Used:
SRT: ⬇ SRT ⬇ Original file

.srt or .vtt (Hindi). The old file is backed up. After that the match for this video is rebuilt (may take a few minutes, keep the page open).

⬜ Not used yet · 00:00:02:09 – 00:29:16:19 (29:14)

00:00:02:09 तो अब बात करते हैं कि भगवतानंद के द्वारा जो मुख्य तीन शास्त्र के आधार पर आक्षेप उठाए गए हैं वो मुख्य रूप से तीन हैं। तो उन तीन का निराकरण प्रस्तुत करेंगे। सबसे पहले है वैष्णव। जीसस क्राइस्ट को जीसस को ईसा को वैष्णव क्यों कहा? तो इसमें इनके कुछ जो प्रश्न है वह पहले क्या हैं? एक है कि वैष्णव तिलक के साथ बताई जा रही है। परंतु उसका अस्तित्व क्या है? मतलब जिस मूर्ति के आधार पर जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने यह कहा है कि जीसस की एक मूर्ति मिली है वैष्णव टीके के साथ। यह पूछ रहे हैं कि उसका अस्तित्व क्या है? क्या स्त्रोत है? कहां है वह स्त्रोत? वह मूर्ति कहां है? किस संस्था के द्वारा उसका सत्यापन किया गया है? किस विधा से उसको ईसा का ही माना जाए। है ना? यह किस विधा से प्राप्त होगा? किस विधा के आधार पर उसको जीसस की ही मूर्ति मानी जाए। शंकराचार्य अभी तक रूम नहीं गए। तो उनको जाहिर

00:01:17:18 है कि लोगों से पता चला होगा या तो वह कौन लोग हैं या फिर यह WhatsApp ज्ञान है। यह सब इनके शुरुआती क्वेश्चन रेज किए गए हैं। करने वाली जो प्रतिमा है जो रोम में है ऐसा पूरी शंकराचार्य जी बता रहे हैं। तो इस प्रतिमा की उपस्थिति का बोध उन्हें कहां से हुआ? आप गौर करेंगे तो ये सारे बयान 2022-23 के आसपास के हैं। तो जब हम यह जिज्ञासा व्यक्त करते हैं कि पूरी शंकराचार्य जी ने जिस प्रतिमा का संदर्भ दिया है, उस एक प्रतिमा का अस्तित्व क्या है? उस एक प्रतिमा का स्रोत क्या है? मतलब वह प्रतिमा कहां है? किस संस्था के द्वारा उस प्रतिमा का सत्यापन किया गया है? या किस प्रति किस विधा से ज्ञान होता है कि अगर ऐसे स्वरूप वाली कोई प्रतिमा है तो वह ईसा मसीह की ही प्रतिमा है। यह कैसे पुष्ट होता है कि रोम में अगर ऐसी कोई प्रतिमा है तो रोम की यह प्रतिमा अब शंकराचार्य स्वयं तो रोम गए नहीं होंगे देखने के लिए। और रोम का कोई व्यक्ति आकर बताया होगा इनको तो क्या बताया? कैसे बताया? कब बताया इसका उन्हें विस्तृत उल्लेख करना चाहिए था। साथ ही कौन सी संस्था उस प्रतिमा की देखरेख कर रही है और जो बात रोम के लोगों को भी शायद ही पता हो आपको कैसे पता है? अब दिव्य विधा से यदि आपको यह पता

00:02:32:21 है कि रोम में वो प्रतिमा है तो इसमें सबसे पहला जो आंसर है कि संभवतः तुमने गुरुदेव का 2020 वाला वीडियो नहीं देखा है जिसमें उन्होंने ईसा की बात की है। वैष्णव तीके के साथ उनकी मूर्ति की बात की है। तो वो वीडियो आप देखोगे तो उसमें उन्होंने बताया है कि उनके पास कौन लोग आए थे जिनके कारण वह ऐसा मानते हैं। विदेशों से कई ऐसे लोग आए थे जो सत्य के पक्षधर हैं। सत्य की खोज में निकले हुए हैं। इसके साथ ही साथ अच्छे स्तर के इतिहासकार उनके पास आए जिन्होंने उनको यह बातें बताई। तो सबसे पहली बात तुम्हारा यह कहना कि कौन लोग हैं वह क्यों नहीं बताया जा रहा? वह तुम्हारा कहना अनुचित है, व्यर्थ है क्योंकि उन्होंने बताया है। दूसरी बात तुमने एक बात और कही कि यह वीडियो यह जो बातें उठना शुरू हुई हैं, यह बातें उन्होंने कही हैं जो ये लगभग 2022 के आसपास से कही हैं। वो भी गलत है। आप गौर करेंगे तो ये सारे बयान 2022-23 के आसपास के हैं। आप गौर करेंगे तो ये सारे बयान 2022-23 के आसपास के हैं। इतिहास साक्षी है कि 10 वर्षों तक ईसा मसीह कहां रहे इस पर आज विश्व स्तर पर

00:03:47:22 अनुसंधान हो रहा है। उनके अनुयायियों ने ऐतिह तथ्य को छिपाने का भरसक प्रयास किया। लेकिन सत्य के अन्वेषण में दक्ष सत्य के प्रति आस्था महानुभाव हमारे पास कई बार आ चुके हैं। विदेश से 10 वर्षों तक ईसा मसीह भारत में रहे और 10 वर्षों की अवधि में पूरी में भी आकर उन्होंने यहां के आचार्यों से सनातन सिद्धांत का प्रशिक्षण प्राप्त किया। विदेश में ईसा मसीह जी का जो चित्र उनके अनुयाई के सहित है, उनकी प्रतिमा है, मूर्ति है, उसमें वैष्णव चित्र चंदन तिलक से युक्त उनका विग्रह प्रतिष्ठित है। साथ ही साथ यहां तक सुदर्शन जी आरएसएस के संचालक इतिहास के बहुत अच्छे जानकार थे। उनका अनुसंधान था कि जब उनको फांसी की सजा दे दी गई वास्तव में उसके बाद भी वह जीवित रहे। भगवत कृपा से किसी प्रकार फंदे से मुक्त होकर चलते चलते वो जम्मू कश्मीर भारत में आए। परंपरा से

00:05:02:24 यह भी एक तथ्य सिद्ध है कि वही उनकी समाधि है। भारत में ईसा मसीह लगभग 2020 या तो उससे पीछे से 2021 नहीं हो सकता। 2019 हो सकता है। 5 वर्ष पुराना वीडियो प्राप्त है गुरुदेव का। इसका अर्थ है कि तुम कही सुनी बातों पर पूरी तैयारी ना करते हुए आधी अधूरी जानकारी पर ही बात करने लगते हो। जैसा कि तुम्हारा पीछे अतीत रहा है इस पूरे विवाद में। तो क्या है कि 2020 में ही गुरुदेव का वह वीडियो प्राप्त हो जाता है जिसमें कि वह ईसा के वैष्णव मूर्ति होने की बात करते हैं वैष्णव टीके के साथ जिसमें वो यह बताते हैं कि उनके पास विदेशों से कई ऐसे लोग आए थे जिनकी बात को वो विश्वास कर सकते हैं। इसके साथ ही साथ अच्छे इतिहासकार आए थे जिन्होंने उनको इस बारे में बताया था। तो उन्होंने सोर्स बताई है उनका सोर्स WhatsApp यूनिवर्सिटी नहीं है जो तुम तंज कस रहे हो। तो अब यहां पर बात यह आती है कि जी जो टेक्निकल वर्ल्ड की जो बातें हैं उस टेक्निकल वर्ल्ड की बातों को उस प्रकल्पता से शायद नहीं समझ पाए और WhatsApp यूनिवर्सिटी वाला ज्ञान उनके चेलों ने दिखा दिया होगा कि देखिए गुरुदेव जीसस की मूर्ति मिल गई पूर्ण लगाए कह और वो बच्चा जीसस तो वैष्णव आदमी

00:06:18:00 था तो वैष्णवाचार्य कह दो फिर जीजस को अगर WhatsApp यूनिवर्सिटी की बात को ही गुरुदेव को रखना होता जैसा कि तुम मजाक उड़ा रहे एक शंकराचार्य का तो भाई यह जो बातें हैं ना कि अ जो वैष्णव मूर्ति मिली है वैष्णव टीके के साथ मिली है या वैष्णव से वैष्णविज्म से मिलाते हुए जीसस टेस्ट को शो करना भगवान के साथ में खड़े होकर के उनके चित्र को दिखाना जीसस के चित्र को दिखाना यह सारी बातें बहुत पहले से भी चल रही हैं। तो WhatsApp यूनिवर्सिटी का अगर यूज करना होता, उपयोग करना होता, उसके आधार पर कहना होता तो गुरुदेव बहुत पहले कह चुके होते। करपात्री जी के समय से भी यह बातें उड़ रही हैं। इस तरीके से जीसस को घुसे हिंदूज़्म है। हिंदू धर्म में डालने का प्रयास किया जा रहा है। ठीक है? तो यह भी तुम्हारा कुतर्क है। इसके बाद एक चीज और है कि गुरुदेव ने अपने उस वीडियो में यह भी बताया है कि परंपरा प्राप्त विधा से कश्मीर में जीसस की समाधि होना सिद्ध है। परंपरा शब्द प्रमाण से। ठीक है?

00:07:34:06 तो अब बात आती है कि इस सब के बाद अपने उसी वीडियो में जब यह दिक्कत आ जाती है कि भाई ईसा को वैष्णव कह रहे हो तो एक दिक्कत आती है कि तो फिर ईशा को आप लोग आप किसी तरीके से सनातन धर्म से जोड़ रहे हो नहीं। ईश्वर और धर्म में अंतर है। धर्म वो है जो वेद बताते हैं। और ईश्वर वह है जो उसके द्वारा प्राप्त होता है। अगर ईश्वर को ही मान लेने से धर्म सिद्धि हो जाती, धर्म की सिद्धि हो जाती कि ईश्वर यह है। अब यह जो कह रहा है वह धर्म है। तो फिर बुद्ध को मानने से भी हो जाती। मगर बुद्ध बुद्ध भगवान के द्वारा जो यज्ञों की रक्षा के लिए वैदिक धर्म का खंडन किया गया उसको तो नहीं माना गया। तो फिर तुम कैसे कह रहे हो कि ईसा को मान लेने से जो है वो जो है वह जो अवैदिक धर्म है बाइबल के द्वारा प्रच प्रतिपादित होने वाला उसके पक्षधर हो गए। और दूसरी बात यह है कि गुरुदेव भगवान ने अपने उसी वीडियो में जगुरु शंकराचार्य जी ने अपने उसी वीडियो में जिसमें वो ये वैष्णव टीके की बात करते हुए बता रहे हैं

00:08:49:06 कि वह वैष्णव हैं। वैष्णव थे ईसा मसीह। तो उसी वीडियो में उन्होंने बताया है कि ईसा के नाम पर यह जो मानवता की धिज्जियां उड़ा रखी हैं ईसा के नाम पर। किसके द्वारा धिज्जियां उड़ा रहे हैं मानवता की? बाइबल के द्वारा। तो अगर ईसा को वैष्णव कह दिया तो बाइबल को स्वीकार करना कहीं से सिद्ध नहीं होता। अपने उसी वीडियो में उन्होंने कहा ईसा के नाम पर क्रिश्चियन तंत्र ने जो मजाक बना रखा है मानवता की धज्जियां उड़ा रखी है यह सब गलत है और जो तंत्र छलबल ढंग की चोट से हिंदुओं को अल्पसंख्यक बनाकर इनके अस्तित्व आदर्श को विलुप्त करने का प्रयास करते हैं। उन्हें मैं भविष्य को देखते हुए संकेत करना चाहता हूं। वे अपनी कूटनीति को वापस ले नहीं तो विश्व में क्रिश्चियन तंत्र नामक कोई तंत्र नहीं रह जाएगा। क्योंकि उनकी आधारशिला बहुत गलत है। मैं डंके की ओर से तथ्य स्थापित करना चाहता हूं। लाखों वर्ष पूर्व भारत आदि की सीमा से जो हमारे पूर्वज अमेरिका, इंग्लैंड आदि चले गए।

00:10:05:15 उनके वंशधरों को अब तक छलब डंके की चोट से चार करोड़ की संख्या में मार दिया गया है। ईसा मसीह के नाम पर यह तांडव नृत्य मानवता को थजी उड़ाने वाला कथम सही नहीं है। तो बाइबल के सिद्धांतों को स्वीकार नहीं कर लिया। इसके साथ ही साथ सीधा सीधा खंडन बाइबल की सीमा का ईश्वर साक्षात अवतार नहीं ले सकता। जगत बना सकता है, जगत बन नहीं सकता। साक्षात अवतार नहीं ले सकता। बाधित है। हो गया। तो कहां से उसमें बाइबल का प्रमोशन मिल गया तुम्हें? अभी और बात करते हैं इस पर। अब उन्होंने उस अपने उसी वीडियो में एक बात और कही है कि 10 साल ईसा कहां गए, कहां रहे कुछ नहीं पता है। है ना? और उनके विश्वसनीय स्त्रोतों द्वारा बताया जा रहा है कि उनकी जो है मूर्ति प्राप्त हो रही है। इसमें वैष्णव टीका है। वो पूरी में बताया जा रहा है कि वो पूरी में रहे थे आगे। अब पूरी से कुछ याद आया मुझे आगे बात करेंगे। बहुत अच्छी बातें हैं। तो यह सारी एक बात हो गई। इसके

00:11:21:02 बाद अब बात आती है कि किस विधा से माना जाए कि वह जो टीका टीके वाली प्रतिमा या चित्र प्राप्त हो रहा है वह ईसा का ही है। वह और किसी का नहीं है। और जब इतने सारे ईसा के बिना टीके की मूर्तियां मिलती है तो ईसा की वह जो मूर्ति है उसी को ईसा का क्यों माना जाए? जबकि बिना टीके की मूर्ति भी प्राप्त है हमें। ठीक है? तो तुम एक बात बताओ तुम्हारा कहना है कि तुम्हें तुम मलेच्छराज को देखते हो। तुमने उसका चित्र बनाने का प्रयास किया है। सनातन धर्म ग्रंथों में जिस जिन बातों का संकेत है। अच्छा तुमने यहां पे एक बात और कही कि अंग्रेजी इतिहासकारों के आधार पर मानते हो क्या? तो अंग्रेजी इतिहासकार तो उल्टा भी लिख रहे हैं। कुछ तो ऐसा लिख रहे हैं कि ईसा ईसा थे ही नहीं। ठीक है? तो अब यह बताओ अब यहां पर तुम कह रहे हो कि अंग्रेजी इतिहासकार तो उल्टा लिख रहे हैं और दूसरी जगह जब तुमको मलेच्छराज दिखाई देता है तो तुम जो है इधर शास्त्रों के संकेत को जोड़ते हो और उधर जो है अंग्रेजों के द्वारा लिखी गई किताबों को जोड़ते हो और अपने मन में सपने में आने वाले मलेच्छराज को स्थापित कर देते हो

00:12:36:12 राक्षस को कॉमिक्स कैरेक्टर को यही तो करते हो अब तुम यह बताओ कि तुमने मलेच्छराज के जो चित्र बनाए हैं। किस विधा से माना जाए कि वह वही मलेच्छ है जिसकी बात शास्त्रों में हो रही है। किस विधा से माना जाए? के आधार पर हमने एआई से कुछ चित्र बनाए हैं जो कि इस वीडियो में इस श्रंखला के इस एपिसोड में आपको समय-समय पर दिखाए जाते रहेंगे। एक क्रूर स्वरूप एक शैतान का जिसका जो मुख है वह गधे का है। जिसके पैर कभी मनुष्य और कभी घोड़े के समान होते हैं। जिसके पंख मोर के समान है। जिसकी आंखें बहुत क्रूर है। जिसके दांत बड़े नुकीले हैं। ऐसा ही स्वरूप है अनाम लक्ष्य का। और ये अनामक्ष ही वो शक्ति केंद्र है। वो शक्ति पुंज है जहां से मलेच्छ आक्ष जहां से अपनी शक्तियों को प्राप्त करता है। मतलब अगर उसमें मलेच्छराज या म्लेच्छ शब्द आ गया शास्त्रों में तो तुमने अपने सपने में आई हुई कल्पना को मलेच्छराज बना के स्थापित कर दिया। यही मलिच्छराज है और मैं जैसा जैसा बता रहा हूं वही मलिच्छराज है। कोई पूछे तो वही शास्त्रों में दिया गया है। हमने हमने ये अपने लाइव में पूछा कि मलेच्छराज तुम्हारा जो है काल्पनिक है। तो तुम्हारे लोग कह रहे हैं कि अरे मलेच्छराज को तुम काल्पनिक कहोगे तो तुम पूरी पीठाधीश्वर जी का अरे पूरी

00:13:51:13 पीठाधीश्वर जी ने अगर मलेच्छराज शब्द का उपयोग कर लिया तो वो वही मलेच्छराज है जो तुम्हारा भगवत आनंद बता रहा है। अगर कबीर कबीर शब्द आ गया जिसको तुम कबीर बोल रहे हो तो बस वह वही कबीर है जिसको तुमने कबीर माना है। शास्त्र में अगर किसी कबीर की बात हो भी रही है। पहले तो कवि कबीर है नहीं। मगर तुमने अगर कबीर को कवि को कबीर बनाया है तो मान लिया कि बात हो रही है शास्त्रों में कबीर की। वह वही कबीर है। यह भी तो शब्द प्रमाण से प्राप्त करना होगा। तो अगर शास्त्रों में मलेच्छराज शब्द का वह आ गया शब्द आ गया उपयोग हो गया तो तुमने बस अपने मन मन के द्वारा मनः कल्पित जो मलेच्छराज है उसको स्थापित कर दिया कि यही वो मलेच्छराज है। क्यों भाई तो तुम अपने शब्दों द्वारा किसी चीज की स्थापना कर सकते हो। मगर जो जगतुगुरु शंकराचार्य परंपरा प्राप्त आचार्य है जो सन्यासी है तुम गृहस्थ हो मगर उसका शब्द प्रमाण नहीं है तुम्हारा शब्द प्रमाण है है ना

00:15:06:24 तुम्हारी दिव्य शक्तियां दिव्य शक्तियां है उनकी शक्तियों का उनकी बातों का उनके वक्तव्यों का मजाक है अच्छा इसमें एक बात और आती है फिर आगे आगे कि पूरी पीठ के जो शिष्य है ना वो बाइबल को गीता का सार कहते हैं। आधे से ज्यादा व्याख्यान तुमने अपने पूरे वीडियो में इसी बात पर दिए हैं। कौन है वो? पूरी पीठ के योग्य पद पर बैठे हुए हैं। परिकर हैं वहां के तो क्यों सुनते हो उनकी बात? गुरुदेव ने उन्हें अपने राजदूत अधिवक्ता के रूप में नियुक्त किया है क्या? यही तो कह रहे थे। तुम चर्चा में ना आने के संबंध में मतलब आरोप लगाने के लिए गली से भी उठा लोगे आरोप को और उसका समाधान प्राप्त करने के लिए तुम्हें अधिकृत व्यक्ति चाहिए।

00:16:07:20 बुराई करने हेतु शिष्य मायने रखते हैं। मगर उस बुराई का निराकरण प्राप्त करने हेतु केवल और केवल अधिकृत व्यक्ति चाहिए। यह है दोगलापन। घगी बंध जाएगी जिस दिन सामना होगा। आओ कभी सामने। हम कितने आरोप लगाए तुमने? समलैंगिकता का आरोप लगाया तुमने। पीडीएफ पढ़ के सुनाई तुमने। हां। विजय श्री पे आरोप लगाया तुमने। घंटों घंटों के वीडियो बनाए तुमने। किसके आधार पर? कौन से योग्य परिकर थे? कौन से नियुक्त किए गए थे पूरी पीठ के द्वारा? कैसे तुमने उनकी बातों के आधार पर इतने गंभीर बातें करी? इतनी लंबीलंबी बातें

00:17:09:28 की। अब ये बताओ तुम्हारी तरफ से एक क्वेश्चन और उठ रहा है कि मौन क्यों है? क्यों नहीं जवाब दिया जा रहा? रिपीट क्यों नहीं बोल रही है? तुम हो कौन? कौन हो तुम? हां। अरे तुम अपने देवता को लाओ तब तो कोई बात बने जो तुम्हें दीक्षा देकर गए हैं। हो कौन तुम भाई जो तुमको जवाब दिया

00:17:44:13 जाए। उन्होंने कह दिया गुरुदेव ने कि 10 युवक नहीं मिल रहे हैं। तो बस उनको कोई मिल नहीं रहा है। यह सिद्ध हो गया। इनमें से जितनी बातें तुम आरोप में लगाते हो ना भगवत आनंद जो खेल खेला है तुमने उनमें से 90% बातों का जवाब तुम स्वयं दे सकते हो। तुम्हारे सामर्थ्य को देखा है मैंने। मगर ये तुम्हारी ये षड्यंत्र पूर्वक तुम ये सब करते हो। जितने आरोप तुम लगा रहे हो। तुम खुद इनके आंसर्स जानते हो। कई सवालों के।

00:18:20:24 पर तुम चाहते हो कि मसाला बने, बवाल हो, योजनाबद्ध तरीके से कर रहे हो। खैर चलो कोई बात नहीं। तुमको यह चाहिए तो यही सही। इसी पर ठीक है। तो तुमने कहा कि 10 युवक नहीं मिल रहे हैं। कई शास्त्रों में वचन आया है। रामायण महात्म में स्कंद पुराण में आया है। देवी भागवत में आया है। कलयुग में सभी ब्राह्मण जो हैं कलयुग के जो ब्राह्मण होंगे वह व्यभचारी होंगे। वह ऐसे हो जाएंगे। कलयुग में स्त्रियां ऐसी हो जाएंगी। तो तुम हो गए वैसे ही। तुम वैसे ही हो गए ना तो वह जो चिकित्सा वाली बात है जोधपुर की वह सही है फिर उसको सही माना जाए क्योंकि शास्त्रों में तो यही लिखा है और फिर रामपाल की बात मान ली जाए वो भी ऐसे ही आरोप लगाता है कि कल उसमें लिखा है शास्त्र में कलयुग के ब्राह्मण ऐसे हो जाएंगे उसी में आगे लिखा है कि कलयुग की स्त्रियां ऐसी हो जाएंगी तो कलयुग की सारी स्त्रियों को ऐसा मान लो। तो अगर 10 लोग नहीं

00:19:36:02 मिल रहे हैं तो इसका मतलब यह हो गया कि जितने लोग उन्हें मिले वह वो नहीं है। सब गलत है। या फिर ऐसे लोगों की कमी है जिनका उपयोग विनियोग इस तरह से ऐसे ऐसे युद्ध में किया जाए। क्या वास्तविकता में द ही लोगों की आवश्यकता पड़ेगी हिंदू राष्ट्र के लिए? और देखा जाए तो केवल एक भी पर्याप्त है। 10 भी नहीं चाहिए। तो यहां क्या कहा जा रहा है शास्त्र में कि हां ऐसे हो जाएंगे। सब ही नहीं हो जाएंगे। 10 लोग नहीं मिल रहे हैं का मतलब है कि लोग नहीं मिल रहे हैं। एक भी नहीं मिल रहा है। यह मतलब नहीं है। कम है। तुम ही अपने कई वीडियोस में कह चुकेगे। कि हिंदू तो ऐसा है, हिंदू तो वैसा है। तो सारे हिंदू वैसे ही हो गए। तुम भी वैसे ही हो

00:20:38:06 गए। बेकार की बातें। अच्छा एक प्रश्न और उठाया तुमने अपनी उसमें वीडियो में। मैकोले की शिक्षा पद्धति के आधार पर कई शिष्य ऐसे हैं जो अध्ययन करा रहे हैं। शिक्षक हैं जो तो मैं मैकोले की शिक्षा पद्धति के आधार पर अध्ययन करा रहे हैं तो गुरु विरोध कर रहे हैं। भाई तुम दिन भर में ऐसे बहुत से कार्य कर रहेगे जो सनातन धर्म के विपरीत जाएगा। कहां तक बचोगे? सब्जी खरीदोगे मार्केट से। वह सब्जी भी इस तरह से उगाई गई है जो विरुद्ध तरीका है धर्म के। गाड़ियों में चलोगे ब्रेक पैड होते हैं। चमड़े का इस्तेमाल होता है

00:21:23:09 उसमें। तो अज्ञानता वश विवशतावश यदि धर्म का अनुकरण नहीं भी कर पा रहे हैं। मगर प्रमाण्य बुद्धि उसमें है तो विरोध नहीं है फिर धर्म का। यह तो मानना पड़ेगा ना। तो प्रमाण बुद्धि देखी जाएगी ना। गुरु के वचनों में है कि नहीं? और यथासंभव निर्वाह किया जाएगा। तुमने बताया नहीं तुम्हारी दिनचर्या इत्यादि के बारे में कहां जंगल से निकल के आते हो टुप से दिखते हो फिर गायब हो जाते हो जब बताओगे ना किन-किन लोगों के साथ हो तुम लिस्ट अपनी सार्वजनिक करोगे ये मेरे साथी हैं इनका नाम ये है इनका नाम ये है दिखाओ तो भाई जिन पर तुम आरोप लगाते हो कि उनके इस व्यक्ति ने ये किया इस व्यक्ति क्योंकि तुम्हें उनकी चीजें सार्वजनिक हैं। किसके साथ रहते हैं? किसके साथ नहीं रहते हैं? कौन किस कार्य में किस संबंध में मदद कर रहा है? सहायता कर रहा है। दिखाओ अपने सहायकों की लिस्ट कौन क्या कर रहा है? कौन कैसा है। फिर पता चले तुम्हारी प्रामाणिकता। कितने धर्म के पक्षधर हैं तुम्हारे अकॉर्डिंगली। है ना? एक तरफ यह व्यक्ति कहता है कि यह अपने आचार्यत्व की प्रामाणिकता के लिए किसी भी ऐसे व्यक्ति के पास नहीं जाएगा जो मैकोले शिक्षा पद्धति से पढ़ा हो या पढ़ाता हो।

00:22:38:28 और वहीं पर दूसरी ओर इसको जो इसके अनुसार जो भगवती से जो इसे वेदांत का ग्रंथ प्राप्त हुआ है परमाक्षर सूत्र उसके भाष्य की भूमिका जरूर यह मैकाले शिक्षा पद्धति से शिक्षा प्रदान करने वाले अरुण पांडे से लिखवाएगा। इसकी जो इसका जो जो तथाकथित परमाक्षर सूत्र नामक ग्रंथ है जिस पर इसका कहना है कि मुझे देवी से प्राप्त हुआ है उस पर इसने भाष्य लिखा है उसकी भूमिका इसने किससे लिखवाई है मैकोले शिक्षा पद्धति के एक शिक्षक अरुण पांडे नामक व्यक्ति से क्या दोगलापन

00:23:20:01 है फिर आगे क्या है तो कुल मिला ला के बात यह है कि वह विरोधी तब कहलाएगा जो व्यक्ति पढ़ा रहा है मैकोले शिक्षा पद्धति की शिक्षा दे रहा है स्कूलों में वो तब विरोधी कहलाएगा जब गुरु वचन धर्म शास्त्र का वचन वहां रख दिया जाए और उस समय वो अपने उन वचनों को वो ना मान के प्रमाणिक प्रमाण्य बुद्धि ना दिखा के उनके प्रति उनके प्रति अनुकरणीय भावना दिखा दिखा करके अनुसरणीय भावना दिखा के मैकोले शिक्षा पद्धति के प्रति अपना भाव प्रकट करें। ठीक है और आगे चलते हैं। फिर आगे अच्छा वो जो शिष्य वाली बात तुमने की थी जो तुम कह रहे थे कि पूरी पीठ के कुछ शिष्य हैं जो ये कहते हैं कि बाइबल जो है वो गीता का सार है। तो इस बारे में तुमने अपने परिकों अपने शिष्यों से नहीं पूछा। अपने चेले चापड़ों से नहीं पूछा। वह जो कहते घूम रहे हैं। अभी आया था ना कुछ दिनों पहले कोई जो कह रहा था दुनिया में कहीं कुछ भी समस्कृति है कुछ भी ज्ञान विज्ञान है तो वह वेदों पर आधारित है। तब तुम्हें

00:24:35:01 यह बात ध्यान नहीं आई। अपने शिष्यों को नहीं सिखाया। यह तो मानना पड़ेगा ना कि दुनिया में अगर कहीं पर बल्ब जल रहा है वो भले ही प्रत्यक्ष रूप से थॉमस अलवा एडिसन से ना मिला हो मगर वो बल्ब जल तो उसी का कारण रहा है ना। नास्तिक करते हैं इस तरह के सवाल कि अगर माता बहन और पत्नी को माता को माता की दृष्टि से देखने का कारण यदि धर्म है तो ईसाई कैसे देख रहे हैं अपनी माता को माता की दृष्टि से उनके पास तो नहीं है गीता दुनिया में जहां कहीं भी बल्ब जलेगा वो थॉमस अलवा एडिसन के आधार पर ही माने माना जाएगा

00:25:19:12 ना प्रत्यक्ष क्ष रूप से वह डायरेक्ट थमस एडिसन के कनेक्शन में नहीं है। मगर घूम फिर के उसी का आविष्कार तो आ रहा है। लोगों के घरों में जा रहा है जो बल्ब के रूप में उसी तरीके से जो वेद का प्रकाश है वो जगह-जगह में पहुंचा है। तो जहां पर भी जितने जितने भी अंश में किसी दुनिया के धर्म ग्रंथ में या पंथ ग्रंथ में विचारधारा के ग्रंथ में जो प्रकाश दिखाई देगा तो उसका मूल हमें मानना पड़ेगा ना कि वेद है। मगर इससे यह सिद्ध नहीं होता कि वह वेद का सार है कि वह वेद सम्मत है। एक अक्षर भी गलत बोल दिया वेद को विरोध हो गया वहीं पर वो अवैदिक है। वरना थोड़ी बहुत समानता तो आतंकवादी और हम हमारे और तुम्हारे बीच भी होंगी। तो बस उन थोड़ी बहुत समानता के आधार पर मान लिया जाए। कि वह आईएस आईएस वाले और हम और तुम सब एक हैं। यह भी नहीं कहा जा रहा है। तो इस भाव को रखते हुए अब पता नहीं किसने क्या कहा है, क्या नहीं कहा है। हालांकि अगर किसी ने यह कहा है कि बाइबल जो है गीता का सार है तो उसने बहुत बड़ी बेवकूफी भरी बात कही है। मगर तुम तो प्रमाणिक लोगों की बात सुनते हो। प्रमाणिक लोगों की बातें मायने रखती है जो अधिकृत

00:26:34:24 हो मठ की तरफ से। तो तुम क्यों सुन रहे हो? क्यों सुन रहे हो? किसी की बात को लेकर के वीडियो बना रहे हो। और जब तुम्हें कोई व्यक्ति ऐसे वीडियोस का उत्तर देना चाहता है तो तुम्हें प्रमाणिकता चाहिए उसकी। इसको कहते हैं दोगलापन। खैर आगे बढ़ते हैं। अच्छा इसमें एक बात और आती है जो यह बात उठी है कि मैंने तुम्हें याद दिला दिया तो इसमें एक बात आती है कि तुमने अपने किसी उसमें कहा था कि अगर सामने वाला तुम्हें लंगड़ा कह रहा है और तुमने यह बता दिया कि तू अंधा है। अगर तू मुझको लंगड़ा कह रहा है तू भी अंधा है। तो मैंने उसको अंधा कह दिया। इससे मेरा लंगड़ा ना होना सिद्ध नहीं होता। यही बात मैं भी कहता हूं। मेरे गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं होता है। है ना? तो यहां पर मैंने क्या किया है? अगर मैंने यह बात कही है कि दुनिया में कहीं कोई चमत्कृति है तो वो वेद के आधार पर ही है। इस बात के आधार पर किसी ने बाइबल बाइबल से जोड़ दिया होगा। मगर मैंने उसको प्रमाणिक तो नहीं माना। तो यहां पर मैंने ऐसा नहीं है कि तुम्हारी बात का उत्तर नहीं दिया है। उत्तर देने के बाद यह कहा है कि तुम्हारे चेले चापड़ भी यही

00:27:50:00 चीज कर रहे हैं। कर रहे हैं। हमें अपनी मान्यता को मानने के लिए तुम्हारे उदाहरण की आवश्यकता नहीं है। इसलिए हमने अपनी मान्यता को पहले बता दिया। अपने अध्ययन को पहले बता दिया। अपनी जानकारी को पहले बता दिया। और उसके बाद तुम्हें याद दिलाया कि तुम्हारे चेले चापड़ों को भी तो रोको भाई जो कालिया जिन्न की उपासना जब तुम करवा रहे हो लोगों को परी की उपासना करवा रहे हो लोगों को तुम तो कालिया जिन परी की उपासना करवा रहे हो और अगर कोई प्रिय पीठ से जुड़ा हुआ शिष्य है जो तुम्हारे अनुसार है और जो कि बाइबल और गीता को बाइबल को गीता का सार बता रहा है तो उसका तुम वह कर रहे हो और तुम उस ऐसी विचारधाराओं के जो तट पुंजीय हिस्से हैं तट पुंजीय वो तो तब भी शीर्ष की बात कर रहा है। तुम जो तटपुंजीय स्तर की चीजें हैं उन चीजों की उपासना करवा रहे हो लोगों से। और उनको जस्टिफाई करते हुए तुम्हारा व्यक्ति कह रहा है कि भैया वे दुनिया में कहीं कोई चमत्कृति है तो वो वेदों के आधार पे है। गुरुदेव का वचन यूज़ कर रहा है वहां पे।

00:29:05:18 तो भाई यह सब बातें उठाने से पहले अपने अपनी विचारधारा अपनी पुष्टि तो करो। तुम तो कालिया जिंदगी करते हैं। एक हमको मेरे निजी परिचित में मिले। उन्होंने

00:29:16:19 अरबी फारसी के मंत्रों से किसी शक्ति की आराधना कर रखी थी। अपने किसी गुरु से प्राप्त करके वो पीर शक्ति की

⬜ Not used yet · 00:29:23:20 – 00:29:51:15 (0:28)

00:29:23:20 वो चिमनी लैंप की चिमनी में वो आते थे। भी हो गई। तो बहुत बाद में किसी समय मुझे भी कुछ आवश्यकता पड़ी तो हमने कहा कि आप जरा बताइए इसमें क्या होना चाहिए? तो उन्होंने कहा वो शक्ति हम नहीं बुलाते। क्यों साधना ये कौन सी स्क्रिप्टिंग चल रही है? बताओ। हां, अब इसमें क्या है? ये जो फोटो है ये फोटो वास्तविक है। मैं पूरी बात बताऊंगा। मैं ये नहीं कि कोई बात को नकारूंगा और कोई बात को स्वीकारूंगा। जो जैसा यथावत करूंगा। ये फोटो असली है। फोटो असली कब का है?

00:29:51:15 एक व्यक्ति ने मुझे बहुत परेशान कर रखा था कि मुझे साधना दीजिए, सिद्धि दीजिए, साधना दीजिए, सिद्धि दीजिए।

⬜ Not used yet · 00:29:56:16 – 00:31:21:18 (1:25)

00:29:56:16 मैंने कहा भाई मैं फोन पर, Facebook पर ऐसा नहीं बताता हूं ऐसा। नहीं मुझे कुछ दीजिए, मुझे कुछ दीजिए। अब वो व्यक्ति मांसाहारी वो व्यक्ति अपने जीवन में शराब भी पीता था। वो व्यक्ति की उम्र लगभग उस समय हमको लग रहा है 32 33 साल की हो सकती है। जन्म से ब्राह्मण ही था। और उस व्यक्ति से संपर्क तोड़े भी मुझे बहुत जमाना हो गया। मुझे याद भी नहीं क्योंकि मैं नंबर लगभग लोगों के सेव करता नहीं हूं। जनरली हां मीडिया प्रभारी नंबर सेव करते हैं तो सिंक होकर मेरे फोन में भी सेव ऑटोमेटिक हो जाते हैं। ये बात है। तो जो ये फोटो ये फोटो वास्तविक है। तो मैंने क्या किया था उस व्यक्ति से पीछा छुड़ाने के लिए कि भाई कुछ इसको ऐसा दे दो कुछ ऐसा विषय दे दो क्योंकि आप वैदिक आप मंत्र देते नहीं। तांत्रिक साबर अगर आप देंगे तो फिर वो व्यक्ति उसका अधिकारी है नहीं। कैसे परीक्षण हो उसका पूरा का पूरा एकदम पकाऊ और तो यह फोटो मैंने उसको भेज दिया था और यह फोटो जो है इस प्रकार के आपको बहुत से हजारों वीडियो आपको YouTube में मिल जाएंगे। हजारों वीडियो आपको Instagram में मिल जाएंगे। हजारों लेख पोस्ट Facebook पर लोग खूब बांटते फिरेंगे। तो मैंने सोचा कि इस व्यक्ति से पीछा छुड़ाने का एक ही उपाय है। और इस फोटो को मैंने भेज दिया और कहा कि ऐसे-ऐसे कुछ कर लेना। लेकिन ये जो है ना कि पहले मेरे पास भेजना और तीन वचन ये बाद में

00:31:11:18 किसी ने एडिट करके लिखा है। ये फोटो हो सकता है कि किसी प्रकार से इस व्यक्ति के हाथ में लगी होगी। ये तो इतना सत्य है इसमें। फोटो सत्य है। फोटो मैंने भेजा है। क्योंकि ये जो डॉट लगे हैं फोटो के नीचे वो मैंने लगाए थे। ये

00:31:21:18 मुझे याद है। लेकिन ये सब जो लिखा है ना कि इसे पहले मेरे पास भेजना पड़ेगा। ये मुझे याद नहीं

⬜ Not used yet · 00:31:25:27 – 00:55:56:00 (24:30)

00:31:25:27 आ रहा। खुद बता रहे हो। मुझे आशा आवश्यकता पड़ी थी। मैंने मांगी थी। पता नहीं की कि नहीं की। खैर दी तो लोगों को तो करने को दी कालिया जिन की उपासना कालिया जिन्न हमें चाहिए सुख और समृद्धि के लिए संतोष के लिए राम कृष्ण इत्यादि पर्याप्त नहीं है। धनवंतरी मंत्र पर्याप्त नहीं है। कालिया जिन आवश्यक है। है ना? और कालिया जन्य से याद आया और कि फिर हमारी जो प्राथमिक शिक्षा दीक्षा है दो ढाई वर्षों तक वो डीएवी ग्रुप में हुई लेकिन डीएवी ग्रुप क्योंकि आर्य समाज है तो वहां सैद्धांतिक टकराहट होने लगी हमारी फिर पिताजी वहां से ले गए यदि फ्रीशंस वाले लोगों के स्कूल में तुम्हारे पिता ने तुमको पढ़ाया फ्रीशंस से जुड़े हुए स्कूल में फ्री मिशंस से ही संबंधित है ना आर्य समाज और तुम आर्य समाज के स्कूल में पढ़ाए लिखाए गए हो। तो क्या आपके पिताजी भी उससे

00:32:41:03 संबंधित हैं? इस तरह का प्रश्न होना चाहिए। क्यों आपको भेजा गया आर्य समाज के स्कूल? तो कहीं ना कहीं कनेक्शन है आपका फ्री मिशनंस से। खैर आगे बढ़ते हैं। इसमें एक चीज और आती है। तुमने बताया था जब मैंने यह वाली बात आई थी ना यही मेरे गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं होता है। यहां पर ये बात उठती है। तो तुमने अपने उस वीडियो में बताया था कि मैंने तुमसे पूछा था विदेश गमन करने वाले व्यक्ति से क्यों मिले? हम तो तुमने वहां पर कह दिया था कि मेरे गलत होने से तुमने अपने तरीके से कहा था किसी शास्त्र का कोई वाक्य बताते हुए तो तुमने कहा कि यह यह फलाना वाला दोष होता है और फिर तुमने बताया कि मैं अंधा हूं भले ही तुम अगर मुझे अंधा कह रहे हो फिर भी तुम्हारा लंगड़ा ना होना सिद्ध नहीं होता है तो तुम्हारा कहना है कि भाई यह जो विदेश गमन वाली बात है मैंने पूछ करके यह सिद्ध किया है कि मैं लंगड़ा ही हूं मतलब अपना मेरा दोष सिद्ध हुआ है क्योंकि मैंने अपने लंगड़ेपन के बारे में कुछ नहीं कहा। यहां पर तुम गलत हो। मैंने अपने लंगड़ेपन के बारे में बताया। उसके बाद तुमसे पूछा लंगड़ेपन के

00:33:56:04 बारे में क्या बताया? जब तुमने यह कहा कि पूरी पीठ के जो शंकराचार्य हैं उनके साथ ये क्यों खड़े होते हैं? बागेश्वर वाले बाबा जी क्यों खड़े होते हैं? या करौली वाले बाबा क्यों खड़े होते हैं? तो मैंने वहां बताया कि अमुक अमुक अंशों में अगर उनके साथ वह खड़े भी हुए उनको आशीर्वाद दिया भी उनसे मिले भी उनको इन लोगों को पूरी पीठ के शंकराचार्य का सानिध्य प्राप्त भी हुआ तो इससे ऐसा नहीं सिद्ध हो जाता है कि पूरी पीठ के जो शंकराचार्य हैं वो उनके समर्थक हैं। ये मैंने बता दिया और फिर उसमें मैंने उदाहरण भी दिया। श्री राम जी ने रावण को पुरोहित बनाया था। समुद्र के पास जब पूजन हुआ था तो क्या वो हो गए समर्थक राम रावण के? रावण द्वारा सीता हरण किए जाने के भी समर्थक हो गए। ठीक है? अब जब मैंने अपना अपने इस लंगड़ेपन का उत्तर दे दिया। उसके बाद तुम्हारे अंधेपन को पूछा कि अब तुम यह बताओ कि तुम विदेश गमन वाले के साथ क्या कर रहे हो? दिगंत देश है। अगर वहां एक व्यक्ति भी ना रहे तब तो आप कहिएगा

00:35:11:10 ना जब वहां कोई वृक्ष ही नहीं दुष्ट ही नहीं तो हम किसकी संगति से पतित होंगे। तो अमेरिका तो जन शून्य स्थान है। अभी है नहीं। लेकिन अगर कल्पना करें कि अगर अमेरिका में एक व्यक्ति भी ना रहे। या प्रशांत महासागर में आपको एक ऐसा टापू मिल जाए जहां एक व्यक्ति भी ना रहे। तो आप कहेंगे ये तो दिगंत देश है। लेकिन यहां कोई विलक्ष रहता नहीं। इसीलिए हम यहां रहेंगे तो ये भी दोष कारक है और यह कहे कि ये तो भारत भूमि है यहां तो हम रह सकते हैं। तो यहां भी जो पापी है वृक्ष उसकी संगति से दूर रहना है। ये कहा लेकिन अब दुर्भाग्य है कि शंकराचार्य पदा जन भी वृक्षों के यहां आना जाना उनके साथ संसर्ग उठना बैठना सब शुरू कर ही दिए हैं। हम बोलते रहते हैं तो उनके चेले हमको गरियाते रहते हैं। लेकिन चलो ठीक है। अगर कदाचित ऐसी कोई अपरिहार्य परिस्थिति बन जाए जिस पर आपका नियंत्रण ना हो तो विधिपूर्वक प्रायश्चित करके उसके विरुद्ध का वक्तव्य स्वयं ही निर्गत कर दे तो बढ़िया है और ना करे तो कम से कम चेों पर नियंत्रण रखें। लेकिन चेले शिष्य कम और वकील ज्यादा बने घूमते हैं। तो कहते हैं कि विदेश में मिले संगति के कारण ना जाए। लेकिन उसी मृच्छों की संगति अगर अपने देश में प्राप्त हो जाए तब भी उनकी संगति ना करे। अथवा सर्वथा जन शून्य निर्जन अगर विदेश भी हो तो भी ना जाए। मतलब दोनों से दूर रहे। जनो विशिष्टो देशो जन

00:36:27:21 विशेषतः मतलब जन्म युक्त देश और देश युक्त जन दोनों ही पाप से शष्ट है। अत शष्ट जन दोनों से दूर रहते हैं। इसे न जन्म या न अंतयान दोनों ही इसे सार्थक होते हैं। त्रिपाठी मिथिला प्रसाद मध्य प्रदेश

00:37:11:24 भारती प्राप्त नवा [प्रशंसा] संस्कृत अमेरिका प्रमा जग माया

00:38:09:02 भगवान भगत हम मम्मी [संगीत] क्या बोलते हैं महािसा किसी को कोई कठिनाई नहीं होती जो अन्य यहां के छात्र हैं और ये हैं स्पेन की हैं सब सब समान है और सब समान रूप से समझते हैं। समझ ये है क्योंकि हमारे शास्त्र को समझने के लिए जो चाहिए वो पढ़े हैं और जहां नहीं है वहां मैं समझा देता हूं।

00:39:13:25 और तो और जो व्यक्ति विशिष्टा द्वैत वाला है उसके साथ आप कैसे खड़े हो उससे पहले उसकी पहले समीक्षा करो उसके मत की है ना और यदि आप समीक्षा नहीं कर रहे हो और यदि आप उसके साथ खड़े हो तो आपको क्यों ना माना जाए विशिष्टाद्वैत वाला आपको क्यों ना माना जाए तो मानना पड़ेगा ना कि अमुक अमुक अंश में साथ होते हुए भी अमुक अमुक व्यक्ति का अमुक अमुक अंशों में विरोध किया जा सकता है। तो हमने भी वही कहा हमने अपना लंगड़ेपन का उत्तर पहले ही दिया कि अमुक अमुक व्यक्ति से अमुक अमुक स्थितियों में साथ होने पर भी अमुक अमुक अंशों में उसका विरोध भी हो सकता है। जैसे कि पूरी के शंकराचार्य जी बागेश्वर वालों के यहां मंच पर गए। वहां पर जाकर के वहां उन्होंने अपने प्रवचन दिया। उसके बाद भी कुछ ही दिनों बाद जब बागेश्वर वालों की तरफ से ऐसा कुछ हुआ जो कि धर्म सम्मत नहीं दिखा पूज्य जगतगुरु भगवान को तो उन्होंने वहां तुरंत ऐसे स्पष्ट वाणी बोली कि थर्रा जाए कोई व्यक्ति सुनकर के। ऐसे वचन उन्होंने बोले थे।

00:40:28:26 ठीक है? और दूसरी बात कि कई ऐसे अभी तुम जहां जिन जिन कथा स्थलों में जाने वाले हो वह आयोजक भी ऐसे हैं जो राजेंद्र दास जी के साथ भी मंच साझा कर चुके हैं। संभवतः आर्य समाजी गुरुओं के साथ आर्य समाजियों के जो गुरु होंगे उनके हिसाब से उनके साथ वो मंच साझा कर चुके हो। ऐसे व्यक्ति के आयोजन में अथवा ऐसे व्यक्ति के साथ मंच साझा करने जा रहे हो ना तो तुम्हें मान लिया जाए समर्थक आर्य समाजी का समर्थक मान लिया जाए प्रीमेशंस वाले का समर्थक मान लिया जाए ऐसे ही कनेक्शन निकालते हो ना तो सोचने वाली बात है अच्छा इसमें एक चीज और आती है कि तुमने अपने उसमें वक्तव्य में कहा था कि अन्य शंकराचार्यों ने क्यों नहीं कहा कि जीसस जो वैष्णव थे तुमने अपने कई लेखों में मलेच्छ इत्यादि की बात में या फिर और भी कुछ और बातें होती हैं। ये सनातनी शास्त्रों से हम बता रहे हैं। कोई बाइबल और जेनेसिस और हदीसों से नहीं बता रहे हैं। इसलिए जो कहता हूं उसको कई बार श्रद्धा पूर्वक सुनना सीखो। केवल निजी द्वेष में निग्रहचार्य का विरोध करना है। इसके चक्कर में जो वास्तविक सत्य है जो वास्तविक संकट है सनातन के ऊपर उसकी उपेक्षा मत करो। क्योंकि हम नहीं बताएंगे तो हम बताने वाले बचे नहीं है अनेक लोग। अब देखो हम तुमको और भी कुछ प्रमाण

00:41:44:00 देते है। अच्छा एक प्रश्न बड़ा सुंदर लोगों ने पूछा था जो युग पुराण के श्लोक से हमको समझना आ गया। वो भी हम तुमको बता देते हैं। क्या है वो विषय? जब आर वृक्ष इबिसिन के विद्रोह इबिसिन के सेना से बचकर या निकल कर भाग रहा था और जब वो रेगिस्तान में गया वहां पर उसको 15 लोग मिले थे। ऐसा हमने बताया था। वो 15 लोग कौन थे? इसका अर्थ है कि वो 15 लोग तो वृक्ष भी पुराने हैं। वर्तमान वृक्ष से ज्यादा पुराने हैं। तो लोग पूछते हैं वो 15 लोग कौन है? ये 15 लोग कौन है? इसके विषय में पूरे के शंकराचार्य जी ने लिखा है। संकेत में लिखा है। लेकिन उसको डिकोड नहीं किया है। हो सकता है वो दृष्टिकोण से नहीं लिखा हो। लेकिन उसका अर्थ उसका वही है। देखो अपने कई वक्तव्यों में अपनी बातों को ठोस करने के लिए तुम नाम लेते हो कि पूरी पीठ के शंकराचार्य जी ने ऐसा ऐसा कहा है। उस समय तुम ये क्यों नहीं देखते हो कि बाकी के तीन शंकराचार्यों ने कहा कि नहीं कहा? देखते हो क्या? नहीं देखते। तो इसका सिद्धांत क्या है? यहां पे भी वही वाली बात है। अंधे हो लंगड़े वाली बात कि हमने क्या किया कि तुमसे ही पूछ लिया कि तुम भी तो ऐसा ही करते हो। तो इससे हमारा लंगड़ेपन का उत्तर नहीं मिला। मगर हम अपने लंगड़ेपन का उत्तर भी देंगे। वह क्या है कि अगर बाकी के तीन शंकराचार्यों का कोई भी वचन इस संबंध में प्राप्त नहीं हो रहा है तो इसका अर्थ यह नहीं कि वह इनके विरोधी हैं।

00:42:59:06 इस सिद्धांत के विरोधी हैं। जब तक विरोधाभासी सिद्धांत प्राप्त नहीं हो जाएगा तब तक उनको विरोधी नहीं माना जाएगा। ठीक है? जैसे कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में जो दो पीठ थी उन्होंने तो स्पष्ट विरोध किया था। मगर बाकी की दो पीठ शांत थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से विरोध नहीं प्रकट किया था। तो इसका अर्थ क्या मान लिया जाए कि वो राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में जो विधि विधान का उपयोग हुआ वो उसके पक्षधर थे।

00:43:35:06 तो सोच समझ के बोला करो अभी आपको अनुभव की कमी है। आपके वक्तव्यों में वह अकाट्यता नहीं है। अकाट्य उत्तर दे दिया है। शंकराचार्य की अकाट्यता अनिवार्य क्यों? जाकर देख लेना। तो आपके जो हैं जो प्रश्न होते हैं वह ऐसे ही सतई स्तर के होते हैं और अपने वचनों को प्रभावशाली सिद्ध करने के लिए शास्त्रीय वचन डालते हो अप्रासंगिक रूप से। खैर आगे चलते हैं। क्या है आगे? हां। एक प्रश्न और उठाया था कि भाई वो जो ईसा है वह किस तरीके से देश में प्रवेश कर रहे हैं। तो कहीं से भी वह प्रवेश करें। भारत में वो उनके रास्ते में पहले तो अन्य पीठे आएंगी। वो पूरी पीठ ही क्यों पहुंच गए सीधे? क्या बच्चों जैसे बात करी की है तुमने ये?

00:44:39:16 हां। मतलब यह कोई सनातन सिद्धांत है क्या कि कोई जिधर से घुसेगा वो वहीं पड़ाव डाल देगा। ऐसे बहुत से आचार्यों की कथाएं मिल जाएंगी। जिनका जन्म कहीं हुआ यात्रा करना शुरू की। रास्ते में अन्य बहुत बड़े-बड़े आचार्य गण मिले मगर नहीं अन्य किसी आचार्य गण से जाकर के उन्होंने दीक्षा शिक्षा दीक्षा ली तो यह प्रश्न बनेगा रास्ते में वो भी तो मिले थे उनके पास क्यों नहीं ठहरे तो हमारे अंधेपन की बात तो हो गई अब तुम्हारे लंगड़ेपन की बात भी ले लेते हैं भगवतानंद रांची में जिस मंदिर में पुजारी रह चुका है उस मंदिर के जो संरक्षक है वर्तमान वर्तमान में वह जिस परंपरा में दीक्षित हैं उस परंपरा के उनसे जस्ट पहले वाले जो महाराज हैं वो मुसलमान कुल में उत्पन्न है जन्म से मुसलमान तो क्या भगवतानंद जैसे कह रहे हो मैं वृक्षों का आचार्य और अगर इतने ही बड़े वैष्णव थे ईसा मसीह पूरे शंकराचार्य की दृष्टि में इतना ही बड़ा वैष्णव एकदम चल रहा था लड़का तो क्रिसमस की बधाई क्यों नहीं दे रहे हैं ईसा मसीह की क्रिसमस मनाने के लिए तो क्या तुम

00:45:54:16 यहां तो सिद्ध है तुमने अपनी खुद की किताब में लिखा है जो तुमने लिखी है जो वहां से प्रकाशित है उसी में लिखी है ना यह बात तो तुम मनाओगे क्या ईद अच्छा एक चीज और है तुमने अपनी म्लेच्छराज वाली जो कहानी चलाई है कपोल कल्पित उसमें तुमने इधर 11वें नियम को कहते हैं मंदिर का नियम इस नियम को इसने वेदों से चुराया है। वेदों में एक सिद्धांत है देहो देवालय प्रोक्तो जीवो नाम सदाशिव तजेत ज्ञान निर्माल्यम सोहम भावेन पूजत नहीं होगा। तो न्यू वर्ल्ड ऑर्डर की भविष्यवाणी विष्णु पुराण में प्राप्त होती है। वहां पर क्या कहते हैं? उसमें हमने कल्कि पुराण का आश्रय लेकर आप सबों को बताया था। कैसे ब्रह्मा जी के पीठ के माध्यम से अधर्म और मिथ्या की उत्पत्ति हुई और उन्हीं की वंश परंपरा में कलिपुरुष आया और वही कलिष मृच्छराज की पैशाचिक शक्तियों का अभिवर्धक है। प्रायोजक है। मृच्छराज का स्पॉन्सर है कलिपुरुष। अभी तो मृच्छराज का दामाद भारत का राजा बनने वाला है। अभी तुरंत नहीं बनेगा। लेकिन भारत के एक राजा मृच्छ बिटिया में आने वाला है। और सारे कुछ हम प्रमाण के साथ तुमको बताएंगे। सबसे पहले हम तुमको बताएंगे युग पुराण से। युग पुराण गर्ग मुनि का लिखा हुआ एक बहुत प्राचीन ग्रंथ है। अच्छा उससे पहले बताता हूं भगवान श्री रामचंद्र जी के समय मिक्षराज था कि नहीं।

00:47:09:20 भगवान श्री रामचंद्र जी के समय भी एक वृक्षराज था जिसने राजा दशरथ पर आक्रमण किया था लेकिन राजा दशरथ ने उसको पराजित करके भगा दिया था बाद में मृक्षराज वापस आया नहीं और वृक्षराज जब वापस आया तब कौन सा समय चल रहा था भगवान श्री रामचंद्र जी वनवास में थे और उन्हीं के भाई भरतलाल जो है वो भगवान के आगमन की प्रतीक्षा में थे भगवान की चरण पादुकाए अयोध्या जी की गद्दी पर प्रतिष्ठित थी तो वृक्षराज ने सोचा कि अभी तो राजा दशरथ पर लोग जा चुके है और राम जी जंगल में है लक्ष्मण जी जंगल में है भरत जी जो है वो मतलब तपस्या में है भगवान के विरह में आतुर है शत्रु जी अकेले कितना संभाल लेंगे अभी सही समय है आक्रमण करने का तो सुनो भूसुंडी रामायण के दक्षिण खंड में इसका वर्णन मिलेगा अध्याय नहीं बताऊंगा तुम खुद खोजना सब कुछ खाली परोस के तुम्हारे मुंह में खिलाऊंगा नहीं कुछ अध्ययन करो और नहीं करना है तो मेरी बात का विश्वास करो कम से कम नहीं तो फिर यही तुम लोग आलसी अपराधी हो जाते हो अविश्वासी हो जाते हो मैंने जितने संदर्भ दिए लोग कह रहे हैं कि बाइबल से क्यों बता रहे हो कुरान से क्यों बता रहे हो या यहूदियों से क्यों बता रहे हो तो पारसियों से क्यों बता रहे हो देखो सनातन शास्त्रों के संकेतों का उपयोग किया उधर अंग्रेजी किताबों का भी उपयोग किया और तुमने बाइबल का भी उपयोग किया तो इस तरीके से तुमने बाइबल का बाइबल के अंदर का जो मटेरियल है उसको कनेक्ट किया ना कि बाइबल में भी वह चीजें दी गई है जो सनातन शास्त्रों में दी गई है तो यहां पर तो वो दोष जो तुमने लगाया था कि बाइबल को बाइबल

00:48:24:21 का जो है बाइबल को सार कह रहे हैं गीता का तुम भी तो यहां सनातन शास्त्रों से जोड़ रहे हो बाइबल को अब तुम भी हो गए बाइबल को मानने वाले क्योंकि तुमने तुमने अमुक अमुक अंशों में जो है सनातन शास्त्रों से बाइबल को मैच कर दिया। तुम हो गए बाइबल को मानने वाले। यह मान लिया जाए और अब तुम मनाओगे क्रिसमस। जब पूरी के शंकराचार्य जी ने ये वक्तव्य बोला था। तुम्हारा कहना है कि इस तरीके से जो है जो

00:48:59:06 लोग धर्म परिवर्तन करेंगे। धर्म परिवर्तन होगा बड़े स्तर पर। ऐसा हो जाएगा, वैसा हो जाएगा। पूरी के शंकराचार्य जी ने जब यह वक्तव्य दिया था तब कितनी बड़ी कंट्रोवर्सी हुई थी। हालांकि वह पहले भी दे चुके थे मगर इस बार जब उन्होंने वक्तव्य दिया तो कितनी कंट्रोवर्सी हुई? तो जब कंट्रोवर्सी हुई किसने की कंट्रोवर्सी? ईसाइयों ने। जब उन्होंने कहा कि जो जीसस थे वह वैष्णव थे। तो किसने की कंट्रोवर्सी? ईसाइयों ने। तो जब लोग धर्म परिवर्तन कर रहे हैं उनके वचनों के कारण तो ईसाइयों को क्यों परेशानी होनी चाहिए? ईसाइयों का तो काम हल हो रहा है। क्यों कर रहे थे वो? वही पोप लोग जिनकी तुम्हारे अनुसार जो है वह समर्थन दे रहे हैं पूरी के शंकराचार्य जिनको वही पोप लोग विरोध कर रहे थे उस समय। अब तुम्हें एक खास बात बताऊं कि पूरी के शंकराचार्य जी के वक्तव्यों के कारण व्यक्ति प्रभावित हुआ कि नहीं। यह बाइबल वाली विचारधारा से इसका कोई प्रमाण नहीं है कि हुआ। मगर तुमने जो मलेच्छ राज्य को प्रचारित किया है और

00:50:14:07 उस दौरान तुमने उसको बाइबल से भी जोड़ा है। सब जगह से जोड़ा है। कालिया जिनकी पूजा तो कराते ही हो। तो इस कारण से म्लेच्छ राज से जुड़ने के लिए लोग जरूर प्रभावित हो रहे हैं। तो कौन कर रहा है भाई बुरी शक्तियों का प्रचार? तुम कर रहे हो। तुमसे लोग आकर के मंत्र मांग रहे हैं। तुम दे रहे हो। पूजा करवा रहे हो इन बुरी शक्तियों की। अवैदिक चीजों की कौन डाल रहा है प्रभाव? हमारे पास एक संदेश आया। वह व्यक्ति लिखता है नमस्ते। आई लाइक योर कंटेंट हाउ टू बिकम अ पार्ट ऑफ द सेटिक कम्युनिटी ऑल आई वांट इज मनी पावर एंड वेल्थ। अब इस व्यक्ति ने हमारी श्रृंखला के किसी एपिसोड को देखकर हमसे संपर्क किया कनाडा के अल्बर्टा प्रांत से और इसने यह संदेश भेजा है। इसको मिलराज का अनुयाई बनना है और इसको लगा कि चलो ठीक है वीडियो में तो जो बातें बताई जा रही हैं वो सब अपनी जगह पर हैं। लेकिन अगर मिलराज के हम अनुयाय बन जाए तो अति शीघ्रता से हम उतने दौलत शहरत इत्यादि से युक्त हो जाएंगे। तो इसीलिए इसने संपर्क किया। आधे से अधिक लोग डरपोक हैं। कह रहे हैं रात को नींद नहीं आ रही। कह रहे हैं इंटरनेट नहीं चल रहा। यह सब

00:51:29:10 होंगे होते रहेंगे। जिस प्रकार की मानसिकता जिस व्यक्ति की होती है उसी प्रकार का अनुभव उसके चित्तवृत्ति को प्रभावित करता है। जिस प्रकार की भावना जिस प्रकार की तपश्चर्या जिस प्रकार का सदाचरण आपके जीवन में होगा उसी प्रकार के अनुभव भी आपको प्राप्त होंगे। लेकिन एक बात है कि चलचित्रों को देखने वाले 80% लोगों ने नकारात्मकता का प्रत्यक्ष अनुभव किया है। ऊपर से तुम लाभ बता रहे हो कि मैंने जिसको दिया था उसको लाभ हुआ था। महिमागान कर रहे हो। एक तो वो ऐसी शिक्षा दीक्षा तुम ला कहां से रहे हो? तुम्हें यह भी परंपरा से मिला हो तो वो भी बता दो। परंपरा से नहीं मिला तो दे क्यों रहे हो? क्योंकि ज्ञान तो प्रमाणिक वही होता है जो परंपरा से प्राप्त हो। तो दे क्यों रहे हो और फिर दे रहे हो उसके बाद उसका महिमा गान भी कर रहे हो कि मैंने चार लोगों को दिया था उनको बहुत फायदा हुआ समृद्धि आ गई उनके यहां तो कौन कर रहा है प्रचार धर्म परिवर्तन लालच के आधार पर भी होता है और सबसे ज्यादा लालच के आधार पर होता है तो कौन दे रहा है उन्हें लालच कालिया जिन्न की पूजा करने का परी की साधना करने का तुम जैसे लोग

00:52:44:15 ना कौन है वास्तविक शत्रु धर्म का तुम जैसे लोग तो कुल मिलाकर बात यह है कि वर्तमान में जानकारी के जितने भी आधुनिक स्त्रोत हैं जो प्राप्त हैं उनके आधार पर जीसस का भारत आना परंपरा प्राप्त विधा के आधार पर उनकी समाधि का कश्मीर में होना विधि वही जो स्त्रोत हैं जानकारी के उनके आधार पर उनकी मूर्ति प्राप्त होना और पूरी के कुछ आचार्यों के आधार पर यह प्राप्त होना कि उन्होंने यहां पर आकर के शिक्षा दीक्षा ली।

00:53:30:00 मगर इस कारण से जीसस के नाम पर चलने वाले तंत्र जीसस के नाम पर फैलाई जाने वाली शिक्षा दीक्षा धर्म उसका समर्थन कहीं पर नहीं किया गया और ना किया जाएगा उसका तो सर्वधन खंडन किया था किया है और किया जाएगा जिनका ईश्वर जगत बना सकता है बन नहीं सकता उनका ईश्वर साक्षात अवतार ले नहीं सकता हम उस ईश्वर ईश्वर को मानते हैं जो ईश्वर जगत बनाता ही नहीं जगत बनता भी है। जिनका ईश्वर जगत बनाता ही नहीं बनता भी है। उन्हीं का ईश्वर श्री राम कृष्ण आदि के रूपों में अवतार ले सकता है। जय श्री राम। अपना ठिकाना यहीं पर बनाए। अभी इस वीडियो क्लिप में चार मिनट की रिकॉर्डिंग हमारी नहीं हो पाई किसी तकनीकी खराबी के कारण इस श्रंखला की घोषणा जब हमने की थी उसी समय से हमारे फोन पर ऑटोमेटिक फील्ड्स में कुछ ऐसी बातें स्वयं आ रही है जो कि ऑफलाइन बातें हैं। ऐसा नहीं कि मैं कुछ नेटवर्क पर सर्च कर रहा हूं या कुछ मैं ट्रेलर रिलीज़ कर रहा हूं तो उसका एल्गोरिदम पकड़ कर कुछ सजेशंस मिल रहे हैं। ऐसा नहीं है। मतलब बिल्कुल ऑफलाइन तरीके से भी जिस मोबाइल से वाईफाई या सिम कनेक्टेड नहीं है उन मोबाइल्स पर भी कुछ सर्च करने पर फोल्डर पर भी सर्च करने पर ड्राइव में भी सर्च करने पर कुछ ऐसी बातें अप्रत्याशित रूप से सामने आ रही है जो कि हमारे संज्ञान में नहीं थी। और अभी क्या हुआ कि जब मैं

00:54:45:01 इस क्लिप की दूसरी प्रति बना रहा था एक दूसरा भाग अब रिकॉर्ड कर रहा था तो लगभग पांच मिनट रिकॉर्डिंग होने के बाद वो स्वयं कैमरा बंद हुआ और उसके बाद वो रिकॉर्डिंग स्वयं मिट गई इसलिए हम इस वक्त को पुनः रिकॉर्ड कर रहे हैं। ठीक है? तो हम बता रहे थे आपको प्रिय हैं। मैं जिस स्थान पर बैठकर ये बात कह रहा हूं उस स्थान पर मैं 29 जुलाई 2015 की रात को भी बैठा हुआ था। क्यों? क्योंकि मुझे धमकी आई थी इसी मुलक्षराज के कुछ गुलामों से जो मेरा अपहरण करना चाहते थे। और तब हम अपने घर से लगभग 1280 कि.मी. दूर इस जगह पर बैठे थे। समय था रात के 7:00 बजे और दिनांक था 29 जुलाई 2015। अब मैं स्टूडियो में ये रहा। उसके बाद ये तुर्की आया। गोवेकली दप में ये रहा। इस प्रकार से अलग-अलग स्थानों पर घूमता हुआ। अंत में ये पहुंचा कोला प्रायद्वीप। कोला प्रायद्वीप में आज से 50 साल पहले तक जाता था। कोला प्रायद्वीप में वैज्ञानिकों का शोर बढ़ने लगा। तो कोला प्रायद्वीप को छोड़कर ये पहुंच गया तुर्कमेनिस्तान के कारण रेगिस्तान में। और पिछले एक साल तक ये तुर्कमेनिस्तान के अकमे रखा था। सीरिया में भी इसकी गतिविधियां हमने 2017 से 18 के मध्य में देखी थी। अनुभव की थी। मतलब देखी थी मतलब गया नहीं था अनुभव की थी और एक शाक परंपरा के साधक से इसकी पुष्टि भी की थी। तो हमने आपको इस विषय में मूलभूत जानकारी आज देने का प्रयास किया शक्ति

00:55:56:00 के। तो जिस पैसा शक्ति के माध्यम से ऐसा हो रहा है उसका जहां संदर्भ जिस प्रकार से प्राप्त होगा चाहे अधिक परंपरा से चाहे अनुभूत परंपरा से हम उसका वर्णन करेंगे। अगर तुमको इसमें प्रमाण नहीं मानना है तो अपनी कंबल और सोना तुम्हारे लिए हम थोड़े बना रहे हैं

⬜ Not used yet · 00:56:05:10 – 00:56:41:00 (0:36)

00:56:05:10 सब बातें। कुछ लोग कहेंगे ये तो शैतानों का ही प्रचार कर रहा है। वृक्षराज का ही प्रचार कर रहा है। तो ये सब बातें मत बोलो। नहीं तो एक दिन होगा मैं कमेंट का ही विकल्प बंद कर दूंगा। फिर जिसको जो बोलना है अपने मन में बोलना और हमको जो बोलना है वीडियो के माध्यम से अपनी बात हम बोलते रहेंगे। लेकिन बहुत सी बातें दर्शक पाठक हमारे जो हैं वो स्वयं भी Google पर सर्च करके जान सकते हैं कि मेरे द्वारा कहे गए शब्दों का क्या संकेत है। बताए गए स्थानों का दिखाए गए चित्रों का उन विजुअल्स का क्या संकेत है? तो आप लोग स्वयं भी अपने जीवन में थोड़ा शोध कर सकते हैं। सामने सामने परोस कर खिलाएंगे नहीं और सुनो। अब कुछ लोग ये कह रहे हैं कि प्रमाण दो। अपनी बात का प्रमाण दो। तो क्या करें? अरे हम रक्षा की गर्दन पकड़ के ला रहे हैं और सेल्फी खींच कर डाल दे रहे तुम लोग के चक्कर में हम तब पर मर जाओगे [संगीत]

Plans for this video (0)

No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.

🤖 Ask AI for suggestions

AI reads the remaining (unused) parts of this video and gives ideas for new videos: from where to where, hook, and what to remove from the middle. Suggestions follow the RULES and appear here as "AI Suggestion". You can review, edit or approve them.

  • ⬜
    Hindi SRT Required

    YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)

  • ⬜
    English SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.

  • ⬜
    Title (per Rules)

    Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.

  • ⬜
    Description

    YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.

  • ⬜
    End Screen

    YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.

  • ⬜
    Cards

    YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.

  • ⬜
    Playlist Automatic

    YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.

  • ⬜
    Thumbnail

    YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.

"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.

Playlists

Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).

A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 56:45 · 25 May 2025

कालिया जिन्न जीसस और म्लेक्षराज- शास्त्र विषयक निराकरण भाग 1

0%
☁️ Drive Not in Drive yet

🔗 This video is made from parts of these videos

B · Live सहानुभूति आड़ में छिपता भागवतानन्द
Open at 00:53:12:24
A · Live कालिया जिन्न परी साधना और म्लेच्छराज
Open at 00:49:03:22 Open at 00:50:59:10 Open at 01:16:15:08 Open at 01:17:40:16 Open at 01:23:37:22 Open at 01:26:45:20 Open at 01:33:41:13 Open at 01:36:11:10 Open at 01:39:16:19
A · Video अल्लोपनिषद और पुरी शंकराचार्य | The Ground Reality Allopanishad #allop...
Open at 00:06:49:27

Notes

Description

(empty)

History

No changes yet.

✂️ Clip Cutter

⌨️ Keyboard shortcuts

Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop

▶

Start

End

🔍 zoom
Already used Plan clips
⚠️ () of this clip is already used in another video (green part). Fine if on purpose, otherwise change the times.
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)

Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".

Clips () · Total

Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.

Hook, full note for editor, status