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00:00:00:07 रहा कि एक प्रकल्प प्रारंभ कर दिया है। एक टूरस्थ ग्रामीण जैसा क्षेत्र है लखनऊ से लगा हुआ। वहां पर एक प्रकल्प चलाया कि वहां के जो निवासी हैं उनके जो वहां के बच्चे हैं कम आयु के हैं तो उनको हम निशुल्क शिक्षा वहां उपलब्ध करा रहे हैं। तो वहां पर एक केंद्र बनाया है जिसके बारे में अभी कुछ दिनों पहले हमने श्स के माध्यम से आप लोगों को अवगत भी कराया था तो वहां पर शिक्षा रक्षा सेवा का एक केंद्र उसको बनाने की योजना है। आज वहां पर कार्यक्रम भी था तो आज थोड़ा सा अंधड़ आंधी चली थी जिसकी वजह से थोड़ा सा अव्यवस्था हो गई। परिणाम स्वरूप फल स्वरूप यहां पर जो है विलंब से आपके सामने उपस्थित हुए। खैर तो शीर्षक आपने देख ही लिया है। थोड़े से गंभीर विषय हैं। पिछले कुछ दिनों से जो एक मामला चल रहा है उसी में कुछ नए तथ्य सामने आए हैं तो आप लोगों को अवगत कराना हमने उचित समझा। अब सबसे पहली बात यह है कि आज बहुत

00:01:15:18 सारी संभावनाएं आपको दिखाई देने वाली है। बहुत सारे ऐसे गंभीर तथ्य भी और प्रमाण के साथ हम कुछ बताने वाले हैं। जिनसे बहुत सारी संभावनाएं आपको दिखने लगेंगी। और वह संभावनाएं क्या होंगी, वह अंत तक आते-आते आपको पता ही चल जाएगा। मगर जैसा कि शीर्षक है तो उसी से रिलेटेड बात करेंगे। हम एक एक नजर में एक ऑब्जरवेशन में एक कहेंगे कि इस पूरी घटना को अगर एक ग्लांस में देखें तो वो क्या आपको कहना चाह रही है तो उस पर आज हम बात करेंगे। सबसे पहले एक इसने अभी भगवतानंद ने दो वीडियोस बनाए हैं जिसमें कि पूरी शंकराचार्य जी का मैंने नहीं देखे पूरी शंकराचार्य जी का उपहास जो कि हम पहले से भी कह रहे थे और वो अब थोड़ा सा और प्रचंड रूप से और आगे आकर के कर रहा है। तो इसमें एक बात यह जानने की है कि इसने अपने कई वक्तव्यों को अपनी परंपरा को अपने आचार्यत्व को प्रमाणित करने के लिए कई बार पूज्य गुरुदेव जो हैं पूरी शंकराचार्य उनके शब्द को प्रमाण के रूप में प्रस्तुत

00:02:30:21 किया है। इसके अपने वक्तव्य हैं। कई जगह पर इसने किया है। अपनी परंपरा अपना अस्तित्व उसको जो बातें बोलता है कि देखो देखो वही बात पूरी के शंकराचार्य जी ने भी बोली है। तो इस तरह की चीजें इसने अपने वीडियोस में अपने Facebook के जो वक्तव्य है उस सब में किया है। इसके अलावा इसने उनका कई बार इसकी पुरानी पोस्ट उठाकर के देख लेंगे तो Facebook इत्यादि पर और मेरे ख्याल से YouTube वीडियोस में भी मिल जाएगी चीजें जहां पर पूरी शंकराचार्य जी का खूब महिमा मंडन किया है। अच्छा शिष्य के रूप में बैठकर उनके चरणों में आध्यात्म का ज्ञान भी अर्जित किया जिसके बारे में हमने अपने पिछले वीडियो में बताया भी था कि जब आप आध्यात्मिक ज्ञान किसी से लेते हैं वो आपका गुरु होता है उसका सम्मान ना करने की स्थिति में भी आप पापी हैं। और इसने अपने वीडियोस में यह तक कहा है कि पूरी शंकराचार्य जी की जो बातें हैं वो बातें सब लोगों के समझने की बस की बात नहीं है। मतलब किसका इशारा उस उस ओर भी होता है कि जैसे वह अपनी कोई दिव्यता वाली बात बोल रहे हैं या फिर हिंदू राष्ट्र से साढ़े तीन वर्ष में हिंदू राष्ट्र इत्यादि की बात बोल रहे हैं तो उसमें भी वो बात आ जाती है कि उनकी बातों को

00:03:45:22 समझ पाना सब सबके लिए संभव नहीं होता है। मगर ये ये दावा कर रहा है कि यह समझता है। तो ये प्रमाण के शब्द प्रमाण के रूप में पूरी शंकराचार्य जी को उपयोग में लाता है। यह अपने अस्तित्व की प्रमाणिकता के लिए भी उनका उपयोग करता है। अपनी जो कही जाने वाली बातें हैं उसके लिए भी उनका उपयोग करता है। महिमा मंडन करता है। है ना? ख्याति प्राप्त करने के लिए शिष्य के रूप में उनसे शिक्षा भी प्राप्त करता है। और यह भी कहता है कि हम जो है उनको ज्यादा मतलब हम औरों से ज्यादा नहीं तो कम से कम यह जरूर कहता है कि मैं गहराई से उन्हें जानता हूं। मगर इस सब के बाद भी गहराई से जानने के बाद भी फिर यह उनकी जो दिव्यानुभूति वाला जो ग्रंथ है उसको लेकर के मजाक बनाने बैठता है क्योंकि इसके द्वारा किए गए जो उठाए गए जो प्रश्न है उस उस पर सामने वाला कोई सवाल ना करे और यह बस बोलता रहे सामने वाला सुनता रहे और अगर कोई बोलेगा पूछेगा कि भाई ठोस प्रमाण लाओ तो ये क्या करेगा कि ये वो ठोस प्रमाण तो दे नहीं पाएगा तो ये ये सब करेगा अब ये तो इसकी इसकी एक जो आपने देखा कि एक पैराग्राफ में अगर इसको जानना चाहे पूरी शंकराचार्य जी को लेकर के यह व्यक्ति क्या है

00:05:01:20 तो इसने अपने लिए उनका सकारात्मक उपयोग भी किया और अब अपने लिए उनका नकारात्मक उपयोग भी कर रहा है जो जनता को दिखाई दे रहा है और वो लोग भी अब इसके विरोध में उतर रहे हैं जो शांत बैठे हुए थे जो इस मामले में मौन धारण किए हुए थे सामने नहीं आ रहे थे अब सब जगह से इसका विरोध होना शुरू हुआ है अभी आगे तो और देखिए क्या-क्या होता तो खैर जब ये गहराई से जानने का दावा करता है उनको और उनका महिमा मंडन करता है उनके लिए सकारात्मक भाव रखता है तो फिर उनकी वो बातें जो गढ़ है उनको लेकर के खुद ही उपास उड़ा अच्छा उपास उड़ाने से मुझे याद आया कि जो जिस तरीके से उपास उड़ाता उड़ा रहा है ना कि तब क्यों नहीं सेना आ गई यह क्यों नहीं हो गया वो आर्य समाजी भी इसी तरीके से अवतारवाद और पुराणों का खंडन करने का प्रयास करते हैं अब तुम यहां कहना ना खंडन नहीं किया आर्य समाज जी ऐसे ही कहेंगे ना ना खंडन नहीं खंडन किया प्रयास नहीं किया खंडन किया ऐसे ही मजाक उड़ाएंगे ना तो यह देख लो किस तरफ जा रहा है व्यक्ति भक्तमाल इस तरीके से भक्तमाल में बहुत सारी कथाएं दी गई है लीलाएं दी गई है ना जो चमत्कारों से ओतप्रोत है तो उन उनप भी ये सारी बातें बनती है व्यक्ति आराम से कर रहा है खैर जो प्रबुद्ध जगत है वो देख

00:06:16:21 रहा है कि ये क्या कर रहा है हमें ज्यादा उसके उसमें जाने की आवश्यकता नहीं जिसने अच्छा किया अपने पैर कुल्हाड़ी मारी है करके जो इसने पिछले दो वीडियोस बनाए भगवान आदि शंकराचार्य जी ने परया प्रवेश करके वो भी चमत्कार था उसको भी चैलेंज करेगा श्री राम जी भी परम ब्रह्म थे फिर वो तो केवल अपनी संकल्प शक्ति से कुछ भी कर सकते थे फिर उनको विलाप क्यों करना पड़ा फिर उनको रोना क्यों पड़ा तो ये ये सब बातें ये बोल सकता है यह वही कर रहा है जो आर्य समाज करते हैं जो विधर्मी करते अवतारवाद को ना मानने के लिए, पुराण को ना मानने के लिए जो उनके तर्क होते हैं वही तो तर्क है इसके। अच्छा यह कर सकते थे तो यह क्यों नहीं किया? वो ब्रह्म थे, परम ब्रह्म थे तो वानर सेना की सहायता लेने की क्या जरूरत पड़ गई? यही तो किया इसने बैठ के। खैर आगे चलते। तो अब अगर इसकी हम एक जीवनी को देखें जो इसका जीवन जैसा कि जो इसके द्वारा जो जीवनी के बारे में बताया गया है। तो उसमें क्या है कि एक विद्वान पिता थे जिनके घर इसका जन्म होता है भगवतानंद का। अब विद्वान पिता भी हैं

00:07:31:27 और इसका कहना है कि मैं भी बचपन से विद्वान ही था और शायद संभवत इनके पिताजी भी यही मानते होंगे। तो जाहिर सी बात है जब जो हमारी जो किसी व्यक्ति की कोई संतान है वो विद्वान है। लक्षण संपन्न है। है ना? और विद्वान दंपत्ति की संतान है। तो कहीं ना कहीं एक भाव बचपन से ही मन में आएगा कि भाई यह किसी किसी महापुरुष के रूप में जाना जाए। कि किसी विद्वान पद पर जिस पद को विद्वता के कारण जाना जाता हो ऐसे पद पर बैठने वाला हो भविष्य में आगे चलकर के। तो कोई बड़ी बात नहीं है कि ऐसा भी भाव रहा हो कि शंकराचार्य के पद पर बैठे। यह स्वयं बैठे या इनके पिता के मन में भाव मतलब एक बचपन से ही होता है ना एक ओरा बना दिया जाता है व्यक्ति के इर्दगिर्द उसको किस दिशा में चलना है तो ये चलते भी हैं ये अपना मन में भाव बना लेते हैं मगर अच्छा इसके साथ ही साथ इनका यह भी कहना है कि बचपन से और भी दिव्यता वाली बातें होने लगी देवताओं के दर्शन होने लगे ये वो है मगर इसमें कुछ चीजें बाधा भी बाधाएं भी आती है बाधाएं क्या है जैसे 2016 में प्रेम प्रसंग या उसके बाद फिर दोबारा से कुछ समय बाद

00:08:46:28 फिर प्रेम प्रसंग बाईपोलर नाम की बीमारी आ गई। अच्छा इस सब के साथ ही साथ जब ये शंकराचार्य के मठ में गए तो ऐसा कोई बड़ी बात नहीं है। इनकी भावना रही हो कि मैं आगे चलकर के भविष्य का शंकराचार्य बनूं। मगर वहां से इनको निराशा प्राप्त हुई। तो यह भी एक इनके मन स्थिति हम लोग जो ये बातें कर रहे हैं इसकी मानसिक स्थिति क्या हो सकती है? उस पर बात कर रहे हैं। तो प्रेम में धोखा वो कहते हैं प्यार में धोखा खाए हुए तो प्रेम प्रसंग में असफल करियर में असफल और एक जो विद्वता की जो चीज प्राप्त करनी थी ख्याति उसमें असफल है ना इसके साथ ही साथ क्या था कि तंत्र मंत्र जैसी दुनिया में भी प्रवेश कर लिया। आज तंत्र मंत्र पर भी बात करने वाले हैं। तंत्र तंत्र वाली जो दुनिया है उसमें भी प्रवेश किया। तो तंत्र साधना इत्यादि में भी ये प्रवेश कर चुके और यही नहीं है ना यही केवल यही नहीं तंत्र के आगे की कुछ चीजें जैसे जिन्न को साधना या वो मैं अभी आगे बात करूंगा। कुछ चीजें सामने आ रही है। कालिया जिन्न की साधना परी की साधना

00:10:02:02 यह सब तो तंत्र में भी एक भीषण तरीके से नकारात्मक ऊर्जाओं के लिए जो है यह जो है प्रयासरत रहे तो इन सब का प्रभाव यह रहा। अच्छा वहां से निकले जो शंकराचार्य के मठ में जो अपने आप को ख्यापित नहीं कर पाए वहां असफल हुए। प्रेम प्रसंग में असफल हुए करियर में असफल हुए। तो फिर इन्होंने एट दी एंड यह जो भी इनके पास उपलब्धियां थी या जो भी इनके पास जो विद्वता थी दिमाग था उसका इस्तेमाल करके इन्होंने क्या किया कि भाई निग्रह संप्रदाय बनाते ये अगर इनकी जीवनी को यहां से यहां तक देखें तो कोई गलत नहीं होगा ऐसा कहना ऐसा प्रतीत होता है ये कोई गलत बात नहीं होगी। तो फिर अपने आप को प्रमाणित करने के लिए अब जब निग्रह संप्रदाय बन गया तो अपने आप को प्रमाणित करने के लिए फिर शंकराचार्य के पास जाना पड़ेगा। जाएंगे भाई शंकराचार्य हमें प्रमाणित कर दें। अच्छा एक चीज और मैंने देखी है कि इनको जो प्रश्रय मिला है अन्य बड़े आचार्यों से जैसे कि ज्योतिष जो

00:11:17:08 ज्योतिर्मठ है उधर और जो अन्य बड़े आचार्यों के साथ में इसको जो मिला है मैंने देखा है कि हालांकि उधर भी इस अगर इसके दृष्टिकोण से देखा जाए तो कोई भी अछूता नहीं रहा है अशास्त्रीयता से सिवाय इसके सिवाय इसके अशास्त्रीयता से कोई अछूता नहीं रहा है बल्कि कि यह स्वयं अनजाने में कहां पर अपने आप को अशास्त्रीय कह चुका है वो जानते ही हैं। जिसको यह चाहता है कि उस पर बात ना की जाए। जैसे इसने स्वीकार किया कि शास्त्रों के हिसाब से गाली देना मना है। मगर फिर भी मैं जो है धर्म सम्मत हूं और तर्क सम्मत हूं और प्रमाण सम्मत हूं। है ना? तो मगर फिर भी ये आज पूरी पीठ के विरोध में ऐसे क्यों खड़ा हुआ है? पूरी के शंकराचार्य जी के विरोध में क्यों ऐसे खड़ा हुआ है? क्योंकि आपने इस व्यक्ति को जिनके साथ जिनका भी विरोध यह कर सकता है। मगर जब शायद मेरे ख्याल से विरोध करने की बारी आती तो कुछ मीठी आवाज में करता हो या ना करता हो मौन धारण कर लेता हो। मगर वो विरोध देखने को नहीं मिलता। यही विरोध देखने को मिलता है। तो दोनों जगह में अंतर क्या दिख रहा है? अंतर यह दिख रहा है कि जिस तरीके से अन्य जगहों पर इसे प्रश्रय मिला, इसको बिठाया गया

00:12:32:24 अपने साथ वो कभी भी इसको पूरी पीठ में नहीं मिला। शंकराचार्य के बगल में इसको कभी भी नहीं बिठाया गया। जो जगतगुरु है उनके बगल में इसको कभी नहीं बिठाया गया। वहां गया तो नीचे ही बैठा। तो एक ये भावना भी हो सकती है। पूरी पीठ से निकाले गए या पूरी पीठ से स्वयं आ गए असफल हो के। वहां कभी उस तरीके का प्रशय नहीं मिला कि इनको जो है निग्रचार के रूप में वहां जो है ख्यापित किया जाए या बगल में बिठाया जाए। यह सारी चीजें भी दिखाई देती है। इसका जो ये व्यवहार है। खैर अभी मना स्थिति पर हम लोग बात कर रहे थे। तो ये बचपन से आकांक्षा कि भाई मैं अह एक विद्वान हूं। तो विद्वता के क्षेत्र में जाना जाने वाला जो पद है उस पर एक ना एक दिन ख्यापित हूं। किसी बड़े नाम से जाना चाहूं। इसके बाद बाधा आ जाती है। दिव्यता भी है। देवताओं के दर्शन भी होते हैं। मगर फिर बाधा आ जाती है। प्रेम प्रसंग आ जाता है। बाईपोलर आ जाता है। और दूसरी भी कुछ ऐसी बीमारियां जो अभी कुछ प्रमाणिकता के अधीन है। जांच के अधीन है। राजस्थान वाला जाना आना। वो राजस्थान वाली बात से याद आया कि इसने अपने वीडियोस में जब वो राजस्थान वाली बात उठाई गई थी कि भाई ये

00:13:47:25 किसी आदत से ग्रसित है। उस आदत के निवारण के लिए उससे छुटकारा पाने के लिए इसका इलाज जो है राजस्थान से कराया जा रहा है। कर रहा है। तो इसने कहा था कि मैं कब गया जोधपुर मैं कब गया राजस्थान। अब इसने स्वयं अपने Facebook की पोस्ट पर राजस्थान के डॉक्टर की पर्ची एक दिखाई है कि मेरा इलाज जो हुआ था वो खांसी, जुकाम इत्यादि का हुआ था। इसने ये खुद अपने Facebook पोस्ट में डाला है वहां। इसका जुकाम इसका जो इलाज हुआ था वहां से वही राजस्थान से जिस जिस राजस्थान से इलाज ना करने को यह सिद्ध कर रहा था इस आधार पर कि मैं कभी गया नहीं उसी राजस्थान से उसी जोधपुर से यह अपना इलाज होना स्वीकार कर रहा है सर्दी जुकाम इत्यादि का या जो कुछ भी उसमें बताई हो सामान्य बीमारी उसका स्वीकार कर रहा है। यानी कि जोधपुर ना जाने के आधार पे राजस्थान ना जाने के आधार पे इसकी वो बात नहीं मानी जा सकती कि इसका इलाज नहीं चल रहा है। खैर इसमें आगे भविष्य में और भी तथ्य खुल सकते हैं और वो है ना गाना किसी दिन मुस्कुरा कर ये तमाशा हम भी देखेंगे इसी ने याद दिलाया मुझे खैर तो बीमारी आ गई बाईपोलर आ गया बाधा आ गई प्रेम प्रसंग आ गया उधर विद्वता

00:15:02:26 है इसके अनुसार दिव्यता है इसके अनुसार इसके बाद शंकराचार्य के मठ में प्रवेश भी मिलता है मगर वहां पर वो स्थिति प्राप्त नहीं हो पाती जो आकांक्षा है जोत्वाकांक्षा है और तंत्र मंत्र में घुस जाते हैं तो फिर उसका सहारा लेकर के किसी तरीके से कुछ ना कुछ एक कहानी बना करके अपने आप को प्रकट कर देते हैं ख्यापित करने का प्रयास करते हैं कि हम एक संप्रदाय है निग्रह उसके हम आचार्य हैं और संभवतः अह क्या कहते हैं ये अंतिम आचार्य हैं वही रामपाल वाली कहानी कि इस मामले में मैं अंतिम नहीं हूं मोहम्मद वाली कहानी अब कोई और नहीं आएगा संभवत सुना है मैंने। अच्छा इसने हमने जो पिछला वीडियो किया है जिसमें इसकी गालियों पर बात की है उसका एक पीडीएफ प्रॉपर बना करके उसके YouTube डिस्क्रिप्शन में डाला गया है। तो जिसको भी वो पीडीएफ लेनी हो। जरूरी नहीं है कि उसको इसी नजर से ले कि भाई भगवत आनंद गाली देता है और उसका इसमें जो है प्रतिकार है। इस नजर से भी लीजिए कि गाली क्यों नहीं देनी चाहिए। गाली का उपयोग क्यों नहीं करना चाहिए? एक जनरल इंफॉर्मेशन के रूप में भी बहुत अच्छी पीडीएफ है तो वहां से आप डाउनलोड अवश्य करें और

00:16:17:27 इसने स्वयं भी अपने शायद वेबसाइट में या Facebook अकाउंट में कहीं पर या अपनी बुक में शायद लिखा है कि लोग कहते हैं कि मैं आचार्य क्यों नहीं हूं। किसने बनाया तुम्हें आचार्य? लो शास्त्रों ने बनाया मुझे आचार्य। फिर शास्त्रों की वहां पर श्लोक दिए गए हैं और श्लोक में श्लोकों के आधार पर कह रहा है कि मुझे शास्त्रों ने आचार्य बनाया है और उसी में जो जो श्लोक है उसी में लिखा हुआ है कि वह संयमी होते हैं। वह आचार्य हैं। मृदभाषी होते हैं। वाणी उनकी इस तरीके की चीजें उसी में लिखी हुई है जो अपने आप को आचार्य के रूप में ख्यापित करने के लिए सिद्ध कर रहा है। अत्यंत विनम्र है ना शीलवान ये सब वहां लिखा हुआ है। तो ये खैर सीधी बातें हैं। अब मुख्य पॉइंट पर आते हैं जो बहुत ही गंभीर पॉइंट है कि यह किस ओर जा रही है यह धारा ये मलेचराज जिन्न की पूजा परी की सिद्धि ये सब किस ओर जा रही है ये सब आज आप देखेंगे तो फिर से एक बार छोटा सा क्रम ले लेते हैं विद्वता दिव्यता और उसके बाद बीमारी प्रेम प्रसंग बाधा उसके बाद शंकर मठ में प्रवेश मगर वहां पर असफल होना तंत्र मंत्र में घुसना और तो और नकारात्मकता की ओर उसमें आगे बढ़ना और अंतत गत्वा कुछ हाथ ना लगने पर अपने

00:17:33:03 आप को निग्रह संप्रदाय के अंतिम आचार्य के रूप में या प्रथम या जो भी जो भी नंबर पर आचार्य हो उसके रूप में ख्यापित करना और वो एक बात अलग है कि उसको प्रमाणिक सिद्ध कराने के लिए भी शंकराचार्य के आगे चक्कर काटना। अब ट्विस्ट क्या आता है कि भाई जब यह चीजें नहीं मन पा जब यह सारी चीजें नहीं प्राप्त कर पा रहे डिप्रेशन है बाईपोलर है प्रेम प्रसंग में भी निराश व्यक्ति है करियर में निराश व्यक्ति है है ना और कुछ वैसे जो उनका भी प्राप्त हुआ है जो अन्य जो आदतें हैं जिसके लिए राजस्थान वाली बात होती है जो अभी तक सत्यापित नहीं है मगर बात उठ रही है

00:18:21:24 तो इस सब के बाद में भी अपनी वो जोत्वाकांक्षा है कि मैं अपने आप को ख्यापित करूं एक ऐसी ऐसे व्यक्तित्व के रूप में जो विध्वता के रूप में जाना जाए जो लोगों के लिए जिसका शब्द प्रमाण तो फिर ये वही दिखता है इसका षड्यंत्र रचना क्या कि अन्यों के जो वो कहते हैं ना लूप होल्स देखना वीक पॉइंट्स है उनको देखना उनका उनको रोस्ट करते हुए अपने आप को ख्यापित करना। भाई वेदों के द्वारा जो सीमित क्षेत्र है वैदिक कौन है? उस सीमित क्षेत्र के अंदर ये वैदिकों से इस बात पर लड़ा है कि तुम्हारा आचरण यहां गलत है। तुमने यहां ये गलत कर दिया वो कर दिया। वो ठीक है। लड़ा है। ये बाहर वालों को कितना लड़ करके आया कि उनको लेकर के अंदर आए। वैदिकों में अंदर वैदिकों में इसने खूब लड़ाई की है। खूब उत्पात किया। राजेंद्र दास जी का कर लिया। ये कर लिया, उधर कर लिया। क्योंकि भाई जो करने चलेगा तो उसको कहीं ना कहीं बहुत सारी चीजें हैं जो दिखाई करने के लिए रणनीतियों का उपयोग करना पड़ेगा। तो इसने सब पर स्टेटमेंट हालांकि अपनी जगह पर आने पर यह थोड़ा मृदभाषी हो जाता है। जैसे कि जब इससे क्वेश्चन किया गया था इसने कुछ एक शास्त्र का नियम बताया था कि अगर कोई तुमको

00:19:37:01 अंधा कह रहा है तो तुम उसको अगर पलट करके यह कह देते हो कि लंगड़ा तू भी तो लंगड़ा है तो उसके लंगड़ा होने से तुम्हारे अंधे होने के बारे में कोई तुमने वो नहीं दिया। पक्ष अपना प्रस्तुत नहीं किया। तो इसको एक दोष बताया था इसने। मुझे याद नहीं आ रहा है। अपनी एक लाइव में दोष बताया था इसको ऐसा करना। तो यह क्या करता है कि जब इस पर कोई बात आती है जब जब यह किसी पर दोष लगा रहा होता है सामने वाला अगर इससे कोई क्वेश्चन पूछ लेता है तो इसको याद दिलाता है कि भाई ये फलाना दोष है। मगर इस पर जब कोई बात पूछी जाती है या इससे कोई ठोस चीज जैसे हमने इससे ठोस चीजें मांगी कि भाई पूरी मठ में पूरी पीठ के ऊपर जो तुम आरोप लगा रहे हो उसके संबंध में जो है वो प्रमाण दो या विजय श्री को लेकर के जो आरोप लगा रहे हो उसके संबंध में प्रमाण दो तो ये व्यक्ति वहां प्रमाण देने की बजाय क्या बातें करता है तीन वर्ष में हिंदू राष्ट्र क्या हुआ चार शंकराचार्य की कितनी पीठे हैं प्रमाणिक ये सब बातें करने लगता है मतलब जो दोष वह यहां पर कह रहा है वही दोष तो उस पर आ रहा है। भाई तूने एक बात कही कि फलाने फलाने के ये आचरण है। ऐसा ऐसा दोष है।

00:20:52:02 जब तुझसे प्रमाण मांगा जा रहा है तो तू कह रहा है तुम यहां गलत हो तुम वहां गलत हो। तो भाई अगर उसको मान भी लिया जाए कि वो व्यक्ति लंगड़ा है। जैसा कि तुमने अपनी एक वीडियो में कहा। तो तुम्हारा अंधा ना होना सिद्ध नहीं होता ना। अच्छा विदेश गमन वाली बात विदेश गमन बागेश्वर वालों ने किया उसको इस इसने खूब उछाला वो अगर शंकराचार्य जी से मिलने चला गया तो ये हो गया देखो देखो विदेश गमनकारी से मिल रहे हैं मगर खुद से जब पूछा गया विदेश गमनकारी से तो इसने स्वयं कह दिया कि भाई विदेश गमनकारी से मिले उसकी कथा में भी गए मगर हम उसके विदेश गमन का समर्थन थोड़ी ना करते हैं तो पूरी के शंकराचार्य जी ने कहा लिख के दे दिया था कि वो बागेश्वर के विदेश देश गमन का समर्थन करते हैं या अमुक अमुक क्षेत्र जिसमें वो गलत है वो उनका समर्थन करते हैं।

00:21:42:26 ठीक है? तो अब इसने षड्यंत्र रचना चालू किया कि लोगों के वीक पॉइंट देखेंगे और जानते ही आप जो सनसनी वाली चीजें होती है वो ज्यादा लोगों को वो करती हैं अट्रैक्ट। तो फिर सनसनी वाली चीजें चालू हुई। सनसनी क्या है भाई? लड़ाई टाइप का सीन दिखेगा तभी मामला बनेगा। इसने कहा भी है कुछ लोगों से मैं उनका नाम नहीं ले रहा हूं क्योंकि जो लोग इसके सहायक रहे हैं वह हमारे भी संपर्क में है तो जब वह कहेंगे कि हमारा नाम ले लो तो हम लेंगे मगर ये तक इसके वर्ड्स रहे हैं जब इनसे कहा गया कि भैया तुम अगर कोई किसी का किसी बात को रख रहे हो तो नाम लेके किसी का किसी को रोस्ट मत करो तो इनका कहना है कि व्यूज नहीं आते उस तरीके से करने पर व्यूज नहीं आते तो इन्होंने अपनी वो रोस्टिंग एबिलिटी मेंटेन किया बनाया इस तरीके से करेंगे तो लोग ज्यादा रुचि लेंगे। खैर चलो रुचि लेंगे और तो इसने षड्यंत्र ये किया कि अन्यों के वीक पॉइंट ढूंढकर कई ऐसे वीक पॉइंट जिसमें खुद भी वीक है। मगर अन्यों के वीक पॉइंट ढूंढकर उस पर बोल बोलकर रोस्ट कर करके जो है स्वयं को ख्यापित करेंगे एक धर्माधिकारी के रूप। ये षड्यंत्र यहां तक इनका दिखाई देता है। कौन? जो प्रेम

00:22:58:00 प्रसंग में धोखा खाया, डिप्रेशन में है, बाईपोलर में है और वो अपने करियर में भी निराश है। तो वह अब निकलता है स्वयं को एक स्वतंत्र रूप से आचार्य के रूप में स्थापित करने के लिए। ठीक है? अभी देखिएगा यह रहस्य कहां जाकर के खुलने वाला है। बहुत रोचक रहस्य है आज का। अब आगे जब हम चलते हैं कि जब यह यात्रा इसकी देखते हैं तो कल तक इसके लिए जो कल तक इसके लिए

00:23:35:24 जो क्या कहते हैं एक मिनट कल तक इसके लिए जो सम्माननीय थे शब्द प्रमाण वाले थे वो आज इसके लिए अपमान के योग्य हो जाते हैं। वो आज इसके लिए मतलब अशास्त्रीय हो जाते हैं। कल तक जिन पूरी पीठ के शंकराचार्य जी का यह महिमा गान करते नहीं थकता था अपने पुराने टाइम में तो धीरे धीरे धीरे धीरे अपने आप को ख्यापित करते करते करते अब आज इस पे आ गया कि भाई जो शंकर के साक्षात शंकर के जो स्वरूप होते हैं ये खुद लिखा है अपने उसमें मगर आज ये इस पे आ गया कि जो है उनका ये कैसे हो सकता है वो कैसे हो सकता है ठीक है अच्छा वीक पॉइंट की बात ये भी है कि जब इसके वीक पॉइंट्स पर इससे बात की जाती है तो ये वहां आता ही नहीं है जैसे हमने इसको चल भाई आजा कर लेते हैं। अगर तुझे नहीं मतलब तुझे नहीं समझ में आ रही है प्यार की भाषा स्नेह की भाषा सम्मान की भाषा तो ठीक है आजा कर लेते हैं आमनासामना तो तब से अब ये दिख नहीं रहा है अब वो फटाफट फटाफट जो पोस्ट डालना शुरू किए थे हमारी लाइव बंद होने से पहले भी पोस्ट वहां डल जा रही है ऐसा हो रहा है वैसा हो रहा है अब वह सब बंद है सक्रियता कमजोर पड़ गई

00:24:51:08 और जबकि उन दिनों नवरात्र चल रहे थे उस समय इतने सक्रिय मतलब यह कहा जा सकता है कि भाई साधना भी तो है व्यक्ति के पास मगर नवरात्रि के दिनों में इतना सक्रिय था व्यक्ति और अब जो है निष्क्रिय दिख रहा है। खैर आगे चलते हैं। अब वैसे इसने अपने एक वीडियो में कहा भी है कि भाई जो मूवीज है वो इससे बनती हैं। मलेच राज वाले उससे जैसे इसने जो मलेचराज की जो सीरीज चलाई है उस पर इसका कहना है कि कुछ लोगों के क्वेश्चंस आते हैं कि भाई ये तो फलानी मूवीज से मैच दिख रहा है। ये तो फलानी मूवीस मूवी से मैच दिख रहा है। तो इसका वहां पे जवाब ये था कि भाई वो मूवीज से ये नहीं बना है बल्कि इससे वो मूवीज बनाई गई है। अब प्रॉब्लम ये है कि जो मलेच्छराज वाली जो सीरीज है इनके हिसाब से तो इन्होंने ही बनाई है। मतलब उस पर ऐसा प्रकाश जो डाला है मेरे ख्याल से इनके अनुसार दुनिया में किसी ने भी नहीं डाला। पर किसने डाला है इस पे आगे बात करेंगे। मगर इसका तो यही कहना है कि भाई मैं एक ऐसी जानकारी तुम्हारे लिए लेके आ रहा हूं जो और किसी के पास नहीं है। तो जब वो जानकारी किसी के पास नहीं है तो उससे प्रेरित होकर के फिल्में क्यों बनेंगी?

00:26:07:08 चलो मान लो तुम्हारी जो तुम्हारे पास जो जानकारी है और किसी तुमसे थोड़ा निम्न स्तर का जो बुद्धिमान होगा उसके पास वो जानकारी होगी। ये फिल्म के डायरेक्टर्स इत्यादि के पास थोड़ी ना होगी। तो फिल्में इसका कहना है वो जो फिल्में बनी है वो मलिचराज से प्रभावित होकर के बनी है। मगर मैं आपको एक बात बता रहा हूं कि आपने ऐसी कई फिल्में देखी होंगी जो कोई व्यक्ति होता है वो फलाने करियर में वो ठीक से नहीं अपने आप को सेटल कर पाया ख्यापित कर पाया। उसकी बात लोगों ने नहीं सुनी, नहीं समझ पाए लोग। है ना? और इस इस तरीके से नाकाम होते कहीं-कहीं उसके फौल्ट भी थे। फॉल्ट्स भी थे। कोई बड़ी बात नहीं है कि पूरी पीठ में अपने पैर इसलिए नहीं जमा पाया क्योंकि इसकी ये चीजें चल रही थी बाइपोलर टाइप की। कोई बड़ी बात नहीं है। खैर अह तो उसके फौल्ट्स के कारण या उसकी जो भी कमी रही हो उसके कारण एक व्यक्ति अपने आप अपना जो करियर भाई प्यार में तो पहले ही विफल हो चुका है। उसके बाद वह व्यक्ति अपना करियर बनाना चाहता है विध्वता के क्षेत्र में तो वहां पर भी करियर में भी वह विफल होता है और वह अपने आप को अब एक स्वतंत्र संप्रदाय के रूप में ख्यापित करना चाहता है तो फिर अब वो

00:27:22:09 उसको कहानियां चाहिए होती है तो कहानियां कहां से मिलती है तो ऐसी बहुत सारी फिल्में जिसमें ऐसा होता है कि व्यक्ति जो है कैसे बना वो इस इस तरह की मूवीज से कांसेप्ट उठाता है मलेचरा जैसी जो चीजें हैं वो कैसे हैं, कैसे दिखाई देती हैं, कहां-कहां रहती हैं? तो अहंकार, बाइपोलर और एक चीज और है मुंह में पिशाचिनी। इसने एक वर्ड यूज़ किया है अपने वीडियोस में। वो वर्ड क्या है? कि कली पुरुष की बहन उसका नाम है ध्रुपत्नी या ध्रुपति। ऐसे कुछ नाम था उसका। मुझे याद नहीं आ रहा है वर्बली। कली पुरुष की बहन ध्रुपति है। या ध्रुपत्नी ऐसे कुछ था। वो उसका मतलब होता है गाली। ठीक है? अभी हमने कल शास्त्र का वचन लिया था जिसमें कि यह बताया गया है जो व्यक्ति गाली दे रहा है वो अपने मुंह में पिशाचिनी को लेकर के चल रहा है। पिशाचिनी को लेकर चलने वाला कौन है? जिसके पास देने के लिए गालियां हैं। कहा था ना अह किसी संत की वाणी है जिसमें कहा जा रहा है कि तुम मुझे गाली दे लो। लाल है।

00:28:37:10 इसकी जीहवा बिल्कुल लपलपाती हुई है। भयानक है और इसके शरीर से बहुत भीषण दुर्गंध आती है। जुआ शराब व्यभचार और धन के मद स्वर्ण आदि में इसका वास हो गया। और इस कल पुरुष की बहन का नाम है दुरुपति मतलब गाली। दुरुपति मतलब गाली। तो यह देख लीजिए। द्रुपति मतलब गाली कली पुरुष की बहन है तो यह कली पुरुष की बहन को और वहां पर शास्त्रों में भी उसे पिशाचनी तो कहा ही गया है तो ये इसका कनेक्शन देखते जाइए कैसे बन रहा है धीरे-धीरे तो फिल्मों की स्टोरी उधर षड्यंत्र दूसरों का अपमान दूसरों में कमियां निकाल करके स्वयं को ख्यापित करना और अब जो सम्माननीय लोग थे वो अपमान की दृष्टि से उनको देखने लगना और इसकी जो कहानी पर्सनल इसने ये कहानी चुराई नहीं मगर आप इसकी कहानी भी आपको कई ऐसी मूवीज हैं कई ऐसी फिल्में जिसमें दिख जाएंगी जिसमें कि व्यक्ति नाकाम हो गया अनेक अनेक जगह जगह से ठोकर खाने लग गया उसके बाद वो समाज के लिए बन जाता है एक खतरा बहुत

00:29:52:16 बड़ा खतरा और इसकी कहानी भी कुछ उसी तरफ जा रही है कि जो अपने करियर को अपनी लव स्टोरी को ठीक से नहीं कर पाया वो आज समाज के के लिए धीरे-धीरे खतरा बनता जा रहा है। अभी तो कुछ लोगों ने बोलना शुरू किया है। हो सकता है इसी तरीके से इसका यह होना था नाश। मैंने उसको बताया था ना कि तुमने गलत तार छेड़ दिए। तो यह तो इसकी कहानी मगर अब यह जो चीजें हो रही है इसके कि अमुक अमुक इसके अंदर अहंकार है, बाईपोलर है, मुंह में पिशाचनी को लेकर के चल रहा है। तंत्र तंत्र साधना में जा रहा है और तंत्र साधना में ही इतना ही नहीं जा रहा है। गंदी आदतें हैं। गंदी आदतें हैं। है ना? वो राजस्थान इत्यादि से जुड़ी हुई। तो मुंह में पिशाचनीय है। गाली को ले चल रहा है। मैं गाली दूंगा। शास्त्र में लिखा है गाली मत दो मगर मैं गाली दूंगा। यह खुद मान रहा है। तो यह सबका एक नकारात्मक जो इफेक्ट है वह इसके जीवन में पड़ रहा है। अब क्या है कि यह तो इफेक्ट पड़ रहा है वो अब इफेक्ट कहां जा रहा है? वो खतरा कैसे बन रहा है समाज के लिए वो देखते हैं। वो कैसे बन रहा है खतरा? तो अब वह खतरा बनते हुए जब मतलब खतरा समाज में बनकर प्रस्तुत हो रहा है तो अब वो जो है एक स्क्रिप्ट लिखना चालू करता

00:31:08:01 है। एक स्क्रिप्ट लिखता है कि कैसे लोगों को डिफेम करना है। किन-किन लोगों को कब कब क्या-क्या बोलना है। वो पूरा अपना एक सेटअप तैयार करता है इस बारे में। इसी बारे में अब हमारी ये श्रंखला पूरी चलेगी कि भाई यह किस तरीके से समाज के लिए खतरा है और आज भी बहुत रोचक चीज क्योंकि मलेच राज पर आज हम बात कर रहे हैं तो आज बहुत रोचक चीजें आपको सामने आने वाली है। आने वाली वीडियोस अलग-अलग टॉपिक्स पर होंगी। मगर अभी यह किस तरीके से समाज के लिए खतरा बन सकता है आने वाले टाइम में वो हम इस पर हम बात करेंगे। अब क्या है इसमें? हां इसमें वो आक्षेपों पर भी बात होगी। अ जो खंडन करने का प्रयास किया है ना ये क्या कहते हैं? सबरी वाला और बुद्ध वाला उस पर भी बात होगी। सब सारे टॉपिक्स पे एक-एक करके बात होगी विधिवत तरीके से। ये पूरी सीरीज चलेगी। गुरुदेव के चमत्कारों पर इसने जो बात उठाई है उस पर भी एक अलग से स्पेसिफिकली वीडियो बनाएंगे। तो अच्छा एक बात और है कि जो कोई भी इसमें प्रतिकारात्मक रूप से लाइव आना चाहता है सामने से बात करना चाहता है जिसको कि गुस्सा है या कुछ समझ में नहीं आ रही है हमारी बातें वो आ सकता है हमने

00:32:23:10 पहले भी कहा था यह खुद आ सकता है हमने पहले भी कहा था आज भी कह रहे हैं काफी पहले कह चुके हैं कि भाई आजा लाइव बात कर लेते हैं क्योंकि जो हम बचाना चाह रहे थे जो हम लोगों को नहीं दिखाना चाह रहे थे हमारे आपस का आपस के बीच की हमारी आपस की वैमनसता जो लोगों के सामने नहीं प्रकट करना चाह रहे थे वो हो चुकी है। अब उसमें कुछ नहीं बचा है। तो आ जाओ। तो ये इस श्रंखला में चलेगा। मगर अभी आज हम बात करेंगे मले म्लेचराज जो है कि यह किस तरीके से मलेच्छराज से यह प्रभावित है। मलेच्छराज को यह प्रचार कर रहा है या म्लेच्छराज का विरोध कर रहा है। यह आज हम कुछ फैक्ट्स पर ध्यान देंगे। सबसे पहली बात है कि इसका यह कहना है कि भाई यह खुद भी कहता है यह जो मलेच राज इत्यादि के बारे में बता रहा है वो यह खुद से नहीं बता रहा वो शास्त्रों में भी है। ठीक है? और यह जो इलुमिनाटी फ्री मिशनंस इनको भी लोग पहले से जानते हैं। प्रबुद्ध वर्ग है बहुत सारा जिसने बहुत सारी रिसर्च कर रखी है। आर्टिकल्स हैं। वीडियोस भी हैं इन सब पर फ्री मेंशन इत्यादि पर तो बहुत पहले से इनके बारे में

00:33:38:16 बहुत सारी चीजें उपलब्ध है। अब इसने क्या है यह दिखाई देता है कि म्लेच्छराज शास्त्रों का मिलेच्छ शब्द जो है शास्त्रों से और इधर फ्रीमेशन इलुमिनाटी को पकड़ करके इसने जो है एक मिक्सर ग्राइंडर में डाला और एक स्क्रिप्ट तैयार की जो आपके सामने हैरीपॉटर इत्यादि जो फिल्में हैं उनसे प्रेरित क्योंकि इसका ये कहना गलत होगा कि फ्री मिशंस या क्या कहते हैं म्लेचराज से प्रेरित हैरीपॉटर जैसी फिल्में हैं। है ना? ये कहना गलत होगा क्योंकि ये इसके अनुसार इस तरह की जो जानकारी है इसने सिस्टमेटिकली वो जानकारी ये दुनिया में लेके आया है वो पहले से नहीं है तो फिर ये ये नहीं कह सकता कि उसके ऊपर फिल्में बन रही है उससे प्रेरित होकर खैर तो हैरीपॉटर वगैरह फिल्में है जो उसमें जो बोल्टम होता है जो मुख्य खलनायक है पूरी सीरीज का उसके बारे में भी यही कहा जाता था कि उसका जो नाम लोगे तो वो जो है उससे उसको शक्ति शक्ति मिलेगी। उसका नाम लोगे तो ऐसी कई फिल्में हैं जिसमें नाम लेने से शक्ति बढ़ती है। ऐसा बोला गया है। तो यह इधर नाम लेने से शक्ति मिलती है। आपने इसकी सीरीज में देख ही लिया। अब क्या है कि इसने जो ये स्क्रिप्ट लिख दी इन

00:34:53:20 सभी इस तरह की फिल्मों के आधार पे। जरूरी नहीं है कि उसी फिल्म मैंने एक उदाहरण के रूप में नाम लिया है हरीपॉटर का। जरूरी नहीं है। मगर इसने खिचड़ी पकाई। अब ये करते-करते इसने केवल यही नहीं किया। इसने विधर्मियों की जो तंत्र साधना है वो भी अपनाने की कोशिश की वो भी उपयोग किया जो इसको परंपरा से प्राप्त नहीं अगर ये अगर निग्रह संप्रदाय है भी और इसकी कोई प्रामाणिक परंपरा है भी पहली बात तो है नहीं मगर दुर्जन तो उस न्याय से अगर मान लिया जाए कि है तब भी हमारी किसी परंपरा में वो जो जिन्न की पूजा है पर साधना ये सब तो नहीं मिलता है परंपरा से शंकराचार्य तो इनकी परंपरा में है नहीं शंकराचार्य के अनुगत तो ये अपने आप को मानते नहीं है। ये तो उसको उनको निग्रह करने आए हैं। वो बात और है कि पांच मिनट में सिटी पिट्टी गुम हो जाएगी अगर आमने सामने बात हो जाए तो। खैर

00:35:48:27 तो बात ये है कि इसने विधर्मियों की जो ये तंत्र साधना इत्यादि है उसमें भी प्रवेश किया और अपनी में प्रवेश किया ही था। बायपोलर था ही डिप्रेशन था ही। प्रेम में असफल व्यक्ति था ही। करियर में असफल व्यक्ति था ही। तो अब अपने आप को ख्यापित करने के लिए इसने यह खिचड़ी पगाई म्लेचराज वगैरह की और इधर क्या होता है कि यह अपने आप को स्वयं को प्रतिष्ठित करने में भी लगा हुआ है। किस तरीके से अन्यों को रोस्ट करते हुए जो वो एक तरीका था ना इसका कि लोगों की कमियां ढूंढो। कहां पर किसका वो वीक पॉइंट है उसको पकड़ करके उस पर बोलो। शास्त्रोक्त गलत बात नहीं बोल रहा है सामने वाला। जो व्यवहारिक रूप से कार्य करने जा रहा है तो उसको रणनीति का उपयोग करना पड़ रहा है। उस रणनीति के चलते वह जो कर रहा है उसमें दोष देख करके यह आराम से समीक्षा कर रहे हैं। तो इस तरीके से अपने आप को ख्यापित कर रहा है। अब एक सोचने वाली बात है जिसके जीवन में इतनी खिचड़ी पकेगी क्या वो व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्त विक्षिप्तता की ओर आगे बढ़ेगा कि नहीं बढ़ेगा? इतनी खिचड़ी जिसके पकेगी सोचने वाली बात। खैर

00:37:06:19 अच्छा एक चीज और है कि ऐसा नहीं है कि यह जो मानसिक मनो स्थिति जो बन रही है इससे कभी व्यक्ति बाहर नहीं आ सकता। यदि वो अपना इलाज कराना चाहेगा तो बाहर आ सकता है। मान लीजिए कि मन मंद बुद्धि हो रहा है व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्तता आ रही है उसके अंदर हो सकता है। मगर ऐसा नहीं है लालाज वाली स्थिति हो गई। वो चाहे प्रयत्न करे तो वो उससे बाहर आ सकता है। मगर जब प्रयत्न करे तब ना जब वो उस और सोचे तब ना कि मेरी मनोस्थिति खराब हो रही है। वो तो अपनी मनोस्थिति के अनुगत होता चला जा रहा है ना। यह दिक्कत है तो प्रयास का अभाव है। वह तो इलाज की बजाय तंत्र साधनाओं में प्रवेश करता है। जो बहुत ही संवेदनशील और गंभीर होती है। और इतना ही नहीं वो उसमें घुस जाता है। जो विधर्मियों की तंत्र साधनाएं हैं उसमें घुसने का प्रयास करता है। उस दुनिया में भी जाता है। उसके प्रमाण अभी आगे हम देंगे। दो कदम आगे मतलब और अब ऐसी दुनिया में जाकर के जब वह इनका चिंतन मनन करेगा श्रवण करेगा चिंतन मनन श्रवण नहीं बल्कि उनको सिद्ध करने के लिए उपासनाएं करेगा जिन और परी जैसी चीजों की

00:38:21:28 उपासना तो इनका परिणाम क्या होगा इनका परिणाम किसके लिए हितकारी होगा ऐसी जिस ऑलरेडी जिसके जीवन में इतनी उथलपुथल है ऑलरेडी वह इतना ज्यादा वीक है और फिर वह तंत्र में जा रहा है। फिर वह तंत्र में भी दो कदम आगे विधर्मियों के तंत्र में जा रहा है। जिन साधना कर रहा है, परिधना कर रहा है। तो ये किसके लिए सकारात्मक हो सकती है? मैं ये पूछना चाह रहा हूं सभी से। अब इनको जरा वो सामग्री दिखा दीजिए जो परिसाधना और यह वाली सामग्री है।

00:39:09:07 हम हां एक मिनट एक मिनट मैं जरा पढ़ पढ़ता जाऊं। एक मिनट जी इसको जरा बड़ा कर दीजिए सबके लिए।

00:39:58:02 अच्छा यह वाले स्क्रीनशॉट्स मुझे भेजे हैं क्या आपने? हां बस काफी काफी है। काफी देखिए ये पहला जो स्क्रीनशॉट आप लोगों को दिखाई दे रहा है। ये बातें हो रही हैं। उस तरफ निग्गू नाम लिखा हुआ है। मतलब कौन है? आप समझ सकते हैं। एक मिनट इसको पढ़ के बता दें। जो सबसे पहला स्क्रीनशॉट है वह ले लीजिए ना। क्रमबद्धता से चलते हैं।

00:40:33:12 हां इसमें यह Facebook पर भी यह पोस्ट डाली गई है। तो ऐसा नहीं है कि हम जो है इसको सार्वजनिक कर रहे हैं। Facebook पर भी यह किसी ने पोस्ट डाली है। तो इसको जरा बड़ा करिए जरा। देखिए यह कोई नंबर है जिस पर यह बात हो रही है। खुले में या कमरे में भोग आदि क्या है? फिर इसके नीचे चलिए। यह सब तो पूछना पड़ेगा। थोड़ा समय दें। अच्छा ये पूछने वाला कौन व्यक्ति है? यह सोचने वाली बात है। कमरे के अंदर एक मिनट। कमरे के अंदर पवित्रता पूर्वक खिड़की दरवाजे खुले और श्वेत पेड़े का भोग या खीर। ठीक है? यह निर्देश दे रहा है जो व्यक्ति है निर्देश दे रहा है जय माता जी भूदेव सहस्त्र कोटिष चरण वंदन एवं धोक फिर आगे चलिए प्रणाम भूदेव अरे भाई ऊपर जाइए मैसेज तो पढ़ने दीजिए प्रणाम भूदेव मुझे आपसे साधना करने हेतु आज्ञा चाहिए मैं विप्र चांडालनी साधा करने की अनुमति आगे चलिए

00:41:48:04 अब देखिए उधर की ओर कौन है वह आपको दिखाई दे रहा होगा नारायण कालिया जिन जिन्नों का सरदार लगी पुकार हो स्वीकार मैं बुलाऊं शीघ्र चला आए जो मैं मांगू वो लेकर आए तीन भवन नौ खंड से लाए ना लेकर आए तो शिव के तीजे नेत्र से भस्म हो जाए पूरे मंत्र ईश्वरों वाचा देखा कालिया जिन जिन्नों का सरदार तेरी हाजिरी का तमाशा दीपावली

00:42:17:22 की रात्रि से तीन रात मिट्टी के बर्तन में खीर बनाकर और दक्षिण दिशा होकर रात 12:00 बजे 108 बार जप करना है। प्रत्यक्ष होने पर पैसा ले लेना है। अधिकतम 10 करोड़ और इसका 25% मुझे देना है।

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00:42:35:03 ठीक है? 25% उनको देना है जो यह निर्देश दे रहे हैं। इसके बाद आगे सामने वाला व्यक्ति प्रतिकार कर रहा है। कह रहा है कि अब ये मुस्लिमों वाला प्रयोग करूंगा क्या? इस तरह की भावना प्रकट कर रहा है। आगे देखिए क्या है? अब ये मुस्लिमों वाला वाला ही प्रयोग करूंगा। जिन वेताल का साधना करके मोक्ष बिगाड़ दूं अपना। कोई और साधन हो तो बताएं। जो अपने हिंदू धर्म से हो। तो इन्होंने कुछ कहा होगा। उसको मिटा दिया गया भेजने वाले के द्वारा। उसके बाद आप कीजिए ऐसा करके एक वॉइस रिकॉर्डिंग भेजी है। तो और एक एक बात और कही है कि इस प्रकार की शब्दावली और चिंतन से बचें। अब आगे लिखा है देखिए टूटा फूटा है। मगर कुछ जो समझ सकते हो वह अवश्य समझ जाए। यह क्या लिखा है? जयमाल। आगे ऊपर करिए जरा। जयमाला आप डरते बहुत हैं। इसके बाद यह देखिए जो इस्लामिक तंत्र साधना जैसी दिखाई देने वाली चीज है वो आपके सामने है। चित्र यह एक चैट है जो हमें प्राप्त हुई है। Facebook इत्यादि से बिंदु के अनुसार 108 सफेद पन्ने पर लिखकर मोमबत्ती

00:43:50:16 से जला देना है। जला लेना है। अमावस्या की रात्रि इसे जिन्न परिसिद्ध हो जाएगी। सर इसे पहले मेरे पास भेजना पड़ेगा। ठीक है? जिन्न और परी को सिद्ध कर रहे हैं। आगे देखिए क्या चल रहा है। भूदेव समस्या यह है कि मेरे पास माला ही नहीं है और यहां ओरिजिनल मिलता ही नहीं है। मैं स्फटिक माला कहां से खरीदूं? वैसे यह यंत्र रोज नया बनाना है या एक ही बनाकर प्रतिष्ठित रखना है। आगे है एक चौकी पर वस्त्र बिछाकर उस पर बनाकर रख लें। फिर इसे ही रखना है। इसके बाद इसे चिड़ियों को या नदी में डाल देना है। फिर आगे देखिए क्या कहा जा रहा है इधर के द्वारा। गुरुदेव जैसा केस आपके पास आया सेम मेरे पास एक वर्ष पूर्व आया है। आप कहे तो बताऊं। नीचे चलिए। गुरु पूर्णिमा से लेकर देखिए। अब यह शायद चैट कोई दूसरी चल रही

00:44:55:07 है। गुरु पूर्णिमा से लेकर अगले पूर्णिमा तक खुले में बैठकर आसमान के नीचे सावन आया। बाहर आई। तेरे बाप शैतान को सजदे की मार आई। परी तू ना आई तो तुझे तेरे बाप शैतान की मार आई। 51 माला जप करना है। प्रत्यक्ष होने पर हाथ में फूल देना है। और साथ रहने को बोलना है। तीन वचन ले ले एवं मृत्यु समय ना बिगाड़ने बोले।

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00:45:23:27 वजू अवश्य कर ले। देखिए वजू वजू करवा रहे हैं। वजू जो नमाज से पहले वजू होता है ना कुछ इस तरीके से पता नहीं क्या वो ना मतलब नहाए नहीं मगर वजू कर ले तो पवित्र मानते हैं अपने आप को। तो कुछ वो वजू वजू अवश्य कर लें। यह सिखाया जा रहा है सनातन धर्म में। ऐसे हो गई सनातन धर्म की रक्षा। वजू अवश्य कर लें। वस्त्र सफेद कुर्ता, पजामा और सिर पर सिर पर जालीदार टोपी रहेगी। दिशा दक्षिण और आसन काला प्रसाद में बटाश और बकरे की चर्बी। आपने यह प्रयोग किया है। मैंने किया है लेकिन सफल देखिए असफलता यहां भी है। मैंने किया है। किया तो है लेकिन सफल नहीं हुआ। अब सामने वाला कह रहा है मैं मुसलमानी प्रयोग नहीं करूंगा। धन्यवाद।

00:46:16:21 भूदेव अच्छा इनके पास माला नहीं है दोबारा आ गया वो वाला दोबारा आ गया यह भी दोबारा है ठीक है ये हो गया ना इनको वो रिकॉर्डिंग भी सुना दीजिए जो जिसमें कि संभवत ये जो भगवतानंद है उसी की आवाज लग रही है वो रिकॉर्डिंग उसी की है कि नहीं है कहा नहीं जा सकता है मगर एक बार रिकॉर्डिंग सुना दीजिए क्या है उसमें किसकी की आवाज है। जनता ये वो करे निर्णय इस बात का कि कौन है इस रिकॉर्डिंग में। देखें

00:46:56:20 जरा जो तंत्र साधना के लिए पूछा जा रहा है वो रिकॉर्डिंग [संगीत] रिकॉर्डिंग सुना रहे हैं ना पीले चावल से यंत्र बनाना है तो कैसे बनेगा मतलब चावल को ही वैसे सजा सजा के बनाना पड़ेगा ना सबके चावल से ही लिखने पड़ेंगे फिर बहुत बड़ा यंत्र बनाना पड़ेगा क्योंकि छोटे-छोटे दाने में पड़ेगा नहीं शुरू से शुरू से सुनाइए शुरू से और स्पीड कम रखिए ना

00:47:44:14 पीले चावल से यंत्र बनाना है तो कैसे बनेगा मतलब चावल को ही वैसे सजा सजा के बनाना पड़ेगा ना सर के चावल से ही लिखने पड़ेंगे फिर बहुत बड़ा यंत्र बनाना पड़ेगा तो बनेगा नहीं रंगोली जैसा पूरा चावल से बनाना पड़ेगा ऐसे ही करना है क्या इसमें इस मुहूर्त को करना है इस प्रकार इसको शुरू से लीजिए शुरू से जाके बनाना पड़ेगा ना अक्षर के चावल से ही लिखने पड़ेंगे फिर बहुत बड़ा यंत्र बनाना पड़ेगा क्योंकि छोटे-छोटे दाने में से तो बनेगा नहीं रंगोली जैसा पूरा चावल से चलाना पड़ेगा। ऐसे ही करना है क्या इसमें? तिथि मुहूर्त को करना है। किस प्रकार से करना है? और इसकी प्रयोग विधि क्या है? किस दिन तिथि मुहूर्त को करना है? किस प्रकार से करना है? तब नहीं इसमें क्या वचन लेना देना है? ये सब बताइए कुछ किस तंत्र का प्रयोग है? सावर है या क्या है? ये

00:48:26:25 आप बोल रहे हैं कि 21 बार जप करना है। किसी भी शुक्रवार के मध्य रात्रि से करना है। तीन रात्रि 21 बार करना है कि 21 माला करना है। 21 बार जप करने मात्र से आ जाती है। क्या? ये तो थोड़ा संदिग्ध विधान लग रहा है। इस बार जपने से आ जाए तो तो बड़ा गजब हो जाए। हमको लग रहा है किस माला होगा। विधान थोड़ा स्पष्ट बताइए आप। ठीक है? इतना काफी है। तो आप लोग खुद निर्णय करें किसकी आवाज है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते कौन है बोलने वाला। फिर भी अगर भगवतानंद इधर परी की साधना परी को सिद्ध कर रहा है। जिन को सिद्ध कर रहा है। और ये सब सामग्री जो है एक हमको करते

00:49:04:00 हैं। एक हमको मेरे निजी परिचित मिले। उन्होंने अरबी फारसी के मंत्रों से किसी शक्ति की आराधना कर रखी थी। अपने किसी गुरु से प्राप्त करके वो पीर शक्ति की वो चिमनी लैंप की चिमनी में वो आते थे

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00:49:18:26 और आते थे तो क्या हुआ था कि जो बुलाता था उसको नहीं दिखते थे। जो आवाहक उसको नहीं दिखते थे। उसके किसी मीडियम को दिखते थे। जैसा कि हमने किसी किसी आहान वालों में बताया कि मीडियम भी रखना पड़ता है तो उसको दिखते थे और इनके छोटे बेटे को दिखते थे। इनको खुद नहीं दिखते थे। तो 810 साल की उम्र के बच्चे को दिखते थे और एक दो कभी-कभी बड़े लोगों को भी दिख जाते थे जिनकी बातें नजर खुली होती है या इस प्रकार की जो छाया वाले होते हैं उनको दिख जाती। तो सबसे पहला इन्होंने प्रयोग क्या किया था? इनकी बहन के दामाद घर से भाग गए थे। घर वाले बड़े परेशान थे। इनको पता ही नहीं था क्या था। तो इन्होंने सोचा आज उस मंत्र को टेस्ट करते। उन्होंने उसको बुलाया। वो चिमनी में आया। जो इनका इष्ट था जो पीर था वो आया और वो पीर जो है वो इनको नहीं दिखता था लेकिन किसी पड़ोसी को दिखने लगा 10 पांच लोग बैठे बोले हां दिख रहा है बोले क्या ऐसा स्वरूप है बोले बिल्कुल ऐसा स्वरूप है तो कहा कि पूछो उनसे कि जो बुरा भोग देना था भोग इत्यादि देके उसका स्वागत करके फिर कहा कि पूछो इनसे कि वो हमारी बहन के दामाद कहां भाग गए हैं तो पूछा गया तो बताए कि विंध्याचल चले जाओ वहां अमुक मोहल्ले में अमुक होटल के अमुक कमरा में वो ठहरा हुआ है बस तुरंत ये उनका विसर्जन करके सीधे निकले विंध्याचल और उसी मोहल्ले के उसी कमरे में उसी होटल के कमरे में उसको पकड़े अपने बहन के दामाद को कहा कि यहां कैसे बोले आपको इनफार्मेशन कैसे मिली? बोले यहां से मिली। उसके बाद से उनको पता नहीं था कि मेरी शक्ति एक्टिवेट हो गई। उन्होंने बस कोई विकल्प नहीं दिख रहा था। कैसे पता करें? तो टेस्ट कर दिया। टेस्ट कामयाब रहा उनका। मंत्र तो पहले से किया हुआ था। कभी टेस्ट किए नहीं थे। अब लगने लगा दरबार। आने लगी भीड़।

00:50:34:00 आने लगी भीड़ और बगल के गांव में हो गई थी एक हत्या। जिनकी हत्या हुई थी वो मेरे पिताजी के अच्छे मित्र थे। तो उनके कुछ इष्ट मित्र आए इनके पास। कहा कि भाई बताओ कि हत्यारा कौन है? अब इन्होंने सोचा कि अगर हत्यारे का पता बता देते हैं तो हत्यारा भी तो बगल के गांव का है। वो भी तो मेरे ऊपर आक्रमण करेगा। क्योंकि ये लोग फिर जाकर हत्यारे को पकड़ेंगे। और अगर नहीं बताते हैं तो फिर ये लोग कहेंगे कि दुनिया को बताते हो हमारी मदद नहीं करते हो। तो इन्होंने कहा कि भाई हमारी जो शक्ति है वो हमारे पास अब नहीं आती क्योंकि मध्यम मार्ग निकालना है और ये कारण था कि इनकी शक्ति धीरे-धीरे क्षीण

00:50:59:10 भी हो गई। तो बहुत बाद में किसी समय मुझे भी कुछ आवश्यकता पड़ी हमने कहा कि आप जरा और ये कारण था कि इनकी शक्ति धीरे-धीरे क्षीण भी हो गई। तो बहुत बाद में किसी समय मुझे भी कुछ आवश्यकता पड़ी तो हमने कहा कि आप जरा बताइए इसमें क्या होना चाहिए? जो

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00:51:09:10 शक्ति है वो हमारे ध्यान नहीं क्योंकि मध्यम आवश्यकता पड़ी है। ध्यान देने वाली बात है। इनको भी आवश्यकता पड़ी। तो यहां से बहुत सारी चीजें निकल के आ रही हैं कि अह सबसे पहली बात तो यह बिलीव ये इनके अनुसार ये सारी साधनाएं होती हैं। है ना? होती है नहीं होती है हम यह बातें नहीं कर रहे मगर इनके अनुसार होती है इतना पक्का है यह पीर जिन परी वाली जो साधनाएं हैं इनके अनुसार होती है अब अ दूसरी बात एक ये भी आ रही है निकल के कि ये बहुत बड़े दिव्य व्यक्ति हैं जिनके ऊपर देवताओं का अनुग्रह रहा है। ये खुद निग्रह संप्रदाय के वो रहे हैं। मगर फिर भी इन्हें किसी से ये सारी साधनाएं सीखने के लिए जाना पड़ रहा है। तो यह भी एक आश्चर्य की बात हो रही है। और एक चीज यह भी आ रही है कि क्या ऐसे हिंदू राष्ट्र बनेगा? क्या ऐसे हिंदू धर्म की रक्षा होगी? यह जिन्न परी को सिद्ध करके जिन्न और परियां सिद्ध की जाएंगी। पीर सिद्ध किए जाएंगे। इनसे सनातन धर्म की रक्षा होगी। इनको अभी अगर हम यह जो हमने अभीभी सामग्री देखी है जिसमें कि जो इस्लामिक मुस्लिम जो जिन इत्यादि को सिद्ध करने की परी को सिद्ध करने की बात हो रही उसमें

00:52:24:14 मुझे 25% हिस्सा दे देना मंत्र कैसे होगा ये सब बातें हो रही अगर ये सब बातें सही है तो ये किस ओर जा रहा है जो जिस ओर हम अभी शुरू में बात कर रहे थे कि क्या-क्या नकारात्मक परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती है पहली बात तो वो तीन जो अभी हमने बात बताई कि यदि ये दिव्यता को प्राप्त आचार्य हैं तो इनको कहीं क्यों जाना पड़ रहा है किसी ज्ञान के लिए वो भी इस प्रकार के नकारात्मक ज्ञान के लिए हां और दूसरी बात ये हो गई कि इनके अनुसार ये सारी सिद्धियां हैं। और तीसरी बात ये हो गई कि ऐसे ही ये धर्म को बचाने निकले हैं। ऐसे ही बचेगा धर्म सिद्धियों से परियां सिद्ध होके। ठीक है? इनके अनुसार यह वाली जो सिद्धियां है तो यह तीन बातें तो अलग है मगर अब यहां पर क्या बोल रहे हैं कि मुझे भी आवश्यकता पड़ी और उधर की जो सामग्री ये दिखा रही है कि ऐसी बातें इनकी हो रही है। किसी से निर्देश मांग रहे हैं, किसी को निर्देश दे भी रहे हैं। किसी को निर्देश दे रहे हैं, किसी से निर्देश मांग भी रहे हैं। यह दिख रहा है। अब जरा इसकी पुष्टि करने के लिए इसमें और प्रबल संभावनाएं क्या है? उसके लिए हमें एक Facebook की पोस्ट भी प्राप्त हुई है। उसको जरा आप चलाइए।

00:53:46:12 ऊपर से ही चलाइए। हां वो एक-ए करके दिखाइएगा। वीडियो मत चलाइए। एक-एक करके दिखाइए। मैं पढूंगा ना। मुंह में पिशाचनी लेकर चल रहा है। गाली लेकर चल रहा है। खुद कह रहा है कि कली पुरुष की बहन का नाम वो है और गाली इसके मुंह में है। तो ये किस ओर दिखा रही

00:54:29:09 है? किस ओर इशारा कर रही है सारी चीजें? खैर इसको पढ़ते हैं। एक पोस्ट डाली है किसी ने Facebook पर अभिजीत तिवारी नाम से है। इसने अपनी एक इस व्यक्ति ने अपनी एक आपबीति सुनाई है। उसमें क्या लिख रहा है वो कि एक गुप्त बात जो हम लिखना नहीं चाहते थे। लेकिन भगवान की अनुमति से लिख रहे हैं। लिखने से पहले अपने यज्ञ पवीत और कुलदेवी का सौगंध खाते हुए लिख रहे हैं कि अगर इसमें जरा सी भी हमारे द्वारा गलत लिखा गया हो तो तत्काल हम मृत्यु को प्राप्त हो जाए। ये शपथ लेते हुए लिख रहा है। शपथ की वैल्यू होती है। अकॉर्डिंग टू भगवतानंद। तो बात संभवत अक्टूबर 2022 की है। हम कपाल भैरव यानी क्षितज सोमानी क्षितज सोमानी का नाम आपने भगवतानंद के मुख से भी कई बार सुना होगा। आचार्य श्री आचार्य श्री मार्तंड भैरव जी और एक साक्षी बाद में जुड़े आचार्य श्री वैभव क्षेत्रज्ञ जी आपस में कई बार कॉन्फ्रेंस पर चर्चा करते रहते थे।

00:55:45:01 हमको तंत्र आदि में शुरू से ही बहुत रुचि रहा है। उसी क्रम में हमें निग्रचार्य श्री भगवतानंद गुरु यह नाम लिया है। यहां पर से संपर्क हुआ था। यह उसने नाम यहां पर लिया है। क्यों लिया? क्योंकि उसने यहां मेंशन किया है। शायद अब ये उतनी आस्था नहीं रखता है। उसके आचार्यत्व में लिखने वाला। मगर उसने यहां पर मेंशन किया है तो उसकी आईडी को मेंशन किया है। इसलिए उसने यहां पर पूरा का पूरा नाम यहां दिखाई देगा आपको। ठीक है? आगे चलते हैं। जो उस समय सबको कालिया जिन्न की साधना बांटते फिर रहा था। अब इस व्यक्ति की जो पोस्ट है ये आज हम पहली बार देख रहे हैं। हमें आज ही प्राप्त हुई है। ये अभी आने से कुछ समय पूर्व दो-तीन घंटे पूर्व जब हम इस लाइव की तैयारी कर रहे थे। तो कालिया जिन्न के सिद्ध होने की बात वहां भी कर रहे हैं। अपने वीडियो में भी यह पीर पीर वगैरह की आवश्यकता की बात करते हुए दिख रहे हैं। और यहां पर यह क्या बता रहा है व्यक्ति कि यह उस समय सबको कालिया जिंद की साधना बांटते फिर रहा था। कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। यह वही व्यक्ति हो जिसके साथ उसकी अभी चैट देखी है। है ना? यह जो जिसको मार्तंड भैरव कहा जा रहा है संभवत यह प्रसून मिश्र

00:57:00:12 नाम के कोई व्यक्ति हैं जो जांच जो जानना पड़ेगा कि कंफर्म करने के लिए उसको समय चाहिए होगा। तो अब क्या है कि यह व्यक्ति साधना देने के लिए जब हमें इस बारे में पता चला तो हमने भी संपर्क किया। यह भी प्रभाव में आ गए कालिया जिन के लिए और संपर्क किया तो क्या हुआ कि यह जब हमें इस बारे में पता चला हमने इससे संपर्क किया यह व्यक्ति साधना देने के लिए राजी हो गया। इसने खुद से मंत्र रिकॉर्ड कर और मंत्र लिखकर और खुद अच्छी तरीके से हमें समझा दिया। हमने स्थान चयन किया और वह स्थान हमें मिल भी गया। फिर शुरुआत शुरू होता है असली खेल। साधना देकर यह व्यक्ति निश्चिंत हो गया। मतलब इसको अब कोई मतलब नहीं था। हमने बस उस साधना का अभ्यास ही शुरू किया था। जैसे मंत्र बोलना सीखना पहले दिन हमें कोई आभास नहीं हुआ। लेकिन दूसरे दिन से ही हमें कुछ अजीब अजीब एहसास होने लगा। ऐसे में लगा कि कोई हमें फॉलो कर रहा है। एक बार तो हम जब साधना करने की योजना बना ही रहे थे।

00:58:10:16 योजना बना ही रहे थे। स्थान देखने गए कि इतना कस के आंधी आई कि हमें लगा कि हम उसमें खड़े नहीं रह पाएंगे ठीक से। फिर अचानक से आया वह रात्रि जो हमने कभी कल्पना नहीं की थी। कांफ्रेंस पर चित सोमानी और आचार्य श्री मार्तंड भैरव जी के साथ बात कर रहे थे। अपना सारा अनुभव साझा कर रहे थे। यह भगवतानंद जी ने हमें नहीं आचार्य जी यानी शायद वह हैं। मार्तंड भैरव जी शायद वो है तो क्या कर रहे थे हम आचार्य श्री मार्तंड भैरव जी के साथ बात कर रहे थे और अपना सारा अनुभव साझा कर रहे थे। आचार्य जी ने हमें दो-तीन बार पहले भी टोक चुका था कि आप यह साधना मत करो। यानी मार्तंड भैरव जी ने बंद कर दो। तो जब हम आपस में बात कर ही रहे होते हैं तभी कुछ मेरे साथ अभी अजीब अजीब घटनाएं शुरू हो जाती हैं। समय रात्रि का था और हम गांव में साधना करने के लिए आ गए थे। मेरा पूरा परिवार मेरे गांव से 12 किलोमीटर दूर फला अमुक अमुक नाम की जगह पर रहता था। रहता है। गांव

00:59:25:22 में सिर्फ मेरे बाबा रहते हैं। बाबा से भी हमने झूठ बोला था कि हम लक्ष्मी की साधना करना चाहते हैं। जबकि हम साधना कालिया जिन्न की करने की योजना बना रहे थे। जिस रात्रि की यह घटना है। अब उसे सुनिए। अगला पेज लगा दीजिए। अगला पेज शो कर दीजिए। जिस रात्रि की घटना है उसे अब सुनिए। उस रात्रि मेरे बाबा ने हमें बोला कि आज हम घर नहीं बाहर घर से दूर कुछ स्थान पर सोएंगे। कुछ अनाज की रखवाली का मुद्दा था। इस बात को बातों के प्रभाव में यह व्यक्ति भूल गया तो कहता है कि हम भूल गए और हम अचानक से बात करने लगे। आचार्य श्री मार्तंड भैरव और सोमानी से बात करते करते जब हम अपने बाहर वाले रूम में गए तो देखा कि मेरे बाबा की शक्ल का ही एक व्यक्ति बिछावन पर कंबल ओढ़ के मंत्र जाप कर रहा है। बाबा इसके चले गए थे। यह बता रहा था। बाबा इसके चले गए थे और अब इसने घर में वापस आकर के देखा है तो बाबा वहां

01:00:40:24 बैठे हैं। आचार्य श्री भैरव जी ने मेरे बाबा से बात करना चाहा। जब हम अपने बाबा के पास फोन लेकर गए। फोन पर वो जो भैरव थे वो भैरव नाम के व्यक्ति है वो थे तो उन्होंने कहा कि बाबा से मेरी बात कराओ तो यह फोन ले बाबा की ओर बढ़ा जो इसको बाबा के रूप में दिख रहा था फोन लेकर गए तो उनकी आंख और चेहरा देखकर हम पूरी तरह से डर गए जो बाबा के रूप में कंबल ओढ़ के बैठे थे ये उसको देख के डर गए ये उसको देख के इतना डर गया कि उनके डांट सुनकर हम भाग गए चले गए। आंगन की तरफ भय के मारे हम रोने लगे। यह सभी घटना के साक्षी आचार्य श्री भैरव जी और क्षितिज सोमानी है। क्योंकि यह दोनों हमारे कॉन्फ्रेंस पर ही थे। उस समय भैरव जी ने कहा कि तुरंत आप किसी मंदिर में चले जाइए। क्योंकि मेरे घर में ही हमारी कुलदेवी का मंदिर था तो हम चले गए और स्थान पकड़ कर रोने लगे। उस समय सुमानी ने मेरा चित्र मांगा तो हमने इनको चित्र भी दिया। कई बार कॉल भी किया। लगातार भैरव जी और सोमानी हमारे साथ कॉन्फ्रेंस पर बने हुए थे। लेकिन मंत्र देने वाला भोगानंद सोया हुआ था कंबल ओढ़कर

01:01:56:04 और बार-बार फोन करने पर भी नहीं उठा रहा था। तब क्षितज सुमानी ने मेरी माताजी, पिताजी से बात किया जो कि सिर्फ और सिर्फ मेरे माता और पिताजी के आवाज था। वास्तव में वे लोग नहीं थे। इसका रहस्य मुझे बाद में अपने माता और पिताजी से ही पता चला कि हमें कोई फोन नहीं आया था। मतलब चित सुमानी के द्वारा इनकी माताजी और पिताजी से बातचीत होने की बात ये बता रहे हैं। मगर बाद में पता चल रहा है कि माताजी पिताजी की बात किसी से नहीं हुई थी। ऐसा इस व्यक्ति का कहना है। इसके आगे क्रम उसके बाद किसी कारण से भैरव जी का फोन नहीं लगने लगा। लेकिन चित सोमानी रात भर कॉल पर मेरे साथ रहे। उसके बाद डर के कारण हम अपनी कुल देवता को पुकारने लगे कि हमें बचाइए। उस समय हमें अपने कुल देवता भगवान श्री उम्मत भैरव का आभास हुआ जो हमें दंडित कर रहे थे। कुल परंपरा से बाहर जाने का और इस्लामी साधना हमारे कुल में करने का तुम्हारा हिम्मत कैसे हुआ है? वह मेरे द्वारा किए गए कृत से बहुत रुष्ट थे। ऐसा इनको आभास हुआ। हमें डांट रहे थे। इसका आभास हुआ। उसी क्रम में यह भी बात आई कि हमारे देवता ने कहा कि कुल परंपरा के बाहर मत जाओ। अपने कुल में रहो।

01:03:11:15 एक गृहस्थ व्यक्ति होने के नाते हमारे देवता ने ऐसा भी हमें आदेश प्रदान किया कि तुम्हें एक सन्यासी से दीक्षा भी नहीं लेनी चाहिए जो कि शास्त्रीय दृष्टि से देखा जाए तो गलत नहीं है। इसके लिए भी डांटा हमें और बोला कि तुम क्यों बाहर इधर-उधर जाते रहते हो? तुम पहले अपनी कुल परंपरा में टिके रहो। लेकिन पूज्य गुरुदेव पुरी आचार्य के दिव्यता और उनके मार्गदर्शन पर कोई प्रश्न चिन्ह नहीं था। उसी समय हमें देवता के दिव्य प्रताप से यह भी आभास हुआ कि पूज्य गुरुदेव के पूज्य गुरुदेव पूरी पीठाधीश्वर कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है। अगला पेज लाइए।

01:04:05:28 हम इसके बाद इसके बाद दिव्य अनुभूतियों का दौर शुरू होता है। बहुत सारे स्वप्न आए। आदेश प्राप्त हुए। यह साधना करो। यहां जाओ वहां जाओ। इसे हम अपने कुल देवता के मार्गदर्शन के बिना स्वतः लिख नहीं सकते। इसलिए हमें क्षमा करें सभी। बात आती है अब इस भगवतानंद की। एक बात यहां मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि किसी भी व्यक्ति के भूत के आधार पर भविष्य का आकलन नहीं किया जा सकता। अगर भूत में व्यक्ति सही होगा तो उसे सही बोला जाएगा। चाहे जितने अंश में वो मैं हो और अगर वर्तमान में व्यक्ति सही होगा तो उसे सही बोला जाएगा। लेकिन भविष्य में अगर व्यक्ति गलत हो जाएगा तो उसे गलत भी बोला जाएगा।

01:04:54:12 यह व्यक्ति इतना धूर्त और कृतज्न है कि कहा नहीं जा सकता। कहा नहीं जा सकता। रामभद्राचार्य केस में जब पुलिस इसको उठाने के लिए आने वाली थी। इसके खिलाफ एफआईआर हो गया था तो इसको कोर्ट में पेश होना ही पड़ता। उस समय इस व्यक्ति ने हमसे मदद मांगी थी। और इस व्यक्ति को अपने देवता की आज्ञा से जो हमने मंत्र सुझाया। वह इसने किया और वह फलित भी हुआ। कई बार अग्नि स्तंभन आदि प्रयोग सीखने की गुजारिश कर चुका है। इस व्यक्ति की कई मुद्दों पर हमने सोमानी ने और मार्तंड भैरव जी ने बहुत मदद की है। लेकिन यह सब भूल गया। हमने बहुत पहले ही सुमानी और आचार्य श्री मार्तंड भैरव जी को कह दिया था कि देखिएगा भविष्य में इसका हम लोगों से भयंकर विवाद होगा जो कि सबके सामने है। हमने खुलकर कभी इसका पोल खोलने की कोशिश नहीं की क्योंकि हम सीधे बोलते तो लोग हमारी बातों पर विश्वास नहीं करते। और इस घटना के साक्षी सिर्फ और सिर्फ क्षतिज सोमानी मार्तंड भैरव ही थे। इसलिए हमने चित सोमानी को बोला कि तुम इसके पास जाओ ताकि तुम देख सको खुद कि कितना यह भ्रष्ट है। क्योंकि हम सिर्फ

01:06:09:20 अपने मुख से बोलते तो शायद चितमानी हमारी बातों पर भरोसा नहीं करते। लेकिन चितमानी गए और दो-तीन दिन बाद ही इस फर्जी की पोल खुलने लगी। उसने उन्होंने वहां देखा कि इसका आचरण और दिनचर्या इतना भ्रष्ट है कि इसके शास्त्रवादी होने का प्राथमिक लक्षण ही इसके अंदर चरतार्थ होता हुआ नहीं दिखता है। यह अंग्रेजी दवाइयों पर जीता है। अब देखिए दवाइयों की बात आ रही है। उधर इलाज की बात आ रही है। तो यह अंग्रेजी दवाइयों पर जीता है और इसके दिनचर्या को देखते हुए क्षितिज सोनी ने जब इसे प्रश्न किया कि यह सब क्या है? तो इसने कहा कि महासाम्राज्य अभिषिक्त साधक को उतना नियम मानने की जरूरत नहीं है। अपने लिए खैर ये कन्वीनिएंट हो ही जाते हैं। फिर सोमानी ने हमें फोन किया कि हम तो फंस गए। हम बोले आप वापस चले आइए और ये चले भी आए। इस फर्जी की सत्यता को सत्यता उनको भी पता चल गई। उसके बाद हम खुलकर बोलने लगे और जो जो बात बोले भैरव जी और चित सोमानी साक्षी है कि यह लोग अपनी आंखों से उसके अंदर देखे थे। कोई जिस बात का कोई क्योंकि जिस बात का कोई प्रमाण नहीं दिखता

01:07:24:24 था हम जानकर भी उसे नहीं बोलते थे। यह व्यक्ति आरोप लगाता है हम पर कि हमने यही बोला था। हमने यह बोला था कि पुर आचार्य भी आपको निग्राचार मानते हैं। इस बात को लेकर यह पुर आचार्य जी को लेटर भी लिख चुका है कि आप ऐसा बोले थे अपने एक शिष्य से। मतलब यह व्यक्ति आज झूठ बोल रहा है कि हम जिन आदि साधना नहीं करते। लेकिन यह बात सच मानता है कि हमने बोला हमने किस प्रकरण में बोला यह लिखे यह व्यक्ति देवताओं के नाम पर छल प्रपु करने वाला व्यक्ति है और आज भगवती की माया देखिए जिस बात को लेकर यह पूरी आचार्य को लेटर लिख चुका है इस बात का शुरुआत शुरुआती जड़ को यह मानने से इंकार कर रहा है। इससे पूछा जाए कि लेटर पर इसने इस घटना को इसने इस घटना को दर्ज किया है तो इसका शुरुआती बिंदु क्या है? कुल मिलाकर यह इतना धूत व्यक्ति है कि अपने द्वारा दी गई कालिया जिन साधना के दुष्प्रभाव को यह नहीं बोला कि इस घटना के बाद हमारी मरण जैसी स्थिति हो गई थी और हम कैसे कैसे बचे हैं। लेकिन इस बात को यह बोलता है किकि हमने सन्यासी से मंत्र ले लिया इसलिए हमारे कुल देवता ने हमें दंडित किया

01:08:40:13 है। आज तो यह झूठ की हर सीमा लांगते हुए इस बात से भी मुकर रहा है कि हमने ऐसी साधना भी कुछ दी थी। हम लोग प्रमाण इकट्ठा कर रहे हैं। यह जो व्यक्ति यहां लिख रहा है, वह प्रमाण इकट्ठा कर रहा है। क्योंकि बात दो वर्ष पुरानी हो गई है। समय आने पर सब चीज प्रकाशित किया जाएगा। इस महा ठक की सारी पोल एक-एक कर खोली जाएगी। हमारे पास पूरा का पूरा इसका एल्बम है। जहां पर इसने मंत्र को उपदेश किया है। ना सिर्फ लिखित बल्कि रिकॉर्ड करके भी दिया है। यह बहुत फ्रॉड व्यक्ति है। इसकी हकीकत सबके सामने है। अंत में हमसे कुछ भूल हुई हो तो हमारे कुल देवता भगवान श्री भैरव से क्षमा याचना। बाकी अगर कुछ गलत कहा है तो मार्तंड भैरव जी और क्षितिज्मानी जी सही करें। इस घटना के बाद से हम सबसे दूर हो गए हैं। कभी भी सार्वजनिक तौर पर इसका उल्लेख नहीं किया क्योंकि कई लोग इस चीज को स्वीकार नहीं करते हैं और वह हमारे मानसिक स्थिति पर भी सवाल उठाने लगते हैं। अब कुछ घटनाएं तो हम लाइव दिखा नहीं सकते हैं। इसलिए हमने इस स्थिति पर मौन साधे मौन साधे रहे। यहां तक कि उस महाच को भी बोला था कि विवाद चाहे कुछ भी हो जाए कभी भी यह प्रकरण सामने नहीं आना

01:09:55:13 चाहिए। लेकिन बार-बार यह व्यक्ति इस चीज का उल्लेख करते रहा। अंत में हमें यहां लिखना पड़ रहा है ताकि लोग हमें ही दोषी ना समझे और हमारी स्थिति को समझने का प्रयास करें। धन्यवाद। ये अपना नाम बता रहे हैं अभिजीत तिवारी। ठीक है? तो यह एक सोचने वाली बात है। किस ओर यह धारा जा रही है। यह खुद अपने पीर की साधना को लेने की आवश्यकता दिखा रहे हैं। इनसे मिलती जुलती आवाज की हमने रिकॉर्डिंग अभी सुनी। वो इन्हीं की आवाज है कि नहीं वो सोचने वाली बात है

01:10:34:01 और फिर जो है पहले का हम लोग बता ही चुके हैं वहां साधना मांगी जा रही है। कहीं पर यह साधना मांग रहे हैं। कहीं पर वो साधना किसी को दे रहे हैं। यहां पर एक व्यक्ति उसी प्रकार के कालिया जिन की साधना की बात कर रहा है कि उससे उसको कितनी परेशानी हुई। तो ये सब सारी चीजें अह आपको एक जब ग्लांस में देखेंगे तो आपको ये नजर आएगा कि पहली बात यह म्लेच्छराज अगर कोई है तो यह उसका विरोधी है या उसका पक्षकार उसका प्रचारक यह सोचने वाली बात है और या फिर यह स्वयं ही उससे प्रभावित तो नहीं है और या फिर इसकी जो ये मानसिक स्थिति है जो ये बिगड़ गई है बायपोलर और ये जो राजस्थान के इलाज और प्रेम में असफलता करियर में असफलता उसका परिणाम है। यह सारी चीजें अब देखिए एक और जो मिलेच्छ से प्रभावित होने वाली बातें देखिए क्या-क्या है जिस ओर हम लोग ध्यान देना चाहिए हमें क्या है ये अपने वीडियोस में कहता है कि वो जो सबके हृदय में एक लाल बत्ती कुछ वो वीडियो दिखाइए लाल बत्ती वाला सबके हृदय में लाल बत्ती

01:11:49:06 जलेगी जो छह अनुशासन है सात में से छह अनुशासन की आज हम चर्चा करेंगे। पहला अनुशासन यह करता है। तुम्हारे हृदय में सदैव एक ज्योति जल रही है। जब भी कोई निर्णय करना हो उस ज्योति का अनुसरण करना। यह पहला नियम कहता है। अब देखिए यहां पर यह व्यक्ति कह रहा है कि तुम्हारे हृदय में सदैव एक लाल एक ज्योति जल रही है और आपने ध्यान से देखा हो तो यह अपने सभी वीडियोस में एक लालटेन एक बत्ती लेकर के चलता है। तो ऐसा मतलब ऐसा दिखाई दे रहा है कि ये कह तो रहा है कि वो लाल बत्ती से लोग सब जो है प्रभावित हो। मगर स्वयं एक बत्ती लेकर के चल रहा है जिससे कि जिसकी ओर लोग आकर्षित हो। जिसके बारे में लोग चिंतन मनन श्रवण करें। ये अपने हर वीडियो में लेकर के चल रहा है। फिर आगे क्या है

01:12:59:24 कि हां एक बहुत जरूरी बात इसने कहा कि ये एक नियम इसने बताया। दूसरा नियम है शायद कि तुम उससे प्यार करो जो तुमसे प्यार करे। वो दिखाइए वीडियो। वीडियो दिखाइए वाला

01:13:54:14 राम वृक्ष ने वृक्षराज के अनुसार दूसरा नियम बनवाया वह यह है कि जो तुमसे प्यार करे उससे तुम भी प्यार करो। अब ये नियम है। लगता है कि आदर्श समाज की परिकल्पना की जा रही है। और इन नियमों को ऐसी शब्दावली में ऐसी परिभाषा में आगे व्यक्त किया गया है कि लोगों की बड़ी आकर्षक लगती है। लोगों को लगता है ये तो बिलकुल सच्चा मार्ग है। इसमें क्या बुराई है? इसमें क्या शैतानियत है? इसमें क्या नकारात्मकता है? सबसे बड़ी नकारात्मकता वही है जिसको आप ना पहचान सके जो आपको अच्छाई का वेश बनाकर बनाओ कि जो तुमसे प्यार करे उससे तुम भी प्यार करो। देखिए ये प्यार वाली जो बात है जो तुमसे प्यार करे उससे तुम प्यार करो। और इसके जीवन में प्यार वाली जो चीज है वो रही है। यह प्रभावित रहा है प्यार वाली बात से कि भाई असफल होना। और इधर ये दूसरा नियम है मम्लेचराज का जो तुमसे प्यार करे उससे तुम प्यार करो। उधर क्या है? प्रेम प्रसंग की असफलता। तो इसको थोड़ा सा कनेक्ट करते जाइएगा। अभी हम एक निष्कर्ष पर पहुंचने वाले हैं। फिर इसके बाद अगला क्या है

01:14:54:13 कि अब क्या है कि इसको अगर हम जोड़ करके देखें सारी जो चीजें नजर आ रही हैं तो क्या दिख रहा है कि बुरी शक्तियों के प्रभाव में क्या कैसा परिणाम आएगा? बुरी शक्तियों के प्रभाव में जो ओतप्रोत रहेगा उधर बीमारी उधर असफलताएं और फिर उधर जो है तंत्र साधना उसमें कालिया जिन्न की साधना और यह और वो तो परिणाम क्या होगा आगे परिणाम स्वरूप इसके जीवन में स्वयं मलेच्छराज के नियमों का पालन आपको दिख जाएगा। जिस मलेच्छराज का यह विरोध करता हुआ दिख रहा है। उसी मलेच्छराज के नियमों का पालन करता हुआ यह व्यक्ति आपको दिखेगा। यह वास्तविकता आपके सामने हम क्रमबद्धता से आज लेकर आए। आगे भी लाएंगे। यह किस ओर जा रही है धारा आप देखते जाइए। अच्छा इसने एक बात और कही है जो मलेच राज्य से इसका जीवन जो प्रभावित दिखता है कि 2015 में इसको जो है आप वो वीडियो चला दीजिए जरा। चलाइए।

01:16:02:14 करने के लिए सेना भेजी थी 2015 में इलुमनाटी ने प्रिय है।

01:16:15:08 मैं जिस स्थान पर बैठकर ये बात कह रहा हूं उस स्थान पर मैं 29 जुलाई 2015 की रात को ही बैठा हुआ था। क्यों? क्योंकि मुझे धमकी आई थी इसी मृक्षराज के कुछ गुलामों से जो मेरा अपहरण करना चाहते थे और तब हम अपने घर से लगभग 1280 किलोमीटर दूर इस जगह पर बैठे थे। समय था रात के 7:00 बजे और दिनांक था 29 जुलाई 2015।

⬜ Not used yet · 01:16:44:08 – 01:17:40:28 (0:57)

01:16:44:08 तो यह जिस जगह पर बैठकर के वीडियो बना रहा है और एक एक चीज और थी कि जो वीडियो बनाते समय की जो चंद्र ग्रहण की स्थिति चंद्रमा इत्यादि की ग्रह नक्षत्रों की जो स्थिति रही है वो वाला वीडियो दिखा दीजिए। तो इसकी जो सक्रिय होने की जो जो मलेच राज को समाज में प्रस्तुत करने की जो टाइमिंग और जो ग्रह नक्षत्र रहे हैं जो दिनांक इत्यादि रही है वो भी बहुत सेम रहे हैं। है ना? तब भी प्रभावित था। तब किडनैपिंग के लिए फोन आया था। धमकी आई थी। आज जो यह वहां से वीडियो बना रहा है और वीडियो बना करके मच राज के बारे में लोगों को बता रहा है और बना बनाते टाइम जो इसकी जो समय धारा है वो जो ग्रहण नक्षत्र इत्यादि होते हैं वो भी सेम यह खुद बोल रहा है। देखिए अपना

01:17:40:28 ठिकाना यहीं पर बनाए। अभी इस वीडियो क्लिप में चार मिनट की रिकॉर्डिंग हमारी नहीं हो पाई किसी तकनीकी खराब के कारण इस श्रंखला की घोषणा जब हमने की थी उसी समय से हमारे फोन पर ऑटोमेटिक फील्ड्स में कुछ ऐसी बातें स्वयं आ रही है जो की ऑफलाइन बा है ऐसा नहीं की मैं कुछ नेट पर सर्च कर रहा हूं या कुछ ट्रेलर रिलीज कर रहा हूं तो एल्गोरिद पकड़कर कुछ सजेशन मिल रहे है ऐसा नहीं है मतलब बिल्कुल ऑफलाइन तरीके से भी जिस मोबाइल से वाईफाई या सिम कनेक्टेड नहीं है उन मोबाइल्स पर भी कुछ सर्च करने पर फोल्डर पर भी सर्च करने पर ड्राइव में भी सर्च करने पर कुछ ऐसी बातें अप्रत्या रूप से सामने आ रही है जो की हमारे संज्ञान में नहीं थी और अभी क्या हुआ कि जब मैं इस क्लिप की दूसरी प्रति बना रहा था एक दूसरा भाग अब रिकॉर्ड कर रहा था। तो लगभग पांच मिनट रिकॉर्डिंग होने के बाद वो स्वयं कैमरा बंद हुआ और उसके बाद वो रिकॉर्डिंग स्वयं मिट गई। इसलिए हम इस वक्त को पुनः रिकॉर्ड कर रहे हैं।

⬜ Not used yet · 01:18:21:27 – 01:23:37:22 (5:16)

01:18:21:27 ठीक है। एक मिनट। अब देखिए पहली बात तो यह है जहां पर इसने बताया कि यह बताने का प्रयास कर रहा है कि जो बुरी शक्तियां हैं वह इसको यह कार्य करने से रोक रही है वो इतनी प्रभावशाली है कि सब कुछ इंटरनेट इत्यादि बंद होने के बावजूद भी इसके फोन को कंट्रोल किया जा सक रहा है उनके द्वारा जो है किया जा रहा है तो अब पहली बात सोचने वाली यह है कि जो शक्तियां इसके फोन को कंट्रोल कर रही हैं तो वह शक्तियां बाद में जब इसने पूरी रिकॉर्ड कर ली तो फिर वो वहां पर उसको कंट्रोल क्यों नहीं किया? जैसे इसके क्वेश्चन होते हैं दिव्यानुभूति या जो भी आर्य समाज के क्वेश्चन होते हैं कि अगर भगवान में इतनी शक्ति है तो वो ऐसा क्यों नहीं कर सकते? तो भगवान की तो अपनी वो इच्छा होती है वो कब क्या क्यों कर मगर बुरी शक्तियों का तो सिंगल पॉइंट एजेंडा है ना कि उनको उसको रोकना है यह वीडियो बनाने से। तो जब वह वीडियो बनाने से रोकना चाह रही है और वह कंट्रोल कर सकती है इसके मोबाइल को तो उसके बाद अगर वह 4 मिनट का 5 मिनट का कंट्रोल कर सकती थी तो उसके बाद दोबारा जब वीडियो शूट हुआ तो तब कंट्रोल क्यों नहीं हुआ सोचने वाली बात मगर एक वो वीडियो और दिखा दीजिए आगे

01:19:33:24 वाला अ चंद्र ग्रहण वाला कि उस दिन भी यही था आज भी वही है यद्यपि अमावस्या को आसुरी शक्तियां अधिक होती है किंतु अनाम नेक्स्ट की ऊर्जा की कलाओं के आधार पर घटती बढ़ती है। ये इसकी विशेषता है। इसीलिए पूर्णिमा की रात्रि को अनाक्ष की शक्तियां सर्वाधिक उत्कर्ष को प्राप्त होती है। जो कि आज भी अलग-अलग शैतान के उपासकों के द्वारा आराधित हो रहे हैं और संजोग से जब ये वीडियो रिकॉर्ड किया जा रहा है तो आज भी जो रात है वो पूर्णिमा की है। तो देखिए तीन चीजें हो गई कि जब यह वीडियो बनाते हैं तो इनके आसपास वह शक्तियां मौजूद है जैसा कि इनका जो वीडियो है वो अपने आप डिलीट हो जाता है। दूसरा पक्ष बता रहा हूं मैं। जब यह वीडियो बनाते हैं तो इनका वह वीडियो डिलीट हो जाता है। ज्यादातर उसी जगह बनाते हैं जब पहले भी वह जो शक्ति थी उससे प्रभावशाली गतिविधियां हो चुकी हैं। और तो और जो समय नक्षत्र इत्यादि है जो भी चंद्र ग्रहण या पूर्णिमा जो भी है एक समय नक्षत्र वह भी सेम टू सेम चल रहा है और इनके साथ में वह शक्ति आसपास है प्रभावित है। वह बात और है। अच्छा एक चीज और है। कि जब हम यह बात

01:20:48:26 कहते हैं कि यह मच्छराज अगर कोई शैतान है इस दुनिया में तो यह उसका विरोधी है या प्रचारक तो यह बात आती है कि इसने अपनी वीडियोस में उसके कुछ नाम बताए हैं कि इन नामों को लेने से उसकी शक्ति बढ़ती है। तो अब आप एक बात बताइए कि जब यह नाम बताएगा तो उसका नाम ज्यादा से ज्यादा लिया जाएगा या नाम को नहीं बताएगा। उसके बारे में बताएं मगर उसके उन नामों को ना बताएं जिससे कि उसकी शक्ति बढ़ती है। तो क्या उसको जो जिन नामों को लेने से उसकी शक्ति बढ़ती है मिलेराज की उन नामों को जब ये सार्वजनिक रूप से बोल देगा तो क्या कहीं ना कहीं उसको लिए जाने वाली संख्या जो है उसमें वृद्धि नहीं होगी। अच्छा वह बात अलग है कि इसने जो उपाय भी बता दिए मगर कितने लोग हैं जो उन उपायों का ध्यान रखेंगे नाम लेते समय है ना यह सब सोचने वाली बात है कि यह म्लेच राज का प्रचारक है या विरोधी है एक बुरी शक्ति का या फिर यह मानसिक स्थिति से गुजर रहा है वो मानसिक स्थिति में बात करेंगे मगर अभी जो मैं नाम वाली बात कर रहा हूं ऐसी भी आपने कई फिल्में देखी होंगी जिसमें कोई जो विलन की पार्टी होती है। वह अपनी किसी चीज को समाज में प्रख्यात कराने के लिए फेमस

01:22:03:27 कराने के लिए अपने लिए ही कोई बुरा अटेमप्ट करवा लेती है। मुझे ऐसा ध्यान आ रहा है एक वो आपने फिल्म देखी हो शायद जिसने देखी हो कलयुग कलयुग मूवी में जिसमें वो कुणाल नाम का शायद अभिनेता है। उस मूवी में भी यही होता है कि जो यह जो अश्लील फिल्में बनाने वाली जो एक वेबसाइट थी वह अपना प्रचार करने के लिए ही कुछ लोगों को पकड़वा देती है जिनकी वो फिल्म बना रही थी अश्लील चलचित्र बना रहे थे तो उनको वो पुलिस के हवाले करवाती जिससे कि वो केस लाइमलाइट हो उस सुनवाई हो कोर्ट तक जाए अखबारों में छपे तो इस सबसे लोगों को यह मालूम पड़े कि दुनिया में कोई अश्लील चलचित्र बनाने वाली वेबसाइट है तो यह भी एक तरीका है ना इम्लेशराज अपना नाम लोगों से अगर इसकी कहानी सत्य है तो वो कहना उच्चारण करवाना चाहता है उसको गुंजायमान बनाना चाहता है तो उसको अपने प्रचारक के द्वारा प्रस्तुत करवा रहा है तो ये सारी चीजें भी है। इसका जो है उसी स्थान पर बैठकर वीडियो बनाना उसी उसी ग्रह नक्षत्र में वीडियो बनाना और तो और इसके

01:23:19:01 आसपास उस शक्ति का होना इसके द्वारा खुद कहा जाना है ना? यह सब चीजें किशोर इशारा कर रही है कि मलेच राज अगर है तो यह उसका प्रचारक है या विरोधी है। अभी मना स्थिति की बात अभी हम आगे करेंगे। जी आप वीडियो चला दीजिए।

01:23:37:22 सीरिया में भी इसकी गतिविधियां हमने 2017 से 18 के मध्य में देखी थी। अनुभव की थी। मतलब देखी थी। मतलब गया नहीं था। अनुभव की थी और एक सा परंपरा के साधक से इसकी पुष्टि भी की थी। तो हमने आपको इस विषय में मूलभूत जानकारी आज देने का प्रयास

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01:23:51:27 किया। ये देखिए देखिए यहां पर देखिए ये मच्छराज के कितना निकटतम है यह भी सोचने वाली बात है। फलानी जगह देखी थी फलानी जगह देखी म्लेच राज से इसकी कितनी निकटता है। एक निकट्टा वाला वीडियो और है वह दिखाइए कि हमने इसको जो है मैंने इसका घर देखा था जब देखिए ऐसा इसके घर अगर मैं कुल चित्र एल डिजाइनर होता तो आपको मैं दिखा देता लेकिन मैं असमर्थ हूं मैं एआई से इसके घर का डिजाइन बनाने का बहुत प्रयास करता मैंने अपने जीवन के तीन दिन में यहां पे ज्ञान है ग्राफिक डिजाइन से बस मैंने तीन दिन प्रेशर किया लेकिन जो मैंने देखा इसके घर का नक्शा वो नहीं दिखा सकता हूं आपको मैं संख्या मत कीजिएगा मेरे पास डाटा नहीं है मैं बस आपको वर्णन करता हूं आप बंद करके वो जानकारी को समझने का प्रयास करे की आप एक ऐसे स्थान पर है जो लगभग लगभग आधा किलोमीटर लंबा और आधा किलोमीटर चौड़ा है। मतलब वो स्क्वायर नहीं है। आप ऐसा समझे की वो आधा किलोमीटर रेडियस का एक गोलाकार क्षेत्र है। उस गोलाकार क्षेत्र के मध्य में एक तल्ले का एक घर है। ये अंडर ग्राउंड नहीं है। ये जमीन टूटा है और उसकी छत एक तरफा स्लोप वाली है। एक तरफा स्लोप वाली उसकी छत है। दो तरफ स्लोप नहीं है। एक तरफा स्लोप है। बिलकुल काले रंग का घर है। उस घर के ठीक सामने आग जल रही है। कुछ टूटे हुए वाहन है। कुछ बिजली के खंबे जहां पुराने बल्ब लग रहे है। और उन बल्बों की रोशनी ज तक है वहां तक प्रकाश है। उसके आगे भक्त नाम है और मैं बहुत निर्भय प्रवृत्ति का व्यक्ति हूं मैं पर्वत निर्भता पूर्व वितरण करता हूं और

01:25:06:28 उस घर की धारा मैंने लगभग आधे मिनट तक देखी मैंने स्वयं को वहां पर आध्यात्मिक रूप से अनुभव किया लेकिन वो इतना भयाक करने वाला था वो भूतला कुछ नहीं था बस धारा था परिवेश था कुछ टूटे वाहन थे और सामने अग्नि था और इसी इसी दृश्य में इतनी नकारात्मकता थी इतनी आसुरी तत्वों का उसमें प्रतिष्ठापन था की मेरे जैसा निर्भर व्यक्ति के निर्देश से काप गया और उसके आगे देखने का साहस कुछ समय नहीं कर पाया था और इस स्थान का नाम क्या है ये खोजने में बहुत परिश्रम किया और तब जाकर पता चला की ये स्थान का कोई निश्चित नाम नहीं है मतलब ये उसका हेड क्वार्टर जो है हेड क्वार्टर की तरह संज्ञा इसको कहते है पगम। इसका नाम है पैरागम। पैरागम का जो मुख्यालय है पैरागम एक उपलक्षण है। मतलब अगर नक्ष यहां बैठा है तो इसी जगह का नाम हो जाएगा पैरागम। अगर नक्षराज दिल्ली बैठा है तो उस जगह का नाम हो जाएगा पैरागम। अगर नक्षराज वाशिंगटन में बैठा है तो उस संस्था का नाम हो जाएगा पैरागम। और पैरागम कोई ऐसी स्थान नहीं है। पैरागम वो थोर है जिसका नक्ष बैठता है उसका हेड क्वार्टर है। चाहे वही बना आपका नाम हो जाएगा पैरागम। इस प्रकार से तो कहने का मतलब यहां पर यह है कि यह बहुत निकटता रखता है। यह उसी समय सक्रिय होता है जिस समय वो शक्तियां सक्रिय थी। यह उसी जगह पर सक्रिय है जहां पर वह सक्रिय पहले वह शक्तियां पहले सक्रिय हो चुकी हैं

01:26:09:19 और यह जो है विरोधी होने के रूप में भी उसके प्रचार का कार्य कर देता है। यह कहते हुए कि इसके नाम को नहीं लेना चाहिए। मगर नाम मैं आपको बता दे रहा हूं। अब इसने जो नाम लेते समय बचाव क्या रखना है यह भी बताया। मगर वह भी एक बात हो सकती है कि क्योंकि मैं इसका विरोधी हूं तो आपको मैं बचाव बता रहा हूं। वह बचाव कितना कारगर सिद्ध होगा नहीं होगा वह एक बात अलग है। मगर नाम लेना बहुत खतरनाक है। नाम लेने से उसकी शक्तियां बढ़ती हैं और नाम इसने सार्वजनिक कर

01:26:44:15 दिया। के आधार

01:26:45:27 पर हमने एआई से कुछ चित्र बनाए हैं जो की इस वीडियो में इस श्रृंखला के इस एपिसोड में आपको समय-समय पर दिखाए जाते। एक क्रू स्वरूप एक शैतान का जिसका

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01:26:54:12 एक बात और है एक बात और ध्यान देने की है। यह मच्छराज को इतना ज्यादा जानता है। वह कहां-कहां चलता है उसका मूवमेंट है। उसका घर देख चुका है। उसकी सक्रिय होने की जो टाइमिंग्स है उसमें उसी में सक्रिय होता है। जो जगह पर वो सक्रिय हो चुकी है वो क्या कहते हैं? वहां पर वो सक्रिय होता है। स्थान वाला भेद भी नहीं है। काल वाला भेद भी नहीं है। और तो यह प्रूफ भी हो रहा है क्योंकि वह शक्तियां वहां पर थी जब इसका वीडियो मिटाया गया। ठीक है? तो यह प्रूफ भी हो रहा है कि वह शक्तियां जिनकी बात कर रहा है वह और यह बहुत निकटता से जानता है। उसके चित्रों को इसने एआई से बनाने का बनाने की कोशिश की है। इस पूरी जो सीरीज है इसकी एडिटिंग इत्यादि म्यूजिक इत्यादि का सिलेक्शन वगैरह भी संभवत इसने स्वयं ही किया है। तो ये कितना ज्यादा निकट है अम्लेक्षराज के। अगर वो है तो यह यहां पर हम लोग इस ओर जा रहे हैं। जी चलाइए आप वीडियो।

01:27:49:01 जब मैं अपने कक्ष में सो रहा था तो काल लगभग 4 बजे ये देखिए यहां पर भी इसके हाथ में लालटेन है। आपके हृदय में एक ड्यूटी सदैव जलती रहनी चाहिए। ये ध्यान देने वाली बातें हैं कि आपको किस ओर ध्यान आकर्षित हो रहा है आपका। जी प्ले करिए। प्रात काल लगभग 4 बजे जब मैं अपने कक्ष में सो रहा था तो किसी व्यक्ति ने हमारे कक्ष के द्वार पर दस्तक दी तो एक दो बार तो मैं सुन नहीं पाया और कुछ देर के बाद जब मेरे नेत्र खुले जब मुझे अनुभव हुआ कि कोई दरवाजे पर है मैं बाहर निकला मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि कामाख्या में ही एक महानुभाव जो पाठ जपा करते हैं यहां के है तो नहीं किंतु साध तपस्या के लिए यही पर प्रवास कर रहे है वो दरवाजे पर थे प्रात काल चार बजे तो मैंने उनसे पूछा भाई आप क्यों आए हैं तो वो बड़े घबराए हुए थे बेचैन उनका चेहरा दिख रहा था वो हमारे कक्ष में आए फिर हमारे साथ बैठ उन्होंने बताया की आप जोराज श्रंखला अभी निर्गत कर रहे है उससे जुड़ी कुछ बातें कर कहनी है हमने सोचा अभी चार बजे सुबह क्या बात करनी है मैंने पूछा क्या बात उन्होंने कहा की अभी अभी उन्हें एक स्वप आया है जिस स्वप्न में कोई व्यक्ति है जो वही किसी परंपरा के साधक है और उन्होंने कहा की भाई में पहले वृक्षराज के संगठन में जुड़ा हुआ था और वृक्षराज के नर इत्यादि में दिया करता था किंतु मुझे इस प्रकार के अभियानों में बड़ी ग्लानी हुई मुझे बहुत अफसोस हुआ की मैं क्या कर रहा हूं तो मुझे प्रायश्चित करना है और मैं देवी जी की आराधना इत्यादि कर रहा हूं तो इसीलिए मैं यहां पर आया हूं तपस्या करने के लिए और मैं बताऊंगा किराज

01:29:04:12 वस्तु का कैसा दिखता है जिस प्रकार के चित्र जिस प्रकार के घटनाक्रम उसके विषय में प्रसारित किए जा रहे उनसे अधिक स्पष्ट और उनसे अधिक ठोस मैं आपको चित्र बनाकर दिखा रहा हूं क्योंकि मैं उस तत्व को भौतिकता से जानता हूं। साधक जी ने बताया इस सत्र में जो व्यक्ति उनसे मिले उन्होंने बताया कि वो ये सब तामसी विद्याएं पश्चात विद्याएं सीखने के लिए अफगानिस्तान के क्षेत्र में गए थे और वहां से सारी विद्याएं काली शक्तियां वो सीख कर जगा कर आए थे और उसी की आराधना करते थे किंतु उसके मार्ग में चलते हुए इन्हें आत्मज्ञानी हुई इन्हें यह बोध हुआ की मैं तो बहुत ही नकारात्मक मार्ग पर निकल पड़ा हूं। तो फिर भगवती की आराधना करते हुए धीरे धीरे उस मार्ग से मुक्त होने का प्रयास कर रहे थे। तो उन्होंने एक श्रेष्ठ वर्ण के दीवार पर उसका चित्र बना कर दिखाया की वो कैसा दिखता है? तो उसमे भी दो शक्तिया एक तो वाहन के रूप में है और एक जो उसके ऊपर सवार है तो ज मैंने आपको आक्ष और उसके भीतर बैठे हुए अनामृक्ष के बारे में बताया था वहां पर ऐसा ही भाव है की एक उसको ढूंढ रहा है और दूसरा उसके ऊपर सवारी कर रहा है अब भौतिक रूप से सवारी कर रहा है की सांस्कार रूप से सवारी कर रहा है ये तो ये सब शक्तियां स्थूल रूप में तो कुटस होती नहीं है की भाई हाथ से तो चाहे बड़ा होगा पैर होगा तो चाहे बड़ा होगा ये सब काम शक्तियां है अपनी इच्छा के अनुसार वो आकृति और भाषा स्वर इत्यादि को परिवर्तित करने का सामर्थ रखती है ये सब शक्तियां तो उन्होंने जो चित्र बनाया और वो जो साधक प्रात काल मुझसे मिलने आए थे उन्होंने जो बताया वो लगभग सात फीट का एक पुरुष जिसकी ऊपरी खाल नहीं है ऊपर की चमड़ी नहीं है उसकी जो मांसपेशिया वो दिखती ऊपरी खा लेंगे। 7 फीट का एक पुरुष जो साला उठा है और नहीं देख पाए। ठीक है। तो कहने का मतलब ये है ये मलेच राज को इतना ज्यादा ब्रीफली जानने वाला

01:30:19:13 कौन है व्यक्ति? यह खुद है। इतना ज्यादा उसकी बारीकियों को जानने वाला यह खुद है। और जहां वो जी शास्त्र उसे बता रहे हैं। बाइबल ऑफ़ जेनेसिस और हदीस से नहीं बता रहे हैं। इसीलिए तो कहता हूं उसको कई बार श्रद्धा पूर्वक सुनना सीखो। को केवल निजी देश में निग्रचार का विरोध करना है। इसके चक्कर में जो वास्तविक सत्य है जो वास्तविक संकट है सनातन इसको मैं बोल दूं एक बार बहुत बढ़िया तो ये मैंने बताया देश काल का सक्रिय होने का देश काल सेम है। सक्रिय होने का प्रमाण है। ठीक है? ये खुद दे रहा है। और उसकी जो बहुत ऐसी चीजें हैं जो कोई सामने से मिला हो वही जान सकता है। वह जैसे कि वह कैसा दिख रहा है और उसका घर उसके मूवमेंट ज्यादा से ज्यादा वो जानता है और इस सब के बाद इसने जितनी भी एडिटिंग है स्वयं की है भगवतानंद ने म्यूजिक वगैरह खुद लगाई है उसके चित्र बनाए ऐसे तो सारी चीजें एक और इशारा कर रही है कि या तो मलेच्छराज के प्रभाव में है या फिर जो मना स्थिति है इसकी मानसिक स्थिति है उसी की उपज है मलेच्छराज है ना वो भी मैं आपको बताऊंगा कि वो वो किस तरह से सामने आ रहा है इसकी मना स्थिति के कारण भी वो मलेचराज

01:31:35:01 नाम का एक एक की एक एंटिटी गड़ी गड़ी जा सकती है। वो भी एक बीमारी होती है। मैं बताऊंगा आपको। मगर अच्छा एक चीज और है कि इस जो इसकी पूरी जो कहानी है राज की इसमें इसने चीजें सांकेतिक तो उठाई है फलाने बुक से सांकेतिक उठा ली या फलाने ग्रंथ से सांकेतिक वो तो उठाई है जैसे रामपाल करता है ना संकेत कि वहां पे अगर सूक्ष्म ग्रंथ कह दिया गया तो सूक्ष्म वहां पे सूक्ष्म वेद बोल दिया गया तो हमने सूक्ष्म वेद मान लिया कबीर वाणी को वहां पे अगर तत्वदर्शी बोल दिया गया जो ठीक ठीक व्याख्या करेगा तो वो मान लिया गया इसको रामपाल को तो ऐसे साकेत संकेतों को तो इसने उठाया है थ्योरी पेपर से आर्टिकल से या ग्रंथों से मगर प्रमाण के रूप में इसने अपनी जो अपनी सिद्धि अपनी साधना है उसको ही रखा है। अपनी अपने शब्दों को ही प्रमाण के रूप में इसने प्रस्तुत किया है। संकेत को लिया है। वहां संभावनाएं उत्पन्न करने वाली चीजों को लिया है। मगर जो पूरी कहानी के लिए प्रमाण है उसमें ज्यादा से ज्यादा से ज्यादा अधिकांशता जैसे रामपाल की कहानी है ना पूरी कि भाई देखो देखो वेदों में यहां पर यह लिखा है इसलिए मैं यह हूं इसलिए कबीर भगवान संकेत यहां के उठा लिए गए उन

01:32:50:04 संकेतों के आधार पर देखो देखो ये अच्छा अर्जुन तो स्वयं वहां खड़ा हुआ है कृष्ण के पास फिर कृष्ण किस तत्वदर्शी के रूप पास जाने की बात कर रहे हैं है ना संकेत मिल गया किसी और के पास जाने का तो वो किसी और अरे किसी और के पास जाने की बात ठीक है चलो मान लिया मगर वो तुम ही हो ये कैसे माना जाए तो वो तुम ही हो मैं सिर्फ उसकी वाणी प्रमाण है तो इसी तरीके से संकेत तो इसने उठाए हैं मगर वो संकेत जाकर वही पूरे होते हैं उसी चीज को ख्यापित करते हैं जिसको यह कर रहा है तो इस इस बात के लिए इसकी वाणी ही प्रमाण है और ऐसे में जब इससे कोई यह पूछ लेता है तो यह क्रोधित होता है क्रोधित होता हुआ भी दिखता है सबूत मांगने पर क्रोधित हो जाता है देखिए

01:33:40:03 चलाइए ये सब

01:33:41:13 सनातनी शास्त्रों से हम बता रहे हैं। कोई बाइबल और जेनेसिस और हदीसों से नहीं बता रहे हैं। इसलिए जो कहता हूं उसको कई बार श्रद्धा पूर्वक सुनना सीखो। केवल निजी देश में निग्रचार का विरोध करना है। इसके चक्कर में जो वास्तविक सत्य है जो वास्तविक संकट है सनातन के ऊपर उसकी उपेक्षा मत करो। क्योंकि हम नहीं बताएंगे तो हम बताने वाले बचे नहीं है अधिक लोग। अब देखो हम तुमको और भी कुछ प्रमाण देते है। अच्छा एक प्रश्न बड़ा सुंदर लोगों ने पूछा था जो युग पुराण के श्लोक से हमको सुना आ गया वो भी हम तुमको बताएंगे।

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01:34:01:08 एक वो श्लोक और था ना एक वो वीडियो था एक जिसमें ये बोल ये बोलता है कि लड़कियां व्हील बना रही हैं। ये सब पैशाचिक वो नहीं है शक्ति तो और कौन करा रहा है? वो वाला वीडियो और दिखाइए। उसमें भी इसका क्रोध इससे सबूत मांगने पर कैसे क्रोधित हो रहा है। भाई हम लोग रामपाल से क्या पूछते हैं कि चलो मान लिया कि वेदों में लिखा है कि वो गाय का दूध पिएगा वो चरवाहा होगा वो ये होगा वो वो होगा। चलो संकेत मिल गए परमात्मा के। अब वो परमात्मा वही कबीर है जो कबीर जिसको तुम कबीर कह रहे हो। ये कैसे माना जाए? वेदों में कवि नाम आ गया तो कवि नाम आ गया। मान लो वेदों में कबीर भी लिखा है। कवि नहीं उसका अर्थ वो ले लो जो तुम कहते होगे। कबीर है वो कवि कबीर है। तो ठीक है। अगर वो कबीर शब्द आ गया उसको कबीर समझना ठीक है। मगर वो वही कबीर क्यों? जिसको तुम मान रहे हो तो वहां पर उनका शब्द प्रमाण है। संकेत यहां से लिया शब्द प्रमाण है। इसी तरीके से संकेत लिए ग्रंथों से मगर प्रमाण क्या है? इसका खुद का शब्द। देखिए और

01:35:12:21 तुम्हारे अंत चेतना पर इतना प्रभाव डाल चुके हैं कि सर पहन के खड़े मूत रहे हो वो और साजिश गम कराए घूम रही है बिना पैसा के शक्ति के तुमको लग रहा है अब इससे ज्यादा क्या प्रमाण दे

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01:35:20:09 तुमको गलीगली में रील लेकिन यहां पे क्या हुआ बहुत बढ़िया इसने कहा कि भाई देखिए ऐसा ऐसासा हो रहा है तो ये क्या बिना पैशाचिक शक्ति के हो रहा है तो बिना पैशाचिक शक्ति के हो रहा है ये कोई नहीं कह रहा है मगर वो पैशाचिक शक्ति के लिए कि जिस रूप में है जैसी दिखती है ऐसा करती है वैसा ऐसा करती है। उसकी जो वस्तुनिष्ठता है उस जानकारी के लिए तो तुम्हारे शब्द ही प्रमाण हो रहे हैं ना तुम्हारे अनुसार। तो ये सारा ताना है।

01:35:57:07 अ तो इस तरीके से क्यों पढ़ना है? इसकी स्पीड धीमी करके चलाइए ना। इतना स्ट्रेट क्यों चला रहे हैं? डेढ़ पे चलाइए या तो 1.5 पे चलाइए। मेरे ख्याल से दो पे चल रहा है।

01:36:11:10 में रील बनाकर लड़कियां जो है सो नाच रही है और व्यभचार फैला रही है। इतनी अंदर की मानसिकता पर प्रभाव पड़ जा रहा है। क्यों पड़ रहा है बिना किसी पैशाचिक शक्ति के? तो जिस पैशाचिक शक्ति के माध्यम से ऐसा हो रहा है उसका जहांजहां संदर्भ जिस प्रकार से प्राप्त होगा चाहे अधिक परंपरा से चाहे अनुभूत परंपरा से हम उसका वर्णन करेंगे। अगर तुमको इसमें प्रमाण नहीं मानना है तो अपने कंबल तान और सो जाओ। तुम्हारे लिए हम थोड़े बना रहे हैं

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01:36:30:12 ये सब बातें। करेंगे। अगर तुमको इसमें प्रमाण नहीं मानना है तो अपने कंबल तान और सो जाओ। तुम्हारे लिए हम थोड़े बना रहे हैं ये सब बातें। [संगीत] हम तो अब समराइज कर ले थोड़ा सा कि इनके जीवन में डिप्रेशन रहा ही है कुछ मैंने बायपोलर नाम की जो बुक है वो थोड़ी बहुत देखी तो डिप्रेशन था इनको दुख से गुजरे हैं संकट की स्थितियों से गुजरे और फिर आगे जो है डिप्रेशन है बाईपोलर है कुछ ऐसे रोग भी हैं जिन जो अभी प्रमाणिक नहीं है कि हैं इनको आदतें कुछ और प्यार में असफल करियर में असफल फिर स्वयं को ख्यापित करने के लिए दौड़ नकारात्मक विधि का आलंबन उसके बाद नकारात्मक चीजों में प्रवेश कर जाना ऐसी संवेदनशील गंभीर साधनाओं में विधियों में प्रवेश करने कर जाना जहां के लिए प्रज्ञा शक्ति और जो विल पावर वगैरह है वो बहुत स्ट्रांग चाहिए होती है व्यक्ति को उसमें प्रवेश कर जाना साथ ही साथ इसके जो लक्षण है वो भी साथ में लेकर के चलना जैसे कली पुरुष की बहन है जो जिसका नाम है द्रुपति वो जो गाली उसको अपने मुख में लेकर के चलना जिसे पिशाचिनी

01:37:46:00 कहा गया है शास्त्रों में भी और इसने भी माना तो इन सबका जो एक अंत में एक इफेक्ट आता है कि या तो यह खुद एक जो जिस शक्ति से लड़ने की बात कर रहा है यह प्रबल संभावनाएं यहां पर उत्पन्न हो रही है कि यह खुद उस शक्ति के प्रभाव में है। यह इस तरीके से उस शक्ति के लिए ही कार्य कर रहा है जिसके बारे में यह बात कर रहा है। जिन्न की साधना, परी की साधना यह सब धर्म को बचाने के लिए नहीं होता है। कहां लिखा है हमारे शास्त्रों में? बताइए। है ना? यही इसको इसके संप्रदाय से मिला है। क्या लुप्त संप्रदाय से? सोचने वाली बात। तो अब तीन संभावनाएं हैं जो मैं आपको बता रहा हूं। या तो यह या तो यह खुद मलच्छराज है। अगर अगर वो ओरिजिनल वाला भी नहीं अगर वो ओरिजिनल वाला मच्छराज भी नहीं जो इसने ख्यापित किया। मगर इसके ताना-बाना जो इसने बुना है उसके अनुसार जो मलेच्छराज नाम की एंटिटी बनी है वो ये खुद ही है। अब यहां पर मन स्थिति आती है। मनस्थिति कैसे कि कोई एक बीमारी होती है उसका नाम ध्यान नहीं आ रहा है मुझे जिसमें व्यक्ति खुद से ही बात करने लगता है। दूसरे

01:39:01:08 रूप में इस पर एक मूवी बनी है कार्तिक कॉलिंग कार्तिक। उसमें वह व्यक्ति क्या करता था? अच्छा ये वीडियो पूरा सुना दीजिए। ये सब सनातनी

01:39:17:01 शास्त्रों से हम बता रहे हैं। कोई बाइबल और जेनेसिस और हदीसों से नहीं बता रहे हैं। इसलिए जो कहता हूं उसको कई बार श्रद्धा पूर्वक सुनना सीखो। केवल निजी देश में निग्रह का विरोध करना है। इसके चक्कर में जो वास्तविक सत्य है जो वास्तविक संकट है सनातन के ऊपर उसकी उपेक्षा मत करो। क्योंकि हम नहीं बताएंगे तो हम बताने वाले बचे नहीं है अनेक लोग। अब देखो हम तुमको और भी कुछ प्रमाण देते है। अच्छा एक प्रश्न बड़ा सुंदर लोगों ने पूछा था जो युग पुराण के श्लोक से हमको सम्मान आ गया वो भी हम तुमको बता देते है क्या है वो विषय जब आर्द्रवलक्ष इबिसिन के विद्रोह भी की सेना से बचकर या निकल कर भाग रहा था और जब वो रेगिस्तान में गया वहां पर उसको 15 लोग मिले थे ऐसा हमने बताया था वो 15 लोग कौन थे इसका अर्थ है की वो 15 लोग तो वृक्ष भी पुराने है वर्तमान से ज्यादा पुराने है तो लोग पूछते है वो 15 लोग कौन है ये 15 लोग कौन है इसके विषय में पूरे के शंकराचार्य जी ने लिखा है संकेत में लिखा है लेकिन उसको डिकोड नहीं किया है हो सकता है वो दृष्टिकोण से नहीं लिखा हो लेकिन अर्थ उसका वही है जब वर्तमान से ज्यादा पुराने है तो लोग पूछते हैं 15 लोग कौन है ये 15 लोग कौन है इसके विषय में

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01:40:06:00 पूरी के शंकराचार्य जी ने लिखा है उसको देखिए यहां पर क्या है पूरी के शंकराचार्य जी के शब्दों को अपने लिए उपयोग में ले रहा है ना पूरी शंकराचार्य जी ने लिखा है अब उनके वो जो शब्द है उनको संकेत प्रमाण तो ले रहा है कि पूरी शंकराचार्य जी सही बात करते हैं क्योंकि इसकी बातों से मैच कर रहे कर रही है तो उनको प्रमाण के रूप में उपयोग कर रहा है मगर फिर भी उनके वो जो शब्द है वो सांकेतिक है मगर उनको अपने लिए प्रमाणिक उसमें यूज़ कर ले रहा है। तो अब उसको और चलाना है तो चला दीजिए। पूरा पूरा कर दीजिए।

01:40:51:27 ठीक है। तो अभी मैं जो बात कर रहा था कि दो चीजें हैं कि अगर इसके द्वारा जो बताई गई प्रचारित वो जो शक्ति है वो है तो इसकी प्रबल संभावनाएं हैं कि यह उसका विरोधी नहीं बल्कि उसके लिए कार्य करने वाला व्यक्ति ही है। क्यों? इस ओर भी देखिए कि जितने भी संत है जो आज थोड़ा बहुत यह खुद कह चुका है। इसने खुद अपने किसी वक्तव्य में यह कहा है कि हिंदू राष्ट्र के लिए अगर कोई कार्य करता हुआ मुझे कोई दिख रहा है तो वो पूरी के शंकराचार्य जी हैं। और आज ये इस स्थिति में है कि पूरी के शंकराचार्य जी का ही विरोध कर रहा है। पूरी के शंकराचार्य जी का ही उपहास कर रहा है। अनेकानेक तरीकों से वो हो पा रहा है कि नहीं हो पा रहा अलग मैटर। मगर अपनी ओर से पुरजोर विरोध ये कर रहा है। पूरी पीठ का पूरी के शंकराचार्य ठीक है। तो अब भाई जो जिसको अधर्म फैलाना उसके रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा कौन है? धर्माचार्य जिनके पास धर्म है जो धर्म को बताएंगे विशुद्ध रूप से तो पहले उनको भी तो नष्ट करना होगा। तो जितने भी ऐसे संत हैं जो किसी तरीके से रणनीति का उपयोग करके जो भी कुछ भी कार्य करने का प्रयोग कर रहे हैं। इसने सबको टारगेट कहीं ना कहीं किया। जितने अंशों में वह गलत दिख सकते थे दुनिया को उतने अंशों में उसने पकड़ खुद भी है। ऐसा नहीं है कि

01:42:07:03 यह कहीं पर गलत नहीं है। मगर इसने अपनी चीजों को अपनी चीजों पर बात नहीं की। इसको ऐसा क्यों करना पड़ा या उसमें जो है थोड़ा नम्र हो गया, विनम्र हो गया। खैर तो अब यह अनावश्यक रूप से यह जो सभी संतों को मुख्य रूप से जिनको यह खुद भी मानता है कि हिंदू राष्ट्र के लिए कार्य करने वाले अगर कोई है तो पूरी के शंकराचार्य जी उनको खुद टारगेट कर रहा है। तो इसकी प्रबल संभावनाएं हैं कि यह म्लेच्छराज का विरोधी नहीं बल्कि म्लेराज का प्रचारक है। उसके लिए कार्य करने वाला है। वह जहां सक्रिय होता था वही यह सक्रिय होता है। वह जब सक्रिय होता था वही यह सक्रिय होता है। तभी सक्रिय होता है। और तो और इसकी जो इसके आसपास उस शक्ति के होने की निशानी यह खुद बताता है कि मेरा मोबाइल पर यह हो गया वह हो गया। अच्छा इसके साथ ही साथ इसकी अगर यह सब नहीं है यह उससे प्रभावित नहीं है तो फिर हमें यह मानना पड़ेगा कि इसकी भी प्रबल संभावनाएं हैं कि इतना सारा इसने जो झेला है अपनी लाइफ में इसने दुख झेला, कष्ट झेला और वो प्यार में, प्रेम प्रसंगों में सफलता झेली, करियर में सफलता झेली। वहां से निराशा हाथ लगी। फिर इसने गलत चीजों का आलंबन लिया। गलत विधि का लोगों का दुष्प्रचार करना उसका आलंबन लिया।

01:43:22:24 लोगों को बुरा भला कहना गाली का आलंबन लिया। पिशाचिनी का आलंबन लिया। कली पुरुष की बहन का आलंबन लिया। उसको अपने मुख में लेकर के चलना चालू किया। और तो और तंत्र साधना में घुसा। वो सामान्य रूप से नहीं। जिन्न को सिद्ध करने गया। जिन्न को सिद्ध करवाने। कालिया जिन्न को सिद्ध करवाने की इसने बात की। परी को सिद्ध करवाने की इसने बात की। तो इन सबके कारण कोई बहुत बड़ी बात नहीं है कि इसकी मना स्थिति इसके इसको एक कोई मानसिक रूप से ऐसी कोई स्थिति इसकी बनी जो अ जो एक मूवी का नाम था कार्तिक कॉलिंग कार्तिक उसमें वो क्या करता था? उसको एक बीमारी हो जाती तो वो दिन में अपने दिन में बात करता था। अपनी आवाज को रिकॉर्ड कर देता था और रात को रिकॉर्ड करने के बाद रात को उसको वो कॉल आता था उसके नंबर पर वो कुछ सेटिंग कर देता था रात को उसको कॉल आता था और उसमें उसकी आवाज खुद ही सुनता था कि देखो मुझे जो उसका कॉल आ रहा है किसी का किसी शक्ति का किसी वैसी शक्ति का कॉल आ रहा है और सुनता था फिर उसके अनुसार कार्य करता था उसको ऐसा लगता था अभी आपने जो वो मर्डर केस देखा है ना अ जिसमें उसने कोमल ने अपने पति को मर्डर करके ड्रम में डाल दिया था। सीमेंट

01:44:37:27 भर दिया था। उसमें उसका जो प्रेमी था जिसके यहां पर शैतान की वो जिसके यहां जो दीवार थी उसमें शैतान का चित्र मिला था। उस प्रेमी को भी ऐसा लगता था कि उसकी मरी हुई मां उससे बात करती हैं। और बाइपोलर नाम की जो बीमारी होती है उसमें उसके ऐसे भी लक्षण बताए गए हैं कि ऐसा हो सकता है कि जो है व्यक्ति को ऐसा एहसास हो कि उससे असाधारण शक्तियां बात कर रही हैं। तो इन सबका निचोड़ के दिखाई दे रहा है कि जो यह ताना-बाना बुना गया है म्लेच्छराज का वो इसके द्वारा ही बुना गया है। उसका डिसऑर्डर है। इसकी प्रबल संभावनाएं उसने उसको गुण करके अपने आप को उससे प्रभावित माना या अपने आप को उसका विरोधी के रूप में प्रस्तुत करने का कार्य किया। मगर क्योंकि वो भी वही है। क्योंकि दूसरी ओर से भी वही खेलने वाला है। तो उसके बहुत सारे प्रभाव इसके जीवन में इसको देखने को मिलते हैं। मेरे साथ यहां यह हुआ मेरे साथ वहां यह हुआ। तो यह तीन चार जो प्रबल संभावना है उस पर हमने आज प्रकाश डाला है। यह जो कुल मिलाकर के क्या बात है कि या तो एक स्वयं म्लेच्छराज के

01:45:45:09 लिए कार्यरत है। उसका विरोधी नहीं उसका प्रचारक है। उसका नाम लोगों को बताता है जिससे कि उसका नाम ज्यादा से ज्यादा लोग ले या तो ये उसके लिए खुद कार्यरत है। और या फिर दूसरे हिस्से में यह भी बहुत जगह दिखाई दे रहा है कि म्लेच राज ये खुद है। अब यह खुद अगर वो जो असाधारण शक्ति वाला म्लेच राज नहीं है तो कम से कम यह कार्तिक कॉलिंग कार्तिक वाला तो दिखाई दे रहा है। यह जो मलेच्छराज बना है काल्पनिक कररेक्टर तो यह खुद ही उस रोल को निभा रहा है

01:46:19:14 उसमें। अच्छा सोचने वाली बात है कि बायपोलर्स की बुक के कवर पर लड़की का चित्र क्यों है? यह जब स्वयं एक पुरुष है तो वहां पर लड़की क्या कर रही है? तो इससे क्या झलक रहा है कि यह अपने उस प्यार को नहीं भूल पाया जो प्रेम प्रसंग है उसको नहीं भूल पा रहा है और इधर मच्छराज का वो क्या है दुनिया को क्या सिखा रहा है मच्छराज जो तुमसे प्यार करे तुम उससे प्यार करो तो वो जो उसको जो ठेस पहुंची है कि इसने जिससे प्यार किया उससे इसको प्यार नहीं मिला तो अब वो मच्छराज के रूप में दुनिया को मनवाना चाह रहा है तो यह बहुत सारी संभावना है जिस पर हमने आज बात की है और अगर इन सारी संभावनाओं पर ध्यान ना भी दे तो कुल मिलाकर एक बात तो आपने आज देखी कि कालिया जिन्न की साधना करने की बात कौन कर रहा है? परी परी को सिद्ध करने की बात कौन कर रहा है? कौन मंत्र मांग रहा है? कैसे करना है? कितने बार में हो जाएगा? तरीका पूछ रहा है। पहली बात क्या ये उचित है? जो स्वयं निग्रह संप्रदाय से जिसको स्वयं दिव्यत्व प्राप्त है बचपन से उसको यह फिजूल की

01:47:34:16 साधना करने के लिए दूसरे के अनुगत होना पड़ रहा है। दूसरी बात और क्या इन साधनाओं से हमारे धर्म को कोई लाभ होने वाला है? मुस्लिम साधनाओं से इस्लाम की साधनाओं से यह सब प्रश्न अपने आप से करें जो इनके समर्थक हैं अथवा विरोधी हैं अथवा न्यूट्रल है। ठीक है? और आगे हम यह श्रंखला चलाते रहेंगे। इसमें कुछ और भी बहुत रोचक तथ्य आपके सामने आएंगे। जैसे उधर से भी कहा गया उस व्यक्ति ने भी अपनी उसमें कहा कि आने वाले समय में बहुत सारे प्रमाण वगैरह उपलब्ध कराएंगे। तो किसी तरीके से इस पर एक ग्लांस में अगर आप देखें एट ए ग्लांस भगवत आनंद एट ए ग्लांस तो आपको ये सारी चीजें दिखने लगेंग कि मलेच राज से प्रभावित है या मृच्छराज के अनुगत है या म्लेच राज के सानिध्य में है या म्लेच राज का विरोधी है ये सोचने वाली बात और अगर वो असाधारण शक्ति नहीं है ही नहीं वो ठीक है वह सब एक कपोल तो वो कपोल कल्पना के रूप में भी यह खुद ही है इसने ऐसा नहीं है कि वो क्या कहते हैं गड़ी है फिर यह प्रभावित है उससे वो जो बीमारी है वो मना स्थिति वाली बात यह भी संभावना प्रबल है और

01:48:50:02 फिर एक पूरा का पूरा षड्यंत्र भी दिखाई देता है। यह सारी चीजें हम लोग इस श्रंखला में आपको धीरे-धीरे प्रकाश डालते रहेंगे। आप लोग भी इस पर अपना जो है प्रतिक्रिया दे सकते हैं। और हां किसी को अगर इस मामले में विवाद में किसी प्रकार से भगवत आनंद का पक्ष लेना है तो वह प्रत्यक्ष चर्चा के लिए आ सकते हैं। हमारा नंबर सार्वजनिक है 7408301869 ठीक है। आगे जो आने वाला आने वाली कड़ी है उसमें हम लोग अह ईसा पर बात करेंगे। जीसस पर बात करेंगे। उस वो जो वैष्णव शब्द आया हालांकि उस पर बात कर चुके हैं मगर अब तरीके से करेंगे विस्तृत तरीके से तो आप लोग बने रहिएगा जय श्री राम

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 1:49:42 · 14 Apr 2025

कालिया जिन्न परी साधना और म्लेच्छराज

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