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00:00:02:19 जय श्री राम जी भैया प्रणाम जय सिया राम जी बताइए जी भैया फ्री है क्या अभी आप बताओ अपनी बात बताओ अच्छा अच्छा हमने कहा कि कमेंट करने से अच्छा है कि सीधे-सीधे आपसे बात ही कर ले है ना हम बताइए जी देखिए मेरे उसमें कहने का यह तात्पर्य था कि आपको विरोध करना है आप करिए उसमें कोई दिक्कत नहीं है जिस विषय में आपको कुछ पता ही नहीं है जिस विषय में आपको कुछ ज्ञात ही नहीं है उस पे आप समीक्षा मत करिए ये आपको कैसे पता कि हमें नहीं पता है? अच्छा आप बताइए अभी आपने समीक्षा की एक मिनट अभी आपने समीक्षा की कि जिस विषय में आपको पता नहीं है उस विषय में समीक्षा मत करिए तो आपने हमारी समीक्षा की ना तो हमें पता है तो हमने करी ना कैसे पता है? आधार क्या है आपका? अरे आप आप विरोध कर रहे हैं तो आप आधार आप बताइए कि आपके विरोध का आधार क्या है? देखिए मैंने आपसे एक सवाल पूछा आपने अगर मेरी समीक्षा की है तो उसका आधार क्या है? उसका आधार यह है। उसका मैंने उत्तर उसमें दिया है। ठीक है? क्या? अब सुनिए पूरे विश्व में नहीं विषय बदल रहा है। आप ये बताइए पहले कि आपने मेरी जो समीक्षा की है हां हां वो किस आधार पे की? आपने मेरी जीवनी को देखा है। मैंने क्या-क्या पढ़ा है? क्या नहीं पढ़ा है? या किसके साथ? पश्चिमावनाय तंत्र के आधार पर ही मैंने आपकी समीक्षा करी

00:01:17:22 है। क्या पश्चिमाना तंत्र के आधार? अब सुन लीजिए। अब सुन आप समझ नहीं रहे। देखिए देखिए अगर आप धैर्य धारण करिए मेरी बात तो सुन लीजिए। आपने देखिए आपने एक गलत स्टेटमेंट दिया है। आप उसमें संभावना व्यक्त कर सकते हैं कि ऐसा लगता है कि आपने नहीं किया होगा। मगर आप निर्णय दे रहे हैं तो ये गलत है। इसी बात की मैं लड़ाई लड़ रहा हूं ना। संभावनाजन्य बातों से आप जो है निर्णय नहीं दे सकते। अगर मैं पश्चिमामय की बात नहीं कर रहा हूं तो उससे सनातन सिद्धांत कोई नहीं जो सिद्ध कर रहे कि मैंने पश्चिम की बात नहीं सुनी या मैं नहीं जानता हूं इस विषय में या जो भी है आपको उसके लिए पुख्ता चीजें रखनी होंगी और इसी चीज की लड़ाई बता दीजिए भैया मुझे यह पता है कि क्या कहते भाग देवी भागवत में लिखा हुआ है कि जो वेद विरुद्ध चीजें हैं द्विजों को उनका अनुसरण नहीं करना चाहिए। बिल्कुल बिल्कुल सही बात है। बिल्कुल सही बात है। हम ठीक है। तो ये तेरी मां आई ये लाली तू ना आई ये सब बातें कौन सी परंपरा से प्राप्त हो रही है बताइए? ये नाथ परंपरा में शावर मंत्र चलते हैं भैया। अरे मेरे भाई सनातन है सनातन शास्त्र है या अपने मन से जन है? नाथ संप्रदाय को आप सनातन का अंग मानते हैं कि नहीं मानते? संप्रदाय की बात नहीं होगी। जहां पर वेदों के विरुद्ध जाएगा। सबका खंडन होगा। आदि शंकराचार्य भगवान ने सांख्य दर्शन का खंडन कर दिया। कि

00:02:32:24 हम सांख को इसलिए मानते हैं कि उसने सांख की गणना बताई है। ने बताया सिद्धांत बताए हैं। मगर जहां पे वेद विरुद्ध होगा तो वेद विरुद्ध में नहीं माना जाएगा। उन्होंने विरुद्ध कैसे हो रहा है? आप बताइए ना। वेद विरुद्ध ऐसे हो रहा है कि जो वेद विरुद्ध सामग्री है वो उसमें पाई जा रही है। कैसे? क्यों? जिन्न क्या है? पर ये क्या है? अब सुन लीजिए जिन्न की बात। अब सुन लीजिए ना। सुन लीजिए। आपको मैं कह रहा हूं। आपको नहीं पता है उस विषय में। देखिए ये तो बाद की बात है। वो आपका अनुमान था जो पहले था। हां अब अब देखिए हमको जो पता है हमको जो पता है उसके आधार पे आपकी सारी चीजें ध्वस्त होंगी। बताइए अब ठीक है। ठीक है। अब आप सुनिए बात सुनिए। पूरी शंकराचार्य जी का ही वाक्य है कि पूरे विश्व में जहां कहीं भी चमत्कृति दिखाई पड़ती है उसके मूल में सनातन सिद्धांत है। बिल्कुल है। बिल्कुल ठीक। अब पूरे विश्व में जहां कहीं भी जो क्षुद्र शक्तियां भी इत्यादि भी हैं। ठीक है? जिनकी उपासना लोग करते हैं। उन सबके उपदेशकर्ता भगवान महादेव ही हैं। ठीक है? उसका कोई प्रमाण दिखाना पड़ेगा ना कि उसका प्रमाण मैं आपको दूंगा। उसी पे आपने कमेंट कर दिया कि उसी पे आपने कमेंट कर दिया कि इनके पास कोई प्रमाण नहीं है कोई प्रमाण नहीं है ना महादेव ने यह क्या कहते हैं लाली तू ना आई अपने शैतान की बाप की मार आई ये सब ये महादेव के वाक्य भाषा के भैया मंत्र हैं लोग भाषा के

00:03:47:27 मंत्र पूरी कोई मंत्र नहीं है पहली बात तो हमारे सारे शास्त्र ही संस्कृत में है बाद में उसका भाष्य किया गया है आचार्यों के द्वारा संप्रदाय के साबर मंत्र का ही पूरा आप खंडन तो मैं आपको बता तो रहा हूं कि जहां पर जो भी कोई ऐसी परंपरा है जो वेदों के विरुद्ध जाएगी शास्त्रों की सीमा के बाहर जाएगी उसका खंडन ही तो होगा अगर है तो होगा उसका खंडन आप नाथ संप्रदाय से सिद्ध मत करिए सनातन से सिद्ध करिए क्यों फिर आप उसका क्यों संप्रदाय का खंड क्यों आदि शंकराचार्य जी ने पंचरात्र का खंडन नहीं किया वैष्णवों के शास्त्र कहकर लेकिन उनके वैदिक अंशों को उन्होंने तो ऐसे ही जो जिसका जो अंश होगा नाथ संप्रदाय का जो वैदिक अंश होगा उसको माना जाएगा वैदिक अंश होगा उसको थोड़ी ना माना जाएगा ऐसे तो इस वाले भी कह देंगे कि हमारा वो अंश है उसको मानो। हमारी परंपरा है। अल्लाह अल्लाह भगवान को जैसे तुम जिन्न की बात कर रहे हो कि वो लोक भाषा में कहा जाता है तो हमने भी अल्लाह कह दिया लोक भाषा में। इसी कारण तो लोग धर्म परिवर्तन करते हैं ना। ऐसा नहीं है। देखिए अरे हमारे यहां धनवंतरी मंत्र है। फिर आप उस चीज को एकदम इस्लामिक उससे बिल्कुल जोड़ेंगे। बिल्कुल पीछे पड़ जाएंगे। इस बात अभी तक मेरे मन में उस व्यक्ति के लिए थोड़ी बहुत रिस्पेक्ट थी। मगर जब से ये पता चला है ना ये कालिया जिन्न को कर रहे हैं। अच्छा ये तो पीछे पड़ेंगे उसके। आप

00:05:03:08 लोगों, आप लोगों की तरफ से नीजतापूर्ण हरकत क्या नहीं करी गई है? क्या आप बताइए? क्या नीचतापूर्ण हरकत की गई थी? हमने उससे अच्छा ये हमने उससे ये कहा था सुनो पहले मेरी बात सुनो। हमने उससे ये कहा था कि ठोस प्रमाण दे दो। ठोस प्रमाण देने की बजाय उसने क्या चालू किया? सा में हिंदू राष्ट्र मधुमक्खी की सेना नागो कितनी सुनिए कितनी पीठे हैं? कितनी नहीं है? चारों शंकराचार्य एक ही बात क्यों नहीं बोल रहे हैं? आदि शंकराचार्य ये सब बातें थी ठोस प्रमाण। प्रश्न क्यों नहीं होना चाहिए? जी फिर प्रश्न होना चाहिए मगर जो विषय था वह क्यों छोड़ा नहीं विषय नहीं छोड़ दिया ना विषय छोड़ा ना जब हमने ठोस प्रमाण मांगे आज भी मांगे थे आज तक ठोस प्रमाण दिए बातें जो बोली है वो ठोस प्रमाण वाली बोली है क्या बताइए अरे तो मैंने तो उसको स्क्रीनशॉट वायरल किया आप देखिए आप ऐसा करिए आप लाइव चर्चा में आइए ठीक है आप लाइव चर्चा में आइए आपके मैं आपके घर पे आके चर्चा कर लूंगा और बताइए लाइव हां तो आप घर पे आ जाइए घर पे बैठ करके बात करिए कैमरा ऑन कर लेंगे उसको वीडियो डालेंगे ऑन कर लीजिएगा। बिलकुल बिलकुल इससे अच्छा तो कुछ हो ही नहीं सकता। ठीक है। आपका समय बताइए समय बताइए। मैं समय आपको बताता हूं जब मेरे पास समय होगा मैं आऊंगा। हां तो बता दीजिए। समय बताइए कुछ आने वाले 10 दिन में 15 दिन में कब आएंगे? चलिए कब आएंगे? 15 दिन में 15 दिन

00:06:18:09 में आता हूं। ठीक है। 15 दिन में बताइए आप हमें। ठीक है। हां। ठीक है। ठीक। ठीक भैया। जय सियाराम। जय श्री राम। प्रणाम। जय सियाराम भैया। जय श्री राम। हां भैया ये कह रहा था मैं वो जो कल आपसे मेरी बात हुई थी। ठीक है आपने भैया जो रील जो बनाया हुआ है उसमें जो आपने स्क्रीनशॉट डाला हुआ है। ठीक है? वो जानकारी के लिए आपको बता दूं वो नकली स्क्रीनशॉट है। ठीक है? उसमें जो अद्वैत विजय वैजंती नाम की जो आईडी आशतोष भट्ट जी की जो है ठीक है। उसको उसमें उन्होंने वीडियो भी उसका पोस्ट किया है। उसमें उनका नंबर ही गलत पड़ा हुआ है। वो जानबूझ के उसमें मालूम पड़ रहा है कि उसमें नंबर जी पहली बात सुनो। स्क्रीनशॉट नकली है या असली है यह तो जांच का विषय है ना। अरे ऐसे सुनिए इस विषय में मैं आपको बता तो रहा हूं। मैं भी तो कुछ बता रहा हूं। मैं भी तो कुछ बता रहा हूं। बताइए। जो सामग्री प्रमाण के रूप में उपलब्ध कराई गई कि ये ये प्रमाण है। क्या वो जांच का विषय नहीं था? कौन सी सामग्री? किस विषय पे? विजय श्री वाली विषय जो हां जो उधर से उपलब्ध कराई गई है आरोप लगाने के लिए। क्या वो जांच का विषय नहीं था? क्या क्या भागवतानंद अपने जनेऊ को पकड़ के जैसे कसम खाई है सौगंध खाई है कि मेरे मैं कभी

00:07:33:13 वो यौन रोग का उपचार कराने के लिए नहीं गया जोधपुर मैं तो जोधपुर ही नहीं गया जी वैसे वैसे भागवतानंद ने इन प्रमाणों के ऊपर क्यों नहीं खाई कसम सौगंध क्यों नहीं खाई? और यदि आपको भरोसा है कि वहां पर ऐसा हो रहा है और भागवतानंद के वचनों पर आपको भरोसा है हमको स्क्रीनशॉट दिखाया उसमें जो मैसेज एक एक मैसेज है जो कि उनकी तरफ से सुन तो लो मैं जो कह रहा हूं बताइए यदि आपको उसके वचनों पर भरोसा है कि भागवतानंद जो आक्षेप लगा रहा है वो 100% बिल्कुल सही है तो क्या तुम अपनी बहुमूल्य चीजों पर रख के हाथ कदम खा सकते हो

00:08:10:24 और यदि नहीं है तो फिर लड़ाई क्यों जिस जिस पर हमें डाउट है जिस पक्ष पर उस पक्ष को लेकर के हम लड़ कैसे सकते हैं? भागवतानंद ने अपने वीडियो में कहा तो भैया नकली ही है। इस मैं आपको याद दिला रहा हूं ना कि आपने जब जांचा था चीजों को यूज़ करने से पहले डिफेम करने से पहले चीजों को जांचा था। क्या उसके आधार पर हमने प्रेम भाईसा को प्रेम भाईसा को जो उन्होंने विजयाश्री बता दिया उसके विषय में तो उन्होंने बाद में बोल ही दिया कि वो हम गलत बताया था। हालांकि वो भी उसने भी हमने भी हमने भी अपने स्क्रीनशॉट वाले वीडियो में बोला है कि यह जांच का विषय है। हम इसको प्रमाणित नहीं करते हैं। यह जांच का विषय स्क्रीनशॉट असली है कि नकली देखिए आप वीडियो पूरी जाकर के। ठीक है। और कालिया जिन्न की बात तो वो खुद स्वीकार कर रहा है ना व्यक्ति। वो तो खुद कह रहा जिन के विषय अच्छा रामचरितमानस में भी जिन्न का उल्लेख है तो आप उसको वैदिक थोड़ी देखिए कालिया जिन्न की बात उसको सिद्ध करने की बात उसका वो जो मंत्र है वो जो गा रहा है ठीक है ये सारी बातें हमने वही कही है ना जो उसने बोली है वो तो फैब्रिकेटेड नहीं है ना वो बात नहीं है वो बाद की बात है और जो जो स्क्रीनशॉट की बात है तो जब तुम हमसे ये प्रश्न कर रहे हो पहली बात हमने वहां पर यह नहीं कहा कि हम इसको प्रमाणित करते हैं हमने वहां पर कहा है वीडियो चलाते समय कि हम इसको प्रमाणित नहीं करते। इसकी पुष्टि

00:09:25:25 हम नहीं करते। मगर ऐसी चीजें सोशल मीडिया से मिल रही हैं। ठीक है? जी जी। मगर दूसरी बात क्या हुआ कि क्या जब तुम लोगों ने इस तरह के प्रमाण प्रस्तुत किए थे तो उनकी जांच वगैरह कर ली थी। क्या तुम लोग आज जनेऊ पकड़ के हाथ में खा सकते हो? सौगंध कि वो बिल्कुल 100% आप प्रमाण को अंकित करिए। मैं बताता हूं फिर उस कि आप किस किस विषय में आप बात कर रहे हैं। जैसे प्रमाण तुमने कहा। तो उन्होंने कहा कि भाई वो क्या कहते हैं वहां पर जो है एक एक करोड़ लिया जा रहा है मठों में आने के लिए। अच्छा हां ठीक है। ये जनेऊ पकड़ के कहेंगे हाथों में और इन्होंने वेरीिफाइड बात नहीं है। ठीक है। इन्होंने कहा कि क्या कहते हैं? अभी जो कल मैंने जो रील डाली है अभी अभी अभी सुबह-सुबह रिलीज हुई है। उसमें इनका वक्तव्य आ रहा है कि जिन लोगों ने ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी को समलैंगिक गतिविधियों में देखा है वो लोग मेरे संपर्क में है उनके पास और भी प्रमाण सुरक्षित हैं। जो प्रमाण उन्होंने उस वीडियो में दिखाया उससे इतक शॉट उन्होंने स्क्रीन रिकॉर्डिंग दिखाई थी ना? मेरी बात सुनिए। सुनिए पूरी हो जाने दीजिए। स्क्रीन रिकॉर्डिंग उन्होंने दिखाई थी ना अपने वीडियो में? जी स्क्रीन रिकॉर्डिंग से इत भी उनके पास प्रमाण सुरक्षित हैं। अब वो जनेऊ जनेऊ हाथ में लेकर के कसम खाएंगे प्रमाण

00:10:40:26 सुरक्षित हैं। अगर प्रमाण सुरक्षित है तो आगे दे दिया जाएगा प्रमाण। उसमें कोई ऐसी बात ही नहीं है। मैं कह रहा हूं तुम आज की डेट में कसम खा रहे हो। तुम उनकी उनके पक्षधर हो ना तुम? जी। तो तुम अपनी बहुमूल्य बहुमूल्य चीजों पे अपने माता-पिता के सर पे हाथ रख के बोलोगे कि वहां उनके पास प्रमाण सुरक्षित हैं। आज की डेट में तुम्हारा स्टैंड क्या है? भगवत आनंद को लेकर प्रमाण सुरक्षित है कि नहीं है? मेरी बात सुन सुनिए। ठीक है। जो वो स्क्रीन रिकॉर्डिंग वाला जो विषय है। अब अब बात करते हैं स्क्रीन रिकॉर्डिंग पर। स्क्रीन रिकॉर्डिंग के आधार पर तुम अपने माता-पिता के सर पर हाथ रख के बोल दोगे। कि हां भैया यहां पर जो है ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी सिद्ध हो रहे हैं। भैया उसी भैया उसी विषय में मैं आपसे वही मुझे आपसे बात करनी है ना? अब सुनिए आप मेरी बात सुनिए। हां पहली बात तो वह जो स्क्रीन रिकॉर्डिंग है वह हम लोग को हम लोग को दो साल पहले से ही प्राप्त है। हमने भी देखी थी। अब सुनिए अब अगर बात किसी तीसरे व्यक्ति चौथे व्यक्ति पांचवे व्यक्ति के थ्रू अगर बात मालूम पड़े तो उसकी कोई प्रामाणिकता नहीं होती क्योंकि चौथे पांचवे व्यक्ति आते-आते वो वो वैसे ही विकृत हो जाती है बात। ठीक है। लेकिन जिनको हम जानते हैं वरुण जी। ठीक है? आप उनसे बात कर लीजिएगा। जब उनका फोन लिया गया था उस वक्त वरुण जी भी वहां पे उपस्थित

00:11:56:09 भाई साहब वरुण जी आपके लिए शब्द प्रमाण है। हमारे लिए नहीं है। यहां बात यह आ जाएगी कि वरुण पर विश्वास करना है कि नहीं करना है। तो हम निजी रूप से तो मानेंगे ना। आप बोलते रहिए लेकिन तो निजी रूप से मानोगे सुनो मनुस्मृति में लिखा हुआ है कि आप यह जो व्यभचार वाला जो आरोप है ये तभी लगा सकते हैं किसी पर जब आप सिद्ध कर दें। अगर आप में सिद्ध करने की क्षमता नहीं है तो आप दोषी हैं। भले ही निजी रूप से आपको सच्चाई मालूम हो। आप ये मानते हैं कि नहीं वो फोन उनका था या नहीं था। पहले ये बताइए। हम यह कह रहे हैं कि उस रिकॉर्डिंग से सिद्ध क्या हो रहा है। हम यह कह रहे हैं। उसमें कई डेट उसमें कई डेटिंग एप्स पड़ी हुई है भैया। आप देखिए ना आप प्रमाण को आप निष्पक्ष होकर देखिए। आप मुझे यह मत समझिए कि मैं आपका विरोधी हूं। आप निष्पक्ष हो के भैया देखिए। क्या डेटिंग उसमें डेटिंग एप्स पड़ी हुई है। उसमें जो है जो व्यक्ति रिकॉर्डिंग जो व्यक्ति स्क्रीन रिकॉर्डिंग करने के लिए फोन ले रहा है आधे घंटे के लिए वो डेटिंग एप डाउनलोड नहीं कर पाएगा।

00:12:54:00 अब चलिए तो अच्छा यह बताइए वही वही चीज बार-बार मालूम पड़ रही है भैया धुआं अभी यहां पे अच्छा अच्छा सुनो चलो ठीक है अब ये धुएं की बात कर लें 2 साल से तुम्हारे पास आज एक ही प्रमाण है जब धुंआ बार-बार उठ रहा है तो दूसरे प्रमाण कहां है 2 साल में वही एक प्रमाण है तुम्हारे पास 2 साल पहले का लेकिन हमारे निजी जो लोग इन्होंने बताया हां तो वो वो फिर वही बात आ जाती वो निजी लोग कहां है ले आओ चलो कोर्ट में भैया मैं मैं कोर्ट में मैं कोर्ट में केस कर रहा हूं। तुम अपने निजी लोगों को बुलाओ, उनकी गवाही दिलवाओ वहां कोर्ट में चलके। बताओ कितने लोग आ रहे हैं साइन करने? चलिए ठीक है। यह भी एक विषय अच्छा आपने उठाया है। बिल्कुल है। इससे इससे मैं तो आपको मैं तो अभी अभी सुनो अभी अभी आप यह कह रहे हैं कि आपको इस आक्षेप पे भरोसा है। आप अपने माता-पिता के सर पे हाथ धर के बोलोगे कि हां इस रिकॉर्डिंग के आधार पर मुझे बिल्कुल भरोसा है कि वो जो है इस चीजों में लिप्त है वो इंसान। बोलो। नहीं ये कैसी बात है कि हम हाथ रख के बोल। आपको विश्वास मैं उस चीज के लिए लड़ता मरता हूं जिस पर मुझे विश्वास हो। मैं ऐसे ही थोड़ी ना उसने क्या कहा था भगवत आनंद ने अपनी वीडियो में कि तुम लोग जाओ 10 लोग जाकर हाथ पैर पकड़ लो फिर अपनी बात बोल दो 5 मिनट लगेगा तो यह करने के लिए हमें यह

00:14:09:03 मालूम होना चाहिए ना कि हम जिस चीज के लिए लड़ने मरने जा रहे हैं वो चीज है कि ऐसे ही चले जाए उसने तो कह दिया भाई किसी चीज के लिए मरने कटने आदमी तब जाएगा ना जब उसको पूरा भरोसा हो कि यूं ही चला जाएगा बातें झोंकना इतना आसान है कमरे में बैठ के वीडियो के सामने कैमरे के सामने हम उस चीज के लिए लड़ते मरते हैं जिस पर हमें विश्वास होता है आपको भैया आपको गोवर्धन मठ से जुड़े हुए कितना समय हो गया है अरे यार फिर तुम अब विषय बहुत सारी बातें करोगे कि इससे क्या मतलब है अभी भागवतानंद से जुड़े हुए तुम्हें कितना समय हो गया हम तो हो गया तीन तीन चार वर्ष हो गया ठीक है तो परंपरा क्या है उसकी परंपरा के विषय में बताऊं आपको शास्त्र प्रमाण दू बताओ चाहिए आपको बताओ अब सुनिए अब चलिए इसी पे इसी पे बात कर लेते हैं। बहुत अच्छी बहुत बढ़िया प्रश्न आपने किया है। ठीक है? आप अपने वीडियो में बार-बार कह रहे हैं कपोल कल्पित संप्रदाय कपोल कल्पित संप्रदाय फर्जी बना लिया। देखो प्रीफिक्स बहुत बड़ा मत दो। मुझे उसके परंपरा बताओ आप। चलिए ठीक है। ठीक है। शाकों का शाकों का एक बहुत प्रसिद्ध ठीक है। तंत्र है शक्ति संगम तंत्र ठीक है। और आपकी जानकारी के लिए भी बता दूं कि पूरी शंकराचार्य जी

00:15:24:04 ने जो मक्केश्वर महादेव का प्रमाण दिया था। के बारे में जो बताया था उसका भी शास्त्र प्रमाण उसी ग्रंथ में प्राप्त होता है। नहीं ऐसा नहीं है। शिव पुराण में भी प्राप्त है। शिवश्वर मकेश्वर महादेव के बारे में है। बिल्कुल चलिए भेजिएगा आप भेज दूंगा। लेकिन उसमें बहुत डिटेल्ड रूप से प्राप्त है और आपकी ही जो पूरी शंकराचार्य जी की जो आई है उसको तो यहां यहां आपकी अधूरी जानकारी है। अपने 18 महापुराणों में से एक पुराण में भी वो दिया गया है। ठीक है आप भेज दीजिएगा अगर अच्छी बात है। मुझे मेरी जानकारी वो होगी। ठीक है। हां। शक्ति संगम सुनिए मैं आपको एक चीज बताऊं। कुछ बहुत लंबी चर्चा होने से पहले कुछ चीजें अगर जिन पर बात हो जाएगी तो अच्छा अच्छा रहेगा। बताइए बताइए। पहले तो आप ये बताइए कि उनका तात्विक मत क्या है? सिद्धांत क्या है? जिससे कि हम फिर उस पर जाएं परंपरा पे। क्या सिद्धांत है उनका? सिद्धांत उनका वही है अव्ययक्ताद्वैत। अव्ययक्ता द्वैत। तो यह जो भाष्य है उनके पास ब्रह्मसूत्र का गीता का और उपनिषदों का प्रस्थान का यह किन आचार्यों ने किया है वो उसमें दिया जाएगा उनके ग्रंथ में ग्रंथ लिख रहे हो वो ग्रंथ भाई परंपरा से ज्ञान आना चाहिए ना वो भाष्य कहां है उसमें फिर सब कुछ दिया जाएगा कि पहले कौन उनके गुरु थे

00:16:39:18 इसका मतलब आज आपको नहीं पता ना उनकी परंपरा क्या है उनके पास अव्यक्त का ज्ञान कहां से आया है वह बताइए कौन से भाष्य उनकी उनकी गुरु परंपरा है जो मित्र नाथ हुए अरे मैं पूछ रहा हूं भाष अवेलेबल है क्या ब्रह्मसूत्र का तात्विक विवेचना जानकारी तो भाई ज्ञान तो ज्ञान तो देखना पड़ेगा कि किस पूर्वाचार्य का ज्ञान आप दे रहे हो आगे ठीक है तो काहे की परंपरा पूर्वाचार्य का मैं नाम बता तो रहा हूं आपको अरे तो वह उसका भाष्य होना चाहिए ना ब्रह्मसूत्र पर भागवत पर ब्रह्मसूत्र पर गीता पर इनके भाष होने चाहिए ना आपके अवक्ता द्वैत के पक्ष में जिनका आप नाम ले रहे हैं उनका भाष्य है अव्यक्ता द्वैत के पक्ष में नहीं इस विषय में नहीं पता है मैं तो मैं बोलूंगा नहीं तो फिर क्यों परंपरा लेके आ रहे हो जिस दिन इस विषय में पता कर लेना तब आना फिर क्यों खामखा लंबे शास्त्र खुलवा रहे हो फलाने तंत्र की ये परंपरा वो परंपरा निग्रह आप तो निग्रह संप्रदाय को ही फर्जी बता रहे हैं ना बात ये है बिल्कुल फर्जी है भाई वो परंपरा वो परंपरा आप मुझे बताइए ना कहां से आ रहा है शांत अग्र संप्रदाय का सुनो अगर अगर निग्रह संप्रदाय का जो तात्विक विवेचन है वह अव्यक्ता द्वैत है तो उसका प्रस्थान त्रय में भाष्य होना चाहिए ना उसके पक्ष

00:17:54:21 में चलिए ठीक है और अगर अगर जिससे तुम उसको जोड़ रहे हो तो क्या उसका प्रस्थान त्रय में अव्यक्ता द्वैत के पक्ष में भाष्य या किसी और के पक्ष में भाष्य है ठीक है सही बात बोली आपने उसका भी उत्तर मिल जाएगा हां तो जैसे आप प्रश्न कर रहे हो ऐसे आपको प्रश्न करना चाहिए ना तीन चार साल से आप जुड़े हो तो ठीक है उसका भी आपको उत्तर दे दिया जाएगा। उसप हम कोई वो कर ही नहीं रहे हैं। है ना? लेकिन जो प्रमाणिक ग्रंथ है आप आप ये अच्छा आपको आक्षेप लगाना भी था। आप ये कहते कि निग्रहचार्य फर्जी है। लेकिन निग्रह संप्रदाय प्रमाणिक है। ये भी आप कह सकते थे। अरे ये नहीं कहा ना? अरे भाई जब वो जब मैं निग्रह संप्रदाय को जानता ही इस रूप में हूं। कोई व्यक्ति कह रहा व्यक्त्वत हमारा सिद्धांत है। तो मैं तो उस निग्रह संप्रदाय को फर्जी कहूंगा ना। कहां है प्रस्तांतय का? बिना पूरी जानकारी के ऐसा नहीं है। सुनो निग्रह संप्रदाय कोई शाक मत वाला भी अपने संप्रदाय को निग्रह संप्रदाय कह सकता है। तो हमने उस निग्रह संप्रदाय को थोड़ी ना मना कर दिया कि वो फर्जी है। मगर जो निग्रह संप्रदाय यह जिस रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं वो फर्जी है। कहां है उसकी प्रस्थान तर की विवेचना? कहां है ब्रह्मसूत्र का भाष्य? ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। इस ये आपने अच्छा हुआ बता

00:19:09:22 दिया। इस पे भी आप तो आपको सोचना चाहिए था ना। आप यहां पूरी मटकी वो कह रहे हैं कि सवाल तो होना चाहिए। कल हमसे कह रहे थे आप कि सवाल होना चाहिए। आपको कोई आप आज तक 4 साल से जुड़े हैं जिसका अनुगत चल रहे हैं। उससे आप आज तक आपने उसकी परंपरा नहीं पूछी। कहां है हमारे पूर्वाचार्यों के भाष्य? ठीक है। प्रस्थान तरी का भाष्य आपको चाहिए है। ठीक है। भाई तात्विक विवेचना ब्रह्म की आएगी ना। अव्यक्ता द्वैत के पक्ष में है। आप जिन आचार्यों का नाम ले रहे हैं वो तो विरोधी सिद्ध हो जाएंगे उनके। हम ठीक है। ठीक है। तो ये लेके आइए फिर बात करिए परंपरा पे। ठीक है। ठीक ठीक ठीक है। और जो और जो ये वाली बात है कि आधे अधूरे प्रमाण तो आधे अधूरे प्रमाणों पर बात निर्णायक रूप से प्रस्तुत करते हुए आक्षेप लगाने की श्रंखला इन्होंने शुरू की। हमने तो तब भी जो जिन प्रमाणों पर हमको पूरा भरोसा नहीं जानवी वाला जानवी वाली बात अब कौन ले आया था जानवी वाली बात जैसे तुम तुमने कई लोगों से सुना है कि कई लोग वहां मठ के करीबी लोग बता रहे हैं ऐसे उनके करीबी लोग हमें बता रहे हैं लो और करीबी लोग ही एक मत नहीं करीबी लोग ही आप गुरुद्रोही हैं जो कि आप आप ही अरे तो भगवतानंद भगवतानंद के

00:20:24:24 से जुड़े हुए उसके जो अनुगत काम करने वाले हैं वो भी तो गुरुद्रोही है उसके जो बोल रहे हैं कि जानवी के लिए गाना लिखा था और वो भगवतानंद ने शेरो शायरी लिखने के लिए क्या वो दिया तर्क कि वो मुझे स्टोर करना था इसलिए मैंने लिख लिया आचार्य पद पे हो दिव्य देवताओं के तुम्हें दर्शन हो रहे हैं बचपन में पहली बात तो पहली बात तो एक चीज हम ये कहना चाहेंगे कि पूरी तरीके से 100% परफेक्ट कोई भी नहीं होता है देखिए देखिए देखिए हम उसके लिए हम उस चीज के लिए लड़ते हैं हम उस चीज के लिए लड़ते हैं जिस पर हमें 100% भरोसा होता है हम उसके लिए लड़ सकते हैं और मर भी सकते हैं मैं ये कह रहा हूं मैं ये भरोसे वाली बात नहीं कर रहा हां। यह बात तो लिखी हुई है

00:21:10:15 कि उपनिषदों में यह बात अगर लिखी हुई है तो इसलिए हम किसी पे भी दोषारोपण करना चालू कर दें। नहीं दोषारोपण नहीं चालू कर दें। लेकिन बात यहां पे क्या आती है? भाई आप आप सीधे इस बात पे बात करो के आपने आरोप जो लगाया है वो आधे अधूरे प्रमाणों पे लगाया है उसके आधार पर सुनिए उसके आधार पर उसके आधार पे आप कुछ भी सिद्ध नहीं कर सकते तो उसके आधार पे आप क्यों अपेक्षा कर रहे हैं लोगों से कि वो लड़े मरे वो आपकी निष्ठा है जो लोग सुनो वो सुनो वो आपकी निष्ठा है कि जिन लोगों पे आपको भरोसा है वो लोग ऐसा बोल रहे हैं उस पर आप ये क्यों चाहते हैं कि आपकी वाणी पर समाज नहीं कर रहा हूं मैं उसकी बात ही नहीं तो शुरुआत तो उन्होंने ही ब्रह्मचारी जी वाले बात हटा दीजिए आप। ब्रह्मचारी जी वाली बात हटा दीजिए। ठीक है? हम पहली बात तो यह है कि हमने निग्रचार्य को कभी इस रूप से इस इस तरीके से प्रचारित ही नहीं किया कि वो उनकी बात जो है वो अकाट्य है। वो जो बोल दे ब्रह्म वाक्य है। आपने लेकिन आपने अपने गुरुदेव को इस प्रकार से वो किया कि भाई वो अकाट्य हैं। उनकी बात अकाट्य होते हैं। अकाट्य होते हैं। धर्म और ब्रह्म के संबंध में अकाट्य होते हैं। वो धर्म और ब्रह्म के संबंध में ना और संबंधों में नहीं ना। क्यों? जब वह आध्यात्मिक रूप से होते हुए एक गुरु हैं। शंकर के साक्षात स्वरूप हैं

00:22:25:18 तो मान वो मनुष्य देह में भी है। अच्छा ये हां तो ये मनुष्य में बोलिए कि मनुष्य देह में है तो कुछ ना कुछ डिफरेंस नहीं जो जो चीजें डिफरेंस हो रही है। मगर वो जो डिफरेंस हो रही है जिनसे उससे हमारे धर्म और ब्रह्म पे कोई फर्क नहीं पड़ता है। आप बताइए भगवत पाद आदि शंकराचार्य जी का जन्म ढई साल धर्म और ब्रह्म वाले में तो कोई है ही नहीं। है दिक्कत है। मैं बता रहा हूं कैसे है। जैसे उसने एक तर्क दिया भगवतानंद ने कि भाई धर्म ब्रह्म पे व्याख्या वो दिक्कत तो तब भी नहीं आएगी जबजानंद को वो जाएगा। धर्म ब्रह्म पे तो तब भी दिक्कत नहीं आएगी जब जो है क्या कहते हैं सब लोग दूसरे धर्म को अपना लेंगे तब भी धर्म और ब्रह्म की व्याख्या नहीं बदलेगी। तो दिक्कत ये है कि अगर भगवत पाद आदि शंकराचार्य जी का जन्म कब हुआ और कब नहीं हुआ। ठीक है? एक मठ कह रहा है कि भाई वो क्या कहते हैं? 1200 साल पहले हुआ है या 1600 साल पहले हुआ और एक मठ कह रहा है कि 2500 वर्ष पूर्व हुआ। ठीक है? अब इससे हिंदुओं के व्यवहारिक धर्म में क्या अंतर आ जाएगा बताओ जरा। क्या अंतर आ जाएगा? मैं आपको संप्रदाय चल रहा है। मैं आपको मेरी भावना समझ लो पहले मैं क्या कहना चाह रहा हूं। मंदिर पर हमला हो रहा है। अगर सबको मालूम है कि हमारा ईश्वर जो है अवतार लेता है।

00:23:40:19 उसकी मूर्ति पूजा हो सकती है तो मंदिर को सब लोग बचाने जाएंगे कि नहीं? हां जाएंगे। क्या वो लोग नहीं जाएंगे जिन्होंने हजार साल कम होगा भगवत पाद आदि शंकराचार्य जी का जन्म? इस बात को लेकर के हमारे हमारे व्यवहारिक धर्म में कोई अंतर आएगा? नहीं व्यवहारिक धर्म में अंतर नहीं। नहीं आएगा। अंतर कब आएगा? सुनो अंतर कब आएगा? अंतर कब आएगा? हम कि आर्य समाज ने सिखाया कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता है। यहां ब्रह्म में अंतर आ गया। तो जो व्यक्ति आर्य समाज से प्रभावित हो जाएगा वो मंदिर को बचाने नहीं जाएगा। तो हम उन बातों पर बात करते हैं जहां पर धर्म ब्रह्म पे आंच आ रही हो। इस्कॉन का क्या है? शिव जी का मंदिर बचाने नहीं जाएगा आदमी। उसके प्रति अनास्था हो जाएगी। तो यहां ब्रह्म में अंतर आया। धर्म में अंतर आया। वर्णाश्रम से भागेगा आदमी। अंतरजातीय विवाह होगा। अब दूसरी बात अब दूसरी बात अब मैं आपकी बात को भी ले ले रहा हूं। अब आप चाहते हो कि हम जो है श्रृंगेरी मठ की समीक्षा करें। यही तो चाहते हो कि भाई भाई तुम चारों शंकराचार्यों में पहले यही तय कर लो कि वो पहले ही तय कर लीजिए कौन सही बोलना है कौन अभी मैं आ रहा हूं। अभी मैं तुम्हारे पास ही आ रहा हूं। आ रहा हूं। जी जी जब आप रामानुजाचार्य वालों के पास जाते हो। उनके बगल में बैठते हो तो उनसे भिड़े

00:24:55:27 आज तक विशिष्टाद्वैत अद्वैत को लेकर के। भैया यहां ज्ञान कांड की नहीं हो रही क्यों नहीं तो आप तय करोगे क्या किसकी बात हो रही परंपरा नहीं तो मैं मैं कह रहा हूं कि जब आपको मालूम है कि अव्यक्ता त्वत है आपका सिद्धांत और दूसरे सामने वाले का सिद्धांत गलत है तो उसकी समीक्षा करो ना रामानुजाचार्य की समीक्षा क्यों नहीं करोगे ज्ञान कांड की मैं बात ही नहीं कर रहा हूं ज्ञान तो मैं तो कर रहा हूं ना भाई जैसे तुम एक खाता खोल रहे हो वैसे मैं भी खोल रहा हूं तुम समीक्षा क्यों नहीं कर रहे हो रामानुजाचार्य की भगवत पाद रामानुजाचार्य की समीक्षा क्यों नहीं कर भगवतानंद

00:25:30:19 अरे तो ज्ञान कांड में तो भाई सबका सबका मतभेद है ही वो कहते हैं ज्ञानी की मतभेद होते हुए भी मतभेद होते हुए भी उनको हम रह सकते हैं ना उस बीच भैया वहां ज्ञान कांड की बात ही नहीं है ना वहां शास्त्र शास्त्रोक्त बात नहीं है आपका सिद्धांत क्या है आपके अनुसार वेद उपनिषदों के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो सिद्धांत है तात्विक सिद्धांत वो है अव्यक्ता द्वैत आपका ठीक है आपने रामानुजाचार्य की समीक्षा क्यों क्यों नहीं की? जैसे आप चाह रहे हो कि हमारी हम समीक्षा करें शंगेरी मठ की या गुरुदेव समीक्षा करें शंगेरी मठ की। क्यों नहीं समीक्षा कर रहे आप? ये दोनों बात अलग है। वहां पे क्या कर रहे हो ना? आपने तय किया कि भाई शंगेरी मठ और उनका जो है ये विभाग निकाला कि चार वो जो है भगवत पाद आदि शंकराचार्य को लेकर के दोनों की बात एक होनी चाहिए। तो हम भी तो एक धर्माचार्य का वो निकालेंगे कि एक धर्माचार्य जो दूसरे धर्माचार्य के पास जा रहा है उसको धर्माचार्य कह रहा है। उन दोनों का तात्विक विवेचन एक होना चाहिए ना। साथ में बैठ रहा है उठ रहा है। सब कुछ कर रहा है। मतलब मूल विषय पहले प्रमाणिकता का ही है ना। कैसी प्रमाणिकता? मतलब कहने का मतलब यह है कि आवश्यक नहीं। आवश्यक नहीं कि सारे विषयों की समीक्षा की जाए। जिन विषयों की समीक्षा किए बिना काम चल सकता है तो वहां

00:26:45:22 चलाया जाता है। धर्म की स्थापना के लिए। अब मेरी बात सुन विप्लव से बचने के लिए अब मेरी बात सुन लीजिए भैया ठीक है मैंने इतनी देर तक सुना जब जब हमें जब हमें सामने वाले श्रृंगेरी मठ की वो समीक्षा करने से या श्रृंगेरी मठ वालों को पूरी मठ की समीक्षा करके करे बिना भी धर्म स्थापना हो सकती है तो हम उस पे ध्यान दें कि इस पे ध्यान दें कि किस किस बात से लड़ाई हो छोटी-छोटी बातें जो होती है ना उसको तो फिर छोटी-छोटी बातें आपके भगवतानंद क्यों नहीं कर रहे रामानुजाचार्य जी की समीक्षा करो ना विशेषता द्वैत नहीं है। अवक्ता द्वैत है।

00:27:22:24 अब सुनिए मेरा उत्तर सुनिए। ठीक है। पहली बात तो यहां पे ज्ञान कांड की बात ही नहीं। ये आप तय कर रहे हो ना। मैं भी तो तय कर लूंगा कि भैया धर्म ब्रह्म में आओ। कहां कोई मतभेद है धर्म ब्रह्म में? चारों शंकराचार्यों के बीच जब जो प्रासंगिक विषय हैं उनके बीच में जानकारी को लेकर के अंतर है। धर्म ब्रह्म तो कोई अंतर नहीं है। धर्म की व्याख्या चारों की एक है। धर्म ब्रह्म की व्याख्या चारों की एक है। तो आप वहां पर लड़ाई करवाने के लिए कह रहे हो ना कि अगर इसको मानते हैं तो वो उसका खंडन इसको मानते हैं तो उसका खंडन तो आप भी तो बताओ। जब न्याय की बात भैया आएगी तो एक ही बात सत्य होगी ना। ऐसा थोड़ी होगा। भाई मैं आपसे भी तो पूछ रहा हूं। आप स्वयं को धर्माचार्य कह रहे हो। दूसरे धर्माचार्य को दूसरे को भी धर्माचार्य कह रहे हो। वो कह रहा है कि विशिष्टा द्वैत है। वो कह रहा है कि द्वैत है। वो कह रहा है कि शुद्धा द्वैत है। तो आप कैसे कह रहे हो उसको धर्माचार्य? जबकि धर्म तो वो है जो ब्रह्म की प्राप्ति करा। ब्रह्म वो है जो आप कह रहे हो। अव्यक्ता

00:28:17:14 द्वैत आप क्यों नहीं समीक्षा कर रहे रामानुजाचार्य की? मधवाचार्य की। निम्बारकाचार्य की करो समीक्षा। अब इसका उत्तर राघवाचार्य जी ने नहीं दिया हुआ था। जब आप उनसे संवाद करने गए थे तो? तो वही उत्तर हमारा इसमें भी है कि जिस जिसकी जिसमें आस्था है जिसकी जिसमें अनुकूलता है उसके अनुगत रह करके वो अपना कार्य कर सकता है। उसकी समीक्षा करके कोई वही नहीं निकलना है अलग से। अगर किसी की श्रृंगी मठ वालों में आस्था है तो वो उस उस हिसाब से चले। उसके धर्म ब्रह्म में क्या फर्क पड़ रहा है उससे? अगर किसी की पूरी मठ में आस्था है तो उस हिसाब से चले। है भैया लेकिन जब कोई यथ जब शास्त्रीय बात होगी जिसप किसी का मतभेद नहीं है। अरे भाई शास्त्रीय बात क्या आपको पता नहीं है पूरी शंकराचार्य जी ने क्या कहा है तो आप हमसे क्यों कहलवाना चाहते हो जिससे कि लड़ाई हो भाई हमारे हिसाब से हमारी जानकारी में जो सत्य है जो यथार्थ है वो बता दिया गया ये है फिर आप क्यों पूछ रहे हो और आपने भी अपनी Facebook पोस्ट में माना है अपनी उस पे वेबसाइट पे माना है कि 25 हजार वर्ष पूर्व हुआ आपको मालूम है सच्चाई क्या है हम जो हमारा पक्ष है शास्त्रों के अनुसार जो जितनी नहीं भगवान ने हमें सामर्थ्य दी उसके अनुसार हमने अपना पक्ष तो बताया है। आप यह क्यों चाहते हो कि हम

00:29:32:16 नाम लेकर के कहे कि नहीं वह गलत है। क्योंकि आपका मकसद धर्म स्थापना नहीं है। आपका मकसद है लड़ाई करवाना। ऐसा लगता है आपको। इस बात को किए इस बात को किए बिना इस बात को किए बिना धर्म स्थापना हो सकती है। आप अद्वैत की स्थापना करिए ना। सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म की बात करिए ना। ऐसी बहुत सी चीजें होंगी जो अभी भी इस बात के सुलझ जाने के बाद भी चारों शंकराचार्यों के बीच में अलग-अलग होंगी। कोई कहेगा गौ माता राष्ट्र माता का अभियान चलाओ। कोई कहेगा हिंदू राष्ट्र का अभियान चलाओ। अच्छी बात है। आज बहुत अच्छी बात है। लेकिन उसमें आपका मत ये होना चाहिए कि भाई हमारे संप्रदाय के आचार्य ये मानते हैं। इसलिए हम ये मानते हैं। बाकी हम किसी के ऊपर अपना मत थोपते नहीं है। बाकी श्रृंगेरी वाले तो हमने कहां थोपा? किस पे अपना मत। किस पे अपना मत थोपा। आप लोग प्रसारित यही करते हैं कि उनकी बात आप लोगों में मत गिनो देखो यहां पे अब तुम अलग जा रहे हो फिर मेरा टेंपर बिगड़ेगा मैंने कब कहा ये बात प्रमाणिक रूप से कब थोपा गया हम लोग अपनी सच्चाई बताएंगे कि नहीं बताएंगे रामानुजाचार्य वाले अपनी अपने विशिष्टाद्वैत को बताएंगे कि नहीं बताएंगे और यह चीज करपात्री जी महाराज ने शास्त्रों का संदर्भ देते हुए लिखी है कि जो इस तरीके की वो होती है कंपैरेटिव चीज चल रही होती है उसमें स्वमत की वो

00:30:47:18 होती है अनन्य ता ना कि दूसरे की निंदा निंदा परक नहीं होती है वो आप क्यों उसको निंदा परक में बनाना चाह रहे हो और अगर बनाना चाह रहे हो तो फिर करो जाकर के रामानुजाचार्य जी की समीक्षा क्योंकि तुम अव्यक्ता द्वैत वाले हो तो विशिष्टा विशिष्टाद्वैत की समीक्षा करो बैठ के 2.2.27 में उन्होंने ज्ञान मार्गीयों को वो कहा है प्रचन्न बौद्ध करो समीक्षा बैठकर के लेकिन वो प्रक्षन्न बौद्ध को तो प्रेरक्षिप्त मानने वाली आप ही है जबरदस्ती आप उनको सिद्ध करते हैं कि नहीं हम मेरे भाई वो पद्म पुराण का पाताल खंड की बात कही है। रामानुजाचार्य ने अपने श्री भाष्य में लिखा है। ज्ञान मार्गों को प्रसन्न बोध। करो समीक्षा बैठ के उसकी। लिखा है। अब आप कॉल पर मान रहे है ना ये बात लेकिन तुम्हारा दिमाग खराब है क्या मेरे भाई। मैं पद्म पुराण वाले को प्रक्षिप्त कहता हूं। जो हमारे पूर्वाचार्यों ने कहा है। श्री भाष्य में उन्होंने उन्होंने प्रचन्न बहुत कहा है। यह थोड़ी ना कहता हूं। यह भी प्रक्षिप्त है। ठीक ठीक ठीक ठीक। चलो परंपरा ले आना फिर बात करना। ठीक है भैया। ठीक है। ठीक है। जय श्री राम। जय सियाराम। जय सियाराम। [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 32:00 · 15 Apr 2025

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