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00:00:00:02 तब हमने बताया कि आचार्य रामशंकर शुक्ल जी ने मुझे व्यक्तिगत रूप से बताया था कि 12 फरवरी 2022 को बताया था कि

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00:00:05:15 कब बताया था जब हम छत्तीसगढ़ के कोलारिया ग्राम में कथा सुभाष कार्यक्रम में थे तो 12 फरवरी 2022 को आचार्य राम शंकर शुक्ल जी ने मुझे व्यक्तिगत रूप से बताया था फोन में बात हुई थी कि ये लोग शंकराचार्य जी के भोजन में आपत्तिजनक मिश्रण

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00:00:14:02 करते हैं परिक हमने ये बात सार्वजनिक की तो संकट की दुहाई देकर चुप रहने की बात करने लगे और अगर शिवाश को ये लगता है कि बात झूठ है तो उस वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद रामशंकर शुक्ल की जो बात हमने आचार्य जी की जो बात कही की परिक भगवान शंकराचार्य जी के कर रहे हैं आपत्तिजनक जो विश्व को दिखाने वाले जींकर शुक्ल जी सवाल में तो आचार्य रामशंकर शुक्ल जी को इतने प्रताड़ित किया गया द्वारा कि वो कहे हमको ये सब हटा दीजिए हटा दीजिए और अंत में क्षमा मांगते हुए या एक प्रकार से कहे तो गिड़गिड़ाते हुए उन्होंने एक वीडियो ऑडियो संदेश जारी किया था अगर आपको वो ऑडियो संदेश चाहिए नहीं 12 फरवरी 2022 को ही हमने आचार्य रामशंकर शुक्ल जी को दोपहर में एक ऑडियो भेजा था उस ऑडियो को मैं आपको भेज दूंगा चार मिनट का ऑडियो था ये कह रहे थे कि मत में चल रही है गांधी जी को जवाब बता रहे सामने जगह सुधार नहीं हुआ अभी समय है सुना

00:01:06:19 तो सभी को जय श्री राम और आज हम शरणागत हैं आचार्य रामशंकर शुक्ल जी और इन्हें किसी भी प्रकार के परिचय की आवश्यकता नहीं है। हमारे सर्वभूत हृदय धर्म सम्राट कृपात्री जी महाराज के कृपा पात्र शिष्य हैं आप और वर्तमान में जो पूरी पीठाधीश्वर हैं श्रीमद जगुरु शंकराचार्य तो उनके गुरु भाई होते हैं और वेद विधान पर बहुत

00:01:42:22 इनका अच्छा अध्ययन है और गुरुकुल में हमारे भटकों को और आने वाली पीढ़ी को तैयार कर रहे हैं जो धर्म ध्वजाओं को लेकर के आगे बढ़ेगी। तो विशेष रूप से आज जिस प्रसंग में हम आए यहां पर गुरुदेव की शरण में वैसे पहले भी आप इन्हें देख चुके हैं हमारे YouTube चैनल पर और इनका भी YouTube चैनल है उसको भी हम लोग अक्सर बताते रहते हैं। विशेष रूप से जो प्रसंग है वो आप सभी जानते हैं। उससे आप अवगत हैं। यदि आप पिछले कुछ दिनों से आहान को फॉलो कर रहे हैं। जिसमें कि एक व्यक्ति है भगवतानंद नाम का जो स्वयं को निग्रह संप्रदाय का आचार्य बताता है। उसकी गद्दी पर मतलब उसका जो उत्तराधिकारी है वो बताता है और वो स्वयं को कहता है निग्रचार्य और उसने अनेक प्रकार के आक्षेप लगाए हैं अह पूरी पीठ पर। हालांकि अप्रत्यक्ष रूप से उसने अनेक बार जो जगदगुरु शंकराचार्य उनका भी उपहास उड़ाया है। जैसे कि उनकी 3 वर्ष की जो हिंदू राष्ट्र की घोषणा है उसको लेकर के फतिया कसना मजाक बनाना उपहास करना या फिर जो

00:02:58:07 क्या कहते हैं ये जैसे उन्होंने गुरुदेव ने कहीं किसी प्रसंग वश कहा कि भाई हमारे पास मधुमक्खियों की सेना है तो इसने वहां पर भी जगदगुरु शंकराचार्य जी का उपहास उड़ाने का प्रयास किया है बनाता है अपने अकेले वीडियो बना करके तो उसने अपने जो यह प्रसंग चल रहा है, जो आक्षेप वह लगा रहा है, इन इसी क्रम में उन्होंने आचार्य श्री का भी नाम लिया है उसने भगवत आनंद ने। तो हमारे साथ आज ये बैठे हुए हैं। कुछ समस्याओं का निराकरण प्रस्तुत जो जिस जितने अंश में ये उस उन विषयों से जुड़े हुए हैं जिसमें उन्होंने इनको जोड़ा है। तो वो सारी बातें हम लोग ये क्रम चलाने वाले हैं कि जो आक्षेप लगाए जा रहे हैं उनका जो आधार है वो क्या है? जिसका नाम लिया जा रहा है उसका क्या कहना है? तो इसी संदर्भ में इस विशेष और महत्वपूर्ण जानकारी को आप लोग जाने और आगे प्रेषित करें जो अभी हमें प्राप्त होने वाली है आचार्य श्री के मुख से तो आचार्य सब आचार्य श्री सबसे पहले आपके चरणों मेरा प्रणाम निवेदन नारायण नारायण जी आचार्य श्री एक भगवतानंद नाम का व्यक्ति है। उसका कहना है कि वह एक लुप्त संप्रदाय है

00:04:13:10 निग्रह नाम का। उसका वह आज का जैसे हमारे यहां शंकराचार्य होते हैं उत्तराधिकारी ऐसे ही वो उस संप्रदाय का उत्तराधिकारी है आज का। तो यह तो खैर एक अलग विषय है कि उसका संप्रदाय क्या है या जो भी है। और वह कहां से शिक्षा दीक्षा प्राप्त कर रहा है। किन आचार्यों के उसमें चल रहा है शरणागत होकर के। वह तो एक अलग विषय है। मगर सर्वप्रथम उसने एक आरोप लगाया है कि पूरी पीठ के परिकर जगदगुरु शंकराचार्य को मतलब नहीं शंकराचार्य पीठ है जो पूरी की उसमें जो शंकराचार्य जी की सेवा में जो रथ है वो परिकर उनको खाने में मिलाकर के कुछ दे रहे हैं वो उसका उद्देश्य संभवत उन्हें अपने वश में करना है। तो अब यह तो इसका आरोप है ही। अब इसमें आप कैसे जुड़ रहे हैं क्योंकि वह आपका नाम ले करके यह बोल रहा है कि यह बात आपने उससे कही है। और वह यह भी दावा कर रहा है कि उसके पास आपकी कोई कॉल रिकॉर्डिंग है। ठीक है? तो सबसे पहले तो आप यह हमें बताएं क्या इस प्रकार की कोई बात आपने

00:05:28:21 उससे कही है या आपकी उससे बात होती है तो क्या बात हुई या कब से बात नहीं हुई? थोड़ा सा इस पर प्रकाश डालें। हरि शरणम पाद तोषित विश्वेषम धर्म मार्ग प्रवर्तकम वंदे हरिहरंदम करप पात्रम जगतगुरु वास्तव में पौराणिक बिंदु के आधार पर पांच संप्रदाय हैं। वैष्णव शय शाणपत सऊ

00:06:03:10 यहां पौराणिक मान्यता है। तो शाक्त संप्रदाय का अंग कह लीजिए क्योंकि परमात्मा के पांच कृत हैं। सृष्टि सजन एवं संहार जिसे संघति कहते हैं। और निग्रह अनुशासन अनुग्रह कृपा इन पांचों संप्रदाय के पांच देवता है। जी सौर भगवान सूर्य से सृष्टि विष्णु भगवान से पोषण चंद्र भगवान से संगृति जी परंबा भगवती से निग्रह जी और भगवान गणपति से अनुग्रह जी तो ये मन से अपना कोई भी संप्रदाय बना ले कुछ कर ले इसके लिए कोई हमारे यहां रोक-टोक तो है नहीं जो भी जब कह दे हम स्वयंभू शंकराचार्य स्वयंभू राम वैष्णवा आचार्य हैं स्वामी को कुछ भी कह ले जी पर मूल रूप है शास्त्र संप्रदाय भागवतानंद ने जो कुछ बात कही जी पहली बात तो कई वर्षों पूर्व महाराज श्री के ही मंच पर हम

00:07:18:19 लोगों का आपसी संपर्क हुआ पूरी वाले शंकराचार्य जी के मंच पर पूरी वाले शंकराचार्य जी के मंच पर संपर्क हुआ और वहां इन्होंने प्रवचन भी किया हमारे यहां आश्रम में आकर के गीता गीता पर भी प्रवचन तीन चार दिन तक किया। कई दिनों तक रहे। अच्छा प्रयागराज में प्रयागराज अच्छा प्रशांत मिश्र जी ने संपर्क कराया। प्रशांत मिश्र जी अच्छा तो संपर्क हो गया। जी अब ये है कि इतने संपर्क था और इस बात से पूरी पीठ को महाराज श्री के दर्शन के लिए गए थे। वहां इनको दर्शन में कुछ व्यतिक्रम हुआ और तब यह उस विषय को लेकर के कई लोगों से भी बात किए होंगे। हमसे इन्होंने पूछा कि महाराज जी से दर्शन के लिए प्रतिबंध किया गया तो हमें दर्शन नहीं मिला। ऐसा क्यों किया गया? तुमने कहा कोरोना के बाद से महाराष्ट्र के दर्शन के लिए दूरी बनाकर रखा जाता है और और भी लोग दूरी बनाते ही हैं कोरोना में। कोरोना के बाद तो लोगों को दूरी बनाना एक प्रकार से संम सिखाया गया। इस दृष्टि से हम लोग भी दूरी बना के रहते हैं। हम इन्होंने परों के संबंध में भी बहुत कुछ बातें कही खानपान को लेकर के

00:08:34:04 तो हमने कहा इस पर हमें कोई ऐसी जानकारी नहीं है। हो सकता है जो कुछ करते हैं वो जाने और आप अपने हिसाब से जो कह रहे हो आप जानिए। इस पर हमारा कोई लेनदेन नहीं है। खानपान के संबंध में या और भी बहुत सी चीजों में नहीं लेनदेन। अभी जो बात इन्होंने भोजन को लेकर के महाराज श्री के भोजन में दिया जा रहा है। ऐसी बात जो आपके द्वारा कही जा रही बताई जा रही है। अब तक तो हमारी उनकी बातें ही कई सालों से नहीं हुई। अगर ये ऐसा कह रहे हैं तो किसी ने कुछ कहा होगा, किसी ने कुछ सुना होगा।

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00:09:06:04 हमारा उससे कोई लेनदेन नहीं है। मतलब आपने यह नहीं कहा है कि परिकरों के द्वारा भोजन में मिलाकर उनको कुछ दिया जा रहा है।

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00:09:13:20 कुछ नहीं है। अच्छा ये बात किसी ने हमको कहा भी था। जी ऐसा अन्य किसी अन्य किसी ने हमसे बताया था। लेकिन हमारी उनकी तो कोई बात ही नहीं हो रही है। कब से नहीं हुई? आचार्य श्री उनकी उनसे आपकी बात लगभग हमारा अंदाज जो पहला इनका वीडियो था वो दो साल तो हो ही गया होगा। अच्छा तो दो साल से तो कोई बात हुई नहीं। 2 साल से कोई बात नहीं हुई है ना। ओ हो हो अच्छा एक ये बात ये तो मान के चल कि दो साल तो हो ही गया होगा लगभग लगभग लगभग लगभग हो गया होगा क्योंकि इस महीने के पहले वाले मेले के पहले की बात है जी जी जी तो लगभग दो वर्ष हो गया होगा जहां तक अनुमान है जी जी तो कोई बात हमारी उल्टी हुई नहीं बात करने के लिए हमने अब मन बना लिया कि इनसे कोई बात भी नहीं करनी है इसलिए कि ये अनावश्यक अनर्गल प्रलाप ज्यादा करते हैं। जी शास्त्र की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए मैंने सुनते हुए लिखा है कि ना प्रष्ठा कर सच गुरु याद आपसे कोई बात पूछे नहीं तो आपको जबरदस्ती क्यों पढ़ते हैं फिर और तमाम संत महात्माओं को लेकर के आप कहो क्या आप ही सारे सार्वभौमिक सिद्धांत जानते हैं पुराणों की बातें मित्र वाक्य है सिद्धांत वाक्य तो पूर्व

00:10:28:28 मीमांसा में मिलता इसलिए हमारे महाराष्ट्र धर्म सम्राट कहते थे पुराणों की बातें प्रशंसात्मक जिसके दरवाजे आप जाइए उसकी प्रशंसा करिए। जी। गणेश पुराण में गणेश जी से सृष्टि, गणेश जी की प्रशंसा, देवी भागवत में भगवती से किस द्वारा सृष्टि उनकी प्रशंसा, शिव पुराण में भगवान शिव के द्वारा सृष्टि उनकी प्रशंसा, विष्णु पुराण में भगवान विष्णु के द्वारा सृष्टि उनकी प्रशंसा। ये हमारी मान्यताएं पुराणों के आधार पर हैं जो यथार्थ हैं। लेकिन इन बातों को को के मूल्य में पूर्व मीमांसा ही समर्थन दे तब वो सिद्धांत माने जाएंगे। यदि पूर्व मीमांसा सिद्धांत नहीं देता नहीं इसको कहता तो वो बातें गौर मानी जाएंगी। इसलिए हमारे प्रमाण वेद है स्मृतियां पूर्व मीमांसा और नीचे आने पर पुराण है। उनके नीचे आने पर रामायण आदि है। तो रामायण महाभारत इतिहास ग्रंथ भी पुराण माने जाते हैं। वेद वाक्य पिता के वाक्य हैं। पितृ वाक्य हैं। पुराण के वाक्य मित्र वाक्य है। मित्र कभी-कभी कोई बात सिद्धांत से भी हटकर के कुछ कह जाता है। तो वे हमारे सिद्धांत नहीं बनेंगे। उसको हम समझ लेंगे तब उस बात को कहेंगे जी और जो हमारी

00:11:44:07 इतिहास ग्रंथ है वो कांता समित वाक्य है पत्नी के समान पत्नी किसी बात को कह रही है उसको व्यक्ति जल्दी मान लेता है सिद्धांत से हट भी जाता है मित्र के वाक्य को सिद्धांत से हट भी जाता है लेकिन जो वेद वाक्य है वो पितृ वाक्य है धर्मम चर धर्म पर चलिए आचार्य देव भव पित देव भव अतिथि देव भव यथावत है सत्यम यात सत्य सत्यम वहां आवाज है। वहां वेद की आवाज है। सत्यम व सत्यम प्रयात कहने पर मित्र वाक्य हो जाएगा। सत्य बोलना चाहिए। हम सत्य बोलने का प्रयास करना चाहिए। पत्नी का वाक्य हो गया। इसलिए किसी प्रकार से सिद्धांत वाक्य से हटकर के हमको पौराणिक सिद्धांतों को प्रशंसात्मक समझ करके उनको ही मूल में नहीं रखना है। जब तक कि वेद वाक्य प्रमाणित ना करें। जी जी बहुत-बहुत सुंदर। इस दृष्टि से कभी भी इन्होंने बहुत सी बातें कही कदाचित हमें अभ्यास नहीं है YouTube का कुछ लोगों ने ज्यादा कदा सुनाया तो सुनाने पर हमने देखा तो हम कहा कि ये इनका प्रलाप है ये अनावश्यक किसी प्रासंगिक बातों को रख के पुराणों की बातों को रख के कभी हमारे धर्म सम्राट

00:12:59:20 महाराज श्री के भी पक्ष को देख के शबरी को इन्होंने कह दिया कि वो भेनी है ब्राहरी नहीं है महाराज श्री ने तो पूर्वा परा सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए किसी भी बात को कब कहां कह रहे हैं इन बातों को ध्यान में रखकर के ऐतिहासिक पौराणिक और स्मृति के वृतांत को ध्यान में रखते हुए वाक्य कहते हैं। उस सिद्धांत के आधार पर ब्राह्मणी कही गई। वाल्मीकि जी ब्राह्मण कहे गए। इसमें कोई आक्षेप लगा करके और आचार्यों के प्रति ऐसी भावना व्यक्त करना एक अनर्गल प्रणाम और महाराज श्री के प्रति इन्होंने इनके प्रति जब ये बात हमारे पहले दो साल डेढ़ साल महाराज श्री यानी कि पूरी पीठाधीश्वर पूरा पूरी पीठाधीश्वर जी तो उनके प्रति इस प्रकार की बातें कहना इनके लिए शोभा नहीं देता इनको वाणी पर संम रखना चाहिए और कोई बात नहीं समझ में आती तो उसके स्वयं कभी अवसर पाने पर महाराज से तो अवसर देते ही हैं। अवसर पाने की बात छोड़ दीजिए। जी आप सभा में खड़े होकर के प्रश्न करिए। जी महाराज उसका उत्तर देते हैं। जी तो उस उत्तर को आप लेकर के संतुष्ट हो जाइए। जी। अना

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00:14:14:15 अनावश्यक लोगों की कही बातों को बाग जाल बना करके जाल बिछा करके ऊटपटांग की बात कहना ये शोभनीय नहीं है ये अशोभनीय बातें हैं।

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00:14:26:19 इससे आपको अपने जीवन को कृतार्थ करना है। इन बातों को कहने की आवश्यकता नहीं। सबसे बड़ा अपराध है। 10 अपराध माने गए सन निंदा सते नाम वैभव कथा से और भेद दी संतों की निंदा करना। फिर क्या असंतों की निंदा करें? तो बोले नहीं लक्षणा से असंतों की भी निंदा नहीं करनी। निंदा होना ही नहीं चाहिए। जी असत वैभव कथा झूठी कथा नहीं कहना चाहिए कि 56 बीघे का पर्चा बो दिया गया। उस उस प्रकार की कोई बात नहीं करनी चाहिए। श्री में इस में कोई भेद नहीं देखना चाहिए। आचार्यों के विद्वानों के गुरुजनों के शास्त्रों के वचनों में अश्रद्धा नहीं आनी चाहिए। जी तो यदि आप किसी बात को कहना चाहते हैं तो शास्त्र की बात को आप अपने ढंग से कह जाइए लेकिन निंदा की दृष्टि से मत कहिए। जी पहली बात तो आपको असंजम के द्वारा ही कुछ कहने की आवश्यकता है। असंजम पकड़ने की आवश्यकता नहीं।

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00:15:24:24 फिर हमारा नाम आप बार-बार क्यों जोड़ते हो? हम तो आपसे कोई बात नहीं कर रहे हैं। आपने पुस्तक भी भेजी तो हमने धन्यवाद भी नहीं दिया। क्यों? क्योंकि आपने प्रथम वीडियो में ऐसी बातें सब कह दी जहां कि हमने उस बात को कोई ऐसा

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00:15:40:16 कुछ कहा नहीं। हम तो इस बात को इस ढंग से कहा कि भाई कोई खानपान की बात है तो वो आप जानिए। उसमें आपने अपना ऐसा कुछ वो नहीं है। नहीं कुछ नहीं। हमने कुछ कहा आपको कहां प्रत्यक्ष मिलेगा? कौन गारंटी है कि आप प्रत्यक्ष सुन रहे हो। श्रोता हो जी। उटपटांग के लोगों ने कुछ कहा सुनी की कर दी और उसको आपने अपने उसमें प्रारूप बना लिया। अपराध बना करके उसको आप कह रहे हैं तो यह आपका असत्य भाषण होगा। इससे अपराध घोषित होगा। इसलिए जब तक पूरी बात प्रत्यक्षीकरण ना हो जाए। कौन सा आप प्रत्यक्ष दे दोगे? कौन सी गवाही दिलाओगे आप? जी। गवाही देने वाला झूठ बोल दे। यही तो गुरु जी मैं भी कहता हूं कि जब आपके पास ठोस प्रमाण नहीं है तो इस तरह से गंभीर विषयों को ऐसे सार्वजनिक तौर पर उछालना तो ये शोभ फिर कोई बात कहीं हो रही होगी। वो जाने दूसरा जाने। जी आप कौन जानने वाले हैं? जी जी आप कौन सी बात आप कौन सा व्यक्ति दूध का धोया हुआ है? आप कौन दूध के धोए हैं क्या जो आप इस प्रकार की बात कर नहीं नहीं गुरुदेव इनका कहना है कि यह निग्रह करने आए हैं सब आपको कौन अधिकार दिया ये कह रहे हैं कि हमको जो है देवताओं ने अधिकार दिया नहीं कौन अधिकार आपको दिया उन देवताओं से आप गवाही दिलाइए वे देवता के प्रत्यक्षीकरण करें कि हां हम कहते हैं कि भाई ये निग्रह

00:16:55:25 करने आए हैं। मगर गुरुदेव अगर आ भी जाएंगे तब भी जो हमारी परंपरा प्राप्त गति है यदि वह सहमत नहीं होगी तो बुद्ध को भी तो नहीं स्वीकारा हमने स्वीकार किया गया तो अगर कोई देवता रूप में आके कह भी देगा कि इनकी बात मानो शंकराचार्य के विपरीत हो के उस समय तो ऐसा हुआ कि परीक्षित के शरीर शांत होने पर जन्मेज ने सब यज्ञ किया विषाक्तता आ गई पूरे देश में तो लोग अधड़ पर चलने लग गए जी जब विषाक्तता आई मस्तिष्क की विकृति आई ब्रेन हेमरेज हुआ तो लोग गड़बड़ हो गए उसी को सुधारने की दृष्टि से जी अब गड़बड़ काम करने लगे सुधारने की दृष्टि से भगवान प्रकट हो के उन्होंने कहा वेद प्रमाण नहीं है उस समय उन्होंने कह दिया वैद की हिंसा वेद में हिंसा लिखी है आप एक बात मान रहे हैं और हिंसा किसकी करनी चाहिए कब करनी इसको नहीं मान रहे जी फल कौन देगा जी हमारे महाराष्ट्र धर्म सम्राट गुरुदेव ये कहा करते थे पूरी पीठाधीश्वर महाराज से बात कहा करते हैं कि फल चौरे नहीं है हमारे यहां फल कौन देगा अगर आप भगवान बदलेंगे सिद्धांत बदलेंगे भगवान भगवान बदलेंगे तो फल देने वाला फल हमसे चाहते हैं सनातन धर्म से और भगवान बदलना चाहते हैं सिद्धांत बदलना चाहते हैं फल कौन देगा दोद मिलकर चार होता है दोद मिलकर पांच आपको कहना है तो गणित के सिद्धांत को बदलना

00:18:10:25 पड़ेगा और बदलने के लिए गणित दूसरी लानी पड़ेगी जी उसके बताने वाले को लाना पड़ेगा बहुत से प्रचारकों ने इसी तरह किया स्वामी मान्य दयानंद स्वामी जी ने इसीलिए अपने अपने सिद्धांत को बदला पुनर्जन्म नहीं माना माना सब नहीं माना अलग से भगवान नहीं माना भगवान से काम चलाई ईसाइयों ने अलग भगवान माना अपना सिद्धांत अपना पक्ष रखा ईसाइयों ने अलग सिद्धांत माना मुसलमानों ने अलग सिद्धांत सिद्धांत माना अबस्थियों ने अलग सिद्धांत माना फिलिस्तियों ने अलग सिद्धांत माना तो अपने अलग-अलग भगवान बदलने पड़े क्योंकि फल कौन देगा हमारे भगवान फल देंगे नहीं सनातन धर्म से फल देने वाला है नहीं इसलिए मैं ग्रहचार्य हो या जो भी हो भगवत भगवत भागवत आनंद को कायदे से रहने की आवश्यकता है। संयम बरतने की आवश्यकता है। इस प्रकार के उपटपटांग की बातें करने की कोई आवश्यकता नहीं। और करना है तो आप सामने प्रत्यक्ष जाकर के कहिए। साहस दिखाइए। साहस दिखाइए। हां। आप सामने मिलिए। जिस तरह से कहने के लिए निंदा मानी जाएगी और निंदा सबसे बड़ा धर्म है। जी। और गोस्वामी जी ने क्या हमारे भविष्य पुराण में भी कहा कि कोई निंदा करने वाला चमगादड़ का जन्म लेता।

00:19:24:04 सब क निंदा जे जड़ कर ते चमगादड़ हो अवतरह ही गोस्वामी जी की पंक्ति क्यों निंदा करते हो आप आप जब जानते नहीं आप आपका प्रत्यक्ष बोध नहीं है आप अनुमान के आधार पर और किसी के कोई आप पुरुष आपको नहीं बता रहा है जो शब्द प्रमाण मानेंगे आप जी जी यही मैं भी कहता हूं हां कोई आप पुरुष कह रहा हो तो शब्द प्रमाण माना जाएगा इधर-उधर के लोग जिनको जिनका स्वार्थ नहीं सिद्ध हो रहा है वो कुछ बात कह रहे हैं जी और बड़ों यह बात तो यही तो हुआ ना वो भगवान सदाशिव माता भगवती पार्वती जगदंबा राजश्री गोद में लेकर के बैठे ऋषियों को उपदेश दे रहे थे जी उस चित्रकेतु राजा ने भली बुरी बात कही स्थापित हुआ जी वही तो जाकर के बाद में वृतासुर हुआ जी तो ऐसी स्थिति में जब तक आपको प्रत्यक्ष भी प्रमाण नहीं है और शब्द प्रमाण भी जब तक आप पुरुषों के द्वारा ना प्रकट हो तब अब तक वो भी प्रमाण नहीं है। अनुमान प्रमाण कहां से सिद्ध करोगे आप? लिंगस पास अनुमान अनुमान पर्वत पर धुआ देख के अग्नि का अनुमान कहां से लगाओगे आप? इसलिए बहुत सी बातों को संजय पूर्वक आप अपना तप करो, स्वाध्याय करो, भजन करो। हम आपको उपदेश नहीं कर

00:20:39:06 रहे हैं। आपको राय दे रहे हैं। हम आपसे तो बातें नहीं कर रहे हैं। बहुत दिनों से कोई मतलब नहीं रखते। इसलिए नहीं रखते कि आप अनर्ग प्राप्त कर जाते हो। जी। कोई आपकी दृष्टि में खड़ा है ही नहीं है। आप ही दूध के धोए हुए हो। आप ही भूगर्भ से पैदा हुए हो। आप ही अपने मन से मठासी बने हुए हो। जी। कौन आपको कह रहा है कि आप प्रमाणित करिए किसी को? आपसे सर्टिफिकेट कोई मांग रहा है क्या? जी। बहुत सी चीजें कलयुग है। इसमें ना वर्ण व्यवस्थित है श्रमता तो वरना आश्रम धन की रक्षा करो। जी गौ कट रही 80,000 उसकी रक्षा करो। जी देश में जी गोपी विप्रेष वेद सती भी सत्यवाद दान शीले सप्त विरा इन सातों की रक्षा करो आप अगर बल सामर्थ्य है आप में भगवान ने आपको भेजा है तो वो दम दिखाओ आप जी अब वेदम वाली बात क्यों करते हो आपकी बातों में कौन सा दम है जब तक कि कोई प्रमाण नहीं इसलिए इन बातों को अनर्गन माना जाए और कोई इनसे कोई बातचीत करने की बहुत आवश्यकता नहीं क्योंकि ऐसे ही भक्त रहते हैं तो इसका अर्थ तो यह तो स्पष्ट है कि आपने ऐसा कुछ नहीं कहा है। जो बातें बना रहे हैं। कोई बात ही नहीं है। हमारी कोई नहीं। अच्छा आचार्य श्री जो यह जो बात है ये मैंने भी अपनी शैली

00:21:54:12 में उन भगवत के समक्ष रखने का प्रयास किया है कि भाई आप केवल अनुमान हो गया किसी बात का तो उसको लेकर के किसी की जो प्रतिष्ठा है उस पर उंगली नहीं उठा सकते। आपके सामने प्रत्यक्ष प्रमाण आपको चाहिए होंगे। ठोस प्रमाण और जैसे आपने बताया कि अगर शब्द प्रमाण चलेगा तो किसका चलेगा अन्यथा आपके पास कौन से वो प्रत्यक्ष प्रमाण होंगे ये भी आपने बताया केवल अनुमान कहीं से कुछ किसी की वही कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा भानुमती का कुबा जोड़ा वाली बात वो उसके आधार पे हम युद्ध स्तर पर नहीं जा सकते ये बात हमने भी बताने की कोशिश की हमने कहा कि अकाट्य प्रमाण आपके होने चाहिए अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के ऊपर लांछन लगा रहे हैं जो स्वयं जगुरु शंकराचार्य जी भगवान की उसमें है। अच्छा इसमें एक चीज यह आती है क्या जैसे कि अभी जब आरोप लग ही गया है वहां की व्यवस्था में तो क्या आप जैसे वहां जाते हैं आते हैं क्या इस तरह का के कोई आपको अनुभव जो ऐसा वहां पर जैसे अब इन्होंने आरोप तो लगाया है आपने नहीं कहा बात अलग है मगर आरोप तो इन्होंने लगाया है तो क्या आपको इस तरह का वहां पर अनुभव कोई वहां महसूस होता है कि इस तरह का ऐसा है कि पहले वाले वीडियो से जी स्वामी जी को अरुचि हो

00:23:09:18 गई। जी जी तो हमने निकटता बंद कर दी। अच्छा जब इन्होंने ये बोल दिया जब इन्होंने बोल दिया केवल महाराज श्री का दर्शन वही मूल्यवान मानते हैं। अच्छा अन्य लोगों से कोई बात नहीं करते। क्योंकि इन्होंने इधर आपके बारे में ऐसा प्रसारण कर दिया तो वहां से एक दूरी बन गई। दूरी बन गई। तो इसलिए हम उन गतिविधियों में बिल्कुल नहीं जाते। मगर जब आप जा रहे थे जब तक इन्होंने नहीं बोला था। आप जैसे खुद उसमें मठ में जा रहे हो जब तो आपने देखा होगा कि कैसी गतिविधियां है क्या है तो वो क्या संदिग्ध लगती थी आपको या क्या था अच्छा लोग आ रहे हैं जा रहे हैं हमारे आश्रम में भी माताएं आ रही हैं लड़कियां आ रही हैं पुरुष आ रहे हैं जी तमाम प्रकार के लोग मठों में आते जाते हैं जी तो उसको आने जाने की दृष्टि को लेकर के और खराब दृष्टि से देख लेना जी लोगों की अपनीपनी नियत है जी हमारा उसमें कुछ लेनदेन नहीं मतलब आपकी जानकारी में ऐसा कुछ नहीं है हम भी मठ चलाते हमारे यहां सब आते जाते हैं। जी तो तो इसलिए हम नकारात्मक सोच नहीं रखते। सकारात्मक सोच रखते। मतलब आपकी जानकारी में मठ में ऐसा कुछ नहीं है। आपकी जानकारी में नहीं है। ये आप कह रहे जब आप नजदीकी थी। अभी तो खैर उनके वक्तव्य के कारण एक जो भीनी

00:24:24:26 भी सी एक दूरी होती है वो आ गई है। तो यह भी भगवतानंद का ही फैलाया हुआ कुचक्र है कि आचार्य श्री के संबंध भी जो वहां से थोड़ा सा ऐसे हो गए। फिर भी क्योंकि आचार्य श्री की जो महानता है उसको कोई नकार नहीं सकता है तो उस पर कोई प्रश्न नहीं कर सकता तो इसलिए आज भी ये स्वतंत्र रूप से वहां जा सकते हैं आ सकते हैं इनको कोई रोक रोकने वाला नहीं है जाते हैं महाराज के साथ उनके मंच पर मंच पे मंच पर भी बैठते हैं वहां उनको कोई नहीं रोकता है जगन्नाथ पुरी भी जाते हैं जी और जो सुविधाएं कमरा मिल जाता रहा महाराज श्री का जो लाड प्यार है मिलता है आशीर्वाद मिलता है जी और फलाहारकि हम करते हैं तो हमारे फलाहार पर महाराज जी की पूरी दृष्टि मिल रहा है कि नहीं मिल रहा है व्यवस्था है कि नहीं है लोगों को कहते भी रहते हैं अच्छा इसमें एक बात आती है ऐसे मतलब हम जब सोच के देखें कि यदि वो कुछ खाने में मिलाकर के दे रहे हैं उनको जगुरु शंकराचार्य भगवान को और पहली बात तो यही अपने आप में एक बहुत बड़ा विषय है कि ऐसा कौन सा पदार्थ है जो उनके अनुगत रहने वाले तैयार कर पा रहे हैं और वह प्रभावशाली सिद्ध हो रहा जगुरु शंकराचार्य पर

00:25:39:27 मगर दूसरी बात एक यह है कि यदि वह खाने में मिलाकर दे रहे हैं और उनको पता चल गया जैसे कि उनको ये संदेश पहुंचाया गया ये भगवतानंद जैसों के द्वारा कि शंकराचार्य जी को कुछ खाने में लाकर तो आप तो उनके शत्रु हो गए। तो इस हिसाब से यदि इस पूरी के शंकराचार्य जी उनके बस वश में हैं क्योंकि वह खाने में लाकर के रोज दे रहे हैं तो उनको तो वहां पर फिर आपको बिल्कुल यदि वो इस इस तरह का कुछ है तो आप तो बिल्कुल भी वहां पर आना जाना आपका रोक दिया जाता है। कैसे हम माने कि मिला करके दे रहे हैं। महाराज श्री का जब प्रसाद आता है तो पूछ लेते हैं शुक्ल जी को पनीर गई कि नहीं महाराज जी को पनीर मिलती है और वही पनीर हमको भेजी जाती है जी महाराज श्री के द्वारा जी सायंकाल दैनिक का नियम इस इस बार ऐसा हुआ पनीर दी जाती थी जी कि फलाहार में हमको पनीर दिया करो जी तो आती थी तो अगर मिलाई गई तो तो हमारे में आप भी वशीकरण में हो जाते हैं हां हम भी मिलाई जाती जो भोजन गुरुदेव महाराज को जाता है वही भोजन अगर आचार्य श्री वहां पर है तो इनको भी जाता है भोजन नहीं आता जो भी जो भी प्रसाद है जो भी जो भी प्रसाद ग्रहण कर किया जा रहा है तो उसमें जो महाराज श्री को जा रहा है और उस उसमें से जो महाराज श्री आप ग्रहण कर सकते हैं तो वो आपको आता है तो पहली बात तो ये दूसरी बात यह है कि एक

00:26:55:03 सोचने वाली बात है कि अगर ऐसा वशीकरण वाला प्रसाद में मिलाकर दिया ही जा रहा है जो अपने आप में एक बहुत बड़ा जांच का विषय है कि अनुगत रहने वाले अब ऐसी चीज ऐसी चीजें कर पा रहे हैं जो जिसके अनुगत है उसको प्रभाव डाल पाए। हम और दूसरी बात यह भी है कि यदि ऐसा कर रहे हैं और जब उनको पता चल गया कि उनको ऐसा लग गया मान लीजिए कि आचार्य श्री ने किसी को यह कहा है कि भोजन में बुला के कुछ दिया जा रहा है तो आचार्य श्री कैसे वहां पर आ जा पा रहे हैं और और गुरुदेव जगद्गुरु शंकराचार्य भगवान की कृपा प्राप्त कर पा रहे हैं। ये भी एक बात है। उनके द्वारा प्रसाद उनके द्वारा जो है प्रसाद का वही वही पनीर हमको भी वही उनका पूरी दृष्टि रहती है जगदुरु शंकराचार्य भगवान की कि इनके पास कौन से वो भोज्य पदार्थ पहुंच रहे हैं कि नहीं पहुंच रहे हैं यथोचित रूप से तो यदि जो परिकर हैं वो गलत कर रहे हैं वो उनको वश में कर रहे हैं तो गुरुदेव भगवान की ये जो कृपा दृष्टि हो रही है आचार्य श्री के लिए उसको क्यों नहीं परिवर्तित कर रहे हैं वो नहीं यदि महाराज श्री को दिया जा रहा है तो अगर हमारे प्रति अरुचि है वहां के परिक्रमों की तो हमको भी कुछ मिला के दिया जा सकता लेकिन ऐसा नहीं होता बिल्कुल तो ये भी एक बात क्लियर हुई

00:28:10:14 अच्छा आचार्य श्री एक बात आई कि जैसे आपने अभी एक पक्ष रखा था कि ये व्यक्ति जो है भगवतानंद ये शास्त्र के पक्ष पक्ष को रखता है। साथ ही साथ शास्त्र के पक्ष को रखने की आड़ में यह जो है उपहास या फिर निंदा परख फतियां कसता है। जैसे एक पंक्त पंक्ति मैंने कसी कहीं पे किसी संदर्भ में कह रहा है कि अह अगर वह इतना ही है तो जब नकली शंकराचार्य घुमाया जाता है तो फिर तुम्हारे भूतों में क्यों पता नहीं चिंगारी होती है। जो स्वयं को आचार्य कह रहा है क्या उसके मुख से गाली जैसे अश्लील भाषाएं शब्द ये सब निर्गत होते हैं। ठीक है जो स्वयं को आचार्य कहे। शब्द दोष भी बहुत बड़े अपराध माने गए हैं। जी मुख से निकले हुए शब्द भी वैचारिक अपराध माने जाते हैं। अच्छा शारीरिक अपराध जैसे वैचारिक अपराध, मानसिक अपराध तो पहली बात तो कोई भी अपराध पहले मनोवैज्ञानिक बनता है। जी फिर कहीं वैचारिक बनता है फिर शारीरिक बनता है। हम तो इसका मतलब है कि मनोवैज्ञानिक अपराध ज्यादा हो रहा है तभी वैचारिक उतर रहा है। जी फिर वैचारिक उतर के शारीरिक कह नहीं पा रहा है। लेकिन शरीर से उसको प्रदर्शन

00:29:25:20 कर रहा है। हम गाली इत्याद देना जी यह शोभा थोड़ी देता है। यह बहुत अच्छी बात नहीं है। मतलब आचार्य के लिए आचार्य के लक्षणों में तो ये नहीं आ सकता है कि वो आचार्य का मतलब इतना है आचिनोजम शास्त्रम वेद मध्यापजा स्वयं आचार जस्मात तम आचार्य विदो विदु वही आचार्य वेदों के सिद्धांतों को निकाल कर लंबे लबा लोगों को बताए सदाचार का पालन कराए अनाचार को बताने से अच्छा है कि सदाचार बतावे सदाचार का बल बढ़ जाएगा तो अनाचार कम हो जाए वो सीधी बात तो जो आचरण ऐसा आचरण करें वही आचरण स्थापित आप अगर बता ही रहे तो यति धर्म का व्याख्यान करो जी ये सन्यास का धर्म है जी जी ये अनंत दंड है ये अमुक दंड है ये अमुक दंड है ये संध्या है यतियों के संबंध में आप उसको बताओ उसकी थ्योरी तैयार करो जी तब प्रैक्टिकल हो हम अब आप कहीं बात कहीं की सुनी कहीं की बात कही जी जी अनावश्यक समय अपना बर्बाद करते हो दूसरे का भी बर्बाद करते हो लोग उसको देखते हैं लोगों के मन में असदभावनाएं व्यक्त करते हो। इसलिए अनावश्यक अपना समय मत गवाइए। अपना स्वाद फिर आप कहते हो हम जंगल में तपस्या करने जाते हैं। लोगों ने हमसे बताया

00:30:40:24 कि अबकी वीडियो में आया वहां जा रहे हैं तो कौन तपस्या आप करते हो? कहां जा रहे हैं? जंगलों में जी जी तपस्या करने कौन तपस्या कर रहे हो? यही आपके पास केवल धंधा रह गया। जी इन लोगों को महाराष्ट्र के परिक्रमों को महाराज के ऊपर अन्य लोगों के ऊपर अन्य साधुओं संतों के ऊपर सबके निकाल निकाल कर उगाते हैं। कहां से उसमें नेगेटिव पावर है उसको आप पकड़ पकड़ के ऊपर उछ रहे हो। नेगेटिव पावर तो मुख में जो रसगुल्ला का स्वाद लेता है वही जीवा बर्चे का भी स्वाद लेती। नेगेटिव बातें कहना उचित नहीं। जी और फिर अब प्रामाणिक भी है बहुत सी बातें तो आप प्रामाणिक है जी अच्छा कहने के लिए तो आप कुछ भी कह सकते हो जी अब कोई आदमी मानहानि का दावा करे बात अलग है आपके ऊपर कोई आक्षेप लगा के दावा करे अलग बात है लेकिन लोग समझते हैं कि छचुरी पटाखा समझ के आपकी बात को कोई ध्यान नहीं देता क्या छचुरी क्या छिछ पका समझ के कोई ध्यान छिछड़ी छचुरी पटाका समझ के कोई आपकी बातों का ध्यान नहीं देता। हां। नहीं तो तमाम लोग का कमजोर बच्चे थोड़े हैं आप आपसे। हां। है जी। आप सबको कमजोर माने बैठे हो। जी।

00:31:56:16 हां। चिचचई पराका के कारण नहीं देता। तो बस वही है कि हाथी जा रही कुत्ते भूक रहे हैं। जी तो हाथी कुत्तों का ध्यान नहीं देते। जी जी। अब इससे बड़ा क्या हो सकता? तो बहुत अनुग्रह प्राप्त हुआ आचार्य श्री का। और एक बात क्लियर हो गई कि आचार्य श्री ने ऐसी कोई बात भगवतानंद से नहीं कही है कि गुरुदेव भगवान को ऐसा कुछ मिलाकर के खिलाया जा रहा है। दूसरा इन्होंने प्रकाश डाला एक तथ्य पर कि इन्होंने ऐसा इनकी जानकारी में ऐसा कुछ नहीं है कि वहां पर ऐसा कुछ वातावरण हो। वो बात और है कि भगवतानंद के ऐसा बयान दे देने के कारण ही आचार्य श्री की आज जो उनके परिकरों से है उनसे एक भीनी सी दूरी हो गई है। इसके बावजूद भी इनको यथोचित वहां पर आदर सत्कार प्राप्त होता है क्योंकि ये गुरुदेव भगवान के प्रिय हैं। ठीक है? दूसरी बात और इसमें फिर यहां पर एक तर्क जो आचार्य श्री ने भी उठाया। दो तर्क उठे यहां से कि यदि जगुरु शंकराचार्य भगवान को कोई वशीकरण वाला पदार्थ दिया जा रहा है तो फिर जब परिकरों को मालूम है कि ये आचार्य श्री इनके उनके परिकों के बारे में कुछ ऐसा विरोधाभासी वक्तव्य दे चुके हैं तो फिर उन्हें सबसे पहले गुरुदेव भगवान के जो गुरुदेव भगवान की जो कृपा दृष्टि इनको

00:33:11:20 जगतगुरु भगवान की जो कृपा दृष्टि इनको प्राप्त हो रही है उसमें बाधा डालनी चाहिए थी और दूसरा तर्क यह भी प्राप्त हो रहा है कि यदि जब ये वहां जाते हैं और इनको वही भोजन वो भोज्य पदार्थ मिलता है जो ये ग्रहण करते हैं वो आता वहीं से है जो गुरुदेव भगवान के लिए तैयार किया जाता है और यदि उसमें कुछ ऐसी ऐसा पदार्थ मिलाया जा रहा है तो फिर वही पदार्थ इनके पास भी आ रहा है तो फिर इन पर भी वशीकरण होना एक ये बात कही जा सकती है। एक और बात है कि वो पदार्थ है कौन सा ये तो अभी तक बताया ही नहीं गया। वो पदार्थ है कौन सा जो ये सब कर रहा है। इस पर कोई दृष्टि डाली नहीं गई। तो ये सब हमें जानकारियां प्राप्त हुई। इसके साथ ही साथ धर्म की कुछ गुण व्याख्या भी गुरुदेव ने अपने शैली में बताई जो कि काफी रोचक थी और सभी इस महत्वपूर्ण जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें क्योंकि लोगों को किसी प्रकार से संघर्ष करके हम कहीं के लिए धार्मिक वो भी मनुवाद के सिद्धांतों के लिए आस्थावान बनाते हैं और इस प्रकार के कुप्रचार से ये जो भगवतानंद जैसा कि गुरुदेव ने कहा कि भगवतानंद अगर शास्त्र का पक्ष रखना है तो शास्त्र का पक्ष रखें मगर निंदा ना करें। उन्होंने कहा यदि तुम्हें सवाल आ रहा है तो सभा में जाकर के तुम सवाल कर सकते हो। यही सब चीजें

00:34:26:21 हमने कही थी और तुम जिन जिन जिस आधार पर तुम जो आरोप लगा रहे हो वो आधार ही नहीं आरोप लगाने का बात करने का। जैसे कि उन्होंने कहा कि शब्द प्रमाण किसका होगा? कोई आप पुरुष होगा। उसका होगा। कोई विशेष प्रतिष्ठा रखता होगा समाज में। उसका शब्द प्रमाण माना जाएगा। या फिर तुम्हारे पास प्रत्यक्ष प्रमाण होने चाहिए। केवल अनुमान प्रमाण के आधार पर आप जाकर के वहां किसी प्रतिष्ठित प्रतिष्ठा प्राप्त व्यक्ति के ऊपर गुरुदेव भगवान के स्वयं के परिकरों के ऊपर आप जो है ऐसे नहीं उठा सकते। जबकि गुरुदेव भगवान स्वयं ने ये कहा है कि मेरे परिकर जो है स्वयं देवता स्वरूप है। तो यह सारी जानकारियां हमें प्राप्त हुई। गुरुदेव आपने हमें समय दिया। आपकी वाणी हमें प्राप्त हुई। आपको मैं प्रणाम करता हूं। हर हर महावीर हर जय श्री राम। [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 35:20 · 01 Apr 2025

आचार्य रामशंकर शुक्ल जी ने तोड़ी चुप्पी @SwamiNigrahacharya @DarkNigrahacharya ​

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