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00:00:00:08 भगवान श्री कृष्ण कहते हैं मैं कौन हूं कृष्ण कौन है सभी धर्मों को त्याग कर माम शरण मेरी शरण में कोई व्यक्ति भूखा हो और बोले मुझे खाना नहीं चाहिए दारू चाहिए परंपरा म गुरु परंपरा ऐसी नहीं होती गुरु परंपरा भगवान तो सब कुछ जानते निराकार है सब जग इसम कैसे संदेह हो सकता है जब मोहम्मद पैगंबर साहब ने कहा अल्लाह यवा ये सभी क बाबल [संगीत] क्या पुराण का ज्ञान बिना परंपरा के आ सकता हैय

00:00:38:00 कवा ऐसा भगवान प् और ब आत्मा परमात्मा सन तो सभी को जय श्री राम और जैसा कि आप सभी जानते हैं आवान के द्वारा जो विभिन्न आध्यात्मिक पक्ष है जो धर्मिक धाराए है ईश्वर के संबंध में जो मत है उनको समाज के समक्ष प्रस्तुत करने का कार्य किया जाता है और इसी क्रम में आज हम आए हैं रायपुर में यह स्कन का एक सेंटर है यूथ फरम नाम से हमने देखा य तो हमारे साथ वहां के जो प्रतिनिधि है वही इस समय विराजमान है आप देख रहे हैं तो सर्वप्रथम मैं चाहूंगा प्रभु जी आप अपना एक परिचय दे दीजिए हमारे दर्शकों को हरे कृष्णा प्रभ जी ने वैसे तो सब कुछ ही बता दिया है मेरा परिचय यही है कि मैं भगवान की सेवा करता हूं और इसकन में एक सेवक हूं और सेवक का काम है सेवा करना प्रभु जी ने कहा वे जो धर्म के स्तर पर काम कर रहे हैं वे उन लोगों को लोगों के सामने इंट्रोड्यूस करते हैं तो वे इकन को भी आज या इकन के अलग-अलग परिपेक्ष को इंट्रोड्यूस करने आए

00:01:53:02 हैं तो मैं उसी इकन में एक सेवक के रूप में कार्यरत हूं पूरे छत्तीसगढ़ में प्रचार प्रसार का कार्य करता हूं ताकि लोग भगवत गीता के ज्ञान से विज्ञ हो सके जान सके कि क्या है भगवत गीता और क्या है भगवान के दिए गए आदेश हम सबको जीने के लिए बहुत ही अच्छा इन्होने अपना परिचय दिया सुंदर था आपका प्रभु जी सबसे पहले जैसे कि जब हम बात करते कि कन एक स्पिरिचुअल ऑर्गेनाइजेशन है स्पिरिचुअलिटी फैला रही है तो इसमें दो चीजें आती है एक तो ईश्वर का अस्तित्व और एक धर्म है ना तो सबसे पहले हम यह देखते कि धर्म जब हम कहते हैं कि धर्म क्या है तो इसकन के अनुसार धर्म की परिभाषा क्या है वो थोड़ा सा बता श्रीमद् भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं सर्व धर्मानंद शरणम ब्रज जब वो कहते हैं ना माम एकम शरणम ब्रज तो यह जो माम एकम शरण बज भगवान क र यही धर्म है और धर्म को कैसे एक्सप्लेन किया जाए तो वेद शास्त्र कहते हैं धर्मम तु साक्षात भगवत प्रितम अर्थात जो भगवान कहते हैं वही धर्म है जी

00:03:08:08 ये तो बिल्कुल ठीक है एक्चुअली एक व्यक्ति के जीवन में धर्म किस प्रकार अंतिम विकल्प के रूप में खपत हो सके मतलब उपयोगिता जैसे हमने कहा कि मोटरसाइकिल क्या है तो हमने बता दिया कि हीरो हंडा है बजाज है पल्सर है तो हमने बता दिया कि वो चिन्हित कर दिया कि क्या है मगर उसकी उपयोगिता क्या है उसके दो पहिए होते वो गति तेज कर देती है जाने में आपको लाभ देती है तो ऐसे ही धर्म की उपयोगिता वाली जो परिभाषा है वो आप हमारे दर्शकों को बताए प्रभु जी इसकन आज इस जो धर्म के क्षेत्र पर कार्य कर रहा है वह इस धर्म का प्रचार प्रसार इसलिए चाहता है ताकि व्यक्ति अपने जीवन में इस धर्म को अपना सके धर्म को अपनाने का कारण यह है कि यह धर्म हमें जीवन जीने की कला सिखाती है यह बताती है कि किस प्रकार से एक आत्मा परमात्मा के साथ जुड़ सकता है इसकन का फुल फॉर्म है इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियस अर्थात यह इकन हर जीवात्मा को परमात्मा श्री कृष्ण से जोड़ने का कार्य करती है मैं कौन हूं कृष्ण कौन है और हमारे बीच में क्या संबंध है इस संबंध को स्थापित करने का कार्य इस धर्म के द्वारा इस कृष्ण भावना मित

00:04:23:13 विज्ञान के द्वारा इकन करती है जी जी मतलब कहने का मतलब है कि एक व्यक्ति को धर्म को फॉलो क्यों करना चाहिए जैसे एक एक न्यूट्रल व्यक्ति है वो पूछ रहा है कि मैं क्यों फॉलो करूं मैं क्यों भगवान की शरण में जाऊ क्यों मैं फॉलो करूं तो उसको हम वो कौन सा सिद्धांत दे सकते हैं जिससे कि वो शांत हो सके उसकी वो जो जिज्ञासा है संतुष्ट हो सके बिल्कुल भगवान मैंने फिर से मैं उसी श्लोक पर वापस आता हूं जिस श्लोक से मैंने शुरू किया था भगवान कहते हैं सर्व धर्मानगर माम कम शरणम प्रज मेरी शरण में आ अ त्वा सर्व पाप मैं आपके सारे कार्मिक रिएक्शंस ले लूंगा मोक्ष स्याम मास और तुम्हें जीवन का अंतिम गंतव्य दूंगा आज समाज में धर्म के जो चार पैर है चारों पैर तीन पैर पूर्णत खंडित है और चौथा पैर आप देखेंगे कि लहु लुहान है आज कहीं ना कहीं वह सत्य भी डगमगा हुआ है वह भी लहु लुहान है और यह चार पैर चार मूल सिद्धांतों के ऊपर आधारित है स्कड इन चार सिद्धांतों कौन इसे कहता है यह हमारे बेसिक प्रिंसिपल्स हैं है ना इन प्रिंसिपल्स को फॉलो करने को कहता है सबसे पहला अवैध संघ नहीं करना है

00:05:39:07 दूसरा मांसाहार नहीं करना है इसे आप हिंसा भी कहते हैं तीसरा किसी भी प्रकार का नशा नहीं करना है जिसमें इकन चाय कॉफी को भी निषेध करता है और चौथा जुआ खोरी नहीं करनी है द्यूत क्रीड़ा नहीं करनी है यह चार सिद्धांत जो है चार प्रकार के जो धर्म के पैर हैं उन पैरों की रक्षा के लिए है तो यदि व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का इस प्रकार से निर्माण करेगा तो निश्चित रूप से वह व्यक्ति अपने जीवन में उस चरम लक्ष्य को प्राप्त करेगा जिसे हम कहते हैं परमात्मा से मिलन या उसे दूसरे शब्दों में मोक्ष भी कहा जाता है बक मगर जैसे हम जैसे कोई यह कहे कि भाई मुझे मोक्ष नहीं चाहिए तो फिर हम क्या कहे उसे अ कोई व्यक्ति भूखा हो और बोले मुझे खाना नहीं चाहिए दारू चाहिए तो ये उसकी स्वेच्छा है अब वो दारू पी करके अपना किडनी खराब करना चाहता है अपने भूख में यानी कि उसको मोक्ष चाहिए हर व्यक्ति को कोई भी व्यक्ति यहां पर आता है तो उसका अंतिम गंतव्य ही भगवत प्राप्ति है अगर वह यह बात नहीं जाता उसको समझाए कैसे सामने वाले को हां य यह एक बड़ा प्रश्नवाचक चिन्ह है जी जी आप देखेंगे प्रश्न अब मेरा आपसे मतलब प्रश्न ये है कि जैसे हमने

00:06:54:10 ये माना कि व्यक्ति हर व्यक्ति का जन्म ही मोक्ष के लिए हुआ है वो मोक्ष चाहता हैय को समझाए कैसे कि भाई तू तू थोड़ा सा नादान है तू जानता नहीं तेरी जो वास्तविक इच्छा है वो मोक्ष की है तो वो कैसे समझाए बहुत ध्यान से इसे हमें समझना होगा हर व्यक्ति संसार में दुखी हो हर व्यक्ति संसार में दुखी है चाहे वह अमीर हो गरीब हो उसके जीवन में खूब सारा ऐश्वर्य हो या किसी भी प्रकार से हम देखें कि बहुत ऊंचे अवधे पर हो लेकिन हमने पिछले कुछ सालों का यदि आप ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो बड़े-बड़े आईएस आईपीएस भी डिप्रेशन में जाकर सुसाइड कर लेते हैं दैट मींस जो आज भौतिक सफलता है इस भौतिक सफलता को हम जीवन का लक्ष्य तो नहीं मान सकते अगर यह जीवन का लक्ष्य होता तो यह लोग सुसाइड नहीं करते जी है ना इस आधार पे अगर अभी हम मैं आप हम सब यहां पर बैठे हैं क्या हम सब यह कह सकते हैं कि हम पूर्णत सुखी है हम भी किसी ना किसी जीवन के किसी ना किसी परिपेक्ष में उलझनों में उलझ जाते हैं दैट मींस अगर

00:08:09:20 इवन दो धर्म के कार्य करते हुए भी कई बार मेरे अंदर काम क्रोध लोभ मोह मद मत स प्रवेश कर जाता है जी जी जी क्योंकि यह माया जगत है जी तो इसलिए अगर आप व्यक्ति विशेष का विश्लेषण करें तो आपको समझ में आएगा कि इस संसार में हर व्यक्ति दुखी है तो यदि वह दुखी है तो क्यों दुखी है क्योंकि वह अपने जीवन में चार चीजें करता है आहार निद्रा भय मैथु खाता है सोता है डर है कि मेरा फ्यूचर में क्या होगा इसलिए वह अलग-अलग गतिविधि करता है काम करता है अपना व्यापार बिजनेस करता है और अपने वंश वृद्धि करता है जिसे आप सेक्स लाइफ कह सकते हैं चार चीज करता है लेकिन यह चार चीजें तो पशु भी करते हैं देन व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन द एनिमल्स एंड अस जी तो हमें इस अंतर को समझना होगा और लोगों को बताना होगा कि जो आपको नहीं मिला आपको नहीं पता कि सुख क्या है आपको नहीं पता कि आनंद क्या है जैसे मान लीज प्रभु जी मैं आपसे प्रश्न करू प्रभु आपको खाने में क्या पसंद है तो आप क्या कहेंगे पनीर की सब्जी आपको खूब भूख लगी हो और आपको शाही पनीर मिल जाए आनंद आ गया अब मैंने बोला प्रभु जी शाही पनीर का दूसरा कटोरा शाही पनीर ो पनीर ख

00:09:25:14 पनीर हर व्यक्ति का अपना अपना टेस्ट किसी को काले किसी को किसी को छोटे किसी को लंबे सबको अपने अपने पसंद है है ना खुवा पनीर हम आपको देते हैं खुवा पनीर का पहला खुआ पनीर का ये पहला कटोरा देन दूसरा कटोरा अब तीसरा कटोरा आनंद आ रहा है उसके बाद मतलब इच्छा भर जाएगी उली मैं कह रहा हूं यह आनंद इस बात पर डिपेंड करता है कि आपके अंदर भूख कितनी है कहने का मतलब है धर्म इसलिए वो करो फॉलो क्योंकि वहां से जो आनंद मिलता है र् धर्म से प्राप्त होने वाला आनंद वो नित्य होता है चिरस्थाई नि होता है तो अब यह बात आती कि यह जो है धर्म इसलिए है कि हमें मोक्ष दिलवाए मगर इसमें ईश्वर कैसे आ जाते हैं आप मोक्ष से क्या समझते हैं मोक्ष आपने बताया ना सभी बंधनों से मुक्ति वो सभी वो दुखों से मुक्ति पाप कर्म नाश हो जाते हैं और सुखी हो जाता है व्यक्ति सदा के लिए आनंदित हो जाता है बकुल तो आनंद किसी को तो रिप्लेस करता होगा आनंद आएगा कहां से आनंद का स्रोत क्या है व भगवान बंधन से मुक्ति आनंद नहीं है बंधन से मुक्ति यह ब्लैंक स्पेस हो गया बंधन छोड़ दिया सभी आसक्ति

00:10:40:20 छोड़ दिए लेकिन बिना आसक्ति के तो आप रह ही नहीं सकते एक जगह से आसक्ति हटाकर दूसरे जगह आसक्ति शिफ्ट करनी पड़ेगी तब व्यक्ति रह पाएगा यदि वह समस्त आसक्ति छोड़ दिया और दूसरी तरफ दूसरी तरफ आसक्ति नहीं लगाया इसका तो फिर हो जाएगा ना कि वो कल्पना कर लो फिर मतलब नहीं भी है तो भी मान लो क्योंकि हम शक्ति को रिप्लेस करना है ना तो लेकिन मान तो फिर अगर आपको भूख लगे तो मैं बोलूंगा मान लीजिए कि आपने खा लिया तो आपका पेट भर जाएगा नहीं नहीं खाना तब मिलेगा ना खाना तो तभी अभी तो पेट नहीं भरा ना व तो पेट तो तभी भरेगा जब वो मिल जाएगा एकली खाना तो अभी आप खिला दे रहे हो जो आप मान लीजिए आप खाना खा लिया हां मान लीजिए कि खाना है जैसे मान लीजिए कि ईश्वर है नहीं मानना कुछ नहीं है अगर हम मानने के बेसिस हमको त आपने जो दूसरा वाला कारण बताया ना कि वो स्त्रोत है इनका वो सही है आनंद का स्रोत है भगवान का जो मूल स्वरूप ब्रह्मा जी कहते हैं ब्रह्म संहिता के पहले श्लोक में कहते ईश्वर परम कृष्ण सच्चिदानंद विग्रह अनादि आदिर गोविंद सर्व कारण कारण तो भगवान का जो स्वरूप है वो है सचित आनंद मतलब आनंद के मूल स्रोत ही भगवान है जी जी तो मतलब ये जो सच्चितानंद है इसके मूल स्रोत भगवान है इसलिए हम भगवान की भक्ति जो करते हैं वो धर्म है और जो भगवान के बताए गए मार्ग है वो धर्म है और धर्म के द्वारा

00:11:55:20 हमें भगवान के द्वारा मिलने वाला जो सच्चिदानंद है वो प्राप्त होता है जी जी अब इसमें एक चीज ये आती है कि भगवान है ये कैसे सिद्ध हो रहा है मतलब कोई स्त्रोत है इसका यह कैसे सिद्ध होता है मतलब वो सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है वो कैसे सिद्ध होता है तथ्यों को अलग-अलग तरीके से देखना होगा यदि कोई व्यक्ति यह सिद्ध करना चाहे आप कैसे मानोगे कि महात्मा गांधी थे आपने देखा महात्मा गांधी को नहीं नहीं देखा लेकिन आप क्यों मानते हो क्योंकि हमें प्रमाण मिलते हैं शब्द प्रमाण शब्द प्रमाण शब्द प्रमाण किसे कहते हैं देर आर थ्री टाइप ऑफ प्रमाण पहला प्रत्यक्ष प्रमाण दूसरा अनुमान प्रमाण और तीसरा शब्द प्रमाण प्रत्यक्ष प्रमाण कई बार हम कुछ चीजें देखते हैं लेकिन वह भी सही नहीं होती है मैक्सिमम टाइम सही हो सकती है लेकिन आप इस प्रमाण को आप इस प्रमाण को एक्यूरेट नहीं कह सकते बिल्कुल उसी तरह अनुमान प्रमाण हमने कुछ देखा हमने कुछ कल्पना किया ऐसा हो सकता है ऐसा हो सकता है लेकिन यह भी प्रमाण नहीं है शब्द प्रमाण अर्थात ऐसा ज्ञान जो गुरु परंपरा से प्राप्त हो है ना तो गुरु परंपरा से प्राप्त

00:13:10:20 ज्ञान को आप क्या कहते हैं स्वीकार करते हैं बिल्कुल इसी तरह से भगवान के होने का प्रमाण गुरु परंपरा देती है नहीं उसमें ये आ जाता है ना कि जिससे हम जो यह कह रहा है हमें उसम बिलीव होना चाहिए जैसे महात्मा गांधी थे तो हमें जिस बुक पर बिलीव है वो बुक कह रही है कि ईश्वर मतलब महात्मा गाधी थे हमें उस बुक प बिलीव है क्यों बिलीव है वो एक अलग मैटर है मगर बिलीव है अगर मान लीजिए जो ये कह रहा है कि ईश्वर है अगर हमें उस पर बिलीव नहीं है तो हम क्यों माने फिर ईश्वर है अगर कोई बिलीव नहीं करता है तो इसके लिए वो ना माने जब अंतिम गंतव्य आएगा तो देखेगा मान लीजिए कोई कहता है कि मैं चोरी करूंगा और चोरी के बाद मुझे दंड नहीं मिलेगा ये मेरा मानना है तोव उसका मानना है लेकिन जब वो पकड़ा जाएगा तो उसे दंडित किया जाएगा सिमिलरली किसी के मानने या ना मानने से ईश्वर के अस्तित्व अस्तित्व पर हम सवाल नहीं खड़ा कर सकते हम मतलब नास्तिकों को उत्तर नहीं दे सकते हैं ईश्वर हैय कैसे सिद्ध होता है बस हम कह रहे तो मान लो इतना ही है नहीं ईश्वर है हम यह कह रहे हैं य भगवान देखिए हर जगह पर भगवान श्रीमद् भगवत गीता में कहते हैं अहम सर्वस्य प्रभु अहम सर्वस्य प्रभु तो भगवान कहते हैं मैं सभी लोगों का क्या हूं प्र प्रभु हूं स्वामी हूं ये भगवान ऐसा कह रहे

00:14:25:25 हैं यदि ब्रह्मा जी की बात करें तो ब्रह्मा जी कह रहे हैं जिसे आप इस ब्रह्मांड का प्रथम जीव कहते हैं इस ब्रह्मांड के सृजन कर्ता भी ब्रह्मा जी है ब्रह्मा जी ब्रह्म संहिता में कहते ईश्वर परम कृष्ण परम ईश्वर कृष्ण है श्रीमद् भागवत में वेदव्यास जी लिखते हैं ते चांस कला पुस कृष्ण स्तु भगवान ये तो भगवान की वो है कि श्री कृष्ण भगवान है अभी बात ये हो रही है कि नास्तिक को हम कैसे सिद्ध करें कि ईश्वर है जब ईश्वर है सिद्ध करेंगे उसके बाद तो वो पूछेगा कि ईश्वर कौन है वो तो अगली स्टेज हो गई ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होता है नास्तिक कैसे मानेगा नास्तिकों का खंडन हमारा हमारी तरफ से क्या दिया गया इस कौन की तरफ से देखिए या जो गुरु परंपरा है जो आप बता ठीक है एक बहुत अच्छा आप लोग रिल्स शॉट्स बहुत देखते हैं आजकल के समाज में है य बहुत ज्यादा चलती है एक बच्चा था एक बच्चे को एक टीचर ने आकर कहा देखो यह आपको कपड़े दिखाई दे रहे हैं बोले हा बोले दिखाई दे रहे मतलब इसका अस्तित्व है बोले आपको यह माइक दिखाई दे रहा बोले हा बोले मतलब माइक होता है हम देख सकते हैं बोले आपको मेरी आवाज सुनाई देती है मतलब मेरा आवाज भी अस्तित्व में

00:15:40:27 है मतलब जिस चीज को हम अपने इंद्रियों से सेंस कर सके वह होता है तो बोले क्या तुम भगवान को देख सकते हो बोले नहीं भगवान को सुन सकते हो बोले नहीं भगवान को चक सकते हो बोले नहीं भगवान को छू सकते हो बोले नहीं बोले हेंस प्रूव्ड भगवान नहीं होते तो बच्चे ने बड़ा उत्तर दिया जो खंडन आप चाह रहे वही खंडन करता हूं बच्चा ने कहा सर क्या आप अपना बुद्धि देख सकते अपना दिमाग देख सकते हैं बोले नहीं बोले चक सकते हैं बोले नहीं बोले सुन सकते बोले नहीं बोले छू सकते बोले नहीं आप बुद्धिहीन है मगर बुद्धि तो निराकार है ना बुद्धि बुद्धि बुद्धि निराकार नहीं है अब इसको बुद्धि को अब बुद्धि को को निराकार या सा बुद्धि फॉर्मलेस है और हम कह रहे हैं जो भगवान है वो श्री कृष्ण है वो तो फॉर्म वाले हैं तो इस एग्जांपल से वो मैच नहीं करेगा बुद्धि इसलिए नहीं दिख रही क्योंकि वो निराकार है हम उस इसलिए उसे नहीं छू पा रहे वो फॉर्मलेस है मगर जो ईश्वर है वो आप खुद कह रहे हो वो फॉर्मलेस नहीं है जी तो फिर हम उसको क्यों नहीं छू पा रहे ये नास्तिक कहेगा मैं नास्तिक नहीं हूं मैं उस पक्ष को सामने लाना चाह रहा हूं जी देखिए जब हम भगवान के विषय में

00:16:55:27 बात करते हैं तो भगवान सड श्वर से पूर्ण है भगवान के छह श्वर होते हैं भगवान का भगवान के पास संपूर्ण शक्ति है ठीक है एक बार अगर हम शक्ति के मान मायने में देखा जाए तो बोले भगवान के पास संपूर्ण शक्ति है तो शक्ति कोई कह सकता है कि मैं शक्तिमान हूं जैसे शक्तिमान सीरियल में शक्तिमान था लेकिन वह यह क्लेम नहीं कर सकता कि मैं पूर्ण शक्ति युक्त हूं भगवान के पास संपूर्ण धन है भगवान के पास संपूर्ण सुंदरता है भगवान के पास संपूर्ण ज्ञान है भगवान के पास संपूर्ण वैराग्य है और इस प्रकार से भगवान सडे स्वर से युक्त है अब कोई भी व्यक्ति अगर भाई हम एक बात तो मानते हैं ना कि कोई अस्तित्व रखता है आप यह तो नहीं कह सकते कि कोई भी चीज स्वचालित है जैसे हर चीज के पीछे आप कारण तो मानते हैं ना कार्य कारण वाला हां मतलब किसी भी भाई कोई भी चीज है तो इसका मतलब इसके पीछे कोई कारण है पंखा चलती है क्योंकि उसके पीछे इलेक्ट्रिसिटी है मतलब कोई भी चीज बिना मतलब के यूं ही चल जाती है क्या तो यह तो ये हो गया ना कि हां संसार में एलन मस्क है मुझे क्या करना तो वो वाला हो गया ईश्वर की परिभाषा मतलब कोई पावरफुल है

00:18:11:01 तो वो मेरा गंतव्य नहीं है कैसे है वो तो वो तो हो मतलब ईश्वर का अस्तित्व इस तरह से सिद्ध हो कि वो मनुष्य का अंतिम लक्ष्य बन जाए जैसे एलन मस्क बहुत अमीर कोई व्यक्ति है मैं मानता हूं है मगर मेरे को उससे क्या मिल रहा है कुछ नहीं तो ऐसे अगर अगर केवल शक्ति की हम ईश्वर को माने कि भाई इस संसार को चलाने वाला कोई है क्योंकि फूल खिल रहा है तो इसका मतलब किसी ने फूल को खिलाया है है ना वही कार्य कारण वाला तो इससे यह सिद्ध होगा कि हा कोई शक्ति है उसमें भी यह बात आ जाएगी उसमें भी क्रॉस क्वेश्चनिंग कुछ हो सकती है कि जैसे कि पृथ्वी को घुमाया ईश्वर ने ठीक है तो हम यह कह रहे हैं जो पृथ्वी को घुमा रहा है वो ईश्वर है हो सकता है कि अब हमने कहा कि यह ईश्वर है जो पृथ्वी को घुमा रहा है मगर जब यह कहा जाए कि उसको भी कि ने धक्का मारा हो पृथ्वी को घुमाने के लिए तो हमारा ईश्वर बदल जाएगा पृथ्वी को घुमाने वाला ईश्वर नहीं है जिसने पृथ्वी को घुमाने वाले को धक्का दिया है वो ईश्वर है तो इसलिए इस पर हम इस जो ईश्वर की ये वाली वो है परिभाषा इसके आधार पर हम जो ई जो मनुष्य का अंतिम रूप से लक्ष्य है उस रूप में भगवान को ख्या पित नहीं कर सकते इससे एक शक्ति का एक्जिस्टेंस आ जाएगा वो तो बौद्ध भी कह देंगे कि प्रकृति में एक शक्ति है जो काम कर रही है ठीक है देखिए एक

00:19:26:06 चीज समझ लीजिए किसी भी व्यक्ति को शास्त्र कहता है अश्र ाल व्यक्ति को इस महिमा का उपदेश देना मूर्खता है यदि आप कह रहे समस्त नास्तिकों को यह तोड़ दे दिया जाए तो आज पूरा संसार एक साथ आस्तिक हो जाएगा मतलब नास्तिकता के लिए हमारे पास खंडन नहीं है नहीं नास्तिकता के लिए खंडन है लेकिन अगर कोई व्यक्ति स्वीकार करने को तैयार ना हो तो क्या लॉजिकली बात कर रहा है ना मैंने आप मैं लॉजिस ही बता रहा हूं आप इस लॉजिस को ही समझिए कि बिना कारण के कोई चीज कार्य नहीं करती अब उस कारण के लिए आपको देखिए इस चीज को समझना पड़ेगा भगवत गीता के चतुर्थ अध्याय में भगवान कहते हैं यह ज्ञान जो है एवं परंपरा प्राप्ति यह ज्ञान जो है परंपरा से प्राप्त है इसे आपको स्वीकार करना पड़ेगा जैसे आप जब स्कूल में गए तो आपने पढ़ा अल्फाबेट ए बी सी डी ई एफ जी आपके टीचर ने बताया द सिंबल इज कॉल्ड ए आपने माना क्यों क्योंकि आपने कहा मुझे भरोसा था उस टीचर पर और उस किताब पर सिमल तो एक नास्तिक व्यक्ति भी ये कह सकता है ना कि ये जो मेरे नास्तिकता का ज्ञान है मुझे परंपरा से मिला है कैसे कर सकते बिल्कुल नहीं कह सकता कहां से मिला दिखाए उस लॉजिक को दिखाए परंपरा परंपरा मतलब गुरु परंपरा ऐसे नहीं होती गुरु परंपरा थरा होती देर फोर यूनिवर्सिटी ऑफ वै देखिए ये शब्द प्रमाण ही आ रहा है और इसमें

00:20:41:06 एक नास्तिक व्यक्ति भी कह सकता है मेरे गु पूरा बता सकता है कि मेरे ये थे मेरे ये थे मेरे थे जैसे आप बता रहे हो आप ये चाहते हो कि आपकी परंपरा पर विश्वास किया जाए मगर नास्तिक की परंपरा पर विश्वास ना किया जाए तो ये तो अनर हो जाए बिल्कुल आप ठीक कह रहे बिल्कुल व हिरण कश्यप की परंपरा से होगा और हिरण कश्यप का जैसा नाश हुआ वैसे इसका भी नाश हो जाएगा तो इस चीज के लिए तैयार रहे तो मतलब ज्ञान पूर्वक हमारे पास खंडन नहीं है नास्तिकता का भाई ज्ञान पूर्वक ख तु मान ले क्योंकि हम परंपरा वाले हैं तुम मान लो नहीं मानोगे तो तुम्हारा नाश हो जाएगा नहीं अथोरा इजेशन है इसी को शब्द प्रमाण किसे कहा जाता है आप शब्द प्रमाण की क्या वैल्यू शब्द प्रमाण शास्त्रों के शब्द प्रमाण तो तब है ना जब उसकी आस्था उस प्रमाण के स्रोत में शास्त्र में क्लियर कहा गया है अ श्रद्धालु व्यक्ति को उपदेश नहीं देना ठीक है अब इसकी बात करते हैं इसमें बात येय है कि हर व्यक्ति जब तक भगवान को नहीं जानता है उससे पहले तक व अ श्रद्धावन है किसको दिया जाए जब तक नहीं जानता तो इसलिए हम उसे जनवा हैं इसलिए हम इसलिए हम इस देखिए प्रभु जी दो तरह की चीज होती है अब आपको कुछ को टेस्ट पसंद आएगा सपोज मैंने कोई खाना बनाया और आपको पसंद आया उनको पसंद नहीं आया देखिए अबकी श्रद्धावन और अ श्रद्धावन की बात ऐसी है

00:21:56:28 कि जो भी व्यक्ति मान लीजिए अभी एक शिशु है जन्म लिया उसने उसको पहली बार कभी ना कभी हम ज्ञान देते हैं ना भगवान का वह भगवान का ज्ञान मिलने से पहले तक व [संगीत] अश्राथा वान लते यो माम जो अ श्रद्धावन होगा वो नहीं करेगा हर व्यक्ति के हृदय में एक चीज समझिए हर व्यक्ति आत्मा स्वरूप है आत्मा परमात्मा का अंश है तो इस नाते उसके अंदर श्रद्धा है वो श्रद्धा किस रूप में छुपी हुई है आप उस श्रद्धा को कैसे निखो ग यह आप के ऊ परर निर्भर करता है और वह उसके पूर्व कर्मा के निर्भर करता श्रद्धावन वाली बात मैंने बहुत चिंतन किया था अपना एक व्यक्तिगत अनुभव शेर करना चा रहा यह प्रश्न मुझे बहुत कुरेता था कि जो भगवान का ज्ञान है व अशुद्ध वान को नहीं देना चाहिए तो फिर बात य आती कि भगवान का ज्ञान मिलने से पहले तो श्रद्धा वानी है तो किसको दे फिर तो इसमें य बात आती है जो ब उपनिषद का एक श्लोक है असतो सद तो यह जो बात है ना असतो स आपने प्यास वो सबके अंदर है ठीक है तो होता क्या है कि कुछ लोग हैं जो इस प्यास पर ध्यान देते हैं इस सवाल को ढूंढते हैं असतो मा सद्गमय कसो मा ज्योतिर्मया वो अपनी

00:23:12:02 आत्मा की जो आवाज आ रही है कि मुझे मोक्ष चाहिए वो उस पर ध्यान देते हैं अन्यों के अंदर से भी वो आवाज आ रही है मगर वो उस पर ध्यान नहीं देते वो तो एसी टीवी फ्रिज कूलर कार प ही अटके रहते हैं तो श्रद्धावन कौन हुआ जो अपनी आत्मा की आवाज सुन रहा है जो उन प्रश्नों को ढूंढ रहा है कि मुझे कोई असतो मा सद गम का उत्तर दे दे कोई मृत मतम मया दे दे तो अ श्रद्धावन उसको कह मतलब जो मैंने जाना अ श्रद्धावन उसे कहा गया जो कि अपनी आत्मा की आवाज को सुनना ही नहीं चाहता है और दूसरा वो है जो आत्मा से आवाज आ रही है कि मुझे मोक्ष चाहिए मुझे प्रश्नों का उत्तर चाहिए मुझे अंधकार से उजाला चाहिए तो ये हो गया श्रद्धावन अगर हम कह देंगे कि श्रद्धावन को ही गीता सुनानी है श्रद्धावन को ही भगवान का ज्ञान देना है तो फिर ये दिक्कत आ जाएगी कि ज्ञान मिलने से पहले तक तो व अशदा वाण जैसे आपने कहा धर्म ना पशु भी समाना आर निद्रा भ मैथुन तो जब तक व्यक्ति को धर्म से नहीं जोड़ा जा रहा भगवान का ज्ञान नहीं दिया जा रहा तब तक तो पशु ही तो है तो व अ श्रद्धावन है उसकी भगवान को कोई श्रद्धा नहीं है जी चतुर विधा भजते भगवान इस बात की व्याख्या करते हैं कि चार प्रकार के लोग मेरी भजन करते हैं ठीक है ना आर्थ अर्था जिज्ञासु और ज्ञानी ठीक है ना अभी आपने एक बात कही कि जो जिज्ञासु होगा वो ज्ञान प्राप्त

00:24:27:09 करेगा जिसके अंदर इसको जानने की श्रद्धा होगी जो आत्मा की आवाज सुन पाएगा ठीक है ना आत्मा की आवाज जब आत्मा कुरे देती है तो वह जिज्ञासा पैदा करती है जिज्ञासा हो भले ही शांति की खोज हो उसको कुछ भी मतलब उसको एक है कि मुझे चाहिए मुझे नहीं पता रास्ता क्या है मुझे कौन है भगवान क्या है लेकिन मुझे कु प्रश्नों के सहारे ढूंढते हैं कुछ उसको सोचते हैं कि कहीं मेडिटेशन कर लू तो शांति मिल जाए यही जिज्ञासा है यही यही वो केवल जिज्ञासु नहीं है वो मैं इसलिए कहा चार प्रकार के लोग भगवान मैं तो नहीं कह रहा हूं भगवान कह रहे हैं भगवान कह रहे चार प्रकार के लोग मेरे शरण में आते हैं पहला व्यक्ति आर्थ जो दिन हो जो दुखी हो जो परेशान हो वो अपनी परेशानी सॉल्व करने के लिए भगवान के पास आता है दूसरा है अर्था किसी चीज की कामना हो मुझे ये चाहिए भगवान ये चाहिए मुझे ये सॉल्व करा दीजिए अर्थ की कामना से आता है तीसरा जिज्ञासा वस मुझे जानना है मुझे जानना है कि यह परमात्मा है कौन ये भगवान है कौन मुझे करना क्या चाहिए मेरी आत्मा क्यों शांत नहीं है ये जिज्ञासा है इस जिज्ञासा को शांत करने आता है इस जिज्ञासा को इस पिपासा को पीने आता है अपनी भूख को मिटाने आता है और चौथा है ज्ञानी कई बार उसके पास खूब सारा नॉलेज हो जाता है लेकिन उस नॉलेज को कहां भुनाना है उसे नहीं पता तो उस नॉलेज को भुनाने वह

00:25:42:16 भगवान की शरण में आता है कि मैं इस नॉलेज का सदुपयोग करूं जैसे आज कहीं ना कहीं हम इस भगवत विज्ञान को लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं मतलब हम चाहते हैं कि जो ज्ञान हमें मिला है उस ज्ञान से हर व्यक्ति ओत प्रोत हो तो इसलिए अगर ये चार कैटेगरी नहीं है तो भगवान को नहीं जान पाएगा इस भूख के बिना इस चीज के बिना एक्चुअली ये चल रहा था कि अ श्रद्धावन को ज्ञान देना ही नहीं है तो वह बात आ जाती कि अगर ऐसा है कि जो भगवान को ना मानने वाला व्यक्ति उसको बात ही नहीं करनी है बात खत्म हो गई फिर तो किसी को नहीं कई तरह की अज्ञात स्वीकृति होती है बिल्कुल

00:26:23:25 अश्राथ से खारिज कर देगा सामने से खारिज कर देगा और उसका हां इस बात को इस बात को पूरा करते हैं इस बात को पूरा करते हैं क्या हम करते हैं हम कैसे उसको अंदर श्रद्धा पैदा करते हैं है ना श्रद्धा एक इंजेक्शन हम श्रद्धा वाला इंजेक्शन कैसे लगाते हैं मैं यह आपको बताने जा रहा हूं आप कह रहे हैं अश्राथ अलाव नहीं करता किसी किसी मैं कह रहा हूं देना नहीं है मगर डायरेक्ट फॉर्म है अपने पास कि नहीं है नास्तिकता का खंडन है नहीं हमारे पास प्रभु जी नास्तिकता का खंडन तब है जब भाई बिना एक्सेप्टेंस के कोई व्यक्ति क्यों आपको स्वीकार करेगा उसके अंदर एक्सेप्टेंस तो होना चाहिए हमारे पास ऐसे ऐसे विद्वान आए हैं तो क्या हमारे पास नास्तिकता नास्तिकों का मुंह बंद कराने के लिए कुछ नहीं है प्रभु जी नास्तिकों का मुंह बंद कराने के लिए कोई कहेगा मैं ये करूंगा ही नहीं तो आप उसके क्या कर बात उसकी जो बात है लॉजिकली निराधार निरुत्तर होने लगे वो बात बिल्कुल प्र जीी आप जैसे ही भगवान के बारे में अस्तित्व की बात करते तो भगवान का अतिव कैसे इस बात को हम प्रूफ कर सकते हैं जैसे आप भाई अगर आप कहते हैं पानी है तो पानी का आप एक फॉर्मूलेशन करते हैं भाई h2o ये इसका केमिकल

00:27:39:00 फार्मूला है ये h2o है सी तरह भगवान के जो गुण है मैंने कहा सड स्वर से युक्त भगवान है और भगवान को मानना पड़ेगा क्योंकि वे अनादि आदिर गोविंद जिनका ना तो आदि है ना अंत है चलिए ठीक है तो इसको तो हम मान लेते हैं कि भाई हर व्यक्ति को मोक्ष चाहिए और मोक्ष का जो स्त्रोत है वो भगवान है और वो है ये हम मान लेते हैं और उनको प्राप्त कराने वाली विधि का नाम धर्म है जी अब इसमें एक बात ये आती है कि वैसे एक टॉपिक और था सर्व धर्मा परत वो बड़ा अच्छा टॉपिक है जी जी जी बिल्कुल तो अच्छा ये जो बात आती है कि ये जो अन्य जो रिलीजस है जैसे इस्लाम हुआ और क्रिश्चियनिटी हुई तो इनको इस कौन किस तरह से देखता है कि वहां पर पूजा किसकी हो रही है क्रिश्चियनिटी में और कुरान के द्वारा किसकी पूजा हो रही है किस तरह से दिखता है इस को में प्रभु जी हमारे अनुसार इस कन के अनुसार पूरा का पूरा यह जो विश्व है यह सनातन धर्मी है किसी और धर्म का कोई अस्तित्व नहीं है जिसे हम क्योंकि धर्म धर्म जब शब्द कहते तो सनातन धर्म का मतलब होता सेवा धर्म और हर व्यक्ति किसी ना किसी की सेवा करता है किसी ना किसी की सेवा करता निठारी वाले किसकी सेवा कर रहे थे

00:28:54:19 मेरे कहने का तात्पर्य य है कि हर व्यक्ति किसी ना किसी की सेवा करता मैं अभी आपके पहले प्रश्न का उत्तर फिर आपके निठारी वाले प्रश्न का उत्तर है ना जैसे अगर कोई भगवान की सेवा नहीं करता अगर कोई भगवान की सेवा से हो जाता है जी तो वह अमेरिका वाले घर में कुत्ता पाल लेते हैं वो कुत्ते की सेवा करते हैं दैट मींस सेवा करना है बस लोगों को यह अनभिज्ञता है सेवा किसकी करनी है इकन के अलावा इकन सॉरी इकन सनातन धर्म के अलावा किसी धर्म को किसी भी धर्म को नहीं मानता क्योंकि कोई और धर्म का अस्तित्व नहीं है बाकी जो धर्म है यह धर्म कालक्रम में लोगों के द्वारा अलग-अलग प्रयोजन से निर्माण किए गए क्योंकि पूजनीय तो सनातन धर्म में जैसा कि ब्रह्मा जी ने कहा रामाद मूर्ति सु कलानी मेन तिष्ठ नाना अवतार म क्रोध भुनेश किंतु कृष्ण संभवत परम कुमान गोविंद आदि पुरुषम तम भजामि तो इस प्रकार से जो भगवान के विभिन्न स्वरूप है इन्हीं की पूजा करना यही इन्हीं की सेवा करना यही हमारा मूल धर्म है वो तो है ठीक है हां ये जो कुरान और इस्लाम मतलब इस कुरान के द्वारा पूजा किसकी हो रही है और क्रिश्चियनिटी के द्वारा पूजा किसकी हो रही है इस बारे में इसन का क्या कहना है

00:30:08:20 कुरान जिसमें मोहम्मद पैगंबर साहब ने कुरान को जो यहां पर लेक आए उन्होंने कहा मैं मैसेंजर हूं मैं एक संदेश वाहक हूं किसका उनका भगवान का उन्होंने भी अपने आप को भगवान के पुत्र के रूप में स्थापित किया मैसेंजर के रूप में उनके दूत के रूप में आप कुछ भी कह लीजिए तो उन्होंने पित किया तो इस कौन मानता है कि वे थे तो भगवान के मैसेंजर लेकिन आपने कहा ना वो अश्र ाल वाली बात तो ये उस ऐसे समुदाय के लिए इस ज्ञान को लेकर आए जो समुदाय भगवान को पूर्ण रूप में समझने के लायक नहीं था या पूर्ण रूप से नहीं समझ पाया तो उन्होंने कुछ क्रियाकलाप सिखाए कुछ नियम सिखाए क्योंकि यह अरब कंट्री से शुरू हुआ उस जगह से शुरू हुआ जहां पर लोग भगवान को जानने का प्रयास ही नहीं कर रहे थे या भगवान को समझ पाने में सक्षम नहीं थे इसलिए कुरान कुरान की मैक्सिमम शिक्षाए बहुत सारी शिक्षाएं जो है वह हमारे जो धर्म ग्रंथ है उनसे मिलती है लेकिन उसमें आज जो लोग कुरान पढ़ते हैं जिसमें मैक्सिमम चीजों को कन्वर्ट कर दिया गया बदल दिया गया जिसकी शिक्षाओं को कहीं भी कुरान कहीं पर हिंसा करने की अनुमति नहीं देता है ना

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00:31:15:02 नहीं नहीं मेरा प्र इसलिए इसलिए वे उस क्योंकि उन्होंने भगवान के स्वरूप को भगवान के तीन स्वरूप बताए गए पहला भगवान का स्वरूप पहला ब्रह्म स्वरूप दूसरा परमात्मा स्वरूप और तीसरा एज इट इज भगवान इसको मैं दूसरे एग्जांपल समझ समझाता हूं जैसे सूर्य का प्रकाश सूर्य लोक और सूर्य देव ये तीन स्थिति है वैसे ही भगवान के र स्वरूप है इसलिए वे अल्लाह को निराकार समझते हैं है ना वो समझते हैं मगर अल्लाह निराकार नहीं है नहीं है बिल्कुल जी जी ब हमारे एक गुरु महाराज हुए वे एक बार जा रहे थे सऊदी अरब जा रहे थे तो उनको रास्ते में उनके फ्लाइट में उनको एक मुसलमान मिला और उनसे उन्होंने बात की तो बोले आप क्या ये हाथ में लेकर माला जप रहे हो बोले हम अपने भगवान का नाम जो है वो जप रहे हैं तो बोले फिर तो लेकिन भगवान को इतना कहने की क्या हो सकता है भगवान तो सब कुछ जानते हैं तो निराकार है सब जगह है बोले उसके लिए पूजा करने के लिए आप लोग मंदिर में जाते हो फिर ये घंटी घंटा बजाते हो फिर आप उनको भोग लगाते हो खाते हो ये करने की क्या हो सकता है तो महाराज ने उनसे प्रश्न किया बोले आप रोज अजान करते हैं बोले हां तो बोले क्या आपके अल्लाह सुनते हैं कि नहीं

00:32:30:07 बोले हां हां सुनते हैं बोले सुनते हैं मतलब कान होगा ना उनका अब वो कन्फ्यूज्ड हो गए कंफ्यूजन में आ गया कि भाई है कि नहीं कान मैं हां बोलू कि ना बोलू तो अगर आप लॉजिक देखें जिस लॉजिक की बात करें तो ये लॉजिक है कि सुनते हैं दैट मींस कान है है ना तो बोले आपके अल्लाह देखते हैं बोले हां हां सबको देखते हैं बोले इसका मतलब आंख है तो फिर आप अल्लाह को ये क्यों कह रहे हो कि निराकार है जिसके आंख कान शरीर है जिसका मतलब उनका एक साकार स वैसे यहां पे एक काउंटर क्वेश्चन हो सकता है आनंद आ रहा है इसलिए मैं उठ बेस कर रहा हूं जी आप ये बताइए जो भगवान है वो एक पत्थर का स्वरूप ले सकते हैं या नहीं ले सकते हैं उस समय वो सुन सकते हैं कि नहीं भगवान सुन सकते हैं ये तो फर उस समय उनके कान है ये तो उनके लिए ये उनके लिए लॉजिक था उस समय क्योंकि उनकी अनभिज्ञता थी अब रही बात कि आपकी इस बात का तो इसी बात का उत्तर ब्रह्मा जी ब्रह्म संहिता में देके अंगा यस्य सक्रिय वृत्ति मंती पश्यंति पांति कलय चिरमि कहते भगवान अपने हर एक अंग से हर दूसरे अंग का कार्य कर सकते हैं भगवान आख से देख भी सकते हैं आख से खा भी सकते हैं आंख से सुन भी सकते हैं और आंख से चल भी सकते उसी तरह से उनका हर एक अंग सभी अंगों का काम कर सकता है तो भगवान पूर्ण है

00:33:41:25 क्वेश्चन ये था कि कुरान के द्वारा पूजा किसकी हो रही है क्योंकि हमने जो जैसे कि इस कोन के जो डिवटी है उनको सुना भी है और कुछ बुक्स भी है तो उसमें कहा जाता है कि कृष्ण और अल्लाह और जो क्राइस्ट है बाइबल का ईश्वर ये एक ही है वो लोग नहीं जानते बात अलग है तो इसमें आपका क्या कहना है मैं इस बात पर इसमें कैसे संदेह हो सकता है जब मोहम्मद पैगंबर साहब ने कहा कि मैं भी उन्हीं परमात्मा का उन्हीं का मैसेंजर हूं बस उन्होंने नाम बदल कर बताया शायद लोग ना मानने को तैयार रहे हो इसलिए उन्होंने नाम बदल कर बताया है ना तो बिल्कुल यदि आपके अंदर श्रद्धा है तो बिल्कुल अल्लाह को आप कह सकते हैं कि वो कृष्ण के स्वरूप है लेकिन अल्लाह बस वो जानते नहीं है क्योंकि अल्लाह उन्हीं कृष्ण उन्हीं राम उन्हीं के अंश हैं अब उनकी अनभिज्ञता है जैसे कई बार बच्चे को टेबलेट लड्डू के अंदर मिलाकर खिलाई जाए ताकि

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00:34:36:06 वो बच्चा खा ले उसे मतलब जहां पर जो कोई भी जिसकी पूजा कर रहा है वो कृष्ण की ही पूजा कर रहा है मगर वो बस उसकी जानकारी अधूरी है ऐसा है मैं ऐसा तो नहीं कहता कि जहां पर जो कोई भी पूजा कर रहा है वह कृष्ण की ही पूजा कर रहा है यदि आप कह रहे हैं कि भगवान कौन है तो भगवान के अंश भगवान के अंश सभी है और मोहम्मद पैगंबर साहब ने उसको समझाया इस तरीके से बाकी मैं यह नहीं कह रहा हूं कि वो कोई किसी की भी पूजा करे मतलब अर्थहीन क्योंकि

00:35:06:07 कुरान की यदि आप शिक्षाओं को एज इट इज फॉलो करें तो आप भी कहीं ना कहीं आप कुछ स्टेप आगे बढ़ेंगे इस भक्ति पथ पर

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00:35:14:12 अल्लाह और कृष्ण एक है कि नहीं अकॉर्डिंग टू स्कन अकॉर्डिंग टू इकान अल्लाह और कृष्ण एक नहीं है लेकिन फिर भी जिस तरह से अंशा स्वरूप हम सब अंश हैं जैसे भगवान के विभिन्न अवतार हो सकते हैं तो हो सकता है कि अल्लाह भी कोई अवतार हो नहीं मगर आपकी बुक्स में तो लिखा है अल्लाह और कृष्ण एक है बुक्स में अल्लाह और कृष्ण को एक नहीं बताया गया है बताया गया अल्लाह इसको इस तरह से समझिए इसीलिए मैं कह रहा हूं कि जिस प्रकार से हर आत्मा परमात्मा का अंश होती है यदि आप भगवान शब्द की व्याख्या करें तो भगवान शब्द में मतलब भगवान कृष्ण है लेकिन फिर भी यदि आप अल्लाह को कहेंगे कुछ अच्छे डिवटी भी हैयर रैंक वाले जी ने भी मेंशन किया है कि अल्लाह कृष्ण और क्राइस्ट एक है इस तथ्य पर मुझे लगता है कि मुझे मुझे लगता है किताब में शीला प्रभुपाद ने ऐसा तो मेंशन नहीं किया ये पहली बात तो डिवटी ने दिया है और आपकी एक बुक है कृष्णा वो मैं जानता हूं उसमें लिखा हुआ है फ्रंट पेज प भूमिका शुरू होती है वो आपका छप रहा है अभी अंदर भी रखी लिखा है इसको इसीलिए मैंने कहा इसको किस तरह से समझा जाए मतलब आप मतलब यह नहीं प्रूफ कर सकते कि क्रिश्चन

00:36:29:18 जो है यह सनातन धर्मी है या फिर हम ये कहते हैं हम कहते हैं आपको अगर ऐसा होता तो हम उनको यह कहते आप अल्लाह अल्ला ही नाम लो आपको बाकी सनातन धर्म फॉलो करने की आवश्यकता ये क्यों कह रहे कृष्णला क्यों छाप रहे य लोगों

00:36:45:10 की श्रद्धा सबसे पहले लोगों को एज इट चीजों को समझाने के लिए मैंने कहा उनका ज्ञान अधूरा है लेकिन सनातन धर्म का ज्ञान पूरा है

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00:36:53:10 तो हम कम से कम उ ऐसा है नहीं कला एक नहीं मगर हम लिख रहे हैं इसको ऐसे समझ सकते हैं कि कृष्ण और अल्लाह आप यह तो मानते हैं ना आत्मा परमात्मा का अंश है जी है ना तो ओबवियस है कि अगर अल्लाह यदि वोह कह रहे हैं अगर अल्लाह का डिस्क्रिप्शन जो दिया हुआ है नहीं नहीं यदि वाली बात नहीं अगर अल्लाह का डिस्क्रिप्शन यदि अल्लाह का डिस्क्रिप्शन यदि अल्लाह का डिस्क्रिप्शन यही है कि वो सवर से पूर्ण है तो बिल्कुल वो कृष्ण है भगवान और अल्लाह में है कुरान में व नहीं है सवर से पूर्ण सवर से अगर पूर्ण नहीं है अल्लाह तो फिर अल्लाह कृष्ण नहीं है तो फिर आपकी बुक में क्यों लिखा है और आपके कई जो कमेंट्री उसम दिया गया है कि अल्लाह और कृष्ण और आपके कई डिवटी कह रहे हैं मैं नहीं कह रहा हूं कह रहे ऐसा क्यों है पता नहीं प्रभ यह तो मुझे आप उस तथ्य को देखना पड़ेगा इसको काट लीजिएगा एक मिनट पज कर तो बुक म बुक मंगा लेते मैं देख लेता हं उसम क्या

00:38:03:19 अल्लाह यहोवा यह सभी कृष्ण है यवा बाइबल का ईश्वर है ठीक अब अब इसकी व्याख्या कर लेते मतलब साकार फम ठीक है तो इसको पीछे से लेंगे है ना जहां से अपन पहले तो य कि लिखा है आप अब इसको प्रू कर लेंगे को नहीं जी शीला प्रभुपाद ने जैसा आपने देखा श्रीमद ये जो श्री कृष्णा बुक है पुण पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण प्रभुपाद वहां पर लिख रहे हैं कि ये सारे चाहे वोह अल्लाह हो जिनको जवा का वर्णन किया गया राम कृष्ण बोले ये सभी एक है लेकिन वो कह रहे हैं कि ये निराकार नहीं है जैसा कि उन्होंने वर्णन किया है सारे साकार है उसम यह बात लिखी हुई है है ना ये निराकार नहीं है यह सभी साकार है बिल्कुल ऐसा है अच्छा इसमें यह बात आती है जैसे हम लोग य क्लेम करते हैं

00:39:08:07 कि जो कुरान में जो शिक्षाएं है वो बदल दी गई है या कुछ ऐसा क्लेम करते वो समझ नहीं पा रहे हैं वास्तव में ऐसा है और उसके ये है तो जैसे हम एक तरफ कहते हैं कि ज्ञान परंपरा से आता है ठीक है तो अगर हम कुरान को सही से जानते हैं हा या बाइबल को सही से जानते हैं बक तो वो कुरान वाली बुक का ज्ञान है वो हमारे पास किस परंपरा से आया है जो हम क्लेम कर रहे हैं उसे ज्यादा सही से जानने की बल उन लोगों की अपेक्षाकृत जिनके पास वो परंपरा से आ रहा है हां ओबवियस मोहम्मद पैगंबर जैसे मोहम्मद जी ने जब आए तो कुरान कंपाइल हुई उनके जाने के बाद उसके बाद वो पीढ़ी दर पीढ़ी जो चेन ऑफ नरेशन उनकी चल रही है वो लोग जो क्लेम कर रहे हैं कि नहीं हमें मोहम्मद जी ने ये बताया है मगर हम क्लेम कर रहे हैं नहीं नहीं यहां पर मुसलमान गलत समझ रहे हैं हम सही समझ रहे हैं तो हमें पुराण का ज्ञान परंपरा से किस तरह से प्राप्त हुआ जो हम क्लेम कर रहे हैं कि नहीं तुम गलत जान रहे हो हम सही जान रहे हैं तो देखिए हमें परंपरा से प्राप्त हुआ क्योंकि शीला प्रभुपाद ने ऐसे कई ऐसे कई अ जितने मौलवी थे या उस समय जो धर्माधिकारी थे वहां के उनसे कई बार उ उनसे बात हुई इसी तरह से कई पादरियों से बात हुई जब उनसे बात हुई उनकी व्याख्या हों पर गहन चर्चा हुआ तो पता चला कि

00:40:23:14 आप जो कह रहे हैं इसमें आपको कंफ्यूजन है क्या आप इसके अर्थ को कहीं गलत तरह से एक्सप्लेन तो नहीं कर रहे हैं नहीं नहीं बात ये आती है कि अगर कुरान का जो चैन ऑफ नरेशन से जो आ रहा है या बाइबल का जो आ रहा है अगर वो ये कह रहा है कि नहीं ये जो ईश्वर है कुरान का वो निराकार है तो फिर हम उस परे ये क्लेम कैसे कर रहे हैं कि नहीं वो निराकार नहीं है वो साकार है तुम शब्दों का अर्थ नहीं समझ पा रहे हो हम समझ रहे हैं जबकि हमें वो परंपरा से प्राप्त नहीं है हमारी परंपरा तो गुरु परंपरा इधर है मधुवा चार्य जी की वहां से कुरान का कोई ज्ञान आया नहीं है तो फिर हम वहां कैसे क्लेम कर सकते कि नहीं तुम गलत समझ रहे हो कर ही नहीं सकते ऐसा कुरान में कहीं नहीं लिखा हुआ है कि जो अल्लाह है वो निराकार है उसमें कई जगह ऐसा लिखा हुआ है जैसे आपको एक छोटी सी बात बता द 6 150 में लिखा हुआ है कि उसकी कोई संतान नहीं हो सकती य यहां जो ईश्वर है वो अपूर्ण हो गया हा क्यक उसम अभाव आ गया किसी चीज का बा और हमारे जो ईश्वर है वो कहीं से भी कितनी भी संतान निकाल सकते ब तो वो पूर्ण ईश्वर है तो वो तो एक डि गया अल्लाह और कृष्ण एक नहीं है मगर हम यह कह रहे कि अल्लाह और कृष्ण एक है क्योंकि हम यह कह रहे कि तुम कुरान का अर्थ नहीं समझ पा रहे हो अब कुरान में लिखा है 6 150 में कि मेरी कोई

00:41:38:15 संतान नहीं हो सकती जबक मेरी कोई पत्नी ही नहीं है तो हम ये क्लेम कैसे कर रहे हैं फिर कि नहीं हमें कुरान ज्यादा समझ में आती है तुमको नहीं

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00:41:46:10 मैं कह रहा हूं कई बार तो ऐसा होता है कि शब्द बिल्कुल खुल के कुछ और चीज कह रहा है मगर हम उसको भी परंपरा के ज्ञान की वजह से बदल देते हैं होता है कि नहीं ऐसा शब्द बिल्कुल जो नगन शब्द का अगर नग्न अर्थ निकाले तो कुछ और ही निकल रहा है मगर हम पूरा का पूरा डायवर्ट कर देते हैं कि हमें क्योंकि परंपरा से मिला है इसका अर्थ ये नहीं है ठीक है तो फिर जब वहां पर

00:42:07:14 कुछ शब्द ऐसे हैं जो ईश्वर को बाध्य कर रहे हैं है ना उसका भी अर्थ हम ऐसा कर रहे हैं कि नहीं हम जो कह रहे हैं वो सही है और तुम जो कह रहे हो वो गलत है जबकि हमारे पास कुरान का परंपरा से ज्ञान नहीं आया तो मैं यह कैसे कहूं कि 6 150 में जो लिखा हुआ है वह परंपरा से आया है क्योंकि कुरान को आप जानते कहां से हो कुरान कैसे कर रही है आपके आपकी जानकारी बताइए उन्हीं से कुरान को आज आप जानते हैं बिलकुल कुरान हम उनसे ही जानते तो फि तो फिर जो कुरान के लिए ये कह रहा है कि 650 में ऐसा लिखा है उसको हम नाई नहीं कर सकते अगर हम उसको आप इस तरह से अगर आप देखेंगे तो आज लोगों ने आज हमारे शास्त्रों में सनातन धर्म के कई शास्त्रों में लोगों ने फेर बदल कर दिए तो परंपरा से हम पहचान लेंगे ना हमारे गुरु है परंपरा से बता दि बिल्कुल उसी तरह से हमारी परंपरा में हमारे गुरु महाराज ने हमको ये बताया इसलिए हमको हम मानेंगे कुरान हमारी परंपरा में नहीं है ना कुरान हमारी परंपरा लेकिन हमारे गुरु महाराज तो परंपरा में है ना उनकी वाणी पर तो हमको भरोसा करना होगा भाई कुरान भाई क्योंकि उन्होंने डिस्कस करके यह बताया अगर उन्होंने डिस्कस करके बताया तो हमें मानना हो गुरु परंपरा से क्योंकि इंफॉर्मेशन आप उनकी परंपरा में घुसने मैं नहीं जाऊंगा मैं अपनी परंपरा में ही बात करूंगा क्योंकि मुझे नॉलेज कहां से आता है मेरी परंपरा से पूछ रहा हूं शील प्रभुपाद जी के पास कुरान का किस परंपरा से ज्ञान आया है जो वो क्लेम कर रहे हैं कि श्लोक

00:43:22:14 है कि नहीं है जो भी है अब यह बात भाई यह बात मुझे इस तथ्य की एजेक्ट जानकारी नहीं शी प्रभुपाद के पास ये एक चीज बताइए कि बिना परंपरा के क्या ज्ञान प्राप्त हो सकता है इस मानते बिल्कुल तो क्या कुरान का ज्ञान बिना परंपरा के आ सकता है नहीं तो इसका मतलब कुरान पर हम क्लेम नहीं कर सकते उसमें तुम जो कह रहे वो नहीं जो हम कह रहे हैं वो लिखा है क्योंकि हमारी कोई परंपरा नहीं है कुरान से जुड़ी हुई हमें वही मानना पड़ेगा जो कुरान प्रभु जी प्रभु जी एक लाइन कर ल जो जो हमें कुरान दे रहा है उसी पर हमको रिलाई करना पड़ेगा कि भाई तुम जो कह रहे हो 650 अगर कुरान को हम

00:44:08:09 एसिस्टेंसिया फिर ऐसे इसकन में बहुत सारे फॉलोअर हैं जो कि मुस्लिम से आज सनातन धर्मी हो गए हैं ठीक है ना यदि हम उनसे बात करते हैं जब हम उनसे यही हिंदी अनुवाद जो आप 6 150 की बात करते हैं कहते हैं ऐसा नहीं है यदि आपको एग्जैक्ट चाहिए तो आप अरबी भाषा में से पढ़ना पड़ेगा हमारे ऐसे मुस्लिम भाई है जिन्होंने इसको बताया है कि आप हमें यहां पर जो परोसा जा रहा है वो गलत तरीके से परोसा जा रहा प्रभुपाद जी की गुरु परंपरा के कुछ नाम बता दीजिए थोड़ा सा दो चार पाच कुछ भी जी शीला प्रभुपाद के गुरु महाराज भक्ति सिद्धांत ठाकुर उनके गुरु महाराज गौर किशोर दास बाबाजी महाराज उनके गुरु महाराज भक्ति विनोद ठाकुर उनके गुरु महाराज जगन्नाथ दास बाबा अब कुरान की परंपरा बताइए थोड़ी सी कुरान की परंपरा मुझे नहीं पता तो फिर हम उसको ढूंढे ना जो कुरान का परंपरा प्राप्त व्यक्ति हो और उसकी बात को माने ना कि ऐसे कि किसी ने कह दिया कि वहां उर्दू में लिखा है अरबी में लिखा है तो बहुत मेरे लिए ज्ञान का स्रोत मेरी परंपरा होगी और मेरी परंपरा मेरे गुरु महाराज है और मेरे गुरु महाराज अगर शिला प्रभुपाद ने कहा है तो मैं ये बात एक्सेप्ट करता तो फिर हमें जानना होगा ना कि आपके गुरु श्री प्रभुपाद जी ये बताते हैं कि वई आई एम ऑथेंटिक बताते हैं ना क्योंकि उन्होंने अपनी परंपरा बताई अगर वो कुरान का ज्ञान

00:45:23:12 होने का दावा कर रहे हैं तो उन्हें अपनी परंपरा बतानी पड़ेगी ना कुरान का ज्ञ कैसे आया उनके पास ठीक

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00:45:29:10 है यह तो फिर य चर्चा का विषय है मतलब एक ऐसा विषय है जिस पर हम लंबा चर्चा कर सकते ब अच्छा इसमें अब एक बात य आती है जैसे की जो कुरान में लिखा हुआ है कि ईश्वर वो नहीं है बहुत सारे डिफरेंसेस है शिक्षाओं के मगर फिर भी हमने बुक में लिख दिया कि ईश्वर और क्या कहते हैं अल्लाह एक है और मुझे जो अभी तक बताया गया है कई बार यह भी बताया गया कि नहीं मान ईश्वर अल्लाह एक है मगर कई बार य बताया गया है कि मुस्लिम्स को अपने धर्म में लाना है इसलिए ऐसा बोल दिया ऐसा बोल दिया गया क्योंकि मुस्लिम्स को कन्वर्ट करना है क्रिश्चन को कन्वर्ट करना है इसलिए ऐसा बोल दिया गया ये भी एक आंसर आता है मगर प्रॉब्लम ये आती है कि फिर दूसरी जगह पर शिव पुराण का जो ईश्वर है यानी कि शिवजी तो जब यहां पर अल्लाह का मान रख रहे हैं जो कि कुरान के अल्लाह है उसका मान हम रख रहे हैं बाइबल के क्राइस्ट का हम मान रख रहे हैं कि कृष्ण क्राइस्ट और अल्लाह एक है मगर जब बात आ जाती है कि शिव जी की यहां तक कि कई जगह पर तो विष्णु जी को भी अलग कर दिया गया है मगर अभी मैं शिव जी की बात कर रहा हूं तो यहां पर मान क्यों नहीं रखा गया कि शिव पुराण वालों को भी अपने में लाने के लिए हम ये बोल दे झूठे मु कि भाई शिव और कृष्ण एक है ये ये एक प्रासंगिक विषय है वो

00:46:44:20 आपके सामने है जी देखिए झूठे ही नहीं कह रहे अब इसमें कहीं भी झूठ वाला शब्द नहीं है कि हम उनको लाने के लिए हम झूठे ही कह दे रहे हैं ठीक है ना मैंने जैसा मानते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है बिल्कुल लेकिन वो साकार स्वरूप में है आप एक चीज जान लीजिए पूरे संसार में हर जीवात्मा कृष्ण का ही अंश है हर जीवात्मा ठीक है तो यदि उसके द्वारा अगर भगवान कोई प्रासंगिक शब्द है तो उसे हम उसी कृष्ण उसी राम से हम पूछते हैं अब जहां तक आपने प्रश्न उठाया कि शिव जी को ये स्कन वाले क्यों नहीं मानते किसने कहा इसकन वाले शिव जी को नहीं मानते या शिव जी को हम अलग कर देते हैं मानते नहीं अब एक स्वरूप की बात सुनि सु मानना प्रभुजी उस प्रश्न उतर अगर मैं ये बात कहूं तो आपको लगेगा अच्छा ये कौन वाले कह रहे हैं ब्रह्मा जी ये बात कह तो मानेंगे ना आप अपनी बात आप अपनी बात बोल लीजिए पूरी ब हां ब्रह्मा जी ब्रह्मा जी कहते हैं इसी शिव जी मतलब कैसे इसको कटेग इज करते अंतर क्या है ब्रह्मा जी ने अल्लाह और कृष्ण को एक कहा है क्या देखिए ब्रह्मा जी ने कृष्ण और अल्लाह को एक कहा है या नहीं कहा है क्योंकि ब्रह्मा जी उस समय जिस समय ब्रह्म सही था उस समय वेदव्यास उस समय पर यह जो अल्लाह आए वो अभी आए

00:48:00:02 अल्लाह आए कब आए अभी इस कलयुग की बात और आपको एक सिद्धांत बता दूं उसम कहा गया है मनुस्मृति में वेद विरोधी नास्तिक होता है और जो कुरान है वेद विरोधी है पैगंबर जो हम कह रहे पैगंबर थे वेद विरोधी थे और जो बुद्ध है जो बौद्ध का व विस्तार वो भी वेद विरोधी था और जो क्रश्न आप ये कह रहे बुद्ध जी भगवान के अवतार नहीं मि और क्रिश्चियनिटी है वो वेद विरोधी है तो वेद विरोधी नास्तिक होता है तो हम यहां पर जो मनुस्मृति का वो है सिद्धांत होने के बाद बाद भी कि कुरान जो है कुरान को कहने वाला कुरान का ज्ञान और कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर ये सब नास्तिक मत है क्योंकि वो वेद विरोधी है तो हम कह रहे हैं कि तब भी इसको लिखे होने के बाद भी हम इस आज्ञा को नहीं मान रहे और हम कह रहे कि ईश्वर वो कृष्ण और अल्ला एक और वहीं पर जो शिव पुराण है जो हमारे सिद्धांतों की सीमा के अंदर उसके द्वारा जो पूजित होने वाला ईश्वर है उसको हम कह रहे हैं नहीं जो शिव दुर्गा काली के नाम को भगवान के नाम के समान समझने वाले पापी और मूर्ख है प्र जी आप इस चीज को समझिए समान और असमान की व्याख्या आप दूध और दही को एक कहते हैं नहीं क नहीं कहते ना तो यही बात तो ब्रह्मा

00:49:15:04 जी कह रहे ीरमण रहे हैं ना हां की बा नहीं माने प्र जी क्यों नहीं मा प्रभु जी वेद विरोधी नास्तिक आप जिस तथ के हमने कहा हमने कहा हम इन्ह साकार स्वरूप में कह रहे हैं हम इनकी व्याख्या कर रहे हम उनको प्रेज कर रहे हैं वैष्णव कह रहे हैं जो पैगंबर जिसने मूर्तियां तोड़ी हम बहुत क्लियर अच्छा एक बात बताइए कई ऐसी बुक्स है उसम वो दिया गया है कि जैसे अर्जुन ने ये किया तो मोहम्मद ने ये किया कप कंपैरिजन चल रहा है भक्त के साथ जो पार्थ है उसके साथ तो हम उसको कर रहे जबक मनुस्मृति कह रही वेद विनोद नास्ति पहली बात अच्छा जो आपने वो कहा ना दूध दही वाली बात हा ब्रह्मा जी वाली ब्रह्मा जी नेय कहा तो इसमें एक वो निकल के आता है कि हम कहते हैं कि हमारे ईश्वर पूर्ण है जिसको हम मानते हैं और ईश्वर पूर्ण का मतलब सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रम मतलब ईश्वर किसी भी तरह के व्यवधान से रहित है ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है वो सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है हम ठीक है यानी कि दुनिया का कोई भी ऐसा

00:50:30:07 कार्य नहीं है जो हमारा ईश्वर नहीं सकता बिल्कुल ईश्वर सर्व सामर्थ्य वान है अब हम कह रहे हैं कि जिस प्रकार दूध से दही नहीं बन सकता दूध से दही बन सकता जिस प्रकार दूध से तो दही बनता है पर दही से दूध नहीं बन सकता उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बनते हैं मगर शिव से कृष्ण नहीं बन तो यहां पे शिव कौन बने शिव एक एक्सपेंशन है श्री कृष्ण की तो यानी कि कृष्ण ही शिव बने मगर शिव बनने के बाद बाधित हो रहे हैं दूध दही बनने के बाद वापस इसलिए अपनी फॉर्म में नहीं आ पा रहा है क्योंकि वो बाधित है वो पूर्ण नहीं है अभाव ग्रस्त है और हमारे ईश्वर तो पूर्ण है तो शिव के रूप में आकर के उ बाधित कैसे हो जा रहे है तो ये एग्जांपल सेट नहीं हो रहा है पूर्ण ईश्वर पर जी अब इसको इस तरह से हमें समझना चाहिए क्योंकि जब हम भगवान की बात करते हैं या हम ईश्वर की बात करते हैं तो भगवान के तीन गुणा अवतार है भगवान के ती सदगुण अवतार में जिसमें आप विष्णु जी रजोगुण अवतार में आप ब्रह्मा जी और तमोगुण अवतार में आप शिव जी को देखते इस तरह से तीन अवतार हैं अब जब भगवान के हम इन अवतारों को अलग-अलग स्वरूपों में देखते हैं और हम इसको समझने का प्रयास करते हैं तो अगर ब्रह्मा जी यह बात कह रहे हैं तो आप इसमें मेरे तत्व क्योंकि कह रहे हैं कि शिव जी है कौन शिव जी को परिभाषित कर रहे हैं ना ब्रह्मा जी किरे शिव जी बने कैसे शिव

00:51:45:14 जी कैसे हुए देखिए ऐसा है कि कई बार हमारे ग्रंथों में बात जो लिखी गई प्र जी ये अपनी अपनी अंडरस्टैंडिंग ये अंडरस्टैंडिंग आपकी है मेरी अंडरस्टैंडिंग मेरी बात तो आपने सुनी नहीं तो अंडरस्टैंडिंग कैसे कह रहे बात तो सुनिए हा ऐसा है कि कहीं कहीं पर अनन्य का भाव लाने के लिए जो आपका ईस्ट है उसमें आपकी अनन्य का भाव आ जाए इसलिए ऐसे कुछ वचन आते हैं जिससे कि वो आपकी अन्यता को पोषित करे जैसे कि आपकी भगवत गीता में प्रभुपाद जी लिख रहे हैं कि सिर्फ कृष्ण ही ऐसा कह सकते हैं कि वो पूर्ण ऐश्वर्य वान है 2.2 ब्रह्मा विष्णु ब्रह्मा शिव नारायण नारायण भी पूर्ण श्वान नहीं है बताइए क्या नारायण को पूर्ण स्वान मानते हैं कि नहीं मानते नहीं मानते मतलब नारायण भी पूर्ण भगवान नहीं है अंतर है उन अच्छा तो मुझे तो अभी तक यही बताया गया था रस की दृष्टि से कह दिया गया है वहा पर अब जिसने बताया मतलब विष्णु भी कृष्ण से कमतर है बकुल अच्छा तो कितने तत्व है फर दुनिया में टोटल हम हमें पता था जीव जग जगदीश्वर अभी एक विष्णु तत्व और आ रहा है अलग से जी देर आर त्वा है ना विष्णु तत्व मतलब कुल मिला के

00:53:01:07 और जीव तत्व शक्ति तत्व ये एक चैप्टर अलग खुल जाए प चल रहा था वो ल जाए कि पहली बात तो ये कि इकोन के अनुसार जो विष्णु भगवान है वो कृष्ण भगवान से कम शक्तिशाली है कम है इसको आप ऐसा समझिए इसको हम विस्तार कहते हैं है ना जब क्योंकि कृष्ण जो है इनको परम ईश्वर कहा गया है कृष्ण से जब विस्तार होता है तो उस विस्तार के बाद कृष्ण से संकर्षण आते हैं अब उस संकर्षण से विस्तार के बाद तीन प्रकार के विष्णु है कारणो दक्षा विष्णु गर्भ दक्षा विष्णु और शिरो दक्षा विष्णु कारण सागर में जो लेटते हैं जिनके श्वास और प्रश् वास से हर एक उनके रोम कूप से एक एक ब्रह्मांड उत्पन्न होता है ठीक है और ऐसे ब्रह्मांड के अंदर आधे भाग में जल भरा हुआ है जिसे हम

00:53:54:02 गर्भधारण है जिनके नाभी कमल से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति होती है और यह गर्भ दक्ष छाई विष्णु यह गर्भ दक्ष छाई विष्णु जिनसे ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई और इसी ब्रह्मांड के अंदर इस ब्रह्मांड के अंदर जो क्षीर सागर है उस क्षीर सागर में शिरो दक्षा विष्णु जो परमात्मा स्वरूप में हर जीव के अंदर जाकर प्रवेश करते हैं तो यदि यह विस्तार है तो अगर आप इसको मैथमेटिकली दृष्टि से देखें है ना हम जब इसको मैथमेटिक्स के दृष्टि से देखते हैं तो अगर 100% अगर हम ऐश्वर्य को देखें या क्वालिटी को देखें जिसको हम कृष्ण कह रहे हैं तो जो सभी के अंदर मैथमेटिकली कुछ परसेंट की कमी आती है इसलिए हम सामान नहीं कर रहे हैं लेकिन इसको हम मात्रात्मक रूप से भिन्न कर रहे हैं गुणात्मक रूप से भिन्न नहीं कह रहे हैं तत्व सेम है विष्णु सारे विष्णु तत्व है नहीं नहीं मैं कह रहा हूं कि जो सब काम कृष्ण कर सकते हैं वो सब कार्य विष्णु कर सकते हैं कुछ एकत कम है जिस प्रकार से कलाओं में अंतर होता है उसी प्रकार से मात्रात्मक रूप से बिल्कुल अंतर है बिल्कुल कम है विष्णु कम कर सकते अब दिक्कत ये आती है आपने कहा कि शि जो श्री कृष्ण ही विष्णु बन रहे हैं ठीक है तो बात य आती है कि श्री कृष्ण विष्णु के रूप में वह सारे कार्य नहीं कर सकते तो

00:55:09:13 बाध बाधित हो गया ना ईश्वर रूप उसने बदला तो बाधित हो गया देखिए प्रभु जी इसको कैसे समझना चाहिए आप कह रहे हैं कोई कार्य नहीं कर सकते यह उनका अपना एक लेवल है वो उनका अधिनियम है जिसमें हम प्रवेश करने का प्रयास कर रहे हैं हम जिस प्रकार से जिस प्रकार से राम जी राम जी ने अपनी मर्यादा बनाई जिस प्रकार से कार्नो दक्षा विष्णु के रोम कूपों से ब्रह्मांड निकल रहा है वो गर्भ दक्षा विष्णु के रोम कूपों से नहीं निकल रहा है जिस प्रकार से जो काम मोदी जी कर सकते हैं प्रधानमंत्री जो आर्डर पास कर सकते हैं वो उनके बाकी मंत्री गण नहीं कर सकते तो हर व्यक्ति के पास अपनी अथॉरिटी है एक परम सत्ता है नहीं पहले इसको समझिए है ना एक राजा की एक परम सत्ता होती है और परम सत्ता के अंदर ही सारा कार्य होता है है तो उस कार्य को इस तरह सेने एपल दिया कि मोदी जी जो कार्य कर सकते व उनके जो असिस्टेंट है वो नहीं कर सकते उनके जो और पार्टी के जो थोड़ा सा नीचे वाले लेवल पर कार वो नहीं कर सकते क्योंकि मोदी जी वो नहीं बन रहे मगर यहां पर कृष्ण ही विष्णु है विष्णु ही शिव है तो फिर वो कैसे नहीं कर पा रहे

00:56:18:09 हैं मोदी जी पूर्ण नहीं है मगर हमारे कृष्ण पूर्ण है जैसे हमारे जैसे आपने कहा ना उनका कान भी सब कुछ कर सकता है उनका नेत्र भी सब कुछ कर सकता है क्योंकि वो हर जगह से पूर्ण है ऐसा नहीं है कि वो हाथों से ही कुछ करना चाहेंगे तभी करेंगे तो फिर उसी प्रकार से अगर वो पूर्ण है तो जब वो विष्णु बन जाएंगे तो वो कम थोड़ी ना हो जाएंगे उतने ही रहेंगे पूर्ण तो पूर्ण है और दूसरी बात आपने जो शब्द प्रमाण की बात कही विष्णु भगवान के लिए भी सब कुछ आया है सच्चिदानंद स्वरूप सब कुछ विष्णु सहस्त्र नाम है पूरा का पूरा सब कुछ प्रमाण भी है मतलब शिव जी के लिए भी है और विष्णु भगवान के लिए भी है राम जी के लिए जी ने सारे पुराणों का संकलन किया ठीक है ना उन्हीं पुराणों के संकलन के बाद अंततः नारद मुनि ने भक्ति को स्थापित करने के लिए श्रीमद भागवत का संकलन कराया वहां पे ये कहा गया है कि उन्होंने वेद और जो वेदांग है छह वो लिख दिए थे मगर वो संतुष्ट नहीं थे तो वहां प जो बात हुई पुराण की हुई है वहां प ऐसा नहीं लिखा है कि 17 पुराण वो लिख चुके थे आप चेक करिए वहां पे जो मैंने वो टेक्स्ट पढ़ा है वहां 1 पुराण का नाम नहीं लिया है उन्होंने कहा है कि अभी वो अ संतुष्ट नहीं है उन्होंने वेद वेदांग लिख लिया है महाभारत शायद लिख लिया है मगर वो पुराण का नाम नहीं लिया उन्होंने कि पुराण भी लिख लिया है पहली बात दूसरी बात ये है ये भी हम प्रूफ करेंगे है

00:57:33:21 क्योंकि जितना मैंने पढ़ा है मेरे हिसाब से उन्होंने सब कुछ रचना कर लिया अंतत उन्होंने श्रीमद् भागवत की रचना की जब वो संतुष्ट नहीं हुए जब उनको आज्ञा मिली ऐसा ही यही ये शब्द वहां नहीं है कि उन्होंने पुराण लिख लिए थे 17 ये शब्द वहां नहीं है ठीक है इन शब्दों की भी हम व्याख्या करेंगे है ना क्योंकि श्रीमद् भागवत में इसका वर्णन है मैंने देखा है वो जो कहा जाता अच्छा इसमें तरीके से हम लोग अन्वेषण कर सकते हैं जैसे रामो विग्रहवां धर्मा श्री राम धर्म का साक्षात स्वरूप है श्री राम ने जो जो किया वो सब सत्य है वो सब धर्म है हमें करना ठीक जो भी हम कर सकते हैं जो हमारी सामर्थ में है अच्छा अब बात य आती है कि श्री राम जो है वह गायत्री मंत्र का जप करते हैं और गायत्री मंत्र का जप करने के द्वारा जो भगवान शिव के लिए भी आया है तो क्या व गायत्री मंत्र के द्वारा किसका जप कर रहे हैं पहली बात ये आती है जी किसका जप कर रहे हैं आप बताए पूर्ण ब्रह्म का देखिए मतलब अपना ही कर रहे हैं वो भी तो पूर्ण ब्रह्म ही है प्र जी अगर आप राम जी की बात कर रहे हैं तो राम जी की बात तो आपको माननी पड़ेगी ना वही राम जी माता पार्वती को श्रीमद् भागवत सुनाते

00:58:48:28 हैं ना वही उन्होंने ही इसको स्थापित किया श्रीमद् भागवत में लिखा है कि वो जो गायत्री के द्वारा जो जिनका वर्णन हुआ है वो शिव है श्रीमद भागवत में लिखा है आठवा स्कंद है और सातवा अध्याय प्र गायत्री जिसमें जिस गायत्री की आप बात कर रहे ब्रह्म गायत्री है इस तरह से ब्रह्म गायत्री गोपाल गायत्री काम गायत्री गोविंद गायत्री जो गायत्री की मैं बात कर रहा हूं भू स्वा ब्रह्म गायत्री कहते हैं पूण पूर्ण ईश्वर की बात हो रही है पूर्ण ईश्वर तो अपना चिंतन क्यों कर रहे हैं अगर वो गायत्री कर रहे हैं इसका मतलब किसी का चिंतन कर रहे हैं ना किसका चिंतन कर रहे पुरुषोत्तम का चिंतन कर रहे कृष्ण का चिंतन कर रहे तो कृ कृष्ण वही तो है कृष्ण और राम में अंतर है प्रभ जी अगर आप फिर से मैं ब्रह्म संहिता में आता हूं उसम ब्रह्मा जी कह रहेम रामाद मूर्ति कला नियम ति नानाव भने किंतु कृष्ण सम भवत परम पुमा गोविंद माद पु तजा अगर ब्रह्मा जी यह बात कह रहे हैं राम बमा जी वाल्मीकि रामायण में कह रहे स्वयं प्रभु प्रभु जी वैसे तो हम कई बार अपने गुरु के सामने कहते भगवन तो फिर ये बा ये बात ब्रह्म समता में लागू क्यों नहीं होगी

01:00:04:02 क्यों क्यों जैसे आप क रहे व यूं ही कह दिया हो य भाई यहां तो कह रहे है ना राम आदि मूर्ति सुकला निय चीज दूसरे में आई है जो क्या कहते कृष्ण जो अथर्ववेद से संबंधित वो है उपनिषद उसम आई है कि जो बाकी सब कला बता रहे आप ये भी आया हम हम कृष्ण और राम में भेद नहीं कर रहे हैं मतलब भेद जो समझ आप कह रहे हैं ना राम अपूर्ण है मैं ऐसा कहां कह रहा हूं कि राम अपूर्ण है मैंने अपूर्ण कहने की बात नहीं की मैंने कहा कलाओं में ये अंतर है क्योंकि भगवान जब आते हैं तो किसी विशेष कारण से आते हैं राम जी आए तो मर्यादित होकर आए उन्होंने उस मर्यादा को पालन करके लोगों को ये शिक्षा दी तो अलग-अलग कारणों से भगवान का आना होता है भगवान ने गायत्री मंत्र के द्वारा अपने पूर्ण रूप की पूजा की क्योंकि वो पूर्ण नहीं थे ऐसा क्यों पूर्ण नहीं होंगे भगवान भगवान भगवान है तो पूर्ण होंगे तो अपनी पूजा की भगवान भगवान सदैव भगवान क्या करते हैं भगवान अपना नाम भगवान कहते हैं भगवान का जो नाम है भगवान से बढ़कर है तो कई बार भगवान अपना भी नाम लेते हैं भगवान को अपने नाम में भी आनंद आ तो अद्वैत सिद्धांत की पुष्टि हो गई यहां प देखिए प्रभु जी अपने पूर्ण रूप को भजन करना सिखाया कि मैं मतलब मैं अपने पूर्ण रूप का वो कर रहा हूं तो अद्वैत सिद्धांत

01:01:19:02 जो है कि हम जो है भगवान का ही वो है क्या कहते हैं माया से प्रक्षित रूप जो है हम हम भगवान के अंश है बिल्कुल इस अंश नहीं हा हम भगवान नहीं है हां तो वहा तो फिर भगवान उन्होंने स्वयं को भगवान समझा था कि नहीं समझा था राम जी ने आप कह रहे हो कि वो अपनी ही अपनी ही वो कर रहे थे स्तुति तो क्या उसको क्या माना अ जी इस राम जी की इस स्तुति पर मेरी कोई व्याख्या नहीं क्योंकि नहीं मेरा कोई अच्छा दूसरा ले लेते हैं पाताल खंड में राम जी ने स्वयं कहा है कि जो तुम हो वही मैं हूं मेरे हृदय में तुम हो तुम्हारे हृदय में मैं हूं और जो तुम में और मुझ में भेद करते हैं वो नरक गामी है पापी ये राम जी कह रहे हैं पाताल खंड में और किसके लिए शिव जी के लिए अच्छा तो ये बात माने कि ना माने हरि और हर में एक्चुअली कोई वैसे भेद नहीं है है ना हरि और हर मैं बिल्कुल इसको हमारे यहां अचिंत भेद भेद का एक तात्पर्य कहा जाता अचिंत वेदा भेद तो जीव और ब्रह्म के भेद को है ना हर जगह कैसे प्रभु प्रभु जी आप उस वही समझिए दूध और दही दूध से ही बना दही का भाग है इसमें भेद है और भेद नहीं भी है अभेद भी है क्योंकि दूध से बना दही है हम तो इसीलिए इस बात इस तथ को समझना चाहिए हमको तो इस तरीके से तो दुनिया में किसी चीज में भेद आएगा ही नहीं जैसे कि लकड़ी से टेबल बन रही है तो टेबल

01:02:34:08 में और लकड़ी में कोई भेद नहीं है इसको भी छोड़ दीजिए मेरे से मेरी संतान जन्म ले रही है तो मेरी संतान उसम मेरे कोई भेद नहीं है मगर मेरी संतान में पावर कम है एट द एंड मेरे आगे जब तक वो मेरे बराबर कत काठी में नहीं हो जाती तब तक तो है ही गुणात्मक रूप से समान है मात्रात्मक रूप से भिन्न है ऐसे तो फिर संसार में कुछ कहीं पर भी भेद है ही नहीं सब कुछ अचिंत वेदा भद है फिर तो मस्टिक प्लेटम और बिल्कुल आत्मा और परमात्मा में कोई गुणात्मक रूप से दोनों सच्चिदानंद है मात्रात्मक रूप से बूंद और सागर के जैसे भेद है और आप जब मस्टिक बात करते हैं तो बाहर जो पंचभूत है तो यहां सब कुछ पंचभूत से ही बना हुआ है आईस वाले में भी कोई भेद नहीं है बिल्कुल शारीरिक प्लेटफॉर्म में कोई भेद नहीं प शारीरिक में नहीं है भाई पंच तत्व से वो भी बने पंचतत्व से हमारा भी शरीर बना है तो फिर भेद है कहां फिर कहां बचा भेद गुणों में है गुणात्मक रूप में केवल गुणों में भेद है वो थोड़ा समझाइए मुझे कैसे हर व्यक्ति अपनी अपनी क्षमता है जैसे जैसे मैं कता हूं जैसे कुत्ता मुंह से खाना खाता है मैं भी खाना खाता हूं तो इसलिए हम में ये समानता हो गई समानता हो गई लेकिन कुत्ता कुत्ता मल खाता है कुत्ते की और भी कुछ चीजें हैं जो मेरे अंदर नहीं है तो ये असमानता हो गई तो ऐसे तो फिर कहीं पर दुनिया में प्रॉपर भेद है ही नहीं फिर तो ये है कि भाई अचिंत भदा भेदी है प्रभु जी क्योंकि थोड़ी बहुत सिमिलरिटी है जैसे मैं थोड़ी बहुत सिमिलरिटी

01:03:49:19 है लेकिन इसको इसको कहते हैं चेतना का अंतर भाई जानवरों में और हम में किसका अंतर है तो उसको बोलते हैं कॉशसनेस का अ अचिंत भेद प्रभु जी आप अचिंत भेद भेद को किसम लेकर जा रहे हैं हम बात कर रहे हैं आत्मा और परमात्मा की हम बात कर रहे हैं आपने कहा ना कि समानता भी है और असमानता भी है इसकी अचिंत वेदा वेद तो समानता और असमानता तो दुनिया की हर दो चीजों में है जैसे जैसे मान लीजिए टेबल है तोय ये तो समझने वाली बात है ना तो फिर फिर भेद मानेंगे कहां फिर भेद का अस्तित्व ही नहीं है फिर तो तो भाई अचिंत भेद क्यों नहीं है भेद का अस्तित्व हम तो भेद तो बता रहे भाई दूध और दही में भेद है ना हमें हर जगह अचिंत कहना पड़ेगा भेद कह ही नहीं सकते फिर हम यह आपकी सोच है आप समझे नहीं जैसे य पर टेबल रखी प्रभुजी आप समझिए मैं मैं इसको इसको रोक लीजिएगा मैं पता क्या कहते वो अरे अरे आओ भाई

01:04:48:06 हेलो अरे सुनो प्रथम प्रथम प्रथम मैं करता तो चलिए कोई नहीं फिर हम प्रभु जी से नेक्स्ट टाइम चर्चा करेंगे अभी प्रभु जी को कहीं जाना है और उन्हें विलंब हो रहा है जैसा कि उन्होंने बताया और कुछ ऐसे ऐसी बातें भी है जो प्रभु जी ने उन पर चिंतन मनन नहीं श्रवण नहीं किया है तो उनका कहना है कि वो किसी अन्य दिन किसी विद्वान और जो श्रेष्ठ श्रेणी के हो उनके साथ हमारे हमारी एक चर्चा व्यवस्थित कराएंगे उसकी व्यवस्था कराएंगे बाकी आप लोगों को चर्चा कैसी लगी बताइएगा और प्रभु जी आपने हमें इतना समय दिया और आपके साथ इतनी सुंदर सी चर्चा हमें प्राप्त हुई उसके लिए बहुत-बहुत आभार धन्यवाद प्रभु जी आपने ऐसा मौका दिया एक्चुअली बहुत सारे ऐसे तथ्य हैं जिन पर आज विचारणीय प्रश्न है बहुत सारे लोगों को इसकन और स्कन के संदर्भ में भी बातें करनी है जानना है और निश्चित रूप से आप भी धर्म को जानने वाले हैं तो मुझे बहुत आनंद आया कि हमने धर्म की ऐसी चर्चा की हमने आपस में

01:06:03:08 एक दूसरे से कई बातों पर कटाक्ष भी किया और उसको लेकर हम आगे बढ़े तो निश्चित रूप से आपके सारे दर्शकों को यह आनंद देगा और हम निश्चित रूप से हम फिर से मिलेंगे और एक सारे संदर्भों को जितने आपके प्रश्न हैं इन तथ्यों को लेकर के हम आपस में बात करेंगे धन्यवाद ह सभी को जय श्री राम जय श्री राम [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 1:06:25 · 09 Mar 2025

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