No part of this video is used anywhere yet.
SRT: ⬇ SRT ⬇ Original file

.srt or .vtt (Hindi). The old file is backed up. After that the match for this video is rebuilt (may take a few minutes, keep the page open).

⬜ Not used yet · 00:00:01:26 – 00:58:11:00 (58:09)

00:00:01:26 जय श्री राम तो वैसे एक प्रॉपर एक वीडि मैंने बना रखा है वर्ण व्यवस्था के बारे में तर्क और प्रमाण के साथ थोड़ा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी उसमें बातें की गई है प्रामाणिक दृष्टिकोण से भी तार्किक दृष्टिकोण से भी तो वह बना रखा है जिसने ना देखा हो व देख सकता है मगर आज जो वीडियो हम लोग बनाने वाले हैं कह सकते हैं कि उसी का संक्षिप्त विवरण भी है और कुछ जो प्रासंगिक सवाल किए जाते हैं उस पर आज हम लोग बात करेंगे कुछ प्रासंगिक प्रश्न आ जाते हैं तो उन पर हम लोग बात करेंगे सबसे पहले जो एक बात उठाई जाती है इसकन से हम लोग शुरू करते हैं उन्होंने एक नैरेटिव बनाया है इनके कई लोग कहते कि जो भक्त हो गया वह दंड सन्यास क्यों नहीं ले सकता है जो भक्त हो गया वह जनेऊ क्यों नहीं धारण कर सकता है जिसकी जीवा पर भगवान का नाम आ गया जो वैष्णव हो गया वह ब्राह्मण क्यों नहीं बन सकता है तो सबसे पहले मैं एक मेंटालिटी बता दूं जैसे कई बार ऐसे भी कमेंट्स आते हैं कि जो लोग मांस खा रहे हैं जो लोग दुरा चरण कर रहे हैं उनको भी आप लोग ब्राह्मण कह रहे हो इसका

00:01:17:03 अर्थ क्या है कि इन लोगों ने जो ऐसा कह रहे हैं उन लोगों ने ब्राह्मण शब्द को एक उससे जोड़ रखा है ब्राह्मण शब्द का अर्थ है जिस जो कि अपराध नहीं कर सक सता और शूद्र शब्द का अर्थ है जो अपराध करता है इसका अर्थ यही हुआ ना अगर ब्राह्मण और शूद्र के बीच में कंपेरिजन कर रहे हैं ये तो इन लोगों ने मेंटालिटी बना रखी है कि जो शूद्र है वह अपराधी है और जो ब्राह्मण है वह निर्दोष है वह दोषी नहीं हो सकता उसके द्वारा अपराध नहीं हो सकता पहली बात तो यह है तो अब यह लोग जो ये बातें कहते हैं कि क्या कहते हैं जो क्या कहते जो ब्राह्मण है वो जिसके मुख पर भी जिसके जीवा पर भगवान का नाम है वह वैष्णव है और वैष्णव तो सबसे ऊंचे होते वैष्णव ब्राह्मण से भी ऊंचे होते हैं जबी आप हरि नाम जपने शुरू हो जाएंगे आप ब्राह्मण से भी ऊंचे हैं फिर उसमें कुछ नहीं मैटर करेगा तो वैष्णव ब्राह्मण से ऊंचे होते हैं मगर हम यहां पर कंपैरिजन किसका कर रहे हैं ब्राह्मण और वैष्णव का कंपैरिजन तब हो सकता है जब एक ब्राह्मण वैष्णव नहीं हो सकता तभी तो ब्राह्मण आकर के

00:02:32:26 वैष्णव होता से उसकी उसका कंपैरिजन किया जा सकता है कि ब्राह्मण अगर एक उपाधि है और वैष्णव अगर एक उपाधि है तो ब्राह्मण जिसके पास उपाधि है उस उपाधि का कंपैरिजन वैष्णव उपाधि से तब हो सकता है जब जिसके पास ब्राह्मण उपाधि है वह वैष्णव नहीं हो सकता कहने का मतलब यह है कि जब आप कह रहे हो कि वैष्णव जो हो जाता है व ब्राह्मणों से भी ऊंचा हो जाता है तो फिर तब क्या होगा जब एक ब्राह्मण ही वैष्णव होगा तो क्या तब आप वहां पर जितने आपके यहां पर वैष्णव हो गए होंगे उसमें ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र का वर्गीकरण फिर से करेंगे या उनको समान रूप से देखेंगे यानी कि वैष्णव होने के बाद भी अच्छा अगर उसके अंदर वर्गीकरण नहीं करेंगे आप तो फिर आपके यहां आपके यहां की कार्य प्रणाली क्या होगी कैसे कार्य कर रहे होंगे आप कोई होगा जो सिर्फ पुजारी होगा कोई होगा जो सिर्फ प्रीचिंग का का करता होगा कोई होगा जो सिर्फ पढ़ाता ही होगा कोई होगा जो सिर्फ जो सेवा कार्य है वही करता होगा है ना तो यह देखना पड़ेगा तो फिर आपने क्या किया कि वैष्णव के नाम से जो पारंपरिक और प्रामाणिक जो वर्ण व्यवस्था उसको तोड़ा

00:03:48:12 उसके बाद आपने वैष्णव के नाम पर उन सबको एक एक बना दिया उसके बाद खुद की व्यवस्था लागू कर दी और खुद से वहां लागू करके फिर से ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र बना दिया या तो ये मान पड़ेगा अगर ऐसा है तो दूसरी बात यह है कि अगर प्रामाणिक रूप से देखें तो एक जो भक्त है उसके लिए जो य शब्द आए हैं कि भाई अगर भक्त है तो वह यह हो गया उस उसको यह फल मिल जाएगा उसने वेदों का पठन पाठन कर लिया जैसे अभी लास्ट स्ट्रीम में एक व्यक्ति आया और बोला कि क्या कहते हैं तीसरे स्कंद के सातवे अध्याय के 14 अध्याय के 33 श्लोक में य लिखा हुआ है कोई शूद्र में घर में पदा हुआ तो ब्राह्मण को दीक्षा दे सकता है सन्यास धारण कर सकता है मैं प्रमाण दिखाने को तैयार हूं श्रीमद् भागवत तीसरा स्कंद 33 वा अध्याय श्लोक संख्या सात कि अहो बता सो पतो गरिया अगर कोई सो पच परिवार में भी पैदा होता है जहां पर कुत्ते का मास खा जाता है यह जिवा अग्र वर्तते नाम तुग जीव के अग्र भाग से भगवान का नाम लेता है तेप तपस ज शरार ब्रह्माणु चरम गति उसने सारी तपस्या कर ली है ज उसने सारे यज्ञ कर लिए हैं जो ब्राह्मणों के कार्य होते सारे पवित्र नदियों में स्नान कर लिया है और सारे

00:05:03:20 वेद को वह बिल्कुल अच्छे तरीके से समझ चुका है तो क्या यह ब्राह्मण वाले गुण उसने कर लिए कि नहीं कर लिए कि जिसकी जीवा पर भगवान का नाम होता है वह जो है उसने सभी वेद कर वैदिक कर्म कर लिए सभी तप कर लिए उसने सारे गंगा नदी में स्नान कर लिया तो इसका किस चीज में परवन है यह सोचने वाली बात है तो अगर हम देखें कि अगर का परवन इसमें है कि उसने वैदिक कर्म कर लिए हैं इस ये जो श्लोक है इसलिए बताया जा रहा है कि वह वेदज मतलब वो वैदिक पठन पाठन करने वाला व्यक्ति हो गया उसने क्योंकि भगवान का नाम ले लिया है और अब वो करा भी सकता है और वो वो सारे कार्य कर सकता है जो एक वेदों का पठन पाठन करने वाला है क्या इसमें इसका परवन है अगर ऐसा है तो फिर मैंने वहां पर भी स्ट्रीम में भी सवाल पूछा था कि अगर ऐसा है तो जो मातृ शक्ति है उसको फिर आप जने क्यों नहीं दे रहे हैं उसको आप त्रिदन सन्यास क्यों नहीं दे रहे हैं अगर कोई स्त्री है वो भी भगवत भक्त हो गई आपके य पर स्त्रियों का भी जने हो जाता है क्या नहीं होता नहीं होता नहीं होता तो

00:06:18:24 उसकी जीवा पर भगवान का नाम आ गया उसने वेदों का पाठ नहीं किया क्या उसको जने क्यों नहीं करा रहे हो इसका अर्थ यह है अगर आप नहीं दे रहे हैं उसको जने और त्रि दंड सन्यास इत्यादि जो आपके यहां दिया जा रहा है उनको विदेशियों को मलेच्छ को तो इसका अर्थ यह है कि जो क्या कहते हैं भले ही उसकी जीवा पर भगवान का नाम है भले ही वह भक्त बन चुका है भले ही वह वैष्णव हो चुका है मगर उसके बाद भी कुछ शारीरिक जो मर्यादा हैं शरीर से उत्पन्न होने वाली जो मर्यादा एं हैं वो लागू होंगी जैसे स्त्री होते हुए वह सन्यास नहीं ले सकती या स्त्री होते हुए व जन नहीं धारण कर सकती तो वह मर्यादा तब भी रही आपने वहां पर उसकी जीवा पर अगर भगवान का नाम आ गया तो वहां पर स्त्री के लिए आपने यह नहीं स्वीकार किया कि उसने भी या तो उसने भी जो है वेद का पठन पाठन कर लिया है तो इसका अर्थ है कि यह जो इस तरह के जो प्रमाण आते हैं कि जो भक्त है अगर वह भगवान का नाम ले रहा है तो वो ऐसा हो गया वैसा हो गया वो यह हो गया श्रेष्ठ हो गया इसका परवन इसमें है के और केवल कि जो भक्ति कर रहा है क्योंकि

00:07:34:09 कौन भक्ति कर रहा है और कौन भक्ति नहीं कर रहा है यह कभी भी कोई दूसरा व्यक्ति नहीं बता सकता है अगर मुझे कोई द्वेष करना है मुझे कोई षड्यंत्र रचना है तो मैं भी आपको आपके अनुसार भक्ति करके दिखा सकता हूं तो इसलिए मेरे द्वारा किए जा रही जो भक्ति है इसके आधार पर आप मुझे अपने आगे प्रामाणिक जो चीजें होंगी उनमें इवॉल्व नहीं करेंगे तो फिर ये जो शब्द कहे जा रहे हैं कि जो भक्ति करने लगता है जो वैष्णव हो गया वो ऐसा हो गया ये किस लिए कहे जा रहे हैं जो भक्ति कर रहा है वो अपनी अतरा आत्मा में अपनी उसमें जानता है कि मैं निष्ठा पूर्वक भक्ति कर रहा हूं या दिखावे के लिए कर रहा हूं या किसी लालसा के लिए कर रहा हूं तो जो भक्ति कर रहा है उसको शास्त्र य बता रहे हैं कि अगर तुम भक्ति कर रहे हो तो तुम्हें तुम इसके बराबर हो गए जो वेदों का पठन पाठन करता है तुम तुम उसके बराबर हो गए अगर तुम भक्ति कर रहे हो तो तुम्हें वही फल मिलेगा जो जो गंगा में स्नान करने वाले को मिल जाएगा जो वेदों का पठन पाठन करने वाले को मिल जाएगा वही फल मिलेगा क्योंकि भक्ति कौन कर रहा है कौन नहीं कर रहा है यह केवल दो लोग बता सकते हैं या तो ईश्वर और या फिर जो भक्ति करने वाला है वोह और कोई नहीं बता सकता

00:08:49:10 कि इसने अगर राम बोला तो इसके राम बोलने के पीछे का उद्देश्य क्या है भगवत भक्ति या फिर कोई षड्यंत्र और अगर नाम बोलने के पीछे के उद्देश्य को नहीं देखा जाता है तो स्कोन जैसी संस्थाएं भी 10 नाम अपराध को मानती हैं उन अपराधों में कई अपराध ऐसे हैं जो मानसिक हो रहे होते हैं वो जो भी है मैं उनको यहां पर नहीं बोलूंगा विषय अंतर हो जाएगा मगर 10 नाव अपराध को मानती है कि अगर वह नाव अपराध हो रहा होगा तो भक्ति नहीं मानी जाएगी तो यानी कि मन में वह क्या सोच रहा है राम बोलते समय हरे कृष्ण हरे राम बोलते समय यह कोई पता नहीं लगा सकता दूसरा व्यक्ति या तो ईश्वर कोई और या फिर वो जो भक्ति कर रहा है तो ऐसे में इस भक्ति के आधार पर उस उसको अन्यों के लिए प्रामाणिक रूप से कहीं किसी संवेदनशील जगह पर नहीं पहुंचाया जा सकता है तो यह जो वो होते हैं यह सारे जो शास्त्रों में प्रमाण दिए गए होते हैं ये इस कारण से होते हैं कि जो भक्ति कर रहा है निष्ठा पूर्वक जिसको अपनी आत्मा में मालूम है कि मैं भक्ति ही कर रहा हूं उसका विश् उसको मालूम हो कि इस भक्ति का फल क्याक है मेरा क्या

00:10:04:12 मैं कहां पर हूं मुझे किस किस प्रकार के फल प्राप्त होंगे तो पहला तो यह रहा कि इस तरह के जो शास्त्रों में वचन है उनका परवन किसम है उनका परवन जो भक्त जो वाकई में वास्तविकता में भक्ति कर रहा है भक्ति में उसकी निष्ठा को दृढ़ करने के लिए और उसे य पता होने के लिए कि भाई तुम्हारी तुम जो ये कर रहे हो उसका फल भी वही है जो वेदों का पठन पाठन करने वाले के बराबर होता है और उससे अधिक होता है जो वेदों का पठन पाठन करने के बाद भी भगवान की शरणागति से दूर है उससे अधिक होता है और वो ब्राह्मण है तो आप ब्राह्मण से श्रेष्ठ भी हो गए मगर अपने लिए अपने लिए आप अपने आप को जान रहे हो यहां पर इन शास्त्रीय वचनों का इसमें प्रव सान है और अगर नहीं है तो फिर दिक्कत आएगी जिसकी जीवा पर भी भगवान का नाम आ गया उसको आप जने दे दोगे उसको आप डं सन्यास दे दोगे आजकल तोते भी हैं घरों में पाले गए जो राम बोलेंगे

00:11:09:01 कृष्णा कणा तो उनका भी जनव कर आओगे उनको भी त्रिन सन्यास दोगे इसमें परेसान नहीं है वहां पे आपको जो शरीर के द्वारा जो प्राप्त होने वाली मर्यादा है उसका निर्वाह तो करना ही पड़ेगा तो जिस प्रकार से आपने एक मातृ शक्ति के शरीर के द्वारा प्राप्त हुई मर्यादा है उसका निर्वाह किया उसके जीवा पर भगवान का नाम होने के बाद भी उसके वैष्णव होने के बाद भी आपने उसको जने नहीं दिया आपने उसको कुछ कुछ चीजों से अलग किया दूसरी चीजें उसको मिली जो मातृ शक्ति की मातृ शक्ति के अनुसार उसको जो एक्स्ट्रा चीजें मिलनी चाहिए वो मिली मगर जो पुरुष ना होने की स्थिति में उसको नहीं मिलनी चाहिए वो नहीं मिली इसी प्रकार से यहां पर फिर वो फेमिनिज्म वाले लोग आ जाएंगे कमेंट करने के लिए कि अरे तुम स्त्री और पुरुष में भेद करते हो भाई भेद का नाम ही संसार है तो कई चीजें अगर पुरुषों अधिक मिली है तो कई चीज स्त्रियों को अधिक मिली तो इसको व्यवस्था मूलक समझना चाहिए नहीं ना कि तिरस्कार मूलक तो इस सबसे पहली बात ये समझ में आ गया आप लोगों को कि जो भक्त की जो चीजें बताई जा रही है शास्त्रों में उनका परवन किसम हो सकता है और अगर हम यह मानेंगे कि किसी ने

00:12:24:03 जिसकी जीव भगवान का नाम है जो वैष्णव हो गया विष्णु भगवान की भक्ति करने लगा वो सबसे ऊंचा हो गया उसको अब कोई दिया जा सकता है तो मैं आपके मंदिर आ जाऊंगा इसन मंदिर में और वहां आ कर के हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्ण कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे बोलने लगूंगा तो आप मुझे दे देना त्रण सन्यास आपके यहां का और फिर किसी स्कोन टेंपल में मुझे बिठा देना नहीं बिठा होगे उसमें फिर आप अपनी और मर्यादा लगाओगे इसका मतलब व शास्त्र के वचन में के बाहर भी कुछ मर्यादा है जिनका निर्वाह करना पड़ेगा ठीक है पहली बात ये हो गई तो अच्छा इसमें अब यह बात और आती है कि जो यह बात कही जाती है कि कर्म के आधार पर जो है किसी का भी व निर्णय होगा और जन्म के आधार पर नहीं होगा इसमें हम चार 1 को भी लेंगे आज चतुर्वर्ण मया सिस्टम तो कर्म के आधार की अगर बात करें तो कर्म को जांचना अनिश्चित है सुनिश्चित नहीं है कर्म को हम जांच नहीं सकते हैं कि यह ब्राह्मण उचित कार्य कर रहा है कि नहीं कर रहा है कैसे कि भाई मान लीजिए कि हमें अपने यहां पर किसी ब्राह्मण की आवश्यकता है मान लीजिए कि विवाह ही करवाना है तो

00:13:39:07 विवाह करने होने से कितने दिन पूर्व हम उसके घर जाकर के रहने लगे यह जांचने के लिए कि ये कर्म कर रहा है कि नहीं ब्राह्मण वाले ठीक है अच्छा घोषित जो करेगा तो पहली बात तो घोषित की नियमावली होनी चाहिए और या फिर यह नियमावली होनी चाहिए कि कौन-कौन से कर्म है जो जांचने होंगे अब यहां पर एक बात आ जाती है कि जो जन्म से है वह कुछ भी कर रहा हो तो उसको स्वीकार कर लिया जाएगा नहीं यहां पर एक बात ध्यान रखने की है कि ब्राह्मण उसको संज्ञा मिलना उपाधि मिलना और ब्राह्मण उचित कार्यों में उसका उपयोग में उसको उपयोग में लेना इन दोनों चीजों में अंतर है अगर किसी ने जन्म लिया है ब्राह्मण का वही वाली बात की मैंने शुरू में कहा था ना कि आपने ब्राह्मण शब्द से निर्दोष को और शूद्र शब्द से अपराधी को जोड़ रखा है यह व मनता फैलाने के लिए इस प्रकार की जितनी भी संस्थाएं हैं इकन आर्य समाज य सब संस्थाएं हैं इन्होंने विप्लव फैलाने के लिए ब्राह्मण के साथ निर्दोष को और शूद्र के साथ दोषी को जोड़ रखा है ब्राह्मण अगर दोषी होगा तो उसको तिरस्कृत कर दिया जाएगा

00:14:54:08 ब्राह्मणो चित कार्यों से उसका उपयोग नहीं लिया जाएगा और शूद्र अगर श्रेष्ठ होगा शूद्र अगर श्रेष्ठ होगा तो उसको वहां पर श्रेष्ठ कहा जाएगा कि हां भा एक अच्छा अच्छा व्यक्ति अच्छा इंसान है भगवत भक्त है मगर उसका जब सामाजिक ढांचे में उपयोग होगा सवे होगा तो लघु उद्योग में सेवाद कार्य में के प्रकल्प में इन सब में उसका उपयोग होगा तो सबसे प सबसे बड़े दुश्मन कौन हुए सबसे बड़े शत्रु जो है वह कौन हुए इनके शूद्रों के जो यह कह रहे हैं कि नहीं ब्राह्मण का मतलब तो निर्दोष है व अपराध नहीं कर सकता और शूद्र का मतलब दोषी है वह तो अपराध ही करने वाला उसी का नाम शूद्र है ऐसा नहीं है तो हम दोबारा जो विषय उस पर आ जाते हैं कि कर्म की जो वो होती है ना कर्म को हम जांच नहीं सकते हैं मिट्टी का उपयोग करने का शौच इत्यादि में विधा शास्त्रों के द्वारा तो क्या आप उसके कर्म को जांचने के लिए उसके साथ सोच में जाओगे कि वो मिट्टी का उपयोग कर रहा है कि नहीं कर रहा है

00:16:10:06 वह जने के साथ व कार्य कर रहा है कि नहीं कर रहा है वह अपनी जो भार्य होगी उसके साथ जब होगा अपने कक्ष में तो वहां पर जाकर के देखोगे कि इस समय ब्राह्मण उचित कार्यों का पालन कर रहा है कि नहीं कर रहा है तो इसलिए जन्म से ब्राह्मण होता है फिर उसके जो जो थोड़े बहुत भी कर्म हमें दिखाई दे गए हमने ऐसे ब्राह्मण को जो या तो शब्द प्रमाण के आधार पर या फिर वह क्या कहते हैं अगर उसके बारे में कोई भी ऐसी सूचना हमें प्राप्त नहीं हो रही है जहां पर वह ब्राह्मण के विरुद्ध जाकर के सिद्ध हो रहा हो तो उसको हम ब्राह्मण उचित कार्यों में उपयोग में लेते हैं यहां पर यह वाली बात आ जाएगी कर्म तो उसके भी चेक करने पड़ेंगे नहीं क्योंकि कर्म की अनिश्चितता है ना कर्म उसके चेक नहीं करने पड़ेंगे क्यों क्योंकि एक मात्र शक्ति तब तक पतिव्रता होती है तब तक वह सती होती है तब तक वो चरित्रवान होती है जब तक वह चरित्र हीनता उसकी सिद्ध ना हो जाए चरित्रवान कहलाने के लिए किसी भी माता को किसी भी मातृ शक्ति को या पुरुष को भी चरित्रवान कहलाने के लिए अपनी जो चरित्र वान संबंधी जो कर्म

00:17:25:08 है उनको लाकर जनता को दिखाना नहीं है वो तब तक चरित्रवान है वो तब तक सीता माता के तुल्य है सीता माता की तर पवित्र है जब तक उसकी वो चरित्र हीनता किसी प्रकार से समाज के समक्ष ना आ जाए हमारे समक्ष ना आ जाए उसी प्रकार से एक ब्राह्मण भी ब्राह्मण घन में जन्मा तब तक ब्राह्मण है जब तक उसका कोई ऐसा अपराध ब्राह्मण विरुद्ध कार्य सबके सामने ना आ जाए तब तक हमें प्राप्त ज्ञान का समाधान करना है मगर जब आप बर्थ को हटा ही देंगे तो आपके पास एक ही पैरामीटर र गया उसके कर्मों को देखो कर्म तो अनिश्चित है कैसे देखोगे तो यहां पर प्रैक्टिकल भी नहीं है अब बात आती है चातु वण मया सिस्टम पर इस पर बात कर ले तो दो तीन एंगल से हम बात करेंगे भगवान ने कहा कि गुण और कर्म के आधार पर मैंने सृष्टि की है ठीक है अब इसका परवन अगर आप इसमें लेंगे कि भाई देखो कर्म क्या आधार पर सृष्टि की है मगर कर्म के आधार पर कौन घोषित कर रहा है कर्म के आधार पर जब व्यक्ति कोई कर्म कर रहा है तो घोषित कौन कर रहा है किय शूद्र या वो है

00:18:40:21 भगवान तो नहीं कर रहे य तो कोई और घोषित कर रहा है कि ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र कौन है भगवान तो नहीं आ रहे बताने के लिए शूद्र वैश वो है तो तो सृष्ट करने वाला कौन हुआ अगर कर्म के आधार पर आपने माना है तो आपके वाले कर्म तो सृष्टि करने वाला कौन हुआ उस उस वर्णाश्रम धर्म की सृष्टि करने वाले भगवान नहीं हुए आप हुए जो आप य घोषणा कर रहे हो कि तुम शूद्र हो आपने सृष्टि की शूद्र की आपने उसे शूद्र बनाया आपने उसे क्या कहते हैं ब्राह्मण बनाया आपने उसे ठाकुर बनाया क्षत्रिय बनाया वैश्य बनाया ठीक है अच्छा अब इसमें दूसरा पक्ष देख लेते हैं कि किसी भी व्यक्ति का जन्म क्या भगवान बिना सोचे समझे कहीं भी करा देते हैं कोई व्यक्ति जिस घर में वेदों का पठन पाठन हो रहा है बिल्कुल वहां पर जन्म लेता है और कोई व्यक्ति वेदों का नाम भी नहीं सुना दूर दूर तक ऐसी जगह पर जन्म लेता है क्यों लेता है हर व्यक्ति को उसी घर में जन्म देना चाहिए जहां वेदों का पठन पाठन हो रहा है उसके बाद व बड़ा होते होते तय करे कि भ मुझे शूद्र बनना है कि ब्राह्मण बनना है कर्म से पर भगवान यदि

00:19:55:26 किसी को वेदों से दूर और किसी को वेदों के पास जन्म दे रहे हैं तो इसका अर्थ है ना कि वो उसके कुछ ऐसा कारण है जिसके कारण वो ऐसा कर रहे हैं तो छंद उपनिषद में भी आता है जिसमें यह प्रमाण है जिसमें बताया गया है कि पूर्व जन के कर्मों के आधार पर इस जन्म का जो है शरीर आपको प्राप्त होता है तो वह कहां पर आपको देना है वेदों के पास देना है वेदों से दूर देना है व पूर्व जन्म के कर्म तय कर रहे हैं तो एक कर्म तो ये वाला आप ले सकते हो और एक और एंगल भी है चातु मंड मया सिस्टम में जो आप ले सकते हो मगर जब आप व्यक्ति की स्वेच्छा अनुसार होने वाले कर्मों को ले लोगे कि उसके आधार पर जो है वो तय हो रहा है ब्राह्मण है वैश्य शूद्र क्षत्रिय तो फिर वो मया सिस्टम नहीं रह जाएगा वह व्यक्ति सिस्टम हो जाएगा व्यक्ति के द्वारा उसकी सृष्टि हुई मया सिस्टम नहीं हुआ अब दूसरा कर्म कौन सा ले सकते हो कि जिस व्यक्ति के लिए मैंने जो जो कर्म निर्धारित किए हैं कि उसको ये ये करने हैं जो मैंने निर्धारित करे करे हैं उन कर्मों के अनुसार मैंने उसको ब्राह्मण वैश्य शूद्र क्षत्रिय

00:21:11:03 की संज्ञा दी है अब अगर वो व्यक्ति उन कर्मों को करेगा जो भगवान ने उसके लिए निर्धारित किए हैं तो व्यक्ति वह स्वधर्म का पालन करने वाला कहलाएगा अन्यथा पतित कहलाएगा तो इस बात को समझना होगा चातु वण मया सिस्टम भगवान क्या क रहे हैं पूर्व जन्मों के कर्मों के आधार पर इस जन्म का शरीर प्राप्त होता है शरीर की सीमा में आपको वर्ण प्राप्त होता है कुल प्राप्त होता है और वर्ण और कुल की सीमा में इस जन के कर्म पुनः प्राप्त होते हैं अब अगर आप उन कर्मों को कर रहे हैं तो आप अपने स्वधर्म का पालन करने वाले हैं अन्यथा आप जो है पतित है कर्म शंकर है अगर अपने वर्ण जैसे जन्म जन्म की व्यवस्था है कि जो उसका वर्ण है उससे विपरीत अगर कार्य करेगा तो कर्म संकर हो जाएगा कर्महीन हो जाएगा पतित हो जाएगा कर्म शंकर शब्द भी आया हमारे शास्त्रों में पतित शब्द भी आया है हमारे शास्त्रों में तो यदि यह सोचने वाली बात है कि यदि हम किसी भी कार्य को करने से उसका वर्ण तय करेंगे तो फिर कर्म शकता का जो अस्तित्व वो कहा रह जाएगा

00:22:26:15 व्यक्ति ने जो कार्य किया वही बन गया तो कर्म शंकर कहां हुआ भाई यदि व्यक्ति का व्यक्ति मान लो आज के टाइम में आपके अनुसार वह आपके द्वारा बनाया गया ब्राह्मण है और वह जो है क्षत्रिय का कार्य करने लगा तो वह कर्म संकर थोड़ी ना होगा व फिर क्षत्रिय हो जाएगा आपके अनुसार क्योंकि व्यक्ति की पहचान तो उसके कर्मों से होती है तो अगर वो क्षत्रिय का कार्य करने लगा तो क्त्र हो जाएगा व सेवा कार्य करने लगा तो शूद्र हो जाएगा तो ये बा बात है चातु वर्ण मया सटम का गलत अर्थ अपार्ट करने का जैसा महाराज श्री ने श्री ने भी बताया आचार्य श्री ने अपने वक्तव्य में कि ये अर्थ है चातु वण मया सटम सृष्टि करने वाले भगवान है तो फिर मनुष्य कैसे तय कर रहा है कि मुझे क्या करना है क्या नहीं कर रहा है जब उसके वर्ण की सृष्टि भगवान ने की है जब भगवान ने कर दी तो यहीं से जन्म सिद्ध हो गया कि मया सटम यहीं से जन्म सिद्ध हो गया तो जब उसके वर्ण की सृष्टि जो है भगवान ने की है तो फिर आप कैसे अपने वर्ण की सृष्टि कर रहे हो कैसे बदल रहे हो तोय बदलने वाली बात भी प्रलाप

00:23:41:24 है अच्छा अब इससे आगे जब चले तो अब हम लोग उस बात पर आते हैं कि ब्राह्मण का अर्थ आपने ले रखा है आपने फैला रखा है कि ब्राह्मण जो है निर्दोष है और शूद्र जो है अपराधी है यह दिक्कत है यह है समस्या समाज की समस्या यह है कि ब्राह्मण का अर्थ आपने निर्दोष ले लिया अरे भाई ऐसा होता तो रावण को बाद में कुछ और कहा जाता ना आज तक रावण को क्यों ब्राह्मण कहते हैं वोह तो अपराधी था बहुत बड़ा कंस को भी क्षत्रिय कहते हैं वो तो अपराधी था बहुत बड़ा क्यों कहते हैं शूद्र कहने लगते तो मेरे भाई शूद्रों को अपराधी समझना बंद करो शूद्र वो वर्ण है जिसको छूट दी गई है कि तुम अगर यह नहीं भी करोगे तो भी तुम जो है क्योंकि तुम्हारा जो दहिक जीवन है वो कठिन है इसलिए तुम इतनी सरलता से ही भगवान को प्राप्त कर लोगे उसको आप अपराधी क्यों बना रहे हो ये जितने भी तंत्र आए हैं सनातन को नष्ट करने वर्णाश्रम को नष्ट करने इन्होंने कैसे अपना कार्य किया है इन्होंने कार्य करने के लिए

00:24:57:02 क्या किया है कि सबसे पहले जो समस्या थी नहीं समाज में मान लीजिए शूद्रों के शूद्रों का समाज है उनके बीच में समस्या नहीं है सब अपने अपने स्वधर्म का पालन कर रहे हैं रामराज हवा जितनी चलती जितनी चलनी चाहिए उतनी ही चलती थी गर्मी उतनी होती थी जितनी होनी चाहिए इसको कहते रामराज जहां पर सब अपने अपने धर्म का पालन करते हैं और जब दूसरा धर्म का पालन करना भी आपका धर्म जाएगा तो फ स्वधर्म का पालन क्यों कहा जा रहा है भाई अगर ब्राह्मण आज वो है और कल को वो क्षत्रिय का कार्य करने लगेगा तो वही क्षत्रिय उसका धर्म हो जाएगा तो सध और धर्म कुछ रहा ही नहीं सब एक ही हो गया इस पर भी बात करेंगे हम लोग स्वधर्म धर्म तो अभी हम लोग य बात कर रहे हैं कि आपने ब्राह्मण से निर्दोष को और शूद्र से दोषी को जोड़ रखा है और फिर इसको जोड़ कर के यह है क्या है एक तरीका है काम करने का पहले प्रॉब्लम को क्रिएट करो और फिर उसको पेस्ट करो क्रिएट एंड पेस्ट जैसे कि पहले जिओ की सिम फ्री में बांटी गई तो यह क्या हुआ क्रिएट किया चस्का

00:26:12:13 लगा दिया लोगों को फ्री इंटरनेट का और उसके बाद चिपका दिया गया 00 का रिचार्ज यह क्या है इसी तरह से कंपनीज काम कर रही है सनातन को नष्ट करने के लिए कि पहले क्या क्रिएट किया कि भाई गायत्री मंत्र जो है एकमात्र वही साधन है मोक्ष का अरे भाई अगर गायत्री मंत्र ही साधन है मोक्ष का तो क्यों कहते हो हरे कृष्ण से भी हो जाएगा अगर वेद का पठन पाठन ही मोक्ष का साधन है तो क्यों कहते हो कि एक मात्र सत्यार्थ प्रकाश पढ़ लो सब कुछ हो जाएगा क्योंकि वेदों का सार आपके हिसाब से सत्यार्थ प्रकाश के रूप में उसको प्राप्त हो सकता है और उससे भी वो व्यक्ति तर सकता है क्योंकि गायत्री मंत्र का सार राम नाम के के रूप में हरे कृष्ण महामंत्र के रूप में उसको प्राप्त हो सकता है और उसके द्वारा वो भी तर सकता है तो क्या किया गया कि भाई अपना संख्या बल या लोगों को सनातन को तोड़ने का कार्य कैसे करें कि गायत्री मंत्र एक वन एंड ओनली वेदों का पठन पाठन वन एंड ओनली तो पहले तो ये गुंजायमान हो गया रेडियो में स्कूलों में क्या कहते हैं आपके घर में जो वो

00:27:27:13 होते हैं क्या वो जो साउंड सिस्टम उनमें बज रहा है घंटियों में बज रहा है गायत्री मंत्र इतना उसको वो कर दिया सबके लिए जनसामान्य के बीच में इतना ज्यादा उसको गाया गया गीत गाए गए उसके कि लोगों को लगने लगा कि हां वह जो आपने जो एक मिथ्या फैलाई थी जड़ में कि गायत्री मंत्र ही एक मात्र साधन है मुक्ति का या वेदों का पठन पाठन डायरेक्ट वेद पढ़ोगे तभी भले ही आप ही नहीं आप सत्या प्रकाश पढ़ के भी अपना काम चला सकते हो भले ही आप य कहते हो नहीं आप हरे कृष्ण का जाप करके भी अपना काम चला सकते हो मगर लोगों को अपने से जोड़ने के लिए पहले आपने मिथ्या फैलाना शुरू की गायत्री मंत्र वेदों का पठन पाठन और फिर उसके बाद जब लोग य भूल ही गए नहीं य मिथ्या है झूठ है जब वही जो परोसा गया था वही उनको सच लगने लगा तब उन्होंने क्या किया कि अरे देख वो जो ब्राह्मण है जो शंकराचार्य वो तुझे नीच समझते हैं तुझे गायत्री मंत्र नहीं पढ़ने देते हैं तब वो क्रिएट की गई प्रॉब्लम को चिपका दिया गया समाज में नफरत

00:28:42:13 भाई को भाई से अलग करने के लिए यह किया गया क्रिश्चियन मिशनरीज भी ऐसे ही कार्य करती हैं जैसे यह तंत्र करते हैं इसकन और आर समा शरीक है जबकि ये जो ऊंच नीच वाले जो शब्द आते हैं शास्त्रों में अब मैं बहुत गहराई से हर एक के उसमें नहीं जाऊंगा कि दयानंद जी ने भी सत्यार्थ प्रकाश अगर पढ़ेंगे तो कई जगह पर उसको मान लिया है कि इसके इस घर में ही विवाह करना यह क्या है विवाह जब बता रहे तो बोल रहे हैं कि उस कुल में करो जिसमें वेदों का पठन पाठन होता हो क्यों करें भाई क्या जहां पर वेदों का पठन पाठन हो रहा है इसका मतलब य पक्का है कि वो लड़का भी वेदों का पठन पाठन कर रहा होगा यहां से आपने जन्म से मान लिया ना तो यह जितने भी शास्त्र में वचन आए हैं कि ऊंच या नीच वाले यह वचन जो आए हैं यह वचन घृणा मूलक वचन नहीं है व्यवस्था मूलक वचन है जैसे एक ही शब्द को दो तरह से बोला जा सकता है ना अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा ये है ना एक ही शब्द को कई भावों के साथ बोला जा सकता है उसी तरीके से

00:29:58:01 ये जो ऊंच नीच वाले जो शब्द है इनका परवन शास्त्रों के अनुसार व्यवस्था में है घरना में नहीं है जैसे मैं किसी घर में नीचे रहता हूं तो उसके लिए मैं नीच हूं उस पर्सपेक्टिव से सेकंड क्लास थर्ड क्लास के डब्बे होते हैं थर्ड क्लास वाले क्या नीच है क्या सेकंड क्लास वाले क्या नीच है क्या व्यवस्था मूलक है व्यवस्था मूलक शब्द का दुरुपयोग किया गया जैसे जाकिर नायक ने किया जहां पर कोई और अर्थ निकल रहा है व अपना अर्थ बना दिया उसका क्योंकि एक ही शब्द के दो अर्थ निकल सकते हैं मास का अर्थ गूदा भी होता है मांस का अर्थ गुदा भी होता है अगर आप फल का भी गदा खा रहे हो तो संस्कृत के अनुसार आप मांस खा रहे हो तो जिस जिन शब्दों के दो अर्थ निकल सकते हैं ऐसा ही एक शब्द है ऊंच नीच वाला उसका उपयोग किया गया अरे वो तुझे नीच कहते हैं वो नीच वो वाला नीच नहीं नीच वो नीच वो वाला नीच है हां वो नीचे है हां वो हमसे नीचे है नीचे चले जाओ नीचे मिल जाएंगे वो वो वाला नीच है

00:31:13:02 व्यवस्था मूलक मगर उसका दुरुपयोग करके यह जो विधर्मी लोग हैं जो जो ताकत हैं सनातन विरोधी उन्होंने दूसरे रूप में आचार्य श्री ने कहा ना राघवाचार्य जी महाराज ने कि अधर्म जो है सीधे नहीं आएगा धर्म का चोला और कराएगा हम भी अपने वीडियो में वही बताते हैं सनातना भास के रूप में आते हैं ये लोग तो कैसे करें कि भई वो जो है तुझे नीच समझते नीच ऐसे कर कर के अरे भाई आप शूद्रों से इतनी नफरत क्यों करते हैं कि शूद्र का अर्थ ही है घृणित कार्य करने वाला अपराधी और ब्राह्मण का मतलब ही है अच्छे कार्य करने वाला निर्दोष क्या ब्राह्मण अपराधी नहीं होता अच्छा ठीक है अब आपके अनुसार चलते हैं जिसकी जीवा पर भगवान का नाम आ गया और वह जो है वैष्णव हो गया वैष्णव तो गाली वाली दे नहीं सकता है आपने उसको यज्ञ पवित दे दिया भले यह बात छोड़ कर के कि आप म

00:32:28:04 को क्यों नहीं दे रहे वो एक अलग पक्ष है मगर आपने चलो फिर भी आपकी सारी चीजों मानते हुए आपने जो है उसको जो है वैष्णव मान लिया क्योंकि उसने आपके सामने हरे कृष्ण का जाप कर दिया और आपने उसको जो है यज्ञ पवित दे दिया इसी कारण से इसका मतलब है कि वह अपराध नहीं कर सकता फिर वह आदमी क्यों गाली दे रहा है क्यों गाली दे रहा है राम का नाम राम और कृष्ण में भेद कर रहा है यह वैष्णव है इसका मतलब वैष्णव की वैष्णव का पता दूसरे के लिए दूसरे के द्वारा नहीं लगाया जा सकता है और अगर कोई वैष्णव है तो उसकी वैष्णव जो है वह उसके लिए है उसको प्रमाणिक जगहों पर सिद्ध करके के वैष्णव है उसके आधार पर उसको चीजें दिलवाने के लिए नहीं है उसकी

00:33:17:25 भक्ति वहां पर जहां पर हम संवेदनशील स्थानों में स्थान में उसको जगह देंगे तो उसके लिए निश्चित पैरामीटर्स के अनुसार देंगे ऐसा नहीं है कि ब्राह्मण जो जन्म से होता है वह गलतियां नहीं कर सकता है यहां पर कुत करने वाले आएंगे इसलिए मुझे एक एक चीज लेनी पड़ेगी ऐसा नहीं है कि जो ब्राह्मण जन्म से होगा वह गलतिया नहीं कर सकता है मगर जन्म से ब्राह्मण लेना इस तरह से है जैसे कि यह जो है एक शुरुआती पैरामीटर है जैसे हम घर से निकलते हैं और घर में ताला लगाते हैं ऐसा नहीं है कि जिस घर में ताला होगा वहां पर नहीं हो सकती हो सकती है मगर जो स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल है यथा संभव वो हम करते तो यह शुरुआती पैरामीटर मात्र है जन्म से ब्राह्मण इसी को कहते हैं नॉमिनेशन और

00:34:13:01 सिलेक्शन और अगर आप कर्म के अनुसार किसी को वैष्णव मानते हो और यह मानते हो कि वह जो है गलत कार्य नहीं कर सकता है तो आपके जने दे देने के बाद भी मेरी ब्राह्मण दीक्षा हुई है ब्राह्मण दीक्षा स्कन में उसके बाद भी वो आदमी गाली बगता हुआ मिल रहा है पटना का इसको कन प्रेसिडेंट मिला आपका वो नग्न अवस्था में मिला ये सब क्या है क्यों मिला क्योंकि ब्राह्मण भी अपराधी हो सकता है इसलिए मिला तो फिर आप यह बोलना बंद कर दीजिए कि जो वैष्णव होगा वो जो है कुछ भी हो सकता है वो सब हो जाएगा ऐसा नहीं है उसकी जो वैष्णव होता है वहां पर जो शास्त्रों के अनुसार है उसका परवन केवल उसकी भक्ति को दृढ़ करने में है उसको ये बताने में है कि अगर तू जानता है तेरे मन के अंदर कि तूने राम का नाम किस भाव से लिया है अगर तूने अच्छे भाव से लिया है तो उसका फल यह है तूने सारे तीर्थ कर लिए तूने सारे वेद पढ़ लिए अब इस पर आ जाते हैं कि अगर व्यवहारिक रूप से उसका वेद पढ़ना स्वीकार कर लेंगे तो अन्य शास्त्री वचनों का खंडन नहीं हो जाएगा अगर यहां पर यह मान लिया जाए कि जो व्यक्ति को जो व्यक्ति भगवान का नाम ले रहा है वो वैष्णव हो गया या जो

00:35:28:13 जो क्या कहते हैं ब्रह्म ज्ञानी है वह ब्राह्मण हो गया ठीक है तो इन दोनों का जवाब देंगे ब्रह्म ज्ञानी मतलब इनको आर समा को जवाब देंगे और जो यह राम का नाम ले रहा है य इसको को जवाब देंगे तोय क्या है कि भाई शास्त्र कहते हैं कि वेद आप तब पढ़ सकते हैं जब आपको आप आपका यज्ञ पवित हुआ हो दोनों मानते हैं ठीक है और आर्य समाज के अनुसार ब्रह्म ज्ञान तब होगा जब वेद पढ़ा हो तो आप ब्रह्म ज्ञान होने से उसका यज्ञ पवित कैसे करा सकते हो जो वेद पढ़ने के लिए आवश्यक है या फिर वेदों का ज्ञान हो गया उसने सभी वेद पढ़ लिए हैं इस आधार पर उसका यज्ञ पवित कैसे करा सकते हो क्योंकि यज्ञ पवित होता है वेद पढ़ने के लिए ब्रह्म को जानने के लिए

00:36:29:01 ब्रह्म को इसलिए नहीं जानते हैं कि हमारा यज्ञ पवित हो या वेदों को इसलिए नहीं पढ़ते हैं कि हमारा यज्ञ पवित हो यज्ञ पवित पहले है ना यज्ञ पवित होगा तो वेद पढ़ सकता है तो अगर इसको व्यवहारिक रूप से मान लेंगे कि उसने वेदों का पठन पाठन कर लिया है तो फिर हमें तो फिर शास्त्रीय वचनों का खंडन हो जाएगा जहां पर यह लिखा हुआ है कि नहीं पहले जने होगा तभी व वेद पढ़ने में अधिकृत है और आपके अनुसार वेदों के द्वारा ही ब्रह्म को जाना जा सकता है आर समाज वेद पढ़ के ही मुक्ति पा सकते हैं तो फिर जो ब्रह्म ज्ञानी हो गया उसका जन तो पहले हो जाना चाहिए था व ब्रह्म ज्ञानी हो कैसे गया इसका मतलब दूसरे रास्ते भी है ब्रह्म को जानने के वेद पढ़ के ही आवश्यक नहीं है तो इसका मतलब जिने भी आवश्यक नहीं है कुछ ऐसे कु तरक भी करते हैं कि जो व्यक्ति ऐसा हो गया उसको जो है मुक्ति मिल जाएगी उसको भगवान मुक्त कर देते वो परम हो जा जाता है हां हो जाता है क्योंकि केवल एक वेद के व्यवहारिक स्वरूप को पढ़ कर के बिल्कुल उसको उसके जो वो क्या कहते हैं जो उनकी शाखा है मध्यानी शाखा या जो भी आपके य आर समाज की बात अलग है तो केवल एक वेद कोई व्यवहारिक स्वरूप में

00:37:44:02 पढ़ कर के ही ब्रह्म ज्ञान या मुक्ति का मार्ग प्रशस्त नहीं होता है अगर वेद नहीं पढ़ सकता व्यक्ति तो संतों की वाणी सुनता है उन्हीं वेदों का अर्थ सुनता है पुराण पढ़ता है अगर स्कोन की बात करें तो और अगर पुराण को ना मानने वाले आर समाज की बात करें तो व अन्य माध्यमों से वेदों का जो रस है वो प्राप्त करता है और उसका पान करके मुक्ति मार्ग पर प्रशस्त हो सकता है तो ब्रह्म ज्ञानी होने से उसका जने नहीं होगा जने होने से व ब्रह्म ज्ञानी होगा अगर इसको व्यावहारिक रूप से लेना है तो और यही शास्त्रों में भी दिया गया है क्या कि भाई ब्राह्मण का जो जनेऊ है वो इस ऋतु में होगा और या फिर आयु में होगा क्यों कहा गया भाई वेद पढ़ने से वो वो आचार्य श्री ने भी बात कही थी कि आप अगर कर्म से किसी को ब्राह्मण मानते हैं तो वेद पढ़ने से किसी के कर्म सेट होंगे वेद पढ़ने से तय होगा कि हा इसके कर्म हो गए यह ब्राह्मण बनने लायक है और वेद वो कब पढ़ सकता है जब यज्ञ पवित हो यज्ञ पवित किसका किस अनुसार होना है यह पहले तय हो रहा है ब्राह्मण का इतने से कितने के बीच में होगा आ से 16 के बीच में

00:38:59:04 ब्राह्मण का 11 से 22 के बीच में क्षत्रिय का 16 से 24 के बीच में वैश्य का तो यह वेद पढ़ने से यज्ञ पवित होने से पहले ही य तय हो रहा है कि कौन ब्राह्मण है कौन क्षत्रिय कौन वैश्य कौन शूद्र यहां किस आधार पर हो रहा है तो यह सब बातें भी सोचने की है कि प्रमाण भी यही कहते हैं कि जन्म से नॉमिनेशन और कर्म से सिलेक्शन यह भी एक दिक्कत है ब्राह्मणवाद ब्राह्मण ब्राह्मणवादी य सब ये सब फैलाया हुआ है मिशनरी टाइप की संस्थाओं के द्वारा अपने में मिलाने के लिए इस तरह की नफरत फैलाई गई है लकीर खींच दी गई दिलों के दरमियान वही वाली बात है जिओ का सिम पहले फ्री बेचो फ्री इंटरनेट दो और फिर जब व्यक्ति को उसकी आदत लग जाए तब उसको जो है उसका मूल्य दे दो इसी प्रकार से पहले गायत्री मंत्र ऐसा कर दो कि सबको उसके प्रति आकर्षण हो जाए वेदों का पठन पाठन तना जरूरी बना दो समाज में ऐसा वातावरण बना दो कि व्यक्ति को बहुत उसके प्रति आकर्षण हो जाए उसकी उसकी आदत हो जाए और फिर बताओगे य तो तुम्हे केवल यही मिल सकता है इसका मूल्य समाज में आना पड़ेगा इसका मूल्य स्कन में आना पड़ेगा

00:40:14:16 जने चाहिए तो सन्यास चाहिए तो जबक ऐसा नहीं है कि जो व्यक्ति त्रिन सन्यास नहीं लेगा उसकी मुक्ति नहीं होगी बा की मुक्ति नहीं हुई क्या उन्होंने लिया था त्रिदन सन्यास तो यह सब बात प्रहलाद प्रहलाद जी ने त्रिन सन्यास लिया था आप कह दो उनकी मुक्ति नहीं हुई थी नहीं लिया था मगर मुक्ति हुई तो मुक्ति को यह जो व्यवहारिक ढांचा है धर्म का सामाजिक ढांचा है धर्म का उससे मत जोड़िए मुक्ति होना एक अलग विषय है भगवान को उसकी शरण मिल जाना भगवान की शरण प्राप्त हो जाना एक अलग विषय है और सामाजिक ढांचे को बनाने के लिए वर्ण व्यवस्था इत्यादि एक अलग विषय और अगर आप करने चलेंगे तो बहुत सारी दिक्कत आएंगी क्या क्या पर्या अवसान होगा भगवान कहेंगे अर्जुन जा तू क्षत्रिय तेरा धर्म है रक्षा करना युद्ध करना धर्म युक्त युद्ध करना तेरा धर्म है जा तू क्षत्रिय लड़ जा कर के तो वहा वो अर्जुन कसे है कि मैं जो है

00:41:29:24 पंडित हो गया हूं हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे मैं तो त्रिन सन्यास लेने जा रहा हूं इसकन संस्था काभी जन्म नहीं हुआ थोड़े दिन बाद उससे लूंगा जब जन्म हो जाएगा तो और कोई तो देगा नहीं रामायण का आचार्य तो देंगे नहीं है ना तो क्या आप ऐसा समझते कि भगवान श्री कृष्ण तर्क हीन बात कहेंगे जिसको अर्जुन काट सकता हो जिसको काटा जा सकता हो तार्किक बात कहेंगे ना भाई धर्म वो होता है जो आपको बाध्य करे मानने के लिए जैसे पुत्र धर्म वह तेरा पिता है तेरा धर्म है उनकी आज्ञा का पालन करना उनकी सेवा करना उनकी रक्षा करना जब आप उस धर्म को त्याग देने को भी धर्म के रूप में प्रस्तुत कर देंगे तो वह धर्म कहां रह गया धर्म तो सीमा है ना मर्यादा रामो विग्रहवां धर्म मर्यादा पुरुषोत्तम धर्म का मतलब ही है बाध्यता यह करना है यह नहीं करना है अगर यह नहीं करके नहीं करने वाला काम करके भी तुम धर्म कहलाओगे तो वो धर्म कहां रह गया यदि तुम किसी के पुत्र हो और उनकी आज्ञा का पालन करना धर्म है तो

00:42:44:24 आज्ञा का पालन ना करना भी धर्म नहीं हो सकता है ना या पिता को ही बदल दे क्या मैं अभी थोड़ी देर किसी और का अब मेरा पिता कोई और है तो धर्म वो है जो ठोस हो जो आपको फिक्स रखे ना कि आपको फ्लेक्सिबल दे कि आप जो है कभी भी उसको त्याग करके दूसरा कार करने लगो व भी आपका धर्म कहलाए और अगर प्रैक्टिकली उसको देखेंगे तो भी बहुत सारी समस्या य तो हमने पीछे से देखा इनपुट देखा है आउटपुट देखेंगे तो भी बहुत समस्या अब कुछ लोग कहते हैं वो रक्षा करनी है तो हम पुलिस के पास जाएंगे यह जो व्यवस्था है य हमारे र् व्यवस्था नहीं है मनुवाद व्यवस्था नहीं है य धर्म का शासन नहीं है य कुछ लोग है जो कुतर करते हैं अरे भाई रक्षा करनी होगी तो फौजियों के पास जाएंगे पुलिस वालो के पास थोड़ी ना जाएंगे तो आप देख लीजिए ना जब वर्ण व्यवस्था लागू नहीं है जन्म आधारित और कर्म आधारित लागू है किसी को भी बना दिया जा रहा है तो क्या आप आज के राज्य से आप वो है

00:43:54:01 संतुष्ट जब व्यक्ति को पीछे उसके ब्लड द्वारा भी वही कर्म करने के गुण प्राप्त हैं तो उसी में उसको जब ट्रेंड किया जाएगा तो उसका जो जो क्षत्रिय होगा ब्राह्मण होगा शूद्र होगा वत्व होगा वो अपने निखर करके आएगा और वरना आप किसी के अंदर गुण कुछ आए आप उसको जबरदस्ती ट्रेनिंग कुछ दो कुछ भी करते रहो पीनी माजा है और संतरे को माजा की तरह ढालने का प्रयास करते रहो

00:44:27:13 उसमें इधर उधर से वैज्ञानिक शोध कर कर के लाकर के मिलावट करते रहो हो सकता है पीला पीला कुछ बना ले जाओ जो थोड़ा बहुत माजा जैसा स्वाद दे जाए मगर फिर भी जो प्योर आम होगा आम का स्वाद माजा जो आम का स्वाद है व आम ही देगा संतरे का स्वाद है व संतरा ही देगा हां कोई आपातकालीन स्थिति आ गई कि नहीं भाई जो है यहां पर जो है यूज करना है तो बिल्कुल यूज किया जा सकता है उसम कोई आपत्ति नहीं है मगर जब आपातकालीन स्थिति नहीं है आम अवेलेबल है तो संतरे को आम की जगह यूज क्यों करना आम को संतरे की जगह क्यों यूज करना आज की जो स्थिति है उसी को तो बदलने के लिए कर रहे हैं आज की स्थिति को ही अगर आप स्वीकार कर लेंगे कि नहीं नहीं पुलिस के पास जाना है डॉक्टर डॉक्टर के लिए डॉक्टर के पास जाना है टीचर के लिए टीचर के पास जाना है फिर वो भले ही जन्म से कुछ भी हो तो उसको आप कहां स्वीकार कर रहे हैं आपको तो परिवर्तन लाना है ना धार्मिक अनुशासन लाना है ना आपको

00:45:28:15 तो यह सब बातें ध्यान रखने की है और अंत में फिर वही बात आ जाती है सबसे बड़ा प्रश्न जो मैंने कहा कि क्रिश्चियन मिशनरीज की तरह य लोग काम करते हैं कि आपने आज तक शूद्र का सर्टिफिकेट कितनों को दिया है भाई आपके यहां पर जो भी वैष्णव हो गया तो वह सारे ब्राह्मणों से भी ऊंचे हो गए तो फिर उसके बाद मैंने कहा ना आपको वर्गीकरण तो करना ही पड़ेगा तो आज तक आपने शूद्रों का सर्टिफिकेट कितनों को दिया है जैसे आप जनेऊ देकर के और निर्दोष बताते हुए ब्राह्मण ही निर्दोष है शूद्र तो अपराधी है यह मेंटालिटी आपने बनाई हुई है और इस मेंटालिटी के बावजूद भी आपके द्वारा बनाए हुए ब्राह्मण जो है वो निकल आते हैं अपराधी आपके द्वारा बनाए हुए ब्राह्मण गाली बाज निकल आते हैं मातृ शक्तियों का बच्चों का शोषण करने वाले निकल आते हैं नले बाजी करने वाले निकल आते हैं इसका मतलब ब्राह्मण का अर्थ केवल निर्दोष नहीं है आपने बनाया है तब भी वो भी एक मनुष्य है वो भी अपराधी निकल सकता है और शूद्र का अर्थ केवल अपराधी नहीं

00:46:40:24 है वो भी एक मनुष्य है वो भी निर्दोष हो सकता है वो भी श्रेष्ठ हो सकता है उसकी श्रेष्ठता का उसका जो उसकी जो भक्ति है उसका परवन किसी भी जो ब्राह्मण जो है वो अगर अपराध कर रहा है तो अपराधी कहलाएगा जैसे रावण इत्यादि कहलाए और अगर कोई शूद्र है जो अच्छे कार्य कर रहा है तो उनकी प्रशंसा होगी जैसे विदुर जी की हुई और अंत तो गत्वा ये सारी बातें जो संस्थाएं हैं जो इस इसी ढांचे पर ही चल रही है कि जो परंपरा प्राप्त जो पीछे से चली आ रही चीजें हैं उनके द्वारा चीजें जो तुम्हें नहीं मिल रही है पहले वही चीजें तुम्हारे लिए उन चीजों के लिए आकर्षण पैदा करेंगे जबकि वो आपके लिए इंपॉर्टेंट नहीं है क्योंकि आपका मुक्ति का मार्ग दूसरा है तो जो आपके लिए इंपॉर्टेंट नहीं है जो आपको उपलब्ध नहीं है वह चीजों के लिए पहले आपके अंदर आकर्षण पैदा करेंगे और आकर्षण जन्म जब ले लेगा उसके बाद हम कहेंगे कि वो हम दे सकते हैं तुम्हे और इस नाम पर आप उसम मिला लेंगे तो बात ये आती है कि आर्य समाज और स्कोन ने कितने लोगों को शूद्र का सर्टिफिकेट दिया है

00:47:56:01 ब्राह्मण का तो दे रहे हो कितनों को दिया है एक को भी नहीं दिखाइए कितने शूद्र आपने बनाए तो इसका मतलब शूद्र का अस्तित्व ही नहीं अरे मैं कह रहा हूं शूद्र छोड़ो आपने वैश्य का सर्टिफिकेट कितनों को दिया है एक को भी नहीं क्या इस कौन आ रर समाज के द्वारा कोई वैश्य बनाया जाता है क्यों नहीं बनाया जाता सबकी ब्राह्मण दीक्षा क्यों हो रही है क्योंकि यदि किसी को बहरूपिया बनना है ना तो वो सबसे सोचता है कि वो जो वो उसकी नजरों में जो श्रेष्ठ है वही पहुंच सोच के देखना ये सारे जो पॉइंट्स मैंने जो बोले हैं विचार करिए विचार करने वाली बात और भगवान अगर आप जो कह रहे हैं वही लोकतंत्र है कि कर्म की जांच होगी सबका प्रतियोगिता होगी चुनाव होगा कौन राजा बनेगा तो राम जी के युग में कौन से चुनाव हुए थे श्री राम के युग में कौन से चुनाव हुए थे वहां मनुवाद हो तो मनुवादी रहो और नहीं हो तो ढोंग मत

00:49:08:06 करो तो आशा करते हैं यह जो व्याख्या है यह अच्छी लगी होगी और मैं एक समरा कर दूं कि भक्ति का परवन किसम है उसकी भक्ति दृढ़ करने में और उसको यह पता होने में कि भक्ति का फल क्याक है जो ऐसे प्रमाण आते हैं कि जिसने भक्ति कर ली ब्राह्मणों से भी श्रेष्ठ हो गया उन ब्राह्मणों से जो वैष्णव नहीं है या जो जिसने भक्ति कर ली उसकी जीवा पर भगवान का नाम है तो उसने सारी गंगा के स्नान कर ली तो वो वहां पर भक्ति का फल बताया जा रहा है और यह जो चीज यह जो प्रमाण है सिर्फ उस व्यक्ति के लिए जो भक्ति कर रहा है क्योंकि वह जानता है कि व अंदर से भक्ति कर रहा है कि नहीं कर रहा है हम नहीं जान सकते किसी को कि जाकिर नायक अगर हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे राम हरे राम बोलने लगे तो वो वाकई में भक्ति करने के लिए ही बोल रहा है या फिर हमारे राष्ट्र पर कब्जा करने के लिए ठीक है तो यह जो है यह जो भक्ति हो रही है य व्यक्ति के व्यक्तिगत उत्थान के लिए प्रमाण है ना कि इन शास्त्रीय वचनों का उपयोग करते हुए जाकर के समाज पर चिपका दोगे यह है तुम्हारा आचार्य इसने राम बोल दिया तो

00:50:23:06 प्रैक्टिकली भी गलत है और फिर दूसरी बात य शास्त्र अन्य बहुत सारे वचन है जो खंडित हो जाएंगे तो सामंजस्य देना है ना अर्ध कुट न्याय नहीं करना ना तो यह सारी बात है वर्ण के साथ एक शब्द लगा हुआ व्यवस्था जब आप कर्म पर जाते हैं तो व सुनने में अच्छा लगता है कि जो यह कार्य कर रहा है व वो कर रहा है व वही है मगर वह व्यवस्था नहीं है कर्म के आधार पर कोई अपना वर्ण कभी भी बदल सकता है व अपने वर्ण उचित धर्म को मानने के लिए बाध्य नहीं है और यदि कोई व्यक्ति जब ये जो जन्मना वर्ण वस्था जब हम उसको बाद करेंगे तो वहां पर अपने वर्णो चित धर्म को ना मानने की स्थिति में व पापी कहलाएगा दोषी कहलाएगा मगर यहां पर क्या होगा अपने वर्णो चित धर्म को ना मानने की स्थिति में भी वह पापी नहीं कहलाएगा व दोषी नहीं कहलाएगा यह व्यवस्था नहीं है यह विप्लव है तो समझने का प्रयास करिए सकारात्मक सोच के साथ तर्क के साथ सोचिए कि कर्म वर्ण व्यवस्था से आउटपुट क्या निकल रहा है व्यवस्था हो रही है कि नहीं हो रही है नहीं हो रही है अच्छा अगर कोई कहे कि एक बार नाम लेने से थोड़ी ना हो जाएगा तो कितनी बार लेने से होगा फिर इसमें प्रमाण चाहिए

00:51:38:28 होगा कितनी बार लेने से होगा फिर इसमें प्रमाण चाहिए होगा किसी थर्ड पार्टी का ऐसी पार्टी का जिसकी जिसका वचन हमारे आपके लिए दोनों के लिए मान्य हो वो हो गया शास्त्र ऐसा कोई वचन तो है नहीं 10 बार नाम लेने से होगा या एक लाख बार नाम लेने से होगा और आपको बता दूं कि जब गिनती करने की बात आती है तो शास्त्र में वचन है कि इतनी करोड़ बार अगर गायत्री मंत्र या फलाना मंत्र या वो वाला मंत्र अगर आपने जाप कर लिया तो आपका पुरुष चरण हो गया यानी कि ऐसा नहीं है शास्त्र संख्या नहीं बताते जहां पर बतानी होती है तो संख्या भी बताते हैं तो अगर मंत्र का जाप करने से नाम का जाप करने से किसी को ब्राह्मण होना था किसी को शूद्र क्षत्रिय वैश्य होना था तो इसकी व्यवस्था शास्त्रों ने की होती प्रमाण नहीं है तर्क भी नहीं है प्रमाण भी नहीं है और सबसे बड़ी बात कि शास्त्रों में कहीं कोई वचन नहीं है कि तुम्हें ब्राह्मण बनना है तुम्हें शूद्र बनना है जीवन के उद्देश्य में कहीं यह नहीं बताया गया कि सब ब्राह्मण बनना चाहिए वैष्णव बनना चाहिए भक्त बनना चाहिए श्रेष्ठ बनना

00:52:54:02 चाहिए ब्राह्मण क्षत्रिय व शूद्र बनने के लिए कहीं भी प्रेरणादायक कोई श्लोक प्रमाण नहीं है मुक्ति के पथ पर चलना चाहिए सत्य बोलना चाहिए ये सब निर्देश है ना कहां निर्देश है कि ब्राह्मण बनना चाहिए क्योंकि ब्राह्मण कोई अपनी इच्छा से नहीं बनता अपने कर्म उससे नहीं बनता है प्रयासों से ब्राह्मण बनके वो जन्म लेता है उसके बाद यदि वो ब्राह्मण के अनुसार कर्म नहीं करता है तो हीन हो जाता है पतित हो जाता है तिरस्कृत हो जाता है बहिष्कृत हो जाता है रहता ब्राह्मण ही है ब्राह्मण शब्द से आप निर्दोष को और शूद्र शब्द से आप अपराधी को जोड़ना बंद कर दो शूद्रों के साथ य नफरत बंद कर दो शूद्र केवल अपराधी नहीं है और ब्राह्मण केवल निर्दोष नहीं है इस बात को सभी जाने ब्राह्मण केवल निर्दोष नहीं है और शूद्र केवल अपराधी नहीं है तो सराइज क्या हुआ कि भक्ति का परवन भक्ति को श्रेष्ठ बताने वाले वैष्णव को श्रेष्ठ बताने वाले शास्त्रीय वचनों का परवन उसकी भक्ति को दण करने में और उसको यह बताने में है कि तुम्हें किस प्रकार के फल प्राप्त हो सकते हैं अगर तुम यह करते रहते

00:54:09:07 हो करोगे समाज समाज को प्रमाण के रूप में उस व्यक्ति की भक्ति को प्रामाणिक बताते हुए और समाज पर चिपकाने के लिए नहीं है कि आज से तुम्हारे हो गए शंकराचार्य आज से तुम्हारे हो गए रामानुजाचार्य आज से त्रिन सन्यासी हो गए इसके लिए नहीं है ठीक दूसरी बात यह जो ब्राह्मणवाद ब्राह्मणवाद है ऐसा नहीं है ऐसा कुछ नहीं है इसका अर्थ है य जो जन्मना वर्ण व्यवस्था का अर्थ जो लोग ब्राह्मणवाद बताते ब्राह्मणों को ऊंचा रखना चाहते नहीं इसका अर्थ होता है जन्मना वर्ण व्यवस्था के की जन्म से नॉमिनेशन और कर्म से सिलेक्शन ऐसा नहीं है कि कोई गलत कार्य भी कर रहा होगा तब भी उसको जो है ले लिया जाएगा नहीं वो सेलेक्ट नहीं होगा यज्ञ के लिए वो यज्ञ से निष्कासित हो जाएगा उसकी संज्ञा ब्राह्मण

00:55:00:28 रहेगी और ब्राह्मण केवल निर्दोष नहीं है और शूद्र केवल अपराधी नहीं है इस तरह का सोचना बंद कर दीजिए और अगर हम कर्म के अनुसार मान लेते हैं तो उसमें ना तो प्रामाणिकता है प्रामाणिकता क्यों नहीं है क्योंकि भगवान किसी को कहीं जन्म देते हैं तो पूर्व जन्मों के कर्मों के कारण देते हैं तो चातु वण ने मया सटम वाला शलोक हो गया प्रामाणिक क्यों नहीं है क्योंकि मया सिस्टम यहां व्यक्ति सृष्टि कर रहा है अपने वर्ण की अपनी इच्छा अनुसार वह जो कर्म कर रहा है उसके अनुसार वह हो रहा है ठीक है और प्रामाणिक क्यों नहीं है कि कर्म सकता का लोप हो जाएगा पतित ब्राह्मण का लोप हो जाएगा क्योंकि ब्राह्मण जब पतित होगा तो व तो क्षत्रिय बन गया पतित ब्राह्मण कहा है दुनिया में है ना ब्राह्मण जब पतित हो गया तो वो वैश्य बन गया आपके अनुसार तो पतित ब्राह्मण कहां रह गया तो अस्तित्व ही नहीं रह जाएगा शूद्र का अस्तित्व ही नहीं रह जाएगा तो शूद्र के जो वो दिए गए हैं आपके अनुसार क्योंकि आपने आज तक शूद्र कोई बनाया नहीं तो प्रमाण नहीं है और कहां कहां से प्रमाणों में दिक्कत आती है कि जो वेद पढ़ेगा जो ब्रह्मज्ञानी होगा

00:56:16:22 वो ब्राह्मण होगा और वेद कौन पढ़ेगा जिसको उपनयन होगा उपनयन किसका होगा कैसे होगा ब्राह्मण का तो यहां ब्राह्मण पहले तय हो रहा है तो यहां भी प्रमाण से विरोध है और तर्क की तर्क का क्या है कि हम किसी को भी केवल भगवान का नाम लेने के कारण अपने आही संवेदनशील गद्दिया पर नहीं बिठा सकते क्योंकि हम यह जांच नहीं कर सकते कि वाकई में भगवान का नाम ले रहा है तो किस भावना से ले रहा है तो यह सिस्टम यह उसके प्रति कोई घणा नहीं है एक सिस्टम है प्रोटोकॉल है जिसको हमें फॉलो करना है और

00:57:03:12 अ और आउटपुट क्या है कि यह जो कर्मणा वर्ण व्यवस्था है यह व्यवस्था नहीं है ये तो विप्लव है क्योंकि कोई भी अपने दायित्व से कभी भी मुख फेर सकता है और उसको भी लोग धर्म कह सकते हैं जैसे कोई जैसे आज की तारीख में हमने कर्मणा फौजी बनाया कर्मणा पुलिस वाला बनाया तो वोह रिजाइन दे सकता है और रिजाइन देने में भी उसको अपराध की दृष्टि से नहीं देखा जाएगा मगर जब क्षत्रिय अपने क्षत्रियो चित कर्म को नहीं कर रहा होगा जन्मना मरण व्यवस्था में तो उसको दोष की दृष्टि से देखा जाता है हीन हो गया जिसने अपने धर्म का पालन नहीं किया पतित हो गया ये दोष की दृष्टि से देखा गया ठीक है और एट दी एंड जो संस्थाएं दावा करती है कि कर्मों से होता है कर्मों से होता है वो शूद्र कहां है कितने शूद्र उन्होंने बनाए अरे शूद्र छोड़ो वैश्य कितने बनाए तो यह सारी चीजें हैं इस पर चिंतन मनन करें लॉजिकली सोचिए थोड़ा सा सकारात्मकता के साथ सभी को जय श्री राम [संगीत]

Plans for this video (0)

No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.

🤖 Ask AI for suggestions

AI reads the remaining (unused) parts of this video and gives ideas for new videos: from where to where, hook, and what to remove from the middle. Suggestions follow the RULES and appear here as "AI Suggestion". You can review, edit or approve them.

  • ⬜
    Hindi SRT Required

    YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)

  • ⬜
    English SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.

  • ⬜
    Title (per Rules)

    Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.

  • ⬜
    Description

    YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.

  • ⬜
    End Screen

    YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.

  • ⬜
    Cards

    YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.

  • ⬜
    Playlist Automatic

    YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.

  • ⬜
    Thumbnail

    YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.

"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.

Playlists

Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).

A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 58:14 · 08 Mar 2025

ब्राह्मण अपराधी नहीं हो सकता है पर शुद्र अपराधी हो सकता है- Iskcon | Arya Samaj

0%
☁️ Drive Not in Drive yet

🔗 This video is made from parts of these videos

A · Live Discussion with iskcon-Follower #iskcon #iskcondevotees
Open at 01:18:29:14
B · Live इस्कॉन की वर्ण व्यवस्था Discussion with iskcon follower-Ajay Sharma #...
Open at 01:03:51:28 Open at 01:08:32:00 Open at 01:17:57:16
A · Video अनसुलझे प्रश्न Disciple of srila prabhupada #iskcon #iskcondevotees
Open at 00:35:19:18
A · Live Live Discussion सत्यार्थ प्रकाश के अनुसार ईश्वर क्या है? #aryasamaj #s...
Open at 00:31:12:25

Notes

Description

(empty)

History

No changes yet.

✂️ Clip Cutter

⌨️ Keyboard shortcuts

Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop

▶

Start

End

🔍 zoom
Already used Plan clips
⚠️ () of this clip is already used in another video (green part). Fine if on purpose, otherwise change the times.
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)

Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".

Clips () · Total

Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.

Hook, full note for editor, status