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00:00:00:02 आशा करता हूं सभी कुशल मंगल होंगे इस लाइव को रखने का एक विशेष प्रयोजन यही है कि हमारी जो सिद्धांत है हमारे उन पर जब कोई प्रश्न उठता है तो सही बात है कि हमें नए नए दृष्टिकोण मिलते हैं और उन दृष्टिकोण से देखते हुए अपने सिद्धांत को रूप से समाज में स्थापित करने का एक अवसर प्राप्त होता है तो इसी के चलते अभी कुछ रिसेंटली जैसा कि आप लोगों ने देखा होगा कुछ सवाल उठाए गए हैं पर मैं कहूंगा कि यह जो सवाल है यह आज नहीं उठाए गए यह पहले से हैं और यथोचित इनके समाधान जो है

00:01:00:18 जो हमारे पूर्वा चार्य गण है उन्होंने दिए हैं पर मैं इस सबको शुरू करने से पहले एक बात ये याद दिलाना चाहता हूं कि भाई बात शुरू हुई थी परंपरा से हमने सबसे पहले केवल इतना पूछा था कि आपको वेद मंत्र कैसे प्राप्त हुए अब उसमें हमारा हमने कहीं भी यह नहीं किया कि भाई नहीं हमारी जो परंपरा है वह सुपीरियर है वो बाद की बात है कि हम जो परंपरा बता रहे हैं उस पर किसी को विश्वास होता है कि नहीं होता है वो एक अलग परिपेक्ष है आप जो परंपरा बताएंगे उस पर किसी को विश्वास होगा कि नहीं होगा वो एक अलग परिपेक्ष है मगर क्या आपके पास कोई बताने के लिए ही सही कोई परंपरा है तो यहां से जब बात शुरू होती है और उसके बाद आप सभी ने जो लोग वीडियोस को देख रहे हैं लगातार बने हुए हैं साथ में तो अ जी मैं क्वेश्चंस लूंगा बैकुंठ धाम जी मैं अपनी बातों को रख लू फिर मैं क्वेश्चंस लूंगा तो इस एक बात का जवाब ना देते हुए पहले तो विषयात

00:02:16:04 ही कह लीजिए कि बहुत सारे सवाल खड़े कर दिए गए शंकर परंपरा पर हमने परंपरा पर सवाल नहीं खड़ा किया था हमने केवल पूछा था कि वेद मंत्र कैसे मिले अब इनका उनके पास उत्तर नहीं था जाहिर सी बात है कि जब आप राजनीतिक बहस देखेंगे तो उसमें विषयात किया जाता है बार-बार जब सवाल का जवाब नहीं होता तो विषयात उन्होंने किया कि अ आप यह आपके परंपरा में यह है आपने शांक का विरोध किया है आपने कपिल का विरोध किया है आप स्वयं को भिक्षु कहते हो और और भी ना जाने क्या-क्या उन्होंने इस तरह की बातें कही दशनामी परंपरा आपने शुरू नहीं की है बहुत सारी बातें कई तो इन सब बातों का यथोचित उत्तर हमने फिर से पुनः दिया फिर से अपनी बात को ऐसे समाप्त किया कि यह भी मान लिया जाए कि हम गलत हैं पर हमारे गलत होने से आपका सही सिद्ध होना माना नहीं जा सकता आपको स्वयं को तो सिद्ध करना पड़ेगा ना कि आपके पास वेद मंत्र कैसे आए वो आपने नहीं बताया और इसके बाद जब हमने कई सारी बातें बता दी तो उन्होंने फिर

00:03:31:07 प्रतिकार स्वरूप फिर बहुत सारी चीजें की मगर मैं ये देख रहा हूं कि उन जो ऋषि उवाच है या जो भी आर्य समाज के फॉलोअर हैं हर हर महादेव भैया जो आर्य समाज के फॉलोअर हैं वो अ मेरे ख्याल से उन प्रश्नों को चयन करते हैं सिलेक्शन करते हैं सिलेक्टिव मूड प आते हैं जिन पर वह बात कर सकते हैं तो हालांकि उनकी सभी बातों पर हमने बात की है पर कुछ ऐसे सवाल है जिनका अलग से जिन पर अलग से बात करना मैंने आवश्यक समझा तो इसलिए मैं आपके सामने आज उपस्थित हुआ हूं तो सबसे पहला तो बात है कि भाई उन्होंने बड़े एक्शन पैक वाले मोड में बोला था कि नहीं भाई हमारा

00:04:22:25 जो हम उस ईश्वर को मानते हैं जो नाच के नहीं दिखाएगा या इस तरह की चीजें नहीं करता है बुराई नहीं है एक तरीके से ईश्वर के अंदर यह उनका कहना था तो जो दूसरे जो सनातन विरुद्ध विचारधाराएं हैं वह कैसे हारती हैं सनातन विचारधारा से कैसे हारती है क्योंकि उन्होंने भी ईश्वर को पूर्ण रूप में नहीं स्वीकार किया है पूर्ण मतलब इस जगत का पूर्णतया इस जगत में ऐसी कोई चीज ना हो जिस को उसने ना बनाया हो इस रूप में स्वीकार नहीं किया या तो वो अपने को अलग कर लेगा या फिर जब ये प्रश्न पूछोगे तो हार जाएगा क्या प्रश्न है कि मान लो ईश्वर नाच नहीं सकता है पहली बात तो हमने प्रश्न ये नहीं किया कि वह नाचेगा या नहीं नाचेगा हमने प्रश्न ये नहीं किया कि वह अवतार ले सकता है या नहीं ले सकता है हमने हमने प्रश्न ये नहीं किया कि वो अवतार लेगा या नहीं लेगा हमने कहा कि उसके अंदर कैपेबिलिटी नहीं है है कि नहीं है तो आपने बड़े ही उसको क्या कहे

00:05:37:27 चातुर्य भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि वो जाहिर बात है आपने इस बात का उत्तर ना देते हुए कि वह ले सकता है कि नहीं ले सकता कर सकता है या नहीं कर सकता उन्होंने जवाब दिया कि हमारा ईश्वर ऐसा नहीं करता करता में और कर सकने में अंतर है पहली बात मैं कोई कार्य कर सकता हूं इसका अर्थ यही नहीं होगा कि मैं वह कार्य करता भी हूं है ना तो उन्होंने यह जवाब दिया हमारा ईश्वर ऐसा नहीं बड़ा इमोशनल अंदाज में हमारा ईश्वर ऐसा नहीं है तो ठीक है अब सवाल यह आता है जब आपका ईश्वर बुराई नहीं कर सकता या तुच्छ कार्य नहीं कर सकता तो दुनिया में बुराई को बनाया किसने

00:06:32:27 बुरा करने वालों को जन्म कौन दे रहा है वह आपका ईश्वर नहीं दे रहा है क्योंकि आपके ईश्वर के अंदर तो बुराई है ही नहीं अगर आप यह कह दे कि भाई बुराई प्रकृति में है वह जो गुण है वह प्रकृति में है और ईश्वर केवल बनाता है प्रकृति के साथ संबंध बना कर के प्रभावित होकर के वो व्यक्ति बुराई वगैरह करने लगता है फिर भी इसका क्या जवाब होगा कि आदमी जो है बुराई करेगा या नहीं करेगा जाकर के प्रभावित होगा कि नहीं होगा तामसिक गुणों से प्रभावित होगा कि नहीं होगा अगर ईश्वर को जो कहो कि ईश्वर को पता है कि यह प्रभावित हो जाएगा तो इसका मतलब है कि तुच्छ काम को बुराई को बनाने वाला भी ईश्वर ही है और जो कहो कि उसको नहीं पता है तो वो ईश्वर सर्व ज्ञाता नहीं है दोनों ही स्थितियों में आपकी चीजें कॉम्प्रोमाइज हो गई या तो आपको मानना पड़ेगा कि उसने सोच समझ के ही बुराई को जन्म दिया उसको मालूम था किय आदमी ऐसा ऐसा कार्य करेगा य रेप करेगा या यह चोरी करेगा यह पाप करेगा यह डांस करेगा आपके हिसाब से यह है

00:07:47:18 तो उसने यह सब जानते बूझ हुए किसी को बनाया या तो यह मानना पड़ेगा या फिर यह मानना पड़ेगा कि उसको पता ही नहीं था कि जिस जीव को मैं शरीर दे रहा हूं जन्म दे रहा हूं बना रहा हूं जन्म दे कुछ भी कर रहा हूं मनुष्य रूप में तो उसको मालूम नहीं था कि यह क्या करेगा तो वह सर्व ज्ञाता सिद्ध नहीं होता तो इस हिसाब से आप पहले अपना वैसे मैं इसके बाद और कोई प्रति उत्तर में नहीं बनाऊंगा क्योंकि जो इस सीरीज को देख रहा होगा उसमें वह अब तक अगर वो न्यूट्रल हो कर के देखेगा पक्षपात विहीन तरीके से देखेगा तो उनका पक्ष बहुत जगह बत कमजोर रहा है उन्होंने कई प्रश्नों के तो जवाब छुए ही नहीं जैसे हमने बार-बार प्रश्न किया अलंकार का आधार क्या है जैसे हम कहते हैं व्यवहार और परमार्थ तो उनकी तरफ से क्वेश्चन आता है कि भाई व्यवहार और परमार्थ शास्त्रों में नहीं दिया वेदों में नहीं दिया पहली बात तो व्यवहार और परमार्थ हम आपको समझाने के लिए बोल रहे हैं और शास्त्रों में भी मिल जाएगा ऐसा नहीं है मगर अगर कहते कि नहीं मिले तो क्या वेदों के मंत्रों को अलंकार माना जाए इस संबंध में कोई प्रमाण

00:09:02:25 है वेदों का कि उसके मंत्रों को अलंकार मान लिया जाए जी जी जय श्री राम सभी को तो यह हो गई बात अब बात करते कि जब ईश्वर के अंदर बुराई भी है तो फिर ईश्वर की पूजा क्यों हो रही है ईश्वर के अंदर सब कुछ है हम ईश्वर के उस रूप की पूजा करते हैं जो वेदों का प्रतिपादन कराए जो मोक्ष का प्रतिपादन कराए मगर उसके जो बाकी का जो रूप है उससे हम उसको डिटैच नहीं मानते अगर डिटैच कर लेंगे अलग कर देंगे बाकी के रूप से तो उसकी सर्वशक्ति मत्ता भंग हो जाएगी चाहे कैसे भी करके देख लो अगर ईश्वर को आप किसी चीज से अलग करेंगे ईश्वर से भिन्न किसी चीज का अस्तित्व मानेंगे तो ईश्वर को सर्वशक्तिमान आप सिद्ध नहीं कर पाएंगे मैंने तो कई बार कहा और आपसे इसको ऐसा नहीं आर समाज वालों से आगे भी चर्चा होनी है बिल्कुल मैं जाऊंगा संभ्रांत जो थोड़े बहुत संभ्रांत होंगे उनके पास जाऊंगा अमर्यादित भाषा शैली का उपयोग करने वालों के मंच पर या उनसे बात करने अपने मंच पर उनको नहीं बुलाऊंगा यह सिद्धांत है तो अलंकार हों से मेरा प्रश्न यही है कि यदि

00:10:18:08 ईश्वर बुराई कर नहीं सकता पर वह करने वालों को बना रहा है तो इस अंश में भी तो वह बुरा हुआ बुराई को जन्म देने वाला बुराई को बना बने वाला उसको मालूम है कि ऐसा करेगा फिर भी वह उसको बना रहा है या तो कहो कि उसको नहीं मालूम है ऐसा करेगा अब जरा यह देखते हैं क्या ईश्वर के लिए कुछ भी अच्छा बुरा है एक पेंटर जब पेंटिंग बनाता है तो यदि वह पेंटिंग में अगर किसी स्त्री की व पेंटिंग बना रहा है तो

00:10:55:18 वह वर्टिकल ही तो है ये येय हॉरिजॉन्टल करने को बोलर यह वर्टिकल है ना ऊपर से नीचे की तरफ कोई बताएगा मेरी मेरा आपको वर्टिकल दिख रहा है हॉरिजॉन्टल दिख रहा है ठीक है हां जैसे एक पेंटर ने पेंटिंग बनाई वो एक स्त्री की पेंटिंग तो जब वह स्त्री की पेंटिंग है तो उसमें जब वह आंखों में कलर भर रहा होगा कानों में कलर भर रहा होगा या फिर वह नीचे का जो अंग प्रत्यंग होते हैं मातृशक्ति के उसमें जब वो रंग भर रहा होगा तो उसके लिए क्या ऊपर और नीचे में कोई भेद होगा भेद हमारे पर्सपेक्टिव से है क्योंकि हम उस पेंटिंग के अंदर है हमारे लिए सब अंतर है उसके लिए सब कुछ एक है तो इसलिए वह जो बुराई हमको लग रही है कि ईश्वर बुराई कर सकता है वह सभी तत्व ईश्वर के ही है ईश्वर ही है ब्रह्मे गंतव्य ब्रह्म कम समाधि ना भगवत गीता 4 24

00:12:11:02 यज्ञ में करने वाला भी ब्रह्म है क्रिया भी ब्रह्म है क्रिया भी ब्रह्म है यह भी ध्यान रखिए और सामग्री जो डाली जा जा रही है यज्ञ में वो भी ब्रह्म है फल स्वरूप प्राप्त भी ब्रह्म होगा तो ब्रह्म के पर्सपेक्टिव से कुछ भी बड़ा छोटा है ही नहीं जो कुछ दुनिया में भेद है वह भेद हमारे पर्सपेक्टिव से है अच्छा बुरा यह है ब्रह्म अगर इसको नहीं मानेंगे

00:12:44:07 अगर इसको नहीं मानेंगे तो हमको ईश्वर को बाधित सिद्ध करना होगा बाधित सिद्ध हो जाएगा तो वो ईश्वर की वो मनुष्य की चाह का विषय नहीं रहेगा जब मनुष्य की चाह का विषय नहीं रहेगा जब वह मनुष्य की चाह का विषय नहीं रहेगा तो फिर मनुष्य को क्या आवश्यकता है कि वह उसकी भक्ति करे उसको प्राप्त करने के लिए प्रयासरत हो वह उसकी चाह का विषय नहीं है क्योंकि मनुष्य जो है स्वयं अवाद बनना चाहता है अवाद य मैं नहीं कह रहा आपने भी माना भगवान श्री कृष्ण अपनी इच्छा अनुसार जन्म लेने की बात कर रहे हैं सत्यार्थ प्रकाश के अनुसार आपने इस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं दिया है ना कि भगवान श्री कृष्ण की चाह का विषय क्या था जब ईश्वर भी ऐसा नहीं है जो अपनी इच्छा अनुसार जन्म ले

00:13:40:04 सके अच्छा अब आगे जो दूसरी बात आती है कि ईश्वर अ पक्ष अ इसी तरीके की और भी उन्होंने बातें कही जैसे उन्होंने ये सब बातें तो हम लोग कर ही चुके हैं कि ब्रह्म को उन्होंने कहां पर क्या कहते ब्रह्म को उन्होंने व्यावहारिक धरातल पर वादित करने का प्रयास किया या परमार्थिक धरातल पर इस पर हम नहीं जाएंगे हम केवल अभी इस जो भौतिक दुनिया जो मनुष्य को दिखाई दे रही है उस दुनिया के ही पर्सपेक्टिव से केवल अगर देख ले तो उनका जो ईश्वर है वो बाधित सिद्ध होता है बहुत से कार्य नहीं कर सकता है जैसे उन्होंने कहा कि भाई वो लीला नहीं करेगा वो डांस नहीं करेगा वो ये नहीं करेगा तो यह सारे तत्व भी उसके नियंत्रण से बाहर है मैं पूछ रहा हूं ऐसे ईश्वर की किसको आवश्यकता है कि कहीं पर कुछ हो रहा है गलत अन्याय अन्याय हो रहा है मगर वह जो अन्याय जो जगह हो रही है वहां पर ईश्वर का कोई नियंत्रण नहीं है वहा ईश्वर कुछ नहीं कर सकता मैं ये नहीं कह रहा वो करेगा कि नहीं फिर ध्यान रखना करेगा कि नहीं वह अलग बात है कर सकता है कि नहीं

00:14:55:25 क्या वह नियम में बंधा हुआ है कि नहीं कर सकता यह मैं पूछ और मैंने अगर वह किसी प्रकार से किसी का किसी की कोई सहायता कर ही नहीं सकता है तो वह मनुष्य की चाह का विषय कैसे होगा क्या संबंध है उसके मनुष्य के बीच चलो इस तरह से देख लेते हैं कि भाई दुनिया में कोई ऐसा है जिसने सृष्टि बनाई है ठीक है बनाई है हम क्या करें हमें क्या मतलब बनाई है हम क्यों करें उसकी भक्ति जै दुनिया में कोई बहुत पैसे वाला है बहुत शक्तिशाली है तो हम क्या उसकी भक्ति करने लग जाए क्योंकि वह शक्तिशाली है क्यों करने लगे भक्ति तो जब तक हम इसको रिलेट नहीं करेंगे कि तुम्हारी चाह का विषय वही है तुम्हें उसी को प्राप्त करना है तुम्हारे उसके बीच में संबंध है तुम उसके अंश हो व अंशी है तब तक हम ये उसकी जो उसके पीछे पढ़ना प्रतिबद्धता के साथ वेग के साथ हम सिद्ध नहीं कर पाएंगे और फिर हमारा जो ईश्वर है अब्राम हो कर के रह गया क्योंकि वह फला फला फला फला कार्य नहीं कर सकता उसके ऊपर नियम है पूर्ण का मतलब होता है पूर्ण किसी भी प्रकार से किसी

00:16:11:04 भी प्रकार से वह बाधित ना हो व्यवहारिक धरातल ध्यान रखिए क्योंकि परमार्थिक धरातल व्यवहार का विषय है ही नहीं प्राप्त व्य का विषय जैसे कि कैलोरी प्राप्त व्य का विषय है और कैलोरी प्रदान करने वा वाला जो अ फूड है सगुण साकार भोजन है वह व्यवहार का विषय है आप कैलोरी के लिए हाथ पैर नहीं मार सकते इसी प्रकार से व्यवहार और परमार्थ में अंतर है और भी कई सारी बातें हैं

00:16:59:12 अब इसके बाद जब हम भक्ति पर आ गए पूजा पर आ गए हैं तो इसमें एक बात आती है कि भगवान की भक्ति करने से उन्होंने कहा अपनी वीडियो में कि मैंने झूठ कहा है सत्यार्थ प्रकाश के बारे में देखिए उन्होंने वहां पर एक कोई ब्रह्म सूत्र का भाष्य दिखाया था आदि शंकराचार्य जी का तो पहली बात तो मैं फिर वही कहूंगा कि वो कहां पर व्यवहार की बात कर रहे हैं कहां परमार्थ की बात कर रहे हैं यह आपको नहीं पता है दूसरी बात हम हमारे किसी भी ग्रंथ से कोई भी क्लेम करने से पहले आपको परंपरा प्राप्त आचार्य के पास जाना होगा क्योंकि आप भले ही परंपरा प्राप्त अध्ययन को माने या ना माने हमारे लगभग सभी ग्रंथों में माना गया है श्रुति के प्रमाण के साथ उन श्रुति हों को आप हटा दे उन प्रमाणों को आप नजरअंदाज कर दे तो बात एक अलग है वो एक बात चर्चा का अलग विषय हो पर कम से कम हमारे ग्रंथ का अध्ययन आप अगर कर रहे हैं और उस अध्ययन के अनुसार अगर कोई प्रश्न खड़ा कर रहे हैं तो पहले जाइए परंपरा प्राप्त आचार्य उसमें भी सार्वभौम आचार्य पद पर बैठने वाले आचार्य के पास जाकर के यह वहां पर कंफर्म कीजिए कि मैं आपके ग्रंथ का जो अर्थ ले रहा हूं क्या वही अर्थ है यह

00:18:14:25 पहली बात दूसरी बात आपने सत्यार्थ प्रकाश का कहा कि उसमें जो है ईश्वर की भक्ति करने से ईश्वर के गुण का आना नहीं लिखा है बल्कि उसके प्रभाव से हमारा जो है सुधरना लिखा है गुणों का सुधरना हमारे अंदर सुधार होगा और ऐसा कहीं नहीं लिखा कि ईश्वर के गुण आपके अंदर आ जाएंगे तो वह मैं आपको दिखा देता हूं यह है पृष्ठ संख्या

00:18:48:22 151 ठीक है 151 पृष्ठ संख्या है सत्यार्थ प्रकाश अभी मैंने इसमें कोई अपनी तरफ से पृष्ठ चिपकाया नहीं है अगर एक दिन चिपका उा ये भी मैं बता द एक दिन चिपका उंग और आपके पास आऊंगा मैं पूछूंगा कि इसमें लिखा हुआ है कि गिल्ली डंडा खेलने से मोक्ष प्राप्त होता है ऐसा लिखा है क्या आप कहोगे नहीं लिखा है तो क्या होगा मैं कहूंगा कि आपका ग्रंथ क्यों माना जाए मेरा ग्रंथ क्यों नहीं माना जाए आपके पास कोई जवाब नहीं होगा यदि आप परंपरा की बात नहीं करेंगे तो ठीक है मैं आऊंगा एक ना एक दिन मैं बता रहा हूं मैं एक सत्यार्थ प्रकाश ऐसी छपवा ंगा जिसमें कि जिसके आधार पर मैं प्रश्न करूंगा आपसे कि इसमें ये ये ये ये लिखा हुआ है तो फिर आपकी बात क्यों मानी जाए और ये मेरी वाला जो ग्रंथ है इसको क्यों ना माना जाए आपके पास कोई जवाब नहीं है यदि आप परंपरा की बात नहीं करेंगे तो और हो तो बताइएगा उसी दिन जिस दिन मैं लाऊंगा ठीक है आपके पास नहीं आऊंगा आपके पास क्योंकि अब आपको ये बता दिया तो आपके पास नहीं आऊंगा किसी के पास जाऊंगा यह परंपरा वाली बात को क्लियर करने के लिए कि परंपरा

00:20:03:22 कितना महत्त्वपूर्ण शब्द है जिसको आपने ताक में उठा के रख दिया है ना गधा समझते हैं परंपरा को आप ना ठीक अब इसमें आप देख लीजिए सत्या प्रकाश है और यह लिखा हुआ है स्तुति का फल क्या है इससे फल यह है कि जैसे परमेश्वर के गुण है वैसे गुण कर्म स्वभाव अपने भी करना ईश्वर के जैसे गुण है वैसे गुण कर्म स्वभाव अपने भी करना अब ईश्वर के गुण क्या क्या है आगे उदाहरण भी है आगे उदाहरण भी है जैसे वह न्याय कारी है तो आप भी न्याय कारी होवे यह भक्ति का फल कितना झूठ बोलोगे भाई पहली बात तो जो प्रश्नों का चयन करते हो वह अपने कंफर्ट जोन उनके हिसाब से करते हो किस किस प्रश्न पर मैं बोल सकता हूं मैं आर्य समाज के मंदिर में 2100 लेकर के विवाह की बात पर नहीं बोलूंगा है ना

00:21:19:00 उस पर नहीं बोलूंगा वह हमारी दुकाने चल रही ना व घर से माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध जो ताने वो जा रही है लापता हो गई उनका विवाह हो रहा है उस पर आप नहीं बोलेंगे ठीक है मुस्लिम मुस्लिम के साथ गैर हिंदुओ के साथ विवाह हो रहा है उस पर आपने कोई जवाब नहीं दिया अलंकार पर आपने कोई जवाब नहीं दिया श्री कृष्ण वाले सवाल पर आपने कोई जवाब नहीं दिया भाई मनुष्य अगर दुनिया में भगवान ने सृष्टि की रचना कर भी दी है तो उसका आप संबंध तो स्थापित करिए अगर कोई शक्तिशाली है तो हम क्या करें होगा भ अपने जब तक वह हमसे उसका कोई कनेक्शन आप नहीं सिद्ध करोगे तब तक वह क्यों बाद होगा उसके अनुसार धर्मा आचरण करने को तो अधर्म का प्रतिपादन कौन कर रहा

00:22:16:04 है अब बात आती झूठ पर कितना इसमें आपने अपने वीडियोस में बोला कि सत्यार्थ प्रकाश में ऐसा नहीं लिखा हुआ है अब आप चेक करिए यह वाला प्रश्न मैंने चिपकाया नहीं है हां मगर मैं एक दिन आपसे परंपरा के विषय में प्रश्न करूंगा जरूर कि यदि सत्यार्थ प्रकाश में यह लिख दिया जाए कोई झूठा पब्लिशर यह लिख दिया जाए कि झूठे पब्लिशर के द्वारा य छाप दिया जाए कि गिल्ली डंडा खेलने से मोक्ष मिलता है टेनिस खेलने से मोक्ष मिलता है है ना चुटकुले सुनाने से मोक्ष मिलता है तो उसको क्यों ना माना जाए

00:23:02:14 उसको क्यों ना माना जाए और आपके वाले ग्रंथ को क्यों माना जाए आपको आना होगा कि जो चेन ऑफ नरेशन है हमारी अर्थात परंपरा है सत्यार्थ प्रकाश से जो होके चली आ रही है वह लोग जो बात कहेंगे वह मान्य होगी नहीं कहेंगे तो आप सिद्ध नहीं कर पाएंगे कि कौन सी किताब सच्ची है कौन सी झूठी परंपरा के बिना अस्तित्व नहीं है अलंकार समाज जो आपने बनाया है परंपरा का खंडन कर कर के अच्छा अब एक दूसरी बात आती है ईश्वर की भक्ति के विषय में यह तो प्रश्न हो ही गया आपने जो कहा था वह झूठ सिद्ध हो गया आपकी सत्या प्रकाश में लिखा है कि ईश्वर की भक्ति का फल यह है कि उसके जैसे कर्म स्वभाव गुण हमारे भी हो अगर ईश्वर न्याय कारी है तो हम भी न्याय कारी हो इसका अर्थ क्या हुआ ईश्वर उत्पत्ति स्थिति समार करने वाला है कर्मों का फल देने वाला है तो हम भी वही हो आ गया ना अद्वैत आप शाब्दिक भेद करते रहो मगर आपको आना अद्वैत पर ही पड़ेगा या तो आप ये मानो कि बहुत सारे ईश्वर हो जाएंगे

00:24:17:15 उत्पत्ति स्थिति समार करने वाले और या फिर यह मानोगे उसमें लीन हो जाओगे नहीं तो इस बात को सिद्ध करो कि गुण आने का क्या मतलब है अगर उत्पत्ति स्थिति समान कर्मों के फल देने को छोड़कर बाकी के गुण आ रहे हैं न्याय कारी होना दयालु होना तो यह फिल्टर किस आधार पर है यह भी बताइए अभी एक तरीका और है मैं आपको मूर्ति पूजक भी सिद्ध करूंगा व भी आप देखिए अब वो कैसे होगा आपने कहा कि ईश्वर की भक्ति का फल यह है कि उसके गुण आएंगे हमारे अंदर और जो आपका भाव प्रकट हो रहा है सिद्ध नहीं है आपका भाव प्रकट हो रहा है कि ईश्वर की उत्पत्ति समार वाली चीज तो नहीं आएंगी मगर हा आप परोपकारी हो जाओगे दयालु हो जाओगे और क्या क्या हो जाओगे मतलब जितने भी अच्छे भाव होते हैं व सब आपके अंदर आ जाएंगे ठीक है तो फिर इसके लिए ईश्वर की भक्ति की आवश्यकता क्यों है भाई यह सारे गुण तो दयानंद सरस्वती जी में भी थे यह सारे गुण तो आपके अनुसार भगवान नहीं को ईश्वर नहीं है श्री कृष्ण मगर उनके अंदर भी यह सारे गुण है राम के अंदर भी य सारे गुण है तो फिर निराकार ईश्वर की आवश्यकता फिर क्यों है बाध्यता क्यों है

00:25:32:16 चलो ठीक है बाध्यता क्यों है निराकार ईश्वर की जब हमें उससे वह जो विवेक रूपी जो गुण है वह प्राप्त करने हैं तो फिर बाध्यता क्यों है निराकार ईश्वर की पूजा करने को जो भी ऐसा कोई व्यक्तित्व मिल जाए जिसमें परोपकार हो जिसमें दुलार हो जिसमें प्रेम हो न्याय हो दया हो उसी ईश्वर की पूजा करो उसी व्यक्ति की पूजा करो पुरुष की महापुरुष की और जब महापुरुष की पूजा करो तो दयानंद सरस्वती भी महापुरुष है आपके अकॉर्डिंग श्री कृष्ण भी महापुरुष है आपके अकॉर्डिंग राम भी महापुरुष है आपके अकॉर्डिंग तो फिर क्यों ना उनकी पूजा की जाए उनसे तो और ज्यादा कनेक्शन है वो तो और हमारे बीच में रहे हैं ऐतिहासिक है उनका चित्र वर्णित हो सकता है ज्यादा वो रिलेट करता है वक्ति उनसे चलो मान लो कि यह रिलेशन वाली बात ना भी हो मगर बाध्यता तो नहीं होनी चाहिए ना कि निराकार की पूजा करो अगर गुण प्राप्त करने के लिए पूजा करनी है न्याय काता परोपकार दयालुता इन सबको प्राप्त करने के लिए भक्ति करनी है तो राम कृष्ण

00:26:47:19 की भक्ति क्यों ना की जाए बताइए आप क्यों ना की जाए दयानंद की भक्ति क्यों ना की जाए और जब इन जैसे लोगों की भक्ति की जाएगी तो फिर इनकी मूर्ति क्यों ना बनाई जाए बन गए ना मूर्ति पूजक या तो यह कहो कि वहां पर सर्वशक्तिमान की पूजा कर रहे हैं अंसी अपने अंश की पूजा कर रहा है मनुष्य की चाह का विषय वास्तविकता में वही है इसलिए उस स्थिति को प्राप्त करने के निमित्त उसकी पूजा भक्ति कर रहा है जिससे कि उसके अंदर व सामर्थ्य वो बल प्राप्त हो जिससे कि वो इस दुनिया से विरक्त हो पाए और ईश्वर में लीन हो पाए और ईश्वर में लीन होना आपका आप दोहरी बातें कर रहे हो अगर आप यह कह रहे हो कि उत्पत्ति स्थिति समार यह सब नहीं आएगा केवल दयालुता आएगी परोपकार आएगी तो भी आप अधूरी बात कर रहे हो और अगर आप यह कह रहे हो कि सब कुछ आ जाएगा उत्पत्ति स्थिति समार आ जाएगा तो भी आप दोरी बात कर रहे हो क्योंकि आप एक तरफ अद्वैत का खंडन कर रहे हो और अगर आप यह जो दयालुता वगैरा वाली भक्ति की बात कर रहे हो प्राप्त करने के निमित्त भक्ति की बात कर रहे हो तो

00:28:02:19 आप दूसरी तरफ मूर्ति पूजा का खंडन कर रहे हो जबकि यहां से मूर्ति पूजा आपकी सिद्ध हो रही है तो ये ईश्वर के विषय में जो आपने बहुत एक्शन पैक तरीके से बातें की है आपको मेरे जो भाव है वो बहुत ही सामान्य दिख रहे होंगे क्योंकि मैं बहुत संतुष्ट हो चुका आपका पक्ष सुन सुन के मतलब मेरे अंदर अब कोई इस प्रकार का नहीं है कि मुझे उत्तर देना उत्तर देना है हां मगर जो कुछ ऐसी चीजें थी जो मुझे लगता था कि इससे लोगों को थोड़ा लर्न करने को मिलेगा अध्ययन करने को मिलेगा तार्किक धरातल पर प्रामाणिक धरातल तो इसलिए मैंने कहा कि चलो लाइव करते हैं अच्छा इसके

00:28:54:13 बाद एक वो और था जैसे पक्षपाती की बात की जा रही है अलंकार समाज के द्वारा सत्यार्थ प्रकाश में कि क्या ईश्वर पक्षपाती है तो प्रश्न फिर यह आ जाता है मैंने अपनी पिछली लाइव में कहा था कि यदि संसार में जन्म लेने वाले प्रत्येक मनुष्य के लिए वेद पढ़ना समान रूप से अधिकृत है वो वेद पढ़ने के लिए प्रत्येक मनुष्य समान रूप से अधिकृत है तो फिर यह जो वेद की ऋचाएं हैं यह मनुष्य के अंदर इनबिल्ट होनी चाहिए इनबिल्ट उनके साथ ही जन्म ले कम से कम साथ में जन्म ना ले तो कम से कम वेदों के प्रति उसके अंदर अट्रैक्शन हो जैसे जब पानी पर सबका अधिकार है तो पानी की प्यास लेकर के जन्म लेता है व्यक्ति भोजन पर सबका अधिकार है तो भोजन की प्यास लेकर के व्यक्ति जन्म लेता है तो वेद की दि भौतिक रूप से पढ़ने का अगर सबको करना है तो वेद की ऋचाओं का आकर्षण भी तो होना चाहिए इनबिल्ट वो तो नहीं है और अगर

00:30:10:06 वेद का अध्ययन से तय हो रहा है कि ईश्वर पक्षपाती है कि नहीं तो फिर इसका क्या जवाब होगा कि एक व्यक्ति साउथ अफ्रीका के जंगलों में जन्म ले रहा है और उसका पूरा जीवन निकल गया उसने वेद का शब्द वेद नाम का शब्द भी नहीं सुना हा वेदना का उसने शब्द भी नहीं सुना तो ये पक्षपात नहीं है उसको ऐसी जगह जन्म क्यों दिया उसको किसी अलंकार समाजी के यहां पर जन्म देना चाहिए था किसी अलंकारी के य जन्म देना चाहिए था जिससे कि बगल में वेद की रचाए होती वेद के मंत्र होते वो तो नहीं किया तो पक्षपात हो गया किसी को अमेरिका में जन्म दे रहे हैं ये भी पक्षपात हो गया मैं तो यहां तक कह रहा हूं कि अगर किसी को वेद के सबसे निकटतम स्थिति में जन्म प्राप्त हो रहा है और उससे एक सेंटीमीटर ज्यादा भी कोई दूरी पर जन्म ले रहा है एक सेंटीमीटर एक बाल के बराबर की दूरी पर भी अगर कोई जन्म ले रहा है तो ईश्वर उसके साथ पक्षपात कर रहा है क्यों क्यों कर रहा है पक्षपात पक्षपात नहीं है ना ईश्वर हमें य मानना होगा कि

00:31:12:25 पूर्व जन्मों के कर्मों के आधार पर इस जन्म का शरीर प्राप्त होता है शरीर की सीमा में कुल वर्ण प्राप्त होता है कुल वर्ण की सीमा में

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00:31:23:16 इस जन्म के हम पुन कर्म हमारे वो होते हैं सिद्ध और अगर हम उन कर्मों को करते हैं तो हम उत्तम वर्ण के ख्याति को प्राप्त करते हैं और अगर यथोचित कर्मों को नहीं करते तो हम पतित हो जाते ब्राह्मण पतित होता है ना भाही गलत कार्य करने पर शूद्र को भी दंड है और ब्राह्मण को भी दंड है ब्राह्मण को ज्यादा दंड है ठीक है यह हो गया सर्वशक्तिमान की बात मैंने बता ही दी आपको के आपका कहना सर्वशक्तिमान का अर्थ है इस पर भी आपने कोई जवाब नहीं दिया मैंने बहुत स्पष्ट अक्षर में शब्दों में पूछा था कि भाई यदि आपके हिसाब से सर्वशक्तिमान का अर्थ यह है कि जो जिस व्यक्ति का जिस एंटिटी का जो कार्य है जिस तत्व का जो कार्य है अगर वह अपने आप व कार्य कर पा रहा है तो वह सर्वशक्तिमान है तो जिसका जो कार्य नहीं है यदि वो भी वो कर पाएगा उसको क्या कहा जाएगा कोई ना कोई उपमा तो दो उ से कर पाएगा करेगा कि नहीं करेगा इस पर मत जाना क्योंकि मुझे मालूम है इस पर अगर जाएंगे तो फिर तुम लगाने लगोगे कि वो बुद्धू है वो बेवकूफ है नहीं

00:32:38:19 क्षमता है कि नहीं इसकी बात बताओ जिसका जो करने का कार्य नहीं है अगर वो कार्य वो कर सकता है वोह क्षमता है अगर उसके अंदर उसको हम कहे क्या क्योंकि सर्व शक्तिमान शब्द तो आपने ले लिया चुरा लिया है ना कि सर्वशक्तिमान का अर्थ तो यह है सीमित कर दिया तो अब हमें कोई ऐसा शब्द तो दे दो कि जो उससे ज्यादा काम कर सकता है उसको क्या कहा जाएगा नहीं दोगे कोई ना कोई उससे सु क्या कहते सुपरलेटिव डिग्री लगाते हुए आपको देना पड़ेगा ना ऐसा परम सर्वशक्तिमान अत्यंत सर्वशक्तिमान कुछ ना कुछ तो आपको उसम एडजेक्टिव लगाना पड़ेगा ना सर्वशक्तिमान के आगे क्योंकि उसमें वो कार्य भी करने की क्षमता है जो इसमें नहीं है यह सिर्फ वही कर सकता है जो उसको करना है दूसरा वो है वो वो भी कर सकता है जो उसको नहीं करना है कर सकता है करेगा नहीं करेगा वो अलग बात ठीक [संगीत] है ये आप नहीं बोलोगे अब अब जो आर समाज का जो अलं और जो जो ईश्वर है आपके द्वारा प्रतिपादित होने वाला अगर उसको देखा जाए तो क्या हो रहा है कि

00:33:54:10 अच्छा उसमें एक तर्क और दिया गया है कि ईश्वर यदि वह सारे कार्य कर रहा है जो उसको करने हैं तो वह सर्वशक्तिमान है अगर वह कर सकता है बिना किसी की सहायता के किसी पर निर्भर नहीं है वह और यदि वह कार्य कर पा रहा है तो वह जो है सर्वशक्तिमान है और अब एक प्रश्न आता है कि भाई ईश्वर के कार्य कौन-कौन से हैं तो यह इसके लिए क्या लिखा गया यह तो ईश्वर ही बताएगा ठीक है अब इस हिसाब से यह जो तर्क है तो मैं अगर ताली बजा

00:34:30:10 लग कोई मुझसे आकर के पूछे भाई तू क्या कर रहा है तो मैं कहूंगा भाई मैं ताली बजाकर यह सिद्ध कर रहा हूं कि मैं सर्वशक्तिमान हूं कैसे अगर मैं वह कार्य कर सकता हूं जो मुझे करने हैं तो मैं सर्वशक्तिमान हूं अगर मैं बिना किसी की सहायता के वह कार्य कर सकता हूं जो मुझे करने हैं अच्छा और यह तय कौन कर रहा है कि तुझे कौन-कौन से कार्य करने है मैं खुद मैं तय कर रहा हूं मुझे ताली बजानी है मैं बजा रहा हूं अब मैं हो गया सर्वशक्तिमान हो गया ना यह तर्क है तो थोड़ा इस पर वर्क करिए सब लोग ताली बजाएंगे और स्वयं को सर्वशक्तिमान घोषित करेंगे और यह कह देंगे हमारा कार्य भाई ताली बजाना अब हम ताली बजा पा रहे हैं देखो मेरा कार्य है सर में ये खुजली मिटाना तो मैं मिटा पा रहा हूं मैं हो गया सर्वशक्तिमान कितना अच्छा तर्क है ना बहुत

00:35:35:20 बढ़िया अच्छा ऋषि वाच जी से चर्चा हो सकती थी पर उन्होंने बहुत ही भदे तरीके से बातें की उस चर्चा में जो इसलिए हो रही थी कि हमें चर्चा कब कहां और कैसे करनी है तो इसलिए ऐसे व्यक्ति के साथ जो अमर्यादित व्यवहार करता है उसके साथ मैं मंच साझा नहीं कर सकता क्योंकि जब वह इंटरनेट पर हम लोग सब मंच साझा कर रहे होंगे और वह कोई अभद्र बात करेगा तो मैं उसको पकड़ के तो थप्पड़ नहीं लगा पाऊंगा

00:36:15:03 इसलिए हां धरातल पर आप करवाइए आयोजित कर लेंगे धरातल पर आप आयोजित करवाइए कर लेंगे उसके लिए जो व्यवस्थाएं है वो कर दीजिए कर लेंगे जब वहां पर क्या होगा कि उसके पास उतनी स्वतंत्रता नहीं होगी कि चीत उड़ा देंगे एक एक एक एक मिनट की वो कमाने वाला पैसे कमाने वाला फिर उसके बाद उनके फॉलोअर्स ने बहुत गंदी गंदी बातें की है शर्म आ जाएगी अगर कोई सत्य का पक्षधर होगा तो ठीक है आप जाकर के देख लीजिए इस पर एक वीडियो बनाया है कि उनकी तरफ से क्या क्या कहा गया और स्क्रीनशॉट डाले गए हैं तो हम ऐसे के साथ मंच साझा नहीं कर सकते ना आप

00:37:03:04 करिए तो सर्वशक्तिमान कौन हो गया भाई जो व्यक्ति यह बताएगा कि मेरा काम क्या है और यदि वह वह कार्य कर लेगा तो वह सर्वशक्तिमान है सभी लोग ताली बजाएंगे और ताली बजा कर के वोय सिद्ध कर सकते हैं कि वह सर्वशक्तिमान है पलक चपका दे ये लो झपक गई पलक मेरा कार्य क्या है पलक झपका मैं सर्वशक्तिमान हूं कितना अच्छा तर्क है ना सर्वशक्तिमान मतलब सर्व शक्तिमान शब्द का आलंबन लेना है तो सर्व शक्तिमान की परिभाषा ही बदल दो अद्य का आलंबन लेना है तो अद की परिभाषा ही बदल दो वेद का आलंबन लेना है तो वेद की परिभाषा ही बदल दो क्योंकि आलंबन लेना है अपनी मंतव्य की सिद्धि के लिए इसलिए वेद की परिभाषा ही बदल दो जिस जिस चीज जिस जिस चीज का उपयोग किए बिना आपका मंतव्य सिद्ध नहीं हो पा रहा है उस उस चीज का अर्थ ही बदल दो और यही मैंने शुरू से कहता आ रहा हूं मुझे कोई दिक्कत नहीं है अलंकार समाज से या फिर वह कृष्ण विस्कन संस्था है जो मुझे

00:38:18:07 कोई दिक्कत नहीं है इन सबसे ईश्वर को सर्वशक्तिमान कहिए बस और यदि आपके अपने अपने अलग अलग थोड़े सीमित सीमित वाले सर्वशक्तिमान ईश्वर है तो असीमित सर्वशक्तिमान का जो सही शब्द हो वो मुझे बता दीजिए व्याकरण के आप ज्यादा ज्ञाता है आप बताइए मुझे मैंने आपसे प्रश्न किया कि जो अपने से बाहर के कार्य भी करेगा उसको हम क्या कहे भैया हम वही कह लेंगे अपने ईश्वर को हम सर्वशक्तिमान कहना बंद कर लेंगे उस पर आपने क्योंकि पेटेंट कर लिया अपना पिछले 100 डे स सालों में हम बंद कर देंगे कहना आप हमें शब्द दे दो दूसरा कोई जो न्याय हो जिसमें की उसकी सार्थकता हो जाए कि जो जिसके करने के कार्य नहीं है उनको भी यदि वो कर पा रहा है तो वह फलाना उसको उपमा दी जा सकती है यह हमें बताइए आप और फिर वो जन समाज देखेगा कि वह आपने क्या दिया क्या निर्णय

00:39:20:00 है सांख्य दर्शन के बारे में हमने बात की थी हमने सांख्य दर्शन के संबंध में ने श्लोक क्रमांक के साथ बताया था कि यहां यहां पर 26 में तत्व की बात हुई है ब्रह्म की बात हुई है महाभारत में और अंततः जीव और ब्रह्म की एकता की बात हुई है आपने सिरे से नकार दिया हालांकि आपने झूठ तो बोल ही दिया है आपने वायु पुराण दिखा दिया पर वायु पुराण का जो अंश है मोतीलाल बनारसी प्रकाशन से छपता है एकलिंग महात्मा है वायु पुराण का जो अंश है बड़ा होने के कारण उसमें काफी सारी व्याख्या होने के कारण उसको स्पेशल एडिशन में अलग से छापा जाता है वो भी आपने पता करने का प्रयास नहीं किया अधूरी जानकारी और अपने सुविधा अनुसार शब्दों का चयन और विषयात इस पर हमारी चर्चा चल रही है शुरू से और उसमें बड़ा आपका जो रोल रहता है व तो क्या कहने कुछ भी कह दो आप हमने अभी तक आपके पूर्वा चार्य के संबंध में कोई अभद्र टिप्पणी की हो कुछ कहा हो तो बताइए आपने क्याक नहीं कह दिया थड़े उड़ा देंगे और बहुत सी चीजें हैं मैं उनको करना नहीं चाहता

00:40:36:00 हूं कपिल जी का विरोध आता है आदि शंकराचार्य इसका भी हमने बताया जवाब कि भाई आप मानो या ना मानो आदि शंकराचार्य जी ने उनके अनुसार उस कपिल का विरोध नहीं किया था जिस कपिल ने महा भारत में सांख्य का ज्ञान दिया था उस कपिल का जो वशिष्ठ से रिलेट कर रहा है जो परंपरा से रिलेट कर रहा है उसका विरोध शंकराचार्य के अनुसार उन्होंने नहीं किया था अब वो विश्वास है कि नहीं है वो फिर दूसरी बात है किसको किस पर विश्वास है कि नहीं वो फिर बात वही आ जाएगी परंपरा फिर मैं कहूंगा सत्यार्थ प्रकाश छपे कीी जिसमें टेनिस गिल्ली डंडे से मोक्ष बताया जाएगा तो आप सिद्ध नहीं कर पाओगे यह सत्यार्थ प्रकाश नकली अगर आप परंपरा को नहीं मानते हो तो आपको मानना पड़ेगा परंपरा सोचो और एक शास्त्र भी कहते हैं मांड के उपनिषद में परंपरा बताई जाती है यह ग्रंथ यहां तक कैसे आया निरुक्त में परंपरा बताई जाती है शास्त्रों में बार-बार भगवान परंपरा की बात करते हैं चार दो में तीन 16 में तो इनसे आप मुंह नहीं फेर सकते मीठा मीठा अपप्पा कड़वा कड़वा थू पे भी आपने कुछ नहीं बोला जब

00:41:51:15 हमने जो आपने प्रश्न किया था कि वो गड पादा चार्य गोविंद पाद जी के जो गुरु है वो राक्षस सिद्ध हो रहे हैं तो आपने वहां क्या किया हमने वहां पर यह समझते हुए कि आप आर समाज के समर्थक है आपको मूर्ति पूजा का समर्थक बताने के लिए हमने वो प्रमाण आपको नहीं दिया था आर समाज के समर्थक होने के नाते वह प्रमाण आपको दिया था आपने जो आक्षेप लगाया था वह हमारे द्वारा स्वीकार किए गए ग्रंथ से नहीं लगाया था मगर हमने जो आपको उस आक्षेप के प्रति उत्तर में उत्तर दिया वो जरूर उन ग्रंथों से दिया जिन ग्रंथों को आप स्वीकार करते हैं है ना हम तो सिरे से नकार रहे व ग नकली है बताइए क्या कर लेंगे फि नकली है वो ग्रंथ झूठा लिखा गया है क्या करें शंकराचार्य से जाकर कंफर्म करिए यह ग्रंथ असली है कि नकली है हम तो परंपरा को मानते हैं ना मनुष्य चाहे चारों वेद पढ़ ले सारे पुराण पढ़ ले उपनिषद पढ़ ले जब तब व्रत दान पुण्य कर्म तीर्थ दान यज्ञ सब कुछ व्यर्थ है यदि आपका कोई आचार्य नहीं है आचार्य से प्राप्त शिक्षा ही विद्या ही फलदायक है जो व्यक्ति गुरु में

00:43:06:14 और गोविंद में अंतर करता है व गुरु पत्नी गमन के समान पापी है स्वेता शत्र उपनिषद में लिखा है उसको कभी मोक्ष नहीं मिल सकता 6 में और आपके ही अनुसार जो वेद का जो वेद का जो वेद पढ़ाए वो गुरु है और आपने अपनी कहा कनी जो सुनाई थी अप्रत्यक्ष रूप से अलंकार समाज वालों ने उन्होंने अपनी कहानी में भी अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार किया था कि हमको जो वेदों की मंत्र वगैरह है वह कहां से मिले हैं वेदा शास्त्रों के मंत्र कहां से मिले हैं गुरु परंपरा पौराणिक गुरु परंपरा जिसको हमको पौराणिक कहते हैं तो ठीक है तो जिससे आपको मंत्र मिले वो आपका गुरु हो गया ना और जब वो गुरु हो गया तो आपने गुरु में अंतर कर दिया गुरु की बातें मानी नहीं तो आप क्या हुए थोड़ी देर पहले बताया शास्त्रों के अनुसार तो इसके बाद दूसरी बात क्या है कि वो जो कहानी आपने सुनाई अलंकार समाज के द्वारा एक कहानी सुनाई गई कि भाई मेरे पास एक गधा था और गधे

00:44:21:22 पर मैंने कुछ ग्रंथ ला दे उसको लेकर घर गया वापस जाकर गधा कह रहा है क्योंकि ग्रंथ मेरी पीठ पर लाद कर आए हैं इसलिए मैं तुम्हारा गुरु हो गया अरे भाई उस गधे पर ग्रंथ आपने ला दे हैं जिनसे आप वेदों के मंत्र ले रहे हो उनको वेदों के मंत्र आपने नहीं दिए हैं उस गधे के साथ सुरक्षा की दृष्टि से आप साथ में हो क्योंकि आपको गधे पर विश्वास नहीं है रास्ते में उन ग्रंथों को कोई ले जाए या कोई बदल दे आपको इस बात का भरोसा नहीं है क्योंकि अगर ऐसा अगर इस तरह से छोड़ के लाए हुए ग्रंथ आपको प्राप्त होंगे तो आप उन्हें अपने जीवन का अंतिम प्रमाण नहीं समझ पाएंगे अंतिम प्रमाण पर यहां तो आप जिनके साथ आप रहे नहीं सुरक्षा की दृष्टि से जिनको आपने ग्रंथ दिए नहीं उनसे लेकर के ग्रंथ जो है उन पर उनको अपना जीवन का प्रमाण माना मान रहे हो कैसे मान रहे हो भाई उन्होंने रास्ते में चेंज तो नहीं कर दिया किसी ने उनके ऊपर हावी होकर के बदल तो नहीं दिया आपको गलत मंत्र तो नहीं दिलवा दिए आपकी मानने की बाध्यता इसलिए है क्योंकि अगर आपने वेदों की बजाय किसी और तरीके से अपने सिद्धांतों का प्रतिपादन किया तो

00:45:36:24 फिर आप स्वयं को सनातन कैसे कहेंगे जब भी कोई नई विचारधारा को स्थापित करना होता है तो कोई पुरानी विचारधारा को आलंबन जरूर लिया जाता है अभी थोड़ी देर में हमारा ब्रह्मा कुमारी वाला वीडियो डाला जा रहा है उसमें ब्रह्मा कुमारी का भी यही है कहने को वैदिक है वेदों को मानते हैं टटोला जाएगा तो नहीं मानते मना कर देंगे नहीं मानेंगे तो यहां पर क्या है भाई वेद मंत्र अगर आपने ले लिए उसके अर्थों को आपने नहीं लिया तो अपनी अपने मन से अर्थ करोगे क्या कहां से सीखी व्याकरण परंपरा से सीखने के बाद अपने मन मुताबिक अर्थ कर लो और उनको भगा दो जिनसे सीखा सब कुछ तो यह सब कुछ यह सामान्य से प्रश्न है य बहुत गहराई गुण वाले प्रश्न नहीं

00:46:40:00 है और अभी जो लास्ट हमारी जो चर्चा हुई थी ई सविधा के साथ हा लॉजिकल बातें मैंने की तो है आपके शायद कानों में कुछ खराबी हुई है यह बबलू कुमार नाम के हैं कोई मैंने पूछा ना अलंकार यों ने अपने वीडियो में कहा कि सत्यार्थ प्रकाश में ईश्वर का गुण मनुष्य के अंदर आए यह नहीं लिखा है मैंने आपको दिखा दिया अब इससे ज्यादा और क्या बात करूं अब भाई अगर यह भी लॉजिकल नहीं है तो सर्वशक्तिमान का जिस तरीके से आप गलत अर्थ लेकर के ले कर के अपना पेटेंट कर रहे हो तो लॉजिकल का भी एक और नया अर्थ हमें दे दीजिए कि लॉजिकल जिससे कि य जो प्रत्यक्ष जो मैं प्रमाण के साथ जो बात कर रहा हूं जब इन बातों को लॉजिकल नहीं कहा जाएगा कुछ अन्य बातों को लॉजिकल कहा जाएगा तो इन बातों को क्या कहा जाएगा इसके बारे में नया शब्द दे दीजिए हम सब मान लेंगे हम आपकी सारी बातें मान लेंगे आप दीजिए तो समाज के सामने आए तो सही कि आपकी सच्चाई है क्या उद्देश्य है क्या नई धारणा दे दो सर्वशक्तिमान

00:47:55:09 का अर्थ बदल दो क्योंकि सर्वशक्तिमान का टैग लेना है वेदों का अर्थ बदल दो क्योंकि वैदिक होने का टैग लेना है विचारधारा वेद विरुद्ध देनी है विचारधारा सर्वशक्तिमान के विरुद्ध देनी है मगर उस शब्द को पकड़े रहो तो इसलिए मैंने

00:48:13:27 कई बार अपनी वीडियोस में कहा है कि सनातन का जो शत्रु है वो सामने शस्त्र लिए खड़ा हुआ कोई अजनबी नहीं है पीछे शास्त्र लिए खड़ा हुआ कोई अपना है तो

⬜ Not used yet · 00:48:29:01 – 01:06:57:00 (18:28)

00:48:29:01 इसे हमें जानने की आवश्यकता है बाकी आप सभी समझदार है एक दो बातें हुई थी पिछली बार जो मुझे ठीक नहीं लगी एक वो आपने अलंकार हों के द्वारा कहा गया कि भाई वो अपने आप को भिक्षु लिखते हैं तो बहुत दोग है आपके यहां के जो ग्रंथ लेखाकार है वह भी अपने आप को भिक्षु लिख रहे हैं प्रेम भिक्षु आर्य तो इसको भी आप थोड़ा सुधार थोड़ा त्रुटी सही करिए उनकी ऐसा ना करें वह जिससे कि आपके जो वक्तव्य हैं वह निराधार सिद्ध हो

00:49:11:03 जाए और बहुत सारी बातें जैसे अब आर समाज के अनुसार जो है मैंने अभी तक सुना था इसमें कोई गलत हो तो बताइएगा कि वर्ण जो है मनुष्य के कर्म से होता है इस पर एक अलग से वीडियो आने वाला है पर फिलहाल के लिए मैं वो जो संस्कार विधि में बताया गया कि यदि किसी को अपने पुत्र को सूत्र बनाना हो तो व ऐसा नाम रखे तो इसका अर्थ है कर्म से नहीं होता है पिता की इच्छा से होता है है ना कर्म से नहीं होता है पिता की इच्छा से होता है अब बात ये आती है कि कोई व्यक्ति का जो पिता है वो उनका स्वर्गवास हो गया वो गुजर गए निधन हो गया उसके यज्ञ पवित होने से पहले वो व्यक्ति जीवन भर अपना जो है वर्ण निर्धारण नहीं कर सकता वो कौन है वोह दयानंद की तरह ही हो जाएगा स्वामी दयानंद जब पहुंचे थे ऐसा प्रकरण बताया जाता है कि वह जाकर बोलते हैं कि दरवाजा कट कटाते व कौन यही तो जानने आया हूं तो यह जो बच्चे होंगे जो जिनके पिता नहीं होंगे समय पर यह नहीं बताएंगे कि हमारा

00:50:27:12 मैं अपने बेटे का वर्ण या आपके अनुसार बालिका का भी यज्ञ होता है तो बालिका का वर्ण क्या होना चाहिए वो ये नहीं बताएंगे तो क्या होगा कि वो बालिकाएं भी दरवाजा खटखटा एंगी बालक भी दरवाजा खटखटा एंगे थक ठक कौन कि मैं अपना वर्ण जानने आया हूं मेरा वर्ण क्या है बता दो भाई तो यह सब चीजें हैं बाकी जो भाई मुझे देख रहे हैं और सहमत है आवाज नहीं आ रही है

00:51:10:27 क्या आवाज आ रही है क्या अच्छा अच्छा तो जो लोग सहमत है इस लाइव के बाद एक बार शीशे के सामने खड़े हो कर के ताली जरूर बजाएगा और ताली बजा के कहिए मैं हूं सर्वशक्तिमान कोई पूछे तो उसे बता दीजिएगा मेरा काम है ताली बजाना और मैं ताली बजा रहा हूं इसलिए मैं सर्वशक्तिमान हूं अकॉर्डिंग टू अलंकार समाज तो इतना आप सब लोग मुझे प्रॉमिस करिए जाने के बाद यह जब अभी लाइव स्ट्रीम पूरी हो जाएगी तो सभी को ताली जरूर बचानी बजानी है और यदि आपका कोई फबुक अकाउंट है य य आपका कोई ा अकाउंट है तो उस पर उसको ताली को शेयर करिए मैं सर्वशक्तिमान हूं ताली बजाने से ही सिद्ध हो जाएगा कि मैं स शक्तिमान हां ऐसे ही बहुत बढ़िया जो इंसान ताली बजा लेगा वही सर्वशक्तिमान है उसका कर्म ताली बजाना है वो बता देगा मेरा कर्म जी अब किसी का कोई अगर प्रश्न हो तो वो बताए कुछ रह तो नहीं गया है उनके ही वीडियो से अगर कुछ रह गया हो तो

00:52:26:00 बता दीजिए वैसे लगभग सारी चीजें ले ली है जी जी ताली सबको ताली बजा बजानी है बजानी है कि मैं भाई ताली बजाऊंगा और मैं हूं सर्वशक्तिमान है ना ताली बजाने वाला सर्वशक्तिमान है क्यों क्योंकि मेरा काम है ताली बजाना किसने बताया मैं बता रहा हूं ना मैं ही बताऊंगा मेरा काम क्या है मेरा काम है ताली बजाना इस बात को मैं आपको दिखा दूं कोई आपको संशय हो तो सब समुल्लास में है ये ईश्वर का काम क्या है यह तो ईश्वर ही बताएगा

00:53:10:28 ना और मैं एक बात और कहूंगा अलंकार से कि वोह जब बनाया करें उत्तर देने वाला वीडियो तो उसमें समग्र प्रश्नों को ले एक एक एक एक पॉइंट को ले फिर वीडियो बनाए ऐसे आधा अधूरा वो इसकी वो क्या था भानुमति ने कुनबा जोड़ा आप ही ने अपने वीडियो में कहा तो ऐसे मत किया करिए सप्तम सम उल्लास में है

00:53:44:25 देखिए यह देखिए सर्वशक्तिमान शब्द का यही अर्थ है कि ईश्वर अपने काम अर्थात उत्पत्ति पालन प्रलय आदि सब जीवों के पुण्य पाप की यथा योग्य व्यवस्था करने में किंचित भी किसी की सहायता नहीं लेता ठीक है अर्थात अपने अनंत सामर्थ्य से ही सब अपना काम पूर्ण कर लेता है

00:54:20:26 और इसी में एक जगह लाइन आती है कि उसके कार्य क्या है तो इसी में आप इसका अध्ययन करेंगे तो कहीं पर लिखा है कि भाई ईश्वर के क्या क्या काम है तो यह तो ईश्वर ही बताएगा ठीक है तो इस तरह से

00:54:57:15 भैया हम मार्गदर्शन कैसे ले सकते हैं किस बारे में पुरी शंकराचार्य जी ने कहा था कि भारत 2023 तक के लिए नहीं कहा था अभी उसमें लगभग एक वर्ष और है सूत्रों के प्रथम पूर्वज द्वितीय पूर्वज कौन थे यह इस तरह के वस्तुनिष्ठ प्रश्न होते हैं आप हमारे चैनल से जुड़े ग्रुप से जुड़े वहां पर आप आए और वेद ईश्वर ने नहीं रचे वेद ईश्वर की सांस के समान पहले से ही अस्तित्व में थे कृपया इस शास्त्र वचन को समझावे हां वैसे इस पर हमारे वीडियोस है आप देखेंगे हम स्कूल्स वगैरह में जाते हैं बताने के लिए जो हम उन ग्रंथों पर विश्वास करते हैं जो यह कहते हैं कि उनको ईश्वर ने रचा नहीं अब स्वास यहां पर जो कहा गया उससे क्या मतलब है हम दो प्रकार के कार्य करते हैं एक चाहकर यानी जिसमें हमारा बुद्धि का प्रयोग होता है वो और दूसरा बिना चाहकर जिसमें हमारा बुद्धि का प्रयोग नहीं होता है जब हमारी बुद्धि का प्रयोग हो जाता है जुड़ जाता है किसी भी कार्य से

00:56:13:00 तो उसमें हमारे पास यह विकल्प होता है कि हम उस कार्य को किसकिस प्रकार से कर सकते हैं जैसे मान लीजिए कि मेरे सामने एक है यह अलंकार समाज की सत्यार्थ प्रकाश और दूसरा अन्य कोई ग्रंथ है मान लीजिए कि दूसरी और कोई चीज है मान लीजिए पेन है तो मेरे सामने दो चीजें हैं कि एक तरफ है अलंकार समाज का ग्रंथ और एक तरफ है पेन तो अब यदि मैं चाहता हूं कुछ उठाना तो मैं चाहूं तो पेन उठाऊं और मैं चाहूं तो यह अलंकार की किताब और यदि तो मैं इसमें से कुछ भी उठा सकता हूं अलंकार की किताब भी उठा सकता हूं पेन भी उठा सकता हूं परंतु कुछ कार्य हम ऐसे भी करते हैं जिसमें हमारी बुद्धि का उपयोग नहीं होता है जो हम बिना चाह के करते हैं ऐसा ही एक कार्य है सांस लेना जैसे एक शिशु माता के गर्भ से जन्म ले रहा है पर वो सांस ले रहा है उसके उसको कोई बुद्धि उसने नहीं लगाई पर वो सांस ले रहा है प्रकार से

00:57:28:08 जो जो वेदा आदि शास्त्र है वो ईश्वर की सांस रूप में सदैव से विद्यमान है उसके लिए उनको उसके ज्ञान को रचा नहीं है ईश्वर ने रच करके वो नहीं रचे गए हैं बुद्धि के प्रयोजन के साथ वो रचे नहीं गए हैं जिस कारण से तार्किकता की पराकाष्ठा सिद्ध होती है क्योंकि यदि ईश्वर कोई चीज बना देगा तो उसकी क्रेडिबिलिटी हमारे लिए उतनी नहीं होगी क्यों नहीं होगी क्योंकि ईश्वर की मर्जी से तो दुनिया में सब कुछ हो रहा है सनातन विरुद्ध विचारधारा जैसे इस्लाम आदि भी ईश्वर की मर्जी सेही उत्पन्न हुई बिना उसकी मर्जी के तो नहीं हुई इसलिए ईश्वर के जो चीजें है उस पर हम डायरेक्ट क्रेडिबिलिटी नहीं ला सकते हम उन शास्त्रों पर भरोसा करते हैं उन शास्त्रों को अपना नियामक मानते हैं अपना अंतिम निर्णायक मानते हैं जिन शास्त्रों को ईश्वर ने रचा नहीं है वो ईश्वर का ही स्वरूप है ईश्वर की सांस के रूप सदैव वि यह कौन कह रहा है य स्वयं वेद कह रहे हमें उन पर आस्था है आस्था से शुरू होता है पर तार्किकता की पराकाष्ठा जैसे सनातन विरुद्ध विचारधाराओं से आप बात करेंगे तो वह स्वयं इस बात की गवाही देंगे कि हमको ईश्वर ने रचा और

00:58:43:21 उसी ग्रंथ में आपको यह भी मिल जाएगा कि ईश्वर झूठ बोल सकता है ईश्वर भटका सकता है ईश्वर अपनी बातों से पलट सकता है जैसे कि इस्लाम की बात करें तो दो ईश्वर कह रहा है कि यदि हम अपनी कोई आयत हटा देते निरस्त कर देते हैं या बदल देते तो उससे पह उससे बढ़िया आयत देते हैं इसका अर्थ क्या हुआ यदि आज उनके य कहा जा रहा है कि मूर्ति पूजा वह है कुफ्र मूर्ति पूजा जो है क्या कहते हैं उसको हराम है तो कल को य आयत बदली जा सकती है और इस आयत में हटा कर के दूसरी आयत आ सकती है कि जो है मूर्ति पूजा आप जो है मान्य हो गई हलाल हो गई है ना इस आयत इस एक आयत ने सारी चीजों प सारी चीजों की क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठा दिया अब इसके बाद वो एक तर्क आपको दे सकते हैं कि भाई उसमें यह लिखा हुआ है कि अब इसके बाद कोई भी आयत नहीं आएगी अब इसके बाद कोई भी नबी नहीं आएगा ये वो आपको तर्क दे सकते हैं मगर जब बदलने की बात लिखी है तो वो तो ये आयत भी बदल सकती है ना जहां लिखा है कि अब कुछ नहीं आएगा वो

00:59:59:14 आयत बदल देगी दूसरी आयत आ जाएगी आएगा एक और नया आ जाएगा कोई यह चीज हो गई और दूसरी बात कि वोह अपनी बातों को पलटते हैं यह भी सिद्ध है दो 187 में जो उनकी जो किताब है उस किताब में लिखा हुआ है कि आज से पहले तक रोजों की रात में अ अपनी पत्नी के साथ गमन करना अलाउ नहीं था पर आज से वो वहां पर कोई कारण है आज से हम इसको जो है अलाउ कर दे रहे हैं आज के बाद से तुम रोजों की रात में अपनी पत्नी के साथ गमन कर सकते हो आधी आधी उसमें लिखा यहां से क्या चीज तय हुई एक कि उनके द्वारा दिए जाने वाले जो सिद्धांत है वो बदले जा सकते हैं इसका मतलब उनको शाश्वत धर्म के रूप में नहीं लिया जा सकता और वह खुद इस बात की गवाही दे रहे हैं कि उनकी किताब के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो धर्म है जो सिद्धांत है वह शाश्वत नहीं है व गवाही खुद दे रहे हैं व यह नहीं कह सकते कि हम उस किताब को मानते हैं जिसमें दिया

01:01:14:19 गया जो धर्म है सिद्धांत है मर्यादा है वह थी है और रहेगी क्यों इस बात की गवाही वो स्वयं दे रही है जो अब तक नहीं था वो हमने दे दिया हमारे ऐसा नहीं है अथर्व वेद के अनुसार जो ना कभी उत्पन्न हो जो ना कभी खत्म हो जिसका ना अंत है जो अनादि है जो किसी भी देश काल परिस्थिति में भी ना बदले उसका नाम सनातन है हम उसको मानते हैं और इसीलिए वेदा दि शास्त्रों पर शास्त्रों की प्रमाणिकता सबसे ज्यादा बढ़ आस्था तो है आस्था से शुरू होता है और प्रमाणिकता सबसे ज्यादा हो जाती है उसके बाद आगे क्या है कि ईश्वर जो लोग अवतार को मानते हैं और मानते क्या है वह सच है कोई नहीं मानता है बात अलग है मगर ईश्वर आए बुद्ध के रूप में भगवान बुद्ध ने यज्ञों की रक्षा के लिए ही मगर यज्ञों का तिरस्कार किया यज्ञों से दूर करने के लिए अनाधिकृत लोगों को यज्ञों की रक्षा के लिए सब किया मगर हमने बुद्ध को बुद्ध को भगवान तो माना मगर उनकी शिक्षाओं को न नहीं लिया ठीक है तो

01:02:30:00 यह सारी आज की चर्चा थी अन्य किसी का कोई प्रश्न हो तो जल्दी से कर ले क्योंकि ताली सभी लोग बजाइए और स्वयं को सर्वशक्तिमान सिद्ध करिएगा और हा एक बात और अच्छा अच्छा याद आ गया जादूगर यह और कहा जा रहा है कि भाई एक बारबार एक वक्तव्य आ रहा है कोई मनीष जी उनके द्वारा क्या सनातन ईश्वर कोई जादूगर है अरे भाई पहली बात तो यह है कि जादू केवल उतनी बात है कि जिस विद्या को आप जानते नहीं है वही आपको चमत्कार लगने लगता है दूसरी बात अब मैं बता दूं आपके अनुसार भी सिद्ध पुरुषों के द्वारा कालांतर में आवागमन माना गया है यह क्या चमत्कार नहीं है यह क्या जादू जैसा नहीं है वही मीठा मठा अप्पा कड़वा कड़वा तू अमनी सृष्टि जो हुई किसी समय तो ऐसा हुआ ना प्रथम जीव है वो उत्पन्न किया भगवान ने वो क्या था चमत्कार नहीं था जो साइंस नहीं कर पा रही है और वो हो रहा है तो वो चमत्कार है तो फिर वहां पर उतने अंश में तो आपने भी उस ईश्वर अपने ईश्वर को जादूगर बना दिया नहीं तो वह फार्मूला दे दो मुझे किस फार्मूले के द्वारा वह बना था पहला जीव और जिसको

01:03:45:24 भी हां भगवान बुद्ध नारायण के अवतार हैं मगर ये वो वाले बुद्ध नहीं जिनके नाम से वह चल रहा है बौद्ध मत हां तो वही जादू को परिभाषित तो करो क्या है आपका जादू भाई आपके में इस बात में कंफर्म नहीं हूं करेक्ट कर दीजिएगा सुना है कि दयानंद भी मुक्त हो गए थे तो ऐसा उनके लिए भी कहा जाता है कुछ दे बता दीजिएगा मैं कंफर्म नहीं सुना था

01:04:19:26 तो हां अब अलंकार समाज ये भी मानने लगा कि हनुमान जी उड़ सकते हैं पहले नहीं मानता था अब मानने लगा तो मुक्त पुरुषों के द्वारा तो जादू को स्वीकार कर रहा है मगर ईश्वर के द्वारा जादू को स्वीकार नहीं करेगा तो सारी चीजें जितनी भी आपने सवाल उठाए हैं सब कुछ है बस मैं अपना वक्तव्य का जो अंत करूंगा वह इस बात से करूंगा कि पहली बात तो अगर किसी को भी हमसे जुड़ना है तो हमारा एक ट नंबर है 7408

01:04:59:12 3069 व स्कन में गए थे उन्होंने कह दिया कि वह हमारा अभी कोई विद्वान यहां पर है नहीं और फिर कभी रखेंगे चर्चा तो संभवत किसी और दिन होगी उनका कोई विद्वान था नहीं पूरे वृंदावन में जो बात कर सके तो संपर्क सूत्र नोट कर लीजिए 7483 189 इस पर आप ट करेंगे तो आपको चार तरह के प्राप्त होंगे एक हमसे जुड़ने के लिए हमारे अभियान में साथ निभाने के लिए धरातल पर या इंटरनेट के माध्यम से आप साथ देना चाहते हैं या फिर आप किसी भी प्रकार से हमसे जुड़ना चाहते हैं तो आप उसको वहां फॉर्म आप फिल कर सकते हैं आगे दूसरा जो फॉर्म है वो है अध्ययन के लिए हम लोग एक क्रमानुसार अध्ययन करते हैं जो हमारे विभिन्न पूर्वा चार्य के ग्रंथ हैं उनको संकलित किया जो मुख्य मुख्य विषय उनको लेकर के एक कोर्स है आहवान उस कोर्स को करते जिससे कि जगह जगह पर धार्मिक योद्धा खड़े हो सके तीसरा जो फॉर्म है वो है आपका कोई प्रश्न है वस्तुनिष्ठता के साथ व्यक्तिगत प्रश्न है कोई जैसे कि ऐसे करें कि ऐसे

01:06:14:14 करें ये माला करें कि वो माला करें जैसे अभी एक प्रश्न आया था शास्त्रों से कुछ तो वो आप प्रश्न कर सकते हैं वहां पर और चौथा जो है डिसएग्रीमेंट का है कि अगर आप हमारे सिद्धांतों से एग्री नहीं करते हैं असहमति है तो आप वह फॉर्म भरिए उसकी एक कंडीशन है कि आपको अपनी पहचान के साथ आना होगा आप व फॉर्म भरिए और उस फॉर्म को भरने पर हमारी तरफ से आपसे संपर्क किया जाएगा और ज जिस प्रकार का फॉर्म आपने भरा होगा उस प्रकार से आप हमसे जुड़ सकते तो आशा करता हूं आज का लाइव आपको अच्छा लगा हो सभी को जय श्री राम और

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    YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.

  • ⬜
    Cards

    YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.

  • ⬜
    Playlist Automatic

    YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.

  • ⬜
    Thumbnail

    YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.

"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.

Playlists

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 1:07:11 · 28 Apr 2024

Live Discussion सत्यार्थ प्रकाश के अनुसार ईश्वर क्या है? #aryasamaj #satyarthprakash #shorts

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