⬜ Not used yet · 00:00:02:08 – 01:13:09:25 (1:13:08)
00:00:02:08 सभी को जय श्री राम जिन जिनको आना है वह थोड़ा सा लेट है अभी तो इस कारण से हमें भी थोड़ा सा समय लग गया आने में तब तक अगर कोई और आना चाहे डिसएग्रीमेंट को लेकर के किसी प्रकार के तो आ सकता है फोटो के सा पेस्ट को रिवील करते
00:00:37:18 हुए अभी हम लोग एक वीडियो लाने वाले हैं प्रॉपर जिसमें रामपाल के बारे में बात होगी यह जब हम मेले में गए थे तो वहां पर रामपाल का शिविर लगा हुआ था सतलोक आश्रम के नाम से वहां से एक कहानी शुरू हुई जब पहले पहले मैं गया तो जैसा उसमें बताया भी है कि हम लोग वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे सवाल जवाब करते समय और उन्होंने वीडियो बंद करवा दिया था तो मुझे इतना कष्ट हुआ था हृदय में कि पहले मैं उनके पास नहीं गया दोबारा पहले मैंने एक स्पीकर मंगवाया जो पोर्टेबल स्पीकर होता है मेरे पास है उसके उसकी सहायता से गोष्ठी आदि करने में भी सहज रहता तो वो स्पीकर मैंने मंगाया और उस स्पीकर को लेके वहां पर एक शो चल रहा था लखनऊ महोत्सव में इवेंट अलग मतलब वह एक मेला है मेले के अंदर स्टॉल्स लगे हुए हैं उनमें से एक स्टॉल सतलोक आश्रम के नाम से रामपाल की है और कबीर पंथिया
00:01:53:00 की है और वही उसी मेले में लखनऊ महोत्सव का इवेंट चल रहा है वहां दिन में शो हो रहे हैं काव्य गान हो रहा है नृत्य हो रहा है ड्रामा हो रहा है ये सब चल रहा है तो मुझे इतना वहां पर कष्ट हुआ कि मैंने पहले उनके पास दोबारा ना जाकर के पहले मैंने एक स्पीकर मंगवाया और स्पीकर लेकर के वहां जहां शो हो रहा था जहां पब्लिक मंच की ओर देख रही है वहां मैं इधर से अपना स्पीकर अपने हाथ में लेकर गया और वहां हिंदुओं को ललकार नहीं लगा
00:02:32:12 तुम्हारी आत्मा क्या मर चुकी है क्या तुम्हारा आत्म सम्मान नष्ट हो चुका है जिस मेले में जिस जगह बैठकर आप यहां पर मनोरंजन कर रहे हो उसी मेले में उसी जगह एक व्यक्ति ने एक स्टॉल लगाया हुआ है जहां पर वह कह रहा है कि ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान नहीं है और दुर्गा के पति भगवान शंकर नहीं है शिव नहीं है बल्कि इनके द्वारा खड़ा किया गया एक तथाकथित काल नाम का ब्रह्म है उसको ब्रह्म भी नाम दिया इन्होंने मगर वो वो वाला ब्रह्म नहीं है जो सनातन ब्रह्म ब्रह्म नाम से है वैसे ही जैसे इसकन का कृष्ण इन्होंने उसको नाम दिया ब्रह्म ज्योति निरंजन तो मैंने कहा तुम्हें शर्म आनी चाहिए लज्जा आनी चाहिए कि यह मैं माइक पर बोलने लगा अब सब लोग परेशान हो गए जो दर्शक थे वह परेशान हो गए कि भाई मंच उधर है यहां से कौन सा कौन सा प्रस्तुति दी जा रही है और जो प्रबंधक थे वहां पर इवेंट के वह
00:03:47:14 प्रबंधक प्रतिकार स्वरूप मेरे पास आने लगे के मतलब दंडात्मक कारवाई की जाए मगर जब वो मेरे पास आए तो मैंने जो बातें उनसे की उनका उनके पास उत्तर नहीं था प्रबंधक पूरे महोत्सव के थे जो वहां पर थे तो मैंने उनसे कहा कि आपने यहां पर क्यों आपने यहां पर क्यों ये स्टॉल लगने दिया है सतलोक आश्रम का आप भी इसके जिम्मेदार है अगर कोई व्यक्ति अपनी मूल धारा को छोड़ कर के अपने जो मठ मंदिर है उन्हें छोड़ कर के अब इनके आश्रम जाने लगेगा ब्रह्मा विष्णु महेश को भगवान नहीं मानने लगेगा तो उसके जिम्मेदार आप भी होंगे तो फिर उन्होंने कहा कि आपको कोर्ट जाना चाहिए आपको यह करना चाहिए वो करना चाहिए मैंने कहा वो भी करेंगे समय आएगा ऐसा हुआ था तो वो जो मेले उसके बाद में उनके पास दोबारा गया था तो उसके बाद जब कबीर पंयो से चर्चा हुई है व पूरी चर्चा तो आपने देखी है फिर कबीर पंथिया की वो जो चर्चा है वो अभी भी हमारे चैनल पर सबसे ज्यादा वही वीडियो जो है देख रहे हैं लोग
00:05:02:22 और शायद उससे जागरूकता आ रही है तो अब क्या हो रहा है कि जो कबीर पंथ ये तथाकथित कबीर पंथ क्योंकि ये कबीर पंथ वो वाला भी है जो सही उसपे है तो तथाकथित कबीर पंत है जो वो अ अब उसके फॉलोअर्स जो है अजीब अजीब तरीके से कुछ कुतर्क युक्त समाधान करने की का प्रयास करते हैं उस वीडियो के विरोध में और सामना होगा तो मेरे ख्याल से चर्चा में पाच 10 मिनट में ही उनका समाप्त हो जाता है क्योंकि हमारे जो सिद्धांत है बिल्कुल स्पष्ट है क्लियर है कि
00:05:46:27 अ सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म हम किसी के विरोध में नहीं है तीन चीजें जहां से मिलेगी वही सनातन है वही आपकी सही शिक्षा है शाश्वत धर्म सनातन नहीं व्यास करके हैं यह इनका नाम समझ में नहीं आ रहा है सियोन आगम शास्त्रों में स्त्रियों और शूद्रों को जने अलाउड है आपने आगम शास्त्रों का अध्ययन कहां से किया
00:06:27:01 है यह शाश्वत धर्म वाला जो प उसके अंतर्गत आ जाता है प्रश्न जब कोई आपको विवादित बात बताने लगे तो हमारा पहला क्वेश्चन क्या होना चाहिए आपने आगम शास्त्रों का अध्ययन कहां से किया है मैं कई बार ऐसा सोचता हूं मुझे कई बार प्रश्न आते हैं कि कोई ऐसा विरोधी बात कह रहा है कोई ऐसा प्रमाण दे रहा है तो सभी सनातनी हों को सारे प्रमाण लेकर चलने की आवश्यकता नहीं है मैं ये बात रील बनाना चाह रहा था एक सभी सनातनी हों को सारे ग्रंथ के प्रमाण हाथ में लेकर चलने की आवश्यकता नहीं अपने धर्म की रक्षा के लिए उसके लिए क्या आवश्यक है केवल एक चीज याद कर लो परंपरा प्राप्त आचार जब भी कोई व्यक्ति विरोधी बात बोलेगा वह परंपरा से नहीं होगा वो व्यक्ति उसकी परंपरा सिद्ध नहीं हो पाएगी तो आपको क्वेश्चन जो रटना है वो यह रट टना है राम ने यह किया कहां से पढ़ा या आगम शास्त्रों में यह दिया है कहां से
00:07:45:14 पढ़ा है ना तो पहले आपका क्वेश्चन होना चाहिए परंपरा प्राप्त जो ज्ञान आप दे रहे हैं वो आपने कहां से प्राप्त किया है और सभी प्रश्नों का उत्तर इसमें हो जाता है आपको कोई भी परेशान कर रहा है शास्त्रों का प्रमाण लेकर उसका अपने तरीके से अर्थ वगैरह करके तो सीधे पूछो आपने अध्ययन कहां से किया भाई हम परंपरा प्राप्त जो प्रामाणिक आचार्य शंकराचार्य उनके उनसे हम अपने सिद्धांत लेते हैं वो उन्होंने बताया हमने यहां से अध्ययन किया है और हम राघवाचार्य जी के शिष्य है हम या प्रेमानंद जी के शिष्य निंबार्काचार्य जी के शिष्य हैं तो यह सब परंपरा प्राप्त संत है आपने अध्ययन कहां से किया आर्य समाज पूज्य शंकराचार्य के शिष्यों से ही डर गया और शास्त्रार्थ करने की बात करते हैं पूज्य शंकराचार्य से यह मुझे थोड़ा सा लगा है व जो एक पत्र आया है अभी उसका सत्यापन नहीं हुआ वो जो पत्र कहां से निकला है क्या है मगर एक बात है कि वो यदि सत्य है तो तो उसमें
00:09:00:15 य लिखा हुआ है उस पत्र में कि वो जो है जो व्यक्ति है मेरे बारे में बताया गया कि यह व्यक्ति है जो तरह तरह के सवाल करता है इसके साथ आप बैठ के चर्चा ना करें और अगर करें भी तो तिथि सुनिश्चित करें विषय सुनिश्चित करें और किसी अपने से श्रेष्ठ विद्वान से कराए तो वहां पर वह श्रेष्ठ विद्वान का पैरामीटर नहीं बताया जैसे स्कोन मैं कहता हूं ना स्कोन थोड़ा सा आर्य समाज की अपेक्षाकृत ठीक है भले ही विवादित परंपरा ही सही पर परंपरा बोलते तो हैं कि हमारे पास ऐसे ज्ञान आया परंपरा को सम्मान तो दिया विवादित सही वो उस पर प्रश्न चिन्ह है कि उनकी परंपरा पर प्रश्न है मगर कम से कम परंपरा का नाम तो लेते हैं इसके साथ ही साथ जैसे हमने कई बार पूछा कि आर्य समाज का अधिकृत किसे माना जाए किसे ना माना जाए इस संबंध में आर्य समाज की कोई नियमावली बता दें वो बात और है कि वो सनातन धर्म ग्रंथों से मैच करती है या नहीं मगर अभी तक मुझे वह नियमावली नहीं बताई गई है कि आर समाज का अधिकृत व्यक्ति कौन होगा क्या
00:10:15:19 इसके लिए यह लोकतांत्रिक जो संविधान है उस पर निर्भर करते हैं अगर करते हैं तो फिर वोह तो शाश्वत नहीं है है ना वो तो बदल जाएगा नियमावली तो चेंज हो जाएगी जो सत्ता में पहुंचेगा जिसका बहुमत हो जाएगा बदल देगा संविधान संशोधित कर देगा तो इसका अर्थ यह है कि आपके यहां पर ऐसा कोई विधान नहीं है कि किसको अधिकृत माना जाए किसको ना माना जाए यह भी एक बहुत बड़ा प्रमाण है इस बात का कि आपके यहां पर गुरु परंपरा को फॉलो नहीं किया जाता है क्योंकि जो गुरु परंपराएं हैं उनके यहां पर जो गद्दी है वह सुरक्षित होती है सुनिश्चित होती है भाई इस परंपरा की जो सर्वोच्च गद्दी है वो ये है
00:11:02:15 तो वो नहीं दिया जाता तो उसमें यह कहा गया है कि अपने से श्रेष्ठ से कराए अब बात यह आती है कि कोई व्यक्ति अपने को निम्न क्यों समझेगा किस आधार पर समझेगा क्योंकि नियमावली तो है नहीं उसको स्वविवेक का पालन ही करना पड़ेगा कि भाई मैं प्रयास करता हूं यह जो सज्जन आए हैं इनके प्रश्नों का उत्तर देने का मगर अब जब तक मुझसे वार्ता हुई नहीं है चीजें नहीं हुई है तो फिर वो क्या करें ऐसे तो इसका अर्थ यह है कि और यह बात कह कर के इन्होंने एक बात और पत्र के माध्यम से सिर्फ बता दी जैसे कि व जो मातृ शक्ति है जो निष्ठा विद्या अलंकार उनके साथ जो चर्चा हुई थी उसमें उन्होंने कहा
00:11:53:24 कि जो व्यक्ति का उपनयन संस्कार है वो उसके पूर्वजों के अनुसार होता है उसके पूर्वज यदि क्षत्रिय होंगे तो उसका उपनयन होगा क्षत्रिय के अनुसार और उसके पूर्वज यदि ब्राह्मण होंगे तो उसका उपनयन होगा ब्राह्मण के अनुसार तो फिर यहां से वंश परंपरा के अकॉर्डिंग जिसको जन्म जन्मना वर्ण व्यवस्था कहा जाता है उसको स्वीकार कर लिया क्यों क्योंकि जिसके क्षत्रिय पूर्वज होंगे उसका तो क्षत्रिय के अनुसार हो जाएगा मगर जिसके पूर्वज शूद्र रहे होंगे उसका तो होगा ही नहीं आपके ही अकॉर्डिंग
00:12:31:02 तो ऐसा कहा उन्होंने ठीक विपरीत है ये आर्य समाज की जो विचारधारा है उसके मगर फिर भी उनको गर्गी कहा गया आधुनिक गर्गी कहा गया सब कुछ कहा गया मगर यदि य पत्र सही है तो उसमें यह जाहिर किया गया कि अभी तक हमारी चर्चा जिससे भी हुई है उन्होंने हमारे प्रश्नों के उत्तर ठीक से नहीं दिए गए दिए हैं और और आगे से ज अगर किसी के पास व्यक्ति पहुंचते हैं तो अपने से श्रेष्ठ से चर्चा कराए तो अनकहे तौर पर यह मान लिया गया कि अभी तक जितने से भी चर्चा हुई है वह सब जो है उत्तर नहीं दे पाए और व कहीं ना कहीं निम्न थे उनके पास जवाब नहीं
00:13:15:06 था हां तो काफी देर हो रही है लगभग 10 से 15 मिनट हो चुके हैं आप लाइव आ जाओ ना अगर कोई कबीर पंथी है चर्चा करना चाहता है तो लाइव आ जाओ है कोई कबीर पंथी अभी नयन नाम का है और आपको कैसे पता कि स्त्रियों ने वेद लिखने में हेल्प की किसने बताया आपको वेदांत राणा जी बोल रहे हैं हम कैसे पता पहली बात तो ये है कि जिनका जिनकी आप तुलना कर रहे हो यह 64 नारायण नयनार में चार से पांच फीमेल ऋषि थे अच्छा आप एक बात बताओ आप बोलते हो जैसे आर्य समाज की ऋषि परंपरा है उसमें कितनी महिलाएं स्त्रियां थी जिनसे होते हुए वो ज्ञान आ रहा है आपके पिछले पाच 10 में कितने ऋषि पर में आपकी स्त्रियां
00:14:30:26 थ और पहली बात यह है वेदांत राणा जी कि उपनयन कराना वेदा अध्ययन करना वेदों को ठीक उसी प्रकार से पढ़ना जिस प्रकार से वेद रूप में जाने जाने वाले जो ग्रंथ है यह मनुष्य का लक्ष्य नहीं है तो अगर वेदों का ही मर्म उन्हे पुराण के आधार पर मिल रहा है या वेदों का ही ज्ञान उन्हें गीता के आधार पर मिल रहा है तो उस कोई अंतर नहीं है कोई उनको फर्क नहीं पड़ जाता क्योंकि कहीं अगर शास्त्र में आप यह दिखा दो लिखा हुआ कि जीवन का जो मुख्य उद्देश्य मूल उद्देश्य है वह वेद के स्वरूप वेद जिस स्वरूप में उसी स्वरूप में उसका अध्ययन जो मूल मूल उद्देश्य है मनुष्य जीवन का वह है मोक्ष भगवत प्राप्ति और वह कहीं पर भी मना नहीं किया गया कि वो नहीं हो सकता यहां पर अपने अपने स्व स्व कर्मणा अपने अपने कर्मों की जो शास्त्रो चित जो कर्म उनकी सीमा में रहते हुए धर्म का निर्वाह करते हुए भेद का निर्वाह करते हुए अभेद की प्राप्ति ही बताई गई है यह माय गुरु जी माय गॉड संत रामपाल जी की
00:15:46:01 गुरु परंपरा संत गरीब दास से चलती आ रही है अच्छा गरीब दास लिखा वो आप आ जाइए लोग साक्षात आमने सामने बैठ कर के पता कर लेते हैं आप योगेश भारद्वाज जी से चर्चा कीजिए उनका नंबर दे दीजिए और अगर हमारा नंबर होना दे सके तो वो भी हो जाए 740 किसी को भी कोई वैचारिक मतभेद है तो वह इस नंबर पर व करें 740 830 18
00:16:34:04 69 इस पर ट करने पर आपको एक फॉर्म मिल जाएगा वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा उस फॉर्म को आप भर देंगे हम आपसे संपर्क करले बस एक उसमें कंडीशन है कि आप अपनी फोटो आपको देनी होगी आपको अपने चेहरे के साथ आना होगा तो चेहरे के साथ साथ आना होगा आपको और अगर आप भरते हैं तो हमारी बिल्कुल चर्चा संभव
00:17:17:25 है उसको हम बता तो चुके हैं अभी उसने बीइंग द स्पिरिट सोल वाले ने एक वीडियो और बनाया है राम जी के उसमें तो मुझे बड़ा अच्छा लगा कि उसने आंसर दिया ही नहीं हमने तो यह पूछा ना अपने वीडियो में कि भाई जब किसी की कोई कही हुई बात श्री राम को काटने लगेगी तो वहां पर श्री राम की बात माननी पड़ेगी जैसे स्मृति की कही हुई बात अगर श्रुति को काटने लगे स्मृति का अगर हम ऐसा अर्थ निकाल रहे हैं जो श्रुति का खंडन हो रहा है तो वहां पर श्रुति की बात को रखना पड़ेगा ना या फिर स्मृति का ऐसा अर्थ निकालिए नहीं तो उसने प्रभु श्री राम ने कहा कि शिव और राम शिव और विष्णु में कोई भेद नहीं है तो उसने इसके जवाब में कहा कि देखो देखो शिव ही तो यह कह रहे हैं भा हमने भी तो शिव का प्रमाण लिया था कि हां शिव ने ऐसा कहा अनन्य को प्रकट करने की दृष्टि से उन्होंने कहा कि जो मुझ में और तुम में अंतर नहीं मानते वह गलत है मगर ठीक इसी प्रकार की बात जब उन्होंने राम के सामने कही तो शिव जी का खंडन करते हुए राम ने कहा कि शिव और विष्णु में कोई भेद नहीं मुझ में और तुम में कोई भेद नहीं इस बात का कोई जवाब नहीं राम को क्यों ना माना जाए राम की बात को झुट दें
00:18:33:10 क्या जो भगवान के अन्य जितने भी स्वरूप हैं व लीला में ऐसे कार्य कर सकते हैं जो कि सत्य नहीं है मगर भगवान श्री राम ऐसे ही कार्य करते हैं जो धर्म है शाश्वत धर्म तो क्या हम उनकी किसी कार्य को किसी कथन को झूठ मान ले तो इस पर उसने बात ही नहीं किया हमने पूछा गायत्री का जप किसके लिए किया अपने लिए किया तो अद्वैत सिखाया राम ने द्वैत खत्म हो गया अपना जब करना सिखाया राम ने यह मान सकते हैं कि अपने पूर्ण जो हम लोग कि हम ईश्वर का ही अंश है और यहां पर द्वैत का निर्वाह करते हुए हम आपका जप कर रहे हैं ईश्वर का तत्व हम एक जैसे हनुमान जी ने कहा था रामचरित मानस में तो इसका भी कोई आंसर नहीं तो वही गन्ने वाली बात है वो तो कुछ कुछ ना कुछ तो कहता ही रहेगा वो कभी ये थोड़ी ना क कह देगा कि मैं आपकी बात मान चुका हूं तो हां कोई आ आएगा नहीं बस कमेंट में ही सही कहा आपने
00:20:12:19 अंबेडकर आप लिंक दे दीजिए हां मैं लिंक दे देता हूं आ गया क्या लिंक आया
00:20:53:24 क्या यह है नहीं मैं इसको स्टार कर दे रहा हूं स्टार कमेंट लिंक को एक गेस्ट आए हैं आलोक जी आपका चेहरा आलोक जी आपका चेहरा नहीं दिख रहा लोक जी
00:21:31:10 आलोक जी आपका चेहरा नहीं दिख रहा है हटा दूं आपको वशिष्ठ आपका चेहरा चेहरा लेकर आए चेहरा छोड़ आए क्या वशिष्ठ
00:22:21:00 जी जी वश जी ट टू स्टेज मेरा आपसे क्वेश्चन था जी बताए जगनाथ टेंपल के अंदर बोल सकता हूं क्या बोलिए बोलिए टपल के अंदर इस बारे में हम लोग बात कर चुके हैं सबके अपने अपने धर्मानुसार अपने अपने अधिकार है और एक प्रोटोकॉल है बहुत बार समझा चुका हूं ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र में दार्शनिक धरातल पर क्या अंतर है और जो जेनेटिक समय प्राप्त होते हैं उसके आधार पर भी अंतर होता है तो जिस तरह का हमारे पूर्व जन्म में हमने कर्म किए हैं उस उन कर्मों की सीमा में इस जन्म में हमें एक कुल प्राप्त होता है उस कुल की सीमा में शरीर प्राप्त होता है शरीर की सीमा में हमारा वर्ण प्राप्त होता है और उस वर्ण की सीमा में हमारा दोबारा से इस जन्म का धर्म रूपी कर्म प्राप्त होता है तो वह जो कर्म है उसके अनुसार यह सब विधि निषेध है कि किसको क्या करना है किसको क्या नहीं करना है
00:23:36:18 मगर इससे यह सिद्ध नहीं होता है कि यह शूद्रों के अहित में है क्योंकि जो मंदिर जाने का उद्देश्य है वह है भगवत प्राप्ति तो शूद्रों की भगवत प्राप्ति के लिए कहा गया है कि आप मंदिर की अगर धवज को देख लेंगे तो आपको उ से भगवत प्राप्ति हो जाएगी तो जब उसको ध्वज से भगवत प्राप्ति हो रही है फिर भी वह इस बात के लिए यदि तुल रहा है कि मुझे अंदर ही जाना है हालांकि वो लता नहीं है शूद्र से नहीं होते यह क्या किया जाता है हमको तोड़ने के लिए यह समस्या को पहले जन्म दिया जाता है और फिर उसको हमसे जोड़ दिया जाता है कि भाई पहले फैलाया गया कि नहीं मंदिर के अंदर जाना ही वो है तभी भगवत प्राप्ति होगी मंदिर के जान मंदिर के अंदर जाकर ही भगवत प्राप्ति होगी जब हमने पहले इसको इंपॉर्टेंट बना दिया और उसके बाद जब उसे इंपोर्टेंट बना दिया फिर कहा कि देख वो तुझे मंदिर के अंदर नहीं जाने दे रहे हैं जबकि शास्त्र में ऐसा नहीं लिखा है कि मंदिर के अंदर जाकर ही भगवत प्राप्ति हो सकती है केवल और केवल तो यहां क्या हुआ
00:24:51:27 अब जो अब अब जब हमने किसी को ऐसा बना दिया कि उसके मन में डाल दिया कि देख वो भगवत प्राप्ति वो तुझे मंदिर के अंदर नहीं जाने दे रहे हैं और जबक भगवत प्राप्ति मंदिर के अंदर जाए बिना भी हो सकती है जो उसका मूल उद्देश्य है जब वो मंदिर के अंदर जाने के लिए लड़ रहा है तो इसका अर्थ यह हुआ कि उसका वो यह नहीं मानता कि मेरे जीवन का उद्देश्य जो है मोक्ष है वह अपनी जो सिद्धि है वह इस बात में ढूंढ रहा है कि मैं अंदर जा सकता हूं कि नहीं अगर वह ऐसा कर रहा है अगर वो ऐसा कर रहा है तो फिर इतने अंश में वो फिर जिस मंदिर जिस धर्म के द्वारा तय किया गया बनाया गया निर्मित जो मंदिर है जिसमें वो जाने की जाने की वो रखता है मगर उसी धर्म के द्वारा बताया गए सिद्धांतों का खंडन करके वह उस मंदिर के अंदर जो विराजमान ईश्वर है व उसका भी खंडन कर र अगर वह ऐसा सोच रहा है कि मेरे जीवन का उद्देश्य मोक्ष नहीं है मंदिर के अंदर जाना जी बोले नहीं मेरा क्वेश्चन ही नहीं मेरा क्वेश्चन ये था कि अपन शुद्ध को अलाव नहीं करते मंदिर जाना आप जो वर्ण बता रहे बता रहे कर्म के पूर्व जन्म के
00:26:07:02 कर्म के अनुसार पूर्व जन्म के कर्मों के अनुसार इस जन्म में प्राप्त होने वाले शरीर के अनुसार सनातन शास्त्रों द्वारा तय किया गया है कि किसकी क्या सीमाए है बो मेरे शरीर का एक ण होता है मतलब आपके अकॉर्डिंग मेरे शरीर का अपना एक वण है आपका जिस कुल में जन्म हुआ है उस कुल के अनुसार आपका वर्ण सुनिश्चित है ठीक है अगर मेरे कर्म उस अकॉर्डिंग नहीं है तो फिर मेरा कौन सा वण होगा मतलब मान लीजिए मैं ब्राह्मण और तो आप तो आप कर्म संकर कहलाएंगे पतित हो जाएंगे अगर ब्राह्मण के घर में जन्म हुआ है ब्राह्मण उचित कर्म नहीं है ब्राह्मण की तरह जीवन का निर्वाह नहीं है तो पतित ब्राह्मण हो जाएगा और ज्यादातर जो कलयुग में है वह पतित ब्राह्मण पतित क्षत्रिय पतित वैश्य है इसीलिए भागवत पुराण में य आया है
00:27:05:16 कि भागवत पुराण में सभी को शूद्र नहीं बता बनाया गया सुन लीजिए भागवत पुराण में फिर यह आया है कि वेदोक्त अनुष्ठानों को करते समय होने वाली जो संभावित भूल चूक है उसके कारण वह भूल चूक के कारण उनको कोई अपराध ना लग जाए प्रज्ञा शक्ति क्योंकि कमजोर हो जाती है जब हम पतित होते चले जाते हैं तो प्रज्ञा शक्ति कमजोर होती है तो वेदोक्त कर्मों में गलती ना हो जाए जैसे हम मंत्र पढ़ रहे हैं गायत्री मंत्र पढ़ रहे हैं उसको कहां कहा पर स्टॉप लगना है कहां कहां पर नहीं लगना है उसको मन में पढ़ना है कितनी आवाज में पढ़ना है बहुत बारीक चीजें होती है तो उसमें गलतियां ना हो गलतियों के कारण हमारे जीवन में दुष्प्रभाव ना आए इस कारण से उनके लिए पतित पतित द्विज और जो शूद्र स्त्री आदि के लिए सभी के लिए पुराणों का विधान किया गया है पौराणिक जो वो है
00:27:58:07 जो इसमें जो ना जाने की बात है उस ना जाने की बात को जैसे मंदिर के अंदर ना जाना या या वेदोक्त अनुष्ठानों में ना जाना इस बात को हम ऐसे देखते हैं कि भाई जाने से मना किया मगर देखना ऐसे चाहिए कि आपको उस जिम्मेदारी से मुक्त किया गया है क्योंकि आपका जीवन ऑलरेडी कठिन है आपका जीवन ऑलरेडी कठिन है इसलिए वो और कठिन हो जाएगा अगर आपको यह वेदोक्त जो पूजा पद्धति है इसमें आएंगे अगर आप तो उसमें क्या है कि आपको इतने कुल्ले करने हैं इतने मट्टी लेकर के चलना है बैठ कर के ही मूत्र त्याग करना है और दो बार मूत्र त्याग के बाद और चार बार बहुत से उसमें ऐसे नियम है जो आपका जीवन जो व्यवहारिक जीवन है वो और कठिन हो जाएगा तो आपको ये जिम्मेदारियां ना उठानी पड़े इसलिए सीधे एक एक कट चार विभाग किए गए भाई कोई हम लॉ लागू कर रहे हैं ना इस ग्रुप से कह दो यह करे इस ग्रुप से कह दो ये करे तो क्या हुआ चार विभाग किए गए उसमें जो यह वाला विभाग है इसको मुक्त कर दिया गया कि आप जाना ही मत तो आपको ये वाली टेंशन नहीं रहेगी सारे नियमों को फॉलो करने की क्योंकि आपका ऑलरेडी कठिन है ठीक
00:29:16:18 है हम और कुछ ठीक है अब मेरे को ये बताइए कि अगर मान लो मैं शूद्र में हूं अभी और अगर मेरे कर्म ब्राह्मण जैसे हैं तो फिर मेरे को तो भी अला नहीं हो पाए आपको ब्राह्मण बनना क्यों है मैं शंकराचार्य नहीं बन सकता जीवन एक मिनट मैं शंकराचार्य नहीं बन सकता तो क्या मैं खत्म हो गया मेरा जीवन हमारे जीवन का उद्देश्य है क्या कहते हैं भगवत प्राप्ति आप ये पूछिए भगवत प्राप्ति हो सकती है कि नहीं अच्छा चलो अभी तो आप कह रहे हो कि मैं ब्राह्मण नहीं बन सकता इसको हटा देते हैं अब इसके बाद लोग ये कहेंगे कि मैं अगर कुछ मैंने ये करा लिया वो करा लिया तो मैं क्या स्त्री नहीं बन सकता तो क्या ये उचित है स्त्री क्यों बनना है स्त्री क्यों बनना है नहीं मेरा वो उद्देश्य नहीं स्त्री बनना तो आप शरीर के ऊपर बात करें बॉडी लेवल प काम कर हो अध्यात्म बुद्धि शरीर के शरीर के ऊपर ही तो है शूद्र ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र किसके ऊपर है मेरा पहला क्वेश्चन आपसे येय था कि ब्राह्मण क्षत्रिय व शूद्र अगर शरीर के ऊपर है अगर मेरा शरीर उस लेवल प मतलब ब्राह्मण के अकॉर्डिंग प्योर हो गया मतलब ब्राह्मण ब्राह्मण क्वालिटी के अकॉर्डिंग मेरा प्योर हो चुका शरीर तो क्या तो भी मैं नहीं हो पागा तो भगवान उतर करके आपका
00:30:31:27 वर्ण घोषित करेंगे जैसे विश्वामित्र जी के अंदर जो ब्राह्मण उचित तत्व थे वोह शेष थे उन्होंने बहुत तपस्या की परंपरा प्राप्त आचार्य जो वशिष्ठ जी हैं उनके पास गए कई बार और कहा कि हमने इतना तप कर लिया हमको ब्राह्मण घोषित कर दो वशिष्ठ जी ने मना कर दिया परंपरा प्राप्त आचार्य देखिए मना कर दिया नहीं आप राज ऋषि हैं आप ब्रह्म ऋषि नहीं है उन्होंने और उसके कारण उनकी शत्रुता भी हुई वशिष्ठ जी के वशिष्ठ जी को काफी क्षति भी पहुंची मगर वो मना करते रहे अंत तो गत्वा क्या हुआ कि उन्होंने इतनी तपस्या की इतनी तपस्या की तब [संगीत]
00:31:26:27 ब्रह्मादेवी वर्ण है वो गुण कर्म के आधार पर विभाजन है गुण कर्म विभाजन से तो तो मैंने कर्म माना ना हां अगर मान लीजिए गुण कर्म दोनों ही अगर उसके ब्राह्मणी कल कहते हैं तो फिर आप अपन कैसे बोल सकते हैं कि वो शूद्र में ही है शरीर के हिसाब से अरे भाई जो मैंने आपको तरीका पूरा बताया तो है आपके सवाल का आंसर भी दिया है पहली बात जो ये है जो आप गुण कम जो आप गुण कर्म विभाग कह रहे हो वो गुण कर्म पिछले जन्म के आधार पर इस जन्म के पिछले जन्म के कर्मों के आधार पर इस जन्म के वो सेक्शनिंग हुई दूसरी बार उसमें भगवान कह रहे हैं मया सटम क्या कह रहे हैं क्या कह रहे भी तो यही कह रहा हूं मैं भी तो यही कह रहा हूं कि ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य सूत्र की शूद्र की जो सृष्टि है वह भगवान करते हैं अगर आप तब करो आप इतना बदल यह गवाही कौन देगा कि आपके अंदर वह तत्व आ गया बताओ कौन देगा य गवाही किसकी गवाही मानने होगी चलो हा देखो मेरा आप से जब उन्होंने वहां पर मया सटम कहा है तो मैं भी तो वही कह रहा हूं भगवान आकर के अगर बोल दे कि भई यहां उन पहले तो वेदो जो हमारे परंपरा प्राप्त आचार्य गण हो जो परंपरा प्राप्त वेदा दि शास्त्र सम्मत वो
00:32:42:04 स्वरूप हो भगवान का वो आक के कहेगा कि हां ये हो गए है ना तो मान्य है तो मया सिस्टम का निर्वाह तो करो उसमें तो अगर हम यह कह दे कि नहीं ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र जो है कोई व्यक्ति घोषित कर सकता है तो पहली बात तो व्यक्ति की अधिकारिता होनी चाहिए कि कौन करेगा ऐसी कोई अधिकारिता किसी व्यक्ति की नहीं है कि वह फलाना व्यक्ति घोषित करेगा कोई नियम नहीं है दूसरी बात यह भी है कि जब मनुष्य कर रहा है सृष्टि ब्राह्मण क्षत्रिय वै शूद्र का तो फिर उन्होंने कृष्ण का माया सिस्टम कहां गया नहीं भगवा भगवाने ब उन्होने कहा मस्टम मैं बनाता हूं किसी ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र मैं बनाता हूं तो यहां तो हम बना रहे हैं ना नहीं मनुष्य के हाथ में हो गया ना आप एक बार समझो उन्होने क्या कहा अब सुनिए सुनिए अब इसको थोड़ा उलट लेते हैं दुर्जन तोष न्याय प आ जाते हैं अब ये बताइए कि कर्म के अनुसार आप वर्ण को बदलने की बात स्वीकार कर रहे हैं तो आप मुझे यह बताएं कि कर्मानुसार जो वर्ण व्यवस्था है उसका परवन क्या है उसका फायदा क्या
00:33:57:07 है हां मैं बताता ब्राह्मण की क्वालिटी बताई 11 क्वालिटी होती ब्राह्मण के अंदर मैंने बोला फायदा क्या है वो हमारे काम कैसे आएगा अगर हम यह जानते हैं कि ब्राह्मण है अगर हम यह जानते हैं क्षत्रिय है तो वह व्यवस्था में कैसे उपयोग होगा इस बात का देखो ब्राह्मण की अपनी एक रेसिटी होती है सोसाइटी के अंदर उसको क्या नॉलेज करना सोसाइटी को लीड करना है और एक जब हम ये बोलो कि यानी कि जब हमें कुछ ज्ञान प्राप्त करने की आवश्यकता होगी तत्व प्राप्त करने की आवश्यकता होगी तो हम ब्राह्मण के पास जाएंगे हा बिल्कुल जाएंगे ना हा ब्राह्मण लीड करता नलेज को और हमें जब रक्षा की आवश्यकता होगी तो हम के पास जाएंगे सही है ना अब यह बताइए जो आपके अनुसार जो वर्ण व्यवस्था है कर्मानुसार वर्ण व्यवस्था इसमें जब एक व्यक्ति को रक्षा की आवश्यकता हुई और वोह गया क्षत्रिय के घर वो क्षत्रिय एक मिनट प ब्राह्मण बन गया आपके अनुसार अब क्या होगा नहीं मैंने केवल कर्म का नाम नहीं लिया मैंने गुण का भी नाम लिया उसके गुण भी वैसे होने चाहिए ब्राह्मण जैसे अरे मैं पूछ तो रहा हूं वो ब्राह्मण चलिए अब इस
00:35:12:10 सीन में बताइए कि उसने गेट खटखटाया वो क्या करे उसको रक्षा की आवश्यकता है बता अगर उसने ब्राह्मण कचर अडॉप्ट कर लिया है ब्राह्मण के अंदर ब्रा कैटेगरी में आ चुका वो तो उसका काम लेकिन एक होता ब्राहमण का काम होता पहले बताता आपको भाई किसी को रक्षा की आवश्यकता है किसी को गोली लगने वाली है व बचने के लिए क्षत्रिय के पास आया अभी व क्या करे व गेट खटखटाने के बाद एक ब बोलने दीजिए परीक्षित महाराज महाराज क्या राज थे मतलब व क् क्वालिटी ब्रा क्लिटी अ
00:35:58:03 मैं यह आपसे कह रहा हूं मेरी बात आप समझिए कि कर्मणा कर्मानुसार व्यवस्था के आधार पर हम किसी को उसके कमान वो ण वर्णो चित धर्म के लिए बाध्य नहीं कर सकते समझिए मैं जो पूरी बात कह रहा हूं एक मिनट एक मिनट बाद नहीं कर सकते मतलब जैसे हम कहते हैं कि यह तेरे पिता है तेरा इनके प्रति कर्तव्य तो यह करना चाहिए यह क्या है हम उसके पुत्र धर्म के लिए उसको बाध्य कर पा रहे हैं मगर जब हम कर्मानुसार कर लेते हैं तो हम किसी से नहीं कह सकते कि तू क्षत्रिय है तुझे काम करना पड़े करना चाहिए बाध्यता नहीं दे सकते वो ये कहेगा वो ये कह सकता है कि मैं जो है ब्राह्मण हो गया हूं अब मैं क्षत्रिय नहीं रहा मेरा धर्म अब जो है रक्षा करना नहीं है मेरा धर्म अब जो है ब्राह्मण बनके ज्ञान देना है तो इस हम किसी को बाध्य नहीं कर सकते उसके वर्ण उचित धर्म के अनुसार जबकि भगवान श्री कृष्ण ने गीता में अर्जुन को बाध्य किया के तू क्षत्रिय है जाके रक्षा कर ठीक है अ मेरी बात मेरे को बोलने दीजिए मैं ये कह रहा हूं मैं बाध्यता की बात नहीं कर रहा मैं बता रहा हूं कि परीक्षित महाराज थे उन्होंने क्या से सोसाइटी को लीड मैं जब आप जब आप हिस्ट्री में जाने लगेंगे तो मैं परंपरा प आऊंगा इसलिए अभी हम सिर्फ तर्क पर बात करें मेरे पास बहुत सारे
00:37:13:06 मैंने अभी आपको मैंने भी आपको दे दिया ना अभी आपको मैं और प्रमाण दे दूं आप स्तंभ सूत्र में लिखा है कि जो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश सूत्र जन्म से होते हैं आप मानोगे इसे नहीं देखो भगवतगीता का कांटेक्ट बता आप मुझे तर्क बताइए आप मुझे तर्क बताइए किय कर्मणा वर्ण व्यवस्था का क्या वो है लाभ वो बताइए एक बार बो क आपको आपने बोला की बाध्यता नहीं की जा सकती मैं मानता बाध्यता नहीं की जा सकती आपने अभी दिया मेरे को की भगवत गीता में भगवान ने अर्जुन को बाध्य किया था तो देखो आपको बताता हूं कि भगवान ने एक और शलोक का कहा था र्म और एक ने था परन साधु नाम मतलब भगवान ने कहा मैं दो कारण के कारण ही आऊगा केवल या तो धर्म की गलानी या तो धर्म का विनाश हो रहा होगा या दूसरा परिता साधु नाम यानी मेरे भक्तों की रक्षा के लिए और विनाश दु नाम या दु को नाश करने के लिए ठीक है तो अब आप बोलन को बाद कि गया था वो क्त्र उसको युद्ध करना है तो देखो ऐसा जरूरी नहीं है उसको बाद किया गया था क्योंकि लास्ट में भगवान खु बोल रहे स पम करू लास्ट में भगवान ने बोला सारे धर्म छोड़ दो तुम मेरे को सनम कर लो और
00:38:28:15 फिर एक और लास्ट में भगवान ने एक और लोक का कहा था यथा इच्छ तथा कुरु जैसी आपकी इच्छा है वैसे करो तो आप ये नहीं कह सकते कि भगवान ने अर्जुन को बाध्य किया गया था बाध्य करने का मतलब यह है कि उसको उसका धर्म बताया गया कि धर्म क्या है बाद में उन्होंने यह कहा कि बाकी अब तू अपने स्वविवेक से जो समझ में आया वो कर समझ रहे हो मैं तुझे तेरा धर्म बता दे रहा हूं वो क्या करना चाहिए वो यह है अब तू अपने स्वविवेक से दूसरी बात आपने कहा पहली बात तो ये आप इस कौन से हैं नहीं इस कौन से नहीं है आपने ये सारा अध्ययन कहां से किया है ये तो आपको मालूम है ये मैंने भग भगवत गीता कौन सी भगवत गीता कौन सी गीता प्रेस से छपने वाली या यह वाली इस कन वाली देखो ये वाली ये स् कौन की भगवत गीता है आप कन के फॉलो है आप स् कन के फॉलोअर है वो इकन का ही पक्ष रखने आए हैं मगर इसलिए खुल के नहीं बोल रहे हैं कि अगर हारू तो सिर्फ मैं हारू एक मिनट अगर मेरी बात गलत साबित हो जाए तो सिर्फ मैं गलत साबित हो जाऊ और अगर जीत जाऊ तो स्कन सही हो जाए क्या बात
00:39:43:19 मेरा च च कोई बात नहीं कोई बात नहीं कोई बात नहीं कोई बात नहीं अभी मैं आपको बात पूछ रहा हूं आपने कहा कि सर्व धर्म को छोड़ दे सारे धर्मों को छोड़ दे क्या इसका अर्थ हम ये ले कि बहन को बहन नहीं मानना चाहिए इसको भी छोड़ दे मिनट मिट माता को माता की दृष्टि से देखना बंद कर दे इसको भी छोड़ दे नहीं इस इसम कहा धर्म को छोड़ दे तो माता को माता की दृष्टि से देखना धर्म है धर्म पशु भी समाना
00:40:18:13 तान कौन धम करना क्या बताया गया है जी अवनी जी बताए जय श्री राम आपका मेन काम है कि आपको जो नॉलेज है वो देना है मतलब आपका जो भगवान की जो सेवा करनी है आपको मेनली वही करनी है जो भगवान की इंस्ट्रक्शन यानी कि सभी धर्मों को नहीं छोड़ना है ना अरे सारे धर्म छोड़ने हैं और भगवान के जो इंस्ट्रक्शन है वही मानने है मेनली यही काम है मैं आपसे पूछ रहा हूं सभी धर्मों को छोड़ना है कि नहीं पहले ये समझाओ कि धर्म है क्या आपके अकॉर्डिंग धर्म क्या है इसीलिए तो मैं कहता हूं कि विषयात ना हो इसलिए मैं एक ही चीज पर पकड़े रहता हूं आपको मैं आपसे पूछ रहा हूं सभी धर्मों को छोड़ना है कि नहीं देखो भगवान कह रहे सब धर्म प सारे धर्म छोड़ सकते हैं सारे धर्म तो यानी की माता को माता की दृष्टि से देखना भी छोड़ दे क्या मैं मात धर्म छोड़ दूंगा तो इसका मतलब मैं किसी को माता की दृष्टि से नहीं देखूंगा आपके अंग अरे भाई आप अपनी माता को माता की दृष्टि से देखना बंद कर दे नॉर्मल न्यूट्रलाइज हो जाए उसको भी पत्नी की दृष्टि से देख सके क्या इस धर्म का त्याग कर देंगे आप क्या मा धर्म ये सिखाया भगवान श्री कृष्ण ने नहीं क्या मात धर्म को छोड़ने का मतलब ये होता है कि उनको माता की दृष्टि से नहीं देखना अरे तो मुझे बताइए ना
00:41:33:24 सुनिए पहले आप ये समझिए पहले आप चलिए पहले इसको समझ लीजिए धर्म किसे कहा जा रहा है रामो विग्रहवां धर्मा कहा गया कि नहीं हां हां बिल्कुल वाल्मीकि रमाया 3 3 13 और राम जी को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया कि नहीं हां बिल्कुल कहा गया है तो राम का नाम धर्म है और राम जो है मर्यादा पुरुषोत्तम है इसका अर्थ क्या आया चलो ठीक है मैं मानता हूं एक बारका अर्थ क्या आया इसका अर्थ क्या आया पूछ रहा हूं हा मर्यादा क्या आया मर्यादा धर्म है तो अब जो माता को माता की दृष्टि से देखने की मर्यादा है माता को पत्नी की दृष्टि से ना देखने की मर्यादा है क्या इसको छोड़ सकते हैं भगवान के उस जो उन्होंने कहा है कि सर धर्म सारे धर्मों को छोड़ दे इसको छोड़ सकते हैं इस धर्म का त्याग कर सकते हैं अब बोल सकता हूं एक बार आप मेरे को बोलने दो मैं पूछ तो रहा हूं पहले इसको क्लियर करिए आप ठीक है मैं उसका आंसर दूंगा अभी नेक्स्ट क्वेश्चन में आपका इसी का आंसर दूंगा एक बार मुझे बोलने दीजिए देखिए दूसरे लोग वेट कर रहे हैं और शायद वो भी आने वाले हैं तो मुझे पहले आप इसका आंसर दीजिए कि अगर सभी धर्मों को छोड़ने की बात है तो क्या इस धर्म का त्याग किया जा सकता है इस मर्यादा का कि नहीं अरे आप बोल
00:42:49:01 ही गलत रहे हैं आपके अ मात धर्म को छोड़ने का मतलब है माता को माता की दृष्टि से नहीं देखना यही तो मतलब आपके मात धर्म का भाई मातृ धर्म मैंने नहीं बोला मैंने मातृ धर्म बोला ही नहीं मैंने बोला एक मर्यादा हमें दी गई है कि माता को किस दृष्टि से देखना है पत्नी की दृष्टि से नहीं देखना है यह हमारी मर्यादा है यह हमारा धर्म है क्या इस धर्म का हम त्याग कर सकते हैं क्योंकि भगवान ने कहा है सभी धर्मों का त्याग करके मेरी शरण में आ जा हा ठीक है और भगवान फर उससे पहले सिखा भी रहे आपको बता मैं अब जो है प्लीज आप क्लियर करिए त्याग कर सकते हैं कि नहीं क्या मैं मानता हूं कि क्या माता को कर सकते है कि नहीं मैं पूछ रहा हूं त्याग कर सकते हैं कि नहीं अरे ये धर्म में काउंट नहीं होता य तो नेचुरल बात है कि आपको माता की दष्ट से देखना ही होगा तो कोई धर्मल हैय हम धर्म से नहीं मिलता धर्म से नहीं मिलता धर्म से नहीं मिलता अरे धर्म है क्या पले आप य समझो तो सही बार कोशिश करो अरे भाई मैं समझूंगा आप एक एक चीज क्लियर करते चलो सुनो धर्म क्या है सुनलो सुनलो धर्म क्या है सच्चिदानंद जीव की चाह का जो वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा बताई जाने
00:44:04:02 वाली सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई जाने वाली विधि का नाम धर्म है आ गया अब जो आपको डू एंड डोंट दिए गए हैं ब्रह्म प्राप्ति के लिए जो आपको डू एंड डों दिए गए हैं यह धर्म है यही मर्यादा है यही नैतिकता है अब आपने कहा कि नेचुरल होता है आपने कहा नेचरल होता है नेचरल है ये नेचुरल होता है आपकी स्कोन की बुक में मैं दिखाऊ धर्मे हीना पशु भी समाना लिखा गया है पशुओं के पास धर्म होता है क्या नहीं पशु के पास में कोई धर्म नहीं होता मैं मानता हूं औरन को आप क रहे नेचुरल होता है पहले इसको सही करो नेचुरल होता है कि नहीं अरे मेरी बात आप समझो किस मदा हमें सिखाई जाती है नेचुरल नहीं होता है हमें बाहर से मिलती है माता पिता के द्वारा गुरु जनों के द्वारा अन भी पशु बनेंगे नेचुरल नहीं होता है ये ये हमें सिखाया जाता है कौन माता है कौन पिता है कौन नहीं होता नेचुरल नेचुरली अगर कहे तो हमारे पास नेचुरली सिर्फ चार चीजें हैं आहार निद्रा भय मैथुन हमें नहीं पता कौन माता है हां ठीक है मैं एक्सेप्ट करता हूं चलो है मैं आपकी बात एक्सेप्ट कर रहा हूं एक्सेप्ट किया आपने क्लियर करिए पहले धर्म नेचुरल नहीं होता
00:45:19:04 वो सिखाया जाता है और धर्म के अकॉर्डिंग होती है मैं एक बात क्वेश्चन पूछ रहा हूं आपसे क्वे नहीं आप क्वेश्चन बाद में पूछना पहले एक क्लियर करेंगे बहुत सारे देखिए विषयात क्यों नहीं करने देता मैं इसीलिए नहीं करने लोग मुझ पर आरोप लगाते तुम सामने वाले को बोलने नहीं देना चाहते हो इसलिए क्योंकि वो विषयात करता है हमारी बात कहां पर शुरू हुई थी कि मंदिरों में प्रवेश है कि नहीं जब मैंने कोई बात बोली तो आपने उसको काउंटर नहीं किया आपने दूसरे प्रश्न ले आए विषयात बात सुनिए तो सुनिए जब आपने पूछा कि जो मंदिर मंदिर प्रवेश से सूद को क्यों रोका जाता है मैंने उसमें कुछ चीजें बताई आपने इन चीजों को काउंटर ना करके प्रश्न दूसरा खड़ा कर दिया ये होता है अब क्या है प्रश्न होते होते होते होते जब मैंने कहा जब मैंने कहा कि भगवान ने मया सटम कहा है तो फिर मनुष्य कैसे बना लेगा अपना वर्ण तो फिर आप आ गए सर्व धन प्रत प तो वो अब जब मैं पूछ रहा हूं अब जब मैं पूछ रहा हूं कि भाई अगर सभी धर्मों को त्याग करना है तो माता को माता की दृष्टि से देखना और पत्नी की दृष्टि से ना देखना यह जो मर्यादा है इसका त्याग करोगे या नहीं करोगे तो आपने पहले तो बहुत देर लगाई और देर लगाने के बाद आप उसको क्लियर ना करते हु बारबार दूसरा प्रश्न दूसरा प्रश्न
00:46:34:10 दूसरा प्रश्न दूसरा प्रश्न करते रहोगे कभी हम निष्कर्ष प आएंगे ही नहीं द अपनी भड़ास निकाल लूंगा मैं आपको बोलने का मौका दूंगा आपको प्रतीक्षा करनी होगी तो अब बात आती है कि आपने कहा कि सभी धर्मों का त्याग करके तू मेरी शरण में आ जा तो क्या इसका अर्थ हमें यह लेना चाहिए कि हमें सभी का त्याग करना है या फिर इसमें अमुक अमुक कई सारी और चीज जो हमने इस पर प्रॉपर एक वीडियो बनाया हुआ है वैसा मानना चाहिए तो क्या मानते हैं आप ठीक एक बार बोल सकता हूं क्या बात उ क्या अब आप पहले मत जाइए अब आप प्लीज पहले मत जा अभी आपने पूछा बताइए मुझे देर हो रही है मुझे दूसरे को लेना पड़ेगा मुझे दूसरे को लेना पड़ेगा मैं आपको आउट करूंगा आप पहले इसका जवाब दीजिए सभी धर्म को छोड़ना है की नहीं छोड़ना
00:47:31:22 है मुझे बोलने दीजिए नहीं नहीं बोलने दूंगा मैं आपको आउट करूंगा मोनो आप स्वतंत्र है आप अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है ठीक है आपको समझना है अभी पहले आप इसको क्लियर करके जाइए आप इसको पहले क्लियर करिए कि सभी धर्मों का त्याग करना है कि नहीं करना है पहले इसको क्लियर करिए भगवान नेहा सभी धर्मों का त्याग करना है सारे धर्म तो इसको माता को माता की दृष्टि से देखना और पत्नी की दृष्टि से ना देखना इसका त्याग करना है कि नहीं करना है अ
00:48:10:07 समझ धर्म को किस काटे में कहा गया उन्होने उन्होने बताया या यानी की जो धर्म के दूसरे स्वरूप है उनका त्याग नहीं करना है अरे धर्म के स्वरूप मुझे एक बात बताइए मुझे बाता अभी आपने माना ना मर्यादा का नाम धर्म है मैं मानता हूं कि मर्यादा बिल्कुल रिलीजन से हमें चीजें मिलती है उसको हम क्या क्या क्या रिलीजन से रिलीजन धर्म नहीं है आप अपनी जानकारी सुधार फिर आइएगा दोबारा हां ठीक है चलो धर्म से मिलती मैं मानता हूं मर्यादा ठीक है मेरा क्वेश्चन ये है मेरे क्वेन नहीं क्वेश्चन मत करिए अभी क्वेश्चन नहीं पहले आप अपना जवाब दीजिए प्लीज नहीं आप कृपा करके यह बताइए सभी धर्मों का परित्याग करना है कि नहीं करना है मैं दो बार दे चुका हूं तीसरी बार दे रहा हूं सारे धर्म छोड़ने है यानी ये माता को माता मानना छोड़ दे माता को भी पत्नी की दृष्टि से देख सकते हैं मर्यादा छोड़ सकते हैं हम क्या मात धर्म को छोड़ने का मतलब यह होता है कि माता को माता नहीं मानना मैं आपसे पूछ बिल्कुल होता है बिल्कुल होता है अगर मातृ धर्म ये है अगर मातृ धर्म यह है कि माता को पत्नी दृष्टि से नहीं देखना है तो अगर हम उसका त्याग कर रहे हैं तो उसका मतलब है कि हम हम स्वतंत्र हो गए उसको भी हम क्या कहते हैं पत्नी की दृष्टि से देख
00:49:25:07 सकते हैं बिल्कुल होता है अगर मात्र धर्म यही है कि मर्यादा है कि माता को पत्नी की दृष्टि से नहीं देखना है तो अगर हम उस धर्म का त्याग कर रहे हैं तो उसका मतलब है कि हम जो है इस मर्यादा का त्याग कर रहे हैं कि हम उसको भी पत्नी की दृष्टि से देख सकेंगे अब आप ठीक है बहुत सारा समय हमने आपको दे दिया आप जाए और अगली बार तैयारी के साथ आए तयारी के साथ आप बोलने का मौका नहीं दे रहे मेरे को बात आप गलत बोल रहे हो ना ऐसा हम नहीं कर सकते माता माता की दष्ट पनी की से देख पहले आपको पहले वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए क्या था कि जगन्नाथ टेंपल के अंदर अलाउ है कि नहीं बात आप ख गुण कर्म आप लिख धम उसके ऊप क्या नाम है वण के ऊपर मैंने आपको बताया कि वन का निधान गुण कर्म के आधार पर किया गया है आपने बताया पिछले जम के कर्म के आधार होता है मैं मानता हूं ठीक है पिछले जम के तो भगवान ने कहा है कि गुण कर्म के इसका विभाजन किया गया फिर आप नेक्स्ट क्वेन आपने उठाया मैं उसी वि आप पदा रहे फिर आप मुझे लेके आए कहां प जो विभाजन किया गया है वो गुण क्रम के आधार पर नहीं जो लास्ट जन्म के अपने बट है उसके पुन लास्ट ब में जोने कर्म कि उसके आधार पर विभाजन किया गया है ठीक है फ मैंने कहा आपको कि आपने बताया कि ठीक है मैंने
00:50:40:13 आपको कहा कि अगर मैं शुद्ध तो मैं ब्राह्मण में नहीं जा सकता आपके अकॉर्डिंग तो फिर आपने मुझे बताया आपने ही मुझे बताया कि मेरा कर्मा क्या नाम था कर्म के आधार पर होता है ना वण विभाजन आपने एक वर्ड नाम दिया था मेरे को कि कर्म के आधार पर वर्ण का विभाजन आपने ही विषत पैदा किया कर्म के आधार विभाजन मैंने नहीं किया वो पैदा फिर मैं आपको आगे नेक्स्ट क्वेन लेके आया क्या सर्व धर्मा प अगर आपके कर्म के आधार प आप विभाजन कर रहे हैं तो मैं आगे लेके आया स धर्मा परज फिर आपने उसम भी क्या कांटेस्ट पैदा कर दिया मातृ धर्म का मतलब आपने गलत मीनिंग निकाला मातृ धर्म का ये सारी चर्चा जनता ने देखी है वो निर्णय कर लेगी कि कौन सही था कौन गलत ठीक है आने के लिए आभार आपका मैं निर्णय के लिए नहीं आया था य नि आप ये कह रहे हो कि माता को पत्नी की दृष्टि से ना देखने की मर्यादा का त्याग किया जा सकता है क्या यही धर्म है क्या मैं ये पूछ रहा हूं अब आपसे ये भी धर्म है इसीलिए कह रहा हूं ये भी धर्म है आपने कहा सब धर्मों का त्याग करो सब धर्मों में से एक धर्म ये भी है ये ही नहीं ये भी आपको कहना होगा कि कुछ धर्मों को छोड़ के त्याग कर दो तब तो मान ही जाएगी बात आप अगर कहोगे सभी धर्मों का त्याग कर दो तो उसमें तो ये आ गया चलो ठीक है एक बार के लिए मैं आपकी बात मान लेता हूं कि चलो ये नहीं एक बार के लिए मत मानिए आपसे चर्चा हो
00:51:55:16 गई है आगे एक और क्वेश्चन उठेगा कि भगवान ने ऐसा क्यों कहा आगे ये क्वेन उठेगा फिर आपसे कि भगवान ने ऐसा क्यों कहा इस पर हमने वीडियो बना दिया है आप जाकर वहां देखिएगा इस पर हमने वीडियो बना दिया देखिएगा ब श्रीधर स्वामी की जो टीका है सुनिए श्रीधर स्वामी की जो टीका है श्रीमद भागवत प यह रामन चार सं की टी का है यह साधक सुदा राम सुखदास जी की और जय दयाल गोविंद का जी की रामानुजाचार्य आपके अनुसार प्रामाणिक श्रीधर स्वामी चैतन्य महाप्रभु के अनुसार प्रामाणिक इन्होंने इसमें यह माना है सभी प्रमाणिक आचार्यों में श्लोक का अर्थ पहली बात जो हमारा इंद्रियों का धर्म है आसक्त होना मोह होना इन धर्मों को त्यागने की
00:53:10:16 बात की जा रही है दूसरी बात कि भगवत गीता की शुरुआत में एक श्लोक आया है जहां पर कहा गया है कि सभी जो सैनिक है वो युद्ध स्थल में अपने प्राणों को त्याग कर पहुंचे हैं प्राणों को त्याग कर अब अगर हम यह मान ले उसको एस इट कि व प्राणों को त्याग कर पहुंचे तो हमें य मानना पड़ेगा कि उनके अंदर भी जान नहीं जो व लड़ सके तो कर क्या रहे हैं तो हमें मानना पड़ेगा कि प्राण जब होंगे तो जीवन की जो आसक्ति होती है मनुष्य के जीवन की आसक्ति उस आसक्ति को त्याग कर पहुंचे हैं तो इसी प्रकार से भगवान एक मिनट इसी प्रकार से भगवान ने जब यह कहा कि सभी धर्मों को छोड़कर आ जा तो जो हम धर्म का पालन करते हैं उससे जो हमें यथोचित यज्ञ कर रहे तो अर्थ की प्राप्ति जो उससे होने वाले जो लाभ है उनके प्रति आसक्ति है उसको छोड़कर तू आ मेरी शरण में तो अपना कुल मिलाकर के बात वही हुई कि जो आपका इंद्रिय जनित धर्म है उसको छोड़ कर के मेरी शरण में आ जा ठीक है अगर आप कहेंगे सभी धर्मों को छोड़कर मेरी शरण में आ जा तो फिर उसमें माता के प्रति जो वो धर्म होता है वो भी आ जाएगा
00:54:25:21 पिता के जो धर्म होता है वो भी आ जाएगा पत्नी के प्रति जो धर्म होता है वो सब आ जाएगा हर धर्म आ जाएगा अगर आप ये कह दोगे सभी धर्मों को छोड़कर और आपसे ही पूछ लूंगा सभी धर्मों को छोड़ने के बारे में 10 नाम अपराध इस कौन क्लेम करता है यह भी धर्म है 10 नाम अपराध को मानना इस कौन के अकॉर्डिंग इसको भी त्याग करके क्या भगवान की शरण में जाना उचित है फस जाओगे ठीक है मेरी बात सुनिए क्या आपने कहा कि अभी भगवतगीता के फर्स्ट चैप्टर में कहीं आता है कि स्टार्टिंग में ऐसा करिए सुनिए मेरी बात सुनिए आप हमें फोन करिएगा ट नंबर है 740819 इस पर आप करिए फॉर्म मिलेगा उसमें फॉर्म भरिए और हम आपसे संपर्क करेंगे दोबारा से आप जो है समय लेकर के विषय वो करके निश्चित करके दोबारा आइए क्योंकि आज हम आपके लिए नहीं आए थे टाइम बीत रहा था तो हमने आपको ले लिया और कई और भी लोग है ठीक है ठीक
00:55:25:09 हैम 18 69 पर करें और सुन लीजिए जो गीता आप पढ़ रहे हैं उस गीता को लिखने वाले भी प्रॉपर पूरी तरीके से नहीं मानते कि जो जन्म से है कुछ नहीं होता है इसमें बहुत सारे ट्विस्ट है उस पर भी अध्ययन कर लीजिएगा इस बीच क्योंकि स्कोन यह नहीं कहता है कि जन्म से मिलने वाली जो चीजें वो कुछ नहीं होती है चैतन्य महाप्रभु ने कहा था कि गैया अगर दूध देना बंद कर देगी तो हम उसके प्रति जो सम्मान की भावना है वो कम नहीं कर देंगे ब्राह्मण पतित हो जाएगा तो उसको हम वेदोक्त कर्मों से आउट कर देंगे मंत्र पढवा बंद कर देंगे उसको जो ब्राह्मण के स्थान पर जो बैठा कर के पूजन पूजन अर्चन किया जाता है उसमें लेना बंद कर देंगे मगर उसको कहा ब्राह्मण ही जाएगा इसी प्रकार से जब आंख अगर अंधी हो जाए फिर भी उसकी जो संज्ञा है व आंख ही रहेगी सबन की तरफ से प्राप्त होने वाली चीज है इकोन के ही अध्यक्ष है जिनके ऊपर मैंने वीडियो बनाया ये कह रहे हैं एक मिनट एक मिनट लेट मी फिनिश एक मिनट तो स्न के ही अध्यक्ष है उन पर मैंने वीडियो बनाया उसमें वह कह रहे हैं कि अगर व सामने वाला भक्त है तो वह
00:56:40:20 ब्राह्मण हो गया ठीक है अगर सामने वाला भक्त है तो ब्राह्मणों से भी ऊंचा हो गया वैष्णव हो गया और क्या कहते हैं यह अगर वो सामने वाला भी भक्त है तो वैष्णव हो गया और उसके बाद वो कहते हैं तो हम उससे से विवाह कर सकते हैं फिर भी वो बेस्ट होगा यदि वोह जन्म से भी हो ब्राह्मण और फिर वो भक्त भी हो जाए तो बेस्ट क्यों हुआ अंतर क्यों रहा यानी कि कन भी इस बात को मान रहा है कि जो शरीर जो जन्म से प्राप्त जो चीज है वो होती है और ठीक है आपके द्वारा प्राप्त होने वाली जो कर्मणा वर्ण व्यवस्था उसको स्वीकार की जाएगा तो उसको स्वीकार करने का अर्थ है कि कोई व्यवस्था है ही नहीं क्योंकि जब जिसकी शरुआत होगी उसके उस जरूरत को पूरा करने के लिए वह व्यक्ति धर्म की सीमा में बाध्य नहीं है अर्जुन कह सकता है भैया मैं ब्राह्मण बन गया और अगर अगर घोषित नहीं हुआ है तो कौन घोषित करता है इसके निमित क्या नियमावली है यह सारी चीजें प्रॉपर हमने वीडियो बना दिया आप देखिएगा ठीक है मेरा क्वेन है क्या जज का क्वे नहीं क्वेन नहीं लेंगे आप दोबारा आइएगा ठीक ठीक है क्या जज का बेटा
00:58:02:01 रामानुज जी आप अपना चेहरा दिखाएं [संगीत] रामानुज जी आप अपना चेहरा दिखाएं जी अवनीश जी बताए आप कुछ कह रहे थे ग ब्राह्मण लाइक अनन्या पांडे एंड पूनम पांडे गीता प्रेस का भगवत गीता सही है जी काफिर आजम इंडिया में इतने सारे रिलीजन है कोई क्यों वण
00:59:13:00 व्यवस्था मानेगा मानेगा बिल्कुल मानेगा जिस दिन हम जैसे किसी मनुवादी व्यक्ति से चर्चा हो जाएगी मानेगा वरना व निशब्द हो जाएगा हां बनाएंगे दास जी बुद्धिस्ट के ऊपर भी वीडियोस बनाएंगे बीच में एक बार वह जो क्या नाम है
00:59:48:18 उसका साइंस जर्नी वो हमारे एक वीडियो पर आए थे बोले कि डिबेट वेट कर लो तो हमने उनसे कहा चेहरा दिखाओ तो शायद उनके अंदर कोई कायरता थी जिस कारण से उन्होंने उस बात को माना नहीं बनाएंगे समय निकालेंगे बनाएंगे मैं यही कह रहा था कि कोई अभद्र भाषा का उपयोग कर रहा था उसको देखने के लिए बोला था बस अच्छा अच्छा हां तो यह हम भी मानते हैं ना इसको आप क्लियर
01:00:31:09 करिए जन्म से नॉमिनेशन नॉट सिलेक्शन पहले जन्म से नॉमिनेशन उसके बाद उसकी योग्यता के अनुसार उसका सिलेक्शन जैसे कहीं पर जब कोई रिक्रूटमेंट होता है भर्ती होती है तो उसमें क्या होता है कि आपकी जो उस प्रतियोगिता से पहले की जो योग्यता है वो इस कारण उसके आधार पर केवल आप यहां आ सकते हो प्रतियोगिता में प्रतियोगिता में आने के बाद जो आप करेंगे परफॉर्म करेंगे उसके आधार पर आपका सिलेक्शन होगा तो यह जो मनुष्य जीवन है यह भी एक प्रतियोगिता है इसमें आने से पहले की जो आपकी योग्यता थी उसके आधार पर आपको एक प्रतियोगिता में आने का भाग मिल गया कि आप यहां इस रूप में आ सकते हो आप इस रूप में आ सकते हो अब आगे यहां पर आने के बाद आप जो वो करेंगे उसके अनुसार आपका सिलेक्शन होगा अमुक कर्मों में जैसे कि बॉलर बैट्समैन के रूप में व्यक्ति जो है मैदान में उतरता है मगर वहां पर होने वाले जो चीजें होती है स्थितियां होती हैं उनके अनुसार उनका उपयोग किया जाता
01:01:44:02 है और आपातकालीन स्थिति में किसी का भी उपयोग कर लेने की भी कर लेने का भी प्रावधान है इस पर मत कहिए कि हा बॉलर का बैट्समैन के रूप में उपयोग है क्या वो आपातकालीन होता यह देखिए चेहरा बहुत बेकार है भैया आपके जैसा हीरो सब थोड़ी ही लगता अच्छा अच्छा अरे ऐसी बात नहीं है भाई पीपल डोंट अंडरस्टैंड द पॉलिटिकल एडवांटेज ऑफ हैविंग कास्ट यह जहर घोला गया है इससे कोई मतलब थोड़ी ना है भाई कोई आपको आप अगर ब्राह्मण नहीं कहला रहे तो उससे दिक्कत क्या है दिक्कत होनी चाहिए जब आपको जो है भगवत प्राप्ति के लिए मना कर दिया
01:02:48:19 जाए सात दीप नव खंड में गुरु से बड़ा ना कोई आप आ जाइए प्रभु सिंह जी लाइव आ जाइए मेरी एक रिक्वेस्ट है य भाई यह क्या मेरी एक रिक्वेस्ट है कि अगर कोई किसी के पास हमारा वह लिंक है तो उसको कॉपी करके दोबारा पेस्ट कर दे यहां कमेंट सेक्शन में अविगत कबीर आप आ जाइए ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध
01:03:38:22 करिए कार्टून जी आप अपने विज्ञान के आधार पर कायरता छोड़िए साहस एकत्रित करिए और सामना करने का साहस दिखाइए आपसे कह रहा हूं कार्टून जी राम कृष्ण से कौन बड़ा उन्होंने भी गुरु न तीन लोक के नी गुरु आगे अधीन धरती पर भगवान है सारी दुनिया अनजान है सनातन धर्म महान
01:04:26:12 हिंदू की हिंदू के बारे में जो आप बात कर रहे हैं कृष्णा जी वोह हिंदू धर्म आपके पास कैसे आया यह बताएं अपने आप को सनातनी कहने वाला पहले यह बताया कि उसके पास य सनातन ज्ञान आया कहां से ठीक है सबसे पहली बात कुछ चार पांच चीजें आपको ध्यान रखनी चाहिए जन्मना और कर्मणा में पहली बात जन्मना का अर्थ ये नहीं है कि नहीं ब्राह्मण है वो कर्म कैसे भी करे उसको ले लिया जाएगा नहीं ब्राह्मण है तो उसको जो है अ चेक किया जाएगा ब्राह्मण घर से चेक किया जाएगा और आगे जो है उसके अनुसार कार्य किया जाएगा कन्हैया आपका
01:05:15:08 चेहरा कन्हैया जी आपका चेहरा सही शिक्षा यह जो जातिवाद का गलत स्वरूप समाज में फैलाया गया है इसकी सही शिक्षा जनजन तक पहुंचाना यह बताना कि जन्म से केवल नॉमिनेशन होगा उसके कर्मों के आधार पर उसका सिलेक्शन अथवा रिजेक्शन होगा और दूसरी बात यह कि अगर कहीं कहीं पर विधि निषेध के रूप में कुछ मना किया गया है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उनसे कोई बैर है शास्त्र को धर्म को अगर कहीं पर जाने से आपको रोका जा रहा है तो उसका आपका हित भी सिद्ध होता है जैसे एक बच्चे को पिता को छूने से रोका जाता है जब पिता जो है कार्य कर रहे होते हैं बिजली का उस समय अगर बच्चे से मना किया जा रहा है कि पिता को मत छुओ तो इसका मतलब यह नहीं बच्चे से प्यार नहीं है इसके बाद आप यहां पर आपको जो वहां से मना किया गया वो आपको उस दायित्व से मुक्त किया गया है जो अत्यंत कठिन हो जाएगा निर्वाह करने
01:06:31:08 में दूसरी बात कर्मणा वर्ण व्यवस्था से जो समाज होगा उसमें विपलव होगा जो आज है तीसरी बात बात करें अगर प्रमाण की तो प्रमाण में भी भगवान अगर वो जो धर्म है वो जो ण वर्णानु सार धर्म है वो अगर बदला जा सकता है कर्म के आधार पर तो फिर भगवान उसको बाद नहीं कर सकते कि तेरा वर्ण यह है और तू यह कर बाद तभी कर सकते हैं जब उसको बदला ना जा सके दूसरी बात भगवान कह रहे हैं मया सटम मैंने बनाया तो फिर यहां इंसान क्यों बना रहा है तीसरी बात अगर इंसान बना रहा है तो कौन किस आधार पर बना रहा है कौन कब कैसे किस आधार पर बनाएगा ठीक है तो यह भी है और अगर इसको हम लोग एक थर्ड पार्टी बन कर के अगर देखें तो मैंने एग्जांपल दिया था कि जो जन्म से जो गुणवत्ता प्राप्त हो आप कितनी भी आप ट्रेनिंग दे दो वो जो गुणवत्ता होंगी अगर उसके अनुसार ट्रेनिंग दोगे तो ज्यादा लाभ होगा और जो गुणवत्ता नहीं है उसके अंदर जन्म से और उसके अनुसार ट्रेनिंग देंगे तो कम लाभ होगा तो हम जब तक हमें जन्मा निसार प्राप्त है तो हम क्यों आपातकालीन धर्म को लागू कर दे वहां जब हमें रट वेलर प्राप्त है तो हम क्यों
01:07:46:08 उसको क्षत्रिय के रूप में उपयोग करने की बजाय हम क्यों लेब्राडोर को उपयोग करें क्षत्रिय बना कर के उसको खुख बना कर के चार टाइम खाना देना बंद करो भाई रट वेलर को लेब्राडोर को तो थोड़ी थोड़ी हिंसक प्रवृत्ति आएगी खामा खा उसको मारना शुरू करो तो वो चिड़चिड़ा होगा क्रोध आए और उसके बावजूद भी कोई गारंटी नहीं है कि जितना अच्छा रट वेलर जो हिंसक है क्षत्रिय है उतना ही अच्छा वो लेब्राडोर बन जाएगा वो भी एक गारंटी नहीं शरीर तो वैसा मिलेगा ही नहीं ताकतवर कितने टन का बाइट होता है रट वेलर का और कितने टन का बाइट होता है लेब्राडोर का ये सब अंतर शारीरिक भेद तो आएगा ही तो वो जो जेनेटिकली जो हमें मिला है उसके अनुसार जब हम उसको उपयोग करेंगे तो हमें ज्यादा व्यवस्थित और ज्यादा अच्छा समाज प्राप्त होगा तो शास्त्र केवल उसकी बात कर रहे हैं कि जेनेटिकली अच्छा इसमें एक बात और मैंने पिछली बार भी बताया था कि हमको गुण कर्म के आधार पर उसको ढूंढना है क्या कहते हैं क्षत्रिय को बेटी का विवाह कराना है क्षत्रिय का अपनी बिटिया का विवाह कराना है तो गुण कर्म के आधार पर अगर हम ढूंढेंगे तो हम उसको लेकर सीधे मेले में चले जाए जो मिल रहा है उसको हिला हिला के देखें उसके अंदर कौन-कौन से गुण है कौन-कौन से कर्म है अगर हमने कोई भी पैरामीटर शुरुआती
01:09:01:10 तय किया तो यही तो वर्ण व्यवस्था है आप जन्मना हो गए जैसे हमने यह कह दिया कि अच्छा घर देखेंगे वहां मिलेगा वहां देखेंगे क्षत्रिय है कि नहीं इसका मतलब क्या हुआ हमने यह मान लिया कि हम जो है जन्म किसी अच्छे घर में जन्म लेने वाले के लिए अपेक्षा कर रहे हैं कि वह हमारे अनुरूप हो उसके जन्म से गुणों को हम करने जा रहे हैं कि वो ज जन्म से गुणों के अनुसार कर्म कर रहा है कि नहीं अगर हमने यहां पर कास्ट का नाम नहीं लिया वर्ण का नाम नहीं लिया हमने कह दिया अच्छा घर अपनी बिटिया के विवाह के लिए अच्छा घर जितने भी कर्मणा मानने वाले हैं वो यह ना कहे अपने जीवन में कि अपनी बेटी की शादी अपनी बहन की शादी मैं अच्छे घर में करूंगा बंद कर दे क्योंकि वहां वो प्राथमिकता से पहले जन्म को मान रहे हैं पहले अपेक्षा कर रहे हैं कि भाई वहां जाक लड़के को देखने जाए बाद में लड़के के अगर गुण उस घर के अकॉर्डिंग जैसा हमने सोचा हमारे अकॉर्डिंग नहीं मिलेंगे तो हम दूसरा अच्छा घर देखेंगे मगर जब कर्मणा वर्ण व्यवस्था मानते हैं तो आपके पास कोई शुरुआती पॉइंट है ही नहीं कुछ नहीं बोल सकते आप यहां जाएंगे अगर हमने बोला कि अच्छा घर अच्छे घर में जाएंगे हम लड़के को चेक करने तो
01:10:16:24 क्या यह आवश्यक है कि अच्छे घर का लड़का भी अच्छा ही हो नहीं हमें उसके कर्मों को चेक करना पड़ेगा यही है नॉमिनेशन ऑफ सिलेक्शन नॉमिनेट कैसे हुआ हमारे अकॉर्डिंग व अच्छा है क्या नॉमिनेट कैसे हुआ कि हमारी जानकारी में ब्राह्मण है क्या हमारी जानकारी में क्षत्रिय है क्या तब उसके पास जाएंगे और तब हम उसको कहेंगे और अगर वह अपने क्षत्रिय वर्ण के अनुसार कार्य नहीं कर रहा है अगर वह नहीं कर रहा है ब्राह्मण वर्ण के अनुसार कार्य तो उसको हम कह सकते हैं कि यहां पर तुम जो है शास्त्रो चित आचरण नहीं कर रहे मगर जब कर्मणा होगी तो हम उसे बाद कर ही नहीं सकते क्योंकि जो वह अपने धर्म को छोड़कर जो दूसरे के धर्म को अपना के जो कार्य कर रहा है वह भी धर्म है क्योंकि भाई जन्म वो कर्म के अनुसार बदल जाएगा जो वो करेगा वो हो जाएगा उसका फिर फायदा क्या है क्योंकि हम ब्राह्मण के पास जाएंगे तो ब्राह्मण हो सकता है क्षत्रिय मिले क्षत्रिय पास जाए क्षत्रिय हो सकता है ब्राह्मण मिले तो यह वर्गीकरण का फायदा क्या रहा क्लासिफिकेशन का फायदा तो यह है ना कि ज्यादा आसानी से हम एक दूसरे तक पहुंच सके ब्राह्मण की आवश्यकता हो तो ब्राह्मण को प्राप्त कर सक क्षत्रिय की आवश्यकता क्षत्रिय प्राप्त कर
01:11:31:08 सके अविगत कबीर मनोहर कन्हैया जी जी कन्हैया जी बताए भाई हरे राम हरे कृष्णा जय श्री राम जय श्री राम अरे आपने तो मेरा चेहरा कई बार देखा हुआ है तो कई बार बात हुई है बारबार आप मेरे से चेहरा दिखाने के क्यों बोलते हैं भाई मैंने बात ये है ना कि मैं ये नहीं जानता था ये कन्हैया लाल चौधरी भाई वाले कन्हैया लाल हां मैं मतलब वही तो कह रहा हूं तो आप तो मेरे से कई बार मिल चुके हो कई बार बात बात भी कर चुके हो सब काम कर चुके हो एक्चुअली मैं इस समय ना अपने चेंबर में बैठा हुआ हूं मैं चेंबर में बैठा हुआ हूं इसलिए मैं मतभेद तो है नहीं हमसे नहीं मैं तो ऐसे ही आ गया आपसे मुलाकात करने के लिए मुलाकात आप अदर वाइज करिए ना चलिए ठीक है चलो चलो
01:12:48:28 ठीक मनोहर मनोहर जी आपका चेहरा योयो 77 जी योयो जी आपका नाम मेरा नाम रत्न है
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01:13:09:25 सर जी कहां से हैं जालौर राजस्थान अच्छा बोलिए सर वो एक कमेंट में कर रहा था अंतरजातीय विवाह वाला कार्टून वीडियो हां आप ही हो हां वो मैं ही हूं अच्छा अच्छा आप तो बहुत सारे अजीब अजीब से प्रश्न किया करते हो शायद मैंने देखा थोड़ा दूर जाइए चेहरा तो दिखाइए थोड़ा सा दूर से लीजिए अच्छा हां बोलिए अंतरजातीय विवाह सर वैसे मेरा आपसे कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है किंतु मेरे जो चीजें समझ में नहीं आती मैं अपने चारों ि पहली बात तो ये है कि जो आपने आधार बनाया है अंतरजातीय विवाह का पहले बताऊं आपको कि अभी मैंने जैसे एक उदाहरण दिया रट वेलर का तो क्या रोट वेलर का संबंध लेब्राडोर के साथ होगा तब भी हमें वैसी क्वालिटी का रट वेलर प्राप्त हो सकता है
01:14:28:10 वैसे तो नहीं होगा नहीं होगा अच्छा दूसरी बात यह कह रहा हूं क्या जो साइंस के द्वारा बताए गए सिद्धांत होते हैं वह शाश्वत होते हैं शाश्वत तो नहीं होते अच्छा मतलब वह कभी भी बदल सकते हैं आज उन्होंने एक पैरामीटर दिया अच्छा है हो सकता है कल को ये भी हो जाए गलत है हां यानी कि उनके उनके आधार पर हम रिलाई नहीं कर सकते किंतु आप भी तो अपनी बात को वेरीफाई करने के लिए विज्ञान के पास ही जाओगे आपको कैसे पता चला कि जो हमारे पिता से जो गुण मिलते हैं वह वैसे ही होंगे वो सहारा मात्र लिया जा सकता है उसके ऊपर डिपेंड नहीं है पूरी तरीके से बात करते समय कुछ भौतिक उदाहरणों का सहारा लिया जा सकता है मगर उसके ऊपर ही डिपेंड नहीं है दूसरी बात मैं उस पर आ रहा हूं जैसे कि हम अपने घर की स्त्रियों का अच्छा नहीं मानते हैं किसी पर पुरुष के साथ आप मानते हैं कि नहीं नहीं नहीं नहीं मैं पूछ रहा हं व्यर्थ क्यों किया जाए व्यर्थ का ना हो नहीं नहीं व्यर्थ नहीं मान लीजिए कोई व्यक्ति है उसकी आसक्ति हो रही है
01:15:44:07 कि किसी के घर की स्त्री का मैं चुंबन ले लू गाल प तो यह उचित मान इसको ना करना या इसको रोकना इससे क्या यह आप मानते हैं ऐसा होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए नहीं मेरे को व्यक्तिगत रूप से ये ठीक नहीं लगता अच्छा तो यह साइंस ने कहा है क्या कि ऐसा नहीं होना चाहिए नहीं विज्ञान ने तो नहीं कहा ऐसा ठीक है अच्छा कहा और कोई प्रश्न है आपका सर धर्म सभी चीजों का अंत थोड़ी है डार्विन का सिद्धांत आप कैसे का करोगे उसको
01:16:25:22 डार्विन का सिद्धांत मार्क्स वाद और रामराज आप पढ़िए विस्तृत है आप पढ़ लीजिएगा डार्विन का सिद्धांत आप यह बताइए कि आप अपने जीवन में मर्यादा का पालन करते हैं क्या मानव उचित हां जितनी मर्यादा है शायद उतनी नहीं किंतु बहुत सारी मर्यादाओं का पालन होता माता को माता की दृष्टि से देखना पत्नी की दृष्टि से ना देखना इसका पालन तो करते हैं ना हां करते हैं का से सीखा यह तो हमें हमारे पिता से ही पता चला पिता भी नास्तिक
01:17:07:24 थे नहीं पिताजी इतने नहीं थे किंतु उन्होने बताया धर्म को मानते थे या नहीं मानते थे मानते थे हा तो धर्मे ना पशु भी समाना आपके जीवन में आप अगर थोड़ी भी मानवो चित मर्यादा का आलंबन ले रहे हो उसका मूल धर्म है साइंस आपको मर्यादा नहीं सिखाती है साइंस आपको आपके उसके अनुसार प्रोजेक्ट देते रहती है कि आज यह अच्छा है ये अच्छा है ऐसे हो ग तो ऐसे कर सकते हैं मगर वह धर्म मर्यादा नहीं देती है दूसरी बात ये कह रहा हूं कि आप अगर धर्म को नहीं मानते हैं तो इसका अर्थ है कि आप ईश्वर को नहीं मानते
01:17:51:13 हैं नहीं मर्यादा टूटने से अंत में क्या हो जाएगा मैं आपसे पूछ रहा हूं ईश्वर को मानते हैं कि नहीं मानते पता नहीं क्योंकि मैंने कभी देखा नहीं है उनको महसूस नहीं किया है तो जब आपने जब आप उस आप उसमें प्रमाण का इंतजार कर रहे हो यानी उसकी एक्जिस्टेंस पर आपको सवाल है सवाल है तो आप नहीं मानते हो आज की स्थिति तो यही है ना यही हुई ना अब आप ये बताओ अब आप ये बताओ आपके मन में ऐसा भाव आता है कि नहीं बारिश ज्यादा पड़ रही तो कम हो जाए हा आता है ना साइंस ने कहा है कि आप बारिश को कंट्रोल कर सकते हो साइंस ने अभी दुबई में किया था ना बारिश को कंट्रोल कर सकते हो धूप को कंट्रोल कर सकते हो नहीं इस रिसर्च हो सकती है नहीं रिसर्च हो सकती है नहीं अभी का सीन क्या है अभी क्लेम हो के मन में इच्छा क्यों आ रही है जिसका अस्तित्व नहीं है ये तो मन है और शरीर है इसलिए
01:19:07:03 हां मतलब आपके मन में जिसका अस्तित्व नहीं है उसकी भी इच्छा है हां है तो जिसका अस्तित्व नहीं है आपके अनुसार भगवान का अस्तित्व नहीं है उसकी इच्छा है आपके अंदर भगवान का अर्थ समझ लीजिए क्या है सत चित आनंद सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर यह भगवान की व्याख्या हो सत चित आनंद का मतलब है सत मैं बोल रहा हूं बोलले सत का मतलब है जो कभी देश काल मतलब सत शाश्वत सत्य ठीक है तो एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी कभी ना मरने की चाह विद्यमान है भले ही साइंस कहे या ना कहे कभी मरना नहीं चाहता है एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी सारा ज्ञान प्राप्त कर लेने की चाह विद्यमान है भविष्य तक देख लेने की चाह विद्यमान है इंडिया पाकिस्तान का मैच चल रहा है तो आंकड़े लगाने लगेंगे कौन है जो नहीं अभी तक घोषित हुआ साइंस की तरफ से वह आंकड़े भी लगाने लगेंगे माता-पिता 200 वर्ष की उम्र में भी अगर हॉस्पिटल में एडमिट होंगे तो एक इच्छा होगी किसी तरीके से बच जाए लेकिन कल को ये चीजें सारी इंसान के कंट्रोल में आ पूरा पूरा पूरा कहने दीजिए
01:20:22:06 मुझे पूरा कहने दीजिए वो भी मैं बताऊंगा वो भी बता कल को ये चीज साइंस के कंट्रोल में आ गए वो भी बताऊ अब इसके बाद तीसरी इच्छा है सदा आनंदित रहने की कि मैं कभी दुखी ना हू मेरे कभी झुरिया ना पड़े मेरे कार के टायर कभी बिसे ना मेरा कभी मोबाइल में एक भी स्क्रैच ना आए तो अब क्या है कि यदि हमारे अंदर कोई ऐसी इच्छा होती है जो पूरी नहीं हो सकती जो बकवास है उस इच्छा से हम आसानी से स्वयं को अलग कर सकते हैं जैसे कि एक छोटे बच्चे ने कहा कि मैं बिल्डिंग को हाथ में उठाना चाहता हूं मैं कार को तान देना चाहता हूं यह कहा छोटे बच्चे ने भौतिक स्वरूप से तो उसकी मां ने कहा पागल है ऐसा कभी नहीं हो सकता साइंटिफिकली वो जो पा किलो का बच्चा है वह 8900 किलो की कार को नहीं उठा सकता या बनी बनाई बिल्डिंग को हाथ पर नहीं उठा सकता तो वह बच्चा जो है वो प्रत्यक्ष रूप से वो कार्य करने की जो इच्छा थी उसके अंदर उसको छोड़ दिया उसने और उसके बिना वो खुश है मगर साइंस हमसे कह रही है कि आप मरोगे आज की आज की तारीख का रिजल्ट यही है साइंस ने नहीं कहा कि आप अमर हो फिर भी मृत्यु का ख्याल तक आते ही आप उसको
01:21:37:14 झटका देते हो आप उससे अलग हटाते हो अपने मन को तो आप साइंस के विरुद्ध जाते हुए मृत्यु से भाग रहे हो मृत्यु बहीन जीवन साइंस ने नहीं कहा कि आप भविष्य देख सकते हो मगर साइंस के विरुद्ध जाते हुए आप सब कुछ जान लेने की कामना कर रहे हो भविष्य जान लेने की कामना कर रहे हो यानी कि अज्ञ विहीन जीवन और साइंस ने नहीं कहा कि आपके कभी जररिया नहीं पड़ेंगी आप कभी ये नहीं होगे वो नहीं होगे आपकी कार कभी खराब नहीं होगी फिर भी आप साइंस के विरुद्ध जाकर के उन सारी स्थितियों को ही कामना कर रहे हो इसका मतलब दुख रहित जीवन तो जिस अब क्या है कि जो हमारे अंदर इनबिल्ट इच्छा है इनबिल्ट मतलब जिससे हम अलग नहीं हो पा रहे कुछ इच्छा है जिनको हम छोड़ कर के अलग हो जाते खुश रहते मगर इन इच्छाओं को छोड़ के हम अलग नहीं हो पा रहे यह तो सदा ही व्याप्त है हमारे अंदर
01:22:31:18 ले यह जो इनबिल्ट इच्छाएं है इनसे ही सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है जिसको एक नास्तिक भी प्राप्त करना चाहता है अब बात यह आती आपने एक बात कही कि वैज्ञानिकों ने अगर इस सबको कंट्रोल कर लिया तो इसका मतलब यह है ना कि वो वही पहुंचे जहां हम जा रहे हैं अगर उन्होंने सच्चिदानंद स्वरूप ति को ढूंढ लिया तो उन्होंने ढूंढा तो वही ना जिसको हम भगवान कहते हैं नास्तिक और आस्तिक में फर्क सिर्फ इतना है कि नास्तिक जिधर भाग रहा है व यह मानता है कि मैं जिधर भाग रहा हूं वो जगह इस दुनिया में है ही नहीं मतलब वह खुद ही कह रहा है कि मैं जहां जा रहा हूं वह दुनिया में है ही नहीं मगर मैं जा रहा हूं आस्तिक का आस्तिक का आस्तिक की स्थिति है कि वो जिधर जा रहा है वो ये कहता है कि वो दुनिया में है ये अंतर है दोनों में अंतर नास्तिक खुद ही खुद को मूर्ख कह रहा है कहां जा रहे हो कि मैं सत चित आनंद को प्राप्त करने जा रहा हूं सच्चिदानंद है नहीं है सच्चिदानंद को ही भगवान कहा गया ना सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर तो सच्चिदानंद है नहीं है तो उसने क्या करा वो उस चीज को मांगने जा रहा है जिसको वो खुद ये कह रहा है वो है ही नहीं तो मूर्ख कौन हुआ
01:23:47:08 या तो उसर भागना बंद कर दे लेकिन आप इसको एक शरीर धारी या आप जिस तरह भी भगवान को मानते हो उस तरह मान रहे हो लेकिन विज्ञान के लिए तो यह केवल एक वस्तु मात्र होगी कैसे होगी वस्तु मात्र वो बताओ भाई सच्चिदानंद का मतलब हुआ अध्य अवाद का मतलब हुआ कुछ भी कर सकने वाला तो अगर वस्तु मात्र होगी तो व कुछ भी थोड़ी ना कर सकती है तो बाद है बाद की अ अवाद के अस्तित्व को स्वीकार करना पड़ेगा ना आपको
01:24:26:27 आज आपने चेहरा दिखाया अच्छा लगा आपने साहस दिखाया बहुत बढ़िया रहा आपके कमेंट्स में पढ़ता रहता था जा में र हा नहीं आप लगे रहते जब भी हमारा वीडियो आता है तो आप उसमें थोड़ा निरंतर में देखता हूं कभी कभी मैंने आपको कहा भी होगा कि लाइव आइएगा नहीं सर मेरा व्यक्तिगत विरोध नहीं है लेकिन मैं इतना ज्यादा दिमाग खराब हो गया है तो प्रश्न पूछने के लिए आप यहां से स्टार्ट करो कि अगर भगवान नहीं है इस दुनिया में आप यहां से अपना जीवन में स्टार्ट करो अगर भगवान नहीं अगर सच्चिदानंद स्वरूप नहीं तो मैं इसको छोड़ क्यों नहीं पा रहा हूं सच्चिदानंद को प्राप्त करने की जो भावना है उसको त्याग करके हम रह सकते हैं क्या नहीं रह सकते वो तो हमारे इनबिल्ट है हा तो बस यही से स्टार्ट करो इसका मतलब है कि इस दुनिया में जैसे हमारे पास प्यास है तो दुनिया में पानी है भूख है तो खाना है देखने की क्षमता है तो दुनिया में दृश्य है सुने की क्षमता है तो दुनिया में आवाज है मतलब हमारे अंदर इनबिल्ट प्यास से ही सिद्ध हो गया कि दुनिया में उसका जो सब्जेक्ट है उसका निवारण करता है वो मौजूद है तो इसी प्रकार हमारे अंदर जो ये इनबिल्ट प्यास है सच्चिदानंद की उसी से सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर
01:25:41:27 है और यदि कोई कह रहा है कि नहीं है तो फिर वो खुद को मूर्ख कह रहा है क्योंकि वह चाहता तो उसी को है जो वैज्ञानिक है जो नास्तिक वैज्ञानिक है वो चाहते तो वही है भाई मैं अगर आज एक प्रश्न पूछूं कि वह कौन सा आविष्कार होगा जिसके बाद वैज्ञानिक चैन से बैठेंगे कि अब मैं आराम करूंगा अब मैं कोई खोज नहीं करूंगा वोह अविष्कार एक ही है सच्चिदानंद स्वरूप अवाद चंद्रमा के साथ फुटबॉल खेल सके हाथी को पूछ से उड़ा कर के फेंक सके इतना मतलब कुछ भी मन में जो सोचे वो कर सके तो यानी कि जा वो भी उधर ही रहे हैं जिधर हम जा रहे हैं बस वो मना कर वो है ही नहीं हम कह रहे है इतना अंतर है और फिर आगे बहुत सी चीज है तो आप एक शुरुआत करिए य से सोचना मार्क्सवाद और रामराज ग्रंथ है यह पढ़िए इसमें डार्विन ही नहीं इसमें डार्विन नहीं डार्विन जैसे बहुतों का तर्क और प्रमाण यहां जो मैंने बताया कुछ भी नहीं है मगर उसके लिए एक डिक्शनरी ले लीजिएगा क्योंकि गुरुदेव की हिंदी बहुत वैसी शुद्ध हिंदी है तो कई शब्द होंगे जो बाउंस हो सकते तो डिक्शनरी ले लीजिएगा चौखंबा पब्लिकेशन
01:26:56:28 से आती है डिक्शनरी सब कुछ इसको पढ़िए अच्छा लगेगा भगवान को भगवान को महसूस करने के लिए कुछ कर सकते हैं भगवान को आप महसूस कर रहे हो ना बारबार जब जब आप अपनी मृत्यु से अमरता की ओर जाने की कोशिश कर रहे हो असत सगम तब तब आप भगवान को महसूस कर रहे हो जब जबन जैसे मीरा जी ई ऐसे भक्त महसूस करते थे इस तरह वो जब आप किशोर जैसे आज आपने जिज्ञासा बस आक के कुछ प्रश्न किए कुछ संतुष्टि कहीं पर कुछ मिली उसके आधार पर फिर आपने उसके अनुरूप काम करना शुरू किया धीरे-धीरे आपकी जो जीवन में प्रेजेंस है भगवान की वो बढ़ती जाएगी और जिनके जीवन में बहुत ज्यादा बढ़ जाती है वो मोक्ष को प्राप्त हो जाते हैं ठीक है हां सर धन्यवाद सर अच्छा लगा जय श्री राम
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01:28:07:01 जय राहुल शर्मा जी कृष्णा कृष्णा आप अपना चेहरा दिखाएं राहुल शर्मा जी जी बताएं राहुल शर्मा जी जी नमस्ते पत जी जय श्री राम जय श्री राम मुझे तो आज आपके चैनल का पता चला तो मैं बस कुछ जिज्ञासा है मेरी उसी को जानने के लिए आपके साथ जुड़ गया मैं तो असल में यहां पर हम जिज्ञासाओं के लिए बात नहीं करते जिज्ञासाओं के लिए हमारी क्लास होती है हर शनिवार को रात को 9 बजे धर्म रक्षा अभियान के निमित्त व आयोजित की जाती है तो आप उसमें आया करिए उसमें भी आप आ सकते हैं जिज्ञासा है तो हां यहां पर हम लोग बात करते हैं वैचारिक मतभेद के निमित्त या फिर जिज्ञासा वाला भी करते हैं सेशन कभी-कभी मगर आज वह नहीं है नहीं मैं मतलब वही प्रश्न पूछूंगा जो आज का विषय है उसी के अनुरूप की क्या होता है कि जैसे सोशल मीडिया पर या फिर
01:29:22:02 य पर कई लोग बारबार य आक्षेप लगाते हैं कि ब्राह्मणों ने सवर्णों ने दलितों का 5 हज सालों तक वो किया दमन किया उनको वो बना र उनके मन में क्यों चली ग भ्रांति भ्रांति देखिए आज बड़े शहरों की लड़कियां छोटे कपड़े पहनना चाहती है बड़े युवाओं में य आ गया बिना शादी के ही बिना विवाह के ही जो है संबंध बना ले किसी महिला से किसी स्त्री से है ना अपनी मर्यादा को लांग कर अब यह मेंटालिटी उनके अंदर क्यों आ गई प्रश्न होगा ना क्यों आ गई मतलब ये चीज बनाई ग है जो शिक्षा प्रद है जो शिक्षा व्यवस्था है उसको भंग करने का प्रयास किया गया मैक्स मलर का खत आप लोगों को पता होगा उसने स्पष्ट लिखा था हिंदुओं को हराना है तो उनकी शिक्षाओं में मिलावट करो तो वोह आज का दृश्य है हम जैसे जैसे अपनी शिक्षाओं से दूर जाएंगे वैसे वैसे सब चीजें आती जाएंगी बढ़ता जाएगा है ना हा वो तो है लेकिन क्या है कि जैसे हम जब हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं कि हम तो उसमें अकेले ब्राह्मण
01:30:37:15 थोड़ र समझ लीजिए हिंदू राष्ट्र का अर्थ समझ लीजिए अन्यों के हित का ध्यान रखते हुए कोई व्यक्ति अगर स्वयं को हिंदू नहीं मान रहा है तो ऐसा नहीं है कि उसका जो है वो हो रहा है अन्यों के हित का ध्यान रखते हुए सुसंस्कृत सुशिक्षित सुसंगत सुरक्षित संपन्न स्वस्थ सेवा परायण व्यक्ति और समाज की संरचना ही हिंदू राष्ट्र का उद्देश्य है यह आपकी बात सही है य पूरी के शंकराचार्य जी बताते हैं यह परिभाषा मैंने सुना है उनको तो लेकिन मेरा प्रश्न कि उन लोगों के मन में यह गणा कैसे आ गई जब मैं गांव जाता हूं बोल तो रहा शिक्षा पद्धति में मिलावट करके आई बोल तो रहा हूं शा से ज दूर रहने लगेगा वक्ति सामर्थ्य मान गुरुओं से जब दूर रहने लगेगा व्यक्ति तो इस तरह से जो है विप्लव की स्थितियां आने लगती है दूर कैसे कर सकते हैं सामर्थ वान गुरुओं से मिलाइए ज्यादा से ज्यादा सामर्थ वान गुरुओं तक पहुंचाए लोगों को परंपरा प्राप्त हो अंतिम निर्णायक सन्यासी हो और समस्त शति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देता हो और
01:31:52:22 अंततोगत्वा वो अज्ञानता रूपी संशय रूपी जो अंधकार है वह दूर करने वाला हो यह चार सिद्धांतों के ऊपर जो आपको गुरु गुरुजन हमारे मिल रहे हैं आज भी हैं उन तक लोगों को पहुंचाए जितना वो लोगों के बीच पहुंचेंगे तो इस तरह की जो शंकाएं उनका समाधान होगा और शिक्षा फैले गी जैसे आज देखिए कुछ अंशों में ही सही मैं नहीं जानता हूं कितना हुआ मगर वो जो धर्म को नहीं मानते थे नास्तिकता को अनुगमन करते थे अभी अभी अभी सामर्थ्य वान गुरुओं के कारण एक नास्तिक जो है आस्तिक की ओर प्रविष्ट हुआ ना क्यों क्योंकि उसको अभी तक सामर्थ्य वान कोई नहीं मिला था आज उसको करपात्री जी के द्वारा जो शिक्षा दी गई पुरी के शंकराचार्य को पुरी के शंकराचार्य जी द्वारा जो थोड़ा बहुत प्रवचन मैंने सुना उनका उसके आधार पर जो मैंने वक्तव्य दिया उसके आधार पर एक नास्तिक के मन में भी आस्तिक का बीच जो है वो अंकुरित हो गया हुआ ना तो यह सामर्थ्य वान गुरुओं के द्वारा ही यह जो भ्रष्ट आ रही है समाज में व्यवस्था में उनके वो भ्रष्ट होता दूर हो सकती है जैसे हम लोग एक सबसे पहला निचले स्तर से हम यह कर सकते हैं
01:33:08:07 कहीं पर भी कोई कथा हो रही है कथा कहने वाला किस परंपरा से वहां लिखवाना शुरू करो इससे दो बातें होंगी एक तो कथा कहने वाले का वेरिफिकेशन हो जाएगा और दूसरा लोगों के अंदर उत्सुकता होगी परपरा होती क्या है आज लोग परंपरा को जानते ही नहीं है जबकि सर्टिफिकेट मार्कशीट आदि के रूप में लोग परंपरा का ही अनुगमन कर रहे हैं कि य आदमी यहां से पास है मार्कशीट तो मार्कशीट क्या है परंपरा है ना मगर कोई जानता नहीं है अगर उससे परंपरा का नाम लो तो लोग सोचते हैं रूढ़ीवादी या कट्टर पंथी ऐसी बातें करने लगते हैं तो हमें इन चीजों को बताना है लोगों को सामर्थ्य वान गुरुओं तक पहुंचा दें तो पूरा शासन तंत्र मीडिया तंत्र सब कुछ शोधित हो जाएगा आज हम अपने सामर्थ्य वान गुरुओं से दूरी दूर हैं इसी कारण से यह सारी स्थिति है और यही उसका निवारण भी है इस पर हमने वीडियो बनाया है जी पंडित जी ठीक है जय श्री राम जय श्री राम
01:34:24:21 कृष्णा जी आपका चेहरा दिखाएंगे प्यारा हिंदू जी आप अपना चेहरा दिखाएं ऑन करिए
01:34:59:13 कैमरा जी बोलिए प्यारा इंदू जी हां मैं स्टेज में हूं ना धन्यवाद आप कैमरा न कर कैमरा ऑन करले मैं चेहरा रिवील नहीं कर सकता उसके लिए चेहरे के बिना हम बात नहीं करते हमने कई बार बताया है करेंगे मतलब मेरा मुसलमानों से थोड़ा पंगा चलता है मतलब किसी और चैनल पर मैं काम करता हूं तो तो वहां प आप चेहरे के साथ होते हैं या चेहरे के बिना होते हैं चेहरे के बिना हमारे में किसी का भी चेहरा रिब चेहरे के बिना होते हैं तो यहां पर चेहरा दिखाने में क्या आपत्ति है मतलब वही डॉक्सिंग वगैरह का दिक्कत है मतलब थोड़ा जब वहां प कोई जानता ही नहीं है कि यहां पर जो व्यक्ति बोल रहा है वही वहां वाला है तो फिर कैसे आपको दिक्कत है या तो वहां पर चेहरा दिखाया होता तो यहां दिखाने में दिक्कत होती खैर हमारी मर्यादा है हम लोग चेहरे के साथ ही बात करते हैं कृपा करके आप चेहरा दिखाए सॉरी भैया वो नहीं हो पाएगा ऐसे बात नहीं कर सकता आपका वे कोई बात नहीं आप अपने सिद्धांतों के साथ किसी अन्य को भेजे हम बात करेंगे चर्चा करेंगे आपका विषय क्या है वर्ण व्यवस्था प ही है मतलब मैंने शास्त्र पढ़े हैं थोड़े बहुत तो मेरा कहां से पढ़े
01:36:15:08 मैंने मतलब ऑनलाइन ही पढ़े हैं कोई गुरुकुल में मैं रहा नहीं निरुक्त में प्रमाण है कि आचार्य याक जो है व कह रहे हैं कि उन्होंने परंपरा प्राप्त अर्थ दिया है भगवत गीता चार दो में भगवान कह रहे हैं श्री कृष्ण यह ज्ञान मुझे परंपरा से यह ज्ञान जो परंपरा से प्रचलित था वह मैंने तुम्हें दिया 3 16 में कह रहे हैं परंपरा प्राप्त ज्ञान ही जो है वह अनुकरणीय है चांदो उपनिषद में लिखा हुआ है परंपरा प्राप्त आचार्यों द्वारा प्राप्त विद्या ही मोक्ष दायक है वहां पर इंटरनेट शब्द नहीं आया है इंटरनेट से पढ़ाई के आधार पर अपने सिद्धांतों को सुना स्वीकार धर्म को ना स्वीकारें परंपरा प्राप्त आचार्यों के सानिध्य में जाएं कोई भी निर्णय लेने से पहले परंपरा प्राप्त रामानुजाचार्य परंपरा निबार काचार्य परंपरा है वल्लभाचार्य परंपरा है रामानंदाचार्य परंपरा है शंकराचार्य परंपरा है सार्वभौम सर्वोच्च जगतगुरु जो है वह बैठे आपको बताने के लिए धर्म और अधर्म में निर्णय करने के लिए अगर आप सनातनी है धर्म पर विश्वास रखने वाले हैं तो सनातन शास्त्रों का आलंबन लेते हुए धर्म को जाने राम जी वशिष्ठ के पास गए थे कृष्ण जी सांदीपन
01:37:30:08 के पास गए थे आप इंटरनेट के पास गए मतलब हमारा हमारा क्या है ना कि घर वाले थोड़े मतलब वो नहीं करते तो फिर उसके आधार पर जो चलिए आप नहीं गए तो उसके आधार पर बनाए गए सिद्धांतों पर अड़ ए मत फिर जब जो आपको बताया जा रहा है उसको स्वीकार कर लीजिए फ मैं कर लूंगा मतलब मेरा बस डाउट ही है मतलब जैसे मैंने स् अगर डाउट है अच्छी बात है हम लोगों की क्लास होती है ह हर शनिवार रात 9 बजे आप जब हमें ट करेंगे तो आपको एक फॉर्म मिलेगा उसमें यहां आने के लिए भी फॉर्म होगा और क्लास में आने के लिए भी अलग फॉर्म होगा आप वो भर दीजिएगा हर हर बार क्लास में आई वहा फेस दिखाना आवश्यक नहीं होता है ठीक है 74836 ये नंबर है इस पर आप करिए जो है वो फ्री है वो निशुल्क है उसमें कोई ऐसा नहीं वो क्लास भी नहीं है बात करते हैं सब चर्चा होती है धर्म की और भगवान को जानने का प्रयास करते हैं ठीक है अच्छा लगा आप आए हा डिस्क्रिप्शन में है ना मतलब फोन नंबर जी दिया है दिया है डिस्क्रिप्शन में हा
01:38:49:27 मैम ठीक है तो अब तो कोई कोई मुझे नहीं लग रहा है हाउ डू वी कनेक्ट एवोल्यूशन एंड वर्ण व्यवस्था वी हैव एनफ एविडेंस ू प्रू एवोल्यूशन एंड वि चलिए अब आज की इसको पूरा करते हैं अच्छा लगा आज की चर्चा में एक जो हमारे बीच में एक नास्तिक विचारधारा वाले थे वह सकारात्मकता उन्होंने दिखाई और अपने जीवन में कुछ नहीं केवल इस बात की खोज करने लगी कि मैं मनुष्य क्यों हूं किस आधार पर मनुष्य यहीं से बस शुरू करिए आस्तिक हो
01:39:35:27 जाएंगे ठीक है तो बंद करते हैं तो सभी को जय श्री राम और एक बात ध्यान रखें हमारा उद्देश्य किसी भी तंत्र अथवा संस्थान को जो सनातन के नाम से धर्म की व्याख्या कर रहा है उसको नष्ट करने का नहीं है हमारा उद्देश्य है अगर उनमें कोई ऐसी शिक्षा है जो कि विवाद खड़े कर रही है जो कि मत मता बना रही है विभाजन कर रही है हिंदुओं का किसी आधार पर कि नहीं यह वाले हिंदू ये मानते हैं ये वाले हिंदू य मानते हैं तो उसमें जो सही चीज हो सकती है वो देने का प्रयास हम कर रहे हैं जिससे कि उस सही चीज के आधार पर दो अलग-अलग हो चुके हिंदू एक हो जाए है ना तो हमारा बिल्कुल नहीं है कि हमें इसको नष्ट करना है इस समाज को नष्ट करना है हमें उसको फलानी विदेश से आई संस्था है उसे नष्ट करना नहीं सब हिंदू भाई है हमारे अगर कोई ऐसी शिक्षा है जिसके आधार पर हम लोग बट रहे हैं तो उसमें सही क्या होना चाहिए उसको हम प्रचारित प्रसारित करने का प्रयास मात्र कर रहे हैं सवा घंटे की भक्ति करते रहिए भगवान के नाम का जप शुरू करिए जिस रूप में भी भगवान को देखते हैं भगवान के नाम का जप जरूर करिए महाभारत के अनुसार छंद उपनिषद के अनुसार अगर चलेंगे तो दिन
01:40:51:00 भर में पांच बार भगवान का स्मरण करिए 1515 मिनट तो आपकी सवा घंटे की भक्ति पूरी हो जाएगी वही भक्ति आपको बल देगी समय आने पर आप अपने परिवार के देश के राष्ट्र के मानवता के काम आ सकेंगे और अपनी जो भगवत प्राप्ति है अपना जो मोक्ष है उसको भी सुनिश्चित कर सकेंगे आचार्यों के प्रवचन सुनिए कोई भी सवाल मन में आता है तो उसका सवाल के आगे उस सवाल को टाइप करके और पूरी शंकराचार्य लिख कर के गोवर्धन मठ उनका ू चैनल है वहां पर जाकर के प्रयास करें ने का ना हो सके तो उनका ट चैनल भी चलता है गोवर्धन मट का गुरुदेव का वहां पर जाएं और धर्म रक्षा अभियान में जुड़ने के लिए भी वहां नंबर दिया गया वहां जड़ सकते हैं हमसे संपर्क कर सकते हैं हमारी जो क्लासेस चलती है जिसमें हम लोग बैठ कर के इसी तरीके से वार्तालाप करते हैं उसमें आ सकते हैं एक बार और नंबर बोल दे रहा हूं 74838 69 सभी को जय स्टडी राम
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