⬜ Not used yet · 00:00:01:21 – 00:24:41:16 (24:40)
00:00:01:21 सभी को जय श्री राम यह वीडियो विशेष रूप से स्कन को फॉलो करने वाले जो योगा ऑफ लव वाले महानुभाव हैं उनके लिए है क्योंकि उन्होंने रिसेंटली हमसे संपर्क किया और यह कहा कि आपको इस कन को लेकर के क्या-क्या समस्याएं हैं वह आप हमें बता दीजिए तो हम यथासंभव प्रयास करेंगे कि आपकी वह जो समस्या शंका उनका निराकरण प्रस्तुत कर सके मुझे ऐसा लग रहा है कि आप उन्होंने मुझे यह भी बताया कि जो उनको फॉलो करने वाले लोग हैं उन्होंने हमारे बारे में आपको बताया है कि हम प्रश्न करते हैं इस कौन से
00:00:45:19 तो इसमें बात यह आती है कि मुझे ऐसा लगता है कि आपको हमारे बारे में पूरी बातें नहीं बताई है आपके फॉलोअर्स ने नहीं तो हमने वीडियो बनाए जिसमें हमने संक्षिप्त विवरण दिया है फिर भी आपने संपर्क किया है और सौहार्दपूर्ण तरीके से बात अपनी रखी है तो मैं आपको चीजें बता देता हूं आप हो सके तो निराकरण प्रस्तुत करिए नहीं तो किसी आपके अनुसार जो विदत व्यक्ति हो उससे हमारी वार्ता करा दे तो और भी अच्छा होगा तो देखिए सबसे पहली बात है कि स्कोन के के कारण जो विकृतियां समाज में आ रही है वह विकृतियां क्या है भाई आप शिव को मानते हो आप विष्णु को मानते हो आप विष्णु भगवान को मानते हो या शिव जी को नहीं मानते हो यह आपका आंतरिक मामला हो सकता है मगर यह प्रभाव कैसे और कब डालने लगता है तो जब वह प्रभाव उससे हमारा समाज भी प्रभावित होने लग जाएगा तो वहां पर फिर क्वेश्चनिंग करना शुरू होता है ऐसे बहुत से हमारे
00:02:00:21 यहां के प्रामाणिक संप्रदाय है परंपराएं हैं जिसमें कि विष्णु भगवान को ही सर्वोपरि माना जाता है और हरि हर में मतलब व एकता की दृष्टि से नहीं देखा जाता वहां पर अन्यता के भाव की सुरक्षा के लिए विष्णु भगवान की यही महिमा का मंडन किया जाता है जिससे कि अन्यता सुरक्षित रहे मगर उनका यह जो भाव है वह किसी भी प्रकार से जो सनातन व्यवस्था है जो समाज का ढांचा है धर्म उसमें कहीं भी विघ्न नहीं डालता है तो ठीक है देख लेते हैं सबसे पहली बात है स्कोन ईश्वर अल्लाह और क्राइस्ट को यानी इकोन ये कहता है कि कृष्ण और कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर अल्लाह बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है क्राइस्ट वो एक है मतलब हमारा जो सनातन सर्वशक्तिमान जो कृष्ण है हमारे वो और बाइबल का बाधित क्राइस्ट और कुरान का बाधित अल्लाह यह तीनों एक है ये एक कर देता है तो यह भ्रांति क्यों फैलाई जा रही है पहला सबसे पहला सवाल यही है य क्यों फैला रहे हो ईश्वर अल्लाह एक नहीं है
00:03:15:25 हमारा ईश्वर है सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म सर्वशक्तिमान सनातन अध्य और ये जितनी भी किताबें हैं जिनका ये आप वर्णन अपनी उसम बहुत उससे करते हैं सम्मान के साथ यह सभी किताबें पहली बात तो वेद विरोधी है और फिर उनके द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को आप जो है कृष्ण के पास लाकर के खड़ा कर देते हैं अब इसमें आपकी ओर से जो अभी तक जो समाधान प्रस्तुत किए गए हैं वो पहला है कि नहीं नहीं हम अल्लाह को सर्वश्रेष्ठ इसलिए कह रहे हैं क्योंकि उनकी किताब के अनुसार अल्लाह सर्वश्रेष्ठ है तो फिर शिव पुराण के अनुसार शिवजी सर्वश्रेष्ठ है उनको क्यों नहीं आप कहते हो ये कृष्ण और शिव एक है है ना क्योंकि व शिवजी वाले वो तलवार लेकर के निकलेंगे नहीं ऐसा इसलिए ना तो शिवजी वालो का कुछ भी कर लो कितना भी मजाक उड़ा लो ऐ इस तर्क में यह बात आती है दूसरी बात कि कुछ कुछ समाधान य प्रस्तुत किए जाते हैं कि नहीं नहीं हम अल्लाह शब्द को ले रहे हैं वो जो कुरान वाला अल्लाह है उसको नहीं ले रहे हैं तो अल्लाह शब्द का एक्जिस्टेंस आपके पास कहां से आया है फर फिर किस अल्लाह की आप बात कर रहे हैं अगर
00:04:31:03 कुरान का अल्लाह नहीं है तो अच्छा दूसरी बात है कि यहां पर एक समाधान दिया जाता है कि भैया वो जो है अल्लाह जो है भगवान ने कहा मेरे अनेक नाम हो सकते हैं तो इसलिए अल्लाह भी हो सकता है तो यहां बात आती है तो फिर वो आप हरे अल्लाह हरे अल्लाह कर सकते हैं तो यहां फिर वही बात आ जाती है कि नहीं हरे अल्लाह नहीं कर सकते क्योंकि अल्लाह अल्लाह तो लिमिटेड है और यहां कृष्ण जी की पत्नी है यानी कि अल्लाह अलग है अल्लाह वो कुरान वाला अल्लाह है कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला अल्ला है और यहां पर जो है कृष्ण भगवान हमारे सनातन है सनातन का अर्थ देखिएगा आप फिर उसमें एक तर्क आ जाता है कि भाई सबको साथ में लेकर चल रहे हैं हम किसी का भी अपमान नहीं कर सकते हम ऐसी कंट्रीज में भी वो करते हैं जहां पर भी जहां पर ऐसा है वैसा है तो इसमें फिर सवाल ये आ जाता है कि जब आप लोगों को बुरा ना लगे इसलिए ऐसा कर रहे हैं कि कृष्ण और अल्ला एक है तो लोगों को बुरा ना लगे इसलिए दुर्गा और कृष्ण एक है और शिव और कृष्ण एक है यह क्यों नहीं सोचते हैं क्यों भेदभाव फिर से ही बात आ गई दूसरी बात क्या कोई हमारा सनातन सिद्धांत ऐसा है जो यह कहता है कि आप धर्म को धर्म का प्रचार करने के लिए धर्म का अर्थ ही बदल
00:05:47:08 दो अगर आप बदले हुए धर्म का प्रचार कर रहे हैं अगर आप बदले हुए धर्म का प्रचार कर रहे हैं तो क्या आप धर्म का प्रचार कर रहे हैं आप तो अधर्म का प्रचार कर रहे हैं जो जो धर्म में नहीं है वो अधर्म है और आप उसका प्रचार कर रहे हैं तो वो अधर्म का प्रचार कर रहे हैं और यदि आप किसी देश काल परिस्थिति वस कोई बात कह रहे हैं कि हमने उनको अच्छा लगे इसलिए ऐसा सुना दिया तो फिर आपको उसे सनातन से नहीं जोड़ना चाहिए है ना उसको फिर सनातन मत कहिए सनातन धर्म ग्रंथ मत कहिए उसे आप अगर आपका कोई कारण है सनातन क्या है जो किसी भी देश काल परिस्थिति से प्रभावित ना हो सदा एक रस नित्य तो आप जो बात यह कह रहे हो प्र प्रभावित हो कर के कि हम वहां पर वो करते हैं इसलिए हम ऐसा कहना पड़ता है तो फिर उसको सनातन धर्म ग्रंथों से क्यों जोड़ रहे हो कहो वो नॉन सनातन ग्रंथ है तो ये क्या कहते मसाला चल नहीं पाता यह वाला है ना अच्छा अब अगर चलिए मान लीजिए कि आपने मुस्लिम कंट्रीज में या क्रिश्चन कंट्रीज में जो है धर्म को पैलाने के लिए पहली बात तो वो जो फैल रहा है वो धर्म नहीं फैल रहा है व अधर्म फैल रहा है क्योंकि
00:07:02:19 जो धर्म में नहीं है वो आप वहां पर प्रस्तुत कर रहे हैं ठीक है सनातन नहीं है वो दूसरा क्या है कि अगर आपने किसी कारण वश किसी कंट्री में मुस्लिम या क्रिश्चन कंट्रीज में अपना प्रचार करने के लिए ऐसा करना शुरू किया है तो हिंदू कंट्री में वो क्यों कर रहे हैं ये बात आ जाती है तो ये वो सारे ईश्वर अल्लाह के कांसेप्ट से जुड़े हुए कृष्ण अल्लाह और क्राइस्ट यह जो आप कह रहे हैं यह गलत है इसको कहना बंद करिए आपके कई ऐसे मंदिर हैं जहां पर भगवान श्री कृष्ण को जो है सेंटा की ड्रेस पहना दी गई है ना य सब बंद करिए करना ईसा मसीह की फोटो आपकी ईसा की फोटो लगी हुई है आपके यहां पर तो यह सब आपका पाखंड फिर दिखाई देता है कि आप अपना बिजनेस कर रहे हैं और बिजनेस के लिए आपको हर व्यक्ति को अपने साथ रखना है तो इसलिए जो जैसा सुनना पसंद करता है उसको वैसा सुना देते हैं और क्योंकि हिंदू से इसलिए उसके विरोध में कोई बात करने से पहले आपको कोई दिक्कत नहीं होती है क्योंकि बड़ी आबादी में क्रिश्चन और मुस्लिम है हिंदू की छोटी आबादी है तो इसलिए आप व सहन कर सकते हैं हिंदू य जो शिव शैव लोगों की जो नाराजगी है वह आप सहन कर सकते हैं पहली बात दूसरी बात यह है कि आप वर्ण व्यवस्था
00:08:17:20 को वर्ण व्यवस्था का पालन नहीं करते हैं किसी को भी त्रिन सन्यास दे देते मलेच्छ को आप किसी को भी जने दे देते हैं किसी को भी आचार्य घोषित करके को घुमाने लगते हैं है ना तो हमारे यहां पर जो वर्ण व्यवस्था है सनातन धर्म में वो जन्म से नॉमिनेशन और कर्म से सिलेक्शन की है जिसका जन्म जिस कुल वर्ण में हुआ है उसके अनुसार यदि उसके कर्म भी होंगे तो उसको उसके अनुसार प्राप्त होने वाला जो पद है वह प्राप्त होगा अन्यथा नहीं होगा मगर नॉमिनेट कौन होगा जो उस कर्म को करने के लिए अधिकृत बताया गया है ठीक है इस पर हमने एक वीडियो और बना दिया है वर्ण व्यवस्था पर पहले भी बनाया अभी अभी रिसेंटली बनाया उसम आप देख लीजिएगा आपकी ओर से जो पूर्वाग्रह दिए जाते हैं और हमारे ओर से उसका जो उत्तर दिया गया वो सब है उसमें अच्छा इसके बाद आप क्या करते हैं कि जो जैसे कि अन्य जो महापुरुष है जैसे तुलसीदास जी की रामचरित्र मानस को आपने तुलसीदास को आप कौन होते हैं कहने वाले वो वैष्णव नहीं है हा कि तुलसीदास जी वैष्णव नहीं थे वो मायावादी थे और
00:09:32:21 आपके जो प्रभुपाद जी है उन्होंने ही अपना जब इनॉगरेशन किया था वृंदावन में मंदिर का तो उन्होंने करपात्री जी महाराज को बुलाया था फिर आप कैसे उनको रासकल कह रहे हैं करपात्री जी महाराज को अखंडानंद जी को आप रासकल कहने वाले कौन होते हैं आपकी किताबों में रासकल लिखा हुआ है तो ये आप गलत कर रहे हैं ईश्वर अल्लाह को एक मत करिए वर्ण व्यवस्था को भंग मत करिए और जो हमारे यहां के दिव्य महापुरुष इत्यादि है इनको आप रासकल मत कहिए आपने तो भगवान श्री कृष्ण को भी नहीं छोड़ा उनको भी रासकल कहा है अपनी सेसाई में गलत है गीता का अर्थ क्यों बदल रहे हैं भाई कमेंट्री का मतलब होता है कि आपके भाव और ट्रांसलेशन का मतलब होता है कि शब्द का अर्थ तो बहुत सारी जगह ऐसी है आपकी भगवत गीता में जहां पर जो ट्रांसलेशन है शब्द का अर्थ वही बदल दिया ब्रह्म का अर्थ क्या होता है ब्रह्म आपने ब्रह्म का अर्थ कर दिया कृष्ण भावना भावित अच्छा कृष्ण भावना भावित भी ब्रह्म है कृष्ण भावना भावित भी ब्रह्म है मगर ब्रह्म केवल कृष्ण भावना भावित नहीं है इसलिए ब्रह्म के लिए कोई और वर्ड य नहीं कर स हमारे
00:10:47:25 अनुसार है वो भी आपके अनुसार तो ब्रह्म और वो अलग है हमारा कांसेप्ट है तो आपने ब्रह्म का अर्थ जो है ब्र क्या कहते हैं वो ब्रह्मा ब्रह्म का जो 424 में है ब्रह्म शब्द बहुत बार आया है ब्रह्मे वतन गंतव्य ब्रह्म कर्म समाधि ना तो वहां पर आपने ब्रह्म शब्द का अर्थ एक बार भी ट्रांसलेशन में नहीं लिखा और ऐसे बहुत सारे ट्रांसलेशन है आपकी भगवत गीता में जहां पर आपने ट्रांसलेशन के साथ छेड़छाड़ की है य छेड़छाड़ क्यों जबकि प्रभुपाद जी अपने जो भूमिका इत्यादि में कहते हैं कि जो एक गुरु होता है उसका कार्य होता है कि पीछे से जैसा मिला है डाकिया की तरह आगे पोस्ट कर देना उसमें अपना मैनिपुलेट ना करना मैनिपुलेट क्यों कर रहे हैं कम से कम ट्रांसलेशन को मत करिए आप कमेंट्री में आप भाष्य लिखा है आप अपने भाव को वरीयता दे सकते हैं बजा इसके भगवान क्या कहना चाह रहे हैं बाद की बात है अलग विषय है मगर आपने ट्रांसलेशन के साथ छेड़छाड़ क्यों की है ना ट्रांसलेशन के साथ छेड़छाड़ मत करिए अच्छा इसके बाद आप प्रभुपाद जी का भी विरोध कर रहे हैं ट्रांसलेशन में ही क्यों कर रहे हैं जब प्रभुपाद जी ने लिख दिया है कि वहां पर दो 30 की की अगर बात करें उसमें ऐसे बहुत सारे उदाहरण एग्जांपल्स है मैं फिलहाल
00:12:02:26 दो 30 की बात कर रहा हूं प्रभुपाद जी ने जब ये लिख दिया है कि देही देह में रहने वाला जो है वह नित्य है सनातन है तो आपने सनातन शब्द को हटा क्यों दिया अच्छा इससे पहले वाला जो मैंने बताया कि आप अर्थ क्यों बदल रहे हैं उसमें एक कुतर्क आया था अमरेंद्र जो है बंगाल के हैं बाबू मोशाई वो एक कुतर्क करते हैं कि भाई जो भक्त होता है उसको हर जगह भक्ति दिखती है तो इसलिए भक्ति को दृढ़ करने के लिए जगह वो लिख दिया है पहली बात फिर वही बात जो किसी देश काल परिस्थिति से प्रभावित ना हो उसका नाम सनातन है तो आप कैसे अपनी प्रभावित वो जो जब वो आप प्रभावित हो गए कि वो भक्ति के लिए लिखी तो फिर वो सनातन अर्थ नहीं रहा आप कह दो सनातन ग्रंथ नहीं है सनातन ग्रंथ वही है जिसमें प्रभावित ना हो वो किसी स्थिति से कि हम भक्त के लिए लिख रहे हैं पहली बात दूसरी बात ये है कि अगर आप भक्त को हर जगह भक्ति दिखती है तो कृष्ण को हर जगह कृष्ण ही दिखता है तो इसलिए जहां पर कर्म की बात हो रही वहां भी भक्ति लिख दी है या जहां पर किसी कृष्ण की बात नहीं हो रही वहां भी कृष्ण लिख दिया है तो फिर आपकी भगवत गीता में किसी भी श्लोक का अर्थ करते समय केवल एक ही शब्द होना चाहिए था कृष्ण या आपके अनुसार जो कृष्ण भावना भावित है वो जो भी कोई भी एक सेलेक्ट जो कर लिया आपने
00:13:18:10 और कोई भी शब्द कैसे आपको दिख रहा है अगर भक्त को केवल भगवान ही दिखते हैं और कुछ नहीं दिखता है तो फिर आपको दूसरे शब्द कैसे दिख गए क्या ऐसे हमें कोई धर्म ग्रंथ प्राप्त हो पाएगा वाल्मीक जी भी राम राम रटते थे उनको भी अगर केवल राम ही दिखता तो हम कथा ही नहीं मालूम पड़ती क्या थी राम कथा तो य कुतर्क है और फिर जब वह एक एक तरीके से ब्लाइंडनेस आ गई क्योंकि आप भक्ति में इतने लीन है कि आप दूसरी चीज आपको नहीं दिख रहे तो भौतिक जगत की दृष्टि से जब आप ब्लाइंड हो गए हैं तो आप उसको आपकी ब्लाइंडनेस से व प्रभावित गीता है तो फिर उसे आप सनातन नाम क्यों दे रहे हैं बहुत सी चीजें हैं भक्ति से प्रभावित गीता फिर देख ना पाने की स्थिति से प्रभावित गीता उसको आप सनातन मत कहिए जो किसी भी देश काल पर स्थिति में ना बदले उसको सनातन कहते हैं प्रभावित ना हो जो नित्य एक रस है तो ये प्रभावित सत्य है जो आपने उसमें अर्थ लिखे व प्रभावित है किस चीज से कि आपके अंदर भक्ति है किस चीज से क्या भक्ति कारण आप देख नहीं पा रहे इससे प्रभावित है वो अर्थ तो उसको सनातन अर्थ मत कहिए कहिए यह सनातन अर्थ नहीं है गीता का और जो आपने लॉजिक
00:14:33:19 बताया उस लॉजिक को भी हमने बताया कि अच्छा अब प्रभुपाद जी का लिखा हुआ बदल रहे उसमें कुतर्क करते हैं कि अरे क्या हो गया अगर वहां पर लिखा तो है जिसका वध नहीं किया जा सकता जिसका वध नहीं किया जा सकता वो अमर है दो 30 में देही नित्य माया है और अर्थ करते समय प्रभुपाद जी ने जो 1972 की भगवत गीता है उसमें उसको कभी ना वध किया जा सकने वाला और अलग से नित्य भी कहा सनातन भी कहा टर्नल भी कहा मगर आज का जो वर्जन है उसमें टर्नल शब्द क्यों हटाया गया क्यों हटाया गया क्योंकि अब्राम फिलॉसफी फैलाई जा रही है ऐसा प्रतीत होता है आप निराकरण प्रस्तुत करिए ब्रम फिलॉसफी कैसे फैलाई जा रही है मैं आपको बताता हूं कि आत्मा जो है शाश्वत है अब शाश्वत शब्द को पहले हटाना है तो अब्राह्मिक जो हमारी सनातन फिलोसोफी है उससे दिक्कत है यही बात 4 24 में भी है क्योंकि चार 24 वाले में सीधे-सीधे वहां पर जो है हमारा कर्ता भी ब्रह्म है हवन भी ब्रह्म है उसमें डाली
00:15:48:19 जा रही सामग्री भी ब्रह्म है क्रिया भी ब्रह्म है और फल स्वरूप प्राप्त होने वाला फल भी ब्रह्म है सब कुछ ब्रह्म है ये हो गई सनातन फिलॉसफी और आप क्या फिलॉसफी वहां पर फैला रहे हो उसको छुपाना चाहते हो व क्रिश्चियनिटी वाली फिलॉसफी क्योंकि आप कह रहे हो ना क्रिश्चन क्रस्ट और कृष्णा सेम नहीं है सेम कैसे सेम अरे भाई कृष्ण कह रहे य धर्म भवती भारता अनम धर्म तमान सजाम सत्यम जनतम ब्रहम ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है वह सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है अल्लाह कौन है वो कह रहा है मेरी मेरी संतान कैसे हो सकती है मैं ये नहीं कर सकता मैं वो नहीं कर सकता हां अपनी बातों को जरूर बदल सकता हूं 33 चार अगर तुमने किसी को कुछ कह दिया है मुंह बोले रिश्ते बना लिए बहन बेटी मां वाले तो उसके बावजूद भी तुम उससे ठीक विपरीत रिश्ते बना सकते हो हम और यहां क्या है रकुल रीत सदा चली आई प्राण जा पर वचन ना जा तो कैसे आप एक कर रहे हो इनको रामो दुर ना भी भाषित हम अच्छा आप जो है राम और
00:17:03:22 कृष्ण में भेद करते हो राम जी 12 कला के हैं कृष्ण जी 16 कला के ये मत कहना वो लीला की दृष्टि से करते हैं अगर लीला की दृष्टि से करोगे तो लीला की दृष्टि से ही तो उन्होंने जो है कई जगह जो व्यास जी है उन्होंने कई जगह शिव जी को बड़ा कहा कई जगह विष्णु जी को बड़ा क तो वहां लीला की दृष्टि से क्यों नहीं मान लेते वो तो लीला की दृष्टि से वस्तुत वो एक ही है आप तो कृष्ण और विष्णु में भी भेद करते हो कि विष्णु भी छोटे हैं कृष्ण से विष्णु भी पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है आपके लोग कहते हैं कि राम जी पूर्ण है पर पूर्ण में भी गुड बेटर बेस्ट होता है कैसे होता है भाई पूर्ण का मतलब है जिसमें किसी चीज का अभाव ना हो गुड बेटर बेस्ट क्या है क्या है गुड बेटर बेस्ट गुड बेटर बेस्ट है कि यदि कोई बेस्ट नहीं है गुड है यानी कि बेस्ट वाली जो चीज है गुड में नहीं है यानी कि व अभी पूर्ण नहीं है तो या तो पूर्ण मत कहो या फिर उसम पूर्ण कहने के बाद गुड बेटर बेस्ट मत करो क्या लॉजिक है तो आपने 2.2 में और कई जगह विष्णु भगवान को भी नीचे कर दिया राम भगवान को भी नीचे कर दिया कि
00:18:18:27 वो रस की दृष्टि से है केवल अगर केवल रस की दृष्टि से है तो अपनी गीता को सही सिद्ध करने के लिए आप अपने ट्रांसलेशन को सही करने के लिए कि नहीं नहीं वो रस दृष्टि से कह दिया वस्तुत मानते एक है तो फिर व्यास जी के ट्रांसलेशन को व्यास जी के लिखे हुए को सही सिद्ध करने के लिए क्यों नहीं मान लेते हैं कि उन्होंने लीला की दृष्टि से अनन्य की दृष्टि से रस की दृष्टि से कह दिया कि शिव विष्णु अलग अलग है या शिव बड़े हैं विष्णु बड़े हैं वस्तुत मानते एक ही है यह वाली बात आ जाती है तो राम और कृष्ण में भेद मत करो विष्णु और कृष्ण में भेद मत करो और यदि आप विष्णु को नीचे मानते हो विष्णु को श्वान नहीं मानते हो तो आप वैष्णव क्यों कहते हो खुद को कृष्णव कहो और कृष्णव वो कौन सा कृष्णव क्योंकि कृष्ण क्राइस्ट सेम तो अपने आप को क्राइस्ट नव क नव क्राइस्ट इ इक्वल टू क्राइस्ट ठीक है यह हो गई आपकी प्रासंगिक जो व्यवहारिक चीज
00:19:20:04 दिक्कत अब इसके बाद आ जाती आदि भौतिक में जाते हैं शिव और विष्णु में भेद क्यों करते हो अय मुझे इसलिए कहना पड़ रहा है क्योंकि आपने ईश्वर अल्लाह को एक कहा कृष्ण अल्लाह को एक कहा आपने वर्णाश्रम धर्म की धज्जिया उड़ाई है तो आपका संप्रदाय जो परंपरा प्राप्त प्रामाणिक संप्रदाय उनसे कोई संबंध नहीं रह गया आगे और [संगीत] बताऊंगा आगे और बताऊंगा मधवा चार्य जी से आपका क्या संबंध है गड़िया संप्रदाय से आपका क्या संबंध है ये सब बातें भी होंगी मगर शिव और विष्णु में भेद कैसे करते हो है ना तो फिर वही वाली बात आ जाती है कि अगर शिव विष्णु जी की मानता वाले शास्त्र है तो जी की मानता वाले शास्त्र भी है तो आपको सामंजस की शिक्षा लेनी है आप ये नहीं कह सकते अच्छा शिव शिव पुराण तामसिक है यह कहां लिखा है कि तामसिक है तो व अपिक है झूठ लिखा है उसम आपको बताना पड़ेगा ना झूठ झूठ कहां लिखा है उसम और यदि व्यास जी एक जगह भी झूठ बोल सकते हैं तो फिर उनके लिखे पर विश्वास कैसे किया जाए फिर तो कुरान जैसा सिस्टम हो गया दो 187 में कुरान को बोलने वाला जो खुदा है वो कह रहा है कि हम अपनी दो 106 में कह रहा है कि हम अपनी आयत बदल देते हैं उनसे अच्छी दे देते हैं
00:20:35:10 अविश्वास पैदा हो गया जैसे विश्वास पैदा हुआ तो फिर उसकी लेखनी प्रमाण नहीं रह गई आपके लिए खत्म करो य ऊंच नीच का भेद व्यास जी को मानना ही बंद कर दो क्योंकि व्यास जी की क्रेडिबिलिटी में आप प्रश्न उठा रहे हो हम नहीं हम दो उनकी अगर दो बातें लिखी तो दोनों कोही मान रहे मनुस्मृति में भी कहा गया दो चीज है तो दोनों धर्म तो आप उनको ये नहीं कह सकते वहां पर उन्होंने झूठ कहा आपको यह कहना पड़ेगा कि उन्होंने रस की दृष्टि से एक जगह यह कह दिया रस की दृष्टि से एक जगह य कह दिया अनंता के भाव को छिपाने के लिए मगर वह आप केवल प्रभुपाद जी की लेखनी को बचाने के लिए कहेंगे उनकी क्रेडिबिलिटी पर प्रश्न ना उठे इसलिए कहेंगे व्यास जी की क्रेडिबिलिटी पर प्रश्न उठ जाए कोई दिक्कत नहीं है उनसे आपका क्या संबंध है वो तो केवल दिखावा पाखंड और प्रभुपाद जी से भी कोई वैसा संबंध नहीं मगर उनके नाम पर अ इस समय चल रहा है धीरे-धीरे अपने आप को अलग करेंगे तोय सारी बातें हैं अच्छा अब आप लोग एक तर्क देते हैं कि हम शिव जी को परम वैष्णव मानते हैं वैष्णवास्त्र
00:21:59:01 और हरिदास ठाकुर आ गए हैं क्यों उ नहीं माने थे पहली बात तो ये जो वैश्णवा नाम यथा शंभू का पाखंड है ये भी बंद करो या फिर समाधान प्रस्तुत करो अच्छा इसमें फिर आगे बढ़े तो यहीं पर देखिए शिव जी का अपमान क्यों है हर जगह बिना बात के शिव जी का अपमान शंकराचार्य का अपमान कि मायावादी है ये है वो मा उनकी बात नहीं भी हो रही फिर भी क्योंकि डर है ना शंकराचार्य से इसलिए ऐसा करते तो क्या है अपमान भाई शिव और पार्वती के दिव्य संबंध विवाह संबंध की तुलना आपने किससे की वहां पर जो हरिदास ठाकुर को मनाने कौन आई थी माया देवी का अवतार कहा गया मगर आपके व्यक्तियों ने बताया व वश्य थी तो एक व्यभिचार का वय विचार की तुलना आपने किससे की विवाह से हरिदास ठाकुर की तुलना किससे की वैष्णवास्त्र
00:22:59:10 तो वैष्णव वैष्णव भी नहीं है और साथ ही साथ आप अपमान भी करते हैं आप आदि शंकराचार्य जी का भी जगह-जगह अपमान करते हैं कि मायावादी मायावादी फिलॉसफी हीन है ये है वो है क्योंकि डर है जिससे व्यक्ति शंकराचार्य से स सदा के लिए दूर रहे वास्तविकता तक पहुंच ना पाए और वैष्णवास्त्र है ना अपने आप को शंकराचार्य का शिव जी को ना मानने वाला विष्णु जी को मानने वाला बताते हुए वैष्णव की शरण प्राप्त कर लेंगे और वैष्णव की शरण प्राप्त करते हुए हम जो है अपनी ब्रा फिलॉसफी को अपनी अब्राह्मिक चीजों को घुस देंगे सनातन धर्म में तो ये भी एक प्रॉब्लम है कि आप जो है शंकराचार्य को मायावादी कहते हैं फिर यह कहते हैं कि प पुराण में उसका खंडन किया गया है तो ये सब आप आकर के साबित करें कि कि जिस
00:24:07:06 मायावादी वह अतार्किक है अवैध है यह सब बातें आपको सिद्ध करनी होंगी अब बात आ जाती है कि इस संबंध में शिव और विष्णु वाले संबंध में प्रभुपाद जी का भी विरोध दिखाई देता है चीटिंग प्रभुपाद जी के द्वारा जो लिखी गई चीज भी कोई वो नहीं है पूरी की पूरी अब वो उनके द्वारा लिखी गई नहीं लिखी गई वो एक अलग है मगर अभी जो स्कोन जो प्रचार कर रहा है उसमें तो प्रभुपाद जी का विरोध है क्यों क्योंकि प्रभुपाद जी खुद भागवत में लिख रहे हैं कि शिव
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00:24:41:16 जी को पार्वती के साथ देखकर उन्हें जो है इंद्रियों के अधीन समझने वाले मूर्ख
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00:24:46:27 है और फिर आपकी भगवत गीता में लिखा हुआ है कि जो है शिवजी वसी भूत हो गए इसलिए देखिए वो इंद्रियों के अधीन है तो मूर्ख कौन हुआ अगर भागवत को मान लोगे तो यह जो लिखने वाला है मूर्ख हुआ और नहीं तो भागवत लिखने वाला फिर गलत ठीक है यह हो गया अब आगे बढ़ते हैं अब यहां पर आपके पास एक व खंबा आता है हम लोग ब्रह्म गड़िया वैष्णव संप्रदाय से हैं तो पहली बात तो यह हुई कि गड़िया वैष्णव संप्रदाय वाले स्वयं वर्णाश्रम धर्म को जन्म से मानते हैं ठीक है दूसरी बात य आती है कि आपका उनसे संबध इसलिए नहीं सिद्ध होता है कि उनके यहां जो पीछे से जो क्रम चला आ रहा है उन्होंने स्कोन को प्रामाणिक इसलिए नहीं माना है और प्रामाणिकता है भी नहीं मैं अपने आपको को अगर स्कन का वह सिद्ध करना चाहूं प्रामाणिक आचार्य वगैरह कुछ भी तो क्या आपकी एक फोटो ले लू आपके यहां के सन्यासी की उससे स्वयं को दीक्षा ले लू जिनका शरीर अब जो शरीर छोड़ चुके हूं जैसे अभी कुछ दिनों पहले ही आपके आ के कोई शरीर छोड़ के गए हैं तो मैं उनकी फोटो लेकर के अपने आप को दीक्षा दे दू तो मैं ऑथराइज वो हो जाऊंगा
00:26:01:27 डिक्टेटर और स्पीकर आपके यहां का मान लेंगे ना यह प्रश्न है कि आपका गड़िया से कैसा संबंध अच्छा अब और पीछे चले जाते हैं चैतन्य महाप्रभु चैतन्य महाप्रभु ने श्रीधर स्वामी जी को अपना गुरु माना जगतगुरु माना श्रीधर स्वामी अपने समय के शंकराचार्य अब इसमें कुतर काता है श्रीधर स्वामी अपने समय के श और उनकी लिखी हुई भागवत को ही वह प्रमाण मानते थे अब इसमें उतर कता है कि जो श्रीधर स्वामी थे वोह दिखावे के लिए वो थे दिखावे के लिए वैष्णव थे वोह दिखावे के लिए शंकर मठ के थे अंदर से व वैष्णव थे तो यहां पर जो भगवान ने तत्वदर्शी तत्व ज्ञानी के जो लक्षण बताए हैं भगवत गीता में जिसका मान मोह नष्ट हो चुका हो जिसके जिसने अपनी इंद्रियों को जीत लिया हो भय इत्यादि सब समाप्त हो गया हो सन्यासी थे ना सीध स्वामी तो अगर यह मानेंगे कि उन्होंने डर के कारण ऐसा किया व आप बताते उस समय यह था वो था व बहुत प्रकोप था शंकराचार्य का तो उन्होंने अगर डर के कारण ऐसा किया
00:27:16:28 तो वह सन्यासी सिद्ध नहीं हो रहे झूठे सिद्ध हो रहे हैं तत्व ज्ञानी सिद्ध नहीं हो रहे तो एक अप्र माणिक व्यक्ति को चैतन्य महा प्रभु ने वो दिया और चैतन्य महाप्रभु के लिए भी आप कहते हो कि उन्होंने जो है प्रभाव था उस समय शंकराचार्य का इसलिए धन सन्यास ले लिया क्योंकि आप माया मायावादी को हीन भावना से कहते चैतन्य महा प्रभु खुद अपने आप को माया मायावादी कहते हैं कि मैं मायावादी हूं मा वहां से मैंने वो लिया है ठीक है तो वो आपके लिए य युग्म अवतार है तो भाई जब वो युग्म अवतार है तो व कैसे डर रहे हैं है ना तो यह बातें हो गई और दूस री बात क्या है अगर उस पर आ जाए सीदर स्वामी प्रामाणिक आचार्य सिद्ध नहीं होते तो फिर उनको चैतन्य महाप्रभु का ये कहना जगतगुरु यानी चैतन्य महाप्रभु झूठ बोलते हैं तो चैतन्य महाप्रभु अगर झूठे सिद्ध हो गए तो फिर से वही बात आ गई कि उनका लिखा हुआ चैन चता मृत वगर जो भी आप उनके वाक्य को प्रमाण मान के जी रहे हैं एक जगह भी झूठ बोल दिया क्रेडिबिलिटी
00:28:17:24 खत्म क्योंकि जो एक जगह झूठ बोल सकता है वो सब जगह झूठ बोल सकता है अगर वो झूठ बोल सकता है तो आपको भी झूठ बोल सकता है ठीक है तो यह एक समस्या आ गई कि ना तो आपका संबंध ग गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय से सिद्ध होता है फिर आप जो भागवत पढ़ रहे हो सीध स्वामी की शंकराचार्य की और शंकराचार्य वैष्णव नहीं थे शंकर मट के अपने वो थे जब गए तो अपने शिष्य को उत्तराधिकारी घोषित किया क्यों किया इसी वैष्णव को करते भाई मेरा उत्तराधिकारी तो ये है तो या तो वो प्रामाणिक आचार्य नहीं थे और थे तो फिर वो शंकराचार्य थे स्मार्थ थे ठीक है अच्छा दूसरी बात यह भी है कि उन्होंने जब यह कह दिया था चैतन्य म प्रभु ने कि जो भी कोई उनके विरुद्ध जाकर के टीका लिखेगा मेरे लिए वैश्या के समान है तो उनके विरुद्ध जाकर के टीका क्यों लिखा आपकी और उनकी टीका में समानता है समानता है तो आप क्यों नहीं पढ़ाते सीदर स्वामी की टीका अपने क्यों नहीं भागवत लिखी और अकॉर्डिंग टू चेतन चरता मृत और अकॉर्डिंग टू चेतन महाप्रभु आपके जो भागवत को लिखने वाला क्योंकि मुझे नहीं पता प्रभुपाद जी की लिखी हुई है क्या है बहुत नले बाजी है उसको
00:29:32:28 लिखने वाला कौन हुआ इसन की भागवत को लिखने वाला अकॉर्डिंग टू चेतन महाप्रभु यह सब बातें ध्यान रखने की है अब पीछे आ जाते हैं कि आप मधवा चार संप्रदाय के भी सिद्ध नहीं होते मधवा संप्रदाय वर्ण को जन्म से मानता है आप नहीं मानते हैं आप वो कहते गुण कर्म विभाग वो देख लीजिएगा दूसरा वीडियो है कनेक्टिंग देख लीजिएगा दूसरी बात कि मधुवा संप्रदाय से अगर आपका ज्ञान आ रहा है तो फिर आपको शंकर संप्रदाय में जाकर भागवत पढ़ने की क्या आवश्यकता है तो चैतन्य महाप्रभु मधवा संप्रदाय के सिद्ध नहीं हो रहे हैं शंकर संप्रदाय के सिद्ध हो रहे नहीं तो क्यों जा रहे हो आप आप उसको प्रमाणिक क्यों मान रहे हो शंकर संप्रदाय भागवत को मधवा चार्य जी से भागवत लीजिए आप ज्ञान लेने तो आपको वहां जाना पड़ रहा है और अंत गत्वा चार दो के भाष्य करते समय आप ये लिख देते जो ज्ञान आ रहा था वो ला व समाप्त हो गई प्राय लुप्त हो गई है यानी वहां से स्टार्ट हुआ है है ना तो जो भगवान श्री कृष्ण जो आदि दैविक वाला जो सीन है वो ज्ञान देना फिर मधवा चार जी तक आना व भी फिर सिद्ध नहीं हो पा रहा है
00:30:48:22 तो यह सब बातें अब यह सब बातें इतनी सारी हो गई तो इसके बाद में अब आउटपुट क्या निकलता है वो सवाल और आ जाता है कि क्या स् कोन के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है अगर है तो क्या वो जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते पर शिव से कृष्ण नहीं बन सकते तो क्योंकि आपके अनुसार कृष्ण का ही एक्सटेंशन शिव है तो क्या शिव बनने के बाद जो कृष्ण है व छोटे हो जाते हैं बाधित हो जाते हैं बाधित हो गए ईश्वर सर्व शक्तिमान नहीं रहा और भी कई कारण है दार्शनिक पक्ष है जो उसी में मोक्ष का पक्ष आ जाता है कि जब बैकुंठ में नहीं गोलोक धाम हां आपके य यह भी एक सुपी और इरिटी किया जाता है गोलोक धाम ऊपर है और बैकुंठ धाम नीचे है बैकुंठ का मतलब क्या है जहा कुंठा ना हो किसी प्रकार की चलिए खैर वो छोड़ दीजिए गोलोक धाम की बात कर लेते हैं गोलोक धाम में जब सब कुछ सुख है तो लोगों का मन में कैसे अभाव आ गया कि हम और कोई सुख प्राप्त करें यानी कि या तो वहां पर सुख का अभाव
00:32:03:25 है तो मोक्ष नहीं है आपके द्वारा मिलने वाला आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है आपके अनुसार प्रतिपादित होने वाला वो सर्वशक्तिमान नहीं वो अल्लाह से मैच खाता है क्राइस्ट से मैच खाता है और आपका ईश्वर आपका जो मोक्ष है वो मोक्ष नहीं है सच्चिदानंद नहीं मोक्ष क्योंकि वहां पर व्यक्ति के जीव के अंदर कुछ और प्राप्त करने की चाह आ रही है आगे भी आ सकती तो वो नित्य शुद्ध ब बुद्ध मुक्त वगर वो नहीं हो पाएगा और अंततोगत्वा आपके द्वारा प्राप्त होने वाला जो धर्म है वो सनातन नहीं है शाश्वत नहीं है क्योंकि बदल रहा है क्योंकि हम क्रिश्चन कंट्री में जाएंगे तो यह कहेंगे मुस्लिम कंट्री में जाएंगे तो यह कहेंगे जहां जैसा होगा वैसा कर देंगे तो बदल रहा है मधवा चार्य जी का सिद्धांत कुछ और है टीका कुछ और है आपका सिद्धांत टीका कुछ और है यानी वो जो मधुवा चार जी वाली जो परंपरा है उससे आया हुआ ज्ञान नहीं अपना ज्ञान है मनम ज्ञान है और चैतन्य महा प्रभु का नाम आप लेना मत क्यों चैतन्य महा प्रभु तो भागवत पढ़ते हैं श स्वामी जी की आप उनको क्यों नहीं मान रहे हो गुरु तो यह कुछ मोटे मोटे एग्जांपल है जो मैंने दिए पढ़े पढ़ने बैठेंगे तो बहुत सारी चीजें निकल आएंगी मगर इन सवालों के जवाब आप प्रिपेयर करिए
00:33:19:07 निराकरण प्रस्तुत करिए जैसा कि आपने कहा और अगर हो सके तो किसी विद्वान व्यक्ति के साथ हमारी चर्चा करवा दे जो आपको लगता हो इसकन का क्योंकि मैंने कई बार ऐसा देखा है कि जो वैष्णव य वृंदावन से मुझे फोन आता है उसमें कहा जाता है कि आप यहां आ जाइए हम यहां पर आपके सवालों के जवाब देंगे जब वहां जाते तो हमको स्कोन नहीं ले जाते हैं कहते कि आप व गड़िया वैष्णव संप्रदाय चले जाइए ठीक है तो आप स्कोन जो है ना वहां से स्कोन से हमारा सवाल आप स्कोन से जवाब दिलवाए जय श्री राम [संगीत]
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