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00:00:06:21 मतलब सर थोड़ा उसको समझा दीजिए सर तो हम फोन लगाते हैं लगाइए फोन जय श्री राम हां जय श्री राम बोलिए जी माता जी आप ब्रह्मा कुमारी से जुड़ी हुई हैं हां तो ब्रह्मा कुमारी में क्या विशेषता है जो आपको घर पे नहीं है हां ब्रह्मा कुमारी जाने से क्या प्राप्त होता है? क्या प्राप्त होता है ब्रह्मा कुमारी जाने से? जी ब्रह्मा कुमारी के ज्ञान से ही तो ईश्वर की प्राप्ति होती है। ईश्वर से क्या प्राप्त होता है? ईश्वर से क्या प्राप्त होता है? आप भी जानते होंगे। आप बताइए तो भाई ईश्वर हमें क्यों चाहिए? क्यों चाहिए ईश्वर? तो आप बताइए आपको ईश्वर की नहीं जरूरत है क्या? भाई मुझे तो इसलिए चाहिए कि शाश्वत सुख ऐसा सुख जो कभी खत्म ना हो इसलिए ईश्वर चाहिए होता है। हां
00:01:10:02 शाश्वत सुख अनंत सुख के लिए ईश्वर की प्राप्ति की इच्छा होती है। अनंत सुख तो इसीलिए आप भी जाती हैं ब्रह्मा कुमारी। अनंत सुख शांति के लिए अनंत अनंत सुख शांति तो दूर की बात हम कोई अभी जो हम जी रहे हैं जिंदगी इसमें हमको सुख शांति चाहिए बाकी तो और सब अनंत सुख की तो बात ही छोड़िए तो मतलब ब्रह्मा कुमारी अनंत सुख की बात अनंत सुख नहीं देता ब्रह्मा कुमारी का ईश्वर ब्रह्मा कुमारी सेंटर अनंत सुख देता है नहीं इस जन्म में तो सुख मिलता है शांति मिलती है ना जो दुख है जो तकलीफ है इंसान के अंदर उसकी तो ब्रह्मा कुमारी उसके वो तो उसके हिसाब से तो हमें वहां ज्ञान मिलता है ना हमारे अंदर शांति महसूस होती है। ये बताइए हां कि आपने जिसके साथ विवाह किया है हां वो आप वहां जा रही हैं वह दुखी है तो इस बात का दुख है कि नहीं आपको? अच्छा ये बताइए आप शादी किए हैं कि नहीं किए हैं? माता जी अभी आपकी बात हो रही है ना? हां तो मेरी बात छोड़िए ना।
00:02:25:03 हम भी आपसे बात कर रहे हैं तो हम ही तो जान सकते हैं कि आप शादी किए हैं कि नहीं? हां हुई है मेरी शादी। हां? हां हुई है। तो आप अपनी औरत को कैसे रखते हैं? हां? अच्छे से। अच्छे से। दुनिया में तो हर आदमी यही ना चाहता है कि हम ही खुशहाल रहे जिंदगी अपनी। तो ये आपको अच्छे से नहीं रखते क्या? वो तो उनकी और हमारी बात छोड़िए। अरे अभी शादी अगर एक औरत अपने सुनिए एक औरत अपने मां-बाप का घर छोड़ के खींच के घर आती है तो किस लिए आती है? आप यह बताइए आपने अभी मुझसे प्रश्न किया कि आपकी पत्नी के बारे में बताइए मैंने बताया ना आपको तब मैं पूछ रहा हूं तो आप क्यों आप क्यों कह रही कि छोड़िए?
00:03:11:20 मैं पूछ रहा हूं वो आपको अच्छे से नहीं रखते क्या? हेलो साहब से पैसे नहीं हम लिए थे। हां हेलो उनके हां बोलिए मैं कह रहा हूं आपके पति आपको अच्छे से नहीं रखते क्या? तो अब हमारे पति की बात तो छोड़िए ना। आप हमसे क्या बात करना चाहते हैं? मैं ये करना चाह रहा हूं कि आप अपने जो सनातन हिंदू धर्म है उसके विरुद्ध जो ब्रह्मा कुमारी है वहां क्यों जा रही हैं? अपने हिंदू अपने हिंदू धर्म में आपने भक्ति की भगवान विष्णु की शंकर की कृष्ण की रहकर अपने घर में रहकर जो हमारी परंपरा प्राप्त जो पूजा पद्धति है उसके द्वारा आपने भक्ति करके सुख प्राप्त करने का प्रयास किया और यदि आप ये कहती हैं, यदि आप यह कहती हैं कि ब्रह्मा कुमारी जाकर के मुझे सुख मिल रहा है। बताइए हम भक्ति क्यों करते हैं? एक मिनट एक मिनट माता जी। अगर आप यह कह रही हैं कि नहीं नहीं मुझे ब्रह्मा कुमारी जाकर के सुख मिल रहा है तो दुख तो नहीं मिल रहा है क्योंकि आपका पति दुखी है और फिलहाल इस समय मैं आपसे जो प्रश्न कर रहा हूं यह भी आपको प्रिय नहीं है तो यहां पर भी आपका सुख बाधित हो रहा है समझ रही हैं मेरी बात तो हम आपसे पूछ रहे हैं ये बताइए कि
00:04:26:24 भक्ति कह रहे हैं कि आप अपने घर में भक्ति की कृष्ण की इनकी उनकी बताइए हम भक्ति हम या आप भक्ति क्यों करते हैं बताइए भक्ति ईश्वर प्राप्ति के लिए ईश्वर प्राप्ति के लिए करते हैं। भक्ति से ईश्वर मिला है। क्यों नहीं मिला है? राजा जनक को मिला है, कृष्ण को मिला है, अर्जुन को मिला है। तो राजा जनक और कृष्ण कब भक्ति किए थे? बताइए। राजा जनक ने भक्ति नहीं की थी भगवान की। अरे तो हम आप हम भी तो आपसे पूछ रहे ना कि कृष्ण की बात किए हैं राजा जनक की बात किए हैं चाहे राम है चाहे शंकर है सब तो परमात्मा की ही मतलब परमात्मा को ही पुकारते हैं एक शिव को तो परमात्मा जो शिव को पुकार रहे हैं उसमें और ब्रह्मा कुमारी वाले परमात्मा में तो अंतर है ना मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं बता रहा हूं बता रहा हूं परमात्मा में क्या अंतर है अंतर है अंतर अंतर है। बता रहा हूं। तो बताइए क्या अंतर है? बता रहा हूं माता जी। ब्रह्मा कुमारी का परमात्मा यह कहता है कि मैं मतलब कि शिव और शंकर अलग-अलग है। जबकि राम ने जिस ईश्वर की पूजा करना सिखाई है। कृष्ण ने जिस ईश्वर की पूजा करना सिखाया है वो ईश्वर और शंकर
00:05:42:02 में कोई अंतर नहीं है। पहली बात। दूसरी बात जो राम और कृष्ण का जो ईश्वर है वही ईश्वर अवतार लेता है। माता के गर्भ से जन्म लेता है। सर्वशक्तिमान है, अनंत है, अबाध्य है, पूर्ण है। और जो ब्रह्मा कुमारी का ईश्वर है, वह केवल परकाया प्रवेश कर सकता है। अवतार धारण नहीं कर सकता। वो सब कुछ नहीं एक एक मिनट सुन लीजिए। वो सर्वव्यापक नहीं है। एक देसी है। एक जगह है, दूसरी जगह नहीं है। यह पूर्ण सत्य नहीं है। दूसरी बात। जिस ईश्वर की राम और कृष्ण ने पूजा करना सिखाया है, वह ईश्वर अनंत मोक्ष देता है। वह यह कहता है कि आप जब वहां जाएंगे वह परमधाम तो वहां से आप वापस नहीं आएंगे। जबकि ब्रह्मा कुमारी कहता है कि आप जो है केवल देवता बनेंगे। और देवता बन करके फिर जो है आप वापस फसेंगे। यह अंतर है मोटे मोटे। बाकी तो बहुत सारे अंतर है। अच्छा आपका ईश्वर कहता है कि जब तक परमधाम जाएंगे तो फिर वापस नहीं आएंगे। हां। और ब्रह्मा कुमारी का ईश्वर कहता है कि परमधाम नहीं जाएंगे फिर यहीं पे। परमधाम तो जाओगे ही नहीं। आप केवल देवता बनोगे। देवता से फिर वापस आप बनोगे वो। द्वापर
00:06:57:15 आएगा आपके अनुसार। फिर त्रेता आएगा फिर जो है वो आएगा कलयुग। फिर आप जो है यहीं आ जाओगे जहां पे हो इस समय। और और आपका आपका परमात्मा कहते हैं कि जो है कि परमधाम जाएंगे तो फिर जो है बिल्कुल दोबारा पुनरावृति नहीं होती है ये अंतर बता रहा हूं आपके वहां में और यहां पे अंतर बता रहा हूं और परमात्मा सिर्फ एक है ठीक है तो परमात्मा परमा परमात्मा माता जी माता जी सुनिए परमात्मा एक है मगर परमात्मा की परिभाषा भाषा अलग-अलग है। ब्रह्मा कुमारी गलत परिभाषा दे रहा है परमात्मा की। वो कह रहा हूं मैं। अच्छा तो ये बताइए शंकर शंकर क्या है? वो देवता है कि भगवान है कि परमात्मा है? क्या जो जो परम सत्य है जो निर्विशेष निर्गुण निराकार जो सर्वव्यापी सर्व नियंता सर्वव्यापक अबाध्य सर्वशक्तिमान जो जो परम तत्व है वही सगुण साकार होता है तो वह शंकर कहलाता है। वह अवतार धारण करता है। ब्रह्मा कुमारी का ईश्वर तो कुछ भी नहीं कर सकता। ब्रह्मा कुमारी का शंकर लेते हैं शिवजी शंकर के आपके हिसाब से वो परमात्मा
00:08:13:01 मेरे हिसाब से नहीं शास्त्र के हिसाब से वेद के हिसाब से अच्छा तो शंकर परमात्मा है शंकर इतना हवन जाप होता है तो हर जगह होता है कि ब्रह्मा देवताय नमः विष्णु देवताय नमः शंकर देवताय नमः तो शिव परमात्माए नमः कहां कहते हैं [गला साफ़ करने की आवाज़] बताइए मैंने क्या कहा मैंने मैं आपका जवाब जवाब दे रहा हूं माता जी मैं आप जैसे यह होता है ना जैसे लोग कहते हैं शिव परमात्माए नमः शंकर देवताय नमः तो आपको मैं यह भी दिखा देता हूं शास्त्र में कि शिव ही शंकर है उसका क्या करोगे इसको क्या करें सुनिए शंकर तो तपस्या आप सुनिए आप कह रही हैं आप कह रही हैं हां चलिए ठीक है तपस्या करने वाली बात सुन लीजिए आप कह रही हैं लोगों के लोग ऐसा कहते हैं मैं कह रहा हूं जो शास्त्र में लिखा अब आप आपने कहा ना कि शंकर जी स्वयं तपस्या करते हैं। उसकी बात भी सुन लीजिए। नारद पुराण में विष्णु भगवान कहते हैं शंकर जी से भगवान आप किसका तप कर रहे हैं? तो शिव जी कहते हैं हे गोविंद मैं किसी का तप नहीं करता। मैं किसी की भक्ति नहीं करता। यह तो मैं नास्तिकों को धर्म में प्रवृत्त करने के लिए
00:09:28:04 लीला करता हूं। केवल अब सीधी सी एक बात है माता जी इतनी बहुत ज्यादा लंबी बात करने का मतलब ही नहीं है। सीधी बात है ईश्वर वो है जो सर्वशक्तिमान है। सर्वशक्तिमान का मतलब सब कुछ कर सकने वाला। अब ये बताइए ब्रह्मा कुमारी के अनुसार ईश्वर गर्भ में धार गर्भ के गर्भ के द्वारा जन्म ले सकता है। अवतार धारण कर सकता है कि नहीं? ये बताइए। ब्रह्मा नहीं। नहीं। तो नहीं नहीं हो सकता तो इसका मतलब वो सर्वशक्ति तो फिर वो इसका इसका मतलब वो सर्वशक्तिमान नहीं है ना सर्व सर्वशक्तिमान नहीं है नहीं है ना जब वो नहीं तो जब से जन्म सुनिए वो तो अच्छा परमात्मा जो है कि हर वक्त यहां आते हैं मैं आपसे ये पूछ रहा हूं माता जी मैं आपसे ये पूछ रहा हूं क्या ब्रह्मा कुमारी के अनुसार जो ईश्वर की व्याख्या की गई है उसमें ईश्वर ईश्वर सर्वशक्तिमान है। हां सर्वशक्तिमान है। सर्व सर्वशक्तिमान का अर्थ क्या होता है माता जी? तो इसका मतलब कि मैंने आप देखिए माता जी चार तरह की बातें करेंगे फिर निष्कर्ष नहीं निकलेगा। आप बोल रहे हैं सर्वशक्तिमान
00:10:43:13 का मतलब कि कुछ भी कर सकते हैं। तो आप बताइए ना सर्वशक्तिमान का मतलब क्या है? तो सर्वशक्तिमान है। ठीक है? लेकिन उनका भी तो मैंने मैंने कहा मैंने माता जी मैं क्या मैं क्या कह रहा हूं? वो ठीक है मत करिए। आप मुझे आप मुझे माता जी आप मुझे सर्वशक्तिमान का अर्थ बताइए क्या होता है? तो सर्वशक्तिमान का मतलब सारी शक्तियां उनके पास है। ठीक है। सारी सारी ना सारी एक भी कम नहीं होनी चाहिए ना। हां। हां। सारी होनी चाहिए ना। हां। ठीक है। अब ये बताइए क्या वो अवतार धारण कर सकता है? अवतार तो वो लेते ही हैं। अवतार माता के गर्भ से जन्म पर काया प्रवेश नहीं। अवतार होता ही है उनका ये हमको भी पता है कहां होता है ब्रह्मा कुमारी के से डेज कोर्स में लिखा है उनका अवतार नहीं होता मेरे पास किताब है ब्रह्मा कुमारी बोल रहे हैं हम लोग को भी पता है क्यों नहीं अवतार होता है लास्ट सीन में उनका जब विनाश का समय होगा लास्ट सीन में उनका अवतार तो होगा ही ये तो नहीं है कि अवतार उनका नहीं होगा अवतार होगा उनके असली रूप में प्रकाश के रूप में अवतार होगा और किस किसी शरीर धारी के रूप में अवतार होगा क्या? तो अब चलिए मैं अपना प्रश्न बदलता
00:11:58:16 हूं। शरीरधारी के रूप में अवतार हो सकता है कि नहीं? नहीं हो सकता है। इसका मतलब शरीर धारी के रूप में अवतरित होने की शक्ति नहीं है। नहीं अवतार अवतार का मतलब क्या कहें कि अवतार मैं कह रहा हूं शरीर धारी के रूप से शरीर शरीर में प्रवेश करने की उनकी शक्ति है। वो जन्म नहीं लेते हैं गर्भ से। तो मैं वही तो आपसे पूछ रहा हूं। जन्म ले सकता है कि नहीं? माता के गर्भ से उत्पन्न हो सकता है कि नहीं? माता के गर्भ से वो जन्म नहीं लेते हैं। तो इसका मतलब माता के गर्भ से प्रकट होने की शक्ति नहीं है ना उसके पास शक्ति है क्यों नहीं? और जब माता का गर्भ से जन्म कलयुग में पाप से जन्म हो रहा है तो भगवान का जन्म तो मैं पूछ रहा हूं ले सकता है कि नहीं? ले सकता है लेंगे ही नहीं वो पाप से जन्म लेंगे ही नहीं। अरे भाई मेरे पास शराब पीने पाप से जन्म इसका मतलब आपका पाप से जन्म हुआ है। हां क्यों नहीं हुआ है? कलयुग में पाप से हर आत्मा का जन्म होता है। और देवता देवताओं का जन्म कैसे होता है? देवताओं का जन्म जो संकल्प शक्ति से होता है। योग बल से होता है। तो संकल्प शक्ति से गर्भ से बाहर नहीं आ सकते वो। क्यों? संकल्प शक्ति से गर्भ से बाहर नहीं आ सकते वो। अरे तो संकल्प शक्ति जब से जब मां के गर्भ में बच्चा आ सकता है तो क्या वो पैदा नहीं होगा? 9 महीने बाद। तो वही तो मैं कह
00:13:13:18 रहा हूं। फिर पाप कहां रह गया वो? हम फिर पाप कहां रह गया वो जब संकल्प शक्ति से गर्भ धारण किया मां ने पाप कहां रह गया तो देवताओं का जन्म संकल्प शक्ति मैंने आपसे क्या पूछा मैंने आपसे क्या पूछा मैंने आपसे क्या पूछा संकल्प शक्ति से गर्भ धारण नहीं कर सकती मां तो संकल्प शक्ति से धारण कर सकती है जब पूरी सृष्टि सतो प्रधान रहेगी पांचो अरे भैया मैं कह रहा हूं आपने कहा कि जब जब स्त्री पुरुष उसके मिलन से होगा तो पाप से उत्पन्न माना आपने। आपने अपने माता-पिता अपना जन्म को भी पापी मान लिया। अपने माता-पिता को पापी मान लिया। ठीक है कोई बात नहीं। अब आप मुझे ये बताइए कि संकल्प शक्ति से ईश्वर गर्व नहीं दे सकता। बिना पाप के हो जाए। क्या बोलना है? संकल्प शक्ति से वो नहीं दे सकता। अपना जन्म बिना बिना स्त्री पुरुष के मिलन से ही गर्भ धारण कर ले वो। [हंसी] किसको कह रहे भगवान को? आप कह रही है ना कि वो पाप से उत्पन्न नहीं होगा। हम तो पाप क्या है? स्त्री पुरुष का मिलन। यही पाप है ना? तो क्या स्त्री पुरुष के मिलन के बिना ही ईश्वर अपनी संकल्प शक्ति मात्र से माता को गर्भ
00:14:28:19 धारण नहीं करवा सकता जिससे कि वो उत्पन्न हो जाए। माता के गर्भ से बाहर आ जाए। जन्म ले ले। संकल्प शक्ति से। तो संकल्प शक्ति से कृष्ण का जन्म हुआ है ना पहला जन्म? मैं आपसे क्या पूछ रहा हूं माता माता जी मैं मैं देखिए देखिए माता जी मैं आपसे क्या पूछ रहा हूं गर्भधारण करवा सकता है या नहीं संकल्प शक्ति से अपने लिए हां नहीं जब उनका इसका मतलब संकल्प शक्ति मतलब कि सर्वशक्तिमान है तो जो चाहे वो कर सकते हैं क्या हां हां बिल्कुल बिल्कुल आप आप कह सकते हैं ना कि ठीक है मैं मैं मैं वही कह रहा हूं इसका मतलब कि इसका मतलब इसका मतलब की सर्वशक्तिमान नहीं मानते ना आप भगवान को ब्रह्मा कुमारी क्यों नहीं मानते हैं सर्वक्तिमान सर्वक्तिमान का अर्थ क्या है मेरा भी पार्ट है पार्ट है कि जब मुझे पूछना है तभी हमें माता जी एक एक करके बात करिए सर्वशक्तिमान का अर्थ क्या मानती हैं आप सर्वशक्तिमान का अर्थ आप जो बता रहे हैं वही हम ही मान रहे हैं तो फिर आप तो ये कह रही है ना सर्व शक्तियां है तो जो चाहे वो कर सकता है यानी कि कर तो सकता है पर करता नहीं है यही है ना तो करता नहीं है तो ये आप बोल रहे है हम तो यही अरे आप ही तो कह रही हो कि आप यह कह रही हो कि मेरे ईश्वर के पास सारी शक्तियां
00:15:43:20 तो हैं पर वो यह वाले कार्य नहीं करता जैसे कि संकल्प से गर्भधारण नहीं करवाएगा और वो जो है गर्भ से बाहर नहीं आएगा। यह शक्ति तो है करने की पर वो करेगा नहीं। क्या हुआ? क्या नहीं हुआ? आप जो बकवास कर रहे हैं यह बकवास वगैरह माता जी माता जी बकवास आप कर रही है आपके यहां आपके यहां केवल मूर्ख बनाया जा रहा है लोगों को हो गई निरुत्तर आप मूर्ख मैंने आपसे क्या पूछा अगर आप ये कह रही है मूर्ख बनाने के लिए आप मूर्ख बना रहे हैं लोगों को और आप मूर्ख हो चुकी आप मूर्ख हो चुकी है आपका ब्रेन वाश हो चुका है मैंने आपसे क्या पूछा सत्य आज नहीं तो कल शाम अरे भैया मैं आपको अभी सिद्ध हो रहा हूं आपका आपका आपके आपके मुंह में सिलाई क्यों हो रही है? मैं आपसे क्या पूछ रहा हूं? मैंने आपसे पूछा कि अगर वो सर्वशक्तिमान है उसके पास सारी शक्तियां है तो आपका कहने का मतलब यह है कि वो उसके पास शक्ति तो है पर वो करता नहीं है। अच्छा दूसरी बात अब ये इसको छोड़ दो। ये बताइए आपने एक बात कही वो पाप पाप से उत्पन्न नहीं होगा। आप ये बताइए आप बोल रहे हैं कि सर्वशक्तिमान है आपने क्या होगा मां के गर्भ से वो चाहे तो जन्म ले सकता है ये बताइए आपके
00:16:58:26 चाहने से वो मां के गर्भ से जन्म लेंगे मेरे मैंने ये प्रश्न मेरा नहीं है कि वो लेगा कि नहीं लेगा मेरा मेरा प्रश्न है उसके पास शक्ति है कि नहीं लेने की शक्ति है तो ठीक है वो भी बोलते हैं यानी कि अभी मैंने यही तो मैं यही तो है कि मैं सर्वक्तिमान हूं ठीक है लेकिन ये नहीं है कि हम जो चाहे वो करें जो मैं पूछ रहा हूं आप एक बात क्लियर कर दीजिए कि गर्भ से जन्म लेने की शक्ति तो है पर वह लेता नहीं है। यह कर दीजिए क्लियर। तो गर्व से लेने की शक्ति है कि नहीं? हम उनसे पूछने ना जाए। इसका मतलब इसका मतलब आपको आपको नॉलेज नॉलेज नॉलेज वहां मिल नहीं रही है पूरी ब्रह्मा कुमारी में। अच्छा तो आपको मिल रही है तो आप ही बताइए। एक मिनट ये चैप्टर जो चल रहा है ना ये क्लोज हो जाएगा। इसमें एक बात और है। आपने कहा वो पाप से उत्पन्न नहीं होगा। यह बताइए जो पाप होता है यह एग्जिस्ट किस जगह पर करता है? कहां पर है पाप? एक समय ऐसा होता है जब आत्मा भी पापी नहीं है और ईश्वर तो पापी हो ही नहीं सकता। तो ये पाप रहता कहां पर है? पाप का जो विचार है ये कहां पर रहता है? पाप नहीं होता है। सब पुण्य होता है। मैं आपसे पूछ रहा हूं। पाप एक्सिस्ट कहां पर करता है? जैसे कि जो बुरे विचार है वह मेरा मन धारण किए हुए हैं। मगर मेरा मन
00:18:14:02 भी एक समय पर ऐसा था जब उसमें पाप नहीं था। है कि नहीं? है कि नहीं? मेरा मन भी मेरा मन भी एक समय पे ऐसा था जब मेरे मन में पाप नहीं था। तो पाप जब मेरे मन में नहीं था, तो उस समय पाप कहां पर एक्जिस्ट कर रहा था। जब ना ईश्वर ईश्वर में पाप कभी नहीं है। मेरे में मेरे मन में आज पाप है। तो आज जब मैं मुक्त था जब आपके अनुसार देवता वाली स्टेज होती है जो तो पाप उस समय एकिस्ट कहां पे करता है? का कौन धारण धारक तत्व क्या है पाप का? जो जहां पर एक्सिस्ट होने के कारण समय आने पर वो पाप प्रवेश कर जाता है मन में। समझ रहे हैं मेरा प्रश्न? हां हां समझ रहे हैं। हां। तो यह पाप एक्सिस्ट कहां पर करता है? जब जीव पाप से मुक्त हो सकता है और ईश्वर तो पाप रहित है। तो तीसरा तत्व कौन सा है जहां पर पाप उस समय रहता है जब जीव पाप को धारण नहीं कर रहा है।
00:19:16:21 एक तीसरा तत्व मानना पड़ेगा ना पाप। पाप के लिए क्योंकि जो प्रकृति है वह तो जड़ है। वो तो धारण नहीं कर सकती ज्ञान को बुरे विचारों को। तो ये बुरा विचार एक्सिस्ट कहां पे करेगा? अब प्रकृति जो है कि इस समय तो प्रकृति भी जो है अशुद्ध है समो प्रधान प्रकृति भी है। प्रकृति को नहीं प्रकृति का खुद का दिमाग है क्या? प्रकृति का खुद का दिमाग है क्या? नहीं खुद का दिमाग नहीं है। लेकिन सही बताइए प्रकृति को किसने बनाया है? ईश्वर ने? ईश्वर ने प्रकृति को अशुद्ध किसने किया है? प्रकृति को अशुद्ध किसने किया है? तमो प्रदान किसने किया है? बताइए। माता जी बात अभी ये चल रही है कि यह जो क्या कहते हैं? बुराई है यह एकिस्ट कहां पर कर रही है? जब आप आपने ईश्वर तो हमारा पाप रहित है। और मनुष्य को भी पाप से मुक्त होने की यात्रा है। इसका मतलब कि बुराई के रहने का और कोई अधिष्ठान हमें मानना पड़ेगा। तो बुराई एक्सिस्ट कहां पे कर रही है? जहां से बुराई बुराई एडजस्ट करती है जब जो है कहां पे सुनिए शुरुआत होता है चेतन तत्व
00:20:31:25 मानना पड़ेगा ना जहां बुराई शुरुआत होता है जब जो है कलयुग और सतयुग और त्रेता जब खत्म होता है जब कलयुग का द्वापर जब समय शुरू होता है तब तब जो [गला साफ़ करने की आवाज़] है कि पाप का समय शुरू होता है तब सबके अंदर पाप प्रवेश करता है अरे तो मैं वही कह रहा हूं ना पाप मैं वही कह रहा हूं ना पाप प्रवेश करता है तो प्रवेश करने से पहले पाप कहां पे था? पाप कहां था? हां पाप था जो है आपके अंदर बुराई आ रही है। मैं पूछ रहा हूं माता जी आप मेरा प्रश्न समझ नहीं पा रही संभवत मैं कह रहा हूं यदि बताइए ना पाप कहां था? आप ही बताइए। मैं बता रहा हूं यह दुनिया जो है यह प्रपंच मात्र है। इसमें कुछ भी पाप पुण्य है ही नहीं। यह पाप पुण्य केवल मनुष्य के लिए है। ईश्वर की दृष्टि में कुछ भी अच्छा या बुरा है ही नहीं। सब समत्व है। एक है सब कुछ कुछ नहीं। सब माया है। इसलिए वो पाप इसलिए इसलिए इसलिए शास्त्रों में उनको पाप पुण्य से गुणों से परे कहा गया है। ईश्वर को इसीलिए वो मुक्त हैं। ईश्वर इसीलिए मुक्त कहा जाता है। जैसे कि एक पेंटर अपनी जब पेंटिंग बनाता है। भले ही वह
00:21:46:28 स्त्री की फोटो बना रहा हो तो वह भले ही आंखों में कलर भरे आंखों को छुए या फिर वो स्त्री के उन अंगों को छुए जिन अंगों को किसी मनुष्य के द्वारा छुए जाने पर आपत्ति हो सकती है। मगर वहीं पर उस पेंटिंग को बनाते समय वो जो पेंटर होता है उसको उन अंगों को छूने पर कोई आपत्ति नहीं होती। इसी प्रकार से इसी प्रकार से जो ईश्वर है उसके लिए कोई पाप पुण्य का भेद नहीं है। इसीलिए उन्होंने कहा समस्त कर्मों को करते हुए भी तू मुझे करता मान क्योंकि किसी भी कर्म के उसमें फल में मेरी आसक्ति नहीं है क्योंकि मैं जानता हूं कि ये सब माया है। प्रपंच मात्र है। अगर हम इसको रियल मान लेंगे पाप और पुण्य को तो हमको इसका एग्जिस्टेंस मानना पड़ेगा। एक और तत्व मानना पड़ेगा। जैसे ही एक और तत्व मान लेंगे तो एक दूसरा ईश्वर खड़ा हो जाएगा। जैसे कि जैसे कि आपको और सरलता से समझाता हूं। जैसे कि मान लीजिए किसी ने बुरा कर्म किया है। ठीक किसी ने बुरा कर्म किया है। उसको उसके बुरे कर्म की सजा कौन देगा? कौन देगा? उसका कर्म देगा। हां। यही यही यही यही फंसता है ना आदमी। देखिए अब ईश्वर तो दे नहीं रहा है। नहीं दे रहा है ना? ठीक। अब मान लीजिए किसी ने किसी को दर्द दिया है, गला घोट के मारा है।
00:23:02:12 उसको उसकी सजा मिलनी है। तो यह फैसला जड़ तो कर नहीं सकती। प्रकृति तो कर नहीं सकती। वो तो जड़ है। कौन कर रहा है ये फैसला? कि इसको कब, किस समय, कौन सा दंड किस प्रकार से देना है वो जो उसने गला घोटा था। सोचा है कभी आपने? दूसरा तत्व मानना पड़ेगा चेतन तत्व। और जैसे ही मान लोगे मुक्त मानना पड़ेगा। सर्वशक्तिमान मानना पड़ जाएगा। दो ईश्वर खड़े कर दोगे आप। सोच के देखिए। थोड़ा विचार करिए। बुद्धिमान है आप। इंटेलेक्चुअल पर्सन है इसलिए इतनी देर तक बात की है। ठीक है? कर्मों का फल देने वाली कौन सी शक्ति है? ईश्वर के अलावा। ईश्वर के अलावा अपने कर्म का फल अपने ही अरे माता जी कर्म का फल, कर्म का फल मैं खुद तो स्वयं को दे नहीं रहा हूं। यह कर्म का फल देने के लिए कोई ना कोई चेतन सत्ता माननी पड़ेगी ना जो निर्णय कर रही है कि इसने अभी उसका गला दबाया है। अब इसके ऊपर ये पंखा गिरा दो। हां। तो ये पंखा गिरा दो। इसके ऊपर ये निर्णय कौन ले रहा है? किसने लिया निर्णय? ईश्वर ले रहा है। यानी कि ईश्वर हमें बुरे बुरा बुरे चीजें करता हुआ दिखाई दे सकता है। मतलब अगर हमको यह नहीं मालूम
00:24:17:18 है कि इस व्यक्ति ने किसी का गला घोटा है। इसलिए इसके ऊपर पंखा गिरा। इसलिए इसकी जो है बाढ़ में मृत्यु हो गई तो हमें ऐसा दिख सकता है कि ईश्वर भी बुरे कर्म कर रहा है। ईश्वर के बुरे से लिप्त होने की प्रतीति हो सकती है। ईश्वर बुरा कर्म कर रहा है। हां भाई अभी-अभी एक शिशु ने जन्म लिया हमारी नजरों में। ठीक? ठीक है। उस शिशु ने पिछले जन्म में किसी की ऐसी निर्ममता से हत्या की थी कि उसका ये कर्म का फल था कि उसको इस जन्म में जो है बहुत बाढ़ के द्वारा या भूकंप के द्वारा मरना है। ठीक। तो अब ईश्वर व्यवस्था करेगा ना भूकंप के द्वारा उसके मरने की। और वो मर गया। अब मर गया तो जनता को क्या लगेगा भाई छोटा सा बच्चा कैसे मर गया? तो भगवान भगवान जो है पाप किया। तो आप बताओ ना आप आप जो सुनिए मैंने आपको क्या इसका मतलब यह है कि भगवान भी हमको पाप से लिप्त होता हुआ दिख सकता है वास्तविकता में भगवान के लिए पाप और पुण्य है ही नहीं भगवान पाप और पुण्य से परे है भगवान मुक्त है अगर पाप और पुण्य सत्य है अगर आप आपके अनुसार मान ले पाप और पुण्य सत्य है तो
00:25:32:26 मान लीजिए कि कोई व्यक्ति अह अभी अभी मुक्त हो गया आपके यहां से। यहां से मुक्त हो गया। भगवान के बिल्कुल पास में बैठा हुआ है। हां। और यहां पर उसके बीवी बच्चे वगैरह सब है नाते रिश्तेदार। अब वहां से वो अपने बीवी बच्चों को दुखी देखेगा तो क्या करेगा? खुश होगा या दुखी होगा या उसको कुछ असर नहीं होगा? बताइए। हम तो जानते हैं कि मरने के बाद हर आत्मा खुद जानती है कि यहां मेरा कोई नहीं था। इसका मतलब वो समझ गए। इसका मतलब इसका मतलब यहां की चीजें झूठी है। इसका मतलब यहां इसका मतलब यहां की चीजें झूठी है। माता जी इसका मतलब यहां की चीजें झूठी है ना। इसका मतलब यहां की चीजें झूठी है ना। मैं कह रहा हूं इसका बोलिए। इसका मतलब यहां की [गला साफ़ करने की आवाज़] चीजें झूठी है ना? यहां की चीजें झूठी हैं। हां
00:26:33:10 भाई आपका जो आपका जो रिश्ते नाते आपका कोई नहीं होता है। वास्तविकता में आपका कोई नहीं है ना? तो वास्तविकता में तो किसी का कोई नहीं है। सब लोग अपना करने आते हैं। इसका मतलब वास्तविकता में ना पाप है ना पुण्य है। सब लोग अपना अपना कर्म करने आ रहे हैं। अच्छा हो या बुरा हो अगर हम बुरा कर्म कर आप कई जगह पर माता जी आप सुनिए आप सुनिए। आपसे काफी लंबी चर्चा हुई है। आप इंटेलेक्चुअल पर्सन है। आप खुद चिंतन मनन करिए। कर्म का फल देने वाला आपने बोल दिया ना ईश्वर ईश्वर देता है। ब्रह्मा कुमारी नहीं मानता है। ब्रह्मा कुमारी की दीदियों से बात कर चुका हूं। राजौरी गार्डन से लेकर के और पटना बिहार तक ब्रह्मा कुमारी यह नहीं मानता है कि कर्म का फल ईश्वर देता है। पहली बात सुनिए सुनिए कर्म का फल अपने आप मिल जाता है। सुनिए अच्छा आप बुरा कर्म करके इस जन्म में फिर जाएंगे अगला जन्म में तो इसके अनुसार ही दूसरा जन्म मिलेगा आपको। मैं ये कह रहा हूं माता जी दुखी जन्म दुखी जिंदगी जीना पड़ेगा। मैं कह रहा हूं दुखी मैं वो कर्मों का हिसाब किताब रख कौन रहा है उसमें बुद्धि चाहिए ना प्रकृति तो रख नहीं पाएगी मैं खुद को सजा दूंगा नहीं और ब्रह्मा कुंवारी के अनुसार ईश्वर दे नहीं रहा है कर्मों का फल नहीं बताइए जो हम कर्म करेंगे
00:27:49:06 हम मतलब सुनिए जो हम खेती करेंगे वही ना काटेंगे कि कोई दूसरा काटेगा अरे माता जी वो इसलिए इसलिए हम वही इसलिए हम वो खेती काटेंगे क्योंकि ईश्वर देख रहा है ईश्वर हमें दंड देगा मगर आपके के यहां पर ईश्वर नहीं देगा दंड। अपने आप मिलेगा। अपने आप कैसे मिलेगा? वो मैं पूछ रहा हूं। अपने आप हां ईश्वर दंड नहीं देता ना आपके यहां ब्रह्मा कुमारी की दीदियां बोल रही हैं। नहीं आप इस शरीर से निकलेंगे। ठीक है? आप बताइए अपने को मानते हैं कि आप इस शरीर से निकलने की बातें आप नई-नई चीजें खुलती चली जा रही है। मैं क्या पूछ रहा हूं? हां यह मेरी दंड व्यवस्था कौन करेगा कि इसके ऊपर दंड व्यवस्था आप खुद कर चुके हैं ना हम कर्म करके अपना दंड व्यवस्था कर चुके नहीं कर्म करके दंड मिलना व्यवस्थित हुआ है मगर किस रूप में किस काल में किस देश में दंड मिलेगा यह व्यवस्थित नहीं किया मैंने जैसे मैंने कहा मैंने किसी का गला घोटा जिसके कारण मेरे ऊपर पंखा गिरना है मुझे दर्द मिलना है अब मेरे ऊपर किस समय कहां पर पंखा गिरेगा यह कैसे कौन तय करेगा
00:28:56:24 ये कैसे कौन तय करेगा तो आप जब कर्म कर चुके हैं तो उसके अनुसार तो आज नहीं तो कल उसका आपको मिलेगा अभी तो हम तीन तारीख सेट करने वाला को नहीं जानते हैं हम यही जानते हैं कि नहीं जानते ना तो ब्रह्मा कुमारी से सुनिए परमात्मा है सुनिए एक परमात्मा है दूसरा उन्हीं का रूप धर्मराज है ठीक है वही जो है कि सबकी सजा दिलाते हैं हम तो यही जानते हैं लेकिन है परमात्मा जो ब्रह्मा कुमारी के अनुसार जो ईश्वर है वो दंड नहीं देता है। ठीक है? और अभी आपने आपने जब के अनुसार फल मिलता है ना तो फल भैया वो लेकिन जो माता जी सुनिए माता जी सुनिए मैं दंड अपने आप को तो दूंगा नहीं। ठीक है चेतन तत्व कितने हैं? दो एक है ईश्वर और एक है एक है जीव। जीव स्वयं को जीव स्वयं को तो दंड देगा नहीं। और ईश्वर जो है वह दंड देता नहीं है। तो यह जो जो व्यवस्था है कि इसको ऐसे यहां इतने बजे इतने समय उस जगह पर यह चीज मिलेगी दंड स्वरूप यह बुद्धि का काम है कि बिना बुद्धि का काम है चेतन का काम है कि जड़ का काम है यह बताइए।
00:30:06:07 अब बुद्धि तो अपना कर चुकी है ना। उसमें तो आ गया है। अरे आप माता जी अब अपना आप सचाई से मुंह फेर रही हैं। आप सच्चाई से मुंह फेर रही हैं। आप बार-बार वही वो बात बोल रही हैं। आप समझ रही हैं मैं क्या पूछ रहा हूं। मगर आपको मानना नहीं है बस अब यह बात है। मैं मैं आप यह समझ रहे आप सुनिए अगर आप ईश्वर को पाप और पुण्य से तोलेंगे ठीक है? अगर आप ईश्वर को पाप और पुण्य से तोलेंगे उसको परे रखकर के नहीं देखेंगे तो उसके द्वारा कर्म फल व्यवस्था तो हो नहीं पाएगी। आपको कर्मों का दंड किसी और से दिलवाना पड़ेगा। और जब आप कर्मों का दंड किसी और से दिलवाओगे तो उस सत्ता को भी सर्वव्यापी सर्वशक्तिमान सर्व सुन सुन लीजिए मैं मैं हो गया अब आप आप जो है अपने हस्बैंड से बात करिए मैं रिकॉर्डिंग भेजूंगा फल फल कौन देता है ये बताइए धर्मराज किस किस लिए है धर्मराज है कि नहीं है बताइए ना अरे अरे भैया सीधी बात है धर्मराज के ऊपर कंट्रोल किसका है किसका है कंट्रोल तो धर्मराज तो परमात्मा ही तो धर्मराज के रूप में है ये आपके यहां ब्रह्मा कुमारी में माना है परमात्मा धर्मराज के रूप में माना है अरे ब्रह्मा कुमारी से ही तो हमको पता है ना कि अरे भैया आपकी ब्रह्मा कुमारी मना कर रही है मना कर रही है वो आप ब्रह्मा कुमारी मना कर रही
00:31:21:10 है कि आप अपने मुंह से कह रहे हैं कोई देखने जा रहा है राजरी गार्डन का वीडियो है उसमें मना किया है नहीं नहीं ईश्वर दंड नहीं देता ईश्वर केवल ज्ञान देता है वीडियो जितना चढ़ाते हैं बनाते हैं कि अच्छा अच्छा सुनिए इसको मैं क्लियर कर लेता हूं ठीक है इसका मतलब इसका मतलब इसका मतलब धर्मराज के रूप में वह आदमी आप लोग से मिलाजुला अरे भैया आपका सेंटर है राजरी गार्डन हेड ऑफिस है दिल्ली का अच्छा सुनिए सुनिए आपने जो माना उसके अनुसार बात कर लेते हैं। इतना हम रमा कुमारी जी के खिलाफ जो आपने आपने जो माना है उसके अनुसार बात सुनिए आप आपने जो माना है आपने जो मान लिया है उसके अनुसार बात कर रहा हूं आपने माना आपने माना है सुनिए सुनिए आपने जो मान लिया है मैं कह रहा हूं आपने जो मान लिया है उस पर बात कर रहा हूं मैं मिलेगा आपको वो सजा वो आपके वो जो तटपुंजिया ये जो लोग है ना ये लेखराज एकराज ये कभी नहीं दे पाएंगे हम जैसों को हम मनुवादी हैं शंकराचार चार के शिष्य हैं। ये लेखराज ये लोग कुछ नहीं कर पाएंगे। पता है कि ब्रह्मा कुमारी के खिलाफ शंकराचार्य हैं। हमें पता है। अरे हमें पता है सनातन धर्म के खिलाफ ब्रह्मा कुमारी है। आपको नहीं पता है। ठीक है। सनातन धर्म के
00:32:36:16 खिलाफ है। किस खिला धर्म कौन बनाया है? बताइए ना। आप ये बताओ। आप ये बताओ आदि सनातन क्या है? आदि सनातन ठीक है। आप बताइए। ठीक है। क्या होता है? आप अपनी चीजों को ठीक है। कह देती हैं। आप ही बताइए सब धर्म का स्थापक। आखिर धर्म स्थापक किसने किया है? कौन धर्म स्थापक किया है? जो हमारा धर्म है सुन लीजिए सुन लीजिए जो हमारा धर्म है वो अनादि है वो कभी भी शुरू नहीं हुआ वो तब से है जब से ईश्वर है अगर मैं आपसे पूछूं ईश्वर को किसने बनाया आप बता पाओगी? तो ईश्वर को किसने बनाया आप ही बताइए? आप ही ईश्वर को किसी ने नहीं बनाया अनादि है तो जैसे ईश्वर है वैसे ही धर्म है। किसको बना रहा है? ईश्वर को किसने बनाया आप बताइए? किसी ने नहीं बनाया ना। इसीलिए तो वो ईश्वर है तो इसीलिए तो ईश्वर है तो आदि सनातन धर्म जो कहते हैं आदि सनातन अपने आप में एक बहुत बड़ी बेवकूफी है सनातन सुनिए सनातन का अर्थ क्या है माता जी हां सनातन का अर्थ क्या है का हो गया हो गया बैंड बज गया निरुत्तर हो गई आप अब बैंड नहीं बज गया चलिए अब आप अपने पति को पति के साथ बैठ के रिकॉर्डिंग सुनिएगा जय श्री राम
00:33:54:13 [संगीत]
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आंखों पर पट्टी बांधकर ब्रह्माकुमारी बनी गांधारी
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