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00:00:01:28 वर्ण व्यवस्था पर हमारी कई सारी चर्चाएं हो चुकी हैं मगर यह वाली चर्चा मुझे कुछ अच्छी लगी क्योंकि इसमें से एक सकारात्मक निष्कर्ष भी निकल करके आया जाहिर सी बात है ऐसा नहीं है कि सामने वाला व्यक्ति जब तक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आपके साथ चर्चा करने नहीं बैठेगा तब तक ऐसे परिणाम सामने नहीं आएंगे और इस चर्चा में भी ऐसा ही हुआ कि जब हमने तर्क पूर्ण और प्रमाण के साथ फैक्ट और फैक्ट्स पर जब बात किया तो इन्होंने सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाया तो आप इस चर्चा को देखिए

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→ Used in: B · Video वर्ण व्यवस्था जन्म या कर्म at 1:15 ↗

00:00:38:07 विषय क्या है हम विषय यही है कि आप जो बोलते हैं कि जो हम लोग का वन व्यवस्था जन्म से जातिवाद होता है उस वही विय देखिए पहली बात तो यह है एक गलत फहमी है परंपरा प्राप्त आचार्यों के बारे में कि वो मतलब ब्राह्मणवाद या क्षत्रिय वाद ऐसा नहीं है उसको समझ सूत्रा क्मक जन्म से नामांकन कर्म से चयन अगर कोई ब्राह्मण का जैसे यज्ञ कराना है तो हम किसी ब्राह्मण को ढूंढने जाएंगे मगर यदि वह ब्राह्मण मदिरापान करता होगा मांसाहार करता होगा तो उसको त्याग भी कर देंगे फिर स्कृत भी कर देंगे फिर किसी शुद्ध ब्राह्मण को जो ब्राह्मण कर्म से भी हो जन्म से भी हो उसको लेकर आया जाएगा पहली बात तो ये है अब अगर हम मान ले कि जो यह वर्ण यह जो है कर्म से होती है ठीक है तो इसका लाभ क्या है यह बताइए मुझे इसका लाभ यही है क्या जैसे कि देखि हॉस्पिटल में डॉक्टर का बेटा भी क्लर्क बन सकता है वहां पर क्लक का बेटा उसम डॉक्टर बन सकता अरे भाई हमने सुनो हमने कहा चार लोगों में यह ब्राह्मण है यह क्षत्रिय

00:01:53:09 है कर्म के आधार पर कर्म के आधार पर कहा यह ब्राह्मण है क्षत्रिय व शूद्र इसका फायदा क्या है ये क्यों बताया जा रहा है इसलिए बताया जा रहा है कि हम लोग का जो समाज है वो व्यवस्थित से चले यानी कि जब हमें ब्राह्मण की आवश्यकता हो तो हम ब्राह्मण को ढूंढ सके ना हा ढूंढ सके ना तो अगर हम कर्म के आधार पर ये वर्ण व्यवस्था को मान लेते हैं तो यह भी तो होगा कि हम ब्राह्मण को जब ढूंढने जाएंगे तो ब्राह्मण कहेगा भैया मैंने अपना वर्ण बदल लिया अभी अभी उसका क्या करें त वो तो क्षत्रिय बन जाएगा फिर मा युद्ध करने चला तो क्षत्रिय बन गया इसका मतलब व्यवस्था कहां रही लेने गए ब्राह्मण को 5 किलोमीटर का सफर किया वहां पर वो कह रहा है भैया मैं क्षत्रिय बन गया भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं अर्जुन से यानी कि कर्म के आधार पर वर्ण कर्म के आधार पर प्राप्त होने वाली जो वर्ण व्यवस्था है उसके द्वारा किसी को उसके धर्म के लिए वर्णाश्रम धर्म के लिए बाद नहीं कर सकते जबकि श्री कृष्ण बाद कर रहे हैं अर्जुन से तू य है तेरा धर्म है रक्षा करना तो बाद कैसे कर सकते हैं क्योंकि वह तो कभी भी बदल सकता है वो कहेगा अर्जुन मैंने अभी अभी

00:03:08:15 जो है कथा कथा करने का सोच लिया सत्यनारायण की कथा करने जा रहा हूं मुझे युद्ध नहीं लड़ना क्या करोगे फिर वण बदल गया मगर वर्ण नहीं बदल सकता इसीलिए भगवान कहेंगे ऐसी बात भाई तू जन्म से क्षत्रिय है तू इसको बदल नहीं सकता है लड़ तेरा काम है

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00:03:26:15 यह बात मैंने जितने भी लोग ये कर्म के अनुसार वर्ण को सुनिश्चित करने की बात करते हैं उन सबसे की है कि यदि कर्म के अनुसार वर्ण व्यवस्था है तो पहली बात तो यह कि वह कौन से पैरामीटर है बिल्कुल फिक्स हो कि ऐसा हो जाएगा यदि तो उसको जो है घोषित कर दिया जाएगा अब कई बार आर्य समाज से भी हम लोग वहां उनके विद्वानों से बात करने गए तो उन्होंने बताया कि भाई जो गुरुजन है वो डिसाइड करते हैं मगर वो पैरामीटर नहीं बताए कि गुरुजन डिसाइड करते हैं पैरामीटर कहां है दूसरी बात यह भी नहीं बताया कि यह कहां लिखा है कि गुरुजन डिसाइड करते हैं तीसरी बात इसमें भी थोड़ा सा ढोल मोल है कि अगर गुरुजन ने एक बार डिसाइड कर दिया तो उसके बाद पुनः बदल सकता है कि नहीं और अगर बदल सकता होगा तो प्रक्रिया क्या होगी और अगर बदल सकता है तो फिर कर्म शकर कौन कहलाएगा या अथवा इनके अनुसार वर्ण शकर कौन कहलाएगा क्योंकि जब कोई व्यक्ति अपने वर्ण के विपरीत कार्य कर रहा है इनके अनुसार तो उसे कर्म शंकर अथवा वर्ण शकर कहेंगे मगर जब कोई व्यक्ति अपने वर्ण के बाहर जाकर के दूसरा वर्ण अपनाते हुए दूसरा कार्य कर देगा तो फिर वर्ण संक

00:04:41:24 का और कर्म संक का तो कोई अस्तित्व ही नहीं रह जाएगा तो इस बारे में इनकी तरफ से कोई स्पष्ट उत्तर कभी भी प्राप्त नहीं होता है मैं पूछना चाहता हूं कि क्या उसका बेटा भी ब्राह्मण ही होगा क्या सय काम करता उसका बेटा सय बन जाएगा अर उसके

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→ Used in: B · Video वर्ण व्यवस्था जन्म या कर्म at 4:14 ↗

00:05:01:14 अंदर गुणवत्ता होगी क्षत्रिय बनने की मगर जब वो उन गुणवत्ता का यूज करेगा जीवन में तब उसे सेलेक्ट किया जाएगा मैंने कहा [संगीत] नॉमिनेशन तो क्षत्रिय बन जाएगा वो अगर मान उसके अंदर क् क्षत्रिय गुण होगा तो क्षत्रिय बनेगा अगर क्षत्रिय से जन्मा है और फिर उसने क्त्र चित आचरण को ब्रह्मण से जन्मा क्त्र जैसा गुण है उसके अंदर वो हमेशा लड़ना चाहता तो त्रय बनेगा वो ब्राह्मण चगा देखिए आप त कालीन स्थितियों में तो हम लोग आलंबन ले सकते हैं वैकल्पिक ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र आदि का मगर जो परफेक्ट तरीका है कि अगर रट वेलर है और हमें फैक्ट्री की रक्षा करवानी है और हमें रट वेलर प्राप्त है जन्म से तो फिर हम किसी लेब्राडोर को रोट वेलर की ट्रेनिंग क्यों दे जब हमें ब्लड से प्राप्त है जिसके अंदर खून भी रट वेलर का हो उसी को ट्रेनिंग दे वो रक्षा करने वाली जबरदस्ती हम लेब्राडोर को रोट वेलर क्यों बनाए उसमें समय भी जाएगा उसमें उसमें श्रम भी जाएगा और एट द एंड हमें शुद्ध रोट वेलर तो कभी नहीं मिलेगा जितना रट वेलर जो खतरनाक होता है उतना खतरनाक लेब्राडोर को हम फिर भी नहीं बना पाएंगे है ना तो

00:06:16:15 इसलिए वर्ण व्यवस्था अब जैसे अब जैसे हमने स्वीकार कर लिया कर्म से वर्ण व्यवस्था को स्वीकार कर लिया तो माना जाता है कि जो अंतर अंतर वर्ण विवाह होगा तो उसमें वर्ण संकर आती है प्रज्ञा शक्ति गिरती जाती है चेतन शक्ति तो क्या है कि ब्राह्मण ब्राह्मण मान लो कर्म से ही मानना है ठीक है तो ब्राह्मण की बिटिया का विवाह ब्राह्मण से हो क्षत्रिय की बिटिया का विवाह क्षत्रिय से हो जिससे आने वाली जो नस्ल है उसकी प्रज्ञा शक्ति बची रहे ठीक है अब हम लोगों ने जब कर्म से माना है तो जब हम अपने घर की बिटिया का विवाह करने निकलेंगे तो हम क्या पैरामीटर सेट करें वहां पर किसके यहां सबसे पहले जाए ये जो सबसे पहले जाने वाली बात है इसी के लिए जन्म से है बस और कुछ नहीं है भाई हम रोड पर उतर कर के हर व्यक्ति के गुणों कर्म तो चेक नहीं करेंगे ए भाई रुक मेरी बहन से विवाह करेगा क्या रुक जा भाई तेरे घर गुणो कर्म बता हम लोग अपने माइंड में एक पैरामीटर सेट करेंगे कि भाई कोई अच्छा घर हो अब ये जो मैंने अच्छा घर हो कहा ना अच्छा घर हो तो अब यहां पर सवाल ये बनता है कि जिसका अच्छा घर होगा क्या उसका बेटा अच्छा होगा क्या जैसे आपने मुझसे कहा ब्राह्मण का बेटा ब्राह्मण नहीं हम अच्छे घर से शुरुआत कर रहे हैं ढूंढा करने की उसी प्रकार से ब्राह्मण घर से

00:07:31:25 शुरुआत करते हैं ढूंढने की उसके बाद भी उसे चेक किया जाएगा कि वोह ब्राह्मण वाले आचरण है कि नहीं मगर शुरुआत कहां से करें उसके लिए जन्म से वर्ण व्यवस्था हा उसके लिए शुरुआत से वर्ण केवल एक प्रारंभिक पैरामीटर लेने के लिए जन्म से वर्ण व्यवस्था स्वीकार किया जाता है कि प्रारंभ कहां से करें कहीं ना कहीं से तो प्रारंभ करेंगे अगर हमने कुछ भी कहा हमने ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र नहीं कहा ठीक है तो हम ये कहेंगे कि भाई ऐसा घर देखे जहां पर दिन और रात भगवान की भक्ति होती हो यह भी हमने क्या कह दिया कि जहां दिन और रात भगवान की भक्ति भक्ति होती होगी तो उससे सिद्ध नहीं होता कि उसका लड़का भी भगवान की भक्ति करता होगा नहीं फिर भी हमें उसको चेक करना पड़ेगा मगर प्रारंभिक पैरामीटर हमने लिया ना तो उसी प्रारंभिक पैरामीटर पर य ब्राह्मण क्षत्रिय वै शूद्र है बस कि नॉमिनेशन कहां से आए

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00:08:26:20 इस बात को हम ऐसे भी समझ सकते हैं एक बहुत छोटा सा उदाहरण है कि घर से जाते समय आवश्यक नहीं है कि यदि आपने ताला लगा दिया तो वहां पर चोरी नहीं होगी मगर फिर भी एक स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल जो होता है उसका हम उपयोग करते ही हैं वो उपयोग क्या है कि वहां पर कोई ना कोई एक छोटा सा छोटा कोई भी ताला अवश्य लगाते हैं इसी तरीके से ये जो प्रारंभिक पैरामीटर है केवल इसके लिए होता है कि हमें जन्म देखना है कि जन्म से कौन ब्राह्मण है जिससे कम से कम पहले शरीर तो हो उसमें ब्लड तो हो ब्राह्मण वाला और ब्लड होता है जेनेटिक्स आते हैं पूर्वजों के यह बात क्या कहते हैं विज्ञान भी मानता है डीएनए होते हैं पिछले जो गुणवत्ता आ जाती है वंशानुक्रम में और कहीं कहीं पर जैसे हमारी कुछ चर्चाएं हुई है तो उसमें वर्ण को जन्म से ना मानने वाले लोगों ने भी कहीं ना कहीं स्वीकार कर लिया जैसे इन मातृ शक्ति को देखिए आप हां पर जो फैक्ट्री है जहां पर निर्माण होता है विद्यावान संस्कारवान बनाया जाता है वहां से त होता है फैक्ट्री तो गुरुकुल हो यानी कोई व्यक्ति अपने मर्जी से लोग वहां पर प्रवृति देखते थे छात्रों की मतलब आचार्य तय करते हैं ब्राह्मण वश शूद्र अर्थ ये हुआ ना कि आचार्य के बिना मैं अपना वर्ण नहीं चेंज कर सकता आचार से पहले सर्टिफिकेट तरीके से लेना पड़ेगा हां पहले तो वही मिलता है लिमिट होती है

00:09:41:21 इससे इसके बीच में ब्राह्मण का होगा इससे इसके बीच में बैश्य का होगा इससे इसके तो वो जो नियम है कि ब्राह्मण का जनि उस तरह से होगा तो ये नियम यहां क्यों लग रहा है जब आचार्य ने उसने विद्या ग्रहण नहीं कि आचार्य ने भी घोष नहीं किया ये वहां पर क्वेश्चन वो तो वर्ण परंपरा से कि भाई जैसे कि वर्ण परंपरा मतलब जो वंश परंपरा होती है वर्ण परंपरा नहीं वंश परंपरा नहीं वर्ण से वर्ण के आधार पर जिनके यहां ये चला आ रहा है कि भा इनके यहां जो बुजुर्ग थे उनके अंदर क्षत्रिय था तो ये क्षत्रिय वर्ण है जैसे कि शिवाजी परंपरा में मतलब वश पर परंपरा चली आ रही किस तरह के थे और ब्रा ब्र ब्राह्मण का कार करते थे य पर पठन उसके बच्चे ना करना उसके अ इन्होने मान लिया कि जो पूर्वज जो कार्य करते आ रहे थे उनके अनुसार पूर्वजों के अनुसार किसी का यज्ञ पवित होगा मतलब ब्राह्मण में क्षत्रिय में अथवा वैश्य में

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→ Used in: B · Video वर्ण व्यवस्था जन्म या कर्म at 7:40 ↗

00:10:31:25 हम लोग अपनी बहन का विवाह करने के लिए सड़क पर तो नहीं उतर जाएंगे चल मेरे साथ और हर हर व्यक्ति का कॉलर पकड़ के दिखा अपने गुण कर्म दिखा अपने गुण कर्म ये तो नहीं कर सकते तो प्रारंभ कहां से करें कि भाई किसी ब्राह्मण का अगर ब्राह्मण से विवाह कराना है तो किसी ब्राह्मण के घर से प्रारंभ करें फिर उनके बेटों को हा अगर ब्राह्मण का घर बचा ही नहीं तो आपातकालीन स्थिति हो गई वैसे तो इस बारे इसके लिए भगवान ने कहा ना कि मैं क्यों आता हूं मैं क्यों आता हूं र के लिए आता धम की र एक लाइन है आगे भी एक लाइन अधम की नाश के लिए अधम साधु भक्तों के उद्धार के लिए साधु भक्त तो जब हम ये कह रहे ब्राह्मण जब रहेंगे नहीं तो वो आना भगवान उस चीज को आने ही नहीं देते हैं उससे पहले ही वो आ जाता है कि यदा यदा धर्म भवती भारता तो ये सब हमारी अपनी बात को रखने के लिए की जाने वाली कल्पनाएं मात्र है कि जब ब्राह्मण नहीं होंगे तो किससे करेंगे या क्षत्रिय नहीं होंगे तो किससे करेंगे जिस दिन ब्राह्मण नहीं होगा क्षत्रिय नहीं होगा वैश शूद्र नहीं होंगे परंपरा प्राप्त उस दिन धर्म नष्ट हो चुका होगा और भगवान धर्म को नष्ट होने नहीं देते हैं जैसे ही नष्ट होने के कग पर आता है उससे पहले आ जाते हैं तो यह ऐसा है मेरा एक प्रश्न

00:11:47:00 है आपसे क्या शूद्र का बेटा ब्राह्मण बन सकता है कई जन्मों के जन्मांतर के बाद उसी जन्म में भगवान बना सकते हैं भगवान प्रकट हो जाए भगवान कोई ऐ मान लीज वो चार वेद ज्ञाता है वो ब्राह्मण कहलाएगा व शद का बेटा मैंने आपको पूछा ना कि आप एक लेब्राडोर को रट वेलर की ट्रेनिंग दे दो बहुत बढ़िया क्या वो रिजनल रट वेलर बन जाएगा नहीं बनेगा बस उतना ही अंतर है उतना सही अंतर है दूसरी बात चलो हम चलो हमारे अंदर हमारे अंदर यह है कैपेसिटी की हम उसको ट्रेनिंग देंगे और 99 पर उसको बना देंगे ठीक क्यों करें जिस दिन रट वेलर म जाए सारा का सारा नस्ल खत्म हो जाए तब करें ना हमारा उद्देश्य है भगवान की भक्ति करना भगवान को प्राप्त करना हम अपनी एनर्जी कहां यूज कर रहे हैं लेब्राडोर को रट वेलर बना के छोड़ेंगे और रटर वाल्मीकि जी शूद्र से तो ब्राह्मण बने वाल्मीकि जी के जो पिता है उसका वर्णन पढ़ लीजिएगा वाल्मीकि रामायण जो गीता प्र से प्रकाशित है उसी को पढ़ लीजिएगा उसी में बताया गया है उसमें रेफरेंस दिया गया मनुस्मृति के आधार पर उनके पिता जो थे ब्राह्मण थे उनके बारे में गलत धारणा फैलाई गई

00:13:02:04 हैय तो पक्का है ना उन्होने उली डाकू बन गए थे हां हो सकता है यह सब वस्तुनिष्ट प्रश्न है इस तो आगे बात हो सकती है डाकू जब बने तो वो सूत्र कहलाएंगे कि क्या आप ये बताओ मैं आपसे पूछता हूं मैं आपको बताता हूं मैं आपको बताता हूं पतित हुए उन्होंने पश्चाताप किया ये सब चीज है हमारे कि मान लो एक ब्राह्मण जो है वो शराब पी ले तो उसमें बताया गया कि वो जलती हुई सलाख का आलिंगन करे अगर तो ऐसे जो दोष हो जाते हैं तो उसके लिए पश्चाताप है उसके बाद बहुत सारी प्रैक्टिसिंग है उसके बाद वो दोबारा अपनी जगह में वापस आता है जो लोग ये कहते हैं कि भैया जन्म से सब लोग शूद्र होते हैं जन्मना जाते शूद्र का बहुत उपयोग किया जाता है उसका वास्तविक अर्थ है कि शूद्र वत होते हैं शूद्र नहीं होते हैं शूद्र वत होते हैं शत शूद्र वत होते हैं अच्छा अब बात ये आती है कि कुछ लोग कहते हैं कि भाई कुछ कर्म ऐसे हैं जिनको करके वो जो शूद्र है वो ब्राह्मण बन जाएगा क्षत्रिय जो ब्राह्मण बन जाएगा वो कौन से कर्म है एक्ली व कहां लिखे हैं और कौन घोषित करेगा और कौन घोषित करेगा कौन घोषित करेगा कि ये बन गया यह भी बात है कौन

00:14:17:12 घोषित करेगा

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00:14:18:04 बहुत सारी उसमें चीज है चलिए बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके भक्ति करना यह भी एक बहुत आवश्यक बात है जो जिसका हमें प्रचार प्रसार करना है कि हम लोग इस पर फोकस कर रहे हैं कि उसको ब्राह्मण कहा जा सकता है कि नहीं क्योंकि यह भावना हमारे मन में डाली गई है विरोधी तंत्रों के द्वारा प्रोग्रामिंग हुई है हमारी प्रोग्रामिंग सेट की गई है कि इनको जो इनका जो धर्म का मार्ग है उससे अगर आपको इनको भटका है तो इनको इसमें लगा दो कि ब्राह्मण कैसे बनेगा ब्राह्मण बन सकता है कि नहीं केवल इस बात पर हो अरे भैया जब आपका उद्देश्य यह है कि हमें भगवत प्राप्ति करनी है तो इस बात पर क्यों क्यों लड़ रहे हो कि हम ब्राह्मण बन सकते हैं कि नहीं और यदि भगवत प्राप्ति आपका उद्देश्य नहीं है तो सनातन आपका धर्म नहीं है और यदि सनातन आपका धर्म नहीं है तो आप मानव नहीं हो मनुष्य नहीं हो धर्म हीना पशु भी समाना तो इन बातों को ध्यान में रखना चाहिए बाकी जो इस तरह के जो जैसे ये आए थे ये भी सकारात्मक दृष्टिकोण वाले थे और जो इस तरह क्या रखते हैं और समझना चाहते हैं इनको और उनके मन में कुछ क्वेश्चन है तो वो लेकर के आ सकते हैं अगर वो अध्ययन के रूप से करना चाहते हैं तो हमारी क्लासेस चलती हैं वह क्लासेस में

00:15:33:07 है और यदि काउंटर क्वेश्चंस करना चाहते हैं तो वह जो है यहां पर उनका स्वागत है जय श्री राम [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 15:49 · 18 Oct 2024

वर्ण व्यवस्था पर चर्चा #aryasamaj #swamidayanandji #iskcon

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A · Video Conversation with an International Arya Samaj Scholar | आर्य समाज वैदि...
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