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00:00:06:16 तो वो जो ध्यान लगाने के लिए ब्रह्मा कुमारी का जो क्या क्लेम है वहां पर ध्यान लगाओ तो क्या होगा इससे ऐसा है राजयोग ऐसा बताया जाता है वहां कि लाइट प्रकाश जो ईश्वर है वो लाइट स्वरूप है बिंदु स्वरूप है तो उसको मन में लाने का है वो बिंदु स्वरूप जो लाइट स्वरूप है ना ये आंखें बंद करके और लाइट को देखना है अंदर मन में तो उसमें मुझे क्या होता था कि मेरा मन शांत होने के बजाय और ज्यादा भारी हो जाता था क्योंकि खींचना पड़ता है ना और प्रकाश चला जाता है फिर से खींच के लाता हूं इधर प्रकाश को फिर चला जाता है फिर पकड़ के लाता हूं तो इतना में माइंड मेरा कंट्रोल होने के बावजूद वो मेरा मीनिंग और वो ज्यादा था मैं भारी भारी और मैंने मैंने आपसे ये पूछा मैंने आपसे ये पूछा है कि ब्रह्मा कुमारी जब आप मेडिटेशन करते हैं ब्रह्मा कुमारी में तो वो क्या क्लेम करता है कि इस मेडिटेशन से आपको यह मिलेगा। क्या क्लेम करता है?
00:01:24:04 पहली बात तो यह जो बोलने का ऐसा बोलूंगा वहां कुछ प्राप्त नहीं होता छूटता है आप आप में छूट जाता है जो कुछ कुछ बात है जो धारण करेंगे ध्यान में ध्यान लगाए कुछ छोड़ना नहीं है वो ऑटोमेटिकली छूट जाएगा मैंने कहा आप अपनी डेफिनेशन मत दीजिए अभी आप हमें मुझे ब्रह्मा कुमारी का क्लेम बताइए कि वो मेडिटेशन करने से आपको क्या मिलता है एक तो परम शांति यह उनका क्लेम है यह उनका क्लेम है उनका भी है मेरा भी है उनका उनका उनका क्लेम क्या है वो बताइए अभी आप क्योंकि आपके थोड़े बहुत उसमें अंतर है ना कुछ ओष भी है कुछ बुद्ध भी बौद्ध भी है ऐसा है ना तो आप अभी केवल ब्रह्मा कुमारी का बता दीजिए क्या क्लेम है
00:02:17:18 यही मन की शांति और आत्मा का जो गुण है प्रेम शांति आनंद पवित्रता वो सब गुण आत्मा का ओरिजिनल गुण है जो बाहर दिखाई देगा ध्यान करने से आत्मा का ओरिजिनल गुण है आत्मा का ओरिजिनल गुण है शांति शांति प्रेम आनंद ये आत्मा ये ये सब आत्मा के ओरिजिनल गुण है ठीक है अच्छा तो ये बताइए कि जैसे वहां पर आपको मेडिटेशन करने से परम शांति मिलती है। आपके घर में कौन-कौन है?
00:02:58:24 तीन लोग, दो बच्चे, पांच लोग। बच्चे कितने बड़े हैं? छोटे। एक 11वीं पढ़ता है और एक छठी चरण पढ़ता है। अच्छा। दोनों बच्चे बॉयज हैं। बालक हैं। बड़ी लड़की है। छोटा बेटा है। बड़ी लड़की है। हां जी। अच्छा। तो जो जैसे बिटिया है जब बिटिया आपकी हुई होगी तो आपने उसको कभी गोद में लिया है? बिटिया को जैसे गोद में ले खिलाते हैं ना उसको कंधे पर रखा है। उसका सर रखते हैं ऐसे कभी तो लिया है आपने कभी?
00:03:44:26 मेरी समझ में नहीं आता है। इस बात करना एक पिता अपनी बटिया को गोद में ले खिलाता है ना उस तरह से आपने लिया है कभी तो जैसे उसने तो तो जब आपने लिया होगा तो आपको शांति मिली थोड़ी सुख मिला था आनंद आया था उसका सर जब कंधे पर रखा था आएगा कौन बाप है जो नहीं आएगा ना गुड गुड अब अब ये बताइए कि इस शांति में और वो जो ब्रह्मा कुमारी वाली शांति है उसमें अंतर क्या है?
00:04:24:04 जमीन आसमान का जमीन आसमान का वो बताइए क्या अंतर है? जमीन आसमान का अंतर है। अरे तो मुझे समझाइए तो कि वहां पर ऐसा है इसलिए वो जमीन आसमान का अंतर है। नहीं तो फिर तो मुझे ये मानना पड़ेगा कि वहां पे वहां पर मुझे यह मानना पड़ेगा कि वहां से जो शांति आ रही होती है वो नीचे से आ रही होती है या वहां की शांति ऊपर से आ रही होती है। यहां की शांति नीचे से आ रही होती। फिर तो ये मानना पड़ेगा। आप मुझे बताइए जमीन आसमान का अंतर क्या है? अब मुझे बताइए कि ब्रह्मा कुमारी का जो मेडिटेशन से जो आपको सुख मिल रहा है वह उसमें और आपकी बिटिया जब आपके कंधे पर सर रखी थी छोटी सी या कभी भी जब आप ऐसे आलिंगन करते होंगे अपने प्रियजन का तो उससे मिलने वाले सुख में और उसमें जो मेडिटेशन आप कर रहे हैं उससे मिलने वाले सुख में अंतर क्या है?
00:05:22:28 मेडिटेशन करने पर जो शरीर का भाव है ना शरीर का भाव वो छूट जाएगा धीरे-धीरे छूटता जाएगा और आत्म स्वरूप में स्थित होता जाएगा वो आनंद अलग ही है ऐसा आनंद नहीं है निश्चय पर है आत्म स्वरूप में स्थित होता जाएगा हां वो आनंद निश्चय भी पर अच्छा तो आप जैसे आप इससे पहले आत्म स्वरूप में स्थित थे क्या कभी इससे पहले
00:06:03:03 सर जी मैं शायद दसवीं पढ़ता होगा दसवीं तो दसवीं कक्षा में तब से इस ज्ञान मार्ग में आया हूं नहीं नहीं नहीं मैं कह रहा हूं अभी जब ब्रह्मा ब्रह्मा कुमारी से जुड़कर आप आत्म स्वरूप में स्थित हुए हैं। तो इससे पहले आप क्या थे? भक्ति मार्ग में था। उससे पहले भक्ति मार्ग में था। अरे उससे भी पहले भक्ति मार्ग से पहले बच्चा था। पहले की उम्र थी। उससे पहले
00:06:45:13 उससे पहले तो जन्म ही हुआ होगा। जन्म से पहले नहीं था। जन्म से पहले आप एक्सिस्ट नहीं करते थे। हां। क्या मान्यता है उस बारे में? क्या मान्यता है उसकी? क्या मान्यता है? सर जी दूध दूध में घी है वो दिखाई देता है दूध में घी है उसमें क्या मान्यता है मैं ये कह रहा हूं मतलब आपका ये पहला जन्म है ये पहला जन्म है आपका हां ना इससे पहले मतलब आप अपने आत्म स्वरूप में थे ना हां हां ना थे तो फिर यहां कैसे आए यहां कैसे आए भाई मतलब आत्म स्वरूप में तो आप पहले भी थे ना
00:07:46:00 पहले भी रह चुके हो ना आत्म स्वरूप में आप हां ये सुनो मेरी बात सुनो हां मेरी बात सुनो अब समझ गए अब आप समझ गए एक ये बात है जो मैं नहीं मानता कि जो आत्मा है भगवत गीता में शायद कहा है कि ऐसा भी नहीं है। अर्जुन को समझाता है ना कृष्ण ऐसा भी नहीं है कि पहले हम नहीं थे। मैं या तू नहीं था। ऐसा अर्जुन को बोलता है ना आप इस बात को नहीं नहीं नहीं अरे मैं ये पूछ रहा हूं आप किसी समय पे उस जगह पर थे जिस जगह पे आज आप जा रहे हो। ये पूछ रहा हूं।
00:08:33:18 ब्रह्मा कुमारी की जो थ्योरी है ब्रह्मा कुमारी की जो थ्योरी है उसके अनुसार आप किसी समय पर देवता थे ठीक है देवता से फॉल देवता से फॉल डाउन होकर के आप बने वो त्रेता वो द्वापर पहले आता है उनके अंत द्वापर फिर सतयुग त्रेता जो भी है फिर आज कलयुग में हुआ यानी कि किसी समय पर आप जो है उस स्टेज पर थे जिस स्टेज पर आज जाने का प्रयास कर रहे हो है है ना? अ ये तो सब आपने जान लिया ब्रह्मा कुमारी से क्या था क्या नहीं। मैं जो मानता हूं वही बोलूंगा मैं। देखिए आप जो मानते हैं वही बताइए मुझे। अभी मतलब यह कुल मिलाकर के ब्रह्मा कुमारी की लेखराज वाली जो थ्योरी है वह आपको नहीं स्वीकार है और ब्रह्मा कुमारी का जो ये कहने का मतलब है जो वो जो देवता थे देवता से ये बने ये भी आपको स्वीकार नहीं है नहीं है ना तो वो बताइए फिर खुल के खुल के बताइए थोड़ा थोड़ा क्लियर फटाफट चलिए ना स्ट्रेट रहिए थोड़ा बातों जी क्या क्या जानना चाहते हो देवताओं ब्रह्मा कुमारी ब्रह्मा कुमारी
00:09:48:21 के अनुसार आज आप देवत्व को प्राप्त करने पहले देवता रह चुके हैं ना अरे भाई ब्रह्मा कुमारी के हां तो वो जो फॉल डाउन होता है कि आज आप कलयुग में है और निकृष्ट जीव की जीवन को जी रहे हैं देवताओं की कंपेरेटिवली वो फॉल डाउन कैसे हुआ कारण क्या है उसका देवता पद से नीचे उतरे उसकी बात कर रहे हो ना हां हां तो हर युग अपना काम करती सतयुग उसका काम करता है। आत्मा प्योर होती है। इसके बाद त्रेता युग आता है। थोड़ी कला कम होती है। इधर द्वापर युग आता है। कम होती है। कला कम होती है। कला कम होती है और थोड़े अवगुण भी बढ़ते हैं कि पाप कर्म इत्यादि। हां जी। बढ़ते हैं ना द्वापर से। बढ़ते हैं। ठीक। गुड। द्वापर से इसका मतलब ये कहा जा सकता है हमारे हमारे शास्त्र ऐसा बोलता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण का जन्म बोलता है ना मैं मैं शास्त्र की बात अभी कर ही नहीं रहा अभी मैं शास्त्र की बात कर ही नहीं रहा हूं मैं तो आपकी केवल थ्योरी समझने का प्रयास कर रहा हूं शास्त्र की बात जब जब मैं पूछू आपसे प्रमाण तो दे दीजिएगा अभी तो मैं केवल आपकी मान्यता समझने का प्रयास कर रहा हूं कि आपकी जो मान्यता है कहने का अर्थ यह है कि आपका जो
00:11:03:25 फॉल डाउन हुआ है वो पाप की वजह से हुआ है ना ठीक हैस अभी आप अभी आपने कहा था कि जो आत्मा का मूल स्वरूप है है ना मूल जो गुण है मौलिक गुण आत्मा के वो है प्रेम शांति और जितनी भी अच्छी अच्छी चीजें हो सकती है वो सब ना ये मूल हैस ठीक है इसका मतलब किसी समय पर ये गुण आत्मा में नहीं थे। कुछ समय ऐसा कोई ना कोई समय ऐसा होता है। अच्छा तो जब जब आप यानी कि वही मेरी बात सुनो वही रहा हूं। लेकिन एक मिनट मैं क्लियर कर यानी कि जब आप जो देवत्व को प्राप्त वाला है तब भी आप में यह सब बुराइयां थी।
00:12:01:10 तब नहीं थी। यानी कि यानी कि एक समय ऐसा यानी कि एक समय ऐसा होता है जब यह सब बुराइयां आत्मा में नहीं होती है। हां प्योर होती है। गुड बहुत बढ़िया। बहुत अच्छे। उसका आप ये बताइए वातावरण पॉजिटिव होता है ना। हां। ठीक है। ठीक है। तो एक समय ऐसा होता है जब ये बुरे विचार पाप कर्म के विचार इत्यादि नहीं होते आत्मा में। यह क्लियर है नहीं होता है ये क्लियर है ना ये ये क्लियर है हां ठीक अब ये बात है कि ये जो विचार है विचार को धारण कौन विचार को धारण कौन कर सकता है कोई चेतन तत्व एक मिनट जो विचार है एक एक मिनट भाई साहब मैं ये पूछ रहा हूं जो विचार है विचार चाहे अच्छे हो चाहे बुरे हो कुछ भी विचार जो विचार करने की प्रवृत्ति या कुछ भी यह इसको धारण कोई चेतन तत्व ही कर सकता है ना
00:13:11:13 कर सकता तो कौन कौन करता है धारण फोन में कौन सब संग्रह करता है फोन हमारा होता है उसमें संग्रह करने की चीज क्या होती है सर मेमोरी कार्ड होता है मोबाइल के अंदर मेमोरी कार्ड होता है मेमोरी कार्ड होता है तो इसमें सूक्ष्म शरीर शरीर को कैसे भूल गई आप? अरे भैया मैं ये कह रहा हूं ये जो बुराई है बुराई ठीक है बुराई या अच्छाई इसको सूक्ष्म शरीर को धारण कौन करता है?
00:13:52:19 आत्मा तो है ही उसका कटका नहीं हो सकता। कट नहीं हो सकता। बिंदु स्वरूप नहीं हो सकता। भाई साहब आप आप मेरी बात सुनिए संजय जी हम लोग थोड़ा सा स्ट्रेट और जो टू द पॉइंट मैटर चल रहा है उस पर थोड़ा सा बात करें। आपने कहा आत्मा जो है उसका जो मौलिक स्वरूप है वो शांति इत्यादि है। ठीक है? ये सब भी शांति और ये प्रेम करुणा ये सब भी विचार ही है ना। विचार है ना यह सब भी आत्मा सबसे पहले अच्छे विचार धारण कर रही है तो आपका स्टेटमेंट तो गलत हो रहा है कि विचार धारण नहीं करती आत्मा आत्मा नहीं करती सूक्ष्म शरीर करती है आत्मा तो बॉडी छूट जाने आत्मा शुद्ध है आत्मा तो शुद्ध है उसमें कोई विचार है ही नहीं सूक्ष्म ही नहीं विचार है ही नहीं अरे विचार है ही नहीं विचार है ही नहीं विचार है ही नहीं ना। हां गुड तो है ही नहीं वो तो शुद्ध है। कोई विचार कोई विचार नहीं है। इस थोड़ा सा मैं कंफ्यूज अरे भाई आप मेरी बात भी तो सुनो। मैंने मांगा आपसे प्रमाण। मैं कुछ और पूछना चाह रहा हूं। आप कहीं और ले जाना चाह रहे हैं। बात ये है। मैं
00:15:07:27 ये पूछ रहा हूं। आपने अभी थोड़ी देर पहले ये कह दिया था ना कि आत्मा का मूल जो गुण है वो शांति इत्यादि है। ये आपने थोड़ी देर पहले कहा था। अब आप कह रहे हो नहीं आत्मा तो इससे भी फ्री है। यह सब तो सूक्ष्म शरीर धारण करता है। नहीं वो विचार की बात कर रहे हो ना विचार नहीं है। ये ये विचार नहीं बोल सकते। क्या है? उसका ओरिजिनल गुण है। आत्मा मतलब एक ऐसी ऊर्जा जो मात्र अस्तित्व को दिखाता है। उसमें कोई दाग नहीं लगता। विचार नहीं रहता। अरे भाई अरे भाई किस जब हम किसी को प्रेम कह रहे हैं प्रेम कर रहे हैं तो प्रेम की भावना आ गई ना मन में विचार हो गया ना ये प्रेम किसको करोगे आप
00:15:56:07 प्रेम करोगे ना प्रेम की भावना हो गई ना मन में विचार ही तो है क्या है ये जो आप समझ लो वही है गुण है गुण है पर गुण है ना आत्मा का ओरिजिनल सनातन है वो तो अरे भाई मैं कहा मैं वो तो वो तो मैंने आपसे पूछा है आत्मा मिटती है कि नहीं मिटती? बात ये चल रही है कि आत्मा ये जो विचार वैचारिक जो चीजें हैं विचार वैचारिक सामग्री इनके बिना आत्मा का अस्तित्व हो सकता है। सीधी बात यह है तो इनका इनका अस्तित्व ये एक्सिस्ट कहां पर करते हैं? जो किसी समय पे आत्मा के साथ कनेक्ट हो जाते हैं। जैसे आपने कहा कि एक समय पे आपके पास ये सब चीजें नहीं थी। आप फ्री थे, शुद्ध थे। फिर फिर समय के साथ यह चीजें आपके साथ कनेक्ट हो गई। चाहे अच्छे विचार हो, चाहे बुरे विचार। तो बुरे विचार की मैं बात कर रहा हूं। यह कहां पर स्थित थे जो समय आने पर आपके पास आ गए? उनका अधिष्ठान क्या है बुरे विचारों का? सर वही तो बताने की कोशिश कर रहा हूं। आप सुनोगे तब ना। ठीक है। सुनोगे? ठीक है।
00:17:11:13 गीता में कहा है ना आप मुझसे शास्त्र का नाम मत लीजिए अभी आप केवल अपनी मान्यता बताते जाइए मैं आपसे पूछ लूंगा बाद में शास्त्र का नाम आप सबूत वहां तो ढूंढ रहे हो शास्त्र सबूत वही था ढूंढ रहे मैंने कहा मैंने कहा कि अगर आप यह मानते हैं कि आत्मा कभी इन चीजों से मुक्त रह सकती है। जो आपने बुराइयां बुराइयां बताई है इन चीजों से आत्मा किसी ना कभी मुक्त रह सकती है। शुद्ध स्वरूप उस समय उसके पास प्रेम शांति इत्यादि होता है गुण। ठीक है? तो यह जो विचार वैचारिक सामग्री है पाप करने की प्रवृत्ति बुराई किसी के बारे में घृणा यह सब यह एक्सिस्ट कहां पर करता है? जो समय आने पर आ जाता है आत्मा के अंदर। इसके धारक तत्व क्या है? अरे भैया मैं पूछ रहा हूं क्या आपसे? अचल वचल क्यों बोल रहे हो? आप सीधे बात करो ना ये वाला तत्व यहां पे रहता है वो और समय आने पे आत्मा के साथ आ जाता है। अब बोलने ही नहीं देता। क्या बोलूं? ब्रह्मकुमारी
00:18:27:08 वाला तर्क नहीं करता है। इतना बहुत कम बोलता है। आप बताइए। बोलने दोगे तो बोलूंगा वरना लेफ्ट हो जाएगा। आप अगर आप अगर आप अगर बेकार की चीजें बोलेंगे तो आपका स्वागत है। आप लेफ्ट हो सकते हैं। आप मैंने आपने अभी बोला आत्मा अचल है। मैंने पूछा है कि आपसे कि वो चलती है कि नहीं चलती है। मूवमेंट करती है कि नहीं करती है? बताइए। क्यों बोल रहा अचल? हां। बोल रहा हूं। आप सुनोगे तब ना। देखा मैंने अभी अभी प्रश्न। अब मैं एक एक मैं एक क्लियर प्रश्न एक मिनट आपने अभी एक मैं एक क्लियर प्रश्न आपसे कर रहा हूं। ध्यान से सुनिए। मैंने आपसे पूछा था कि आत्मा मूवमेंट करती है कि नहीं करती है? पूछा था
00:19:14:00 तो मेरा जवाब में पहले आत्मा ही आना चाहिए। शब्द ऐसा जरूरी तो नहीं है। आत्मा को समझाने के लिए मुझे मुझे आप आप मुझे अचल है। क्यों बता रहे हैं? आप जो विषय से संबंधित जो बात चल रही है वो बताइए। अचल है से क्या मतलब है? और अगर आप बताएंगे तो मैं टोकूंगा। चलिए बताइए। वो अचल अडोल है आत्मा और जो हिलता है आता है वो सूक्ष्म शरीर आता है और उसमें ही विकारों से भरे होता है। हमारे पूर्व जन्मों का जो भी आप मानते हैं सूक्ष्म शरीर में वो एक मुख से दूसरी योनि में जाता है। एक योनि से दूसरी, दूसरी से तीसरी। ये आवागमन करती है। आत्मा तो स्थिर है। उसका कटका नहीं हो सकता। ठीक है। समझ रहे हो आप? समझ गया। आपने जो कहा आप जो कहना आप जो कहना चाह रहे हो वो मैं सुन लिया समझ गया। अब मैं उसमें और क्लिटी चाहता हूं। यह सूक्ष्म शरीर किस तत्व से बना होता है? प्रकृति से बना होता है या अपने आप में एक स्वतंत्र रूप से एक तत्व है सूक्ष्म शरीर
00:20:29:10 नहीं नहीं यह बोल सकते हैं हम वो कॉस्मिक एनर्जी वाला कॉस्मिक एनर्जी हां जी इसको समझाइए थोड़ा सा लाइट की बिजली को कैसे समझाओगे लाइट की बिजली है। नहीं नहीं उसकी व्याख्या करनी है तो कैसे समझाओगे? लाइट की बिजली की व्याख्या करनी है। लाइट की बिजली कैसे दिखाओगे? नहीं नहीं बिजली बोल रहा हूं। मैंने मैंने दिखाने की बात कही है। मैंने कहने की बात कही है। देखिए आप तो पता चलेगा। मेरी बात सुनिए। मेरी बात सुनिए। मैंने आपसे पूछा है कि यह जो यह जो सूक्ष्म शरीर है यह बना किस चीज से होता है? तो इसमें जड़ प्रकृति का मटेरियल यूज किया जाता है। या फिर हम ये मान ले कि पर एक मिनट एक मिनट एक मिनट या फिर हम यह मान लें कि परमात्मा और आत्मा और
00:21:44:28 प्रकृति इसके अलावा एक तत्व और है जिससे कि सूक्ष्म शरीर बना है। सीधी बात एक तत्व और एक्सिस्ट करता है। सर पहली बात तो यह है कि मन बुद्धि से पर है। मनुष्य बुद्धि नहीं कह सकती इसकी व्याख्या। मतलब आपको नहीं पता। आपको नहीं पता। किसी को पता नहीं रहेगा। इसका किसी को भी मतलब ब्रह्मा कुमारी के पास ये ज्ञान नहीं है। नहीं नहीं किसी के पास। ठीक है। कोई बात आप ये मुझे वो किसी किसी के पास होगा कि नहीं होगा? मैं ये पूछ रहा हूं भाई साहब मैं ये पूछ रहा हूं। ब्रह्मा कुमारी का ये क्लेम गलत हो गया ना कि तीन ही तत्व है। जीव प्रकृति और आत्मा परमात्मा जीव और प्रकृति ये तीन तत्व मानती है। आप एक चीज चौथा और बता रहे हो। सूक्ष्म शरीर और उसका उपादान आप बता नहीं रहे हो। वो तो अपने आप में मान लेता हूं। सूक्ष्म शरीर अपने आप में एक शाश्वत तत्व है। और दुनिया भर में जितनी आत्माएं उन सबका सूक्ष्म शरीर एक्सिस्ट करता है। शाश्वत
00:22:52:28 हां जी और एक और एक बात इससे जुड़ी है बोल देता हूं कि मनुष्य शरीर का जो सूक्ष्म शरीर होता है ना वो मनुष्य योनि में ही जाते हैं। हां स्त्री पुरुष हो सकते हैं दूसरे जन्म लेकिन वो बिल्ली कुत्ता कोई पशु पक्षी उसमें एडजस्ट नहीं करते हैं। मतलब सूक्ष्म शरीर एक ऐसा तत्व है जिसकी अपनी चेतना होती है जिस कारण से वह बुराई और अच्छाई के विचारों को अपने पास स्टोर कर सकता है। सूक्ष्म शरीर वो वही वही मेमोरी कार्ड है। वही आती जाती है। यानी वो चेतन सत्ता है।
00:23:36:21 चेतन सत्ता तो आत्मा को बोलेगा। चेतन सत्ता इससे एक्सेस करती है आत्मा से आत्मा है तो वह काम कर सकती है वरना तो मैंने इसीलिए पूछा है ये जो बुराई और अच्छाई है ये विचार है इसको धारण वो कर सकता है जो चेतन हो इसको जड़ तो धारण कर नहीं सकता जो चेतन नहीं वो जड़ हुआ आप कह रहे हो वो जड़ नहीं है जड़ नहीं तो चेतन है नहीं तो क्या है आप बता दो नहीं आत्मा की व्याख्या नहीं हो सकती इसकी व्याख्या सिर्फ इतनी हो सकती है कि वो हां हां वो वो वो पूर्ण ज्ञान भी नहीं कहेंगे उसको उसको पूर्ण अज्ञानी भी नहीं कहेंगे उसको पूर्ण प्रकाश भी मैं समझ गया मैं समझ गया इसको इसको पूर्ण भी नहीं इसको दूसरी तरीके से समझ लेते हैं तो अभी जब आपने कहा कि आत्मा अपने मौलिक स्वरूप में जा रही होती है तो आपने यह माना कि आपका कभी ऐसा होगा जब आप सूक्ष्म शरीर से भी अलग हो जाओगे और या फिर आपका जो एंडिंग पॉइंट है वो यही है कि सूक्ष्म शरीर के साथ तो हमेशा रहोगे ऐसा है क्या? सूक्ष्म शरीर से भी अलग हो जाओगे। ऐसा होता है
00:24:46:24 आत्मा तो हिलेगी नहीं। सूक्ष्म शरीर ही अवर करता है। आत्मा उसमें भी है लेकिन उसका नहीं हो सकता। भाई साहब मैंने क्या समझा नहीं? मैंने कहा कि अभी आपने ये बात कही थी कि भाई जो आत्मा का मौलिक स्वरूप है ना उसमें शांति इत्यादि है। है ना? और जब हम मेडिटेशन करते हैं तो जो मौलिक स्वरूप है वो हम प्राप्त करने लगते हैं अपना। ठीक है? हां जी। यही गाना आपने। इसके बाद हम इस पे आ जाते हैं। इसके बाद हम इस पे आ जाते हैं कि अ इसके बाद हम इस पे आ जाते हैं कि आपने यह माना कि ये जो वैचारिक सामग्री है इसको धारण करता है सूक्ष्म शरीर। अब वो सूक्ष्म शरीर चेतन है। जड़ है। ये मैं नहीं कह सकता। हां चेतन आप उसे मानते नहीं। जड़ उसे आप मानते नहीं। आप क्या मानते हो वह तो आप बता नहीं पा रहे हो बात एक अलग है मगर फिर भी यह वैचारिक जो चीजें हैं वैचारिक सामग्री यह धारण करता है सूक्ष्म शरीर तो अब मैं यह पूछ रहा हूं कि आपने जो कहा कि ध्यान करने से आत्मा मौलिक स्वरूप में स्थापित होने लगती है स्थित होने लगती है तो मौलिक स्वरूप सूक्ष्म शरीर के बिना वाला मौलिक स्वरूप या मौलिक स्वरूप सूक्ष्म शरीर के साथ वाला मौलिक स्वरूप
00:26:00:26 किसको कह रहे हैं मौलिक स्वरूप आप मौलिक किसे कह रहे हो? ओरिजिनल जो उसका वास्तविक स्वरूप है। मतलब सूक्ष्म शरीर के बिना भी उस आत्मा एक्सिस्ट करती है ना। हां जी। ये हो गया। यानी कि यह जो सारी गंदगी है यह शरीर में होती है सूक्ष्म शरीर में और आत्मा जो है आप जब ध्यान लगाते हैं तो आप जो है अपने सारे शरीरों से मुक्त हो के सूक्ष्म शरीर के वो आपने मौलिक स्वरूप में जाकर के वो भोगते हैं। क्या कहते हैं? ठीक है। ठीक है ना? हां। तो अब इसमें बहुत सारे प्रश्न हो जाते हैं। मगर मैं जो मेरा जो मुख्य विषय चल रहा है कि बुराई उसके अंदर आई कहां से? मैं उस पर ही रहता हूं। तो अब आप यह बताइए कि आत्मा सूक्ष्म शरीर जब सूक्ष्म शरीर में आने से ही पाप आना है तो सूक्ष्म शरीर से आत्मा कनेक्ट क्यों हो रही है? कौन कर रहा है कनेक्ट? उसे एक तरीके से मान लीजिए कि ये जो बुराई है वो सूक्ष्म शरीर में रहती है और सूक्ष्म शरीर सूक्ष्म शरीर से आत्मा को जोड़
00:27:16:02 के आत्मा को पापी जो बुराई करने की वो है दे दी जाती है तो कौन कर रहा है ये अरे वो खुद पे ही करता है सूक्ष्म उसका संस्कार उसका संस्कार खुद से ही करता है कि मुझे समझ गया मैं समझ गया मैं थोड़े से समझ जाता हूं भाई साहब इतना सा बोलते मैं समझ जाता हूं खुद से करता है बस समझ गया हां अब इसमें आगे चलते हैं इसका मतलब यानी कि उसको मालूम है कि उसमें में जाकर के मैं पापी बन जाऊंगा और फिर भी वह उससे जुड़ता है खुद से। अरे उसका संस्कार ही ऐसा है ना वो पवित्र पवित्र शरीर उसका संस्कार ऐसा है कि उसको मालूम है कि वो पाप से जुड़कर के सूक्ष्म शरीर से जुड़कर के पापी बन जाएगा। मगर फिर भी वो उससे जुड़ता है।
00:28:10:26 नहीं नहीं पापी तो है ऑलरेडी। वो पाप को लेकर ही जाता है दूसरे शरीर में। यानी आत्मा जब सूक्ष्म जब सूक्ष्म शरीर से अलग है तब भी आत्मा पापी होती है। पाप होते हैं उसके पास। हां सूक्ष्म शरीर में रहता है। अरे [हंसी] भाई साहब मैंने कहा मैंने कहा सूक्ष्म शरीर से जब आत्मा अलग हो गई है तब उसके पास पाप है कि नहीं है? आत्मा में बोल रहे हो आत्मा में। हां हां आत्मा में कहां पाप रहेगा? आत्मा नहीं रहेगा वो तो शुद्ध है। तो अब अब आप ये अब आप ये मुझे बताइए सुनिए सुनिए मैं मैं बताऊं मान लीजिए ये हो गई आत्मा इसको मानिए आत्मा है और ये उसका सूक्ष्म शरीर है। सूक्ष्म शरीर में पाप है। ठीक है? इससे जोड़कर के पापी हो जाएगी आत्मा। तो आत्मा को पाप इस सूक्ष्म शरीर से कौन जोड़ रहा है? क्यों जोड़ रही है वो? जब वो इधर पापी हो रही तो नहीं नहीं पापी हो जाएगी ऐसा नहीं वो पाप लेकर जाती है उसका मन है ना वो मन ही मान लो सूक्ष्म शरीर जो है उसका संस्कार भर के दूसरे शरीर जाती है अभी वो सूक्ष्म शरीर
00:29:26:04 से अलग है मैं क्या पूछ रहा हूं अभी वो सूक्ष्म शरीर से अलग है ना आत्मा मैं तब की बात कर रहा हूं सूक्ष्म शरीर से कनेक्ट क्यों हो रही है आत्मा भैया आपको एक तो पूर्ण मूर्ख मिले या तो पूर्ण ज्ञानी मिले। मेरे जैसा बच्चे का नहीं मिला आपको। आप जा सकते हैं। यह सवाल मैं क्यों पूछ रहा हूं वो आप लोग समझ लीजिए। आप जा सकते हैं। भाई साहब मैं समझ गया आपका आंसर क्या है।
00:30:09:27 यह सवाल मैं इसलिए पूछ रहा हूं कि यह लोग यह कहते हैं कि आत्मा का जो मूल स्वरूप है वो शांति करुणा प्यार इत्यादि पाप रहित है। दूसरी ओर यह भी कहते हैं कि भैया जो आत्मा है वो सदा सुखी नहीं हो सकती। हर 5000 साल में वो इनका एक साइकिल है। उनको मोक्ष पूरी थ्योरी आप समझ लीजिए। शुरू से अंत तक मैंने क्या और क्यों पूछा है उसको आप लोग भी जान लीजिए। देखिए जब मैंने उससे यह पूछा इनसे भाई साहब से कि जब आपने बिटिया का सर कंधे पर रखा था तो आपको कुछ सुख की अनुभूति हुई होगी तो उसमें और इसमें अंतर क्या है? तो इन्होंने बताया परम सुख है जमीन आसमान का अंतर है और इसमें हम अपने मौलिक स्वरूप में आते हैं। ठीक है? तो सीधी सी बात है इसमें अंतर ये होता है आध्यात्मिक सुख में और इस सुख में यह सुख अनंत होता है। आध्यात्मिक सुख। इसको समझना है। अगर यह अनंत नहीं है तो इस सुख में भौतिक भौतिक चीजों से मिलने वाले सुख में और अध्यात्म से मिलने वाले सुख में कोई अंतर नहीं है। अगर यह सुख अनंत नहीं है तो अनंत है तो ही वो परम सुख है। वो अनंत सुख है और वही सच्चिदानंद वाला मामला है मोक्ष वाला। तो अब पहली बात इनके यहां की थ्योरी ये है ब्रह्मा
00:31:24:28 कुमारी के यहां की कि अनंत सुख तो है नहीं। तो पहली बात इस इस सुख में और इस सुख में अंतर क्या आया? अब यह तो एक बात हो गई कि इस सुख में उस सुख में कोई अंतर नहीं है। जो भौतिक दुनिया से जो सुख प्राप्त कर रहे हैं वही सुख वहां से भी मिल रहा है क्योंकि वहां वो खुद क्लेम कर रहे हैं कि वहां पर भी आपका इतनी देर का ही सुख है और तमाम सारी दुनिया की दुनियादारी की चीजों को छोड़ के व्यक्ति से कहा जाए कि हम तुम्हें इतनी देर के लिए जैसे जेल पर जेल से बाहर छोड़ते हैं ना पेरोल पे पैरोल कहते हैं क्या कहते हैं जेल से थोड़ी देर के लिए बाहर तो उस समय उस व्यक्ति को कैसी अनुभूति होगी जब वो पैरोल पे बाहर होगा है ना और दूसरी बात यह होती है कि पैरोल पर जो मुक्ति होती है ना पैरोल वाली वो मुक्ति भी पूरी तरीके से मुक्ति नहीं होती। यही हो कि पैरोल वाली जो मुक्ति है वो पूरी मान ली जाए क्योंकि उसमें उसके एक कष्ट होता है कि बस 15 दिन में वापस जाना है। एक महीने में वापस जाना है। जैसे राम रहीम पैरोल पर बाहर आता जाता है। तो जितनी देर वो बाहर आता है और वापस जाता है उतनी देर उसके अंदर सारे दुख भले ही खत्म हो जाए जेल से संबंधित। एक दुख दोबारा उसके मन में होता है कि मुझे दोबारा जाना है। ठीक है? तो एक तो यह हो गया कि यह वह जो जिस ब्रह्मा कुमारी में जा रहे हैं लोग
00:32:40:09 वहां पर अंतर क्या है यह कोई नहीं बता पाएगा। वही भौतिक सुख यहां का भी बाधित है और ब्रह्मा कुमारी के द्वारा आध्यात्मिक दुनिया का जो सुख है वह भी बाधित है। वह खुद यह क्लेम कर रही है। दूसरी बात अब इसमें ये लोग जब बातें करते हैं मीठी-मीठी बातें करने के चक्कर में तो इनको यह कहना पड़ता है कि आत्मा का जो मौलिक स्वरूप होता है वो शांति होता है। शांति और यह जैसे अभी आपने हमारी पिछली कुछ चर्चाएं हुई हैं उसमें देखा होगा तो जो शांति है शांति और यह अच्छी-अच्छी मीठी-मीठी बातें प्यार प्रेम करुणा दया है ये सब ये उसका मौलिक होता है तो वो मौलिक भी होने लगती है अब दिक्कत ये आती है कि इन्होंने जब यह माना कि यहां से छूट करके वहां जाना है इसके लिए हमें अच्छे काम चाहिए तो वहां से छूट वहां से इनको यहां आना है जो ये माने बैठे हैं कि वहां से आना है उसके लिए बुरे काम चाहिए तो अगर यहां से वहां जाने के लिए अच्छे काम आत्मा का वास्तविक धर्म है तो वहां से आने के लिए बुरे काम आत्मा का वास्तविक धर्म मानना पड़ेगा। इसका अर्थ क्या हुआ कि अधर्म करना, पाप करना, व्यभचार करना, ब्रह्मा कुमारी के अनुसार झूठ बोलना यह सब उसका मौलिक धर्म होगा। यह सब भी उसी प्रकार से जैसे जितना सच बोलना, जितना शांति प्राप्त
00:33:55:20 करना, शांति की ओर जाना, जितना यह सब उसका धर्म है आत्मा का उतना ही दूसरी चीजें भी धर्म है। तो क्या ब्रह्मा कुमारी के अनुसार कभी धर्म स्थापना हो पाएगी? धर्म संस्थापना हो पाएगी ब्रह्मा कुमारी के अनुसार क्योंकि बुराई से अच्छाई की ओर जाना भी धर्म है और अच्छाई से बुराई की ओर आना भी धर्म है। ये इसलिए क्वेश्चन था। ठीक है? और अगर हम यह कहते हैं कि नहीं नहीं आत्मा जो है पाप कर्मों के बिना रह सकती है आत्मा। अब यह तीसरा पॉइंट आ गया बचने के लिए कि आत्मा पाप कर्मों के बिना उसका मौलिक स्वरूप है। तो पाप कर्मों के बिना जब मौलिक स्वरूप है तो मौलिक स्वरूप जब वो पहुंच रही है तो वहां से इधर आ रही कैसे है? पाप कर्मों से कौन डाल रहा है? अच्छा माया ये मानते नहीं है। प्रपंच रूपी संसार ये मानते नहीं है। नहीं तो सब कुछ उसमें आ जाए। समस्त कर्मों को करते हुए भी तू मुझे कर्ता मान। यह सनातन फिलॉसफी है भाई अकाट्य सिद्धांत कहीं से भी आ जाओ गिरा दिए जाओगे इसको कहते हैं सिद्धांत खैर तो वो तो ये मानते नहीं है तो अब ये मानना पड़ेगा कि वो जो बुराई इसमें नहीं थी वो आई कहां से किसने डाली परमात्मा बुराई डाल डालेगा नहीं इनके यहां क्योंकि वो वो नहीं है सर्वशक्तिमान परमात्मा तो ये वाली चीजें करता ही नहीं है तो
00:35:10:24 परमात्मा बुराई डालेगा नहीं तो क्या होगा जब परमात्मा बुराई डालेगा नहीं तो बुराई से अच्छा अच्छा पहले इन्होंने काफी देर तक बचने के लिए जो सूक्ष्म शरीर में डाल दिया बुराई मतलब विचारों को जबकि विचार जो है यहां पर भी ये फंसे विचार जो है धारण कर सकता है कोई चेतन तत्व चेतन तत्व केवल दो हैं परमात्मा और जीव तो परमात्मा तो बुराई धारण नहीं कर सकता इनके अनुसार क्योंकि माया इत्यादि ये मानेंगे नहीं प्रपंच मानेंगे नहीं तो वो धारण नहीं कर सकता तो क्या होगा फिर तो जीव या तो जीव में मानना पड़ेगा कि हां उसके अंदर बुराई पाप कर्म वगैरह भी सदा से थे हैं और रहेंगे। इसका मतलब जब कोई हत्या भी कर रहा है तो वह अपना मौलिक धर्म निभा रहा है। जब कोई रक्षा कर रहा है तो वह भी धर्म कार्य कर रहा है और जब कोई भक्षण कर रहा है वो भी धर्म कार्य कर रहा है। यह है इस पॉइंट में मैं लाना चाह रहा हूं। इस सच्चाई को आप समझिए। ब्रह्मा कुमारी के सिद्धांतों के अनुसार या जैसे जो दूसरे सेक्ट हैं इनके अनुसार जितना धर्म आचरण जिसे हम कहते हैं सदा सदाचरण जिसे हम कहते हैं वो धर्म है उतना ही जो दुराचरण है वो भी धर्म सिद्ध हो जाएगा क्योंकि हमें यह मानना पड़ेगा कि बुराई उसमें इनबिल्ट है आत्मा में इनबिल्ट
00:36:26:12 है बुराई और बुराई सच है माया तो है नहीं प्रपंच तो है नहीं सच है तो बुराई अगर सच है तो वह आत्मा में इनबिल्ट है तो इनबिल्ट है तो जब कोई हत्या करता है बलात्कार करता है चोरी करता है पाप करता है तो ब्रह्मा कुमारी जैसे तंत्रों के अनुसार वो भी धर्म है क्योंकि जिस जिस प्रकार से अशांति से शांति और शांति की यात्रा इनके यहां निश्चित है उसी तरीके से शांति से अशांति की यात्रा भी इनके यहां निश्चित है। तो जिस तरीके से सच्चाई का आलंबन लेकर के शांति की यात्रा करते हैं तो उसी तरीके से झूठ का आलंबन लेकर के अशांति तक की यात्रा भी इनके यहां सुनिश्चित है। ठीक है? तो अब क्या हुआ कि धारक तत्व इन्होंने सूक्ष्म शरीर मान लिया। तो सूक्ष्म शरीर से कनेक्ट कौन कर रहा है? मानना पड़ेगा। या तो वह खुद कर रही है। अगर खुद हो रही है तो फिर यह बुराई आ गई। सूक्ष्म शरीर से कनेक्ट होने का विचार ही बुराई है। भाई जब मालूम है कि यह पाप है तो इससे कनेक्ट क्यों हो रहे हो? तो यह विचार भी बुराई है। लो तो ये बुराई कहां रहती थी? आत्मा में ही रहती थी। इसका मतलब पाप कर्म भी आत्मा का शाश्वत धर्म है।
00:37:43:25 ठीक है? इस तरीके से इनकी सारी बातें खंडित होती हैं। आशा करते हैं आपको चीजें समझ में आ रही हो। [संगीत]
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क्या पाप करना भी आत्मा का मूल धर्म है? ब्रह्माकुमारी की थ्योरी डिकोड
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