⬜ Not used yet · 00:00:02:02 – 00:02:00:09 (1:58)
00:00:02:02 आज हम बात करेंगे कि भगवत पाद आदि शंकराचार्य जी मायावादी हैं कि नहीं है ना अब सबसे पहली बात यह है कि यह जो मावाद शब्द है इससे प्रॉब्लम क्या है इससे प्रॉब्लम यह है कि पद्म पुराण में मावाद के लिए कहा गया है कि जो मावाद है वह प्रच्छन्न बौद्ध सिद्धांत है और वह अ वैदिक होता है उस रास्ते पर नहीं जाना चाहिए इस श्लोक का आलंबन लेकर के स्कोन द्वारा अपने लोगों को शंकराचार्य के शुद्ध ज्ञान से बचाने के लिए पट्टी पढ़ाई जाती है कि मायावादी है मायावादी उनसे दूर रहना पद्म पुराण में मना किया गया है तो सबसे पहली बात तो यह है कि मायावादी
00:00:46:00 मायावादी आती है कि यदि इनसे पूछा जाए कि भाई पद्म पुराण में शंकराचार्य जी का नाम लेकर के तो नहीं बताया है कि शंकराचार्य ही जो सिद्धांत देंगे वही वाले मायावादी बात हो रही है क्योंकि माया वाद का अर्थ क्या है हर वो वाद जिसमें माया का माया का वर्णन हो रहा हो माया की बात हो रही हो तो वह माया वाद है तो इस प्रकार से माया का वर्णन तो इनके ग्रंथों में भी स्कोन के ग्रंथों में भी है लगभग सभी जितने भी हमारे प्रामाणिक आचार्य हैं उनके ग्रंथों में आपको माया शब्द एन केन प्रकार मिल ही जाएगा तो इस दृष्टिकोण से तो मायावादी सभी हैं मगर यह सीधे-सीधे शंकराचार्य के ऊपर लगाना कि ये जो पद्म पुराण में जो मायावादी बात हो रही वो शंकराचार्य के लिए ही हो रही है तो जब किसी स्कोन के व्यक्ति से इस प्रकार से पूछा जाता है कि आप जो है आदि शंकराचार्य जी को मायावादी क्यों कहते हो की फिलोसोफी
00:01:57:28 मायावादी है आपकी
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→ Used in: B · Video शंकराचार्य को मायावादी कहने वाला #iskcon अर्धपागल निकला @swamiRaghvacharya जी ने... at 0:30 ↗
00:02:00:09 ये ऐसा नहीं है कि बस इकन वाले बोल रहे हैं या कोई एक पर्टिकुलर संप्रदाय बोल रहा है
⬜ Not used yet · 00:02:07:04 – 00:12:04:21 (9:58)
00:02:07:04 ठीक है जितने भी संप्रदाय ले लो जितना भी इंफॉर्मेशन अवेलेबल है गल पे हर जगह प मायावादी को नहीं कहा गया ठीक है और सेकंड चीज आपकी फिलोसोफी बुद्धिज्म से काफी मिलती जुलती है देखिए ये एक तो इनका पहला पॉइंट होता है कि शास्त्रों में लिखा है मगर जब पूछा जाता है कि शास्त्रों में कहां लिखा है कि आदि शंकराचार्य मायावादी थे तो इनके पास कोई उत्तर नहीं है उसके बाद अगला इनका प्रश्न अगला इनका काउंटर होता है कि आपके आचार्यों ने स्वयं स्वयं कहा है कि हम मायावादी हैं पहली बात क्या शास्त्रों में ये लिखा है कि फलाने फलाने जो आचार्य होंगे वो जो स्वयं को मायावादी कहेंगे हमने उसी मायावादी है दूसरी बात कि जो हमारे आचार्य ऐसा कह रहे हैं क्या वह स्वयं को प्रच्छन्न बौद्ध मायावादी कह रहे हैं जो तो आप इस मायावादी होने को पदम पुराण से जोड़ रहे हो क्या वह स्वयं को अवैध मायावादी कह रहे हैं अधार्वा दी कह रहे हैं जो आप इसको उससे जोड़ रहे हो अच्छा एट द सेम टाइम वह स्वयं को सच्चिदानंद स्वरूप का बोध कराने वाला भी कहते हैं मगर उस पर इनको विश्वास नहीं है इनको उन्होंने जो मायावादी कह दिया है स्वयं को कहीं कहीं पर
00:03:22:08 किसी किसी ने तो इनको उस पर भरोसा हो गया बाकी के उनके सिद्धांतों भरोसा नहीं है तो ये तो अर्ध कुट न्याय है भाई कि आप जिसकी एक बात मान रहे हो उसकी दो बात दूसरी बात क्यों नहीं मान रहे तो फिर से बात आ जाती है कि उनको मायावादी मानने का आपके पास क्या सनातन सिद्धांत है कौन से शास्त्र में लिखा है तो अब यह इनका तीसरा पक्ष आ जाता है अब इस व्यक्ति ने को की मायावा अस शास्त्रम प्रचन बौम उच य उन्होने उसम कोट प्रचन बध नहीं शलोक बात हो रही है शलोक प्रक्षिप्त है या नहीं प्र कैसे हो सता कोट कर र बता नु जाचार्य जी ने अपने ग्रंथ में ब्रह्म सूत्र के भाष्य में 2.2 प 27 में बोला है इस श्लोक का उपयोग करते हुए जो आदि शंकराचार्य जी है उनका खंडन किया है ठीक है आप देख सकते हैं इस व्यक्ति ने पूरा श्लोक वहां पर उत किया है फिर बाद में अच्छा हमने जब उसको चेक किया तो वहां पर यह श्लोक नहीं है रावण जाचार्य जी ने वहां पर प्रच्छन्न बध कहा है ज्ञान मार्गी हों को मगर वहां पर श्लोक नहीं है दूसरी बात यह है कि अगर क्या यह रामानुजाचार्य जी को प्रमाण मानते हैं क्या उनके किसी भी सिद्धांत
00:04:37:10 का खंडन तो नहीं करते हैं करते हैं बिल्कुल करते हैं रामानुजाचार्य जी ने विष्णु की भक्ति बताई है और यह विष्णु को निम्न और श्री कृष्ण को उच्च बताते हैं अब व भक्ति रस है कि वह वाकई में भेदभाव कर रहे हैं वह एक अलग चर्चा का विषय हो जाएगा मगर ये एज इट इज रामानुजाचार्य जी का ज्ञान तो नहीं मानते हैं हा तो फिर ये उनके ऊपर भी डिपेंड नहीं हो सकते कि रामानुजाचार्य जी ने अगर उनको प्रच्छन्न बध कहा है तो इसी से सिद्ध हो गया कि ये वही प्रच्छन्न बध है जिसको मायावादी कहते हुए पदम पुराण में खंडन किया जा रहा है दूसरी बात ये व्यक्ति कहता है रामानुजाचार्य जी ने श्लोक का उपयोग किया है श्लोक का पूरा उपयोग किया है और वहां क्या लिखा है वेदवा दी प्रचन बध तो हमने जब इस व्यक्ति का काउंटर किया कि भैया वहां पर इस श्लोक का उपयोग नहीं किया है रामानुजाचार्य जी ने और ना ही प्रत्यक्ष रूप से वहां आदि शंकराचार्य जी लिखा तो यह बात भी कही जा सकती है कि रावण जाचार्य जी ने पता नहीं कौन से वेदवा दी प्रच्छन्न बौद्ध का खंडन वहां किया है क्योंकि उन्होंने स्पष्ट आदि शंकराचार्य जी भी वहां नहीं लिखा है संस्कृत में अब बात आती है कि रामानुजाचार्य जी ने कहां पर किसका खंडन किया किसको अवैध माना किसको नहीं माना यह बात हमें कैसे पता लगेगी जाहिर सी बात है अगर यह लोग जो यह आक्षेप लगा रहे हैं कि रामानुजाचार्य जी ने आदि शंकराचार्य
00:05:52:21 जी का क्या कहते खंडन किया है तो यह जो ज्ञान है ब्रह्म सूत्र उन तक आया कैसे कैसे आया परंपरा से तो उनकी परंपरा के जो प्रामाणिक आचार्य हैं वह स्वयम यह कह रहे हैं कि वह जो श्लोक है मायावादी है तो ये उनकी जिसकी एक बात को मान रहे हैं दूसरी बात को नहीं मान रहे अगर रावण जाचार्य जी ने प्रच्छन्न बध कह दिया आदि शंकराचार्य जी को तो इन्होंने तुरंत प्रामाणिक मान लिया उसे जबकि उनके ही दूसरे सिद्धांतों का स्वयं खंडन करते हैं और रावण चार्य जी की परंपरा के ही शिष्य बता रहे हैं कि वो जो श्लोक है वो प्रक्षिप्त है तो वो ये नहीं मानेंगे वो तो सही है उसके लिए इनके पास पांडुलिपि है अच्छा अब बात ये आती है कि रामन जाचार्य जी को अगर ये प्रमाण नहीं मानते तो उनकी इस बात को प्रमाण कैसे मान रहे हैं कि प्रच्छन्न बहुत आदि शंकराचार्य जी हैं क्योंकि इनके पास तो कोई भी अन्य शास्त्रोक्त प्रमाण उपलब्ध नहीं है कि भाई आदि शंकराचार्य का सिद्धांत ही वो
00:06:57:25 मायावादी इतना झूठ बोलता है जिसमें एक तरफ कहता है कि रामानुजाचार्य जी ने जो है इस श्लोक का पद्म पुराण वाले श्लोक का उपयोग करते हुए आदि शंकराचार्य जी का खंडन किया अपने ब्रह्मसूत्र के भाष्य में और बाद में जब बारी आती है दिखाने की प्रमाण दिखाने की तो वहां क्या दिखाता है आधी लाइन प्रच्छन्न बध वहां पर कहा है और आदि शंकराचार्य जी का तो नाम भी नहीं लिया है तो यह है त्रिया चरित्र जो संभवतः इसको न मंदिरों से सिखाया जा रहा है हमारी युवा पीढ़ी को कि अपनी वर्चस्व होता को स्थापित करने के लिए उन सिद्धांतों का भी आलंबन ले लो उन महानुभावों का भी आलंबन ले लो जिनको तुम नहीं मानते मगर अपनी वर्चस्व सिद्ध कर लो बाद में उन महानुभावों को भी मैं नहीं मानता है ना अब इसके बाद एक तर्क और दिया इस व्यक्ति ने कि भगवान शिव के ही अवतार के बारे में ये वाली बात है कि वो जो है आकर के ऐसा ऐसा प्रच्छन्न बहुत सिद्धांत देंगे वेद वेद वेदों की ठीक है तो इसलिए क्योंकि आदि शंकराचार्य जी शंकर भगवान के अवतार हैं इसलिए उन्हीं पर यह श्लोक फिट बैठता है भाई भगवान आदि शंकराचार्य जी जो हैं वह शंकर
00:08:12:28 भगवान के अवतार हैं शिव अवतार हैं यह किन श्लोकों से पता चलता है इससे तो पता नहीं चलता उनको अगर शंकर का अवतार मानना है तो दूसरे श्लोक है जिसमें कि उन्हें वैदिक कहा जा रहा है उनका अनुसरण करने वाले को मोक्ष प्राप्त करने वाला कहा जा रहा है तो फिर यहां तो खंडन है ना वहां पर प्रेज किया गया है उनको उनके अवतार को कुण पुराण में उनको प्रेज किया जा रहा है मगर ये वहां से लेंगे वहां से क्या लेंगे कि वो आदि शंकराचार्य जो है शिव के अवतार है वहां से केवल इतना लेंगे उनका वैदिक होना नहीं लेंगे जैसे रामानुजाचार्य जी से बाकी की चीजें नहीं लेंगे कि उन्होंने जो है विष्णु के बारे में क्या कहा या उनकी परंपरा प्राप्त जो आचार्य हैं वो उस श्लोक को प्रक्षिप्त कह रहे हैं वही परंपरा प्राप्त आचार्य जिनके कारण उन्हें वो ब्रह्म सूत्र प्राप्त हुआ है जिसके कारण जिसके आधार पर वय बोल पा रहे हैं कि रामानुजाचार्य जी ने उनको प्रच्छन्न बध कहा है ठीक है तो रामानुजाचार्य जी का सिर्फ बाकी की चीजें नहीं लेंगे सिर्फ वो लेंगे जिनसे इनका मंतव्य सिद्ध हो रहा हो उसी प्रकार से शास्त्रों से भी यह कर्म पुराण का कर्म पुराण सेब यह सिद्ध करेंगे कि शंकराचार्य जी शिव के अवतार थे तो यह वहां से सिर्फ शिव का अवतार लेंगे बाकी की चीज नहीं लेंगे वैदिक थे धर्मावलंबी
00:09:28:18 थे वो नहीं ले वहां से अच्छा इसी प्रकार से हमारे आचार्यों ने यदि कहीं कहीं पर स्वयं को मायावादी कहा है तो उनका सिर्फ मायावादी यह नहीं लेंगे कि वह वैदिक भी है व स्वयं को वैदिक भी कह रहे हैं यह नहीं लेंगे तो इस तरह से लेंगे और अंततोगत्वा इनका कहना है कि भाई अगर वह शंकर जो शंकर भगवान के जो अवतार है वो अगर वो वाले नहीं है प्रच्छन्न बध वाले या मायावादी जिनकी बारे में बात हो रही है पद्म पुराण में तो हमें आप दूसरा प्रमाण दे ये कौन सा ऐसा शंकर भगवान का अवतार है जो कि क्या कहते हैं ये जो कि जिसने कि अवैध माया बाद दिया हो तो यह कहां का सिद्धांत है भाई कि अगर आपको चोर नहीं मिल रहा है तो जो आपको सामने दिखाई दे रहे हैं उनमें से ही पकड़ के आप किसी को बना दोगे एक करोड़ असंख्य असंख्य अवतार बताए गए शिव भगवान के हां वो शिव भगवान के अवतार के प्रमाण दिखाओ आप मुझे और नहीं दिखाओगे तो मैं आपको बोल दूंगा आप ही हो वाले असंख्य है ना तो आप जिस कोन में जितने लोग हैं आज वो सब शिव भगवान के वही अवतार है जिसने कि प्रच्छन्न बध सिद्धांत दिया है मायावादी दिया है अधर्म फैलाने वाले लोग हैं और अब मैं बता दूं आपको शौर पुराण में कहा जा रहा है कि कुछ लोग ऐसे आएंगे
00:10:43:25 जो मलेच्छ को जो है गुरु बनाएंगे पाखंड फैलाए अधर्म फैलाए यह सब बातें इतनी सारी की जा रही है अब अब क्योंकि हमें कोई और नहीं दिख रहा है यह जो भविष्यवाणी है किस पर फिट बैठ रही तो हम आप पर कर देते हैं फिट कि मले को जो मलेच्छ देश में जन्म लेने वाले लोग हैं उनको आप गायत्री की दीक्षा दोगे मन गण द्वैत वादी विचारधारा फैलाओ ग जो जो द्वैत आचार्य होंगे उनके भी विरुद्ध व्याख्यान करोगे वर्ण और ब्रह्म का धर्म और ब्रह्म का तो यह सारी जो चीजें हैं वह हमें मिल नहीं रही है तो हम आपके ऊपर चिपका देते हैं सौर पुराण की तो क्या य उचित होगा तो कुल मिलाकर के जो
00:11:28:07 मायावादी कोई भी सनातन सिद्धांत नहीं है कि उसमें जिस मायावादी बात हो रही है प्रच्छन्न बौद्ध वाले मायावादी बात हो रही है वो वही मायावादी शंकराचार्य जी का मायावादी धार्मिक संस्थान के द्वारा बनाया गया नैरेटिव है जिससे कि लोग शंकराचार्य से दूर रहे और उनके माया जाल में फसते रहे उनका जो भ्रम जाल है माया जाल है उसमें फसते रहे और और अंततोगत्वा यह व्यक्ति बोलता है कि
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00:12:04:21 मेरे पास एक प्रमाण है कि श्रीपद राम चरने श्री भाष्य में यह कहा है इस चीज को कहा है
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00:12:11:08 कि मायावादी है लोक प्रक्षिप्त है या नहीं नहीं वो शलोक प्रिप कैसे हो सकता ब्र कोट कर र है बताइ कोहा है मायावा शस्त्र प्र ब उ प्र बलोक बात हो रही है श्लोक प्रक्षिप्त है या नहीं प्रैसे रामानुजाचार्य जी ने अपने श्री भाष्य में ब्रह्म सूत्र के भाष्य में लिखा है उस श्लोक का पद्म पुराण वाले श्लोक का उपयोग करते हुए आदि शंकराचार्य जी का नाम लेते हुए खंडन किया है उसके बाद जब हम इस बात का प्रतिकार करते हैं कि रामानुजाचार्य जी ने ऐसा कुछ नहीं लिखा है वहां पर ना ही वह श्लोक लिखा है और ना ही वो आदि शंकराचार्य जी का नाम लिया है तो यह भाई साहब फिर रील बनाकर कहते हैं कि देखो देखो प्रचन बहुत कहा है भाई बात श्लोक की हो रही है कहां है श्री भाष में वह श्लोक कहां है मतलब कि यहां पर आप स्तर देखिए तोहरे चरित्र का त्रिया चरित्र का किस तरह का चरित्र निर्माण किया जा रहा है तथाकथित जो यह बता रहे हैं कि हमको वहां से धर्म की शिक्षा मिलती है उन केंद्रों से किस तरह का जो चरित्र है वो निर्माण हो रहा है व्यक्ति पहले कह रहा है कि बहुत से लोग
00:13:26:16 कहते हैं इसलिए मैं आदि शंकराचार्य जी को मायावादी मान की फिलोसोफी मायावादी है आपकी
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00:13:49:19 ये ऐसा नहीं है कि बस इकन वाले बोल रहे हैं या कोई एक पर्टिकुलर संप्रदाय बोल रहा है
⬜ Not used yet · 00:13:56:14 – 00:17:12:00 (3:16)
00:13:56:14 ठीक है कितने भी संप्रदाय लेलो जितना इंफॉर्मेशन अवेलेबल है गल पे हर जगह पर मायावादी को नहीं कहा गया ठीक है और सेकंड चीज आपकी फिलोसोफी बुद्धिस्म से काफी मिलती जुलती है देखि उसके थोड़ी देर बाद कहता है मैंने य बात कही नहीं पहले प्रमाण मांगता है उसके थोड़ी देर बाद कहता है मैंने प्रमाण मांगा ही नहीं पर से तो ये परंपरा हां ले लिया
00:14:34:28 इंस्ट्रक्शन हां ले लिया इंस्ट्रक्शन हां ले लिया इंस्ट्रक्शन हेलो क्यारी आवाज आ रही हेलो क्या हेलो जनक नहीं मिला नहीं नहीं नहीं वो आपकी रिलेटिविटी है शिवाजी देखो ट वो आपकी रिलेटिविटी है शिवान जीी देखो वो आपकी रिलेटिविटी है शिवान जी देखो पद्म पुराण व्यास बल्कि शंकराचार्य के बाद है अब इन्होंने आगे लिखा है पूरा शुरू से लेकर के अंत तक आप देखेंगे अगर वीडियो को तो उसमें ऐसा सुनाई दे रहा है कि कोई इनको इंस्ट्रक्शन दे रहा है निर्देश दे रहा है इनकी सहायता कर रहा है ठीक है सहायता कर लीजिए ले लीजिए मगर उससे जो बाधा आ रही है चर्चा में वह तो ना आने दीजिए मगर एक व्यक्ति कहता है नहीं नहीं नहीं वह अपनी बातें कर रहे हैं उसमें साफ कई जगह पर खुसर पुसर आवाजें आ रही है इंस्ट्रक्शन दे रहा है इनको व्यक्ति
00:15:50:06 और यह हम मतलब हमको मतलब पूरी जनता को जो उसको देख रही है उसको जो है सीधे-सीधे सरे सरासर जो है उनकी आंखों में मिर्च डाल कि नहीं वहां कोई नहीं है कमरे में और भी कई लोग है क्या कहां पर आपको देखना दिखा द एक ब एक बार लोगों को दिखा दीजिए य है कैमरा फ्लिप कैसे होता है इसम अच्छा चलिए हटाइए छोड़ रहने दीजिए देखिए पूरा स्टूडियो है य कोई नहीं य है
00:16:30:21 रहा तो यहां बुक है आपके पॉइंट लिखने के लिए ठीक ठीक है ठीक है बहुत अच्छी बात है अब आप ये बताइए अब आप ये बताइए सेक न प्रभ पेन पेन ठीक है कोई बात नहीं अब आप ये बताइए कि वीडियो आपने कहा कि अगर वो मुझे फील पहले कहता है कि मेरे कमरे में कोई नहीं है फिर थोड़ी देर बाद कैमरा घुमा के भी दिखाता है कि भई जो है यहां पर कोई नहीं है और फिर थोड़ी देर बाद वहा पर कोई नहीं है फिर थोड़ी देर वही पर पेन मांगता है इशारे होते हैं प्रामाणिक परंपरा हां रामानुजा चार परंपरा कब के है 19वी सदी
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→ Used in: B · Video शंकराचार्य को मायावादी कहने वाला #iskcon अर्धपागल निकला @swamiRaghvacharya जी ने... at 7:01 ↗
00:17:12:00 के ही है अरे तो 19वी सदी के तो उसको फ प्रमाण कैसे मान लेंगे हम लोग मतलब
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00:17:16:21 अगर कोई आचार 19वी सदी में ऑथेंटिक गुरु परंपरा से होगा तो प्रमाणिक नहीं माना जाएगा 19वी सदी की बात ही नहीं है अरे तो 19वी सदी तो उसको प्रमाण कैसे मान लेंगे हम लोग 19वी सदी की बात ही नहीं है अरे तो 19वी सदी तो उसको प्रमाण कैसे मान लेंगे हम लोग इसके बाद थोड़ी देर के बाद कह कि 19वी सदी के हैं तो हम उनको प्रमाण कैसे माने फिर थोड़ी देर बाद कहता है 19वी सदी का कोई वही नहीं है इसमें प्रमाण ना मानने के पीछे आधार फिर थोड़ी देर बाद कहता है कि मैंने अभी उसे पूरी तरीके से रिजेक्ट नहीं किया है सुनो अभी तक मैंने उस चीज को कंपलीटली रिजेक्ट भी नहीं किया मैंने आपसे बस क्वेश्चन
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→ Used in: B · Video शंकराचार्य को मायावादी कहने वाला #iskcon अर्धपागल निकला @swamiRaghvacharya जी ने... at 8:31 ↗
00:17:45:14 पूछा किस आधार पर कहा आप इस अध्ययन करिएगा कि उन्होंने क्या कहा किस आधार प गलत कहा सही कहा दे
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00:17:51:14 रहे मैं क्यों अध्ययन करू जा आप प्रमाण दो आप कपलीट रिजेक्ट नहीं कर रहा हू तो आप अभी बीच मदार में हो ना एक तरफ कहता है झूठ नहीं है गलत एक तरफ कहता झूठ नहीं गलत है झूठ नहीं गलत है फिर कहता है अनय है अनय है और फिर लास्ट में कहता है एक तरीके से झूठ भी कह सकते हैं एक तरीका एक तरीका कोई भी बात आपकी स्पष्ट है क्या मु हो ग क्या मुक्ति के बाद होगा कि नहीं नहीं तोय सब हो रहा क्या ू हैसे हो रहे
00:18:24:24 ता व कोसे करने वाले होते नहीं हो सकती भावना गलत हो सकती है गलत हु यार झूठ नहीं होता किसी की पत्नी उसको प्यार ना कर पति को वो हो सकता है दिखा रही है लेकिन वो पत्नी प्रेम कर रही है ये चीज रियल नहीं एक्टिंग है तो अभी जो मुझे एक्सपीरियंस हो रहा था ये तो रियल था मगर जिस कारण से एक्सपीरियंस हो रहा था वो अरियल था यही है ना गेम में उसको लग रहा है मैं मरने वाला हूं गड्ढे में गिरने वालाला हूं या हीरो से अगर वो करेक्ट है हीरो को दुख हो रहा है फिल्म के तो उसको लगता है कि अरे यार इसके साथ गलत हुआ मगर कौन सी इंफॉर्मेशन ऐसी होती है जिसके कारण वो सस्टेन कर पाता है वो तब भी नॉर्मल रह पाता है विचलित नहीं होता है जब उसको ये पता चलता है कि दिखाया गया था ये सिफ्टिंग था हां ये झूठ था जो दिखाया गया दि समथा बसरा यहां तक हो गया यानी कि वो जिसको मैं प्रेम समझ रहा हूं वो रियल नहीं है हां एक तरीके से कह सकते है वो झूठ है झूठ तर तरीके से तरीके से बोल सते कोई सिद्धांत है क्या ये धर्म है क्या जो सिद्धांत ही नहीं है जो तुम्हारा क्लियर ही नहीं है तो इसको तुम धर्म कहते हो धर्म का मतलब होता है मर्यादा निश्चित होती है मर्यादा आपके सिद्धांत ही नहीं क्लियर है एक तरीके से एक तरीके से अ ब ब ब पूरे में ये चला है अपनी बातों से मु करते रहो तो मैं मैं ये कह रहा था कि आप देख सकते हैं कि किस स्तर का मतलब त्रिया चरित्र का निर्माण हो रहा है नव युवकों का किस प्रकार से वहां पर इसको क्या कहेंगे ब्रेन वाशिंग नहीं कहेंगे
00:19:39:24 तो क्या कहेंगे कि व्यक्ति सत्यवादी बजाय झूठ वादित मिथ्या वादित को ही अपना धर्म समझ रहा है और हमने जब इन्होंने यह कहा कि रामानुजाचार्य जी ने अपने श्री भाष्य में आदि शंकराचार्य जी का नाम लेते हुए और इस श्लोक का पदम पुराण वाले श्लोक का उपयोग करते हुए आदि शंकराचार्य जी का खंडन किया है तो हमने इस सापेक्ष में कि रामानुजाचार्य जी ने माया वादम अश श आश्रम वाला जो श्लोक है उसका उपयोग अपने श्री भाष में नहीं किया यह बता इस संदर्भ में हमने वहां पर प्रच्छन्न बध ना होने की बात कही तो यह व्यक्ति इसको पकड़ कर के और हमें झूठा सिद्ध करने का प्रयास कर रहा है जो पूरी चर्चा में झूठ बोलता है जो व्यक्ति कहता है कि रामानुजाचार्य जी ने जो है यह पदम पुराण का यह श्लोक जो है प्रक्षिप्त नहीं माना है बल्कि उसका उपयोग करते हुए आदि शंकराचार्य जी का खंडन किया है और फिर बाद में जब दिखाता है उनका श्री भाष्य तो व श्लोक नहीं दिखा पाता है वह केवल व दो शब्द दिखाता है प्रच्छन्न बौद्ध व श्लोक कहां है और अपनी झूठ के आधार पर रामानुजाचार्य जी के जो परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्य श्री माधवाचार्य शास्त्री जी जिन्होंने उस श्लोक को प्रक्षिप्त कहा है उनको अप प्रामाणिक ठहरा रहा है व्यक्ति
00:20:55:15 सोचिए किस स्तर के त्रिचर का निर्माण हो रहा है उन केंद्रों में जिनको ये सनातन धर्म का ज्ञान देने वाला कहते हैं सनातन धर्म का प्रचार करने वाला कहते हैं है ना अरे भाई आपका अपना सिद्धांत कहां है शंकराचार्य को अवैध मायावादी मानने का जिसकी बात पद्म पुराण वाले श्लोक में हो रही है पहली बात तो वो श्लोक प्रक्षिप्त है मगर अगर उसको मान भी लिया जाए कि वह सही श्लोक है प्रक्षिप्त नहीं है तो उस श्लोक में जिस मायावादी बात हो रही है वैदिक मायावादी वो मायावादी मायावादी शंकराचार्य जी का
00:21:33:07 मायावादी कहां है शास्त्र में है नहीं कहां है कौन से वह सनातन सिद्धांत है जिसके आधार पर आप यह कह रहे हो कि जो है यह जो आदि शंकराचार्य जी का मायावादी मायावादी भास वाले श्लोक में हो रहा है आपके पास क्या सिद्धांत है आपके आचार्यों ने माना है रावण जाचार्य ने माना है बहुत से लोगों ने माना है और क्योंकि और कोई अवतार नहीं है इसलिए यही व अवतार है है ना और जो लोग यह समझते हैं ना कि हम लोग अपने जो हमने जो सिद्धांत को स्वीकार किया उसकी महिमा मंडन के लिए सब करते नहीं ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता को बचाने के लिए करते हैं ईश्वर में बाधा ना आ जाए इसलिए हम इस सिद्धांत का प्रचार प्रसार करते हैं ईश्वर के बाधित होने में ही अधर्म की उत्पत्ति होती है इसीलिए कहता हूं मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करो शंकराचार्य का विरोध करते हुए ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर सकने वाला इस संसार में कोई भी नहीं है अगर
00:22:48:18 ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करना है तो आपको शंकराचार्य का आलंबन लेना ही होगा जय श्री राम [संगीत]
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