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00:00:01:26 मिथ्या नंबर छ ब्रह्मा विष्णु महेश की उत्पत्ति दुर्गा से हुई है जिन्हें इन मिथ्या चारियों ने काल ब्रह्म ज्योति निरंजन की पत्नी बताया है वह काल ब्रह्म ज्योत निरंजन जो परम ब्रह्म नहीं है एवं परम तत्व इन सबसे भिन्न है ठीक है तो अब प्रमाण पर आते हैं देवी परब्रह्म है कि नहीं पहली बात तो यह है देवी परम ब्रह्म से भिन्न नहीं है इसके बारे में हमने पीछे भी देख लिए अभी यहां पर भी देख लिए ऋग्वेद में परमेश्वर परमात्मा नित्य सनातन सच्चिदानंद स्वरूप परम तत्व ही है देवी परम ब्रह्म से अभिन्न है 10 125 ये वहां पर आया है देवी सूक्त में 10 125 पढ़िए जो
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00:00:51:16 देवी शक्ति है वही परमात्मा है जो परमात्मा है वही शक्ति है देवी भागवत
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00:00:56:03 तीन सा 14 से 15 तो अब यह बताइए जब परमात्मा और देवी एक है तो क्या कबीर जी पत्नी बने हैं ज्योति निरंजन की क्योंकि यहां से सिद्ध हो रहा है कि देवी जो है वह परमात्मा एक ही है तो देवी भगवती ही ब्रह्म और ब्रह्म की शक्ति है देवी भागवत 36 11 और देवी शक्ति ही परमात्मा है और परमात्मा जो परमात्मा है वही शक्ति देवी भागवत 3 सा 14 से 15 देवी और परम
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00:01:28:20 ब्रह्म एक है देवी में और उसमें किंचित मात्र भेद नहीं है देवी भागवत
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00:01:33:00 नछ दो प्रकृति और पुरुष यह दोनों सर्वत्र व्याप्त है इन्हीं लोगों को आद्य शक्ति और परमात्मा कहते हैं क्या बात है क्या बात है परमात्मा किसको कहते हैं प्रकृति और पुरुष देवी और ब्रह्म जो ब्रह्म और ब्रह्म की शक्ति है ठीक है अंततोगत्वा फिर से बात आ जाती है भगवती नाही स्त्री है ना ही पुरुष है ना ही नपुंसक ही है देवी भागवत तीन छ साथ तो उनका किसी प्रकार से किसी की पत्नी होना या जिस तरह से आप बायोलॉजिकल मां या पिता रूप में वो प्रतिष्ठित करने का प्रयास करते हो किसी एंटिटी को वो कैसे सिद्ध होता है
00:02:13:16 हैं ऐसे में उनके द्वारा उत्पन्न होने के कारण उनके उनका किसी की माता अथवा किसी की पत्नी होना सिद्ध नहीं होता एवं इस प्रकार विभिन्न रूपों में दिखाई देना देवी भागवत पुराण द्वारा भगवती रूप में ख्या पित परम तत्व की लीला मात्र है क्या है लीला सृष्टि करने के लिए योग माया का आश्रय लेकर परमात्मा ने अपने दो भाग कर लिए जिसमें से बाया भाग प्रकृति कहा गया यही प्रकृति देवी ब्रह्म स्वरूपा नित्या और सनातनी सनातनी है अगर आपका ईश्वर कुछ और डिफरेंस डिफरेंसेस है तो ठीक है मगर वो सनातन ईश्वर नहीं है सनातनी ईश्वर कौन है देवी मां देवी भागवत 99.1 8 से 10 अगर इससे अलग करते हो अपने ईश्वर को देवी से तो वो सनातन ईश्वर नहीं सनातन ही है क्या जा रहा है सनातन है अगर उसको भी सनातन कहा जा रहा तो तुम्हे मानना पड़ेगा कि देवी और व एक है यह उनके लिए है जो कबीर पंथिया से थोड़ा सा ठीक है भगवती सगुणा या निर्गुणा केवल कार्य भेद से देवी भागवत 39 34 37
00:03:28:27 मैं और परब है तो भी माया रूपी कार्य कारण की उपाधि से यह सारे आपको प्रमाण मिल ठीक है अब बात य आती है ध्यातव्य की जो हृदय से झुलसा देने वाली उपरोक्त मिथ्या देवी भागवत के आधार पर प्रचारित की जाती है जबकि देवी भागवत के ही द्वारा सृष्टि का उत्पन्न होना भगवान श्री कृष्ण के द्वारा भी बताया गया है यह मानोगे भाई वही परम तत्व विष्णु है विष्णु ही कृष्ण है तो देवी भागवत में भगवान कृष्ण के द्वारा भी सृष्टि का उत्पन्न होना बताया गया है वहां पर देवी नहीं कर रही सृष्टि की रचना देवी कृष्ण से आदेश ले रही है कृष्ण परम नियंता हो गए वहां कल्प भेद से ठीक है कल्प भेद यानी सृष्टि कई बार बनी तो किसी सृष्टि में कृष्ण के रूप में परम नियंता को रखा गया किसी सृष्टि में विष्णु के रूप में परम नियंता को रखना गया वस्तुत एक ही परम तत्व के अलग-अलग नाम रूप हैं मात्र और यह भी ध्यान रखने की बात है कि पूर्व जन्म के प्रभाव के कारण या फिर इस जन्म में मिले हुए संस्कारों के कारण व्यक्ति की रुचि ये जो पांच रूप है या इन पांचों रूपों के जो अवतार हैं राम कृष्ण आदि
00:04:44:07 उनमें से एक के प्रति आस्था बन जाती है तो ऐसे में शास्त्रों को नकार ना नकारते हुए कैसे अपने ईष्ट के प्रति भक्ति करें कैसे उसमें अनन्य का भाव देखें तो हे ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश मैं आप सबकी भक्ति इस रूप में करना चाहता हूं राम रूप में करना चाहता हूं मुझे आप सभी आप सभी की भक्ति राम रूप में देने की कृपा करें और मस्त होकर के आप जो है भगवान की भक्ति करिए क्या दिक्कत है भगवान के सभी रूपों को भगवान माना और राम में आवान कर लिया उन सबका श्री राम के अंदर और राम रूप में भक्ति करो इसी कारण से यह जो सामर्थ्य वान गुरुओं तक ना पहुंचने के कारण ही कई बार जो मन स्थिति होती है उसके आधार पर रस पूर्वक रस में डूब करके नहीं नहीं राम से भिन्न राम से भिन्न कोई भी वो नहीं है राम से ऊंचा कोई भी नहीं है कृष्ण से ऊंचा कोई भी नहीं है विष्णु से ऊंचा कोई भी नहीं है शिव से ऊंचा कोई भी नहीं है यह सभी बातें भक्ति रस में कही जाती हैं जब अपने ईस्ट के प्रति बहुत ज्यादा अनन्य होता का भाव आ जाता है तो जैसे एक व्यक्ति अपनी बिटिया के लिए कहता है कि तुमसे अच्छी बिटिया संसार में और कोई नहीं है तुमसे अच्छी मां और कोई नहीं है ऐसा नहीं है कि यही अंतिम सत्य है मगर उसका
00:05:59:08 अपने ने अन्यता के भाव को कि मुझे तुम्हारे अलावा और कोई नहीं चाहिए उस भाव को एक्सप्रेस करने के लिए व्यक्त करने के लिए लाइने होती हैं जो कि वहां पर बड़ा छोटा बड़ा बड़े छोटे के रूप में वहा आपको दिखाई देती है जो हमारे जो आचार्य गण ऐसे बोल देते हैं कहीं कहीं पर वैष्णव वैष्णवास्त्र भाव है जिसको प्रस्तुत किया गया है ठीक
00:06:39:15 है अब यह देखिए कृष्ण भगवान सृष्टि की रचना कर रहे हैं तो क्या हो रहा है श्री कृष्ण चंद्र परमात्मा की आज्ञा से वह देवी प्रकृति पांच प्रकार की बन गई किसकी आज्ञा से भगवान श्री कृष्ण की कौन देवी वही मां भगवती देवी भागवत 9 एक 12 1 भती का पांचवा स्वरूप देवी राधा यह राधा जी की प्रामाणिकता है भगवती
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00:07:05:09 का पांचवा स्वरूप देवी राधा परमात्मा श्री कृष्ण को प्राणों से भी प्यारी है
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00:07:12:10 तो यहां पर परमात्मा किस रूप में देखे जा रहे हैं श्री कृष्ण के रूप में और उनकी जो प्राणों से प्यारी यानी उनको सबसे ज्यादा प्रिय कौन है वहां पर राधा है देवी भागवत 91.44 ऐसा होता है कि कई बार हमें किसी के प्रति ऐसी भावनाएं व्यक्त करनी होती हैं जिनको व व्यक्त करने के लिए हमें शब्द नहीं मिल रहे होते हैं तो जो उपलब्ध शब्द होते हैं उन्हीं के आधार पर हमें वह एक्सप्रेस करना पड़ता है हम पूरी तरीके से अपने भाव को एक्सप्रेस नहीं कर पाते तो यह जो यह जो स्थिति है यही एक तरीके से निर्गुण निराकार की भी व्याख्या है कि निर्गुण निराकार वह है जो किसी के व्यवहार में नहीं आ सकता मगर हम उसके बारे में बात तो कर रहे हैं तो हमारे पास उपलब्ध शब्द क्या है जो व्यवहार में नहीं आ सकता तो लो भाई इसी के आधार पर हमने जो व्यवहार में ना आ सकने वाला उसके बारे में बात की मगर यह हमारी व्यवस्था है वस्तुतः व व्यवहार में नहीं आ
00:08:15:10 सकता तो इसी प्रकार अन्य अन्य शास्त्रों में परम ब्रह्म के अन्य लीलाम स्वरूपों द्वारा देवी तथा संसार की उत्पत्ति बताते हुए उस स्वरूप को परमात्मा कहा गया है शिव ही परमात्मा है शिव महापुराण एक पा बा तो यहां पर क्या हुआ शिव के द्वारा सृष्टि ब्रह्मा विष्णु और शंकर रूप से जगत की उत्पत्ति स्थिति एवं समार के कारण विकार रहित विष्णु ही सृष्टि कर रहे हैं तो यह विष्णु पुराण आ गया दूसरा अध्याय एक एक से तीन दूसरा अध्याय एक से तीन तो वही वाली बात है जो विष्णु है अब इनमें अब इनकी एकता है अलग अलग शास्त्रों में इनके नामों से सृष्टि की रचना बता दी गई मगर उन्हीं शास्त्रों में इनकी एकता भी बताई गई है कि इनमें कोई भेद नहीं है भेद करना पाप है और जो कहीं पर श्रेष्ठता और निम्न होता के भाव प्रस्तुत करने वाले वो आए भी है तो उन्हें हमें भक्ति रस में अन्यता का भाव अनन्य होता का भाव लाने के लिए समझना होगा तभी शास्त्रों की रक्षा हो सकेगी वरना उनको रियल समझ लेंगे तो यह गलत सिद्ध हो जाएंगे जहां एक बताया जा रहा है तो हमें वहां यह रखना होगा कि वो जो पंक्तियां आ रही है वो इस जो अनंतता का भाव प्रकट कर के लिए आ रही है ईट
00:09:30:10 के प्रति उनकी भी आवश्यकता है तो जो विष्णु है वही शिव है इन दोनों में कोई भेद नहीं है भेद भाव रखने वाला नरक यातना भोगनी पड़ती है ब्रह्मा के विषय में भी यही समझना चाहिए कि उनमें और विष्णु एवं शिव में कोई
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00:09:46:14 भेद नहीं है महाभारत अनुशासन पर्व मोक्ष धर्म पर्व 341 27 से 28 श्रीमद् भागवत दो च 12 श्रीमद् भागवत 12 10 22 वरा पुराण 70 30 26 से 27 39 से 40 नारद पुराण
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00:10:02:10 28210 172 15158 से 159 और श्रीमद् भागवत 8 सा 2 यह सब बता रहे हैं कि यह सभी जो है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश इत्यादि यह सभी एक हैं एक है और शुरू में भी हमने ले लिया जहां से भगवान में कैसे भगवान अलग-अलग जो कार्य है उनको करने के लिए पांच अलग-अलग प्रकार के कृत्यों के निर्वाह के लिए वह पांच अलग-अलग रूपों में व्यक्त होते हैं जहां एक और भगवान श्री कृष्ण अब एकता को और बताने वाला प्रमाण हम प्रस्तुत कर रहे हैं भगवान श्री कृष्ण भगवत गीता में क्या कह रहे हैं कि छंदों में मैं गायत्री हूं ठीक है और वेदों को किसके परायण बताया गया है वहां भगवान श्री कृष्ण क्या कह रहे छंदों में गायत्री हूं और तू मुझको भज तू मेरा ध्यान कर मेरी शरण में आकर के मुक्ति को प्राप्त हो जाएगा तो यह सब उन्होंने अपने लिए बोला और वेदों के परायण कौन है श्रीमद् भागवत के अनुसार विष्णु भगवान और हमने पीछे जाना पीछे हम जान कर के आए कि वेदों के द्वारा कौन जाने जाते हैं शिव जी
00:11:18:08 और वेद किसका विचार है गायत्री छंद इत्यादि किसका विचार है शिव जी का तो इस संबंध में प्रमाण ले लीजिए श्रीमद् भगवत गीता 1035 श्रीमद् भागवत 87 30 श्रीमद् भागवत दो पा 15 श्रीमद् देवी भागवत 12 च सा ठीक है देवी ही कारण रूप से समस्त विश्व की रचना करती है ऋग्वेद 10 125 प8 तो अब क्या बात आ जाती है
00:11:50:02 कि भगवती परमात्मा परम ब्रह्म के साथ भगवती का परमात्मा परम ब्रह्म के साथ एकत्व का वर्णन नहीं होना चाहिए मगर है और ब्रह्म के साथ भी है तो आप या तो यह मानो कि तीनों एक हैं या तो यह मानो कि देवी भागवत गलत है जिसके आधार पर हम जो है अपनी मिथ्या को प्रचारित प्रसारित करते हैं है ना तो सना आप कुछ भी कहिए कोई दिक्कत नहीं सनातन शास्त्रों का सहारा लेकर के बोलेंगे तो दिक्कत है कुछ भी ई नया कल्ट बना लीजिए भाई जैसे इस्लाम है बाइबल है है ना बाद में आने वाले कई और क है आप भी बना लीजिए अपना नया कल्ट कोई दिक्कत नहीं है वो फिर तब बात होगी सनातन विरुद्ध विचारधारा के अनुसार अब आपकी एक मिथ्या आती है कि देवी भागवत के अतिरिक्त जो है ऐसा सुनाई देता है कहीं-कहीं से अन्य सभी पुराण काल्पनिक है जैसे हमने इसमें शिव पुराण का भी दिया हालांकि हमने वेदों का भी दिया है मगर हमने शिव पुराण कहा और हमने भागवत कह दिया तो अब हो सकता है कि वो जो आपके जो लोग हैं जो वीडियो बनाते हैं वो एकम अद्वितीय यह सब वीडियो बनाओ वो कौन है वो फैक्ट वाला है कोई तोय सब
00:13:05:02 वीडियो बनाते व क्या करते हैं कि पूरे वीडियो में ढेर सारी बातें हैं मगर उनमें से वह बात पकड़ लो जिस पर हम बोल सकते हैं या जिस पर हमने रटा हुआ है पहले से है ना तो अब भागवत प मैंने प्रमाण दे दिया तो वो ऋग्वेद को नहीं देखेंगे ऋग्वेद से भी दिया सबसे भागवत देखो भागवत जो है उनके पास कुछ होगा पर हम अभी वो भी सिद्ध कर देंगे जो होगा ना जो होगा वो आप कर सकते हो उसका भी निस्तारण यही है तो क्या है कि देवी भागवत से ही अन्य पुराणों की प्रामाणिकता सिद्ध हो जाती है देवी भागवत में क्या बताया गया है सारे पुराण 18 पुराणों के नाम बताए गए हैं कहां पर बताया गया है भागवत देवी भागवत एक प्रथम स्कंध है एक एक से तीन ठीक है और यही बातें यही जो सूची है वह श्रीमद् भागवत अध्याय 13 में दी गई है नारद पुराण अध्याय चार में दी गई है अच्छा श्रुति शास्त्रों में भी यह जो 18 महापुराण है इनका कहीं कहीं पर संदर्भ मिल जाता है ढूंढने पर क्या है यजुर्वेद में 13 तीन में बात हो रही है अग्रिम पुराण ब्रह्म पुराण के बारे में बात हो रही
00:14:20:10 है और पदम पुराण में ऋग्वेद 1082 छ में बात हो रही है कि विष्णु भगवान की नाभी में एक अंड रूप पद्म जन्मा था इसी पद्म की व्याख्या जो हुई है वो पद्म पुराण बना प्रजापति परमात्मा ने यजुर्वेद मूलक विष्णु पुराण को बनाया यह कहां हो रही है बात तैत्र आरण्यक दो तीन दो चर पढ़ना ये आरण्यक वगैरह कहां जानते हैं भाई बस एक ही रट्टा विद में प्रमाण है ओए यह सब सुना ही नहीं होगा तैत्र अरण्यक सपद ब्राह्मण सब सुना है क्या कभी हां तो पता करो अरण्यक क्या है तैत्र क्या है सपद ब्राह्मण क्या गोपद ब्राह्मण क्या है थोड़ा पता करो अभी निरुक्त भी आ जाएगा अभी निरुक्त आएगा वो भी पूछना अग्नि पुराण मेरी जीवा पर स्थित है यानी कंठा ग्र है तो यहां अग्नि की बात हुई तत्र अरण्य में तीन 10 आ चर भविष्य पुराण की बात हो रही रण में न बनती तो यह शति शास्त्र है शति का अंश है शति शास्त्र है यह पुराण नहीं है कर् नामक की बात हो रही स ब्राह्मण में तो ऐसे ही अन्य अन्य पुराणों की बातें जहां जहां हुई उदाहरण के रूप में आपको मैंने दे दिया है और
00:15:35:12 जितना अवेलेबल है व यहां आपको मिल भी जाएगा स्क्रीन पर [संगीत]
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