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00:00:01:28 [घंटी की आवाज़] सनातन हिंदुओं को नष्ट किया जा रहा था तो मैं बहुत परेशान होता था उनको देख के और समझ में भी नहीं आता था क्या करूं फिर धीरे-धीरे आपकी आपके बारे में जाना आपकी शरणागत हुआ दीक्षा भी प्राप्त की तो आपने एक निर्देश दिया था आज से कुछ वर्षों पूर्व मुझे जब मैंने ये सारी चीजें आपके समक्ष रखी थी तो आपने कहा था कि ऊपर ईश्वर का बल और नीचे संघ का बल आप पहले उसको संकलित करें, इकट्ठा करें। तब जाकर के आप जो है सनातन मानव लोगों की रक्षा के लिए निकलें। गुरुदेव एक बात आती है कि हमारे कई सनातन के धर्म सनातन धर्म के मंदिर ऐसे हैं जिसमें कि जो पूजा अर्चना है भगवान की वो विधि पूर्वक नहीं हो रही है। तो जो सामान्य हिंदू जन है उनको उन मंदिरों के प्रति किस तरह दृष्टिकोण रखना चाहिए। कई कई लोग ज्यादा शास्त्र की मर्यादा के कारण उपेक्षा भी करने लगते हैं। तो किस तरह का दृष्टिकोण होना चाहिए गुरुदेव ऐसे मंदिर के लिए जी
00:01:06:24 पुराण है प्रतिष्ठा ना हो तो देवता का नहीं होता है। प्रतिष्ठा और पूजन आदि ना हो तो मूर्ति सिद्धि शक्ति हो जाती है। जाने शक्ति प्रसाद आदि अशुभ शक्ति का सो जाता है और शक्ति बुरा पहचा देती है। बुरा तो गुरुदेव ऐसे मंदिरों में दर्शनार्थ पहुंचे सामान्य हिंदू जन या ना पहुंचे। जी
00:01:48:02 शायद व्यक्ति ना पहुंचे आम जनता ना पहुंचे तो कर लेंगे [गला साफ़ करने की आवाज़] पिता से तो दर्शन आज होता ही नहीं है कि कहां से दर्शन करना चाहिए कि का दर्शन मंदिर का दर्शन करना चाहिए आज तक तो है नहीं इसलिए व्यक्ति ना जाए हम जनता नहीं जाएंगे तो तो क्या होगा पर कब्जा कर लेते आपके मतलब नहीं है हम कब्जा कर लेते हैं
00:02:31:08 यह वो प्रश्न है जिसने मेरे साथ-साथ मुझ जैसे कई शास्त्रनिष्ठ लोगों को जो लोग शास्त्रों में आस्थानित हैं उन लोगों को परेशान कर रखा था क्योंकि भारत के अधिकांशतः मंदिर ऐसे ही हैं जहां जहां पर विधि निषेध का पालन नहीं हो रहा है या फिर वहां पर ऐसे ऐसे विग्रह भी हैं जो हमारे लिए पूजनीय नहीं है। आप समझ रहे होंगे मैं किनकी बात कर रहा हूं साईं की तो कई बार होता है जो प्रामाणिक आचार्यों से जो लोग जुड़ गए हैं शास्त्र निष्ठावान है। शास्त्रनिष्ठ हैं। शास्त्रों में आस्थान्वित हैं। तो वह कई बार स्वयं को इस दोराहे पर खड़ा पाते हैं कि भाई यह सार्वजनिक रूप से एक हिंदुओं का स्थल है। इसमें लोग जा रहे हैं। अब मैं यहां जाऊं कि ना जाऊं। तो इस प्रश्न का हल वैसे तो आपने देख ही लिया गुरुदेव ने क्या दिया। इसी क्रम में आगे गुरुदेव ने यह भी बताया कि वो जो सिद्धांतिक लोग हैं वो कौन है? जैसे करपात्री जी महाराज जिनके जीवन में शास्त्र निष्ठा तप के रूप में शौचाचार के रूप में इत्यादि लगभग प्रत्येक जितने भी क्षेत्र होते हैं शास्त्र द्वारा निर्देशित उनमें उनकी गति थी। तो ऐसे
00:03:46:16 लोगों के लिए ही गुरुदेव ने कहा कि यदि आपका जीवन इस प्रकार से शास्त्र निष्ठा से ओतप्रोत है तब तो आपके लिए ऐसे मंदिर स्थलों में जाने की अनिवार्यता नहीं है। परंतु यदि आप एक सामान्य हिंदू हैं। यदि आप आपके जीवन में शास्त्र निष्ठा तो है। शास्त्र के प्रति आस्था तो हैं। परंतु आज के विपरीत वातावरण के कारण आप पूरी तरीके से शास्त्रों को अप्लाई नहीं कर पा रहे हैं अपने जीवन में। तो ऐसे में यह अनुचित होगा कि आप मंदिर के विषय में ही एकदम कांटे की नोक पर सोचने लग जाओ कि भाई यह मंदिर जो है शास्त्रों की कसटियों पर खड़ा उतरता है कि नहीं पूरी तरीके से तभी मैं अंदर जाऊंगा। यदि आपके जीवन का कोई भी अंश बाकी नहीं रह गया है शास्त्रों शास्त्रों के अनुरूप चलने से तो बात अलग है। परंतु यदि आप कई बार कई जगहों पर समझौता कर रहे हैं विपरीत वातावरण के कारण तो ऐसे में आपके द्वारा इस प्रकार के मंदिरों का इस प्रकार के स्थलों का तिरस्कार करना या उन्हें छेक देना वह अनुचित कहलाएगा क्योंकि यह मंदिर, यह
00:05:01:22 मंदिर स्थल हमारे देवताओं के हैं। कभी ना कभी आज नहीं तो कल यहां पर देवता निवास करते ही थे। तो उस दृष्टि से भी आपके मन में इन स्थलों के लिए सम्मान की भावना होनी चाहिए। हां जो पूरी तरीके से किसी ऐसे व्यक्ति को समर्पित है जैसे कि चांद मियां जो साईं बाबा के बारे में बातें स्पष्ट हुई थी। अब ऐसे किसी व्यक्ति का मंदिर बना हुआ है जैसे आजकल सुनने में आ रहा है कि कोई राजनेता हैं उनका भी मंदिर बिहार में बनने वाला है तो ऐसा कोई मंदिर है जहां पर हमारे सनातन देवी देवता हैं ही नहीं और बल्कि सीधे तौर पर वह किसी व्यक्ति विशेष को समर्पित मंदिर है तो ऐसे मंदिरों को आप छेक सकते हैं। ऐसे मंदिरों की आप उपेक्षा कर सकते हैं। परंतु यदि कोई मंदिर है हनुमान जी का वहां पर कोई विग्रह लगा हुआ है या फिर वहां पर विधि निषेध का पालन नहीं हो रहा है या फिर उसकी स्थापना ठीक से नहीं हुई है तो यहां पर आपको आंकलन करना होगा क्या मंदिरों को लेकर के शास्त्र निष्ठा की कसौटी द्वारा प्राप्त दृष्टि रख रखते समय आपके जीवन में भी शास्त्र उसी
00:06:16:28 तरह से लागू है जिस तरह से आप इन मंदिरों को देख रहे हैं। जय श्री राम। [संगीत]
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क्या शास्त्रविधि-रहित मंदिरों में दर्शन करना चाहिए? पुरी शंकराचार्य जी द्वारा निराकरण
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