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00:00:02:01 मैं देख रहा हूं कि जब से हमने अलंकार समायो की जो मूल विचारधारा है उस पर जब कुछ सशक्त प्रश्न खड़े कर दिए हैं तो तब से वह बौखला से गए हैं और इसी कारण से कुछ भी अनर गर्ल प्रलाप कर रहे हैं जैसे अभी एक अलंकार बोला कि कोई दूसरा अलंकारी कहीं पर पूज्य गुरुदेव से शास्त्रार्थ किया उसने उत्तराखंड में और शास्त्रार्थ में पूज्य पूरी शंकराचार्य जी को उसने हरा दिया ऐसी एक मिथ्या फैला रहा है तो सबसे पहले तो मैं कहूंगा कि यह जो शास्त्रार्थ था इसकी पूर्व में सूचना आपके अलावा और किसकिस को थी इस अलंकारी के अलावा और किसकिस को थी दूसरी बात वहां निर्णायक कौन बना था किसने किसको इस शास्त्रार्थ के लिए आमंत्रित किया था इन सब बातों पर भी प्रकाश डाल दीजिए अगर इस प्रकार के तथ्य और प्रमाण आपके पास नहीं है तो क्यों बेकार में स्वयं को एक संकट में डालने का प्रयास कर रहे हैं क्योंकि इस प्रकार के वक्तव्य के आधार पर एक अच्छी खासी संवैधानिक कार्यवाही आपके विरुद्ध की जा सकती है वह बात और है कि धरातल पर कार्य करते धर्म रक्षा में पूरा मंतव्य है हमारा तो इसलिए

00:01:17:24 जो भिन्न प्रकार की जो गतिविधियां होती है उस पर ज्यादा हम समय नहीं दे पाते मगर समय मिलेगा तो यथोचित कारवाही भी कर सकते हैं तो इसलिए ऐसे प्रयास करने से बचे जिसमें कि आप स्वयं को ही गड्ढे में डाल रहे हो कुटने की तैयारी कर रहे हो ऐसे प्रयासों से बचना चाहिए अलंकारी को अब बात आती है कि इन्होंने आधार क्या बताया कि एक अलंकारी ने उत्तराखंड में कहीं पर गुरुदेव को जाकर के शास्त्रार्थ मराया इसने उसका आधार यह बताया कि उसने पूछा कि वेदों में हिंदू शब्द मुझे दिखा दो तो सबसे पहले तो मैं य पूछूंगा कि हे मेरे प्रिय अलंकारी क्या सत्यार्थ प्रकाश का नाम जिसे आप प्रमाण मानकर अपना जीवन का निर्वाह करते हैं ईश्वर को बाधित करने का प्रयास करते हैं लोगों को नास्तिक अधर्मी बनाने का प्रयास करते हैं जिसके आधार पर क्या यह नाम वेदों में वर्णित है अगर नहीं है तो फिर क्या आप उसके बाद भी इसको प्रमाण मानते हैं मानते हैं तो क्यों मानते हैं क्या सत्यार्थ प्रकाश में दी गई जितने भी विधि विधान है वो सारे वैदिक हैं वेदों में दिए गए हैं या वेदों के आधार पर जो अन्य धर्म ग्रंथ प्राप्त है उनमें दिए गए उनसे भी आपने प्रमाण

00:02:33:02 के रूप में सत्यार्थ प्रकाश में उन चीजों को निहित किया है विधियों को निहित किया है तो यदि उनका एज इट इज संदर्भ वेदों में नहीं है तो आपने उनको क्यों मान लिया है जाहिर सी बात है इस पर आपका उत्तर यही होगा कि सत्यार्थ प्रकाश में जो बातें आप लिखी हुई है आपके अनुसार वह सारी बातें वैदिक शास्त्र सम्मत जो ग्रंथावली है वैदिक वांगम है उसके के आधार पर है इसलिए वो हमारे लिए प्रमाण है और हमारे अकॉर्डिंग हमारे अनुसार जो तथाकथित हमारे ऋषि है महा ऋषि है उनके द्वारा वो विरचित है इसलिए हमारे लिए वो प्रमाण है उन्होंने कहा है कि वेदों पर आधारित है इसलिए हमारे लिए वो प्रमाण है तो इसी प्रकार से जो हिंदू शब्द है वो उच्चारण भेद से जो वेदों में सिंधु शब्द आया है उसी का ही उच्चारण भेद से उपयोग किया गया किनके द्वारा कोई सामान्य लोगों के द्वारा नहीं हमारे उन्हीं ऋषि महा ऋषियों के द्वारा जिन ऋषि महा ऋषियों से हमें हमारा वैदिक वांगम परंपरागत रूप से प्राप्त होता है आपकी तरह नहीं कि जब भी आपसे पूछा जाता है

00:03:48:16 कि भाई आपको यह वैदिक वांगम कैसे प्राप्त हुआ तो आप कहते हो हमारी परंपरा ब्रह्मा से चलती है ब्रह्मा से चलती जमिनी तक आती जमिनी आपको बॉल की तरह लो कैच लो ऊपर से लो बीच के सारे लोग गायब सीधे ब महर्षि दयानंद सरस्वती जी के पास आपके हाथ में आ जाती है बॉल लो भाई ऊपर से फेंक रहा हूं जमनी सी ने ऊपर से फेंकी वैदिक मांग में ये लो कैच और बीच में कोई नहीं सीधे आ गई लपक के अरे भैया मांडो को उपनिषद में जो महा ऋषि गण है वो बता रहे हैं वैदिक वांग में उनके पास कैसे आया वो अपने से हाथ हाथ किसने दिया किसने किससे किससे किसको स्थानांतरित हुआ वो बता रहे हैं तो आप क्यों नहीं बता रहे महा ऋषि दयानंद जी के जस्ट पहले वाले गुरु कौन है जिनसे उनको वैदिक मांग में प्राप्त हुआ और उनके जस्त पहले वाले गुरु कौन है जिनसे उनको वैदिक मांग में प्राप्त हुआ और उनके गुरु कौन है तब ऐसे आप कनेक्ट करिए जेमिनी से अपने को ब्रह्मा जी से अपने को वरना य कौन सा तरीका लो भाई कैच ब्रह्मा जी ने ऊपर से उड़ा के दिया बीच में कोई नहीं सीधे लपक लिया दयानंद जी ने कुछ ऐसा ही है क्या अब बात कर लेते हैं कि भाई ू शब्द की जगह हिंदू शब्द का उपयोग क्यों किया जा रहा है किस आधार पर किया जा रहा

00:05:03:19 है महा ऋषियों के द्वारा वो महा ऋषि जिनके जिनके द्वारा हमें जो हमारे सनातन शास्त्र सम्मत पूरा वैदिक वांग में प्राप्त है उनके द्वारा ये सिंधु शब्द की जगह हिंदू शब्द का उपयोग क्यों और किस आधार पर हो रहा है तो सबसे पहले तो मैं आपको बता दूं ये पाणिनीय सूत्र है मेरे पास इसमें सातवा अध्याय चतुर्थ पाद और उसका 52 वा सूत्र है 5वा इसमें लिखा हुआ है कि सकार जो होता है वह ह का हो जाता है मतलब कि कुल मिलाकर के सा जो है उसका उपयोग हा में होता है यानी कि सा और हा एक ही है सा की जगह पर ह का उपयोग वैदिक है यह पाणिनीय सूत्र कह रहे हैं इसको तो मानते हैं ना अष्टाध्याई सूत्र अच्छा यह उपयोग वेदों में हुआ भी है जैसे कि सरस्वती को एक जगह सरस्वती कहा गया एक जगह पर श्री को हिरी कहा गया और इसी आधार पर आने वाले टाइम में केसरी को तुलसीदास जी ने अपने चौपाइयों में केहरी भी कहा अब पहली बात तो य आती है कि आपका कोई एक अलंकारी है जो अपने वीडियो में यह कहता हुआ दिखाई देता है कि अरे भाई

00:06:19:08 अगर सा की जगह हा का उपयोग करना भी है तो इस्लाम को लाम क्यों नहीं कह रहे हो है ना और डनी को डनी क्यों नहीं कह रहे हो यह सब इस प्रकार के कुतर्क भी करता है तो इसका क्या उत्तर है पहला उत्तर तो यह है तो इसका अर्थ है कि आप वे वेदों का भी विरोध करते हैं वेदों की बातों को नहीं मानते क्योंकि वेद यह कर रहा है कि सरस्वती को हरस्त कह रहा है वेद यह कर रहे हैं कि वह श्री को री कह रहे हैं ठीक है दूसरी बात यह है कि जब सा की जगह इस प्रकार हा का उपयोग करते हुए सिंधु के सिधु सिंधु को उच्चारण भेद से हिंदू कहा जाता है तो वह भी किसके द्वारा परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्य ऋषि महा ऋषियों द्वारा ठीक है यह भी ध्यान रखिएगा हां अब क्या है तो कहा जाता है तो किस आधार पर कहा जाता है क्योंकि हिंदू शब्द के वैदिक अनुशीलन कराने वाले अर्थ प्राप्त होते हैं जैसे कि हिकार जो है वह गाय का धोत है तो हिं काती हुई गाय को धोने वाला हिंदू जो प्रणवा अक्षर है उसकी रचना भी ऐसे हुई है सत्य शब्द की रचना भी ऐसे ही हुई है तो यह सब गलत है क्या आपके हिसाब से आप इसके विरोधी हैं

00:07:35:00 तो अगर विरोधी भी है तो कोई बात नहीं पहले आप गैर सनातनी स्वयं को घोषित करिए पहले आप स्वयं को अवैध घोषित करिए बाहर जाइए सनातन की सीमा से ऐसा नहीं उसके बाद छोड़ देंगे उसके बाद भी लपेट पर पहले कहिए तो कि हम नहीं मानते इतने संदर्भ में उपनिषदों को नहीं मानते इतने संदर्भ में पाणिनीय सूत्र को नहीं मानते इतने संदर्भ में वेदों को नहीं मानते इतने संदर्भ में इतने संदर्भ में हम अवैध हैं यह कहिए तो बाहर जाइए उसके बाद भी छोड़ेंगे नहीं लपेट तब भी पर पहले आपका यह चेहरा तो सामने आए ठीक है अब क्या हुआ कि जब हम सिंधु के आधार पर पानी सूत्र के आधार पर और जो वेद है हमारे उनके आधार पर जब सा की जगह ह का उपयोग करते हैं तो हमें सिंधु के स्थान पर उच्चारण वेद से हिंदू शब्द प्राप्त होता है परंपरा प्राप्त आचार्य ऋषि महा ऋषियों द्वारा और उस हिंदू शब्द के कई अर्थ होते हैं क्या हिकार करती हुई गाय को धोने वाला हिमालय से लेकर हिंदु सरोवर यानी कन्याकुमारी के बीच का जो स्थान है वह है हिंदू स्थान और वहां रहने वाला व्यक्ति हिंदू सिंधु सिंधु का अर्थ गंगा भी है तो गंगा यानी सिंधु को जटाओ में धारण करने वाले भगवान शिव चंद्रमा

00:08:50:12 चंद्रमा को सिन कहा गया है तो सिन को धारण करने वाले सिंधु और उनके उनका जो उपासक देश है व ू देश और वहां रहने वाले हिंदू अगर इतिहास को देखें तो इसका उपयोग हमारे कई लोगों ने कहा और अपने अपने तरीके से हिंदू की व्याख्या की जैसे कि हीनता से दूर रहने वाला हिंदू हिंसा से दूर रहने वाला जो विकृत हिंसा है उससे दूर रहने वाला हिंदू इसी प्रकार से अनेका अनेक प्रकार की जो व्याख्या है वह हमारे इतिहास में भी अलग-अलग महापुरुषों ने की है अच्छा हुआ जो आप जैसे लोग महाराणा प्रताप और जो छत्रपति शिवाजी है या हरियर बुक्का है इन जैसे लोगों के समय में थे नहीं बहुत आपका भाग्य अच्छा है नहीं वहां जाकर जब ये लोग हिंदवी राष्ट्र के लिए लड़ रहे थे तो आप लोग वहां जाकर जब यह कहते ना कि अरे हिंदवी राष्ट्र नहीं अपना झंडा बदल दो हिंदवी राष्ट्र मत कहो हिंदी हिंदू शब्द तो विदेशियों ने दिया है विदेशियों की देन हिंदू शब्द का अर्थ तो होता है चोर लुटेरा काफिर डाकू तो यह सब जब आप बोलते ना इन लोगों से छत्रपति शिवाजी से महाराणा प्रताप आदि से यह धर के कूट देते आपको कूटते अच्छे से है ना वो

00:10:03:28 द्वंद कहां तक पाला जाए युद्ध कहां तक टाला जाए तू भी राणा का वंशज फेंक जहां तक भाला जाए तो

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00:10:09:28 भाला कहां कहा जाता फिर अच्छा अब इसके बाद की बात क्या है कि जो एक यह तर्क लाया जाता है कि भैया उनके जो जो जो द्वेष भावना रखते हैं हिंदुस्तान से हिंदुओं से द्वेष भावना रखते हैं उन्होंने अपने धर्म ग्रंथों में हिंदू शब्द का अर्थ यह दिया हुआ है भाई राम शब्द का अर्थ गुलाम लिखा हुआ है अब बताइए क्या करें राम नाम जपना बंद कर दें आर्य का अर्थ जो है वह घोड़ा लिखा हुआ है तो उस हिसाब से क्योंकि भाई वह लोग भी प्रमाणिक है आपके लिए उस हिसाब से आपका जो समाज का नाम क्या घोड़ा समाज हो जाएगा या फिर आप आर शद शब्द का उपयोग भी बंद कर दोगे हमको भी कह दोगे हम भी आर शब्द का उपयोग बंद कर दे अपने लिए इतनी सी बात समझने की है कि जो हमारे से हमारी संस्कृति से हमारे धर्म से द्वेष भावना रखते हैं उसने अपने यहां के शास्त्रों में अपने यहां की किताबों में लोगों के मन में पहले से हमारे प्रति बैर भावना भरने के लिए वहां पर हमारे यहां के जो बहुमूल्य शब्द है जो जिनके प्रति हमारे अंदर आदर है उन शब्दों का गलत अर्थ वहां पर लिखा है अब कोई अपनी किताबों में जाकर के कुछ भी लिख दे तो हम वहां से प्रभावित होकर के अपने जो अपना जो जीवन यापन है अपना जो निर्वाह अपने जो

00:11:25:00 सनातन सिद्धांत है उनको बदल दे क्या या फिर हम उन्होंने जो लिखा वह मानने लगे कि अलंकार समाज नहीं घोड़ा समाज कैसी बातें करते हैं आप लोग और कुल मिलाकर के लास्ट में प्रश्नों से भागि नहीं सीधे बताइए मूल प्रश्न का जवाब दीजिए मूल प्रश्न बख लाइए नहीं क्या आर समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं यदि है तो क्या व अवतार ले सकता है यदि है तो क्या वह मनुष्य रूप में मनुष्यों के बीच में आ सकता है और अगर नहीं आ सकता नहीं ले सकता अवतार तो उसे अनंत सामर्थ्य वान कहने वाला बंद कीजिए अनंत नहीं है सामर्थ उसका कहिए ना अंत है वह यह नहीं कर सकता यह कहिए फिर बात आगे की जाएगी पहले कहिए ना ठीक है हम यह भी मान लेंगे हां भाई ईश्वर ऐसा हो सकता है जिसकी जिसमें सामर्थ्य का अंत हो ये मान लेंगे अगर यह कहिए ना फिर उसको अनंत सामर्थ वान क्यों कह रहे हैं अपने शास्त्रों में कहिए कि उसके सामर्थ्य का अंत है वह यह नहीं कर सकता पहले इसको स्वीकार करिए उसके बाद

00:12:40:07 यह सब सोचा जाएगा कि वह आएगा तो क्यों आएगा या वह ऐसा क्यों करेगा यह तो आगे की बात हो गई ना भाई पहले उसको अंत लगाइए कि हां वह यह कार्य नहीं कर सकता यह उसकी सीमा है सीमित कीजिए ईश्वर को खुल कर के ये तो वही वाली बात हो गई ना जो ये जो अलंकार समाज से पूछा जाता है कि भाई ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं तो अलंकार समाज कह देता शक्तिमान का अर्थ यह नहीं होता सर्वशक्तिमान का अर्थ यह नहीं होता है कि वो कुछ भी कर सकता है तो यह वह वाली बात हो गई कि जब मंत्री जी से पूछा गया बाढ़ आई हुई है जिले में और मंत्री जी से पूछा गया कि भाई बाढ़ का पानी जो है व खतरे के निशान तक आ गया है तो मंत्री जी ने क्या समाधान दिया खतरे का निशान दो इंच और ऊपर कर दो है ना यानी कि जब खतरा आ रहा है खतरे के निशान तक जब पानी आ रहा है तो खतरे के निशान की परिभाषा ही बदल दो तो जब आपके आड़े सर्वशक्तिमान शब्द आने लगा तो सर्वशक्तिमान की परिभाषा ही बदल दो मगर ऐसे होगा थोड़ी ना आपसे पूछा जाएगा कि यदि अवतार जो नहीं ले सकता उसको भी सर्वशक्तिमान कहेंगे तो जो अवतार ले सकता होगा उसको क्या कहेंगे कोई तो शब्द बनाओ वो शब्द बनाओ हम वही लगा लेंगे आप

00:13:55:08 कह दो वो सर्व सर्व शक्तिमान है ठीक है भैया हमारा ईश्वर आप सर्व ति मान को रख लो हम सर्व सर्व शक्तिमान को रख लेंगे है ना अगर जिसकी सामर्थ्य का अंत है उसको भी अनंत सामर्थ्य वान कहेंगे तो जिसकी सामर्थ्य का अंत नहीं होगा उसको क्या कहेंगे तो इन सब बातों मूल प्रश्नों पर आओ मूल प्रश्न वेदा शास्त्र कैसे मिले ब्रह्मा जी ने कैच कराए हैं क्या ऊपर से लो कैच कैच बीच के लोग कहां है कैसे मिले जय श्री j [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 14:33 · 11 Jul 2024

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