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00:00:01:21 सभी को जय श्री राम मैं इस समय प्रयागराज में हूं मां गंगा के बिल्कुल किनारे पूज्य गुरुदेव का आश्रम है वहीं पर मैं दर्शन करने के लिए आया हुआ था गुरुदेव आए हुए थे यहां पर और इसी बीच में इस यात्रा के दौरान एक हमारे धर्मजीत हुई इनका नाम श्री व्यास मुनि है वि प्रवत ब्रह्मचारी जी राष्ट्रीय धर्म रक्षक संघ है उसके निमित उसके माध्यम से सक्रिय है धर्म की रक्षा के लिए और एक विशेष अभियान इस समय चल रहा है जो भगवान हंस का हंसराज तीर्थ है उसे अतिक्रमण से मुक्त कराने के निमित्त एक अभियान चल रहा है तो आज हम इस पर प्रकाश डालेंगे इनके वाणी के द्वारा इस पर प्रकाश डाला जाएगा और सबसे पहले हम जानेंगे कि जो हंसराज तीर्थ है उसकी जो पौराणिक शास्त्रोक्त व क्या है उसके बाद उस पर जो आज के हमारे वर्तमान समय के समकालीन जो विचारक हैं जो धर्मजीत को लेकर के उनके दृष्टिकोण क्या है और किस प्रकार
00:01:16:25 से यह अक्रांता के द्वारा इस पर अतिक्रमण किया गया है और जो दर्शनार्थी है वह वहां दर्शन करने से वंचित हो रहे हैं जो वहां का जो महत्व है जो वहां का जो शक्त पौराणिक लाभ है फल है वह प्राप्त करने से जो आम जन समाज है वह वंचित हो रहा है और इसके बाद जब यह अभियान चलाया गया उसे मुक्त कराने के लिए कि जन समाज के लिए व सुलभ हो सके तो हमारे पक्ष की क्या चीजें हैं कौन-कौन से ऐसे दृष्टिकोण है या रिसर्च है या फिर आदेश है सरकारी विभागों के द्वारा या अन्यों के द्वारा कौन से हमारे पक्ष में है और सामने वाले पक्ष का वहां पर क्या दृष्टिकोण है उनके पक्ष से क्या बातें हैं तो ये सारी चीजें आज हम जानेंगे तो मैं चाहूंगा आपसे कि प्रारंभ में आप कुछ इसकी जो महत्ता है पौराणिक और शास्त्रोक्त महत्ता उस पर थोड़ा सा प्रकाश डाल दीजिए जय श्री हंस भगवान जय जगन्नाथ सर्वप्रथम मैं बहुत-बहुत आभार व्यक्त करना चाहूंगा कि आप अपने तीर्थ स्थलों को लेकर के भी बहुत सारे सक्रिय रहते हैं और गुरुदेव भगवान के चरणों में सादर निवेदन प्रणिपात निवेदित करते हैं यह तीर्थराज प्रयाग की धरा धाम
00:02:32:01 है यह पावन भूमि है और आप जहां विराजमान है यह ब्रह्म प्रयाग क्षेत्र है जिसे बहिर वेदय परिक्रमा के अंतर्गत रखा गया और मैं व्यास मुनि विपलव अभी जनपद प्रयागराज के पंचकोष द्वादश माधव और त्रि यज्ञ वेदय परिक्रमा के लिए सेवा दे रहा हूं मेरा कोई जो इन्होंने अभी पंच कोषयमिन परिक्रमा मार्ग ये एक रेडियस शास्त्रोक्त रेडियस बनाया गया है प्रयाग की परिक्रमा है तीन प्रकार से त्रिवेदी हो गई तीन प्रकार से और एक पंच कोषी परिक्रमा है तो उसके बारे में अभी महाराज जी ने बात की तो इसलिए मैंने उसको थोड़ा सरलीकरण कर लिया जिससे कि थोड़ा सरलता रहे जी यद्यपि मेरा कोई अभियान या कोई योजना नहीं है जो कुछ भी आप देख रहे हैं यह गुरुदेव और महापुरुषों के दर्शन मात्र से जो एक प्रेरणा प्राप्त होती है उसकी परिणति मात्र है और यह हमारी जो पंचकोष द्वादश माधव और त्रि यज्ञ वेदी परिक्रमा के सेवा के दरमियान हमने एक बहुत ही पवित्र पावन तीर्थ स्थल का दर्शन किया जो अलौकिक था
00:03:47:03 उसके लिए फिर हमने यथा सामर्थ्य मुहिम भी चलाने की भावना प्रकट की और आज उसी की परिणति के रूप में भगवान विष्णु के जो 24 अवतार है उनमें एक श्री हंस भगवान है उनकी जन्मभूमि है उनकी अवतरण स्थल है पौराणिक हंस तीर्थ क्षेत्र यही प्रतिष्ठान पुर झूसी जहां आप विराजमान है यहां से लगभग 150 200 मीटर की दूरी पर ही है जिसके बारे में स्वयं महर्षि कृष्ण दैपायन वेदव्यास जी ने मत्स पुराण में कर्म पुराण में और भी बहुत सारे धार्मिक ग्रंथों में स्पष्ट रूप से लिखा है राजस्व के दृष्टिकोण से जैसे कि आप यहां देख रहे हैं उत्तरण प्रतिष्ठाना भागीरथ स्तु
00:04:28:21 पूर्वतयारी कोर्म प्राण का उद्धारण है अश्वमेध फलन तस्म स्नान मात्रण भारत यावत चंद्र सूर्य ताव स्वर्गी मते यानी माता गंगा के पूर्वी तट पर और प्रतिष्ठान पुर झूसी जिसे कहा गया उसके उत्तरी भाग में प्रसिद्ध पौराणिक हंस भगवान की जन्मभूमि हंस प्रप तीर्थ विराजमान है जहां हंस तीर्थ में रहते हुए य हंस तीर्थ जो देख रहे हैं और हंस कूप के जल से स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है मरणोपरांत जीवात्मा को स्वर्ग में निवास मिलता है ऊर्ज नव हंसो जाता स्वयं हरि या गोपाल तापन उपनिषद का वचन है यानी कार्तिक शुक्ल नवमी को श्री हंस भगवान का यहां अवतरण हुआ था इनका उल्लेख मत्स पुराण पूर्व पुराण नारदीय पुराण बृहद नारदीय पुराण पद्म पुराण प्रयाग सता धय और पद्म पुराण के पाताल खंड में इनका विशेष उद्धरण दिया गया है जी जी मैं इस वीडियो में आपको नीचे दिख जाएगा जितने भी महाराज जी ने अभी बोले हैं प्रमाण स्थल हम आपको बता देंगे एक मैं हंस भगवान से रिलेटेड एक आपको थोड़ा सा प्रकाश डाल दूं जो मुझे जो हमारे साथी हैं इन्हीं के द्वारा ही प्राप्त हुआ है जानकारी वह यह है कि सबसे पहली बात
00:05:43:28 जो सृष्टि का जो विचार है और जो प्राकट्य है वो यहीं से माना गया हमारे शास्त्रों के अनुसार और हंस भगवान इसमें कैसे रिलेट करते हैं व मैं आपको बता रहा हूं कि जो विष्णु भगवान के नाभि से जब ब्रह्मा जी उत्पन्न होते हैं तो व यज्ञ करते हैं तो सबसे पहला यज्ञ क्योंकि प्रयाग जहां पर किया गया सबसे पहला यज्ञ जहां पर किया गया उस यज्ञ को करने के कारण इस जगह का नाम इस स्थल का नाम इस भूमि का नाम प्रयाग पड़ा ऐ प्रक ञ तो प्रयाग जो यहां का नाम है वो इसीलिए क्योंकि यहां पर सृष्टि का पहला यज्ञ हुआ तो यहां अक्षयवट जो है वह प्रधान स्थल माना जो कि पांच योजन में विस्तीर्ण है ऐसा पद्म पुराण का उधारण मिलता है जी तो ब्रह्मा जी को जब सृष्टि करना हुआ तो भगवान का साधना करते हैं ध्यान करते हैं फिर उन्हें वह ज्ञान विज्ञान मिलता है फिर वह यहां इस धरा धाम पर प्रथम जो यज्ञ किए थे जी ब्रह्मा जी ने तो यही प्रयाग में किया उसी के आधार पर यहां तीन वेदियो का निर्माण हुआ अंतर्वेदी मध्य वेदी और बहिर वेदी ार पतग निवाह याग्नि और दक्षिणा अग्नि विष्णु प्रयाग रुद्र प्रयाग तथा ब्रह्म प्रयाग क्षेत्र जी तो इस आधार
00:06:59:01 पर य जो जिस स्थल पर आप है यहां से लगभग 1 150 मीटर की दूरी पर ही जो ब्रह्म प्रयाग क्षेत्र थी वहीं ब्रह्मा जी की सभा लगता था और उसी ब्रह्मा जी की सभा में जो सनक सनातन सनन एवं सनत कुमार जो नक बाल ब्रह्मचारी हैं उन्होंने वह ब्रह्म जिज्ञासा प्रकट किया था जैसा कि आप हंस गीता का जब उल्लेख मिलता है भागवत महापुराण में उसमें इसका विवरण है 36 श्लोकी हंस गीता के दौरान तो सदको ने प्रश्न किया था कि परमपिता ब्रह्मा जी जो मन की चित्तवृत्ति होती है और जो यह गुण है सतोगुण रज गुण तमोगुण ये आपस में उलझे ही रहते हैं इनको पृथक कैसे किया जाए इस पृथक करने का उपाय क्या है तो उसमें चकि परमपिता ब्रह्मा जी रजोगुण थ सृष्टि के सृजन के कार्य में तल्लीन थे तो हृदय में उन्होंने यज्ञ पुरुष भगवान श्रीमन नारायण का ध्यान किया तो नारायण ने उस नीर छीर विवेक युक्त ज्ञान को देने के लिए जैसे हंस पक्षी दूध और पानी को पृथक करने में समर्थ है वैसे ही भगवान नारायण ने हंस का स्वरूप धारण करके अवतरित हुए और हंस गीता का उपदेश दिया था जी याय भी माना गया कि गोपाल मंत्रराज का उपदेश भी यही दिया और स्वयं शालिग्राम अर्च विग्रह के रूप में यहां विराजमान रहे उसी शालिग्राम अर्च विग्रह की तब से आज तक उपासना चलती आ रही है जी तो यह इस तरह से भगवान विष्णु भगवान ब्रह्मा को ज्ञान देने के लिए हंस के रूप में अवतरित होते हैं
00:08:14:10 क्योंकि भगवान ब्रह्मा उस समय रजोगुण से तल्लीन थे क्योंकि वह सृष्टि की रचना कर रहे थे और वो अवतर उनसे जब उनके जो सनत कुमार जो उनके मानस पुत्र है मानस पुत्र है उनके जो उन्होंने जब उनसे ब्रह्म तत्व संध प्रश्न किए तो उन्होंने भगवान विष्णु का ध्यान किया नारायण का ध्यान किया तब नारायण भगवान ने अवतार लिया हंस भगवान के रूप में तो इस तरह से हंस भगवान का जो अवतार है वो यहीं पर सिद्ध होता है य तेन हंस हो जाता है स् गोपाल तापन उपनिषद का वचन है गोपाल ताप ने उपनिषद का वचन हैय और जब वह यहां पर उत्पन्न होते हैं फिर आगे वहां पर जो हंस गीता वो भी आती है भागवत में है हा हंस गीता का तो ये इस तरह से यहां का महत्व है भगवान के 24 अवतारों में से जो एक अवतार है व हंस भगवान के रूप में उनका अवतार है और बहुत महत्व है और जैसा कि महाराज जी ने बताया कि यहां जो हंस कूप है उसमें स्नान करने पर आपको अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल प्राप्त होता है अगर किसी का जो यज्ञ पवित्र संस्कार है वह समय पर नहीं हुआ या अन्य किसी प्रकार से वह आबाद रूप से संध्या बंदन से वंचित हो रहा है किसी भी प्रकार से तो जो यहां का संध्या वट वृक्ष है उसके नीचे
00:09:29:27 वंदन करने पर आपका जो व्रत दोष है वह हट जाता है त्रिकाल संध्या यदि आप इस इस वृक्ष के नीचे करें और साथ ही साथ यदि न केन प्रकार संध्या बंदन में लोप हो गया है तो उस दोष के निवारण की मुक्ति भी यहीं से हो जाती है ी वृक्ष के नीचे संध्या वंदन करने से जी क्योंकि जो संध्या वट वृक्ष है अपने आप में अनुपमे है जी जैसे रुद्र प्रयाग क्षेत्र में अक्षयवट विराजमान वैसे आपके इस क्षेत्र में संध्या वट वृक्ष विराजमान है इनकी अपने आप में अतुलनीय बातें की गई है शास्त्रों में जैसे कि मर्ष पुराण को पुराण का उरण लिखा हुआ दिख रहा है अथ संध्या वटे रम में ब्रह्मचारी जितेंद्रिय उपवास सुच संध्या ब्रह्म लोकम वाप यात तस्मा द्विज वराह सर्वे गत्वा संध्या वटा के संध्या उपास विधिवत पूजत च माधवम एवं संध्या
00:10:28:09 वटमैन संध्या वध चाम तमन वसति धर्मात्मा श्री शंक थर माधव एवं संध्या वट प्राथ मुत लोप पात प्रसन्न भव साम संक थर्मा तथापि रते संध्या वटा चामा तमन वति धर्मात्मा संक थर्मा जो हमारे प्रयाग नगरी है यहां भगवान विष्णु प्रधान देवता माने गए हैं उनके द्वादश विग्रह यहां विराजमान है जो द्वादश माधव कहलाते हैं उनमें एक शकष ठर माधव है प्रयाग के द्वादश माधव में नवे माधव उनका मूल स्थान भी संध्या वट वृक्ष ही है संध्या वट वृक्ष के नीचे उनका आश्रम है ऐसा पद्म पुराण सताधार प्राप्त होता है तो इस संध्या वट वृक्ष के नीचे जो भी साधक तपस्वी खास करके जो ब्रह्मचारी होते हैं वो त्रिकाल संध्या करें ब्रह्मचर्य को धारण करके सुचिता पूर्वक स्वच्छता पूर्वक तो उन्हें ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति होती है मरणोपरांत ब्रह्म लोक में निवास मिलता है साथ में जैसा कि आपने बताया कि संध्या वट वृक्ष के नीचे यदि त्रिकाल संध्या किया जाए तो व्रत संज्ञा जो होती है उसका भी प्रायश्चित होता है और साथ ही संध पास जो लोप हो जाता है किसी कारण वस आप संध नहीं कर पाए हैं तो उसके प्रायश्चित के लिए भी लोग प्राय यहां संध पासन करते रहे हैं ऐसा वटवृक्ष इस संध्या वट वृक्ष का महत्व रहा जहां स्वयं संकर माधव प्रयाग के द्वादश माधव में नवे माधव विराजमान रहे
00:11:43:25 कूप के बारे में आपने बताया ही कि इस पवित्र कूप के जल से तर्पण श्राद्ध इत्यादि की क्रिया करने से पितरों का भी ऊर्ध्वगामी गति की प्राप्ति होती है हंस तीर्थ में स्वयं जगन्नाथ स्वरूप में श्री हंस भगवान विराजमान है तो इनका जो एक सरफेस जो महात्म में है उसके बारे में हमने आपसे निवेदन किया अब आगे जैसे आपने कहा कि इनका दर्शन के एक बात मैं बता दूं इस क्षेत्र का नाम झूसी कैसे पड़ा इसके बारे में भी एक बड़ी रोचक बात है क्योंकि जो यहां पर गुरु गोरखनाथ जी थे वोह तपस्या कर रहे थे और जो कोई यहां के राजा थे हा उन्होंने उनकी अवमानना की थी तो उन्होंने श्राप दे दिया था जिसके कारण कि ये क्षेत्र जो है झुलस गया था जी और झुलसने के कारण ही इस क्षेत्र का नाम झूसी पड़ा है तो बड़ी रोचक कथा थी गुरु गोरखनाथ यही संध्या वट वृक्ष के नीचे रहते थे गुरु गोरखनाथ और भगवान मशद नाथ की तपस्थली यह संध्या वट मानी गई है य भी ध्यान रखने का विषय है यहां उनका गुरु गोरखनाथ जी का अलक्ष रंजन धुना और चमत्कारी चिमटा भी विद्यमान था आज से एक दशक पूर्व तक पीआईएल में इन सब चीजों का जिक्र किया गया है जिसे क्रियायोग संस्थान ने नष्ट कर डाला अब किसी का नाम नहीं लेना चाहते लेकिन लेना जरूरी है अभी महाराज जी ने त्रिवेदी जो परिक्रमा बताई थी उसमें से एक परिक्रमा है रु
00:12:59:06 प्रयाग हां अंतर्वेदी अंतर्वेदी और एक परिक्रमा है ब्रह्म प्रयाग है उसमें आने वाला ये तीर्थ है हा बहिर वेदी मतलब पंच कोषी परिक्रमा में अंतर्वेदी मध्य वेदी बहिर्बी तीनों परिक्रमा समाहित है साथ ही साथ यहां जो द्वादश माधव की परिक्रमा होती है वह भी पंचकोष परिक्रमा में समाहित द्वादश माधव अ 12 मंदिर हैं माधव भगवान के भगवान नारायण के 12 स्वरूप 12 मंदिर हैं और उनमें से जो नवा मंदिर है वो भी इसी परिक्रमा मार्ग में है जो हमारे हंत तीर्थ क्षेत्र में हां पंचकोष परिक्रमा में ब माधा ब माधा आते हैं भगवान विष्णु के 12 स्वरूप है और वो सभी स्वरूप यहां विराजमान है जी अगर थोड़ा सा बात कर ही लेते हैं माधव की जब जिक्र कर ही दिए मूल माधव वट माधव अक्षय माधव अक्षय वट वृक्ष में विराजमान है शंख माधव पूर्व दिशा में है और फिर अग्नि कोण पर आपके श्री चक्र माधव है दक्षिण दिशा में गदा माधव है नरत कोण में पद्म माधव है और पश्चिम दिशा में अनंत माधव है और फिर आपकी बिंदु माधव मनोहर माधव और अशी माधव है और संकर माधव आपके संध्या वट वृक्ष के नीचे विराजमान है जिनकी इतनी महिमा बताई गई सारे भक्तों के संकटों को निवारण करने में समर्थ हो जी तो यह हमने जाना कि हंस भगवान का प्राकट्य
00:14:14:14 और हंस भगवान की जो यह तीर्थ स्थली उनके निमित्त और जो कूप है यहां पर जो वट वृक्ष है यहां पर इन सबका कितना महत्व है शास्त्रोक्त अध्ययन करने पर हमें पता लगता है इस पर हम आते हैं हमने महत्ता जान ली और कहां पर है कि जो पौराणिक शास्त्रोक्त यहां की चीजें हैं वह हमने जान ली अब इसमें अ किस क्रम में अ यह जो यहां का जो दर्शन है जो सुलभ होना चाहिए हर आज जो कलिकाल में जो हमारा आम जन समाज है जो अ तमोगुण से प्रभावित होता जा रहा है लगभग लगभग तो उसमें तमोगुण से मुक्ति के निमित्त जो इतना सुलभ हम हमें जो तीर्थ प्राप्त होना चाहिए उससे हम वंचित हो रहे हैं श्रद्धालु जो प्रयाग आकर के मुक्त हो जाने चाहिए ऐसे वटवृक्ष ऐसे कूप का स्नान करके उससे व वंचित हो रहे हैं जिस प्रकार से यह कुछ वर्षों पूर्व तक हर जनमानस को सुलभ था संध्या संध्या वट के नीचे संध्या करना वहां पर ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए त्रिकाल संध्या करना या फिर कूप में स्नान करना या फिर उस कूप के जल से पित्रों को तर्पण करना यह सभी जो विधियां यह सुलभ थी जन समाज के लिए पर आज कुछ अनैतिक गतिविधि के कारण
00:15:29:18 वो सुलभ नहीं है और इसी पर अब प्रकाश डालेंगे आगे महाराज जी जी जैसे कि भगवान हमने आपसे निवेदन किया कि हमारे जनपद प्रयागराज के पंचकोष द्वादश माधव एवं बहिर वेदय परिक्रमा स्थल भगवान विष्णु के 24 अवतारों में एक श्री हंस भगवान की जन्मभूमि पौराणिक हंस तीर्थ क्षेत्र हंस तीर्थ मंदिर हंस कोप संध्या वट वृक्ष श्री संकष्ट हर माधव गुरु गोरखनाथ जी की तपस्थली प्रभु दत ब्रह्मचारी जी की तपस्थली आदि प्रतिष्ठान पुर झूसी कोहना गंगा तट कुंभ मेला क्षेत्र के अंतर्गत जो आता है प्रयागराज उत्तर प्रदेश की यह जो पावन धरा धाम है इस पर जो दर्शन में लगातार अर्चन बढ़ती आई हैं इसके पीछे का जो कारण है इसकी हिस्ट्री जो है उसके ऐतिहासिक पक्ष के बारे में अगर हम चर्चा करें तो सबसे पहले जैसे कि हमने कहा कि कार्तिक शुक्ल नवमी अक्षय नवमी जिसे आप आवला के नवमी के रूप में मनाते हैं उस दिन हम लोग परिक्रमा यात्रा भी निकालते हैं हंस भगवान की आप सभी लोग साधार आमंत्रित है उस परिक्रमा यात्रा में यही सी मठ से परिक्रमा यात्रा हम लोग निकालते हैं तो उस कार्तिक शुक्ल नवमी को भगवान हंस के रूप में यहां शालिग्राम र्चा विग्रह के रूप में प्रतिष्ठित हुए जिसकी उपासना पूजा चलती आई फिर उसे एक विस्तृत स्वरूप दिया गया उनकी उपासना का और उसी पौराणिक हंस तीर्थ क्षेत्र में धर्माता
00:16:45:00 जो मुस्लिम धर्माता के युग में है ऐसा श्री प्रभु ब्रह्मचारी जी बताते हैं कि ईदगाह का निर्माण कर दिया गया तो फिर हिंदुत्ववादी जो हमारे केशव कश्मीरी भट्टाचार्य जी हैं फिर अहिल्याबाई होलकर जी हैं इन सब के समय में तीर्थों को पुनः जागृत किया गया इनको स्वरूप दिया गया हंस कोप इत्यादि को वर्तमान स्वरूप दिया गया और इनके बाद जो एक हमारे ठाकुर प्रसाद सिंह जी थे आत्मा हंस जो हंस संप्रदाय स्वीकार करने के बाद आत्मा हंस कहलाए उन्होंने नटम फिजियोलॉजी बहुत ही सुंदर है स्वयं उत्तर प्रदेश शासन ने इसे बताया कि ऐसा मंदिर पूरे विश्व में कहीं नहीं है ऐसा दर्शनीय स्थल पूरे विश्व में कहीं नहीं है ऐसा हस तीर्थ मंदिर के बारे में बताया इसके नोट में फिजियोलॉजी पर कभी आप प्रकाश डालिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण है ये तो इस तरीके से इसकी फिजियोलॉजी के बारे में जो टूटा फूटा मुझे कुछ बताया महाराज जी ने वो मैं बताना चाहता हूं बहुत उत्सुक हूं मैं जो मंदिर का निर्माण हुआ है वो हमारे जो सात चक्र होते हैं सट चक्र उनके आधार पर हुआ है तो नीचे से लेकर के जब आप उस मंदिर को देखेंगे तो नीचे जो आप थोड़ा सा बताएंगे उसी क्रम में जो जो संध्या वट वृक्ष है यहां संध्या बंदन किया जाता है गायत्री संध पासन किया जाता है ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति होती है ब्रह्म ज्ञान में ब्रह्म रंद्र की जागृति होती है यह भी ध्यान रखने
00:18:00:04 का विषय है जो ट चक्रों का भेदन होता है मूलाधार चक्र है मूलाधार चक्र के बाद इस अनुक्रम में जो हम लोग मणि पुरक चक अनाहत चक्र और मूलाधार स्वाधिष्ठान मणिपुर अनाहत और विशुद्ध चक्र फिर आज्ञा चक्र है ना तो इस अनुक्रम में जो सट चक्रों का जागरण होता है वहां त्रिकाल संध्या से बहुत ही जल्दी सिद्ध होती है इसीलिए साधक तपस्वी वहां जाते थे और जो हंस तीर्थ मंदिर है उसकी संरचना को भी इन्हीं सब सारे बिंदुओं को ध्यान में रख कर के यहां जो हंस भगवान ने उपदेश दिया है सनकादिक ब्रह्मचार्य को उस मानस सरोवर का बहुत सुंदर प्रकटीकरण किया गया यहां सबसे महत्त्वपूर्ण विषय तो यही है यहां मानसरोवर का बहुत अच्छा चित्रण किया है वहां सन सनातन सनन एवं सनत कुमार की मूर्तियां है ऐसा हम नहीं कह रहे हैं या प्रयाग प्रदीप हिंदुस्तान अकेडमी से प्रकाशित है और यह आर्कलॉजिकल डिपार्टमेंट के लिए प्रकाशित पुस्तक है उसमें इसका उदार बहुत अच्छा किया गया है अभी बीच में एक संदर्भ आया था कि हंसराज तीर्थ के क्षेत्र में जो मुगल आक्रांता है उनके द्वारा भी आघात पहुंचाया गया है और कुछ भूभाग पर उन्होंने ईदगाह का निर्माण किया फिर समय-समय पर जो महापुरुष एवं जो दिव्यांगना हैं उनके द्वारा जैसे अ अहिल्या जी ने यहां पर उसका जीर्ण उद्धार किया और जो हमारा वट वृक्ष है जो पौराणिक है जो
00:19:15:15 एक तरीके से सृष्टि के प्रारंभ से ही मान लीजिए और जो हमारा जो कूप है ये सभी पौराणिक है तो उनको बचाते हुए और एक जो जो ट चक्र का हमने अभी आधार बताया उनको लेते हुए एक मंदिर का जीवन उद्धार और हस्ती क्षेत्र के संरक्षण हेतु उसको किया गया अभी वर्तमान की स्थिति यह है कि कुछ कहना चाहिए कि असामाजिक तत्वों के द्वारा उसको धीरे-धीरे अपने अधिकार क्षेत्र में लिए लिया जा रहा है जो कि उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और यह ध्यान ना रखते हुए कि यह जो संपत्ति है यह किसी विभाग की किसी सरकार की किसी लोकतांत्रिक राज्य की अथवा किसी व्यक्तिगत किसी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है बल्कि यह प्रत्येक सनातनी की धरोहर तो उस पर थोड़ा सा प्रकाश डाल दीजिए हा जैसे कि आपने पूर्व में भी कहा था कि दर्शन पूजन में जो अड़चन आ रही है उसके बारे में स्पष्टीकरण कहा था आपने तो स्पष्ट रूप से नाम लेना ही उचित होगा हम जो स्पष्ट तथ्य है व प्रकाशित कर ही पड़ेगा य जो हमारे तीर्थ
00:20:30:18 स्थल है अभी तक हमारे जो पूर्वा चार्य रहे धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी पूर्वा चार्य स्वामी निरंजन देव तीर्थ जी श्री प्रभ दत्त ब्रह्मचारी जी इन सबके संयुक्त प्रयास से हमारे पंचकोष परिक्रमा के सभी तीर्थ स्थलों को चिन्हित करके शिलालेख स्थापित किए गए थे लेकिन स्वयं प्रभु दत ब्रह्मचारी जी ने लिखा कि संकर माधव का स्थान संध्या भट वृक्ष के नीचे है लेकिन आज उस मंदिर को तोड़ दिया गया और पर्यटन विभाग नया मंदिर जो है स्वयं प्रबत ब्रह्मचारी आश्रम के में बना रहा है कारण क्या है कि उसे एक बहरूपिया ने चार दिवारी में कर रखा है आज की वर्तमान स्थिति मैकाल शिक्षा नीति से लोग ग्रसित हैं कोई गुरु परंपरा नहीं कोई स्वस्थ परंपरा नहीं उससे लोग अपना स्वयं ही किसी कोई भी अपने आप को योगी के रूप में या कोई साधक के रूप में ख्या पित करना चाहता है और अपनी एक नई परंपरा स्थापित कर लेता है उसी विचारधारा से प्रभावित है एक यहां पर सत्यम क्रिया योग संस्थान है जहां परंपरा प्राप्त कोई गुरु नहीं है गुरु गोविंद ग्रंथ से काफी दूरी है अपनी मनमुक उनकी परंपरा है स्वयं को महावतार बाबा एक जो की विनंती है उससे अपने को जोड़ते हैं फिर भी उस परंपरा से भी हटे हुए हैं स्वयं को ईश्वर के रूप में ख्या पित करते हैं महिलाओं को रखते हैं वस्तु स्थिति यह है कि हंस तीर्थ के दर्शन के लिए जाए तो उन्होंने चार दिवारी एंक्रोचमेंट कर रखा है अभी हंसकर दिवारी के बाहर था एक वर्ष के पूर्व ही उसे भी उन्होंने चार दिवारी में कर लिया उसका
00:21:45:19 भी दर्शन पूजन नहीं हो पा रहा जो जो मंदिर जिसका जीवण उद्धार करके उसको इस तरह से बनाया गया था उसको अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया गया चार दीवारी खड़ी करके और जो वृक्ष है संध्या वट वृक्ष उसको भी अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया गया और उस पर काफी दिन से प्रशासनिक और संवैधानिक कारवाई यां चल रही है हमारी ओर से कि ऐसा ना हो व मुक्त हो पाए पर वह चलते चलते ही अभी हाल ही में 2023 में ऐसा करना शुरू किया गया कि जो कूप था जिस पर कोई विवाद नहीं था जो विवाद था वो वटवृक्ष पर था और मंदिर पर था जो 12 माधव जी के मंदिर हैं भगवान विष्णु के 12 जो अभी मंदिर बताए थे उसमें से जो नौवा मंदिर था संकष्ट जी संकष्ट माधव वाला उस मंदिर को तोड़ दिया गया है और जो हंसराज जी का भगवान हंसराज का जहां पर वह स्वयं स्थापित है तीर्थाश्रम जी शालिग्राम के रूप में उसको अपने अधिकार क्षेत्र में पहले ले लिया गया था साथ ही साथ जो संध्या वट है जिसका बहुत पुण्य है उस को भी ले लिया गया था जिस पर की विवाद काफी वर्षों
00:23:00:20 से चल रहा था और उसमें क्या-क्या हमारा पक्ष कितना मजबूत है और जिन्होंने कब्जा किया है अधिकार में ले लिया है नैतिक रूप से उनका पक्ष कितना मजबूत हैय अभी हम इस पर प्रकाश डालेंगे मगर इसी बीच अभी हाल ही में 2023 में क्या किया गया जो कूप था जो उनके उस पर कोई विवाद ही नहीं था क्योंकि वो मुक्त था उस पर सभी का जाना आना सब कुछ सुलभ था उस हंस कूप को भी धीरे से अपनी बाउंड्री लगा कर के अंदर ले लिया गया है तो यह एक जो होता है कि अनैतिकता की पराकाष्ठा कि अगर तुमने अगर प्रयास भी किया हमारी अन्याय पूर्वक कार्रवाइयों के प्रतिकार स्वरूप तो हम और अन्याय बढ़ा देंगे जो मीटर है अपना उसको बढ़ा देंगे तो वो यहां पर हुआ तो अभी इसके आगे जो हम जो शुरुआत से जो यह जो विवाद चल रहा है उसमें हमारा पक्ष कितना मजबूत है और जो सामने वाले उनका पक्ष किस तरह से मजबूत नहीं है इस पर प्रकाश महाराज जी डालेंगे देखिए जो हंस तीर्थ क्षेत्र पर एंक्रोचमेंट हो रहा है इसकी पूरी हमने मिथल देखी हमसे पूर्व भी संतों ने हंस तीर्थ क्षेत्र को बचाने के लिए यथा सामर्थ्य प्रयास किया मामला हाई कोर्ट तक गया हमने देखा कि 1985 ईसवी में सत्यम क्रिया के संस्था
00:24:16:02 संचालक जो है सत्यनारायण सिंह उर्फ योगी सत्यम महिलाएं भी इनके आश्रम में बहुत सारी रहती है तो ये कोई परंपरा प्राप्त संत नहीं है इस चीज को सबसे पहले ध्यान रखने की आवश्यकता है तो जो सत्यनारायण सिंह है इन्होंने क्या किया स्वयं को योगी सत्यम के रूप में उद् भाषित किया बताया और योग इत्यादि के प्रचार प्रसार के नाम पर इत्यादि विदेशों से अपना सामंजस्य सादा कि और यहां 1985 में एक नया खाता खुलवाया 45 काजी खाता था इसलिए उसका नाम का के नाम से चालू कराए थे किसके नाम से 45 का के नाम से 45 का ये कोई सरकारी योजना थी क्या नहीं कोई योजना नहीं थी इंदराज एक था इंदराज एक फर्जी घटना घटित हुई भूमि घोटाला थी उसी का य अनुक्रम था तो 1992 में नाम पर दिया गया और फिर वहां धीरे से एंक्रोचमेंट करना शुरू किया तो उस समय के संत थे स्वामी शारदानंद जी महाराज और भी बहुत सारे संत थे उन लोगों ने उसका विरोध किया और मामला एसटीएम फूलपुर के यहां गया मुकदमा चला एसटीएम फूलपुर ने राजस्व के दृष्टिकोण से देखा किय सारी जमीनें ग्राम सभा की है आबादी की जमीने हैं कुछ कदीमी की क्षेत्रे हैं कुछ बंजर हैं तो इस तरीके से लगभग चार से पांच बीघे का जो क्षेत्र आता था हंस तीर्थ आश्रम के उपयोग उपभोग का उन्होंने उस सब को कहा कि भाई आपकी जमीने नहीं है आप ये गलत तरीके से कर रहे हो और जिस एसडीएम फूलपुर का निर्णय आना था उसके दो महीने पहले ही सत्यम
00:25:31:10 क्रियायोग संस्थान ने क्या किया कि उन पंडों के नाम से अपने नाम पर रजिस्ट्री करवा डाली ताकि हम तो ये कहे कि हम क्या करें हमसे तो रजिस्ट्री हुई है हमने तो इनसे खरीदा है हम तो इससे रजिस्ट्री किए हुए हैं लेकिन एसटीएम फूलपुर ने जब जांच बैठाई सारी चीजें क्लियर हो गई फिर तहसीलदार की रिपोर्ट वगैरह मंगा कर के उन्होंने उसे खारिज कर दिया फिर उन्होंने बोर्ड ऑफ रेवेन्यू गए वहां धन दिया लालच दिया जो कुछ भी दिया एक पक्षीय निर्णय लिया लेकिन उसमें भी बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने कहा कि भूखंड संख्या 11 में संध्या वट है भूखंड संख्या 12 में हंस तीर्थ आश्रम है और भूखंड संख्या तीन में हंस कूप है हंस कूप का मामला किसी भी न्यायालय वगैरह में नहीं गया है ध्यान रखने का विषय है कुछ राजस्व की यहां कमिया रही हंस कूप की बात मैं फिर बता दूं वो अभी तक किसी भी न्यायालय में नहीं गया है क्योंकि उस पर हाल ही में कब्जा करने का प्रयास प्रारंभ किया गया है है ना तो ये भी ध्यान रखने वाली चीज है जी राजस् विभाग की क्या कभी रही कि इतना पौराणिक कुआ है पौराणिक हंस कोप है उसे आपको चिन्हित करके उसके नाम पर पर्टिकुलर एक खतौनी में स्थान चिन्हित कर देना चाहिए इतना क्षेत्रफल हंस कूप के नाम पर है अब वो माफिया प्रवृत्ति का व्यक्ति है उसे तो भूमि पर कब्जा करना है बेटा आप गंगा जी का जमीन है कुंभ मेला क्षेत्र की जमीन है यहां तो वैसे भी किसी को निर्माण कार्य नहीं करना चाहिए हाई कोर्ट का सीधे-सीधे अमान ना मानी गई है लेकिन फिर भी उच से चार दिवारी एकदम बनाते हुए सब चले जा रहे हैं
00:26:46:16 खास करके ये तथाकथित जो सत्यम के योगी बैठे हुए हैं तो कारण उसके पीछे यह है कि न्यायपालिका चुप है मीडिया चुप है इन सब का बहुत बड़ा स्खलन है हाई कोर्ट का स्पष्ट अवमानना किया जा रहा है बेटा गंगा निर्माण कार्य नहीं हो सकता है कुंभ मेला अधिकारी कुंभ मेला क्षेत्र लोग क्या कर रहे हैं कुंभ मेला क्षेत्र की लैंड पर इतना कब्जा होता चला जा रहा है कोई कुछ नहीं कर रहा है हंस को पौराणिक होसे चिन्हित करके उना स्थान को प्रोटेक्ट कर लीजिए लेकिन फिर भी नहीं पुरातत्व ने अपना रिपोर्ट लगाया पर्यटन ने रिपोर्ट लगाया राजस्व ने रिपोर्ट लगाया पुलिस विभाग स्वयं ने रिपोर्ट लगाई लेकिन कुछ कारवाई नहीं फिलहाल इसकी ऐतिहासिकता और इस पर कब्जे की जो कथा हम सुना रहे थे उसके तरीके से हम थोड़ा सा अवगत करा दें 1992 में इस तरीके से इन्होंने फर्जी इंदराज को घटित कर दिया था और फिर 2002 में अपने कराए भी थे एसडीएम फूलपुर ने निरस्त कर दिया बोर्ड ऑफ रेवेन्यू गए 2009 में वहां से मल्होत्रा साहब थे उन्होंने निर्णय दिया उन्होंने कहा कि जो संध्या वट जिसमें है जो भूखंड संख्या 11 है इतनी जमीन ग्राम सभा की है लिहाजा इतनी जमीन क्रियायोग संस्था ग्राम सभा को कहीं अन्यत्र दे दे क्योंकि इनका कब्जा पूर्व से ही है यह कह कर के दिया क्योंकि ये स्वयं को धार्मिक संस्था या सामाजिक संस्था के रूप में चिन्हित कर रहे हैं लेकिन पूछा जाए क्या धार्मिक कार्य किया जा रहा है क्या सामाजिक कार्य किया जा रहा है संतों को ही प्रताड़ित किया जाता है अभी जो लोग दर्शन करने गए थे साधु संत उनको बंधक बनाकर वि प्रताड़ित किया गया क्या-क्या घिनौने कार्य किए जा रहे हैं वो सब दिखाई नहीं पड़ते
00:28:01:21 हैं संतों के साथ इतना बड़ा प्रताना किया जा रहा है अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है फिलहाल इस तरीके से इन्होंने 2009 में बोर्ड ऑफ रेवन्यू का जो निर्णय आया लेकिन उसमें भी ध्यान रखने का विषय है आज भी हंस तीर्थ आश्रम ये जो दिख रहा है भूखंड संख्या 12 में इसमें पांच विश्वा इन्होंने फर्जी इंदराज कराया था 12 विश्व आज भी मंदिर के ही नाम पर आबादी है और जिसे इन्होंने कहने लगे कि हमारी मंदिर है भैया आपने 1992 में आए हो ना उससे पहले हंस तीर्थाश्रम है 250 300 साल पुरानी मंदिर हैं ये सारी चीजें सभी प्रमाण है शास्त्रों में प्रमाण है आर्कलॉजिकल डिपार्टमेंट की रिपोर्ट है हर चीजें बोर्ड ऑफ बोर्ड ऑफ रेवेन्यू का जो निर्णय दिया गया 2009 में उसको तत्कालिक ग्राम प्रधान ने उस समय हाई कोर्ट में चैलेंज कर दिया हाई कोर्ट ने उसका परिशीलन किया और स्टेटस क्यों दे दिया स्थगन का आदेश दे दिया लेकिन इसके उपरांत भी क्रियायोग संस्थान ने स्थगन के आदेश को फॉलो नहीं किया वो अपनी चार दीवारी को बढ़ाता चला गया कोर्ट ऑफ कंटेंट की नोटिस जारी हुई पुरी के शंकराचा जी भी वहां स्थलीय निरीक्षण करने गए इससे झल्लिया करके वह तत्कालिक ग्राम प्रधान के ऊपर क्रिमिनल केसेस लंच करा देते था जो उसके विरुद्ध जाता है क्रिमिनल केसेस लंच करा देते हैं और क्रिमिनल केसेस के थ उनको छ महीने के लिए जेल भेज दिया गया निर्दोष जो थे निर्दोष ग्राम प्रधान और वो जो संत थे उन सब पर क्रिमिनल केसेस लांच कर दिए गए और फिर वो जब तक बाहर
00:29:16:27 आए ये अपना एंक्रोचमेंट करना शुरू कर दिए उनके पास सामर्थ्य नहीं था गृहस्थ थे करते तो क्या करते तो वो स्टेटस क्य वाला मामला जो है आज भी ऐसे ही पेंडिंग का पेंडिंग पड़ा हुआ है लिहाजा क्या हुआ कि 2012 में पीआईएल डाली गई उसमें बृज कुमार पांडे जी प्रधान रूप से थे उन्होंने 37 324 ल 2012 आप लोग देख भी सकते हैं पीआईएल नंबर को उसके रिशन को भी निकाल सकते हैं तो उसमें राजस्व विभाग ने आख्या लगाई कि भूखंड संख्या 12 में जो हंस तीर्थ आश्रम है वह क्रियायोग संस्थान की चार दीवारी से बाहर है और हंस तीर्थ के दर्शन पूजन से कोई अड़चन नहीं आ रही है और भूखंड संख्या 11 में जो संध्या वट वृक्ष है व वर्तमान में क्रियायोग संस्थान चार दिवारी में है और स्टेटस क्यों से जब कोर्ट का आदेश हुआ है 2009 वाला तब से यह दर्शन पूजन से रोक रहे हैं इस चीज को कोर्ट में राजस्व विभाग ने रिपोर्ट लगाई तो इन्होंने एफी डेविड दिया कोर्ट को कि हम वट वृक्ष और मंदिर के दर्शन से किसी को वंचित नहीं कर रहे यह बात ध्यान रखने की है कि इस चीज को कोर्ट ने अपने ऑर्डर में सबमिट किया कि लर्न काउंसिल अपीयरिंग यर द रेस्पोंडेंट स कैटेगरी स्टेटेड द रेस्पोंडेंट आर नॉट ंग एनी रिटी टू विजिट द टेंपल मतलब महाराज जी का कहना यह है कि जो अतिक्रमण कारी हैं उन्होंने कोर्ट
00:30:31:27 को यह कहा कि हम किसी को भी दर्शन से और वहां के स्नान आदि से स्नान ध्यान आदि से रोक नहीं रहे हैं परंतु वास्तविक परिस्थिति कुछ और थी इस बात पर जो हमारी ओर से जो अपील की गई थी मुक्ति के लिए उस जगह की मुक्ति के लिए तो उस उस अपील को कोर्ट ने खारिज किया डिस्मिस कर दिया यह कहते हुए कि वो तो आपको ऑलरेडी सुलभ है ना जिसको आप पाना चाह रहे हो वो आपको डी प्राप्त है तो क्यों ऐसा करना प करना पड़ा उन्हें क्योंकि उनको एक यह कहा गया कि हम तो सबके लिए मंदिर को खुला रख रहे हैं हम तो सबके लिए आना जाना सबको दे रहे हैं अनुमति तो इस बारे में एक बार वहां पर जो है हमारी कहेंगे कि लापरवाही कह लीजिए या फिर किसी प्रकार से अन विज्ञ कह लीजिए या फिर अतिक्रमण कारी की चातुर्य कह लीजिए उसके आधार पर हमारी वो जो अपील थी कि उसकी मु के लिए अपील थी उसको डिस्मिस किया गया इसी अनुक्रम में हम आगे बताना चाहेंगे कि एक पीआईएल फिर पड़ी जिसमें इन्होंने क्रियायोग संस्थान ने जितने सारे लीगल एंक्रोचमेंट कर रखा है बड गंगाजी में हाई कोर्ट की उमाना करते हुए उन सब के बारे में जिक्र किया गया तो तत्कालिक जो जांच अधिकारी के लिए फैक्ल वेरिफिकेशन मांग गया था डीवाई चंद्र चण की पीठ
00:31:46:27 ने माई थी तो फैक्ल वेरिफिकेशन के लिए भावनाथ सिंह जी आए डीएम भावनाथ सिंह यादव जी थे वो आए और एक पक्षी रिपोर्ट लगा दी बिना दूसरे पार्टी की बात को सुने हुए ले दिया कि एक प्राचीन मंदिर है जो पूर्व से ही स्थित है जिसे क्रिया योग सत्संग मंदिर के नाम से बताया जो हंस तीर्थ आश्रम है जो हंस तीर्थ मंदिर उसे क्रियायोग सत्संग मंदिर बोल दिया और जो संध्या वट वृक्ष है उसको महावतार बाबा वट वृक्ष बोल दिया इस तरीके 2015 की इनकी रिपोर्ट है इन्होंने उसके अस्तित्व को कहीं ना कहीं से डिरा ही कर दिया उनको बताना चाहिए था ये संध्या वट वृक्ष है और ये हंस तीर्थ मंदिर है इनका दर्शन सबको सुलभ होना चाहिए तो इस तरीके से क्रियायोग संस्थान पक्ष देखता है कि डीएम भावनाथ सिंह ने कह रखा है कि हमारी मंदिर है यह हमारी हमारा वटवृक्ष है भैया किसी की भी जमीन हो बात इसकी नहीं होती जो पौराणिक स्थल होते हैं उसके दर्शन पूजन परिक्रमा से किसी को नहीं रोकना चाहिए आप चाहे जो बाकी करें अपने मनमुक कार्य करिए कुछ करिए लेकिन र तीर्थ के दर्शन से किसी को वंचित ना करें यह एक बड़ा निवेदन है तो आज तक का जो घटनाक्रम रहा उसके बारे में हमने आपको बताया अब रही बात रिपोर्टों की तो रिपोर्टों में आपकी जो आर्कलॉजिकल डिपार्टमेंट की है पुरा तत्व विभाग की रिपोर्ट अभी लेटेस्ट 2022 और 23 में आई है वह हमारे ही पक्ष में है हमारे पक्ष का मतलब जो सत्य है उसके बारे में लिखा है कि ये हंस तीर्थ है हंस कूप है संस्कृति विभाग
00:33:02:06 ने भी इसी का प्रतिपादन किया है और सबसे बड़ी बात हम आपको बताएं कि उत्तर प्रदेश शासन से प्रकाशित है कुंभ दिग्दर्शिका 2013 2019 में इसको दर्शनीय स्थल घोषित किया गया है इसके पौराणिक पक्ष के बारे में स्वयं उसने उद्धारण किया अर्थात शासन से द्वारा यह मान्यता प्राप्त तीर्थस्थल है और पर्यटन विभाग ने अपने मैप में इसका बकायदा मैप बना कर के इसको चिन्हित किया हुआ है पर्यटन विभाग ने लिखा भी है कि जो इस पर अराजक तत्व अतिक्रमण कर रहे हैं उनके विरुद्ध कारवाई पुलिस प्रशासन करे तथा हंस तीर्थ को चिन्हित करके उसके नाम पर लैंड को अंकित करके राजस्व विभाग उसको मुक्त करावे लेकिन अभी तक धरातल पर कार्यवाही नहीं हो पाई है तो यह तो पर्यटन विभाग की बताया उत्तर प्रदेश शासन की बताया पुरातत्व के हमने बताया पुरातत्व के अलावे कमिश्नरेट प्रयागराज ने भी इसका संज्ञान लिया है उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री जी को भी पत्र प्रेषित किया हुआ है आईज के माध्यम से जो हमने डाला था उसमें उन्होंने पूरा उद्धरण दिया है वर्तमान वस्तु स्थिति के बारे में भी अवगत कराया कि हंसती क्षेत्र कितना पौराणिक है कितने साधु संत इसके लिए सक्रिय हैं हमारे शंकराचार्य भगवान ने इसके अतिक्रमण मुक्त करके इसको दर्शन पूजन के समुचित प्रबंधन हेतु शासन से निवेदन कर रखा इनके अलावा बहुत सारे संत हमारे पूज्य विद्या भास्कर
00:34:17:09 जी राघवाचार्य जी किसी संत विशेष का हम नाम नहीं लेना चाहेंगे लेकिन सभी संत समाज अपने तीर्थ स्थल को बचाने के लिए सभी प्रतिबद्ध हैं तो इसी अनुक्रम में हमने कहा कि हाई कोर्ट का जो जजमेंट है 37 324 2012 यह भी हंस तीर्थ के दर्शन के लिए संचित प्रबंधन हेतु यह भी एक अच्छा प्रमाण है और हाई कोर्ट ने स्टेटस क राजस्व परिषद की रिपोर्ट पर लगा रखा है वह भी एक प्रमाण ही सपोर्टिव प्रमाण है और प्रयागराज विकास प्राधिकरण का भी पक्ष में ही है हंस तीर्थ के किया जो है नगर निगम की सीमा के भीतर है राजस्व विभाग ने भी लिखा कि इसे प्रोटेक्ट करना पुरातत्व विभाग प्रोटेक्ट कर पर्यटन विभाग दर्शन के लिए सुलभ कराए तथा नगर निगम आगे आकर के इनका दर्शन पूजन सबको सुलभ करा दे दो मिनट का सारा कार्य है अब लेकिन देखना है कि इस प्रभावशाली माफिया के विरुद्ध कौन भगवान के प्रति समर्पित व्यक्ति है जो आगे आता है और हंस तीर्थ क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कर संरक्षित करते हुए पौराणिक महात्म के अनुरूप दर्शन पूजन एवं परिक्रमा का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित करता है यह प्रधान हेतु है इसमें कोर्ट ने जो हमारी एक अपील डिस्मिस की है वह भी एक हमारे पक्ष में ही
00:35:32:13 एक मजबूत प्रमाण है क्योंकि कोर्ट ने उसमें इस बात को मानते हुए हमारी अपील डिस्मिस की है कि वहां पर दर्शन और ध्यान और परिक्रमा सबको सुलभ है जबकि वो नहीं है अगर इस बा उसके उस डिस्मिस को माना भी जाए तो वो इस बात पर है क्योंकि वहां ये सब चीजें सुलभ है मगर वो सुलभ नहीं है आमजन को वहां पर एक बाकायदा एक बाउंड है जिसके उस तरफ आमजन नहीं जा सकता है इसके साथ ही साथ यह जो जांच हुई है जो विभागीय जांच हुई है जितनी भी जैसे सांस्कृतिक विभाग या पर्यटन विभाग या फिर उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा जो कुंभ दिग्दर्शिका पत्रिका छापी जाती है उसमें भी जो हमारे पक्ष में जितना भी सामग्री प्राप्त है इससे
00:36:22:16 भिन्न कई महानुभावों द्वारा जो ग्रंथ लिखे गए हैं ग्रंथ का संकलन है तीर्थ या प्रयाग के बारे में वहां पर जो चिन्हित किया गया है जैसे गीता प्रेस गोरखपुर का ही है र् तीर्था और जो प्रभु दत्त ब्रह्मचारी जी है उन्होंने भी अपने ग्रंथों में इसका उल्लेख किया है और इसके साथ ही साथ निंबार्क संप्रदाय क्योंकि वह भगवान हंस से ही आ रहा है तो उनके भी ग्रंथावली जितनी भी दार्शनिक ग्रंथावली उसमें एन केन प्रकार आपको इसका संदर्भ मिल ही जाता है और साथ ही साथ इसके साथ महाराज जी ने और भी कई सारे नाम हमको गिनाए थे जैसे कि एक रिसर्च की गई है प्रोफेसर डीपी दुबे जी के द्वारा उन्होंने भी अपनी रिसर्च में जहां जहां पर एक कूप है यानी हंसराज जी का हंस भगवान का कुआ हंस कुआ और जो मंदिर है उसको चिन्हित किया है डीपी दु दुबे जी ने और श्याम सुंदर सिंह जी हैं जो निंबार्क पीठ प्रयाग के हैं उन्होंने तीर्थ एवं तीर्थराज प्रयाग नाम के ग्रंथ में इसको चिन्हित किया है कि यहां यहां पर यह हंस तीर्थराज क्षेत्र है इसके साथ ही साथ महाभारत में इसका प्रमाण है और प्रयाग
00:37:38:01 प्रदीप नाम की एक पत्रिका है जिसमें की इसका आपको संदर्भ मिल जाएगा तो यह सारी चीजें हैं मेरा आप सभी से निवेदन है जो भी इस वीडियो को देख रहे हैं इसको ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाए और अपील करें अपने अपने माध्यम से हैशटैग आपको बता दिए जा रहे हैं वह हैशटैग लगा कर के रील बनाएं और मूवमेंट चलाएं मेक फ्री हंसराज तीर्थ इसमें हमारी सहायता करें ज्यादा से ज्यादा जन समुदाय इसको जाने यह googleapis.com
00:38:57:14 कोना कुंभ मेला क्षेत्र गंगा तट प्रयागराज उत्तर प्रदेश भारतवर्ष सबको संरक्षित करके पौराणिक महात्म के अनुरूप दर्शन पूजन एवं परिक्रमा का संचित प्रबंधन करें एक मात्र उद्देश्य हमारा यही है ताकि हम लोग अपनी पंचकोष परिक्रमा द लिए जो हमारी पौराणिक संपदा है वो सुलभ हो जाए ये हमारा सही तरीके से पूरे कर सके जैसे कि इसमें लिखा भी है संरक्षित हो दर्शनार्थ सर्व सुलभ हो जी तो आप सभी से निवेदन है जो भी संरक्षित करने में सहयोग दें जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाए जिससे कि एक सशक्त मूवमेंट दिखाई दे इस जगह को मुक्त कराने के लिए और मुक्त क्यों कराना क्योंकि यह जगह किसी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है यह हर प्रत्येक सनातनी की है तो यह थी हमारी विशेष चर्चा एक महत्त्वपूर्ण विषय पर और संभवतः भविष्य निकट भविष्य में हम आपको उस जगह का वो भी कराएंगे अवलोकन कि वहां पर धरातल पर किस तरह की परिस्थितियां है सभी को जय श्री राम जय श्री हंस भगवान हंस तीर्थ क्षेत्र की जय हो पौराणिक हंस जन्मभूमि की जय हो पौराणिक हंस तीर्थ क्षेत्र की जय हो हंस तीर्थ मंदिर
00:40:12:18 की जय हो हंस कूप की जय हो संध्या वट वृक्ष की जय हो संकष्ट हर माधव की जय हो जय श्री जगन्नाथ जय श्री हंस भगवान सीताराम जय [संगीत] जगन्नाथ i [संगीत]
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हंस तीर्थ मंदिर को मुक्त करो | Free Hansa teerth movement #freehindutemples #free_hansa_teerth
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