Used:
SRT: ⬇ SRT ⬇ Original file

.srt or .vtt (Hindi). The old file is backed up. After that the match for this video is rebuilt (may take a few minutes, keep the page open).

⬜ Not used yet · 00:00:02:00 – 00:00:39:18 (0:38)

00:00:02:00 तो जैसा कि अभी हम बात कर रहे हैं पिछले कई दिनों से अद्वैत सिद्धांतों के बारे में तो एक आरोप और लगाया जाता है अद्वैत के ऊपर कि भाई अद्वैत में जो है भक्ति भाव नहीं है। भक्ति रस [संगीत] थोड़ा कम है। और इसी परिपेक्ष में आगे एक क्वेश्चन किया जाता है कि जो अद्वैत को मानने वाले लोग हैं वो ज्ञान मार्गी है। वो जो है भक्ति [संगीत] मार्गी नहीं है। वो जो है ज्ञान पर ज्यादा चलते हैं। उनका फोकस ज्ञान पर उनका भक्ति रस उनके पास नहीं होता है। तो इसी पर आज हम बात करेंगे। सबसे पहली बात अभी यही प्रश्न कुछ दिनों पूर्व पूज्य गुरुदेव जी महाराज से पूछा गया था। तो गुरुदेव जी महाराज ने सूत्रात्मक शैली में बड़ा ही सरल उत्तर दिया कि अन्य

00:00:39:18 में प्रीति आत्मा के लिए होती है। आत्मा में प्रीति अन्यों के लिए नहीं होती है।

⬜ Not used yet · 00:00:43:22 – 00:06:56:00 (6:12)

00:00:43:22 अगर हम इस सिद्धांत को सही से समझ ले तो यह तथ्य उद्भाषित होगा कि श्रेष्ठतम भक्ति की जो पराकाष्ठा है वो भी अद्वैत में ही है। कैसे? अगर आप यह कहते हैं कि भाई मैं भगवान की भक्ति करता हूं। मुझे उससे बहुत सुख मिलता है। सभी कहते हैं भगवान की भक्ति करने का मन करता है। भगवान की भक्ति में मेरी प्रीति है। मेरी खुशी है भगवान की भक्ति में। अब बात यह आती है कि अगर आप अपने से भिन्न भगवान को मानते हैं। द्वैत मानते हैं। आप और भगवान का एकत्व नहीं मानते। किसी भी स्तर पर व्यवहार में छोड़िए परमार्थ में भी नहीं मानते। तो इसका अर्थ क्या है? कि आप भगवान से प्रेम नहीं करते हैं। आप अंततः अपने से ही प्रेम करते हैं और अपनी प्रीति के लिए अपने सुख के लिए भगवान को एक साधन के रूप में उपयोग करते हैं। इसी को अगर और देख ले कि अगर अंतिम रूप से द्वैत को मान लिया जाए अद्वैत को ना स्वीकार किया जाए अंतिम रूप से तो अगर आपको बैकुंठ लोक गोलोक या जो भी लोक बताए जाते हैं यदि आपको द्वैत के अनुसार यदि आप द्वैत के अनुसार मिलने वाले मोक्ष को मोक्ष मानते हैं तो यदि आप उसके अनुसार किसी धाम में या लोक

00:01:59:01 में पहुंच भी जाते हैं और भगवान आपसे थोड़ी भी दूर बैठे हैं और आप यदि संतुष्ट हो चुके आप ये मान चुके यही मेरा मोक्ष तो इसका अर्थ है कि सारा जीवन आपने जो भगवान की भक्ति की थी वो भगवान की भक्ति नहीं वस्तुत [संगीत] वो उस धाम की उस लोक की भक्ति थी जिस जहां पहुंचकर के आप सुख सुखी हो सके [संगीत] उसमें भगवान का उपयोग आपने एक साधन के रूप में किया था जो वहां पर आपको पहुंचाएगा और यदि वहां खड़े होकर के आपके मन में अभी भी एक इच्छा आ रही है कि भगवान मुझे आलिंगन कर ले भगवान मुझे छू ले मैं भगवान के पैर पकड़ लूं मैं भगवान के पास चला जाऊं एक सेंटीमीटर दूर भी यदि आप हैं और आपके मन में यह इच्छा आ रही है कि मैं भगवान से चिपक जाऊं तो इसका अर्थ है कि अभी आपको मोक्ष नहीं मिला है। तो भक्ति की पराकाष्ठा कहां है? जब आप यह कह पाएंगे कि मैं भगवान की भक्ति इसलिए करता हूं कि उससे प्रीति भगवान को ही मिलती है क्योंकि मेरे अंदर भगवान ही है। उनको प्रीति मिल रही है इसलिए मैं भगवान की भक्ति करता हूं। तो ये तो हुई अद्वैत की भक्ति। तो आप ही बताइए कि भक्ति की पराकाष्ठा कहां पर है? अद्वैत में के द्वैत में? एक मिथ्या फैलाई गई है भगवत पाद आदि शंकराचार्य जी के बारे में कि वो द्वैत के विरोधी थे

00:03:14:21 और अद्वैत के समर्थक थे केवल अद्वैत के। ऐसा नहीं है। वो द्वैत के विरोधी नहीं थे। उन्होंने द्वैत को स्वीकार किया व्यवहार में और उन्होंने द्वैत के रास्ते पर चलके फल के रूप में प्राप्त होने वाले प्राप्त के रूप में स्वीकार किया। अद्वैत को अर्थात अगर ऐसा ना होता तो वो इतने सारे हिंदू मंदिरों का पुनरत्थान क्यों कराते जहां पर मूर्तियां है जहां पर भगवान की भक्ति होती है जहां पर भगवान की भक्ति का गुणगान होता है भगवान की लीलाओं का गुणगान होता है क्यों वो पुनरुद्धार करते इतने सारे मंदिरों का अगर ऐसा ना होता तो उनसे पूछे जाने पर कि भाई अब मैं जीव भाव को प्राप्त हो गया हूं अब मुझे करना क्या है एट द एंड मैंने सब जान लिया द्वैत अद्वैत मैंने सब कुछ सारी चीजें जान लिए मुझे करना क्या है? व्हाट टू डू? तो क्या कहा उन्होंने अंत में? या तो तुम काम के शत्रु शिव का भजन करो या तो तुम कंस के शत्रु कृष्ण का भजन करो। क्यों कहा उन्होंने? उन्होंने तो नहीं कहा आज से अभी से तुम खुद को कृष्ण समझने लगो। उन्होंने तो नहीं कहा कि आज से अभी से तुम खुद को शिव समझने लगो। उन्होंने प्राप्तव्य की स्थिति में माना कि तुम जब तुम कृष्ण को भजोगे तब तुम्हें प्राप्त होगी वो स्थिति कृष्ण के साथ एकत्व की स्थिति। और अगर वह स्थिति

00:04:29:22 प्राप्त नहीं हो रही है तो या तो आपकी भक्ति वास्तविक नहीं है और या फिर आपको मिलने वाला मोक्ष वास्तविक नहीं है। इसी क्रम में आगे भक्ति और ज्ञान के नाम पर भी अपनीपनी रोटियां सेकी जाती है। भाई वास्तविकता में आप ज्ञान को भक्ति से अलग कर ही नहीं सकते हैं। एक ही सिक्के के दो पहलू है। ज्ञान और भक्ति। पूज्य कृपात्री जी महाराज ने तो ज्ञान को भक्ति की संतान कहा है। फल कहा है। भक्ति से मिलने वाला फल है। और एट द एंड आप अगर कहते हैं कि हम भक्ति मार्गी है। हम ज्ञान मार्गी नहीं है। तो यह बताइए कि भक्ति करने से आपको अगर जो मोक्ष मिला उस मोक्ष के रूप में मिलने वाला जो फल है वो आपको किस रूप में आया? आप तक किस रूप में आता है? जो द्वैत [संगीत] के अनुसार जो फल मिलता है भक्ति का वह आप तक किस रूप में आया? मैं खड़ा हूं कहां बैकुंठ लोक क्या है? ज्ञान तो ज्ञान के बिना भक्ति के फल का कोई अस्तित्व है क्या? अगर आप व्यवहारिक धरातल पर भी देख ले आज की प्रासंगिक धरातल पर कि मुझे जो है भगवान की भक्ति करने से बहुत सुख मिलता है। यह सुख किस रूप में आता है आपके पास में? ज्ञान के रूप में। अगर और ज्यादा व्यवहारिक धरातल पर देख ले तो यह जो ज्ञान,

00:05:44:28 भक्ति और कर्म है इनको आपस में विभाजित किया ही [संगीत] नहीं जा सकता है। ऐसे बस इतना सा होता है कि किसी के जीवन में ज्ञान पहले आ जाता है। किसी के जीवन में भक्ति पहले आ जाती है। किसी के जीवन में कर्म पहले आ जाता है। इतना अंतर मात्र है। जैसे कि कि भाई मुझे भक्ति करनी है। यह अपने आप में एक ज्ञान है। भाई मुझे किसकी भक्ति करनी है? भगवान श्री कृष्ण की यह क्या है? ज्ञान है। अब मुझे भक्ति करनी है तो हरे कृष्ण हरे राम बोलना है। यह क्या है? कर्म है। आप ज्ञान को भक्ति से अलग नहीं कर सकते। भक्ति का फल है ज्ञान। जब आप द्वैत का निर्वाह करेंगे तो आपको अद्वैत की प्राप्ति होगी। जब आप भक्ति करेंगे तब आपको ज्ञान की प्राप्ति होगी। जब आप भेद के रास्ते पर चलेंगे तब आपको अभेद की प्राप्ति होगी। तो कहने का तात्पर्य यह है कि द्वैत और अद्वैत के नाम पर समाज का विभाजन करना बंद कर दीजिए। शिव और विष्णु के नाम पर समाज का विभाजन करना बंद कर दीजिए। ज्ञान और भक्ति के नाम पर समाज का विभाजन करना बंद कर दीजिए। [संगीत] जय श्री राम।

00:06:54:18 [संगीत]

Plans for this video (0)

No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.

🤖 Ask AI for suggestions

AI reads the remaining (unused) parts of this video and gives ideas for new videos: from where to where, hook, and what to remove from the middle. Suggestions follow the RULES and appear here as "AI Suggestion". You can review, edit or approve them.

  • ⬜
    Hindi SRT Required

    YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)

  • ⬜
    English SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.

  • ⬜
    Title (per Rules)

    Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.

  • ⬜
    Description

    YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.

  • ⬜
    End Screen

    YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.

  • ⬜
    Cards

    YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.

  • ⬜
    Playlist Automatic

    YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.

  • ⬜
    Thumbnail

    YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.

"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.

Playlists

Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).

A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 6:58 · 15 May 2024

क्या अद्वैत में भक्ति रस नहीं है Part-5 #adiguru #bhakti #bajan

0%
☁️ Drive Not in Drive yet

Notes

Description

(empty)

History

No changes yet.

✂️ Clip Cutter

⌨️ Keyboard shortcuts

Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop

▶

Start

End

🔍 zoom
Already used Plan clips
⚠️ () of this clip is already used in another video (green part). Fine if on purpose, otherwise change the times.
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)

Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".

Clips () · Total

Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.

Hook, full note for editor, status