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00:00:01:08 तो सभी को जय श्री राम। जय श्री राम। आज हम बात करने वाले हैं एक रामपाल जी के अनुयाई हैं और उनकी जो गीता 13 ज्ञान अमृत और गीता ज्ञान गंगा ज्ञान गंगा नाम की पुस्तकें हैं। उनमें से कुछ चीजें हैं। कई ऐसी चीजें जो हम उसे पढ़कर भ्रमित हो रहे हैं। तो उसको समझने के लिए रामपाल जी के अनुयाई मिले हैं। तो इनसे हम कुछ बातें करेंगे। चर्चा है तो सबसे पहले थोड़ा सा आप अपना परिचय दे दीजिए। प्रमोद दास लमपुर तो सबसे पहले तो मैं यह जानना चाहता हूं कि जैसे आपकी ज्ञान गंगा जो किताब है वो यह कहती है कि कबीर जो है वो भगवान हैं और ब्रह्मा विष्णु महेश कहीं ना कहीं कबीर से कुछ निचले स्तर के तो जो कबीर हैं जिनको आप भगवान मानते हैं गीता ज्ञान अमृत के द्वारा क्या ये सर्वशक्तिमान है? जी शास्त्रों में तो यही है। तो शास्त्रों में ईश्वर की एक परिभाषा दी गई है कि सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म ईश्वर वो है जो कुछ भी कर सकता है। जिसने सारे नियम बनाए हैं। है ना? वो उसके
00:01:16:19 ऊपर कोई भी नियम लागू नहीं हो सकता। उसने सभी नियम बनाए हैं। तो क्या कबीर वही है जिन्होंने सारे नियम बनाए हैं। जिनके ऊपर कोई नियम लागू नहीं हो सकता। हां जी। हर धर्म के हर शास्त्र में तो यही है। आप अभी हम लोग गीता ज्ञान अमृत ज्ञान गंगा की बात कर रहे हैं तो आप उसके बारे में बताइए। धर्म शास्त्रों के अनुसार तो मतलब कबीर इज गॉड कबीर गॉड है मगर मैं यह पूछ रहा हूं क्या कबीर के ऊपर कोई भी नियम लागू होता है कबीर जी के ऊपर कोई नियम लागू नहीं होता तो जो कबीर हैं वो अपनी देह को नष्ट कर सकते हैं क्या शब्द है वो मैं मैं पूछ
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00:01:59:20 रहा हूं वह अपने जो दिख रहे हैं कबीर वह अपना नाश कर सकते हैं। वो शब्द रूप है। मैं आपसे
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00:02:07:08 पूछ रहा हूं क्या वो अपना नाश कर सकते हैं? वो अविनाशी हैं। मैंने आपसे पूछा क्या वो अपना नाश कर सकते हैं? इसका जवाब दीजिए। हां या ना? कर सकते हैं। वो शब्द है। शब्द का कभी नाश नहीं होता। अरे मैंने आपसे यह नहीं पूछा वो क्या है? अभी आपने कहा उनके ऊपर कोई नियम लागू नहीं होता। अब मैं पूछ रहा हूं क्या वह अपना नाश कर सकते हैं? परमात्मा है वह तो कुछ भी कर सकते हैं वो जाने। आप ना अपने मुंह से आप बताइए उनका जो दिखाई देने वाला स्वरूप है, क्या उसको वो नष्ट कर सकते हैं? एक मिनट। उनका जो दिखाई देने वाला रूप है, क्या उसको वो नष्ट कर सकते हैं? छोड़ सकते हो शरीर को? तो जिस समय वह अपने स्वरूप को छोड़ेंगे उस समय वह किस रूप में विद्यमान होंगे? शब्द रूप में। उन इस शरीर के अंदर जो शरीर है वो शब्द रूप है। असली शरीर वो है। मतलब वो अपने उस रूप में यहां पर नहीं है जिस रूप में वो वहां पर हैं। है ना? यानी जो शरीर यहां दिख रहा है जो शरीर यहां साकार सगुण साकार शरीर दिख रहा है जो आंखों को दिखाई दे रहा है उस शरीर में वह यहां पर नहीं है नहीं जी उस शरीर में नहीं उस
00:03:22:09 शरीर के अंदर है वो तो आप तो कहते हो कि नहीं परमात्मा सगुण साकार है हां जी साकार है परमात्मा साकार रूप को तो वो नष्ट कर पा रहे हैं ना कौन कबीर वो अभी जो जिस चोले में है वो वो शरीर पांच तत्वों का बना हुआ है लेकिन उनका अविनाशी जो शरीर है वो शब्द रूप है वो अविनाशी है। क्या वह मनुष्य अपनी आंखों से देख सकता है? किसको? उनका अविनाशी शरीर नहीं देख सकता। तो जो निराकार है उसकी व्याख्या क्या होती है? जिसका कोई आकार ना हो। जो आंखों का विषय ना हो। जिसको आंखों से देखा ना जा सके। जिसको आंखों से देखा ना जा सके। जिसको हाथों से छुआ ना जा सके। जिसको कानों से सुना ना जा सके। यह होता है निराकार। निर्गुण निराकार। आप कह रहे हो कि वह उनके पास एक ऐसा शरीर है जिसको कानों से सुना नहीं जा सकता, आंखों से देखा नहीं जा सकता, हाथों से छुआ नहीं जा सकता। मगर फिर भी वो साकार है। हम तो जी शास्त्रों में जैसा लिखा है वो परमात्मा साकार है। हर धर्म के हर ग्रंथ में बाइबल में कुरान शरीफ में और वेदों में सभी लिखा हुआ
00:04:37:10 कि वो परमात्मा साकार है। उसने मनुष्य को अपने जैसा बनाया था। अच्छा चलिए अब थोड़ा और आगे चलते हैं। अब ये बताइए कबीर ने क्या अवतार भी लिए हैं दूसरे या खुद ही आता है? कबीर साहब कलयुग में दो बार आते हैं। एक बार तो उसका शरीर एक बार तो अपने असली रूप में आते हैं वो। फिर दोबारा में जब आते हैं तो वो किसी अन्य चोले में आते हैं। पर होता वो कबीर ही है। कहने का अर्थ मेरा यह है क्या कबीर अवतार ले सकता है? प्रकट होता है। पर मां के गर्भ से जन्म ले सकता है। नहीं लेता। नहीं। अभी आपने कहा वो किसी नियम के नीचे नहीं है। हां जी। तो ये नियम क्यों आ रहा है? मैं मां के गर्भ से जन्म नहीं ले सकता।
00:05:24:28 भाई जिसने सब कुछ बनाया हो जिसने जीव को बनाया हो तो जीव के पेट से उस परमात्मा की उत्पत्ति कैसे हो सकती उसी को तो परमात्मा कहते हैं जो कोई ना कर पाए वो कर पाए तो फिर परमात्मा क्यों नहीं कर पा रहा है क्या चीज अरे मैंने पूछा आपसे क्या परमात्मा किसी भी नियम के नीचे है आपने कहा नहीं है अब मैं पूछ रहा हूं क्या वो माता के गर्भ से जन्म ले सकता है तो आप कह रहे हैं नहीं ले सकता तो ये नियम गया ना क्या नियम आ गया ना परमात्मा के ऊपर परमा परमात्मा पर कोई भी कर्म लागू नहीं होता। तो ये नियम आ गया ना वो माता के गर्भ से जन्म नहीं ले सकता। नियम नियम हो या ना हो पर वो माता के पेट से जन्म नहीं ले सकता। तो भगवान
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00:06:11:18 पर नियमित हो गया ना। तो तो सर्व नियामक नहीं है तो तो परमेश्वर नहीं है। फिर वो
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00:06:18:09 किसी और ने नियम बनाया कि भाई तुम परमेश्वर हो पर अब तुम माता के गर्भ से जम नहीं लोगे। उसके लिए देखो जी ऐसा है कि मैं इतना ज्ञानी नहीं हूं। उसके लिए शास्त्र प्रमाण आप शास्त्रों को अभी शास्त्रों पे आगे चलते हैं। मैं आपसे अभी पूछ रहा हूं। आपने कहा नियम लागू नहीं होता। फिर आपने कहा माता के गर्भ से धन नहीं ले सकता। तो नियम लागू हो गया ना। तो यानी कि आपका जो कबीर है वो नियमित है। नियमित है ना पता नहीं आप ही तो कह रहे हो माता गर्भ से जन्म नहीं ले सकता नहीं ले सकता तो ये नियम है ना एक हां नियम है नियमित हो गया ना मानो तो मानो [हंसी]
00:07:01:18 जो है वो और कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला अल्लाह एक ही है। हां जी। वही कबीरा वही अल्लाह है। अब अल्लाह 61 101 में कह रहे हैं मेरी संतान नहीं हो सकती कुरान में। हमने तो नहीं पढ़ा। आप बिना बिना पढ़े आप करते। भाई कोई कुरान खोल के दिखाओ जरा Google से अभी के अभी। किसी का मोबाइल है? हमने कुरान शरीफ कुरान आयत नंबर 25 अरे भाई मैं जो पूछ रहा हूं वो तो बताइए। कुरान में छ 101 में लिखा है मेरी संतान जन्म नहीं ले सकती। यानी कुरान का जो अल्लाह है कुरान का जो ईश्वर है वो कह रहा है मैं नियम के नीचे हूं। मेरी संतान जन्म नहीं ले सकती। तो क्या आपका कबीर भी ऐसा ही है नियमित जिसकी संतान नहीं हो सकती?
00:07:52:07 मतलब क्या कबीर भी ऐसा नियम के नीचे है जिसकी संतान नहीं हो सकती? जो धरती पर नहीं आ सकता क्योंकि कुरान का जो ईश्वर है वह कह रहा है मैं धरती पर नहीं आ सकता। मेरी संतान धरती पर नहीं आ सकती। क्या कबीर भी ऐसा ही है? समझ ही नहीं रहा हूं मैं आपकी बात। आपने कहा कुरान का ईश्वर अल्लाह और आपका ईश्वर कबीर एक है। ठीक है? अब जो कुरान का ईश्वर है वो ये कह रहा है। सुन लीजिए। सुन लीजिए। सुन लीजिए। सुन लीजिए। कुरान शरीफ का कुरान का जो ईश्वर है वह यह कह रहा है कि मैं अवतार नहीं ले सकता मैं धरती पर नहीं आ सकता। मेरी संतान जन्म नहीं ले सकती। क्या कबीर भी धरती पर नहीं आ सकता है? क्या कबीर की भी संतान जन्म नहीं ले सकती है? क्या यह बात सही है? कबीर कबीर जी की संतान जो है जन्म नहीं लेती है धरती पे। कभी तो स्वयं ही आते हैं। तो चलिए स्वयं वो तो यह कह रहा है मैं भी। मैं मैं आ ही नहीं सकता। कौन? कुरान का ही निराकार है ना आप तो कह रहे हो कि अल्लाह और कबीर एक है अल्लाह और कबीर
00:09:05:01 अल्लाह और कबीर एक वो एक है लेकिन कुरान शरीफ का जो ज्ञान दाता है जो ज्ञान देने वाला वो कोई और है वो कोई और है लेकिन अल्लाह और कबीर एक है कि नहीं अल्लाह और कबीर एक है तो जब एक हैं तो अल्लाह कह रहे हैं कि मैं धरती पर नहीं आता अल्लाह कह रहे हैं कि मेरी संतान जन्म नहीं ले सकती नहीं देखा तो आप बिना पढ़े ही किसी को मानने लगते हो। नहीं तो जब आपने पढ़ा नहीं कुरान को आपने कैसे मान लिया कि कबीर कबीर और अल्लाह एक है? हमने कुरान शरीफ आयत नंबर जो आयत नंबर 52 से 58 तक पढ़ी है। बस बाकी कुरान से आपको मतलब नहीं है। उसमें साफ-साफ ये आप पूरी किताब पढ़ोगे कि उतनी पढ़ोगे जितनी आपके मतलब की अब हमें तो जितनी पढ़ने को मिली है उतनी आप कुरान के आधार पे ये कह रहे हो कि उसका अल्लाह और यहां कबीर एक है। बाइबल में और कुरान शरीफ में साफ-साफ लिखा हुआ है कि जिस परमात्मा ने सारी सृष्टि को बनाया उसने छह दिन में बनाया। मैंने आपसे मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या कुरान का ईश्वर जैसे बाधित है नियमित है वैसे ही वैसे आपने मान चुके हो कि कबीर भी नियमित है मां के पेट से जन्म नहीं ले सकता है और उसके एक एक नियम और बता दिया आपने कि उसकी संतान भी जन्म नहीं ले सकती है तो ये तो बाधित
00:10:20:09 हो गया ईश्वर और तैत्री नहीं तो फिर जो भी आपने कहा शास्त्रों में प्रमाण शास्त्रों में कहा गया है सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म अर्थ अगर लेंगे इसका ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है वह सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है। अब इसका क्या करें? यह यह बात बिल्कुल सत्य है कि ईश्वर किसी नियम के नीचे नहीं है। ये नियम है ना वो मां के पेट से गर्भ जन्म नहीं ले सकता। नियम थोड़ी है ये कोई क्या है ये? ये कोई नियम नहीं है। क्या ये नियम नहीं है। आप ही तो बता रहे हो वो ये नहीं कर सकता। हां, जन्म नहीं ले सकता। तो ये नियम ही तो है। आप क्या बता रहे हो ये? क्या बोल रहे हो ये? आप ये क्या बता रहे हो ईश्वर के बारे में? आप यह क्या बता रहे हो बताइए तो परमात्मा से मिल ही नहीं सकता नियम क्या है ये अच्छा ये नियम नहीं है ठीक है भाई यह नियम नहीं है ठीक है अच्छा अब और आगे चलते हैं क्या कुरान के द्वारा मिलने वाली शिक्षा और सनातन शास्त्रों के द्वारा मिलने वाली शिक्षा एक है जी हमने तो यह देखा कि हर धर्म का हर शास्त्र बस एक ही बात कहता है मैं अभी कल को एक नई किताब लिख दूंगा उसको धर्म नाम दे दूंगा उसको भी मिला लेंगे नहीं जी कैसे मिला लेंगे जो किताब हमारे जो धर्म ग्रंथों से मेल खाएगी हम तो उसको मानेंगे। धर्म किसी को भी
00:11:35:13 धर्म मानने का आधार क्या है आपका? जो हमारे शास्त्रों से मेल खाए। हां। तो मैं अब तो क्या कुरान का जो तो जो कुरान का जो ज्ञान है वो आपके शास्त्रों से मेल खाता है क्या? हमारे शास्त्रों हां जी मेल खाता है। यही मुझे सुनना था। मेल खाता है। मैं पूछता हूं। वाल्मीकि रामायण में भगवान श्री राम कह रहे हैं रामो दुरनाभि भाषते राम दो प्रकार की बातें नहीं करता। मैं अपनी
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→ Used in: A · Video शिव पुराण तामसिक है | हरि हर में भेद #iskcon #aryasamaj at 30:17 ↗
→ Used in: A · Live Discussion with Hare Krishna Center ( Not From Iskcon ) at 1:17:47 ↗
00:12:05:06 पत्नी को त्याग सकता हूं। मैं अपने भाई को त्याग सकता हूं। मैं अपने प्राणों को त्याग सकता हूं।
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00:12:11:22 मगर मैं अपने वचन से मुकर नहीं सकता। क्या ये शिक्षा सनातन द्वारा दी जा रही मानते हैं आप? हां जी। अब कुरान में 33व चैप्टर के चौथे वर्ष में कहा जा रहा है कि तुमने अगर किसी को माता बहन बेटी बोल दिया है वो सब तुम्हारे मुंह की बातें हैं। तुम उससे मुकर सकते हो। ये कुरान कह रही है। तो ये शिक्षा अलग हो गई। अलग हो गई। तो आप कैसे कह रहे हो? दोनों में एक ही शिक्षा है। हमने तो आयत नंबर 52 से 58 तक जो पढ़ा है उसमें साफसाफ यह लिखा हुआ है तो जब आपने पूरा खुद नहीं पढ़ा है तो फिर आप लोगों को क्यों बहका रहे हैं कि भाई हमने वो कुरान और उसका ईश्वर एक है। आप तब बोलिएगा जब कुरान को आप बाकी को भी देख लें कि बाकी में क्या लिखा है? तब बोलिएगा कि कुरान की शिक्षा और सनातन की शिक्षा एक है। आप अभी क्यों बोल रहे हैं? आप मना कर दीजिए कि हमने पढ़ा नहीं है। हमने तो इसलिए कहा है आप इसलिए बोल रहे हैं क्योंकि आपके कोई तथाकथित गुरु हैं जिनको आप गुरु मान बैठे हैं। उन्होंने आपसे कह दिया कि कुरान और इसकी शिक्षा एक है। आपने उसको मैच नहीं कराया। मैं आपसे पूछ रहा हूं। राम ने सिखाया एक बात करना। कुरान सिखा रही है कि आप अपनी बात से बदल सकते हैं। तो आप क्यों कह रहे हैं लोगों से कि कुरान और इसकी शिक्षा एक है। कुरान
00:13:26:24 शरीफ का जो ज्ञान दाता है उसने जो ज्ञान दिया है उसने अपने हिसाब से ज्ञान दिया हुआ है। लेकिन लेकिन उसमें यह जो दिखाया गया है कि कबीर ही परमात्मा है जिसने छ दिनों में सारी सृष्टि को रचा और यही बात हमारी वेदों से भी लिखा रही है। तो इसलिए हमने चलो अब आगे चलते हैं। आपका ईश्वर नियमित है, बाधित है और कुरान की शिक्षा अलग है और सनातन की शिक्षा अलग है। अब आगे चलते हैं।
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→ Used in: A · Video एक सवाल : दुनिया भर के पाखंडी परेशान | परंपरा at 12:20 ↗
→ Used in: B · Video रामपाल की गुरु परंपरा का काला सच: क्या है सतलोक और कबीर साहेब का असली रहस्य? | R... at 0:01 ↗
00:13:52:14 अब यह बताइए मुझे कि जिन श्लोकों का अर्थ आप लेते हैं कि हमारे वेदों से मेल खा रहे हैं। यानी वेद आपके लिए प्रमाण है। अच्छा ये वेद आपको मिले कैसे? मिले कैसे? वेद तो मोबाइल में अभी आपके में। अरे मोबाइल में कहां से आए? मार्केट में कहां से आए? गोरखपुर से प्रकट कहां से हुए? नहीं। तो आप तक कैसे आए? आपको सपने में आके दिए या आपने कहीं किसी पुस्तक में पढ़ा, किसी किताब में देखा? कैसे आए? वेद हमने टीवी पे देखे हैं। संत रामपा जी उनको खुल खोल के जो दिखाते हैं। उनके पास वो जो खोल के दिखा रहे हैं जो किताबें वो कहां से आई हैं? मार्केट से आई हैं। और कहां से आई हैं? मार्केट तो इसका मतलब है आप मार्केट को प्रमाण मानते हैं। मार्केट प्रमाण मानते मार्केट को प्रमाण नहीं मानते लेकिन जो वेद आपको मिले वेद आपको मिल कैसे रहे हैं जो उन्होंने खोल के दिखाया कि देखो यहां वेद में लिखा हुआ है वो वेद उन तक कैसे आया वो श्लोक जिसका अर्थ आप ले रहे हो कि कबीर भगवान है वो श्लोक आप तक कैसे आया सृष्टि की शुरुआत हुई आज से दो करोड़ साल पहले मान लो या आपके अनुसार
00:15:07:18 कुछ और समय होगा तो वो शुरुआत से ले आप तक वो श्लोक कैसे आया यह बताइए। तो इसका मतलब अभी जो मार्केट में जो किताबें जो बिक रही हैं, जो वेद हैं, कुरान शरीफ है, गीता है, यह सब बेकार हैं। बेकार नहीं है। मुझे मालूम है। मुझे मालूम है वो कहां से आया। मैं आपसे सुनना चाह रहा हूं। क्या आपको पता है वो कहां से आया? कहां से आया? क्या आपको पता है वो कहां से आया? वेद। हां। मुझे पता है कि मार्केट में वो जो किताबें छप रही है, किस आधार पे छप रही है। क्या आपको पता है किस आधार पे छप रही हैं? नहीं पता। हां। वह छप रही हैं गुरु शिष्य परंपरा के आधार पर। जब वेद प्रकट होते हैं तो उसके बाद गुरु अपने शिष्य को वेद रटाते हैं और उसका अर्थ भी रटाते हैं। फिर वह अपने शिष्य को रटाता है। तो ऐसे शिष्य के शिष्य के शिष्य के शिष्य के शिष्य के द्वारा आज तक वह वेद व्याप्त हैं। रटे हुए ब्राह्मण हैं जो उनको रटते हैं और छपवाते हैं। उस छपवाने के द्वारा आपको वेद प्राप्त होते हैं। ठीक? तो अब यह समझ में आया कि गुरु परंपरा के द्वारा अब तक वेद आया तो यह जो ज्ञान है उसका अर्थ वो उससे लोगे जो परंपरा से आया जिससे श्लोक आया है उससे उसका अर्थ लोगे या अपने मन से लोगे मन से क्यों लेंगे जो
00:16:24:14 वेद है जो आए कैसे भी आए हो जो वेद हम दोनों कैसे भी नहीं गुरु परंपरा से आया है अगर अगर आज आप उठा करके देखें वेदों का सबसे पुराना भाष्य तो वो वो सायन वास है जो रामपाल अपने उसमें खोलते हैं तो सायन की किताब होती है तो जब सायन के आप श्लोक ले रहे हो तो सायन का अर्थ क्यों नहीं ले रहे हो वो सायन का अर्थ ले रहे हैं नहीं ले रहे हैं साइन के श्लोक ले रहे हैं इन चीजों से इन चीजों का हमें कोई ज्ञान नहीं है इन चीजों का तो आपको कुछ भी जब ज्ञान नहीं है तो आप क्यों लोगों को भ्रमित करते हैं कबीर भगवान है अब अब ये जो हमारे जो वेद है आप जैसे जो बता रहे हो कि गुरु प्रणाली के और आए हुए हैं। मेरा कहने का मतलब यह है सुनिए मैं जो कहना चाह रहा हूं। मैं वो वही वही मैं कह रहा हूं। देखिए वो जो खोल के दिखा रहे हैं वो जहां से श्लोक आए हैं वहीं से अर्थ भी आया है। अगर आपको किसी व्यक्ति के ऊपर विश्वास नहीं है कि यह भूु है। मान लो यह बुद्ध बुद्धू है। ये तो उसके श्लोक पर भी विश्वास नहीं होना चाहिए। बुद्धू है। गलत श्लोक बता सकता है ना? और अगर उसके अर्थ और अगर उसके श्लोक पर विश्वास है तो यानी कि आपके लिए वह बुद्धिजीवी है और अगर उसके
00:17:39:15 श्लोक पर विश्वास है तो उसके अर्थ पर भी विश्वास होना चाहिए। मगर आप श्लोक उससे ले रहे हो अर्थ अपना दे रहे हो। तो रामपाल जी के पास वो वेद के श्लोक कहां से आए हैं? मार्केट से ही तो उठा रहे हैं। और वो कौन सी किताब खोल रहे हैं? सायन भाष्य। आप दोबारा देखना कौन सा भाष्य पढ़ते हैं वो। तो मेरा कहने का अर्थ यह है कि अगर आप जैसे मान लीजिए भाई इधर आना जरा। जैसे मान लीजिए यह मेरा छोटा भाई है। अब अगर मैं इसको बुद्धू मानता हूं तो इसके द्वारा दी जाने वाली श्लोक को भी मैं नहीं मानूंगा कि यह वास्तविक है। ठीक? और अगर मैं इसको यह मानता हूं कि यह बुद्धिमान है। तो जो यह श्लोक जितना विश्वास मुझे इसके श्लोक पर होगा, उतना ही विश्वास मुझे इसके अर्थ पर भी होना चाहिए। मगर आपने क्या किया है कि श्लोक तो इससे ले रहे हो मगर अर्थ अपना दे रहे हो बताओ नहीं संत राम जो दयानंद सरस्वती जी के द्वारा जो वेदों का जो जो वेदों की जो व्याख्या की गई है उस व्याख्या को खुल के दिखा दयानंद सरस्वती जी के पास वेद कहां से आए उन्होंने रटे हुए थे उनके पास सपने में आए थे या फिर पीछे से गुरु परंपरा के द्वारा जो रटंत विद्या आती है आप आपको शायद मालूम नहीं होगा यजुर्वेद
00:18:54:28 में अष्टाविकृति नाम का श्लोक है कि इन वेदों को कैसे-कैसे कौन-कौन याद करेगा। अगर उसको सरल भाषा में आप लोगों को बताऊं तो वेद के मंत्रों को याद करने का तरीका होता है दाएं से मध्य तक एक आदमी रटेगा। मध्य से बाएं मतलब बाएं से मध्य तक एक आदमी रटेगा। मध्य से दाएं तक एक आदमी रटेगा। ऐसे ही नीचे वाली पंक्ति को रटा जाएगा। इस प्रकार से आठ उल्टे सीधे तरीकों से वह मेद का मंत्र याद किया जाता है। आठ तरीकों से जब वह मेद का मंत्र याद किया जाता है तो उसको आठ परंपराएं वो उल्टे सीधी वाली तरीके से वेदों को रटाती हैं अपने शिष्यों को और वह ऐसे करके प्राचीन काल से आज तक विद्यमान है जिससे कि वेदों में कोई मिलावट ना कर पाए। क्योंकि जिस दिन भी कोई एक श्लोक बढ़ाएगा वह आठों आठों परंपराओं के लोग आएंगे वहां पर और वह अपने अपने श्लोकों अपने उल्टे सीधे तरीकों से उस श्लोक को लिखेंगे और उससे जो मैच नहीं खा रहा होगा वो हटा दिया जाएगा। यह है वेदों का प्रमाण है। अब सुनिए मैं यह कह रहा था कि आपके रामपाल जी को वेदों के सारे मंत्र याद है क्या? उनको याद नहीं याद है पर वो खोल खोल के दिखाते। हां तो खोल के वो दिखाते किसको हैं? जो पहले से गुरु परंपरा के द्वारा श्लोक आ चुके
00:20:10:02 हैं उनको अर्थ किसका देते हैं जो है उसमें नहीं उस किताब जिस किताब को वो खोलते हैं उसका अर्थ लेते हैं क्या ना यह झूठ है वो अर्थ अर्थ अपना सुनिए दयानंद सरस्वती ने कहा क्या कबीर भगवान है नहीं कहा अब आगे चलते हैं अब अंतिम प्रश्न मैं इनसे करूंगा अब आप मुझे बता दीजिए आपने कई जगह यह बात कही कि उसमें एक जगह काल अपने मन का ज्ञान दे रहा है यह वो तो भगवत गीता का आप हट जाओ आप हट जाओ भगवत गीता का जो आपने किताब छापी है गीता तेरा ज्ञान अमृत उसमें आपने ऊपर लिखा है गीता तेरा ज्ञान अमृत अंदर 38वें नंबर के पष्ठ पर आपने लिखा है कि गीता का 95% ज्ञान मानने लायक है 5% ज्ञान व्यर्थ है क्योंकि वह काल ने अपने मन से दे दिया है तो आपने अपने मेन पृष्ठ पर यह क्यों नहीं लिखा गीता तेरा 95% ज्ञान अमृत
00:21:11:10 पता नहीं जी यह तो धोखा है ना जैसे किसी को अपने पास बुलाना है तो अच्छी बात उसको दिखा दी बड़ी-बड़ी जब वह आ गया उसके बाद आप उसको बता रहे हो अंदर की चीज कि हम पूरी गीता को नहीं मानते 5% गीता को हम बेकार कहते हैं सिर्फ 95% गीता को हम प्रमाण मानते हैं और ऊपर क्या लिखा है गीता तेरा ज्ञान अमृत तो कोई भी हिंदू हिंदू होगा तो उसके मन में तुरंत झुकाव आएगा। भाई गीता को मानता है यह तो मगर आप मानते नहीं है। आप 5% को व्यर्थ मानते हैं। अब बात करते हैं आगे क्यों मानते हैं? अब मान अब अब मैं उस पर आ रहा हूं। आपका वो काल तो आपके अनुसार उसका 5% ज्ञान काल ने अपने मन से दिया है और बाकी 95% परमेश्वर का ज्ञान है। वह भी काल ही दे रहा है। कोई और दे रहा है। अच्छा वह भी काल दे रहा है। हां जी। अब आप यह बताइए कि काल जो 5% ज्ञान गलत दे रहा है उसके क्या कारण है? क्या कारण है? वो भटकाना चाहता है या तो या फिर वह अज्ञानी है। तो दो में से एक कारण होगा। क्या कारण है? सुनो बैठो बैठो। क्या कारण है भाई साहब? क्या कारण है?
00:22:23:01 वो अज्ञानी भी और भ्रमित भी करना चाहता है। तो जो व्यक्ति भ्रमित करना चाहता है वह सब जगह करेगा ना। हम जो व्यक्ति अज्ञानी है वह अज्ञानता सब जगह देगा ना फिर 95% क्यों नहीं देगा उस पर कैसे भरोसा उस पर कैसे भरोसा जो व्यक्ति अज्ञानी है वह अपनी अज्ञानता हर जगह देगा जो व्यक्ति भ्रमित करना चाह रहा है वो हर जगह करेगा फिर बाकी की चीज पर भरोसा कैसे लेकिन उसे ऊपर का लेकिन उसको ऊपर की जो जो बातें बताएं वह तो जो बताएगा ही वो भ्रमित करना चाहता है कि नहीं बिल्कुल कर रहा है। वो अज्ञानी है कि नहीं? अज्ञानी भी है। तो 95% ज्ञान उसका परफेक्ट है। यह कैसे? 95% ज्ञान परफेक्ट है। चाहे चाहे तो परमात्मा ने अपने रिमोट से जो उबलवाया हो उस पे तो परमात्मा का 5% नियंत्रण नहीं था क्या उसके ऊपर? पता नहीं। बस पता नहीं। तो ये है कबीर पंथ की सच्चाई। यह रामपाल तो यह रामपाल की सच्चाई। रामपाल को फॉलो करने वाले लोगों का यह हाल होता
00:23:38:02 है जो अंत में कहते हैं पता नहीं। पता नहीं पता नहीं। पता नहीं। कबीर भगवान है क्यों? पता नहीं। वो नियमित है बाधित है। जन्म नहीं ले सकता। क्यों? पता नहीं। वो अल्लाह के समान है। पर उसकी शिक्षाएं मैच नहीं खाती। सनातन की शिक्षाएं उनकी शिक्षाएं अलग हैं। पर क्यों पता नहीं। अंत में कहते हैं शास्त्री प्रमाण है। 26 को उनका अर्थ की बात कह रहा है। यह आपका यह आपका अर्थ है। यह सुनिए यह सुनिए चिल सुनिए। आपकी आवाज इसमें आएगी नहीं अगर बिना माइक के बोलोगे। आप सोच रहे हो कि मैं चिल्ला के कह दूं उसमें नहीं आएगी। ठीक है? मैं एक मैं माइक दे रहा हूं आपको। देखिए आप वेद को प्रमाण मानते हैं। तो प्रमाण मानते हैं। वेद आपको कहां से मिले? फिर कहां से मिले? हां। रामपाल से मिले या कहीं और से मिले। आपके पास में जो शास्त्र है अब वह आपको कहां से मिले? गुरु गुरु शिष्य परंपरा से गुरु शिष्य परंपरा से। मैं शंकराचार्य जी का शिष्य हूं। ऐसे नहीं मिले होंगे। किन्हें? होंगे। वो तो मार्केट से खरीद के ला रहे हैं ना? वो दयानंद सरस्वती के भाष्य को ला के दिखा रहे हैं ना। तो दयानंद सरस्वती
00:24:53:10 के किताब अर्थ को क्यों नहीं मान रहे? दयानंद सरस्वती ने कहा कि वो ईश्वर साकार है। दयानंद सरस्वती ने कहा है। मैं कह रहा हूं दयानंद सरस्वती ने जो अर्थ दिया है क्या निरा परमात्मा ने अपने भाई परमात्मा परमात्मा को साकार हम भी मानते हैं।
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00:25:16:12 जी जी
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