⬜ Not used yet · 00:00:02:12 – 00:21:25:24 (21:23)
00:00:02:12 तो सभी को जय श्री राम आशा करते हैं आप सभी कुशल मंगल होंगे आज का विषय आपने देख लिया है आज दो महानुभाव आने वाले हैं रामपाल जी को मानने वाले और हमें उनकी तरफ से एक प्रस्ताव आया था कि भाई हम आएंगे और आपके वहां पर होगा हम लोग दो लोग आए और मैं और बाबूराम यादव आपने देखा होगा बाबूराम को पिछले कुछ दिनों में हम लोग एक सीरीज बना रहे हैं बाबूराम की स्पेशल वो बाबूराम कॉमेडी कॉमेडी कॉमेडी नाइट्स विथ बाबूराम यादव इस तरह से उसमें बाबूराम की जितनी भी गतिविधियां है इस प्रकार की वह सब आपको देखने को मिलने वाली है है ना तो और और जो अमित दास जी है वो आने वाले हैं
00:01:08:27 जो जिनके बारे जि जिन्होंने अपने एक लाइव स्ट्रीम में य कहा था कि क्या कहते हैं धर्म सनातन कोई धर्म नहीं है यह है वह है तो आने वाले हैं कुछ उन्होंने शायद सभी को जय श्री राम सभी को आशीर्वाद ढेर सारा और इसके साथ ही साथ आपको जैसा कि न्यूज मिला हो एक शास्त्रार्थ हुआ यहां पर यह शायद प्रयागराज में और शास्त्रार्थ में जो करपात्री जी को मानने वाला जो पक्ष था वह विजय हुआ और ईश्वर के अवतार को ना मानने वाला पक्ष हार गया जो कि अल जो आर्य समाज था वह पराजित हुआ है और
00:02:06:14 इसके साथ ही साथ हम मैं बाद में भूल जाऊ तो एक बार याद दिला दीजिएगा दोबारा से इस अनाउंसमेंट को करने के लिए विग्रहवां धर्मः विग्रहवां धर्म नाम से हमारा दूसरा चैनल है जो हम कुछ आने वाले वीडियोस वगैरह और लाइव चर्चा वगैरह उस पर करेंगे विग्रह वान धर्म और उस पर आपको लगभग 79000 के आसपास सब्सक्राइबर मिलेंगे वह काफी दिन से डीएक्टिव है मतलब हम लोग उस पर काम नहीं कर रहे थे किनी कारणवश पर उस पर आपको जो है 79000 के आसपास 80000 के आसपास सब्सक्राइबर्स है उस पर आप उसको सर्च कर सकते हैं विग्रहवां धर्म तो वहां पर उसको हमने अपने बैकअप चैनल के रूप में खड़ा करना है तो आप लोग वहां पर भी अपनी सक्रियता दिखाए उसको भी आप फॉलो कर ले क्योंकि दिन प्रतिदिन इस चैनल पर आक्रमण होता जा रहा है चैनल बंद नहीं हो रहा है मगर आक्रमण हो रहे हैं तो इसलिए एक दूसरा चैनल भी होना चाहिए इसलिए और अद्वैत वेदांत जी का कहना
00:03:21:19 है कि आप स्पॉन पर वीडियोस क्यों नहीं बना रहे हैं ऐसा कुछ नहीं है कि कोई विशेष रूप से नहीं बना रहे हैं फिलहाल इकन भी दूसरी गतिविधियों में इकन जो है उलझा हुआ है बांग्लादेश में जो उनके लोग हैं उनके साथ चल रहा है इधर हम रामपाल में व्यस्त हो गए हैं बीच में आर समाज का भी है तो किसी भी कार्य को जब शुरू करें तो फिर उसको पूर्ण करके ही अब एक लय बन चुकी है तो हम लोग देख रहे हैं और ऐसा नहीं है कि कोई ऐसा सोच लिया कि इस कौन के बारे में नहीं बताना कोई बात आएगी वो अच्छी हो तो अच्छे रूप में और ठीक नहीं है तो ठीक नहीं वाले रूप में यहां से प्रेषित अवश्य किया जाएगा पहाड़ी जी हमारे साथ हैं जो आज एक तरीके से मॉडरेटर का रोल निभाने वाले पाड़ी जी स्वागत है आपका जय श्री राम जय श्री राम हर हर महादेव सभी लोगों को हर हर बिल्कुल
00:04:18:18 आज लाइव चर्चा में पहले हम लोग उन्हीं दोनों को ही लेंगे और उन दोनों को लेने के बाद ही हम जो है किसी और के लिए जो अ क्या कहते हैं ये जो लिंक है उसको पब्लिक करेंगे तब तक आप चर्चा का आनंद लीजिए अच्छा इनकी अभी मैंने पहाड़ी जी एक थोड़ी सी कॉमेडी वाली चर्चा इन दोनों की देखी थी दोनों लोग हालाकि दोनों लोग ठंड तो पड़ी रही है इसमें तो कोई माइनिंग मतलब वो नहीं है म दोनों लोग एकदम एक टोपा पहन करके बांध करके आपस में चर्चा कर रहे थे तो उसमें जो है बाबूराम के सामने ने हमसे बात करते समय एक बात कही थी ना अमित दास ने अमित दास ने कहा था कि काल जो है वो जीवात्मा को खाता है बिल्कुल और जीवात्मा अलग है आत्मा अलग है अच्छा तो जब जब इस मामले पर जो है वहां चर्चा हो रही थी तो वो दृश्य देखने लायक था जो बाबू भाई तत्वदर्शी है आजकल के तत्वदर्शी बाबू भाई है वो बोले नहीं नहीं भगत जी भगत जी वो जो जीवात्मा और आत्मा एक है अमित दास
00:05:33:19 बोले नहीं दो है ये क्या कह रहे हो भगत जी आप गलत बोल रहे हो य दृश्य देखने वाला था मॉडरेटर जी आप जो है अगर हो सके तो दृश्य दिखा दीजिए मैंने आपको भेजा हुआ है जब तक वो लोग नहीं आ रहे तब तक थोड़ा सा दर्शक उसे देख ले मतलब कि खुद के ज्ञान के पर खुद ही फस गए हां एक कह रहा है कि नहीं जीवात्मा और आत्मा एक है व ठीक कह रहा है मगर दूसरा कह रहा है अरे क्या भगत जी आप गलत बोल रहे हो जीवात्मा और आत्मा दो है अलग अलग है और
00:06:17:12 ये जो चैनल है हमारे चैनल पर एक गरिमा मैंने देखी है कि हम किसी को ऐसे ही सर्टिफिकेट किसी को नहीं देते हैं जैसे उनके चैनल पर जाओगे तो उनके चैनल देखना कि शुरू से लेकर सर्टिफिकेट देना शुरू कर देते हैं यह पाखंडी वो धूर्त वो नकली धर्म गुरु यह गुंडा यह वो मतलब की सर्टिफिकेट देना शुरू कर देते हैं लाइव आते ही और उनका टाइटल भी उसी प्रकार से होगा गालिया गालियों से शुरू होगा गालियों से शुरू होगा और गालियों प खत्म होगा और बोलते हैं कि हमारे गुरु जी ने हमको संस्कार दिए हमें किसी से लड़ना नहीं सिखाया ये देख रोक लीजिए क रहे है कि आत्मा और जीवात्मा दोनों एक होती है भगत जी जो आत्मा है उसी को जीवात्मा भी कहते हैं और यह आत्मा जब य से लिकन करके जाती हैय इसका मेरे पास प्रमाण है इसके पास सबूत है गरु पुण में आत्मा का सूक्ष्म शरीर होता है जो इन आंखों से देखा नहीं जा सकता ये मेरे पास इस गरु पुराण में सबूत है कभी भी करके हमारे से प्रमाण देख सकते [संगीत] हैमा सक्ती है भगत जी भगत जी उसी को
00:07:33:02 उस भगवत गीता में दोनों की व्याख्या अलग अलग की गई है आप क्या गलत बता रहे हो कैसे भगवत गीता में दोनों की व्याख्या अलग-अलग की गई है आपने पढ़ा नहीं गीता अध्याय 15 का आठ अभी तो पढ़ा था पढ़ जी का आ प वो हॉलीवुड लगता [संगीत] है ग को वायु गंध के स्थान से ग को जैसे ग्रह करके ले जाता है वैसे ही देदी का स्वामी जीवात्मा भी जिस शरीर का त्याग करता है उससे इन मन सही इंद्रियों को ग्रह करके फिर जिस शरीर को प्राप्त उसम जाता है जीवात्मा जीवात्मा गंध को ग्रहण कर रही है आत्मा गंध को ग्रहण नहीं करती आत्मा किसी भी चीज को ग्रहण नहीं करती जी बता बता व जो आत्मा
00:08:48:14 है आत्मा को जीवामा कते उसको क्या है कि य जो मन है मन को अपने साथ में लेकर के जाती है और उसके जो इंद्रिया है इंद्रियो को भी साथ में लेकर के जाती है बस इतनी सी बात है और वो जब जाएगी तो दूसरे पु इनको प्रवेश कर लेगी इंद्रियो को और मन को सुना आपने तो एक मत नहीं है तो य कैसे जन च इनम से तत्वदर्शी का शिष्य कौन है पहले य तय करलो
00:09:29:18 तभी मालूम पड़ेगा आपकी तत्वदर्शी मुझे लग रहा बा बाबू राम यादव तर्शी के श मगर ये त के श नहीं है आपस में जब विरोध होता ऐसा ही होता है जब जीवात्मा जीवात्मा जब नाम ही जीवात्मा कहा गया उसका तो जीव को अलग आत्मा को अलग कैसे कर रहे हैं जीव भाव को प्राप्त हो चुकी आत्मा जीव भाव को प्राप्त हो चुकी आत्मा बिल्कुल गीता में तो क्षेत्र और क्षेत्र ज्ञ भी कहा गया है क्षेत्र शरीर को कहा गया क्षेत्र ज्ञ आत्मा को सौर कंसाना जी है सौरव कंसाना जी राम पालियो से तो आपको भी दिक्कत है हा इतने ज्यादा अवैध है ये लोग कम से कम इस विषय में तो आपको हमारे साथ होना चाहिए हा कंसाना जी और आप दूसरे से पूछ रहे हैं कि कभी नहाता नहीं है और स्वयं को देखिए आपने डीपी में क्या लगा रखा है आप कभी उप वस्त्र नहीं धारण करते क्या ऐसे ही रहते हैं क्या सदा सर्वदा
00:10:45:18 यह तो दूसरे को सर्टिफिकेट बहुत जल्दी दे देते हैं ये ये यह वो राम पाली नहीं है य अलंकार मुझे लगता है इसलिए बलाए है क्योंकि वो शास्त्रार्थ वाला नीर डाला है ना हमने अच्छा अच्छा आर्य समाज को हमारे जो परंपरा प्राप्त आचार्य है डॉक्टर ज्ञानेंद्र शर्मा उन्होंने पराजित किया अखबारों में आया वही सर्वशक्तिमान वाला विषय था उन्होंने बोला कि जो सर्वव्यापी है सर्वशक्तिमान है वो एक मूर्ति में कैसे आ सकता है और आ जाएगा तो छोटा हो जाएगा अरे भाई जो सदा सर्वदा एक रस रहने वाला है वह अपनी शक्ति को नियंत्रित करके कम ज्यादा करके पृथ्वी इत्यादि का निर्माण करता है कि नहीं करता है बिल्कुल बिल्कुल जैसे मैं कोई कार्य कर पा रहा हूं जैसे मैं मुझे मुझे जो है यह येय पेन उठाना है तोय पेन उठाने मैं इसलिए उठा सका क्योंकि क्योंकि मेरे हाथ जो है ना वह मेरे सर से अलग है अगर मैं पूरा एक जैसा होता तो मैं पेन नहीं उठा सकता था क्योंकि जब भी मैं कोई काम करूंगा जब भी मैं म करूंगा तो मेरी पूरी बॉडी एक साथ
00:12:00:20 मूव करेगी ना तो बक वो सदा सर्वदा जो एक रस है हर जगह वो एक बराबर है जिसके वो हाथ प नहीं वो अपने आप को नियंत्रित करता है कम ज्यादा के फॉर्म में आता है अब अगर ये कहेंगे कि उसने अपने आप को ही नियंत्रित कर लिया तो उसके एक रस का भंग हो जाएगा उसकी जो एक रसता है भंग हो जाएगी तो उस मानना पड़ेगा कि एक रस होते हुए भी न्यून और अधिक वाले रूप में यानी सगुण निराकार अभी भी है मगर सगुण निराकार व अवतरित होता है उसका व रूप खत्म नहीं हो जाता इसी प्रकार से ईश्वर जो सब जगह है उसके रहते हुए भी वह व जो अवतार है उसम वह प्रकट होता है ऐसा नहीं है कि उसका वो वाला जो रूप है वो अलग हो गया खत्म हो गया ऐसा नहीं है होते हुए भी तो क्या मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी सभी प्राणियों का ईश्वर होते हुए भी अपनी योग माया को अधीन करके प्रकट हो ह इसी का तो उत्तर दिया है हा फिर सातव सिरजा महम को बोला ना सिरजा खुद को सजन करता हूं हा यदि ईश्वर स्वयं को नियंत्रित नहीं कर पाएगा कम ज्यादा न्यून अधिक वगैरा वाले उसम रूप में नहीं आएगा तो सृष्टि की रचना
00:13:15:24 ही नहीं होगी अच्छा ये मान लिया जाए कि ये मान लिया जाए कि ईश्वर जो है केवल अपने मन में सोचता है और हो जाता है सही बात है पहली बात तो ये जो मन में सोचने वाली बात है ये जो है अद्वैत मत का वो करती है ब ठीक है वह केवल अपने मन में सोचता है मगर यह ईश्वरीय बात है हमको तो कोई ना कोई शक्ति काम करती हुई भौतिक रूप से अनुभव होगी ना बिल्कुल है ना हमको तो इधर इधर जो हम जो देख रहे हैं कि भाई कोई शक्ति प्रकट हो रही है जैसे यदा यदाई धर्मस्य का अर्थ करते हुए यह कह दिया कुछ भाष्य का ने इनके आगे कि कुछ भी हो वो अवतार ले सकता हो या ले सकता हो मगर जब जब कोई धर्म पर बात आती है तो कोई ना कोई शक्ति प्रकट होती है अब ये कैसे प्रकट हो रही है यह तो सब जगह एक एक सी है कम ज्यादा है ही नहीं तो प्रकट कैसे हो रही है प्रकट होने का शक्ति प्रकट होने का आपने मान लिया तो आपने सगुण ईश्वर को तो मान ही लिया ना अब ईश्वर जब सगुण निराकार हो रहा है निर्गुण निराकार से तो क्या निर्गुण निराकार खत्म हो गया नहीं जब सगुण हो रहा है तो क्या निर्गुण खत्म हो गया तो आपको मानना पड़ेगा दो रूप आपको मानने पड़ेंगे निर्गुण निराकार होते हुए भी वो सगुण
00:14:31:00 निराकार में अपना सृजन कर लिया उसने इसी प्रकार से सगुण निराकार होते हुए भी वो सगुण साकार में भी सृजन कर लेता है भाई यही बात ईश्वर जो है वो अभी सर्वत्र व्याप्त है मगर केवल ये हमें शास्त्रों से गुरुओं से और जो उसका प्रतिभास सत्ता है कि हमें महसूस हो रहा है कोई शक्ति तो है बिल्कुल बकुल अभी भौतिक इंद्रियों का विषय नहीं है रे हम चाहे तो उसको नकार सकते हैं अपने उस प्रासिक अनुमान को हटाकर एक तरफ ठीक है मगर ईश्वर किसी एक देश में स्वयं को इंद्रियों का विषय बना देता है बिल्कुल वही अवतार है य तो गीता में भी साफ साफ कह रखा जब 11 अध्याय में विराट स्वरूप दिखाने के बाद जब अर्जुन ने चतुर्भुज देखने की अभिलाषा जाहिर की तो चतुर्भुज रूप में जब व आए तो तब उन्होने बवे अध्याय में अर्जुन ने पूछा कि कि आप सगुण की जो सगुण की जो भक्ति है और जो निर्गुण की भक्ति है इसमें कौन सा श्रेष्ठ है तो श्री कृष्ण
00:15:46:03 भगवान ने बोला कि सगुण की सबसे मेरे हिसाब से सबसे अच्छी सगुण की है वो भी को मेरे को प्राप्त होते है निर्गुण की भी भक्ति ठीक है पर वो बड़ी कठना से होती है क्योंकि व व्यक्त है ऐसा है भागवत में सीधे कह दिया है जब तक आपको ईश्व ईश्वर हर जगह ना दिखने लगे जैसे चार च 35 में क्या क्या कहा गया कि वो ज्ञान जिस जिसके कारण तू सब लोगों में मुझको स्वयं को पहले और फिर मुझको देखेगा हम सब में मुझको देखेगा ऐसे ही 13 अध्याय में भी कहा है 29 या 30 में कहा है कि तू पूरी दुनिया को मुझ में एक मुझ में स्थित देखने लग तो भागवत में आया है कि जब तक तुमको ये स्थिति प्राप्त नहीं हो जाती है तब तक मूर्ति पूजा करते रहो व उसी उसी से ही वो स्थिति प्राप्त होगी आपको ये श्रीमद भागवत में कहा गया कि जब तक तुम्हें ब्रह्म ज्ञान का प्राप्त नहीं हो जाता तब तक मेरी मूर्ति में आपने पूजन करना चाहिए तब तक पूजन करिए बिल्कुल यही गरु पुराण में भी कह रखा है सवे अध्याय में कि जब तक आपको यह ज्ञात ना हो जाए कि अहम ब्रह्माम
00:17:01:24 मैं ब्रह्म हूं तब तक आप ये व्रत जप तप तीर्थों में ये प्रयत्न करना चाहिए मुक्ति के लिए जी अच्छा चलिए ठीक है थोड़ा सा पॉइंट पर आते हैं कुछ बातें कर लेते हैं तब तक जब तक वो लोग नहीं आ रहे हैं जैसे कि यह लोग कहते हैं कि भाई यह लोग इस तरह से बात मतलब कहते कि हम भाषा जो है हमारी जो है मर्यादा भूल रहे हैं ऐसे किसी ने वीडियो बनाया अब इनकी भाषा देखिए क्या
00:17:34:25 है दिख रहा है हेडिंग देखिए खाली ्र इंद्र गधा बनता है अब ये इनकी भाषा है इंद्र भी इंद्र भी गदा बनता है ये इनकी भाषा है है ना और देखिए ऐसा है अभी एक लाइव और होगा अब वो वाला लाइव हम लोग अपने नए उस पर करेंगे जो नया चैनल है विग्रहवां धर्म उस पर हम लाइव करेंगे इस वीडियो के डिस्क्रिप्शन में उसका नए चैनल का लिंक दे देंगे और उसमें एक बहुत इंपॉर्टेंट शक्स आ रहा है पता है कौन आ रहा है जो रामपाल को गुरु तो मानता है पर इन सारी किताबों का खंडन करता है वो वो कहता है रामपाल के जेल जाने के बाद छापी जा रही है इनको छापने वाला कोई पता नहीं है कौन है क्योंकि रामपाल ने इतनी ज्यादा घटिया पन की भाषा यूज नहीं की है अपने ग्रंथों में उसके पास कुछ सबूत भी है पुरानी वाली ज्ञान गंगा भी है उसके पास और वो पेज नंबर के साथ बता रहा है कि ये देखिए यहां पर ये बदल दिया गया जैसे पुरानी ज्ञान गंगा में ये लाइन नहीं लिखी है रामपाल ने कि उसको जो है लोग जेल में डाल देंगे बिल्कुल मुकदमा चलाएंगे मगर
00:18:50:07 नई ज्ञान गंगा में वो मुकदमा चलाने वाली बात ऐड कर दी गई तत्वदर्शी के लिए हां अच्छा यह सब है वो आएंगे तो वही बताएंगे वो हम अपने नए चैनल पर वो लाइव करेंगे विग्रहवां धर्म उसका लिंक डिस्क्रिप्शन में दे देंगे तो इनकी भाषा देखिए कितनी वो य वो खुद इस बात से बहुत चिढ़ा हुआ है कि रामपाल के नाम पर यह गंदगी क्यों फैलाई जा रही है उसका उसका उद्देश्य ये है मैं ये अभी मैं उसका समर्थन नहीं कर रहा हूं कि रामपाल की बाकी बातें है कि नहीं मगर इतने अंश में वो हमारे साथ है कि जो अपमा किया जा रहा है हिंदू देवी देवताओं का हिंदू भगवानों का वो नहीं करना चाहिए ये देखो अब इनकी भाषा देखिए क्या है ये पढ़िए जरा तू च खसम ये कौन सी भाषा है तू 14 खसम करेगी यानी 14 पुरुषों को पति बनाएगी यह भाषा है इनकी और यह यूज कर रहे हैं कि ऋषि ने किसी अप्सरा को कहा क्या इस तरह से बात होती है हमारे शास्त्रों में यह एक संत की वाणी है तू 14 कसम करेगी यह तो हमारे यहां
00:20:06:06 मैंने देखा निम्न स्तर के जो लोग होते हैं अनपढ गवार चे टाइप के लोग वह आपस में जब गाली गलोज कर रहे होते हैं हैं कटाक्ष कर रहे होते हैं पढ़े लिखे लोग नहीं पढ़े लिखे लोग और बुद्धिजीवी कटाक्ष भी करते तो मर्यादित भाषा में करते कटाक्ष मगर यह कटाक्ष क्या नीचता वाला खसम शब्द तो हिंदी का है ही नहीं ये तो उर्दू का है शायद ये मरने के पश्चात गधी बनेगी इंद्र गधा बनता है है ना ये इनके काम है अच्छा एक चीज और मैं बोल रहा था कि ये कहते हैं कि जो काल ने अपना मत दे दिया है कहीं कहीं वो मानने लायक नहीं है है ना काल ने जो अपना मत दे दिया है कहीं कहीं वोह मानने लायक नहीं है मगर आप देखिए इन्होंने काल के मत को भी माना है यह देखिए ज्ञान गरमा गीता की और इसको पढ़ लीजिए आप दिख रहा है आपको
00:21:22:22 पूरा पढ़िए
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→ Used in: A · Live गीता के नाम पर रामपाल के बोलबचन अध्याय 3 Ep- 5(b) #satlokashram at 5:12 ↗
→ Used in: B · Video रामपाल का मनमौजी गीता अर्थ #6 अध्याय 3 का #श्लोक #gita #gitagyan at 16:19 ↗
→ Used in: A · Live गीता के नाम पर रामपाल के बोलबचन अध्याय 4 Ep- 6 #satlokashram at 16:17 ↗
00:21:25:24 जो ऊपर लिखे मेरे मत के अनुसार करते हैं वह मुझे कर्मों से बच जाते हैं जो ऐसा
⬜ Not used yet · 00:21:34:07 – 02:08:30:12 (1:46:56)
00:21:34:07 नहीं करते हैं वे मूर्ख अज्ञानी है हा तो क्या हुआ काल का मत भी माना जा रहा है अब लो भाई काल का मत भी मान लिया और आपको एक बहुत कॉमेडी वाली बात बताऊ यह लोग कहते ना तत्वदर्शी अरे भाई तत्वदर्शी तो कोई तात्विक बात तो बताए चलो मैंने सारी कहानी मान ली सारी कहानी माली ऐसे ऐसे ऐसे ऐसे कर कर करके हमको तुमसे ज्ञान लेना है तो ज्ञान तो दो अंत में ज्ञान तो दो क्या ज्ञान दे रहे हो देखो ज्ञान क्या मिल रहा है साहब मेरी वाली परम गति कुछ समय के लिए अमर अब ये बताओ मतलब जो काल की भक्ति करेगा वो कुछ समय के लिए अमर हो जाएगा जो वेद और गीता के अनुसार चलेगा वो कुछ समय के लिए अमर हो जाएगा ठीक है अब ये बताइए कुछ समय के लिए अमर क्या होता है यही मेरे समझ में नहीं आया इसका तत्व दर्शन होना चाहिए ना र् संत य कह रहा है कुछ समय के लिए अमर अमर का मतलब है जो मरता नहीं है तो कुछ समय के लिए अमर क्या है जो मर नहीं रहा वो अमर है तो इस समय मैं भी अमर हूं आप भी अमर है बिना
00:22:49:07 वेद गीता का अनुसरण किए जितनी जनता इसको देख रही है वो अभी बहुत ज्यादा इस पद नहीं उसने वो बिल्कुल से सब कर लिया है तो सब अमर है कुछ समय के लिए अमर क्या है ये क्वेश्चन मैंने पूछा था य अविनाशी और अ अजन्मा इसका अर्थ क्या है व उसका अ इनका इसका अर्थ तो यह हुआ कि अविनाशी मतलब जो मरता नहीं है और अ का अय हुआ जन्म नहीं लेता है तो य चार के पाच बोल रहे ऐसा तोय जवाब बहुत सालों बाद बहुत समय बाद इसकी जन्म मत्य होती तभी ऐसा लिखा गया है य पर उत्तर इनका उत्तर इस अच्छा तो जिसकी मृत्यु कभी नहीं होती है उसको क्या कहेंगे अगर बहुत सालों बाद जिसकी मृत्यु होती है उसको भी अमर कहोगे तो जिसकी मृत्य होती नहीं है उसको क्या कहोगे भैया नई नई डिक्शनरी बना लो अपने हिसाब से पूरी थ्योरी चेंज कर दी अविनाशी और अजन्मा मैं फिर बता रहा हूं एक बहुत इंपोर्टेंट लाइव स्ट्रीम हम लोग करने वाले हैं जिसमें बहुत सारे राज खुलने वाले हैं प्रासंगिक शास्त्रोक्त तो बात हमने रामपाल के विषय में बहुत कर ली है अब जो प्रसंग जो वैसी व्यवहारिक बातें है
00:24:04:10 कि क्या हो रहा है कैसे चल रहा है इनका तंत्र कैसे आप देखो इनके खिलाफ इतनी चीजें हो रही है कहीं पर मुकदमा वगैरह दर्ज नहीं करा रहे य लोग क्यों नहीं करा रहे कराएंगे तो जो इनके ऊपर डायरेक्ट हानि होगी ना इनके शरीर पर उस पर करा सकते हैं यह किताबों के आधार पर ये कोई मुकदमा क्यों नहीं दर्ज करा सकते पता है क्योंकि इनको छापने वाले का पता ही नहीं है है प्रश्न तो ये आएगा ना कोर्ट में कि इन किताबों को छापा किसने कौन जाए को अच्छा आप इनकी किताबें मंगाने के लिए फोन भी करोगे तो आपको बाकायदा मेंबरशिप की तरीके से मेंबर बनना होगा तब आपकी आपको इनकी किताबें मिलती है फोन ऑन करो आप ऐसे नहीं मिलती कि मैं कुरियर करवा दो वहां से ले लू दुकान लगी हो ऐसे नहीं है ठीक है तो मेंबरशिप टाइप से ही आपको जैसे ये नेटवर्क मार्केटिंग होती है ना कुछ ऐसी कंपनी है जो अपनी डायरेक्ट सेल नहीं करती नेटवर्क मार्केटिंग के द्वारा ही आप उस परचेस कर सकते हो जैसे हर्बालाइफ हर्बालाइफ का नियम है है ना वैसे ही ये लोग अपनी किताब देते हैं डायरेक्ट इनकी कहीं पर दुकान सीधे स्टॉक नहीं लगा होगा और लगा होगा तो मेंबरशिप बनाने के रूप में ही लगा होगा बिल्कुल ऐसे
00:25:19:13 कोई इनकी किताब खरीद के थोक के बाब में नहीं बेच सकता है भाई गीता प्रेस की आप किताबें ले आओ बेचो तो सबसे पहले तो इसी पर एक लगाम है कि तुम हमारी जो ग्रंथ है उनको कभी भी कहीं से भी खरीद सकते हो और उसमें तीन 13 चार दो ये सब कर लेते हो और अपनी किताबों को तुमने रहस्य मेंही बना रखा है तुम्हारी प्रिंटिंग प्रेस गायब है वो बबाना की प्रिंटिंग प्रेस अभी तक मिली नहीं तो हम लोग इन सब मामलों के संबंध में एक लाइव स्ट्रीम करने वाले हैं अपने नए चैनल विग्रहवां धर्म नाम से वो चैनल है आप लोग सर्च कर ले हम लोग इस वीडियो के डिस्क्रिप्शन में उसको डाल देंगे लिंक को तो आप लोग वहां पर अपना सपोर्ट
00:26:03:13 करें बिल्कुल एक भाई साहब कह रहे हैं संत रामपाल की फोटो लगी है इससे बड़ा प्रूफ क्या है तुमने भी सुनो इसका जवाब मैं दे दूं तुमने भी अपनी डीपी पर फोटो लगाई है कृष्ण और उनकी जो संगिनी है उनकी पूजा करने वाले के रूप में तो क्या तुम हो गए क्या कृष्ण के भक्त दिखाऊं क्या रामपाल को मानने वाले लोग क्या सोचते सोचते हैं प्रश्न के बारे में कथनी और करनी में
00:26:37:07 अंतर कितनी बुरी बुरी बातें करते हैं अच्छा एक सिद्धांत इनका मुझे नहीं समझ में आता है हटा दीजिए भैया इसको हटा दीजिए कमेंट एक सिद्धांत य नहीं समझ में आता है मुझे कि एक यह सिद्धांत नहीं समझ में आता है मुझे यह कहां का सिद्धांत है कि जब तुम्हे पूर्ण ब्रह्म के बारे में जानकारी जो सबका बॉस है फिर भी तुमको इनकी नीचे वालों की भक्ति करनी है जो तु जो बुरे हैं जिन्होंने तुम्ह फसा रखा है यह कौन सा सिद्धांत है कर्जा देना है कर्जा इनने कर्जा ले रखा है इनसे इनके लोक में रह रहे हैं तो कर्जा ले रखा तो इनका कर्जा देके जाएंगे बोलते हैं य तो फिर कर्जा पि क्यों नहीं मानते हो पितरों का भी मान लो कर्जा हा पितरों का कर्जा नहीं मानेंगे
00:27:39:13 भाई पित्रों से भी तो कर्जा लिया है उनके द्वारा शरीर तो प्राप्त हुआ है ना बिल्कुल वो कुल मिलाकर हिंदू धर्म से जुड़ी हुई हर मान्यता पर उनको आघात करना है नाम से मानव धर्म और काम से मुस्लिम समाज तैयार करना है तो अभी तक ये दोनों आ नहीं रहे हैं ये लोग बोल रहे हैं कि बोलते हैं कि हम भी यज्ञ करते हैं पर यज्ञ तो तभी पूर्ण होगा जब वेदों के मंत्रों का उच्चारण होगा हम ये तो वेदों में भी लिखा गया है तो कौन सा यज्ञ कर रहे हैं शास्त्रों से जो इनकी भक्ति चल रही है कहां चल रही है इनकी सीधे बोलो ना कबीर वाणी जो हमारी है उससे हम भक्ति कर रहे हैं बाकी का तो आलंबन हम इसलिए ले रहे हैं कि हमने कैसे इनको नहीं मानना है यही तो ल यही तो कर रहे
00:28:38:06 हैं अध्याय चार के 34 से सीधे 15 के एक में पहुंच जाते हैं ये बीच की इतनी सारी बातें छोड़ दी जी वेदों के जानने वाला तत्वदर्शी है बोला तो वेद 15 के 15 में बोला है कि वेदों से जानने योग्य मैं हूं वेद य देखिए पूरी बुराई कर रखी है इस पेज पर भगवान श्री कृष्ण की जिसका उन्होने फोटो लगा रखा है तो फोटो लगाने से सिद्ध नहीं होता है कि आप उस पक्ष के व्यक्ति हो गए उसी प्रकार से अगर इन किताबों पर रामपाल दास का फोटो है तो इससे सिद्ध नहीं हो जाएगा कि वो रामपाल जो है रामपाल के द्वारा जानकारी में छप रही है किताब तो ये होने वाला है लाइव उसम देखिए हा कोई आया
00:29:28:25 अमित दास बताइए कैसे हैं आप सबब बढ़िया सतगुरु देव जी की जय जय श्री राम आपके वो नहीं आए आरहे आ रहे अच्छा मैं आपने हमसे एक बात कही थी कि हम आपको बोलने देंगे और आपकी अनुमति के बिना दो घंटे से पहले हटाएंगे नहीं है ना मैंने कहा पर वचन जा वो ठीक है हम मानेंगे आप भी हमें एक वचन दे दीजिए इस बात को शुरू में ही कि बात अटक जाने पर बिना बोले यहां से भागेंगे नहीं
00:30:07:13 बक जो चीज गलत होगी उसे माना जाएगा नहीं वो माना नहीं आप य से भागेंगे नहीं रिमूव हो गए बस य से ऐसा आपने किया है ना क बार अच्छा ऐसा मैंने कभी नहीं किया है आपने अपनी तरफ से हर बार हटाया है आपने किया चलो ठीक है इस बात पर हम रील बना देंगे बार बोल दीजिए आप अपनी तरफ से कभी नहीं हटे यहां से बोलज आप अपनी तरफ हम अपनी तरफ से अब अब अब इन बातों को छोड़िए अब नई शरी से डिबेट चालू हो रही है ना उस पर चर्चा कीजिए बाबूराम जी चेहरा दिखाए कोई दिक्कत नहीं मैं दिखा रहा हूं बाबूराम दिखा रहे बात एक ही है ना अमित भाई कैसे हो बढ़िया बढ़िया बढ़िया बाबूराम जी कैसे हो मस्त है अच्छा थोड़ा से मैं थोड़े से छोटे छोटे नियम है उसे मैं तय कर लू फिर उसके बाद अपनी ज्ञान चर्चा बढ़ा लेते हैं बोलिए पहला पहला जो नियम है कि आप अपनी तरफ से हमें रिमूव नहीं करोगे दूसरा जो नियम दूसरा जो नियम है जब तक मेरे सवाल पूरे ना हो जाए तब तक आप बीच में नहीं बोलोगे जब तक आपका आपकी बात पूरी ना हो जाए
00:31:22:16 या सवाल पूरे ना हो जाए बात या सवाल दोनों एक सवा सवाल आप लिख के लाए हो कितने सवाल है आपके कोई सवाल कुछ लिखा नहीं हुआ है मैं मैं बस शास्त्रों से ही बोलूंगा अरे भाई कोई लिमिट होती है ना आपके तो 1000 सवाल हो सकते हैं तो हम रुके रहे तब तक भैया दो घंटे तक चलेगी आपके कुछ सवाल होंगे जब तक आपकी बात पूरी ना हो जाए तब तक हम बीच में नहीं बोलेंगे जब तकरी बात पू अगर कोई किसी की बात को काट रहा होगा तो आप याद दिला दीजिए जो अगर सही लगेगा तो वहां पर चुप हो जाएगा आदमी जैसे हम आपको याद दिलाएंगे आप हमें याद दिलाएगा ठीक है मेरा मेरा कहने का मतलब यह है कि जैसे कि मैं कुछ बता रहा हूं आपको या पूछ रहा हूं आपसे आप फिर उस बात को काट के बीच में से फिर बोलोगे तो ना तो ऑडियंस को सुनने में मजा आएगा और ना हमें आपसे सवाल आएगा ठीक है ठीक है अब आपने दो बातें कही है दो बातें हमारी सुन लीजिए आप बिना बताए भागेंगे नहीं भैया कितनी बार बोले नहीं भागेंगे अरे तो बोल तो हमने भी दिया था कि हम आपको रिमूव नहीं करेंगे दोबारा आपने हम अपने गुरु के चरणों की सौगंध खाते हैं कि हम भागेंगे नहीं हां और दूसरा ये दूसरा दूसरा नियम
00:32:37:20 यह है कि विषय प ही बात होगी विषयात नहीं करेंगे मैं मैं ओनली फॉर गुरु पर बात करूंगा और ऐसा है कि जब गुरु पर बात करूंगा कोई टॉपिक अगर मैं पूछूंगा तो व गुरु से संबंधित होगा आप ऐसा करिए आप ऐसा करिए टॉपिक आप कोई भी पूछेगा मगर आप जब मैं पूछू कि इसका इस बात से क्या संबंध है तो बता दीजिएगा नहीं मैं जो भी मैं क्या कह रहा हूं मैं जो भी टोटली कुछ भी अगर बोल रहा मुह से तो वो गुरु से संबंधित संबंधित ही होगा मैं वही कह रहा हूं अगर मुझे डाउट हो जाए कि उससे संबंधित नहीं है तो आप जो है मुझे वो संबंध बता दीजिएगा ठीक है ठीक ठीक है ठीक है अच्छा अब गुरु पर बात होनी है आप शुरू कर रहे हैं कि मैं शुरू करूं
00:33:29:25 मैं ही शुरू कर लेता हूं हां बोलिए अच्छा मेरा यह सवाल है आपसे कि क्या आप तत्वदर्शी को महज एक संत के रूप में मानते हैं या तत्वदर्शी वाकई कोई एक संत होता है जिसके शरण में जाने से मोक्ष हो जाता है या इस समय धरती पर कोई तत्वदर्शी संत है ऐसा है कि मेरे मानने या ना मानने से कुछ नहीं होता जो शास्त्रों में जो शास्त्रों में आचार्य और गुरु होने के संबंध में लक्षण बताए गए हैं उनको फॉलो करने के अनुसार जो तत्वदर्शी है वो तत्वदर्शी है वो कुछ चार पांच है सुन लीजिए वो कुछ चार पाच है पहला की वो सन्यासी ब्रह्मचारी होना चाहिए अवेद 11 पा 16 मनुस्मृति 12वां अध्याय 112 से 114 इसके अलावा गीता में अनेका अनेक जगह कहा गया है कि वही उस संसार रूपी पेड़ को काट सकता है जिसके पास वैराग्य
00:34:45:26 हो योगी के पास वैराग्य होना चाहिए ठव अध्याय में ठीक है तो पहला लक्षण आ गया कि तत्वदर्शी संत कौन होगा प्रामाणिक आचार्य गुरु कौन होगा जो वैरागी हो वैराग्य हो जिसके पास अंतिम निर्णायक ठीक अच्छा जोय किसी के पास से आवाज आ रही है कुछ अजीब सी बीच बीच में इसके पीछे से आही बाबू जी आप अपना म्यूट कर आप अपना म्यूट किया है क्या आपने बाबू जी हा अब म्यूट है आही आपसे ही आ रही है मेरे पीछे आप क जंगल मंगल में बैठे हैं क्या नहीं जंगल में नहीं मैं अपने घर पर ही हूं लेकिन कहीं शादी ब्याह के कारण कहीं साउंड बज रहा है अच्छा चलिए ठीक है तो पहला लक्षण प्राप्त हुआ वैराग्य होना चाहिए दूसरा लक्षण प्राप्त हुआ कि परंपरा प्राप्त होना चाहिए ब्रा पर उतर देने दीजिए परंपरा प्राप्त होना चाहिए गुरु क्योंकि जब हम बात करते हैं कि हमारी भक्ति शास्त्र सम्मत है तो शास्त्र हमारे पास
00:36:01:07 ऐसे नहीं आए हैं शास्त्र हमारे पास परंपरा से तो यदि परंपरा से आने वाले हमें उन शास्त्रों पर उन वचनों पर उन मंत्रों पर विश्वास है तो जिससे वो मंत्र जिससे वो शास्त्र में प्राप्त हो रहे हैं उस पर भी विश्वास होना आवश्यक है और यदि उनसे आने वाले शास्त्रों पर और यदि उस पर विश्वास नहीं है तो के द्वारा प्राप्त होने वाले शास्त्रों पर विश्वास होना भी उचित सिद्ध नहीं होता है इसका प्रमाण है मुंडकोपनिषद और क्या कहते भगवत गीता में आपको बताया ही है कई बार और अनेका अनेक जगह कि गुरु परंपरा से जो आपको प्राप्त हो रहा है ज्ञान वही ज्ञान प्रमाणित तो पहला लक्षण वैराग्य और दूसरा लक्षण गुरु परंपरा तीसरा लक्षण सुन लो शास्त्रों में कई जगह भ्रमित कर देने वाली बातें आ जाती है ऐसा लगता यहां तो ये कह रहे हैं यहां तो ये कह रहे हैं अब अगर हम ये मान ले इसको छोड़ दो इसको पकड़ लो तो जिस शास्त्र को हम प्रमाण मान रहे हैं उसी की एक बात को हमने खंडन कर दिया और जब किसी शास्त्री को एक बात हमने यह कह दीय मानने लायक नहीं है तो इसका मतलब हमारे धर्म और
00:37:16:09 अधर्म का फैसला वो शास्त्र नहीं कर रहा है कुछ और है जिसके आधार पर हम उसको चेक कर रहे हैं इसमें क्या सही है क्या गलत है और वो हमारे धर्म और अधर्म का फैसला कर रहा है तो इसलिए म पुराण में दिया गया 145 में अध्याय 5वा श्लोक कि समस्त स्तुति स्मति शत स्मार्थ धर्म का अनुगमन कराने वाली शिक्षा ही साधु सम्मत शिक्षा है तो क्या हुआ अर्ध कुट न्याय नहीं होना चाहिए जैसे कि मान लीजिए रामपाल जी की बात कर लेता हूं रामपाल दास जी ने एक जगह अपनी गरिमा गीता की पुस्तक में ब्रज का अर्थ जो है वो लिया है आना जाना नहीं लिया है अब मैं केवल उन उतनी बात पकड़ लू पीछे उन्होंने कहा है कि यन का अर्थ है मेरा अर्थ नहीं है उस बात को छोड़ दू तो मैं इस बात को क्लेम कर सकता हूं कि देखो देखो क्या कहते हैं य जो रामपाल भी व भी ब्रज का अर्थ आना कर रहे हैं देखो दिखाता हूं हमने अपने में दिखाया दिखाया है इसका मतलब क्या है म सुनलो सुनलो समस्त श में सामंजस की शिक्षा होनी चाहिए एक भी लाइन
00:38:31:13 को हम कट नहीं कर सकते कि यह मानना है यह नहीं मानना जैसे ही कट करेंगे तो हमारा उस पूरे शास्त्र पर विश्वास ना होना सिद्ध हो जाएगा तो पहला वैराग्य होना चाहिए दूसरा परंपरा प्राप्त होना चाहिए तीसरा समस्त शति स्मति शास्त्रों में सामंजस की शिक्षा देने वाला होना चाहिए और चौथा और सबसे इंपोर्टेंट पॉइंट गुरु वही गुरु का मतलब क्या है क्या है गुरु का मतलब गुरु का मतलब जो है कि जो परमात्मा से मिला दे अंधकार से हा का मतलब अंधकार का मतलब अंधकार और र का मतलब निकालने वाला इसका मतलब गुरु कौन है जो अपने शिष्य को अंधकार रूपी अज्ञानता से बाहर निकाल दे तो अंत गवा गुरु आपको जो ज्ञान है ना अंधकार रूपी से अंधकार रूपी अज्ञानता से निकाल वो ज्ञान देने वाला होना चाहिए जैसे की कई सवाल खड़े हो जाते हैं कि यदि कबीर स शरीर है तो उसके आसपास की दुनिया को उसने नहीं बनाया क्या कभी कोई आज तक रामपाल वाला व्यक्ति इस पर नहीं टिक सका अगर उसका शरीर अविनाशी है तो बदल
00:39:46:21 कैसे रहा है बताऊंगा मैं बताऊंगा अच्छा थोड़ा सा मैं य कह रहा हूं थोड़ा श और आप थोड़ा सा उस तरीके से बोलिए जिसे हमें कभी कोई रामपाल का शिष्य है जो आज तक इन बातों पर बात ही नहीं करता है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत इन पर बात नहीं करता कभी कोई यही तो मेन ज्ञान है जो होना चाहिए भाई उस बात होगी अभी आज गुरु से फिर कल होगा आपने पूछ गुरु किसे मानते हो गुरु किसे मानते हो तो गुरु जब हमने गुरु किसी को कह रहे तो वो हमारे गु का मतलब और रू का मतलब निकालने हमें वो गुरु है हमारा जो हमें अंधकार रूपी अज्ञानता से बाहर निकाले मगर य तो रामपाल दास जी का कोई भी ऐसा शिष्य आज तक नहीं आया जिसने हमसे सर्वशक्तिमान शाश्वत धर्म परम स्वतंत्र मोक्ष इन सब विषयों पर बात की नास्तिक को भी खंडन नहीं कर पाता व वो केवल प्रमाण रट के आ जाता है वो केवल प्रमाण तो रट के आता है मगर व इन बातो पर कभी बात नहीं करता तो अच्छा जैसे जैसे एक उदाहरण और द आपको अमर का मतलब आप क्या मानते हैं अमर
00:41:01:24 का मतलब जो जन्म मृत्यु में ना आए जिसकी मृत्यु नहीं हो सकती जी वही है ना अमर अच्छा अमर का मतलब वो है अब ये अपनी किताब में कह रहे हैं कुछ समय के लिए अमर इसका मतलब क्या है अस्थाई भाई आप ये टॉपिक थोड़ा सा कहीं अंत जा रहा है आप मैं आपको एक बात बता रहा हूं जैसे कि अमर का मतलब आपने बहुत आसानी से बता दिया जिसकी मृत्यु नहीं होती मृत्यु विहीन है मगर इन्होंने कहा कुछ समय के लिए अमर तो कुछ समय के लिए जो अमर है वो कौन होता है अगर उसकी मृत्यु है तो अमर नहीं है कभी भी हो दो लाख वर्ष के बाद मगर वो अमर नहीं है क्योंकि उसकी म होगी मैं उसी मेन पॉइंट प आ रहा हूं मेन मुद्दे प कुल मिलाकर के आपने मुझसे गुरु की पहचान पूछी थी शास्त्र सम्मत जो है वो है पहला सन्यासी ब्रह्मचारी वैरागी दूसरा परंपरा प्राप्त तीसरा समस्त सुट स्मति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देने वाला और चौथा अपने शिष्य का संशय दूर कर देने वाला मतलब सं कुल मिलाकर यही है सर्वशक्तिमान
00:42:17:08 ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म अ संशय की बात को जो तो भगवत गीता 44 है उसमें भी कहा गया है त्मा विनती क्या कहा है जिसके मन में संचय है दुविधा है वो ना तो इस लोक में सुखी रह पाएगा ना परलोक की तो बात दूर है चलो स दर्शी संत की थोड़ी सी बात कर ले शिव पुराण में एक जगह ये आया है कि केवल तत्वदर्शी संत ही मोक्ष देगा बाकी की मोक्ष कहने सुनने की बातें होती है तो तो क्या करें सही बात है गुरु ही है जो आपका अंधकार मिटाएगा मैं बात तत्वदर्शी की कह रहा हूं तत्वदर्शी गुरु और आचार्य में कोई अंतर नहीं है तो यानी किने आपने जिस गुरु से शिक्षा ग्रहण कीी थी वो तत्वदर्शी है और कुछ वहां से आपसे शिक्षा ले आप उनसे शि लेने के कारण आप में भी वही शिक्षा होगी और जिससे मैं आपसे प्रश्न
00:43:32:16 पूछूंगा तो मुझे ठीक ठीक आपसे उत्तर मिल देखिए पहली बात तो य है कि यह कोई क्लास नहीं है जो सिर्फ आप प्रश्न पूछेंगे आप पूछिए आपको आजादी है प्रश्न जब मैंने अभी पूछा कि अमर का मतलब क्या है तो आपने कहा बात कहीं और जा रही है ओनली गुरु पर बात होगी गुरु से संबधित तो बात है आपस कह रहे वो यह बात बता रहा है कुछ समय के लिए अमर गुरु से संबंधित ही तो बात है ये क्या है कुछ समय के लिए अर बताइए ठीक है मेरा जो पहला प्रश्न है आपसे आपके पास जवाब नहीं है इस बात का कुछ समय के लिए रहे बाबूराम बाबूराम
00:44:20:18 दिखा बता रहा लिए होता है हमेशा के लिए कुछ समय का अमर का मतलब होता है अस्थाई और हमेशा के लिए अमर होता है अस्थाई भाई साहब अमर का मतलब क्या है अमर का मतलब जिसका मृत्यु ना हो जिसका मृत्यु ना हो तो कुछ समय के लिए जिसकी मृत्यु नहीं हो रही है वो तो मैं भी हूं आप भी हो तो हम लोग अमर है क्या कुछ समय के समय अमर है क्या हम लोग अमर वहां प कौन सी बात चल रही है पहले ये तो भी ये भी तो देखा जाएगा बात चल रही है देखो किस विषय केपर बात चल रही है रहा कौन से विषय पर बात चल रही है कौन सा पेज है आप मुझे बताइए मैं निकालता
00:45:11:13 हूं गरिमा गीता बताइए गरिमा गीता पेज नंबर बात चल रही है उस पर बताएंगे तब पलो पढ़ लो बताओ कौन सा 39 है क्या हा 39 कौन सा बुक गरिमा गीता की अरे जहां अमर और अविनाशी जैसे शब्द आ गए वहा तो सीदास का अर्थ हो गया ना जिसकी मृत्यु नहीं होती है फ प्रसंग कोई भी चल रहा
00:45:49:13 हो गरिमा गीता की में कौन सा उसम आप थोड़ा सा दिखाना कौन सी जगह लिखा हुआ है परमा गीता की पेज नंबर 39 हां वह कौन से प्रश्न है कौन से प्रश्न प्रश्न दिखा दीजिए अरे प्रश्न दिखा तो दिया ये देखो यहां मेरी वाली परम गति दिख रहा है बड़ा करो भैया मेरा जरा और ये मेरी उंगली ये वाली ये कुछ समय के लिए अमर दिख रहा है हम क्या है एक सेकंड मैं देख रहा हूं ओम नाम का जाप का कार्य करके विशेष आस्था के साथ स्मरण करते हुए इसका उत्तर बता देम आप पहले आपस में त कर लो कौन बोलेगा फिर बताना हम दोनों ही बोलेंगे नहीं नहीं एक साथ बोलोगे तो समझ में नहीं आएगा हा एक एक उत्तर एक ही आदमी बता जो उत्तर बताना है आप बता दो बताओ देख इसको एक बार पढ़ देता हूं बाबूजी बाबू जी मैं आपको बताऊ इसमें ये आया
00:47:04:13 है कि ओम नाम का जाप करते हुए जो ओम तक की जो साधना करेगा वो कुछ समय के लिए अ हो जाए य बताइए थोड़ा मेरे पास उत्तर है उत्तर है मेरे पास प इसको पढ़ जनता भी देखेगी पढ़ इसको जैसे य पर ण परमात्मा की पूरी जानकारी धीरा नाम अर्थात तत्वदर्शी संतो से सुनो मैं ज्ञान देने वाला ब्रम भी नहीं जानता फिर भी अपनी भक्ति विधि को बताते हुए अध्याय 40 शलोक नंबर 15 में कहा है कि मेरी साधना ओम नाम का जाप कार करते करते विशेष आस्था के साथ सुमर कर तथा मनुष्य जीवन का मुख्य कर्तव्य जानकर सुमर कर इसे मृत्यु उपरांत अर्थात शरी
00:47:59:25 बाहु दस जी आपकी आवाज नहीं आ रही हैय क रहे है इस बताया है कि मुझ ब्रह्म लोक को प्राप्त हो जाता है तो गीता अध्याय आ लोक नंबर 16 बताया है कि ब्रह्मलोक में गया हुआ प्राणी पुनर्जन्म में वापस आता है पुनर्जन्म से वापस आना ठीक है कुछ समय के लिए अमर का मतलब क्या है वो समझाइए य कुछ समय के लिए स्वर्ग चला जाएगा ब्र महा स्वर्ग चला जाएगा इसके बाद अमर का मतलब क्या है मेरे भाई बाबू बता रहे बता रहे जैसे की यहां पर हमने ओ मंत्र की जाप किया तो ओ मत्र जाता पूछ रहा अमर का मतलब क्या है बाबू अमर मरता नहीं है कुछ समय के लिए अमर कह रहा है कुछ समय के लिए कुछ समय के लिए अमर को जरा प्रैक्टिकली मुझे बताओ कुछ समय के लिए अमर का मतलब क्या है जरा
00:49:03:12 सम अमर कुछ समय के लिए अमर मतलब कुछ समय के लिए मरेगा नहीं मैं प्रैक्टिकली आपको बताऊ अर है मैं आपको प्रैक्टिकली बता नहीं मने वाले अभी दो मिनट तो जिंदा शवा आपको प्रैक्टिकली बता हम लोग की आई हैम है कुछ समय के लिए इसके बाद तो कुछ समय के लिए भाई मेरे देखो कुछ समय जो अमर है वो कुछ समय के लिए नहीं हो सकता और जो कुछ समय के लिए वो अमर नहीं हो सकता ये दोनों चीज साथ में आने वाली नहीं जैसे जो शाश्वत है वो बदल नहीं सकता और जो बदल सकता है वो शाश्वत नहीं है सिंपल भाई इसम ये बता दिया कि ओ मंत्र का जाप करेगा ब्रह्मलोक वो आप रखिए बा सुनो वो आप उनका जो भाव ले रहे हो वो भा बात अभी मैं आपको ये पूछ रहा हूं य कुछ समय के लिए अमर क्या बताया आपके गुरुजी ने ये कुछ समय के लिए अमर क्या है मैं बता या तो देखिए अगर वो कुछ समय के लिए जिंदा कुछ समय के लिए अर आप ये कह रहे हो कि वो कुछ समय के लिए ऐसी स्थिति में है कि वो मरेगा नहीं यानी एक घंटे जी लेगा दो घंटे जी लेगा 100 साल जी लेगा 100 लाख साल जी लेगा
00:50:18:27 मरेगा नहीं तो फिर उस तो फिर कुछ समय के लिए जो मरेगा नहीं तो हम और आप भी अमर हो गए उस हिसाब से अरे मेरा उत्तर सुन लोगे जा अमित जी बोलेंगे बोलिए अम जैसे मार्केट में मार्केट में हम मोबाइल खरीदने जाते हैं जी तो वहां पर एक गारंटी कार्ड मिलता है व वहा गारंटी लिख के देते हैं कि आपका यह मोबाइल एक साल तक खराब नहीं होगा ठीक है जी वहा गारंटी दी एक साल तक खराब नहीं होगा यानी कि एक साल इसम कोई खराबी नहीं आएगी तो हम हम उसको यह समझे कि अब इसकी जिंदगी भर खराबी नहीं आएगी तो वहा वो कह रहा है ना वहा वहा वो उसको नष्ट होने वो कह रहा है य एक साल तक खराब नहीं होगा होगा तो हम गारंटी ले रहे हैं
00:51:16:25 कहा उसका जवाब ठीक उसी प्रकार कह रहे हैं कि एक साल तक तुम अमर हो उसके बाद में आपकी मृत्यु हो जाएगी आप धरती लो जाओगे भाई साहब मैंने आपसे क्या कहा कि वो ये नहीं कहता है कि यह नाशवान नहीं है मोबाइल वो कहता है क्या वारंटी वाला वो कहता है क्या ये मोबाइल नाशवान नहीं है मोबाइल नाशवान नहीं है वहां पर बोला गया है ना कि वारंटी में वारंटी तो आप वारंटी लिखो ना आप कह रहे हो कुछ समय के लिए अमर ये क्या बात हुई भाई वारंटी अगर कुछ अगर कुछ समय तक एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट अगर कुछ समय तक नष्ट ना होने वाली चीज को भी अविनाशी कहा जा सकता है अमर कहा जा सकता है तो इस समय मैं अमर हूं बाबू अमर है और ये ये बाड़ी जी अमर है और अमित दास भी अमर
00:52:14:26 है अगर कुछ समय तक नष्ट ना होने वाली चीज को भी अमर कहा जा सकता है तो इस समय हम चारों अर है जी हम लोग कुछ समय के लिए है कुछ समय के लिए यानी अभी हम लोग अमर है यानी हम चारों अमर है जी कुछ समय के लिए अमर है हर वो व्यक्ति जो मर नहीं रहा है वो अर है भाई इस समय जो भी जो भी दुनिया में इस समय सांस ले रहे हैं जितने भी प्राणी है दुनिया में वो सब इस समय हमारे भाई ये हैन वहा कुछ समय लगाइए वहा लिखा कुछ समय कुछ समय लगा लीजिए कुछ अरे भाई कुछ समय अभी मेरे को पता है कुछ समय के लिए मगर अमर तो हूं ना जी जी अच्छा अब दुनिया में जितने भी प्राणी इस समय सांस ले रहे हैं वो सब अमर है इस समय जी ठीक अब ये बताइए कि जो कभी नहीं मरेगा उसको क्या कहेंगे वो अविनाशी है अरे आप कुछ समय के लिए अविनाशी तो इसको भी मान रहे हो ना जो कभी नहीं मरेगा उसको अविनाशी माना जाएगा जो मरता है वो कुछ समय के लिए मर है अरे भाई
00:53:30:06 एक शब्द है क्या कभी ना मरने वाले के लिए लगता है इस प्रकार आप एक ही प्रश्न में उलझे रह जाएंगे आगे डिबेट बढ़ेगी नहीं तो फिर आप कह दो इसका जवाब नहीं है हम लोग आगे चलते हैं जवाब है बोल तो दिया आपको कितनी बार बोले आपको बोल तो दिया कुछ समय के लिए मतलब है साल तक की आप यहां पर गलत बोल रहे हो जो अमर है जो मर नहीं सकता वो कुछ समय के लिए मर नहीं सकता कोई डेफिनेशन सूट नहीं कर रही और जो मर सकता है उसको अमर नहीं कह सकते वो जो वारंटी देता है वो वारंटी देता है वो जो वारंटी देता है वो ये नहीं कहता है य फोन अविनाशी है एक साल के लिए कहता है अगर ये खराब हो गया तो मैं इसको सही करूंगा या बदल के दूंगा एक मिनट एक मिनट शिवांश जी जिस प्रकार वहां टाइम फिक्स हो रहा है एक टाइम फिक्स हो रहा है कि भाई हम एक साल तक के लिए आपको यह हमारी जिम्मेदारी है कि एक साल तक आपको इसके बीच में कुछ नहीं होने देंगे यह हमारी जिम्मेदारी है उसके बाद में हमारी जिम्मेदारी खत्म हो जाती ठीक उसी प्रकार भगवान ये कह रहे हैं कि ओम से मिलने वाली
00:54:46:13 गति आपको आपने जितनी भक्ति अर्जित की है उतनी भक्ति के अनुसार आपको ब्रह्मलोक में रखा जाएगा और ब्रह्म लोक पर्यंत पुनरावृति में आ जाएंगे मैं आपको यह कह रहा हूं कि जो कुछ समय के लिए अमर होते हैं इनके लिए कोई एक शब्द है क्या एक शब्द जैसे कि जो परम पिता परमेश्वर है उसके लिए एक शब्द है परमात्मा ठीक है ऐसे ही यह जो आप कह रहे हो ना परिभाषा के साथ समझ रहे हो मेरी बात समास पढ़ा है आपने समास बहु समास वगैरह पढ़ा है आपने लंबा है जिसका लंबोदर ठीक है तो यह हमने पढ़ी परिभाषा और उसका आंसर क्या आया लंबोदर पीला है पत्र जिसका पीतांबर तो ये हमने पढी परिभाषा एक मिनट अब आपने कहा कि जो कुछ समय के लिए जिंदा है वो कुछ समय के लिए अमर है य बाबू भैया ने कहा ठीक है अब मैं जब ये पूछ रहा हूं कि जो कभी नहीं मरता फिर उसको क्या कहा जाएगा जो कभी नाश नहीं होता उसको क्या कहा जाएगा जब
00:56:01:19 इसको भी आपने अमर मान लिया अभी के टाइम हम चारों को दुनिया को आपने अमर मान लिया जो सांस ले रहा है वो अमर है तो जो कभी नहीं मरता कभी भी नहीं मरेगा अविनाशी है उसके लिए एक शब्द क्या है परिभाषा नहीं अब एक शब्द बताइए तो बोल तो दिया अविनाशी अशी अविनाशी तो आपने इसको भी बोला ना किसको नहीं उसको अविनाशी नहीं होला उसका उसका मोक्ष नहीं हुआ उसका फिक्स टाइम है वो सीमित है भाई साब सीमा में है क्या सीमा में ब जैसे आप इंगलिश में पढ़ेंगे मैं आपको उदाहरण कितना बढ़िया दे रहा हूं जैसे कि आप हम हम गाड़ी लेने जाए या कुछ भी चीज लेने जाए तो वहां का मालिक एक सीमा के अनुसार वो कहता है कि एक साल तक हमारी जिम्मेदारी है इसको ना ना बुखार आने देंगे ना खासी आने देंगे कुछ भी हो तो हमारे पास ले आना हम ठीक करके देंगे तो व एक साल की एक सीमा बन गई उसकी उसके बाद में ब्रह्मलोक पर्यंत पुनरावृति में भाई साहब जो ठीक है आपने बात बताई हमारे पास ले आना बज पहली बात तो ये कि वो लोग अपनी जो चीज देते हैं जिसकी वो वारंटी दे रहे हैं वो व
00:57:16:19 वारंटी देते समय यह नहीं कहते यह फोन जो है कभी खराब नहीं होगा बीमार होने में और मरने में अंतर है वो ये नहीं कह व बीमार होगा ही नहीं आप यह कह रहे हो वो मरेगा ही नहीं दूसरी बात अमर का अर्थ में ऐसा कोई डिक्शनरी ऐसी कोई शास्त्रोक्त बात हमें आप दिखा दीजिए कि कुछ समय तक की गारंटी जिसकी ली जाए उसको हम लोग अमर कह सकते हैं है कोई प्रमाण जिस प्रकार जैसे की स्वर्ग जाने के बाद में किसी का मोक्ष होता है स्वर्ग जाने के बाद में किसी का म होता है नहीं होता वापस आते हैं तो वो लिमिट में है ना हा लिमिट में ट में तो ऐसे देवताओं की जो जन्म मृत्यु होती है तो फिर उन्हें अमर क्यों कहा जाता है क्योंकि जो संसार के सभी तत्व वो तो अविनाशी है जीव और ब्रह्म सब अविनाशी है मैं ये पूछ रहा हूं जैसे कि एक चरण के अनुसार देवताओं को कहा जाता व अमर हो चुके लेकिन वो जन्म मृत्यु में आते हैं वो स्वर्ग में रह रहे हैं और
00:58:31:21 जन्म मृत्यु में आते हैं वापस उ धरती लोक पर आना पता व ला व तो लीला है मतलब आप और हम करे तो गलती अरे भाई मैंने क मैं तो आपके अमर शब्द जो आपने तत्वदर्शी ने लिखा है ना नहीं बता रहे दूसरी को ला रहे उसे कोई मतलब ही नहीं है जो आप बता रहे आपको मिल चुका है आप विषय को देखो देखो आपको लग रहा है ऐसा आपको ऐसा लग रहा है मैंने आपको पूछा है कि यदि कभी ना मरने वाले को आपने कहा एक साल तक की जिसकी गारंटी ले ली जाए उसको भी अमर कहा जा सकता है ठीक है आप कहां चले गए अमित दास जी बाबूराम जी तब तक आप बात करें आपने आपने जिसकी एक वर्ष की गारंटी ले ली उसको भी अमर कहा जा सकता है कुछ समय के लिए उसमें टाइम फिक्स कर दिया है कितने समय के लिए तो यह जो कुछ समय के लिए जिसकी गारंटी ले ली जाए उसको भी अमर कहा जा सकता है यह कहीं पर प्रमाण है उसमें यह प्रमाण है
00:59:46:26 कुछ समय के लिए य अमर है इसके बाद इसकी मृत्यु हो जाएगी नहीं नहीं नहीं कुछ समय के लिए जिसको मारा नहीं जा सकता जिसकी गारंटी ले ली जाए उसको अमर कहा जा सकता है कोई डिक्शनरी है शब्दकोश है इसका जैसे कि आयु होती है किसी किसी व्यक्ति का या किसी का भी उसका आयु देखिए बाबू भाई इसीलिए बस बुरा लगता है मैंने आपसे पूछा कोई प्रमाण है कि जो कुछ समय तक जिसको मारा ना जा सके आप कह रहे हो गारंटी ले ली मैंने आपसे पूछा है कि इसम कोई शास्त्रोक्त प्रमाण है आपके पास
01:00:26:08 इसका उत्तर दीजिए इसका उत्तर यही है कि य कुछ समय के लिए देख देखा मैं पूछ रहा हूं शास्त्रो प्रमाण है शास्त्रों का प्रमाण अविनाशी के लिए दे अमा है मैंने आपसे यह पूछा है कि जिसको कुछ समय तक की गारंटी ले ली जाए उसको भी अमर कहा जा सकता है इस संबंध में शास्त्रों का प्रमाण है इसका प्रमाण बता रहे हैं बताओ क्या प्रश्न था क्या प्रश्न था कुछ समय के लिए जिसकी गारंटी ले ली जाए उसको भी अमर कहा जा सकता है इस संबंध में आपके पास कोई प्रमाण है जी इसका प्रमाण है इसका प्रमाण य है इसका प्रमाण है कि जो उसकी उन्होने कमाई करेगा स्वर्ग में जाएगा स्वर्ग में भोगे जैसे ही उस उसको हम अमर नहीं कहते हमारे जो तत्वदर्शी है हमारे जो संत हमारे जो आचार्य उसको अमर नहीं कहते जी तो फिर देवताओं को अमर क्यों कहा जा रहा है क्योंकि व अमर है व अमर नहीं है जन्म मृत्यु में आते हैं
01:01:42:13 व जन्म मृत्यु में लीला पूर्वक आते हैं देख आप जो कहे ला बता तो रहा आप लीला सुनलो जो तुम्हारे र् है परमात्मा के पूर्ण अवतार है कि नहीं है देखिए एक ही परमात्मा है जो अविनाश है इसके अलावा चाहे कोई देवता हो चाहे कोई अन्य हो सब जन्म मृत्यु में आप इसको नहीं कह सकते कि अमर है इसका आपके पास परमात्मा के कोई भी अविनाशी नहीं है कोई नहीं है कोई अविनाशी नहीं है पक्का पक्का कोई अविनाशी नहीं है
01:02:24:25 तो आत्मा अविनाशी नहीं है आत्मा परमात्मा का अंश है आत्मा तो परमात्मा का अंश है ना लेकिन तो आत्मा तो जन्म मृत्यु में आ रही है यहां पर तो वही तो मैं कह रहा हूं इसी उसी तरीके से आत्मा जन्म मृत्यु में आने वाली होते हुए भी अविनाशी है उसी तरीके से देवता भी जन्म मृत्यु में आने वाले होते हुए भी अविनाशी है जितने भी शरीर धारण करेंगे वो सब की जन्म मृत्यु होगी भाई अ एक परमात्मा है आप अगर प्रमाण है तो दिखा दो नहीं है तो हम लोग आगे चलते हैं प्रमाण है कि कुछ समय के लिए जिसको मारा नहीं जा सकता उसको भी अमर कहा जा सकता है इस संबंध में कोई प्रमाण है इस संबंध में प्रमाण का वही प्रमाण है जो बता दिया व अनिश्चित है उसका निश्चित नहीं मृत्यु होना ही होना है उसका जितने पूछ प्रमाण है कि जिसको थोड़ी देर के लिए मारा नहीं जा सकता कुछ नहीं किया जा सकता थोड़ी देर के लिए उसको भी अमर कह सकते हैं प्रमाण
01:03:36:24 हैब फसते हो अच्छा दोबारा एक बार बोल दो मैं बोल रहा था सुनाई नहीं दिया एक बार दोबारा बोल प्रमाण है किस चीज का प्रमाण मैंने बोला जिसको थोड़ी देर के लिए हम जिसकी गारंटी ले ले कि उसको कोई मार नहीं सकता क्या उसको अमर कहा जा सकता है इस संबंध में कोई प्रमाण है शास्त्र का डिक्शनरी का पाणिनी सूत्र का अध्याय का या आपका शिवराम आपटे का वो जो उसम है कुछ समय के लिए जिसको मारा ना जा सके उसको भी अमर कहा जा सकता
01:04:16:07 है प्रमाण रुक जा दिखा रहे आपको बताइए एक गीता अध्याय 15 श्लोक नंबर 16 में बताया है कि जो अक्षर पुरुष है जो अविनाशी है इन दोनों से जो श्रेष्ठ परमात्मा है वो तो अन ही है तो यहां पर क्या है कि अविनाशी होते हुए देखिए इसको अश्र माना गया है जो उत्तम पुरुष है जो अनही है जब क्या बता रहे मैंने पूछा ये देखो बाबू तुम बात को बदल रहे हो देखो ऐसे मत करो बीच में काटना पड़ेगा कितने अच्छे से बात हो रही है और बात आगे बहुत देर तक चलेगी यह गलत बात मत करो मैंने पूछा है कि जिसको कुछ समय के लिए मारा नहीं जा सकता उसको भी अमर कह सकते हैं इस संबंध में कोई प्रमाण है उसी को तो बता रहे हैं कि एक ऐसी भी है जो अविनाशी
01:05:31:10 होते हुए भी आपने जो बताया वो मैं बता दूं आप क्या बता रहे हो कि जो अविनाशी जो मारा जा सकता है उसको भी जो अश्र है वो भी अविनाशी है आप ये बता रहे हो मैं पूछ कुछ रहा हूं आप जबरदस्ती मिला रहे हो उसमें जो अश्र है वो अश्र वाली बात आएगी अनुत्तम वाली बात खुल जाएगी फिर मैं सिटे की डिक्शनरी निकालू विषय बदल जाएगा मैं नहीं चाहता हूं विषय बदले हमारी चर्चा एक फ्लो में आ ग बढ़े जिससे की हम बहुत सारे जो तथ है उनको निकाल सके तो आप मुझे य बता दीजिए आप ये ऐसे बोल सकते हैं आपकी जानकारी में वह प्रमाण नहीं है आगे कभी आप लाएंगे ऐसे भी बोल सकते हैं अभी नहीं है कोई बात नहीं आ इसके बारे में विचार करेंगे इसका उत्तर क्या होता है आपके पास अभी उत्तर नहीं है जी हमारे पास उत्तर अभी तल उत्तर बता दिया हमारे पास य उत्तर गलत बात नहीं मैंने आपसे पूछा है कि जिसको थोड़ी देर के लिए मारा ना जा सके उसको भी हम लोग अमर कह सकते हैं क्या इस संबंध में कोई आपके पास प्रमाण है अब दीजिए उत्तर मैं आपसे बता तो रहा हूं जिस प्रकार देवताओं को अमर कह रहे हैं वो अमर मैं बताऊ आपको
01:06:46:10 आपकी और मेरी जो ग्रंथों की व्याख्या है उसी को लेकर के तो आज हम चर्चा कर रहे हैं समझ रहे हो आपकी व्याख्या ग्रंथों की अलग है मेरी व्याख्या ग्रंथों की अलग है इसलिए हमारा आपस में टकराव है वैचारिक हाथ पैर से नहीं वैचारिक टकराव है ना अब हम लोग जब कोई भी बात सिद्धांत मानेंगे तो हम लोग चेक करेंगे कि भाई ये जो बोल रहे हैं इसका कोई प्रमाण है कि नहीं जब ऐसी कोई बात जो बिल्कुल ही उल्टी जा रही है तो थोड़ी देर के लिए एक मिनट थोड़ी देर के लिए जिसको मारा नहीं जा सकता कोई गारंटी ले ले जिसको थोड़ी देर के लिए मारा नहीं जा सता उसको भी अमर कहते कह सकते हैं तो क्या इस बारे में आपके पास कोई शास्त्रोक्त प्रमाण
01:07:35:19 है अभी आपका अभी आपने बोला था देवता अमर है इसका प्रमाण कहा है मैं आपको दिखा देता हूं जो अजन्मा विनाशी शता सप निषद में जो वो है कल्प के प्रारंभ में एक से बहु श्यामी होता वही देवता बनता है वही सब कुछ बनता है तो देव अगर वह सब कुछ बनता है तो जन्म मृत में तो आ गया उसको तो अपना शरीर त्याग रहा है अविनाशी मेरे भाई सुनिए दो तत्व एक ही है जो जन्म मृत्यु में आकर जीव भाव को प्राप्त हो गया जिसको मरने से भय होने लगा ठीक है वोय जीव भाव में आ गया और जिसको यह मालूम है ये जन्म मृत्यु के दिखावा है वस्तुत मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता वो मुक्त भाव में आ गया तो भगवान ने कहा ना तेरे और मेरे बहुत से जन्म हो चुके हैं कहा ना जी मगर तू नहीं जानता इसलिए तू बध है तू नहीं जानता इसलिए तू मुक्त नहीं है तू इस चीज को जानता नहीं है कि तू जन्म मृत्यु वाला होते हुए भी अमर है और भगवान कौन है जो य जान भगवान कौन है जो यह जानता है कि जन्म मृत्यु
01:08:51:01 वाली लीला होते हुए भी वो अमर है जो यह जानता है जी जी भगवान ने वहां पर यह भी बताया है कि अर्जुन अना बाब देखो हमारी जो चर्चा है वो बदल रही है मैं फिर से पॉइंट पर आ जाता हूं आपसे मैंने एक सवाल पूछा है आपसे मैंने एक सवाल पूछा है सुनिए आपसे मैंने एक सवाल पूछा है जो थोड़ी देर के लिए मारा ना जा सके उसको भी अमर कह सकते हैं क्या इस संबंध में आपके पास कोई प्रमाण है शास्त्र का मेरे पास जो प्रमाण था बता दिए इसके अला कोई प्रमाण नहीं है आपके पास क्या प्रमाण है उसम लिखा है अमर शब्द के बारे में बात हुई है वहां पर मैंने जो पंक्ति बोली है उससे रिलेटेड कुछ लिखा है क्या वहां पर अमर शब्द लिखा मैं आपको प्रमाण दे रहा हूं मैं आपको प्रमाण दे रहा हूं हां दे दीजिए अ जैसे कि आप जैसे कि ब्रह्मा विष्णु महेश अमर अजर अविनाशी है है ना ये कई ग्रंथों में इसका प्रमाण आता है उनकी जन्म मृत्यु नहीं होती हां जबक देवी भागवत पुराण में ये लिखा हुआ है कि ब्रह्मा विष्णु महेश अपना अपना समय आने पर मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं नष्ट हो जाते हैं हा ठीक जी तो अब आप
01:10:06:15 ये कैसे कहेंगे कि वो सदा के लिए अमर है क्योंकि सदा के लिए अर है और लीला पूर्वक उनका जो है त्र भाव आविर्भाव होता है लीला मैं त्र भाव की बात नहीं कर रहा मैं ये कह रहा हूं कि देवी भाव पुराण में ये लिखा हुआ है अपना समय आ जाने पर शिवराम आप की डिक्शनरी दिखा दूं आविर्भव तिरोभाव का मतलब जन्म मृत्यु भी है मैं मैं आविर्भाव तिरोभाव नहीं बात कर रहा मैं ये कह रहा हूं मैं तो बता रहा हूं ना आ भाव भाव का अर्थ जन्म मृत्य भी लिया जा सकता है मैं तीसरे स्कंध पर नहीं जा रहा मैं कहां क आप जा रहे हो आर भाव और रो भाव का अर्थ जन्म मृत्यु भी होता है ये मैं आपको दिखा देता हूं शिवराम आपटे की डिक्शनरी से जिसमें आप ब्रज का अर्थ जाना करते हो उसी से दिखा देता हूं दिखाऊ मैं आपको बता रहा हूं कि मैं उस पेज पर नहीं जा रहा दूसरे पेज पर ठीक उसके दूसरे पेज पर लिखा हुआ है कि अपनाना समय आ जाने पर नट हो जाते यह जो मैंने आपसे सवाल पूछा है कि जिसको क्या कहते थोड़ी बहुत देर के लिए मारा नहीं जा सकता है उसको भी अमर कह सकते हैं उसको भी अमर कहा जा सकता है इस संबंध में हमें प्रमाण
01:11:21:15 दीजिए आप यह संबंध है जिस जिसको कुछ समय एक साल के लिए कुछ सम के लिए पहले ही पता था कि वो एक एक एक पॉइंट से य दूसरे पॉइंट पर जाते ही नहीं तो फिर चर्चा करने में क्या मजा आएगा मजा आएगा आप कह इस प्रश्न का जवाब प्र दे चुके यार देवी देवता अर नहीं है फिर भी में आते हैं आपने कोई प्र
01:11:55:10 आपने कोई प्रमाण मैं आपके प्रमाण ना होने की चीज को आपको समझा देता हूं अब मैंने गारंटी ले ली सुनिए मैंने गारंटी ले ली पाच मिनट के लिए बाबू भाई को कोई कुछ नहीं कर सकता मैं गारंटी ले रहा हूं अगले पाच मिनट की बाबू को अर कहोगे क्या अभी मैं गारंटी ले रहा हूं बाबू अर हो गया बाबू अमर हो गया ऐसे समझोगे आप मेरी बात को ऐसे नहीं समझ पाओगे मैं गारंटी ले रहा हूं बाबू अी पा मिनट अगले पा मिनट तक बाबू को कुछ नहीं हो सकता पा मिनट तक बाबू अर है क्या इस समय थोड़े सम के लिए एक बार बोल दो कि हा मैं पा मिनट के लिए अर हं हम दूसरे क्वेश्चन प आ जाएंगे बोल दो बाबू ये आप लोगों कीय जो थिंकिंग है जनता देख ले इसको मैं बता रहा हूं जी जब वहा ये शब्द आ गया थोड़ा समय थोड़ा समय यानी कि एक लिमिट आ गई तो आप अमर मत बोलो यही य वहां अगर आप थोड़े समय के लिए उसको सुख में भेज रहे हो थोड़े समय के लिए उसको भय मुक्त कर रहे हो तो उसको अमर मत बोलो अगर अमर बोलोगे तो मैं कह रहा हूं क्या पाच अगले पाच मिनट के लिए बाबू भाई को हम लोग अमर कहे
01:13:10:18 भाई आप लोग कमेंट कर दो पाच मिनट के लिए मैं गारंटी ले रहा हूं बाबू को कुछ नहीं होगा भैया टाइमर दिखाइए जरा एक 13 17 ठीक है अब 5 मिनट एक 18 18 प हम लोग जब देखेंगे पा मिनट के बाद तो तो अब इस पाच मिनट में बाबू को अमर कहा जा सकता है कि नहीं बिल्कुल कहा जा सकता है व पर बोलिए कुछ समय के लिए बोलिए कमेंट में लोग उतर देंगे मिट के लिए अर है बाबू कह दो हा मैं पाच मिनट के लिए अर हूं बोल दो एक बार हम दूसरे प्रश्न प चले अमर है भाई कह तो रहा हूं मैं अमर है हा देखो भाई ये है तत्व ज्ञान अब और आप आप बोलिए बाबू भाई मैं अमर हूं पा मिनट के लिए बाबू भाई कुछ हो तो नहीं गया मेरी वाणी नहीं गलत मत कर दे बाबू भाई अरे बाबू भाई अरे कहां चले गए एक मिनट रुकिए उसका नेटवर्क कट रहा उनका नेटवर्क मुझे डर लग रहा है भाई अच्छा ठीक है नेक्स्ट टॉपिक प चला जाए चलिए अगला
01:14:13:26 टॉपिक अगला अग अगला अगला प्रश्न मैं ले रहा हूं आपसे अगला प्रश्न मेरा यह है कि [संगीत] आपने आपने जब वहां पुस्तक सेवा पर पुस्तक रोकी गई थी तो एक बात बोली गई थी वहां पर आपके मुख से कि वेद शस्त्र पढ़ने से मोक्ष नहीं होता ऐसा संत रामपाल जी महाराज के पुस्तकों में लिखा हुआ है ठीक है जी हा बात क्या हां वहा गुरु की बात है बिल्कुल गुरु की बात है गुरु वाली बात हो गई क्या ये बात गुरु में ही आएगी ये गुरु तक ही पहुंचेगी यह बात अच्छा ठीक है चलो आप उसका उत्तर दीजिए क्या वेद शास्त्र पढ़ने से मोक्ष होगा वेद शास्त्र पढ़ने से और पढ़ कर के य सचित उस पर अमल अमर करने से उसको समझने से मोक्ष होगा बिल्कुल होगा आपने वहां यह शब्द बार-बार दोहराए कि यह लोग यह कह रहे हैं कि वेद शास्त्र पढ़ने से मोक्ष नहीं होगा
01:15:29:07 वेद शास्त्र पढ़ने से मोक्ष नहीं होगा तो आप हमसे पूछोगे ना कि हमारा वो कहने का भाव क्या है हां आप हमसे पूछोगे ना हम क्या कहना चाह रहे हैं वहां तो हम बता रहे हैं आपको कि ये लोग हम जब यह कह रहे हैं ना कि यह देखो यह लिखा है यज्ञ करने से मुक्ति नहीं है और कौन सा कौन सा य पांचवा यज्ञ ये देखो पांचवा यज्ञ करने से यज्ञ केवल एक नहीं है ज्ञान यज्ञ भी शामिल है ज्ञान यज्ञ से भी मुक्ति नहीं है पाच यज्ञ है तो हम ये कह रहे हैं कि भाई जो वेदों के अनुसार जो पूजा भक्ति है उससे मुक्ति नहीं है और यह आपकी किताबों में जगह जगह लिखा हुआ है तो आपके भी किताब में तो लिखा हुआ है वेद शास्त्र पढ़ने से मुक्ति नहीं होती है वेद शास्त्र के अनुसार आप बात को बदल रहे हो वेद शास्त्रों के अनुसार जो भक्ति है उससे मुक्ति नहीं है बातों को बदलो मत वेद शास्त्रों के अनुसार
01:16:44:18 जो भक्ति है उससे मुक्ति नहीं है यह आपके में लिखा हुआ है इस पर आप सहमत है कि वेद शास्त्र के अनुसार मुक्ति नहीं है मैं तो कह रहा मुक्ति है वेद के अनुसार यदि आप अपने कर्मों को करेंगे वेद शास्त्रों के अनुसार चलेंगे तो मुक्ति है आप कह रहे हो वेद शास्त्रों में भी मुक्ति की वो नहीं है काल ब्रह्म तक की भक्ति है वेद शास्त्रों में दिखाइए कि वे शस्त्र शास्त्रों से मुक्ति है क्या वे शास्त्रों के अनुसार चलने से मुक्ति है प्रमाण दिखाइए वेद शास्त्रों के अनुसार चलने से मुक्ति है प्रमाण दिखाऊ जी आप कह रहे हो आप इस बात को स्वीकार कर रहे हो ना कि वेद शास्त्र के अनुसार चलने से मुक्ति नहीं है यह कह रहे हो ना इसका प्रमाण रखा
01:17:38:07 ह उने आपने वेदों से मुक्ति नहीं होगी ठीक है तो आप भी मान रहे हो वेद से मुक्ति नहीं होगी इसका मतलब मेले में गलत नहीं चलाया वो बाद की बात है वेदों से मुक्ति होगी कि नहीं होगी व बात सही है कि नहीं है इन्होंने प्रश्न ये किया है कि वेदों के मैंने जो मेले में चिलाया था वो निराधार था या आधार था तो आपने मेरा जवाब दे दिया व आधार था आपको यही सिखाया गया ना कि वेदों के अनुसार मुक्ति नहीं होगी आपका ग्रंथ कह रहा
01:18:17:00 है रामपाल जी ने अपनी किताबों में सही लिखा है कि गलत लिखा बात अलग है अमित दास पूछा है कि आपने मेले में चिल्लाया था इसका क्या आधार है मैंने चिल्लाया था सही चिल्लाया था ना चिलाता मतलब कहने का ये है अमित दास एक मिनट अमित दास मैं इनको बात समझा दू बाबूराम बा बाबूराम यादव अमित दास का कहना ये है कि ऐसा नहीं है हमारे गुरुजी ऐसा नहीं कहते कि वेदों के अनुसार मुक्ति नहीं है ठीक है तो मैंने वहां पर गलत चिल्लाया कि वेदों के अनुसार मुक्ति नहीं है मगर आप भी इस बात को एडमिट कर रहे हो कि हा वेदों के अनुसार मुक्ति नहीं है वो चर्चा का एक अलग विषय है मैं सिद्ध करूंगा वेदों के अनुसार मुक्ति है भाई वेद केसर कहा मुक्ति है प्रमाण दिता को मि बाबू भाई आप दो मि प्र मेरा य है प्रश्न मेरा य है केवल वेद शस्त्र पढ़ने से मुक्ति होगी केवल मैंने वहा पर कहा था केवल वेद शस्त्र पढ़ना लिखा है इसम इस समय यह है आपसे कि केवल वेद शस्त्र पढ़ने से मुक्ति होगी नहीं उनको समझने से
01:19:32:02 उनके अनुसार आचरण करने से उस पर चलने से वेदोक्त पथ पर तब होगी मुक्ति क्या तप व्रत तीर्थ यात्रा जय ओम पूजा वेद शास्त्र अगम आदि की कथा करने से मुक्ति होगी एक मिनट आप रुक जाइए आपने दो प्रश्न किए है ना अभी तक आप पूछिए आप अब हमें भी तो पूछने दो पूछ लो हा सबसे पहले तो मुझे ये बताओ क्या वजह थी जो आपका सतलोक है जो आपका सतलोक हैव गुरु पर ही बात होगी गुरु परही बात हो रही है भाई गुरु ने आपको सही ज्ञान दिया है कि नहीं दिया वो पूछ रहा हूं हा तो आपके गुरु के अनुसार जो काल है वो किसको खाता है भाई साहब केवल गुरु पर बात होगी अरे फिर वही बात केवल गुरु प बात है तो पित पूजा भी कैसे आ गई अब यहां पर ये बा गु गुरु से तो जुड़ी हुई है सारी बात मैं मैं बता रहा हूं आपको मैं बता रहा
01:20:47:04 हूं आपको हा यहां पर आप आंसर देंगे फिर मैं आपको बता दूंगा फिर वो परफेक्ट ग्रुप ही ऐड होगी भाई साहब मैं भी तो परफेक्ट गुरु पर आ रहा हूं आपके गुरु का ज्ञान सही है कि नहीं सही है वो मैं कटाक्ष कर रहा हूं आप उसका उत्तर दीजिए तो यहां आप बात ईश्वर पर लेकर आ रहे हैं ईश्वर पर कहा है आप क ला भी रहा हूं अभी गुरु पर बात हो रही थी आप ब्रह्मा विष्णु महेश पर गए थे कि नहीं गए थे वहा आपको प्रमाण देना पड़ तो बस तो मैं भी गुरु के ज्ञान को ही तो चेक कर रहे भाई मिला विषय को बदल रहे सुनिए सुनिए विषय को नहीं बदल रहा हूं आप बदल रहे हैं आप चाहते केवल आप क्वेश्चन करें अभी मैं एक छोटा सा क्वेश्चन करर हूं छो सा क्वेन करर हूं मैं एक छोटा सा क्वेश्चन कर रहा हूं एक मिनट मैं छोटा सा क्वेश्चन कर रहा हूं कि काल ब्रह्म है जो वो किसको खाता है एक मिनट रुकिए बाबू जी आप रुकिए मुझे बोलने दीजिए जैसे कि आपके गुरु ने जो साधना आपको बताई है और व आपसे पूछ रहा हूं वो साधना वाकई मोक्ष की दायक है कि नहीं आप प्रश्न कर सकते हैं
01:22:03:00 गुने म आपको अपना गुरु से कनेक्शन बता रहा आपको गुरु से कने ड श्वर कीने अर्थ बताया है शास्त्र का सही है नहीं य जांचने के लिए मैं आपसे प्रश्न कर रहा हूं भाई हमारे गुरु की साधना जी पा जी य चाहते हैं कि यह जो प्रश्न करे यह जिस क्षेत्र य जिस तरह का प्रश्न करे वैसा ही प्रश्न करू य थोड़ी ना भाई गुरु से संबंधित आपने भक्ति चुनी हमने ईश्वरीय ज्ञान चुना आपने भक्ति का करने का तरीका जानना चाहा और हम ईश्वर का स्वरूप जानना चाह रहे आत्मा का स्वरूप जानना चाह रहे हैं य फसाने वालेप जानना आमा आत्मा और ईश्वर की बात हम नेक्स्ट डिबेट में करेंगे फिलहाल में जो जो जो गुरु के द्वारा मंत्र दिए जाते हैं वो किस विधि से किया जाता हैट में हम लोग गुरु और भक्ति दोनों की बात कर रहे हैं गुरु और वक्ति दोनों की गुरु ली गुरु गुरु देखो गुरु अगर कहोगे
01:23:18:01 केवल ना तो उसम तो सारी चीजें आ जाएंगी हम पूछ रहे हैं आपसे कि काल किसको खाता है आप हमें बता दो आपके गुरु ने क्या बताया बाबू भाई जवाब दीजिए काल किसको ता है काल जो शरीर कार हो है अनामा उसको काल वहा ले जा कर के उसको तप गर्म करता है ता है तो उसके शरीर से जो दुर्गंध उसको खाता अच्छा मतलब की वो मनुष्य नहीं होते को वो खाता है मनुष्य तो वो है ना जो शरीर में आत्मा का एक सूक्ष्म शरीर होती है अरे तो मनुष्य नहीं है ना मनुष्य तो वो है ना जो भूलोक का प्राणी है जो भूलोक पर चर विचर रहा है वो है मनुष्य तो मनुष्य को नहीं खाता ना वो जीवात्मा के सूक्ष्म शरीर को पीस के जो तत्व निकलता है उसके बाद भी जीवात्मा अस्तित्व में रहती है उस मैल खाता है वो गंध निकलती वो खाता है ठीक है जी मनुष्यों को नहीं खाता है वो हा तो तत्वदर्शी जी का ज्ञान य है के शरीर को
01:24:33:02 नहीं खा रहा वो मनुष्य को बता रहा पाच तव वाले शरीर शरीर निकल जाएगी तो वो आत्मा सूक्ष्म शरीर में मनुष्य कहलाए कीी क्या क्या कहलाए वो नहीं कहलाए दुर्ग को खाता है व मनुष्य तो नहीं कहलाए ना या काल मनुष को नहीं खाता है काल मनुष्य को नहीं खाता है ये तत्व ज्ञान है तत्वदर्शी का ठीक है अब मैं आपसे पूछ रहा हूं आप बताए अब अगला प्रश्न अगला प्रश्न हम लोग का है अरे भाई अभी मेरा प्रश्न खत्म नहीं हुआ है हा तो आप ब ये देखिए काल जो है मनुष्य को खाता है पढ़ लीजिए कौन से पेज प लिखा हुआ है पहले पढ़ लीजिए फिर बताते हैं बड़ा करो भरा बड़ा
01:25:29:28 करो बड़ा करो इसको बड़ा करो पढ़िए हरा वाला काल ब्रह्म एक लाख देह ऋषि मनुष्य देह ऋषि शरीर धारी प्राणी ता है उसके लिए इससे तीनों पुत्र व्यस्त बनाए रखते हैं वहा वहा पर क्या होता है बाबू भाई आपने कहा वो मनुष्य को नहीं खाता है आपके तत्वदर्शी लिख रहे हैं मनुष्य को खाता है बता रहे हैं बता रहे य से यहां से जब शरीर को लि कानते हैं तो व वह आत्मा जैसे मनुष्य शरीर में है जैसे मनुष्य शरीर है उसका एक शरीर से ऐसे ही रहेगा आप लोग यार सत्यवादी नहीं हो यार मजा नहीं आता आप लोगों से इसीलिए फिर चचन होने लगती है यार कुछ गलत किया है तो बोल दो मुझसे गलती हो गई आगे बढ़ो उससे तुमको नहीं पता था तुम्हारे तत्वदर्शी ने लिखा है कि मनुष्य को खाता है वो पता नहीं उसको ु ल कर लो य
01:26:45:12 यहां पर किसी मनुष्य को खाते हुए आप देख रहे हैं क्या अरे भाई यह लिखा तो है क्या लिख रहा है क्या लिख रहा है इसम अरे उसी चीज को बता रहे है मनुष्य जैसे आकार में सूक्ष्म शरीर होती है उसको इस मनुष्य जैसा आकार नहीं लिखा है इसमें मनुष्य लिखा है बड़ा करो क्या दिखा रहे हैं यह देखो प्रतिदिन एक लाख मानव शरीर मानव जब आत्मा शरीर छोड़ देती है तो उसको मानव नहीं कहते हैं और अगर कहते हैं तो दिखाओ मुझे कहां कहते हैं जो मनुष्य लिग कर जाती है उस आत्मा को
01:27:27:20 खा है मनुष्य से जब आत्मा निकल जाएगी उसके बाद उस आत्मा को मनुष्य कहा जाएगा गलत बात कर रहे हो या बा अरे यार जो वहा परमा बा बाबू तुम कहा पर बैठे हो कहा पर बैठे मलो े तुम्हारे गुरु की फोटो है ना तुम उसी कमरे में थूक रहे हो अरे नहीं य पर नहीं थके अभी तुमने थका अरे शिवा भाई क्या बात कर रहे हो आप अपने प्रश्नों को
01:28:04:20 रखिए य गुरु के अपमान नहीं है अगर तुम गुरु मानते हो जिस कमरे में तुम्हारे गुरु चलो आप बात का जवाब दीजिए मुझे बताइए कि जब आत्मा शरीर छोड़ देती है मनुष्य का उसके बाद भी उसे मनुष्य कहा जाता हैर होता है सूक्ष्म शरीर होते है मनुष्य जैसे सेम अच्छा बाबू अभी थोड़ी देर पहले तुमने यह कहा था कि मनुष्य को नहीं खाता है यहां पर लिखा है मनुष्य को खाता है उसका सूक्ष्म शरीर लिखा हुआ है वहा पर सक्षम शरीर को मनुष्य को खाता है मानव शरीर को खाता है सूक्ष्म शरीर नहीं लिखा है पृ संख्या बताइए मेरे को पृ संख्या पृष्ठ संख्या बताइए
01:29:08:10 215 अरे बाबू राम भैया जो जो जिस प्रकार आप बोले उसी प्रकार से लिखा होना चाहिए ना फिर व तो लिखी नहीं है वहा तो मानव धारी शरीर लिख रखा है तो तुम अपने जो गुरु है उन्हीं की अलना कर फर इस हिसाब से और सबसे बड़ी बात जो तत्वदर्शी है उसकी बात को समझने के लिए भी बाबूराम यादव के तत्व दर्शन को सुनना पड़ेगा अब उनको छोड़ के इनके शरण में जाना पड़ेगा ये भी तो है 15 से 20 मिनट का समय मेरे को दीजिएगा एक मिनट रुक जाइए मिल गया इसका उत्तर हां आप जो यहां पर बोले थे देखिए कोक में लिखा हुआ मनुष देव ऋषि हां जो मनुष्य है जो अपना इस शरीर को छोड़ता है तो अगला जो शरीर है उसका देव ऋषि शर को वहा पर लिखा हु में
01:30:04:22 देखिए देव ऋषि का अथ य होता है अरे मेरे भाई तुम कैसे पलस्तर करने लगते हो अपनी बातों में फस जाते हो तो बाबू मैंने देखा है हमेशा पलस्तर करते हो एक काम करो एक जग लो उसम अपनी सारी बातें डाल दो और एक शरबत बनाक हमको पिला दो हम पी लेंगे बाबूराम भैया सत्य को स्वीकार करो जो लिखा है उसको पढ़ो ना क्या लिखा है वहां पर इसमें ऑप्शन दिए हैं मनुष्य देव अथवा ऋषि को व खाता है तो व कह र मनुष्य देव ऋषि और तुम चलो यहां तो यह मिल गया तुम्हे अभी मानव शरीर दिखाए थे उसका क्या करें मानव
01:30:46:15 शरीर रुक जाइए अब हमारा भी प्रश्न रहेगा इसके बाद हमारा प्रश्न य भाई साब देखिए बाबू भाई आपने दो प्रश्न पूछे थे हमने एक प्रश्न पूछा है अभी अभी तक एक ही प्रश्न पूछे हाभ अभी तक अभी तक आप एक प्रश्न पूछे अभी तक एक ही प्रश्न पूछा है भाई हमने आपने दो पूछे नाने पहला गुरु था और दूसरा एक और था आपने मे में लाइन क्यों कही थी दो और अब हमने पूछा कि आपने दो पूछ लिए अब एक हमें पूछ लेने दो हमने पूछा कि भाई काल किसको खाता है हमने आपने कहा वो जीवात्मा को खाता है मनुष्य को नहीं खाता अब आपके जो गुरु है वो लिख रहे हैं मानव शरीर को खाता है मनुष्य को खाता है अब आप उसमें चिल्लम पटी करते रहिए मुझे बताइए कि शरीर छोड़ने के बाद भी आत्मा को मनुष्य कैसे कहा जा सकता
01:31:46:28 है इसी चीज को लिका रहे प्रश्न रख रहे हैं आपसे उत्तर देना है रखे बोलिए बोलिए मेरा प्रश्न य है कि आपके गुरुजी मोक्ष के लिए किस विधि से मंत्र देते हैं इससे संबंध स्थापित करिए विषय का कोई भी संबंध हो उसका हम उसे तो देखना चाहते हैं कि आपके गुके गुरुजी इसके उतर अब मैं इसके उत्तर में फिर एक सवाल बोल दूं ऐसे तो विषय बदलते
01:32:19:19 जाएंगे पूछ रहा सक्तिमान है कि नहीं भैया जी अरे मैं पूछ अभी बोल यही खत्म हो जाएगी सारी डिबेट अरे भैया जी मैं पूछ रहा हूं पूछ र मैं पूछ रहा हूं अरे बाबू बाबूदास मैं पूछ रहा हूं उनका पूछने का अर्थ यह है कि जैसे कि हम गुरु की शरण में जाएंगे तो वो किस प्रकार हमें मंत्र देगा जिससे हमारी मुक्ति होग साब देखो अम अभी बात यह चल रही है कि जब मानव धारी की बात हो रही है मनुष्य की बात हो रही है आप कह रहे मनुष्य को नहीं कता आपके ख मनुष्य को ही खाता है मानव शरीर को ही खाता है तो या तो ये गलत है या बाबू ने गलत बोला अा मानव शरीर को लिखा हुआ है क्या व प हा मानव शरीर दिखा दो भैया अभी दिखाया था आपने जो मानव शरीर लिखा है सीधे सधे कौन से पृष्ठ पर लिखा हुआ है बाबूराम जी आप ही बोल दीजिए आपने तो देखा अभी खद निकाल के पेज नंबर पेज नंबर कौन सा है दिखा र दिखा रहे बता दीजिए मुझे पेज नंबर तो बताओ अभी बताते हैं ना भाई बिल्कुल वर्बल थोड़ी ना रटा हुआ डला है बताते हैं आपको अभी मानव शरीर दिखाया था बड़ा बड़ा करके दिखा दीजिए मानव
01:33:42:18 शरीर अरे अभी अभी जो दिखाया था आपने दो मिनट पहले वाला प्रमाण वो दिखाइए आप मुझे पेज नंबर तो बता दो भैया भाई साहब वो मुझे रटा हुआ नहीं है वो मैं देख करके आपको बता रहा हूं और जब वो आ जाएगा स्क्रीन पर पेज नंबर भी आपको बता दिया जाएगा आप देख लेना बोल के हां बड़ा करिए
01:34:17:28 इसको यह देखिए मानव शरीर पढ़ लिया पेज नंबर बता दो इनको कौन सा है क्या है अध्यात्म ज्ञान का गोला तो नहीं है कहीं आध्यात्मिक ज्ञान गंगा और पेज नंबर 91 पढ़ लो मेरे प्रश्न का उत्तर दीजिए एक मिनट इस विषय को खत्म हो जाने दो फिर हम आपको उत्तर देते हैं
01:35:15:14 इतना सन्नाटा क्यों है भाई क्या हुआ अरे क्या हुआ अमित जी बोलिए अ अमित दास जी कहीं चले गए बताइए हम तो बोल तो रहे हैं या तो आप गलत हो या आपकी य त किताब गलत है
01:35:56:26 हमारे प्रश्न का उत्तर दीजिए जो हमने प्रश्न किया देखा बात को खत्म थोड़ी ना करोगे आपने दो प्रश्न कर लिए है तीसरा हमने दो नहीं किए हमने पहला किया यह वाला कि आप कह रहे वो जो है सूक्ष्म आत्माओं का जो सूक्ष्म शरीर होता है उसकी गंध को खाता है य पर मानव शरीर धारी प्राणियों को खाता है जी पड़ी जी बोलिए बाबू भैया देखो होता क्या है कि जब ज्ञान चर्चा करते इसका एक नियम होता है कि जब तक एक टॉपिक खत्म नहीं होता उसका कुछ आधार निकलता नहीं है तब तक उसके हम आगे नहीं बढ़ सकते हां यह है कि हम दर्शकों के ऊपर छोड़ सकते हैं कि हां यह हमारी वार्ता हुई है आप खुद अनुमान लगा सकते हैं कि य क्या सही है क्या गलत है मैं आपका इसको 11 के 32 में प्रमाण दूंगा भगवत गीता 11 के 32 आप एक बार आप वो चेहरा दिखाकर बात करें वो क्योंकि बाद में रील वगैरह बनती है ना तो दिक्कत आती है
01:37:10:08 जी फिर चले गए अमित दास जी तब तक क्वेश्चन रखे रहिए कुछ बाबूराम बाबू हा बाबू बाबू जी से आप बात कर लीजिए ठीक है अब मैं कुछ क्वेश्चन ठीक है गीता से ही पूछे जाएंगे आपके लिए ठीक है देंगे उसका देंगे उसका शिवांश जी देंगे सुनिए सुनिए बा बाबू भाई थोड़ा होपलेस हो रहे हैं एक बार इनको अप अपना प्रश्न करने दीजिए बोलिए बाब भाई आपके गुरुजी मक्ष के लिए मंत्र देते गायत्री मंत्र विधि बताइए
01:37:57:02 काय मोक्ष के लिए मंत्र क्या मंत्र सम जो मंत्र देते हैं गायत्री मंत्र उसको किस विधि से जाप करना किस विधि से जाप करते हैं जी अब मैं आपको यहां पर एक उत्तर दे दूं आपको विधि नहीं पसंद है आपकी विधि अलग है क्या भाई उसी को तो पकड़ेंगे कि भाई आपके गुरुजी किस विधि से देते हैं आप ठीक है आपकी विधि अलग है आपको लगता है हमारे गुरु जी गलत विधि से देते हैं ऐसा है क्या हैं भई आप तो हर पॉइंट प कमी लि कान रहे हैं किसी को देखना चाहते आप समझ नहीं रहे हो मेरी बात हमारे और आपके बीच में मैं आपको एक बात क्लियर करूं हमारे और आपके बीच में जो दूरियां है वो इन बातों को लेकर नहीं है कि हमारी विधि गायत्री मंत्र को जपने की क्या है और आपकी गायत्री मंत्र को जपने की क्या विधि है इस बात को लेकर दूरी है मत मत मत मानो हमारी विधि को अपनी लगा लो जाओ मर ब्रह्मा विष्णु महेश को भगवान ना मानना कबीर को भगवान मानना वेदों के अनुसार और यह क्या कहते संत रामपाल को तत्वदर्शी मानना यह सब बंद करो अपनी विधि जो तुम्ह पसंद है वो बनाओ कोई दिक्कत नहीं जाओ मान लो हमा ग उतर देने
01:39:12:07 मतलब यने देखो ऐसा है कि अगर हम ऐसे विषय निकालेंगे ना एक लाख विषय आ जाएंगे और उनको साबित करते र कभी चर्चा हमारे बीच में दूरी किस बात को लेकर है दूरी शिवा जी अमित अम आपको हमारे अनुसार गायत्री मंत्र नहीं जपना है अपने अनुसार जपना है तो जप लो जाओं भाई हम शास्त्रों के अनुसार मत्र जपेंगे शास्त्रों शास्त्रों के अनुसार मंत्र जपोगे वो ठीक है मगर अगर तुमको हमारी चीज उस मामले में समझ में नहीं आ रही है तो हम नहीं तुम्ह कह रहे गलत बोल रहे हैं हम नहीं कह रहे जाओ जपो जा कर
01:40:04:16 के हमारा प्रश्न ये है क्या प्रश्न का उत्तर लेने गए थे अमित दस व ले आए कि नहीं ले आए या उसको छोड़ दे एक्चुअली ऐसा था कि मेरा फोन जो सेम सेम का है वो अचानक बीच में स् हो जाता है अच्छा इस वजह से फिर मुझे आ रही है सेम सेम के मोबाइल है तो अच्छा एक्चुअली जो प्रश्न हमारा ये था कि क्या आपके गुरुदेव हा जो मंत्र देते हैं वो माला से जपने के लिए देते हैं या या माला से बोलकर बो जपा जाता है या मन में बोला जाता है वो किस प्रकार उच्चारण किया जाता है हमारा प्रश्न यह है देखो प्रश्न आपका यह है ऐसा नहीं है कि इसमें विधि शास्त्रोक्त नहीं है मगर मैं आपको य बता रहा हूं कि अगर आपको उससे दिक्कत है आप वो वाली विधि मत अपनाओ जो आपको सही लग रही है वो अपनाओ हमारे बीच में दूरी किस बात को लेकर है कि गीता का ज्ञान देने वाला कृष्ण से अलग कोई काल है इस बात को लेकर दूरी है जो व्यक्ति अपनी दो दो चार चार तरह की बातें लिख रहा है उसको आप में बैठे हुए को परंपरा को आप नहीं मान रहे हो इस बात को लेकर के दूरी है
01:41:19:25 तो इन बातों को लेकर के कपूर को जलाया सुनो सुनरी बा कपूर क्यों जलाया अगर वो ती क्यों जलाई ये क्यों किया वो क ऐसे करते रहेंगे हम लोग एक लाख प्रश्न एक लाख उससे भी ज्यादा शिवांश भाई उस विषय प हम ईश्वर के ईश्वर वाले विषय पर डिबेट होगी ईश्वर वाले विषय प डिबेट नहीं है ईश्वर वाले विषय प डिबेट नहीं है डिबेट है गुरु प गुरु प है ट और गुरु सेही संबंधित प्रश् चल रहे जिस प्रकार हमारे गुरुदेव मंत्र देते हैं वो शास्त्र में प्रमाणित है आपरा शस्त्र में प्रमाणित है देवी भागवत से दिखा देता हूं आपको गायत्री मंत्र काप प्रण के साथ हां तो वही मैं पूछ रहा हूं जो मंत्र आपको दिया जाता है वो मंत्र क्या मुख से जप किया जाता है माला से या मन में मन उस मंत्र का उच्चारण किया जाता है सबसे परम तरीका है मन का कि मन में जप करो और शुरुआत में जो सबसे उत्तम होता है कि मन में जप करो और मध्यम होता है कि बुदबुदा के करो और शुरुआती होता है कि आप जो है इतना बोलो कि केवल खुद ही सुन पाओ चिल्ला के तो करना ही नहीं चाहिए मंत्र का जाप
01:42:35:19 ठीक है अब बाबूदास जी इसका थोड़ा प्रमाण बताइए इसका प्रमाण य है मंत्रों को किस प्रकार जपे तब पूर्ण मोक्ष को प्राप्त होंगे बता इसमें बताया है कि मनुष्य के शरीर में चक्र पाए जाते हैं चक्र में का होता
01:43:13:16 है चक्र की बात बाबूदास चक्रों की बात नहीं मंत्र किस तरह जाप किया जाता है मंत्र की जा बताया शवास सेको बोला है कि अजबा जाप होता है शवास अंदर और बाहर ते देखो भाई इसमें तो मैं आपको यही कहूंगा कि आपने पुराण पढ़े कहां से पाड़ जी आप कु कहना चाहेंगे इनको इस बात प शिवांश भाई वहां ये लिखा हुआ है कि केवल उसको तत्वदर्शी संत देगा और उसी से ही पूर्ण मोक्ष होगाय बस आप अपने गुरु को तत्वदर्शी सिद्ध कर दो हम आपके अपने गुरु को तत्वदर्शी सिद्ध कर रहे हैं तो हमारे गुरुदेव तो सासों वाला मंत्र देते हैं ना तो हमारे गुरुदेव भी तो देते हैं ना आपने अभी कहा कि मन में जभी तो मैंने आपसे पहले प्रश्न किया था कि आपने कहा मन में जपना चाहिए अरे मेरे भाई आप ये बताओ कि जब आप मन से जप रहे हो तो व सास के साथ जपा जा रहा है कि नहीं जपा जा रहा है मन में कुछ नहीं चल रहा है अब अजपा जाप का मतलब बताइए बाबूदास अजज कैसे होता है बास प बता अ जाप कैसे होता है अजबा जाप का मतलब होता है कि एक मंत्र को
01:44:28:28 सांस के द्वारा अंदर लेंगे और एक मंत्र को बा अरे मेरे भाई उस समय तुम्हारा मन काम कर रहा होता है कि नहीं कर रहा होता है यह बताओ आपका ग्र कहा भाई एक सांस के अंदर एक सांस के बाहर एक मंत्र लेंगे दूसरी सांस के अंदर और दूसरे मंत्र को लिया जाएगा उसको बोलते पूछ रहा हूं आपका मन उस समय एक्टिव होता है या निष्क्रिय होता है उसम मन मन मन में मंत्र नहीं चल रहा होता है जब सास के द्वारा वो जाप कर रहे हो जब जब सास के द्वारा जाप करते हैं उस मंत्र को हमें ध्यान में रखा जाता है और वो मंत्र वो ध्यान हो रहा होता है मंत्र के ऊपर अरे कहां पर होता है कौन सी इंद्री में ध्यान होता है वो ध्यान की कौन सी इंद्री है भैया जिस मंत्र को हम जाप करते हैं उस मंत्र के ऊपर ध्यान होता है जैसे हमने कोई मत्र न मन सेही तो लगाओगे कान से लगाओगे से लगाओगे सा से लगाओगे व ध्यान मन सेही तो लगाओगे ब मन के बिना जाप कर लोगे चलो तुम य कह रहे हो तुम मन के बिना जाप करते हो हा बोलिए
01:45:44:08 इनके गुरुजी जाप नहीं देते हैं बाबूराम बाबूराम देखो ज्यादा स्वयं को बनने का प्रयास मत करो मैंने अभी क्या पूछा है कि आप जो है मन के बिना जाप करते हैं हम स्सों वाला मंत्र बात कर रहे हैं मन वाला मत्र बात पू क्या मन के बिना जाप करते हैं ध्यान लगाया जाता है मंत्र पर मैंने आपसे पूछा क्या आप मन के बिना जाप करते हैं बिल्कुल नहीं अपना कैमरा ऑन कर लीजिए
01:46:23:21 बोलिए तो आप भी मन से ही जाप करते हैं ना सास के साथ मन सास के साथ मन के मन से जाप किया जाता है हमने अगर सास नहीं बोला तो आपने बोला तो सही हो गया हमारा गलत हो गया बिल्कुल गलत है आप अगर शवास के साथ नहीं ले रहे हो उसको एक मंत्र शवास से छोड़ा जाता है तुमने अगर कहीं से एक जगह से डेफिनेशन य पकड़ ली है कि सांस वाली है तो मन वाली गलत कहां हुई उसम ड हुआ ना उसमें ऐड हुआ है ना मन गलत हमारा तब होगा जब आप यह कह दो कि हम मन के बिना जाप करते हैं हमारे गुरु भी यही कहते हैं कि जो आपका जो मंत्र जाप है वो सांसों के साथ आना जाना चाहिए बिल्कुल सही है मगर जो उत्तम सब सबसे सर्वोत्तम जाप होता है व मन में होता है अ उसको आप बुदबुदा भी नहीं सकते किलाना तो दूर की बात
01:47:21:01 है और बाबूराम भैया जो मंत्रों का जाप किया जाता है ना व ऐसे ही किया जाता है इ ऐसे किया जाता है यह कोई न बात नहीं है जो आप हमको बता [संगीत] रहे बाबू बाबूराम ने बाबू राम ने गरु पुरा को नहीं 20 मिनट का मुझे समय दीजिए
01:47:57:19 कुछ क्वेश्चन जो बाबू भाई जीत्मा है य किसका अंस है क्या बो पा पाड़ जी गुरु के ऊपर बात होगी केवल गुरु के गुरु के बात कर मिनट एक मिनट गुरु से ही रिलेटेड नाय बात हर बात गुरु से रिलेटेड है गुरु सही बात बता रहा है नहीं र अपना भक्ति बता ही नहीं तो हम पूछ रहे कि वो ज्ञान बता रहे वो सही है कि नहीं आप अपनी लिमिटेशन लगा देते हो हर बात और अप भी पूछ सकते हो और उसम भी जवाब नहीं होता है ठीक है गुरु के वही पूछिए जो पूछ रहे थे आप वही पूछिए जो पूछ रहे अच्छा जीवात्मा किसका अंश है ये ये परमात्मा की अमित जी आप अपना कैमरा ऑन रखिए प्लीज
01:48:53:02 तरफ है ना वो चेहरा थोड़ा साफ नहीं आ रहा इसलिए मैंने ऑफ कर रखा है कोई दिक्कत नहीं है चेहरा आने दीजिए असाफ आने दीजिए अनुत्तम आने दीजिए अ श्रेष्ठ आने दीजिए पर आने दीजिए कौन से परमात्मा य तो बता दीजिए एक बार परम अच्छर ब्रह्म कौन कबीर देव जी अरे गीता में परम अक्षर ब्रम लिखा हुआ है कौन कौन ये परम अक्षर ब्रम कबीर देव जी है ना गीता के अनुसार हम बात कर रहे हैं गीता परर बात कर गीता करेंगे तो परम अक्षा ब्रम कौन नाम तो बता दीजिए उसका परम अक्ष ब्रम पूर्व परमात्मा को बोला गया है आदि पुरुष को स अच्छा ठीक है ओके 15 का सात निकालो बार पढ़ो तो गीता अध्याय 15 का सात निकालो एक बार अमित जी आप अपनी यह ऑन कर लीजिए स्क्रीन प्लीज [संगीत]
01:50:03:00 जोर से पढ़िए [संगीत] थोड़ा पढ़िए पढ़ जोर से पढ़िए थोड़ा दर्शक भी सुने नहीं
01:50:39:10 निकला जी जी लिखन रहा लिखन रहा है पढ़िए वो मुझे लगता है पहले आश्वास सो रहे हैं इसमें कोई बम तो नहीं है तो पहले एक बार मैं पढ़ लू मन में उसके बाद पढ़ूंगा बोल के ऐसा कोई बात नहीं है आप ही पढ़ के बता दीजिए पढ आप पढ़ एक बार सातवा का लिखा हुआ है हा सतवा में लिखा हुआ है यह देह में
01:51:25:03 दे में जीवात्मा मेरा ही अंश और वही इन प्रकृति में मन और पांचों इंद्रियों को आकर्षण करता है तो यह तो काल का अंश हो गया सनातन अं हो गया काल का आत्मा तो यह कहां हो गया व परम पिता परमेश्वर परम अक्षर ब्रम का तो परम अक्षर ब्रम का हो गया ना परम अक्षर ब्रम कौन है काल नहीं है मान य लोग को हटा देते हटा दीजिए ह र इस विषय पर चर्चा हो रही थी आप विषय क्यों चेंज कर रहे चलो ठीक है गुरु के विषय पर जाते चलो ठीक है 15 का
01:52:12:01 एक ब्र की मृत्यु दिखा देंगे फिर आप क्या मिनट अमित दस जी ब की म दिखा आपको अमित दास जी अभी आप दास जी अभी आप एक समय चले गए थे प्रश्न चल रहा था वो मानव शरीर को खाता है हम हमने दिखा दिया हम इसमें आप क्या कहोगे इस पर मेरी कोई प्रतिक्रिया नहीं है म आपको नहीं पता किसको खाता है मैं बता तो रहा हूं गीता अध्याय 11 के श्लोक 32 में स्वयं काल भगवान ये कह र खाते हुए मुझे दिख नजर आ रहे हैं तो मुझे वो जो नजर आ रहे हैं तो जिस प्रकार हमारे गुरु जी ने शब्दों के अनुसार बताया शब्दों से बताया था और काल भगवान सूक्ष्म शरीर को खाता है अब वो वहां उन्होंने गलत लिख दिया या सही लिख दिया मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता ये क्या बात हुई ये क्या बात हुई भाई आप या तो ये मानो ये बुक से बुक में प्रिंटिंग में गलत हो गया है क्योंकि अगर वो सूक्ष्म शरीर को खाता है तो मानव शरीर को नहीं खाता मनुष्य को नहीं खाता है ये क्या बात हुई
01:53:27:14 ि पड़ी नहीं करूंगा बाराम एक मिनट मेरी बात हो रही है अमित दास जी बोलिए तो मैं कह रहा हूं आप लोग कह रहे हो वो सूक्ष्म शरीर को खाता है ये कह रहे वो मानव शरीर को खाता है अच्छा आप लोग ये भी नहीं कह रहे वो खाता है आप लोग य कह रहे उनको क्या वो तपत शिला पर नि चोड़ा जाता है उसकी कोई गं खाता है ुना जाता है है ना उसकी गं को सूंघता है गं को खा के सेंगे वो तो सूंघता है खाता है वो खाता है भाई गंद को खाता है बिल्कुल खाता है वो उस गंद को मतलब क्या चबा के खाता है अब वो चबा के खाए कैसे भी खाए खा रहा है वो देखिए ये गोल मल बात है नहीं स्पष्ट बात करिए देखिए जब हम किसी बिना आकार वाली ये वायु ज आप ये विषय क्यों बदलना चाह रहे यह विषय का बदल रहा है आप छोड़ के चले गए रनेट आपका बा इसलिए हमने बाबूराम से दूसरी बात करी थी अभी बात हो गई है पा जी कुछ पूछने वाले हैं गुरु के विषय में उससे पहले जो आप अधूरा छोड़ गए थे वहा मानव शरीर आपने बोला मानव शरीर लिखा है
01:54:42:24 तो क्या लगता है आपको मानव शरीर को खाता है कि नहीं खाता है ये बात गुरु पर फिर बैठ रही है बिल्कुल बैठ रही है आपका गुरु सही बात बोल रहा है नहीं बोल रहा कही हुई बातो को काट तो नहीं रहा है गलया हो रही है नहीं हो रही है मैंने यह पूछा है कि क्या तत्वदर्शी गुरु होना चाहिए गुरु कैसा होना चाहिए किस प्रकार वो मंत्र दे तब वो सिद्ध हो जन की बात देखिए अगर गुरु अमित जी देखिए अभी हमारी बहुत अच्छी चर्चा हो रही है आगे मैं भगवान से प्रार्थना करूंगा बारबार ऐसी चर्चाएं हो अपने बीच में ठीक है जैसे आप बोल रहे हो जैसे आप गुरु की प्रमाणिक बात करते समय गुरु की भक्ति को जांच कर रहे हो गुरु की भक्ति को जांच कर रहे हो तो मैं भी गुरु की प्रमाणिकता को जानने के लिए गुरु के ज्ञान को जांच कर रहा हूं आप भक्ति का ज्ञान जांच कर रहे हो मैं ईश्वर के स्वरूप का ज्ञान जांच कर रहा हूं आत्मा के स्वरूप का ज्ञान जांच कर रहा हूं उसके लिए ईश्वर पर डिबेट होगी तो मेरे भाई ऐसे तो मैं भी कह सकता हूं आपके सवालों पर भक्ति के विषय पर अलग से डिबेट होगी मैंने तो नहीं कहा मैंने आपकी बात का उत्तर दिया फिर तो कोई विषय बचा ही नहीं मुझे ऐसा लगता है फिर डिबेट में मजा ही नहीं आएगा अरे मजा क्यों नहीं आएगा पहली बात तो यय जो
01:55:58:02 ये जो क्या कहते मानव शरीर धारी वाली बात है ये आप चलती हुई बात कम से कम 15 मिनट चली थी आप छोड़ के गए थे उसको आप पूरा करिए फिर वो गुरु का प्रश्न पूछ रहे पहाड़ी जी यह गुरु से संबंधित है यह प्रश्न अरे जैसे आपकी भक्ति गुरु से संबंधित है ऐसे ही ईश्वरीय ज्ञान भी गुरु से संबंधित है गुरु का बताया गया मंत्र और गुरु से संबंधित मैच हो रहा हैया का स्वरूप गुरु का बताया हु सुन तोलो हा जो गुरु की बताई हुई भक्ति से प्रमाणित होगा कि वह गुरु जो मंत्र बता रहा है कि सही बता रहा है कि नहीं बता रहा है फिर गुरु जो ईश्वर बता रहा है उस पर अलग से बात होगी
01:56:55:01 अरे मेरे भाई आपने कहा कि गुरु की बताई हुई भक्ति मैं कह रहा हूं गुरु का बताया हुआ आत्मा का स्वरूप देखो वो छोड़ दो मैं अलग से कोई विषय तो खोद नहीं रहा हूं यह विषय चल चुका है ठीक है इस विषय में बात इस पर आ गई थी मानव शरीर को खाता है आप चौक गए थे मानव शरीर लिखा है हमने दिखा दिया मानव शरीर लिखा है अब आप हम क्या करें मुझे मुझे यह पता है कि आप विषय वो बदलेंगे नहीं उस पर ही रुके रह जाएंगे और लगता है एक दो घंटे इसी पर चर्चा होती रहेगी चलो इसी प कंटिन्यू करते हैं बोलिए गीता अध्याय 11 के 32 में जब वो स्वयं खाता हुआ नजर आ रहा है उसको क्या करें उसे फाड़ दे नहीं फड़ो तो नहीं फड़ो तो भगवान वहां पर दिखा रहे हैं कि सब जो जितने भी जीव जंतु है उनका लय मुझ में होता है इसलिए वो अपना समार वाला रूप दिखा रहे हैं हां तो वो सत्य है ना हां है सत्य तो हमारे गुरुदेव ने वहां लिख दिया कि वो असत्य है आप कह रहे हो कि उसके बाद जो गुरु जैसे मैंने आपको अर्थ बताया ना समझाने के लिए वो क्या सीन है जब आप अर्थ बता रहे हो तब भी आप ये कह रहे हो कि वो मानव शरीर को खाता है अर्थ में आपको बात को स्पष्ट
01:58:10:12 करना है खोलना है बात को आप वहां पर लिख रहे हो मानव शरीर को खाता है मानव देह को खाता है मैं वही तो कह रहा हूं गीता अध्याय 11 के 32 में वो मानव शरीर खाता हुआ दिख रहा है शरीर को ही खा रहा है अरे मेरे भाई मैं नहीं दिख रहा मैंने नहीं दिख रहा वो शरीर के सहित खाता हुआ दिख रहा है मुझे मैंने वहा पर आपको एक बात बोली है अमस जब कोई लोक है उसका भावार्थ जब करेगा गुरु तो आपको उसका भावार्थ बताएगा ना अब आपने मुझसे पूछा मैंने भावार्थ बता दिया मगर आपने जो भावार्थ है उसम लिखा है कि शरीर को खाता है व भावार्थ हा वही भावार्थ आ रहा दिहारी बात सु आखों से दिखने वालीज
01:59:02:08 गहा बा ठीक ठीक बाब भा रु अ एक बात बताओ जब गीता में लिखा हुआ है तो फिर अलग से लिखने की कोई आवश्यकता नहीं है फिर तो कोई किताब जब उसम लि फिर क्यों लिख रहे व वहां प लिख दिया तो गलत है अरे मैं बोल तो रहा हूं जब आप भावार्थ जब आप समझा रहे हो तब तो आपको असली बात लिखनी होगी ना देखो भैया जी मैं वही बता रहा हूं जैसे आंखों से जो चीज दिख रही है आप उसे कह रहे हैं कि वो गलत है और जो लिखा जा रहा है उसे कह र है ये भी गलत है क्योंकि ये गुरु हमारे क्योंकि गुरु वो है जो चीज को हम समझ नहीं पा रहे आंखों से देखते हुए वो हमें तत्व दर्शन दिखाएगा वो हमें तत्व दर्शन देगा तत्व ज्ञान देगा क्योंकि आंखों से दिखने वाली चीज तो भ्रमित करने वाली है काल हमें ब्रह्म वो आपके अनुसार जो काल है वो हमको हर घड़ी बेवकूफ बना रहा है तो तत् दर् वो है जो हमें तत्व ज्ञान देगा तो तत्व ज्ञान ये दे रहा है जो हम आखों से रहा है अच्छा मुझे मुझे यह बताओ कि वो भ्रमित कैसे कैसे भ्रमित कर रहा है उस समय कुल मिलाकर एक मिनट एक मिनट मैं आपकी बात का जवाब आपके ही शब्दों में दे दूं मैं आपकी बात समझ गया
02:00:17:22 एक तरीके से यहां पर ये बात भी भ्रामक है ये बात भी नहीं है हम बोलो मैंने यह पूछा है आपसे कि काल ब्रम वहां पे अर्जुन को गलत दिख रहा है भीष्म खाते हुए वो गलत दिख रहे हैं ऐसे गलत कैसे है आप ये बताइए मैं बोल तो रहा हूं कि उसका वास्तु करते है कि भगवान भगवान ये वहां पर दिखा रहे हैं कि मैं ही सब का शृंगार करता हूं वहां प वो ये दिखा रहे हैं हम और अर्जुन को दिखाई दे रहा है कि बम को आप चबा रहे हैं द्रोणाचार्य को आप जबा रहे हैं जबक द्रोणाचार्य के साथ तो बाद में युद्ध हुआ तो अर्जुन को ये समझ में आ रहा है उस समय उस समय अर्जुन कोय समझ में आ रहा है कि आपके दांतो में द्रोणाचार्य पिस रहे हैं तो अर्जुन को वो लीला जो दिख रही है वो गलत दिख रही है उस समय द्रोणाचार्य वास्तव में नहीं पिस रहे थे भगवान ने उसको एक आशय बताया था कि सब प्राणियों का जो लय है वो मुझ में होता है सबका समार करता मैं हूं अर्जुन को जो दिखाई दिया था वो अर्जुन को गलत दिखाई दिया ना क्योंकि उसके बाद द्रोणाचार्य से उसने युद्ध किया तो वही पूछना चाह रहा हूं व भगवान अर्जुन को गलत क्यों दिखा रहे हैं गलत क्यों दिखा रहे हैं मैं य भगवान ने उसको सही दिखाया देखो भगवा अब देखो तुमने
02:01:34:18 ब गल सुनो भगवान गम इसका उत्तर लेलो भगवान गलत दिखा रहे भगवान गलत दिखाने वाले काल को क्यों बना रहे हैं बोलिए क्यों बना बताओ वो तो क्या दोबारा से पूछना हा दोबारा सुन नहीं पाया कबीर ने काल को क्यों बनाया कबीर ने आप विषय से क्यों भटक भटका रहे य ब विषय से अटक रहे अपना करो क्यों कर रहे भवान कोई
02:02:16:09 नहीं ब की उत्पति दिखा द भाई जान आपसे पूछ रहा काल को क्यों बना रहे हैं भटकाने के लिए वो कैसे बना रहे हैं वो विषय अलग है मैं ब्रह्म की उत्पत्ति दिखा दल तो मुझे इसका जवाब दे दो यहां पर जो य बात लिखी है सच है कि झूठ है जो सच आंखों से गीता में देखा जा रहा है वो सच है तो यानी की जो अर्जुन समझ नहीं पा रहा था यह भी वो बिन समझी हुई बात है यह वास्तविक बात नहीं है जनता को समझाने के लिए लिखा हुआ है जनता को समने समने के लिए क्या समझाने के लिए मेरे हमारे गुरु जी ने यह बताया है कि काल ब्रह्म सूक्ष्म शरीर को खाता है और आपने वहां यह ले लिया कि जो पांच तत्व के शरीर को खा रहा है तो यहां सूक्ष्म शरीर लिखा है कि मनुष्य का शरीर लिखा है हा वो बाद में गुरु जी ने यह भी उनकी तरफ से यह भी बोला गया था कुछ चीज वहा गलत हो चुकी है ये तुम्हारी बात पर भरोसा कैसे करें उन्होंने य भी बोला है दरा बोलो क्या बोले क्या बोले गरिमा गरिमा गरिमा क्या बोलते कौन सी गीता है बादास जी
02:03:31:20 गीता गमा नहीं नहीं जो मोटी बुक आती है ना अपनी क्या क्या नाम है उसका गरी गैरी नज हा अभी आपने क्या बोला वो कुछ चीज गलत हो गई है उसम गरमा गीता की एक एक मिनट हेलो चलिए पहाड़ी जी आप पूछिए अमित जी आएंगे तो हम अपनी बात कंटिन्यू करेंगे
02:04:12:01 हम मैं पूछ लू अमित जी अमित जी वो पहाड़ी जी मैं पूछ आपकी आवाज नहीं आ रही पहाड़ी जी प्रश्न करना था ओके ओके ठीक है गुरु पे क्वेश्चन कर रहे हैं जैसे मैं गीता से मैं इधर उधर नहीं जाऊंगा एक बात क्लियर कर दूं जाने से पहले अमित दास ने ये कहा है कि जो है कुछ चीजें इसमें गलत गलत हो गई है गरमा गीता की में ये कहा है उसने ठीक है हम लोग बात करेंगे अब आप अपनी बात कंटिन्यू करिए वो गलत नहीं हुआ है वो जनता को समझाने के लिए लिखा हुआ है अरे आपके अमित दास ने बोला है अभी हम लोग बात करेंगे अभी उस आप मत सोचो आप उनसे बात करो पहाड़ी 434 और 15 एक से लेकर चार तक तुम तत्वदर्शी संत सिद्ध सिद्ध करते हो किसको रामपाल जी को तो 434 बार पढ़िए एक बार आप पढ़िए 434 हा 434 पढ़िए वही से तो सिद्ध करते हो ना आप उनको तत्वदर्शी आपका 15 के सात का उत्तर दे दूं पहले हां बोलिए दे दिए उत्तर चलो दो
02:05:23:26 15 के साथ इस देह में सनातन जीवा देह में सनातन जीवात्मा मेरा ही अंश है और वही इस प्रकृति में स्थित पाच इंद्रियों को आकर्षण करता है यहां पर क्या है कि उसने बोल रहा है कि मेरा कौन जीत्मा यह सनातन जीवात्मा य सनातन जीवात्मा मेरा ही अंश है और प्रकृति में स्थित मन और पांच इंद्रियों को आकर्षण करता है अपने अंदर आकर्षित करता है हा इसने 14 के तीन चार पा में बताया है कि अर्जुन प्रकृति से उपन तीन गुण अविनाशी जीवात्मा को बा र संपूर्ण जितने भी जीवधारी है सभी को तुम प्रकृति से उत्पन्न जान और प्रकृति गर्भधान करने वाली माता है और मैं बीच को स्थापित करने वाला समझ रहे हैं प्रकृति से तो उत्पन्न होते हैं सर सारे जितने भी ये जीव प्राणी है जितने भी हम आप जितने भी ये फल फ्रूट हैय जितने भी संसार में प्रकृति से उत्पन्न होते हैं इसमें वो जीवात्मा का क्या लेना देना
02:06:39:02 बता रहे हैं तो यहां क्या है कि यहां पर प्रकृति के द्वारा जितने भी जीव सब उत्पन्न हो रहे प्रकृति में यहां पर वहां पर वहां पर जी नहीं लिखा है आप समझे जीवात्मा जीवात्मा अलग है ठीक है शरीर अलग है जी वहा शरीर की बात हो रही है भूत प्राणियों की बात हो रही है वहा भूत जीव की बात नहीं हो रही व भूत माने प्राणी होता है होती है शरीर शरीर शरीर की उपरे वो कौन सी बात रह गई थी क्या नाम है इनकी बात हो जाने दो अमित जी इनकी बात हो जाने दो फिर हम आप बात कर लेंगे और आज सेशन आज का समाप्त करेंगे दो ढाई घंटे हो जाएंगे फिर हम अगला रखेंगे है ना बाबू भाई आप लोग बात कर लो फिर मैं अमित जी से बात चल रही थी कर लूंगा बा हा क्या बोल रहे हो बोलो बोलो य [संगीत] बता वहा से सतलोक से ज प्रकृति को य नि किया गया
02:07:52:01 14 के च में 14 के चार में क्या लिखा पहले अच्छे से पढ़ो एक बार क्या लिखा है पढ़ो पहले व पर क्या आत्मा लिखा है क्या पढ़ रहा से पढ़ रहे तीन से बोले थे हम तीन चार पाच तीन से पढ़ रहे हे अ हे अर्जुन महत् ब्रह्मा
✅ This part is already used · 02:08:30:12 – 02:08:49:26 (0:19)
→ Used in: A · Live रामपाल का ज्ञान या अज्ञान disscussion with kisan das follower of #santrampaljima... at 1:33:01 ↗
02:08:30:12 रूप मूल प्रकृति संपूर्ण भूतो की यो है अर्थात गर्भधान का स्थान है और मैं मैं उस योनि में चेतन समुदाय रूप गर्भ को स्थापन करता हूं जड़ चेतन जड़ चेतन के संयोग से सब
⬜ Not used yet · 02:08:49:26 – 02:57:21:00 (48:31)
02:08:49:26 भूतो की उत्पत्ति होती है भूत भूत प्र सुनिए प्रकृति से भूत उत्पन्न हो रहे है आत्मा नहीं रहे आत्मा प बात हो रही है उनका सवाल आमा य बात गुरु पर जा रही है या कहीं और जा रही है बाबूराम जी नेहा है य बाबूराम जी ने कहा है व विषय छूट गया था उसको पूरा करना है य बाबूराम जी ने कहा है बाबूराम जी बात गुरु पर होना चाहिए देखिए चल रही है तो चलने दीजिए नहीं तो आप कह दीजिए तो हटा देते इस बात को छोड़ देते बोलिए छोड़ना है अमित दास जी आप चौथा पढ़िए उस विषय पर हम कल बात करेंगे टीआर पाड़ी जी चलो ठीक है चलो चलो ठीक है श्वर वाले विषय पर खूब चर्चा करेंगे जी अमित दास जी आपसे अभी बात हो रही थी आपने कहा था कि गीता गरिमा गीता की में कुछ चीजें गलत छप गई है आपके गुरु ने कहा था वो वो गलती के वस मुंह से निकल गया होगा लेकिन उसके लिए माफी चाहता हूं गलत हो गया मेरे मुख [संगीत]
02:10:05:25 से मैं जहां पर गुरुदेव ने लिखा है वह बिल्कुल सत्य लिखा है इसमें कोई दोराई वाली बात नहीं नहीं नहीं यह जो लाइन है यह सच है कि झूठ है व मानव शरीर को खाता है कि नहीं खाता है बिल्कुल सूक्ष्म शरीर को खाता है वो सूक्ष्म शरीर नहीं मानव शरीर मनुष्य देह धारी अब अब एक बात बताइए मुझे गीता अध्याय 11 के 32 में जो देदारी शरीर खाते हुए दिख रहा है तो उसे मैं सूक्ष्म शरीर समझू या डायरेक्ट शरीर खाते हुए समझू कैसा क्या समे आप मुझे एक बात बताइए भाई साहब तत्वदर्शी क्या करता है ज्ञान देते हैं तर्शी का आवश्यकता क्या है ज्ञान देते हैं ज्ञान तो ये है लिखा हुआ है गीता में फिर वो क्या करता है
02:11:01:08 वो परमाता तव का ज्ञान देते हैं अरे वो भी तो शास्त्र में ही लिखा है अपने मन से देते हैं कि शास्त्र से देते हैं बता बता दे रहे हैं जैसे एग्जांपल लेते हैं यहां से हमें दिल्ली जाना है तो दिल्ली तक का रास्ता पुस्तक में लिखा है कि ऐसे ऐसे वहां पर चले जाओगे लेकिन हो सकता है रास्ते में चोर लगेंगे कोई लूटपाट करने वाला लगे कुछ भी लग सकता है तो हमें यहां से एक रास्ते में पार करने वाला वहा तक छोड़ने वाला एक व्यक्ति चाहिए तो वह सहायक व्यक्ति हम वहा तक लेकर छोड़ देगा तो हम आराम से पहुच जाएंगे मैं आपको यह पूछ रहा हूं क्या तत्वदर्शी का काम यह नहीं होता है कि शास्त्रों का जो सही अर्थ है वह हमें बताए बिल्कुल बिल्कुल होता है बिल्कुल तो इसमें तर्शी सही अर्थ बता रहे हैं क्या सही अर्थ बता रहे बकल सही अ बिल्कुल सही अर्थ बता यानी की ये माना जाए कि वो जो है है मानव शरीर प्राणी मानव शरीर को ता है मैं एक चीज बीच में बोलूंगा जो बारबार आप हसते तो अच्छी नहीं है बारबार हसना मजाक उड़ाना देखिए ये गुरुजी के लिए नहीं हस रहा ह आपकी लीपा पोटी के लिए हस रहा हूं अच्छा हमारी
02:12:16:10 जैसे वहा लिखा हुआ है शने अभी आपने माफी मांगी है मिनट पहले माफी मांगने के तेवर नहीं होते हम माफी मांगी किससे मांगी थी माफी किस चीज की अभी आपने कहा था मेरे मुंह से गलत निकल गया हां तो उस विषय जो विषय मैंने गलत बोला था उसके लिए अम दास जी मेरे प्यारे भाई मेरे छोटे भाई अभी आपने माफी किससे मांगी
02:12:57:01 थी उसके लिए किसे मांगी ी किससे मांगी थी व बता तो र मनुष गीता में जब लिखा हुआ है उसके मुख मेंस सबको खा र मनुष जैसे सबको दिख रहे हैं तो उसी का तो अर्थ बताता है तत्वदर्शी बया है वहां पे शरीर को रहा है सामने दिख रहा है हमें पड़ी जी आप इनकी बात से संतुष्ट है क्या यह जो बोलना है नहीं संतुष्ट इसलिए नहीं होंगे क्योंकि जो अर्जुन को जो चमत्कारी जो आंखें दी थी व उसके कारण वो चीजें वो देख पा रहे थे और क्या युद्ध होने के बाद क्या जते शरीर थे वो क्या काल ने खा लिए थे उस समय यह भी बोला था कि हे अर्जुन मैं इन सबको तो पहले ही मार चुका हूं अब तू निमि बन जा हा बस जस्ट ये क्या था उनको एक भविष्य दिखाया था किय तेरे बिना भी मारे जाएंगे एक निश्चित समय काल के बाद य इनका नष्ट होना जरूरी है नष्ट होंगे कर बाब भा को मट कर देख चीज है ये हो सकता है किताबों में गलंग
02:14:12:20 हो गई हो सुनो अम सुनो अमित दस ऐसा हमें भी मालूम पड़ा है कि अभी हम लोग कल परसों में इस लाइव स्ट्रीम करने वाले हैं हमारा जो दूसरा चैनल है विग्रहवां धर्म पर उसका लिंक इस वीडियो के डिस्क्रिप्शन में दे दिया जाएगा हम लोग उस पर लाइव स्ट्रीम करेंगे उस व्यक्ति के साथ जो यह बताएगा कि रामपाल दास जी के जेल जाने के बाद उनकी ज्ञान गंगा की किताब इत्यादि में कौन-कौन से परिवर्तन किए जा रहे हैं ठीक है यह बात तो है मगर अभी मैं एक बात पूछ रहा हूं देखो एक बहुत साधारण सी बात है कि तत्वदर्शी वो है जो हमको जो हमें ज्ञान समझ में नहीं आ रहे हैं व वो रियल जो है उसका अर्थ भावार्थ वो हमें बताए मगर यदि वो भावार्थ में भी वही लिख देगा जो हमें वहां दिखाई दे रहा है तो फिर य तत्वदर्शी की आवश्यकता क्या रही समझ रहे हो मेरी बात तो इसको आपको देखना चाहिए कि गलत छप गया है आपकी टीम से गलती हो रही है यहां पर और यह एक बार नहीं हुआ है चलो एक जगह हो गया हो कई बार हो रहा
02:15:16:00 है आप गुरु वाले विषय को क्यों तोड़ना चाहते हैं गुरु गुरु के बारे में ही तो बोल रहा हूं कि गुरु अगर वो सक्ष आप देखो सबसे पहले चीज क्या है देखो आपकी बातें बता आपने अभी क्षमा मांग ली वो ठीक है बाबू भाई ने शुरू में कहा नहीं मनुष्य को नहीं खाता वो मनुष्य को नहीं खाता वो उसके बाद हमने दिखा दिया मनुष्य को खा रहे हैं अब आप कह रहे हो कि वो चीज सही है गीता में लिखी है अरे भाई गीता में लिखी है तो तुम तो ये कहो ना कि अगर वो लिखी है तो ठीक है गीता में लिखी है वो गलत हमारा गुरु सही कहता है तुम तो यह कहोगे ना क्योंकि तुम तो उस बात को मानते नहीं हो जो चीज तुम्हारे गुरु से मैच नहीं खाती तुम तो भले ही तुम तो ये बात मत कहो कि नहीं गीता में लिखा तो मानेंगे गीता के कई चीजों को तुम प्रमाण नहीं मानते हो हमार इसी हमारे गुरु जी ने सत्संग में कई बार बताए है मानव शरीर धारी प्राणियों के सूक्ष्म शरीर को व दुर्गंध गान कर खाता है मैं यह कह रहा हूं यहां क्या गलत बताया उन्होंने ये पूछ रहा हूं वो समझाने के लिए वहा पर है क्या क्या समना चाहते बताओ एक मिनट मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं तो वही वही जो दृष्टि से देखा जा रहा है कि वहां काल भगवान जीवों
02:16:31:09 को शरीर के सहित खा रहे हैं वो एक घंटे पहले दिखा दिया उन्होंने ठीक है जी तो उन्होंने कहा कि मैं इन सबको तो पहले ही मार के खा चुका हूं अब तू निमित्त बन जा मेरे भाई जो ये गुरु है आपके तत्वदर्शी आपको रिजल्ट बता रहे हैं ना निचोड़ क्या है गीता का य इसम वही तो बता रहे हैं निचोड़ क्या है गीता में कौन सी बात क्या है उसका निचोड़ ये यहां पर वो बता रहे हैं और फिर कह रहे हैं कि वही बात कह रहे जो अर्जुन को दिख रहा है जो हम पढ़ रहे पर आपको वो सच्चाई क्यों नहीं बता रहे यहां पर कि वो आत्माओ के सूक्ष्म शरीर को व पिलाता है वो क्या तक्ष शिला है क्या है उस पर भजता है फिर उसकी गं को खाता है और एक बात और तुम क गं को खाता है ये भी तुम उल्टी बात बोल रहे हो गंद को सुता नहीं है खाता है उसको मारो श्रीधारी प्राणी के सूक्ष्म शरीर का अगर इसका प्रमाण अगर कहीं से मिल जाए तो आप क्या कर स्वीकार करेंगे भाई साहब मैं ये कह रहा हूं यहां तत्वदर्शी से गलती हुई है या किताब वाले छापने वालों से गलती हुई है ये बता दीजिए मुझे वहां सही लिखा है किसी से गलती नहीं हुई है तो गलती नहीं हुई है तो आप कह रहे हो कि वो सूक्ष्म
02:17:46:10 शरीर को खाता है यहां कह रहे मानव शरीर को खाता है मनुष्य को खाता है क तुम कह रहे हो वो उसकी गं को ग्रहण करता है और फ शिवांश भाई हम उसका प्रमाण दे रहे हैं ना में अरे भाई तुम प्रमाण यह दे रहे हो जो वहां पर एक चीज जो है समझ में नहीं आ रही है उसी को तुम प्रमाण दे रहे हो ऐसे तो मैं बहुत सी बातें कह दूंगा कि य पर तुम्ह गीता में दिख रहा है अब एक मिनट एक मिनट अब जैसे की मान के चलो एक्स वाई ज मानो कि मान के तुम हमारे गुरु ने गलत लिख दिया अब आप उसको कैसे सही करोगे आपके गुरु ने हमारे सपोज दैट हमारे गुरु ने वहां आपके हिसाब से गलत लिख दिया आपके हिसाब से अब आप उसको कैसे सही करोगे आप अपने द्वारा जो चल रही है उन्हें कैसे बताओगे उस उस श्लोक का सही अर्थ क्या है जो हमें बताया गया है गुरु के द्वारा हा बताइए वहां पर भगवान यह बता रहे हैं कि सभी प्राणियों का लय मुझ में है इनको मैं पहले भी कई बार मार चुका हूं आगे भी मारूंगा ही तू केवल निमित्त बन जा ये उसका अर्थ है कोई काल नहीं खाता पीस पास के भगवान
02:19:01:21 वहां ये बता रहे हैं कि मैं सबका समार भी करता हूं सब प्राणियों को जन्म देने वाला भी मैं ही हूं और उनकी मृत्यु का विधान करने वाला भी मैं ही हूं तो तू इस बात की चिंता मत कर कि तू किसी को मार रहा है या तू किसी को बचा रहा है तो मैं समझ रहे हो हो जाती है काल उनको खाता है उस शलोक के आधार पर अब दूसरी बात ये है कुल मिलाकर के आप यह बात बताओ क्या यह बात गलत है या सही है यह बताओ काल खा य पर लिखा है रुक सुना जनता भी देख लेगी का शलोक नंबर 27 में य लिखा हु सीतरा के पुत्र रजा के समुदाय सहित आप में प्रवेश कर रहे हैं और पिता में दर तथा वह अवर हमारे पक्ष के सभी प्रधान सहि सब के सब आपके दाढ़ के कारण विकराल भयानक मुख में बड़े वेग से दौड़ते हुए प्रवेश कर रहे हैं और कई एक हुए सरो सहित आपके दांतो के बीच में लगे हुए दिख रहे
02:20:17:26 हैं थ सम क्या पूछ रहा समझ में नहीं आ रहा है माया आप कहते हो या आपके रामपाल जी कहते हैं कि वो सूक्ष्म शरीर को खाता है पर यहां पर किताब में आपकी जो बुक है उसमें लिख रखा है कि मानव शरीर को खाता है तो यहां पर भ्रमित क्यों कर रहे हैं ये अरे गीता बता देता हूं मैं एक बात और बता देता हूं एक इसको और क्लियर कर देता हूं क्या है कि वहां पर भगवान ने जो अपनी माया दिखाई है माया माया के द्वारा आगे की कुछ चीजें बताई या पीछे की कुछ चीजें बताई है उसको आपने अभी की चीज बना कर के नहीं देखो वो तो काल है भूत है राक्षस है वो तो खाता है उसको आपने प्रमाण के रूप में उपयोग में ले लिया है तो जब ले लिया है तो आपकी बातें आप उसको काटनी नहीं चाहिए तो जब आपने ये ले लिया है कि काल जो है सूक्ष्म शरीर को खाता है तो हम आपके तत्व ज्ञानी पर काउंटर कर रहे हैं कि जब तुम कह रहे हो वो सूक्ष्म शरीर को खाता है मनुष्य शरीर को छोड़ देने के बाद खाता है वो भूज करके जो गंध निकलती है उसको सूंघता है तो मानव शरीर को खाने वाला तुमने क्यों लिखा हम यहां पर गलत सिद्ध कर रहे हैं तत्व ज्ञानी को कि उसको कोई तत्व ज्ञान नहीं है हम यह सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं आप या तो यह बता दो कि इसमें मिस प्रिंट हो गया है
02:21:33:07 चार बार पांच बार या तो यह बता दो कि उनकी जानकारी के बाहर छप रही है य किताबें या यह बता दो कि उनसे गलती हो गई है तत्व ज्ञानी से आपने तत्व ज्ञानी को गलत सिद्ध कर रहे हैं और आपने देखो बाबू अगर आप यह नहीं मानोगे कि उनकी जानकारी के बाहर छप रही है किताब या यह नहीं मानोगे किय प्रिंटर से गलती हो रही है तो फिर य दोष जाएगा तव पूरा उत्तर दे रहा उसका पूरा उत्तर दे रहा हूं इसके लिए आपको मेरी पा मिनट का समय देना पड़ेगा बोलो बोलो जैसा कि मैंने आपसे पहले पूछा था कि हमारी जो शरीर है परेशानी है हमें नर्क और यह चीजें हमारे लिए माया क्यों रची गई तो आप ने उसके उत्तर में ये कहा कि हमारे साथ ईश्वर गेम खेल रहा है ठीक है जी गेम खेल रहा है उसके बाद में शरीर जब हम हम कैसे भी करके भक्ति करके उस निराकार परमात्मा में चले गए वहां जाने के बाद में फिर दवारा से वो सृष्टि रचना करेगा और फिर से हमें धरती लोक पर उतारे यानी कि वहां गीता में भी यही कह रहा है कि मैं सबको मैं ही सबको मारने वाला हूं और मैं ही सबको उत्पन्न करने वाला
02:22:48:12 हूं तो इस बात से यह सिद्ध हो गया मोक्ष तो कहीं नहीं है इस धरती पर दूसरी बात में जब वो खाता हुआ दिख रहा है खाता हुआ दिख रहा है तो साथ ही साथ में यह बोला कि हे अर्जुन मैं अपना य वास्तविक स्वरूप ना किसी को दिखाता हूं ना आगे में किसी को दिखाऊंगा यहां पर यह बातें हो गई तो यानी कि जो उसकी वास्तविकता है जो यह वास्तविक जो दिख रहा है जो इसकी वास्तविकता है वह छुपा के रखता है वह अपनी योग माया से छुपा के इसलिए कि ताकि जो मेरी सच्चाई जो सबको अभी दिख रही है कि सबको मैं खा रहा हूं यय सच्चाई सबसे छुपी रहे इसके लिए य बोला था कि मैं अपनी योग माया से छुपा रहता हूं यह इसका पूरा उत्तर है हो गया हा बिल्कुल इसमें आपने इस बात का उत्तर कहां दिया है कि काल ब्रह्म जो है मानव शरीर को नहीं खाता है बल्कि मानव शरीर से निकलने के बाद जो आत्मा का सूक्ष्म शरीर होता है उसको जो गंद निकलती है उसको खाता है आपके देखिए मैं ये काउंटर नहीं कर रहा हूं बो बोल रहा बोल रहा तो मुझे बोलने दीजिए आप मैं यह काउंटर
02:24:03:20 नहीं कर रहा हूं कि देखिए अमित दास जी आप बारबार कैमरा ऑफ मत करिए अब आप कैमरा ऑफ मत करिएगा प्लीज सुनिए जब मैं यह बोल रहा हूं मैं कोई आपके गुरु पर अभी काउंटर नहीं कर रहा हूं कि उन्होंने य बात कही कि वो खाता है तो इसका प्रमाण क्या है ये नहीं कर रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं अगर आप यह कह रहे हो कि वो आत्मा शरीर जब छोड़ देती है और वह सूक्ष्म शरीर को खाता है बल्कि खाता क्या है वो गं सूखता है वो प्रश्न अगला होगा कि वो खाता है कैसे सिद्ध करोगे मगर अभी मैं कह रहा हूं कि अगर वो कह रहा है अगर आपके गुरु यह कह रहे हैं कि आत्मा जो है ये क्या कहते हैं शरीर छोड़ने के बाद सूक्ष्म शरीर जो होता है उसकी गंध को वो ग्रहण करता है तो फिर यहां पर आपके जो गुरु है वो ये क्यों लिख रहे हैं कि वो खाता है मानव शरीर को क्यों लिख रहे हैं क्योंकि वो उसकी वास्तविकता है वह सामने दिख रहा है शरीर को ही ता है वो वहा सामने जोय वास्तविकता है ये वास्तविकता लिख रहे हैं या ये भ्रमित करने वाला ज्ञान लिख रहे हैं बिल्कुल भ्रमित नहीं य वास्तविकता जो काल भगवान खाता है अपना वास्तविक चीजें जो
02:25:18:22 छुपा के रखता है ये वास्तविकता है ठीक है ये वास्तविकता है तो इसका मतलब इसका मतलब वो डायरेक्ट इंसानों को खाता है उसके स शरीर को नहीं खाता है अच्छा एक मिनट हम पूछ रहे है आप पूछ रहे है कि काल खाता है या नहीं खाता है अब हम बता कुछ नहीं खाता है नहीं खाता है तो फिर वो लोक गलत है मैं बोल तो रहा हूं उसका अर्थ ये है भगवान अपने भगवान अपने समार्क रूप को प्रदर्शित कर रहे हैं और सुनो मेरे गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं होता स्वयं को सही सिद्ध करो स्वयं को सही सिद्ध करो हम जनता कोने रा सही होना सिद्ध नहीं होता प्रश्न ये है कि यदि सूक्ष्म शरीर को खाता है आत्मा के तो यह मानव शरीर धारी प्राणी को खाता है क्यों लिखा है जनता को डराने के लिए लिखा है भय उत्पन्न करने के लिए लिखा है काल के लिए बुराई काल से लोग नफरत करें इसलिए लिखा है क्यों लिखा है आपने कह दिया की काल नहीं खाता
02:26:25:15 है अभी खाने प आ जाऊगा बाबू तो तुम भाग जाओगे तुम कह रहे हो भ के सता है अब लोग गीता के विरोध में हो ग तु बा उतर हा जैसे कि आपने कहा कि गुरुदेव ने हमारा इसलिए लिखा है कि लोगों को भ्रमित करने के लिए तो हम यह समझे कि गीता में जो दर्शाया जा रहा है खा
02:27:05:22 हु गीता में अर्जुन को जो दिख रहा है वो अन अन वहा पर क्या अर्जुन नहीं डर रहा मैं आपसे प्रश्न पूछ रहा हूं क्या व अर्जुन नहीं डर रहा क्या वहा नहीं डर रहे क्या अरे उस क्या मतलब है भाई उस आपकी पुस्तक में लिखा है वो सही है और हमारी पुस्तक में लिखा है वो गलत है सुनो मेरी बात यहां ज्यादा देखो डन डन ग्रीक में जाने से कुछ नहीं होगा दादा एक्टिंग में मत आओ सुनो मेरी बात सुनो मैं यह नहीं कह रहा हूं कि तुम्हारी वो बात सूक्ष्म शरीर की बात गीता से प्रमाणित है कि नहीं सवाल ये है कि तुम ये कह रहे हो कि वो अब इसी बात कंटिन्यू करना है सुनो सवाल ये है सवाल ये है कि तुम ये कह रहे हो कि वो सूक्ष्म शरीर की गंद सूंघता हैला भुनने के बाद में अभी प्रमाण नहीं मांग रहा बाद में मांगूंगा प्रमाण तो बाद में मांगूंगा प्रमाण में बाद में मांगूंगा अभी तो मैं य बात कन्यू रखना है आज की ट में एक मिनट एक मिनट यह बात मैं कह रहा हूं तो पूरी होने दो मैं अभी इस बात का प्रमाण तो मांगी नहीं ला
02:28:21:00 भूने का प्रमाण क है उसकी वो गंध संगता है इसका प्रमाण कहां है है ना मैं अभी नहीं और मैं ये भीभ पूछ रहा हूं य पूछूंगा कि गं को खाता कैसे है यह भी पूछूंगा मगर फिलहाल मैं य कह रहा हूं अगर तुम यह कह रहे हो कि वो सूक्ष्म शरीर को पीस कर गं सूंघता है सूक्ष्म शरीर को तो यहां पर मनुष्य को शरीर धारी प्राणी को खाना क्यों लिखा है मानव शरीर को खाना क्यों लिखा है हर बार बोल चुके हैं फिर बारबार उसी बात को क्यों दोहरा रहे हैं समझ में नहीं
02:28:58:00 आ आपको इसी प्रश्न में ही उलझे रहना है या आगे ब है बात ये है तुमको जहा पर उत्तर नहीं देना है वहा तुम डायलॉग मार दो आपको इसी प्रश्न में उ रहना है अरे कह दो नहीं है इसका उत्तर आगे चलो चलते हैं आगे आप कह दीजिए कि काल नहीं खाता है आप कह दीजिए कि काल नहीं खाता है मेरे भा काल ता प्रमाण मा तुमसे काल ता है नहीं अलग बात है
02:29:32:04 तुमम सक प्रमाण दे रहा स स बिल्कुल सक यह जो शरीर है इसको आपने क्या बोला शरीर जो स मतलब य समझा व शरीर उसे शरीर बोला जाएगा और जो सूक्ष्म शरीर है उसे शरीर नहीं बोला जाएगा मानव शरीर नहीं बोला जाएगा मनुष्य नहीं बोला
02:30:03:22 जाएगा इसका मैंने इस इस बारे में पूछ शुरू में सुनो मृत्यु हो जाने के बाद निकली हुई आत्मा के शरीर को भी मनुष्य कहा जाएगा मानव शरीर कहा जाएगा इस संबंध में प्रमाण दे दो हो गई बात खम प्रमाण दे दो डिक्शनरी से दे दो आदमी के मर जाने के बाद जो आत्मा निकल के जाती है उसका सूक्ष्म शरीर होता है उसको भी मनुष्य कहते हैं दे दो जैसे कि अब मानव जैसा शरीर होगा फिर उसी शरीर को तो खाया जाएगा जैसे किन ज नहीं मानव जैसा नहीं मानव शरीर देख मत करो सुन तो लो सुन तो लो उत्तर तो सुन लो भाई जैसे कि आपने कहा कि सूक्ष्म मैंने सूक्ष्म शरीर है सूक्ष्म शरीर है वो कैसा शरीर है मानव जैसा है या किसी राक्षस जैसा है या बंदर जैसा है कैसा शरीर है उसे कैसा बोलेंगे शरीर को चलो मैंने तुम्हारी बात मान ली मानव जैसा है और बोलो हां हम नहीं तो मानव जैसा है तो उसको क्या बोलेंग क्या दर्शाए इसे वहां ऐसे लिखना चाहिए था जो मान मानव जैसा लिखेंगे
02:31:19:07 वहां ऐसा नहीं आपके हिसाब से वहां ऐसा लिखना चाहिए था कि मानव जैसा जो सूक्ष्म शरीर है उसे मानव जैसा दिखाई देने वाला जो सूक्ष्म शरीर है उसको ता है जैसे जब जहां जहां प जहां जहां में ब्रह्म को प्राप्त होने वाली जो शांति है उसको उन्होंने पूरा लिखा है कि वो ब्रह्म को ब्रह्म के ब्रह्म के लोग की जो शांति है परम नहीं मगर उस लोग की परम शांति को प्राप्त होता है जैसे उन्होंने अमर अमर के लिए लिखा है खोल के लिखा है कुछ देर के लिए अमर हो जाता है कुछ देर के लिए अमर हो जाता है ये सब लिखा है ना उन्होने खोल के तो इसको खोल के लिखो भाई इसको लिखो कि वो मनुष्य को नहीं खाता जो आत्मा छोड़ के निकलती है आत्मा के उसको खाता है बात ये आ रही है दिक्कत ये आ रही है अमित क्यों मैं तुम्हारे अब देखो तुम्हारे गुरु ने वही कहा है जो तुम कह रहे हो मैं ये बात क्यों
02:32:12:01 मानू आप बोल दिया आपने तो बोल दिया कि काल खाता भी नहीं है आपने ये चीज बोल दिया देखो मेरे देखो बाबू मैं तुम्ह तुम्हारी बातों का एक एक बात का जवाब मुह तोड़ बिल्कुल दे सकता हूं मगर विषय ना बदले इसलिए सिर्फ एक बात कहूंगा मेरे गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं होता जब ट्रेन में बिना टिकट एक मिनट जब ट्रेन में बिना टिकट पकड़े जाओगे तो यह नहीं कहोगे टीसी से इस ट्रेन में अभी तो बहुत सारे बिना टिकट के घूम रहे हैं अपना टिकट दिखाओ अपना टिकट नहीं तो चालान होगा दे अरे बाबूदास बा अब आपसे प्रश्न पूछ एक मिनट हम आपसे प्रश्न पूछ ले प्रश्न पूछ लीजिएगा इसका क्या
02:33:04:25 करें डिबेट को खत्म कर दे इसको कंटिन्यू करें नहीं इसको कंटिन्यू करेंगे अब कल अब अभी आप य बात बता दीजिए इसका क्या करना है एक मिनट मैं इसका जवाब दे चुका हूं जैसे कि मानव जैसा शरीर होगा व शरीर है तो वहां परब आप यहां रामपाल के रामपाल जी के द्वारा ये जो लिखा गया है मनुष्य शरीर खाता है य कहीं नहीं लिखा है वो सूक्ष्म शरीर खाता है तो मैं क्या करूं इसका य गलत लिखा है तो वही चीज तो मैं बोल रहा हूं शरीर को यदि सूक्ष्म वाला शरीर है उसे हम सूक्ष्म वाला शरीर शरीर नहीं माने शरीर मानो मानव शरीर नहीं मानोगे मनुष्य शरीर नहीं मानोगे व का शरीर है मानव शरीर नहीं है वो हम मनुष्यों से निकली हुई आत्मा का शरीर खाता
02:33:59:27 है अरे बाबू भाई य अरे अमित जीय समझो जो हमारा जो मनुष्य शरीर है व पंच भूतों से बना है ना क्या जो सर है व पांच भूतो से बना है क्या अा वहा पर ये लिखा है कि पंच शरीर वाला खाना है मानव शरीर का अर्थ य होता है मैं वही तो आपसे प्रमाण मांग रहा हूं मैं आपको मनुष्य का अर्थ दिखा देता हूं क्या होता है ठीक है आप मुझे मनुष्य के मर जाने के बाद उसके शरीर से निकली हुई जीवात्मा का जो सूक्ष्म शरीर है उसको मनुष्य कहा जाएगा ये आप मुझे दिखा दो गीता में अर्जुन भी तो नहीं कहा कि सूक्ष्म शरीर को खाता है वो तो डायरेक्ट बोल रहा है खा रहा है तो उसको समझाया गया ना और फिर उसको मोक्ष का मिला अर्जुन को उसको तो तत्व ज्ञान नहीं था ना तुम्हारे अनुसार है तुमको है ना तुम्हारे अनुसार तत्वज्ञान जी उसको नहीं था ना तो आप अपना तत्वज्ञान बताइए भैया चार के चार के 19 में बताया गया है पंडित कौन होते हैं फर वही बात मैं पूछ रहा हूं ये बात गल है क्या बाबूस बाबूदास शिवान जी इसको कंटिन्यू करेंगे इसको कंटिन्यू करेंगे आप लोग एक दो दिन
02:35:14:28 में फि आइएगा कल हमारी चर्चा संभवत जो विग्रहवां धर्म हमारा दूसरा चैनल है उस पर होगी और वो व्यक्ति आएंगे जो ये बताएंगे कि रामपाल दास जी के जेल जाने के बाद उनकी किताबों में क्या हेर पेर हुआ है वो सब वो लेकर के आएंगे और उनको लाने का प्रयास करेंगे और आज की चर्चा बड़ी सटीक हुई काफी हद तक और हम लोग इसको कंटिन्यू करेंगे आगे आने वाले आगे आने वाले जो बात है ये वाली जो बात है ये सूक्ष्म शरीर को कता है यहां से चालू करेंगे और फिर हम लोग ईश्वर के विषय में भी बात करेंगे अगली आने वाली च पर अभी मैं आपसे एक प्रश्न ले सकता हूं क्या अब भाई साहब दो घंटे 35 मिनट हो चुके हैं हमने दो घंटे का समय रखा था चर्चा के लिए तो अब हम लोग अगला मतलब इस पहले तो एक दिक्कत वाली बात क्या है कि एक विषय एक विषय है जैसे मान लो तुम उस विषय को ही नहीं खत्म कर पाते तो हम क्या करें जब आप गोल मोल बातें करेंगे तो हम क्या करें बताओ आपको आपको लग रहा है गोल मोल ले हमारी आंखों से जो दिख रहा है उसे झूठा मानले यानी कि जो यह जो लिखा है यह सच है व मानव शरीर को ही खाता है
02:36:30:06 हम कितनी बार बोले कितनी बार समझाए आपको स मिनट मिनट लोने मिनट आपने कहा आखों से दिख रहा झूठ मानले अभी आपको आंखों से क्या दिख रहा है वो पढ़ो आखों से क्या दिख रहा है क्या दिख रहा है बड़ा करो भैया मानव श क्या दिख रहा है मानव देव ऋषि मानव देव ऋषि लिखा हुआ है वहा प मानव जैसा लिखा है क्या मानव देव ऋषि लिखा हुआ है ना मानव जैसा मानव जैसा लिखा है क्या मानव जैसा नहीं लिखा हुआ है मानव देव ऋषि लि अच्छा अब इनको मानव शरीर वाला भी दिखा दो मानव शरीर वाला भी दिखा दो ऐसे नहीं मानोगे पकड़ लेंगे ब अच्छा पीडीएफ में अलग लिखा है और आपके बक वो बुक अलग हैय गमा गीता की व शायद कोई और बुक है दिखाओ मानव शर अगर हम किसी बुक से सुम शरीर वाला दिखा दे या गुरुजी के सत्संग से दिखा दे तोय मानेंगे आपके गुरु को अपनी बात का ध्यान नहीं रहता है जो उल्टी पलटी बातें करते हैं दो तरह की
02:37:45:19 हम यह मानेंगे अच्छा और क्या जैसे आप लोग सुनो जैसे आप लोग मैं आपको जैसे आप लोगों ने देवी भागवत में ब्रह्मा विष्णु महेश को एक जगह विना नाशवान मान लिया और मैं उसी देवी भागवत से आपको दिखाऊ कि वो नाशवान नहीं है अर हम अना परम तत्व परमात्मा तो आप उसको नहीं मानोगे क दोगे गलत है ऐसे ही हम उसको नहीं मानेंगे आपकी य किताब गलत है आपका तव दर्शन गलत है आप पुराणों को आप पुराणों को गलत कह रहे हो और मैं आज य जो आज जो कोई व्यक्ति है जो जेल में बंद है उसके नाम से उसने भी नहीं लिखी उस पर डाउट है उसके नाम से जो किताब छप रही है उसको गलत नहीं कह सकता आप हमारे पुराणों को गलत कह देंगे उनको लिखने वाले ऋषियों को गलत कह देंगे उनको कहने वाले ब्रह्मा विष्णु महेश को गलत कह
02:38:42:22 देंगे दिखाओ इनको मानव शरीर वाला दिखाओ मानव शरीर वाला दिखा दो इनको एक लाख मानव शरीर धारी प्राणियों को खाता है आहार करता है लो अब बताओ अमित दास यह देख लो अब यहां पर ऋषि और देव भी नहीं है मानव शरीर
02:39:18:10 धारी आंखों से क्या दिख रहा है आपको म्यूट अन म्यूट कर लो हेलो सुन पा रहे हैं आवाज तो ज बाबूस को दोबारा बास आवाज नहीं आ रही
02:39:53:26 है एक मिनट एक मिनट प जी अब मेरी आवाज आ रही है क्या अब ठीक है हा अमित दास जी बोलिए बाबूराम जी कहां चले गए चलिए अब इस चर्चा को एक दो दिन में
02:40:26:04 फ कोई बात नहीं इसको हम लोगन कर मैं आपसे संपर्क मुझे लगता है आन और जनता को जय श्री रामराम जय श्रीम अपने कुछ लोग पंडित जी को जोड़ लीजिए मेरी आवाज रिपीट सुना देर भाई जय श्री राम जय श्री राम मैं ये कह रहा था गायत्री मंत्र के विषय में प्रश्न पूछ रही थ तो आपने तो अच्छे से लपेटना था इनको ऐसा है ना कभी-कभी विषय को ना मैं इस पर एक प्रॉपर वीडियो बनाऊंगा विषयात नाम होगा उसका वो कह रहे थे गायत्री
02:41:20:20 मैं उ गा गरुड़ पुराण की आपने पूछ गायत्री कितने प्रकार की होती है गायत्री का सा विमुक्त है गायत्री की 24 मुद्राए क्या है गायत्री का ब्रम गायत्री का विनियोग क्या है ज कुछ तो पूछते उनसे ठंडे हो जाते हो स्स के अजपा जप गलत अजपा जप रटन जो बारबार मन में एक ही बार बोलते रहे 24 घंटे उसे अजपा जप कहते हैं कुछ पता आप होता उपांशु बो उपांशु का मतलब मन के द्वारा बिल्कुल ठ भी ना हिले वो गायत्री जो है उसी का फल मिलता है गायत्री मुह के बाहर तो कभी बोलना ही नहीं चाहिए मन में माला के द्वारा माला भी कैसी होनी चाहिए कैसे करना चाहिए उनसे थोड़ा पूछते आप कुछ य इनकी हवा टाइट वो सब इसकी मगज से बाहर की वस्तु है सब ऐसा है ना सुनिए तो ऐसा होता है कि विषय से भटका भटके ना हमको हम उनको बोल देते ये देखो शिव पुराण में देखो क्या क्या तरीका है गायत्री मंत्र का जाप करने का ये देखो देवी भागवत में क्या क्या तरीका है उना पवित्र संस्कार के तो गायत्री मंत्र कैसे बोल देते तुम्हारे गुरु जी कौन सा जप देते हैं उनसे जर पूछते प्रमाण दिखाते हैं हमर किताब में
02:42:36:09 खंडन करने के लिए पास का उचा आप गुरु कैसे अरे हमारे गुरुजी शंकराचार्य अद्वैतवाद और इतने सुप्रसिद्ध विद्वान जि नासा भी सर्च कर र न की किताबों पर अरे तुम्हारे कहां कहां देखो तुलना होती है बराबर की वस्तु की कहां कांच का टुकड़ा कहां मणि को कथा को काच और मण लोक महान का भागवत में भी कहा तुम कांच का टुकड़ा और मणि की तुलना कर हो बता मैं आपको एक बात बताऊं ये लोग जो ये प्रश्न करते हैं खाली नित्य कर्म पूजा प्रकाश खरीद ले रप की आती है गीता प्रस से उसमें पूरी जो विधि दी गई है उसमें हर चीज का उन्होंने प्रमाण भी दिया है हां चीज का प्रमाण दिया विन उसम बकुल तो कोई ज्यादा कठिन काम थोड़ी ना है मगर प्रॉब्लम क्या है ना की जो एक विषय चल रहा था उस विषय को बचाने के लिए भी उस उन विषयों पर आओ तो य जो एक अच्छी सी वार्ता देखने को मिली है ना वो नहीं मिलती है जैसे मुझे तो हसी आईस को अंदर लो शवास को छोड़ो अरे भाई क्या कह मन नहीं होता वो कह रहे मन नहीं होता उसम बात मूर्ख है मूर्ख है मूर्ख महामूर्ख
02:43:51:13 है कहां से आ ऐसे लोग कहां से दुनिया में भगवान इनको तो अच्छी पढ़ने की कहीं अच्छे विद्यालय में जाने की जरूरत है अच्छे गुरु की जरूरत है यह उन्होंने तो य कोई पढ़े लिखे थोड़ी नहीं है कोई य तो उस किताब में से देख देख देख देख करके बस बता दिया चलिए दोबारा दोबारा आएंगे दोबारा आएंगे आने दो सूत्र आई के द्वारा पाण सूत्र से संस्कृत संस्कृत ब प्रश्न करेंगे वह आपके पास कभी नहीं आएंगे बिल्कुल तथ्यात्मक भाई इसको आप कैसे सिद्ध कर रहे हो कौन सा सूत्र लग रहा है कौन सी विभक्ति लग रही है कौन सा निर्वचन हो रहा हैक व्याकरण की बातें हो जाएंगे गोस्वामी जी गोस्वामी जी व तो पंडित जी कह रहे वही बात है कि उसको वो नॉलेज अपने मगज में वो नॉलेज नहीं है ज्ञान का उसने रटी रटाई बात बोलने की है जी एक कोई राज कुमार जी है उन्होंने आज जो है कहा है अभी अभी चलती लाइव स्ट्रीम में कि आज मैंने आज मैं रामपाल का परित्याग करता हूं समझ गया हूं अब मैं साहब रामपाल अपना मार्केट
02:45:06:22 खड़ा कर रहा है और कुछ नहीं है जय श्री राम जय श्रीराम बहुत अच्छा लगा बहुत रामपाल दास के फलोर की राजकुमार स की और सर घूम जाएगा इनका जो मैंने अपने चैनल पर वीडियो बना रखे हैं वो देखेंगे तो और सर घूम जाएगा इनका मैंने आज
02:45:41:09 देख एक मिनट ऐसा है ना कि ये लोग जो बड़े विषय है ना कि रामपाल तत्वदर्शी है कि नहीं जो गीता ज्ञान को बोलने वाला काल है अलग श्री कृष्ण से वो है कि नहीं या क्या कहते हैं ये गीता में दो तरह का ज्ञान है थोड़ा मानने लायक है थोड़ा मानने लायक नहीं है कि नहीं वेद को बोलने वाला काल नाम का राक्षस है कि नहीं और क्या कहते हैं इनका कबीर जो है उसका वेदों में प्रमाण है कि नहीं कबीर भगवान है कि नहीं कबीर सर्वशक्तिमान है कि नहीं यह कुछ ऐसे मोटे बड़े विषय हैं जिस पर यह कभी बात नहीं करेंगे और खा करेंगे तो मु की खाएंगे तो इनको यह क्या करते हैं कि यह समय को निकालने के लिए देखिए हमने जो हम पर आरोप लगा रहा था उसका मुंह बंद कराने के लिए छोटे छोटे छोटे छोटे छोटे छोटे अलग अलग ऐसे विषय लाएगा लाएंगे जिससे कि मेन जो पृष्ठ भूमि है उसका कोई मतलब नहीं है भाई करने को तो आप नाम जब भी सकते हो नाम जप से भी मुक्ति दिखाई है हमारे शास्त्रों में कलयुग में दिखाई है ना तो यह
02:46:56:18 ऐसी चीजों को ले अब कहीं तो व्यक्ति को इनको लगता है कहीं व्यक्ति को वो चीज नहीं आई हम देख ले देखो मुह बंद कर दिया तो इसलिए वहां पर यह करने की बज कि ला मैं तुझे प्रमाण दिखाऊ भाई तुझे गायत्री मंत्र की विधि नहीं है समझ में आ रही है हमारी मत कर इस बात को लेकर हम आपत्ति नहीं है जा आपत्ति हमें इससे है कि तूने हमारी दुर्गा माता का अपमान क्यों किया तूने रामपाल को तत्वदर्शी कैसे माना तूने कबीर को वेदों के अनुसार भगवान कैसे कहा तूने कबीर को सर्वशक्तिमान कैसे कहा तूने मोक्ष जो रामपाल के द्वारा मिल रहा है उसको परम स्वतंत्र कैसे कहा इससे आपत्ति है इस पर आओ तुम जाओ कर लो अपना मंत्र का जाप अलग से क्योंकि यह जो सवाल है ना ये वाले इतने सारे आ जाएंगे अच्छा आप बताओ कपूर जलाने से क्या होता अच्छा बताओ धूप जलाने से क्या होता है अच्छा बताओ गौ मूत्र से क्या सवाल के जवाब सबके सवाल के जवाब सबके हैं मगर यह केवल भटका करके आपको जो मूल विषय है उससे दूर ले जाने के लिए है जिससे कि कभी आप वो खंबा ना हिला पाओ बोल तेरा वो तत्वदर्शी है कि नहीं बोल ईश्वर तेरा
02:48:11:19 सर्वशक्तिमान है कि नहीं व वो ना कर पाओ इसलिए अभी आर समा ने क्या करा था कि हिंदू शब्द प्रामाणिक है कि नहीं इस पर बात करेंगे अरे मत मत कहो अपने आप को हिंदू तुम ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दो हम भी कहने लगेंगे हिंदू शब्द जो है अप्र माणिक है हम भी कह देंगे कर दो अपना ईश्वर सर्व शक्तिमान सिद्ध कर दो हम कहेंगे ू हिंदू शब्द अप्राम के लो तो हमारे आपके बीच की मुख्य दूरी हिंदू शब्द को लेकर नहीं है मगर वह मुख्य विषय जो वो जानते कि हम कभी नहीं कर पाएंगे ईश्वर को सर्वशक्तिमान परंपरा प्राप्त आचार्य सब नहीं कर पाएंगे हम लोग तो इसलिए ऐसे कुछ इधर उधर की बातें करते रहो उसमें टाइम पास होता रहेगा हमारा जो चल रहा है व तंत्र वो चलता रहेगा तो इसलिए विषय मूल विषय को पकड़े रखने के लिए थोड़ा सा इस वहां पर भी मैं आर समाज के यहां पर गया था तो उन्होंने ऐसी ऐसी बातें बातों के उत्तर मुझे दे दिए जिन बातों को मैंने पूछा ही नहीं था मगर फिर भी दे दिए अब अगर मैं उनका जवाब देने बैठूं तो मेरा मूल विषय रह जाए फिर हो जाए रात हो गई अब चलते जय श्री राम तो मैंने जानबूझ के उन विषयों पर शांत रहा जिन विषयों से मेरा मूल विषय प्रभावित
02:49:26:24 नहीं हो रहा था मैं उसको पकड़े रहा तो कई मेरे अपने हैं उन्होंने मुझसे कहा भैया आपने उसको इतना कैसे बोलने दिया आपने उसको य क्यों बोलने दिया कमेंट आते तो मैंने कहा अगर मैं वो उसको खंडन करने लगता उन बातों को तो मैं इस पर ना आ पाता कि उन्होंने ही एक जगह माना कि अवतार ले सकता है उन्होंने एक जगह माना कि नहीं परम वो जो है जो वर्ण व्यवस्था है वो से शुरू होती है उन्होंने मान लिया अगर मैं उनके उन चीजों का खंडन करने लगू तो यह चीजें बड़ी वाली जो चीज जिन पर हार सुनिश्चित है वो जो है खंडित हो जाती है खर इनको अभी अगली बार य गाय म पड़ी जी मैं सोच रहा हूं एक बार आप जाकर वापस आ जाइए मेरी बात रिपीट सुनाई दी जाती है आप जब ऑन करते हैं म्यूट करते हैं अपने
02:50:15:22 आप तो ठीक है आज की चर्चा दो घंटे 50 मिनट की हो गई है बहुत सुंदर रहा बहुत बढ़िया आपने बहुत अच्छे से लपेटा ऐसी कोई व नहीं भगवान आपको शक्ति देता देते रहे ऐसे प्रभु से प्रार्थना करते हैं और इन लोगों का भगवान जो भी गलत रास्ते पर है इनको मैं यही कहूंगा भगवान सद बुद्धि दे ये लोग जो है कि सच्चाई को स्वीकार करें बस बस इनको ये कहना आता है यह देखो एक व्यक्ति क्या कह रहा है संत रामपाल जी नहीं नहीं वो तो यह क्या कह रहे हैं मेरी 20 पर
02:51:08:01 है यह कोई मजाक कर रहा है यह र जो भी करे उसमें कोई व नहीं जो गलत है तो गलत है बिल्कुल सनातन ही सत्य है पाखंड है गुरु परम पूज्य राघवाचार्य जी भी कहते हैं जदा रहने दीजिए रने मैं ये कह रहा हं देखिए देखिए ये कुछ लोग होते हैं देखिए अंधे ब्लाइंड लोग इनको यही बोलना आता है संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान फला फला पूरा विश्व ये वो अभी इनसे पूछ ले संत रामपाल जी का ज्ञान क्या है तो बस
02:51:51:13 दो आ ग जी पाड़ी जी आप अपना वक्तव्य दीजिए फिर इसको जो है आगे पोस्टपोन किया जाए इसको चर्चा को जी पाड़ी जी म्यूट है उनका म्यूट है म्यूट भी है और कुछ मुझे लग रहा है नेटवर्क एरर आप इसको निरंतर रखिए निरंतर इसको निरंतर चलने दीजिए चर्चाओं को देख काफी लोगों को सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है ऐसी बात नहीं है अक्षय जी हमारा नंबर नोट कर लीजिए
02:52:34:14 74836 इस पर आप ट करिएगा मैसेज मत करिएगा इनके अंदर एक चीज और है मुझे यं ही वीडियो आया करते वीडियो लो संत रामपाल के वीडियो अरे भैया आपको अगर चर्चा करनी है उसके लिए करो अपने वीडियो अपने पास रखो मैंने भज जहां पर मुझे बुरा लग रहा था मैंने कहा आप इसको देखिए फिर इसको देख कर के इनको उत्तर दीजिए मैंने आपको एक वीडियो भेजा था पर मैंने उसको देखा नहीं उसमें कुछ लिखा था उन्होंने अप शब्द ही लिखा था हां बहुत सारा मैं मैं भी नहीं देखता हूं इनके वीडियो पूरे पूरे नहीं देखता हूं विशाल भाटिया जीरू
02:53:18:21 की चर्चा करते हैं अरे वेद तुम्हारे समझ में वेदों के समझ से कितने परे हैं तुम लोग कहां वेदों को समझेंगे पहाड़ी जी आ नहीं रहे हैं क्या बात है चलिए ठीक है सभी को जय श्री राम अगली लाइन आ जी आ गए संक्षिप्त सुन लेते हैं उनका उपसर ले लेते हैं उसने वीडियो बनाय में उसने वीडियो बनाया उसके बारे में बात करने
02:53:51:01 मैंने नहीं एक चीज और है फिर से मैं बता दूं हम लोगों का दूसरा चैनल है विग्रहवां धर्म उस पर हम लोग आने वाले हैं उसको आप लोग फॉलो करिए उसका लिंक के डिक्र में उसका लिक ाल देका आप लिंक भेज दीजिए मुझे कांटेक्ट नंबर दे दिया है 74036 जी एक नीचे कोई कमेंट कर रहे थे कि जो मनमाना आचरण करता है ना उसकी मुक्ति होती है य गीता से बोलले अध्याय 16 का 23 और 24 आचरण का अर्थ बता दूं आचरण का अर्थ होता है बहे आपका बिहेव कैसा होना चाहिए जब आप 21 लोक से जब पढ़ोगे वो 20 श्लोक से जब पढ़ोगे वहा तीन आचरण की बात कर रखी काम काम क्रोध और लोभ ये तीन आचरण है जो मुक्ति मुक्ति में बाधा डालते हैं तो इन् तीन आचरण का त्याग देना चाहिए मलो सब नाथ नरक के पंथ ये तुलसीदास जी ने भी कह दिया ये नरक के रास्ते है तीनों के तीनों में बोला कि शास्त्र ही प्रमाणित है तेरे लिए जो आचरण की बात करी है तीन आचरण को त्यागने की बात कर रखी वहां पर कि काम
02:55:06:07 क्रोध और लोभ को त्याग कर जो तुम्हारे जो दान रूप क्रियाए है तप रूप क्रियाए भक्ति रूप क्रियाए है इन क्रियाओं का क्रियाए करनी चाहिए इन तीन आचरण को त्याग के ये तीनों आचरण नरक का द्वार खोलती है जब आप 16 से 20 श्लोक से पढ़ोगे इसलिए कहता हूं ज्ञान पूरा लीजिए कि अगर किसी बड़े स्टेज में आप बैठोगे तो वहां यह चीज बताई जाएगी कि ज्ञान पूरा लेना पड़ता है बीच बीच के श्लोक आप पढ़ ले हो अध्याय चार का 34 श्लोक पढ़ लिया अध्याय 15 का एक शलोक एक से चार पढ़ लिया फिर सीधे 18 में चले गए अभी ये लिंक है हमारे चैनल का बिल्कुल बकुल आप इस लिंक के द्वारा जो है उसको सब्सक्राइब कर लीजिए चैनल को फॉलो कर लीजिए तो सवाने पूरी स्ट्रीम में इनसे एक सवाल पूछा कि जीवात्मा किसका अंश है य बो परम पिता परमेश्वर परम अक्ष बत बढ़िया बहुत बढ़िया सवाल है आपका बहुत बढ़िया तो मैंने
02:56:12:03 बोला 15 का सातवा पढ़ लीजिए वहा तो काल बो मैं बाहर गया था पर मैं आज पूरी डिबेट देखूंगा मैं मुझे नींद बहुत आ रही थी वैसे कितने में फ गए तो गीता पढ़ी नहीं ना इने जी जी चलो खैर और भी क्वेश्चन थे मेरे इनको बोलो जरा पांचवा अध्याय का आठवा श्लोक पढ़िए प्रेशन वाला जरा वही नहीं पढ़ पाएंगे उनको जरा पूछ उस श्लोक के बारे में आएंगे दोबारा एक दो दिन में आएंगे तब करते हैं है ना इनकी ऐसी क्लास लगाओ ये बिचारे अभी क्लास अभी क्लास मजेदार नहीं थी क्या आज तो बहुत अच्छी बहुत अच्छी रही बिल्कुल बहुत बढ़िया बहुत सुंदर
02:57:03:21 को चलिए सभी को जय श्री राम हर ह महादेव भवानी दने सन्मुख रहे गणेश पंच देव रक्षा करें स ब्रह्मा विष्णु महे चलिए
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