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00:00:01:29 [संगीत] तो सभी को जय श्री राम आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और आज का विषय तो आपने देख ही लिया है गंभीर विषय जिस पर हम लोग चर्चा करने वाले हैं जो चर्चा में हमारे आज के मुख्य अतिथि हैं वोह एक सरप्राइज

00:00:43:21 है आचार्य प्रशांत जी जो आर्य समाज से हैं उन्होंने एक वक्तव्य दिया है हमारे लिए कि कॉल वार्ता पर हमने उनको मना किया चर्चा में ना आने के लिए हमको यह नहीं पता है कि हमारी कॉल वार्ता आचार्य प्रशांत जी के साथ कब हुई अब बात य आती है वह कौन है जिसने कि उनको शिवांश द्विवेदी बनके या फिर शिवांश द्विवेदी की का मध्यस्थ बन कर के उनको यह कहा क्या कोई ऐसा है वाकई में जिसने उनको यह कहा या फिर आचार्य प्रशांत जी झूठ बोल रहे हैं क्योंकि अभी तक हमने जितने लोगों का आचरण देखा है उनके लिए बात नहीं करूंगा तो उसमें झूठ फरेब धोखा इत्यादि अ जो स्थितियां है लोगों की वो प्राप्त होती है तो ई समदा जी आपका स्वागत है सत्यम जी हैं और इनका ई संविधान नाम से पेजेस हैं

00:01:58:22 जिस पर ये अपने जो विचार हैं उनको रखते हैं जी आप थोड़ा सा अपने बारे में बता द और फिर मैं कुछ कहूंगा उसके बाद हम लोग मुख्य विषय पर आएंगे जी सत्यम जी शेयर कर देता हूं लाइव को लाइव अच्छा अ आपके चैनल पर नहीं नहीं लिंक शेयर कर देता हूं ऐसा अच्छा अच्छा ठीक है ठीक तब तक मैं कुछ बातें बता दूं सबसे पहली बात तो यह है कि अभी हम लोग ये जो 30 40 मिनट जो भी वार्ता होगी उसके बाद कुछ बाकी रह गए थे एक दो चीजें मिस कर गया था मैं जो दोगला भाई अभिषेक के बारे में जब बात कर रहे थे रामपाल एंड कंपनी तो वह बातें हम लोग 30 40 मिनट के बाद लेंगे और एक शुरुआत में जब तक यह अपना कार्य कर रहे हैं तब तक मैं आपको बता दूं कुछ कुतर्क किए जाते हैं जिनका मैं समय समय पर जब ध्यान आ जाता है तो बता देता हूं कुत उन कुतर्कों

00:03:13:26 का समाधान तो हमने एक जगह पर कहा था कि भाई तुम हमारे छोटे भाई की बात क्यों कर रहे हो उसने किसी से क्या टिप्पणी की है उसको क्यों तुमने चर्चा में घसीटा छोटे वाले भाई को और पता नहीं किसी कारणवश हमने यह भी कहा कि अगर जो पिजा खाते हुए तुम छोटे अनुज की जो इमेजेस दिखा रहे हो दुनिया को वो उसकी 10 12 साल पहले की है आज आप आक के उससे अगर बात करोगे तो उसमें इतना सामर्थ्य है कि व तुम्हें उठा उठा के पटके तो मतलब यहां मैंने अपने जो अनुज है उनका सामर्थ्य दिखाया कि उनमें इतना सामर्थ्य है ऐसा है बोला मैं ठीक है बोला अब इस पर कोई दीदी है दीदी नहीं सॉरी दी दी है उन्हीं समाज हों की समाज हों की दीदी है और समय आने पर व यह भी कहती है कि मैं आर समाजी नहीं हूं यह भी कह देती है इनका सबसे बड़ा दोगलापन तो यही दिखता है कि भाई यह किसी एक सिद्धांत के है ही नहीं जिसका कोई सिद्धांत नहीं होता उससे कैसे बात करोगे आप जैसे कि कई

00:04:29:00 बार होता है कि रामपाल वाले आकर के रामपाल जी द्वारा दी जाने वाली जो शिक्षाएं हैं उन्हीं का ही विरोध करते हैं क्यों क्योंकि अपने आप को वहां पर जितवा है भले ही रामपाल जी को हराते हुए जितवा है उनके मन में य होता है तो इसी प्रकार से ऐसे लोग होते जो किसी सिद्धांत के सगे नहीं है खैर तो कोई इनकी दी है व यह कहती है भाई कि जो व्यक्ति बॉडी की बात करेगा जो व्यक्ति शरीर के बाहुबल की बात करेगा उसको छपरी नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे है ना वैसे जो स्वयं को आर्या कहने वाली है मुझे लगता है कि कोई लड़का ही है जो आवाज बदल के बात करता है तो आर्य शब्द का जो अर्थ है वह किसी किसी भाषा में थोड़ा भी है अश्व भी है तो जो इस तरह से किसी सिद्धांत के सगे नहीं होते हैं उनके लिए आर समथिंग ना कह करके ऐसी दी को या ऐसे ब्रो को घोड़ा अश्व समथिंग समथिंग कहना ज्यादा उचित वहां पर लगेगा वो किसी किसी भाषा में है आर शब्द का अर्थ है ऐसा वो माधवाचार्य शास्त्री जी है ना

00:05:44:03 उनकी उनके ग्रंथ में लिखी है य बात या समथिंग उसमें लिखी है गर्व से कहो हिंदू में आर शब्द का अर्थ कहां कहीं कहीं पर कुछ अन्य देशों में गलत उसम भी है र हम आ जाते हैं सनातन सिद्धांत पर तो मैं जब भी बात करता हूं कि भाई कोई बात आप हमारी अगर काट रहे तो सिद्धांत से काटिए सनातन सिद्धांत से मनम कीी बातों से मत काट तो उधर से जितने भी दागदी फायर होते हैं वो सब मनमुक कुछ भी कहते रहो कि ऐसे व्यक्ति को छपरी कहेंगे कि नहीं कहेंगे जो बॉडी की बात करता हो भाई जब रामायण की शुरुआत होती है तो उसमें प्रभु श्री राम के कंधे बताए जाते हैं व स्थल बताया जाता है अगर यह सब बताया जा रहा है तो छपरी हो गए रामायण के जो नायक है वो छपरी हो गए ना ऐसे ही सनातनी हो ना तुम लोग जब राक्षस का वो ण के रूप में शव पड़ा हुआ होता है दुदु भी राक्षस था हा वहां पर लक्ष्मण जी बताते हैं कि मेरे भाई में इतना शौर है इतना वीर है कि वो एक छू देंगे तो वो उड़ जाएगा उड़ जाता है

00:07:00:07 वो सब पपरी पन है आपके हिसाब से रामायण में सनातन सिद्धांत कहां है भाई तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एकमात्र शास्त्र प्रमाण है शास्त्र लाओ ना बाहुबल की बात करने वाला छपरी है शास्त्र से दिखाओ कहां है शास्त्र और अगर नहीं है शास्त्र के बाहर से अपना ज्ञान देना है मनमुक ज्ञान देना है तो यह ढंडोरा पीटना बंद करो कि हम धर्म के प्रचारक है धर्म के रक्षक हा आ गया हूं एक मिनट एक और उनका कुत क था यह जो ती है समाझ हों अलंकार समाज हों की द इनका एक कुतर्क था कि भाई यह बोल रहे हैं ऐसे ऐसे शब्द बोल रहे हैं पहली बात तो हमने किसी एक व्यक्ति विशेष को वो शब्द नहीं बोला था कोई मातृ शक्ति थी जो नृत्य कर रही थी तो उसके लिए वो शब्द बोला था कि वो जो नाच रही है तो नाचने वाली के रूप में जब वो नाच रही है जिस समय तो जिस समय कोई नृत्य कर रहा है तो उसको नृत्य की बोला जाएगा और अगर उसको नाचना कहते हैं नाच है वो तो नाचने वाले को जैसे

00:08:15:20 नाचने वाला कहा जाएगा तो जिस समय वो नाच कर रही है तो उनको नाचने वाली कहा जाएगा इस संदर्भ में हमने वहां पर वह शब्द उपयोग में लाए खैर और वो भी किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं था एक जनरल किसी का नाम लेकर के कोई टिप्पणी नहीं थी पर्सनल अटैक नहीं था खैर फिर भी हम फिर हमें यह कहा गया कि भाई यह क्या सन्यासियों की ऐसी भाषा होती है क्या परंपरा प्राप्त ऐसे होते हैं पहले तो सनातन सिद्धांत सुनो इस बारे में जब सूप नखा कामा वेश होकर के है ना रामचंद्र जी के पास आती है तो रामचंद्र जी वहां पर उसके साथ विनोद ही करते हैं सीधे-सीधे फ फ्लैट जवाब नहीं दे देते स्पष्ट रूप से विनोद करते हैं वहां पर क्योंकि वह देख रहे हैं कि का मातुर हो गई है तो अगर कोई आता ताई हो रहा है तो उसके साथ विनोद करने का भी प्रावधान है सनातन सिद्धांत में अब दूसरी बात ले लेते हैं कि यह जो दी है ये अपने आप को अ कहती कि

00:09:34:00 हम समाजी नहीं है मगर हम जो दयानंद जी हैं उनके सिद्धांतों को बहुत मानते हैं तो मेरे भाई दयानंद जी ने उन्हीं सन्यासियों को जिनका आप अपने ढंडोरा पीटते हो कि हम बहुत संतों का बहुत सम्मान करते हैं हम उन्हीं सन्यासियों को उन्हीं आचार्यों को पोप पंडे इत्यादि इत्यादि काहा है भांड काहा यह सब सन्यासियों की लैंग्वेज है तक कहा है

00:10:12:04 भगवान शिव पर आस्था रखने वालों पर कितना बड़ा कोठरा गात है यह सब सन्यासियों की लैंग्वेज है तो इसीलिए कहता हूं कि आप जरा सिद्धांतों पर बात करो साइकेट्रिस्ट और कानून इत्यादि वगैरह बहुत पहले छोड़ चुके वो कहावत है की गुरुदेव की लाइब्रेरी में कानून की किताब भी पढ़ी थी हम जी सत्यम जी जय श्री राम बोलिए जय श्री राम नम चंडिका हर हर महादेव जी तो आज का विषय यही था कि आपके और जो जिसके बीच वार्ता होने जा रही थी शास्त्रार्थ होना था उसका मध्यस्थ मैं हूं तो सबसे पहले तो यह क्लियर कर देता हूं कि अगर आपको किसी ने यह कहा हो कि मैं मध्यस्थ नहीं हूं ऐसा अगर किसी ने कहा हो तो अभी बता दीजिए ताकि मैं वोह भी क्लियर कर दूं कि मध्यस्थ था भी या नहीं अगर जिसको लगता है कि मैं मध्यस्थ नहीं था और व प्रमाणित कर दे कि मैं मध्यस्थ नहीं था ऐसा कहके

00:11:27:18 तो मेरा जो ई समधा चैनल टेलीग्राम पर 14000 जो सब्सक्राइबर है मैं उसको दे दूंगा ऐसा की ऐसा उसको एडमिन ओनर बनाकर लेफ्ट कर जाऊंगा अगर यह प्रमाणित कर दे कि मैं मध्यस्थ नहीं था तो एक मिनट यहां पर मैं बोलना चाहूंगा एक बहुत बड़ा खुलासा है कि जिस वार्ता की आचार्य प्रशांत जो आर समाज से हैं जिस वार्ता को वो उधत कर रहे हैं कि हमने जो है शिवांश की सारी शर्तें मान ली और शिवांश ने हमसे मना कर दिया वो वार्ता उन्होंने हमसे से नहीं की थी वोह हमारे एक

00:12:28:04 बंधुवुलु जो भी मैसेज हमारा गया है उन तक वो इनके द्वारा गया है और वो क्या गया है वो कुछ और गया है और उन्होंने उसको कुछ और रूप देकर के वहां डाल दिया सबसे पहली बात तो यह आ जाती है हम अपने हर वीडियो में जब अपना नंबर देते हैं हम अपने फबुक में लगभग हर कमेंट में नंबर देते रहे हैं हमारे प्रोफाइल में हमारा नंबर है हर तरह से हम तक पहुंचना बहुत ही सरल और सुगम है तो यह स्थिति आती क्यों है लोगों की कि वो किसी और से हमारे बारे में बात करते हैं जब हमने अपना नंबर दे रखा है क्या हाथ कापते हैं नंबर डायल करते समय जैसे वो भाई साहब वो इनके आजकल वो आगे बात करेंगे विज्ञान दर्शन जी जो आजकल इनके वो सिप सलार बने हुए हैं सरगना वही एक है बस वही पार लगाएंगे अब समाज की अलंकार समाज की तो अब उन्होंने क्या किया जब हमारा जब जब हमारा नंबर सर्वसामान्य के लिए सुलभ है जब हमारा फेस जो इंस्टा अकाउंट है उस पर जो मैसेज आते ज्यादातर मैसेज के जवाब दिए जाते हैं तो उनको क्या आवश्यकता पड़ी थी कि बात जो है जाकर के आदित्य रसने से करें जो छोटे भाई है क्या

00:13:43:06 आवश्यकता पड़ी थी डर डर है ना और इसी प्रकार से आचार्य प्रशांत जी तो सज्जन व्यक्ति मैंने मुझे उनसे ये अपेक्षा नहीं थी मगर उन्होंने भी यही किया भाई डायरेक्ट जब हमारा नंबर अवेलेबल है तो आपको किसी और से वार्ता करनी आवश्यकता क्या पड़ रही है और फिर आवश्यकता जब पड़ रही है चलो मध्यस्थ का उपयोग कर भी रहे हैं तो फिर सच्चाई के साथ क्यों नहीं कर रहे हैं यह सच्चाई है कि नहीं है उनके द्वारा कही जाने वाली बातें आप लोगों को अभी पता चलेगा मगर इन्होंने एक बहुत बड़ी बात कह दी है कि इनका टेलीग्राम पर ई संविधान नाम से 14000 फॉलोअर्स का चैनल है यह उसकी ओनरशिप उसको दे देंगे जो यह कह दे आकर के ये सिद्ध कर दे कि ये वो मध्यस्थ नहीं है जिस मध्यस्थता के आधार आचार्य प्रशांत यह कह रहे हैं कि हमने उनको कॉल पर मना कर दिया हमने उन्हें मना नहीं किया है वो इनके आधार पर य बोल रहे कि हमने मना किया है अब इन्होंने यह बोला भी हमारी तरफ से कि नहीं यह सारी कहानी अब आपको पता चलने वाली है जी सत्यम जी बोलिए तो सबसे पहले मैं बता दू जो आचार्य प्रशांत शर्मा जी है मैं उनका सम्मान करता हूं क्योंकि वह अन्य आर्य जो नव आर्य समाज की भाति नहीं है चर्चा करने में बहुत अच्छे से करते

00:14:58:10 हैं जैसे हम चर्चा करते हैं वैसे ही वो करते हैं और चर्चा का स्वरूप भी ऐसा ही होना चाहिए तो उन्होंने मुझे कहा कि अभी जो यह चल रहा है चर्चा का विषय कि एक दूसरे पर बोले जा रहे हैं सब तो मैं चाहता हूं कि विज्ञान दर्शन जो मोहित गोड है उनका और शिवांश जी का शास्त्रार्थ हो जाए आमने सामने बैठकर तो मैंने अच्छा विचार है हो जाना चाहिए बात कर लीजिए तो उन्होंने कहा कि आप बात करिए शिवांश जी से कि वोह तैयार है या नहीं है इधर मोहित गोड तैयार है तो मैंने बोला ठीक है मैं पूछ लेता हूं फिर मैंने शिवांश जी को फोन किया पूछा कि ऐसी ऐसी बात है कि वह आपको शास्त्रार्थ के लिए आमने सामने के लिए पूछ रहे हैं तो शिवांश जी ने कहा कि पहले सबसे पहले मोहित को उन टिप्पणियों के लिए माफी मांगनी पड़ेगी जो उस स्ट्री में बैठ के हम मेरे परिवार के लिए उसने की तो मला ठीक बात है और उसने किया उस स्ट्रीम में हुई इसको थोड़ा स्पष्ट करिए क्योंकि मोहित गौर फिर यहां पर ये क मैंने कोई टिप्पणी नहीं की उस स्ट्रीम के उस स्ट्रीम से जुड़ा होने के लिए माफी मांगनी होगी कुछ इस तरह का भाव था या मोहित गौड़

00:16:13:10 की टिप्पणियों के लिए ही केवल माफी का भाव हां तो इस तरह इन्होंने कहा वही जाकर मैंने कह दिया कि वहां पर पहले वो माफी मांगने का कह रहे हैं कि पहले माफी मांगे उसके बाद सहार दोपर चर्चा होगी कोई तो उन्होंने ने कहा कि जब मिलेंगे आमने सामने तो माफी मांग लेंगे तो जब मिलेंगे आमने सामने तब माफी मांग लेंगे उसके बाद शास्त्रार्थ कर लेंगे तो बोला ठीक है मैं यह कह देता हूं उनका क्या रिप्लाई आता है तो मैंने शिवान जी को फिर फोन किया शायद अगले दिन किया था और इनको यह बात बताई तो इन्होंने कहा नहीं पहले वह अभी माफी मांगे उसके बाद मिलने का तय होगा जहां मिलना होगा फिर मैंने यही बात आचार्य जी को बता दी कि वो तो ऐसे कह रहे हैं कि पहले माफी मांगो और उसके बाद मैंने कहा कि आचार्य जी आप एक बार मोहित की मेरे से बात करवा दीजिए ताकि उसमें पता चल जाए कि मुद्दा क्या है पूरा मोहित जी की तरफ से तो आचार्य जी ने मुझे कुछ पॉइंट लिखकर भेजे मोहित ने लिख केर भेजे थे वहीं से उस आचार्य जी ने मुझे फॉरवर्ड कर दिया कि ये ये ये बिंदु है जो मोहित के हैं वही बिंदु मैंने फॉरवर्ड कर दिया शिवांश जी को ट पर सुबह किए थे शाम को इन्होंने सीन कर लिया था और शाम को जब सीन कर लिया उसके बाद मैंने 8

00:17:28:18 बजे के आसपास कुछ आचार्य जी को मैसेज किया कि उन्होंने सीन तो कर लिया लेकिन रिप्लाई नहीं दिया तो आचार्य जी को यह लगा कि इन्होंने कोई रिप्लाई नहीं दिया है इसका मतलब वोह नहीं आएंगे जबकि शिवांश जी ने आचार्य जी का वोह पूरा पढ़कर इन्होंने आप वीडियो बना रहे थे युगल किशोर जी के साथ उसमें आपने वीडियो में कहा था उसका रिप्लाई दिया था आपने जी तो उन्होंने वो वीडियो नहीं देखी थी और आज मैंने जब यह कहा था कि वो शिवांशी ऐसे कह रहे हैं कि पहले माफी मांगे तो उसका अर्थ यह था कि अभी माफी मांगे उसके बाद मिलने की चर्चा होगी तो आचार्य जी यह समझ नहीं पाए उनका उन्होंने यह समझा कि पहले माफी तो मांग ही रहा है मोहित गड़ मिलने पर कि म मांग लेंगे फिर भी ये मना कर रहे हैं तो मेरे समझाने में दिक्कत हुई या उनके समझने में दिक्कत हुई इसमें मुझे पता नहीं है लेकिन य से दिक्कत चालू हुई इसके बाद इ आचार्य जी ने तुरंत डाल दिया कि उन्होंने मना कर दिया यह होने के बाद सुबह शिवास जी का मेरे पास रिप्लाई आ जाता है उन सारे बिंदुओं का इन्होंने बिंदु बनाकर भेज दिए थे मैंने वही फॉरवर्ड आचार्य जी को कर दिया फिर

00:18:44:01 मैंने यह भी कहा कि आपने जो डाला है वो जल्द जल्दी डाल दिया हो सकता है उनको रिप्लाई करने में लेट हो गया है यह और लेकिन इन्होंने कर दिया है तो कहीं भी यह चर्चा नहीं हुई कहीं भी मैंने यह नहीं कहा कि शिवांश जी मना कर रहे हैं शास्त्रार्थ के लिए यह करने को तैयार है शर्त सिर्फ एक है कि पहले मोहित गोड को माफी मांगनी होगी इस बात को मैं जरा दर्शकों को और क्लियर कर दूं अगर मैं कहीं पर गलत हूं तो आप मुझे बताइएगा हां जब आपने हमसे प्रस्ताव रखा है तो एट दी एंड हमारा यह कहना था कि एक ऐसी चर्चा जहां पर मर्यादा का उल्लंघन हुआ है जो कि यदि मोहित गौर हमसे अकेले में माफी मांगने को कह रहे हैं तो इसका मतलब व मान रहे हैं कि हां उस चर्चा में गलत हुआ है पहली बात वो मान रहे हैं तभी तो हमसे अकेले में वहां पर जब शास्त्र से तुरंत पहले माफी मांगने के लिए तैयार हुए हैं ठीक है अब बात यह आती है कि हमने यह कहा कि जिस चर्चा से आप जुड़े हुए हैं यदि आपको लगता है कि वह चर्चा गलत थी आपको सार्वजनिक रूप से चर्चा की निंदा करनी चाहिए उस चर्चा से जुड़े होने वाले के रूप में क्षमा मांगनी चाहिए और उस चर्चा को जो व सोल मीडिया

00:19:59:02 के पटल पर डला हुआ है उसको हटाने की मांग भी करनी चाहिए य तीन बातें मेरी थी क्या मैं सही कह रहा हूं सत्यम जी हां यही बातें थी इस पर मैं एक और ध्यान देना चाहूंगा बताना चाहूंगा कि जो मोहित गोड की तरफ से बिंदु आए थे कि ये यह बिंदु है मेरी तरफ से उसमें बिंदु संख्या दो है अगर आप चाहे तो बाद में इसको कम्युनिटी में पोस्ट कर दे कि उन्होंने क्या लिख के भेजा था उनमें वो लिख रहे हैं कि स्ट्रीम पर 30 मिनट बाद विज्ञान दर्शन ने जाकर अपना रिएक्शन दिया उसे क्या पता कि यह जानकारी कहां से और किस प्रसंग में आई है आपके ऊपर बात हो रही है लेकिन मैं जब कह रहा हूं कि विज्ञान दर्शन ये कह रहे है कि 30 मिनट बाद जॉइन हुए तो स्ट्रीम चालू होने से पहले कम्युनिटी पर पोस्ट क्यों कर दिया इस स्ट्रीम के बारे में तो यानी उनको पता था चलिए पता भी नहीं था कि क्या होने वाला है लेकिन स्ट्रीम का जो टाइटल था छपरी परंपरावादी तो इससे भी समझ कि नहीं यार यहां कुछ गड़बड़ हो सकती है बार पूछ लेता हूं कि ये किसके के विषय में हो रहा है क्या विषय है यह हमारी जिम्मेदारी होती है हम कहीं जा रहे हैं तो पूरी जानकारी ले नहीं तो कहीं भी पहुंच जाए और फिर कह दे नहीं मेरी कोई गलती नहीं है

00:21:12:15 तो जी मैं भी एक बात जोड़ना चाहूंगा इसमें मैंने भी एक उत्तर लिख के दिया था उनके इस बिंदु का कि मान लिया कि तुम 30 मिनट बाद जुड़े हो स्ट्रीम से तो तुम्हें तीन घंटे की स्ट्रीम में अंत तक ये पता नहीं चल पाया कि इसमें क्या हो रहा है और तुम वहां पर बैठ कर के सुन रहे हो उसमें अपनी क्योंकि उसमें तुम किसी का प्रतिकार तो नहीं कर रहे हो और बल्कि उनके ही पक्ष में उनका ही समर्थन रखने वाली बातें कर रहे हो तो इससे भी उनको मोरल सपोर्ट प्राप्त हो रहा है वो करने का जो वो कर रहे हैं जो आपको पता नहीं है जो आपको पता होना चाहिए अंत तक दूसरी बात ये आती है कि चलो ठीक है स्ट्रीम होने के बाद आपको पता चल गया उस स्ट्रीम में क्या था जब पता चल गया जब पता चल गया तो अब आप उसका प्रतिकार करो कि ऐसा ऐसा हुआ उस स्ट्रीम में हटाइए इसको अनैतिक है अमर्यादित है अब भी नहीं है क्योंकि भाई क्षमा मांगने के लिए भी बहुत ज्यादा साहस चाहिए होता है वह हर एक में नहीं होता है क्षमा मांगने के लिए भी साहस चाहिए होता है तो जब तुम्ह जब तुम्ह पता चल गया बाद में स्ट्रीम और हटाने की मांग करो वीडियो बनाओ उसके विरुद्ध कि ऐसी ऐसी चीजें हुई है मुझे धोखे में रखा गया मुझे मालूम नहीं था ये चीजें वहां

00:22:27:19 पर हो रही है बनाओ वीडियो प्रतिकार करो गलत गलत व्यक्ति का जी उन्होंने बिंदु संख्या एक में लिखा है कि वो सब जानकारी तो उन बहन ने स्ट्रीम पर करी थी कि भाई पत्नी आदि की जो खुद महिला है तो यह बिंदु मुझे कभी समझ ही नहीं आ रहा है इतने मतलब दो तीन दिन से पढ़ रहा हूं कि महिला है तो क्या गाली देने का वो परमिशन मिल जाती है कि तुम महिला हो महिला को गाली दे सकते हो तुम पुरुष हो तुम पुरुष को गाली दे सकते हो या अभद्रता पूर्वक व्यवहार कर सकते नहीं कर सकते ये सनातन सिद्धांत तो मुझे नहीं दिखाई दे रहे इसमें जैसा कि बताया जाता है है नहीं सनातन सिद्धांत तो है ही है लेकिन यह तो सामान्य से नियम होते हैं समाज में जीने के कि किसी को अभद्रता पूर्वक कुछ नहीं कहना मैं तो ये कहूंगा चतम जी की जितने भी नियम ग्रहण करने योग्य है मानव उचित मर्यादा के रूप में वो सारे नियम हमारे ग्रंथावली में दिए गए हैं बिल्कुल वाल्मीकि संहिता अगर आप देखें वाल्मीकि संहिता में लिखा हुआ है कि भोजन करते समय अच्छे विचार ही होने चाहिए मन में अगर बुरे विचार होंगे तो राक्षस प्रवृत्ति का आचरण

00:23:42:21 बना देगा तो ये आज भी आप देखिए ना लागू हो रहा है कि आप भोजन करते वक्त टीवी देख रहे हैं उस पर कुछ भी ऐसे मारधाड़ देख रहे हैं तो मन वैसा रहेगा और जैसा मन होगा और जैसा खाना होगा जैसा मन होगा वैसे आचरण बनता जाएगा धीरे धीरे अपना तो ये शास्त्र तो बहुत कुछ ऐसी बातें कहते हैं जिनको समझना है सिर्फ जी तो इसमें एक बात और है

00:24:15:21 कि जैसे यह यह बात जो कही जा रही है कि मातृ शक्ति ने मातृ शक्ति को बोला इसलिए इसमें कोई दोराय नहीं है मतलब उसमें कोई ऑफेंस नहीं है तो जब सूपनखा जो अटैक कर रही थी सीता माता पर कि मैं इसको ही मार देती हूं भाई हमारे पास तो यही है जीवन जीने के लिए हम हर बात में रामायण को लाएंगे हर बात में श्री कृष्ण महाभारत को लाएंगे गीता को लाए हमारे पास यही है हमें ज्यादा इससे बाहर की चीज हमें नहीं मालूम है आप लोगों को मालूम होंगी तो सूपनखा पर जब सूपनखा जब अटैक कर रही है माता सीता पर तो उसमें लक्ष्मण जी को श्री राम जी को बीच में नहीं आना चाहिए क्योंकि एक मात शक्ति मातृ शक्ति पर अटैक कर रही है हमारा क्या काम उसम है ना वो सब गलत था आप लोग सही हो मर्यादा पुरुषोत्तम गलत है उनके छोटे अनुज गलत है रामायण गलत है आदर्श गलत है व रामो विग्रह वान धर्मा लिखने वाले जो ऋषि वाल्मीक है वोह गलत है यह लोग सही है जी अच्छा एक पॉइंट और कहते हैं कि मैंने अर्थात विज्ञान दर्शन ने लाइव में उन पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की पर उन्होंने खुद टिप्पणियां की है फिर भी मैंने कोई क्षमा की उम्मीद नहीं की जिन्हे चर्चा करनी है वह क्षमा पर इतना नहीं अटक

00:25:31:12 अब आपने कितनी करी वह मुझे नहीं पता लेकिन यह जब कहते हैं कि जिन्ह चर्चा करनी होती है वो क्षमा पर इतना नहीं अटक तो भाई आपको चर्चा करनी है तो आप भी मत अटको क्षमा मांगो और चर्चा करो बिंदु तो यह भी बन रहा है नहीं व्यक्तिगत टिप्पणी इन्होंने नहीं की मगर यह वहां पर समर्थक के रूप में खड़े हुए हैं और फिर वही बात होती है कि डायरेक्ट भीष्म पिता म ने द्रौपदी का ण करने का प्रयास तो नहीं किया मगर व वहां बैठे थे तो क्या उनको वह दोष नहीं लगा मौन रहे बिल्कुल लगा है हा सबसे पहले तो विवेकी का ही व होता है अगर आप आप यह बनते हो कि आप जो है धर्म जानते हो धर्म अधर्म में अंतर जानते हो तो पहले तो फिर आपका ही बनता है कि आप उसका प्रतिकार करो द्रोणा

00:26:24:16 ब्रा जी मनुस्मृति में तो ब्राह्मण को सबसे ज्यादा दंड मिलता है क्योंकि वो धर्म और अधर्म को जानता है इसीलिए हां इसीलिए ब्राह्मण को अधिक दंड क्यों है क्योंकि विवेकी का दायित्व ज्यादा होता है यदि आप ये कह रहे हो कि हमें मालूम नहीं था वहा क्या हो रहा है और मैंने तो कुछ अपनी ओर से पर्सनली नहीं बोला तो आपको वहां पर आप अगर विवेकी हो तो आपका दायित्व ज्यादा हो जाता है आप उसे रोको जो गलत हो रहा है ना कि वहां पर मौन समर्थन दो ना कि वहां पर कुछ ऐसे वक्तव्य देते हुए उनका समर्थन करो जो वक्तव्य उस समय उनके काम आ रहे हो उनकी चीजों को ठोस बनाने के लिए हां जी चलिए ये चले गए वहां पर इन्होंने सारी बातें हो गई वहां खड़े थे ठीक है सम सम मतलब स्ट्रीम में थे जब इनको पता चल गया कि यह जो स्ट्रीम पर सारी चीजें दिखाई गई थी वो भूतकाल था किसी व्यक्ति का अब वो ऐसा बिल्कुल नहीं है वो स्वयं कह रहा है कि वो तो अधर्म था जो मैं कर रहा था अब मैं इस रास्ते से हट गया तो अब तो मानना चाहिए कि ठीक है व स्ट्रीम नहीं होनी चाहिए थी अब तो मानो यह बात कि हां वो स्ट्रीम नहीं होनी चाहिए थी ये तो स्पष्ट है वही वही मैं कह रहा हूं कि अब तो उसकी निंदा करो अब तो उसका प्रतिकार करो हा

00:27:39:24 अब क्या हो गया अच्छा एक बात और आती है कि भाई यह कहा जाता है बीच बीच में मैं थोड़ा सा वो दे देता हूं अब यह कहा जाता है कि शिवांश द्विवेदी को विज्ञान दर्शन के साथ शास्त्रार्थ के लिए ल गया मर शिमा द्विवेदी ने उसको एक्सेप्ट नहीं किया अच्छा अभी मैं ललकार रहा हूं आ समाज के पूरी दुनिया में सबसे बड़ा जो विद्वान है वो आ जाए लखनऊ ललकार दिया अब अगर नहीं आया एक दो दिन बाद में डाल दूंगा भाग गए भगोड़े है चलेगा मतलब कोई भी कारण हो उसके ना आने का वह मायने नहीं रखता नहीं आया भगोड़ा है कहोगे अरे शर्म करो कुछ लज्जा होनी चाहिए तुम लोगों में कुछ पक्षपात हीनता एक कौन है न्याय प्रियता एक कौन है केवल अपने मत की सिद्धि मैं ऐसी चर्चा में क्यों जाऊं जहां मुझे उस व्यक्ति को सम्मान देना पड़े जो खुद ये मान रहा है कि वो ऐसी चर्चा के साथ में समर्थक के रूप में उपलब्ध था जो चर्चा उचित नहीं थी मैं उसको मुझे उसको सम्मान देना पड़ेगा

00:28:55:19 ना क्यों दूं मैं उसको सम्मान क्यों हंस के बात करूं उससे क्यों सामान्यत बात करूं उससे स्पष्ट वादी है हम लोग अपनी भावनाओं को एक तरफ करके अपने विचारों को एक तरफ करके खला पाखंड यह सब दिखाना नहीं आता है सिखाया नहीं गया जो अंदर है वही बाहर है अच्छा मैंने जब आपने जब वो मोहित गोड के बिंदुओं का रिप्लाई मुझे दिया उसके उसी दिन मैंने आपको 11 बजे मैसेज किया था कि इस चर्चा का मैं मध्यस्थ बना उसके लिए क्षमा चाहता हूं आपसे मैंने क्षमा मांगी थी वो क्षमा इसलिए मांगी थी कि मैं समझा नहीं पाया इस वजह से लोग गलत समझ रहे हैं कि आप च चर्चा से मना कर दिए तो उसकी गलानी मुझे अंदर बहुत थी आप एक बात बताइए मुझे सच्ची सच्ची एक मत हृदय पर हाथ रख के बात बताइएगा कि आप उनको समझा नहीं पाए या वो आपको समझ नहीं पाए ठीक है उन्होंने उसम पोस्ट डाल दिया कि भाई शिवांश द्विवेदी की सारी शर्त मानने के बाद भी शिवांश द्विवेदी ने चर्चा से मना कर दिया है क्या इसमें मेरा कोई दोष है जो मेरे लिए उन्होने भ्रांति फ नहीं नहीं आपका कोई दोष

00:30:10:28 मेरा कोई दोष नहीं है अच्छा दस बात जब आपको जब उन्होंने यह वहां पर रिप्लाई डाल दिया है कि शिवांश द्विवेदी की सारी शर्तें मानने के बाद भी हमने जो है वो शिवांश द्विवेदी जी ने चर्चा के लिए मना कर दिया जब उन्होंने रिप्लाई डाल दिया वहां पर और हमारी वो पोस्ट आ चुकी थी उस समय कि हम किस किस तरह से चर्चा करेंगे मोहित गौर के साथ और आपके साथ तो हम तैयार है करने को यह पोस्ट में डाल चुका था फिर भी उन्होंने उसके बाद य रिप्लाई डाला है अगर यह रिप्लाई डाला भी है तो एक सत्यवादी व्यक्ति यह होता है कि अगर उससे गलतफहमी के कारण कोई कार्य हो गया है भ्रांति के कारण कोई कार्य हो भी गया है तो उसको सहर्ष स्वीकार करता है साहस के साथ हां भाई ठीक है सत्यम जी ने मुझसे जो कहा मैं नहीं सम पाया तो क्या आपने उनकी य जो गलत फहमी है उसके बाद दूर करने का प्रयास किया जब उन्होंने रिप्लाई डाल दिया उसके बाद हां मैंने कहा था कि आपने एक जल्दबाजी करी है और ना मैं आपको समझा पाया बात को कि असल में बात क्या है उसके बाद मैंने उनको आपने तो समझाया आपने तो सही शब्द कहे थे पहले माफी मांगे उसके बाद चर्चा के लिए बात होगी आपने समझाया रिप्लाई के बाद रिप्लाई के बाद मैंने आपने जोय बाद में रिप्लाई डाला है

00:31:26:10 कि वो मना कर दिया चर्चा के लिए तो वो ठीक नहीं है वो जल्दबाजी में डाला गया है और मैं आपको समझा नहीं पाया ढंग से पूरी बात को नहीं आप अपने ऊपर क्यों ले रहे हो ना समझा पाने की बात आप एक न्यूट्रल बात कह सकते हो ना कि भाई मैंने जो कहा वोह समझ नहीं पाए मगर ये नहीं ये नहीं कहा जा सकता इसमें सिर्फ आपकी गलती उनके ना समझने में हो सकता है वो सिर्फ अपने पॉइंट ऑफ व्यू से देख रहे हैं हां हा ठीक है ठीक है ठीक है भाई आपने तो यही बात कही थी ना उनसे शुरू से कि पहले वो माफी मांगेगा उसके बाद चर्चा के निमित्त जो भी बात होनी वो और न्याय भी यही कहता है कि अगर आपकी जो चीजें वह सार्वजनिक है तो पहले आप सार्वजनिक रूप से वह सारी कार्य करिए बाद में वहां पर जाकर के चर्चा होगी आप ही सोचो कि यदि मैं किसी व्यक्ति के साथ दुराव रखता हूं दूरी रखता हूं तो मैं उसके साथ कैसे वहां जाकर के सौहार्द पूर्ण व्यवहार करूंगा क्या वह पाखंड नहीं होगा क्या वह छलावा नहीं होगा झूट नहीं होगा अगर मैं करता भी हूं तो तो मैं क्यों करूं क्यों मैं झूठ का आलंबन लू अच्छा इसमें अगर किसी को यह लग रहा हो कि भाई सत्यम को मध्यस्थ बनने का बड़ा शौक है तो मैंने

00:32:41:13 आचार्य जी को दो बार कहा था दो या तीन बार कि आप डायरेक्ट शिवांश जी को कॉल कर लीजिए या मोहित जी कॉल कर ले तो चर्चा आराम से हो जाएगी कि क्या गलती किसकी है क्या शर्त है कब चर्चा होगी तो आचार्य जी ने कहा कि नहीं आप ही उनको कहिए तो मैं कोई शौक से इस मध्यस्थ मध्यस्थ नहीं बना इस चर्चा का तो यह सारी कहानी है कि पहली बात आचार्य जो प्रशांत जी कहते हैं स्वयं को उन्होंने डायरेक्ट हमसे बात क्यों नहीं की दूसरी बात यह है कि जब उन्हें आधी अधूरी कोई बात पता चल रही है उसके बाद उन्होंने क्यों डाल दिया वहा रिप्लाई कि हम उनसे बात नहीं करना चाहते हैं तीसरी बात यह है कि जब उन्होने सच्चाई खोल खोल के बताई कि नहीं यह आपने शिवांश द्विवेदी की तरफ से गलत डाला हुआ है रिप्लाई कि शिवांश जी ने सारी शर्त मान लेने के बाद भी चर्चा के लिए मना कर दिया जब इन्होंने उनको खोल खोल के बताई तो वह क्यों अपनी उस झूठी बात को हटा नहीं रहे वहां से सोच के देखिए क्यों क्योंकि जो अपनी लोक लज्जा का डर है तो इसलिए अब जो झूठ निकल गया है गलत बात कोई निकल गई है

00:33:56:20 अज्ञानता के चल ना समझ पाने के चलते उसी का ही निर्वाह करेंगे यही एक बात और जोड़ एक बावा एक बात है हमने भाई अंततोगत्वा एक बात माननी पड़ेगी कि हमने स्पष्ट कहा कि जब तक वह तीन चीजें हैं कि पहले तो मोहित गौर उस चर्चा की निंदा करें सार्वजनिक रूप से स्वयं के उससे जुड़े होने के लिए क्षमा याचना करें और

00:34:30:16 उस वीडियो को उस वहां से हटाने की मांग करें प्रतिकार करें यथा सामर्थ्य तो इन तीन चीजों को करने के बाद तुरंत रख लेंगे चर्चा कोई बात नहीं है शेर का बच्चा एक ही अच्छा जहां चा चाहोगे वहां पहुंचेंगे उसमें कोई डर थोड़ी ना है कोई भय थोड़ी ना है किसी को ईश्वर को सर्वशक्ति मान सिद्ध किया जाएगा भाई आर्य समाज की तरफ से धर्म को शाश्वत सिद्ध किया जाएगा और सबसे बड़ी बात यह है कि ये आर्य समाज वाले मोहित गौर मोहित गौर चिल्लाया करते हैं मोहित गौर आकर के अपनी लाइव स्ट्रीम में कहते हैं कि भैया मैं आर समाजी नहीं हूं यह भी एक बात है यह भी एक बड़ी बात है अच्छा कॉल रिकॉर्डिंग है आपके पास कि नहीं इन सब बातों की दिखा नहीं रहे मगर है ना तसल्ली के लिए हां वो तो रहती है अगर बात पड़ जाएगी तो कॉल रिकॉर्डिंग भी है यह सुनिए क्या कह रहे हैं वो आर्य समाज से मैं तो अभी पहली बार देखा आर्य समाज से नहीं है बिल्कुल भी आर्य समाज से नहीं है यहां कुछ लोग हैं जो कि

00:35:45:19 आर्य समाज की संस्था से डायरेक्ट एसोसिएटेड है जैसे अभी ऋषि जी आए थे बाकी अन्य लोग अपने आए थे बाकी अन्य लोग अपने अपनी स्वतंत्र अच्छा एक बात और है जानते हैं वैसे इन्हें बहुत बड़ी विज्ञान धर्म और धर्म की सब सारे जो परंपरा प्राप्त आचार गण है इनके आगे पानी पानी है सब कुछ जो है इनका ऐसा ऐसा है मगर इनको यह नहीं पता है किय ऋषि विवाज क्याक करते हैं ये बहुत ताज्जुब की बात है नहीं ये कह रहे हैं कि ऋषि विवाज जी आर्य समाज से है और वो व्यक्ति कहता है कि मैं आर्य समाज से नहीं हूं तो आर्य समाज से है कौन इनमें से मेरे को तो यही समझ नहीं जो जिस व्यक्ति की छवि बिगड़ने लगती है वह आर समाज से नहीं है अच्छा इसमें देखिए मैंने आज सुबह ा पर स्टोरी डाली थी कि मैं इस मध्यस्थ चचा का और वो सब गलत हुआ उसके बाद भी उस स्टोरी को देखने मैं पूरा कर दूं मैं फिर बता रहा हूं हमारी पहली बात उन्होंने एक मिथ्या प्रचार किया है इसके लिए भी हम कुछ एक्शन ले सकते हैं मगर हम सम्मान करते हैं आचार्य प्रशांत जी का जो उन्होंने हमारे नाम से एक मिथ्या प्रचार किया है कि कॉल वार्ता पर शिवांश नारायण द्विवेदी ने चर्चा करने

00:37:00:19 से मना कर दिया व कॉल वार्ता व सिद्ध नहीं कर पाएंगे हमारे साथ कब हुई पहली बात दूसरी बात य है कि उन्होंने यह कहा कि हमने उनकी सारी शर्त मान ली हमारी तीन शर्त थी मोहित गौर यह कहे कि वह जो चर्चा थी वह गलत थी अनैतिक थी उसकी निंदा करें क्षमा मांगे उस चर्चा से जुड़े होने के लिए और उस चर्चा को सोशल मीडिया से हटाने की मांग करे केवल इतना करे इन न शर्तो को मानते ही हम लोग वार्ता करेंगे और जगह डिसाइड करेंगे आधी दूरी आप आ जाओ आधी दूरी हम हो जाए जहां चाहो वहां एक बीच का मध्यस्थ पॉइंट डिसाइड कर लो आ जाएंगे भैया तो यह तो पहली बात क्लियर है मोहित गौर से किस रूप में चर्चा हो सकती है और क्या वह तीन शर्त मान रहे हैं कि नहीं मान रहे हमने अपनी पोस्ट में भी डाल दिया दूसरी बात य है कि आचार प्रशांत स्वयं क्या कम है उन्होंने तो कोई टीका टिप्पणी वहां पर ऐसी नहीं की है वो आ जाए चर्चा के लिए उनसे तो हम पीछे नहीं हट रहे हैं कब आना है आ जाइए भाई बीच में इंदौर आ जाइए कहां पर आपका आश्रम है दोनों आ जाते हैं बीच में मिलकर के वार्ता कर लेते हैं हो जाएगी चर्चा अच्छा तो क्यों

00:38:15:22 इसका उत्तर नहीं आ रहा है और जब आपको ऐसे ही मोन हो जाना था तो क्यों बीच में कूद पड़े आधी पड़ी लकड़ी उठा ली आधी रोटी पर दाल तो आपने ले ली क्या अब मैं इस पर कोई रिप्लाई नहीं दूंगा किसी टीका टप्पणी पर मतलब दूसरे के बारे में मिथ्या प्रचार करके अब मैं शांत हो जा रहा हूं अब आप लोग देखो अपना अच्छा शिवास जी मैंने जब डालता है कि शिवांश मना कर दिया है अरे भाई जब मस् व्यक्ति कह रहा शिवांश मना कर दिया उन आचार से पूछो तो कहां पर मना किया तुम्हारी बात कहां पर हुई थी शिवांश से जो उसने मना कर दिया वही मैं कह रहा हूं कि जब मध्यस्थ व्यक्ति कह रहा है कि वो गलत फहमी है तो भी देखने के बाद उसने डाली है वो स्टोरी तो इनका मानसिक स्तर देखिए कितना निम्न है बहुत निम्न है य समझ नहीं पा रहे हिंदी नहीं समझ पाते क्या लिखा हुआ है अच्छा स्तर की बात करते हैं एक बात मैं आपको बताता

00:39:30:24 हूं कि आपने जब स्ट्रीम कर ली उन्होंने स्ट्रीम करी फिर आपने स्ट्रीम करी फिर उन्होंने एक और स्ट्रीम करी थी दीदी ने तो उसमें एक महिला को बुलाती है वह शास्त्र चर्चा के लिए उस महिला उस स्ट्रीम का एक घंटे और दो मिनट से आप चलाएंगे वह महिला कहती है कि शिवांश जी या शिवांश जी या इन लोगों में आपका नाम शायद नहीं लिया इन लोगों में मैच्योरिटी नहीं है ठीक है अब मैच्योरिटी की वो बात कर रहे हैं जबकि खुद वो महिला एक कुत्ते को पालती है जिसको सुपुत्र कहती है उसका नाम रख रखे हैं उसका सरनेम रख रखे हैं तो मैच्योरिटी किसम नहीं है मतलब आप एक जानवर को पाल रहे हैं जो भोग योनि है शास्त्रों के अनुसार उसको नाम दे रहे हैं उसको सुपुत्र कह रहे हैं ठीक है पुत्र शब्द का अर्थ क्या होता है यह नहीं जानते शास्त्रों में लिखा है जब और उसको सरनेम दे रहे हैं क्या ब्राह्मणों का सरनेम क्यों दिया जा रहा है उस कुत्ते को बात तो यह भी है तो क्या उनका लेवल कहां है मैच्योरिटी उम कहा है फिर इसी के दो मिनट बाद कहती है कोई कोई अपनी व्यक्तिगत लाइफ में क्या कर रहा है क्या नहीं कर रहा है वह तो एक अलग बात है मगर मैं तो यह कह रहा हूं कि

00:40:46:06 जो व्यक्ति ने आपको फीस नहीं दी है आपको यह नहीं कहा मेरा इलाज कर दो आप उसका इलाज क्यों कर रहे हो य समझ में नहीं अच्छा दूसरी एक बात और है कि मैं कहना चाहूंगा कि जो भी मातृ शक्ति है जिनको हृदयाघात पहुंचा है और मैंने कहीं कहीं पर करुणा भरे शब्द भी सुने हैं हालांकि मैंने उसे सबसे पहली बार बहन के रूप में ही बोला था जो भी कोई वक्तव्य दिया था जिनकी वजह से उनको आघात पहुंच गया उसमें बहन शब्द सबसे पहले था और यह बात सच है कि आज भी यदि कभी एन केन प्रकार ने मुझे पता है कि बहुत फालतू बात होगी य कहना मेरा उनके लिए आज भी अगर बहन होते हुए आपके किसी भी प्रकार से आपके ऊपर कोई संकट आएगा और अगर मैं आसपास होऊंगा तो प्राथमिकता से रक्षा में उठने वाले हाथ भी यही होंगे यह बात भी सत्य है तो हालाकि इन दृष्टि कोणों को वो लोग देख नहीं पाए और

00:42:01:13 हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है ना कि हम सबके हैं कोई निराकार ईश्वर की बुराई करेगा हर समाधि यों के निराकार ईश्वर तो भी हम जाएंगे भैया कोई भगवान श्री कृष्ण की बुराई करेगा तो भी हम जाएंगे क्योंकि कृष्ण भी हमारे हैं कोई श्री राम की की बुराई करेगा तो भी हम जाएंगे शि शिव जी भी हमारे हैं राम भी हमारे हैं हमको हर एक तरफ से जाकर के मोर्चे को संभालना ही संभालना है हम सबके हैं पर हमारा कोई नहीं है यही तो है स्मार्थ होते हुए वैष्णव स्मार्थ होते हुए जो शब है इनकी व्यथा वास्तविकता क्या है यही है कि हम सबके हैं पर हमारा कोई नहीं है एक मिनट जरा डिस्प्ले ठीक कर लू डिस्प्ले में दिक्कत आ

00:43:14:14 हां अ मैं वापस आ गया हूं क्या हां तो और एक बात और है कि यह जो मातृ शक्ति है जिसके बारे में हो रहा है मुझे पता ही नहीं है कि वह लाइव में थी कि नहीं थी कि क्या है सब जानकारियां है नहीं व्यक्ति विशेष के रूप में मैंने बताया ना मैंने कोई टिप्पणी की नहीं है किसी व्यक्ति विशेष के लिए मैंने आधार दिया है कि क्या क्या हो रहा है किसकिस प्रकार से हो रहा है और आप लोग हमें गलत सिद्ध कर रहे हो

00:43:48:14 खैर फिर भी मैं अपनी बहनों को कहूंगा जिसको मैंने बहन कहा है वो अगर चर्चा करना चाहे तो चर्चा कर सकती है और सामान्य चर्चा के रूप में सौहार्दपूर्ण चर्चा के रूप है ना तो तो अब ये वाली बात है कि आज मैंने एक आज मैंने एक एक थोड़ी सी रोचक बात हो जाए बीच में कि आज मैंने एक रील देखी उस रील में एक सीन दिखाया गया कि बैटमैन

00:44:28:28 सुपरमैन को पीट रहा है मार रहा है और सुपरमैन के ऊपर नाम लिखा गया था मेरा और बैटमैन के ऊपर नाम लिखा गया था यह गौर जी का मोहित गौर तो पहली बात तो यह है जिसने रील बनाई य दिखा रहा है देखो यह मोहित गौड़ हैय कह रहा है मैं एनी टाइम एनी वेर भैया तुम तो एनी टाइम एनी वेर वाले होही धर्म धर्म का कुछ नहीं है तो व्यक्ति ऐसा ही होता है एनी टाइम सिद्धांत वादी के तो सिद्धांत होते हैं ना और अगर एनी टाइम एनी वेयर हो तो क्षमा मांग के आ जाओ ना एनी टाइम एनी वेयर आ जाओ क्षमा मांग के अगर आप तैयार हो तो हमारे चैनल पर आ जाओ कल बिना क्षमा मांगे अब हमारे चैनल पर और वो जो मध्यस्थ चर्चा में अंतर क्या है कि हमारे चैनल पर हम आपसे सौहार्द पूर्ण चर्चा नहीं करेंगे उसी भाव के साथ चर्चा करेंगे जिस भाव के साथ हमें आपके आपने जो है हमें हमारी आपसे दूरी है अगर आपको स्वीकार है वो भाव आ जाइए मध्य मध्यस्थ स्थान क्यों ढूंढा जा रहा है जिससे कि दोनों एक दूसरे के प्रति सामान्य बिहेव

00:45:44:25 करें तो उसमें वो बैटमैन बनाया गया उसको मोहित गड को और सुपरमैन बनाया गया हमें मगर उसमें जिस बनाने वाले ने बेवकूफ ने यह नहीं देखा फिल्म में पीटा पीटा बैटमैन को ही गया है बैटमैन वर्सेस सुपरमैन आई थी तो मैंने देखा था उसको और उसमें मार मुख्य रूप से जो पड़ी है वह बैटमैन की ही पड़ी है बस एक बार यह होता है कि बैटमैन ने बहुत बढ़िया कवच बनाया था उस कवच को पहन करके थोड़ी देर के लिए फाइट में वो भारी पड़ा था बस सुपरमैन पर बस वो भी कवच बना कर के जो कवच उसने बनाया था आखिर में वो सब तोड़ ताड़ के फेंक देता है सुपरमैन तो तुम जहां से रेफरेंस ले रहे हो कम से कम उसको ठीक से जांच तो कर लो सुपरमैन बैटमैन की कारवार वो ऐसे फाड़ देता है कि दोबारा ऐसा है इस तरह से मेरे सामने सब मत करना इस तरह फाड़ देता है

00:46:43:13 तो ये बात जी अच्छा मैं एक कहता हूं कि ये कहते हैं कि आप स्त्री विरोधी है ऐसा आप पर आरोप लगता रहता है साथ प मुझे भी जोड़ लेते हैं मैंने दीदी को कहा कि आप चर्चा करिए मेरे साथ तो कहा फॉर्म भरना पड़ेगा क्या तो मैंने बोला मैं उनकी तरफ से नहीं हूं मैं तो खुद अपना चैनल है उस पर आप चर्चा कीजिए अच्छा इनको चर्च अंतर नहीं पता मैं चर्चा की बात कर रहा हूं इसका मतलब है आप बोलेंगे मैं बोलूंगा ये चर्चा हो डिबेट होती है कोई पक्ष लेकर अपना रखेंगे और वो शास्त्र जैसा हो गया तो मैं जब भी चर्चा की कहता ये डिबेट प ले आते तुम्हारे विषय पर डिबेट क्यों करू ऐसा तो मैंने कहा कि चर्चा होगी अगर आप अकेले करने में सामर्थ्य हीन है तो दो जनों को ले आइए तीन जनों को ले आइए लेकिन करिए तो सही तो इन्होंने कोई रिप्लाई नहीं दिया है और जब ये कहते हैं कि स्त्री विरोधी है तो मैं मेरे बारे में बता दूं कि मैं खुद शाक्त संप्रदाय से हूं ठीक है स्त्रियों का बहुत सम्मान होता है हम तो देवी पूजक हैं और अगर हमारा व्यक्तिगत मेरा देखा जाए तो मेरे बड़े जिस देवी की जिस देवी की ये अंडर कवर्ड जो गुंडे पाले हुए हैं ऋषि वाद जैसे

00:47:59:03 जिस देवी की ये अपमान करते अमानना करते हैं समय आने पर वह जनेऊ का प्रतिपादन कराने के लिए उन्हीं देवियों की मूर्तियां ले आते हैं क्या दोगलापन है भाई उसी उसी उसी देवी का अपमान करता है तुम्हारा ऋषि वाद जो तुम्हारी चर्चाओं में तुम बिठाते हो सम्मान के साथ कुछ भी कितना भी गिर जाओगे जीतने की हवस है केवल तो दीदी कहती है कि हम तो महिलाओं के लिए काम कर रहे हैं तो महिलाओं के लिए कैसा काम होता है मैं बताता हूं अच्छा वह भी कर रही होगी मुझे नहीं पता बहुत अच्छा कर रही होंगी अपने स्तर पर तो मेरा व्यक्तिगत है मेरे जो बड़े भैया है उनका ट्रस्ट है डिवाइन भारत चैरिटेबल ट्रस्ट उसमें निशुल्क कन्याओं को पढ़ाया जाता है जिनके माता-पिता नहीं है जो गरीब है उनको निशुल्क पढ़ाया जाता है वह भी बहुत अच्छे स्कूल में सामान्य स्कूल में नहीं बहुत अच्छे स्कूल में तो 50 से अधिक कन्या है जिनको निशुल्क पढ़ा रहे हैं तो यह भी कार्य ही है अगर हम स्त्री विरोधी होते तो क्या मेरा परिवार यह सब कार्य करता अच्छा इनको लग रहा होगा ट्रस्ट है तो डोनेशन मिलता होगा कोई ने नहीं जब से लग जाते शूद्र देखिए स्त्री विरोध शूद्र का जनेऊ शूद्र का वेद पाठ और यह जो तथाकथित नैरेटिव

00:49:14:10 है इनके ऊपर ही तो इसकी अलंकार अलंकार समाज की पूरी इमारत है अलंकार समाज में बहुत कम ऐसे लोग हैं जो बिना ये जो शूद्र और यह वाली बातों के बिना जो है भर्ती हो जाए उनके मन में पहले र घोला जाता है ऐसे ऐसे यय है देखो जहां तुम हो उसके बाद तब वो जो है भर्ती होते हैं बिल्कुल कता जन्मना जाते शूद्र सबसे बड़ी बात हा पुराणों का खंडन य आप ही बोलिए आप ही की बात है आप ही बोले कि जब भी वर्ण व्यवस्था में चार तरफ से गिर जाते हैं कि अब तो कुछ बोलने को बचा ही नहीं है तो तुरंत बोलेंगे कि देखो एक श्लोक है जन्म ना जायते शुद्र है स्कंद पुराण में आता है इसके अनुसार तो सब शुद्र है अरे भाई जिस जो तुम कह रहे हो कि वर्ण कर्म से होता है इतनी देर से वो ये श्लोक तुम प्रमाण के रूप में देख के तुम स्वयं सिद्ध कर रहे हो कि शुद्र तो जन्म से हो गया वर्ण जन्म से हो गया तो ये जो श्लोक है वो तुम्हारा प्रमाण नहीं है वो हमारा ही प्रमाण है तुम बस बातों को घुमा के समझ नहीं पाए और खुद की बातों में फस गए सामने वाला इतना ध्यान से पकड़ा नहीं

00:50:29:10 अगर वो पकड़ ले तो वही पर बता दे कि ये तो हमारा ही प्रमाण है कोई दूसरा प्रमाण लेकर आओ और ऋषि वाक्य हो जाता है स्कंद पुराण के लिए कि वर्ण व्यवस्था तो कर्म से होती है अरे ऋषि वाच ने अपनी कई रील्स में यह पुराणों का और भी संदर्भ लिया है कहीं कहीं पर वायु वायु पुराण का मैंने देखा था खैर मैं अभी एक बात कर रहा था कि आखिर में संक्षिप्त वि दे दू अभी तक की वार्ता का कि जी जी शिवांश जी की जन्मना ता जायते शुद्र है अगर वो यहां किसी ने सुना है तो वो भी फिर खोजने की प्रयास खोजने का प्रयास करेगा तो इसका अर्थ है कि जन्मना जायते शुद्र संस्कार दज उच्च यहां जो शूद्र इसलिए कहा है कि असं स्कृत व्यक्ति की शुद्र वत संज्ञा होती है हमारे यहां सिद्धांतों में कि जैसे कोई संस्कार नहीं हुआ इसको मैं ऐसे बता दूं जैसे कहा जाता है कि धर्मेन हीना पशु भी समाना इसका अर्थ ये नहीं है कि जो पहली बात इस लाइन का अर्थ है कि धर्म के बिना व्यक्ति पशु के समान है या कहीं कहीं प आया कि गुरु के बिना व्यक्ति जो है स्कंद पुराण में ही आया है

00:51:44:14 गुरु जिनका गुरु नहीं वो पशु है तो इसका मतलब यह नहीं हो गया कि जो व्यक्ति उसकी पशु योनि है नहीं वो पशु वत है ऐसे ही यहां पर जो ये शूद्र शब्द आया है जन्मना जाति शूद्र वो शूद्र वत है और यह बताओ जब वर्ण से जब कर्म से ही किसी का वर्ण डिसाइड हो रहा है तो जब व्यक्ति ने कोई कर्म किया नहीं है तो उसको तुम क्यों शूद्र बोल रहे हो यह भी बात है और माना जाए तो पूरा विश्व शुद्र हो गया मले भी शुद्र हो गया चतुर्वर्ण में आ गया चतुर्वर्ण के बाहर कोई रहा ही नहीं फिर हां सब चतुर्वर्ण वर्ण में आ गए

00:52:31:16 आचार्य प्रशांत ने जया किशोरी जी का भी विरोध किया था ध्यान हो आपको तो वो नारी नारी विरोधी कहलाएंगे क्या नहीं क्योंकि उन्होंने तो सिद्धांत का खंडन किया है और जो वो कर रही है धर्म के ण में व्यापार जी ठीक है तो नहीं तब जो हैय नहीं पूछने जाते तुमको किसने अधिकार दे दिया खर आज की जो चर्चा है उसका मैं सूत्रा क्मक शैली में थोड़ा सा बता दूं क्या संक्षिप्त विवरण है उसके बाद हम कबीर वालों को लेंगे कबीर टॉपिक उठाएंगे पहली बात यह है कि आचार्य प्रशांत जी ने एक पोस्ट डाली जिसमें उन्होंने यह कहा कि आर्य समाज और पौराणिक तो यह पौराण कों के बीच जो वैचारिक मतभेद है या जो भी चल रही छटा कसी उस को समाप्त करने के लिए आर समाज की पक्ष से मोहित गौड़ और पौराणिक समाज की तरफ से शिवांश नारायन द्विवेदी आए और चर्चा करें और इस बात को खत्म करें और उसके बाद उनके कुछ वो रह जाते हैं तो हमसे भी चर्चा कर सकते हैं यह उन्होंने कहा पोस्ट डाल करके अब पहली बात तो इसमें दो चीजें

00:53:46:20 हैं मोहित गौड़ आर समाजी नहीं है मोहित गौड़ आर समाजी नहीं है मोहित गौड़ बोल रहे हैं और जब आप यह समझ रहे व आर समाजी है तो आप आर्य समाज के लिए वही शब्द यूज कर रहे हो जो आर समाज चाहता है कि हमारे लिए य शब्द यूज किया जाए तो आप कौन होते हैं आर्य समाज के समक्ष हम यह कभी नहीं चाहते हैं कि हमको जो पौराणिक उद्बोधन किया जाए या वहां पर हमें उद् भाषित किया जाए हमें वहां पर आप सनातन वैदिक कार्य हिंदू कहिए परंपरा प्राप्त सनातनी कही है तो आपको यह अधिकार किसने दिया जो आप हमें एक संज्ञा दे दो पौराणिक क्योंकि पौराणिक को आपके यहां पर आपके ही लोग हीन भावना से उपयोग में लाते हुए प्रस्तुत करते हैं हम तो वैदिक हैं आर्य समाजी और यह पौराणिक है ये वैदिक नहीं है पौराणिक है आपसे हमने कहा है क्या कि हम वैदिक नहीं है तो हमारे लिए पौराणिक शब्द क्यों यूज कर रहे हैं अगर करना भी तो वैदिक यूज करिए पहली बात दूसरी बात आपने कहा कि आर्य समाज के पक्ष से मोहित गौड़ आएंगे मगर मोहित गौड़ तो यह कह रहा है कि वो आर समाजी नहीं है तो फिर आपका ये जो जो निमंत्रण है खारिज हो गया अपने आप में ही क्योंकि आप यह चाहते हैं कि आर्य समाज और जो

00:55:01:26 आर्य समाज के नवयुवक और हमारे बीच जो चीजें चल रही है वो शॉर्ट आउट हो मगर जो व्यक्ति आ रहा है स्वयं को कह रहा है मैं आ समाज का नहीं हूं इसका मतलब वो चर्चा हो भी जाएगी तो वो शॉर्ट आउट नहीं होगी क्योंकि वो ये कह रहा है कि मैं आर समाजी हूं ही नहीं आर समाज तो ये कहेगा कि भैया तुमने जिससे बात की थी वो तो आर समाजी था ही नहीं वो तो ब बो चका हैह बात दूसरी बात यह कि हमने नीता मोहित गौड़ उस चर्चा की निंदा करें उससे जुड़े होने के लिए क्षमा याचना करें और उसको हटाने की मांग करें यह तीन चीजें करने पर हम मोहित गौर के साथ चर्चा करेंगे इन शर्तों को उनके द्वारा स्वीकार नहीं किया गया आचार्य प्रशांत के द्वारा मगर यह कहते हुए कि हमने उनकी सारी शर्तें स्वीकार कर ली थी एक मिथ्या प्रचार हमारे नाम से कर दिया कि हमने उनकी सारी शर्त स्वीकार कर ली और कॉल वार्ता पर शिवांश नारायण द्विवेदी जी ने वो जो निमंत्रण था उसको ठुकरा दिया है और चर्चा करने से मना कर दिया है तो ये झूठ भरोसा गया हमारी तरफ से कि हमने चर्चा करने से मना किया और दूसरी बात कॉल वार्ता हमारी और आपकी हुई नहीं है किसी मध्यस्थ के द्वारा हुई है मध्यस्थ आपको ये बोल रहा है कि आप जो लिख रहे हैं हमारे संदर्भ से वो गलत लिख रहे हैं तो

00:56:16:28 आपको उसे संशोधित करना चाहिए एक मैच्योर पर्सन की तरह वहां पर आपको अपना करना चाहिए निर्वाह और चौथी और बात हमने मोहित गौर के साथ चर्चा के लिए मना किया है आपके साथ तो नहीं किया है आप करिए चर्चा आप आइए अ पॉट बोला है ये अच्छा पॉइंट बोला है तो आप जो कह रहे है ना कि आचार्य प्रशांत जी को मना नहीं किया चर्चा के लिए वह आ सकते हैं तो विज्ञान दर्शन जी अच्छे से सुन लीजिएगा यह वाक्य हा या फिर ऐसा समझा जाता हो कि नहीं विज्ञान दर्शन ही एक अगवा का हो सकते हैं पूरे आर् समाज के तो बात अलग है भाई घोषित कर दो विज्ञान दर्शन ही एक मात्र हो सकते हैं अगवा का आर् समाज के अलंकार समाज के अलंकार समाज मुझे इसीलिए यूज करना पड़ रहा है क्योंकि आप पौराणिक यूज कर रहे हो हम स्पष्ट वादी है ना भावनाओं को छुपाते नहीं है जो भावना मन में उसको बिल्कुल रख देते हैं स्पष्ट सामने तो हमने आपको तो मना नहीं किया हमने अपनी पोस्ट में हमने अपने रिप्लाई में हमने अपने वीडियो में बारबार यह कहा कि हम आपके साथ चर्चा करने के लिए तैयार हैं आप बात करिए कहां कैसे हो सकती है कब हो सकती है और हमने बार-बार अपना फोन दिया अभी भी दे रहे हैं

00:57:32:13 740819 आप में कोई कमी है क्या जो आपको मोहित गौर की आवश्यकता है तो यह सारी बातें हैं इसके लिए हमने लाइव रखी थी आशा करते हैं यथोचित संदेश लोगों तक पहुंचेगा और जो अलंकार समाज है व उसको थोड़ा सा झूठ फरेब धोखा इत्यादि से ऊपर उठना चाहिए और आकर के सत्य की खोज के लिए वार्ता करना चाहिए सत्य की खोज एक व्यक्ति कर रहा है धोखा की अपने समक्ष जो है आवान के किसी फॉलोअर के रूप में अपने ही व्यक्ति को बिठा ले रहा है अपने मन मुताबिक वहां से तर्क और प्रश्न करवा रहा है फिर उनका निराकरण करके बेताज बादशाह बनने का प्रयास कर रहा है यह क्या है झूठ फरेब धोखा अपनी बातों को सिद्ध करने के लिए जो मूर्तियों का खंडन करते हैं वह मूर्तियों को ही ले आते हैं ये क्या है झूठ फरेब वो धोखा पुराणों की निंदा करने वाले अपनी बातों को रखने के लिए पुराण का ही उपयोग करते हैं ये क्या है झूठ फरेब और जब आपके लिए पुराण प्रमाण नहीं है तो क्यों ला रहे हो अपनी चीजों के लिए अपनी चीजों को सिद्ध करने के लिए उनको पक्ष यह है झूठ फरेब धोखा तो यह सारी चीजें

00:58:45:07 हैं तो अब मैं चाहूंगा कि भाई और यह वो मध्यस्थ है जिन्होंने वो दूध का दूध और पानी का पानी किया है कि इनके थ्रू आचार्य प्रशांत जी का संदेश तक आया अच्छा एक बात और क्लियर कर दीजिए ई समदा जी सत्यम जी क्या जो संदेश आप मुझे दे रहे थे क्या मुझे यह उस समय बताया भी था आपने कि आचार्य प्रशांत का वो संदेश है सिर्फ आपने आचार्य बोला था तो इतना तक मुझे नहीं पता था किय कहां से आने वाली बात है जो मेरे मित्रवत मुझे बता रहे हैं और इन्होंने उनकी लाज इतनी रखते हैं देखिए उनकी पीठ पीछे के उनकी कौन सी बात कहनी है किसी से किसी से नहीं कहनी है दोनों तरफ ये संभालते हैं इन्होंने वह रिकॉर्डिंग तक हमें नहीं द है इन्हीं के पास है जो इनकी बातें आचार्य प्रशांत जी के साथ हुई इन्होंने ऐसा नहीं किया कि अगर आचार्य प्रशांत जी गलत है तो लो शिवाज जी यह लो रिकॉर्डिंग दिखा दो यह इस तरह से निर्वाह कर रहे हैं अपने धर्म का दोनों ओर से निर्वाह कर रहे हैं तब इनको गिल्ट हो रहा है कि भाई मेरे कारण जो है शिवांस द्विवेदी के नाम से गलत मिथ्या प्रचार हो रहा है वो भी उस व्यक्ति के द्वारा जिसको मैं सही समझता हूं हमें आचार इन्होंने इतनी वहां पर कहूंगा वो उपलब्ध नहीं थे आचार्य प्रशांत जी उनकी पीठ पीछे भी हमारे से

01:00:00:09 उनका कभी नाम नहीं लिया बाद में जब ये मुश्किलें पड़ गई तब इन्होंने भेद खोला कि जिससे मैं आपकी बात जिसको जिसकी बात मैं आपको बता रहा था वो यही है आचार्य प्रसन बाद में और बात यह जा रही है कि हम डरते हैं चर्चा से यह फैलाया जाता है हमारे बारे में यह भी सुन लीजिए भाई सीना तान के आर समाज के मंदिरों में कौन गया अब आप कह रहे हो कि आपने जितने भी लोगों से बात करी उन्हें शास्त्र का उतना ज्ञान नहीं था व आपकी जो इंटरनेशनल प्रचार है उनको भी आप इसी में समझते हो बोल दो वो जो आपकी आधुनिक गार्गी है उनको आधुनिक गार्गी की संज्ञा दी गई थी एक लाइव डिबेट में लाइव स्ट्रीम में तो ये आप किसके लिए कह रहे हो और जब ऐसे आप अपने लोगों को नकारने लगोगे कि नहीं नहीं वो वो जो है शास्त्रों का ज्ञान नहीं था उसको शास्त्रों का ज्ञान नहीं था तो फिर किसको समझा जाए आर समाज की तरफ से प्रतिनिधि उसको जो कह रहा है मैं आर समाजी नहीं हूं आपने हमारे हमारे भय से एक फतवा जारी किया हमारे लिए यह है शिवांश नारायण द्विवेदी य इस तरह से चर्चा करता है इसकी चर्चा में मत आ जाना इसकी बातों में मत आ जाना तो यहां पर यहां पर कौन छोड़ रहा है चर्चा चर्चा को कौन छोड़ रहा है कौन भाग

01:01:15:09 रहा है कौन अपने मंदिरों में फतवा जारी कर रहा है भैया इससे चर्चा मत करना क्यों इतना टेरर हो गया क्या ऐसे खड़े नहीं कर पाए क्या आप जो शिवांश नारायण द्वेदी से बात कर सके कोई सभ्य व्यक्ति नहीं है आपके पास अरे भाई हम तो आपके मंदिरों में जा ही रहे थे अभी भी जाएंगे प्रयास तो करेंगे ही फतवा जारी हुआ हो या ना हुआ हो अभी मुझे किसी ने टैक कर दिया माउंट आबू से व पत्र बहुत पहले का आया था हमारे पास उसका उत्तर दे दिया था हमने कह दिया आ जाओ उसमें वो शास्त्रार्थ के लिए बोल रहे मैंने कहा आ जाओ लखनऊ कर लो चर्चा आपके समय आपके स्थान पर ही क्यों हो आ जाओ लखनऊ हमें आपसे चर्चा करने की आवश्यकता लगेगी तो हम अवश्य आ जाएंगे आपको लग रही आ जाओ लखनऊ दो तीन घंटे बैठ के चर्चा हो जाएगी अच्छे से भाई हम किसी के भी बुलाने पर क्यों चले जाए अभी मैं मैं कह रहा हूं ना हर समाज का दुनिया का संसार का सबसे बड़ा विद्वान हो अगर उसमें सामर्थ्य है तो व आ जाए लखनऊ चर्चा हो जाएगी इनमें से ना हो जिनके ऊपर य यह जो रडार प जैसे अंडर

01:02:30:14 कवर्ड गुंडे या उस चर्चा से जुड़े हुए लोग जो है यह है ना बहन को छोड़ कर के उसको एक थोड़ा सा मैंने वो दिया है मातृ शक्ति होने के नाते एक उसको क्या कहते हैं प्रायोरिटी प्राथमिकता दी है थोड़ी छूट दी है तो आ जाए चर्चा के लिए नहीं है क्या यही ऋषि वाच यही सब है जिनको धर्म अधर्म का बोध नहीं है जिनका कोई सिद्धांत नहीं है क्या सिद्धांत है भाई तुम्हारा मैं समाजी नहीं हूं मैं परंपरा प्राप्त आचार्यों का शिष्य नहीं हूं मेरा कोई सिद्धांत नहीं मगर मैं सनातन धर्मी हूं सनातन धर्म आया कहां से तुम्हारे पास सपने में आकर दे गए भगवान यह सब बातें है चलिए

01:03:26:03 जो भी आ रहे हैं जी हरि शरणम जी जय श्री राम रामपाल दास के शिक्षाओं के बारे में जो हम लोग यहां पर चर्चा करते हैं उसके निमित्त किसी को अगर आना है वैचारिक मतभेद के निमित्त तो वो आए जी हरि शरणम जी प्रणाम जय श्री राम जय श्री राम रछ र

01:04:05:06 बताइए अब जो आदित्य जी आदित्य जी इंडियन फर्स्ट भारतीय समथिंग समथिंग लिखा है मैं चाहूंगा कि आप लोग किसी और स्ट्रीम में आए अ ये आर समाज वाला टॉपिक हम लोग बंद कर रहे हैं फ किसी दिन लेंगे और इतना ही बोलना था बस ये जो बता जी हरि शरणम जी बताए अच्छा एक वो जो दोगला भाई अभिषेक है उसकी बात याद आ गई उसने प्रश्न किया था कि यह जो हरे कृष्ण हरे राम मंत्र है कहां लिखा है पहली बात तो यह मंत्र जो है लिखा है कली संत्र उपनिषद में है ना और दूसरी बात यह है कि नाम जप की महिमा का गुणगान कई जगह पर किया गया है और आप गल पर कर लीजिए पद पुराण में दिया गया है खंड में नाम जप नाम जप को लेकर के हमने स्कोन वालों से बहुत सारे वो प्रश्न किए 10 नाम अपराध में से एक नाम अपराध है जिसको स्कोन चेंज करता है तो नाम अपराध जब बताए जा रहे हैं नाम अपराध जब बताए जा रहे हैं तो इसलिए बताए जा रहे हैं क्योंकि नाम जपने की विधा है और नाम जपने की विधा क्यों है य भागवत पुराण में दिया गया है क्या दिया है भागवत पुराण में

01:05:21:16 कि पतित ब्राह्मण और जो ऐसे लोग हैं नका जो है उच्च मतलब अच्छी अवस्था में जिनको शरीर नहीं प्राप्त है उन लोगों द्वारा वेदोक्त कर्मों में होने वाली संभावित भूल चूक के कारण उन्हें वेदोक्त कर्मों से मुक्त करते हुए पुराण पुराणों की व्यवस्था की गई है और पुराणों के आधार पर भी उनकी निवृत्ति होती है उनकी मुक्ति होती है और इसका 932 में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि जिनका जन्म जो तामस गुण प्रधान होता है जिनके जीवन में उनकी भी की मुक्ति हो जाती है अगर वो मेरे शरण में आ जाते हैं इन सब बातों को जोड़ कर के जो नाम जप है पुराणों में नाम जप का विधान किया गया है और अनेका अनेक शास्त्रों में है नारद पुराण में है पद्म पुराण में है आवश्यकता पड़ेगी तो उसका श्लोक क्रमांक इत्यादि सब उपलब्ध करा दिया जाएगा हालांकि इस बारे में तो आप गल पर भी सर्च कर लेंगे बहुत सारे प्रमाण मिल जाएंगे ठीक है पद्म पुराण में है जहां पर 10 नाम अपराध बताए गए हैं तो 10 नाम अपराध बताए इसलिए जा रहे हैं कि नाम जप करते समय आप वो 10 अपराध ना करें वहां पर आप सर्च कर सकते हैं अनेक अनेक जगह और तुलसीदास जी का अगर आप वो करते हो तो उन्होंने भी नाम जपते कलयुग में बहुत ज्यादा जोर दिया है भगवान के नाम का जप

01:06:36:25 बहुत बहुत सारे प्रमाण है नाम जप के ठीक है जी हरि शम जी बोले जय श्री रामय श्री राम जय श्री राम आप ये निकाल दीजिए आपकी आवाज बहुत कम आ रही है अभी लगभग 15 दिन पहले की बात

01:07:10:16 है आप अपना सबसे पहले परिचय दे दे तो अच्छा होगा लवलेश तिवारी लखीमपुर खेरी अच्छा लखीमपुर खीरी से कमलेश तिवारी जी बता अभी लगभग 15 दिन पहले की बात है तो हम एक गांव में ऐसे गए थे काम से तो वहां यही रामपाल वाले घूम रहे थे अच्छा हा तो उनसे आपके वीडियो देखे थे और थोड़ा स्टडी भी करते रहते इस विषय में तो फर उनसे बातचीत हो गई तो फिर व भाग गए थेम साथ में हा हमने फिर जो उनका जो लिस्ट रहती है जिसम केवल लिखा रहता है सोर्स लिखे रहते हैं ना वो होता कुछ नहीं है उनके पास तो वही जो शब्द था कि कबीर मतलब परमात्मा है तो हमने कहा दिखाइए फिर आप सोर्स दीजिए तो जो जो उन्होंने बताए कि मतलब वहां वहां लिखा है तो हमारे मोबाइल में पीडीएफ पड़े थे तो हमने निकाले उनको कौन सी पीडीएफ थी आपके मोबाइल में जी कौन किस मतलब क्या था उस पीडीएफ में यही

01:08:25:22 व गीता के जो वो थे मतलब उन्होंने गलत ट्रांसलेशन कर रखा था उन्होंने अपने वा गीता अच्छा हमारे पास गीता प्रस गोरखपुर का पीडीएफ है अच्छा हां तो वही हमने हमने भी एक पीडीएफ दी हुई है प्रमाणों के लिए एक पीडीएफ दी हुई है जी वो जो रामपाल वाली जो सीरीज है छह वीडियोस की उसमें अंत में है जी जी जी बोलिए ये जो ग कोई रामपाल का श भैया आ करके बताना चाहे तो आ सकता है चर्चा चल रही है व आए और बताए कि ईश्वर सर्वशक्तिमान उनका है कि नहीं वेदों में कहां प्रमाण है कि कबीर भगवान है यह सब वो बताए आ कर जी ह शरण वो गीताप्रेस डट ओजी वाली जो वेबसाइट है ऑफिशियल गीता प्रेस गोरखपुर की

01:09:40:10 जी ह हरि शरणम जी आपको आवाज आ रही है मेरी जी नेटवर्क य वेब जी तो उनकी उनकी वेबसाइट पर एक सेक्शन है ईबुक का तो वहां पर बहुत सारी ई बुक्स उन्होंने फ्री ऑफ कॉस्ट अवेलेबल करवा रखी डाउनलोड नहीं हो सकते हैं बट पढ़ सकते हैं आप उनको ऑपरेटर जी यहां पर ऑपरेटर जी आप एक बार और बीच बीच में दे दीजिए कोई आने की चेष्टा कर रहा होगा तो उसको लिंक मिल जाए जी तो हमने मतलब वहां के जो लोग थे तो हमने बताया कि यदि आपको मतलब आप बुक्स नहीं खरीद सकते इसे कम समय है पढ़ना चाहते हैं तो आप यहां से पढ़ सकते हैं किताब यह ज्यादा अच्छा रहेगा गीता प्रेस और यह लोग दिग भ्रमित कर देते हैं लोगों को तो फिर वहां पर आप आप सफल हुए उनको उनका प्रतिकार करने में जो वो दुष्प्रचार कर रहे थे आज एक व्यक्ति का फोन आया आज एक व्यक्ति का फोन आया मैं उस चर्चा को आपको थोड़ा सा बताऊ बोला कि आप जो है रामपाल दास जी के बारे में बहुत गलत सल

01:10:55:16 बोलते मैंने कहा हमने क्या गलत बोला बोलते हैं वो जो उनका वो कहते हैं मैं कुत्ता हूं तो वो वो अपने आप को इसलिए कह रहे हैं वो अपनी दीनता प्रकट कर रहे हैं ईश्वर के समक्ष तो मैंने कहा ऐसे ही तो दीनता प्रकट कर रहे हैं ब्रह्मा विष्णु महेश दुर्गा माता के समक्ष उस बात को तो आपने पकड़ लिया अच्छा आविर्भव तिरो भाव से एक बात और याद आ गई आविर्भव और तिरो भाव का अर्थ जो है क्योंकि प्रकट और अप प्रकट है मूल मूल अर्थ आविर्भाव और रो भाव का मूल अर्थ है प्रकट और अपक तो प्रकट और अपक का उपयोग जो है जन्म और मृत्यु में होता है ऐसा नहीं नहीं होता है मगर वो मूल अर्थ नहीं है जैसे प्रतिमा प्रतिमा का मूल अर्थ है के समान किसी के समान है ना मगर मगर अब जब क्योंकि मूर्ति जो विग्रह देखने में किसी के समान होती है इसलिए मूर्ति के लिए भी प्रतिमा शब्द का उपयोग होता है तो इसलिए प्रतिमा का अर्थ मूर्ति भी हो जाता है तो इसी प्रकार से जब किसी का जन्म हो रहा है तो वो क्योंकि प्रकट हो रहा है और मृत्यु हो रही है तो उसका जो है अप प्रकट हो रहा है तो इसलिए जन्म मृत्यु के लिए भी आविर्भव और त्र भाव य होता है मगर आविर्भव और त्र भाव का मूल अर्थ प्रकट और अपक है

01:12:11:12 जन्म मृत्यु नहीं है मलय आवाज क से आ रही है मेरी आवाज आपके य चल रहा है क्या य था व आपकी आवाज य कट रही थी लाइव स्ट्रीम पर अच्छा अच्छा तो भाई रामपाल को फॉलो करने वाले लोग है कहां गए आए और अपना वो जो रामपाल दास जी के द्वारा जो दिया जाने वाला जो ज्ञान है उसकी रक्षा करें आ कर के जी उन्होंने हमसे कहा कि ये जो बोलिए बोलिए ये जो मूर्ति मतलब जो पूजन का है कोई देवता जो ब्रह्म है मूर्ति नहीं हो सकती मूर्ति तोय गणपत थव शीर्ष में भगवान गणेश की पूजी जो मूर्ति है उसका विधान है उसमें फल श्रुति

01:13:07:14 में हमने वही टेक करके बताया तुम प्रत्यक्ष ब्रह्मा से आप अपना चेहरा दिखाए मनीष गिठाला जी जी जी जय श्री राम जय श्री राम तो मुझे जो मुझे जो फोन आया था मैं एक मिनट अपनी बात पूरी कर लू मुझे जो फोन आया था उसमें व्यक्ति कहता है कि आप ऐसा क्यों कहते तो हमने कहा आप ऐसा क्यों कहते हैं यह दुर्गा माता के बारे में तो बोला दुर्गा माता के बारे में वह एस इट बात लिखी है मेरे भाई वह एस इट बात लिखी है कहां पर कबीर सागर में भाई कबीर सागर आपके लिए प्रमाण है हमारे लिए नहीं है हमारे लिए प्रमाण है ही नहीं वो दुर्गा दुर्गा माता की उत्पत्ति जब पुराणों से हो रही है वेदों से हो रही है तो दुर्गा माता के लिए बात जानने के लिए आप कबीर सागर में कैसे जा सकते हैं केवल उतना ही अंश उनका सुना जा सकता है जो जहां से दुर्गा माता की उत्पत्ति हो रही है जहां पर है वहां से मैच खा रहा हो और यदि तुम्हारे कबीर सागर में लिखा हुआ है दुर्गा जी के बारे में वह सब तो तुम्हारे रामपाल स्वयं को कह तो रहे कि मैं कुत्ता हूं

01:14:22:19 हम भी तो वही बात रिपीट कर रहे हैं वो बुरी क्यों लग रही तो कुल मिलाकर के वर्ड गलत नहीं है गलत यह है कि सच बोलना चाहिए वो ये बोले कि देखिए जो बात वो बोलते हैं दुर्गा माता के बारे में वो लिखी है किताबों में अरे भाई तो हम भी तो जो बात रामपाल दास जी के लिए बोल रहे हैं वो बात रामपाल दास जी स्वयं बोलते हैं अनेक अनेक वीडियो में बोलते हैं तो इसका मतलब क्या है कि बात ये है कि वो जो शब्द है वो बोल सकते हैं मगर वो सच होना चाहिए पहली बात तो ये है तो पहली बात हमारा जो शब्द हम जो बोल रहे हैं अगर आपके लिए कबीर सागर सच है तो आपके लिए रामपाल भी तो सच है आप जो शब्द यूज कर रहे हो वो ऐसी चीज से कर रहे जो हमारे लिए सच नहीं है मगर हम जिस जहां से शब्द यूज कर रहे व ऐसा शब्द यूज कर रहे जो आपके लिए सच है सोचिए कौन न्याय प है दूसरी बात

01:15:20:16 कि अब यह बात आ जाती है कि आप तो ये आपने कहा कि भाई उसका भाव यह है रामपाल दास जी जो अपने आप को य बोल रहे हैं भाव यह है हम भी तो बताते हैं कि भाव है तुम हमारी बात मानते हो इसका मतलब क्या है कि सच बोलना चाहिए यह आप हमको कह रहे हो ठीक है उसके बाद सच क्या है और क्या नहीं है यह भी आप ही डिसाइड कर रहे हो समझ रहे हैं बंधुवर जिन्होंने आज हमें फोन किया था आप हमें पहले तो यह कह रहे हैं वो शब्द आप बोल सकते हो जो बोल रहे हो मगर वो सच होना चाहिए आपने कहा सच होना चाहिए उसके बाद क्या है यह भी आप ही डिसाइड कर रहे हो हमारे पास कोई अधिकार है ही नहीं कुछ भी करने का मेरे भाई क्योंकि आप स्वयं भू हो क्योंकि आप तानाशाह हो इसलिए आप जो डिसाइड करोगे उसको हमें फॉलो करना है ऐसा नहीं

01:16:16:14 होगा अंकित झा चेहरा दिखाए तो मनीष जी आप बताए जय श्री राम जय सियाराम मैं ये क रहा था गीता में 10 31 पर भगवान श्री कृष्ण ने एक बात बोली ना सस्त्र दारियो में राम हो मुझे इस पर य शंका है शका क्या है व रियल में मैंने उसको किया है देखा है तो दशरथ रघुवीर प्रभु राम है ना उनके लिए नहीं कहा शायद मेरे अनुसार वो भृगु नंदन परशुराम जी है उनके लिए कहा उन्होंने श्रीराम ह इस बात का फिर मैंने परीक्षण कहां पर किया महाभारत केन है ना उसमें दो तीन में उन्होंने फिर से कहा कि मैं सस्त्र धारी भग भार्गव राम लोक क्रमांक बोलिए जरा 10 31 पहले गता देखो आप 10 32 31 10

01:17:22:21 31 ये तो आप हमसे फोन प बात कर लेते नहीं तो आप फोन कर बात ही नहीं बता यहां शंकराचार्य जी ने दशरथ पुत्र राम माना है परशुराम नहीं माना शस्त्र धारियों में पवित्र करने वालों में वायु और शस्त्र धारियों में मैं दशरथ पुत्र राम हूं य शंकराचार्य जी की है और श्रीधर स्वामी जी ने क्या माना है

01:17:58:00 महाभारत का आदि पर्व खोलो आप मैं बता देता हूं य संक समाधान कर देता हूं इससे हमारा अभिप्राय क्या है इससे क्या करना है ये मिट क्यों कहना चाह रहा हूं क्योंकि अगर भगवान श्री कृष्ण कहते मैं शस्त्र धारी हूं राम हूं तो वो एक मात्र अंश रूप में हो गए स्वीकारी बताओ क्यों क्योंकि बाकी जो अवतार है उनके अंश अगर वो राम जी को अर्जुन को यह बता रहे हैं जी जी वो अधारी थे तो ये क्या है तो सामान्य हो ग राम जी कोधारी में जोड़ देते वोय बता रहे की जिस भी क्षेत्र में जो सबसे सर्वश्रेष्ठ है वह मैं हूं जैसे अगर कोई उसमें मैं सिंह हूं पशुओ में सिंह हूं जो भी कोई सर्वश्रेष्ठ है वो मैं ही हूं यह बता रहे तो शस्त्र धारियों में जो सर्वोत्तम सबसे बड़े जो धन धारी माने गए व राम माने गए राम से बड़ा तो कोई नु है नहीं धनुर्धारी बोले उन्होने सधी बोला महाभारत का आदि परम में लिखा हुआ है दो तीन में कि मैं सस्त्र दार में भर्ग पुत्र राम हूं

01:19:13:01 उन्होंने यह बात बोल ठीक है तो आप आप वो मान लो हमारी इस हमारे यहां पर चर्चा होने का क्या उच उसका क्योंकि मैंने अधिकतर य लोग मतलब इस चीज को मैंने परीक्षण कर लिया कि मतलब जो प्रभु राम जी के लिए कहते हैं तो सामान्य अंश के रूप में दोरा देते हैं तो मैंने माना कि एक अगर सस्त धारी मानना राम जी के लिए एक अंश के रू में है यहां पर नहीं नहीं वो आपकी राम भक्ति कह रही है देखिए ऐसा है राम जी को कहीं पर भी जो हमारे आचार्य गण है उन्होंने अपूर्ण नहीं माना है पूर्ण माना है पूर्ण जो हो गया जो पूर्ण हो गया वो कहीं वो अंश अंश नहीं रहा वो पूर्ण है पूर्ण का मतलब पूर्ण जब पूर्ण मान लिया उनको राम जी को पूर्ण परम ब्रह्म मान लिया जगह जगह तो फिर वो पूर्ण ही है वो तो कहीं कहीं पर उन्होंने अगर धनु धारी का रोल निभाया है या शस्त्र धारी का रोल निभाया है तो सबसे ऊंचा शस्त्र धारी दुनिया में कौन है राम तो उस रूप में कहा जा रहा है कि वो श्रेष्ठतम जो संज्ञा हो सकती है किसी शस्त्र को धारण करने वाले की उस रूप में कहा जाए इस रूप मैं नहीं मानूंगा इस चीज को तो आपको मैं कहां मनवा रहा हूं मैंने तो बुलाया भी नहीं आपको मनवाने के लिए बताइए इसमें तो हमारा होना ही नहीं चाहिए हा बताओ क्यों और दूसरा कारण य बता देता हूं मैंने श्री कृष्ण सहीता आपसे

01:20:28:09 हम फोन पर बात करेंगे यहां पर बात नहीं कर पाएंगे क्षमा चाहता हूं ओके जी सनातन धर्म रहस्य कौन है भाई सनातन धर्म रहस्य आप कैमरे के सामने आएंगे दिख नहीं रहे जमिनी जी जी

01:21:09:07 बोले नमस्कार शिवा जी सभी को ज्र राम जी खुश र आवाज आ रही है मेरी जी आ रही है आ रही जी मैं माफी चाहूंगा देर से मैं जड़ पाया और जी जो जिस प्रकार से आप धर्म के लिए कार्य कर रहे हो तो वो स्पीचलेस है मतलब मार्वेल है बढ़िया है इसी प्रकार से आप करते रहिए हमारे हरियाणा से खबर आ रही है विशेषकर रोहतक जिले से रामपा कुछ टूटे हैं वो आपके वीडियो के बदौलत प्रयास के बदौलत क्या कर राम पाली जो है टूट कर के आए हैं धर्म में वापस आपकी वीडियो देख कर के अच्छा जी ऐसा एक हमारे मित्र ने हमें खबर दी थी जो रोहतक का रहने वाला है क्या बात तो प्रयास रंग ला रहा है आपका और जो हमने देखा है व मतलब गलत नहीं हो ग अति शक्ति नहीं है आज करपात्री जी महाराज जी की छवि आपके अंदर दिखाई

01:22:24:07 दे रही कैसी बात कर रहे हैं ज्यादा बोल दिया नहीं दूसरा बात य कि हरियाणा में विशेष रूप से भव स्थिति है एक धर्म में मतलब की जो असमंजस की और भ्रम की स्थिति तो आज मतलब कि हरियाणा में चर्चा आपको बताऊ अपने लेवल से बात करूं के अगर कोई क्वेश्चन का आंसर है तो सिर्फ आपके चैनल पर मिल सकता है मैं सभी भाई जो देख रहे हैं मैं यही कहूंगा कि आपका कोई भी प्रश्न है चाहे वह धर्म से जुड़ा हुआ सोत्री वा का प्रश्न है तो आहवान चैनल से जुड़े और फॉर्म भरे और यहां पर मतलब की क्वेश्चन रखे अपना आपके क्वेश्चन का आंसर मिलेगा

01:23:25:12 कपाती जी बहुत महान वेदों के महान पारंगत हमने तो उनका अगर एक कोई कण भी होगा ना तो वो भी खैर बहुत बड़ी बात होगी वह भी अपने आप को नहीं समझा कभी खैर का भाव है और अगर कोई हमारे कारण जो है आ रहा है वापस से तो बहुत बहुत अच्छी बात है भगवत कृपा से ऐसा हो रहा है गुरु गोविंद ग्रंथ का बल है पीछे मेरे पीछे देखिए मैं आपको दिखाऊ थोड़ा सा ऊपर कर मैं इसको मेरे पीछे कौन कौन है मेरे पीछे गुरु है और ऊपर देखिए नारायण भी है यानी गोविंद भी है और ग्रंथ तो आप देख ही रहे हैं तो मेरे पीछे तीन चीज है गुरु गोविंद ग्रंथ एमथ जीी इसीलिए हमारे वीडियो में आता है मिशन एम मिशन जीी

01:24:19:21 जीी हम सभी का साथ भी आपके साथ है प्रेम भी आपके साथ है बस बस बस वो वो इसी रूप में जो आप लोगों का साथ है वो इसी रूप में समाहित हो गया सब भाइयों का साथ मिल गया और एक मतलब एक ध्वजा लहरा दि है कि हम भैया अब लोग लोगों का विषय बन गया है चर्चा का कि भाई अच्छा आज सुबह मुझे मुझे एक फोन आया वो प्रशंसा कर रहे थे व बोले कि मुझे अब आपका वीडियो जब तक आता नहीं तो मुझे रात में नींद नहीं आती जी वो बोल रहे थे जी पहाड़ी जी जय श्री राम हर हर महादेव हर हर महादेव सभी लोगों को आज लेट ही आए आप भी हा आपका विषय था ही नहीं तो आपका लेट आना ठीक ही है दूसरा विषय चल रहा था आपकी एक्सपर्टीज आपकी जो एक्सपर्टीज है वो विषय नहीं था बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल सही कहा आपने उस दिन ये उनके स्ट्रीम में एक जो हमारे सनातनी भाई गए थे तोव एक क्वेश्चन में आके अटक गए थे कि जो अध्याय 18 का 62 वा श्लोक है कि वो तो दूसरे की शरण में जाने को

01:25:34:22 बोल रहे हैं तो इसका उत्तर वो सही सही दे नहीं पाए थोड़ा मैं एक्सप्लेन कर दूं यहां पर कि अगर कोई कंफ्यूज हो रहा है कि व दूसरे की शरण में जाने को बोल रहे हैं भगवान श्री कृष्ण तो यह सरासर गलत है उन्होने पढ़ी नहीं गीता अच्छी से पूरी जब मैं पहले भी बता चुका हूं कि जो शरणागत की बात शुरू होती है अध्या 18 से 55 श्लोक से शुरू होती है तो एक बार मैं इसको थोड़ा सा इसका निरूपण कर दूं मैं कि लोगों को अच्छे से समझ में आ जाए 55 श्लोक में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से बोलते हैं कि परा भक्ति से मुझे जितना हूं और मैं जो हूं तत्व से जान लेता फिर मुझ मुझे तत्व से जानकर तत्काल प्रविष्ट मुझ में प्रविष्ट हो जाता है 56 में श्लोक में फिर उन्होने बोला मेरा आश्रय लेने वाला भक्त सदा सब कर्म करता हुआ भी मेरी कृपा से शाश्वत अविनाशी पद को प्राप्त हो जाता है 56 में श्लोक में मेरी कृपा से यह नहीं बोला कि किसी और की कृपा से 57 श्लोक में फिर बोला चित्त से संपूर्ण कर्म मुझ में अर्पण करके मेरे परायण होकर तथा समता का आश्रय लेकर निरंतर मुझ में चित्त वाला हो जा अभी यहां पर अर्जुन कुछ नहीं बोल रहे उनसे भगवान

01:26:49:26 श्री कृष्ण से समझा रहे लगातार कर्म के बारे में श्लोक में बोला मुझ में चित्त वाला होकर मेरी कृपा से संपूर्ण विघ्नों को तर जाएगा और यदि तू अहंकार के कारण मेरी बात नहीं सुनेगा तो तेरा पतन हो जाएगा अब यहां पर उनको धमका भी रहे कि तू मेरी बात नहीं सुनेगा तो तू तेरा पतन हो जाएगा फिर भी श्री अर्जुन कुछ नहीं बोले चुप्पे चाप बैठे रहे दोबारा फिर 59 में श्लोक में बोला अहंकार के अहंकार का आश्रय लेकर जो ऐसा तू मान रहा है कि मैं युद्ध नहीं करूंगा तेरा यह निश्चय मिथ्या है क्योंकि तेरी छात्र प्रकृति तुझे युद्ध में लगा देगी यह धमकाया उसको अर्जुन को भगवान श्री कृष्ण ने हे कुं सा सा श्लोक में बोला हे कुंती नंदन अपने स्वभाव जन के कर्म से बदा हुआ तू मोह के कारण जिस युद्ध को नहीं करना चाहता उसको भी तू छात्र प्रकृति के पवस होकर करेगा 60 तक हु अब 61 श्लोक सबसे इंपोर्टेंट है यहां पर ना हे अर्जुन ईश्वर संपूर्ण प्राणियों के हृदय में रहता है यहां पर बोला कि ईश्वर संपूर्ण प्राणियों के हृदय में रहता

01:28:05:00 है अपने माया से शरीर रूपी यंत्र पर आरुण हुए संपूर्ण प्राणियों के उनके सौभाग्य के सौभाग स्वभाव के अनुसार भ्रमण कराता रहता है अब 62 श्लोक में क्या बोला कि हे अर्जुन सर्व भाव से उस ईश्वर की ही जो अंतर्यामी रूप से जो हृदय में रहते हैं उस ईश्वर की ही यहां पर ही शब्द आया मतलब जो पहले वात चलली है जिसकी वही बात यहां करी जा रही है इस श्लोक में त अर्जुन सर्व भाव से उस ईश्वर की ही शरण में चला जा उसकी कृपा से तू परम शांति को प्राप्त हो जाएगा अविनाशी परमत को प्राप्त हो जाएगा मतलब कहने का अर्थ यह है कि यहां किसी और की शरण में नहीं जो हृदय रूपी अंतर्यामी रूप से जो ईश्वर रहता है हमारे हृदय में उनकी शरण में आने जाने को बोल यहां पर ही शब्द आया है स्पेशल तो पुरानी बातों को जो पुरानी जो बात चल रही थी 61 श्लोक में उसी की शरण में जाने को बोल रहे यह नहीं बोल रहे कि तू दूसरे की शरण में चले जा और सबके हृदय में भगवान श्री कृष्ण ही निवास करते हैं अध्याय 15 के 15 श्लोक में आप देख सकते हो ये हो गया आपका मैं बोलू

01:29:20:08 इसमें कुछ बोलिए देखिए पह बात य है कि पहले अर्जुन को समझाया गया कि तेरा धर्म तेरा मोक्ष का परवन किसम तुझे ईश्वर की शरण में जाना है उसके बाद उसको बोल दिया मैं ही ईश्वर हूं मेरी शरण में आना है जी ईश्वर की व्याख्या की उसके बाद लास्ट में बोल दिया अब मैं एक चीज बोलता हूं कि अगर मुझे बोलना है कि मैं ही ईश्वर हूं तो क्या मैं बोलूंगा मैं ही ईश्वर हूं या जो ईश्वर है मेरे जैसे अगर मुझे यह वाली बात बोलनी है कि ईश्वर मेरे रूप में यहां पर बैठा हुआ है तो मैं यही तो बोलूंगा कि ईश्वर मेरे रूप में यहां पर बैठा हुआ है अगर मैं बोलूंगा कि ईश्वर इस रूप में यहां पर बैठा हुआ है इस व्यक्ति के रूप में यहां पर बैठा हुआ है तो इसका मतलब है मैं अपनी बात नहीं कर रहा हूं मैं किसी और की बात कर रहा हूं जैसे मैं आपसे बात कर रहा हूं और मैंने बोला ईश्वर इस व्यक्ति के रूप में यहां पर बैठा हुआ है मैंने इशारा भी नहीं किया ईश्वर इस व्यक्ति के रूप में यहां पर बैठा हुआ है तो इसका मतलब है मैं अपनी बात नहीं कर रहा हूं किसी तीसरे की बात कर रहा हूं है ना मैं हो गया फर्स्ट पर्सन आप हो गए सेकंड पर्सन और जिसके बारे में मैंने बात की वो हो गया थर्ड पर्सन

01:30:35:13 ठीक है इनके रामपाल दास भी कई बार ऐसे ही बोलते हैं इस दास इस दास के रूप में ऐसे बैठा हुआ है पता नहीं परमेश्वर को इस दास में क्या दिखा अब वो यहां पर अपनी बात तो नहीं कर रहे हैं किसी और की बात कर रहे हैं इसका मतलब बिल्कुल दिखा दो भैया कोई ऑपरेटर जी कोई पढ इस दास वाला कोई वीडियो ऐसा पढ़ाओ इस दास मैंने आपको इसस दिया मैंने आपको एक वीडियो भेजा इस दास को भेज दिया हा भेजा होगा पर वो अभी इनके पास नहीं होगा रेटर के पास आप हमें बता दीजिए है कि नहीं वह वीडियो नहीं तो चलिए वह वीडियो मिल जाएगा मेरे ख्याल से अभी नहीं होगा तो रामपाल दास स्वयं कई बार ऐसे बात करते हैं रसपूर्ण जो वो अपने बारे में ही बात कर रहे हैं मगर वो ऐसे शब्दों का उपयोग करते हैं कि वो किसी और के बारे में बात कर रहे हैं ठीक है तो वहां पर क्या समझा जाए कि वो अपने बारे में बात नहीं कर रहे हैं पहले तो पहली बात तो ये हो गई अच्छा दूसरी बात ये हो गई कि जैसे कल हमने एक वीडियो दिखाया था आा अगर ब्रज

01:31:50:13 का अर्थ जो है जाना है है ना तो यहां पर यह कह रहे हैं आजा यहां पर जो रामपाल है वो कह रहे हैं आजा बंदे शरण राम की बारबार कह रहे तो यह कह रहे आ जा तो क्योंकि य पर जा शब्द है तो यहां पर जो यह आ कह रहे जा क रहे व पहली बात तो सम यहां ब्रज लिख दे क्या ब्रज का अर्थ फिर वहा जाना मान लेंगे क्या ये या कई बार जाने का उपयोग जो होता है वह आने में भी होता है यह मानना पड़ेगा जाना शब्द का उपयोग आने में भी होता है वरना अगर आने और जाने को बिल्कुल अलग समझ लेंगे तो यह जो कह रहे आजा इसका अर्थ क्या है आके जा आ फिर जा यही कह रहे ना जी हा विशाल बो ज जय श्रीम जय श्री राम श्रीम प्रमा ब लाया हूं बिना प्रमाण की थोड़ी

01:33:00:06 आऊगा बिना प्रमाण के थोड़ी आऊगा मैं हा आऊंगा तो इनका खंडन लेके ही आऊंगा मैं और बाकी सनातनी जो लोग है उनकी संतुष्टि होगी इसमें अब वोह चाहे रोना है तो रो ले राम पाली लोग तो अभी मैं लाया हूं अभी मेरे पास है यह महाभारत है मेरे पास देख सकते हैं आप लेकिन यह गीता संक्षिप्त वा पूरा प्रॉपर छ खंड वाली महाभारत है य संस्कृत में एक लाख लो की तो अब मैं इसमें इनका खंडन बताऊंगा अब एक चीज तो चलो यह लोग मानते हैं कि जो श्री कृष्ण भगवान है व तो विष्णु जी के अवतार है तो अब एक चैप्टर में य लाया हूं महाभारत अभी देखिए इसमें क्या लिखा हुआ है थोड़ा सा

01:33:48:02 हमको एक सेकंड है आप महाभारत अंशा वतन पर्व अध्याय नंबर अध्याय नंबर कौन सा पर्व है य आदि पर्व अनुशासन पर्व आदि पर्व आदि पर्व पहला खंड आदि पर बोलिए एक सेकंड व हमको हमको मिल नहीं रहा है मैं पहले मैं सबसे पहला प्रमाण आपको महाभारत के पहले अध्याय से दिखाऊंगा ठीक है महाभारत का सबसे पहला पर अब ये कहते हैं कि श्री कृष्ण को हम भगवान मानते हैं लेकिन वो जो है छोटे भगवान है और उनकी भी एक्सपायरी डेट है श्री कृष्ण की तो अगर ये लोग बोलते कि श्री कृष्ण भगवान वो सुप्रीम गॉड नहीं है छोटे भगवान है और वो भी जन्म मृत्य उनका होता है तो देखिए अब इनकी बंड बजने वाली है क्योंकि महाभारत का जो सबसे पहला अध्याय है ना सबसे पहला अध्याय सबसे पहले प का पहला है उसम इनका खंडन मिल जाएगा तो महाभारत का पहला ये आदि पर्व का पहला जी मैं दूसरा भी दिखाऊंगा अभी तो यह देखिए अभी मेरे पास है महाभारत का आदि पर्व पहला अध्याय श्लोक

01:35:03:28 नंबर 252 से लेके 252 से लेकर दो ज शम करया अपने को मूट म्यूट कर लीजिए मैं अभी पहला प्रमाण दिखा रहा दिखात इनको म्यूट करिए जी बोलिए मैं पहला प्रमाण आपको दिखा देता हूं दूसरा मुझे भी मैं ढूंढ के बताता हूं पहला प्रमाण

01:35:38:20 य उग्र सवा ऋषि कह रहे हैं मर्ष वेदव्यास जी लिख रहे हैं सूत वंशी संजय ने यह सब कहकर पुत्र शक से व्याकुल रपति राष्ट को समझाया बुझा उनको स्वस्थ किया इसी महाभारत इतिहास के आधार पर श्री कृष्ण द्वैपायन ने इस परम पुण्यम उपनि रूप महाभारत का निरूपण किया है विदत विद्वत जनलोक लोक में और शेषम कवि पुराणों में सदा इसी का वर्णन करते हैं महाभारत का अध्ययन अंतःकरण को शुद्ध करने वाला है जो कोई श्रद्धा के साथ इसके किसी भी एक श्लोक के या एक पद का भी अध्ययन करता है उसके सब पाप संपूर्ण रूप से मिट जाते हैं इस ग्रंथ रत में शुभ कर्म करने वाले देवता देवऋषि निर्मल ब्रह्म शी यक्ष महाना का वर्णन किया गया है इस ग्रंथ के मुख्य विषय है स्वयं परब्रह्म स्वरूप वासुदेव भगवान श्री कृष्ण उन्हीं से उन्हीं का इस पूरी महाभारत में संकीर्तन किया गया है वेही सत्य पवित्र एवं पुण्य है वे ही शाश्वत परब्रह्म है और वे ही अविनाशी सनातन ज्योति है परब्रह्म कौन अविनाशी कौन श्री कृष्ण मनीषी पुरुष मनीषी या तत्वदर्शी पुरुष उन्हीं की दिव्य लीलाओं का संकीर्तन किया करते हैं उन्हीं से सत असत सत सत उभय रूप संपूर्ण विश्व उत्पन्न होता है उन्हीं से संतति प्रवृत्ति और जन्म मृत्यु तथा पुनर्जन्म होते हैं देखिए

01:36:53:24 पहला अधक है कौन सा श्लोक है श्लोक कौन सा है पहला अध्याय श्लोक नंबर ये 254 से लेकर 258 तक बहुत बढ़िया पहला अ तो देखिए वो तो कोई भी ग्रंथ उठा लीजिए जिसके नाम का वो ग्रंथ है जो ईश्वर वो अगर पढ़ने लगेंगे फड़ा बहुत प्रमाण मिलेंगे बहुत प्रमाण मिलेंगे अनेकानेक बहुत सारे प्रमाण जी आगे बोलिए कृष्ण ने परीक्षित को खुद अश्वथामा के ब्रह्मास्त्र से बचाया था क्या उनकी जन्म मृत्यु होगी ये पहला अध्याय बोल रहा है कि भगवान श्री कृष्ण से जन्म मृत्यु होती है तो जिससे जन्म मृत्यु होती है वो भला क्या मरेगा एक तरह से तोव अपनी देह का नाश कर रहा है ना लीला पूर्वक वो केवल वो भी लीला होती है लोगों को दिखाने के लिए आविर्भव तिरो भाव होता है केवल और ये देखिए मैं दिखा रहा हूं ये है मेरे पास पद्म पुराण हम अब ये देखिए मैं इसमें दिखा रहा हूं जिसमें लिखा है कि ईश्वर अपनी देह का नाश भी कर सकता है ये देखिए यह संक्षिप्त है तो इसमें अध्याय नंबर मैं बता नहीं सकता इनके क्या बात है ये तो मेरे वाले वीडियो में काम में आएगा जिस पर य लोग जिस पर य लोगन वाले भड़कते हैं

01:38:10:21 मुझसे ये देखिए महाभारत अरे रामपाल वाले कहां गए कमेंट ही लिख रहे शिवा ये ये कल के डिबेट में मैं देख रहा था ये रामपाल वाले क्या आपके हमारे पास पढ़ने आते हैं क्या भैया इनके पास कुछ होता सब कुछ हम ही दिखाए और हमारे पास य पढ़ने आते हो क्या भैया तुम्हारे पास कुछ नहीं है कुछ नहीं है फिर फिर भी हमारा विश्वास अट आज तो मैंने एक अदभुत वीडियो देखा जो पवन दास करके इनके य कोई जिन्होने वीडियो बनाया था एक बार [संगीत] य कह रहे अनपढ लाइव जाओ नहीं लाइव आओ होता है

01:39:03:15 येस बात को अर्पण कौन है तो सब देखा है ना किसके लिए कह रहे भाई जी मैं प चलिए ठीक है कमेंट करके बता दीजिए सत्य जी ये देखिए मैं पदम पुराण से दिखा रहा हूं आपको मैं इसमें से कुछ पढ़ूंगा जिसमें लिखा हुआ है कि ईश्वर अपनी दे का नाश लीला से कर सकते हैं देखिए यहां पर पदम पुराण का दूसरा अध्याय होगा इसमें मषि पु भीष्म पितामह का संवाद के अंतर्गत य पद्म पुराण है तो उसमें भीष्म पिता में कौन सा है कौन सा अध्याय है देखिए अय गीता प्र संक्षिप्त है तो इसम अध्याय नंबर देखि लिखा नहीं है पेज नंबर क्या है बता देता हूं पेज नंबर 20 पेज नंबर 20 आपके पास कौन सा वाला है चौखंबा का है कि गीता प्रस का है चौखंबा अच्छा मैं तो गीता प्रस के ग्रंथ पढ़ता हूं मैं तो ज्यादा चटर का नाम क्या है अब वो उसम चैप्टर नंबर भी नहीं लिखा है लास्ट में नहीं नहीं नाम नाम होगा ना कुछ चैप्टर का जहां से शुरू हो रहा होगा वहां देखो नाम होगा कुछ उसके सबसे आखरी में मैं पढ़ रहा हूं फम पुलत का संवाद सृष्ट क्रम का वर्णन तथा

01:40:18:15 भगवान विष्णु की महिमा अच्छा अब आप अपना वो पढ़ो पेज नंबर 20 है ना ये पेज नंबर 20 किसका संवाद है मर्ष पुल और भीष्म पितामह अच्छा इसमें देखो यह चीज जो मैं पढ़ रहा हूं य आपको विष्णु पुराण के पहले अंश के दूसरे अध्याय में भी मिलेगा इसमें कह रहे हैं पुराण का कौन सा है विष्णु पुराण का कौन सा ये पहला अध्याय पहला अंश दूसरा अध्याय के स्टार्टिंग में ठीक है नहीं लास्ट में लास्ट में सॉरी श्लोक नंबर अभी नहीं है वो ऊपर रखा हुआ है ठीक है बाद में बाद में बोल लिखा हुआ है इसमें भगवान विष्णु स्वयं ही ब्रह्मा होकर संसार की सृष्टि में प्रवृत्त होते हैं और तथा जब तक कल्प की स्थिति बनी रहती है तब तक वेही युग युग में अवतार धारण करके समूची सृष्टि की रक्षा करते हैं वे विष्णु सत्व गुण धारण किए रहते हैं उनके पराक्रम की कोई सीमा नहीं है हे राजेंद्र जब कल्प का अंत हो तब ही अपना तम प्रधान रद्र रूप धारण करते हैं और रद्र माने शिव रूप धारण करते हैं और अत्यंत भयानक आकार धारण करके संपूर्ण प्राणियों का संहार करते हैं तोय तीनों

01:41:33:21 वो तीन गुणों का व मतलब उसको यूज करते हैं उसका ऐसा नहीं कि उसम वो बंधे हुए हैं इस प्रकार सब भूतों का नाश करके संसार को एव जल में निमग्न कर वे सर्व रूप धारी भगवान स्वयं ही शेष नाग की सया पर सहन करते हैं फिर जागने पर ब्रह्मा का रूप धारण करके वे नए श से संसार की सृष्टि करने लगते हैं इस तरह एक ही भगवान जनार्दन सृष्टि पालन और संघार करने के कारण ब्रह्मा विष्णु तथा शिव नाम धारण करते हैं वे प्रभु सृष्टा होकर स्वयं अपनी सृष्टि करते हैं पालक होकर पालनीय रूप से अपना ही पालन करते हैं और संघार कारी होकर स्वयं ही अपना संघार करते हैं देखिए स्वयं ही अपना संघार करते हैं इसका मतलब अपनी देह का नाशय कर सकते हैं इसमें जब बताया जा रहा है साफसाफ पृथ्वी जल तेज वायु और आकाश सब ही है क्योंकि अविनाशी विष्णु अविनाशी विष्णु ही सब भूतों के ईश्वर और वि रूप है इसलिए प्राणियों में स्थित सर्ग आदि भी उन्हीं के सहायक है देखिए यह वाली लाइन मैं फिर से पढ़ता हूं वे प्रभु सृष्टा होकर स्वयं ही अपनी सृष्टि करते हैं पालक होकर पालनीय रूप से अपना ही पालन करते हैं और संघर कारी होकर स्वयं स्वयं अपना ही संहार करते

01:42:42:13 हैं बढ़िया अब एक महाभारत का दूसरा प्रमाण है मैं जब तक ढूं रहा हूं आप लोग अपनी बातें कीजिए चलिए उनको ते बाबू राम जी आ गए हैं अरे शद का शिवराम आप जी की जो संस्कृत व्याकरण है ना शब्दकोश अगर उनके ऊपर इतना विश्वास है तो उधर वच के अर्थ के साथ पधार लिख रखा है और उसके आगे एग्जांपल दे रखा है मामक मामे कम शरणम ब्रज पधारो उसके आगे एग्जांपल लिख रखा है आप अच्छे से देखिएगा पधार पार क्या होता पधारो आओ और वहा पर एग्जांपल के तौर पर भी लिख रखा है मामे कम शरणम ब्रज पधारने के लिए दिया उन्होने वो ठीक है उनके लिए अचित इंजम कर दिया ब्रज शब्द में उनका ही व्यक्ति बोल रहा है आजा अब इसको क्या करेंगे इसको कम कहेंगे कि कम एंड गो कहेंगे या केवल कम कहेंगे कम का मतलब आना जाना दोनों कैसे हो गया अरे शिवा भैया यानी कि जब कई बार जाना शब्द का उपयोग आने के उसमें भी होता है सिंपल

01:43:58:24 हम जी शिवा शिवांश भाई वो एक इनके यहां रामपाल जी क्या एक पवन दास करके हैं तो उनको ये लोग कहते हैं गुरु द्रोही तो उनका आज मैंने य पर वीडियो देखा उसमें रामपाल जी फोन पर बात कर रहे हैं और अपने सबसे कह रहे हैं कि ये जो दिल्ली वाला संजय है और ये पवन दास है ये दोनों गुरु द्रोही हैं और इन लोगों से बातचीत नहीं करना इन लोगों से मतलब नहीं रखना तो उन्होंने अपनी वीडियो बनाई है पवन दास जी ने वो कह रहे हैं अब देखो जिस पद्धति से रामपाल जी ने जो कार्य करने की कार्य किया है उसी पद्धति सब उनके चेले वही साथ उनके साथ कर रहे हैं तो वो कह रहे देखो भाई ये काल जो है ना इसने जब बड़ बड़ों को मूर्ख बना दिया है तो वो काली जो है ना वो परमात्मा जो है ना मेरे परमात्मा रामपाल जी वही काल के रूप में इन सब चेलों को मूर्ख बना रहे हैं वास्तव में वो मुझे मुझे बना रहे सभी लोगों के बीच में इसको कहते हैं अपने ही जाल में फस जाना जी भाई जो चीज आप यूज करोगे तो आपके चले वही चीज आपके लिए भी यूज करेंगे आगे चलके वो परंपरा बन जाती है ना कपट की कपट की परंपरा बन जाती है चलिए बाबूराम जी आपसे

01:45:14:07 चर्चा कहां पर छूटी थी आपने कहा था ये मैं देख के आऊंगा फिर बताऊंगा आपको जी सर हम बताइए हा सर बताइए बता रहे हैं सर बता रहे बता रहे हैं बता रहे सर अरे बोलिए ना बता रहे बता रहे आप कर रहे हो कब से रामपाल जी स्वस्थ है इस समय जेल में कि नहीं उनकी खबर लेते हैं कि नहीं आप अरे जेल से जेल से फोन करके डीलिंग करते हैं मैनेजमेंट है य मेरे द्वारा बनाया गया है और आप सब लोग उसके अनुसार चले और बात करते जेलम बोलिए जेलम जेल धाम सर ट जी बोलिए अच्छा लावा भाई अभिषेक करके जो है जो हमेशा भकता रहता हैय प आके उसको

01:46:23:01 जोड़ के रिक्वेस्ट करके बोलिए कि भैया यहां आओ और हम तुमसे जरा सा भी अग्रेसिव होकर बात नहीं करेंगे अपनी बात को सिद्ध करो हम बड़े आराम से और बड़े धैर्य से आपसे बात करेंगे मैंने तोय बोला है लोग से कि तुम लोग अगर तुम लोग चाहो तो किसी बीच की जगह प आ जाते हैं कोई चैनल ते है बीच का चैनल जो न्यूट्रल हो उसपे हम लोग चर्चा कर लेते हैं और वो सब छोड़ो किसी बीच के स्थान में आ जाते हैं मैं आ जाता हूं चार कदम अपने घर से तुम आ जाओ अपने घर से चार कदम हां हा बस लेकिन कैमरे में रिकॉर्डिंग जरूर होगी सारी बात ऐसे नहीं नहीं है उतना ही है बस वीडियो देख पूजा का देखो ऐसे फोटो हा

01:47:10:18 हा शकर के समान मुख बना के ऐसे नहीं देखो शिवांश भाई जो अर्ध ज्ञानी होता है ना उसको भय जरूर होता है अपने जी ये तो है तभी इसलिए नहीं आते हैं जो अर्ध ज्ञानी होता है जिनका ज्ञानी आधा हो बाबू राम जी आप क्या सिद्ध करने वाले हैं कुमारी गाय से दूध पीना कबीर साकार है कबीर सर्वशक्तिमान है गीता का ज्ञान जो है भगवान श्री कृष्ण ने नहीं काल ने दिया है काल कृष्ण से अलग है श्री कृष्ण अविनाशी नहीं है ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है किस विषय पर बात करने और आपके जो संत है वो तत्वदर्शी है गीता के आधार पर और गीता में 5 प्रतित ज्ञान जो है वो काल ने दिया है वो 5 प्र ज्ञान वो कौन सा वाला है कौन से श्लोक है वो वो सब आप बताएं कौन से विषय पर बात करने वाले

01:48:19:15 हैं घ घट रामायण सर मानते हैं पहले आप विषय बताइए विषय सुनिए पहले विषय बताइए विषय क्या है अभी आप अभी आपने जो जो पूछा था मैं सभी का उत्तर दूंगा घटमा य मानते हो तो हम उसी से प्रमाण दिखा देते हैं नहीं हम किसी भी रामायण को तब तक मानते हैं जब तक वह रामायण वाल्मीक रामायण के अनुरूप हो यदि वाल्मिक रामायण का विरोध होगा तो उसको नहीं माना जाएगा जैसे कि किसी भी शास्त्र को तब तक माना जाएगा जब तक वेदों के अनुरूप हो यदि वेदों का विरोध होगा तो उसको नहीं माना जाएगा 70 पर विरोध करती है घट रामायण हमारे वाल्मीकि रामायण का कौन ने लिखी है घट रामायण कहां से अभी हुए थे लस देख आप पहले अपनी बात बताइए आप सिद्ध क्या करना चाहते हैं यह बताइए पहले हम यह सिद्ध करना चाहते हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश के माता पिता है इनके हम इस चीज को सिद्ध करना चाहते हैं घट रामायण से भाई आप यह बताइए कि हम आपको भविष्य पुराण से सिद्ध कर दे कि

01:49:34:19 कबीर के माता-पिता है तो हम जबरदस्त थोड़ी कर रहे सर यदि आप स्वीकार करेंगे तो हम इस दिखाए नहीं स्वीकार करेंगे तो हम इसमें जबरस्त बात य हो रही है बात यह हो रही है कि ब्रह्मा विष्णु महेश को यदि कहीं पर जन्म ने वाला कहा गया है आर भाव तिरो भाव वाला कहा गया है मगर अंततोगत्वा उनको अविनाशी भी कहा गया है अगर श्री कृष्ण को जन्म लेने वाला कहा गया है मगर अंततोगत्वा उनको अविनाशी भी कहा गया है उसको छोड़ नहीं सकते ना ऐसी चीज बोलनी पड़ेगी जिसमें दोनों चीजों का मान हो जाए जैसे कि रामपाल दास जी ने स्वयं को तत्वदर्शी भी बोला परमेश्वर भी बोला और कुत्ता भी बोला तो अब हमें ऐसा अर्थ निकालना पड़ेगा दोनों बातों का जिसमें दोनों में से किसी बात का खंडन ना हो तो आप ये अर्थ निकालते हो उसका कि कुत्ता जहां पर बोला है वो उन्होंने रस पूर्वक बोल दिया है अपनी अपनी दीनता प्रकट करने के लिए ईश्वर के प्रति बोल दिया है यही निकालते हो ना जी तो इसी प्रकार से भगवान श्री कृष्ण के लिए बारंबार अविनाशी सनातन

01:50:49:20 काल शाश्वत सब कुछ आया है काल ही परमेश्वर है वेद में आया है हम आपको वेदों से प्रमाण दे रहे हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश परमेश्वर है गणपति परमेश्वर है कवियों के कवि हैं वेदों से प्रमाण दे रहे हैं वेदों के आगे तो किसी की नहीं चलेगी ना कि चलेगी आपके लिए चलेगी जी नहीं चलेगी तो नहीं नहीं आपके लिए आपके लिए नहीं चलेगी वो तो तो तो कवि का सुनिए कवि का अर्थ क्या है कवि का अर्थ क्या है

01:51:25:13 जो कवि का अर्थ है कभी होगा दूसरा क्या होगा कवि का अर्थ कबीर तो नहीं है परमात्मा तो नहीं है भैया मुझे दूसरा प्रमाण मिल गया बताइए ब ढूंढने पर सब लोग सुनिए अभी बाबूराम दास जी आप भी सुनिए आप ये तो मानते हो आज की लाइव बहुत ज्यादा नहीं चलाएंगे आज 10:30 प वो कर देंगे क्योंकि भाई थोड़ा सा जीवन थोड़ा सा वो हो रहा है थोड़ा प्रभावित हो रहा है व्यक्तिगत जीवन प्रभावित हो रहा है हा नींद नहीं पूरी हो पा रही है थकान रहती पूरे दिन चलिए मैं बस दूसरा प्रमाण आपको दिखा दे रहा हूं आप सब देखिए जो सनी लोग है वो उनको आनंद आएगा और जो रामपाल के लोग देख रहे हैं वो या तो रोएंगे या फफड़ा एंगे अपनी बातें बोलेंगे वि में प्रमाण है

01:52:19:00 लिए कब भगवान है वेदों में प्रमाण नहीं हो कबीर साब भगवान नहीं कहां चले गए भैया अ वो चले गए क्या बाबूराम जी घाट घाट का पानी बाबू राम दस सुनि सुनि सुनिए नेटवर्क आना बाबू रामस थ य पर नेट पकड़ता है सर बाबूराम जी [संगीत] जी सर एक मिनट सब लोग चुप हो जाए सब लोग एक मिनट चुप हो जाए विशाल टिया जी आप अपना प्रमाण दिखाइए तो सबसे पहले मैं दिता से दिखाए एक सेकंड मैं दिखाऊंगा पहले पहले मैं आप यह तो मानते हो ना कि श्री कृष्ण भगवान विष्णु के अवतार है यह मानते हो ना आप जी तो अब देखिए मैं महाभारत से आपको दिखा रहा हूं जहा से गीता निकली है ये है मेरे पास महाभारत पव ये 6वा अध्याय चैप्टर 63 अब य से पगा दो लछ छपा

01:53:34:07 देंगे बक गीता प्रस की महात खंड वाली गीता से प्रकाशित महाभारत अय देखि मैं पढ लोक नंबर हा बोलिए लोक संख्या 98 से लेके 98 से लेके 104 तक मैं पढ़ूंगा ज्यास जी बता रहे हैं राजा आप सब ध्यान से सुनिए राजा कुंती भोज की कन्या कुंती के गर्भ से सूर्य के सूर्यदेव के अंश से महाबली कर्ण की उत्पत्ति हुई वह बालक जन्म के साथ ही कवच धारी था उसका मुख शरीर के साथ ही उत्पन्न हुए कुंडल की प्रभा से प्रकाशित होता था अब आगे सुनिए बाबूराम शास्त्री जी और सभी सनातन लोग उन्हीं दिनों विश्व वंदर महा यशस्वी भगवान विष्णु जगत के जीवों पर अनुग्रह करने के लिए वसुदेव जी के द्वारा देवकी के गर्भ से प्रकट हुए वे भगवान आदि अंत से रहित आदि अंत से रहित दती मान संपूर्ण जगत के कर्ता तथा प्रभु है उन्हीं उन्हीं को अव्यक्त अक्षर ब्रह्म अव्यक्त अक्षर अविनाशी ब्रह्म और त्रिगुण में प्रधान कहा गया है त्रिगुण में प्रधान और अक्षर यानी अविनाशी ब्रह्म कहा गया है आत्मा अव्यय प्रकृति

01:54:49:13 प्रभव प्रभु पुरुष विश्वकर्मा सत्व गुण से प्राप्त होने योग्य तथा प्रण वक्ष यानी ओमकार भी ही है उन्हीं को अनंत अचल देव हंस नारायण प्रभु था था अजन्मा अजन्मा अव्यक्त पर अव्यय अव्यय का मतलब अविनाशी कैवल्य निर्गुण विश्वरूप अनादि जन्म रहित और अविकारी कहा गया है वे ही सर्वव्यापी परम पुरुष परमात्मा वे ही सर्वव्यापी परम पुरुष परमात्मा सब के कर्ता और संपूर्ण भूतों के पितामह है उन्हीं परमात्मा ने नेही धर्म की वृद्धि के लिए अंधक और विषण कुल में बलराम और श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिया अवतार याया बाबूराम जी इसको मानेंगे कि

01:55:36:20 नहीं हम दिखा रहे बाराम जी मेरी बात सुनि मैं एक बात कहूंगा आपसे मैं आपके बातो को मना नहीं कर रहा हूं कि आप जो बोल रहे वो लिखा नहीं है मैंने आपको बता दिया कि दो प्रकार की जब बातें आएंगी ग्रंथों में तो हमें उनको मिलाकर आंसर लेना पड़ेगा एक प्रकार की बात से दूसरी प्रकार की बात कट नहीं जाएगी समझ रहे हैं मैं आपके प्रमाण को मना नहीं कर रहा हूं आप थोड़ा बुद्धि खोल के समझिए जहां पर उन्होंने अपनी दीनता प्रकट करने के लिए कहा भी है कि मेरा भी आविर्भव होता है तेरो भाव होता है अपने को बेकार बताया है तो वो उसी प्रकार से बताया जैसे रामपाल दास जी स्वयं को कुत्ता बता

01:56:25:07 जी जी जी तो इस बात को आप समझिए यह कहीं का सिद्धांत नहीं है कि एक बात के आधार पर दूसरी बात को काट दिया जाए यह सिद्धांत अवश्य है यदि दो प्रकार के वो होंगे शास्त्र में वचन दोनों एक दूसरे के विरोध होंगे तो दोनों धर्म है यह हम कई बार दिखा चुके हैं अभी दिखाऊ तो सर तो ये क रहे हैं कि इसको सही कैसे माना जाए कि कौन सही है या कौन गलत है इसकी व्यवस्था भी शास्त्र में की गई है कौन सही कौन सही है कौन गलत है ही नहीं आपको ऐसा रास्ता निकालना है जिसमें किसी का खंडन ना हो दूसरे शब्द का खंडन ना हो दूसरी बात एक मिनट मुझे शास्त्र ने इन सब बातों का शास्त्र ने इन सब बातों का वो दिया है निचोड़ कि आपको सही अर्थ बताने वाला कौन है अब मैं सही अर्थ बता वाला कौन है पहले तो इसको समझ लो कौन है कोई बात नहीं गीता उठा लीजिए सर गीता उठा लीजिए अरे मैं गीता नहीं ला रहा हूं मैं कुछ और ला रहा हूं मैं कुछ और ला रहा हूं जी ये जो तुमने कहा

01:57:40:09 ना बता भगवत गीता 44 में लिखा है संचय भगवत गीता 440 में क्या लिखा है क्या लिखा है संशय जिसके मन में संशय होता है वो कभी सुखी नहीं रहता 4 है जिसके मन में संशय होता है अरे मैं बता रहा हूं अभी ऐसा कोई प्रमाण प्रमाण की बात नहीं है जिसको आपको मानने में आपके पक्ष का खंडन हो जाए अभी खोल के देखने की आवश्यकता नहीं है भगवत गीता 4 में जैसे आज आप पूछ रहे हो ना एक तरफ ये बात है एक तरफ यह बात है तो इसका इसका उत्तर कैसे मिलेगा तो इसकी व्याख्या भगवान ने की भगवत गीता 440 में उन्होंने बोला है कि संचय आत्मा विनती अभी मैं आपको एक सिलसिले बार से बताता हूं एक

01:58:46:09 मिनट अब जब उन्होंने यह बता दिया कि तुम्हारा जो सबसे बड़ा शत्रु है वो कौन है वो है संशय आपके मन में जो संशय आ रहा ना य य लिखा है वहा वो लिखा है तो यह आपका दुश्मन है अब यह संशय कटेगा कैसे तो स्कंद पुराण गुरु गीता इसमें बृहद व्याख्या है कि संन सेय आपका कटेगा कैसे गुरु गीता यह स्कंद पुराण का एक चैप्टर है जिसम शिव और पार्वती आपस में बातें कर रहे हैं तो इसका मैं खोल रहा हूं लोक क्रमांक 3

01:59:27:27 सॉरी हा यह देखिए पहली बात आपने जो कहा है ना कि यह कैसे पता चलेगा क्या होगा इस इसे कहते हैं संचय और इसी को कहते हैं अज्ञानता रूपी अंधकार आपको अज्ञानता है नहीं समझ में आ रहा है क्या करना है आपका रास्ता साफ नहीं है तो इसी की व्याख्या यहां पर है यह देखिए दिख रही है यह व्याख्या देखिए गु का मतलब गु का मतलब अंधकार और रू का मतलब निकालने वाला इधर देखिए इधर इस तरफ र रु का मतलब प्रकाश र का मतलब प्रकाश होता है जी जी का मतलब का मतलब अकार अरे जो शास्त्र में लिखा वो पढ़ लो पहले पढ़ लो पहले गु का मतलब अंधकार और रू का मतलब निकालने वाला ब्रह्म रूप प्रकाश है गुरु है है ये अवतार का उपनिषद में भी यही दिया गया है जी ठीक है तो गुरु का मतलब क्या हुआ जी जो आपको आपके जो मन में संशय आ रहे हैं उनको दूर कर दे अब अगला पॉइंट है संशय दूर कौन करेगा यह तो समझ में आ गया कि गुरु अब गुरु कौन होगा उसकी व्याख्या सुनो क्यों गुरु

02:00:43:01 ही संशय को दूर करने वाला क्यों है क्योंकि क्योंकि गुरु शास्त्र और युक्ति से केवल शास्त्र से भी नहीं गुरु कौन है शास्त्र और युक्ति से तर्क और प्रमाण से तर्क तर्क भी देगा और युक्ति केवल शास्त्र नहीं केवल शास्त्र करेगा तो उलग जाओगे कन्फ्यूज हो जाओगे तो क्या है ये गुरु गीता 184 जी गुरु गीता 184 इसमें पढ़िए

02:01:26:25 यह देखिए 184 जी गुरु गीता 184 में क्या है कि क्योंकि वह शास्त्र और युक्ति से आपके संपूर्ण संश हों का समाधान करते हैं किससे प्रमाण और तर्क से ठीक है जी ठीक है अब बात आती है आगे के अब उसका जो है इसमें जो है उन्होंने गुरु की और व्याख्या भी की है कि गुरु गुरु जो शिक्षा है व गुरुदेव के मुख में रहती है चले गए क्या जो शिक्षा है वह गुरु गुरु के मुख में रहती है अब आगे हम देखेंगे कि गुरु कौन हो सकता है 191 में भी गुरु कोही संशय मिटाने वाला कहा जा रहा है 191 भी देख लेते हैं कि गुरु कृपा से सब संशय मिट जाते हैं

02:02:34:19 गुरु गुरु दीक्षा से विमुख रहे लोग वास्तविक ज्ञान से रहित है तो पहली बात तो य आ गई कि आपका जो सबसे बड़ा शत्रु है वह संचय है और संशय से निकालने वाला कौन है गुरु अब आगे हम देख लेते हैं कि गुरु किसे कहा गया है पहली बात तो एक और है कि जो ऐसे गुरु का चुनाव करता है जो गलत है प्रामाणिक नहीं है निषिद्ध गुरु है वह ब्रह्म प्रलय तक पशु योनि में पड़ा रहता है यह भी इसी में लिखा है गुरु गीता में स्कंद पुराण ब्रह्म प्रलय तक पशु योनि में ही पड़ा रहता है इसलिए सब प्रकार के प्रयासों से होकर जो है वो अच्छा यहां पर देखिए जो गुरु अपने दर्शन से शिष्य को भ्रांति में डालता है मतलब जब आप अपने गुरु को देखें तो ट्रांसपेरेंसी हो इसीलिए कहा जाता है वैराग्य जो वैराग्य हो वैरागी होता है उसका जीवन कैसा होता है जैसा आपको दिख रहा है वैसा इधर है उसमें कोई पदे बाजी नहीं होती मगर गृहस्थ होगा तो उसमें एक आवरण होगा आपके और उसके बीच में एक दूरी होगी

02:03:49:25 तो जो गुरु है वह अपने दिखावे से शिष्य को भ्रांति में ना डालने वाला हो तो यहां भी वैराग्य की ओर इंगित किया जा रहा है ठीक है और ऐसा गुरु निषिद्ध माना जाता है और वैराग्य की बात तो अनेक अनेक जगह हुई है अब पहली बात क्या हुई भगवत गीता चार दो धर्म का ज्ञान जो ज्ञान है ब्रह्म प्राप्ति का वो कहां से प्राप्त हो रहा है गुरु परंपरा से भगत भग गीता चार दो एवं परंपरा प्राप्ति मम भगवत गीता न 16 परंपरा प्राप्त सेय जो चक्र है प्रकृति का चक्र है परंपरा से प्रचलित है जो इसके अनुसार चलते हैं उन्हीं को मोक्ष मिलता है भगवत गीता पांचवे अध्याय में भी कहा गया है कि पूर्व जो पूर्वज करते चले आ रहे हैं परंपरा से वही करने पर आपको मोक्ष मिलेगा उन पूर्वजों की बात नहीं की जा रही है यहां पर कि आपके बीच में कुछ पूर्वज ऐसे भी हुए जिन्होंने गलत कार्य कर दिया उन पूर्वजों की बात की जा रही है जो पीछे से अपने पूर्वजों को फॉलो कर रहे थे वही आप फॉलो करो आचार्य लोगों हा यही बात छंद उपनिषद में भी लिखी है कि आपके गुरुजन

02:05:05:14 जो परंपरा प्राप्त जो विद्या है वही गुरुओं से प्राप्त जो विद्या है वही आपकी आपको जो मोक्ष दिला सकती है तो पहली बात तो क्या निशानी आ गई हमारे पास कि गुरु जो होना चाहिए व परंपरा प्राप्त होना चाहिए क्यों क्योंकि उसने शास्त्र किसी दुकान खरीदे नहीं थे उसने अपने गुरु से सुने थे और जब सुने थे तो जब उसके मन में यह सब बातें आई थी ना गुरु से सुनते समय शास्त्र य अभी तो आपने थोड़ी देर पहले गुरुदेव यह कहा था कि वोह अविनाशी नहीं है वो अपना आविर्भव रो भाव बता रहे ब्रह्मा विष्णु महेश और आप कह रहे हो व अविनाशी है तो जब उन्होंने पूछा उन्होंने बताया वहां पर वह अपने आप दीनता प्रकट कर रहे थे वो आविर्भव तिरो भाव का मतलब उनका केवल य है कि वो प्रकट प्रकट होते हैं समझे बाबूराम जी आप चले जाते हैं बात अलग है अरे हम आ गया सर नेटवर्क क पसे इतनी बातें कहते हैं अगर हम यह कह दे कि व लोक प्रक्षिप्त तो क्या करेंगे हा सर रहे जी सर मैं आ गया सुनि गुरु की पहचान के लिए सबसे पहली बात हो गई ज्ञान परंपरा से प्राप्त होना चाहिए तो जो अर्थ गुरु आपको बता रहा है

02:06:20:19 वो जो गुरु ब बैठा है वह परंपरा से होना चाहिए क्योंकि यह जो शास्त्र है यह आपको किसी पब्लिक प्रेस ने अब छाप के दिए हैं गीता प्रश्न अभी छापे हैं पिछले हजार हज 1200 सालों में मेरे ख्याल से कागज की खोज हुई होगी प्रिंटिंग की खोज हुई होगी है ना ऐसे ही हुआ होगा अंदाजा है मेरा एकदम क्लियर उससे पहले शास्त्र कैसे चलते थे परंपरा से गुरु ने अपने शिष्य को रए उन्होंने अपने शिष्य को रटा तो जब ऐसे चलते थे जब ऐसे परंपरा से चलते थे तब आपके जैसे ही शिष्यों के मन में सवाल आते थे कि गुरुदेव अभी अभी तो आपने कहा था कि वो उनका आविर्भाव तिरोभाव होता है और अब आप कह रहे हो गुरुदेव कि ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है तो गुरुदेव उनको समझाते थे कि जहां पर उन्होंने अपना आविर्भव रो भाव बताया है वो उन्होंने अपनी दीनता प्रकट की है जिसकी वो पूजा कर रहे हैं उसके प्रति सम्मान प्रकट किया है तो गुरु ऐसे निर्धारण तो इसका मतलब क्या हुआ और यह भगवत गीता में लिखा भी है परंपरा प्राप्त निरुक्त तक में लिखा है शति पर दी जा रही है उपनिषद में लिखा है सुति परंपरा दी जा रही है मुनि परंपरा दिखाता हूं आपको अच्छा हम कुछ आप से शका समाधान करना चाते किया है पर क्या है क्या नहीं है इसका निर्धारण

02:07:35:19 कौन करेगा कैसे करेगा उसका प्रश् का जवाब सुनिए य शुद्ध परंपरा क्या कह रही है जन कैसे चला परंपरा से चला जी कैसे चला परपरा परपरा से चला इसको हमारे गुरुजी भी कहा तो सही कहते हैं कि नहीं परंपरा से चलती आ र है वो पहले से वो लोग जैसा भी उ आपके पास आपके पास कबीर से पहले की परंपरा नहीं है ना नहीं जैसे कि वेद जो गीता है इसको हमारे गुरु जी ने बोला है कि जो ये लोग इतना तक हमारे यहां तक लाकर पहुंचा पले पहले मेरी पूरी बात सुन लीजिए गुरु की जो पहचान है वो शास्त्र ही बता रहे हैं 15 में कहा जा रहा है कि जो वृक्ष वृक्ष है जो उल्टा संसार रूपी उल्टा वृक्ष उसको काटने के लिए आपके पास हथियार होना चाहिए वैराग्य का स्कंद पुराण में बोला जा रहा है कि जो गुरु अपने शिष्य को भ्रमित करे अपने उससे रूप से यानी कि आप पता ना लगा पाए अंदर जाकर क्या करने वाला है भ्रम पैदा हो तो ग्रस्त जो होता है वो एट दी एंड जब जाएगा तो अपने दरवाजे की कुंडी लगाएगा ग्रस्त व्यक्ति कौन है जिसके जीवन का कुछ ना कुछ हिस्सा ऐसा है जो छुपा हुआ है समझ गए

02:08:51:00 जी जी उसके बाद वो क्या कर रहा है आपको नहीं पता सन्यासी कौन है जिसके जीवन का हर हिस्सा आपको पता है क्या कर रहा है वो सन्यासी है तो सन्यासी आपको ब्रम में नहीं डाल रहा है कि मैं गेट बंद करने के बाद क्या कर रहा हूं अपने कमरे में ग्रस आपको संचय में डाल रहा है कि वह गेट बंद करने के बाद गुरुजी अपने कमरे में क्या कर रहे हैं इसलिए वह अंतिम निर्णायक नहीं है समझ रहे हैं जी तो वैरागी छव अध्याय में भी वैरागी की ई है और अथर्ववेद 11 पा 16 में कहा जा रहा है कि ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है और मनुस्मृति में कहा जा रहा है मनुस्मृति में धर्म में तुमने अभी प्रश्न किया य संशय का निराकरण कौन करेगा तो उसमें कहा जा रहा है धर्म में संशय होने पर किसके पास जाए ब्रह्मचारी के पास दिखा देता हूं अ सर गीता में तो तत्वदर्शी के पास बोला है अरे मेरे भाई वही तत्वदर्शी है जी तत्वदर्शी काल से कोई तुम्हारे पास व्याख्या है क्या व उसमें बोला गया वो तत्व ज्ञान देगा तुमको सुनना नहीं है बाबू मैं समझ रहा हूं तुम्हारी बात तुमको केवल भ भ अपनी बात बोलनी है रट्टू तोते वाली

02:10:07:01 तत्वदर्शी की व्याख्या क्या है बताओ तत्वदर्शी व्याख्या यह है कि जो वह तत्व ज्ञान को देगा जो ञान क्या है वो तत्व ज्ञान क्या है तत्व ज्ञान वह ज्ञान है जो परमात्मा तक का ज्ञान जिसे जीव का मेरे भाई तोय जो रामपाल ने दिया वह परमात्मा का ज्ञान है यह कैसे सिद्ध हुआ बताओ व सि ऐसे हुआ कि उन्होंने उन्होने परमा परमात्मा तक का पहचान बताया कि परमात्मा वह है वहां रहता है ऐसे उसका विधि है ऐसे मिलेगा पहली बात तो यह परमात्मा की बात क्या यहां नहीं बताई जा रही तुमको जी वही व्याख्या क्यों मानी जाएगी जो रामपाल बोल रहे हैं परमात्मा की व्याख्या दूसरा जो परमात्मा की बात कर रहा है वो गलत है नहीं नहीं का नाम क्यों नहीं ले रहे हो तुम 15 एक का नाम क्यों नहीं ले रहे हो जी स उल्टे वक्ष के रूप में उल्टे वृक्ष की व्याख्या कर दे उसका नाम लेना बंद कर दिया नहीं नहीं उसको कहा भूलेंगे सर उसको तो पहले लेना है बोलो तत्वदर्शी का तत्वदर्शी के लिए व्याख्या बताओ वो वाली 15 एक वाली ठीक है उसको भी बताएंगे बाबू

02:11:22:04 तुमको कुछ जानना नहीं है तुमको यहां रट्टू तोता बनना है तुमसे वैसे ही बात करेंगे चलो आप आपसे हम कुछ पूछने आ हो रहे थे चलो बोलो आपसे हम कुछ पूछ में क्या लिखा है 15 एक में क्या लिखा है पढ़ो उसको पहले हम जो पूछना चाह रहे उसको की व्याख्या 15 एक में है कि नहीं है है सर उसको हम क मना कर रहे प है तो पढ़ो है तो पढ़ो और हम गीता से दूसरा नहीं पूछ पढ़ो 15 एक की व्याख्या पढ़ो तत्वदर्शी की

02:11:59:18 पढ़ो सर ऐसे जबरदस्त ज्ञान चर्चा नहीं होती है देखिए ह तुमने कहा कि उसम तो तत्वदर्शी के पास जाने के लिए कहा गया है तुम मुझे दिखा दो कि तत्वदर्शी का अर्थ ये लिखा हो जेल धाम में बैठा हुआ रामपाल बस दिखा दो वो किसी का नाम नहीं लिखा उसमें लिखा है मुको दिखा नाम नहीं लिखा है तो ठीक है तो तुम अपना वो प्रमाण ना कि कहां कौन सी तरीके से रामपाल सिद्ध हो रहे हैं सर जो चीज हम पूछना चाह रहे गीता से उसको बताइए हमरे मेरे भाई तत्वदर्शी की व्याख्या तुम 15 एक से मानते हो कि नहीं मानते हो यह बताओ फस गए ना अय क्योंकि इन्हीं किताबों में ठोक ठोक के लिखा है ये मालूम है इनके पास 15 की काट है अब ये 15 नहीं बोलेंगे उसको हम मानते हैं हम कुछ दूसरा पूछना चाह रहे मानते हैं तो वो खोलो नहीं तो य स्वीकार रामपाल ने व झूठ बोला गलत बोला नहीं स्वीकार कर रहे भाई बोले कैसे झूठ बोलेंगे क्या तत्वदर्शी की क्या व्याख्या है वहा पर बोलो संत रामपाल जी महाराज ने बताए हैं गीता अध्याय 15 श्लोक नंबर एक से चा जो कोई व्यक्ति जड़ से लेकर के संसार ब्रज को जड़ भाई तुम शलोक पढ़ो अपनी रामपाल जी जो बोल रहे

02:13:14:18 वो मत बोलो 15 एक में क्या लिखा है वो पढ़ो जी 15 एक में लिखा हुआ है आदि पुरुष परमेश्वर मूल वाले ब्रह्मा रूप मुख शाखा वाले जिस

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→ Used in: A · Live सतलोक आश्रम का अधिकृतवक्ता #तत्त्वदर्शीसंत#rampaljimaharaj at 30:02 ↗

02:13:30:13 जिस संसार रूप पीपल के बृज को अविनाशी कहते हैं वेद जिसके पत्ते कहे गए हैं उस संसार रूप वृक्ष को जो पुरुष जो व्यक्ति मूल सहित यानी जड़ सहित तत्व से जानता है

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02:13:44:01 वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है यानी कि तत्वदर्शी वो है जो वेद को पूर्ण रूप से जानता है नहीं जो इस संसार में ब्रिज को जड़ से लेकर पत्ते तक जानता है अच्छा जड़ से लेकर पत्ते तक जानने वाला कोई कैसे सिद्ध होगा यह बताओ वो बताएगा उसके बाद से पता चलेगा कि वो कहां तक का ज्ञान दे रहा है अरे तो भाई मुझे बताओ ना उसका सबूत क्या है कि किसकी व्याख्या मानी जाएगी जड़ से लेकर पत्ते तक की व्याख्या दूसरी बात तुमने कहा नहीं मि एक मिनट एक मिनट तुमने कहा वहा पर लिखा है कि वो वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला होगा लिखा है कि नहीं आपने नहीं कैसे बोला पहले य बताओ मानते हो कि नहीं मानते हैं मानते हैं मानते रूप से जानने वाला होगा जी जो वे देवी भागवत में देवी भागवत में लिखा है वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला वो है जो मां भगवती की निरंतर पूजा करता है गायत्री मंत्र का जाप करता है और बोलो दिखाऊ रुक रुक तो लीजिए पहले भाई मैं रुकूंगा मुझे पहले बता दो ये मानते हो कि नहीं

02:14:59:03 इस पहला श्लोक हम पढ़ रहे हैं इसका क्या कह रहा है मैं तुमसे पूछ रहा हूं इसको मानते हो कि नहीं मानते को जानने वाला कौन है जो संसार रूपी ब्रिज को डिटेल बता देगा अरे तो देवी भागवत में झूठ मान रहे हो देवी भागवत में उसकी पहचान दी गई है तो पीपल के संसार प बताओ एक बात बताओ तुमसे किसने कहा कि शंकराचार्य ने या रामानुजाचार्य ने डिटेल नहीं बताई हम किसी को थ पूछ रहे बता बताइ डिटेल उ सुनो संसार रूपी उल्टे क् की डिटेल आदि शंकराचार्य जीने राम अनचार जी ने बताई है हो य बता देंगे शिष्य बन जाएंगे सब संत रामपाल जी महाराज के भगत उस बता बताइ है अब अब ये बताओ रामपाल ने बताई है कि नहीं ये बताओ अच्छा बताइए तो आप उसको बता दीजिए कैसे बता इसमें लिखा रामपाल ने बताई है कि नहीं आप जो शंकराचार्य बताया उसको बता दीजिए ना भाई इसमें लिखा हुआ है आदि पुरुष परमेश्वर मूल वाले तो जो आदि पुरुष परमेश्वर है मूल जड़ वाला

02:16:14:16 वह कौन है इसके बाद बोल रहा है कि जो ब्रह्मा रूप मुख शाखा वाला तो ये ब्रह्मा कौन शाखा वाला है मैं तुमसे ये पूछ रहा हूं कि यहां पर लिखा है कि वेदों को जानने वाला भी होगा वही व्यक्ति होगा कि नहीं होगा अरे पहले क्यों मैं बोल रहा हूं जो व्यक्ति उल्टे वृक्ष की व्याख्या करेगा उसी व्यक्ति के लिए लिखा है वो वेदों को जानने वाला भी होगा ठीक जी जी जी तो भागवत पुराण में देवी भागवत में स्पष्ट बताया गया है कि जो पूर्ण रूप से वेदों को जानने वाला है वो मां भगवती की निरंतर पूजा करता है गायत्री मंत्र का प्रयुक्त जाप करता है है यह लक्षण बता दिया पहचानने के लिए इसको नहीं मानोगे मानते हैं इस ब्रज को बताइए इस अगर जो पूजा कर को कैसे बताना है बताओ क्या बताना है वृक्ष के बारे में बताओ क्या बताना है बृ को ये बताना है कि कौन जड़ है कौन पेड़ है कौन डाल है कौन पत्ते है इसको बताइए हा अरे तो मैंने बता तो दिया जो सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है वही जीव जगत और जगदीश्वर के रूप में प्रकट होता है वही पत्तो के रूप प्रकट होता है वही दाल के रूप में प्रकट होता है वही तरह तरह की लीला करता है वेदों में भी लिखा है गलत गलत आंसर है आंसर गलत है आपको हम

02:17:29:18 प्रूफ करा रहे आपको प्रूफ कर रहे आपको प्रूफ करा दे रहे गलत आर मैंने बोला है एक मिनट जो मैंने बोला है वो शास्त्र में लिखा दिखा दूं मैं दिखा रहा हूं भाई इसी गीता से दिखा रहा बाब बाबू भाई मेरी बात सुनिए ध्यान से लड़ाई इस बात की नहीं है कि क्या गलत है और क्या सही है एक ही सिद्धांत है जो हमारे और आपके बीच में टकराता है वो सिद्धांत ये है कि आप हमारी कही हुई बात को जबक हम शास्त्र से दिखाते हैं तो शास्त्र की उस बात से काटते हो जहां पर से आपको लग रहा है कि इससे वो बात कट रही है सवाल यह आता है कि शास्त्र में अगर दो प्रकार की बातें लिखी हुई है तो उनमें से किसी एक बात को क्यों माना जाए कोई बात नहीं हम इस बात को यब जी कि शास्त्र ये कह रहे हैं कि दोनों बातों को मानना पड़ेगा कोई बात नहीं हम इस बात आप आप ये कह रहे हो कि जो भगवान जो भगवत गीता है वो कृष्ण ने नहीं बोली ठीक नहीं बो दिखा र वो आपने आप आपने बोला कि वो काल ने बोली है ठीक जी सर जी सर काल ने बोली है पहली बात ये है गीता में कहीं नहीं लिखा है कि कृष्ण ने

02:18:44:18 नहीं बोली पहली बात ये है गीता में कहीं नहीं लिखा है कि जो स्वयं को काल कह रहा है वो कृष्ण नहीं है मगर महाभारत में लिखा है कि श्री कृष्ण ही काल है ठीक अब हमने आपको शास्त्रों से दे दिया कि श्री कृष्ण ही काल है एक मिनट एक मिनट हमने आपको शास्त्र से दे दिया कि श्री कृष्ण ही काल है ठीक अब क्योंकि आपको ये लगता है कि यहां पर तो श्री कृष्ण ऐसी बात बोल रहे हैं तो मेरे भाई हमारे और आपके बीच में जो दूरी है वो इस बात की है कि आप शास्त्र को अधूरा अधूरा स्वीकार कर रहे हो जब सरर पर तुम्ह ऐसा लग रहा है जब तुम्ह कहीं पर ऐसा लग रहा है कि यह बात विरोधाभासी है तो तुम यह बात को स्वीकार करके इस बात को काट नहीं सकते आपको ऐसा अर्थ निकालना एक मिनट आपको ऐसा अर्थ निकालना पड़ेगा जहां शास्त्र की दोनों बातों का मान रह जाए और यह बात भी मैं नहीं कह रहा हूं यह बात भी मैं नहीं कह रहा हूं यह बात भी शास्त्र ही कह रहे हैं समझ गए तो सर हम शास्त्र से दिखा आप घटमा कर आप कह रहे घट मानेंगे नहीं तुम जो शास्त्र से दिखा रहे हो उसकी बात केवल नहीं मानी जा सकती

02:19:59:24 दोनों को मिला के मानना पड़ेगा तुम अगर शास्त्र से ये दिखा रहे हो कि काल श्री कृष्ण से अलग है थोड़ी देर के लिए मान लिया तो मैं तुम्हे शास्त्र से दिखा रहा हूं कि काल और श्री कृष्ण एक है तो तुम्हारी बात को क्यों माना जाए एक गीता से गीता से दिखा दीजिए गीता कृष्ण ने बोला है दिखा दीजिए गीता महाभारत से दिखा तो रहा हूं तुम दिखाओ ना कि श्री कृष्ण काल नहीं है टट से दिखा रहे हैं गट से दिखा घट रामायण प्रमाणिक तब मानी जाएगी जब वो वाल्मीकि के अनुरूप हो कोई बात नहीं गीता को क्यों माना जाए हम गीता से दिखा दे रहे हैं ये क्या है गता गीता से दिखा दे रहे हैं अरे भाई महाभारत को नहीं मानते क्या कोई बात नहीं हम गीता से दिखा दे रहे दिक्कत क्या है आपको पूछ रहा महाभारत को मानते हो कि नहीं मानते मानते हैं तो उसम लिखा है कृष्ण ही सनातन काल है भाई जिसने जिसने इस ग्रंथ को गीता को बो इसी से दिखा दे रहे हैं आपको क्या दिक्कत है पागल हो गए हो क्या मैं पूछ रहा हूं महाभारत को मानते हो कि नहीं बिल्कुल मानते हैं बिल्कुल मानते हैं तो उस लिखा है कि कृष्ण ही सनातन काल है इसका क्या करोगे गीता

02:21:15:00 कहां से आई भैया पूछ कहां से आ एक मिनट एक मिनट एक मिनट हां बताओ हम इसी से दिखा दे रहे आपको उसम क्या दिक्कत पड़ रहा है भाई पूछ रहा महाभारत के लिखे का क्या करोगे दोगे उसे अगर वो लिखा हुआ तो उ स्वीकार करेंगे उसम कौन सी बड़ी बात हैर सचाई पता च सनातन काल है करलो स्वीकार गीता से भी मैच करना चाहिए गीता कर अरे मेरे भाई मैं तुमसे यह पूछ रहा हूं कि रामपाल ने एक जगह अपने आप को कुत्ता कहा है और एक जगह अपने आप को परमेश्वर कहा है कौन सी बात को मानते हो व तो मैच नहीं र दोनों

02:22:00:14 बात जिसने इस गीता का ज्ञान बोला उसने अपना मत्र अपने आप को तत्वदर्शी भी कहते हैं और कुत्ता भी कहते हैं यह तो मैच नहीं खा रही बात इसका मतलब आप तो भाई कह रहे हैं बिल्कुल सही कह रहे रामपाल जी कुता गता क्या रहे हो गता मैं कह रहा हूं थोड़ी देर के लिए मैं मान ले रहा हूं गीता में कोई ऐसी बात लिखी है जो महाभारत की चीज को विरोध कर रही है ठीक है मैच नहीं हो रही तो यह कहां पर लिखा है यदि कहीं शास्त्र में कोई ऐसी बात आ जाए जो पहली वाली बात की गलत पहली वाली बात को गलत साबित कर दे जो पहली वाली बात मानी नहीं जाएगी य कहां लिखा है क लिखा है भाई जिसने गीता बोला है वो खुदरा सचाई से कोई मतलब नहीं है बाबू अपनी आत्मा में झाक कर देखो पागल हो ग तुम मैं तुमसे य पूछ रहा हूं बाबू बाबू मेरी बात सुन लो बाबू महाभारत में अगर कुछ लिखा है और तुम्हारे हिसाब से तुम्हें लग रहा है कि गीता में कुछ और लिखा है ठीक है मैंने

02:23:15:21 मान ली तो उस लिखे हुए से महाभारत की लिखी हुई बात नहीं मानी जाएगी यह कहा लिखा है और मैं तुम्ह बता रहा हू मैं तुम्ह बता रहा हूं कि यदि धर्म में दो जगह दो अलग अलग बातें आएंगी तो दोनों को मानना है यह धर्म में लिखा है उस इसको बाबू को कुछ नहीं समझना है इसको केवल अपनी रट तोती लगानी है य देखो

02:24:05:03 यह देखो जहां शास्त्रों में जहां सुति शास्त्रों में थोड़ा पढ़ के सुना दीजिए एक मिनट जहां शति हों में विरोध है वहां पर दोनों ही अर्थों को धर्म माना है अगर विरोध है भी अगर विरोध है भी सुनो अगर विरोध है भी तो भी हमें दोनों को मानना पड़ेगा किसी एक को नहीं मान सकते तो इसका मतलब कि अगर तुम्हारे हिसाब से गीता में कहीं लिखा है श्री कृष्ण काल नहीं है तब भी आप इस बात को काट नहीं सकते कि श्री कृष्ण ही काल है समझ गए कुछ आया बुद्धि में जैसे उसम और कुछ लिखा है उसको हम बता रहे आपको गीता में यह भी लिखा है कि कृष्ण कृष्ण के माता पिता भी है इस गीता में भी लिखा है हम इसको उसने अभी महाभारत का उसने दिखाया ना कि वासुदेव ही देवकी के गर्भ से जन्म लेते हैं भगवान श्री भगवान जो सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है वो देवकी के गर्भ से जन्म लेते हैं और प्रकट होते हैं वो लीला

02:25:20:09 पूर्वक दिखाते हैं कि मैं जन्म ले रहा हूं ये बताओ कबीर ये बताओ एक बात बताओ मुझे एक बात बताओ कबीर जो है वो परमेश्वर है भाई इस इस गीता के अंदर ये परमे वो बताओ कबीर परमेश्वर है हम उस पर बात नहीं कर रहे हम गीता पर बात कर रहे हैं आपको अभी बात कर रहे हैं रुक जाओ हम कबीर पर बात कर रहे हैं करनी है कबीर पर बात की नहीं करनी है उस पर नहीं करना है हमको गीता पर बात करना है नहीं करना है तो जाइए चलिए जाइए अगर अगर आपको गरु पुराण पर बात करना तो बात कर सकते हैं गरु पुराण म के बारे कबीर बात नहीं करनी है कबीर पर बात करनी है कि नहीं करनी है कबीर कर है जब आप कबीर में बात करनी है बात करना करनी है पहले गीता प बात करिए अरे मेरे भाई तुम्हारे पास गरुण पुराण है तो ये कहा लिखा है कि महाभारत मानी नहीं जाएगी तो हम स्वीकार तो हम स्वीकार कर रहे हैं कहा मना कर रहे श्री कृष्ण ही सनातन काल है कहां स्वीकार कर रहे हो गरुड़ पुराण महाभारत में तो य भी लिखा हुआ है श्री कृष्ण

02:26:35:12 ही सनातन काल है स्वीकार करो स्वीकार कर रहे है कि जो काल है भ उसको स्वीकार काल को स्वीकार ही करते हैं नहीं सनातन काल है बोलको कैसे बो कितना भागोगे सच्चाई से कितना भागोगे लानत है तुम पर लानत है तुम हम प्रूप कर रहे तो आप कह रहे तुमसे ये पूछ रहा हूं ये कहा लिखा है कि अगर तुम्हारे पास यहां पर कुछ लिखा है तो यहां का लिखा हुआ मान्य नहीं होगा यह कहां लिखा है मैंने तुमको बता दिया दोनों जगहो का लिखा हुआ धर्म है तुम मुझे दिखाओ कि अगर यहां पर कोई लिखा होगा तो बाबू भाई के कहने पर यह बात मानी जाएगी यह बात नहीं मानी जाएगी दिखाओ

02:27:22:09 ग ग गीता को कोर्ट से इसको खारिज करवा दीजिए गीता अगर ऐसी बात है तो भाई आप लोग मानते नहीं गीता को अरे गीता कहा से आई है बताओ कहां से आई है गीता आप ही लोग के माध्यम से आए है लेकिन आप लोग इस ग्रंथ को स्वीकार नहीं गीता किस शास्त्र का अंश है यह बताओ हम उसको जब नहीं अभी वहा तक पढ़े कैसे स बाब तुम पागल हो गए हो कुछ नहीं पता है तुम्ह गीता महाभारत का अंश है किसका अंश है इसमें कृष्ण जी के माता-पिता भी लिखा हुआ है हम इसको प्रूफ कर दे रहे भैया इसको हटाओ ये कुछ जानने नहीं आया है इस ह तुमसे मैं पूछ रहा हूं गीता किसका अंश है ये कुछ नहीं बो बात बोलेगा ये अपने मन की बात बोलेगा आप बता दीजिए हम उसको नहीं पढ़े उसको हम नहीं पढ़े हैं आप बता दीजिए उसको पूछ रहा हूं कि गीता के लिखे हुए के कारण महाभारत को नहीं मानना है यह कहां लिखा है मेरे

02:28:30:00 भाई जो सच्चाई होगा जो तत्व ज्ञान से जानता होगा मैंने सवाल क्या पूछा है मुझे शास्त्र से प्रमाण दो कि गीता का लिखा हुआ महाभारत का मान्य नहीं होगा यदि गीता में नहीं लिखा है तो यह कहां लिखा है ये कहां लिखा हुआ है कि आप घट रामायण को नहीं मानेंगे य कहा लिखा हैता क्योंकि गट रामायण यदि वाल्मीकि रामायण का विरोध करेगी तो नहीं मानेंगे तुलसीदास जी ने लिखा है तुलसीदास जी का जितना भी लिखा हुआ सबको गलत साबित कर दीजिए तुलसीदास का लिखा माने होगा तो नहीं मानेंगे तुलसीदास जी ने कुछ ऐसा नहीं लिखा जो वाल्मीकि रामायण का विरोध हो आपको हम दिखा देरा फोटो उसका दिखा दे रहे हैं उसमें लिखा क्या चीज है दिखाओ

02:29:21:02 सबसे बड़ी इनकी भूल तो यह है कि परमात्मा संघार नहीं करता है संघार करने वाला कोई और है कंफ्यूजन यही पर है इन लोगों का कि काल करता है जो कुछ करता है परमात्मा कुछ नहीं करता हैन कुछ नहीं है बस कपट का आश्रय और कोई बात नहीं अरे घट रामायण क्यों ला रहे हो भाई कौन है घट रामायण वाले हम नहीं जानते य देखि तुलसीदास हाथरस वाला लिखा हुआ है लसम मानस की बात कर रहा हूं तुम तो अपनी कुछ भी लिख लाओ सब कुछ मान लेंगे क्याई कहां से छपा उसको तो हम दिखा दे रहे है छपा कहा से है अरे तो ऐसे तो अभी बोल रहा य शिवांश नारायण द्वेदी की लिखी हुई कबीर सागर हैलो लो लिख देता हूं लो कबीर सागर लो और इसको कल छ दूंगा

02:30:13:00 मैं रामपाल तत्वदर्शी नहीं है बाबू भाई कबीर दास जी क्या सृष्टि का संघार करते हैं इस गीता को अगर आप लोग गलत साबित कर देंगे तो जीवन भर आप लोग का चेला बन जाऊगा गीता को गलत साबित कहा कर रहे ल नहीं है खा दि श्री कृष्ण अरेता मुझे दिखाओ जो काल है व श्री कृष्ण से अलग है वो दिखाओ जी दिखा रहे हैं हां दिखाओ बेवकूफ कहीं के मूर्खों की

02:31:08:22 टोली सब कुछ बोलने के बाद गीता गलत है क्या गीता गलत है क्या जो पूछ रहा हूं उसका आंसर नहीं है ग मिला लीजिए गीता बहुत बड़ा तुमको मौका मिल गया बोलने का बोलो गीता अध्याय 14 श्लोक नंबर पा लिए हा हा क्या लिखा है पढ़ो अरे क्या लिखा है पढ़ो जी जी पढ़ रसरा श्लोक से पढ़ रहे हैं तीसरा श्लोक से हा हां लिखा हु हे अर्जुन मेरी महत

02:31:55:26 ब्रह्मा रूप मूल प्रकृति संपूर्ण भूतों की योनि है अर्थात गर्भधान का स्थान है और मैं उस योनि में चेतन समुदाय रूप गर्भ को स्थापन करता हूं उस जड़ चेतन के संयोग से सब भूतों की उत्पत्ति होती

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02:32:10:22 है इसके बाद इसके बाद आलोक है कौन सा श्लोक है ये श्लोक नंबर तीन का है ठीक बोलो आगे बोलो चौथा श्लोक में बोल रहा है कि हे अर्जुन नाना प्रकार की सब योनियों में जितनी मूर्तियां अर्थात शरीर धारी प्राणी उत्पन्न होते हैं प्रकृति तो उन सब की गर्भ धारण करने वाली माता है और मैं बीज को स्थापन करने वाला पिता हूं इसके बाद पाचवा श्लोक में देखिए लिखा है हे अर्जुन सतोगुण रजोगुण अ तमोगुण यह प्रकृति से उत्पन्न तीनों अविनाशी जीवात्मा को शरीर में बांधते हैं ये तीनों गुण है रज गुण ब्रह्मा स विम यह बताओ कि यह कहां लिखा है कि यह जो गीता बोल रहा है वह काल है और काल जो है व श्री कृष्ण से अलग है यह कहा लिखा है यह तो हम भी पढ़ रहे हैं इसमें इसमें यह बता रहा है कि जो रज गुण स क्या बता रहा है बोलो बोलो ये बता रहा है कि रजो गुण सतो प्रकृति से उत्पन्न हुए है ग धारण करने वाली माता है और मैं इसके अंदर बीज स्थापित करता हूं

02:33:25:24 मैं पिता हूं यह बोल रहा है ये बोल रहा है य है ब्र से अलग कोई काल है य कहा लिखा है यह स्पष्ट नहीं कर रहा कि य ब्रह्मा विष्णु म इसके बच्चे है और माता पिता पूछ रहा हूं कि यह जो काल है वो श्री कृष्ण से अलग है यह बताना ब्रह्मा विष्णु महेश की बात कहां से आ अभी अभी ब्रह्मा विष्णु महेश का सवाल चल रहा है क्या तुमको हमें यह बताना है कि जो काल है जो तुम्हारे हिसाब से जो गीता है व कृष्ण ने नहीं बोली है व किसी काल ने बोली है वो जो काल है व कृष्ण से अलग काल है व कृष्ण नहीं है बोलो जी सर जी जी बता गता गीता अ गीता अध लोक नंबर 13 खोलिए खोल लेंगे खोलते रहो करवाओ बेज्जती अपनी और रामपाल दास की

02:34:22:25 अच्छा भला इनको मैं बता रहा था तो सर क्या करें कहां क्या मतलब बड़े सीधे बन के पूछ रहे थे इनको करना था अपना कुतर्क वो तो सर आपके इस डिबेट में देख रहे हैं जनता देख रही है पूरी जनता बोलो कौन सा कौन सा बताया आठवे का आठवे का 13 श्लोक श्लोक का अर्थ यह है कि ओम इस एक अक्षर रूप ब्रह्मा को उच्चारण करता हुआ और उसके अर्थ स्वरूप मुझ निर्गुण ब्रह्मा का चिंतन करता हुआ शरीर को त्याग कर जाता है वह पुरुष परम गति को प्राप्त होता है तो करिए ओम का परम गति जी पाड़ी जी विषय बदल जाएगा बहुत बहुत दिक्कत होती है फिर विषय बदलता है तो रुक जाइए हा इसमें कहां लिखा है कि श्री कृष्ण से अलग कोई काल है इसने बोल रहा है कि मुझ ब्रह्म का ओम मंत्र है ओम मंत्र का जाप करता हु रहा हूं श्री कृष्ण से कोई अलग काल है कहां लिखा है बोल रहा है कि मैं ब्रह्म हूं कृष्ण थोड़ी बता रहा है कि मैं कृष्ण हूं ये कह रहा है मैं ब्रह्म हूं अरे पहले यह बताओ कि यह कहां लिखा है कि गीता को बोलने वाला कोई श्री कृष्ण से अलग काल है तब तो तुम्हारी बात मानेंगे मैं पूछ रहा हूं ये कहां लिखा है

02:35:38:01 दिखा रहा हूं दिखा रहा हूं एक मिनट तुरंत दिखा दे रहा दिखा बारबार दिखाओ अरे वो घुमाते रहेगा आप क्या मतलब एक घंटे से यही चल रहा है यही देखिए स सचाई जब दिखाते तो आप लोग धीरे से साइड कर देते हैं क्योंकि आप लोग हारते हैं देखो बाबू फ बोलोगे तो तुम्हारे कैमरे के अंदर घुस के कटा मारना पड़ेगा मुझे एक घंटे से तो जेल रहे भैया हद होती

02:36:11:21 है दिखाओ भैया दिखा रहा हूं आज तो शिवान जी अपना आप र सर तो ऐसा लग रहा है फट के बाहर आ जाएगा हमारे स्क्रीन के ऊपर जो हालत हो गई है ना सबकी हालत यही हो गई है गीता अध्याय शलोक नंबर गीता गीता अध्याय सात श्लोक नंबर 25 कैमरे में घुस के कोई कंटाप मार नहीं सकता है तो उसका कोई अर्थ नहीं है केवल विनोद है गीता अध्याय सा लोक नंबर इसमें लिखा हुआ है कि अपनी योग माया

02:37:06:16 से छिपा हुआ मैं सबके प्रत्यक्ष नहीं होता इसलिए यह अज्ञानी जन समुदाय मुझे मुझ जन्म रहित अविनाशी परमेश्वर को नहीं जानते अर्थात मुझे जन्मने मरने वाला समझता है

⬜ Not used yet · 02:37:20:02 – 02:38:00:15 (0:40)

02:37:20:02 राइट इसमें यह कहा लिखा है कि यह कालने यह काल बोल रहा है और काल श्री कृष्ण से अलग है पहले इसको देख लीजिए क्या कर रहा है कि मैं जन्मने मरने वा बात बताओ की काल ने बोली और काल श्री कृष्ण से अलग है दो चीज दिखाओ काल श्री कृष्ण से अलग है इसने कह रहा है कि मुझे जन्मने मरने वाला प्राणी समुदाय समझ रहे ज कोई अगर ये बोलेगा मुझे ज जन्ने मरने वाला प्राणी समझ करके मुझे साधारण समझता है तो वो श्री कृष्ण नहीं है एक चक्र लोक दोबारा दोहरा दे रहे हैं समझ लीजिए यह कह रहा है कि अपनी योग माया

02:38:00:15 से छिपा हुआ हूं मैं सबके प्रत्यक्ष नहीं होता सबके प्रत्यक्ष नहीं होता इसलिए यह अज्ञानी जन समुदाय मुझ जन्म रहित अविनाशी परमेश्वर को नहीं

⬜ Not used yet · 02:38:13:14 – 03:10:48:00 (32:35)

02:38:13:14 जानते अर्थात मुझे जन्मने मरने वाला समझते हैं श्लोक को समझिए लोक इससे कहा से दुआ किय जो बोल रहे हैं वह श्री कृष्ण नहीं है ये तो कह र है मैं छिपा रता किसी के सामने ही नहीं होता हा श्र कृष्ण का भी रूप है श्री कृष्ण का ही ऐसा एक रूप है जो सबके सामने नहीं आता यह भी तो क रहा है मैं जन्मने मरने वाला नहीं हूं देखिए क रहा है श्री कृष्ण भगवान श्री कृष्ण भगवान का जन्मने मरने वाला रूप नहीं है ऐसा भी एक रूप है उनका जो जनता मरता नहीं है और बोलो च अ तो ये कह रहा हूं कि अगर यहां पर यह कह दिया गया कि वो जनता मरता नहीं है तो वह श्री कृष्ण से अलग कोई काल है यह कहां लिखा है अगर वह यह कह रहा है कि व जनता मरता नहीं है तो वह श्री कृष्ण से अलग हो गया यह कहां लिखा है य य श्लोक प्रूफ कर रहा है 14 का एक 14 का एक से लेकर पाच लोक त वो प्रूफ किया आपको अच्छा तुम ये कह रहे हो एक मिनट एक मिनट एक मिनट तुम ये कह रहे हो कि ब्रह्म ये कह रहा है ये जो काल काल काल ब्रह्म ये कह रहा है कि मैं जनता मरता नहीं हूं जबकि श्री कृष्ण

02:39:28:21 का जन्म वो होता है मृत्यु जी ठीक है जी अच्छा अब यह बताओ कि काल ने कहीं पर गीता में यह कहा है कि हे अर्जुन काल बोल रहा है ना हम काल ही बोल रहा है ना गीता तो काल काल ने भगवत गीता में कहीं पर यह कहा है क्या कि तेरे और मेरे बहुत से जन्म हो चुके जी बोला है बोला कहा यहां वो ये कह रहा है मेरी जन्म मृत्यु नहीं होती वहां वो कह रहा है मेरी जन्म होता है भाई दोनों बात तोय प्रूफ किया दो तरह से बात बोला इसने तो फिर कौन सी बात हो क्यों मान रहे

02:40:10:14 हो भाई ये जब दोनों तरह का बात बोल रहा है मैं पूछ रहा हूं कौन सी बात और क्यों मान रहे हो काल ही यह बोल रहा है ना मेरी जन्म मृत्यु नहीं होती है मेरी मुझे जन्म मरने वाला समझते मूर्ख है और काल ही बोल रहा है तुम्हारे हिसाब से कि मेरे और तेरे बहुत से जन्म हो चुके हैं य यह बोल रहा है कि मनुष्य की भाति में जन्मने मरने वाला नहीं हर समय जन्मता मरता नहीं हूं जैसे मनुष्य 100 साल में मर जाता है जन् मरण होता है जन् मरण होता है इसका मरण अगर होता है मनुष्य की भाति नहीं होता है तो श्री कृष्ण से अलग हो गया यह कहां लिखा है हां इसी में लिखा है ये कह रहा है कि मैं अपनी योग माया से छिपा रहता हूं सबके प्रत्यक्ष नहीं होता योग माया से छिपे रहते हैं तो वो श्री कृष्ण से अलग है यह कहां लिखा है मेरे

02:41:03:22 भाई अरे यार जब ये 11वां अध्याय में विराट रूप दिखाया और सबको देखना अर्जुन ने जब देखा तो उसके मुंह में सब घुस उड़ रहे हैं वो सबको खा रहा है चबा रहा है ये बताइए कोई भगवान खाता है क्या ये तो राक्षस लोग खाते हैं ऐसे क लिखा है ये कहां लिखा है भगवान नहीं खाता क्या भगवान किसी जी पहले मैं तुम्ह लिखा दिखाऊंगा पहले तुम मुझे बताओ भगवान भगवान नहीं खाता है यह कहा लिखा है भगवान किसी जीव को नहीं खाता है भगवान क्यों न नहीं ता है य लिखा

02:41:38:14 है अरे यार वो दयालु भगवान है तो काहे के लिए खाए कृ भगवान तुमसे पूछ रहा हूं भगवान नहीं खाता है यह कहां लिखा है जी गोविंद जी बोलिए वो ना बाबूराम जी बस आपसे इतनी बात जानना चाह रहे हैं शिवास जी कि आपने यह जो बात पढ़ी है कि भगवान नहीं खाते हैं किसी को भी या नहीं उसको ग्रहण कर सकते ये आपने कहां पर पढ़ी है वो ये नहीं कह रहे कि आप गलत कह रहे हो वो पूछ रहे हैं कि कहां पर किस शास्त्र में पड़ा क्योंकि आपकी जो भी बात होगी ना वो शास्त्र अनुसार होनी चाहिए है ना तो आप अपने से बात नहीं कह सकते कि भगवान जाके दुकान से टॉफी नहीं ले सकते भगवान इसको खा नहीं सकते भगवान वहां पर बैठकर मंजीरा बजा के कीर्तन नहीं कर सकते ठीक है आपकी बात पूछ हम पूछ रहे हैं कि कहां पढ़ा आपने यह बता प्रूफ कर रहे आपको इसको आठवे अध्याय कावा लोक खोलिए यार य भाई ये टाइम वेस्ट कर रहे हैं कुछ नहीं कर रहे हैं बार बार बस ये कर लो वो कर लो तु मुझे ब बाब भैया बाबू भैया मैं आपको यह पूछ रहा हूं एक मिनट अब आप शलोक मत पूछो अब आप मुझे बता दो क्या भ गीता का कोई ऐसा श्लोक है जिसमें य लिखा हो कि भगवत गीता श्री

02:42:53:21 कृष्ण से अलग किसी काल ने बोली है है क्या बिल्कुल बोली है दिखा जी श्री कृष्ण यह लिखा है श्री कृष्ण से अलग काल ने बोली है तभी लोक खोलो फालतू मत बोलो उसमें श्री कृष्ण का कोई नाम तक नहीं है कि श्री कृष्ण ने बोला होगा रहा नाम नहीं है मगर बोल तो शरीर किसका है अभी तुम बोल रहे हो क्या कोई और बोल रहा है ये बताओ ये बताइए कोई प्रेत बन के सी पर अभी अभी एक मिनट मैं पूछ रहा हूं अभी तुम बोल रहे हो या कोई और बोल रहा है अभी तो मैं बोल रहा हूं लेकिन जब कोई प्रेत बढ़ सिर पर बैठ जाएगा वो तो बताओ क्या जब तुम बोल रहे हो खुद मुख से तो हमें यह पूछने की और तुम्हें बताने की आवश्यकता है कि अभी मैं ही बोल रहा हूं इसने अपने एक मिनट मैंने तुमसे जो सवाल किया उसका आंसर दो बाबू अभी जब तुम बोल रहे हो मेरे सामने तो क्या मुझे तुमसे पूछने की और तुम्हें मुझे बताने की आवश्यकता है कि तुम ही बोल रहे हो अगर गीता गी मैंने जो पूछा है उसका जवाब दो मैंने जो पूछा उसका जवाब

02:44:08:26 दो हा हा पूछने की जरूरत नहीं है पूछने की जरूरत नहीं है नहीं है ना पूछने की ना बताने की ना पूछने की ना बताने की अब सुनो एक मिनट एक मिनट प पट को हमारा बात आपका पकड़ गया रुक जा एक मिनट एक मिनट भगवत गीता का ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने भगवान श्री कृष्ण से भिन्न किसी काल ने दिया है यह तुम नहीं बता पाए अब मैं बताता हूं भगवत गीता का ज्ञान कृष्ण ने ही दिया है और कृष्ण ही काल है मैं तुम्हें दिखा देता हूं हम बता रहे आप बताएंगे रे पास बाबू कहीं लिखा है कि काल है श्री कृष्ण से अलग है आपने बोला कि अगर सामने से कोई बात कर रहा है तो ये बताने की जरूरत नहीं है कि किसी और ने बोल रहा है आप इस बात को बोले अब लेकिन अर्जुन ने 11 अध्याय में पूछा कि हे उग्र रूप वाले आप कौन है आपको देख करके मुझे बहुत डर लाग सहस्त्र बाहु आप कौन हो तो उसने बोला कि मैं काल हूं सबको खाने के लिए आया हूं अर्जुन तेरे अलावा किसीने मेरा विराट रूप को किसी ने नहीं देखा तो इससे सिद्ध हो गया के काल उनसे अलग है बिल राइट क खा है कहा लिखा

02:45:24:18 है अरे यार 14 अध अगर किसी व्यक्ति ने अगर किसी व्यक्ति ने अपना उग्र रूप दिखा दिया किसी को और वहां पर भावा वेश में आकर के व्यक्ति यह बोल रहा है कि मैं आपको पहचान नहीं पा रहा हूं आप कौन है तो वह अपने रुद रूप को दिखा रहा है कि मैं काल हूं तो वह काल श्री कृष्ण से अलग है यह कहां से हो गया भाई उसने यह क्यों नहीं क दिया मैं श्री कृष्ण हूं उसने तो अच्छा अच्छा ठीक है अब ये बताओ कि रामपाल दास जी ने ये क्यों नहीं कह दिया कि मैं तत्वदर्शी हूं ये क्यों कहा कि मैं कुत्ता हूं उन्होंने ये बोला है कि मैं जगत गुरु तत्वदर्शी उनके पुस्तक में देखिए लिखा हुआ है उन्होंने बोला मैं जगत भैया इनको सुनाओ इनको सुनाओ मैं कुत्ता हूं कह रहे हैं ये सुना है तुमने कि सुनना है उन्होंने बोला है कि मैं उस परमात्मा का कुत्ता हूं 24 घंटा उनका ज्ञान को भोगते रहता हूं आपने बोला है कि मैं तुच्छ सा जीव हूं तुच्छ जबरदस्ती करते हैं यार अरे मैं पूछ रहा हूं उन्होंने बोला है मैं तुच्छ सा जीव

02:46:34:26 हूं देखिए हमारे लास्ट हो रहा है अगर आप और सुनली तो खत्म हो रहा है मेरा आपसे बहुत सुन चुके आप जा सकते हैं ठीक है जी कोई बढ़िया आया कर एक मिनट बाब भाई एक मिनट किधर गए किधर गए बाबू भाई जशवंत जी आए हो बाबू भाई लेट गए नहीं इनको लगता है कि परमात्मा सार नहीं करते गीता में ही अध्याय 13 के 16 श्लोक में लिखा है वे परमात्मा स्वयं विभाग रहित होते हुए भी संपूर्ण प्राणियों में विभक्ति की तरह स्थित है और वे जानने योग्य परमात्मा ही संपूर्ण प्राणी के उत्पन्न करने वाले तथा उनका भरण पोषण करने वाले और संघार करने वाले हैं लो वही

02:47:29:24 परमात्मा चला गया चला गया यह इनको मैं बताना चाह रहा था मैं य गीता में लि रामपाल दास की तरफ से चलिए अब एंड करते हैं अब हो गया बाबू भाई मैं आपको कोई थप्पड़ पपड़ नहीं मारने की बात कर रहा था मैं टीवी में घुसकर जो च चित्र था एक टीवी में घुसकर कोई किसी को थप्पड़ नहीं मार सकता है टीवी में घुसकर किसी को चित्र को जो है विनोद कर रहा था कि मैं चित्र को जो है थप्पड़ मार दूंगा टीवी में घुसकर तो ये काल्पनिक बात है यह किसी को कोई धमकी नहीं है मारने की ऐसा कुछ नहीं है तो ऐसा ना समझे कि दोबारा ना आए यह सोचते हुए कि हमने आपको जो है ऐसी कोई वो मारने मारने की बात कह दी मगर आप भी थोड़ा सा बुद्धि विवेक लेकर के आए कि जो प्रश्न आपसे बारबार पूछा जा उस प्रश्न का उत्तर ना दे कर के आप अपने हाथ में जो लेकर आए हैं बस उसी पर बात कर रहे हैं तो टीवी में घुसकर जो चित्र है उसको हाथ लगाने की रूप में मैंने ये बात कही है वस्तुत वास्तविकता ये है कि आप हमारे भाई हैं और भटके हुए तो बात अलग है मगर आपको ऐसा कोई अभद्र आचरण आपके साथ नहीं

02:48:44:25 हो सकता चलिए गीता मानते हैं पर महाभारत नहीं मानते हैं अगर कहीं पर इनको लग रहा है कि काल काल बोल रहा है तो वोह बात कट जाएगी जो महाभारत में लिखी है हां भाई जसवंत रावत जी बोलिए जय श्री राम भाई जी जय श्री राम भाई जी पहले मैं इनके लिए कुछ कहना चाहता हूं जी मैं मैं कहना चाहता हूं पहले तो इनको यह पूछो प्रकृति है क्या प्रकृति अपन को मिलेगी गीता अध्याय सात के श्लोक नंबर चार और पाच में मैं बताऊं प्रकृति क्या है पहले इनको यह पूछो प्रकृति श्री कृष्ण से अलग नहीं है वही श्री कृष्ण है वही प्रकृति है आपको एक बात बताऊ मेरी बात सुनिए जसवंत रावत राजावत जी देखिए हा जी हा जी हम सब जानते वास्तविकता क्या है इनके साथ आप शास्त्र के प्रमाण देते रहोगे ये जो शास्त्र के प्रमाण इन्होंने रटे हैं यह केवल उसको ही दिखाएंगे

02:49:59:27 आप कितने भी शास्त्रों के प्रमाण दे दो वह सब इनके लिए गलत है क्योंकि इनके पास जो शास्त्रीय प्रमाण है चुनिंदा वही सही है उनका अर्थ भी वही सही है जो इनको तिचा दर्शी जी जाने से पहले दिखा गए पूछने की ये है कि ईश्वर का आविर्भाव रो भाव नहीं होता है चले गए फिलहाल तो मगर इनसे पूछने की बात यह है कि ईश्वर का यदि आविर्भाव तिरो भाव नहीं होता है तो जहां पर इनका ईश्वर बैठा है सतलोक वो किसने बनाया सिंपल अभी कल वो बोल के गया ना कल वो बोल के गया कि वो जगत से पहले अव्यक्त रूप में था तो आर भाव भाव हो गया अब इनको यह भी बताए कि अभी तो फिलहाल नहीं है महा भारत की किताब कि श्री कृष्ण ने अभिमन्यु को जीवित क्यों नहीं किया मैं प्रमाण सहित अरे देखिए वो सब बातें बहुत अलग है उनको कुछ भी कहते रहोगे वो रट्टू राट रट के जो बात आते हैं वो वही बस बोलते रहेंगे जब मैंने उनसे कई बार पूछा ये कहां लिखा है कि अगर यहां पर कुछ लिखा है और वहां पर उसके विरुद्ध लिखा है तो इनमें से कोई एक बात मान ली जाएगी दूसरी बात कट जाएगी

02:51:15:06 ये कहां लिखा है अरे मैं ये बता रहा कक वो उन्होंने वही रटा है वो वही बोल सकते हैं जितनी चाबी भरी जेल धाम निवासी ने उतना लिखलो ना बस बस बस गीता ज्ञान श्री कृष्ण ने अर्जुन को दवारा क्यों नहीं दिया गीता ज्ञान इनको ये पूछो गीता ज्ञान की पुनः उनको एक कथा सुना के स्मृति करा दी थी महाभारत पुराण को पढ़ो पता चल जाएगा किसी और दिन लेते हैं जी ठीक श्रीराम गुरुकुल गोविंद जी जय श्री रामसे जसवंत जी कह रहे हैं कि इनको प्रकृति का नहीं पता तो जसवंत जी जैसे जितने भी हमारे भाई बंधु है ना ठीक है उनको मैं पहले एक बात बता देता हूं कि प्रकृति गहन विषय है जिस व्यक्ति को यह नहीं पता है जिनके चेलों को कि प्रकट होने का मतलब क्या होता है हमारी इंद्रियों के विषय क्या होते हैं हमारी इंद्रियों के नाम क्या होते हैं ठीक है आविर्भव तिरो भाव जिस पर इनकी दुकानदारी चल रही है ठीक है जो मेन प्रोडक्ट है इनके ठीक है उसका मतलब क्या होता है और वो कहां पर लिखा है ठीक है इन इन सब ये बेसिक क्वेश्चन मैंने कल इनसे पूछे थे कि भाई अध्याय श्लोक में मंत्र में अंतर क्या होता है तो आप इनसे कोई बहुत बड़े

02:52:30:25 जो ज्ञान की ना उम्मीद मत रखा करिए ना ही इनसे कोई अति विषय जो गहन विषय है जो ज्ञान पूर्वक या जो आप कह सकते हो कि बड़े विषय हैं उन परे चर्चा ना किया करें इनसे ठीक है हालांकि मैं आपको एक बात बताता हूं मैं परसु चोत पढ़ भी रहा था पढ़ा भी रहा था जो वशिष्ट जी हैं जो योग वशिष्ट में जो वशिष्ट जी हुए हैं वह भगवान श्री राम को पढ़ा रहे हैं ठीक है उनको जो दे रहे हैं ज्ञान दे रहे हैं उन्होंने इस बात पर भी बहुत अच्छी बात कही है कि अनाधि कारी को ज्ञान देना मनुष्य स्वयं भी उससे यूत होता है अपनी महिमा से और उसका तो कुछ जाता नहीं ठीक है इसलिए विशेषक यह बात का भी ध्यान रखना है कि वशिष्ठ जी एक महापुरुष थे ठीक है ऋषि थे तो उनकी बातों को भी थोड़ा सा हमें याद रखना चाहिए इसलिए ऐसे व्यक्तियों के साथ इन सब चीजों इनको इन्हीं की बात से काटना उत्तम है मेरे हिसाब से हां बस बस गीता तड़वी जी आप आ जाइए और ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करिए बस सीधी बात आप आ जाइए मेरे को जो पता है वह मैं आपकी सेवा में लगा दूंगा ठीक है जितना मेरे को पता होगा वो मैं आपकी सेवा में लगा दूंगा ना ठीक है बाकी

02:53:46:01 जो मेरे से गलती होगी वो मैं आपसे पूछ पूछ लूगा लोकेश पांचाल जी कह रहे हैं कलयुग के ब्राह्मण गुंडे से कम नहीं आज शिवांश भाई का जो रूप दिखा उससे स्पष्ट हो गया लोकेश पांचाल जी अपने गुंडे को देखिए जिसने बोला है कि दुर्गा माता के साथ क्या क्या होता है और यह वही व्यक्ति है जिसको मैंने पंक्ति बोली है ना विनोद पूर्वक जिसमें की किसी को छुआ नहीं जा सकता टीवी में घुस करके यह वही व्यक्ति है जो कल अभी एक दो दिन पहले य बोल रहा था कि दुर्गा माता के साथ ये सब हुआ है क्यों हुआ है क्योंकि हमारे दर्शी संत जी ने बोला है तो अपने गुंडई पर ध्यान दीजिए और ज्यादा दिक्कत है तो आ जाइए देखा था आप आए थे जब लाइव में जब लाइव में आए थे बोला बोल रहे थे मेरे मेरा जो ईश्वर है उसको दुख होता है रोता है वो ये बंदी छोड़ है ये बंदी छोड़ है ऐसा छू से ईश्वर वो रो रहा है बंदी छोड़ तो हनुमान जी है ना छूट ही बंदी महासुख

02:54:53:16 मानते थोड़ अजर अमर है साथ चिरंजीवी है उनको तो मानते ही नहीं है नहीं माने हमने इनकी इनकी कोई हमने वो कोई इनकी स्ट थोड़ी देनी सत्य बात सत्य बोलने वाले भाई साहब आपको क्या प्रॉब्लम है चलिए ठीक है आज की चर्चा वो रही लोकेश पांचाल जी आप यह लिखा दिखाइए कि शास्त्रों में यदि दो अलग-अलग जगह दो अलग अलग प्रकार की बातें हो रही है तो उनमें से वही बात माननी है जो लोकेश पांचाल ने स्वीकार की है या उनके तिरछे दर्शी देल धाम निवासी ने स्वीकार की है हां भाई कोई और है जो आना चाहता है उनका नेट खत्म हो गया उनकी पिक्चर पूरी हो

02:55:42:19 गई पिक्चर खत्म पैसा हजम सत्य जी अगर आपकी माता ने निष्ठा से दुख पिलाया तो आप भी चेहरा दिखाकर आइए वहा पीछे से पीठ पीछे बोलने से कुछ नहीं होगा ठीक है ऐसे कुत्ते भते रहते हैं नहीं पड़ता महामंत्र वेदों में कहा लिखा है भाई यह आप क्राइटेरिया डिसाइड मत करो कि वेदों में क्या लिखा है क्या नहीं लिखा है यह देख लीजिए भैया आप अभी कुछ बातें कर रहे थे यह देख लीजिए कौन है क्या है क्या नहीं है हेलो लोकेश पांचाल जी पॉइंट टू बी नोटे कुछ दिखाई दे रहा है क्या स्क्रीन पर अरे यह कोर्ट से

02:56:49:26 यह सिक्योरिटी है भाई इसमें क्या तकलीफ है बोल रहा है यह सिक्योरिटी है अच्छा मान लो की ईश्वर तो किसी को खाता मारता नहीं है याय ईश्वर के लोग तो खाने मारने के लिए बंदूक लेकर चल रहे हैं और ईश्वर को ईश्वर के लोगों को बंदूक की क्या आवश्यकता पड़ रही भाई जो स्वयं परमेश्वर है उसको बंदूक लेकर चलना पड़ रहा है कहां गए लोकेश पांचाल हेलो लोकेश पांचल हेलो हां तो इसका मतलब आप यह कह रहे हैं कि पीएम के पास होती है तो इसका मतलब अपनी रक्षा में की जाने वाली जो हिंसा होती है वो गुंडई नहीं होती है है ना और दूसरी बात यह तो परमेश्वर है यह तो कभी किसी को मार खा नहीं सकते हां तो यह जो हमने बातें बोली है ना हमने उसको बोली है जो दुर्गा माता के लिए गंदी बातें बोलता है अश्लील बातें बोलता है समझे बिल्कुल और ऊपर आ जाओ भाई ज्यादा कमेंट कमेंट मत

02:57:57:00 खेलो और वह सत्य क्या कह रहे थे वेदों में महामंत्र लिखा दिखाओ मैं कह रहा हूं वेदों में लिखा दिखाओ कि तत्वदर्शी रामपाल है ऐसे अगर चलोगे तो फिर ऐसे ही पूछेंगे केवल वेद ही नहीं है वेदों का वेदों का वेदों के साथ साथ पुराण भी है उपनिषद भी है और गीता भी है महा भी है तो आप यह डिसाइड मत करो कि केवल वेद में लिखा दिखाओ वेदों के आधार परही पुराण है वेदों के आधार पर उपनिषद है सनातनी वह है जो इन सबको

02:58:36:03 माने आपका कौन सा कमेंट दिखाना है वेदों में गणपति का नाम है शिवजी का नाम है विष्णु का नाम है कहीं पर भी कबीर नाम नहीं है यह लोग कवि को कबीर बनाते हैं चलिए कोई नहीं आ रहा कोई लगता है सब लोग समझ चुके हैं कि नहीं पढ़ना है चक्कर में और कोई है नहीं टक्कर में हां जी बोलिए मैं ना ये जो लिख रहे हैं कमेंट में कबीर है इसमें तो आप एक काम करिए ना आप अगली लाइव जब भी होगी ना तो प्रमाण हमें दे देना हम आपको खुद ही खोल के खा देंगे ठीक है और आपको पता चल जाए वहां कबीर है क्या है और दूसरी बात यह जो कहते हैं इन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा हुआ है कि परमात्मा या उनका अवतार यानी कि यह जो अपने आपको को कबीर का अवतार बताते हैं ठीक है यह कभी भी जो है हिंसा करने नहीं आते हिंसा कौन करते हैं जैसे श्री कृष्ण राम आदि जो है वह हिंसा करते हैं और सोचते हैं कि शांति स्थापित कर देंगे लेकिन उनसे शांति स्थापित हो नहीं पाती तो यह जो अभी हथियार हमने देखे हैं भाई पहले तो वो पुलिस की वर्दी में नहीं है ठीक है तो वही

02:59:51:08 पता चल जाता उनका दूसरी बात यह है कि यानी कि आपके बाबा जी की लिखी हुई किताब के भीतर जो बात है अवतार जहां पर अवतारवाद की बात आती है वहां पर यह बात झूठी सिद्ध हो जाती है तो आपकी बातों को काटने के लिए मेरे को कभी-कभी लगता है अवतार की परिभाषा नाम का यह जो है कि मुझे आपकी बातों को काटने के लिए ना आप ही बहुत हो आपकी बातों को काटने के लिए किसी भी अन्य ग्रंथ तक को उठाने की आवश्यकता नहीं आपका आचरण और आपकी बुक यह दोनों बहुत है आप ही की बातों का खंडन करने के लिए ब तो इसलिए प्रमाणित हो जाता है कि आपकी कोई भी बात सार्थक नहीं है ना ही आपके व्यवहार के अनुसार ना ही आपके ज्ञान के अनुसार तो यह मैं अपना पॉइंट रखना चाह भाई साब भाई साहब सुनिए राम जी धनुष नहीं लेते थे यह हमें दिक्कत नहीं है हमारे ईश्वर हैं जो धर्म की रक्षा के लिए समार भी करते हैं आप कह रहे हो कि ईश्वर समार नहीं करता है समार करने के लिए रामकृष्ण आदी आते हैं ईश्वर कभी किसी को मारता नहीं है समझ गए अपनेट कमेंट कमेंट क्यों खेल रहे हो ये फिर अपने कमेंट से मैंने कहा ना इनकी किसी भी बात का खंडन करने के लिए ग्रंथ खोलने की इनकी अपनी बातें ही अपना खंडन

03:01:06:24 है फिर अपनी बात का खंडन कर गया कमेंट करके आपने ज्यादा चर्चा कर ली गोविंद जी [हंसी] बोलिए बोलिए गोविंद जी की चर्चा मैं एक दिन देख रहा दो तीन दिन पहले देख रहा था गोमूत्र गोबर गणेश कुछ नहीं बचा नहीं ना कुछ भी कुछ बचा हो कुछ ऊंची बाज बची हो वह जो वेदों का गहन ज्ञान छापते फिरते थे टीवी पर अब वह बचा हो तो कुछ बात करे ना अब यही है अगरबत्ती धूप ली की टॉफी उसका रैपर उसका ट्रेड मार्क ठीक है उसके बाद ये एमसील जो है वो काले और ग्रे रंग में ही क्यों आती है ये लाल रंग में क्यों नहीं आती हिंदू एमसील क्यों यूज करता है क्या इससे मोक्ष हो जाएगा ठीक है पेन से ही क्यों लिखते मोर पंख से क्यों नहीं लिखते ठीक है इसके बाद कुछ नहीं मिलता तो बस वही टीका टिप्पणी करेंगे इधर उधर की बातें करेंगे कहां कहां वेद का ज्ञान और कहां गोबर ठीक है तो ये इनका ग्राफ ऐसे नीचे आया हमारे चैनल के बाद ऐसे सीधे गिरता हुआ इसको कहते सर के बल गिरना वेदों

03:02:21:24 से गोबर प अगरबत्ती पे अगरबत्ती इतने लोगों के मैसेज फोन आ रहे हैं शिवांश जी मैं बता देता हूं इतने लोगों के मैसेज फोन आ रहे हैं कि मतलब वो आपकी मतलब ये वीडियोस देख देख के ना उनको सच में मतलब उनकी बुद्धि खुल रही है कह रहे हैं मतलब बोलते हैं कि कुछ तो गड़बड़ है मतलब यह तो थोड़ा फिर से देखना पड़ेगा मतलब वो अच्छे अच्छे पढ़े लिखे लोग भी इसमें जा रहे थे जो थोड़े बहुत वो थे अपने प्रियजनों के कारण माता-पिता के कारण है ना लेकिन उसके बाद भी वो और अब वो यही नहीं रुक रहे हैं कि नहीं नहीं हम तो बच गए आप कह रहे अब हम अपने आप अपने लोगों को भी बचाएंगे इस इस कुए में गिरने से ठीक है तो ये सब चीजें है और यह अच्छी है हो रही है और उसको सपोर्ट करना भी चाहिए बाकी इनका तो काम ही यही है कि टका टिप्पणी करते रहेंगे पर्सनल सिद्धांत प कोई बात होगी ही नहीं बस घुमाना मैं एक बात और आपकी बात मैं पंडित जी की उसमें ऐड कर देता हूं कि जितने भी लोग ये देख रहे हैं ना चैनल यह चैनल साधन है हमारा ठीक है ये वैसा ही जैसे राम जी के हाथ में धनुष था तो इसको सपोर्ट करिए ठीक है हर एक प्रकार से क्योंकि यह हमारा ठीक है साधन है बिना साधन के बिना साधन के ना कोई भी चीज साध्य जो

03:03:36:24 होती है वह प्राप्त नहीं होती ठीक है इसलिए वीडियोस को लाइक करना इसको शेयर करना लोगों के साथ इससे रीच बढ़ती है ठीक है तो मैं जरूर चाहूंगा जितने भी लोग हैं वो अपना अपना भी फर्ज भाई थोड़ा सा सही कक मेरा भी चैनल था वो बंद हो गया मैंने एक दो बार फिर बनाया इन्होंने जो है इस प्रकार की कार्य किए अब मैं चाहता हूं कि जो चल रहा है ना उसी को थोड़ा आगे धके ले ठीक है ना कि अपने अपने पर्सनल स्वार्थ के लिए अपने अपने वो बनाकर तो उसमें लगे रहे जो चल रहा है जो शक्तिमान है उसको साधन देने चाहिए मेरी अपनी ये फिलॉसफी है जो शक्तिमान है जो कार्य कर सकता है उसको हमें अपने साधन देने चाहिए ठीक है उसके साथ अपना सहयोग करना ताक वो और आगे बढ़ सके तो यरा व साथ हो गए हैं और कुछ पुरानी चीज वो भूल चुके हैंको बारबार ना करा जाए और एक बात और है कि लोकेश पांचाल जी कह रहे हैं कि सतलोक आश्रम आ जाइए पहली बात य हमने आपको कई बार कहा है कि आप वहां से किसी बीच के स्थान में आ जाइए और हम से किसी बीच के स्थान में आ जाएंगे इंदौर में हमारे लोग हैं हो सकता

03:04:51:25 है ऐसी वो आयोजित हो सके हम आ सकते हैं बिल्कुल आ सकते हैं इसके लिए सतलोक आश्रम वालों से कहिए इंदौर वालों से व हमसे संपर्क करें आपस में बातचीत करके हम यह तय करेंगे कि हमारी चर्चा कहां पर हो सकती है ठीक है उनको दीजिए निष्ठा पूर्वक निष्ठा पूर्वक माता जी ने देखिए लोकेश जी आप कह रहे आप भी तो आए थे मेरे चैनल पर क्योंकि मेरा खंडन करने के रूप में आपको जो आपको अपने मत का प्रचार करना था उससे काफी फायदा मिलता आप ऐसे व्यक्ति नहीं है कि आप पर्टिकुलर आपका खंडन करने के लिए मैं कहीं जाऊं पहली बात और यदि सतलोक आश्रम इत्यादि है जो ऐसी चीजें हैं हां जिनके साथ चर्चा में सफल अथवा असफल के रूप में कोई ना कोई तथ्य बाहर आ सकता है तो उनके साथ में चर्चा करने को त र मैंने तो कई बार कहा है आपका वो दोगला अभिषेक हो या एक वो जो जिसको कम दिखता है वो क्या नाम है एकम हेमंत बाबा

03:06:00:15 एकम एकम अवि एकम अद्वितीय हा वो मैंने कई बार कहा है अगर यह लोग मुझसे चर्चा करने के लिए वो करते हैं प्रयास तो मैं बिल्कुल इनके साथ चर्चा करूंगा मेरे चैनल पर नहीं किसी बीच के चैनल पर करेंगे किसी को ढूंढेंगे बहुत सारे ऐसे चैनल है चर्चाएं करवाते हैं केवल ठीक है दूसरी बात अगर बीच के चैनल को भी नहीं मानना है तो बीच की जगह पर आ जाओ आप आ जाओ अगर आपका यहां से 500 किलोमीटर है 50 आप आ जाओ 50 हम आ जाएंगे हम तो ओपन है भाई सबके लिए ठीक है और उसके उसके लिए ना पूर्ण कोई ऐसी चीज बनाइए लिस्ट बनाइए ये ये चीज प्रमाण होंगी ऐसा थोड़ी है कि आप आपको प्रमाण दिखाए तो आप मचल जाओ और उसम यह पूछ रहे हैं आज भी मैंने सुना कि भगवान कृष्ण ने यही क्यों बोला उन्होंने यह क्यों नहीं बोला यह कोई बात है करने वाली उन्होने यह क्यों बोला वो क्यों नहीं बोला यह क्या बात है बताइए गीता को मानते और महाभारत को नहीं मानते गीता को मानते महाभारत को नहीं मानते चलिए ठीक है सभी को जय श्री राम और जो लोग आज नहीं जुड़ पाए वो अगली

03:07:15:18 लाइव में जुड़ने का प्रयास करें जब भी होती आज आपने देखा कि हमने जब उस व्यक्ति से पूछा कि वो तत्वदर्शी है कि नहीं सिद्ध करो तो और फिर वह गीता का ज्ञान जो है काल ने दिया है श्री कृष्ण से अलग हमने भले भले उससे पूछा कि प्रमाण दिखाओ कि अगर वह काल ही है वह काल श्री कृष्ण से अलग कैसे है यह बताओ ठीक है तो उसने कहीं पर भी कोई प्रमाण नहीं दिया और अंततोगत्वा जो है हमने उसको ये बता दिया कि श्री कृष्ण ही सनातन सनातन काल है और श्री कृष्ण ही गीता का ज्ञान देने वाले थे और हमने अनेक अनेक बार यह प्रमाण दिए हैं प्यारी बहना कुछ कह रही है शिवांश भैया ओपी ओवर पावर

03:08:12:14 ओवर अमेजिंग समसम ओवर पावर तो गलत होता है चलिए उनके लिए ओवर पावर है सामने विरोध है ओवर पावर ओवर किल ऐसे ऐसे करके शब्दों का प्रयोग होता है जी से बहस मतलब जिंदगी तहस नहस बिल्कुल सही बात लगसी को पता ये शिवाजी गिरी कह र तुम लोग के दूत हो भाई काल ही परमेश्वर है दिखा दे क्या

03:08:57:06 अवेद अच्छा काल के द नाटक है व खत्म हो रहा है उससे बाहर निकलो वापस आ जाओ हा बिल्कुल खतम होहा य क्या है क्या दिखा रहे हैं य अरे जो आपने दिखाया था कल व श्लोक है ना ये कालेन काले नायम जन सर्वो उसम लास्ट लाइन देखिए क्योंकि काल ही परमेश्वर है

03:09:29:16 पयाया शलोक में लास्ट में देखिए कालो ही परमेश्वर हम लोग तो परमेश्वर के दूत है और तुम किसके हो रचा दर्शी जेल धाम निवासी उसके दूत अगर उल्टा कर भी दिया जाए तो हम काल के दूत है ठीक है और ये परमात्मा के दूत है परमात्मा के दूत जो है वो छुपकर क्यों कमेंट कर रहे हैं काल के दूतों से यानी कि कॉल फिर वही बात है कि काल को आपने बड़ा माना हुगा फिर कबीर जी से क्योंकि आप तो कबीर जी आपको तो खुल के आना चाहिए ना मैदान में मैंने आज एक व भेजा की बातो का कोई तर्क नहीं कल चर्चा करते हैं एक लास्ट बात कह दूं मैं शिवांश भाई को मैंने वीडियो भेजी है किसी वृद्ध महिला की मृत्यु हो गई है देहांत हो गया है उनके सामने जाकर यह बोल रहे हैं वो वेदों में प्रमाण है कबीर जी भगवान है बाइबल में प्रमाण है कबीर जी भगवान है अरे उनको तो छोड़ दो यार कम से कम वह अपनी अंतिम यात्रा में है अब वो भाई उनका अपना पर्सनल मैटर है कोई क्या करे चलिए सभी को जय श्री राम श्रीम हर महादेव महादेव महादेव

03:10:46:20 [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 3:10:53 · 11 Nov 2024

क्या है आचार्य प्रशांत के कॉल का सच? शिवांश नारायण द्विवेदी @darshnikvichar #sanatandharma

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