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00:00:01:16 [संगीत] तो सभी को जय श्री राम आप सभी का जो पर्व है दीपावली तैयारियां अच्छे से चल रही हो और ऐसी हम प्रार्थना करते हैं किसी भी प्रकार का विघ्न नाए अब मुझे लग रहा है ऐसा की जो समर्थक है या जो दर्शक है उनको आदत हो गई है हमारे प्रतिदिन लाइव आने की ऐसा नहीं है क्योंकि जितना हम सक्रिय यटू पर दिखते हैं उससे ज्यादा सक्रिय धरातल पर तो इसलिए ऐसा संभव नहीं है कि हम प्रतिदिन लाइव आए मगर लाइव ना आने की स्थिति में जो चोर होते हैं मौका परस्त व उसी को उसी को अपनी जय जयकार समझते हैं जय श्री राम सभी को जय श्री राम आशीर्वाद छोटों को बड़ों के लिए

00:01:18:00 सम्मान तो सबसे पहली बात जब दीपावली से शुरू हुई है तो दीपावली परही बात कर ले कि मैंने आपको कई बार कहा है कि जब भी किसी प्रकार का प्रश्न आपको सताया करे तो आप अपने प्रश्न को लिखें और सर्च करें य पर पुरी शंकराचार्य शंकराचार्य तो उसमें आपको प्राप्त हो जाएगा आपके जो संशय होंगे लगभग लगभग आपको प्राप्त हो जाएगा

00:01:53:07 तो मैंने अभी यह इसकन नर्मदापुरम वालों का देखा नहीं है मगर आप ही लोग बता दीजिए कि क्या है नर्मदापुरम वालों ने क्या कहा है मैंने देखा नहीं हालांकि मुझे पता चल गया था आने से पहले कि उन्होंने हमें टैक किया है तो दीपावली पर हम लोग बात कर रहे थे दीपावली में राजा बली की कथा है और भगवान वामन का उनको दिया जाना वरदान उन पर उनकी कृपा और उसके बाद उस कृपा का क्रियान्वित होना जिससे कि य दीपावली पर्व जो है मनाया जा रहा है सदियों से इस कथा को आप जहां पर वामन भगवान की वावन भगवान और राजा बली के बारे में बात हुई वहां पर आप पढ़ सकते हैं भागवत में भी संभवत इसका है और भविष्य पुराण में भी है आवश्यकता पड़ी पड़ेगी तो श्लोक क्रमांक के स उपस्थित होंगे अच्छा इसके बाद क्या हो रहा है मैं एक चीज देख रहा हूं कि जो

00:03:09:06 चोर होते हैं उनका एक आदत होती जैसे ही फसने लगते हैं तो वह भागते हैं वहां से वैसे मैं देख रहा हूं कि बहुत सारे नैरेटिव जो चलाए गए थे एक एक करके वो नैरेटिव बंद हो रहे हैं जैसे एक नैरेटिव था वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है अब इनका व्यक्ति आता है चित्रपट पर तो वह यह नहीं कहता कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है व यह कहता है कि मतलब दूसरे टॉपिक छेड़ता है कि जैसे यहां पर तो इनको अविनाशी कहा गया है यहां तो नाशवान कहा गया इन टॉपिक्स पर बात करता है मेरा वीडियो आपको ठीक से दिखाई दे रहा है उसमें कुछ ऐसा है कि कुछ मुझे ऐसा लग रहा है वीडियो ठीक से नहीं आ रहा

00:04:03:18 है हां वही मैं कह रहा था आजकल क्या हो गया है दूसरे मुद्दों पर बातें हो रही है अब धीरे-धीरे इनका जो एक एक नैरेटिव है ना जो इन्होंने तथाकथित तंत्र ने बना रखा है वो एक एक नैरेटिव जो है उसको बिल्कुल प्यार से बिल्कुल जो एक व होता है ना शिल्पकार तराश है जो एक मूर्ति उसकी तरीके से हम एक एक कर कर जैसे हमने सबसे पहले पकड़ लिया था उसको वेदों में प्रमाण है कबीर

00:04:37:01 भगवान तो हमने उस नैरेटिव को तोड़ा सबसे पहले अब ये लोग आते हैं तो वो बात नहीं करते हैं दूसरी बातें करते हैं अ इसके बाद क्या है कि आप एक चीज देखिए हम जब भी अपना वीडियो चालू करते हैं लाइव में तो जो भी व्यक्ति हमारा प्रतिकार कर रहा है अगर हमें पता चल जाता है कि उसने क्याक कुतर्क किए या कौन से प्रमाण मांगे या कौन सी प्रमाण की बात की तो हम जब अपना वीडियो चालू करते हैं तो सबसे पहले उनके कुतर्कों का समाधान और यदि प्रमाण से संबंधित कोई बात है तो उसके बारे में बात करते हैं और अब हो क्या रहा है कि जब हमने लाकर के बिल्कुल जगह पर एक प्रहार यथोचित तरीके से कर दिया है तो अब क्या हो रहा है कि हमारे प्रश्नों का उत्तर दिया ही नहीं जा रहा है नई चीजें खोदी जा रही है उन पर भी बात करेंगे कौन सी नई चीजें है समाधान भी देंगे मगर सोचने वाली बात यह है कि भाई आपका कहना यह है कि हम यहां

00:05:52:03 से उनको समय नहीं देते हैं बोलने का जबकि वो यहां पर कुतर्क कर रहे होते हैं जैसे एक महानुभाव है नाम मुझे याद नहीं आ रहा है इनका नाम है रतन दास फसबुक पर अपनी हम तो अपने पोस्ट डाल रहे हैं फेसबुक पर उन्होंने हमें टैग किया यही रामपाल दास जी के मामले अब जब हमने कभी कुछ डाला तो हमें ध्यान हो गया कि भाई इनका जो नाम है रतन दास करके एक रतन दास नाम की आईडी है जब फेसबुक खोलते हैं वह नाम तभी याद आते हैं तो हमें याद रहा या फिर हमने चेक किया हमको कि पिछली बार किसने रामपाल वाले विषय में टैक किया था तो जब हम उत्तर प्रस्तुत कर रहे हैं या कुछ रामपाल के संबंध में हम प्रस्तुत कर रहे हैं तो हमने उसी नाम को ढूंढ कर के टैक कर दिया अब होता क्या है कि वो महानुभाव एक दिन अचानक से प्रत्यक्ष यहां वीडियो में आ जाते हैं और हमसे कहते हैं मैं राजन दास तो मैं उनसे पूछता हूं भा अपना पूरा परिचय दीजिए तो बोलते आप तो मुझे जानते हैं मतलब हमने अगर उनको वहा एफबी पर टैग कर दिया उनका नाम से उनको जानते उनको टैग हमने कर दिया तो हम उनको जानते हैं और हमने अगर यह कह दिया नहीं हम आपको नहीं जानते तो अपने वीडियो में जाकर कुत कर रहे देखो देखो

00:07:07:08 इसने एक दिन पहले मुझे टैक किया था और अब ये मुझे जानता नहीं है तो इतना उनका और व वो व्यक्ति उस व्यक्ति की कहानी क्या है कि उसको हमने हटाया क्यों था यह जो दास नाम का व्यक्ति जो कह रहा है कि हमको हटा दिया उसने टैग लाइन डाली कि भगड़ जब हम उससे सीरियसली और स्थिरता के साथ साथ बात करने का प्रयत्न कर रहे हैं तो वो हंसी ठट में है जैसे मैंने पूछा कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है यह कहां लिखा है अरे आपको नहीं पता अरे ये म ये क्या है भाई हम आपके मित्र थोड़ी ना है अपने मित्रों के साथ ये सब करिए हसी ट्टा तो जब उन्होंने दो तीन बार इस तरह की चीजें की जैसे मैंने उनसे कहा कि अपना परिचय दीजिए अरे आप तो मु जानते हैं आप मुझे नहीं जानते आप ये नहीं जानते अवेदों में प्रमाण है ये सब जो जो एक मंच पर जब हम बातें कर रहे व हसी मजाक करने की आवश्यकता नहीं है हम आपके मित्र नहीं है संगी साथी नहीं है तो हमने उनका ये रवैया देखकर हम जानते भी नहीं थे कि वही अभी भी उन्होंने क्लियर नहीं बताया था कि मैं वही रतन दास हूं जिसको आपने टैग किया है फेक पर तो हमने समझते हुए कोई जो है निठल्ला व्यक्ति

00:08:22:15 आया है जो उसके आचरण से दिखाई दिया यह जो है समय बर्बाद करने आया है और इसको किसी भी मुद्दे की बात में किसी भी मुद्दे की बात जय श्री राम जय श्री इसको किसी भी मुद्दे की बात में रुचि नहीं है यह केवल यहां ह इकट्ठा करने आया है यह सोचते हुए इसको हमने हटा दिया अब दूसरे दिन वीडियो बनाता है देखो देखो हमको हटा दिया यह है वो है बनाओ मगर बात क्या है ना कि एक कमरे में बैठ कर के केवल अपना पक्ष रखने में बहुत आसान होता है और और प्रत्यक्ष वार्ता करते हुए एक व्यक्ति से नहीं 151 20 20 व्यक्तियों से एक साथ अकेले वार्ता करते हुए भी अपने पक्ष को यथावत ठोस तरीके से रख देने में अलग बात होती है जो हमने कई बार किया है भगवत कृपा से गुरु गोविंदो ग्रंथ के

00:09:22:12 तो बात चल रही थी कि हम इनके कुतर्कों का भी समाधान देते हैं जब हम लाइव आते हैं तो अगर हमें पता चल गया कि कहां कहा कौन-कौन से कुतर्क किए गए हैं उनका भी समाधान देते उसके बाद अपनी बात को चालू करते हैं तो इनको अब इनका कहना यह था कि हम इनको समय नहीं देते मगर जो भी लोग प्रयास कर रहे हैं हमारे हमारे विरुद्ध बात करने का यहां तो हम समय नहीं देते तो यहां विरोध नहीं कर पाते वो लोग जब वहां जाकर के अपना अकेले आराम से सुरक्षित है वहां तो उठा पटक भी नहीं सकता किसी को जैसे ये भय हो जैसे सामने आने में क्या भय होता है कि शिवांस कहीं मारे नहीं भगा भगा करके हो सकता है हम ऐसा करते नहीं है ना करेंगे मगर सामने वाले को लगने लगता है कि भाई ये उठा उठा के पटके ना हमको और बाल पकड़ के हिला ना दे यह सब ना करे तो इस कारण से भय के कारण वो अपने एक कमरे में बैठ कर के जब बातें कर रहे होते हैं और तब भी उनको ये होश नहीं आता है कि जो भाई मुद्दे का विषय की बात है उसका तो हमने करते किस टॉपिक पर वहां पर हमको बोलने नहीं दिया गया हमारे लोगों को बोलने नहीं दिया गया उस टॉपिक का तो निराकरण करते मगर निराकरण

00:10:37:24 होगा तब तो करेंगे ना निराकरण होगा तब तो करेंगे तो अब क्या बात आती है कि भाई अब दूसरी ननई चीज उठेंगी गोबर उठेगा धूप उठेगी यह सब बातें उठेंगी तो इन सब बातों का समाधान देते हुए और हम जब उत्तर लाते हैं तो ऐसे उत्तर लाते हैं कि उसमें इ एंड बट ना कर सके हमारे उत्तर ऐसे नहीं होते उत्तर जब होते कांटे की नोक वाले होते हैं और यह कांटे की नोक वाले होते हैं इसका प्रमाण मैं आप ही लोगों की तरफ से दिलवा दूंगा है ना तो यह ध्यान देने वाली बात है अब सबसे पहले बात कर लेते हैं कि भैया इनके द्वारा एक तो यह सब कपोल कल्पित कथाएं फैलाई जाती है कि वहां पर श्री रामचंद्र आए श्री रामचंद्र जी को यह करने वा कबीर थे वो करने वाले कबीर थे कहां पर वर्णित है य सब बातें कहां पर वर्णित है जो ये राम पालियो के द्वारा रामपाल को फॉलो करने वालों के द्वारा यह बातें जो फैलाई जाती है कि राहुल जी आपको य बातें पता है थोड़ा सा राहुल जी इनके बारे जो रामचंद्र जी के बारे में और यह सब बातें जो फैलाई जाती है इनके

00:11:53:07 द्वारा मुझे पता है मैंने देखा इन लोगों का क समुद्र का रचना राम जी ने नहीं की थी कबीर दास जी ने किया कबीर दस जीने हनुमान जी को ज्ञान दिया हा लोग वो हम लोगों ने कल इसका निराकरण देखा था अध्यात्म रामायण इत्यादि में जिसके जिससे मिलती जुलती कथाए सुनाते हैं अच्छा मगर वहां पर क्या था जो मुनि के भेष में मिले थे वो रामचंद्र जी ही थे हा व भगवान राम वही पर कहा जा रहा है जो मुनि के भेष में मिले थे जी र

00:12:31:25 हा यह सब बातें ट पर आती है सही कह रहे गोविंद जी पर डालते बस लोग ट पर पाई जाती है अपने मतलब की बात लेे बस थोड़ी दक्ष शमा जी मैं एक क्रम चल रहा है उसको जरा पूरा कर ल एक क्रम बना लिया है उसको बस पूरा कर लू तो पहली बात तो य दीपावली के बारे में इनके द्वारा फैलाई गई मिथ्या जो हमने बताया कि दीपावली क्यों मनाते हैं राजा बली का प्रकरण है और भी बहुत सारी चीजें जुड़ी हुई है दीपावली से दीप मलिक उत्सव कहते हैं इसे अब बात आती है कि इनके द्वारा दीपावली के बारे में एक बात और फैलाई जाती है कि भाई मेरी लास्ट दीपावली ऐसा हुआ था वैसा हुआ था वही नापतोल वाला पहले मैं ऐसा था पहले मैं ये करता था वो अब मुझे लो वो ऐसे करते हैं ना कि पहले मैं ऐसा था ये करता था वो करता था टा टाया फिर उसके बाद अरे वाह ये अब ये बिल्कुल चेंज हो गया ये हो गया वो हो गया तो ये इनकी तरफ से कपूल कल्पित कहानिया बताई जाती मगर मैं एक बात कह रहा हूं कि जो रामपाल दास जी है उन्होंने कुछ किया हो या ना किया हो

00:13:47:02 उनके रहते कुछ लोग मरे तो जब उनको कुछ हत्या का जिसका आरोप लगा उनके ऊपर ऐसा तो हुआ ना पकड़म पकड़ाई में कुछ अ चलो वहां भी कुछ नहीं हुआ वो भी आधारभूत मान लेते मगर इनके यहां पर भी भंडारे में यह हो गया वो हो गया ऐसा सुनाई देता है तो अगर ऐसा हो गया भंडारे में तो फिर इनको भंडारा नहीं करना चाहिए अगर कोई अप्रिय घटना किसी कारण वस घट गई है तो इनको वो मेरी लास्ट भंडारा यह कहते हुए उस भंडारे का त्याग कर देना चाहिए है ना अगर रामपाल जी इस समय जेल में है और उनके ऊपर कोई आरोप है कि उ वो इसमें शामिल थे या नहीं थे मगर जेल में तो है ना एक अप्रिय घटना तो जेल जाना भी है तो अप्रिय घटना है और वह कह रहे हैं कि मैं फसाया गया है य अप्रिय घटना है तो क्योंकि रामपाल दास जी के साथ एक अप्रिय घटना घट गई है तो उनसे मिलने वाला जो ज्ञान है उसको छोड़ देना चाहिए मैंने लास्ट बार उसका आलंबन तब लिया था जब वह जेल गए थे तो उसके बाद ज जेल चले गए तो नहीं छोड़ रहे मगर भाई यह तो बहुत बड़ी बात है इसको छोड़ देना मैं तो यह कह रहा हूं कि जिस मिठाई की दुकान पर कल छापा पड़ा है कि यहां पर मिलावट होती है उस मिठाई की दुकान को लोग नहीं छोड़ पाते हैं

00:15:02:21 जो जो जो सही बात है जो जिस पर कल छापा पड़ गया उस मिठाई की दुकान को लोग नहीं छोड़ पाते मगर आप यह कह रहे हो कि जो हमारा यह त्यौहार है या जो भी हमारी परंपराएं हैं जो भी हमारा बेस है जो भी हमारी संस्कृति है उसको हम इसलिए छोड़ दे क्योंकि अब आपका मन हो गया है भगवान बनने का या भगवान तक पहुंचाने वाला बनने का इसलिए हम यह सारी चीजें छोड़ दे और इसलिए आपको हमारी जो परंपरा प्राप्त जो चीजें चली आ रही है उन हर चीजों से तकलीफ है ये परंपरा प्राप्त वाला चीजें चली आ रही है पूर्वजों से इसके बारे में मुझे जरा याद दिला दीजिएगा मैं अंत में बोलूंगा है ना मगर अब ये तो रहा दीपावली का निराकरण अब इससे आगे अगर हम चले तो इन्होंने दो बातें उठाई है हम वो नहीं करेंगे जो ये करते हैं इन्होंने दो बातें उठाई है गोबर और धूप ठीक है तो हमारे यहां गोबर का लेप क्यों लगाया जाता है सबसे पहले तो प्रमाण है भविष्य पुराण में प्रमाण है भागवत पुराण में प्रमाण है और जगह जगह ज्यादातर जहां पर पूजा की अच्छे से विधि बताई जा रही है वहां पर सर्वप्रथम गोबर का लेप लगाने की बात हो रही है

00:16:18:02 पंचगव्य में से एक पदार्थ भी होता है ये है ना और इसको जो है मैं अगर इसको जो है ये लक्षमी गोमूत्र इत्यादि ये पंचगव्य में आता है तो अब यह तो रही एक बात दूसरी बात अब साइंटिफिक अगर देखें गोबर के बारे में वैसे बहुत सारी चीजें हैं मगर एक मोटी मोटी चीज अगर मैं बता दूं तो यह नॉन कंडक्टर होता है मतलब एनर्जी को पास आउट नहीं करता है जो गोबर से बना हुआ लेप होता है एनर्जी को पास आउट नहीं करता है गोबर से बनी हुई चीज एनर्जी को सोख लेती है और अगर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो जहां पर मंत्र उच्चारण हो रहे होते हैं जहां पर यज्ञ हो रहा होता है हवन हो रहा होता है वहां पर बहुत अपरंपार ऊर्जा उत्पन्न हो रही होती अगर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देख मगर ऐसा नहीं है कि हम इतना ही शास्त्रोक्त बातें करके छोड़ेंगे हमें ऐसी बातें करके छोड़ेंगे जिसका जिसके बाद आपका फन उठ ना सके नाग वाला ठीक है तो वो प्रमाण आपके पास राहुल जी है आपने भेजे हैं क्या वो नंबर पर मैंने आपको कहा था भविष्य पुराण व आप भेज हम य स्क्रीन पर दिखा देंगे अब

00:17:33:15 गोबर की बात हो गई भविष्य पुराण में है भविष्य पुराण में बता देता हूं पढ़ करके नहीं तो फिर रह जाएगा वैसे भी आप लोगों को तर्क से तो कोई मतलब है नहीं तर्क हमने आपको कृपा रूप में दे दिए हैं आपको तो प्रमाण से मतलब होता है प्रमाण के मूल में भी इससे मतलब होता है कौन सी बात रामपाल दास जी ने कही है देखो भागवत भत कथा के ब एक उदाहरण दे दे रहा हूं सबसे पहले लेप लगाया जाता है यहां तक कि मरणासन स्थिति में भी गोबर के लेप की आवश्यकता होती है अगर आपको पता है कि व्यक्ति प्राण छोड़ सकता है शरीर छोड़ सकता है तो वहां पर भी प्राण गोबर के लेप की आवश्यकता होती है क्यों क्योंकि उसमें कुछ एक विधि है कि अगर प्राण फलाने द्वार से ही बाहर निकले अगर प्राण फलाने द्वार से ही बाहर निकले तो उसको उत्तम गति माना जाता है और ऐसा विश्वास किया जाता है कि इसको जो है ब्रह्म प्राप्ति हो जाएगी मोक्ष प्राप्ति हो जाएगी अब वो उसके कर्म हो ना हो ना हो मगर यथोचित हमने इंतजाम किया यथोचित प्रयास किया उसके लिए गोबर का लेप मरणासन में भी लगाया जाता है वहां पर भी वही होती है कि जो शरीर है जो देह उसके और

00:18:49:09 भूमि के बीच में कोई ऐसी चीज होनी चाहिए जिससे कि वो ऊर्जा है ना वो पास आउट ना हो जाए वही रह जाए वो जो ऊर्जा है वो निकल के जमीन में ना जाए वो वही वही रह जाए इसलिए वहां पर भी गोबर का लेप होता है इसके बारे में गोबर के लेप गोबर की जो वैज्ञानिकता है गौमूत्र की जो वैज्ञानिकता इसके लिए प्रॉपर एक अलग से लाइव या वीडियो बनाएंगे प्रॉपर बहुत सारे कट्टा भर के जैसे कट्टा भ के प्रमाण दिए थे ना कि रामपाल रामपाल जी तत्वदर्शी क्यों नहीं है कबीर भगवान क्यों नहीं है ऐसे कट्टा भर के प्रमाणों के साथ आएंगे फिलहाल अभी छोटे मोटे प्रमाण के साथ कुछ और हम यहां पर आपको य उचित समाधान उपलब्ध करा दे रहे हैं तो कथा का श्रवण किसी तीर्थ में वन में अथवा अपने घर पर ही अच्छा माना गया है जहां पर लंबा चौड़ा वैदान हो कथा स्थल रखना चाहिए भूमिका शोधन मार्जन और लेपन लेपन हो गया है ठीक है करके रंग बरम की धातुओं से चौक और ये भाई एक बात बताऊ आपको अगर ये सब चीजें जाननी है ना ज्यादा ज्यादा मेहनत ना करो वो तो आपसे हो नहीं पाएगा यह नित्य कर्म पूजा प्रकाश है इसी को खरी लेना इसी में तमाम सारी चीजें तंबाकू और य पंचगव्य

00:20:04:10 का उपयोग और प्रमाण के सहित कि कौन-कौन से शास्त्र में लिखा है यह पूरा इन सब चीजों में लिखा हुआ इसमें लिखा हुआ है और यह हमने गोबर का दे दिया गाय के गोबर का उपयोग और अभी हम आपको भविष्य पुराण से दे देते हैं धूप का य कैसी बच्चों जैसी बातें कर देते हो कभी कभी इसीलिए वो वीडियो आया है मैं अभी बताऊंगा वो वीडियो इसीलिए आया जिसके बारे में अभी बात करने वाला हूं तो इसमें क्या है यह देखिए शुरू से ही धूप का उपयोग बताया जा रहा है गणपति जी का पूजन हो रहा है गणपति जी के पूजन में और धूप इत्र लड्डू धूपन चा सुगंध ठीक है भविष्य पुराण यह है आपका

00:21:02:18 गणपति पूजन गणपति कल्प का वर्णन यह है 29 वा अध्याय और वहां से चालू है और धूप तो इतनी बार आएगा कि पूछे नहीं ये भैया देख लो लिखा है फिर मत कहना कि दिखाओ यह देखो धूपन दिखा धूप च सुगंध ठीक है धूप का प्रमाण हो गया और इसके आगे बारबार है धूप का जो उपयोग है बारबार इसी चैप्टर में कई बार है तो यह देखो अग्र धूपम धूप दिखाए तो इसको पढ़ा करो थोड़ा मेहनत किया करो ऐसे बच्चों जैसे मत कर दिया करो इससे नाक आप ही की कटती है हमारी नहीं अब बात आती है कि अब थोड़ी तार्किक बातें भी हो जाए हां आप भी दिखा दीजिए वह प्रमाण भविष्य पुराण वाला जो आप लगाया था राहुल जी भेज दी आपको व में ना

00:22:18:06 ठीक है ऑपरेटर जी आपके पास एक प्रमाण आया होगा उसको जरा शो कर दीजिए ट से आया होगा उसी नंबर पर भेजा है ना आपने जो मैंने आपको बता बताया था ठीक है नए नंबर से आया होगा आपके पास हमने नहीं भेजा है भविष्य पुराण के उसमें प्रश् है तब तक आप मौखिक रूप से बता दीजिए अगर आ जाएगा तो वो दिखा दिया जाएगा आप

00:23:03:09 बताइए जी जी भविष्य पुराण में है गोमूत्र और गोवर के जो महिमा बताई गई है उसका विशुद्ध वर्णन है कहां पर है भविष्य पुराण में है अब अध्याय 32 में है शायद 32 कौन सा खंड है उसम तीन ख है अरे खंड का तो भी नहीं है इधर भविष्य पुराण मेरे पास था नहीं ना इसलिए नहीं आपने तो चित्र लगाए थे ना उसके प्र जी जी अच्छा एक बात जी चलिए ठीक है भविष्य पुराण में है और अच्छे से प्रमाण दे भी दिए जाएंगे मगर फिलहाल बात यह हो रही है और दिए भी है यहां पर एक जगह भी अगर आ गया तो उतना पर्याप्त है मगर मगर जो बृहद व्याख्या हुई है वो अच्छे से बता दिया जाएगा और शायद 32 नंबर का था मैंने भी देखा था उसेस 32 था 5 हा 32 नंबर का था अब भाग कौन सा है यह देखना पड़ेगा एक मि देखना पड़ेगा लोक तो है

00:24:27:18 [संगीत] आपके पास कौन से प्रकाशन अच्छा कौन से पीडीएफ से अध्ययन किया था भविष्य पुराण का नहीं मैंने गल किया था ना अच्छा ग से किया था अरे फटाफट से प्रमाण मांग लेते हैं पता नहीं कौन किस विषय पर आ जाती है देखना पड़ता है अचानक से ना क्योंकि इनके पास अपनी बातो का उत्तर नहीं होता इसलिए बिल्कुल हा ये विनायक गोबर के गणेश बनाए जाते अगरबत्ती क्य जाती छो छोटी चीज पकड़ अगरबत्ती का दे तो दिया हमने ूप का हमने दे दिया अब वो धूप का उपयोग किस किस प्रकार से होता है व बाद की बात है 134 चेक कर लेते हैं शायद यहां पर होगा

00:25:32:19 अरे ऐसे बल टाइम पास कर रहे हैं ये जानना इनको कुछ भी नहीं जानना शास्त्र ते भागवत में दे दिया है इसका और धूप भी दिखा दी आपको उसम पूजा में धूप दिखाई जा रही तो आपको भी दिखा दी जी अब बात करते हैं कि सबसे पहली बात यह है क्या हम इन बातों को लेकर के धूप का पूजन क्यों होता है या गोबर का उपयोग क्यों होता है क्या इन बातों को लेकर के हमारे और आपके बीच में मतलब हमारे और रामपाल को मानने वालों के बीच में मतभेद है क्या इन बातों को लेकर के दूरिया है बिल्कुल भी नहीं बक भी नहीं क्या इससे हमारे धर्म और ब्रह्म पर फर्क पड़ रहा है बकुल धर्म के बारे में धर्म हमारा क्या है और हमारा ब्रह्म क्या है वो समझ में नहीं आया भाई इतने सारे विधि विधान है कि अगर इन पर व्यक्ति फोकस करने लगेगा विधि विधान पर हर छोटी से छोटी खैर ये तो इंपोर्टेंट है जो य गोबर और धूप है मगर मैं एक बात कह रहा हूं कि कपूर क्यों जला अब इसका भी साइंटिफिक और प्रामाणिक आंसर है मगर हर चीज को अगर हम आंसर ढूंढते रहेंगे तो फिर हम भक्ति कब करेंगे

00:26:47:25 एक सामान्य व्यक्ति की दृष्टि से मैं बता रहा हूं ठीक है सही बात तो मेन बात होती है कि अगर हमें ब्रह्म के बारे में समझा दिया गया तो जिसने समझाया उसी ने फिर हमको बताया कि इसको प्राप्त कैसे करू फिर उसमें अ जैसे कि मान लीजिए कि एक मैदान पर उतरने से पहले बता दिया गया कौन कैप्टन है कौन यह है कौन वो है किसको क्या करना है अब जब मैदान पर उतर गए और जब कैप्टन यह कह रहा है कि भाई जाकर के ऑफ में लगो मिड में लगो लेग में लगो स्ट्रेट में लगो तो वहां पर बारबार भले ही वह सचिन क्यों ना भले ही सचिन क्यों ना हो बारबार वह कप्तान सेय कहेगा क्या कि मैं वहां क्यों लगू समझाओ तार्किक रूप से प्रमाण दिखाओ है ना अगर ऐसे कहेगा तो वो मैच कितनी देर का होगा तो कहने वाली बात ये है कि इससे क्या आपके धर्म और ब्रह्म पर फर्क पड़ रहा है या ऐसी ऐसी कोई दूरी है क्या मत करो भैया धूप का उपयोग अगर आपको दिक्कत है प्रॉब्लम हमारे आपके बीच में ये है कि कबीर को भगवान नहीं कहा गया संत रामपाल को तत्वदर्शी नहीं कहा गया इससे मत भागो इससे क भाग रहे हो मत करो आपको नहीं समझ में आ रहा है धूप का उपयोग

00:27:59:14 परंपरा प्राप्त संस्कार आपको समझ में नहीं आ रहे हैं मत करो यूज इसको लेकर के कोई वो है ही नहीं वैचारिक मतभेद मत करो अरे भाई मैं कह रहा हूं अभी सामान्य हिंदू जो पंच परमेश्वर में विश्वास रखते हैं वो क्या करते हैं क्या पूरा पूरा ये धूप और ये गोबर का उपयोग नित्य प्रति कई लोग होंगे जो केवल भगवान को नमस्कार करके अपना काम चलाते हैं मगर आस्था उनकी पंच देव उपासना में ही है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश नहीं है आस्था उनकी वेद जो वेदा आदि शास्त्र है वैदिक मांग में उन है आस्था उनकी पुराण ये पुराण में है उपनिषदों में है आस्था उनकी है बस वो करते नहीं है मत करो कोई दिक्कत नहीं है इसको लेकर के हम आपके पास आए भी कहां हम तो पूछ रहे हैं कि वेदों में प्रमाण दिखाओ कबीर भगवान दिखाओ बकुल बछ रहे दिखा अच्छा इन सब बातों की एक बात इन्होने यह कहा कि हमारे जो पूर्वज थे वो अनपढ थे ठीक है हमारे जो पूर्वज थे व अनपढ थे नास जो नास सुक्तम है ऋगवेद का जिस पर गुरुदेव के गणित पर वो है शंकराचार्य जी के

00:29:14:18 गणित पर बहत व्याख्या है और जो वैदिक मैथमेटिक्स है व आप लोगों ने दे दी होगी ना जिसको कॉपी कर रहा है विदेश आजकल इतनी सारी साइंटिफिक चीज दे आप लोगों ने दुनिया को ना पर आजकल रिसर्च कर रहे हैं जिस पर नासा वाले आकर के समाधान प्राप्त करते हैं क्या कहते हैं ये अच्छा वो जेल धाम में आते होंगे आपसे मिलने के लिए विश्व बैंक वाले शंकराचार्य के पास आते अपनी गुथ सुलझा हैं संयुक्त राष्ट्र वाले आते हैं नासा वाले आते हैं मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं तो आपसे भी मतलब आपकी जो चीजें हैं उनको भी किया ही गया होगा जब आप ये कह रहे हो कि हमारे जो पूर्वज है वो अनपढ थे अच्छा दूसरी बात ये है कि बात होती है जब प्रमाण की बात होती है जब प्रमाण की तो हर बात फिर प्रमाण से बोली जाती है हमने तो आपको प्रमाण दे दिया हमारे पूर्वज कौन जिन्होंने वेद दिए हमारे पूर्वज कौन जिन्होंने वैदिक मैथमेटिक्स दी हमारे पूर्वज कौन जिन्होंने ये इतने सारे चाणक्य आर्य भट्ट इतने सारे बड़े-बड़े विद्वान ठीक है अब आप कहीं तो लिखा दिखाओ कि हमारे आपके पर्टिकुलर आप के पूर्वज अनपढ होंगे ऐसा हो सकता

00:30:29:22 है पर्टिकुलर आपकी जो चेन है वो अनपढ़ रहे होंगे जिसके कारण आज आपका ये हाल है है ना मगर ऐसे नहीं कह सकते कि आज सनातनी हों के जो पूर्वज थे वो अनपढ थे दूसरी बात बात है प्रमाण की आप प्रमाण दिखाइए कि पूरे सनातन समाज के जो पूर्वज थे व अनपर थे दूसरी बात अगर वो अनपर थे तो भाई एक दो आप लोग अपनी 10 पीढ़ियों की गुरु परंपरा दिखा रहे हो है ना तो 10 में से दो पीढ़ी पहले तीन पीढ़ी पहले पूर्वज आपके अनपढ हो गए तो उनका अनुगमन करने वाले आप हो आप अपने आप को ही अपने पूर्वजों को जब वो कर रहे हो तो आप अपने आप को ही वो कह रहे हो अनपढ ये तो रही ये बात अब जो सृष्टि चक्र को नहीं फॉलो करता है पूर्वजों की बातों को फॉलो नहीं करता है क्योंकि आप लोगों को तर्क से कोई मतलब नहीं है आप लोगों को प्रमाण चाहिए वो प्रमाण में दे रहा हूं सारी चीजें एक तरफ कर दो आप यह तो स्वीकार करते हो ना कि हमारे पूर्वजों ने गाय के गोबर का और धूप का उपयोग किया तो लो

00:31:45:16 भगवत गीता में दे दे रहे भगवत गीता में प्रमाण दे देते हैं आपको यह बात भगवत गीता में कही गई है कि पूर्वजों के मार्ग पर चलकर ही मोक्ष प्राप्त होगा और उनके विरुद्ध चलकर के मोक्ष प्राप्त नहीं होगा इसको आप 3 16 में देख लीजिए कि सदियों से जो परंपरा से जो चक्र चला आ रहा है उसी को फॉलो करके आपको मोक्ष प्राप्त होगा अन्यथा नहीं होगा यह हमारे पास प्रमाण है आप प्रमाण दिखाए कहां लिखा है कि पूर्वज हमारे यह देखिए 415 में लिखा है भगवत गीता 415 हमने प्रमाण वहां से भी दे दिया पुराणों से अभी वेद से भी देंगे भगवत गीता

00:33:00:27 415 क्या लिख रहा है इसीलिए तो मैं कहता हूं ना कि आप अपने वो वाले वो दिखा दीजिए क्या कहते हैं वो 5 परट कौन-कौन से हैं जिससे कि हमें खोलने में वो ना हो संकोच नहीं तो फिर तुम कहोगे यह काल ने बोला है तो 4 15 इसमें लिखा

✅ This part is already used · 00:33:24:06 – 00:33:34:20 (0:10)

→ Used in: A · Live गीता के नाम पर रामपाल के बोलबचन अध्याय 4 Ep- 6 #satlokashram at 1:05:27 ↗

00:33:24:06 है पूर्व काल के पूर्वजों ने भी इस प्रकार जानकर ही कर्म किए थे इसलिए तू भी पूर्वजों द्वारा सदा से किए जाने वाले कर्मों को ही कर

⬜ Not used yet · 00:33:34:20 – 00:44:35:27 (11:01)

00:33:34:20 लो कोई जरूरत नहीं है गोबर का उपयोग महत्ता क्यों है दिखाने की लो तुमने माना ना पूर्वज करते थे ये लो प्रमाण अब तुम दिखाओ प्रमाण कि पूर्वज तुम्हारे अनपढ थे दिखाओ सिद्ध करो तुम्हें जन्म देने वाले तुम्हारे दादा परदादा सब अनपढ थे कहो चिल्ला चिल्ला के मैं अ का वंशज हूं मैं अनपढ का वंशज हू तुम तुम हो अनपढ के वंशज हम नहीं है हम ज्ञानवान महापुरुषों के वंशज है अच्छा दूसरी बात इनका कहना है कि आजय जो आधुनिकीकरण है यह तब कहां था अगर वह पढ़े लिखे थे तो इस आधुनिकीकरण के कारण एक जो आज आप क्या दे रहे हो समाज को आधुनिकीकरण के नाम पर क्या दे रहे हो आपने क्या दिया है समाज को पता है कि मा अगर अपने बालक को मोबाइल नहीं दे रही है देखने के लिए तो बल्ला मार के सर फोड़ रहा है वो अपनी मां का दुनिया में सबसे ज्यादा सर्च की जाने वाली जो वेबसाइट है वह क्या दिखाती है पता है यही आधुनिकीकरण कर रहे हैं

00:34:50:03 आप भाई अगर आप आज की आधुनिकता के नाम पर अपने पूर्वजों से प्राप्त जो संस्कार है जो जो परंपराएं हैं जो धर्म है धर्म अथवा धर्म की व्याख्या उसको ठुकरा रहे हैं तो इसका मतलब आज जो चीजें प्राप्त है दुनिया में समलैंगिकता की ओर बढ़ रहा है व्यक्ति ये क्या कहते हैं वो क्या है वो क्या एलजीबीटी क्यू यह सब चीजें पहले थी क्या जो आज इतने चरम स्तर पर पहुंच रही है तो ये अगर आपको आप आपका धर्म आपके द्वारा जो तत्वदर्शी रामपाल के द्वारा आपके अनुसार मेरे अनुसार नहीं आपके अनुसार यही चीजें आप दे रहे हो क्या समाज को क्योंकि आप पढ़ लिख ज्यादा गए हो भाई आप ल कर देखिए ना आप एक तरफ कहते सद ग्रंथ है और सद ग्रंथ को लिखने वाले आप लोग आप कहते हो अनपढ़ थे सद ग्रंथों को यह आपका सम्मान अपने ग्रंथों के लिए और तो और अगर पूर्वज अनपढ़ थे तो फिर तो आपने अपनी लाइनेज में भी सबको अनपढ़ कह दिया

00:36:00:16 अच्छा हमने तरह-तरह से इनकी हर बात का प्रतिकार किया पहले साइंटिफिक तरीके से उपयोग बताने का उपयोग बताया गोबर का गणेश जी के बारे में बृहत व्याख्या उनको प्रथम पूज्य क्यों है उनका व हाथी के सर का दृष्टांत क्या है वह सब है और नित्य कर्म पूजा प्रकाश में आप य सब पढ़िए बहुत अच्छे से लिखा है सब कुछ और हमने फिर भागवत से भी दिखा दिया का उपयोग ले सबसे पहले शुभ कार्य में इसके बाद हमने भविष्य पुराण से धूप का आपको प्रमाण दे दिया बहुत जगह है मगर अभी हमने आपको काम चलाने भर का दे दिया तो इसके अलावा हमने आपसे प्रश्न ये पूछे कि जब आप यहां पर होते हैं तो हम तो बोलने नहीं देते मगर जब आप बंद कमरे में होते हैं तब भी भय से ग्रसित होते हैं क्या शिवांश नाम के भय से ग्रसित इसलिए वो जवाब नहीं निकलता है मुह से कब कपी आती है यह भी आपका लिए हो गया फिर हमने यह भी बता दिया कि अगर आप अनपढ़ कह रहे हैं तो व आपकी जो वंशावली है वो अनपढ़ है क्योंकि हमारे पूर्वज तो बहुत ज्ञानी जो वैदिक मैथमेटिक्स दे रहे हैं जो बहुत बड़े बड़े

00:37:16:06 चीजें है जो आज प्राप्त करना बहुत वो है दुर्गम भाई श्रुति शास्त्र किसे कहते हैं वैसे पढ़ा नहीं होगा ये सब क्योंकि इतने इस पर आते ही नहीं है रामपाल दास जी कभी अपने चलचित्र बनाते समय श्रुति जो है श्रुति शास्त्र जो होते हैं जो भगवान से प्रकट होते हैं और जो ब्रह्मा जी के द्वारा आगे जो बढ़ाए गए परंपरा अनुसार क्या है शति का मतलब सुति को याद रखा जाता था आज आपके रामपाल दास जी स्वयंभू भगवान है पूरे वेद याद है उन्हें आपको याद वो याद करके रखते थे जिससे कोई इसमें मिलावट ना कर सके समझ गए तो अब क्या है कि आप जिनसे आपको ये सब चीजें प्राप्त हुई पवित्र सद ग्रंथ आप य सब दोगली बातें है खैर आप उसका कोई सम्मान नहीं है आपको अपनी वर्चस्व सिद्ध करनी है रामपाल दास जी को भगवान सिद्ध करना है आपको इससे मतलब नहीं है कि उसके क्या दुष्परिणाम होंगे समाज में किस प्रकार नसता फैले गी उससे आपको कोई सरोकार नहीं है आपने

00:38:31:06 अपने पूर्वजों को कुल मिलाकर के अनपढ कह दिया और चिल्ला चिल्ला के क रोज कहो कल एक थंबनेल बनाना मैं पूर्वजों का मैं अनपढ का वंशज हूं खाना नहीं आता था कि खाना कहां डालना आंख में के मुंह में ऐसे अनपढ थे मेरे पूर्वज यह थंबनेल बनाना हमारे नहीं थे आपके होंगे हमने सिद्ध कर दिया और हमने क्या प्रमाण दे दिया कि भगवत गीता से जो पूर्वजों के अनुसार चल रहा है जो परंपरा से प्राप्त शास्त्रो चित जो वचन है उनका अनुगमन कर रहा है वही मोक्ष का मोक्ष प्राप्ति करेगा ठीक है तो अब एक तो ये हो गया अब लास्ट में हम ऐसी बात को करते हुए अपनी इसको इस वक्तव्य को पूरा करेंगे और हमने ये भी दे दिया

00:39:20:22 कि हमने आपको ये भी दे दिया कि दीपावली में उसमें भी तार्किक तर्क ही था उसमें तो प्रमाण नहीं था तो हमने यह भी दे दिया कि दीपावली क्यों मनाई जाती है उसका जो शास्त्रों में जो वर्णन है वो भी दे दिया और तर्क भी दे दिया अब इसके बाद एक चीज और है जैसे आप कह रहे हो अपने पूर्वजों को अनपढ कह रहे हो तो आपके जो रामपाल दास जी है वह गुरु की शरण उन्हें प्राप्त हुई थी लगभग 30 वर्ष की उम्र में लम समम ऐसे ही कुछ प्रख्यात तो जो 30 वर्ष से पहले वो आप कहते हो वो तो पूर्ण ब्रह्म है वो ब्र काही अवतार है और कबीर का ही अवतार है तो वो अनपर थे क्या अनपर थे बोलो वेदों में प्रमाण है और रामपाल अनपढ है बोलो ऐसे बोलना शुरू करो फिर अब यह सारी

00:40:19:16 बातें आपने कई वीडियोस बनाए और यहां पर भी आपके कई बार लोग आए और उसमें यह सब बातें हुई हमने प्रश्न रखे और पूछा मगर विषय से हटकर बहुत सारी बातें हुई मगर उसका उत्तर नहीं दिया मगर जब आप अकेले कमरे में बैठ कर के वीडियो बना रहे हो वहां पर वीडियो में भी वही रिपीटिंग बातें हैं जैसे अमित दास की अगर बात करूं वो अमित दास यहां पर उसने तीन चार बार बताया कि यहां पर ब्रह्मा विष्णु महेश को नाशवान सिद्ध हो रहे हैं हमने उसको बताया कि भाई नाशवान वो लीला रूप से सिद्ध हो रहे हैं जैसे तुम्हारा जो रामपाल है वो कुत्ता सिद्ध हो रहा है तुम्हारे द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है जो रामपाल दास जी हैं वो कुत्ते सिद्ध हो रहे क्योंकि वो खुद को कुत्ता कह रहे हैं तोव लीला पूर्वक कह रहे हैं आपको मानना होगा यह बात इसी प्रकार से वो लीला पूर्वक है वस्तुत तत्ता ना अविनाशी है और हमने अविनाशी के संबंध में प्रमाण भी दे दिए रामपाल दास जी के संबंध में आपने प्रमाण नहीं दिए कि कहां लिखा है वो कि कभी रामपाल दास जी जो फलाने फलाने ने इतने इतने दिन तक जेल धाम में रहेंगे वो जो है भगवान है भगवान के अवतार है ऐसा कोई प्रमाण आपने नहीं दिया

00:41:36:06 अच्छा अब यह सब बातें जो है इन सबके बाद अब मैं आपका एक व्यक्ति है कोई जिसका नाम है पवन दास ठीक है वो आपसे खुद कह रहा है कि अपनी बंदर जैसी शकल लेकर के मत जाओ उस लड़के के पास हमने कितनी बार कहा हमने भी ये बात कही कि भाई जो सामर्थ मान हो वही आया करें जिन्होंने अभी दो टके का जिनको ज्ञान है यह मेरी भाषा नहीं है दो टके वाली यह वो बोल रहे हैं दो ढले का ज्ञान नहीं है दो टके का ज्ञान नहीं है आप लोगों को और आप आ जाते हो मुझसे चर्चा करने तो यह आप ही का व्यक्ति आपको बोल रहा है कि आप लोग अपनी भक्ति में मन लगाओ यहां पर आकर के ज्ञान चर्चा करके और अपने आपको को बुद्धिमान सिद्ध करने का प्रयास मत करो यह आपके व्यक्ति आपको बोल रहा है जो आप लोग बना बना करके और कुतर्क कर रहे हो जिस कोई यहां के जो प्रश्न है वो शेष रह जाएंगे आप कोई उसका उत्तर नहीं दे रहे हो यह देखो अब यह पवन दास है चलो इनकी तो फोटो हम दिखा देंगे बाद में मगर इन्होंने भी आपको यह आवान किया है कि भाई यह तक कह दिया

00:42:51:14 अपने वीडियो बना कर के पवन दास ने कि ही तुम रामपाल दास जी के शिष्य हो मगर उसने अपने गुरुओं से जो भी ज्ञान लिया वो तुम्हारे अनुसार जो भी है गलत है सही है वो बात की बात है मगर उस उसकी तुम लोग उससे टक्कर मत लो उसके पास मत जाओ तुम लोग वहां जा जा कर के ना कही कटाओ ग और कटा रहे हो कटा रहे हो बिल्ली जैसा मुंह लेकर के आ जाते हो बंदर जैसा मुंह लेकर के आ जाते हो मैं नहीं कह रहा मैं नहीं कह रहा ये आपका ही व्यक्ति कह रहा है जो रामपाल दास जी का फॉलोअर तो ये हो गया आपकी असफलता का प्रमाण समझ रहे हैं तो वीडियो बनाओ कम से कम उन प्रश्नों का उत्तर दो जिन प्रश्नों पर हम में मतभेद है हम तो नहीं कहने आए तुम धूप का उपयोग क्यों नहीं करते हम तो नहीं कहने आए कि तुम गोबर का उपयोग नहीं करते हालांकि वो शास्त्रों में वर्णित है और ना ही उसका उसके बारे में यह पता होने से और विश्वास होने से आपके धर्म ब्रह्म पर कोई असर पड़ रहा है प्रभावित हो रहा है आपके धर्म और ब्रह्म पर फर्क तब पड़ेगा जब आप यह कहोगे कि सतलोक में अगर कबीर दास जी बैठे हैं तो सतलोक किसने बनाया तब

00:44:06:16 पड़ेगा जब आपके मन में ब्रह्म को लेकर के संशय हो जाएगा अगर कबीर दास जी का शरीर शाश्वत है तो अपने आप को ट्रांसफॉर्म कैसे कर पा रहा है और अगर ट्रांसफॉर्म नहीं कर सकता वह सर्वशक्तिमान क्यों कहला रहा है यह है संशय इनके कारण आपका जो ब्रह्म है जो मुक्ति है वो बाधा है क्यों बाधा है भगवत गीता 44 हम अपनी प्रमाण से कहते हैं भगवत गीता 440 संशय आत्मा विनती जिसके मन में अपने ब्रह्म को लेकर धर्म को लेकर

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→ Used in: A · Live क्या रामपाल के kabir अविनाशी अजर है ? #rampaljimaharaj #kabir at 35:48 ↗

00:44:35:27 संशय होगा वो ना तो इस लोक में सुखी है और ना ही परलोक में सुखी है दोना

⬜ Not used yet · 00:44:40:15 – 00:53:17:18 (8:37)

00:44:40:15 प्रमाण अपनी बातो का प्रमाण दो पूर्व जनप थे प्रमाण दो मिलावट हो गई प्रमाण दो कहां लिखा है मिलावट हो गई तभी तो माने तो तुम कह रहे हो फ तो मनमुक हो गया ना कि भाई वो जो है वो मैनिपुलेटेड हैले कहां लिखा है आपके जो गुरु है वह हर बात प्रमाण से करते हैं ना तो प्रमाण लाओ कहां लिखा है कि शास्त्र जो है बदल दिए गए नहीं आएंगे प्रमाण तो मनमुक कौन हुआ उसी मनमुक नैरेटिव कोही तो हम चला रहे हैं आजकल तो यह सारी बातें हैं जो एक लाइन से मैंने बताने का प्रयास किया और अंत में अपने पक्ष के संबंध में मजबूत और भी बातें कह दी अब आज हम लोग जो ये चर्चा कर रहे हैं इसमें हमें इनका एक नैरेटिव और पकड़ना है आज वो क्या है

00:45:37:00 कि अब आप यह सिद्ध करिए आप हमें यह बता दीजिए कि किस प्रकार से जो रामपाल दास जी है वह तत्वदर्शी संत हैं क्योंकि उन्होंने यह कह दिया कि परमात्मा के पवित्र ज्ञान का प्रचार मैं कैसे कर पाऊंगा मैं तो दो कोड़ी का हूं यह तो के वचन है खुद के और अगर आप यह कहते हो कि नहीं नहीं वो ऐसा इसलिए कह रहे थे तो हम कह देंगे ये तो ऋषियों का अपना मत है ऐसे ही जो आज जो अनपढ गवान के जो वंशज है आज के यह उनका अपना मत है उन्होंने तो अपने बारे में य कहा है मैं दो कौड़ी का हूं और मैं जो है कुत्ता मात्र आप जब समाधान दोगे तो वो समाधान आपका अपना मत है तो आज हम लोग तत्वदर्शी के बारे में बात करने वाले हैं कि संत राम पाल दास जी को तत्वदर्शी क्यों नहीं मानना चाहिए क्यों नहीं माना जा सकता और अगर कोई है जो यह बता सकता है तत्वदर्शी है तो व आ करके बताए जी अब हम सबसे पहले ले लेंगे सुनेंगे दक्ष शर्मा जी से शुरुआत करते हैं जी दक्ष शर्मा जी बोले जय श्री राम

00:46:52:04 जी रामपाल के बारे में बोने आवाज आ रही है आपकी अब आ र आप एक बार लीव करके दोबारा आ जाइए ठीक तब तक आप बात करें मयंक कुमार जी जय श्री राम जय श्री राम जी

00:47:30:16 बोलिए पता है भैया मैंने इनकी कुछ चीजें देखी है रामपाल वालों की जैसे कि अपन लाइव चलाए लाइव में उनसे डिबेट कर रहे हैं तो वो भी अपनी कॉपी करके वह भी अपना लाइव चलाने लग गए फिर जैसे कल आपने लाइव से पहले उनका जो फोटो लगाए वो भी फोटो लगा रहे हैं इसका पता क्या पता चल रहा है कि उनमें खुद में तो बुद्धि है ही नहीं उनकी खुद की बुद्धि तो जीरो हो गई ये उनके व्यक्ति ने कह दिया ना कि तुम में बात करने की तमीज नहीं है तुम में बैठने की तमीज तुम्हें बैठना नहीं आता बोलना नहीं आता क्या क्या तो कहा है वो वीडियो देखो एक बार उनके व्यक्ति ने भी कह दिया कि मत जाओ तुम नाक कटा दोगे तुम अपना भी मोक्ष खराब करोगे हमारा भी मोक्ष खराब करोगे तुमने अगर 100 भक्त भी खराब करवा

00:48:22:08 दिए नहीं अमित को हम नहीं लेंगे अब अमित है आए हैं क्या यह कंटेंट लेने आते हैं इनको अब नहीं लिया जाएगा क्योंकि अपना कंटेंट लेकर के उधर जाकर के अपने आप को विजय घोषित करते हैं उनके खुद के व्यक्ति ने इस बात को कहा है तुम में ज्ञान नहीं है अभी तुम घर बैठो अपनी भक्ति कर लो दो धले का ज्ञान नहीं है और क्या कता बंदर जैसी बहुत बुरा बुरा र हम लीज अय देखो ना कल क्या था कि अगरबत्ती जलाना वेदों में कहां इसका प्रमाण है अब ये किस चीज की बात कर रहे हैं जबक उनको खुद को देखा जाए ना तो खुद भी अपने महाराज के आगे जो घी का दीपक होता है व जला के रखते हैं और इनका यह है कि 24 घंटे इनको जलाना है और भुजना नहीं चाहिए चाहे घर में खाने के लिए कुछ हो या ना हो लेकिन वह जरूर जलना चाहिए सुबह शाम महाराज की जो इनकी फोटो है उसके आगे इनको दंडवत प्रणाम करना है तो फिर यह उस चीज को क्यों मना कर रहे जब पहले बात तो बोलते है ना कि खुद उस चीज से दूर हटो फिर ताकि पहले खुद दूर हटो फिर उस चीज के लिए आप बात करो ना आप भी तो वही चीज

00:49:37:12 कर रहे हो ना ये मैंने इससे और याद आया देखिए यह वाकई में जोय पवन दास ने बोला है कि इनके दो पौड़ी का ज्ञान नहीं दो ढेले का ज्ञान नहीं वह काफी प्रतीत होता है कि सत्य क्यों वहां अभी जो राहुल जी आए थे आपको दिखे थे ना राहुल जी थोड़ी देर थे भविष्य पुराण का जिनसे प्रमाण मांगा था वो जो राहुल जी है वोह वहां गए थे प्रमाण देने तो उन्होंने कहा भविष्य पुराण से मैं प्रमाण दे रहा हूं अब जब भविष्य पुराण से प्रमाण देने लगे मैं तो वेद से मांगूंगा मुझे वेद का दिखाओ पहले जब ब्रह्मा विष्णु महेश को अविनाशी कहते हैं आपके रामपाल दास तब चिल्लाते मैं तो वेद से मांगूंगा वेद दिखाओ पहले नहीं और क्या आपके आपके द्वारा वेदों पुराणों को स्वीकार नहीं किया गया पुराणों को मना कर रहे हो रामपाल दास जी की जो ज्ञान गंगा है उसमें उन्होंने जो पुराण है 18 उनको माना है है ना पुराणों को स्वीकार किया है तो पुराणों से वो व्यक्ति आपको प्रमाण दे रहा है हालांकि वेद में भी है अन्या सूक्त है गाय का पूरा और वेद में भी कई जगह पर गाय की महिमा और गाय के जो पंच गव्य है उनकी महिमा है मगर मैं कह रहा हूं अगर वो पुराण से प्रमाण दे भी रहा है

00:50:53:00 सामने वाला आप मना कैसे कर सकते हो आपका जो माया जाल है जो तंत्र है आपका वो तो आधा पुराणों पर खड़ा हुआ सबसे बड़ा जो नैरेटिव है ब्रह्मा विष्णु महेश नाशवान है वो आपने वेद से दिया है क्या कहां से दिया है देवी भागवत देवी भागवत देवी भागवत जब देखो तब देवी भागवत देवी भागवत अब जब पुराण से आपको दिया जा रहा है तो आप च मुझे वेद से दिखाओ वेद से दिखाओ कहीं दिखा ना दे लाइव स्ट्रीम बंद हो जाएगी कहीं जी बोलिए म जी भैया एक चीज है ना मुझे एक चीज क्लियर करनी है आपने जो ऋग्वेद का ऋग्वेद का मंडल नंबर नौ सक्त नंबर एक और मंत्र नंबर न इसको मुझे एक बार इसका क्लेरिफिकेशन करके बताओ क्योंकि यह बोलते है इसम ये लिखा हुआ है हा मैं दिखा दे इस इसमें है ना जैसे बोलते हैं कि जो भगवान है ना कवार गाय का दूध पीता है जबक मैं इसको पढ़ा ना तो इस चीज में उसम लिखा हुआ ही नहीं है इस बात तो बोलते किस हिसाब से यह अपने मन से बोलते हैं पहले वेदों का भाष्य लिख देते संस्कृत का भाष्य लिख देते तब तो अगर कुछ क्लेम करते तो माना भी जाता ऋग्वेद दसवा मंडल पहला स नहीं सुनो सुनो सुनो

00:52:08:16 ऋग्वेद में ऋग्वेद में मुझे मालूम है य वाला स मैं जानता हूं रेवे न न नवा नवा होगा हा नवा मंडल सक्त नंबर एक ये आ गया आपकी स्क्रीन पर हा मैं यहां पढ़ लेता

00:52:50:16 हूं चुप्त नंबर एक मंत्र नंबर न इसमें लिखा है तथा मतलब कोई यज्ञ हो रहा है उसके बारे में आगे बात चल रही है और क्याक होता है तथा बालक सोम को अवध जिनका वध ना किया जा सके गाय इंद्र को पान कराने हेतु ठीक है इंद्र को जो दूध है उसका पान कराने के लिए सोम

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→ Used in: A · Live क्या रामपाल का ज्ञान शास्त्र सम्मत है #rampaljimaharaj #कबीर at 2:50:41 ↗

00:53:17:18 रस में गाय का दूध मिलाया जाता है यही मिश्रण यज्ञ में इंद्र को अर्पित किया जाता है और उसके प पश्चात अन्य यज्ञ कर्ता उसका पान करते हैं तो

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00:53:28:19 यहां पर इंद्र को यानी देवता है जो उनको पान कराने का अर्थ दिया गया है गाय के द्वारा गाय के समिश्रा उसका भाव है तो इसमें कहीं नहीं लिखा है कि वो गाय जो है कुमारी होनी चाहिए आठ नंबर मंत्र भी पढ़ दीजिए एक बारी आप प्रचुर मात्रा में धन का दान एक मिनट उस सोम को उंगलियां लाती है तेजस्वी दिखने वाले सोमरस को निकालते हैं और यह मीठा हो जाता है तीन शक्तियों से युक्त होता है दुखों अथवा शत्रुओं का नाश करने वाला होता है अब इसमें भाष्य में लिखा है सोमरस ज्योति धारा कोष को समृद्ध करता है यह समाम मधु तीन स्थानों में रहता है यह दुखों का निवारण कर आनंद को बढ़ाता है इसमें तीन प्रकार की शक्तियां रहती है जिनसे शरीर मन और बुद्धि को सामर्थ प्राप्त होता है यहां पर एक यज हो रहा है प यहां पर एक यज्ञ हो रहा है जिस यज्ञ में जो

00:54:43:19 पदार्थ मिलाए जाते हैं वह कहां से आने चाहिए उस पदार्थ की बात हो रही है और पता क्या बोलते हैं किना जो परमात्मा होता कमारी गाय का दूध पीता है मैंने क प्रमाण है तो बता रहे थे ऋग्वेद न है सक्त नंबर एक है और म मंत्र नंबर न है पर मैं इसको पढ़ा तो मुझे ऐसा लगा नहीं कि इसमें चीज लिखी हुई है भाई बालक सोम को अवध जिनका वध ना किया कर के ऐसी गाय इंद्र को पान कराने हेतु अपने दूध के साथ मिलाकर संस्कृत करती है इसमें कहां आ गया कि गोविंद जी आप जुड़

00:55:30:21 जाइए आप आ सकते चाहे तो तो इसमें कहां लिखा है कि कुमारी गाय का दूध पीता है ये अपने से स्टोरी जोड़ ली क्योंकि शायद उन्होंने कुमारी गाय का दूध पिया होगा इसलिए इसमें कहीं नहीं लिखा है कि कुवारी गाय का वो दूध पीता है दूसरी बात अगर गाय का दूध पिया भी है तो जो जिस ईश्वर को जिस रूप में हम जानते वो कृष्ण भगवान के बारे में दिया गया है है ना उन्होंने गाय का दूध दिया मगर वहां पर भी यह वाली बात गलत है कि अपने मन से कुमारी गाय का दूध पिया है यह सब बातें हैं अब हम लोग आ जाते हैं आज का जो मुख्य विषय है उस पर जी मैं कुछ कहना चाता हूं सेवक जी जुड़े हुए हैं आज एक बार सेवक जी आकर चले गए थे और पता नहीं चला था सेवक जी अपना चेहरा दिखाए तो आपको जोड़ लिया जाएगा पहली देख लो ऋग्वेद नौवा मंडल सूखते और श्लोक नौ न ही है ना तो न एकन हो गया ऋग्वेद 9 एकन में यह कहीं नहीं लिखा है कि परमात्मा जो है वह कुवारी गाय का दूध पीता है आप बताइए कहां लिखा

00:56:46:20 है अब यह पता है क्या है ये इनके भगत भी पढ़ेंगे ना तो भी पता है इस चीज को ना नहीं मानते हो वो पता है क्या बोलते हैं कि यदि गुरु ने कह दिया ना तो वही है आख जानने की कोशिश नहीं करते हैं ना तो अब हम लेंगे राघव जी बोलिए जी भैया जय श्री राम भैया मैं उस दिन उनकी ला उस दिन उनकी लाइव में गया था जिस दिन य चल रहा थाय गोबर वाला और ये वाला तो भैया जब मैं ये गोबर वाला चल रहा था ना जब ये गोवर का लेके वो चल रहा था और अगरबत्ती का लेके तो भैया वहां पर मैंने र माण उनको दिए उनके कमेंट में जाके लाइव में तो उन्होंने मेरे को वहां से ब्लॉक कर दिया तो मैंने वहां पर पद्म पुराण का और क्या कहते हैं महाभारत का इनका प्रमाण दिया था और कुछ वेद के भी तो उन्होंने मेरे को लाइव में नहीं लिया तो भैया वही सोच र मैं एक बार अपने प्रमाण दे गोबर के ले हां एक मिनट आप बोलिए

00:57:59:20 जी भैया ये जो पद्म पुराण है ना इसमें जी बोलिए जी ये पद्म पुराण के सृष्टि खंड में और अध्याय न जी प पुराण खंड जी भा निकाल लू पदम पुराण षष्टि खंड अध्याय अध्याय 48

00:58:58:02 ट खंड अध्याय 48 इसमें चैप्टर का नाम मालूम है आपको जी भैया य गाय और बैल की उसम वो बताए ग ग का महात्म य उसम लोक नंबर 163 में देखेंगे तो उसम आता है कि लक्ष्मी जी निकाल मिनट 64 654 हम श्लोक 163 य हां भ हां हां हां भाही

00:59:50:19 163 हम 163 में लिखा है गौ के दाहिने पास में कुबेर और वरुण का निवास है गौ के वाम पास में महा बलवान और तेजस्वी यक्ष का निवास होता है गौ के मुख के भीतर गंधर्व का निवास है नासिका के अग्र भाग में सर्पों का निवास है गौ के खुरो के पश्चिम भाग में अप्सराओं के निवास है गौ के गोबर में लक्ष्मी का निवास गौमूत्र में स सर्व मंगला का निवास गौ के पैरों के अग्र भाग में ग्रहों का निवास है तथा उसके खंबा टा में ब्रह्मा जी का निवास गायों के चारों स्तनों में सभी सागरों का निवास है जो व्यक्ति नित्य ही गौ का स्पर्श करता है व नित्य स्नान करने का फल प्राप्त करता है यह सब लिखा है भैया देख लीजिए गाय के गोबर में लक्ष्मी का निवास है प्रमाण ओनली प्रमाण

01:00:56:04 ठीक है बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया और भैया भैया एक प्रमाण मतलब पदम पुराण में बत स प्रमाण एक मैं आपको बता रहा हूं केवल इतना लिख लीजिएगा अगन सूक्त वेद में पूरा सूक्त है गाय की महिमा कहता हुआ अगन सूक्त और गौ पर समग्र चिंतन नाम से पीडीएफ मिल जाएगी आपको करपात्री जी के द्वारा गौ एक समग्र चिंतन इसको देख लीजिएगा पूरा आपको सारे प्रमाण यथोचित मिल जाएंगे बस भैया एक आखरी बता दो जैसे जो महाभारत था उसमें अनुशासन पर एक

01:01:44:14 मिनट हम बोलिए बोलिए महाभारत में अनुशासन पर्व के अंतर्गत एक दान धर्म पर्व आता है अध्याय 83 में हां दान धर्म पर्व आता है अध्याय 83 अध्याय 83 में आता है महाभारत अनुशासन पर्व और अध्याय कौन सा बता रहे हैं 83 जान धर्म पर केंद्र

01:02:23:25 83 यह जो प्रश्न है ना गौ मूत्र पर गोबर पर यह प्रश्न आज के नहीं है आप नए नहीं हो कॉपी पेस्टेड हो यह मैं कहूंगा अगर सनातन के नाम से अगर इस प्रकार के सनातन पर आक्षेप बहुत उठ रहे हैं मगर वोह पुराणों को ना मानने वाले होते ज्यादातर तो वो उठाते हैं मगर आप लोगों को तो लज्जा होनी चाहिए कि जब आपने पुराण को प्रमाण के रूप में स्वीकार किया है आप कैसे उठा सकते हैं वाले

01:02:56:02 प्रश्न ग का महात्मा [संगीत] हैया 81 नंबर हा तो इसमें य जी भीम क्वेन करते है ना यस सर 0 कौन सा में 8383 83 गलो और ग का उत्कर्ष बताना ग को वरदान देना ये हा तो इसमें लक्ष्मी जी और गायों के बीच में संवाद है जिसकी कहानी भीष्म जी सुनाते हैं युधिष्ठिर को तो उसमें यह आता है कि 84 वाले श्लोक में में खोल लेता हूं पढ़ दूंगा य से

01:03:43:04 350 मैं य से पढ़ दूंगा तो आपने स्क्रीनशॉट नहीं लिया आपको बैन किया गया तो स्क्रीनशॉट लिया करिए [संगीत] श्लोक कौन सा बताया आपने 22 से पढ़िए भैया वहां से पहले लक्ष्मी जी रिक्वेस्ट करती है फिर 24 तक में उनको गाय अपना गबर में स्थान देते कौन सा बोला कितना श्लोक नंबर

01:04:14:22 22 श्लोक [संगीत] 22 इसी से य गए हम सब लोगों के ऊपर स्थान में निवास करती है तुम्हारे प्रश्न के अनुसार मैंने यह बात बताई कि गए देवताओं के भी ऊपर स्थान में क्यों निवास करती है इसके सिवाय गए वरदान भी प्राप्त कर चुकी है और प्रसन्न होने पर दूसरों को वर देने की शक्ति रखती यही है क्या नहीं भैया ये नहीं एक श्लोक नंबर 24 है और 23 है सुर भी ग पुण्य कर्म करने वाली और शुभ लक्षणा होती है सर्वश्रेष्ठ बल सूदन वे जिस से पृथ्वी पर गई है उसको मैं पूर्ण रूप से बता रहा हूं यह वाला नहीं है भैया यह श्लोक है एव मुक्ता ततो गाव ऐसे करके श आप चैप्टर नंबर शायद थोड़ा ऊपर नीचे बोल रहे हो चटर का नाम क्या है बताओ चैप्टर का नाम क्या है इसमें मेरा वाला तो इंग्लिश से है तो इसमें युधिष्ठिर और क्या कहते हैं भीष्म जी का संवाद है

01:05:26:06 यह शुरू होता है भैया युधिष्ठिर और किसका संवाद है भीष्म जी का भीष्म जी का यह तो है वशिष्ठ परशुराम का संवाद भीष्म जी का यहां पर उदिर जी के साथ संवाद नहीं है किसी और आप आप ही बता दो फिर क्योंकि यहां अभी देखने में देर लग जाएगी लाइव स्ट्रीम चलर इसमें बाद में डाल देंगे हा ये 83 से ही आसपास होगा क्योंकि उसी में हो सकता है कंफ्यूजन तो इसमें युधिष्ठिर जी और भीष्म जी के बीच में संवाद चलता है तो उसमें युधिष्ठिर जी पूछते हैं कि गाय के गोवर की इतनी महिमा क्यों बताई गई है ऐसे पूछते हैं क्वेश्चन उसमें भीष्म जी कहानी सुना भीष्म जीय कहानी सुनाते हैं लक्ष्मी जी की और गायों के बीच की संवाद तो उसमें लक्ष्मी जी पहले पूरा महिमा मंडन करती है लक्ष्मी जी का गाय से संवाद है क्या वहां पे हां लक्ष्मी जी का गाय चर मिल गया वो चैप्टर मिल गया लक्ष्मी जी का गाय से संवाद है

01:06:36:19 347 हा युधिष्ठिर जी ने कहा मैंने सुनाया कि गाव के गोबर में लक्ष्मी का निवास है किंतु इस विषय में मुझे संदेह है अतः इसके संबंध में यथार्थ बात सुनना चाहता हूं तो फिर भीष्म जी ने कहा यह 82 नंबर का चैप्टर है जो मैं पढ़ रहा हूं पहले श्लोक से ठीक तोय आप लोग नोट कर लीजिएगा नंबर का है पहले शलोक शलोक नहीं पहले शुरू से अच्छा तो है यह बोल रहे हैं जो इस विषय में विज्ञ पुरुष फिर य आगे बताते

01:07:14:04 हैं 22 निष्पाप ग वास्तव में तुम्हारे अंगों में कहीं कोई कुत स्थान नहीं दिखा देता तुम परम पुण्य मय पवित्र और सौभाग्य शालनी होते मुझे आज्ञा दो कि मैं तुम्हारे शरीर में रह सकू यही है हा य लक्ष्मी जी कह रही लक्ष्मी के ऐसा कहने पर करुणा और वात्सल्य की मूर्ति शुभ स्वरूपा गने एक साथ मिलकर सलाह की फिर सबने लक्ष्मी से कहा ठीक है अब यह तो रही प्रमाण और भी है भैया ये 24 इसके बाद वाला जो है उसम गाय ऐसा आशीर्वाद दे देती हैको पढ़ अव तुम्हारा सम्मान करना चाहिए तुम हमारे गोबर और मूत्र में निवास करो क्योंकि हमारे हमारी यह दोनों वस्तुएं परम पवित्र है लो ठीक है भैया प्रमाण कहते हैं इसे बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया राघव जी मगर आप लोग वहां पर स्क्रीनशॉट तो लिया करो कि आपको भाई आपने प्रमाण दिया आपके साथ ऐसा हुआ वो बोलने नहीं दिया गया जी भैया जी भया अब मैं एक बात याद दिलाना चाहूंगा जो राहुल जी वहां गए थे उन्होंने वहां पर यह गलती की थी कि जब उन्होने व पुराण का वो किया तो इन्होंने वहा यह नहीं कहा कि पुराण को तुम मानते

01:08:29:12 तो हो आप पुराण से प्रमाण देते हो ना कि ब्रह्मा विष्णु महेश क्या कहते हैं वो है नाशवान पुराणों से ही तो देते हो मगर इन्होंने वहां कुछ कहा ही नहीं है आ गए वापस वही की वही ना कहना चाहिए था र अ एक अब जी दक्ष शर्मा जी बोलिए जी प्रणाम मैं रामपाल से तो नहीं रिलेटेड है पर थोड़ा य स्थिति बताना चाहूंगा य आ समाज नेला ख बारे में आपको बारे समाज ने जो फैला रखी य सेंट्रल यूनिवर्सिटी न

01:09:16:10 उसका अच्छा आप इसको इसको किसी और दिन ले लीजिएगा अभी क्योंकि बात चल रही है जिनके बारे में उसके रहने देते हैं है ना आप किसी और दिन लाइव में इस बात को रखिएगा मैं एक बात बताना चाह रहा था कि हमने प्रमाण भी दे दिए और तर्क भी दे दिए वैज्ञानिकता भी दे दी पर मैं एक बात बताऊंगा आपको पहली बात तो यह है कि एक शब्द प्रमाण वाली बात होती है कि अगर हम धर्म ब्रह्म के बारे में यथोचित और संतुष्टि जनक मिल गया तो फिर हम छोटी छोटी पॉइंट आउट नहीं करते वो शुरू में मैंने बताया गोबर के उपयोग की वैज्ञानिकता भी बताई और इसी प्रकार से वैज्ञानिकता गौमूत्र की भी है मगर मैं कह रहा हूं कि क्या आपके जीवन में जो यह कहते हैं कि गोबर से क्या होता है गौ मूत्र से क्या होता है क्या आपके जीवन में सभी चीजें क्या आप इसी तरह से बिलीव करते

01:10:18:21 हैं क्या सभी चीजें आप इसी तरह से बिलीव करते हैं अगर आप आप अपने घर की जो मातृ शक्तियां है उनको किसी पराय पुरुष से स्पर्श होने से बचाते हैं क्यों बचाते हैं बताइए आ गया ना धर्म क्योंकि धर्म ने कहा है और कोई कारण नहीं है क्या हो जाएगा उससे किस साइंटिस्ट ने मना कर दिया है आज तो पढ़ लिख गए हो ना आपके वो पूर्वज अनपर थे हमारे नहीं थे भाई तो इन सब चीजों प गौर किया करो इसीलिए आपके ही व्यक्ति को आपको कहना पड़ता है दो कौड़ी का ज्ञान दो ढेले का ज्ञान बिल्ली जैसा मुंह बंदर जैसा मुंह ठीक है अभी आप भी बात करेंगे तत्वदर्शी पे अभी तो वो मेन चैप्टर खुला ही नहीं है तो राम जी शरण स्मार जी जय श्री राम बोले जय श्री राम भाई सभी को जय श्री राम मुझे एक दो बात कहनी है इसके बाद तो मेरा नित्य कर्म का समय हो जाएगा आवाज आ रही है ना जी तो एक तो अभी गौ महिमा की जो चर्चा चल रही थी

01:11:34:00 अनंत ममा गौ की गौ माता की शास्त्रों में वर्णित है हम वर्णन भी नहीं कर सकते लेकिन हम लोगों ने फेसबुक पर एक पेज बनाया था गौ महिमा के नाम से ही व पेज है और जिनको ग गौ माता की महिमा को समझना है अध्ययन करना है एक स्थान तो उस पेज के अध्ययन से भी गौ महमा को समझा मेरी आईडी से भी जुड़ा है व पेज तो उस पेज को खोल करके भी लोग उसका अध्ययन कर सकते हैं एक बात अच्छा दूसरी बात एक वो एमपी राम पालियो का एमपी य करके कोई चैनल है [संगीत] ना होगा क्या करना बताइए आप सांकेतिक भाषा का उपयोग करिए अच्छा अच्छा लेना कर जी जी वहा पर राम अच्छा इससे कुछ समय पहले ही लाइव में एक सज्जन कह के गए थे कि हम राम रामचरित मानस को नहीं मानते हम तो वाल्मीकि रामायण को मानते हैं और इनका ही एक गुरु भाई उस चैनल पर कह रहा है और उसम जो कलयुग

01:12:49:16 के वर्णन में भगवान के नाम की महिमा का जो वर्णन है उसकी चर्चा वह कर रहा है वहा कह रहा है कि एक नाम एक ही नाम अधारा वगैरा कई कोट कर रहा है अच्छा उसम उसने उसने यह भी कह दिया चौपाई में एक चौपाई की हरि गुगा वाला जो है ना कलयुग के के आधार के ऊपर अच्छा राम नाम अलंबन इसको छोड़ दिया और साथ में कहता है कि ना तो राम राम करने से कुछ नहीं होगा एक आधार होना चाहिए सबका तो इस प्रकार के तो ये लोग है कि वही पर लिखा हुआ है हरि गुण का भी उसने कह दिया राम नाम अवलंबन एक को छोड़ दिया कि कलयुग केवल नाम आधारा वाला जो प्रसंग है और कहता है कि नहीं ये सब राधे राधे करने से राम राम करने से कुछ नहीं होगा एक ही आधार होना चाहिए एक ही नाम होना चाहिए अलग अलग करने से नहीं होगा तो इस प्रकार की तो लोग इनकी मूर्ता के संबंध में क्या कहा जाए और के संबध में उनका अपना व्यक्ति कह रहा है भैया मत जाओ उससे जीत नहीं पाओगे तुम्हारे बस्ती नहीं है फिर भी आ जाते

01:14:05:02 हैं और मैं कहता हूं कि भाई सामर्थ वान को आने दो क्यों नाक कटवा रहे हो मैंने कई वीडियोस में कहा कई लाइव में कहा कि आप लोग समर्थक नहीं हो आप लोग विरोधी हो रामपाल दास जी के क्योंकि इतना कमजोर पक्ष य प्रस्तुत कर रहे हो कि पूछो नहीं लोग हसेंगे अब वही बात उस अब इतना सा बिल्ली जैसा मुह लेकर बैठे रहेंगे अब भाई मेरे विरुद्ध कुछ भी बनाने से पहले उसके विरुद्ध बनाओ ना वीडियो बनाओ तुमने बिल्ली ज वाला क्यों कहा हम तो हम तो बहुत जीते हैं हम तो विजय होक आए हैं बनाओ वीडियो तब पता चले न न्याय प्रिय हो बना दो उसके लिए

01:14:50:09 वीडियो उ उसने कहा कि तुम परास्त हो जाओगे तुम ढेले वाले हो तुम जो है बंदर के मुंह वाले हो तुम जो है बिल्ली के मुंह वाले हो हमने तो कहा नहीं अब आप उसके विरुद्ध पहले वीडियो बनाओ लाइव करो कि पवन दास ने हमको कैसे कहा हम तो जीते थे हम तो सिद्ध करके आए थे या हम तो यहां कमरे में बैठ के सिद्ध कर रहे हैं जहां पर हमें भय नहीं है अब नहीं बनेगा बात जी जी जी बहुत बढ़िया मुझे एक तो ये बताना था कि फु पर जो जिनके पास ग्रंथ आदि नहीं है अध्ययन करने के लिए तो फेसबुक पर है गौ महिमा करके वहां से काफी सामग्री गौ माता की महिमा के संबंध में प्राप्त हो जाएगी जो वहा से अध्ययन करना चाहे सर्च करेगा तो वहा मिल

01:15:38:19 जाएगा ठीक [संगीत] है आप आ गए स्टेज पर संदीप बत्रा जी जय श्री राराम जय जय श्री राम कैसे हो मित्र बस कृपा है राम की हो जी जी राहुल मैं आपको यह कहना चाह रहा हूं आप मुझसे संपर्क जरूर करिएगा लाइव स्ट्रीम के बाद ठीक है जी आपने वहा जाकर के जब उन्होंने यह कहा कि हम पुराण को नहीं मानेंगे तो आपकी आपकी बोल आपको आपने बोला क्यों नहीं वहां पर के जो ब्रह्मा विष्णु इसको नाशवान बताते हो पुराण से बताते हो कि वेद से बताते हो क्यों नहीं मानोगे आपको बोलना चाहिए था आपकी ज्ञान गंगा में लिखा है कि पुराण हमारे प्रमाण है सद ग्रंथ है कहां लिखा है कि अगर सद ग्रंथ होंगे तो वेद को मानेंगे और पुराण को नहीं मानेंगे कहां लिखा है हर चीज प्रमाण मांगो कुछ भी बोले उसका प्रमाण मांगो कहा लिखा है भाई जब आपने पुराण को स्वीकार कर लिया कि अभी

01:16:53:21 हमारा सद ग्रंथ है आपको जवाब देना तो आप कह रहे नहीं पुराण को मानेंगे आप ब्रह्मा विष्णु महेश को अविनाशी नाशवान सिद्ध करते हो देवी भागवत से इनका पूरा आधार ढांचा जो है पुराण की जो ये वाली बातें है कल्प भेद से चीज है कि भगवत में ये कहा गया और विष्णु पुराण में य उसी पर तो टिकी है जी जो कल्प भद से भगवान की अनेकानेक लीलाए है अलग अलग उसी पर तो इनका पूरा किला टिका हुआ है और उसी को य मना कर रहे हैं

01:17:27:16 अभी आप कुछ बोलना चाहते हैं रा हा जीय ये शास्त्रों से थोड़ा थोड़ा अंश लेते हैं जो कि इनके काम का है बाकी नहीं मानते ये किसी भीज वो भी वो भी हम अबकी बार जब थोड़ा थोड़ा लेंगे तो हम उसका भी प्रमाण मांगेंगे ये कहा लिखा है थोड़ा थोड़ा लो बोले हम श श्लोक को नहीं मानेंगे मुझे बोल रहे थे ना कि आप आपको संस्कृत आती है अच्छी बात है लेकिन श्लोक नहीं देखना हमने हमें प्रमाण दिखाओ आप अपने हाथ में शास्त्र दिखाओ ऐसे लाइव करके मैंने बोला श्लोक दिखा देता हूं आपके पास भविष्य पुराण आएगा आप

01:18:04:08 पढ़ेंगे वेद में दिखाओ पहले कहा लिखा है पहले वेद में दिखाओ कहां लिखा पहले वेद में दिखाओ और जनके जब इनके व जेल धाम निवासी जेल धाम में नहीं थे बाहर थे जेल धाम से तो उनसे उन्होने बोला था कि क्या कहते हैं यह हमको जो है नावान ब्रह्मा विष्णु महेश को नासमा वेदों से दिखाओ पुराणों से नहीं जी जी धर्म धर्म सनातन जी बोलिए जय श्री राम भैया मेरे पास एक प्रमाण है धूप का उसका जो धूप है

01:18:44:22 ना मैंने एक बार राम पालियो से एक बार डिबेट की थी एक वीडियो भी बनाया था उस पर तो ये लोग क्या करते हैं कि हमारे जो शास्त्र है जो हमारे पुराण है इनको तोर मोर कर प्रमाण हमको देते हैं जैसे इन्होंने भागवत जी के आप लोग डिबेट करने डिबेट मत किया करो कभी भी केवल चर्चा किया करो डिबेट करने का किसने किसने कह दिया आप डिबेट करने जाओ चर्चा करो आप बोलिए आगे जी तो इन्होंने एक प्रमाण दिया था मुझे तृतीय भागवत जी के तृतीय स्कंद के 19 में अध्याय का 25 वा श्लोक जिसमें यह लोग बता रहे हैं कि आप मूर्ति की पूजा नाहा करें कपिल भगवान ऐसा कह रहे हैं ऐसा ये लोग बता रहे थे मुझे कि आप मूर्ति की पूजा ना करें मैं सबका आत्मा परमेश्वर सभी भूतों में स्थित हो ऐसा इने प्रमाण दिया परंतु जब मैंने इनको आगे का प्रमाण दिया इन्होंने 19वां श्लोक तो पढ़ लिया लेकिन आगे 25 वा श्लोक इन्होंने नहीं पढ़ा जब मैंने इनको 25वां श्लोक का प्रमाण दिया कि भगवान कपिल यहां पर बता रहे हैं कि व्यक्ति तब तक प्रतिमा का पूजन करता रहे जब तक उसे पूरी प्रकृति में मेरा दर्शन ना हो जब मैंने इनको ये वाला प्रमाण तो ये लोग डिबेट छोड़ के भाग जाते हैं चर्चा छोड़कर ये लोग

01:19:59:25 भाग जाते हैं और आगे फिर ये कहने लगते हैं हम इसको प्रमाण नहीं मानते हैं हमें अन्य कहीं से प्रमाण दो और फिर बहाने मानने लगते हैं तो इनका काम केवल एक है ये जो सभी तंत्र है कि यह तोड़ मोरकर शास्त्रों को प्रस्तुत करेंगे और समाज में भ्रांति फैलाने का यह लोग कार्य करते हैं अच्छा ठीक है यह तो है ही तभी तो हम उतरे हैं ना इतना बारबार हम लाइव आ रहे हैं यह सब चीज ही तो है और क्यों आ रहे हैं भाई आपको आपने देख लिया एक व्यक्ति है जो मेले में जाता है आपके लोगों से बात करता है उसके बाद वह वायरल हो जाता है वह वीडियो उसके बाद आपके लोग तब भी क्या करते हैं जो जो ऐसे लोग है जिनको लोग जानते हैं थोड़ा वो लोग भी सामने नहीं आते कि शिवांश जी हमें आपसे बात करनी है आपके चैनल पर नहीं आएंगे आप ऐसा कर मैं इधर से इंदौर आ जाता हूं मुंबई से आप आ जाइए लखनऊ से इंदौर वहां चर्चा कर लेंगे या फिर वो और ही कहीं चलते हैं अगर आपको और कहीं जाना हो तो वहां चले चलेंगे चर्चा के लिए मगर चर्चा करने का साहस नहीं है इनम बंद कमरे में बैठ करके और वह

01:21:14:25 बातें करने का साहस है जो बातें अभी हमने छुई नहीं है जो छू लेंगे उससे भाग जाएंगे अवा छू लिया गोबर और धूप हमने छ लिया अब देखना अब जो है नया विषय खुल जाएगा क्योंकि सामना करने का साह में नहीं है तो हमने सभी को सुन लिया है लगभग लगभग जितने भी लोग आए अभी तक बस संदीप जी और ह जी रह गए थोड़ा थोड़ा सा दो दो मिनट इनको भी सुन ले जी ह में भी प्राप्त होता है गवर का और क्या प्राप्त होता है मनुस्मृति के पम अध्याय में 24 श्लोक में आपको प्राप्त होगा के बहार से लीपने से खरोच से और गायों के गोबर से लीपने से भूमि शुद्ध होती है अच्छा बढ़िया जी बहुत बढ़िया एक बात बताता हूं मैं अपने ना अपने मतलब की घर की बात बताता हूं आपको हमारे माता जी है ना तो उन्होंने ना जिस समय हमारे घर के अंदर किसी डिलीवरी केस से दो डिलीवरी केसेस में ऐसा हुआ है ये कन्फर्म बता रहा हूं मैं आपको उन दो डिलीवरी केसेस में क्या हुआ डॉक्टर ने ने बोला है मतलब वहां पे पेशेंट वहां पे डॉक्टर कह रहा है कि शायद ऑपरेशन करना पड़ेगा तो माता जी

01:22:29:25 ने क्या किया गोबर का अर्क लेके ना अर्क लेके उसका पानी बना के अर्क लेके उसको मतलब उसको थोड़ा कन्वेंस करके बच्चों को पिला दिया और बच्चा नॉर्मल हो गया था उनका ये मतलब जीती जाती मेरे सामने की बात है सर ये जी मतलब उन्होंने क्या किया गोबर का आर्क लेके ना एक उसमें जैसे छन्नी मतलब छन्नी में लेके एक तरह से जैसे चुन्नी की छन्नी में लेके उसको अर्क को अच्छे से दबाया उसका जो अर्क निकला उसको तुरंत पिला दिया और बच्चे दोनों के दोनों नॉर्मल हुए और बड़े आराम से हुए बाद में बच्चे बड़े म कविंस हुए कि वाकई य कितनी पावर है इस यह मेरी आंखों देखी बात है सर य और ये बताओ इनके पूर्वज से लेकर आज तक भी आज एक लोग कह रहे हैं कि हम लोग जो है हम लोग जो है वो हो रहे हैं आधुनिक हो गए पढ़ लिख गए हैं जब इनकी पढ़ाई देखी होगी आपने वो खुद कह रहा है अनमा से खते हो इनका व्यक्ति कह रहा है इनको दिने दिखने के ना बोलने का बोलना आता है ना ना कहना आता है और चले जाते बंदर सा मु लेय इनका व्यक्ति कह रहा

01:23:36:06 है ये जिन पूर्वजों को वो कह रहे है ना कि वो पूर्वज हमारे जो अनपढ थे वो गोबर सेही लीप करके बना हुआ चूहा होता था और आज देखिए पूरा जो वर्ल्ड है पहले जाता है नन हो जाता है वो पहले स्टील के बर्तनों प आता एलुमिनियम के बर्तनों प आता है आज पूरा पूरा विश्व मट्टी के बर्तनों की ओर अग्रसर हो रहा है दोबारा हमारी जो परंपरा उन्हीं पे आ रहा है जी जी जो बेहतरीन खेती गिनी जाती है ना वो गोबर से ही गिनी जाती है और धन भी बन रहा है आज की डेट में गबर से इधन बन रहा है वो देखो ना इधन गैस नहीं वो गैस नहीं बनती उससे उसे लोग अपना ोप जलाते हैं कुछ करते हैं काफी कुछ होता है वो करने वाले के ऊपर है जी हर्ष जी जय श्री राम य यहां पे सीएनजी प्लांट है वहां प भी मैक्सिमम यूज होता है ये इस समय गोबर यूज होता है मैक्सिमम वहां पे सीएनजी प्लांट उसके अंदर भी अच्छा हा जी जी बोलिए जी जी जय श्रीम जय श्री राम सेवक जी आपको बस अभी ले रहे हैं हमें पता चल गया रहे थोड़ा इनको सुन ले जो जो लोग आए जी ह जी ये जो बोल रहे थे ना लाइव में कि धूप से पूजन करने का विधान कहां

01:24:51:12 है क्या है ऐसे करके तो मैंने आज ही पढ़ा था भविष्य पुराण के संक्षिप्त भविष्य पुराण जो है उसमें पेज नंबर 76 में लिखा हुआ है सूर्यदेव का उपासना में उसमें लिखा हुआ था कि धूप दीप ये सब अर्पित करे ऐसे करके तो उसमें चैप्टर का नाम क्या है चैप्टर का नाम क्या है चैप्टर का नाम मैंने पेज देखा था मैंने पेज सूर्यदेव उपासना सूर्यदेव का उपासना में हा यस ठीक है ठीक अरे वो बहुत अनेकानेक जगह प्रमाण है उसमें कोई ऐसी बात नहीं है चलिए अब आप अब मैं को ले लू सेवक जी को सेवक जी चले गए क्या सेवक जी चले गए सेवक जी चले गए अगर आप आना चाहे तो आ सकते हैं और अगर नहीं आना चाहते तो कोई बात नहीं है हा मैं एक बात कह रहा था आप ये जो संदीप जी तत्वदर्शी क्यों कहते हैं इनको रामपाल दास जी को सर एक ना व आपने कहावत सुनी होगी के अंधो में काना

01:26:06:14 राजा जी वो वो प्रॉब्लम है ज्ञान जो है कुए वाला है अ इनको समुंदर में पता ही नहीं हो क्या रहा है तोय उसको राजा समझ बैठे हैं इस करके इनको लगता त है इससे बाहर य निकले ही नहीं तो कैसे पता लगेगा इनको सर यह बताओ ना सेवक जी हमारे बीच में है शायद संभवत ये पक्ष रखने आए हैं और प्रदीप कुमार जी स्टेज पर नहीं है सेवक जी हेलो आप हमें बताए कि जो रामपाल दास नमस्कार जय श्री राम जो रामपाल दास जी है यह तत्वदर्शी आप क्यों कहते हैं बताइए

01:26:57:18 क्या मेरी आवाज आपके मेरी आवाज आ रही है जी आ रही है हेलो जी आपकी आवाज आ रही है हमने पूछा कि आप जो है रामपाल दास जी को किस आधार पर तत्वदर्शी की संज्ञा या पद या उपाधि देते हैं सर ऐसा है कि जो हमें संत रामपाल जी महाराज ने जो ज्ञान दिया है तो उनका यही वो सत्संग में यही बताते हैं कि जो शास्त्रों के आधार पर जो ज्ञान देते हैं जो शास्त्रों का जो निष्कर्ष है उसको सामने लाते हैं उस निष्कर्ष के आधार परही संत रामपाल जी महाराज तत्वदर्शी संत हैब उसम कने मलकी बात समझ गया जी जी उसमें एक मुख्य श्लोक आता है श्रीमद् भगवत गीता जी में बोलिए कौन सा अध्याय 15 का शलोक एक नहीं अध्याय 15 से पहले तत्वदर्शी जहा कहा गया वो तो बोल दो 434 15 एक पर तो आएंगे 44 तो बोल दे ही क लो

01:28:13:12 ठीक है खोल लेता इसम आप का पक्ष कमजोर हो जाएगा अगर सीधे 15 प आएंगे तो मैं आपके लिए बोल रहा हूं प बोलना चाहिए खोलू 4 34 15 एक खोलू बताइए 15 खोल ठीक है 15 एक 15 एक

01:29:04:25 है आदि पुरुष परमेश्वर रूप मूल वाले और ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा वाले जिस संसार रूप पीपल के वृक्ष को अविनाशी कहते हैं तथा वेद जिसके पत्ते कहे गए हैं उस संसार रूप वृक्ष को जो पुरुष मूल सहित

⬜ Not used yet · 01:29:24:12 – 01:33:59:24 (4:35)

01:29:24:12 से जानता है वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है इसमें तत्वदर्शी कहा है तो जो जो जानकारी इसमें दी गई है 15 के अध भाई साहब इसम तत्वदर्शी कहीं नहीं आया तत्वदर्शी का यही अर्थ है जो भी जो गुण रहस्य को जो उजागर कर कहां लिखा है भाई साहब में छपे हुए गुट रहस का जो उजागर कर हम लोग यहां पर अगर हमें एक दूसरे की बात पर यूं ही विश्वास कर लेना होता तो आजय नौबत आती क्या अगर हमें ऐसे मुझ वाली बातो से विश्वास कर लेना होता तो आज हम और आप य आमने सामने इस तरह से होते क्या नहीं आप कहने का मतलब क्या कहना क्या चाह रहे हो आप कहना क्या ये है कि शास्त्रों के आधार पर तत्वदर्शी बिल्कुल फिक्स तत्वदर्शी शास्त्रों के आधार पर आपने रामपाल दास जी को कैसे कहा

01:30:25:16 तो जो शास्त्रों का जो ज्ञान है गुण रहस्य उसको उजागर जो करता है वही संत होता है कि नहीं होता शास्त्र के गुण रहस्य कौन समझाएगा परिभाषा न जानने वाले एक बात क आप ये कहो वो शास्त्रों को जानने वाले हैं तत्वदर्शी शब्द कैसे आ रहा है समझिए मेरी बात को तत्वदर्शी शब्द की बात कर रहे हम लोग तत्वदर्शी यही है ना जो शास्त्रों का जो जो ज्ञान जो तत्व है जो उसको उजागर कर उसको सामने रख भाई साहब वेद के तात्पर्य को जानने वाला है यहा ये लिखा है वेद के तात्पर्य को जानने वाला तो पहली बात तो ये है अगर इसके आधार पर आप उन्ह तत्वदर्शी कह रहे हो तो तत्वदर्शी के बजाय आपको कहना चाहिए वो वेद के तात्पर्य को जानने वाला है तो वेद का अर्थ दूसरा क्या होता है ज्ञान भी तो होता है ना जो जो संपूर्ण ज्ञान का जानकार होता है ज्ञानी होता वही तो वेद अगर आप तत्वदर्शी के संबंध में आप एक बार मुझे बताओ ताप क्या होता है बता दे रहा हूं बता दे रहा ठीक है अभी बताता हूं अगर आप तत्वदर्शी के लिए शास्त्रोक्त बात नहीं लेते हैं तो उसमें प्रॉब्लम य आएगी कि तत्व तो तेजाब भी है

01:31:41:13 तत्व तो दूध भी है दूध में भी तत्व है बहुत सारे तत्व है पानी को भी तत्व कहा गया है विज्ञान की भाषा में ठीक है तो अगर तत्वदर्शी का शाब्दिक वो ढांचा निकाला जाए तो वह निकलेगा तत्व को देख सकने वाला तत्वदर्शी यानी पानी को जो देख लिया वो भी तत्वदर्शी है जिसने दूध को दे लिया व भी त है मेरी बात सुनि मेरी बात पूरी हो जाने द पूरी हो जाने दीजिए पूछूंगा आपसे तो जब तक हम शास्त्र का आधार नहीं लेंगे कि यहां पर किस तत्वदर्शी की बात हो रही है तो कोई भी जो पानी को देख लेगा वो भी तत्वदर्शी सिद्ध हो जाएगा तो य पर कहीं नहीं इस जो लोक आपने बताया 15.1 उसमें नहीं लिखा है कि संसार रूपी वृक्ष की उल्टी उल्टे वृक्ष की व्याख्या कर देने वाला तत्वदर्शी है यहां लिखा है वेद को जानने वाला और तत्वदर्शी की बात आई

01:32:41:09 है तत्वदर्शी की बात आई है चौथा अध्याय 34 वा श्लोक बहुत फेमस है आपको कैसे नहीं पता व मैं नहीं जान पा रहा हूं पर मैं बता दे रहा हूं आपको आपके य से इसको ही कोट किया जाता है सदा रामपाल जी की प्रमाणिकता के लिए आपकी तरफ से ज्यादातर सबसे पहले यही श्लोक कोट किया जाता है उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ 434 में लिखा है तत्वदर्शी तो एक बार मैं आपको रोकना चाहता हूं इसमें क्या उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर के मन में उमड़ने वाले जितने भी आपके आपके मन में उमड़ने वाले जितने भी प्रश्न है मैं उनका पूर्व पक्ष के रूप में सबका जवाब दे दूंगा बिना आपसे पूछे आप मुझे समय तो दीजिए आप जितने प्रश्न पूछने वाले हैं मैं सबका जवाब दे रहा हूं आपको आप समय दीजिए मुझे बोलिए हर प्रश्न का जवाब दे रहा हूं हां तो यहां पर इन्होंने कहा कि तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ भगवत गीता 434 उसके बाद 435 में उन्होंने कहा कि वो कौन सा ज्ञान है जिसको जो तत्व ज्ञान कहा गया है और तत्व ज्ञान को जानने वाले को तत्वदर्शी कहा गया तो आगे कह रहे हैं मुझ सच्चिदानंद

01:33:56:19 परमात्मा में देखने वाला ज्ञान यह लिखा है

✅ This part is already used · 01:33:59:24 – 01:34:11:08 (0:11)

→ Used in: A · Live क्या रामपाल के kabir अविनाशी अजर है ? #rampaljimaharaj #kabir at 3:06:16 ↗

01:33:59:24 जिस ज्ञान के द्वारा तू संपूर्ण भूतों को नि शेष भाव से पहले अपने में और फिर मुझ सच्चिदानंद घन परमात्मा में देखेगा तो

⬜ Not used yet · 01:34:11:08 – 01:39:45:27 (5:35)

01:34:11:08 यहां पर भगवान ने कहा कि तू तत्वदर्शी के पास जाकर के ज्ञान ले वह ज्ञान जो मुझे परमात्मा मुझ में पूरी सृष्टि को दिखाएगा सब लोगों में सृष्टि को दिखाएगा मतलब श्री कृष्ण भगवान परमात्मा को देखना परमात्मा को श्री कृष्ण में देखना श्री कृष्ण भगवान को परमात्मा समझना यह तत्व ज्ञान है और इस तत्व ज्ञान को जानने वाला तत्वदर्शी है यह 435 से निकला अब आ जाते हैं आपके 15 एक प मैं आपके सारे प्रश्नों का जवाब दे दूंगा जो भी मन में आ रहे मैं जानता हूं कौन ककन से आ रहे मैं उनका भी जवाब दूंगा आते आपके 15 अब भाई साहब देखिए सबसे पहली बात है कि आपने कहा कि 15 एक में यह कहा गया है कि 15 एक से सिद्ध होता पहली बात तो यह है कि 15 एक में लिखा तत्वदर्शी है उल्टे वृक्ष में व्याख्या करने उल्टे वक्ष के रूप में व्याख्या करने वाला तत्वदर्शी यह नहीं लिखा है वेदों को जानने वाला लिखा है ठीक है वेदों को जानने वाला

01:35:13:26 अच्छा भाई साब मैं जानता हूं आप क्या पूछेंगे मैं बता तो रहा हूं मुझे बोलने मैं सारे प्रश्नों का जवाब दूंगा मैं आपके सारे प्रश्नों का जवाब देगा वेदों को ने वाला किसे कहा गया है देवी भागवत में मैं आपको बता देता हूं ठीक है वेदों को जानने वाला देवी भागवत में किसे कहा गया है वो मैं आपको बता देता हूं [संगीत]

01:36:27:10 श्रीमद् भगवत गीता मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी समस्त प्राणियों का ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृति को अपने अधीन करके योग माया से प्रकट होता हूं चार छ श्रीमद् भगवत गीता 10 ती जो मुझको अजन्मा अर्थात वास्तव में जन्म रहित अनादि और लोगों का महान ईश्वर तत्व से जानता है तत्व से वो मुक्त हो जाता है जो मुझे तत्व से जान लेता है वो मुक्त हो जाता है श्रीमद भगवत गीता 10 तीन यह है वो तत्व ज्ञान जिसको जानने वाला तत्वदर्शी कहलाएगा ठीक है और वेदों को जानने वाले को देवी भागवत में कहा गया है कि जो मां भगवती को परम ब्रह्म परम ब्रह्म स्वरूपा समझता है वो तत्व वेदों को जानने वाला कहलाता है जहां पर वो वाली बात आई है ना आपकी कि सतयुग के राक्षस जो है ब्राह्मण है कलयुग के देवी भागवत में वहीं पर बात लिखी है वही यह बात लिखी है देवी मां को परम ब्रह्म समझने वाला वेदों को जानने वाला है पहली बात ये हो गई अब एक बात यह और आती है कि आप अगर यह कहो कि उल्टे वृक्ष के रूप में संसार की जो व्याख्या कर दे तो अभी संदीप बत्रा जी भी कर देते हैं

01:37:42:12 क्या ये भी तत्वदर्शी हो जाएंगे अभी जो मयंक कुमार दि ये भी कर देंगे या ये भी हो जाएंगे एक बात दूसरी बात एक बात य आपकी तरफ से क्लेम किया जाता है कि जो वेदों में संपूर्ण ज्ञान नहीं है वेदों में संपूर्ण ज्ञान है ही नहीं है क्या आप बताओ आपके अनुसार वेदों में हमारे गुरु जी यह बताते हैं वेदों में ज्ञान तो है उसम अधूरा ज्ञान है संपूर्ण अधूरा वही वही वही कह रहा हूं तो यहां से भी वो तत्व ज्ञानी नहीं स हुए वेदों को जानने वाला तत्व ज्ञानी सिद्ध हो जाएगा अब आप तत्व ज्ञानी कैसे स तत्वदर्शी कैसे कहेंगे जब जब वेदों में अधूरा ज्ञान है तो उसको जानने वाला तत्वदर्शी कहां से सिद्ध हुआ जब वेदों को जानने वाला मां भगवती को ब्रह्म मानने वाला परम ब्रह्म मानने वाला परमात्मा मानने वाला है तो मां भगवती को नॉर्मल सामान्य मानने वाले एक प्र देवी मात्र मानने वाले देवी भी नहीं भले बड़ा अपमान किया इन लोगों ने वो वेदों को जानने वाला कैसे सिद्ध हो जाएगा जब तत्वदर्शी कहा जा रहा है तत्व से जानने वाला श्री कृष्ण को श्री कृष्ण

01:38:57:12 को परमात्मा मानने वाला कहा जा रहा है तत्व ज्ञानी तो फिर श्री कृष्ण को परमात्मा ना मानने वाला तत्वदर्शी कैसे सिद्ध हो जाएगा इतने सारे प्रश्न खड़े हो जाते हैं बताइए पहली बात तो श्री कृष्ण को भगवान क् हम श्री कृष्ण को विष्णु जी को जो त्रिदेव है उनको भगवान मानते हैं ये आपकी गलत धारणा है आप कह रहे हो हम उसको भगवान नहीं मानते ये अपने लोक के ब्र परम ब्रह्म परमात्मा सच्चिदानंद स्वरूप

01:39:30:10 परमेश्वर अब आपने अध्याय चार अध्याय चार के श्लोक 34 का जो वर्णन किया था आपने अभी उसमें लिखा था जो आपको पढ़कर सुना रहा हूं जो जो आपने सुना है उस ज्ञान को त तत्वदर्शी ज्ञानियों के

01:39:45:27 पास जाकर समझ उनको भली बाती नवत प्रणाम करने से उनकी सेवा करने से और कपट छोड़कर सरता पूर्व प्रश्न करने से वे पर मात्म तत्व को भली भाति जानने वाले ज्ञानी महात्मा त उस तत्व ज्ञान का उपदेश करेंगे यहां पर

⬜ Not used yet · 01:39:59:22 – 02:03:19:25 (23:20)

01:39:59:22 तत्व आपने यहां पर तत्व का अर्थ निष्कर्ष भी होता है जैसे कोई जो ज्ञान होता है कोई प्राणों का ज्ञान है या उसका निष्कर्ष भी तत्वज्ञान कहलाता है कोई भी सता है तत्व ज्ञान कहलाता है ना और इस तत्व ज्ञान के लिए आप कोट करते हो 15 एक के वेदों को जानने वाला तत्व ज्ञानी है हालाकि वहा लिखा नहीं है वेद को जानने आप कहते होय को जानने वाला देने वाले नहीं है हर जगह नहीं लिखा होगा त ह शलोक में नहीं लिखा होगा होगा यह कहा लिखा जगह नहीं लिखा होगा अगर तर्शी की बा

01:40:49:13 में उसम बता किसका किसका गीता के हर श्लोक में तत्वदर्शी का जो आप कह रहे हो लिखा होगा हर श्लोक में लिखा हुआ है तत्वदर्शी भाई साहब मैंने तो आपको बता दिया ना उसके अगले में देखिए तत्व से जानने वाला कौन है भगवान ने 10 तीन में बता दिया तत्व से मुझे जानने वाला ही तत्वदर्शी है बता तो दिया आप जब नई व्याख्या ला रहे तो आपको बताना पड़ेगा कि रामपाल दास जी कहां से तत्वदर्शी सिद्ध हो रहे हैं तो अध्याय जो 15 का लोक एक मैंने प्रश्न क्यों किया है मैंने प्रश्न क्यों किया है क्योंकि आपके ही अनुसार जो वेद है वो तत्व ज्ञान नहीं देते हैं आपके अनुसार वेद अधूरे हैं अधूरा ज्ञान है उनमें आपके अनुसार वो तत्व तत्व ज्ञान देने वाले नहीं है तो फिर जब गीता में यह लिखा है कि 15 एक में कि भैया जो उल्टे वृक्ष के रूप में व्याख्या कर देगा अगर मान भी ले कि नहीं उल्टे वृक्ष की व्याख्या तो केवल रामपाल दास जी ने ही की है जबकि बहुतों ने की है मगर मान ले कि केवल उन्हीं ने की है तब भी वो वेदों को को जानने वाले के रूप में अधूरे ज्ञान को जानने वाले के रूप में शापित हो रहे हैं अधूरा ज्ञान जानते क्योंकि उन्होंने वेदों को जानने वाले बन गए उल्टे वृक्ष की व्याख्या करने के रूप में तो तत्वदर्शी जो आपने कहा तत्व का मतलब निष्कर्ष

01:42:04:24 होता है तो वो निष्कर्ष वाले कहां से हो गए अध्याय 15 के लोक एक बार सुनिए उसम क्या लिखा है आप आप थोड़ा सा एक काम करिए कैप हटा दीजिए क्योंकि आपका चेहरा बिल्कुल अंधेरे में है अब दिख रहा चेहरा दिख रहा व समझ में नहीं आ रहा चेहरा आपका अब देखिए सर इसमें आदि पुरुष परमेश्वर मूल वाले ब्रह्मा रूप मुख भया भैया आपका चित्र रुक गया है हेलो जी

01:43:08:15 तब तक भैया वो प्रमाण दिखा दीजिए जो व में भेजे आपको ट में मुझे नहीं मिले वो प्रमाण आप आप अभी कर दीजिए जी संदीप जी बोले सर यह जो तत्व ज्ञान की बात कर रहे हैं ना यह गीता जी के अंदर जो तत्व शब्द आया है ना व इनको यही नहीं पता कि व आत्मा के लिए आया हुआ हैय आ गया भविष्य पुराण भविष्य पुराण का श्लोक देख लीजिए आ गया जी जी उसम तत्व ज्ञानी तत्व ज्ञानी उसको बोलते हैं जो आत्मा द्वारा परम तत्व का आपको दर्शन करवा दे जो चार ब प कह रहे हो बिल्कुल सही बात हैय वो परफेक्ट बात है पर इनको पले पहले तत्व को समझना पता नहीं किस चीज को समझ रहे हैं इनको तत्व देख सबसे जरूरी सबसे जरूरी बात ये है कि आप वेद और गीता के द्वारा किसी को तत्व ज्ञानी सिद्ध जब कर पाओगे जब आप यह मानोगे कि वेद और गीता के द्वारा तत्व ज्ञान मिलता है आप तो खुद ही कह रहे व अधूरे है सर वो भी ये भी पता होना चाहिए प तत्व का अर्थ क्या है पूरी गीता जी में तत्व का अर्थ तो आत्मा ही तो हुआ आत्मा आत्मा किसका अंश है श्री

01:44:23:15 हरि विष्णु जी श्री कृष्ण भगवान बारबार कह रहे मुझे तत्व से जानना ही तत्व ज्ञान है बारबार कह रहे हैं कान पकड़ोगे एक कावत नहीं है कान ऐसे पकड़ लो ऐसे पकड़ लो मैं कह रहा हूं कितनी जगह से पकड़ोगे यहां से पकड़ लो यहां से पकड़ लो यहां से पकड़ लो इनकी बात सिद्धि नहीं होगी सबसे पहली बात जब च 34 को एक क्रम में लेते हैं चार 34 को जब हम 15 एक से जोड़ते हैं तो चार चौ में कहा गया तत्वदर्शी 15 एक में कहा जा रहा है वेदों को जानने वाला वेदों को जानने वाला भागवत में कहा जा रहा है कि वेदों को जानना विष्णु को जानना वेद किसके परायण विष्णु के परायण श्री हरि के परायण और ब्र और ब्र और ब्रह्म और ब्रह्म की शक्ति एक ही है तो वहा देवी को परम ब्रह्म के रूप में देखना तत्व ज्ञान है वेदों को जानने वाला है अगर वेदों को जानना तत्व ज्ञान है तो ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश को परमात्मा मानने वाला तत्व ज्ञानी है तो यहां से भी खंडित हो गए तीसरी बात जब ये खुद कह रहे हैं कि वेद और गीता में तत्व ज्ञान है ही नहीं तो वेदों को जानने वाला तत्व ज्ञानी कहां से हो गया जी जी कहा कहा से कहां से इनको किस किस प्रकार से चोट पहुंचेगी सर जब तक ये तत्व का अथ आत्मा नहीं समझ तब तक समझ नहीं आना

01:45:39:03 बिल्कुल और वो जो चौथा पॉइंट है कि अगर इन्हीं ग्रंथों से हम देखें तो तत्व ज्ञानी तो श्री कृष्ण को भगवान मानने वाला श्री कृष्ण को परम परमेश्वर मानने वाला तत्व ज्ञानी सिद्ध हो रहा है नहीं तो तुम अपनी व डेफिनेशन लाओ अब इस डेफिनेशन लिए इनको वेद और गीता से बाहर जाना पड़ेगा जी जी बाहर जाना पड़ेगा तब भी हो सकता है वो तत्वदर्शी शब्द ना आ जाए नहीं आप हो सकता क्योंकि जो उनकी भाषा शैली है जिसमें कबीर सागर और गरीब दास जी ने लिखा है वो ये जो शुद्ध हिंदी वाली भाषा शैली तो है नहीं वो तो देसी भाषाए है है ना रस वाली भाषा है तो उसम वो तत्वदर्शी मिलना बहुत मुश्किल है तो कहां कहां से आ गए क्या नहीं आय रामपाल जब इनके अनुसार शास्त्र अधूरे हैं वेद ही पूरे नहीं है फिर भी ऐसे क्यों बोलते कि हम शास्त्रों के अनुसार भक्ति देते हैं वेदों के अनुसार भक्ति देते हैं इसलिए होता है जैसे कुछ पेपर आ जाते क कई बच्चे कहते बाहर से पेपर आ गया अब जब पेपर की तैयारी नहीं कर तो बाहर से ही आएगा पेपर वो हिसाब है इनका अब इन एक एक पॉइंट प बात करते हैं भैया बिना चहरे के नहीं लेते

01:46:53:02 भ आ बिना चेहरे के ना आए यहां से इनको कि आउट कर दो कुछ बदमाशी करने आए हो सकता है हा हा जीी हा सही क रहे तत्व का अर्थ पूछो तत्व का अर्थ रा गीता जी के हिसाब से क्या है सिर्फ तत्व का पूछो वही पर ये हथियार गर देंगे इनको तत्व का अर्थ नहीं पता है ह ये कुछ और ही मान बैठे हैं जी फुल स्क्रीन का यह जो प्रमाण है थोड़ा देख लीजिए विश् पुराण में 35 वा अध्याय है और क्या क्या लिखा है जरा देख लेते

01:47:33:14 हैं सूर्य किरण मतलब ऊपर जाइए ऊपर सूर्य किरण के समूह में पिंडी रूपी में पिंडी रूप में गो के मूत्र में साक्षात गंगा व गोबर में यमुना जी व्यवस्थित है तभी ये सब प्रमाण है आप देख सकते हैं जी जी जी ठीक है आज बात हो रही है तत्वदर्शी में तो आज इस तत्वदर्शी शब्द की हम पूरी मीमांसा कर लेंगे जी जी 26 वा अध्याय 27 वा अध्याय है और 35 वा अध्याय 28 वा अध्याय है 29 वा अध्याय है जी जी या शायद य अध्याय नहीं है श्लोक क्रमांक है ठीक है इसलिए बाद में देख लिया जाएगा बा करते लोग टी आर पहाड़ी जी को ले लेते हैं तत्वदर्शी के मामले में इनकी भी कुछ ज गहन अध्ययन होगा इनका एड टू स्टेज और हम ले लेते हैं वो रामपाल दस जी कहां गए इनको देखो मात्रा नहीं लगाना आता है रामपाल 10 लिख रहे हैं देख लो भाई या आर पहाड़ी भैया कल उनके डिबेट में जाने की कोशिश कर रहे थे बोल भी रहे थे मुझे ऐड करो प्रमा देता लेकिन वो ड नहीं कर रहे थे

01:48:49:06 अरे रामपाल दस जी अपनी वो मात्रा तो सही लगा लीजिए रामपाल 10 लिखा है देखिए यह लोग है जो रामपाल दास जी का पक्ष कमजोर करते हैं आकर रामपाल 10 वाह नहीं सर इसने सही लिखा है 10 क्योंकि वो भी तो कवि का कबीर कर देते हैं तो ये भी 10 का दास कर देंगे ना अच्छा दास दस का दास यह गोडाउन मेंही प्रॉब्लम है सर गोडाउन में प्रॉब्लम है शोरूम ऐसा ही निकलेगा चलिए कोई नहीं हां भाई स्पिरिचुअल नॉलेज भैया जय श्री राम जय श्री राम

01:49:28:22 जी चर्चा करो आप लोग हम सुन रहे हैं आप कहां से हैं क्या परिचय आप क्यों आए हैं स्टेज पर क्यों जुड़े हैं प ने निकले हो नहीं नहीं सुनने के लिए आए सव सरत नहीं करते क्या हमारे वीडियोस में लाइव में आप कमेंट नहीं करते हैं क्या करते हैं नहीं पता नहीं नहीं करते सा पता नहीं कमेंट नहीं करते चलिए जब कोई कार्य नहीं है तो रहने दीजिए आप दर्शक बन के देखिए फिर वो भाई साहब कहां चले गए जो टोपी आधा चेहरा था कहां चले गए सेव दाजी लगता काम पड़ गया उनको चले ग हर हर महादेव सभी लोग हर हर महादेव जय श्री राम जय श्री राम ज आज तत्वदर्शी संत की मतलब गहन अध्ययन हो रहा है इसम जी जी तत्वदर्शी प हर हर एंगल से हम लोग देखेंगे कि भाई रामपाल दास जी तत्वदर्शी हुए तो हुए कैसे बिल्कुल बिलकुल एक एक बात प अब जो है बात की जाएगी सबसे पहले तो तत्व क्या है यही पूछना

01:50:44:02 बाकी है ज्ञान की बात तो छोड़ दीजिए क्योंकि हमारे शास्त्रों में तो मुझे तत्व से जान लेना यानी मेरा पार मर्थक स्वरूप जान लेना अपना पार मर्थक स्वरूप जान लेना ये तत्व है अब आप अगर कुछ नया तत्व ला रहे अच्छा आप अगर वेदों को जानने वाला तत्व ला रहे हो तो दो बातें वेदों को जानने वाला वो कहा गया जो परमान बमा विष्णु महेश भगवती गणेश को एक बात दूसरी बात वेदों को जानना तत्व है ही नहीं आपके अनुसार क्यों क्योंकि वेद अधूरे है अभी बोला ना भाई ये आप लोग मैंने एक बार वहा मेले में भी कहा था जो भी हिंदू है और अभी वो फसा नहीं है ये जरा अपने भेजे में डालो इनकी बातें इनको शर्म नहीं आती है ये कहते हुए कि वेदों में अधूरा ज्ञान है और हिंदू कहते हैं हिंदू के नाम प ते

01:51:35:02 हैं ये हिंदू है जो गीता और वेद के लिए बोल रहे है कि अधूरा ज्ञान है यही है तुम्हारे वो हिंदू जो गीता तेरा ज्ञान अमृत कह कर के ले जाते तुमको भाई से भाई को अलग कर देते हैं बिल्कुल सही कह रहे हो शिवांश भाई जैसे यह तत्व का जो ज्ञान था यह 600 साल पहले कबीर दास जी आए फट फुल बात है 600 मर जाना अपने अपने घरों में कट जाना अलग अलग हो कर के ऐसे क्योंकि गीता और वेद में तो भैया तत्व ज्ञान है ही नहीं अधूरा ज्ञान है बाट देंगे तुम्हे इसी तरह से कुछ लोग आएंगे प्रजापति हमारा जो है ईश्वर आता है डेली हमको बताने के लिए वो आएंगे वो कहेंगे ले जाएंगे आध को फिर कुछ लोग आएंगे शिवजी जो है भगवान नहीं है वो ले जाएंगे आध को फिर कुछ लोग कहेंगे कि वो भगवान अवतार नहीं ले सकता एनी हाउ नाश किसका हो रहा है सनातन समाज का देखो इनको जो स्वयं को कहते हैं गीता तेरा ज्ञान हमरे हम भी सनातनी है देख लो इन सनातन का वेदों में अधूरा

01:52:50:10 ज्ञान है शर्म नहीं आती बोलने से पहले शम क्यों नहीं आती है क्योंकि इनको घटी पिला दी गई है ब्रेन वश हो चुका है लज्जा भी नहीं आएगी बोलते समय वेद और गीता में अधूरा ज्ञान है जी जी भैया जो चैट पर आ रहे हैं तो शायद उनको लिया जाए वह आ रहे हैं शायद कौन आ रहे दस के नाम से लो भैया इनको रामपाल दास जी को राम स सभी को हा जय श्री राम बोलिए जय श्री राम स सभी संतो की जय सभी भक्तो की जय र्मी पुरुष की बता तत्व ज्ञानी किस आधार पर कहते हैं रामपाल दास जी को बताए त भगत जी ऐसा है कवि साब भी ऐसे री राय है पथरी गए सतलो और बाकी श जी आए थे

01:53:53:25 तत्वदर्शी क्यों का तत्वदर्शी से अपनी बात शुरू करिए कि तत्वदर्शी का अर्थ ये होता है उसके बाद तत्वदर्शी का अर्थ य होता है तो इसलिए ऐसा यहां लिखा उसने यह किया इसलिए वो तत्वदर्शी सिद्ध होता है ऐसे आइए पहले आप जो ऊपर की बात नहीं नीचे से ऊपर जाइए सीढ़ी से ऊपर जाइए जिसे हम समझ पाए हम अल्प ज्ञानी है हम अल्प ज्ञानी है नीचे से जैसे पृथ्वी जलका य हमा साब सबसे पहले बताए तत्वदर्शी का अर्थ क्या है र् बता र पाच बता अच्छा तो इन पाच तव के लेने वाला तत्वदर्शी हो गया यह भी है और परम तण परमात्मा है सते मल परमात्मा को जानने वाला तत्वदर्शी हो गया हा परमात्मा को जाने तर्शी हो जाएगा ना अच्छा परमात्मा को जानने वाला अगर हम लोग भगवान श्री कृष्ण को जानते हैं तो हम तत्वदर्शी हो गए हां जो जान ले हो जाए त क्या तो

01:55:08:28 यानी कि यहां पर यह संदीप बत्रा जी बैठे हैं यह भगवान कृष्ण को जानते हैं परमात्मा के रूप में तोय तत्वदर्शी है जानते पर ऐसा है ना साक रूप में मानने उनका परम चतु आत्म तो निकल भाई साहब वो दोनों रूपों को मानते हैं तो अगर दोनों रूपों को मानोगे तो फिर आप साकार रू में स् जाओगे ये अपनी बात जो है जो आप बात बोल रहे हो वो प्रमाण के साथ बोलो हम आपको प्रमाण के साथ अपनी बात बोल दे क्या अगर आपकी आज्ञा हो तो परमाण तो मैंने आप मा तुम देख तो रहे हैं ना आ है ना सामने बताइए भाई साहब आपका पहला क्लेम है कि आप जो है शास्त्र समत भक्ति करते हो और हम लोग जो है जो जो रामपाल दास को नहीं मानते वो शास्त्र विरुद्ध भक्ति करते हैं तो आप अपनी बात जो बोले वो प्रमाण के साथ बोले बोलिए प्रमाण देखिए ऐसा जैसा श्री कृष्ण जी ने कहा है गीता जी में भूतो को पूजने वाले भूत बनते हैं पित्रों को पूजने वा पित्र के पास जाएंगे देवता को पूज देवताओ के पास जाएंगे मेरा पूजन करेंगे मेरे पास आएंगे तो श्री कृष्ण जी को कहां कर क करकी

01:56:24:15 भक्ति श्री कृष्ण ने कहा कि मैं परमेश्वर हूं परम आपने कहा कि परमेश्वर को तत्व से जान लेना यह बात उसम भी लिखी है श्री कृष्ण ने मुझे तत्व से जान लेना तत्व ज्ञान है मुझे तत्व से जान लेना उस की हम सब भक्ति नहीं कर पा रहे है ना कोई तो निकाल रहा कोई खा लिखा है नहीं कर पा रहे हैं मनम बातें नहीं लिखी बा बोलो देखिए श्री कृष्ण जी की भक्ति करेंगे तो उन्ही के स्वरूप को ध्यान करेंगे जब भाई साहब श्री कृष्ण ने ये कह दिया कि मैं परमेश्वर हूं भगवत गीता में सातवे अध्याय के 37 में श्लोक में तो उस परमेश्वर को दूसरे रूप के लिए कहा गया ना ब्रम रूप के लिए चलो आ जाते है ये कहा लिखा है दूसरे रूप के लिए परमेश्वर को बताओ लिखा नहीं मांग रहा हूं मैं केवल ऐसी बात कर रहा अभी तुमसे मनम बात है सब

01:57:33:19 ऐसे अरे तो बताओ ना कहा पर लिखा है वो कोई और परमेश्वर है श्री कृष्ण के अलावा और उसको जान लेना तत्व ज्ञान है वो ब्रह्म रूप जो बताया गया है वो अलग बताया गया है भाई साहब मुझे आप लोक क्रमांक बोलते जाइए जिससे हमारी बातें थोड़ी सरल हो हम लोग थोड़ा कम बुद्धि वाले हैं हमें थोड़ा देर से समझ में आता है आप प्लीज हम पर जो है कृपा रखिए और आप लोक क्रमांक बोलते जाइए भाई जी हमने नहीं कहा कम बुद्धि वाले हमने ना कहा नहीं हम तो कह रहे हैं ना भाई हम कह रहे हैं आप हमने कब कहा आपने ये कहा वैसे आप सब तो देखिए विष यांतर कैसे हुआ विषयात कैसे हुआ पहली बात तो ये है कि अब जब हमने आपके ही श्लोकों को पहले ही पकड़ रखा है तो आपने अपने उन्हीं श्लोकों को छोड़ दिया जिनका रक्ता मारा जाता सुबह से शाम तक यह बात आपने नोट की क्या बाकी लोगों नहीं छोड़ा उस तो कभी बा कर

01:58:32:09 थो देखिए प्लीज आपसे क्षमा आपसे आज्ञा मांग रहा हूं मेरे चैनल पर मैं ही आपसे आज्ञा मांग रहा हूं मुझे बोलने दीजिए ठीक है इनकी तरफ से रट्टा मारा जाता है सुबह से रात तक 44 15 44 154 अब इनका मुह नहीं खुल रहा है कि 44 में ये लिखा है और 15 एक में लिखा है कि वो जो है उल्टे वृक्ष के रूप में व्याख्या कर देगा वो जो है तत्वदर्शी होगा भैया हमारा वो वीडियो दिखा देना जरा जो मेले वाला सीन है उसमें शुरू में ही है कि जो उल्टे वृक्ष के रूप में व्याख्या कर देगा वो तत्वदर्शी होगा अब 15 एक की जब हमने बात पकड़ ली है तो अब ये 15 एक को छोड़ दे रहे हैं अब केवल मौखिक बात कर रहे हैं लिखित बात ही नहीं कर रहे हैं ऐसा है ना भगवान या कबीर साहब हो या सतगुरु देव हो ठीक है पूरे या फिर श्री कृष्ण हम आप जो है जो भी बोले वो शास्त्र से बोले आप शास्त्र सम्मत भक्ति बताते हो शास्त्र से बोलिए हम आपको शास्त्र से बोल रहे

01:59:37:07 हैं 15 शलोक 17 में कहा ना उत्तम पुरुष अन्य उसम कहा गया उ हा हां और अगले मैं ही हं 18 में कहा वो मैं ही हूं देख लेते हैं रुको 15 श्लोक 17 रुको स साकार रू के [प्रशंसा] लिएला ये हमारे विषय से अलग है बस ये जो अभी आप बात कर रहे हमारे विषय प है ही नहीं ये बातें हो चुकी है अलग नहीं अलग नहीं है अलग नहीं है तो बताओ तत्वदर्शी का पहले अर्थ बताओ शास्त्र से और उसके बाद बताओ कि यह देखो यसे सिद्ध होता है कि 15 शलोक 17 में उस वो तत्व ज्ञान है बताओ तो आपका मार्ग सरल करते हैं आप ही अपना मार्ग जो है कठिन कर लेते हैं आप हमें तत्वदर्शी का अर्थ बताए शास्त्र से और फिर उस अर्थ को जोड़े 15 एक से या 151 से

02:00:35:20 जोड़िए वो परम च इसलिए कहा जाता है कि वो कभी मृत्यु को प्राप्त नहीं होता है वो मैंने आपसे पूछ है तत्वदर्शी का अर्थ बताए शास्त्र से उसके बाद उससे जोड़े 15 एक को फिर 151 को आपने कहा ना कि मैं त मैंने बता शास्त्र से बताओ तत्वदर्शी का अर्थ शास्त्र से शास्त्र से तो बता रहा श जी ने कहा अर्जुन तुम्हारे और मेरे ब जम हो चुके य शरीर के हो गए ना और जो

02:01:10:02 परमय बात कह देने से तत्वदर्शी कहा से सिद्ध हो रहा है भाई शास्त्र में कहा लिखा है तत्व ज्ञान शब्द तत्व जन त य सेही पता चल जाता कबी सा शरीर इन शरीर सेरना शरीर जाना जानने वाले को तत्वदर्शी कहेंगे कहा लिखा है ऋ में बताया तो तीन प्र है और एक रूप में विराजमान ते मैं आपसे य नहीं कह रहा हूं परमात्मा के बारे में क्या बताया ऋगवेद में मैं आपसे पूछ रहा हूं परमात्मा के बारे में व ऋगवेद वाली जान लेना तत्वदर्शी संत की पहचान है यह कहा लिखा है जी अभी पीछे आपने त को जान ले त तो हो गया परमात्मा हो गया परमात्मा हो गया त जान बताया कि भगवान श्री कृष्ण को परमात्मा के रूप में जान लेना ही तत्व ज्ञान है अब आप मुझे बताइए कि उनसे भिन्न किसी को परमात्मा के रूप में जान लेना तत्व ज्ञान है यह कहा लिखा है मैं ये क रहा उस भक्ति कर रहे कोई पित्र पूज कोई भूत

02:02:26:08 पू बहुत सारे चैप्टर नहीं खोलने हैं वो विषयात हो जाएगा यह बात तो रही जाएगी आपको अभी तत्वदर्शी सिद्ध करना है आप 15 एक जानते हैं कि नहीं जानते बताइए त बोला जाता है नहीं बोला जाता है करने के लिए 15 एक बोला जाता है कि नहीं बोला जाता है उल्टे रूपी वृक्ष का बताया गया अलग अलग ये बता देगा वो पूर्ण संत हैय बताया बताया कबी साल पहले आ बता दिया

02:03:08:28 था बो भाब भाई साब बोल सकता हं 15 एक में ये लिखा है मैं खोल देता हूं 15 15 एक में लिखा

02:03:19:25 है आदि पुरुष परमेश्वर रूप वाले मूल वाले और ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा वाले जिस संसार रूप पीपल वृक्ष को अविनाशी कहते हैं तथा वेद जिसके पत्ते कहे गए हैं उस संसार रूप वृक्ष को जो पुरुष मूल सहित तत्व से जानता है

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02:03:40:25 वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है इसमें कहां आया तत्व दर्ति वेद को तत्व से जानता तो क्या आ गया आ वे तत्व का क्या मतलब तत्व का मतलब परमात्मा है व ह हटाना जरा अभी आप कह रहे थे कि परमात्मा के बारे में जो पूर्ण ज्ञान होता है वह तत्व ज्ञान होता है ठीक है यहां पर लिखा है कि वेद के तात्पर्य को जानने वाला होता है क्या आपके अनुसार वेद में पूरा ज्ञान है भगत जी ज्ञान है मान

02:04:22:08 बताइए क्या वेद में पूरा ज्ञान है पूरा ज्ञान दे तो भैया जो उस परमात्मा की भक्ति करेगा उसी की बात करेगा क रहा क्या वेद और गीता में पूरा ज्ञान है हां कि ना पूरा ज्ञान भक्ति पूरा ज्ञान बता तो दिया श्री कृष्ण जी ने भी फिर बता दिया मैं पूछ रहा हूं एक बार बताइए कि हां वेद और गीता में पूरा ज्ञान है पूरा ज्ञान इशारा दिया गया

02:04:56:18 हा बोलने में दिक्कत आ रही है क्या मैं बता रहा पूरा ज्ञान हो तोरा हो तो परमात्मा की तर पूरान पूरा ज्ञान किसी सक्ष क श्र कण जी माखन क्यों खाते य बता मा भाई साहब जो प्रश्न चल रहा है उस पर रहे मैं आपसे पूछ रहा हूं कि यहां पर लिखा हुआ है कि जो उल्टे वृक्ष के रूप में संसार की व्याख्या कर देगा वो वेदों को जानने वाला कहलाएगा तत्वदर्शी नहीं कहलाएगा इसमें नहीं लि कहलाएगा दूसरी बात मैं आपको बता रहा हूं भागवत पुराण में देवी भागवत में वेद को जानने वाला इवन भगवत गीता में भी तत्व को जानने वाला वो है जो परमेश्वर को कृष्ण मानता है परमेश्वर को विष्णु मानता है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश इनको परमेश्वर मानने वाला वेदों को जानने वाला कहा गया है अगर वेदों को जानने वाला तत्वदर्शी है तो यहां पर जो हम लोग है जो बैठे हुए ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश

02:06:11:19 को परमात्मा कहते हैं वोह तत्वदर्शी है और जो नहीं कहता वो तत्वदर्शी नहीं है अगर 15 एक श्लोक के आधार पर आप यह कहते हैं कि जो रामपाल है वो तत्वदर्शी क्योंकि यहां पर उल्टे वृक्ष की व्याख्या करने वाले को वेदों को जानने वाला कहा गया है वेदों को जानने वाला तो दो बात वे किसकी रहे है वेद किस परमात्मा की भगवान श्री कृष्ण की और बोलो कोई बात नहीं क रूप में मान लो परमात्मा को कबीर साहब ने खुद कहा कण कबीरा सु जो दो कर जानी सतगुरु मिलाना होए उन्होने भी तो कहा है नहीं नहीं नहीं नहीं आपका जो कबीर है वो कृष्ण से बड़ा है अगर वो कह रहे हैं कि कृष्ण कबीरा एक है एक मिनट एक मिनट वो कह रहे हैं कृष्ण कबीरा एक इसको भी मैं मान सकता हूं मगर आपका जो कबीर है वो कृष्ण से बड़ा है क्या कबीर भी आपके अनुसार आपके अनुसार क्या कृष्ण जो कबीर है वो नाशवान है नहीं वो परम त नाशवान कैसे आपके अनुसार जो कृष्ण है वो तो नाशवान है शरीर नाशवान नाशवान नहीं जी तो कबीर का शरीर नाशवान

02:07:26:27 है क्या नहीं परम [प्रशंसा] तत्व को एक नहीं मानते कितना अपनी ही सचाई से भाग रहे आज देख रहे हो रोज कहते है कि वो जो इनकी भक्ति करेगा अभी मना कर रहे थे अब कह रहे मान लो परमात्मा मान लो भगत जी सुनो सुन आप भी सुनो सुनो सुनो अभी ये बताइए क्या कृष्ण की भक्ति करना भी मोक्ष दायक है कि नहीं है उस त की करोगे तो मोक्ष दय है अगर इस की करोगे साकार रूप तो हम उसम जाएंगे स्वर्ग लोक जाएंगे ब्रह्म लोक जा सकते हैं फ कबीर कबीर के साकार रूप की भक्ति जो है मोक्ष दायक है पर भगत जी वो साकार

02:08:20:13 य इसीलिए मैं कह रहा हूं कि अब जो है हम प्रमाण दो कृष्ण जो है जो ये आपने बोला आप जो है कृष्ण की भक्ति कर सकते हो जो कबीर है वो फिर भी श्रेष्ठ है और जो कृष्ण है वो श्रेष्ठ नहीं है यह प्रमाण दो कृषण जी श्रे है उस ल आपने कहा कबीर की साकार भक्ति कर सकते हो कृष्ण की नहीं कर सकते आपने कहा ना अब य प्रमाण सुनो जबस उस रूप में आ जाएंगे हो जाएंगे फिर वही बात आपने प्रमाण देना है कृष्ण की साकार भक्ति गलत है और कबीर की साकार भक्ति सही है प्रमाण दो गलत तो गलत तो है नहीं गलत हो सकती है हम साक रू माने चले जाएंगे गलत क्या है अरे गलत है मोक्ष नहीं मिलेगा ये चलो इसको और क्लियर कर दे कृष्ण की साकार भक्ति से मोक्ष नहीं मिलेगा कबीर की साकार भक्ति से मोक्ष मिलेगा प्रमाण दो चलो भगत जी कबीर साहब की हमारे तुम्हारे जैसा शरीर नहीं है वो विदेही रूप भाई साहब मु समान चाहिए कमान कष्ण जी ने कहा है उस कत्व के लिए कोई गला नहीं सकता अग्नि में जला नहीं सकता हवा में सुका नहीं सकता वो शरीर रूप में क आपसे ये कह रहा हूं बात ये हो रही

02:09:35:14 है कि कृष्ण जी की साकार भक्ति से मोक्ष नहीं मिलेगा और कबीर जी की साकार भक्ति से मोक्ष मिलेगा ये प्रमाण दो मुझे भगत जी आप पांच तर है ये आने जाने में लगे इसी को तो काल कहते हैं शरीर में आ फस ढेर सारी जगह भगवत गीता में लिखा हुआ है कि भगवान श्री कृष्ण की जो है वो परम तत्व है परम तत्व परम तत्व है तो सही पर शरीर को छोड़ के बताया है ना शरीर जब जैसे बाली ने मारा था कृषण जी के पैर में तीर शरीर त्यागा था तो वो पर आपका मतलब ये है कि तत्व से कृष्ण और कबीर एक है हां त एक है बिल्कुल एक है उन्होने कबीर एक है हा बिल्कुल तो तत्व से जब एक है तो वही तत्व जब कृष्ण रूप में है तो उसकी भक्ति बाधित हो रही है वही तत्व जब कबीर के रूप में उसकी बाद नहीं हो रही उसकी भक्ति तो फिर यह कहां लिखा है यह हमें बताओ अरे भत जी तो आख ही दिख रहा है त्या शरीर नहीं त्याग तो भी कबीर ही बकुल

02:10:44:08 रू मुझे एक बात बताइए क्या आपके जो कबीर है व सतिमान है नहीं है बताइए हा सर्व शक्तिमान इस बिल्कुल सब कुछ कर सकते हैं कि नहीं कर सकते कर सकते हैं करने वाले काम सारे करेंगे अब ये बताइए अब ये बताइए अगर वो सब कुछ कर सकते हैं कबीर दास जी तो आप एक तरफ कह रहे हैं कि उनका जो वोह है शरीर वह शाश्वत है है ना शाश्वत का समझते हैं

02:11:20:07 ना पूछ रहा सास मतलब नष्ट नहीं होता है सब कुछ कर सकते हैं नष्ट नहीं होता और परिवर्तनशील नहीं होता नित्य स्थाई होता है क्योंकि अगर वह परिवर्तित भी हो रहा है वो भी नष्ट की स्थिति है जैसे कि मान लो यह पेन है यह पेन जो है बदल गया और इतना बड़ा बन गया तो जितनी देर इतना बड़ा बना उतनी देर इसका जो यह वाला स्वरूप है नष्ट है नहीं है इसका अस्तित्व नहीं है हो गया ना तो परवत को भी वही कहा जाता है नाश ठीक है तो इसलिए परिवर्तन ना हो और जो सदा स्थाई रहे वह शाश्वत है नित्य स्थाई ठीक है अब आप कह रहे हो कि आपके जो कबीर है उनका शरीर जो है वह जो शरीर में आए थे वो शरीर शाश्वत शरीर है ठीक है तो क्या कबीर सर्वशक्तिमान भी है अगर उनका शरीर शाश्वत है भगत जी है तो सही एक रूप में बैठे ठीक है दूसरे बाल रूप में रू में उ प्र कर तक पहुच जाएंगे अब आपने कहा कि

02:12:35:13 कबीर जो है वो सर्वशक्तिमान भी है और आपने एक तरफ कहा कि उनका शरीर शाश्वत है नित्य स्थाई है अब बताइए क्या कबीर अपने शरीर को बड़ा छोटा शेर के रूप में हाथी के रूप में पहाड़ के रूप में परिवर्तित कर सकते हैं कि नहीं है अगर वो भगवान है ईश्वर है परम परमेश्वर है कर सकते हैं कि नहीं भा जीी ये बताइए सत्य सनातन परमधाम किसे कहते हैं देखा ज सत्य सनातन है वो तो वो देखने में मतलब ऐसे पाच त क्यों आएगा पा बताइए भाई साहब क्या भगत जी एक हो जाए क्या वो अपने शरीर को परिवर्तित कर सकते

02:13:25:25 हैं शरीर बताता रहा कर सकते हैं पर ना एक मिनट एक मिनट कर सकते हैं अगर तो फिर इसका मतलब उनका शरीर भी शाश्वत नहीं है शाश्वत इसलिए तो है जैसे उन्होने जैसे उन्होंने अपने शरीर को बदला और जितनी देर बदला उतनी देर उनका जो वो वाला शरीर था वो नहीं था दुनिया में उसी तरीके से भगवान श्री कृष्ण ने भी बदलने के रूप को ऐसे दिखा दिया कि हम शरीर छोड़ के जा रहे हैं बात तो वही हुई और कबीर साहब त्याग कर नहीं गए ना शरीर शरीर थे अरे भैया तो आप आपका जो आपके जो कबीर साहब है उनका शरीर यदि शाश्वत है तो बदल नहीं सकता और अगर बदल सकता है तो वो शाश्वत नहीं है और अगर बदल नहीं सकता तो वो सर्वशक्तिमान नहीं है दोनों में से एक बात आपको माननी पड़ेगी शमान सर्व शक्तिमान वो हो नासन हो जाए फिर वैसा हो जाए सर्व शक्ति नान नहीं मैं बता रहा हूं कौन होता है सर्वशक्तिमान उसकी परिभाषा सुन लीजिए त्रयो उपनिषद दो एक सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रम प्रद उपनिषद ईश्वर पूर्ण है पूर्ण का मतलब उसमें आए दाए बाए ऊपर नीचे किसी भी प्रकार से कोई भी कमी

02:14:41:04 नहीं हो सकती कमी वो जो चाहे वो कर सकता है सुन लीजिए सुन लीजिए वो जो चाहे वो कर सकता है अगर उस पर भी कोई नियम लागू हो रहा है कि व यह नहीं कर सकता तो वह ईश्वर नहीं है वो पूर्ण नहीं है क्योंकि कर भगत जी वो परम तत्व कैसा जो अपने आप को मतलब शरीर छोड़ के चले जाए और फिर अरे भाई श सुनिए इसको भी मैं बता दूं लीला रूप में शरीर को छोड़ के दिखा रहे हैं जैसे लीला रूप में आपके कबीर पहाड़ बन के दिखा रहे हैं लीला रूप में आपके कबीर शेर बन के दिखा रहे दिखा सकते कि नहीं शरीर तो नष्ट नहीं किया उन्होने अरे मेरे भाई वो शरीर नष्ट होना ही है जितनी देर शेर बने उतनी देर उनका वो शरीर है कहां गया शेर कहां बने वो तो बने नहीं शर बने तो आप आप ही कह रहे बन सकते हैं या तो बोलो नहीं बन सकते सर्व शक्तिमान बता इसलिए परम पू र हं शर बन सकते है कि नहीं एक लॉजिक क्वेश्चन है इनके लिए दिखा सकते बनने की क्या जरत है मिल दास जी एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट

02:15:56:13 प पॉट पॉइंट कट कर दू एक बात सु कबीर दास जी को सृष्टि बनाने की क्या जरूरत है भाई बताओ कोई कमी थी क्या उनको यह बात करना ईश्वर के लिए बहुत बेवकूफी भरी बात होती है कि उसको जरूरत क्या है तो हम तो अपनी गलती से आए कोई भगवान कोई बाप अपने बच्चों को गलत जगह भेजेगा क्या बताइए अब बालक चर्चा करके बड़ा अच्छा लगा पाड़ी जी आप बात कर लीजिए इनसे रामपाल दास जी चुप र रहिएगा एक मिनट सिर्फ एक बात पूछना है जो कबीर दास जी थे वो उसी रूप में आए थे यहां के जिस रूप में वो [संगीत] गए उसी रूप में आ अच्छा उस रूप में आए थे बच्चे के रूप में आए थे और बूढ़े के रूप में गए और एक रूप कैसे हो गया उनका शरीर खत्म नहीं होता रूप हो खम नहीं होता किसी भी तरह से सुनो सुनो सुनो अरे तीनों अवस्था आना उनकी शरीर में निरंतर बदलाव हुआ बालक अवस्था पर्ण अवस्था

02:17:11:16 शर आ वो तो शरीर उस शरीर में तो गए नहीं वस्था में गए वृद्ध में गए तो ले गए ड़ तो जो शरीर ले आ सबसे पहले मेरी बात सुनो तीन सि करना चाह रहे हो आपको अगर उनका शरीर बदल रहा है तो शाश्वत नहीं है और यदि बदल नहीं रहा है शाश्वत है तो तुम्हारा जो कबीर है वह सर्वशक्तिमान नहीं है शाश्वत का अर्थ पता है क्या हुआ मेरी बात सुनो वै वैसे तो शाश्वत का बहुत गुण अर्थ है वो छोड़ दो मगर अगर तुम्हारा साकार कोई शाश्वत मान ले तो उसमें हथौड़ी मार दो उसमें छेना मार दो उसमें बुलडोजर चला दो मगर वो टस से मस नहीं होगा कम से कम इतना तो मानना पड़ेगा कि वो ना कम होगा ना ज्यादा होगा वो जैसा है वैसा ही रहेगा शाश्वत वो है मगर आप खुद कह रहे हो कि वह बच्चे के रूप में आया फिर वो बड़ा हो गया तो ज्यादा हो गया यानी पहले जो बच्चे के रूप में आया वो शाश्वत नहीं था नित्य स्थाई कहां स शक्तिमान है तो कर सकते हैं लीला सर्वशक्तिमान नहीं है फिर वो शाश्वत नहीं है

02:18:27:01 भैया अब इनसे बहुत भेजा मान लिया ये जो है थोड़ा अ ह पब्लिक ने देख लिया है समझ लिया है आप लोग निर्णय करिएगा कि कैसा इनका स्तर है कितनी देर और इनसे वो मारा जाए सर जी जीता जागता उदाहरण है कि वो आए हैं बालक अवस्था में उनके शरीर में निरंतर परिवर्तन हो रहा है तो वह कैसे शाश्वत हो गए कैसे सनातन हो गए यही बातन से पूछता हूं इकोन का ईश्वर इनका ईश्वर में यही सेम है इकोन वाले भी कहते हैं कि गोलोक धाम में जैसे कृष्ण बैठे वैसे ही नीचे आते हैं तो अगर वैसे ही आते पहली बात तो बाल अवस्था में आए शरीर चेंज हुआ तो क्या हुआ कि उनका वो शरीर जो है गोलोक धाम वाला व नहीं खुद ही कह रहे और दूसरी बात अगर मान भी लिया जाए कि शाश्वत है जो बड़े हो गए य शाश्वत है यह शाश्वत है व पहले केवल लीला थी यह शाश्वत अब यह शाश्वत है तो यह ना तो शेर बन सकता है ना ही वह और कुछ कर सकता है बहुत सारी जगह ना वो अपने शरीर को बड़ा कर सकता है जबकि वह विश्वरूप व

02:19:42:07 विराट रूप भी दिखा रहे हैं भगवान विराट रूप भी दिखा रहे हैं अपना बिल्कुल नित्य स्थाई नित्य नित्य स्थाई होता है शाश्वत पढ़ो सनातन हां जी भैया जय जगने जी जय श्री राम व कीजिए आवाज नहीं आ रही आपकी हेलो आ रही है जी सर जी मेरे को यह लगता है गता पड़े बड़े नहीं रहते इ का दिमाग खराब रहता है और जाता है जो जैसा बोलता है उसको सच मान लेता है उसको मिस इंटरप्रेट करके जो भी गलती से बताते मिसली करते हैं और इसी को सच मान लेते हैं उसके बाद इस कल्ट में फस जाते कोई सा भी कल्ट हो जैसे कि ब्रह्मा कुमारी हो गया संत रामपाल हो गया राधा स्वामी हो गया य सब में लोग मासूम लोग फसे रहते लोग का दिमाग काम नहीं करता ऐसा मेरे को लगता है लोग अपना दिमाग नहीं लगाते जी आप सही कह रहे हैं संजय सिंह जी

02:20:57:13 बताइए जय श्री राम हेलो संजय सिंह जी आप गुटका खा रहे हैं क्या गुटका खा रहे हैं क्या नहीं गुटका नहीं खाते जरदा खा रहे बताइए आने का उद्देश्य आपके हां भाई तत्वदर्शी के बारे में ही आया था हां बोलिए तत्वदर्शी सिद्ध करिए रामपाल दास जी को नहीं नहीं रामपाल का शिष्य नहीं हूं यार अच्छा हा तो आपको आना नहीं चाहिए आप तो यहां पर मुझे लग रहा है रामपाल दास जी की तरफ से आए हैं क्या जो रामपाल दास को नहीं मानते उनको जो है बदनाम करो जाकर के नहीं नहीं नहीं ऐसा नहीं है आप जरदार थूक के आइएगा नहीं जरदा नहीं पहले तो यहां थोड़ा सभ्यता से आइए मुंह में कुछ भी डाल के ऐसे देखिए हमारे कोई भी गुरु कोई भी हमारे जो धर्म गुरु है वो कोई कभी यह नहीं कहते कि आप गुटका खाओ पान खाओ शराब पियो जुआ खेलो वो उनकी श्रीराम जी जी जी जी पाड़ी जी वो उनकी बुद्धि है जो यह

02:22:12:13 चीज करते हैं इसको हमारा सनातन से कोई लेना देना नहीं है कि हम सनातन की वजह से ये लोग गुटका खा रहे हैं या शराब पी रहे हैं या कुछ गलत काम कर रहे हैं इसमें सनातन का कोई हाथ नहीं व उनकी बुद्धि है बहुत से लोग ऐसे जो नहीं खाते हैं बहुत से लोग इको पहली बात तो सबसे पहले यही जानना चाहिए कि सनातन और शाश्वत कहते किसे हैं यही जान लेंगे तो य ईश्वर को सर्वशक्तिमान समझने के पीछे अपने ज्ञान के चू खोलने

02:22:45:28 लग गोविंद जी बोलिए जय श्री राम ये क्या दिखा रहे हैं स्क्रीन पर हां यह कमेंट बहुत आता है शिवांश जी इतने ऊंचे पद पर बैठकर भी आपने खीर वाली दूध में नहाने की बात कही है अच्छा हमने पहली बात तो व जो बात कही है कि खीर के दूध खीर से नाया जाता है पहली बात तो यह है कि उस पर हमने कहते समय यह कहा कि इसके बारे में हम प्रमाणिक नहीं है ऑथेंटिक नहीं बोल रहे जो वर्ली इर उधर बातें हो रही है यह जांच का विषय है मगर दूसरी बात यह है कि आपने पूछा था क्या जब बुरी तरीके से राम भगवान का अपमान किया जा रहा था कि उनको ज्ञान दे दिया यह दे दिया कहा किस आधार पर कहा था उन्होंने इसीलिए तो आप लोगों का साहस नहीं होता ना सामना करने का बस वही कमेंट्स में आप लोग बातें कर सकते हो क्योंकि बचपन में माता जी ने निष्ठा पूर्वक

02:23:51:03 इसीलिए नहीं आते हो इतनी बातें उन लोगों की गलतियां होंगी सनातन का अर्थ नहीं पता होगा रामचरित मानस और रामायण का भेद नहीं पता होगा मगर वह कभी कमेंट में नहीं आएगा लिख कर के रामपाल दास जी इतनी कपोल कल्पित कहानियां सुनाते हैं लोगों को कहां लिखी है कुछ नहीं पता उनसे कभी नहीं पूछा राम जी के विषय में क्या उड़ाई हुई है रामपाल दा जी ने कि वो सीता माता को कष्ट हुआ था क्या एक वो अब्बा फैलाई हुई है इन्होने कपोल कल्पित पूछा कभी जेल धाम वालों से हां जी गोविंद गुरकुल जी जय श्री राम हां हरि ओम जी सभी को जय श्री राम ये इन्होंने बताया हुआ है कि दिवाली आप क्यों मनाते हो जबक उन्होंने माता सीता को तो वनवास भेज दिया था तो आप इस खातिर भगवान को भगवान मान राम जी को भगवान मानते हो ये वो इनमें से दो चीजें कंटक्ट हो जाएंगी कैसे होंगी वो भी सभी लोग देखिएगा ध्यान से मैं एक बात और एक बात और पूछ लू इस व्यक्ति ने डीपी लगाई है गुरु गोरखनाथ की और गुरु गोरखनाथ

02:25:06:19 को रामपाल दास जी मूर्ख समझते हैं सोचिए ये कितनी मतलब भरत चाल है हिंदुओं को ये दिखाने की कि देखो हम तुम्हारे ही बीच के व्यक्ति हैं और हम रामपाल जी को फॉलो कर लय देखो बिल्कुल ये गोरखनाथ का चैनल चला रहे हैं और ये रामपाल दास जी के पक्षधर है क्यों चला रहे हैं गोरखनाथ के नाम से चैनल सोचो जरा इसलिए कि जो इनको फॉलो करने लगे पहले फिर धीरे-धीरे उसको य कन्वर्ट करें रामपाल दास जी की ओ देख लो इतना इतने इतने युद्ध स्तर पर पाखंड और धोखा चल रहा है धोखा इतने युद्ध स्तर पर कि गोरखनाथ जी का फोटो लगा लिया गोरखनाथ जी का चैनल चल रहा है और पक्षधर किसके हैं रामपाल दास जी के जो गोरखनाथ को अज्ञानी समझते हैं पर मैं आपको बताऊ ये जो बात है ना ये सबसे खतरनाक बात है ये ये सबसे खतरनाक बात है य मिशनरी क्रिश्चन मिशनरी ऐसे ही काम करती थी क्या काम करती थी कि आपको भगवत गीता छाप के दी भाई और उसके अंदर ज्ञान जो है व बाइबल का है

02:26:21:25 यह मैंने जो अभी देखा ना आप यकीन मानिए मेरे को य इनके जो झूठे वेद इन्होंने वो ट्रांसलेशन की ना उससे भी 10 गुना खतरनाक ये चीज लगी मेरे को क्योंकि यह ये बड़ी सोची समझी साजिश थी यह जो इन्होंने किया हुआ और दूसरी बात मैं आपको बताता बकल जो ये बोलते हैं कि राम जी को भगवान क्यों मानते हो उन्होंने तो वहां पर भेज दिया तो फिर दो चीजें कांट्रडिक्ट हो जाएंगी पहली तो यहां तो कबीर जी को यह बात पता नहीं होगी ठीक है या तो कबीर जी को यह बात नहीं पता होगी और उन्होंने रामायण नहीं पढ़ी होगी ठीक है क्योंकि भविष्य पुराण के जो हमने उत्तर उत्तरार्ध है उसका उसमें हमने पढ़ा भी था कि वह भगवान श्री राम के भक्त थे कबीर जी जो है वो राम जी के भक्त हैं ठीक है उनका जन्म भी हुआ है उनके माता-पिता ने उनको वन में छोड़ा था और वहां से वो ले आए फिर वो भगवान विष्णु की भक्ति करने लगे और यहां तक कहा है वो इतने उत्तम भक्त थे कि भगवान विष्णु स्वयं उनकी सभी सुविधाओं को पूरा करने लगे थे ठीक है अब यहां तो कबीर जी को यह बात नहीं पता थी लिए वो राम जी के भक्त थे पहले तो यह मुद्दा उठेगा ठीक है तो भक्त कबीर जो है क्या उनको नहीं पता था कि उन्होंने अपनी जो ये है माता है ठीक है जो उनकी धर्म पत्नी है उनको भेज दिया था वनवास तो अगर वो पता था फिर भी उनकी भक्ति कर

02:27:36:26 रहे हैं तो यानी कि उनको पता था कि उसके पीछे का लॉजिक क्या है यानी कि उनको पूरी बात पता होगी ठीक है तो कबीर जी से ही इनका पर्दा फाश हो जाता और दूसरी बात मैं ये कहने आ हूं पहले आपने मेरे को इनवाइट किया था लेकिन स्टूडियो फुल था इन्होंने कहां से सारी की सारी काल की कहानी चुराई है यह मैं आपको बता देता हूं ये अच्छा मैंने मैंने वो हाईलाइट करके सारा कुछ रख लिया है उसको हम अगली वीडियो में हो सके हैं कभी भी तो पूरा ही उसको पढ़ेंगे बाबा रामपाल ने कहां से चुराई है यह सारी कहानी ठीक है दरअसल भगवान श्री कृष्ण और माता राधा जो है वह प्रकृति स्वरूप में जब बताया जाता है कि यह सृष्टि का निर्माण नहीं हुआ था ठीक है उससे पहले वह एक जल में एक अंडा रूपी जो है ना वो होता है मैं पूरा पढ़ के बताऊंगा अब इतना याद नहीं मेरे को ठीक है वहां पर उनका एक पुत्र होता है उस अंडे में माता राधा जी का शक्ति स्वरूप और श्री कृष्ण का परमात्मा स्वरूप वह एक होता है ठीक है उस अंडे में से एक बालक निकलता है ठीक है उस बालक का जो कार्य है उसको कहा जाता है ज्योति निरंजन ठीक है उसे कहा जाता है ज्योति निरंजन और उसका नाम बड़ा स्पष्टता से वहां पर लिखा हुआ है

02:28:52:03 उसकी सहस्त्र बजाएं थी सहस्त्र शीष थे उसके और वह जो है उसी से सारे ब्रह्मांड जो है उपजत हैं सारे ठीक है और जो काल शब्द है वो उसके लिए बड़ जैसे कहते हैं ना बिल्कुल स्पष्टता से उसके लिए दिया गया है और वो भगवान श्री कृष्ण का सोवा अंश था ठीक है फिर उसको भूख लगती है भगवान श्री कृष्ण आते हैं ठीक है तो जैसे इन्होंने बताया ना कबीर जी को भूख लगी तो शंकर जी लेकर आ गए ठीक है यह कहानी भी उधर से चुराई गई है फिर उन्होंने उनको आधी आधी वरदान दिए कि अब तुम्ही से सारी सृष्टि का मैं निर्माण करवाऊंगी इस कल्प में तुमसे ही सारी मतलब आपका कहने का मतलब य है कि गप्प भी अपने मन से नहीं मारी है वो भी चुराई है कहीं से मैंने एक कमेंट किया था वो आपने शायद ध्यान नहीं दिया होगा हमारे साथ एक भाई जुड़े हुए थे जिन्होंने आपको प्रमाण दिए थे ना वो गोबर आदि के और वो धूप के उन्होंने तो उन्होंने आपको कहा कि मैं व कर रहा हूं आप आपको ठीक है मैंने नीचे कमेंट लिखा हुआ था कि हमारा

02:30:20:15 मैंने एक बार आदि शंकराचार्य जी की फोटो देख कर के शंकराचार्य की फोटो लगा कर के सनातन को पढ़ाने का प्रचार कर रहा है ा पर सोचिए तो फिर आप इस

02:31:03:26 में हल भी आप इसी लाइव में बता इसका हल जो है ना व आप इसी लाइव में इसके साथ ही बता दीजिए कि इससे बचने का फिर क्या प्रयत्न हो सकता है मैं बता रहा हूं मैं बस इसकी एक बात यह जो व्यक्ति है जो गोरखनाथ इस तरीके के व्यक्ति य व्यक्ति इसी तरीके के व्यक्ति एक बार आएंगे चैनल पर कमेंट करेंगे कि आपकी लाइव चर्चा देख के आपके वीडियोस देखकर मैं नास्तिक हो गया और फिर अगले दिन आएंगे वह रामपाल जी की तरफ से जो है पक्ष वाले कमेंट करेंगे अे भैया नास्तिक हो गए तो रामपाल को मानने वाले कहां से हो गए और वहां पर अपने लोगों के लिए जो अपने लोगों ज्ञान दे रहा है कि दीपावली करोगे तो नरक जाओगे यह होगा वो होगा यह सब चीज यह देखो यह सब वीडियोस बना रहे हैं यही लोग दीपावली में ये होगा वो होगा दीपावली बनाओगे तो ऐसा हो जाएगा वैसा हो जाएगा फिर ये लोग बना रहे हैं अच्छा अगर वास्तविकता ये है इन्हीं में से पाच द लोग ऐसे होंगे दीपावली में पटाखे फोड़े बना रह नहीं

02:32:06:12 पाएंगे अरे शिवांश जी अभी मैं एक वीडियो देख रहा था इनकी उसमें एक रामचरित मानस का जब व नदी पार कर रहे होते हैं भगवान श्री राम माता सीता तो कोई मुनि आते हैं कोई मुनि ऋषि एक दोहा है उसम चौपाई है उसमें वो आते हैं तो वहां का प्रसंग है पर वहां पर यह क्लियर नहीं लिखा कि वो कौन थे क्या थे मतलब उनका उदाहरण दे रखा वहां पर प्रसंग दे रखा है तो वो चौपाई दिखा के व लोग बोले थे कि ये जो मुनि थे ये कबीर दास जी है ये परमेश्वर कबीर दास जी है वीडियो में देखा मैंने अभी बना रखी है पर जस्ट नीचे का आप पढ़ोगे चौपाई तो उसम बोल कि जो मुनि थे वो श्री राम जी के चरणों की रज रहे और लक्ष्मण जी के पाव छू रहे हैं और सीता माता जी के पांव छू इसका मतलब कबीर दास जी पांव छू रहे हैं फिर अरे वो पूरा इनका पूरा गोल गल गोल गोल घुमाते रहो और व्यक्ति को जो है सद भक्ति कराते रहो वो सद भक्ति नहीं वो स भक्ति

02:33:10:01 है एक और पोल यही खोल देता हूं वीडियो में यह कहते हैं कि वही जो आजय दे रहे थे कि कुवारी गाय का दूध पीते हैं भगवान श्री कृष्ण देवी भागवत स्कंद में एक बार बैठे थे कहीं पर ठीक है तो उनका मन हुआ दूध पीने का तुरंत ही वह अपनी इच्छा शक्ति से सुर भी नाम की एक गौ उत्पन्न करते हैं अब वो विवाहित है या कुवारी वैसे तो विवाह होता नहीं कुछ भी उसके साथ उसका बछड़ा भी था परंतु उसके साथ उसका कोई सांड आदि नहीं था ठीक है और उसका दूध वो पान करते हैं ठीक है और इसी के साथ ये जो सारा कार्य है ना फिर आगे बढ़ जाता है यानी कि कुवारी गाय का दूध पीने वाला यदि कोई है हमारे ग्रंथों में तो केवल भगवान श्री कृष्ण है इन्होंने इतनी भी शर्म नहीं की कि भाई अपना कोई ग्रंथ ही लिख लू मैं अलग से वही से कॉपी पेस्ट कर रहे हैं सारा कुछ मतलब की पु इन्होने मिलावट और इन्होने मिलावट संक्षिप्तीकरण और संशोधन के नाम पर पेन चलाया है पहले से छपे हुए ग्रंथों में तो पूरी की पूरी कहानी कपी कॉपी है यह हम अगली लाइव में हो सकता है कि ग्रंथ में ही दिखा दे जैसे यहां पर दिखाते हैं अन्य शब्द जो आ रखा है उस मंत्र में ऋग्वेद के ना में अध्यन शब्द का अर्थ होता है अहिंसक गाय जो मानने योग्य ना

02:34:25:19 हो लि अहिंसक गौ थी वो भी लिखा है तो अपने मन से कर लिया उन्होने व अपने मन मैं आपको बताता हूं एक टस्ट है इसमें उन्होंने क्या किया कि हमारे हरियाणी भाषा में बोलते हैं य अध गाय है य अध गाय है मैं यह पूछना चाहता हूं क्या संस्कृत और हरियाणा की लोकल भाषा एक ही है क्या इनके हिसाब से इनके हिसाब से एक ही है जैसे संस्कृत में कुत्ते को स्वान बोला जाता है और उत्तराखंड में पहाड़ी भाषा में स्वान का अर्थ होता है सुंदर लोकल भाषा में तो हम किसी को स्वान कहे तो क्या संस्कृत में स्वान ग तो सुंदर तो नहीं होगा वो क्या होगा स्वान कार् तो कुत्ता है तो संस्कृत अलग है लोकल लैंग्वेज अलग है तो दोनों का डिफरेंट है उने वीडियो में कह रखा बाबा रामपाल जी ने कि हमारे गांव में हम बोलते है कि ये गाय अधेड़ है अध अधे है एक दूध नहीं देती है तो इसका अर्थ यह हुआ किय अध थी बिना ण द्वारा टच करी हुई गाय बोलते हैं इसको पर अधनोम लिखा अहिंसक गाय ना मान इनसे जो है ना इनसे इनका जो एक टैग

02:35:40:25 लाइन है कि हम शास्त्र सम्मत भक्ति करते हैं तो इनकी कोई बात शास्त्रों से तो सिद्धि नहीं होती आप सही कह रहे थे इनकी कोई भी बात शास्त्रों से बिना शास्त्र के बाहर जाए बिना शास्त्र के बाहर जाए इनकी कोई बात सिद्धि नहीं होती अभी मैं आज आज इनके चैनल पर फिर जा रहा हूं एमपी वो वाला जो था पूरा नहीं नाम लूंगा यहां पे ठीक है वहा आज मैं फिर जा रहा हूं आज देखिएगा इनका मजा ठीक है दरअसल मेरी आंख में कोई प्रॉब्लम हो गई थी इसलिए मैं कल गया नहीं था आज इनका मजा और देखिएगा कैसे ये उछलते हैं कोई प्रमाण नहीं किसी बात का धू अब मुझे लग रहा आपको ले नहीं शायद य पूछ रहे हैं ये पूछ रहे हैं कि आपका धूप का प्रमाण कहां प गोबर का अरे तुम जो ज्योति यज्ञ करते हो उसका प्रमाण किस ग्रंथ में है भैया तुम हमारे पास तो है मगर बात उसम कई सारे तर्क है क्या इस बात को लेकर हमारे और आप में वो हैता दूरी क्या इससे आपके धर्म ब्रम पर दिक्कत आ रही है और अत हमारे पास तो प्रमाण भी है तुम्हारे पास नहीं मिलेगा तो क्योंकि तुम्हारे पास ग्रंथ नहीं है तुमने काट दिया तुम जो ज्योति यज्ञ बता रहे हो वो ज्योति यज्ञ गीता में कहां है तुम जो बता रहे हो फोटो की पूजा और रामपाल जी के चप्पलों की भी पूजा होती है वो मैं आपको प्रमाण दूंगा अभी

02:36:56:00 मैं इसके ऊपर ज्यादा बात नहीं करूंगा क्योंकि अभी मेरे पास प्रमाण लेके आऊंगा मैं चप्पलों की पूजा यदि तुम कर चप्पल पूजा किस ग्रंथ में है भाई पहले तुम्हें यह बताना पड़ेगा ठीक है आज के आज के एक बार मुख्य विषय पर दोबारा से रोशनी डाल दे मुख्य विषय जो है कि तत्वदर्शी संत रामपाल नहीं है क्योंकि पहली बात 434 के बाद 435 में ही बताया जा रहा है कि भगवान श्री कृष्ण को परमात्मा रूप में स्वीकार करना ही तत्व ज्ञान है ठीक है पहला दूसरा अगर इनके अनुसार वहां नहीं बताया गया है 15 एक में बताया गया इनकी बात पकड़ ले तो वहां पर भी पेड़ की व्याख्या करने वाला तत्वदर्शी नहीं बल्कि वेदों को जानने वाला कहा गया है पर उस वा तत्व ज्ञानी है तो शास्त्र में वेदों को जानने वाला उसे कहा गया है जो ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती अथवा गणेश को परमात्मा मानता हो पर यह भी तो देखिए संसार रूपी जो वृक्ष है ना जो अश्वत वृक्ष की बात आ रही है वहां पर भगवत गीता दव अध्याय 26 में श्लोक में वो बता र कि अश्वत वृक्ष मैं ही हूं

02:38:11:13 भाई हा देख वहा पर वहा पर जो वृक्ष है उसको अविनाशी कहा गया है वृक्ष को ये समझिए बकुल वृक्ष को अविनाशी कहा गया है और वो उसको भी परमेश्वर रूप कहा गया है वृक्ष को भी परमेश्वर रूप कहा गया है ठीक है परमेश्वर रूप वृक्ष अविनाशी वृक्ष अब बात ये आती है कि अगर यह जो संसार रूपी वृक्ष है वो परमेश्वर रूप है परमेश्वर रूप तो है नहीं क्योंकि कबीर ने तो प्रकट की है सृष्टि बिल्कुल कबीर ने तो सृष्टि प्रकट की है और वो अविनाशी नहीं है क्योंकि अगर प्रकट की है तो वो लय भी हो सकती है बिल्कुल है ना तो वो अविनाशी कहां से हो गई ये बात हो गई दूसरी बात कि इनके अनुसार वेद और गीता का ज्ञान पूर्ण नहीं है अधूरा है तब भी वो तत्वदर्शी नहीं हुआ वहां उल्टे वृक्ष के रूप में व्याख्या कर देने वाला चौथी बात मतलब छवी बात कि उल्टे वृक्ष के रूप में व्याख्या कर तो दी मगर किसकी व्याख्या सही है और किसकी गलत है रामपाल दास जी की ही सही है गीता प्र गोरखपुर की गलत है या अन्य किसी व्यक्ति की गलत है यह कहां लिखा है कि केवल नि कौन करेगा कौन निर्धारण

02:39:26:16 कर रहा है भाई केवल एक बात पकड़ ली तत्वदर्शी तत्वदर्शी तत्वदर्शी त पागल हो गए उसम और जब जब उसको ढूंढा टॉर्च लेकर के ढूंढने निकले तो कुछ नहीं है खोखला है सब आज देखो वो आए प्रमाण पर बात ही नहीं कर रहे आज जो रट विद्या होती थी आप देखो धीरे धीरे कैसे बदल रहा है मामला जो प्रमाण गीता अध्याय फलाना और श्लोक इतना यह भाषा है इनकी गीता अध्याय तना पवित्र गीता अध्याय इतना श्लोक क्रमा लोक जी लोक 37 आज देखो दो लोग आए दोनों ने प्रमाण पर बात नहीं की एक बात परपर की बात एक बात जी कि हमारे ग्रंथ के आगे पवित्र लगाते हैं तो बड़ा खुश कम से कम उनका अपमान तो नहीं कर रखा जाए अंदर की चीजों के तोड़ मोर के पेश किया है अरे पर अंदर य तोड़ मरोड़ है कह तो रहे हैं गीता और वेद में अधूरा ज्ञान है खत्म हो गई बात मैं मैं ये कह रहा हूं य अंदर वाले ज्ञान को आपने मानना ही नहीं है तो वह पवित्र किस आधार पर है यह तो बता दीजिए कम से कम मैंने एक दिन पूछा था कि अगर उसम एक भी श्लोक आप कह रहे हो कि वो गलत है तो फिर तो वो झूठा हो गया पवित्र नहीं बचा पूछा था मैंने एक दिन

02:40:42:01 ये आज तक ये क्यों नहीं बता पाए वो 5 पर वाले श्लोक कौन-कौन से हैं ये नहीं बताएंगे कि जिस दिन उन्होंने बता दिया तो बाकी के 665 जो श्लोक है वो उनके लिए काल बन जाएंगे काल बिल्कुल बिल्कुल आ आओ आने के लिए पर ये वाली स्ट्रीम में अगली हम चर्चा कर लेंगे ये काल वाला फंडा इन्होंने कैसे चोरी किया और कुवारी गाय कौन सा है किसका कुवारी गाय का दूध पिया था ये वाली अगली लाइव में मेरे हिसाब से चर्चा कर लेनी चाहिए हम नहीं नहीं बिल्कुल बिल्कुल करेंगे उसको करेंगे श्रीश जी एक बार मैं ये 15 का जो एक शलोक नंबर एक है इसका थोड़ा निरूपण कर दूं मैं मैं आपको एक सेकंड रोकूंगा मेरे को एक बात बताइए कबीर जी की भक्ति करनी क्यों है हमें मतलब कोई इसका गोल होगा ना क्योंकि शास्त्रों ने कहा है और शास्त्र कौन से जिनको हम नहीं मानते मैं एक और बताता हूं इसमें क्योंकि उससे हम सतलोक चले जाएंगे और सतलोक में क्या है कोई दुराचार नहीं कोई कुछ नहीं कोई कुछ भी नहीं है ठीक है केवल सुख ही सुख है वहां इच्छा भी नहीं है पर इच्छा नहीं है तो फिर वो आत्माएं मांगकर यहां पर आया कैसे ठीक है ना उसने कहा ना मेरे को आमा और दूसरी बात अपनी सगी बहन के साथ व्या विचार करने की उसने कोशिश की यानी कि वहां पर व्या विचार भी खुला खुल्लम खुल्ला

02:41:57:06 चल रहा है तीसरी बात है वो अन्याय की जगह है मैं खुद से नहीं कह रहा हूं मैं इसका प्रमाण देता हूं यदि आज कोई किसी भी स्त्री के साथ दुष्कर्म करने की कोशिश करे ठीक है तो क्या न्याय है उसको दंड देना या फिर उसको घर से निकाल देना और कहना ये ले एक के 47 रोज एक लाख लोगों का कत्ल किया कर और ये ले मेरे घर जैसे 21 घर ले और खुली धन संपदा ले बस मेरे घर से चला जा यह न्याय है ये कौन सा न्याय है भाई मेरे को तो समझ नहीं आया तो ना वहां पर सुनिए ना वहां पर शाश्वत है ना वहां पर जाकर हमारी इच्छाएं पूर्ति होने वाली या खत्म होने पली है यानी कि हमें कोई भी किसी प्रकार का मोक्ष नहीं है वहां पर ना ही वहां पर हमें यह गारंटी है वहां पर हमारे साथ किसी अन्य के साथ व विचार नहीं होगा झूठ ठीक है मोह हर प्रकार का लोभ वहां पर है इसलिए वहां तो इनकी पुस्तक के अनुसार बता रहा हूं यह बात मैं सृष्टि रचना के अनुसार प्रथम पेज पर भी आपको मिल जाएगा तो क्यों करना क्यों है कबीर जी की भक्ति को क्या करना सतलोक जाकर बिल्कुल अब आप अपनी बात रखिए तो इसका मैं निरूपण कर देता हूं अभी मैं मैं ही खुद ही साबित हो जाऊंगा मैं तत्वदर्शी हूं मैं

02:43:13:07 ठीक है इसमें लिखा क्या है ये देखिए इन्होने मनरा को पेन चलाया मनरा को कबीरा किया है वो भी किसम ग्रंथ का नाम है जो गरीब दास वाला जो ग्रंथ है ना उसमें मनरा इन्होने कहीं कहा है तो उसको इन्होंने कबीरा कर दिया मनरा इतना बड़ा अंतर [हंसी] भाई और इनको इनको मेरे हिसाब से ना रा शब्द देखते कुछ हो जाता है इनको जहा भी एंड में कहीं र या रा मिल जिन्होंने पंजाब को हरियाणा कर दिया और बटाला को वाला कर

02:43:52:21 दिया तो उसको थोड़ा अभी आज इसको क्लियर करते 15 एक 15 दो 153 इस तीनों श्लोकों में ये जो पीपल रूपी वृक्ष है ना इसकी व्याख्या करी गई है खुद हम पढ़ सकते हैं क्या कहा गया पूरे बता रखे हैं उनके एक एक हिस्से को बता रखा है ी इन्हीं श्लोकों में ऊपर की और मूल वाले तथा नीचे की और शाखा वाले संसार रूपी अस्वत वृक्ष को परभ रूप से अव्यय कहते हैं और वेद जिस के पत्ते हैं वेद के पत्ते हैं पत्तो को क्या कहा गया है यहां पर वेद उस संसार विर को जो जानता व संपूर्ण वेदों को जानने वाला है अब दूसरे श्लोक में क्या बोला फिर उनके बारे में बताया उस संस विर की गुण सत्व रज और तम के द्वारा बड़ी हुई तथा विषय रूप कोपलो वाली शाखाएं अब शाखाओं का निरूपण हो रहा है य पर कि शाखाएं क्या है उसके बाद हो रहा नीचे मध्य में ऊपर सब जगह फैली हुई मनुष्य लोक में कर्मों के अनुसार मल भी नीचे और ऊपर सभी लोगों में व्याप्त हो रहे हैं व्याख्या तो पूरी कर द तो मैं भी ले है ना वही तो मैं इनको कहता पहले ही व्याख्या वही पर है सारी की

02:45:04:04 सारी मुझे तो कॉमेडी याद आती है मामा जीी आ रहे मामा जी आ रहे तो पहले चिल्लाने ल मामा जी आ मामा जीी आ मामा जीी आ मामा जी आ मामा जी परेशान हो गए चिल्ला क्यों रहे भाई मामा जी आ गए और फिर पूछा कि क्या बात है तो उसकी जड़ में कोई बात नहीं हम लोग यूं ही चिल्ला रहे जिससे कि मामा जी उस सत्यता को ना देख ले जो सत्यता को वह छिपाना चाह रहे हैं मामा जी के कारण मामा जी की अनुपस्थिति में घर पर कुछ कार्यक्रम कर रहे हैं अब मामा जी का आना हो गया अचानक से तो चिल्लाने लगे मामा जी आ गए मामा जी आ गए मामा जी आ गए खूब चिल्लाने लगे मामा जी वो इसलिए चिल्लाने लगे कि उस चिल्ला चिल्लाने में व्यक्ति य भ जाए कि मुझे यहां पर आकर के थोड़ा अपने स्थिर आंखों से कुछ देखने का प्रयास करना चाहिए उनके चिल्लाने पर ध्यान चला जाए और यह केवल यह नहीं करते हैं यह कई तंत्र ऐसे हैं जो करते हैं जैसे मायावा

02:46:12:26 मायावादी भाषा में कुछ एक दो चीज व रट ली मायावा माया बाद करते रहो एक बाछा आपसे जहां विकार हो वहां क्या मुक्ति है मुक्ति पूर्ण मोक्ष संभव है जहां विकार हो जहां इच्छाएं हो वो तो इनके अनुसार है भाई जहां से व्यक्ति आ रहा है विकार है तभी तो आ रहा है व नहीं अब संत रामपाल जी कहते हैं कि वहां तुम्हें जलेबी फल फ्रूट यह सब चीज खाने को मिलेंगे तुम्हारा परिवार होगा तो यहां से कौन से बंधनों से छूट के जा रहे हो तुम परिवार यही बंधनों से तो छूट के जा रहे हो अरे अगर जीभ की लालसा खत्म नहीं हो पा रही तो कौन सी मुक्ति है बताइए ना व्या विचार वहां हो रहा है और खुलेआम हो रहा है व्या विचार करने वाले को इनाम दिया जा रहा है ठीक है इच्छाएं की भरी है एक लोग से कह रहा मेरा काम नहीं बन रहा मेरे को 21 लोग दीजिए ठीक है मतलब वो जैसे होता है ना कि मेरा वन बीएच के से काम नहीं चल रहा मेरे को थ बीएच के चाहिए तो वो क्या है इच्छा है ना वो बकार है जो इन्होने मुनार को जो अभी ग्रंथ दिखाया था ना जहा मुनार को इन्होंने कबीर वो कर दिया कबीरा पन चला के वो गुरु ग्रंथ

02:47:28:02 साहिब था हा हा हां गुरु ग्रंथ जी का था ये वाला मुझे याद नहीं था उसका नाम क्या है ये मुझे ऐसा क्यों लग रहा आने वाले समय में सारे लोग इकट्ठे होकर इनकी खबर लेंगे अरे शिवांश भा भाई कल एक बहुत गंदा शब्द बोला है गुरु आदि गुरु शंकराचार्य के लिए एक व्यक्ति ने लाइव स्ट्रीम में आपने सुना होगा वहा फसबुक पर फेसबुक पर नहीं लाइव डिबेट प नहीं हमने हमने सुनी नहीं ना उनकी क्या थी हा मैं आपको क्लिप भेजूंगा वह इतने गंदे शब्द बोले की वह आदि गुरु शंकराचार्य के बाल नौ चेंगे उनके दाढ़ी नौच इस तरह की भाषा

02:48:13:03 बोली ये भाषा अच्छी है क्या किसी गुरु के लिए बोलना जेल धाम अच्छा है तो फिर जेल धाम के द्वारा प्रतिपादित होने वाली भाषा है क्या करोगे जेल वहा यही सब होता है बाल नोचे जाते हैं दाढ़ी खींची जाती है यह वो फिर वो सोचते हैं कि पता नहीं सबके साथ य होना अनिवार्य है अमित आपके साथ करके गए वहां करके गए वहा यह बोलने की ज्ञान से ज्ञान काटा जाता है और जो हमारे हेमंत दास जी इतने बुजुर्ग हैं उनको यह पता नहीं कि ज्ञान से ज्ञान नहीं काटा जाता है अज्ञान को ज्ञान से काटा जाता है ज्ञान से ज्ञान को बो जाता है हां नहीं अगर एक बात और है ना अगर तुम अपने ज्ञान से ज्ञान तो वो मौखिक ही बोल रहे हैं ठीक है शास्त्रों को तो बीच में लाते नहीं अब ज्ञान से ही ज्ञान को काटना है तो शास्त्रों की बात क्यों करनी तुम छोड़ दो ना उस बा तुम बोलो लॉजिक से लॉजिक को काटेंगे हम हम फ लॉजिक में फिर भाग जाएंगे जब मैं पूछूंगा वो पहाड़ बन सकता है कि नहीं फिर भाग जाएंगे भाई प्रमाण में तो तुम थोड़ा दूर थोड़ा बहुत देर तक घमा घुमाने का प्रयास भी कर सकते हो मगर लॉजिक पर आ जाओगे तो वो कहीं टिकेगा ही नहीं किसी

02:49:28:07 भी हाल में पाच 10 मिनट मुश्किल से अगर लॉजिक की बात होगी तो मुश्किल से पाच 10 मिनट टि कोगे बहुत देर लगाओगे कहने में मंत दास जी ने तो 10 12 साल हो गए नाम दीक्षा लिए उने तो समझाना चाहिए था बेटा ज्ञान से ज्ञान नहीं काटा जाता अज्ञान को ज्ञान से काटा जाता है ज्ञान प हेमंत दास जी हो हेमंत दास जी को अपनी वो जो शक्ल है जिसको उनके ही व्यक्ति ने कहा कि बंदर जैसी शक्ल लेकर के आप लोग बोलते हैं मत करो इस तरह की ज्ञान चर्चा तो पहले उन चीजों को काटना तो सीखे तब तो व जानते हो कि ज्ञान से ज्ञान को नहीं काटा जाता है वह तो ऐसा लगता है जैसे कि उनके कानों में आवाज थोड़ा मतलब जैसे उनको कम सुनाई देता है तो व इस तरह वहां बात करते हैं कु जब मेरी चर्चा हो रही थी वो हेमंत दास जो है चलो बड़े हैं हमसे वो व्यक्ति नहीं बोला वो वो नहीं बोला उसके आगे जितने भा बो थे वो बंदा पता नहीं क्या फोन प स्क्रोल किए जा रहा है किए जा रहा है किए जा रहा है कोई एक डेढ़ घंटा वो बेचारा सुन्न होकर बैठा र कभी छोटी सी चू करके फिर वापस बैठ जाते ऐसे ऐसे ब

02:50:43:26 एक सभ्यता है कि अगर दो व्यक्ति बात कर रहे हैं तो तीसरा व्यक्ति चुप होता है कुछ नहीं बोलते हैं मै वो कर वहा क्या हो ये हमारी बात है आप देखि कितने बंदे थे एक भी बंदा फालतू की चूचा नहीं कर रहा था बीच में हमने हमने इतनी बार कह दिया कि भाई आप बुजुर्ग है बड़े हैं या जो भी मतलब जिस तरह से भी आप सम्मान आप हमसे फोन करिए हमारी एक विवत एक चर्चा डिसाइड हो कि हम लोग इस जगह पर आने वाले हैं और हम लोग यथोचित रूप से चर्चा करेंगे तो सम्मान के तरीके से सुनना समझना किसी को लेना ही नहीं है वहां पर भर भर के अपमान हो रहा आद गुरु शंकराचार्य जी का सबका वैसे इनके वो हालाकि वो भी क्या सिखाएंगे वो राम जी का अपमान कर चुके शिव जी का अपमान कर चुके हो गया ना बाप इसका ऐसे बात करते हैं फिर भी वो कहीं कहीं पर उन्होंने कहा कि वो सन्यासी है संत है संतों की हम ऐसे रक्षा करते हैं ऐसे सम्मान करते हैं कहीं कहीं पर कहा तो ये उनकी बात मान कर के अगर सम्मान का ध्यान रखे तब क्या बात है फिर ऐसे ऐसे चैनल पर जाकर के चर्चा थोड़ी ना होगी जहा इस तरह वो किया जाता है अनादर भया अगर आपको अभी भी कह रहा हूं किसी को भी अगर वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करनी है

02:51:59:18 वह हमसे संपर्क कर सकता है यहां ना आए तो हम लोग बीच का कोई चैनल ढूंढेंगे बीच की कोई जगह ढूंढेंगे वहां पर बात करेंगे यदि रामपाल दास जी के फॉलोअर्स में से कोई भी ऐसा है जिनको ऐसा लगता है कि वो रामपाल दास जी के पक्ष को मजबूती के साथ रख सकते हैं वही आगे आए अन्य कोई ना आए अन्य कोई भी ना आए हमारा ये विनम्र निवेदन है क्योंकि आप लोग आएंगे तो गलत तरीके से यहां पर उनका पक्ष रखेंगे संत रामपाल दास जी का और आप उनके लिए और हार्मफुल यानी कि हानिकारक सिद्ध होंगे ठीक है एक बार मैं आपको बात चाहता हूं छोटी सी एक बार मैं अपना छोटा सा एक्सपीरियंस शेयर करना चाहता हूं मैं ना एक बार

02:53:18:18 दो रामपाल वाले एक दूसरे को इतनी मतलब वो गालियां देने लगे जो सुन के भी बंदे को शर्म आ जाए दो रामपाल वाले आपस में ही गालि गलोज करना शुरू हो गए ठीक है अच्छा मल इका इनका छोटा सा झूठ पकड़ा मैंने तो एक दूसरे में ऐसे य घमासान करने लग पड़े ये है वो है वजह सिर्फ इतनी सी थी मैंने इनको बस इतनी बात पूछी थी कि ये जो सारे नीचे सुन रहे हैं कोई उस वक्त 253 लोग थे वहां पे मैंने कहा ये सारे मतलब कि नए-नए लोग हैं जैसे बच्चे होते हैं वैसे वैसे कुछ हम ग्रंथ आदि पढ़ते हैं य यहां पर ठीक है उस बंदे को ये नहीं हजम हुआ वो पता नहीं रामायण की कोई कहानी सुनाया मैंने कहा ये रामायण पढ़ी हुई इसका रेफरेंस दे दो सबके सामने खोल लेते हैं ठीक है तो वो जो बंदा था एक उसने कोई गाली गलोज की पहले तो उसने शराब पी हुई थी फिर दूसरा बोलने लगा भैया मेरे को एक बार ऊपर लो हो अब मेरे लिए दिक्कत ये होगी कभी जो मेरा फोन है उसमें कभी-कभी टच की प्रॉब्लम हो जाती थी पहला फोन था मैं लाइव काट भी नहीं पा रहा हूं और ऐसी ऐसी गाली गलोज कर रहे हैं एक दूसरे को मैं मैंने बड़ी मुश्किल से अपना फोन साइड पर होल्ड करके किसी तरीके से स्विच ऑफ किया उसको इतने पागल भी हो जाते समय पर जब इनकी बातें आप अभी भी मैं एक बार रिपीट कर दूं आज का हमारा मुख्य टॉपिक है रामपाल दास

02:54:33:21 जी हालाकि किसी और टॉपिक पर भी आ सकते हैं मगर हम लोग आज मुख्य रूप से बात कर रहे हैं कि रामपाल दास जी तत्वदर्शी कैसे सिद्ध होते हैं यह बताएं कैसे सिद्ध होते हैं भगवत गीता के अनुसार रामपाल दास जी तत्वदर्शी सिद्ध नहीं होते आपके अपने कबीर वाणी गरीब दास वाणी या और कुछ ग्रंथ और उन ग्रंथों में भी पेन चलाने के बाद अगर वो होते हो तो होते हो बात अलग है मगर रामपाल दास जी भगवत गीता के अनुसार तत्वदर्शी सिद्ध नहीं होते अगर इसको हम सूत्रा क्मक शैली में समझे तो पहली बात जहां पर चार चौ में तत्वदर्शी की बात की है उसी के अगले श्लोक में बताया है भगवान श्री कृष्ण को को ही परमात्मा दृष्टि से समझ लेना समत्व दृष्टि से सभी प्राणियों को उनमें और उनको ही सब में समदर्शी बन जाना इसे तत्व ज्ञान कहा गया है दूसरी बात भगवान कृष्ण को ही 10 तीन के अनुसार अविनाशी अजन्मा समझ लेने वाला परमात्मा समझ लेने वाला तत्व ज्ञान कहा गया है तीसरी बात अगर आप 15 एक में उल्टे वृक्ष की व्याख्या करने वाले को ही तत्वदर्शी समझते हैं तो पहली बात उल्टे वृक्ष की व्याख्या करने वाले को वेदों

02:55:48:25 को जानने वाला कहा गया है ना कि तत्वदर्शी कहा गया है दूसरी बात उल्टे वृक्ष के रूप में कोई भी व्याख्या कर सकता है करी है तो फिर एक रामपाल दास जी को ही क्यों तत्वदर्शी माना जाए यह सवाल उठ खड़ा हो जाएगा वहीं पर एक और बात उठ खड़ी हो जाती है कि आप ही के अनुसार जो वेदों का ज्ञान है वो तात्विक ज्ञान नहीं है पूर्ण ज्ञान नहीं है अधूरा ज्ञान है तो फिर उनको जानने वाला आप ही के अनुसार तत्व ज्ञानी सिद्ध नहीं होता और अगर वेदों को जानने वाला ही तत्व ज्ञानी है तो वेदों के जानने वाले कहे गए हैं वेदों के द्वारा विष्णु को जाना जाता है कहां लिखा है वेदों के द्वारा विष्णु को ब्राह्मण मैं बता रहा हूं भागवत में लिखा है वेदों के द्वारा श्री हरि को ही जाना जाता है कल हमने जो पिछली लाइन 15 15 15 15 हा पिछली लाइव में भी यही प्रमाण मिले थे वेदों के द्वारा विष्णु को जाना जाता है और श्रीमद् भागवत दो पा 15 में भी है कि वेद नारायण

02:57:04:10 के परायण है ठीक है और इसी प्रकार वेदों के द्वारा शिव को जाना जाता है शिव पुराण का है लिखा हुआ है वेदों के द्वारा शिव को जाना जाता है और देवी भागवत में तो स्पष्टता लिखा है कि मां भगवती को परम ब्रह्म के रूप में जान लेना ही जान लेने वाला ही वेदों को जानने वाला है तो वेदों को जानने वाला यदि वेदों को जानने वाला यदि अ वो

02:57:42:21 है तत्व ज्ञानी हां वेदों को जानने वाला यदि तत्वदर्शी है तो वेदों को जानने वाला वह है जो ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश को परम ब्रह्म के रूप में स्वीकार करता हो कृष्ण को परम ब्रह्म के रूप में स्वीकार करता हो तो कहीं से भी पकड़ लीजिए तत्वदर्शी कहां से सिद्ध हो गए रामपाल इस पिक्चर में कैसे आ गए कबीर दास जी इसमें कैसे आ गए वह सबके लिए आपको जो है इस अधूरे वांगम को वैदिक वांगम को छोड़ना पड़ेगा और जब आप छोड़ेंगे तो आप वेदों का विरोध करने वाले के रूप में वेद निंदक होने के रूप में गैर सनातनी हो जाएंगे हिंदू हो जाएंगे वेदों को पवित्र ग्रंथ मानने वाला नहीं रहेंगे वेदों के नाम पर आप लोगों को मूर्ख नहीं बता पाए बना पाएंगे कुलदीप राज जी ऊपर आ जाइए और बात करिए त तत्वज्ञान मेरे पास फेसबुक का लॉग इन नहीं है ट्राई कर लेता हूं शं भाई एक में इनका एक ये रहता है कि सिर्फ भक्ति से ही मोक्ष की प्राप्ति होगी पर गीता में परमाण बता रहा हूं कई मनुष्य ध्यान योग के द्वारा कई मनुष्य सांख्य योग के

02:58:59:16 द्वारा कर्म योग के द्वारा कर्मयोग के द्वारा अपने आप में अपने आप से अपने आप में परमान तत्व का अनुभव करते हैं परमा तत्व का अनुभव करते हैं और फिर आगे क्या लिखा 2 लोक में 13 का 2 में लिखा 25 दूसरे मनुष्य इस प्रकार ध्यान योग सांख्य योग कर्म योग आदि साधन को नहीं जानते हैं पर दूसरों को जीवन मुक्त महापुरुषों को सुनकर ही उपासना करते हैं ऐसे में व सुनने के अनुसार आचरण करने वाले मनुष्य भी मृत्यु को तर जाते हैं मतलब कि जैसा जैसा महापुरुषों ने किया तू भी उनको देखते हुए

02:59:41:19 कर अब मैं आपको कुछ बातें बता दूं जो कही गई है देखिए इसमें य दिक्कत आती है टीआर पहाड़ी जी जब भी हम इनको कोई श्लोक का प्रमाण देंगे ना कि देखो य तो एक आ गया तोय ये कहेंगे कि भैया वो काल ने कह दिया गलत जन तो इसलिए पहले इनसे डिसाइड करना होगा कि 665 लोक व हमें बता दो जिसमें से हम आपको प्रमाण दे यह फस गए इनको कहना चाहिए था गीता का गीता का 80 पर ज्ञान गलत है तब तो इनकी 20 पर में बात चल पाती बिल्कुल अब ये 5 पर बोल के फसे हुए हैं बिल्कुल

03:00:27:21 आवाज आ रही है क्या बस कम आ रही है कम आ रही है ना आवाज ऐसे सुनाई नहीं देगी आपके पास यदि हो किसी के पास तो आपको गोविंद गोविंद जी आपको फ पर एक लिंक भेज देते हैं वो वीडियो आप जरा वीडियो की आवाज सुना दीजिए कोई बात नहीं ा पर भेजेंगे इ पे ं प ं प भेज दीजिए इनको गोविंद गुरुकुल जी को

03:01:05:27 लिंक तब तक भई अगर कोई आना चाहता है तत्वदर्शी के रूप में अ भई भ एक बात समझ में नहीं आती कि जी राघ जी जब तक जैसे हम लोग नॉर्मल हिंद है तो हम लोग जैसे जब प्रैक्टिस कुछ भी करते हैं तो मतलब ज्यादा से ज्यादा हम लोग इतने कटर नहीं होते अपने उसके लिए तो आवाज बत कम आ रही है आपकी एक मिनट जी अब आवाज आ रही आ तो रही है मगर वो आपका मुझे लग रहा है प्राकृतिक ही धीमी आवाज है हम लोगों की बहुत तेज है अच्छा उसके हो सकता है इसकी वजह से थोड़ा सा यहां पर है तो थोड़ा सा कम जैसे ये क्वेश्चन था मेरा कि जैसे अगर नॉर्मल जैसे हम लोग प्रैक्टिस करते हैं तो उसमें मतलब कोई इतना ऐसे कट्टर नहीं होता कोई बस नॉर्मल ही हम लोग त्यौहार में कर लेते हैं या कुछ कर लेते हैं लेकिन मतलब जितने भी ऐसे कल्ट होते हैं चाहे कोई भी हो चाहे य इनके हो रामपाल के होहे कोई ये लोग भैया इतने ऐसे कैसे कट्टर हो जाते हैं अपने उसके लिए मतलब छोड़ने को तैयार ही नहीं होते

03:02:19:07 इसका कारण तो यही है कि इनको डर डर की भक्ति सिखाई जाती है इसलिए र भय काल हैता है अगर तुमने विश्वास किया तो ये हो जाएगा वो हो जाएगा और यहां पर क्या है भय की भक्ति नहीं होती है यहां पर आपको जो है संतुष्ट कराया जाएगा अथातो धर्म जिज्ञासा अथातो ब्रह्म जिज्ञासा अब वहां पर जो है भय की भक्ति कराई जाती है तुम अगर ये नहीं करोगे तो ये हो जाएगा यह करोगे तो यह हो जाएगा उसी पर जोर दिया जाता है हालांकि यहां पर भी गलत चीजें करने पर सजाए है मगर धर्म व्यक्ति को धार्मिक बनाने से पहले वो व्याख्या देना व्यर्थ होता है तो यहां पर एक सस्टेंड एक तरीका होता है कि आप इस पर चलिए पहले संतुष्ट करिए पहले सामने वाले की अथातो धर्म जिज्ञासा अथातो ब्रम जिज्ञासा को शांत करिए उसके बाद बताइए कि नरक कब मिलेगा कब नहीं मिलेगा क्या है क्या नहीं है मगर इनके य पर वो तत्व ज्ञान व जिज्ञासा है वो शांत हो ना हो मर पहले आदमी को वो भय भय के रास्ते पर डाल दिया जाएगा कि अगर मेरी कही हुई बात पर तुमने डाउट किया तो काल आ जाएगा और काल तुमको यह कर देगा और काल वो तुम्हें ये कर देगा देखिए गोविंद जी आपको प्राप्त हुआ क्या

03:03:35:27 लिंक मेरे को नहीं प्राप्त हुआ अभी चलिए तब तक हम इनको देख ले जरा नमन दास जी को नमन दास जी आप अपना कैमरा ऑन करें तब हम आपको ऊपर ले और और मैं राघव जी से एक मिनट बात करना चाहूंगा तब तक जी जी बो क्या होता है कि पुरुषार्थ जहां भी नहीं जिस भी समाज में पुरुषार्थ नहीं होता है ना ठीक है वो ऐसा ही हो जाता है जैसा लूटने के लिए अब कोई व्यक्ति खड़ा ही है तो क्या करेगा है ना इसलिए पुरुषार्थ जो है वह सबसे मेन पॉइंट है आपको थोड़ा सा पुरुषार्थ यह करना है कि कुछ भी हो चाहे कोई भी जो बेसिक ग्रंथ है ना यदि आप उसको भी पढ़ोगे तो धीरे-धीरे आपको अपनी जिम्मेदारी का एहसास होने लगता है ठीक है अबने एक भी छोटा सा ग्रंथ पढ़ लिया ना कोई भी हो वो ठीक है तो आपको अपनी जिम्मेदारी का पता चलने लगता है लेकिन मेरे को भी समाज को कहीं ना कहीं सही दिशा पर लेकर जाना है ठीक है यहां पर जितने लोग बैठे हैं सबने कभी ना कभी कोई ऐसी बात सुनी या तो श्रवण किया या तो उसको पढ़ा तो पता चला मेरी कुछ जिम्मेदारी है संसार के लिए मैं केवल बैठकर आरोप प्रत्यारोप नहीं कर सकता हूं क्योंकि हम किनकी संताने हैं आपको पता है हमारे भगवान चमत्कार से नहीं बने

03:04:51:22 जंगल जंगल फिर करर पुरुषार्थ दिखाया है समाज को भगवान श्री कृष्ण भी कह रहे हैं मेरे को कोई कर्म करने की आवश्यकता नहीं फिर भी यहां खड़ा होकर कर्म इसलिए कर रहा हूं क्योंकि यदि आज मैं कर्म नहीं करूंगा यह मेरा फॉलो करने वाले लोग बिल्कुल कर्मों से हीन हो जाएंगे आप समझ रहे बात मैं क्या कह रहा हूं जी यद्यपि उनको कर्म करने की आवश्यकता नहीं भी थी फिर भी कर्म करके दिखा रहे हैं ठीक है तो दो चीजें हमेशा याद रखिएगा एक कि बिना पुरुषार्थ कि हमें भगवान भी हासिल नहीं हुए है ना भगवान चाहते अगर तो कहते कि भाई मैं तो नहीं जा रहा जंगल मेरा तो हक बनता है मैं तो युवराज हूं तो क्या हो जाता है ठीक है भगवान तो भगवान लेकिन फिर भी उन्होंने यह चुनौती स्वीकार की और लोगों को बताया मैं जब महल में बैठा हूं ना तब भी मैं उतना ही त्यागी हूं जितना कि मैं वनों में सब भटकते समय त्यागी हूं ठीक है तो इसलिए पुरुषार्थ सबसे पहली बात है किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ठीक है ये ये थोड़ा सा दर्शन की बात है ठीक है इसको पुथ छीन लिया जाता है बिल्कुल और डर दे दिया जाता है सेव और सेव और जलेबी के नाम पर पुरुषार्थ छीन लिया जाता है और भैया भैया इतनी मतलब वो लोग कट्टरता से काम करते हैं कि मतलब जैसे इस कन को देख लीजिए तो मतलब वो सुबह से निकल जाते हैं उनके

03:06:06:25 ब्रह्मचारी तो रात को आते हैं घर ऐसे गीता उता बेज के वैसे इन लोगों के भी मतलब दिन भर उसके उसके काम में लगे रहते हैं मतलब इसी का एडवांस रूप वो है स्कन और यह थोड़ा सा पिछड़ा रूप है हा जी ये आ गया हमारे सामने और मैं आपको यकीन के साथ में कह सकता हूं भाईयो और बहनों भले वर्तमान में उनको गुरु जी का ज्ञान नहीं है जो जगत वाले हैं जो ज्ञान चर्चा कर रहे हैं संत रामपाल जी के भक्तों के साथ में व शिवांश नाम का लड़का वर्तमान में हो सकता है उसको ज्ञान नहीं है उसको संत रामपाल जी को समझ नहीं पा रहा है लेकिन वो लड़का वर्तमान में रामपाल जी के भक्तों से ज्ञान मार्ग में लाख गुना अच्छा है उस व्यक्ति को भले ही शास्त्रों की शास्त्र अनुकूल भक्ति का ज्ञान नहीं है लेकिन उसको जितना ज्ञान है जितना उसने अपने गुरुओं से सीखा है जो शास्त्र विरुद्ध ज्ञान उसने अपने गुरु से सीखा है ना उस शास्त्र विरुद्ध ज्ञान में भी वह संत रामपाल जी के भक्तों से लाख गुना बुद्धिमान है लाख गुना बुद्धिमान उसके बोलने का तरीका उसके सवाल करने का तरीका उसके जवाब देने का तरीका तो भाई आप लोग नहीं जीत पाओगे क्यों फालतू

03:07:21:25 में अपनी बेज्जती करवाते हो अपना वोह बंदर जैसा थोबड़ा लेकर तुम वहां पर बैठ जाते हो मान बड़ाई में आके और जब तुमसे वह सवाल करता है वह काटे के सवाल करता है वह बिल्कुल एक्यूरेट सवाल करता है क्योंकि वह जिज्ञासु है उसको शास्त्र अनुकूल भक्ति का कुछ नहीं पता ये जो वीडियो है इसमें और बात और और देख लीजिएगा आगे परंपरा वाले दश्य को भी इन्होंने बताया और यहां इन्होंने इस व्यक्ति ने जो यह पवन दास है इसने बोला कि ये हमने जो प्रश्न किया था दीक्षा वाले मामले में तो सामने वाले का मुह इतना सा हो गया था यह सब चीजें यह आपके रामपाल दास के फॉलोअर ने और शायद संभवत आपके जो है यह सब उसने कही है आप लोगों को तो यहां पर जितने भी लोग ये कमेंट करते रहे ना अब तक कि देखो देखो ऐसा हो रहा है वैसा हो रहा है आपको उनके विरुद्ध कमेंट करने चाहिए आप समझना चाहिए कि आप कम से कम

03:08:37:19 सामर्थ्य लेकर आए यहां पर ऐसे ही ना चले आए आभी दिन में देखो कैसा एक आदमी आया था तो ये यह सब चीजें है आप लोग ध्यान रखिए कि कहीं ऐसा ना हो कि संत रामपाल जो अपने आप को कहते हैं जो इस समय जेल धाम में है कथा कथित संत वो उनका पक्ष की रक्षा करने के चक्कर में कहीं उनकी मटिया मेट तो नहीं करवा रहे हो बिल्कुल यह बात है हरि दसों हम आप ऊपर आ जाइए आपको कोई बात करनी हो तो जय श्री राम सभी को छोटी दिवाली की हार्दिक शुभकामनाए

03:09:18:01 आना त तत्वदर्शी सिद्ध करने के लिए तो आ सकता है जितने भी हमारे सनातनी भाई हैं इनका एक नॉर्मल क्वेश्चन रहता है कि ओम तत्सत य क्या है ये मंत्र हैय सांकेतिक है ओम तत्सत का व्याख्या मैं कर देता हूं इसी से गीता से ही देखो 23 श्लोक में ओम तत्सत ये तीन प्रकार के परमात्मा का नाम है ये तीन नहीं है ये एक ही है पर इनके तीन प्रकार के नाम है तो ओम से क्या होता है इनका एक नॉर्मल सा क्वेश्चन और रहता है जनली की हमारे वेदों में जो गायत्री मंत्र है उसके आगे ओम नहीं लगाया य ओम क्यों लगाया बोलते पाखंड है ओम पाखंड नहीं हमारे जो ऋषि मुनि थे वह कोई अज्ञानी नहीं थे वह बहुत सामर्थ थे तो 24 लोक में बोला है इसलिए वैदिक सिद्धांतों को मानने वाले पुरुषों की शास्त्र विधि से निहित यज्ञ दान और तप रूप क्रियाए सदा ओम इस परमात्मा के नाम के उच्चारण कर करके ही आरंभ होती है इसलिए गायत्री मंत्र के आगे ओम लगाया जाता है जितने भी वेद हमारे चार वेद है चार वेद सिर्फ गायत्री मंत्र के आगे जब वेदों का उच्चारण होता है मंत्रों का तो सबसे पहले ओम लगाया जाता है उसके आगे उसके बाद पीछे की

03:10:33:13 मंत्र बोले जाते हैं जी तपस्या जब उसम आही गया कि तपस्या जो है प्रणव से प्रारंभ होनी चाहिए तो फिर तपस्या प्र जो है प्र से प्रारंभ होगी और एक अगर इसको नॉर्मल एक सामान्य भाषा में कहे तो गायत्री मंत्र कर किसके लिए रहे हैं परम अक्षर ब्रह्म के लिए वो एक अक्षर कौन सा है प्रणव सिंपल प्रणव सिंपल अब तत तत से क्या क्या होता है त कहां प्रयोग किया जाता है 24 25 लोक में पढ़ना तत नाम से कहे जाने वाले परमात्मा के लिए ही सब कुछ है ऐसा मानकर मुक्ति चाहने वाले मनुष्य द्वारा बल्क इच्छा रहित होकर अनेक प्रकार के यज्ञ और तप रूप क्रियाए तथा दान रूप क्रियाए की

03:11:26:00 जाती ठीक है मतलब तब से क्या होता है कि फल को त्याग देना और कर्म करना जैसे कहीं भंडारा किया फल की इच्छा के बिना यह क्या है तप रूप क्रिया एक तरफ से दान रूप क्रियाए अब सत से क्या होता है देखो 26 लोक में हे पार्थ ऐसा यह परमात्मा का नाम सत्ता और श्रेष्ठ भाव में प्रयोग किया जाता है तथा प्रसन कार्य कर्म सत शब्द जोड़ा जाता है जैसे प्रस कार्य कौन से हमारे जने विवाह संस्कार तो वहां सत शब्द जोड़ा जाता है मंत्रों के आगे तो यह इसकी व्याख्या कर रखी है य ओम तत्सत यह कोई सांकेतिक नहीं है संकेत उसके नीचे दे रखे हैं 25 23 में तीन प्रकार के नाम बता रखे परमात्मा के 24 में ओम के महिमा बता रखी है 25 में तत का 26 में की महिमा बता रखी है पढ़ लीजिएगा अरे भाई हम लोग जो संध्या वंदन करते हैं उसमें लास्ट में जब ब्रह्म को सब कुछ अर्पण करना होता है तो यह जिसने जो भी संध्या वंदन करता होगा वो वहां पर इनका उपयोग करता है इसमें आता है प्रणव तत्सत श्री ब्रह्मा

03:12:41:04 परम स्तु जी ये नित्य कर्म पूजा प्रकाश रखी है मेरे पास नित्य कर्म पूजा प्रकाश इसमें संध्या बंदन की विधि है संध्या बंदन की विधि में अनेकानेक जगह आपको तसत श्री ब्रह्माम मस्तु यह मिलेगा आपको एक जगह दिखा देता हूं देवी भागवत पुराण में देवी जी इसका खुलासा कर रहे हैं पढ़िए ये देखिए यह जब लास्ट में गायत्री जप हो गया है उसके बाद गायत्री का आवान होता है गायत्री सबसे पहले जी और जब बाद में जब मंत्र जाप हो जाता है तो उसके बाद गायत्री माता को वापस विसर्जन किया जाता है तो विसर्जन करते समय तसत श्री ब्रह मापम मस्तु ये होता है और इसी प्रकार से अगर हम य मतलब अनेकानेक जगह जहां पर संपन्न हो जाता है जो आपने कार्य जो किया है अनुष्ठान जो किया व संपन्न हो जाता है तो लास्ट में वो ब्रह्म को अर्पण करने के नाम पर ये होता है

03:13:56:24 सब कुछ तुमको अर्पण जैसे सदाचार हुआ सत्कर्म हुआ ये सत के साथ जड़े जाते हैं हा तो अब दोबारा य क्वेश्चन नहीं आना चाहिए कि कि गायत्री मंत्र के आगे ओम क्यों लगाया जाता है हा को अभी कोई हो मैं फिर बता रहा हूं आप आए और तत्वदर्शी सिद्ध करें 4 34 15 एक से वरना कहना बंद करो तत्वदर्शी

03:14:33:07 रामपाल है कोई अन्य किसी बात के लिए आना चाहता हो तो वह आ जाए हरि दसो अम जी आ जाइए माता जी ने निष्ठा पूर्वक आपको पान कराया है सेहतमंद दुग्ध से आपका पोषण किया है आप आ जाएं अन्यथा अनर गर्ल बातें व्यर्थ बातें करना कायरता का तक है अब यह मेरे ख्याल से गंगा माया नदी के पवित्र जल के ऊपर ये लोग करने दो उससे अच्छी बात है एक एक करके हम लोग यहां पर लो भाई प्रमाणों की बछ लो मैं पहले ही बता देता हूं हमारे वेदों में ही कहा गया है कि जो हे जल जल तुम्हारा जो जल है नदिया तुम्हारा जो जल है वह पवित्र है तुम्हारे उसम स्नान करने से हमारे पाप सारे नष्ट हो जाते हैं वेदों में ही लिखा है अगर यह स्ट्रीम तुम चलाओगे तो हम परमाण देंगे वेदों सेही वहां साफ साफ लिखा है गंगा यमुना सरस्वती [संगीत] नदियां वेदों में ही इतने परमाण दिखा देंगे

03:15:48:12 कि शायद पूरा एक दिन बीत जाएगा साफसाफ लिखा है कि हे जल तुम्हारे स्नान से तुम्हारे स्नान करने से हमारे सारे पाप नष्ट हो जाते हैं भैया आपका इतना डर हो गया इनम कि अ जो उनकी लाइव स्ट्रीम होती है उसमें इसमें पीछे ग्रीन पर्दा लगा के करते हैं तो वो उसमें इनके जो फॉलोवर्स होते हैं वो जाके आपके क्वेश्चन पूछते हैं जो आप यहां पर करते हैं क्वेश्चन तो वो क्या करते हैं वो उनको बाहर निकाल देते हैं फिर आंसर देते पूछना चाहूंगा अध्यन का अर्थ आप स्ट्रीम चलाएंगे अन्या का अर्थ संस्कृत शब्द को से मुझे यह दिखा दो कि कुवारी गाय होता है यह दिखा दो मैं रामपाल जी के चरण छू लूंगा संस्कृत शब्द कोश से दिखा दो नैरेटिव इनके तोड़े हैं वेदों में प्रमाण नहीं है कबीर भगवान नहीं है पहली बात दूसरी बात कि वेदों का ज्ञान बोलने वाला कोई श्री कृष्ण से भिन्न कोई काल है यह दूसरी बात है यह सिद्ध नहीं कर पाए वह काल स्वयं श्री कृष्ण ही बोल रहे हैं वही परमेश्वर

03:17:03:14 है वही काल और आज हम लोगों ने बात की है कि क्या रामपाल दास कोई तत्वदर्शी संत है भगवत गीता वेद के अनुसार पुराणों के अनुसार नहीं है ठीक है हरि दसोम जी आपको जो प्रश्न करने हैं आप ऊपर आगे कर सकते हैं आपका कहना है कि अभी वह समय नहीं आया है तो इसका अर्थ है कि अभी तक आपने वही दूध पिया है जो आप कमेंट के माध्यम से कुछ कर सके उतना ही पुष्टि वर्तक दूध पिया है आपने जो आप कमेंट में अनर गर्ल बातें कर सके इतना ही साहस प्रदान किया है माता जी ने आपको इसीलिए आप ऐसा कर पा रहे हैं खर जिस दिन ऐसा कहीं से प्राप्त हो जाए एनर्जी वगैरा प्रोटीन फैट और कार्ब तो आइएगा हमने सामने से बात

03:17:58:15 करेंगे गुरु गरीब दास जी है उन्हीं के उन्होने अपने उसम लिख रखा है श्री सदगुरु ग्रंथ साहिब को य मानते हैं उन्हीं से य रिफरेंस देते हैं ठीक उसम इन्होंने श्री कृष्ण जी को परब्रह्म परमात्मा कहा है इसमें एक स्रोत लिख रखा है उन्होने अ कृषण उसमें लिख रखा है हरि हरि हरि हरि परब्रह्म परमेश्वर पुरुषोत्तम परमानंद नंद आनंद कंद यशोदा नंद यशोदा नंद कौन श्री कृष्ण भगवान श्री गोविंद दीन नाथ दुख दुख दुख दंद फंदन गोविंद कौन श्री कृष्ण भगवान जगन्नाथन काटन दुख दंद फंदन करुणामय कमल नैन कृपा सिं सर्व मोहन मुरलीधर मुरलीधर हमारे कबीर जी बजाते नहीं थे नहीं बजाते थे मुरली दर सर्व सोहन मेघ श्याम मूर्ति मन भावन माधव मुकुंद रामरूप राधा और गोवर्धन कर पर वम

03:19:02:02 रंगनाथम हसी केस गुण गावत भया आनंद जन दास गरीब जस सुनी सुनी लागी रही अंतरी धुनी वासुदेव वनमाली बजप प्रभु दीन बंधु बृज पति कौन श केश मैं उनकी स्तुति गा रहा बोल गरीब दास खुद बोल रहे जन दास गरीब जन सुनी लागी रही अंतरी धुनि वासुदेव वनमाली बृज पति प्रभु दीन बंधु यह मानेंगे

03:19:35:20 जीने प्राइवेट में मैसेज भेजा उसको अगर आप रीड कर सके एक बार तो प्राइवेट चैट में हाजी प्राइवेट चैट में यह कहां से प्रकाशित है परम पूज्य श्री 1008 श्री सतगुरु देव ब्रह्म सागर जी भूरी वाले महाराज के परम शिष्य पूज्य श्री 108 श्री स्वामी संत राम महाराज जी के शुभ संकल्प अनुसार उनके उत्तराधिकारी परम शिष्य श्री 108 श्री स्वामी चरणदास ब्रह्मचारी जी महाराज के आशीर्वाद से उनके चरण रज शिष्य स्वामी दर्शन दास ने सर्वजन सुखाय हेतु इसका डिजिटल स्वरूप में प्रकाशन करवाया है श्री सतगुरु ग्रंथ साहिब देखे तो दिखेगा इनकी गरीब दास य इन्हीं से प्रमाण देते हैं पर उसमें तो य अथ कृष्ण स्रोत लिखा है उसमें पूरा उनको पारब्रह्म परमेश्वर बताया है जी तो मैंर कह रहा हूं कि आए भैया कोई और बात करें वो क्या 9 एकन

03:20:51:03 बोलते हो भाई अब जब पूछा जा रहा है 9 एकन तो अब आ नहीं रहे हो कहां गए सतलोक वासी कहां गए बरवाला वाले कहां गए एलसीडी पर दीक्षा लेने वाले कहां गए चैलेंज करने वाले कि उन्होंने फलाने टाइम पर चैलेंज किया था मेरे को तो अभी हो गए करीब साल हो गया कब से बोल रहा हूं आओ भैया समझा दो

03:21:23:20 हां अब क्यों नहीं आ रहे लगता है बात मान ली आपने अपने भाई की मेरी भी मान ली और उस भाई की मान ली जो बता रहा है के बंदर जैसा बिल्ली जैसा थोपड़ा लेकर मत जाया करो बोलना नहीं आता है पूछना नहीं आता है सुनना नहीं आता है बताना नहीं आता है हां कहां गए भाई चलिए ठीक है इस लाइव को हम लोग आज समाप्त करते हैं अब इस पर ध्यान रखिएगा तीन नैरेटिव हमने तोड़ लिए हैं हर कोई इसको पकड़े क्या है पहला वेदों में प्रमाण नहीं है कबीर भगवान नहीं है दूसरा कि गीता का ज्ञान श्री कृष्ण से भिन्न किसी काल ने नहीं दिया बल्कि स्वयं श्री कृष्ण ने ही दिया है उन्होंने ही स्वयं को कहीं पर काल कहा है और वही परमेश्वर उन्होने स्वयं को कहीं परमेश्वर और आज तीसरा नैरेटिव इनका क्या तोड़ा है कि भैया आप बिना शास्त्रों के बाहर जाए शास्त्रोक्त तरीके से सिद्ध करिए मनमुक तरीके से नहीं शास्त्रों के आधार पर सिद्ध करें रामपाल दास जी तत्वदर्शी है अब अगला इका कुछ और

03:22:38:21 लेकर के हम लोग आएंगे और आज एक बात और है कि प्रभु श्री राम ने रामायण में कहा था लक्ष्मण जी से कि मृत्यु हो जाने के बाद जो भी बीच में नसता होती है मतभेद होता है वो सब खत्म हो जाते हैं तो आज जो है दयानंद जी की जो आर्य समाज रूपी जो संस्था है उसके प्रवर्तक है उनकी आज पुण्य तिथि है तो हम उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हुए इस लाइव स्ट्रीम को आगे बढ़ा रहे हैं सम्मान इसीलिए कि वेदों में प्रमाण बुद्धि तो थी उनकी तो उस रूप में वह हमारे भाई हैं आर्य समाज को भी फॉलो करने वाले हमारे भाई है जिसकी भी वेदों में प्रमाण बुद्धि हमारे भाई है व आपस की बात है निपट वो होता रहेगा कि किसका क्या मत है किसका क्या नहीं है तो एक बात यह रही कि वेदों में प्रमाण बुद्धि मात्र जिसकी है उसके कारण हमारे भाई है और दूसरी यह रही कि राम जी ने सिखाया है मृत्यु हो जा तो किसी भी प्रकार का जो वैचारिक मतभेद होता है व शरीर के साथ ही चला जाता है फिर कुछ नहीं रह जाता तो इस

03:23:54:00 इस बात को भी ध्यान में रखें और इसलिए आज उनकी जो पुण्य तिथि है हम उनको सम्मान प्रकट करते हैं और अगर अभी भी कोई है रामपाल का भक्त जो आना चाहे वो आ सकता है आज एक सबसे बड़ा मिथ्या में तोड़ लाऊ ईश्वरनाथ जी आए हैं आपका परिचय ईश्वरनाथ जी नमस्कार मैं आया हू पहले भी सर अच्छा आए आवाज नहीं आ जी आपका गला बैठा हुआ है क्या नहीं मेरा तो सही है गला अब ठीक है ठीक है बोलिए जी मैं ये कहना चाहता था कि आज अयोध्या के अंदर जो कार्यक्रम हो रहा है आप परिचित होंगे उससे आप एक मैं चाहता हूं भाई साहब आपने हमसे व्यक्तिगत संपर्क क्यों नहीं किया जब आप शंकराचार्य जी के समर्थक है तो मुझे याद आ गया आपने संपर्क क्यों नहीं किया हमसे मान्यवर मैंने इसलिए संपर्क नहीं किया क्योंकि मुझे लगा कि आप व्यस्त होंगे जब आप कार्य करते हैं ज सनातन सिद्धांतों पर बात करते हैं लगने पर बात नहीं करते

03:25:09:21 हैं लगने पर बात नहीं होती है सनातन सिद्धांतों पर बात होती है बात वही बोले जिसको अका रूप से आप कह पाए अका रूप से ऐसी बातें मत करिए जिनका कोई बेस ही नहीं है मुझे लगा हमने कही कोई बात क्या मुझे लगा जब मैंने आपसे कहा नंबर देते हुए कि हमसे संपर्क करिए तो आपको करना चाहिए था कर्मण्य वादी कारते मा फले सु कदाचना आपने एक बार भी प्रयास नहीं किया और लगे प हो गए अर्जुन भी यही सोच लेता कि मुझे लगा कौरव जीत जाएंगे इसलिए मैं लडूंगा नहीं मान्यवर मैं आपसे क्षमा चाहता हूं मैं आपसे आप जाइए और व्यक्तिगत संपर्क करिए मैं

03:25:58:27 क तो देखते हैं फिर अगली लाइव में क्या हमारा रता है ला में हम लोग आपकी वो जो आपकी जो कुछ रोचक जानकारिया उनके साथ में लेते हुए इनका एक और नैरेटिव लेंगे जिसको ब्रेक करेंगे और आशा करते हैं कि आज लोगों को काफी कुछ अच्छा जानने को मिला हो पूरी लाइव चर्चा में चलिए हा जी जी टी आर पाड़ी जी आप अपनी बात पूरी कर लीजिए जी एक नैरेटिव आज लास्ट में और तोड़ के जाऊंगा इनका क्वेश्चन रहता है कि भगवान श्री कृष्ण अगर इतने सामर्थ्य वान थे तो अभिमन्यु को जीवित क्यों नहीं किया क्या कारण था तो कैसे भगवान हो सकते हैं तो इसका कारण इने ढूंढने की कोशिश नहीं करी मैं बता देता हूं महाभारत के प्रथम खंड के उसमें जब महाभारत की जो रचना रची थी जब जब क्या हुआ था भीमसेन को वायु और अर्जुन के देवता का इंद्र का अंश जानो रूप सौंदर्य की दृष्टि से इस पृथ्वी पर जिनकी समानता करने वाला कोई नहीं था वे समस्त प्राणियों के मन मोह लेने वाले नकुल और सहदेव अश्विनी कुमार अंश से उत्पन्न हुए थे वर्चा नाम से विख्यात जो चंद्रमा के प्रतापी पुत्र था वह महा यशस्वी अर्जुन कुमार अभिमन्यु हुआ जन्म

03:27:13:28 उसके अवतार काल के चंद्रमा ने देवता इस प्रकार कहा अब किसने कहा अब यहां पर चंद्रमा ने कहा देवताओ से मेरा पुत्र मुझे अपने प्राणों से भी अधिक प्रय है अत मैं इससे अधिक दिनों के लिए नहीं दे सकता इसलिए ति लोक में इसके रहने की कोई अवधि निश्चित कर दी जाए फिर उससे उस अवधि का उल्लंघन नहीं किया जा सकता उनकी अवधि वहा निश्चित कर दी गई थी पहले ही किधर जब यहां जब महाभारत का जब पूरा प्रसंग रचा जा रहा था एक माया थी जब महाभारत हम पढ़ेंगे कि ये क्यों हुई क्यों हुआ कोई कहेगा कि यह द्रोपदी जी के कारण हुआ ना यह मुख्य कारण नहीं था द्रौपदी के कारण धर्म की स्थापना करने के लिए यह युद्ध हुआ था नहीं मैं एक बार एक बार और यहां प मैं आपको एक मिनट रोकना चाहूंगा ये कहते हैं इन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा है कि दरअसल महाभारत का कोई धर्म से लेना देना नहीं वो तो पारिवारिक झगड़ा था संपत्ति का उसकी वजह से महाभारत हो गया तो मैं इनसे ये पूछता हूं क्या क्या संपत्ति धर्म में नहीं आती बैंक जाकर लूट लू यदि मैं या कोई अन्य व्यक्ति और बोल दूं यह तो संपत्ति का झगड़ा था तो क्या ये इनके लिए धर्म है संपत्ति किसी की हड़प जाना ठीक है तो इनकी किसी बात में कोई लॉजिक

03:28:29:04 नहीं है जब ये पूछेंगे ना कि अभिमन्यु को क्यों नहीं बचाया तो हम पूछ लेंगे कि कबीर जी के बहन भाई उनकी पत्नी उनके बच्चे कहां पर है ठीक है ना तो इतनी लंबी इनके साथ सर दर्दी लगाने की आवश्यकता बस आपने जो प्रमाण दिया है वो बिल्कुल यूजफुल है और इसको हम यूज भी करेंगे वंदना जी जुड़े हैं प्रणाम एक एक चीज और है आप लोग बहुत मेहनत करते हो आप लोग बहुत मेहनत करते हो पर इन सब बातों का तो एक ही वो है भाई ईश्वर की अपनी इच्छा कि उसको क्या करना है क्या नहीं करना है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म पूर्ण है वो अगर हम यह कह दे कि ईश्वर ने यह क्यों नहीं किया तो इतने क्वेश्चन खड़े हो जाएंगे रामपाल दास जी जेल गए ईश्वर ने क्यों नहीं बचा लिया हम नहीं पूछते उनसे सवाल क्यों नहीं पूछते क्योंकि उसका आंसर यह हो सकता है हम हम उनकी तरफ से आंसर स्वयं ले लेते हैं वो नहीं दे पाएंगे उसका आंसर ये हो सकता है कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है हम नहीं करेंगे य क्वेश्चन ईश्वर ने जब काल ने ऐसा ऐसा किया तो जीवों को बचा क्यों नहीं लिया ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता उसका मन उसको लीला करनी थी भेज दिया ये मैं आंसर दे रहा हूं

03:29:44:04 उनकी तरफ से सोचो ये आंसर इनके के पास से नहीं निकलेंगे और ज कर उने जब को जिंदा कर दिया हा ईश्वर किसी भी नियम के नीचे नहीं है इस बात को समझिए सुनिए रामायण में जो वानर जितने भी घायल हो गए थे युद्ध में क्या लिखा है अंत में सबको सही करया सब सही हो गए बताइए तो ईश्वर के ऊपर नियम नहीं है कि तो व किसी को मरने नहीं देगा अगर आपका ईश्वर ऐसा है तो किसी की मृत्यु नहीं होती है आपके यहां क्या आपके तो आश्रमों में हो जाती है फिर कामा केस चल रहा है जिंदा हो जाते लोग केसी ता अभी इसमें भी आएंगे महाभारत में इतने लोगों को क्यों मरवा दिया इसम भी आएंगे महाभारत में इसका प्रमाण हैर

03:30:46:01 जी ने अपनी मठा मनाय अनुशासनम में 42 नंबर नहीं 43 नंबर के श्लोक में सूक्ष्म वेद कहा है और हम पिछली वाली लाइव स्ट्रीम देख लीजिएगा उसमें बहुत सारे प्रमाण दे चुके हैं सूक्ष्म वेद कहा जाता है बीज बीज वेद बीज को यानी कि प्रणव को ओमकार को सूक्ष्म वेद कहा जाता है दूसरी बात जो शास्त्र है उसमें कई जगह पंचम वेद कहा गया है पुराणों को और तीसरी बात अगर सूक्ष्म वेद कहा भी है तो इससे यह सिद्ध नहीं हो जाता कि आप जो बताओगे वह सूक्ष्म वेद है शास्त्र में लिखा दिखाओ कि सूक्ष्म वेद वही जो कबीर वाणी है या गरीब दास की वाणी है वो लिखा दिखाओ वेद में ठीक है तो कना भी नहीं आता सूक्ष्म कहते हैं मुझे लगता है अब कोई बाकी नहीं रह गया है जिसने जिसकी माता जी ने निष्ठा पूर्वक जो है उनकी सेवा की हो उनको पोषक तत्वों से पान कराया हो इसीलिए ऐसा हो रहा कि कोई आ नहीं पा रहा है जो जो चिल्लाया चिल्लाते फिरते थे 434 15 एक 44 15 44 15 एक आज आ नहीं रहे आज कोई नहीं आ रहा है जो सिद्ध कर सके और सुनो भैया मेरे लिए

03:32:01:07 मुझे बुलाने का तरीका भी समझ लो मेरा फोन नंबर नोट करो 74836 अगर यदि आप कोई लेवल पर है लेवल पर ऐसे नहीं कि कोई कोई भी व्यक्ति मतलब किसी नेे फोन मिला मैं उसके कहने पर जो उसकी चर्चा बुलाने पहुंच जा हूं नहीं अगर कोई लेवल है आपका तो हम एक मध्यस्थ स्थान ढूंढ लेंगे ऑनलाइन के लिए चैनल ढूंढ लेंगे ये प्रमाण देख लो भैया पंचम वेद के रूप में नोग उपनिषद सात एक दो पंचम वेद प्रमाण देख लेना य यही निकाल रहा था मैं जी तो अगर आप हमसे संपर्क करते हैं तो कोई बीच के स्थान में भी मैं आने को तैयार हूं आप बताइए आप में कितना वो है संघर्ष की भावना सत्य की रक्षा के लिए यदि आप उसे सत्य समझते हैं जो आप मनवाना चाहते हैं औरों से और हमारी बात ऐसी है कि हम तो घर से निकले ही ते

03:33:02:00 बांध कर सर पे कफन जा हथेली पर लिए लो बड़ चले है यह कदम जिंदगी तो अपनी महिमा मौत की महफिल में है सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है हाथ जिनम हो जुनू कटते नहीं तलवार से सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से दूर रह पाए जो हमसे दम कहां मंजिल में है सरफरोशी

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03:33:29:27 की तमन्ना अब हमारे दिल में तो आना अगर अमूल का दूध ना पिया हो बचपन में वही वाला पियाओ जो पीना चाहिए अब तो ये हो गया ना कि डॉक्टर भी कहते कि शुरू के छ महीने जो है अपना ही पला मगर फिर भी शायद इनके साथ नाइंसाफी हो गई है जो इनको अपना पक्ष सिद्ध करने का साहस नहीं है इनम जी माता जी वंदना झा जी माननीय जय श्री राम जय श्रीम काफी देर से देख रही थी लाइव स्ट्रीम तो उसम एक आए रामपाल जी के वो बोल रहे थे कि कबीर दास जी स शरीर गए यहां से तो इसलिए वो परमात्मा हो गए और श्री कृष्ण जो शरीर छोड़ कर के गए तो मेरा उनसे क्वेश्चन ये है अगर नेक्स्ट टाइम कभी वो आए या कभी कोई बात कहे तो पहली बात की कबीरदास जी शरीर के साथ गए थे ये देखा किसने है भाई इनकी बात मैंने कहा ना इनके बातों को मानने के लिए शास्त्र से बाहर जाना ही पड़ेगा हां तो मैंने तो नहीं देखा कि वो गए या मैंने सुना भी नहीं है शास्त्र में भी शास्त्र प्रमाण भी नहीं है कि वो सर शरीर गए थे ऐसे तो हम भी कहे श्री कृष्णा जी के पार्षद आए थे उनके

03:34:44:28 धान से वो अपने पार्षदों के साथ में वो अपने र सवार शरीर गए आपने क्या देखा है कि उनका अंतिम संस्कार होते हुए आपने देखा है तो आप इस बेस पर आप कैसे बोल सकते कृष्णा वो शरीर छोड़ कर के गए थे और कबीर दास जी शरीर के साथ गए थे सेकंड थिंग ये चीज मीरा बाई के लिए भी हमने सुनी है कि वो मतलब एकदम से गायब हुई थी वो भगवान के शरीर गई ी सरीर सरीर गई थी तो क्या वो परम पूण परमात्मा हो गई कृष्ण जी से बड़ी हो गई तो ये के ऊपर कोई नियम लागू नहीं होता वो शरीर भी जाएगा बिना शरीर के भी जाएगा कृष्णा जी ने तो अपने भक्तो को स शरीर भेजा है जो दूसर को भेज सकते क्या व खुद नहीं जा सकते बो हा जी कौन है और मैंने अने भैया से तो यह भी सुना था व भी रामपाल जी ज मैंने बताया था वो य भी कहते रा कृष्णा जी की भक्त नहीं थ पहले थ बाद में उन्होने छोड़ दिया था क और वो हमेशा मुझसे एक सवाल करते है कि वो राम नाम क्यों जप वो तो कृष्णा जी की भक्ति उन्होंने ये क्यों बोला की राम रतन धन पायो कृष्ण रतन धन पायो क्यों नहीं बोला उस तरह से मैंने बहुत सारे सवाल कर सकते है ना आप

03:36:00:01 क्या नाम भा हमने इनकी एक ही बात पकड़ ली अभी अभी इन्होने इनके जो रामपाल है व खुद कह रहे मैं कुत्ता हूं वो खुद कह रहे दो कौड़ी का हूं अब ये कुछ भी बताएंगे तो वो इनका मत है वो तो स्वयं कह रहे मैं कुत्ता हूं जैसे ब्रह्मा विष्णु महेश ने कह दिया कि हमारा भी आविर्भव होता है त्र भाव होता है ठीक है तो इनके पीछे पड़ गए तो अब अब हम पूछ रहे हैं वो तो कह रहे कुत्ता है कुत्ते की भक्ति कहां लिखी है भाई स अगर उनको अगर उनको कुत्ता ही माना जाए जबक वो नहीं है वो अपनी उसमें एक महिमा गान के तौर पर वो बात कर रहे है रस में वास्तविकता नहीं है वो मगर अगर ऐसे पकड़ ले बात को तो इतनी बातें इनकी रोज दिन भर में हम पकड़ेंगे ये लोग सा लेना इनका संभव नहीं होगा उनके जो भक्त है वो भी चुराए हुए हैं जैसे अभी प्रभु जी बता रहे थे इनकी कहानिया चुराई हुई है या इन टोटल वो अगले वाले में हम लोग खुलासा करेंगे हा भाई कोई आया है क्या केशव केशव जी आए कोई देखते हैं कहां गए केशव जी हट गए क्या चले ही गए चलिए बते आज काफी टाइम हो गया साढ़े तीन घंटे हो गए

03:37:16:25 बंद करते हैं लास्ट एक संदेश है अगर महाभारत को जानना है तो खंड छ के जो स्वर्गारोहण पर्व है वो पूरा पढ़िए आपको पूरी राम महाभारत समझ में आ जाएगी कि क्या है पूरा पढ़ने की जरूरत भी नहीं है खाली उसके पूरे अध्याय पढ़ लीजिए वो समझ में आ जाएगा स्वर्गारोहण पर्व कि ये युद्ध था क्या आखिर कौन मरा कौन नहीं मरा इसमें ना कोई मरा ना किसी ने जन्म लिया व सब पता चल

03:37:53:02 जाएगा ठीक है केशव गोस्वामी जी जय श्री राम जय श्री राम शिवा भैया जी बताए आप जो कार्य कर रहे बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं मैं गुजरात पब से आपको सु मैसेज भी किया अच्छा आभार बत अा

03:38:29:16 जी आभार आपका आभार अच्छा माननीय आपसे एक बात पूछनी थी अभी जो हमने पिछले कुछ दिनों से जो और थोड़ा सा सक्रियता और बढ़ा दी है तो इससे कुछ आपका ओवरव्यू क्या रहा सामने से आपसे पूछ रहा वंदना वंदना जी से वंदना जी आपसे पूछ रहा तो यही कूी पहले बहुत टॉर्चर मतलब मेरे साथ होता था वो हमेशा कुछ ना कुछ चीजों को लेकर के बोलते रहते थे मतलब कई साल से मैं परेशान रही थी लेकिन सीरियसली आप लोग के मत क्या बोलू भगवान की इतनी कृपा हुई आप लोग का ना मुझे सपोर्ट मिला है बहुत सारी चीज मुझे जानने के लिए मिली है और अ उनकी भी बोलती बंद हो गई है हम नहीं बोलते हैं अ नहीं मैसेज करते हैं या फिर पहले हमेशा बोलते थे तुम कृष्ण की पूजा करती हो तुम्हें मोक्ष नहीं मिलेगा तुम्हें तुम जन्म बंधन में फसी रहोगी जन मृत्यु के चक्र में सब अभी ऐसा कुछ नहीं क्योंकि अभी कुछ भी बोलते हैं तो मेरे पास एक ही लाइन है आपको जो बोलना है आप वहां जाक के बोलिए शिवान जी के सामने बोलिए अगर वो मान लेंगे तो मैं मान लूंगी बस तो तब से वो चुप हो गए हैं अभी कोई प्रॉब्लम नहीं है अभी मतलब मैं बहुत सुकून से हमें रह पा रही हूं सीरियसली आप लोग को बहुत सपोर्ट

03:39:44:25 हुआ है आप लोग के सपोर्ट की वजह से मुझे इतना रिलैक्सेशन अभी मिल पाया है चलिए आभार आपका जी केशु जी आप कुछ कह रहे थे आवाज नहीं आ रही मैं एक सेकंड अपनी बात रखना चाहूंगा छोटी सी वंदना जी के लिए वंदना जी जब ये आपको बोलते हैं ना कि भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु आदि होगी तो पहले उनसे यह कंफर्म कर लीजिए आप पुराण से मानेंगे या महाभारत से मानेंगे एक बात उनसे कंफर्म कर लीजिए ठीक है जब आप भागवत पुराण पढ़ेंगे ना तब जब भगवान का धाम गमन होता है तो वहां पर स्पष्ट लिखा हुआ है कि उन्होंने अपनी जो मूर्ति अर्थात शरीर है उसको अग्नि के अनुसार नहीं जलाया बल्कि स शरीर व अपने धाम को चले गए ये बात बड़ी क्लियर ठीक है अगर वो मानेंगे महाभारत को क्योंकि एक जगह रुकते नहीं महाभारत को मानेंगे मसल पर्व के अंदर चौथा अध्याय है और उसका 20 नंबर श्लोक और 21 नंबर श्लोक में आपको पढ़ देता हूं उन्होंने यह लीला क्यों रख ठीक कहते हैं तत्पश्चात उन्होंने तीनों लों की रक्षा ठीक है यानी कि तीन लोग की रक्षा तथा दुर्वासा का वचन पालन करने के लिए अपने परम धाम पधारने का उपयुक्त समय प्राप्त हुआ समझा इसी उद्देश्य से अपनी संपूर्ण

03:41:00:07 इंद्री वृत्तियों का निरोध ठीक है लास्ट जो लोक है वो ये है भगवान श्री कृष्ण संपूर्ण अर्थों के तत्व वेता यानी कि जानने वाले अविनाशी देवता अविनाशी आ ग य ठीक है तो तभी समय उन्होंने देखा और देह मोक्ष देह त्या नहीं देह देह मोक्ष अलौकिक लीला का संवरण करने के लिए यहां पर ये स्पष्ट लिखा है कि लीला का संवरण करने के लिए कार्य था वो लीला स्वरूप में था लीला का ही अर्थ है लीला का ही अर्थ है दिव्य कार्य लीला का ही अर्थ है व्यवहार व्यवहार भगवान जब कुछ करते हैं वो उनकी लीला है उसमें व्यवहार में भगवान कुछ भी कर सकते हैं वो आपको दिखा देंगे मैं अपनी देह का नाश कर दिया लो आप कह ही नहीं सकते नहीं किया ये बात और आपने ये बात याद रखनी पहले कंफर्म कर लेना पुराण मानोगे या महाभारत मानोगे ठीक है अब तो पहले अब तो पहली बात ये आद आती है कि ये पहले वो 35 श्लोक बता दे कौन से हैं भगवत गीता के जिससे हम लोग हम लोग बाकी के 665 से अपना मोक्ष का फिक्स कर सके कि भैया 35 श्लोक बता दो हम

03:42:15:08 को 5 पर भगवत गीता का उसके बाद हम देखे मोक्ष किन श्लोकों से हम मोक्ष पाएंगे अथवा आपको मोक्ष दिला पाएंगे प्रयास करेंगे आपको मोक्ष दिलवाने का तो पहले 35 लोक पता चल जाए सारे शास्त्र आज की अगर अगर आज कोई लाइव स्ट्रीम होने वाली है तो मैं बताना चाहूंगा कि भैया आप लोग ना वो 35 श्लोक छाट के बताइए अगर आप सुन रहे हैं तो कि वो 35 लोक कौन-कौन से हैं जिनको नहीं मानना है जो ने अपने से बोल दिए हैं फिर बात करेंगे 665 पर भगवान श्री कृष्ण स्वयं सर्वशक्तिमान परमेश्वर है उन्होंने ही कहीं पर खुद को परमेश्वर कहीं पर उसका सखा अर्जुन का और कहीं पर स्वयम को काल कहा और इन सब बातों का आपने यदि कुतर्क के आधार पर निकाला है तो कुछ जैसे जो अच्छे स्तर के जो ज्ञाता होते हैं विद्वान होते हैं वो मना करते हैं अरे कुत से बात मत करो मतलब ज्यादा ही लो लेवल का ज्ञान होता है जिनका मस्तिष्क तो वो यही कहते क्या बिल्कुल निर् बुद्धि लोगों से आप भिड़े हुए निर् बुद्धि हों के चक्कर में भी तो हमारे कुछ भाई बहन पढ़ रहे हैं ना प्रॉब्लम ये है इसलिए कुतर

03:43:30:16 को का भी समाधान करेंगे ये सब कुतर्क है उतको का समाधान ये कोई उस लेवल की बातें नहीं हो रही है इसीलिए कहता हूं ना कि इकन से बात हो दयानंद जी से दयानंद वालों से बात हो आर्य समाज वालो से बात हो तब भी एक लेवल होगा उसमें चर्चा का है ना और फिर उसमें और ज्यादा ऊपर तो अलग लेवल की बातें हो जाए मगर यहां तो कोई लेवल ही नहीं मगर बात क्यों सर क्यों मारना पड़ रहा है इन चर्चाओं को देख कर के जो फसने वाले होंगे वह ना फसे बस इतनी बात बिल्कुल को फैला रखा है कोई आ नहीं रहा है लगभग काफी देर हो गई है

03:44:15:25 की एक वीडियो है मेरे पास दिखा बीच एक सेकंड बीच में डिस्टर्ब कर रहा हूं मैं अभी चलता हूं आप अपना जारी रखिए ठीक है मे बड़ी ु होने वाला है भी आते आपके पीछे पीछे बस ठीक आज मैं पिछली बार उन्होंने कुतर्क किया था कि अपनी दूसरी वाली गीता लेके आई वही लेने जा रहा हूं आज उनके पास जाने के लिए एक बात और है एक बात और है वो मैंने भी नोट किया आपको बोलना चाहिए था कि पदम पुराण का शिव पुराण का भगवती पुराण का हलवा वो देते समय उसका लेखक कौन है वोह दिखाया है क्या जैसे उसने बात उसने एक बात कही थी कि हमारे गुरुजी जो है व लेखक का नाम भी बताते हैं तो क देवी भागवत का लेखक का नाम बताया क्या बहुत से ऐसे शास्त्र उन्होने खोले उसम लेखक का नाम नहीं बताया केवल प्रकाशन का नाम बताया है बहुत से शास्त्र बक ठीक है जय श्री राम ठीक है बहुत आपका आभार और एक स्पेशल मैं बात कहना चाहूंगा जैसे शिवांश जी ने आज जो भी लोग देख रहे हैं कितनी प्रेम पूर्वक दयानंद जी को भी उन्होंने बड़ा ही सम्मान दिया है ठीक है हमारा सनातन धर्म यही सिखाता है सभी पूजनीय है जब

03:45:31:01 तक कि वह एक ठीक है या तो हमारे एक धर्म के अनुसार चल रहे हैं ठीक है और जो चला गया है उसके लिए सदैव आदरणीय होना चाहिए और हमारी यहां लाइव की सबसे बड़ी बात ही यही है कोई भी अपशब्द किसी के लिए नहीं बोला जाता हालाकि मैं एक न्यूज बोलने लगा था रामपाल जी के खिलाफ तो शिवांश जी ने बोला कि नहीं हम उस परे चर्चा नहीं करेंगे ठीक है तो आदर बना रहना चाहिए सभी के लिए सभी आइए आइए हाथ पकड़ते हैं ठीक है और मजबूत करते हैं इस तंत्र को जिसका नाम सनातन है आप सभी को बड़ा आभार आप सभी को हरि ओम सीताराम हरि ओम जय श्री राम जी अ योगेश जी

03:46:13:16 बताइए जी एक राम जिसम वो ब्रज का अर्थ बता रहा है उसम आजा भी दिखाई दे रहे है गलती से मैं दिखाऊ हा आपका परिचय क्या है योगेश जो पहले आए थे दो दिन पहले अरे पूरा परिचय बताइए आप रामपाल दास जी के फॉलोअर है या नहीं है या इधर से है कि उधर से थोड़ा अपने बारे में बता दीजिए एक बार आपकी तरफ से ही ह हेडफोन मतलब वैसे डायरेक्ट बात कर लीजिए क्योंकि है क्या ना वो स्पष्ट आवाज नहीं आती

03:46:56:06 है एक सेकंड रुको शिवांश जी एक दिन प्रा प्रकृति और अपरा प्रकृति के का आप व्याख्यान कर दीजिएगा स्ट्रीम में लोगों को समझने में किता में प की ग है उसके बारे में असल में असल में क्या है मेरे पास बहुत सारे इनफॉर्मेटिव टॉपिक्स रखे हुए हैं जिसको मुझे एक करके बनाना है मैं आपको अलग से बता दूंगा बहुत सारे हैं उसमें यह भी है प्रकृति परा प्रकृति और परा प्रकृति जी मगर अभी क्या है समय का तो दिवाली का टाइम चल रहा था और तो अभी इन्ही का ही डेली कुछ ना कुछ हुआ ही जा रहा है तो समय नहीं निकल पा रहा है बहुत सारी चीज रहती है करेंगे इस पर बिल्कुल जी कहां गए भाई साहब चले व संस्कृत शब्द कोश से जब वो दिखा रहे हैं कि ब्रज का अर्थ जाना ही होता है तो उसके नीचे वही पर आना भी लिख रखा है जी जी भाई साहब आपका नाम आप म्यूट

03:48:11:02 है नमस्कार ज हेलो जी जय श्री राम जय श्री राम मैं इन राम पालियो से ये पूछना चाहता हूं कि अगर कबीर ईश्वर है तो जिस युग में यह हुआ था 500 साल पहले मुस्लिम युग में उस टाइम मुसलमान बहुत सारे अत्याचार करते थे कन्वर्जन करते थे जजिया कर लगाते थे ईश्वर इन सब चीजों को रोक क्यों नहीं पाया ईश्वर को तो धर्म के विरुद्ध अधर्म के विरुद्ध लड़ाई करनी हो जसे राम आए कृष्ण आए लड़ कबीर क्यों नहीं लड़ पाया ये बिल्कुल आप सही कह रहे अगर इनसे इन्ही की भाषा में बात करनी है तो ऐसे ही देना पड़ेगा मैं असल में यह सब बात खोदता नहीं हूं य

03:49:03:16 क्वे कहने का मतलब न दो मारता भी है शिवांश नाम भी है वो ईश्वर थोड़ी ना हो जाएगा कबीर तो नाम स्पष्ट है भी नहीं अरे सामने वाले ने इतिहास बदल दिया बोल शिवांश भाई मैंने यह पूछा मैंने कहा अगर इतने सामर्थ्य वान थे इतना अत्याचार हो रहा था अभिचार हो रहा था वहां तो उस समय रोका क्यों नहीं धर्म की स्थापना करने के लिए आए थे ना वो तो गुलाम रहा बोले कहां था उस समय उस समय था ही नहीं मैंने कहा 800 साल मुगलों ने राज किया 200 साल से 250 साल अंग्रेजों ने राज किया हमने कहा स्वतंत्रता दिवस बनाते हैं हम क्यों बनाते हैं कब हुआ भारत आजाद 1947 क्यों बनाते हैं फर जब वहां उस समय नहीं था क्या आज से 1398 ईसवी में उनका जन्म हुआ कबीर दास जी का उस समय किसका राज था यही मुगलों का औरंगजेब यही लोग औरंगजेब तो नहीं और दूसरे लोग थे उस समय वो इतना अत्याचार कर रहे थे रोका क्यों नहीं सामर्थ्य मान थे ना वो तो तो बोला उस समय नहीं था कुछ भी नहीं था ऐसा बोले सिकंदर लोदी को उन्होने वो किया था इतिहास दिया उने 800

03:50:18:21 200 नहीं किया भाई राज इतिहास गलत है पर अलग से लाइव होगा जी जी जी इस पर अलग से बात होगी हां तांबे का पात्र आप लेय जल लेने के लिए है आप ले लीजिएगा छोटे भाई ठीक है बहुत अच्छे से वर्णन है बाता जी जी जी मैं यह कहना चाहता हूं कि जैसे यह लोग कहते हैं कि कबीर फूल में से उत्पन्न हुआ था और बिना शरीर के मर गया शरीर उसका य था फूल बन गया ऐसे तो हमारे कर्ण भी थे जो फूल के परही आए थे हम उसको भगवान नहीं बना पाए जिसके पास बहुत सारी पावर्स थी हमने उसे ईश्वर नहीं बनाया उन्होने एक बना दिया अरे नाजायज औलाद था किसी की उसने भाई कैसी बातें कर रहे हैं आप कैसी बातें कर रहेने नाम लिख रखा है जय श्री राम और इस तरह से बात करते हैं क्या किसी के बारे में बात नहीं करते चलिए ठीक है आपने अपने भाव व्यक्त कर लीजिए आने के लिए आपका आभार समर्थन के लिए आभार मगर इस तरह से बात नहीं करनी है बिल्कुल भी किसी के बारे में

03:51:34:18 ठीक है कु और बन जाएंगे देखिए जो शब्द है उनको मर्यादित रह कर के बात करें गलत तरीके से गलत व वर्ड्स का यूज ना करें ठीक है अब मेरे ख्याल से सब है नहीं कोई जिसने वाकई में माता जी ने निष्ठा पूर्वक जिसको इनकी आवाज नहीं आ रही है अन म्यूट कीजिए अपने आपको को अन म्यूट कर

03:52:10:16 लीजिए नहीं ठीक है बात बोल हटा लीजिए ये माफी मांगे य वाला ठीक है अब कोई अगर आना चाहे तो अब काफी देर हो चुकी है अब बढ़ाते हैं फिर हम कभी आते हैं लाइव और मैं आपसे कहूंगा आप आपने नाम तो दिखाया नहीं य पर राम नाम की गरिमा का थोड़ा सा ध्यान रखें गिरो मगर उस झरने की तरह जो गिर के भी अपनी सुंदरता खोने नहीं देता रामचंद्र जी की पत्नी का अपरहण कर लिया था हरण कर लिया था रावण ने मगर रामचंद्र जी ने उनकी पत्नी का हरण नहीं किया मंदोदरी को नहीं ले आए व और राम रामो विग्रह वान धर्मा अगर हम धर्म के रक्षक स्वयं को कहते हैं तो धर्म को धारण भी करना होगा इसलिए एक मर्यादा में बात करें जी कुछ कहना चाहते हैं आप मतलब यह था कि जैसे आज के युग में भी कई बच्चे नदियों में नालों में पाए जाते हैं तो उसको श्वर थोड़ी ना बना देंगे जैसे क वो तक तर्क आपका है थोड़ा सा उसम वड जी बोलने का ठीक

03:53:26:20 है तो जय श्रीम सभी को जय श्री राम और आने के लिए आभार कबीर जी हिंदू थे और कबीर जी का सम्मान है उनके प्रति किसी भी प्रकार की अपमानजनक बात नहीं की जाएगी और और समय देने के लिए आभार आने के लिए सुनने के लिए रहने के लिए आभार और एक बार जाते जाते में फिर से बता दू कि अभी तक हमने इनके तीन नरेट तोड़ दिए हैं पहला अब यह नहीं कहते कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है य लाइव में आक के नहीं कहते नीचे कमेंट्स में कहले अपनी अपनी जो लाइव करते हैं वो प्राइवेट वाली उसम भी नहीं कहते वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान यह इनका जो नैरेटिव है ब्रेक हो चुका है दूसरा नैरेटिव इनका है कि का ज्ञान भगवान श्री कृष्ण से अलग किसी काल नाम के व्यक्तित्व ने दिया था तो वो नैरेटिव भी ब्रेक हो चुका है अ ये ना तो यहां आ कर के कहते हैं नहीं काल काल काल और ना ही अपनी जो लाइव करते हैं अलग से उसमें कहते हैं और तीसरा जो आज हमने बात की है कि गीता के अनुसार रामपाल दास तत्वदर्शी संत नहीं है तो इनके ही अब यहां तो य आज

03:54:41:20 किसी ने बात कोई नहीं की अभी यहां पर चु हो गए हैं आ नहीं रहे हैं और इसके बाद जब जाहिर सी बात है जो इनकी लाइव इत्यादि होती है तो उसमें कोई शास्त्रो और तार्किक समाधान शायद संभवत ही दे पाए ये बहुत असंभव है वो संभव तो नहीं है तो कुछ बोल पाए ऐसा जो तार्किक प्रतीत हो जाए वो भी संभव नहीं है और अब इसके बाद इनके एकएक जो इन्होंने नैरेटिव फैलाए हैं एक एक हर उस नैरेटिव पर विस्तृत विवेचन करेंगे इसी प्रकार से लाइव चर्चा में और आज की लाइव में हमने यह भी बताया कि भाई सबसे पहले जब हम लाइफ शुरू करते हैं तो आपने जो चीजें उठाई होती है हालाकि वो निराधार होती है और उनका निराकरण प्रस्तुत करते हैं उसके बाद आपने चीज उ फैलाई धूप कहां है तो हमने प्रमाण दे दिया गोबर का उपयोग का है प्रमाण दे दिए यह भी बताया कि धर्म ब्रह्म में कहीं बाधक नहीं है और हम आपसे इस बात को लेकर के हमारे आप में दूरी नहीं है कि आप गोबर का उपयोग क्यों नहीं करते या आप धूप का उपयोग क्यों नहीं करते इस बात को लेकर दूरी है कि आप जो उसके परमेश्वर कहे गए हैं उनका अपमान करते हैं और जो नहीं कर नहीं कहे गए हैं शास्त्रों में ईश्वर का रूप जिसे नहीं बताया गया है उसको सम्मान देते देने के लिए आप इनका

03:55:56:25 अपमान करते हैं जिनको परमेश्वर का रूप बताया गया है तो इस बात को लेकर के दूरी है और सनातन की आड़ में सनातन विरुद्ध शिक्षाए देते हैं इस बात को लेकर के दूरी है और हमने यह भी बताया कि आपको आप ही के लोगों ने हारा हुआ और अनेक उपहास जनक शब्दों से आपके लिए उपयोग करते हुए आपी के लोग ने आपको जो है कहा है कि आप जो है भक्ति कर लो यहां पर आकर के सामना करने का या फिर उसका जवाब देने का प्रयास ना करो यह सब भी है और इसके साथ ही साथ और विस्तृत व्याख्या हुई है आज तो सभी का समय देने के लिए आभार राहुल शर्मा जी टी आर पहाड़ी जी सभी को जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम आ

03:56:47:04 [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 3:56:54 · 30 Oct 2024

क्या रामपाल तत्वदर्शी संत हैं #rampaljimaharaj #kabir

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A · Live रामपाल पंथ और उनके अनसुलझे रहस्य #rampaljimaharaj #kabir
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A · Live क्या गीता का पाँच प्रतिशत ज्ञान काल ने बोला है ? #kabir #rampaljimaha...
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