⬜ Not used yet · 00:00:01:03 – 01:01:02:27 (1:01:02)
00:00:01:03 [संगीत] सभी को जय श्री राम प्रार्थना करते हैं आप सभी कुशल मंगल होंगे और हम जो कार्य कर रहे हैं वह आप लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहा होगा अ एक जो प्यारी बहना करके हैं उनके घर का प्रारूप बदल चला है और अब वहां पर जहां पहले जिस स्थान पर भगवान को हटा दिया गया था और रामपाल जब जेल में नहीं थे तब की उनका तब का उनका कोई चित्र है उसको लगा कर के उसका ईश्वर के रूप में उसकी भक्ति कर रहे थे लोग अनजाने में अज्ञ वश तो वहां पर पुनः ईश्वर की स्थापना हो चुकी है पुनः वहां पर भगवान का मंदिर बन चुका है बजाय किसी तथाकथित जेल धाम निवासी तत्वदर्शी की फोटो के वहां पर जो हमारे वेदा आदि शास्त्र सम्मत भगवान के जो स्वरूप है वह वहां पर आपको दिखने लगे
00:01:16:21 तो यह एक अच्छा अचीवमेंट है कि सदैव मन में यही भावना रहती है कि हमारे कार्य करने से एक जगह भी अगर बदलाव आया तो बस हम लोग हमारा वही जो हमारा कार्य करना है सार्थक हो जाएगा तो कल चर्चा चल रही थी कि गरुण पुराण में क्या क्या लिखा है तो श्राद वाला भाग जो है वह आज पूरा करेंगे उसके बाद जो है व्रत पर बात करेंगे वैसे गरुण पुराण में ही सारी चीजें में मिल जाती है तो श्रा के पक्ष में पितृ पूजा के पक्ष में हमने वेदों से प्रमाण दिखा दिया था कल बहुत सारा दो सूक्त है पूरे पूरे अथर्ववेद के 18 जो अवा जो कांड है उसमें
00:02:15:26 तो उसमें अंत में जो दो सूक्त है वह दोनों सूक्त ही पितृ पूजन के ऊपर है और एक बहुत इंपॉर्टेंट वाला है कि इसमें कभी-कभी आर्य समाज की तरफ से ऐसा हो जाता है ऐसा कहा जाता है कि भाई वह प वो पित पूजन की बात हो रही तो जो माता-पिता है जो सजीव है जो अभी जो जिनका देह जिनका देहांत नहीं हुआ है उनकी बात हो रही है तो उसके विषय में भी हमने कुछ प्राप्त किए थे
00:03:01:16 व रि उसमें क्या है ना कि 40 35 और कौन सा था उसमें सीधे-सीधे लिखा हुआ है कि जिनको गाढ़ा गया है जिनको जलाया गया है ऐसा ऐसा हुआ है तो उन पित्रों की बात हो रही है तो यह सारी बात तो हम कल कर चुके हैं अब आगे यह चल रहा है कि श्राद पर एक क्वेश्चन आया था कि वो एकादश में भोजन करना जो है करने पर जो है उसको कुत्ते की यनि में मिलता है गरुण पुराण के अनुसार तो उसका जवाब ऐसे कल पंडित जी ने दे भी दिया था उसका जवाब यही है कि जिसमें मरणा सोच लगा हो मरणा सोच मरणा सोच का मतलब मरण असच मतलब मरण के कारण वहां पर अभी अशुद्धि है तो वहां पर कोई व्यक्ति गवे दिन का भोजन प्राप्त करता है भोजन कर लेता है जाकर के या फिर वहां पर जो है यज्ञ करता है अनुष्ठान करता है वहां से कुछ प्राप्त न ले लेता है कुछ भी करके तो उस प्रकार से उसको क्याक हानि होगी वो सब उसका
00:04:16:20 वृतांत वहां पर बताया गया है यह बात उन्होंने कल अच्छे से बताई हु थी जो पंडित जी आए थे अब यहां बात आती है विधि को त्याग करके अगर आप कोई कार्य करेंगे तो क्या रामपाल स्वीकार करते हैं रामपाल भी तो अपनी बातों में यही सब बातें बोलते हैं कि भाई मंत्र तो है मगर गुरु से नहीं लोगे तो ऐसा हो जाएगा वो हो जाएगा वो हो जाएगा गुरु नानक जी को कबीर जी ने प्रणव प्रणवा करर का मंत्र दिया था ऐसा कोई वृतांत आता है वो जा रहे थे उनको देख कर के कोई और जपने लगा उसके साथ प्रॉब्लम हो गई तो मंत्र भी आपका तारक तभी सिद्ध होगा ना जब उसको यथोचित स्थान से आप लेंगे तो उसी तरीके से जो भी विधिया है श्राप दादी की या भोजन प्राप्त करना तो आपको कहां से प्राप्त करना है विधि निषेध को तो आपके जो अमुक अमुक स्थितियों में आपके जो तथाकथित जेल धाव निवासी है वह भी स्वीकार कर रहे हैं मगर क्या श्राद्ध करने से मुक्ति है कि नहीं तो आज हम आपको वो दिखा देते गरुण
00:05:22:04 पुराण जो स विधि पित्रों का यह गरुण पुराण है गरुण पुराण अ गरुण पुराण का हां 107 वा अध्याय है और 10 सावा नहीं सॉरी हां 99 वा अध्याय है और उसका यह श्लोक क्रमांक है लास्ट है 37 38 39 है ना पहले मैं पढ़ देता हूं फिर आपको दिखा दूंगा क्या लिखा है इसमें जो स विधि पित्रों का श्राद्ध करते हैं व पुत्र श्रेष्ठ स् सौभाग्य स्मृद्धि समृद्धि राज्य आरोग्य अपने समाज में श्रेष्ठ वाणज में प्रभू लाभ तथा नाना शुभ फल पाते हैं वे यशस्वी तथा शोक हीन होकर अंततः परम गति को प्राप्त करते हैं परम गति परम गति ठीक है
00:06:37:27 वे ऐश्वर्य विद्या वाक सिद्धि ताम्र आदि धातु गौ बकरे अस्व मतलब संपदा उनकी आयु बढ़ती है सकाम व्यक्ति कृतिका से भरणी तक प्रति नक्षत्र में शाद द्वारा यही संपदा पाते हैं आस्तिक ब्राह्मण नवान तथा नवोद श्राद्ध करें उनके पि तृप्त हो जाते हैं उनको आयु संत प्रजा ऐश्वर्य विद्या स्वर्ग मोक्ष क्या देते हैं क्या देते
00:07:12:07 हैं यहां पर दिख रहा है मोक्ष क्या देते हैं पित तृप्त हो जाते हैं और क्या देते हैं मोक्ष ठीक है अब कुछ लोग यह कहेंगे कि यहां पर ये लोग कुतर करते मोक्ष वाला मोक्ष नहीं है जो भाई मोक्ष का मतलब है बंधनों से मुक्ति ठीक है तो अगर आप जैसे कई बार उसमें हेरफेर करते जैसे उन्होंने कहा परम शांति को प्राप्त हो गए तो उसकी वाली परम शांति काल की परम शांति ठीक है तो शांति का मतलब है जब आपके अंदर कुछ अशांत ना हो तब शांति है तो आप यदि यह कह रहे हो कि वो व्यक्ति मुक्त तो हुआ मगर वो वो वाली है इसका मतलब व उस समय अपने जो उसके जो त्रिविध ताप है उनसे वह मुक्त हुआ नहीं है क्योंकि उसके मन में अभी भी यह बात चल रही है कि अभी तो मैं यह वाली मुक्ति को प्राप्त हुआ हूं यह पूर्ण मुक्ति नहीं है इस भावना के होते हुए वह वहां पर मुक्त नहीं कहा जा सकता वह अमुक्ति ही है मुक्त नहीं है वो मक्ष नहीं उसे प्र तो श्राद करने से मोक्ष प्राप्त हो रहा है
00:08:27:25 और शाद करने से और क्या प्राप्त हो रहा है 18 दो 34 दिखा देता हूं और यह जो श्राद्ध किया जाता है पित्रों तक पहुंचता है कि नहीं कल हमने बता दिया था कि जो
00:09:01:24 श्राद्ध के द्वारा भी मुक्ति प्राप्त हो रही है लोगों को और अगर आपका वह कवि कबीर है तो कबीर तक पहुंच रहा है व्यक्ति ठीक है ये 18वां अध्याय आवा कांड
00:09:41:07 और 18वां कांड और उसका दूसरा सू और उसका 34 वा मंत्र वैसे तो यह पूरा यह दूसरा सूक्त भी पितृ मेद है यह देख लीजिए दूसरे नंबर का जो सूक्त है यह भी पितृ मेद ही है दिख रहा है पितृ मेद इसका 34 वा मंत्र क्या कह रहा है वह
00:10:23:15 समझिए सब में पित्रों की बात हो रही है ये लोग अंधे हैं ना या तो इनको जो फॉलो करता है वो अंधा है जो पितर गाड़ने के संस्कार से संस्कृत हुए हैं जो दूर देश में कात के समान त्याग देने से संस्कृत हुए हैं जो अग्नि से संस्कृत हुए हैं जो संस्कार के अन ऊपर के लोकों में स्थित है उन सब पित्रों के लिए अग्नि हे अग्नि देव तू हविष्य का भक्षण करने के लिए आ मतलब यज्ञ की यज्ञ में जो हम आहुति दे व आहुति वहां तक पहुंचे इसलिए अग्नि देव प्रकट हो है ना तो यह सारे श्राद्ध के प्रमाण है और श्राद्ध से हमने मुक्ति भी दिखा दी वेद में भी और गरुण पुराण में भी अब यदि आप गीता की किसी बात का ऐसा अर्थ निकालते हैं जो वेद विरुद्ध है गरुण पुराण विरुद्ध है आप उसको मत मानिए हम तो यह अर्थ निकालते हैं कि पित्रों को ही ईश्वर समझ समझकर पूजा करना वो गलत है पित्रों के लिए ही वो जो अनुष्ठान होता है वह अनुष्ठान किस और सभी अनुष्ठानों में कौन प्रतिष्ठित होता है पितृ यज्ञ भी हो रहा है
00:11:38:15 तो उसमें प्रतिष्ठित कौन है भगवान और इस बात में एक गीता का ही एक श्लोक और है जिसमें भगवान कह रहे हैं कि वोह लोग जो मुझसे भिन्न अन्य देवताओं का पूजन करते हैं वह तो भज तो मुझे ही रहे मगर अविधवा क्यों क्योंकि जब वो किसी भी देवता की आप भगवान से अलग स्वतंत्र सत्ता मान लोगे कि नहीं यह हमें मोक्ष दे देगा स्वतंत्र सत्ता कि कृष्ण से ज्यादा य बलशाली है हमको मोक्ष दे देगा तब आप गलत हो जाओगे तो भगवान श्री कृष्ण वहां पर कह रहे हैं मुझसे भिन्न किसी को भी अगर तुम भज रहे हो भज तो मुझे ही रहे हो मगर अविधवा है क्योंकि मुझसे स्वतंत्र किसी की सत्ता तुमने स्वीकार कर ठीक है तो यह तो हो
00:12:24:02 गया आपका श्राद्ध का पूरा कंप्लीट हो गया अब हम लोग व्रत पर बात करेंगे आज और हमने जो आज का टाइटल दिया है ना कि भाई पहले हेमंत पाटिल जी सबसे पहले आप शास्त्र सम्मत बातें करते हैं कि नहीं करते हैं तो अपनी जो भी बात बोलिए वह शास्त्र से बोलिए आप बोलिए कि आप जो बोल रहे हैं वह कहां पर लिखा है क्योंकि मैं जो बोल रहा हूं व वेद से दिखा रहा हूं ना आपको है ना तो आप अपनी शास्त्रों से बोलिए या तो कहिए कि जो बातें बोलते हैं वो शास्त्र सम्मत नहीं बोलते हैं अपने मन गंत बोलते हैं मन की बातें मत बोलो शास्त्र की बातें बोलो शास्त्र शास्त्र सम्मत भक्ति कराते हैं ना तुम्हारे तत्वदर्शी सभी धर्म सद ग्रंथों को खोल के दिखा देते हैं जेल में रोज वो चेक करते हैं कितने शिष्य बने उनके है ना तो शास्त्र से बोलो तो व्रत के लिए भी हम सबसे पहले वेद ही खोल लेते हैं ऋग्वेद
00:13:32:19 में पहला ही मंडल है और उसका 24 वा सूक्त है और 24 वा सूक्त और उसका 15वां मंत्र वेद सेही दिखाएंगे ना आपको भरभर के प्रमाण दे दिए वेद से मत मानो गीता की वो बात जहां लिखा है अगर आपको ये समझ में आ रहा है कि पित्रों की पूजा करने वाला पितृ लोक में जाएगा पित्रों को प्राप्त करेगा मत मानो तुमने तो लिखा है ना कि गीता की वो बात नहीं मान सकते जो वेद विरुद्ध
00:14:17:26 हो समझे मत मानो गीता की वो बात हमारे लिए गीता की एक एक बात मान्य है मगर उसका जो अर्थ हम लेते हैं वो अर्थ है आपके द्वारा दिया गया अर्थ नहीं अगर आपका अर्थ अलग है मत मानो तुमने ही तो लिखा ना गीता की जो बात वेद से मेल नहीं खाएगी वो गलत है दिखा दो इनको चवा नंबर पृष्ठ गरमा गीता की का गरमा गीता की का चवा पृष्ठ दिखाओ इनके मुंह पर मारो भग भग भग भग कोई शास्त्र नहीं कोई आधार नहीं बस मन गणतंत्र सम्मत भक्ति करते हैं ये लोगों को बेवकूफ बनाते हैं ये
00:15:04:10 पवा मंत्र देखो आंखें खोल के क्या लिख रहे हैं तुम्हारे तथाकथित तत्वदर्शी देखो पीडीएफ के हिसाब से चवा पेज है हां बड़ा करो इसी को आ तो गया था वही तो था अभी जो ओपन हुआ था वही था 14वां प्रश्न पीडीएफ के हिसाब
00:15:41:19 से ये तो चार है हां बड़ा करिए हां गीता का जो ज्ञान वेद से मेच मेल मेल नहीं करता वह ज्ञान गलत है तीसरी लाइन पर अंडरलाइन कर दो बस वह गलत ज्ञान है और इसमें वह जो धूर्त व्यक्ति है ना जो आकर के कहता है गलत कुछ भी नहीं है गलत लिखा है धूर्त गलत गीता का जो ज्ञान वेदों से मेल नहीं खाता वह गलत ज्ञान है धूर्तता मत करो वेदों से मेल कराओ अगर गीता में किसी और परम ब्रह्म के लिए आ आचरण करना सिखाया तो वेद कह रहा है कि ब्रह्म के लिए आचरण करो परम ब्रह्म नहीं कह रहा है
00:16:37:09 वो मत मानो गीता का वो ज्ञान उसके पास जा अभी बताऊंगा उसके का भी उसके मामला भी कर बताऊंगा बात को पकड़ते हो ना तुम लोग तो यह भैया ऋग्वेद है ऋग्वेद का पहला मंडल और 24 वा सूक्त और पवा मंत्र क्या लिखा है हे वरुण उत्कृष्ट अर्थात सिर पर बंधे हुए रस्सी के बंधन को हमसे ऊपर की ओर खींच शिथिल कीजिए निकृष्ट अर्थात पाव में अवस्थित पाश को नीचे की ओर खींच करर शिथिल करिए शरीर के मध्य भाग श्रय प्राया अथ आदित्य अदि तव व्रते आपके व्रत में रहते हुए शरीर के मध्य भाग
00:17:52:09 अर्थात नाभी प्रदेश गत पाश को शरीर से प्रथक कर शिथिल करिए बंधन मुक्ति के अन हे अदिति के पुत्र वरुण अदिति के लिए समर्पित होकर अथवा खंडन रहित होकर आपके व्रत में रहते हुए हम पाप रहित हो जाए आपके व्रत में रहते हुए तव व्रते यह पढ़ लो दिख रहा [संगीत] है ये त व्रते आपके व्रत में रहते हुए हम पाप रहित हो जाए ठीक है तो वेद क्या कह रहे हैं व्रत रखो व्रत रखने से पाप रहित होते हैं और दिखाता
00:18:48:07 हूं यजुर्वेद पहला अध्याय तुम लोग को जब मैं ग्रंथ खोलता हगा वेद तो कितना डर लगता होगा ना खोल रहा है यार हमारी तो पूरी सल्तनत मिटी जा रही है है ना ऐसे ही भाव आते होंगे डर लगता होगा यह क्या है यार य तो वेदों से निकाल रहा है अब क्या करेंगे हमारा जो ताना बाना पूरा कसा हुआ वो काल और गीता पर कसा हुआ
00:19:25:25 है वेदों से तो हमने इशारा ले लि लिया है बस अपने मन का तो पहला ही अध्याय है यजुर्वेद का और पहले अध्याय में ही पांचवा मंत्र व्रत का पालन करने वाले अग्नि मैं व्रत का आचरण करूंगा वह व्रत मुझसे शक्य हो मेरा वह व्रत सिद्ध हो यह मैं झूठ छोड़ छोड़कर सत्य के पास जाऊं असत से सत की ओर यह देखिए यजुर्वेद है ठीक है और अपना खुद का पब्लिकेशन नहीं है यह पांचवा मंत्र देखिए हे व्रत का पालन करने वाले अग्नि व्रत का मैं आचरण करूंगा तो यह वेदों से हो गया हो गया अब लाओ इसका वेदों से मैच नहीं खा रही अगर अगर तुम भगवत गीता के किसी श्लोक का ऐसा अर्थ निकालते हो जो वेदों का वेदों से मैच नहीं करता तो गीता का वो
00:20:41:00 ज्ञान गलत है मत मानो यदि तुम गीता का अर्थ य निकालते हो कि व्रत नहीं रखना चाहिए तो ठीक है अब गरुण पुराण से ले लो आप के बारे में गरु पुराणों में तो पुराणों में तो इतने हैं कि पूछो ही मत यह देखो लाइन लगी पड़ी है कहां से खोल के
00:21:13:16 दिखाऊ पहले सुना देता हूं पढ़ के विभिन्न तिथियों में व्रतों का वर्णन एक अध्याय पूरा अनंग त्रयोदशी व्रत वर्णन अखंड द्वादशी व्रत वर्णन अगस्त व्रत वर्णन रंभ तृतीया व्रत वर्णन यह सब अध्याय है पूरे पूरे हां ठीक है व्रत किसको कहते हैं य भी अभ खोल के दिखा देंगे आपको इसी में और भैया इतनी बकर बकर जो कर रहे हो आओ ना भाई ऊपर आओ तुमने व्रत को कैसे निषेध कर दिया जहां पर व्रत नहीं लिखा है वहां पर तुम कह रहे हो कि य व्रत करने को मना किया गया है जहां व्रत लिखा है करने को वहां तुम क कि नहीं यहां पर व्रत का मीनिंग कुछ और है बहुत बड़े दोगले हो भाई कहां से सीखा है दोगलापन जेल से हां जेल में भाई अपराधी बहुत होते हैं जेल में अपराधी बहुत होते हैं सही बात है तो जेल से जो है वो सीखने को मिल सकता है ये सब दोगलापन
00:22:21:20 तो इतने सारे व्रतों का वर्णन है एकादशी का महात्म पढ़ लेते हैं एकादशी व्रत का तो क्या है एकादशी व्रत का महात्म शिवरात्रि का भी है दोनों का पढ़ते हैं 417 और 420 ठीक है 417 हां यह आ गया यह सब माघ मास के शुक्ल पक्ष में और वैसे ही द्वादशी पापों का नाश कर देती है
00:23:02:03 ना और यह सब व्रतों का वर्ण व्रत से व्रत कैसे करना है ये सब उसमें आ रहा है और एकादशी का महात्म भी है ठीक है शिवरात्रि का भी है इसी में शिवरात्रि व्रत वर्णन मैं अब सर्व काम प्रद शिवरात्रि व्रत कहता हूं गौरी ने इस व्रत के संबंध में शिव शंकर से पूछा था तब महेश महेश्वर ने कहा था कि माग तथा फागुन मास के बी इस तरह से इन्होंने बताया कौन सी तिथि में किया जाता है जैसे एकादशी में उपवास रहकर द्वादशी को भगवान विष्णु की अर्चना द्वारा सभी मानवीय कामनाएं पूरी हो जाती है त तत शिवरात्रि व्रत करने वाला व्यक्ति भी नरक से भी मुक्त हो जाता है इस विषय में प्राचीन इतिहास है और यह सारा वहां का चल रहा है और फिर आगे विधि बताई जा रही है अर्पित करें ऐसे यह सब व्रत का वर्णन ही हो रहा है ठीक है तो
00:24:17:14 यह इतना है ना इसमें ही केवल इतना है अभी तो बहुत सारे और शास्त्र बाकी है व्रतों के वर्णन के लिए हम व्रत का वर्णन है व्रत का अगर बहुत सरल मीनिंग अगर करें तो हम लोग अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण करते हैं नियंत्रण करना सीखते हैं जिससे कि हम उ उनके जो विषय है उनमें होने वाली आसक्ति से दूर हो पाए इसके साथ ही साथ अगर भौतिक रूप से देखें तो अगर हम लोग उप क्या कहते हैं उपवास रखते मतलब जो वो अगर निराहार रहते हैं तो उससे भी क्या होता है कि अगर बायोलॉजिकली हम देखें य ये जो साइंस के साइंटिफिकली अगर हम देखें तो हमारी बॉडी रिटॉक्स होती है और अब मैं यह पूछता हूं जो इन्होंने गीता का एक अर्थ निकाला है कि बिल्कुल ना खाने वाला गलत है तो क्या व्रत का मतलब यह लिखा है कहीं पर कि बिल्कुल ना खाना व्रत है बिल्कुल ना खाने का मतलब तो यह भी हो सकता है ना कि एक पूरी जीवन ना खाने वाला अच्छा आप बताओ आपको अगर कई ऐसे मेडिकल टेस्ट होते हैं जिसके लिए आपको भूखा रहना पड़ता है कि उसके एक दिन पहले आपको कुछ नहीं खाना या सुबह भूखे पेट रहना है तो हम कहते य चार घंटे
00:25:32:22 बिल्कुल नहीं खा रहा है इसलिए अय नरक में जाएगा क्योंकि गीता के अनुसार य मना किया गया है क्या य बात सही है ऐसा कहना अपने मन से कुछ भी कहीं भी कोई भी अर्थ लगा लो और चले आओ रामपाल के आश्रम में सीखा जाता है किसी के बात नहीं मानने के लिए आयुर्वेदिक पाखंडी है यह सिखाया जाता है तो भाई जो भी शत्रु हैं यह सनातन संविधान के वेदों के पुराणों के वह आ जाए आ जाए ऊपर और हो जाए दूध का दूध और पानी का पानी ठीक
00:26:18:12 है दे दो इनको भाई लिंक कोई आना चाहता हो और भी बहुत सारे व्रत है चंद्रायण व्रत पापों से मुक्त होने वाले बहुत सारे व्रत हैं से मुक्ति कराने वाले भी व्रत है देखिए अगर व्रत का मतलब वह नहीं है जो तुम जान रहे हो तो तुमने व्रतों को निषेध कैसे किया कैसे लिखा तुमने कि व्रत करना गलत है हां ऊपर आजा बता दूंगा यही भाषा सिखाई है ना रामपाल ने तुझको
00:26:56:22 आजा अब हम लोग देखते हैं इसमें एक जगह व्रतों की और व्याख्या जहां पर सनातन शास्त्र द्रोही है यह लोग जो स्वयं को सनातन अच्छा एक वो ठाकुर नाम की कोई महिला है वोह अपने उसमें कह रही है कि यह जो शिवांश नारायण द्विवेदी है यह सनातनी नहीं है वैदिक है वैदिक धर्मी है ऐसे ऐसे गंवार है लोग शिवांश नारायण द्विवेदी सनातन धर्मी नहीं है वैदिक धर्मी है अब लोग वेद अलग हो गया बाहर से हो बाहर हो गया वेद
00:28:06:20 तो भैया किसी ने भी जिसकी मां ने निष्ठा पूर्वक दुग्ध पान कराया हो और वह आकर के रामपाल की जो शिक्षाएं हैं सनातन विरुद्ध शास्त्र विरुद्ध उनको यहां पर सही शास्त्र सम्मत या सनातन सम्मत सिद्ध करने का गुर्दा रखता हो तो वो आ जाए बात करें है ना मैं आपको बता रहा था प्रायश्चित हां प्रायश्चित में व्रतों का ही दिया है 344 प्रायश्चित में व्रतों का ही दिया है कि किस चीज में कैसा प्रायश्चित
00:28:51:27 करें 333 ये क्या है प्रायश्चित वर्णन 344 ये आ गया अब इसमें सब जगह प्रायश्चित में चंद्रायण व्रत करो यह करो है ना यही सब लिखा हुआ है इससे आप ये पापों से मुक्त हो जाओगे यह देखिए यह सब प्रायश्चित में वृति व्रत लिखे हैं कितना दिखाऊ व्रत आपको थक जाएंगे आप चंद्रायण व्रत दिख रहा है हर जगह व्रत व्रत व्रत और फिर व्रत की विधि बताई गई है ना जिसको अर्थ समझ में ना आ रहा हो विधि से समझ ले यह व्रत है व्रत की विधि भी लिखाई गई
00:29:48:28 है तो भाई लिंक दे दीजिए टी आर पहाड़ी जी आए हैं आप मंच संभालिए पहाड़ी जी इनका कु इनका कुछ बचा नहीं है जो थोड़ा बहुत बचा था ना उसका मैंने वो किया है पहले तो हर हर महादेव सभी लोगों को हर हर हर महादेव नहीं जिस देवी भागवत पुराण कोय सीने से लगा के बैठते हैं कि देखो देवी भागवत पुराण में यह लिखा है वो लिखा है उसी देवी भागवत पुराण में स्कंद तीन के 26 27 अध्याय में नवरात्रि व्रतों का विधान है इसका क्या करेंगे 26 में 26 वा जो अध्याय है नवरात्र विधान कुमार कुमारी पूजा में प्रसत कन्याओं का वर्णन इसका क्या करेंगे अब ये मत हो जाएगा ऋषियों का अरे तो ये ऋषियों का है तो वो क्यों नहीं है जहां से तुम ब्रह्मा विष्णु महेश को वो नाशवान घोषित कर रहे हो एक तरफ से जाकिर नायक की अवैध वो है ये सब चीजें
00:31:01:03 एक तरफ से धगला पनी है जी अच्छा यह जो पितृ पूजा के लिए ये मना कर रहे हैं गीता से जब हम व पूरा अध्याय पढ़ेंगे नौ का अध्याय पढ़ेंगे तो समझ में आ जाएगा कि यहां पर पितृ पूजा के लिए मना नहीं किया उनकी सत्ता को मान के आपने बता दिया उसे कई बार अलग अलग तरह से कहा है जैसे मेरे को छोड़ के कोई देवता को मतलब इसमें यह नहीं है कृष्ण के अलावा शिव उपास्य नहीं है आप जब यह मान लोगे नहीं शिव ही स्वतंत्र रूप से कृष्ण अलग है शिव अलग है जब उनकी स्वतंत्र सत्ता स्वीकार कर लोगे तब दिक्कत है जैसे आमतौर पर ये वाली चीज होती है ना ब्रह्मा बड़े विष्णु बड़े तो जब आप विष्णु से भिन्न किसी की सत्ता को स्वीकार कर ले नहीं विष्णु अलग है शिव अलग है और शिव बड़े हैं तब दिक्कत है आप यह मानो कि वही कृष्ण यहां पर शिव है वही शिव य कृष्ण तो कोई दिक्कत नहीं है मुझसे भिन्न मुझसे भिन्न मुझसे अलग यदि मुझसे अलग आप किसी को देवता को पूज रहे हैं तब दिक्कत है यह तो साफ लिखा है इसी अध्याय में लिखा है जी
00:32:16:06 इसमें जब आप ये 25 वावा तो पढ़ लेते हैं 25 वा जब 26 27 28 पढ़ोगे तो उसमें यह बोल रहे कि जो भी तू कर्मकांड कर रहा है तू मेरे को अर्पण कर तू कर्म न से मुक्त हो जाएगा तो सर्वदा मुक्त र हो जाएगा उसका जो कर्म फल है उसका जो कर्म फल है यहां पर आ रही है निष्काम और सकाम भाव की बात अगर हम सकाम भाव से ये चीज करेंगे तो हम उन्हीं को प्राप्त होंगे अगर हम निष्काम भाव से ये सब परमपिता परमात्मा के लिए ही है इस भाव से हम करेंगे तो हम मुक्त हो जाएंगे जैसे कि एक बात आती है कि अर्जुन से कहा गया कि अर्जुन तेरी परिणाम में वृति नहीं होनी चाहिए आसक्ति नहीं होनी परिणाम की चिंता मत कर तू युद्ध कर मगर यदि जीतने के लिए व्यक्ति युद्ध नहीं करेगा तो फिर व्यक्ति युद्ध करेगा क्यों युद्ध करतो करने का तो यही है कि जीतना है इसलिए ही तो लड़ रहे हैं तो फिर युद्ध करेगा इसका एक अर्थ यह आता है सामने कि जीतने से मिलने वाले जो भोग है जी जी उनमें आसक्ति रख के त युद्ध मत लड़ कि मैं युद्ध जीत जाऊ तो मुझे महल भी मिल जाएगा मगर महल से मिलने वाला जो सुख
00:33:31:07 है उसकी लालसा मत रख तो फिर किसम लालसा करें कि मैं लड़ रहा हूं मैं युद्ध जीतना चाहता हूं क्योंकि ईश्वर ने कहा है मैं महल में रहना चाहता हूं क्योंकि ईश्वर ने कहा है क्योंकि शास्त्र ने कहा है जब आप इस बुद्धि से काम करेंगे तब वो आसक्ति रहित काम कहलाएगा बिल्कुल और आप ये रख लेंगे कि मैं महल में रहना चाहता हूं क्योंकि महल में मुझे ठंडी ठंडी हवा मिलेगी सोने के लिए बहुत अच्छा आरामदायक कमरा मिलेगा तो उससे भोग भोग में जब आ सक्ति हो जाएगी वहा के तो दिक्कत है और यही बात कल जो हमने वो रुचि मुनि वाला जो देखा था उसम प भी यही बात समझा रहे हैं कि जब तुम प्रवृत्ति मार्ग से होते हुए जाओगे तो प्रवृति मार्ग से मिलने वाले भोगों में अपनी वो मत रखो मगर वह कार्य करते रहो कि क्यों कर रहा हूं यह कार्य क्यों कर रहा हूं विवाह ईश्वर ने कहा है शास्त्र ने कहा है शास्त्र वेद कर्मों को करके आप मुक्ति मार्ग पर आसानी से जा सकते हो बिल्कुल भगवान श्री कृष्ण ने 24 श्लोक में कह दिया कि क्योंकि संपूर्ण यज्ञों का भोक्ता मैं हूं स्वामी भी मैं हूं परंतु व मुझे तत्व से नहीं जानते हैं इसलिए उनका पतन हो जाता है इसलिए 25 श्लोक में कहा कि जो देवताओ का
00:34:46:08 पूजन करते हैं वो देवताओं को प्राप्त होते हैं जो पि को पूजन करते हैं पित्रों को प्राप्त होते हैं तो 26 श्लोक में लिखा है कि जो भक्त कि जो भी मुझे चढ़ावा देता है पुष्प फल जल आदि जो भी देता प्रेम पूर्वक अर्पण कर लेता हूं उनको बिल्कुल हा मैं एक व्यक्ति अभी कोई पूछ रहा था व्रत का बहुत बढ़िया वो बता दूं शरीर इंद्रिय और मन पर विजय पाने के लिए तासन तासन और जिता हार होने की परम आवश्यकता है यह एक अनिवार्य नियम है अध्यात्म मार्ग का पथिक तब तक इस पथ में अग्रसर हो ही नहीं स जब तक कि वह तासन और खासकर जिता हार ना हो जाए जिता हार होने का एकमात्र उपाय विधिवत तत व्रत और उपवास करना ही शास्त्र में बतलाया गया है वैदिक वांगम में एकादशी आदि के साधारण व्रतों से लेकर चांद्रायण प्रक्ष चांद्रायण और पराग आदि नाना वि व्रतों एवं उपवास की इति कर्तव्य और अनुष्ठान से होने वाली आत्म शुद्धि का विषद वर्णन विद्यमान है व्रत और स से जहां एक जहां अनेक शारीरिक व्याधियों
00:36:01:10 समूल नष्ट हो जाती है वहां मानसिक आदियोगी महात्मा गांधी जैसे विशिष्ट व्यक्तियों ने भी स्वयं अनुभव करके व्रत पवास को आत्म शोधन का सर्वश्रेष्ठ उपाय प्रकट किया है इस शारीरिक केवा मानसिक रोग की निवृत्ति के लिए किस विधि से मिताहार दुहार जलार केवा निर्जल उपवास और किस प्रकार का कौन सा व्रत धारण व्रत मतलब कि हम यह नहीं करेंगे इस बात का हम व्रत धारण करते हैं व्रत धारण करना चाहिए यह विस्तार तो व्रत विधायक ग्रंथों में ही दृष्ट है परंतु व्र तोप वास सर्वथा और सर्वदा आचरण है एक वैज्ञानिक अनुष्ठान है इतना मात्र प्रकट कर देना यहां हमें अभीष्ट है र्थ पहले इसका शास्त्रीय स्वरूप आगे बताए फिर विषद व्याख्या है है ना सभी धर्मानुसार
00:37:05:00 मानुष का अंतिम लक्ष्य क्या है धर्म पर सभी [प्रशंसा] धर्मानुसार धर्मानुसार उन्हीं विषय वासनाओं का भोग इस प्रकार से हमें करने के लिए विधि बताता है कि हम उन भोगों में रहते हुए भी उनसे हम निवृत हो सके जैसे कि एक व्यक्ति पैदा हुआ जन्म हुआ उसका अब उसकी तो वो है व्यक्ति जो उसको जन्म से प्राप्त है वो क्या है कि किसी भी स्त्री के साथ गमन कर लेना यह उसका जो प्राकृतिक है मगर इसमें धर्म ने क्या किया विवाह एक नारी सदा ब्रह्मचारी लगाम लगा दी तो क्या हुआ भोग तो आपने किया तब भी वो मगर इस तरह से किया कि धीरे धीरे धीरे धीरे आप उस जो आसक्ति हो रही है आपके मन में उससे आप मुक्त हो पाओ इसको धर्म कहते हैं और अब क्या है मन के संयत होने पर समस्त इंद्रिया अपने आप वशीभूत हो जाएंगी यह तत्व उपनिषदों में शरीर को रथ इंद्रियों को घोड़े और मन को
00:38:20:00 घोड़ों की लगाम रूपा कल रूप का अलंकार से प्रकट करते हुए स्पष्ट किया त अनुसार 10 इंद्रियों के बाद मन को भी 11वी इंद्रिय शास्त्र ने माना है सो एकादशी तिथि को मन शक्ति को केंद्र चंद्रमा क्षितिज की एकादश कक्षा का अवस्थित होता है यदि इस अनुकूल समय में मनो निग्रह की साधना की जाए मन को निग्रह करने की साधना के मन इधर उधर भागे ना तो ऐसा नहीं है कि व्रत धारण करने वाले दिन आप केवल निराहार रहते हो उस दिन आप झूठ वचन ना बोलने के लिए भी अपने आप को सीमित करते हो उस दिन आप स्त्री संग ना करने के लिए भी जितनी भी इंद्रिया सक्ति हो सकती है जिसके विषय हो सकते हैं उन सबसे आपको आप अपने आप को दूर रखने का उपाय करते हो प्रयास करते हो उसको कहते हैं व्रत तो साधना की जाए तो वह सद फल पति होती है इसी वैज्ञानिक आशय से एकादश सेंद्रिय भूत मन को एकादशी तिथि के दिन व्रत उपवास धर्मानुसार
00:39:27:27 तो अब कोई आना चाहता है चक्कर में पड़ना चाहता है तो वह बताए अमित दास जी गायब हो गए अभी तो थे अमित दास जी को बुलाइए अब देखो चेहरा हो तो आइए अमित दास जी अमित दास जी जब एक कंटिन्यू जब बात चल रही होती है सिर बीच का एक सिलेक्ट श्लोक लेना यह सबसे बड़ा दोगलापन है पूरी बात को सुनिए पहले वहां पर किस चीज के बारे में बात हो रही है आगे पीछे के श्लोक पढ़िए खाली ये ना खाना ज्यादा खाना ज्यादा सोना कम सोने वाली बात नहीं कहे गई उस ध्यान योग के बारे में बहुत सी चीजें कही गई है कि शुद्ध भूमि पर कुछ मृग छाला और वस्त्र बिछे हैं ना अत्यंत ऊंचा है ना अत्यंत नीचा होना चाहिए अपने आसन को स्थिर स्थापन करके [संगीत] जय श्री राम जय श्री राम कैसे हैं आप बढ़िया बढ़िया वीडियो चल रहे हैं हमारे बिल्कुल चट बन रहा है हमारा
00:40:43:16 बिल्कुल बिल्कुल अ पहले तो मैं आपको इस बात के लिए धन्यवाद कहना चाहूंगा कि आपकी वजह से मुझे भगवत गीता पढ़ने में रुचि बड़ी और दूसरा धन्यवाद मैं टी आर पड़िया जी से कहूंगा कि उन्होंने अच्छे से समझाया मुझे लेकिन भगवत गीता में कई चीजें ऐसी रह जाती हैं जिनकी वजह से कंफ्यूजन पैदा होते हैं बताइए आप अपनी कंफ्यूजन बताइए मैं प्रयास करूंगा दूर करने शिवांश भाई आप बात करिए मैं जरा पाच मिनट में फ्री होता हूं ठीक है
00:41:24:08 जी मेरी और टी आर पाया जी की एक डिबेट हुई थी शायद उनमें आपने देखा हो नहीं मैंने देखा नहीं सुना है पर मैं देख नहीं पाया तो मैंने उनसे बात की तो कई मैंने उन्हें प्रमाण दिखाए जहां पर कृष्ण भगवान उस परमेश्वर की शरण में जाने के लिए और वही परमात्मा है और मतलब कई जगह उस और वह का प्रयोग किया गया है ठीक है ठीक है तो मैं आपसे यह पूछना चाहता हूं क्या परमात्मा की निगाह में उस वह और ऐसे शब्द अपने लिए प्रयोग होते हैं या किसी दूसरे के लिए प्रयोग होते हैं ठीक है ऑपरेटर महोदय इनको वह प्रमाण दिखाइए उस वाला अमित दास जी को आज ही हम लोगों ने अभी अभी शेयर किया ना लास्ट ट में शायद लास्ट में दो प्रमाण है लास्ट उनमें से वो उस वाला प्रमाण
00:42:33:21 दिखाइए जिनदा फकीर के रूप में कबीर जी ने उसी ब नदी के किनारे पहुंचकर श्री नानक जी को राम राम कहा उस समय श्री नानक जी ने कपड़े उतारकर स्नान कर लिए तैयार थे जिंदा महात्मा केवल आगे दिखाइए श्री नानक जी को दिखाई दे रहे थे अन्य को नहीं श्री नानक जी से वार्ता करने लगे कबीर जी ने कहा कि आप मेरी बात पर विश्वास करो एक पूर्ण परमात्मा है तथा उसका सतलोक उसका किसका किसका अमित दास जी किसका उसका सतलोक उसका उसका सतलोक स्थान है जहां की भक्ति करने से जीव सदा के लिए जन्म मरण से छूट सकता है और नीचे दिखा दीजिए उस स्थान नीचे दिखा दीजिए तीसरा तीसरी लाइन उस स्थान तथा उस परमात्मा किसकी किसकी उस परमा परमात्मा की प्राप्ति की साधना का केवल मुझे ही पता है तो यहां पर रामपाल जी के हिसाब से वह परमात्मा अलग हो गया उस शब्द के उपयोग के कारण नहीं क्योंकि वहां पे बात आप कबीर जी नहीं बात कर रहे हैं ना कौन कर रहा है कबीर जी बात कर रहे
00:43:49:19 हैं अच्छा कबीर जी बात कर रहे हैं ऐसा है मैं आपको बताऊं ठीक है अब मैं आपको बता दूं बात क्या देखिए कुछ समय के उपरांत जिंदा फकीर के रूप में कबीर जी ने उसी बन दी कबीर जी ने ठीक है ठीक है भैया कबीर जी ही बात कर रहे हैं नानक जी ऐसा होता है जब व्यक्ति कुछ जानता नहीं है ठीक है कि भैया मुझे उस परमात्मा के बारे में बताइए तो मैं तुझे बताना मैं जानता हूं मैं ही परमात्मा हूं मगर मैं तुझे बताना अभी वो अभी वो परमात्मा को मुझ में नहीं देख रहा है मुझसे अलग समझ रहा है तो मैं ऐसे बताना चालू करता हूं कि वो परमात्मा ऐसा है वह परमात्मा ऐसा है उस परमात्मा के बारे में ऐसे ऐसे करता है वो सर्वशक्तिमान है वो सब कुछ है वो फिर फिर यह भी बताता है कि वो मैं ही हूं वो जिस परमात्मा के बारे में मैंने पूरी व्याख्या की है वो मैं ही हूं तो वो तो अध्याय 18 में बता चुके हैं ना मैं काल हूं सर्वव्यापी हूं मैं देखो तुमने बात का घुमाना शुरू किया विषय ये चल रहा है क्या उस शब्द के कह देने से परमात्मा कोई और हो जाएगा या नहीं हो जाएगा पहले इसको क्लियर करो हो जाएगा या नहीं हो जाएगा देखो
00:45:05:01 सराम मेरी बात सुनो सकारात्मक तरीके से बात करने का कोशिश करोगे अमित दास तो कोई ना कोई निष्कर्ष पर पहुंच पाओगे इसका मतलब यह है हमने आपकी गीता से ही यह दिखाया कि उस शब्द का इस्तेमाल होने पर यह सिद्ध नहीं होगा कि वह जो व्यक्ति बोल रहा है परमात्मा उससे कोई अलग है क्योंकि आपके अनुसार जो परमात्मा है वो भी परमात्मा के लिए कहीं कहीं मुझ शब्द का इस्तेमाल ना करके उस और इस इस इस शब्द का इस्तेमाल तो उन्होंने इतना किया कि पूछो नहीं अगर बात व्याकरण पर ही आ जाएगी तो मैं अपनी बात जब भी करूंगा तो मैं मैं कहूंगा अपने लिए मेरी मैं जैसे जब रामपाल जी ने यह कहा मंच पर कि वो परमात्मा मैं ही हूं वहां पर उन्होंने ये नहीं कहा वो परमात्मा मैं ही हूं वो परमात्मा मेरे रूप में आपके सामने है उन्होंने ये नहीं कहा उन्होंने कहा वो परमात्मा इस दास के रूप में आपके सामने है तो जब इस शब्द का इस्तेमाल होता है वो भी थर्ड पर्सन के लिए होता है मगर ये उनकी शैली है अपने लिए बात करने के लिए इस दास इस दास दिन भर यही करते हैं उन्होंने ये नहीं कहा कि मुझ दास के रूप में वो वहा विद्यमान है तो इसका अर्थ क्या होता है कि अगर भगवान ने उस शब्द का उपयोग कर लिया तो इससे सिद्ध नहीं होगा कि परमात्मा कोई और है हमने
00:46:20:06 आप ही से दिखा दया आपको नहीं तो यह मान लो कि कबीर जी ने यहां पर किसी और परमात्मा की बात की है व अपने लिए बात नहीं नहीं की कोई और है परमात्मा कबीर से भी ऊपर अच्छा जी तो मतलब इसमें 18 के 62 में और 66 में यहां अंतर क्यों है जैसे कि 66 में के 62 में 18 के 62 में आप शब्द पढ़ो क्या लिखा है संस्कृत शब्द पढ़ा है आपने 18 62 का 18 शब्द पढ़ा है नहीं नहीं मैंने नहीं पढ़ा 18 62 का संस्कृत शब्द पढ़ो क्या लिखा है मैं बताता हूं क्या लिखा है बताइए
00:47:12:26 बताइए अमित दास जी आपके चैनल पर आके आपको मैं इतनी अच्छी से एक्सप्लेन कर गया 62 और 66 देखिए में 182 में क्या लिखा है हे सब प्रकार से उस वो परमेश्वर नहीं लिखा है क्या लिखा है परम शांति परम शांति तो अर्जुन को अगर परम शांति मुझे व परम शांति कैसे मिलेगी तुझे व परम शांति कैसे मिलेगी मेरी शरण में आके यहां पर परमेश्वर की बात नहीं हुई है श्लोक में यहां श्लोक में परम शांति स्थान की बात हुई है यहां श्लोक में परम शांति स्थान यानी मोक्ष का स्थान उसकी बात हुई है परमेश्वर की बात नहीं हुई है परम गति परम स्थिति तो वो तुझे परम स्थिति कैसे मिलेगी 18 मेरी शरण में आके देवेंद्र जी जय श्री
00:48:17:25 राम अरे क्या हुआ कहां चले गए आपकी आवाज नहीं आ रही देवेंद्र जी राम राम जी अब आ रही है आवाज जी आ रही है हां मैं यह जो 18 का जो 62 वा श्लोक है इस पर थोड़ी सी मैं अपने पॉइंट रखना चाहता हूं जी जी बोलिए बोलिए यह अमित दास जी सीधे आउट आउट क्यों हो गए भाई यह कंटेंट लेने आए थे क्या फिर
00:48:52:18 से अमिन दास जी आ जाए तब मैं एक्सप्लेन करूंगा तब थोड़ा सा और ज्यादा अच्छा र सम आ जाएगा आप कर दीजिए अमित दास जी आएंगे नहीं वो उनका हो गया वो जितना लेने आए थे वो आके लेक चले गए अब वो मेरी ऐसा है इस समय जो मेरा जो नाम है मैं मतलब बढ़ई नहीं बड़ती नहीं मार रहा हूं मेरे नाम का उपयोग करके इनके ठंडे पड़े हुए चैनल चल रहे हैं सबके चल रहे हैं सब लोग शिवा द्वेदी एक्सपो बना रहे हैं और कम से कम एक पहला वीडियो तो सभी का चल जाता है एक व व्यक्ति ने थंबनेल में ऐसे फोटो डाली है मुझे सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म दे दो मैं तुम्हारा हो
00:49:36:19 जाऊंगा तो इसीलिए वो आए थे चले गए बिना बताए हां जी मेन चीज ये लोग सेंस नहीं समझते कि उसका अर्थ क्या निकल रहा है जैसे यहां पर भगवान श्री कृष्ण ने बताया कि परम शांति परम धाम इन दोनों की चीज की जो प्राप्ति हो जाए उसी ईश्वर के बारे में कहा गया है इसमें तो अब ये पहले वाले श्लोक तो पढ़ते नहीं एक श्लोक जो रामपाल ने बता दिया वही इन्होंने देख लिया अब 18 का जो 5वा श्लोक है उसमें भगवान ने साफ साफ शब्दों में कहा है कि मेरे परायण हुआ कर्म योगी संपूर्ण कर्मों को सदा करता हुआ भी मेरी कृपा से सनातन अविनाशी परम पद को प्राप्त होता है तो जो परम शांति है परम धाम है वो अपनी कृपा से कह रहे व में श्री कृष्ण भगवान तो इसको ये समझना चाहिए मतलब पहले लोक पढ़े नहीं इन्होंने अगर ये 56 वा श्लोक पढ़ लेते तो 62 वाला ऑटोमेटिक क्लियर हो जाता कि परम शांति कहां से आ रही है व भगवान कृष्ण की शरण से आ रही है तो इन्ह ये समझना चाहिए ऐसे ही गीता जी में अनेकों श्लोक है मैं आपको बहुत है बहुत है भाई मैं तो इनसे यह कह रहा हूं पूरे सतलोक आश्रम वाले पूरे सतलोक आश्रम वाले सबसे पहले मुझे
00:50:51:20 वो 35 श्लोक बता दो जिनको मानना नहीं है हां जी हां पहले वो 3 श्लोक बता दो इनको नहीं मानना फिर मैं तुम्ह श्लोक निकाल के दूंगा कि हा इनको मान इनको मानने का 665 लोक में से मैं दे दूंगा आपको कि भगवान श्री कृष्ण भगवान सिद्ध हो रहे हैं क्योंकि भगवान श्र क इनको थोड़ा सा ना मना कर रखा है कि खुद से अध्ययन नहीं करना और जो हमने जो श्लोकों का वर्णन कर रखा बस उन्हीं का अध्ययन करना है तो अधूरा ज्ञान है अधूरा जन इन्होंने अपनी अपनी किताबों में कहीं लिखा है कि तुम जो ये मेरी जो किताबें पढ़ोगे ना तो तुमको इतना इतना मिलेगा और मेरी किताब में नहीं पढ़ोगे तो ऐसा होगा वैसा होगा हां जी हा जी हां जी अब जैसे ही एक श्लोक है गीता जी के अध्याय आठ का ये 21 वा श्लोक है इसमें भी भगवान अपने लिए कह रहे हैं कि अव्यक्त अक्षर इस नाम से कहा गया है उसी अव्यक्त अक्षर नाम अव्यक्त भाव को परम गति कहते हैं जिस सनातन अव्यक्त भाव के प्राप्त होकर जन्म मरण से मुक्त हो जाते हैं वही मेरा परम धाम है
00:52:07:07 यही उस 62 वाले श्लोक में बताया कि जो परम शांति परम धाम की प्राप्ति होती है वही भगवान श्री कृष्ण अपने लिए हर जगह बोल रहे हैं तो इन्ह अगर कहीं पसे कंफ्यूजन हो रहा है तो भगवान के अनेको स्वरूप है अब अपने इस समय भगवान कृष्ण स्वरूप में आए उनका एक अवतार है लेकिन वो वहा पर जो उस शब्द का जो इस्तेमाल हु व उनके परब्रह्म जो ब्रह्म स्वरूप है उसके बारे में कहा गया है तो इनको य समझना चा सब अरे भाई फैक्ट भाई अरुण इनको जरा वो दिखा दो यह कौन सा ईश्वर है कबीर से अलग दोबारा दिखाओ इनको प्रमाण जरा फैक्ट बाई अरुण को इनको इनको देखिए मैं एक बात समझ में आई है मुझे डिफेंड करने से कुछ नहीं होगा अटैक करने से ही होगा कुछ हम अपने शास्त्रों की समरी इनको बताते जाएंगे इनके कुछ बल्ले नहीं पड़ इनका मुह इनके मुह पर टेप तब लगेगा जब इनके शस्त्रों से ही खोल के दिखाओ कि अब ये वाला मना कर य तर्शी ने गलत कह दिया हा जी ने गलत कह दिया इसको मना करो वहा तो तुम कह देते हो मषि की वाणी अपनी सोच काल ने कह दिया होगा मानना नहीं है कुछ भी है इसको कैसे छोड़ोगे तो भैया तत्वदर्शी की किताब दिखाइए इनको अभी जो खोली थी यह देखिए बा अरु
00:53:23:00 हां भाई यह कबीर कह रहे कि मैं तुम्हे सतलोक में रहने वाले परमात्मा के बारे में उस परमात्मा के बारे में बताऊंगा नीचे लाइए हा ये कबीर जी कह रहे हैं एक मेरी बात पर विश्वास करो एक पूर्ण परमात्मा है तथा उसका सतलोक स्थान है यह किसका सतलोक स्थान है कबीर तो स्वयं वहां खड़े हैं बताओ भाई फैक्ट बाई अरुण माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पान तो कराया ही होगा तो बताइए ये कहां कौन से सतलोक आश्रम में कौन सा परमात्मा है उस उस उस उस पर खेलोगे ना खेल उस परही हम भी
00:54:11:21 खेलेंगे तो [संगीत] भाई कौन है जो भी आए वो अपना चेहरा लेकर के आए श्रीमद भगवत गीता का जो ऋग्वेद के रूप में दूसरे शब्दों में गागर में सागर है चारों वेदों में 18 हज ये है वो है इसमें क्या पढ़ना है भाई उनको गीता में 574 श्लोकों में लिखा है अच्छा 574 श्लोक काल ब्रह्म ने श्री कृष्ण के मुख से कहे हैं शेष श्लोक संजय तथा अर्जुन के कहे गए हैं जो ज्ञान से संबंधित नहीं है अब काल ने कहे 576 74 श्लोक जबकि इन्होंने कहा कि गीता का 5 पर ज्ञान जो है वह गलत है व देखना पड़ेगा इनको समरा दिखाना पड़ेगा अब भाई ऊपर आ जाइए कोई है क्या
00:55:27:07 [संगीत] एक भाई साहब है जो यह बोल बता रहे हैं कि एक मिनट सतलोक आश्रम में कोई गया था उन्होंने कहा कि हु इज गॉड व्ट इस मंत्र ऑफ मोक्ष एंड हु इ प्योर संत टुडे इन तीन बातों पर ही बात होगी केवल हां तो हम भी तो इन्हीं तीन बातों पर बात करते हैं इसी को तो कहते हैं सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म शाश्वत धर्म का मतलब प्रमाणिक आचार्य के द्वारा प्रतिपादित होने वाला धर्म परम स्वतंत्र मोक्ष कैसे मिलेगा क्या है और सर्व शक्तिमान ईश्वर जो पूर्ण हो सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म है ना कुछ लोग कहते हैं कि बोनस नाड़ी में के बंधनों में नहीं आता भाई नहीं आता लीला पूर्वक आपको दिखाई देता है हमको दिखाई देता है नहीं आता उसका जो अगर इधर की ओर से देखे भी तो उसका जो शरीर होता है दिव्य होता है पाप से विद्ध नहीं होता कुछ लोग
00:56:42:26 निराकार अवतार ना लेने वाला घोषित करने का प्रयास करते हैं मूर्ख तो वो भी बाद करते हैं वो भी वेदों का विरोधी करते हैं अरे भाई जब तुम्हें वेदों का वो मंत्र दिख रहा है जहां पर वो क्या कहते शरीर धारण ना करने वाला है तो वह मंत्र क्यों नहीं देखते हो जहा वो अपने माया का आलंबन लेकर के अनेक अनेक रूप धारण करने वाला बन रहा है वो क्यों नहीं देखते हो उसको छोड़ दोगे और फिर मनुस्मृति का दूसरे अध्याय का चवा श्लोक क्यों नहीं देखते हो जहां पर लिखा हुआ है कि जब सुतिया परस्पर विरोध होने लगे तो दोनों सुतिया मानने मान
00:57:22:10 लो अरे ये देखिए राम राम जी आप बारबार मैसेज म करिए वो सब बातें हो चुकी है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है ईश्वर वही है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है तो भैया इनको दे दो मेरे ख्याल से अब तो कोई चीज रह नहीं गई है रामपाल की ऐसी जो इसका हमने निराकरण प्रस्तुत ना किया हो श्राद्ध है व्रत है हर चीज हमने बताई और इनके ही इनका य जो उस का खेल है इसका भी निस्तारण हो गया आज अच्छा मैं एक बात कह रहा था यह लोग कहां कौन से अध्याय में कहते हैं कि ऐसा मेरा मत है कहते हैं ना कहीं पर ऐसा मेरा मत है ऐसा मेरा मत है जिसके कारण सिद्ध होता है छ अध्याय का है शायद 36 श्लोक है अध्याय का 36 शलोक है 3 ऐसा मेरा मत है
00:58:36:19 यह कहीं कहीं पर यह कह देते यह मेरा मत है तो छव अध्याय के 36 में श्लोक में भगवान ने कहा यह मेरा मत है ठीक है तो इन्होंने यह कैसे पता किया कि इससे पहले के कितने श्लोक है जहां से इनका ये मत शुरू हुआ था [संगीत] हा जी जो छवा अध्याय है वो योग और सन्यासियों के लिए बताया गया है और वहा पर जो बात हो रही थी व योग की बात हो रही थी और उन्होने इसे जबरदस्ती व्रत बना दिया और व्रत को जबरदस्ती कोयोग बना दिया हयो और फिर कल खुद हयो का साथ दे रहे महा रुचि मुनि रुचि मुनियो कर रहे इनके हिब वाला हयो रुचि मुनि कर रहे प कह रहेर आ और ये फिर उसको समझा रहे तत्वदर्शी देखो देखो मोक्ष के मार्ग पर चल रहा है अपनी बातों का खुद ही कूड़ा कर लेते हैं इसीलिए कहते है र् दर्शी है तत्वदर्शी नहीं हैय ते हां जी हां
00:59:41:02 जी और ये जैसे त को बोलते श विद्ध श विरुद्ध हो कैसे सकता है व्रत का परिभाषा ब्रह्मा जी ने गरुण पुराण में जो दी है वो ये दी है कि जो शास्त्र के अनुसार नियम और पालन है वही व्रत है हा अब ये ब्रह्मा जी से ज्यादा तो ज्ञानी है नहीं नहीं नहीं ये ज्ञानी है य लिखते हैं ब्रह्मा ब्रह्मा विष्णु म ज्ञानी ऐसा लिखते हैं य धूर्त ये धूर्त नीच अपनी किताबों में ये भी दिखाते हैं लोगों को कि ब्रह्मा विष्णु म अ ज्ञानी है इनके लिए तो ऋषि मुनि है वेदव्यास जी है यह भी अज्ञानी है जबकि यह समझते नहीं कि कहां वेदव्यास और कहां ये देखिए इनकी पकड़ देखिए य 36 में श्लोक में कहते हैं कि काल का अपना मत है वो नहीं मानना है ठीक है गता की का पेज नंबर 70 निकालिए जरा गर्मा गीता की पेज नंबर 70 स्न के हिसाब
01:00:45:21 से और इसका पैराग्राफ नंबर तीसरे से चौथा आय ये य बस बस हां तीन के श्लोक 30 में कहा है कि अर्जुन अब
✅ This part is already used · 01:01:02:27 – 01:01:21:06 (0:18)
→ Used in: A · Live गीता के नाम पर रामपाल के बोलबचन अध्याय 3 Ep- 5(b) #satlokashram at 11:40 ↗
→ Used in: A · Live रामपाल की सेना साथ सीधी बात #तत्त्वदर्शीसंत #rampaljimaharaj at 21:26 ↗
→ Used in: B · Video रामपाल का मनमौजी गीता अर्थ #6 अध्याय 3 का #श्लोक #gita #gitagyan at 16:12 ↗
→ Used in: A · Live गीता के नाम पर रामपाल के बोलबचन अध्याय 4 Ep- 6 #satlokashram at 16:10 ↗
01:01:02:27 ज्ञान योग द्वारा मेरे पर आश्रित होकर अर्थात सर्व धार्मिक कर्मों को मुझ में त्याग कर निक्षा ममता रहित युद्ध में होने वाले संभावित दुख को त्याग कर युद्ध कर गीता अध्याय तीन के श्लोक 31 32 का सार है जो ऊपर लिखे मेरे मत का अनुसरण करते व बुरे कर्मों से बच जाते हैं जो ऐसा
⬜ Not used yet · 01:01:21:06 – 01:31:08:00 (29:47)
01:01:21:06 नहीं करते मूर्ख अज्ञानी है वह सर्व शास्त्र विरुद्ध ज्ञान पर आसक्त है जो हानिकारक है उनका पतन निश्चय है ऊपर लिखे मत से तात्पर्य है कि देवी देवताओं की यहां पर इन्होंने मत मान लिया अगर यह गीता को बोलने वाले काल है कोई श्री कृष्ण नहीं है और काल का अपना मत नहीं मानना है तो यहां पर इन्होंने काल के मत को मान लिया है यज्ञ व प्रणवा करर नाम जब नाम का जाप भी निष्काम भाव से नीचे करिए और करत था पूरा गुरु बनाकर शास्त्र अनुकूल करना चाहिए इन्होंने नहीं कहा य ये यहां पर य इसका मत हैय मानना नहीं है अतु स्वयं की शास्त्र विधि अनुसार साधना को खोकर स्वीकार करके आत्म कल्याण करना चाहिए तो यहां पर इन्होंने उसका मत मान लिया है काल का और दूसरी बात यह भी है कि अभी हम जो बात बता रहे थे ना कि शास्त्र विधि मरणा सोच की अगर आप बात कर रहे हैं अगर शास्त्र विधि त्याग कर आप वहां पर भोजन करेंगे तो हां आपका कुत्ते का जन्म होगा शास्त्र त्याग कर यहां आपने कहा ना शास्त्र विधि को अपना कर ही जो करोगे वही आपके काम आएगा ठीक है राधे राधे राधे राधे
01:02:37:15 भैया कौन आया है पहाड़ी जी है जो भी आए भैया फेस दिखाए तो उन्हें स्ट्रीम में जोड़ा जाएगा अब कुछ बचा नहीं है वैसे रामपाल वालों के पास एक वो श्राद्ध था व्रत था वो भी छीन लिया मुक्ति के दो साधन बचे थे वो भी छीन लिए हां कुछ वीडियो बनाते हैं ना आप प्रमाण दिखाते हैं वो लोग वीडियो बनाते कि ना यहां पर यह लिखा है वहां पर यह लिखा है हमने एक दिन प्रमाण दिखाया था कि देवी जी कह रही मैं ही ब्रह्मा हूं मैं ही विष्णु मैं ही शिव हूं तो वहां पर एक व्यक्ति यह वीडियो बना रहे हैं कि ना वहां पर यह कह रहे हैं कि यह सब चीज मैंने बनाया तो तभी ऐसा बोलली कि मैं यही हूं पर य अ अलग है तो इनका अर्थ फिर क्यों माना जाए वही तो बात है फिर फिर वो आ जाएगा प्रमाणिक गुरु कौन परंपरा प्राप्त आचार्य इसीलिए तो परंपरा चाहिए
01:03:41:15 भाई अच्छा की बा बोलो आपके सभी धर्मों के इंसानियत पर बात पूछनी थी वर्ण व्यवस्था छुआछूत पर अगली बार जुड़ने का लिंक में कमेंट में रखना देव जाट जी आप जो है हमारा नंबर नोट कर लीजिए 4369 इस पर आप ट करिए आप फर्म को भर दीजिए हम आपके साथ सुनियोजित ढंग से चर्चा कर लेंगे अजीत सिंह जी अपना फेस दिखाए चले गए अजीत सिंह जी चले गए तो ऐसा
01:04:14:26 है इस समय हमारे ऊपर अलग अलग तरह से बहुत सारे प्रहार होते हैं दिन भर मेरे जो चैनल है उसको मेंशन कर देता है कोई ना कोई डेली कोई ना कोई मेंशन जरूर करता है कभी आर समाज से कर देते हैं मेंशन इस समय शायद आर समाज में व चल भी रही होगी वो जो हमने कहा था ना कि भाई जो भी विद्वान आएगा वार्ता करने के लिए चर्चा करने के लिए जो विद्वान आएगा वह कच्छे में होना चाहिए और वह नृत्य करेगा पहले और फिर नाक रगड़े उसके बाद उसके साथ वो होगी चर्चा क्यों क्योंकि वह पता है क्या कह रहे वो यह कह रहे हैं कि आप हमसे चर्चा तो करो मगर कैमरा केवल हमारा चलेगा हमने कहा ठीक है आपकी य शर्त मान हमारी य वाली शर्त मान
01:05:00:01 लो अच्छा य एक ये जो आचरण की बात करते हैं आचरण का अर्थ होता है अपना बिहेव यहां पर जिन आचरण की बात हो रही है श्लोक संख्या 16 के 2 में वो तीन आचरण की बात हो रही है काम क्रोध और लोभ की बात अरु आपने विषय क्यों बदला पहले तो यह बताओ अभी आप उस पर बात कर रहे थे ना अब उससे डर लगा भूत है क्या तत्वदर्शी में उस तत्वदर्शी में भूत है क्या जो डर लग रहा है आपने उसको छोड़ क्यों दिया ये लोग ऐसे छोड़ते हैं अपनी कही हुई बात को
01:05:42:22 दोगले और अब सुनो तुम्हारे सवाल का उत्तर हां हम वेद को मानते हैं मगर पूरा पूरा मानते हैं अधूरा नहीं कि तुमने जो हमें मंत्र बता दिया बस उतने को मान कर के बैठ जा त तत्व जपने लगे समझ में आ रहा है जी बोलिए पड़ी जी हा तो यहां पर आचरण की मैं थोड़ा इनका क्लियर कर दूं जब 20वें श्लोक से आप पढ़ना शुरू करोगे हे कुंती नंदन मण मनुष्य मुझे प्राथना करके ही जन्म जन्मांतर में आसुरी योनि को प्राप्त होते है यहां पर भी देखो भगवान श्री कृष्ण क्या बोलने जो मुझको प्राप्त नहीं होते हैं वो जन्म जन्मांतर में आसुरी योनि को प्राप्त होते हैं और भी अधिक अधम गति को अर्थात भयंकर नरक में चले जाते हैं 20 में 21 में क्या बोला काम क्रोध और लोभ यह तीन प्रकार के नरक के दरवाजे जीव आत्मा का पतन करने वाले हैं इसलिए इन तीनों को तीनों का त्याग कर देना चाहिए 2 में बोला फिर 22 में बोला हे कुंती नंदन इन नरक के तीनों दरवाजे दरवाजों से रहित हुआ मनुष्य अपने कल्याण का आचरण अपने कल्याण का आचरण करता है उस उससे परम गति को प्राप्त हो जाता है अब आचरण की
01:06:57:22 बात आई 22वें में या फिर 23 में बोला कि जो शास्त्र विधि को छोड़कर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण करता है वह ना सिद्धि को प्राप्त होता है ना सुख को प्राप्त होता है ना परम गति को प्राप्त होता है यहां पर कहने का अर्थ है जब हम कोई शुभ कार्य कर रहे हो या कोई ऐसा कार्य कर रहे हो मन में कोई भाव रख के मन में क्रोध है लोभ है मोह है माया है अगर यह करके हम यह कार्य करेंगे क्योंकि शास्त्रों में इसको वर्जित बताया गया है कि जब तुम कुछ ऐसा कार्य करो किसी को तुम दान दे रहे हो पर मन में तुम्हारे क्रोध है तो यह नरक का दरवाजा खोलेगा हमारे लिए कहने का अर्थ यह है तो 24 में फिर बोला कि अंतः तेरे लिए कर्तव्य और
01:07:54:13 अकर्वेंट री काम क्रोध और लोभ इन तीन आचरण को त्याग के हमें कर्तव्य कर्म करना चाहिए बिल्कुल मैं इनको इनके एक इनके डगले पन की पराकाष्ठा दिखाऊं आपको देखिए गरमा गीता की का पेज खोलिए कंप्यूटर स्क्रीन के अनुसार 19 लेपन की पराकाष्ठा वो जेल धाम निवासी की परा या उनके नाम से छापने वालों की पराकाष्ठा है मगर लेपन की पराकाष्ठा है 19 पेज नंबर पैराग्राफ नंबर तीसरे से
01:08:49:01 चौथा चेहरा दिखाओ धुलाई करने वाले तत्वदर्शी चेहरा दिखाइए हां यह क्या है और थोड़ा नीचे चलिए तत्व ज्ञान के अव से मूर्ख पाण ये और और नीचे चलिए पेज वही है ये हा पेज वही है ये पेज वो नहीं लग रहा मुझे पेज चेक करिए जरा 199 होना चाहिए पीडीएफ के अनुसार 179 हां चलिए नीचे
01:09:35:28 चलिए तत्व ज्ञान क्या हा ये ये ये ये बस बस बस बस बस हा देखिए गीता ज्ञान गीता अध्याय न श्लोक 11 का अनुवाद इस पर जरा अंडरलाइन कर दीजिए हां ये अंडरलाइन करिए ये देखिए तत्वदर्शी का ज्ञान देखिए तत्वदर्शी को कितना ज्ञान है देखिए ऊपर वाली लाइन अंडरलाइन करिए ऊपर वाली जो सेकंड लाइन है ना ऊपर से सेकंड मनुष्य से ना मनुष्य शरीर ऊपर से सेकंड ना ना लाइए मत स्क्रीन मनुष्य शरीर से जस्ट अगली लाइन गीता अध्याय न श्लोक 11 और ऊपर मनुष्य शरीर के बाद अगली लाइन हा गीता अध्याय न श्लोक 11 का अनुवाद मूर्ख जन मुझ को मनुष्य का शरीर धारण करना वाला तु जानते हैं क्या है मूर्ख जन मुझे तु जानते हैं अब भावार्थ में दिखाइए क्या है भावार्थ में दिखा दीजिए क्या है यह है तत्वदर्शी के ज्ञान की पराकाष्ठा तत्व ज्ञान के अभाव में मूर्ख प्राणी मुझे सब प्राणियों का ईश्वर मानते हैं प्रभु मानते हैं अरे भाई तू त तो कर ले के मूर्ख ईश्वर कहता है या तुच्छ कहता है
01:10:51:01 तू त तो कर ले पहले फिर तो तू किताब छाप तू किताब पहले छाप रहा है तुझको ही नहीं मालूम है अरे पहले त तो कर ले कि मूर्ख वो जो गीता कह रहा है उसको प्रभु कहते हैं या तुच्छ कहते हैं तु और प्रभु में तो विलोम हो गया बिल्कुल ये है तत्वदर्शी तथा कथित देख लीजिए तत्वदर्शी का ज्ञान अर्थ होगा अनर्थ ऐसे कर रखा है ये जो तत्वदर्शी आए हैं यहां पर ये अपना चेहरा नहीं दिखा पा रहे हैं शायद इनका मुंह काला हो गया है कहीं पर इनकी ऐसी धुलाई हुई होगी जिसके कारण धुला धुलने से हालांकि कालिक मिटटी है मगर इनका चेहरा काला पड़ गया जो चेहरा नहीं दिखा पा रहे तो इनको हटा दीजिए रमेश करके कोई आए हैं रमेश प्रजापति जी आपका स्वागत है बताइए क्या कहना चाहते हैं ठीक है हटा ली हो गया स्क्रीन ये जो शेयर कर रहे हैं इनको हटाइए जो तहस नहस कर रहे हैं अपनी जिंदगी को बोलिए रमेश प्रजापति चेहरा दिखाइए
01:12:13:04 अपना भाई भाई तत्वदर्शी है ये जो कह रहे हैं कि मूर्ख लोग गीता कहने वाले को तुच्छ समझते हैं मूर्ख लोग गीता कहने वाले को भगवान समझते हैं यह है तत्वदर्शी अरे भाई खुद पहले तय कर ले मूर्ख लोग करते क्या है फिर एक बात बता दे अर्थों का अनर्थ कर रखा है और बोलते हैं कि इसमें ज्ञानी ज्ञान है ज्ञान गंगा राहुल कुमार माता जी ने निष्ठा पूर्वक दुध पान कराया है तो आप ऊपर आए बात करें सामने आकर के है
01:12:52:16 ना टू स्टॉप द ट्रेन पुल द जाती है ना पर आने के नाम पर बाजार जिसने खोला था उसके अनुयाई अभी भी उसका प्रचार कर रहे हैं क्योंकि मार्केट में जब नया प्रोडक्ट आता है तो उसका खूब प्रचार होता है वही हो रहा है ना हमको कहने की आवश्यकता यह कहते हैं कि जो काल है उसको डेली खाना खाना है काल को है ना डेली खाना खाना है मगर काल तो कह रहा है इनकी भगवत गीता के चौथे अध्याय के 14 श्लोक में कि मेरे लिए कुछ भी प्राप्त करने को शेष नहीं है काल तो यह कह रहा है मुझे कुछ भी प्राप्त नहीं करना 32 में कह रहा है मैं मेरी किसी फल में आ सक्ति नहीं है और मुझे कुछ भी प्राप्त करना शेष नहीं मैं तो यूं ही करता हूं मेरे लिए कुछ भी आवश्यक नहीं है तो कह रहा है फिर तुम कह रहे हो काल को तो खाना खाना है डेली य कौन सा काल है भाई आज अमित दास जी का आपने छल देख लिया आज बड़े शरीफ बन के आए थे
01:14:08:06 आज मैंने तो देखा नहीं मैं तो कहीं थोड़ा काम था काम में चला गया था क्या बोल रहे थे मैंने सुना नहीं वो बात जहां पर कुछ हुई बिना बोले चले गए क्योंकि शायद उनको यहां कुछ मानना पड़ने वाला था मानना मानने वाले थे चले गए बिना कुछ अब वो अपना कुछ कंटेंट बनाएंगे कुछ ये देखो ये ऐसे इस पर कह रहे थे चलिए ठीक है फिर आज के लिए इतना काफी है आवश्यक नहीं हर स्ट्रीम दो दो घंटे ढाई ढाई घंटे तीन तीन घंटे चलाया अब कुछ है ही नहीं इन कुछ मिलेगा तो बताएंगे आ जाना भाई जिसकी माता जी ने निष्ठा पूर्वक दुध पान कराया हो वो आए और यहां पर जो है ब्रह्मा विष्णु महेश को भगवान ना मानते हुए ईश्वर ना मानते हुए श्री कृष्ण को ईश्वर ना मानते हुए सिद्ध कर दे कुछ भी सिद्ध कर दे तत्वदर्शी सिद्ध कर दो तुम तुम्हारे ही शास्त्र में मैं तुम्हे तत्वदर्शी दिखाऊ कौन है कबीर ने कभी रामपाल को तत्वदर्शी बोला है क्या मैं दिखाता हूं किसने
01:15:18:24 बोला हां पर कबीर दूसरे की पूजा करने की बात कर रहे हैं ना कबीर जी ने यह यह ज्ञान गंगा यह ज्ञान गंगा में ज्ञान गंगा खोलिए जरा देखिए तत्वदर्शी कौन है हमें अपने शास्त्रों की जरूरत नहीं है अपनी चीजों को सिद्ध करने के लिए इन्हीं के शास्त्रों से हमारी चीजें सिद्ध होती है ज्ञान गंगा खोलिए
01:16:00:02 ज्ञान गंगा का पेज नंबर 30 हां पर कबीर जी का भजन है कबीर जी वहां कह रहे हैं मैं तो उसको बजता हूं जिसके इतने हजारों हाथ है अब क्या करोगे मैं तो उसका भजन करता हूं अरे भाई तो भी तो यह कह सकते हैं कि तुम बात को समझ नहीं पा रहे हो गीता की कि वह किस विषय में बोला जा रहा
01:16:33:20 है तुम भी तो नहीं समझ रहे हो अपने मन से मुह उठा के चल दिए गीता का अर्थ करने हमको बता रहे हो तुम समझ नहीं रहे हो बात को ऊपर आओ ना माता जी ने नहीं दुख पान कराया निष्ठा पूर्वक आ जाओ य देखो मैं कह किससे रहा हूं सबसे पहले बात समझो मैं तो नहीं आ रहा आपके चैनल पर कमेंट करने आज एक लड़के ने मुझसे यह कहा मैसेज में आकर के बातचीत करने लगा फिर मैंने कहा माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पान कराया है तो आप आइए हमारे चैनल पर लाइव यह बात तो मैं भी कह सकता हूं तुम आ जाओ मैंने कहा मैं तो तुम्हारे पास नहीं आया ना मैसेज करने यदि तुम यहां पर मैसेज करके मुझसे तर्क वितर्क कर रहे हो तो सामने से बात करने में किस बात का भय है जो चीज आप लिख के कर सकते हो वो सामने से बोल के क्यों नहीं कर सकते क्योंकि तुम्हें पता है कि तुम्हारी बात में कम री है इसलिए तुम डरते हो और मैं तो कह रहा हूं यदि कोई भी आवश्यक व्यक्ति हो मुझसे बात करे कहां बीच का स्थान चुना जाएगा ना मेरा ना आपका क्यों जाऊ मैं आश्रम और ऐसा नहीं है कि गया नहीं हूं गया हूं तुम्हारा स्टॉल लगा है वहां पर तुम्हारे 20 20 25 प लोग हैं वहां पर मैं उनसे भेड़ा भी हूं और तुम्हारे नाम दान
01:17:48:20 केंद्रों में फोन किया मैंने कि भैया मैं आया हूं तो उन्होंने कहा हमारे पास कोई विद्वान नहीं है फि विद्वान कहां से टपक रहे हैं कमेंट्स में तो एक बार वो वीडियो चला दीजिएगा जाओ आश्रम में फोन किया था जो आपने हा वो बड़े मजेदार है आश्रम में फोन किया था भाई मैं आ गया हूं मथुरा आ जाओ ज्ञान चर्चा कर लेते हैं थोड़ी बताओ तो वो बोले नहीं नहीं पहले बोले कल आ जाओ 11 बजे तो पहले की रिकॉर्डिंग नहीं हुई थी फिर पहले बोले कल आ जाओ फिर उसके बाद उसके बाद अगली अगली बार फिर वहां से कोई और बोलता है फिर बोलते कि क्या कहते हैं यह हमारे पास अभी कोई विद्वान है नहीं सब गए हुए हैं कब आएंगे 6 तारीख को आएंगे भाई कोई व्यक्ति बाहर से आया हुआ है जब तो वह कहां तक रुकेगा 15 20 दिन तक ड़ी ना रुकेगा ठीक
01:18:52:26 है इनके सारे चैलेंज देते रहते कि तुम रामपाल के किसी भी चेले से ज्ञान चर्चा कर लो तो वही तुमको वो कर देगा मिट्टी में मिला देगा अब किधर गए विद्वान अब कहां है विद्वान कोई नहीं है क्या कोई मायका लाल ऐसा नहीं है जो अपने तत्वदर्शी की इज्जत की रक्षा करने आए अरे रोते होंगे आपके तत्वदर्शी आओ भैया पहले खुद की जो जो लोग भी कमेंट में बकबक कर रहे हैं वो ऊपर आए ना
01:19:35:04 भाई तो जो भी कोई मायका लाल है जिसको उसकी माने दुग्ध पान कराया है निष्ठा पूर्वक आपने इनको हां क्या वो संपर्क करें हमारा नंबर नोट करें 7408 30169 वो आके बात करे चर्चा करें ठीक है चर्चा करिए आकर के आपने निरुत्तर कर दिया है ै बंद कमरे में वीडियो बना सकते हैं बाकी कुछ नहीं कर सकते
01:20:13:04 हां कुछ रह गया है क्या अरे किसी को पकड़ लोगे तुम्हारा तत्वदर्शी इतना ज्ञानी इतना महात्मा इतना परमात्मा स्वयं है और वो एक लाइन में कह रहा है कि जो मूर्ख है वो गीता बोलने वाले को तुच्छ समझते हैं अगली लाइन में कह रहा है जो मूर्ख है वो गीता बोलने वाले को भगवान समझते हैं प्रभु समझते हैं अब बताइए यह तत्वदर्शी है तत्वदर्शी कैसा होता है उसके बारे में पारस ल अव दिया जी जय श्री राम जय सियाराम भैया जी सादर प्रणाम जी जी खुश रहिए भया जी मैं आपकी वीडियो देख के बहुत अधिक प्रभावित हूं और आपको बारंबार धन्यवाद है कि आपकी वीडियो से बहुत ज्यादा समाज में चेतना आ रही है और व्यक्तिगत रूप से मैं आपको बताना चाहता हूं कि मैं भी इसी रामपाल के तो प्रत्यक्ष नहीं पर एक और धर्मदास द्वारा रचित एक कबीर पंथ जो चल रहा है जिसका काशी बनारस दामाखेड़ा इत्यादि स्थानों से संचालन होता है तो ये लोग भी अपने आप को वैसे तो संत बोलते हैं पर वास्तविकता
01:21:28:10 ये है कि ये लोग संत के नाम पर ये भी वही रामपाल का ही काम कर रहे हैं इनके साहित्य भी वैसे के वैसे ही जैसे रामपाल के है पर हम आप केवल रामपाल का विरोध कर रहे हैं पर ये जो अभी जो कुंभ होने वाला है भैया जी इसमें ना छानिया उनकी भी लगने वाली है सब कबीर पंथ की ये जो क अगर लगेगी तो वहां उनको शिवांश नारायण द्विवेदी मिलेगा क्योंकि शिवांश नारायण द्विवेदी मार्ग में जाता है इसलिए जीरा जाता इसलिए कौन कौन अपना नकली वाला काउंटर खोल के बैठा है गुरु परंपरा जी जी लखनऊ में आदि शंकराचार्य वैदिक गुरुकलम जो है हमारे पूज्य गुरुदेव आचार दनल मण त्रिपाठी जी का उनका शिष्य अरे वाह अरे वाह अरे वाह अरे वाह आप तो गुरु भाई समान है हमारे परंपरा से तोही है और उनका तो बहुत समान आचार श्री का जी जी उनके गुरुकुल के आप गुरुकुल में अध्यन कि गु नहीं नहीं अध्यन नहीं करे
01:22:36:22 उनसे बहुत बढ़िया बहुत बढिया बहुत अच्छे बत अच्छे है बहुत ज्ञानी है बहुत अनुशासित है बहुत सिित है उनकी कितनी वो करें बारंबार आचार्य दनल अच्छा हमारे भी कई बार प्रश्नों का निराकरण निराकरण हम भी उनसे मांग लेते हैं कभी कभी जी जी जी उनका एक व्यक्तिगत समूह है ब्रह्मसूत्र उसम हम लोग है गुरुदेव की कृपा से अच्छा तो बहुत आशीर्वाद प्राप्त होते रहता है गुरुजी का बिल्कुल बक बहुत बढ़िया ल नहीं नहीं मैं मध्य प्रदेश से हूं अच्छा बालाघाट जिला बालाघाट से तो यहां से कैसे संपर्क हुआ आपका आचार्य श्री का चैनल से चैनल से तो नहीं उनके ब्रह्मसूत्र समूह में एक लवी भारद्वाज भैया जी है दिल्ली के उनके आग्रह पर गुरुजी से संपर्क होना हुआ था और 2014 में जो धर्म संसद लगी थी स्वरूपानंद जी की छत्तीसगढ़ में कवर्धा में तो उसमें हम लोग गए थे शंकराचार्य जी की आईटी सेल में थे हम लोग साई विरोधी अभियान में थे तो वहां से परिचय हुआ था जी अच्छा अच्छा बहुत बढ़िया ठीक है भैया कभी आना हुआ तो बालाघाट की तरफ से हम आपसे संपर्क करेंगे जीरा
01:23:53:13 न हा हमारा नंबर नहीं आप करिए हमारा नंबर 74836 यह राधा स्वामी वालों का भी कबीर कबीर पंथ जैसा ही सिस्टम है बिल्कुल जी जी जी बहुत सारे पाखंड चल रहे हैं भैया जी राधा स्वामी वाले क्या करते जैसे सबको ये कबीर वाले कबीर को सबसे ऊपर वाले लोक में दिखाते हैं परमधाम में ऐसे ही राधा स्वामी वाले राधा स्वामी को दिखाते सबसे परम धाम में जब आपको परम मोक्ष मिलेगा तो आप राधा स्वामी वाले लोक में पहुंच जाए इसीलिए ऐसे लोगों से बात करने जाता हूं ना मैं ऐसे लोगों से बात करने जब मैं जाता हूं तो मैं खामखा शास्त्र इत्यादि पहले नहीं खोलता पहले तो सीधे कहता हूं क्या आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं इसी व फ जाता है दुनिया का कोई भी तंत्र कोई भी यह जो तथाकथित स्वघोषित तंत्र और संत है यह सब इस जगह आकर के फस जाते हैं कि इनके द्वारा जो नकली जितने भी आचार्य होते हैं
01:25:08:18 इनके द्वारा प्रतिपादित होने वाला मिलने वाला जो भगवान है व भगवान ही नहीं होता क्योंकि वह सर्वशक्तिमान नहीं होता व बाधित होता है इनके य पर मैं इनके एक व्यक्ति से मिला था यह कबीर पंथ का एक व्यक्ति आया था द बाट उसको मैंने पूछा क्या तुम्हारा ईश्वर अपनी देह का नाश करके दिखा सकता है वो सद है उसका वध नहीं होता सव मैं पूछ के रहा हूं देह का नाश कर सकता है कि नहीं नहीं कर इनके य इनके य पर देह का नाश है इनके य पर निराकार माना है कि एक कोई अनामय लोक है अनामय लोक से जो इनका कबीर है वो सतलोक में आता है और वो सब सद वहां से यह मिथ्या फला नहीं वो साकार ही है मगर वो निराकार से साकार हो रहा है पहली बात दूसरी बात फिर फर मैंने उससे पूछा की वो कह रहा है कि अगर ईश्वर ईश्वर नष्ट हो जाएगा मैं ईश्वर के नष्ट होने की बात नहीं कर रहा हूं उसकी देह के नष्ट होने की बात कर रहा हूं अच्छा क्या दे के ईश्वर इस समय सद हमारे आसपास बगल में है क्या सदे तो नहीं है प्रकट रूप से तो नहीं है मगर उसकी
01:26:23:20 सत्ता तो विराजमान इससे सिद्ध होता है कि देह के कारण सत्ता नहीं है जी और दूसरी बात यह है कि अगर हम उसकी देह को अंतिम मान लेंगे तो बहुत से कार्य करने में असमर्थ हो जाएगा वो जैसे अपना रूप नहीं बदल पाएगा क्योंकि उसकी देह जो है व न बदल नहीं सकती दे का नष्ट होने का मतलब क्या है गायब कर दिया होगा नष्ट का नष्ट होने का मतलब क्या है यही है ना तो एक ही सवाल है दुनिया के जितने भी शास्त्र विरोधी है जितने भी परंपरा विरोधी है जितने भी जो सनातन परंपरा परंपरा प्राप्त आचार्य हैं उनका विरोध करने वाला जितना भी तंत्र हो दुनिया का संसार का वो सुन ले केवल एक सवाल है उन सबसे क्या तुम्हारा ईश्वर सर्व शक्तिमान है या नहीं सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है या नियम के नीचे आने वाला पादित है बस इसलिए ये सब ये सब कंफ्यूज हो गए इनके यहां पर अब तैयारियां चल रही है कबीर ये जो रामपाल है इनके यहां तैयारिया चल रही है इस प्रश्न का क्या जवाब
01:27:31:19 दे जी भैया अया भैया जी बड़ा अच्छा लगा आप आए और आपने अपनी बात कही बड़ा अच्छा लगा जी भैया जी जी जी आप तो आप हमारे लिए एकदम देवदूत है क्योंकि आपने जो कार्य किया है यह हम लोग बहुत परेशान है लेकिन हम लोग इतने बड़े स्तर पर नहीं कर पा रहे आप हमें जब भी साथ हमें आप ले लीजिए हम आपके साथ सयो पूरा करने के लिए तैयार है बिल्कुल बिल्कुल धरातल पर जुड़िए आप उसम हमें संपर्क करिएगा नंबर हमारे डिस्क्रिप्शन में भी लिखा हुआ है और वैसे यहां पर प्रदर्शित भी हो जाता है
01:28:09:12 74036 और आप जुड़िए बिल्कुल साथ में धीरे बोलिए स्मरण कर लेता 7 नहीं य लिख के आ रहा है स्क्रीन पर वो आप बाद में स्क्रीन ले आप ले सकते हैं धन्यवाद जी जी धन्यवाद जय श्रीम जी जय श्री राम ठीक है पड़ी जी आज की लाइव को छोटा ही रखते हैं और ये भाई साहब है जो कह रहे माता जी ने इं प्रो दुध पान कराया कि नहीं कराया इ प्रो वाला दुध पान कौन सा है इं पर कराते क्या बहुत जल्दी पता लग जाएगा तू एक बार मेरे सामने तो आ आज मैं तेरे को देख रहा हूं यह क्या कह रहे हो यार एक बार मेरे सामने तो आज मैं तेरे को देख रहा हूं यह क्या है समझ में नहीं आ रहा तुम भी तिचा दर्शी हो गए क्या क्या कहना है क्या नहीं कहना पता नहीं है सेंटेंस तो सही लिख लो और सुनो ऐसा गुरुदेव ने शास्त्र के साथ साथ शस्त्र की विद्या भी दी है तो रा गहरा मत समझना है नाना
01:29:25:22 सातो को साथ मारूंगा वो घातक का डायलॉग एक फिल्म है उसका डायलॉग है सातो को सात मारूंगा एक त मारूंगा य धमकी मत देना सामने आ तो ये वो संदेश आर जी आ जाइए आप आना चाहते हैं क्या सामने संदेश आर्य जी मुझे लग रहा कह रहे हैं जो सामने आने को हमसे कह रहे हैं उनसे कह रहे हैं संभव चलिए फिर बिल्कुल बिल्कुल जय श्री राम सभी को आने के लिए और आज इनका ये चैप्टर खत्म हो गया श्राद्ध और व्रत से जो आपको घृणा करवाई है कुछ छोटी मोटी चीजें बचें तो लाएंगे और हम बहुत जल्द एक बुकलेट बनाने वाले हैं उसमें चैप्टर्स है कि कहां पर अर्थ में गपला किया कहां पर विरोध दो तरह की बातें की कहां पर वो तत्वदर्शी के लिए वो त सिद्ध नहीं होता भगवान भगवान सिद्ध नहीं होता कबीर की दो बातें इस तरह से चैप्टर वाइज उसको खोलो पढ़ो और आनंद लो और किसी चीज के लिए नहीं है केवल कॉमेडी के लिए है वो आप आनंद प्राप्त करिए उसको पढ़ के ठीक है तत्वदर्शी तत्वदर्शी क्यों
01:30:40:28 नहीं है वो श्री कृष्ण से अलग काल क्यों नहीं है तत्वदर्शी की दोरी बातें ये सब उसम हम लोग एक सिलसिले बार क्रमानुसार लिख देंगे सभी को पास आपको शेयर करूंगा पीडीएफ बना के रखा है तो वो भी आप उसम ड कर लीजिए जो भी अच्छा लगे आपको बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल सभी को जय श्री राम जय श्री राम [संगीत]
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क्या रामपाल सनातन धर्म का शत्रु है ? #तत्त्वदर्शीसंत #rampaljimaharaj
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