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00:00:01:04 वो जो लिखा हुआ है ब्रह्मा विष्णु महेश के पिता कौन है कहां पर लिखा है ये देखिए इसे र पुरुष य ज्योति निरंजन जाना जाता है ब्रह्मा इसी ब्रह्म का ज्येष्ठ पुत्र है विष्णु मध्य वाला पुत्र है शिव अत्र है ये ज पूरा सृष्टि रचना आप ये ब्रम ज्ञान है यह किस परंपरा से प्राप्त हुआ है भगवत गीता चार दो में भगवान कह रहे हैं एवं परंपरा प्राप्ति मम परंपरा से प्राप्त होने वाला ज्ञान प्रमाणिक कहा गया है तो हम लोग ज्ञान लेने किसके पास जा रहे हैं जितने भी गुरु हैं शंकराचार्य हैं आचार्य हैं उनको किसी को भी वो यथार्थ ज्ञान नहीं पता अथ वेद 117 16 में लिखा है ब्रह्मचारी आचार्य बनता है मनुस्मृति में 12वें अध्याय के 112 से 114 में लिखा है धर्म में संशय होने पर ब्रह्मचारी के पास जाएं इसको मानेंगे कि नहीं इसको मानेंगे कि नहीं मैं आपको गीता लाके दूंगा मान लोगे क्या मैं गीता लाके दूंगा मान लोगे मानने तो ये ये किस परिमाप पर निर्धारित होगा कितना मानने के लायक है

00:01:05:18 लखनऊ महोत्सव में हिंदुओं को अपना ब्रेन वश कराना है तो लखनऊ महोत्सव में आइए अपने बच्चों को लेकर के ब्रेन वश कर यह जो सच्चाई आपने देखी है जो वीडियो आपने देखा है यह हमें दो बार में बनाना पड़ा क्योंकि पहले हम इनके पास जब बात करने गए थे तो हम सिर्फ दो लोग थे वहां पर इन्होंने बल का प्रयोग करते हुए हम लोगों हम कम संख्या में थे वहां पर तो इन्होंने हमारा वीडियो दबाब डाल कर के बंद करवा दिया था और बाद में हम लोग जब काफी लोगों को मैंने आवान किया कि आप लोग भी साथ में चलिए ऐसा ऐसा हो रहा है जब कुछ और लोग मेरे साथ वहां पहुंचे तब इस तरह की बातचीत सामने आ पाई जो हमने आपके सामने प्रस्तुत की है

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00:01:47:25 मेरा कहने का अर्थ ये है कि अगर यह लोग गली गली जाकर के सतलोक के नाम से या फिर मुक्ति के नाम से मोक्ष के नाम से यह जो ज्ञान है इन तथाकथित ज्ञान इनके किताबों में इसका प्रचार प्रसार कर सकते हैं तो हम लोग वहां पर इनको काउंटर क्वेश्चन क्यों नहीं कर सकते जहां पर इतनी विवादित बातें लिखी हुई है दुर्गा माता के बारे में ब्रह्मा विष्णु महेश के बारे में वहां पर हम इनसे काउंटर क्वेश्चन क्यों ना करें इसमें वह जो लिखा

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00:02:18:16 हुआ है ब्रह्मा विष्णु महेश के पिता कौन है कहां पर लिखा है सृष्टि रचना है यह सृष्टि रचना है ना तो जब पूरा सृष्टि रचना समझेंगे तब है देखो जैसे ब्रह्म है ये किस ब्रह्मांड के स्वामी हैं इसे क्षर पुरुष या ज्योति निरंजन काल आद नाम से उपमा से जाना जाता है यह तथा इसके सर्व ब्रह्मांड नाशवान है ब्रह्मा इसी ब्रह्म का ज्येष्ठ पुत्र है ठीक है विष्णु मध्य वाला पुत्र है तथा शिव अंतिम पुत्र है ये तीनों ब्रह्म के पुत्र केवल एक ब्रह्मांड में एक विभाग वो कहां है इनके पिता लिखा नहीं ब्रह्म ये ब्रह्म है ब्रह्म के तीनों कौन है ब्रह्म जो है 2 ब्रह्मांड के स्वामी है वो कौन है ब्रह्म ब्रह्म का नाम कबीर है नहीं नहीं ब्रह्म जो है ये जो गीता बोल रहे हैं नानको काल जति निरंजन कहते देखिए जो कबीर साहब तो परमात्मा है है ना तो तो व तो सबके पिता हैब हा वो तो हम सबके पिता है ना तो सृष्टि रचना जब हम पूरी पढ़ेंगे उस परिचय में लिखा है ब्रह्मा विष्णु महेश के पिता कौन है यही है ये ब्रह्म है यह काल ये अलग है हां यह ब्रह्म मतलब सबके पिता तो य

00:03:33:18 कबीर साहब हुए इन्होने सृष्टि रची और दुर्गा के पति दुर्गा के पति कौन है यह जब पूरा सृष्टि रचना आप यह ब्रह्म ही है ब्रह्म दुर्गा के पति वो दुर्गा के पति शिवजी नहीं है ब्रह्म अच्छा मैं यह जो इसमें जो ज्ञान है यह किस परंपरा से प्राप्त हुआ है यह देखिए कबीर साहब जो है ना यह आके जब बताए हैं यहां पर धर्मदास को यह पूरा बताए हैं ये किस परंपरा से कबीर साहब तो अभी आए थे ना मतलब हज 600 साल पहले तो वहां तक वो ज्ञान आया कैसे वही ज्ञान है ना इसमें जो कबीर साहब ने दिया जो कबीर साहब ने दिया तो कबीर साहब तक वो ज्ञान कैसे आया था नहीं कबीर साहब जो है वो परमात्मा है ये हमेशा आते हैं तो उन्होंने कहा कि जैसे जैसे उन्होंने कहा कि सतयुग में सक्रत नाम से आए त्रेता में सुनिए तो कभ तो परमात्मा है ना तो वो तो हमेशा आता है ना तो जैसे जैसे स मैं कहना पूछा कि कबीर साहब के कोई गुरु थे जिन्होंने उनको ये ज्ञान दिया नहीं कबीर साहब के गुरु ने तो जगतगुरु है कबीर साहब ना वो तो हमेशा आते हैं वो ये ज्ञान देने ही आते हैं मेरी मैं ये कह रहा था कि जो हमारा ईश्वर है वो तीनों गुणों से व्याप्त है सत जो तम तो तम का अर्थ है कि ईश्वर जो है तम वाले कार्य भी कर सकता है

00:04:48:27 यानी कि वो बुराई भी बुराई को भी जन्म दे सकता है ऐसा मानते हैं आप कि नहीं नहीं नहीं ये हम बताएं आपको जब आप सृष्टि रचना को इसको पूरा पढ़ेंगे मैं पूछ रहा हूं मैं मनवा नहीं रहा हूं पूछ रहा हूं देखो हम बता रहे हैं ना जैसे जैसे आपने कहा कि भाई कबीर साहब को ये ज्ञान कहां से आया आपका ये कहना है ना तो कबीर जैसे परमात्मा है वो तो देखिए वो उन्होंने किसी स्कूल में नहीं गए लेकिन वेदों का ज्ञान मैं वही तो पूछ रहा हूं जो ज्ञान जो है वह परंपरा से प्राप्त होता है भगवत गीता चार दो में लिखा है छंद के उपनिषद में लिखा है राम भी जब जन्म लेते हैं तो परमात्मा वो एक गुरु के पास जाते हैं श्री कृष्ण जब जन्म लेते हैं तो गुरु के पास जाते तो कबीर जी के गुरु का नाम क्या था कबीर जी ने गुरु केवल संसार दृष्टि से बनाया रामानंद जी को ता लोग लोक मर्यादा के त मदा को दिखाने के लिए कि अगर हम गुरु नहीं बनाएंगे तो लोग ये कहेंगे कि कबीर का कौन गुरु था अपने आप लोग गुरु बन जाएंगे इसलिए इस परंपरा को बनाए रखने के लिए उन्होंने दिखावटी में उनको रामानंद जी को हम उनकी शिक्षा माने कि ना माने माने गुरु होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए तो फिर कबीर जी के गुरु क्यों नहीं है कबीर

00:06:04:03 जी न को बनाया संसार दृष्टिकोण से बनाया ठीक है उनके गुरु से उन्हें जो ज्ञान प्राप्त हुआ था वोह क्या ज्ञान था यही था उनके गुरु ने देखो रामानंद जी क्या करते थे कि उन्होंने 1400 शिष्य बना रखे थे लेकिन उस थोड़ा दूर रखो उन्होने वो सिर्फ ब नहीं आगी अच्छा वे सिर्फ ब्राह्मणों को ही शिष्य बनाते थे तो आप कभी साहब आए तो उनको तो रामानंद जी शिष्य नहीं बना सकते थे तो अब उनको यह परंपरा डालना था कि अगर हम ऐसे ही यह परंपरा हट जाएगी तो गुरु बनाने के लिए उन्होंने लीला की उन्होंने क्या किया सीढ़ियों पर लेट

00:06:48:25 गए आप नहीं बताएंगे य प सुनिए यह परमात्मा के स्टार्टिंग में जब शट था ये चारों युग नहीं बने थे ठीक है अ रिकॉर्डिंग करो ऐसा नहीं ऐसा नहीं ठीक नहीं है आप या तो प्रश्न दे प्रश्न मिल जाएगा नहीं त है देखिए बात ये होती है कि हमारे मन में जब कोई प्रश्न हमारे मन में कोई प्रश्न उठता है जब हमारे मन में जब कोई प्रश्न उठता है तोय प हम क्वेरी नहीं कर सकते जवाब देब नहीं गली गाए यहां तो आपने स्टॉल लगाया हुआ है ना ऐसे तो गली गली पुस्तक सेवा भी होती है हम लोगों की वही हम कह हर जगह नहीं ऐसा भी सिद्धांत है कोई ब सत्य है तो आपको बताने में क्या दिक्कत हो रही है तो आपको भी भाई रिटर्न में उसी पे हम पूछ रहे हैं ना काउंटर उसी पर कर रहे हैं रिकॉर्ड इसलिए कि लोग भी देखें लोग भी जाने गुज के वहां भी चलेंगे आप यहां फिलहाल आपका स्टॉल लगा है तो यहां नहीं पूछ सकते कोई गलत बात

00:08:03:27 लिखी है क्या इसमें आप रिकॉर्ड या वीडियो बना कर के आप नहीं जी ऐसे नहीं करिए आप उसको य या फ पर लाइव करें या कुछ भी करें चाते लोग जाने हमने कर रखा है हमने पहले से दे रखा है जब आपकी चीज ओरिजनल है सतलो की बात हो रही है सात्विक बातें हो बि छुपाना क्या छना है ही नहीं छुपाना नहीं

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00:08:26:10 है आपको प्रॉपर जवाब मिलेगा से जैसे आप लोग डिस्कस कर रहे थे कि आप लोग जो साधनाए करते हैं वो करते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश तक की है ना और यहां हमारे गुरु जी के यहां क्वेश्चंस है पहले क्वेश्चंस है जैसे इसमें पेपर में दिया गया है कि ब्रह्मा विष्णु महेश के माता-पिता कौन है तो यह जो ज्ञान है वो स्टार्ट ही परम अच्छा ब्रह्म से होता है नहीं वो आप सही कह रहे हैं मैंने मैंने आप बहुत अभी ल ज्ञान को समझे बहुत टॉप लेवल का ज्ञान है ये आपके अकॉर्डिंग है नहीं ये तो ये ये आपके अकॉर्डिंग है व इस इसीलिए इसीलिए बात कर रहा हूं जैसे अगर आप मेरा प्रश्न ये

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00:09:04:20 नहीं है कि आपका ज्ञान गलत है मैं निचला हूं आप पुचले हैं ये सब नहीं है मेरा प्रश्न यह है आप मेरा प्रश्न बस इतना है आप कह रहे हो कि हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई अलग-अलग नहीं है सिख को मैं मान लेता हूं मुस्लिम और ईसाई हिंदू के साथ कैसे जुड़ सकता है जबकि हिंदू धर्म में कहा जा रहा है कि यदा यदाई धर्मस्य ग्लानि भवति भारता अभ्युत्थानम धर्मस्य तदात्मानं सजाम जब जब धरती में पाप होगा मैं प्रकट हो जाऊंगा मैं स्वयं को प्रकट करूंगा अच्छा इस्लाम का जो ईश्वर है वो ये कह रहा है 6101 में कि मेरी संतान नहीं हो सकती ऐसा कोई कार्य नहीं है जो सनातन ईश्वर नहीं कर सकता मगर इस्लाम का ईश्वर य कह रहा है मेरी मूर्ति पूजा नहीं हो सकती मैं जन्म नहीं ले सकता मैं अवतार नहीं ले सकता तो क्या आप मानते हैं सनातन ईश्वर अवतार नहीं ले सकता नहीं इसमें प्रश्न ये कि पहली बात तो आप इस प्रश्न प आइएगा कि हम सब कहते हैं कि परमात्मा एक है तो पहले यह पता चले जो एक परमात्मा है वो साकार रूप में है वो निराकार नहीं है वो अवतार ले सकता है या नहीं निश्चित रूप से लेता है अनंत अवतार इलाम का ईश्वर तो मना कर रहा है मैं नहीं ले सकता अवतार नहीं वो सनातन परमात्मा नहीं है क रहे हो कि वो दोनों धर्म एक है ये तो कुरान में लिखा हुआ है आप तो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो धर्म है

00:10:20:00 कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वह दोनों हमारी चीजों पर मैच नहीं करते हमारे सनातन से मैच नहीं करते आप गुरुजी द्वा लिखित पुस्त तक है मुसलमान नहीं समझे ज्ञान कुरान वो आप पढ़िए उसमें दोनों सिमिलरिटी क्या मोहम्मद साहब भी नहीं समझे मोहम्मद साहब जिस तरीके से जो गीता ज्ञान दाता है गीता ज्ञान दाता जो समझे होते तो अलग क्यों होते मतलब मोहम्मद साहब नहीं समझे उस ज्ञान को उसे आपने नहीं गीता ज्ञान जैसे गीता ज्ञान दाता ने श्री कृष्ण जी के शरीर का उपयोग किया था ज्ञान बोलने के लिए ऐसे ही मोहम्मद साहब का शरीर यूज हुआ था ब्रह्म ने अपना ज्ञान उनके माध्यम से दिया था ये है कि मोहम्मद साहब नहीं समझे थे ना वो ज्ञान नहीं मोहम्मद साहब ने तो वो जो ज्ञान है वो ब्रह्म ने दिया उनके शरीर में प्रवेश कर तो वो समझ गए थे कि नहीं समझे थे यानी कि जो मु जो मुसलमान जो जो मुसलमान जो धर्म है वह यह कह रहा है कि हम वह हैं जो रसूल को मानते हैं मोहम्मद को मानते हैं तो आपके अनुसार वो जो रसूल को मानने वाला धर्म है वो मुसलमान नहीं है वह जो कुरान की जो शिक्षा आई है जो जो कोई आपके अनुसार जो ब्रह्म है उसने जो शिक्षा दी है उसको मानने वाला मुसलमान है मगर वो मुसलमान अपने आप को य मानते हैं रसूल के माध्यम से जो हमें प्राप्त हो रहा व ज्ञान जो हो रहा है जो ज्ञान की चर्चा हो रही

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00:11:33:25 है हम वह मुसलमान है तो आपके अनुसार ये वाले दूसरे वाले मुसलमान है यह क्या कहीं और एजिस्ट करते हैं नहीं मेरा पहले तो आपसे यह है कि पहले हम लोग धर्म पर नहीं जाते हैं हम लोग मानते हैं कि जीव हमारी जाति है मानव धर्म हमारा ये तो आपके आपके फ्रंट पेज प लिखा है ना हिंदू मुस्लिम ईसाई नहीं कोई नहीं आ तो हम लोग जो प्रमोट कर रहे हैं वो मानव धर्म कर रहे हैं तो जब ये जो धार्मिक पुस्तकें जब बनी है जो आप बात कर रहे हैं गीता वेद कुरान बाइबल उस समय कोई धर्म नहीं था उस समय जो आप कह रहे हैं वो केवल सनातन धर्म था ये

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00:12:05:16 बाद में हम लोग डिवाइड हुए मैं वही कह रहा हूं कि कि इस्लाम के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो धर्म है उसकी एक प्रकृति है कि वह बदलता है जैसे कि 2187 में उन्होंने कहा कि अब तक यह नियम नहीं था मगर आज हम यह नियम लागू कर रहे हैं 287 में अ रोजों के दिनों में स्त्री संघ करने पर प्रतिबंध था पहले उसके बाद रोजों की रात में पत्नी संग संग कर सकते हैं इसकी अनुमति दे दी गई तो यह क्या हुआ एक नियम पहले नहीं था आज हो गया तो यह हो गया कि यह सनातन नियम नहीं है फिर सनातन नियम तो जो था है और रहेगा सनातन तो वो हुआ ना तो फिर हम इसको एक कैसे कर देंगे नहीं ऐसे काफी अगर जो आपके जो क्वेरीज है ऐसे काफी क्वेरीज आपको गीता में मिलेंगे जैसे सेम जैसे आप जाएंगे कि गीता ज्ञान दाता ने एक जगह उत्तम पुरुष तो और परमात्मा इति उधार ते अध्याय नंबर 15 श्लोक नंबर 17 ये कहता है फिर उसने नीचे पीछे कहा अध्याय दो के श्लोक नंबर 12 में हे अर्जुन तेरे और मेरे बहुत से जन्म हो चुके हैं है ना तो अविनाशी और जन्म ये दो चीजें हो गई तो ये जब जो कोड वर्ष दो चीजें हो गई यह तो तब है ना जब हम लोग अगर गीता से वो ज्ञान ले रहे हैं तो गीता को हमें पूरा फॉलो करना पड़ेगा अगर पूरा फॉलो करना है तो भगवत गीता चार दो में भगवान कह रहे हैं एवं परंपरा प्राप्ति मम परंपरा

00:13:20:18 से प्राप्त होने वाला ज्ञान प्रमाणिक कहा गया है तो हम लोग ज्ञान लेने किसके पास जा रहे हैं गीता का ज्ञान लेने किसके पास जा रहे हैं जो परंपरा प्राप्त आचार्य उनके पास तो जा नहीं रहे हैं परंपरा प्राप्त आचार्य कौन है शंकराचार्य उनके पास जा नहीं रहे हैं हम लोग अपने मन से गीता का ले रहे हैं आप पहले जो आपको जो क्वेरी हो रही है दो अर्थ एक मिनट एक मिनट जो दो क्वेरीज हो रही है आपकी अलग-अलग वो क्वेरी मिटाने के लिए आप पहले परंपरा प्राप्ति मम अगर गीता से आपको लेना है कुछ तो पूरी गीता लोगे कि आधी अधूरी लेगा पूरा लेंगे तो एवं परंपरा प्राप्ति मम का क्या करें नहीं तो जो देखिए जब भी कोई एक संत होता है या गुरु होता है जो आप कह रहे हैं व परंपरा से ही उसको अधिकार होता नाम दान देने का है ना जैसे ज्ञान की या फिर जो गुरु की पदवी है वो एक परंपरा है परंपरा के थ्रू हम लोग उसको फॉलो करते हैं सेम ऐसे ही ये ज्ञान जो संत रामपाल जी महाराज तक पहुंचा हुआ है परंपरा से है नहीं आप आपने कहा कबीर दास जी के जो गुरु कबीर दास जी के जो गुरु थे वो थे रामानंद क्या नाम था रामानंद जी ठीक है वो श्री श्री परंपरा से थे रामानुजाचार्य परंपरा से वैष्णव वो श्री है रामानुजाचार्य जी की परंपरा से और अब आपका कहना ये है कि कबीर जी ने उनका ज्ञान नहीं दिया अपना ज्ञान यहां पर दे दिया गुरु से प्राप्त ज्ञान आगे नहीं बढ़ाया ना

00:14:36:12 इसलिए गुरु बनाया रा तो तो जब चलती रहे तो फिर आप इसको क्यों तोड़ रहे हैं नहीं हम कहां तोड़ रहे हैं आप तोड़ तो रहे हैं जब वो चाहते हैं कि लोग परंपरा प्राप्त आचार्यों के पास जाएं तो आप क्यों कह रहे हैं शंकराचार्य के पास ना जाए नहीं शंकराचार्य जो हैं उनको अधिकार तो हो नाम देने का अध जो परंपरा आती है वो अधिकार आता है जिस तरीके से एक सदगुरु इससे पहले नानक देव जी हुए मेरा प्रश्न यह है कि गुरुओं से ज्ञान ले परंपरा प्राप्त गुरुओं से कि ना ले हा बिल्कुल नहीं बिल्कुल नहीं जिनको नाम दान देने का अधिकार होना चाहिए उनसे आप ज्ञान ले लीजिए कोई तराज नहीं उसम आप इसमें ये कह रहे हैं ना आप इसमें यह कह रहे हैं आप उनके बिल्कुल विरुद्ध

00:15:21:13 विरुद्ध आप इधर आइए ये गलत है जब हम परमिशन के बगर अभी आप हमने क्या कहा अभी हमारी आपकी बात होगी आप ये क्या कर रहे हैं तो मैं आप बात हमसे पूछा आपने गलत बात नहीं हो रही है भाई साब ये पूछ रहे गलत बात हो रही डिस्कस करना किसी भी ज्ञान चर्चा डिस्कस करना सेटिस्फाइड हो कर के आराम से बैठिए बात करेंगे भाई साहब भाई साहब यह कोई गलत बात है क्या ये आप ये गलत है आप मर्ज बानी बात कर रहे हैं आप सद ग्रंथों को लेकर के रखिए और प्रमाणित करके बताए थे सद ग्रंथों को लेकर ही तो बात कर रहे हैं टाइम और समय फिक्स कीजिए चलिए बैठते हैं आपके साथ में जितना समय लगेगा ठीक है आप टाइम और डेट नोट कर लीजिए बता दीजिए बैठते हैं परमाणु के साथ में आपका शुभ नाम आपका शुभ नाम आपका शुभ नाम आपका शुभ नाम नहीं ग्रंथ लेके ही तो बात कर रहे हैं मैंने बोला मैंने बोला एवं काम जबानी ग्र की बा क्यों मैंने कहा ना एवं परंपरा प्राप्ति मैंने कहा चार दो भगवत गीताने परंपरा हिसाब से जो बोला वो बोल दिया परंपरा में ही गु गुरु प्रणाली चलती है क्या आपको यह पता है यथार्थ गीता का

00:16:36:19 ज्ञान देने वाला संत कौन है यथार्थ गीता ज्ञान देने वाला गीता का वास्तविक और सच्चा ज्ञान देने वाला संत कौन है सच्चा ज्ञान देने वाला ज्ञानेश्वर महाराज जी आप ये आप कह रहे हो क रहे रहा गुस्सा क्य हो रहे गुस्सा क्यों रहे क्रोधित क्यों हो रहे हैं इनकी आंखें दिखाओ जरा कैमरे में पहले ये मैं इसलिए कह दिया कि आपने गीता पढ़ी है ना जी पढ़ ज्ञान किस भगवान ने दिया भगवान श्री कृष्ण ने कृष्ण जी ने कृष्ण जी ने गीता अध्याय चार के श्लोक 34 में क्या बोला है तत्व ज्ञानी तत्व ज्ञानेश्वर नहीं तत्वदर्शी संत की शरण में जाने के लिए बोला है तत्वदर्शी संत कौन

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00:17:10:13 है तत्वदर्शी संत जो होते हैं परंपरा प्राप्त सुनिए मैं बताता हूं तत्वदर्शी संत कौन है अतर्वस्ना 3 16

00:17:29:08 जो तत्वदर्शी तत्वदर्शी तत्वदर्शी जो संत है वो वो परंपरा से होना चाहिए और मत्स पुराण 145 वा अध्याय मत्स पुराण 145 वा अध्याय 5वा श्लोक तत्वदर्शी संत वो जो समस्त सुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा दे उसके बाद उसके बाद उसके बाद उसके बाद उसके बाद देखिए आप आप मानते ना हो तो बात आप मानते नहीं है वो बात नहीं हो रही है है तो ऐसा ना आपसे क्षमा चाहते मैं वो नहीं कह रहा हूं मैं वो नहीं मैं अगर मैं एक जिज्ञासु बनके सवाल कर रहा हूं तो आप मेरी जिज्ञासा शांत करिए बुरा क्यों मान रहे हैं नहीं तो आप गलत कर रहे ना सब गीता में लिखा हुआ है उल् अर्जुन उल् गता जनता प्रभु नेहा तत्वदर्शी संत की पहचान में प्रमाण सहित आपको दे रहा हूं आप मान रहे हो अथर्व गद 11 सा 16 खोलो ब्रह्मचारी ही आचार्य बनेगा का जन अरे भैया खोलो ना अथ अथर्ववेद 1171 अभी आपने श्लोक क्रमांक बोला अथर्ववेद में 117 16 में लिखा हुआ है भैया देखो ब्रह्मचारी आप यही तो बात

00:18:42:28 है तो आचार्य तो वही बनेगा प्रमाणिक आचार्य वही बनेगा अंतिम निर्णायक वही होगा यही है तो तो वो आप देखिए ना ब्रह्मचारी की परिशा क्या होनी चाहिए हां हम नहीं बता रहे उसके बाद उसके बाद उस परमात्मा को पाने देख मैं आपको ये बोल रहा हूं जैसे अभी गीता अध्याय 15 श्लोक 16 17 में अभी उन्होंने बोला अभी मैंने जो बोला अथर वेद 117 16 सुना आपने चार सुना मैंने जो बोला सुना उसका क्या करें उसका क्या करें बोला भा ये भी तो मु जबानी बोला है अरे तो ये लिखा आपकी किताबों में लिखा है किसने छापी है मैं भी तो वेद का क्रमांक चेक तो करो मैं भी तो वेद का क्रमांक बता रहा हूं वेद खोलो आप किसको लाइए आप इंटरनेट प अभी वेद खोल लो 1171 आप भी खोल लीजिए नेट पर तो तो मैं कहां इनको डिनायर रहा हूं मैं डिनायर रहा हूं आपने उसका अर्थ गलत लिया इसलिए मैं कह रहा हूं आचार्य कौन होगा हम राइटर तो नहीं है उस बुक के इस बुक के राइटर हम तो नहीं है रहे हैं तो आपकी आपका दायित्व है ना कि ये क्या है क्या नहीं है तो उसको समझने के लिए आराम से प्यार से बैठिए यही

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00:19:56:24 बैठ जाइए समझ ले ब जाते र् संत हमारी आपकी बातचीत हा जी गीता ज्ञानदाता प्रभु ने कहा अध्याय शलोक

00:20:13:09 क्योंकि मैं कह रहा हं सुनि तो भाई साहब जब मैंने पूछा तो वो क्यों नहीं बोला आपने चलिए ठीक है रुक जाओ बोलो बोते हम सुनते हैं बहस का मुद्दा यही बनता हैलिए उसके बाद में अर्जुन उनसे क्वेश्चन करता है हा कि वो तत्वदर्शी संत कौन है मैं उसकी पहचान कैसे कर पाऊंगा ठीक है तो क्या बोले हैं हा बोलिए बोलिए आ अध्याय 15 श्लोक 16 एक से चार में उस तत्वदर्शी संत की पहचान जो इस उल्टा संसार रूपी लटके हुए संसार रूपी वृक्ष की जड़े तना टहनिया और पत्तों तक की विधिवत जानकारी ब जब आपकी बात पूरी हो जाए तो मुझे बता दीजिएगा अभी तो आप सुन ही रहे हैं इसीलिए बीच में आपको याद दिला रहा हूं जब आपकी बात पूरी हो जाए तो मुझे बताइएगा कि मुझे कब बोलना कट कर रहे कर कोई मतलब नहीं है भैया अथातो धर्म जिज्ञासा अथातो ब्रह्म जिज्ञासा जब मैं कह रहा हूं ना ये लिखा है अभी आप भैया लिखा हुआ मैं भी तो बताऊंगा बस मुझे ये बता दीजिएगा कि अब आप बोल सकते हैं देखिए एक से चार में जब ये लिखा हुआ है कि यह संसार उल्टा लटका हुआ एक पीपल रूपी वृक्ष है जिसकी जड़े तो ऊपर की ओर है और तना और डाल और टहनिया ये तीन ये तीन शाखाएं हैं पत्ते रूप संसार है जो इस उल्टा लटके लट वृक्ष

00:21:28:19 की जो विधिवत जानकारी बता दे वो हां सह वेद वित उसमें लिखा है ठीक है तो वो पूर्ण संत तत्वदर्शी संत है ठीक है ना तो उनकी शरण में जाने के लिए बोला है तो अब य ये जानकारी क्या हमने गलत लिख दी या गीता ज्ञान दाता बोलने वाला प्रभु ने गलत दे दिया फिर अब मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं ये कह रहा हूं जै मैं बोल सकता हूं कि नहीं बोल सकते हैं चारों वेदों का ही ज्ञान गीता जी में बोला गया था कब बोलूंगा बस ये बताइए आप बोलिए तो अब ये बताइए गीता में कुछ ऐसा लिख दिया जाए अगर ऐसा अर्थ निकाला जाए जो वेदों के विरुद्ध हो तो आप मानेंगे उसे वेद विरु अगर गीता का अगर देखिए मैंने आपसे जो प्रश्न पूछा वो बताइए अगर गीता में कुछ ऐसा अर्थ निकाला जाएगा गीता के श्लोक का जो वेद विरुद्ध होगा तो आप मानेंगे उसे मैं पूछ रहा हूं मानेंगे तो अथर्ववेद 117 16 में लिखा है ब्रह्मचारी आचार्य बनता है मनुस्मृति में 12 अध्याय के 114 से 12 अध्याय के 112 से 114 में लिखा है धर्म में संशय होने पर बचारी के पास जाए अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को बनाए इसको मानेंगे कि नहीं इसको मानेंगे कि नहीं नहीं मानेंगे अवेद को नहीं मान रहे आप नहीं मानेंगे कहीं कहीं पर ब्रह्म ज्ञान है और उस पूर्ण ब्रह्म के ज्ञान से अलग है उसका अपना मनमाना आचरण

00:22:43:22 है इसलिए नहीं मानेंगे उसको हम बनता में दो प्रकार का ज्ञान है आत्म ज्ञान और ब्रह्म ज्ञान ठीक है ना आत्म आत्म ज्ञान से हमारा आत्म कल्याण होता है जो परम पिता परमात्मा परम अक्षर पुरुष की भक्ति करने से प्राप्त होता है और ब्रह्म ज्ञान उसी के स्तर का है इसलिए वो हमें नहीं मानने है नहीं उन्होने कहाय मेरा मत है यह मेरा मत है तो आप यहां पर अथर वेद की शिक्षा को नहीं मान रहे ना मान रहे हैं कि नहीं मान रहे हैं आप एक कार्य करिएगा पहले से रिक्वेस्ट की जा चुकी थी कि ये ज्ञान चर्चा का बहस यहां प नहीं होगा दरी बात आप ये बताइए हम सबके अंदर ईश्वर है कि नहीं बैठेंगे उसका टाइम डेट कीजिए तब करेंगे क्वेश्चन हमारे आपके अकॉर्डिंग होंगे लेकिन यहां नहीं होंगे हम ये गलत किया ये सब कर रहे ये गलत कर रहे हैं आप ये गलत क्यों है ये गलत क्यों है भाई साहब ये गलत क्यों है मतलब नहीं आप बताओ ब्रह्मा विष्णु महेश के माता-पिता कौन है ब्रह्मा विष्णु महेश के माता पिता सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर जो ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश के रूप में उत्पन्न होते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश के माता ब्रह्मा विष्णु महेश के माता-पिता सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर जो ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश के रूप में हां प्रमाण प्रमाण भागवत में दुर्गा

00:23:58:24 जी के ब हम देंगे हम देंगे हम देंगे हम दे तो रहे हैं अब सुन लो आपने प्रश्न पूछा विष्णु पुराण में विष्णु भगवान ही स्वयं ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में जब समार करते हैं हा तो तो यही तो तो ये नहीं सब कुछ खत्म कर दो आप आप यह बता दो क्या ईश्वर हम सबके अंदर है या नहीं नहीं नहीं देवी महाप हम सबके अंदर ईश्वर है या नहीं शक्ति अंदर है परमात्मा हा ठीक ठीक अब ये अच्छा अब ये आया अब आया इस हम लोग बात कर सकते हैं तसल्ली से हमारे अंदर ईश्वर है कि नहीं हमारे अंदर परमेश्वर की शक्ति है हां जैसे उसने शब्द रूप में अ वो जो समरथ है वो शब्द रूप में सब में व्यापक है फिर भी वो संपूर्ण तरीके से मैं पूछ रहा हूं हमारे अंदर ईश्वर है या नहीं हम जो हम जो बता रहे हैं वो समझिए कि ईश्वर की शक्ति भाई मैं हां या ना मैं पूछ रहा हूं ईश्वर है या नहीं हमारे ईश्वर हमारे अंदर अपने शक्ति नहीं है और ईश्वर अच्छा ईश्वर की शक्ति और ईश्वर में अंतर है हां बिल्कुल अंतर है बिल्कुल अंतर है उस संपूर्ण मालिक अस ब्रह्मांड राजा के समान वो सतलोक में बैठा हुआ है ईश्वर की शक्ति और उसमें अंतर है हम सभी

00:25:13:26 जीवों के साथ में है हम सभी आत्माओं के साथ में है और सब कड़कड़ में वो व्यापक भी शब्द रूप में है लेकिन फिर भी वो राजा के समान सतलोक में विराजमान है हा ईश्वर की शक्ति और उसमें अंतर है ना बिल्कुल अच्छा इसका मतलब शक्ति कहीं ना कहीं ईश्वर से थोड़ी कम होती है शक्ति भाई वो जितनी देगा सभी जीवों के उतनी प्राप्त होगी ना शक्ति और ईश्वर में अंतर है ना अंतर मीन संपूर्ण तरीके से वह जो गॉड है वो फिर भी बैठा वो अपनी शक्ति जितनी जीवों को देगा उतने में रहना पड़ेगा प्रश्न का उत्तर अभी आप नहीं दे पाओगे हम जो बता रहे ये सिर्फ और सिर्फ फसाने का मात्र मैटर है अच्छा मुझे ऐसा लग रहा था कि मुझे ऐसा लग रहा था कि हम यहां पर कुछ ज्ञान लेने आए हैं भाई सतलोक का ज्ञान अगर ज्ञान लेने आते तो हमारे बताने के हिसाब से जितना हम कह रहे हैं उतना ही पर जो आप बता दो वो मान ले नहीं हम नहीं बताएंगे हम आपको जो है ना वीडियो भेज देंगे गुरुजी के जो ज्ञान चर्चा ई व देखिए गुरु जी आपके लिए गुरु जीी है वो ठीक है वो एक बात अलग है वो एक बात अलग है नहीं सटीक उत्तर सटीक उत्तर ये मैं आपको मिला कि नहीं उनसे ज्ञान ये बताइए मिला आपको मिला जो आपको मान नहीं उसको आप मेरे प मान नहीं मैं नहीं क रहा रहा टारगेट आपने मुझे किया तुने बोला नहीं नहीं मैंने ऐसा नहीं कहा

00:26:29:02 मैं आपसे समझना चाह रहा हूं कि ये हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई एक कैसे जिज्ञासु होता और प्यार से बैठकर समझ लेता बहस मुद्दा नहीं बनाता मैंने कहा भैस का मुद्दा बना आपने बना दिया आपने बना दिया कहा वीडियो आप क्यों बना रहे हैं मान ही नहीं रहे आप रिकॉर्डिंग किए जा रहे हैं वो वीडियो बनाए जा रहे हैं अच्छी चीज को आप अच्छे समझ लीजिए ये तो अच्छी चीज है ना तो ये तो ये तो ये तो अच्छी चीज है तो लोगों को देखना चाहिए जब आपको पहले रिक्वेस्ट करके मना किया गया यह नहीं करना है क्यों कर रहे हैं मैं इसलिए कर रहा लोग

00:27:00:22 जाने आप आप जो सोचोगे वही अंत है आप जो सोचेंगे वही अत तो एक और पे आ जाएगा तो नहीं जानेंगे आपके माध्यम से नहीं आना है सनातन सिद्धांत है सनातन सिद्धांत समझना हमारे तो फिर आपका क्यों माना जाए आपका क्यों माना जाए आप मत मानिए मैं आपको मना नहीं रहा हूं क्यों कह रहे कि आपने हमारी बात नहीं मानी हमने आपको कोई मनाने का वो नहीं लिया है जिम्मेदारी नहीं ली वीडियो बंद नहीं किया इन्होने अपना को नहीं किन्ने जो भी कहा तो मैंने मैं लड़ने नहीं आया हूं मैं यह जानने आया हूं कि ये जो मुस्लिम चैन प आ रहा है ईश्वर टीवी पर सुबह 6 बजे नेपाल वन पर सुबह 6 बजे उसम जब उसमें जब कोई क्वेरी होगी तो फिर मैं किससे पूछूं कब आओ अच्छा बताइए मैं आपसे नंबर फोन कर लू ठीक है ठीक ठीक है तो यह फिलहाल हम लोग महोत्सव में आए हैं और यहां पर ये जो अ सतलोक आश्रम का लखनऊ ये यहां पर स्टॉल लगा हुआ है हमने आकर के कुछ इनसे प्रश्न पूछे जैसे कि यहां पर कहा जाता है कि ब्रह्मा विष्णु महेश के पिता जो है वह कोई और है एक मतलब एक और एक और एक

00:28:15:24 एंटिटी है जिसको ये ब्रह्म कहते हैं और उनके ऊपर भी वो कबीर है जिन्हें हम यह जानते हैं कि जो कबीर थे वो रामानुज चार परंपरा से दीक्षित थे और विष्णु भगवान की पूजा करते थे मगर यहां पर यह सिखाया जा रहा है कि वह विष्णु की पूजा नहीं करते थे वह स्वयं परमेश्वर थे व सिखा के गए कि मैं परमेश्वर हूं मेरी जो है पूजा करिए इसके साथ ही साथ यहां पर यह भी सिखाया जाता है कि जो दुर्गा माता है उनके जो पति है वास्तविकता में वो वो ब्रह्म है वो शिवजी नहीं है शिवजी अलग है शिवजी अलग है ब्रह्म अलग है काल अलग है द दूसरी बात यह भी सिखाया जाता है कि इस्लाम के द्वारा प्रतिपादित होने वाला धर्म और जो सनातन धर्म ग्रंथ है उनके द्वारा प्रतिपादित होने वाला धर्म एक ही है तो यह सारी चीजों पर जब हमने यहां पर आकर कर के बात की तो यहां पर जो अंतिम उत्तर प्राप्त हुआ है वो यह हुआ कि आप समय ले लीजिए समय ले लीजिए और फिर आप आइएगा नहीं तो आप आपने क्या कहा है अभी अंत में क्या कहा आपने परमेश्वर आता है वो सबका पिता है उनका धर्म एक है तो इस्लाम क्या है ये बताइए ये सब काल ने पैदा किया सब तमाम धर्म बहुत से धर्म पंथ जो पूरे विश्व में चल रहे हैं सलाम इस्लाम क्या है कुछ भी हो कोई हो वो सब काल ब्रह्म द्वारा प्रतिपादित है

00:29:31:08 और परमात्मा के धर्म एक है उसमें हिंदू मुस्लिम नहीं होता परमात्मा का धर्म एक है वो सनातन है इस्लाम क्या है तो है लेकिन वो सनातन को खोजना है धर्म धर्म कोई मतलब नहीं निकल रहा भग जीने परमात्मा स्वयं आते हैं बह नहीं होए अंत का आपको जब भी समय मिलता है डेट समय फिक्स करके आ अच्छा पहले प्रश्न भी बता द और जैसे जैसे देखिए हमारा जो आपसे ज्ञान चर्चा या आप जो जानकारी ठीक है ना ये मतलब मतलब ये जो मनुष्य की चाह है चित्त की चाह वो कंप्लीट नहीं करेंगे इसी में कंप्लीट हो जाएगी आप सीमित कर रहे हैं ना आप सीमित कर रहे हैं हम सीमित नहीं कर रहे हैं हम सीमित नहीं कर रहे हैं ये जो क्वेश्चन इसमें 13 प्रश्न है इसी में आप जो पूछ रहे हैं इसी में कंप्लीट आंसर आ जाएगा अगर इसके बाहर का मेरा प्रश्न हुआ तो आप देंगे जवाब अगर मेरे पास बाहर का प्रश्न हुआ तो जवाब मिलेगा बाहर का प्रश्न यदि हमारे इन चारों धर्मों के पवित्र शास्त्रों के आधार पर अलग होगा उसमें प्रमाणित नहीं होगा तो वो मान्य नहीं होगा उसको हम नहीं मानेंगे अच्छा बस तो यह कौन तय करेगा कि इसमें शास्त्र में दिया है कि नहीं दिया है हमारे साद

00:30:46:08 ग्रंथ तो यह तो आपके है ना मैं आपको ब्रह्म सूत्र से बता रहा हूं अथातो ब्रह्म जिज्ञासा इसको मानेंगे कि नहीं नहीं हमारे ही क्यों आपके नहीं है तो फिर हमारे क्यों कह दिया आपने हमारे आप सबके है ना आपके ये हमारे नहीं है ये आपके हैं ये ये ये ये देखिए देखिए ऐसे मैं भी आपको गीता लाके दूंगा आप मान लोगे उसको जो गीता मैं लाके दूंगा उसको मान लोगे आप मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं आपको लाके दूंगा गीता मैं मैं आपको गीता लाके दूंगा मान लोगे क्या मैं गीता लाके दूंगा मान लोगे मेरे मानने या तो ये ये किस परिमाप पर निर्धारित होगा कितना मानने के लायक है इसका पैरामीटर क्या है

00:31:30:01 भाई किसी किताब से कितना मानना है कितना नहीं मानना ये किस पर आधारित है प्रिकल पर क्या प्रैक्टिकल है जिस चीज का प्रैक्टिकल हो वही सही है नहीं सब तो प्रैक्टिकल के नियम क्या है प्रैक्टिकल के नियम उसी में दिए हैं उसी में दिया है नियम क्या नियम किस में दिया है आपकी में गीता में रामायण में तो प्रैक्टिकल के नियम तो ये है कि राम जब जन्म लेगा तो वशिष्ठ के पास जाएगा उसके अनुसार भन मिलेगा कबीर अपने गुरु का ज्ञान नहीं

⬜ Not used yet · 00:31:55:13 – 00:32:13:06 (0:18)

00:31:55:13 दे रहे आपके हिसाब से व अपना ज्ञान तो इसका अर्थ क्या हुआ प्रैक्टिकल का नियम खारिज हो [संगीत] गयाने ठीक है ठीक

✅ This part is already used · 00:32:13:06 – 00:39:30:14 (7:17)

→ Used in: B · Video सतलोक आश्रम में 2023 की ज्ञान चर्चा at 30:08 ↗

00:32:13:06 इस दुनिया में जितने भी गुरु हैं शंकराचार्य आचार्य है उनको किसी को भी वह यथार्थ ज्ञान नहीं पता है जो कबीर साहब ने बताया दिया है दुनिया को अभी अभी अभी एक और रे ठीक है फिर आपने जो अंत में कहा है ना ये जो क्या कहते हैं कि उन्होंने दिया मेरा नाम शिवांश नारायण द्विवेदी मैं अभी बताता हूं बताता हूं मेरा कहना बस यह है कि आप यह कह रहे हैं कि रामानुजाचार्य परंपरा से रामानंद चार चार तक जो ज्ञान आया वो कबीर जी ने नहीं दिया अपने पास से नया ज्ञान दिया क्योंकि वो स्वयं परमेश्वर है अब बात कई इसमें बहुत सारी बात आप बनारस चले जाओ और रामानंद जी के आश्रम चले जाओ वहां पता कर लो देखिए उनकी गद्दी रामानंद जी के बाद उनकी गद्दी पर कौन बैठा बस बात खत्म जी वो खुद कबीर साहब को बताएंगे अरे अरे कबीर साहब को बताएंगे वो ठीक है मगर ज्ञान अगर बदल गया तो वो सनातन ज्ञान कहां से रहा बदला ही नहीं गया ना जो जिन्होने बदला वो गलत आप ही तो कह रहे हो जो गुरु ने जो ज्ञान दिया था परंपरा से वो ज्ञान कबीर ने नहीं दिया है यही तो कह रहे हो अरे मैंने नहीं कहा परंपरा अभी भी चली आ परस कह रहे थेने

00:33:28:09 आपका रिकर्ड है हम नहीं मानते क्योंकि गुरु ने जो ज्ञान उनको दिया था व गुरु का ज्ञान उन्होंने आगे नहीं बढ़या उन्होने अपना ज्ञान दिया फिर नहीं तो परमात्मा तो अपना देगा गुरु का ज्ञान आगे नहीं बढ़या ना मैं पूछ रहा हूं गुरु का ज्ञान आगे बढ़ाया कि नहींन चलिए खैर हमारा कहना बस इतना था मेरा परिचय है शिवांश नारायण द्विवेदी पुरी शंकराचार्य पुरी के शंकराचार्य जी का शिष्य हूं और और मेरा कार्य बस इतना है कि जो तथाकथित विचारधाराओं के आधार पर जो सनातन धर्म बट रहा है वह जो इस तरह का शोधन कार्य है वह कर करके लोगों को एक मत किया जाए इकट्ठा किया जाए जिससे कि लोग संगठित हो सुरक्षित हो विभिन्न विचार धाराओं के कारण अलग-अलग मत पंथ बन जाने के कारण हमारा समाज बढ़ चुका है जिसकी वजह से हां अब आप लोग अब आप नहीं होगा क्योंकि आपकी जो विचारधारा है आपने अभी कहा वेद को नहीं मानूंगा आपने कहा आपने कहा अथर वेद 117 16 मैंने कहा गीता का ऐसा अर्थ

00:34:46:04 आपको तो ये ये जो सार है ये आप मान रहे हो मुझे सिद्ध तो करो इसको कि ये सार है उसका किसका अरे क्या सामने लेके आऊ अवेद बोला है ना अब उसको लेके आइए अच्छा आप आप लेके इसमें जो लिखा है वो लेके आइए लेके आएंगे आप लाइए तो फिर फिर बात तो वही हो गई जो जैसे आप किताब में छपा हुआ दे रहे हो मैं अपने मुंह से बोल रहा हूं में आए हो अर्जेंसी भाई आपने स्टॉल लगाया हुआ है इमरजेंसी है क्या ये आप अपनी मनमर्जी से दोस्ता करने के लिए आए अरे बैठ के ही बात करने आए थे अब ये गर्म होने लगे ये वाले भैया ये इनका इनका सीन है ये गर्म हुए थे इनका आप इनकी आप रिकॉर्डिंग इनकी रिकॉर्डिंग देखिएगा आप साथ चलोगे आश्रम वहां हरियाणा चलिए मेरे साथ आप चलेंगे जहां मैं ले जाऊंगा मैं तो आपके स्टॉल तक आया हूं आप चलेंगे मेरे साथ तो फिर फिर वही बात हो गई ना भाई साहब आप आना अपने पवित्र सद ग्रंथ लेकर के तो मैं तो मैं तो अपना बोल रहा हूं ना कोट कर तो रहा हूं अगर ये सद ग्रंथ तो आप ये सद ग्रंथ है आपका मे को भी दिखाना पड़ेगा पवित्र सद ग्रंथ ले आए सगं पवित्र है ये सिद्ध करो ना कैसे तो यानी

00:36:01:08 आपके पास भी इस समय सिद्ध नहीं हो रहा है चलिए ठीक है लखनऊ महोत्सव में हिंदुओं को अपना ब्रेन वश कराना है तो लखनऊ महोत्सव में आइए अपने बच्चों को लेकर के ब्रेन वश कराइए माननीय योगी जी से मैं यह कहना चाहूंगा कि अगर वह महादेव की पूजा करते हैं मां भगवती की पूजा करते हैं महाकालेश्वर में मंदिरों के निर्माण करवाते हैं तो ऐसे स्टॉल क्यों लगने देते हैं महोत्सव में मैं कहना चाहूंगा माननीय गगी जी से कि उनको क्यों अनुमति दी जाती जब वो कहते ब्रह्मा विष्णु महेश के पिता कोई और है और दुर्गा दुर्गा के जो पति है वह शिवजी नहीं है वोह कोई और है जिसका नाम ब्रह्म है ये वो ब्रह्म नहीं है जो खुद ही जीव जगत और जगदीश्वर के रूप में प्रकट होता है वो ब्रह्म नहीं है ध्यान रखिएगा और सबसे बड़े वाले परमेश्वर वो कबीर जी है कबीर जी कौन जो खुद गोविंद के पुजारी थे तो ऐसे स्टॉल आप लोग लगवा हैं अनुमति बढ़ता है और इनकी जो पहली लाइन पर जो ये सब भ्रामक शिक्षाए लिखी हुई है जिसकी वजह से समाज में विकृति आती है अपना कोई परमाण कार्ड देंगे कोई कार्ड

00:37:11:22 का दोहरे अर्थ वाली बातों के आधार पर सनातन को इस्लाम के साथ नहीं मिलाया जा सकता है जो इन्होंने बात कही है भगवान एक जगह कह रहे हैं कि मैं अजन्मा अविनाशी हूं दूसरी जगह कह रहे हैं तेरे और मेरे कई बार जन्म हो चुके तो एक जगह परमार्थ की बात हो रही है कि हां ईश्वर वह है जिसका जिसका जिसको किसी ने जन्म नहीं दिया जिसका कभी जन्म नहीं होता मगर व्यवहार में ईश्वर का जन्म होता है ईश्वर जन्म लेता है अवतार लेता है प्रकट होता है और भगवान ने यह बात कही भी है कि मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी सभी भूतों का ईश्वर होते हुए भी योग माया को अपने अधीन करके प्रकट होता हूं मैं अपना सजन करता हूं तो इसके आधार पर क्या सनातन को इस्लाम के साथ समतुल्य बताया जा सकता है नहीं बताया जा सकता इसके अलावा यह जो बात है यह भगवान के बारे में ब्रह्म के स्वरूप के बारे में है और धर्म क्या है जिससे कि ब्रह्म को प्राप्त किया जाता है तो धर्म और ईश्वर में अंतर है मैं माननीय योगी जी से भी कहना चाहूंगा कि वो इसे संज्ञान मिले हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है कि वह संत कबीर दास जी को ईश्वर कहे इससे कोई आपत्ति नहीं है मगर यह शिक्षा देते समय वो वेद उपनिषद पुराण इनका संदर्भ ना ले अपने ग्रंथ स्वयं लिखे

00:38:26:26 हैं उसके आधार पर वो उन्हें अगर ईश्वर मानते तो माने हमें कोई आपत्ति नहीं है मगर वो इन इन ग्रंथों के आधार पर जो परंपरा प्राप्त हमारे जो धर्म ग्रंथ है इनके आधार पर वो ब्रह्मा विष्णु महेश के समतुल्य या उससे श्रेष्ठ किसी और को बताने की चेष्टा करते हैं जबकि संत कबीर दास जी स्वयं भगवान विष्णु के भक्त थे यह हम सभी जानते हैं कितने सारे उनके दोहे हैं विष्णु भगवान की भक्ति को समर्पित और आज संत कबीर दास जी की आड़ में अपने मंतव्य की पूर्ति हेतु ब्राह्मण शिक्षा का प्रचार प्रसार किया जा रहा है इसीलिए मैं माननीय योगी जी से कहना चाहूंगा कि इसे संज्ञान में ले और इस पर कारवाही करें और जो लोग इस वीडियो को देख रहे हैं मैं उनसे भी कहना चाहूंगा कि आप भी अपने आसपास जब ऐसी शिक्षा का प्रचार प्रसार होते हुए देखें जहां पर ईश्वर को बाधित किया जा रहा है सनातन धर्म ग्रंथों के साथ जहां पर ऐसे धर्म के बारे में बात की जा रही जो बदलता है सनातन धर्म ग्रंथों के साथ या फिर जहां पर ऐसा ज्ञान दिया जा रहा है जो परंपरा प्राप्त आचार्यों से नहीं मिला है तो वहां पर तुरंत ऐसे प्रचार प्रसार को रोकिए ऐसी शिक्षा का प्रतिकार करिए

⬜ Not used yet · 00:39:30:14 – 00:39:54:00 (0:24)

00:39:30:14 आप अगर अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर अपने इस तरह के वीडियोस डालेंगे तो हमें वहां पर टैग करिए वहां पर हमारे शैग यूज करिए शग सनातन या सनातना भास शग आदित्य वाहिनी एम3 जीी यानी कि मिशन गुरु गोविंद और ग्रंथ जय श्री राम

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 39:54 · 18 Dec 2023

रामपाल के सतलोक आश्रम का सच | Brahma Vishnu Mahesh ka pita jyot niranjan | Sanatan ya Sanatanabhas

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