⬜ Not used yet · 00:00:01:21 – 00:17:36:25 (17:35)
00:00:01:21 जैसे मखी होती है वो हमेशा क्या करती है फूलो पर जाकर बैठती है अच्छी जगह पर बैठती है लेकिन मक्खी जो होती है वो हमेशा गंदी जगह पर जाकर बैठती है अगर अच्छी चीज भी रखी होगी तो वो गंदी जगह पर ही जाकर बै जय श्री राम तो आज हम एक रिएक्शन वीडियो बना रहे हैं एक मान्यवर हैं उन्होंने हमारा कोई वीडियो देखा है जिसमें हमने रास्ते पर जो इकन की यथारूप गीता उसका प्रचार प्रसार करने वाले कुछ लोग थे उनसे हमने कुछ प्रश्न किए थे और उन्होंने प्रश्न का जवाब नहीं दिया था बल्कि असमर्थता प्रकट की थी बल्कि हमारा कैमरा वगैरह भी छीनने लगे थ तो इस वीडियो पर एक रिएक्शन वीडियो बनाया गया है स्कन के एक फॉलोअर है उनके द्वारा अब वो कोई पदाधिकारी भी हो सकते हैं मुझे नहीं पता उनके बारे में ज्यादा तो उन्होंने एक रिएक्शन वीडियो बनाया सर्वप्रथम मैं आपको यह बता दूं कि उन्होंने अपनी रिएक्शन वीडियो में हमारा उपहास भी उड़ाने का प्रयास किया है अप्रत्यक्ष रूप से बिना कहे जैसे होता है ना मीठे से उस तरह से कुछ प्रयास किया है और हम अपने बारे में ये बता दे कि हमने आज तक जितने भी वीडियोस बनाए हैं जिसमें हमने स्कोन की जो संशय पूर्ण शिक्षाए जो विवादास्पद शिक्षाएं जिनका उत्तर कभी प्राप्त नहीं हो सका संतुष्टि जनक उन पर केवल प्रश्न उठाते हैं हम अपने वीडियो में हमने कभी भी किसी के लिए कोई अभद्र शब्द का उपयोग नहीं किया कभी भी कोई अमर्यादित बात नहीं कही कभी भी किसी का उपास तक नहीं उड़ाया
00:01:16:21 मैंने अपनी बात करूं तो मैंने अभी तक अपने किसी भी वीडियो में किसी का उपास नहीं उड़ाया तो पहली बात तो यह है कि मेरा निवेदन है उन मानवर से आपसे मेरा निवेदन है अगर आप यह वीडियो देख रहे हैं कि आप बिना किसी का उपहास उड़ाए भी अपने उत्तर को वहां पर रख सकते हैं खैर अच्छा अब यहां से जब हम शुरू करते हैं तो एक चीज और आती है कि जब भी स्कन की शिक्षाओं पर प्रश्न किया जाता है तो ज्यादातर ऐसे लोग होते हैं जो जिस मुद्दे पर बात हो रही जिस विषय पर बात हो रही है उस पर बात ना करके इधर उधर के आरोप लगाते हैं उपमा देते हैं जैसे अभी अमोग लीला जी का एक वक्तव्य आया था उन्होंने उसमें कहा कि भाई इस कौन की बुराई करने वाले वह हैं हाथी चले बाजार और अमुक अमुक भोके हजार तो यह भी उन्होंने कहा तो इसलिए भाई यह वीडियो क्योंकि देखने वालों को तो यही लग रहा होगा कि यह भी एक किकन की निंदा हो रही है जबकि ये निंदा ना समझे से इसे एक चर्चा समझे और वास्तविकता तक पहुंचने का प्रयास समझे तो इसलिए हम यहां पर बता दें कि जो स्वान होता है वह हाथी जब गुजरता है तो दूर से भ होता है और हाथी जब उसकी ओर देख लेता
00:02:31:25 है ना तो वह दुम दुबा के भाग जाता है तो इसलिए हमारी तुलना स्वान से नहीं करनी चाहिए क्योंकि इस्कॉन के विषय में कोई भी वीडियो बनाने से पहले हम स्वयं उनके मंदिर में गए थे लखनऊ इकन टेंपल में हम गए थे जहां पर उनके लोग थे सब तरफ से हम उनसे घिरे हुए थे वहां पर जाकर के हमने उनसे एक सभ्यता पूर्वक वहां के जो अध्यक्ष थे उनसे वार्तालाप किया और प्रयास किया कि जो संशय हैं हमारे स्कोन से प्राप्त होने वाले वह दूर हो सके मगर उनका जो प्रति उत्तर था हमारे प्रश्नों के संबंध में जो सबसे प्रमुख बात है जो मुझे याद रही वह यह है कि उन्होंने अंत में यह कहा शुरुआत में उन्होंने हमारे प्रश्नों के उत्तर दिए प्रारंभ में और बाद में जब प्रश्नों का जो स्तर है वह कठिन होता गया तो अंततः उन्होंने ये कहा कि शास्त्रों की गहराई में जाना हमारा उद्देश्य नहीं है और उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मैं मूर्ख हूं मुझे वेद पुराण उपनिषद का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं है और इसके साथ ही साथ उस वीडियो में भी ये वीडियो हमारे
00:03:44:00 [संगीत] ठीक है कोई नहीं तो सबसे पहले तो यह बात मैंने आपको इसलिए बताई कि हम स्वान नहीं है क्योंकि स्वान दूर से बात भोगता है और उसके बाद जैसे ही उसकी ओर देखो तो वो भाग जाता है मगर हम वो हैं जो हाथी के पास अगर आप स्वयं को हाथी समझते हैं तो आपके गढ में जाकर के वहां हाथी के पास जाकर के अच्छे से बात करके और तब आए थे और जो जिस रूप में आप अपने आप को हाथी समझ रहे हैं तो आपका जो हाथी का जो प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जो रिप्रेजेंटेटिव है आपके उन्होंने हाथ जोड़ लिए थे मैं इसमें अपना घमंड नहीं प्रस्तुत कर रहा हूं मगर जो हुआ था वह फैक्ट आपको बता रहा हूं अब इसी प्रकार से अभी जो यह रिएक्शन वीडियो बनाया गया है यह मान्यवर के द्वारा तो इसमें भी उन्होंने क्या किया है कि जो हमने जिस पॉइंट पर क्वेश्चन किया है उस पर बात ना करके पहले तो पास उड़ाने का प्रयास किया जैसे अमोग लीला जी ने कर दिया था कि हाथी चले बजार कुत्ते भोके जार तो अमोग
00:04:59:06 लीला जी की तरह ही जो अभी ये जो रिएक्शन वीडियो बनाया गया उसमें भी उन्होंने फैक्ट पर बात ना करते हुए विषय पर बात ना करते हुए पहले उपास उड़ाया गया और मैं ये देख रहा हूं जितने भी फॉलोअर्स हैं स्कन के वो जब हम इस तरह के काउंटर क्वेश्चंस वगैरह करते हैं स्कन की शिक्षाओं पर तो वो आकर के उन क्वेश्चंस को जवाब देने की बजाय बाकी सारी बातें करते हैं कि अ तेरे से नहीं होगा व्यूज के लिए तू यह सब कर रहा है मतलब बाहर के आरोप अगर हमने कोई शास्त्र का प्रमाण दिया तो ऐसा नहीं है ज्यादातर लोग हैं जो शास्त्र का प्रमाण के बिना ही बात करते हैं खैर तो इन्होंने क्या किया इन्होंने कहा कि भाई मुझे देख कर के उन्हें मधुमक्खी और मक्खी की याद आती है कि जैसे मधुमक्खी जो होती है वह फूलों पर ही बैठती है और सिर्फ फूलों की ही महक लेती है मगर मक्खी जो होती है वह जाकर के मल पर बैठती है और इसके संदर्भ में उन्होंने उदाहरण यह दिया कि भगवत गीता में कई जगह पर विष्णु और कृष्ण की एकता दिखाई गई है मगर उन्होंने यही दूसरे अध्याय का दूसरा श्लोक बोल दिया कि विष्णु जी पूर्णेश्वर वान नहीं है तो सबसे पहली बात तो मैं आपको ये याद दिलाना चाहूंगा कि हमको निम्न प्रस्तुत करने के लिए ही सही पर आपने स्वयं य स्वीकार कर लिया कि आपके द्वारा जो भाष्य लिखा गया है श्रीमद् भगवत गीता का उसमें कहीं कहीं पर मल
00:06:14:07 है जिस पर कोई मक्खी बैठ सकती है है ना अब जब आगे चले कि इन्होंने किस प्रकार से क्वेश्चन ये था हमारा कि दूसरे अध्याय के दूसरे श्लोक में जो व्याख्या हुई है उसमें यह लिखा हुआ है कि कृष्ण के समान ब्रह्मा विष्णु महेश भी नहीं है यानी कि विष्णु भी कृष्ण से थोड़ा सा डाउन है और वहां लिखा हुआ है कि विष्णु भी कृष्ण के समान पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है अर्थात यह है कि कृष्ण ही जो है भगवान का एक सर्वो सर्वोच्च रूप है और उनके अलावा विष्णु भी उनसे भिन्न है और निम्न है तो यह उस श्लोक से उस व्याख्या से प्रस्तुत हो रहा है तो हमने यही क्वेश्चन किया था और इसी के जवाब में उन्होंने वीडियो बनाया पर सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक बात यह है कि इन्होंने बहुत सारी बातें की अपने रिएक्शन वीडियो में इन्होंने हमको अप्रत्यक्ष रूप से मक्खी बोल दिया इन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से अपनी जो भाष्य है भगवत गीता का जो लिखा हुआ उसमें कहीं किसी एक अंश को मल भी बोल दिया परंतु उन्होंने उस प्रश्न का उत्तर ही नहीं दिया है जो प्रश्न किया गया है कि विष्णु को पूर्ण ऐश्वर्य वान क्यों नहीं माना गया है दूसरे अध्याय के दूसरे श्लोक की व्याख्या में इस बारे में उन्होंने बात नहीं की इस बारे में उन्होंने क्या कहा कि भाई बहुत सी जगह पर विष्णु और
00:07:29:12 कृष्ण को एक माना गया है तो बिल्कुल हमने यह तो आरोप नहीं लगाया था ना कि कि विष्णु और कृष्ण को आपने यहां यहां पर एक क्यों बताया हमारा प्रश्न यह था कि आपने विष्णु के लिए य लाइन पंक्ति क्यों लिखी है कि विष्णु पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है नारायण पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है अच्छा आप अगर यह कहो कि हम अगर यहां लिख भी दिया तो क्या होता है हमने कई जगह पर अच्छा भी तो लिखा है कृष्ण और विष्णु की एकता दिखाई है कई जगह पर हमने कृष्ण और विष्णु को एक बताया है कई जगह पर हमने विष्णु की जगह कृष्ण कृष्ण की जगह पर विष्णु शब्दों का उपयोग किया है तो यह तो ठीक इस प्रकार से हो गया कि कोई व्यक्ति अपनी धर्मपत्नी को बहुत प्यार करता है पूरे साल प्यार करता रहता है और अगर किसी दिन उसने उसे गाली दे दी किसी दिन उसने उस पर हाथ उठा दिया या कोई अमर्यादित व्यवहार कर दिया तो उससे क्वेश्चन ना पूछा जाए क्योंकि उसने पूरे साल बहुत अच्छे-अच्छे कार्य किए हैं इसलिए वह अगर कोई पाप कर्म कर रहा है कोई दुरा चरण कर रहा है तो उससे क्वेश्चन ना पूछा जाए उससे प्रश्न ना पूछा जाए क्या यही आपका न्याय है आपने कहा कि आप कृष्ण और विष्णु में कोई अंतर नहीं समझते तो क्या आपने कहीं पर भी अपनी पूरी ग्रंथावली में कृष्ण भावना भावित की जगह विष्णु भावना भावित लिखा है आपने जिस तरीके से विष्णु के लिए यहां
00:08:44:13 पर लिख दिया कि विष्णु पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है क्या आपने अपनी पूरी ग्रंथावली में कृष्ण पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है ऐसा लिखा है तो फिर आपकी जो इक्वलिटी है वो तो जाहिर हो ही नहीं रही इन चीजों से हां ये कहते हुए कि हम विष्णु और कृष्ण को एक मानते हैं आप अप्रत्यक्ष रूप से कृष्ण को श्रेष्ठ और विष्णु को निम्न सिद्ध करने का प्रयास भी करते हो जैसे कि आप कहते हो कि कृष्ण ही ओरिजिनल फॉर्म है विष्णु का यानी कि विष्णु का जो विष्णु फॉर्म है विष्णु रूप जो है वो ओरिजिनल नहीं है कृष्ण उसका ओरिजिनल फॉर्म है और क्या कहते हो कि भाई कृष्ण जो है वो वाला रूप है जो घर के जो जिनके साथ हम खेल सकते हैं जो पिता के कई रूप होते हैं अरे भाई पिता के कई रूप होते हैं पर सभी बच्चों को आवश्यक नहीं कि वही रूप अच्छा लगे जो घर वाला हो हो सकता है कि किसी किसी को वो रूप अच्छा लगे जिसमें उसके पिता यूनिफॉर्म में हो कहीं पर वर्दी में खड़े हो एटीट्यूड में खड़े हो वो फॉर्म अच्छा लगे और भगवान तो इतने दयालु होते हैं कि उनको किसी भी रूप में भजो अगर भाव अच्छा है तो वो उनको जरूर मिलते हैं अपने भक्तों को जैसे कि सुदामा जब भगवान श्री कृष्ण से मिलने गए थे तो उस समय श्री कृष्ण किस फॉर्म में थे घरेलू वाली फॉर्म में या पदाधिकारी वाली फॉर्म में और किस तरीके से दौड़े चले आए थे सुदामा के पास खैर फिलहाल
00:09:59:18 बात यह चल रही है कि आप अप्रत्यक्ष रूप से किस प्रकार से विष्णु रूप को निम्न और कृष्ण रूप को श्रेष्ठ सिद्ध करते हो मैं यह बात तब कह रहा हूं जब आप भेद करते हैं कृष्ण और विष्णु में हम भेद नहीं मानते कृष्ण और विष्णु में हम तो हरि हर में भेद नहीं मानते आप तो कृष्ण विष्णु में भेद कर रहे हैं हरि हरि में भेद कर रहे हैं इसके अलावा स्कोन के जो प्रमुख प्रतिनिधि हैं उनके कई वीडियोस ऐसे हैं जिसमें कि वो विष्णु रूप के लिए निम्न को बिल्कुल स्पष्ट रूप से प्रकट कर रहे हैं ये वीडियो देखिए आप थोड़ा सा विष्णु एंड कृष्ण आ सेम और हम लड़ भा थ पढ़ लो थोड़ा पढ़ लो तोन आ जाएगा कृष्णा कॉल करता धाम से वृंदावनम से या विष्णु या सो कृष्णा इ परम सत्य धीमही ही परम सत्य ही इ नॉट जस्ट गॉड कृष्णा इज मोर देन गॉड गड कन विष्णु नारायण गॉड और विष्णु आए इस तरह से हमें पता लगता है कि कृष्णा बड़े हैं अवतारी है और नारायण उनके और विष्णु अब आप मुझे कोई भी ऐसा वीडियो दिखा सकते हैं क्या जिसमें कि कृष्ण की निम्न प्रकट हो रही हो कोई ऐसा प्रतिनिधि हो इसकन का जो कृष्ण की निम्न होता को प्रकट कर रहा हो और इस तरह से मजाक उपास इस तरह से बात कर रहा हो कृष्ण के बारे में विष्णु को सर्वोपरि रखते हुए तो ये इक्वलिटी कहां है इसका अर्थ है एक आपने कहावत सुनी होगी एक्शन स्पीक्स
00:11:14:19 लाउडर देन वॉइस आपने कहा कि हम विष्णु और कृष्ण को एक मानते हैं मगर जब जब विष्णु और कृष्ण की बात हो रही है तो आप कृष्ण को प्रधान और विष्णु को निम्न रख रहे हैं आपको प्यार है हमें भी है मगर अपनी भावनाओं को आप सार्वभौमिक नियम बनाकर थोप मत लोगों के ऊपर यह आपकी व्यक्तिगत भावना हो सकती है कि आपका कृष्ण के प्रति प्रेम होने का यह भाव है हमारा भी राम के प्रति प्रेम होने के बहुत सारे तर्क है हमारे पास कि हम इसलिए प्यार करते हैं राम को आप बताते हो कि भाई वह पूर्णिमा का चांद होता है जो वो जो है फलाने दिन ऐसा दिखता है फलाने दिन ऐसा दिखता है मगर कृष्ण जो है वो पूर्णिमा का चांद है जब आप खुद देख रहे हो आप अब इस बात में तो आप स्वयं ही अपना वो कर रहे हो रिपीटेशन क्या कर रहे हो कि चांद का पूरा ना दिखाई देना य चांद की कमी नहीं है हम मनुष्यों की कमी है हम मनुष्य अन्य दिनों में चांद को पूरा नहीं देख पा रहे य हमारी अपूर्णता है यह भगवान की किसी और आकृति में दिखने की अपूर्णता नहीं है वह तो हर तरह से वही चांद है हमको नहीं दिख रहा है तो इसलिए भले ही हम उसे किसी भी रूप में ध्या हम ध्या एक ही चांद को रहे तो आप क्यों यह बात लोगों को पेस्ट करना चाहते हो कि भाई कृष्ण
00:12:29:25 ही पूर्ण रूप है मधवा चार्य जी ने तो अपने गीता भाष्य में लिखा है विष्णु के सभी रूप पूर्ण होते हैं तो आपने यहां पर कैसे कह दिया कि विष्णु जो है पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है हां जहां जहां पर शास्त्रों में प्रमाणिक रूप से विष्णु को मोक्ष दायक कहा जा रहा होगा विष्णु रूप को सर्वोपरि कहा जा रहा होगा वहां आप जरूर आप जो यह बात बार आपने जो अपनी वीडियो में ये बात बोली ना कि कई जगह पर कृष्ण की जगह विष्णु लिखा है विष्णु की जगह कृष्ण लिखा है तो विष्णु की जगह पर कृष्ण वहीं पर लिखा होगा जहां पर शास्त्रीय प्रमाणों के द्वारा विष्णु को सर्वोच्च कहा जा रहा होगा और आपको वहां पर कृष्ण को रखना होगा तो वहां पर आप क्या करते हो विष्णु की जगह क्योंकि प्रमाण प्रमाण जो है ज्यादातर विष्णु रूप के बारे में है तो आप विष्णु की जगह पर कृष्ण तभी लिखते हो जहां पर विष्णु की श्रेष्ठता सर्वोच्चता सिद्ध हो रही हो वहां पर कभी आपने कृष्ण को नहीं रखा जहां पर विष्णु की निम्न सिद्ध हो रही हो यह बात यहीं से पता लग जाती है जैसे आपने विष्णु के लिए लिख दिया अपने मन से कि विष्णु पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है नारायण पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है आप एक लाइन दिखा दीजिए इस कोन की ग्रंथावली में जहां पर लिखा हो कि कृष्ण जो है पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है तो
00:13:44:26 आप क्या कर रहे हो कि कह तो रहे हो कि हम विष्णु और कृष्ण को एक मानते हैं मगर इस चीज को निर्वाह नहीं कर रहे हो अब जैसे कि हम अन्य सिद्धांतों की बात करें हम जो अन्य विचारधाराएं हैं ईश्वर के बारे में उनकी बात करें तो सारी विचारधाराएं कहेंगी कि हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है जैसे इस्लाम हमारा ईश्वर सब कुछ कर सकता है ऐसा दुनिया में कोई कार्य नहीं जो वो ना कर सके मगर जब उनसे पूछो कि आपका भगवान जन्म ले सकता है आपका ईश्वर जन्म ले सकता है तो कहेंगे नहीं क्या वोह संतान को जन्म दे सकता है नहीं उसकी संतान कैसे हो सकती है जब उसकी कोई पत्नी नहीं है तो यानी कि उन्होंने कहा तो कि हम तो सर्वशक्तिमान कहते हैं हम तो सर्वशक्तिमान कहते हैं मगर आगे अपने वचनों में इस बात को निभाया नहीं आप भी यही कर रहे हैं अपने को सेफ साइड रख रहे हैं कि भाई विष्णु और कृष्ण एक है विष्णु और कृष्ण एक है मगर आगे अपने इन वचनों को निर्वाह नहीं कर रहे हैं क्या कर रहे हैं वहां पर कृष्ण क्योंकि अपने घर का सा है इसलिए ज्यादा प्रिय है इसलिए ज्यादा सर्वोच्च है कृष्ण इज द ओरिजिनल फॉर्म और इन और इस शिक्षा को आपके जो प्रतिनिधि है प्रमाणिक प्रतिनिधि व इन शिक्षाओं को एग्जीक्यूट भी कर रहे हैं क्रियान्वयन भी कर रहे हैं अब कुल मिलाकर के जो मैंने शुरू में बात एक कही थी आपसे कि आपने मेरे प्रश्न
00:15:00:02 के उत्तर के संबंध में कोई बात ना कह कर के बाकी सारी बातें कही है तो इस विषय में मैं कोई अभद्र अमर्यादित टिप्पणी तो नहीं करूंगा उपास भी नहीं करूंगा मगर मुझे एक बात जरूर याद आ रही है कि जब हम छोटे में सामाजिक विज्ञान का प्रश्न पत्र हल करते थे तो कभी-कभी ऐसा होता था कि हमें जिस प्रश्न का उत्तर नहीं मालूम है उसके लिए यह होता था कि भाई सामाजिक विज्ञान है तो इसमें हम बारे में खूब सारा लिख सकते हैं तो हमें ज्यादा ज्यादा नहीं मालूम है तो उसी बात को हम रा घुमा फिरा करके बार-बार बोलते थे तो वही चीज आपने इसमें की जैसे सामाजिक विज्ञान में क्या है कि भारत एक विविधताओं में एकता का देश है अब हम इसी को बार-बार कहेंगे एकता में विविधताओं वाला देश है भारत भारत एकता वाला देश है भारत विभिन्नता में एकता वाला देश है हमारे पास इससे इसके अलावा और कोई लाइन ही नहीं है तो हम बार-बार यही लाइन बोलेंगे तो आपने भी यही किया है जो प्रश्न पूछा गया है कि भाई आपने नारायण को पूर्ण ऐश्वर्य वान क्यों नहीं माना दूसरे अध्याय के दूसरे श्लोक में इसका उत्तर क्या है वोह तो आपने दिया नहीं आपने सब कुछ बता दिया हमने यहां एक माना है हमने वहां एक माना है हालांकि उसमें भी
00:16:15:08 मानते मानते आपने कई जगहों पर खुद यह सिद्ध कर दिया कि हम जो है कृष्ण को ही हम भेद करते हैं हम कृष्ण को श्रेष्ठ मानते हैं परंतु अंततः विष्णु और कृष्ण एक है तो भाई साहब अपनी वाणी और अपने शब्दों का मिलान करिए और ऐसी बात बोलिए जिसका आप निर्वाह भी करें ठीक है और अंततः कुछ बातें मैं आपको याद दिला दूं आपने पढ़ने की बात कही आप कोई पदाधिकारी हैं कि नहीं कोई अधिकृत प्रतिनिधि है कि नहीं इकन के यह मुझे नहीं पता मगर इकन के अधिकृत प्रतिनिधि य बात बोलते हैं कि शास्त्रों की गहराई में जाने का हमारा कोई उद्देश्य नहीं है तो शास्त्र पढ़ने की बात आप कैसे कर सकते हैं जब इस्कोन की तरफ से इस्कोन का प्रतिनिधि बोल रहा है कि शास्त्रों की गहराई में जाना हमारा उद्देश्य नहीं है इसके अलावा इस्कोन द्वारा अधिकृत रूप से नियुक्त होते हुए भी उन्होंने स्वयं की असमर्थता प्रकट करते हुए इकन की असमर्थता को भी प्रकट किया हमारे प्रश्नों का उत्तर ना दे पाने में मैं मूर्ख हूं मुझे किसी वेद पुराण उपनिषद का ज्ञान नहीं है और शास्त्रों की गहराई में जाना हमारा उद्देश्य नहीं है तर्क कुतर्क वितर्क
00:17:30:26 शास्त्र के विभिन्न गहराइयां इनमें जाना हमारा उद्देश्य नहीं है हम
✅ This part is already used · 00:17:36:25 – 00:17:44:26 (0:08)
→ Used in: B · Video कृष्ण और अल्लाह एक हैं : शिवजी भगवान नहीं हैं Iskcon president lucknow at 0:03 ↗
→ Used in: A · Video Does Iskcon dharma Follow Sri Chaitanya Mahaprabhu | Aparimay shyam das presiden... at 4:46 ↗
00:17:36:25 इस बात को समझता हूं कि मैं खुद अव्वल दर्जे का मूर्ख हूं और मुझे कोई वेद पुराण उपनिषद का ज्ञान नहीं है
⬜ Not used yet · 00:17:44:26 – 00:19:40:00 (1:55)
00:17:44:26 तो फिर आप वेद पुराण उपनिषद की बात कैसे कर सकते हो जब आपके अधिकृत प्रतिनिधि ये बोल रहे हैं कि शास्त्रों की गहराई में मैं जाना ही नहीं है आप क्यों जा रहे हो हालांकि आप गए और हमने आपको आपका उत्तर भी दिया अब बात यह आती है कि इकन के एक अधिकृत प्रतिनिधि होते हुए उन्होंने जो भी किया यदि वह सही है तो आपको वही करना चाहिए आपको हाथ जोड़ना चाहिए स्वयं को मूर्ख कहना चाहिए और शास्त्रों को पढ़ने की बात नहीं कहनी चाहिए ज्ञान ज्ञान लेने की बात तो दूर आपको आप जो शास्त्रों का संदर्भ दे रहे हो यह भी आपकी आपके प्रतिनिधि के विरोध में है जिसको आपने स्वयं वहां बिठाला है जिस संस्था का पक्ष ले रहे हो और यदि वह गलत है उनको यह नहीं करना चाहिए था जो उन्होंने वक्तव्य दिए हैं य नहीं कहने चाहिए थे तो कम से कम आप एक लिखित में एक यह कहिए कि हमारे प्रतिनिधि ने उस दिन यह लाइंस यह पंक्तियां गलत कही स्वीकार है तब बात करिए वरना आपका तो कोई मुह है ही नहीं हमसे बात करने का और फिर भी अगर बात कर रहे हो तो उस प्रश्न का तो उत्तर दो जो पूछा गया है विष्णु पूर्ण ऐश्वर्य वान
00:19:00:06 है या नहीं और अगर नहीं है तो यहां क्यों लिखा है अगर विष्णु और कृष्ण में कोई भेद नहीं है तो आप क्यों कह रहे हैं कृष्ण इज द ओरिजिनल फॉर्म ऑफ विष्णु आप क्यों आपके जो अमोग लीला प्रभु है वह क्यों विष्णु की निम्न और कृष्ण की श्रेष्ठता दिखा रहे हैं आपके वचनों में और आपकी जो व्याख्या है उसमें मिलान क्यों नहीं हो रहा है तो इन बातों पर विचार करिएगा कोई अ व्यवहार हो गया हो तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूं जय श्री
00:19:38:10 राम
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Reply to @Association | Vishnu & Krishna | This is not the theory of Shrila Prabhupad
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