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00:00:04:21 इकन के द्वारा दी जाने वाली शिक्षाओं में से एक और विवादास्पद शिक्षा है कि शिवजी परम वैष्णव है और वह भगवान के सबसे बड़े भक्त हैं श्री कृष्ण के और इसके लिए एक उदाहरण भी दिया जाता है कि भगवान श्री कृष्ण की रासलीला के समय शिवजी ने उस रासलीला में प्रवेश मांगा था मगर उन्हें अनुमति प्राप्त नहीं हुई थी मतलब यह हालत है शिवजी की कि वो कहीं जाना चाहते हैं उनको अनुमति प्राप्त नहीं हुई मगर एक पक्ष को छुपाया जाता है महाभारत आदि कई शास्त्रों में इसका वर्णन है कि श्री कृष्ण के रूप में राम के रूप में यहां तक कि विष्णु के रूप में भी उन्होंने जो भक्ति की है वो शिव की की है यानी कि अगर सबसे बड़े वैष्णव शिव हैं तो सबसे बड़े शैव जो है वो विष्णु है राम है कृष्ण है भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत में उपमन्यु ऋषि से ऑफिशियल शिव के नाम की दीक्षा लेकर के 1000 वर्षों तक शिव जी की तपस्या की थी और उन्होंने वहां पर ये तक कोट किया है कि मुझे कोई अगर वर दे सकता है तो वो केवल और केवल शिवजी है अब य यहां पर एक डुअल स्टेटस देखने को मिलता है कि अगर शिवजी उनकी भक्ति करेंगे तो इसको इकोन वाले कहते कि हां ये शिवजी देखिए सबसे बड़े भक्त हैं मगर जब भगवान श्री कृष्ण शिवजी की भक्ति करेंगे तो यहां पर वो कहेंगे ये तो उनकी लीला है आप यह कहते हैं कि शिवजी सबसे बड़े वैष्णव है मगर भगवत गीता यथारूप के दूसरे अध्याय के 62 में श्लोक
00:01:19:27 में शिव जी की जो वैष्णव है परम वैष्णव होता वो भी भंग कर दी गई है यह कहते हुए कि शिवजी अपने ऊपर कंट्रोल नहीं कर पाए अपनी भक्ति के माध्यम से वो कंट्रोल नहीं कर पाए वहीं पर कोई दूसरे भक्त थे जिन्होंने अपने ऊपर नियंत्रण कर लिया और वह भक्ति में रमे रहे इंद्रियों के अधीन नहीं हुए मतलब शिवजी भगवान नहीं है परम वैष्णव है और अगर हम ध्यान से देखेंगे तो इकन के अकॉर्डिंग शिवजी परम वैष्णव भी नहीं है अब वो क्या है इकन ही बताएगा जहां एक और हमने देखा है कि इकन के अनुयाई इकन के प्रतिनिधि हमेशा शास्त्र पढ़ने की बात करते हैं कहते हैं कि शास्त्र पढ़िए तब अपने धर्म को जान पाएंगे शास्त्र पढ़िए और जब हम हम उनके ऑफिस में उनके मंदिर के अध्यक्ष के पास जाते हैं और इस तरीके के प्रमाण रखते हैं कि यहां यह लिखा है यहां ये लिखा है इसका क्या करें तो जब उनके पास उत्तर नहीं होता है तो वो स्वयं ये कहते हैं कि शास्त्रों की गहराइयों में ना जाएं केवल हरे कृष्ण का जाप करें मतलब उन्होंने जो कह दिया है उसको मान लीजिए और बिना शास्त्रों के प्रमाण के बस आप वो जो कह रहे है वो सोचने लग जाइए अच्छा इन सब बातों के बाद मैं एक बात और बताता चलू कि शंकराचार्य में शंकर आ जाने की वजह से अक्सर लोग ऐसा सोच लेते कि शंकराचार्य शंकर
00:02:34:28 की तरफ वाले हैं ऐसा नहीं है शंकराचार्य जी के हिसाब से ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश इन पांचों में कोई भेद नहीं है समय-समय पर कल्प भेद से भगवान के इन पांचों रूपों की परब्रह्म होता वेदों में भी है और पुराणों में भी है और ऐसा नहीं है कि शंकराचार्य जी का शास्त्रार्थ बौद्धों को हराने के बाद जैनों को हराने के बाद हिंदू धर्म को एक करने के लिए सनातन धर्म को एक करने के लिए केवल वैष्णव के साथ नहीं हुआ था शवों के साथ भी हुआ था शकतो के साथ भी हुआ था तो शंकराचार्य का मतलब यह नहीं है कि सिर्फ शैव की तरफ के लोग ना शंकराचार्य का मतलब है जो सार्वभौम गुरु पद है वो यह वो पद है यहां से वह शिक्षा मिलती है जिसके सानिध्य में सनातन समाज एकत्रित हो सकता है वरना वो झगड़ते रहेंगे कि नहीं हम शिव को नहीं मानते हम विष्णु को नहीं मानते मैं खुद अपनी बात बताऊं तो मैं प्रभु श्री राम का भक्त हूं यानी कि वैष्णव मगर मैं स्मार्थ होते हुए ही वैष्णव हो सकता हूं स्मार्थ का अर्थ पांचों को बराबर समझना मगर उन पांचों रूपों में से किसी एक में हमारी श्रद्धा ज्यादा होती है पुनर्जन्म के प्रभाव से या इस जन्म के संस्कारों के कारण अब बात ये आती है कि फिर भक्ति करें कैसे आप करके देखिएगा एक बार कि जब आपको जिसमें आपका
00:03:50:04 ध्यान ज्यादा लगता है जो आपको ज्यादा अट्रैक्ट करता है भगवान का जो भी रूप राम कृष्ण हनुमान जो भी रूप आपको ज्यादा अट्रैक्ट करता है आप बाकी के जो जैसे हनुमान जी शिव जी के अवतार हैं तो आप पांचों देवों से कहिए हे ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश आप मुझे हनुमान जी के रूप में दर्शन दीजिए और मैं हनुमान जी के रूप में आपकी भक्ति करना चाहता हूं और फिर देखिएगा आपकी भक्ति जो होगी कितनी संतोष जनक होगी इस हरि हर के भेद से आप उठ जाएंगे मां भगवती और ब्रह्मा जी की तुलना से आप बाहर निकल आएंगे चला करता है कि भाई वो वाले भगवान छूट गए वो वाले भगवान छूट गए सब खत्म हो जाएगा और फिर देखिएगा आप कितनी संतोष जनक तरीके से उनका ध्यान लगाएंगे
00:04:37:03 ब
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Iskcon Demigod Shiv is the Ultimate Vaishnav | but What about Lord Vishnu | Sanatan or Sanatanabhas
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