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00:00:04:18 जय श्री राम यह वीडियो मैंने जो कल वीडियो डाला था जिसमें मैंने इकन और आर्य समाज के बीच में जो विवाद चल रहा है या कहे कि अमोग लीला जी और जो राहुल आर्य जी उनके बीच में जो विवाद चल रहा है उसके बारे में मैंने अपना एक पॉइंट ऑफ व्यू कल प्रस्तुत किया था तो उस पर काफी अभद्र कमेंट करने वाले इसन केलो आ रहे हैं हालांकि मैंने उनको वहां पर भी जवाब दिया है एक फॉलोअर और है जो काफी दिनों से लगातार मुझे कमेंट्स के माध्यम से बात करने का प्रयास करते हैं पर ऐसा कई बार हुआ है कि मैंने उ उनसे यह भी कहा है कि आपको अगर अपने पक्ष पर अपने विश्वास पर दृढ़ता है मजबूती है तो आप किसी ऑनलाइन मंच पर आकर के सामने से वार्तालाप कर लीजिए एक स्वस्थ चर्चा कर लीजिए क्योंकि इस प्रकार से कमेंट्स के माध्यम से अपने भाव को अपने व्याख्या को पूरी तरीके से प्रस्तुत कर पाना संभव नहीं होता है प्रत्येक व्यक्ति का क्योंकि एक व्यक्ति नहीं है कमेंट करने वाला तो इस पर उनकी तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आता वह बात को घुमा देते हैं यह कहते हैं कि हमारे पास समय नहीं है तो यहां पर प्रश्न यह उठता
00:01:19:25 है कि अगर आपके पास समय नहीं है तो फिर आप यह टाइप कैसे कर पा रहे हो अगर आप टाइप कर रहे हो तो इससे यह प्रतीत होता है कि आपके पास समय तो है पर आप उस जगह पर आ कर के अपने पक्ष को रखने में सामर्थ्य वान नहीं है जहां पर आपकी सफलता अथवा असफलता स्पष्ट रूप से लोगों के सामने आ जाएगी या फिर ऐसा भी है कि आप इस प्रकार से बात करना ज्यादा उचित इसलिए समझते हैं क्योंकि यहां पर आप कुछ भी कहने के लिए किसी भी तरह का अमर्यादित व्यवहार करने के लिए अभद्र व्यवहार करने के लिए स्वतंत्र महसूस करते हैं अनुभव करते हैं ऐसा नहीं है कि विरोध आर समाज के फॉलोअर्स ने प्रकट नहीं किया है क्योंकि मैंने अपने वीडियो में दोनों ही जो मान्यताएं हैं स्कन की मान्यता और आर्य समाज की मान्यता इन दोनों के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को बाधित बताया है जो कि है भी लिमिटेड ईश्वर है दोनों ही मान्यताओं के अनुसार पर आर समाज के लोगों ने जब इसका विरोध प्रकट किया है तो बहुत ही शालीनता के साथ और मर्यादित रहते हुए हां पर मैं यह कहूंगा कि यहीं पर अगर राहुल आर्या जी को देखा जाए तो उनके जो शब्दावली होती है या उनका क्रिटिसाइज करने का जो तरीका होता है वो उतना मर्यादित नहीं होता जिसके लिए मेरा उनसे निवेदन है कि आप अपनी बात को रखें तो एटलीस्ट थोड़ा सा मर्यादा का
00:02:34:25 भी ध्यान रखें क्योंकि इतना तो तय है कि आप भी राम को आदर्श मानते हैं और हम भी राम को आदर्श मानते हैं अब बात ये आती है कि जब मैं स्कन के फॉलोअर्स से यह कहता हूं कमेंट्स के माध्यम से कि यदि आप अपने पक्ष को यहां पर रख पाने में समर्थवादी सार्वजनिक ऑनलाइन मंच पर आकर प्रत्यक्ष रूप से वो बात कर लीजिए तो लोगों को भी दिखाई देगा कि आप क्या कह रहे हैं और मैं क्या कह रहा हूं दूसरी बात वहां पर जो बातें होंगी मर्यादित होंगी क्योंकि आप यहां पर मर्यादा को लांग सकते हैं पर मैं नहीं लांग सकता हूं क्योंकि रामो विग्रह वान धर्म नाम की जो पंक्ति है जो श्लोक का जो वो टुकड़ा है वो मेरे गुरु ने मेरे ब्रेन में ड्रिल मशीन के द्वारा डाल दिया है तो बाहर नहीं निकल सकता है खैर एक बात और मैं कहना चाहूंगा कि जब भी मैं इनसे किसी ऑनलाइन सार्वजनिक मंच पर आने की बात करता हूं तो यह बचते हैं और फिर अंततः जब मैं इनसे पूछता हूं क्या इकन के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो ये इस बात का जवाब देते हैं कुछ इस प्रकार से कि हरे कृष्ण का जाप करिए भज गोविंदम मण मते अरे भाई हरे कृष्ण का जाप हम कर रहे हैं नहीं कर रहे आपको कैसे पता आप कैसे यह अंदाजा लगाते हो
00:03:49:26 कि हम भगवान श्री कृष्ण की पूजा नहीं करते राम जी की पूजा नहीं करते अगर हर बात का जवाब हरे कृष्ण ही देना है तो फिर इनको शुरू से ही सिर्फ यही कहना चाहिए था मगर जब इनको लगता है कि हम यहां पर तर्क प्रस्तुत कर सकते हैं तो वहां पर तो यह तर्क प्रस्तुत करते हैं मगर जब इनको लगता है कि अब हम फंस चुके हैं अब हमारे पास कोई उत्तर नहीं है तो यह कहते हैं हरे कृष्ण का जाप करिए हां यह कोई नई बात नहीं है आज से एक डेढ़ वर्ष पूर्व जब हमने अ लखनऊ इकन मंदिर के जो अध्यक्ष हैं उनका जब हमने इंटरव्यू लिया था तो उन्होंने भी जब वो ऐसी चीजों पर जब फंसने लगे थे तो उन्होंने भी यही कहा था कि सिर्फ हरे कृष्ण का जाप करिए उन्होंने तब तक सारे जवाब उत्तर प्रस्तुत किए थे जब तक उन्हें लगता था कि उनके पास उत्तर है मगर जैसे ही उनके पास उत्तर का अभाव हुआ तो उन्होंने भी यही बात कही कि हरे कृष्ण का जाप करें तो इसके अलावा एक फॉलोअर और हैं नि स्कोन के जिन्होंने हमसे प्रमाण मांगे कि श्री कृष्ण ने भगवान शिव की भक्ति कहां की है तो हमने उनको महाभारत आदि से जब यह प्रस्तुत किया कि श्री कृष्ण भगवान ने उपमन्यु ऋषि से दीक्षा लेकर के 1000 साल तक तपस्या की थी भगवान शिव की तो उन्होंने यहां पर ये कह दिया कि महाभारत में जो एकमात्र जो जानने लायक चीज है वह गीता है
00:05:04:28 उसके अलावा सभी जो है वो फालतू है उसका कोई वह निरर्थक है अगर निरर्थक है महाभारत पूरी तो जो गीता है वह उसी के द्वारा प्रतिपादित होती है अर्थात अगर हम महाभारत को अलग हटा देंगे गीता से बचे हुए शेष भाग को तो हम यह पता ही नहीं लगा पाएंगे कि जो गीता किसके और किसके बीच में संवाद हो रहा है कौन बोल रहा है और कौन उसको सुन रहा है तो आप थोड़े से मैं ये नहीं कह रहा हूं कि आप अपने आप को गलत मानना शुरू कर दो मगर थोड़े से तार्किक हो जाइए खैर अंततः एक बात स्कन वालों की तरफ से बहुत ज्यादा कही जाती है कि भाई इसकन ने पूरी दुनिया में अंग्रेजों को यह किया अंग्रेजों को ये मनाया तो आपके धर्म का निर्णय क्या इस आधार पर होता है कि कौन जाकर के अंग्रेजों को प्रभावित कर लेगा बस हम उसी की बातों को मानेंगे दूसरी बात एक बात और कही जाती है इकन के द्वारा कि भाई इकन ने दुनिया भर में 900 से ज्यादा मंदिर बनवाए हैं और इतना सब किया हिंदुइज्म के लिए सबसे पहली बात आप यह जान लीजिए कि शंकराचार्य ने बौद्ध मत का खंडन किया था अगर आपके जो आपकी जो परंपरा आप बता रहे हैं जो ईश्वर से कनेक्टेड है तो उन्होंने खंडन क्यों नहीं किया अमोग लीला जी कहते हैं कि बौद्धों का खंडन करने के लिए शंकराचार्य जी का अवतार
00:06:20:04 हुआ था तो इसका अर्थ है कि शंकराचार्य जी के का जो मत है उसके उससे भिन्न जो आपकी व्याख्या है क्या वह सामर्थ्य शली नहीं है बहुत का खंडन करने के लिए अच्छा इसके बाद अंततः जो मंदिर वाली बात है तो मेरी जानकारी में इसकन मंदिर वह है जहां केवल श्री कृष्ण को ही भगवान माना जाता है तो आपने कहा ऐसे मंदिर दुनिया भर में 900 है अब जरा यह सोचिए कि ऐसे मंदिर दुनिया भर में कितने हैं जिसमें कि ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश को समान रूप से माना जाता है जहां शिव की निराकार रूप में पूजा होती है जहां शिव की भोले बाबा के रूप में साकार रूप में पूजा होती है वहीं पर कृष्ण भगवान भी भी होते हैं वहीं पर राम जी भी होते हैं वहीं पर हनुमान जी भी होते हैं ऐसे मंदिर कितने हैं शायद आप गिन भी नहीं पाएंगे वो सारे मंदिर शंकराचार्य के हैं अच्छा एक बात और है जो शंकराचार्य जी के सानिध्य वाले मंदिर हैं जैसे जगन्नाथ पुरी आदि इनमें आपको एनीहाउ कभी ना कभी जाना पड़ जाता है मगर उन्हें आवश्यकता नहीं पड़ती आपके द्वारा निर्मित करवाए गए जो मंदिर हैं जिसमें तथाकथित एक बाधित ईश्वर की पूजा होती है इसमें आने की कभी हमें आवश्यकता नहीं पड़ती तो इन जरा तार्किक धरातल पर उतरकर इन वास्तविकता हों को जानने का प्रयास करिए मैं बहुत ही शीघ्र
00:07:35:15 अति शीघ्र द्वैत अद्वैत और ये जो अचिंत भदा भेद है ना इस पर बात करने वाला हूं एक वीडियो लाने वाला हूं प्रस्तुत करने वाला हूं तो तब तक के लिए जय श्री राम
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