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00:00:00:01 झूठ बोलोगे तो ईश्वर नहीं मिलेगा और सच बोलोगे तो मिलेगा ठीक है तो हमको यह नियम मिलते हैं ना कि झूठ बोलोगे तो नहीं पहुंचो ग सच बोलोगे तो पहुंचो ग इसी प्रकार से मर्यादा को मानोगे तो पहुंच जाओगे नहीं मानोगे तो नहीं पहुंचो ग तो ये धर्म हमको कैसे मिला क्योंकि हमको ईश्वर तक पहुंचना है ईश्वर तक पहुंचने के लिए जो रास्ता है वही धर्म है क्या है धर्म तो हमको धर्म क्यों मिला क्योंकि हमने ईश्वर को माना अब होता यह है कि जिन लोगों के अंदर धर्म को ना मानने की भावना ज्यादा होती है वो लोग ईश्वर को नकारते हैं अब समझ में आ रहा है आपको बताता हूं जैसे कि हमारी माता जी ने कहा घर में मम्मी ने कहा कि बेटा किचन में जूते पहन के मत जाना तो आप पूछोगे क्यों नहीं जाना व कई तरह के सवाल दगी फिर आपको ये भी कह दगी भगवान ने कहा है तो आपको अगर यह लग रहा है कि मुझे चप्पल उतारने में कष्ट है तो आप वहां
00:01:15:04 बोल दोगे मैं नहीं मानता भगवान को समझ रहे हैं तो भगवान को नकार कौन है भगवान को कौन नकता है जिसको धर्म पसंद नहीं है जिसको मर्यादा पसंद नहीं पसंद नहीं जिसको जानवर की तरह रहना पसंद है तो जब उसके पशु पर आघात होता है उसका जो जानवर पन है जो जानवर का जो तत्व है उस पर जब आघात होता है तो व कहता है मैं नहीं मानता ईश्वर को तो यही बस दुनिया में दो तरह की एक तरीके से कह लिया जाए की मतभेद यही दुनिया में दो तरह के मतभेद है एक एक वर्ग है जो आपको कहता है मर्यादित हो जाओ सीमित हो जाओ इंसानों की तरह बिहेव करो मर्यादा में रहो जिससे कि तुमको अच्छा सुख मिले दूसरा कहता है नहीं नहीं सारे नियम तोड़ो और जो है कुछ भी करो जानवरों की तरह रहना शुरू करो कोई नियम नहीं कोई मर्यादा नहीं तो दूसरा वर्ग ऐसे कहता है अब बात आती है कि जो दूसरा वर्ग है उसकी बातों को हम खत्म कैसे करें यही से बस आज का हमारा टॉपिक
00:02:30:10 स्टार्ट होता है क्या जब कोई हमसे कहे कि मैं नहीं मानता ईश्वर को तो ईश्वर के कई प्रकार के शत्रु है पहला शत्रु होता है जो ईश्वर को बिल्कुल नकार देता है जो कहता है कि ईश्वर है ही नहीं कौन सा होता है पहला शत्रु हां जो कहता है ईश्वर है ही नहीं दूसरा शत्रु जो होता है वो कहता है कि ईश्वर है तो मगर उसमें कुछ कमियां है क्या होता है ईश्वर है हा और तीसरा शत्रु जो होता है वो कहता है कि ईश्वर है तो मगर उसने जो धर्म बताया वो मत मानो जो धर्म मैं बता रहा हूं वो मानो ये तीन तरह के शत्रु होते हैं अब आप में से बताओ कौन कौन लोग है जो ईश्वर को मानते हैं सभी मानते हैं मतलब अपने आप को जानवर कहलाना अच्छा नहीं लगता ना तो नास्तिक व्यक्ति के अंदर जो प्यास है वो किसकी है भगवान की तो हमने क्या लिखा था ऊपर संसार में प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वो भले ही नास्तिक ही क्यों ना हो क्योंकि
00:03:46:01 एक नियम है नियम क्या है कि आपके अंदर जिस जिस तरह की चाह मौजूद है उस चाह का सब्जेक्ट दुनिया में मौजूद है ये नियम है कैसे हमारे अंदर भूख है तो दुनिया में खाना है हमारे अंदर प्यास है तो दुनिया में पा हमारे पास सुनने की क्षमता तो दुनिया में आवाज है हमारे पास देखने की क्षमता तो दुनिया में दृश्य है तो जिस प्रकार हमारे अंदर एक नास्तिक के अंदर भी व्याप्त भूख के विषय खाने का अस्तित्व सिद्ध होता है जिस प्रकार एक नास्तिक के अंदर मौजूद देखने की चाह का विषय दृश्य सिद्ध होता है सुनने की
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00:04:29:07 चाह का विषय आवाज सिद्ध होता है उसी प्रकार एक नास्तिक के अंदर व्याप्त यह सत चित आनंद की चाह का विषय सच्चिदानंद
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00:04:39:10 स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध हो जाता है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर यानी भगवान ठीक है तो यानी कि अगर कोई नास्तिक कभी मरना नहीं चाहता है तो वो नास्तिक नहीं है अगर कोई नास्तिक सब कुछ जान लेना चाहता है तो वो नास्तिक नहीं है अगर कोई नास्तिक अगर सदा सुखी रहना चाहता है तो वो नास्तिक नहीं है तो नास्तिक के अंदर की चीजों से हमय प्रूव कर सकते हैं कि तुम नास्तिक नहीं हो तुम भगवान को ही खोज रहे हो क्योंकि तुमने कहा कि इस दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जो मौसम को कंट्रोल कर सके मगर तुम खुद वही बनना चाहते हो तुमने कहा कि इस दुनिया में कोई ऐसा नहीं है जो अमर हो मगर तुम खुद अमर बनना चाते तुमने खुद कहा इस दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जो समय भी कब्जा कर ले मौसम पर कब्जा कर ले और सब कुछ जानता हो मगर तुम वही बनना तो नास्तिक व्यक्ति ही सबसे बड़ा सबूत है इस बात का कि दुनिया में ईश्वर है तो आज के बाद आपको अगर कोई नास्तिक मिलेगा आपके धर्म को छीनने के लिए तो आप उसको समझा पाओगे कि नहीं समझा दोगे कितने लोग है जो समझा सकते हैं
00:05:55:09 ल के पूरा हाथ उठाओ अच्छे से सब लोग समझा सकते हैं स
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Students learned the relationship between Dharma & Ishwar | ahvaan sessions | आदित्य वाहिनी
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