⬜ Not used yet · 00:00:24:14 – 00:46:34:00 (46:10)
00:00:24:14 ऊपर नहीं हां हां कर लो कर लो परेशान ना हो। सबकी आएगी। सबको सबकी फोटो आएगी।
00:01:18:26 यहां उपस्थित सभी अध्यापक गणों का और जितने भी यहां पर सहयोगी कर्मचारी हैं उनका और सभी बच्चों को यथोचित अभिवादन। यथोचित अभिवादन का मतलब आपने समझा? यतोचित अभिवादन का अर्थ है जिसके जिसके लिए यथा योग्य जो अभिवादन होता है मतलब हम कहते हैं नमस्ते प्रणाम चरण स्पर्श या फिर या फिर अलग-अलग संस्कृति है सभी तो उनके अनुसार उनका जो विवादन है वो उनको मैंने दे दिया इस एक वर्ड में यथोचित जिसके लिए जो यथा योग्य है जिसको जो अच्छा लगता है उसका वैसा अभिवाद किसी को नमस्कार करते हैं, किसी को प्रणाम करते हैं, किसी को चरण स्पर्श करते हैं। और जो दूसरी संस्कृतियां है उनके अनुसार भी अलग-अलग अभिवादन है। तो सभी का यतोचित अभिवादन तो जब भी आपके मन में कभी संशय हो कि हम किसको क्या बोले तो ये वन वर्ड में आप उसको ऐसा बोलना आपका उचित हो जाता है। ठीक है? क्योंकि यहां पर
00:02:33:27 जैसे आपकी जो अध्यापिका है उन्होंने बताया सभी संस्कृति से जुड़े हुए बच्चे हैं और सही बात है इसलिए सबका यथोचित धन्यवाद आज हम यहां पर एकत्रित हुए हैं अध्यात्म को जानने के लिए सबसे पहले अध्यात्म जानने क्या है अगर एक लाइन में बहुत सरल भाषा में बच्चों को समझाने के लिए तो अपने आप का अध्ययन स्वयं की स्टडी आत्म उसका अध्ययन वो हो गया अध्यात्म अगर सरल भाषा में अपने आप को जानना अगर आप अपने आप को जान गए तो आपने संसार में सब कुछ जान लिया तो ये पूरी जो आप दुनिया देख रहे हैं ये सब कुछ इसी एक पंक्ति पर टिका हुआ है अपने आप को जानने के लिए लोग इसी दौड़ में दौड़ रहे हैं इसी दौड़ में स्कूल जाते हैं। इसी दौड़ में सर्विज में जाते हैं। बिजनेसमैन बन जाते हैं। एक ही दौड़ है सबकी अपने आप को जानना। जो इस
00:03:49:01 मार्ग में जो इस रोड पर आगे निकल जाते हैं वो श्रेष्ठ हो जाते हैं। अपने आप को जानने के रूप में वो कहेंगे कि अनुभवी हो जाते हैं। एक्सपीरियंस हो जाते हैं। और जो जितना पीछे रह जाते हैं अपने आप को जानने के बारे में वो अपने जीवन में असंतुष्ट और जो है असता से असंतुष्ट मतलब अनसटिसफाइड और अनह दो चीजें उनके जीवन में आती है। अध्यात्म का आपके लिए क्यों जरूरत है? अध्यात्म की जरूरत आपको इसलिए है कि इससे हमारा जो मनोबल होता है वैसे तो बहुत सारे कारण होते आपका आपके परस्पेक्टिव से देखा जाए तो अध्यात्म का जो है कि आप जिस स्टेज में है उसमें आप कुछ बन रहे हैं है ना कुछ बन रहे हैं कुछ बनना चाहते हैं कहीं पहुंचना है आपको कॉमटीशन में है स्पर्धा में एक अगर व्यवहारिक दृष्टि से देखा जाए बिहेवियर अगर आपका आज का देखा जाए तो उसके अनुसार आप
00:05:04:28 किसी प्रक्रिया में प्रोसेस में इस प्रोसेस में कई सारे उतार चढ़ाव आते हैं। कभी नंबर कम आए कभी फेल हो गए कभी नहीं बन पाए है ना छोटे बड़े कई सारे उतार चढ़ाव आते हैं। तो हम उन पदार्थ चढ़ावों को पेश कर पाए। इसके लिए आपको आधार की जरूरत होती है। कि हम कभी टूटे ना हम कभी भी बिखरे ना। हम कभी भी कमजोर ना पड़े। इसके लिए आपको अध्यात्म की नीड है। इससे अगर अलग हो के एक बात देख अध्यात्म की नीड सभी को जरूरी है। तो वो नीड इसलिए दी है आपको क्योंकि अध्यात्म से ही आपके जीवन में मोरल वैल्यू आती है। क्या आती है? मोरल वैल्यू ये काम अच्छा होता है और ये काम बुरा आपको कैसे पता चलता है? क्या साइंस बताती है झूठ बोलना है? नहीं ना? तो मोरल वैल्यू आती है आपको कहां से? अध्यात्म से। अध्यात्म शुरू होता है खुद से और पहुंचता है ईश्वर तक।
00:06:20:00 कहां तक? ईश्वर तक। शुरू होगा खुद से खुद को जानने की खोज और फिर पहुंचेगा कहां तक? ईश्वर। ईश्वर तक। जब ईश्वर तक पहुंच गए तो क्या हो गया? वो कंप्लीट हो गया। अगर ईश्वर तक पहुंच गए तो कंप्लीट हो गया। शुरू कहां से हुआ था? वो तो जानना। तो हमारा जो मीमांसा दर्शन है उसमें दो बातें आती है उसमें आती है अथो ब्रह्म जिज्ञासा अथो ब्रह्म जिज्ञासा ब्रह्म जिज्ञासा भगवान कौन है क्या है अब ये जानना क्यों जरूरी है ये अभी हमें आगे पता लग जाएगा तो दूसरी बात आती है अधातो धर्म जिज्ञासा क्या आती है अधातो धर्म जिज्ञासा अथो ब्रह्म जिज्ञासा अथो धर्म जिज्ञासा यहां से मनुष्य की जर्नी शुरू हो जाती है हमारी और हमें भले ही हम 30 साल के हो जाए 50 साल के हो जाए 60 साल के हो जाए या 20 साल के हैं या 10 ही साल के पांच ही साल के हमारे मन में ये जो प्रश्न है हमेशा रहता है बस इतनी सी बात है
00:07:35:03 कि हम उस प्रश्न पे ध्यान नहीं देते सबके सबके मन में भी हम बात करेंगे इस पर तो बहुत ज्यादा विलंब ना करते हुए सीधे आज का जो सब लेसन है जो आपका सेशन है वेदांत फिलोसफी पर आधारित आपकी स्पिरिचुअल एबिलिटीज है वो पढ़ाने के लिए जिससे कि आपका जो कार्य क्षमता है कार्य क्षमता मतलब कैपेबिलिटी पढ़ने की लिखने की याद करने की सब कुछ वो बढ़ पाए और आपकी लाइफ में मोरल वैल्यू मजबूत हो जाए। मोरल वैल्यू मजबूत होना क्यों करोगे? क्योंकि हम इंसान तभी तक कहलाए जा सकते हैं जब तक हमारे पास मोर ही है। हमारे पास क्या है? हां। नैतिकता। तो हम मनुष्य तभी तक कहलाए जा सकते हैं जब तक हमारे पास क्या है? नैतिकता। नैतिकता। अगर हमारे से नैतिकता को अलग कर दिया गया तो हम मनुष्य उसको भी देखेंगे तो शुरुआत करते हैं यहां से कि सबसे पहले ईश्वर है ये आपको पता है
00:08:51:06 अच्छा आपसे अगर कोई पूछे कि मैं नहीं मानता ईश्वर को तो आपके पास कोई उत्तर है उसके लिए नहीं ईश्वर है आप बिलीव करते हैं क्योंकि आपके मम्मी पापा ने कभी आपको बताया होगा माता पिता ने गुरु ने आपको बताया होगा इसलिए आपका मानना है कि ईश्वर है मगर मैं अभी बिना मम्मी पापा के बताए हुए बिना किसी गुरु के बताए हुए आपको यहां पर अभी हम प्रूफ करने वाले हैं कि ईश्वर है पहले ठीक है तो आज हम पांच ऐसे जरूरी लेसन सीखेंगे जो कि आपको आजीवन काम आएंगे आपके जो लाइफ की जो जर्नी है उसमें आपके जितने भी कॉमटीशन है उसमें और एट द सेम टाइम इम्यूनिटी बी ह्यूमन बनने में आपके [गला साफ़ करने की आवाज़] काम आएंगे। एक मनुष्य धर्म को धारण करने में आपके वो सारे पांच पॉइंट जो है वो काम आने वाले हैं। तो पहला है कि ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होता है? अगर मम्मी ने नहीं बताया, पापा ने नहीं बताया या फिर गुरुजन ने भी नहीं बताया। आपसे ये नहीं कहा कि ईश्वर
00:10:06:09 है। अभी तक आपको जो ईश्वर के बारे में जो बात पता है और ईश्वर महत्वपूर्ण क्यों है? ये भी जानेंगे। फिर उसके बाद नैतिकता या नैतिकता को अगर कहा जाए धर्म ये महत्वपूर्ण क्यों? इंपॉर्टेंट क्यों है? ये सारी बातें आज हम जानेंगे। बहुत इंटरेस्टिंग होने वाला है। ठीक है? तो आप लोग थोड़ा ध्यान से सुनिएगा और बहुत इंटरेस्टिंग बनाया आपके लिए। तो सबसे पहले ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होता है? पहला पॉइंट है हमारा जो आज आप सीख के जा रहे हैं यहां से वो है इस दुनिया में इस संसार में हर इंसान इस संसार में हर मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है। फिर वो भले ही खुद को नास्तिक क्यों ना कहता हो। अगर कोई खुद को ये भी कह रहा है ना कि वो नास्तिक है। मगर वो ढूंढ किसे रहा है? तो हमारा आज का पहला जो लेसन है वो क्या है? संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है। भले ही वो खुद को नास्तिक क्यों ना मानता हो। अब ये कैसे प्रूफ होगा? और इसी के द्वारा हम ये भी प्रूफ कर लेंगे कि ईश्वर है। ठीक है? तो सबसे पहली बात है उपनिषद है।
00:11:21:20 वेदांत कहते हैं इसे। उपनिषदों को क्या कहा जाता है? वेदांत। उपनिषद में पहले अध्याय के तीसरे के 28 वे श्लोक में लिखा हुआ है एक 28 असतो मा सगमाया तमसो मा जोया मृत्यु मांगया ठीक है जो अर्थ है जानने का शायद प्रयास किया हो तो अभी आयु इतनी नहीं है संभता आपने प्रयास नहीं किया होगा इस श्लोक में पूरा संसार है इस श्लोक में पूरा संसार थोड़ा सा अपना आज का पहला लेसन जिससे आपको याद
00:12:36:09 सभी को दिखाई दे रहे ज्ञान बात करते हैं ज्ञान की बात करते सबसे पहले किसको करते हैं तो कम हो जाए सोचता है ना सर हम सब सोचते हैं नास्तिक भी सोचता है धूप भूख ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाएगा। कम हो जाएगा। अच्छा भूकंप ना है। इसका अर्थ क्या हुआ? इसका अर्थ ये हुआ कि नास्तिक व्यक्ति भी प्रकृति को कंट्रोल करने वाला है। बनना चाहता है। जबकि वो खुद कह रहा है इस दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जो प्रकृति को कंट्रोल कर सके। वो खुद कह रहा है ना? वो प्रकृति को खुद कंट्रोल करना चाहता है। चाहता है। बारिश कम हो जाए। भविष्य देखना चाहता है। कभी-कभी ये भी सोचता है बंदा कि काश मैं भूतकाल में चला जाता, पास्ट में चला जाता और माता जी की गोद में खेल के आता। मम्मी की गोद में खेल के आता। बड़े हो जाते तो ज्यादा याद आती है। है ना? अभी भी आपको कुछ पुराने दिन याद आ जाते होंगे। काश वो बचपन में जाए वो फलाना के लिए डंडा या गैंग बदला खेल के आए। इसका अर्थ क्या है? हम टेंस को भी कंट्रोल करना चाहते हैं। काल को काल है उसको भी हम कंट्रोल करना चाहते हैं। ये जो चाह है ये
00:13:51:13 डिजायर नास्तिक के अंदर भी होती है। तो आज के बाद जब आपसे कोई ये कहे कि मैं भगवान को नहीं मानता हूं तो उससे पूछना क्या तुम कभी मरना चाहते हो? ठीक है? ये जरूरी है आपका जानना। क्यों जरूरी है वो अभी बताते हैं आपको। तो ये बात आपको पता चल गई। आज के बाद कोई भगवान के बारे में आपसे अगर ये कहेगा भगवान नहीं है तो आप उसको जवाब दे पाएंगे यस सर जी तो ये पहली बात आप सबको पता होनी चाहिए इसीलिए हमने पहला जो नरेटिव है वो लिखा है संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है ये सर्व सिद्ध बात है फिर वो भले ही रूप से अपने आप को नास्तिक क्यों ना कह रहा हो अच्छा मगर हम लोग आई को पाना कब चाहते हैं जब हमें उसकी की सूक्षा मिल जाती है। है ना? इस दुनिया में मोबाइल है। मगर हम उसको पाना कब चाहेंगे? जब उनको YouTube पे, Google पे, आज तक, न्यूज़ चैनल पे कहीं से पता लग जाए कि iPhone वालों ने बहुत अच्छा मोबाइल निकाला नया। तब हमारे मन में आता है काश ये मोबाइल हमारे पास आ जाए। तो फिर हमारे मन में भगवान को भगवान जैसा बन जाने की चाह क्यों आई? हमको तो किसी ने बताया नहीं। जबकि चाह हमारे अंदर ऑलरेडी जन्म से
00:15:06:14 ही व्याप्त है। ये आया ना क्वेश्चन समझ रहे हैं आपको किसी ने नहीं कहा कि इस दुनिया में कोई भगवान है। फिर भी आपकी अंदर चाह मौजूद है भगवान के पास जाने की। है ना? भगवान जैसा बनने की चाह सबके अंदर है ना? कभी ना मरने की, सदा सुखी रहने की, सारा ज्ञान हासिल करने की चाह। ये भगवान जैसा बन जाने की चाह आपके अंदर क्या है? मौजूद है। प्रेजेंट है सबके अंदर। तो ये क्यों है? इसके लिए सनातन धर्म कहता है ये इसलिए है क्योंकि आप भगवान के अंश हो। ईश्वर के आप क्या हो? अंश। अंश। तो इसलिए आपके अंदर वो चाह आ रही है। अपने आप जन्म से आप जैसे ही जैसे ही गर्भ से बाहर आएंगे आपको अगर कोई थप्पड़ मारने लगेगा आपकी पलक चमप जाएगी। यानी आप बचना चाहते हो, जीना चाहते हो जबकि आपको जबकि आपको कुछ भी किसी ने कुछ भी नहीं किया फिर भी आप जो है मरना नहीं चाहते वही से छोटे से तो ये चाह जो है वो लेकर के आप चलते हो इसका अर्थ क्या है कि आपके अंदर ईश्वर का अंश मौजूद है इसका अर्थ ये है जब आपको किसी ने मोबाइल के बारे में नहीं बताया तो आप मोबाइल
00:16:21:25 के लिए कभी भी प्रयास नहीं करोगे आपको किसी ने अगर मोबाइल के बारे में ये नहीं बताया कि इस दुनिया में कोई ऐसा ऐसा फला फला मोबाइल आ गया है फलानी फलानी लैम्बोगरी कार आ गई या फलानी फानी बाइक आ गई है या रोशन आ गया है या गदर टू लगी है या ओ माय गॉड लगी है सिनेमा घरों में तो जब तक आपको भगाया नहीं जाएगा बाहर से तब तक आप उसको देखने नहीं जाओगे कि मैं गदर टू देखने जा रहा हूं आप गज टू यार देखने कब जाएंगे जब आपको कोई बताएगा तो भगवान के बारे में आपको किसी ने नहीं बताया कि इस दुनिया में कोई अमर है इस दुनिया में कोई ऐसा है फिर भी आपके अंदर जन्म से ही ये चार विद्यमान है कि मैं कभी ना मरू मैं सब कुछ जान लूं और मैं सब कुछ कंट्रोल कर लूं। विद्यमान है ना? आपके मन में आता होगा टीचर आज ये वाला चैप्टर पढ़ाए। टीचर ऐसे बात करें टीचर मेरे अनुसार चले। आता है मन में ये गुरु मेरे जो गुरुग है वो भी मेरे अनुसार चलने लगे। टीचर बैठे हैं। कैसे कहे बच्चे क्या? माता पिता भी मेरे अनुसार चलने लगे। तो ये सब भाव क्यों आ रहे हैं? आपको जन्म से मिलाए क्योंकि हमारे अंदर ईश्वर का अंश है। मौजूद है। तो ये दूसरी बात है जो ईश्वर का अस्तित्व जब किसी नास्तिक के सामने
00:17:36:28 सिद्ध करें तो आपके प्रूफ कर देना है। आपको ये बातें पता होनी चाहिए। ठीक है? तो पहला नरेटिव हमारा क्लियर हो गया। संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है। फिर वो भले ही नास्तिक मैं कहता हूं। किसी को बोरिंग लग रहा है क्या ये? इंटरेस्टिंग लग रहा है। यस सर। तो ईश्वर की जो पहली भगवान की जो पहला पहला फीचर है सबसे इंपॉर्टेंट फीचर वो क्या होना चाहिए? तो यहां से आता है हमारा दूसरा नरेटिव।
00:18:11:22 ईश्वर वही है जो ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। ईश्वर कौन है? तो ये हमारा दूसरा नेटिव है। ईश्वर वही है जो कुछ है। अभी हमने पिछले वाले में जाना कुल मिलाकर के हम कुछ भी कर सकने वाला बनना चाहते हैं। है ना? कभी मरना ये क्या है? हम मृत्यु को भी हरा दे। ऐसा ही तो है। कभी ना मरने की इच्छा मतलब क्या है? हम मौत को भी हरा दे। तो हम प्रकृति को कंट्रोल कर ले। तो इसका अर्थ क्या हुआ? कि हम कुछ भी कर सकने वाला बनना चाहते हैं। चाहते हैं। तो फिर
00:19:27:06 ईश्वर कौन होगा? हमारे अंदर चाह है। तो चाह का विषय कौन होता है? जिसके अंदर वो गुण मौजूद हो। जैसे हमारे अंदर खाने की भूख है तो खाना कौन होगा जो हमारी भूख को मिटा दे मिटा दे हमारे अंदर प्यास है तो वाणी में क्या होगा जो हमारी प्यास को मिटा दे हमारे अंदर जब सब कुछ कर सकने वाला बनने की चाह है तो इसका जो सब्जेक्ट है वो क्या होगा कुछ भी कर सकने वाला तो ईश्वर वही है जो ये कहां लिखा है ये लिखा है
00:20:20:14 उपनिषद दो एक ये लिखा है उपनिषद दो एक में क्या लिखा है सत्यम ज्ञान मतलब ब्रह थोड़ा कठिन है। सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह सत्य है ज्ञान है अनंत है वही ब्रह्म है वही भगवान है तो ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है कर सकता है अब अगर हम जो वैदिक संस्कृति है जो वैदिक स्क्रिप्चर है उसके अकॉर्डिंगली अगर जानना चाहे भगवान देखिए क्या करते हैं। अगर कोई कहे कि वो मछली नहीं बन सकते तो वो मत्स अवतार ले लेते हैं। अगर कोई कहे कि वो कछुआ नहीं बन सकते तो वो कछुए का अवतार ले लेते हैं। अगर कोई कहे कि वो बरा नहीं बन सकते तो वो बरा का अवतार ले लेते हैं। अगर कोई कहे कि वो जन्म नहीं ले सकते मनुष्य के रूप में तो वो राम के जन्म लेते हैं। अगर कोई कहे कि वो क्या कहते हैं मर नहीं सकते
00:21:35:25 तो वो कृष्ण के रूप में आके मृत्यु को प्राप्त हो के भी दिखा देते हैं। ये सब भगवान क्यों कर रहे हैं? क्योंकि वो आपको बताना चाह रहे हैं कि ईश्वर वही है जो खुशी कर सकता है। अगर कोई ऐसा है जो ये कह रहा है कि मैं ईश्वर हूं। मगर मैं जन्म नहीं ले सकता या यहां नहीं जा सकता या वहां नहीं जा सकता या वो फलाना कार्य है तो मैं नहीं जा सकता। तो इसका मतलब वहां पर हमें विचार करने की आवश्यकता नहीं है। है विचार करने की आवश्यकता है। है क्योंकि ईश्वर की सबसे पहली क्वालिटी क्या है? कुछ भी कर सकता कि वो कुछ भी कर सकने वाला होना चाहिए। अनलिमिटेड होना चाहिए। उसके अंदर कभी भी ये बात ना आए। ईश्वर के लिए कभी भी ये बात नहीं लिखी जा सकती कि दुनिया में कोई ऐसा कार्य है जो ईश्वर ना कर सके। अर्थात दुनिया में कोई ऐसा कार्य है जिसके लिए ईश्वर के सामने ये सके ही कांट डू इट ईश्वर के लिए हम ये नहीं कह सकते इसीलिए ईश्वर देखिए सभी धर्मों में कहा गया है मैं कुछ भी कर सकता हूं सभी धर्म भगवान श्री कृष्ण भगवत गीता के चौथे अध्याय
00:22:51:01 के सातव श्लोक में कहते हैं क्या कहते हैं जब जब धरती पर पाप बढ़ता है मैं अवतार लेता हूं जब जब धरती पर पाप पढ़ता है प्रकट हो जाता हूं। अच्छा कोई अगर ये कहे क्या ईश्वर झूठ बोल सकते हैं? तो वो झूठ भी बोल सकते हैं। श्री कृष्ण के रूप में झूठ बोलते थे कि नहीं? यस सर। मोहिनी के रूप में बुद्ध अवतार के रूप में उन्होंने झूठ बोले। ठीक है। कोई अगर ये कहे क्या ईश्वर सिर्फ सच बोल सकते हैं कि नहीं? तो राम के रूप में आ जाते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम मेरी गर्दन को देख के ये लोग हां नहीं कर रहे और मैं इनको भरमा रही हूं। जब हम ये कहेंगे क्या भगवान सच बोल सकते हैं तो राम बन के आ जाते हैं। जब हम ये कहेंगे कि क्या भगवान झूठ बोल सकते हैं? कृष्ण बन के आ जाते हैं झूठ बोलने। वो आपको बता रहे हैं। अच्छा कई बार आता है कि क्या भगवान रास लीला ये रास रचा सकते हैं? या रो सकते हैं या ये कर सकते हैं। तो भगवान के सामने हम ये नहीं लिख सकते कि कोई भी दुनिया में ऐसा कार्य है जो भगवान नहीं कर सकते। तो भगवान ने ये सारी जो चीजें की है ना
00:24:06:16 मछली बन जाना कछुआ बन जाना नरसिं अवतार ले लेना खंबा फाड़ के निकल आना है ना हां बिल्कुल निकले ना को मारने आप लोगों ने अनेक कारण है साइंटिफिक है स्पिरिचुअल है फिलोसफिकल है सारे कारण है एक कारण सब जगह पर है क्या कि भगवान आपको क्या बता रहे हैं मैं ईश्वर हूं और मैं कुछ भी हां और दूसरी बात आपको जो जीवन याद जीवन भर याद रखनी है वो क्या रखनी है? ईश्वर वही है जो सुन सकता है। ईश्वर के सामने हम यह नहीं लिख सकते कि दुनिया में कोई ऐसा काम है जो ही कांट डू इट। ही कांट डू इट नहीं लिख सकते। अगर ईश्वर के सामने हमने ही कांट डू इट लिख दिया तो ईश्वर जिसकी वो बात हो रही है वो ईश्वर नहीं है। नहीं है। तो ये हमारा दूसरा पॉइंट है। ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। कुछ भी कर सकता है। बन जाएंगे, नरसिंह बन जाएंगे, मछली बन जाएंगे, बरा बन जाएंगे, बौना बन जाएंगे, रोएंगे, हसेंगे, नाचेंगे, कूदेंगे। इन सबके पीछे वैसे बहुत सारी गहराई वाली बातें हैं। मगर एक बात हमेशा है कि ईश्वर वही है जो कुछ भी है। चिल्लाना नहीं है। मतलब आराम से बोलना।
00:25:22:00 अब इससे दोनों से मिलकर के बात निकलती है। धर्म, नैतिकता, और मानवता। अब ये दोनों बातें हमने जानी क्यों? ये दोनों बातें इसलिए जानी कि चार चीजें हैं जो जानवर और मनुष्य में समान है। क्या क्या चीजें हैं? सुनो बहुत ध्यान से सुनो। अब यहां पे वो बात आ जाती है कि आपको ये दोनों बातें हमेशा ध्यान रखने की जरूरत क्यों है? आपको ये दोनों बातें सदा ही ध्यान रखने की आवश्यकता क्यों है? क्योंकि अगर ये दोनों चीजें आपको मालूम है तभी आपके पास क्या है?
00:26:07:15 जी। धर्म को ही दूसरी भाषा में नैतिकता कहते हैं। नैतिकता को ही दूसरी भाषा में मानवता कह रही है। और एक शब्द और लगा सकते हैं धर्म के लिए मर्यादा। क्या लगा सकते हैं? मर्यादा मर्यादा धीरे बोलना है धीरे तो इन सबका एक ही अर्थ है धर्म नैतिकता मानवता या मर्यादा हम किसी विशेष धर्म की बात नहीं कर रहे यहां पे मानवता को ही धर्म कहा जाता है नैतिकता को ये तो हर किसी के पास धर्म कहा जाता है और मर्यादा को ही धर्म कहा जाता है तो ये ये कैसे आते हैं हमारे जीवन में ये आए क्यों जब मनुष्य मनुष्य के अंदर ये बन जाने की प्यास जागृत हुई तो उसे मालूम पड़ा कि दुनिया में कोई ये है। मगर मनुष्य का जो लक्ष्य था वो केवल ये जानना थोड़ी ना है कि इस दुनिया में कोई iPhone है। उसको iPhone को हासिल करना चाहता है। तो आपको मालूम पड़ गया कि भगवान है। मगर ये आपका लक्ष्य नहीं है। मालूम करना आपका लक्ष्य क्या है? करना भगवान को हासिल करना।
00:27:22:16 आपका शुरू में लक्ष्य क्या था? सब कुछ करने वाला बन जाना। सब कुछ कर सकने वाला बन जाना। आपका बोल था, ऐका लक्ष्य है ईश्वर के पास। ईश्वर जैसा बन जाना। ईश्वर तक पहुंच जाना। ईश्वर तक ईश्वर को प्राप्त करने के लिए आपको दिए जाते हैं। क्या दिए जाते हैं? नियम। नियम क्या नियम यही नियम होते हैं मर्यादा यही नियम होते हैं मानता यही नियम होते हैं यही नियम होता है भारत आपकी जिंदगी का मेन मकसद क्या है कुल मिलाकर के पैसे क्यों कमाना चाहते हैं क्यों कमाना चाहते हैं क्यों बड़ा आदमी बनना चाहते हैं अमीर बनना है हां अमीर बनके आपको क्या मिलेगा सुख सुख मिलेगा ना और और ऐसा सुख प्राप्त करना चाहते हैं कि मेरे पास इतने पैसे होंगे कभी खत्म ना हो। मैं ऐसा बन जाऊं कि दुनिया में सबसे टॉप पर कुल मिलाकर के हमारा मन क्या कर रहा है? भगवान जैसा बन जाने का। अब क्या होता है? जब आपकी ये जो मेन इच्छा है ना भगवान जैसा बन जाने
00:28:37:20 की इच्छा। इस इच्छा के लिए आपको बताए जाते हैं नियम। अगर आपको भगवान जैसा बनना है तो आपको क्या करना पड़ेगा? नियम। झूठ बोलना बंद करना पड़ेगा। पाप करना बंद करना पड़ेगा। है ना? दुर्व्यवहार करना बंद करना पड़ेगा। भेदभाव करना बंद करना पड़ेगा। मनुष्यों के साथ जानवरों जैसा बर्दाब करना बंद करना पड़ेगा। या कई संस्कृति में बताया जाएगा कि मांस मत खाया करो। है ना? ये क्या है? नॉनवेज मत खाया करो। ये नियम आपको बताए जा रहे हैं जिससे कि जिससे कि एट द एंड आपकी वो इच्छा पूरा पूरी हो जिस इच्छा के लिए आपकी शुरुआत हुई थी। आपके मन में जो बात है ना अमीर बनने की अमीर बनने से वो इच्छा पूरी नहीं हो सकती। क्यों? आपके पास मान लीजिए किसी के पास बहुत पैसा है और उसको हार्ट की प्रॉब्लम है। है तो वो दुखी है इसलिए क्या वो सुखी हो पाएगा? नो सर। उसको मृत्यु का भय सताएगा। तो मृत्यु के भय से मुक्त कर दे। ये वो शिक्षा है। क्या शिक्षा है? आपको मृत्यु भी ना डरा सके। आपको सुखी रखे। आपको पता चल गया। किसी को पता चल गया फलाने को कैंसर है,
00:29:52:24 ये है वो है। तब भी हम घबराए नहीं। डरे नहीं कुछ समझ में आए नहीं। कुछ नहीं हो रहा। तो ये वो शिक्षा है। तो ऐसा बनने के लिए ही आपको बताए जाते हैं क्या? रूल्स। और इनहीं रूल्स को कहते हैं नियम नियम नियम को मर्यादा मानवता नैतिकता और कि आप ऐसा करोगे तो अच्छा होगा और ऐसा करोगे तो अच्छा नहीं होगा क्यों ऐसा करोगे तो आप भगवान से दूर जाओगे और ऐसा करोगे तो भगवान के पास पास जाओगे यही होता है धर्म यानी कि भगवान को प्राप्त करने के लिए जो शास्त्रों के द्वारा आपको नियम बताए जाते हैं झूठ नहीं बोलना है ना और फलाने काम
00:30:39:15 तो हम टॉप ऑफ द वर्ल्ड बनना जो चाहते हैं है ना वो चाहने के लिए हमें मिलता है कि अगर झूठ बोलोगे तो भगवान से डूब जाओगे। सच बोलोगे तो भगवान जैसे बन जाओगे। अगर पाप करोगे तो भगवान से जुड़ जाओगे। अगर पाप नहीं करोगे तो भगवान जैसा बन जाओगे। इसी आधार पर हमको ये नियम मिलते हैं। मगर जब ये नियम हमको मिलते हैं तो साथ ही साथ हमको क्या मिल जाता है? साथ ही साथ हमको प्राप्त हो गई मोलिटी। क्वालिटी मिल गई। हम तो चाहते थे भगवान जैसा बन जाना। मगर हमको फ्री में क्या मिली? नैतिकता। तो अब बात आती है कि हमें ईश्वर के अस्तित्व की आवश्यकता क्या है? अगर हम स्वयं को मनुष्य मानना चाहते हैं तो हमें यह मानना पड़ेगा कि इस दुनिया में कोई ईश्वर है जिसको पाने के लिए हम कुछ नियमों का पालन करते हैं। नियमों को फॉलो करते हैं। करते हैं। उनहीं नियमों से हम इंसान है। उनहीं नियमों के कारण हम क्या है? इंसान। इंसान। अब देखिए क्या है? चार चीजें मनुष्यों में और जानवर में सेम
00:31:54:24 होती है। सुनो। आहार यानी कि भूख, निद्रा यानी कि शीत, भय यानी कि डर। और एक होती है मैथ। उसके बारे में नहीं बात करते। ये चार चीजें जो है मनुष्यों में और जानवर में क्या कहते हैं? जानवरों में सेम होती है। यानी अगर देखा जाए यहां नहीं लिखा है। घर भी खाना खाता है। मनुष्यते हैं। जानवर भी सुनता है। जानवर मनुष्य में अंतर है। इसके अलावा मनुष्यों में भी है और जानवरों में जानवरों में भी है। मगर कौन सी चीज है जो जानवर को मनुष्य को जानवर से विशेष बना देती है। वो कौन सी चीज है? ये इंपॉर्टेंट लाइन है। धर्म। जानवर और मनुष्य में अंतर जानवरों का कोई भी धर्म नहीं है। जानवर का होता है कोई धर्म नहीं होता है। कहां सोना है? हाथ धोने हैं कि नहीं? जानवर को पता है नहीं पता है ना? अंतर अगर बहुत सरल भाषा में अगर देखें कि कौन हमारी माता है, कौन हमारी बहन है, कौन हमारी बुआ है? क्या ये साइंस हमें बता सकती है? नो। कौन बताएगा? धर्म। धर्म। साइंस की किताब आपको ये नहीं
00:33:09:25 बता सकती कि वो आपकी दुआ है। ये बताएगा धर्म धर्म यानी कि रिश्ते नाते जीवन में जितने भी क्या जानवर कुछ रिश्ते मानते हैं क्या? नहीं। वो लोग मानते हैं कोई हमारी मां है, कोई हमारी चाची नहीं है? ना यही अंतर है जो आपको और जानवरों से श्रेष्ठ बना देता है। अगर आपके पास धर्म नहीं होगा तो आप अपने आप को मनुष्य नहीं कह सकते। और धर्म कब होगा? जब आप ये मानेंगे कि इस दुनिया में कोई ईश्वर है। ठीक है? तो ये जो शक्ति के रूप में हमें प्राप्त होता है वो क्या होता है? धर्म। और अगर कोई व्यक्ति यह कह रहा है कि दुनिया में कोई ईश्वर नहीं है और वो किसी को माता कह रहा है, किसी को बहन जी कह रहा है, किसी को बुआ कह रहा है तो इसका अर्थ है कि वो अनजाने में भगवान को मानता है। वो तभी कह सकता है क्योंकि संसार की कोई भी वैज्ञानिक किताब ये आपको नहीं बताएगी कि वो आपकी बहन है। वो आपकी चाची है। ठीक है? तो इसलिए आपको आवश्यकता है इन दोनों बातों की। किस लिए? मानव बन जाने के लिए धर्म धर्म की आवश्यकता क्यों है आपको मानव बन जाने के लिए और मानव बनने की आवश्यकता क्यों है तभी तो
00:34:24:28 आप श्रेष्ठ हो जानवरों से आपके अंदर भिन्नता क्या है आप क्यों अलग हो जानवरों से क्योंकि आपके पास क्या है धर्म तो मान धर्म के कारण ही आपको जो है कहा जाता है जानवरों से अलग अब ये बात आती है तीसरी। बहुत जरूरी बात है। सब लोग ध्यान से सुनिए। बहुत ध्यान से सुनिए। बिलकुल आवाज नहीं।
00:34:59:13 एक चीज तो क्लियर हो गई ना? केवल ऐसे ग्रंथ प्रमाणिक माने जा सकते हैं। माने जा सकते
00:35:33:10 हैं। जो ये ना कहे कि उन्हें किसी ने रचा है।
00:36:10:09 ये तीसरा हमारा नियम है ईश्वर के विषय में थोड़ा सा लेट शुरू हुआ था हां ठीक है स्टार्ट करो ईश्वर के विषय में एक मात्र उन ग्रंथों को हम प्रमाणित मान सकते हैं जो ग्रंथ ये ना कहे कि हमको किसी ने बनाया आया। क्यों? क्यों? क्योंकि हमने अभी जाना था इससे जस्ट पहले कि ईश्वर वही है जो है। तो अगर कोई ग्रंथ है जो ये कहता है कि मुझको जो है ईश्वर ने बनाया तो ईश्वर को झूठ भी बोल सकते हैं। बोल सकते हैं ना? नहीं जाना ना कि ईश्वर वही है जो उसी के अगर कोई ग्रंथ ऐसा है जो ये कह रहा है कि जो हमको जो है ईश्वर ने बनाया है डायरेक्ट तो हम उसको प्रमाणिक नहीं मान सकते ईश्वर के विषय में ये बात कहां लिखी है उपनिषद मैं लिखता नहीं हूं टाइम ज्यादा लगेगा उपनिषद दो चार में लिखी है ईश्वर के विषय में केवल उन ग्रंथों को माना जा सकता है जो ये ना कहे कि मुझको
00:37:25:13 ईश्वर ने बनाया जो तो ग्रंथ क्या होते हैं? कुछ ग्रंथ ऐसे होते हैं जो ये कहते हैं कि हमें ईश्वर ने बनाया नहीं। ऐसे पहले ग्रंथ क्यों है? वो ये कहते हैं हमें ईश्वर ने बनाया नहीं। हम तो सदैव विद्यमान थे ईश्वर की सांस के रूप में। किस रूप में? सांस के रूप में। थोड़ा सा डिस्टरबेंस अगर ना मिले तो मैं बहुत जल्दी सेशन को समाप्त कर। पांच मिनट। थोड़ा लेट शुरू हुआ था। हम
00:38:02:07 तो जो वैदिक स्क्रिप्चर है वो ये कहते हैं कि हमें ईश्वर ने रचा नहीं है। हमें जो है हम सदैव विद्यमान थे हमेशा से। कब से जब से ईश्वर है। किस रूप में? ईश्वर की सांस के रूप में। अब ये सांस का क्या फंडा है? सांस का फंडा समझ लीजिए। क्या फंडा है? हम दो प्रकार के काम करते हैं। एक जिसमें हम चाहते हैं कुछ करना। दूसरा जिसमें हम नहीं चाहते कुछ भी करना। मतलब बिना बिना चाहे हो गया। बहुत इंपॉर्टेंट बात है। इंपॉर्टेंट है। आपको ये कोई नहीं बताएगा। आप सुनिए। जब हम चाह के कुछ करते हैं। तो जैसे मान लीजिए मेरे सामने एक कपड़ा है चौक साफ करने का और मेरे सामने चौक है। ठीक है? अब मैं चाहता हूं कि नीचे से कुछ उठाऊं। तो मैं चाहूं तो एक पकड़ा उठाऊं मैं चाहूं तो
00:38:57:13 अभी आप लोग क्या कर रहे हैं किसी को पिंच कर रहे हैं तो आप चाह रहे हैं ना पिंच करना चोटी करना ये करना बातें करना ये आप लोग चाह रहे हैं ना अब देखिए क्या बता रहे हैं तो अगर इसी प्रकार से अगर ईश्वर चाहता है कुछ बनाना तो वो चाहे तो झूठ बोले और वो चाहे तो सच बोले सच बोले मगर कुछ काम हम ऐसे भी करते हैं जो कि जिसके लिए हम कभी चाह नहीं दिए जैसे कि सांस लेना। एक बच्चा माता के गर्भ से जन्म ले रहा है और क्या कर रहा है? उसकी कोई इच्छा नहीं थी। कुछ नहीं था। मगर वो सांस इसी रूप में जो वैदिक स्क्रिप्चर है जो ईश्वर के संबंध में प्रमाणित माने जाते हैं। इसी रूप में हमेशा से विद्यमान है। वो ये नहीं कहते कभी हमको ईश्वर ने हमको ईश्वर ने बनाया। वो ये कहते हैं कि हम सदैव विद्यमान थे। ईश्वर की सांस के रूप में है। तो ये हो गया अपना तीसरा नियम। ये भी आपको याद रखना है। और
00:39:58:21 चौथा नियम चौथा नियम है ये जो ज्ञान है वो हमको प्राप्त कैसे होता है? ज्ञान हमको कैसे प्राप्त होता है? परंपरा से। कैसे? परंपरा से। परंपरा से। भगवत गीता चार दो भगवत गीता तीन 16 सा उपनिषद मांडनिषद बहुत सारे उपनिषदों में वर्णन है कि ज्ञान प्राप्त होता है परंपरा से इंग्लिश में कहे तो चैन ऑफ नरेशन से ज्ञान प्राप्त होता है जैसे आप यहां स्कूल में पढ़ने आए हैं तो यहां पे जो टीचर्स हैं वो सारे टीचर्स डिग्री डिग्री होल्डर है उनके पास कोई ना कोई मार्कशीट है है ना उनके पास कोई ना कोई सर्टिफिकेट है मार्कशीट है डिग्री उस डिग्री में क्या लिखा हुआ है? उन्होंने शिक्षा को कहां से प्राप्त किया? उसका नाम लिखा है ना? आपको भी अगर आपकी मार्कशीट मिलेगी तो उसमें क्या लिखा होगा कि इन्होंने फलानी क्लास कहां से पास आउट की? उसका नाम। तो ये क्या हुआ? आपके गुरु कौन है? उसका नाम। अगर हम उस गुरु के पास जाएंगे कि आपने शिक्षा कहां से प्राप्त की? उनके पास भी एक सर्टिफिकेट होगा जिसमें उनके गुरु का नाम लिखा होगा। अब ये गुरु का
00:41:13:25 गुरु का गुरु का गुरु का गुरु क्या बन गया परंपरा परंपरा चार्ज में भगवान श्री कृष्ण बोलते हैं ज्ञान प्राप्त होता है कहां से परंपरा से तो क्या होता है कि जब हम धर्म के लिए ईश्वर के लिए ईश्वर की खोज शुरू करते हैं तो हमें कई प्रकार के लोग मिलते हैं तरह तरह की बातें बताने वाले जैसे कि जब हम पढ़ना चाहते हैं पढ़ाई करने तो कई रास्ता चलते भी आपको आपके स्टूडेंट्स ही बता देंगे नहीं दो पांच होता मैं प्रूफ कर दूंगा। मगर हम ज्ञान किसका ऑथेंटिक मानेंगे? जिसने परंपरा से ज्ञान प्राप्त किया हो। तो आप जो आखरी बात मानेंगे वो किसकी मानेंगे? उन गुरुओं की जिनके पास परंपरा से अध्ययन हो। यानी डिग्री अगर हिंदी में इंग्लिश में कहे तो डिग्री मार्कशीट सर्टिफिकेट और जो धर्म का ज्ञान हम प्राप्त करते हैं वो कहां से प्राप्त करते हैं? परंपरा आचार्यों से। हिंदी ये हो गई। इंग्लिश में आप उसको जानते हो डिग्री, मार्कशीट, सर्टिफिकेट आप इंग्लिश में उसे इस रूप से जानते हैं। तो ये चार जो चीजें हैं आज की पहला पहला नेटिव ने क्या जाना? इस दुनिया में हर इंसान इस इस संसार
00:42:28:28 का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है। वो भले ही हो। ईश्वर वही है जो है। और तीसरी जो बात है वो क्या है? ईश्वर के विषय में वही ग्रंथ प्रमाणित माने जा सकते हैं जो यह ना कहते हो कि उनको ईश्वर ने रचा। ठीक है? चौथी बात ज्ञान प्राप्त कहां से होता है? परंपरा। और पांचवी बात है कि अगर जो प्रभु श्री राम है राम जी जो है वो मानव मात्र का
00:43:08:07 प्रभु जो पांचवा जो हमारा आज का टॉपिक है प्रभु श्री राम ये किसी धर्म विशेष के लिए वो नहीं है कि भगवान वो हटा दीजिए आदर्श तो आदर्श है भगवान मनुष्य मात्र के लिए आदर्श है अगर आपको कुछ भी नहीं मालूम है जीवन में क्या करना है क्या नहीं करना है क्या बोलना है क्या नहीं बोलना है किसके जैसा बोलना है किसके जैसा नहीं बोलना है तो मनुष्य मात्र के लिए आप किसी भी कम्युनिटी से बिलोंग करते हो किसी भी धर्म से बिलोंग करते हो अगर आपने राम को फॉलो कर लिया तो आप एक मानव बन जाएंगे आपको क्या मिल जाएगा धर्म और अगर धर्म मिल जाएगा तो आखिर में क्या मिल जाएगा जैसा जब हमारी यात्रा क्या थी सब कुछ कर सकने वाला बनने की तो वो यात्रा आपकी पूरी हो जाएगी इसलिए वाल्मीकि रामायण में श्लोक आता है रामो विग्रहवान
00:44:05:22 धर्मः रामो विग्रह धर्मः ये है वाल्मीकि रामायण तीन 37 और 13 ये कहा जा रहा है कि राम जो है चलते फिरते जीते जागते धर्म है तो अगर आपको मनुष्य बनना है क्या बनना है मनुष्य तो जो राम ने किया वो आप करो राम क्या थे वो कहते थे रघुकुल नीत सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई तो आप कभी भी झूठ मत बोलो राम कहते थे एक नारी सदा ब्रह्मचारी आगे चलके आपका विवाह होगा तो हमेशा एक पत्नी को समर्पित करने वाला बनो। राम ने कभी भी पिता की आज्ञा का अनादर नहीं किया। तो क्या आप कभी भी अपने माता पिता की आज्ञा का अनादर ना करें। तो सारी चीजें आप अगर राम से सीख लेंगे तो आप मानव बन जाएंगे। आपको धर्म मिल जाएगा और आपकी जो सतचित आनंद की जो जर्नी शुरू हुई थी पहले पॉइंट से वो आपकी कंप्लीट हो जाएगी। पांच पॉइंट हम फटाफट दोहरा लेते हैं एक बार। पहला पॉइंट है दुनिया में
00:45:20:26 हर व्यक्ति भगवान को ही है। दूसरा पॉइंट है ईश्वर वही है जो है। तीसरा पॉइंट है ईश्वर के विषय में ऐसे ग्रंथ ही प्रमाणिक माने जा सकते हैं जो ये ना कहते हो कि और पांचवा पॉइंट है राम धर्म का साक्षात स्वरूप है। अगर किसी को धर्म का पालन करना है तो वो राम का अनुकरण राम को फॉलो कर सकता है। यह बात कृष्ण के लिए नहीं कही गई है। यह बात दुनिया में अन्य किसी भी व्यक्तित्व के लिए नहीं कही गई है कि आप उसको पूरा फॉलो कर लो। नहीं, केवल और केवल राम के लिए कही गई है कि आपको अगर धर्म का पालन करना है तो राम को फॉलो कर लें। इसी के साथ आज का ये सेशन आपके लिए थोड़ा सा जल्दी के कारण समय के अभाव के कारण बंद करना पड़ रहा है। हमारी क्लासेस चलती है ऑनलाइन। तो जो बच्चे उन क्लासेस में संडे संडे को चलती है ऑनलाइन क्लास ज़ूम पर एक घंटे की होती है तो जो भी बच्चे इसमें आगे इसको थोड़ा एक्सप्लोर करना चाहे पढ़ना चाहे इसको संडे संडे वो अपना नाम कांटेक्ट नंबर मेंशन कर सकते सभी को यतोचित अभिवादन ठीक है सभी को यतोचित अभिवादन
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Ahvaan session in Central Public School | Aditya Vahini | Puri Shankaracharya | SHEELD PROGRAM
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