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00:00:00:03 [संगीत] मैं

00:00:02:21 स्वयं इस बात को समझता हूं की मैं खुद अव्वल दर्जे का मूर्ख हूं और मुझे कोई वेद पुराण उपनिषद का ज्ञान नहीं है [संगीत] शास्त्रों में वेदों में भी विरोधाभास है लेकिन वेदों में कोई विरोधाभास नहीं है और वह शिक्षा मिलेगी हमको हमारे प्रमाणित ग से वेद पुराण उपनिषद उनको जब हम सुनेंगे तब हम जान पाएंगे

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00:00:37:22 [संगीत] बहुत कन्ज्यूरिंग स्टेटमेंट लग रहा है और यह ऐसा क्यों का रहे हैं मुझे नहीं पता अगर आप इस पर कुछ डिस्कस करेंगे अध्यक्ष महोदय ने ऐसा क्यों बोला यह मैं नहीं बता सकता [संगीत] की पूर्ण भौतिक है यह जीवात्मा है और ना उनको यह बोल सकते हैं की यह पूर्ण ब्रह्म परम ब्रह्म परमात्मा है कोई अल्लाह अलग नहीं है कृष्ण अलग नहीं है [संगीत]

00:01:23:04 ए गुरुजी बहुत बहुत धन्यवाद [संगीत] क्या है इस्कॉन इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कृष्ण कॉन्शसनेस अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावना अमृतसर जी

00:01:57:21 ने की और उनका मुख्य उद्देश्य था की गीता तथा भागवत के प्रामाणिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाना और गुरजीत थोड़ा सा अपना बारे में बताएं हमें अपना व्यक्तिगत परिचय आपका कैसे आप इस भावना मत संघ से जुड़े नाम जो है वह अनुराग दीक्षित था और मैं आईसीआईसीआई बैंक में जॉब करता था लेकिन भगवान की विशेष कृपा हुई और खास करके हनुमान जी हनुमान जी को बहुत अधिक प्रेम करता था और उनके मंदिर जाता था और उनकी सेवा करता था तो हनुमान जी की विशेष प्रेरणा से हमारे मैन में राम भक्ति कृष्ण भक्ति के प्रति जागरूकता है इंट्रोडक्शन

00:03:01:22 बहुत ही बहुत ही सुंदर बहुत अच्छा लगा आपका सुनके अच्छा गुरुदेव ये इसमें जैसे की हम नाम सुनते हैं की अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनात्मक संघ तो हम जानना चाहते हैं की ये हिंदुत्व में सनातन धर्म में कृष्ण जी का महत्व क्या है देखिए सनातन धर्म को जानने वाले लोग समझेंगे की क्या सनातन धर्म जब तक हम सनातन धर्म में जन्म लेने से हम सनातन धर्म को नहीं समझ पाएंगे सनातन धर्म को जानने के लिए हमको यह शिक्षा लेना होगा यह समझना होगा की वास्तव में सनातन धर्म है क्या और वह शिक्षा मिलेगी हमको हमारे प्रमाणित ग से वेद पुराण उपनिषद उनको जब हम सुनेंगे समझेंगे तब हम जान पाएंगे लेकिन अगर हम उनको पढ़ी नहीं रहे उनको समझ ही नहीं रहे हैं तो हम कैसे सनातन धर्म को समझ पाएंगे तो श्रीमद् भागवत में श्रीमद् भागवत गीता में अन्य पुराने में स्पष्ट रूप से वर्णन है की वास्तविकता में परम ब्रह्म परम भगवान श्री कृष्ण है और सब उनके दास हैं एक ले ईश्वर कृष्ण और सब व्रत ईश्वर परमार कृष्ण सच्चिदानंद विग्रह

00:04:16:07 और बहुत अच्छा लगा गुरुदेव यह श्री कृष्ण के बारे में सुनकर के हमें भगवान श्री कृष्ण का मैं भी बहुत भक्त हूं एक अगला हमारा यह रहेगा की जैसे आजकल हम देखते हैं की धर्म के नाम पर काफी युद्ध हो रहा है दुनिया में पंथ के नाम पर कई सारे पंथ बन गए हैं तो इसमें आप किस तरह से देखना चाहेंगे की जैसी क्रिश्चियनिटी है क्या जैसे हमें कई बार कौन से इस्कॉन की जब हम पढ़ करते हैं कुछ स्टडी करते हैं तो कई बार ऐसा आता है की सारा धर्म की एक कृष्ण और क्राइस्ट में कोई अंतर नहीं है कृष्ण और मोहम्मद में कोई अंतर नहीं

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00:04:54:01 है देखिए जी कृष्ण और कृष्ण में कोई अंतर नहीं है नहीं बहुत बड़ा अंतर है कृष्ण मोहम्मद साहब कहां कृष्ण समझिए जैसे हमारे संस्थापक का चाह रहे हैं प्रभु जी तो हम प्रभु जी को भगवान नहीं बोलते जीसस है वह गुरु है वह और वह स्वयं बोलते हैं की मैं भगवान का पुत्र हूं मोहम्मद साहब स्वयं बोलते हैं मैं भगवान का दूध हूं

00:05:32:03 अगर कोई उनको भगवान बोलता है तो यह गलत है लेकिन भगवान ने स्वयं स्पष्ट बोला की मैं भगवान हूं घोषणा कर रहे हैं की मैं भगवान हूं तो इसलिए हमको समझना चाहिए की कभी भी हमको भगवान कृष्ण की तुलना मोहम्मद साहब यह किसी और संत से नहीं कर सकते सनातन धर्म और वास्तविक आध्यात्मिक चेतना के अनुसार कृष्ण उनको अल्लाह भी बोलते हैं उनको गोद भी बोलते हैं उनको jihaba भी बोलते हैं उसमें कोई भेद नहीं कोई अल्लाह अलग नहीं है कृष्ण अलग नहीं है घोड़ा अलग नहीं है एक ही है जैसे हम कभी-कभी ऑफिशल वेबसाइट के थ्रू पढ़ करते हैं जब तो एक shilaprabha जी का एक कथन मिलता है की कृष्ण और क्राइस्ट के नाम में कोई फर्क नहीं है तो इस पर थोड़ा सा प्रकाश डालेंगे कृष्ण देखिए क्राइस्ट वो क्राइस्ट को ही समानता बताइए की कृष्ण कहें या क्राइस्ट कहे लगभग एक ही है ऐसे करके

00:06:50:00 वह जो बोलना चाह रहे हैं वह बता रहे हैं की कृष्ण ही एकमात्र भगवान का परफेक्ट नाम है क्योंकि अगर आप रूप जी की पुस्तक लेंगे आप उसे साक्षात्कार का विज्ञान पुस्तक हो तो मैं भी

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00:07:02:06 आपको को बोलता हूं

00:07:20:18 मतलब क्राइस्ट शब्द में उनको समझने के लिए उन्होंने इस चीज को लिया मतलब भाषा से उन्होंने जो बोला ना जैसे ये बोल रहे हैं ना यहां पर क्राइस्ट ग्रीक शब्द क्रिस्टा का ग्रीक संस्करण है जब कोई भारतीय व्यक्ति कृष्ण को पुकारता है तो वह अक्सर कृष्ण कहता है कृष्ण एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है sarvakarshan यानी आकर्षण की वस्तु बिल्कुल इसलिए जब भगवान को क्राइस्ट कृष्ण कृष्ण के रूप में संबोधित करते हैं तो भगवान के समान सर्व आकर्षण सर्वोच्च व्यक्ति का संकेत देते हैं जब यीशु ने कहा की हमारे पिता हैं ना क्राइस्ट शब्द आया था कोई क्राइस्ट बोलता है क्या कृष्ण कृष्ण

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00:08:53:07 संस्कृत के अनुसार क्राइस्ट केवल कृष्ण कहने का एक और तरीका है हम उसे

00:09:18:03 शब्द को कृष्ण जीसस क्राइस्ट ईशा मसीह को नहीं मैन रहे हम उसे शब्द को कृष्ण मैन सकते हैं अलग भाषा में कृष्ण मैन सकते हैं मतलब अच्छा ठीक है ना ठीक है राइट शब्द जो है उसको कृष्ण

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00:09:32:03 मैन सकते हैं ऐसे हम लोग रिकॉर्ड में टोटल पंच पॉइंट रहते हैं जिसमें से एक तो मुझे जिसमें से एक प्रॉब्लम है का देते हैं सिर्फ समझने के लिए है उन्होंने simularity दिखाई है खैर आप मुझे पहले यह बताइए की सील topaji कौन के संस्थापक है फाउंडर और इन्होंने की काफी सारी बुक्स लिखी हैं जैसे भागवत गीता भाष्य उन्होंने लिखा है गीता यथा रूप गीता भागवत पुराण पर भाष्य भी लिखा है उन्होंने इसके अलावा कई और बुक्स हैं जैसे आत्मा साक्षात्कार वगैरा उसी बुक के रेफरेंस से हमने विवाद भी की है उनसे तो वह फाउंडर है अच्छा की जैसा की उन्होंने कहा की हमारे पॉइंट्स नहीं उन्होंने कहा की जिस तरीके से प्रभु पाजी हमारे गुरु हैं वैसे ही जीजू और मोहम्मद जी भी हमारे गुरु हैं तो क्या कोई सनातनी इनमें से किसी

00:10:47:06 भी टीचिंग फॉलो कर सकता है और दूसरा सवाल यह है क्योंकि नहीं मतलब सवाल नहीं है ये इसमें मैं ऐड करूंगा क्योंकि इन्होंने ही कहा की श्री कृष्ण भगवान को अल्लाह भी कहते हैं उन्हें यहोवा भी कहते हैं है ना भगवान को तो एक तरीके से टीचिंग फिर मैं इनमें से किसी भी ले सकता हूं अध्यक्ष महोदय ने ऐसा क्यों बोला यह मैं नहीं बता सकता बट कृष्ण अल्लाह और यहोवा में काफी अंतर है और आगे इट इसे ही देख लें तो उसमें भी लिखा है चौथे छत में श्लोक में की जब जब बाप की वृद्धि होती है धर्म की वृद्धि होती है ना प्रकट होता हूं वहीं पर अगर हम इस्लाम में देखें तो इस्लाम में कई बार ही घोषित किया है जो अल्लाह है उन्होंने की मैं प्रकट नहीं हो सकता जैसे उनकी जो किताब है उसका छठवें श्लोक उसमें वह का रहे हैं की मेरी कोई संतान कैसे हो सकती है जबकि मेरी कोई पत्नी नहीं है तो सनातन धर्म वह है जिसमें

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00:11:57:21 एक अनलिमिटेड ईश्वर की पूजा करवाई जाती है और यदि कोई व्यक्ति किसी भी ऐसी एंट्री की पूजा करने की शिक्षा दे रहा है जो रिस्ट्रिक्टेड है तो वह व्यक्ति फिर सनातन हिंदुइज्म का गुरु नहीं

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00:12:15:23 कहा सकता इसके अलावा इसके अलावा और भी कई ऐसी टीचिंग्स है जो बिल्कुल अपोजिट है एक दूसरे के जैसे सनातन की टीचिंग है रघुकुल रीत सदा चली आई परंजय प्रवचन एन जाए रामदेव प्रकार की बातें नहीं करता वहीं पर अगर हम उनकी बुक देखें तो उसमें आता है की मूक की बातों का कोई मोल नहीं होता है इस तरह के भाव प्रकट किए गए हैं तो यह भी टीचिंग्स में बहुत बड़ा डिफरेंस होता है तो ऐसा नहीं कहा जा सकता की वह लोग भी धर्म के ही गुरु हैं और या कृष्ण और अल्लाह से है अच्छा तो मतलब की जैसे यहां पर हिंदुइज्म में जो श्री राम है इनकी कही हुई इन्होंने कुछ का भी दिया तो वह हो गया परमानेंट की भाई हो गया मैंने का दिया तो यह है लेकिन उधर जो है जब तक कोई चीज रिटर्न

00:13:13:16 एक डिफरेंस जी बिल्कुल वहां साफ ए गया है की कई बातें कुछ ऐसी विषय चल रहा है जहां पर उन्होंने कहा है की यह सब तो तुम्हारे मुंह की बातें हैं तो तुमने मतलब भाव यह प्रकट किया जा रहा है की फालतू आपने इस तरह से बोल दिया वही राम का रहे हैं की जो मेरे मुख से निकल गया मैं अपने भाई को छोड़ सकता हूं लक्ष्मण को छोड़ सकता हूं सीता को छोड़ सकता हूं मगर मैं अपने वचन से नहीं मु कर सकता तो यह टीचिंग्स गुरुजी यीशु जैसे इस मसीह

00:13:46:02 जो जीसस क्राइस्ट उनको हम किस रूप में देखें एक आर्वैदिक व्यक्ति के रूप में जो वेद विरोधी हैं या फिर हम उनको ऐसा माने की हमारे धर्म के एक और वो मैसेंजर हैं दूध हैं क्या किस रूप में पहले तो यह समझना बहुत आवश्यक है धर्म क्या है हिंदू धर्म मुस्लिम धर्म सिख धर्म यह धर्म नहीं है धर्म क्या है जिसको धारण किया जाए अगर आप चीनी से मिठास को हटा दोगे तो फिर चीनी का अस्तित्व खत्म हो जाए ऐसे ही नामक नामक से जो नमकीन पैन है आप उसको हटा नहीं सकते अगर नामक से आपने नमकीन पर हटा दिया तो इसका मतलब है फिर नामक नाम की कोई चीज नहीं है तो धर्म का मतलब जिसको धारण किया जैसे चीनी का धर्म है मिठास उसने मिठास को धारण कर रखा है अब मिठास हटते ही चीनी नाम का अस्तित्व खत्म हो गया तो इसी प्रकार से हम मनुष्य हैं हम लोगों का धर्म क्या है हिंदू धर्म सिख धर्म ईसाई धर्म मुस्लिम धर्म नहीं अगर यह होता तो पता चलता है एक सनातन धर्म आने वाले समय में कोई व्यक्ति उसको समझता है और

00:15:01:06 वो मुस्लिम बन जाता है फिर उसको कोई दूसरा व्यक्ति समझता है तो वो अपने घर वापसी कर लेता है और पुनः सनातन धर्म को स्वीकार कर लेता है एक व्यक्ति उसको जो आध्यात्मिक ज्ञान नहीं है अभी दो का ज्ञान नहीं है उसे व्यक्ति को कोई समझता बोलता है की आप क्रिश्चियन बन जाओ समझ में आता है उसको वह घर वापसी करता है वह फिर सनातन धर्म स्वीकार कर लेता है तो यह अगर वह उसको बदल रहा है तो उसका अस्तित्व खत्म हो जाना चाहिए तो ये धर्म नहीं है मनुष्य का एकमात्र धर्म है सेवा सेवा के बिना कोई मनुष्य नहीं रह सकता चाहे मुस्लिम हो हिंदू हो ईसाई हो सनातन धर्म कोई भी बिना सेवा के नहीं रह सकते तो सेवा परमो धर्म सेवा ही वास्तविकता मूल धर्म है क्या सेवा किसकी सेवा वो फिर अपने आप में एक अलग विषय में बड़ा गहरा विषय होगा लेकिन इतनी बात हमें समझनी चाहिए की सेवा धर्म है ना की हिंदू मुस्लिम सिख ईसाइये धर्म नहीं है यह vichardharay हैं कोई किसी विचारधारा से प्रभावित है आज उसे विचारधारा को स्वीकार कर रहा है कल वो किसी और विचारधारा से प्रभावित हुआ उसको स्वीकार करने लगा लेकिन ये धर्म नहीं है तो गुरुदेव इसका मतलब मैं ये मानना चाहिए की सनातन नाम का कोई धर्म नहीं है नहीं सनातन धर्म है क्यों धर्म है इसको भी समझ लीजिए सनातन

00:16:16:09 का मतलब क्या है प्राचीन शाश्वत शाश्वत हमेशा से है और हमेशा रहेगा आप किसी भी शरीर में रहे हमारे शास्त्रों में वर्णन मिलता है की 84 लाख प्रकार की योनियों हैं लेकिन आप किसी भी योनि में जाओगे आप सेवा को नहीं छोड़ पाओगे पशु हो पक्षी हो की तो हो चिड़िया हो चिट्ठी हो कोई भी आप देखोगे बिना सेवा के नहीं रह सकता है कुछ ना कुछ कोई एन कोई बराबर सेवा कर रहा है एक चींटी अपने बच्चों के लिए भोजन ले जा रही है उठा रही है दाना उठा रही है कुछ किसी भी आप जीव को देखेंगे बिना सेवा के वो नहीं रह सकता तो जो सनातन धर्म है सनातन धर्म का मतलब क्या है लोग सनातन धर्म ही नहीं समझते सनातन का मतलब है और हम कौन हैं हम अपनी पहचान अपने शरीर हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई अमेरिकी चीनी भारतीय पाकिस्तानी से कर रहे हैं ये हमारी वास्तविक पहचान नहीं है हम वास्तविकता में शर्म नहीं आत्मा है और हम हमेशा से हैं हमेशा

00:17:18:00 सनातन मात्रा एक धर्म है दुनिया में सनातन धर्म यह लेकिन सनातन धर्म को समझने के लिए हम किस सनातन धर्म क्या है तो सेवा सनातन जो सेवा करना है हम लोगों का जो मूल तो जो जैसे कोई अगर मुस्लिम फिलासफी को फॉलो कर रहा है वो भी सनातनी है निश्चित रूप से उसको ऐसे भी समझ सकते हैं आप आप देखिए 1400 साल पहले ये दुनिया में कोई मुस्लिम था 2000 साल पहले कोई दुनिया में ईसाई था अगर हम और 5 साल पहले कोई दुनिया में सरदार

00:18:01:11 बिल्कुल बिल्कुल चाहे जैन हो चाहे बहुत हो चाहे जो भी अपना अपना उनके पैगंबर आए उनके मैसेंजर आए उनकी विचारधारा आई उसे विचारधारा को जो फॉलो करने वाले लोग हैं ये आए कहां से गुरुजी जैसे अपने भी एक बात कही की ये जैसे मोहम्मद हुए या फिर ये जीसस क्राइस्ट हुए ये मैसेंजर थी गोद के मगर अगर हम इनकी जब बुक्स को पढ़ते हैं तो काफी ऐसी बातें मिलती हैं जो वेदों का बिल्कुल स्पष्ट रूप से विरोध कर रहे हैं और हमारे शास्त्रों में कहा गया की वेद विरोध करने वाला नास्तिक है तो हम फिर उन्हें कैसे मैन लें की वो धार्मिक व्यक्ति द हान बिल्कुल समझने वाली बात ये है कई बार अगर हम वेदों वेदों को भी पढ़ते हैं वेदों को भी देखते हैं तो वेदों में वेदों का मतलब क्या है वेद का मतलब है ज्ञान और ज्ञान में सब कुछ ए जाता है

00:18:59:14 तो कहा जाएगा अरे एक जगह यह माना किया जा रहा है शराब और दूसरी जगह लोग शराब का भोग लगा रहे हैं सर आप चड्ढा रहे हैं एक तरफ माना किया जा रहा है की मांस नहीं खाना चाहिए और एक तरफ लोग बड़ी चड्ढा रहे हैं तो देखा जाए तो शास्त्रों में वेदों में भी विरोधाभास है तो समझने वाली बात इतनी है जो व्यक्ति जिस लेवल को समझ सको समझता है उसे लेवल की बात की जाती है उतनी ही बात की जाती है तो उसे समय जिन पर स्थितियों में मोहम्मद साहब द जिन परिस्थितियों में आपके जीसस द उनको वो समझ रहे द की जो लोग जितनी बात समझ पाएंगे उनको उतनी बात समझे की कम से कम इतना तो मानो लेकिन भगवान को याद करो लेकिन अगर कोई कहता है की नहीं ईसाई धर्म ही पूर्ण है इसमें पूरा ज्ञान है या कोई कहता है की नहीं मुस्लिम धर्म पूर्ण है या कोई बोलता है की नहीं यह सिख धर्म पूर्ण है या कोई बोलता है की हम कोई हम हिंदू धर्म में ही कोई व्यक्ति बोलता है की मैं जो बोल रहा हूं यही पूर्ण है या कोई संत महात्मा ये कहे की यही पूर्ण है तो वास्तविकता में वहां पर थोड़ा सा समझदारी की जरूरत है पूर्ण एकमात्र भगवान है और उनकी वाणी है और ये जो वाणी है वो आपको वेदों के रूप में प्राप्त है और वेदों में जो ज्ञान दिया गया है वो बिल्कुल परफेक्ट है हान

00:20:14:19 उसको समझने के लिए जो पात्रता चाहिए वो हमारे पास ना होने के कारण कई बार हमें वेदों में भी विरोधाभास दिखता है लेकिन वेदों में कोई विरोधाभास नहीं है वो दिखता है जैसे इस पर मैं अभी थोड़ा सा अभी मैं पढ़ कर रहा था एक vaishnavacharya जी उनकी एक बुक उन्होंने बनाई क्यों उसमें बहुत सारे सपनों के जवाब दे तो उसमें से एक जवाब उन्होंने दिया था की जो जगह-जगह पर हमें पुराने शास्त्रों में मांस दिखता है मांस मदिरा उनकी उन्होंने वो वाले अर्थ दिए द जो निरुक्त से निकले हमारे जो पुराना प्राचीन ग्रंथ है जिससे हमने वेदों को कहते हैं की उसको हम समझ पाए वेदों को नियुक्त की सहायता से बिल्कुल आप नहीं ये चीज सही गई है तो फाइनली हम क्या मानें की जीसस क्राइस्ट और मोहम्मद साहब हमारे धर्म के ही भगवान के ही भेजे हुए मैसेंजर द या फिर कोई ऐसे लोग जो जिन्होंने वेदों का विरोध किया निश्चित रूप से इस तरीके से बोलना उचित नहीं है चाहे मोहम्मद साहब हो चाहे गुरु नानक देव जी हो चाहे और अन्य जितने धर्म को स्थापित करने वाले धर्म आचार्य हैं या धर्म को फैलाने वाले जो आप देखेंगे जो पैगंबर हैं पुत्र हैं मैसेंजर हैं

00:21:29:27 इनका वास्तविकता में इन्होंने लोगों की योग्यता के आधार पर बात कही लेकिन सब ने एक बात बोली ईश्वर को ध्यान करो ईश्वर का स्मरण करो वही सब कुछ है आप देखेंगे चाहे ईसाई हो वो भी किसको याद करते हैं मुस्लिम को देखेंगे वह भी भगवान को याद यानी सब कहीं ना कहीं अगर देखा जाए तो ईश्वर से ही जोड़ रहे हैं हान जी लेकिन भेद कहां है लोगों की योग्यता के अनुसार जो इसी तरह से भगवान के जितने भी ये मैसेंजर आए हैं चाहे वो मोहम्मद साहब हो चाहे वो जीसस हो चाहे वो अन्य सनातन धर्म के लोग उन्होंने लोगों को आकर के उनकी चेतना उनके लेवल वर्तमान परिस्थिति के अनुसार ही बात कही की इतना इतना समझ जाएं हम लोग तो मतलब हमें ऐसा ही देखें की हमारे भगवान द्वारा भेजे गए मैसेंजर हैं हमारे भगवान उनके भगवान

00:22:27:01 अलग भगवान आत्मा द्वारा श्री कृष्ण द्वारा ही सबको भेजा जाता है की आप जाओ और धर्म की स्थापना करो धर्म को समझो और धर्म की चर्चा करो और व्यक्ति को उसके अनुसार जिस तरह के उसमें समर्थ

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00:22:41:24 उसके अनुसार वेल इतने से पार्ट में भी 5 पॉइंट्स मेरे पास आते हैं अभी आप वो पंच पॉइंट suniyega पहला पॉइंट होता है की कोई सनातनी किसी भी किसी के भी बात पे अपना धर्म बदल लें तो कोई धर्म नहीं है कोई धर्म नहीं है विचारधारा पॉइंट नहीं है अगर ऐसे ऐसा करें

00:23:22:06 वह लास्ट की दो स्टेटमेंट है इन्होंने बोला की वेदों में कांट्रडिक्शन जो पॉइंट नोट किया है वो का रहे हैं की वेदों में जो ज्ञान है उसमें विरोधाभास नहीं है अत फर्स्ट इसका इनका स्टेटमेंट यह है की वेदों में कांट्रडिक्शन और लास्ट पॉइंट वेदों में कोई विरोधाभास नहीं है तो ये अपने में मतलब जितना मैंने अभी देखा मुझे एक बहुत कन्ज्यूरिंग स्टेटमेंट लग रहा है और ये ऐसा क्यों का रहे हैं मुझे नहीं पता अगर आप इस पर कुछ डिस्कस करें या फिर अपने कुछ पॉइंट रखे तो प्लीज यार देखो स्टेटमेंट कन्ज्यूरिंग तो डेफिनेटली हैं एक जगह कुछ का रहे हैं फिर अगली जगह कुछ का रहे हैं तो कन्फ्यूजन तो है ऐसा लग रहा है की शायद यह थोड़ा सा पहले कुछ गलती हो रही है इनसे और बाद में शायद उसे ठीक कर रहे हैं मगर ऐड दी एंड इन स्टेटमेंट में हम लोग क्या डिस्कस करें इस पर डिस्कस करना कुछ बनता ही नहीं है क्योंकि अगर हम एक स्टेटमेंट पर डिस्कस करेंगे तो वो का देंगे हमने दूसरा ये कहा था अगर हम उसे पर डिस्कस करेंगे तो का देंगे तो कहने का मतलब यहां पे हमें शायद यहां कुछ इस करने का

00:24:37:11 बनता नहीं है की किसी विशेष हमारा विशेष देश कल paristhitivash वहां के लोगों की योग्यता के अनुसार उनके लिए जो उचित था वह ज्ञान उन्होंने दिया गया पर हमें याद रखना चाहिए अभी थोड़ी देर पहले इन्होंने भी इस बात को कहा की जो किसी भी देश कल परिस्थिति में ना बदले अथर्ववेद में लिखा हुआ है जो किसी भी देश कल परिस्थिति वर्ष ना बदले वही सनातन है

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00:25:09:05 उसी का नाम सनातन है शाश्वत है तो अगर किसी परिस्थिति वर्ष किसी को कोई ज्ञान दिया जा रहा है तो वह ज्ञान सनातन

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00:25:20:17 ज्ञान नहीं है और वह ज्ञान सनातन धर्म का ज्ञान नहीं अच्छा गुरुदेव एक पब्लिक में काफी यह बात है चर्चित की आ जैसे हमारे शिल्पा

00:25:39:14 जी हैं इनके बारे में कहीं कहा जाता है की शिव को नहीं मानते द ऐसा कई बार आता है की कृष्ण को ही कहते हैं और शिव को नहीं मानते हैं उन्होंने भागवत में अपने भाष्य में तीसरे आ शायद स्कंद है और 25 चैप्टर है 25 में श्लोक है उसमें कहा है की शिव को कृष्ण के तुल्य समझना समझने वाले मूर्ख है ऐसे बहुत दुर्गा को तो इस तरह की चर्चाएं फैली हुई है कोई भी जब तक समझेगा नहीं सिद्धांतों को तो नहीं समझ पाएगा मेरा आप सबसे यह प्रश्न है परमात्मा कितने हैं परमात्मा कितने हैं परम भगवान

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00:26:28:17 एक शक्ति सब बोलेगा कोई शक्ति है जो संसार को चला रही

00:26:38:14 इसको हमें वेदों से जानना है और वेदों में इसका स्पष्ट निर्देश है वेदों में बताया गया है की वास्तविकता में किसकी क्या स्थिति है चेतन वर्णन आता है एक ले ईश्वर कृष्ण और सब भृत्य एकमात्र ईश्वर परमेश्वर कौन है कृष्ण और सब क्या है व्रत व्रत मतलब होता है दास और सब सर्वेंट है शिव जी भगवान के महान भक्त हैं और शिव तत्व को समझने के लिए और भी जगह बहुत कुछ बोला है शिव तत्व जो है वो जीव तत्व से ऊपर है यानी ब्रह्मा जी की पोस्ट है ब्रह्मा जी एक पद है ब्रह्मा जी कोई व्यक्ति नहीं है लेकिन शिव एक व्यक्ति ने बताया शास्त्रों के आधार पर यह ब्रह्मा जी और कृष्ण के बीच की स्थिति अच्छा यानी शिव को आप यह भी नहीं बोल सकते की पूर्ण भौतिक है यह जीवात्मा है और ना उनको यह बोल सकते हैं की यह पूर्ण ब्रह्म परम ब्रह्म परमात्मा को मानते नहीं है हम शिवजी का सम्मान करते हैं वो मा भगवान के महान भक्त हैं हम हनुमान जी का सम्मान करते हैं वो हनुमान जी के महान भक्त हैं आप देखेंगे हमारे कई मंदिरों में सीताराम लक्ष्मण हनुमान जी की आपको विग्रह मिलेंगे और हनुमान जी और शिव जी

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00:27:49:13 रुद्र बता रहे हैं तो ऐसा नहीं है की हम उनको नहीं मानते या उनका अपमान करते हैं ना तो इससे आपको नहीं लगता मैं

00:28:04:15 अगर आप पढ़ेंगे शास्त्रों को पढ़ेंगे तो शास्त्रों में ये बोला गया की जो व्यक्ति भगवान को भगवान के समान ऐन देवी देवताओं को समझता है वो व्यक्ति पाखंडी है जो व्यक्ति भगवान के समान समझता है मतलब ये जो शिव और दुर्गा है ये देखता है हैं शिव देवी देवता से ऊपर है देवी देवता अलग है भगवान श्री कृष्ण भगवान नहीं है चर्चा करने का क्योंकि हम अगर हम जनरल पब्लिक को कुछ बोलेंगे तो वो समझ नहीं पाएगा तो उसको वो समझने के लिए उसे चेतना से आना पड़ेगा परम वैष्णव शिवजी है और उनका स्थान अलग है वो उनको देवी-देवता नहीं बोल सकते देवी देवता तो पद है जैसे सूर्य चंद्र ये पद है जैसे मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री ये पद है इस पद पर आज कोई बैठा है कल कोई बैठा होगा इसी तरीके से सूर्य हैं इन पर आज कोई व्यक्ति बैठा हुआ है कल कोई भी बैठेगा इंद्र पद है वर्तमान समय में इंद्र कौन है

00:29:07:22 समझेंगे जानेंगे तो यह सब क्लियर है ठीक है तो मतलब ये का सकते हैं की शिव जी का और दुर्गा जी का नाम श्री कृष्ण के समान समझना नहीं चाहिए शिव जी के समान उनको नहीं सब भगवान एक है परमात्मा एक है शिव जी को अगर कोई कृष्ण के समान सोचता है की एक ही बात है भगवान कृष्ण को या शुभ कौवे की बात है तब वो ठीक नहीं अच्छा लेकिन शिव से जो द्रोह करता है शिव जी का जो अपमान करता है शिव जी की जो अपेक्षा करता है उससे भगवान प्रसन्न नहीं होते उसे कभी भगवान की भक्ति नहीं मिलेगी

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00:29:46:12 इस पार्टिकुलर सेगमेंट में भैया थोड़ी सी इंपॉर्टेंट और सीरियस बात भी करेंगे सबसे पहले इन्होंने कहा की शिव जी पूर्ण ब्रह्म परमात्मा नहीं तब भी सवाल करूंगा की मुझे इन लोग को भी बताना है अपने भी शब्द को शिव जी को भगवान समझने वाले पाखंडी और मूर्ख हैं ये ये का रहे हैं की वेदों में लिखा हुआ इन्हीं का पॉइंट नहीं है वेल ओके पहले तो आप मुझे यह बता दीजिए पूर्ण ब्रह्म क्या है पूर्ण ब्रह्म हमने भी थोड़ी देर पहले डिस्कस किया था की वह एंटी मतलब सुप्रीम कोर्ट जो रिस्ट्रिक्टेड भी हो सकती है जो कहीं पर भी बाधित नहीं मतलब अगर हम नॉर्मली अगर हम कहें की हम जो देखते हैं गोद भगवान तो पूर्ण ब्रह्म का मतलब है सर्वोच्च सर्व शक्तिमान भगवान जो अंतिम लेवल हो सकता है शक्तिमान का वह पूर्ण ब्रह्म है हान तो मतलब एक तरीके से जो एक दिमाग में कॉमन पीपल के दिमाग में भगवान को लेकर के जो इमेज है नहीं है बिल्कुल वही अच्छा यह

00:31:01:13 होता है पूर्ण ब्रह्म तो ऐसे तो कितने लोग हैं जो शिव भगवान को इसी नज़रिया से देखते हैं तो फिर इन्होंने ऐसा क्यों कहा की जो है वो पूर्ण ब्रह्म नहीं है भगवान नहीं है भगवान ना हो करके उदास है नहीं शिव जी

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00:31:20:03 पूर्ण ब्रह्म है और ये घोषणा कई शास्त्रों में शिव पुराण में वो का रहे हैं मैं पूर्ण ब्रह्म परमात्मा हूं भागवत पुराण में श्री कृष्ण का रहे हैं प्रभु श्री रामचंद्र उनकी पूजा कर रहे हैं पद्म पुराण में देवी भागवत में देवी

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00:31:35:06 का रही हूं मैं पूर्ण ब्रह्म इसके अलावा और भी कई शास्त्रों के प्रमाण है जहां पर साफ-साफ मेंशन है शिव भगवान पूर्ण ब्रह्म परमात्मा है अच्छा तो ऐसे जिस तरीके के मतलब यह स्टेटमेंट है मतलब जैसे यह आए हैं यहां से ना हो लेकिन जैसे भी स्टेटमेंट है आपको नहीं लगता की जैसे फॉर एग्जांपल मुझे शिवजी बहुत कूल लगता है अगर मैं भाई अपनी भाषा में अगर मैं बोलूं तो क्योंकि तीसरी आंख है भाई उनकी त्रिशूल है डमरू है वो इतना बढ़िया कैरक्टर है शिव जी

00:32:19:01 वाले अगर उसमें लेकर चले तो मेरी मम्मी बहुत बड़ी devbhuti है शिवजी है कल को अगर वह ऐसे स्टेटमेंट चलती है तो फिर कौन से जो स्टेटमेंट ए रहा है उनको तो काफी बुरा लगेगा नहीं बिल्कुल बिल्कुल इसमें क्या है वही थोड़ी सी डाउटफुल हो जाती हैं क्वेश्चनेबल हो जाती है की उन्होंने अपनी बुक्स में ऐसा क्यों लिखा अब जैसे हम अगर सील पापाजी की बुक देखें भागवत पुराण का भाष्य जो उसमें तीसरे स्कंद के 25वें अध्याय के 25 में श्लोक में उन्होंने कमेंट्री में ही लिखा की 10 नाम अपराधों में से 1 अपराध होता है भगवान कृष्ण के समान शिव दुर्गा आदि के नाम को समझना वहीं पर नारद पुराण में साफ-साफ लिखा हुआ है 10 नाम अपराधों में मतलब एक जगह एक व्यक्ति खुद की मैन से अपने भाष्य में लिख रहा है और दूसरी जगह शास्त्र में लिखा हुआ है नारद पुराण में 10 नाम अपराधों में से एक अपराध है शिव और विष्णु में भेद करना मतलब शिव और विष्णु में जो अंतर करेगा वो पापी है इसको बस सिंपल सिंपलीफाई

00:33:34:22 ऐसे कर लीजिए प्रकट करते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश जब वह इसको ऐसे समझ लीजिए की मैं जिनको एक व्यक्ति हूं तो मैं जब जिम जाता हूं तो वहां के लोग जब मुझसे मिलते हैं तो वो मुझे एक स्पोर्ट्स ड्रेस में देखते हैं मैं अभी आपसे मिल रहा हूं तो एक फोरम मॉल तेरे मिल रहा हूं मैं पूजा करने मंदिर जाता हूं तो धोती पहनता हूं तो ये मेरे तीन डिफरेंट ग्रुप हो गए तो जो मेरे जिम में फ्रेंड्स हैं उनको मेरा वही रूप अच्छा लगेगा जिस रूप में वो मुझसे डेली मिलते हैं इसी तरीके से जब भगवान ने जन्म दिया तो ब्रह्मा के रूप में देखें भगवान ने जब पालन किया तो विष्णु रूप में देखें भगवान ने जब नाश किया तो शिव रूप में देखें मगर जगह-जगह पर इन तीनों की एकता के बारे में साफ मेंशन है शास्त्रों में इन तीनों में कोई भेद नहीं है इन तीनों में भेद करने वाला पापी है और शिव भी पूर्ण ब्रह्म है विष्णु भी पूर्ण ब्रह्म का ही रूप है ये सारी चीज शास्त्रों मेंशन है दिखाई दे रहा है की प्रभु बाजी जो है वह हमारे

00:34:39:18 शास्त्रों के शास्त्रों के खिलाफ है और सेल्फ opinited तो अभी जैसे शास्त्रों के विरुद्ध तो प्रभु पाजी तो मुझे दिखाई दे रहे द लेकिन ये गुरुजी हमें का रहे हैं की आप शास्त्र इनका क्वांटिटी स्टेटमेंट लेकिन बिल्कुल जो हम शास्त्र पढ़ेंगे तो मैंने आपको जो प्रमाण बताएं हैं वह स्क्रीन पर ए रहे होंगे आपकी और आप बिल्कुल वहां से यह पता कर सकते जो भी चीज हम बोल रहे हैं

00:35:15:24 और प्रमाण शास्त्रों के यह आपस में कांट्रडिक्शन यह जो सेल्फ ओपन नहीं है अब ऐसी क्यों बोल रहे हैं यह एक अलग मैटर है नेक्स्ट उसके इंटरव्यू [संगीत] के अनुसार जीवन जीता है शिव जी

00:35:56:00 सर्वश्रेष्ठ भगवान के भक्त हैं भागवत गीता के भाष्य में प्रभु जी लिखते हैं की शिव से परम और कोई भक्त को वहां मेंशन किया उन्होंने हरिदास ठाकुर जी हैं उनको परम भक्त कहा है शिव जी से भी ऊपर वैष्णव नहीं है

00:36:31:13 जैसे इसको ऐसे समझ सकते हैं की भगवान को प्रेम करने वाली अनंत jivatmaen और उन अनंत jivatmaon में हर व्यक्ति का अपना अपना स्थान पढ़ेंगे

00:36:56:03 और ग्रंथ पढ़ेंगे aachariyon के तो वहां आपको पता चलता है की नहीं इनसे बड़े भक्त यह है इनसे बड़े भक्त यह हैं उनसे बड़े भक्त यह है और फाइनली पता चलता है की नहीं सबसे बड़ी तो राधा रानी है वो भगवान की महान भक्त है उनसे बड़ा कोई भक्त नहीं है तो मतलब शिव जी को परम वैष्णव माने या ना माने रूप में उनको ऐसे मतलब क्या उसको समझने के लिए कोई एक सिद्धांत दिया है उसके आधार पर ये बताया है की हरिदास जी को बोला की हरदा जी इतने समर्पित द की उनको एक वेश्या पहुंचती है और वो उनको एप्रोच करती है अपना संघ करने के लिए रात्र के समय में अकेली पहुंचती है लेकिन नमाज हरदास ठाकुर विचलित नहीं होते बल्कि वो उसको भक्त बना देते हैं

00:37:47:01 लेकिन अगर शिव जी के विषय में शास्त्रों में पढ़ेंगे तो जब मोहिनी अवतार का दर्शन शिव जी बोलते हैं की भाई आप मुझे अपना मोहिनी अवतार दिखाइए तो भगवान कहते नहीं तुम मोहिनी अवतार जी बोलते नहीं है मुझे आपका मोहिनी अवतार देखना है बहुत सुंदर है तो जब भगवान अपना मोहिनी अवतार लेते हैं तो पता चलता है शिव जी विचलित हो जाते हैं और के पीछे भागने लगते हैं तो कहने का तात्पर्य है उसे दृष्टांत को दिखाने के लिए प्रभुपाद जी ने एक बात बोली की जो भगवान जी ने कंट्रोल कर लिया इस बात को समझने के लिए ये बात बोली लेकिन शिव जी का स्थान कोई कम स्थान नहीं है ऐसा सोचना की नहीं वो अंदाज़ जिसे छोटे हैं या हरदा शिव उनसे बड़े हैं ये नहीं एक दृष्टांत देने के लिए बताया है भागवत में कहा है ना की जैसे यहां जो श्रीमद् भागवत गीता में कहा फूफा जी ने की शिव जी को जब पार्वती माता ने कामदेव ने उनको जब वह किया था तो प्रेरित तो पार्वती माता की समझने पर वह मैन गए द और हरिदास ठाकुर जी नहीं माने द यह दृष्टांत दिया था जी और एक दूसरा दृष्टांत भी मैंने और बताया उसके अलावा यह भी तो कहने का तात्पर्य केवल इतना सा है की

00:39:02:13 आचार्य कुछ बोल रहे हैं तो वो कुछ प्रसंग से कुछ समझने की बात कर रहे हैं किसी बात को पकड़ करके खींचने या उसको अलग तरीके जैसे आम जनमानस क्या करता है वह बात को पकड़ता है बोलेगा ये ऐसा कैसे हो गया शिव जी से बड़ा कौन भक्त है चारों तरफ शिव जी के मंदिर हैं शिव जी की इतनी आराधना है सनातन धर्म में शिव जी का कितना ऊंचा स्थान है और आप का रहे हैं की अल्लाह ठाकुर से बड़े हैं तो ये आम व्यक्ति नहीं समझ पता ये क्या ये क्या बोल दिया ऐसा थोड़ी होता है लेकिन हमें समझना होगा की एक भक्त एक संत प्रभु पाजी किस आधार पर क्या बताना चाह रहे हैं क्या मैसेज देना चाह रहे हैं क्या समझाना चाह रहे हैं वो हमें थोड़ा सा समझना होगा लेकिन ऐसा नहीं है शिव जी की स्थिति कोई छोटी स्थिति है या वो छोटी नहीं पर एक समय पर जाकर के हरिदास से कहीं ना कहीं वो उसे perpeksh में जिस घटना को लेकर के वो समझा रहे हैं वो बताने कंट्रोल कर लिया इंद्रियों को और शिवजी

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00:39:54:27 नहीं कर पाए लेकिन सी आर गोइंग फॉर डी डिस्कशन मोड जितना हिस्सा हुआ है अभी तक और इस पे मेरे पास जितने पॉइंट्स बने हैं जो स्क्रीन पे भी मैंने डेल हैं कांट्रडिक्शन फिर से साफ साफ दिखाई देती है सबसे पहला पॉइंट शिवजी परम वैष्णव है परम वैष्णव का मेरा मतलब अगर मैं आपको प्रॉपर फ्रैक्शन का मतलब होता है विष्णु जी के हैं विष्णु जी के जो परम भक्त होते हैं वो होता है

00:40:29:21 शिव जी परम वैष्णव है फिर उसके बाद कहते हैं हम की ऐसा नहीं कहेंगे की शिवजी से ज्यादा बड़ा भक्त कोई नहीं पर हम वैष्णव होने के बाद भी शिवजी से बड़ा कोई वक्त है शिव जी से शिव जी सबसे बड़े भक्त नहीं है ऐसा नहीं है फिर नेक्स्ट पॉइंट इनका आता है चौथा पॉइंट है वो कहते हैं की शिवजी महान भक्त फिर से कॉन्टैक्ट राधा रानी तो शिवजी नहीं भगवान नहीं परम भक्त

00:41:49:03 दूसरे चैप्टर के 62वें श्लोक को देखें तो उसमें लिखने वाले जो हैं sealprapat जी ने कमेंट्री में लिखा है की हरिदास ठाकुर जो है उनको अपनी सेंसर पे बहुत कंट्रोल था शिवजी से भी ज्यादा इस्कॉन की गीता उसमें लिखा हुआ है अच्छा तो मतलब क्या गीता इनकी अलग गीता है हाई स्कूल

00:42:29:27 कहे हैं तो होता क्या है की जब कोई लेखक unsulon का अर्थ करता है तब वह सिर्फ गीता भागवत गीता का ही जाती है मगर कभी जब लेखक साथ में पाठको को समझने के लिए अपने जो रीडर्स होते हैं उनको समझने के लिए साथ में अपने कमेंट्री भी लिखता है की इस लोक के माध्यम से भगवान क्या कहना चाह रहे हैं तो तब वो अपनी उसे बुक को एक अलग नाम दे देता है तो ऐसी सील तोड़ने अपनी कमेंट्री से जब गीता को एक्सप्लेन किया तो उन्होंने अपना नाम दिया भागवत गीता आगे इट इसे अच्छा तो मतलब जितने भी गीता होते हैं

00:43:08:16 वह उसमें जो संस्कृत श्लोक है वह श्लोक से होता है और उसमें जो हिंदी होती है जो उसे संस्कृत का हिंदी में जो का सकते हैं अनुवाद है वह भी से होता है और उसे हिंदी का जो मीनिंग है की वह हिंदी में लिखा क्या है उसको और डिटेल हिंदी में इसको हम लोग का सकते हैं उसकी सिमरी या फिर उसका एक्सप्लेनेशन वो एक्सप्लेनेशन अलग-अलग लोगों का अलग-अलग क्या है जो स्टैंडर्ड है जो नियम है वो ये है की आप जो संस्कृत के श्लोक है उसकी हिंदी डबिंग आप एग्जैक्ट करिए आगे इट इसे उसके बाद जो भी आपके भाव है वो आप अपनी कमेंट्री में डालिए जो भी आपको समझ में ए रहा है जो भी आपको अलग से कहना है मगर भगवान के शब्दों को चेंज मत करिए मगर भागवत गीता आगे इट इस में कई जगह ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहां पर भगवान के शब्दों को भी चेंज किया गया यानी ट्रांसलेशन में भी चेंज हैं कमेंट्री में चेंज नहीं है ट्रांसलेशन में भी चेंज है वो इस पर हम आगे बात करेंगे

00:44:09:27 लास्ट ठाकुर जी तो हरिदास ठाकुर दूसरे अध्याय के 62वें श्लोक में कमेंट्री में शिल्पा जी ने यह बताने की कोशिश की है की हरिदास ठाकुर वह व्यक्ति हैं जिन्हें अपनी सेंसेक्स पे बहुत ज्यादा कंट्रोल था शिव जी से शिव जी से भी कंपेरटिवली तू शिवजी उन्हें ज्यादा अपने ऊपर कंट्रोल था क्योंकि एक रात में कोई प्रॉस्टिट्यूट आई थी जिसके मनाने पर भी वो माने नहीं द पर फिजिकल अफेयर तो मतलब की जो है हरिदास ठाकुर जी किसी प्रॉस्टिट्यूट की बात तो मैं नहीं आए द और अपने उसी जो मेडिटेशन

00:44:50:09 तो इसीलिए वह शिवजी से बड़े हो गए 62वें श्लोक में शिव जी की कोई बात नहीं हो रही है मगर फिर भी पता नहीं क्यों सील प्रोप पाजी ने शिव जी को यहां पर रखा की शिव जी जो है अपनी इंद्रियों को वश में नहीं कर पाए इंद्रियों को कंट्रोल नहीं कर पाए और वहीं पर इस्कॉन से जुड़ा हुआ कोई व्यक्ति था हरिदास ठाकुर उसने अपने को कंट्रोल में कर लिया क्या शिवजी वैसे क्या कंट्रोल नहीं कर पाए हैं क्या ये स्टोरी क्या है हान ये उन्होंने प्रकरण दिया है जब शिव ध्यान मग्न द और पार्वती माता उन्हें विवाह के लिए माना रही थी तो उसे समय क्योंकि देवताओं को किसी रक्षा से भाया था उसे रक्षा के नाश के लिए कार्तिकेय जी का जन्म होना था और उसके लिए जरूरी था की शिव जी का विवाह पार्वती माता से इसी संदर्भ में पार्वती माता वहां पर उनको माना रही थी शिव जी को तो विवाह के लिए अगर शिवजी मैन गए पार्वती मटक से तो इसलिए उनको कहा गया की वो विषयों के अधीन हो गए और यहां पर एक वैश्य जहां उन्होंने कहा गया है प्रॉस्टिट्यूट है उसके मनाने पर हरिदास ठाकुर नहीं माने तो इस चीज को कंपैरिजन यहां पर किया गया की भाई वहां

00:46:05:12 पर विवाह के लिए वो मैन गए और यहां पर हजार ठाकुर प्रॉस्टिट्यूट के लिए नहीं माने तो इसलिए हरिदास ठाकुर जो है ज्यादा अपने आप को कंट्रोलर बन गए सेल्फ सेंसेज को कंट्रोल करने वाले और शिव जी जो है कम हो गए जैसे फॉर एग्जांपल उधर जो है हम जैसा की आपने अभी कहा और इन्होंने भी जैसे अभी कहा की हरिदास ठाकुर जी प्रॉस्टिट्यूट की बातों में नहीं आए द और इधर शिव जी शादी के पार्वती तो इधर शिवजी पार्वती माता से शादी कर लिए तो इसी और दूसरी तरफ वो प्रॉस्टिट्यूट

00:46:46:13 के साथ नहीं गए कहां एक प्रॉस्टिट्यूट के साथ जाना एक मैटेरियलिस्टिक थिंग और कहां यह उनकी शादी करना है इस स्पिरिचुअल थिंग थी एक तरीके से अगर हम देखे जाएं तो एग्जांपल आपको वैसे क्या लग रहा है ये सही एग्जांपल है की इस बेसिस पे उनको आगे बढ़ा दिया गया नहीं बिल्कुल नहीं क्योंकि स्क्रीन पर आपको यहां दल देना मैं बता दूंगा भागवत पुराण के भाष्य नहीं एक जगह गलती से क्या है शिव जी को पार्वती के साथ देखने वाले देख कर शिव जी को पार्वती के साथ देख कर विषयों के अधीन समझने वाले मूर्ख होते यह shilpvad नहीं अपनी एक दूसरी बुक में कहा है तो यहां पर अब यह इनका बुक में भी कांट्रडिक्शन ए गया यहां पर गैस parvatiyon के दिन और दूसरी जगह पार्वती के साथ देख कर विषयों के अधीन समझने वाले मूर्ख तो यह डायरेक्ट

00:48:14:07 दिखा दो की नहीं हुई भैया उनकी हरिदास जी की और एक और कहानी यहां पे मेंशन हुई थी शिवजी और मोहिनी जी की कहानी के बारे में उसके बारे में अगर आप बताइए वह कौन सी कहानी देखिए कहानी तो यह है की जब कोई रक्षा था जिसका वध करना जरूरी था उसको वरदान प्राप्त हो गया था भस्मासुर नाम था उसको वरदान था की वह जिसके सर पे हाथ रख देगा वो भस्म हो जाएगा तो वह जब से वरदान दे दिया था शिव जी ने तो जब वरदान प्राप्त हो गया तो बस में सिर्फ

00:49:29:10 शिव जी को ही मरने के लिए उनके पीछे भाग और ऐसे में विष्णु भगवान रक्षा के लिए आए और उन्होंने मोहिनी रूप धारण किया मोहिनी रूप धारण करके उन्होंने भस्म उसूल से भस्मासुर उनकी ओर आकर्षित हुआ मुझे तुमसे शादी करनी है तो उन्होंने कहा मैं तो उससे शादी करूंगी जो नृत्य कर सकता हो तो नृत्य के उन्होंने भस्म सुनने का नृत्य सिख लूंगा तो फिर मोहिनी रूप ने कहा की तो चलो मैं सिखाती हूं तुम्हें तो सीखने के बहाने से उन्होंने कुछ ऐसे एक्टिविटीज करवा कर के भस्मासुर का हाथ उन्हें के सर रखवा दिया इस तरह से भस्मासुर का तो नाश हो गया मगर फिर आता है की जब शिवजी ने मोहिनी रूप में विष्णु भगवान को देखा तो वो उनके तरफ आकर्षित हो गए मोहिनी रूप की तरफ और तब उनके पीछे भेज विष्णु भगवान मोहिनी रूप में ए गया और वो पीछे पीछे और इसी दौरान उनका वीर भी इसके लिए हो गया यानी एजुकेट हो गया है मतलब स्पर्म एजुकेशन हो गया उनका

00:50:40:06 सही में ऐसा है ऐसा कुछ हुआ था की हमें एक चीज समझनी होगी की अभी यहां पर क्या दिखाई दे रहा है पहले आप यह समझिए की इस कहानी के द्वारा भगवान करके ए रहे हैं यह जो कहानी है भगवान की विभिन्न लीलाओं में से एक है अब प्रॉब्लम यह है की इस कॉर्न वाले टीचिंग्स देते हैं वह अपनी एक जगह पर जहां पर कृष्ण भगवान कोई लीला करते हैं तो उनकी लीला को आगे इट इसे लीला के रूप में ही स्वीकार करते की तो भगवान की लीला है मगर जब शिव भगवान लीला करते हैं तो उनकी लीलाओं को आगे इट इस स्वीकार नहीं करते वहां पर उनको का देते तो विषयों के अधीन हो गए

00:51:28:12 ऐसा ऐसे कुछ अंतर भेद करने की कोशिश करते हैं मगर जैसे कृष्ण भगवान की रासलीला हमें बहुत सारे साइंटिफिक और मैटर डिस्ट्रिक्ट को अर्थ समझती है उसी तरीके से जो भगवान शिव की यह लीला है यह भी हमें बहुत से साइंटिफिक और स्पिरिचुअल अर्थ समझती है नहीं ये पॉइंट तो मुझे सही लगा अभी तकलीफ तो ये वाला पॉइंट मुझे स्पेसिफिकली सही लगा की वर्जन शायद श्री कृष्ण भगवान की भी तो ऐसी कुछ लीला है विद रिस्पेक्ट कृष्ण भगवान ऐसे बात नहीं है किसी के इस भगवान की जो है अपन रिस्पेक्ट नहीं करता अपन बहुत ज्यादा रिस्पेक्ट करें शिव जी के बाद वही मेरे फेवरेट है बट ऐसे इंटरव्यू को देख करके ओके तो श्री कृष्ण भगवान जी की भी ऐसी काफी लीला आए हैं आप ने एक रास लीला बताया था मुझे बचपन में याद है की उन्होंने शायद वो कपड़े चुराए द उनके हैना और तो फिर वो उसमें ये लीला हो गई लेकिन जब शिव जी का रहे हैं कर रहे हैं ये चीज अवेलेबल करके वो एग्जैक्ट स्टोरी होगी वो कैरक्टर नाइस तो हान जैसे की उधर उनका एक साइंटिफिक रहता है उधर एक बहुत बड़ी फिलासफी रहती है उसे साइड में जब श्री कृष्ण भगवान ने वाला करते हैं वो तो मुझे पता है लेकिन शिव जी वाला क्योंकि ये मैंने भी

00:52:43:16 पहली बार सुना है की वेट हो गया तो इसके पीछे मतलब क्या स्टोरी है फिलासफी तो यह जो दास्तान है भगवान शिव का मोहिनी रूप के प्रति आकृष्ट होना यह एक्चुअली हमारे जो पृथ्वी और सूर्य चंद्रमा का निर्माण है और जो सोने का उपज है की धरती पर सोना कैसे बना चांदी कैसे बनी धातुओं कैसे बनी ये उसकी कहानी को यहां पर लीला रूप में भगवान ने दर्शाया है अब ये कैसे दर्शाया है की जब हम शास्त्र पढ़ते हैं तो उसमें भगवान जो विष्णु है उनको अग्नि का रूप कहा गया है और साइंटिफिक लिए प्रूफ पृथ्वी दिस काफी पहले आपका एक गोला थी तो पृथ्वी हो गई भगवान विष्णु का मोहिनी रूप और भगवान विष्णु है इधर-उधर फैले हुए अग्नि के रूप में बाप और वो जब इकट्ठा हुई तो भगवान विष्णु बन गए मोहिनी भगवान विष्णु जब मोहिनी बने कैसे बने मोहिनी कैसे बने पृथ्वी कैसे बने जो शिव है यानी चंद्रमा चंद्रमा का गुण होता है शीतलता ठंडक और शीतलता के कनेक्शन में आने पर भगवान विष्णु

00:53:58:25 मोहिनी बने मतलब शिव जी को बचाने के लिए बने द ना भगवान विष्णु मोहिनी तो यहां पर वह कनेक्शन है की चंद्रमा की शीतलता के प्रभाव से वह जो वाष्प की गर्म वास विष्णु रूप वह मोहिनी बन जाती है यानी पृथ्वी बन जाती है है मतलब की जो है जिस तरीके से जान चक्कर लगता है एक्जेक्टली तो फिर यहां जो शिव जी का मोहिनी के पीछे भगाना है वहां पर चंद्रमा का पृथ्वी के परिधि में आकर के पृथ्वी के चक्कर काटना है चंद्रमा जो है वो पृथ्वी के पृथ्वी में आते ही पृथ्वी के चक्कर काटने लगा तो ये हो गया की भगवान शिव जो है मोहिनी रूप का पीछा कर रहे हैं इसके बाद भगवान शिव क्योंकि भगवान शिव मोहिनी रूप को प्राप्त नहीं कर पाए उसी तरीके से चंद्रमा भी पृथ्वी को प्राप्त नहीं कर का रहा है आज भी देख लीजिए चक्कर ही कट रहा है इसके बाद एक आगे स्टोरी आती है की भाई भगवान शिव का वीर जहां पर गिरा जिसके लिए दुआ आकर्षण से वहां वहां सोने की उपज अब यहां पर जब चंद्रमा की जो बर्फ होती है वह पिघल के पृथ्वी के गिरती है तो पृथ्वी पर दो तरीके के तत्व मौजूद हो गए एक ठंडी बर्फ का पिघला हुआ पानी और एक जो उसके अंदर की अपनी गर्मी है तो जहां-जहां बा करके वो गर्म तो ये जो चंद्रमा का

00:55:13:25 पिघला हुआ पानी बर्फ पिघली हुई जब पृथ्वी के संपर्क में आने से चंद्रमा की जो बर्फ पिघल वो जब पृथ्वी पर गिरी वो बा के जहां-जहां गई तो जहां पर गर्म जो पृथ्वी की क्वालिटी थी वो ज्यादा थी और चंद्रमा की क्वालिटी कम तो वहां वहां सोना हुआ और जहां जहां चंद्रमा की क्वालिटी ज्यादा थी और पृथ्वी की क्वालिटी गर्मी वो कम थी वहां वहां चांदी हो गई अच्छा तो मतलब की शिव जी को चंद कहा गया मोहनी जी को अर्थ कहा गया तो ये तो मतलब एक तरीके से ये जो इनकी स्टोरी थी जो इतनी ज्यादा एक तरीके से बहुत छोटे रूप में इन लोगों ने बताया है ना क्योंकि ये एक तरीके से मैं कहूंगा स्टोरी ना हो करके एक बहुत फिलॉसफी थी थ्योरी थी काफी ज्यादा अच्छी और इन्होंने इसको ऐसा सिंपल स्टोरी बनाया और बनाया क्या समझा थोड़ा सा कहना यही चाहूंगा की हमारे पुराने में जितनी भी यह सब कथाएं हैं लीलाएं हैं ये सब कोई ना कोई स्टोरी बता रही हैं अब क्या है की यह पार्शियल्टी दिखाई देती है की भगवान कृष्ण के द्वारा की जाने वाली लीलाओं को लीला रूप में ही लिया जा रहा है उनके अर्थों को समझने की कोशिश की जा रही है मगर जब शिवजी वही लीलाएं कर रहे हैं वही चीज कर रहे हैं तो उनके

00:56:29:01 ऊपर आरोप लग जाता है की भाई वो इंद्रियों के अधीन है जबकि शिवजी ने कई जगह शिव जी को कहा गया की वो गुनाह अतीत है gunatish हैं गुण तीनों गुना से ऊपर है इसके भी प्रमाण आपको मैं प्रोवाइड कर दूंगा अच्छा तो आगे चलेंगे

00:56:48:03 एक दूध दही वाला उदाहरण कृष्ण जी जैसे जिस प्रकार दूध से दही बन जाता है मगर दही से दूध नहीं बनता है उसी प्रकार श्री कृष्ण तो शंकर भगवान बन सकते हैं मगर शंकर जी पुन हैं

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00:57:04:25 श्री कृष्ण नहीं बन सकते ये कैसे हैं और कहां से हैं इसको समझने का प्रयास किया की अचिंत वेद वे दर्शन दिया अचिंत vedabhet का मतलब होता है भी और नहीं भी है कृष्ण शिव है भी और नहीं भी है

00:57:23:03 कैसे नहीं है तो उन्होंने उदाहरण दिया की दूध से दही बनाया जा सकता है तो जब दूध से दही बना है अगर दही को पूछा जाए की उसमें क्या कंटेंट है तो अब क्या कहेंगे दूधी तो है केवल दही में दूध में भेद क्या है जाम कही बन जाता है लेकिन है तो वह दूध कई घंटे तो दूध दही को भी दूध बोला जा सकता

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00:57:45:19 है भी और नहीं भी है तो दूध से नहीं बन सकता है लेकिन अगर आप दही से दूध बनाना चाहो नहीं बन सकता इसी बात को समझने के लिए बोला की कृष्ण मतलब मुझे लगता था की ब्रह्म sammita का श्लोक है ऐसा कुछ दूध दही walain करने के लिए आचार्य

00:58:10:27 समझाया अच्छा मतलब नहीं यह charitamrat में भी है या फिर ब्रह्म संहिता में है तो यहां पर एक क्वेश्चन यह बनता है गुरुदेव की जैसे हमारे ईश्वर के लिए कहा गया पूर्ण ईश्वर दे कुछ भी कर सकता है तो जब हम उसके सामने लगा देते की वो ये बनकर कहीं वापस नहीं बन सकता तो फिर यहां बात हो गया क्योंकि भाई एंड उपनिषद का एक ऐसे नियम है की ईश्वर वही है जो जिसके सामने कोई लिमिट एन लगता है भारत बाधित नहीं हो सकता ईश्वर हमारा पूर्ण ईश्वर श्री कृष्ण भगवान कुछ भी कर सकते हैं तो यहां पर हम कहीं ना कहीं उन्हें बाधित कर रहे हैं की जैसे अब दही तो भाई पूर्ण नहीं है वो तो अपुन है अब यहां पर श्री कृष्ण को हम बाधित कर रहे हैं की वो शंकर बनने के बाद पुनः श्री कृष्ण नहीं बन सकते तो यह ऐसा आता है सवाल इस तरह से हम सनातन धर्म का जो कॉन्सेप्ट है पूर्ण ईश्वर वाला जिसमें जैसे अन्य जो पंथ हैं उसमें ईश्वर अवतार नहीं ले सकता यह नहीं कर सकता वो नहीं मगर हमारा क्या है

00:59:20:25 सब कुछ कर सकते कहीं पर बाधित नहीं होते हो तो यही सर्वोच्च ईश्वर की सबसे बड़ी पहचान है की वो बाधित नहीं हो सकता लिमिटेड नहीं हो सकता अनलिमिटेड है कुछ भी कुछ भी का मतलब कुछ नहीं अच्छा इस चीज को उपनिषद भी हमारे मानते हैं वेद भी मानते हैं की वो बाधित नहीं हो सकता सच्चे स्वरूप परमिश वर्मा तो यहां पर हम जब दूध दही से उनकी तुलना कर रहे हैं की जिस प्रकार दूध से दही पुनः वापस दूर नहीं बन सकता उसी प्रकार श्रीकृष्ण भी शंकर बनने के बाद पुनः कृष्ण नहीं बन सकते तो यहां नाच सकते वाला ए गया ही कांत और सनातन धर्म के ईश्वर के सामने वही है की ये नहीं लिखा जा सकता की ही कांड डू इट वाली बात यह जब भी कोई भौतिक उदाहरण दिया जाता है तो वो केवल समझने देखिए पहले तो यह बात समझना बहुत आवश्यक है ईश्वरी विषय जो है ना वो अचिन है अचिंत का मतलब क्या होता है विचारणीय नहीं है जो आपकी बुद्धि से आपकी सोच से आपकी मैन की पहुंच से परे हैं तो इसको अचिंत बोला जाता है तो अचिंत विषय को मानसिक चिंतन द्वारा एग्जैक्ट नहीं समझा जा सकता कभी भी तो यहां पर यह दूध दही से उनका करें बिल्ला या ना करें

01:00:32:28 और लोक चिंतन करना चाहते लोकतंत्र के आधार पर समझना चाहते हैं तब निश्चित रूप से उन्हें एक्सप्लेन करने के लिए भौतिक उदाहरण देकर बात समझे जाती है नहीं तो इसको निराधार माने क्या मानेगी यह इसको जैसे आप जैसे कोई हमारे गुरुदेव समझा रहे हैं किसी को डिप्टी को तो उसमें यह इसको करके ना करें मतलब उसमें फिर बात

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01:00:54:03 ही रह जाता है जी सही है की हम लोग आचार्य को फॉलो करते हैं और हम लोग एक दूसरे को प्रभु संबोधित करते हैं हमारे आचार्य प्रभु पाजी है गुरु

01:01:15:14 एक बहुत बड़ा व्यापक शब्द है वह अलग बात है की गुर्जर बड़ी dayalta करके हम लोगों को कोई जिम्मेदारी देते हैं तो वो और हम उसे पर सेवा करते हैं और उसे प्रकार करते हैं तो ये समझना बहुत आवश्यक है तो हम लोग एक दूसरे को प्रभु बोलते हैं हम अपने को गुरु नहीं मानते हम अपने को भगवान का सेवक और गुरु का दास मानते हैं तो कहने का तात्पर्य है की जो आपने कहा की हम दही दूध दही बोले की ना बोले निश्चित रूप से बोलिए नहीं बोलेंगे तो समझेंगे कैसे लोग लेकिन इसके साथ-साथ

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01:01:47:21 विषय है इसको एग्जैक्ट तुलना करने की कोशिश मत करो समझने के लिए हम कुछ भी उदाहरण दे देते हैं बाकी इसका कोई मीनिंग नहीं है और भगवान में क्या भेद उसको कैसे समझा चलो भाई शुरू करते हैं ओके ओके यहां पे मेरे पास ओके सबसे पहले श्री कृष्ण भगवान शिव बन सकते हैं पर शिव जी श्री कृष्ण भगवान नहीं बन सकते हैं इस चीज को इन्होंने उदाहरण दिया दूध देकर एग्जांपल से दूध देख के एग्जांपल ले लो उसे करते हैं काफी ज्यादा तो ये दूध दही का एग्जांपल क्या है इसे जरा आप एक्सप्लेन करिए प्लीज

01:02:41:12 फोन की तरफ से की जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर दही से दूर

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01:02:47:04 नहीं बन सकता उसी प्रकार भगवान कृष्ण तो शिव बन सकते हैं मगर शिव बने हुए कृष्ण पुनः श्री कृष्ण नहीं बन सकते तो यहां पर क्या

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01:03:00:20 मैंने जैसा की पहले ही बताया था की सनातन धर्म में पूर्ण ईश्वर की पूजा की जाती है पूर्ण ईश्वर को भगवान कहा गया है जो रिस्ट्रिक्टेड नहीं हो सकता बातें नहीं हो सकता हमारा भगवान जिसकी हम पूजा करते हैं उसको कृष्ण रूप में पूजा करें किसी भी रूप में पूजा करें तो वह जैन भी ले सकता है अगर कोई कहे की वह जन्म नहीं लेता तो जैन भी लेता है अगर कोई गए की वो मार नहीं सकता तो रामकृष्ण आदि के रूप में मार्ता भी है वो हर कम कर सकता है जो एक मनुष्य दृष्टि से सोचा जा सकता है वह हर वह पॉसिबल कम कर सकता है मगर जब हम का देंगे की कृष्ण कम यह उसके नाम के सामने यह नहीं लिखा जा सकता सनातन ईश्वर के नाम के सामने की फलाना कम ही कांत डू इट मगर जब हम यह का देंगे की इस तरीके से दूध दूध और दही वाले उदाहरण को हम रख देते हैं तो हम अपने ईश्वर को बाधित करते हैं तो यहां पर पूर्ण ब्रह्म की जो क्वालिटी पूर्णेश्वर की जो रिस्ट्रिक्टेड नहीं है कहीं भी वो खत्म हो जाती है इस एग्जांपल को लेने के बाद तो अब इन्होंने एग्जांपल दिया जब मैंने क्वेश्चन पुट अप किया तो उसके बाद फिर उन्होंने कहा की केवल लोगों को समझने के लिए अब समझने के लिए इन्होंने पहले भी एक christoprishna में यही बात कही की समझने के लिए तो

01:04:15:23 यहां पर यह समझ में ए रहा है की मतलब अपनी किसी भी बात को किसी भी निर्धारित करके आधार पर केवल समझने भर के लिए लोगों को मनवाने के लिए कुछ भी बोल दिया जा रहा है जैसे जब इन्होंने ये कहा की कृष्ण क्राइस्ट को समझने के लिए यह समान कहा गया है मगर एक ध्यान रखने वाली बात ये है की सनातन धर्म के विषय में सनातन धर्म के विषय में वेद ही एकमात्र प्रमाण है और उसके बाद वेदों के अनुसार चलने वाले सभी व्यक्ति जो भी बात कहेंगे वो हमारे लिए स्वीकार्य हो सकती है अब वेद प्रमाण क्यों है यह भी हमें समझना पड़ेगा की जब हम कहते हैं की हमारा ईश्वर आबाद है वो कुछ भी कर सकता है वह सच भी बोल सकता है वो झूठ भी बोल सकता है जैसे बोला भी है राम बांके वो सिर्फ सत्य बोलते हैं और कृष्ण बांके चल करते हैं मोहिनी बन के चल करते हैं तो जब वह झूठ बोल सकते हैं तो यह कैसे तय होगा की उन्होंने कौन सी बुक आपको भड़काने के लिए दी है मनुष्य को और कौन सी बुक उन्होंने वाकई में धर्म के रास्ते पर चलने के लिए तो यहां पर वेदों की महत्ता हमें मालूम पड़ती है की जिस प्रकार से मनुष्य अपनी लाइफ में दो तरह

01:05:31:00 के हम लोग कार्य करते हैं एक कम हम प्रयत्न करके करते हैं और कुछ कर हम बिना एफर्ट करते हैं तो जब हम एफर्ट डालकर जो कार्य करते हैं जैसे मैं चुनाव कर सकता हूं की मुझे सच बोलना है की झूठ बोलना है क्योंकि मैं एफर्ट दल रहा हूं चाहता हूं मैं कोई कम करना मगर कुछ कम हम ऐसे भी कर रहे हैं जो हम बिना चाहत के कर रहे हैं जैसे सांस लेना तो ये सांस जो है मेरे बिना एफर्ट के इसमें मेरी कोई चाह नहीं शुद्ध है मैं ले रहा हूं आना है इसी तरीके से जो वेद हैं वो भगवान के स्वास्थ्य रूप में प्रकट होते हैं शिव पुराण में लिखा है सभी जगह हमारे यहां वेद अपोलोस हैं उनकी रचना भगवान ने भी नहीं की वो भगवान के स्वास्थ्य रूप में प्रकट होते हैं इसलिए सबसे ज्यादा प्रामाणिक माने जाते हैं और फिर जो भी भगवान ऐसे अवतार लेते हैं जो भी भगवान ऐसे रूप लेते हैं जिसमें वह वेदों का अनुपालन सीखने वेदों का अनुकरण करवा वह सारे शास्त्र लेगी मान्य हो जाते हैं जैसे रामायण भागवत गीता महाभारत ये सब वेदों के अनुसार वेदों का प्रतिपादन करते हैं इसलिए हमारे लिए स्वीकार है तो जब यह कहते हैं की सभी धर्म के ज्ञान वो मनुष्यों को आधार पर दिया गया है फल फल तो वहां पर उन्होंने अपनी कहीं भी किसी बुक में वेदों के आधार चलने वेदों के आधार पर चलना नहीं सिखाया जैसे मैंने शुरू में भी कहा वेदों

01:06:46:04 को प्रमाण नहीं मानना था मोहम्मद साहब ने वेदों को प्रमाण नहीं मानना था तो जब तक कोई वेदों को प्रमाण मैन के नहीं चल रहा है वेदों का अनुकरण नहीं करवा रहा है तो हम उसको सनातन धर्म की शिक्षा देने वाला नहीं मैन सकते इसी प्रकार से यहां पर भी ईश्वर को बाधित करके पेश किया जा रहा है दूध दही के उदाहरण से जोड़कर अब वो मैन नहीं रहे या जो भी है वो आगे देखिए क्या कम तरीका है समझने का वही वही एक साउंड ए रहा है की लोगों को अपनी बात तो लोगों के पेस्ट कर देने का ब्रेन में बिठा दें की भाई ये देखिए यहां लिखा है मगर इस शिक्षा को कभी भी हम मातम नहीं मैन सकते की भगवान ये कम नहीं कर सकते शिव बनने के बाद उसे पुनः कृष्ण नहीं बन सकते तो अनजाने में ये अपने भगवान जो हमारे भगवान श्री कृष्ण जो पूर्ण ब्रह्म के स्वरूप है उनको ये बाधित कर रहे हैं यहां पर इस उदाहरण से जोड़कर हान क्योंकि उन्होंने ये कहा था की यहां केवल समझने के लिए है इसका कोई तर्क नहीं है इसके कोई मीनिंग नहीं है ओके तो जिसका कोई मीनिंग नहीं है तो भाई उसको नहीं समझाया जाता हान तो इसका तर्क अब आप ही बताइए ना केवल समझने का मतलब क्या हुआ क्योंकि आपने केवल लोगों को अपनी बात थोपना के लिए कोई एक उदाहरण मात्रा दे दिया है जबकि व्यास strvriti में महर्षि वेद व्यास जिन्होंने हमारे पुराने

01:08:01:11 की रचना की जिन्होंने हमारे वेदों का पृथक्करण किया चार भागों में बनता महर्षि वेद vyasiner लिखा है व्यास स्मृति दो एक 11 में की शास्त्रों के विरोध में व्यक्तिगत तर्क apramanya होते हैं तो यह जो यह का रहे हैं की लोगों को मैन मनाने के लिए बताने के लिए समझने के लिए ऐसा तर्क नहीं दिया जाता है जो मान्य ना हो वही तर्क दिया जाएगा जो मान्य है जो प्रमाण है जिसको हम यह नहीं कहे अंदर से की नहीं नहीं तो उनको केवल समझने के लिए का दिया है मगर वास्तविकता में ऐसा है नहीं भगवान आबाद है जो भी है उन्होंने जो यह मिसकनसेप्शन भारी बातें हैं इसमें हम बहुत ज्यादा क्या डिस्कस करें या नहीं है मुझे नहीं पता

01:08:53:21 की अत फर्स्ट गुरु जी आई एम नॉट एबल तू आंसर अब आप इस बात को देखें की लखनऊ में जितने भी लोग इसको मंदिर से जुड़े हुए हैं उनके अगर कोई गुरु हैं गुरु रूप में वह जिसे देखते हैं तो इन्हीं को देखते हैं अब शुरुआत में इनको गुरु शब्द से कोई प्रॉब्लम नहीं थी कोई दिक्कत नहीं थी मगर जैसे हमारे जो क्वेश्चन द थोड़े से ऐसे हुए जो शायद कैपेबल नहीं द आंसर करने में तो इन्होंने फिर अपने आप को फिर प्रभु जी के लिए यह थोड़ा सा एक नजर ए रहा है साउंड ऐसा कर रहा है की जब क्वेश्चन

01:09:59:25 एक जिम्मेदारी दी गई यहां की व्यवस्था संभालने की और मुझे आप प्रभु जी गई है मैं गुरुजी नहीं हूं तो इनडायरेक्ट वे में उन्होंने यह कहने की कोशिश की ऐसा लग रहा है बट गुरुजी मतलब बहुत ज्यादा वो अच्छे नहीं करते जो है रिस्पांसिबिलिटी पर बात ए जाती है तो क्योंकि जिस पोस्ट वह है उसे पोस्ट पर उनको आधार पर हम थोड़ा सा हमारे जो ठेस पहुंचती है जैसे सबसे पहले अब मैन लीजिए शिव और कृष्ण के भक्त होंगे तो वो आपस में डिस्ट्रीब्यूशन हो जाएंगे और ये जो हम लोग जो यूनाइटेड नहीं हो का रहे हैं इस कांसेप्सनस की वजह से इसी चीज का फायदा जो अपोनेंट्स है वो उठा लेते हैं समय-समय पर इंडियन कल्चर उन्हीं की बात कर रहा हूं ठीक है आगे

01:10:49:24 चलते हैं गुरुदेव आता है प्रभु जी एक यह भी आता है निकल कर के की जैसे क्या श्रीमद् भागवत पुराण का कोई विशेष महत्व है 18 mahaprano में या सभी पुराण बराबर है श्रीमद् भागवत पुराण का विशेष महत्व है और इसे मैं नहीं निकले कर रहा हूं इसे स्वयं जिन्होंने लिखा है वह डिक्लेयर कर रहे हैं क्योंकि वेद व्यास जी ने जब 17 पुराण लिख लिए फिर भी अशांत द वेद पुराण उपनिषद सब लिख चुके हैं लेकिन फिर भी अशांत है फिर भी उनको शांति नहीं मिल रही तो वो अपने गुरु को ध्यान करते हैं तो नारद मुनि प्रकट होते हैं और फिर उनको chatushlo की भागवत सुनते हैं और फिर वो chaturshlo की भागवत को 18000 श्लोक में एक्सप्लेन करते हैं और जब भागवत की रचना करते हैं तब वो पूर्ण रूप से शांत और आनंद का अनुभव करते हैं

01:11:52:03 वेदव्यास जी ने बड़ी ही परिपक्व अवस्था और अपने गुरु के निर्देशन में उसको एक्सप्लेन किया और उसको बताया तो भागवत का स्थान लेकिन उसको महापुराण बोलते हैं और इसका बहुत विशेष स्थान है अच्छे गुरुदेव जैसे प्रभु जी प्रभु जी जैसे हमारे 18 पुराने की जब हम सूची को चेक करते हैं जैसे देवी भागवत में आई है वो सूची नारद पुराण में है यह भागवत पुराण में भी अंत में तो उसमें सूची में वह अंत में नहीं आता है वह मध्य में आता है एक तो

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01:12:31:27 यह कांट्रडिक्शन हो जाए

01:13:09:11 उसमें भी ये चीज है की उनका संतुष्टि दिखाई गई है यह हमारे महर्षि वेदव्यास जी की जो भक्त तो यह फिर संजय का विषय ए जाता है और अगर हम इनको दोनों को पुराने को एक नहीं मानेंगे देवी भागवत को श्रीमद् भागवत को तो हमारे पुराण 18 से हो जाएंगे 19 तो वह हमारी सूची कैंसिल हो जाएगी उसे पर फिर प्रश्न चिन्ह मुड़ जाएगा तो इसको कैसे हम समझे की जो जनरल आम व्यक्ति है वो इन सूची में इन नाम में इनमें ना फैंस करके वो पहले मूल चेतना में आए क्योंकि हम अगर जनरल व्यक्ति को कुछ चर्चा करेंगे ना और उसका वो स्टार है नहीं वो उसको समझ नहीं सकता तो वो स्विच को उसको स्वीकार नहीं कर पाया सबसे बेहतर यह है सबसे बेहतर तरीका जो हमारे आचार्य ने बोला पहले जैसे चेतन महापुरुषों की स्वयं भगवान है उनके गुरु ने उनसे क्या कहा

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01:14:06:21 तो भगवान का नाम जप करो वाराणसी में आते हैं aachariyon के बीच में पहुंचने

01:14:24:12 हैं और लोग उनको बोलते हैं की यह क्या तुम नाचते हो गेट हो रोते हो कीर्तन करते हो यह क्या कुछ वेदांत पर चर्चा करो कुछ वेदों पर चर्चा करो कुछ तर्क वितर्क करो चीजों को आप करो आप तो इतने विद्वान आप कर सकते हो तो वो क्या बोलते हैं मेरे गुरु ने मुझसे बोला है की तुम मूर्ख हो तुम भगवान के पवित्र नाम का जाप करो तो मैं इतना बुद्धि नहीं है की तुम इन वेदों को पढ़ सकूं बाल की खाल निकलेगी तुम्हारे बहुत सारे प्रश्न होंगे और तुम कंफ्यूज होंगे और तुम फिर किसी लाइक नहीं रहोगे इसीलिए अगर आप देखोगे चेतन महाप्रभु ने केवल शिक्षष्टकम और उन्होंने कोई वेद पुराण उपनिषद बहुत कुछ लिख करके कुछ बहुत सारे ग्रंथ नहीं दिए केवल उन्होंने आठ श्लोक दी है आठ श्लोक को बस कोई मैन ले इन पर चलने उसको जीवन का लक्ष्य मिल जाएगा तो मेरा कहना यह है की हम जनरल पब्लिक में जो भी तर्क वितरक भागवत पुराण इसमें ये इसको ये वहां ये इन सब में ना पढ़कर के अगर हम कलियुग के मूल धर्म को समझे और उसको स्वीकार करें तो मनुष्य लक्ष्य जल्दी

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01:15:25:24 मिलेंगे मनुष्य जीवन को जो मूल लक्ष्य को जल्दी मिलेगा फिर उसको क्या मतलब 19 पूर्णम ने 18 माने फिर वो एक परिचय बना रहेगा और सांसे

01:15:55:27 में भी प्रश्न जो हम करते हैं वो अलग-अलग स्टार पर अलग कई बार क्या करते हैं गुरु से और गुरुजन क्या करते हैं हमें उसका उत्तर नहीं देते तो उसके दो कारण है एक कारण यह है की वो जानते हैं की अभी इस प्रश्न को समझने के ये योग्य नहीं है या वो उसे विषय पर अभी चर्चा करना उचित नहीं समझते इसलिए मैं आपको सिंपल सी एक बात बोलूंगा की हम कोई भी विषय को कुछ भी ऐसा नहीं बोलना चाहते जिसको कोई व्यक्ति अलग parveksh में देखें अच्छा जो शास्त्र में बोला गया जो वेद व्यास जी ने कहा जो नारद मुनि ने बोला हम और जो हमारे माधवाचार्य ने कहा जो हमारे प्रमाण आचार्य बोला उसे चीज को हम आपको रिपीट कर रहे हैं और उसी बात को बोल रहे हैं की हम इतना समझे की श्रीमद् भागवत पुराण सर्वश्रेष्ठ पुराण है मतलब यह जो सवाल आएगा अगर पढ़ने पर तो इस पर ध्यान ना दें और अपनी बुद्धि को कृष्ण कॉन्शसनेस

01:16:58:02 अगर हम उन सवालों की खोज में उनकी बाल की खाल में जाएंगे तो निश्चित रूप से जो मूल विषय है वो निकल जाए पहले तो मुझे ये बताओ ये मनुष्य शरीर है कितने दिन के लिए कितने दिन के लिए मिलाया हमको हम मानते हैं ज्यादा से ज्यादा 100 साल हम मानते हैं 100 साल ठीक है 100 साल तक कोई जिंदा नहीं है लेकिन अब मैन लेते हैं आप 100 साल तो अभी 100 साल में 50 साल तो सोने में निकल जाते हैं 50 नहीं 40 साल है ना बचा हुआ कमाने ने निकल जाता है दैनिक दिनचर्या हमने कल निकल जाता है

01:17:37:13 और उसमें जबकि हमारी कोई योग्यता नहीं है हमारे अंदर कोई स्टार नहीं है हमारा तो अगर हम उन विषय में fansenge तो निश्चित रूप से हम अपने मूल लक्ष्य इवे हो जाएंगे इसलिए मेरा निवेदन है आमजन आपके माध्यम से जनरल यूथ को और जनरल लोगों को कृपया व्यर्थ की चीजों में अपने को मत fasaiye वर्ण आप लक्ष्य से भटक जाएंगे मूल सिद्धांत को समझिए अगर आचार्य ने बोला चेतन महाप्रभु ने बोला महात्मा चार ने बोला प्रभु जी ने बोला छठ goswamiyon ने बोला बोरा संसार आप देख रहे हो सब जगह आप स्वयं विवेक से देखिए घर जगह-जगह भागवत कथाएं क्यों हो रही है अभी कलयुग का प्रभाव बढ़ रहा है तो नई-नई चीज ए रही है कोई कुछ कर रहा है कोई कुछ कर रहा है नए-नए भगवान ए रहे हैं नई-नई खोजें ए रही यह सब मूर्खता है कृपया भगवान भगवान है और भगवान का जो निर्देश है गुरुजनों का जो निर्देश है उसको हम स्वीकार करें और इस बात को समझे की भागवत पुराण सर्वश्रेष्ठ प्राण है मैं नहीं बोल रहा हूं की मेरी कोई वैल्यू नहीं है मेरी कोई वैल्यू नहीं है लेकिन गुरुजनों का वैल्यू है चैतन्य महाप्रभु का वैल्यू है जो स्वयं साक्षात श्री कृष्ण है वो कुछ का रहे हैं वो कुछ हमें बता रहे हैं तो हम उनकी

01:18:52:16 बात को स्वीकार करें और उसे पर अपने जीवन को आगे बढ़ाएं

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01:19:00:18 सबसे पहला पॉइंट 17 फिर उन्होंने कहा की भागवत पुराण लिखने के बाद उन्हें शांति मिली है ना फिर आपने उनको कुछ एक्सप्लेन किया की जो है ऐसा करके कुछ आपने एक्सप्लेन किया की भागवत पुराण आखिरी में नहीं लिखी गई थी चौथे नंबर पे लिखी गई थी चौथे पंच नंबर पे वेल वो क्या एक्सप्लैनेशन इनका एक क्लेम आता है इनकी तरफ से की भागवत पुराण क्योंकि सबसे अंत में लिखी गई है और क्योंकि उसकी रचना से पहले सारे पुराण लिखे जा चुके द 17 पुराण और 18 पुराण भागवत पूर्णतः जिसके ना लिखे जाने की वजह से वेदव्यास जी असंतुष्ट द तो मतलब वह एक कोशिश करते हैं यह प्रूफ करने की तरफ से की भागवत पुराण ही सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट पुराण है मतलब स्पेसिफिक उसको बनाने की कोशिश की जाती है मगर जब हम शास्त्र देखते हैं तो कुछ और ही मिलता है तो यह कैसे मिलता है सबसे पहले देखिए कैसे बात जब यह कहते हैं की 17 पुराण लिखे जा चुके द तो

01:20:15:25 कहीं भी भागवत पुराण में ऐसा मेंशन नहीं है की 17 पुराने की रचना हो चुकी थी और 18 दूसरी बात जब हम भागवत पुराण में नारद पुराण में देवी भागवत में पुराने की सूची आती है बल्कि मध्य में आता है और तीसरा कांट्रडिक्शन आता है की हमारे जो 18 महापुराण की सूची है उसमें भागवत पुराण का नाम सिर्फ एक बार लिया गया है तो यह सभी प्रामाणिक आचार्य इस बात को मानते भी हैं की भागवत पुराण केवल श्रीमद् भागवत नहीं है भागवत पुराण देवी भागवत भी है एक ही भागवत पुराण के दो पार्ट हैं जिसमें एक में नारी रूप में ईश्वर की व्याख्या हुई और दूसरे में पुरुष प्रधान रूप में ईश्वर की व्याख्या हुई है और अगर हमेशा नहीं मानेंगे तो हमारी जो सूची 18 महापुराण की यह हो जाएगी 19 तो फिर हमारे जो पुराने की सूची 18 पुराण तो हमारे शास्त्र खंडित हो जाएंगे अगर हम इस बात को स्वीकार नहीं करेंगे तो अगर यह कहते हैं की भागवत पुराण को लिखने से पहले संतुष्ट द तो

01:21:31:11 वहां पर फिर देवी भागवत को भी लिखने से पहले वेदव्यास जी असंतुष्ट द वैसे ऐसा देवी भागवत में लिखा भी गया है मगर आपकी जानकारी के लिए बता डन की सभी पुराने में जब हम उनको पढ़ते हैं तो उनकी mahimaon का मंडन किया गया है वहां पर उसे पुराण उसे पुराण को सबसे अच्छा कहा गया है मगर आफ्टर ऑल जो दीप जो सबसे ज्यादा जरूरी बात आती है पुराने

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→ Used in: A · Video Ahvaan Call of Dharma | कौन हैं शंकराचार्य | who is jagadguru Shankaracharya | आ... at 13:19 ↗

01:21:57:12 में श्लोक आता है की ब्रह्मा जी ने की शुरुआत से पहले पुराने का स्मरण किया था और वह पुराण एक मतलब सृष्टि की हाथ से पहले एक ही पुराण था जिसमें की 100 करोड़ श्लोक द उसी बड़े पुराण को वेदव्यास जी आते हैं द्वापर में और वह छोटा करते संक्षिप्त करते हैं 18 भागों में विभक्त करते द तो यानी की कोई भी स्पेसिफिक अलग से पुराण है ही नहीं एक ही पुराण के 18 चैप्टर हैं अलग-अलग बस इतना है की वेदव्यास जी ने जब शिव तत्व में भगवान की व्याख्या की तो उसे चैप्टर का नाम शिव पुराण लिख दिया जब देवी तत्व ईश्वर की व्याख्या की तो उसे चैप्टर का नाम देवी भागवत लिख दिया जब पुरुष तत्व में जब कृष्ण तत्व विष्णु तत्व में ईश्वर की व्याख्या की तो भागवत पुराण या विष्णु पुराण आदि लिख दिए गए

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01:22:48:15 इस तरीके से उन्होंने चैप्टर का नाम रख दिया जबकि यह सारे चैप्टर मिला करके एक ही पुराण तो जब हमने यह वाला क्वेश्चन इन किया की आप कैसे क्लेम करते हैं तो इन्होंने यहां पर सीधे का दिया की तर्क मत करो नहाने आगे उन्होंने ये भी कहा उन्होंने ये कहा है की हमको ये समझना होगा की हमें संशय कहां करना है और कहां नहीं करना है मतलब थोड़ी सी एंड भक्ति टाइप की मुझे यहां पे भैया थोड़ी सी फुल हो रही है और

01:23:25:13 आप ऐड यह का रहे हैं की पहले पुराने थी उसको तोड़ करके 18 पुराण बनाएंगे तो यानी इसमें इनकी बात का गलत हो गई है की 17 में बनाया है ये बिल्कुल ये वहां पे मैं भागवत पुराण में मेंशन भी नहीं है की 17 पुराण महापुराण लिखे जा चुके हैं मतलब एक्चुअली वहां पर बात यह है की वेदव्यास जी ने जब महाभारत की रचना कर दी या अन वेदों के चार भाग कर दिए उसके बावजूद भी उन्हें संतुष्टि नहीं मिली थी क्योंकि उन्होंने पुराण पुराने की रचना नहीं की थी पुराने पर उन्होंने कार्य नहीं किया था यह संतुष्टि वो वहां जया कर रहे हैं ना की वो सिर्फ भागवत पुराण की बात कर रहे हैं जब वो बात कर रहे हैं वो सारे पुराने की बात कर रहे हैं पहले उन्होंने हम लोगों को कहा की शास्त्र पदों कोई भी डाउट है शास्त्र पढ़ो तुम्हारे अपने डाउट क्लियर करो और वह क्या था वह डाउट वाला संस्कृत में इस्तेमाल करते द

01:24:43:16 तो फिर का रहा है की यहां पर यह लोग का रहे हैं की आपको यह समझना होगा बेटे की कहां पर डाउट पूछना है कहां पे नहीं ऐसा है की नहीं शुरू से हमसे कहते रहे की शास्त्र पदों अगर सनातन धर्म को जानना है तो शास्त्र पदों सनातन धर्म को तभी जान सकते हैं जब शास्त्रों को पढ़ेंगे इसके अलावा अपनी बातों को वजन डालने के लिए भी इन्होंने हमेशा शास्त्रों का कहा की मैं मैं नहीं बोल रहा हूं शास्त्रों शास्त्रों में लिखा है मैंने बोल रहा हूं शास्त्र में लिखा है मगर वही जब हमने अपनी किसी बात को इनके सामने रखा की शास्त्र में तो यह लिखा है तो उसके जवाब में इन्होंने का दिया की भाई व्यर्थ के तर्क में ना पढ़ो या फिर संशय भी जहां पर कहां पर करना कहानी करना है बताओ होना चाहिए अब सबसे पहली बात है मैंने अभी थोड़ी देर पहले बताया था की व्यास स्मृति दो 11 मैं सीधे-सीधे मेंशन है की शास्त्र के विरुद्ध व्यक्तिगत तर्क apramanya तो मैंने जो भी बात अभी अभी जो इनसे प्रश्न किया वह मैंने शास्त्रों के प्रमाण से किया मगर उन्होंने जो ये बात बोली है की तर्क मत करो यह तो शास्त्रों के हमारे शास्त्र से कहते हैं की तर्क करो और यह

01:25:59:12 कहते हैं की संशय कहां होना चाहिए कहां नहीं होना चाहिए इसका भी नियम होता है ऐसा कोई नियम हमारे शास्त्रों में नहीं दिया गया है बल्कि यह कहा गया है भगवान श्री कृष्ण ने चौथे अध्याय के 40 में श्लोक में कहा है की जिसके मैन में संशय होगा दुविधा होगा दुविधा होगी उसका ना तो श्लोक में उसका जीवन अच्छा होगा ना ही उसका परलोक में जीवन अच्छा होगा तो फिर यहां पर गुरु गीता में भगवान ने कहा स्कंद पुराण भगवान शिव कहते हैं की गुरु वह है जो संशय को नष्ट करें गुरु वह है जो युक्ति प्रमाण और तर्क से संशोधन का निराकरण करें तो अगर यह मेरे संशो का अपने शिष्यों के संशो का संशोधन का निराकरण नहीं करते हैं या फिर का देते तर्क मत करो या यह का देते हैं की अभी आपकी योग्यता नहीं हुई है उसे बात को समझने की तो ऐसी कोई नियमावली कहीं पे नहीं है ऐसी कोई नियमावली कहीं पर नहीं है अगर आपने मुझे शिष्य बनाया है तो मैं जो संशय मेरे जो उत्पन्न होंगे वो एक गुरु का कर्तव्य है उनको दूर करना और अगर गुरु सांसों का निराकरण नहीं कर रहा है तो सांसों का मतलब है अंधकार और गुरु का अर्थ होता है गुरु का मतलब अंधकार र का मतलब अंधकार से निकलने वाला यह भी हमारे उपनिषद

01:27:14:15 में लिखा हुआ है की गुरु का अर्थ क्या होता है तो अगर यह मेरे संशो का निराकरण नहीं कर रहे मुझसे मुझे अंधकार से नहीं निकल रहे हैं तो फिर फिर यह जो अपने गुरु तत्व है उसे पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा कर देते हैं तो

01:27:31:02 प्रभु जी एक एक चर्चा और है जो मैं देखता हूं की कई बार की विरोध में कई ऐसे वीडियो वगैरा आते हैं जिसमें की क्लेम किया जाता है जैसे माधवाचार्य जी जो द उन्होंने भी श्रीमद् भागवत पर भाषी लिखा था और जो हमारे श्री चैतन्य महाप्रभु जी हैं उन्होंने माधवाचार्य जी के भाष्य को ना मैन के उन्होंने श्रीधरी जुटी का है उसको प्रामाणिक माना इसके अलावा एक चीज और है की जैसे कौन की जो परंपरा है गुरु परंपरा वह ब्रह्मा जी से शुरू होते हुए माधवाचार्य जी तक आते हुए और फिर इस तरीके से चेतन महापुरुष जी से होते हुए हमारे जो प्रभु जी उन तक आती है पर माधवाचार्य के जो स्वयं के अधिकृत मठ हैं वहां पर क्लेम मतलब विनायक किया जाता है और वहां पर क्योंकि चेतन महाप्रभु जी ने माधवाचार्य जी के भागवत नहीं अपनाया और तो उन्होंने जो तत्कालीन शंकराचार्य श्रीधर स्वामी उनके भाष्य को उन्होंने अपनाया तो इस कारणवश उनको अपनी लाइनेज में नहीं लिया गया है तो माधवाचार्य जी की अधिकृत परंपरा में उनका नाम नहीं है और इस्कॉन की जो गुरु परंपरा

01:28:46:07 है उसमें उनका नाम है माधवाचार्य जी कहते हैं की जो हमारी गुरु परंपरा है वो हमसे स्वयं से प्रारंभ होती है मगर इस्कॉन कहता है की माधवाचार्य की परंपरा कृष्ण भगवान स्वयं से प्रारंभ होती है तो यह क्लेम उठाया किया जाता है उसको मुझे रिटर्न में दीजिए क्योंकि उसे पर मेरा कोई चिंतन मनन और श्रवण नहीं है तो हम पहले इसको दीपाली तर्कों के आधार पर और प्रमाणित चौक के आधार पर समझेंगे तब आपको

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01:29:12:27 उसके विषय में बोलेंगे जैसे चाय मृत हमारी कौन की पुस्तक है इसमें जो हमारे चेतन प्रभु

01:29:40:18 हंसी कहे स्वामी ना माने जाना वेश्यार भरे तारे करिए गाना एटा कहीं महाप्रभु मोना ढीला सुनिया सवार माने संतोष हेला तो इसमें ये आगे का रहे हैं जो कोई स्वामी श्रीधर स्वामी की abhilana करता है तत्कालीन शंकराचार्य

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01:30:00:13 से टोंक चल रहा है जो जैसा मैन कर के शंकराचार्य जी की परंपरा की शंकराचार्य लिखने

01:30:33:00 की कोशिश करेगा तो उसे वेश्याओं में जीना जाना चाहिए इस तरह का कोड किया तो अब यहां पे प्रज्ञा जी ने भागवत में प्रभास लिखा है तो वो भी उन पर भी प्रश्न उठ गया ये इस तरह से पता है हमें ये समझना चाहिए की मैंने फिर उसी बात को फिर रिपीट करूंगा लेकिन हम लोग इन vyakhyaon में इन विषयों में जब चेतन महाप्रभु जैसे स्वयं भगवान है वो क्या का रहे हैं की मैं मूर्ख हूं जबकि वो सब पर डिस्कशन कर सकते हैं सब पर चर्चा कर सकते हैं हम लोग वास्तविक में बड़ी छोटी बुद्धि के साथ है

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01:31:17:14 एन कृष्ण चेतना वाले लोग तो हम इन विषयों में ना फर्स्ट करके हर एक कृष्ण महा मंत्र का जप करें और यही हमारा निवेदन सबसे है रिपीट करूंगा की हम मूर्ख हैं हम इन विषयों में ना पढ़कर इससे क्या होगा की हम

01:31:45:09 केवल जब हम कोई चीज समझते नहीं है और उसको समझने की कोशिश करें कुछ भी करते हैं कई बार वो हमें जैसा लगता है की अरे ये तो पद से हटकर भी कुछ कर रहे हैं लेकिन हम उसको समझने की उतने योग्य नहीं होते की वास्तविकता में ये कार्य किस स्टार पर हो रहा है और क्यों हो रहा है तो मेरा निवेदन केवल इतना सा है की हम इन सब में नफ़्स करके हम मूल बात को समझे जिसे सब ने कहा है कलयुग केवल नाम ए रहा है ना इसमें तो कोई संदेह नहीं है किसी को अच्छा जितने लोग प्रश्न करने वाले हैं उन लोगों से अगर पूछो की आप कितने माला जप करते हैं जैसे मेरा आपसे मैं आपसे प्रश्न है आप उससे प्रश्न कर रहे हो फिर आपसे प्रश्न आप कितनी बार रोज जब करते हो

01:32:43:12 तो भगवान की कृपा आपको मिलेगी और आप चीजों को समझ पाओगे तो देखो आप सबको भी मैं बोलना चाहूंगा की जैसे प्रभु ने माला जप कर रहे हैं वैसे ही आप भी 16 माला करिए और इन तर्क उत्तर के विभिन्न गहराइयों इनमें जाना हमारा उद्देश्य नहीं है हम कोई टीका लिखने नहीं आए हैं हम कोई बहुत ज्ञान देने नहीं आए हैं मैं स्वयं इस बात को समझता हूं की मैं खुद अव्वल दर्जे का मूर्ख हूं और मुझे कोई वेद पुराण उपनिषद का ज्ञान नहीं है मैं तो केवल गुर्जरों के मुख से जो श्रवण किया है उसे पर पूर्ण श्रद्धा रखते हुए आगे बढ़ रहा हूं और निश्चित रूप से यही प्रत्येक अच्छे शिष्य का लक्षण है और उसे ऐसा ही करना चाहिए उसे अपनी विवेक को अपनी बुद्धि अपनी भौतिक बुद्धि को तर्क वितर्क को तर्क में फ़साना नहीं चाहिए फिर भी अगर कोई प्रश्न किसी को परेशान कर रहा है तो निश्चित रूप से उसका समाधान देना चाहिए आपने मुझे बोला है मैंने आपको यह भी बोला है

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01:33:48:05 की हम इसको ज्यादा प्रामाणिक है क्योंकि वो परंपरा से प्राप्त है अच्छा अच्छा हम इस बात को बोलते हैं की हान केवल इस्कॉन की गीता ही प्रामाणिक है ऐसा हम नहीं बोलते हान हम ये जरूर बोलते हैं की इसको उनकी गीता प्रमाणित है और संसार में बहुत सारे ऐसे ग्रंथ हैं या ऐसी गीता kitikayen हैं जो प्रमाणित नहीं है लेकिन हम ये नहीं कहते की एकमात्र इस्कॉन की गीता ही प्रमाणित है ये हमने बोलते हैं और ये बोलना ठीक भी नहीं है इसमें एक्चुअली इसलिए ये वाला

01:34:24:05 प्रश्न था क्योंकि एक भक्तों को एक आ वो हो जाती है निश्चित की हम प्रामाणिक ज्ञान ले रहे हैं तो इसलिए ये परंपरा पे जब प्रश्न उठाता है तो pramaniktavya प्रश्न उठ जाता है

⬜ Not used yet · 01:34:37:02 – 01:50:49:00 (16:12)

01:34:37:02 परंपरा पर देखिए परंपरा कौन व्यक्ति जैसे परंपरा की हम बात करें तो अगर आप देखेंगे तो प्रश्न उठाने वाले बहुत प्रश्न करते हैं जैसे हमारी परंपरा है तो हमारा शिक्षा गुरु दीक्षा गुरु परंपरा है हमारी परंपरा में ही शिक्षा गुरु है और दीक्षा गुरु है तो कोई कहे की नहीं ये तो प्रमाणित परंपरा है ही नहीं कोई कुछ भी बोले तो कुछ भी देखो मैंने कहा ना तर्क और का इसका कोई लॉजिक नहीं कोई कुछ भी हो सकता है कुछ भी बोल सकता है

01:35:11:28 प्रामाणिक गुरु के बारे में और गुरु परंपरा के बारे में मेरा कोई चिंतन मनन श्रवण नहीं है इनका स्टेटमेंट है यह इस वाले डिस्कशन पॉइंट का पॉइंट है इस वाले डिस्कशन का| वो मैं अपने गुरु से दे रहा हूं तो सबसे पहले हिंदी क्या होगी मतलब बहुत सरल हिंदी

01:36:17:07 नास्तिक नहीं हूं भाई मैं लेकिन यहां पे मुझे इस चीज पर वह ए रही थोड़ा सा की थोड़ा सा हंसी भी ए रही है की सबसे पहले आप का रहे हैं की मैं इसलिए तुमको पढ़ा रहा हूं क्योंकि मेरे टीचर्स बहुत ज्यादा प्रामाणिक टीचर्स ने मेरे से पढ़ाया है इसलिए मैं तुम्हें ये पढ़ा रहा हूं फिर मैंने कहा की ये इतना प्रामाणिक या ऑथेंटिसिटी इतनी इसमें ऐसी क्या है उसे पर मैंने क्वेश्चन किया तो कम भाई उसे ऑथेंटिसिटी वो जो प्रामाणिक है वो मेरे को भी नहीं पता क्यों क्योंकि मेरा चिंतन मारन मारन श्रवण नहीं भैया ये तो खैर मैं छोटा हूं मुझे ज्यादा नॉलेज नहीं है आप इस पर कुछ अपना वो दे दीजिए अपने शब्द इसमें दे दीजिए मैं यहां पर मैं सबसे पहले बताना चाहूंगा की हमने अभी पीछे से इनको देखा तो जैसे इन्होंने शास्त्रों की बातें कही तो साथ में एक शब्द का इस्तेमाल कई बार किया की हम मैं नहीं का रहा हूं हमारे आचार्य ने बताया वो का रहा हूं या मैं नहीं का रहा तो यह हमें जो परंपरा प्राप्त जो ज्ञान है परंपरा से जो ज्ञान प्राप्त हुआ है वो तो अब मैं बताना चाहूंगा की इस को की जो गीता है उसमें एक क्लेम किया जाता है की हमें जो ज्ञान प्राप्त हुआ है वो परंपरा से हमें प्राप्त हुआ है सबसे पहले भगवान कृष्ण

01:37:32:15 ने दिया ब्रह्मा जी को फिर उनसे नीचे जो भी है होते हुए माधवाचार्य जी आए माधवाचार्य जी से होते हुए ज्ञान आया आ चैतन्य प्रभु जी तक और चैतन्य प्रभु जी से आया शील्ड ग्रुप आज तक यह इस तरह की परंपरा गुरु परंपरा इस्कॉन की गीता में छपी हुई है अब जब भी इस्कॉन की गीता लेंगे तो अब जब मैं ये भी इस बात को बार-बार बोल रहे हैं की मैं जो ज्ञान प्राप्त परंपरा से प्राप्त है प्रमाणिकता है तो अगर फिर मैंने इस परंपरा पर जब स्टडी की ओर इनसे क्वेश्चन पुट अप किया

01:38:16:27 प्रेम करते हैं माधवाचार्य का जो खुद का ऑफिशल मठ है उससे जो उनकी लाइनेज मिलती है गुरु शिष्य परंपरा की उसमें माधवाचार्य घोषित करते हैं की उनको ज्ञान उनसे पहले कोई गुरु नहीं है उसे लाइन में माधवाचार्य जी के अकॉर्डिंग माधवाचार्य जी की गुरु परंपरा मधुबाला चार जी से ही शुरू होती है मगर यह क्लेम करते हैं की माधवाचार्य जी को ज्ञान मिला उनके गुरु के गुरु के मतलब चार नाम माधवाचार्य जी से पहले ऐड करते हैं सबसे पहले तो यह क्लेम करते हैं जो माधवाचार्य जी नहीं मानते उसके बाद फिर माधवाचार्य जी ने कमेंट्री लिखी थी मैंने थोड़ी देर पहले बताया था की कमेंट्री क्या होती है भाषी क्या होता है

01:39:05:13 उसे भागवत पुराण की कमेंट्री को अगर इनकी परंपरा माने यह जो परंपरा दिखाई जा रही है इसको अगर हम रियल माने तो इस कमेंट्री को माना नहीं चैतन्य महाप्रभु है जो इनके बाद में गुरु आए मतलब चेतन महाप्रभु अगर माधवाचार्य की गुरु शिष्य परंपरा हैं गुरु शिष्य परंपरा से हैं तो वो अपने ही गुरु की भाषा को ना मानकर किसी अन्य गुरु के भाष्य को मैन रहे हैं और वो भाष्य था शंकराचार्य जी का भाषण श्रीधर स्वामी नाम का जो टीका है इन्होंने वहां पर मैंने श्लोक क्रमांक भी बताएं उनसे पूछा मैंने तो चेतन महाप्रभु का जो रेफरेंस आता है मैंने रेफरेंस के साथ आपको यहां मिलेगा

01:39:52:20 शंकर श्रीधर स्वामी को जगतगुरु मानता हूं सीधा सीधा स्वामी जो है तत्कालीन शंकराचार्य द जिन्होंने भागवत पर भाष्य लिखा था और इन्होंने यह भी घोषणा की की मैं श्रीधर स्वामी के द्वारा ही भागवत जानता हूं मतलब भागवत जो भगवान को ये समझते हैं वो श्रीधर स्वामी के भाषी के द्वारा ही समझते हैं तो इन्होंने उसकी प्रमाणिकता वहां की जो शंकराचार्य गुरु शिष्य परंपरा है शंकराचार्य जी की उसमें जो इस समय तत्कालीन श्रीधर स्वामी जो शंकराचार्य द उनके लिखे हुए वर्षीय को इन्होंने प्रामाणिक माना ना की कौन के द्वारा बताया गया जो इनके ही गुरु हैं माधवाचार्य जी उनको प्रामाणिक इन्होंने नहीं माना इसके अलावा इन्होंने एक घोषणा और की चेतन महाप्रभु ने उसका भी रेफरेंस इन की बुक्स में मिल जाएगा आपको वह घोषणा यह थी की जो भी कोई श्रीधर स्वामी के अलावा भागवत पर भाष्य लिखेगा वह मेरे लिए वेश्या सब्सीट्यूट के समान होगा यह चैता अमृत में लिखा हुआ है यह उन्होंने घोषणा की तो पहली बात तो यह ए जाती है की अगर चेतन महाप्रभु माधवाचार्य की गुरु परंपरा के द तो उन्होंने अपने गुरु की परंपरा का ज्ञान ना लेकर के शंकराचार्य

01:41:08:04 की परंपरा का ज्ञान क्यों लिया दूसरी बात उन्होंने जब यह घोषणा कर दी थी की श्रीधर स्वामी के अलावा जो कोई भी भाषा लिखेगा वो मेरे लिए वेश्या के समान है तो फिर शिल्पम पद ने बाद में shilphane बाद में अपने ही गुरु का विरोध कर दिया भागवत पुराण पर भाष्य लिख दिया तो अब एक यह कांट्रडिक्शन ए जाता है अब इसके संबंध में जब मैंने इनसे पूछा तो इन्होंने तो कहा की इन्होंने कोई चिंतन ही नहीं किया इन्होंने स्टडी नहीं किया इस बारे में तो सबसे पहली बात यह ए जाती है की जिस ज्ञान को बार-बार यह का रहे द की हमारी सोर्स ऑफ इनफॉरमेशन बहुत ही ऑथेंटिक हमारी सोर्स ऑफ इनफॉरमेशन बहुत ही ऑथेंटिक है मगर जब मैंने उससे उसकी ऑथेंटिसिटी वेरिफिकेशन पूछा तो इन्होंने कहा की मैंने इसके बारे में स्टडी नहीं की है तो फिर इनको कैसे पता की वह सोर्स ऑफ इनफॉरमेशन ऑथेंटिक थी वेल ओके भाइयों बहनों अब ए रहा है बहुत ही ज्यादा तड़पता भड़कता और थोड़ा सा सीरियस संगीन क्वेश्चन जो इस्कॉन पर उठाया जाता है ओके उठा लिया जाए भैया तो भागवत गीता जिस पर एक बार मैं फिर से बता डन की संस्कृत के श्लोक एक होते हैं उसका हिंदी मीनिंग एक होता है और उसे हिंदी मीनिंग का एक्सप्लेनेशन अलग होता है ठीक है एक्सप्लेन

01:42:23:21 है इतना सब कुछ सब कुछ क्लियर चल रहा है अब यह है की हमारे पास मतलब आपके पास प्रूफ तक है की इसमें जो संस्कृत का श्लोक छोड़ करके बाकी सब है उसमें चेंज धीरे-धीरे करके लाया जा रहा है की आप एक बार अपने मुंह से बताइए की लाया जा रहा है आप साथ ही साथ में मुझे सबूत भी दिखा देंगे जैसे मैं वीडियो में दल दूंगा और दूसरी चीज की ऐसा कौन के लीडर्स उनके में फेस में का सकता हूं की गीता जब हम पढ़ते हैं तो मैं उदाहरण

01:43:11:01 जिस यज्ञ में यज्ञ भी ब्रह्म है और उसमें उसे होने वाली जो सामग्री है वह भी ब्रह्म है उसमें जो क्रिया की जा रही है वह भी ब्रह्म है करने वाला भी ब्रह्म है ऐसे यज्ञ के फलस्वरूप प्राप्त होने वाला जो फल होता है वो भी ब्रह्म है भगवान बार-बार ब्रह्म ब्रह्म ब्रह्म की बात कर रहे हैं मगर shilpropa जी की जब हम गीता पढ़ते हैं तो उसमें हम यहां पर नीचे ब्रह्म का अर्थ ब्रह्म लिया ही नहीं गया है ब्रह्म की जगह पे एक भी जगह आपको इसका ट्रांसलेशन जब आप पढ़ोगे तो एक भी जगह पे आपको ब्रह्म शब्द लिखा हुआ नहीं दिखाई देगा तो इस तरीके के बहुत सारे इसमें ट्रांसलेशन ऐसे हैं जो अपने मैन से कर दिए गए जबकि अपने मैन के भाव को लेकर भगवान के वचनों को बदलने की आजादी नहीं होती है

01:44:04:21 यह कब एडमिट करते हैं की अब एक नई रिसर्च आई है उसे चर्च के अनुसार प्रभुपाद मैंने जो गीता लिखी थी 1972 में 1972 का जो वर्जन है उसमें जो इस समय जो इस्कॉन के द्वारा प्राप्त कराई जाने वाली गीता है और उसमें मतलब वो जो 1972 का ओरिजिनल वर्जन और अभी का जो लेटेस्ट वर्जन है इसमें भी मिलावट हो रही है मतलब प्रभु जी ने पहले ईश्वर के वचनों को बदला अब कोई व्यक्ति है jaiduetnam के तो वो इनके वचनों को भी बदल रहे हैं मतलब इन शॉर्ट अगर मैं कहूं की भागवत गीता इस्कॉन की भागवत गीता को पढ़कर यदि कोई व्यक्ति स्वयं को पाजी का शिष्य मानता है यह मानता है की मैं उनकी बुक पढ़ रहा हूं तो वह गलत सोच रहा है वो असल में बुक पढ़ रहा है जायदाद जोशी की गीता में मिलावट कर रहे हैं जैसे कुछ उदाहरण में दे डन देखिए

01:45:10:04 1972 का जो वर्जन है उसमें लिखा हुआ ओ धनंजय रेडियो रिजल्ट्स और यह क्या लिख रहे हैं

01:45:44:09 एक्टिविटीज फॉर डिस्टेंट बाय डिवोशनल सर्विसेज तो यहां पर इन्होंने थोड़ा सा शब्दों को बदल दिया एक्टिविटी बाय डिवोशनल सर्विसेज और ये का रहे हैं कीप ऑल अबाउट minenable एक्टिविटीज फॉर डिस्टेंट बाय डिवोशनल सर्विसेज तो ये शब्दों का बदलाव अपने मैन से बिना

01:46:23:01 इसमें क्या कहा है देखिए फ्रॉम डी साइकिल ऑफ बर्थ एंड डेथ बाई रिनाउंसिंग डी फ्रूट्स ऑफ एक्शन इन डी मटेरियल वर्ल्ड इन दिस वे दे कैन अटेंड डेट स्टेट बियोंड ऑल मिज़ और ये क्या का रहे हैं

01:47:04:06 फ्रीडम सेल्स फ्रॉम डी रिजल्ट्स ऑफ वर्क इन डी मटेरियल वर्ल्ड इन दिस वे दे विक्रम फ्री फ्रॉम डी साइकिल ऑफ बर्थ एंड डेथ मतलब यहां पे भी शब्दों का फिर आपको दिख जाएगा अपने भूमिका में जब हम पुस्तक की भूमिका देखते हैं जो कंटेंट जहां पे बताया जाता है शुरू में परिचय होता है इंट्रोडक्शन होता है लेखक का तो सील प्रोप पाजी खुद कहते हैं कई जगह पर की हमें अधिकार नहीं है भगवान के वचनों को बदलने का एक गुरु का कार्य केवल इतना होता है की वह भगवान के भगवान ने जो संदेश दिया है उसको आगे इट इसे आगे पहुंचा दें तो यह अपने वचनों को बदलने पर तो क्वेश्चन उठा रहे हैं मगर इन्होंने स्वयं जो भगवान की वचनों को बदल दिया भागवत गीता में से मैंने अभी एग्जांपल दिया उसका क्या तो यह बहुत सारे मिस्ट्रीज हैं डाउट्स हैं जो क्रिएट होते हैं और जब हम पूछते हैं जब इनसे पूछा जाता है तो ये कुछ ऐसे सवालों के जवाब देते हैं की अभी आप योग्य नहीं है जबकि ये कोई प्रमाणित

01:48:19:24 बात नहीं है व्यक्तिगत तार अपमान या फिर ये कहते हैं की संचय कहां पे करना चाहिए उसका भी पता होना चाहिए उसका भी नियम है ऐसा नहीं है या फिर ये कहते हैं की तर्क और कुत्तर को मत करो है ना तो यह सारी डाउटफुल चीज हो जाती हैं जिसकी वजह से एक लास्ट में आफ्टर ऑल डाउट बना ही रहता है और कहा जाता है की सांसे आत्मा vinishchit भगवान श्री कृष्ण कहते हैं तो जो लोग इनके टच में हैं मैं उनसे कहूंगा की इनके पास जाकर के प्लीज अपने डाउट जरूर क्लियर करें क्योंकि इन डाउट की वजह से मिसकांसेप्सनस की वजह से हिंदू समाज बढ़ रहा है होगा आपको क्या लगता है कौन सी गीता पढ़ना अभी के लिए सबसे सही है उन्होंने कई बार कहा जो vaishnavacharya हैं शंकराचार्य हैं उन्होंने कई बार कहा भगवान ये जो गीता प्रेस गोरखपुर है ये हमारे शास्त्रों के लिए रेल ऑथेंटिक चीज प्रोवाइड करती है इसके अलावा चौखंबा पब्लिकेशन से इनकी किताबें भी ऑथेंटिक रहती हैं आज इट जैसा होता है उसमें वैसा ही लिखते हैं हान कोई लेखक अगर कमेंट्री करता है तो कमेंट्री में करता है ट्रांसलेशन में कुछ नहीं होता और इनकी कमेंट्री भी हमारे जो प्रामाणिक

01:49:35:03 आचार्य हैं उनकी मतलब एक ऑब्जर्वेशन टाइप की रहती है की उसी अनुसार कहीं भी हमारी हिंदुइज्म की जो मूल धारा है जो मूल शिक्षा है जैसे ईश्वर बात इतनी हो सकता रिस्ट्रिक्टेड नहीं हो सकता यह मूल हमारा कॉन्सेप्ट है तो इसके विरुद्ध कोई नहीं जाता है फिर भी अगर कोई जाता है तो गुरु बैठे हैं परंपराई तो अगर अमूमन आपको अगर लेनी है सबसे पहले तो मैं कहूंगा की आपके पास एक आ प्रामाणिक गुरु हो आपकी नजरों में और वो फिर आपको बताया की आप कौन सी गीता पढ़िए फिर भी आपको अगर पढ़नी है तो गीता प्रेस गोरखपुर या chaukamba पब्लिकेशन से आप गीता खरीदी हो पड़ी है

01:50:22:08 आपके सारे सवालों के जवाब मिल गए होंगे और अगर आप चाहते हैं इस तरीके से इस तरीके के इंटरव्यू हम लेते रहे ऐसी इनफॉरमेशन वीडियो हम बनाते रहे और आपको क्या चाहिए क्या गलत बताते रहे उसके लिए आप सपोर्ट करिए अब आप चाहे जैसे सपोर्ट करिए मुझे नहीं मतलब है अब आप चाय डोनेशन देखे सपोर्ट करिए चाहे इस वीडियो लाइक कमेंट शेयर करके सपोर्ट कर दीजिए वो आपके डिपेंड करता है बस अपने अपने लेवल पर सपोर्ट करिएगा जय श्री राम मिलते हैं जल्दी से

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 1:50:57 · 28 Jan 2023

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