⬜ Not used yet · 00:00:02:28 – 02:19:47:27 (2:19:45)
00:00:02:28 तो जय श्री राम सभी को। आशा करता हूं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। मेरी आवाज आप सभी को साफ आ रही होगी और एक महानुभाव ने हमें यह भिजवा दिया है। हमने अपनी एक लाइव स्ट्रीम में कहा था कि इसकी आवश्यकता है। तो ये हमें प्राप्त हो गया है। उनको बहुत-बहुत आभार। आज का विषय थोड़ा थोड़ा आप समझ ही रहे होंगे। कुछ दिनों पूर्व हमारी एक चर्चा हुई थी अलंकार समाज के एक फॉलोअर हैं निर्भय करके उनके साथ। उस चर्चा का बहुत ठोस अगर देखा जाए तो अगर निष्पक्षता के साथ देखेंगे तो बहुत ठोस मुझे नहीं लगता कि कोई निष्कर्ष प्राप्त हुआ। परंतु अपनीपनी रोटियां दोनों पक्ष सीख सकते हैं। जैसे वह यह दावा कर सकते हैं कि भाई पंचाव वाला वाली बात जब आई तो हमने वहां पर पंचाव से अनभिज्ञ होना अपना स्वीकार किया कि हमें पंचाव्य नहीं पता। हां पंचाव शब्द से हमें नहीं मालूम अगर उसमें जो दी गई सामग्री थी यदि वो ओपन हो जाती उस पर बात होती तो बात कुछ अलग हो सकती थी। इसी इसके दूसरी तरफ जो 90% जो चर्चा हुई उसमें
00:01:18:14 वह हमारे पक्ष में रही क्योंकि वह जो जो प्रश्न पूछते गए तार्किक कि भाई वो कैसे बनता है कैसे अवतार होता है तो हमने उन्हें जवाब दिए और वो उससे उन्होंने कहा कि अच्छा चलिए ठीक है फिर आगे बढ़ते हैं तो 90% चर्चा में हमने जवाब दिए जिनको जितना वो काट सकते थे काटा उसके बाद वो आगे बढ़े तो उनके आगे बढ़ने के पीछे उनका यह औचित हो सकता है कि उनको पंचावे पे जाना है परंतु एक औचित परंतु यह भी एक अर्थ निकल रहा है उस बात का कि भाई हमारी चीजों को जब तक काट रहे थे काट सके तब तक उन्होंने काटा और उसके बाद वो जब नहीं काट सके तो वह आगे बढ़े अपने पंचाव की ओर बीच में एक अविद्या वाला प्रश्न भी आया था तो उसका भी हमने जवाब दिया यह तो रही यह बात अब जिस प्रकार से वह हमारा एक अर्थ निकालते हैं कि उन्हें इसलिए हटा दिया जिस प्रकार से दूसरा पक्ष यह अर्थ निकाल लेता है कि हमने उन्हें इसलिए हटा दिया क्योंकि हमें पंचा में मांगी गई सामग्री नहीं ज्ञात थी। हम दे नहीं सकते थे पंचाब में मांगी गई सामग्री। तो यह दो अलग-अलग पक्ष हो गए। एक पक्ष हो गया कि हमें पंचाब के बारे में ज्ञात है कि नहीं ज्ञात है? क्या होता है? इस शब्द का क्या अर्थ है? इसमें क्या-क्या मांगा जा रहा है? एक तो यह बात हो गई। दूसरी एक बात यह हो गई कि जो पंचाय में
00:02:33:18 मांगी गई सामग्री है वो हमारे पास अवेलेबल है कि नहीं अवतारवाद की सिद्धि के समर्थन में। तो कंपटीशन इस बात नहीं था कि किसकी वोकैब जो शब्दकोश है किसका वह कैसा है या किसकी किसका भाषिक अध्ययन कैसा है इस बात को लेकर नहीं है तो पंचांग शब्द के बारे में यदि हमको नहीं ज्ञात है तो सामने वाले को बताना चाहिए कि भाई पंचांग के अर्थ में मैं यह मांग रहा हूं आप ये मुझे दो अब वो बताने की स्थिति ऐसी उलझना उलझन भरी हो गई कि वो आगे बढ़ नहीं पाए वहां मगर इसका ये अर्थ निकालना कि हमारे पास पंचाव नहीं है देने का मतलब उस पंचाव में जो भी सामग्री मांगी जा रही है वह नहीं है। यह अर्थ निकाल निकालना बिल्कुल भी उचित नहीं है। अच्छा तो अगर यह अर्थ निकल सकता है तो यह अर्थ भी निकल सकता है कि निर्भय जब तक हमारी बातों को काट पा रहे थे काटा। उन्होंने खूब भरसक प्रयास किया कि भाई वो तत्व क्या होता है जो अवतार अवतरित होता है जो एक जगह दिखाई देता है। हर तरह से प्रयास करने के बाद जब उनके पास कुछ और नहीं था तो उन्होंने अपने पंचाव की ओर आगे बढ़े। मेरे ख्याल से वो पंचाव की ही तैयारी करके आए थे इस चर्चा के लिए। खैर यह तो हो गई सारी बातें। तो मेरे हिसाब से उसका बहुत अच्छा कोई निष्कर्ष नहीं निकला। मगर 90% अगर आप देखेंगे तो वहां पर हमने अपने पक्ष को प्रस्तुत किया और उसको कोई काट नहीं पाया। पंचाब की जब
00:03:48:19 बात आई तो वो खोला ही नहीं गया कि उस पंचाब में मांगा क्या जा रहा है। तो वो जब खुल ही नहीं पाया तो उसका जवाब देना और ना देना एक बराबर हो गया और वो चर्चा पोस्टपोंड सी हो गई। तो यह तो रही वो चर्चा में क्या हुआ था। अब होता क्या है कि उस चर्चा के बाद अह कुछ ऐसा होता है कि निर्भय और मेरे बीच में थोड़े से व्यक्तिगत संबंध ठीक होते हैं। उस चर्चा के बाद ऐसा नहीं है कि निर्भय ने हार मान ली थी या मैंने हार मान ली थी। मगर कुछ वो चर्चा कुछ इस तरह से स्थगित हुई थी जिसको बाद में निर्भय ने ये भी माना कि उसका बिहेवियर उसको ठीक नहीं लगा। उसने माना इस चीज को कि उसको अपना बिहेवियर ठीक नहीं लगा और उसने कारण भी बताया कि वह अनेकानेक धर्मियों के मंच पर जाता रहता है जिसके कारण वहां की उसे हैबिट लगी हुई है और यह वो इस बात के लिए तैयार रहता है कि उसके प्रति ऐसा बिहेव किया जाएगा व्यवहार किया जाएगा इसलिए वो अपने आप को वैसा ही आवरण बना करके चलता है। गलती यहां पर उससे ये हो गई कि यहां पर मैं उसको लेकर के न्यूट्रल था। मैं सच्चाई के साथ था ना कि उसको डोमिनेट करने के लिए। तो जब उसने स्वतंत्र रूप से उस चर्चा को देखा एक तृतीय पक्ष के रूप में दर्शक के रूप में तो उसने इस बात को ग्लानी महसूस की और उसने इस खेद को प्रकट किया और जब उसने
00:05:03:27 ऐसा प्रकट किया तो मेरे को एक ग्लानी ये हो रही थी कि भाई भले ही उसने जो भी बिहेवियर किया हो मगर जिस समय मैंने उसको पंचाव्य वाली बात पर हटाया था उस समय वो पंचाव्य को लेकर के हमें नीचा नहीं दिखाना चाहता था बल्कि उस समय वो यह कह रहा था कि अभी 5 मिनट पहले जब मैं पंचाव्य बता रहा था तब तो आपने रोक दिया तो अब दोबारा आप पंचाव्य क्यों पूछ रहे यह बिल्कुल अक्षरस जो बातें हैं वो साफ-साफ है। तो अब इसमें एक ये बात हो सकती है कि भाई मेरी भी तो गलती मगर मेरी गलती जो है उसका जनक कौन है? मुझे जो इस तरह की भावनाएं आ रही हैं कि भाई यह नीचा दिखाने के लिए ऐसा कर रहा है या फिर वह जो जो हमारा विषय है उस पर बात ना करके विषय अंतर करने का प्रयास कर रहा है कि तुम्हें पंचाव क्यों नहीं पता है। अवतारवाद की सिद्धि नहीं बल्कि ऐसा लग रहा था उस समय कि अब वो इस पर आ रहा है कि पंचाव क्यों नहीं पता है। तो जब मैंने बाद में उस चर्चा को देखा तो मुझे लगा कि भाई अभी थोड़ी देर पहले जब पंचा बताने वाला था तब हमने कहा था भाई इसको आप मत खोलो। वो उसमें भी रीजनिंग दूसरी थी। उसकी बात को समझ ना पाने की। रीजनिंग दूसरी थी। मगर हमने उसे रोका था। तो बाद में जब वो जब हम जब हमसे उसने पुनः पंचाव मांगा तो हमने कहा कि पंचाव क्या होता है? तो उसने कहा कि भाई पंचाव क्या होता है? आप क्यों पूछ रहे हो? तो जैसे ही उसने ये बात कही तो मुझे लगा कि यह इस बात पर आ रहा है निर्भय कि
00:06:19:18 जो है वो यह दिखाना चाहता है कि तुमको पंचाव नहीं पता है। भैया मुझे बहुत कुछ नहीं पता है शास्त्र में और आपको भी नहीं पता है। ये बात सत्य है। तो इसी आधार पर मैंने और यह जो कंपटीशन है इस बात पे नहीं है कि शास्त्र में लिखे हुए प्रत्येक शब्द का अर्थ का बोध किसको है। तो इसी बात को आधार बनाते हुए मैंने उस चर्चा को स्थगित किया कि भाई अब विषयंतर कर और ऑलमोस्ट तीन सा 3 घंटे हो चुके थे हम लोगों को शायद तो और उसमें इतनी झगझिक वो गरमा गर्मी वो सब भी हो चुकी थी तो मेरे अंदर ये जो ग्लानी थी कि भले ही निर्भय उस वातावरण का जनक था उस चर्चा में मूल रूप से निर्भय की वजह से वो वातावरण उत्पन्न हुआ था कि सामने वाले की बात को नहीं समझ पाना और फिर भी मेरे अंदर यह ग्लानी आई कि जब इसने ने सामने से ऐसा किया तो मैं भी उसको थोड़ा सा उदारवाधिता उसके प्रति दिखाऊं और फिर मैंने कहा कि भाई यह गलती तो मेरी भी है कि जब जिस समय तुम गलत थे उस समय तो थे मगर जिस समय गलत नहीं थे उस समय तुम्हारे पूर्व के गलत होने के कारण मैंने तुम्हें वहां गलत समझ लिया तो यह कहते हुए मैंने भी उसको एक तरीके से आत्मसात किया आलिंगन किया भावनात्मक आलिंगन किया निर्भय के साथ और क्या कहते हैं उसमें एक ये भाव भी था कि अगर यह क्षमा मांग रहा है कोई क्षमा मांगता है तो उसको अकेलापन ना फील हो और इसलिए हमें भी
00:07:34:21 उदार हो जाना चाहिए। ऐसा नहीं हां अच्छा अब आ गए देखा अच्छा हुआ ना देखा पता चल गया हां मांग ली क्षमा ऐसे नहीं करते हैं जब कोई क्षमा मांग रहा है अपनी ओर से वो बेंड हो रहा है तो फिर आपको भी वहां पर थोड़ा सा हंबल होना चाहिए ऐसा मुझे लगता है और मैंने वही किया उसको अकेला नहीं छोड़ा कि माफी मांगने वाली स्थिति में केवल तुम ही नहीं हो मैं भी हूं तो मैंने इस तरह से अपने आप को उसके साथ वहां पर प्रस्तुत किया कि तुम अकेले मत समझो भाई तुमसे ही गलती नहीं हुई मुझसे भी ये सारी तो यह बातें हैं तो अब इसके बाद हम लोगों में व्यक्तिगत वार्ताएं भी शुरू हो गई और कुछ थोड़ी सी व्यक्तिगत जानकारियां भी साझा हुई एक दूसरे को और सैद्धांतिक चर्चाएं भी हुई। तो इस ये सैद्धांतिक चर्चाएं जो हुई है उसके बारे में हम बाद में बात करेंगे। अब होता यह है कि बातें चल रही, बातें चल रही। फिर कुछ दिनों बाद मुझे यह दिखाई देता है कि निर्भय जिस चैनल से जुड़ा हुआ है उस चैनल पर मेरी बातों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। जैसे मान लीजिए कि मैंने वाकई में कोई गलती की है कि पंचाय में मैंने आपको हटा दिया तब आप उस क्लिप को निकाल दो कि हां भाई मैंने हटाया ठीक है। पंचा मैंने हटाया। हालांकि उसका भी अर्थ मेरा दूसरा है। पंचाव से मैं डरता नहीं हूं। हां अगर भाषिक कुछ वो हो रही है अल्पज्ञता
00:08:49:27 हो तो उसको आप बताइए भाषिक। ठीक है? क्योंकि भाषा को लेकर के शास्त्रार्थ नहीं था हमारा। तो एक तो यह बात हो गई। तो मैंने देखा कि निर्भय के निर्भय जिस चैनल से जुड़ा हुआ है उसी चैनल पर चीजों को काट छांट करके और जैसे मान लीजिए कि मैंने मुझसे कहा गया कि यह बताओ और फिर मैंने कहीं दूसरी जगह कहा हो कि क्यों बताएं। तो यहां पर मैंने कहा मुझसे कहा गया यह बताओ और मेरा दूसरी जगह का कट लगा के यहां रख दिया गया कि क्यों बताएं। तो इससे क्या हुआ कि मैंने कहा कि क्यों बताएं। तो यह इस तरीके से उसके चैनल पर बहुत सारे शॉर्ट वीडियोस बनाए जाने लगे। हालांकि मुझे प्रभाव नहीं पड़ता है उन वीडियोस से क्योंकि हमारी ट्रेनिंग ही ऐसे हुई है। ठीक है? हम लोगों की ट्रेनिंग ऐसे ही हुई है कि हमें हर विपरीत परिस्थिति ये कुछ भी विपरीत परिस्थितियां नहीं है। भाई जितने भी इस समय युवा जुड़े हुए हैं उस चैनल से और निर्भय भी स्वयं भी हैं। इससे 100 गुना हजार गुना ज्यादा विपरीत परिस्थितियों में आग में जल के तप के बाहर आने के बाद यहां पर बैठे हुए हैं। तो यह सोचना बेकार है कि उससे मुझे कोई प्रभाव पड़ता है। हां, सिद्धांत यह है कि अगर आप मुझे बड़े भाई की तरीके से देख रहे हैं। है ना? और हमारे बीच में एक विश्वास का संबंध है यदि तो फिर आपको वहां पर ऑब्जेक्शन होना चाहिए कि भाई
00:10:04:28 तुम शिवश जी की बातों को तोड़ मरोड़ के प्रस्तुत मत करो। उन्होंने जहां जो वाकई में गलतियां की गई हो उसको आप प्रस्तुत करो। कहीं मैं व्यवहार की बात कर रहा हूं राम जी के विषय में कहीं राम जी के विषय में परमार्थ की बात कर रहा हूं तो उन दोनों को जोड़ करके आप दिखा रहे हो। जबकि आप व्यवहार परमार्थ अच्छे से मुझसे समझ चुके हो। तो मैंने इस चीज को ऑब्जेक्शन किया निर्भय को। तो जब निर्भय को मैंने ऑब्जेक्शन किया तो निर्भय ने कहा मैं उनके बीच में नहीं बोल सकता। यह नहीं है वो नहीं है। जबकि महाभारत गीता हमें क्या सिखाती है? गीता रामायण इन ये जो ग्रंथ है मैंने देखा ज्यादातर जो ये जो युवा है ये इसका उनके मतानुसार जो अर्थ किया गया है उसके प्रचार पर तो जोर देते हैं। मैंने देखा मगर अपने जीवन में नहीं उतारते। ये बड़ी समस्या वाली बात है। अपने जीवन में नहीं उतारना है कि हमसे हमारे ऊपर जब यदि वो चीज लागू होगी तो हम अलग हट जाएंगे। अरे भाई बोलो ना जाकर के अगर आप जिस चैनल से जुड़े हुए हो वहां से ये सब हो रहा है जिसको आप बड़ा भाई कह रहे हो उसकी रिस्पेक्ट कर रहे हो हां तो वहां जाकर के जब उसके साथ ऐसा हो रहा है उसकी बातों को गलत तरीके से प्रस्तुत करके उसका अपमान किया जा रहा है तो आप कैसे चुप हो और अपमान ही नहीं उसमें जोक टाइप से भी बनाया जा रहा है वहां पर ये सब हमने किया क्या किसके साथ किया हमने अभी तक बताइए हम नहीं करते ये सब हां हमने किया फड़ों
00:11:20:09 के साथ किया रामपालियों के साथ किया जो ऐसा डिर्व करते हैं। उसमें भी कहीं मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया। एक मर्यादा के अंदर रहते हुए ही हमने विनोद किया। खैर और निर्भय के साथ या आर्य समाजियों के साथ इस तरीके का हमने कोई ऐसा कोई मजाक नहीं किया कि उसकी फोटो बिगाड़ दी। उसको जोकर टाइप का बना दिया। ज्यादातर इनके यहां देखो तो वही जो अभी इस समय वो कर रही है अवेकनिंग भारत वाली वही इनके चैनल पर होने लगा। तो मैंने ऑब्जेक्शन किया तो ये दूर हट गए। यह उसी तरह से दूर हट गए जैसे सीता माता का अपहरण होने पर यदि कोई जाए कि भैया कुंभकरण के पास जाए और कहे कि भैया तुम्हारे भाई ऐसा कर रहे हैं तो कुंभकरण कहे भैया तुम्हारा मैटर है हम तो अपने भाई की साइड है ये किया इन्होंने तो फिर न्याय और अन्याय के बीच में संबंध नहीं देखे जाते यही सिखाया था भगवान ने गीता में कि आपके गुरु वहां खड़े हुए हैं। आपके पिता मां वहां खड़े हुए हैं सामने और आप जो है धर्म के पक्ष में हो। द्रोपदी का चिर हरण हुआ है तो आपको बाण चलाना है कि नहीं चलाना है तो संबंधों का निर्वाह करो मगर सिद्धांत का त्याग मत करो अच्छा ये दिक्कत भी है कि एक जो गुरु का अभाव है जीवन में कि भैया किसको केंद्रित हो के हम चले तो गुरु है ही नहीं आर्य समाज में
00:12:35:10 आधा तीर आधा बटे इसकी इसकी उसका अरोड़ा भानी मोती का कुबा जोड़ा टाइप से व्यक्ति चलता है तो कोई एक जो एक होता है ना मेंटर मेंटोर कहते हैं क्या कहते हैं उसको वो नहीं होता इनके पास तो कहीं ना कहीं अपनी मनमर्जी चलाते हैं। हमारे पास आपके अनुसार अप्रामाणिक है क्या है वह बाद की बात है। मगर हमारे पास एक केंद्र में रहने के लिए एक गुरु तो है। आफ्टर ऑल वो हमें जज कर सकता है। वो हमें बता सकता है। सुधार कर सकता है और हम सुधरेंगे। अगर उन्होंने कह दिया ऐसे तो ऐसे वैसे ही चलेंगे। तो ये वाली बात है। इनके यहां वो गुरु का अभाव है जो बस ग्रंथि है जिस जो जैसा उसको पढ़ ले उसका जो हिस्सा जो समझ ले बस वही है। खैर कम टू द पॉइंट। तो यह सारी चीजें हुई और इसके बाद जब मैंने ऐसा ऑब्जेक्शन किया और ऑब्जेक्शन करने के बाद जब इसने निर्भय ने यह वाली भाषा क्या कहते हैं बताई कि भाई मैं क्या करूं वो तो आप लोगों का मैटर है आप लोग जानो मैं तो चला नहीं रहा हूं मैं तो कर नहीं रहा हूं दूर हट गए तो मैंने कहा भाई ठीक है तो फिर हमारे बीच में इस तरह से बात करना मतलब हमारे बीच में जो जो ये व्यक्तिगत जो संबंध एक जैसा स्थापित होने लगा का वो उसने जन्म लिया था। एक शिशु रूप में ही था वो नवजात शिशु के रूप में। तो वो मैं आगे नहीं बढ़ा
00:13:50:19 सकता क्योंकि भाई मेरे सिद्धांत अलग हैं। तुम्हारा ब्रह्म अलग है। मेरा ब्रह्म अलग है। चल जाएगा। तुम्हारा धर्म ही अलग है। और धर्म तो धर्म यह जो नैतिकता है यह वाली भाई जो नैतिकता है कि भाई यहां पर इसको अनावश्यक इसका जोक बनाया जा रहा है। उसमें भी तुम कह रहे हो कि मैं दूर हूं। और अभी कल भी ऐसा ही हुआ। वह बताता हूं फिर क्या हुआ। तो खैर ये जो बातें हुई निर्भय के साथ फिर मैंने कहा एक काम करते हैं तुम तुमको तुम्हारा जो धर्म युद्ध है उसके लिए मेरा आशीर्वाद शुभकामनाएं और तुम लड़ो और हम लोग इस तरीके से मैं जो है आपके साथ कनेक्ट नहीं रह सकता। मैंने ये बताया। हालांकि मैंने ये नहीं कहा कि जीवन में कभी तुमसे बात नहीं करूंगा। ठीक है? मैंने ये भी नहीं कहा। तो वो WhatsApp पे मेरे मैसेजेस हैं अभी भी। तो हम जब ये हुआ तो मैंने कहा कि
00:14:51:25 आप मतलब तुम अपना कार्य करते रहो। मैं अपना कार्य करता रह रहा हूं। हमारा इस तरीके से बात करना पॉसिबल नहीं है क्योंकि तुम्हारे सिद्धांत अलग हैं। अब वो सिद्धांत मुझे नहीं लगता कि जो इनके यहां की विशुद्ध रामायण इत्यादि है उसमें भी हो कि भैया संबंध का निर्वाह करने के लिए सिद्धांत का त्याग कर दो। मुझे नहीं लगता कि हो वही वाली बात है कि जो तुमने खुद रामायण स्वीकार कर रखी है जो गीता तुमने खुद स्वीकार कर रखी है हमारी वाली नहीं जो तुमने स्वीकार कर रखी तुमने उसको भी अपने जीवन में नहीं उतारा तो क्या किया तुमने तुम धर्म के लिए लड़ने चले हो मगर तुम अपने ऊपर नहीं उतार पा रहे तो क्या फायदा है कौन सा धर्म है केवल लोगों को दबाना चाहते हो अपने नाम के आगे तो खैर मेरे को दुख हुआ कि भाई अगर ये मुझे बड़ा भाई मानता है तो जब मेरे साथ अन्याय हो रहा है और ये वहां पर दर्शक है ये वहां पर जुड़ा हुआ है। सामर्थ्यवान होते हुए भी यदि व्यक्ति उसमें अपना क्या कहते हैं? न्याय का पक्ष नहीं लेता है ना तब भी वह जो है अन्यायकारी कहलाता है। तो वहां पर आप विवेकी हैं। आप सामर्थ्यवान है। आप वहां पर नहीं बोले इसलिए हमने इनसे किनारा किया। हालांकि यह कहते हुए किया कि हमारे बीच में इस तरह से व्यक्तिगत चर्चा नहीं और शुभकामनाएं दी कि तुम तुम्हारा जो भी तुम सोच रहे हो कि धर्म है तो उसके लिए जो है तुम्हें शुभकामनाएं और इस तरह से मैंने म्यूट कर लिया और ऐसा भी नहीं कि ब्लॉक कर
00:16:06:28 दिया। इसके बाद क्या होता है काफी दिनों के बाद जब अभी ये सोनाली जी सोनाली से जब बातचीत शुरू हुई अवेकनिंग भारत वाली है जो उनसे जब बात ये सब शुरू हुआ तो मैंने देखा कि जो वो जो जो निर्भय के साथ जो चर्चा हुई थी उसको गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। अच्छा निर्भय के साथ मेरी बहुत सारी सैद्धांतिक चर्चा ऑन कॉल हो चुकी है। जिसके बारे में अभी हम बात करेंगे तो यह क्या कहते हैं? चर्चा का कट वगैरह निकाल करके सोनाली को वो दिया जा रहा है सहारा कि ये देखो ये निर्भय से ऐसा हुआ था वैसा हुआ था। सोनाली उसको प्रस्तुत कर रही है कि ये जो है न्याय दर्शन के चक्कर में भाग गए। न्याय दर्शन पे नहीं भागा था। फिर वही बात। मैं सिद्धांत के वजह से मैंने तुम्हें नहीं हटाया वहां से। पहली बात तो टाइम हो चुका था। बहुत सारा। गरमा गर्मी हो चुकी थी। उसके बाद तुम वो अर्थ नहीं बता रहे थे उस शब्द का जो पर्टिकुलर तुम्हें मालूम था तो मैंने तुमको हटाया था। मैंने ये थोड़ी ना कहा था कि पंचा के अंदर जो चीजें हैं वो तुम जब मुझे बताओगे तो बताने के बाद मैं तुम्हें दूंगा नहीं। या तो ये कहो कि भाई भाषिक शास्त्रार्थ है ये साथ साथ में कि किसकी क्या भाषा पर पकड़ है वो भी है तो
00:17:22:00 हम भी फिर कुछ ऐसे तुम्हें शब्द देंगे जो तुम्हें ना मालूम हो। भाई सर्वज्ञ तो कोई नहीं है ना। शास्त्र में ऐसे बहुत से शब्द मिल जाएंगे जो सामने वाले को ना मालूम हो। तो वहां पर बात थी अवतार की सिद्धि की हो रही है कि नहीं हो रही इस बात की नहीं थी कि शिवश नारायण द्विवेदी को अमुक शब्द का अर्थ पता है या नहीं पता है तो अब जो है बात आगे बढ़ती है तो जब मैंने देखा कि सोनाली गलत तरीके से वहां पर पोट्रे किया जा रहा है तो फिर मैंने बहुत प्यारे शब्दों में मैंने इसको निर्भय को एक मैसेज भेजा मैंने कहा अच्छा मुझे लोग ट्रोल कर रहे थे निर्भय से क्यों भाग गए निर्भय से क्यों भाग गए निर्भय से क्यों भाग गए इस तरह से मुझसे उससे कह रहे थे। मैंने कहा भाई भागा कौन है? निर्भय से तो मेरी बहुत सारी चर्चा हुई है। फोन कॉल पे भी उस चर्चा के बाद भी निर्भय से मेरी बहुत सारी चर्चा हुई है। अगर भागना होता तो वो चर्चा क्यों करता? भाई ठीक है माफी आप माफीनामा हो गया। उसके बाद जो है टाटा बाय-ब भाई जिसको गिल्ट है उसने गिल्ट कर लिया। मान लिया मगर हमारी सैद्धांतिक चर्चा हुई। कम से कम मुझे लगता है फोन पे हमारी दो तीन चार घंटे की तो चर्चा है। अच्छा तो ये सब इनको नहीं पता था। तो जब यह लोग इस तरह से प्रस्तुत कर रहे थे कि न्याय दर्शन की वजह से मैंने उसको हटाया तो मैंने निर्भय के द्वारा जो लिखित में मुझे एक मैसेज भेजा गया
00:18:37:01 था यह कहने के लिए कि नहीं मेरा व्यवहार गलत था। उसने उसमें स्वीकार किया था कि मेरा व्यवहारिक त्रुटि मुझे दिखाई दे रही है। मुझे उसका खेद है। तो जब मुझे यह पता लगा कि वहां से हटाए जाने के पीछे कारण क्या है? निर्भय का भी व्यवहार और फल स्वरूप मेरा भी व्यवहार बिगड़ना और वह कारण है। न्याय दर्शन कारण नहीं है। मगर न्याय दर्शन करके जब दिखाया जा रहा है तो मैंने उनको शोधित करने के लिए उनको ध्यान दिलाया कि निर्भय ने लिखित में माफी मंगवाई थी और ये जो क्या नाम है इनका? अरे इनका क्या नाम है? अब वो उनको ये भी बुरा लग जाता है। संदीपन रॉय अब उनको पता है क्या क्या बुरा लग जाता है? वो मैं अभी आगे बताऊंगा। क्षेत्र विषयक टिप्पणी करते हैं। अरे भैया क्षेत्र विषयक टिप्पणी नहीं करते हैं। कई बार ऐसा होता है आपका नाम जब मुझे याद नहीं आ रहा है तो मैंने बंगाली कह दिया आपको। इसमें कौन सी टिप्पणी हो गई? आप मुझे नॉर्थ इंडियन कह दो। उत्तर प्रदेश का निवासी कह दो। जो शब्द आपको आ जाए क्षेत्र विषयक वो कह दो अगर नाम नहीं। नाम इनका थोड़ा सा मेरे लिए संदीप अलग नाम है। संदीपन थोड़ा मेरे लिए कहने के लिए वो यूजुअल नाम नहीं है। थोड़ा सा यूनिक है इसलिए जल्दी आता नहीं है। तो कई बार मैंने में ऐसे नाम होते हैं हमारे बोल देते हैं वहां पर संदीप ऐ कई
00:19:52:07 बार हमें जैसे किसी का नाम नहीं लेना है और उसको मैसेज पहुंच जाए जैसे कि भागवतानंद का नाम नहीं लेना था तो भागवतानंद को मैसेज भी पहुंच जाए तो हमने क्या किया कि उसके बारे में इर्दगिर्द की चीजें तो बताई डायरेक्ट नाम नहीं लिया तो ऐसा भी हुआ है तो उसको भी ये लोग अच्छा अब ये सारी बातें तो हो गई एक तरफ अब जब मैंने इनको मैसेज भेजा कि भाई एक काम करते हैं निर्भय कैसे कैसे हो छोटे भाई? क्या लिखा मैंने? कैसे हो छोटे भाई? और हमारी वह चर्चा अधूरी रह गई है। तो ऐसा करते हैं कि किसी दिन चर्चा कर लेते हैं। वह पूरी कर लेते हैं। अब ये बताओ जो न्याय दर्शन की वजह से जो छोड़ के जा रहा है वो क्यों तो तुम्हारे साथ चार घंटे की चर्चा वहां करेगा फोन पे और क्यों तुम्हें मैसेज भेजेगा कि भैया आमने सामने की चर्चा कर लेते हैं। तो पहली बात तो इनके गाल पे तमाचा है ना जो इस तरह से बातें कर रहे हैं। जो इस तरह की बातें कर रहे हैं इनके गाल पे पहला तो तमाचा है। उसके बाद फिर मैंने कहा जब भी इन लोगों की कोई चीज स्पष्ट क्लियर कट सामने आ जाती है तो ये लोग आगे बढ़ जाते हैं। विषयंतर एक ही नुस्खा है विषयंतर कर डालो बस। तो अब मैंने कहा चर्चा कर लेते हैं। तो यहां पे क्या हुआ? मेरे मन में ये भाव था कि अब तो छोटे भाई की तरीके से मैंने कहा तो मैंने मेरे मन में यह भाव था हो सकता है कि इस बार यह कहे भैया
00:21:07:08 आप इस बार हमारे चैनल पे आ जाइए। तो मैंने कहा अब की बार ऐसा कर लेंगे कि अगर यह बुलाएंगे तो इनके चैनल पर चले जाएंगे। मैंने इस भाव से मैं तो एक्सपेक्ट कर रहा था कि ऐसे ही कहेंगे कि भैया आपके यहां पे हो चुकी है एक बार चर्चा। अब हमारे यहां पर कर लेते हैं। तो मैंने कहा ठीक है भाई भाई को मैसेज कर रहे हैं छोटे भाई को तो चले जाएंगे। वो बात अलग है कि भैया एक महाभारत में दोनों दो पक्षों में खड़े हुए हैं। ठीक है? तो ये हुआ। अब अब जब इन्होंने वीडियो बनाया इस मैसेज के जवाब में आ हा हा तो मुझे बड़ा शौक लगा भाई बहुत बड़ा झटका लग गया वो वीडियो देख के अच्छा पहली नंबर बात तो ये है कि शुरू के 1520 मिनट का वीडियो तो मैंने उसको फॉरवर्ड किया मुझे लग रहा है अब ये बोल नहीं रहा है आगे जाके बोलेगा है ना ये मुझसे यह ना कह सका कि भैया वही जो मैंने एक्सपेक्ट किया था वो ना कह सका इसने वीडियो बनाया निर्भय ने और वीडियो बना करके इसने कहा कि अब तुम्हें ट्रोल कर रहे हैं इसलिए तुम आ रहे हो। मैंने तो अपना झंडा काहे का झंडा गाड़ दिया भाई तुमने? काहे का झंडा गाड़ दिया? अरे उस वीडियो में अगर वो तीन घंटे का वीडियो है ना तो दो घंटे 45 मिनट मेरा झंडा गड़ा है। तुम काटते काटते रह गए पर काट नहीं पाए ना। कौन सा तत्व होता है जो अवतरित होता है?
00:22:24:02 ह झंडा गाड़ दिया तुमने। मतलब अपने एक स्वषित एक काल्पनिक दुनिया में स्वयं को खुश रखने का अच्छा तरीका है भाई। और फिर तुम सोच रहे हो कि मुझे तुमसे तुमने कहा कि क्या कहते हैं आपको जो है एक तरीके से ऐसा उसने शो किया कि मुझे अब गरज है उसके साथ चर्चा करने की उसने निर्भय ने ऐसा उसमें शो किया कि मुझे अब गर्ज हो रही है तो मैं मतलब मेरा जो एक तरीके से जैसे पैरों तले जमीन खिसक गई कि ये इसको मैं इस दृष्टि से देख रहा हूं और ये कैसे मेरी तरफ मेरे लिए वो लेके चल रहा है भाव कि हां अब आया ना उसके मन में ये भाव थी कि अब अब जो है इनको अब आवश्यकता पड़ेगी। अब तुम्हें मेरे चैनल पे आना पड़ेगा। और अगर वो संदीपन जी से वो करना है ना तो संदीपन जी से करना है तो से क्षमा मांगनी पड़ेगी। संदीपन जी के अब अलग नुस्खे हैं चर्चा से बचने के। उनके अलग नुस्खे हैं। आज हर हर चीज पे बात होने वाली है बहुत डिटेलिंग के साथ। ठीक है? और लास्ट तक बने रहिए। बहुत बड़ा सरप्राइज भी है। बहुत बड़ा शॉकिंग सरप्राइज। ठीक है? तो वो आप लोगों को लास्ट में पता चलेगा। फिलहाल तो इसने जब ऐसा किया तो मैंने कहा कि मैंने कहा मैंने कहा कि भाई ये मैंने एक बहुत बड़ा सा जवाब इनको लिख के भी दे दिया और मुझे ये नहीं मालूम है कि शुरू में ये सब बोल रहा है मैं
00:23:39:06 शंकर संप्रदाय का नाश कर दूंगा और चारों शंकराचार्य आ जाए और ये वो सब ये भी बोल रहा है उसमें वो हां ये भी बोल रहा है चारों शंकराचार्यों को वो चैलेंज दिया था उस वीडियो में ये ये बिना देखे ही ये बिना देखे ही मैं वहां से चालू कर रहा हूं जहां से ये सब बातें कर रहा है ना कि अब आपको गरज पड़ी है तो मैंने अपने हिसाब से रात में ही जब मैंने देखा तो रात में ही एक बहुत बड़ा सा लंबा सा मैसेज लिख करके भेज दिया। हर बात का जवाब मैंने जो मेरे देखा था बाद में मैं देख रहा हूं। दूसरे दिन लोग मुझे टैग कर रहे हैं रील में। इसने ये सब गंदा संा गंदा भी बोला है कि भैया वो चारों चारों शंकराचार्य राजा हैं और ये है और वो है मैं खत्म कर दूंगा। पुराण ही सबसे बड़ा अधर्म है। ये सब बोला। तो बाद में पता चला। तो फिर मैंने बाद में जब मुझे अच्छा जब मैंने वो मैसेज भेजा बिना इन इन अंशों के जवाब के तो उस मैसेज के बाद भी काफी सारी चर्चाएं चलती रही कुछ का कुछ बातें करते रहे और बाद में जब मैंने वो रील्स देखी वो भी भेजी मैंने ये क्या कह रहे हो कि आपने ऐसा कहा आपने वैसा कहा फिर आपका भी नाम लेने लगा उसने ये कहा है सनातन शंकर ने ये कहा मैंने आपकी वो देखी फोटो मैंने जब सनातन शंकर जी की फोटो देखी तो उसमें दयानंद जी को ग्रीन कपड़ों में दिखाया गया था ठीक है
00:24:54:16 हम व्यक्तिगत कटाक्ष नहीं करते। हमारा सिद्धांत ही इतना मजबूत है। हमें क्या जरूरत है व्यक्तिगत जाने की? तो उन्होंने उनको ग्रीन कपड़े में वो किया था। जैसे ही मैंने देखा कि हां ये चीज है बदलने लायक। तो मैंने इनको फोन भी किया और मैंने कहा कि वो ग्रीन वस्त्र जो है उनके वो आप देख लीजिए उसका। तो इन्होंने उसको बदला भी। यह होता है सिद्धांत की रक्षा। सिद्धांत है तो है। उसमें ये नहीं है कि सना सनातन शंकर जी हैं। अब इनके बारे में एक बात और आ रही है भाई कि भैया इन्होंने गाली दी। इनकी वो वॉइस जैसे आजकल एक वो निर्भय का एक ऑडियो जो है अ वायरल किया हो रहा है जिसमें कि निर्भय गालियां बक रहा है हमारे आराध्यों के लिए हमारे क्या कहते हैं हमारी राधा राधा मां के लिए और राधा राधा वाले विषय में इन सब में आचार्यों को वेदव्यास जी को वो गाली बकता हुआ सुनाई दे रहा है जो कौन ये जो अपना निर्भय तो अब ये बात ये बात इन्होंने उठाई कि भैया निर्भय के नाम से ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है। तो अभी अभी मुझे पता चला कि भाई इनके नाम से एक वीडियो बना दिया गया जिसमें यह गाली दे रहे हैं। तो भाई पहली बात तो यह है कि वो वीडियो कब का है। अगर इनके भूतपूर्व जीवन का है तो उसके बाद तो इन्होंने पश्चाताप पूर्वक बहुत सारी क्षमा याचना करते हुए अपने जीवन को सुधारा है और गीता में लिखा हुआ है 9:32 में
00:26:09:22 कि यदि कोई भगवान की शरण में आ जाए तो उसको जो है साधु मानने योग्य है। दूसरी बात कि वो कब हुई है, कहां हुई है? भाई यह जो रिकॉर्डिंग चल रही है इसकी रिकॉर्डिंग बहुत सारे लोगों के पास है जो यह बताने को भी तैयार है कब और कहां हुई है तो यह सारी चीजें तो अलग हो गई मगर मैं ये ये जो ऑडियो निकला है ये कल की जो मैंने लाइव स्ट्रीम करी थी मैंने इस पे भी डाला था और आज भी मैंने करा था उसके बाद ही ये है और मैं बताऊं मैं इस पे एफआईआर करने वाला हूं और फॉरेंसिक इस पे रिपोर्ट करने वाला हूं और जो भी इसमें लिप्त पाए जाएंगे ना ये ध्यान रखना कि मैं छोडूंगा नहीं ठीक है क्योंकि मैं इनके जैसा इनके जैसा मैं छुपने वाला हूं नहीं क्योंकि जिस आईडी से मुझे जिस आईडी से मुझे भेजा गया वो आईडी मैं आपको दे दूंगा उस आईडी को तो प्रायोरिटी से करिए उसने Instagram पे अपलोड किया है। अब आते हैं सबसे अचंबे की बात है कि ये किसी टेलीग्राम चैनल पे है और मैं आज तक कभी भी किसी टेलीग्राम चैनल से जुड़ा ही नहीं हूं। हां WhatsApp के थ्रू जरूर आपके जैसे आपके भी कुछ ग्रुप्स हैं उनमें मैं जुड़ा हूं। लेकिन और इस किसी भी टेलीग्राम चैनल पर तो मेरा चैनल ही नहीं है। मेरे को कई लोग बताते हैं टेलीग्राम चैनल बना लो। तो भैया तुमने जो कार्य किया है अब इस पे पूरी कारवाई होगी और मैंने
00:27:24:28 अभी-अभी पता किया है कि साइबर क्राइम सेल में इसका रिपोर्ट करूंगा मैं। फॉरेंसिक साइंस लैब में इसकी जांच की जाएगी और आपको विद प्रूफ दिखाऊंगा और वो दूसरे वाला भी। ठीक है? तो जो भी कर रहे हैं वो आप करिए। लेकिन आपको फिर इसके जो बाद में परिणाम है वो भी झेलने पड़ेंगे। यह याद रखना। अब जो है एक मैं वो बता दूं जरूरी बात मुख्य विषय चालू करने से पहले कि निर्भय ने एक बात बताई थी कि भैया वो क्योंकि विधर्मियों से लड़ता रहता है। इस कारण से उस हैबचुअल हो गया है कि सबको जो है वो एक सींग से निकले हुए रहते हैं। वो मारता हुआ चलता है। है ना? मतलब उस उसमें कह रहा हूं मैं एक शॉर्ट में वो बात आ जाए समझ में। तो बाद में जब उसने बताया भैया वो जो है मेरी हैबिट ऐसी हो गई है। इतने लोगों से मैं वो फेस करता हूं। ऐसा नहीं है। तुम अकेले नहीं फेस करते हो। तुमसे 10 गुना ज्यादा ही फेस करते होंगे। तुमसे 10 गुना ज्यादा कभी चेक कर लेना हिसाब किताब कितना है। ठीक है? केवल ऑनलाइन जाकर के और ये मुंह चोरी करना इसी को ही वो नहीं कहते हैं धर्म युद्ध। है ना? धरातल पर भी हम फेस करते हैं। सामने से स्त्री कह रही है कि तुमने मुझे छेड़ा है। रिपोर्ट लिखवा दूंगी। भाई 25-25 बार थानों के चक्कर लगा रहे हैं।
00:28:40:02 हाई कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं। जगह-जगह मिलने जा रहे हैं कि भैया हमारी मां को गाली दी जा रही है। तुमने ही नहीं झेला है संघर्ष। तो अगर तुम यह कहो कि संघर्ष के कारण मैं ऐसा हो गया हूं तो वो कोई एक सिद्धांत नहीं है कि ऐसा हो जाना। हां। मगर यह कह सकते हैं कि कमजोर प्रज्ञा शक्ति है। कमजोर सहनशक्ति है जिसके कारण हम सिद्धांत विहीन हो जाए ऐसा इन कारणों के चलते तो ठीक है एक बार को एक बार को स्वीकार कर किया जा सकता है उसको ऐसा नहीं है मगर उसको यही बना लेना कि भाई ऐसा है तो इसलिए मैं ऐसा कर सकता हूं अब मैं जो है कुछ भी कर सकता हूं तो यह भी बात नहीं है तो पहली बात तो यह है कि आपका इस तरीके से बदलाव आना मानसिक संतुलन खो देना वो ठीक नहीं है। दूसरी बात यह है कि अगर वहां पे खो रहा है तो आपका यहां भी खो रहा है। हो रहा है कि जब मैंने आपको यह भेजा कि भैया ये देखो क्या-क्या तुमने कहा यह सब क्या है कि अरे कम से कम मैं जो कहता हूं उसको स्वीकार तो करता हूं आप तो स्वीकार भी नहीं करते है ना इन्होंने जवाब दिया जब मैंने वो शंकराचार्यों पर इनका कटाक्ष देखा पुराण धर्म है और शंकराचार्य शंकर परंपरा का सबसे पहले मैं नाश करूंगा और ये करूंगा वो करूंगा अरे तुम्हरे जैसे बहुत आए भाई कितने और कितने चले गए हैं 100 150 साल पहले चले आए हो नाश करोगे तुम शंकर परंपरा
00:29:55:03 का तो थोड़ा सोच समझ के बोलो। जहां से खत्म होता है तुम्हारा वहां से हमारा शुरू होता है। ठीक? अब आगे चलते हैं। खैर तो ये जब मैंने इनको कहा तो इन्होंने वहां पर ये नहीं कहा कि गुस्से में कुछ भी उसमें ऐसा नहीं हां किया है और आप आप देखो उनका साथ देते हो सनातन शंकर का तो उन्होंने मुझे इनकी फोटो भेज दी वही पोस्ट वाली। उसमें मैंने देखा ये गड़बड़ है। मैंने सुधरवाई। अब देखो सुधारने के बाद देखो एक टांग पर खड़ा कर दिया दयानंद जी को। तो जब तक मैं इससे पहले कहूं कि भाई ये गलती भी तो हो सकती है। फोटो उठाते टाइम छोटी सी फोटो है। इतनी बड़ी फोटो में अगर हमारा इतना बड़ा स्क्रीन है लैपटॉप का और उसमें हमको इतने बड़े बॉक्स में एक फोटो दिख रही है तो तो वो जो है हम नहीं देख पा रहे कि वहां पर एक ही टांग है। मगर वहां पर वो हमको भेज रहे हैं कि यह देखो अब कलर चेंज हो गया तो अब एक टांग वाली फोटो लगा दी। तो इससे पहले कि मैं यह कह पाऊं कि भाई ठीक है इसको भी बदलवा देते हैं। दो टांग वाली लगा देते हैं और कलर तो चेंज कर सबसे बड़ी बात है कि मानना कि हां भाई ये गलत कलर गलत है। तो वो जब तक मैं टाइप कर पाऊं तब तक उसका एक मैसेज आया कि हम मुझे क्या समझ में नहीं आता है। यहां से कहानी बदल गई। मुझे क्या
00:31:10:04 समझ में नहीं आता है। तो यह जो चीज कही ना उसने तब मैं समझ गया कि भाई बात करना ठीक नहीं है। अब क्यों समझा मैं ऐसा? जब इनकी यह रील वायरल हुई जिसमें गालियां दे रहे हैं बेधड़क और मेरी जो बुद्धि है वो मुझे लगातार कह रही है निर्भय ही है। एक बार निर्भय ने कहा कि भैया मेरे जो वो विरोधी हैं उन्होंने मेरी आवाज बना के निकाली है। एक बार कहा पर मेरा भ्रातत्व भाव है ना तुम्हारे प्रति जो मैंने विश्वास कर लिया। फिर तुम मुझसे किस से ये कह रहे हो कि मैं सब समझता नहीं हूं। क्या सामने वाले से विश्वास की अपेक्षा करते हो और स्वयं उस पर अविश्वास प्रकट करते हो। यह है अन्याय। दूसरों के साथ वही व्यवहार करो जो अपने लिए पसंद हो। तुमने एक बार कहा और सबसे बड़ी बात है कि अगर वो वॉइस तुम्हारी नहीं है। हम बोल देते हैं मान लेते हैं चलो तुम्हारी नहीं है। तुम एक बार वीडियो में आओ जैसे मैं बोल पा रहा हूं पब्लिक के सामने कि जो भी ये अभी आज नया-नया वीडियो बना है उसमें मेरी आवाज नहीं है। मैं उसकी फॉरेंसिक जांच कराऊंगा। तुम भी एबल हो कि भ हां भाई इसकी फॉेंसिक जांच करवाई जाए निष्पक्ष तरीके से और अगर मैं गिल्टी में पाया जाऊंगा तो मैं माफी मांगूंगा क्षमा मांगूंगा तो ये तुम बोल नहीं रहे हो ये भी नहीं इनको करना तो ये
00:32:25:06 चाहिए कि ये आकर के खुद रिपोर्ट लिखाएं और दिखाएं ये देखो मैंने रिपोर्ट लिखाई है रिपोर्ट लिखवाई है बिल्कुल और ये तो मैटर खेल अलग हो गया आप मुझसे एक बार कह रहे हो कि भैया वो आवाज मेरी नहीं है। मेरी बुद्धि पूरा पूरा जोर दे रही है तुम्हारी आवाज है। फिर भी मैंने विश्वास किया। क्यों किया? क्योंकि मैंने तुम्हारे अंदर भाई देखा और तुमने क्या किया? मैं क्या समझता नहीं हूं क्या? यह जो अपना तुम पर्सेक्टिव लेकर के चलते हो ना पहले से कि सब मुसलमानों से मैं भिड़ रहा हूं इसलिए मैं यहां भी वैसा ही बिहेव करूंगा। वही हमारे संबंध में घातक सिद्ध हुआ। ठीक है? मैंने तुम्हारे साथ न्याय पूर्ण और न्याय क्या कहते हैं? न्याय के पक्ष से निष्पक्षता के साथ दृष्टि रखी। जहां पर मुझे लगा मैं इस बात को सिद्ध नहीं कर सकता। भाई इसी की आवाज है। मैंने तुरंत तुम्हारी बात मान ली। ठीक है। तुम्हारी आवाज नहीं है। मान ली ना? पर जब मैं कह रहा हूं, कुछ कहने वाला हूं तो मेरा पक्ष सुनने की जरूरत ही नहीं है। पहले ही निर्णय कर लिया, अपने मन से सोच लिया कि ये मैं जानबूझ के करवा रहा हूं। भाई मेरी जानकारी में जितना आएगा मैं उसका सामना करूंगा। कोई भी गलत चीज होगा आज के बाद भी दयानंद जी के विषय में कोई भी गलत बात कहता है आप मुझे बताइए। मुझे पता तो चले। आपने बताई इतनी छोटी सी फोटो की बात। मैंने उसको तुरंत चेंज करवाया। यहां तक
00:33:40:12 कि जिनसे मैंने कहा उन्होंने क्षमा शब्द भी लिखा वहां पर क्षमा पूर्वक बदला उस बात को इसको कहते हैं सिद्धांत की रक्षा केवल धर्म धर्म चिल्लाने से कुछ नहीं होगा उसको धारण करो अपने अंदर बड़े अद्वैत का खात्मा करेंगे हम तो जब ये हुआ तो हमने मैंने कहा भाई अब यहां से आगे मैं तुमसे बात नहीं कर सकता क्योंकि क्या होता है मैं वहां पर ये चीजें रखता उसमें फिर और मुंहजोरी होती वहां पर वो वो अपना फिक्स किए बैठे हैं। जब उसने सोच ही लिया है कि मुझे क्या समझ में नहीं आता है। जब सामने वाले ने समझ लिया है कि मुझे क्या समझ में नहीं आता है। उसको मेरे ऊपर विश्वास नहीं है। और वो ये चाहता है कि मैं उस पर विश्वास रखूं। वो अगर कह दे आवाज मेरी नहीं है तो मैं मान लूं। अरे बड़े बड़ा भाई अगर कहा है तो विश्वास भी करो ना।
00:34:32:19 बिल्कुल बिल्कुल विश्वास भी करना पड़ेगा और और बात वार्ता करने के भी बहुत सारे तरीके होते हैं। अगर आप किसी से सभ्य वार्ता कर रहे हो तो आपके उसकी बात का सम्मान भी करना चाहिए ना कि अपनी बात को उसके ऊपर थोपते रहो। शेर और बकरी को एक ही एक ही लकड़ी से आकोगे क्या? अरे तुमने कुछ तो धर्म आचरण देखा होगा ना। तभी तो तुमने माना कि बड़े भाई जैसे हैं कुछ है। फिर तुमने एक झटके में कह दिया कि मैं सब जानता हूं। मैं समझता नहीं हूं क्या? सैद्धांतिक विरोध तो रहेगा ही। वहां कटाक्ष करेंगे ही। तुम नहीं करते हो क्या? और देखा जाए तो शुरुआत किस पक्ष से हुई है कटाक्ष की? दयानंद जी को कोई जानता भी था शंकराचार्य के समय में कौन थे? कहां थे? किसने आकर के विरोध किया? गप्पों गपोड़े हैं, ये है वो हैं। किसने किया? दयानंद जी ने है ना? तो दयानंद जी के लिए कटाक्ष जाएंगे ना। हास्यपूर्ण बातें तो उन्होंने शुरू की ना। शंकराचार्य ने नहीं शुरू किया। दुनिया में जो भी कोई आया है शंकराचार्य के बाद ही आ रहा है जो इस तरह से कटाक्ष कर रहा है तो शुरुआत तो तुम ही लोगों ने की है भाई अपना सिद्धांत रखते तुमने किताबों में छापा है कपड़े कपड़ गप्पे ठीक तो थोड़ा सा धर्म को धारण भी करो निर्भय केवल चिल्लाने से नहीं होगा कि हम
00:35:47:25 बहुत बड़े वो क्या कहते हैं वो वो कौन सी थी क्रिस थ्री के विलेन हो गए विवेक ओबराय चार्ल्स जेवियर और मैग सबका मिक्सचर ठीक है ऐसे नहीं चलेगा हां तो अब बात आती है कि इन्होंने अपने वीडियो में जो जो बातें कही हैं उसको हम सुनेंगे सारी बातों का एक-एक आंसर है मेरे पास वो सारे आंसर देंगे और लास्ट में आपको एक बंपर प्राइस देंगे बंपर इनाम तो सनातन जी इससे पहले आप थोड़ा सा अपना कुछ विचार प्रकट कर दें जिससे कि हम लोग क्वेश्चंस उठाना शुरू करें नहीं नहीं बिल्कुल और ये जो आपने आज की स्ट्रीम स्ट्रीम करिए। बहुत महत्वपूर्ण थी। मैं काफी दिनों से ये सोच रहा था कि क्योंकि उसके चैनल से भी आ रहा था कि वार्ता आपसे होने वाली है। आप भी यह कह रहे थे कि हमारा कुछ डिस्कशन होना है। तो ये क्लेरिफिकेशन आपने जो दिया बहुत बढ़िया किया क्योंकि मेरे मन में यह भ्रम फैल रहा था कि एक तरफ तो वो ऑडियो चल रहा है जिसको मैं उठा रहा हूं। मैं बोल रहा था शिवश भाई जो है उसका साथ दे रहे हैं और उसके साथ वार्ता कर रहे हैं। अब मेरा मन नहीं मान रहा था। उसने काफी चैलेंज भी किया कि मैं तुम्हें चैलेंज करता हूं। तो मैं कहता हूं किसी के साथ भी अगर मैं बात कर रहा हूं और वो अभी तक क्लियर नहीं हुआ है कि वो जो वॉइस है वो उसी की है। मेरे मन में तो सबसे
00:37:03:01 पहले वो शब्द गूंज रहे हैं जो उस ऑडियो में है। चलो नकली है। आप कहते हो नकली है। फेक है। एक बार भी निर्भय नहीं आया वीडियो के माध्यम से और ये नहीं कहा। अगर वो ऐसा भी कह देता पब्लिकली भी कि ये जो वॉइस है ये नकली वॉइस है। एआई के थ्रू है। आजकल तो एआई से वीडियो भी बन जाते हैं। सबको पता है मेरा हूबहू एआई बन जाता है। लेकिन वो पता चल जाता है कि एआई है। तो अगर वो भी है तब भी आप पब्लिकली एक बार आकर बोलो कि हां भाई यह एआई है और यह मेरे नाम से ना माना जाए तो हम चलो मान लें। ठीक है। उसके बाद आपने उसके ऊपर रिपोर्ट करा कि नहीं करा? क्योंकि आपको रिपोर्ट करना चाहिए। आपके नाम से अगर कोई चीज चल रही है तो आपको एक बार रिपोर्ट तो करना चाहिए कहीं पर और आप बोलते हो मैं असमर्थ हूं जी रिमोट नहीं कर पाता तो पब्लिकली आकर वीडियो बनाकर बोल दो कि ये आवाज मेरी नहीं है मेरे नाम से नकली चल रहा है तब भी बात मान ली जाएगी लेकिन वो भी आपने नहीं किया ऊपर से आप क्या कर रहे हो मेरे चैनल से या शिवश जी के चैनल से वीडियो ले रहे हो उस पूरे शॉट में आपका कोई वैल्यू एडिशन नहीं है आपने वहां कमेंट्री भी नहीं की है बस आप हमारे ही वीडियो को कट पेस्ट कर रहे हो आधा पोर्शन मेरा उठा लिया आधा पोर्शन शिवश जी का उठा लिया और उन दोनों वीडियो को कट करके आपने शॉट चला रहे हो और फिर नीचे आपके जो जितने भी फॉलोअर हैं वो वहां पर अभद्र बातें बोल रहे हैं, मजाक उड़ा रहे हैं। तो भैया जब आप संदर्भ से काटकर
00:38:18:09 उन वीडियोस को चला रहे हो क्या वो अधर्म नहीं है? अगर हम भी ऐसा ही करें तो फिर क्या आप उसको सही मानोगे? नहीं मानोगे। तो जब आप हमारे द्वारा की गई उस बात को सही नहीं मानोगे तो फिर तुम्हारे द्वारा की गई वो बात कैसे सही है? अच्छा ऊपर से इन्होंने क्या किया कि उन वीडियोस को चलाया मैंने उस पे YouTube को रिपोर्ट किया। YouTube से मेरे को आया कि भैया ऐसेसे इन्होंने काउंटर क्लेम कर दिया उसके ऊपर। अब मेरे पास 10 दिन का टाइम था कि मैं उसके लीगल कारवाई करूंगा। लीगल कारवाई करता तो वीडियो तो हट जाते। इवन चैनल भी डिलीट हो सकता था। लेकिन मैंने वो नहीं किया। मैंने बोला चलो छोड़ दो। ये खाली वार्निंग रूप में इनको सबक होगा। अगर आगे के लिए ऐसा नहीं करेंगे। लेकिन फिर उनकी पोस्ट आती है। उस पर क्या करते हैं? मेरा पर्सनल ईमेल आईडी। अच्छा मेरा नाम क्या किसी को पता नहीं है? शिवाश जी को क्या मेरा नाम नहीं पता है? वो मेरा पर्सनल ईमेल आईडी वहां पर पब्लिक में सबको दिखा रहे हैं। भाई मैं नहीं चाहता हूं कि वो जो पर्सनल ईमेल आईडी है वो पब्लिक में जाए। वो मेरा किसी दूसरी चीजों के लिए है। जो मेरा पब्लिक में जो मेल आईडी है वो सनातन शंकर के नाम से है। तुमने वहां पर वो दिखाया। मैंने फिर YouTube में रिपोर्ट किया। तो YouTube ने वो पोस्ट हटवाई आपकी। उसके बाद आपने फिर दोबारा वही काम किया। कल फिर इन्होंने मेरा नाम लिखकर स्पेशल वो सबको जो है लिख रहे हैं। भाई जब मैंने अपने चैनल के माध्यम से अपना पब्लिकली नाम नहीं अनाउंस किया है तो आपको क्या अधिकार बनता है मेरे पर्सनल नाम
00:39:33:13 अच्छा मेरे पास इनका ना इनका इन्होंने जब YouTube में वो किया था क्योंकि जब भी आप काउंटर क्लेम करते हो तो आपको एड्रेस देना पड़ता है। अच्छा मेरे पास इनका एड्रेस है वेस्ट बंगाल वाला अब मैं क्या करूं वो पब्लिक में दिखा दूं सबको क्या यह सही बात होगी क्या यह धर्म माना जाएगा मैं ऐसा क्यों करूंगा मैं ऐसा नहीं कर सकता लेकिन आपने वो काम किया तो भैया जो काम आप कर रहे हो ना वो गलत कर रहे हो अगर आपको अपना मत सिद्ध करना है तो उसके सही तरीके से करो ना कि दूसरों के ऊपर लांछन लगाकर किसी के ऊपर जो उसकी पर्सनल लाइफ है उसके उसको सामने लाकर उसको पब्लिक में उछाल कर है ना जैसे शिवा जी के बारे में भी किया था। वो एक कोई इनका ही मातृशक्ति थी आर्य समाज से जुड़ी हुई। उन्होंने आपके भी पर्सनल फोटोग्राफ पब्लिक में वो दिखाए थे। तो इस तरह से थोड़ी जो है वो आप सिद्धांतिक रक्षा कर पाओगे अपने मत की। भव्य राधा कृष्ण भव्य राधा कृष्ण दास का आधार कार्ड मोबाइल नंबर सब कुछ मुझे एक साल पहले मिल गया था। अगर परेशान करने की भावना हो व्यक्तिगत तो उसको ऑनलाइन डालने में क्या देर लगती मुझे? पर सिद्धांतवादी है ना अगर लड़ेंगे तो लड़ाई के तरीके से लड़ेंगे। ये छिचोर पट्टी हमारे पास नहीं है कि उसकी फोटो निकाल ली। उसका वहां से आईडी
00:40:48:16 निकाल ली। उसका ये कर लिया। उसका घर का एड्रेस सब कुछ है। और पूरे हिंदुस्तान में हमारे गुरु भाई बहन है। बिल्कुल बिल्कुल क्या दिक्कत है किसी की पर्सनल जानकारियां शेयर करने में वहां? मगर नहीं सिद्धांतवादी हैं। सिद्धांत से लड़ेंगे। गलत तरीके से आज तक कि जो वह व्यक्ति कहना नहीं चाह रहा है मगर हमने जो है दिखा दिया। शॉर्ट बनाते हैं। ऐसा नहीं है। छोटे-छोटे विषयों को छोटा कट करके दिखाते हैं। भाई यह हुआ मगर व्यक्ति जो कहना चाह रहा है वो हमने दिखा दिया कि वो नहीं कहा। हमने दिखाया कुछ कहना कुछ और चाह रहा था। ऐसा नहीं। ऐसा हमने कभी नहीं किया। दिखा दो एक भी शॉट हमने बनाया ऐसा। तो आप लोग वही कर रहे हो अपने चैनल से। मैं आपत्ति जता रहा हूं तो कह रहा हूं यह मेरा काम नहीं है। ऐसे ही कुंभकरण ने कहा था। ऐसे ही द्रोणाचार्य ने कहा था। ऐसे ही भीष्म पितामह ने कहा था मेरा काम नहीं मेरा काम नहीं। तो विवेकी में गिने गए क्या? अगर आप धर्म का अधर्म का धर्म का साथ ना देकर के अधर्म के पक्ष में खड़े भी हुए हो मौन तब भी आप दोषी कहलाओगे। मौन समर्थक अधर्म के
00:41:54:16 चलो और ऊपर से वो धमकियां और दे रहे हैं कि तू चला जा कोर्ट में देखा जाएगा। अरे भाई वो बात मैंने इसलिए कही है कि भैया मैं वो कारवाई कर सकता था पर मैंने नहीं की। क्यों? क्योंकि मैं यह चाहता था कि आप उसमें सुधार करें। मैं वहां पर अपने उस पोस्ट में यह थोड़ी बोल रहा हूं कि मैं कोर्ट चला जाऊंगा। मैं कह रहा हूं मेरे पास वो ऑप्शन था। वो आज भी है मेरे पास विकल्प मौजूद। लेकिन मैं उसमें आपको धमकी नहीं दे रहा हूं। लेकिन आप तो उकसा रहे हो, प्रवोक कर रहे हो कि भाई तू यह कर तू करके दिखा दे। देखते हैं तेरे में कितना दम है। माता ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया। भाई सबकी माता ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया होता है। और अगर तुम वाकई में उस बात को बार-बार अच्छा इनकी हर पोस्ट में यही बात लिखी होती है। माता ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया। निष्ठा पूर्वक दूध पिलाने की बात यह होती है कि भैया अगर वहां पे साहस का वहां पर प्रतीकात्मक है वो दूध। हम भाई अब तुम यहां कमेंट में आकर के बातें कर रहे हो, परेशान कर रहे हो। हम हमारे पास दिन भर टाइम थोड़ी ना है कि कमेंट में आकर के तुमको जवाब देते रहे और यहां पे पूरा शास्त्रार्थ कर ले। तो तुम जब यहां पे आकर बोल रहे हो तो तुमसे कहा जाता है कि साहस का प्रदर्शन करो और सामने आके बात करो। उस साहस के लिए प्रतीकात्मक ये बात कही जाती है कि माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया तो ऐसा करो आप। सामने आके अगर
00:43:09:25 नहीं करना है तो यहां भी मत करो। यहां क्यों कर रहे हो? जैसे यहां पर भी कई सारे लोग हैं कि भैया तुम निर्भय आर्यन खुला मैं भी तो दे रहा हूं। मैं भी तो दे रहा हूं। खुला चैलेंज दे तो रहा हूं। आ जाओ किस में दम है? बहुत दिनों से दे रहा हूं। निर्भय निर्भय जी ने जब मुझे फोन किया था जब बात तय हो गई थी उसके बाद चार महीने लगे थे मुझे वापस फोन करने के। अगर निर्भय के भरोसे हो तो हां और निर्भय से मेरी जो चर्चाएं हुई है फोन पर उसको लेकर के मैं अभी लास्ट में बात करने ही वाला हूं। क्या है क्या नहीं है? तो थोड़ा देख लो क्या है क्या नहीं है निष्पक्ष बात किया करो अपने से मैं हीरो नहीं बनता कि नहीं भैया पहले से ही पहले अपने जो है अपने आप को हम तोप है जब गोली दाग दी गोला दाग दिया तब बता तब लोगों ने कहा तुम तोप हो हम तब भी नहीं कहते ठीक है तो ठीक है अनिकेत जी आप कुछ बोलेंगे इस बारे में है अनिकेत जी कि नहीं अंधेरा है अनिकेत जी अच्छा ये तो यहां तक तो चलो ठीक है कि माता ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है लेकिन इनके ही चैनल पर जब मैंने कमेंट किया तो मेरे को पता है क्या लिखते हैं ये कहते हैं न्यूट्रल चैनल में आओ अगर तुम्हारे पिता ने
00:44:24:26 निष्ठा पूर्वक गर्भाधान किया है अब ये क्या बात है भाई ये ये कौन सी बात तुमने वहां कर दी है तो इस तरह की बात ये नीच ये नीच लोग हैं ये नीच लोग हैं अश्लीलता हमने कहा दूध पिलाया तो दूध वाले में कोई अश्लीलता थोड़ी ना है। मगर ये ये नीचता है। इसमें अश्लीलता है। आप माता पिता के दृश्य को चित्रित कर रहे हो वहां पर किसी व्यक्ति के। ये तुम्हारे यहां से सिखाया गया है। ये जो दयानंद जी का सेट बना है ना ये अलंकार ये सीखते हैं ये अधर्म। भाई एट द एंड आउटपुट क्या है? ये लोग कहते पुराण अधर्म है। पुराण अधर्म है। हमारे यहां अगर जो चीजें तुम नहीं समझ पा रहे हो भैया उनकी जो तात्विक व्याख्या क्या है? आदि दैविक अर्थ क्या है? हमारे यहां नहीं कहां पर शिक्षा दे दी गई कि इस तरह का रास अर्चा बताओ हम तो उल्टा रोकते हैं अगर तुम यह कह रहे हो कि वो रास नहीं बताना चाहिए था उससे बड़ा अधर्म है तो कहां शिक्षा दे दी जा रही है उसका एग्जीक्यूशन कहां हो रहा है जो आप गलत अर्थ लेकर के बैठे हो उसका एक्सजीक्यूशन का समर्थन कहां पर हो रहा है हो अगर हो रहा है तो वहां पर जो हमारे सिद्धांत है उनके विरुद्ध जाकर के हो रहा है ना वो तो तुम्हारे यहां भी हो रहा है तो तुम कैसे उसको अधर्म का आधार बता रहे हो हां मगर तुम्हारे यहां आगे कुछ सिद्धांत ऐसे जरूर है
00:45:40:00 जो सीधे सीधे अधर्म का साथ दे रहे हैं। हमारे हमारी दृष्टि में अभी मैंने तुम्हारी दृष्टि से जो अधर्म है उसके बारे में बताया। तुम्हारी दृष्टि से जो अधर्म है यानी तुमने कहा पुराणों की कथा अधर्म तो उसका इंप्लीमेंटेशन तो नहीं हो रहा ना आचरण में। अब हमारी दृष्टि से जो अधर्म है उसका तो इंप्लीमेंटेशन हो रहा है। एक्सजीक्यूशन भी हो रहा है। सिर्फ वो लिखा नहीं है। उसका एक्सजीक्यूशन भी हो रहा है। जैसे वर्णाश्रम जैसे मूर्ति पूजा विरोध इसका एक्सजीक्यूशन है। आपको रास लीला नहीं समझ में आ रही राधा मां का जो चरित्र है वह समझ में नहीं आ रहा है पात्र तो उसका एक्सजीक्यूशन हम कहां कह रहे हैं शंकराचार्य बैठ के नहीं जाओ तुम राधा ये जो लीला हुई ऐसे तुम भी करो कहां कह रहे हैं तुम कह रहे हो जो हमें अधर्म दिखाई दे रहा है वो तुम कर रहे हो जो तुम्हें अधर्म दिखाई दे रहा है वो हम कर भी नहीं रहे समझ में आ रहा है कुछ ये अंतर परंपरा की खाल उधेड़ देंगे ऐसा लिखते हैं ये लोग परंपरा की खाल उधेड़ देंगे क्योंकि अंगूर खट्टे हैं अंगूर खट्टे हैं पांच मिनट में परंपरा करेंगे।
00:46:41:20 चलो एक शब्द और यूज़ करता है वो भैया मैं ठोक के आया गया था और ठोक के आया परंपरागत वाले लोग को इधर भी ठोक के आया उधर भी ठोक के आया। अब वो गुरुकुलम वाले को बोलता है कि वो वो जो है शब्द प्रमाण दे रहा था उसमें उसको मैंने ठोक दिया और उसको मैंने बोला अनुमान प्रमाण से बता। मतलब तुम शब्द प्रमाण को काट रहे हो। एक तरह से वेदों को खंडन कर रहे हो। नहीं ठीक है वो अभी सब आगे बातें होंगी अभीगी सब बातें सैद्धांतिक बातों पर क्या हुआ है क्या नहीं हुआ वो आगे बात होगी मगर एक बात कह रहा हूं कुल मिलाकर के आपको अगर केवल धर्म के रक्षक और प्रचारक मत बनो अपने अंदर उसको धारण भी तो करो भाई राम जैसे बनो भी तो बन रहे हो तुम राक्षस जैसे रावण जैसे और बात कर रहे हो कि मैं जो ताल ठोक रहा हूं
00:47:34:09 हां शास्त्रवाद जी आप थोड़ा सा वो बताइए क्या है? कितना लंबा है? बहुत ज्यादा लंबा तो नहीं है। नहीं भैया जय श्री राम। ये जो हो रहा है आज आज जो ये हो रहा है लाइव बहुत बढ़िया है जो कि होना चाहिए था। बहुत दिन से इसके विषय में लगे हुए थे। और यह जो निर्भय है जो चाहता है कि आपसे डिबेट करना चाहता है वो चाहता है मेरे दृष्टिकोण से वो वही चाहता है उसे ही आना चाहिए और यदि वो आपको बुला रहा है तो यह आपका अपना है कि आप उसके पास जाए कि नहीं जाए लेकिन मेरे दृष्टिकोण में यह है कि प्यासा जो होता है वो कुएं के पास आता है ना कि कुआं प्यासे के पास जाता है। ठीक है? और वो जो है व्यक्ति वो ये दावा कर रहा है ईश्वर अवसर नहीं ले सकता। तो भाई तुम शास्त्र प्रमाण के विरुद्ध दावा कर रहे हो तो तुम्हें ही आकर के सिद्ध करना चाहिए ना कि उसे सिद्ध करना होगा कि शास्त्रों में लिखी बात सही है कि गलत गलत बात गलत बात ऐसे नहीं झूठे की हद तक चोर के घर तक इनका ये कहना है ना कि अवतार तुमने कहा है तो तुम सिद्ध करो उसके बाद हम भी तो ये कहेंगे कि सर्वशक्तिमान तुमने कहा है तो तुम सिद्ध करो भाई
00:48:49:18 जैसे तुम ये बात पकड़ रहे हो कि अवतार तुमने कहा है तुम्हें सिद्ध करना है हम भी तो कहेंगे कि सर्वशक्तिमान तुमने भी कहा तुम सिद्ध करो सर्वशक्तिमान हम तो अवतार सिद्ध कर लेंगे पराक्रम से गूंजे त्रिभुवन धरती पाताल दुष्ट भंजन हम कर देंगे सिद्ध उस दिन हुआ क्या है क्या मैंने क्वेश्चन किया कोई ना और जो क्वेश्चन किया उससे विषयंतर हो गया हुआ क्या उस दिन पंचा वाली बात पे झगड़ा हो गया बात खत्म हो गई और ये खुद जानते हैं कि जो पंजाब लेके आए थे उस दिन अगर खुल जाते आज की तारीख में जानते होंगे हम मट्टी कु जाती हमारी जितने आर्य समाजी चिल्ला रहे हैं अगर उस दिन पंजाब में खुल जाता मट्टी कुड़ जाती बिल्कुल आज की तारीख में आज की तारीख में जानते हैं अच्छा मैंने जब इनको कहा कि भाई चर्चा कर लो इनको एक दिन लग गया यह बताने में कि चर्चा मेरे चैनल पर होगी मैसेज लिख देना था भैया चर्चा यहां होगी मगर नहीं एक दिन लग गया वैसे तो 11000 का इनाम थोप चुके थे तो इसका मतलब तैयार थे ना पूरी तरीके से बता देते मेरे चैनल पर होगी। दूसरी बात यह है कि मैं इनके चैनल पर जाकर अब कर क्यों नहीं रहा हूं। मैं तो पहले तैयार था। मैंने इस बात का
00:50:05:06 इस बात को एक्सेप्ट किया था कि भाई अगर उनके चैनल पर भी बुलाया जाएगा तो जाके कर लेंगे क्योंकि एक बार वो आ चुके हैं और मेरा उनके प्रति अच्छी अच्छा दृष्टिकोण है कि भाई अच्छा इंसान तो फिर जब उसने ऐसी बात की कि अब आपको ट्रोल किया जा रहा है इसलिए अब आप आए हो बात करने। इसका मतलब और मैंने तो उस दिन अपना झंडा गाड़ दिया था। इसका मतलब तुम्हारी निगाह में मैं यह सोचता हूं कि मैं उस दिन हार गया था। और मैं अगर इस इस कारण से तुम्हारे कहने के अनुसार तुम्हारे चैनल पे आ गया तो इस बात को मैंने स्वीकार कर लिया कि मैं अपने आप को हारा हुआ मानता हूं। नहीं हारा हुआ मानता। भाई कहां से मानू मैं? भाई तुमने जो जो तर्क जो भी विरोध किया तार्किक रूप से उसका मैंने उत्तर दिया। तुमने कहा अच्छा चलो ठीक है। आगे बढ़े। 95 पे आया। पंचा की बात हुई नहीं। खत्म हो गया। तो मेरा पक्ष कहां से असिद्ध हो गया? वहां पर अगर देखा जाए तो मेरा पक्ष ही सिद्ध हुआ। अगर मैच ड्र भी हुआ बिना किसी निष्कर्ष के ड्रा हुआ तो जितना पक्ष सिद्ध हुआ मेरा हुआ। तुमने अब उस पर प्रश्न उठाया क्या? वो पैराडॉक्स लेकर आए। उसका उत्तर दिया मैंने तुम्हें। तुमने कहा अच्छा चलो ठीक है मैं मान गया। अब आगे बढ़िए। मान गए ना? मान गए? कहां ले जाओगे इस शब्द को? मान गए। हम्म भाई आगे बढ़ने के लिए ही सही। तुमने माना ना हमारी बात को। हमने तुम्हारी
00:51:20:14 कौन सी बात मान ली? बताओ कौन सी बात मान ली जो हमारे विरोध में तुमने कही हो तुम मान ली हमने इसको कहते हैं सिद्धांत की पुष्टि आपका वो अपना मंतव्य रहा होगा कि पंचा के लिए आप आगे बढ़ रहे हो मगर आपको मानना पड़ा आपने माना है उसमें अच्छा चलो ठीक है मान लिया ये क्या है ये मान लिया ना वो सब कुछ कर सकता है आना बताऊंगा जब कभी मिलोगे तब नष्ट करोगे अद्वैत परंपरा को। जी भैया। और एक और बात है कि वो जो चाहते हैं निर्भय लोग निर्भय जो है वो ये चाहता है कि वो ये वाला ये वाला ये वाला कुतर्क सिद्ध हो गया इनका। ये अगर ये बात कहते हैं ना कि तुमने कहा है कि अवतार ले सकता है। हम भी तो कहेंगे तुमने कहा है कि सर्वशक्तिमान है। सिद्ध करो सर्वशक्तिमान फिर पीछे पड़ जाएंगे। बिल्कुल छुपने की जगह नहीं मिलेगी। हां चलो बोलो।
00:52:26:24 हम ये बोल रहे हैं कि ये लोग जो कहते हैं कि पंचाव या फिर न्याय दर्शन। ठीक है? अरे न्याय दर्शन में तीन को स्वतंत्र प्रमाण दिए गए हैं जिसमें प्रत्यक्ष प्रमाण, अनुमान प्रमाण और फिर शब्द प्रमाण होते हैं। यदि अनुमान प्रमाण के आधार पे ही शब्द प्रमाण को अगर जज करना होता तो शब्द प्रमाण का अपना एक जो है स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना जाता ना उसे उसे तो अनुमान प्रमाण के अंतर्गत आने वाले पंच के आधार पर माना जाता है। क्योंकि ये नहीं मानेंगे इस बात को। प्रमाण तो अब शब्द प्रमाण है हमारे पास अवतार तो फिर तुम कैसे इसका खंडन कर सकते हो पंचाव से वो भी पंचाव जो होते हैं अनुमान प्रमाण के अंतर्गत आने में जो है अव्यय के सहारे होते हैं इसको न्याय की उसको सिद्ध किया जाता है तो अब सीधा बात आता है कि भाई जो चीज अनुमानित पर टिकी हो उसको अनुमान प्रमाण से सिद्ध किया जाता है ना कि जो पहले से शब्द प्रमाण के आधार पर है उसको भी सिद्ध करने लगे ये कहां से सीख लिया आप मुझे न्याय दर्शन में यह चीज दिखा तो शब्द प्रमाण को भी अनुमान प्रमाण से जज करना चाहिए। तब मैं अपने त्व को मानू। दिखाओ मुझे कहां लिखा है? शब्द प्रमाण तो अपने
00:53:41:27 आप में एक स्वतंत्र है। मगर ऐसा नहीं है कि हमारे पास अनुमान प्रमाण है नहीं। हम तुम्हारे ईश्वर से अपनी अवतार की सिद्धि करेंगे। ध्यान रखना। अभिमान जहां जहां सब कुछ खत्म होता है वहां से शंकर परंपरा शुरू होती है। आखरी आखरी किनारा है इस दुनिया में धर्म का शंकराचार्य ध्यान रखना आवे ना जावे चले अभी जुम्मा जुम्मा अभी युवा हुए हो और बोल रहे हो कि परंपरा को हम ये कर देंगे अद्वैत नष्ट कर देंगे अरे उन्ही की वजह से आज अस्तित्व है तुम्हारा तुम्हारे दयानंद जी लिखे बैठे हैं जाओ पढ़ लो थोड़ा सा अपनी सत्यार्थ प्रकाश हां बोलिए प्रश्न
00:54:30:09 जी भैया यही सब था जो ये आते हैं हो गए सारे हो गए सारे हो गए नहीं हो गए मैं तो बहुत नहीं आप मुझे जाइए मैं मैं जो स्किप करना होगा तो मैं स्किप कर दूंगा आपने मैसेज भेजा था ना मुझे पॉइंट्स को लिख के बहुत सारे जी बहुत सारे भेजे मैंने वो वो बोलना पहला दूसरा तीसरा चौथा पांचवा ऐसे जी उनका तो पहला बात यही था कि जो शिवश है वो कुतर्की है उसका जो पहला बात था कि वो शिव जो है वो कुतर्की है क्योंकि इस बात को तो सिद्ध नहीं कर पाएगा कुतर्की तो फिर कुतर्की अगर इस तरह से देखा जाए तो कुतर्की तो तुम भी हो भाई अगर तुम्हारे कहने से ही निर्णय होना है तो लो हमने भी कह दिया तुम कुतर्की हो यह कोई बात है क्या आप चर्चा करें और चर्चा के माध्यम से ये निर्णय लोगों को लेने दे कौन कुतर्की है कौन नहीं ठीक है वो कुतर्क देखा है क्या-क्या कुतर्क है सत्यार्थ व प्रकाश में ऋग्वदा आद भाष्य भूमिका में क्या-क्या कुतर्क किए गए एक जगह कह रहे हैं कि भगवान की पूजा करने से कुछ नहीं मिलता कर्म से ही मिलेगा ठीक दूसरी जगह कह रहे हैं भगवान की पूजा करने से निराभिमानता आएगी
00:55:46:00 निराभिमानता का मतलब क्या है कि तुम्हारे अंदर कर्म को करने से प्राप्त होने वाले फल में अभिमान ना आए कि मैंने किया है। यानी कि एक तरफ कह रहे हैं यह मत सोचो कि भगवान दे रहे हैं। दूसरी तरफ कह रहे हैं यह सोचो कि भगवान दे रहे हैं। बताइए या तो मान लो व्यवहार परमार्थ परमार्थ से भगवान नहीं दे रहे हैं। व्यवहार से भगवान दे रहे हैं। मगर तुम्हें तो काटना था ना हमारी बात को तो कुतर्क कर दिया। निराभिमानता लिख के फंस गए। दयानंद जी निरभिमानता लिखा है उसमें कि भैया पूजा करने से क्या आएगा? निराभिमानता। अच्छा भगवान कुछ देते हैं नहीं देते तो निराभिमानता शब्द इनको काट रहा है कि नहीं काट रहा है भाई मैं अगर मान लीजिए मैं कुछ पुरुषार्थ करके कुछ ले आ रहा हूं मगर पूजा करने से मेरे अंदर यह भाव आएगा कि मैं नहीं लाया ये भगवान की वजह से मुझे मिला भगवान ने दिया यही बात हम लोग कहते हैं तो ये लोग काटने आ जाते हैं भगवान कभी कुछ नहीं देता अपने पुरुषार्थ से मिलता है तो जब पुरुषार्थ से मिलना सोचना है तो काट क्यों रहे हो फिर उस बात को निराभिमानता इतने कुतर्कों से भरा पड़ा है ना सत्यार्थ प्रकाश हर दो चार पन्ने बाद एक कुतर्क कि वो लोहा कि भैया जिसने तलवार बनाई है उसको वो नहीं होगा जिसने तलवार
00:57:01:08 बनाई है उसको दोष नहीं लगेगा तलवार से यदि हत्या होगी तो दोष उसको लगेगा जो तलवार से हत्या कर रहा है। अच्छा जिसको मालूम होगा इस तलवार से हत्या होगी उसको क्या होगा? क्या कुतर्क है ये? जिसको मालूम है कि मैं किसी को तलवार दे रहा हूं और उससे हत्या होनी है। जो जानता है यह मुझसे तलवार क्यों ले जा रहा है। जैसे अतीक अहमद हम वो जानता है कि मैं AK-47 किसी को दे रहा हूं तो उससे जाके हत्या होनी है। किसी की वो कोई मिलिट्री को दे रहा था क्या? AK-47 चोरों को, लुटेरों को इनको दे रहा था। तो फिर वो दोषी नहीं है जो जानता इस्लाम इस्लाम वाले भी तो यही कहते हैं बुराई को बनाना बुराई नहीं है। ये भी तो यही कहते हैं। वो मुफ्ती भी यही कह रहे थे। बुराई को बनाना बुराई नहीं है। वाह कोई जानता है कि बम फटेगा जाकर के निर्दोष उससे मारे जाएंगे बम से। फिर भी बम बना रहा है। ईश्वर को अकर्ता सिद्ध करने के लिए अद्वैत की शरण में आना पड़ेगा। आ जाओ जितना जल्दी हो सके। ठीक है? समस्त कर्मों को करते हुए भी तू मुझे करता जान। क्यों? क्योंकि यह सब कुछ माया है। कुछ गलत
00:58:16:16 हो ही नहीं रहा है। जब इस पर आओगे ना तब ईश्वर को निर्दोष सिद्ध कर पाओगे। जब इस पर आओगे कुछ गलत हो ही नहीं रहा है। ठीक है। हम हां जी बताइए। ये तो उसने अपने लाइव में ये कहा था कि जब उसे आपने हटा दिया था तो आपने ये बोल के हटाया था कि आपको उस चीज का ज्ञान नहीं था उस कुछ जो है ना मतलब कि आपने आपको वस्तुनिष्ठ जो जानकारी चाहिए थी जैसे कि पंचावधि का उसका जो ध्यान नहीं था इसलिए आपने उसको हटा दिया इसलिए नहीं हटाया कि आपने जो स्वीकार किया है ना कि आपको नॉलेज नहीं हां उसने अपने एक वीडियो में बोला था कि आपको जो नॉलेज नहीं है इसलिए उसको हटा दिया। उसका ये हां भाई तो ये तो मैं अभी भी बोल रहा हूं कि वो कंपटीशन इस बात का था ही नहीं कि मुझे किस शब्द का अर्थ आता है किसका नहीं आता है। कंपटीशन इस बात का है कि मेरा जो सिद्धांत है ईश्वर अवतार ले सकता है। उसको मैं सिद्ध कर पा रहा हूं कि नहीं। आप कोई एक ऐसा शब्द ले आए जो मुझे नहीं मालूम। मैंने अभी भी कह रहा हूं। मैंने बहुत से शास्त्र नहीं पढ़े अभी भी उसमें कुछ लिखा हुआ तुम फिर ले आओगे। मैं उसका तुमसे मतलब पूछूंगा। हम इसलिए यहां पर आमनेसामने हैं कि हमें अवतार को सिद्ध करना
00:59:31:22 है। या तो वो सिद्ध होगा या असिद्ध होगा। अगर तुम कोई ऐसा शब्द ला रहे हो जो मुझे समझ में नहीं आ रहा है तो आपको समझाना होगा और समझाइए और फिर पूछिए कि मैं दे पाता हूं कि नहीं दे पाता हूं। हां उसने बोला था कि आपने जो है चर्चा से पहले उसे कहा था कि चर्चा होगी। लेकिन जब उसे आपने हटा दिया तो बाद में आपने कहा है कि यह डिबेट मैं जीत गया। आप अपने लिए शायद ऐसा बात बोले हैं कि मैं जीत गया डिबेट तो उसने ऐसा कहा था डिबेट जीत गया मैं यह जो शब्द है ये पंक्ति तो मैंने नहीं कही पर यह बताओ जितना पक्ष हमारा आया है उसमें से 90% जो भाग है उसमें हमारी सिद्धि हो रही है तुम काटने का प्रयास भी किया ऐसा नहीं कि तुमने काटने का प्रयास नहीं किया जब तुमने धारणा पूछी थी तो तुमने या तो तुम सीधे कहते अच्छा ये धारणा है चलो इस पे आ जाते पंचावे पे आ जाते तुमने ऐसा तो नहीं किया तुमने तुमने उसको काटा ना जगह-जगह कि नहीं नहीं ऐसा नहीं होता ऐसा नहीं होता तो काटने के बाद जब तुम ये कहते हुए आगे बढ़ रहे हो अच्छा ठीक है ठीक है हम ये समझ गए इतना समझ गए काटने के बाद जब तुम आगे बढ़ रहे हो तो फिर ये मानना पड़ेगा ना कि अब तुम्हारे पास क्षमता नहीं है उसको काटने की और तुम अगर काटते निर्भय तो उस दिन तुम्हारा जो भ्रम है ना वो टूट जाता
01:00:48:04 अपने आप को अंतिम व्यक्ति मत समझो ठीक है जहां और भी है सितारों के आगे उस दिन तुम्हारा भ्रम टूट जाता और जहां तुमने काटा अविद्या वाले में काटा फस गए बोला ना अच्छा ठीक है मान गए अब आगे चलिए आप बोला कि नहीं बोला इसका क्या करोगे और मैं तो अभी भी कह रहा हूं हां मैंने बोला था भैया मैंने सारे शास्त्र नहीं रट लिए हैं नहीं पढ़ लिए हैं सिद्धांत मेरे पक्के हैं सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म करो बात कोई शब्द ऐसा आएगा जो कठिन है जटिल है नहीं समझ में आ रहा है हम आपसे पूछेंगे आप हमें समझाइए ये क्या बता क्या पूछ रहे हो हम जब समझ के आपको उत्तर देंगे उसको क्या दिक्कत यहां इस बात का कंपटीशन है क्या कि किसने कितना क्या किसकी शब्दावली कितनी गहरी हो गई है किसने कितने शास्त्र कंठस्थ कर लिए हैं यदि ऐसा है तो ऐसा कह के आओ ऐसा कह के आओ अवतार की सिद्धि के लिए आए थे अवतार की असिद्धि हुई नहीं और जितनी मैंने सिद्धि करनी चाही आपके काटने के प्रयास पूर्वक भी आपके काटते हुए भी उतनी मैंने अवतार की सिद्धि करी और तुम काट नहीं पाए आगे। हां जी बोलिए।
01:02:01:06 मैंने ये भी कहा कि आपने उस रेट है आपका उसका उस आपने क्लिप को काट छाट करके प्रस्तुत किया है जनता के समक्ष और फिर इस पे उसने आपत्ति जताई थी। आपको शायद कमेंट किया मतलब आपको शायद उसका मैसेज आया होगा। तो लेकिन आपने उसका कोई उत्तर नहीं दिया। इसलिए उसने आपके भी वीडियो को स्टार्ट करके अपने चैनल पे लगाने पहली बात एक बात बताओ जो जो विजेता घोषित करने की बात हो रही है इनके ही चैनल पर इनको विजेता घोषित करते हुए संदीपन रॉय का तुरंत वीडियो आया था कि नहीं आया था लाइव के तुरंत बाद आया था कि नहीं आया था वो क्यों हुआ भाई इसलिए आया था कि इससे पहले कि जनता कुछ और समझ ले मैं उनके दिमाग में प्रीफिक्स कर दूं पहले से इसको कहते हैं वो देना है माइंड मेकअप प्रोग्रामिंग करना अपने लोगों कि भाई पहले से उसको एक वो दे दो प्रीफिक्स जनता को वो इस इस तरीके से सोचना शुरू करे जैसे मैंने बताया ना कोई भी विदेशी आक्रमण हो रहा है मायावाद मायावाद जातिवाद जातिवाद ये लेके आएगा उसी तरीके से कि इससे पहले कि जनता अपना कुछ निर्णय ले उसमें ऐसा कुछ बोल दो जिससे कि वो हमारे अनुसार हमारी दृष्टि से उस चर्चा को देखने लगे तो ये संदीपन रॉय की पहल थी अगर यही बात है
01:03:16:07 कि मैंने अपने आप को क्यों कहा अगर संदीपन रॉय नहीं करते तब तो तुम ये बात कहते कहने का अधिकारी थे कि भाई आपने क्यों कहा संदीपन रॉय तुम्हारे ही चैनल तुम भी उसी चैनल से हो वो कह रहा है ना कोई निष्पक्ष व्यक्ति थोड़ी ना कह रहा है तुम्हारा ही चैनल है और तुम ही कह रहे हो संदीपन रॉय के रूप में ठीक है तो यह बात कहने की है ही नहीं दूसरी बात क्लिप कटिंग क्लिप कटिंग क्या तुमने वहां पर अपने पक्ष के अनुसार नहीं डाला है क्या वीडियो बना के तुमने अपने चैनल पर दिखाया है ना हाईलाइट के हाईलाइट के नाम पर वीडियो
01:03:48:24 और सैद्धांतिक जहां पर हमारी हमारी पुष्टि हो रही है वो हम जनता को बताएंगे ही भैया आपने कहा मान गए तो हमने दिखाया मान गए क्यों कहा मान गए मत कहते मान गए ना कहो ना मान गए क्यों कह रहे हो झूठ क्यों बोल रहे हो हमने कहां कह दिया हम मान गए तुम्हारी बात कहां कह दिया बताओ और जहां कहा होगा वहां अभी भी कहेंगे कि हां मान गए वहां पे हमारी वो हुई है कहा किस किस चीज में होगा कि भैया कोई मुंह से गलत बात निकल गई कुछ हो गया अच्छा अच्छा अच्छा ठीक है मान गए ये गलत बात निकल गई। यह थोड़ी ना हमने सिद्धांत तुम्हारा स्वीकार कर लिया। हम जब पूछने बैठे तो हां ठीक है मान गए ना। माने नहीं कतई नहीं। तुम माने हमारी बात। चलो बोलो आगे।
01:04:35:08 जी भैया एक समय ये भी रहा है कि करपात्री जी ने आर्य समाज के शास्त्रा किया था और जो हाल हुआ था ये उनके जो है ये सब ये सब सिर पैर की बातें ये सब इनहीं को करने दो जो चीजें हम सिद्ध नहीं कर सकते उसमें केवल शब्द ही प्रमाण है कौन जीता था कौन हारा था अब ये बकवास इनहीं को इनको करने दो हम लोग इसमें क्या जाए भाई शब्द ही प्रमाण है तब इतिहास में क्या घटना हुई थी कौन भागा भागा फिर रहा था सब जानते हैं किसने शास्त्रार्थ में हारने के बाद अपने शास्त्रार्थ में हुई पराजय को विजय में दिखाने के लिए रातोंरात पर्चे छपवाए थे बनारस में हार हो गई थी जबकि और वहीं रुक गए थे ऐसा होता है व्यक्ति स्वीकार नहीं कर पाता मैं तो बहुत बड़ा तार्किक व्यक्ति था कैसे हार जाओ तो क्या करता है अलग-अलग मुस्क निकालता है जीतने के वही किया था तो जग जाहिर है मगर हम उसको लेकर के लड़ते नहीं है उन बातों को लेकर क्योंकि वहां शब्द की बात आ जाएगी और फिर हम अपना शब्द प्रमाण प्रस्तुत करेंगे। तुम अपना करोगे। तो ऐसी चीजों पर लड़ो ना जो अकाट्य हो। अकाट्य चीजों पर लड़ो जो जिसमें ड्रॉ होने की संभावना उनप क्यों बात करें? ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं? फिनिश फिनिश। परंपरा वेयर इज योर
01:05:50:12 परंपरा। शास्त्र कैसे आए? शास्त्र कैसे आए? काल्पनिक ही बता दो। है क्या? नहीं है हमसे है शास्त्र तो कैसे अविश्वास करोगे हम पर हां ये सब होंगी ना बातें ये सब जो ख्याली पुलाव पका रखे हैं सब निकल जाएंगे और उस दिन भी निकले ही होंगे जब धारणा धारणा पे बात हुई थी कि भैया क्या है क्या है तो ढाई तीन घंटे बात हुई है ना उस उस बारे में फिर लक्षण पे बात हुई इनका ये कहना है लक्षण में जीत गए कहां से जीत गए भैया अगर यही बात है कि शब्द प्रमाण को तुम्हें नहीं मानना है तो शब्द प्रमाण तो ये भी कह रहा है ना भूभ स्वास से जो है वो मिलेगा मोक्ष। कहा क्या लक्षण है इसमें? बताओ क्या लक्षण है? बहन भाई का विवाह नहीं करना। क्या लक्षण है इसमें?
01:06:38:04 क्या बेवकूफी वाली बात? प्रणव से मोक्ष मिलेगा। इसका क्या लक्षण है? बताओ। शब्द पुराण से मान रहे हो उसको मान रहे हो ना? तो अवतार कौन है? कौन नहीं? शब्द पुराण से मानेंगे। और भी तमाम सारी चीजें जब होगी ना कभी आमने सामने वैसे हम तो आने नहीं वाले अब तुम्हारे पर क्योंकि हम आएंगे तो यह सिद्ध हो जाएगा कि भैया क्या कहते मैंने अपने वीडियो में कभी भी यह जाहिर करने की कोशिश नहीं की कि निर्भय अपने आप को हारा हुआ समझता है। मैंने अपने आप को जीता हुआ बताया। मेरे पास प्रॉपर उसके लिए ठोस वो है कि भैया जितना भी हुआ है उसमें मेरा पक्ष आ भी रहा है। ठीक है? और अगर इस बात को मान लिया जाए कि पंचाम के कारण मैंने इनको हटाया तब भी 90% और 10% का रेशियो आएगा। तब भी तो जीत हमारी होगी। आखरी बॉल पे तुम्हारा कुछ अच्छा शॉट लग गया। बात अलग है। मगर देखा तो ये जाएगा ना कि कौन जीता। किसके रन ज्यादा बने। ठीक है? अगर दुर्जन तोष न्याय से बोल रहा हूं। इस बात को तो ये तो ये बात रही। अब लक्षण की बात आ जाएगी। लक्षण में अपने आप को मैंने लक्षण पे अरे भैया तुम कर्मणा जो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र बनाते हो उसमें क्या लक्षण है यहां तो हमारे पास अवतार के लिए शब्द प्रमाण भी है ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र में क्या लक्षण होता है जो तुम उसको मान लेते हो किसी को
01:07:53:06 बताइए क्या जाकिर नायक नहीं ढोंग कर सकता है ब्राह्मण होने का वहां तुम मान लेते हो जहां पर शब्द प्रमाण नहीं है वहां तुम अनुमान से यूं ही अपने मन से किसी को भी ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र मान लोगे और जहां पर शब्द प्रमाण है उसको को तुम लक्षण पूछोगे जब अवतार को सिद्ध करने के लिए लक्षण नहीं स्वीकार कर पा रहे हो शब्द प्रमाण नहीं स्वीकार पा कर पा रहे हो तो कौन ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र है कर्म के अनुसार इसमें कहां से तुम लाओगे इसका तो प्रमाण भी नहीं है शब्द प्रमाण तुम्हारे यहां की अपनी ही व्यवस्था पे वार करते हो तुम ये लक्षण वाली बात बोल के समझ में आ रहा है समझाऊंगा जब कभी आओगे बोलो आगे बोलो और उस दिन जो पंचाय वाली बात थी अगर उस पे भी ये आते मतलब आपकी तो जो आप बात कर रहे थे तार की वो पंचाव्य वाली ही थी। बस यह है कि वहां पर अगर उसको क्रमवार जो पांच अवयव बोला जाता है उनमें यह बात अगर लगाई जाती तो पहले नंबर पर प्रतिज्ञा है तो प्रतिज्ञा है कि ईश्वर अवतार ले सकता है। वो उस पर बात नहीं करनी वो अलग है। वो चैप्टर अलग है। पंचा पंचा के अंदर की सामग्री क्या है? क्या नहीं है? वो चैप्टर ही अलग है। और फिर जो बात आप कर रहे थे वो वो कहीं ना कहीं पंचाव्य के दायरे में ही थी सारी बातें। वही आगे की बात तो फिर वो न्याय
01:09:08:12 दर्शन में क्या ऐसा न्याय दर्शन में क्या ऐसा होगा कि न्याय ना हो न्याय दर्शन है तो न्याय की बात करेगा ना हम न्याय देंगे तुम्हें न्याय बिल्कुल तो उसने आगे ये भी कहा था कि जो पाखंड है ना उसका मूल कारण पुराण है और पौराणिक वाद है उसका मूल कारण और पुराण के जो सिद्धांत है वो वेदों को ओवरटेक कर चुके हैं। ऐसा उसका कथन था। इसका जवाब वैसे मैंने दे दिया है पर फिर भी मैं बता रहा हूं कि जो मूल कारण है ना पुराण है ना कुछ है मूल कारण है ईश्वर के नाम से झूठ बोलना ईश्वर की वाणी को अपने मन मुताबिक बताना ठीक है जो नियोग वाले चैप्टर में बहुत अच्छे से किया है दयानंद जी ने और किसी ने पूर्व पक्ष में क्या रखा है ये लोग क्या करते हैं जैसे मान लो कि शयनाचार्य ने कहीं पे वो बलि में वो स्वीकार कर लिया कि यहां पे अमुक की बलि हो जाए या इस बलि को स्वीकार कर लिया तो ये लोग अरे अरे देखो देखो अरे देखो भैया ये लोग ये इसकी बलि की बात कर रहे हैं अरे अच्छी छी छी छ अच्छा वहां पे ये बात नहीं करते भैया शास्त्र में लिखा है कि नहीं बस वो तर्क तार्किक रूप से अच्छा लगेगा या नहीं लगेगा डजंट
01:10:23:20 मैटर ठीक अब जब किसी ने नियोग में बात की नियोग विषय में बात की कि भैया ये बताइए तो मुझे अधर्म लग रहा है वैभचार लग रहा है वैश्या भक्ति लग रही है अच्छा ये बताओ कि किसी दूसरे की स्त्री को जब तुम घर ले आते हो तो वह तुम्हें जब तुम पत्नी बना के लाते हो तो वह तुम्हें व्यभचार क्यों नहीं लगता? क्योंकि तुमने वहां पर नियमों को माना है शास्त्र के। तो शास्त्र के नियमानुसार यदि तुम कार्य कर रहे हो तो अधर्म नहीं दिखना चाहिए। क्योंकि किसी दूसरी स्त्री को तुम अपने घर लाए तो नियमानुसार लाए तो वो भी धर्म हो गया। ठीक है? क्योंकि शास्त्र में उसकी आज्ञा है। तो यानी कि तार्किक दृष्टि से इधर उधर से जो बाहरी हमारी जो ये वाली दृष्टि होती है व्यवहारिक दृष्टि इससे जज करना अती्द्रिय विषय धर्म अधर्म को यह गलत है यहां पर ये कह रहे हैं मैं बता देता हूं क्या कह रहे हैं त्याग प्रकाश
01:11:34:28 यह प्रश्न किया पूर्व पक्ष में प्रश्न संख्या है 97 चतुर्थ समुल्लास और इसमें तीन बातें मुख्य है जो मैं आपको बता दूं नियोग में जो दयानंद जी ने कही है। एक बात कही है उन्होंने कि पति की मृत्यु होने के बाद जो अगर विधवा है उसकी तो वह एक दो तीन चार ऐसे करके 10 पतियों का वरण तक कर सकती है मतलब जैसे दूसरे से किया वो खत्म हो गया फिर तीसरे से किया वो खत्म हो गया तो चौथे से किया और उसमें प्राथमिकता जो पति के कुल के जो उसके भाई वगैरह उनको देनी है देव इत्यादि को तो ऐसे करके 10 तक वो जा सकती है ये नियोग में उन्होंने कहा ये पहला क्लेम अब इसमें हमारे परंपरा प्राप्त आचार्य का यह मत नहीं है। ठीक है? नियो का अर्थ दूसरे तरीके से स्वीकार करते हैं। ये नहीं। एक जगह पर दयानंद जी ने कहा है 96 वे पष्ठ पर कि यदि पति की मृत्यु हो गई है और पति अभी मृत्यु सैया पर है तब भी उस समय भी वो मृत्यु सैया पर है उस समय भी वो किसी को मतलब किसी को जो है वरण करके उसके साथ यह प्रक्रिया अपना सकती है भले ही पति उस समय मृत्यु सैया पर और थोड़ा सा संस्कृत में उन्होंने साफ सफाचट
01:12:50:16 लिखा है और हिंदी में थोड़ा उन्होंने बाद में ठीक कर दिया है। वो थोड़ा सा अप्रत्यक्ष रूप से लिख दिया है। मगर कुल मिलाकर पति की मृत्यु अभी अभी हुई है। उस समय भी वरण कर सकती हूं दूसरे पति का। और तीसरा एक क्लेम है जो सुनने में अशोभनीय लगता है। क्या क्लेम है? कि पति जीवित है, विदेश गया हुआ है, धर्म के लिए, कार्य के लिए, अर्थ कमाने के लिए। उस समय भी यदि इतने इतने वर्ष बाद भी वो ना लौटे तो स्त्री को ऐसा ऐसा कर लेना चाहिए। 10 तक की काउंटिंग है। उससे आगे नहीं। यह दयानंद जी ने माना। इनहीं मंत्रों का दूसरा अर्थ हमारे परंपरा प्राप्त आचार्य देते हैं जो सुनने में ऐसे नहीं लगते। अब क्या हुआ कि इन्होंने आगे इनसे सवाल किया गया है पूर्व पक्ष में कि
01:13:41:06 कि यह सुनने में जो है व्यभचार लग रहा है। यह नियोग की बात व्यभचार के समान दिखती है। तो उत्तर दे रहे हैं दयानंद जी। जैसे बिना विवाहितों का व्यभचार होता है वैसे बिना नियुक्तों का व्यभचार कहा था। अगर नियुक्त नहीं हुआ मतलब प्रक्रिया के अनुसार नहीं आए तो व्यभचार होगा। इससे यह सिद्ध हुआ कि जैसे नियम से विवाह होने पर व्यभचार नहीं कहा था तो नियम पूर्वक नियोग होने पर भीचार नहीं कहावेगा। दूसरे की कन्या का दूसरे के कुमार के साथ शास्त्रोक्त विधि पूर्वक विवाह होने पर समागम में व्यभचार व पाप लज्जा नहीं होती। वैसे ही वेद शास्त्रोक्त नियोग में वेद शास्त्रोक्त नियोग यानी कि क्योंकि शास्त्र का सिद्धांत है तो वहां पर फिर अपनी तर्क बुद्धि से उसको पाप नहीं समझना चाहिए। तो यदि आपको यह लग रहा है कि यहां बलि क्यों हो रही है? यहां ये क्यों हो रहा है? यह कहने की बजाय अरे वो देखो बलि दे रहे हैं। ये कहने की बजाय ये देखो शास्त्र में लिखा है कि नहीं? यह शास्त्र में लिखा है कि नहीं? क्योंकि आप यहां पर वही दृष्टि अपनाने को कह रहे हो। अपनी बुद्धि से तर्क करने को मना कर रहे हो आप यहां पर। ठीक है? शास्त्र के सिद्धांत के विरुद्ध और आगे कह रहे हैं। परंतु यह वैश्या के सदस कर्म दिखता है। यह प्रश्न पूर्व पक्ष नहीं। क्योंकि वैश्या के समागम में किसी निश्चित पुरुष
01:14:56:14 व कोई नियम नहीं है और नियोग में विवाह के समान नियम है। जैसे दूसरे को लड़की देने दूसरे के साथ समागम करने में विवाह पूर्वक लज्जा नहीं होती वैसे ही नियोग में भी नहीं होनी चाहिए। क्या जो व्यभचारी पुरुष व स्त्री होते हैं वह विवाह होने पर भी कुकर्म से बचते हैं। तो आगे आती है बात प्रश्न हमको नियोग की बात में पाप मालूम पड़ता है। फिर से उसने कहा अभी सहमत नहीं हुआ। तो जब पाप मालूम पड़ता है तो दयानंद जी कह रहे हैं जो नियोग की बात में पाप मानते हो तो विवाह में पाप क्यों नहीं मानते? कुल मिला के बात वही है क्योंकि शास्त्रज्ञा है तो पाप नहीं है। शास्त्रज्ञा नहीं है तो पाप है। यहां मान लिया तो फिर ये सब चिल्लाते क्यों हो भाई मंच पे तुम? अरे वहां पे ऐसा किया है। वहां साचार्य के यहां तो ऐसा लिखा हुआ है। ऐसा कैसे लिख सकते? सिर्फ इतनी बात करो। शास्त्र में लिखा है कि नहीं लिखा है? इतनी बात पूछो ना। नहीं वहां पे अपनी तर्क शक्ति ले आएंगे। दूसरों की बात काटनी होगी। जैसे ईश्वर सर्वशक्तिमान है। अरे जो सर्वत्र व्याप्त है वो एक जगह कैसे आ सकता है? क्यों पूछ रहे हो? शास्त्र में लिखा है कि नहीं ये पूछो सीधे। तब तो वहां अवतार को काटने के लिए तरह तरह की चीजें ले आओगे तुम। वहां क्यों नहीं कह रहे हो? शास्त्र में लिखा है। खैर ठीक है चलो आगे बढ़ो आप।
01:16:13:18 जी भैया। उसने आगे यह भी कहा था कि जो आज नियोग वाले विषय पर हमने अपनी जो Instagram प्रोफाइल है सर्वशक्तिमान धर्म से इस समय एक्टिव है इंडिया में आहान कॉल ऑफ धर्मा नाम से जो थी वो बैन हो गई है तो जो सर्वशक्तिमान धर्म नाम से जो है वो वहां पर एक रील डाली है वहां जाकर आप लोग देख सकते हैं। जी जी तो उसमें कहा था कि सत्यनारायण भगवान की जो कथा है उसमें क्या है कि एक जो राजा है जो भगवान का प्रसाद नहीं खाता तो भगवान क्या करते हैं सब सब राजपाट लूट लेते हैं ये सब कुछ तो ये जो भी कुछ किए हैं भगवान वो सब कुछ हिरण्यकश्यप जैसा लगता है हिरण्यकश्यप राक्षस था क्योंकि हिरण्यकश्यप कहता था कि मेरी पूजा करो नहीं तो मैं सब कुछ खत्म कर दूंगा। तो यहां पर भगवान सत्यनारायण का तुलना हिरण्यकश्यप से कर रहा है। तो यह पूजा ना करने से पूजा ना करने से तुम्हारे अंदर ये निराभिमानता आएगी क्या? वो शक्तियां आएंगी क्या? ये भूभ स्वाहा क्यों कर रहे हो फिर तुम? भाई भगवान की पूजा करने से कुछ तो मान ही रहे हैं ना वो। वही पारमार्थिक रूप से इस तरह से देखा जाता है कि भगवान की पूजा करोगे तो सत्य का चिंतन होगा। चिंतन होगा तो चित्त की
01:17:28:19 शुद्धि होगी। चित्त की शुद्धि होगी तो अविद्या से मुक्ति होगी। यह हो गया पारमार्थिक और व्यवहारिक ये हो गया कि भगवान की पूजा करोगे तो भगवान तुम्हें धनधान से परिपूर्ण करेंगे। तुम्हारे जीवन में सुख देंगे। तुम्हारे यहां भी मैंने वही बात की ना इनके यहां अपनी बातों को काटे बैठे हैं। किस चक्कर में? क्योंकि भैया हमको जो है परंपरा प्राप्त आचार्यों के सिद्धांत का किसी तरीके से बुराई करनी है। अपमान करना है। और खुद वही मान लेना है। खुद वही मान लेना है। खुद वही मान लेना है। हां। दूसरे शब्दों से खुद मान लेना है। भैया निराभिमानता का मतलब बता दो। क्या है? भगवान की पूजा करने से निराभिमानता आएगी। यानी कि यह भाव आएगा कि मैंने ये कर्म किया है। उसके फल स्वरूप मुझे प्राप्त नहीं हुआ है। बल्कि भगवान के फल स्वरूप ही मुझे प्राप्त हुआ है। यही तो हमारे आचार्य कह रहे हैं। यही तो हमारे आचार्य कह रहे हैं। चलिए बिल्कुल।
01:18:26:19 उसमें यह कहा है कि जो मूर्ति पूजा होते हैं, अवतारवाद होता है ये सब का जो है ये पुराण इसका कारण है और अगर हम लोग पौराणिक सिद्धांत का खंडन कर देंगे तो ये सब ऑटोमेटिकली सब इसका खंडन हो गया अवतारवाद मूर्ति पूजा आदि का बना दो सबको जिहादी आखरी युद्ध तो मूर्ति पूजों से होना है ना बना दो यही तो है शक्ल बदल के आर्य समाज के रूप में इस्लाम ही आया है ना बुत परस्ती खत्म करना है और दिखावा करना है फिर वहां जाकर के हम जो है वो क्या कहते हैं राम मंदिर के बहुत बड़े समर्थक हैं हमने हैदराबाद में इतनी मूर्तियां बचाई थी जितने अंश में कोई आर्य समाजी मूर्तियों के लिए लड़ रहा है ना उतने अंश में वो आर्य समाजी नहीं है। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार से जितने अंश में जो मुस्लिम है वो गीता और रामायण के लिए लड़ रहा है यदि तो उतने अंश में मुस्लिम ही नहीं है।
01:19:24:09 तो ये टाल ठोकना बंद करो कि हमने वहां ये किया था वो किया था। सिद्धांत क्या है तुम्हारे? मूर्ति पूजा का विरोध जो तुम्हारे सच्चे आर्य समाजी के चेहरे से टपक रहा है। ये है सच्चा आर्य समाजी। हर कोई सच्चा आर्य समाजी नहीं है। दोगले हैं ज्यादातर। तुम कम से कम इस मामले में तुम सच्चे आर समाज कहलाने लायक तो हो। जिहाद जिहाद फैलाओगे ना मूर्ति पूजा खत्म करके जिहाद के लिए आए बस मुखौटा पहन लिया है वैदिक का वैदिक का मुखौटा पहन करके जिहाद हां जी बोलिए
01:20:00:24 जी इसी पर है मूर्ति पूजा के लेकर के एक और बात है कि आप एक बार छत्तीसगढ़ गए थे वहां पे कोई आर्य समर्थ का मंदिर था जहां पर मूर्ति पूजा हो रही थी ठीक है आपने अपने वीडियो पे वो दिखाया था तो उसमें कहा है कि जहां मूर्ति पूजा होती है वहां भी आपको समस्या है। जहां मूर्ति पूजा नहीं होती है वहां भी आपको समस्या है। और बाद में जब उसने पता किया इस विषय में तो ये जो था ये मंदिर वास्तविकता में आर्य समाज का शायद नहीं है। वो ऐसे ही बैनर ये सब लग गया था आर्य समाज का। उसने अपने केस करो ना भाई उस पर। केस क्यों नहीं कर रहे हो? जाओ केस करो उनके ऊपर। तुम्हारे नाम से कैसे चल रहा है मूर्ति पूजा वाला मंदिर? हां। क्यों नहीं केस कर रहे? हम कैसे मान ले कि वह नहीं है आर्य समाज का? बताइए। कैसे मान ले? क्योंकि हमारे यहां परंपरा नहीं है। परंपरा के विरोधी हो ना? हम केस कर सकते हैं। गोवर्धन मट का वो बन के कोई घूमेगा अगर तो हम केस कर सकते हो। किया है। तुम कर दो केस जाकर के। कोई व्यक्ति आर आर्य समाज के नाम से रजिस्टर्ड खुद को करा रहा है। लो घोषित कर दो। समाज नहीं है। इसको कहते हैं परंपरा का पावर जो तुम्हें कभी समझ में नहीं आएगा और कभी परंपरा पर बात हो गई ना तब बिल्कुल तुम्हारा बिल्कुल
01:21:15:25 यह जो नशा है पूरा परंपरा को छील देंगे ये कर देंगे सारा हिरण हो जाएगा नशा पूरा उतर जाएगा अभी तुम दूसरे तरीके के रूप को सामना किया था तुमने भैया के माफ कर दो क्षमा कर दो इसलिए मुझे अलग तरीके से मैं तुम्हारे को लेकर के हो गया था मगर ऐसा विश्वासघात मेरी सहष्णता का मेरी उदारता का यह तुमने ना दिया मुझे फल वहां लाइव में आकर के कह रहे हो कि मैं खत्म कर दूंगा शंकर परंपरा को मैंने जब जब कहा ना आर्य समाजियों के लिए ये होगा मैं कहता हूं शोधन तुम्हारी तरह नहीं हूं मैं समझे दर्शन विज्ञान और व्यवहार सीखा मैंने अपने गुरु से हमेशा शोधन कहा लय कहा नष्ट करना कभी नहीं कहा
01:22:06:16 शोधन होना चाहिए थोड़े संस्कार भी ले आओ मेरे भाई। माने फौजी घूम रहे हो। सत्य से साक्षात्कार नहीं हुआ। कोई मिला नहीं है। इसका मतलब हम अच्छा कमेंट बॉक्स में एक व्यक्ति लिख रहा है के मूर्ति पूजा का खंडन अवश्य होना चाहिए। मूर्ति क्योंकि आर्य समाज जो है मूर्ति का खंडन नहीं करता। मूर्ति पूजा का खंडन करता है। ये बताओ इनकी ये बातें हैं। ऐसी बात ये सब बातें फालतू की इनको क्या ही जब हां क्योंकि आपकी तो उसमें साफ लिखा हुआ है ना कि जो मूर्ति पूजा करता है वो हजारों के बराबर पाप है। ऐसा लिखा हुआ है। तो भैया शास्त्रों में जब आप प्रतीकात्मक उपासना करते हैं तो वहां पर आपको अपने इष्ट की वहां पर मूर्त बनानी पड़ती है। वेद मैं तो यह कह रहा हूं। मैंने तो यह तक कहा मैंने मैंने तो यह तक कहा अपनी लाइफ में कि आपको अगर यह लगता है कि मूर्ति पूजा गलत है मगर वेदों में आपके अनुसार अलंकार के रूप में अवतार की बात हुई है ना हुई तो है तो तुम्हें दुश्मनी क्यों हो रही है उससे दुश्मनी इसलिए है क्योंकि जो जड़ है उसमें जिहादी भावना है फिर यह कहना पड़ेगा मुझे मूर्ति से दुश्मनी नहीं होनी चाहिए ना आपकी
01:23:21:18 निष्ठा नहीं है मूर्ति में आप अपनी पद्धति से चलो हमने तो सबको स्वीकार किया है मगर नहीं मूर्ति से दुश्मनी है। वो हार आदि तो डला होता है ना दयानंद जी की मूर्ति के ऊपर भी जब भी इनके आर्य समाज के मंदिर में जाते हैं वहां हार लगाया होता है दयानंद जी की मूर्ति के ऊपर वो सब चलता है। मैंने एक दिन पूछ लिया था कि दयानंद जी की फोटो लगी हुई है। दयानंद जी तो है नहीं। उनको फाड़ के जो है इसको पैरों के नीचे अगर कोई करे कुचले या उस पर थूके या और अपमान करे क्या लगेगा? कैसा लगेगा? तो अभी अगर मैं इनकी जो सत्यार्थ प्रकाश है वह कोई दयानंद जी तो है नहीं सत्यार्थ प्रकाश पर इनकी वो छपी हुई है चीजें उसके साथ कोई अपमान पूर्वक व्यवहार करने लगे कोई तो कैसा लगेगा क्यों लगेगा वहां तो प्राण प्रतिष्ठा पूर्वक हमारे पास मंत्र है जिसके द्वारा हम ये मान रहे हैं कि इसमें भगवान देवत्व की प्राप्ति हो गई आपके यहां आपने तो ऐसा कुछ नहीं किया फिर क्यों मान रहे हो क्यों भावना जुड़ी हुई है आपकी उससे और जब आपकी भावनाएं बिना मंत्र के जुड़ रही है तो हमारी मंत्र के द्वारा जुड़ रही तो तुम उसका अपमान करोगे।
01:24:29:03 चलो बिल्कुल। नहीं भैया उसने एक जगह बोला था मेरी लाइव में कि जब नकली शंकराचार्य आदि कोई कुछ बन जाता है तो उसके लिए आप शब्द कोर्ट जाते हैं। वहां पे आपको कोर्ट की मोहर पर आप लोग डिपेंड हो जाते हैं प्रत्यापित करने के लिए कि कौन नकली है, कौन नकली है। ठीक है? तो फिर यहां पर आपका शब्द प्रमाण कहां चल जाता है। ठीक है? आप सब बेवकूफी भरे बेवकूफ तो हम लड़ रहे हैं ना उस व्यवस्था को चेंज करने के लिए हमने उस व्यवस्था को स्वीकार थोड़ी ना कर रखा है हां तुम्हारे यहां तुमने जो लोकतांत्रिक व्यवस्था अपने यहां बनाई अपना देखो जाकर के भाई हमें जो भी हथियार मिलेगा हम उससे लड़ रहे हैं ना जिस समय जो हथियार मिलेगा उस उससे उस समय लड़ेंगे ना ये सस्ती अविद्या है अविद्या का क्यों उपयोग कर रहे हो ये YouTube YouTube जो चला रहा है वो कितना भ्रष्ट व्यक्ति होगा। क्यों उपयोग कर रहे हो भैया उसका? तुम तो उस पर डिपेंड हो अपनी चीजों को करने के लिए। तो धरती पर गिरा हुआ व्यक्ति धरती का ही सहारा लेकर के उठ खड़ा होता है। ठीक है? जमीन पे जमीन पर दौड़ता है वायुयान पहले। तब जाकर के वो धरती से अलग हो पाता है। उसी
01:25:44:04 प्रकार प्रपंच रूपी संसार में फंसा हुआ व्यक्ति प्रपंच रूपी संसार का ही ऐसा सहारा लेता है कि प्रपंच रूपी संसार से मुक्त हो जाए। जिस प्रकार से पानी में चलने वाली नाव पानी का ही सहारा लेती है। चप्पू चलाया जाता है। उसके कारण वो आगे बढ़ता है। गंतव्य तक पहुंचता है। ठीक है? और तुम नहीं ले रहे हो क्या सहारा? तुम्हारा सहारा नहीं है क्या? भाई तुम्हारी भी तो तुम भी तो रामराज को मानते हो। कोई व्यक्ति रजिस्टर्ड करके पहुंच जा रहा है। तुम उस पर कुछ कह भी नहीं पा रहे हो। अरे हम कम से कम कह तो रहे हैं। घोषित तो कर रहे हैं। तुम्हारे यहां तो घोषित भी कौन करेगा? यह नियम नहीं है। अच्छा नियम कैसे पता चलेगा? कौन घोषित करेगा? कि वो दयानंद जी के सिद्धांतों को जानता मानता है कि नहीं। अब भैया जनता को यदि आर्य समाज से कुछ सीखने जाना है तो कौन सा आर्य समाज प्रमाणिक है? यह जानने के लिए पहले उसको सब कुछ सीखना है। आर्य समाज में यदि हमें पढ़ने जाना है तो कौन सा आर्य समाज प्रमाणिक है? उसके लिए पहले हमें आर्य समाज की पढ़ाई पढ़ाई बाहर कर लेनी है। फिर हम यह तय करेंगे कौन सा प्रमाणिक है क्योंकि हम जान गए आर्य समाज के सिद्धांत क्या है और फिर हम जाएंगे वहां पर पढ़ने क्यों जाए भाई पढ़ने
01:26:59:15 जब हम पढ़ चुके हैं बाहर जी सनातन जी जी बिल्कुल बिल्कुल तो जब सिद्धांतों पे आप नहीं टिक पाते हो तभी पर्सनल आघात वहां पर करने के प्रयत्न करते हो और इन्होंने पहले भी करे हैं। इवन जब मैं इनके साथ काम कर रहा था तो काफी इनके टेलीग्राम टेलीग्राम तो नहीं हां WhatsApp के बहुत सारे ग्रुप्स थे तो उन उन ग्रुप्स में ऐसी ऐसी बातें मतलब शेयर की जाती थी संदीपन रॉय भी वहां पर होते थे और इनको मैं कई बार कहता था कि आप यह जो राधा मां का अपमान यहां पर हो रहा है क्योंकि हम तो बचपन से राधे-राधे बोलते आए हैं। हमारे घर में सभी हमारे जो माता-पिता हैं, सभी भाई बंधु हैं, सब राधे-राधे बोलते हैं हमारे घर में। बचपन से हमारी राधा के प्रति आस्था रही है। और वहां पर अगर कोई राधा मां का अपमान करता हुआ अगर मिलता है तो बड़ा हृदय को ठेस पहुंचती है। तो मैंने कई बार उनको कहा कि यह मत कीजिए मत कीजिए। अच्छा इनके होते हुए वो चीजें हो रही थी। मैंने वो ग्रुप छोड़े थे तो इनका फिर फोन आ जाता था कि आपने वो क्यों छोड़ दिया। अच्छा इनको इतना भी नहीं समझ में आ रहा है जब मैं एक दो बार बोल रहा हूं कि भैया यहां पर राधा का अपमान हो रहा है। यहां पर शिवलिंग के बारे में गलत बातें फैलाई जा रही हैं। अभद्र बातें फैलाई जा रही हैं।
01:28:15:08 तो मैंने इनसे हाथ जोड़कर विनतियां की हैं। उसमें एक थर नाम का भी व्यक्ति था जो अभी आर्य समाज छोड़ चुका था। छोड़ चुका है अभी तो। तो वो व्यक्ति भी वहां पर था और बहुत सारे इनके अभी भी हैं जो एक आईडी से आते हैं। उनका आईडी मेरे को याद नहीं आ रही अभी। तो वह अभी भी उन्होंने वह बना रखे हैं। वहां पर पुराण प्रवचन नाम का कोई एक चैनल इन्होंने बना रखा है जो कन्हैया चौधरी जी मेरे को बताते रहते हैं कि उनका कोई ऐसा चैनल है जहां पर ऐसा दुष्प्रचार ये करते रहते हैं। तो आप पर्सनल अटैक अगर कर रहे हो यानी कि आपके सिद्धांत कमजोर हैं। यही बात बौद्ध कर रहे हैं। यही बात जो है यह तथाकथित जो नव बौद्ध हैं और इस्लाम वाले हैं यह सब यही बात करते हैं पर्सनल अटैक वहां पर किया जाता है क्योंकि आपके सिद्धांतों में दम नहीं है तो पहले सिद्धांतों को मजबूत कीजिए तब आप जो है वह हमसे बात करने के लिए आइए किसी व्यक्ति को गलत साबित करके अपने सिद्धांत को पुष्ट नहीं किया जाता है। ठीक है जी अनिकेत जी कुछ बोलना है?
01:29:29:27 है नहीं जी शास्त्रवाद जी आपने क्या अगली बात बोल भैया उसने अपने लाइव में ये कहा है जी भैया महाराज जो है एक मिनट हां अंकित जी बोले मैं ये कह रहा था भैया कि ये अभी इससे तो इतना पता चल चल गया है कि ये सैद्धांतिक खंड खंडन तो नहीं कर पाएंगे। इनके पास कुछ बचा नहीं है। ये यही नहीं ऐसे बहुत से लोग तो अब ये केवल कुतर्क कुतर्क यही खेलते रहेंगे। तो क्या अब हम इसी को खेलते रहेंगे क्या? हम
01:30:10:07 जी सैद्धांतिक खंडन कहां से करेंगे? ये सिद्धांतिक खंडन जब होगा तब तो अभी तो भैया केवल क्या कहते हैं? तुमने बॉल डाली है और हमने बैटिंग की है। ये हमारी बारी है ना बॉल डालने की। हां। कहां तुम अंधेरे में हो? और हमने बैटिंग की हम आउट नहीं हुए बैटिंग में और अभी जो करनी हो बिंग वो कर लेना। उसके बाद हम बॉल डालेंगे। कहां गलतफहमियों में पड़े हैं लोग। मतलब उसको यह लगने लगा निर्भय को निर्भय को यह लगने लगा कि इन्होंने मुझसे चर्चा के लिए कहा है इसका मतलब इनको दिक्कत हो दिक्कत नहीं हो रही भाई मैंने तो सोचा ही था मैं तुम्हारे चैनल पे आऊंगा तुमने इतनी अकड़ में वीडियो बना दिया ये सब करके कर दिया अपने वही पर्सेक्टिव की वजह से कि भाई मैं हैबचुअल हूं तो हर बार थोड़ी ना तुम्हारा ये नादानीपन स्वीकार कर लिया जाएगा ठीक है एक बार हो गया था तो ठीक है हो गया अब हर बार तुम वही चीज करोगे कि मुझे हैबिट हो गई इसलिए मैं सबको उसी लकड़ी से आकता हूं ऐसे नहीं चलेगा ना तूफान ही फैसला करेगा रोशनी का दिया वो चलेगा जिसमें दम हो
01:31:20:14 वीडियो भी तो डिलीट किया था इन्होंने जो आपकी चर्चा के बाद बनाया था उसमें तो बहुत अभद्र बातें कही थी वो तो मैं तो रिकॉर्ड करने वाला था लेकिन उतने में वो कि उसका कहना था कि उसकी आत्मा ने उसे मतलब जो वो किया ना कचोटा वो तब कचोटा जब वो एडिटिंग करने बैठा समराइज करने वो उसका यह कहना था कि उससे उससे पहले तक तो मेरी बबासी भरी हुई थी वही वाली हम मगर उसका यह कहना था कि जब मैंने वीडियो को देखा कटिंग करने के लिए तो मैं देख पाया कि वहां पर जो है मेरी ओर से ऐसा शुरू हुआ जिसके कारण वो सब वातावरण वैसा गर्म हुआ जिसके कारण आखिर अंतत गतवा वो एक निष्कर्षपूर्ण बात नहीं हो पाई। मैं सच बता दूं तो निर्भय को लेकर के उस अंदाज में था ही नहीं कि मुझे इसका तिया पाचा करना है तुरंत। ठीक है? हम मैं तो था कि आज जो है दो इंटेलेक्चुअल पर्सन के बीच में तात्विक तरीके से बात हो जाए तो लोगों को बहुत कुछ जानने को मिले क्योंकि वही मैं हमेशा बोलता रहता हूं सर्वशक्तिमान है कि नहीं परंपरा क्या है तो वो सुन चुके लोग ना कुछ नॉलेजेबल चीजें मिले और क्या होता है कि जब सामने वाला प्रतिद्वंदी स्ट्रांग नहीं मिलता तो हम ये चीजें दे नहीं पाते तो प्रतिद्वंदी स्टंग मिला था मैं उस बिहेव से बैठा था कि भाई ये एक ठीकठाक व्यक्ति है इससे अगर हम
01:32:36:04 इत्मीनान से चर्चा करेंगे तो बहुत कुछ लोगों को जानने सुनने को मिलेगा और वो इस बात का फायदा उठा रहे हैं कि भाई मैं जो है आज जो है क्या कहते थोड़ा सा मैं लाइट सा बिहेव मुझे मेरा आपको दिखा होगा उस सीधे टू द पॉइंट ये नहीं हराना है और जब हराने की भावना से आएंगे हराना ही या खत्म करना है तो फिर देखना फिर अब बाबा होने लगेगा फिर थोड़ी देर में बिल्कुल चलो जी शास्त्री जी जी नहीं भैया उसमें सरपत्री जी महाराज के लिए यह बोला था कितनी जी महाराज को भी आर्य समाज का सहायता लेना पड़ गया था गौ आंदोलन में क्योंकि वो जानते थे कि आर्य समाज के बिना वो कुछ नहीं कर पाएंगे ऐसा उनका वक्तव्य था अच्छा तो ये बताओ प्रॉपर केवल आर्य समाज कुछ कर लेगा आज की तारीख में केवल आर्य समाज है क्या हु आर यू दिखता है कोई आर्य समाजी सड़क पे जाओ क्या कर लोगे तुम जब तक झूठ बोल के धोखा देकर के अमुक अमुक तरीके से तुम हम हम लोगों के बीच में अगर घुसोगे नहीं तुम्हारी बात सुनने वाला कोई नहीं खाली पड़े हैं सन्नाटा ढला हुआ है तुम्हारे मंदिरों में
01:33:51:27 निराकार भगवान को लेकर कुछ नहीं कर पाओगे तो वही साकार भगवान को मानने वालों के बीच में जाते हो उनको जो है क्या कहते हैं थोड़ा बहला फुसला करके धीरे धीरे धीरे उनको कन्वर्ट करते हो क्या किस किस उसमें हो तुम्हारा स्वरूप है क्या आर्य समाज क्या स्वरूप है? कोनेकोने में कहीं ढला हुआ कोई सुनसान सन्नाटे वाला आर्य समाज मंदिर बस क्या कर लोगे तुम उससे क्रांति बताओ और कितनी कर डाली है तुमने आज तक क्रांति
01:34:24:00 क्रांतिकारियों को जन्म दिया। क्रांतिकारियों को जन्म दिया। जितने नाम गिनाओगे ना उससे 100 गुना 100 गुना ज्यादा क्रांतिकारी मूर्ति पूजक थे। शिवाजी कौन थे? मूर्ति पूजक। हरिहर मुका कौन थे? मूर्ति पूजक महाराणा प्रताप कौन थे मूर्ति पूजक मूर्ति पूजक सारे हमारे गौरवशाली इतिहास मूर्ति पूजक था कौन था इनमें से निराकार को मानने वाला कोई काली मां की भक्ति कर रहा है कोई विष्णु भगवान की भक्ति कर रहा है सब मूर्ति पूजक थे
01:34:55:25 और क्रांतिकारियों में भी जब टटोलने जाएंगे ना तो वही निकलेगा वो काशी का शास्त्रार्थ गप्पे गपोड़ों की गप्पे सबका नाम लिख लो अपने साथ। एक आध कोई आ गया सबका नाम लिख लो अपने साथ। रामसेतु आंदोलन में तुम चले गए थे। जितनी बड़ी-बड़ी लड़ाईयां हुई है ना विधर्मियों से देख लो इतिहास उठा करके किसने लड़ी?
01:35:29:15 सबसे बड़ी लड़ाई इस देश की कौन सी रही? राम मंदिर किसने लड़ा? जीता और तुम जिनका पक्ष लेते हो सत्ता में बने रहने के लिए दूसरों को कांग्रेसी कहते हो राजनीति करते हो धर्म के नाम पर वो मूर्ति पूजक नहीं है क्या तुम्हारे यहां जाते हैं ना तो तुम उनका अभिवादन करते हो तुम्हारा हुआ था अभी प्रतिनिधि सभा में हुआ था ना हुआ था प्रतिनिधि सभा हुई थी क्या हुई थी 150वा वर्ष तो वहां जब भाजपा वाले आ रहे तो प्रणाम है भैया प्रणाम है ये हो हो रहा था वहां और इनके ही यहां के एक व्यक्ति ने प्रह्लाद बनके उस चीज का विरोध किया था। कौन? आचार्य प्रशांत है जो इनके साथ मुरैना में एमपी में रहते हैं। विरोध किया था कि नहीं? कईयों ने विरोध किया कि भैया क्यों हो रहा है? तुम्हारे यहां जब वो लोग जाते हैं ना तो तुम ये करते हुए दिखाई देते हो। और जब वही लोग हमारे यहां आते हैं तो वो पैर छूते हुए दिखाई देते हैं। चरणों में ये सच्चाई है। क्या कर लोगे तुम उनके बिना? जो तुम्हारे लिए प्रणम्य में है उनके लिए जो प्रणम्य है वो हम है
01:36:38:21 जिसको तुम बाबे बोल रहे हो बाबा बोल रहे हो क्या बोल रहा था ये निर्भय क्या बोल रहा था अंबानी की शादी में जब गए थे तो पैर क्यों छू रहे थे क्यों छू रहे थे पैर वही तुम्हारे यहां के मुख्य अतिथि होते हैं समझे जाओ जाके उनका शोधन करो पहले जाके जो उनकी उसमें लगे हुए हैं खुशामद करने में फिर कहना बाबा है यह है तू तड़ाक
01:37:11:13 अब इनकी परंपरा भी आपको बताऊं परंपरा क्या है निर्भय आर्य संदीपन रॉय एक मिनट किसी की उदारता को कायरता नहीं समझना चाहिए निर्भय हमने तुम्हारे प्रति जो व्यवहार किया तुमसे तुम्हारा कोई भय है क्या अरे होगे तुम निर्भय हम भी शिवश है। कोई भय नहीं है। अब ज्यादा नहीं बोल सकता। क्या करूं? बिल्कुल बिल्कुल। तो किसी की उदारता को कायरता मत समझो। हमने तुम्हारे प्रति भ्रातत्व भाव से जो एक प्रेम पूर्वक व्यवहार प्रकट किया उसका तुमने ये सिला दिया। तुम ये दिखा रहे हो कि तुम बहुत बड़े फन्ने खाओ। तुमने पता नहीं क्या कर लिया उस डिबेट में। हमें तो कुछ नहीं दिखा। हम तो संतुष्ट बैठे हुए हैं। अच्छा सिद्धांत पर चर्चा तुमने चालू की भैया सिद्धांत पर चर्चा कर ले। क्यों? जो जीतता है वो संतुष्ट होता है मेरे भाई। चर्चा किसने शुरू की? फोन पर पहले सिद्धांतिक बताओ। तुम तुमने तुम तो जीते थे ना। हम जीते थे। आज भी संतुष्ट है और तुम्हारे इस समय हो रहा होगा। मैं इसी समय लाइव ज्वाइन कर लूं। इसी समय हो रहा होगा कि मैं अभी अभी अगर जब तुम यह
01:38:26:14 देखोगे या तो अभी अगर देख रहे हो तो अभी लग रहा होगा बटन दबा दूं मैं दबा दूं दबा दूं लग रहा होगा तुम्हें जो हारता है जिसका पक्ष सिद्ध नहीं हुआ होता है वो दोबारा उसमें रहता है हारा हुआ पहलवान हमेशा तुरंत दूसरे उसकी उसमें रहता है वो वाली कहावत है ना हम फ़ पर सिद्धांतिक चर्चा किसने शुरू की थी भाई माफी अभी मांगने की बात हो गई भ्रात भाव एक दूसरे को प्रकट कर दिया। ठीक है हो गया। किसने सिद्धांत की बात छेड़ी थी? तुमने यानी तुम्हारे अंदर था कुछ बाकी। मैं संतुष्ट हूं। दुनिया का कोई माय का लाल नहीं काट सकता हमारे सिद्धांत को। सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म आ जाए दुनिया का कोई भी माय का लाल जो आ सकता है और इनहीं तीन सिद्धांतों के आधार पर दुनिया में धर्म है सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन पत्नी कौन बहन है ये व्यक्ति समझ पाता है इनहीं तीन सिद्धांतों के आधार पर तुम्हारा खोखला ईश्वर वो तो सिद्ध ही नहीं हो पाएगा मनुष्य की चाह का वास्तविक विषय ही नहीं है वो सिद्ध तक नहीं कर पाओगे उसे
01:39:36:21 भाई सच्चिदानंद की चाह है ना तुम क्या दे रहे हो मोक्ष में उसे बाित आनंद सच्चिदानंद नहीं है तुम्हारा बाित आनंद है मोक्ष में तो मनुष्य की चाह का विषय ही नहीं है वास्तविक वो और बने फने का घूम रहे हो जी और अभी तो एक ही विषय पे वो बात हुई है अभी तो बाकी के विषय तो और खुलना बाकी है अच्छा इन्होंने अपनी परंपरा बताई है देखो हमारे जैसे हमारी जो गुरु शिष्य परंपरा है तो हमारे गुरुदेव पूरी शंकराचार्य जी उनकी पूरी अखंड परंपरा है। इनकी परंपरा क्या है? निर्भय ऊपर संदीपन रॉय महेंद्र पाल आर्य ठाकुर अमर सिंह महात्मा हंसराज स्वामी दयानंद जी और स्वामी विजानंद स्वामी पूर्णानंद और स्वामी ओमानंद ओमानंद के ऊपर फिर खत्म हो जाती है तो यानी कि ये 150 वर्ष से थोड़ा सा और पीछे चले जाओ तो सात 50 साल और पीछे चले जाओ बस 200 अच्छा ये भी परंपरा मानी जाएगी कि नहीं मानी जाएगी ये ये सबसे बड़ा प्रश्न ओमानंद इत्यादि का भी अगर हम छानबीन करेंगे ठीक है अगर उसकी भी हम छानबीन करेंगे करेंगे उसमें भी कुछ और ही चीजें निकल आएंगी कि वो मूर्ति पूजक तो नहीं थे कहीं
01:40:48:12 परंपरा की बात मैं आपको बताऊं सैद्धांतिक चर्चा जो हुई है हमारी फोन पर ठीक है उसमें अवतारवाद की सिद्धि हमारी हो चुकी है बिल्कुल क्लियर कट निर्गुण सगुण का निर्गुण सगुण का निर्गुण और सगुण का सिद्धि कर ही नहीं पाए। सिद्धांतिक चर्चा हो चुकी है। ठीक है? अभी मैं आपको बताऊंगा कुछ चीजें। परंपरा पे बात आई। निर्भय ने स्वयं स्वीकार किया है। यजुर्वेद का वास इनको दयानंद जी को उनकी कुल परंपरा से मिला है। यजुर्वेद खुद माना। और इनकी कुल परंपरा तो शिवलिंग की पूजा कर रही थी। हम खत्म हो गई परंपरा इनकी यही खत्म हो गई हम ये परंपरा पे चर्चा हुई है हमारी और निर्भय क्या होता है कि जब ऐसे चीजें क्लियर कट होने थोड़ा सा उसके अंदर टरामेंट उसका वैसा हो जाता है गरम ठीक है वो वो उसमें कोई आपत्ति नहीं है ये पूरा हो जाने देते उसके बाद हम लोग करते कुछ करते
01:42:03:13 ये पूरा हो जाने दीजिए रह जाएंगे। ठीक है? तो क्या है? निर्भय आर्य से दो विषयों पर अच्छी खासी चर्चा हुई है। परंपरा पर और अवतार पर। दोनों ही चर्चाओं में फोन फोन की बात कर रहा हूं। दोनों बातों में हमारे सिद्धांत की सिद्धि हो गई। वही निरुत्तर थे। निर्भय अरे निरुत्तर थे। जब फोन पर चर्चाएं हुई है। सुन लीजिए सब लोग कान खोल के। फोन पर जो चर्चाएं हुई है मेरी और निर्भय आर्य की निरत्तर अवतारवाद की सिद्धि हुई है उसमें और निर्भय आर्य ने अपनी परंपरा बताते हुए दयानंद जी के लिए बताया मुझे खुद कि उनको तो यजुर्वेद जो है वहां से मिला था उनकी कुल परंपरा से लो कुल परंपरा के विरुद्ध कैसे जा रहे हो फिर भाई जिससे वेद मंत्र मिले अगर उस पर विश्वास नहीं है तो उसके वेद मंत्र पर भी विश्वास मत करो ना बात खत्म हो गई यही परंपरा ढेर ये पांच मिनट में परंपरा खत्म करेंगे आ जाना भाई कर देना हम बोलिए
01:43:13:03 बिल्कुल शास्त्रवाल जी आपका कोई पॉइंट है अभी जी जी जी बिल्कुल है कितना बाकी है कितना बाकी है अभी नहीं नहीं हो गया लगभग खत्म हो गया नहीं नहीं हो गया खत्म हो गया बस और दो पॉइंट और है बस पहला पॉइंट ये है कि जब आप कहते हैं कि उनके आचार्यों को स्वषित ठीक है तो उसने कहा था कि तब हम भी कह देंगे कि स्वोषित भगवान तीन आंख वाला बाबा या ऐसे करके कुछ था उसने सब कुछ कहा था स्वषित नहीं नहीं तुम तो मलेच्छों को गुरु बनाओ अपना ये जो परंपरा प्राप्त आचार्य तुम्हें दिखाई नहीं देंगे तुम तो मलेच्छों को बुलाओ आर्य समाज में सर्टिफिकेट दे दो भैया या तो उनको अपनी बेटियां दे दो ब्या दो और या फिर उनको अपना आचार्य बना के बिठा लो ये हो गए हमारे आचार। मिलेच्छों को आचार्य बना के बिठाओ तुम।
01:44:06:26 मतलब कि जिस चीज के लिए हम बाहरी दिखावा करके लड़ रहे हैं हम उनको अंदर नहीं आने देंगे। वही अगर हमसे सर्टिफिकेट लेके आएगा तो हम उनको अपना जो है माई बाप बना देंगे। आचार्य बना के बिठाएंगे। और जो हमें प्राप्त है हमारे अपनी कुल परंपरा से शुद्ध आचार्य उनके प्रति ये सब फैलाएंगे। तीसरी आंख और ये और वो बनाओ। एक दो को तो बना के बिठा लाई है तुम्हारी अभी परंपरा जो बताई शायद उसमें भी कोई है हां इसमें भी है यह मौलाना थे 30 वर्ष पहले एक मस्जिद वो तो खुद कहते हैं कल उन्होंने शायद एक लाइव स्ट्रीम भी करी है किसी ने मेरे को वो भेजा था उनका वीडियो का कुछ अंश तो वो खुद बता रहे हैं कि मैं 30 वर्ष पहले एक मस्जिद का मौलाना था और फिर मैं आर्य समाज से जुड़ा और आज मैं वेद मेरे पास वेद है ऐसा कुछ वो कह रहे हैं उसमें तो कह रहे हैं वेद मिल जाएंगे तुम्हें भी मिल जाएंगे कह रहे हैं ये देखो इंटरनेट पर पड़े हैं वैदिक स्क्रिप्ट इन पर वही इंटरनेट परंपरा हां जी
01:45:08:07 जी शास्त्रवाद जी आगे एक मिनट जी एक मिनट एक मिनट एक एक मिनट रुक जाइए एक मिनट रुक जाइए राजा राजा राय जी जय श्री राम बताइए जय श्री राम अरे भैया मैं एक बात कहना चाहता था युधिष्ठिर मीमांसक जी इनके बड़े प्रमाणिक आचार्य हैं आर्य समाजियों में तो उन्होंने एक ग्रंथ में लिखा है मेरे पास पेज है उसमें उन्होंने लिखा है कि जो आप लोग बात कर रहे थे परंपरा के बारे में अभी तो सरस्वती से केवल उन्होंने व्याकरण शास्त्र पढ़े हैं स्वामी जी ने उनसे शास्त्र वेद नहीं पढ़े वो लिखा है उन्होंने व्याकरण का ज्ञान लिया है शास्त्रों वेदों का नहीं तो उस हिसाब से परंपरा से भी नहीं सिद्ध होगी वैदिक परंपरा कहां है वैदिक परंपरा उनकी से सिद्ध नहीं होती है ऐसा इनके परम प्रमाणिक आचार्य उन्होंने लिखा है। मैं आपको पेज भी भेज सकता हूं कि उन्होंने विजानंद सरस्वती से केवल और केवल केवल और केवल व्याकरण का ज्ञान लिया है। शास्त्रों वेदों का नहीं वेद शास्त्रों का ज्ञान नहीं लिया है। आप बोलोगे तो मैं भेज भी दूंगा। तो फिर गुरु परंपरा कैसे सिद्ध हो जाएगी? बताइए। हालांकि अगर व्याकरण की भी बात करेंगे तो व्याकरण के लिए भी हमें प्रामाणिक परंपरा चाहिए।
01:46:23:22 व्याकरण के लिए भी तो चाहिए। ठीक है। मान लो कोई व्याकरण चलो मान लो कोई किसी यूनिवर्सिटी में पढ़ सकता है लेकिन वेद तो बहुत ही संवेदनशील विषय है ना वैदिक ज्ञान नहीं नहीं भाई व्याकरण के आधार पर कौन सा नियम कहां लागू हो सकता है नहीं हो सकता है उसके लिए भी तो आपको पीछे से परंपरा तो क्या व्याकरण के नियम तो व्याकरण के अनुसार क्या नियम माना जाएगा परंपरा मानी जाएगी व्याकरण के अनुसार परंपरा मानी जाएगी नहीं भाषा का ज्ञान है वो मैं ये कह रहा हूं कि अगर वहां से वो अपनी व्याकरण को भी प्रमाणिक करने की कोशिश करेंगे तो वो भी नहीं होगी क्योंकि उनकी वो परंपरा भी खंडित है बिजानंद जी वाली परंपरा भी खंडित है या तो उसमें नाम बता पीछे के आचार्य ये बात तो ये तो गड़ा हुआ नाम है ओमानंद जी एकांत तो आज तक बड़े-बड़े स्कॉलर समाजियों की किताबें पढ़े कहीं ओमानंद नहीं कहा गया चलो ठीक है देखा जाएगा आपकी बात आपके आगे अपनी बात टिकाने के लिए थोड़ा सा बोल दिया ओमानंद जींद जी तो वैदिक परंपरा में होंगे ही नहीं व्याकरण का ज्ञान लिया है उन्होंने लिखा स्वामी जी का ज्ञान स्वतंत्र था चलिए ठीक है इतना ही कहना
01:47:38:24 था मुझे बाकी उनका आपको पता ही है बिजली का तार कमेटी बनाना ये वैदिक अर्थ है उनके उनके परंपरा प्राप्त अर्थ यही है बिजली के तार रेल का इंजन नियोग ये वैदिक अर्थ है उनके ये वही परंपरा उनकी अपनी पर्सनल रही होगी नहीं स्वतंत्र स्वतंत्र एक तरफ तरफ कहेंगे एक तरफ कहेंगे कि भगवान के समझाए बिना हमें समझ में नहीं आएगा धर्म और ब्रह दूसरी तरफ स्वतंत्र हो काम करेंगे और मोक्ष में लोग मोक्ष में मन थक जाता है ऊब जाएंगे वहां भीड़ बढ़ जाएगी तो वापस भी आना है ये तर्क है कि लगातार स्वादिष्ट खाना खाने से भी व्यक्ति उब जाता है वाह ये तर्क है और एक एक महाकल्प कम टाइम थोड़ी होता है बहुत टाइम हो गया इसके बाद फिर वापस आना भी पड़ेगा वरना फिर व्यवस्था बिगड़ जाएगी प्रमाणिक आचार्य के तर्क जाने की क्या जरूरत है? यही रहो। एक एक व्यक्ति कह रहा है कि वाई वाई म्लेच शुड नॉट नो द नॉलेज ऑफ वेदा। नहीं ये बात गलत है। नॉलेज वो ले सकते हैं डायरेक्टली पढ़ना पढ़ाना नहीं है। ठीक है? नहीं तो ऐसे ही अनाधिकारी उत्पन्न होंगे दुनिया में। कैसे? जिनका प्रतिकार आज हम कर रहे हैं। नॉलेज लेने से कोई दिक्कत नहीं है। नॉलेज उनके इतने सारे भाष्य है, प्रवचन है, टीकाएं सुनिए, सुनाइए।
01:48:54:12 खूब नॉलेज ग्रहण करिए। हां जी शास्त्र जी अगला पॉइंट अर्थ भिन्न नहीं होना चाहिए बस परंपरा से होना चाहिए। जी जी जय श्री राम जय श्री राम जी भैया उसने ये कहा था कि आपने तो उसे जो डिबेट में आपने उसे इक्वल राइट्स दिए नहीं थे और बार-बार उसे म्यूट कर रहे हैं या फिर नीचे स्पेस कर दे रहे थे इस और फिर भी उसने आपको हरा के चल गया। एक तरह का उसके बात थी बात अलग है कि वो कुछ कर नहीं पाया था सर उसने ऐसा बोला था और देखो हराना ना हराना तुम चिल्लाते रहो वो वो जनता डिसाइड करेगी उसमें कौन हारा कौन जीता ठीक है पहली बात दूसरी बात ये है कि बैक स्टेज के हम आपको क्यों दें भाई जो हमें हमारे लेवल का लगेगा जो व्यक्ति कि जिसके साथ हमें बराबरी से चर्चा करनी है उसके साथ हम बराबरी से भी चर्चा करेंगे और इन्होंने जो एक आध बात कही जो अभी तक आपने पूछी नहीं है इन्होंने कहा कि हम तो घर में हम तो उनके यहां जाकर के भी करते हैं। हम फिर अपने ईगो को साइड में कर देते हैं। हम भी करते हैं। हम अपने ईगो को ही नहीं अपनी सेफ्टी को भी साइड में करके जाते हैं। निर्भय तुम अपनी सेफ्टी को साइड में नहीं करते हो। केवल ईगो को साइड में करते हो। ये ऑनलाइन दुनिया के लोगों से जुड़ना है। ये सब ये सब केवल ईगो को साइड में करके जा रहे हो ना। हम तो अपनी सेफ्टी को
01:50:09:18 दाब पर लगा के जा रहे हैं दूसरे के कैंप में और ईगो को भी कि नीचे बैठ के बात कर रहे हैं। सेफ्टी को दाब पे लगा के जा रहे हैं। जब हम रामपाल के यहां गेट खटखटाते हैं। समझे? हमको तुम तोप बन के दिखा रहे हो। कि मैं अपने ईगो को साइड में रख के जाता हूं। मैं सिद्धांत की रक्षा के लिए कर लेता हूं। करते हैं हम भी मगर हम ये देखते हैं कि हम ये एनर्जी अपनी का कहां पे लगाए। किसी हर छुटैया के कहने पर उसको जो है अपने वो राइट्स दे दिए यह दे दिया यह हम नहीं करते हमारे लिए तुम और तुम्हारा चैनल नगण्य थे आर्य समाज की ओर से प्रातत्व भाव एक अलग बात है मगर एक वैल्यूलेस व्यक्ति थे तुम्हारे लिए तो हम क्यों तुम इतने सारे अब समझौते करें कि हम तुम्हें ये दे वो दें जैसे हर साधारण व्यक्ति आकर के जुड़ता है वैसे जुड़ो और हमें जो लगेगा कि हां भाई इसके लिए हम ये कर सकते हैं उसके उसके द्वारे पे जाएंगे। जैसे तुम्हारे यहां के वो आचार्य रहे कौन है? परिवराजक जी उनके यहां बात की। उन्होंने कहा जब इधर से निकले तो हो लीजिए। मैंने जाऊंगा। कभी ना कभी उनके गेट पे जाऊंगा। उनके यहां जाकर के उनसे बात करूंगा। वो है हमारे लिए इंपॉर्टेंट। तुम नहीं हो। तुम्हारी जो ये जो क्या कहेंगे किशोरों
01:51:24:21 की फौज है युवाओं की फौज संदीप आर्य आप लोग नगण्य हैं हमारे लिए। हां हम आपके लिए हो सकते हैं ऐसे। तो आप अप्रोच करो। जैसे वो हमारे लिए इंपॉर्टेंट है तो हम जाएंगे उनके पास। ठीक है? योगेश भारद्वाज जी कह देंगे हम जाएंगे उनके पास। जाएंगे। अभी तो उन्होंने मना ही कर दिया कि नहीं करनी बात। योगेश भारद्वाज जी अपनी एक उसमें कह रहे हैं कि कि यह जितने भी कोर्ट से प्रमाणित होते हैं ये परंपरा प्राप्त नहीं ये तो कोर्ट प्राप्त आचार्य है और तुम क्या हो तुम क्या हो तुम तो कोर्ट रजिस्टर्ड हो यहां तो परंपरा प्राप्त तब भी है स्वतंत्र रूप से वहां तो जो शासन लागू है उस शासन के अनुसार सिद्ध करने जा रहे हैं जो शासन लागू है उस शासन के अनुसार हम सिद्ध करने जा रहे हैं। मगर तुम्हारा तो नियम ही वही है। स्वतंत्र नियम है ही नहीं। रजिस्टर्ड कराओ रजिस्टर्ड। वहां मरई माता का मंदिर भी रजिस्टर्ड है। आर्य समाज के नाम से हम तो सोच समझ के बात किया करो। जेब में नहीं है। टल्ला टिल्ला मांग रहे
01:52:39:22 हो लाल किल्ला। योगेश भारद्वाज जी आपसे बात कर रहा हूं। तो हमारे लिए जो इंपॉर्टेंट पर्सन होगा हम देखेंगे कि उसके जगह पर हमको जाना है कि नहीं जाना। बीच में जाना है। आप हमारे लिए ऐसे व्यक्ति नहीं थे जिसके लिए हम कुछ एक्स्ट्रा एफर्ट्स लगाए। हम आपके लिए थे तो आपने लगाए। ठीक है? हर दूसरा व्यक्ति हर दूसरा कोई स्मैकिया आ जाए। आपकी बात नहीं कर रहा हूं। हर गली चलता व्यक्ति साइकिल चोर स्मैक किया हमसे कहने लगा। आ जाओ आ जाओ आ जाओ। चैलेंज है चैलेंज है। चैलेंज है। और राइट्स दे दो अपने वो एक्सेस दे दो वो अपना एक्सेस दे दो अपने उसमें स्ट्रीमर्ड वगैरह में। तो हम यह करते घूमे बस दिन भर।
01:53:23:15 सोच समझ के बात करो। बिल्कुल ऐसेसे लोग शास्त्रार्थ के लिए बुलाते हैं कमेंट बॉक्स में माता ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो वहां पर आ जाओ। भैया तुम मतलब ये चाह रहे हो कि अगर कोई तुम्हें ऐसे ललकारे इस ये शब्द बोलकर अगर तुम्हें ललकारे हो बोले कीचड़ में मल युद्ध करना है। फिर फिर कहेंगे कि नहीं वो आया नहीं। हमने बुलाया हमने आया नहीं हार गया मतलब हार मान ली। पहले तुम खुद को ऐसा बनाओ कि हमसे सोचे कि हमें अपने घर से बाहर निकलना है तुम्हारे लिए तब हम आएंगे। बनाओ अपने आप को ऐसा हमने बनाया है ना ऐसा हमने बनाया तुम्हें आना पड़ा हमारे द्वारे। ठीक है? तो अपने आप को ऐसा बनाओ कि हमें दिखे जनता तुमसे प्रभावित हो रही है। तब तुम्हारे तंबू में आएंगे और फिर तुम्हारे पर कच्चे उड़ाएंगे। नीचे बैठ के भी उड़ाएंगे। बनाओ अपने आप को ऐसा। अभी तुम जीरो हो जीरो कुछ नहीं नथिंग तो क्यों करें हम तुम्हारे लिए एफर्ट्स हां तुम भाई के नाते हम ये एफर्ट करने वाले थे जिसमें तुमने आग लगा दी ऐसा वीडियो बना करके भाई के नाते हमने सोचा था चलो इस बार हम उसके यहां चले जाएंगे और इसमें वो कुतर्क तो आपने बोले ही
01:54:38:19 नहीं ये संदीपन रॉय जी संदीपन रॉय जी के लिए मैंने कहा कि भाई एक काम करो तुमसे जो है खटापटा अब नहीं चाहिए तो ऐसा करो तुम ना चर्चा करो। संदीपन रॉय जी को भेज दो। हम लोग एक चर्चा करते हैं जिसमें पहले मैं मुस्लिम पक्ष बनूंगा। संदीपन रॉय जी मेरे मत का खंडन कर दें। मुस्लिम होते हुए मैं आर्य समाजी होते हुए मुस्लिम का खंडन कर दें। फिर मैं अद्वैती होते हुए उनका खंडन करूंगा। तो वो क्या कह रहे हैं? वो कह रहे हैं कि नहीं नहीं उन्होंने इतना अपमान किया है। ये किया है वो किया है। वो हमारे दयानंद जी को की किताब के सिद्धांत को कुतर्क कहते हैं। अरे भैया तुम्हारे दयानंद जी ने गप्पे कहा उसका क्या? शुरुआत तो तुमने की ना। और तुम्हारे एक अकेले शंकराचार्यों को सम्मान कर देने के कारण क्या वो जो सैद्धांतिक विरोध है वो खत्म हो गया। सिद्धांत को तो हम कहेंगे ना कटाक्ष कि यहां पर एक कुतर्क है
01:55:31:22 और अगर इस तरीके से कुतर्क कह देने के कारण अगर चर्चा नहीं होनी है तो दुनिया में फिर कोई चर्चा ही नहीं होनी चाहिए। क्योंकि सबके हिसाब से दूसरे सामने वाले का कुतर्क है। तो क्यों चर्चा कर रहा है फिर निर्भय? या तो तुम सही हो, निर्भय सही है। यह सब चर्चा से बचने के बहाने हैं। तुमको मालूम है कि निर्भय तो थोड़ा बहुत टिक भी जाएगा। हम नहीं टिक पाएंगे। समझे? इसलिए निर्भय के कंधे पर बंदूक रख के गोली चलाओ। चलो ये चल जाए शायद हमारा आखरी मोहरा। हालांकि टिके जीतेगा वो भी नहीं। मगर तुम्हारी अपेक्षाकृत तो वो स्ट्रांग पर्सन है भाई। तो उसी के सहारे चल रहे हो बैसाखी लेकर के। अपनी बातों में तुमने कह दिया हमारे को यह कहा वह कहा हमने कब व्यक्तिगत कटाक्ष किया तुमने करते हो तुम करते हो व्यक्तिगत कटाक्ष तुम्हारे चैनल से ऐसे शॉट बनाए जा रहे हैं जो हम नहीं कहना चाह रहे वो तुम दिखा रहे हो कि हमने कहा तुम्हारे चैनल से अजीब अजीब तरीके के उसमें फेस भी होते हैं हम बिल्कुल बिल्कुल ये बहाने हैं इनके मैंने कहा मैंने ये बात कही थी मैं आपको बताता हूं मैंने क्या लिखा था जब ये कह रहा है कि आपको जो है सनातन शंकर जी की चीजें नहीं दिख रही मैंने कहा तुम वैसे बड़े तार्किक बनते हो। बड़े तुम्हारे अंदर बौद्धिक है। बड़े तुम स्मार्ट गए। मगर अपने लोगों का बात आते ही
01:56:46:24 तुम वहां पर भोले बन जाते हो। बेवकूफ बन जाते हो। ये कहा मैंने उसको ध्यान देना भूल जाते हो तुम। कि ये ये क्या कर रहा है? चर्चा से भागने का प्रयास है। ये हमने कभी कोई व्यक्तिगत कटाक्ष नहीं किया है। दयानंद जी पर। ठीक है? और जो सैद्धांतिक कटाक्ष है वो वो किए हैं वो होते रहेंगे। तुम पौराणिक कहते आए हो तुम नहीं कहोगे कोई और कह रहा है अलंकारी हम कहते रहेंगे हो तुम अलंकारी जहां पर भगवान की चमत्कारिक व्याख्या आई वहां वहां पर तुमने अलंकार ठूस दिया और उसके नाम पे अपना नया स्वतंत्र एक वो बना लिया समाज और उसी के कारण ये सब लोग जन्मे हैं रामपाल इसन ये सब तुम्हारी देन है ब्रह्मा कुमारी बिल्कुल बिल्कुल इन्हीं के किए हुए अनुवादों पे तो रामपाल ने पूरा रेफरेंस लिया है उसने लिखा भी कि यह सारे जो जितने अभी मैं रेफरेंस दे रहा हूं वेद वैदिक वांगमय के वो सारे दयानंद जी के वेद भाष्य से लिए हुए हैं। वो तो बड़ा स्पष्ट उन्होंने कहा है और स्वषित मत जो इतने बन गए हैं ये इन्हीं के इन्हीं की देन है।
01:58:01:01 गुरुकुल गोविंद जी ने पत्थर उठा सकता है वाला इनके यहां पर वो दे दिया था उत्तर फिर भी ये लोग कहते हैं कि हम जीत गए फिर भी ये लोग कहते हैं कि हम जीत गए क्यों कहते हैं क्योंकि जो है वो जो है आपको शास्त्र का रेफरेंस नहीं दिया तो भैया शास्त्र का रेफरेंस ना देने में जब वो हारे हैं तो पत्थर का जवाब देने में तुम भी तो हारे हो वहां क्यों मौन हो बिल्कुल। अच्छा एक चीज और है। यह लोग क्या पूछते हैं? देखो कि तुम्हारे आचार्य ने कहां पर माना है कि सर्वशक्तिमान का अर्थ है कि वो सब कुछ कर सकता है। ठीक है? अब ये बताओ जब आचार्य ये लिख देंगे सब कुछ कर सकता है। तो हम ये कहेंगे फिर ये ये नहीं कह सकते कि ये कुछ का मतलब कहां लिखा है? तुम्हारे आचार्यों ने कुछ का मतलब कहां लिखा है? नहीं समझे मेरी बात? जैसे ये लोग कह रहे हैं कि तुम्हारे आचार्यों ने कहा लिखा है कि सर्वशक्तिमान का अर्थ है। वो सब कुछ कर सकता है। हम उनसे पूछेंगे तुम्हारे आचार्य ने कहां लिखा है कि अर्थ का अर्थ होता है। बताओ
01:59:06:14 बिल्कुल अभी आर्य समाजियों के रेफरेंस से ही तुम मुझसे बात नहीं कर पाओगे। अव्यवहारिक था ईश्वर। व्यवहार में कैसे आया? मुक्ति के विषय में लिखा हुआ है तुम्हारे यहां। जब वो मूल रूप से अव्यवहारिक है तो व्यवहार में कैसे आ गया? व्यवहार में कैसे आ गया? हो गया स्वरूप का विरोध हो गया। स्वरूप स्वरूप चिल्लाते हो। स्वरूप का विरोध हो गया ना? नित्यता खत्म हो गई। व्यवहार में नहीं था। व्यवहार में आ गया। हो गई नित्यता खत्म। शाश्वत खत्म स्वरूप का वो हो गया खंडन। और सगुण निराकार से पहले क्या था? वो भी है प्रश्न। वो अभी आएगा। जी शास्त्रवाद जी बोले।
01:59:49:15 भाई अब तो लगभग हो ही गया है प्रश्न। आखरी प्रश्न है। साथ में यह भी है कि आपने जो इतनी भारत को आर्य समाज घोषित कर दिया है। ऐसा उसका दावा है कि आपने उसे आर्य समाज घोषित कर दिया है। अरे भैया तो आर्य समाजी किसको कहा जाएगा? किसको नहीं कहा जाएगा? इसमें तुम सिद्धांत तो दो। वो दयानंद जी के भाष्य को दिखा रही है। परंपरा प्राप्त आचार्यों का विरोध कर रही है। तुम्हारे चैनल पर उसको पनाह मिल रही है। तो क्या करें? क्या कहे उसे? भाई कोई भी आर्य समाजी उसी को माना जाएगा ना जो दयानंद के सिद्धांतों के प्रति निष्ठावान हो। उसकी निष्ठा है। नहीं तो स्वतंत्र रूप से उसकी वैदिक व्याख्या क्या है? बताएं वो और तुम कोई होते नहीं हो तय करने वाले। तुम्हारे यहां परंपरा है नहीं। तुम ही को निर्धारित कर दिया हो। इन्होंने कहा था राहुल आर्य जी ने मुझे जो है नियुक्त किया है इसके लिए।
02:00:40:21 हैं? कौन है वो? कौन है भाई राहुल आर्य? हम तो तुम्हें बहुत उससे ज्यादा वो मानते हैं। श्रेष्ठ मुझे नहीं मुझे नहीं पता राहुल आर्य कौन है। होंगे तुम्हारे कोई मैंने तो ये देखा था। मैंने तो ये देखा था संस्कृत में शास्त्रार्थ की बात आई थी तो राहुल लाल पीछे भाग गए थे। जब इस वालों ने कह दिया था संस्कृत में होगा। भाग गए थे वहां से। जय श्री राम का विरोध किया। विरोध किया था महेंद्र पाल आर्य जी ने तो तब राहुल आर्य ने उनका विरोध किया था कि आप जय श्री राम का विरोध नहीं कर सकते और इनकी जो रामायण लिखी है जगदीशानंद सरस्वती जी की उसको राहुल आर्य नहीं मानते हैं वो मूल वाक वाल्मीकि रामायण को ही रामायण मानते हैं ये भी बात है और राहुल आर्य और इनकी कोई बनती नहीं है। हां राहुल आर्य जो है वीडियो बनाते थे वो जय श्री राम का विरोध किया तो उन्होंने कहा यम महेंद्र पाल आर्य ने कि आप जय श्री राम मत बोलो जय श्री राम नहीं बोलना चाहिए तो उन्होंने बोला नहीं नहीं क्यों नहीं बोलना चाहिए जय श्री राम राम हमारे लिए आराध्य है वो छुपा बैठा है ना अंदर हर हर तथाकथित सनातना भाष के अंदर भी एक हिंदू छुपा बैठा है ना भाई दिक्कत है मैं एक बात कह रहा था कि वो जो गोविंद गुरुकुल वाली जो चर्चा हुई थी उसमें
02:01:55:25 गोविंद गुरुकुल जी शास्त्र का प्रमाण नहीं दे पाए तो वह हारे हुए माने गए और निर्भय से उन्होंने शास्त्र का प्रमाण मांगा था कि क्या कहते हैं शास्त्र का प्रमाण ये माना था कि जो है ईश्वर अपने आप को नष्ट कर सकता है क्या? तो तो इसने निर्भय ने बोला था कि मैं जो है पोस्ट में डाल दूंगा। ऐसा कुछ उन्होंने प्रमाण मांगा था। निर्भय ने बोला पोस्ट कर दूंगा। तो भैया जब पोस्ट कर दोगे उस समय तुम नहीं दे पा रहे हो तो तुम भी हारे। तुम भी हारे हम उन्होंने यह भी कहा था कि मैं बाद में दे दूंगा गुरु गोविंद वाल जी ने के मैं प्रमाण अवतार के संबंध में उन्होंने गीता के वो दिए तो हम नहीं मानेंगे तो नहीं मानोगे तो हम क्या करें भाई परंपरा पे आ जाओ बताओ परंपरा तुम्हारी जहां तक दिखाओ तो वो हम नहीं मानेंगे है ना शास्त्र प्रमाण की बात तो ऐसी है जब तुमने न्याय वो कहा था ना न्याय दर्शन पंचाव तो मैं चाहता तो वही तुम्हें टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चैन करता समझे तुम्हारी परंपरा पूछ के तोते उड़ जाते पूरे आर्य समाज के उसी दिन वो तो मैं थोड़ा सा उसको एक उस वे में ले जाना चाहता था जहां चीजें एक्सप्लोर हो ये नहीं बस क्योंकि हमारे जो
02:03:11:06 हमारे जो तीन सिद्धांत है वो शुरू होते ही खत्म कर देते हैं चर्चा को खत्म टाटा बाय बाय हो गया ये है उसी में फंस के रह जाता है व्यक्ति इसीलिए मैंने कहा वो मुंह नहीं खोलते थोड़ा बढ़ाते इसको इसको जो है वो वो कौन सा शब्द है वो एबोरेट एबोरेट करो हम एबोरेट वो तो ये बात है और हो गए सारे प्रश्न भैया बस यही था आखरी ये है कि आप जो अवतारवाद का जो वो पूछ रहा था उसप आप ये उसका कहना है कि आप फंस गए थे कि जहां पे अवतार के लक्षण की बात उसने आपसे पूछी थी वो तो उत्तर दे दिया यदि शब्द प्रमाण हां वही बात है। शब्द प्रमाण वाली बात है। वही वाली बात है। आखिर उसे उसने आपको ये मैंने मैंने जब उससे पूछा था गायत्री का मैंने जब उससे पूछा था गायत्री का लक्षण क्या है? तो क्या जवाब दिया था उसने? मौन क्या लक्षण है गायत्री का? अच्छा भगवान की पूजा करने से वो आएगा। ये तुम्हें वो मिलेगी। इसमें क्या लक्षण क्या है इसमें? तुम में भगवान के गुण आएंगे। इसके लक्षण क्या है? बताओ
02:04:27:10 कोई लक्षण नहीं शब्द प्रमाण है। और इसने एक बात और कही थी इंटरव्यू लेने के बहाने जाता हूं। है ना? हम इंटरव्यू लेने के बहाने जाता हूं। ये कहा था इसने कि मैं इंटरव्यू लेने के बहाने। अच्छा ये जब हमारे यहां आए थे तो इंटरव्यू लेने के बहाने का आए थे? क्या काहे के बहाने आए थे? मैं जब इंटरव्यू लेने जाता हूं तो मैं अपनी पहचान नहीं छुपाता हूं। कोई मुझसे पूछेगा तो मैं यही बताऊंगा शिवश नारायण द्विवेदी आवान शंकराचार्य जाके पूछ लेना किसी से भी पहचान नहीं छुपाता। तुम तो पहचान छुपा के आ चुके हो मेरे पास। क्यों आए थे भाई? तुम करो तो वह न्याय है। हम करें तो जो अन्याय है यही होता है। जहां पर ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं होता है ना वहां अधर्म होता है। प्रतिष्ठित अधर्म
02:05:23:22 इंटरव्यू लेने के बहाने जाते। इंटरव्यू लेने के बहाने हम इसलिए जाते हैं इंटरव्यू लेने क्या चर्चा करने के बहाने हम इसलिए जाते हैं क्योंकि अगर हम उनको शास्त्रार्थ बोलेंगे तो वह लोग सबसे पहली बात तो उसको टालेंगे ज्यादातर लोग। टालते हैं करना ही नहीं है। अच्छा दूसरी बात क्या करते हैं? अखबार में छपवाओ, होर्डिंग लगवाओ, टीवी चैनल बुलाओ। बहुत बड़े स्तर का शास्त्रार्थ होगा। जिसको करते करते 100 शास्त्रार्थ हो जाए। जिसको करते करते 100 शास्त्रार्थ हो जाए।
02:06:00:21 इसलिए करना पड़ता है और गुरुकुल के आचार्य से पूछते हैं। आचार्य जो गुरुकुल में पढ़ा रहे हैं उनके पास जाते हैं। आचार्य जो उस गुरुकुल के हेड होते हैं। यही बात है भैया। उसने तो यह तक कह दिया था कि आपने स्ट्राइक मरवाया है उनके चैनल पर। जबकि यह कहीं से भी सत्य नहीं है। अरे ये तो मना कर रहे थे। मैंने मना किया था। इन्हने मना किया। इस मामले में इस मामले में स्ट्राइक मारने के विषय में पूर्ण रूप से अधिकारी हैं। क्योंकि उन्होंने इनसे कोई परमिशन तो ली नहीं है। मजाक वो बना ही रहे हैं इनका। ठीक है? दूसरी बात यह है कि इसमें न्याय अन्याय का फैसला कैसे होगा? तुमने कैसे मान लिया कि तुम्हारा इनके वीडियो को यूज़ करना न्याय नहीं है या अन्याय है। कैसे माना? अन्याय या अन्याय का निर्धारण आपने कर लिया अपने आप ना। इस मामले में वो स्वतंत्र है या तो मुझे सिद्धांत दो कि नहीं करना चाहिए था इन्हें। हम बिल्कुल कोई भी गलत तरीके से और इवन शिवश जी ने भी कई बार कहा है कि हमारे संदर्भ से काटकर अगर कोई वीडियो
02:07:15:25 प्रस्तुत करेगा तो भैया वो सही नहीं माना जाएगा। अगर आप हमारे वीडियोस को यूज करोगे जब मैं शुरू में इनसे इनसे जुड़ा था तो मैंने भी इनसे परमिशन मांगी जी मैंने ईमेल भी करा है इनको आहान ईमेल आईडी पे तो मैंने उनको यही लिखा था तो इन्होंने कहा था मेरे वीडियो को आप यूज करिए लेकिन संदर्भ जो वहां पर बात कही गई है उससे भिन्न बात नहीं होनी चाहिए तो वही मैंने वहां पर किया लेकिन आपने क्या वो चीज की अच्छा परमिशन तो लेने की बात तो दूर की बात है जो बात मैंने कही नहीं उसको काट काट कर तुम वहां पर दिखाओगे तो भैया फिर हम तो विरोध करेंगे और विरोध करने के लिए आपको हम गिड़गिड़ाएंगे तो नहीं के भैया मेरा वीडियो आपने दिखाया अगर मैं ऐसा बोलूंगा हटा दो तो आप बोलोगे अरे ये तो मेरे से वो वो आ गया देखो आ गया अपनी औकात पे तो हमारे पास जो लीगल तरीका है भैया वही है और वो हम अपनाएंगे बिल्कुल अच्छा संदीपन जी ने जो ये कहा कि हम बहुत अच्छे से बात करते हैं वो भी सुन ले कि भैया अलंकारी जो शब्द है वो केवल आपके बिहेवियर पर निर्भर नहीं है। आपका जो मूल स्त्रोत है ये सत्यार्थ प्रकाश इस पर निर्भर है। ठीक है? और इसके अलावा आपके बहुत सगे वाले इन शब्दों का उपयोग कर रहे हैं। तो केवल एक आप अगर नहीं कर रहे हो उसके आधार पर हम अलंकारी ना कहें तो ये हम नहीं स्वीकार करेंगे। हां हम जो है नमाजी नहीं कहते आपको कभी भी। नमाजी
02:08:31:10 इत्यादि हमने कभी पसंद नहीं किया। ठीक है। यह भी देखो कि धर्म चरितार्थ किस-किस के अंदर हो रहा है। अच्छा मैं एक बात अब बता दूं कुल मिलाकर के। जी जी आप तब तक बोले कुछ मैं बता रहा हूं।
02:09:13:27 सनातन जी शंकर जी जी जी जी तो यही सारी बातें हैं। इसको क्लेरिफाई करना बहुत ज्यादा जरूरी था। यह विषय जो आज आपने रखा इन्होंने इन्होंने संदीपन जी ने एक चीज बोली थी कि मैंने दयानंद जी के लिए तू तड़ाक कहा है। ठीक है? मैं चैलेंज दे रहा हूं। संदीपन जी आप मुझे बताइए मैंने कहां तू तड़ाक कहा है। दयानंद जी के लिए। दयानंद के बाद जी ना लगा हो यह बात एक अलग है। मगर दयानंद ऐसे करता है। आपने जो वहां पंक्ति यूज़ की वह बात एक अलग है। कई बार होता है स्लिप ऑफ टंग के कारण हो जाता है। कई बार होता है। हां उनको यह भी आपत्ति है कि वो स्वामी क्यों नहीं लगाते दयानंद जी के आगे? स्वामी दयानंद क्यों नहीं बोलते? तो कुल मिलाकर के अगर उनसे हमें चर्चा करनी है तो हम एक काम करते हैं। पहले आर्य समाजी बन जाते हैं। उसके बाद हम उनसे चर्चा करेंगे विरोधी। ये कोई बात है क्या? फिर यह तो महर्षि भी बोलते हैं तो फिर यानी कि बोलेंगे महर्षि नहीं बोला अब इस पर भी क्षमा मांग हां ये मतलब कितने अकाट तरीके हैं चर्चा से दूर रहने के संदीपन जी के मानना पड़ेगा हम
02:10:19:13 मैंने कहा निर्भय से ये पंक्ति भेजो मुझे तू तड़ा कहां किया है मैंने तो तुरंत बात बदल गई तुरंत बात बदल गई वहां पे नहीं वो है नहीं ना होगा तभी तो भेजेंगे और वैसे भी हम कभी अभद्रता नहीं करते हालांकि एक पोस्ट में पुराने उसमें मैंने लिख दिया था। वहां पर भी जी नहीं लगाया गया था। तो उसके ऊपर मैंने ऑलरेडी पोस्ट कर दी है। अब जो तुम हमारे आचार्यों को जो संबोधित करते हो मेरे पास तो बहुत सारे प्रमाण है जहां पर तुमने भी जी नहीं लगाया है। तुम्हारी पोस्टों में भी वैसे लिखा होता है शंकराचार्य को चैलेंज है। चारों शंकराचार्यों को चैलेंज करते हैं हम। तो भैया वहां पर भी आपने जी नहीं लगाया था तो उस पर कब आप क्षमा मांगोगे यह भी बता दो। पर चलो उतना हम नहीं जाएंगे क्योंकि हमारा तो मेन सिद्धांत है। यह बात पर तो कभी बात होती नहीं है कि कोई जी लगा रहा है नहीं लगा रहा है। लेकिन जहां तक हम प्रयास करते हैं कि सभ्यता के साथ ही किसी का नाम लिया जाए। बढ़िया तरीके से ही लिया जाए। किसी का अपमान ना किया जाए। व्यक्तिगत व्यक्तिगत गलती से गलती से यदि कोई स्लिप ऑफ टंग की वजह से हो गया हो, कभी जी ना लगा हो, बातें दयानंद ऐसे करता है। मैंने कभी नहीं कहा। अब मेरी जानकारी में नहीं कहा। मुझे पता चलेगा मैं माफी मांगूंगा। अच्छा मैं ऑपरेटर
02:11:34:14 को कुछ अपने स्क्रीनशॉट भेज रहा हूं। ऑपरेटर कृपया करके वो स्क्रीनशॉट यहां प्रदर्शित करें आप जरा। मैंने आपको भेज दिए हैं। तो मैं आपको एक थोड़ा सा इसके संदर्भ दे देता हूं। जब तक ये प्रदर्शित कर रहे हैं। ऑपरेटर मेरी बात सुन पा रहे हैं?
02:12:18:07 तो हमारी जो मूल बातें हुई हैं जो पूरी फोन कॉल पर जो बातें हुई है पूरी दो चार पांच घंटे की बातें हैं सैद्धांतिक उसमें व्यक्तिगत भी है पर सैद्धांतिक बात हो जाएंगी करीबन तीन चार घंटे की बातें होंगी हमारी मेरी और निर्भय की उसमें निर्गुण और सगुण वाला मैटर फंसा हुआ था इसके इसके बारे में निर्भय का निर्भय निरत्तर थे जब मैंने पूछा कि भाई ईश्वर सब जगह एक रस रूप से सर्वत्र व्याप्त है। ठीक है? तो अब उसको पृथ्वी का एक मिट्टी का यह कण हिलाना है। ठीक? तो यहां पर एक ऐसी शक्ति बन के वो उत्पन्न हो रहा है। केवल यही कण हिलेगा बाकी के नहीं हिलेंगे। क्योंकि ईश्वर सर्वत्र सदा एक रस है। सर्वत्र व्याप्त वाला। तो अगर वो पूरा हिला तो सब कुछ हिलेगा। सब कुछ हिलेगा। तो धक्का जब लगेगा सब में लगेगा। सब कुछ हिलेगा। अगर वो ईश्वर हिला एक रस वाला ईश्वर हिला जो सब जगह समान है तो यदि उसने मूवमेंट किया हालांकि यह भी बात है मूवमेंट करेगा कहां भाई मूवमेंट करने के लिए उससे अतिरिक्त कोई जगह चाहिए ना तब वो मूवमेंट करेगा तो फिर भी मान लीजिए कि वो हिला तो सब कुछ हिलेगा तो फिर मैंने कहा निर्भय से कि भाई अब यह बताओ
02:13:33:15 कि वो तो वो हिलेगा तो हिल नहीं सकता क्योंकि उसके बाहर कोई जगह ही नहीं तो हिलेगा कहां दूसरी बात कि अगर वो मान लो हिल भी रहा है तो दुनिया का प्रत्येक कण प्रत्येक एटम सब कुछ हिलेगा तो क्रिया कैसे होगी? रचना कैसे होगी सृष्टि की? ठीक है? तो इसके लिए उसको ऐसा करना पड़ेगा कि वो एक जगह तो हिले। ठीक है? बाकी सब जगह ना हिले। एक जगह हिले और बाकी सब जगह ना हिले। तो ये उसका रूप परिवर्तनशील हो जाएगा। सनातन नहीं रहा। यह उसका रूप अगर वो एक जगह हिला बाकी सब जगह नहीं रहा नहीं हिला तो यह उसका रूप परिवर्तनशील हो जाएगा कि जो वो है उसमें बदलाव आ रहा है। इसलिए हमारी जानकारी में सबसे पहले वो एक अवतार लेता है। ऐसा अवतार जो कहीं भी कम ज्यादा हो सके। तो जो पहली स्टेज है उसको कहते हैं निर्गुण निराकार। और जो दूसरी स्टेज है उसको कहते हैं सगुण निराकार हम लोग। ठीक है? तो वो जो अवतार लेता है तो ईश्वर का अवतार उसके मौलिक स्वरूप के विरुद्ध वही सिद्ध हो गया। ईश्वर का अवतार उसके मौलिक स्वरूप अगर तुम्हारा कहना स्वरूप के विरुद्ध कैसे कर सकता है? तो अब हम बता रहे हैं ईश्वर का अवतार उसके मौलिक स्वरूप के विरुद्ध वहीं पर सिद्ध हो गया कि ईश्वर सब जगह होते हुए भी उसने एक डायमेंशन
02:14:49:01 और लेते हुए उसमें ऐसा रूप में अवतरित हुआ जहां पर वो कहीं भी कम ज्यादा हो सकता है कहीं भी हो सकता है कहीं भी नहीं भी हो सकता है। कहीं भी काम करने वाला हो सकता है जो उसकी शक्ति के रूप में मान लो जो शक्ति काम कर रही है कि पृथ्वी को धक्का लग रहा है पर जुपिटर को नहीं लग रहा है। जुपिटर को धक्का लग रहा है पर पृथ्वी को नहीं लग रहा है। ठीक है? और अगर वो एक रस वाला ईश्वर हिलेगा एक रस वाला ईश्वर हिलेगा तो जुपिटर पृथ्वी सब कुछ एक साथ हिलेगा फिर तो पृथ्वी बन ही नहीं पाएगी पृथ्वी बन ही नहीं पाएगी फिर तो तो इसलिए सर्वत्र व्याप्त ईश्वर भी एक ऐसा सगुण निराकार रूप लेता है जो कहीं पर कम ज्यादा हो जब मैंने ये प्रश्न किया तो निर्भय जी निरुत्तर थे उन्होंने पहले कहा कि अरे आर्य समाज इससे ज्यादा नहीं बताता है ये कहा था फर्स्ट टाइम निर्भय का उत्तर ये आपका आपके यहां का जो वो बॉस है सारे तर्कों का ये उत्तर था निर्भय का ठीक है और उसके बाद उसके बाद उसने जब अगली बार हमारी जब बहुत लंबी बातचीत हुई है निर्भय और मेरी उसमें वो इस पर आया कि भगवान तो इच्छा करता है उससे हो जाता है। मैंने कहा इच्छा आ के इन मिट्टी के कणों को प्राप्त कैसे होती है? इच्छा आ के मिट्टी के जड़
02:16:04:09 तत्व को प्राप्त कैसे होती है उसकी इच्छा? अच्छा पहली बात तो ये मानना पड़ेगा कि ईश्वर केवल इच्छावान है। शक्तिमान नहीं है। शक्तिमान मानना पड़ेगा। यानी कोई फोर्स कोई बल काम कर रहा है ना बल के रूप में ईश्वर ही काम कर रहा है ना तो बल के रूप में ईश्वर काम कर रहा है तो बल तो कहीं पर लग रहा है। कहीं पर नहीं लग रहा है। तभी सृष्टि हो पाएगी। है ना? तो जब तो इसका मतलब ईश्वर या तो यह मान लो कि तुम्हारा ईश्वर जो है परिवर्तनशील है। परिवर्तनशील है तो शाश्वत सत्य नहीं है। और या फिर ये मान लो कि वो सत्य रहते हुए भी एक और अवतार लेता है। यहां पे फिर वो माया वाला डायमेंशन आपको मानना पड़ जाएगा। कहां लेता है? वो आपको डायमेंशन क्रिएट कर वो बात एक अलग है। मानो या ना मानो। मगर अवतार यहां पर घोषित हो गया। पहला ठीक। व्यवहार में ना आ सकने वाला ईश्वर सर्वत्र व्याप्त था। किसी के व्यवहार का विषय नहीं था। जब क्रिएशन करनी थी व्यवहारिक हो गया मौलिक स्वरूप के विरुद्ध आ गया ठीक तो ये जब प्रश्न आया तो निर्भय आर्य प्रथम दृष्ट्या में निरत्तर पहली बार हो गए उन्होंने कहा इसके आगे तो आर्य समाज जानता ही नहीं उसने कभी बात ही नहीं की दूसरी बार में उसने कहा दूसरी बार में उसने कहा कि क्या कहते हैं ईश्वर केवल इच्छा करता है बहुत देर
02:17:19:15 तक मैं अटका रहा वो इच्छा प्राप्त कैसे होती है भाई कोई नर्वस सिस्टम है क्या मिट्टी के कणों में जो वह समझ जाए ईश्वर ने आर्डर दिया है तो मुझे वैसा ही करना है और फिर भी वैसा ही करने वाले के लिए बल तो चाहिए ही फिर उसको बल भी दे दो शून्य बना दो ईश्वर को अवतारवाद का विरोध करने के चक्कर में तो जैसे ही आप यहां अवतार मानते हैं कि ईश्वर व्यवहारिक हो गया और मिट्टी के कणों के लिए बाधा बना ठीक है प्रकृति प्राकृतिक तत्वों के लिए बाधा बना वैसे ही उसका एक अवतार और होता है अब वो प्रकाश का भी बाधा बन गया पहले प्रकृति के अन्य तत्वों का बाधक था। अब वो प्रकाश का भी वादक हो गया। जब वो प्रकाश का वादक बन जाता है तब उसे सगुण अवतार कहते हैं। ठीक है? प्रकाश में जब बाधा डाल दी उसने कि भैया यहां का विषय और ये प्रकाश टकरा के वापस गया तो वो सगुण साकार हो जाता है। इस विषय में निर्भय आर्य का पक्ष बिल्कुल ढीला जो हमारी फोन पर चर्चाएं हुई है। अब इसका मैं आपको प्रमाण दे रहा हूं। क्या प्रमाण है? भैया दिखाओ जरा WhatsApp यह चीथड़े उड़ाएंगे यह परंपरा को खत्म करेंगे इससे इससे पीछे जाओ जरा इससे पीछे वाला ये मैंने आपको दिया है
02:18:39:06 मैंने आपको दिया है यह पढ़ा है मैंने इसे पहले हां यह 3 फरवरी वाला दिखाइए इसमें 3 फरवरी 2026 लिखा हुआ यह बड़ा करिए इसको। बड़ा करिए। ऊपर कर दीजिए। थोड़ा ऊपर सरकाइए इसको। 3 फरवरी के नीचे से दिखाइए। और नीचे। यह देखिए यहां पर मैं वो वाली बात कह रहा हूं। जब मैंने ऑब्जेक्शन किया था कि आपके यहां ऐसे शॉर्ट बनाए जा रहे हैं तो मैंने कहा था इन विषयों में मुझे तुम्हारा व्यवहार उचित नहीं लगता है। ठीक है? अब और नीचे जाइए। मुझे लगता है कि हम नीचे लाओ नीचे लाओ वापस लाओ वापस लाओ वापस लाओ ऊपर जाओ। हां बस बस बस मुझे लगता है कि हम दूर ही ठीक है। निर्भय दोनों का धर्म अलग होने के कारण हमारे सिद्धांत हमारे भारतत भाव को चोट पहुंचाएंगे। ऐसे में जो भी है जितना भी वैसा ही बना रहे वही पर्याप्त है। तुम छोटे भाई सदैव रहोगे। ये मेरी भाषा है और ये मेरा दृष्टिकोण था इनके प्रति। ऊपर ले जाओ।
02:19:46:26 हां
✅ This part is already used · 02:19:47:27 – 02:19:52:28 (0:05)
→ Used in: A · Live स्वयं को निर्भय कहने वालों में आह्वान का भय बौखलाहट अभद्रता और पलायन at 29:27 ↗
02:19:47:27 सैद्धांतिक विषय में यदि तुम कभी आमने सामने चर्चा करने चाहते हो तो अवश्य हो जाएगी।
⬜ Not used yet · 02:19:52:28 – 02:41:04:00 (21:11)
02:19:52:28 ये कब कहा है मैंने? 3 फरवरी को कहा है। मैंने तो नहीं कहा कि सैद्धांतिक विषय में चर्चा नहीं होगी। ठीक है। अच्छा फिलहाल मैं तुम्हारे निर्गुण सगुण वाले वीडियो तथा संदीपन जी के साथ वाली चर्चा सुनिश्चित होने की प्रतीक्षा कर रहा हूं। हुआ क्या था कि जब यह निर्गुण सगुण पर अटक जाते थे तो यह बहुत देर तक वही एक ही बात रिपीट करते थे। इच्छा इच्छा इच्छा तो मैं कहता था अब मैं इतनी देर तो हो गई मैं क्या मुंह चोरी करूं। मैं कह मैंने इनसे कहा एक काम करना तुम निर्गुण और सगुण पे एक वीडियो बनाओ। मैंने इनसे कहा तीन फरवरी को कहा सोचिए। इन्होंने डन भी किया। मैंने कहा निर्गुण और सगुण पे तुम वीडियो बना दो जिससे कि जनता देख ले तुम्हारा पक्ष क्या है? कि निर्गुण आखिरकार सगुण हुआ कैसे? यह कब कहा मैंने? 3 फरवरी को। आज तक इनके यहां आया क्या? वीडियो आया निर्गुण निर्गुण अवतार निर्गुण सगुण कैसे हुआ? इस विषय पर वीडियो आया नहीं आया। ठीक है। अब इसके बाद मैंने कई दिनों बाद इनसे संपर्क किया है। और
02:20:57:27 मैंने इनसे पूछा कि क्या हुआ? निर्गुण सगुण वाला वीडियो नहीं बनाया। अच्छा आपने पूछा इनसे हां बहुत दिनों के बाद पूछा क्योंकि यह जिस तरीके से मुझे इच्छा इच्छा में अटका रहे हैं जब ये वीडियो बनाएंगे तो इनको लोग सुनने वाले होंगे तो इन्हें वहां पे ऐसी बात कहनी होगी जिससे कुछ निष्कर्ष निकले मैंने कहा तुम अपनी जनता को निर्गुण शगुण पे वीडियो बना के दिखा दो 3 फरवरी को इन्होंने कोई वीडियो नहीं बनाया उसके बाद फिर जो अगला वो वाला स्लाइड लगाइए जिसमें ऊपर लिखा है ये पढ़ा है मैंने यह पढ़ा है मैंने वाला चैट दिखा जरा इनको
02:21:41:10 हम ये पढ़ा है मैंने तो ये क्या है कई दिनों के बाद जब मैंने दोबारा इनसे संपर्क किया निर्गुण सगुण वाले वीडियो का क्या हुआ तो इन्होंने मुझे फोटो भेजी जो सत्यार्थ प्रकाश में जो पेज है जहां पर निर्गुण सगुण की बात दयानंद जी ने कही है जो कि मेरे हिसाब से कुतर्क है और कुछ नहीं वो फोटो इन्होंने मुझे भेज दी तो मैंने क्या कहा ये पढ़ा पढ़ा है मैंने। मैं उसको पढ़ने के बाद तुमसे कह रहा हूं। तुम ये बात अपने लोगों को बताओ जिससे तुम जब बनाओगे तब तुम्हें खुद दिक्कत होगी कि मैं क्या बताऊं इस बारे में। समझ रहे हो आप? भाई मेरे से तो तुम भाई हूं तुम्हारा बड़ा तो तुमने यहां पे मुंह चलाया। ये सब कह दिया इच्छा है। इच्छा है इच्छा है। तो मैंने क्या कहा? ये पढ़ा है मैंने। आप वीडियो बना दो इस पर। यह प्रश्न मैंने वीडियो और मैंने यह भी बताया कि यह प्रश्न मैंने वीडियो में भी कई बार बोला है। फिर मैं देख लूंगा जो फाइनली आपका पक्ष क्या है। जब भी समय मिले तब बना देना कोई जल्दी नहीं है। बस बस करो बस करो। ठीक है। हां। ठीक है। तो ये देखिए कि आज तक क्या निर्भय आर्य के फॉलोअ और आर्य समाजियों के फॉलोअर को या संदीपन आर्य संदीपन रॉय के फॉलोअर को आज तक निर्गुण सगुण का वीडियो मिला है। निर्गुण सगुण पर बात की है क्या निर्भय ने कभी क्यों नहीं कर रहा है क्योंकि उसको मालूम वहां धाराशाही
02:22:56:26 है उसका पक्ष ठीक दूसरी बात अब आ जाती है जो हमने जो बात कही इनसे कि भैया अभी जब लास्ट टाइम जब हमने वो किया इनको अप्रोच किया कि चर्चा करते फिर उन्होंने इस तरीके का घमंड पूर्वक वीडियो बनाया जो बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा उसके बाद जब मैंने उसको देखा उसमें वो वो पक्ष अभी देखा ही नहीं था कि इन्होंने परंपरा के लिए क्या कहा है पुराण के लिए क्या कहा है? करपात्री जी महाराज के लिए क्या कहा है? मुक्तेश्वर जी के लिए क्या कहा है? कुछ जानते नहीं हो तो चुप रहो ना भाई। ज्यादा पॉलिटिक्स में कूदने की जरूरत है क्या? नहीं जानते हो मौन रहो। ठीक है? तो फिर मैंने जब इनका ये रुख देखा तो मैंने इनको भेजा। एक लंबा सा इनके सारे उत्तर भेज दिए। जो सब अभी संदीप नार इत्यादि के बारे में बोला है। सब कुछ बोल दिया। उसके बाद लास्ट में मैंने क्या कहा? मैंने कहा मैं एक काम करता हूं। तुम्हारे मेरे बीच जो सैद्धांतिक चर्चा हुई है, रिकॉर्डिंग हुई है, उसको मैं रिलीज कर देता हूं। ठीक है? उसको रिलीज कर देता हूं। और उसमें से जो हमारी जो व्यक्तिगत बातें हुई है, परिवार में कौन-कौन है, क्या है, कैसे रहते हैं? यह सब बातें हम काट देंगे। सैद्धांतिक बात नहीं काटेंगे। मैं उसको रिलीज कर देता हूं। वो रिकॉर्डिंग मेरे पास सेफ है। दिखाओ भैया वो मैसेज दिखाओ।
02:24:24:07 हम ये देखो लास्ट लाइन में क्या कह रहा हूं कॉल ये बात इससे नहीं इससे ऊपर का ऊपर लाओ हां इससे ऊपर जो मैसेज है यह मैसेज जो है क्या कहते हैं मैंने जो है यह मैसेज वही वाला है जो अभी सारी बातें आप लोगों को मैंने बताई है। वही मैसेज है। इसी में उसका अंत है यह। तो लास्ट में मैंने लिखा है कॉल पर हमारी जो सैद्धांतिक चर्चा हुई है उसको मैं डाल देता हूं। बाकी आगे बाकी आगे देखा जाएगा। ठीक है? अब इन्होंने क्या उत्तर दिया है इसके बारे में? नीचे लाओ।
02:25:04:09 और नीचे और नीचे वो वो वाला लाओ। और नीचे। नहीं नहीं नहीं। हां। नीचे चलो। हां। यह कॉल रिकॉर्डिंग कॉल रिकॉर्डिंग अपलोड वाले में मुझे आपत्ति है वह यह कि आप अपने हिसाब से काट छाट कर प्रस्तुत कर सकते हैं। अतः मेरी इसमें सहमति नहीं है। चर्चा करना हो तो जनता के सामने होना ही ठीक है। ठीक है। अब पहली बात है कि यही बात दोबारा आ गई। काट छांट कर प्रस्तुत कर सकते हैं। तो भाई तुमने चर्चा की क्यों थी? अच्छा रिकॉर्डिंग हो रही है। यह बात भी इनको मालूम है। रिकॉर्डिंग हो रही है। यह बात भी इनको मालूम है। उस रिकॉर्डिंग में ये बात आएगी। रिकॉर्डिंग हो रही है। दूसरी बात यह है इन्होंने एक तर्क और दिया है। मैं अभी स्क्रीनशॉट नहीं लिया है। उसमें इन्होंने यह भी किया है कि मैं अपने सारे तर्क नहीं दे पाया था। कॉल रिकॉर्डिंग में मैं अपने सारे तर्क नहीं दे पाया था। तो इसका मतलब तुम ये मान रहे हो कि कॉल रिकॉर्डिंग में तुम्हारा पक्ष परास्त हो गया। तर्क ना दे पाने के कारण। पहली बात। दूसरी बात कि तुम्हें जहां पर तुम तर्क नहीं दे पा रहे हो। तुम कहो कि मैं तर्क और लेकर के आऊंगा। वहां अड़ो मत। वहां तुमने बोला भैया मैं तर्क और लेकर के आऊंगा। नहीं बोला वहां तो तुम इच्छावान है। इच्छावान है। इच्छावान है। करके अड़े रहे। दूसरी बात तीसरी बात क्या है कि इस तरीके से तो हर व्यक्ति कह सकता है चर्चा में हार जाने के बाद कि
02:26:19:10 मैं उस समय अपने सारे तर्क नहीं रख पाया था। लो भाई तुम सोचते हो कि मैं पंचा की वजह से आ रहा हूं तो अपने ही सिद्धांत को वहां लगा लो। अगर तुम ये सोचते हो मैं तो हारा ही नहीं हूं। तुम अगर ये सोचते हो तो अपने सिद्धांत को लगा लो। हां। ये क्या बात हुई? मैं तर्क नहीं रख पाया था। आर्य समाज की ओर से थे अगर तुम तो वहां तुम्हारा सिद्धांत वीक पड़ा था निर्भय ना ऑन कॉल तर्क ना रख पाने की वजह से तुम जो है चर्चा को ना दिखाने का प्रयास कर रहे हो और कॉल रिकॉर्डिंग मैं काट छाट के करूंगा तो तुम तुमने भी तो की है इन्होंने ये भी कहा है कि मेरे पास भी है मैं भी कर रहा हूं ये भी उसमें आ जाएगा रिकॉर्डिंग कॉल रिकॉर्डिंग तो तुम्हारे पास भी तो है अगर हम काट छाट के दिखाएंगे तो तुम दिखा देना असली वाला तो अब जितने भी फॉलोअर्स हैं निर्भय आर्य के वो पूछे निर्भय से कि भैया ऐसा क्या हो गया है जो आप कॉल रिकॉर्डिंग सुनाने से मना कर रहे हो सुनाने दो ना क्या छिपाना है क्या दिक्कत है कॉल रिकॉर्डिंग से भाई भाई जब मैं तुमसे पूछ रहा हूं कि भैया निर्गुण सगुण कैसे हुआ तो जनता को सुनने दो ना तुम्हारा क्या जवाब है उसमें काहे की काट छाट जनता को सुनने दो ना तुम्हारा क्या जवाब है तो जितने लोग ये घूम रहे हैं चक्कर में निर्भय निर्भय निर्भय जितने लोग घूम रहे
02:27:34:14 हैं वो निर्भय से जाके कहे कॉल रिकॉर्डिंग जारी करने की अनुमति प्रदान करो। छोड़ दो दे दो मेरी कॉल रिकॉर्डिंग जारी कर दो। और उसने उसने भी की थी कॉल रिकॉर्डिंग तो उसको क्या दिक्कत है? कैसे काट दूं? मैं सिर्फ इतना काटूंगा जो मुझे लगेगा कि यहां पर्सनल हो रहे हैं हम लोग। तो पर्सनल चीजों को हम काट देंगे पर्सनल जानकारियों को। और भाई तुम सैद्धांतिक चर्चा कर क्यों रहे हो? जब तुम्हें विश्वास नहीं है ऑन कॉल क्यों कर रहे हो फिर या तो इतना विश्वास करो कि जिससे कर रहा हूं वो ऐसा ऐसा धोखा नहीं करेगा ये क्या बात हुई या तो तुम धोखेबाज समझ लो या फिर विश्वास पात्र समझ लो विश्वास पात्र है तो फिर धोखे की अपेक्षा मत करो और धोखेबाज है तो विश्वास पात्र मत समझो ठीक है तो जितनी जनता घूम रही है कि निर्भय ने निर्भय जीत गए निर्भय जीत गए वो जाके पूछे निर्भय से कॉल रिकॉर्डिंग के लिए मना क्यों किया है छिपाता वो है जो हारा होता है छिपाता वो नहीं जो जीता होता है। इसीलिए कहते हैं मत पड़ो किसी निर्भय के चक्कर में। मत पड़ो किसी संदीपन रॉय के चक्कर में। मत पड़ो ऋषि मंतव्य इत्यादि के चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में। इसीलिए कहते हैं। ठीक है। हां जी आप लोग अब अपनी बात बता दे कुछ। बिल्कुल बिल्कुल आपने तो पूरा क्लियर कर दिया। काफी जो आपकी जो वन
02:28:49:20 टू वन बात हुई है। उसको मतलब बताना जरूरी था क्योंकि जो भी पीछे बातें हुई थी ये जनता को तो नहीं पता उनको तो वही पता है जो सबके सामने जो लाइव में डिस्कशन हुआ है और इसको जो तीर तीस मार खान समझ रहे हैं तो इतना कोई तीस मार खान है नहीं जितना आप समझ रहे हो क्योंकि जब ऑलरेडी इस पर काफी बातें हो ही चुकी है इस लाइव स्ट्रीम में भी इसमें भी हो चुकी है और उसमें भी हो चुकी है जिसको भी भ्रम है जो अभी भी भ्रम में जीना चाहता है भैया वो स्वतंत्र है उसको तो कुछ कर ही नहीं सकते जितने लोगों को है पहली बात तो यह है कि अब चर्चा उसके यहां जाकर के तो होगी नहीं। हां, यह जरूर हो सकता है कि मैं कभी ऐसी जगह से निकलूू जहां निर्भय हो। वैसे मुझे अब मन नहीं है उससे चर्चा करने का। जो मैंने उसके वो वाली बातें सुन ली ना जो शुरू में उसने कही है। परंपरा को छील दूंगा, ये कर दूंगा, वो कर दूंगा। सबसे पहले अद्वैत को नष्ट करूंगा। तू कर लेना भाई तेरे में जितना दम हो। ठीक है? अब एक अद्वैती बात कर रहा है तुझसे। शंकर परंपरा का सैनिक बात कर रहा है। कर ले। और तुम ऐसे व्यक्ति नहीं हो कि हम तुम्हारे चैनल पे आए। तुम भाई होते तो हम तुम्हारे चैनल पे जरूर आ जाते। पर वो वो चीजें तुमने खत्म कर दी अपना घमंड दिखा करके अपना जो है झूठा अहंकार खोखले हो तुम निरत्तर हो रहे हो कॉल की चर्चा में वहां जाकर के डंका पीट रहे हो मैं बहुत बड़ी गन मशीन हूं
02:30:05:18 बताइए दूसरे की उदारता का ये परिणाम मिलता है उसे बड़े भाई की तरीके से तुम्हारी केयर कर रहा हूं शब्दों की मर्यादा रख रहा हूं तो तुम ये करोगे जा कर के कि मेरी मेरी गरज हो गई तुम्हारे यहां आने की आना है तो मेरे चैनल पे आओ और उनसे संदीपन जी से माफी मांगो ये है वो है ढिमका। वाह ये मुझे उम्मीद नहीं थी निर्भय तुमसे। हम नहीं नहीं नहीं ये तो है धोखा है। फरेब है धोखा है। फरेब है। अच्छा इन्होंने ये मैं देखता हूं हमेशा ये लोग फरेब और ये सब पता नहीं कहां से सीखते हैं कि कुछ जो चीज है उसको वैसे ना दिखाकर। हमारे अंदर यह नहीं है। हम वही दिखाएंगे जो हमने बोला होगा। जो हमारी बात हुई होगी हम वही बताएंगे। इनके में पता नहीं कहां से यह चीज आती है कि निर्भय अपनी लाइन में कहता है कि मैं तो आप आप भाई भाई कहते हो आप भाई का वो दिखाओ ना भाई तुम्हारे बारे में जब भी बातें हुई है ना लाइव में तो होता क्या है कि सैद्धांतिक विरोध है सैद्धांतिक विरोध होते हुए मैं बात को रख रहा हूं और उसमें तुम्हारी बात है तो पहले क्या है कि तुम छोटे भाई हो ना तुम्हारे लिए तू तड़ाग निकला ठीक है अब छोटा भाई है तो तू तड़ाग सैद्धांतिक विरोध के साथ तू तड़ाक निकल गया तो इक्वल टू क्या है अपमान समझ रहे हो आप
02:31:20:21 इस वजह से ऐसा लगा इस वजह से ऐसा लग सकता है कि भैया अपमान हो गया। मगर फिर मैं कोशिश करता हूं उसको सही करने की कि कहीं इसको अपमानित ना लगे। मैं करता हूं अपनत्व से। तू तड़ाक क्यों आया? क्योंकि छोटा है। तो तू तड़ाक आ गया। और सिद्धांतिक विरोध है तो सिद्धांतिक विरोध के साथ जब वो छोटे भाई होने के कारण तू तड़ाक आया तो वो ऐसा लग सकता है कि अपमानजनक। तो उसको समझो ना अपने भाई से। अगर तुम भाई कहते हो, भैया कहते हो, बड़े भैया कहते हो, समझो ना। बड़े भैया को उसका उनका पक्ष रखने का समय तो दो। तुमने अपने आप ही डिसाइड कर लिया कि मैं समझता नहीं हूं क्या? तो फिर मैं भी कह सकता हूं मैं समझता नहीं हूं क्या? वो तुम्हारी जो ऑडियो रिकॉर्डिंग है वो तुम्हारी है। ये क्या बात हुई भाई? विश्वास कहां है? विश्वास जो रिश्ते होते हैं ना वो विश्वास की मिट्टी से बनते हैं। जो घर होता है विश्वास की मिट्टी से बनता है। जहां विश्वास नहीं है वो रिश्ते नहीं है वो घर नहीं है। हम हम बिल्कुल बिल्कुल हां जी आपसे तो आपसे तो बातचीत अच्छे तरीके से हो रही थी। ऐसा तो था नहीं कि भाई कोई उसमें ऐसी कोई बात हो रही थी। वहां पर भी यह लोग वो जो था ना पहले से सोच लेना किसी चीज को प्रीजज
02:32:35:25 कर लेना। हम तो अच्छे तरीके से वार्ता तभी हो पाती है जब आप ऐसी चीजें नहीं करते हो प्रीजज नहीं करते हो चीजों को है ना आपने कहा मैंने इमीडिएटली वो पोस्ट डाल दी थी हालांकि मैं वहां कहीं किसी कार्य में व्यस्त था तो मैंने उसको लिखा पूरा मैंने कहा ये ये पॉइंट जरूर लिखने हैं उसमें सारी चीजें लिखी हमने क्षमा मांगी भैया जहां दयानंद जी ने लिखा था दयानंद जी का अपमान हो गया ऐसा आपको लगा तो अच्छा मैंने वो पोस्ट भी डिलीट कर दी ऐसा नहीं कि वो पोस्ट अभी भी मेरे उस पे है मैंने वो पोस्ट भी डिलीट कर दी क्योंकि हमें वह करना ही नहीं है भाई ऐसी चीज शुरुआत ही थी वह शुरुआत जब थी तब तब की पोस्ट थी अब तो मैं ऐसी पोस्ट अच्छा ऐसे हम जब भी अच्छा अभी भी आप देखोगे जो जो भी मैं पोस्ट कर रहा हूं इनके ये जब कुछ बोलते हैं ऐसी चीज हमारे आचार्यों के विरुद्ध में तब वहां पर भाषा की मर्यादा का मैं बड़ा ध्यान रखता हूं कि भैया ऐसी तो कोई बात तो नहीं लिख दी है लेकिन इनकी पोस्ट देखो तू कर ले क्या करना है देखते हैं धम जैसे किसी को उकसाते हैं ना किसी को प्रोवोक करते हैं। ज्यादातर फड़ होते हैं। ज्यादातर फड़ टाइप के होते हैं। इनके यहां धर्म है नहीं। दर्शन विज्ञान व्यवहार का सामंजस्य है नहीं। फड़ टाइप के होते हैं। सोचते हैं हमने बहुत ये रट लिया है कुछ तो बहुत बड़ी
02:33:50:26 तोप हो गए। मैं तो यही कह रहा हूं कि भैया हमारे जो अगर कंटेंट को यूज़ करना है तो उसको सही तरीके से ये मैं वहां कह रहा हूं। यह कह रहा है नहीं तुझे पुलिस पुलिस में जा तू वो कर देखते हैं मैं आपको दिखाऊं अगर इसका इनके चैनल पे जो अभी भी पोस्ट रखी हुई है उसमें कैसी भाषा की यूज की हुई है तो करते हैं ना कानूनी कवाई तुम्हें किसने रोका था संजीव शर्मा अवतारियों रियल नाम से आओ अब अच्छा लीगल लीगल खेलना है तो लीगल नाम से आओ बताओ तुम्हारा अच्छा तुम लोग क्या लीगल नाम से बैठे हो वहां पर ऋषि मंतव्य क्या है बताओ मेरे को और तुमने अपने नाम के पीछे जो आर्य लगाया है क्या यही आर्य नाम तुम्हें तुम्हारे जो माता-पिता थे उन्होंने दिया था बचपन में अपना जो आधार कार्ड दिखा देना कभी मैं भी दिखा दूंगा तो वहां पर पता चल जाएगा कि कौन रियल नाम से है और कौन रियल नाम से नहीं है तो इन इस तरह की बातें नहीं करनी है वहां पर आप सीधा लिखते हैं कि ठीक है जी आपने हमारी वीडियो पे अगर स्ट्राइक लगाई है अगर आप यह बोलते हो कि ठीक है आपने गलत लगाई है आप मत लगाइए हम आपके वीडियो को सही तरीके से पेश करेंगे तो मैं क्यों उस पर करता जब आपने गलत तरीके
02:35:05:27 से पेश किया तभी तो जी इसमें इसमें मुझे इसमें मुझे दो तीन बातें इसने मैसेज करके कही कि भैया लाइव में आपने मुझे हटाने के बाद ये खुद कहा था कि जो है मैं तैयारी करके आ जाऊं। तो भाई जो शब्द तुम रट के आए हो उस शब्द की तैयारी करके आऊं। अवतार की तैयारी तो अभी है ना। तुम उस शब्द को खोलो। उस शब्द को खोलो। मेरे पास पंचाव के अंदर जो सामग्री मांगी जा रही है वह नहीं है। ऐसा नहीं है। पंचाव क्या है? यह तो बताना पड़ेगा ना तुम्हें अगर मुझे नहीं मालूम है तो। मैं तुम्हें कोई ऐसा शब्द दे दूंगा जो तुम्हें नहीं मालूम होगा। तुमने सारी किताबें रट ली है क्या? दे दूंगा तुम्हें कोई ना कोई ऐसा शब्द। बिना गूगल किए और तुम नहीं कर पाओगे उसका। बिल्कुल बिल्कुल बहुत सारी चीजें हैं। न्याय शास्त्र में बहुत सारे ऐसे भाई कहां पर भाई देखो पंचाव का मतलब शाब्दिक क्या है? जिस पंच अवयव यही तो हुआ पंचाव का जिसमें मतलब पांच प्रकार की सामग्री हो तो ये तो शाब्दिक अर्थ हो गया। अब कहां पे वो किस लिए यूज़ हो रहा है ये तो तुम सामने वाले को बताओ ना। अच्छा फिर इन्होंने एक बात कही उदारता की कि उदारता को कायरता समझने के लिए समझने की तो आप भी इसमें पीछे नहीं रिप्लाई देने का समय क्यों लग रहा है? समय
02:36:21:06 मांगने समय करने की बात इसलिए कही थी क्योंकि तुमने फर्स्ट ऑफ ऑल तुमने किया था ₹1000 का ऐलान तुमने किया था और जिस पक्ष के लिए तुम कर रहे थे उसमें मैं भी था और तुमने अपने ऐलान में यह भी कहा था कि जो है वो कांग्रेसी वो ये राजनीतिक बातें कहीं अखिलेश इसलिए मुझे कटाक्ष करना था क्यों किया था केवल धार्मिक रहते ना राजनीतिक तो तुम हुए हम अच्छा इनको अगर वाकई में चैलेंज देना था तो ऐसा सीधा लिखते ना शंकराचार्यों के शिष्यों को चैलेंज है ये कांग्रेस और अखिलेश की परंपरा वाले बताओ और खुद को इन्होंने बीजेपी वाला सिद्ध कर दिया तो यहां कोई पार्टी का वो चल रहा है क्या हम यहां कोई राजनीतिक पार्टी की आपस की वार्ता चल रही थी क्या अगर आपको सही तरीके और ऐसे इस भाषा में कभी भी किसी को चुनौती नहीं दी जाती है। जिस भाषा में तुम चुनौती देते हो। चुनौती देने की जो भाषा है वह सभ्य होनी चाहिए। अगर आप चाहते हो कि वहां पर सभ्य वार्ता हो। अपनी जीत का दावा आपने वार्ता से पहले ही कर रखा है तो वो तुम्हारा बहुत बड़ा भ्रम है। हम
02:37:38:28 मेरे को तो शिवश जी रोकते हैं। ये तो शिवश जी कहते हैं कि मत मत जाओ नहीं तो मैं तो एक दो बार इनके चैनल पे भी गया था। एक बार गया भी था। अच्छा उस वक्त एक व्यक्ति बैठ के बात कर रहा था। जैसे मैं वहां पर इनकी लाइव में जुड़ा कम से कम चार पांच लोग इकट्ठे आ गए। इकट्ठे हो गए। अच्छा फिर अभद्रता भी करने लगे। मेरा मेरा ऑडियो कुछ वहां पर वो हो गया डिस्कनेक्ट तो वहां पर अभद्रता करने लगे तो एक एक बात और है। मैं जिनके पास जाता हूं जिनके पास जाता हूं यदि वो बिल्कुल ही गंगू तेली हैं। उनको कुछ नहीं मालूम। जैसे वो इंटरव्यू वाली बात है ना तो भाई वो यह सब चिल्लाते क्यों हैं? रटा रटाया ज्ञान क्यों चिल्लाते हो? उनसे कहो चिल्लाना बंद करें। या तो जो वो कह रहे हैं उसको साबित करें।
02:38:32:04 बिल्कुल ठीक है तो सारे हो गए हैं। संदीपन रॉय खुद महेंद्र पाल आर्य के साथ वो जो मौलाना है कन्व्टेड हिंदू जिसको ये लोग गुरु बनाकर बिठाए उनके साथ बैठकर बहुत अपमान करते हैं। कर वो व्यक्ति करता है। महेंद्रपाल आर्य बहुत अपमान किया। कल भी किया है। कल भी किया है उन्होंने। शायद कल एक लाइव किया है कि राम जो है ईश्वर के अवतार नहीं है। राम महापुरुष हैं। कल भी उन्होंने इन्हीं सब बातों को लेकर कुछ बातें करी हैं। ये करते ही रहते हैं अपने चैनल पर और कहते हैं दावा क्या करते हैं? मैंने शंकराचार्यों को हराया हुआ है शास्त्रार्थ में। मेरे सामने टिक नहीं पाएंगे।
02:39:12:00 पता नहीं कहां पर हराया हुआ है। कौन सी उसमें इन्होंने बातें करी हैं। हमारे आचार्य इन लोगों ने इन लोगों ने जो है खूब खूब अच्छे से अपमान किया है। आज इनको कोई मिल गया है ऐसा जिसकी वजह से इनको सुधरना पड़ रहा है। तो ये निग्रह हो रहा है इनका। चलिए ठीक है। बहुत बढ़िया रहा। शास्त्रवाल जी आप कुछ कहना चाहेंगे? बहुत बढ़िया आपने लिखाया भैया बहुत सारे संशय लोगों को दूर हो गए होंगे इस विषय को लेकर के और निर्भय को अपना उत्तर मिल गया होगा।
02:39:57:18 सबको ही मिल गया होगा जो भी ये इनके समर्थक हैं उनको भी जवाब जरूर मिल गया होगा इस बात पर। ठीक है। तो किरण जी आप बोले किरण जी कहां चले गए? चले गए क्या? चले गए। ठीक है। फिर सभी को समय देने के लिए बहुत-बहुत आभार कि अरे भाई मैं ना कांग्रेसी हूं ना बीजेपी वाला हूं ना सपा वाला हूं। मैं केवल शंकराचार्य का शिष्य हूं। अपने धर्म का धार्मिक हूं मैं। राम का भक्त हूं। बस और कुछ नहीं। भाड़ में जाए बीजेपी, भाड़ में जाए कांग्रेस और भाड़ में जाए क्या कहते हैं? सपा। जब तक वो धार्मिक धर्म का संरक्षक है कोई यह नाम इनमें से कोई भी नाम जब तक धर्म संगत है तब तक हम उनके अपने हैं जब जब धर्म संगत नहीं है तो मेरे लिए इनमें से कोई भी नाम कोई भी वैल्यू नहीं रखता है। ठीक है बिल्कुल बिल्कुल
02:40:56:02 चलिए ठीक है फिर सभी को जय श्री राम जय श्री राम जी ओम
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