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00:00:01:22 तो सभी को जय श्री राम। आप सब ने हमारी कल चर्चा देखी होगी। वही अभी कंटिन्यू होने वाली है और रिजवान जी आ चुके हैं। हम उनको ले रहे हैं। जी रिजवान जी। तो हम लोग वहीं से शुरू करते हैं जहां पे कल थे। और आपका फोन शायद गम हो गया था तो जिस कारण से वो चले गए। कुछ इनका कुछ टेक्निकल इश्यूज है शायद इनके यहां पर।
00:00:57:20 कहां गए रिजवान जी आइए हां जी कोई टेक्निकल फॉल्ट है क्या अपने आप आप क्विट हो क्विट कर जाते हो क्या चक्कर है नहीं नहीं वो क्या है ना कि मैंने अभी मैसेज में गया था मैसेज में जाने के बाद फिर कट हो गया ओ अच्छा अच्छा तो मैं वो कह रहा था हम लोग वही से शुरू करते हैं। जैसे प्रश्न यह था कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं? तो सर्वशक्तिमान के विषय में आपने यह तो नहीं बताया कि भाई अगर वो किसी भी कारण से अगर रुक रहा है बात मतलब कोई ऐसी चीज है जो वो नहीं कर रहा है और नहीं कर सकता है तो आप सत्यता वाली बात बोल नहीं रहे। मगर आपकी बातों से वही लगा कि वो नहीं कर सकता है। फिर उसके बाद जो है आपने कुछ रीज़ंस दिए थे कि वो इन कारणों से ऐसे वाजिब कारण है जिनकी वजह से उसका ना करना ही उचित है। और सवाल ये था कि वो कर सकता है कि नहीं। मतलब सवाल इस बारे में था कि एक होता है कि मैंने इस बात का चुनाव किया कि मुझे क्या करना है और क्या नहीं करना है। ठीक है? और एक हुआ कि मेरा चुनाव नहीं है। मेरे ऊपर वह लदा हुआ है। तो यह क्लियर नहीं हो पाया। यह क्लियर आपने नहीं किया कि वो लदा हुआ है या चुनाव किया है। आपने इस विषय में स्ट्रेट एक जो
00:02:12:26 साफ सुथरी बात है वो नहीं बोली। उसके बाद हम आगे बढ़े कि भाई जो आप कारण बता रहे हो ना करने का कि वो जो है गलत चीजें नहीं करता है। तो फिर यह हुआ कि दुनिया में जो बुराई हो रही है तो वो उसकी सत्ता से बाहर हो रही है कि नहीं हो रही। आपने बताया कि भाई उसको उनको टेस्ट के लिए भेजा गया है। वो एक इंपॉर्टेंट टेस्ट है। इसलिए वो नहीं बीच में दखल अंदाजी नहीं करता है। उसने बता दिया है क्या सही है और क्या गलत है। मगर वो बीच में दखलअंदाजी नहीं करेगा बताने के बाद। तो उसके बाद अ उसके बाद फिर ये हुआ कि आपने जब ये पूछा गया कि वो टेस्ट इतना इंपॉर्टेंट क्यों है? जिसकी वजह से स्ट्रोमा से निकलना पड़ रहा है। गुजरना पड़ रहा है लोगों को। तो आपने फिर बताया कि अ वहां पर जब उन्होंने इंसानों को बनाया था तो इंसानों को उन्होंने जो है जन्नत में जन्नत जैसी कोई जगह थी वहां पर छोड़ा था और जो विरोधी हो गए थे जिसको इब्लिश भी कहा गया है ना तो वो जो विरोधी हो गए थे उसने उनको बहकाया बहकाने की वजह से उन्होंने कुछ गलती की गलती के कारण फिर जो है इस्लाम के अनुसार जिसे ईश्वर माना जाता है अल्लाह कहा जाता है उसने उनको जमीन पर भेज दीजिए भेज दिया इस टेस्ट के लिए कि अब तुम में से जो सही व्यक्ति होगा वह वापस आएगा अन्यथा जो दूसरे होंगे उनको जो है दोजक इत्यादि या जो भी सजाएं उनकी होंगी वो दी जाएंगी। तो बात ये आ जाती है कि यह जो
00:03:28:00 अच्छाई और बुराई है वो जमीनी नहीं है। वहां पर भी अच्छाई और बुराई है। ये तो पहला पॉइंट है। वहां पर भी मतलब आपने कहा ना कि उसने मौत और मृत्यु और जन्म को उसने इवॉल्व किया। है ना? तो इवॉल्व से पहले भी अगर मृत्यु और जन्म को अच्छाई और बुराई के रूप में देखें तो वहां पर भी अच्छाई और बुराई एक्सिस्ट कर रही है। मतलब टेस्ट यहां पर है कि अच्छाई और बुराई दोनों चीजें दे दी और अब आपका टेस्ट हो रहा है। मगर अच्छाई और बुराई वहां पर भी है। तो क्या वहां पर भी टेस्ट चल रहा था? और दूसरी बात फिर वही वहां पर भी लागू हो जाती है कि जब उसे मालूम था कि जो इब्लिश है वो बहकाएगा तो उसने इब्लिस को बनाया ही क्यों था? क्या वहां भी कोई टेस्ट चल रहा था? अगर चल रहा था तो उस टेस्ट के पीछे की वजह क्या है? ये एक मिनट रुकिए क्योंकि बहुत सारा सवाल हो गए हैं आपकी बातों में। जी एक से ज्यादा सवाल हो गए हैं तो एक एक को लेने में फिर काफी टाइम लग जाएगा। और मैं फिर अपनी बात पूरी नहीं कर पाऊंगा। आप दूसरी बात कर देंगे। तो मैं चाह रहा हूं कि आज की जो हमारी बातचीत हो ना वो ऐसी हो कि जब मैं बोलूं तो आप जो है सुने और फिर जब आप बोलना चाहेंगे तो मैं खामोश हो जाऊंगा ताकि बात बस ये कह रहा हूं कि मैं जो पूछ मैं बस आपसे इतना निवेदन है मेरा कि मैं जो पूछूं
00:04:43:06 आप जो भी बोलेंगे आप उसमें मैं जो पूछा है उसका जवाब इंक्लूड होना चाहिए। ठीक है? बस मेरा इतना निवेदन है। ऐसा ना हो कि मैंने पूछा कुछ है और आप बहुत सारी चर्चा तो की मगर मैंने जो पूछा उसका आंसर नहीं दिया। पहली बात। दूसरी बात मैंने इसीलिए एक बार में अपनी मैंने इसीलिए एक बार में अपनी बात रखी कि भाई जिससे कि जो इससे रिलेटेड के जुल्म जो वहां पर ईश्वर की सत्ता है कि नहीं इससे रिलेटेड जो क्वेश्चन है वैसे तो बहुत सारे हैं वैसे बहुत सारे हैं मगर इससे रिलेटेड ईश्वर की सत्ता है कि नहीं जहां जुर्म हो रहा है तो आपने कहा कि यहां पे ईश्वर की सत्ता है मगर वो नहीं बोलता है क्योंकि टेस्ट है तो वहां पर भी ईश्वर की सत्ता है जहां पर इब्लीस ने उन्हें बहकाया तो वहां भी वो को नहीं बोला तो वहां भी टेस्ट था तो फिर जाना पड़ेगा कि उस टेस्ट की वजह क्या थी ये चीज बताइए मैं पहली चीज ये बताऊंगा अभी जो आपने बात बोली कि ईश्वर ने यहां पर टेस्ट लिया है तो वो दखल नहीं देगा यहां पे तो ये बातें मैंने कल भी नहीं बोली थी आप पूरा वीडियो देख लेना कि ईश्वर ने ये दुनिया में भेजा है तो वो टेस्ट के लिए भेजा है तो वो लेकिन मैं ये कह रहा हूं आप ना आप जो सवाल पूछा उसको क्लियर करिए अगर मैंने नहीं बोला आपने नहीं बोला होगा आपके भाव वो नहीं रहे होंगे आपके शब्द वो नहीं रहे होंगे
00:05:58:12 तो वो देख लेगा। आप जो अपनी है वो बता दीजिए। आपने क्या नहीं बोला इसकी वजह आप ये बताइए कि आपको बोलना क्या है? हां वही मैं बता रहा हूं। जैसे आपने कहा कि इब्लीस जो है वहां पे भी जैसे नाफरमानी है। इब्लीस में तो ईश्वर चाहता तो वो नाफरमानी नहीं करता। ये बात कल भी आई थी कि ईश्वर अगर चाहता तो वो नाफरमानी नहीं करता। तो वो कोई रोबोट तो हां मैं वही कह रहा हूं ईश्वर ने कोई रोबोट नहीं बनाया है कि उसने प्रोग्राम फिट कर दिया। अब वो उस प्रोग्राम के मुताबिक ही चलेगा। यानी डिसीजन लेने का हक हर एक को है। अब वो बात वहां पर भी वहां पर भी टेस्ट चल रहा है क्या? ना वहां कोई टेस्ट नहीं वहां टेस्ट नहीं वो हमें याद कराया जा रही है। ये बात वहां की हमें याद की जा रही कराई जा रही है कि ऐसा हुआ क्या था कि किस कारण से तुम अपनी उस उपलब्धि से नीचे नीचे उतर गए। उस उपलब्धि से आप नीचे उतर गए। ये आपको याद दिलाया जा रहा है ताकि आप वापस उस उपलब्धि को पाकर और इस जमीन से निकल कर और उन उसी उपलब्धि पर पहुंच गए। मैं कह रहा हूं हमारा सवाल ये था कि वो बुराई को बनाता है कि नहीं? तो आपने कहा बुराई को वो बनाने वाले
00:07:13:18 बनाते हुए भी उस पर दोष इसलिए नहीं लगेगा क्योंकि वो टेस्ट ले रहा है। तो यहां पे तो चलिए टेस्ट हो रहा है इसलिए उस बुराई का दोष नहीं लग रहा है। मगर वहां पे उसने बुराई को बनाया है तो वो दोष उस पर लगेगा कि नहीं लगेगा को बनाने का? सुनिए मेरी बात। सुनिए मेरी बात। उसने जो बुराई है उसको भी इवोल्व किया है ना। तो अब वो बताएगा कि तूने करना क्या है। जैसे मिसाल के तौर पर सूअर भी ईश्वर ने ही बनाया है। वो गंदगी खाता है। है ना? वो गंदगी खाता है। सूअर बनाया तो उसे भी सूअर नहीं है हर एक को लेकिन उसकी बॉडी जो है उसकी रिक्वायरमेंट गंदगी खाने की है। तो वो गंदगी ही खाएगा। यानी कि ईश्वर ने ये सोच कर बनाया था ना इब्लीस को कि बहकाएगा। इससे तो ये सिद्ध हो रहा है। ये किसने कहा कि ईश्वर ने ये सोच के बनाया कि इब्लीस जो है ना ऐसा करेगा। मतलब उसको नहीं पता था इब्लीस क्या करेगा? भाई उसको तो सब पता था उसको सब पता था और मैं वही कह रहा हूं जब उसको पता था उसने यहां पे यहां पे बुराई में यहां उसने बुराई बनाई है और वो रोक भी नहीं रहा है क्योंकि यहां वो टेस्ट ले रहा है वहां पे उसने बुराई बनाई है रोक नहीं रहा है वहां क्या है वहां भी टेस्ट ले रहा है क्या चक्कर
00:08:28:21 है इसमें बुराई क्या थी कि ईश्वर ने ये कहा कि समा मलाइका से देवताओं से कि तुम अरे भैया जब जब उसने बहकाया वो बहकाना तो बुराई है ना वहां ईश्वर की सत्ता है कि नहीं किसने बहकाया जब उसने बहकाया इब्लिशस ने जिसकी वजह से लोगों को सजा मिली वो नीचे आए फिर ट्रॉमा उनको झेलना पड़ रहा है उनको वो परीक्षा से गुजरना पड़ रहा है अगर वो बहकाता नहीं तो वो नीचे नहीं आते अगर वो बहकाता नहीं तो उनको सजा नहीं मिलती तो जब वो बहका जब वो बहका रहा है जब वो बहका रहा है तो वहां रोक सकते हैं ना उसको ईश्वर मत नहीं बहकाने बल्कि इब्लीस को बनाएंगे ही नहीं। बल्कि बहकाने वाले को बनाएंगे ही नहीं। बात ही खत्म। हां जी। सुनिए। वहां इब्लीस ने नहीं बहकाया है। शैतान ने बहकाया है। किसने बहकाया? शैतान को शैतान को किसने बनाया? चलिए ईश्वर की ईश्वर की सत्ता के बाहर है क्या शैतान? शैतान पहले मैं आपसे कहूंगा आपको समझने के आपको इस्लाम के बारे में बिल्कुल नॉलेज नहीं है इसलिए मुझे समझाना पड़ेगा और आप अगर समझना नहीं चाहते हैं तो वो एक अलग बात है। अब शैतान में एक लफ्ज है इसको समझना तो पड़ेगा ना कि इस लफ्ज से आखिर कहना क्या चाह रहे हैं? बात क्या हो रही है?
00:09:43:22 जो है ये मत बताइए शैतान क्या है? बस ये बता दीजिए वो ईश्वर की सत्ता से बाहर है या अंदर है? बस ये बता दीजिए। वो शैतान जो है ईश्वर ने उसको नकार दिया है। उसको अपने से दूर कर दिया है शैतान को। मैं कह रहा हूं ईश्वर की सत्ता से बाहर है कि अंदर है। ईश्वर का कंट्रोल है कि नहीं शैतान पर? शैतान पर। हां। है ना ईश्वर का कंट्रोल? तो फिर वो जब जानता है कि शैतान ऐसा कर सकता है, ऐसा करेगा तो क्यों बना रहा है शैतान को? अरे यार शैतान कोई शख्सियत नहीं है। अब यही तो आप है ना। शैतान क्या मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं विचार है चेतना है सोच है तत्व है कुछ तो है अब मैं समझा देता हूं ना जब आपको पता नहीं है तो पूछ लो ना अरे मैं कह रहा हूं भाई साहब वो जो भी है कुछ कुछ एलिमेंट है मगर मगर उसको बनाया तो ईश्वर ने है ना नहीं आप बताइए वो क्या है मैं क्यों बताऊं भाई साहब आप आप इसमें देर लगाओगे कि वो ये ये है जबकि मैं पूछ रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं क्या ईश्वर क्या ईश्वर उसको बनाने से रुक सकता था कि नहीं? ना बनाता। यानी
00:10:59:18 एक मिनट मुझे वो जो मैं मुझे जो पिक्चर है वो थोड़ी क्लियर कर लेती। यानी कि आपके अनुसार यहां पर बुराई का दोष जुर्म को रोकने वाला होते हुए भी ना रोकने की स्थिति में भी बल्कि उसको जन्म देने की स्थिति में भी उस बुराई का दोष उस पर नहीं जा रहा है कुरान के ईश्वर पर क्योंकि वो टेस्ट ले रहा है। अब टेस्ट क्यों ले रहा है? क्योंकि ये लोग जो थे वो ऊपर थे वो अच्छी अच्छे जीवन में थे। अब वो अच्छे जीवन से गिरे कैसे कि उनको बहकाया गया कि किसके द्वारा बहकाया गया कि शैतान के द्वारा। शैतान को बनाया किसने? शैतान को बनाया किसने? उसको इवॉल्व किसने किया भैया? वो भी ईश्वर ने किया। तो ईश्वर ही बुराई को बना रहा है जिसके कारण लोग बहक रहे हैं और फिर वो जब नीचे आ रहे हैं तो फिर ईश्वर उनको ट्रॉमा दे रहा है। वहां ट्रॉमा होने दे रहा है। कह रहा परीक्षा है। परीक्षा है तो फिर ऊपर क्या चल रहा था? वो भी परीक्षा थी। ऊपर क्यों बनाया? बुराई को ऊपर क्यों बनाया? हम मेरी बात सुनिए। आपको ही अगर बोलना है तो आप बोलते रहिए।
00:12:02:19 भाई साहब आप मुझे ये बताने में लग रहे हो। आप मुझे ये बताने में जा रहे हो। मैं क्या है आप आप थोड़ा सा कुछ आप ये बता आप आप शैतान आप शैतान पे बात करिए बोलिए क्या बोलना है? शैतान पे हां तो जैसे आपको नहीं पता ना शैतान अरबी वर्ड है। शैतान का मतलब होता है ये शैतान क्या है? नहीं पता है। इससे क्या मैं प्रश्न ये है शैतान को उसने बनाया है कि नहीं? अरे तो पहले शैतान है क्या? ये तो जान लो। उससे मतलब अगर शैतान अगर शैतान कुछ ऐसा है जिसको जिसको ईश्वर ने नहीं बनाया ये बता दो शैतान कुछ ऐसा है जिसका जिस पर उसका कंट्रोल नहीं है ईश्वर का ये बता दो ये तो क्लियर करो जब उसका जो चलो बताओ बताओ शैतान क्या है बताओ शैतान ही कौन है आपको पता ही नहीं है शैतान अरबी वर्ड है उसके शब्द के अर्थ से ही तो पता चलेगा बताओ बताओ यह मत बोलो आपको नहीं पता आपको नहीं पता इसमें देर मत करो आप वो बताओ है क्या
00:13:04:12 आपको इसमें ज्यादा इंटरेस्ट है कि आप मुझे क्या-क्या नहीं पता इसमें इंटरेस्ट नहीं है शैतान क्या है बताइए भाई साहब मैं वही कोशिश कर रहा हूं आप बीच में ठोक रहा आप बताने दीजिए ठीक है शैतान है इसका मतलब होता है दूर कर देने वाला दूर हो जाने वाला दूर कर देने ईश्वर से दूर करने वाला अब शैतान बोलते वो चाहते जो भी चाहते हम करते हैं या कोई भी करता है वो चाहत जो ईश्वर से दूर कर दे वो होती है शैतान। वो चाहत है। अब मैं अगर कोई चाहत करता हूं और वो चाहत मेरी अगर मुझे ईश्वर से दूर करती है तो वो मेरी चाहत शैतान होती है। और ये शैतान इंसानों में से भी होते हैं और जिनों में से भी होते हैं। दोनों में से होते हैं कि जो ईश्वर से दूर होने वाली चाहते करते हैं कि वो चाहते उन्हें ईश्वर से के करीब नहीं करती है बल्कि ईश्वर से दूर करती है। और फिर भी वो ये चाहते करते हैं। ये चाहते करते हैं। तो शैतान जो है हमारे अंदर की जो चाहत है हमें पता है कि भाई ये चाहत करने से मैं ईश्वर से दूर हो जाऊंगा लेकिन फिर भी मैं वो चाहत करके ईश्वर से दूर हो जाता हूं तो ईश्वर ने मुझे शैतान की पैरवी करने से मना किया है शैतान की इबा पीछे चलने से मना किया यानी उन चाहो वो एक
00:14:19:18 विचार है ये बात मैंने पहले बोली थी वो एक विचार है चाहत विचार है चाहत रूपी विचार मैंने ये बात बोली थी कि वो विचार हो सकता है मानसिकता हो सकती है मैंने सब बात बोली थी। खैर अब मैं आ रहा हूं। क्या क्या चाहत पे मैं मैं आ रहा हूं पॉइंट पे। क्या उस चाहत पे ईश्वर का कंट्रोल है कि नहीं? है ना? तो फिर उसने उसको क्यों रिवॉल्व होने दिया? तो उसने रूह डाल के एक लिबास पहना दिया ना तकवे का। तकवा पहना दिया। हिफाजत करना। उन चाहतों से कैसे हिफाजत करें अपनी कि हम ईश्वर से दूर ना हो। अरे मैं कह रहा हूं जो चाहत जो चाहत किसी को बहका सकती है, नीचे जाने का कारण बन सकती है, उसको ट्रॉमा दिलवाने का कारण बन सकती है, उसको ईश्वर क्यों बना रहा है? आपने कहा था कि नीचे सुनिए, मेरी बात ध्यान से सुनिए। प्रश्न यह था कि बुराई को बनाने की स्थिति में दोष तब नहीं लगेगा जब बुराई को बनाने वाला किसी एक विशेष उद्देश्य से टेस्ट के उद्देश्य से उसको बना रहा है। ठीक है? ये बात हमारी हुई है। अब मैं वहां पर सिद्ध कर रहा हूं कि उसने बुराई ऊपर भी बनने दी। बनाई ऊपर भी उसने बुराई बनाई। तो फिर दोष तो
00:15:34:21 वहां लग गया। यहां नहीं लगेगा। यहां टेस्ट है तो वहां क्या था? वहां क्यों बनाई? वहां चाह क्यों बनाई? तो ये किसने कहा? आप भाई साहब आप बताइए वहां चाहत क्यों बनाई दूर ले जाने वाली? उस पर हक था कि नहीं ईश्वर का? चाहत तो ऑलरेडी थी ना। भाई जो इब्लीस जो मायूस वो ईश्वर की सत्ता के बाहर थी। सत्ता के बाहर कैसे हो सकती है? ईश्वर के कंट्रोल के बाहर थी क्या वो चाहत? ईश्वर के कंट्रोल के बाहर तो कोई चीज नहीं है। तो फिर क्यों कह रहे हो? वो तो थी। ईश्वर उसको रोक सकता था ना उस चाहत को रोक सकता था ना तो रोबोट नहीं बनाया ना तो यानी कि वो रोक सकता यानी कि वो रोक सकता था मगर नहीं रोका तो रोबोट हो जाता ना फिर तो रोबोट से क्या मतलब है आपको उसको उसको क्या करना एक आदमी सुनिए मेरी बात सुनिए दो मिनट दो मिनट दो मिनट दो मिनट दो मिनट दो मिनट दो मिनट एक आदमी सलाम पीना चाह रहा है ना अब ईश्वर ने उसकी प्रोग्रामिंग ऐसी कर दी वो शराब पी ही ना सके। तो ये रोबोट ही हुआ ना। तो भाई साहब उसने तो रोबोट ही बनाए थे ना जो मेरी इबादत करे मेरे अनुसार चले। क्या बनाए थे उसने? कौन सा आदेश गलत बताया इंसान को?
00:16:49:25 ये बताओ कि ये आदेश उसका गलत है? कौन सा आदेश गलत है स्वर्ग में? मैं आदेश गलत की बात नहीं कर रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं। उसका उदेश उसका उद्देश्य उसका उद्देश्य क्या था बनाने का? उसमें उसमें उसने जो उसमें उसने जो उसको चाहत दी है ना बुरी चाहत उसको देने का उद्देश्य क्या था चाहत तो नब्स कर रहा है ना यार फिर आप कहां चले जाते हो का की बात हो दी किसने चाहत उसे उसका निमित्त कारण क्या है किस चाहत है तो इंसान जब करेगा ना जब इंद्रियों का इस्तेमाल करेगा चाहते कब करेगा है वहां पे इंद्रियां है कहां वहां जहां आता मैं जन्नत है वहां पर उन्होंने चार तो पहले वहां की बात कर लो। अरे वही की तो बात कर रहा हूं। वही की बात कर रहा हूं। शैतान ने बहकाया अच्छा ये बताओ एक मिनट शैतान ने बहकाने की बात कहां पे कही थी? हां। तो शैतान ने जो बहकाया फिसलाया उन चाहतों ने तो उससे पहले भी कुछ हुआ होगा ना। वो वो बता दीजिए। पहले क्या हुआ था? उससे पहले भी कुछ हुआ। जब अल्लाह ने कहा कि तुम दोनों क्या हुआ? भाई साहब वो क्या हुआ था वो बता दीजिए। क्या हुआ? हां जब कहा कि तुम दोनों जन्नत में ठहरो
00:18:05:03 और जहां से जी चाहे खाओ और पियो लेकिन इस दरख्त के करीब ना जाना। तो फिर शैतान ने उन दोनों को फिसला दिया उससे। उससे फिसलाया। वो शैतान वो चाहत वो बुराई ईश्वर की सत्ता के अंदर है या बाहर है। मैं ये पूछ रहा हूं। तो पहले बात सुनोगे फिर बाद में डिसाइड करना आप कि सत्ता से बाहर है या अंदर है पहले पूरी बात तो सुनोगे ना ठीक है भैया बोलिए बोलिए जब आदम को जन्नत में ठहराया तो एक कंडीशन रख दी कि ये एक सजरा है एक दरख्त है इसके करीब ना जाना तो शैतान जो है यानी शैतान कौन है वो चाहते इंसान जो करता है जो उसे दूर ले जाती है ईश्वर से वो चाहते ख्याल डालने लगी जो ईश्वर जो शैतान है वो चाहते उन्होंने वसवसा किया और हमारा जो एक पहलू सही होता है, एक पहलू गलत होता है। उनके बीच में मतभेद हुआ। ये उनके बीच में मतभेद हुआ। उस सजरे के करीब ईश्वर का वहां पर उद्देश्य क्या था बनाने का? यही ईश्वर ने तो जमीन में खाली उत्तराधिकारी बनाना था। लेकिन उसने इब्लीस ने पहले ही नाफरमानी करके और अपनी पूछ रहा हूं आदम को
00:19:20:04 बनाने का उद्देश्य क्या था? आदम को इंसान को बताया था कल कि ईश्वर की ताबेदारी करें। ईश्वर के आदेशों की पालना करके जीवन व्यतीत करें। तो जब उसका उद्देश्य ये था तो उसमें उसने बुराई को क्यों डाल दिया कि ये चार्ज कर सके। दूसरी केवल इबादत की थी उसके ना किसने डाल दिया बुराई? ईश्वर ने। दोनों नहीं ईश्वर ने उसको दोनों रास्ते बताए कि ये रास्ता तुझे मुझसे दूर ले जाएगा। ये रास्ता मेरे करीब कर देगा। आपने दोनों मैं पूछ रहा हूं दोनों मैं पूछ रहा हूं दोनों रास्ते क्यों बताएं क्यों बताएं ताकि इंसान सही रास्ता चुने और गलत चुनेगा तो उसे भुगत इससे उसका क्या उसका उद्देश्य था कि मेरी इबादत करे उसका उद्देश्य क्या है ये बताओ उद्देश्य हां तो उद्देश्य जो है उसकी इबादत करना यानी उसकी बात के ताबे हो जाना तो जब वो बताएगा ना कि जब ये है उद्देश्य जब यह है तो दूसरा रास्ता बताने की जरूरत क्या है दूसरा रास्ता बताने की जरूरत है ना? दूसरा रास्ता बताने की जरूरत है कि शायद वो मनोरंजन करना चाहता हो अपना। ये आप कह रहे हैं। तो आप बता दो। फिर उद्देश्य बता दो
00:20:35:08 दूसरा। उसने ये बताया है कुरान में के अगर अल्लाह अपने पास अगर कोई खेल करना चाहता तो वो अपने पास से कर लेता। तुम्हें बनाने की जरूरत नहीं पड़ती उसे। तो भाई साहब दूसरा रास्ता क्यों बताया? दूसरा रास्ता क्यों बताया? दूसरा रास्ता क्यों बताया? ये बताइए। उसने एक ये जो दुनिया है ये खेल तमाशा है। लेकिन उसने ये खेल तमाशे के लिए नहीं बनाई है। यहां पे सीरियसली कोई बात है जो समझने की जरूरत है वो ये है कि हम हम सबको ईश्वर के करीब होना है। वापस भाई साहब आप ट्रैक बदल रहे हैं। मैं कह रहा हूं दूसरा दूसरा दूसरी चीज को डालने का। जब उसका उदेश उसका उसका उदेश इबादत था तो दूसरी चीज को डालने का वो क्या था? मेरी बात सुनिए ईश्वर सर्वशक्तिमान है। इस पर हम बहस कर रहे हैं, बातचीत कर रहे हैं। है ना? तो ईश्वर के सर्वशक्तिमान होने पर मैंने आपको कल भी बताया था के तीन बातें बताई थी कि उसके जैसा कोई नहीं है और एक बताया था आपको के ये सब बातें हम कर चुके हैं उसके डीप में आए हैं वो चीज क्लियर हुई नहीं कि उस चुनाव है या दबाव है एक मिनट उसप चुनाव है या दबाव है वो तो क्लियर हुआ नहीं एक मिनट भाई साहब एक मिनट उसप चुनाव है
00:21:50:09 या दबाव है वो तो क्लियर हुआ नहीं अब उसके बाद आगे जब हम बढ़े हैं चलिए आपके वाजिब कारण को टटोलते तो उसमें यह बात आई है कि क्या वो बुराई को बनाने वाला है? तो आपने कहा कि भाई वो यहां पर बुराई में बुराई जो वो बना रहा है जो एक्सिस्ट कर रही है मगर वो परीक्षा लेने के कारण नहीं बोलता। उसने कानून तो बताया है। उसने कानून बता दिया है कि कानून लागू हो। उसने सब किया है। मगर वो तब भी उसके बाद अगर लागू नहीं हो रहा है तो बोल सकता है पर वो नहीं बोलता क्योंकि उसको टेस्ट लेना है। अगर वो बोल देगा टेस्ट खत्म हो जाएगा। तो उसको टेस्ट क्यों लेना है? क्योंकि ये लोग भटक के ऊपर से नीचे आए हैं। इनको सजा मिली है। उसने बोला एक मिनट अब ऊपर से ऊपर अब वो ऊपर से नीचे जो आए हैं वो इसलिए आए हैं क्योंकि ईश्वर ने जब अपनी इबादत करने के लिए आदम को बनाया तो उसने साथ में एक बुराई रूपी चाहत को भी बनाया जो आदम को दे दी तो उसको जब अपनी इबादत करवानी थी तो उसको जब एक मिनट रुकना एक मिनट रुकना आप जो भी बात कह रहे हो ना ये वो देनी लिखी है कहीं नहीं लिखी हुई है जो आप बोल रहे हो जो आप बोल रहे हो वही बोल रहा हूं। जो आप बोल रहे हो वही बोल रहा हूं। अब ठीक है। इस वाले इस चुके इंसान के अंदर बुराई ईश्वर ने रखी
00:23:05:15 और अच्छाई भी ईश्वर ने रखी। यही बोल रहा हूं ना और ईश्वर चाहता तो रोक सकता था। नहीं रखता। मतलब इंसान भी जो है बिल्कुल गलतियां करने से ही पाक हो जाता कि उससे कोई गलती हो ही ना। ऐसा बना तो उसने अपने उसने उसका उद्देश्य था कि मेरी इबादत करे। उद्देश्य ये नहीं था कि वो उसकी जांच करे कि अच्छाई चुनता है कि बुराई चुनता है। आदम को बनाने का उद्देश्य था। आदम को बनाने का उद्देश्य क्या था? आदम को बनाने का उद्देश्य क्या था? आदम को बनाने का उद्देश्य क्या था भाई साहब? इंसान को बनाने का उद्देश्य कल बताया था कि ईश्वर के आदेशों के ताबे हो। बस तो ये अगर ये उद्देश्य है तो अगर यह उद्देश्य है तो भटकाने वाली चीज डालने का कोई मतलब नहीं था जो भटका सके ऐसी चीज का क्रिएशन कोई भटकाने वाली चीज कौन डाल रहा है ये बताइए क्या ईश्वर डाल रहा है ईश्वर भटका रहा है तो ईश्वर के बिना आ रही है वो ईश्वर के बिना आ रही है शैतान अभी समझाया तो सही आपको चाहत वो जो चाहत का तत्व है वो वो ईश्वर ने बताया है कि नहीं? एक मिनट सुनिए आप। अब दो मिनट सुनोगे। बात पूरी होने नहीं देता। सुनिए मेरी बात। चाहत जैसे अभी मैं
00:24:20:19 चाहत करूं कि मुझे सच बोलना है लेकिन मुझे कहीं पर झूठ बोलने में फायदा नजर आ रहा है। तो मैंने चाहत क्या की? उस वक्त झूठ बोलने की क्योंकि मुझे मेरा फायदा नजर आ रहा है। लेकिन मुझे ये भी पता है कि झूठ बोलना गलत है। ईश्वर ने झूठ बोलने से मना किया है। लेकिन मैं ये चाहत कर रहा हूं कि झूठ बोलूंगा तो फायदा होगा। तो यह चाहत मैं कर रहा हूं ना। भाई मैं कर रहा हूं। ईश्वर थोड़ी कह रहा भाई क्या चाहत पे ईश्वर का कंट्रोल है कि नहीं बताइए। तभी तो रोकने के लिए उसने आदेश दिया है कि तुम झूठ मत बोलो। मतलब ये वो ये कंट्रोल है कि वो जो है शिक्षा देगा। मगर ये कंट्रोल नहीं है कि आपके माइंड में वो चाहत आए ही ना। ये कंट्रोल नहीं है। वो आप जब उस मकाम पे पहुंचोगे ना तब वो जहाज भी आना बंद। कंट्रोल है कि नहीं कि वो चाहत ना हां वो है ना ऐसे ऐसे ऐसी भी स्थिति है कित है उसके पास कंट्रोल है कि चाहत आए ना फिर भी वो चांद को आने दे रहा है ना हम वहां तक नहीं जा पा रहे ठीक है ठीक है ये वाली बात हम लोग बहुत कर चुके इसी से संबंधित एक अगली चीज है वो ये है कि जो ईश्वर के जो कंट्रोल है सत्ता
00:25:35:22 ठीक है वो सब जगह एक बराबर है या फिर ऐसा है कि जहां पर ईश्वर है वहां ज्यादा है और जहां पर ईश्वर नहीं है वहां पर कम है। हेलो हम मैं ये पूछ रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं कि ईश्वर का जो कंट्रोल है हेलो चले गए आवाज आ रही है? हेलो हां बोलिए हां बोलिए बोलिए मैं पूछ रहा हूं ईश्वर का जो है ईश्वर का जो कंट्रोल है वो ऐसा है कि जहां पर ईश्वर है वहां ज्यादा है या फिर सब जगह एक बराबर है पूरा कंट्रोल ईश्वर का कंट्रोल जो है ना हर चीज है हां पूरा मुकम्मल कंट्रोल है पूरा एक बराबर ऐसा नहीं है जहां वो बैठा है वहां ज्यादा है ऐसा नहीं है जहां वो बैठा है वहां ज्यादा है और जहां पर वो नहीं है जहां पर भी वो है नहीं नहीं बेटा कहां है वो भाई है कहीं पर वो है ना हां कहीं भी है चलो ठीक है हां हां ठीक है उसकी ज्ञान
00:26:52:14 मैं मेरा सवाल ये है कि कहीं एक जगह पर जहां पर वो है वहां ज्यादा है और पूरी पूरी दुनिया जहां पर वो नहीं है वहां पर कम है ऐसा तो नहीं है सब जगह के बराबर कंट्रोल है ना? हां, उसका कंट्रोल है सब जगह। ठीक है। बराबर कम ज्यादा तो नहीं है ना? बराबर बोले तो बराबर मतलब एक समान जितना जहां पर वो है जितना वहां कंट्रोल है, जहां पर वो नहीं है, वहां पर भी उतना ही कंट्रोल है। सब जगह बराबर कंट्रोल है उसका। एक समान। एक समान। अरे जितना यहां है उतना ही यहां भी है। कहीं कम ज्यादा नहीं है। बात सुनिए। बराबर कंट्रोल का मतलब जैसे मैं मेरी बात सुनिए। जैसे कोई अभी कल आपने कहा था ना कि उसने नियम बनाए तो उस नियम के आधार पे सारी चीज कंट्रोल में है। सूरज अपनी जगह पे कंट्रोल में है। चांद अपनी जगह कंट्रोल में है। हर चीज कंट्रोल में है। मेरा ये दो की बात मेरा प्रश्न दूसरा है भाई साहब। मेरा प्रश्न दूसरा है। मैं यह कह रहा हूं कि जहां पर वो बैठा जहां पर वो है एक्सिस्ट करता है जहां पर वहां पर ऐसा तो नहीं है। वहां ज्यादा कंट्रोल हो जहां पर वो
00:28:07:18 नहीं है वहां पर कम कंट्रोल हो। ऐसा तो नहीं है। जहां पर वो है और जहां पर ये सृष्टि है जो भी रचना है उसकी तो उन रचनाओं पे ही तो कंट्रोल होगा ना। रचनाओं पे ही तो कंट्रोल होगा जो भी उसने रचना की मैं ये कह रहा हूं जहां वो स्वयं है मैं कह रहा हूं जहां वो स्वयं है वहां का जो एरिया है जहां वो स्वयं है ठीक है वहां पर ऐसा तो नहीं ज्यादा कंट्रोल हो और जहां पर वो नहीं है सृष्टि उसमें थोड़ा कम कंट्रोल हो ऐसा तो है नहीं बराबर कंट्रोल है ना सब जगह मुकम्मल कंट्रोल है मुकम्मल मुकम्मल में तमाम चीजें आ गई तमाम कंट्रोल पूरा कंट्रोल है उसका पूरा पूरा अच्छा अब ये बता दीजिए कि जहां पर वो नहीं है वहां पर उसका कंट्रोल किस माध्यम से हो रहा है? कहां पर नहीं है? जैसे जहां आप हो वहां तो नहीं है ना वो सर्वव्यापी नहीं है ना ईश्वर आपका। सर्व्यापी है कि नहीं? मुझे देख नहीं रहा है। अभी मैं बैठा हूं। मुझे देख नहीं रहा है। मैं वही कह रहा हूं। किस माध्यम से देख रहा है भाई साहब? मैं वही कह रहा हूं। किस माध्यम से देख रहा है। एक गुण बताता हूं। वो बसीर है। बसीर बसीर
00:29:23:01 का क्या मतलब देखने वाला है। बसीर का मतलब यही है कि वो भाई साहब मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं वो सब जगह है कि नहीं ये बताओ। हां बिल्कुल सब जगह है। सर्वव्यापी है। हां लेकिन जात के ऐतबार से नहीं। जात समझ रहे हो जातो जात के ऐतबार से नहीं है। हां जात वो अपनी अपने कंट्रोल के रूप अपने कंट्रोल के ऐतबार से है। हां कंट्रोल के ऐतबार से हर जगह है। उसके इल्म के ऐतबार से हर जगह है। और उसकी रूह जो उसने हर एक चीज को अस्तित्व देने के लिए उसके रूह की वजह से वो हर जगह है। अच्छा तो ये इसमें से मेन चीज कौन सी है? जिसकी वजह से वो हर जगह है। एक मान ले कि वो अपनी शक्ति के कारण हर जगह है। ये मान सकते हैं। अगर एक एक बात एक शब्द से कहे तो अपनी शक्ति के कारण हर जगह है। हां उसकी शक्ति के कारण हर जगह है। ठीक है? ये समझ लो। तो जैसे वो यहां पर है और अपनी शक्ति के कारण उसका कंट्रोल सब जगह है। इसलिए कहा जाता है कि वो सब जगह है। वस्तुत वो एक जगह है।
00:30:36:14 अब वो देख रहा है और वो सुन रहा है। ठीक है? तो यानी कि उसमें और उसकी यानी कि उसमें वो और उसकी शक्ति ये दो अलग-अलग तत्व है। शक्ति और वो भाई आप देखिए आप आप जो बोल रहे हैं जुबान से ये दोनों अलग हो सकते हैं क्या ये आपके गुण है ना बोलना आपका गुण है देखना आपका गुण है सुनना आपका गुण है तो ये आपके अंदर ही है ना ये आपसे बाहर क्योंकि ये मुझसे जुड़ा हुआ है इस कारण से जो मेरी आवाज है मेरे जो दृष्टि है वो सब जगह नहीं है जितनी मेरी सीमा है वहां तक है अभी मैं पूछ रहा हूं उसकी सीमा तो नहीं आपकी तो वो एकद नहीं है। उसकी कोई हद नहीं है। मैं कह रहा हूं जब वो मैं ये कह रहा हूं जब वो यहां पर है तो उसकी शक्ति के कारण वो सब जगह उसका कंट्रोल है और कंट्रोल होने के रूप में आप ये कह रहे हैं वो सब जगह है। वस्तुत वो यहां पर है। तो अगर वो यहां पर है तो इसका मतलब ये मानना पड़ेगा कि उसकी शक्ति एक अलग तत्व है। है उसी की मगर वो तत्व एक अलग है। क्योंकि वो क्योंकि अगर शक्ति और उसको एक मान लोगे अगर शक्ति और उसको
00:31:51:18 एक मान लोगे तो यह कहना पड़ेगा कि वो स्वयं सब जगह है। तो वो तो दोनों वो तो एक मानते नहीं हो आप क्योंकि वो आप ये नहीं मानते कि सब जगह है। तो आप तो जैसे आपका मानना है कि वो शरीर धारण करके हर जगह है। हमारा ये मानना नहीं है। मेरा ये मानना नहीं है। शरीर धारण करके हर जगह है। मेरा मानना ये है कि ईश्वर सर्वव्यापी है। ईश्वर के तीन स्वरूप है। तीन स्तर हैं। निर्गुण निराकार के रूप में वो सब जगह है। फिर सगुण साकार के रूप में वो क्रियाशील है। कहीं पर है, कहीं पे नहीं है। फिर वो सगुण सगुण साकार सगुण निराकार के रूप में वो सगुण हो जाता है। फिर सगुण साकार के रूप में वो जो है शरीर धारण करता है। अब ये तो ये तो एक अलग बात रही। अभी अभी भाई साहब पूछ रहा हूं। अभी देखो भाई साहब भाई साहब टॉपिक भाई साहब टॉपिक टॉपिक चेंज हो जाएगा। अभी आप अभी आप
00:32:51:22 अभी आप अरे क्वेश्चन आप भाई साहब आपका अभी टॉपिक खत्म नहीं हुआ ना जो चल रहा है अभी आप ये समझिए कि मैं क्वेश्चन कर रहा हूं। यानी कि यानी कि इस्लाम के पास किसी की बातों का उत्तर तब है जब सामने वाला किसी प्रकार से गलत सिद्ध हो रहा हो अपनी मान्यता में आपकी मान्यता पहले मुझे जाननी पड़ेगी। ठीक है। फिर मैं उसको चेक जब मेरी मान्यता में खोट है तभी इस्लाम सही सिद्ध हो सकता है। अन्यथा इस्लाम सही सिद्ध नहीं होगा। वो खोट तो सत्य के तथ्य के आधार पर देखा जाएगा ना। खोट है या सत्य है? भाई सत्य है या अभी आपसे एक न्यूट्रल व्यक्ति क्वेश्चन कर रहा है। आप ये मान के चलो उसका कोई मान्यता है ही नहीं। अभी वो इस्लाम के द्वारा एक मिनट भाई साहब अभी वो इस्लाम के द्वारा क्लेम अभी जो इस्लाम के द्वारा क्लेम किए जा रहे हैं उस पर क्वेश्चन कर रहे हैं। आप मुझे बता दो
00:33:56:04 एक मिनट बोलिए। एक मिनट मैं बोल दूंगा। ठीक है? ताकि बात सही होती रहेगी। आप विषय को चेंज मत करिएगा। आपसे सवाल किया गया उसका आंसर दीजिएगा। मुझे तो सिर्फ ये बताना ईश्वर सर्वशक्तिमान है। बस मैंने क्या मेरा क्वेश्चन क्या है? मेरा क्वेश्चन ये है कि वो शक्ति एक अलग तत्व है ना। क्योंकि अगर शक्ति को पूरा का पूरा वही मान लोगे तो फिर हमें यह मानना पड़ेगा कि ईश्वर सर्व्यापी मगर आप सर्व्यापी तो मानते नहीं है। एक देश मानते हैं आप उसकी कंट्रोल के रूप में मानते हैं। सर्वव्यापी अभी बोला ना सर्वव्यापी जो है वो उसके गुणों के गुणों के आधार पर है। अरे तो मैं वही तो कह रहा हूं। शक्ति के कारण उसकी शक्ति जो पूरे में फैली हुई है जिसके कारण कंट्रोल है उसके कारण उसको आप सर्व्यापी कहते हैं मगर वो स्वयं से तात्विक रूप से वो सब जगह नहीं है तत्व से वो सब जगह नहीं है ना वो उसकी जात के ऐतबार से हर जगह नहीं है उसकी सिफात के ऐतबार से हर जगह वो जिसे आप जात कहते हो उसी को शायद मैं तत्व कह रहा हूं जात की जात के अनुसार वो एक जगह है ठीक तो यानी कि शक्ति की जात और जो उसकी जात है दोनों में अंतर है जात में
00:35:10:04 अंतर कैसे है भाई ये मानना पड़ेगा देख पा रहे हो जात अगर भाई साहब जात में अंतर नहीं है तो ये कहना पड़ेगा जात के अनुसार भी वो सब जगह है क्योंकि उसकी शक्ति सब जगह है उसमें आप मुझे बता दो शक्ति और मैं पूछ रहा हूं मैं ये पूछ रहा हूं शक्ति और उसमें अंतर क्या है? क्या अंतर है? ये बताओ वही बिलकुल एक मिनट जैसे आप मुझे वीडियो कॉल पे देख भी रहे हो लेकिन मेरे पास मौजूद नहीं हो है ना लेकिन देख रहे हो अपनी जगह पे होते हुए भी मुझे देख रहे हो है ईश्वर जो है जहां भी वो है वो वहीं से हर एक चीज को उसकी ज्ञान परिधि में लिए हुए है उसको इंटरनेट के मैं आपको इंटरनेट और मोबाइल उपकरण के माध्यम से देख रहा हूं इस तात्विक रूप से मैं और इंटरनेट और मैं और मोबाइल अलग-अलग है अलग-अलग मानना पड़ेगा। अगर अगर सुनिए अगर मैं जात के अगर मैं जात के अनुसार आपके समक्ष नहीं हूं फिर भी आपको देख रहा हूं तो एक माध्यम है मेरे पास जिसके अनुसार मैं देख रहा हूं। अगर ये माध्यम और मुझ में अंतर है तो ये कहना पड़ेगा कि मैं वहां पर नहीं हूं आपके समक्ष और अगर इसमें और मुझ में कोई अंतर नहीं होगा माध्यम में और मुझ में तो फिर ये कहना पड़ेगा
00:36:25:08 कि मैं इस माध्यम के रूप में मैं भी वहां पर हूं। समझ गए आप? तो अभी मैं पूछ रहा हूं आपसे कि देखना एक मिनट हां हां हेलो हम बोलिए हेलो बोलिए आप बोल रहे है जात के हिसाब से कोई माध्यम आप जो मुझसे बात कर रहे हो किसी माध्यम के जरिए कर रहे हो तो ईश्वर का ऐसा क्या माध्यम है कि उस माध्यम से जो है वो हमें देख भी रहा है सुन भी रहा तो यही तो उसकी शक्तियां है उसने जो है
00:37:07:10 उसका माध्यम है उसकी शक्ति उसकी जो शक्ति है जो शक्ति को जानना पड़ेगा ना तो वो शक्ति और उसमें अंतर क्या है ये बताइए सर्वक्तिमान है ये उसी का एक अंग है ना मैं वो सर्वशक्ति मत्ता उसकी खंडित कर रहा हूं उसकी सर्वशक्ति मत्ता सिद्ध नहीं हो रही क्योंकि अगर हम ये कह रहे हैं ईश्वर सब जगह नहीं उसकी शक्ति है। एक मिनट मैं बता रहा हूं। आपको मैं बता रहा हूं मेरा मेरा क्या है? अगर हम ये कह रहे हैं ईश्वर सब जगह नहीं है। उसकी शक्ति सब जगह ईश्वर तो एक जगह है जात के अनुसार। तो इसका मतलब जात के अनुसार उसकी शक्ति में और उसमें अंतर है। क्यों? क्योंकि शक्ति सब जगह है और वो एक जगह है। तो जात के अनुसार क्योंकि वो एक जगह है इसलिए जात के अनुसार शक्ति और उसमें अंतर है। अब अगर शक्ति और उसमें अंतर है तो जाहिर सी बात है कि शक्ति किसी ना किसी परिपेक्ष से कम होगी। नहीं तो अब उसके बराबर हो जाएगी हर तरीके से तो फिर शक्ति भी ईश्वर हो जाएगी। दूसरा ईश्वर मिल जाएगा। दूसरा तत्व मिल जाएगा। ठीक है? वो तो हो नहीं सकता। तब होगी। एक मिनट लेट मी फिनिश। भाई साहब एक मिनट अगर शक्ति कम अगर शक्ति एक मिनट भाई साहब शक्ति अगर कम होगी तो फिर हमें
00:38:22:12 ये मानना पड़ेगा कि जितना कंट्रोल पुराण के अनुसार जो ईश्वर है उसका वहां पर है जहां वो है उतना कंट्रोल उसका सब जगह नहीं है तो उसका जो है शाश्वत सत्ता उसकी सिद्ध नहीं होगी वो वो देश जो है आप जो वही आप कह रहे है ना कि बाधा उसके बीच में तो कोई बाधा है नहीं ये तो आप कह रहे हैं कि बाधा है। मैं तो कह रहा हूं कोई बाधा नहीं है। ज्ञान भी बस मैं ये पूछ रहा हूं भाई साहब शक्ति शक्ति और उसमें अंतर क्या है? शक्ति और उसमें अंतर क्या है? जैसे आप ईश्वर को अलग कर रहे हैं और उसकी शक्ति को अलग कर रहे हैं। वाह वाह बहुत बढ़िया बात। की दो नहीं है। आप अलग कर रहे हैं। आपके लिए शक्ति है। आप अलग कर रहे हैं। आप अलग कर रहे हैं। मैं नहीं कर रहा। मैं कह रहा हूं कि वो होना चाहिए वही शक्ति के रूप में। भाई मैं तो कह रहा हूं इसके हिसाब से वो वहां नहीं जा सकती है तो आप अलग कर रहे हैं। भाई साहब भाई साहब एक मुझे आप मुझे आप मुझे इतना रिजवान जी रिजवान जी रिजवान जी आप मुझे रिजवान जी आप आप मुझे इतना बता दीजिए कि किस मामले में शक्ति और
00:39:37:18 ओश में अंतर है बस इतना बता दीजिए किस मामले में अंतर है अंतर मैंने बताया क्या है मैंने बताया आप बता दो ना भाई साहब क्यों फिजूल का बोल रहे हो आप बीच में आप बीच में बोल जाते हो आप सुनिए मेरी बात अब नहीं बोल रहा आप अपनी बात बोले अब नहीं बोल रहा अपनी बात बोले तो ईश्वर और उसकी सारी पावर जो है वो उसी से जुड़ी हुई है। अलग नहीं है। अलग नहीं है। ईश्वर और उसकी और उनहीं पावर से वो हर चीज पर कंट्रोल किए हुए है। हर चीज पर कंट्रोल किए हुए है। और कुछ को उसने दिक्कत है देखिए जी समझने का प्रयास करिए। मेरा क्वेश्चन कुछ और है। मेरा क्वेश्चन कुछ और है। क्वेश्चन ये है अगर आप ये कह रहे हैं कि क्वेश्चन मेरा ये है कि अगर आप ये कह रहे हैं कि ईश्वर सब जगह नहीं है तो फिर और फिर आप कह रहे हैं उसका कंट्रोल सब जगह है क्योंकि उसकी शक्ति सब जगह है तो हमें ये मानना पड़ेगा ना कि उसकी शक्ति में और उसमें कुछ अंतर है तभी तो शक्ति के हर जगह होते हुए भी हम लोग ये कह रहे हैं कि ईश्वर सब जगह नहीं है। समझ रहे हैं? मैं समझने का प्रयास करिए। इसको आप को जात को
00:40:55:15 जात को ऐड कीजिए कि जात के ऐतबार से वो जात के ऐतबार से हर जगह नहीं है। जात केतबार से शक्ति और उसमें अंतर है ना कहां हुआ अंतर कहां हुआ? तो नहीं है। नहीं है। कहां हुआ? अंतर कहां हुआ? पहले अंतर इस तो फिर शक्ति जान के तो फिर अंतर क्या है? पहले तो ये बता दो। कोई नहीं उसकी अगर सुनिए सुनिए उसकी दिव्य दृष्टि अगर असीमित है अगर उसकी दिव्य दृष्टि असीमित है तो वो उससे दूर होगी ही नहीं उसकी दिव्य दृष्टि उससे दूर होगी नहीं वो जहां चाहे देख सकता है जितना दूर चाहे देख सकता है भविष्य भूतकाल सब देख सकता है बिल्कुल देख सकता है बिल्कुल देख सकता है मगर वो जो दिव्य दृष्टि है वो जो दिव्य दृष्टि है वो कंट्रोल नहीं कर पाएगी उसको दिखाएगी तो वो वो सारे काम नहीं कर पाएगी तो देख वो वो वो सारे काम नहीं कर पा एक मिनट वो वो सारे काम नहीं कर पाएगी जो देखने वाला है कर पाएगा वो दिव्य दृष्टि उसको सूचना तो वो एक मिनट भाई साहब वो दिव्य दृष्टि वो दिव्य दृष्टि उसको सूचना तो देगी वहां क्या हो रहा है मगर वहां कंट्रोल कि ये होना चाहिए या नहीं होना चाहिए ये उसको नहीं दे पाएगी उसके लिए उसका हाथ भी उतना ही लंबा होना चाहिए अगर
00:42:10:24 वो अगर वो किसी शरीर में है तो जो भी है जिस तरह से भी कंट्रोल करता है उसका सब कुछ उतना ही लंबा होना चाहिए असीमित असीमित सीमित अगर असीमित है अगर उसका सब कुछ उतना ही असीमित है तो हो गया सर्व्यापी अच्छा मैंने कल एक बात भाई आप कंट्रोल की बात कर रहे हो ना तो जितने भी रोशनी से बनाए हुए देवता है वो सब कंट्रोल में है सब कंट्रोल में है अब देवता फैले हुए देवता फैले हुए है देवता तो फैले हुए अब जो इंसान की बात हो रही है तो इसको आजादी भी दी है आजादी भी दी है। समझ रहे हो? उसका एक पूछ रहा हूं। मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं कि अगर उसकी शक्ति सब जगह है, सर्वव्यापी है तो जात के हिसाब से क्योंकि वो सर्व्यापी नहीं है तो जात के हिसाब से जो है शक्ति और उसमें अंतर आ गया ना जात का? क्योंकि मैं बता तो रहा हूं। जात के हिसाब से ईश्वर है वो एक जगह है और उसकी शक्ति सब जगह है। शक्ति सब जगह है तो आ तो गया अंतर तो कैसे आया अंतर अरे
00:43:27:13 शक्ति सब जगह है ना उसने नियम बनाए ना उसने नियम बनाए आप खुद मान रहे हो उसने नियम बना हर नियम से बात मैं कह रहा हूं भाई साहब नियम से बात से एक जगह एक मिनट एक मिनट आप मुझे बताइए से ईश्वर एक जगह है जात से ईश्वर एक जगह जात से ईश्वर एक जगह है हां वो समय से परे है समय से परे है ईश्वर एक जगह है कि नहीं भाई साहब मैं पूछ रहा हूं स्थान देश की बाधा से बाधित है ना आप कैसे कर सकते हो उसका आप ये कह दो हमें नहीं पता इस बारे में ये कह दो हम नहीं कह सकते ये कह दो घुमा क्यों रहे हो तो जब तो ये जब कहेंगे जब वो बताएगा अब उसने जो बताया वो तो आप बता नहीं रहे हो उसने जो बताया है इसका मतलब आपको नहीं पता है वो जांच के हिसाब से एक जगह है कि नहीं है कि क्या है मामला मेरे को मुझे बताने दीजिए आप मुझे बताने दीजिए बताइए आप यही जानना चाह रहे हो ना कि इस्लाम के हिसाब से ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं यही जानना चाह रहे हो
00:44:42:21 अभी उसके हम इंड में आ गए भाई साहब वो वो क्वेश्चन के इंडेक्स में आ गए जात के हिसाब से ईश्वर एक है ना आप पैरामीटर लगा रहे हो कि ये होगा तो सर्वशक्तिमान मानूंगा फिर वही बात पैरामीटर लगा रहे हो अभी सवाल क्या चल रहा है भाई साहब अभी सवाल क्या चल रहा था भाई साहब सवाल सर्वशक्तिमान होने का है तो वो उसके गुणों से हम समझेंगे तो एक गुण जैसे दिव्य दृष्टि आपने जो बताया था वो समझ गए पूरी तरीके से एक समान वो है शक्तिमान मगर अभी जो है अगर आप उसकी शक्ति को उससे अलग करेंगे अगर यह कहेंगे कि उसकी शक्ति तो सब जगह है मगर वो नहीं है तो फिर वो समान रूप से सर्वव्यापी शाश्वत शाश्वत रूप से सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होगा। अच्छा आप कौन सी शक्ति उससे अलग करना चाह रहे हैं? कोई एक शक्ति बताइए जिसे उससे अलग कर आप कर रहे हैं कि ईश्वर सब जगह नहीं है उसकी शक्ति सब जगह है। अगर ईश्वर नहीं है उसकी मैंने जात के ऐतबार से कहा ईश्वर एक है ना तो भाई साहब भाई साहब वही तो जात के जात के ऐतबार से उसकी शक्ति और उसमें अंतर आ गया ना
00:45:58:12 जात के ऐतबार से ईश्वर एक जगह है उसकी शक्ति सब जगह है तो अंतर आ गया ना आप एक जगह तो आप ठहरा रहे हो तो आप क्या कह रहे हो एक जगह नहीं कह रहे हो आप एक जगह नहीं कह रहे हो मैं कह रहा हूं तो क्या कह रहे हो एक जगह आपके समय ये कह रहा ईश्वर आप क्या कह रहे हो? आप क्या कह रहे हो? ईश्वर जो है वही मैं आपको बताता हूं कि कुरान में ये आया है कि वही अव्वल है, वही आखिर है, वही जाहिर है, वही बातिन है। यानी जो कुछ भी हमें नजर आ रहा है हमारे आपको मैं भाई साहब आपका वीडियो दिखा दू। आपने कहा है जांच के हिसाब से एक जगह है। क्या चीज? हां तो वो जगह हम नियंत्रण वो जगह हम जो नहीं डिसाइड कर सकते ना मैं जगह मैं डिसाइड कर रहा हूं वो मैंने डिसाइड किया कि वो जम्मू कश्मीर में है कि ताजमल में से मैंने कहा मैं कह रहा हूं जहां भी है एक जगह है सब जगह नहीं है जहां भी है वो समय से परे है वो जगह कितनी बड़ी है कितनी छोटी है उस बात ही नहीं
00:47:05:22 वो अनंत रूप से नहीं है और लोग अनंत रूप से नहीं है ऑल लोग वो बहुत बड़ी जगह है मगर अनंत जगह नहीं है जहां अनंत रूप अनंत रूप अनंत रूप मतलब कह रहे हैं नहीं मैं कह रहा हूं कि वो जहां भी है जो उसका वो जहां भी है वो एक देसी है वो सब जगह नहीं फैला हुआ असीमित रूप से नहीं फैला हुआ सर्वव्यापी नहीं है वो या है तो वो तो है कंट्रोल कंट्रोल जब हर जगह है उसका तो उसकी शक्तियों से है ना कंट्रोल तो वो हर जगह हुआ ना क्या मैं भाई साहब प्रश्न क्या चल रहा है आपको समझ में नहीं आ रहा जो मैं बोल रहा हूं मैं क्या पूछ रहा हूं मैंने पूछा ये है मैंने मैं बता देता हूं मैं कंट्रोल की अभी बात नहीं हो रही उससे आगे आ गए शक्ति पे आ गए अब आप पीछे जा रहे हैं हम आगे आ चुके हैं तो क्या है मैंने पूछा ये है मैंने पूछा ये है सुनिए मैंने पूछा ये है कि जहां पर वो है। ठीक है? अब आप कह रहे हो कि जात के आधार पर वो एक जगह है। अब वो वो बहुत अच्छी जगह है। बहुत दिव्य जगह है। बहुत अच्छी जगह है। ठीक है? और वो
00:48:20:26 समय से भी परे है। ठीक है। बढ़िया बात है। वो जगह असीमित है। असीमित है। मतलब वो जगह सब जगह फैली हुई है। वो जगह सब जगह फैली हुई है। ना असीमित मतलब वो इस समय से परे है और वो जगह का हम जो है ना इहता नहीं कर सकते। हमें अपने दायरे में नहीं ला सकते। बस ये समझ लीजिए कि वो असीमित जगह है। लाम मक्का जिसे बोलते हैं। असीमित जगह है तो फिर यहां पर भी हो गई ना वो वो परे वाली जो सीमा है ना एक मिनट एक मिनट एक मिनट वो जो परे वाली सीमा है ना वो क्रॉस कर गई अगर असीमित है तो। वो क्योंकि यहां पे भी होना चाहिए फिर। हां तो हां तो वो समय से परे है। समय की बात कर रहा हूं। मैं समय की बात कर रहा हूं क्या भाई साहब समय से तो मैंने समय मैंने समय का कोई सवाल ही नहीं किया है तो जो भी तो मैं ये कह रहा हूं जो क्रिएशन उसने की है ना क्रिएटर ने वो उस क्रिएशन के अंदर नहीं है केबार से उसके अंदर नहीं है अंदर मगर उसकी शक्ति है ना हां उसके पावर्स उसके अंदर है उसके पावर है ठीक तो अब जाट के ऐतबार से उसके पावर में और उसमें में अंतर आ
00:49:35:27 गया ना कैसे आया? अरे भैया वो नहीं है क्रिएशन के अंदर। उसकी पावर है क्रिएशन के अंदर। पावर है ना? तो उस पावर से ही तो वो हिदायत करेगा क्रिएशन को। अच्छा मैंने क्या करेगा? अगर जांच के हिसाब से जांच के हिसाब से वो यहां नहीं है। मगर उसकी शक्ति यहां है। तो जांच के हिसाब से अंतर आ गया ना उसकी शक्ति और उसमें कैसे आ गया अंतर? भाई रूह जो आत्मा जो है वो उसके उसके आदेश से ही तो है अपनी मर्जी से मैं बता रहा हूं कैसे आ गया अंतर क्या ईश्वर जो है वो जात के हिसाब से अपनी क्रिएशन में है
00:50:18:26 जात के ऐतबार से नहीं है अब देखिए दूसरा क्या जो उसकी शक्ति है वो जात के ऐतबार से क्रिएशन में है मैं क्या पूछ रहा हूं भाई साहब देखिए आप जितना विषय करने का प्रयास करेंगे मैं आपको फिर खींचूंगा। मैं आपको फिर पॉइंट में ले आप भी तो जवाब दो कुछ मैं क्या पूछ रहा हूं? आप भी जवाब दो। क्या आपके अंदर ईश्वर जात के ऐतबार से है? ईश्वर हमारे अनुसार सर्वव्यापी है। तो जांच के ऐतबार से वो हमारे अंदर भी है। ठीक है? अंदर है। ठीक है। आपने कहा अब होगा क्या? अब सुनिए सुनिए भाई साहब। अब होगा क्या? क्वेश्चन एक मिनट एक मिनट भाई साहब भाई साहब एक मिनट अब इसमें क्या होगा भाई साहब भाई साहब इसीलिए इसी आपके क्वेश्चन का जवाब नहीं दे रहा था एक मिनट भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब एक मिनट मैं इसीलिए आपके सवाल को बात के लिए रख रहा हूं जिससे कि हमारा विषय ना हो विषयांतर टॉपिक छूट जाए क्यों क्योंकि जब मैं कोई जवाब दूंगा रिजवान जीवान जी जब मैं सुनिए जब मैं कोई
00:51:34:00 जवाब दूंगा रिजवान जी रिजवान जी रिजवान जी रिजवान जी जब मैं कोई जवाब दूंगा तो होगा क्या उससे आपको बहुत सारे क्वेश्चन निकलेंगे ठीक है अब वो जो क्वेश्चन निकलेंगे वो क्वेश्चन पे क्वेश्चन उधर चलते चले जाएंगे ये जो टॉपिक होगा अपना वो रह जाएगा तो अरे तो कोई आप ये नहीं चाहते कोई चैप्टर खत्म निष्कर्ष पर पहुंचे तो खत्म करने के लिए दो शब्द में भी हो सकता है कि ईश्वर सर्वगुण संपन्न है। सर्वशक्तिमान है। उस ईश्वर को मैं मानता हूं। जिसको मान ठीक है तो चर्चा बंद करें हो गया। दो शब्द में हो गया। आपने कह दिया सर्व शक्तिमान है। मान ले कोई क्वेश्चन नहीं। दो शब्द में हो गया। मैं जिस सर्वशक्तिमान को मानता हूं ना। अब आप मुझे बताइए आप भाई साहब देखिए आप जो है ना चर्चा से पलायन कर रहे हैं फिलहाल फिलहाल आप चर्चा से पलायन नहीं करूंगा दो घंटे ये नेता नगरी के लोग होते हैं सुनो नेता नगरी की लड़ाई कैसे होती है अच्छा तुमने ये क्यों किया अरे फलाने सन में तुमने भी तो किया था भाई आप अगर आप आपका अगर सिद्धांत मजबूत है आपका धर्म और ब्रह्म का ज्ञान मजबूत है तो उसको सिद्ध करने के लिए आपको सामने वाले को गलत सिद्ध करने की जरूरत
00:52:49:03 क्या है दूसरे के गलत होने से आप एक मिनट भाई साहब भाई साहब एक मिनट भाई साहब जी मेरी बात पूरी तो होना चाहिए मैं कुछ मिसाल दे रहा हूं मैं कुछ उदाहरण दे रहा हूं दूसरे के गलत होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता आपको अपने आप को सही सिद्ध करना ही होगा ना तो अगर वो आप मुझे अभी गलत सिद्ध कर भी देंगे आपका ईश्वर सर्वव्यापी है तो ये कर लो वो कर लो तो उसमें आपका पक्ष सिद्ध नहीं होगा आपको अपना पक्ष सही सिद्ध करना होगा एक एक बात मैं उदाहरण दे रहा हूं। मैं उदाहरण दे रहा हूं। भाई साहब उदाहरण दे रहा हूं। उदाहरण दे रहा हूं। बिना टिकट के कोई व्यक्ति ट्रेन में पकड़ा गया। अब उससे हम कह रहे हैं अरे अभी तो इतने सारे ट्रेन में बिना टिकट के हैं। तुम भी तो बिना टिकट ये भी तो बिना टिकट है। तो इस कारण से क्योंकि दूसरे लोग बिना टिकट के हैं। अगर थोड़ी देर के लिए मान लिया जाए कि मेरा सिद्धांत गलत है। तो उससे सिद्ध हो गया आपका टिकट बिना लिए चलना सही है। तो आप अपना सिद्धांत पहले बताओगे तो सही ना। मेरे को तो आप तो इसका मतलब ये मान लूं मैं अपना सिद्धांत बता रहा हूं। आपके पास जवाब नहीं है। मेरी इन बातों का आगे बढ़े
00:53:57:10 मैंने जो आपके जवाब दिए आपने सहमति जताई आप मेरे सिद्धांत को गलत सिद्ध किए बिना आप मेरे सिद्धांत को गलत सिद्ध किए बिना अपने इस्लाम को मजबूती के साथ सिद्ध कर सकते हैं या नहीं? है उतनी उतना हो नहीं सकता इस्लाम में। आपने अभी तक सिद्धांत बताए नहीं और मैंने सर्वक्तिमान कह रहा हूं क्या है? रिजवान जी रिजवान जीवान मेरा प्रश्न क्या है? मेरा प्रश्न क्या है? आप मेरे सिद्धांत को गलत सिद्ध किए बिना अपने सिद्धांत की पुष्टि कर सकते या नहीं? मैं आपके सिद्धांत को क्यों गलत कर? मैं सत्य बताऊंगा। अब आप मानो या ना मानो या आपके ऊपर आप अपना सत्य बताइए। ये फिर मेरे को क्यों पूछ रहे हैं कि आपका क्या आपने बताया नहीं ये सब क्यों पूछ रहे हैं आप सत्य बताइए इस्लाम का आंसर दे रहा हूं आप क्वेश्चन कर रहे हैं मैं उसका आंसर दे रहा हूं आप क्वेश्चन आ रहे है ना अब आपका ईश्वर आपके अंदर है तो ये कैसे वो कैसे वो कैसे वो कैसे वो तो छूट जाएगा कि ईश्वर यदि सर्व्यामी नहीं है एक मिनट ईश्वर यदि ईश्वर यदि ईश्वर यदि भाई साहब भाई साहब देखिए देखिए भाई साहब मैं थक चुकी मैं
00:55:13:03 हां सिर्फ एकिए मैं भी जानने का हक रखता हूं कि मैं जिस व्यक्ति से अरे भैया तो जो चीज चल रही है उसको छोड़ देने का बोलिए एक मिनट बोलिए बोलिए थोड़ा संयम रखिए मैं जानने का हक नहीं रखता कि मैं जिस व्यक्ति से बात कर रहा हूं ईश्वर को लेकर उसका क्या कांसेप्ट है फिर मैं जो है अपना कांसेप्ट ईश्वर को लेकर जो है वो मैं उसके सामने जब रखूंगा तो वो चाहे सहमति जताए या असहमति जताए मुझे उससे कोई मतलब नहीं क्योंकि ना तो मुझे उसको मनवाना है और ना ही मुझे बस बात अपनी रखनी है और आपको अपनी बात रखनी है हमें एक दूसरे को मनवाना तो है नहीं आप मेरी बात मान लीजिए और या मैं आपकी बात मान लू बात हमने मैं अपनी रखूंगा आप अपनी रखेंगे तो मुझे इतना हक तो है कि मैं जानू कि आपके ईश्वर के बारे में क्या कासेप्ट है इतना तो हक है। बोलिए। हक है। हक है। हक है। बिल्कुल। अब मैं आपकी बात का जवाब देता हूं। आपको वो हक है। मगर वो हक तब है जब हमारा कोई विषय अधूरा ना हो। समझ रहे हैं? आप ये चुनाव नहीं करेंगे कि मैं कब अचानक
00:56:28:12 से मैंने आपसे पूछा आपका नाम क्या है? या मैंने आपसे पूछा मान लीजिए कि मैंने किसी चोर से पूछा। मान लीजिए किसी चोर से पूछा कि भाई ये चोरी का चोरी की घड़ी तुम्हारे पास कैसे मिल रही है? तो उसी समय चोर कहने लगे मैं इसके बात का जवाब तो बाद में दूंगा। पहले तुम ये बताओ फलानी जगह पे जो जमीन है वो कब्जे की है कि नहीं? तो ये सही है क्या? उसकी जांच में लग जाए। वो जो वो जो चोरी की घड़ी उसके पास थी उसकी बात ही ना करें। तो तो सुनिए तो आर्गुममेंट सही है ही नहीं। क्या
00:57:04:04 ये आर्गुममेंट जो आपने दिया है ये आर्गुममेंट सही है ही नहीं। भाई अगर कोई आदमी गलत कर रहा है तो उसके बेस पर मैं भी गलत करके कहूं कि इतने लोग गलत कर रहे हैं तो मैंने भी अगर गलत किया तो क्या गलत हुआ? मैं नहीं कह रहा हूं। मैं नहीं कह रहा हूं। मैं नहीं कह रहा हूं। मैं नहीं कह रहा हूं। मैंने गलत नहीं कहा। मैंने कहा जांच हो। जब आपकी जांच हो रही है उसी समय आप जांच को रुकवाने के लिए। दूसरी चीज कह रहे हैं। इसकी जांच करो पहले। दूसरी बात दूसरी बात दूसरी बात आप मुझे आप मुझे आपने जो तीन चार बातें बोली थी उन तीन चार बातों का जवाब देने दीजिए पहली बात अब उसमें जो दूसरी बात है कि आपको जानने का हक है तो मैं बता दूं हमारे यहां पर जो परम तत्व है मैंने अपने कई वीडियो में बताया है और आप जाकर के देख लीजिएगा एक ही परम तत्व जीव जगत और जगदीश्वर के रूप में अपने आप को उभाषित करता है। ठीक है? जीव, जगत और जगदीश्वर तीनों रूपों में प्रकृति भी वही है और जीव जो है जो एक मिनट भाई साहब मुझे बोलने दीजिए ना प्रकृति भी वही है और प्रकृति भी वही है और जो जीव जो इंसान के रूप में जन्म लेगा वो भी वही है। ठीक है? और उसमें जो ईश्वर
00:58:19:10 बनके जिसकी पूजा होगी वो भी वही है। इस कांसेप्ट से जो पूरी दुनिया है, प्रकृति है उसमें सर्वव्यापी है ईश्वर। क्यों? क्योंकि वो प्रकृति भी है। ठीक? और क्योंकि जो जीव जो जन्म ले रहा है जो जीव जो जन्म ले रहा है ईश्वर के रूप में उसके अंदर भी ईश्वर है। क्यों है? क्योंकि वो वही तत्व उसके रूप में स्पित हुआ है और जो ईश्वर बन के आ रहा है वो भी वही है क्योंकि वही ईश्वर बना है। एक ही तत्व जीव जगत जिग्नेश्वर बना। अब इस कांसेप्ट से कोई भी चीज उसके कंट्रोल के बाहर नहीं है। यहां तक कि उसको तत्व बनाने के लिए अलग से कोई सहायता नहीं चाहिए। अभी मैंने ये प्रश्न तो पूछा ही नहीं आपसे कि उसने आत्मा को बनाया कहां से? पूछना तो पूछ रहे पूछ लेना। अभी मैंने ये वाले प्रश्न पूछे नहीं कि वो तत्व कहां से आया? वो जो इंसान बनाया वो तत्व कहां से आया? ठीक है। अब ये तो हो गई। अब ये तो हो गई मेरी व्याख्या। मेरी व्याख्या हो गई। जब जब ईश्वर भाई साहब मुझे उत्तर देने दीजिए। आपने सवाल किए मुझे उत्तर देने दीजिए। हां। तो अब जो है जब वो जीव जगत और जगदीश्वर के रूप में प्रकट होता है तो क्या होता है कि जब वो
00:59:34:12 हर जगह है और ईश्वर के रूप में भी प्रकट हो रहा है तो फिर वो अवतार भी धारण करता है। जैसे वो जीव जगत जगदीश्वर के रूप में अपने आप को अलग-अलग रूपों में एक क्या कहते हैं? सर्वव्यापी होते हुए भी वो एक देश अपने आप को प्रकट करता है। ठीक है? सर्वव्यापी होते हुए भी अब क्या है कि वो एक देश हो गया। इससे उसका सर्वव्यापी खत्म नहीं हो गया। वो सर्वव्यापी है। उसने एक और रूप धारण किया है। ठीक है? तो ये सारा कांसेप्ट है। थोड़ा लंबा है। आपके बहुत सारे क्वेश्चन होंगे। सबके जवाब है मगर अभी क्या है ये जो इस्लाम पे जो प्रश्न उठ रहे हैं छूट जाएंगे एक एक बात ये हो गई मेरे गलत एक अभी मेरा अभी मेरा खत्म नहीं हुआ भाई भाई साहब खत्म नहीं हुआ अभी मेरा खत्म नहीं हुआ भाई साहब खत्म नहीं हुआ तो एक बात ये हो गई कि मेरे अगर मैं गलत सिद्ध भी हो भी जाऊंगा ये जो मान्यता है वैसे मैं सिद्ध नहीं हूं मैं सिद्ध कर दूंगा अगर मैं गलत हो भी जाऊंगा तो आपका सही होना सिद्ध नहीं होता पहली बात ठीक दूसरी बात ये कि मैं आपका मेरा जानने का हक था एक मिनट मिनट भाई साहब दूसरी बात ये हुई कि आपने कहा कि भाई मेरा जानने का हक है तो मैंने अपनी मान्यता भी बता दी। अब तीसरी बात और करते हैं कि हम यहां आए क्यों है? हम यहां अपनी मान्यता को केवल रखने नहीं आए। हम उसकी पुष्टि के लिए आए हैं। अब मैं बता दूं कैसे?
01:00:49:22 आपने मेरे इंस्टग्राम अकाउंट पे जब ईश्वर सर्वशक्तिमान वाला प्रश्न मैंने किया था एक मातृशक्ति से यानी महिला से तो वहां पर आपने लिखा था हमसे करो कितने सवाल करने हैं। हम जवाब देंगे तुम्हें। ठीक है? आज मैं सवाल का जवाब आज मैं सवाल कर रहा हूं तो आप कह रहे हैं आप अपनी मान्यता बताओ या तो एक मिनट या तो वो आपको लिखने से पहले लिखने से पहले आप सवालों के घेरों में आओगे तब आप बिल्कुल भी जवाब नहीं दे पाओगे जो आपने अपनी विचारधारा बताई है ना वो आपको देने पड़ेंगे जवाब देने पड़ेंगे जवाब मैं मैं दे दूंगा मैं दे दूंगा जवाब मैं दे दूंगा अभी मैं पूछ रहा हूं अब आप दोबारा से टॉपिक पर आ आप दोबारा टॉपिक पर आ जाए जवाब देते हो या ये पूरी डिबेट मैं दूंगा मैं दूंगा मैं दूंगा जवाब टॉपिक पर आ जाए मौका देते हो कि नहीं देते हो सवाल का ठीक है हां अभी अभी फिलहाल आप बताइए अभी फिलहाल आप बता दीजिए कि ईश्वर जो है उसमें और उसकी जो शक्ति है जो सर्वव्यापी है जो उसकी क्रिएशन में भी है वो नहीं है क्रिएशन में तो अब जांच के आधार पे क्योंकि ईश्वर नहीं है और क्या कहते हैं शक्ति है तो जात के आधार
01:02:04:28 पर दोनों में अंतर आ गया ना हेलो पूछ रहा हूं जांच के आधार पे अंतर आ गया ना हां तो अंतर कैसे आया वो आप स्टेप स्पष्ट कीजिए ना अभी आप स्पष्ट कीजिए अंतर कैसे आ गया तो अंतर नहीं है मेरी बात सुनिए। जैसे मैं आपसे बोल रहा हूं। है ना? अब ये जो मैं शब्दों का इस्तेमाल कर रहा हूं। अपनी बॉडी से मैंने क्या पूछा अंतर है कि नहीं? आप ही बता दीजिए।
01:02:47:01 तो मुझे जवाब बोलने दो जवाब दूं। आपको सुनना तो चाहिए ना। जवाब शाम तक मेरे थोड़ी ना है। शाम तक बैठा रहूं। आपका जवाब सुनता रहूं। उल्टा सीधा बोलने दे रहे। बोलने दोगे आप दो मिनट आप टू द पॉइंट बोलिए ना आप पॉइंट से फालतू की बातें जो मैं बोलना चाह रहा हूं या मैं वो बोलूं जो आप बोलवाना चाह रहे हो भैया अगर मेरे प्रश्न का आप जवाब नहीं बोलेंगे तो मुझे नहीं सुनना है अगर मेरे प्रश्न का जवाब नहीं बोलेंगे तो नहीं सुनना है मुझे आप जो प्रश्न कर रहे हैं उसका ही तो जवाब दे रहा हूं नहीं बोल रहे हैं जवाब आप मैंने पूछा उसमें उत्तर है कि नहीं है आपने सुना ही नहीं आपने फैसला भी कर लिया आपने हां मैंने सुना नहीं और आपका जवाब होना चाहिए। हां अंतर अंतर नहीं है। भाई आप क्या इतने बड़े अंतर्यामी हो? क्या आपने जवाब सुना नहीं और आप देखो पर्सनल व्यक्तिगत उसप मत जाओ टीका टिप्पणियों पे आप अपना जवाब बताओ। आप जवाब नहीं दे रहे हो तो मेरे को जवाब देने दो। भाई साहब मैं देखो मैं चर्चा को अब ऑफ कर दूंगा। या तो आप अपना जवाब बताओ। प्लीज निवेदन है। चैनल है चाहे तो चाहे तो क्या करें? तो आप जो अब इस पर आ गए आप अंतर्यामी अभी और कटाक्ष हो मैं कटाक्ष
01:04:02:04 करूंगा आपके ऊपर आप भाई भाई आप जो है मेरे बारे में क्यों बोल रहे हो कि आप जो है जवाब नहीं दे रहे हो जबकि मैं दो शब्द बोला था अभी अभी सिर्फ दो शब्द बोला था और आपने बीच में टोक दिया पूरी बात तो सुन लो फिर उसके बाद बोलना कि आपने सुनिए सुनिए जब आपने मेरी विचारधारा पूछी तो मैंने टू द पॉइंट जवाब दिया जो मेरी जो मेरी विचारधारा मैंने सुनने की हिम्मत रखी कि आपकी पूरी बात सुनी आपकी तरह अगर मैं भी बीच में कूद जाता तो आपकी बात मुकम्मल नहीं होने बात बोलेंगे दोबारा मैं पूछ रहा हूं आप बात बोलनी है आपको हां अब जो आपने सवाल किया उसका जवाब लोगे हां बोलो आपने जो सवाल किया कि ईश्वर की शक्ति सवाल बता दोबारा ईश्वर की ईश्वर और मैं सवाल बता दूं दोबारा ईश्वर और उसकी शक्ति में अंतर है या नहीं? अगर है तो क्या है? बस बताओ। हां। ठीक है। अब आपका यह सवाल हो गया। मेरा ये जवाब है ईश्वर और उसकी शक्ति में अंतर नहीं है। वो उसके साथ ही है। उसी के साथ रहती है उसकी शक्तियां और वो उन शक्तियों का इस्तेमाल करके कार्य करता भी है। वो फाइल
01:05:17:08 है। वो करने वाला है। उनहीं शक्तियों के साथ जरा सा कोई भी अंतर नहीं है। उसकी सर्व वो उसकी सारी शक्ति जो है वो लामहदूद है। जिसकी कोई सीमा नहीं है। ये जवाब दे रहा हूं मैं कि उसकी जो जितनी भी शक्तियां है वो असीमित है। उसकी उसको हम अपनी ज्ञान परिधि में नहीं ले सकते। असीमित है। मैंने पूछा भाई साहब जरा सा भी किसी बात का कोई अंतर नहीं है। उसकी शक्तियों के अंदर जैसे अलग-अलग शक्तियां है ना तो अलग-अलग शक्तियों के अंदर वो अपनी शक्तियों के अंदर असीमित है। अब आप किस शक्ति के बारे में अंतर पूछ रहे हैं? सभी पूछ रहे हो
01:06:05:06 समस्त उसकी समस्त शक्ति जो है वो असीमित है मैंने क्या पूछा मैंने क्या पूछा नहीं मिला जवाब नहीं मिला मैंने पूछा है अंतर है आपने अभी मुझसे पूछा ना कि आपको जवाब मिला अब मैं आपको जवाब दे रहा हूं मिला कि नहीं मिला तो आप मुझे बोलने नहीं दे रहे फिर कहेंगे कि मैं मैं आपको जवाब देता हूं आप मुझे बोलने नहीं दे रहे उसकी जो समस्त शक्ति है उनमें और ईश्वर में अंतर है जरा सा भी किसी भी बात का की नहीं है बस ये पूछ रहा हूं
01:06:42:12 बताया ना उसकी शक्तियों में अंतर नहीं है हर शक्ति उसकी असीमित है ये बोला मैंने के हर शक्ति उसकी असीमित है अंतर है बच रहे हैं आप भाई साहब फिर बच रहे हैं मैं शक्तियों के आपस में अंतर की बात नहीं कर रहा हूं मैं शक्ति और ईश्वर के बीच में अंतर है या नहीं यह पूछ रहा हूं। जरा सा भी जरा सा भी अंतर किसी भी बात को लेकर हां नहीं है। वो सारी शक्तियां उसी के साथ है उसी के भीतर है। जात को लेकर के भी अंतर नहीं है। उसी के साथ मैंने कहा जात को लेकर के भी अंतर नहीं है। जात तो एक है ना। जात एक है। एक है। एक है। एक है। जात एक है जात एक है ना हां जात एक है तो ईश्वर की जात है कि वो एक देसी है तो उसकी शक्तियां भी एक देश है या फिर अगर शक्तियों की या फिर या फिर शक्तियों की जात सर्वव्यापी है तो क्या ईश्वर भी सर्वव्यापी है अगर जात एक है दोनों की तो हां जात एक है सर्वव्यापी है सर्वज्ञानी है और उसकी
01:07:58:02 असीमित है पहला महदूद ईश्वर सर्व्यापी है सर्व मतलब असीमित ज्ञानी है सब चीज में ऐसी लगा दो जात के हिसाब से भी ईश्वर सर्वव्यापी है जात के ऐतबार से हां ईश्वर सर्वव्यापी है वो अपनी क्रिएशन में भी है हर नहीं जात के ऐतबार से तो आप मानते हो मैं नहीं मानता अरे तो आप बताओ मैं नहीं मानता कि फिर उसकी शक्ति में अंतर आ गया ना क्योंकि शक्ति क्रिएशन के अंदर भी है नहीं मानता मैं वही कह रहा हूं कि मैं जात के ऐतबार से उसे हर चीज में नहीं मानता मानता हूं कि हर चीज के अंदर आप ये कह रहे हैं कि उसकी शक्ति और उसकी जात एक है। अब जात यदि एक है तो ईश्वर क्योंकि अपनी एक मिनट जात यदि एक है तो ईश्वर अपनी क्रिएशन के अंदर नहीं है। जबकि उसकी शक्ति है तो जात एक कैसे है फिर? तो वो उसके गुण वो उसके गुण से है ना जात से नहीं उसके गुण से है हमसे अटैच हमसे अटैच है उसके गुणों से यानी कि यानी कि गुण का अंतर है शक्ति और उसमें से
01:09:13:06 वो हमसे अटैच है गुण का अंतर है शक्ति और उसमें कैसे हुआ अंतर कैसे हुआ अंतर अरे भैया जब कोई चीज अंतर नहीं हुआ ना उसके गुणों से बताइए बताइए। अच्छा मैं दो मिनट लू आपसे गुणों के अंतर को समझाने की। जैसे मेरे देखने की एक हद है कि मैं कहां तक देख सकता हूं। सुन लीजिए। सिर्फ एक मिनट सुन लीजिए ताकि बात अच्छे से हो जाए। कि मेरी देखने की एक सीमा है। है ना? देखता ईश्वर भी है, देखता मैं भी हूं। लेकिन मेरे देखने की एक सीमा है। लेकिन ईश्वर जो देखता है उसकी सीमा अपरंपार है। तो ये वो सर्वशक्तिमान है। उससे ज्यादा शक्ति वाला कोई है ही नहीं। कोई है ही नहीं। जो भी जिसका जिसके बारे में भी कहोगे वो उससे कमतर होगा। उसके बराबर भी नहीं हो सकता। उससे कमतर ही होगा। जिसको भी और वो जो भी शक्ति उसे मिली होगी वो उसी से मिली होगी। ईश्वर से ही मिली होगी।
01:10:23:22 आपने इतनी बातें शायद समझ में आ जाना चाहिए हमारे क्या है भाई साहब मेरा उदाहरण आपने जैसे मेरा उदाहरण दिया देखिए बात क्या है जैसे मेरी जो दृष्टि बीच में थोड़ा सा ना बोले तो मैं आपको समझाने का प्रयास कर रहा हूं। जैसे मेरी जो दृष्टि है वो मैं कह रहा हूं सर्व्यापी नहीं मैं कह रहा हूं 5 किलोमीटर तक जा रही है। आसमान में अगर देखूं तो 5 किलोमीटर तक जा रही है। उसके बाद मुझे नहीं दिख रहा है क्या है। ठीक है? अब ये जो 5 किलोमीटर में मेरी दृष्टि तो जा रही है। मगर मैं उस 5 किलोमीटर में अगर कोई पंछी उड़ेगा तो अगर उसके हाथ से मैं उसकी गर्दन मरोड़ना चाहूं तो नहीं मोड़ सकता। ठीक है? यानी कि मेरा वहां कंट्रोल नहीं है पांच मिनट। एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट अगर मैं उस पंछी की अह जो गंध है वो सूंघना चाहूं तो मैं नहीं सूंघ सकता क्योंकि मेरी दृष्टि तो वहां पे है पर मेरी नाक वाली जो पावर है वो वहां पे नहीं है। अगर मैं उस पंछी को अपनी एक मिनट भाई साहब भाई साहब मुझे पूरा करने दीजिए रिजवान जी अगर मैं अपने पैर से उसको छूना चाहूं तो मैं नहीं छू सकता। क्यों? क्योंकि मेरा पैर वहां तक नहीं पहुंच
01:11:38:26 रहा है। और यदि मैं वो हर चीज जो यहां से कर सकता हूं यदि मैं वो हर चीज जो मैं यहां से कर सकता हूं वो मैं वहां भी कर सकता हूं तो इसका मतलब मानना पड़ेगा मेरा पैर भी वहां है मेरी सूंघने की क्षमता भी वहां है मेरी ला मेरा हाथ भी वहां है हर वो चीज जो मैं यहां पर रह के कर सकता हूं वो चीज वहां पर भी है ये मुझे मानना पड़ेगा तभी मेरा तभी मेरा वो 5 किलोमीटर के उसमें कंट्रोल सिद्ध होगा ठीक है अब आपके यहां क्या है अब आपके यहां क्या है? एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट मुझे फिनिश करने दीजिए। अब आपका क्या है कि ईश्वर एक जगह है। वो अपनी क्रिएशन में नहीं है। मगर उसकी शक्ति उसके क्रिएशन में है। उसकी शक्ति यदि क्रिएशन में है तो कुछ ना कुछ अंतर आ रहा है। उसकी जो कंट्रोल है जो जहां पर वो है वहां ज्यादा है। जहां वो नहीं है वहां कम है। क्योंकि आप कह रहे हो वो नहीं है उसी शक्ति है। या तो ये मान लो शक्ति और वो एक है। तो हमें ये कहना पड़ेगा ईश्वर अपनी शक्ति के रूप में हर जगह है। हो गया। मतलब की एक मिनट। मतलब कि ईश्वर और शक्ति दो अलग-अलग तत्व नहीं है। एक ही तत्व है। हो गया। जात से भी जात से भी वो एक ही मानने
01:12:54:04 पड़ेंगे। फिर आपके कुरान का वो जो क्लेम है कि वो एक जगह है। तो वो क्लेम खंडित होगा। अब इस पर बताएं। हो गया। पहली चीज कुरान का ऐसा कोई क्लेम नहीं है कि वो एक जगह है। आपने कुरान का नाम लिया तो बता दूं कि वो कुरान के वो अपनी क्रिएशन में नहीं है ना भाई साहब। वो अपनी क्रिएशन में नहीं है। आपने कहा है वो अपनी क्रिएशन में नहीं है। आपने ही कहा है आपने कहा है वो अपनी क्रिएशन में नहीं है। यानी कि कोई दायरा है जिसके अंदर वो नहीं है। आप मुझे एक मिनट बोलने दीजिए। आपको जो भी अपना पॉइंट ऑफ व्यू रखना है सवाल जो भी रखना है रख अपने टाइम में रख लेना। ठीक है? मैं ये कह रहा हूं कि जैसा आपने कहा कि कुरान के हिसाब से एक जगह तो कुरान में ऐसा कहीं नहीं लिखा है। वो आपको बताना पड़ेगा अगर आप ये क्लेम कर रहे हैं तो। दूसरी चीज आपने कहा कि आपकी दृष्टि जो है वहां तक पहुंच रही है 500 किलोमीटर तक लेकिन आप फिजिकली वहां 500 किलोमीटर तक मौजूद नहीं है। लेकिन आपकी दृष्टि के ऐतबार से आप वहां तक देख पा रहे हैं और एक पंछी उड़ रहा है। आप उसकी गर्दन अगर मरोड़ना चाहे तो आप फिजिकली अपनी बॉडी को वहां तक नहीं ले जा पा रहे। फिजिकली बॉडी को नहीं ले जा पा रहे हैं तो आप फिजिकली जो है वहां मौजूद नहीं है लेकिन आपकी दिव्य दृष्टि वहां तक जा रही है। देख पा
01:14:09:06 रही है कि 500 किलोमीटर दूर पर एक पंछी जो है उड़ रहा है और आप सूंघना चाह रहे हैं तो आपने के सूंघने वाली जो शक्ति है अगर वो भी एक्टिव हो जाए तो वो सूंघ भी सकती है और सुनने वाली अगर आपकी जो शक्ति है वो भी अगर एक्टिव हो जाए तो वो भी 500 किलोमीटर तक की सुन सकती है। सुन सकती है और अपनी आवाज पहुंचा भी सकती है। अगर वो चीजें भी एक्टिव हो जाए तो अब ये हो गई हमारी एक हद के 500 किलोमीटर लेकिन ईश्वर के लिए जब हम कहेंगे कोई बात तो ईश्वर के लिए ये चीजें हद नहीं होती है उसके लिए लामहदूद होती है उसके लिए कोई बाधा नहीं आ सकती कि भाई ईश्वर इतनी देर इतनी दूर तक ही देख सकता है नहीं वो तो लामहदूद है इतनी दूर तक ही सुन सकता है नहीं उसके लिए ये चीजें नहीं होंगी वो तो लामहदूद है ईश्वर तो उसके लिए ये चीजें नहीं होगी ये हमारे लिए है क्योंकि हम क्रिएशन है और वो क्रिएटर है। तो क्रिएशन के लिए पाबंदियां होती है। एक हद होती है। लेकिन जो क्रिएटर होता है वो तो इससे परे होता है। ठीक है। अब आप बोलिए। हम ठीक है। बोलता हूं। बोलता हूं। देखिए बात ऐसी है कि अगर मैं पहली बात तो ये है कि जो काम मैं यहां बैठ के कर सकता हूं। मगर
01:15:24:09 वही काम में आप कह रहे हो ईश्वर असीमित है तो जो काम ईश्वर एक जगह रहकर कर सकता है वही कार्य सारे कार्य ईश्वर वहां रह के भी वहां पे भी कर सकता है जहां वो नहीं है तो हमें ये मानना पड़ेगा हर तरह से उसकी शक्ति जो वहां पर है उसके रूप में ईश्वर ही है नहीं तो अगर आप ये कहेंगे कि ईश्वर नहीं है वहां पर वहां पर नहीं है और उसकी शक्ति है तो शक्ति और ईश्वर दो अलग-अलग पदार्थ हो गए दो अलग-अलग तत्व हो गए या फिर आप कह लो जात के हिसाब से अलग हो गए। ईश्वर की जात क्या है कि वो एक जगह है और उसकी शक्ति की जात क्या है कि वो सब जगह है। ठीक है? तो ये जात के आधार पर दो अलग-अलग तत्व हो गए। जब तत्व हो गए दो अलग-अलग तो फिर दिक्कत ये आएगी जब दो अलग-अलग तत्व हो गए तो कहीं ना कहीं किसी ना किसी कारण में किसी ना किसी आधार में शक्ति को ईश्वर से अलग मान कम मानना पड़ेगा। कम नहीं तो ईश्वर दो हो जाएंगे। एक शक्ति ईश्वर है और एक जो है वो स्वयं ईश्वर है। दो ईश्वर हो जाएंगे। तो अगर वो मानेंगे तब भी दिक्कत है। एक मिनट भाई तो अगर वो सारे काम सब कुछ वहां कर सकता है जो वो यहां कर सकता है जहां वो है। तो ये मानना पड़ेगा कि वो स्वयं वहां पर है।
01:16:39:13 तभी कर पाएगा। और यदि वो स्वयं नहीं है कोई दूसरा तत्व है। है ना? कोई दूसरा तत्व है तो फिर अंतर आ जाएगा। फिर उसकी सत्ता सर्वव्यापी और नित्य नहीं रह जाएगी। शाश्वतता भंग हो जाएगी। जी तो आप जो बता रहे हैं कि ईश्वर जो है नहीं सर्व्यापी जैसे हमने अभी बात की थी कि सर्वव्यापी गुणों के एतबार से है। जात के ऐतबार से वो यानी कि जात के ऐतबार से जात के ऐतबार से उसकी शक्ति और उसमें अंतर है ना? नहीं अंतर नहीं है। अरे भाई जांच के हिसाब से ईश्वर एक जगह है। अब आप मुझे बोलने देंगे। से अच्छी बात चल बिल्कुल अच्छी बात चल बोलिए बोलिए। हां देखो गुण जो होता है ना गुण ईश्वर के गुण वो उसके गुणों से हर जगह मौजूद है। उसके गुणों से हर जगह मौजूद है। लेकिन उसकी जात के ऐतबार से वो हर जगह नहीं है। मुझे बोलने दीजिएगा। अपने टाइम में बोलिएगा एक मिनट बाद आराम से ताकि अच्छे से बातचीत चले। सुनने वाले को भी कुछ बात समझ में आए क्या आप क्या कहना चाह रहे हैं मैं क्या कहना चाह तो वो अपने जैसे हम गुण गुण के एतबार से वो हर जगह है और उसकी जात के एतबार से वो ला मक्का
01:17:54:24 में है ला मक्का के अंदर वो है अपने जात के ऐतबार से गुणों के बार बता चुके हैं आप रिपीट कर रहे हैं बहुत बार बता रहा हूं आपने अभी सर्वव्यापी भाई साहब उससे समय वेस्ट हो रहा है ना आप जो चीजें आप मुझे बता चुके हो उस मैंने क्वेश्चन नया किया है। हां तो सर्व्यापी सर्वव्यापी वाली जब बात आई तो मैंने गुणों के ऐतबार से सर्वव्यापी कहा अरे भाई साहब आपने शुरू में ही बता दिया था कि वो गुणों के हिसाब से सर्वव्यापी है कंट्रोल के हिसाब से सर्वव्यापी है शक्ति के एक मिनट अभी आपने कहा कि ईश्वर जो है उसकी शक्ति जो है और वो जो ईश्वर है वो दोनों अलग-अलग चीज हो गई अंतर आ गया हां आपके हिसाब से ये अंतर आ गया। तो आप तो मुझे पहले ये क्लियर करो कि अंतर है कि नहीं है? आप मानते क्या हो? अंतर है कि नहीं है? शक्ति और जो भी गुणों जो भी गुण है जिस गुण से उसने अपने आप को जाहिर किया है तो वो गुण सारे के सारे उसी में है। उसी में है वो अलग नहीं है। मैंने पूछा क्या है? शक्ति और उसमें अंतर है कि नहीं? शक्ति जो है उसके गुणों से ही पता चलेगी ना। तो वो गुण जो है वो उसी के साथ ही है। भाई साहब
01:19:09:25 शक्ति और उसमें अंतर है कि नहीं यही तो दिक्कत है। अरे पता चले आप पता करके आओ फिर बता देना एक मिनट पता चलेगी आप पता करके मुझे बता दो शक्ति और उसमें अंतर है कि नहीं वो साथ में है साथ में समझ रहे हो जैसे वही बात साथ में है मैं क्या पूछ रहा हूं शक्ति और उसमें अंतर है कि नहीं हां तो एक मिनट अब जवाब दे देता हूं मैं कि अंतर जब वो होगा तो जब वो गुण उससे जुदा हो जाएंगे उसके साथ नहीं रहेंगे उससे अलग हो जाएंगे तब वो अंतर आ जाएगा जब उससे अलग हो जाएंगे ना उसके गुण तो अंतर आ जाएगा क्या वो गुण उसके साथ नहीं है यानी कि अंतर नहीं है अंतर नहीं है नहीं है उसी के गुण किसी भी मामले में किसी भी पैरामीटर से किसी भी ऐतबार से अंतर नहीं है सारे सारे हां सारे गुण उसी के हैं। मैंने क्या कहा भाई साहब? दोबारा सुन लीजिए। दोबारा सुन लीजिए। ईश्वर और उसकी शक्ति में ईश्वर और उसकी शक्ति में किसी भी एतबार से कोई अंतर है या नहीं? कोई अंतर नहीं है।
01:20:25:03 अब बोलिए आगे कोई अंतर नहीं है। किसी भी ऐतबार से नहीं है। किसी भी ऐतबार से नहीं है। इसकी डेफिनेशन बता चुका हूं। किसी भी एतबार से अंतर ईश्वर और उसकी शक्ति में नहीं है। किसी भी एतबार से डेफिनेशन बता चुका। ठीक है। ठीक है। तो ईश्वर की शक्ति तो सब जगह है। मैं बोलू मैं पूछ रहा हूं। हां कि ना? वो अपने गुणों से हर जगह प्रकट है। ईश्वर की शक्ति शक्ति हर जगह है। शक्ति भी गुणी है ना? शक्ति भी उसका गुण है। ठीक है। वो अपने गुणों से हर जगह जगह है। हर जगह प्रकट है। हां हां ईश्वर हर जगह है। गुणों के ऐतबार से भाई साहब भाई साहब जात के ऐतबार से ईश्वर हर जगह है।
01:21:23:27 जात के ऐतबार से नहीं है। पहले भी बोला था नहीं है। नहीं अब आप समझिए देखिए देखिए अब आप समझिए जात के ऐतबार से ईश्वर हर जगह नहीं है जात के ऐतबार से शक्ति सब जगह है मगर आपने अभी क्या कहा था किसी भी एतबार से ईश्वर की शक्ति और उसमें अंतर नहीं है अभी आपने कहा हां दिखा भी कह रहा हूं नहीं अभी भी कह रहा हूं ना तो ये बात ठीक है अभी भी जनता ठीक है ठीक है समझ लीजिए इसको ठीक है मैं समझ गया आपके पास जवाब है नहीं आप आप जो है आप जवाब दोगे नहीं और आप कह भी दोगे अपनी बातों से पलट भी जाओगे और फिर कह दोगे मैं अभी भी कह रहा हूं अरे भैया आपने कहा किसी भी ऐतबार से आपने कहा किसी आपने कहा आपने कहा किसी भी ऐतबार से आपने कहा किसी भी ऐतबार से शक्ति और ईश्वर में अंतर नहीं है फिर आप कह रहे हो जात के ऐतबार से ईश्वर एक जगह है जुदा हो जाएगी भाई उससे जुदा जब हो जाएगी तब अंतर होगा ना भाई जब साथ ही में तो अंतर कहां है? अंतर जब होगा जब उससे जुदा हो जाएगी। जैसे ईश्वर की बात माने क्या हम ये माने कि शक्ति भी जांच के एतबार से वही में है जहां ईश्वर है। वहां नहीं है जहां पर ईश्वर नहीं है।
01:22:40:26 ईश्वर तो हर जगह है ना उसके गुण केतबार से बोल रहा हूं। भाई साहब जात के ऐतबार से नहीं बताया कि ईश्वर जात के ऐतबार से हर जगह नहीं है। गुणों के ऐतबार से यानी कि उसकी शक्ति भी यही माना जाए वो हर जगह नहीं है। जात के ऐतबार से वही है जहां ईश्वर है। शक्ति हर जगह गुण उसके गुणों गुण हर जगह है और उसी गुणों से वो अपने आप को प्रकट कराता है ताकि लोग ना जाने। भाई साहब ये बताइए एक अंतर आ गया ना कि वो ईश्वर हर जगह नहीं है जात के ऐतबार से। शक्ति हर जगह है केबार सेबार से है मैंने कहा ना केबार से आपने क्या कहा था किसी भी ऐतबार से ईश्वर और शक्ति में अंतर नहीं है मगर जात के ऐतबार से अंतर आ रहा है अंतर कैसे आ गया आप कोई बीच में कोई दीवार बना रहे हैं कि उसके गुण जो है ना इस दीवार के पार हो गए और ईश्वर इस दीवार के पार है आप ये क्या बीच में दीवार लगा रहे इसको ऐसे समझते हैं इसको ऐसे समझते हैं जैसे की मेरे अंदर देखने की क्षमता है। एक अब ये जो क्षमता है मुझसे जुड़ी ये जो क्षमता है मुझसे जुड़ी हुई है। तो ये जो देखने की दृष्टि है मेरी ये और मैं
01:23:56:02 एक ही है। ये और मैं एक ही है। नहीं वो वो आपका गुण है। भाई दीवार तो है नहीं कोई बीच में। तो ये दृष्टि और मैं एक ही है। यानी कि यानी कि यानी कि अगर मैं अंधा हो गया। यानी कि अगर मैं अंधा हो गया तो मैं मर गया। क्योंकि मेरी दृष्टि समाप्त हो गई। मर गया। मरे नहीं मरे कहां? मरे कहां? आपका एक गुण नष्ट हो गया। इसका मतलब ये दोनों अलग-अलग पदार्थ है। ये दोनों अलग-अलग पदार्थ है। क्यों? ये पदार्थ भाई मेरी दृष्टि मेरी दृष्टि नष्ट हो रही है। पर मेरा अस्तित्व भी है। तो अलग-अलग पदार्थ हो गए। मेरी बात सुनिए। एक आप देखते हो अपनी फिजिकल दृष्टि से एक आप देखते हो आपकी ज्ञान ज्ञान दृष्टि से। आपके आंखें बंद भी होगी तो ज्ञान दृष्टि से आप देख रहे हो नहीं देख दृष्टि तो है मैं नहीं देख पाऊंगा मैं जहां पर मेरी दृष्टि समाप्त हो गई जिस कलर को मैंने नहीं देखा मैं उसे नहीं पहचान पहचान पाऊंगा ज्ञान से तो कलर से नहीं पहचान पाऊंगा ना ये एक आपकी इंद्रिय है जो है नष्ट हो गई कलर को आप देख नहीं सकते ठीक है ना ये एक इंद्री आपकी नष्ट हो गई ठीक है ना देखिए ऐसा है काफी देर हम इस चीज पे वो कर लिए जनता जो चर्चा देख रही है वो इसका अब आप
01:25:11:03 एक काम करिए भाई साहब अब आप सवाल अब आप मेरे से अब आप मेरे से अब आप मेरे से सवाल करिए आपको हमारी मान्यता में क्या दिक्कत है आपने कहा था जब मुझे समय देना मैं दे रहा हूं बोलिए मेरा क्लेम है मेरा क्लेम है मेरा क्लेम है कि ईश्वर सर्वत्र सर्वव्यापी होते हुए भी ईश्वर जो है किसी देश काल परिस्थिति में अवतार लेता है जिसकी मूर्ति बना के हम पूजा करते हैं और उसके अवतार लेने से ही यह सिद्ध होता है कि वो सब कुछ कर सकता है। वो सर्वशक्तिमान है और वो परम स्वतंत्र मोक्ष देने वाला है। अभी मोक्ष के विषय में मैंने सवाल नहीं किया है। ईश्वर आपका सिद्ध कैसे होता है वो सवाल नहीं किया। पर अभी मैं आपको टर्न दे रहा हूं। आप सवाल करिए। बोलिए।
01:25:55:15 सबसे पहला मेरा सवाल ये है कि ये जो भी बातें आपने कही है इन बातों का ज्ञान आपको कहां से हुआ? सबसे पहला सवाल इसका जवाब दीजिए। फिर आगे बढ़ते हैं आराम से। इन बातों का ज्ञान हुआ कहां से? शास्त्रों से। कहां से? शास्त्रों से। तो आपके नजदीक हां शास्त्रों से हुआ। तो आपके नजदीक प्रमाणित जो शास्त्र है आपके जो सबसे अहम शास्त्र है वो कौन-कौन से हैं? भाई साहब मैं आपको एक बात बताऊं जो आप प्रश्न करने जा रहे हैं। मैं समझ चुका हूं। तो मैं आपको उत्तर दे रहा हूं। मैं समझ चुका हूं।
01:26:37:01 रहे हो जी मैं भागने का रास्ता नहीं देख रहा हूं। मैं चर्चा को शॉर्ट कर रहा हूं। जिस पॉइंट पे आप आ रहे हो मैं उसी पॉइंट पे आ रहा हूं। आपका जो है मैं देखिए आप एक काम करिए। अब एक काम करिए आप दोबारा टर्न में आइए। ठीक है? डेढ़ घंटे की चर्चा हो चुकी है। अब आपने सवाल लेके दोबारा आइए। ठीक है? ठीक है? ठीक है वापस वापस काट के आऊं।
01:27:08:19 अरे भाई मैं ये कह रहा हूं कि जो सवाल आप कर रहे हैं ना रिजवान जी मैं जानता हूं आप क्या मेरी सुन लीजिए मैं अगर मेरी चीज से आप सहमत ना हो तो आप बताइएगा कि मैं कहां गलत हूं। ठीक है। आपका सवाल ये है कि अगर आपके लिए वेद सर्वोपरि है तो क्या वेद ये कहता है क्या वेद ये कहता है कि ईश्वर अवतार ले सकता है और अगर कहता है तो मुझे दिखाइए। ठीक यही सवाल है। वो मैं मांगूंगा। वो प्रमाण मैं बाद में मांगूंगा। पहले मैं जानना चाह रहा हूं कि आपके नजदीक प्रमाणित ग्रंथ कौन से हैं। मैं ये पहले आप बता दे मुझे सिंपल सी बात है कि आपके नजदीक यही है प्रमाणित ग्रंथ है। भाई भगवत गीता है चारों वेद है उपनिषद है जो भी है टू द पॉइंट आपको टू द पॉइंट सवाल नहीं करने है हां मेरे लिए वेद भगवत गीता वेद भगवत गीता उपनिषद स्मृति ग्रंथ और क्या कहते हैं जो गीता महाभारत रामायण है ये सब मेरे लिए प्रमाणिक ग्रंथ है अब बोलिए पुराण भी है उसमें अब बोलिए और इन इन किताबों के अंदर कोई भी मतभेद नहीं है इनकी बातों में। ये भी आप मानते होंगे। जैसे हम मानते हैं कुरान के अंदर कोई बात नहीं है। किताबों में मतभेद किताबों में मतभेद नहीं है। किताबों में मतभेद नहीं है। मगर मतभेद
01:28:24:00 होना या ना होना ये आज का हमारा वो नहीं है। टॉपिक अभी आज का टॉपिक है क्या? अभी टॉपिक आज का क्या है? टॉपिक आज का क्या है भाई साहब? टॉपिक है सर्वशक्तिमान। आपने जाना है वो किस ग्रंथ से जाना है उस ग्रंथ के अंदर भी सारे ग्रंथों से सारे ग्रंथों से
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01:28:48:28 अब मैं सवाल कर आपसे हां बोलिए हां ना तस प्रतिमा अस्ति ये जो श्लोक है ऋग्वेद का क्या ये ऋग्वेद का श्लोक जो है ये सही है हो गया सवाल पहले पूछ रहा हूं सही है क्या ये सही है सही है तो इस श्लोक के अनुसार जो है उसका कोई रूप नहीं है उसकी कोई प्रतिमा नहीं है अब जो कोई भी उसकी प्रतिमा बोलने देंगे कि नहीं नातस प्रतिमा अस्ति का अर्थ मैं आपको बता रहा हूं मैं आपको का बता रहा हूं आपको जवाब देना है जवाब आपको मैं नहीं टोकूंगा आपको मैं आपको नहीं टोकूंगा मैं सिर्फ अपनी पूरा डिटेल बता रहा जब कुछ बच जाए तो आप काउंटर करिएगा। मैं डिटेल बता रहा हूं। पूरा सवाल और ऑब्जेक्शन होने दो ताकि आप आसानी से जवाब दे सके। सवाल क्योंकि आप सवाल में आप अर्थ बता रहे हैं। अर्थ मत बताइए। सवाल करिए। हां तो सवाल तो कर दिया। आपने बताया वो जो आपने जो अर्थ बताया वो जो आपने अर्थ बताया वो अर्थ गलत है। [संगीत] जो आपने अर्थ बताया वो अर्थ गलत है। तो
01:30:04:02 बस मैं वही कह रहा हूं ना मुझे अर्थ बताने दीजिए। जब शैतान की बात आई थी आपने शैतान का अर्थ बताया। जब मलाइका की बात आई थी तो आपने मलाइका का अर्थ बताया। जब आदम की बात आई थी आपने आदम का अर्थ बताया। तो जब आप मेरे ऊपर क्लेम कर रहे हैं मेरे ग्रंथों पर जब आप मेरे ऊपर क्लेम कर रहे हैं मेरे ग्रंथों पर तो आप मुझे उसका अर्थ बताने देंगे ना बताइए हां बताइए अब पहले तो मैं अर्थ बताऊंगा उसके बाद मेरी एक और दलील है उसको भी आप सुनिएगा अर्थ सुनिए पहले आप अर्थ बताइए हां अर्थ बता नातस प्रतिमा अस्ति का जो अर्थ है प्रतिमान से बना है प्रतिमा किससे बना है? प्रतिमान। मान मतलब वैल्यू। मान मतलब वैल्यू। तो यहां पर उसने ये नहीं कहा मेरे जैसी प्रतिमा यानी मेरी मूर्ति नहीं है। कोई यानी मेरी मूर्ति नहीं है। कोई ये बात नहीं हो रही। यहां कह रहे मेरे जैसा मान, मेरे जैसी वैल्यू किसी की नहीं है। संसार में मेरे जैसी वैल्यू। ठीक है? अब क्योंकि मूर्ति दिखने के मामले में किसी के जैसी होती है। जैसे मान लीजिए मेरी किसी ने मूर्ति बनाई तो दिखने के मामले में वो मेरी जैसी है। तो इसलिए मूर्ति को भी प्रतिमा
01:31:19:18 कहा जाने लगा। मगर प्रतिमा शब्द का वास्तविक अर्थ है प्रतिमान। मेरे समान कोई नहीं है। वहां ये कहा जा रहा है। पहली बात। दूसरी बात यह है कि मेरे ग्रंथों के विषय में मैं आपको बताऊंगा और आपके ग्रंथों के विषय में आप मुझे आप मुझे बताएंगे। क्यों? क्योंकि यहां पर ये क्लेम नहीं हो रहा है कि वो क्यों? क्यों? उसका कारण ये है एक शब्द होता है परंपरा। भगवत गीता चार दो में तीन 16 में और मांडकोपनिषद में मुंडकोपनिषद में सॉरी एक से लेकर चार तक पहले ही अध्याय में शायद परंपरा बताई जा रही है कि भैया ऋषियों ने वेद दिए उसको फिर उसने दिए इस ऋषि को फिर उसने दिए इस ऋषि को ऐसे करके करके ऋषियों से लेकर आज तक के जो हमारे आचार्य है वहां तक की हमें परंपरा प्राप्त है। तो हमारे ग्रंथ का अर्थ कौन बताएगा? जिसको अपनी परंपरा से वेद प्राप्त हुआ होगा। हां मैं कुरान को लेकर के यह नहीं कह सकता हूं नहीं आपकी कुरान में यह लिखा है। मैं सही बता रहा हूं।
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01:32:31:27 ज्यादा से ज्यादा मैं यह कह सकता हूं। मुझे आप पर विश्वास नहीं है। मगर मैं ये क्लेम नहीं कर सकता। नहीं आपकी किताब में ये लिखा है। क्यों नहीं कर सकता? आपका फ़ लगता है गरम हो गया। आपका फ़ गरम हो गया। लग रहा है। छू के देखिए। आ जाइए। आ जाइए। बाहर निकल के आता हूं। कैसे सहारा मिलता है इन लोगों को देखते हैं कि वेद से बताइए इनको इससे मतलब नहीं है कि तर्क क्या है वो क्या है इनको वेदों पर भरोसा है तो वेदों से प्रश्न करते हैं क्यों करते हैं क्यों करते हैं आप लोगों को मालूम है ना
01:33:22:27 [हंसी] देखिए मैंने एक तो बताया आपको नातस प्रतिमा अस्ति का अर्थ हालांकि आपका चित्र अभी भी रुक रुक के आ रहा है। मुझे लग रहा है आपका फोन गया फिलहाल के लिए तो मैं अपनी बात को पूरा कर लेता हूं। पहली बात नात प्रतिमा का सही अर्थ है कि उसके समान कोई नहीं है। प्रतिमान उसके जैसा मान किसी का नहीं है। दूसरी बात यह है कि
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01:33:53:25 मैंने अभी तक आपकी किताब को लेकर के क्लेम ये नहीं किया कि आपकी किताब में ये लिखा है। आप ये कैसे बोल रहे हो? मैंने उसको एज इट इज माना जो आपने अपनी किताब के अनुसार बोला। क्योंकि मैं क्लेम नहीं कर सकता हूं। आपकी किताब में क्या लिखा है मैं बताऊंगा। क्यों? क्योंकि परंपरा से वो किताब आपको पाठ आई है। मेरे पास नहीं आई है। मैंने उस चैन ऑफ नरेशन से उसका अध्ययन नहीं किया है जिस जिससे आपने किया है। तो आपकी किताबों में क्या लिखा है क्या नहीं लिखा है। इस बात
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01:34:19:13 को लेकर एक मिनट भाई साहब आपकी किताबों में क्या लिखा है क्या नहीं लिखा है। इस बात को लेकर के मैं आपको चैलेंज नहीं कर रहा हूं। और वैसे भी आज का विषय ये नहीं है कि किसकी किताब में क्या लिखा है वो सामने वाला बताएगा कि मैं बताऊंगा। आज का विषय तो यह है कि आपकी जो मान्यता है जो आप ले आए किताब से निकाल के बाहर ले आए क्या वह मान्यता लॉजिकली सिद्ध हो रही है क्या हमारी तर्क बुद्धि और इत्यादि के साथ उसका समर्थन हो रहा है आप जो मान्यता लेकर आए हैं और या फिर मेरी मान्यता का समर्थन हो रहा है दूसरी बात तीसरी बात ये है कि अगर यह मान भी लिया जाए कि वहां प्रतिमा की ही बात हो रही है तो ईश्वर के तीन प्रकार के स्तर हैं। एक है निर्गुण निराकार जो सर्वव्यापी है। समान रूप से सब जगह पर है। ठीक है? एक है सगुण निराकार जो कहीं पर उसमें गुण आ जाते हैं तो कहीं पर वो क्रियाशील है, कहीं पर वो नहीं है तो इस कारण से वो सगुण निराकार है। और फिर है सगुण साकार। ठीक है? तो अगर इसको दुर्जन तोष न्याय होता है कि थोड़ी देर के लिए तुम्हारी बात को मान भी लेते हैं। ऐसे होता है ना कि चलो थोड़ी देर मान लेते हैं। तो उस थोड़ी देर अगर मान भी ले यहां प्रतिमा की बात हो रही है तो जो ईश्वर का ये जो निर्गुण
01:35:34:26 निराकार स्वरूप है ना यहां उसकी बात हो रही है कि उसकी प्रतिमा नहीं बनाई जा सकती। बिल्कुल सही बात है। ईश्वर के निर्गुण निराकार रूप की प्रतिमा नहीं बनाई जा सकती। वो सही बात है। मगर वही ईश्वर अपने अपना जो निर्गुण निराकार वाला जो स्वरूप है उसको बिल्कुल बिना छेड़े हुए एक दूसरा स्वरूप तैयार करता है। वो होता है सगुण निराकार। सगुण निराकार। अब क्या होता है कि जो जैसे मैं आपको इसको ऐसे समझाता हूं। जैसे बिजली होती है बिजली। बिजली बिजली जो है वो जमीन में भी व्याप्त है। सब जगह। ठीक है? जल इत्यादि में व्याप्त है। सब जगह मौजूद है। मगर वह झटका नहीं मार रही है। ठीक है? फिर वही बिजली किसी माध्यम से हमने कुछ ऐसा किया कि वही बिजली तारों में दौड़ने लगी। अब उसको छुओगे तो अभी भी वो निराकार है। जो सर्वत्र व्याप्त है। झटका नहीं मार रही वो क्या हो गई? निर्गुण निराकार। निर्गुण भी है। अभी गुण नहीं है उसमें। और फिर वही बिजली जब तारों में दौड़ने लगी उद्योग करने के कारण तो वही बिजली झटका मारने लगी। अब क्या हो गई वह सगुण निराकार और फिर वही बिजली बल्ब के माध्यम से उस बिजली ने ऐसा स्वरूप बनाया जो हमारी आंखों का विषय बन गया। ठीक है?
01:36:50:04 व्यवहार का विषय बन गया। तो अब वो हो गई सगुण साकार। तो इसी प्रकार से भगवान के तीन स्तर है। तो अगर आप थोड़ी देर के लिए मान ले कि नातस प्रथमा अस्ति कहा गया है तो उसके सगुण वो सगुण अथवा निर्गुण निराकार रूप के बारे में कहा गया है। सिंपल। अब दूसरी बात यह है कि वेदों में ही 31 19 में यजुर्वेद में यह कहा गया है कि वह नाना प्रकार के रूप बनाता है। गर्भ में विचरण करता है। वो जो है प्रकट होता है। विराट सूक्त सूक्त हमारे यहां वो तो कुछ हमारे यहां आ के जो कुछ भटके हुए सनातनी है जिनको हम घर वापस जो भटके हुए मार्ग पे है उनको वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। जो वेदों का ऐसा अर्थ प्रस्तुत करते हैं कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। वो बात अलग बात है। अभी बात ये है जो मूल मान्यता है वेदों की हमारी मेरी हम जो प्रॉपर सारी चीजें ले चल रहे हैं उसके अनुसार ईश्वर अवतार ले सकता है। फिर भी अगर ये टॉपिक अगर आप इस जोर देते हैं एक मिनट भाई भाई साहब अगर आप इस पे जोर देते हैं कि ये वेदों से मैच नहीं खा रहा वेदों में ये लिखा है वो लिखा है तो ये हमारा टॉपिक नहीं है। टॉपिक यह है कि अगर मैं ईश्वर को सर्वशक्तिमान मानता हूं तो वह किस किस प्रकार से आप उसको काउंटर
01:38:05:18 करिए कि सर्वशक्तिमान नहीं हो रहा ये बताइए मेरी मान्यता मैं करूंगा लेकिन आपके ज्ञान का आधार वेद है आपके ज्ञान का आधार जो है वो वेद है और आपने वेद की जो मैंने श्लोक बताया था उसको आपने उसे मूल्यवान कहा कि उसके जैसा मूल्यवान मतलब कोई है नहीं है ना जैसे अरबी के अंदर इसी वर्ड को कहेंगे तो वम कुत इसको अरबी में भी कहते हैं कि उसके जैसा कोई नहीं है। ये आयत कुरान में भी है कि उसके जैसा कोई नहीं है। तो यहां हमारे बीच में एक समानता पाई जा रही है कि आप भी उसी ईश्वर को मानते हैं कि जिसके जैसा भाई साहब देखिए मैं दोबारा से आपको पास आ रहा हूं। आपका ईश्वर अवतार धारण नहीं कर सकता है। हम उस ईश्वर को मानते हैं जो सबको कर
01:38:55:18 जो ये जो आप जो ये सिद्ध करना चाह रहे हैं कि वेद में भी कुरान का ही ज्ञान है। कुरान में भी वेद का ही ज्ञान है। ये हमारा विषय नहीं है। आप टू द पॉइंट जवाब क्या है? मैं आपसे वही कह रहा हूं। एक मिनट रुकिए। मैं ये कह रहा हूं क्या ईश्वर के अवतार लेने से उसके सर्वशक्तिमान होना साबित होता है क्या या अगर वो ईश्वर अगर अवतार नहीं लेगा हां मैं बता रहा हूं ना आपने क्या बोला ना लास्ट में आपके वाक्य के अंत में क्या आया सुनिए आपने बोला आपने बोला क्या आपने बोला क्या आपने बोला क्या भाई साहब भाई साहब सुन लीजिए आपने क्या बोला ना आपने क्या बोला अभी आपने क्या शब्द का उपयोग किया ना तो सुनाई नहीं दिया होगा इसलिए सुनाई नहीं दिया होगा इसलिए क्या बोला होगा आपने बोला ऐसा होने से ऐसा होता है क्या
01:39:51:03 वो मैं मैं ये कह रहा हूं कि आपके नजदीक मैंने बोला आपने अभी एक आपने अभी एक सेंटेंस बोला है जिसमें कि प्रश्नवाचक शब्द आया है प्रश्नवाचक शब्द आने का मतलब है आप मुझसे कुछ पूछ रहे है हां लेकिन बात कंप्लीट नहीं होने दी ना आपने वो पूछ ही तो रहा हूं मैं आपसे मैं सवाल कर रहा हूं आपसे तो पूछ ही रहा हूं तो मैं यह कह रहा था कि जैसे ईश्वर अगर अवतार ले ले तो उसका सर्वशक्तिमान होना साबित होता है। और अगर ईश्वर अवतार ना ले तो उसका सर्वशक्तिमान होना साबित नहीं होता है। ये बताइए मुझे ये कैसे अगर वो ईश्वर मैं जिस ईश्वर को मानता हूं अवतार नहीं लेता है। क्योंकि ज्ञान के अंदर बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं भाई साहब। मैं बता रहा हूं।
01:40:37:08 मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं। मैं बताइए। इसके लिए हमें पहले यह जानना आवश्यक है कि ईश्वर मनुष्यों का क्या कहते हैं जो मनुष्यों द्वारा उपास्य मनुष्यों द्वारा प्राप्त किया जाने योग्य मनुष्यों द्वारा धारण किया जाने वाला उद्देश्य वो किस प्रकार से सिद्ध होता है यह हम जान ले पहले तब हम यह जान पाएंगे कि ईश्वर का अवतार ले सकने वाला लेने वाला आवश्यक नहीं है ले सकने वाला आवश्यक है ले सकता हो क्षमता होनी चाहिए वो लेता है कि नहीं लेता बात अलग है बाद की बात है वो मैंने सिद्ध कर जो है ईश्वर की क्षमता सिद्ध हो रहा
01:41:25:20 मैं क्षमता सिद्ध मैं क्षमता सिद्ध कर ये क्षमता नहीं रही फिर उसमें कि वो बिना रूप लिए भी कर सकता है बोला है आपने कहा क्षमता नहीं रही वो क्षमता नहीं रही अच्छा आपकी आवाज आ रही है। बिना उतार के आगे पीछे हो रही है भाई साहब। हेलो हेलो आपकी आवाज आगे पीछे हो रही है। जी मैं ये कह रहा हूं के अगर आपका जो जिसका एक बार जाके दोबारा आइए। एक बार जाके दोबारा आइए। आप आपकी आवाज लिप्सिंग बदल रही है आपकी।
01:42:30:19 जी आवाज आ रही है अभी अब आपने मुझसे ये पूछा है रिपीट करने दो रिपीट रिपीट करने दो आपको मैं वीडियो दिखा आपको मैं वीडियो आपने कंप्लीट नहीं करने दिया मैं बिल्कुल चुप रहूंगा सुनूंगा किस में बोले थे मैं बोल नहीं पाया था आपने कुछ पूछा था मैं बोल रहा था आप बीच में बोले थे मैं बोला था और कंप्लेंट कर रहा था कि आपने बीच में एक मिनट आपको मैं वीडियो दिखा देता हूं भैया इनको वीडियो दिखाओ एक मिनट एक मिनट भाई साहब भाई साहब एक मिनट आपकी अभी आवाज नहीं आ रही। मैंने आपको म्यूट किया है। मैं आपको वीडियो दिखाता हूं। आपने एक प्रश्न किया था। आपने एक प्रश्न किया था। मैं उसका उत्तर दे रहा था। उसके बीच में आप फिर प्रश्न करने लगे थे। मैं आपको उसका उत्तर दे नहीं पाया था। आप फिर बोलने लगे थे। 10 सेकंड दीजिए। 10 सेकंड ओनली। बोलिए। हां। तो मैं यह कह रहा हूं कि ईश्वर आप जिस ईश्वर में अवतार मानते हैं तो वो बगैर अवतार लिए इस बात पर सक्षम नहीं है कि बगैर अवतार लिए भी वो कुछ कर सके। हो गया। अब मैं पूरा उत्तर दूं। आप दीजिए कि बगैर अवतार के वो नहीं कर सकता क्या कुछ? मैं पूरा उत्तर
01:43:45:25 दू। फिर काउंटर बीच में थोड़ा सा टाइम दे दीजिएगा। अवतार के भी सब कुछ कर सकता है। मगर यह उसकी इच्छा पर है कि वो अवतार ले कोई काम करे या बिना अवतार ले। मगर हम उस पर बाउंडेशन नहीं लगाएंगे कि नहीं भैया अवतार ले नहीं कर सकता। पहली बात। दूसरी बात उसका अवतार ले सकने वाला या किसी भी मर्यादा से मरदित या किसी भी बाधा से बाधित ना होने वाला आवश्यक क्यों है? वो मैं आपको बता रहा हूं। ईश्वर का ईश्वर होने के लिए अबाध्य होना अनंत सामर्थ्यवान होना किसी भी बाधा से बाधित ना होने वाला आवश्यक क्यों है वो मैं आपको बता रहा हूं। अब सुनिए ध्यान से यह हम ध्यान देना पड़ेगा कि ईश्वर है और ईश्वर किसी मनुष्य का किसी जीव का या ईश्वर मनुष्य मात्र का प्राणी मात्र का जो है प्राप्तव्य है। प्राप्तव्य का मतलब होता है जिसको जिस तक हमें पहुंचना है जिसको जिस स्थिति को हमें प्राप्त करना है। इस रूप में ईश्वर को सिद्ध करने के लिए हमें नास्तिकों का जवाब देना पड़ेगा। वो जवाब क्या है? नास्तिक का प्रश्न होता है। मैं कैसे मान लूं कि कोई ऐसे एंटिटी है दुनिया में
01:45:01:01 जो कि इसकी पूजा करनी चाहिए जो सर्वशक्तिमान है। ठीक? तो उसके सामने पूजा करने योग्य, पहुंचने योग्य, प्राप्त किए जाने योग्य, जानने योग्य ईश्वर को स्थापित करने के लिए जो हमारी आर्गुममेंट है वो शुरू होती है ब्रहण्यक उपनिषद एक तीन 28 से असतो मा सदगमया तमसो मा ज्योतिर्गमया मृत्युमा मृतम गमया ठीक इसका अर्थ है कि प्राणी मात्र के अंदर कभी ना मरने की प्राणी मात्र के अंदर अंदर कभी ना मरने की, अखंड ज्ञान को प्राप्त करने की यानी कि मूर्ख ना बनने की और कभी भी दुखी ना होने की चाहत विद्यमान है। ठीक है? इस चाहत को ही कहा जाता है सत, चित आनंद यानी सत यानी अमरता। चित यानी कि अखंड ज्ञान। ऑल नोइंग। ठीक है? सर्वज्ञ और क्या कहते हैं? आनंद का मतलब अनंत एंडलेस जॉय।
01:46:06:14 हमेशा का आनंद की बात कर रहे थे। आनंद का आनंद तो ये सच्चिदानंद की चाह एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी होती है। तो अगर हम उदाहरण के रूप में देखें तो एक नास्तिक व्यक्ति भी कभी-कभी ये चाहता है कि बारिश ज्यादा हो रही तो कम हो जाए। एक नास्तिक व्यक्ति भी यह चाहता है कि कल अगर जो है इंडिया पाकिस्तान का मैच हो रहा है तो मैं यह जान सकूं कि उसमें कौन जीतेगा या फिर मैं कंट्रोल कर सकूं कि कल जो है भारत जीत जाए ऐसा कुछ हो जाए वो भारत जीत जाए या पाकिस्तान जीत जाए जो भी है भविष्य को भी देखने वाला या फिर भविष्य को भी कंट्रोल कर सकने की भावना नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी है। यानी कि नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी एक भावना व्याप्त है कि वो तीन प्रकार की बाधाओं से बाधित ना हो। पहली बाधा देश करत, काल कृत या फिर परिस्थिति कृत। ऐसा दुनिया में कुछ ना हो जिससे मैं रुक जाऊं। ठीक है? अब क्या है? एक सिद्धांत है कि हमारे अंदर जिसज चीज की चाह है उस चाह के होने से ही यह सिद्ध होता है कि दुनिया में उस चाह का निवारण
01:47:21:25 निराकरण करने वाला जो सब्जेक्ट है वो मौजूद है। जैसे हमारे अंदर भूख से सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में भोजन है। हमारे अंदर प्यास से सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में पानी है। हमारे अंदर सुनने की क्षमता से सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में आवाज है। तो जिस प्रकार एक नास्तिक के अंदर देखने की चाह से दृश्य सिद्ध होता है। भोजन की चाह से भूख से भोजन सिद्ध
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01:47:50:09 होता है। प्यास से पानी का अस्तित्व सिद्ध होता है। उसी प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त यह जो सतचित आनंद की चाह
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01:47:59:27 है उससे यह सिद्ध होता है कि कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है जो उसकी चाह का विषय है। जो हम मांग रहे हैं वह वही है। ठीक है? यहां तक पहुंच गए। अब इसमें क्या है? हमने क्या देखा था कि उस चाह को जब हमने खोला था तो हमने देखा था कि वो देश कृत कालकृत परिस्थिति कृत किसी भी बाधा से बाधित ना हो। ठीक? तो इसके लिए आवश्यक है अगर उसकी चाह का विषय वो सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है। है ना? तो वो ना तो देश बाधा से बाधित हो। यानी कि क्या ईश्वर यहां हो सकता है कि नहीं हो सकता? बाधित हो गया। यानी कि यह जो ईश्वर है जो यहां नहीं हो सकता वो उसकी चाह का विषय नहीं है। नास्तिकता का उत्तर नहीं है वो ईश्वर। उसी प्रकार अगर हम कहे कि वो तब था अब नहीं है। कालकृत बाधा वो तब था तब नहीं है। अब नहीं है। तो काल कृत बाधा से बाधित हो गया तो फिर वो नास्तिक की चाह का विषय नहीं हो सकता। क्योंकि वो हर प्रकार की बाधा से मुक्त होना चाहता था। देशत कालकृत और परिस्थिति कृत तो वो भी नहीं है तो इस्लाम का जो ईश्वर है वो कालकृत बाधा से तो मुक्त है वो था है और रहेगा ये तो है मगर यहां पहली नंबर बात उपदेश कृत बाधा से बाधित है कि वो वहां है यहां नहीं हो सकता बाधित है तो
01:49:15:15 हमारा क्या है भाई साहब लेट मी फिनिश लेट मी फिनिश भाई साहब लेट मी फिनिश अब क्या है हां पूरा करता हूं अब क्या है देश कृत से बाधित नहीं होना चाहिए तभी वो उसका उपास सिद्ध होगा। काल कृत से बाधित नहीं होना चाहिए। तभी वह उसका उपास सिद्ध होगा। अब उसके बाद है परिस्थिति। इस कारण से वो ऐसा नहीं कर सकता। इस कारण से वो ऐसा नहीं हो सकता। यह परिस्थिति है। है ना? ऐसा है। यह वाला लॉजिक है इसलिए वो ऐसा नहीं कर सकता। तो ये परिस्थिति है। तो परिस्थिति कृत बाधा से भी वो बाधित नहीं होना चाहिए। तब जाकर के वो ईश्वर जो होगा जो देश कृत कालकृत परिस्थिति कृत किसी भी बाधा से बाध्य नहीं होगा। अगर कोई ऐसा है वही ईश्वर नास्तिकों का उत्तर है। वरना नास्तिकों का उत्तर नहीं सिद्ध होगा। यानी कि वो जीव की चाह का वास्तविक जो विषय है जो जीव की वास्तविक चाह है अनंत सच्चिदानंद की चाह वो प्राप्त कराने वाला वो सिद्ध ही नहीं होगा। अगर वो परिस्थिति बाधा से बाध्य होगा तो जब हम कहते हैं कि अमुक एक मिनट तो जब हम कहते हैं कि अमुक अमुक कारणों से ईश्वर अवतार नहीं ले सकता तो क्या हुआ परिस्थिति कृत बाधा से बाध्य है
01:50:31:03 अभी वो देश कृत बाधा है ना उसको छोड़ दीजिए अभी वो देश कृत बाधा उसको छोड़ दीजिए वो हमने काफी देर उस पर बहस कर ली वो सर्वशक्तिमान की शक्ति और वो शक्ति और उसमें शक्तिमान में अंतर है कि नहीं मगर मगर यहां पे क्या है जब हम कहते हैं कि अगर वो ऐसा करेगा तो ऐसा हो जाएगा ऐसा करे तो ऐसा हो जाएगा। यानी कि वो परिस्थिति जन्य जो बाधा है उससे बाधित हो रहा है। और अगर वो हो रहा है तो वो उसका उपास सिद्ध नहीं हो सकता। अगर हो सकता है तो आप सिद्ध करके बता दो। मैं हर चीज को काउंटर कर सकता हूं कि अल्लाह जो कुरान का ईश्वर है वो इस इस कारण से जीव मात्र की चाह का वास्तविक विषय सिद्ध होता है। सिद्ध करके दिखा दो। हां जी। तो मैंने आपको ये बता दिया कि उसका उसका परिस्थिति से बाधित ना होना आवश्यक क्यों है? ये मैंने आपको बता दिया। हां बताइए। तो देखिए सबसे पहली चीज तो आपने ये बताया कि मनुष्य रूप में वो जो आता है ईश्वर मनुष्य रूप में अवतार लेता है। तो मनुष्य रूप में आता है तो मनुष्य की बॉडी जो है उसी रूप में आएगा और उसके पास नाक होगी सूंघने के लिए। कान होंगे सुनने के लिए। और आंखों की देखने के लिए बॉडी के जितने भी आजा होंगे वह उनका यूज़
01:51:46:14 लेगा। उनका यूज़ करेगा। जैसे इंसान करते हैं। यूज़ करने का नाटक करेगा। यूज़ करने का नाटक करेगा। यूज़ ही नहीं करेगा। वो वहां पर उस रूप में होते हुए भी, वो वहां पर उस रूप में होते हुए भी सब जगह है। ठीक है? ना मैं आपने कहा कि वो नाटक करेगा। आप सत्य से हटके नाटक करने लग जाएगा। तो ये दुनिया ही सत्य नहीं है। ये दुनिया ही सत्य नहीं है ना हमारे यहां तो वही तो मैंने कहा ये दुनिया ही आने वाली है। जिसको मान रहे हो जिसने इस दुनिया को बनाया है। इसको इसको ही लीला कहते हैं। ये सुनिए। अब जैसे जो वो वाला सवाल का जवाब है वो दे देता हूं मैं आपको कि अगर ईश्वर की सत्ता कहीं पर है। मैं उसका जवाब दे दूं आप समझ जाओगे। अगर ईश्वर की सत्ता कहीं पर है
01:52:42:21 नहीं नहीं आप आप बीच आप बीच में आ गए आपकी फोटो चिपक रही है आपका फोन लग रहा है गरम हो गया फिर से गरम नहीं हुआ है मेरे कॉल आ गया था कॉल आ गया था तो इस वजह से बाहर आ गया मैं तो अभी वापस आ रहा हूं आइए
01:53:48:19 हेलो हम फोटो नहीं आ रही आपका चित्र हां चित्र नहीं आ रहा है क्यों अब पता नहीं क्यों आप देखिए क्यों नहीं आ रहा है चलिए ठीक है ऐसा करते हैं आज इनका मुझे लग रहा है फोन वो गरम हो गया टेक्निकल इश्यूज आ रहे हैं हम लोग फिर किसी दिन ये चर्चा अगर उनको उनके लिए सहज होगा तो रख लेंगे है ना और क्या कहते हैं हमने इनसे पूछा कि सर्वशक्तिमान है यदि है तो वह किसी भी बाधा से बाधित है कि नहीं तो वो एक तो देश कृत बाधा से बाधित है वो हर जगह नहीं है जात से और दूसरी बात परिस्थित परिस्थिति कृत बाधा से तो बाधित है ही है अच्छा एक बात और बता दूं मैंने क्वेश्चन ये वाले किए नहीं इनका कहना है कि वह झूठ नहीं बोल सकता मगर उसने खुद कहा है सातवें उनका जो सातवें नंबर की जो सुरा है उसमें खुद कहा है कि मैं लोगों को भटकाता
01:55:03:27 हूं तो भटकाने के विषय में क्या है? कौन किसको कौन भटका रहा है? ईश्वर ही भटका रहा है। तो भटकाने वाला ईश्वर सिद्ध हो रहा है। झूठ वो बोल सकता है। मगर वो अपनी बारी पर बोलता है। और एक जगह दो 106 में कुरान के ईश्वर ने कहा है दो6 में कुरान के ईश्वर ने कहा है कि हम अपनी कोई आयत बदल देते हैं तो उससे बेहतर आयत देते हैं। है ना
01:55:40:26 रिजवान जी मैं अब इस चर्चा को दो घंटे ऑलमोस्ट हो गए हैं और आपका टेक्निकल इशू भी आ रहा है। आपकी फोटो भी चिपक रही है। लिप्सिंग हो रही थी आगे पीछे तो दोबारा किसी दिन जिस दिन आपको सहज लगेगा उस दिन कर लेंगे और क्या कहते हैं मैं एक एंडिंग दे रहा हूं। आ रही है आपको? हां आवाज आ रही है। ठीक है। वो क्या मुझे कॉल आ रहा था इस वजह से डिस्टर्बिंग हो गई थी। अच्छा मैं अभी सुन रहा था। मैंने देखा आपको आप कुछ सात नंबर की सूरत की बात कर रहे थे कि उसमें ईश्वर जो है भटका रहा है। तो मुझे हां हां हां हां कर रहा था बताइए। ईश्वर ने भटकाने की बात कही है ना? नहीं नहीं कही। अच्छा मैं अभी बता मैं अभी बता ये कहीं पे कहा गया दो 106 में कि हम अपनी कोई आयत बदल देते हैं तो जो है उससे बेहतर आयत देते तुम नहीं जानते ईश्वर जो चाहे वो कर सकता है नहीं आयत नहीं बदलते हैं आयत से आयत से है ना ये आयत है सूर बकरा दूसरी सूरत की 106 नंबर की आयत है के जो हम बदलते
01:56:56:09 हैं आयत से या भुला देते हैं तो उससे बेहतर के अच्छे के साथ आते हैं या उसी के जैसे के साथ तो कोई भी चीज आयत से बदलता है। आयत को नहीं बदलता है। आयत से बदलता है। आयत को नहीं बदलता है। मिसाल दे दीजिए। मिसाल मिसाल दे दीजिए। समझ पाऊं मैं आपकी बात को। हां। नहीं समझ पा रहे ना आप? तो जैसे जैसे कोई ज्ञान मैं गलत समझा हुआ हूं। मिसाल के तौर पर तो वो आयत से क्या करेगा? बदल देगा मेरे उस ज्ञान को। यानी आयत का ज्ञान दे देगा मुझे। और जो मैं ज्ञान पहले समझा हुआ था उस आयत के ज्ञान से सही ज्ञान पे आ जाऊंगा। है ना? तो आयत से मेरे ज्ञान को बदल देगा और उससे बेहतर ज्ञान दे देगा जो इससे पहले मैं समझा हुआ था। अपनी मर्जी से या उसके जैसा ही बेहतर दे देगा। समझ रहे हैं? तो ये वहां आयत में है। अरबी है अभी टाइम लग जाएगा और दूसरा आप भटकाने की कह रहे थे एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट आपने जो आयत पे बोला है वो मैं समझ रहा हूं जैसे मैंने किसी आयत को पढ़ के गलत समझ लिया है ना
01:58:13:03 जैसे मैंने किसी आयत को पढ़ के गलत समझा तो ईश्वर क्या करता है ऐसे शब्दों में वही आयत दोबारा देता है जिससे मैं सही समझ जाऊं। ये बात है क्या चिपक गया आपने मैंने चिपक रहा है आपका बार-बार मुझे कॉल आ रहा है ना बार बार कॉल आ जा रहा है इस वजह से आप डीएनडी लगाइए ना वहां आप डीएनडी लगा लीजिए भाई साहब
01:58:47:08 चलिए ठीक है अब हम जो है फिर दूसरे किसी दिन रखेंगे अभी मैं बता दूं इन्होंने जो क्लेम किया है वह क्लेम इनकी कुरान से ही खंडित होता है। 5 101 में कहा जा रहा है कि ज्यादा सवाल
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01:58:59:18 मत करो अन्यथा जो है तुम्हारे लिए वो आयतें खोल दी जाएंगी जिन आयतों के कारण
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01:59:05:22 पहले के लोग बागी हो गए थे। मतलब इनका जो है आयत बंद भी होती रहती। रिजवान जी आपके साथ फिर किसी दिन कंटिन्यू कर लेंगे। दो घंटे हो चुके हैं। दो घंटे हो चुके हैं और जो है आपका प्रॉब्लम भी आ रही है। तो 5 101 में क्या कहा गया कि तुम्हारे लिए वह आयत खोल दींगी जिनको पढ़कर कुछ लोग भागी हो गए यानी कि पहले जो नियम था वो अब हटा दिया गया तो शाश्वत सिद्धांत नहीं है। मतलब बदलना वहां पर सिद्धांत जो पहले उसके द्वारा अभी कल्याण होना था मगर अभी कल्याण नहीं हो रहा है तो बदलना सिद्ध हो रहा है। और एक आयत और है दो 187 उसमें क्या है कि अब तुम्हारे लिए रोजों की रात में स्त्री संग करना भी अलऊ कर दिया गया है। कर दिया गया अलऊ। तो यानी कि पहले नहीं था अलऊ। अब है अलऊ। यानी नियम बदल रहा है। यानी आयतों से मिलने वाला जो नियम इत्यादि है वो चालू बंद बदलते रहते हैं। और जो इनकी ये वाली बात है तो फिर ये वाली फिट हो जाती है। कौन सी कि हम अपनी कोई आयत बदल देते हैं तो उससे बेहतर देते हैं। हम और एक बात और है कि
02:00:17:13 आयत दी किसको जा रही है? दी जा रही है आयत मोहम्मद जी को। तो अगर ना समझने वाली बात आएगी वो समझ नहीं पाए थे शब्दों को तो फिर मोहम्मद जी पर भी प्रश्न उठ जाएंगे। ये सारी कई बातें हैं और मैं थोड़ा समराइज कर दूं। ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। परिस्थिति कृत बाधा से बाधित है। सब जगह नहीं हो सकता। देश कृत परिस्थिति से बाधित है। अगर ये कहते हैं कि ये सब जगह ऑल क्या ओमनीपोटेंट है। तो फिर इसको इनको मानना पड़ेगा कि हर जगह शक्ति के रूप में वो है पर ये मानते तो है नहीं। तो ये वाली एक बात रह गई। दूसरी बात इन्होंने कहा कि भाई वो गलत काम नहीं कर सकता मगर वो शैतान को बनाने के रूप में गलत काम कर रहा है जो आगे चलके एडमम वो आदम को भटका रहा है इंसान को भटका रहा है इंसान नीचे आ रहा है तो वो भटका रहा है भटकाने वालों को जन्म दे रहा है हां वो चाहत को जन्म दे रहा है नहीं उसको ही पकड़ ले शैतान रूपी चाहत है जो उसको बना रहा है कुल मिलाकर के वो ऐसी चीजें कर रहा है जो दूसरों के लिए कष्टदायक है अच्छा और क्या पूछे और क्या पूछा था हमने इनसे जुल्म वाली बात में फिर वो वो सिद्ध नहीं होती। अच्छा टेस्ट की बात है कि यहां पर उसने बुराई और अच्छाई दोनों को बनाया क्योंकि टेस्ट लेना था तो वहां पर क्यों बनाया? वहां तो टेस्ट नहीं था। टेस्ट तो यहां है तो
02:01:32:19 क्यों बनाया? रोबोट चाहिए था। तो मतलब रोबोट नहीं चाहिए था ये उद्देश्य है या क्या चाहिए था वो उद्देश्य क्लियर नहीं हुआ। अच्छा अब कुछ तात्विक चीजें हैं। इन्होंने अपनी चर्चा में यह भी माना कि जो सृष्टि है वह कई बार बनती है और यह भी माना कि जो लोग क्या कहते हैं वहां जाते हैं तो वो जो है हमेशा के लिए रहते हैं। तो यानी कि ये धरती वाली जो सृष्टि है वो कई बार बनती है। मगर वो वाली जो सृष्टि है वो कई बार नहीं बनती। तो फिर जो धरती वाली सृष्टि है उनके लिए दोबारा जन्म दोबारा इंसान बनाए जाते हैं। दोबारा आदम की कहानी शुरू होती है। आदम और जो भी है या फिर नए तत्व बनाए जाते हैं और जो नरक में चले गए वो नरक ही भोगते रहते हैं। वो क्या है वो भी विवेचना इन्होंने नहीं की। और
02:02:22:19 हां हमने अभी इनसे ये पूछा ही नहीं है कि जो है इनके अनुसार उपास्य प्राप्तव्य एकमात्र गंतव्य स्थल क्योंकि जो कॉनंटेंजेंट वाली थ्योरी है ना कंटेंजेंट वाली थ्योरी कंटेंजेंट वाली थ्योरी में भी वो सर्वशक्तिमान की कारण वो वो सिद्ध नहीं होगा। इस्लाम का ईश्वर जो है सब कुछ हर चीज का मूल कारण सिद्ध नहीं होता क्योंकि वह सब जगह नहीं है। सिंपल सीधी सी बात हर चीज का मूल कारण सर्वव्यापी नित्य सिद्ध नहीं होता। तो कॉन्टेंजेंट वाली जो थ्योरी है वो लागू नहीं होती। फिर भी अगर मान लेते हैं कि कंटेंजेंट के द्वारा अल्लाह जो है वो सिद्ध हो जाता है। उसका अस्तित्व मगर फिर भी वो मनुष्य का उपास्य मनुष्य का प्राप्तव्य सिद्ध नहीं होता। क्योंकि इनके यहां पर तो सच्चिदानंद है ही नहीं। सच्चिदानंद है ही नहीं तो फिर उस ईश्वर या उस किताब के द्वारा दी जाने वाली मान्यता कोई क्यों माने जहां पर उसको उसकी वास्तविक जो इच्छा है जिसके कारण वो किसी भी किताब को मानता है वो इच्छा पूरी नहीं हो रही क्योंकि अंत में घोड़े की कहेंगे तो घोड़ा आ जाएगा इन्होंने कहा तो घोड़े की कहेंगे घोड़ा आ जाएगा यानी बाधित हो रहा है अनंत आनंद नहीं है बीच में आनंद बाधित हो रहा है घोड़ा आएगा तब आनंद मिलेगा घोड़ा नहीं है तो बाधित नहीं तो मोक्ष भी नहीं है तो क्या हो गया सर्वशक्तिमान ईश्वर
02:03:38:07 परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म तीनों चीजें हमने निकाल ली जो हम क्लेम करते हैं। तीनों चीजें निकाल ली। ना सर्वशक्तिमान ईश्वर है ना परम स्वतंत्र मोक्ष है ना शाश्वत धर्म है। धर्म बदल रहा है। आयतें बदल रही है। चीजें बदल रही है और मोक्ष बाधित है। परम स्वतंत्र मोक्ष नहीं है और सर्वशक्तिमान ईश्वर भी। अब ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करने के विषय में हम बता चुके हैं कि अगर ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करना है तो यह मानना पड़ेगा ये संसार जो है माया से बना हुआ है क्योंकि अगर वो सर्वत्र एक रस है तो माया से बना हुआ हमें मानना पड़ेगा और
02:04:19:27 माया से बना हुआ मानना पड़ेगा। जब हम इसको माया से बना हुआ मानेंगे तो वो जो जुल्म हो रहा है ना वो वाली बात भी करेक्ट हो जाएगी कि अगर किसी को चोट पहुंची है तो उसको यह बताना है कि तुम अभी छोटे हो तुम समझ नहीं पा रहे हो ये सब एक खेल है मतलब अविद्या है ये तुम्हारी माया का भ्रम है वस्तुत तुम कौन हो नैन चिनती शस्त्राण नैन धति पावका न चैन क्ले न सोति मारता वस्तुत तुम ही हो तुम आत्मा हो तत्व से तो तुम खा ही जो है आपको खामखा ही मतलब ऐसा लग रहा है कि आपके साथ जैसे बच्चा रोता है ना व्यर्थ की बातों में ऐसे ही वो व्यर्थ की बातों में और इससे ही ईश्वर का इंटरप्ट ना करना भी सिद्ध हो जाएगा। क्यों? क्योंकि जिसको यह नहीं मालूम है कि अविद्या है उसका मान इंटरप्ट होना प्रभावित होना तो उचित है। मगर जिसको मालूम है कि अविद्या अविद्या ही है। उसका वो इंटरप्ट नहीं हो उससे प्रभावित नहीं हो वो भी उचित है। तो वो चीज हो जाएगी। अब क्या है कि ईश्वर क्योंकि नित्य है तो इसलिए उसने जब माया बनाई तो उस माया कर में वो कितने भी अवतार ले सकता है। सगुण निराकार में आता है। उसके बाद सगुण साकार में। ये सारी पूरी अपनी कांसेप्ट हो गई जो सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत
02:05:35:08 धर्म के संबंध में हम व्याख्या देते हैं। अब वो बात वो वाली बातें कई बार हो चुकी है। शास्त्रों में कहां-कहां लिखा है इसके लिए आप हमारे दूसरे सनातन सिद्धांत वाली सीरीज बनाई हुई है क्या कहते हैं प्लिस्ट उसमें जाकर के आप चेक करें और जो रिजवान जी और रिजवान जी के समर्थक भी हैं जो आगे चर्चा में आना चाहे वह भी हमारी मान्यताओं को देखने के लिए उन वीडियोस को देख ले पहले। हालांकि यह चर्चा इस बारे में है ही नहीं। चर्चा कहां से शुरू हुई? हमने किसी मातृ शक्ति से पूछा था आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं? तो Instagram पे इन्होंने कहा था वो जवाब नहीं दे पाई थी तो उन्होंने कहा था मैं जवाब दूंगा। मगर इन्होंने जवाब नहीं दिए। जवाब इन्होंने नहीं भी दिए मगर हमको चीजें प्राप्त हो गई। ठीक है। अब ये अपूर्व कुमार करके कोई आ रहे हैं मगर अपनी फोटो नहीं दिखा रहे हैं। तो इनको ले पाना मुश्किल होगा। चलिए ठीक है। सभी को जय श्री राम। शास्त्रवाद जी बताइए। सुन लेते हैं आपका रिजवान जी चर्चा काफी लंबी हो गई है दो घंटे की तो हम किसी और दिन आगे बढ़ाएंगे बात को है ना आपने कई बातों का उत्तर भी नहीं दिया है आप वहां पर मौन हो गए और आप जो विषयंतर करते हुए इस पर आ गए कि भैया अब आप जवाब दो हमने जवाब दिया भी है और फिर किसी दिन देख लेंगे
02:06:51:01 हां बताइए शास्त्रवाद जी जय श्री राम भैया जय श्री राम क्या सीखने को मिला कुछ कि नहीं खामखाई मेहनत अच्छा चर्चा हुआ कल भी बहुत अच्छा चर्चा हो रहा था चलिए भैया यहां पे आवाज आ रही है हेलो जी जी आ रही है जी ऐसा तो बहुत अच्छा हुआ आज लेकिन आज जो आपने उनको सिद्ध किया है ना कि जो गुणों के आधार पे और जात के आधार पे जो ईश्वर इनका है वो सर्वव्यापी सिद्ध नहीं हो रहा है ना जात के आधार पे लेकिन गुण के आधार पर गुण के आधार पर सर्व्यापी बता रहा है। अरे जब गुणी होगा तो गुण होगा ना। गुणी होगा तो गुण भी होगा। उधर गुणी ही गुण वहां पे उसका प्रयोजन क्या हुआ? वो जानते ही नहीं ना गुण गुण और उसमें इसीलिए मैं देखो ऐसा होता है अगर हम उनकी बात को बार-बार करेक्ट करने लग जाए ना तो उसमें क्या होता है ये हम लोगों को जानना होगा कि अ विषय को बचाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। फटफट पलटता जाएगा। बहुत चुटकियों में विषय बदलता जाएगा। अब मैं गुणों को समझाने जाऊंगा। वो कुछ क्लेम
02:08:06:02 करने लगेंगे। वो एक नई व्याख्या शुरू हो गई। तो क्या है जो वो बोल रहे हैं उसी में से कुछ ऐसा खोजो जिससे कि अपना काउंटर कर पाओ। जो बोल रहे और जैसे उन्होंने बोला कि भैया जात के आधार पर नहीं है तो यह हमारे लिए पर्याप्त है कि एक अंतर है क्योंकि जात के आधार पर ईश्वर एक जगह है इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि जात के आधार पर ईश्वर और उसकी शक्ति एक है और वही जात जो है वो हमारा हमारी दृष्टि उसको तत्व कहते हैं शायद है ना बिल्कुल तत्व की दृष्टि से सर्वत्र है हमारे में तो वहां पे ये दो अलग-अलग बता रहे हैं यही तो फसता है बिना सर्वव्यापी होते हुए उसकी सत्ता को नित्य नहीं मान सकते कम ज्यादा करना पड़ेगा शाश्वतता भंग हो जाएगी और देश कृत परिस्थिति से बाधित होते हुए वो सिद्ध हो जाएगा बाधित मतलब हां ईश्वर ओमनीपोटेंट नहीं रह जाएगा फिर
02:09:09:13 ओमनी प्रेजेंट तो है ही नहीं ओमनी पोर्टेंट भी नहीं रह जाएगा। बिल्कुल यहां पे इनका जो ईश्वर सर्वव्यापी अगर उनका जो ईश्वर है गुण के आधार पे यदि सर्वव्यापी है और जात के आधार पे एक देश है तो एक देश होते हुए सर्वव्यापी सत्ता को वो कंट्रोल कर पा रहा है। इसका मतलब सर्वव्यापी सत्ता ज्यादा पावरफुल हुआ ना। सर्व्या एक आ रहा है। एक ये आ रहा है। देखिए क्यों ऑन स्टेज? ये अच्छा एक कमेंट आया। इसका जवाब देना मैं आवश्यक समझता हूं। मनीष जी मैं इस धारणा के साथ जीता हूं कि मेरे पास क्या है? अगर सामने वाले के सिद्धांत को पढ़ के और फिर मैं उसे तोड़ सकता हूं। यानी कि मुझे अपने सिद्धांत पर कम वो है, डाउट है। भाई तुम अपनी मान्यता का जो भी अर्थ लेकर के आ रहे हो, यदि वो वेद विरुद्ध है, शंकराचार्य के विरुद्ध है, हम उसको काट सकते हैं। कुछ भी ले आओ। कुछ भी निकालो। हां। फिर जब हम ऐसे काट देंगे फिर सेकेंडरी हो सकता है कि हम ये कह सकते हैं भाई कुरान में जो तुम क्लेम कर रहे हो कुरान की ओर से आपकी बात अच्छी है फिर वो सेकेंडरी हो सकता है मगर पहले आपको स्वतंत्र रूप से अपने मत को स्थापित करने वाला होना
02:10:24:19 चाहिए स्वतंत्र हमें जरूरत नहीं है सामने वाले का सिद्धांत जब गलत सिद्ध होगा तभी हम जैसे वो कर रहे थे वो क्यों कर रहे थे क्योंकि उन्होंने वेदों के बारे में थोड़ा बहुत जाकिर नायक को जाकिर नायक को कहां से पता लगा है वो तो आप जानते ही हैं कौन देता है ऐसे विचारों को शरण नास प्रतिमा को उसमें मैं क्या कहूं इसीलिए मैं कहता हूं ना लोगों को कि भाई देखो इन इन चीजों से हमें दिक्कत आती है क्या दिक्कत आती है जिसको ये परंपरा मालूम होगा ये मालूम होगा वो तो वहां टिक पाएगा वरना वो जिसको बता दिया नात अस्ति देखो तुम्हारा भी तो ईश्वर अवतार नहीं ले सकता है तो जो अनबिटेबल क्वेश्चन है वो हमारा आएगा ही नहीं बच्चे के पास अनबीटेबल क्वेश्चन क्या तुम्हारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है क्या वो वो जीव मात्र की चाह का वास्तविक विषय है और फिर क्या जो उसके द्वारा मिलने वाला जो मजहब है, दीन है या जो नियमावली है क्या वो शाश्वत है जिस पर तुम भरोसा कर सको भाई आज जैसे एक चीज बदली है कि पहले जो है स्त्री शंकर नहीं था अब कर सकते हैं तो कल को और भी चीजें बदल सकती है कोई और आयत आ सकती है पहले मूर्ति पूजा गलत थी आज मूर्ति पूजा सही
02:11:39:20 तो लो हम तो मर गए लड़ लड़ के वो तो बुत परस्ती मत करो बुत परस्ती मत करो मगर यहां तो यार बदल दिया है ना शाश्वतता होनी चाहिए तो इसलिए आपकी बात अच्छी है पर वो सेकेंडरी हो सकती है कि हम उनकी उनकी बुक से उनकी बुक का जो पर्याप्त जो अध्ययन होना चाहिए हम इस पर ध्यान कम देते हैं कि वहां पर वो हलाला क्या है वो ये वो चीजें नहीं जो तात्विक विचना है ना जिससे अकाट सिद्धांत वो है उस पर ध्यान दिया है। उनकी तात्विक विवेचना क्या है? अभी यह सब तो पूछा ही नहीं गया। अभी यह सब तो पूछा ही नहीं गया।
02:12:26:04 अभी ये सब तो पूछा ही नहीं गया कि जो इंसान बनाया था वो तत्व कहां से लिया? हम अब वो तत्व अगर केवल अपनी इच्छा शक्ति से बना दिया। हां तो इच्छा शक्ति से बना तो यानी वो तत्व वही से आया इच्छा शक्ति के रूप में तो अंश हो गया अभी ये सब तो पूछा ही नहीं गया है कि नहीं वही तो ये लोग बिल्कुल बिल्कुल ये लोग अलग-अलग कहांहां से अभी फसेंगे अभी तो आगे चर्चा बाकी है अगर आएंगे फिर अगली बार जो आएंगे हम कल वाला जो चर्चा था भैया वो बहुत बढ़िया था आप और हम मिलकर कर दोनों धर्म की रक्षा करेंगे। अनुस्त
02:13:12:24 है ना मिलकर करेंगे। सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म इसको कोई काट नहीं सकता। कोई भी आ जाए दुनिया का। इसीलिए कहता हूं मत पड़ो चक्कर में। कोई नहीं है। कोई नहीं चक्कर में कोई नहीं चक्कर में। बिल्कुल भैया। पहले जो आपने उनको जो तर्क दिया था ना एक तो कि हम जो बता रहे हैं मेरे ही पैरामीटर से तुम मेरे को ईश्वर से ईश्वर मत मानो वो वाला पैरामीटर वाला जो बात था ना वो बहुत बढ़िया था हां जी
02:13:53:18 अपने हिसाब से बता रहे थे ना कि कुरान में ये लिखा है तो कुरान में लिखने से हम इसको ऐसे ही मानेंगे तो तुम अपने बाहर से तर्क क्यों ला रहे हो और यहां पे आप बोल रहे थे अगर हम अपना तर्क नहीं लगाएंगे तो फिर आपके दिए हुए तर्कों से ही अगर हम ईश्वर को सिद्ध करेंगे तब तो वही हो गया ना कि हम ही जो पैरामीटर सेट कर रहे हैं उसके आधार पे तुम मानो देखो एक बहुत बड़ा अंतर है पांच 101 में 101 में प्रश्न करने को मना कर दिया गया और हमारे यहां क्या कहा गया है हमारे यहां प्रश्न से ही सभी शास्त्र शुरू होते हैं भगवत गीता अर्जुन के प्रश्न सारे पुराण आप पढ़ लो सब में नैमिसारंड में 80000 88000 ऋषि मुनि बैठे थे वहां जो है प्रश्न प्रश्न किया
02:14:38:07 तो हमारी चीजें प्रश्न से ही शुरू होती है सारी और पराकाष्ठा देखिए अथ तो ब्रह्म जिज्ञासा अर्थात तो धर्म जिज्ञासा गुरु वही जो संशय दूर कर दे अज्ञानता रूपी अंधकार दूर कर दे प्रश्न करते जाओ आपको उत्तर मिलते जाएंगे इधर से इधर से शुरू करो जरूर कभी भी आप उसको बताओ ना तो इधर से शुरू करो इधर से कि ईश्वर लोगों के लिए प्राप्तव्य सिद्ध कैसे होता है? बस यहां से शुरू करो। यहां से जब सिद्ध करोगे तो वो काउंटर करेगा। सर्वशक्तिमत्ता आ जाएगी। तो उधर से जब शुरू करोगे ना तो यहां तक लाने में कई बार आपको देर भी लग जाएगा। देर भी लग जाएगी। यहां से शुरू करो। उधर ले जाओ। कि अगर ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करना है तो हमें क्या-क्या मानना पड़ेगा। बस मानना पड़ेगा तो माया आ जाएगी। विद्या आ जाएगी सब आ जाएंगे। ठीक है? बिल्कुल भैया बहुत बढ़िया रहा चर्चा। हां ये वाला क्वेश्चन रह गया है। वो ठीक है। बहुत सारी चीजें रह गई है। अभी तो बहुत सारी चीजें रह गई। मैं आपको बताऊं अगर सार में कुछ कई सारे क्वेश्चंस हैं। जैसे इन्होंने वो मैंने बताया सृष्टि का इन्होंने दोबारा बनना
02:15:53:08 स्वीकार कर लिया। तो फिर वो वाले लोग जो अमर हो गए हैं वो भी दोबारा मिटेंगे और मरेंगे। क्या होगा? तो कौन सी सृष्टि दोबारा बनती है? यानी कि वो जो वो है क्या कहते हैं? वो आदम वो भी दोबारा बनता है। बहुत सारे झोल है। सबसे पहली बात तो यही है तत्व कहां से आए? दूसरी बात जो नरक में जाएंगे उनको अनंत सजा मिलती रहेगी कि उसके बाद उनका कुछ होगा। अगर उनका दर्द बंद हो गया। अगर उनका जो दर्द है वो बंद हो गया तो इसका मतलब उनकी सजा पूरी हुई। अब वो खाली बैठे। अब खाली बैठे हैं तो क्या वो जन्नत में रहेंगे? कहां रहेंगे? नरक में तो रहेंगे नहीं तो या तो उनका पुनर्जन्म देना पड़ेगा कि भैया अब तुम अब तुम्हें चेक करते हैं सही करते हो कि नहीं तो पुनर्जन्म का कांसेप्ट आ जाएगा और अगर जन्म नहीं दिया तो उनको यूं ही आपने मुक्ति दे दी किस कारण मुक्ति दे दी ये भी दिक्कत आ जाएगी बहुत सारी दिक्कतें ठीक है और टेस्ट वाली बात तो सिद्ध हुई नहीं
02:16:54:14 के लिए सभी को अ आभार तो आप जो है वो कमजोर वाले हिंदू ना बने मतलब एक्स मुस्लिम इत्यादि कई कई सारे ऐसे कार्य कर रहे हैं आप वो ना बने कि हलाला है ये है वो है मोहम्मद जी ने ये किया वो किया ये सब नहीं आप क्या वो कौन से हिंदू बने जिसको अपने ऊपर विश्वास हो अपने ऊपर हमारे पास क्या है जो हम ले चलते हैं स्वतंत्र मेले में मिले थे मुझे रामपाल वाले कोई क्या तैयारी करके गया था बिना तैयारी के वहां पर उनको मैंने खदेड़ा था क्यों क्योंकि परंपरा प्राप्त ज्ञान और वो भी उसका भी परंपरा प्राप्त ज्ञान का बिल्कुल तिनके मात्र कुछ नहीं ना के बराबर अल्पज्ञ है ना कोई क्या हम लोग हमेशा तैयारी करके चले बाहर निकले तो अब जैसे कि अपने घर की स्त्री को लेकर के
02:18:09:20 बाहर जा रहे हैं तो जब कोई अटैक होगा तो हम उससे ये कहेंगे रुक जाओ हम हथौड़ा ले आए छेनी ले आए लड़ने के लिए बेसबॉल का डंडा ले आए ये सब करेंगे क्या आपके पास क्या है आप क्या कर सकते तो उसी से लड़ोगे ना तो अपने आप को ऐसा बनाओ कि ऑन द स्पॉट वहां पर आप अपने धर्म की रक्षा कर पाओ। ये दूसरे की किताबों को पढ़ के आप जो है और अपने धर्म की रक्षा कर पा रहे हो तो इसका मतलब आपने आपके पास अपने सिद्धांत कमजोर है। है ना? ऐसे हिंदू बनिए। मैंने अपना उनके सिद्धांत को काउंटर भी किया और अपना सिद्धांत सिद्ध भी किया। उसको तोड़ नहीं सकता कोई। यहीं से चालू करो। जीव की चाह का वास्तविक विषय सिद्ध कर दो तुम ईश्वर को बिना उसके तीन प्रकार की बाधाओं से मुक्त हुए देश कृत कालकृत परिस्थिति कृत किसी बाधा से बाधित ना हो तो मानना पड़ेगा कि वो निर्गुण निराकार सगुण निराकार सगुण निराकार कैसे आया माया से बस जैसे ही माया आएगी माया तो भगवान की परम शक्ति है जैसे ही माया आती है तो अगर और धर्म को ना मानने वाले ना जानने वाले सब लोग किनारे होने लगते हैं। अब
02:19:24:28 देखा था ना अविद्या का अविद्या का जैसे ही अविद्या आई थी तो क्या हुआ था? हां चलिए ठीक है। जय श्री राम सभी को। जय श्री राम। [संगीत]
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⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
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⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
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⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
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⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
क्या इस्लाम का ईश्वर सर्वशक्तिमान है? Discussion with Rizwan | Part 2 — Continued
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