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00:00:01:01 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और आज हमारी एक बहुत प्रतीक्षित चर्चा होने वाली है। रिजवान खान जी हैं जो हमसे चर्चा करने हेतु यहां पर उपलब्ध हैं। उन्हें हम ले लेते हैं अभिलंब। रिजवान जी स्वागत है आपका। विषय पर आने से पहले एक छोटी सी बात मैं पूछूंगा बस एक जिज्ञासा के हिसाब से कि

00:00:38:07 जैसे आपके यहां कहा जाता है कि पुनर्जन्म तो आपके यहां माना नहीं जाता ना। पुनर्जन्म आखिरत के में जो होगा ना वो माना जाता है। आखिरात में फैसला होगा जो आया है उसका दोबारा यहां यहां पे जन्म नहीं होना है। हां नहीं उनका नहीं होना है। तो जैसे इस विषय में इस्लाम द्वारा क्या बताया जाता है कि जो जैसे जिस दिन वो आखिरी रात होगी उससे जस्ट पहले कोई बच्चा जो जन्मा होगा और जो अभी कुरान को जान भी नहीं पाया होगा और जो है फिर कयामत आ जाएगी और उसके बाद आखिर रात में उसका फैसला किस आधार पर होगा? इस विषय में क्या बताया इस्लाम ने? इस्लाम ने इसके बारे में बताया है कि एक लफ्ज आया है कुरान में नसूर नश्र करना इसका मतलब होता है रिलीज करना यानी दोबारा रिलीज करना जैसे सेवन अर्थ और सेवन ही आसमान सेवन डायमेंशन ये बताया गया है और उनके अंदर मुख्तलिफ तरीके से इंसान का जीवन जो है वहां बीत रहा है।

00:01:54:14 सूर फुरकान की आयत नंबर तीन पढ़ेंगे ना तो मैं यही कह रहा हूं कि उनका जो फैसला है ना जो कयामत से एक दो दिन पहले जन्मे होंगे या कोई एक पर्टिकुलर टाइम होगा जब जन्म होना बंद हो जाएगा बच्चों का है ना कुछ या फिर कयामत से जो एक दो दिन पहले जो जन्मे होंगे बच्चे तो उनका फैसला किस आधार पर होगा क्या होगा उनका हां तो कयामत से कोई एक दो दिन पहले वैसे जन्मेगा नहीं ये लिखा है आपके आपने एक दो दिन पहले कयामत से जो जन्मेंगे ये बहुत टाइम पीरियड पहले ही बंद हो जाएंगे बच्चे होना यानी जिनको

00:02:36:26 क्या चीज ये लिखा है आपके यहां कि कयामत से इतने दिन पहले तक बंद हो जाएंगे बच्चे जन्म लेना पहले नहीं इसमें यूं लिखा है कि कयामत से पहले औलादें होना बच्चे होना जो है वो बंद हो जाएंगे कितने दिन पहले ये नहीं दिन पहले नहीं कोई दिन मुकरर नहीं किया है बल्कि ये जरूर बताया गया है कि कयामत से पहले तो ये एक निशानी हो जाएगी जब है ना बच्चे होना बंद होंगे तो वो घटनी जाएगी और इसमें एक चीज ये और आती है कि अ क्या कहते हैं ये जैसे जो जानवर इत्यादि है इनका फैसला कैसे होगा? तो जानवर इत्यादि जो है पहली चीज इनको अल्लाह ने यानी जो ईश्वर है उसने अपनी इबादत के लिए नहीं बनाया। ईश्वर ने जानवरों को अपनी इबादत के लिए नहीं बनाया। भक्ति के लिए नहीं बनाया। ठीक है? कुरान की एक आयत है फलक जिन्ना कि हमने इंसान और जिन्नात को अपनी ताबेदारी के लिए बनाया। यानी ईश्वर के जो एहकामात है जो ऑर्डर्स हैं उनको उनके ताबे होने

00:03:52:00 के लिए बनाया है। तकलीक किया है। मतलब कहने का मतलब है कि इनकी टेस्टिंग नहीं चल रही है। हां जानवरों की टेस्टिंग नहीं है। तो जैसे कयामत आ जाएगी और ये मर जाएंगे तो ये भी दोबारा वहां जीवित होंगे। जहां आखिर रात है क्या है? है ना? वो तो फिर स्वर्ग नरक जैसे जन्नत जहन्नुम बोलते हैं ना तो जन्नत के अंदर तमाम तमाम खुशनुमा चीजेंगी। तमाम खुशनुमा चीजें जन्नत के अंदर होंगी। इंसान का नफ्स जो चाहेगा वहां उसे वो चीज मिलेगी। मान लीजिए कोई शख्स में नहीं जो ये जो जानवर है जानवर जानवर का यहां पे जानवर को कर्म के लिए नहीं बनाया कि वो यहां कर्म नहीं कर्म के लिए नहीं बनाया वो कोई बात नहीं मगर यहां जब डेथ हुई तो उसके बाद जानवर वहां पे जिंदा होगा क्या होगा कि नहीं होगा इसमें इस्लाम कहता क्या है अभी मैं काउंटर नहीं कर रहा हूं केवल मैं जिज्ञासा जानना चाहता हूं इस्लाम ने कहा क्या है कुरान जानवरों के बारे में यही कहता है कुल्लू कुल अल फान लेकिन जब हर श को फना होना है हर एक को कुल्लू मन अल फान हर एक जो चीज है

00:05:07:03 उस पर फना होगा यानी वो खत्म होगा अब जानवर जो है कयामत का दिन होगा मोहम्मद रसूल्लाह की एक हदीस मिलती है जिसमें बताया गया है कि अल्लाह ताला कयामत के दिन सींग वाली बकरी को जिसने किसी बिना सींग वाली बकरी को मारा होगा तो उनको भी लाएगा और लाकर इंसाफ करवाएगा कि तेने इस सींग वाली बकरी ने बिना सींग वाली बकरी को जो मारा था उसका इंसाफ करवाएगा उसको सींग देगा और ताकि वो वापस उसका बदला ले ले कि उसको क्यों बिना गलती के मारा तो ये इंसाफ बताने के लिए कि अल्लाह जो है वो इंसाफ वाला है। ऐसा नहीं होगा यहां अगर किसी के साथ नाइंसा नाइंसाफी हो गई तो ऐसा नहीं है कि कयामत के दिन भी नाइंसाफी होगी। वहां नहीं होगी कि वहां फैसला करने वाला नहीं मैं वो नहीं पूछ रहा हूं। मैं अगर इंसाफ होगा तो उसका स्वरूप क्या होगा? किस सूरत में इंसाफ होगा? अगर इंसाफ जैसे अगर किसी को जैसे जानवर का कर्म तो चेक किया नहीं जा रहा है तो वहां पे जानवर होंगे नहीं होंगे या होंगे तो किस आधार पर कहां होंगे? ये मैं पूछ रहा हूं। नहीं वहां नफ्स होगा। नफ्स नफ्स समझते हैं आप? नस मतलब

00:06:22:09 नस मतलब आपकी बॉडी के अंदर जो आपकी सकी है ना आपकी बॉडी आपकी है और आपकी सकी को जब मौत आएगी तो आपकी बॉडी जो है वो उसे मृत घोषित कर दिया जाएगा तो आपका जो नफ्स है ना जिस नब्स से हम ऑर्डर लेते हैं यानी कोई भी ख्वाहिश हम करते हैं या कुछ भी करते हैं नसे हम आत्मा कहते हैं वो जिसे हम आत्मा कहते हैं नहीं आत्मा नहीं आत्मा नहीं आत्मा को तो हम रूह बोलते हैं। रूह न बॉडी ये तीन कांसेप्ट को समझने की जरूरत है। रूह, नफ्स, बॉडी। अब नफ्स जो है कुरान में आया

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00:06:59:20 कुल्लू न्स जा मौत। भाई साहब एक बात कहूंगा आप थोड़ा अपने यहां पर बोलिए। शोर बहुत आ रहा है। तो मतलब क्या हो रहा है ना ये हम लोग जो बातचीत कर रहे हैं वो शोर की वजह से डिस्टरबेंस आ रहा है। अच्छा ठीक है। ठीक है। बोलता हूं मैं। बंद कर दो। अभी बिल्कुल हुआ है। हां तो मैं ये कह रहा था कि नब्स के बारे

00:07:40:16 में जैसे कुरान ने जो नफ्स के बारे में कहा है उसके बारे में मैं बताना चाहता हूं। का मतलब आप कहीं न का मतलब आप कहीं चेतना से तो नहीं कह रहे जो उसकी जो उसके अंदर जो कॉन्शियसनेस होती है हां कॉन्शियसनेस कॉन्शसनेस जो होती है ना हमारी सा की कॉन्शसनेस जो होती है उसी के बारे में बोल रहा हूं तो कुल न्स मौत अब ये जो कॉनशसनेस के बारे में इसको भी समझने की जरूरत है सिर्फ कॉन्शसनेस ही नहीं क्योंकि जानवरों के अंदर भी अकल तो होती है अकल तो होती है ना लेकिन उनके पास है तो कॉन्शियसनेस क्या है माम उनकी कॉनशियसनेस को क्या मिलेगा मतलब ऐसे वो जो एक वो है वो एक है ना कि कब्र में से उनके पास नफ्स नहीं है उनके पास नफ्स नहीं है तो क्या है वो जीव है

00:08:31:01 जीव है मैं बस मैं मैं इसमें ये नहीं कह रहा हूं कि आप गलत है कि सही है मैं इसमें ये जानना चाह रहा हूं कि अगर वो मरा है तो यही रह जाएगा उसका वहां पर कोई काम नहीं है वो एक क्या कहते हैं? एक नकली प्रतिबिंब जैसा है वो यही मर के खत्म हो जाएगा। ऐसा है उसकी या फिर या फिर या फिर वो भी एक मिनट या फिर वो भी किसी लोक में परलोक में या आपके हिसाब से जो जन्नत हो या कुछ हो वहां पे वो भी दोबारा से वहां खड़ा होगा कुछ करेगा। ये मैं पूछ रहा हूं। हां तो वही मैं कह रहा हूं। जानवरों का कोई हिसाब किताब नहीं होगा। हिसाब किताब समझ रहे हैं। यानी जो भी आप और हम जो हमारी इंद्रियों का इस्तेमाल कर रहे हैं ना मैं ये नहीं कह रहा। मैं ये नहीं कह रहा मतलब कि वहां वो होंगे ही नहीं। ये माना जाए वहां वो होंगे ही नहीं। नहीं वो होंगे। लेकिन जैसे मान लो आज मेरे जैसे जैसे यहां है वैसे ही वहां होंगे। ना वहां नहीं वहां ऐसे नहीं होंगे। कैसे होंगे? वहां ऐसे वहां ऐसे नहीं होंगे जैसे मान लो कोई जानवर है मेरे सामने अगर वो मर गया तो अब हम अगर ये सोचे कि जिस तरह से यहां जीवन

00:09:46:04 व्यतीत कर रहा था ये जानवर तो स्वर्ग में भी ऐसे ही होगा या नर्क में भी ऐसे होता है तो स्वर्ग नर्क का कांसेप्ट उनके लिए नहीं है क्योंकि ये जितनी भी चीजें है ना ये इंसान के लिए ईश्वर ने मैं समझ गया जो मैं आप जो नहीं है वो मत बताइए आप जो वो बताइए जो है समझ रहे हैं जैसे मैंने पूछा किसी से कि स्वस्थ रहने के लिए क्या-क्या क्या खाना चाहिए? तो मैं उसको बता रहा हूं। देख तुझे मूंगली नहीं खानी है, तुझे आलू नहीं खाना है या तुझे पिज़्ज़ा नहीं खाना है, बर्गर नहीं खाना। मगर ये नहीं बता रहा हूं कि तुझे खाना क्या है? समझ रहे हैं? तो मैं मुझे थोड़ा सा वो बताइए। मुझे ये बता दीजिए। उनका होगा क्या? जी उनका कोई हिसाब किताब नहीं होगा। ये दो वर्ड में मैंने समझाया कि उनका कोई हिसाब किताब नहीं होगा। आप बता नहीं होगा। बता रहे हैं भाई। अगर वो वहां होंगे खत्म हो गया। अगर हम चाहेंगे जैसे मुझे घोड़े की सवारी करनी है। ठीक है? मुझे घोड़े की सवारी करनी है। मुझे उड़ने वाले घोड़े की सवारी करनी है। तो ईश्वर मेरे लिए वो अवेलेबल करेगा। अगर मुझे उड़ने वाले घोड़े की सवारी करनी है या मुझे चलने वाले घोड़े की तेज स्पीड में लाइट की स्पीड में चलने वाले घोड़े की सवारी करनी है तो ईश्वर मेरे लिए अवेलेबल करेगा

00:11:01:10 स्वर्ग में। अच्छा। तो उन चीजों के लिए वो वहां पर होंगे। हां हम चाहेंगे तो अच्छा जैसे मतलब जिन जिनके बारे में इंसानों को पता ही नहीं है। कुछ ऐसे प्रजातियां जीव हैं उनका क्या होगा? जैसे कई प्रजातियां जैसे कई प्रजातियां ऐसी है जिनके बारे में लोगों को पता ही नहीं है। उनका क्या होगा? नहीं उनको तो पता है। हां। ईश्वर को तो वहां ईश्वर हमें ऑप्शन देगा कि तुम्हें इनमें से कौन सी चीज चाहिए ना ऑप्शन वगैरह नहीं देगा ऑप्शन वगैरह नहीं देगा ये जितना ज्ञान होगा जितनी सोचने की बसीरत होगी जैसे आज साइंस ने मान लो डायनासोर अब्सॉर्ब किया कि डायनासोर भी किसी टाइम में रहते थे इस पृथ्वी के ऊपर फिर वो विलिप्त हो गई प्रजाति तो आज साइंस ने क्या किया जान तो साइंस ने किस तरीके से जाना उन्होंने जमीन की खुदाई की और उनको फसल्स मिले और फसल्स मिले तो उन्होंने उससे जाना कि इसकी आकार ये होगा और ये होगा। इस तरह से उन्होंने एक रूप दिया कि इस तरह से दिखता होगा डायनासोर। तो हमने भी जान लिया कि भाई डायनासोर ऐसा दिखता होगा। हमारे साइंटिस्टों ने काफी

00:12:16:12 रिसर्च करके मालूमात की है। तो ऐसे ही हम भी मालूमात जब हासिल करते हैं ना तो मालूमात से हमें बहुत सारी चीजें पता चलती है। जैसे हमें फरिश्तों के बारे में पता चलता है कि उनके एक से ज्यादा पंख होते हैं। थोड़ा थोड़ा सा काफी है। थोड़ा सा काफी है। जैसे कि आपने कहा कि जैसे वहां पे वहां पे जाकर के जैसे हमारी इच्छा हुई कि वो जो है जो घोड़े हैं कुत्ता है, बिल्ली है। हमें जिस रूप में उसकी आवश्यकता होगी तो वह हमारे लिए अवेलेबल हो जाएगा। तो इसमें बहुत सारी चीजें हैं। फिर क्वेश्चन पर क्वेश्चन जैसे एक बात ये आती है कि वो अवेलेबल हो जाएगा तो वो जिस समय अवेलेबल होगा उससे पहले कहां पे रहेगा?

00:13:02:12 उससे पहले यहां तो कयामत आ गई। यहां तो कयामत आ गई। फिर आपने बताया कि एक सेकंड कयामत को आपने क्या समझा है? कयामत के बाद दुनिया खत्म हो गई ना दुनिया खत्म हो गई ना दुनिया तो खत्म हो गई लेकिन दुनिया कोई एक ही दुनिया है अच्छा तो दूसरी दुनिया से वो आएंगे तो ये आपसे ये जानना चाह रहा हूं कि कयामत के बारे में आप क्या जानते हैं जैसे कयामत एक अरबी वर्ड है ना जिसका मतलब है ये बताइए अभी मैं आपको काउंटर नहीं कर रहा हूं अभी मैं जान रहा हूं केवल बिल्कुल हम मैं भी बताना ये चाह रहा हूं कयामत लफ्ज का मतलब होता है खड़ा कर देना। बिल्कुल सीधा खड़ा कर देना। जिस तरह से जैसे हम पहले भी जो मर चुके हैं जो भी मर रहे हैं जो आगे आएंगे वो मरेंगे सब मर गए। इस इस दुनिया से इस दुनिया से तो गए है ना। अब उन सबको जो है खड़ा कर देगा अल्लाह ताला वापस। तो उसको कयामत बोलते हैं। सबको खड़ा कर देगा मरे हुए को और जो भी उन्होंने कर्म किए होंगे अपनी बॉडी के साथ उन कर्म के आधार पर उनके फैसला होगा। तो कयामत ये है। बाकी सूर

00:14:17:18 इब्राहिम जब हम पढ़ेंगे तो उसमें आया है कि और उस दिन इस जमीन को बदल दिया जाएगा दूसरी जमीन में। मतलब इसी जमीन को दूसरी जमीन में बदल दिया जाएगा। तो जमीन तो रहेगी ना। जन्नत भी अगर होगी तो किसी जमीन पर ही होगी ना। भाई उसके अंदर भी पांव रखने के लिए जमीन तो होगी। ऐसा तो नहीं होगा कि हवा में लटके होंगे। यानी यानी कि वो जो वो जो जानवर होंगे वो दूसरी जमीन पर पहुंच जाएंगे। दूसरे ग्रह दूसरी तो दुनिया उसमें पहुंच जाएंगे। जानवर की बात नहीं कर रहे हैं। जानवर तो देखो मैंने अभी आपको बताया था हमारे लिए अवेलेबल हो जाएंगे। जैसे अगर मेरी चाहत हो रही है। मैं वही कह रहा हूं कि यहां ये दुनिया खत्म हुई तो हम पहुंचे आखिर रात में तो आखिर रात में वो जानवर कहां से आए? दूसरी दुनिया से आए हैं या वहां पर कोई एक स्टोर है जहां पर जानवरों को रखा जाएगा वहां से अवेलेबल होंगे वो क्या है वो तो ये चल ही रहा है ना अल्लाह की जो कायनात है मुख्तलिफ डायमेंशन जो है मुख्तलिफ डायमेंशन जो है उनके अंदर चल ही रहा है

00:15:21:06 देखो भविष्य हमारे लिए तो भूतकाल भविष्य काल वर्तमान काल है ना डायनासोर जब थे अगर ईश्वर तो रिवाइंड कर [हंसी] सकता है वापस पीछे मतलब फॉरवर्ड कर सकता है, बैकवर्ड कर सकता है। ईश्वर के लिए तो कोई इमॉसिबल कोई चीज है नहीं। भाई साहब मैं बस भाई साहब मेरा सवाल दूसरा है। मैं बस ये कह रहा हूं कि जो ये जानवर हैं ये दूसरी दुनिया में जाएंगे। दूसरी डायमेंशन में जाएंगे और हमारे लिए आखिर रात इत्यादि में बोलने पर वहां उपलब्ध करा दिए जाएंगे। ना ना आप शायद समझ नहीं पा रहे हैं या मैं समझा नहीं पा रहा हूं। मैं ये कहना चाह रहा हूं। अभी मैंने बताया था कि डायनासोर मान लो छ करोड़ साल पहले थे। है ना? तो वो हमारे लिए तो छ करोड़ साल पहले थे। है ना? [हंसी] अब ईश्वर के लिए तो नहीं कह सकते ना कि छ ईश्वर के लिए भी छ करोड़ साल पहले थे। ईश्वर की निगाह में तो भूतकाल, वर्तमान काल और भविष्य काल तीनों एक ही एक ही वक्त में एक्सिस्ट कर रहा है। भाई हमारे लिए हमारे क्योंकि हमारा ज्ञान महदूद है एक हद तक है तो हमारे लिए आने वाला कल जो होगा वो होगा मैं तो समझ गया उसको उसको

00:16:36:07 आप उसको उसको मत बताइए। वो बताइए कि वो क्या करेगा कि जानवर जो मर गए हैं उनको पीछे से उठा के वापस ले आएगा हमारे सामने। ऐसे ना वो या ना ले आएगा वो तो वहां जब जाएंगे ना हम और जब हम खिश करेंगे तब देखो हम वो बात कर रहे हैं नहीं पता है अभी हमको अभी हमको नहीं पता जानवरों का क्या सिस्टम है कुल मिला के बात मैंने जो आयत बताई ना वहां नफ्स के लिए हर वो चीज होगी जो वो चाहेगा। अगर मान लो मेरा नफ्स चाहेगा कि मुझे किसी उड़ने वाले घोड़े की सवारी करनी है तो मेरे लिए ईश्वर उड़ने वाला घोड़ा अवेलेबल कर देगा। देखिए वो उड़ने वाला घोड़ा तो ईश्वर अपने आप से बना सकता है ना नया मैं पूछ रहा हूं यहां के जानवरों का क्या होगा कुछ नहीं होगा यहां के मतलब वो मर के यहीं रह जाएंगे खत्म हो जाएगा उनका शरीर जमीन बदल जाएगी दूसरे ग्रह पे जाएंगे क्या होगा बहुत सारी प्रजातियां विलुप्त हो गई अब तो नहीं है ना अब तो नहीं है जो सर्वाइव कर सकी जो प्रजाति सर्वाइव कर सकी वो भाई साहब तो ये ये आप शुरू में ही कह रहे थे कि वो यही खत्म हो जाएंगे उनकी आगे की कोई कहानी नहीं है। आप वही समझाना चाहता नफ्स इसीलिए समझा रहा था लेकिन आप नफ्स को समझे नहीं। नफ्स समझा रहा था मैं कि नफ्स उनके अंदर नफ्स

00:17:51:08 नहीं है। नब्स नहीं नब्स का मतलब है कि उनके अंदर जो है कॉन्शियसनेस नहीं है। ना ये नब्स कॉन्शसनेस आप कह रहे हैं न्स मतलब वो वो दर्द सहन वो दर्द सहन कर रहे हैं। वो चिल्ला रहे हैं। वो बचना चाहते हैं। वो जीना चाहते हैं। वो खाना चाहते हैं। वो पीना चाहते हैं। तो कौन सी चीज नहीं है उनके अंदर? मतलब नफ्स की बात कर रहा हूं। नफ्स आप समझिएगा बात को। न्स जैसे आपकी बॉडी के अंदर आप हैं। है ना? और आप स्वाद में समझते हैं। जायके के अंदर समझते हैं। आपको अगर सब्जी दी जाए तो उसमें अच्छा मसाला वगैरह लगा के आप खाएंगे और जानवर के सामने जब रखी जाएगी तो वो सीधा उसको चारा समझ के खा जाएगा। उसका भोजन समझ के खा जाएगा। लेकिन हम मनुष्य हमारे पास नफ्स है तो हम उसको हमारे स्वाद अनुसार करते हैं। तो अब ये चीज उनमें नहीं है कि किसी जानवर कभी कोई शेर जब मांस खाता है तो आपने देखा कि नमक मिर्ची लगा के बढ़िया तलवल के खाए ना कोई शाकाहारी जानवर को देखा कभी कि वो अच्छे से तेलवेल में तल के खाए नहीं तो वो नफ्स जो ये हमारे से डिमांड ये भी इसको हम इसको हम इसको हम ये भी कह सकते हैं कि हमारे पास चीज है उनके पास हमारे पास चीज एक ही

00:19:06:09 है। हमारे पास ज्यादा है। हमारे पास ज्यादा उनके पास कम है। मगर है ही नहीं। सुनिए तो है ही नहीं। अगर यह कह देंगे कि है ही नहीं तो फिर यह मानना पड़ेगा जैसे शेर है वो कोई प्रकार के मांस को ज्यादा प्रभ करता है। कुत्ता है वो कोई किसी प्रकार के भोजन को ज्यादा अच्छा लगता है उसे और कोई प्रकार का भोजन उसे कम मतलब वो स्वाद में सेलेक्टिव है। स्वाद में सिलेक्टिव है मगर उसको अपने और स्वादिष्ट कैसे बनाया जाए इतनी बुद्धिमता उसके अंदर नहीं है। अब अगर ऐसी बात की जाए तो सुनिए तो ऐसी बात की जाए तो कई इंसान ऐसे होते हैं जो आगे बुद्धि वाला व्यक्ति समझ पा रहा है, सीख पा रहा है, कर पा रहा है मगर वो इंसान नहीं कर पा रहा है। जैसे कि रिजल्ट आता है, क्लासेस होती है, फाइट होता है तो उसमें कई लोग कम नंबर लाते हैं, कई लोग ज्यादा नंबर लाते हैं। इसी में और पीछे चलते चले जाए और पीछे चलते चले जाए तो जानवर हो जाएगा व्यक्ति। मतलब मैं कह रहा हूं इससे इससे उसका स्वाद स्वादिष्ट ना बना पाना इससे ये तो सिद्ध होता है कि जो है उसके पास हमसे कम बुद्धि है मगर ये सिद्ध नहीं होता कि बुद्धि है ही नहीं क्योंकि वो बचने का प्रयास कर रहा है वो सारी चीजें कर रहा है वो जीना चाहता है आहार निद्रा भय मिथुन

00:20:21:18 वो सब है उसमें बस उसके शरीर के उसको जो शरीर प्राप्त है उसका हमारी हमारी जानकारी में उसके शरीर का परम परम कल्याण उसको जो शरीर मिला है उससे सद्गति कैसे प्राप्त करनी है जो मोक्ष है वो कैसे प्राप्त करनी है वो क्या कहते हैं वो इतनी बुद्धि नहीं है कि वो धर्म को समझ पाए कि मोक्ष कैसे प्राप्त करना है ये हमारी मगर आप अगर कह रहे हैं कि वो जो है क्योंकि वो खाने को स्वादिष्ट नहीं बना सकता इसलिए हम उसमें किसी चीज की कमी मान रहे हैं जिस चीज को आप नब्स कह रहे हैं मैं ये नहीं कह रहा हूं आप मैं वही कह रहा हूं आप जो बोले चले जा रहे हैं मैं ये कह रहा हूं के नब्स और बुद्धि बुद्धि और नफ्ज़ इनको आप एक साथ मिला दे बुद्धि को और उसको एक साथ नब्ज़ या तो आप नब्ज़ या तो आप जो है ना वो आप वो कर दो आप डिफाइन कर दो नब्स आप क्या किसे कह रहे हो जो इंसान में नहीं है। फिर मैं देखूंगा कि जो चीज आप कह रहे हो वो इंसान में है कि नहीं। ठीक है मैं नब्स को डिफाइन डिफाइन करता हूं। लफ्ज एक अरबी लफ्ज है और इस लफ्ज का मतलब होता है एक ऐसी हवा एक ऐसी हवा जो हमारी बॉडी को लगती है। है ना? जो हमारी बॉडी में है।

00:21:36:28 है ना? तो हमारी बॉडी के जिस भी ऑर्गन्स को लगती है, इंद्रियों को लगती है। तो वो इंद्रियां एक्टिव होती है और वो इंद्रियां बॉडी के अनुकूल ख्वाहिश करती है। है ना? और बुद्धि क्या करती है कि ये जो नफ्स ने यानी जो ये हवा हमारे ऑर्गन्स को लगी है और जो डिमांड हमसे ये करवा रही है ये बॉडी से जो डिमांड करवा रही है इसको असल में जब देखा जाएगा क्या इस डिमांड का आदेश ईश्वर ने दिया है या ना दिया है ये चीज चेक चेक करेगा माइंड और नफ्स यानी वो हवा जो हमारी बॉडी को अंदर लगी है हमारे ऑर्गन्स के टच हुई है हमारे ऑर्गन्स में जो है लग रही है और हमसे ख्वाहिश करवा रही चाहत करवा रही है तो वो हवा जो होती है ना हवा हवा समझ लो हमारी बॉडी में ऑक्सीजन है ना पानी है सब कुछ है तो वो जो हवा के स्वरूप जो हमारे अंदर नफ््स है न्स हवा के स्वरूप तो हमारे बॉडी के अनुकूल ही और जैसे आपने मिसाल दी एक ऐसे व्यक्ति की जिसका माइंड थोड़ा ज्यादा ग्रोथ किया हुआ है और एक का कम किया हुआ है तो जिसका कम किया हुआ है वो भी स्वाद स्वाद में तो समझता है। ऐसा नहीं है कि वो स्वाद में

00:22:52:00 नहीं समझता है। स्वाद में वो भी समझता है। जानवर भी समझ रहा है ना। जानवर समझता है तो आप एक काम कीजिए। हम तो बंदर क्या जान अदरक का स्वाद और ये सारी चीजें हम बोलते हैं। लेकिन आप एक काम कीजिए। किसी भी जानवर को आप इतना इवॉल्व करके बताइए। इवॉल्व करके बताइए। उसके मेंटालिटी से इवॉल्व करके बताइए कि वो भी इंसानों की तरह। जैसे इंसान भी एक टाइम था इंसानों के बराबर की बात नहीं कर रहा हूं। मगर बाद में वो सेलेक्टिव होता है। मेरे मैं नहीं देखा था मेरे मित्र के यहां पर एक स्वान था जिसे कुत्ता कहते हैं। सुनिए उसको आप अगर फलाना वाला भोजन देता था वो तो वो अरुचि से खाता था नहीं खाता था मगर कुछ भोजन ऐसे थे जिनको वो तुरंत चाप जाता था पूरा बॉडी शेर जो है ना शेर नहीं खाता है। बॉडी का जो ठीक है। ठीक है। दूसरा इसमें एक दूसरी जानकारी वो है कि जैसे जो कुत्ता है उसके मन में भी ये है कि मैं मरू नहीं मुझे चोट ना लगे मैं मरू नहीं वो उसके मन में भी ये भाव है ये तो मानते हैं ना आप चाहता है जीना चाहता है किसी कुत्ते से ये

00:24:07:01 कहते हुए सुना होगा ना आपने जब आप उसे मारने का प्रयास करते हैं तो वो भागता है ना अब भागेगा वो तो क्योंकि उसको दर्द होगा भाई कोई भी चीज हो काटने को भी यही सिद्ध यही सिद्ध करता है कि उसके अंदर सर्वाइवल वो है डिजायर कि वो सर्वाइव करना चाहता है बचना चाहता हैना चाहता है सही है हां उसी को मैं कह रहा हूं जीना चाहता है अब क्या है कि उसने ऐसा कुछ नहीं किया कि उसको वो जो मांग रहा है वो ना दिया जाए तो ये उसके साथ अन्याय जैसा नहीं होगा। फिर तो वो क्या मांग रहा है? आप बताओ। वो हमेशा जीना जीना चाहता है ना हमेशा मगर उसको मार दिया गया। जबकि उसने कुछ लिया नहीं था। अब हमेशा जीना तो इंसान भी चाहता है लेकिन मौत एक अटल सत्य है वो आनी है। हां। मौत मौत एक अटल मगर उसके लिए इंतजाम है ना। उसके लिए इंतजाम किया है ना ऊपर वाले ने कि तुम यहां पे पहुंच के अपना सेटलमेंट कर सकते हो। मार कौन रहा है? अरे कोई नहीं मार रहा हूं। अपनी मौत मर रहा हूं। मैं कह रहा हूं इंसान के लिए तो इंतजाम किया है ना। यही

00:25:22:07 तो उसूल है। यही तो उसूल है कि हमें ईश्वर ने कौन सी चीजें बताई है जो हमारे लिए लाभदायक है और कौन सी चीजें हैं जो हमारे लिए हानिकारक है। कौन सी चीजें खाने योग्य है और कौन सी चीजें खाने योग्य नहीं है। तो ये ज्ञान के आधार पे ही तो हमें पता चलेगा ना। मान लीजिए एक व्यक्ति मैं वो नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं जो कुत्ते की जो आशा है कि मैं जिंदा रहना चाहता हूं मगर उसको बिना बात के मार दिया मर गया वो प्राकृतिक आपदा से मर गया कैसे भी मर गया मर गया वो उसकी जो ख्वाहिश है वो उसके उसके बारे में कोई विचार कोई चिंतन नहीं तो उसके साथ एक अन्याय नहीं हुआ कि वो पूरे जीवन चाहता था कि उसको भी अमरता प्राप्त हो जाए वो सर्वाइव करे पर वो मर गया तो ये आपको बताया होता भी मोक्ष पाना चाहता है हां हां हां ये बिल्कुल कुत्ता जो है मोक्ष पाना चाहता है। ये आपको किसने बताया? अरे भैया अभी आपने माना ना कि वो जो है बचना चाहता है। मैं मोक्ष अभी मोक्ष का वो मत लाइए बीच में। उसके अंदर एक इंस्ट है कि वो सर्वाइव करना चाहता है। हर हाल में बचना चाहता है। भागता है मुझे मारते तो। अंत

00:26:33:25 अंतते तो उसे भी मरना ही है। चाहे वो है मगर मगर उसके मरने के विषय में उसके मरने के विषय में जैसे इंसानों के लिए उन्होंने चिंतन मनन किया। आपके अनुसार जो ईश्वर है उन्होंने चिंतन मनन किया। वैसा चिंतन मनन जानवरों के लिए नहीं किया। जबकि दर्द उन्हें भी हो रहा है। मौत से वो भी डर रहे हैं। सुख वो भी प्राप्त करना चाहते हैं। आनंद वो भी प्राप्त करना चाहते हैं। मगर उनके लिए नहीं किया कुछ भी। किसने? ईश्वर ने नहीं किया। कहना चाह रहा हूं। पूछ रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं। हम जहां रह रहे हैं ना जहां रह रहे हैं। भूलोक में जो रह रहे हैं। हम जमीन पर जो रह रहे हैं। जमीन से ऊपर आसमान है। है ना? तो आसमानों की जिंदगी अलग है और जमीन की जिंदगी अलग है। और एक जिंदगी मरने के बाद जिसको हम बोलते हैं आलम बरजक। आलम बरजक बोलते हैं जिंदगी को उस वो जिंदगी अलग है।

⬜ Not used yet · 00:27:33:18 – 00:27:53:25 (0:20)

00:27:33:18 बच्चों को बच्चों को आप शांत कराइए। वो हर लगातार उनकी आवाजें आ रही है। थोड़ा आप शांत करके आइए। किसी शांत जगह से बात करिए। बड़ा अच्छा डिस्कशन चल रहा है। देखता हूं।

00:27:53:25 मतलब हम टॉपिक पे अभी तक आए नहीं। हां तो बस इसको इसको यहां पे मतलब फुल स्टॉप मान ले कि नहीं ईश्वर ने जो है उनकी ये जो चीज है कि वो जीना चाहते हैं। वो सुखी होना चाहते हैं। इससे ईश्वर को कोई मतलब नहीं है। इस्लाम के अनुसार क्योंकि उसने उसको मनाया ही ऐसे। मतलब कैसे नहीं देखो हम इंसानों को जो ईश्वर ने बनाया ना तो हम ही उनकी देखरेख करेंगे। जैसे मान लो एक कुत्ता मेरे मोहल्ले में रहता है। है ना? और वो जीना भी चाहता है। है ना? और मैं देख रहा हूं के उसके पास जो है भोजन की कमी है। तो ये मेरी जिम्मेवारी बनती है कि उस कुत्ते तक भोजन मैं पहुंचाऊं। क्योंकि मैं उसका ख्याल रखूं। ये मेरी जिम्मेदारी बनती है। ईश्वर ने मुझे जिम्मेदारी दी है कि मैं अल्लाह की ईश्वर की बनाई हुई हर एक चीज के ऊपर मैं क्या करूं? ध्यान दूं। इसलिए मैं भाई साहब आप आप मेरा शायद मैं सवाल मैं

00:28:57:03 मेरे से शायद कोई गलती हो रही है। मैं आपको शायद अपना सवाल समझा नहीं पा रहा हूं। मैं यह कह रहा हूं कि एक दिन कुत्ते को मरना है। एक दिन इंसान को भी मरना है। इंसान के लिए मौत के आगे की चीजें इंसान को सर्वदा सुखी रखने के लिए यदि वो इस्लाम के अनुसार चलता है तो उसके लिए इंतजाम ईश्वर ने किया है। मगर कुत्ते इत्यादि जो हैं है ना? उनके लिए कोई इंतजाम नहीं किया। जबकि उनके अंदर भी ख्वाहिश है कि मैं जीूं, मैं सुखी रहूं। तो वो वो जो अंतिम सुख है इंसान उसे दे सकता है। पल भर के लिए राग दे सकता है। एक दिन का भोजन दे सकता है। मरते दम तक का भोजन दे सकता है। परंतु उसे वो जो अनंत सुख उसको चाहिए कुत्ते को मैं कभी दुखी ही ना हूं। वो जो अनंत सुख चाहिए कहना चाह रहे हो कि कुत्ता ये चाहे कि मैं भी इंसानों जैसे जिंदगी गुजारू। यही कहना चाह रहे हो। कुत्ता ये नहीं चाहता है। कुत्ता सुखी रहना चाहता है। वो इंसानों को नहीं वो ये नहीं जानता इंसानों का जीवन सुखी है कि नहीं है। वो अपनी जानता है कि भैया मैं मरू नहीं मुझे कोई दुख नहीं होना चाहिए। उसप उसप इस्लाम के अनुसार जो ईश्वर है उसने

00:30:12:14 कोई बात की है उन लोगों की कि नहीं की? बस इतना बता दीजिए हम लोग विषय पर आ जाए। की है बात कि नहीं की है? इस्लाम ने जानवरों के प्रति जो कुछ उनके लिए जमीन में रखा है वह सब वो खा रहे हैं और सुखी है। नहीं जैसे देखिए जो आप कुरान से हमें मिलता कुरान से कुरान से हमें मिलता क्या है? जैसे जो हमारे अंदर मौत का खौफ है वो मौत का खौफ दूर होगा। भाई जब अगर तुम कुरान को फॉलो करोगे तो तुम्हारे लिए मौत के बाद भी एक बहुत वैसी जीवन आपके लिए सुरक्षित है। अगर कुरान को फॉलो करोगे। जो अभी के लिए मान लेते हैं अनंत आनंदमय है। है ना? यहां पर मतलब आपको आपके लिए हर चीज सकारात्मक है। कोई भी चीज ऐसी नहीं जो आपको बुरी लग सके। ठीक है? तो आपकी जो इच्छाएं हैं उनकी पूर्ति करने के लिए इस्लाम के अनुसार जो ईश्वर है उसने इंतजाम किया है। पर ये जो जानवर इत्यादि है इनकी इच्छाओं की कोई मतलब कोई इंतजाम नहीं है। जिस कारण से जो कुत्ते का जो वो है एंड वो उसके साथ ही अधूरा है। अतृप्त मतलब कि वो जो सदा सुखी रहना चाहता था सदा आनंदमय रहना चाहता था वो उसका नहीं सुना गया। इंसान का सुना गया। इंसान

00:31:27:25 का सुना गया और कुत्ते का नहीं सुना गया। कुत्ता भी मांग रहा है कि मुझे सुख चाहिए, मुझे आनंद चाहिए, मुझे अमरता चाहिए। वो मैं कह रहा हूं। नहीं आपको बताया किस कुत्ते ने आपको बताया कि मुझे आनंद चाहिए, मुझे सुख चाहिए और मुझे भी स्वर्ग चाहिए। मुझे भी नरक चाहिए और मुझे भी जो भाई साहब अभी मैंने अभी मैंने नरक इत्यादि नहीं बोला है। मैंने बोला है कि वो कभी मरना नहीं चाहता है। वो कभी मरना नहीं चाहता है। वो ऐसी वो वो ऐसी कोई चीज नहीं चाहता है जो उसे ठीक ना लग रही हो। वो ऐसी कोई चीज नहीं चाहता। देखिए आप आप ख्वाहिश करवा रहे हैं कुत्ते से। कुत्ते से आप ख्वाहिश करवा रहे हैं। अभी आप अभी मैं ख्वाहिश नहीं करवा रहा। मैं अभी मैं अभी आप आपने खुद बोला ना वो भी जीना चाहता है कुत्ता है तो कुत्ता अगर कुछ सोचता है तो ये बात नहीं भाई साहब अभी आपने माना कि वो जीना चाहता है अभी आपने माना हर कोई जीना चाहता है हर कोई जीना चाहता है तो वही तो मैं कह रहा हूं कि इंसानों के लिए जीवन के बाद भी एक सुखी संसार की व्यवस्था है। जानवरों के लिए क्या है? तो आप यह या तो यह कह दीजिए कि हां पार्शियलिटी है कि जानवरों के लिए कुछ नहीं है। बता रहा हूं कि जानवरों के लिए क्योंकि जानवर के अंदर वो रूह

00:32:42:28 मैं अब रूह की बात आएगी। जानवरों के अंदर वो रूह नहीं है कि जिस रूह की वजह से इंसान को बसीरत मिली, फवाद मिला और तीसरी चीज समात मिली। समात समझ रहे हैं? तीनों चीजें इसका कुत्ता इस दुख के यानी कि कुत्ता इस दुख के साथ ही उसका अंत हो जाएगा कि भैया मैं जो है जो चाहता था मुझे नहीं मिला। मैं वही तो कह रहा हूं उसको नहीं है। वो कह रहा हूं के बारे में आप बता रहे हैं तो ये कुत्ते ने आपको बताया क्या? देखो हमारी इस गुफ्तगू से कोई मतलब नहीं निकलेगा। हम टॉपिक पे आएंगे ठीक रहेगा क्योंकि कुत्ते के बारे में विषय में हम बात करने नहीं बैठे।

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00:33:20:28 हम ईश्वर के बारे में ईश्वर मैं आता हूं ईश्वर पर। ईश्वर पर आता हूं। काफी चर्चा हो गई है। ठीक है। मैं अभी विषय पर आता हूं कि क्या इस्लाम के अनुसार प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है या नहीं? अब प्रतिपादित लब्ज का मतलब आप बताइए। क्योंकि जो मुझे अनुसार इस्लाम के अनुसार जो ईश्वर है जिसे आप खुदा कहते हैं ऊपर वाला कहते हैं अल्लाह भी कहते हैं। इस्लाम के अनुसार जो अल्लाह है क्या वो सर्वशक्तिमान है? जी अला कुल्ली शहीन कदीर है। अब ये अरबी वर्ड मैंने बोले इनकी व्याख्या जब आप बोलोगे तो कर दूंगा। मतलब सर्वशक्तिमान है। इतना काफी है। आपने माना सर्वशक्तिमान है। सर्वशक्तिमान का मतलब है ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है। वो सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है। सारे नियम उसने बनाए तो वो किसी नियम के नीचे नहीं है। हां नियम का बनाने वाला। है ना? हां हां। यानी कि वो अबाद है। ज्ञानी अभा मतलब अनस्टोपेबल मतलब कोई ऐसी चीज नहीं है। कोई ऐसा नियम नहीं है जो रो जिसको जो उसे रोक दे। हां इससे रोक तो नहीं सकता लेकिन

00:34:36:19 लेकिन वह अपने वादे के खिलाफ नहीं करता है। यानी जो वादा उसने कर दिया जो ज्ञान उसने बता दिया ना उस ज्ञान के खिलाफ वो करता नहीं है। ये भी उसने बताया है। ठीक है। मतलब उसको कोई रोक नहीं सकता है मगर वो वादे के खिलाफ करता नहीं है। वो एक बात है। ठीक है। अच्छा तो अभी मैं पूछ रहा हूं क्या वो हमारे बीच में अवतार ले सकता है? क्या इस्लाम का जो ईश्वर है वो मनुष्यों के बीच में आ सकता है? अवतार के रूप में मनुष्यों जैसा कोई रूप धारण करके या कोई भी रूप धारण करके ना वो रूप धारण नहीं करता है। रूप धारण नहीं करता है वो वो जिस तरह से मनुष्य से वार्ता वार्ता यानी कलाम करता है ना वो उसने बताया है। जैसे सूर अ सूर की हम जब 51 नंबर आयत पढ़ेंगे तो उसमें लिखा है कि किसी बशर के लिए यानी किसी भी इंसान के लिए नहीं है कि अल्लाह उससे

00:35:33:08 चले गए भाई साहब क्या हुआ? अरे अभी अभी तो मेन टॉपिक आया था। कहां गए भाई साहब रिजवान जी

00:36:19:03 रिजवान जी कहां गए? वापस आए। अभी-अभी तो मुख्य टॉपिक आया हमारा। क्या इस्लाम के अनुसार जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है या नहीं? मैं पता करता हूं। आ गया आ गया आ गया। बहुत बढ़िया। जी शिवश जी कट कैसे गया है? पता नहीं कैसे गया। चलिए ठीक है। बहुत बढ़िया। तो मैंने पूछा है कि वो आ सकता है कि नहीं? कैपेबिलिटी है कि नहीं? क्षमता है कि नहीं उसके अंदर। नहीं वही मैं बता रहा हूं। बात क्षमता की नहीं आ रही। समता की अगर बोलेंगे तो फिर वो सर्वशक्तिमान ना रहा। समता की बात नहीं। हां वही तो वही तो मैं कह रहा हूं। बात उसूल की होगी कि ईश्वर जो है इंसानों से किस तरह से बात करता है। मैं वो नहीं कह रहा। हम लोग उस पे आएंगे कि वो करता है कि नहीं इस पर भी डिस्कशन करेंगे। अभी मैं पूछ रहा हूं कि वो हमारे बीच में आ सकता है कि नहीं। उसके अंदर कैपेबिलिटी है कि नहीं? नहीं तो कैपेबिलिटी वाली बात आएगी तो फिर तो बहुत सी बातें आ जाएंगी ना। बात कैपेबिलिटी की नहीं है। बात यह है क्या वो कैपेबिलिटी की है। देखिए देखिए मैं बताऊं जैसे कि

00:37:34:04 मान लीजिए कि मदिरा शराब शराब मैं पीता नहीं हूं। मगर अभी पूछा ये जा रहा है कि पी सकता हूं कि नहीं? ठीक है? उसको मैं अपने शरीर में अंदर ले सकता हूं कि नहीं? उस पदार्थ को मदिरा रूपी पदार्थ को या शराब आप जो भी कहते हो तो उसको मैं इंटेक उसका कर सकता हूं। मैं पीता नहीं हूं वो एक अलग बात है। वो मेरा नियम है। नहीं पीता हूं। वो आपकी कैपेबिलिटी बताई आपने कि आपकी ये कैपेबिलिटी है। आपकी है ना? अब आप हम बात कर रहे हैं ईश्वर पे। आप इंसान पे बात कर रहे हैं कि इंसान की क्या कैपेबिलिटी है? हम बात कर रहे हैं ईश्वर जो है वो इंसानी रूप धारण करने की कैपेबिलिटी रखता है कि नहीं रखता है। तो अगर वो इंसानी रूप धारण करेगा तो वो ईश्वर नहीं रहेगा। पहली चीज वो ईश्वर नहीं रहेगा। वो मनुष्य कहलाएगा। देखिए भाई साहब इसमें पहली ये बात आती है कि जब हम कहते हैं वो किसी भी नियम से बाध्य नहीं है। ठीक है? वो ईश्वर अगर नहीं रहेगा ये दूसरा चैप्टर है कि ईश्वर नहीं रहेगा उसके ईश्वरत्व की रक्षा मैं आपको सिद्ध करूंगा कि इंसानी रूप धारण करने के बाद भी वो ईश्वर रहेगा। मैं आपको ये सिद्ध करूंगा ये बाद की बात है। अभी एक नियम आ रहा है। आपने

00:38:49:08 कहा उसके ऊपर कोई नियम नहीं है। अभी नियम आ रहा है। क्या नियम समझ रहे है? नियम यह आ रहा है कि वो नहीं आएगा नीचे। वो जो है अवतार नहीं ले सकता। यह नियम ईश्वर नहीं लेता। तो इसमें नियम कहां हुआ? नियम हो गया ना ही कांट डू इट। वो अवतार नहीं ले सकता। ईश्वर तो झूठ भी नहीं बोलता। तो आप कहोगे कि ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं रहा। ईश्वर झूठ बोलने वालों को बनाता है ना। आप ये बताइए आप जिस ईश्वर को मानते हैं क्या वो कहते? भाई साहब एक एक करके हम करेंगे बात। एक एक देखिए कोई लड़ाई नहीं है। कोई लड़ाई नहीं है। एक-ए करके हम बात करेंगे। अभी अगर मैंने आपसे पूछा तो आप अपनी चीज बता दीजिए। आप जो जो पूछेंगे मैं सब सवालों का जवाब देता जाऊंगा। कोई सवाल जब आप कर रहे हो ना तो मैंने कहा बात यहां कैपेबिलिटी की अगर मैं अभी के लिए मान लेता हूं मेरा ईश्वर गलत है। कोई ईश्वर सिद्ध नहीं होता। मैंने मान लिया। अब आप बताइए आपका ईश्वर ईश्वर कैसे है? मैं ये मानता हूं कि आपका और मेरा ईश्वर अलग नहीं है। मैं ये मानता हूं। जो मैं मैं बता रहा हूं जो परिभाषा मेरे पास है ईश्वर की वो गलत अभी मैंने मान लिया अब आप मुझे अभी जो टॉपिक चल रहा है अभी जो टॉपिक चल रहा है मैं इस बात को बाद में करूंगा कि भाई मैं जो है कैसे सिद्ध करूंगा

00:40:04:09 अपने ईश्वर को वो बाद की बात है अभी जो टॉपिक चल रहा है ना वो छूट जाएगा बात ये है वो नए चैप्टर खुलते जाएंगे अभी टॉपिक देखिए अभी तीन अभी मैं मैं आपको तीन चीजें बता रहा हूं एक आपने कहा वो किसी नियम के नीचे नहीं है मगर वो नीचे नहीं आएगा क्योंकि उसका ईश्वरत्व भंग हो जाएगा। इसका मतलब अपने ईश्वरत्व की स्थापना के लिए ईश्वर इस नियम के नीचे है कि वो नीचे नहीं आएगा। ये नियम आ गया। ये एक रूल आ गया जिसके नीचे वो है। ये किसने बनाया? एक मिनट। आप ही तो बता रहे हो। नहीं तो ये तो आप बता रहे हो ना। मैं तो उस रूल को बताऊंगा जब आप मुझसे पूछोगे। मैं अल्लाह के रूल को बताऊंगा कुरान से। भाई कुरान हमारे पास पूछ रहा हूं कि अगर वो अच्छा दूसरा एक शब्द था पहला तो हो गया किसी नियम के नीचे नहीं है दूसरा शब्द था सर्वशक्तिमान सर्व का मतलब सर्व सब कुछ भी कर सकने वाला एक मिनट मैं जब बोल रहा हूं आप जब बोलेंगे तो आप ही को बोलने दूंगा आप मुझे बीच में इंटरप्ट ना करें मैं आपको नहीं करूंगा ठीक है तो सर्वशक्तिमान अब सर्व का मतलब होता है सब कुछ अब जब हम ये कहते हैं कि वो इस वजह से नीचे नहीं आ सकता। ठीक है? वो बाद की बात है कि वो इस इस कारण से नीचे नहीं

00:41:19:10 आ सकता। मगर अगर हम कहें कोई भी कारण है तो हम ये नहीं कह सकते कि वो अबाध्य है। कोई भी कारण है वो अबाध्य नहीं है। बाधित है। अगर कोई भी कारण है तो हम ये नहीं कह सकते वो सर्वशक्तिमान है। कोई कारण है वो वो रीजनिंग सही है गलत है। बाद की बात है। मगर वो सर्वशक्तिमान नहीं है। फिर सर्व शब्द हटाना पड़ेगा। अनलिमिटेड पावर वाला शब्द हटाना पड़ेगा। ओमनीपोटेंट शब्द हटाना पड़ेगा। मतलब वो एक बात अलग है कि उसके पास रीजनिंग है कि मैं इसलिए ऐसा नहीं जैसे कि वही मदिरा वाली बात कि भाई मैं जो है मदिरा मैं जो है मदिरा इस इस वजह से नहीं पी सकता हूं। ठीक है? तो ठीक है नहीं पी सकते। मगर ये मानना पड़ेगा कि इतने में मैं बाधित हूं। मैं फिर सर्वशक्तिमान नहीं हूं। ये मानना पड़ेगा। फिर हम आगे बढ़ेंगे कि भैया क्या यह जो बाध्यता आ रही है जिसकी वजह से वो सर्व शब्द हट रहा है अब शब्द हट रहा है क्या इसके बिना हम ईश्वर को ईश्वर मान सकते हैं कि नहीं और आप जब मेरे से पूछेंगे मैं जो परिभाषा ग्रहण करता हूं ईश्वर की वहां मैं आपको हर चीज का जवाब देता जाऊंगा ईश्वर को सर्वशक्तिमान भी सिद्ध करूंगा सब कुछ सिद्ध करूंगा मैं अब मैं बोलूं जब हां बोलिए है ना आपने

00:42:35:10 आपने अपनी कैपेबिलिटी पर आपने अपनी क्षमता पर ईश्वर की यह चीज नापने की कोशिश की कि मैं शराब पी सकता हूं पूंगा नहीं एक अलग बात है लेकिन कैपेबिलिटी है आपके अंदर कि आप शराब पी सकते हैं। है ना पी सकते लेकिन तो पीने से पहले आपको ये भी तो पता होगा ना कि ये शराब जो है आपकी बॉडी के ऑर्गन्स पर क्या किस तरह से असर अंदाज होगी। है ना? क्योंकि आपकी बॉडी के अंदर तो कैपेबिलिटी है ही नहीं। पीने की तो है, चाहत तो है। लेकिन क्या आपकी बॉडी भी इस कैपेबिलिटी को बर्दाश्त कर पाएगी कि वो निरंतर निरंतर उस शराब को पीते पीते जब ऑर्गन नष्ट हो जाएंगे तो कैपेबिलिटी कहां रही? इंसान की कैपेबिलिटी की एक हद है। उस हद तक ही मैं वही कह रहा हूं। मैं वही कह रहा हूं। कैपेबिलिटी नहीं रही ना। मैं सर्वशक्तिमान नहीं कह रहा हूं खुद को। मैं वही कह रहा हूं। आप और हम जो बात कर रहे हैं ना ईश्वर के सर्वशक्तिमान होने की ईश्वर के सर्वशक्तिमान होने का मतलब कतई यह नहीं है कि ईश्वर से हम झूठ बुलवाए। क्या ईश्वर में इतनी कैपेबिलिटी नहीं है कि वो झूठ नहीं बोल सकता। तो ये ये पैमाने हम रख रहे हैं ईश्वर के लिए जो सरासर गलत है। दो मिनट रुकिएगा मुझे

00:43:50:12 बात मुकम्मल होने दीजिएगा। हम जिस तरह से ईश्वर को जानते हैं या अल्लाह को जानते हैं ना तो हम कुरान के ज्ञान के आधार पर जानते हैं अल्लाह को। है ना? और इससे पहले भी ऐसा नहीं है कि कुरान का ज्ञान ही जो है ना वो है। इससे पहले भी ईश्वर ने अपना ज्ञान नाजिल किया है और पहले भी लोगों के पास आया है ज्ञान। अब ये लोगों की है कि उन्होंने क्या मिलावट कर दी है। उन के पास अभी सत्य ज्ञान मौजूद है। तो हम कुरान को मानते हैं तस्दीक करने वाला। यानी किसी भी किताब में जिन लोगों ने अपने आप को धर्मों में बांट लिया। भैया भैया भैया भैया देखिए विषय बदल रहा है विषय बदल रहा है आप इसी पे रहिए आप अभी ये मिलावट का मैं कह ही नहीं रहा हूं कि इसको मान लो उसको मान लो मैं तो नहीं कह रहा हूं देखिए आप अपने टाइम में बोलिएगा मैं अपनी बात क्यों नहीं है विषयंतर हो रहा है ना टॉपिक चेंज हो रहा है भाई वो हमारा टॉपिक है ही नहीं कि मैं मैं तो इस किताब को मानूंगा आप इस किताब को मानते हो आपने कहा कि आप कुरान के अनुसार मानते हो सुनिए आपने कहा कि आप कुरान के अनुसार मानते हो तो मैं कुरान की कही हुई चीजों को चैलेंज कर रहा हूं कि ये चीजें कैसे सही मानी जाती है। मेरे सामने कोई आयत रखिए कि इस आयत में ये कहा गया है तो मैं आपको उस आयत के रेफरेंस से बताऊंगा कि उस आयत में कहा क्या जा रहा है। मैंने किया

00:45:05:15 तो आप आपके अनुसार जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है मगर वो अवतार नहीं ले सकता है। उसके लिए अमुक अमुक कारण है मगर फिर सर्व शब्द नहीं आएगा। अगर हमने कारण दे दिया कि हम कोई भी फलाने कारण है जिससे हम नहीं कर सकते तो वो सर्व शब्द नहीं आएगा। या तो आप एक्सेप्ट करो या तो आप ये एक्सेप्ट करो कि इतने इस तरह के कार्य ना करने पर भी किसी को कुछ एक कार्य ना करने पर भी किसी को सर्वशक्तिमान कहा जा सकता है। अनंत सामर्थवान कहा जा सकता है। अब मुझे भी बोलने दीजिए। सर्वशक्तिमान होने का कतई वो मतलब नहीं है कि ईश्वर जो है ना ईश्वर ईश्वर ना रहे। ईश्वर ईश्वर ना रहे तो ये भी कोई कैपेबिलिटी है कि ईश्वर से हम कहे कि अगर तेरे ईश्वर में कैपेबिलिटी है तो ईश्वर ना रह के दिखा। ईश्वर ना रह के दिखाए। तो ये भी कहेंगे भाई कैपेबिलिटी नहीं है ईश्वर में ईश्वर ना रहने की। तो एक तो कोई बात हुई नहीं। ये तो कोई लॉजिकल बात नहीं हुई। नहीं लॉजिकल बात यह हुई कि इसका मतलब उसको अपने मान सम्मान के लिए जिस रूप में वह जाना जाना चाहता है इस कारण से वो नहीं बन सकता मगर वो बन सकता है या तो ये कहिए कि वो वो बन मैं पूछ रहा हूं कारण भाई साहब मेरा

00:46:20:16 प्रश्न क्या है मेरा प्रश्न समझिए मैं कह रहा हूं उसके अंदर क्षमता है कि नहीं ये तो एक वो हो गई उसकी विल कि भैया अगर मैं ऐसा बनूंगा तो लोग ये कहने लगेंगे तुम ईश्वर नहीं हो इसलिए मैं नहीं बनता हूं। मगर वो बन सकता है कि नहीं? मैं ये पूछ रहा हूं। तो मैं उसी है कि नहीं? वही मैं कह रहा हूं। कुरान में उसके गुण उसके गुणों से ही तो हम जानेंगे ना ईश्वर को। तो हम वही बात कर रहे हैं। अल्लाह एक शब्द है। जैसे अल्लाह एक शब्द है। इसका जो मतलब है वो उसके गुण को प्रकट करेगा। चलिए मतलब ये माना जाए वो नहीं बन सकता। उसमें नई कैपेबिलिटी नहीं है। फिर भी आप उसे सर्वक्तिमान कहते हैं। सर्व शक्तिमान की बात आ रही है ना तो सर्वशक्तिमान किसी को जानने के लिए उसके गुणों से ही जानेंगे ना। नहीं उसके गुण से ही जानेंगे। गुण से जानेंगे ना बताइए कि भाई ईश्वर के गुणों से हम उसे जानेंगे कि वो सर्वशक्तिमान है या नहीं है। बराबर है ठीक है। अब उसके गुण क्या है? गुण देखेंगे हम क्या है कि उसको हम अल्लाह नाम से जानते हैं। अरबी भाषा में। ठीक है? अरबी भाषा में हम उसे अल्लाह कहते हैं। हम उसे रहमान कहते हैं। हम उसे रहीम कहते हैं। हम उसे मुख्तलिफ नाम है जिन भाई साहब ये बताने का आप मुझे एक बात बताइए। यह बताने का हमारे टॉपिक से क्या कनेक्शन है कि आप उसे किस-किस नाम से बुलाते हैं बताइए।

00:47:36:26 ये क्या होता है ना ये व्यर्थ की टाइमिंग आप ले रहे हैं। टॉपिक भटक जाएगा भाई साहब मुकम्मल थोड़ा टॉपिक भटक जाएगा विषय में रहिए आप ये नाम है। मैंने नाम तो पूछे नहीं है। मैं नाम को तो चैलेंज नहीं कर रहा हूं। आप नाम क्यों बता रहे है? इसीलिए मैं कह रहा हूं टॉपिक पॉइंट थोड़ा मेरा निवेदन हैदन मिनट मैं आपको नाम से नाम इसलिए बता रहा हूं क्योंकि नाम के शब्दों के अर्थ से ही गुण प्रकट होते हैं। समझ रहे है ना? है ना? ये तो जैसे अगर मैं विष्णु आप सीधे गुण बता दीजिए ना उसमें ये गुण है। बस अल्लाह शब्द का मतलब समझाना पड़ेगा ना आपको। इसीलिए नाम बताना जरूरी है। अब मैं आपको अल्लाह शब्द का अर्थ बताता हूं। अल्लाह शब्द का अर्थ बताता हूं। अब अरबी जैसे आपको नहीं आती है। मुझे आती है तो मैं आपको बता रहा हूं। अल्लाह शब्द का अर्थ होता है कि हमें ऑर्डर देने वाला। इला इला बोलते हैं अरबी के अंदर ऑर्डर को। अब जैसे नफ्स भी हमारा इला है। हमें ऑर्डर देता है। हमें आंखों का इस्तेमाल करने का जो चाहत है वो हमारे अंदर होती है। अगर आप सुन रहे हैं मेरी बात तो अल्लाह शब्द को मैं समझा रहा हूं। क्योंकि अल्लाह कोई ऐसा नहीं है कि अल्लाह मुसलमानों का है। मैं अल्लाह शब्द के अर्थ से उसके गुण

00:48:51:27 को प्रकट कर रहा हूं कि अल्लाह वो इला है। हर चीज को ऑर्डर देने वाला है। हर चीज को आर्डर देने वाला है। वो अला कुल श कदीर है। यानी हर श के ऊपर वो एक पैमाना रखने वाला है। पैमाना समझ रहे हैं आप? है जी। पैरामीटर पैरामीटर पैरामीटर पैरामीटर पैरामीटर उसने रखा हुआ है। है ना? हर चीज के ऊपर एक पैरामीटर रखा हुआ है उसने। तो ये सर्वशक्तिमान होने के लिए ये लफ्ज ही काफी है। अल्लाह अला कुल्ली शहीद कदी ये तीन लफ्जों में ही उसकी सर्वशक्तिमान होना साबित हो जाता है। अब ये जो हमारे सवाल है कि ईश्वर अवतार लेगा या नहीं लेगा। तो ये कांसेप्ट बनाए हुए जो है ना हमारे अगर मैं आपसे कहूं कि वेदों से क्या आप साबित कर पाएंगे ये चीजें? भाई साहब मैं ये नहीं कह रहा हूं कि मुझे वेद से साबित करना है कि नहीं। मैं बस आपसे पूछ रहा हूं आपका ओपिनियन क्या है? अगर नहीं है तो मेरी जो जिज्ञासा उठ रही है कि जब वो सब कुछ नहीं कर सकता। एक मिनट जब वो सब कुछ नहीं कर सकता है उसके बावजूद भी जब वो सब कुछ नहीं कर सकता है उसके बावजूद भी वो क्या कहते हैं उसको सर्वशक्तिमान क्यों कहा जा रहा है? उसको ये कहना चाहिए वो शक्तिमान है। वो शक्तिमान है पर एक मिनट भाई साहब एक एक मिनट भाई

00:50:07:01 साहब भाई साहब एक मिनट अगर हम कह रहे हैं कि वो सर्वशक्तिमान है तो उसमें बाधा आ रही है। दूसरी बात हम कह रहे हैं कि वो अबाध्य है मतलब उसमें बाधित नहीं है। तो जब वो बाधित नहीं है तो उसको अबाध्य क्यों कह रहे हैं? जब वो अनंत सामर्थ्यवान नहीं है तो उसको अनंत सामर्थ्यवान क्यों कह रहे हैं? ये हमने अभी तक पूछा जिसमें कि आप ये स्वीकार नहीं कर रहे हो कि भाई क्या कहते हां अगर चलो ठीक है। ठीक है। कुछ कारण ऐसे हैं जो लॉजिक आपने दिए वो लॉजिक पे हम बाद में आगे जाएंगे कि लॉजिक वो कैसे कट रहे हैं वो मैं आगे जाऊंगा। अभी के लिए मान लेते हैं आपने जो लॉजिक दिया वह सही है। तो आपने जो लॉजिक दिए उसके बाद अगर कोई लॉजिकली चीजें हैं और वो काम हम अगर नहीं कर सकते हैं उसके बावजूद भी हम फलाने एंटिटी को सर्वशक्तिमान कह सकते हैं। अगर उसके पास सही रीज़ंस हैं कुछ काम ना करने के तो तो भी उसे हम सर्वशक्तिमान कह सकते हैं। और ऐसे को हम इस प्रकार से बने सर्वशक्तिमान को हम ईश्वर भी कह सकते हैं। ये एक आगे की बात है कि फिर मैं वो लॉजिक भी काउंटर करूंगा। ठीक है? अब दूसरी बात ये है कि अगर हम ये कहें कि फलानी फलानी रीजनिंग के कारण यदि कोई व्यक्ति रुक रहा है कुछ करने से

00:51:22:09 तो इसका मतलब कि वो उसको भी हम सर्वशक्तिमान कह सकते हैं। तो फिर दिक्कत ये आएगी कि अगर उसको हम सर्वशक्तिमान कह सकते हैं तो फिर उसको क्या कहेंगे जो किसी भी कारण से रुके नहीं उसको क्या कहेंगे? उसके लिए क्या शब्द होगा? जो किसी भी कारण से ना रुके। आप जो मैं अब मैं आपका जवाब देता हूं। आपने जितनी भी डेफिनेशन उस सर्वशक्तिमान के लिए कही ना तो आपने खुद के अपने पैमाने रखे। अपने पैमाने मैं भाई मैं भाई साहब मैं सर्वशक्तिमान की डेफिनेशन आपकी स्वीकार कर रहा हूं। मैं मैंने आपकी स्वीकार कर ली। मैंने अब की डेफिनेशन कि वो फलाने फलाने कार्यों में गुड रीज़ंस के कारण अगर बाधित हो जाए तब भी वो है। वो फलाने फलाने कार्यों में गुड गुड रीज़ की वजह से मैं आपने मैं भाई साहब मैं आपकी डेफिनेशन मान गया। अब मुझे बस ये बता दीजिए जो कहीं नहीं रुक सकता उसको क्या कहेंगे? उसके लिए क्या शब्द है? जो कहीं नहीं रुक सकता मतलब झूठ भी बोल सकता है कुछ भी कर सकता है। हां उसको क्या कहेंगे? जो झूठ भी नहीं बोल देखो झूठ भी असीमित असीमित असीमित असीमित जिसकी कोई सीमा नहीं है। जिसकी कोई सीमा नहीं है। झूठा कहेंगे। सुनिए मेरी बात। झूठ बोलेगा

00:52:37:18 तो मैंने क्या कहा भाई साहब? मुझे बस मैंने बता दिया वो झूठ भी बोल सकता है। कुछ भी कुछ भी का मतलब कुछ भी उसको क्या कहोगे आप? तो वो उसके जो भी कार्य वो करेगा ना उस कार्य के हिसाब से उसके लिए शब्दों का इस्तेमाल होगा। जैसे अगर कोई जुल्म करता है तो हम उसे जालिम कहते हैं। तो अगर ईश्वर नहीं ये तो पर्टिकुलर ये तो पर्टिकुलर उसके एक विभाग को आप नाम दे रहे हैं। मैं कह रहा हूं कोई ऐसी एंटिटी अगर है जो जिसका जिसकी कोई सीमा नहीं है किसी भी क्षेत्र में वो कुछ भी उसके लिए नामुमकिन शब्द है ही नहीं तो वो नामुमकिन शब्द नामुमकिन शब्द जब उसके लिए कुछ है ही नहीं तो उसको आप क्या कहेंगे अरबी में अल्लाह कहेंगे अरबी में अल्लाह के लिए अरे अल्लाह के लिए तो नामुमकिन शब्द है ना कि वो औकात नहीं ले सकता क्या अल्लाह के लिए अल्लाह के लिए नामुमकिन शब्द है वो कुछ अच्छे रीज्स है जिसके कारण वो कुछ कार्यों में रुका हुआ है। वो नहीं कर सकता। आप बताइए कौन से कार्य नहीं कर सकता? अरे अवतार नहीं ले सकता। झूठ नहीं बोल सकता। अभी के लिए मान लेते हैं। ये चीज आपको किसी ने बताई होगी ना। भाई ये आपको बताया होगा। उसने ईश्वर ने

00:53:52:21 आपके ईश्वर ने आप जिसे ईश्वर मानते हैं उसने बताया। आप मुझे बता दो ना। आपकी कुरान क्या कहती है इस बारे में? मैं मान लूंगा। आप बता दो क्या कहती है इस बारे में। मैं बता रहा हूं लली श के उसके जैसा कोई चीज है ही नहीं। उसके जैसी कोई चीज नहीं है। अब इतनी सी आयत में आप समझ लीजिए वो जिसके भी जैसा बनेगा तो वो उसके मिसल हो जाएगा। तो इस आयत ने क्लियर कर दिया कि उसके जैसा कोई है ही नहीं। यानी कि भाई साहब वो रुका है ना कि वो किसी के जैसा नहीं है। किसी के जैसा नहीं हो सकता।

00:54:30:21 नामुमकिन शब्द है नामुमकिन शब्द एक्सिस्ट कर रहा है ना उसके लिए बताइए कहां कर रहा है अरे आप ही ने तो कहा उसके जैसा कोई नहीं है इसलिए वो अवतार नहीं ले सकता नहीं हर एक जो है ना वो उससे कमतर है और वो उन सबसे बलातर है तो जब वो मैं मैं देखिए आपको ऐसा लग रहा है आपको ऐसा लग रहा है कि शायद मैं आपसे झगड़ने बैठा हूं। मगर हम लोगों की जो चर्चा है सुनिए तो हम लोगों की जो चर्चा है वो आगे बहुत ही सुंदर रूप से आगे बढ़ सकती है। बहुत सुंदर रूप से आप दो मिनट आप एक एक मिनट आप जो है ना बात का टू द पॉइंट आंसर देने से बच रहे हैं। ये दिखाई दे रहा है क्योंकि मैंने आपके सामने एक मिनट एक मिनट सुनिए तो भाई साहब सुनिए तो मैंने आपके सामने हर तरह का विकल्प रखा है। देखिए पहला विकल्प मैंने क्या रखा कि आप यह मान लीजिए कि कुछ कार्यों से कुछ सही रीजनिंग है तो उनके लिए अगर उन कार्यों को ना कर नहीं कर पा रहा है यदि अल्लाह तब भी उसे सर्वशक्तिमान कहा जा सकता है। ये मान लीजिए कुछ कार्यों को यदि वो नहीं कर पा रहा उसके सही रीज़

00:55:45:22 है इस कारण से अगर वो नहीं कर पा रहा शब्द हटाएंगे ना करिए कि वो कर तो सकता है पर वो इस इस कारण से करेगा नहीं बस सिंपल वो कर सकता है यू बोलिए कि उसकी शान के लायक नहीं है उसकी शान जैसे कोई मगर है ना कर सकता है ना बात मैं भी कोई शान के लायक नहीं है मगर कर सकता है है ना? तान के लायक नहीं है ना? अरे तो उसके अंदर पावर है ना करने की। भाई साहब पावर है कि नहीं? पावर आप एक काम करिए आप अपना व्यू रखिए। यही यही पे आपको कर रहे हैं। आप जो है ना इस इस सवाल से बच रहे हैं। आप जो कहना चाह रहे हैं ना कि कर सकता है। कर सकता है। कर सकता है। तो मैंने जब एक आयत पढ़ी कि अला कुल श कदीर है हर श पर बे पैमाना रखने वाला है वो पैरामीटर जो बताया सही और गलत का पैरामीटर उसने रखा है ना सही और गलत का है ना अब आप ये को ईश्वर यानी कि हम कुरान को कहने वाले को ईश्वर मानने की बजाय कुरान को पहले अपना वो मान ले कुरान पर विश्वास कर ले भले

00:57:00:28 ही कुरान की ही बातों से वो ईश्वरता उसकी भंग हो रही है कुरान की बातों से कोई मैंने कहा ना सिद्ध नहीं हो रहा ना मगर आप ये कह रहे हो क्योंकि कुरान ने सुनिए कुरान ने क्योंकि कुरान ने रोका कुरान एक मिनट भाई साहब भाई साहब भाई साहब कुरान ने क्योंकि रोका हुआ है कि इससे पैरामीटर आप नहीं लगा सकते इसलिए हम रुक जाए मतलब कोई हमसे आके कहे मैं भगवान हूं एक मिनट कोई हमसे आके कहे मैं भगवान हूं ये मेरी किताब है इसको पढ़ तो मैं कहूं भाई इसमें तो तुम्हारे बारे में ऐसा ऐसा-सा लिखा तुम भगवान कैसे हो? उसी में लिखा है कि पैरामीटर कौन सेट करेगा? कुरान सेट करेगी। उसी में लिखा है पैरामीटर कौन सेट करेगा? कुरान सेट करेगी। तो फिर अब तू मेरे भगवान होने पे डाउट नहीं कर सकता। कुरान नहीं सेट करेगी अल्लाह सेट करेगा। ये मैंने कहा कुरान अरे भाई कुरान अल्लाह अपना जो सेट किया वो कुरान में देगा ना। हां वो ज्ञान जो उसने बताया ना वो ज्ञान है। मेरा सुनिए मैं मैं मैं आके आपसे कहूं मैं भगवान हूं। मैं आपसे आगे कहूं मैं भगवान हूं और मुझे कैसे चेक करेगा कि मैंने बता दिया पैरामीटर इससे तू चेक कर अगर आप और कुछ पूछेंगे उससे दाएं बाएं तो वो नहीं वो पैरामीटर मैंने सेट नहीं किया वो तू नहीं कर सकता सवाल ऐसा है ना तो फिर ऐसे तो इस

00:58:16:04 हिसाब से किसी को भी भगवान मान लिया जाएगा शिवम जी शिवम जी एक मिनट मैं आपसे ये पूछूंगा जब आप कहेंगे कि मैं भगवान हूं तो मैं आपसे कहूंगा भगवान शब्द का अर्थ बताएं आप बताएंगे अरे भैया देखिए आप टॉपिक को दूसरी तरफ ले जा रहे हैं। तो दो मुख्य विषय है ना मैं कह रहा हूं सर्वशक्तिमान ईश्वर मैं कह रहा हूं अनंत मैं कह रहा हूं मैं मैं आपको बता रहा हूं अर्थ मैं आपको अर्थ बता रहा हूं सच्चिदानंद स्वरूप सर्वशक्तिमान परमेश्वर ठीक है अब बताइए भगवान का भगवान शब्द का हां हां भगवान शब्द पे देखिए भाई साहब यही तो मैं कह रहा हूं आप मेरा यहां पे आप मैं बता रहा हूं देखिए मैं भगवान शब्द का अर्थ आपको बता सकता हूं और स्क्रिप्ट बता सकता हूं। मैं टॉपिक को बचाना चाहता हूं। टॉपिक बदलते चले जाएंगे। आप मेरा यहां पर आप मेरा यहां पर आप मेरी योग्यता मत चेक करिए कि मुझे भगवान शब्द का हिंदी अर्थ आता है कि नहीं। मेरी बात सुनिए। आप मुझे ये बताइए। आपने अभी एक तर्क दिया। आपने अभी एक तर्क दिया है कि भाई अल्लाह के विषय में जो पैरामीटर होंगे वो अल्लाह ही बताएगा। और उससे कोई भी दाएं बाएं शब्द नहीं पूछा जाएगा। तो अब बात यही है इस प्रकार से तो कोई भी व्यक्ति अपने

00:59:31:08 आप को भगवान क्लेम कर लेगा और पैरा भी खुद ही देगा आप करके देखो आप करके देखो मैं आपके क्लेम को रद्द करूंगा आपकी ही बातों से करूंगा अरे तो यही तो मैं भी कर रहा हूं यही तो मैं भी कर रहा हूं अल्लाह की बातों को रद्द आपको अपने जब मैंने कहा जब मैंने कहा कि वो ले सकता है कि नहीं तो आप पैरामीटर ले आए पैरामीटर कुरान में दे दिया है मना किया पैरामीटर में सीमित किया ना अच्छा मैं मैं आप मुझे मुझे रद्द करिए। मुझे रद्द करिए। मैं मैं अभी अपने आप को भगवान सिद्ध कर रहा हूं। आप मुझे रद्द करिए। ठीक है। मैं भगवान हूं। मैं मैं ईश्वर हूं। जो जीव की चाह का वास्तविक विषय है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर उसी का मैं रूप हूं। यहां बैठा हूं। बताओ क्या? आपसे पूछा है भगवान शब्द का अर्थ बताइए। फिर उस अर्थ से आपके अंदर भाई साहब आप वही पूछ सकते हो जो मैं आपको लिख के दूंगा। आप और कुछ नहीं पूछ सकते हो। मैं पैरामीटर सेट करूंगा। आपने कहा कि आप भगवान है। ठीक है? कहा ना? आप ये भी आप मेरी मर्जी के बाहर ये भी नहीं पूछ सकते भगवान शब्द का अर्थ बताओ। मैं वो हूं मैं वो हूं। मैं मैं वो सुनो मैं वो हूं सबको सबको आर्डर देने वाला। आपने अल्लाह शब्द की जो व्याख्या की थी ना मैं वो हूं। अल्लाह शब्द की व्याख्या की थी। अल्लाह शब्द की व्याख्या की

01:00:46:14 थी आपने? मैं वो हूं। ठीक है। अभी आप मुझे काउंट करो। मैं हूं आपको ऑर्डर देने वाला। मैं हूं सबका शासनकर्ता। मैं हूं सर्वशक्तिमान। अब आप मुझे काउंटर करो। मैं अपने को भगवान मैं अपने आप को भगवान नहीं कह रहा हूं। मैं अपने आप को भगवान नहीं कह रहा हूं। मैं अब अपने आप को सर्वशक्तिमान सबको आर्डर देने वाला। अभी तो आप अपने को कह रहे क्योंकि मुझे टॉपिक बचाना है। विषयंतर से बचाना है मुझे। इसलिए मैं शब्द को छोड़ रहा हूं। जिस मेरी जिसज बात से जिसज बात से आप नया टॉपिक खोलने का प्रयास करेंगे मैं उस बात को छोड़ दूंगा। आपको नया टॉपिक नहीं खोलने दूंगा। टॉपिक ये चल रहा है मैं अपने आप को वो कह रहा हूं। मैं मैं अपने आप को वो कह रहा हूं जो अल्लाह शब्द का अर्थ आपने बताया मैं वही हूं। ठीक है? अच्छा जो अर्थ आपने बताया है। आप ही रहमान है। ठीक है। आप ये है ना? ये ये मैं नहीं कह रहा। आपने जो अर्थ बताया मैं वो हूं। अब इसे आप काउंटर करिए। क्या काउंटर करिए? अब आप मुझे सिद्ध करिए। मैं नहीं हूं वो। हां नहीं हो ना आप? क्योंकि कुरान की जो आयत है उसके मिसल कोई शय नहीं है। अब आपके मिसल तो कितने सारे मैं

01:02:01:15 आपके मिसल हूं। मैं आपके मिसल हूं। ये आप थोड़ी सी हिंदी बोलिए। हिंदी बोलिए। थोड़ी हिंदी बोलिए भाई साहब। थोड़ी भाई साहब हिंदी बोलिए। हम मैं कह रहा हूं मांस और हड्डी से बना हुआ शरीर मेरा भी है और आपका भी है। तो मैं तो आपके लिए हो गया। अल्लाह ने जो कहा है देखिए जो प्रश्न आप कर रहे हैं वो प्रश्न सही प्रश्न नहीं है। मैं आपको लिख के दूंगा। आप केवल उसकी सीमा में रहकर प्रश्न कर सकते हैं। तो आप जो प्रश्न कर रहे हैं ना तो वो भी आप किसी आयत से करिए तो सही रहेगा। आप अपना पैरामीटर जो है ईश्वर पर लगा रहे हैं। मैं मैं वही तो कह रहा हूं। अगर कुरान से ही प्रश्न करना है तो मेरी भी मैं लिखी हुई चीज आपको दे रहा हूं। आप उससे प्रश्न कर सकते हैं। आप उसके बाहर से प्रश्न नहीं कर सकते। मैं आपसे पूछूंगा ना कि भ आपका सोर्स ऑफ नॉलेज कौन सी किताब का मैं भी आपसे पूछ रहा हूं ना। मैं भी आपसे पूछ रहा हूं ना कि आपको भगवान कैसे माने? जबकि आपने आपने जो लिख के दिया है उसमें ये बातें आपकी कट रही है आपकी बात से। बस वही मैं कह रहा हूं। ये बताइए खुद को भगवान कहने वाला पैरामीटर सेट कर देगा कि ये मेरा पैरामीटर है। यही तुम पूछोगे। इसके बारे में तुम कुछ नहीं सकते हो। इस तरह के आधार पर तो हर कोई व्यक्ति भगवान बन के घूमेगा। ईश्वर बन के घूमेगा।

01:03:16:19 वही कह रहा हूं शिवम जी कि आपने अभी तक कुरान की एक भी आयत नहीं बताई और आप कह रहे हो उसी पैरामीटर से आप बता रहे हो। तो मुझे कोई आयत तो बताओगे इस बता रहा हूं भाई। मैंने आपसे कहा कुरान आपने पढ़ी है। कुरान आपने पढ़ी है। ठीक है। आप मुझे बताइए क्या कुरान के अनुसार जो ईश्वर है वो अवतार ले सकता है या नहीं? मैं उसमें चैलेंज कहां कर रहा हूं कि नहीं कुरान में ये नहीं लिखा है आप गलत बता रहे हो मैंने चैलेंज किया तो शिवम जी ये बात तो मैंने शुरू में ही बता दी थी कि ईश्वर जो है अवतार नहीं ले सकता ना लेगा नहीं ले सकता नहीं ले सकता तो यहां बाकी हुआ ना पूरी बात सुनिए ना उसकी शान के लायक नहीं है शान के लायक नहीं के लायक नहीं है इसका मतलब ये हुआ मैं आपको ऑप्शन क्या दे रहा था कि अगर किसी भी शान के लायक ना हो इस कारण से वो कोई काम ना कर पा रहा हो शान के कारण तो भी उसे सर्वशक्तिमान ही कहा जाएगा। मैं ये कह रहा हूं नहीं मैं ये कह रहा हूं कि आपने जो कहा ना कर पा रहा है इस शब्द को हटा दीजिए इस शब्द को हटा दीजिए कि ना कर पा रहा जब शान के लायक भी कह रहे हैं इसका मतलब वो कर सकता है पर इसका मतलब वो कर सकता है मगर शान के खिलाफ है इसलिए

01:04:31:20 करता नहीं ये कहिए आप कर सकता है शान के लायक नहीं है बस शान के मैं पूछ रहा हूं सर मैं पूछ रहा हूं कर सकता है पर शान के लायक नहीं है मैं पूछ रहा हूं कह रहा हूं जो कुछ भी जो कुछ भी वो कर सकता है है जो कुछ भी वो कर सकता है वो अपना सर्वशक्तिमान होना जो बताता है ना वो अपने ज्ञान के थ्रू बताता है और आपसे क्या सवाल किया है आपने एक बात की उसकी शान के लायक नहीं मैंने उसे एक्सेप्ट कर लिया तो फिर आप सोचिए कि वो कर तो सकता है पर उसकी शान के लायक नहीं है इसलिए नहीं करता बस बात खत्म हो गई बात खत्म हो गई बात खत्म क्यों कर रहे हैं भाई साहब मेरे मेरे अंदर जिज्ञासा मैं पूछूंगा ना सवाल बात खत्म क्यों भाई जब आपने भी मान लिया कि उसके शान के लायक नहीं होगी जो चीज है मैं अभी आपकी बात को अभी आपकी बात को यह माना कि उसकी शान के लायक नहीं है इसलिए वो नहीं लेता। मगर अब आपसे पूछ रहा हूं इसका मतलब ये तो माने ना कि वो कर सकता है। ले सकता है जन्म अवतार के रूप में ले लेगा तो फिर वो ईश्वर नहीं रहेगा। ये भी मैंने पहले बताया था क्योंकि ले सकता आप मुझे ये बताओ वो ले सकता है कि नहीं वो नहीं लेगा लेगा वो बाद की बात है। शिवम जी मैंने आयत से बताया आपको ले सकता है। मैं मैं इसको यहीं पे रोकता हूं। अब मैं आगे चलता हूं थोड़ा सा इसको छोड़ते। अब

01:05:46:28 मुझे एक बात बताइए आप समझ नहीं पा रहे हैं। नहीं वो वो वो देखने वाले समझ लेंगे। यहां तक जो हुआ है उससे वो समझ लेंगे। मैंने हर बात कह दी है। मैं मेरे हिसाब से ये है कि आप उस प्रश्न का जवाब देने से बच रहे हो कि वो ले सकता है कि नहीं। अब आ रही है। वो आप बोल ही नहीं रहे हो। आपने कहा शान के लायक नहीं है तो ये हम लोग हम लोग इस विषय में क्या माने कि वो ले सकता है पर शान के लायक नहीं है इसलिए नहीं लेगा ये बोलो ये प्रश्न देखिए ये प्रश्न आपने किया ना कि वो अवतार ले सकता है नहीं ले सकता ठीक है ना मैंने कहा ये उसकी शान के लायक नहीं अब शान के लायक क्यों नहीं है वो मैंने आयत बताई लली शहीन के उसके मिसल कोई शय नहीं है अब अब मेरे को इसकी व्याख्या तो करने दो कि अगर वो मान लेते हैं मानव रूप लेता है मान लेते हैं मानव रूप लेता है उसके बाद भी क्या वो ईश्वर रहता है क्योंकि उसके मिस्रल के मानव रूप में बहुत सारे मानव घूम रहे हैं तो कुरान की ये आयत गलत हो जाएगी जो ज्ञान उसने बताया है ईश्वर ने तो ईश्वर ने भाई साहब हम तो यही कह रहे हैं ना कि कुरान में कुछ कुछ ऐसी चीजें हैं जो कि सिद्ध नहीं हो रही है हम तो यही कह रहे हैं ना ये तो आप कह रहे हो ना तो वो वो गलत हो रही है ना वो कह रही है कि सर्वशक्तिमान है फिर वो कह रही है वो कह रही है कि वो छ 150 में कह रही है कि भैया जो है ईश्वर

01:07:02:04 की कोई संतान नहीं हो सकती क्योंकि क्योंकि उसकी कोई पत्नी नहीं है। ईश्वर की कोई संतान कैसे हो सकती है? उसकी तो कोई पत्नी ही नहीं है। यानी कि कुछ काम ऐसे हैं वो नहीं कर सकता। चलिए ठीक है। ठीक है। अब आपने कुछ क्लेम इसमें किए हैं। झूठ बोलना। हां। झूठ बोलने वाली बात आपने बताई है। तो सबसे पहले तो यह बता दीजिए कि यह झूठ बोलने से मतलब है कि जो ईश्वर है वो बुराई नहीं करता कर सकता है। इस्लाम का जो ईश्वर है वो इस सीमा में है कि वो बुरे कार्य नहीं कर सकता है।

01:07:41:22 है ना? बुराई और अच्छाई इन दोनों के ऊपर उसने पैमाना रखा है। मैंने बताया था पैरामीटर बुराई का और अच्छाई का यह भी बताया वो मतलब वो मतलब वो गिरे हुए कार्य नहीं कर सकता। वो सत्यवादी है। वो सत्य बोलेगा वो झूठ नहीं बोल सकता। अब ये बताइए क्या बुराई को बनाना बुराई है कि नहीं? बुराई को बनाना। बुराई को बनाना। बुराई को बनाना बुराई है कि नहीं या बुराई को करना बुराई है या नहीं? जैसे कि बम बनाना बुराई है कि नहीं या किसी इंसान के अंदर ही भरना कि भैया जो है तुम बड़े होकर के ये करना वो करना ये सब वो है कि नहीं? बुराई है कि नहीं ऐसा करना? बिल्कुल गलत शिक्षा देना गलत है। गलत शिक्षा देना, गलत ज्ञान से भ्रमित करना, गलत चीजें बताना ये सब गलत है। या गलत जिनसे गलत हो सकता है उन चीजों का निर्माण करना वो भी गलत है ना? निर्माण तो इस्तेमाल उसका इस्तेमाल गलत होगा। इस्तेमाल गलत होगा। अच्छा तो मतलब जैसे किसी ने तलवार बनाई और उस तलवार से कोई मर्डर किया गया तो अगर वो मर्डर

01:08:59:08 एक्टिविटी गलत करी उसने। उसने गलत किया तो तलवार बनाने वाले पर दोष नहीं आएगा। तलवार चलाने वाले पे दोष आएगा। बिल्कुल। क्योंकि वो उसका माइंड के अंदर ये विचार कैसे आया कि किसी को तलवार मार दूं या तो गुस्से में आया होगा या नफरत होगी। कोई ना कोई वजह बनी होगी। मगर तलवार बनाने तलवार बना के उसे देने वाले को दोष नहीं आएगा। हम नहीं उसे क्यों दोष आएगा? तलवार उसे प्रोवाइड कराने वाले को दोष नहीं आएगा। बनाने वाले ने यह कहकर उसे नहीं दिया कि मेरी तलवार से तुम निर्दोष को मारना या गुस्से में आ जाओ तो किसी के मार देना। उसने कतई ये नहीं कहा। उसने बस एक तलवार बनाई ताकि उससे दो पैसे कमा के वो अपना गुजर बसर करे। ठीक है? अब मैं ये पूछ रहा हूं। मैं मैं अपना सवाल आगे बढ़ा रहा हूं। कि यदि तलवार वाले को यह मालूम है यह तलवार से क्या करने वाला है। अगर उसको यह मालूम है और वो उसे रोक भी सकता है तब भी उस पर दोष नहीं आएगा। तलवार देगा ही नहीं वो भाई तलवार देगा। तलवार देगा ही नहीं। यानी वो बुरी चीज को बनाएगा ही नहीं। नहीं बनाने की बात नहीं है। बात देने की होती है देने की।

01:10:14:09 बनाएगा नहीं। ये क्या बात हुई? भाई दूसरा आदमी उसको अपनी सेफ्टी के लिए जानवरों से हिफाजत करने के लिए रखना चाह रहा है। कभी कोई शेर आ जाए, कोई जंगल में रह रहा है, कोई खेत में रह रहा है तो उससे अपनी हिफाजत के लिए रख रहा है। बनाना तो सही है। इस्तेमाल गलत हो गया ना? तो मैं वही कह रहा हूं ना अगर जैसे मुझे ये मालूम है कि ये जिसको मैं दे रहा हूं जिसको मैं तलवार दे रहा हूं वो देगा ही नहीं। वो देगा ही नहीं। अगर जैसे जैसे मुझे ये मालूम है कि मैं जो तलवार बना रहा हूं मुझे पक्का पता है इस तलवार के द्वारा कल एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या होगी तो मेरे द्वारा इस तलवार को बनाना ये जानते हुए कि इसके द्वारा एक पाप होगा तो मुझ पर पाप चढ़ा कि नहीं उस पाप का आदेश किसने दिया करने का क्या किसी किसी ने भाई साहब जैसे जैसे कि मैं बम बना रहा हूं ठीक है बम बना रहा हूं मुझे मालूम है ये बम जो है जाकर के किसी होटल वगैरह में लगाया जाएगा। निर्दोषों की जान ली जाएगी। अब ये मेरा बम बनाना गलत है या सही है। तो आपके ऊपर पहले यह निर्भर करेगा कि आप जो बम बना रहे हैं क्या आप अपने अपनी मर्जी से अपनी मर्जी से अपनी मर्जी से अपनी मर्जी से बना रहे हैं ना तो कानून व्यवस्था भी है देश के अंदर। यानी मुझे दोष लगेगा। यानी

01:11:29:15 मुझे दोष लगेगा। अगर आप चोरी छुपे बना रहे हैं और कानून को देश की जो सरकार है उसे गुलाम की नजरों में दोष लगेगा कि नहीं लगेगा? आपकी नजरों में तर्क आपके अनुसार क्या है वो बताइए। कोई भी गलत करेगा ना तो उसका दोष लगेगा। जो भी गलत यानी कि यानी कि ये जानते हुए कि बम से निर्दोषों को मारा जाएगा। ये जानते हुए बम बनाना गलत है। पाप है। पाप है। है ना? बम बनाना पाप है। पाप है ना? नहीं। अरे भैया आपसे पूछ रहा हूं। आप क्लियर जवाब दे ही नहीं रहे हो। कोई बात का बम बनाने के पूछ रहे हो ना तो मैं बम के अंदर जो भी सामग्री लग रही है उनके अंदर ऐसी कौन सी चीज है जो सामग्री लगा के उस चीज को बनाकर जब तक इस्तेमाल ना की जाए तब तक कोई पाप आ जाएगा। बताइए मुझे मुझे ये मालूम है ना कि मैं ये जो बना रहा हूं ये कहां जाकर फटना है? गलत जगह पे फटना है। मुझे मालूम है। अब बताओ पाप है कि नहीं? मुझे सब मालूम है। मैं मैं जानता हूं ये कहां जाके फटने वाला है। आपको मालूम है ये कहां जाके फटने वाला है? हां।

01:12:44:24 अब बताओ मैं पापी हूं कि नहीं? कहां जाके फटेगा? तो फिर आप ही दोषी हो। भाई दो अगर मैं अगर मैं बुराई को बना रहा हूं और मुझे पता है कि अगर मैं किसी चीज को बना रहा हूं और अगर मुझे पता है कि ये इसके द्वारा बुराई होने वाली है तो बुराई का दोष मुझ पर भी आएगा। बुराई का दोष जो है ना सिर्फ करने वाले पे आएगा। अरे भैया आप ही तो कह रहे थे कि बम बनाने वाले पे दोष आएगा। क्या तो बम का अगर कोई व्यक्ति बम बना रहा है सुनिए मैं बताऊं अगर कोई सुनिए तो अगर कोई व्यक्ति बम बना रहा है एक मिनट अगर कोई अगर कोई व्यक्ति बम बना रहा है उसको ये पता है कि इस बम का उपयोग भारतीय संसद में करना है या फलाने ताज होटल में करना है या मतलब कहीं कुछ उस उसको ऐसी घटनाएं करनी है जो गलत है जो निर्दोषों को मारना है। उसको मालूम है कि मैं जो बम बना रहा हूं। देखो हर चीज़ के दो पहलू होते हैं। शिवम जी आप मुझे इसका सही पहलू भी बताओगे के जैसे हमारे देश ने कुछ बम बना के रख रखे हैं और दूसरे देशों ने भी बम बना के रख रखे हैं। मैं कह रहा हूं जिसके बारे में मुझे पता है कि इससे

01:14:00:02 गलत ही होगा। वो बम बनाना बनाने का दोष मुझे लगेगा कि नहीं लगेगा? मैं वो कह रहा हूं ना वो इस्तेमाल बताएगा ना। इस्तेमाल बताएगा। भाई साहब वो इस्तेमाल मुझे मालूम है ना वो इस्तेमाल मुझे मालूम है उसका क्या इस्तेमाल होना है अच्छा मेरी बात सुनिए अगर वो बम सुनिए मेरी बात अगर वो बम ऐसे दुराचारियों पर जो अत्याचार कर रहे हैं जो अत्याचार कर रहे हैं पाप कर रहे हैं मजलूम की हत्या कर रहे जैसे मान लो तीर चलाई है ना ब्रह्मास्त्र चलाया है ना पांडव ने कौरव पे मिसाल के तौर पर बता रहा हूं तो ये तीर जिसने बनाया आपके हिसाब से तो ये तीर उन्हें पता था मेरा प्रश्न दूसरा है मेरे भाई मेरा प्रश्न दूसरा मैं ये कह रहा हूं कि मुझे ये मालूम है कि उसका मैं ये कह रहा हूं कि मुझे मालूम है आप जो है आप जो है सवाल का जवाब देने नहीं आए हैं आप मैं समझ गया आप जो है टॉपिक से भाग रहे हैं कह रहा हूं जब ईश्वर जब जब किसी व्यक्ति को ये मालूम है कि इसका उपयोग पांडवों की तरह कौरवों पे नहीं होना जब इसका उपयोग देश के प्रति जो दुराचार करते हैं उनप नहीं होना है बल्कि निर्दोषों पे होना है। जब मुझे

01:15:15:08 मालूम है जब किसी व्यक्ति को मालूम है उस स्थिति में उसके द्वारा वो जो बम वो जो बम बनाया जाना उसके द्वारा बम बनाया जाना गलत है कि नहीं है? मैं ये पूछ रहा हूं। मैं वही जवाब अभी हम अभी हम दूसरा दूसरा जो पहलू है कि उसका उपयोग और भी कहीं हो सकता है। वो उसका उसका जो दूसरा पहलू है उससे हमारा अभी संबंध नहीं क्योंकि हमने डिक्लेअ कर दिया कि हमें मालूम है हमें मालूम है कि उसके साथ गलत ही होना है। अब बताइए [हंसी] जो बम बनाने वाला है वो गलत है कि नहीं? अब आपकी बात सही समझ में आई। आपने एक शब्द और ऐड किया कि निर्दोष मारे जाएंगे। आपने ये शब्द ऐड किया कि निर्दोष मारे जाएंगे। मैं आपको भाई साहब मैं आपको क्लिप दिखा देता हूं। मैंने निर्दोष पहले भी कहा था। अच्छा मैंने चलो ठीक है। मैंने नहीं सुना होगा। है ना? तो आपने एक बार निर्दोष सुनिए एक बार नहीं मैंने कम से कम तीन चार बार निर्दोष शब्द का उपयोग किया है। चलो ठीक है। मैंने नहीं सुना होगा। लेकिन आपने कहा निर्दोष मारे जाएंगे। है ना? निर्दोष तो जो बना रहा है उसको और उसके पीछे उसका इरादा भी ये है कि भाई इसको बनाऊंगा तो निर्दोष जो है ना मारे जाएंगे। है ना? सिर्फ यही इरादा है। दूसरा कोई इरादा ही नहीं है। यानी उसको इस्तेमाल करने का दूसरा कोई विकल्प ही नहीं

01:16:30:14 है। तब तो गलत हो जाएगा। और अगर दूसरा दूसरा विकल्प और क्या हो सकता है? जब उसको ये मालूम है इससे छोटा बच्चा मारा जाएगा। थोड़ा ऑप्शन उदाहरण दे दीजिए और क्या-क्या हो सकता है। मैंने आपको तलवार की मिसाल दी थी कि तलवार जिसने बनाई उसको ये भी पता है कि इस तलवार के इस्तेमाल से कोई किसी को क्या कत्ल कर सकता है। लेकिन इसी तलवार के इस्तेमाल से वो अपना डिफेंस भी कर सकता है। डिफेंस मैं उसकी बात कर रहा हूं जिसको मालूम है तलवार से क्या होगा। आप क्यों बदल रहे हैं बात को? आप यार एक पहलू ही बता रहे हो ना तो मैं एक पहलू मान रहा हूं। अरे मैं ये नहीं कह रहा हूं कि वो एक न्यूट्रल व्यक्ति है। उसको कुछ पता नहीं है कि वो तलवार जिसको दे रहा है तलवार से क्या होने वाला है। मैं ये कह रहा हूं उसको पता है कि वो तलवार जिसको मैं ये कह रहा हूं वो तलवार जिसको दे रहा है उससे क्या होने वाला है उसको पता है। उसकी बात पूछ रहा हूं मैं। मैं नूतन व्यक्ति की बात नहीं पूछ रहा हूं। आप बार-बार ना आप बार-बार टॉपिक चेंज कर रहे हो। खामखा जो है हाई हो गई। सुनिए मेरी बात ये अभी जो दो पॉइंट बोले ना उसका जवाब सुनिए कि जिसको ये मालूम है कि ये तलवार मैं दूंगा और ये जाके इसका गलत इस्तेमाल करेगा तो उस तलवार बनाने वाले को उस शख्स को तलवार नहीं देनी चाहिए। यानी उसने गलत किया देख के ना। अरे यार अब वही तो बात है ना। अब दूसरा शख्स आया उसने आके कहा

01:17:45:15 कि भाई मुझे भी तलवार चाहिए लेकिन मैं खेत के अंदर रहता हूं और मुझे जानवरों का डर है। तो अगर दूसरा शख्स आया अगर दूसरा शख्स आया। अगर अगर दूसरा भाई साहब मैं समझ गया आपकी बात समझ गया। अगर दूसरा शख्स आया और वो उसको बेवकूफ बना करके ले गया या वो सही काम के लिए ले गया उसने उसका यूज गलत कर दिया। ठीक है? दूसरा शख्स आया तो हमें ये मानना पड़ेगा। हमें ये मानना पड़ेगा कि जिसने तलवार दी है वो नहीं जानता था कि ये इसका क्या करेगा। हां बिल्कुल। ठीक है। मगर जो आपका कुरान का जो ईश्वर है वो जानता है कि कौन व्यक्ति क्या करेगा जिसको मैं बना रहा हूं। जानता है ना? हां तो उसने कानून बनाया ना जैसे नहीं कानून नहीं कानून नहीं वो जानता है कि यह व्यक्ति जो है बलात्कार करेगा। मैं उसको बना रहा हूं। तो फिर यहां पर उसको मालूम है कि यह ऐसा करने वाला है। अगर मालूम है तो फिर उसको दोष लगेगा कि नहीं लगेगा? नहीं लगेगा तो क्यों नहीं लगेगा? और कोई ऐसी अगर उसको नहीं मालूम है। अगर उसको नहीं मालूम है तो वो सर्वज्ञ कैसे ये बताइए। हां मैं वही कह रहा हूं कि आप जैसे ईश्वर के लिए इस बात को ले जा रहे हो ना बहुत लेट लाए आप शुरू में ही अगर ये बात कर लेते ना तो वो बातें तो पहले भी हम सुन चुके हैं कर

01:19:00:16 चुके हैं। ठीक है तो कोई बात नहीं लेट आ गया। ठीक है आप बताइए। ईश्वर जो है सर्व ज्ञानी है उसे सब कुछ पता है पहले से है ना पहले से ही पता है तो उसने जो हमें यहां डाला है ना इस धरती पे जो भेजा है कुरान के अनुसार अलजी खतम के हमने मौत को और जिंदगी को तकलीक किया ताकि हम देखे तुम में से कौन है अच्छे कर्म करने वाला अच्छे कर्म करने वाला कौन है तो अब दो चीजें हो गई अच्छे कर्म करने वाले को वो देखना चाहता है कि तुम में इतनी बुराइयों के बीच बीच रहता हुआ भी अपने आप को अच्छाई पर कायम कौन रख सकता है? है ना? तो वो ये देखना चाहता है। अब बुराई के ऊपर उसने प्रतिबंध लगा दिया कि तुम्हें बुरा नहीं करना है और बता दिए अपने कानून के तहत। अब पूरी बात सुनिएगा। उसने बता दिया कि बुराई तुम्हें नहीं करनी है। अब फिर भी कोई व्यक्ति बुराई करता है तो उस बुराई का जो दंड है ना वो उसको मिलेगा। यहां अगर कानून व्यवस्था अगर ईश्वर के अनुसार है तो जिनों के हाथ में कानून व्यवस्था है वो दंड देंगे। और अगर कानून व्यवस्था वैसी नहीं है तो मरने के पश्चात तो कर्मों का हिसाब होना ही है। जैसे मिसाल के तौर पर किसी एक व्यक्ति ने 100 व्यक्ति का कत्ल किया और उस व्यक्ति को तो एक ही

01:20:15:18 बार कत्ल किया जा सकता है। लेकिन ईश्वर जो है वो तो सर्वशक्तिमान है। उसे मौत भी नहीं देगा लेकिन सजा देगा। ईश्वर जो है उसे बराबर सजा देगा उन 100 कत्ल की जो उसने किए। अब दुनिया में तो हम उसे एक ही बार मार सकते हैं। लेकिन ईश्वर उसे बराबर सजा देगा उस 100 कत्ल करने की। और अगर वो इस मतलब मतलब कि अगर मैं जैसे अब इसमें एक बात समझ में आई कि ईश्वर ने हमारा टेस्ट लेने के लिए हमें यहां भेजा। ठीक है? टेस्ट परीक्षा लेने के लिए। मौत और जिंदगी को इवॉल्व किया ताकि देखे तुम में से कौन है जो अच्छे कर्म करने वाला है। मौत और टेस्ट हो गया ना भाई साहब। उसको क्यों खींच रहे हैं? जब शॉर्ट में बात नहीं पड़ रही है तो मौत और जिंदगी अरे भाई भाई साहब जब छोटी पंक्ति में बात हो सकती है तो क्यों खींच रहे हैं? मैं बोल रहा हूं उसने टेस्ट लेने भेजा। उसमें हो गई वो बात। परखा जा सके, जांचा जा सके सब हो गया उसमें। तो कह रहा हूं मैंने जो आयत पढ़ी ना उसके अंदर दो लफ्ज भाई साहब एक आप एक बार आपने आयत पढ़ दी। बार-बार पूरी-पूरी चीजें बताने की आवश्यकता कहां रह गई? मैंने कहा टेस्ट में भेजा। हां ठीक है। आप कट करके बता रहे हैं ना इसलिए

01:21:30:21 मुझे बोलना पड़ रहा है। जैसे मैंने कहा कि मौत और जिंदगी को तकलीक किया ताकि तुम्हें आजमाए मौत और जिंदगी को तकलीक किया जो दुनिया बनाई है वो आजमाने के लिए बनाई है। हां ठीक है। ठीक है। आजमाने के लिए बनाई है। और आजमाने के लिए बनाने के कारण जब यहां आते हैं तो फिर वो जो है बाधा नहीं डालता है। उसके कर्मों में कि वो बुराई चुन रहा है, अच्छाई चुन रहा है। उसके बाधा नहीं डालता। वो उसको करने देता है। बाद में वो देता है। ठीक है? करने नहीं देता है। यहां भी एक मिनट के लिए रोकूंगा आपको। करने नहीं देता है वो। उसने नफ्स के अंदर ये ख्याल डाला हुआ है कि ये गलत है। इससे बचो। और ये भी डाला हुआ है कि ना ये चीज गलत है। ये दोनों ख्याल उसने नफ्स के अंदर डाल रखे हैं ऑलरेडी।

01:22:21:20 भाई साहब करने देने से मेरा मतलब है कि जैसे मेरी मान लीजिए आपकी बिटिया है। ठीक है? हां। और छोटी बिटिया है मान लीजिए और उसको कोई मार रहा है आप वहां खड़े हैं। और आप उसे रोक सकते हैं। अब अगर आप उसको करने दे रहे हैं तो हम ये कहेंगे कि आप करने दे रहे हैं कि आप चेक करना चाहते हैं बिटिया अपने बचने के लिए क्या कर रही है। ठीक है? और आपने आपने बिटिया के आपने जो जो उसे मार रहा है ना उसको दोनों बातें सिखाई है। देख अपनी छोटी बहन को मत मारना। मान लीजिए बड़ा भाई मार रहा है। सपोज देख अपनी छोटी बहन को मत मारना और जो है छोटी बहन को मारना गलत होता है। ठीक है? दोनों बातें आपने उसके मन में सिखाई। मगर फिर भी ये तो कहना पड़ेगा ना कि आप अगर वहां खड़े हैं आप उसको रोक सकते हैं मारने से। मगर आप वहां पे करने दे रहे हैं उसको। क्योंकि आप रोकने में सामर्थ रखते हैं। तो कहना पड़ेगा ना। ये कहना तो पड़ेगा लेकिन उसको यह भी कहना पड़ेगा साथ में कि मारने वाला व्यक्ति आपको मार किस वजह से रहा है। उस वजह से आपको या तो डिफेंस करना है या सामने वाला जो देख रहा है ना वो जाके जैसे अगर मेरे सामने टीचर अगर मेरे बच्चे को मारेगा मेरे बच्चे को मारेगा तो मैं

01:23:36:21 टीचर से ये पूछूंगा आपने किस गलती पर इसको मारा। तो वो मुझे गलती बताएगा। आप भाई साहब ना या तो आप मेरी बातों को जानबूझ के नहीं समझ रहे हैं और या फिर ना समझने का नाटक कर रहे हैं। मैं कह रहा हूं वो निर्दोष बहन को मार रहा है। मैं कह रहा हूं वो निर्दोष बहन को मार रहा है। दैट्स इट। उसका मन है मारने का। वो पाप कर रहा है। अभी आप बगल में खड़े हैं। अभी आप वहां बगल में खड़े हैं। अगर आप उसको मारने दे रहे हैं तो फिर ये कहा जाएगा कि नहीं कि आप मारने दे रहे हैं। भले ही आपने उसको बताया हो। भले आपने उसको बता दिया गलत है। अरे मैं रोकूंगा उसको मेरे सामने हो रहा है। अत्याचार हो रहा है। यह निर्दोष को मार रहा है। अगर आप रोकेंगे रोकेंगे नहीं तो ये कहा जाएगा ना कि आप उसको करने दे रहे थे। आप जांच रहे थे बेटी अपनी सुरक्षा में क्या करती है या मेरे बताने के बाद बेटा क्या करता है। आप आप ये कहेंगे ना मैं जांचने के लिए मैं करने दे रहा था। तो उसके अंदर सामने वाले व्यक्ति को देखूंगा ना मैं कि क्या वो क्या हक रखता है मारने का? मैंने उसको ट्रेन करने के लिए थोड़ी भेजा है। मैंने ट्रेन करने के लिए थोड़ी भेजा है उसको कि जा बेटा तुझे कोई मारे ना तो मैं ये देखूंगा कि भाई तेरे अंदर कितनी क्षमता है। क्योंकि बच्ची हमें पता है ये बच्ची ये मुकाबला नहीं कर सकती। ये उसका मुकाबला नहीं कर सकती।

01:24:52:02 लेकिन हम भाई साहब मैं ये नहीं कह रहा हूं आप क्या करेंगे? मैं ये कह रहा हूं अगर आप नहीं रोकते हैं तो उसको कहा जाएगा ना कि आप करने दे रहे हैं क्योंकि वो आपकी सामर्थ्य के अंदर की बात है। उसको रोकना आपके सामर्थ के अंदर की बात है। कि निर्दोष को मारा जा रहा है। आप यू कहिए कि एक ऐसी बच्ची को मारा जा रहा है जिसको सिखाया गया है कि तुझे जो है सहन सहन करना है। आप यू मत कीजिए निर्दोष को मारा जा रहा है। टीचर मार भी मुख्तलिफ होती है। मार बहुत तरीके की होती है। अब आप कह रहे हो निर्दोष को कोई मार रहा है तो जुल्म अगर कोई कर रहा है तो उस जुल्म के खिलाफ हाथ से अल्लाह के रसूल मोहम्मद रसूल्लाह ने कहा है के जालिम का को जुल्म करने से रोक दो। तो हम तो रोकेंगे। उसको जुल्म करने से। किसी निर्दोष को अगर कोई मार रहा है तो।

01:25:46:14 मेरा सवाल आप बार-बार बदलते हैं। आप यहां पर कुछ नहीं कर रहे। केवल टॉपिक चेंज कर रहे हैं। मैं ये कह रहा हूं। मैंने परिस्थिति आपको ये नहीं बताई। मैंने सुनिए सुनिए। मैंने आपसे ये नहीं पूछा कि आप क्या करेंगे? मैंने आपसे ये नहीं पूछा आप क्यों करेंगे। मैंने आपसे एक अर्थ पूछा है कि आप एक जगह खड़े हैं। आपके पास कोई कारण है वहां पर छोटा मोटा कोई पाप हो रहा है। कोई गलत बात हो रही है। मगर आप टेस्टिंग करने के लिए किसी कारण से उसमें बीच में नहीं बोल रहे हैं। ठीक है? अब बीच में नहीं बोल रहे हैं तो यह कहा जाएगा ना कि आपने यह कार्य होने दिया क्योंकि क्योंकि आपके अंदर वह क्षमता थी कि आप उसे रोक सकते थे। बस मेरा सवाल ये नहीं है आप क्या करोगे? मेरा सवाल ये नहीं है कि आप क्यों क्या करोगे? मेरा सवाल ये है कि अगर आप वहां खड़े हैं और आप उसे रोक नहीं रहे हैं तो ये कहा जाएगा ना कि आपने उसको करने दिया। हां तो मेरी एक्टिविटी जो होगी परिस्थिति के मुताबिक होगी। आपने तो मेरे विचार भी कह दिए कि मैं वही बात आपकी मैं आपकी एक्टिविटी नहीं पूछ रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं। अगर आपने ऐसा किया तो उसको क्या कहेंगे? तो आप ही ने दे दिया ना जवाब। अगर मैं अगर इसलिए बच्ची को कोई मार रहा है तो मैं अगर

01:27:01:18 ये देख रहा हूं कि भाई मैं देखूं बच्ची कितना सहनशीलता है उसके अंदर तो जवाब तो आपने ही दे दिया। मैं क्या कर सकता हूं? मैं तो देख रहा हूं बस खड़ा खड़ा। तो ये कहा जाता है कि आपने करने दिया। नहीं तो आपने कह तो दिया। मुझे देखना है खाली। भाई साहब मैं पूछ क्या रहा हूं आपने करने दिया कि नहीं दिया ये बताइए आपके हिसाब से तो करने देना पड़ेगा आपके हिसाब से क्या है भाई मेरे हिसाब से क्या है मेरे हिसाब से यही है अगर किसी निर्दोष को मारा जा रहा है तो मैं देखूंगा अपनी ताकत के अनुसार के उसकी हिफाजत कैसे मैं ये नहीं पूछ रहा हूं मैं ये नहीं पूछ रहा हूं कि आप क्या करोगे मैं भाई साहब मैं मैं भाई साहब मैं भाई साहब ये पूछ रहा हूं भाई साहब मैं ये पूछ रहा हूं हूं कि अगर आपने नहीं रोका तो उसको क्या कहा जाएगा? बस आप कह रहे अगर मैंने नहीं रोका तो है ना तो अब आप बीच में फिर अब आप बीच में फिर ये मत बोलना कि आप टेस्ट कर रहे हो उसको ये मत बोलना बीच में आपने जो मैं तो आपके भले के लिए बोल रहा हूं। चलो ठीक है हटा दो हटा दो नहीं रोका बताओ क्या कहोगे आपने जो कहा कि आपके सामने एक निर्दोष बच्ची को मारा जा रहा है ना आप क्या करोगे ठीक है ना नहीं निर्दोष नहीं

01:28:17:08 क्या करोगे नहीं कह रहा हूं अगर आपने नहीं रोका तो ये कहा जाएगा कि आपने होने दिया हां तो देखने वाले यही कहेंगे कि तेरी बच्ची को कोई मार रहा था और तूने जो है रोका नहीं अब जो है मेरा आर्गुमेंट जो होगा वो उसके ऊपर निर्भर करेगा कि मैंने क्यों नहीं रोका? नहीं, नहीं, मैं ये पूछ रहा हूं कि ये तो मानना पड़ेगा ना कि आपकी क्षमता थी, आपने नहीं रोका। वो आपके पास रीजन है कि क्यों नहीं रोका? यही तो मैं कह रहा हूं इतनी देर से। वो एक गलत बात है वो तो कोई पूछेगा तो बताऊंगा। तो मैं पूछ रहा हूं ना क्या पूछ रहे हो? क्यों नहीं रोक? क्यों नहीं किया? [हंसी] आप ये पूछ रहे हो ना कभी क्यों नहीं रोका? आप यही क्यों नहीं रोका? चलो चलो आगे बढ़ते हैं। आगे बढ़ते हैं। समझ गया मैं समझ गया। शब्दों के बहुत ज्यादा है। शब्दों में नहीं उलझा रहा हूं। शब्दों में हां उलझा रहे हैं आप। आप आप टू द पॉइंट बात नहीं कर रहे हैं। खैर चलिए पॉइंट जो चाह रहे हैं वो बोल लो जो आप चाह रहे हैं। नहीं आप आप वो बातें बताएंगे ही नहीं जहां पे फंसने वाली बात है। क्लियर नहीं है आप। अरे ना आप क्लियर नहीं है। जहां फंसने वाली बात है आप क्लियर नहीं करेंगे। आप सुनिए आप एक बात बताइए। ये बात हम कर क्यों रहे हैं? मैं एक बार याद दिला दूं। एक मिनट ये बात हम कर क्यों रहे हैं? मैं याद दिला दूं? ये बात हम कर क्यों रहे हैं? मैं याद दिला दूं?

01:29:32:09 यह बात हम कर इसलिए रहे हैं क्योंकि जब हमने कहा था कि ईश्वर अवतार ले सकता है कि नहीं तो आपने कहा था भाई ईश्वर अब तो आप कहोगे बुरे कार्य कर सकता है क्या तो बुरे कार्य ईश्वर नहीं करता है तो फिर आप वो भी कह दोगे वहां भी बातें तो मैं इसलिए अब ये सिद्ध कर रहा हूं कि ईश्वर के द्वारा बुराई बुरे कार्य हो रहे हैं कि नहीं हो रहे हैं ईश्वर झूठ बोलने वालों को बना रहा है एक मिनट एक मिनट ईश्वर ये जानता है ये व्यक्ति झूठ बोल रहा है इस्लाम का ईश्वर ये जानता है ये व्यक्ति झूठ बोलेगा फिर भी उसको बना रहा है। अब उसके पास रीजनिंग कोई भी हो। उसके बाद रीजनिंग है। मगर वो जो बुरा करने वाला व्यक्ति है जैसे मान लीजिए कि कोई बहुत सारे एंकर से भयंकर गुनाह होते हैं दुनिया में और जो गुनाह होते हैं वो क्या कहते हैं? उस समय जो तकलीफ हो रही है। आपने कहा कि बाद में जो हंटर से मारेगा ये मारेगा। मगर उस समय तो तकलीफ हुई ना। तो अगर किसी व्यक्ति को मालूम पड़ेगा कि भैया यह जो है ये इसने हमें टेस्टिंग के लिए भेजा है और ये चाहता तो इसको रोक सकता था मगर मेरे इतने इतने तकलीफ हुई मुझे मगर क्योंकि इसका वो टेस्टिंग चल रहा था इसलिए वो बीच में नहीं बोला एक मिनट इसकी वो टेस्टिंग चल

01:30:47:10 रही थी इसलिए वो बीच में नहीं बोला एक मिनट भाई साहब इसने जो है टेस्टिंग एक एक मिनट भाई साहब मैं ऐसा ही कर देता हूं इसने टेस्टिंग करने के लिए जिंदगी और मौत को टाइप की चीजों को इवॉल्व किया और फिर हमने उससे जुड़ा कनेक्ट किया भेजा जो भी है और फिर उसके बाद मेरे साथ ये ये हो रहा था मगर ये उसमें नहीं बोला क्योंकि इसका अपना वो एक टेस्टिंग चल रही थी उसकी उसे जरूरत क्या थी क्या आवश्यकता थी जिसके कारण मुझे इतना यहां तकलीफ झेलनी पड़ गई और मैं नहीं रोक पाई और मेरे साथ ये हुआ तो उसका दोष उसे नहीं लगेगा क्योंकि उसने चुना है कि मैं टेस्ट लूं। उसने चुना है और उस टेस्ट का रीजन क्या है वो भी अभी हम उस टॉपिक पर बात करेंगे। अभी तक ये क्लियर है हो गई बात? हां बोलिए। आपने जो बात की जावेद अख्तर साहब वाली कि वो चाहता तो रोक सकता था। आपने एक बात कही कि वो चाहता तो रोक सकता था। तो उसने रोका क्यों नहीं? उसने होने दिया कि भाई मैं टेस्ट ले रहा हूं। है ना? वो टेस्ट ले रहा। आपने ये कह के बात को हटा के वो चाहता तो रोक सकता था। तो मैं यह कहना चाहूंगा कि ईश्वर ने जो इंसान बनाया है जो कानून व्यवस्था दी है जिस कानून व्यवस्था को इंसानों को इंसानों

01:32:02:14 को सामने लाना था कि चोर के हाथ काट दिए जाए। हाथ काटने का मतलब ये नहीं है कि कोई रोटी चुरा ले तो उसके हाथ काटना। पूरी बात मुकम्मल होने देना। वरना फिर आप कहोगे टॉपिक से हट रहे हैं। टॉपिक से नहीं हट रहे। कुछ बातें समझाने के लिए मिसाले दी जाती है। तो खाद काटने का मतलब है उसके लिए वो चीजें खत्म कर दो कि उसे चोरी करनी ही ना पड़े। तो ईश्वर ने जो कानून दिया है ना तो कुछ शक्तियां है जैसे किसी ने किसी की जान को कत्ल किया तो उसके एवज में ये बताया कि उसको भी कत्ल किया जाएगा या फिर फिया देकर छोड़ दिया जाएगा। ये दो ऑप्शन बता दिए। अब ये जो पीड़ित है वो पीड़ित डिसाइड करेगा कि इसको क्या सजा मिलनी है। और दूसरी चीज कि पीड़ित ये डिसाइड करेगा कि इसको इससे कुछ पैसा लेके इसे छोड़ दिया जाए या फिर इसने ये कत्ल किया तो इसके बदले में इसको भी कत्ल किया जाए। ये कानून ईश्वर ने दिया है। और इसी कानून को नाफिज यानी सामने लाने के लिए इंसानों को ये आदेश दिया है कि तुम ईश्वर के कानून के अधीन होकर भी ईश्वर का कानून चलाओ। लेकिन हम देखते हैं कि जमीन पर ईश्वर का कानून जो है वो बहुत कम जगहों पर है लागू। तो हम देख रहे हैं ऐसे अत्याचार हो रहे हैं कि रेपिस्ट जो होते हैं रेप करने वाले कुरान कहता है उसके 100 कोड़े मारो

01:33:18:00 और जो ईश्वर को मानने वाले हैं जो ईश्वरीय ज्ञान से मुतमई है मुतमई है उनको भी सामने लाओ ताकि वो ऐसी गलती करने से डरे और रुके ऐसी गलतियां करने से उसको डरे बाजार मारो 100 को उसको तो ये सजा का प्रावधान ईश्वर ने इसीलिए बताया है ताकि क्राइम रुके और ईश्वर के यहां तो सजा होनी है कि जो कर्म हम यहां कर रहे हैं वो तो कौन? कहां चले गए भाई साहब रिजवान जी

01:34:23:08 रोकी जी कहां है आप? जय श्री राम। हम तो सुन रहे हैं। [हंसी] उनको ले लीजिए। उनको ले लीजिए। चलिए बाद में चर्चा करते हैं। चलिए चलिए ठीक है। हां जी। क्या हुआ ये कट कैसे गया? ये तो आप ही जानो हमारी ओर से कुछ नहीं। हां तो मैं वही बता रहा था कि ईश्वर ऐसा होने क्यों दे? ईश्वर कहां होने दे रहा है? ईश्वर ने इंसानों को आदेश दिया है कि जो भी बुराई जमीन पर हो रही है उस जमीन पर उस बुराई को रोको। तो ईश्वर ने तो आदेश दिया है। अब जैसे सूर निसा की आयत नंबर 75 में कहा गया कि तुम्हें क्या हो गया है कि तुम उन लोगों से झगड़ते नहीं। सुनिए पूरी आयत सुनिएगा। उन लोगों से हो गई। अब कितनी देर सुनता रहा हूं। एक घंटे सुनता रहा हूं क्या? दो मिनट आप बोलिए। दो मिनट मैं बोल लूंगा। आपको जो आपका जो पॉइंट ऑफ व्यू है इस मिनट बोल भाई साहब। पांच मिनट बोलिए। फिर मैं बोलूंगा। मैं आपको पांच मिनट दे रहा हूं। बोलिए सवाल क्या है? मैं बता दूं। सवाल क्या है? मैं बता दूं कि हां

01:35:38:12 बताओ कि भाई किसी व्यक्ति ने कुछ टेस्ट लेने के लिए कोई चीज तैयार की। उससे कुछ लोगों को जोड़ा है ना? और वो व्यक्ति वहां पर वहां पर जो वो लोग जो जुड़े हैं वो आपस में एक दूसरे के साथ कोई पाप कर रहे हैं निर्दोषों के साथ। गलत हो रहा है। मगर क्योंकि वो टेस्ट ले रहा है। टेस्ट का कारण क्या है? वो तो एक अलग बात है कि उसका कारण क्या था भाई? वो इतना इंपॉर्टेंट टेस्ट था। वो एक अलग बात है। मगर चलो वो वो ये व्यक्ति कह रहा है भाई मैं तुम्हारा टेस्ट ले रहा हूं इसलिए तुम्हारा जो बलात्कार हो रहा है अभी वो मैं नहीं रोकूंगा। दूसरी बात इसमें यह भी है कि अगर आपने सजा दी है। इसमें आपने सजा अगर मुकरर की है कि भाई अगर जो बलात्कार होगा उसको 100 को पड़ेंगे तो क्या वो कोड़े पड़ जाने से उसको जो कष्ट हुआ था वो नदारद मान लिया जाएगा। हुआ ही नहीं है मान लिया जाएगा या क्या होगा? उसको जो उस समयकार हुई उसकी आत्मा में उसका उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ किसी महिला के साथ इतनी सारी चीजें हुई तो क्या बाद में सजा दे देने से वो उनका ना होना मान लिया जाएगा क्या ये सब चीजें हैं और क्या ऐसी बात कह के मैंने तुम्हें टेस्ट के लिए भेजा ऐसी बात कहते हुए जो सामर्थ्यवान है उसको

01:36:53:22 नहीं रोक रहा है वो वहां खड़ा हुआ है वो रोक सकता है अवेलेबल है नहीं रोक रहा है फिर भी उसको जो है यह कहा जाए कि तुम दोष से मुक्त हो। तुम रोक सकते थे पर तुम दोष से मुक्त हो। क्योंकि वो ये कह रहा है कि मैंने तुम्हारा टेस्ट लिया। वो टेस्ट इतना इंपॉर्टेंट क्यों है? ये भी एक जानने वाला विषय है। अब आप बताइए बोलिए। मैं ये कहूंगा आप ये कह रहे हो कि कोई व्यक्ति खड़ा है और वो उसके सामने रेप हो रहा है और वो कह रहा है कि नहीं मैं रेप होने दूंगा क्योंकि मैं तो टेस्ट लेना चाह रहा हूं। तो उस बात व्यक्ति की आ रही है ना तो व्यक्ति अगर वहां खड़ा है उसकी आंखों के सामने अगर वो रेप हो रहा है तो वो सारे काम छोड़कर सबसे पहले उस रेप करने वालों को रोके उस व्यक्ति गलत है यानी वो व्यक्ति गलत है जो नहीं रोक रहा है वो व्यक्ति गलत है अब व्यक्ति को व्यक्ति नहीं रोक रहा है भाई व्यक्ति को होगा ही गलत क्योंकि व्यक्ति को आदेश अल्लाह ने दिया है कि रोक अल्लाह थोड़ी कहेगा हर काम के लिए आपको रोटी खानी है अल्लाह थोड़ी आके तुम्हारे मुंह में रोटी डालेगा। हाथ दिए हैं आपको। अरे जिसको अल्लाह का आदेश नहीं पता है। जिसको अल्लाह का आदेश नहीं पता है। उसको जिन लोगों को ये नहीं पता कि अल्लाह ने क्या कहा है। उसको ये नहीं पता कि अल्लाह ने क्या कहा है। मगर फिर भी वो वहां पे रोक सकता है। एक इंसान जो है चीतकार कर रहा है

01:38:09:03 और उसको ये नहीं पता अल्लाह ने क्या कहा है। उसके लिए क्या है। वो दोषी है कि नहीं। वो रोक सकता। उसके लिए उसके लिए उसकी नियत के अनुसार फैसला होगा कि वो उन लोगों से डर के इस झमेले में नहीं पड़ना चाह रहा था। मैं डरने की बात नहीं कर रहा हूं। मैं कह रहा हूं वो बहुत पावरफुल है। वहां पे अगर सात लोग कर रहे हैं तो वो 200 लोगों से निपट सकता है। इतना पावरफुल है। अब बताइए दोषी है कि नहीं? वो दोषी है। बिल्कुल। अल्लाह ताला उसको कयामत के दिन पूछेगा हिसाब लेगा। अब मैंने दो तीन प्रश्न किए हैं। मैंने दो तीन प्रश्न किए हैं। तीनों का जवाब आप दे दीजिए तब मैं बोलूंगा। बोलिए। हां। तो अल्लाह ताला अगर उसके पास पावर है रोकने की और वो नहीं रोकता बुराई को उसके सामने हो रही तो अल्लाह कयामत के दिन उससे हिसाब लेगा इस चीज का कि तेरे सामने ये बुराई हो रही थी। तूने क्यों नहीं क्यों नहीं रोकी? अब वो जो भी है जिसके पास पावर है वो इम्तिहान का नाम ले के अगर वो नहीं रोक रहा है। जिसके पास पावर है वो दोषी है। ये माना आपने। इम्तहान की बात कहां से ऐड कर दी अब? अरे मैंने बोला ना मैंने बोला रिवाइंड करके सुना दूं आपको इम्तहान बोला है कि नहीं? इम्तहान बोला है कि नहीं सुना दूं आपको? मैं पूछ रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं इम्तिहान सुना दूं आपको। मैंने

01:39:24:04 बोला है कि नहीं बोला? सुनिए। अब आपने बोला कि एक शख्स जिसके पास पावर है। है ना? और उसके सामने रेप हो रहा है। है ना? रेप और वो 200 आदमी को रोकने की ताकत रखता है। लेकिन वो नहीं रोक रहा है। वो कह रहा है कि मैं तो इम्तिहान टेस्ट ले रहा हूं। है ना? वो कह रहा है कि मैं टेस्ट ले रहा हूं। मैं रोक तो सकता हूं। लेकिन मैं ये कौन सा टेस्ट है भाई? ये कौन सा टेस्ट? हां ये कौन सा टेस्ट है? ये कौन सा टेस्ट है? चलो ठीक। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। ईश्वर ने तो सही नहीं कहा कि मैं तुम्हारा टेस्ट इस तरह लूंगा। ईश्वर ने जो बताया है वो मैं आपको बता देता हूं कि हम तुम्हें आजमाएंगे भूख से, भूख से, खौफ से, माल की कमी से, नफ्स के नुकसान से। और इनहीं चार चीजों के बारे में कुरान में आया है कि शैतान वहां पर टेस्ट नहीं है। जहां पर बलात्कार हो रहा है वहां टेस्ट नहीं चल रहा है। ईश्वर जो है वहां टेस्ट नहीं ले रहा है। गलत हो रहा है और जो भी सही लोग दुनिया में है उनको ये आदेश है कि तुम उस गलत के खिलाफ उसे रोकने के लिए एक्टिविटी करो। ये आदेश ईश्वर की सत्ता भी है ना वहां पे। उसने ईश्वर ने तो एक आपको मार्ग दिखा दिया कि इस मार्ग पर चलना है, इस मार्ग पर नहीं चलना है। अब इंसान

01:40:39:10 गलत मार्ग पर जा रहा है तो सही मार्ग पे जो लोग हैं वो अगर पावरफुल है तो उस गलत मार्ग पर चलना इतना कठिन कर दे इंसानों के लिए कि वो गलत मार्ग पर जाने से पहले 10 बार सोचे कि कानून सजा देगा। जैसे मिसाल के तौर पे अब सुनिएगा सुनिएगा सुनिएगा। मिसाल के तौर पर जैसे हमें पता है कि भाई शराब पीने से अक्सर लोगों को कैंसर हो रहा है तो हम कैंसर के हॉस्पिटल ना बनवा के सबसे पहले इस शराब को ही बंद कर दें क्योंकि ये नुकसान पहुंचा रही है तो ये गवर्नमेंट के अंदर पावर है ना करने का तो जो करने का उनके अंदर पावर है अगर वो ना करके बल्कि शराब भी बिकने दे और कैंसर के अस्पताल भी खुला दे तो ये चीजें गलत है। बोलिए अब आप क्या कहना चाह रहे हैं? मेरे बाकी के दो प्रश्न और हैं। वो भी आप आप जवाब दे दीजिए उनका। एक बार और एक बार और दोहरा दीजिए। दूसरे एक है कि क्या बाद में सजा मुकर मिल जाने से क्या उसके उसको जो कष्ट हुआ था उसको जो दिक्कत हुई थी क्या उसका ना होना मान लिया जाएगा? कि हुई नहीं ना वो नहीं होगा। वो तो देखो किसी की भी पीड़ा जो है ना पीड़ा बहुत बड़ी होती है लेकिन टरेरी इंसाफ हर एक को चाहिए कि

01:41:54:14 अगर किसी ने मुझे 10 थप्पड़ मारे हैं तो मैं यह उम्मीद रखूंगा कि इसने इसको जो इसने मुझे 10 थप्पड़ मारे हैं कष्ट मिला है निर्दोष को उसका वो कुछ वापस नहीं आ सकता उसका कोई निवारण वो तो मिला वो तो मिला ही है उसका निवारण उसका निवारण सजा से नहीं हो सकता पूरा उसकी पूर्ति नहीं हो सकती सजा से तो वो उसके पास जिंदगी है ना बाकी की वो वो दर्द दर्द कितनी देर तक रहेगा आप बताइए? अरे भैया जिस महिला की इज्जत लूट ली गई है वो आजीवन रहेगा दर्द इज्जत लूट जाने का नहीं उसे किसने कहा कि आजीवन दर्द लेके बैठी रहे किसने कहा किसने कहा मतलब वो वो पवित्र मानी जाएगी उसके बाद भी भाई चार महीने 10 दिन में पवित्र वैसे भी हो जाएगी इसकी गरिमा भंग कर दी गई जिसका सामूहिक इस तरह से जिसके साथ अत्याचार हो गया आप ये कह रहे हो आप ये कह रहे हो जिसके साथ अत्याचार हो हो गया। आप ये कह रहे हो कि वो जो क्या कहते हैं चार महीने बाद जो उसको जो एक आत्मा में चोट पहुंची है ना कि मेरे साथ ऐसा किया वो चार महीने के बाद वो चार महीने के बाद वो उसकी आत्मा की चोट खत्म हो जाएगी। जब तक उसे इंसाफ नहीं मिलेगा वो चोट रहेगी उसके साथ जब तक हो जाएगी। इंसाफ मिलने पे खत्म हो जाएगी। होगी। चलो

01:43:09:18 चलो ठीक ठीक। यहां पे मैं आपका ये लॉजिक ये आपका जो लॉजिक है यहां पे बिल्कुल भी एक्सेप्टेबल नहीं है। अब आप कह रहे हैं तो हम आगे बढ़ाते हैं चर्चा वो बिल्कुल भी एक्सेप्टेबल नहीं है कि कोई व्यक्ति को हमने अगर अगर किसी का किसी महिला के साथ इतनी बुरी चीजें हुई है और उसके बाद जो है उसके जो विक्टिम है और जो एक्यूज़्ड है उसको हमने सजा दिलवा दी तो उसके साथ जो हुआ था वो ट्रॉमा वो ट्रॉमा खत्म हो जाएगा। वो मानसिक पीड़ा जो झेल रही है वो मानसिक पीड़ा उसे मानसिक

01:43:46:02 ना पूरी बात सुनिए अधूरी बात नहीं पूरी बात सुनिए उस मानसिक पीड़ा से उसे ही दोबारा उठना पड़ेगा लड़ना पड़ेगा और ऐसी बहुत सी वो लड़ेगी मगर वो जो एक चीज है वो बदल नहीं जाएगी ना उसके साथ ऐसा हुआ था वो क्या सोचे उस पीड़ा के बारे में उस पीड़ा के बारे में वो क्या सोचे जिसने भी दोष किया ना है उसको मान लो सजा मौत दे दी गई सजा मौत सजा मौत से आप ये मान रहे हो ना उसका ट्रॉमा खत्म हो जाएगा नहीं ईश्वर का इंसाफ तो बाकी है ना ये तो दुनिया का इंसाफ है तो ईश्वर के इंसाफ से वो ट्रोमा खत्म हो जाएगा मतलब अगर जो दोषी है जो दोषी है उसको बाद में सजा दे दी जाए सुनिए किसी के साथ कोई अत्याचार हुआ उसके बाद में उसको सजा दे दी जाए जिसने अत्याचार किया है ईश्वर के द्वारा भी दे दी जाए तो उसका वो ट्रोमा खत्म हो जाता है। यह बात है। ना ईश्वर पूछेगा ना उससे कि तुझे क्या चाहिए? वो जिसको भाई जिस चीज से भी उसका ट्रोमा खत्म होगा। चीजें ऐसी होती है जो वापस प्राप्ति नहीं की जा सकती वो क्या मांग लेगा उसके बदले? किसी के मां-बाप का मर्डर हो गया। सुनिए किसी के माता-पिता का मर्डर हो गया। अब हम कह रहे हैं उसके तेरे मां-बाप का वो जो दोषी

01:45:01:06 है ना मारने वाले अब उनको जो सजा दिलवा रहे हैं। उससे उसके मां-बाप वापस आ जाएंगे क्या? बिल्कुल नहीं आएंगे। उसे हिम्मत रखनी पड़ेगी। अब आप मुझसे कह रहे तुझे क्या चाहिए? अब भैया मजबूरी में कोई मांग ले अगर वो मजबूरी में मांग ले मुझे उड़ने वाला सुनिए में मांग ले चलो सुनो मां-बाप का प्यार तो मिलना नहीं है उड़ने वाला घोड़ा दे दो मुझे तो इससे उसका मां बाप का जो ना ये यहां नहीं मांग सकता वहां तो इंसाफ मांगेगा ना वहां तो उसके मां-बाप भी होंगे मां-बाप भी होंगे और जिन्होंने मारा होगा वो भी होगा दोनों होंगे कयामत के दिन जो होगा ना वो मां-बाप भी होंगे उसके और जिन्होंने मारा है वो भी होंगे सब होंगे कुल मिला के आपने इस बात का जवाब नहीं दिया कि वो जो उसको कष्ट हुआ है उसका क्या निवारण दिया कष्ट का निवारण नहीं दिया मेरे हिसाब से आपकी जानकारी में दिया आपकी जानकारी में दिया बताइए आप दे तो

01:45:59:03 आपने किसी को कष्ट हुआ है किसी के साथ कष्ट हुआ है ठीक है किसी को कष्ट हुआ आपने कहा हम उसको सजा दे देंगे बाद में जबकि आप में आप उसको रोक सकते थे मगर आपने नहीं रोका नहीं रोका तो मैं बता रहा हूं ना उस व्यक्ति को तो ईश्वर ने आदेश दिया था कि रोकना चाहिए उस व्यक्ति को ईश्वर ने ही आदेश दिया कि रोकना चाहिए मैं इसी पे आ रहा हूं मैं इसी पे आ रहा हूं भाई साहब मैं इसी पे आ रहा हूं ट्रोमा खत्म कैसे होगा ये हमें नहीं पता अब आगे उसी पे आ रहा हूं उसने आदेश दिया था ट्रोमा से गुजरता है हर इंसान गुजरता है कोई ना कोई साइकोलजिकल चोट पड़ती है लेकिन ईश्वर के लिए के गुजरने से और ट्रॉमा का ना होना सिद्ध नहीं होता है।

01:46:45:03 क्योंकि दुनिया में सब दुखी है इसलिए हम ले क्योंकि दुनिया में सब दुखी है। इसलिए हम ये मान ले कि कोई व्यक्ति है जो हमारा टेस्ट ले रहा है। वो वहां पे खड़ा था। उसने हमारे साथ ऐसा ऐसा होने दिया। अब हमें क्योंकि ट्रॉमा हो रहा है। एक तो दुनिया में सबको होता है। इसलिए हम उस व्यक्ति को दोषी ना माने जो हमारा टेस्ट ले रहा था। पहले तो दुनिया में सब कैसे दुखी है? मुख्तलिफ हालतों में है सब हालत में अभी मैं अपना अभी मैं अपना प्रश्न कर रहा हूं। आपने माना आपने आपने माना अभी मैं अपना प्रश्न कर रहा हूं। आपने माना आपने ये माना सुनो आपने ये माना कि क्या कहते हैं ये आपने माना ये

01:47:31:08 बता रहा हूं। आपने ये माना कि अगर सामर्थ्य है और वह रोक सकता है और अगर उसने किसी टेस्ट का बहाना लेकर के नहीं रोका तब भी उसको जो है फिर उसको जो है दोषी माना जाएगा। अब यहां पे आपने दो बात बोली एक भाई साहब प्रश्न पूरा होने प्रश्न पूरा होने दीजिए। अब नहीं तो मेरा प्रश्न पूरा कहां हुआ? एक तो उसको दोषी माना जाएगा। उससे पूछा जाएगा भाई ऐसा कौन सा टेस्ट था जो तू ले रहा है? तो अब ये मुझे बता दीजिए टेस्ट की क्या आवश्यकता है जिसके लिए लोगों को ट्रोमा से होकर भी गुजरना पड़े तो गुजरने दिया जाए। क्या टेस्ट है? ये आपके किसने कहा कि वो ट्रोमा में जो है ना इस तरह से जो आप बता रहे हो पहली चीज तो आप जो बता रहे हो कि ट्रोमा के अंदर मान लो किसी का रेप हो गया, बलात्कार हो गया और वो ट्रोमा में चले गए तो ईश्वर कह रहा है कि नहीं मैं टेस्ट ले रहा हूं। ये आपको किसने बताया? भाई किसी मुसलमान ने ये कहा के भाई ऐसे औरत आप बता दीजिए भाई साहब। आप बता दीजिए क्या मामला है? मैं वही कह रहा हूं कि जहां भी जुल्म और अत्याचार हो रहे हैं तो तमाम इंसानियत जो अपने आप को सही समझती है, इंसानियत में समझती है उन्हीं इंसानों को तो हिदायत की जा रही है ईश्वर

01:48:46:14 की तरफ से। ईश्वर हिदायत दे सकता है। ये माना जाए, बचा नहीं सकता। इस्लाम का ईश्वर हिदायत दे सकता है, बचा नहीं सकता। ये माना जाए। डाय से ही तो बचाया जा रहा है। भाई हिदायत नहीं होगी तो बिना हिदायत के बिना किसी और को निमित्त बनाए स्वयं से बिना ले सकता है कि नहीं पहले आप डिफाइन करो कि बिना हिदायत के बचोगे कैसे बिना हिदायत के कैसे जब वो सुनो जब वो पृथ्वी सूर्य चंद्रमा इत्यादि को रोकने की ताकत रखता है तो वो जो गलत लोग गलत कर रहे हैं ना उनको आराम से रोक सकता है हमारे पास एक वाजिब कारण है कि उसको दोष क्यों नहीं लगेगा पर वो कारण आप पे लागू नहीं होता इस्लाम के ऊपर

01:49:30:14 सही है। है ना? अब जो कानून व्यवस्था है उससे सवाल किया जाएगा कि ये कानून व्यवस्था इंसानों ने जो बना रखी है वो ईश्वर के अनुरूप अभी मैं पूछ रहा हूं। मैं आपकी चीजें समझ गया। दर्शक देख रहे हैं वो समझ जाएंगे किसने क्या बोला? अभी मैं आपसे ये पूछ रहा हूं। वो टेस्ट की क्या आवश्यकता है? वो टेस्ट की क्या आवश्यकता है? किस टेस्ट की? जो ईश्वर ले रहा है। हां। ईश्वर ले रहा है तो ईश्वर किस चीज का टेस्ट लेता है? आपको यह भी पता होना चाहिए कि ईश्वर किन-किन चीजों से टेस्ट लेता है? भाई साहब फिर गायब हो गए। इनको केवल आप पूरी वो चर्चा देख लो। इनको केवल सवाल से बचना है। इन्होंने ये ये सीखा है कि सवाल से किस तरीके से बचा जाए। वो सीधा उत्तर नहीं देंगे। ठीक है? यही सीखा है आपको टू द पॉइंट बात किस किस किस तरीके से टेस्ट लेता है यह कौन सी बात है भाई हमने पूछा टेस्ट ले क्यों रहा है

01:50:31:10 हमने पूछा कि टेस्ट ले क्यों रहा है अब वो कहेंगे किस-किस तरीके से ले मैं कह रहा हूं किसी भी तरीके से किस ले रहा हो टेस्ट जो है किसी भी तरीके से ले रहा हो आप तो यह बताओ वो ले क्यों रहा है टेस्ट जिसकी वजह से किसी को बलात्कार के ट्रॉमा में जाना पड़ रहा है किसी को माता-पिता की हत्या देखने के ट्रॉमा में जाना पड़ रहा है। ना जाने कितने प्रकार के दुख को देखने के ट्रॉमा से गुजरना पड़ रहा है। तो वो ऐसा टेस्ट ले क्यों रहा है? उसकी आवश्यकता क्या है? आपकी आवाज नहीं आ रही। हेलो हां जी बोलिए। आपने ही तो म्यूट कर रखा है। यहां लिखा हुआ है द होस्ट म्यूटेड। हां बोलिए। हां तो मैं यह कह रहा हूं उसको जरूरत क्या है? आप यह कह रहे हो जरूरत क्या है? तो भाई उसको तो कोई जरूरत नहीं थी कि तुम्हारा टेस्ट टेस्ट की उस टेस्ट कीेंस क्या है? क्याेंस यही है कि हम वापस उस जगह पहुंच जाए जहां शांति अमन कोई दुराचार ना हो। लेकिन उसके लिए हम आए इसलिए कि टेस्ट हो रहा है। मेरी बात सुनिए। हम आए इसलिए टेस्ट हो रहा है। अगर टेस्ट ना होता तो हम आते क्यों? आते क्यों? तो वही

01:51:46:12 तो मैं बताना चाह रहा हूं आपको। हम आए कैसे? जैसे हम कुरान पढ़ेंगे तो पता चलेगा ईश्वर ने कहा कि उतरो जमीन पर। है ना? वही तुम्हें मरना है तो जमीन पर जब उतारा गया तो जमीन से पहले भी कहीं होंगे। कहीं होंगे। जमीन से पहले भी कहां से वो मैं आपको बताऊंगा। यहां जमीन पे तो जमीन से तो हमारी जो क्रिएशन हुई है वो बॉडी की हुई है ना। फिर नब्स पे बात आ जाएगी। आपको पीछे आप थोड़ा सा पीछे से शुरू कर लीजिए। शुरू से वो जमीन पे कैसे आए वो वहां से शुरू करिए। हां वहां से शुरू करते हैं ना तो सबसे पहले कुरान की मैं कुछ आयत आपको बताता हूं केवल केवल नंबर बोलिएगा आयत को पढ़ने की आवश्यकता नहीं है। उससे समय बचेगा केवल नंबर बोल दीजिए बस देखो नंबर तो मैं बोल दूंगा लेकिन मैं जो समझाना चाह रहा हूं वो क्या आप समझ पढ़ने की आवश्यकता तब है सुनिए पढ़ने की आवश्यकता तब है जब मैं आपको काउंटर करूं नहीं कुरान के फला नंबर में ये नहीं लिखा है आप नंबर बोलिए समय बचाइए मैं वही कह रहा हूं कि जैसे कुरान अरबी में व्याख्या जरूरी है। व्याख्या अरे भाई साहब तो व्याख्या बोलिए ना नंबर के बाद उसमें जो अर्थ है वो बोलिए क्योंकि वो उर्दू में बोलना वेस्ट हो जाता है। हां चलो ठीक है अरबी नहीं बोलता हूं आपको सीधा व्याख्या हिंदी में ही बोलता हूं ठीक है। ईश्वर ने कहा कि याद करो जब हमने मलाइका

01:53:01:18 से कहा ये हमें याद कराया जा रहा है कि याद करिए जब हमने मलाइका से कहा वो सुरा सुरा और वो सूर आयत का नंबर बोल दीजिए। एक सेकंड फिर आयत नहींहा चलो ठीक है मैं जो बोल रहा हूं उसका वो रेफरेंस जो भी मांगेगा उसको दे दूंगा मैं जो बता रहा हूं वो कुरान की मुख्तलिफ सूरतों में आया है ये वाकया के याद करो जब हमने मलाइका मलाइका मलाइका से कहा कि मैं मिट्टी के सलाल से बसर तकलीक करने वाला हूं बनाने वाला हूं तो जब उसको मैं दुरुस्त कर दूं और उसमें रूह डाल दूं, रूह फूंक दूं तो तुम उसके लिए सजदा करना। तो ये एक पूरा प्रोसेस है जमीन पर चला है। आपने मुझे बोलने दे दीजिएगा क्योंकि आपने बोला है कि पूरा पीछे से चलिए पीछे से चलिए तो मैं बता रहा हूं के ईश्वर ने कहा याद करिए जब हमने मलाइका से कहा कि मैं मिट्टी से बस तकलीक करने वाला हूं। जब उसको दुरुस्त कर दूं ठीक-ठाक कर दूं और उसमें रूह दूं। यानी ठीक-ठाक करने के बाद उसमें रूह डाल दूं। रूह डाल दूं। यानी उसकी क्रिएशन की नॉलेज डाल दूं। मकसद को डाल दूं कि किस मकसद के तहत तू क्रिएट किया गया है। उस

01:54:16:24 मकसद को जब उसके अंदर मैं डाल दूं, उसको बता दूं तो फिर फरिश्तों से मलाइका से कहा जा रहा है उसके लिए सजदा करना। अब आ जाइए आप कुरान की दूसरी सूर बकरा की आयत नंबर 29 एक मिनट एक मिनट एक मिनट इसको मैं थोड़ा क्लिटी से समझ लूं कि हम लोग किसी रूप में है सारे इंसान वहां पर उनको क्रिएट किया उसने ईश्वर ने क्या किया मैं समझ नहीं पाया इसमें आपने क्या कहा नहीं समझा ना तो इसके लिए मैं फिर हां तो मैं कह रहा हूं ये याद दिलाया जा रहा है मैं बताऊं आप जो वो रेफरेंसेस है रेफरेंसेस देते हुए और कुरान की आयत का अर्थ पढ़ते हुए वो जो चीज है ना रेफरेंसेस आप अलग से दे दीजिएगा मैं डिस्क्रिप्शन में डाल दूंगा कि इसमें कौन-कौन सी आयतों की बात की है। आप सीधे ऐसे ऐसे बताइए कि भैया अल्लाह ने कुरान के ईश्वर ने जो है सबसे पहले इंसानों को बनाया फलाने उसमें ये कहा कि मैं तुझे इसलिए बना रहा हूं। उसके बाद फिर वो ऐसे ऐसे करके धरती पे चले गए। आप जो है रेफरेंसेस दे के अभी बात मत करिए। अगर मैं पूछूं कि रेफरेंस इसका दो तो आप दे दीजिएगा। इससे क्या होगा? समय बचेगा और मैं चीजों को

01:55:31:25 सीधे समझूंगा। अभी आप पहले उर्दू अभी तो आप उर्दू में नहीं पढ़ रहे हैं मगर पहले आप उर्दू में पढ़ेंगे। फिर उसकी एग्जैक्ट हिंदी पढ़ेंगे। अब हिंदी पढ़ने से भी समझ में नहीं आया। आप सीधे वो व्याख्या बताइए। वो व्याख्या क्या है? कि क्या हुआ था जो जो है यहां इम्तहान में आ गए। जी हां तो व्याख्या ही बता रहा हूं मैं जैसे ये बात अभी आपके नहीं समझ में आई है ना जो मैंने आयत को कोट किया हिंदी के अंदर आपके सामने वो नहीं आई आप दोबारा से मुझे मुझे आप एक जैसे कहानी सुनाते ना एक बार ऐसा था ऐसा हुआ था फिर ऐसा ऐसे बता दो कि कैसे बनाई कैसे बनाई इम्तिहान में कैसे पता अच्छा कहानी के तौर पे बता दूं आपको हां ठीक है कहानी के तौर पे बताता हूं लेकिन शब्दों के आधार पे बताऊंगा ताकि कि आप बीच में सवाल भी कर लो कि भाई कहां लिखता शब्दों का आधार मत बताइए आप तो आपकी जो कहानी है वो बया कर दीजिए बस कहानी नहीं है ना क्योंकि वो शब्दों का व्याख्या मैंने बोला ना व्याख्या करूंगा तो मैं मुझे करने दीजिए मैंने सबूत मांगू तो आप सब शब्द शब्द दीजिए ना आयत का तो नहीं मांग रहे है सबूत लेकिन मैं भी जो बोलूंगा मैं भी तो ईश्वर को का वो हूं ना के मैं बोल रहा हूं जो वाकई में उसी ज्ञान को बता रहा हूं या अपनी मर्जी से बता रहा हूं तो मैं भी तो अभी आप अभी आप अपने मुस्लिम

01:56:47:06 और मुस्लिमों को इस्लाम को मानने वालों को यहां वो क्या कहते हैं ये सिद्ध करने नहीं आए कि मैं इस्लाम को मानने वाला हूं। अभी तो आप ये करने आए हैं कि आप इस्लाम के पक्ष से इस्लाम का जो कहा गया ज्ञान है उसको आप सिद्ध करने आए वो सही ज्ञान है। ठीक है? अब मैं आपसे मैं उस पर काउंटर करने बैठा हुआ हूं। ठीक है? तो मैं आपसे ये पूछ रहा हूं कि भाई ये कैसे आके फंसे? तो आप अपनी सीधे धारा प्रवाह जो उसका वो है व्याख्यान वो बता दीजिए कि कैसे आगे बस हां तो बस आप थोड़ी देर खामोश रहिएगा मैं बता रहा हूं ठीक है मैंने जैसा कि आयत में बताया कि मलाइका मलाइका वर्ड में समझते हैं आप

01:57:28:09 देखो मुझे आप आपको ही तो समझाना है कि मैं क्या कहना चाह रहा हूं भाई साहब मैं ये कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं हमें ऑब्जेक्ट्स के नाम क्या थे क्या नहीं थे इससे मतलब नहीं आप मुझे ना नाम नहीं है कोई बात आपके अगर समझ में नहीं आएगी तो फिर बात करने का क्या फायदा आप बताइए आपको जो बोलना है बोलिए मैं सुन रहा हूं बोलिए अब वही जब मैं आपसे पूछ रहा हूं मलाइका जो है ना जैसे आप लोग देवता बोलते हैं मुझसे मुझसे कुछ मत पूछिए आप अपनी जो बात कहनी है वो बता दीजिए सीधे अगर मुझे कोई शब्द समझ में नहीं आएगा अगर मुझे कोई शब्द समझ में नहीं आएगा तो मैं उसको पूछ लूंगा कि ये नहीं समझ में आया मलाइका शब्द समझ में आ गया ना मलाइका नहीं नहीं तो मैं वही बोल रहा हूं कि आप पूछ नहीं रहे हो। मैं बता देता हूं। मलाइका जैसे आप लोग देवता बोलते हैं ना जैसे आप लोग देवता बोलते हैं हम मलाइका बोलते हैं। अरबी वर्ड मलाइका का मतलब जिनको ईश्वर ने कुछ इख्तियारात दे रखे हैं। कुछ पावर्स दे रखी है। है ना ईश्वर ने तो उन्हें हम मलाइका बोलते हैं। तो ये मलाइका से कहा गया कि मैं मिट्टी से तीन से तीन से एक बसर एक नहीं मतलब बसर बनाने वाला हूं। तो जब उसको मैं दुरुस्त कर दूं यानी उसकी मुख्तलिफ जो बॉडी लैंग्वेज है उसकी क्रिएशन उसकी दुरुस्त हो जाए तो

01:58:43:13 और फिर उसके अंदर मैं रूह दूं रूह दूं यानी उसे मैं अपना ज्ञान भी डाल दूं उसके अंदर तो तुम सब उसके लिए क्या करना सजदा करना इतनी बात समझ में आई एक एक मिनट एक देवता है एक देवता है कई देवता है कई देवता है कई देवता है कई देवता है मैं उसको मिट्टी से दुरुस्त कर दूं रिपेयर नाट से नहीं उनसे देवताओं से ये बात कही कि मैं मिट्टी से बनाने वाला हूं मट्टी से मट्टी तो समझ रहे हैं आप कि मिट्टी से हमारी क्रिएशन जो हुई है इंसान की इंसान की जो क्रिएशन हुई है मट्टी से मैं मिट्टी से इंसान बनाने वाला हूं हां मिट्टी से इंसान बनाने वाला हूं। अब ये ऐसे बोलो ना यार सीधे सीधे कि मैं मिट्टी से इंसान बनाने वाला हूं। पूरा ही तो मैं वही शब्द बोल ही नहीं रहे। तो मैं अरबी में जो लिखा है वो बोल रहा हूं। इंसान नहीं लिखा है। बस लिखा है। तो कह रहा हूं जो है आप अरबी में जो लिखा है वो मत बताइए। आप जो उसका निचोड़ निकलता है हिंदी में वो बताइए। क्यों आप निचोड़

01:59:51:13 बताइए? बोलते हैं उसको जो आगाह होने वाला है। आघा आघा समझ रहे हैं? किसी भी चीज को अभी तक मैं ये समझाऊं कि ऊपर वाले ने यह कहा कि मैं मट्टी से इंसान बनाने वाला हूं। जब मैं उसमें रूह डाल दूंगा, अपनी नॉलेज डाल दूंगा तब तुम उसको सजदा करना। ये उसने कहा देवताओं से। लेकिन एक चीज मिस कर दी आपने कि उसको पहले दुरुस्त कर दूं। यानी इंसानी जो क्रिएशन है पहले उसे वो तो दुरुस्त हो जाए। फिर उसके बाद उसमें रूह डाली जाएगी। पहले इंसानी को प्रॉपर जब मैं इंसान को प्रॉपर बना दूं

02:00:28:19 प्रॉपर बना दू या क्रिएट कर दूं यानी इसकी एवोलेशन करके और इसको सद्बुद्धि तक पहुंचा दूं सद्बुद्धि तक पहुंचा दूं तो फिर जब इसके अंदर मैं अपना ज्ञान यानी रूह डाल दूं रूह डाल दूं तो तुम फिर उसके लिए सजदा करना कुछ अब कुछ क्लियर हुआ यानी कि एक तरीके से मुझे ऐसा लग रहा है कि इंसान बनाने के बाद जो उसको को बुद्धि का स्तर तक पहुंचाने के लिए यहां टेस्ट के लिए भेजा गया। ऐसा है क्या? ना अभी वहां नहीं जाइए। अभी हम वहां जा रहे हैं। अभी वो टेस्ट की बात ही नहीं है। अभी भाई साहब मैं फिर कह रहा हूं। आप उन शब्दों से बचिए जिन्हें आपको लगता हो कि मैं समझ नहीं पाऊंगा। आप सीधे हिंदी बोलिए कि ऊपर वाले ने इंसान बनाए मिट्टी से और देवताओं को बताया कि जब मैं उन्हें उच्च स्तर की बुद्धि तक पहुंचा दूंगा, रूह डाल दूंगा। मतलब उन्हें दुरुस्त कर दूंगा, रूह डाल दूंगा। उसके बाद तुम उन्हें सजदा करना। ठीक है? अब आगे क्या हुआ? फिर बताइए। हां। तो अब फिर आप पूछ नहीं रहे हो। क्या आपको समझ में आ गई बात? हां। अभी तक आप मैंने जो बोला गलत बोला उसमें कुछ अगर गलत बोला सही करिए। आपने अभी आखिर में कहा कि उसको सजदा करना। तो आपको

02:01:44:00 सजदा लफ्ज पता है। होगा पता तभी। का मतलब सजदा का मतलब इतना तो कह ही सकते हैं कि उसका सम्मान करना। उसका नहीं सम्मान नहीं कहेंगे सजदा लफ्ज सजदा जो लफ्ज होता है ना उसका अर्थ होता है के किसी के आगे अपने आजज आजिज आ जाना यानी अब मैं आपको इसको कैसे हिंदी में ट्रांसलेट आजज में समझते हैं आजज में आजज में भी नहीं समझ नहीं जैसे मान लीजिए आपके ज्ञान के आगे मान लीजिए आपके पास ज्यादा ज्ञान है। है ना? और मेरे पास कम भाई मैं आपसे एक रिक्वेस्ट कर रहा हूं। केवल हिंदी बोले आप हिंदी बोले। हिंदी हिंदी बता रहा हूं। मुझे अर्थ तो समझना पड़ेगा ना वरना बात का कोई वो नहीं रहेगा। जैसे मान लीजिए आपके पास ज्यादा ज्ञान है। मेरे पास कम ज्ञान है। अब आपके ज्यादा ज्ञान जो है मेरी ज्ञान परिधि में नहीं आ रहा है। है ना? तो मैं आपके ज्ञान के आगे आज ही जा। अब इसको क्या बोलेंगे हिंदी में वो आप बता दो झुकना नहीं रुकना नहीं यार झुकना कह रहा हूं झुकना

02:02:59:13 ना झुकना नहीं झुकना नहीं आज ही यानी मेरा जो माइंड है ना इस बात से हार गया कि मैं इस ज्ञान को समझने के लायक नहीं हूं। अरे भाई साहब वो सम्मान प्रकट करने का ही एक प्रतीक है। जो आप सजदा कह रहे हैं ना वो सम्मान प्रकट करने का ही एक प्रतीक है। ये स्वीकार करना कि मैं इनसे छोटा हूं। ज्ञान में किसी भी चीज में हूं छोटा फलानी चीज में मैं छोटा हूं। किसी में नहीं सिर्फ ज्ञान में अभी हम जो बात कर रहे हैं खाली ज्ञान की कर रहे हैं ना क्योंकि अभी आगे वाली जो मैं बताऊंगा ना आयत उसमें मैं बताऊंगा आयत मत बताना भाई साहब मैं दो घंटे हो चुके हैं बहुत ज्यादा समय नहीं है आप हमें संक्षिप्त में अगर स्टोरी बता सके कि व्यक्ति कैसे फसा हिंदी में बिना आयतों के बिना उर्दू के आपको संस्कृत में बताता हूं जब ईश्वर ने कहा कि मैं जमीन पे जमीन पर एक उत्तराधिकारी बनाने वाला हूं जमीन ये मलाइका से कहा देवताओं से कि मैं जमीन पर एक उत्तराधिकारी खलीफा यानी जो एक के बाद पीछे पीछे आता रहेगा और मेरे कहे अनुसार चलता रहेगा ऐसे इसको बनाने वाला हूं तो फिर देवताओं ने कहा कि ये तो जो है फसाद करेगा यानी बिगाड़ कर देगा धरती में

02:04:15:18 तो ईश्वर ने कहा कि जो मैं जानता हूं तुम नहीं जानते फिर ईश्वर ने आदम को कहा जो मैं जानता हूं तुम नहीं जानते। इसका क्या मतलब है? इसका मतलब यह है कि वो उन्होंने ये प्रकट किया था कि यह फसाद करेगा यानी बिगाड़ कर देगा जमीन पे। तो उनको आगे का पता नहीं था। उनको ये बात पता नहीं थी। तो ईश्वर ने कहा तुम नहीं जानते जो मैं जानता हूं क्योंकि वो अपने का ये कहना था कि उनका ये कहना था फसाद नहीं करेगा। टेंशन मत लो। मैं जानता हूं। ना ये बात तो उनको समझानी थी ना मलाइका को फरिश्तों को देवता को समझानी थी ये बात। तो फरिश्तों ने जब ये कहा तो कहा जो मैं जानता हूं तुम नहीं जानता आगे सुनिए तो फिर ईश्वर ने ज्ञान दिया ज्ञान दिया अस्मा का यानी बुलंदियों का बुलंदियों का ज्ञान दिया किसको आदम को और फिर वो ज्ञान देकर उन देवताओं से कहा कि अगर तुम सच कह रहे हो तो मुझे इन नामों की खबर दो यानी इनकी पहचान बताओ इन बुलंदियों की तो उन देवताओं ने कहा कि ईश्वर हमें तो बस उतना ही ज्ञान है जो तूने हमें सिखाया है और इससे ज्यादा हम नहीं जानते तो एक मिनट थोड़ा पीछे थोड़ा पीछे से थोड़ा पीछे से पीछे से थोड़ा जाइए वहां से बताइए दोबारा से जब

02:05:31:01 ईश्वर ने ये कह दिया कि मैं जानता हूं तुम नहीं जानते इसके बाद से दोबारा बता दीजिए जब ईश्वर ने कहा जो मैं जानता हूं तुम नहीं जानते फिर इसके बाद ईश्वर ने आदम को आदम को नाम सिखाए बुलंदियों के है ना पहचान करा दी उसको उसके अस्तित्व की किस तरह से वो ऊंचाई पर चढ़ सकता है यह पहचान उसको करा दी कराने के बाद उन पहचान के बारे में देवताओं से पूछा कि मुझे खबर करो इस पहचान के बारे में। क्या तुम्हें भी इतना ज्ञान है? तो उन देवताओं ने कहा कि हमें तो इतना हमारे लिए नहीं है ये ज्ञान जो तूने हमें तो सिर्फ उतना ही है जितना तूने हमें ज्ञान दिया है। तो फिर आदम से कहा कि आदम तू इनको खबर दे। उस बुलंदी के साथ उन नामों के साथ खबर कर इनको। तो जब आदम ने उनके सामने वो पूरा ज्ञान बता दिया तो फिर कहा अल्लाह ने क्या मैं नहीं कहता था के मैं जानता हूं जो आसमान और जमीन में छुपी हुई चीजें हैं उनको भी मैं जानता हूं और जो सामने प्रकट है उसे भी मैं जानता हूं और मैं जानता हूं जो कुछ तुम जाहिर करते हो और जो कुछ तुम छुपा के रखते हो अपने मन के भीतर उन सबको मैं जानता हूं। तो ये बात क्लेरिफाई होने के बाद जो है

02:06:46:02 ईश्वर ने फिर कहा कि अब आदम के लिए सजदे की सजदा करो आदम के लिए। यानी अब ईश्वर के आगे उन्हें झुकना था यानी इस बात को मानना था कि हां हमारे पास कम ज्ञान है। आदम के पास ज्यादा है। तो उनमें से जो एक था वो मायूस हो गया इस बात से कि ईश्वर ने हमसे ऊपर किसी को रख दिया। हमसे ज्यादा किसी को ज्ञान दे दिया तो वो हुआ इब्लीस। वो हो गया इब्लीस। इब्लीस मतलब मायूस हो गया वो तो ईश्वर ने कहा कि तूने क्यों नहीं तू क्यों नहीं इस पर सजदा किया तो उसने कहा कि मैं तो इससे अच्छा हूं बेहतर हूं तो क्योंकि तूने इसको मिट्टी से बनाया और मुझे आग से बनाया मुझे आग से बनाया इसको मिट्टी से बनाया तो उसने जो पैमाना रखा आग मिट्टी का जबकि पैमाना था उस ज्ञान का कि ज्ञान उसको जो दिया है उस ज्ञान के आधार पर वो बुलंदी पर गया लेकिन उसने अपना आर्गुममेंट दिया तो ईश्वर के आदेश को उसने नहीं माना। तो फिर ईश्वर ने आदम को कहा कि आदम तुम और तुम्हारे जो साथ है जो तुम्हारा जोड़ा है तुम दोनों तुम दोनों जाओ जन्नत में ठहरो थोड़ी देर ठहरो। यानी जन्नत का भी अनुभव कर लो और वहां ठहरो। यानी हमेशा के लिए नहीं भेजा। ठहरने के लिए कहा क्योंकि अभी पहले बताया था कि जमीन पर भेजना

02:08:01:08 था खलीफा बना के। यानी ईश्वर के आदेश को लागू करें। उसी परिस्थिति में रखे। तो जब जन्नत के अंदर दोनों को रखा गया और कहा कह दिया कि शैतान जो है तुम्हारा दुश्मन है। शैतान तुम्हारा दुश्मन है। और ये जो एक सजरा है दरख्त है। दरख्त मतलब ये वैसा कोई लकड़ी का दरख्त नहीं है। यानी एक कोई विचारधारा होती है। उस विचारधारा के करीब मत जाना। मना कर दिया कि इसके करीब मत जाना। वरना तुम भी जालिम बन जाओगे। यह बात जब कह दी तो फिर शैतान ने उनको उस चीज से फिसलाया यानी धोखे से उनको फिसला दिया और उनको बांट दिया तकसीम कर दिया। अलग-अलग कर दिया। जैसे अलग-अलग विचारधाराएं हो जाती है ना फिर हम मतभेद करने लगते हैं। ऐसा ही उसने स्वर्ग के अंदर कर दिया। स्वर्ग के अंदर मतभेद करने लगे तो ईश्वर ने फिर उन्हें सबको जमीन पर भेजा कि अब तुम वहां जाओ सब उतरो। क्योंकि जन्नत के अंदर इस तरह से नहीं रहा जाता क्योंकि वो हमेजगी की जन्नत नहीं थी। ठहराया था सिर्फ अनुभव करने के लिए कि स्वर्ग है और वो अनुभव करने के बाद जो है इंसान को अनुभव तो है ही। अब इसके बाद जमीन पर भेजा कि तुम सब उतर जाओ जमीन पर। वहीं तुम्हें ठहरना है और वही तुम्हारे लिए सारी चीजें मैंने व्यवस्था कर दी है। अब

02:09:16:09 तुम्हें वही जीना है, वही मरना है। फिर वहीं से दोबारा तुम उभारे जाओगे। यानी वापस तुम्हारे अंदर इवुलेशन होगी। दोबारा इवोल्व किए जाओगे उठाए जाओगे फिर उसने दुनिया बना दी दुनिया तो पहले ही बनी हुई थी ना भाई जीव जंतु रह रहे थे ना इंसान से पहले इंसान से पहले जीव जंतु पहले जीव जंतु रह रहे थे बहुत सारे जीव रह रहे थे जीव जंतु अब मैं समझ गया हम टेस्ट लेने इसलिए भेजा है क्योंकि उन्होंने वहां वो गलती की थी वो वो शैतान के बहकावे में आ गए थे नहीं ये कहीं नहीं कहा कि हमने ने तुम्हें टेस्ट लेने के लिए भेजा बल्कि कुछ चीजें बताई है कि ये इस तरह से हम तुम्हें आजमाएंगे कि यानी हमने को ही तो टेस्ट कहते हैं ना वो बिल्कुल ठीक कह रहे हो पहले बात सुन लीजिए ताकि कांसेप्ट समझ में आ जाए वरना ये होगा कि मैं कुछ कांसेप्ट समझा रहा हूं आपके कुछ और समझ में आ जाएगा मैं ये कह रहा हूं जब जमीन पे जब उतारा ना क्योंकि वहां मतभेद हो गया है ना तो जमीन पर उतार दिया और कहा तुम्हें यही जीना यही मरना है यहां तमाम व्यवस्थाएं कर दी गई है तो और फिर यहीं से तुम उठाए जाओगे। फिर अभी जो है तमाम इंसान जो थे तमाम इंसान जो थे वो तो एक ही समुदाय

02:10:31:13 थे। कोई भी बटा हुआ नहीं था। है ना? फिर ईश्वर की तरफ से कहा कि मेरी तरफ से जब हिदायत आएगी तो उस हिदायत वो तो केवल आदम आए थे ना। आदम और वो हव्वा ना ना हव्वा हवा ये ऐसा कुछ कुरान में हव्वा लिखा हुआ ही नहीं है। हव्वा शब्द ही नहीं है कुरान में। अरे भाई ठीक है आप सही कर दो। आप इस पे क्यों जा रहे हो? शब्द ही नहीं। आप ठीक कर दो। आगे बढ़ो। मुख्य विषय पे आओ। हां बिल्कुल। कुरान के अंदर ये कोई एक आदम की बात नहीं हो रही है। एक आदम की बात मतलब उसने बहुत सारे आदम बनाए थे। बहुत सारे आदम जो है उनको ज्ञान दिया था और बहुत सारे आदमों को उसने जो है जन्नत में छोड़ा था। बहुत सारे आदमों ने वो गलती की थी। शैतान के बहकावे में आकर। आदम से पहले भी जमीन पर इंसान मौजूद थे। ये भी आपको इंसान वो क्यों थे क्यों थे? क्योंकि मैंने अभी बताया तो थाने शायद सुना नहीं के मैं मिट्टी से इंसान बनाने वाला हूं। फिर जब उसको ठीक-ठाक कर दूं तो वो प्रोसेस तो चल ही रहा था ना जमीन पर। जमीन पर वो तो यानी कि उसने जो इंसान बनाए थे उनमें से कुछ आदम थे जो जन्नत में गए थे एक्सपीरियंस करने के लिए। एक

02:11:46:16 सेकंड रुकिएगा। मैं आपको आदम शब्द को समझा दूं ताकि बात थोड़ी क्लियर समझ में आ जाए। आदम भी एक शब्द देखो शब्द के मतलब से ही समझा जाएगा। अब शब्द समझा आदम का मतलब होता है जिसको बिल्कुल मिक्सचर जैसे मिक्स करके बनाया गया है। यानी जिसके अंदर तमाम बिहेवियर को रख दिया गया। जैसे देवताओं का बिहेवियर भी इसके अंदर है। राक्षसों का बिहेवियर भी इसके अंदर है। जानवरों का बिहेवियर भी इसके अंदर है। तमाम अच्छाइयां भी इसके अंदर है और तमाम बुराइयां भी इसके अंदर है। दोनों है। अब ये जिस चीज को भी एक्टिवेट करेगा इसका वो रूप सामने आ जाएगा। यानी राक्षसों का बिहेवियर नहीं होता। देवता अलग होते हैं, राक्षस अलग होते हैं। जो देवता रोशनी से बनाए गए हैं। उन देवता में राक्षसों का बिहेवियर नहीं होता। जो रोशनी से बनाए गए हैं और जो आग से बनाए गए हैं लेकिन आग से बनने के बाद वो अपने क्रियाओं से अपने कर्मों से देवता बन गए वो वापस देवता देवता के पद से हट सकते हैं। ठीक है हम हो गया आप पूछिए और दूसरी बात आप बोलेंगे जैसे जैसे बताता जाऊंगा क्योंकि ये कोई कहानी तो बहुत लंबी है तो बात तो जो जो आदम था

02:13:02:14 इंसान भी आदम ही थे। इंसान को आदम नहीं कहा जाएगा। जो नीचे इंसान जो है ना हमारा वो इंसान हमारा इंसान जो है ना वो हमारा एक बिहेवियर का नाम है वो वो बिहेव जब हमारे अंदर आता है ना तो मैं ये कह रहा हूं भाई साहब कि जो जन्नत में जो भेजा था आदम को वो और जो धरती पे पहले से ही थे जो क्रिएशन चल रही थी वो वो एक ही थे या उनमें भी अंतर था जिसको जन्नत भेजा वो अलग था अलग क्वालिटी थी और जो इंसान पृथ्वी पे थे वो अलग क्वालिटी थी हेलो

02:13:37:18 हां जी हेलो हां जी हां जी आवाज बिल्कुल धीरे आ रही है आपकी मैं अब आ रही है आवाज हेलो जय श्री राम हेलो हेलो मेरी आ रही है एक बार आवाज हां आ रही है बहुत अच्छी आ रही है आपकी बिल्कुल धीमी हो गई भाई कोई कमेंट कर दो आवाज सही आ रही है कि नहीं ये मुझे कॉल आ रहा है बीच-बीच में इस वजह से हो रहा होगा आप डीएनडी लगा दीजिए डीएनडी डू नॉट डिस्टर्ब लगा दीजिए फोन में क्या लगा दूं? फोन में होगा। वो जो सेटिंग्स होती है ना उसमें डीएनडी होती है। एक डीएनडी डू नॉट डिस्टर्ब। आपकी आवाज नहीं आ रही है। अरे डू नॉट डिस्टर्ब लगा दीजिए भाई साहब। मैं एक मिनट मैं एक मिनट कमेंट कर दीजिए भाई साहब। डू नॉट डिस्टर्ब लगाने के लिए। एक कमेंट कर दीजिए। मैं उसको यहां विज़िबल कर दूंगा।

02:14:31:18 एक कमेंट कर दो कोई। कोई अगर देख रहा हो तो अरे ये कमेंट कर दो कि डू नॉट डिस्टर्ब लगा लीजिए। हां डू नॉट डिस्टर्ब को यहां विज़िबल कर दो। अभी तक इन्होंने जो कहानी सुनाई है इसमें कहीं भी वो संतुष्टि जनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है कि अब बात आएगी कि देवता को क्यों बनाया? किसने बनाया? दूसरी बात कि भाई वो ये चाहते थे कि अ जो शैतान है वो सजदा करे। मतलब शैतान नहीं शैतान से पहले अग्नि वाला वो आग वाला जो देवता है उसमें से एक इब्लिश ने जो है सजदा नहीं किया। अब सजदा नहीं किया तो

02:15:41:27 क्या ईश्वर को ये नहीं पता था कि सजदा नहीं करेगा। फिर उसने इब्लिश को क्यों बनाया? यहां कौन सी टेस्टिंग चल रही है? नीचे के लिए तो टेस्ट शब्द भी था। अब कौन सी टेस्टिंग है यहां पे? ये इसको जरा डू नॉट डिस्टर्ब वाले निर्देश को आप स्क्रीन पे कर दीजिए। आवाज की प्रॉब्लम हो रही है बस। हेलो हां जी। जी शिवम हां अभी आ रही है आवाज शिवम जी 17 मिनट हो चुके हैं। हां अपने फोन में आप जो है अपने फोन में डू नॉट स्टॉप लगा लीजिए। अच्छा इसमें मैं ये कह रहा हूं कि बात घूम फिर के वही आ गई कि चलिए वो बाद में पूछ लेंगे कि वो जो क्या कहते हैं वो था ना जो इंसान और आदम वो एक ही क्वालिटी के थे कि अलग-अलग थे जिसको जन्नत भेजा वो बाद में पूछ लेंगे। तो वो जो है रिपेयर कर रहे हैं। रिपेयर करने के बाद वो जो है सजदा करने को कहा सजदा। अच्छा ये बताइए जैसे वो ये चाहता था कि भाई वो सजदा करे तो क्या

02:16:56:28 ईश्वर को ये नहीं मालूम था कि वो सजदा नहीं करेगा बाद में इनको बहकाएगा। किसको? ईश्वर को। हां। ईश्वर को नहीं मालूम था। यू कहना चाह रहा है। पूछ रहा हूं। आपसे पूछ रहा हूं। ईश्वर तो सर्व ज्ञानी है ना? मालूम था। तो उसने वहां पर बहकाने से रोका क्यों नहीं जिसके कारण उनको यहां डाल दिया गया जमीन पे ना तो उसका डिसीजन उसको लेने दिया अगर वो रोक देता अगर वहां भी टेस्ट चल रहा है वहां भी टेस्ट चल रहा है वहां क्या टेस्ट है तो बताइए क्यों नहीं रोका बताइए बताइए बताइए क्यों नहीं रोका मैंने आपको क्या कहा कि इंसान को और जिन को अपनी इबादत के लिए बनाया तो टेस्ट भी तो इंसान और जिन का ही होगा ना देवता का थोड़ी हो रहा है टेस्ट देवता का टेस्ट थोड़ी हो रहा है। जो लोग इंसानों से या जिनों में से देवता बन गए लेकिन असली उनकी रोशनी से रोशनी से नहीं बनाए गए वो तो वो तो उस मूल कारण है अब आया मूल कारण आया है कि उसने अपनी इबादत के लिए इंसानों को बनाया और जिन को जिन जिन समझते हो जिन जिन को जिन्न को और इंसानों को उसने अपनी इबादत

02:18:12:09 करवाने के लिए बनाया इबादत का मतलब समझ में आता इबादत का मतलब वो पूजा करें उसकी हम तो पूजा कहते हैं अपने आप क्या कहते हो इबादत का अर्थ बताइए पूजा नहीं उसके आदेशों के मुताबिक चले जैसे आंखों का इस्तेमाल उसके आदेश के मुताबिक करें और जुबान का इस्तेमाल उसके आदेश के मुताबिक करें कान का इस्तेमाल उसके आदेश के मुताबिक करें पूरी बॉडी का स्ट्रक्चर उसी के मार्गदर्शना मतलब उसको क्या करवाना था उनसे जो वो आदेशों के मुताबिक चलना था उन्हें मतलब जैसे होता है ना मुझे जो है बनवानी है तो मुझे वो आवश्यकता ये थी ना कि उसने एक क्रिएशन की है ना बेहतरीन तो वो बेहतरीन कब दिखेगी जब वो उसके कमाल को पहुंचेगी जैसे मैं आपको बताता हूं के हम जो ज्ञान दिया है उस ज्ञान के क्रिएशन क्रिएशन ये जो पृथ्वी इत्यादि यही क्रिएशन है सब सब है क्रिएशन इंसान भी क्रिएशन है इंसान भी क्रिएशन समझ गया मैं समझ गया मैं समझ गया मैं श समझने की मैं शॉर्ट में आपको बताता हूं। आप गलत हो तो बताना कि ईश्वर ने इस्लाम के अनुसार जो ईश्वर है उसने देवता भी बनाए। उसने इंसान भी बनाए, जिन्न

02:19:27:18 भी बनाए और उसने एक कायनात पूरी बनाई। जन्नत भी है उसमें। उसमें जो है वो भी है, पृथ्वी इत्यादि भी है। अब उसने जो इंसान बनाए वह इसलिए बनाए हैं कि यह मेरे अनुसार जो है यह जो क्रिएशन है इसमें कार्य करने में मेरी मेरी मदद करें। जो जैसे जैसे मिसाल के तौर पर मैं आपको बता दूं ईश्वर ने जो क्रिएशन की ना तो क्रिएशन करता है ना तो क्रिएशन को बताता है कि तू अगर इस तरह चलेगा ना तो तू और आगे बढ़ जाएगा। कमाल पर पहुंच जाएगा। कमाल पर पहुंच जाएगा। और अगर ऐसे नहीं चलेगा ना तो तू गिर नीचे गिर जाएगा। तू उस कमाल तक नहीं पहुंच पाएगा। तो ईश्वर ने मार्ग दिखाया अच्छा सबको अच्छा बनाया लेकिन भाई साहब मैं ये कह रहा हूं कि उसको क्या जरूरत थी लोगों को बनाने की

02:20:22:12 अरे तो वो ब्रह्मा है यदि वो खाली है ना उसका एक गुण खाली के यानी वो रचना करता रहता है अब उसे रचना वो रचना करता है मतलब मतलब मूल कारण ये है कि वो रचना करता है उसका वो गुण है ठीक है ये आपने रचना करने यहां पे आना चाह रहा हूं उतनी देर से वो रचना करता है उसका एक गुण है मैं यही आना चाह रहा हूं तो वो गुण जो है ना वो रचना करने के बाद वैसे ही रचना को छोड़ नहीं देता है बल्कि अब वो रचना में वो रचना में उसका मन है कि वो जो है कोई काम जो है इंसानों के द्वारा करवाए वो कोई काम इंसानों के द्वारा करवाए और उसका उसका वो है कि वो कोई काम चाहे तो देवताओं के द्वारा करवाए देवता भी इबादत के लिए है कि नहीं है वो काहे के लिए है देवता तो उसके वो नाफरमानी नहीं करते वो ईश्वर के लिए उल्लंघन नहीं करते किस लिए देवता किस लिए देवता उसी के कार्य को करते हैं लेकिन उसके आदेश से करते हैं अपनी मर्जी से नहीं कर सकते अपनी मर्जी से नहीं कर सकते मतलब इबादत दोनों को करनी है ना उसके उसके अनुसार उन्हें भी चलना है इनको भी चलना है वो ऑलरेडी है वो ऑलरेडी ताबे है उसके उनको कहने की जरूरत नहीं है लेकिन हमें शिक्षा की जरूरत है वो तो जो

02:21:37:18 ईश्वर बोलेंगे अच्छा शिक्षा की जरूरत है तो इसका मतलब वो टू द पॉइंट उनको पहले से ही मालूम है कि हमें क्या मतलब हमें बस बोलना है हमें करना है क्यों करना है ये उन्हें नहीं मालूम है क्यों क्यों करना है ये उनको पता है इंसानों को उनके पास आदेश आना है ईश्वर का देवताओं के पास और उन्हें वो करना है बस है ना वो ये नहीं हम कर रहे तो ऐसा नहीं ये वाले लोग हैं ये क्यों और जो ये वाले लोग हैं ये क्यों बनाए जो अग्नि से बनाए जो थोड़े से बदल सकते हैं मतलब राक्षस भी बन सकते हैं। हां तो ये जो है इनको आग से बनाया। आग समझ रहे हो? आग जैसे हमारे अंदर गुस्से की आग है। बहुत सारी आग है यानी जिनके अंदर क्रोध है। है ना? तो ये ऐसी वाली आग अच्छा जी। वो आग दो तरह की है। मैं आपको बताना चाहूंगा। दो तरह की एक आग है नारे समूह। नारे समूह यानी ऐसी आग विषैली आग। है ना? और एक है जो मिलीजुली आग है। मिलीजुली आग यानी मुख्तल तरीके की आग है। जैसे हमारे अंदर भी है ना बिहेवियर आग का कि कभी हमारा कुछ खाने से पेट में आग लग जाती है। कभी गुस्से में आग बबूले हो जाते हैं। तो वो जो अंदर की जो गर्मी है ना गर्मी और मुख्तलिफ

02:22:52:19 जो गर्मी हम देख रहे हैं वो उन उन बिहेवियर से उनकी क्रिएशन हुई है। उन बिहेवियर से और हमारी जो क्रिएशन हुई है वो तीन से हुई है। अरबी में जिसे मैंने मिट्टी कहा था ना मिट्टी तो वो तीन जो है ना तीन बोलते हैं जो किसी भी माहौल में अपने आप को ढाल ले किसी भी माहौल में हम लोग हम लोग थोड़ा सा टू द पॉइंट आ जाए मैं समझ गया मैं समझ गया कुछ होगा तो मैं पूछूंगा जी ईश्वर क्योंकि सृष्टि रचना करता है इसलिए उसने रचना की ठीक है क्योंकि वो रचना करता है इसलिए उसने रचना की ठीक ये मैं आपको ठीक तो रचना की। अब रचना के बाद उसने कुछ बनाए आग से कुछ बनाए। मतलब कुल मिलाकर के कुछ ऐसे तत्व बनाए जो गलत भी जा सकते हैं। कुछ ऐसे तत्व बनाए जो गलत नहीं जा सकते। कुछ ऐसे तत्व बनाए जो दोनों है। गलत भी जा सकते हैं सही भी जा सकते हैं। है ना? हम

02:23:51:13 अब इसके बाद क्या है? इसके बाद क्या है कि अब इसके बाद क्या है कि जो उसने इंसान बनाए थे उनको उसने वो ज्ञान दिया कि मेरे बारे में क्रिएशन के बारे में ज्ञान दिया ज्ञान के मामले में उसने कहा कि सजदा करो मगर जो गलत जा सकता था राक्षस जैसे काम कर सकता था उसमें से एक ने वो जो है सजदा करने से मना कर दिया उसका नाम पड़ा एिस ठीक है अब इसमें एक तो नाम नहीं नाम नहीं पढ़ा ये गुण पढ़ा ठीक ठीक ठीक कोई बात नहीं अब इसमें ये बात है कि क्या ईश्वर हर बार बिल्कुल सेम पैटर्न होता है यहां ये धरती बनने का या नहीं मतलब वो रचना करता रहता है तो एक बार करता है दो बार करता है या एक ही बार की है दोबारा नहीं होगी क्या है वो करता रहता है करता रहता है इसे अरबी में बोलेंगे खल्ला यानी कि एक बार आधी रात आएगी उसके बाद दोबारा आ सकती है क्या चीज आख आखिरात के बाद दोबारा क्रिएशन होगी दोबारा आखिरात फिर होगी हां उस क्रिएशन के बारे में भी बताया है कुरान में ये जो तुम्हारी पहली क्रिएशन है कुरान

02:25:06:14 में आया है मैं बता मैं ये नहीं कह रहा भाई साहब मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं बार-बार चलता रहेगा ना सृष्टि का चक्र वही मैं आपको बताना चाह रहा हूं अगर आप बोलने दो तो बोलने दो तो जैसे सूर इब्राहिम में कहा गया और क्यों बताना चाह रहे हो मैं जब आपको सीधे टू द पॉइंट पूछ रहा हूं ये बार-बार सृष्टि बनती है कि नहीं बता दो बनती है मैं आपसे प्रूफ थोड़ी ना पूछ रहा हूं कि कुरान में कहां कहा गया है ये बात तो मैं तो कुरान को ही रेफर करूंगा ना मैंने जब मैं आपसे प्रूफ मांगू जब मैं आपसे प्रूफ मांगू कि भैया मुझे कुरान का प्रूफ दो तो आप दो ना मैं प्रूफ नहीं दे रहा हूं मैं ये बताना चाह रहा हूं कि कुरान जो है ये ज्ञान दे रहा है बस मैं प्रूफ नहीं दे रहा हूं कि कुरान ये बता रहा है मैं मैं मानता हूं कुरान ने माना है कि वो एक बार नहीं बनाता दोबारा बनाता रहेगा बार-बार बनती रहेगी। अरे माना नहीं है। वही तो लफ्ज से इस्तेमाल माना नहीं बता रहा है कुरान। कुरान बता रहा है के ये इस जमीन के को बदल कर दूसरी जमीन ले आएगा वो। यानी अभी जिस जमीन पर हम है ना इस जमीन को बदल देगा। दूसरी जमीन आ गई फिर हिसाबो किताब होगा। फिर उसके बाद दोबारा

02:26:19:08 यानी क्रिएशन बदलने यानी कि क्रिएशन बदलने के बाद बार-बार क्रिएशन बनती रहेगी। एक बार बनेगी जो लोग चले जाएंगे उनको मौत नहीं आएगी। सुनिए जो लोग जन्नत में चले जाएंगे उनको मौत नहीं आएगी। वो जीवन मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाएंगे। समझ रहे हो? भाई साहब मैं पूछ क्या रहा हूं? मैंने क्या पूछा? मैं यह पूछ रहा हूं कि सृष्टि दोबारा बनेगी कि नहीं? मैंने पूछा है कि उनको मोक्ष मिलेगा कि नहीं? आपकी आवाज कट रही है। शिवा शिवम साहब आपकी आवाज कट रही है। आपका नेट पैक शायद खत्म हो गया है। आपका नेट पैक खत्म हो गया है। नहीं मेरा तो नेट पैक अनलिमिटेड है। तो फिर अभी आपका रुक रुक के आ रहा हूं। तो आपका फोन आपका फोन गरम हो रहा होगा। हां हो सकता है। नहीं फोन भी गरम नहीं हो रहा। हाथ में ही है। अच्छा मैं ये कह रहा था जैसे मैं भाई साहब मैं मैं पूछ रहा था बस मुझे इतना बता दीजिए। सृष्टि बनती है फिर नष्ट होती है। फिर बनती है फिर नष्ट होती है। यही है ना?

02:27:31:18 आप क्या कहना चाह रहे हैं वो आप बोल दीजिए पहले फिर मैं बता दूंगा। ठीक है। अरे भाई मैं अभी मैं ये आपसे पूछ ही तो रहा हूं। जो कहना चाह रहा हूं वही तो कह रहा हूं कि आपके यहां सृष्टि बनती है फिर नष्ट होती है। बताने दीजिए ना मुझे बताने दीजिए। मुझे बताने दीजिए। आप क्या कहना चाह रहे हैं? आप कह दीजिए। फिर मैं जब पूछ रहा हूं कि मैं ये कहना चाह रहा हूं तो फिर कह रहा हूं मुझे बताने दीजिए। मैं वही तो बता रहा हूं। जब इस इस जमीन को बदल कर दूसरी जमीन आएगी तभी तो हिसाब किताब होगा। वो दिन ही तो होगा हिसाब किताब का लोगों को हिसाब किताब होगा। मेरा प्रश्न है सृष्टि बनती है। सृष्टि बनती है फिर नष्ट होती है। फिर बनती है फिर नष्ट होती है। यही है।

02:28:19:20 क्या हिसाब से आपसे हिसाब के हिसाब से कितनी बारि बनती है। मैं ये नहीं कह रहा हूं मेरे भाई कि कितनी बार बनती है। मैं कह रहा हूं क्या? मैं कह रहा हूं मतलब बनती है और ना टूटी रहती है बार-बार। आवाज कट रही है आपकी? यू आर इन द शो। एवरीवन कैन सी एंड द आपका फोन गरम हो गया होगा जिस कारण से शायद आपका वो रुक रहा है। रुक रुक के दिखाई दे रहा है। अरे क्या आवाज आ रही है? आपके पीछे टन टन की आवाज आ रही है। हां अभी दिख रहा है इंटरफेस नहीं शायद कुछ मोबाइल में ही आ रही है आवाज टन टन टन ऐसे आप एक काम करिए जाके वापस आ जाइए हेलो आवाज

02:29:15:08 लेकिन मैं कह रहा था शिवम जी ढाई घंटा हो चुका है हां हां ढाई घंटा हो चलिए ठीक है मैं एक क्रिएशन वाली बात में ये कह देता हूं कि हमको जो है उसने टेस्ट लेने के लिए भेजा कि कौन सही करता है कौन नहीं करता। हालांकि उसको मालूम है कि कौन क्या करेगा। उसको मालूम है ना? आप बोल लीजिए पहले फिर मैं बोलूंगा। ठीक है। उसको मालूम है देखिए उसको मालूम है कि शैतान उनको बहकाएगा जन्नत वालों को। फिर भी उसने शैतान को बनाया। उसको मालूम है कि कौन क्या करेगा? फिर काहे का टेस्ट? उसको मालूम है कि क्यों कौन क्या करेगा? फिर भी फिर भी टेस्ट लेने के लिए भेजा है। है ना? तो उसको मालूम था कि कौन उसमें पास होगा, कौन उसमें फेल होगा। फिर भी उसने टेस्ट लेने के लिए भेजा है। उसको मालूम था और वो यह चाहता था कि मैं अपनी क्रिएशन में इनकी मदद लूं। वो ये चाहता था कि मैं अपनी क्रिएशन में इनसे मैं अपनी क्रिएशन में इनसे काम करवाऊं। परंतु वह यह जानते हुए भी उसने एक राक्षस को बनाया हुआ था कि वो जिनको मैं काम करवाने के लिए अपना जो भी करवाने के लिए बना रहा हूं वो उनको बहकाएगा। फिर भी उसने उनको बनाया।

02:30:30:19 यानी कि उसने एक बुराई को बनाया जिसकी वजह से वो बहके और वो बहके और वो जमीन पे आए और जमीन पे आके फिर से उनका टेस्ट हो रहा है। जबकि उसको मालूम है कि कौन अच्छा करेगा कौन गलत करेगा। यह सब बातें हैं। तो आप ये समझे हैं कि बात में आपका जो है ना वो रुक रुक के आ रहा है। ठीक है आज के लिए यही स्टॉप करते हैं। 9:42 हो गया है और कई चीजें थी जो

02:31:08:16 कई चीजें थी जो आपने देखा कि वो जो टॉपिक है उससे मुड़ के जा रहे हैं। और जो टेस्ट वाली बात है उसको मैं बता दूं कि अह जब तक हम यह जो संसार में हो रहा है इसको जब तक हम माया का नाम नहीं देंगे अविद्या का नाम नहीं देंगे मतलब ये हो ही नहीं रहा है ये नाम नहीं देंगे तब तक उस जो पॉइंट है ना कि ईश्वर ने रोका क्यों नहीं उसका जो है निराकरण व्यक्ति को नहीं मिल पाएगा जब तक हम उसको माया अविद्या इत्यादि के रूप में नहीं देखेंगे। अब निराकरण क्यों नहीं मिल पाएगा? जब जैसे कोई

02:31:55:15 जी शिवम जी [हंसी] आवाज आपकी आवाज कट रही है। आप आपकी आवाज कट रही है और आपका वो जो है ना जो चेहरा है वो रुक रुक के आ रहा है। आप अब हम लोग फिर किसी दिन रख लेंगे। हो सकता है कल भी रखें तो कल से कंटिन्यू कर लेंगे। ठीक है? तो मैं ये कह रहा था कि भाई जैसे कोई बच्चा है जो ये नहीं जानता है कि मेरे इंजेक्शन लग रहा है वो क्यों लग रहा है या फिर बच्चा है वो किसी ऐसी चीज के लिए अपनी अल्प बुद्धि के कारण किसी ऐसी चीज के लिए चाह रहा है जो उसके लिए ठीक नहीं है तो वो रो रहा है वो रो रहा है मगर वास्तविकता क्या है कि वो जानता नहीं है इसलिए रो रहा है। उसकी बुद्धि कम है इसलिए रो रहा है। तो जब हम उसे बताते हैं कि तू जिस चीज के लिए रो रहा है वो वो नहीं थी जिसके लिए रोया जाए। तो यही उसका एक निराकरण हो सकता है। तो निराकरण क्या है? यह सारी चीजें जो हैं यह माया है। यह संसार प्रपंच रूपी संसार जो है माया है। इसलिए यहां पर होने वाला जो कार्य है उससे तुझे जो है होने की आवश्यकता नहीं है। और जब तुझको ही होने की आवश्यकता नहीं है तो ईश्वर को उससे प्रभावित जब मनुष्य

02:33:10:21 को ही उससे प्रभावित होने की आवश्यकता नहीं है तो ईश्वर को उससे प्रभावित होने की कोई आवश्यकता शेष नहीं रह जाती। दूसरी बात। दूसरी बात यह है कि इन्होंने कहा कि वो जो यह मैं इसलिए कह रहा हूं कि भाई क्या कहते हैं ये मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि इन्होंने ये सब पॉइंट उठाए ना बीच-बीच में कि आप बताओ। अच्छा दूसरी बात इन्होंने एक बात बीच में कही थी कि भाई वेद से ईश्वर का अवतार सिद्ध करो। तो हम लोग कई बार उस पर वीडियो बना चुके हैं। 31 19 में नाना रूपों में प्रकट होता है। ये किसका सहारा ले रहे हैं यहां पर? वो आप समझ सकते हैं। ठीक है? और एक बात और थी कि जो है

02:33:59:03 तो जब जो ये जानता है कि ये खेल है ये अविद्या है। है ना ये माया है। वो अगर उससे प्रभावित नहीं हो रहा है कि वहां जो हो रही है चीजें वो ना हो। तो जो यह जानता है कि अविद्या है उसको कोई फर्क उसको प्रभावित ना होना उस चीजों से वो जरूरी नहीं कि हो और बाकी इन्होंने जो कहानी सुनाई मैंने पूछा कि टेस्ट लेने क्यों भेजा तो टेस्ट लेने इसलिए सबसे पहली बात तो टेस्ट लेने भेजा है तो ईश्वर को मालूम था कि नहीं मालूम था कि टेस्ट टेस्ट में कौन पास होगा कौन फेल होगा पहली बात दूसरी बात ये है कि उसको जन्नत में भेजा था उसको अपना काम करवाना था उसको मालूम था ना भैया रोड़ा बनेगा तो उसको बनाना ही नहीं चाहिए काम खत्म। अच्छा

02:34:43:08 खैर ये सब चीजें हो गई। इन्होंने वो लॉजिक वाली बात है। सर्वशक्तिमान पे तो इधर-उधर से बच के निकलने का प्रयास होता रहा कि भाई मैं ये नहीं कहूंगा कर नहीं सकता। मैं तो ये कहूंगा उसके लिए वो नहीं। वो कर नहीं सकता वाली चीज आएगी नहीं। और अभी हम लोग धर्म पे, ईश्वर के अस्तित्व पे और मोक्ष पे उस पे गए नहीं है। वो हम आगे अगर इनसे चर्चा हुई तो जाएंगे। और बुराई हां बुराई को बनाना बुराई है कि नहीं बुराई को बनाना बुराई है अगर वह व्यक्ति जानता है कि क्या हो रहा है क्यों हो रहा है जब तक उस बुराई के अस्तित्व को ही आप नहीं नकारोगे बुराई है ही नहीं इसका अस्तित्व ही नहीं है तब तक उसका दोष उसको लगेगा जो सामर्थ्यवान होते हुए भी उसको नहीं रोक रहा है ये सारी चीजें थी जो समझ रहे अभी बात हो नहीं पाई उनका फोन गरम हो गया था फोन गरम होता है तो ऐसा होने लगता है मेरा भी कुछ समय पहले तक हुआ था मेरे साथ चलिए चलिए फिर पंडित जी अगर हैं तो उनको ले लिया जाए क्या? नहीं है। चलिए ठीक है सभी को जय श्री राम। दो घंटे 36 मिनट की एक काफी लंबी चर्चा हुई। जय श्री राम सभी को।

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 2:36:03 · 09 Jan 2026

क्या इस्लाम का ईश्वर सर्वशक्तिमान है? Discussion With Rizwan

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