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00:00:01:27 तो जय श्री राम सभी को आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और हमारे साथ में पंडित लोकी जी भी हैं वो भी हमें ज्वाइन कर रहे हैं और आज का जो विषय है वो आप लोगों ने देख ही लिया होगा कि हम जो लाइव चर्चा करते हैं कल एक बहुत अव्वल दर्जे के कहेंगे कि तर्कहीन व्यक्ति जिसके पास तर्क है ही नहीं तो जरा भी तर्क शक्ति बहुत कमजोर है। मतलब बौद्धिक स्तर उसका बहुत निम्न है। ऐसे एक व्यक्ति से कल मगजमारी करनी पड़ी। लगभग दो घंटे तक बात हुई। ब्रह्मा कुमारी से ब्रह्मा ये मत चालू करो। ब्रह्मा कुमारी से उत्पन्न एक और सेक्ट जो है अब एक संस्था के रूप में काम किया जिसने उसका नाम पड़ा आध्यात्मिक विश्वविद्यालय। और अब उस सेक्ट में भी वही जैसे ब्रह्मा कुमारी में हुआ कि हम अपना नया बनाएंगे। ऐसे ही अब वह जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय उसमें भी वही सब चल रहा है। थोड़े बाद थोड़े दिनों बाद देखेंगे। आध्यात्मिक विश्वविद्यालय किसने शुरू किया है? वीरेंद्र देव दीक्षित नाम का कोई व्यक्ति है। और अगर हम सोशल मीडिया इत्यादि पर न्यूज़

00:01:17:06 वगैरह देखते हैं तो बहुत सारे आरोप लगे हैं। कि युवतियों का शोषण करता करता था। ऐसा है वैसा है। कुछ ये सब बहुत सारी चीजें आरोप लगे हुए हैं और भाई देखिए उसका शरीर नष्ट हो चुका है। मगर ऐसा भी है कि कुछ लोग यह भी कहने वाले लोग हैं कि शरीर नष्ट नहीं हुआ है। कुछ लोग ये कहने वाले लोग हैं कि शरीर जो है वो दूसरे में प्रवेश करके आ रहा है। वो ब्ल ब्ल बहुत सारी चीजें हैं जो कल हमने लाइव स्ट्रीम में देखी। तो अ हमारी ये जो मगजमारी हम जो कर रहे हैं कई बार ये क्वेश्चन आता है कि भाई इससे क्या फायदा होना है? समाज ये भड़भड़ देख रहा है। समाज और यह और वो तो श्वता जी इस बारे में आप थोड़ी सी अपनी बात रखेंगे कि हमारी इन लाइव स्ट्रीम से क्या लाभ प्राप्त हो रहा है समाज को। भाई वहां पर जैसे कुछ न्यूज़ चैनल होते हैं ना कुछ वैसा सिनेरियो भी दिखाई देता है कई बार न्यूज़ चैनल्स जैसा वो नहीं जानबूझ के वो एक गरमा गर्मी वाली डिबेट होती है। जय श्री राम अवनीश जी जय श्री राम। तो कुछ वैसा सीन यहां भी बन जाए। कल तो मैं बिल्कुल मतलब मेरा ये समझ लीजिए जो व्यक्ति आया था उसने सिरिंज लगा के मेरे ब्रेन से सारे न्यूट्रिएंट्स सारा ऑक्सीजन

00:02:32:24 सारा ब्लड सप्लाई सब निकाल लिया था है ना फिर भी हमने उसे क्यों लिया तो इसके पीछे मेरी रीजनिंग है पर मैं थोड़ा सा श्वेता जी आप अपने पर्सपेक्टिव से थोड़ा सा बताएं मुझे आवाज नहीं आ रही है आपकी कोई कारण है विशेष इसका मेरी आवाज सबको आ रही है? श्वेता जी की आवाज आ रही है सबको?

00:03:06:00 म्यूट थे आप। म्यूट थे। अब बोलिए। अभी भी नहीं आ रही है। अब आ रहा है। अब आ रही है। सेटिंग तो देखिए ऐसा है कि ये कार्य जो हम कर रहे हैं ना या फिर जो आवाहन जो है ये कार्य कर रहा है वो बहुत ही स्तर पर आपको दिखेगा दूर से। ठीक है? लेकिन जो इसका प्रभाव होगा या फिर जो पड़ रहा है ना वो बहुत ही मूल में जाके हो रहा है क्योंकि वो क्या कर रहा है कि आवान जो ये ये जो चीजें कर रहा है चाहे वो धरातल पर कर रहा हो चाहे नवम मार्ग द्वारा यानी सोशल मीडिया इत्यादि के माध्यम से जो कर रहा हो वो सीधा मूल पे आप कहेंगे अधर्मियों के मूल पे वार कर रहा है ठीक है और जो कर रहा है सिद्धांतों के बल पर ठीक है जो जो कर रहा है जो हमारे जो परंपरा प्राप्त ज्ञान हैं उसके बल पर। ठीक है? यह नहीं कर रहा है कि जाके किसी को फिजिकली मार रहा हो या फिर उस उस पे कोई झगड़ा आदि कर रहा हो। उस तरह से नहीं सिद्धांतों के बल पर कर रहा है। हां, जहां कहीं जरूरत पड़ रही है वहां पर ऑफ कोर्स जाकर क्या बोलते हैं? बोलना पड़ रहा है या फिर उनकी सच्चाइयों

00:04:21:03 को अवगत कराना पड़ रहा है जो कि आपको मिलेगा ही क्योंकि हम कोई भी कार्य आवाहन कोई भी कार्य जो है वह पीठ पीछे या छुप छुपा कर नहीं करता। ठीक है? क्योंकि यह कार्य जो है वह धर्म रक्षा के लिए है। और जब जहां तक धर्म रक्षा की बात आती है वहां पर मनुष्य को क्या बोलते हैं सिद्धांतों पर चलकर ठीक है? राम के पथ राम कृष्ण आदि के पथ पर चलकर ही उसको करना चाहिए और वो कर रहा है। हम हमारा भी प्रवास प्रयास यही रहता है। कभी हो सकता है कि कभी जाने अनजाने में हमने या आवाहन ने कभी ऊपर नीचे कुछ बातें कह दी हो या जो कि 99.9% नहीं हो नहीं होगी। बट कभी-कभी हो सकता है। तो उसके लिए वो आप स्वयं समझ सकते हैं क्योंकि हमारा जो मूल उद्देश्य है वो है पूरी समाज को इस दुनिया को सही धर्म से अवगत कराना। ठीक है? क्योंकि काल नेमी जैसी जो संस्थाएं हैं और जो अलग-अलग जो पंथ आदि जो हो गए हैं ना वो सनातन का चोला ओढ़े हुए बहुत ही गलत शिक्षाएं दे रहे हैं। ठीक है? और आपने बहुत सारी ऐसी वीडियोस में देखा होगा अंत में जब शिवान जी का आता है ना वो वो गुस्से वाला जो एक इंट्रो इंट्रो कहूंगा जो जो एंड वाला पार्ट है हिंदू तो है ना हिंदू तो है ना घर में बैठे रहो

00:05:36:12 बस ये सोच कर कि हिंदू तो है ना करेंगे तो एग्जैक्टली वही चीज ही हमें या मोस्टली बहुत सारे लोगों को सनातन धर्मियों को रोकती है वो ये और उनके मन में भाव रहता है कि हिंदू वाला कार्य तो हो रहा है लेकिन हिंदू वाला कार्य नहीं हो रहा ये कालमी वाला कार्य हो रहा है और अगर कालमी का रेफरेंस देंगे तो उसके लिए एक बार आपको रामचरितमानस रामायण आदि का अध्ययन करना चाहिए आपको पता लग जाएगा कि हनुमान जी जब संजीवनी लेने जा रहे थे तो कान लेमी नाम का व्यक्ति राम राम कर रहा था। राम राम इसलिए और उसका मुख्य उद्देश्य यह था कि वो संजीवनी जो है वो समय पर ना ले ना ले जा पाए। है ना? तो इसी तरह से बहुत सारी ऐसी संस्थाएं हैं जो मुंह में राम बगल में छुरी वाली जो कहावत है ना वह बिल्कुल यहीं पे फिट बैठती है। ठीक है? और जिसमें बगल में छुरी है केवल और केवल सनातन के पीठ पर घोंप रहे हैं। सनातन यानी हम सब हम सब के पीठ पर घोंप रहे हैं। क्योंकि अगर ये मूल हिला देंगे हमारा। ठीक है? अगर तो हम क्या बोलते हैं? फिर हम वही है धर्मे हीना पश्चमी समाना वही वाली हालत हो जाएगी। ठीक है? तो तो आह्वान जो ये कार्य कर रहा है वीडियो वीडियो आदि के माध्यम से लाइव के माध्यम से कक्षाओं के माध्यम से नाम जप के माध्यम से जो हमारा नामास्त्र चल रहा है जो ये लाइव सेशंस होते हैं जो हमारे

00:06:52:02 लाइव चर्चाएं होती हैं या फिर जो क्लासेस होते हैं उसमें हमारा मूल उद्देश्य ये नहीं है कि अपना कोई ज्ञान देना। ठीक है? जैसे जगुरु आदि शंकराचार्य महा महाभाग ने अपनी तरफ से कोई ज्ञान नहीं दिया है। उन्होंने केवल वही ज्ञान हमें हिंदी में यानी कि आसान शब्दों में समझा दिया। कोशिश की उस समय की जो आसान भाषा थी जो कि संस्कृति थी उसमें बताने का प्रयास किया है। वही जो शास्त्र सम्मत बातें हैं। उन्होंने अपनी तरफ से कोई ज्ञान नहीं दिया। जैसे कई लोग यह कहते हैं ना कि आदि गुरु शंकराचार्य का यह अद्वैत सिद्धांत है। यह उनका अद्वैत सिद्धांत नहीं है। ठीक है? यह सिद्धांत वही सिद्धांत है जो वशिष्ठ ऋषि ने भगवान श्री राम को दिया। वही सिद्धांत है जो भगवान कृष्ण ने सूर्यारायण भगवान को दिया। ये वही सिद्धांत है। वही सिद्धांत है जो अह कई उपनिषदों में ब्रह्मा जी ने सनत कुमार आदि को दिया या नारद जी को दिया एसेट्रा। ठीक है? तो तो वही चीज है। तो इसीलिए जब कोई यह बोलता है कि आदि गुरु शंकराचार्य के सिद्धांत है तो मैं इससे बिल्कुल असहमत हो जाता हूं क्योंकि सिद्धांत शास्त्र का है। शास्त्र वेदों का सिद्धांत है। ठीक है? तो बस अभी तो यही कहूंगा और यही हमारा मतलब नहीं आपने तो बहुत वाइड स्केल से पूरी सारी पूरा कांसेप्ट क्लियर कर दिया। जी।

00:08:07:08 बहुत बढ़िया। और अभी एक फोन आया मेरे पास यहां आने से जस्ट पहले तक और मेरे ख्याल से जो हम लोग 101 मिनट लेट हुए उसमें उस फोन की भी भूमिका रही है थोड़ी सी। हालांकि मैं इस मामले में मेरा रिकॉर्ड हिस्ट्री सीटर हो गया हूं मैं कि अब भाई मैं जो है यही आता हूं। तो मुझे अपनी इस छवि के निमित्त जो जनता जनार्दन है उसके प्रति क्षम्य भाव जो है वो रखने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है। मगर अभी जिस व्यक्ति का फोन आया वो बोला कि मैं ब्रह्मा कुमारी से हूं। हम और पहले उसमें ब्रह्मा कुमारी से हां मेन ब्रह्मा एज अ दर्शक कहूं ना तो अब इतनी सारी जो ऐसे वीडियोस आ गई हैं आपके पिछले एक दो हफ्ते ब्रह्माकुमारी की तो कंफ्यूजन हो गई है एस अ दर्शक कि कौन से वाले ब्रह्माकुमारी की बात कर रहे हैं आप देखिए इस समय अभी तक हमारे पास दो सेक्शन बन पाए हैं हां हां एक तो ब्रह्माकुमारी और एक है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय लेकिन कल वाली चर्चा में उसमें से भी एक निकल रहा था जो सुनने में पता लगा अमूल फोकने जी हां मगर उसने अपना नाम नहीं बदला है उसने अपने आप को वही रखा है आध्या आध्यात्मिक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय हम

00:09:22:19 जी तो वो व्यक्ति जो है बोलता है कि मुझे तुम कहां से बोल रहे हो तुम्हारा नाम क्या है ये चैनल तुम्हारा ही है क्या मैंने कहा ठीक है हां हां जो भी है फिर जब वो कुछ बोलने लगा कि तुम धर्म पे ज्यादा बोल रहे हो धर्म के बारे में ज्यादा बोल रहे थे अब भाई धर्म के बारे में ज्यादा भी नहीं बोलना चाहिए ये भी एक अपराध है। दिक्कत यही है। [हंसी] तो जब उसने यह कहा ना धर्म के बारे में ज्यादा क्यों मतलब आपत्तिजनक उसने क्यों शब्द नहीं लगाया मगर उसमें यह हो गया कि धर्म के बारे में ये क्या हो गया

00:10:01:13 आपकी आवाज सुन उसने उसने जो है क्यों शब्द नहीं लगाया हालांकि मगर उसने ये जरूर कहा कि भाई धर्म के बारे में ज्यादा बोल रहा है आपत्ति आपत्ति पूर्वक तरीके से उसने ये पंक्ति कही तो जैसे ही वो नहीं होता है कुछ एक इंस्टिंक्ट होता है हर व्यक्ति के अंदर कि कहां पे वो एक्टिव होता है होता है ना तो मैं अभी तक नॉर्मल हूं जब उसने ये लाइन कही एकदम से दूसरा रोल चालू हो गया फिर मैंने उससे [हंसी] तुरंत पूछा कि भाई तुम्हारा नाम क्या है तो बोला कि मेरा नाम जो भी हो मैंने कहा जो भी हो क्यों जब तुम चाहते हो कि सामने वाला अपनी पहचान तुम्हें ठीक से बताए तो तुम अपनी पहचान क्यों छुपाओगे तो पहले मैंने उसको थोड़ा सा जो आता है ना व्यक्ति बहुत तेजी में कॉल कराऊंगा शोएब अख्तर और ग्लेन मैग्रा और ब्रेटली और सबको मिक्स करके जो बॉलर बनेगा ना वो बॉल कराऊंगा मैं। है ना? सबसे पहले तो राहुल द्रविड़ की तरह तो तुम्हारा नाम क्या है? तो उससे व्यक्ति थोड़ा डिप्लीट होता है। फिर वो जो आया था ना वो भर के भूबा उससे व्यक्ति थोड़ा फिर मैंने कहा कि भाई फिर आगे बोलता रहा कि तुम ये वो तो अभी हम लोग डालेंगे वो चीज बताएंगे सार्वजनिक करेंगे। मुख्य बात यह रही कि उसने आखिर में दूसरी

00:11:16:16 भाषा में मुझे कुछ उल्टा सीधा शायद बोलना शुरू कर दिया। मैं समझ नहीं पाया। अब मैं क्या करूं? ये क्या बोल रहा है? तो जब वो दूसरी भाषा बोलने लगा तो मैं भी बोलने लगा। [हंसी] फिर वो क्या कहते हैं? बोला कि अब हिंदी में बोलने लगा। दोबारा हो गया। मैंने कहा हिंदी सीख ली। पांच मिनट लगे हिंदी सीखने में। तो फिर लास्ट में धमकी देता है कि भाई मैं तुम्हारे सारे वीडियोस वगैरह बंद करा दूंगा, रद्द करा दूंगा। ठीक है? मैं उसको बोला कि अगर तुम पाखंडी नहीं हो तो आओ बात करो। तो वो इधर उधर की बातें करने लगा तो मैंने कहा ठीक है तो फिर बंद करा दो तुम। तो यह होता है हमारी लाइव स्ट्रीमिंग से। हमारी लाइव स्ट्रीमिंग से यह होता है। यह लोग अपने बिल से बाहर आते हैं। क्या हुआ था? मैं अपने अपने परिवार के साथ हिंदुस्तान हस्तशिल्प महोत्सव गया था। रामपाल के लिए थोड़ी ना गया था। गया था। लखनऊ वाला लखनऊ वाला। हां लखनऊ वाला। हां टकरा गया। वहां देखा धर्म वहां पर विरोध किया। अगले दिन वीडियो बना और आज स्थितियां

00:12:32:00 आपके सामने इतना बड़ा आंदोलन शुरू हो गया। तो क्या हुआ कि जब हमने इनकी चीजों को इनकी जड़ों को टटोला चीजें चेक करने की बात की उसके कारण ये बिलबिला करके जैसे एक दवाई होती है ना जो डाल दो तो अंदर जो चींटियां भरी होती है सब बाहर भागती है है ना वो दवाई जैसे डाली तो वो सारी चीटियां फिर बाहर निकल के आ गई कितने सारे आपने हमारे लाइव स्ट्रीम देखे हम है ना कितने सारे लाइव स्ट्रीम आपने हमारे देखे जो रामपाल पे लगातार चल रहे बहुत बुद्धि का लेवल बिल्कुल डाउन और हम लोग उनसे जूझ रहे हैं। क्यों जूझ रहे हैं? जिससे वो जो मूर्खता पूर्ण बातें हैं वो समाज में ज्यादा से ज्यादा लोग देखें। ये है देखो मूर्खता की पराकाष्ठा और वो देखा लोगों ने और आज हालात ये हो गए हैं कि वो जब कोर्ट का फैसला जब आएगा तब आएगा। जगह-जगह इनकी किताबें जलाई जा रही है। पैरों तले पैरों से कुचली जा रही है। बिहार में अभी देखिए सब जगह आवाजें उठ उठ खड़ी हुई है। ये हुआ जागरूकता। तो अब एक बात सिद्धांत की आती है। मैंने कई बार कहा है कि भाई मुझे जरूरत क्या है? मुझे जरूरत किसी से

00:13:47:01 तब यह बात कहने की है कि तुम्हारा सिद्धांत गलत है जब मैं कहीं पर अपने धर्म के लिए खड़ा हूं। लड़ रहा हूं। रक्षा कर रहा हूं अपनी चीजों की। वहां पर मेरे तुम्हारे द्वारा फैलाई गई गंदगी मेरे आड़े नहीं आनी चाहिए। सिंपल। तुम अपनी कोई भी मान्यता रखो कोई दिक्कत नहीं है। मगर जब मैं जब हम धर्म की लड़ाई लड़ने जाएंगे तो वहां पर तुम्हारी मान्यता से उत्पन्न होने के कारण मेरे कोई सामने समस्या नहीं आनी चाहिए। तुम मेरे ही पाले में हो। मैं तुम्हारा हूं। मैं भाई हूं तुम्हारा। तुम्हारी अपनी मान्यताएं बहुत सारी अलग-अलग हो सकती। मगर मगर आती है। क्यों आती है? जब मैं जाता हूं रामचरितमानस को जलने से बचाने के लिए तो आर्य समाधि नहीं आता है।

00:14:33:20 आर्य समाजी तो एक बार आर्य समाजी तो एक बार को जो ये वाली एक लाइन है ना ये एक बेल्ट बनी हुई है। उनकी मान्यताएं जो भी है मगर वो एक मतलब अपने आप को वो सैनिक के रूप में जो प्रदर्शित करते हैं। है ना स्वतंत्रता का आंदोलन या जो भी है वो अपने आप को उससे जोड़ते हैं तो वो राम राम मंदिर आंदोलन से भी जुड़े रहते हैं। करते हैं उनकी मौलिक मान्यताएं भले ही उसी के खिलाफ हो जो वो करने की कोशिश कर रहे हैं। भाई राम मंदिर के लिए तुम लड़ रहे हो मगर तुम्हारा जो इंजेक्ट है लास्ट में वो तो यही है ना कि मूर्ति पूजा गलत है तो एट द एंड तुम अपने सिद्धांत के विरुद्ध लड़ रहे हो तो तुम अपने लिए ही तो मुसीबत खड़ी कर रहे हो या तो उस सिद्धांत के लिए या उस सिद्धांत का पोषण करने के चक्कर में अपने उस युद्ध के लिए तो वो एक अलग चीज है। मगर जैसे कुमार विश्वास ने अनेकानेक लोगों ने कह दिया कि भाई राम रामचरितमानस का वो उत्तरकांड प्रक्षिप्त है। अब स्वामी प्रसाद मौर्य उसको जला रहा है या यह बीके वाले लोग भर देते हैं लोगों के अंदर कि राम कृष्ण सब कल्पना है यह वो तो ऐसे में जब राम ये स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे लोग जब उसको जलाते हैं हम जब उसको जलाते हैं तो क्या होता है कि कुछ हिंदू जो बहुसंख्यक है बहुसंख्यक होते हुए भी वो थोड़ी सी मात्रा

00:15:48:28 में वहां पर विरोध करने पहुंच पाता है। यह है हमारी सबसे बड़ी दिक्कत। हम संगठित नहीं है। आपकी इन मान्यताओं के कारण जो आपने हमारी मूल मान्यताओं के विरोध में अपने अपने नए-नए नाम देकर के खड़ी की है। तो मैं आपकी पर्सनल चीजें मैंने अपने चैनल पर कभी किसी के बारे में जैसे इस का कोई व्यक्ति हो इस कान के फाउंडर हो या आर्य समाज के फाउंडर हो दयानंद जी हो प्रभुपाद जी हो इनके लिए कभी भी कोई व्यक्तिगत रूप से इनकी व्यक्तिगत जीवन शैली इत्यादि को लेकर के कटाक्ष नहीं किया ना ही इनका मुंह बिगाड़ा ना ही इनका मुंह बिगाड़ा ना ही चेहरा बिगाड़ करके जो है मैंने कहीं पर लगाया ऐसा कुछ नहीं किया केवल इनके द्वारा जो ऐसी मान्यता है वो मान्यता है जो हमारी चीजों में दिक्कत डाल रही है उनको मैंने क्वेश्चनिंग की। ठीक है? और ये भी कहता रहा कि आप मुझे अगर समझा दोगे ये चीजें ऐसे ऐसे करके आड़े नहीं आएंगी तो मैं समझ जाऊंगा। फिर मैं आपकी चीजों को साथ में ले चलूंगा। वो साथ में हो नहीं पा रहा है। मैंने ये सब कहा है। तो ये तो उद्देश्य है कि ये चीजें हमें करनी क्यों पड़ रही है? क्योंकि सनातन समाज बटा हुआ है और जब तक वो बटा रहेगा जितना ज्यादा वो बटा रहेगा उतना ज्यादा वो अपने जो मौलिक आदर्श

00:17:04:09 है अपने अस्तित्व और आदर्श की रक्षा नहीं कर पाएगा। इसलिए हमें उन सार्वभौम सिद्धांतों की का सानिध्य लेते हुए जो ऐसे पाखंडवादी तंत्र फैल रहे हैं उनसे क्वेश्चनिंग करनी पड़ेगी। और जैसे ही क्वेश्चनिंग करी तो वो दवाई डाली तो वहां से चींटियां बाहर आने लगी। अब आप देखिएगा कुछ ही दिनों में बीके या आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से एक बड़ा संघर्ष आप लोगों को देखने देखने को मिलने वाला है। जैसे अभी रामपाल के साथ मिला और जैसे रामपाल का वैचारिक अंत हुआ है। वैचारिक अंत हो चुका है। व्यवहारिक अंत चल रहा है। ऐसे ही फिर अगर ये लोग इसी तरह से करते हैं धमकी पूर्वक देते हैं तो क्या होगा? इन्हीं की हानि होगी। इन्हीं की हानि होगी। क्योंकि हम तो घर से

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00:17:49:20 निकले ही थे बांध कर दर पे कफ़न। जा हथेली पर लिए लो बढ़ चले हैं ये कदम जिंदगी तो अपनी महिमा मौत की महफिल में है सरफरोशी की तमन्ना अब

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00:17:59:13 हमारे दिल में हमारे दिल में है ना तो एक तो ये बात हो गई अब इसमें एक दूसरी बात आती है इससे मिलती जुलती चीजें ही है जैसे अभी आपने हमारी एक चर्चा देखी तो निर्भय निर्भय के साथ निर्भय आर्य कहते हैं वो स्वयं को तो उनके साथ आपने हमारी एक चर्चा देखी और वो चर्चा मेरे लिए भी बहुत प्रतीक्षित चर्चा थी क्योंकि थोड़े इंटेलेक्चुअल लेवल के जो पर्संस होते हैं व्यक्ति होते हैं उनके साथ बात करने में आनंद आता है। तर्क वितर्क करना और सत्य के ऊपर बात करना तो ऐसा नहीं है। नो डाउट कि निर्भय आर्य जो है एक बुद्धिमान व्यक्ति है। है ना? और निर्भय आर्य को लेकर के मैं अपनी कुछ फीलिंग्स बताऊं। पर्सनल फीलिंग्स मैं शेयर कर रहा हूं। तो निर्भय यार में छोटा भाई मुझे दिखाई देता है और कहां से दिख रहा है। मुझे एग्जैक्ट वो दिन नहीं याद है कि कहां से ये छवि बनी है। हालांकि उसने जब ये कहा तो वो जो अंदर गौ रूप से वो जो भावना थी जब उसने भ्राता श्री कहा तो वो गौ रूप से जो भावना थी वो थोड़ा सा उस वो भावनाएं थोड़ा व्यवहार में आ गई। वो आना जाना सिद्ध

00:19:14:16 हो गया। [हंसी] हां पहले से ही थी मगर उसके भ्राता ये कह देने थे व्यवहार में आ गई हूं तो वो एक फीलिंग तैयार हो गई फिर क्या है तो उस दिन जो मैं बैठा था बहुत सच्चे मन हालांकि मैं चर्चाएं जो करता हूं वो ऐसे नहीं करता हूं कि सामने वाले को परास्त कैसे करना है। मैं ऐसे करता हूं जो चर्चाएं होती हैं मेरे पास ये है। अब मैं क्या कर सकता हूं बस और अगर मैं उसमें प्लानिंग कर रहा हूं, खुराफात कर रहा हूं, रणनीति अपना रहा हूं। इस तरीके से स्ट्रक्चरल मेरा मानना है कि अगर मैं स्ट्रक्चरल वे में तैयारी कर रहा हूं तो इसका मतलब कहीं ना कहीं मैं सत्य की रक्षा नहीं अपने मत की रक्षा कर रहा हूं। मैं तो ऐसे चल रहा हूं। ये है मेरे पास सर्वशक्तिमान ईश्वर, परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म। बस कहीं कोई मिल जाएगा मैं इनहीं तीन बातों पर उसको लपेट दूंगा। मैं बहुत ज्यादा चीजों की बात नहीं करूंगा। सांख्य दर्शन न्याय दर्शन बहुत ज्यादा बातें नहीं करूंगा वो मैं आऊंगा उस आगे मेरे पास क्या है मैं उसको लेके चलता हूं अगर मेरे पास सत्य चीज है तो वो हर जगह जीतेगी अगर मेरे

00:20:29:25 पास झूठ है तो वो हारेगी और फिर मुझे उसे एक्सेप्ट करना पड़ेगा मुझे उसमें रणनीति की क्या जरूरत है स्ट्रक्चरल कि मैं उससे यह सवाल करूं फिर उसको ऐसे कहलवा दूं फिर उसकी कही हुई बात को आधार बना करके अगला चैप्टर खोलूं और फिर उसको वहां परास्त कर दूं देखो ये नहीं सिद्धांत है। अब मेला गए उसने चार बातें झूठी लिखी। सीधे परंपरा क्या है? ये है सिद्धांत। तैयारी करके नहीं जाना है कि अगर वो झूठी बात बोलेगा ये करेगा तो उसको वहां पे ये देंगे वो कोई तैयारी नहीं। बिना तैयारी के है ना वो इस तरह से चलते हैं तो मैं वहां पर सच्चे मन से आया था एकदम और उससे एक दो दिन पहले से पिताजी से भी मेरी बातें हुई थी अपनी तो उनको भी मैंने कहा था ये जो व्यक्ति आ रहा है बुद्धिमान है और आपको चर्चा देखने में आनंद आएगा अच्छा लगेगा अब वो बात अलग है कि हमारे सिद्धांत ही ऐसे हैं नहीं तो मुझे मुझे लगता है कि कहीं ना कहीं इंटेलेक्चुअल लेवल उसका निर्भय आर्य का ज्यादा होगा मुझसे अब हम हम हम लोग निम्न स्तर के हैं। पर हमारे पास सिद्धांत ऐसा है तो करें क्या? उसको कैसे तोड़ोगे है ना वो एक बात है। तो उसको लेकर के मुझे फीलिंग्स आती थी कि छोटा भाई है

00:21:45:08 लगभग वैसा ही है वो भी और उसका जो एटीट्यूड वगैरह भी है थोड़ा सा वो एक प्रभावशाली अच्छे व्यक्तित्व का है तो वो अच्छा लगता है और जैसे वो अवेंजर्स में नहीं स्पाइडरमैन और कैप्टन अमेरिका लड़ रहे होते हैं। कहां से हो? कहां से हो? तो वो कहता है मैं न्यूयॉर्क से। तो फिर लास्ट में कैप्टन अमेरिका जब उसको छका देता है ना फिर कहता है मैं भी मैं भी न्यूयॉर्क से था। तुम में दम है। [हंसी] है कि नहीं? हां। तो वो है कुछ वैसा उसको लेकर के रहता है। अब क्या हुआ कि वो उस चर्चा में क्या हुआ है? पूरा शुरू से लास्ट तक वो तो एक अलग विषय है। है ना? वो अभी हम एक दूसरे पार्ट में कर लेंगे। मगर अच्छा इसमें इसमें आप इसको यह जो अभी निर्भय आर्य ने माफी भी मांगी है आपको पता हो शायद क्षमा उस पर डाली है कि उसने वीडियो को देखा है ना और उसने जो है आत्मग्लानी फील की तो उसने वहां पर जो है कहा है निर्भय ने कि मुझे क्षमा मैं मतलब अपनी गलती के लिए क्षमा प्रार्थी हूं।

00:23:00:12 ऐसे ऐसे कुछ वर्ड्स कहे उसमें एक्सजेक्टली वर्ड ना भी हो तो भाई समझ जाना अपनी ओर से देख लेना। तो अब [हंसी] ये ये कुछ चीजें हुई है। ठीक है? तो मैं क्या है जब वो चर्चा पूरी हो गई उसके बाद जब मैं उसे एडिट करने बैठा जो दो पार्ट मैंने डाले हैं। है ना? और एक श भी डाला है अभी थोड़ी बहुत देर पहले। जब उस चर्चा को मैं देख रहा हूं तो एक नंबर तो निकल के आया कि निर्भय बहुत डेडिकेटेड तरीके से आया था। बहुत डेडिकेटेड था उसके लिए। है ना जैसे सब कुछ सिस्टम बना के बिल्कुल नहीं मुझे आज ये करना तो ये जो मेहनत है ना इसके लिए उसे अप्रिशिएट करना चाहिए है ना बहुत डेडिकेटेड था उसकी अपनी चीजें बिल्कुल क्लियर थी मुझे कहां पहुंचना है कहां से चालू करते हुए कहां पहुंचना है हां वो जो मेरी बात है वो यहां पे क्रॉस होती है कि हम अपने मत की रक्षा करने आए हैं। हम धर्म की रक्षा या सनातन की रक्षा करने नहीं आए। वो चीज अलग है। मगर ये बहुत ही बेसिक चीज है। मतलब अगर यह बात अगर किसी के ध्यान में आ जाए ना तो जो मंथन होने के बाद जो अर्थ जो निकलेगा ना वो धर्म ही होगा। इसमें कोई दो राय नहीं है। अच्छा मैंने कभी नहीं कहा है कि मैं किसी और का मत नहीं मानूंगा।

00:24:15:15 भाई तुम मुझे ऐसी चीजें दो जो सामने वाले के समक्ष कटे ना। मैं जहां जाऊंगा ये सर्वशक्तिमान ईश्वर लेकर के जाऊंगा। मुसलमान को पांच मिनट में हराऊंगा। पांच मिनट में ईसाई को मैं चुप कराऊंगा पांच पांच मिनट में तो वहां पर ये चीजें ना कटे मुझे वो दे दो अगर कुछ तोड़ भी है भाई मैं मैं उनसे ये नहीं कहूंगा तुम्हारे यहां हलाला गलत है तुम्हारे यहां जो ट्रिपल तलाक है वो गलत है या अमुक चीज गलत है या मोहम्मद जी मोहम्मद ने ऐसा किया या उसने वैसा किया मैं ये नहीं कहूंगा मैं सीधे कहूंगा तुम जिसकी चीजों को मान रहे हो क्या वो वो है जो तुम उसको सोच रहे हो बस खत्म बिल्कुल हम ऐसी लड़ाई क्यों लड़े जिसका अंत ही नहीं है। फिर वो कहे तुम्हारे यहां राम ने ये किया था। फिर हम उसको कहे नहीं साहब जो है वो तो उत्तरकांडी प्रक्षिप्त है। फिर हम उसको बताएं ये वो परंपरा नहीं है। ये वो ये अनंत लड़ाई है। फिर वो अपने हमारे शास्त्रों में से कुछ ले आए। वो अनंत युद्ध है। युद्ध को समाप्त कहां किया जा सकता है? मूल चीजों पर बात करो। मूल मूल में क्या है?

00:25:21:06 धर्म की गुणवत्ता की वो परिवर्तनशील नहीं है। ये भी एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज है जिसको कहते हैं शाश्वत धर्म वो बदल रहा है। 187 में कह रहा है तो वो अपने पहली बात है कि वो अपने उसमें आया था। तो जब मैं उसको पूरे को देख रहा हूं ना श्वेता जी तो मुझे उसमें दिख रहा है मेरा छोटा भाई कैसे परेशान है वो जो नहीं एक मुझे उसके प्रति करुणा का भाव आया उसको देख रहा हूं ना उसका चेहरा पहले तो मैं उसमें जॉइ था तो मुझे अपनी चीजें भी जब मैं एक न्यूट्रल दर्शक की तरह से उसको देख रहा था उसके प्रति मेरे को बहुत वैसा भाव आया कि इसको चर्चा से हटा के मैंने गलत किया है और वो भाव क्यों आया

00:26:07:10 मुझे जो यह लग रहा था ना कि वह अपने को बड़ा साबित करना चाह रहा है। एंड में मैं यह देख रहा हूं कि मैं उसकी बातों के बीच में टोक रहा हूं। हालांकि वो उद्देश्य पूर्वक नहीं है कि मुझे विघ्न डालना है। वो एक स्वाभाविक कहीं पे मेरी चीजों का विरोध हो रहा है तो मेरे मुंह से निकल जा रहा है। जैसे उसने माना कि मेरे मुंह से स्वाभाविक रूप से ये निकल जा रहा है कि ठीक है ना? ठीक है ना? है ना? है ना? या स्वाभाविक रूप से निकल रहा है तो वो मेरा स्वाभाविक रूप जिसके प्रति मैं कंट्रोल करने की बात भी कह रहा हूं मगर इसके कारण से वो मेरे प्रति थोड़ी सी अभद्रता कर रहा था ये चीज आप देखोगे उस वीडियो को कि कूदो मत बीच में है ना या हेलो हेलो हेलो हेलो इस तरह की चीजें तो मैं ये सब तो देख रहा हूं ये सब देख रहा हूं मगर इन कारणों से ये जो उसने अभद्रता की इन कारणों से मेरे मन में ये गलतफहमी आ गई कि वो मुझे जो है नीचा दिखाना चाह रहा है ये ये दिखाते हुए कि तुमको पंचा का मतलब नहीं पता है। समझ रहे हो? उसको इससे मतलब नहीं है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं। वो वहां पर ये सिद्ध करने में लग गया कि शिवश को पंचाव का अर्थ नहीं पता है। ठीक है? तो यह मुझे उस समय लगा कि यह मेरी गलतफहमी

00:27:22:14 है। मैंने जब उसको पूरा देखा पहले मुझे और मैं उस वीडियो को देखतेदेखते आपको रात को एक दो दिन पहले मैंने फोन लगाया था। क्यों लगाया था पता है? मुझे इतनी करुणा आ रही थी कि हम लोग वीडियो बनाए और कहे जो इसने किया है। इसने अपने पर्सेक्टिव से किया है। है ना? कि वीडियो को जब इसने तीसरी आंख से देखा होगा तो इसको लगा होगा कहीं-कहीं गलत मिस बिहेव हो गया। तो तो ऐसा ही बिहेव मेरे मन में आ रहा था कि हमने यार उसके साथ जो है उसको समझ नहीं पाए। उसने गलती की अभद्र आचरण किया वो एक अलग बात है। मगर उसका उद्देश्य जो है ये नहीं था कि वो मुझे क्या कहते हैं नीचा दिखाना चाह रहा है क्योंकि लास्ट में जब उसने कहा था मेरी स्क्रीन शेयर कर दो आप। हमने कहा था स्क्रीन शेयर करने की जरूरत नहीं है। अच्छा उसको यह लगा कि हमने स्क्रीन शेयर ना करने के लिए इसलिए कहा है कि जिससे कि उसका पलड़ा भारी ना हो जाए। है ना? और उसका कहना था कि हम मैं बताना चाहता था कि पंचाव क्या है क्या नहीं है जो भी है। बिल्कुल बिल्कुल। उसने अपनी अगली जो लाइव थे मैंने जो कुछ समय के लिए देखा था जब थोड़ी करात्री जी की निंदा तो मैं मैं इसको पूरा मैं इसको पूरा कर दूं। तो हमने वहां पर यह सोचा था कि एक तो कोई फोटो अगर दिखा रहे हो तो आप अपनी बात बोल

00:28:37:15 दो। अगर आवश्यकता लगेगी तो प्रमाण के रूप में फोटो को लेंगे। हमारे मन में ये नहीं था। हालांकि उसको ऐसा लग रहा है कि हमारे मन में ये था कि हम उसकी चीजों को यहां दिखाना नहीं चाहते। कहीं हमारी हार हो जाए। ऐसा कुछ नहीं भाई। हम अपने सिद्धांत पे लड़ अभी थोड़ा आपको समझने की आवश्यकता है। हम राम को खून में रखते हैं अपने। हम राम को अपने खून में रखते हैं। यह जो झूठी इत्यादि वाली चीजें हैं, यह जानकारी में बुद्धि पूर्वक तो नहीं करने का प्रयास करते हैं। अब भगवान के द्वारा कहीं पर हो जाए मतलब मतलब हमारा जहां कंट्रोल ना हो वहां पर हो जाए वो बात अलग है। अनजाने अनजाने में तो उसके लिए क्षमा याचना भी कर लेते अगर पता चल गया तो। तो ऐसा उद्देश्य नहीं था कि हम तुम्हारे पलड़े को भारी होने से रोकना चाहते थे। उद्देश्य ये था कि भाई आप जो फोटो दिखा रहे हो उसके बारे में पहले आप बता दो अगर हमको आवश्यकता लगेगी हम आपत्ति करेंगे कि ये है कि नहीं है तो आप दिखाना प्रमाण पहली बात फिर जो है लास्ट में जब उसने ये कहा कि मैं क्यों दिखाऊं ये बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट है ये जो है ना उसने कहा कि मैं क्यों दिखाऊं श्वेता जी ध्यान दीजिएगा इस बात पे अब हम ये देख रहे हैं कि हमें अब उसके अभद्र आचरण से ये लगने लगा है कि ये जो है हमको ये दिखाना चाहता है कि जो है पंचा पंचाव इसको

00:29:52:21 नहीं आता है। भाई तुम पंचाव्य का अर्थ बताओ। पंचाव्य में क्या-क्या चीजें हैं और वो चीजें आप मांगो तो हम ना दे तो बताओ। है ना? हम शास्त्रार्थ नहीं कर रहे थे। शास्त्र चर्चा कर रहे थे। शास्त्रार्थ में इसमें मैं इसमें एक बात कहूंगा। आपने तो एक बार वीडियो देखिएगा ना तो जब मैं ने ज्वाइन किया था तो मतलब उसके ही डिफेंस में एक बात कहता हूं आपको कि स्टार्टिंग में उसने उस उसने कहा था कि मैं दिखा दूंगा या बता दूंगा आपको क्या होता है। फिर जब मैंने उसको मना कर दिया था कि आपको आवश्यकता नहीं है। फिर जब आपने बोला दिखाने के लिए तो उसने मना कर दिया और आपको लगा कि अब वो मैं मैं उसी पे आ रहा हूं। उसी पे आ रहा हूं। कि जब मैंने वो वीडियो पूरा लास्ट तक देखा है ना तो मैंने क्या किया? मैंने देखा कि हमने कहा कि उसकी आवश्यकता नहीं है और फिर हम कह रहे हैं कि बताओ तो शायद तो मैं मुझे लगा कि इसने ये जो लाइन कही है मैं क्यों बताऊं ये इसलिए कही है जब मैं एडिटिंग कर रहा हूं तब ये लाइन इसलिए इसने कही कि भाई जब तुम पहले जब मैं बता रहा था तब तो तुमने रोक दिया मना कर दिया एक्सक्टली मैं यही कह रहा था यही कह रहा था मैंने आपको यही कहा था उसके बाद में तुम कह रहे हो उसके बाद में तुम कह रहे हो कि जो है दिखाओ पहले मैं दिखा दिखा रहा

00:31:07:22 था तो तुमने मना कर मतलब अपने वो अपने हिसाब से उसको समझाना चाह रहा होगा हमने कहा मत हमने कहा मत दिखाओ हालांकि वो समझा वो दिखा के समझा रहा था तो हमने उससे कहा कि भाई तुम जो है वो दिखाना दिखाना तुम बता दो मगर जब हमने जब उसने क्या कहते जब आपने मना कर दिया आवश्यकता नहीं है और फिर मैं कह रहा हूं दिखाओ तो उसने कहा फिर मैं वो बहुत कनेक्टिंग हो गया कि भाई क्यों दिखाऊं जी मैं क्यों दिखाऊं अब मेरे को लगा अच्छा ये जो है यही सिद्ध करना चाह रहा कि जो है इसको पंजाब में नहीं पता है। ठीक है। राइट राइट। हां बिल्कुल सही पकड़ा आपने। यही बात है। हां यही बात है। मगर इसमें एक ट्विस्ट है। अब मेरा मैं इसको देख के रोआसा हो गया। भाव विभोर हो गया। रात में जब मैंने देखा कि मेरे से अन्याय हो गया। मतलब अन्याय क्यों हुआ? वो अभद्र आचरण की वजह से जो मेरी एक दृष्टि उसके लिए बन गई थी। उसमें मैं उसके पक्ष को समझ नहीं पाया। समझ रहे हैं? तो मेरे अंदर इतनी वेदना हुई। मैं रात को ही उनको फोन कर रहा हूं। ऑपरेटर को और चीजें कर रहा हूं। आपको फोन मिला रहा हूं कि भाई तुरंत लाइव करो और जल्दी अपनी ये बात बताओ। है ना? और दोबारा से आयोजन करो। अब इसमें ट्विस्ट है। एक ट्विस्ट क्या है कि जब मैं उसकी वीडियो जो उसने लाइव किया

00:32:22:24 है जब मैं मैंने मैंने कहा शायद इसने वहां अपना ये पॉइंट जो है क्लियर किया हो। पंचावे वाला कि उसने क्यों कहा था कि वो जो है मैंने कहा कि इसका देख ले कंफर्म कर ले चलो अब रात में तो लाइव हो नहीं सकती 11 12 बज चुका था तो मैंने उसकी लाइव देखी जितना उसने बोला है तो सबसे पहले तो उस पूरे उसमें व्यक्तिगत कटाक्ष थे कि गुरुकुल तो तुम गए नहीं हो तुम्हें अपने पता नहीं तो यहां से फिर से जो एक वो करुणा वाला भाव आया था वो पहले डिप्लीट होना शुरू हुआ उसमें पूरे व्यक्तिगत गत कटाक्ष ही थे और वो सैद्धांतिक बातें जो थी उस पर अभी हम बात करेंगे व्यक्तिगत कटाक्ष ज्यादा थे कि तुम ये है तुम वो हो और तुम्हारा अपना ही गुरु विरोध है तुम्हारे गुरु कुछ कह रहे हैं आचार्य कुछ कह रहे हैं और तुम गुरुकुल नहीं गए हो और भाई हेतु नहीं पता इसको हेतु नहीं पता भाई तुम्हारा मेरे हेतु ना पता होने से धर्म की रक्षा होगी क्या शिवश नारायण द्विवेदी को हेतु नहीं पता है ये आपके आपके आपके मत की रक्षा कर रहे हो आप मेरे भाई सनातन की रक्षा करो सनातन की शिवश नारायण द्विवेदी को हेतु पता है या नहीं पता है

00:33:38:14 या शिवश नारायण द्विवेदी पंचाव्य आपको दे पाए पंचाव समझ पाएगा कि नहीं दे पाना तो अलग बात है पंचाव्य समझ पाएगा या नहीं समझ पाएगा मेरे भाई ये आपका लक्ष्य नहीं है अगर आप एक योद्धा हो धर्म के योद्धा आर्य समाज के योद्धा मत बनो सनातन धर्म के योद्धा बनो क्या मतलब है शिवा नारायण द्विवेदी को हेतु का मतलब पता है कि नहीं पता है भाई? इससे क्या मतलब? हम अच्छा खैर आगे दूसरी बात करें कि जब मैंने उसकी वो लाइन देखी तो उसमें उसने जो बातें प्रस्तुत की ये जो लास्ट में उसका बोलना है तो उससे यही सिद्ध हुआ कि वो यही दिखाना चाह रहा था कि शिवा नारायण द्विवेदी को पंचायत में नहीं आता है। अब लो तो वो जो करुणा भाव वाली चीजें तैयार हुई थी जो मैं कहना चाह रहा था तो मैंने कहा खत्म हो गया भाई हमने सही निकाला हम सही समझ रहे थे ये यही दिखा रहा है क्योंकि वहां पे बार-बार वो बोल ही रहा है इसको हेतु नहीं पता है इसको हेतु नहीं पता है ये गुरु ये गुरुकुल में रह के नहीं पढ़ा है ये नहीं है वो नहीं है भाई मैं नहीं है मेरे पास सिर्फ राम का नाम है मेरे राम का नाम है मेरे पास और मेरे गुरुदेव का आशीर्वाद मेरे पास इतनी चीजें ये जो है ना इनको भी कुछ मत समझो आप नहीं ऐसा नहीं है कि आपको नहीं पता है बता उस समय था

00:34:53:20 मैं मैंने आप समझे नहीं एक बात कहूंगा मैं मैंने मैं एक बात कहूंगा मैं हमेशा उस स्थिति में अपने आप को खड़ा रखना चाहता हूं जो सबसे विपरीत स्थिति हो आप समझ नहीं रहे हो एक आम इंसान को कहीं पे अगर कोई कहेगा कि तुम्हारा धर्म खराब है तो वो कहेगा मुझे पंचा दो कहोगे आप आम इंसान बनके लड़ना सिखाओ जनता को अपने धर्म की रक्षा करना सिखाओ भाई हम किसी मुस्लिम के पास जाएंगे भाई तुम्हारा जो है ईश्वर वो काम का नहीं है या वो जो है मनुष्य की चाह का विषय नहीं है उसमें बात करेंगे फिर कहेंगे भाई हमारा सर्वशक्तिमान नहीं तुम्हारा भी तो नहीं है तो कहेंगे हमारा है क्योंकि हमारे न्याय शास्त्र के अंदर आ जाता है वो वो हमारी अंदर की चीजें हो सकती है मगर जिन चीजों के आधार पर आप जो है मुझे गलत सिद्ध करने निकले हो उन चीजों से सनातन की रक्षा नहीं होनी है ठीक है इसमें मैं इसमें बस एक बात कहूंगा कि मैं मैं उस टाइम क्या बोलते हैं मैं इसीलिए बोल रहा था कि आप इनको देने दीजिए या बोलने दीजिए क्योंकि जो आप उत्तर देंगे ना क्योंकि मैं जानता हूं ये बात मैं आपको पहले भी आपको ये बात कही थी कि जब आप उत्तर देंगे तो उसमें वो पांचों पॉइंट कवर

00:36:08:28 हो जाएंगे अगर हाइपोथेटिकली स्पीकिंग या दुरदंतोष ने ऐसे मान लेते हैं कि आपको नहीं पता आपको कुछ नहीं पता उस हेतु के बारे में पंचाव के बारे में और या फिर न्याय दर्शन के बारे में लेकिन जो उत्तर आप देते हैं ना उसमें वो पांचों पॉइंट कवर हो जाते। ठीक है? लेकिन वहां तक चली बात ही नहीं गई थी तो उसके चर्चा ही नहीं हो पाई थी तो वो बात अलग है। बट ये मतलब ये मेरी मतलब थिंकिंग थी। ये मेरा प्रोसेस था और इसलिए मैं चाह रहा था कि आगे चली जाए। जो न्याय न्याय शास्त्र है मैंने उसका बहुत ज्यादा मैं आपको बता दूं बहुत ज्यादा अध्ययन नहीं किया क्योंकि मेरे अंदर ये भावना है उसके प्रति कि भाई न्याय क्या नाम है? न्याय। और अगर हम तर्क के साथ लड़ रहे हैं तो कहीं भी ऐसा नहीं होगा कि वो तर्क के विरुद्ध जाएगा। हां न्याय शास्त्र जो है न्याय करेगा तो कहीं अन्याय नहीं कर देगा। जब हम न्याय के लिए लड़ रहे हैं। है ना? न्याय के लिए लड़ रहे हैं तो वो कहीं अन्याय नहीं कर रही। तो इस दृष्टिकोण से मैंने बहुत ज्यादा उसको देखा नहीं है। हालांकि अगर आप उसको खोल खोल के पूछोगे जो पॉइंट्स तो हम उसका जवाब देंगे और अंत में जीत हमारी होगी। क्योंकि ये बात सत्य है कि मत पड़ो टक्कर में कोई नहीं है टक्कर में। यह वो वाली बात नहीं है कि भाई हम अपने उसके लिए कह रहे हैं। हम धर्म के लिए कह रहे हैं। सनातन धर्म सनातन धर्म का जो सिद्धांत है वो ऐसा सिद्धांत

00:37:24:07 है कि उसके सामने पूरी दुनिया का कोई माई का लाल आ के उस सिद्धांत को छोटा नहीं कर सकता है। मगर वहां हम ये नहीं कहेंगे पंचाव में आप हराओगे तो हम मानेंगे नहीं तो नहीं क्योंकि वहां विरोधी है वो तो न्याय शास्त्र को भी नहीं मानेंगे। खैर समय आने पर न्याय शास्त्र की बात भी होगी। तो अभी अब थोड़ा सा मैं उस चर्चा में हुआ क्या था उस पर भी थोड़ी रोशनी डाल दूं। सबसे पहली बात आती है कि इन्होंने अपनी लाइफ में बहुत सी चीजें ऐसी कही है जो बहुत मतलब एक वो व्यक्तिगत कटाक्ष वो शायद अच्छा पहले निर्भय ने जाकर के एक लाइव और किया था। ये भी बात है और उसमें बहुत सारी अभद्र बातें कही थी तो उसको इन्होंने प्राइवेट किया है जहां तक मेरी जानकारी में उसके बाद उसी लाइव की बात कर रहा हूं। उसी लाइव में अच्छा तो उसके बाद इन्होंने जो एक और लाइव किया जिसमें सभ्रांत भाषा में की ये बात वो अलग है हम मैं देखा ही नहीं मतलब मैं उसके बाद तो हट ही गया फिर मैं फिर मैं गया ही नहीं फिर आज तक नहीं गया हूं तो जो जो लाइव तुरंत तुरंत की थी ना इसने जाकर के वो लाइव में बताया जा आप ही ने बताया था कि बहुत गंदा गंदा बोला था तू तड़ाक वाली भाषा में खैर अब उसने क्षमा मांग ली है तो उसको लेकर के बहुत सारी विवेचना नहीं होगी

00:38:39:27 जी तो अब जो है वो वाली बात जो खत्म हो गई जो मेरे अंदर एकदम से भाव उमड़े ना कि मेरे से अन्याय हो गया क्योंकि मैंने इनकी जो लाइव देखी बाद वाली जिसमें इन्होंने क्लियर कर दिया कि भाई ये वहां पर यही दिखाना चाह रहे थे कि जो है शिवश को ये नहीं पता हां मुझे नहीं पता है इसमें मुझे कोई दिक्कत मैं क्या कहता हूं मेरी पहचान क्या है मैं नहीं हूं आचार्य मैंने कभी कहा मैंने क्या कहा प्रभु श्री राम का साधारण भक्त और श्रीमद जगुरु शंकराचार्य का अल्प अल्पज्ञ शिष्य क्या अल्पज्ञ शिष्य मैंने कभी नहीं कहा ठीक है हां मगर वो दृश्यम में जैसे चौथी क्लास फेल था ना वो वाट लगा के रख देता है ना पूरे सिस्टम की तो बस वैसा कुछ अगर देख अगर कुछ दिख रहा हो किसी को तो वो देख सकता है खैर अभी तो मैं कह रहा हूं कि हमारे समाज को ऐसा बनाओ कि समाज अगर मेले में जाए और वहां पे ऐसी पुस्तकें बिक रही है जिसमें माता यह माता को गाली दी जा रही है या मैं कह रहा हूं दयानंद जी को ही गाली दी जा रही है तो वहां ऑन द स्पॉट वो चीजें कर सके ऐसा हमें समाज को बनाना है और उस सब वैसे समाज के लिए हमें सिद्धांत देने होंगे कंक्लूजन

00:39:55:20 ठीक है अब वहां पर वो न्याय शास्त्र लेकर के नहीं जाएगा कि भैया ये तुम्हारे हमारे न्याय शास्त्र में पंचाव के रूप में ये चीज जो मैं बोल रहा हूं वो सिद्ध है कि नहीं सामने वाले को मतलब ही नहीं न्याय शास्त्र से ये तो इंटरनल लड़ाई हो गई न्याय शास्त्र के हिसाब से दो हिंदू जो आपस में बात कर रहे हैं उनके बीच में क्या सिद्ध होता है मगर सामने मुस्लिम होगा नास्तिक होगा विधर्मी होगा बाइबल वाला होगा वो थोड़ी ना न्याया शास्त्र के आधार पर तुमसे लड़ेगा तो वहां तुम क्या करोगे चुप रहोगे हम तो तभी लड़ेंगे जब नया शास्त्र को मान लोगे भाई नया शास्त्र को मानना क्यों है ये तो बताओ उसे वो तो सिद्ध करो तर्क वितर्क करके अच्छा तो शुरुआत होती है कहां से इसने अपनी लाइफ में कहा है कि करपात्री जी ने ये बोला ये अपना मत सिद्धि नहीं कर पा रहे थे मेरी पहली लाइन क्या थी? जिस प्रकार जो परम सत्य है जो परम तत्व है वो जीव जगत और जगदीश्वर के रूप में उद्भाषित होता है। एक ही परम सत्य जीव जगत और जगदीश्वर के रूप में उभाषित होता है और वही अपने आप को एक ऐसा रूप धारण करता है जो मनुष्य के व्यवहार का विषय बन जाए। यही कुछ कहा था वहां पर है ना? अब ये क्या हुआ कि मैंने अपना मत स्थापित किया ना वहां। इसमें कोई किसी को कन्फ्यूजन रही क्या? फिर इसने वहां जो अपनी लाइव की है उसमें बार-बार कहा है कि इनका मत स्थापित करने में भी मैं इनकी हेल्प कर रहा था। वह क्या हेल्प थी मैं बताता

00:41:10:24 हूं। इनको पंचाव में लिखने के लिए मेरी एक पंक्ति चाहिए थी। वो पंक्ति क्या थी कि जिस प्रकार जीव शरीर धारण करता है उसी प्रकार ईश्वर भी शरीर धारण करता है। ठीक? इनको मेरी एक पंक्ति चाहिए थी। तो जब तक मैं वो पंक्ति नहीं बोल रहा हूं। जो इनको चाहिए आखिर जो इन्होंने जो स्ट्रक्चरल तैयारी की है ना रणनीति कि कैसे मैं यहां तक लाऊंगा कैसे फसाऊंगा और मैंने बता दिया कि रणनीति को मैं क्यों नहीं वो करता हूं तो वो जो इसने जो तैयारी की थी वो तैयारी में वो पंक्ति इसको चाहिए थी तो इसने जो अपनी लाइफ में कहा है कि अपने मत को ही नहीं सिद्धि कर पाए अपने धारणा ही नहीं रख पा रहे थे मैंने मदद की वो मदद इन्होंने इसलिए की कि करपात्री जी ने कहीं पर अगर ये लिख दिया है कि जिस प्रकार वो जीव धारण करता है शरीर वैसे ही ईश्वर भी करता है तो बस वही एक बात है जो मुझे उनकी कृपात्री जी की माननी चाहिए ना भक्ति सुधा सुनू ना कर कृपात्री जी के प्रमाणिक शिष्य क्या कह रहे हैं उनकी सुनू बस तुमने जो वही एक पन्ना वो जो दो चार चीजें उनकी बता दी मैं वही सुनू उनका

00:42:15:03 तो मैंने अपनी ओर से अपना अपनी धारणा स्पष्ट की मगर ये वहां कह रहे हैं कि नहीं कर पा रहे थे क्यों क्योंकि इसको वो लाइन नहीं मिल रही थी जिस प्रकार जीव शरीर धारण करता है तो खैर वो तो एक अलग अलग बात है। अब दूसरी पॉइंट आता है कि अगला जो मामला हुआ पता है सच बात तो ये है कि जो हमारे बीच में जो नॉलेज वाली बातें हुई है वो शायद हमारे बीच में आधे घंटे की है। आधे घंटे की नॉलेज वाली बातें हैं। बाकी सब व्यर्थ का चला है और

00:42:48:19 आपकी कि मेरी? अब अब आ रही है। हां। तो वह जो चर्चा हमारी वह आधे घंटे की थी मात्र या शायद एक घंटे में हो जाती। वो दो चार पॉइंट है जो अच्छे थे जिन पर बात अच्छे से हुई है। तो पहली यही थी मैंने कहा कि अ ईश्वर शक्ति के रूप में है ना मिट्टी इत्यादि जैसे जो कण होते हैं वो बातें बाद की वो सगुण साकार कैसे हो? सगुण निराकार कैसे हुआ वो बात अलग है। मगर मिट्टी के कण से स्पर्श करती है। शक्ति जैसे यह मिट्टी का कण है मान लीजिए ठीक है इसको धक्का लगा तो उस धक्के ने इसको छुआ ना अब यहां पे वो क्या कह रहा है निर्भयार्य निर्भय का कहना है कि छुआ नहीं है अट्रैक्शन किया है भाई अट्रैक्शन भी एक क्रिया का नाम है आकर्षण बल मान लिया आकर्षण में बल जो है वो जाके छुएगा नहीं तो फिर वो कैसे आएगा छुएगा ना उसको स्पर्श हुआ बल का हुआ तो छुआ। अब मेरा कहना यह था कि जैसे एक बल इसके बगल में एक बाधा बन के है जिसके विपरीत ये मिट्टी का जो कण है इसके विपरीत

00:44:03:20 नहीं जा सकता। मतलब इसको चीर के इधर नहीं निकल सकता। ऐसा बल है ठोस है ना? और इसके द्वारा धक्का दिए जाने पे इधर ट्रेवल भी करेगा। अगर वो इधर खींचना चाहेगा तो इधर ट्रेवल भी करेगा। यही है ना बल बल है तो यानी कि मिट्टी के कण के लिए एक ठोस जैसा फील होने वाला बल जो है निर्मित किया निर्मित हुआ ईश्वर उस रूप में ठीक है हम तो मैंने कहा कि जब किसी चीज पर पड़ के जो सन रेज है वापस आती है तब हम उसको देखते हैं यही होता है ना तो हमारी जो ये जो रोशनी है उसके मार्ग में क्या ईश्वर ऐसी बाधा उत्पन्न कर सकता है कि उससे टकरा के चीज वापस आ जाए तो बाधा यहां पे भी तो उत्पन्न हो रही है। है ना? यहां भी बाधा ही उत्पन्न हुई। वहां भी बाधा उत्पन्न हुई है। रोशनी टकरा गई वापस आ गई या उसके पास रोशनी जाए ही नहीं। मैंने कहा भी अच्छा मगर वो ना तो इसको काउंटर कर रहा है इन तर्कों को। देखिएगा वो काउंटर क्योंकि वो उसके इंतजार में है। जिस प्रकार जीव बस वो एक पंक्ति पंचाव्य। उसको वहां ले जाना है तो वो काउंटर नहीं कर रहा है। हालांकि मैंने यह भी कहा कि भाई उसको पता नहीं होगा इसलिए नहीं कर रहा। मगर उसका उद्देश्य था कि मुझको उस पंक्ति के साथ वहां ले जाना। निर्भय

00:45:18:21 का यही उद्देश्य था। हम तो अब क्या होता है कि मैंने ये वाली बात कर दी। सबसे पहले स्पर्श वाली बात क्लियर हो गई कि स्पर्श का विषय बनता है। ठीक है? हम अब वो वाली बात अलग है कि ये अलग अगर उससे दोबारा बात होती है निर्भय से तो फिर उसमें हम अपनी चीजें बताएंगे कि फिर वो जो तत्व से रोशनी टकरा के वापस आ रही है तो उस पर रूप रंग कैसे आया है ना रूप रंग कैसे आया वो वो चीजें बात की है। देखिए नहीं नहीं वैसे क्या है कि आप इसको मतलब साइंट ये कन्वर्सेशन ना बहुत ही साइंटिफिकली चली जाती। ठीक है लेकिन जिस साइंस और जिस फिजिक्स के लॉस की आप बात कर रहे हैं उसका मूल क्या है? वो भी तो ईश्वर है ना। वही तो भाई जब हमने अचिंत शक्ति मान ही रहे हो। सीधी सिंपल सी बात है। जब आप धक्के के लिए मान रहे हो तो आंखों का विषय बनने के लिए मान लो। इसमें एक और बात कहूंगा। इसमें भी लिमिटेशन है। जैसे क्या हुआ कि मान लीजिए विज्ञान की भाषा में हमारा जो ये यूनिवर्स है वो फोर फोर डायमेंशनल है। ठीक है? एक मिनट हां बोलिए मानने पे भी एक है। क्यों मानना पड़ेगा? क्योंकि मनुष्य की चाह है कि कोई हो ऐसा जो सब कुछ कर सके। सब कुछ कर सके। में जो जो चीजें बाधांगी उसको आप अचिंत शक्ति से आप मानते चले जाओ।

00:46:34:00 वरना यहां चाह का विषय नहीं रह जाएगा। फिर ईश्वर की सिद्धि नहीं हो पाएगी। यह सब सोचना है ना। इसलिए मानना पड़ेगा। मानना पड़ेगा। चलिए अब आप बोलिए। मैं तो मैं यही कह रहा हूं कि जैसे मतलब कम पॉलिसी साइंटिफिकली चली जाती है लेकिन उसका ना फिर फिर वो डिबेट जो है फिर वो मूल वाली ठीक है वो अलग वो अलग हालांकि मेरा वो क्षेत्र है भी नहीं वो फिर जिसमें नहीं अगर मान लीजिए कन्वर्सेशन चल भी रही है या बातें चल रही है अब आप क्या है कि आपकी भी लिमिटेशन है ना मतलब आप क्या है इस यूनिवर्स के को क्या किसी भी एक्शन को जो फिजिकल एक्शन हो रहे हैं जो व्यवहारिक एक्शन हो रहे हैं जो काम हो रहा है उसको आप इसी के बनाए हुए रूल्स के अंडर ही मतलब के हिसाब से ही आप उसको प्रूव कर सकते हो। ठीक है? मैंने ये भी कहा। मैंने ये भी कहा जो आप कह रहे हो। मैंने ये भी कहा जैसे ये नोटबुक है। ठीक है? इसका कलर क्या है? इसका कलर क्या है? इस चीज में हमारी आंखें प्रमाण है। जी। इस चीज में हमारी आंखें प्रमाण है। अब मैं कहूं कि यहां जो आवाज है उसके लिए भी मेरी आंख प्रमाण होगी। तो मेरी आंख आवाज के विषय में प्रमाण नहीं हो सकती। तो यह अती्द्रिय विषय है। हां बिल्कुल अती्द्रिय विषय एक समय पर जाकर तो वहां अचिंत शक्ति को आपको मानना पड़ेगा। अब क्यों मानना पड़ेगा? मान लो देखो जाके वो कहता है जावेद अख्तर

00:47:49:06 कहते हैं मान लो। क्यों मान लो? क्योंकि मनुष्य में चाह आ रही है। आप मनुष्य की चाह का विषय सिद्ध करो। फिर क्या है? क्यों आ रही है? नहीं तो अपने आप को पागल मान लो। नहीं तो अपने आप को पागल मान लो। जो चीज है नहीं उसको खोज रहे हो। ठीक है? तो मैं इसमें हां एक बात कहूंगा जैसे कि मैं इन जनरल सबकी सभी ऑडियंस के लिए बात बोलता हूं कि क्या है ना कि जैसा कि ये यूनिवर्स की अपनी लिमिटेशन है। इस ब्रह्मांड की अपनी लिमिटेशन है। ऐसे बहुत सारे ब्रह्मांड है जिसको मतलब आप मतलब सोच या समझ सकते हैं या फिर जो चीजें कर सकते हैं। अब क्या है कि जो मॉडर्न साइंस है ना वो इनफेरेंस के बेसिस पे चलती है। जैसे कोई टूल, कोई मशीन, टेलिस्कोप, माइक्रोस्कोप या फिर कोई इंस्ट्रूमेंट जिससे आप क्या करते हो? ऑब्जर्व करते हो और उसको इनफर करते हो। जैसे कि प्रत्यक्ष या परोक्ष बोल देंगे उसको। प्रत्यक्ष या परोक्ष। ठीक है? लेकिन यह मेथड जो है वो के वो आपको ईश्वर की चाह या फिर ईश्वर की डिस्कवरी से अह को प्राप्त नहीं करवा सकती। ठीक है? इसीलिए जगुरु आदि शंकराचार्य ने एक अपना एक ग्रंथ लिखा अपरोक्ष अनुभूति। ठीक है? जिसमें आप क्या बोलते हैं और ये उन्होंने तीसरा मेथड बताया इस इस हमारे इस संसार के हिसाब से इस

00:49:04:07 जगत के हिसाब से कि अपरोक्ष मतलब ना तो डायरेक्ट परसेप्शन ना इनफेरेंस ना डायरेक्ट मतलब प्रत्यक्ष ना परोक्ष। ठीक है? यह तीसरा मेथड बताया जिससे आप मतलब ब्रह्म को समझ सकते हो। ठीक है? और वह होता है मतलब इस एक्सटर्नल वर्ल्ड के बियों्ड सोचना या जानना और वो क्या है वही मूल चाह अस्तो मादम तमस मृत्य मृतम गमय वो जो मूल चाह है ना वो मूल चाह वो अपरोक्ष अनुभूति कराएगा तब आपको ब्रह्म की अनुभूति आदि होगी फलाना फलाना ठीक है तो आपका जो कन्वर्सेशन है वही चीज उसको समझनी थी ठीक है अगर वो ये समझ जाता कि जो ये परोक्ष और प्रत्यक्ष और अपरोक्ष के बीच का जो है ना गैप ये गैप वो जो गैप और वो जो अपरोक्ष अनुभूति है वो ईश्वर है वो ब्रह्म है ठीक है जो हम क्या बोलते हैं ऑफ कोर्स इससे नहीं जा सकते तो वो जो का लगना या नहीं दिखना जी जिसको आपने एक वर्ड दिया था अचिंत शक्ति ठीक है बस लास्ट पॉइंट बोलूंगा तो वही अचिंत शक्ति जो है वही ईश्वर है या वही अचिंत शक्ति का जो मूल है वो ईश्वर या ब्रह्म है बस ये कह रहा था बोलिए तो फिर भी जो क्योंकि ये वाली हमारी चीजें क्लियर है कि वो आंखों का विषय कैसे बन जाता है उसमें तत्व क्या है क्या नहीं है वो

00:50:19:08 विषय क्लियर है हमारी तो जो यह जो जहां पे वो बात हो रही थी उसका मैं जवाब दे सकता था तो मैं दे रहा था मैंने दिया बट जो इतना खोल करके जवाब देना था ना जैसे अभी मैंने दिया है अच्छा स्पर्श वाली बात पे उसको लगा कि मैं मिट्टी के कण को स्पर्श करने की बात नहीं कर रहा हूं मैं मनुष्य द्वारा ईश्वर को स्पर्श करने की बात कर रहा हूं तो उसमें भी थोड़ी बहुत देर मतलब दूसरी बातें करने लगा तो मैंने उन बातों को इसलिए नहीं छुआ है ना कि हमारा ट्रैक ना बदल जाए। ट्रैक चल रहा है जो चलता रहे। तो मैंने अगर वह ऐसे कहने लगा जैसे उसने कहा कि भाई ईश्वर स्पर्श करता है। मैंने कहा ईश्वर नहीं करता तो तुम बताओ तुम क्या कौन स्पर्श करता है? मतलब मैंने उस पर छोड़ा। हां हां क्योंकि बात तो वही है। ईश्वर ही स्पर्श कर रहा है ना मिट्टी के कण को जब वो मिट्टी के कण इकट्ठा हो रहे है। है ना? अदृश्य शक्ति के रूप में वही स्पर्श कर रहा है। हां बिल्कुल। तो स्पर्श का व्यवहार वहां हो रहा है। यानी वो व्यवहार बन रहा है। या मैं मैं मैं इसको थोड़ा सा और एक लाइन में और बोल देता हूं। मान लीजिए इस पे भी कोई किसी उस उस व्यक्ति ने ये कर दिया है कटाक्ष कर दिया या फिर कुतर्क या तर्क कर दिया अपना कि नहीं नहीं भाई ईश्वर कैसे कर रहा है? वो तो ऑटो एटॉमिक एनर्जी से आपस में हो रहा है। न्यूक्लियर एनर्जी से आपस में हो रहा है। तो वो जो न्यूक्लियर एनर्जी है उसका मूल क्या

00:51:34:14 वो ईश्वर है जो न्यूक्लियर एनर्जी दे रहा है या जो फिर वो एटम्स में आ रही है और फिर वो आपस में इधर उधर धक्का लग रहा है मुश्किल या फिर ग्रेविटेशनल एनर्जी या फिर दूसरी फलाना फला या सगुण का कुल मिलाकर के सगुण निराकार का अर्थ यही है कि वो व्यवहारिक है जी सगुण निराकार का अर्थ यही है कि वो व्यवहारिक है व्यवहारिक है व्यवहारिक है तो हमारी किसी ना किसी इंद्री का विषय तो है ही है ना व्यवहार का मतलब क्या है करेक्ट है ना विषय है अब अब जो है वह व्यवहारिक है तो मैंने उसकी जब व्याख्या की तो थोड़ी बहुत देर उसमें चली और फिर मैंने बताया कि भाई आंखों की रोशनी में बाधा उत्पन्न हुई उससे टकरा के वापस आई तो वो हो गया वही बाधा मिट्टी के कण के लिए उत्पन्न हुई थी अब वो रोशनी के लिए उत्पन्न हो रही है ठीक इसमें आगे चले उसने क्या किया ऐसे ऐसे वो अनगिनत बाधाएं ला सकती है अनगिनत वो हम सोच भी नहीं सकते इसमें उसने क्या किया इतना मैं कहूंगा कि अपने उस लाइन के चक्कर में के वो जीव जिस तरह से शरीर धारण करता है जो कृपा जी महाराज के ग्रंथ से उसने पढ़ लिया है और उस को अपने न्याय पंचा में जो डालना था वहां जाके एंड करना था उसको बूम करना था उसके हिसाब से जो उसको एंडिंग क्लाइमेक्स उसने रच रखा था इस फिल्म का तो वो उसकी रक्षा कर

00:52:49:18 रहा था वो उस पर ला रहा था शरीर धारण करता है ये क्यों नहीं बोल रहा है ये व्यक्ति शरीर धारण करता है जैसे जीव और आपने बोला भी है अच्छा वहां कह रहा है कि भाई वो खुद उनके क्लियर नहीं थे सोचिए यहां पे खुद बता रहा है। आपने एक वीडियो में बोला भी है कि जिस प्रकार से जीव शरीर धारण करता है वैसे ईश्वर भी करता है। तो इसका मतलब मेरा क्लियर है। मगर वहां अपनी लाइफ में बता रहा है कि मेरा क्लियर नहीं था कांसेप्ट। है ना? वो उसने क्लियर करवाया। ये बता रहा है बार-बार। वो उसने क्लियर करवाया। खैर इससे आगे बढ़ी। हम लोग इस पे आ गए। धारणा स्पष्ट हो गई कि जिस प्रकार जीव शरीर धारण करता है वैसे भी वैसे ही ईश्वर भी शरीर धारण करता है जिसे अवतार कहा जाता है। है ना? हम आगे चले अब आगे वो आ गया सब कुछ कर सकता है तो ये कर सकता है क्या तो उस पर तो आप लोगों को मालूम ही हम हमारा कितना पावरफुल कांसेप्ट है फिर भी मैं थोड़ा सा समझा देता हूं इसको अब वो काउंटर करे तब ना जो प्रश्न रह जाते हैं जब सामने वाला काउंटर ही नहीं कर रहा है तो वो बाकी के प्रश्नों का उत्तर कैसे दूंगा मैं अब मैं देता हूं देखिए दो और दो पांच कर सकता है क्या दो और दो पांच होता है यह क्या कोई क्रिया है क्या ये कोई एक एक्शन है क्या?

00:54:05:10 हां ये एक इंफॉर्मेशन है कि दो और दो पांच होते हैं और दो और दो चार दो और दो दो और दो चार होते हैं। ये एक इंफॉर्मेशन है। अब उसका कहना है कि दो और दो पांच कर सकता है। इसका मतलब इंफॉर्मेशन चेंज करने की बात हो रही है ना। पहली बात क्रिया की बात नहीं हो रही है कि इस पत्थर को उठा के वहां फेंक सकता है। ये कोई क्रिया की बात नहीं हो रही है। क्या हो रहा है? इंफॉर्मेशन इंफॉर्मेशन चेंज हो सकती है क्या? बहुत साधारण सी बात है। अच्छा वास्तविकता में तत्व कितने हैं? आर्य समाज की बात ले लो। आर्य समाज की बात ले लो। कोई कहे ये तीन तत्व है केवल वास्तविकता में। हमको दिख कितने रहे हैं? जीव को आभास क्या हो रहा है? तीन से ज्यादा तत्वों का आभास हो रहा है ना। तभी तो बंधी है। बंधन में है। तभी तो बंधन में है। अगर आर्य समाज की धारा से भी चले। शंकराचार्य को अभी छोड़ दो। मगर जीव को आभास हो रहा है ना झूठ का तीन से ज्यादा तत्वों का हां हो रहा है हो रहा है तो यानी कि ईश्वर गलत इंफॉर्मेशन दे रहा है हां हां बिल्कुल हां गलत इन दे रहा है तो वही गलत इन नहीं दे सकता है कि दो और दो पांच होते हैं हां है ना अब बात ये आ जाती है कि रियलिटी में नहीं हुआ है इंफॉर्मेशन चेंज की है तो भाई रियलिटी में तो तीन से ज्यादा तत्व नहीं

00:55:20:16 है रियलिटी में तो कोई किसी की मां नहीं है कोई किसी का भाई नहीं जितना कोई किसी का भाई है, जितना कोई किसी की मां है, उतना ही कोई सर्वशक्तिमान ईश्वर अवतार लेता है। बस सिंपल मैंने कब कहा कि भाई उस दुनिया में अवतार लेता है मुक्त की दुनिया में। समझ रहे हैं? तो कहने का तात्पर्य क्या है? कि रियलिटी में नहीं हुआ तो भाई कोई रियल में कोई किसी की मां भी नहीं है। कोई किसी का भाई रियल में ये सब जो आप इतने तत्व देख रहे हो ये है ही नहीं। रियल क्या है? तीन तत्व है। अभी आर्य समाज के अनुसार बात कर रहा हूं। वो अद्वैत की बात तो बाद की। तीन तत्व निर्गुण निराकार, सगुण साकार ये सब सगुण निराकार वो तो बाद की बात है। ठीक है? अच्छा एक चीज और है। अब ये हमारे ग्रंथों के आधार पे हमको बता रहे। जबकि मैंने शुरू में तीन वो तीन बेर खाती है। वो तीन बेर खाती थी। बिजना डुलाती है। वो बिजना डुलाती थी। हम इसमें वो तीन बेर बेर शब्द का उपयोग दो बार विजुना डुलाती है बिजना बिजना शब्द का उपयोग दो बार कौन से शब्द का उपयोग किस लिए तुम कैसे तय करोगे भाई हमारे आचार्यों ने क्या कहा है जब हमारे आचार्य ठो ताल ठोक ठोक करके ये कह रहे हैं कि हमारा जीव हमारा जो ईश्वर है वो जगत बनाता ही नहीं बनता भी

00:56:35:20 है तो फिर तुम कहां से कह रहे हो कि वो शरीर धारण नहीं कर सकता ईश्वर ही हमारे यहां तो ईश्वर ही शरीर धारण कर रहा है भाई तुम्हारा जो वो है अगर अद्वैत के हिसाब से देखेंगे तो ईश्वर ही शरीर धारण कर रहा है। हालांकि अभी मैं ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं दे रहा हूं। मगर इस बारे में पंचाव के बारे में वो अगर बात हुई निर्भय से तो फिर बात होगी वहां अभी ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं है उस संबंध में। मगर क्या कहते हैं ये? जब हमारा ईश्वर जगत बनाता ही नहीं, बनता भी है तो तुम अब हमारे ही आचार्यों का नाम लेके हमें बता रहे हो कि अवतार नहीं ले सकता। वो ये मान रहे हैं। यह कैसे कह रहे हो? और अगर तुम्हें आचार्यों का वो करके करना था तो तुम आचार्यों के पास जाओ। वहां जाके कहो उनसे कहो कि भैया तुम्हारा न्याय से मैच नहीं खा रहा है।

00:57:28:26 सीधे अच्छा दूसरी बात एक ये आ जाती है तो इंफॉर्मेशन वाली बात आप समझ गए कि ईश्वर को इंफॉर्मेशन बदलनी है इन सब चीजों में। वंद्या पुत्र में ईश्वर ऐसा पत्थर में यह सब इनफेटिव वाली बातें हैं। यहां इंफॉर्मेशन चेंज करनी है। आपको महसूस होगा कि हां ईश्वर ने वह कर दिया जो मैं चाहता था। हां। खैर तो बात ये है क्या कि अब मान लो चलो इस पर भी आ जाए व्यक्ति कि भैया उसने रियल में नहीं किया। अब तू सिद्ध कैसे करेगा? कैसे करेगा सिद्ध? उसने तो तुम्हारे मन की इंफॉर्मेशन बदल दी। तुम खुद बोलोगे दो और दो पांच होते हैं। फिर सबूत क्या है? सबूत क्या है? कि भैया और जितने लोग हैं उनका भी मन बदल दिया और लोग है ना जैसे करपात्री जी ने उसमें एक बात लिखी है नास्तिकवाद आस्तिकवाद में कि वैश्या को ऊपर से आप देखेंगे ना वो बात ही पारमार्थिक धरातल से दिव्य दृष्टि से हो रही है उन्होंने बात मान उन्होंने उसमें ये लाइन लिखी है कि वैश्या को कुमारी नहीं बना सकता क्या ईश्वर वैश्या को कुंवारी बना सकता है तो उन्होंने क्या कहा जन्मांतर में तो बना ही सकता है ये जन्मांतर कौन देख सकता है? जन्म जन्मांतर कौन? जन्मांतर

00:58:44:02 देख सकता है। जिसको दिव्य दृष्टि प्राप्त है। जो इस दुनिया के बाहर जाकर के देखेगा कि व्यवहारिक भौतिक जगत क्या है? यही व्यक्ति जन्म ले रहा है। दूसरा क्या भौतिकता को मानने वाला व्यक्ति देख सकता है कि जन्मांतर हुआ है? नहीं हुआ है। तो क्या हुआ है? कि उसने दूसरा शरीर धारण किया है। मगर इस दूसरे शरीर को आप दूसरा सिद्ध कैसे करोगे? जितनी भी भौतिक साइंस है वो तो शरीर के जो अवयव होते हैं फिंगरप्रिंट ये सब इनसे पहचान करती है। तो क्या ईश्वर दूसरे शरीर को भी वही फिंगरप्रिंट दे सकता है? हां दे सकता है। हो गया दे सकता है। क्या वही के वही तिल लगा सकता है? जहां पहले तिल था वहां लगा सकता है। तो सिद्ध कैसे करोगे कि वो शरीर नहीं है। और फिर जो अगर क्वालिटी की जांच हो सकती होगी कि वैश्या का जो शरीर है उसमें क्या चीज क्षतिग्रस्त होती है और बाद में क्या चीज जो है कौमार्य के लिए अनिवार्य होती है उसकी टेस्टिंग कर लो। तो भौतिक क्या ईश्वर ऐसा शरीर दे सकता है? शरीर बदला हुआ है। यह ईश्वर जानता है। यह दिव्य दृष्टि ईश्वर पर विश्वास रखने वाला जानता है। मगर जब तक कोई ईश्वर पर विश्वास नहीं रख रखता है तब तक वो ये नहीं कह सकता ये दूसरा शरीर है। सिद्धि नहीं कर पाओगे। तो दूसरा शरीर सिद्ध ना कर पाने की स्थिति में भौतिकता

00:59:59:03 के अनुसार क्या हुआ? वैश्या को कुमारा बना दिया। कुमार्य दे दिया ईश्वर ने। अब तुम मानो चाहे ना मानो। अब जो नहीं मानेगा उनके मन की इंफॉर्मेशन बदल सकता है। सब कहने लगेंगे हो गया हो गया हो गया। इसी को कहते हैं ईश्वर की माया शक्ति। मेरे भाई ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करना है ना। जीव की चाह का वास्तविक विषय बनाना है ना। अधर्मियों को विरोधियों को खदेड़ना है ना। नास्तिकों का मुंह बंद करना है ना। ये है वो शक्ति सर्वशक्तिमान ईश्वर की शक्ति। नहीं हरा पाएगा कोई इस शक्ति को। हम अपने आचार्य के लिए अपनी परंपरा के लिए नहीं लड़ते हैं। हम धर्म और ईश्वर के लिए लड़ते हैं। धर्म और ईश्वर। हां। हां आचार्य का सिद्धांत हमारे पास है। वो हथियार है। ब्रह्मास्त्र है वो। यह शायद इस जीवन में आप लोग समझ पाओ। अपने दिल पे अपने हृदय पे हाथ रख के शीशे में देख के अपने आप को देखो एक बार कि शिवश नारायण द्विवेदी कहना क्या चाह रहा है। भाई उसको देखो ध्यान से। पहले ही अपना पर्सेक्टिव मत बनाओ विरोधाभास का कि वो कहना क्या चाह रहा है। एक बार झांको अपनी आत्मा में। खैर तो अविद्या वाली बात क्लियर हो गई। फिर इसके बाद हम

01:01:14:04 लोग अब अविद्या वाली बात पर भी इन्होंने काउंटर नहीं किया उसमें चर्चा में। है ना? अच्छा एक वो आना जाना वाली बात हुई थी बीच में आना जाना पीछे पड़ गए कि वो जो है आपने देखना शब्द क्यों कहा है? आसमान को तो देख ही नहीं सकते। भाई मंत्र को देखा था क्या ऋषियों ने? काहे के लिए मंत्र दृष्टा मंत्र दृष्टा लिखे पड़े हो। व्यवहार में कहना पड़ रहा है ना व्यवहार कैसे करोगे करेक्ट और ये जो ज्ञान है तो ये जो ज्ञान है ईश्वर का ये ज्ञान भी ज्ञान के रूप में है कि मंत्रों के रूप में ही है मंत्रों के रूप में होगा तो कहीं ना कहीं किसी देश काल परिस्थिति से बाधित होगा होगा ना कहीं ना कहीं ऐसी जगह होगी जहां नहीं होगा क्योंकि मंत्रों के रूप में कोई समय धारा में नहीं है और क्योंकि वो उसका रूप है मंत्र एक रूप है तो मंत्र के के रूप में ईश्वर का ज्ञान भी तो अवतरित हो रहा है। प्रणव के रूप में ईश्वर का ज्ञान भी तो अवतरित हो रहा है। अरे इसको दूसरे तरीके से ले लीजिए ना आप नमी का ले लीजिए एग्जांपल पानी और जो पानी का जो मूल है वो क्या है? एटॉमिक स्ट्रक्चर H2O हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिलकर बनता है। ठीक है? अब वो तो हमारे इस क्या बोलते हैं? एटमॉस्फियर में तो है ही सराउंडिंग्स

01:02:29:06 में। लेकिन क्या हम उस सराउंडिंग में होने के बाद भी क्या हम उससे अपनी प्यास बुझा पाते हैं? नहीं हमें व्यवहार करना पड़ता है। उसको गिलास में पानी के रूप में लेना पड़ता है और फिर पीना पड़ता है। तो इसने मुझे इसने इसने मुझे वो भी नहीं दिखाने दिया क्योंकि ये हर चीज इसमें अब धैर्य रख रहा था कि मैं सब चीजें यहां मान लूं। इसको पंचांग पे ले जाऊं और वहां इसको बिल्कुल क्लियर कट चुनौती दे दूं। है ना? ये इस चक्कर में इसने कहीं काउंटर नहीं किया। हालांकि भाई क्योंकि उस समय मैं उस पर्सेक्टिव से देख नहीं रहा था तो मुझे ये भी लग रहा था भाई काउंटर होगा नहीं इसके पास नहीं तो थोड़ा बहुत तो करता जैसे अविद्या वाली बात का नहीं किया पीछे धारण करने वाला नहीं किया कि कौन सा तत्व है वो फिर रूप कैसे आ गया नहीं किया तो वहां उतनी ज्यादा खुल के बात नहीं हो पाई फिर तीसरा पक्ष आया ये कौन सा ये वाला कि भाई पहचानेंगे कैसे ईश्वर को फिर यह लक्षण वाला पक्ष आया किसी इन्होंने कहा है कि कोई लिख के गया इनके यहां भाई ठीक है। उनको मैं क्या ही कहूं जो लिख के गए हैं। मगर बात यह है कि जब मैंने इनसे पूछा प्रणव को आपने क्यों स्वीकार किया है? तो उसमें इन्होंने शास्त्र का ही प्रमाण दिया। तो मैं भी तो वही कह रहा हूं। ईश्वर कौन है? कौन नहीं है? इस विषय में शास्त्र प्रमाण है। शब्द प्रमाण है। शब्द क्या

01:03:44:07 है? शास्त्र ही तो शब्द है। शास्त्र मगर कौन से शास्त्र? कौन से शास्त्र? जो गुरु गोविंद और ग्रंथ के सामंजस्य से जो शास्त्र होंगे वो शास्त्र शास्त्र है नहीं तो वो भी कहेगा रामपाल मेरा भी शास्त्र ले लो तो गुरु उसमें आना पड़ेगा ना गवाही देने के लिए परंपरा से हां ये वही शास्त्र है जो पहले था वही है ये गुरु को लाना पड़ेगा ना परंपरा आप तरीके से आप यही टेस्ट कर सकते है आपके पास कुल मिला के शब्द वो भी है जो शास्त्र में है शब्द वो भी है जो गुरु के पास है इन दोनों में सामंजस्य होना चाहिए ऐसा नहीं है कि शास्त्र कुछ कह रहा हो इसी के द्वारा स्वीकार शास्त्र कुछ कह रहा है और यह कुछ कह रहा है। नहीं अगर इन्होंने जिस शास्त्र को स्वीकार मान्यता दी है वो शास्त्र भी वही बात करे ये भी वही बात करे दोनों तब वो जो है माना जाएगा। तो इन्होंने प्रणव के विषय में और बहुत सी चीजें हैं जो अगर हमारे बीच में चर्चा होगी तब के लिए मैंने रख रखी है। इन्होंने काउंटर नहीं किया। जब मैंने पूछा भाई प्रणव को तुम मोक्षदायक क्यों मान रहे हो? ईश्वर का एकमात्र प्रतीकात्मक क्यों मान रहे हो? उन्हीं को जो शास्त्र में दिए हैं। किसी को भी मान लो जो गूंगा बोल रहा है कुछ भी मान लो गूंगा बोल सकता है। उसको भी पूजा में हवन में ये करने लगो हवन में यज्ञ में नहीं करेंगे। वही करेंगे जो शास्त्र

01:04:59:15 में लिखा है तो बस राइट। एक जगह तक ला सकते हैं। हम चीजों को तर्क खूब कर सकते हैं। तर्क की पराकाष्ठा पे हम खड़े हैं। मगर एक जगह तो हमें श्रद्धा लानी पड़ेगी ना। विश्वास लाना पड़ेगा ना। वेद वेद अपुरुष है। इसमें क्या प्रमाण है? वेद अपुरुष है। इसमें यही प्रमाण है कि उनका कोई कर्ता नहीं है। उनका कोई करता नहीं है। इसलिए भाई वह कर्ता है। और वो कहां से मिला वो भी शास्त्र हमारे लिए तो हमारे लिए तो वेद वाक्य क्योंकि प्रमाण है तो उसने कह दिया वेद अपुरुष है तो मानना है। वेद अपुरुष है। मगर ये तर्क की पराकाष्ठा है। तर्क की पराकाष्ठा क्या है कि कुरान और बाइबल कहती है मुझे इसने लिखा। मुझे इसने बनाया। वेद कहता है मुझे किसी ने नहीं बनाया ये तर्क की पराकाष्ठा था करेक्ट हम है ना तो यहां तक आ गई बात फिर इन्होंने काउंटर नहीं किया और इन कई और बातों का काउंटर नहीं किया इन्होंने जैसे मैंने पूछा कि भाई फिर जो है जो नहीं जो निर्गुण निरा जो निर्गुण है एक रस है वो सगुण कैसे हो रहा है उस पर भी काउंटर नहीं किया अब आ गई बात कुल मिलाकर के पंचाव्य पे है ना तो पंचाव्य तो आपने देखा ही है। पंचाव का मामला क्या है? उसको अगर एक खोलते वहां

01:06:14:19 पर तो हमारी चीजें हैं। अगर चर्चा होगी तो देखा जाएगा। और अंत तो कथवा एक बात और बता दूं उस पूरी कन्वर्सेशन में चार घंटे की कन्वर्सेशन एक पॉइंट है जिसका ये अर्थ निकाल सकते हैं कि देखो यहां हमारा पल्लाव भारी है। वो पॉइंट क्या है कि उसने पंचा कहा। मैंने कहा भाई पंचा बताओ। तो उसने कहा क्यों बताऊं? ये पॉइंट है। तो पंचा वो ये कह सकते हैं कि पंचाव का नाम सुनकर हटाया गया। हमारा कहना यह है इसने अभद्राचरण किया और यह यह नहीं बता रहा है सिद्धांत क्या है इस पर लड़ रहा है इसको पंचाव नहीं आता और वह यह दिखा सकते हैं कि भाई इनको पंचाव से सिद्ध नहीं कर सकते थे इसलिए हटाया गया बस बाकी पूरी कन्वर्सेशन में हमारी एक बात उसने नहीं काटी अब इसके पीछे सामर्थता का दोष है कि सामर्थ्य नहीं था असामर्थता का दोष है या वो जो उसकी रणनीति थी स्ट्रक्चरल उसको करना था ना उस पंक्ति को बचा के लाना था जीव धारण जैसे जीव शरीर धारण कर सकता है। मेरी प्रतिज्ञा पंचा में जो प्रतिज्ञा है वो बना समझ रहे उसमें हो गया उसमें उसके साथ चूक हो गई। लास्ट तक बेचारा सारे सीने में पत्थर रख रख के चीजें वो लेके आ रहा है शुरू से चार घंटे तक अपने आप को धैर्य रख रहा है। हाथ भी जोड़ रहा है कई जगह पर। हालांकि वो अभद्र आचरण था मगर उसके मन में उस समय नहीं

01:07:29:25 रहा होगा हाथ जोड़ने का। मगर क्यों जोड़ रहा है? चलो मैं फंस गया। मगर आप टॉपिक पे आओ। हाथ जोड़ रहा हूं। क्यों कर रहा है? अपने उस वो वो जो पंचा की प्रतिज्ञा है ना उसकी रक्षा के लिए समझ रहे हैं लेकिन उस प्रतिज्ञा पे भी डिस्कशन नहीं हुई ना नहीं तो वो तो उसका अपना वो अगर पंजाब मां खुलता अगर ये ये ना कह करके कि भाई मैं क्यों बताऊं मैं पंजाब में ये ये चीजें मुझे चाहिए दे देंगे भाई दे देंगे तुम काटो तो सही और एक सनातन शंकर जी ने भी बातें की है कि यह तो एक पक्ष है कि पंचाम का भी हम दे सकते हैं। उसमें कोई दिक्कत नहीं। मगर एक पक्ष ये भी है मान लो कि पंचा से मैच नहीं खा रहा है। ठीक? नहीं दे पा रहे। तो क्या भगवत गीता का वो श्लोक हटा दे। यदा धर्मस वाला या जो वेद में जो लिखा हुआ है कि ईश्वर नाना प्रकार के अवतार लेता है वो प्रकट होता है वो हटा दे। अब तुम कहोगे उनका वो अर्थ नहीं है। यही कहोगे तो फिर बात वही घूम फिर के आ जाएगी। तुमको प्राप्त कैसे हुआ? करेक्ट। कैसे प्राप्त कैसे हुआ? फिर परंपरा पे आ जाएगी। कहने का मतलब ये है जैसे इन्होंने उसमें भी

01:08:44:26 कहा कि भाई उसमें ही लिखा है कि वो जो है बाधित हो रहे हैं। उसमें ही जो है वो सर्वशक्तिमान भी है। बाधित हो रहे वाला पकड़ रहे हो वो वाला नहीं पकड़ रहे हो। तो अगर तुमको यह लग रहा है निर्भय आर्य से मैं कह रहा हूं। अगर तुम्हें यह लग रहा है कि शास्त्र में एक जगह भगवान बाधित दिखाई दे रहे हैं और तुमको अब ये विश्वास नहीं हो रहा है कि ये जो बोल रहा है जो व्यक्ति इस पर क्वेश्चन करने वाला है कोई भी व्यक्ति हो कि भाई मुझे उस शास्त्र पे विश्वास नहीं हो रहा है मुझे उस बात पर विश्वास नहीं वो बाधित नहीं क्योंकि वो बाधित की एक्टिंग तो कर रहे हैं। इसने कई कई जगह पे वो दिया है। खुद ऐसे तर्क दिए हैं कि पुलिस वाला कहीं पे खड़ा है। तो हम कैसे पहचानेंगे उसे भाई उसकी वर्दी से पहचानोगे। अब वो अगर भष बदल के खड़ा होगा जासूसी करने के लिए तो कैसे पहचानोगे? पुलिस वाला अगर भष बदल के खड़ा होगा जासूसी करने के लिए तो कैसे पहचानोगे? तो भैया वहां पे आपको कोई शब्द प्रमाण दिए जाएंगे। मैं हां मैं इसका अच्छा एक बात और है। एक बात एक बात और है। पुलिस वाला अगर कोई खड़ा है उसमें तो शब्द ही प्रमाण है। शब्द ही प्रमाण है। बोल दिया। हां हां हां क्योंकि क्योंकि रियलिटी में क्या है? मतलब अगर व्यवहार की रियलिटी में देखें तो रियलिटी में क्या है? वो तो पुलिस वाला ही है ना वही खड़ा है। चाहे भेद खड़ा हो चाहे वो वर्दी में खड़ा हो पुलिस वाला ही है तो वो तो वैसे वो अपने आप में ही प्रमाण है कि

01:10:00:00 वो पुलिस वाला है अगर उस तरीके से उसकी वास्तविकता जांचने के लिए एक ही काम हो सकता है कि उसकी अंतरात्मा के साथ तुम एक ही भूत हो जाओ और उसके विचारों को जान आओ कि उस वो बैरूिया है कोई या क्या है ना खैर अच्छा एक पॉइंट और इन्होंने कहा है अपनी लाइफ में मुझे ध्यान आ गया इसलिए कह रहा हूं अच्छा एक चीज अब ध्यान आ गया तो और कह देता हूं कि संदीपन आर्य ने अपने वीडियो में कहा कि हम तो आकाश को मस्तक कहते हैं ईश्वर का। मस्तक क्यों कह रहे हो भाई? जब हम उसको यहां पे खिड़की देख खिड़की के रूप में उसका अवतार को देख रहे हैं आसमान के तो तुम्हें दिक्कत हो रही है। वहां आसमान का मस्तक क्यों कह रहे हो? और एक चीज और करते हैं ये लोग मालूम है? यह कुछ अभी यंग एज के ही होंगे मुझे लगता है। मैं नहीं मैं मैं उनके डिफेंस में बोल देता हूं। उन्होंने अलंकार में कहा होगा इसे। अलंकार तो फिर अलंकार शब्द से प्रॉब्लम क्या है? अच्छा एक बात और है ये लोग हमें सम्मान पूर्वक भी पौराणिक भी कहते हैं। इन मुझे हो सकता है इसलिए कहते हो क्योंकि ये खुद को वैदिक समझते हैं। तो ऐसे वैदिक जो कि उनकी नजरों में पूर्णत वैदिक नहीं तो इसलिए पौराणिक कहते हो। ऐसा इनका पक्ष है। ठीक है? तो हम भी तो वही कर

01:11:15:01 रहे हैं कि ऐसे आर्य जो हमारी नजरों में पूरे के पूरे आर्य नहीं है उनके लिए हम आर्य समाधि नहीं कह सकते। हम उनको अलंकार समाधि कहते हैं। उसमें भाईचारा कहां मिट गया? अलंकार कोई गाली थोड़ी ना है। जैसे आप पौराणिक को गाली नहीं मानते हो ऐसे आप अलंकार को भी गाली ना समझो। ये कहना है। पहली बात। अब इन्होंने एक चीज वहां पे और कही है कि पृथ्वी पृथ्वी गोल वाला उदाहरण। तो पृथ्वी गोल वाला उदाहरण जो है उससे ये लोग कहते हैं कि मैं अद्वैत की स्थापना करता हूं ना अद्वैत की स्थापना नहीं करता हूं मैं दो प्रकार के बताते हैं हां दो प्रकार के पर्सेक्टिव आपको बताता हूं कि देखो एक रियलिटी का पर्सपेक्टिव तो यह है मगर वो जानते हुए भी आप एक और रियलिटी आपकी बिहेवियल रियलिटी व्यवहारिक सत्य उसके अनुसार आप बिहेव करते हो है ना तो यह जो एक रियलिटी मैं यह समझाने के लिए दो प्रकार के पर्सेक्टिव को समझाने के लिए बात बोलता हूं। अद्वैत के लिए नहीं बोलता हूं कि दो प्रकार के पर्सेक्टिव है। रियल में कुछ और हो सकता है। फिर भी आप जो है दूसरी चीजें कर रहे हो। ये दिखाने के लिए वो बात बोलता हूं। तो वो कुछ अपनी अलग ही चीजें बता रहे हैं। तो ये सारी चीजें ऐसे क्यों होना चाहिए? ये तो मतलब बिल्कुल सेल्फ एक्सप्लनेटरी

01:12:30:14 है कि जब भी भी आपने ये वाला बताया है या फिर कहीं से भी पढ़ाया जाना है तो उसमें केवल व्यवहार परमार्थ का डिफरेंस के लिए एक रियल वर्ल्ड क्लोजेस्ट टू अस हमारे जो जितने जो बिल्कुल नजीक समीप है उसका एग्जांपल देके समझाया गया है बस और यही है एक और मतलब रियलिटी कुछ और है फिर भी हमने जो है हम जो है क्योंकि हमारी रियलिटी कुछ और है तो उसके अनुसार हम काम कर रहे हैं है ना ये बात है आसान से एग्जांपल या उदाहरण देके समझाने की प्रयास किया गया जो हमें दिख आसपास वहां अद्वैत अद्वैत की सिद्धि में वो एग्जांपल सहायक होता है। वो अद्वैत के लिए ही नहीं है। द्वैत के लिए भी है वो। अगर द्वैत भी कहे तो द्वैत के लिए भी है। जैसे कि द्वैत के अनुसार जो जीवात्मा है और ब्रह्म है वो अलग है। ठीक है? अब जीवात्माएं किसी की ना कोई मां है, ना कोई बहन है, ना कोई पत्नी है, कोई किसी का नहीं है। ठीक है? सब एक है। एक जैसी आत्माएं हैं सारी। अब यहां नीचे कोई किसी की मां है, कोई किसी की वो है, पत्नी है। है ना? माता बहन और पत्नी हो गई। तो अब भाई हम अगर वहां का रियलिटी ले आए, द्वैत वाली रियलिटी यहां ले आए द्वैत के अनुसार। अभी मैं अद्वैत की रक्षा नहीं कर रहा हूं मेरे भाइयों। ध्यान रखना। मैं अभी द्वैती हो गया हूं। जय हो मधवाचार्य जी की।

01:13:46:02 ठीक है? तो अभी द्वैत हां तो मैं अभी जो है द्वैत के लिए बात कर रहा हूं। कोई अगर एक कुतर्क करे कि भाई जब कोई किसी की माता बहन पत्नी नहीं है तो सब बराबर हो गए। नहीं वो पारमार्थिक सत्य है। और दूसरी रियलिटी है। आपकी रियलिटी ये है कि ये आपकी मां है। ये आपकी पत्नी है और ये आपकी बहन है। ये आपकी व्यवहारिक रियलिटी है। तो ये दो प्रकार के पर्सपेक्टिव मैं समझाने का प्रयास करता हूं। इस पृथ्वी इन्होंने हालांकि मुझे ये चीजें अब पता चली। ये लोग बड़ी तैयारी करते तेरी बारी है कमर कस ले तेरे बस में जैसे वो मॉनटी था ना ब्रदर ब्रदर मूवी में मॉनटी ब्रदर मूवी थी ना बस वही किस्सा है डेविड डेविड से वही चिड़ है डेविड [हंसी] डेविड से वही वाली चिड़ है मोंटी वाली है ना ब्रदर मूवी में पूरी तैयारी करता है वो डेविड से लड़ने की तो खैर अच्छा एक चीज और मैं बता दूं कि क्या कहते हैं इस पूरी चीज में एक चीज और है। अभी हमने तो क्वेश्चनिंग की ही नहीं है। बिंगो ये बात तो रह गई ना। भाई हम क्या कहते हैं? हमको

01:15:01:03 तुम हम अपने पूजा भक्ति जो भी करेंगे हम कुछ नहीं कहेंगे किसी से। आप हमें तीन चीजें दो। सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म। हमें ये सिद्ध नहीं करना है कि दयानंद जी गलत थे। हमें तीन चीजें समाज को देनी है। सूत्रात्मक शैली में बच्चे बच्चे को पकड़ाना है। जिससे जब कोई कहे कि मूर्ति को तोड़ दो क्योंकि उसकी मूर्ति पूजा नहीं हो सकती तो बच्चा कहे ना तबा ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है अवतार भी ले सकता है उसकी मूर्ति भी हो सकती है मूर्ति की रक्षा होगी हां तभी होगी रक्षा हां सही मायने में तभी होगी रक्षा नहीं तो फिर ऐसे समाज जो है वो अपने अपने मंतव्यों से अपने अपने जो फिलॉसफी से बटा रहेगा एक तो मैंने अभी क्वेश्चन किए नहीं हालांकि क्वेश्चन तो मेरे भी है ना कि भाई मैं अपना कुछ भी करूं मुझे गलत सिद्ध नहीं करना। मुझे आप ये तीन चीजें दो। तो तीन चीजें दोगे कैसे? जब मैं आपसे मांगूंगा तो मैंने मांगा कहां? हमने तो कभी ये कहा ही नहीं। हम किसी का वो साथ नहीं देंगे। हमने कहा तीन चीजें लाओ साथ लो। वो तीन चीजें कोई दे ही नहीं रहा है। फिर आ के हमारी चीजों पर कुछ मेरे गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं होता। सिद्ध नहीं होता। हां बिल्कुल। अपने आप को तो सिद्ध किया ही नहीं। पहली बात। दूसरी बात एक ये है कि वो शास्त्रों

01:16:16:07 की बात में बता रहा था कि एक बात ये आई थी कि भाई मुझे जो है शास्त्रों की एक बात सही लग रही है। एक बात गलत लग रही ना ऐसा नहीं कर सकते। इसको कहते हैं अर्ध कुकुट न्याय है ना गांव की लाइब्रेरी में गुरुदेव की लाइब्रेरी में धर्म की किताबें भी पढ़ी थी हमने। ठीक है? तो क्या है? अकुट न्याय नहीं कर सकते। आप जब ये कहेंगे ना मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि वो लीला थी। जिस रूप में आपको भगवान बाधित दिख रहे हैं। हालांकि भगवान ऐसी चीजें कर रहे हैं। भगवान हो तो विराट स्वरूप दिखाओ तो वो दिखा रहे हैं। ठीक है? और वो अपने व्यवहारिक और पारमार्थिक दोनों तरीके के वो बता रहे हैं। सत्य जैसे इसमें से व्यवहारिक और परमार्थिक में संदीपन रॉय जी ने एक बात कही वहां लाइव में। अरे भाई जब प्रभु श्री राम सत्य है तो वो जो है झूठ कैसे बोल सकते हैं? मैं भगवान नहीं हूं। क्यों बोल रहे हैं झूठ? भैया वो मनुष्य की जो सीमा है उसमें रहकर के सत्य ही बोला उन्होंने और वो उनका पारमार्थिक सत्य है। ऐसे तो दुनिया में कोई भी जो व्यक्ति है ना वो सत्य बोलने वाला सिद्धि नहीं होगा। कोई भी क्योंकि वास्तविक सत्य तो त्रयतवाद है तुम्हारे अनुसार आर्य समाज के अनुसार तो इस हिसाब से तो कोई सत्यवादी सिद्धि नहीं होगा। जो व्यवहार

01:17:31:10 में रहकर व्यवहारिक सीमाएं हैं उसमें रहकर उन्होंने कहीं भी वो नहीं किया है। ऐसे मनुष्य उन्होंने वही बोला है जो सत्य हो। क्या मतलब थोड़ा आप लोग मैच्योर लोग हो और संदीप संदीपन रॉय मुझे मतलब उस मामले में अगर वो इंटेलेक्चुअल लगता है शार्प बुद्धि वाला लगता है जो निर्भय आ रहे हैं वो अगर मुझे शार्प माइंड वाले दिखते हैं वो स्पाइडरमैन तुम में दम है तो ये संदीपन रॉय मुझे समझदार दिखते हैं ये समझदार है मगर मतलब किस श्रेणी की चीजें कर देते हैं कहीं-कहीं पे तो वो ध्यान देने वाली बात तो मैं वहां पर बुक पे आ जाऊं। बुक वाली बात जो है वो ऐसी है कि अगर आप कह रहे हैं कि भगवान यहां बाधित दिख रहे हैं और यहां पर भगवान के लिए कहा जा रहा है कि वो वही है। ठीक है? क्या कहते हैं वो

01:18:25:06 कि वो सर्वशक्तिमान ही है। अच्छा एक बात बताइए जब ऋषियों के अंतःकरण में ज्ञान आया था वेद का तो ऋषियों ने कैसे पहचाना था उसे? ऋषियों के शब्द प्रमाण को मानते हो ना कि भगवान ने वेद प्रकाशित किए ज्ञान के ज्ञान के रूप में या उपदेश किया वेद का तो उन्होंने कैसे पहचाना अपनी दिव्य दृष्टि से ना अनुभूति से अब उसको आप मान रहे हो शब्द प्रमाण को कि हां वो तो उसी ने किया था कि उन्होंने दिखा दिया था कि मैं सर्व्यापक हूं मैं वही हूं मैं वो हूं दिखा दिया था उन्होंने ऋषियों को ऋषियों को अनुभूति हुई कि ये वही ज्ञान का प्रकाश है जो इस माया रूपी संसार के बिल्कुल विपरीत है। तो वो अनुभूति जिस सिद्ध पुरुष को होती है जिसको देखकर वो बताता है कि हां ये अवतार है वो अवतार है। सिंपल शास्त्रों में भी है और फिर जो आज के जो आगे आने वाले गुरुजन होंगे सुशास्त्रों की सीमा में रहकर जिसको अवतार कहेंगे तो अवतार माना जाएगा। है ना? तो ये तो रही बात। अब बार-बार वो बात छूट जाती है। तो मगर फिर भी यदि आपको ऐसा लग रहा है कि अ क्या कहते हैं कि एक जगह भगवान बाधित दिख रहे हैं। मगर वो

01:19:40:07 कह रहे हैं उसी शास्त्र में लिखा है कि वो लीला है और फिर गुरुजन कह रहे हैं कि नहीं ये अवतार है तो आपको विश्वास नहीं हो रहा उनकी इस बात पे तो फिर आप उस शास्त्र को मानने वाले सिद्ध नहीं होते। उस शास्त्र में आपकी प्रमाण्य बुद्धि नहीं रह गई क्योंकि जहां पर एक पॉइंट भी झूठ हो सकता है वहां कहीं भी झूठ हो सकता है। तो आपको यह कहना पड़ेगा वहां पर आपको यह कहना पड़ेगा कि हां वहां पर आपको यह कहना पड़ेगा कि मैं रामायण को नहीं मानता। अगर जिस मैं यही तो कह रहा हूं आप वेद को ना मानने वाले बन जाओ ना। अगर आपको वेद जिनसे प्राप्त हुए उन्हीं के अर्थ पर विश्वास नहीं है तो आप सीधे कह दो कि हम वेद को नहीं मानते। वरना आप जितना भी नियमावली लाकर रख दो। शास्त्रार्थ में हरा दो। फिर भी आपका उनप अविश्वास सिद्ध होने के कारण आप वैदिक सिद्ध नहीं हो पाओगे। हम करेक्ट हां है ना ये सिद्ध कैसे करोगे कि ये वही मंत्र है जो वहां से आए हैं बदल दिए किस व्यक्ति ने जिसको तुम झूठा कह रहे हो उसने जिसको तुम अज्ञानी कह रहे हो तुमने तो हो सकता है भूभ स्वाहा की जगह तुम्हारा वो आमीन इत्यादि कोई आया हो वास्तविकता में अंतकरण में फिर तो यह वाली बात

01:20:55:10 है इस इस संबंध में इस संबंध में जो है पुंडरिक पुंडरिक का उदाहरण उसने खुद भी दिया था। खुद ही उसने कई ऐसी चीजें की है निर्भय ने जो वहां की वहां हो सकती थी। मगर हुआ क्या? पुंडरीिक पंडिक का उदाहरण दिया। पुंडरीिक कह रहा हूं मैं। पुंडरीिक महाराज जी के पास पहुंच गए। पोंडरीिक आया था तो पंडिक पोंडरीिक जो था उसको भी देखो वहां पर पहचाना गया। है ना? अनुभूति से पहचाना। सब कुछ करके नहीं दिखाया। ईश्वर ने कुछ एक चीजें कर दी जो नॉर्मल नहीं है कुछ एक चीजें मगर अनुभूति मेन है अनुभूति हमें फसा कौन रहा है अनुभूति फंसा कौन रहा है अनुभूति एक माया है भगवान की जो हमें फसा रही है तो भगवान का जो ज्ञान है वो भी तो एक माया जैसी शक्ति है जैसे अविद्या एक शक्ति तो विद्या भी तो एक शक्ति है भगवान ज्ञान स्वरूप है ना तो जब हमें अविद्या की शक्ति का जो वो होता है अनुभूति जिसके कारण हम फंसते हैं उसी प्रकार हमें विद्या की शक्ति की अनुभूति जिस रूप से होती है। एक सिद्ध पुरुष को तपस्या करने वाले को वो पहचान लेता है कि ईश्वर का अवतार ये है। ठीक है? अच्छा तो यह सारी चीजें हैं और निर्भय आर्य ने जो है

01:22:10:21 क्षमा भी मांगी है पब्लिकली और संदीपन रॉय जी के माध्यम से भी मुझे फोन पर मैसेज भी आया और मैं अप्रिशिएट करता हूं उन लोगों की जो साहसिक बातें हैं साहसिक चीजें हैं और डेडीकेशन है जो अपनी चीजों के लिए और थोड़ा सा आत्म मंथन करने की आवश्यकता है मेरे अनुसार है ना मेरी जानकारी में थोड़ा आत्म मंथन करें और टोटे भाई जैसे हो निर्भय आर्य तुम मेरे और तुम्हारे प्रति बहुत स्नेह और मैं हो सकता है शायद समाज में एक दूसरी छवि बन गई हो कि मैं बहुत पत्थर जैसा व्यक्ति हूं मगर वास्तविकता में ये है कि मैं कोमल हृदय का व्यक्ति हूं जरा सी बात पर पिघल जाता हूं और मतलब कोमल अपनी तारीफ नहीं कर रहा मतलब मैं वो स्थिति बता रहा हूं कि मेरे आंसू तक आने वाले थे जब मैंने तुम्हारा तुम्हारी बेबसी देखी थी उस चीज को एडिट करते समय शायद तुमको भी मेरे प्रति वैसा भाव आया हो तभी तुमने ने वो पोस्ट डाली है, क्षमा मांगी है। मगर मुझे बहुत करुणा आई थी। जब मैं तुमको देख रहा था ना ऐसा लग रहा था मेरा छोटा भाई वहां पर बोल रहा है। वो वहां आना चाहता है। अच्छा मैं आपको एक पर्सनल एक्सपीरियंस बताऊं कि बहुत समय पहले क्या हुआ था? मैं अपने छोटे भाई को साथ में ले गया था जिम वर्कआउट कराने के लिए। तो जिस समय वो वर्कआउट कर रहा था बेंच

01:23:26:02 प्रेस। तो भाई वो शुरुआत थी उसकी और मैं एक्सपीरियंस था। तो वो बेंच प्रेस पर जो है लिफ्ट कर रहा है वेट तो उसकी जो चेहरा था ना वो ऐसा दिखाई दिया मैं वही रो दिया मैं वहीं पे रो दिया कि मैं अपने भाई को असहाय स्थिति में नहीं देख पाया मैं वही रो दिया आंसू आ गए फिर मैंने कहा तुम दूसरी जिम में जाओ मैं तुम्हें कसरत करते मैं तुम्हें कसरत करते हुए नहीं देख पाऊंगा क्योंकि तुम लगाओगे पूरी ताकत तुम्हारा चेहरा सहाय सा दिखेगा तो मुझे बड़ी दया आएगी समझ रहे हो तो मुझे बिल्कुल सेम एक्सपीरियंस बिल्कुल सेम वैसा ही स्नेह और करुणा अंदर से दर्द वो जो उसके चेहरे पर मैं देख रहा था ना बहुत ध्यान से जब एडिट कर रहा था तो मुझे बड़ा उसने भावुक किया और मैं अंत में मैंने रात को ही आपको फोन मिलाया था आप देखिएगा रिसेंट उसमें जाके स्ट्रीम में तो मैंने फोन मिलाया था कि लाइव कर रही है हमसे अन्याय हो गया इस बच्चे के प्रति है ना तो बहुत अपनेपन से बस वो है कि मैंने जब उसकी लाइव देखी तो उसमें पता चला कि नहीं नहीं [हंसी] तो वो

01:24:33:06 तो सारी चीजें हमने अभी क्लियर कर दी है। निर्भय आर्य और संदीपन जी के लिए ये है कि भाई आपने क्षमा मांग ली। हमने मतलब हमारे मन में उस बात को लेकर के वो जो हुआ उसको लेकर के कोई वो नहीं है। अगर आपको चर्चा करनी है तो हम कुछ ही एक दो दिन में मतलब कुछ अपना शेड्यूल देख के दोबारा से आयोजित कर लेंगे। इसके लिए निर्भय हमसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क में है। संदीप जी भी संपर्क में है तो वहां पर डिसाइड हो जाएंगी चीजें। हां श्वेता जी आप कुछ कह रहे थे नहीं बस मैं तो अपनी बात कह चुका हूं सारी और मैं बिल्कुल मैं सहमत सहमत हूं इस चीज से कि हां ठीक है एक बार तो जरूर हो जानी चाहिए क्योंकि मुझे भी ऐसा लग रहा था कि उस समय वो चर्चा आगे बढ़ सकती थी लेकिन फिर वही है मिसकम्युनिकेशन या मिसअंडरस्टैंडिंग की वजह से शायद मुझे ऐसा लगता है कि वो हो गई लेकिन बाद में तो फिर आपने बात अपनी सारी कह ही दी है। तो देखते हैं अभी आप बताइए। बस मैं यही कहूंगा कि वो जो लाइव की है ना निर्भय ने कि जैसे उसने अभी क्षमा की है मगर वो लाइव में भी उसने सारी बातें जो है वो जो है वही व्यक्तिगत कटाक्ष मैं वो देखूंगा वो वाली वीडियो अगर डाली होगी उन्होंने तो हां तो उसमें भी व्यक्तिगत कटाक्ष ही है तो आगे से भविष्य में व्यक्तिगत कटाक्षों से बचे सैद्धांतिक कटाक्ष करिए है ना कि एक ऐसा ईश्वर है जो

01:25:48:16 अवतार नहीं ले सकता है ईश्वर में बात करिए व्यक्तिगत कटाक्ष से बचिए है ना बातों पर बात करी है तो कुछ रह गया हो तो मुझे याद दिला दें अन्यथा फिर लाइफ को पूरा बस यही है यही है और हां एक और बात इसमें मैं जोड़ना चाहूंगा कि जैसा भाव आर्य समाजियों के जो हमारे बंधुओं के साथ में है वैसा ही मतलब ऐसा नहीं है कि उनसे कोई द्वेष भाव नहीं है। कहने का मतलब यह है वैसा ही हमें हमें हमारे लिए कोई द्वेष भाव इस वाले के सदस्यों के साथ भी नहीं है। उनसे भी केवल सैद्धांतिक मतभेद ही है या किसी भी हिंदू के साथ जैसे कि आपने आपको याद होगा जब मैं लाइव पे था और जब एक क्रिश्चियन महानुभाव आए थे और उन्होंने बोला था कि इनके हिसाब से कहते हैं कि बाइबल में भी में भी प्रमाण है कबीर साहब भगवान है तो आपने वहां पे उस उसे उस व्यक्ति को रोक दिया था। है ना? आपने कहा था कि कि आप यह प्रूफ करिए कि क्रिश्चियन ये बाइबल के से प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्व शक्तिमान है। क्योंकि अंततवा संत रामपाल या फिर जो रामपाल रामपाल को फॉलो करने वाले वो भी अंत में हमारे भाई ही हैं और जो हमारी वो चल रही है तो ये चीज है ठीक है तो इसमें कोई दो राय नहीं है वो ये पहले भी थी और आज भी है

01:27:04:02 कहीं ना कहीं मैं आपको बता दूं रामपाल से बहुत आगे दयानंद जी थे विद्वान डाउट ही नहीं है कोई दो राय नहीं है और ये सब बातें भी संदीपन रॉय जी ने गलत कही है कि जगदगुरु शंकराचार्य जी महाराज है कि वो कह रहे हैं कि उनका खंडन नहीं किया जा सकता। खंडन इसलिए नहीं किया जा सकता जो त्रेतवाद से मिलता जुलता रामानुजाचार्य जी का वो दर्शन था और वो जब कर रहे थे तो उनको लगा कि रामानुजाचार्य जी की बातों को मुझे काटना पड़ रहा है। तो जब पूर्वाचार्यों ने कर रखा है इस बारे में काम दयानंद जी पर काम कार्य अच्छा खासा कर रखा है। तो उनके मन में क्योंकि आस्था थी तो उन्होंने अपनी पर्सनल उसके हिसाब से नहीं किया। मगर यह कहना कि हो ही नहीं सकता है। ऐसा उन्होंने नहीं कहा तो गलत प्रचारित करने से बचें। ऐसी बातें प्रचार ना करें जो है नहीं वही करिए ना कांटे की नोक वाला काम क्यों नहीं पकड़ते आप लोग कांटे की नोक सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म मुझे वक्तव्य याद है जब मतलब मैंने देखा था ये वीडियो जब गुरुदेव बोल रहे थे तो उन्होंने कहा था मतलब रामनाचार्य महाभाग के लिए सम्मान जो कहते हैं कि मतलब ये मुझसे नहीं हो पाएगा ये मैं कर नहीं सकता है ना अच्छा सम्मान सम्मान सम्मान जो है स्वामी दयानंद जी के लिए भी था हां वो तो है बिल्कुल है हां नहीं कभी

01:28:19:13 उनको हमेशा जी और देखो निर्भय निर्भय निर्भय और संदीपन के लिए एक बात है कि जैसे संदीपन ने उस संदेश में यह भी लिखा है कि अ क्या कहते हैं कि जो उस समय कमेंट बहुत गलत गलत आ रहे थे। ऐसा नहीं है। कमेंट मेरी स्क्रीन पर मुझे भी गलत गलत दिख रहे थे। पर जो है अभी भी आ रहे हैं। आज अभी आज भी आ रहे हैं। गीता में देखिए भगवत गीता में जो बात भगवान ने कही है ना ऐसे ही नहीं कही है। आसक्ति रहित होना सीखिए। अब भाई हम है तो हमारे पास तो राम का नाम है। हम उससे कोशिश करते हैं आसक्ति रहित होना। आप जो आज यज्ञ कर रहे हैं उससे करिए अपने आप को आसक्ति रहित। समत्वता तो लाइए कि जिस जीत का लालच हार का भय दोनों ना हो। उसमें अपने अंदर इतना कंट्रोल लाइए कम से गलत बिहेव ना निकले। पद से बड़े-बड़े जिनको कार्य करने होते हैं ना जीवन में वो छोटी चीजों पर अपने आप को प्रभावित नहीं होने देते। और और मैं इसमें आपको एग्जांपल एक छोटी मोटी चीजें बैठे हैं तो मैं बता दूं कि मेरे मेरे जो छोटे भाई हैं वो मेरे साथ मतलब एक डबल बेड है तो वो कहते थे कि मैं एक दूसरे बेड पे जाके सोऊंगा कि क्यों सोओगे? कि मुझे जो है मतलब स्पेस ज्यादा चाहिए। कुछ बुक

01:29:34:21 चाहिए। मैंने कहा लोग मर रहे हैं दुनिया में। उनके पास सोने की जगह नहीं है। तुम्हारे पास बेड है, कंबल है मगर तुम्हें अपना सेपरेट चाहिए। और तो मैंने उनको ये कहा कि सुनो अगर तुमको अच्छा नहीं लग रहा हो बातें गलत। मगर अपने आप को तैयार करो। हर विपरीत परिस्थिति से लड़ने के लिए। ऐसे नहीं होगा। इतना आसान नहीं है धर्म का धर्म की रक्षा का मार्ग। विपरीत परिस्थितियों के लिए तैयार करो। अपने आप को विपरीत से विपरीत तब जो है आप सामान्य स्थितियों में तो बहुत सामान्य रहोगे। तो कहने का मतलब यह है अपने आपको थोड़ा सा

01:30:12:07 तो उस वीडियो में भी जो अभी लाइव हो रही थी और यह कहना है कि गलत कमेंट आ रहे थे तो हमारे ऑपरेटर ऑटोमेटिकली जो उल्टी सीधी बातें लगातार करता है एक दो बार चेतावनी देने के बाद हटा देते हैं। हमारी ओर से इन बारे में उल्टी सीधी बातें कभी भी ना दयानंद जी के लिए की गई है। हां सैद्धांतिक कटाक्ष जरूर किए गए हैं। ठीक है? सैद्धांतिक कटाक्ष सी है। मगर दयानंद जी ये करते थे। वो चिलम फूंकते थे। सब बातें उल्टी सीधी जो हमने तो यहां तक कि आप पता नहीं कैसी नजर रख रहे हैं। दो साल तीन साल आप करियर की बातें कर रहे हैं। हमने जब रामपालियों ने दयानंद जी के लिए उल्टी सीधी बात की थी तो शायद पोस्ट भी की थी और वीडियो भी बनाया था। हम तो उनका कहीं ज्यादा सम्मान है। मगर बात यह है कि हम उनके उन सिद्धांत जिन सिद्धांतों का हम ये विरोध कर रहे उन सिद्धांतों को ले जाके उससे नहीं लड़ सकते शत्रु से दूसरे से नहीं कर सकते। बाहरी व्यक्ति से नहीं लड़ सकते। तो इसलिए उन सिद्धांतों पर ऑब्जेक्शन है। वो हमें दे दो। उनका निराकरण दे दो। जो ऑब्जेक्शन निकल रहा है जो शत्रु करता है जो शत्रु करेगा जब हम उसको पटकने देने जाएंगे। वो निराकरण हमको दे दो। हमें कोई दिक्कत नहीं है। खूब आराम से उसी को आगे बढ़ाओ आप तो वो निराकरण नहीं दोगे बल्कि हम जो लेके जा

01:31:27:08 रहे हैं जो राह स है उस पर वार करोगे। इसका भी नष्ट कर दो तो क्या रहेगा? शत्रु के लिए एक भी हथियार नहीं रह जाएगा। यही तो कर रहे हो। भाई शत्रु से हम भिड़ने जा रहे हैं। हमारे पास एक हथियार है। तुम्हारा ठीक नहीं है। इसको लेके नहीं जा सकते। इसको हटा दो। पीछे रखो। अपने तक रखो। प्रचारित मत करो। ठीक है। इस इस ये हो गया। मगर आप क्या कह रहे हो? अच्छा हमारा खराब है ले तेरा भी फोड़ दूंगा बम शत्रु के लिए हमारे पास क्या रह गया कुछ नहीं इसलिए कहते हैं मेरे गलत होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता आप अपने आप को सिद्ध करिए हम तो वहां पर सिद्ध है ही पूरे पूरे देश में इस समय बातें हो रही है पूरे देश में बच्चे पूछते हैं कमेंट में जाके क्या तुम्हारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है ये लाना है बच्चों की उस पे तब जब किसी बिटिया से कहा जाएगा ना कि ये कैसा भगवान है जो नाच रहा है एक ऐसा भगवान है जो ये रो रहा है तब वो त से बोलेगी ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है सकता है ना चलिए ठीक है सभी को जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री कृष्णा हर हर महादेव कृष्णा

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