⬜ Not used yet · 00:00:01:06 – 02:23:09:00 (2:23:08)
00:00:01:06 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और अभी अभी दयानंद जी के सिद्धांतों को मानने वाले एक काफी डडीिकेटेड व्यक्ति के साथ जो बहुत समर्पित है शायद भावनाओं से दयानंद जी के प्रति उसके साथ एक अच्छी वार्ता हुई है नॉलेजफुल मतलब काफी इनफेटिव चीजें आपको उससे मिलेंग आप उसे अवश्य देखें और उस वार्ता में वार्ता में अंत में उसमें मतलब वह सहजता के साथ में उस वार्ता अपने गंतव्य तक नहीं पहुंची है। तो प्रतिक्रियात्मक उस व्यक्ति ने जो यहां पर निरुत्तर हुआ हमारी जानकारी में उसकी जानकारी में जो भी हो हमारे किसी भी सिद्धांत को वो काट नहीं पाया। उसने काउंटर क्वेश्चन किए पर एक समय पर जाकर चुप भी हुआ और ऐसा उसने कुछ नहीं किया जिससे अवतार सिद्ध नहीं होता और इस पर हम लोग एक विस्तृत चर्चा संभवत करेंगे पर हमारे चैनल पर नहीं सनातन शंकर जी के चैनल पर एक विस्तृत चर्चा होगी इस बारे
00:01:16:12 में तो वहां पर एक विस्तृत चर्चा आपको देखने को मिलेगी तो आप लोग अपडेटेड रह और अभी जो है हम जब दिल्ली पालम गए थे तो पालम में ब्रह्मा कुमार ारी से उत्पन्न एक संस्था जिसका नाम था आध्यात्मिक विश्वविद्यालय उनके किसी सज्जन के साथ सज्जन कैसे कहें मतलब प्रतिनिधि के साथ तो हमारी चर्चा हुई थी वो आप लोगों ने देखी होगी तो अभी उसी संबंध में मुझे मतलब अभी ये जो आने वाले हैं अभी हमारे साथ में तो ये उसी से कनेक्टेड है बट बट पूरी तरीके से मतलब उसी सेंटर का हिस्सा नहीं है शायद कुछ विरोधाभास भी तो अभी देखते हैं इनको लेते हैं और फिर बात करते हैं।
00:02:09:06 जय श्री राम विवेक जी जय श्री राम शिवश जी जी आपकी आवाज बहुत धीमी आ रही है शिवश जी आप मेरी आवाज बहुत धीमी आ रही है हां जी [गला साफ़ करने की आवाज़] मैंने तो अपना फोन स्पीकर आप वॉल्यूम वगैरह इनक्रीस करके देख लीजिए एक बार एक बार एक इसमें स्पीकर में शायद आवाज नहीं आ रहा है। स्पीकर का कोई ऑप्शन है इसमें। हां अब ठीक है। नहीं अभी भी आवाज तो कम ही है। आप एक काम करिए पहले एक बार आउट हो जाइए और फिर दोबारा उसी लिंक से जुड़कर वही प्रोसेस पूरी करते हुए आ जाइए। अब सेटिंग्स आपको नहीं सही करनी पड़ेगी। सेटिंग करनी नहीं पड़ेगी तो आ जाएंगे फॉलो करते हुए। और कैमरे को बहुत ज्यादा दूर भी मत रखिए आप क्योंकि कैमरा बहुत दूर रख रहे हैं तो उसमें फिर आपकी आवाज सुनाई नहीं दे रही है।
00:03:21:20 मैं एक बार आउट करता हूं। आप दोबारा आओ फिर देखो। ठीक है। हां जी। ठीक है तो वो जो चर्चा है पूरी चार घंटे के लगभग बना है बट हमने उसको समराइज करके जो है और दो हिस्सों में डाल दिया एक हिस्से में जिसमें उस व्यक्ति ने पूछा था कि भाई अवतार होता है इस संबंध में आपकी धारणा क्या है मतलब कैसे मानते हो कैसे वह एक जो एक तरीके से उसको प्रतिज्ञा कह सकते हैं कि आपकी क्या कहना क्या चाहते तो वह एक पार्ट में है उसने कोई इसमें काउंटर नहीं किया है और अगर किया है तो हमने उसका निराकरण प्रस्तुत किया है अगर उसने सवाल किए और दूसरा पार्ट है कि क्या ईश्वर सब कुछ कर सकता है इस संबंध में और ईश्वर को ईश्वर के अवतार के विषय में शब्द ही प्रमाण है इस संबंध में बातचीत उस व्यक्ति का वहां कहना था के लक्षण है वह सब वैसे हम सनातन शंकर जी के भी बताएंगे मगर अभी बात हो रही है तो जैसे उसने कहा कि भाई ईश्वर को पहचाने कैसे कि उसमें ये चीजें हो
00:04:36:24 सकती है तो हमने उसको कहा भी कि भाई प्रणव को क्यों तुम ईश्वर से संबंधित मानते हो शब्द प्रमाण है बहुत सी चीजों में ईश्वर से तो उसमें उसने काउंटर नहीं किया उन चीजों का और एक बहुत बड़ी चीज है कि भाई जब ऋषियों के अंतःकरण में उनके अनुसार ईश्वर ने वेद के मंत्र प्रकाशित किए ये तो ऋषियों ने कौन से लक्षण से पहचाना था क्योंकि कोई भी लक्षण व्यवहार में आने वाला है नहीं उसकी सर्व्यापकता है ना और अगर एक आध लक्षण आ भी रहा हो वैसे आ नहीं सकता मगर दुर्जन तो उस न्याय से मान भी ले तो आ भी रहा हो तो मगर सारे लक्षण जब तक घटित नहीं होंगे लक्षण जब तक घटित नहीं होंगे तब तक कैसे माना जाएगा तो वैसे इस संबंध में एक प्रॉपर एक चीज है कि हम वहां पर चर्चा करेंगे मगर इतना है कि भाई आपने कैसे माना कि ऋषियों के अंतःकरण ईश्वर ने वेद प्रकाशित किए वो कैसे पहचाना था कि ऋषियों का अनुभव आप पुरुषों का अनुभव शब्द प्रमाण है ना उन्होंने अनुभव किया कि ईश्वर ही है वहां तो कोई प्रमाण नहीं था तो सारी चीजें हमारी उसमें बहुत क्लियर है सामने वाला ना तो काउंटर कर पाया काउंटर तो खैर वो किया ही नहीं सवाल किए उन सवालों का हम जवाब देते गए और चर्चा के अंत में उसने कुछ ऐसी चीजें की जिसके कारण हमें
00:05:51:25 उसे हटाना पड़ा वो आप लोग जानते ही हैं देख सकते हैं तो वो दो पार्ट में जिसको संक्षेप में देखना हो तो आप जो है उसमें देख सकते हैं। मैं इनको भाई साहब को ले लेता हूं। जी विवेक जी जय श्री राम। जय श्री राम। ओम शांति सभी को और नए साल की सभी को बहुत-बहुत शुभकामना। ठीक आ रही है आवाज? अब बिल्कुल ठीक आ रही है? हां जी। तो बोलिए। म आपका अगर कोई सवाल है तो जिस सवाल से हम चर्चा शुरू कर सकते हैं तो पहले सबसे पहले थोड़ा सा अपने बारे में जैसे हमारा जो आपने वो वीडियो देखा उस वीडियो से आपका संबंध क्या आपके मन में प्रेरणा आई कि आपको हमसे संपर्क करना चाहिए तो उस संबंध में थोड़ी सी चीजें जो बतानी है वो आप बता दीजिए अभी हम उस पक्ष में नहीं जा रहे हैं कि आपकी आईडियोलॉजी क्या है धर्म और ईश्वर के संबंध में अध्यात्म के संबंध में वो एक अलग पक्ष है। है ना? मगर आपका अपना जो व्यवहारिक अस्तित्व जो आप स्वीकार करते हैं कि मैं यह हूं, हमारी संस्था यह है और वो जो पालम वाला वीडियो है उस उस वीडियो से इस प्रकार से कनेक्टेड है। उस केंद्र से यह विरोध है या विरोध नहीं है जो भी है
00:07:07:01 वो चीजें आप बता दीजिए। देखिए पालम वाला जो वीडियो देखा था हमने वैसे पालम का जो जिस सेंटर में आप गए थे वो हमारे सेंटर से ही उन्होंने कुछ दिनों पहले अपना एक अलग सेंटर बना लिया। म हमसे अलग होकर हमसे अलग होकर उन्होंने अपना एक अलग सेंटर बना लिया। तो अच्छा उनकी तो म दोनों के जो कुछ भी है तो आवाज आ रही है अभी कट गई थी आपकी आवाज। हां तो उसमें दो म तो म वो जो सेंटर है वो हमारे म हम हमसे म अलग हो गए और उन्होंने अपना एक अलग सेंटर बना लिया तो उसमें जो है वो हमारे एक मिनट थोड़ा सा यहां क्लियर कर दे पहले तो ये थोड़ा सा बता दीजिए कि मतलब आपका जो संस्था है आपके आपका भी आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नाम है आपकी संस्था का जी आध्यात्मिक विश्वविद्यालय ओरिजिन जो है वो हमारा है जो 1976
00:08:22:26 एक मिनट मैं कुछ और पूछ रहा हूं ये आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के पीछे भी ब्रह्मा कुमारी है हां जी ब्रह्मा कुमारी से निकल एक मिनट भाई साहब मैं मतलब एक पक्ष रख दूं फिर आप उसमें अपनी बात बता दीजिए ब्रह्मा कुमारी से निकल ब्रह्मा कुमारी से निकलता है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से निकलता है एक नकली आध्यात्मिक विश्वविद्यालय और ऐसा ही है। देखिए वो भी हमारे ही अनुयाई थे पहले उनको कुछ और एक्स्ट्रा करके दिखाना है। आप समझे नहीं मेरी बात। आप बताइए आप आप अपनी बात बताइए मतलब एक क्लियर कर दीजिए कि ब्रह्मा कुमारी से अलग होता है पहले आध्यात्मिक विश्वविद्यालय कुछ थोड़े बहुत मतभेद से है ना देखिए अलग अलग नहीं कहेंगे क्या है एक होता है बेसिक नॉलेज एक्सपेंशन प्राइमरी नॉलेज नहीं वो प्राइमरी मैं वो नहीं कह रहा नॉलेज होता है मैं वो नहीं कह रहा हूं भाई साहब मैं ये कह रहा हूं कि ब्रह्मा कुमारीज का एक एक्सपेंशन है, एक ब्रांच है आप या कुछ मामलों में क्योंकि ब्रह्मा
00:09:38:09 कुमारी में और हमारे में कुछ मतभेद म ज्ञान के आधार से कुछ मतभेद मैं वही कह रहा हूं वही कह रहा हूं। तो जिसके कारण तो अभी अरे भाई साहब विवेक जी ऐसा है ना पहले एक हेडलाइन सेट कर दे फिर आप अच्छे से बोलिएगा। हेडलाइन यह है कि ब्रह्मा कुमारी से थोड़े से मतभेद से आपका आध्यात्मिक विश्वविद्यालय अलग रूप में स्फुटित हो जाता है। ठीक है? आईडियोलॉजी बेसिक आईडियोलॉजी है। आईडियोलॉजी बेसिक वही है। बस थोड़ा से कुछ मतभेद है इसलिए आप आप हो और ब्रह्मा कुमारी ब्रह्मा कुमारी है। ठीक है? अब इसके बाद अब इसके बाद ब्रह्मा जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय है उससे भी एक और स्फोटित हो जाता है अलग। अब यह जो अलग हुआ है यह कुछ क्या कहते हैं जो व्यवहारिक पक्ष है उसको लेकर के अलग हुआ है जैसे कि मेरी जमीन मेरा मकान या मेरी दुकान इस तरह की चीजों को लेकर के या फिर इसकी भी आईडियोलॉजी थोड़ी सी क्योंकि अलग है आपसे इसलिए वो अलग हुआ है। ये कह रहा हूं जैसे आप आपका ब्रह्मा कुमारीज के साथ प्रॉपर्टी को लेके मामला नहीं है। समझ रहे हैं? आपका ब्रह्मा कुमारीज के साथ मामला है कि
00:10:53:10 वो कुछ शिक्षाओं में आप उनसे इतर हो। तो जैसे यह आपसे अलग हुआ है तो यह शिक्षाओं में इत है या फिर प्रॉपर्टी इत्यादि को लेकर के या जो कि नहीं मेरा मैं अपने नाम से चलाऊंगा ये आप लोग गलत कर रहे हो ऐसा कुछ देखिए उनका क्या म उनकी क्या प्रॉब्लम है ये हम म इसमें हम हमसे यानी इसके बारे में हमको कोई डिटेल पता नहीं है लेकिन और उसमें हमको जाना भी नहीं है तो उनकी समस्या क्या है वो म वही बता सकते हैं। ठीक है? और इनसे हमको म कोई लेना देना भी नहीं है। लेकिन वास्तव में अभी जो हमको परिचय म जिस उद्देश्य से हम आध्यात्मिक विश्वविद्यालय जो संस्था है वास्तव में संस्था नहीं है। यह एक परिवार है। ईश्वरीय परिवार
00:11:50:12 और ईश्वरीय परिवार का जो हमारा जो लक्ष्य है यह हमारा वसुदेव का कुटुंबरी थोड़ी पटरी थोड़ी सी बदल रही है। पहले वो जो मामला है ना उसको क्लियर करना आवश्यक है। जैसे आपने कहा कि हम ओरिजिन है। तो इसका मतलब आप ये कह रहे हैं वो ओरिजिनल नहीं है। देखिए हमारे नहीं आपको वो हमारा वही मामला है। उस उसको हम उससे उसको जो है हम ज्यादा उसको उससे हमारा कोई लेना देना नहीं है मतलब वो हमारा आपस का मामला है उसको हम उनको भी हम ओरिजिनल उनको भी ओरिजिनल माने उनको भी ओरिजिन हां जी उनको भी ओरिजिन माने
00:12:43:20 तो ओरिजिन माना क्या है हम लोग वो अभी अभी अलग हुए 2018 से अरे तो मैं वही कह रहा हूं ना अलग किस बात पे हुए हैं मकान की बात पे दुकान की बात पे कौन सी बात पर अलग हुए वो जानना चाह रहा हूं आईडियोलॉजी को लेकर अलग है कि चीज को लेकर अलग वो मुझे नहीं पता उसके बाद आप ये क्लेम ये क्लेम कैसे कर रहे हो कि वो अलग है वो ऐसा क्या कर रहे हैं कि वो अलग है उन्होंने बोर्ड तो आप ही का लगाया है तो आप यह क्यों नहीं कह रहे हो कि वह हमारा ही ब्रांच है क्योंकि उन्होंने जो है हमारे म जो हमारे जो मधुबन के सिद्धांत है उन नियमों के अलग अपनी एक संस्था चालू कर दी म अलग से इसी नाम से उन्होंने एक म अलग सेंटर चालू कर दिया जो कि हमारे सिद्धांतों के अकॉर्डिंग नहीं है। जैसे मतलब कुल मिलाकर के जैसे आपके यहां पर जो आपकी यह जो आपका परिवार है इसको व्यवस्थित रखने के कुछ नियम कायदे कानून होंगे आपके यहां उन नियम उन नियम कायदे कानूनों के विरुद्ध जाकर के उन्होंने अपना सेंटर क्योंकि स्टार्ट किया है इसलिए
00:13:59:06 वो आप उनको अलग कह रहे हो जी बिल्कुल तो कुछ थोड़ा सा बताएंगे नियम कायदा कानून क्या था वो थोड़ा सा नियम कायदा कानून हमारे सेंटर का यह नियम कायदा कानून है कित जो उन्होंने तोड़ा है अभी आप जो भी हमारे सेंटर की निमित होती है तो शिव म परमपिता परमात्मा आ के कन्या माताओं को आगे बढ़ाते हैं कन्या माताओं के सर पर ज्ञान का कलश रखते हैं। कन्या माताओं को ज्ञान सुनाने के लिए आगे बढ़ाते हैं। प्रोत्साहन आगे बढ़ाते हैं और उनको ही जो है वो इंचार्ज बनाते हैं। तो इन सिद्धांतों से हटकर वो मना तो इन सिद्धांतों पर वो नहीं चल रहे हैं। और उन्होंने अपना वो क्या वो क्या पुरुषों को आगे बढ़ा रहे हैं क्या? म खुद ही पुरुषों अभी आप गए तो आपको म जो भाई साहब मिले थे तो आप तो उनके सेंटर पर गए थे ना तो वहां पर आपको कोई लेडी मिली क्या कोई माता या कोई बहन
00:15:14:12 जो आपको अटेंड करे अटेंड करे मा ज्ञान सुनाने के लिए तो यहां पर हमारे में जो निमित्त होते हैं वो जो है कन्या माता होते हैं तो शिव बाबा ने जब परमपिता परमात्मा जो परमपिता परमात्मा शिव जो है उन्होंने कन्या माताओं को आगे बढ़ाया ज्ञान का कलश कन्या माताओं को दिया है बांटने के लिए। मतलब वो इस चीज को वो इस चीज का उल्लंघन कर रहे हैं। वो इस चीज का उल्लंघन कर रहे हैं। तो इस समय आपके यहां पर कोई माता कन्या कोई आपके यहां इस समय कन्या माता होंगी जो ज्ञान का कलश जिनके सर पर है इस समय। ज्ञान का कलश स्थूल कलश नहीं है। ज्ञान ज्ञान उनके पास आता है। मैं समझ गया। ज्ञान उनके पास आता है। उनके पास आता नहीं है वो परमात्मा तो ज्ञान देने वाला जो है शिव बाबा उनकी देह में आते होंगे नहीं नहीं नहीं शिव बाबा तो प्रैक्टिकल में साकार सृष्टि पर सम्मुख बैठ के हमको म ज्ञान सुनाते हैं किसी के शरीर में नहीं आते
00:16:26:02 शरीर में ही आते हैं। अभी ये बात ही हमको क्लियर करना है कि परमपिता परमात्मा कैसे म सृष्टि पर आते हैं। वो करेंगे वो एक हमारे दूसरा पक्ष है अभी थोड़ा सा समझ ले व्यवस्था क्या है वो समझ रहा हूं तो आपके यहां पे आपके यहां पे कन्या माता कोई होंगी मेन जिनको ज्ञान जो स्थूल कलश नहीं जो एक ज्ञानार्थक कलश जिनके सर पर परमपिता परमात्मा ने दे रखा है दे रखा है है ना तो वो उनका नाम क्या है उनको ही निमित्त रखा है उनका नाम क्या है? मैं वही कह रहा हूं। उनका नाम क्या है? जिनको निमित्त रखा है। वो तो देखिए म वो तो एक सेंटर नहीं है हमारा ढेर सारे सेंटर है। जितने भी जितने भी यहां पर शहर है मुख्य मुख्य शहरों में एक एक सेंटर सेंटर में एक कन्या माता हेड है। सेंटर में एक एक कन्या माता निमित्त शिव बाबा ने उनको निमित्त बनाया है। सेंटर बहुत बढ़िया के लिए बहुत बढ़िया अगली अब अगली बात ये अगला अगली बात ये है कि वो कौन
00:17:41:06 व्यक्ति है जो ये जो परंपरा है अच्छा एक चीज और ये जो कन्या माताओं को आगे करने वाली बात है ये ब्रह्मा कुमारी से आई है ना ये तो ब्रह्मा कुमारी में भी ऐसा ही होता होगा हां जी ब्रह्मा कुमारी में भी ऐसा ही होता है लेकिन एक बात है ब्रह्मा कुमारी में जो होता है वो दिखावे दिखावे का होता है। जैसे ब्रह्मा कुमारी में जो भी दिखाने के लिए उनको गद्दी पर बिठाया गया है। लेकिन पीछे से उनको चलाने वाले सारे पुरुष है। कन्या माता जैसे कि रबर स्ट रबर स्टैंप है। जैसे कि सारी जो ताकत है वो तो पुरुषों के हाथ में है। प्रॉपर्टी से लेकर के जो कुछ भी है बाकी उनका इतना डिटेल मुझे पता नहीं है। लेकिन कन्या माताओं को सिर्फ रबर स्टैंप की तरह मतलब एक तरीके से वहां पर भ्रष्टाचार है ब्रह्मा कुमारी में भ्रष्टाचार की बात नहीं कह रहा मैं नहीं तो दिखावे का मतलब भ्रष्ट आचरण का मतलब होता है एक मिनट भाई साहब भ्रष्ट आचरण का मतलब मतलब होता है गलत आचरण भ्रष्ट यानी गलत और आप ये कह रहे हैं वहां दिखावा हो रहा है यानी ढोंग हो रहा है तो ढोंग हो रहा है तो उसको भ्रष्टाचार
00:18:56:21 नहीं कह सकते क्या हां तो भ्रष्टाचार कह सकते हैं आपके आपके तरीके से लेकिन भ्रष्टाचार का जो मेन अर्थ है वो परमपिता परमात्मा ने बताया है कि भ्रष्टाचार माना भ्रष्ट इंद्रियों से जो आचरण किया जाता है उससे भ्रष्ट वो उसको भ्रष्टाचार कहा जाता है तो तो आप ये बताइए जब कोई व्यक्ति ढोंग कर रहा है कोई व्यक्ति एक मिनट भाई साहब क्लियर करते चले जब कोई व्यक्ति ढोंग कर रहा है जो चीज है नहीं वास्तविकता कह कुछ और रहा है यानी कि वाक इंद्री से वो गलत बोल रहा है क्योंकि सच्चाई ये है कि वही लीड कर रहा है मगर वो एक बता रहा है लोगों को कि मैं नहीं ये लीड कर रही है जो माता जी है तो ये तो इंद्री के द्वारा भ्रष्टा आचरण हो गया ना
00:19:49:06 देखिए हमको इन बातों में मना इन बातों में हमको जाना नहीं है हमको तो देखिए सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए कोई बात नहीं है यदि आप किसी मामले में जजमेंट नहीं देना चाहते हैं तो कोई बात नहीं उसमें आप बोल दीजिए कि भाई मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहता ठीक है तो अब ये बात आती है कि जैसे जैसे आप हैं तो आपने कहा हमारे आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के कई सेंटर हैं और उस उन सब में माता जी होती है जो लीड करती हैं और ये जो व्यक्ति है ये जो व्यक्ति है मतलब जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय पालम वाला जो मामला है इसने एक परंपरा का उल्लंघन कर दिया है कि वो अब यह वो अब खुद को आगे बढ़ा रहा है माता जी को आगे नहीं बढ़ा रहा है माताओं को आगे नहीं बढ़ा रहा है ना कह सकते हां अब बात ये आती है उसने आप मतलब जैसे अभी भी आपके परिवार जो आपका परिवार है उसके कई कई सेंटर है ना कई सेंटर है तो इस व्यक्ति ने इस व्यक्ति ने अपना एक ही सेंटर खोला या इसने अपने कई सेंटर खोल लिए हैं। अभी तो मुझे एक ही पता है। पालम। अच्छा। और इस व्यक्ति
00:21:04:12 का नाम क्या है जिसने खोला है? ये तो वही देव सिंह भाई के घर में खुला है। जिनसे आप अच्छा वो जिससे मैंने बात की थी उसका घर है वो। हां जी। अच्छा। हां तो देव सिंह के घर में खुला है तो वो हेड है। वो मतलब ये कह रहा है कि मेरे ऊपर ज्ञान का क्लश है। नहीं नहीं नहीं वो क्या कह रहे हैं उनका मतलब कहने का मतलब ये है कि आपने ये कहा ना कि वो अलग हुए हमसे कौन अलग हुआ है यहां से कौन गया है? कुछ महीने पहले तक कौन था? जो अब कह रहा है मेरे ऊपर ज्ञान का कलश है। कौन कह रहा है ज्ञान का कलश? यहां पर क्या है? मर ढेर सारे अनुयाय है हमारे अनुयाई है हमारे तो वो लोग म स्वतंत्र है अपनी अपनी तरीके से चलने के लिए माना नियम जो है वो हम किसी को नियमों में हम किसी को बांध के नहीं रखते ईश्वर जो है वो स्वतंत्रता का सम्राट है वो ईश्वर इसलिए कहा जाता है क्योंकि वो जोर जबरदस्ती जोर जबरदस्ती किसी पर शासन नहीं करता आप मेरी बात समझ नहीं आप बार बार धार्मिक सुनिए तो आप जो है ना धार्मिक आध्यात्मिक और दार्शनिक पक्ष में जा रहे हैं मैं अभी यह
00:22:19:13 पूछ रहा हूं कि जो वहां पर अब जो ज्ञान का कलश है ज्ञानार्थक वो ज्ञान का कलश हम अभी जिस विषय में चर्चा करने के लिए आए हैं मेरा कहने का मतलब है मेरा कहने का मतलब है कि वहां पर जो व्यक्ति क्लेम कर रहा है कि जो मेरे मेरे ऊपर ज्ञान का कलश है परमात्मा का परमात्मा ने दिया है वो व्यक्ति अमोल कोकने नाम का है जो शायद वकील भी था ना उस विषय में हम कुछ कह नहीं सकते। वो उनका क्या मत है उस विषय में हम कुछ [गला साफ़ करने की आवाज़] नहीं कह सकते। जब हमें उनके बारे में पता ही नहीं तो हम उसके बारे में जजमेंट कैसे दे सकते हैं? नहीं तो आपने ही तो कहा कि अभी थोड़े दिन पहले तक वो यही पे थे। वो कौन थे? इतना पता है ऊपर ऊपर की बात पता है। बाकी अंदर की बात है। वो कौन थे जो अभी कुछ दिन पहले तक यहां थे अब नहीं है। बस ये बता दीजिए। अमोल कोकने। अमोल कोकने। अच्छा हां जी। तो उन्होंने फिर अपना जो है एक सेंटर खोला है देव सिंह जी के घर में और जो है वह अपना यह कहना है उनका कि वो उनके ऊपर ज्ञान का कलश है। ठीक है? तो ये बात आपको इसलिए बताना जरूरी था कि आप जहां पर गए थे। तो
00:23:35:15 म तो म अभी आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के नाम से उन्होंने भी खोल रखा है तो आप इसमें कंफ्यूजन हो जाएंगे कि भाई सारे आध्यात्मिक विश्वविद्यालय मना क्या एक तरीके हम तो सभी को एक आपने उसमें टाइटल भी दिया था कि ये आध्यात्मिक विश्वविद्यालय है या पागलखाना अब भाई वहां जो व्यक्ति था वो बातें ही ऐसी कर रहा था आपने तो देखा ही होगा इसी बात के लिए मैंने आपको क्लियर किया कि उस सेंटर से हमारा कोई लिंक नहीं है। अच्छा तो एक बात बताइए कि जैसे एक सामान्य व्यक्ति है वो कह रहे हैं कि हम आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वाले हैं। आप कह रहे हैं कि वो लोग नहीं है वो नकली है। कुल मिला के बात यही है जब वो लोग नकली है तो ये हम लोग पहचान कैसे करें? वो नहीं है तो इसके लिए है ना परमपिता परमात्मा ने सभी को जजमेंट करने के लिए अलग-अलग म हर एक के अलग-अलग प्रकार की बुद्धि मिली हुई है सबको जन्म से ही सभी को बुद्धि की दा मिली हुई है तो अपनीप बुद्धि के अनुसार ही हमको जज करना है के सच्चाई क्या असलियत क्या है और असली क्या है नकली क्या है तो वो तो समझ जितना म
00:24:50:24 बुद्धि का उपयोग करके जितना समझने की कोशिश करेगा जितना जो गहराई में जाएगा तो उसको उतने ही मना गहरे जैसे सागर में गहराई में जितना गहराई में जाएंगे तो उतने हमको गहरे रतन मिलेंगे ऊपर ऊपर अगर हम तैरेंगे देखेंगे तो ऊपर ऊपर तो कचरा ही मिलेगा है ना मतलब कहने का ये है कि मैं मेरी बात समझिए आप मैं समझ रहा हूं कि आप शायद एक मिनट आप शायद मेरी बात को समझ नहीं पाते मैंने कहा कि कैसे डिसाइड करेंगे एक नहीं नहीं वो बात नहीं है आप दूसरे वे में चले जाते हैं। मैं अभी बताता हूं आपने जो बात कही ना गहराई में जाने की जैसे कोई ये क्लेम करे जैसे कोई ये क्लेम करे कि वो किसी का पिता है। ठीक है? अब उससे हमने कहा भाई दो लोग कह रहे हैं पिता है। तो दोनों ही लोग पिता तो नहीं हो सकते। एक पिता है। तो अब जो एक पिता है उससे हम मांगेंगे भाई कुछ हमें चीजें दो। अब वो अगर यह कहेगा गहराई में जाकर के देखो तो पहले तो उसके साथ जो है वो व्यक्ति जो उसकी संतान है वह जाकर के एक साल दो साल रहेगा तो यह नुकसान नहीं है। शुरुआत में कुछ तो चीजें हो प्रमाण के लिए कि हां ये पिता जैसे बर्थ सर्टिफिकेट में उसका नाम होना
00:26:06:02 है ना उसके सिग्नेचर होना कुछ ऐसी निशानियां होना तो अब पहले व्यक्ति अब बुद्धि से सेलेक्ट करना है अपना दिमाग यूज़ करना है तो व्यक्ति वहां जाके पहले भर्ती हो जाए जो नकली है जो नकली है आपके अनुसार मगर आप आपने सुनिए दो नहीं कह सकते एक मिनट भाई साहब अरे नकली नहीं है फिर आप ये क्यों कह रहे हो कि वो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नहीं है आप इस कन्फ्यूजन में ना होना दोनों बातें नहीं करनी चाहिए ना देखिए सांच को आंच नहीं होती अगर आप सत्य के रक्षक अगर आप धर्म के रक्षक है तो एक बिंदु भी झूठ नहीं होनी चाहिए अगर है तो कहिए नहीं है तो कहिए बीच किसी बात की नहीं है अच्छा सुनिए मैं जो कह कह रहा था मैं जो कह रहा था आपने कहा बुद्धि से जितनी गहराई में जाएंगे पता लगता जाएगा तो वो अपनी पूरे जीवन को वहां पर जो आपके हिसाब से प्रामाणिक नहीं है वहां पर बिता ये जांचने के लिए कि वो प्रामाणिक है या नहीं क्या हमारे पास कुछ ऐसा सिस्टम नहीं है तो ऑफिसियल मना अभी आप वहां पर गए तो कोई ना कोई तो आपको सही रास्ता दिखाने वाला आपका वीडियो जैसे हमने देखा तो हमने आपको बताया कि वो म ऑफिशियल नहीं है
00:27:21:06 हमारा। ये तो आपका क्लेम है ना। इसके संबंध में कोई आपके पास सामग्री कुछ साक्ष्य, कुछ तर्क ये कुछ चीजें होनी चाहिए ना। देखिए ज्ञान को प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं होती। अगर मतलब आप ये कह रहे हो कि कोई वो सेंटर जो है वो पुराना है म जो जो हमारा जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय जहां से ओरिजिन है तो वहां से हम म उसके अंडर में रह के जो जो सेंटर खुले हैं तो वही जो है हमारे म आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के ओरिजिनल सेंटर है तो वो तो आपको पता नहीं लगेगा आपको बता आपको थोड़ी आपको थोड़ी आसानी हो जाएगी। मैं बता देता हूं आपको कि जैसे कि मान लीजिए कि मैं ब्रह्मा कुमारी से जुड़ा हुआ था। वीरेंद्र देव दीक्षित नाम है ना जिन्होंने आध्यात्मिक विश्वविद्यालय शुरू किया था। है ना? तो वीरेंद्र वीरेंद्र देव दीक्षित जी आध्या ब्रह्माकुमारी से जुड़े हुए थे। कुछ आइडियोलॉजिकल डिफरेंसेस आए। उनके और ब्रह्मा कुमारीज के कांसेप्ट में उनको उन्होंने यह माना
00:28:36:09 कि यह एग्जैक्ट मुरली का सही अर्थ नहीं बता रहे हैं। मुरली का सही अर्थ थोड़ा ये होना चाहिए। यही बात है। ठीक है? थोड़ा सा आपने सही कुछ चेंजेस हो तो बदल लीजिएगा। अभी मोटा मोटा बता रहा हूं। अभी मैं मोटा मोटा बता रहा हूं। तो उन्होंने उन्होंने कहा कि भाई मुरली का सही अर्थ हम बताएंगे। तो अब वो बताएंगे तो उन्होंने अपना एक नया परिवार बनाया आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के नाम से। उस परिवार में हां बोलिए बोलिए वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के नाम से कई ब्रांचेस खोली उन सब में माताओं को नियुक्त किया। ठीक है? हां। अब जितने वो ब्रांचेस वीरेंद्र वो जो ब्रांचेस खुलते थे वो कहीं ना कहीं वीरेंद्र देव दीक्षित जी की अनुमति सिग्नेचर से खुलते होंगे। सिग्नेचर से खुलते थे या खाली कह दिया ऐसे ही खुल जाते। मतलब उसमें कोई ऑथराइज जो आज की कानूनी ये पत्र पत्र वगैरह ऐसा होता था क्योंकि अगर ये होगा तो हम किसी को भी क्लेम कर सकते भाई इसके पास लेटर नहीं है ये ये नहीं है ऑथेंटिक अगर ऐसा वर्बल ही था यही दिक्कत है यही दिक्कत है कि भाई वर्बल ही चल रहा था सब
00:29:51:13 इसलिए तो अब एक यहां से और दिक्कत वर्बल ही चल रहा है लेकिन आप जो है ना जो मेन टॉपिक जिस उद्देश्य से हमने ये कॉन्फ्रेंस किया है तो मेन क्या हमको ईश्वर जो ईश्वर के बारे में हमको जानना है तो बाकी साइड में रख के ये तो एक छोटी सी शंका है एक छोटी सी शंका है मेरी एक छोटी सी शंका है बस वो बता दीजिए कि वीरेंद्र देव जैसे आपने कहा माताओं को आगे बढ़ाना तो वीरेंद्र देव दीक्षित जी आगे कैसे बढ़े फिर मतलब वो तो स्वयं स्वयं पुरुष
00:30:36:04 तो देखिए गोपाल कन्हैया के लिए क्या गाया हुआ है कृष्ण जो म भगवान जो है गोपाल कन्हैया के रूप म कृष्ण के रूप में गओं को पालने के म गौ की पालना करते थे तो भगवान को गौ की पालना करने के लिए ही क्यों आना पड़ता है क्योंकि भगवान जो है वो दुख हरता है सुख करता है अच्छा तो आप आप सीधे कह दीजिए भाई साहब आप सीधे कह दीजिए कि वो स्वयं वो स्वयं आगे नहीं बढ़े वो तो इन जो ये माताएं हैं इनकी व्यवस्था के लिए थे। हां नहीं परम अभी आप मेरी बात थोड़ा ध्यान से सुन लीजिए आपका जो भी प्रश्न है ठीक है अभी जो है परमपिता परमात्मा शिव मना शिव जो है वो इस सृष्टि पर हाजिर नाजिर है मनुष्य सृष्टि पर आ चुके हैं और जो है ये अभी भाई साहब मैं अब यहां पर आपको थोड़ा ठोस तरीके से कहूंगा ये वाला जो पक्ष आ चुके हैं धार्मिक क्लेम आध्यात्मिक क्लेम, दविक क्लेम ये अभी हम पांच मिनट में शुरू करने वाले हैं। बस मैं अभी इतना जानना चाह रहा हूं कि आपने यह कहा कि वो स्त्रियों
00:31:51:15 को ही आगे बढ़ाया जाएगा। मगर वो वीरेंद्र देव दीक्षित स्वयं जो है आगे कैसे बढ़े उनके ऊपर ज्ञान का कलश कैसे आया? अरे वो तो खुद ही परमपिता परमात्मा परमात्मा का स्वरूप है ना। उसके उनके अंदर ही जो सुप्रीम सोल शिव है वो उनके शरीर में ही म उन उनके शरीर के द्वारा ही ज्ञान सुनाते हैं। प्रवेश प्रवेश करती थी। ठीक है? ये चीज मैंने यानी कि ये जो माताएं जिनको आप कह रहे हैं ना जिनके ऊपर ज्ञान का कलश होता है। इनके अंदर परमपिता प्रवेश नहीं करते। नहीं
00:32:28:26 परमपिता शिव सुनाते हैं ज्ञान उस ज्ञान को लोगों में बांटने का बांटने के लिए समझ गया समझ गया अभी वो वीरेंद्र अभी वो वीरेंद्र देव दीक्षित जी जो है जो जिनके अंदर परमपिता परमेश्वर आते थे तो वो अभी कहां है वो अभी कहां है मतलब उनके अंदर आज भी मुरलियां आती है डेली या नहीं आती जी [नाक से की जाने वाली आवाज़] देखिए अभी इस बात को समझने के लिए आपको जो है थोड़ा थोड़ा जो मैं अभी बताने जा रहा हूं वो आपको ध्यान से सुनना पड़ेगा। तो एकदम से आप म लास्ट सीढ़ी पर पैर रख दोगे तो कुछ समझ नहीं पाओगे। आप क्या करिए लास्ट सीढ़ी वाली जो बात है वह मुझे बताइए। अगर नहीं समझ पाया तो मैं कहूंगा कि आप भैया आप विस्तार से बताइए। जैसे लास्ट सीढ़ी वाला कोई जैसे लास्ट सीढ़ी वाला कोई फार्मूला है H2SO4 तो H2SO4 मुझे आपने बताया मैंने कहा मैं तो जानता नहीं हूं H2SO4 NaCl मैं तो जानता नहीं हूं तो फिर मैं कहूंगा कि आप मुझे पूरा एक्सपेंड कर दीजिए। हो सकता है समझ जाऊं। एक बार ट्राई तो करिए।
00:33:44:12 अभी आप समझ लीजिए जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी है इनका सफर शुरू कैसे हुआ? तो ब्रह्मा कुमारी मैंने आप बताइए पूरा हिस्ट्री बताइएगा आप पूरी हिस्ट्री बताइएगा मगर मुझे अभी ये बता दीजिए कि वो अभी है परमात्मा उनके अंदर ही आते हैं या किसी और के अंदर आते हैं मतलब वो है कि गए क्या हुआ उनका वो तो अभी माना अभी शरीर छोड़ चुके हैं अभी उनका नया जन्म दूसरा जन्म हो चुका है तो वो जो जन्म है कहां पे
00:34:21:15 तो वो जो जन्म है उसके लिए तो इशारे है। सारे मुरलियों में इशारे दिए हुए हैं। बाबा ने जो इशारे इशारे आपने इशारे डिकोड कर लिया आपने देखिए उनका जो टाइम दिया टाइम जो म प्रत्यक्ष होने का जो टाइम है वो फिक्स है जबकि महाशिवरात्रि महाशिवरात्रि जब होती है तो महाशिवरात्रि माना जब की घोर अज्ञान अंधकार की रात्रि जब सारी दुनिया में फैलती है जब सारी दुनिया में माना जैसे अज्ञान के अंधेरे में जैसे सब ठोकरे खाते रहते हैं। किसी को सही रास्ते का पता नहीं चलता। तो ऐसे जब सारे ही आधार खत्म हो जाते हैं तब वो म अंधकार को खत्म करने के लिए वो महाशिवरात्रि म जब सारी दुनिया में महाशिवरात्रि होती है वो अभी बहुत जल्दी ही आने वाली है वो टाइम तो उस महाशिवरात्रि में वो शिव की प्रत्य शिव की प्रत्यक्षता नदी हुई है ड्रामा में नहीं कह रहा हूं मैं मैं पूछ और पूछ रहा हूं। मैं भाई साहब पूछ ये रहा हूं। एक मिनट एक मिनट मेरा सवाल क्लियर मैं सवाल क्लियर कर दूं
00:35:36:26 कि जो वीरेंद्र देव दीक्षित है ये इन्होंने शरीर कब छोड़ा और दोबारा दूसरे शरीर में इनके आने की संभावना है भविष्य में आने वाले हैं या फिर अभी भी है किसी शरीर में। एक तो ये हो गया। एक तो ये हो गया। दूसरा दूसरा सवाल है दूसरा दूसरा सवाल है कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी के शरीर में परमात्मा आते थे तो फिर जो अगला शरीर जो होगा वो परमात्मा पकड़ेंगे ना उस शरीर को अब वीरेंद्र देव दीक्षित का तो काम खत्म हो जाना चाहिए जी नहीं क्योंकि वीरेंद्र देव दीक्षित स्वयं परमात्मा नहीं वीरेंद्र देव दीक्षित स्वयं पर भाई साहब अभी मेरी बहस नहीं हो रही है आपसे डिबेट नहीं कर रहा हूं मैं आपसे अभी मैं आपकी बातें सुन रहा हूं मैं अभी भी क्वेश्चन कर रहा हूं। मैं अभी आपको काउंटर नहीं कर रहा हूं। अभी मेरी क्या है बात कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी स्वयं परमात्मा तो थे नहीं। क्योंकि आपकी जो आईडियोलॉजी है उसमें ये है परमात्मा पर काया में प्रवेश करता है। इतना पक्का है। नहीं आप इस बात को परमात्मा स्वयं आता है। अभी सुन लीजिए ना। देखिए भाई साहब भाई साहब सुनिए तो देखिए ऐसा
00:36:52:02 मैं आपको मैं आपको क्यों देखिए हमारे पास कोई सुबह तक का तो टाइम है नहीं समझ रहे हैं हो सकता है कि आप जो बात परमपिता परमात्मा के बारे में पूछा तो आपको यह बात क्लियर करना जरूरी है कि परमपिता कौन है और परमात्मा कौन है तो परमपिता जो है अच्छा ठीक है ठीक है समझ गया समझ गया मैं आपकी बात समझ गया परमपिता परमात्मा परमपिता के शरीर में आते हैं। यह होगा परमपिता जो है वह परमात्मा के पिता परमपिता परमात्मा परमपिता के शरीर में आते होंगे। देखिए परमपिता अलग है। परमपिता जो है वो है शिव और परमात्मा वो है शंकर। तो दोनों मिलकर के परमपिता परमात्मा हो गए। तो नाम पड़ा शिव शंकर। ठीक है? तो शिव जो है उनको अपना शरीर नहीं है। वो माने उनको अपना शरीर नहीं है लेकिन है तो ज्ञान के सागर वो अजन्मा है अकर्ता है अभोक्ता है लेकिन उनके वो त्रिकालदर्शी है भाई साहब आप ये बताइए कि जो विजय वीरेंद्र देव दीक्षित है वो शिव है शिव शिव ने शरीर में प्रवेश
00:38:07:10 किया है किसी के या शंकर है या कौन है वो बताइए बहुत ज्यादा उसमें उस पार्ट में मत जाया करिए बहुत ज्यादा वो प्रवचन जैसा वो अभी चालू करेंगे हम लोग आपको मिलेगा वो बोलने का मौका मिलेगा। अभी आप मुझे थोड़ी क्लेरिटी दे दीजिए कि वो जो वो जो शरीर है ना वीरेंद्र देव दीक्षित जी का उसको हम शंकर मान ले या शंकर जी का प्रवेश मान ले या शिव जी का प्रवेश मान ले वो क्लियर करिए अभी उनका महिमा मंडन नहीं चाहिए कि वो वो है निर्वाद है अबाद है ये वो ये सब नहीं चाहिए अभी अभी क्लिटी पहले मुझे हेडलाइन मिल जाए फिर मैं उनमें से किसी एक हेडलाइन पर अपनी जिज्ञासा आपसे शांत करूंगा समझ रहे हैं हेडलाइन तो दीजिए मुझे वो बताइए वीरेंद्र जो दीक्षित जी जो है वो है शंकर अच्छा और जो उनमें तो शंकर जो है वो परम पिता है सॉरी वो परमात्मा है म आत्माओं के बीच में वो परम पार्ट धारी है म इस सृष्टि रूपी रंग मंच पर वो ऑल राउंड पार्ट धारी है म इस मनुष्य सृष्टि का जो भाई कितना उनके महिमा मंडलन में लग जाएंगे उनकी पहचान बस करनी अभी अभी चालू करेंगे ये वाला पार्ट आपको बता तो रहा हूं। आप उनका महिमा मंडन करने लग जाते हो।
00:39:22:14 हां तो ठीक है। इस बात में संतुष्ट है आपके वो विजय वीरेंद्र देव दीक्षित जो है वो शंकर भगवान का एक ऐसा रूप मनुष्यों के बीच में आते हैं। म वो म शंकर काम के आधार पर नाम पड़ता है। ठीक है? उन्होंने शंकर शंकर माना क्या है? मिक्स। ठीक है? तो शंकर माना मिक्स। तो उनमें जो है शंकर माने मिश्र में लिखा हुआ है वर्ण शंकर जायते सारे वो शंकर होता है भाई साहब वो शंकर होता है वो शंकर है ये शंकर है भाई साहब भाई साहब मैंने थोड़ा बहुत पढ़ा है अध्ययन किया आपको दिखा दूं उसमें सा होता है सा सड़क वाला और शंकर एक मिनट भाई साहब अंतर है भाई साहब भाई साहब सुनिए सुनिए सुनिए शंकर निम्नता का अरे सुनिए तो भाई साहब सुनिए देखिए ये हमारा टॉपिक नहीं है मगर मैं अब मेरी जानकारी जो है वो बता दूं शंकर एक निम्नता का द्योतक है शंकर श्रेष्ठता का द्योतक है ठीक अब आप अब आप सबको शंकर और शंकर एक ही मानते हैं तो आप कोई बात नहीं उसको कह लीजिए आप अपनी बात रखिए क्योंकि वो मेरा विषय नहीं है। ठीक
00:40:37:20 है तो अभी बात आपको म समझ में आ गई मतलब जो परम जो शंकर भगवान है जो शंकर भगवान है वो वीरेंद्र देव दीक्षित के रूप में प्रकट होते हैं। हां जी हां तो अभी शिव जो है वो उन प्रवेश करने वाला है। शिव शिव में प्रवेश करते हां उनमें प्रवेश करते क्योंकि शिव अपना शिव को अपना शरीर नहीं है। तो शिव जो है वो शंकर में प्रवेश करते हैं। यानी कि शिव शंकर बनते नहीं है। शंकर की बॉडी में प्रवेश करते हैं। हां जी। इसीलिए शिव के साथ शंकर का नाम जोड़ा जाता है। शिव ब्रह्मा नहीं कहा जाता। शिव विष्णु नहीं कहा जाता। शिव शंकर कहा जाता है। क्योंकि शंकर के रूप में ही वो संसार में प्रत्यक्ष होते हैं। क्योंकि शंकर जो है वही एक ऐसा पुरुषार्थी है जो कि शिव समान स्टेज को एक सवाल हल हो गया। एक सवाल हल हो गया। दूसरा वाला जो सवाल है कि वो उनका जो जन्म है मतलब मृत्यु पिछला जो शरीर था उनका वो पूरा हो चुका है। है ना? हां जी। और अभी उन्होंने नया शरीर धारण किया है शंकर ने। हां जी। हां जी।
00:41:54:04 बिल्कुल। और कभी कभी उनके अंदर शिव जी आते हैं। कभी कभी उनका वो उनका मुकर रथ है। कभी कभी की मना ये संगम युग में ही आते हैं। और संगम युग के बारे में आप समझ लीजिए। मतलब की शंकर जो बॉडी है वीरेंद्र देव दीक्षित जी की वो उसमें दो एंटिटीज है। एक निराकार शिव और स्वयं शंकर दो एंटिटीज है। हां जी। दो आत्माएं हैं। शरीर एक ही है। अच्छा ठीक है। ठीक है। तो इसको ऐसे भी तो कह सकते हैं कि शिव ही शंकर बन जाते हैं। इसमें क्या दिक्कत है? बात तो एक ही हो गई। शिव का मतलब होता है भोला। और शंकर का मतलब शिव के साथ जुड़ा हुआ है भोला। और शंकर के साथ जुड़ा हुआ है भाला। शिव का हम लोग विग्रह बनाते हैं। शिव का लिंग बनाते हैं। उसको हम शंकर लिंग नहीं कहते। और नहीं है आप कहते नहीं है मैं बताऊ मैं बताऊ दो आत्मा भक्ति मार्ग की बात है ना कोई बात नहीं कोई बात नहीं जैसे एक शरीर है एक शरीर है एक शरीर है उसके अंदर दो दो आत्माएं है एक शंकर
00:43:09:10 की और एक परमात्मा स्वयं है शंकर ही परमात्मा है और शिव जो है वो परमपिता है परमपिता तो एक शरीर है उसमें दो चीजें हैं। शंकर भी है और शिव भी है। ठीक है? शंकर और शिव दोनों में एक शरीर में। तो शिव पहले जो भी अब वो जो भी कहते हैं वो दोनों कह रहे हैं। जो भी करते हैं वो दोनों कर रहे हैं। हां जी। म कहने वाला शिव है। उनके द्वारा नहीं तो तो बात तो दोनों की है ना वो। बात तो दोनों की है ना जो है उसमें जो उसमें भी जो पढ़ाई पढ़ाने वाला है वो है शिव क्योंकि ज्ञान का सागर जो है वो शिव है शिव में सारा आदि मध्य अंत का ज्ञान भरा हुआ है सृष्टि के आदि मध्य अंत का ज्ञान मैं दूसरी बात पूछता हूं आप आप तुरंत अपने चैप्टर्स खोलने लग जाते हैं समझ नहीं मतलब मैं कैसे आपसे बात करूं मैं अभी मैं अभी ये पूछ रहा हूं कि जैसे जैसे उन्होंने कुछ उठाया मान लीजिए कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने अपनी बॉडी से कुछ उठाया रुमाल उठाया ठीक अब ये रुमाल रुमाल दोनों दोनों की इच्छा से उठाए
00:44:24:14 बॉडी आपका कहना है कि वो सिर्फ शंकर की है शिव जी की नहीं है ऐसा है [गला साफ़ करने की आवाज़] अब देखिए उसमें देखने में तो नहीं आता कि कौन कर रहा है। मेरा कहने का मतलब ये है कि वो कौन सी चीज है जिसके कारण हम ये माने कि अलग-अलग है। इसमें दो है वो क्या है गैपिंग है हवा खाली हवा है एक आत्मा लेफ्ट में है एक आत्मा राइट में है यह फैसला कैसे हुआ शिव जो है वो असोचता है और शंकर जो है वो मनन चिंतनशील है मनस मतलब मतलब शिव के अंदर शिव के मतलब शिव के अंदर वो नहीं है ज्ञान नहीं है शिव शिव जो है अमन शिव जो है शिव जो है ना वो उसकी म वो अमन है म उसका मन नहीं है ठीक है तो वो विचार हो गया
00:45:33:06 के लिए सोचना नहीं पड़ता उसको नहीं नहीं वो जड़ है बुद्धि है उसके बुद्धि है कि नहीं शिव के वो तो बुद्धि मानो की बुद्धि है। सेवक जो है वो सोच सकते हैं कि नहीं? मतलब उनके पास कैपेसिटी है कि नहीं? विचार देखिए विचार जो है ना उसको करना पड़ता है जिसके बुद्धि में कोई कन्फ्यूजन है। शिव की बुद्धि में कोई कन्फ्यूजन नहीं है। इसलिए वो म जो भी बोलता है सत्य ही बोलता है। उसके मुख से कुछ भी गलत निकल नहीं। जैसे जैसे कि शिव ने बोला जैसे कि जैसे जैसे कि शिव ने बोला कि मैं शिव हूं। ठीक ये एक विचार है ना देखिए भगवान कभी शिव ने शंकर के मुख से बुलवाया। भाई क्यों बात को पकड़ते हो? शिव ने शंकर के मुख से बुलवाया कि मैं शिव हूं। [गला साफ़ करने की आवाज़] शंकर भी नहीं कहेगा कि मैं शिव हूं। क्योंकि एक उदाहरण एक उदाहरण दे दीजिए। एक उदाहरण एक उदाहरण दे दीजिए कि शिव जैसे बोलते हैं तो क्या बोलते हैं?
00:46:48:19 मैं पूछ रहा हूं आप अरे भाई साहब कुछ और कह रहा हूं। आप लड़ने बैठे हैं क्या मुझसे? मैं कुछ और पूछ रहा हूं। तो पता नहीं आप क्या कर रहे हैं। मैं पूछ रहा हूं कि आप एक उदाहरण दे दीजिए कि शिव इस तरह की बात बोलते हैं। एक उदाहरण दीजिए मुझे। देखिए शिव जो है वो इस तरह की बात मना अभी मुरली की मैं बात आपको पढ़ के सुना दू आपको हां एक उदाहरण बस उदाहरण चाहिए बहुत लंबा नहीं एक पंक्ति चाहिए बस एक पंक्ति देखिए जैसे मुरली में आया है बाप तुम बच्चों को समझाते हैं तो तुमको बस बस बस बस ये शिवजी ने बोला है ना हां जी हां तो बात बच्चों को समझाते हैं। यह बैकरी वाक्य होता है ना उससे पहले ये मन में होता है। है ना? हम जब ये बोला गया तब ये सुनने का विषय बना। कानों का विषय बना। जब ये बोला गया इससे पहले एक विचार था मन में। ठीक है? तो आप कह रहे हो कि शिवजी के पास मन नहीं है। तो ये विचार कहां पे था? फिर
00:48:03:06 उनको विचार करने की जरूरत ही नहीं। अरे मैं क्या कह विचार कर विचार उसका ये जो ये जो ये जो सत्य है ये ये जो सत्य है कि बाप तुम लोगों को बता रहा है ये एक सत्य है ना सत्य है ना अब ये जो सत्य है इससे पहले कहां था बोलने से पहले लिखने से पहले ये सत्य कहां था ठीक है जब बोला तभी तो वाक्य बना मतलब इससे पहले इससे पहले अस्तित्व में नहीं था। यह जो सत्य है बाप तुम लोगों तुम लोगों को बता रहा है। यह पहले नहीं था उसमें अस्तित्व में उससे पहले उससे पहले अस्तित्व में नहीं था। जब बोला तभी अस्तित्व में आया। अच्छा तो मतलब ये सनातन सत्य नहीं है। सनातन सत्य है। अभी आप टॉपिक चेंज कर रहे हैं। नहीं तो आप आप जो है वो वहां फंसने वाली बात है ना कि आपने ये कह दिया मन नहीं है। अब मैं उनके द्वारा बोली हुई किसी बात को पूछ रहा हूं। ये बात जो है इससे पहले किस रूप में थी। अब आप उसको स्वीकार नहीं करोगे तो फिर मैं वहां पर आपको काउंटर करूंगा कि अगर मुरली सनातन सत्य है तो वो कम से कम लिखा लिखी दिखाई देने
00:49:18:12 से पहले वो मन में होनी चाहिए नहीं तो मानना पड़ेगा कि देश काल परिस्थिति में ये बनाई जा रही है। ये सनातन सत्य नहीं है। पहले से एक्सिस्ट नहीं करता था ये सत्य। ये बात अभी आप सत्य सनातन की परिभाषा किसको कहेंगे? भाई साहब परिभाषा अलग मैं परिभाषा सुनूंगा। आप ये बता दीजिए यह पहले एक्सिस्ट में नहीं था ना। ठीक है? नहीं था ना? नहीं था। नहीं था। वो भाई साहब को भेज दीजिए आप। आप आप जो पीछे से आपको सिखा रहे हैं उनकी आवाज आ रही है। आप उनसे कहिए वो आ जाए अगर उनको ज्यादा पता है तो। हां। थोड़ा डिस्टरबेंस आता है। क्या है ना? वो क्या है? जब उनकी वो आवाज आती है। हां नहीं था। हां नहीं था। ऐसी आवाज आती है ना उनकी तो इरिटेट करती है। इरिटेट करती है।
00:50:08:28 अभी एक बात समझ लीजिए कि मनुष्य को मन होता है। ठीक है? और मनुष्य को भगवान नहीं कहा जा सकता। क्योंकि उसका मन भाई साहब मैंने सवाल तो ये पूछा है कि ये जो विचार है जो ये बात है ये बात होने से बाद के रूप में आने से पहले वाक्य के रूप में आने से पहले एक विचार ये विचार कहां पे था? ये ये तो जब बोला तभी तो उत्पन्न हुआ। अच्छा चलिए छोड़िए अब हटाइए। हो गया। ठीक है। अब हम आगे बढ़ते हैं कि शिव जी जो है आते हैं शंकर की बॉडी में और अच्छा शंकर के पास भी अपना मन विचार है कि नहीं है कि वो भी नहीं है। शंकर के पास मन है। मन है। हां जी। इन दोनों में से इन दोनों में से सुपर पावर शिव है। सुपर पावर क्यों है? अच्छा ठीक ठीक अब समझ में आ गया। तो
00:51:10:02 अभी जो है आपका कहना ये है कि आपने आपके यहां पे भी मेल की बॉडी में ही मामला चालू हुआ और आप मगर आपने जो प्रचारिका बनाया वो स्त्रियों को बनाया। मगर आपके यहां से जो निकल के गया व्यक्ति अमोल कोकने नाम का उसने जाहिर सी बात उसने अच्छा उसने वीरेंद्र देव दीक्षित जी की बात को माना है या नकार दिया है कि मतलब वो अभी भी यही मान रहा है कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी की बॉडी में ही शिव वो शिव शिव शंकर है मतलब वो दोनों वही है या फिर वो ये कह रहा है मैं हूं मैं शंकर हूँ मेरी बॉडी में शिव है नहीं नहीं वो वीरेंद्र तो दीक्षित जी को ही मानते हैं अच्छा ठीक ठीक ठीक अच्छा अब दूसरी बात ये आ गई आपने कहा है कि उन्होंने पिछली बॉडी छोड़ दी थी और अभी नई बॉडी में चुके हैं वो बॉडी कौन सी है और कहां है वो बॉडी अभी बहुत जल्द प्रत्यक्ष होने वाली है संसार में मतलब अभी अभी आध्यात्मिक विश्वविद्यालय को नहीं पता है बॉडी कहां है वो तो अभी परीक्षा का समय है ये महाशिवरात्रि के समय जब परीक्षा होती है ना तो अभी तक अभी तक सन 1936 से यह संस्था शुरू हुई तब से लेकर अभी तक वीरेंद्र देव दीक्षित
00:52:25:13 जी का जो शरीर शरीर छोड़ा था उन्होंने वो कब छोड़ा था वो 2023 के पहले तो 23 से अब तक [नाक से की जाने वाली आवाज़] 23 से अब तक कोई मुरली नहीं आई है नहीं और ये ब्रह्मा कुमारीज में तो डेली मुरली आती है ब्रह्मा कुमारी की जो मुरली आती है ना वो 1969 के पहले की जो उन्होंने ब्रह्मा बाबा ने जो बोला है उन्होंने वो लिख के छाप करके रखा है उसी मुरलियों को वो लोग म रिपीट करते रहते हैं डे बाय डे तो नहीं तो ये नाटक होता है कि आज फिर परमपिता परमात्मा के मतलब शिव जो है वो किसी बॉडी में आके बोल के गए ये नाटक है मतलब वो तो अभी भी मानते हैं ना परमात्मा रोज आ रहे हैं वो आपने उनसे पूछा नहीं कि परमात्मा किसके तन में आ रहे हैं। आपने उनसे यह बात उन्होंने ना उन्होंने क्लियर की आपको कि ये मुरलियां आ कहां से रही है? ना आपकी मछ रहा अनुसार क्या है? आपके अनुसार मैं ये नहीं कह रहा कि है क्या? मैं ये कह रहा हूं आपके अनुसार क्या है? आपके अनुसार
00:53:42:02 18 जनवरी 69 को वो ब्रह्मा बाबा ने शरीर छोड़ दिया। उससे पहले तक म 1951 से लेकर के 1969 18 जनवरी 1969 तक जो भी ब्रह्मा बाबा ने बोला है वो जो है मुरलियों के रूप में लिख के या ऑडियो रिकॉर्डिंग करके रखी हुई है तो उनहीं मुरलियों में से सिर्फ चार पांच साल की मुरलिया उनके पास शेष है जो रिपीट करते रहते हैं और ये कहते हैं कि हमारे ऊपर फिर ब्रह्मा बाबा है किसी ना किसी को वहां बिठा देते हैं और फिर कहते कहते वो ब्रह्मा बाबा आए और बोल गए पहले पहले वो लोग कहते थे कि गुलजार दादी में वो म शिव आते थे लेकिन वास्तव में उनमें शिव नहीं आते वो ब्रह्मा की आत्मा आती है और ब्रह्मा की आत्मा आ के गुलजार दादी के अंदर अव्यक्त वाणी नाम की वाणी चलाते हैं तो जिसमें जो है वो ब्रह्मा बाबा जो है वो देवात्मा है तो देवत्मा जो है धारणा की वाणी चलाती है। धारणा युक्त वाणी चलाती है। तो उसमें जो है हमको मनुष्य से देवता म बनने के लिए जो जो धारणा हमको
00:54:58:02 जो देवी हमको धारण करनी है तो वो सारी बातें वो ब्रह्मा बाबा गुलजार दास जी के तन में प्रवेश करके बताते थे। तो वो पार्ट भी जो है वो 2017 के बाद बंद हो गया। अच्छा ठीक है कोई बात नहीं। एक बात यह है कि जैसे हम कह रहे आती है तो यह बॉडीज जो होती है ब्रह्मा जी हैं शंकर है क्या यहां के अलावा हमारे बीच के अलावा भी कहीं पर है रहते हैं आपकी मान्यता क्या है इसमें देखिए जो भी मना इस पृथ्वी के अलावा और कहीं भी कोई मनुष्य सृष्टि नहीं है ना माना इस पृथ्वी के अलावा और कहीं भी कोई मनुष्य संसार
00:55:55:27 पृथ्वी के अलावा ये जो शंकर है जो शंकर है जैसे आपने कहा कि वो वो गए ठीक है शंकर तो स्वयं देधारी का नाम है ना हां आत्मा तो अविनाशी है वो तो आत्माशी आत्मा अविनाशी है तो मतलब शंकर भी वास्तविकता में निराकार आत्मा ही है। शंकर भी वास्तविकता में निराकार आत्मा ही है। ऐसा है। हां शंकर भी आत्मा ही है। और आत्माओं का भी वो भी आत्मा ही है। आत्मा और म जो आत्मा और आत्माओं के पिता में [नाक से की जाने वाली आवाज़] अंतर ये है कि मनुष्य आत्माएं जो है वो इस सृष्टि में आकर के शरीर धारण कर करके शरीर धारण करके अपना अपना अनेक जन्मों का पार्ट बजाती है।
00:56:53:03 लेकिन शिव जो है [नाक से की जाने वाली आवाज़] वो [गला साफ़ करने की आवाज़] इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर म गर्भ से जन्म गर्भ से जन्म नहीं लेता और उसका आने का भी जो टाइम है वो भी गीता में शिव जो है गर्भ से जन्म नहीं लेता जो शंकर है जो शंकर वो आत्मा है जो शंकर नाम की वो गर्भ से जन्म लेती है हां जी अच्छा मतलब वो जो बॉडी होती है वो वो जो बॉडी होती है वो अविनाशी नहीं होती है वो मतलब बॉडी नहीं होती बॉडी जो है वो अविनाशी मना बॉडी तो अभी 5000 साल से जो है ये मनुष्य सृष्टि चल रही है ठीक है पांच चार साल से मनुष्य सृष्टि में ज्यादा से ज्यादा मनुष्य हो गया वो हो गया वो हो गया तो अभी दोबारा से उसमें आ जाते है एक क्लियर कर कहते हैं कि वो जो शंकर ने जो जन्म लेना है जब वो जन्म ले लेंगे तो फिर उस बॉडी में वो आएंगे। जबकि कहना चाहिए कि बॉडी दोनों लोग धारण करते हैं। शिव को भी बॉडी चाहिए। शंकर को भी बॉडी चाहिए। दोनों
00:58:08:04 निराकार है। फिर अंतर क्या है दोनों में? अंतर वही है कि वो उनके पास मन नहीं है और शंकर के पास मन है। अंतर यह है कि एक सगुण है एक अगुन है। लेकिन दोनों मिलकर के सगु नहीं कछु भेद दोनों मिलकर एक हो जाते हैं स्वभाव संस्कार से। शिव जो है ना वो इस मनुष्य सृष्टि में जब आता है तो जो मनुष्य सृष्टि का जो बीज है मनुष्य सृष्टि का जो आदि पुरुष है जिसको म जिसको हर धर्म में मान्यता प्राप्त है म जिसमें जिसको हर धर्म में मान्यता है आदि पुरुष के रूप में जैसे हिंदुओं में उनको आदिदेव कहते म आदिदेव कहते हैं शंकर को और जैनियों में आदिनाथ कहते हैं। क्रिश्चियनों में उनको एडमम कहते हैं। मुसलमानों में उनको आदम कहते हैं। तो मनुष्य सृष्टि का जो म बीज है या मनुष्य सृष्टि का जो आदि पुरुष है उसकी हर धर्म में मान्यता है। [गला साफ़ करने की आवाज़] अच्छा वो जो है धर्म का मनुष्य कहने का मतलब है
00:59:24:07 नहीं कहने का मतलब ये है के मनुष्य हर धर्म में जो अलग-अलग नाम से आपने कहा कि जो शिव है वो अगुण है यानी उनके अंदर गुण नहीं है। नहीं गुण है ये आना जाना क्या है गुण आना जाना माने प्रवेश करते हैं तो प्रवेश करना प्रवेश करना क्या है उनके पास प्रवेश करने का गुण है ना हां तो वो गुण तो उनके अंदर है लेकिन बिना शरीर के वो गुण जो है वो प्रत्यक्ष नहीं होते मतलब मतलब मतलब वो अगुण नहीं है अगुण नहीं है वो। देखिए उसके अंदर गुण शिव जो है वो गुण और अवगुण दोनों से परे है। अरे भाई तो ये प्रवेश करना ये प्रवेश करना क्या है फिर? ये क्वालिटी है ना एक वो प्रवेश कर सकते हैं किसी के शरीर में। तो प्रवेश करने के लिए योग्य है। तो [गला साफ़ करने की आवाज़] तो गुण हुआ ना? गुण किसे कहते हैं? आप ये बताइए गुण किसे कहते हैं? गुण माना गुण म जो भी हमारे अंदर हमारा एक्टिविटीज
01:00:39:18 है [नाक से की जाने वाली आवाज़] भाई साहब उनको कहिए वो भी आ जाए आप दोनों लोग आ जाइए आप आ जाओ बगल में आ जाओ बीच में बीच में बोलते हो ना वो अजीब वो थोड़ा सा विघ्न है आपस में बात कर रहे हैं वो लोग नहीं नहीं वो आपको बताते हैं ना वो खुसुर फुसुरता वो अच्छा नहीं लगता है आप तो इतने मतलब स्वयं में ही सामर्थ समर्थवान दिखते हैं फिर भी आप उनको बोल बोल रहे हैं खुसुर खुसुर खुसुर खुसुर वो अजीब लग रहा है। देखो चोरी हो रही है। ऐसे नहीं करना चाहिए। ठीक है। वो लोग नहीं बोलेंगे। आप बोलिए। हां ये कह रहा था मैं कि आपने कहा वो अवगुण है। गुण नहीं है उनमें। अब अब जो है ये गुण किसे कहते हैं? ये बता दीजिए।
01:01:25:27 ठीक है गुण और अवगुणों की जो बात है ना वो साकार में जब शिव जो है जब मैं नहीं कह रहा हूं गुण दिखाई कब देता है मैं कह रहा हूं गुण कहते किसे है ये बताइए ये गुण माना अब गुण की परिभाषा आपके अकॉर्डिंग तो मैं बता नहीं पाऊंगा म गुण जो अपने अकॉर्डिंग बताइए ना भाई साहब आप अपने अकॉर्डिंग बताइए ना भाई साहब गुण गुण जो है वो त्रिकालदर्शी है। ठीक है? और त्रिमूर्ति के त्रिमूर्ति को भी रचने वाले हैं। ब्रह्मा विष्णु शंकर को भी रचने वाले हैं। वो ज्ञान का सागर है। उनके अंदर ज्ञान का अखूट भंडार भरा हुआ है। और प्यार का सागर कहा जाता है। भाई साहब पता नहीं आप कहां चले जाते हैं। तुरंत आप अपने प्रवचनों में चले जाते हैं। बार-बार मैं आपको पूछ रहा हूं। हां तो ये आप कि वो ऐसा करते हैं, वो ऐसा करते हैं। ये कहां से आ गया? गुण की परिभाषा देनी है ना? तो गुण ही तो मैं बता रहा हूं। बताइए एक बार और बता दीजिए। गुण गुण किसे कहते हैं?
01:02:37:27 गुण जो है वो म शिव के जो शिव के अंदर जो है वो मैं बता रहा हूं। वो ज्ञान का सागर है। अरे भाई साहब आप क्या बता रहे हैं कि मैंने पूछा कि भैया यह बताइए एनर्जी किसे कहते हैं? तो आप बता रहे हैं मोटरसाइकिल जो है वो वो जो है पेट्रोल का सागर है। पेट्रोल की टंकी है उसमें पहिया लगा हुआ है। हवा भरी ये क्या है? भाई मैं पूछ रहा हूं गुण किसे कहते हैं? मेरी जानकारी में गुण ये है कि वो यह कर सकते हैं। यह कर सकते हैं। वह ऐसे होते हैं। वैसे होते हैं। क्वालिटीज उसको गुण कहते हैं। किसी की क्वालिटी क्या है? उसको गुण कहते हैं। है ना? तो आप तो जब क्वालिटीज को गुण कहते हैं तो आपके जो ये जो शिव है जिनको आप अगुण कह रहे हैं जिनमें गुण नहीं है। तो अगर गुण नहीं है तो ये जो प्रवेश कर रहे हैं प्रवेश करना क्या है? उनके अंदर उनके अंदर किसी को किसी शरीर को धारण करने का गुण है ना? हां चलो ये चलो ठीक है
01:03:47:10 तो फिर वो तो फिर वो अगुण नहीं है फिर चलिए कोई कोई बात नहीं कोई बात नहीं कोई बात नहीं हम लोग दूसरा चैप्टर अब खोलते हैं। अब छोड़िए ये वाला जो फटसी की दुनिया है इससे थोड़ा बाहर निकलते हैं और थोड़ा सा दूसरी चीजों पे आते काफी भारी हो गया उसको लाइट करते थोड़ा अब मुझे ये बताइए कि आपने बता दिया कि शिव ऐसा करते हैं शंकर ऐसा करते हैं ये है वो है बहुत सी चीजें मैंने सुनी आपकी अब मुझे बताइए ईश्वर है यह सिद्ध कैसे होता है [नाक से की जाने वाली आवाज़]
01:04:26:02 ईश्वर है या सिद्ध ऐसे होता है अभी आपने टॉपिक छेड़ा है तो इसके लिए जो है हमारा वाला जो पार्ट है ना कि आप कौन है आप क्या सोचते हैं और आप जो है आपकी पहचान इत्यादि के विषय में वो पार्ट अभी खत्म हुआ है। अब मैं आपके जो आध्यात्मिक विचार हैं है ना उनको जानना चाह रहा हूं कि वो कितने पावरफुल है। उसमें कितना सामर्थ है। वह जानने के लिए पहला सवाल है कि आप मुझे बताएं कि ईश्वर है यह सिद्ध कैसे होता है? ठीक है। ईश्वर जो है पहले तो आप ईश्वर की परिभाषा समझ लीजिए कि ईश्वर माना जो है ईश माना शासन करने वाला। और वर माना श्रेष्ठ। तो जो श्रेष्ठते श्रेष्ठ इस संसार में आकर के जो श्रेष्ठते श्रेष्ठ शासन करता है। तो वो है ईश्वर। जिसकी सत्ता जो है वो सभी को म स्वीकार करनी पड़ती है। नास्तिक से नास्तिक स्वीकार करनी पड़ती है। होती नहीं है। ईश्वर है जिसकी सत्ता दो चीजें हो गई। मैं क्लियर कर रहा हूं। ईश्वर वो है जिसकी सत्ता
01:05:41:10 सब जगह है। ये ईश्वर है या ईश्वर वो है जिसकी सत्ता सबको माननी है। भले ही हो ना हो। माननी है, स्वीकार करनी है। जैसे मान लीजिए जैसे मान लीजिए किसी ने परमाणु बम बना लिया। वो कह रहा है मेरी सत्ता मानो। नहीं तो परमाणु लगा दूंगा। ये तो मानना हो गया। देखिए सत्ता मानी कब जाएगी? जब उसकी सत्ता चलेगी। अगर कोई इंकार करता है कि नहीं हम ईश्वर को नहीं मानते। अगर कोई कहता है कि हम ईश्वर को नहीं मानते। जब उसके भी सर पर डंडा बजेगा तो वो भी मानने के लिए मजबूर हो जाएगा। मतलब है जिसकी सत्ता सब जगह है। सब जगह है। है लेकिन हमेशा नहीं है। ईश्वर जो है वो म कलयुग के अंत में ही इस सृष्टि पर आता है।
01:06:35:18 अब समझ लीजिए कि कलयुग का रहता है। ऊपर परमधाम में आत्मलोक में गीता में देखिए गीता में एक श्लोक आया मतलब अभी मैं सोच रहा था कि पृथ्वी के अलावा और कोई लोक नहीं है आप आप एक आत्मलोक को मानते हैं आत्मलोक जहां परमात्मा का लोक ठीक है जी तो वो परमात्मा के परमात्मा के लोक से यहां आता है कलयुग कलयुग के अंत में हां क्योंकि सृष्टि मकान पुराना होता है अब आप सुन लीजिए ना आप बीच में बोलते रहेंगे तो मेरी बात ये नहीं जानना चाहता ना कि क्यों आता है जब मैं पूछू तब बता दीजिएगा मैं अभी वही पर क्वेश्चन कर रहा हूं ना कि भाई जब वो वहां रहता है आत्मलोक में और जब वो यहां नहीं होता है तो यहां सब फ्री होते हैं मतलब मतलब यहां उसकी कोई सत्ता नहीं होती है जैसे देखिए कुमार का जो चाक होता है कुंभ पहले आपने एक बात समझ ली ना आप एक बात समझ ली ना कि वो क्यों आता वाला प्रश्न मेरा था ही नहीं। अभी जो आपने बात कही है उसी में से एक प्रश्न कर रहा हूं। क्यों आता है अलग बात हो जाएगी। ठीक है? तो अभी मुझे ये बताइए कि जब वो वहां होता है तब भी उसकी सत्ता होती
01:07:50:21 है नीचे सब जगह या वो तभी होती है जब वो आता है तब होती है। तब तक बाकी सब सत्ता हीन सत्ता से रहित होते हैं। उसकी ईश्वर ही सत्ता से रहित होता है संसार। नहीं नहीं ईश्वर की सत्ता सदा कायम होती है सृष्टि पर सदा कायम इस सृष्टि पर ईश्वर की सत्ता होती है अब तक मैं अब तक मैं आपकी बात से एक बात समझाऊं कि ईश्वर वो है जिसकी सत्ता हर काल में और हर देश में है। है ना? अब देखिए आप ईश्वर की ईश्वर एक और बात बताना चाहता हूं आपको कि जो परमपिता शिव है वो जब इस सृष्टि पर आता है तो किसी एक व्यक्ति को मना अपने जैसा संपूर्ण 100% अपने जैसा बना के जाता है। तो वो जो है इस सृष्टि पर सदा कायम म सृष्टि को चलाने के लिए निमित रहता है। तो जब कभी भी मना देखते देखते हैं कि सृष्टि जो है पतन में जा रही है तो थोड़े म टाइम टू टाइम वो उस सृष्टि को बचाने के निमित्त बनता है। तो जैसे कि मना
01:09:06:00 जो सृष्टि का मनुष्य सृष्टि का आदि पुरुष है वो संगम युग में ही म पुरुषार्थ करके शिव समान बन जाता है। तो म वो शिव बाबा कहा जाता है। तो जब फिर से नई सृष्टि की शुरुआत म परमपिता परमात्मा अभी कलयुग के अंत में आ के इस कलयुगी सृष्टि का विनाश करके नई सृष्टि का निर्माण करके वो अपना काम खत्म करके वापस जाके परमधाम में बैठ जाते हैं। तो फिर किसी को शिव बाबा बना के जाते होंगे। एक को आप समान बना जाते हैं 100% बाकी सब नंबर वन कोई उससे थोड़ा कम मेरा प्रश्न अभी मेरा प्रश्न वही की वही है। वो बना जाते हैं किसको वो बना जाते हैं किसको क्या कर जाते हैं वो बात एक अलग है। मैं ये पूछ रहा हूं। मैंने सवाल ये किया है कि उनकी सत्ता हर जगह है या नहीं है। हर जगह है। हर समय है। हर जगह भी है। हर समय भी है।
01:10:14:00 हर समय में भी है। हर इसको कहते हैं देश काल परिस्थिति सब में उसकी सत्ता है। है ना? हां जी। और जब वो जब वो क्या कहते हैं? जब वो वहां होते हैं आत्मलोक में तो अपना जो कार्यभार है अपने जैसा एक को बना के जाते हैं यहां 100% हां जी [गला साफ़ करने की आवाज़] ठीक है वो भी तो वो उनका काम करते हां सिर्फ 100 साल के वो उसका काम करते रहते हैं जो उसका काम है वो करते रहते हैं हां जी अच्छा जब वो वहां होते हैं और दूसरे को काम दे जाते हैं जब वो वहां होते हैं और दूसरे को काम दे जाते हैं तो उस समय यहां पे होने वाली जो चीजें हैं वो उनको उनको मालूम होती है कि नहीं मतलब उनको बिल्कुल डिस्कनेक्ट बिल्कुल डिस्कनेक्ट होके बैठ जाते हैं। बिल्कुल डिनेक्ट एक मिनट बिल्कुल डिनेक्ट मैं कह रहा हूं बिल्कुल डिस्कनेक्ट होके बैठ जाते हैं या फिर देखते हैं पूरा सृष्टि में क्या चल रहा है पूरा देखते हैं। नहीं नहीं बिल्कुल डिस्कनेक्ट होके बैठ जाते हैं। उनको उनको कोई मतलब नहीं संसार में क्या चल रहा है। वो तो एक म
01:11:29:01 वो क्या है एक पूरा फिल्म सेटिंग करके ड्रामा का म जो ड्रामा जो है ना वो पूरा करके जैसे कोई जैसे कोई सिनेमा हॉल में पिक्चर चलाने वाला प्रोजेक्टर चलाने वाला व्यक्ति होता होगा उसको मालूम है कि उस फिल्म में क्या होना है तो वो अपना प्रोजेक्टर चला के अपना चायवा पीता रहता है बैठता है अलग तो ऐसे ही वो जो वो है अपना पिक्चर चालू कर दी और वह अपना जाते हैं [नाक से की जाने वाली आवाज़] उनको मालूम है कहां क्या हो रहा है उनको मालूम ही नहीं इसमें और करेक्ट और करेक्शन इसमें जो शिव है वो है डायरेक्टर वो हमेशा पर्दे के पीछे रहता है और बाकी सब हम जो है वो है एक्टर और यह सृष्टि जो है ये रंगमंच है
01:12:17:08 कि जब वो यहां से जाता है तब भी उसका कंट्रोल सब जगह होता है वहां बैठे बैठे या फिर वो कंट्रोल यह जो नीचे होता है व्यक्ति जिसको अपने जैसा बना के जाता है उसके माध्यम से होता है। इन दोनों के बीच में कोई कनेक्शन होता है कि भाई ऐसे से ऐसा या नहीं होता है ये थोड़ा सा क्लियर करें। देखिए अभी एक फिल्म एक फिल्म जब बनती है तो फिल्म पर्दे पर आने से पहले उसकी शूटिंग होती है। ठीक है? तो हर एक पार्टधारी को पता है कि मुझे क्या करना है। वो हर एक पार्ट हर एक म एक्टर का वो ड्रामा सेट करके जाता है। अब यहां पर एक्टर भी जो है ना अपनी क्वालिटी के हिसाब से अपना पार्ट चुनते हैं। जिसमें जितनी क्षमता होगी परमात्मा शिव जब इस सृष्टि पर आता है तो उसके वो जो ज्ञान सुनाता है तो उस ज्ञान को कोई तो 100 परसेंट पकड़ता है और कोई जो है वो 1% पकड़ता है। तो नंबर व जितने भी सृष्टि पर एक्टर है म ए टू जेड जितने भी 500 700 करोड़ म 800 करोड़ जितनी भी जनसंख्या है उनमें से हर
01:13:32:09 एक का पार्ट जो है वो इस म सुप्रीम सोल शिव परमात्मा शिव परमपिता शिव वो सेट करके जाता है जिसने जितनी परमात्मा से पढ़ाई पढ़ी और जिस अनुसार पढ़ाई पढ़ी उस अनुसार उसने अपने अनेक जन्मों का भाग्य इस एक जन्म के पुरुषार्थ में उसने बना लिया। जबकि परमात्मा इस सृष्टि पर आता है। कब आता है? संगम युग में आता है। और यह संगम युग 100 साल का होता है। बता दीजिए। अब आप मुझे ये बता दीजिए सत्ता से आपका क्या तात्पर्य है? सत्ता का मतलब क्या है? नहीं अभी आप ये जो बात तो समझ लीजिए। ये समझ गया। मैं समझ गया कि वो फिल्म सेट करके जाता है। उसको सब मालूम ही है। उसको सब मालूम है कहां क्या हो रहा है। वो देखे चाहे ना देखे। तो ये जो फिल्म है ना ये 5000 साल तक चलती है। अच्छा नीचे नीचे जो ये वाले होते हैं जो जो 100% होते हैं जो 100% होते हैं नीचे वाले इनको भी सब मालूम होता है या ये अपने आप में नए होते हैं। इनको केवल 5000 साल में ये केवल दृष्टा होते हैं। इनको भविष्य मतलब इनकी क्या क्वालिटीज होती है? इनकी क्वालिटी यह होती है कि इन्होंने अपनी आत्मा में
01:14:47:10 जितनी जितनी पावर भर ली तो उस अनुसार वह श्रेष्ठ से श्रेष्ठ म इनको जैसे संगम युग में जो भी पार्ट इन्होंने भर लिया अपनी आत्मा में ये अनेक जन्मों तक ये पावर काम करती है आत्मा में। अरे भाई इन्होंने जब मेरी बात को आप समझिए भाई साहब। थोड़ा सा भटक रहे हैं आप। मैं यह पूछ रहा हूं जब सुनिए सुनिए जब जो शिव शिव जी है जो शिवजी वो जब यहां पिक्चर चालू करके जाते हैं तो आपने कहा कि एक व्यक्ति को अपने जैसा बना के जाते हैं। उसके अंदर सारी पावर होती है। वो देहधारी होता है। इतना तो है। सिर्फ एक व्यक्ति को ही नहीं। परमात्मा आता है तो सारी दुनिया के लिए म सारी दुनिया ही उससे उसके ज्ञान से लाभान्वित होती है। कोई म कोई 100% जैसे टीचर पढ़ाता है आपने तो कहा था कि एक व्यक्ति को 100% अपने जैसा बना के जाता है। लेकिन तो सिर्फ एक व्यक्ति को ही नहीं पढ़ाई पढ़ाता ना। पढ़ाई तो सभी को पढ़ाता है। मैं यह नहीं कह रहा हूं। 100% एक को बना के जाता है कि सब कईों को बना के जाता है। क्लियर कर दीजिए। को एक ही 100%
01:16:03:08 एक जो है 100% पुरुषार्थ बनता है और शिव किसी को नहीं एक व्यक्ति एक व्यक्ति तपस्या से अपनी बल से पुरुषार्थ से 100% शिव के जैसा बनता है ये भी पहले से ही सेट होता है एक ही बनेगा हां हां और ये भी पहले से ही सेट होता है इनकी जो यादगार है इनकी जो यादगार मैं मैं दूसरा प्रश्न पूछ रहा हूं मैं कह रहा हूं आप मुझे सत्ता से मतलब बता दीजिए। सत्ता क्या है? सत्ता माने अथॉरिटी उसकी पावर जैसे राजा है। प्रैक्टिकल बताइए। पावर पावर से मत प्रैक्टिकल बता दीजिए। एक उदाहरण देके बता दीजिए कि पावर से मतलब क्या है? भाई देखिए बात ये है। मैं देखिए पावर पे प्रश्न क्यों किया मैंने? आपने कहा कि यह जो फिल्म है वो रची हुई है पहले से वो चल रहा है उसमें वो बार-बार पिक्चर चालू करके जाता है और पिक्चर चालू करते टाइम जिन्होंने पुरुषार्थ किया होता है उनको वो इधर से उधर ले जाकर के छोड़ के दोबारा से और एक व्यक्ति जो है तपस्या वाला हो जाता है अपने अपने हिसाब से अपने अपने हिसाब से पुरुषार्थ के हिसाब से लोगों को अगला जो सृष्टि चालू होती है उसमें उनको रोल मिल जाता है यही है
01:17:18:09 देखिए हर जब भी यह सृष्टि का पुनर्निर्माण होता है तब तब शिव इस सृष्टि पर आता है। जब जब हुए धर्म की हानि बड़े अधम असुरों अभिमानी अरे भाई मैं पूछ क्या रहा हूं मैंने इसलिए पूछा है यह प्रश्न कि जब सब कुछ पहले से सेट है तो सत्ता का मतलब क्या है फिर जब सब कुछ सेट है तो सत्ता का क्या मामला है ये पूछ रहा हूं मैं और दूसरी बात ये भी पूछ रहा हूं कि जो लोग इस दुनिया से उस दुनिया में प्रवेश करते हैं अगले नाटक में वो किसी ने पुरुषार्थ कम किया है तो उनका रोल बदलता है या फिर ये भी पहले से सेट होता है कि इसका क्या मतलब वो जो इस इस दुनिया में जो जिसका जो रोल था अगली दुनिया में भी उसका वही रोल रहेगा। ऐसा कुछ है। अभी अभी यहां पर एक बात और समझने की है आप शायद म उसको समझ नहीं पाए। एक बात और बतानी है आपको कि जब ये सृष्टि की शुरुआत होती है तो म जनसंख्या जो है वो बहुत थोड़ी होती है। सिर्फ 9 लाख जनसंख्या होती है सतयुग के आदि में। जब सृष्टि की शुरुआत होती है, नई सृष्टि की शुरुआत होती है तो 9 लाख से इस सतयुग की शुरुआत होती है और 5000 साल बाद कलयुग
01:18:33:22 के अंत में आकर के परमधाम से सारी आत्मा जब नीचे उतर आती है तो कुछ समय पहले वो परमात्मा शिव जब सारी आत्मा नीचे उतरने को होती है तब वो परमात्मा शिव को भी सृष्टि पर आना पड़ता है। जबकि सारी ही आत्मा सृष्टि पर मौजूद होती है तब वो आ के ऐसा मैंने ज्ञान सुना था कि भाई साहब मैंने प्रश्न दूसरा पूछा है। मैंने ये पूछा है कि जैसे यह जो मैं अभी जो इस समय कर रहा हूं यह मैंने यह अपनी जैकेट की चैन ऊपर की यह पिक्चर का एक सीन है ना है ना अब जब पिक्चर दोबारा चालू होगी तो मैं अगली पिक्चर में मेरी ही आत्मा ये चैन ऊपर करेगी किसी शरीर को धारण करके या फिर किसी और ने जो कर्म किए होंगे उसके हिसाब से उसको मेरे जैसी बॉडी मिलेगी और फिर वो करेगी इस चैन को ऊपर नीचे कौन करेगा मैं नहीं मेरी आत्मा ही करेगी या किसी दूसरे की? सेम टू सेम वही सेकंड बाय सेकंड पांच चार साल में जो कुछ भी बीता वो सेम टू सेम रिपीट होता है। मैं कह रहा हूं घटनाएं सारी वही होंगी। मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं भाई साहब मैं कह रहा हूं घटनाएं सारी
01:19:48:26 वही होंगी। जो रोल को प्ले कर रहे हैं वो लोग बदल जाएंगे या फिर वो एज इट इज वही रहेंगे। जैसे मेरी आत्मा ने अभी ये किया इस जन्म इस नाटक में ये जो आज की जो डेट है एक एज इट इज वही रहेगा तो अगले जन्म में भी मैं यही करूंगा अगले जन्म की बात नहीं कर रहा मैं अगली सृष्टि अगली सृष्टि अगली सृष्टि उसमें भी यही करूंगा
01:20:20:19 यही करोगे अभी जैसे हम बातचीत कर रहे हैं ठीक है ठीक ठीक है भाई साहब समझ गया भाई साहब समझ गया यानी कि मेरी जो आत्मा है वो हर 5000 वाली साल वाली जो सृष्टि होती है उसमें 1 दिसंबर 2026 के दिन शाम को 824 बजे के आसपास ये चैन ऊपर नीचे करती है ना सही है एज इट इज अब ये बताइए कि पुरुषार्थ का क्या मतलब रहा अब ये बता दीजिए पुरुषार्थ का क्या मतलब रहा और इसका क्या मतलब मतलब रहा सप्ताह का। अभी बता दीजिए। अभी पुरुषार्थ का मतलब यह है कि आपको जो म आपको जो अभी पता है कि अभी आप चैन ऊपर नीचे कर रहे हैं। अभी तक का ही पता है आपको। आगे क्या होना है उसका पता नहीं है और इस जन्म में अभी तक जो समय बिताया आपने इस एक जन्म का ही आपको पता है इसके बाद आने वाले जन्मों का आपको पता नहीं है उसमें हमको उसमें [नाक से की जाने वाली आवाज़] हमको हम क्या बनेंगे लेकिन अभी हम संगम युग में संगम युग संगम युग का इतना महत्व है कि परमात्मा शिव जब सृष्टि पर आया हुआ है भाई साहब
01:21:35:25 मैं पूछ रहा हूं मेरे पुरुषार्थ करने से फायदा क्या होगा वो बताइए क्या आप अगर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की शिक्षाओं पर चलेंगे तो आपको यह फायदा मिलेगा यह होगा आप तो मनुष्य से देवता बनेंगे इसी जन्म में यानी यानी कि अगली सृष्टि में अगली सृष्टि में जो मैंने इस सृष्टि में नहीं पाया है वो मिल जाएगा सतयुग देखिए सतयुग की शुरुआत होगी तो वो देवता ही सृष्टि होगी [हंसी] तो देवता देवता म जो अभी जो परमात्मा से यानी कि मेरी आत्मा ने इस सृष्टि में जो किया है जरूरी नहीं कि अगली सृष्टि में मेरी आत्मा वही एज इट इज करेगी।
01:22:24:02 अगर मैंने पुरुषार्थ किया तो बदल जाएगा। 5000 साल 5000 साल में ज्यादा से ज्यादा एक आत्मा 84 जन्म लेती है। 5000 साल में मैं ये पूछ रहा हूं जैसे मैंने अभी एक तारीख बताई तो अगर मैंने पुरुषार्थ किया और अगले जन्म में भी मुझे यही चीज मिली इस तारीख के दिन तो मुझे फायदा क्या मिला वो बता दीजिए। आपको अगले जन्म का तो पता नहीं है ना। इस जन्म में आप पुरुषार्थ इस जन्म में आपको पुरुषार्थ करने के लिए शरीर मिला है। इस जन्म में आपको पुरुषार्थ तो इस जन्म में आप जो पुरुषार्थ करेंगे उस पुरुषार्थ के आधार पर आपके अगले 84 जन्म डिपेंड करेंगे कि आपको वही राजा बनना है या
01:23:15:20 देवता बनना है राजा बनना है ये जो पुरुषार्थ है पुरुषार्थ से मिलने वाला राजा बनना देवता बनना ये सब जो चीजें हैं ये बदल सकती है तो ये फिक्स्ड पिक्चर नहीं है। ये फिक्स नहीं है। फिक्स जो म अभी आपको है ना अपने अनेक जन्मों का तो पता नहीं है ना। आपको तो सिर्फ इस एक जन्म के जितने समय अभी आप कहने का कहने का मतलब है जो पिक्चर फिक्स है ये ईश्वर के लिए। आपको तो यहां के हिसाब से करना है और आपको नहीं मालूम है कि ये फिक्स पिक्चर है। तो आप पुरुषार्थ करो। ये बात है। नहीं नहीं आप समझे नहीं। मैं ये बता रहा हूं कि आपको तो अभी इस जन्म का अभी तक का ही पता है कि अभी तक क्या हुआ है मेरे साथ। अरे भैया मैं ये कह रहा हूं मैं प्रश्न ये कर रहा हूं कि जो अगली सृष्टि होगी अगर उसमें भी मुझे 1 दिसंबर 2026 के दिन ये चैन ऊपर नीचे करनी है तो आज के बाद अगर मैंने पुरुषार्थ किया भी है या अब से पहले जो किया भी होगा उसका मुझे फल क्या मिलेगा अगर वो फिक्स है कि मुझे यही करना है क्या कुछ अपग्रेडेशन होगा नहीं होगा अपग्रेडेशन होगा तो बदल गया सीन बदल गया अपग्रेडेशन
01:24:30:28 नहीं होगा तो मेरी मेहनत का मुझे फल क्या मिला वो वो तो जो फल है मेरी मेहनत का वो इसी जन्म जन्मों में मिलना है या सृष्टि बदलने पर भी मिलना है। सृष्टि बदलने पर भी आपकी आत्मा में अभी आप समझ लीजिए एक बार मैं जो बताना चाह रहा हूं वो आप समझने की कोशिश कीजिए। सुन लीजिए थोड़ा अभी हम संगम युग में संगम युग का आप मतलब समझ गए कि परमात्मा जब इस सृष्टि पर आया सन 1936 से लेकर या 2036 तक ये है संगम युग का पीरियड। मेरी एक बात सुनो भाई साहब विवेक नाम है ना आपका जो बातें बोलने के बिना काम चल जाए वो मत बोलो जैसे परमात्मा आया अब आपने बताया कि 201936 से ये ये बोलने की आवश्यकता नहीं है बार-बार क्या जरूरत है ये बताने पर आप सिद्धांत बताइए ना आप उसमें तारीख क्यों बता रहे हैं बार-बार उसमें जो आपकी एक्सप्लेनेशन है वो बहुत एक मिनट उसमें जो आपकी एक्सप्लेनेशन है वो बहुत लंबी हो जाती है जिसके कारण जो मुख्य विषय होता है उससे ध्यान हटता है। आप आप वस्तुनिष्ठ जानकारियां मत दीजिए। सिद्धांत बताइए केवल कि परमात्मा आता है। जैसे परमात्मा 1936 से यहां तक आता है। ये क्या बता
01:25:46:07 ये क्यों बता एक बार बता भी दिया आपने कि वो आए थे 1936 से चालू हुआ है। ये सब बता तो दिया आपने बार-बार उसको क्यों बता रहे हैं? जिससे कि हम लोग ये सोचने लग जाए। हां वही वही है परमात्मा। वही है परमात्मा। ये इसलिए उन उन बातों को कहने से बचिए। जिन बातों को कहे बिना काम चल सके श में रखिए बातें थोड़ी बताइए में बात यह है आप एक जन्म परमात्मा से पढ़ाई पड़ेंगे तो 84 जन्म आपको 84 जन्म आपको कुछ नहीं करना पड़ेगा राजा बनेंगे महाराजा बनेंगे आप मनुष्य से देवता बनेंगे ढाई हजार साल की जो सृष्टि परमात्मा तैयार कर अपने भविष्य को बदल सकता हूं अगर मैं पुरुषार्थ करूंगा तो आप पुरुषार्थ करेंगे परमात्मा से जो पढ़ाई पढ़ के आप देवी गुणों को धारण करेंगे तो मनुष्य देवता भविष्य को बदल सकता हूं अगर मैं पुरुषार्थ करूंगा परमात्मा से पढ़ाई करूंगा तो हां जी बिल्कुल तो भविष्य को बदल कैसे सकता हूं भविष्य तो पहले से तय है तय नहीं है आपको पता है आपका अगले जन्म में क्या बनेंगे मुझे नहीं मुझे नहीं है मगर मैं वही बनूंगा ना जो जो परमात्मा ने
01:27:01:10 फिक्स कर रखा है। मैं तो वही बनूंगा। हो सकता है आपने म अभी पुरुषार्थ नहीं किया। जैसे आप अगर अभी पुरुष आप तो यही सोचेंगे कि जो होना है सो होना है तो हम खाना नहीं मना बैठे रहेंगे। खाना अपने आप आ जाएगा। हम अपने हाथ से उठाएंगे नहीं खाएंगे नहीं तो पेट में मैं वही तो कह रहा हूं। मैं वही तो कह रहा हूं कि ये सब फिक्स है ना भाई। मुझे कुछ करने की जरूरत क्यों है फिर? फिक्स फिक्स जो है वो म आपका पुरुषार्थ करने का भी अगर आपके ड्रामा में फिक्स होगा तो आप पुरुषार्थ करेंगे। अगर आपने हिम्मत की कि हमको पुरुषार्थ करना है। मनुष्य से देवता बनना है। देखिए ऐसा है। आपके पास इस बात का जवाब नहीं है। हम रोज इस बात का जवाब देते हैं लोगों को। मैं बता देता हूं। मैं बता देता हूं। आपके पास इस बात का सटीक उत्तर नहीं है। मैं दे देता हूं। वाल्मीकि रामायण में लिखा है। अरे सुन लो अब मैं बता रहा हूं। बहुत देर हो गई। आप बता नहीं पा रहे हो। वाल्मीकि रामायण में लिखा हुआ है भाग्य के भरोसे। अरे सुन लो भाई मैं आपको सुन तो रहा हूं इतना लंबा लंबा। वाल्मीकि रामायण में लिखा है वाल्मीकि रामायण में लिखा है भाग्य के भरोसे रहने वाला जो होता है वो नो नो नो नो नो नो नो नो नो नपुंसक होता है। ठीक है? तो अब बात ये है अरे
01:28:16:19 भाई सुन लो भाई सुन लो मेरे भाई। क्या है कि यह पिक्चर फिक्स्ड है। मगर यह किसको पता है? ईश्वर को। अगर आपकी थ्योरी को मैं इस समय सपोर्ट कर रहा हूं। ये पिक्चर फिक्स्ड है। ये किसको पता है? ईश्वर को। हमारे अनुसार हमें हमारी जानकारी फिक्स्ड नहीं है। तो हमारा व्यवहार क्या है? व्यवहार यही है कि जो है हमें कर्म करना है, पुरुषार्थ करना है। उसके अनुसार हमें मिलेगा जो मिलेगा। हमें ये नहीं सोचना जो होगा वही मिलेगा। क्योंकि वो जो वाली बात है एक मिनट भाई साहब परमात्मा जो है वो हर जन्म में आ के शूटिंग नहीं करता वो इस कलयुग के अंत में भाई साहब इस पूरी 5000 साल की इस पूरी 5000 की साल की सृष्टि में जो होना होगा वो परमात्मा को वही होना है ना पता है ना उसको हां ठीक है आपने आप अगर अपने सुनो हमें अपने पर्सेक्टिव से जो दिख रहा है वो वो हमें करना है और यह बात सत्य है कि परमात्मा को पता है कि क्या होने वाला है क्या होगा वो त्रिकालदर्शी है उसको पता है वो ड्रामे में क्या होना है क्या नहीं होना है ठीक है यही है ना देखिए त्रिकालदर्शी के बच्चे भी मास्टर
01:29:31:25 त्रिकालदर्शी होते हैं वो बच्चों को भी म जिन जो बच्चे उससे पढ़ाई पढ़ते हैं अरे भैया वाली बात वो अलग चैप्टर है कि उसके और बच्चे कितने हैं और कौन-कौन लोग हैं जो त्रिकालदर्शी है वो अलग चैप्टर है मैं अभी ये कह रहा हूं कि हमें अपने आंख से जो दिख रहा है वो कार्य करना है। भले ही हमें मालूम है कि सब कुछ फिक्स है। ठीक है? मैं यह कह रहा हूं। जैसे कि जैसे कि हमें मालूम है एक नजर से हमको मालूम है कि पृथ्वी गोल है। मगर हमारी नजरों से दिख रहा है कि पृथ्वी चपटी है। तो हमें चलना कैसे है? अपनी नजरों के हिसाब से कि पृथ्वी चपटी है मगर वो बात अलग है कि वास्तविकता में पृथ्वी गोल है। वास्तविकता है हमारी दृष्टि जो है धोखा हमारी दृष्टि से जो दिख रहा है वो धोखा अरे भाई तो फिर तुम मुझे वजहार क्यों कर भाई इतना लंबा खींच रहे हो बात को जब तुम जब तुम इसको भी ठुकरा दोगे कि हमारी नजर धोखा दे देती है वो सही बात है तो फिर व्यक्ति पुरुषार्थ क्यों करेगा पुरुषार्थ इसलिए करेगा क्योंकि हमको राजा बनना है मनुष्य से देवता बनना है तो वही बनूंगा ना मैं तो वही बनूंगा ना जो लिखा है नाटक मैं तो वही बनूंगा। भगवान किसी का भाग्य लिखता नहीं है। वो
01:30:48:07 मैं कह रहा हूं भगवान ने लिखा है जो पिक्चर पहले से सेट है। जो नाटक पहले से सेट है मेरे भाई विवेक जी जो नाटक पहले से सेट है वही होना है। तो फिर मुझे पुरुषार्थ करने की आवश्यकता क्या रह गई? आपको पुरुषार्थ करने की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि आपको मालूम नहीं है कि आगे क्या होने वाला है। मैं वही तो कह रहा था। मैं वही कह रहा हूं जो मुझे मेरे नजरिए से जो दिखाई दे रहा है उसके अनुसार काम करना है। वो बात अलग है कि मेरा वो चीजें सब सेट है। भगवान ने आपको बताया कि आपको पुरुषार्थ करना है। आप ये पुरुषार्थ करेंगे तो ऐसे बनेंगे। ये पुरुषार्थ करेंगे तो ऐसे बनेंगे। ध्यान नहीं देना है। की पिक्चर फिक्स है। सुनिए। अब एक पॉइंट निकल के आया। एक पॉइंट निकल के आया है। एक पॉइंट निकल के आया है विवेक जी। एक पॉइंट निकल के आया है विवेक जी कि इस बात पे ध्यान नहीं देना है कि पिक्चर फिक्स है। ये पॉइंट निकल के आया है। ठीक है? पिक्चर फिक्स है। इस पे ध्यान नहीं देना है। तभी हम पुरुषार्थ करेंगे ना। पहली बात। सुनो। अब अब बात ये है सत्ता क्या संगम युग का आपने जो पूछा भाई वो बताओ सत्ता क्या
01:32:03:08 है ईश्वर की सत्ता सब जगह है वो बताओ देखिए सत्ता क्या है सत्ता माना परमात्मा का जो ज्ञान है तो ज्ञान के आधार पर जो हमारी आत्मा के अंदर संस्कार भर जाते हैं अच्छे या बुरे तो उन म निर्णय शक्ति जो हमारे अंदर भर जाती है जब राजा है और राजा के अंदर म कंट्रोलिंग पावर जो होती है वो कहां से आती है? उन्होंने राजा म जैसे शिवाजी महाराज हो गए महाराणा प्रताप हो गए पृथ्वीराज चौहान हो गए तो इन्होंने ये कंट्रोलिंग पावर इनके अंदर आई कहां से इन्होंने इनके लिए कोई स्कूल कॉलेज था क्या नहीं ये परमात्मा ने संगम युग में संगम युग में इनके अंदर संस्कार शिवाजी महाराज के गुरु थे समर्थ रामदास गुरु शिष्य परंपरा है हमारे यहां पर वो उनके गुरु थे यह ग्रंथ रखा हुआ है समर्थ रामदास का ये देखिए ठीक है? ये शिवाजी के गुरु थे। तो यह कहना बंद करिए कि कोई स्कूल कॉलेज थे क्या? खैर अब आप अपनी बात बताइए मुझे कि वो सत्ता क्या है? भाई साहब सत्ता तो अभी बता दिया मैंने। परमात्मा की जो सत्ता है वो है ज्ञान। तो
01:33:18:14 ज्ञान जो है ज्ञान से ही वो ज्ञान एक ही बात है। सत्ता और ज्ञान एक ही बात है। अच्छा आप सत्ता का क्या अर्थ निकाल रही है? मैं नहीं समझ पा रहा हूं। आपने अथॉरिटी बोला था ना? अथॉरिटी अथॉरिटी हां तो अथॉरिटी बोला था ना अरे अरे अभी आप मुझसे पूछ रहे हो तो मैंने पूछा आपने अथॉरिटी बोला था। अथॉरिटी का मतलब पूरी दुनिया की कोई भी डिक्शनरी खोलेंगे तो उसमें निकले कंट्रोल जिसका वो निर्णायक हो जो जहां का वो वहां का सत्ताधारी वहां का निर्णायक कहलाता है वही अथोराइज्ड होता है। जैसे कि आपके यहां पर एक वर्बल अथॉरिटी चलती थी जिसका उल्लंघन किया है इन्होंने अमोल कोकने ने वर्बल [गला साफ़ करने की आवाज़] अथॉरिटी का कि भाई तुमने अपने को ही आगे बढ़ा लिया। पुरुषों को आगे बढ़ा लिया। जबकि कन्याओं को स्त्रियों को प्रचारिका के रूप में निकालना था। इसको कहते हैं। अब आप कह रहे हो सत्ता का मतलब ज्ञान है। तो ज्ञान और सत्ता एक ही बात है। देखिए परमात्मा जो है वो ज्ञान के आधार पर ही अपनी सत्ता कायम करता है। बिना ज्ञान के सत्ता कैसे कायम होगी? सत्ता का मतलब है कंट्रोल। ठीक है? कंट्रोल के कंट्रोल का मतलब हमारी जानकारी में क्या है? वो मैं पहले बता दूं।
01:34:33:20 जैसे कि सुनिए जैसे कि ये पड़ा हुआ है ये ये एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। मेरा इस पर ये कंट्रोल है कि मैं इसको उठा सकता हूं नीचे से ऊपर। ये मेरा कंट्रोल है इसके ऊपर। ठीक है? ये सत्ता है मेरी इसके ऊपर। फिलहाल इतनी इतना काम मैं कर सकता हूं। इसको नीचे से उठा सकता हूं। ठीक? अब ज्ञान क्या है? ज्ञान तो ये तो जड़ वस्तु है। तो जड़ वस्तु को तो मैं ज्ञान दे नहीं पाऊंगा। ठीक है? तो क्या अब आप थोड़ा सा क्लियर करिए कि ज्ञान के रूप में वो सत्ता क्या मामला है वो ज्ञान के रूप में म सत्ता ऐसे है कि परमात्मा जो है वो म किसी के ऊपर जोर जबरदस्ती कंट्रोल नहीं करता है जैसे किसी कोई गलत चीज है जैसे मैंने पूछा करता क्या है आप ये क्यों बता रहे हो वो ऐसा नहीं करता है मैंने पूछा ज्ञान ये क्या मामला है आप बताइए ईश्वर का कंट्रोल ही सत्ता है या उसका ज्ञान ही सत्ता है। कंट्रोल जो है वो जोर जबरदस्ती का कंट्रोल नहीं है उसका। यानी कि ईश्वर का कंट्रोल नहीं है। ईश्वर का कंट्रोल नहीं है। आप जो है ज्ञान को ही कंट्रोल कह रहे हैं। निरर्थक
01:35:48:21 नहीं। हर चीज की वो समझ देता है कि यह कार्य करने क्यों नहीं करना? ज्ञान कहते हैं ना। इसको तो ज्ञान कहते हैं ना। तो ज्ञान के आधार से ही अपनी सत्ता मैं समझ गया वो ज्ञान देके एक मिनट भाई साहब एक मिनट भाई साहब ज्ञान देके वो ज्ञान दे के और वो कोशिश करता है कि ज्ञान के माध्यम से वहां अच्छा अच्छा हो जाए। अच्छा देखिए अभी है ना आपको हम जो बात समझाना चाह रहे थे उस बात को आप समझने के लिए हमको बोलने का मौका नहीं दे रहे। अरे भाई साहब देखिए बात ऐसी है कि जो मैं प्रश्न पूछता हूं आप उसका जवाब ना दे अभी प्रश्न पूछने से हमारा जो लिंक है वो टूट जाता है हम जो बोलना चाहते हैं नहीं नहीं मेरी बात सुनिए मेरी बात सुनिए बात ऐसी है बात ऐसी है कि आप जो है ना जो मैं पूछ रहा हूं जो मैंने बताया जो हम मुख्य बात जो हम समझाना चाह रहे वो बात रह जा रही है तो नहीं रह रही है ना भाई साहब नहीं रह रही बात ऐसी है आप जो हर बात कर रहे हैं आप हर बात जो कर रहे हैं
01:37:04:00 वो सुन लीजिए आप जो भी बात कर रहे है ना वो तर्क पूर्ण तरीके से सिद्धि नहीं हो रही है बात आपको झूठ नहीं लग रही है आपने अभी तक सुना ही नहीं ना हम जो तर्क पूर्ण वाक्य मना तर्क पूर्ण आप क्या चाहते हो कि मैं जो है आपको ऑन करके और बैठ जाऊं और आप जो है इस अपना प्रवचन चलाओ दो तीन घंटे दो तीन घंटे की बात नहीं आप आधा घंटा ही सुन लो आधा घंटे ये आपको पहले कहना चाहिए था कि मैं आऊंगा तो आधा घंटे पहले मैं बोलूंगा सिर्फ ये बोला था आपने ये चर्चा है ये ये चर्चा है या फिर ये कोई एक आपका प्रवचन का सेशन है चर्चा से जो है वो बातें सिद्ध नहीं होती चर्चा करने से म ढेरों भाई साहब ये भी एक चर्चा का विषय है कि बातें सिद्ध होती है कि नहीं होती? यह आपका क्लेम है। आपका दावा है। इस संबंध में आपसे मैं कुछ बातें करूंगा तो वो चर्चा बन जाएगी। तो ये कहना गलत है। चर्चा करने से बातें सिद्ध नहीं होती। बातें हम जब प्रवचन देते हैं तब सिद्ध होती है। कहने का मतलब ये है हम लोग काफी पास में आ गए। हम लोग काफी पास में आ गए। आपका कहने का मतलब ये है एक मिनट। आपका कहने का मतलब ये है कि जो
01:38:19:03 परमात्मा है वो ज्ञान देता है सब जगह। उस ज्ञान के माध्यम से ही जो उसकी बात को समझ जाता है वो ठीक काम करने लगता है। जो उसकी ज्ञान को नहीं समझता है वो थोड़ा अपने हिसाब से चलता है। इसी को परमात्मा की सत्ता भी बोला जाता है। ऐसा ही है। नहीं नहीं आपने पूरी बात समझी नहीं। तो अब समझ लो। आप बीच में अब बोलेंगे तो फिर लिंक टूट जाएगा मेरा। परमा भाई अब आप तो अब आप तो कल सुबह तक बोलते जाओगे तो मुझे बोलना पड़ेगा ना। आप मुझे थोड़ा बता दो। पांच 10 मिनट बोलना है। कितनी देर बोलना है आपको? बताओ। अभी कितनी देर बोलना है? मुझे बस पांच मिनट बोल लेने दीजिए। उसके बाद बोलो बोलो। पांच मिनट में बोलो बोलो चालू हो गया। ठीक। अभी परमात्मा जो है वो जब इस सृष्टि पर आता है तो तीन मुख्य रूप से म तीन मूर्तियों की रचना करता है। ब्रह्मा विष्णु और शंकर। तो वो जो ब्रह्मा विष्णु शंकर है वो इसी साकार मनुष्य सृष्टि में म अनेक जन्म लेते लेते कलयुग के अंत में साधारण मनुष्य साधारण मनुष्य के रूप में होती है तो वास्तव में ब्रह्मा विष्णु शंकर जो है वो इस सृष्टि रूपी रंगमंच की जो हीरो हीरोइन पार्ट
01:39:34:12 धारी आत्माएं है जिनको हम एडमम यू बोलते हैं आदम हवा बोलते हैं या शंकर पार्वती कहते हैं जो मनुष्य सृष्टि के आदि पुरुष है तो उनमें वो परमात्मा शिव जो है नंबर व प्रवेश करके पहले तो म जो कृष्ण में प्रवेश करता है उसका नाम रखता है ब्रह्मा ब्रह्मा सुन लीजिए पहले तो ब्रह्मा नाम इसलिए रखता है क्योंकि ब्रह्मा माने वो बड़ी ते बड़ी मां ब्रह्मा माने बड़ी और मां माने मां और परम जो परम पिता शिव है वो है बड़े से बड़ा पिता तो वो जिसका आधार लेता है नई मनुष्य सृष्टि की रचना करने के लिए उसका नाम रखता है ब्रह्मा तो ब्रह्मा के द्वारा वो ब्राह्मण की सृष्टि रचता है। जो कि शास्त्रों में लिखा है कि ब्रह्मा के मुख से ब्राह्मण निकले। तो यह जो ब्राह्मण की सृष्टि की ओरिजिन की बात है। अभी जो समय चल रहा है यह सृष्टि के ओरिजिन की बात है। जबकि ब्रह्मा के मुख से वो परमात्मा शिव ज्ञान सुना के ब्राह्मणों की मंशावली ब्राह्मणों की सृष्टि अभी तैयार कर रहे हैं। जिसकी याद जो अभी ब्रह्मा कुमारी ईश्वरी विश्वविद्यालय सारे भारत में फैले हुए हैं जगह जगह। अब उसी में से जो है दो तरीके के ब्राह्मण हो जाते हैं। एक तो मना रावण कुंभकरण
01:40:49:27 मेघनाथ जैसे और एक म विश्वामित्र जैसे श्रेष्ठ ब्राह्मण जो कि मना हर धर्म में म शास्त्रों में उनको देवासुर दे देव और देवता और असुरों के रूप में भी दिखाया गया है। कौरव और पांडवों के रूप में भी दिखाया गया है उनहीं को और उनहीं को जो है राम और रावण राम संप्रदाय और रावण संप्रदाय के रूप में शास्त्रों में इनका वर्णन है। शास्त्र जो भी लिखे गए हैं वो सारे अभी संगम युग की बात है ना कि सतयुग त्रेता युग की कोई बात है। और दूसरी बात परमात्मा म ब्रह्मा के मुख से जो मां का पार्ट बजाता है म ब्राह्मणों की सृष्टि तैयार करता है तो उनमें दो म एक तो श्रेष्ठ ब्राह्मण जो कि ब्रह्मा के मुख की मुख से जो ज्ञान निकला परमात्मा शिव के शिव ने जो ब्रह्मा के मुख से ज्ञान दिया उस ज्ञान को महत्व देने वाले और जो मुख वंशावली ब्राह्मण कहे गए वो जो कि ब्रह्मा की देह को ही देखते रहे तो जो ब्रह्मा की देह से जिन्होंने देह की पालना जो ली जिन जिन्होंने ली वो तो मना शास्त्रों में दिखाया गया है कि असुर जो है वो ब्रह्मा से म वरदान लेने के निमित्त बने ब्रह्मा ने असुरों को ही
01:42:05:01 वरदान दिए ज्यादातर और शंकर म जो राम वाली आत्मा है माना अनेक जन्म लेते लेते सतयुग के आदि से लेकर कलयुग के अंत तक अनेक जन्म लेते लेते वो साधारण मनुष्य के रूप में इस सृष्टि पर कहीं ना कहीं है तो उसमें परमात्मा शिव प्रवेश करके शंकर का पार्ट बजाते हैं। माना वो शंकर जो है उसके द्वारा पिता का पार्ट बजाते हैं और कृष्ण म ब्रह्मा कृष्ण उर्फ ब्रह्मा के रूप ब्रह्मा के द्वारा मां का पार्ट बजाते हैं। सुप्रीम सोल शिव तो वो सुप्रीम सोल शिव उसके लिए मना ब्रह्मा के द्वारा मां का पार्ट और शंकर के द्वारा पिता का पार्ट बजाता है। इसीलिए उनको बोलते हैं तमेव माता पिता तमेव म तुम ही हो माता पिता तुम ही हो एक शिव के लिए बोलते हैं एक मिनट और
01:43:04:16 फिर वो शंकर के द्वारा वो मैसे कलयुगी संसार का विनाश करके इस कलयुगी संसार का विनाश करते हैं क्योंकि हर हर बम बम शंकर के नाम के साथ जुड़ा हुआ है। जब से 1936 से परमात्मा का कार्य शुरू हुआ है तब से ये एटम बम भी बनना शुरू हो गए और कलयुग के जब ये मनुष्य म भगवान का जो ईश्वरीय कार्य चल रहा है उनकी जो नई दुनिया की सतयुगी दुनिया की राजधानी तैयार हो जाएगी जो कि 16108 माला के रूप में गाया जाता है तो वो 16108 की माला रूपी मन के जो पुरुषार्थ करके म आत्मा रूपी मन के जो पुरुषार्थ करके भगवान के गले का हार बनते हैं। कोई तो आठ के रूप में सर में दिखाते हैं। कोई 108 के रूप में गले में दिखाते हैं। कोई भुजाओं में कोई कमर में और कोई बड़े बड़े मंदिरों में 16000 की माला दिखाते हैं। तो वो माला के मन के जो है वो परमात्मा का बनाया हुआ श्रेष्ठ श्रेष्ठ आत्माओं का संगठन है। जो कि सारी सृष्टि से चुन करके ज्ञान के माध्यम से मना चुन के रुक जाइए।
01:44:21:13 एक मिनट 44 44 22 हो रहा है आप जो है 45 तक बोल 46 तक बोलिए आप डेढ़ [नाक से की जाने वाली आवाज़] मिनट दिया शंकर के द्वारा जो म जो मनुष्य सृष्टि जो की जो राजधानी परमात्मा की जो म श्रेष्ठते श्रेष्ठ राजधानी जो तैयार हो जाती है तो उसके बाद जो है यह विनाश शुरू हो जाता है। तो जो एटम म पहले तो तीसरा विश्व युद्ध शुरू होगा भारत में भारत के भारत के अंदर ही और भारत के आसपास के जो अनेक धर्म है म अनेक धर्म मत पंथ इस्लामी बुद्धि क्रिश्चियन आदि जो है वो सारे ही आपस में लड़ेंगे और माना जो अनेकता को एक एक में एकता में बदलने के लिए यही युद्ध होगा। ये तीसरा विश्व युद्ध हो गया। हो गया। ठीक है। मुझे नहीं सुनना। मुझे नहीं सुनना भाई। एक तक नहीं सुनना मुझे। रुक जाओ। एक मिनट एक प्रश्न है। आप मेरे किस प्रश्न का जवाब दे रहे हो? मैं आपके कोई प्रश्न का जवाब नहीं दे रहा। मैं जो आपने कहा था ना कि सत्ता को समझना है तो मुझे बोलने दो। क्यों कहा था? झूठ बोला था क्या?
01:45:36:24 तो अरे सत्ता माना क्या है? ईश्वर की सत्ता मेरे प्रश्न का मेरे प्रश्न का उत्तर दे रहे हो ना? आपसे मैंने पूछा कि मोटरसाइकिल सुनो आपसे मैंने पूछा कि मोटरसाइकिल किसे कहते हैं? आपसे मैंने पूछा मोटरसाइकिल किसे कहते हैं? कि भैया सन 1947 मेंटा को जमशेदपुर में स्टील मिला था और जो है सन 1948 तक उन्होंने वहां काम किया। अब ऐसा करेंगे आगे उनका फ्यूचर प्लान ये है। इसमें भैया मैंने मोटरसाइकिल पूछा है। मोटरसाइकिल किसे कहते हैं? ये कहां पर आया? मैंने पूछा है सत्ता से मतलब क्या है? ज्ञान के रूप में सत्ता है या सत्ता का वास्तविक ईश्वर का ईश्वर का वास्तविक कंट्रोल है। ईश्वर का अनेक झूठे धर्मों का विनाश करके एक सत्य सनातन धर्म की स्थापना करके जाता है। ये उसकी सत्ता है। ये तो युद्ध है। आपने कहा कि एक मिनट विवेक जी थोड़ा सा अपने माइंड को खोल के कान को खोल के सुनो क्या कह रहा है सामने वाला। आपने कहा था वो सर्वज्ञ सत्ताधारी है। अब आप जो है उसको एक केवल परिस्थिति में सीमित कर रहे हो कि वो जो पाखंडी धर्म होंगे उनको खत्म करके जाएगा। भाई जो हमेशा जिसकी जहां पर सत्ता है उसका
01:46:52:00 क्या हुआ? और आपने दूसरी बात ये कही कि भैया वो क्या कहते हैं? जोर जबरदस्ती करके किसी को कंट्रोल नहीं करता है। जबकि आपने शुरू में बताया था कि जो सत्ता नहीं मानता उसको डंडा पड़ता तब मान लेता है। यह डंडा क्या है? वो डंडा ड्रामा का डंडा है। जब परिस्थित परिस्थितियां ऐसी विकराल उनके सामने आ जाती है अपने ही उल्टे कर्मों का है तब उसको याद आता है कि यार भगवान ने हमको तो सही रास्ता बताया था लेकिन हमने गलत रास्ता चुना तब नहीं है एक अलग मैकेनिज्म है जो यह देखता है कि गलत रास्ते पर कौन चल रहा है उसको दंड मिलता है ईश्वर की सत्ता नहीं
01:47:41:15 गलत रास्ते पर दंड क्या है वो तो खुद म जो उल्टे कर्म करेगा वो खुद ही अपने उसके सामने म उसके पास कोई एक मैकेनिज्म एक कोई मैकेनिज्म है ना जो ये एक कोई सत्ता है ना कोई शक्ति है ना जो देख रही है कि गलत कर्म कोई कर रहा है तो उसको दंड दो कोई सत्ता है ना तृतीय कोई शिव के साथ धर्मराज मैंने शिव के साथ जो है वो धर्मराज भी है। धर्मराज जो है यानी सत्ता में नाम नहीं रहा हूं। है ना सत्ता सत्ता तो मैंने कब सत्ता से तो इंकार नहीं किया मैंने। वो तो सत्ता सदा कह रहा हूं कि ईश्वर जोर जबरदस्ती नहीं करता है। ईश्वर जोर जबरदस्ती नहीं करता है तो जो दंड है वो कौन देता है? अब आपने कहा धर्मराज देता है। धर्मराज के ऊपर ईश्वर की सत्ता है कि नहीं? धर्मराज जो है वो म धर्मराज वो दंड देने के निमित्त बनता है वो उसके पास अथॉरिटी है क्योंकि उसने यानी कि यानी कि जहां पर कोई कुछ गलत यानी कि दुनिया में जहां पे भी कोई कुछ गलत करता है वहां पर धर्मराज के
01:48:56:16 द्वारा ईश्वर की सत्ता होती है। इतनी सी बात बतानी है। आप प्रचार करने चले आए यह होता है वो होता है कोई साफ सुथरी बात नहीं कर रहे हो आप सामने वाला पागल समझ रखा है क्या आपने टॉर्चर दिया आपने मुझे पांच छ मिनट आपने आप मेरी बात को समझ नहीं पा रहे अरे भाई कुछ समझाने वाली बात होगी समझने वाली तब तो समझूंगा मैं आपसे पूछ रहा हूं खेत की आप बता रहे हो खलियान की मैं पूछ रहा हूं मूली की आप बता रहे हो टमाटर की मैंने मैंने आपसे पूछा सत्ता क्या है? तो आप सत्ता के बारे में बताओ। धर्मराज जो है वो वो दंड देता है। ये सत्ता है ये कंट्रोल है। जो गलत करता है उसको दंड देता है धर्मराज। अब दंड देने के निमित्त कौन बनता है? वही बता रहा हूं। वहां ये हुआ वो वो हुआ। आखिर में मैंने फिर पूछा तो आप बता रहे हो कि वो जो आखिर में आएगा वो पाखंड का नाश करेगा। वो सत्ता है। फिर मैंने पूछा जब वो वो सत्ता है तो तुमने क्यों कहा? हर समय हर स्थिति में हर जगह उसकी सत्ता है। वो तो एक स्थिति में हो गई ना। हर स्थिति में नहीं हुई वो। हर स्थिति में उसकी सत्ता है। हर स्थिति में उसकी सत्ता है। सत्ता है। तो वो किस
01:50:11:25 रूप में है? यानी कि कोई गलत कर रहा है तो उसको गलत नहीं करना चाहिए। नहीं तो वहां पर उसको दंड मिलता है। यह सत्ता है। देखिए दंड जो है दंड देने के लिए वो निमित्त बनता है। परमात्मा अगर किसी को दंड देगा ना तो उसके साथ उसका हिसाब किताब बन जाएगा। लेकिन परमात्मा किसी को दंड नहीं देता। वो दंड देने के लिए उसको अधिकारी बनाता है जो कि सारे संसार का म सारे संसार को म उन लोगों को सहन करने के निमित्त बनता है। जैसे मां होती है बच्चों को म लालन पालन रुक जाओ रुक जाओ रुक जाओ रुक जाओ रुक जाओ धर्मराज के ऊपर धर्मराज के ऊपर ईश्वर के धर्मराज धर्मराज को अगर ईश्वर बनाता है तो ईश्वर की सत्ता धर्मराज पे हुई ना धर्म जो धर्मराज है वो ईश्वर के अनुसार चलेगा या अपने मन से चलेगा ईश्वर के अनुसार ही चलेगा यानी धर्मराज के द्वारा ईश्वर की सत्ता हुई जैसे प्राइम मिनिस्टर अपनी पुलिस या फौज के द्वारा राष्ट्रपति अपनी सत्ता स्थापित करता है। यही हुआ ना? यही ठीक है। हां यानी कि दुनिया में कुछ अच्छा बुरा हो रहा है
01:51:27:01 तो उस पर जो है ईश्वर की सत्ता है। देखिए अभी जो शिव जो है वो तो अकर्ता है। वो दुनिया में नाम मत बताओ। मैं पूछ रहा हूं ईश्वर की सत्ता है कि नहीं? ऊपर कोई अच्छा बुरा जो हो रहा है उस पर कंट्रोल ईश्वर का है कि नहीं? ईश्वर के कंट्रोल में है। रह के वो अपना कार्य कर रहा है। ठीक है। ईश्वर का कंट्रोल है। यानी कि अच्छा हो रहा है तो वो ईश्वर की सत्ता में हो रहा है। बुरा हो रहा है तो ईश्वर की सत्ता में हो रहा है। बिल्कुल अच्छा बुरा जो भी भाई साहब भाई साहब मैं आपकी जंग वो फटसी नहीं सुनने बैठा हूं। आपने ऑलरेडी इसमें मुझे ना दो घंटे टॉर्चर कर रखा है। अब [नाक से की जाने वाली आवाज़] जाकर के आपने क्लियर कट बात की है। अब जाकर के आपने क्लियर कट बात की है। नहीं तो मुझे इतना ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है आपसे आपकी वास्तविक बात को निकलवाने के लिए पूछो नहीं। खैर अब मैं आगे बता आगे पूछ रहा हूं कि इसमें ये कहां से आ गया? इसमें यह कहां से आ गया कि जो ईश्वर है सवाल यह था ईश्वर है यह कैसे सिद्ध होता है?
01:52:43:10 ईश्वर जब मैंने आपसे एक बार फिर से बता दूं जब मैंने आपसे पूछा था तो आपने मुझे बताया था जब मैंने पहले पूछा आपसे कि ईश्वर है कैसे सिद्ध होता है? तो आपने कहा कि ईश्वर की पहले डेफिनेशन समझो। तो मैंने कहा ठीक है बताओ। तो आपने कहा ईश्वर वो है जिसकी सब जगह सत्ता है। ठीक है? मैंने ये नहीं ईश्वर माना माना श्रेष्ठ से श्रेष्ठ शासनकर्ता [गला साफ़ करने की आवाज़] जो शासन पर सत्ता आ गई ना यार। क्या बात कर रहे हो आप? शासन का तो वही है। सत्ता ही है। तो बात तो एक ही है ना। ठीक है अभी। तो तो समझ गए तो बात म उस बात को रिपीट क्यों तो तो यह सिद्ध कैसे होता है कि सत्ता है कैसे सिद्ध होता है वो बताओ ये ड्रामा जो चल रहा है ना उसकी सत्ता क्या है अभी आप सांस ले रहे ये प्रकृति आपको फल दे रही है प्रकृति आपका पोषण कर रही है जमीन में बीज बोते हो तो पौधे निकलते हैं तो ये सारी ईश्वर ने जो है प्रकृति को ऐसा बनाया म्
01:53:58:19 क्यों मानू प्रकृति को ईश्वर ने बनाया है मैं क्यों मानू आप मानो ना मानो इससे हमें कोई फर्क नहीं मैं उसमें पूछ रहा हूं क्या आपके आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के पास ऐसा ज्ञान है जो नास्तिकता का उत्तर दे सको आप या मानो ना मानो करके छोड़ दिया है नास्तिक नास्तिक से नास्तिक भी जो है ना वो अंत में परमात्मा को अरे वो बाद की बात है जीते जी कोई व्यक्ति जानना चाहता है कि मैं कैसे मानूं कि इस दुनिया में कोई सत्ता है जो अच्छे कर्म का अच्छा फल देगी बुरे कर्म का बुरा फल देगी यह मैं कैसे मानू भाई अगर मैं चोरी करूंगा तो यहां का इंडिया का कानून है कि वो जो है अगर मैं पकड़ में आ गया पुलिस के तो वो मुझे दंड देगा ये मुझे मालूम है प्रत्यक्ष प्रमाण ठीक है मगर मैं बुरा करूंगा तो मेरे को दंड मिलना ही मिलना है वो धर्मराज के द्वारा या आपके जो पर जो ईश्वर है उनके सिपाही के द्वारा मुझे दंड मिलना ही मिलना है। ये पक्की बात है। ये मैं कैसे मानूं? कैसे मानू कि एक कोई कैसे मानू कि एक कोई सर्वसत्ताधारी सबका शासक
01:55:14:04 है कोई जो सब जानता है जो सब देख रहा है। कोई हर हर कोई अपने कर्मों के अनुसार ही अगले जन्म में म अगले जन्म में फल पाता है। कोई अगर इंसान मैंने क्या पूछा? मैंने क्या पूछा है? इस संसार में कोई ईश्वर भी है जिसके हाथ में सब सारा कंट्रोल है। जो सब कुछ जानता है जो सब कुछ कर सकता है। यह सिद्ध कैसे होता है? भाई साहब मैंने आपको बता दिया कि भगवान जो है वो सृष्टि रूपी नाटक का जो शूटिंग जो है रिहर्सल वो अरे भैया आप ये कह रहे हो भगवान ये करता है मैं कह रहा हूं भगवान है ये कैसे सिद्ध होगा आप मैं आप ये बता रहे हो भगवान ने ये किया ये ये करेगा ये ये करता है मैं पूछ रहा हूं कि भगवान है जिसकी आप बात कर रहे हो वो सिद्ध कैसे होता है ये ज्ञान मिला है क्या मुरली के द्वारा आपको ये पूछ रहा हूं वीरेंद्र दीक्षित ने दिया था ये ज्ञान वीरेंद्र देव दीक्षित जी जो है उन्होंने ज्ञान दिया था कि ईश्वर है कैसे सिद्ध होता बिल्कुल दिया गया है। बताइए सर आप वाकई अगर आप समझना चाहते हैं
01:56:29:10 मैं [गला साफ़ करने की आवाज़] समझने के लिए आपने पांच छ मिनट स्टोरी बताई हमारे यहां वो क्या लिखी गई है कहानी कहानी बताई आपने आपने सिद्धांत नहीं बताया सिद्धांत क्या होता है हां अभी आप हमें बोलने ही नहीं देंगे तो आप समझेंगे कैसे भैया फिर से मैं विनम्रता पूर्वक आपसे कह रहा हूं। विवेक जी सुनिए विवेक जी सुनिए विवेक जी सुनिए विवेक जी सुनिए विवेक जी सुनिए आप जो है मुझे यह बताएं कि जिस ईश्वर की फीचर्स आप बता रहे हो कि वो ये करता है वो ये करता है वो ये है वो वो है तो मेरे मैं कैसे मानूं कि उसका अस्तित्व है ये कैसे मानूं ये बताओ
01:57:19:13 आप अपनी आत्मा को देख सकते हैं आप मैंने कहा कि मुझे दिखाओ। मैंने कहा कि मुझे दिखाओ। मैंने कहा है कि मुझे दिखाओ। देखिए मैंने कहा है क्या? भगवान जो मैंने देखो ये रटे रटाए डायलॉग मत बोलो भाई। ये बहुत आगे बहुत पीछे की चीजें हैं। आप मुझे बताओ ईश्वर है ये सिद्ध कैसे होता है? या फिर जो भी व्यक्ति आ के एक मिनट एक मिनट भाई साहब भाई साहब एक मिनट जो भी व्यक्ति आ के जो भी व्यक्ति जो भी व्यक्ति आ जो भी व्यक्ति आ भी व्यक्ति आहारे बाबा आते हैं उन्होंने कहा गिल्ली डंडा खेलो तो उसकी बात मान ले वो एक कहानी सुनाए हमको उसकी बात मान ले भाई पहले आप बताइए
01:58:13:06 अर्जुन ने भी भगवान से ये प्रश्न पूछा था कि हम आपके दिव्य रूप को कैसे देख सकते हैं तो भगवान ने बोला तुम मुझे देखने की बात नहीं देख मेरे भाई मैं रूम को देखने की बात नहीं कर रहा हूं। अरे मेरे भाई रिकॉर्डर मत चलाओ। अरे मेरे भैया रिकॉर्डर नहीं पूछ रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं कि ईश्वर है सिद्ध कैसे होता है? मैं नहीं कह रहा हूं कि मुझे ईश्वर दिखाओ। मैंने कहा क्या? ज्ञान को। ईश्वर जो ज्ञान आकर ईश्वर जब खुद सृष्टि पर आता है तो वो जो ज्ञान देता है उस ज्ञान के आधार पर ही हम पर आता है ईश्वर सृष्टि पर आता है ये कैसे सिद्ध होता है चलो कैसे सिद्ध होता है हां वो खुद आ के जो ज्ञान देता है म ज्ञान के आधार से ही सिद्ध होता है कि ईश्वर जो ज्ञान देगा उसमें सारी सृष्टि को परिवर्तन करने का जी मैं आपसे मैं आपसे कहूं कि एक मिनट अगर मैं आपसे कहूं ईश्वर इस सृष्टि पर आता है और वो क्योंकि आके ज्ञान देता है उसके ज्ञान से सिद्ध होगा। अब उस ईश्वर ने ही मुझे बताया है कि गिल्ली डंडा खेलो। तो मैं उसकी बात मान लो। मेरी बात मान लोगे आप। साहब गिल्ली डंडा खेलने के लिए भगवान नहीं बोलेगा।
01:59:29:08 हां वही मैं कह रहा हूं। इसका मतलब इसका मतलब किसी के भगवान होने के विषय मैं उसी पे आ रहा हूं। किसी के भगवान होने के मैं वही मैं उसी पे आ रहा हूं मेरे भाई कि किसी के भगवान होने के संबंध में कुछ फिक्स चीजें होंगी है ना उनमें से कुछ चीजें अभी आपने मुझे बताई देखिए भगवान ने भी अर्जुन को मना अपने अस्तित्व के बारे में जब बताया तो ज्ञान के कह रहा हूं मेरे भाई मैं ये नहीं कह रहा हूं भगवान ने अर्जुन को बताया देखो ऐसा है गीता की बात वो मानेगा जो पहले गीता को मानता हो। गीता में भगवान ने कुछ कहा है। श्री कृष्ण भगवान ने कहा है। आपके अनुसार वो कौन थे? उन्होंने कहा है। वो कोई व्यक्ति तब सुनेगा समझेगा जब उसकी उसमें आस्था हो। आस्था तब होगी जब वो उस गीता को भगवान के द्वारा प्रदत्त मानता हो या किसी ना किसी रूप से आस्था हो। मगर मैं अभी आपको जीरो की बात पूछ रहा हूं। ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होता है? आप कह रहे हो वो आके ज्ञान देता है। अरे भाई आके ज्ञान देता है। ये तो बाद की बात है। वो है वो एक्सिस्ट करता है। ये कैसे सिद्ध होता है? जैसे मैंने कहा कि भैया ये जो बोतल
02:00:44:16 है ये ये बोतल जो है ये है ये कैसे सिद्ध होती है? वो तो आप अभी म बोतल अभी बोतल आप हाथ में दिखाया आपने आपने जब तक दिखाया नहीं मुझे तब तक मुझे पता नहीं कि आपके म टेबल पे बोतल रखा है ईश्वर को बिना देखे ईश्वर को बिना देखे बात ईश्वर को बिना देखे ये बात सिद्ध नहीं होगी कि ईश्वर है नहीं
02:01:16:12 है आपकी यह मुरली में आया ईश्वर ईश्वर इस सृष्टि पर आता है। ये मुरली में एक मिनट आपने अभी बताया था कि हमारे पास मुरली में हमें सिखाया गया है कि नास्तिकों का उत्तर क्या है? ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होता? एक मिनट एक मिनट भाई साहब भाई साहब मैं क्या कह रहा हूं विवेक जी विवेक जी आपने अभी कहा दो मिनट पहले विवेक जी कि मुरली में हमें बताया गया है कि ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होता है ये आपने कहा अब आप कह रहे हैं अब आप कह रहे हैं कि मुरली में ये मुरली में ये बताया गया है कि मुरली में ये बताया गया है कि ईश्वर को बिना देखे उसकी सिद्धि नहीं होती अरे वो जब सृष्टि देखिए गीता में लिखा ईश्वर को बिना देखे माना वो जो साकार सृष्टि पर है
02:02:14:28 मैं पूछ रहा हूं मुरली में क्या लाइन लिखी थी यही लाइन लिखी थी बिना देखे उसकी सिद्धि नहीं होगी बस मैं पूछ रहा हूं आपसे लिखी है एक लाइन में एक लाइन में ईश्वर का जो ज्ञान है वो किताबों में ज्ञान नहीं का उत्तर 100 लाइन में लिखा है नास्तिकता का उत्तर कुछ तो बता बता दो गीता में लिखा है न विदु सुरना नरको बताया गया है ईश्वर ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होता है मुरली में क्या लिखा था वो बताइए देखिए गीता में लिखा है न विदुर प्रभ दे मनुष्य सर्व म गीता में जो म मुझे जब तक मुझे देवता गण भी नहीं जानते ऋषि गण भी नहीं जानते महर्षि गण भी नहीं जानते जब मैं खुद आता हूं तभी मैं खुद अपना परिचय खुद देता हूं स्वयं
02:03:19:18 एक मिनट भाई साहब विवेक जी मैं समझ गया आप क्या कहना चाह रहे गीता में ये लिखा है कि मुझे पहचान नहीं पाते मैं अपना परिचय खुदा के देता हूं तब समझ में आता है जब भगवान खुद आता है तब तभी उसको हम पहचान पाते हैं यानी कि जब तक भगवान नहीं आएगा जब तक भगवान नहीं आएगा तब तक हम किसी को ये नहीं समझा सकते कि भगवान है कि नहीं है। और दूसरी बात एक मिनट भाई साहब एक भाई साहब एक मिनट एक मिनट मैं आपको म्यूट कर दूं। आप थोड़ा इंटरप्ट कर देते हो। मैं म्यूट कर दूं आपको। एक मिनट सुनिए। अभी आपकी आवाज नहीं आ रही है। मैं अपनी बात बोल रहा हूं। आप चुप हो जाइए। अभी आपकी आवाज नहीं आ रही है। अभी आपकी आवाज नहीं आ रही है। मैंने म्यूट किया है। मैं अपनी बात एक बोल रहा हूं। देखिए पहली बात तो यह हो गई कि जब तक भगवान आएगा नहीं तब तक ये आप सिद्ध नहीं कर सकते कि भगवान है। पहली बात। दूसरी बात यह है कि आपने कहा कि गीता में यह कहा गया कि वो मुझे पहचान करने के लिए बात होना कि मैं अपनी पहचान करवाता हूं। यह बात एक अलग है और वो है कि नहीं इस संबंध में हम किसी को क्या बताएं यह बात एक अलग है जैसे कि शिवश नारायण द्विवेदी विवेक जी है कि नहीं ये कैसे सिद्ध होता है कि भाई वहां जाओगे उनका
02:04:34:24 घर मिलेगा वहां पर एक ये होगा उनके दो बच्चे होंगे वो कह रहे हो हमारे पापा आ रहे हैं वहां उनकी हो सकता है फोटो हो उनका घर हो ठीक है इतनी कुछ कई सारे प्रमाण हो सकता है वहां आप दिख भी जाओ दिखना भी एक प्रमाण हो गया ठीक दूसरा ये है कि हम पहचानेंगे कैसे कि भाई विवेक जी हैं कि भाई वो सांवले से होंगे और वो जो है यह जो फोटो में जो चित्र है ना ऐसे दिख रहे होंगे या उन्होंने जैकेट पहन रखी होगी या उनकी पत्नी का नाम ये होगा उनके बच्चों का नाम ये होगा ये ये पहचान हो गई या इस तरीके की और भी पहचान तो गीता में जो कहा है वो पहचानने के विषय में कहा है जो बात आपने अभी कही वो अस्तित्व है इस संबंध में वहां नहीं कहा है और आपने कहा है कि हमें मुरली में बताया गया है तो मुझे आप देखिए अगर है तो ठीक है। नहीं है तो हम आगे बढ़ते हैं। जरूरी नहीं है कि उस प्रश्न का जवाब आप आपके पास है। बिल्कुल पक्का नहीं है यह। ठीक है? तो अब मुझे बताइए क्या ईश्वर है इस संबंध में आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के पास कोई शिक्षा है? कोई ज्ञान है? क्योंकि ईश्वर का दिया हुआ ज्ञान है ना? हां। तो वो बताइए। मैं एक समझ लीजिए आपके सामने नास्तिक है। वह कह रहा है भाई मैं नहीं मानता ईश्वर है। अब मुझे सिद्ध करिए ईश्वर कैसे है? वह बताइए आप।
02:05:50:14 देखिए नास्तिक नास्तिक [गला साफ़ करने की आवाज़] जो है वो अहंकारी बहुत होते हैं। रावण में भी अहंकार था। तो रावण ने म अपनी म मैंने आपको फिर से म्यूट किया है। मैंने आपको फिर से म्यूट किया है। आप मुझे उदाहरण दे दे के ये मत बताइए कि भैया देखो भगवान को मान लो मान लो क्योंकि उसके साथ ऐसा हुआ था। उसके साथ ऐसा हुआ था। यह उदाहरण दे दे के मत बताइए। मुझे बताइए मैं कैसे मानू कि ईश्वर है? ठीक है? यह मत बताइए रावण के साथ गलत हुआ था। देखो उसने माना नहीं था। हिरण्यकश्यप के साथ गलत हुआ था। उसने माना नहीं था। पहली बात तो यह है कि रावण और हिरण्यकश्यप के ऊपर मेरा बिलीव होना चाहिए और बिलीव होने के लिए मैं आस्तिक होना चाहिए हूं। समझ रहे हैं मेरी बात? समझ रहे हैं? नहीं। अभी मैं अभी अनम्यूट कर रहा हूं। आप मुझे जो है ये बताइए कि ईश्वर है। इस बात की सिद्धि कैसे होती है?
02:06:45:15 बोलिए। नास्तिक भी नास्तिक से जो आस्तिक है वो तो थोड़ा सा ज्ञान सुन थोड़ा सा उनको म ज्ञान सुनाएंगे तो वो मान लेगा जो नास्तिक है वो तो तब मान लेगा आपको मैं आखरी मौका दे रहा हूं भाई साहब मैंने बहुत समय खर्च कर लिया मैं एक लास्ट चांस आपको दे रहा हूं जो मैंने पूछा है उसका उत्तर है तो बोलिए नहीं तो बोल दीजिए कि नहीं है आप फिर से नास्तिक और आस्तिक की क्वालिटी बता रहे हो कि उसको ज्ञान देंगे वो समझ जाएगा उसको नहीं देंगे वो नहीं समझ जाएगा अरे भैया नास्तिक से आप क्या कहोगे कि ये देख ऐसे ऐसे सिद्ध होता है कि कि जो है ईश्वर है। जैसे अगर कोई मुझसे कहेगा कि विवेक जी है कैसे सिद्ध होता है? ये दिख रहे हैं भाई ये दिख रहे हैं। देख लो ये विवेक जी है। तो ऐसी कौन सी बात है आपके पास जो आप नास्तिक से बोलोगे कि ईश्वर है। ये देख मैंने सिद्ध कर दिया। जरूरी नहीं है वो देखने से ही सिद्ध हो। जरूरी नहीं है देखने से ही सिद्ध हो। मगर वो कैसे सिद्ध होगा वो आप बताइए
02:07:48:26 सामना होगा तभी तो वो म नास्तिक समझता है कि भाई हमसे ताकतवर कोई चीज है नहीं हमारे पास एटम बम है शक्ति लेकिन एटम बम उसने बना तो लिए लेकिन उसके पास फोड़ने की ताकत नहीं है भाई साहब से आप क्या कहोगे ईश्वर है ऐसे सिद्ध होता है एक चांस और दे रहा हूं मैं उसके बाद ये लाइव वो करूंगा ये आपका दिख रहा है वो पागल आप मना कर रहे थे पागलखाना नहीं है वो दिख रहा है क्या है वहां पर आप ये तक नहीं बोल पा रहे हैं कि भैया हमारे पास हमारे पास नहीं है नहीं पता हमको हो सकता है आया हो हमारे पास ईश्वर का परिचय है तो हम क्यों ईश्वर का परिचय नहीं ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होता है भाई ईश्वर को सिद्ध तो करो तब तो हम देखेंगे कि ईश्वर कौन है पहले ईश्वर को सिद्ध तो करो जैसे कि हमने कहा हमने कहा हमने कहा कि भैया हमारे पास मोटरसाइकिल का परिचय है कि वह लाल कलर की है। उसके दो टायर है उसके यह है। अभी वो मोटरसाइकिल हमारे सामने नहीं है। ठीक दूर है कहीं मोटरसाइकिल का हमारे पास परिचय है। फिर मैंने कहा ये मोटरसाइकिल होती है कैसे सिद्ध होता है? तो ये हमारे पास नहीं है। मैं पूछ रहा हूं होने के विषय में उसका अस्तित्व
02:09:04:09 होने के विषय में कुछ है? बिल्कुल है। वीरेंद्र वीरेंद्र देव दीक्षित जी के द्वारा इतना मना जो [गाना गाने की आवाज़] 40 साल जो ज्ञान सुनाया गया उनमें सृष्टि के आदि मध्य अंत का सारा ही उसमें रहस्य भरा हुआ है। तो कोई कहने का मतलब है क्योंकि वीरेंद्र देव दीक्षित जी के पास आदि मध्य और अंत का ज्ञान है। इसलिए मान लिया जाए कि वह ईश्वर है और वह है तो इससे सिद्ध होता है कि वह ईश्वर है मतलब ईश्वर होता है और कैसे सिद्ध होगा चलो आप एक मिनट के लिए आप ही बता दीजिए कि ईश्वर कैसे सिद्ध होगा मैं तो मैं तो कर ही दूंगा मैं मेरा कार्य रोज सिद्ध करता हूं मेरा कार्य मैं कर दूंगा नहीं आध्यात्मिक विश्वविद्यालय मैं बताऊंगा विवेक जी मैं बताऊंगा आप लड़ने की कोशिश मत करो मैं बताऊंगा आपको अगर बता तो बताइए वही कर रहे हो आप बताओ बताओ अभी आप पहले अपना पक्ष क्लियर करो आपके पास है बिल्कुल हां बताइए क्या है वो बताइए क्या है
02:10:20:24 हमने बता दिया जो बताना था आपको जो समझना है अभी आप समझ नहीं पा रहे देव दीक्षित ने इतना ज्ञान दिया है जिससे वो सिद्ध होता है कि वो ईश्वर है तो इसमें सबसे पहली बात आ जाएगी कि उन्होंने कहानी किससे बताए हैं जो जिसको आप ज्ञान कह रहे हो वो कथाएं सुनो जिसको आप ज्ञान कह रहे हो सबसे पहली बात वो कथाएं है कथाएं ये होगा वो होगा वो होगा तो क्या ये मान लिया तो क्या ये माना जाए जो कथाएं सुनाए वो ईश्वर है और देखो वो ईश्वर है जो सुना रहा है उसका अस्तित्व सिद्ध हो गया आपने तो सुनी संसार में सुनो वीरेंद्र देव दीक्षित जी की सत्ता है एक एक मिनट एक मिनट आपने कहा ना उसकी सत्ता हर जगह होती है
02:11:07:18 हां हां तो इस समय यहां पर उसकी सत्ता है क्या जहां मैं बैठा हूं। बिल्कुल [नाक से की जाने वाली आवाज़] अच्छा तो वीरेंद्र देव दीक्षित इस संबंध में क्या करते हैं कि वो मैं अगर उनके बारे में कुछ अनापशनाप बोलूं या वो बोलूं उल्टा सीधा इस संबंध में क्या है? वो तो कलंकीधर का पार्ट कलंकीधर अवतार इसीलिए गाया हुआ है कि म भगवान का एक अवतार कलंकीधर अवतार भी है कि वो कलंकों को धारण कर लेता है। वो म कलंको से विचलित नहीं होता। कोई अगर हमने जो काम हमने जो गलत काम किया नहीं है और हमारे ऊपर कोई आरोप लगाते तो साधारण व्यक्ति जो है वो विचलित हो जाता है कि ऐसे हमको क्यों कह दिया? इसने हमको ऐसे कैसे कह दिया? मैंने तो ऐसे किया नहीं। मैं तो ऐसे हूं नहीं। लेकिन भगवान का जो पार्ट होगा वो इन बातों से विचलित नहीं होगा। वो हंसते हंसते इन कलंकों को भी धारण कर लेगा कि भाई म बच्चे हैं बच्चों को म उसके अंदर वो दया भाव है क्षमा भाव है तो उनको भी सहन कर लेता है कि ये सारे संसार ये सारे सारा संसार जो है
02:12:22:28 वो मेरे बच्चे हैं तो बच्चों को आपका कहने का मतलब यह है आपका कहने का मतलब यह है कि वीरेंद्र देव दीक्षित जो है वह सर्वशक्तिमान और श्रेष्ठतम शासक और सर्वज्ञ ईश्वर हैं। और क्योंकि वह है तो इससे सिद्ध हुआ कि वो है मतलब वो उनका अस्तित्व है। आपका कहने का मतलब ये है। ठीक है। हां जी बिल्कुल हां जी। हां ये चीज क्लियर हो गई। तो वीरेंद्र देव दीक्षित जी वो अगर सर्वशक्तिमान है तो वो नित्य भी तो होने चाहिए। नित्य तो सदा इस सृष्टि रूपी नाटक में एक सेकंड भी उनका पेट कम नहीं होता। जब वीरेंद्र देव अभी मैं उस शरीर की बात कर रहा हूं जिसको देखने के कारण आप मुझे ये सिद्ध कर रहे हो कि वो है तो अब मैं उस शरीर की बात कर रहा हूं। जो दिखा जो आंखों का विषय है और जब आप ये कह दोगे कि नहीं वो वो शरीर छोड़ने के बाद भी है तो वो उसमें फिर सिद्धि आ जाएगी कि उसको देखा किसने कैसे? समझ रहे हो? देखिए हां आ आप आत्मा अविनाशी है। शरीर विनाशी है। आत्मा
02:13:38:14 भाई साहब नास्तिक व्यक्ति आत्मा को मानता नहीं है ना। उसको सिद्ध करिए ना आत्मा है। परमात्मा है आत्मा है। यही तो मैं कह रहा हूं। फिर आप आप जब आप जब अविनाशी वाले पार्ट को जब सिद्ध कर रहे हो तो वीरेंद्र देव दीक्षित जी को क्यों ला रहे बीच में कहने का मतलब ये है अविनाश कहने का मतलब वीरेंद्र देव दीक्षित जी मेरी आंखों का विषय है इस कारण से आप सिद्ध कर रहे हो कि देखो वो है जबकि उसके अंदर की जो वो आत्मा है उस शरीर के अंदर की जो अभी दूसरे शरीर को धारण करने वाली है हम उसकी स्थिति की बात कर रहे हैं हम तो जब इस संसार में जब टोटल विनाश होगा तो उस म जो जो अभी वीरेंद्र जो दीक्षित का जो अभी अगला जो हमारा जन्म है वो उस टोटल विनाश में भी वो अकेला ही बचेगा सारे संसार में मैं ये कह रहा हूं कि जो शरीर नष्ट हो रहा है वो तो ईश्वर है नहीं तो हमें अदृश्य ईश्वर की स्थापना करनी है जो जो दिखाई नहीं दे रहा है हमें सिद्धि किसकी करनी है फिलहाल हमें सिद्धि हमें नास्तिक के समक्ष एक उस ईश्वर की सिद्धि करनी है जो निराकार है आपने कहा ना परमात्मा निराकार है
02:14:54:00 तो आंखों का विषय तो है नहीं परम पिता वही तो वही तो ईश्वर है परमपिता शिव ही तो ईश्वर है ईश्वर मेन ईश्वर कौन है मेन ईश्वर कौन है मेन परम पिता ही है हां तो वो है ये कैसे सिद्ध होता है ये बताओ वो इस सृष्टि पर आ के और सारे संसार को है यह आपका क्लेम है मेरे भाई। आप अपने क्लेम को तर्क की जगह पर यूज़ कर रहे हो। अभी समय दावा है। ये आपका क्लेम है। विवेक जी लालने के पाव पालने में दिखाई देते हैं। सूर्य जब उदय विवेक जी सुनिए अब मैंने आपको म्यूट किया है। दोबारा सुनिए। यह जो आप दंत कथाएं बोल रहे हैं यह आपका क्लेम है कि वह ऐसा करता है, वह ऐसा करता है, वह यह होता है। मैंने आपसे पूछा है निराकार जो आप परमात्मा कह रहे हो, उसकी सिद्धि कैसे होती है कि वो है वो एक्सिस्ट करता है। वो सिद्धि बताइए। अब मैं लास्ट बार पूछ रहा हूं। अगर आपने इस प्रश्न का उत्तर नहीं दिया तो क्या कहते हैं? हम लोग अगली बार करेंगे। मैं ये मान लूंगा कि आपके पास उत्तर है नहीं। ठीक है? अब मैं
02:16:09:13 लास्ट बार पूछ रहा हूं। नहीं तो हम लोग ये मानेंगे हमारे पास उत्तर नहीं है। आप जो भी कहते रहो क्या है कि निराकार परमात्मा की सिद्धि करिए। आप वीरेंद्र दीक्षित को बीच में लाए। वीरेंद्र दीक्षित जी की जो बॉडी है वो नित्य नहीं थी। आंखों का विषय दिया वो निराकार परमात्मा नहीं है। निराकार परमात्मा को एक नास्तिक के समक्ष सिद्ध कैसे करें? ये बोलिए। दृष्टि रूपी नाटक खत्म होने वाला होगा ना। नास्तिक जो है वो लास्ट में जाकर के रुक जाइए आप रुक जाइए मैं समझ गया आपके पास नहीं है ठीक है आपके आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में जो वीरेंद्र दीक्षित जी नाम से जो आ रहे हैं वो आप बता रहे हो उन्होंने सारी रहस्य खोल दिए मगर वो ये नहीं बता पाए कि निराकार परमात्मा है ये सिद्ध कैसे होता है मैं बता देता हूं आपको मैं बता देता हूं बहदार उपनिषद में लिखा हुआ है एक तीन 28 में असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर गमया मृत्युमा मम गमया इसमें जीव मात्र की चाह बताई जा रही है। एक जीव जो है वो सत हो जाना चाहता है। सत स्वरूप हो जाना चाहता है। मैं मृत्यु विहीन जीवन।
02:17:25:08 एक जीव जो है वो चित हो जाना चाहता है। यानी कि अज्ञता विहीन जीवन। चित का मतलब अखंड ज्ञान। सत का मतलब अमरता। और आनंद का मतलब सदा सुखी रहने वाला जो जीव है वह सतित आनंद हो जाना चाहता है। अब एक नियम है हमारे अंदर जिस जिस चीज की प्यास है उस चीज का जो निराकरण करने वाला उसका सब्जेक्ट है उसका अस्तित्व सिद्ध है। जैसे हमारे अंदर प्यास है तो इसका मतलब दुनिया में पानी है। हमारे हमारे अंदर भूख है तो इसका मतलब दुनिया में भोजन है। हमारे अंदर सुनने की क्षमता है। इसका मतलब दुनिया में आवाज है। हमारे अंदर देखने की क्षमता है। इसका मतलब दुनिया में दृश्य है। तो जिस प्रकार एक अच्छा ये नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी है। जो सवाल कर रहा है कि मैं नहीं मानता ईश्वर है। उसके अंदर भी है। तो जिस प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर आपकी आवाज नहीं आ रही है। जिस प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर अह भी व्याप्त प्यास का विषय पानी सिद्ध होता है। भूख का विषय भोजन सिद्ध होता है।
02:18:40:19 उसी प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त ये जो सतचितानंद की चाह है इससे ये सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है। जो कि उसकी चाह का विषय है। ठीक है? हमारे एक नास्तिक व्यक्ति भी यह चाहता है कि धूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। बारिश ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। यानी कि वो मौसम को भी कंट्रोल कर लेने वाला बनना चाहता है। जबकि विज्ञान ने अभी तक नहीं कहा कि तुम मन में सोचोगे और मौसम को कंट्रोल कर लोगे। इसका मतलब इस दुनिया में कोई है जो मौसम को भी कंट्रोल कर सकता है। वो भविष्य देख लेना चाहता है। कल कल एक मिनट भाई साहब एक मिनट वो आपका आपका जो ईश्वर है ना उस पर परिभाषा सेट नहीं होगी। मैं उसी पर आऊंगा। तो क्या कहते हैं? अगला क्या था? हां एक नास्तिक व्यक्ति भी कल मैच में कौन जीतने वाला है? कभी-कभी यह आशा करने लगता है। यह जीत जाए। मेरे अनुसार कल भविष्य फल आ जाए। भविष्य को कंट्रोल करने वाला भविष्य को देख लेने वाला भी बनना चाहता है। इसका मतलब है इस दुनिया में कोई है जो भविष्य भी जानता है। भविष्य
02:19:55:20 को भी देखता है। ठीक है? तो यह हो गई सच्चिदानंद की सिद्धि। ठीक? अब आपके पास एज ए नास्तिक अगर कोई काउंटर क्वेश्चन हो तो मुझे बताते जाइए। मैं हर चीज को तोड़ता जाऊंगा। ठीक है? एज ए नास्तिक अगर आप नास्तिक बनके ये जो मैंने सर्वशक्तिमान सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रह्म ईश्वर की जो स्थापना की है ये है। उसको अगर आप एक नास्तिक के नजरिए से काट सकते हैं तो बताइए। नहीं तो हम अगले चैप्टर पर चले
02:20:31:25 आपने जो बोला उसी पर बोलना चाह रहा हूं कि नास्तिक जो अपने को नास्तिक कहता है कि भाई हम आत्मा को नहीं मानते हम परमात्मा को नहीं मानते लेकिन उसके अंदर भी आत्मा है या नहीं देखिए भाई साहब सिद्धि सिद्धि इस बात की हो रही है कि क्या हम किसी को यह बिलीव दिला सकते हैं कि ईश्वर है तो आप बिलीव नहीं दिला पाए आप बिलीव नहीं दिला पाए। आप उसको दिखा रहे हैं वीरेंद्र दीक्षित को जो अभी मर गए हैं। तो आप ठीक है। अब इस बारे में बहुत लंबी बहस हो गई है। मेरी बात सुनिए। मेरी बात सुनिए। अब आप एक छोटा सा क्वेश्चन कर रहा हूं। एक छोटा सा क्वेश्चन कर रहा हूं। उसको छोड़ दीजिए। उस मत बोलिए। बहुत घंटों हमने रगड़ लिया उसको। अभी मुझे मैं पूछ रहा हूं कि जब सब जगह ईश्वर की सत्ता है तो यह जो अच्छाई और बुराई दोनों चीजें हैं आपने कहा वहां पर भी ईश्वर की सत्ता है। है ना? सत्ता है। ना तो जहां पर बुराई हो रही है वहां पर भी ईश्वर की सत्ता है। मम वर्तमान वर्तते मनुष्य पार सर्व
02:21:40:09 यदा देव मना मेरे मन का ही अनुसरण सारे संसार म संसार के सारे प्राणी करते हैं। भाई साहब मैंने क्या पूछा? मैंने क्या पूछा भाई साहब? मैंने पूछा क्या है? इसका सिंपल जवाब नहीं दे पाएंगे क्या आप? मैंने पूछा ईश्वर की सत्ता है जहां पे बुराई हो रही है कि नहीं? हां या ना जवाब दे दो भाई। हर कार्य का आदि जो है वह परमेश्वर से होता है। मतलब गीता में भी बोला है आप सरल शब्दों में एक्सेप्ट करते हैं ना हां है सत्ता ये स्वीकार करने में दिक्कत हो रही क्या जाइए आप यहां चलिए
02:22:30:14 [गला साफ़ करने की आवाज़] पागल खाने की फैक्ट्री ना कहे तो क्या कहें? ठीक है सभी को जय श्री राम। तो
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