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00:00:02:12 सभी को जय श्री राम और आज की चर्चा आप लोग जानते ही हैं किस विषय पर है और आप लोग उत्सुक होंगे। मैं ऐसी अपेक्षा करता हूं। इस तरह की पहली अपने आप में एक चर्चा होने जा रही है। भागवत आनंद के सपोर्टर्स कमेंट्स के माध्यम से कई बार विरोध प्रकट किया करते हैं और मेरे पास इतना समय नहीं होता है कि एक-एक व्यक्ति को जो उत्तर मैं अपने वीडियोस में दे चुका हूं। उस एक-एक व्यक्ति को जाकर के कहूं कि यहां या तो यह बताऊं या तो अपना उत्तर वहीं कमेंट्स के माध्यम से प्रस्तुत करूं। और या फिर मैं अह उस एक एक व्यक्ति को लिंक दूं कि इस वीडियो मैंने तुम्हारी द्वारा पूछी गई बात का उत्तर दिया है। तो ऐसा ना होने की स्थिति में मेरे पास ज्यादा समय नहीं होता है। यदि भी भाग जबकि भागवतानंद से अगर ऐसे विरोध करते तो भागवतानंद तो एक वित्तीय उत्तर भी नहीं देता। मैं तो प्रयास करता हूं कि जो भी व्यक्ति आकर के इस विषय में विरोध कर रहा है तो मैं उसको कहता हूं भाई सामना कर लो। सामने से आकर बात कर लो। कम टू लाइव या फिर सामना करो या प्रत्यक्ष वार्ता करो। इस तरह का मैं संदेश जरूर छोड़ देता हूं क्योंकि मुझे मालूम है कमेंट के माध्यम से

00:01:17:13 चर्चा अनंत काल तक चलती रहेगी। कोई निष्कर्ष नहीं दिए और यदि सामने वाला चुप भी हो गया तो वह दिखाई नहीं देगा उसका चुप होना निरुत्तर होना ये सब चीजें हैं मगर ये सब जो अंध भक्ति करने वाले जो फॉलोअर्स हैं वो नहीं दिखाई देता है मगर फिर भी आज एक किसी ने समर्थक ने सामर्थ अपना साहस दिखाया है तो वह सामने आया है तो इस विषय में उसका अभिनंदन अभिनंदन करते हैं और ले लेते हैं उसको उनको जो बृजेश तिवारी जी करके हैं जो आए

00:01:53:13 जी भैया प्रणाम जय श्री राम जय सिया राम भैया जय आप थोड़ा सा ऐसे रखें कि आपका सर जो कट रहा है ना वो कटे ना अच्छा ऐसे ऐसे में ठीक है ना नहीं वो ठीक है पहले पहले भी ठीक था बस सर आपका कटे ना इतना दूर कर लीजिए कि सर ना कटे अभी सर आपका सर कट रहा है ना थोड़ा सा जी जी जी अब ठीक है अब ठीक है तो आप सर्वप्रथम अपना परिचय दे दें थोड़ा सा और किस विषय में आप यहां पर आए हैं वो थोड़ा सा दर्शकों को बता दें। मैं सांडिल गोत्री पंडित बृजेश तिवारी में नाम लिखता हूं।

00:02:44:21 हेलो जी सुन रहा हूं। सल गोत्री पंडित बृजेश तिवारी मैं नाम लिखता हूं। यही मेरा परिचय है और मध्य प्रदेश दमोह जिले से मैं बिलोंग करता हूं। तो किसका पक्ष रखने आप आज आए हैं? किसके पक्ष से बात करने आए हैं? देखो भैया पक्ष की बात रही ऐसी कि आपके कमेंट सेक्शन में लगातार जो भाषाई मर्यादा का ध्यान नहीं रखा जा रहा था। वो आपका जो वो है ना क्या कहते हैं? जी हम हां अब बोलिए क्या था कि आपके चैनल पे मैंने कई बार देखा है कि श्री भगवत आनंद गुरु जी के लिए आपके चैनल के माध्यम से आपके कमेंट सेक्शन में जो भी कमेंट किए जाते हैं उसमें एक तो

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00:03:35:18 हमें सबसे पहली बात यह है कि हमें उनका पक्ष प्रमाणित लगता है कि यदि उनके द्वारा कोई बात की जा रही है तो ये प्रमाणित बात है।

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00:03:42:28 अच्छा और आपके आपके द्वारा जो प्रति उत्तर में बात की जाती है तो हमें कहीं ना कहीं लगता है कि बगैर साक्ष्य के आधार पे आप उनप एलगेंस लगा रहे हैं। अच्छा ठीक है जी आप भाई साहब दीक्षित हैं। जी किस परंपरा से? वैसे भी हम शैव परंपरा से हैं। [संगीत] शैव परंपरा कोई नाम होगा कुछ आपके गुरु का आपकी कहां पर विराजमान होते हैं वो श्री योगीराज बालकदास जी महाराज उनका नाम है।

00:04:31:10 और बद्रीम के निकट राजस्थान के हैं क्या? नहीं नहीं राजस्थान की नहीं है। अच्छा तो बद्रीनाथ के बद्रीनाथ के आसपास उनका कोई स्थान है। हम आपने एक बात कही कि आपको उनकी एक बात उनकी बातें प्रामाणिक प्रामाणिक लगती हैं। जी जी जी वो अपने आप को निग्रहचार्य लिखते हैं। क्या ये बात प्रमाणिक है? अब उन्होंने जितना बताया है उसके हिसाब से तो प्रमाणिक लगता है हमें तो लगती है कि नहीं लगती है मैं पूछ रहा हूं हमें प्रमाणिक लगता है कहां से प्रमाणिक है थोड़ा सा उनके संप्रदाय के उनके संप्रदाय के विषय में हमारा उतना गहन अध्ययन नहीं है लेकिन सुनने के आधार पे जो भी उन्होंने बताया है देखिए अगर सुनने के आधार पे है तो आपको कहना चाहिए इस विषय पे मैं वो प्रामाणिक है कि नहीं मैं नहीं जानता अगर सुनने या तो या ना मानू प्रमाणिकता

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00:05:37:13 का पैमाना यही है कि जो व्यक्ति शास्त्र उसकी करनी है शास्त्र उनकी रहनी है और शास्त्र उनकी कथनी है तो

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00:05:45:15 अब इसमें प्रमाणिकता कहां फिर तो हर चीज में प्रमाणिकता हर चीज का एक सर्टिफिकेट फिर लोग मांगेंगे ना नहीं नहीं क्या तीन चीजें बताई आपने क्या प्रमाणिकता है शास्त्र उनकी हमको करनी लगती है शास्त्र उनकी रहनी लगती है करनी और रहनी एक मिनट करनी और रहनी करनी और करनी और रहनी आपने कैसे देखी है उनकी जो भी उनके द्वारा प्रचारित किया जाता है सोशल मीडिया प्रचारित की बात नहीं है आपने करनी और रहनी देखी वो बाहर आकर के शौच के बाद कुल्ले करते हैं कि नहीं वो संध्या वंदन समय से करते हैं कि नहीं ये सब आपने देख लिया ये सब उनके जो साक्ष्य उन्होंने दिए हैं। उसके माध्यम से यह प्रकट होता है कि अंदाजा है ना देखो भैया ऐसा है कि पूरी पीठ शंकराचार्य से हम व्यक्तिगत कभी नहीं मिले हैं। लेकिन उनके प्रति हमारी श्रद्धा है। तो उसमें अब कहिए ये कहिए ये कहिए कि आपके पास प्रमाण नहीं है मगर आपकी श्रद्धा है। पूरी पीठ के शंकराचार्य जी के पास पूरी पीठ के शंकराचार्य जी के पास हमारे पास प्रमाण है। आप प्रमाण नहीं दे रहे हैं। आप केवल कह रहे हैं कि आपकी श्रद्धा है। अब विुअल फुटेज

00:07:00:26 ही आप प्रमाण मानेंगे कि विुअल फुटेज आप दीजिए हमको तो फुटेज हमारे पास आप मुझे बताइए ना कि वो निग्रहचार्य कैसे आप बताइए मुझे अब अब आप देखिए अब ये शब्दों के मायाजाल में आप फंसा रहे हैं। आप विषय पर आइए भाई साहब मैंने आपसे बड़ा ही सीधा और सरल प्रश्न पूछा है कि वो अपने आप को निग्रहचार्य कहते हैं। ये बात प्रमाणिक कैसे है? आपकी श्रद्धा है तो आप श्रद्धा बोलो। प्रामाणिक बोलना है तो प्रमाण दो। इसके विषय में वह अपने वक्तव्य निर्गत कर चुके हैं। उनमें आप जाकर देख सकते हैं। इसमें इसका मतलब यह है। इसका मतलब तो यह है कि जब हमसे कोई क्वेश्चन करे तो हम यह कह दे कि हमने इसके संबंध में अपने वक्तव्य निर्गत कर चुके हैं और आप जाकर के देख लीजिए। भाई वो जो निर्गत किए वो जो निर्गत किए हुए वक्तव्य है उन्हीं में तो दोष दिख रहा है हमें। तभी तो हम आपके पास आए पूछने। उन्होंने तो समय दिया नहीं। एक मिनट एक मिनट उन्होंने तो समय दिया नहीं। उन्होंने समय नहीं दिया। आप मिल गए उनके पक्ष से तो हम आपसे पूछ रहे हैं कि वो अपने को वो अपने आप को निग्रचार्य कहते हैं। इस बारे में प्रमाण क्या है? प्रमाणिक क्या है? क्या प्रमाण है? अब प्रमाणिकता के लिए हम आपसे पहले भी कह चुके हैं कि वो बात बताऊं।

00:08:16:14 आपको एक बात बताऊं। अप्रामाणिक होने की बात बता दूं। पहली बात तो यह है कि यदि कोई शास्त्र सम्मत लक्षण दिख रहे हैं जिसमें आपको ऐसा लग रहा है आपकी श्रद्धा उसमें भी प्रमाण नहीं आपकी श्रद्धा है तो आपको शास्त्र सम्मत लक्षण यदि दिख रहे हैं यदि लक्षण दिख रहे हैं आपकी श्रद्धा अनुसार तो

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00:08:36:16 उससे उनका आचार्यत्व सिद्ध होगा निग्रचार्यत्व सिद्ध नहीं होगा निग्रचार्यत्व के लिए तो निग्रचार से निग्र निग्रह परंपरा जो तथाकथित उन्होंने बताई उस परंपरा का प्रमाण चाहिए होगा। फिर उसके अंतर्गत आने वाले किस तरीके से उन तक वो पद पहुंचा इन सब चीजों में प्रमाण चाहिए होगा। आचार आचरण से आप आचरण से आप आचार्यत्व को सिद्ध कर सकते हैं। ये तो रही एक पक्ष। इससे आप निग्रचार्यत्व को सिद्ध नहीं कर सकते। दूसरी बात यह है कि अगर आपको कुछ लक्षण ऐसे दिख रहे हैं जो कि शास्त्र सम्मत है। आपकी बात अगर दुर्जन तोष न्याय से मान भी लूं तो मैं आपको ठीक विपरीत लक्षण दिखा देता हूं आचार्य के जो ठीक विपरीत है।

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00:09:24:09 बताइए आप उसका यदि आपके पास उसका कुछ साक्ष्य है तो आप दिखा सकते हैं? बिल्कुल साक्ष्य है। जी। आचार्यत्व का लक्षण क्या है? जो शास्त्रीय आपने कहा शास्त्रों के अनुसार चले। प्रामाणिक जिसके लक्षण हो शास्त्र सम्मत हो के जी हम

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00:09:42:14 भागवतानंद ने अपने खुद के वीडियो में कहा है कि मैं गाली देता हूं और गाली देना अशास्त्रीय है ये मैं मानता हूं

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00:09:50:04 ये एआई का जमाना है किसी की छवि बिगाड़ने के लिए अरे भाई उसने देखो अगर झूठ पे खेलना है तो फिर आप जा सकते हो आप नहीं उसने अपने सुनो उसने अपने उसने अपने किसी भी वीडियो में स्वीकार नहीं किया कि उसने गाली नहीं दी है। उसने उसका एआई से बनाया गया। उसने स्वीकार किया है कि मैं गाली देता हूं। मैं गाली दूंगा और गाली देना शास्त्री है। ये मैं मानता हूं। ये ये इस पर हम भरोसा नहीं कर पाएंगे क्योंकि अभी तक जितना हमने उनको सुना है उन्होंने भाई तो फिर हम क्या कर सकते हैं? जब बात यहां पे आ जाएगी कि आप जो जो व्यक्ति सामने से कह रहा है भाई ऑपरेटर महोदय इनको इसका वो गाली वाला वीडियो अगर आप दिखा सके तो दिखाइए जरा ड्राइव से खोल करके। तब तक मैं दूसरी बात कर देता हूं। जी ये बताइए कि जो परंपरा होता है उसका महत्व यही है ना कि हम आगे वो ज्ञान दे रहे हैं अपने अपने से जुड़ने वाले लोगों को जो हमें पीछे से हमारे से प्राप्त हुआ है। जी हम भागवतानंद ने कुछ अवैदिक सामग्री जैसे कि कालिया जिन की पूजा

00:11:05:06 परिधना इसके विषय में भैया हम थोड़ा सा टोकना चाहेंगे। इसके विषय में जो उसका नाम आया था आदित्य वैभव का नाम आया था। देखिए भाई साहब मेरा पहले प्रश्न पहले आप मेरा प्रश्न सुन लीजिए। प्रश्न क्या है? आपको मेरा प्रश्न नहीं पता है। प्रश्न मैं ये कह रहा हूं कि यह

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00:11:23:01 जो ज्ञान है परिसाधना कालिया जिन्न का जो कि वेदों के विपरीत है। यह ज्ञान उसको किस परंपरा से मिला? निग्र परंपरा से मिला। कैसे मिला?

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00:11:34:26 इस ज्ञान की इसके बारे में कोई प्रमाणिक सबूत तो हो जिसको आधार बनाकर यह सब बात की जा रही है वह व्यक्ति स्वयं अपने अरे भाई उसने ये माना है कि ये पूजा मैंने कभी नहीं की है ये मगर ये पूजा मैंने किसी को दी है ये उसने माना है अपने वीडियो में अब जब तुमको उसका यही नहीं मालूम है उसका पक्ष नहीं मालूम है तुम क्या तुमसे क्या बात की जाए फिर आप आप सिरे से जब प्रत्यक्ष प्रमाणों को ही खारिज कर दे रहे हैं तो आप अनभिज्ञ के व्यक्ति हैं। नहीं नहीं नहीं हमने हमने वो सुना है उसके विषय में हमें जानकारी है। उन्होंने क्या बताया था उसको घुमा घुमा के वो प्रस्तुत किया जा रहा है। वैसे नहीं बताया था। उन्होंने ये बताया था कि वो यही बता रहे थे कि यदि दूसरे किसी

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00:12:20:12 जैसे जानकारी के लिए किसी साधना के विषय में आपको जानकारी है लेकिन वो हमने किसी को दिया

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00:12:26:24 नहीं है। ये पक्ष था उनका। अरे भाई दिया है। दिया है। किसको दिया है? किसको ये आदित्य वैभव सिंह इत्यादि को दिया है और यह बात और यह बात और यह बात भागवतानंद ने स्वयं अपने मुख से स्वीकार की है कि मैंने दिया था और ये भी कहा है कि उसको फायदा भी हुआ था नहीं उन्होंने देवी मंत्र की उसमें बात की थी कुछ उपासक मंत्र बताए थे जो सात्विक मंत्र थे और व्यक्ति सात्विक मंत्र नहीं थे कालिया जिन परिधना की पूजा उसने दी है उनको कालिया ये सुनो पहले गाली का सुनो गाली का सुनो पहले वेदों को भी प्रमाण मानने वाले ये लोग नहीं है केवल एक बहाना बना कर रखा है कि हम वेदों को प्रमाण मानते हैं जबकि वेदों को प्रमाण मानने वाला व्यक्ति असम रूप से पुराण स्मृति आगम इतिहास आदि को भी प्रमाण के रूप में परिगण करेगा तो अब मुख्य समस्या यहां पर क्या है गाली तो मैं गाली देता हूं यदि कोई गाली सुनने का काम करे मैं ऐसा संत नहीं हूं कि मुझे मां बहन की गालियां देते रहो तो मैं माथा झुका कर सुन लूंगा ऐसी सारस्वत सिद्धि हमारे पास नहीं है कि कोई मुझे गालियां दे और मुझे अपनी सिद्धि बचाने के चक्कर में माथा झुकाकर सुनना पड़े बिल्कुल नहीं कदापि नहीं किसको मानोगे वेद को मानोगे प्रमाण पुराण को मानोगे स्मृति को मानोगे तंत्र को मानोगे इतिहास को मानोगे आधुनिक नीतिकारों को मानोगे किसको मानोगे जहां से मानोगे वहां से प्रमाण देंगे चलो प्रारंभ करते हैं तुम्हारा पोस्टमार्टम

00:13:42:16 पीछे से शुरू से लगाइए उसको शुरू से उसमें ये स्वीकार करेगा कि गालियां देना शास्त्रीय है पीछे नहीं नहीं हमने सुन लिया थोड़ा आगे करिए नहीं हमने सुन लिया है हमने विषय सुन लिया है सुन लिया है विषय हमने हमने विषय सुन लिया है क्या सुन लिया? क्या सुन लिया? अरे क्या हुआ?

00:14:26:27 [संगीत] इस वीडियो के आधार पे यह बात कहां प्रमाणित होती है? उन्होंने यह कहा है कि यदि हमको कोई गाली देगा तो उसके प्रति उत्तर प्रत सुना रहे थे। दोबारा सुन लो। अब सुना रहे थे। अब दोबारा सुन लो। इसीलिए सुना रहे थे। सुना नहीं तुमने। गाली

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00:14:46:21 देना अशास्त्रीय है किसी भी स्थिति में। अब बात दूसरी आती है कि अगर हमको कोई गाली देगा तो हम उसको गाली देंगे। अगर राम जी की पत्नी का हरण करेगा तो राम जी उसकी पत्नी का हरण करेंगे।

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00:15:01:18 नहीं गाली देने गाली देने का निषेध शास्त्रों में बताया गया है। आप शास्त्रों से बताइए कि गाली देना कहां पर उचित माना गया है। और जबकि आपका आदमी आपका आदमी सुनिए आपका व्यक्ति स्वयं कह रहा है कि यह अशास्त्रीय है। अगर रावण का अगर अगर रावण सीता का हरण करेगा तो श्री राम जी मंदोदरी का हरण करेंगे क्या? नहीं आप गलत ट्रैक पे जा रहे हैं। उन्होंने यह कहा है कि यदि कोई व्यक्ति यदि भाषाई मर्यादा के विरोध में यदि हमसे बातचीत करेगा तो उसके लिए हम प्रति उत्तर देंगे। उसकी भाषा में अब आपने वो दूसरे ढंग से उसको प्रस्तुत कर दिया है। मैंने आपको बताया तेरे लिए सुनिए तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य की स्थिति में शास्त्र प्रमाण है। आप मुझे शास्त्रों से बताइए कि कब किस स्थिति में गाली देना माना है शास्त्र ने। नहीं माना के संबंध में बहुत सारी नहीं माना के संबंध में आपको मैंने उसी सुनिए। नहीं माना है कि संबंध में भागवतानंद का ही प्रमाण है कि वो कह रहा है कि वो शास्त्रीय है। अगर किसी अगर किसी सुनिए अगर किसी संदर्भ में वो शास्त्रीय है उसका गाली देना

00:16:16:28 तो आप मुझे प्रमाण दीजिए। नहीं तो उन्होंने किन-किन गालियों की गालियों में भी तो स्वान होता है। ये ऐसी गालियां है कुछ की जिनके द्वारा संबोधन किया जा सकता है। इनका उसने ये कहा है कि मैं गालियां देता हूं। मैं गालियां दूंगा। गालियां देना शास्त्रीय ये भी मैं मानता हूं। उसने माना कौन सी है? कौन सी गालियां दी? आज तक प्रमाणित तो हो कोई एक वीडियो तो हो आपके पास कि जिसमें वो गाली देते दिखे। ये देखो ये क्या दिखाया जा रहा है? ये ये भैया ये ये मत दिखाइए। इसमें क्या है? इसी इसी का पूरा ये बनाया है कि ये ये कोई भी आपका एक मिनट इसको हटा दो। तुम्हारा व्यक्ति कह रहा है ना कि मैं गालियां दूंगा मैं गालियां गालियां शास्त्रीय है अभी देखो एक मिनट पॉज करो एक मिनट पॉज करो एक मिनट मेरी बात सुन लो अभी तुम क्या कह रहे थे अभी तुम क्या कह रहे थे अभी तुम क्या कह रहे थे कि गालियां देना जो है अगर सामने वाला भाषाई मर्यादा का उल्लंघन करके बात कर रहा है तो हमारा भी भाषाई मर्यादा का उल्लंघन करना उचित है जब मैंने उचित होने के संदर्भ में जब मैंने उचित होने के संदर्भ में प्रमाण मांगा तो अब आप ये कहने लगे कि उन्होंने कौन सी गालियां दी है ये भी तो

00:17:32:00 देखना पड़ेगा उचित है कि नहीं पहले ये बताओ क्या पहले ये बताओ उचित है कि नहीं उचित नहीं है लेकिन स्ान कुकर स्टान कुकर पे मैं बाद में आऊंगा उचित है कि नहीं है नहीं उचित नहीं है लेकिन उन्होंने कभी ये प्रमाणित नहीं ये ये प्रमाणित नहीं हुआ है कि उन्होंने इस प्रकार के अपशब्दों का प्रयोग किया है जो आज के समय में भाषाई गालियां चल रही अरे मेरे भाई उसने अपनी पोस्ट में माता बहन इत्यादि को लेकर तक गाली दी है। अपनी Facebook अपनी Facebook पोस्ट में उसने दी है और उसने इन बातों उसने इन बात उसने इन बातों को स्वीकार किया है। जाके पहले उससे पूछ के आओ। नहीं यह किसी की छवि बिगाड़ने के लिए कोई भी ऐसा नहीं है। उसने दी है। सुनो उसने दी है और उसने इस बात को स्वीकार किया है। आपको जानकारी कम है। आपको जानकारी कम है। अच्छा एक बात बताओ एक बात बताओ। रुको एक बात एक बात बताओ। अगर हमने बाद में तुमको ये प्रमाण दे दिया कि हां भाई उसने ही दी थी गाली तो तुम मान लोगे कि वो निगराचार नहीं है। ऐसे कैसे मानेंगे? विषय समझेंगे

00:18:47:03 पहले कि किस विषय में गाली दी है? कैसे दी है? कौन सी गाली दी है? ये सब भी तो गाली दी थी। जी अच्छा आपके पास उसका फुटेज है कुछ वीडियो कुछ साक्ष्य है आपके पास मैं आपको साक्ष्य दिखा रहा हूं आप मान कहां रहे हो कह रहे हो ये नहीं मानेंगे वो वो वो कैसे मानेंगे वो तो आप आप लोग भी मतलब इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करते हैं तो वो भी एक प्रकार से मेरी भाषा कहां पे है और मेरे कर देने से उसका सही सही होना सिद्ध नहीं होता है किसी और के कर देने से किसी और के गलत होने से भागवत आनंद का सही होना सिद्ध सिद्ध नहीं होता है। तो पहली बात तो आपने जो कही थी पहली बात आप अब मैं थोड़ा पीछे मूल विषय पे आ जाता हूं। पहली बात आपने ये कही थी कि उसके आचरण से दिखता है कि वो आचार्य है। जबकि वो खुद ही कह रहा है कि मैं गाली देता हूं और गाली देना शास्त्रीय है। ठीक है। वो खुद है। एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक एक मिनट एक मिनट एक मिनट भाई साहब। भाई साहब एक मिनट वो खुद मान रहा है कि वह कुछ ऐसे कार्य करता है जो अशास्त्रीय है। दूसरी बात कौन सी परंपरा से कौन सी परंपरा से उसको वो वो वाला वो वाली क्लिप भी दिखा दो इनको

00:20:02:07 कि भैया उनको कालिया जिन का मंत्र चाहिए था और जो है मैंने उनको कालिया मंत्र कालिया जिन का मंत्र दिया अभी ये पहले ये पहले हम देख चुके हैं। आप मत दिखाइए इनको। यह पूरा एडिट करके कालिया का मंत्र दिया ना उसने काली का मंत्र दिया ना दिया है तो अब हम वो दिखाते हैं अब पहले देख चुके हैं वाली बात मत करना अब दिखाते हैं पहले वो वाला वीडियो दिखा रहे उनको कालिया का मंत्र चाहिए था वो कटिंग में डला हुआ पूरा प्रमाण दे चुके वो पूरा प्रमाण दे चुके ये दिया है तुम्हारा थोड़ा सा कचरा है फिर मैं क्या बताऊं फिर मुझे इस तरह से बात करना पड़ता है तुम्हारी जानकारी सुनो सुनो मेरी मैं ठीक मैं मैं ठीक है। मैं अपनी बात को मैं अपनी मैं अपनी बात को वापस ले रहा हूं। आपको जानकारी कम है भागवतानंद के विषय में और आधी जानकारी पे कूलने चले आए हो आप। यदि आप सीधे सुनिए आप सीधे-सीधे जो ट्रुथ है जो फैक्ट्स है उनको इंकार कर रहे हो। जिनको भागवत आनंद स्वयं भी इंकार नहीं करता। सुनो भागवतानंद का ये कहना नहीं है। भागवतानंद का ये कहना नहीं है कि उसने कालिया की पूजा नहीं दी किसी को। उसका

00:21:17:08 यह कहना है मैंने स्वयं नहीं करी। मैंने औरों को दी। मैंने स्वयं नहीं करी। उसका यह कहना है। और तुम कह रहे हो कि उसने दी ही नहीं किसी को। ठीक है? तो आपका यहां पे आप यहां पे आपकी लैक ऑफ नॉलेज है। अब सुनो दूसरी हमें नॉलेज है। उस विषय का हमें हमें उस विषय का नॉलेज है। वो व्यक्ति स्वयं स्वीकार किया है। अपने दूसरे वीडियो में कहा है। यही उसने किसने कहा है? वो आदित्य

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00:21:46:02 वैभव ने अपना अपने मुंह से बोला है कि उसने अमुक अमुक लोगों को यह साधना दी है।

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00:21:53:25 कैसे भाई नहीं आगे पीछे का जो सुनो उसने जो वीडियो में एक्सप्लेनेशन दिया था उसने जो वीडियो में एक्सप्लेनेशन दिया था उसने ये नहीं दिया था कि मैंने ये साधना नहीं दी है। उसने ये बताया था कि देखो भैया मैंने इसमें जो विधि बताई है ना इस विधि में मिक्स किया है। अरे भैया मिक्स कर देने से ये बात थोड़ी ना बदल गई कि तुमने कालिया जिनकी साधना नहीं दी। कालिया जिनकी साधना दी कालिया जिनकी साधना दी मगर उसको और बुरा दिखाने के लिए के अनुसार कुछ लोगों ने उसमें एडिटिंग की आप हमको आप हमको बोलने नहीं दोगे तो ऐसे में वार्ता नहीं हो पाएगी और आप अपना पक्ष अपना पक्षी विजय घोषित कर देंगे। बोलिए हमारा कहने का हमारा यह है कि उन्होंने जो उसके विषय में पूरा वीडियो निर्गत किया था उस वीडियो के कुछ ही अंश आपने दिखाए हैं। अरे मेरे बोला है कि नहीं मैंने ये साधना दी है। यह बोला है यह आप कहीं से भी कुछ भी कटिंग करके आजकल यह दुनिया खराब तुम जाओ तुम और कहीं जाओ तुम्हारा दिमाग खराब है तुम जाओ कहीं से भी उसने ये ये लाइन उसने ये लाइन बोली है कि नहीं उसने ये लाइन बोली है कि नहीं ये

00:23:09:08 अरे

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00:23:09:20 उस लाइन का हम आपको साक्ष्य दे देंगे प्रमाण दे देंगे हम उसको कैसे बोला है पूरा वीडियो आपको दिखा देंगे लेकिन उस लाइन का क्या साक्ष्य दोगे उसका पूरा नहीं पूरा वीडियो आपको

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00:23:22:09 उसप निर्गत करेंगे। पूरा पूरा वीडियो चलाइए कैसे की उपासना अमुक अमुक को दी इसमें तुम्हारा पक्ष क्या है ये बताओ तुम्हारा पक्ष क्या है वीडियो निर्गत करोगे वो करते रहना तुम्हारा पक्ष क्या है वो बताओ नहीं हम यहां यहां आने से पहले हम आपसे यही कह रहे थे कि आप बातों में शब्द भाषाओं में ऐसे फसा के मत करिए आप फंस रहे हैं तो निकलने के लिए दूसरा रास्ता मत अपनाइए आपका पक्ष क्या है? वीडियो आप निर्गत करेंगे करते रहिएगा। उसने अपने मुख से बोला है कि मैं मैंने कालिया जिनका मंत्र दिया। उसने अपने मुंह से बोला ये हम अपनी बात पे अक हैं। पूरा वीडियो जब देखा जाएगा पूरे वीडियो से ये प्रमाणित होगा कि पूरी बात क्या थी? एक आप मुझे बताइए ना कि उसमें उसका पक्ष क्या है? उसने नहीं दिया। क्या पक्ष है उस पूरी वीडियो में? उसी के लिए उसी के लिए तो यहां पे आए हैं।

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00:24:21:27 आप आप उस वीडियो का पक्ष बता दीजिए। आप उस वीडियो का पक्ष बता दीजिए। उसमें उसने क्या पक्ष दिया है? उसमें हमसे उसमें हमसे बेहतर आपको जानकारी है क्योंकि

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00:24:32:00 वो वीडियो आपने उसके साथ छेड़छाड़ तो जब मुझे जब मेरी जानकारी पे तुम डिपेंड हो तो मुझे काउंटर क्यों कर रहे हो? जब मेरे मुझे जब मुझे तुम जब मुझे तुमसे बेहतर पता है उस विषय में तो तुम मुझे आक्षेप कैसे कर रहे हो? बेहतर पता नहीं है। बेहतर पता नहीं है। कैसे छवि बिगाड़ना है यह पता है आपको? तो अभी तो तुम कह रहे थे उस विषय में आपको मुझसे बेहतर पता है। नहीं ये कहा कोई पक्ष प्रस्तुत तुम्हें इस बात के विषय में कोई पक्ष प्रस्तुत करना है कि मैंने उनको कालिया जिन्न का मंत्र दिया। उसने यह बात कही। अब इस विषय में आपका पक्ष क्या है? उसने वीडियो में क्या कहा था वो बता दो। पूरा वीडियो आप देख लीजिए। पूरे वीडियो में बात है। उसमें जवाब क्या दिया इस बात का बताओ ना मुझे? उसमें सब मिल जाएगा आपको। आपको पता है आपको यहां क्यों आए हो? तुम यहां क्यों आए हो? उसमें सब मिल जाएगा। ये सब प्रपंच करने के लिए नहीं आए हैं हम। हम आपको ये प्रमाणिक निगराचार है। हम आपको यह बताने के लिए आए थे। निग्राचार बात को बदलोगे। मैं बात को बदलोगे मैं समाप्त कर दूंगा चर्चा। निग्रचार को प्रमाणिक मानते हो कि नहीं? आपका आपका निजी को

00:25:47:01 प्रमाणिक मानते हो कि नहीं? किसको? निगराचार्य को भागवत आनंद को प्रामाणिक मानते हो कि नहीं? मानते हैं। अब मैं आपसे एक सरलता पूर्वक प्रश्न कर रहा हूं। एक मिनट भाई अब मैं आपसे एक मिनट भाई साहब एक मिनट प्रश्न को छोड़िए मत जो पकड़ में आया उसको पकड़े रहिए। भागवतानंद को आप प्रामाणिक मानते हैं। आपने कहा वो निग्राचार है। मैंने जब आपसे पूछा कि कैसे तो उसकी परंपरा के बारे में आपको कुछ नहीं पता है। आपको केवल यह पता है कि उसके लक्षणों से वो जो है निग्रचार लगता है। ठीक है? मैंने आपसे बताया कि यदि उसके अंदर लक्षण होंगे भी तो उससे उसका आचार्यत्व सिद्ध होगा। निग्रचार्यत्व सिद्ध नहीं होगा। निग्रचार्यत्व के लिए उसकी जो परंपरा है उसके प्रमाण होने चाहिए। पहली बात। अब जब आचार्य एक मिनट भाई साहब मुझे पूरा करने दीजिए। अब जब आचार्य अब जब

00:27:02:02 आचार्य की बात भी आचार्यत्व की बात भी अगर करते हैं एक मिनट भाई साहब एक मिनट आचार्य की आचार्यत्व की आचार्यत्व की बात भी अगर करते हैं तो अगर आपको उसके कुछ ऐसे अच्छा मैंने पूछा क्या प्रमाण है उसके लक्षणों के बारे में? क्या प्रमाण है लक्षणों? तो आपने कहा यह तो अपनी अपनी मानना है श्रद्धा है। इसमें भी प्रमाण नहीं है। मानना मानना नहीं मैं पूरा मैं पूरा कर लूं। बिंदुगत रूप से आप बोलिएगा। जीवन में भी आपके जीवन में ऐसे व्यक्ति होंगे जिनके विषय में मैं पूरा कर लूं। फिर बिंदुगत बिंदुगत बोलना। तो उसके लक्षणों के संबंध में आपकी आस्था है। आपकी श्रद्धा है। ठीक है। अब मैंने आपको कहा कि भाई अगर आपका आपकी श्रद्धा यह है कि उसके कुछ लक्षण ऐसे हैं। जो शास्त्र सम्मत कुछ नहीं आपके हिसाब से शास्त्र सम्मत उसके लक्षण है और उनके अनुसार भी वो निग्रचार नहीं आचार्य सिद्ध होगा। ये ध्यान रखिएगा उनके अनुसार वो निग्राचार्य नहीं आचार्य सिद्ध होगा। मगर यहां पर मैं अभी आपके इस बात को भी ऐसे काउंटर कर रहा हूं कि उसकी कुछ चीजें जो शास्त्रीय विरुद्ध दिखाई दे रही है। उसने खुद अपनी जीवा से बोला कि भैया गाली देना अशास्त्रीय

00:28:17:10 है। यानी कि वो गाली देकर और वो ये भी कह रहा है मैं गाली देता हूं मैं गाली दूंगा। तो जब वो कह रहा है अशास्त्रीय तो उसी की बात का अनुकरण करते हुए उसी की बात से सिद्ध हो रहा है कि वो शास्त्र सम्मत उसका आचरण नहीं है। पहली बात। दूसरी बात ये है पूरी कोई नहीं खड़ा कर दिए मेरा पूरा हुआ नहीं मेरा पूरा हुआ नहीं भाई साहब भाई साहब मेरा पूरा हुआ नहीं आपका मेरा पूरा हुआ नहीं बोलने का अवसर ही नहीं देना भाई साहब मैं अवसर दूंगा आपको धैर्य आप धैर्य रखिए मैं अवसर दूंगा आपको धैर्य रखिए थोड़ा अब उसके बाद मैंने बताया कि भैया ये बताइए वो जो कालिया जिन्न और परी साधना देता है दूसरों को जो बात वो स्वीकार करता है कि किसी को कालिया जिन का मंत्र चाहिए था। मैंने उसको दिया। उसने

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00:29:05:18 कई बार कहा है कि मैंने दिया है पर मैंने खुद के लिए उपयोग नहीं किया। यह बात मैं मानूंगा। और जो उसने एक्सप्लेनेशन बताया बनाया था बहुत लंबा चौड़ा। मेरे ख्याल से वो वीडियो उसने हटा भी लिया वहां से। तो जो उसने एक्सप्लेनेशन बनाया था बहुत लंबा चौड़ा उसमें उसने ये नहीं कहा था कि मैंने कालिया जिन का मंत्र नहीं दिया। उसने यह बताया था कि कालिया जिन का मंत्र तो मैंने दिया है। यह तो बात सही है। मगर उसके नाम पर जो एडिटिंग करके स्क्रीनशॉट दिखाए जा रहे हैं वो सब नकली है। उसमें मिलावट है। उसमें आधी बात सच है। आधी बात गलत है। ये कुल मिलाकर के कहानी है। अब आपका कहना है कि कालिया जिनका मंत्र के संबंध में मुझे वीडियो देखना है। तो भैया आप यहां पर क्यों आए फिर? अब आप हमारा पक्ष सुनेंगे आप? हां बताइए। स्वामी राघवाचार्य और विद्या भास्कर के प्रति आपकी श्रद्धा है कि नहीं है? बिल्कुल है। वो दोनों आचार्य अपनेप पीठों से वीडियो भी निर्गत कर चुके हैं। बता भी चुके हैं। निग्रचार्य जी के पक्ष को निग्रचार जी निग्रचार्य जी के पक्ष से सहमत भी हैं। कई जगहों पर वो सहमत पाए गए हैं। हां। अच्छा। अच्छा। तो उससे उससे किसी व्यक्ति की

00:30:20:19 क्या प्रमाणिकता सिद्ध नहीं होती है

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00:30:22:09 कि कोई पीठ पर प्रमाणित आचार्य यदि उस ठीक है एक मिनट आपका प्रमाणित है आपका उत्तर मैं समझ गया हम आप आचार्यों की वाणी से सिद्ध कर रहे हैं कि वो निग्रचार है। जी ठीक अब आप मुझे एक बात बताइए पहले इसका मतलब यह मानू कि इस संबंध में आपके पास उत्तर नहीं है कि उसने कालिया जिनका मंत्र उसको कहां से मिला कहां पे दिया उस विषय पे हम अभी भी अटक है कि उसके विषय में उन्होंने वीडियो पक्ष बताओ मेरे भाई निर्णय मत बताओ आपकी मान्यता क्या है वो मत बताओ आपका तर्क क्या है आपका लॉजिक क्या है आपके पास फैक्ट एंड फिगर क्या है वो बताओ अपोल कल्पनाओं के तर्क नहीं दिए जाते हैं आप कल्पित बात कर रहे हैं पूरी हम कल्पित बात नहीं कर रहे हैं। बात नहीं

00:31:15:01 है आपने उस वीडियो का एक अंश निकाला है। अरे आप बाकी का अंश बता दो ना मेरे भाई। बाकी का अंश आप बता दो ना। बाकी का अंश आप वीडियो में जाके देख लीजिए। हम देख चुके हैं। अब ये बार-ब क्या देखा था जिससे आपको इसका उत्तर मिला इस बात का कि उसने कालिया जिन का मंत्र दिया कि नहीं दिया। वो क्या उत्तर था? आप गोलगोल मत घुमाइए। आप हमारे प्रश्न पे तो आइए। गोलगोल मत घुमाइए। ऐसे ही होता है जब व्यक्ति फसता है। आप इस प्रकार आप इस प्रकार से बात करेंगे। देखो ऑपरेटर महोदय आप मुझे परेशान कर रहे हैं। या तो आप कोई क्लिप निकाल के दिखानी है तो दिखाइए। नहीं दिखानी है तो आप बार-बार इस तरीके से लोगों का ध्यान इनके शंकर मठों में जो वास्तविक चल रही है

00:32:01:03 चुप हो जाइए। चुप हो जाइए। आप सुनाते रहेंगे भैया। कोई कोई सारा चल रहा है। चला रहा हूं। इसमें दिखा रहा हूं आपको कि उसने उसने कहा है। आप ये छोटेोटे विषय में फंसा के मुख्य विषय से हटना चाह रहे हैं और कुछ नहीं। अच्छा ये मुख्य विषय नहीं है कि वो निग्राचार्य है कि नहीं। ये आपके लिए मायने नहीं रखता। प्रमाण पत्र ले घरघर पहुंचाने की आवश्यकता नहीं है कि पोस्टल भाई साहब एक मिनट आप जो भी बातें बोल रहे हैं शास्त्रीय बातें बोले मनगढ़ंत बातें नहीं मनगढ़ंत आप क्या बोल रहे हैं अब अब देखिए अब मैं आपसे एक स्टेप आगे बढ़ रहा हूं। अब मैं एक स्टेप आगे बढ़ रहा हूं। आपके पास इस बात का पक्ष नहीं है कि उसने मुसलमानी साधना दी तो कहां से उसको मुसलमानी साधना प्राप्त हुई और वो आगे कहां उसके विषय में आपका जवाब है उसके विषय में आपका जवाब है कि वीडियो देख लो यानी कि आपको नहीं पता आपके पास भी तो कोई ऐसा साक्ष्य नहीं है। आप भी तो साक्ष्य नहीं दे पा रहे हैं। मेरे गलत होने से मेरे गलत होने से मेरे गलत होने से उसका सही होना

00:33:16:09 सिद्ध नहीं होता। आपको फिलहाल उसको निग्राचार्य सिद्ध करना है।

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00:33:22:24 ये उनका विषय है। यह हम सिद्ध करने के लिए नहीं आए हैं। उनकी परंपरा के विषय में हम वो जानते होंगे ना। सुनो।

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00:33:29:01 तो अब दूसरी बात ये आती है कि विद्या भास्कर जी महाराज ने और राघवाचार्य जी महाराज ने क्या ये कहा है कि हमने पूरी परंपरा उनकी जानते हैं। प्रामाणिक है सब कुछ है। इतना लंबा चौड़ा कोई नहीं रखता है। व्यक्ति के लक्षणों को देख के करता है। शास्त्र में इतना लंबा चौड़ा कोई नहीं करता। एक मिनट तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य की स्थिति में शास्त्र प्रमाण है। भाई सुनो वही तो बात है शास्त्र प्रमाण है प्रमाण है तो सुनो राघवाचार्य जी महाराज ही अपने ही वीडियो में अपनी परंपरा बता रहे हैं अपने से पूवाचार्यों के नाम बता रहे हैं शंकराचार्य

00:34:24:02 वो मैं पूछ रहा हूं ना कि उनकी प्रामाणिकता बताओ वो तुमको क्या पता बताओ नहीं तो राघवाचार्य की बात पे राघवाचार्य जी की बात पे आपको यकीन हो गया कि वो निग्रचार की बात पे अभी बात क्या हो रही थी अभी तुमने कहा निगराचार्य भी बता रहे हैं कहा ना तुमने तुमको पता है ना इस प्रकार की आप बात करें आपको लगेंगे फिर सबका प्रमाण चाहिए आपको कोई किस प्रकार की किस प्रकार की आपको आपको हर चीज का प्रमाण चाहिए उनके समुदाय का प्रमाण चाहिए 20 बार वो अपनी वीडियो में बता चुके हैं जो आपको पसंद है बात वो है नहीं नहीं नहीं हम तो पकड़ हम

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00:35:10:21 हमारा हमारा यही कहना है कि वो अपने वीडियो के माध्यम से कई बार अनेकों

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00:35:16:26 बार इस विषय में बता चुके मैं उनके वीडियो में कहे गए वक्तव्यों को काउंटर करूंगा तो काउंटर करने के लिए तुम उनके वीडियो के वक्तव्यों को यहां रखो। मैं तोड़ दूंगा उसको। तुम रख ही नहीं पाए। तो तुम आए क्यों? आपने जिस प्रकार से ये संवाद किया है। जिन विषय में हमको दूसरे विषयों में उलझा के रखे हैं आप मुख्य विषय की आप बात नहीं कर रहे हैं कि आपके पास आपके अनुसार सुनिए। पहली बात पहली बात। इस सुन लीजिए मेरा उत्तर। लीजिए आपने ही कहा। आप आप शुरू में कह देते यह मुख्य विषय नहीं है। आपने पहले दंब भरा कि हां वह निगराचार है। आप कह देते मुख्य विषय नहीं है। इस पर मुझे चर्चा नहीं करनी है। हमने जब आप जब आप फस गए अब जब आप फंस गए तो आप कह रहे हैं विषय नहीं है। ये आपको जवाब दो जवाब दो। अब मुझे बताओ ये सिद्ध करो कि मुख्य विषय कैसे नहीं है। सिद्ध करो। चलो हम आपके जब लाइव विषय इसमें आए थे हमने पहले ही बात किया था कि आप यह मान के चलना कि निग्रहचार के पक्ष के अलावा पूरी दुनिया के पक्ष आपको प्रमाणित लगते हैं।

00:36:32:16 केवल आधा आधा बटे की बातें मत करिए। कट टू कट बात करिए। मेरे पास इतनी ना एनर्जी है ना इतना समय है। आपने कहा कि यह मुख्य विषय नहीं है। आपने कहा ये इतना मुख्य विषय नहीं है। इस संदर्भ में अपना लॉजिक और अपना प्रमाण प्रस्तुत करिए। चलिए ये क्या प्रमाण की आवश्यकता है वो प्रमाण अपना दे चुके हैं कौन तय कर रहा है मेरे भाई के लिए मुख्य विषय नहीं है तुम तय करोगे क्या और कौन तय करेगा आप तय करिए ना क्या मुख्य विषय है हम किस लिए यहां आए हैं मैं कर रहा हूं तय तुमने क्लेम किया कि वो निग्रचार है भागवत श्री भागवतानंद गुरु तो मैंने कहा भैया वो आपने क्लेम किया वो प्रामाणिक बातें करते हैं तो मैंने क्लेम किया एक मिनट आपने क्लेम किया कि वो प्रामाणिक बातें

00:37:21:18 आपने किया आपने क्लेम किया आपने क्लेम किया कि वह प्रामाणिक बातें करते हैं आपने किया वो प्रामाणिक वीडियो देख चुके देख लिया इनके अंधभक्तों का इनके अंध भक्तों की स्थिति देखी यही लोग हैं जो जो कमेंट में होते हैं। इनको यह नहीं पता है कि भागवतानंद का पक्ष क्या है और यह उसके पक्ष में लड़ने लड़ने चले आ रहे हैं। अब बताइए अब भागवत आनंद का निग्रह कर देना भाई वीडियो बना के। इनकी किस्मत तो अच्छी नहीं होनी चाहिए मेरे हिसाब से। इन पर वीडियो बना देना। इन्होंने तुम्हारे विरुद्ध बहुत बातें बोली है। तुमने कहा कि भाई मैं गाली देता हूं। मैं गाली दूंगा और फिर तुमने कहा कि वह शास्त्री है। मैं मानता हूं। यद्यपि शास्त्रों से भी सिद्ध है। यद्यपि शास्त्रों से भी सिद्ध है। मगर तुमने कम से कम यह बात तो अपने वीडियो में बोली है। ठीक है?

00:38:34:12 आपके भी बहुत से ऐसे अंश काट काट के मैं एक अंतिम अवसर प्रदान करना चाहता हूं। मगर आप ओवरलैपिंग मत करिएगा। मैं आपको बराबरी का पूरा मौका दूंगा। हर बात को कहने का और दे रहा हूं। मगर आपको मेरी मेरी बात नहीं सुनना है। आप जाइए आपको नहीं सुनना है। आप जाइए। आपको नहीं सुनना है। आप जाइए भैया यहां पे दे दो जरा लिंक। अगर और कोई आना चाहे किसी की मायके लाल ने किसी की माता ने उसको निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो तो वो आ जाए। रामपाल और भागवत आनंद की तरफ से कोई आना चाहता हो दोनों में से कोई भी तो आ जाए।

00:39:13:15 देखा कैसे प्रिंटेड है? खुद को नहीं मालूम है भागवत आनंद का पक्ष क्या है यहां पर विवाद करने चले आए ऐसे लोग हैं वह व्यक्ति खुद कह रहा है कि भैया मैं गाली देता हूं मैं गाली दूंगा गाली देना शास्त्रीय मैं मानता हूं यानी इतने अंश में शास्त्र सम्मत नहीं है वो खुद कह रहा है और ये कालिया जिन का मंत्र मुझसे लेने आए थे कुछ लोग उन्होंने मंत्र मांगा था उनको कालिया जिन का मंत्र चाहिए था और वो कालिया जिन का मंत्र किससे ले गए हमसे लेके गए तो ये आचार्यों के लक्षण है अवैदिक सामग्री को इधर से उधर पहुंचाना

00:39:55:18 ये आचार्यों के लक्षण है क्या फिर अभी आगे की बात क्या कही थी इस व्यक्ति ने कि राघवाचार्य

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00:40:03:20 जी महाराज और विद्या भास्कर जी महाराज उन्होंने लोकाचार्य की दृष्टि से यदि इस व्यक्ति को जो नाम ये लिखता है मैं भी कई बार आचार प्रशांत को आचार प्रशांत बोल देता हूं। जबकि वो तथाकथित है। तो लोकाचार की दृष्टि से बोलते हैं। बोला जाता है भाई। हमने भी लोकाचार की दृष्टि से बोला था इसको निग्राचार क्योंकि अपने लिए अपने लिए निगराचार लिखता था। मुझे कई लोग आहान लिखते हैं। तो मेरा नाम क्या

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00:40:32:04 आहान है? जब बात पूछी जाएगी ऑफिशियली कि भैया आप प्रामाणिक बोलो कि शास्त्रीय रूप से प्रमाणिक हो। ये उनकी परंपरा है। क्या राघवाचार्य जी विद्या भास्कर जी महाराज के महाराज ने कभी इनकी परंपरा में प्रकाश डाला है क्या? वो जो अपने लिए सुनना पसंद करते हैं कहते हैं वही कहा जाता है। और यदि ये विवाद ना होता तो हम भी उसको वही कहते जो उसके चैनल का नाम था। हमारे गुरु जी केवल शास्त्रीय बातें करते हैं। और क्या है वो शास्त्रीय बातें? श्रद्धा है हमारी। यह ऐसे ब्रेन डेड लोग हैं। देख लो भागवतानंद के फॉलोअर्स के मानसिक स्तर की क्या मानसिक स्तर कैसा है?

00:41:17:20 मैंने हालांकि ये जो चीजें हैं इसने गाली दी। इसने कालिया जिनका मंत्र दिया। यद्यपि मैंने जो है इनकी क्लिप्स निकलवा के रख ली थी। इनके मेन चैनल पे अभी भी वीडियो है यह वाला। जिसमें यह बात बोल रहे हैं। मैं गालियां देता हूं और मैं गालियां दूंगा। कैसे कब? किस परिस्थिति में यह देखो। अब लोग कह रहे हैं इसका शास्त्रीय विधान है क्या? बिल्कुल नहीं। सूत संिता में पुराणों को स्पष्ट गाली नहीं। सूत संिता कब? किस परिस्थिति में ये देखो। अब लोग कह रहे हैं इसका शास्त्रीय विधान है क्या? बिल्कुल नहीं। किस परिस्थिति में ये मैं गालियां देता हूं। नहीं है। और यह बात सही है। शास्त्रीय विधान नहीं है गालियों का। भाई धर्म और अधर्म के बीच में एक अंतर होता है। अधर्म कुछ भी कर सकता है। धर्म की एक वो होती है मर्यादा। उसके अंदर रहकर के आपको युद्ध लड़ना होता है। श्री राम जी कहीं मंदोदरी का क्या अपहरण करेंगे? अगर सीता माता का अपहरण किया जाएगा।

00:42:23:20 अब दूसरी बात क्या है कि कालिया जिनका मंत्र उसने खुद ने पूजा नहीं की। यद्यपि उस पर भी काउंटर है। उस काउंटर क्या है कि कालिया जिन की पूजा उसने खुद ने नहीं करी। उसके लिए उसने रीजनिंग क्या दी है? इसलिए नहीं कि उसकी आस्था नहीं है। भागवतानंद ने ये नहीं कहा कि मेरी आस्था नहीं है कालिया जिन के मंत्र में इसलिए मैंने नहीं की। उसने ये कहा मुझे समय नहीं मिल पाया। इसकी पूजा के लिए जो समय इत्यादि होता है वो मैं वो मेरे पास नहीं निकल पाया। उसने एक वीडियो में यह भी कहा है कि मुझे आवश्यकता थी तो मैंने इसकी जानकारी ली थी किसी से। यह क्या है भाई? आवश्यकता प्रकट कर रहे हो, जानकारी लेना प्रकट कर रहे हो तो आपकी श्रद्धा है कालिया जिन के मंत्र में तो आपको बताना होगा कौन से वैदिक विधान के अनुसार वो कालिया जिन का मंत्र आया। अब यहां पे अन्य कुछ परंपराओं के द्वारा आप ये नहीं कह सकते उस परंपरा में भी होता है। फिर आपको उसका निग्रह करना चाहिए। अगर कोई ऐसा कर रहा है तो पहली बात। दूसरी बात इन्होंने क्वेश्चन क्या बोला है? राघवाचार्य जी विद्या भास्कर जी

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00:43:27:13 महाराज यद्यपि राघवाचार्य जी विद्या भास्कर जी महाराज ने उनकी परंपरा पर कभी प्रकाश नहीं डाला है। उन्होंने ये नहीं कहा हम मानते हैं भाई इनकी परंपरा प्रामाणिक परंपरा है। ऐसा कुछ नहीं बोला है। निग्राचार्य नाम से संबोधन करते हैं। बस अब यदि बोला भी है तो फिर ऐसे भी आचार्य जो उसको नहीं मानते तब क्या करोगे?

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00:43:47:10 शंकराचार्य उन्होंने कहा निग्राचार्य कोई नहीं हो सकता। सही बात है। एक व्यक्ति क्या सभी विपरीत जो वो है ब्रह्म की तात्विक विवेचना उन सब पर निग्रह करने वाला कैसे हो सकता है? भाई किसी के यहां पे पंच जो पंचरात्र है उसको प्रमाणिक माना जा रहा है। किसी के यहां पे नहीं माना जा रहा है। तो ये व्यक्ति अगर पंचरात्र वाले को प्रमाणिक मानेगा तो इसका मतलब पंचरात्र को ना मानने वाले को प्रमाणिक नहीं मानेगा। ये कैसे तय हुआ होगा? तो एक ही व्यक्ति सबका निग्रह नहीं कर सकता। सबका ठेकेदार नहीं बन सकता और ये बात शंकराचार्य जी ने भी बोली तो ये कोई बात है क्या कि तुम्हारी उन पर आस्था है अच्छा अब दूसरी बात इस व्यक्ति ने क्या कहा शव हूं मैं क्या शव जो शव परंपरा के अनुसार जो दर्शन है वो क्या रामानुजाचार्य के बिल्कुल सटीक है बिल्कुल मिलता वो है कहीं ना कहीं

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→ Used in: B · Video भागवतानंद की गुरु परंपरा क्या है | Discussion with Supporter of Bhagwatanand at 4:47 ↗

00:44:42:21 कुछ ना कुछ अंतर है ना तो वहां पे क्या ये रामानुजाचार्य जी का विद्या भास्कर जी का खंडन करता है

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00:44:49:25 तो ये तो अपने स्वमत की पुष्टि हो गई यदि हम ऐसे आचार्यों के वक्तव्य को लेंगे बीच में तो फिर भाई तुम शव कैसे हो विद्या भास्कर जी महाराज को मानो वो तो विशिष्टा द्वैत वाले हैं तुम शव कैसे हो गए विद्या भास्कर जी महाराज उसको कभी प्रमाणिक कह ही नहीं सकते क्योंकि उनके अनुसार तो विशिष्टा द्वैत है तात्विक विवेचना और इसके भागवत के अनुसार अद्वैत है और इसका वो एक अलग से अव्यक्ता द्वैत वो है तो यदि यदि ऐसी बात आ जाएगी तो उसमें तो विपरीत ही दोनों खड़े मिलेंगे। तो ये कहां की बात ला के जोड़ रहा है? तो ये सारी चीजें हैं। आप लोग देख सकते हैं इन लोगों का मानसिक स्तर क्या है? कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, भानुमती का कुबा जोड़ा। खैर मैं आज आप लोगों को एक बहुत बढ़िया बात बताने जा रहा हूं। शक्ति संगम तंत्र में क्या लिखा है? अच्छा इस व्यक्ति के पास कुछ था नहीं। अपने पक्ष के लिए केवल एक बात थी। उन्होंने अपने वीडियोस बनाए हैं। अरे भाई तो तुम क्यों आए हो? उन वीडियोस को देख के समझ के परख के जो मैं उनके बारे में क्वेश्चन रेज कर रहा हूं। उनके उत्तर दे दो कि तुमने क्लिप बनाई। भाई यहां पे मैं क्लिप की बात नहीं कर रहा हूं। मैं आपसे यहां पे एक लाइन बोल रहा हूं कि उन्होंने उसने

00:46:05:08 कहा कि मैंने कालिया जिनका मंत्र दिया। अब तुम्हारा इसमें क्या पक्ष है कि वीडियो देख लो। इसलिए आए यहां पे बताने के लिए कि वीडियो देख लो। वीडियो देख के ही तो प्रश्न उठ रहे हैं। तभी तो हम क्वेश्चन पूछ रहे हैं। तुम भी देख लो जाकर के वीडियो मेरे फिर क्यों आए हो यहां पर मैं भी तो यही कहता हूं अपने मेरे कमेंट में आकर के इधर उधर की बातें करते हैं अब मैं इनको यही कहने लगूं वीडियो देख लो वीडियो देख लो समझ गया वो तो फिर शांत भी हो गया लेकिन 146 नंबर पेज पर क्या लिखा है शक्ति संगम तंत्र में सप्तम ये छिन मस्तिका खंड छिन मस्त स्था खंड चतुर्थ खंड ठीक है और इसका है पष्ठ संख्या 146 इस ये भागवतानंद की स्टोरी में जो बुनियादी श्लोक है ना वो यहीं पर है ये छिनस्ताखंड शक्ति संगम तंत्र का चतुर्थ खंड छिनस्ता खंड और इसमें सातवा पटल और सातव पटल में श्लोक है

00:47:23:15 108 श्लोक क्रमांक 108 और क्या है? अब यहां पर कहा जा रहा है इसके बाद संभवत ये भगवान शिव कह रहे हैं। इसके बाद विभिन्न प्रकार के पाखंड तंत्रों में तीन तंत्र एवं पांच उपतंत्र बताए गए हैं। क्या बताए गए हैं? इसके बाद ध्यान से पढ़िए। बहुत जरूरी बात है। शक्ति संगम तंत्र चतुर्थ खंड सप्तम पटल और 108वा श्लोक। इसके बाद विभिन्न प्रकार के पाखंड तंत्रों में 146 नंबर पृष्ठ क्रमांक है। ग्रंथ के अनुसार हां 146

00:48:20:12 यही होगा शायद मैं दिखा दूंगा यहां से दिखा दूंगा मैं तो ये आपको अगर दिख जाए तो ये नीचे नीचे की लाइन पड़ी है नीचे नीचे की इसके बाद ठीक है क्या लिखा है इसके बाद विभिन्न प्रकार के पाखंड पाखंड तंत्रों में तीन तंत्र एवं पांच उपतंत्र हैं। हे देवी पांच रात्रागम में मूल रूप से 10 तंत्र है तथा

00:49:03:22 सात उपंत्र हैं। अब जो [संगीत] एक दो तीन चार पांच छ सात आठ अब जो आठ पाखंड तंत्रों की बात की गई है। 108 नंबर का श्लोक है उसमें लिखा है इसके बाद विभिन्न प्रकार के पाखंड तंत्रों में तीन तंत्र एवं पांच उपतंत्र हैं। ठीक है? और उसके बाद पांच रात्र में मूल रूप से 10 तंत्र हैं तथा सात उपंत्र हैं। तो यह बताया गया है। अब यह जो आठ पाखंड तंत्र बताए गए हैं। आठ पाखंड तंत्र बताए गए हैं। उन आठ पाखंड तंत्रों में पहला तंत्र क्या है?

00:50:09:25 एक दो तीन चार पांच छ सात आठ जहां तक मेरी जानकारी है अघोर आगम तंत्र 146 है क्या हां इसमें नीचे आइए नीचे आइए और नीचे आइए ऊपर ऊपर जाइए पीछे जाइए पीछे हां यह वाला यह 108 इसके बाद विभिन्न प्रकार के पाखंड तंत्रों में तीन तंत्र एवं पांच उपतंत्र हैं। ठीक है? अब आगे 109 नंबर के श्लोक में दिखाइए। पहला तंत्र दिखाया जा रहा है उपतंत्र में अघोरागम।

00:50:49:27 ठीक है? अघोरागम पहला हो गया। इसके बाद अगले श्लोक में देखिए भैरवागम। यह दूसरा हो गया। इसके बाद तीसरे तंत्र में देखिए देखिए संजीवनी आगम। इसके बाद चौथे में देखिए नीलेश्वर आगम 112 नंबर श्लोक और नीलेश्वर आगम के बाद देखिए मृत्युंजय आगम और उसके बाद देखिए विश्वूपागम

00:51:26:04 और उसके बाद देखिए विूपागम और लास्ट में अगले पृष्ठ पर आपको दिखेगा निग्रह आगम निग्रह आगम तो क्या हुई कहानी? इसके बाद विभिन्न प्रकार के पाखंड तंत्र बताए जा रहे हैं। जिसमें तीन तंत्र एवं पांच उपतंत्र हैं। और फिर उन आठों की जानकारी आगे दी गई है। अघोर आगम, भैरव आगम, संजीवनी आगम, नीलेश्वर आगम, मृत्युंजय आगम, विश्वूप आगम, विूपागम और निग्रह आगम ये सारा दिया गया है। यानी कि ये जो आठ तंत्रों के नाम मैंने गिनाए उसमें जो आठवा तंत्र है वही निग्र आगम है। जिस श्लोक का उपयोग भागवत आनंद अपने को प्रामाणिक सिद्ध करने में लेता है। और जबकि शास्त्र इसे क्या कह रहा है? ये आठ जो पाखंड तंत्र बताए जा रहे हैं उनमें से अंतिम है। अब इसमें कुछ निराकरण होगा तो प्रस्तुत कर सकता है। जो अभी प्रथम दृष्ट्या में जो दिखा है वो यही दिखा है। तो क्या सिद्ध हुआ?

00:52:42:04 आठ पाखंड तंत्र बताए गए। उन आठ पाखम पाखंड तंत्रों में जो अंतिम नाम है आठवा नाम वही निग्रह आगम है। तो कहां से वैसा हो गया? वैदिक हो गया। ये प्रश्न उठता है। ठीक। अब इसमें अगर कुछ निराकरण होगा तो प्रस्तुत करेगा। खैर मूल विषय क्या हुआ कि उसके आचरण जो भी हो मेरी उसमें श्रद्धा है। राघवाचार्य जी महाराज ने भले ही बताया हो उसकी परंपरा क्या है? क्या नहीं है? नहीं बताया है या बताया है या विद्या भास्कर जी महाराज ने बताया है या नहीं बताया है मुझे उस पर विश्वास करना है और जब मुझसे उसका पक्ष पूछा जाएगा तो मैं क्या कहूंगा वीडियो देख लो यह पक्ष है उसका इसीलिए हमने किसी को बुलाया था कि भैया देख लो इनका स्तर क्या है

00:53:51:18 और इसके साथ ही साथ राघवाचार्य जी महाराज है जो क्या ये राजेंद्र दास जी महाराज जी से नहीं मिलते मगर राजेंद्र दास जी महाराज तो इसके अनुसार गलत है। हम अब ये कहेगा कि भैया हमने व्यक्ति का विरोध थोड़ी ना कर दिया जो नहीं मिलना है। तो भैया जब व्यक्ति का विरोध नहीं है तो धीरज के शास्त्री से मिलने पर तुम पूरी के शंकराचार्य जी पर कटाक्ष क्यों करते हो? हम तो पहले तुम खुद तय कर लो कि कौन अप्रामाणिक है कौन प्रामाणिक है। दूसरी बात क्या है कि अगर केवल आचार्य की वाणी बोल देने से ही मानना है तो फिर तुम सेव मत रहो। पहले तुम श्री संप्रदाय में दीक्षा ले लो। और इसको भी कहो भागवत को जो अव्यक्त ले चल रहा है। जो पांच पांचों पंच देवताओं का मंत्र दे रहा है उसको कहो कि भैया केवल श्री मंत्र दो क्योंकि आचार्य ने जो बोल दिया विद्या भास्कर जी महाराज ने राघवाचार्य जी महाराज ने वही प्रमाण है तो उस हिसाब से रामानुजाचार्य जी का खंडन नहीं हो सकता विपरीत नहीं जा सकते अगर ऐसा है तो तो फिर आप श्री श्री संप्रदाय में सब लोग आ जाइए सबसे पहले

00:55:07:15 तो कहने का अर्थ क्या है कि आपके पास इस विषय में कोई प्रमाण नहीं है कि वह आचार्य है कि नहीं। यह प्रमाण होना तो बहुत दूर की बात है कि वो निग्रहचार्य है कि नहीं। ये कपोल कल्पित कल्पना है। अगर ये व्यक्ति थोड़ा इस तरह से बात करता कि जैसे प्रबुद्ध जन करते थोड़ा सा करता अगर व्यवस्थित रूप से व्यवस्थित शैली में अगर बात करता तो फिर आगे और भी बात आती। मगर वो उसकी व्यवस्थित शैली है ही नहीं। वो हर बात में क्या कह रहा है? यह तो तुमने एडिटिंग की है। जिसको भागवतानंद स्वीकार कर रहा है उसको यह व्यक्ति कह रहा है कि तुमने एडिटिंग की है। और फिर कह रहा है पक्ष रखने को कहो। भाई अगर उसने वीडियो में जवाब दिया है तो तुम बता दो इस बात का जवाब क्या है? कि उसने कालिया जिनका मंत्र किसी को दिया। ये उसने कहा है। क्या इसको तुम वैदिक मानते हो? नहीं मानते हो तो तुम्हारा जो भी पक्ष है वो दो।

00:56:07:03 और राघवाचार्य जी महाराज, विद्या भास्कर जी महाराज ऐसे आचार्य जो हैं इन्होंने कहीं पर भी इसकी परंपरा को परंपरा पर प्रकाश नहीं डाल दिया है। जो हम उनसे प्रश्न करें। उन्होंने लोकाचार में जो नाम इसका प्रचलित है उस नाम को उन्होंने उपयोग में लिया है। बाकी उसकी परंपरा प्रमाणिक थोड़ी ना उन्होंने घोषित कर दी है। अरे और अगर यही बात लेनी है कि आपका उनमें श्रद्धा है कि नहीं तो फिर तुम्हारी अगर इस हिसाब से चलोगे तो तुम्हारी भागवतानंद में श्रद्धा सिद्ध नहीं होगी क्योंकि उनका सिद्धांत विशेषता द्वैत है अगर ऐसे करके चलोगे तो कि बिल्कुल ऐसे ही मानना है कि विद्या भास्कर जी महाराज ने राघवाचार्य जी महाराज ने जो कह दिया यद्यपि उन्होंने कहा नहीं है फिर भी दुर्जनोष न्याय से उन्होंने कह दिया इस तरीके से मानना है तो तुम्हारी भागवतानंद में ही श्रद्धा सिद्ध नहीं होगी हो गई फिर क्योंकि भागवत तो पांचो पांचो भगवान के पांचो रूपों को मान रहा है और श्री संप्रदाय में नारायण को माना जाता है परम तत्व के रूप में केवल तो ये सब बातें विचारणीय है आप लोग थोड़ा बुद्धि का उपयोग करें और

00:57:23:06 मैं मुझे लगता है आज का हो गया आप लोगों को थोड़ा सा मुझे ये लोग मिल नहीं रहे थे ये लोग कमेंट तो करते हैं ये वे अब ये ये लोग क्या चाहते हैं इनका इनका भागवत खुद कहता है क्या मैं एक एक को जा के कमेंट में जाकर के जवाब दूं वीडियो बना दिया देखो और मैं कम से कम ये तो कहता हूं कि भैया तुमको कोई आपत्ति है मेरे वक्तव्यों से तो तुम लाइव आ जाओ सामना कर लो अब लाइव आकर के क्या कह रहे हैं मतलब सवाल करेंगे तो खुद से बोल करके और जवाब देना होगा तो वीडियो देख लो

00:58:01:03 चलो एक बार और दे चलो अगर कोई आना चाहता हो तो आ जाए। अगर ऐसे आचार्य की वाणी को प्रमाण मानना है बिना किसी शास्त्रीय संदर्भ के और किसी आचार्य की वाणी को इस तरह से प्रस्तुत करना है तो फिर आप विशिष्टा अद्वैत में द्वैत में सब में निर्णय कर लो फिर पहले ठीक है तो ये अपने स्वमत की पुष्टि के लिए अगर कहीं पर कोई वाणी कही जाती है तो इसलिए शंकराचार्य वाला जो है उनकी वाणी को स्वीकार करें क्योंकि उनमें श्रद्धा है तो यह तो वह खुद नहीं कहेंगे वो खुद कहेंगे कि राघवाचार्य जी महाराज ने क्या कहा था कि जिसकी जिसमें श्रद्धा है वह उस मत को स्वीकार करें उसी में प्रमाण बुद्धि रखे तो शंकराचार्य तो कह रहे हैं निकराचार्य

00:59:16:04 कोई नहीं हो सकता तब क्या करोगे और राघवाचार्य जी महाराज विद्या भास्कर जी महाराज कई ऐसे लोगों से मिलते हैं जो भागवत आनंद के अनुसार ठीक नहीं है जिनमें से एक तो मैं भी हूं भागवत आनंद के अनुसार तो मैं जो है मेरे ऊपर उसने क्या-क्या आरोप लगाए मेरी गुरु बहन के साथ ही मुझे जो अनैतिक संबंध रखने वाला जोड़ दिया भाई और बहन के पवित्र संबंध को उसने कलंकित किया यदि उस पर विश्वास होता है तो ऐसे आचार्य गण मुझे क्यों सुशीष देते? ये सब बातें आप लोग सोचे और इस तरीके से आचार्यों के वक्तव्यों को आधार बना के आचार्यों के कंधे पर रख के बंदूक ना चलाएं। अगर आए हैं तो लेके आइए कि भैया यह प्रमाण है उसके निग्राचार्यत्व के संबंध में।

01:00:09:03 ठीक है? मेरे ख्याल से हो गया काफी सभी को जय श्री राम। [संगीत]

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