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00:00:01:18 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। और आज का जो विषय है बहुत ही गंभीर विषय है। आप लोग देख ही रहे हैं बंगाल इत्यादि जो क्षेत्र हैं वहां पर हिंदुओं के साथ क्या हो रहा है और अभी हमने हाल ही में नागपुर इत्यादि में भी कुछ ऐसी घटनाएं सुनी है जो अह हमारे अस्तित्व और आदर्श को दबाया जा रहा है। तो मैं कुछ विशेष जो दृष्टिकोण है उनकी तरफ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा। जितने भी श्रोताग हैं और जो सेकुलर हैं वो अवश्य इस वीडियो को जरूर देखें ध्यानपूक जो सेकुलर धर्मनिरपेक्ष विचारधारा रखते हैं। तो आज हम लोग थोड़ा सा थ्योरिकल बात करेंगे। समस्या से निकलने समस्या क्या है और उस समस्या का उपाय क्या है इस पर थ्योरिकल बात करेंगे और इस श्रंखला में आगे आने वाले दो-तीन दिनों में कुछ एक महत्वपूर्ण घोषणा की जाएगी

00:01:16:28 कि प्रैक्टिकली ऑन ग्राउंड एक साधारण से साधारण व्यक्ति के रूप में हम क्या कर सकते हैं? शंकर जी हैं। वह भी जुड़े हैं। उनको जोड़ने का ऑप्शन नहीं आ रहा है। एक बार दोबारा आप पुनः लीव करके वापस आए। जय श्री राम सभी को। और

00:01:50:04 ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। इससे संबंधित कुछ सामग्री वगैरह है जो अभी कुछ दिनों में हमारे YouTube में जो सेक्शन होता है जहां से आप हमारे से जुड़ी हुई विचारधाराओं से जुड़ी हुई चीजें जो सिद्धांतों से जुड़ी हुई जो चीजें हैं वो आप वहां पर प्राप्त कर सकते हैं। तो मैं उस पर आता हूं मुख्य बिंदु क्या है कि आज हम लोग बात करेंगे कि हमारी समस्या क्या है थ्योरिकली और उसका उपाय क्या हो सकता है? कैसे हो सकता है? और अभी कुछ अह दो-ती दिन में तीन से 4 दिन के अंदर हम लोग एक अभियान है जिस पर हम अभी गुप्त रूप से कार्य कर रहे हैं और फिर वो आपके सामने भी आएगा। तो आप वो अभियान अभी उसमें कुछ तैयारियां बाकी है तो अभी उसकी घोषणा नहीं की जा रही। ऐसा कोई ऐसा भी नहीं है कि कोई वैसा कुछ सीक्रेट एजेंट वाला बस यह है कि कुछ तैयारियां चल रही हैं और पूरी होते ही उस अभियान को आपके समक्ष प्रस्तुत कर दिया जाएगा। मगर बात यह है कि एक साधारण से साधारण व्यक्ति होते हुए भी आप कुछ कर पाएंगे। जो लोग साधार जो लोग भी हैं जो ऐसा सोचते हैं कि हम क्या कर सकते हैं

00:03:05:10 या मतलब ऐसी चीजें हैं ही नहीं ऐसी स्थितियां नहीं हमारे हाथ में कुछ भी नहीं है। जो लोग ऐसा भी सोचते हैं वो भी उस अभियान का हिस्सा बन सकते बन सकते हैं। बन सकेंगे। तो आप लोग इस श्रंखला से जरूर जुड़े रहिएगा। अब सबसे पहली बात है कि आज की स्थितियां क्या है? आप देख रहे हैं कि बंगाल में हमारे भाइयों के साथ क्या हो रहा है? हिंदुओं के साथ क्या हो रहा है? नागपुर में क्या हुआ? अभी कुछ अभी मैंने आने से पहले वो बोर्ड पर एक न्यूज़ देखी थी। उसमें कितनी सत्यता है वह नहीं पता है। पर उसमें जो वक्ता था वह यह कह रहा था कि जब उसने वक बोर्ड के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में याचिका लगाने का प्रयास किया था तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा उसे पूछा गया कि भाई अगर वफ बोर्ड अवैध रूप से गलत तरीके से प्रॉपर्टीज पर अपना हक जमाता है, अधिकार जमाता है तो तुम्हारी कोई प्रॉपर्टी है क्या जिस पर उसने ऐसा किया हो? उसके पास जवाब नहीं था। उससे इस तरह का प्रश्न किया गया तो उसके पास जवाब नहीं था क्योंकि वह एक समष्टि के रूप से उस याचिका को लेकर

00:04:20:16 के कोर्ट गया था। उसके बाद अभी उसने बताया कि अभी यह जो वफ बोर्ड जो जो नया बिल आया है उसके प्रतिकार स्वरूप जो मुस्लिम समाज के जो नेता इत्यादि हैं या ओवैसी इत्यादि ये लोग भी कोर्ट गए हैं। तो इन लोगों ने कोर्ट जाकर के ये उसका विरोध कर रहे हैं। जो परिवर्तन हुआ है व बोर्ड में तो यह उसका विरोध कर रहे हैं। अब जो वक्ता था जो यह न्यूज़ दे रहा था वो एक जानेमाने वकील हैं जो इस संबंध में आप लोग शायद जानते भी हो उनका नाम मुझे नहीं याद आ रहा है। वो यह बता रहे थे कि अब जब ओवैसी इत्यादि जब मुस्लिम समाज के पक्ष में व बोर्ड के पक्ष में ये जो नया बिल आया है इसके विरुद्ध जब वो कोर्ट गए तो कोर्ट ने उनसे नहीं पूछा कि आपके साथ पर्सनली क्या हुआ है? उनसे पूछा गया था। उनकी जो याचिका थी वह एडमिट भी नहीं हुई। वापस ले वापस लेनी पड़ी उनको अपनी याचिका उनसे पूछा गया था। मगर आज जब ये लोग जा रहे हैं सुप्रीम कोर्ट तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा ये नहीं पूछा जा रहा है कि आपके साथ पर्सनल क्या अटैक हुआ? पर्सनली आपके साथ

00:05:35:20 क्या हुआ? तो कहने का तात्पर्य यह था उनका कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी उनके साथ हिंदुओं के साथ सौतेला व्यवहार होता है। तो इसका कारण क्या है? इस पर हम लोग जो है बात करेंगे। सनातन शंकर जी आपका स्वागत है। सनातन शंकर जी भी जुड़ चुके हैं। जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। तो दिल दहलाने देने वाली तस्वीरें आ रही हैं। बंगाल से आ रही हैं। अभी इससे पहले भी कुछ चला था तो उस समय भी आई थी और एक इशारा हमें जगुरु शंकराचार्य जी ने कई बार करा है करते रहते हैं कि विप्लव की स्थितियां आने वाली है और हम लोग अगर उन स्थितियों के लिए तैयार नहीं होंगे तो बहुत जल्द ऐसा नहीं है कि वो जो आग हमसे देखिए मैंने भी आज से कुछ छ महीने पहले जब बांग्लादेश में घटनाएं हो रही थी तो मैंने भी उस समय कहा था कि हम लोग क्या है ज्यादातर ये प्रतीक्षा करते रहते हैं कि वो जो आग है वो वो जब तक हमारे गेट के सामने तक नहीं आ जाएगी तब तक हम लोग नहीं हिलेंगे। अच्छा छोटा था छोटा था तब मैं कभी-कभी चंबल

00:06:51:06 नदी है जो वहां कभी-कभी घूमने गया हूं। छोटा था तब मैं तो उसमें घड़ियाल पाए जाते हैं। घड़ियाल मैंने देखा है घड़ियाल और मगरमच्छों की एक प्रकृति होती है। प्रकृति क्या होती है? जब वह धूप सेक रहे होते हैं। और बहुत आलसी अवस्था में जब पड़े हुए होते हैं घड़ियाल तो उनको छोटामोटा कंकड़ पत्थर मारो चिढ़ाना चाहो तो वो लोग हिलते ही नहीं है। आप उन्हें जो है परेशान करना चाहो तो बहुत प्रयत्न करने पर भी वो हिलेंगे नहीं। मतलब जब तक आप वह जो एक बड़ा सा कुछ ऐसा ले नहीं जाओगे कि उनको लग जाए कि हां अब जब क्या कहते हैं जब तक कि उनको यह ना लगे उसको यह ना लगे घड़ियाल को कि भाई अब ये जो पत्थर है मुझे ऐसा नुकसान पहुंचा सकता है जिससे मेरा आने वाला जीवन जो भविष्य का जीवन है वो प्रभावित हो जाए तो तब तक वो घड़ियाल हिलते नहीं थे। ऐसा ही कुछ हाल आजकल हिंदुओं का है। ये लोग बातें कर लेंगे ज्यादा से ज्यादा यह होगा YouTube खोल खाल के देख लेंगे सोशल मीडिया पर यहां

00:08:06:07 से मैसेज आएगा तो आगे फॉरवर्ड कर देंगे या अगर और निष्ठा हुई तो किसी आरएसएस बजरंग दल या हिंदूवादी जो उन्हें प्रायोरिटी से प्राथमिकता से जो अपने आसपास ऐसा कोई दिखाई देगा तो उसमें अपना नामांकन करा लेंगे। उसमें भी नामांकन कराने पर भी कोई आवश्यकता पड़ने पर बहुत ही मुश्किलों से वह अपने घर से निकलेंगे बाहर। जी जी जी जितना भी चल रहा है इसमें जो सेकुलरिज्म है ना हमारे देश का वो बहुत बड़ा मतलब जिम्मेवार है इस बात के लिए और पिछले जब से हमारा देश आजाद हुआ है और जब से ये मुगल काल हमारे देश में आया फिर अंग्रेजों का टाइम आया इस टाइम पे हिंदुओं को क्या किया गया सेकुलर बनाया गया है। उनको यह कहा गया है कि देखो जी सब मजहब के लोग सब धर्मों के लोग एक साथ रहना चाहिए और सब धर्मों को जो है वो आपस में मिलजुलकर रहना चाहिए और यह जो मीठी गोली दी गई है हिंदुओं को इसमें हिंदू इतना अंधा हो गया है वो यह समझने लग गया है कि भाई अगर आपके ऊपर कोई दूसरे मजहब वाला अटैक कर भी रहा है तो उसके लिए भी जो सरकार जिम्मेदार है सरकार को ही आपकी सुरक्षा

00:09:21:10 करनी है क्योंकि संविधान बना दिया। अब जब संविधान बना दिया तो यह बात आ जाती है कि भैया जब संविधान हमारी रक्षा कर रहा है तो फिर हमें हथियार उड़ाने की क्या जरूरत है? कानून ने यह बोला कि आपको कानून हाथ में नहीं लेना है। अरे भाई जब सड़क पर आप चल रहे हो और आपके ऊपर अटैक हो रहा है। आपके ऊपर जो है वो इन विधर्मियों द्वारा अटैक किया जा रहा है तो एटलीस्ट वहां पर तो आप अपनी रक्षा के लिए तो हथियार उठाइए। वहां पर आप सेकुलरिज्म का चोला पहनकर नहीं रह सकते हो क्योंकि वो ग्राउंड है वो लेवल है। पुलिस आते-आते टाइम लगता है। सबको पता है कि भैया पहले बहुत दंगा हो जाता है। दोनों तरफ से बहुत वो चीज हो जाती है। जब असली तरह से मारकाट हो चुकी होती है तब जाके पुलिस आती है। पुलिस भी जब नाकाम हो जाती है तो फिर आर्मी डिप्लॉय की जाती है। तो भाई अगर हिंदू जो हैं वो यह सेकुलरिज्म का चश्मा उतार कर थोड़ा सा निडरता दिखाएं। एकजुट होकर कम से कम अपनी कम्युनिटी को ही बचा लो। मान लो आपके मोहल्ले में 20 घर हैं। अब आपको पता है कि सामने वाले जो है वो आपके ऊपर अटैक कर रहे हैं। तो एक्चुअली 20 घर मिलकर तो कम से कम अपनी सुरक्षा का कोई ना कोई इंतजाम तो करें। कहते हैं मुसीबत आने पर बिल्ली भी शेर बन जाती है। हमने सुना था बचपन में कि भाई जब बिल्ली को ऐसा लगता है कि मुसीबत आ रही है तो वो

00:10:36:14 भी गुर्राती है। कई बार वो उसके सामने चार खूंखार कुत्ते होते हैं जो उसको घेर के खड़े हो गए होते हैं तो बिल्ली भी अपना आकार बढ़ा बढ़ाकर उनको गुर्रा कर डराने की कोशिश करती है। अरे हिंदू तो वो भी नहीं कर रहा है। तो कम से कम ये चीज तो आप करिए। तो ये मेरा एक इसमें पॉइंट है कि जी बिल्ली वाला जो आपने कहा ना इससे मुझे एक चीज समझ में आई अभी-अभी जी कि बिल्ली भी मुसीबत के समय अपनी सीमा से बाहर जाकर के प्रयत्न करना शुरू करती है। वो जानती है कि मैं कुत्ते से नहीं भिड़ सकती वह प्रयत्न करती है। मगर हम हिंदु भारतीय हिंदुस्तान में रहने वाले जो हिंदू हैं। उनकी स्थिति क्या है कि हम शेर हैं। ऑलरेडी हमारी स्थिति मजबूत है। अभी आज के टाइम में मगर फिर भी हम बिल्ली की सीमा के अंदर रह रहे हैं। बिल्ली की सीमा से बाहर निकलना तो बहुत दूर की बात है। शेर की सीमा में आ जाना तो बहुत दूर की बात है। हम बिल्ली की सीमा में भी अंदर रह रहे हैं। क्यों? आपने एक पॉइंट दिया कि मुसीबत आते समय वो ऐसा प्रयत्न करती है। मुसीबत आते समय। जी। तो यहीं पर पॉइंट है।

00:11:51:20 पॉइंट क्या है कि हिंदू को लग ही नहीं रहा है कि मुसीबत है। यह प्रॉब्लम इसको कहेंगे आरामाभास। आरामाभास आरामाभास कहेंगे ना हमें बहुत आराम है। उसका आभास जी। तो यह इनका सोचना है कि कहीं पर किसी महिला के साथ अत्याचार हो रहा है। कहीं पर किसी के साथ दुराचार हो रहा है। मारपीट हो रही है। उसको मारा जा रहा है। हिंसा हो रही है। तो ये वो हिंदू हैं जिनको यह लगता है कि यह मुसीबत मेरी मुसीबत नहीं है। तो वो कहां से फिर बिल्ली की सीमा से बाहर निकलेंगे? जी। पहले उनको ये तो कह लो। खैर धर्मनिरपेक्ष कौन होते हैं और कौन नहीं होते हम लोग इसी श्रंखला में एक एक दो दिन में ही एक वीडियो लाएंगे धर्मामीटर नाम से उसमें हम कुछ चीजें बहुत रोचक जानने को मिलेंग और प्रैक्टिकली कुछ समझ में आएंगी चीजें कि कौन कहां पर है क्या कर रहा है वो बहुत एक धर्मनिरपेक्ष किसे कहते हैं राष्ट्रवादिता के नाम पर धर्म का धर्म से द्रोह करने वाले कौन होते हैं सनातना भाष है ना अध्यात्म भाष नास्तिक

00:13:06:21 विधर्मी सबकी की विवेचना है उसमें तो हम लोग इसी श्रंखला में वो एक आने वाला वीडियो उसमें हम बात करेंगे। आज हम बात कर रहे हैं कि हमारी प्रॉब्लम क्या है और उसका जो जो थ्योरिकल थ्योरिकली उस प्रॉब्लम का सॉल्यूशन क्या है? तो सब लोग जानते हैं कि हमारी प्रॉब्लम क्या है? अच्छा प्रॉब्लम का जब हम लोग प्रॉब्लम के रूट में जाते हैं तो प्रॉब्लम का फेस बदलने लगता है। जब हम उसके अंदर डेप्थ में जाने लगते हैं। जी। तो जो हमें दिखाई दे रहा है सबसे पहले तो हमें धर्म और यह जो लड़ाई हो रही है धर्म और अधर्म के बीच तो कुछ लोगों को यह भी लगता है कि भाई ये धर्म और अधर्म के चक्कर में लोग मारे जा रहे हैं। कुछ लोगों को यह भी लगता है। तो पहले सबसे पहले पॉइंट पे तो लोगों को समस्या नहीं मालूम है और फिर अगर हम उस समस्या में किसी एक पक्ष से मरने अथवा मारने वाले हैं तो उसमें भी उसको यह लगता है कि हम अपनी लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं। हम किसी और के लिए लड़ रहे हैं। हम शब्दों के लिए लड़ रहे हैं या गाय माता के लिए लड़ रहे हैं तो इसलिए लड़ रहे हैं क्योंकि वेद में लिखा है। है ना? या वेद के लिए लड़ रहे हैं तो इसलिए लड़ रहे हैं कि बस हमारी आस्था है। मेरा व्यक्तिगत उसमें निजी उसमें कुछ नहीं है। ऐसा है।

00:14:22:08 तो सबसे पहले ये लोग जो सोचते हैं कि ये मेरी निजी लड़ाई नहीं है। व्यक्तिगत युद्ध नहीं है। एक ये जो है केवल एक वही है। हम लोग शब्द प्रमाण के लिए लड़ रहे हैं। जिस पर आस्था उसके लिए उस उनको डेप्थ में जाकर पता चलने की जरूरत है। अभी मैंने कुछ दिनों पूर्वी एक पहले धर्म और अब सबसे पहला जो चैप्टर हम लोग बात कर रहे हैं उसमें धर्म और अधर्म का प्रैक्टिकली आपके जीवन में क्या प्रभाव पड़ता है? हम उस पर बात कर रहे हैं। तो प्रैक्टिकली क्या प्रभाव पड़ता है? इस चीज को समझना है। अभी मैंने कुछ दिनों पूर्व ही एक विद्यालय की कुछ मातृ शक्तियां थी। मतलब किशोर अवस्था में थी। वह उनका मैंने वीडियो देखा। उनके टीचर्स ने उन्हें कुछ उनसे गलती हो गई होगी तो जो छुट्टी का समय होता है उसके बाद भी उनको स्कूल में ही रोक लिया वो क्लास रूम में बैठी हैं शायद होंगी 810 या चार पांच और इतनी अश्लील गालियां दे रही हैं विद्यालय के प्रबंधक को प्रशासन को इतनी अश्लील कि एक जो पुरुष है उसको भी शर्म आ जाएगी हमारे आपके जैसे पुरुष भी वहां शर्मा जाएंगे कि यह लड़कियां हैं।

00:15:37:13 यह मातृ शक्तियां है और यह हमारे आपके जैसे ही किसी व्यक्ति के घर में रहती होंगी और जब वो इस स्तर की अश्लील बातें कर रही है गंदी इतने स्तर की बातें जब वो कर रही हैं तो फिर उनका निजी जीवन कैसा होगा? कैसा उनका चरित्र होगा? क्या है? तो क्या हम आकलन कर सकते हैं? क्या हम कल्पना कर सकते हैं कि हम अच्छा जब वह यह सब कर रही थी वो ठीक है वो वीडियो वायरल हो गया मगर जब वो यह सब कर रही थी तो उनके घर वालों को तो नहीं पता है ना कि वो ये सब कर रही है है ना उनका चरित्र ऐसा है उनके मुख से ऐसी ऐसी बातें निकल रही है तो ये क्या है अधर्म का यहां पर अधर्म का प्रभाव है और धर्म का अभाव है ये जो स्थिति है अब क्या हम में आप आप में से कोई भी या जो इस वीडियो को देख रहा है वो यह कल्पना करना चाहेगा कि उसके घर की कोई बहन बेटी मातृशक्ति अपने अंदरूनी रूप से ऐसी हो वो इस हद तक जाकर के खुलेआम कैमरे पर इतनी अभद्र इतनी अश्लील बातें

00:16:52:14 बोल रही हो बोल सकने वाली हो ऐसा जीवन जी रही हो ऐसे लोगों से प्रभावित हो ऐसे लोगों के साथ उठती बैठती हो क्या कोई चाहेगा बिल्कुल नहीं। तो यह है धर्म का प्रभाव। जहां पर धर्म होता है वहां पर ऐसी स्थितियां कम होती चली जाती है और जहां पर अधर्म का प्रभाव होता है वहां पर ऐसी स्थितियां बढ़ती चली जाती है। ये है आपकी लाइफ में प्रैक्टिकली धर्म किस तरीके से प्रहार करता है। जी और सुभाष जी एक और एक और बात है इसमें कैसे प्रैक्टिकली आपके जीवन में अधर्म प्रवेश करता है। जी जी जी तो इसमें एक और बात है कि देखो अभी ये भी है कि हमारे जो हिंदुओं को तोड़ दिया गया है बहुत सारे संगठनों में। अब रामपाल वाले हैं वो अपना एक अलग मान्यता लेकर चल रहे हैं। इस वाले हैं वो अपना अलग मान्यता लेकर चल रहे हैं। आर्य समाज वाले अपने अलग ही वेदों की पिपनी लेकर घूम रहे हैं। वो क्या कर रहे हैं? अभी मैंने वो देखा एक आर्य समाज जी को वो अपनी टेलीग्राम पर पोस्ट कर रहा है कि भाई शंकराचार्य कहां है? अब जब ऐसी चीजें आ रही है तो शंकराचार्य उन्हें याद आ रहे हैं। वैसे दिन भर वो शंकराचार्यों को ही कोसते रहेंगे। अच्छा

00:18:08:00 नकली शंकराचार्यों पर कभी उन्होंने कोई कोई प्रश्न नहीं उठाया है। जबकि हमारे देश में बहुत सारे नकली शंकराचार्य घूम रहे हैं। उनके ऊपर कभी वो प्रश्न नहीं करेंगे। लेकिन जब इस तरह की घटना आएंगी तो उन्हें वो चार मठों के शंकराचार्य याद आएंगे। भाई शंकराचार्य इस बारे में क्या कर रहे हैं? वो इस बारे में कदम क्यों नहीं उठा पा रहे हैं? तो ये जो लोग हैं ना ये जो अलग-अलग उसमें संप्रदायों में संगठनों में बटे पड़े हैं ये भी इसके लिए बहुत जिम्मेदार हैं जो बंगाल में हो रहा है क्योंकि इन्होंने क्या किया है अंदरूनी रूप से हिंदू समाज को तोड़ा है हिंदुओं की जो मान्यता है उसको तोड़ा है ऐसा तोड़ने से जब आर्य समाज कोई होगा वो कह कहेगा भाई मंदिर टूट रहा है मेरे को क्या मतलब मेरे तो दयानंद सरस्वती लिख के गए हैं मंदिर टूट गया तो मंदिर में तो जो पत्थर पूजा है वहां पर तो मूर्ति पूजा करनी नहीं है ईश्वर अवतार ले ही नहीं सकता है तो वह तो बोलेगा ठीक है भाई इससे तो मेरा लेना देना है नहीं हां कोई दयानंद सरस्वती को कोई गाली देगा तब मैं आगे आऊंगा तो वह वैसा है रामपाल वाले सोच रहे होंगे कि रामपाल हमारे गुरु है उन्होंने तो बोल दिया कि भैया ये सब हिंदुओं की जो शास्त्र है वो सब खराब है जो रामपाल लिख के गया है वही बातें माननी है वो कभी बाहर निकल के नहीं आएगा अब जो हमारा मूल सनातन धर्म को मानने वाला हिंदू बच जाता है वो बेचारा यह सोचता है कि मेरे बगल वाला जो

00:19:23:03 हिंदू है जो आर्य समाजी है वो तो मेरे साथ नहीं खड़ा खड़ा है। इधर वाला जो है इस वाला वह मेरे साथ नहीं खड़ा है। तो वह अकेला पड़ जाता है। यह भी इसका बहुत बड़ा कारण है कि हिंदू संगठित नहीं हो पा रहा है। ये ये भी विवेचना आज भी है और जो हमारा जो अगला जो वीडियो आएगा ना धर्मामीटर उसमें भी ये विवेचना है कि ये लोग कौन है और इनका क्या स्तर है वो अलग हिस्सा है। तो ये विवेचना आज भी है कि ये किस तरीके क्या मतलब इनका क्या रोल है। इस यह जो अधर्म रूपी जो चीजें हमारे सामने आ रही हैं उसमें इनका क्या रोल है? बिल्कुल प्रैक्टिकली बताने जा रहा हूं। तो जैसे हमने अभी ये जाना कि हम अपने जीवन में अपने लिए अंतरात्मा से कुछ आवाजें निकलती है हमारे लिए कि हम हमें भूख लगी तो हमें खाना मिल जाए। ठीक है? हमें प्यास लगी तो हमें पानी मिल जाए। यह आवाें हमारे अंतर अंतर अंतर्मन से निकलती हैं जो सिद्ध है तभी के निकलती है। अब जैसे अभी मैंने देखा अ तो कुछ दिनों पूर्व की बात है। एक छोटा सा मोहल्ला था। कुछ शायद कोई परचून की दुकान थी वहां पर और लोग कुछ सामान खरीद के मतलब एक सड़क का उसमें कैमरे

00:20:38:04 में दृश्य आया था और एक बेतहाशा एक वैन वो fortuner गाड़ी वो आती है और पांच 10 लोगों को कुचल के चली जाती है। ठीक है? और उसमें से शायद दो की मृत्यु भी हो गई है। मुझे एग्जैक्टली पता नहीं है। अब यह सोचिए कि वहां परचून की दुकान पे कौन गया होगा। कोई मेरे जैसा शिवश गया होगा ना नमक लेने, आटा लेने, सरसों का तेल लेने या कुछ और लेने शायद उसका अ क्या कहते हैं? चीनी खत्म हो गई हो उसके यहां राशन में तो चीनी लेने वो गया हो। वापस लौट रहा होगा। जी और वापस लौटते में उसको Fortuner वाले ने कुचल दिया और बड़े बेरहमी से मतलब वहां वो फॉर्च्यूर जो गई है अब पता चला कि भाई जो Fortuner का चालक था वो अब वो उसके वो किस समाज से था वो सभी जानते हैं लोग बताया जा रहा है मुस्लिम समाज से था मगर अभी समाज को मत देखिए कि वो किस समाज से था अभी देखिए कि वो नशे में था उसने मदिरापान किया हुआ था और उसने बेतहाशा अपनी गाड़ी चलाई उसके कंट्रोल में नहीं थी उसने 810 लोगों को ऐसे कुचला जैसे मतलब वहां पर वो मच्छर भी ना कहे उनको

00:21:53:10 मच्छरों का भी प्राण होता है। ऐसे कुचल के वो चली गई। तो यह क्या है? अपने नशे में चूर होकर के जब आप अन्यों के लिए मुसीबत बन रहे हो तो यही तो अधर्म है। यहीं पर तो धर्म का अभाव है। उस व्यक्ति के जीवन में धर्म का अभाव है और अधर्म का प्रभाव है। जो वह व्यक्ति इस तरीके से गाड़ी चलाता हुआ अन्यों के लिए काल बन गया। मौत बन गया। तो जयपुर का हादसा जयपुर में हुआ है। हां मातृ शक्तियां सुरक्षित नहीं है। जिनका चरित्र अच्छा है वो सुरक्षित नहीं है। और प्रारंभिक स्तर पर मातृशक्तियों का चरित्र भी ठीक नहीं रह पा रहा है। पुरुषों का चरित्र नहीं ठीक रह पा रहा है। हम में से जितने लोग यह देख रहे हैं वो सब यही सोचते हैं कि हमारे घर में ऐसा नहीं होगा। वह सब यही सोचते हैं कि मैं जब परचून की दुकान पर जाऊंगा तो मैं सकुशल वापस आ जाऊंगा। मेरे साथ ऐसा नहीं होगा कि वहां से कोई फॉर्च्यून निकलेगी और मुझे जो है पीस के चली जाएगी। हम सब यही सोचते हैं। यही समस्या है कि हम धर्म और अधर्म के प्रभाव को अपने जीवन में समझ नहीं पा रहे कि धर्म की आवश्यकता क्यों है। जब आपके आप

00:23:08:21 जहां पर रह रहे हो वहां पर अधर्म होगा। तो इस तरह के हादसेस आपको देखने को मिलेंगे। आपके घर की मातृ शक्तियां ऐसी ऐसा करती हुई प्राप्त मिलेंग प्राप्त होंगी इससे भी और विव्स विव्स आपको दृश्य मिलेंगे जैसे कि वो दृश्य था जिसमें एक पत्नी ने अपने पति को जो है ड्रम में डाल दिया काट पीट के और ऊपर से सीमेंट डाल दिया तो धर्म का प्रभाव क्या है आपके जीवन में धर्म ऐसी स्थितियों से आपको बचाता है इसलिए आपको धर्म रक्षा करनी होगी इसलिए आपको धर्म के साथ खड़ा होना होगा। अगर आप ऐसी स्थितियों से नहीं निकलना आप ऐसी स्थितियों में लिप्त नहीं होना चाहते। धर्म अब क्या है कि जैसे मेरे घर की स्त्रियां अश्लील बात ना करें। ये क्या है? एक नियम है। मदिरा पान पीकर गाड़ी ना चलाएं। मदिरा पान ना करें। ये क्या है? यह नियम है। यही नियम जब एक ऐसी सशक्त एंटिटी यानी कि भगवान ऐसे सशक्त तत्व से जुड़ जाते हैं। यह नियम किसने दिए? भगवान ने दिए। भगवान को प्राप्त करना है तो यह

00:24:23:22 नियम मानने होंगे। जब आपके लिए ये जो नियम है वो इस रूप में आपके सामने आ जाते हैं तो यही नियम धर्म कहलाते हैं। जी। तो आजकल आजकल क्या है ना समाज में यह जो धर्मवीहीनता हो गई है अभी कश्मीर में एक फौजी हमारे ही जहां पे मैं रहता हूं वहीं के आसपास हिमाचल से ही वो व्यक्ति था और वो शहीद हो गया। अब उसके इंटरव्यू आ रहे हैं सोशल मीडिया पर उस पिता के कि भाई मेरे बेटे मेरा बेटा शहीद हो गया तो वो क्या कह रहा था कि भैया क्योंकि सरकार ने मिलिट्री वालों को सही वो नहीं दिए इंस्ट्रूमेंट इसीलिए मेरा बेटा शहीद हो गया तो इसके लिए जो है वो मोदी सरकार जिम्मेवार है। तो ये मैं सुन रहा था और हमारे भी घर में यह बातें हो रही थी तो ये बोला जा रहा था कि देखो सरकार उन मिलिट्री वालों को वो सहूलियत नहीं दे पा रही है इसलिए वो शहीद हो गया। तो जब मैंने यह सुना तो मुझे बड़ा दुख भी हुआ। फिर मैंने अपने ही परिजनों को अपने ही घर वालों को यह समझाया। मैंने कहा देखिए यह जो क्षत्रिय धर्म होता है ना क्षत्रिय धर्म में अगर कोई व्यक्ति देश के लिए अगर वीरगति को प्राप्त हो जाता है तो वो

00:25:38:28 उस पिता के लिए उस मां के लिए एक शौर्य की बात है गर्व की बात है ना कि उसके लिए आपको सरकारों को या जो हमारा मतलब सरकारी वो चीजें हैं और प्रशासन है उसको हमें कोसना चाहिए क्योंकि जब क्षत्रिय धर्म का वो व्यक्ति पालन कर रहा था उसमें उसमें बहुत ज्यादा पॉसिबिलिटी थी कि उसकी जान भी जा सकती थी और वो जान उसकी गई भी देश को देश की रक्षा करते हुए तो उसमें प्रलाप नहीं करना चाहिए जो मुझे बहुत दुख हुआ कि हमारे समाज इतना धर्म विहीन हो गया है कि जहां पर उस पिता को यह गर्व करना चाहिए कि मेरा पुत्र जो है वीरगति को प्राप्त हुआ है। देश के लिए उसने अपनी जान दी है। वो उस गौरव को अनुभव ना करते हुए वो प्रलाप कर रहा था। कोस रहा था तो वहां पर यह लगा कि कहीं ना कहीं ना हमारे समाज में से धर्म विहीनता बहुत मतलब धर्महीन हो गया है हमारा समाज। वह चीज को यह नहीं कर पा रहे हैं कि यार यह जो क्षत्रिय धर्म है अगर मिलिट्री में कोई बंदा तो क्षत्रिय ही हुआ एक तरह से चाहे वैकल्पिक क्षत्रिय है तो उसे उस पर क्या है कि फक्र होना चाहिए। इसे उसे गौरव महसूस होना चाहिए। उसे मैसेज नहीं देना चाहिए। मैं यह कहूंगा कि वो

00:26:54:00 वैकल्पिक रहे। इसी कारण से उनके मन में इस तरह के विचार आ रहे हैं। जी बिल्कुल क्योंकि वैकल्पिक वो होता है ना कि चलो उस समय वो त्याग देता अपने धर्म को छोड़ देता। वैकल्पिक है ना कर्माण करुणा वो छोड़ देता। अरे मरने का वो आ रहा है मगर उसने नहीं छोड़ा। मगर उसके पिता शायद वो करुणा वाला ऐसा सोचते हो शायद। उसने नहीं छोड़ा। वो तो अपने धर्म पर टिका रहा। मगर संभवत उनके पिता के अंदर वह भावना ना रही हो या कभी-कभी इसमें बेनिफिट ऑफ डाउट यह भी दे दीजिए भाई किसी का लाल गया है किसी का पुत्र गया है ये भी हो सकता है ये भी हो सकता है तो उसके उसका जो बुद्धि और विवेक तुरंत की तुरंत उस तरह का नहीं रह जाता है कि उसको क्या करना है क्या नहीं करना है खैर तो हम लोग एक बात ये कर रहे थे कि धर्म क्या है जो आपकी रक्षा करता है धर्म आपकी रक्षा करता है और उस धर्म के आधार पर ही एक दो पाले बनते हैं कि एक वो है जिसको मदिरापान करना है। जिसको मदिरापान करके कार चलानी है। जिसको मातृ शक्तियों के का चरित्र बिगाड़ना है। जिसको वैसी ही मातृ शक्तियां चाहिए जो इस तरह के चरित्र वाली हो। ऐसे

00:28:09:10 ही पुरुष चाहिए जो इस तरह के चरित्र वाले हो। उसको ऐसा ही संसार चाहिए। जो सामर्थ्यवान हो वह जो दुर्बल हो उसको जो है न वो दबाए कुचले कार वाला पैदल चलने वालों को मार डाले उसको वैसा ही संसार चाहिए ठीक है और धर्मवान वो व्यक्ति है और ज्यादातर वो व्यक्ति है जो ये नहीं चाहते हैं कि जो ताकतवर हो अपने से निर्बल को मार डाले। ठीक है? तो यह क्या है कि हम ना मारो यह धर्म है। एक ज्यादा ताकतवर वाला व्यक्ति जबरदस्ती बिना किसी बात के किसी अपने से कमजोर व्यक्ति को दबा ना दे कुचल ना दे। ये धर्म। तो अब जब यह नियमावली बन जाती है कि भाई हम ये ये मानेंगे और हम ये मानेंगे। ये हो गया धर्म और ये हो गया अधर्म। तो सबको ये क्लियर होना चाहिए। यह जो धर्म और अधर्म की लड़ाई है ना यह गौ माता को बचाने की लड़ाई, वेद की लड़ाई, राम की लड़ाई, कृष्ण की लड़ाई, यह आप किसी और के लिए नहीं लड़ रहे हो। यह लड़ाई आप अपने लिए लड़ रहे हो कि आप अपने घर के पास वाली परचून की दुकान पर जब जाओ राशन लेने या जो भी आपको लेना है

00:29:24:12 वह लेने तो वहां से वापस आते समय आपको कोई फॉर्च्यूर कुचल ना दे। आपको किसी दिन यह खबर ना आए कि आपकी घर की बिटिया, आपके घर की बहन या आपके घर की कोई अन्य मातृ शक्ति इस तरह के चरित्र चारित्रिक उसमें लिप्त है या आपको कभी यह खबर ना आए अचानक से कि आपके घर के पुरुष ने यह कार्य किया इसलिए आपको धर्म की आवश्यकता होती है। अब जब हमें यह मालूम पड़ गया कि दो पाले हैं कि एक है अधर्म और एक है धर्म। तो इसमें जो इस समय जो हम जो हावी हो रहे हैं जो नष्ट करना चाहते हैं अ हिंदुओं के अस्तित्व और आदर्श को वो क्यों हावी हो रहे हैं और हम क्यों वहां पर दुर्बल हो रहे हैं और हमारी ओर से ऐसा तो कभी नहीं होता है कि हमारी ओर से प्राथमिक रूप से कोई अटैक कर दिया जाए। ऐसा सुनने में आता है क्या कि हिंदुओं ने प्राथमिकता से कहीं कुछ अटैक कर दिया हो। प्रतिकार स्वरूप जहां पर अपनी रक्षा के लिए किया हो बात अलग है। मगर प्राथमिकता से कहीं पर अटैक किया हो, कहीं कोई आक्रमण किया हो तो हमारी जानकारी में तो ऐसा

00:30:39:13 है नहीं। फिर भी नहीं ऐसा नहीं होता। फिर भी ये स्थितियां आ क्यों रही है कि सामने वाला यह सोच कैसे लेता है कि हम इनको मार सकते हैं। हम इनको कुचल सकते हैं। संभवत इंटरनेट का कुछ इशू हुआ होगा इसलिए थोड़ा वीडियो आपका रुक गया है शिवाश जी मेरी आवाज आ रही है जी जी जी जी आ रही है जी तो ये ये जो भावना है ये इनके अंदर उद्भाषित क्यों हो जाती है कि हम ये ये कर सकते हैं इसका कारण है कि हमने अपने जीवन को जीने के लिए जो नियमावली चुनी थी मूल में मूढ़ में उस नियमावली को लेकर के हमारे मतमतांतर बन गए हैं। हम लोग बटे हुए हैं। और ये बात मैं नहीं बोल रहा हूं। यह ऋग्वेद में दव मंडल में लिखी हुई बात है कि सदैव एक मत होकर ईश्वर की पूजा करनी

00:31:54:16 चाहिए। धर्म के पथ पर आगे बढ़ना चाहिए। जो लोग ये कह देते हैं ना कि अरे कोई नहीं हमारे यहां तो इतने संप्रदाय हैं तब बटे हुए हैं ये तो पुराना ही चलता आ रहा है। है ना? इस आधार पर आज नवीन संस्थाएं संगठन बना के हिंदुओं को बांटने की बांटने का कार्य करते हैं। मगर जो जितने भी हमारे प्रमाणिक संप्रदाय इत्यादि है वो ब्रह्म तत्व को लेकर के उनमें भिन्नता है। ब्रह्म तत्व आचरण व्यवहार और धर्म में कोई भिन्नता नहीं है। सभी एकमत रूप से वर्णाश्रमी है। सभी मूर्ति पूजक है। ब्रह्म तत्व को लेकर के केवल उनमें भिन्नता है जिससे जिसका व्यवहार में कोई जिससे कि व्यवहार में आने वाला कोई प्रभाव नहीं होता है उत्पन्न मगर क्या है कि सामने वाले को पता है कि ये हमसे इस समय तो संख्या में ज्यादा ही है हिंदू सामने वाले को यह पता है कि हमसे भले ही हिंदू ज्यादा हो मगर यह लोग इतने बटे हुए हैं हर स्तर पर कि हम आराम से इनको कुछ भी कर सकते हैं और ये लोग बटे होने के कारण हमारा कुछ नहीं कर सकते। कैसे बटे हैं? किस-किस रूप में बटे हैं? तो पहला रूप हो जाएगा कि ये आने वाला जो श्रंखला है उस वीडियो में धर्मामीटर

00:33:09:18 का एक वो है उसमें हम बताएंगे। मगर अभी उदाहरण के तौर पर अगर ले तो ब्रह्मा कुमारी, आर्य समाज और निरंकारी रामपाल भी अपने आप को हिंदू कहता है। हिंदू ही फंसते हैं ना मुसलमान नहीं फंसते। रामपाली हो गए और अगर लिस्ट बनाने जाएंगे तो इसमें बहुत ढेर सारे आ जाएंगे। अब तो इस समय वो भी एक कल्ट जैसा बनने लगा ये स्वषित आचार प्रशांत का है ना तो इतने सारे रूपों में हम लोग बटे हुए हैं सामने वाले को पता है आज आप कोई व्यक्ति अगर ताबीज नहीं पहने टोपी नहीं लगाए और उसके लक्षण ऐसे प्राप्त नहीं हो रहे हैं कि वो मुस्लिम है तो आप यह नहीं बता सकते हो कि यह व्यक्ति आपके आपकी मदद करेगा कि नहीं संकट के समय धर्म और अधर्म की लड़ाई नहीं बता सकते। क्यों नहीं बता सकते? कि हो सकता है सामने वाले अच्छा सामने वाले ने अगर जय श्री राम या हाथ में कलावा भी बांध रखा हो या फिर ऐसा कुछ उसने धारण कर रखा हो, टीका लगा रखा हो तब भी आप यह नहीं सोच सकते कि धर्म के नाम पर ये मेरे साथ खड़ा हो जाएगा। क्यों? बिल्कुल। क्योंकि हो सकता है वो धर्मनिरपेक्ष हो।

00:34:24:24 कलावा बांधने के बाद बाद भी। टीका लगाने के बाद भी वह सेुलर विचारधारा को टीका लगाने के बाद भी वह राष्ट्रवाद के नाम पर धर्म का धर्म से द्रोह रखने बिल्कुल यह तो है ही के यह पता कर ही नहीं सकते कि भाई सामने वाला व्यक्ति जो है वो लगा जी जी अब आ रही है आ रही है आ रही है हां तो हम इतने स्तर पर बटे हुए हैं यह जो आपने अभी कहा ना कि इस है ब्रह्मा कुमारीज है आर्य समाज है और बहुत सारे तंत्र है एक नहीं है बहुत सारे तो इनके इनके रूप में हम इतने बट चुके हैं व्यवहार में धर्म में व्यवहारिक उसमें हम इतने बट चुके हैं जिसके कारण आज किसी चीज को लेकर के हम एक मत हो ही नहीं पा रहे हैं मैं बटे होने का स्वरूप थोड़ा बताऊं आपको कि पहला हमने ले लिया ऋग्वेद में है कि हमें बटा हुआ नहीं होना चाहिए। तो यह लोग कहना बंद करें जो लोग ये कहते हैं कि हम लोग बटे हुए हैं कोई दिक्कत नहीं। बट कर नहीं रहना चाहिए।

00:35:40:16 मगर बटने का कारण क्या है? और बटे होने का स्वरूप क्या है? हम लोग बटे हैं। आज 10 लोगों की एक सभा लगा दीजिए। अलग-अलग लोगों की वो आर्य समाज ना हो। ठीक है? वो शंकर शंकर संप्रदाय से ना हो वो इस से ना हो वो गायत्री परिवार से ना हो ब्रह्मा कुमारी से ना हो ऐसे दत्त सामान्य लोगों की आप सभा लगा दीजिए हिंदुओं की और एक टॉपिक डाल दीजिए उनके बीच में कोई भी एक टॉपिक ये लो भाई खेलो इस पर 5 से 10 मिनट के अंदर वो सब आपस में मतभेद रखने वाले दिखाई देंगे आप उस टॉपिक पे जी तो इसका अर्थ क्या है इसका अर्थ यह है कि आज के समय एक सिद्धांत ऐसा नहीं है जिसको लेकर के स्वयं को हिंदू कहने वाला प्रत्येक व्यक्ति एक मत एक सिद्धांत मोटे-मोटे तौर के तौर पर जो मुख्य अह महत्वपूर्ण सिद्धांतों की बात करें तो मुश्किल से कोई एक सिद्धांत शायद ही संभव हो ऐसा मिल पाए जिसमें जिस पर स्वयं को हिंदू कहने वाला उसमें सभी हर प्रत्येक व्यक्ति

00:36:55:18 एकमत हो जाए। जैसे मैं एग्जांपल जैसे अभी ये कहा जाए कि नहीं भाई मास है उसको अमुक अमुक स्थितियों में अमुक अमुक लोगों के द्वारा ही अमुक अमुक विधि के द्वारा ही ग्रहण करने का प्रावधान है हिंदू धर्म में। अन्यथा सामान्यतया उसको निषेध ही किया गया है। है ना? अगर मैं यह बात कहूं तो अभी इसी बात को लेकर के बहुत सारे मतभेद खड़े हो जाएंगे। कुछ लोग यह कहेंगे नहीं हम तो सीधे कसाई की दुकान से मांस लेकर के आते हैं खाते हैं और हम हिंदू हैं। मतलब शास्त्र सम्मत बातों के विरुद्ध वो आचरण कर रहा है। विरुद्ध वो आचरण ही नहीं कर रहा है। वो कह रहा है यही धर्म है। शास्त्र सम्मतता कह रहा है उसमें। फिर भी वह स्वयं को हिंदू कह रहा है। अभी मैं अगर कह दूं

00:37:52:03 कि एक नारी सदा ब्रह्मचारी या एक पत्नी व धर्म धर्म होता है जो प्रभु श्री राम के द्वारा बताया गया वो श्रेष्ठतम नहीं जिन लोगों के मन के अंदर ज्यादा की लालसा होगी वो कहने लगेंगे कि नहीं दो करो तीन करो चार करो मगर फिर भी वो अपने आप को हिंदू ही बताएगा जी अच्छा अगर हम लोग ये कहे और थोड़ा सा आगे चलते हैं दार्शनिकता पर आ जाते हैं। हम ये कहे कि ईश्वर जो है अवतार ले सकता है तो आर्य समाज आ जाएंगे कि नहीं अवतार नहीं ले सकता। मूर्ति पूजा हो सकती है। नहीं हो सकती। हम ये कहे कि भाई जो अंतरजातीय विवाह है उससे दिक्कत होती है या हम कहे शिवजी भी भगवान है तो कौन आ जाएगा? वह कहने लगेगा कि नहीं नहीं यह है वह है। तो कुल मिलाकर के कोई भी ऐसा गंभीर सिद्धांत नहीं है जो हमारे यहां पर स्वयं को हिंदू कहने वाला हर व्यक्ति मानता हो। ये भी अब तो नहीं रहा है। अब तो यह भी नहीं रहा है कि वेद कि हम सब वेद का सम्मान करते हैं। चाहे उसका कोई भी

00:39:07:06 अर्थ ले मगर हम वेद का सम्मान करते हैं। तो ये भी नहीं रहा। क्यों? ब्रह्मा कुमारीज और रामपाल यह दोनों अपने आप को हिंदू क्लेम करते हैं। मगर वेद की बात आने पर ये कहते हैं कि वेद हमारे लिए प्रमाण नहीं है। अंतिम प्रमाण नहीं है। जी है ना? बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल। तो क्या है? हम लोग हम लोगों की समस्या है बटे हुए होना और हम बटे हुए हैं। यह हमारा स्वरूप है। हम बटे हुए हैं। स्वयं को हिंदू कहने वाला प्रत्येक व्यक्ति कोई उसके पास ऐसा सिद्धांत नहीं है जो बगल वाला भी मान रहा हो। वैचारिक रूप से हम लोग बटे हुए हैं। ये है वैचारिक भिन्नता ही हमें एक दूसरे से अलग किए हुए हैं। अब वो वैचारिक भिन्नता इंडिविजुअली हो कुल कुल परंपरा के कारण हो या फिर संगठन बना के हो वो बात की है। मगर वैचारिक भिन्नता हर दूसरे चरण पर हमको देखने को मिलेगी हमारे समाज में। और जब विचार अलग-अलग होंगे तो व्यवहार एक कैसे होगा? जो हमारे विचार ही

00:40:22:12 अलग हैं। मांस खाने को लेकर के हमारे विचार ही अलग हैं। अच्छा मैंने ऐसी परंपराएं देखी है कुल परंपराएं कि हमारे यहां तो ममेरी फुपेरी बहनों से विवाह हो जाता है। भले ही मनुस्मृति में मना किया गया हो। मगर वह भी अपने आप को हिंदू कह रहा है। तो स्वयं को हिंदू कहने वाला जो है एक ऐसा सिद्धांत नहीं है जो स्वयं को हिंदू कहने वाला प्रत्येक व्यक्ति मानता हो। एक सिद्धांत ऐसा नहीं है। तो हम लोग कहां से संगठित होंगे और कहां से सामने वाला हम पर प्रहार करने से डरेगा? जी बिल्कुल बिल्कुल और सबसे बड़ी बात यह है कि धर्म की रक्षा के लिए हिंदू तब आएगा आपने बहुत अच्छा एग्जांपल दिया कि जब तक हम धर्म को सही से समझेंगे नहीं तब तक धर्म रक्षा के लिए खड़े नहीं होंगे। जब तक हम यह अपने आप को यह नहीं समझेंगे कि हम सनातन धर्मी है तब तक हम धर्म रक्षा के लिए खड़े नहीं होंगे। अब मंदिर की मूर्ति तोड़ी जा रही होगी तो आर्य समाझी कहेगा कि भाई यह तो हमने पहले ही मना किया था कि मूर्ति तो होनी नहीं चाहिए। मंदिर तो बिना मतलब के बना रखे हैं तो ये अगर तोड़े जा रहे हैं तो भाई ठीक ही हो रहा है। है ना? तो वो तो खड़ा नहीं होगा। में

00:41:37:13 इस में एक बात याद आई मुझे जी जी कुछ धूर्त प्रकार के स्वयं को जो आर्य समाजी कहते हैं कुछ लोग ऐसी धूर्तता फैलाते हैं कुछ ऐसी मिथ्या प्रचार करते हैं कि भाई फलाने आक्रमण में हमने मंदिरों की रक्षा की थी। फलाने आक्रमणों में हम मंदिर को बचाने गए थे। अच्छा अब इनसे अगर पूछा जाए कि आर्य समाजी कौन होता है तो यह क्या कहते हैं जो आर्य समाज की विचारधारा को मानता हो वही होता है ना यही लोग कहते हैं ना जो अभी एक भाई साहब आए थे उन्होंने क्या कहा था कि जो आर्य समाज के 10 सिद्धांत जानता हो और उन्हें मानता हो और हम चेक भी करेंगे कि वो आचरण में लाता है कि नहीं लाता है। ठीक है तो आर्य समाज के जो 10 सिद्धांतों को जानता हो और मैं मानता हूं मतलब आर्य समाज की विचारधारा अपने जीवन में लागू करता हो। ठीक है? तो आर्य समाज वो है जो आर्य समाज के सिद्धांत को मानता है। अब कुछ लोग ये कहते हैं कि आर्य समाजियों ने जाकर के मंदिरों को बचाया

00:42:52:14 था। तो मंदिर को जो बचाने गया जब इनके ग्रंथों में लिखा है इनकी किताबों में ठूस दिया है कि मूर्ति पूजा पाप है अधर्म है तो जो वहां जाकर के मूर्तियों की रक्षा कर रहा है वो आर्य समाजी कैसे हुआ बिल्कुल आर्य समाजी वो तब माना जाएगा जब आर्य समाज ने उसे सिखाया हो कि मूर्ति पूजा भी धर्म है उसकी रक्षा करना आर्य समाज के पूरे वांग में कहां पे लिखा है कि मूर्ति पूजा के लिए सकारात्मक चीजें कुछ लिखी हो। इसका मतलब जो व्यक्ति वहां जाके रक्षा कर रहा है वो आर्य समाज के सिद्धांतों के विरुद्ध कर रहा है। जी तो फिर उसको तुम आर्य समाज का तमगा क्यों दे रहे हो? और यदि कोई व्यक्ति अपने मन से कुछ भी करता रहे मगर यदि वह कभी ना कभी आर्य समाज को स्वीकार करने वाला रहा होगा तो इसलिए उसको कहोगे आर्य समाजी तो अभी वो अश्लील चैट उस दिन पकड़ी गई थी कहो वो आर्य समाजी है बोलोगे बिल्कुल आप यही कहोगे ना कि आर्य समाज के विरुद्ध जाकर के कहा हम नहीं मानते कि वो आर्य समाजी है जो व्यक्ति गलत कर रहा है वो आर्य समाज के सिद्धांतों के विरुद्ध जाकर के गलत कर रहा है

00:44:07:15 हम नहीं मानते वो आर्य समाज जी वहां क्यों अपना टैग नहीं दे रहे हो? उसने भी कभी ना कभी अपने आप को आर्य समाजी कहा है। तो आपकी परिभाषा के अनुसार आर्य समाज की विचारधारा या आर्य समाज की नियमावली को मानने वाला अपने जीवन में लागू करने वाला कम से कम उसके प्रति श्रद्धा भाव दिखाने वाला लागू ना भी कर पाए तो श्रद्धा भाव दिखाने वाला वो आर्य समाजी है ना। तो जो धर्म जो मूर्ति के प्रति सकारात्मक व्यवहार कर रहा है उसको आर्य समाजी क्यों कह रहे हो? वहां पर भी आप कहो ना कि हम नहीं मानते कि वार समाजी हैं। वो हिंदू थे। कहीं ना कहीं उनके अंदर सनातन परंपरा का बीज बाकी था जो उन्होंने जाकर के मूर्तियों की रक्षा की। आर्य समाधि तो वो तब तक थे ना जब तक उन्होंने उन बातों को माना कि अगर रामलीला अगर किसी ने देख ली तो उसको इतना पाप पड़ेगा। जितने 100 वर्षों तक अश्वमेद यज्ञ करोगे उतना पुण्य मिलेगा। उसके बराबर पाप मिलेगा। तो यह कहना बहुत ही निर्लज्जता का कार्य है कि आर्य समाजियों ने मूर्ति मूर्ति की रक्षा की मंदिरों की रक्षा की। आर्य समाज के अनुसार ऐसे मंदिरों का अस्तित्व होना ही नहीं चाहिए जिसमें मूर्ति हो। तो

00:45:22:19 वहां जो रक्षा करने गए जो रक्षा करने गए थे वहा समाजी नहीं थे। जी कुछ कह रहे हां मैं ये कह रहा था कि हाइपर क्वेस्ट नाम का एक चैनल है उस पे जब वो व्यक्ति आर्य समाजियों से बात करता है तो वो आर एस मांझी बन जाता है उस उस देर के लिए एक घंटे के पडकास्ट के लिए और वो व्यक्ति मैंने देखा है कि वो मंदिरों में भी जाता है मूर्ति पूजा भी करता है लेकिन जब उस क्षण उस वीडियो को रिकॉर्ड कर रहा होता है तब वो पूरा उन उनकी बातों को समर्थित करता हुआ यह मानता है कि भाई आप जो कह रहे हो वो ठीक कह रहे हो तो ये जो दोगले तरह के जो हिंदू हैं और ये मोहित गड नाम का बंदा जो उनके मंचों पर भी जा रहा है आजकल वो कभी यह मानता ही नहीं कि मैं आर्य समाज जी हूं। वो ये कहता है कि जी मैं दयानंद को मानता हूं। लेकिन मैं ये नहीं मानता कि मैं आर्य समाज जी हूं। मतलब ये दोगली तरह की जो बात ये करने वाले जो हिंदू हैं ना इन्होंने भी हमारे साथ है ऐसे लोग ऐसे लोग ये जो लोग हैं वो हाइपरस्ट तो व्यापारी है और ये जो मोहित गौर है ये भी व्यापारी है जी जी क्योंकि ये आर्य समाज को भी डिनाइड करता है तो ये व्यापारी है ये ये भी नहीं है कि दयानंद के प्रति जो है कोई समर्पण भाव हो इसका ये है कि मैं अपना धंधा कैसे चलाना है मुझे लोगों में अपना वो कैसे रखना है कि मैं सबको अच्छा लगू दुकान जो होती है वो सबको अच्छी लगनी चाहिए ना दुकान पे हम ये थोड़ी ना लिख सकते हैं कि वही यहां पे

00:46:37:20 मुस्लिम ना आए। जी जी दुकान तो सबको अच्छी लगनी चाहिए। अब जैसे यहां पे एक रामपाल का चेला है समोसे की ढेल लगाता है तो उसने वहां पे ये नहीं लिखा है कि मैं रामपाल का चेला हूं। रामपाल की फोटो लगा देगा। तो उसके पास लोग जाना बंद कर देंगे। समोसे खूब उसके बिकते हैं। है ना? तो उसने नाम अपनी जो वास्तविकता उसको छुपा के रखता है। तो जिसको दुकान चलानी है अपनी वो व्यक्ति अपनी वास्तविक जो धारणा है उसको बचा के रखता है। तो ये दुकानदार हैं ये लोग। ये लोग धंधे वाले लोग हैं। इनको अपना मंच चलाना है। सबको खुश करके रखना है। इसलिए ये लोग सबके मन की बात करेंगे। तो ये ना आर्य समाजी है ना कुछ है। और वक्त आने पर उसी उसी का पक्ष लेंगे। उसी का सब कुछ करेंगे। उसी का सब मानेंगे। उसी के अनुसार पूजा पद्धति चलाएंगे मगर हम आर्य समाजी नहीं है। इसी तरीके से हाइपरक्वस्ट मूर्ति पूजा कर रहा है तो परंपरावादी हो गया। मूर्ति पूजा परंपरा से प्राप्त है। अरे मूर्ति पूजक तो हो गया। मगर तुम्हारे सामने तुम्हारे सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। तुम वहां क्यों नहीं बोल रहे हो कि यह तो गलत है। क्योंकि तुम धंधे वाले हो। तुम दुकान

00:47:52:28 वाले हो। तुम्हें इससे मतलब नहीं है कि धर्म का कहां लोप हो रहा है, कहां खंडन हो रहा है धर्म का। तुम्हें अपने रुपए से मतलब है। कैसे फॉलोवर्स मिलियन तक पहुंचे उससे मतलब है। वो राम मंदिर बेच रहे हैं। जब ये सारा चल रहा था राम मंदिर बनने का प्रकरण तो वो एक चैनल है आर एस मांझी का वो राम मंदिर बेच रहा है उस पे वो साथसाथ वो राजनीतिज्ञ भी है। हां हां हां वो अच्छा उस उस व्यक्ति के मुख से ही मैंने पुराणों की भी प्रशंसा सुनी है। उसी व्यक्ति के मुख से उनकी एक वेबसाइट है आर्य समाज की उसप वो पुराण भी बेच रहे हैं। मतलब बड़ी सुनकर मेरे को हंसी आती है और मेरे एक मित्र हैं। अभी वो आर्य समाज जी की विचारधारा के हैं। मतलब पहले वो मेरे साथ थे। लेकिन वो जब वो चैनल पे आते थे वो अपने आप को आर्य समाज जी रिप्रेजेंट करते थे। तो उन्होंने मेरे को फोन करके पीछे से बताया। कहते हैं जी ऐसा है ये जो आपके जितने भी आर्य समाज जी है ना ये सारे जो अजय आर्य है ये सब मूर्ति पूजा करते हैं। घर पे पूरा इनका मंदिर मंदिर बना हुआ है। तो मैं बड़ा सुन के हैरान रहा क्या? मैंने कहा फिर तो ऑनलाइन माध्यम से क्यों नहीं बोल पाते? कहते क्योंकि ना हम जब डिबेट करने जाते हैं तो हम पुराणों को डिफेंड नहीं कर पाते इसलिए हम क्या करते हैं अपने आप को आर्य समाजी रिप्रेजेंट करते हैं वहां पर वो सुन के मेरे को इतनी हंसी आई मैंने कहा भाई आप मतलब पुराणों को डिफेंड नहीं कर पा रहे हो तो आप आर्य समाजी बन जाओ मुसलमानों

00:49:08:02 को बोल दो कि हम पुराणों को नहीं मारते वेद से बात करो तो मतलब ये सनातना आभासी हिंदू जो है ना ये भी हमारे उसके लिए बहुत बड़ा खतरा है ये व्यूज के लिए चैनल बनाने के लिए मतलब अपने बस चैनल बनाना है चैनल चलाना है इनको पैसे कमाने हैं। अब आप देखो मेरे चैनल को देखो जब मैं रिएक्शन दे रहा था और जनता को जो अच्छा लगता था वो वैसा कर रहा था तो बहुत व्यूज आ रहे थे। बहुत व्यूज आ रहे थे। जैसे ही मैंने सच बोलना शुरू करा व्यूज कम हो गए। है ना? लोग कह रहे हैं यार वो आर्य समाजियों के जो रिएक्शन देते थे वही करते रहो तो तुम्हें बहुत सारे व्यूज मिलेंगे। मैंने कहा मुझे नहीं चाहिए भैया। बेसिकली जब मैं आया था इस फील्ड में तो मैं जानने आया था कि मेरा सनातन धर्म क्या है। अब मैं जान गया हूं। धीरे-धीरे मैं वहां तक पहुंचा हूं। मैंने कहा मैं वापस नहीं जा सकता। अब यू टर्न नहीं है यहां से। क्योंकि पहले मैं जो कर रहा था कार्य वो अज्ञान बस कर रहा था। मैं यह जान रहा था। मैं सोच रहा था कि यह मेरा सनातन धर्म है। लेकिन जैसेजैसे मैं आगे बढ़ता गया तो मुझे बहुत सारे कंट्राडिक्शन दिखते गए। तो जब मुझे उस तरफ मैं पहुंचा हूं। सच्चाई तक मैं पहुंच गया हूं। तो अब बैक तो मैं नहीं जा सकता हूं। तो अब हमें जो है वो मूल सनातन धर्म को जो मैं अब तक समझ पाया हूं। इसी को मुझे आगे बढ़ाना है और अब मुझे इतना पता है कि जो

00:50:23:03 मैं कर रहा हूं वो सही कर रहा हूं। वो इसलिए सही कर रहा हूं क्योंकि जब मैं कंपेयर करता हूं सनातना आभासी लोगों से अपने आप को जैसे कि आपने एग्जांपल दिया एक जो ये हाइपरस्ट वाला और ये जो राम मंदिर बेच रहा है अब ये दोगले किस्म के लोग हैं। ये आर्य समाज के सिद्धांतों को वैसे कह रहे हैं कि हम मान रहे हैं लेकिन एक्चुअल में उसको अपने जीवन में वो नहीं कर पा रहे। तो ऐसे लोग ऐसे लोगों को आप क्या कहोगे? तो दोगला ही कहोगे वो चीज मैं नहीं कर सकता भैया दोगला दोगलापन हम नहीं कर सकते जो हमारा मूल सनातन धर्म है सबको पता है परंपरा से ही हमें ज्ञान मिला है तो उसको आप कैसे नकार सकते हो मैं उसी पे आ रहा हूं मैं उसी पे आ रहा हूं तो इसमें क्या है पहला हमको पता चला कि हमारी प्रॉब्लम है कि हमें हम लोग बटे हुए हैं और उदाहरणार्थ उसका स्वरूप भी हमने देखा कि उस बटे होने का स्वरूप क्या है कि हिंदुओं के पास एक ऐसा सिद्धांत नहीं है जिसके जिसको स्वयं को हिंदू मानने वाला हिंदू कहने वाला हर व्यक्ति मानता हो। एक सिद्धांत ऐसा नहीं है। कोई भी बात बोलोगे उस बात को लेकर के स्वयं को ही हिंदू कहने वाले जो दूसरे लोग होंगे उसको काटेंगे। तो ये तो हो गया वो

00:51:39:04 कि हमारी समस्या जो सतही स्तर पर दिखाई दे रही है वो क्या है? अब इसमें इससे आगे जब चलते हैं तो इस जो समस्या का जो अगला चरण आता है वह आता है कि एक हमारे ग्रंथों में डिफरेंसेस है और एक हमारे ईश्वर तत्व में डिफरेंसेस हमारी आस्था किन ग्रंथों पर है या तो इसमें डिफरेंसेस है और ये हमारे ईश्वर तत्व पे डिफरेंसेस तो ये दूसरा चरण आ गया और एक तो यही है कुछ लोग ऐसे ही मिल जाएंगे जो नास्तिक होंगे सपोज दैट अभी हमने जो गुरुकुल की हम तैयारी कर रहे हैं। जहां पर जो आधुनिक शिक्षा है वह दी जाए और उसके साथ-साथ निशुल्क निशुल्क आधुनिक शिक्षा दी जाए और साथ ही साथ जो है वहां पर अपने धर्म की शिक्षा भी प्रदान की जाए। तो वो चल रहा है। तो अब क्या है वहां पर जब हम लोग पैदल मार्च करने गए पैदल लोगों को आसपास के लोगों को बताने गए कि यहां पे हम ऐसा-सा करने जा रहे हैं। आप लोग आया करिए। तो क्या हुआ? गेट खोला बाहर तो लिखा है राम और श्याम बाहर लिखा है नेम प्लेट पे गेट कटाया अरे मैं इन चीजों में नहीं पड़ता मैं तो मैं जो है नास्तिक टाइप का व्यक्ति हूं तो नास्तिक मिल गया

00:52:54:16 नास्तिक मिल गया और नहीं तो फिर धर्मनिरपेक्ष मिल गया राष्ट्रवादी मिल गया फिर थोड़ा और आगे चले तो हमारे वो वो आश्रम का नाम है शिव शक्ति श्याम आश्रम तो वो वो मालूम पड़ा और ही किसी सेक्ट को मानने वाला मिल गया समाज मिल गया तो ऐसे करके वो जो जो हम केंद्र बनाना चाहते हैं उसको कि वो हिंदुओं का केंद्र बने तो वो हिंदू जो है वहां क्यों आएगा वो तो अलग-अलग उसमें विचारधारा में फंसा हुआ है। तो इसका कारण यही है कि हमारा जो धर्म और ब्रह्म है वो अलग-अलग है। हमारा जो धर्म और ब्रह्म है वो अलग-अलग है। व्यवहार में ही अलग-अलग है। परमार्थ की बात अलग है। है ना? परंपराओं में जो भेद आता है, जो तात्विक विवेचना में अंत में जाकर वो पर पारमार्थिक भेद आता है। तो यहां व्यवहारिक ईश्वर ही व्यवहार में ही ईश्वर अलग-अलग हो गया। धर्म अलग-अलग हो गया। इस कारण से हम लोग बटे हुए हैं। तो पहला चरण जो आता है कि हम लोगों को यह नहीं पता है कि नास्तिकता को कैसे शांत कर सकते हैं। नास्तिकता के लिए सार्वभौम सिद्धांत क्या है? कि संसार का प्रत्येक आज मैं ज्यादा लंबी व्याख्या नहीं करूंगा नहीं तो धारा बदल जाएगी। संसार का

00:54:09:20 प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है। फिर वो भले ही स्वयं को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो। यह पहला सिद्धांत है। इसके डेप्थ में हम लोग कई बार बातें कर चुके हैं अलग-अलग उसमें। तो यह क्या हो गया? जब आप किसी को अपने जो हिंदू राष्ट्र हिंदू रक्षा के लिए बुलाने जाओगे तो वहां पर जो बाधा आपको मिलेगी वो पहली बाधा कौन सी होगी? नास्तिकता के रूप में। तो व्यक्ति को ये पांच सिद्धांत सदैव ज्ञात होने चाहिए। कौन से पांच सिद्धांत है? पहला कि संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है। फिर वो भले ही स्वयं को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो। यह पहला सिद्धांत इस पर हम एक प्रोग्राम भी लाने वाले हैं इन पांच सिद्धांतों पर पंचकास्त्र है ना तो यह क्या है कि ये पांच सिद्धांत ऐसे हैं जो अकाट हैं और इन पांच सिद्धांतों को लेकर के हम हिंदुओं को एक कर सकते हैं। ठीक है? आगे हम बात करेंगे कि हम लोग यह जो हमारी वैचारिक एकता का अभाव है हमारे बीच में। उसी के कारण व्यवहारिक

00:55:25:01 एकता का अभाव है। उसी के कारण सामने वाला हम पर हावी होने की चेष्टा कुचेष्टा करता रहता है। तो क्यों है? क्योंकि हम बटे हुए हैं भी विचारों से भी और व्यवहार में भी तो हम दिख ही नहीं रहे हैं कि कितने हैं। कौन कौन है जो बोलेगा? जैसे सपोज दैट मैं कहीं पर खड़ा हूं और मैं ये उम्मीद करूं कि यहां के हिंदू मुझे बचाएंगे तो हम दिख भी नहीं रहे हैं। हम लोग यूनिफॉर्म नहीं है। हम वह लोग ज्यादा से ज्यादा संख्या में यूनिफ है। वह दिखते हैं। हम लोग यूनिफॉर्म नहीं है। हम लोग नहीं दिखते कितने हैं कितने नहीं है। तो वैचारिक भिन्नता, व्यवहारिक भिन्नता और फिर यूनिफार्म की कमी। तो अभी जो ये जो पांच सिद्धांत हैं इनको मैं शॉर्ट में बता दूं और फिर आगे मैं बात करूंगा। यह पांच सिद्धांत ऐसे अकाट पांच सिद्धांत हैं जो हर हिंदू को पता होने चाहिए और यदि वह स्वयं को हिंदू कह रहा है तो वह इन्हें मानने वाला भी होना चाहिए और ये ऐसे सिद्धांत है जो उसके विरुद्ध धर्म के विरुद्ध बोलने वाला इन सिद्धांतों के विरुद्ध बोलने वाला कोई भी व्यक्ति इनको काट नहीं सकता है। पहला सिद्धांत कि

00:56:40:28 संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है। फिर वह भले ही स्वयं को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो। यह हो गया नास्तिकता का उत्तर। जब यह उत्तर आपके पास होगा डेप्थ में आप दूसरे वीडियोस में देख लीजिएगा। जब यह उत्तर आपके पास होगा तो जो नास्तिकता फैलाने वाला व्यक्ति होगा वह आपके धर्म कार्य में बाधा नहीं बन पाएगा। वो जो लोगों को प्रभावित कर रहा होगा वहां पर उनको बोल के अरे दुनिया में कोई भगवान नहीं है। क्यों जा रहे हो मंदिर? वह प्रभावित नहीं कर पाएगा। चलो वह स्वयं नहीं आएगा मगर उससे प्रभावित होने से बचेंगे जो लोग वह तो आएंगे। तो पहला सिद्धांत संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है। फिर वो भले ही स्वयं को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो। दूसरा सिद्धांत कि

00:57:31:01 ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। संसार का ऐसा कोई कार्य नहीं है जो ईश्वर नहीं कर सकता है। ईश्वर किसी भी प्रकार के व्यवधान से रहित है। वह सभी प्रकार के नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है। तो इसके बारे में भी हमारा चैनल ही हमारा अस्तित्व हमारे चैनल का अस्तित्व ही मेरे ख्याल से इसी सिद्धांत पर है। हम लोग काफी डेप्थ में बातें कर चुके हैं। तो यह जो सिद्धांत है यह हम हिंदुओं को मालूम होना चाहिए। अगर यह सिद्धांत हम हिंदुओं को मालूम होगा। यह ऐसा सिद्धांत है जिससे सभी लोग प्रेम करते हैं। जिसको ईश्वर से प्रेम है, जिसको धर्म से प्रेम है, उसको यह बात सुनने में बहुत प्यारी लगती है कि ईश्वर सर्व सामर्थ्यवान है। ईश्वर अनंत रूप से शक्तिमान है। सर्वशक्तिमान है। तो इस एक सिद्धांत के अंतर्गत रहते हुए भी हम हिंदुओं को एकत्र कर सकते हैं। तीसरा क्या सिद्धांत है? वेद ईश्वर के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणिक जिन्हें ईश्वर ने भी ना रचा हो प्रधारण उपनिषद दो चार 10 और वो सत्यम

00:58:46:09 ज्ञानम अंतम ब्रह्म जो पहला सिद्धांत हमने लिया था ईश्वर के विषय में केवल वही शास्त्र पहला सिद्धांत हमने लिया था कि संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वह भले ही स्वयं को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो तो इसके समर्थन में है असतो मा सद्गमया तमस ज्योतिर्गम मृत्यु मृतम गम और ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है इसके समर्थन में बहुत सारे हैं मगर एक ले लेते हैं सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म और ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है इसका फायदा आपको कब मिलेगा जब आप जाएंगे अपने घर के आसपास और कोई यह कहेगा कि मैं आस्तिक तो हूं मगर मैं उस ईश्वर को नहीं मानता मू मैं जो है वेद को नहीं मानता मैं तो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को मानता हूं। मैं तो बाइबल के द्वारा मिलने वाले ईश्वर को मानता हूं। ठीक है? तो वहां आप उसको बताओगे कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। अच्छा ये बात कुरान में भी लिखी है। वो बात और है कि वो आगे ले नहीं जाते उस बात को। कुरान में भी कहीं पर गलती से कैसे लिखी वो नहीं पता। मगर यह बात कुरान में भी मेंशन है कि जब

01:00:02:02 कोई आयत तुमसे छीन ली जाती है तो उससे बेहतर आयत दे दी जाती है। तुम नहीं जानते ईश्वर जो चाहे कर सकता है। ईश्वर जो चाहे कर सकता है। तो कुल मिला के ये जो सीमित ना होने की भावना है उसमें भी मगर वो आगे दूसरी ऐसी चीजें बोल देते हैं कि उनकी ये बात कट जाती है। जैसे कि ईश्वर की कोई संतान कैसे हो सकती है? उसकी कोई पत्नी है क्या? अब यहां पर क्या हुआ? यहां पर ईश्वर ने अपनी उस बात को ईश्वर जो चाहे कर सकता है वाली बात को वो कर दिया। खैर हम लोग उस पर आ जाते हैं हमारे पांच सिद्धांतों पे। तो पहला सिद्धांत असुतो सद्गमया तमसो ज्योतिर्गमय मृत्यु मृतम गमया हर हिंदू को याद होनी चाहिए। इतनी बात कि संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान कोई ढूंढ रहा है। फिर वो भले ही स्वयं को नास्तिकी क्यों ना कहता हो। दूसरा सिद्धांत सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। तीसरा सिद्धांत ईश्वर के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणिक जिन्हें ईश्वर ने भी ना रचा हो। क्यों? क्योंकि जो हमारे वेदाद शास्त्र है वो ईश्वर

01:01:17:08 की स्वास के रूप में है। उन्हें कभी भी ईश्वर ने रचा नहीं है। हम लोग इस पर बात कर चुके हैं। दूसरे वीडियोस है उसमें आप देखिएगा। तो अब क्या है यहां पर एक और क्वालिटी मिलेगी धर्म में बाधा डालने वाले लोगों से लोग जैसे ब्रह्मा कुमारीज वो क्या कहेंगे कि अरे हमारे पास रोज भगवान आते हैं वो जो बता रहे हैं वो धर्म है ये वेद वगैरह में धर्म नहीं है वेद इत्यादि में तो कुछ बातें मानने की कुछ बातें नहीं मानने की हमारे पास तो डायरेक्ट भगवान आ रहे हैं वो बता रहे हैं वो हम मानेंगे रामपाल तो ऐसे लोगों के लिए ये सिद्धांत है क्या कि ईश्वर के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणिक जिन्हें ईश्वर ने भी ना रचा हो। क्योंकि जहां पर ईश्वर का प्रयत्न पूर्वक बुद्धि इन्वॉल्व हो जाएगी तो ईश्वर तो सब कुछ बना रहे हैं। ईश्वर की मर्जी के बाहर कुरान रची बन गई क्या दुनिया में? ईश्वर की मर्जी के बाहर बाइबल बन गई क्या दुनिया में? है ना? वो ईश्वर की इच्छाओं की सीमा से बाहर की चीजें हैं क्या? तो खैर केवल वही शास्त्र प्रमाणिक जिन्हें ईश्वर ने भी ना रचा हो ब्रदारण उपनिषद दो चार 10 इसके बाद यह सारा ज्ञान जो है

01:02:32:16 ऐसा अकाट्य ज्ञान हमें प्राप्त कैसे होगा तो वो ज्ञान प्राप्त होता है परंपरा से गुरु से लक्षण संपन्न सन्यासी अथर्ववेद 11 5 16 मनुस्मृति 12वा अध्याय 100 12 से 114 भगवत गीता तीन 16 चार दो निरुक्त में भी दिया है परंपरा मुंडकोपनिषद एक से चार परंपरा तो वहां पर परंपरा की महत्ता बताई जा रही है तो परंपरा प्राप्त ज्ञान लक्षण अंतिम रूप से सन्यासी समस्त श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देने वाला और अंततो गतवा अपने शिष्य का संशय दूर कर देने वाला है ना जी संशय क्या है कि रामपाल बहुत बड़े तत्वदर्शी है। ठीक है? मगर जब उनसे पूछा जाता है कि जहां ईश्वर खड़े होके जहां उसने जब पृथ्वी इत्यादि लोकों का निर्माण किया मृत्यु लोक का निर्माण किया तो वो जगह उसने खुद बनाई है कि क्या हुआ था? तो वहां वो सिटी मिट्टी गुम हो जाती है। ये वो

01:03:47:16 तत्वदर्शी संशय दूर नहीं। कुरान में तो यही कह दिया जाता है ज्यादा सवाल मत करो। ज्यादा सवाल करोगे तो तुम्हारे लिए वह आयत खोल दी जाएंगी जिसके कारण पहले वाले लोग बागी हो गए थे। इसका मतलब क्या हुआ? कि पहले जो धर्म था वो कुछ और था। आज धर्म कुछ और है। जब लोगों ने बगावत शुरू की कि हम नहीं हम तो दारू पिएंगे। हम तो शराब पिएंगे। हम तो जो है विचार करेंगे तो थोड़ा थोड़ा दारू थोड़ा थोड़ाा इत्यादि जैसी चीजें कुछ या दारू ना दी गई हो तो और दूसरी चीजें के चलो इतना कर लो हरम कर लो या ये कर लो जो भी हो उनके यहां अलऊ कर दिया गया पांच एक में लिखा है ये कुरान में जी जी तुम ज्यादा सवाल मत करो तुम्हारे लिए आयतें खोल दी जाएंगी तो गुरु अंत गतवा कौन जो आपका अज्ञानता रूपी अंधकार दूर कर दे अद्वतारिका उपनिषद गु का मतलब अंधकार, रू का मतलब निकालने वाला। और इसके बाद पांचवा सिद्धांत क्या है? रामो विग्रह धर्मा। नारायण समारंभा शंकराचार्य मध्यमाम अस्मदाचार्य परताम और इसमें समस्त परंपरा प्राप्त आचार्य आते हैं। जो राम ने किया वो धर्म है और

01:05:02:19 धर्म आपको परंपरा प्राप्त आचार्य से मिलेगा और वो आचार्य आपके श्री संप्रदाय के आचार्य भी हो सकते हैं। शंकर संप्रदाय के आचार्य भी हो सकते हैं। यहां से आपको धर्म मिलेगा परंपरा प्राप्त। तो नारायण समारंभाम शंकराचार्य मध्यम अस्मदाचार्य परताम वंदे गुरु परंपरा अब मैं एक आप आप कुछ कह रहे थे आप बताएं हां मैं ये कह रहा था ये सैफ नाम का बंदा ये कह रहा है कि क्या तेरा ईश्वर जो है वो व्यवहार में बलात्कार कर सकता है तो यह इस तरह से क्वेश्चन करते हैं इस्लामी ईश्वर जो है वह धर्म स्थापना करते हैं तुम्हारे रूप में कर सकता है सेफ। तुम बताओ तुम कर सकते हो कि नहीं? [हंसी]

01:05:54:16 तुम बताओ। जी जी तो प्रपंच रूपी संसार है जो ये भी कुरान में लिखा है कुरान में ये भी लिखा है ये जो है यह संसार जो है खेल है तमाशा है ये कुरान में लिखा है तो क्या तुम्हारे ईश्वर को जिसको तुम ईश्वर कह रहे हो खेल में होने वाली चीजों से सुखदख होता है क्या प्रभावित होता है क्या तुम्हारा ईश्वर अगर प्रभावित होता है तभी तो यह आएगा कि यह कर सकता है यह नहीं कर सकता अगर प्रभावित नहीं हो सकता है तो सब कुछ कर सकता है कोई सीमा नहीं है क्योंकि उसके वो वहां से देखने पर तो एक खेल है ना तो पहले तुम तय करो तुम्हारा ईश्वर सुखदख से प्रभावित होता है कि नहीं वहां भी उसको भी कष्ट होता है क्या फिर बस बात करना जी और जिसको भी जिससे भी बात करानी है यहां मंच खुला हुआ है यहां तुम ला सकते हो चेहरे के साथ आना होगा। यह मर्यादा है। खैर हम लोग वापस आ जाए।

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→ Used in: B · Video शंकराचार्य जी अकाट्य क्यों ? #shankaracharya at 0:03 ↗

01:07:00:28 एक बहुत महत्वपूर्ण बात है जो अभी पिछले कुछ दिनों भगवतानंद इत्यादि से बात करते समय उठी है कि शंकराचार्य जो है अकाट्य होते हैं। यह बात उठी कि तुम ये क्यों कहते हो कि शंकराचार्य अकाट्य है। उनके मुख से निकलने वाला वाक्य जो है ब्रह्म वाक्य। ये क्यों कहते हो? तो पहली बात तो मेरी बात सुनो। ब्रह्म वाक्य भी प्रमाण नहीं है। सोच के देखो हमारे यहां क्या हुआ? परंपरा प्राप्त जो ज्ञान विज्ञान है उसके विरोध में बोलने आए ब्रह्म बुद्ध अवतार ब्रह्म ही थे ना ब्रह्म वाक्य वाक्य भी प्रमाण नहीं है। किसके आगे? परंपरा प्राप्त गुरु गोविंद और ग्रंथ के जो सामंजस्य से जो ज्ञान प्राप्त है उसके विरोध में ब्रह्म स्वयं भी आ गए अवतरित हो गए कहने लगे मत मानो वेद को तो माना क्या उसको बात को किसकी बात मानी गुरुओं की बात मानी परंपरा प्राप्त आचार्यों की बात मानी ना मान लेते तो बन जाओ आज बौद्ध तुम भी तो जो लोग ये कह रहे हैं कि ये मत कहो कि शंकराचार्य

01:08:16:02 अकाट होते हैं वो वो ये सुन ले बहुत जरूरी चीज है सुनने की मैं इस दुनिया में ये वाली जो दुनिया है ना इस दुनिया में ऐसे ही नहीं आया हूं सामान्य तरीके से मैं पहले अधर्म से विधर्मियों से रामपालियों से अपने जीवन में भिड़ा जी और एक जो सामान्य सा जीवन जी रहा होता है जिसके जीवन का लक्ष्य केवल होता है कंजपशन कंजशन वैसा जीवन जीने वाला व्यक्ति मालूम ही नहीं है कि जीवन का उद्देश्य मोक्ष है। जीवन का उद्देश्य भगवत प्राप्ति है। भक्ति है। यह सब कुछ नहीं मालूम। केवल कमाना है खाना है। कमाना है खाना है। कमाना है खाना है। हां मगर यह सवाल जरूर होता था मन में। तदया तम ज्योतिमया जिसके कारण आज मैं यहां आ गया। ये बात अच्छी है कि प्रारब्ध में कुछ ऐसे कर्म किए थे कि किसी ऐसे घर में जन्म मिल गया जहां पर राम के बारे में मुझे बचपन से बताया गया। जहां मुझे हनुमान चालीसा दी गई पढ़ने। यह एक भाग्य था, प्रारब्ध था। तो मैं जो है इस रूप में नहीं आया कि मैं जो है एक वंश परंपरा से मेरे यहां पर जो है शंकराचार्य को माना जा रहा हो या

01:09:31:06 वो हमारे कुलगुरु रहे हो। इस कारण से मैं अभी उनके यहां आ गया और आज जो है शंकराचार्य का अगर कोई विरोध करेगा तो मैं जो है उसके पीछे पड़ जाऊंगा। उसका विरोध करने लगूंगा क्योंकि शंकराचार्य को शंकराचार्य के प्रति मेरी अंधभक्ति है। सुनो मैं कैसे आया। जब एक मुसलमान से मेरी धर्म और अधर्म को लेकर के चर्चा होने लगी। जब मेरा धर्म मेरे धर्म का अस्तित्व मेरे धर्म का पक्ष मुझे रखना था तो एक सवाल अटका। वो व्यक्ति भी कौन था? इसको भी समझो। क्षत्रिय कुल में उत्पन्न और मेरे साथ व्यायाम करता था, वर्कआउट करता था। हालांकि उससे पहले भी मैं ऐसी स्थितियां से जूझ रहा था। मगर एक होता है ना कि जैसे घड़ा भर जाता है। तो वो घड़ा भरने वाली जो स्थिति थी वो यह था। यह व्यक्ति वो मेरे साथ व्यायाम करता था। एक दिन वो मेरे घर पर आया। मैंने उसे भोजन के लिए बुलाया था। भोजन पा लेने के बाद हम लोग जब बैठे बात करना शुरू किया

01:10:46:26 तो मैंने उससे उसका जो आध्यात्मिक दृष्टिकोण है वो पूछ लिया सौभाग्य से मेरा सौभाग्य था कि मैंने पूछ लिया तो जब मैंने इससे ऐसा पूछा तो वो बोलता है मुझे इस्लाम बहुत पसंद है। अच्छा तब मेरे लाइफ अच्छा एक टर्निंग पॉइंट और है जो इस से जुड़ा हुआ है वो कभी और बताऊंगा एक ये टर्निंग पॉइंट है। तो मेरा एकदम से यह हुआ यह क्या तो उसके बाद से मेरी खोज शुरू हुई उसके बाद उसके पहले जो अध्ययन था वह था मगर उसके बाद से खोज शुरू हुई तो फिर उससे तर्क वितर्क चालू हुए कि नहीं क्यों सनातन इज बेस्ट वो बोल रहा है इस्लाम इज बेस्ट तो ये सब चीजें चालू हुई उससे जूझते समय एक समय आया जब वो मुझे वेद के भाष्य अपने अनुरूप बता रहा था है ना? वेदों का अर्थ वो अपने अनुरूप मुझे बता रहा था। तो समस्या यह आई मैंने कहा तुम्हारे नहीं माने जाएंगे। उसने कहा तुम्हारे क्यों माने जाएंगे? क्या जवाब था इसका? बताओ। अगर हमने परंपरा को छोड़ दिया। परंपरा प्राप्त गुरुओं को छोड़ दिया तो वेद के इस मंत्र के कई अर्थ निकल सकते हैं।

01:12:02:00 यही अर्थ क्यों माना जाए? इसका क्या जवाब होगा? यह जो मूर्ख लोग हैं, धूर्त लोग हैं, मूर्ख वो जो आज भगवतानंद के चक्कर में शंकराचार्य की अकाटता को चुनौती दे रहे हैं। और धूर्त वो जो अपने संगठन बनाने के चक्कर में आर्य समाज जैसे लोग वो परंपरा प्राप्त आचार्यों पर जब गण में जाओगे तो तुम्हारे पास अकाट उत्तर नहीं होगा इस बात का कि तुम्हारा क्यों माना जाए। एक समय आएगा जब एक ही शब्द के कई अर्थ निकल रहे होंगे तब तुम्हारे पास अकाट उत्तर नहीं होगा ऐसा उत्तर दोगे जिसको जो मानना है वो मान यही उत्तर तो दोगे बहुत बड़ी बात है यही समय आया था मेरे पास उस मुस्लिम से जूझते हुए कि मेरा उत्तर क्यों मान्य तो मैंने कहा कि इसलिए मान्य क्योंकि यह परंपरा प्राप्त आचार्य बता रहा है। यह वह बता रहा है जिसने अपने गुरु से यह वेद लिए थे। ये वेद जाकिर नायक के पास आए कैसे? मुस्लिमों के पास आए कैसे? जिससे आए उस

01:13:17:01 पर अविश्वास नहीं कर सकते ना। तो वेद किसी ना किसी प्रकार से यहां पर आ रहे हैं ना। परंपरा से आ रहे हैं ना। तो परंपरा को हम मना नहीं कर सकते। परंपरा प्राप्त आचार्यों को हम मना नहीं कर सकते। उन पर अविश्वास प्रकट नहीं कर सकते। अविश्वास प्रकट कर दिया परंपरा प्राप्त आचार्य पर तो उससे प्राप्त होने वाले हमें वेदों पर भी अविश्वास हमारा सिद्ध हो जाएगा। और फिर तुम धर्म की रक्षा कैसे करोगे? फिर तो यही करोगे कि जो तुम्हारे विरुद्ध खड़ा है। तुम्हारे पास भले ही उसका कोई वैचारिक उत्तर हो ना हो। बस तुम उससे तलवार से लड़ोगे। बस मैं सही क्यों हूं? तुम ये नहीं सिद्ध कर पाओगे। केवल तुम लड़ पाओगे हथियार लेकर के। फिर तुम्हारे साथ कौन खड़ा हो कौन नहीं खड़ा हो बातें बात की है। तुम्हारे पास वैचारिक उत्तर नहीं होगा। तो मैं हिंदुओं का ध्यान दिलाना चाहता हूं। क्या कि वेद और ईश्वर के वेद और ईश्वर के संबंध में प्रमाण क्या है? प्रमाण वेद और ईश्वर के संबंध में कि हां कृष्ण ईश्वर हैं। हां वेद ही धर्म है। क्या प्रमाण है इसके संबंध में तुम्हारे

01:14:32:04 पास? मैं आज उन हिंदुओं से पूछ रहा हूं जिन्होंने भगवतानंद के चक्कर में यह कहा कि शंकराचार्य अकाट नहीं होते। यह कहना गलत है। सिद्ध करो शंकराचार्य अकाट होते हैं। तो तो भाई वेद और ईश्वर के संबंध में जो प्रमाण है ना वह प्रमाण है शब्द प्रमाण। किसी ने तुमको कहा है कि यह ईश्वर की वाणी है तो वह ईश्वर की वाणी है। अगर कहने वाले के प्रति तुमने अविश्वास खड़ा कर दिया तो फिर वो शब्द प्रमाण तुमने अपना खत्म कर दिया। कर दिया। तो फिर तुम्हारे पास कोई प्रमाण नहीं है कि वह वेद ईश्वर की ही वाणी है। राम ईश्वर है। कृष्ण ईश्वर है। वेद के द्वारा बताया गया धर्म धर्म है। तो अपने एक शब्द प्रमाण को तो तुम्हें बचा के रखना ही होगा ना। अगर तुमने सब पर झूठ झूठा होने का आरोप लगा दिया तो तुम्हारा वो शब्द प्रमाण खत्म। तुमने हिंदू धर्म को वैचारिक रूप से नष्ट कर दिया। और जब विचार ही नहीं है हिंदू धर्म का तो व्यवहार कहां से बचेगा? कहां से बचेगा? इसलिए कहता हूं इसलिए लड़ता मरता हूं शंकराचार्य की अकाटता

01:15:47:22 के पीछे। क्योंकि जिस दिन तुमने अपने परंपरा प्राप्त सभी गुरुओं में दोष दृष्टि रख के और उनके प्रति अविश्वास प्रकट कर दिया उस दिन तुमसे तुम्हारा शब्द प्रमाण छीन लिया जाएगा छीन जाएगा तुम्हारी अपनी वाणी के द्वारा तुम देखो शंकराचार्य झूठ बोलते हैं शंकराचार्य ने यहां ये झूठ बोला ये वो किया ये उनकी अकाटता की रक्षा के लिए प्रयास मत करो तुम उनकी दोष दृष्टि रखो और उनहीं की नहीं जितने आचार्य परंपरा प्राप्त सब पर तुमने दोष दृष्टि डाल ली। वैसे भी गिने चुने कुछ बचे हैं और उनकी सब पर तुमने विश्वास अविश्वास प्रकट कर दिया तो तुम्हारे पास क्या क्या शब्द प्रमाण रह जाएगा? वेद को वेद मानने के लिए वेद को धर्म मानने के लिए वेद को अपारुषय मानने के लिए क्या शब्द प्रमाण रह जाएगा? कैसे कहोगे ये वही वेद है जो वहां ऋषियों से चल के आए हैं। कैसे अपना धर्म सिद्ध करोगे? और जब सिद्ध नहीं कर पाओगे तो ये व्यवहारिक ये तो आ नहीं है। फिर आगे और नाश करोगे। इसलिए शंकराचार्य की अकाटता इसलिए परंपरा प्राप्त आचार्यों की अकाटता की रक्षा करनी होगी। अपने शब्द प्रमाण को बचाने के लिए ये इसमें डालो इस बात को। वेद वेद अपश्य है। ये ये गुरु शिष्य परंपरा ने

01:17:02:24 ही बताया। यही चीज यही चीज ना मुझे भी समझ में आई थी। और आर्य मां जी इस चीज को समझते नहीं है कि भाई तुम वेद में तो कहीं स्पष्ट रूप से लिखा नहीं हुआ कि वेद अपष है। बताया किसने? परंपरा प्राप्त आचार्यों ने अच्छा वहां से तुमने वो तो ले लिया कि वेद अपोरष है वो तुम बताते फिर रहे हो लेकिन तुम उस परंपरा को नकार दे रहे हो जैसे कि आपने कहा कि जो परंपरा को नकार दिया तो फिर वेद अपष है ये तुम तक कैसे आया तुम्हें वो सिद्ध करना पड़ेगा तो ये बहुत बड़ा सिद्धांत आपने जो पांच सिद्धांत बताए हैं ये मैं तो कह रहा हूं लिख लेने चाहिए जो भी वीडियो को इसको अभी देख रहे हैं या आप बाद में देखेंगे वो इन पांच सिद्धांतों को अगर लिख के रख लेंगे तो आपको कोई भी डाउट डाउट होगा ही नहीं। कोई संशय होगा ही नहीं। धर्म को लेकर के सनातन धर्म मूल रूप से है क्या?

01:17:52:18 जी। तो कहने का अर्थ यह है कि आपको अपने शब्द प्रमाण की रक्षा करनी होगी। अपने शब्द प्रमाण के प्रति इस प्रकार से अविश्वास अनास्था प्रकट करते रहोगे तो तुम पर ही हावी होगा ना सामने वाला के। वेद का अर्थ तू क्यों करेगा? मैं क्यों नहीं करूंगा? करूंगा मैं वेद का अर्थ निकालूंगा भैंसे की बलि गाय की बलि वेदों से मैं करूंगा ना अर्थ मैं करूंगा मैं निकालूंगा चचेरे में मेरे फुफेरे भाइयों भाइयों से शादी करने का अर्थ मैं निकालूंगा तू क्यों निकालेगा तो आप अपने धर्म की रक्षा नहीं कर पाएंगे अगर आपने अपने शब्द प्रमाण पर हमला कर दिया उसके प्रति अविश्वास प्रकट कर दिया तो इसलिए जो मेरे जीवन में जो शंकराचार्य के लिए जो अकाट्य शब्द आया है ना वो ऐसे नहीं आया कि मैं जो मेरे कुल परंपरा में शंकराचार्य पद की पूजा होती है या किसी कारण से मुझे वो अच्छे लगे और मैं उनके अनुगत हो गया। भाई जब तर्क करने जाओगे ना जब कहीं निकलोगे किसी से सामना होगा ना तब यही सिद्धांत काम आएंगे जिनका आज तुम पीछे पड़े हो यही शंकराचार्य काम आएंगे जिनको आज तुम कह रहे हो कि नहीं यह है वो है और अगर ये लोग

01:19:07:18 जो ऐसा कर रहे हैं प्रश्न शंकराचार्य कोट्य क्यों कह दिया हंसी कर रहे हैं। यह लोग चाहे तो शंकराचार्य के उन वाक्यों का बहुत अच्छा समाधान है जिसको लेकर के लोग आवाजें मतलब ये खिचड़ी पका रहे हैं। साढ़े तीन वर्ष में हिंदू राष्ट्र और ये सब बातों ये जो भगवत आनंद ने अपने YouTube वीडियोस में वही वही अगर चाहे तो इन पंक्तियों की रक्षा वो स्वयं कर सकता है। मुझे मालूम है उसमें इतना सामर्थ है। वो अगर तर्क करने पर आएगा। वो इन सिद्धांतों की ये जो वाक्य हैं शंकराचार्य के इन वाक्यों की रक्षा वो स्वयं कर सकता है। मगर वो क्या कर रहा है? ऐसी चीजों का फायदा उठा रहा है जिस पर कि कोई कुछ बोला नहीं जा रहा है। हालांकि हमने अपने वीडियोस में भी बता दिया। मगर बात यह है कि यदि आपने अपने शब्द प्रमाण को ही खंडित कर रखा है तो अंतत गत्वा आप अपने धर्म के दुश्मन कहलाएंगे। आपको अपने शब्द प्रमाण को बचाना होगा और अगर तुम शंकराचार्य को छीन रहे हो समाज से परंपरा प्राप्त आचार्यों को छीन रहे हो समाज से और तुम स्वयं को सनातनी और हिंदू कहते हो तो दो ना उन्हें दूसरा विकल्प विकल्प तो दो कि ये हमारा शब्द प्रमाण है और वो होना

01:20:22:21 चाहिए शब्द प्रमाण परंपरा प्राप्त आचार्य होना चाहिए लक्षण संपन्न सन्यासी होना चाहिए वैदिक वांगमय का गाता होना चाहिए संशय दूर कर सकने वाला होना चाहिए। दो विकल्प तब तुम्हारे हाथ खड़े हो जाएंगे। अरे औरों की छोड़ो अपनी परंपरा नहीं बता पा रहे हो। और शब्द सनातन धर्म के शब्द प्रमाण तुम हमला कर रहे हो। गुरु क्या है? गुरु शब्द प्रमाण है। शंकराचार्य क्या है? शंकराचार्य शब्द प्रमाण है। वो कह रहा है यह वेद है। यह आया है वहां ष्टि के प्रारंभ से अब तक और तुम अपने शब्द प्रमाण के विरोध में आसानी से आवाजें उठा लोगे नहीं वो अकाट नहीं होते है वो है तो जरा सोचो जब मुस्लिमों से नास्तिकों से विधर्मियों से सामना होगा तब यही शब्द प्रमाण तुम्हारे काम आएगा। जब आर्य समाजियों से बात होती है तो यही तर्क तो प्रस्तुत किया जाता है कि जहां से तुम्हारे पास वेद आए जहां से तुम्हारे पास मंत्र आए वहां से अर्थ भी आया अर्थ क्यों नहीं मान रहे हो अर्थ नहीं मान रहे हो तो वेद क्यों मान रहे हो वेद मान रहे हो तो अर्थ क्यों नहीं मान रहे हो तो अगर तुम उसके

01:21:38:00 प्रति अविश्वास प्रकट कर दोगे अपने अकाट्य उनकी अकाट्यता पर आप जब उंगली उठा दोगे तो आप अपने धर्म का नाश करोगे ठीक है और मैं इसलिए अकाट्य बोलता हूं। मेरे उनकी अकाट्यता के लड़ने का कारण ये है क्योंकि मुझे आगे लड़ना है। तुमसे नहीं लड़ना है। जी मुझे आगे जाना है। आगे युद्ध खड़ा है। युद्ध की घड़ी आगे है। वहां लड़ना है। वहां मैं इन चीजों को अगर सुरक्षित नहीं रखूंगा। अपने शब्द प्रमाण को तो वहां नहीं लड़ पा। तुम लोग इन इस दूर दृष्टि को नहीं देखोगे। तुम्हारे पास इतनी दूर दृष्टि नहीं है ना भगवतानंद के पास है। भागवतानंद तुम्हारे लिए भी मैं कह रहा हूं। तुम्हारे पास भी वो दूर दृष्टि नहीं है। तुम अपने सनातन धर्म के जो साक्ष्य है तुम्हारे पास उन पर हमला कर रहे हो। और जबकि तुम्हारे पास इतना सामर्थ्य है कि जो प्रश्न तुम उठा रहे हो उनका उत्तर तुम स्वयं दे सकते हो।

01:22:36:24 ठीक है? खैर अब इसमें एक बात आती है। एक बात और कर लूं मैं। आप बोल आप बता दीजिए आप कुछ कह रहे फिर मैं आपकी बात पूरी कर हां मैं ये कह रहा हूं कि अभी जो यह हो रहा है ना वेस्ट बंगाल में जो आज की हमारी स्ट्रीम का टॉपिक भी है तो वो इसलिए भी हो रहा है क्योंकि वर्ण व्यवस्था जो जन्म से नहीं मानी लोगों ने उसको जन्म से ना मानकर इन्होंने जो वैकल्पिक रूप से कर दी ये भी बहुत बड़ा कारण है। मुझे याद है जब ये डायरेक्ट एक्शन डे हुआ था तो उसमें एक गोपाल पाठा नाम का एक व्यक्ति था जो कि अपना मेरे कसाई था वो पर वो क्षत्रिय वर्ण से था उस व्यक्ति ने जो है वो अपना धर्म को फॉलो किया और गोपाल पाठा ने एक ही दिन में जब प्रत्युत्तर देना शुरू किया तो जो सामने वाला पक्ष था जिसने दो दिन में कितने नरसंहार कर दिया था हिंदुओं का वो पक्ष रुक गया इवन महात्मा गांधी जी को यहां से जाना पड़ा गोपाल पाठा के हाथ पांव जोड़ने पड़े कि भाई रुक जा मत यह कर। तो गोपाल पाठ ने कहा कि अगर मेरे हिंदू हिंदुओं पे अगर कोई भी विधर्मी अगर कुछ भी करेगा तो मैं यह तब तक नहीं रोकूंगा जब तक मैं 10 गुना मारकाट नहीं कर दूं। तो वो व्यक्ति क्षत्रिय वर्ण का था। हमारे वर्णाश्रम जो है वो जन्म से हटा

01:23:51:25 दिया गया। इसीलिए आज बंगाल की ये स्थिति हो गई है। ये बात समझ में नहीं आ रही है लोगों को। आर एस मांझी क्या कर रहे हैं? ब्राह्मण बना रहे हैं सबको। अब सब सबको तुम ब्राह्मण ही बना दोगे। तो जो क्षत्रिय वाला काम है वह करेगा कौन? क्षत्रिय वाला काम कोई करेगा नहीं। वो तो फिर उसी में क्या होता है कि हिंदू भागने के अलावा कोई रास्ता नहीं रह जाएगा। क्योंकि आपके पास क्षत्रिय है ही नहीं। क्योंकि आपके पास क्षत्रिय कौन है? वैकल्पिक रूप से मिलिट्री और पुलिस वाले और पुलिस वाले किसके अधीन है? सरकार के अधीन। वो तो आएंगे नहीं ग्राउंड लेवल पर रक्षा करने। तो जहां पर जब वो जन्म से अगर कोई क्षत्रिय होगा वही व्यक्ति लड़ पाएगा। गा भी देखा ना महाराणा सांगा सांगा राणा सांगा के लिए कुछ कहा था एक व्यक्ति ने संसद में तो क्या किया उन क्षत्रिय लोगों ने जो जन्म से राजपूत थे उन्होंने उसकी ईंट से ईंट खड़ी कर दी उसके घर को घेर लिया था मैंने वो वीडियो देखे उनमें उन भाइयों की जो क्षत्रिय कुल के थे यहां से पूरा छिल गया पूरे शरीर लेकिन उनके उफ तक नहीं है मुंह पे और वह कह रहे हैं कि हम अभी भी लड़ेंगे हमारे जो राणा सांगा के लिए अगर किसी ने कोई भी गलत बात कही तो हम उसको छोड़ेंगे नहीं तो वो होते हैं जन्म से क्षत्रिय वाले तो वर्ण को जन्म से नहीं मानोगे तब भी यह प्रॉब्लम आएगी तो हिंदुओं को भागने पर खड़ा होना पड़ेगा तो ये एक पॉइंट था अभी एक

01:25:06:28 मोहतरमा है या कौन है ये रिद्धिमा कपूर ये कह रहे हैं कि भारत के कई टुकड़े कर दिए कि हिंदू केवल अकाट्य प्रमाण का प्रत्तर देता रह गया तो ये आपके लिए था जो मैंने अभी कहा है अरे इन ऐसे लोगों को मुझे लेने दिया करिए मेरे मैं ऐसे लोगों के लिए मुझे लगता है मेरा जन्म है भारत के कई टुकड़े हो गए और हम क्या करते क्या बोला इन्होंने? क्या बोला? भारत के कई टुकड़े हो गए और हिंदू केवल अकाट्य प्रमाण से प्रति उत्तर देता रहा। हां, इसमें एक लाइन और जोड़ दीजिए। एक लाइन और जोड़ दीजिए कि हिंदू केवल YouTube पे कमेंट करता रहा। हां हिंदू केवल YouTube पे कमेंट कर रहा है। बिल्कुल। मैं ऐसे ही लोगों के लिए जन्मा हूं ना। वही फैसला ऑन द स्पॉट। जी जी। है ना? भारत के कई टुकड़े हो गए। मगर हिंदू केवल क्या करता रहा? दूसरे की किसी की फोटो दूसरे को बदनाम करने के लिए और वो YouTube पर जाकर कमेंट करता रहा। हो गया दिल इनका नकली है। हां नकली है। दिल गार्डन गार्डन हो गया। खैर खैर जी मैं ये कह रहा था अब एक बात आती है जो हमने अभी बात की ना कि अपने शब्द प्रमाण को आप जो है आघात पहुंचा रहे हो। अपने वैसे ही आचार्य कम है परंपरा प्राप्त। मगर आप जब अपने परंपरा प्राप्त आचार्यों पर अविश्वास प्रकट कर रहे हो

01:26:22:02 तो आप जो है हिंदू धर्म को ही सनातन को नष्ट नष्ट करने पे तुले हो। खैर अब बात आती है कि इसमें एक चीज आ जाएगी कि भाई गुरु अगर कोई ऐसा आचरण करे जो कि हमारे सनातन धर्म के विरुद्ध हो तो हम उसमें दोष दृष्टि ना रखें। ठीक है? तो यहां पर दो बातें हो रही है। इसको समझ लीजिए। गुरु यदि कुछ कह रहा है यह सत्य है और आप उस पर दोष दृष्टि कर रहे हो तो इस इस प्रक्रिया के द्वारा इस गतिविधि के द्वारा आप अपने सनातन को नष्ट कर रहे हो। मगर गुरु ने सिखाया कि ये मैं तुम्हें जो ग्रंथ दे रहा हूं इसमें ये अमुक अमुक जो लाइन है इनका कोई भी वो करे उल्लंघन इसमें जो धर्म है इसका यदि कोई उल्लंघन करे तो वो आचरण अधर्म युक्त ही मानना तो यदि तुम गुरु के वचन वचनों को वचनों के प्रति गुरु के द्वारा दी जाने वाली जो सीख है उसके प्रति जब तुम अविश्वास दिखाओगे तो वहां पर आप सनातन पर प्रहार करोगे। मगर गुरु कह रहा है कि तुम्हारा यह

01:27:37:08 ग्रंथ है और इसमें लिखी हुई एक एक बात सत्य है और फिर भी गुरु का कोई आचरण उसके विरुद्ध जा रहा है तो हां वहां उस आचरण पर आप कह सकते हो गुरु के प्रति अविश्वास नहीं प्रकट कर सकते। अगर करोगे तो सनातन पर आप सनातन को नष्ट करने की तैयारी कर सकते। आचरण वो कह रहा है हां इसमें लिखा है मदिरापान करना मना है ठीक बात है मगर वो मदिरापान कर रहा है वहां पर वो आप गुरु से कह सकते हो कि आप मद्रापान तो वो भी कहेगा करपात्री जी कहते थे कि जहां पर शास्त्रों में और गुरु के उसमें अंतर आ जाए वहां पर शास्त्र को प्रमाण प्रधानता देना मगर वो जो शास्त्र होंगे वो भी तो गुरु से ही मिले होंगे तो उनहीं शास्त्रों को शास्त्र मानोगे ना जो गुरु से मिले हैं या किसी इस्लाम वाले के द्वारा दे देने पर भी तुम मान लोगे कि यह भी शास्त्र है। कुरान को भी मान लोगे शास्त्र है। बाइबल को भी मान लोगे शास्त्र है। तो गुरु के प्रति अविश्वास प्रकट करना एक अलग चीज है। और गुरु का कोई आचरण जो शास्त्र से बाहर जा रहा है उस पर प्रश्न करना एक अलग चीज है। गुरु के प्रति अविश्वास प्रकट नहीं कर सकते। गुरु जिन शास्त्रों के लिए कहेगा

01:28:52:16 कि यह शास्त्र हमारे शास्त्र है वही शास्त्र शास्त्र है। और फिर उन शास्त्रों के आधार पर यदि गुरु का कोई आचरण दहिक रूप से उसके बाहर जा रहा है तो आप प्रश्न कर सकते हो। मगर आप गुरु की अगर गुरु की क्रेडिबिलिटी पर ही उंगली उठा दोगे कि ये गुरु झूठ बोल रहा है। यहां पे वो अज्ञानी हो गया। यहां पे वो मूर्ख हो गया या वो यहां पर लालच वश बोल रहा है। यहां पे वो द्वेष वश बोल रहा है। तो क्या किया आपने? अपने शब्द प्रमाण को खत्म कर दिया। नष्ट कर दिया। फिर क्या होगा कि उसके द्वारा दिया गया जो शास्त्र है। वह भी शास्त्र नहीं है। कैसे है शास्त्र बताओ? तो यह बातें हैं ध्यान रखने की है कि हमें हिंदुओं को यूनफॉर्म होने की आवश्यकता है और हमें हम हिंदू जो बटे हुए हैं उनको एक शत्रु होने की आवश्यकता है। उनको संगठित होने की आवश्यकता है। संगठित होने के लिए हमें चाहिए होंगी। हमें चाहिए होगी संशय से हमारा निवारण। जिन संशयों के कारण हम बटे हुए हैं। संशय क्या है? चार 40 संशयात्मा विनश्यति हम संशयों के कारण बटे हुए हैं। किसी का कुछ संशय किसी का कुछ संशय है तो हम लोग एक हो सकते हैं जब हमारे संशय संशय जो है वो कटे

01:30:07:27 हैं। कुछ कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांतों को लेकर हम एक शत्रु एक मत हो। तो हमारे संशय कटते हुए हमें जो सार्वभौम सिद्धांत है वो कहां से मिलेंगे? गुरु से। गुरु कौन होगा? जो परंपरा प्राप्त हो। ठीक है? तो हमें हमारे सार्वभौम सिद्धांत जिन सिद्धांतों के आधार पर हम हम अपने पड़ोस में रहने वाले हिंदू को अपने साथ खड़ा कर सकते हैं वो सिद्धांत हमें गुरु से मिलते हैं। परंपरा प्राप्त गुरु। तो यह पहला चरण है। आगे आने वाले वीडियो में हम लोग बात करेंगे अह धर्मामीटर के बारे में कि कौन किस प्रकार का हिंदू है, कौन किस प्रकार का आस्तिक है, कौन किस प्रकार का विधर्मी है और उसमें आपको थोड़ी सरलता होगी लोगों को समझने में वो जरूर देखिएगा और इसके बाद बिल्कुल एक प्रैक्टिकली एक योजना है जो हम तीन से चार दिन में आपके सामने प्रस्तुत कर सक कर कर देंगे जिसके द्वारा आप यह समझ पाएंगे कि आप एक सामान्य से सामान्य व्यक्ति होते हुए भी किस प्रकार अपने धर्म की रक्षा करने में निमित्त बन सकते हैं।

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01:31:20:09 जी सनातन शंकर जी बिल्कुल बिल्कुल जो आपने पांच सिद्धांत बताए और जो आप ये सीरीज लेकर आने चाह रहे हैं जो वो भी बहुत इंपॉर्टेंट है क्योंकि आज जो हमारा समाज विघटित हो गया है संगठनों के नाम पर, संप्रदायों के नाम पर और संप्रदाय भी कैसे जो कि गुरु शिष्य परंपरा से नहीं चल रहे हैं। वह स्वषित रूप से ऐसे संगठन बने पड़े हैं। ये बहुत बड़ा कारण है आज जो बंगाल में हो रहा है उसके लिए और जो पांच सिद्धांत हमारे हैं उनको फॉलो नहीं कर पा रहा है हिंदू वो भी बहुत बड़ा रीजन है वर्णाश्रम को आप जन्म फॉलो तो दूर की बात है उन्हें जानता ही नहीं है जानता ही नहीं है वो भी बात है कि सबसे पहले तो पता होना चाहिए कुल मिलाकर के अगर हम अभी आज की पूरी चर्चा का अगर निचोड़ देखें तो हिंदू की जो यह दुर्दशा आज बंगाल में दिख रही जो हिंदू को दबाया जा रहा है उसका कारण है हिंदू जो है बटा हुआ है ब और बटे हुए का कारण है संशय अर्थात उसके पास सनातन के संबंध में जो सार्वभौम सिद्धांत है वो नहीं है और सार्वभौम सिद्धांत ना होने का कारण सार्वभौम सिद्धांत

01:32:36:04 ना होने का कारण क्या है गुरु के प्रति अनभिज्ञता गुरु का अभाव और फिर गुरु में भी गुरु होने पर भी क्या वहां पर विकृति है कि कोई अप्रामाणिक गुरु भी गुरु है ठीक है तो फिर वहां पर क्या है उसका निवारण क्या है कि परंपरा प्राप्त गुरु और जब ये कुछ इस तरीके से जो हमें धर्म प्राप्त होता है परंपरा प्राप्त आचार्यों से तो हमें तीन चीजें मिलती है वो होती है सर्वशक्तिमान ईश्वर, परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म ये तीन चीजें हमें मिलती है और यही वो तीन घटक है जो हमें एक कर सकते हैं। तो ये आज का था थ्योरिकली हमने जाना कि हमारा वैचारिक अप्रोच क्या होना चाहिए सनातन को संगठित करने के लिए हिंदुओं को संगठित करने के लिए। अभी इसके बाद हम एक और वैचारिक लाएंगे एक से दो दिन में और उसके बाद आपके समक्ष प्रस्तुत करेंगे। ग्राउंड रियलिटी ग्राउंड में आप क्या कर सकते हैं? एक सामान्य हिंदू होते हुए अपने धर्म की रक्षा में कैसे निमित्त बन सकते हैं। ठीक है जी सनातन शंकर जी आप कुछ बताएं उसके बाद हम इसको विराम

01:33:51:25 जी जी तो ये बहुत इंपॉर्टेंट है कि सबसे पहले हमें यह समझना पड़ेगा कि हमारे सनातन धर्म के ऐसे कौन से सिद्धांत हैं जिनको के हम यह मानेंगे कि अकाट्य सिद्धांत है। इन सिद्धांतों की कोई काट नहीं है और मोटा-मोटा रूप से जो भी मजहब वाले हैं या दूसरे संप्रदायों को मानने वाले हैं वो भी मोटा-मोटी रूप से इसको मानते जरूर हैं। लेकिन कहीं ना कहीं वो बीच में मिस कर जाते हैं। जैसे परंपरा मिस कर गए या फिर उन्होंने क्या किया? वही पे वही पर वो विरोधी हो जाते हैं। हां वहीं पे वो विरोधी हो जाते हैं। अच्छा स्वषित रूप से वो ये मनमुखी अनुवाद करने लग जा रहे हैं। आचार्य प्रशांत कुछ अलग अनुवाद कर दे रहे भगवत गीता के किसी श्लोक का। आर्य समाज वालों ने तो भगवत गीता के वो 630 श्लोक हटा ही दिए। जहां पर श्री कृष्ण जो है योग की बात कर रहे हैं। परंपरा की बात कर रहे हैं। आत्मा और परमात्मा के विषय में बात कर रहे हैं। वो सब उन्होंने हटा दिए। तो उनको तो बात अलग ही उनको तो कर ही नहीं सकते। तो मनमुखी रूप से अनुवाद किए जा रहे हैं। और फिर कुछ लोग तो मैंने यह भी सुने हैं कि जो कहते हैं कि जी हमारे गुरु का कोई गुरु नहीं है। हमारे गुरु को स्वयं जो ज्ञान है वो ईश्वर ने डायरेक्ट दिया है। ऐसे भी मैंने सुने

01:35:07:00 हैं। जैसे दिव्य ज्योति जागृति संस्थान वाले हैं। उनका उनके गुरु हैं। वो अभी है नहीं दुनिया में। वो 10 साल से कहते हैं शरीर छोड़ के गए हुए हैं। वो वापस आएंगे। तो उन्होंने बोला कि मेरे को मेरे को कहा था कि भैया तुम दीक्षा ले लो। तो मैंने कहा जब आपके गुरु वापस आएंगे मैं तब उनसे लूंगा दीक्षा जब वो जीवित हो जाएंगे तो वहां पर उनके पास भी उत्तर नहीं था क्योंकि उनके उनके गुरु का गुरु कोई है ही नहीं। तो यह बहुत इंपॉर्टेंट बात है। बंगाल की स्थिति का जो कारण है वो यही है कि हम अपने मूल सनातन धर्म से हट गए हैं। हम अपने मूल सनातन धर्म को नहीं पहचान पा रहे हैं। यह बहुत बड़ा बहुत बड़ा रीजन है कि जो बंगाल में स्थिति हो रही है और वर्णाश्रम को आप जन्म से नहीं मान रहे हो। ये भी इसका बहुत बड़ा कारण है। ये ये उसमें ही आ गया ना शाश्वत धर्म में शाश्वत धर्म धर्म तीन घटक बताए जो मैंने पांच सिद्धांत दिए हैं। उसमें शुरू के जो दो तीन सिद्धांत हैं वो आपके प्रैक्टिकली काम ऐसे आते हैं कि जब आप किसी को लेने जाओगे अपने साथ खड़ा करने के लिए कंधे से कंधा मिलाने के लिए कि चलो भाई धर्म की रक्षा करनी है तो अगर आपके पास नास्तिकता का उत्तर होगा तो आप वहां पर अगर वो नास्तिक मिल गया नास्तिक नास्तिकता वहां बोलने वाला मिल गया नास्तिकता से लोग प्रभावित हो रहे होंगे तो आपके पास नास्तिकता का उत्तर होगा

01:36:22:07 क्या उत्तर है अगर वहां पर विधर्मी मिल गया कि हम जो है उस ईश्वर को नहीं मानते जैसे तुम मानते हो जैसे इस्लाम और बाइबल अगर वो मिल गया तो आपके पास क्या उत्तर होगा आपके पास उत्तर होगा ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है तुम्हारा ईश्वर क्या अवतार नहीं ले सकता क्या तो वहां पर आप विधर्मी को परास्त करोगे और अपने लोगों को वहां जो उससे प्रभावित हो रहे होंगे उनको ला पाओगे अपने उस क्या कहते हैं अभियान से जोड़ पाओगे फिर उसके बाद फिर उसके बाद तीसरा फिर तीसरा व्यक्ति कौन मिलेगा जो मतलब यह जो दूसरा चरण है ना उसमें या तो व्यक्ति सर्वशक्तिमान विरोधी होगा और या फिर वो वेद विरोधी होगा। तो वेद विरोधी हो गया ये विधर्म वेद विरोध में सर्वशक्तिमान का विरोध भी शामिल है। तो विधर्मी हो गए। मुस्लिम मिल गए कि हमारे पास तो स्वयं ऊपर वाले का जिब्राइल आया था। उसने भेजा है। तो हमारे पास स्वयं ये आया था। तो उसका उत्तर क्या है? ईश्वर के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणित जिन्हें ईश्वर ने भी ना रचा हो। लो उत्तर नहीं था मुफ्ती जसो के पास हम गए थे जा चुके पूछा था मैंने कि कैसे तोबा डब्बा चब्बा हो गया था हालांकि उस समय

01:37:37:12 तो हम बस एक क्या कहेंगे कि एक प्रयोग करने गए थे प्रयोग कि जो मैं सोच रहा हूं उसकी क्या वो है स्थिति है ना मैंने भी वो वीडियो देखा था मैंने देखा था वो वीडियो तो लास्ट में वो जब उनके पास उत्तर नहीं था तो वह इधर उधर की बात करने लग गए थे फिर पहला प्रश्न मेरा विधर्मियों से ही था जो लोग यह सोचते हैं कि मैं अपनों के पीछे पड़ा हूं। कुछ लोग ऐसे भी है ना तुम हिंदुओं से ही प्रश्न करते हो। जाओ जाकर देखो। पहला प्रश्न विधर्मी से किया था मैंने कि तुम्हारा ईश्वर सब कुछ कर सकता है। हां किसी भी नियम के नीचे नहीं है। नहीं अवतार ले सकता है? नहीं वो तो नहीं ले सकता। तो नियम लागू हो गया। ये पहला प्रश्न विधर्मियों से था। खैर तो ये जो शुरू के तीन सिद्धांत है यही आपको जीत दिलाते हैं। इसी में छुपा है। परम स्वतंत्र मोक्ष सर्वशक्तिमान ईश्वर और शाश्वत धर्म। मोक्ष किससे रिलेटेड है? नास्तिकता के उत्तर से। नास्तिक को आस्तिक कैसे बनाएंगे? तू भी मोक्ष ढूंढ रहा है। तो संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान मोक्ष स्वरूप ईश्वर कौन होता है? मोक्ष स्वरूप। तो संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है। फिर वह भले ही खुद को नास्तिक क्यों ना कहता हो। यह हो गया परम स्वतंत्र मोक्ष। फिर विधर्मी को आप चुप कराओगे।

01:38:52:12 कैसे कराओगे? ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। विधर्मी को नहीं सनातना भाष को। जितने सनातना भाष मिलेंगे वो सब ईश्वर को बाधित करेंगे। ईश्वर यह नहीं कर सकता वो नहीं कर सकता। सनातना भाष तो ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। और फिर तीसरा कौन मिलेगा? विधर्मी विधर्मी क्या करेगा? वेद को भी नकारेगा और सर्वशक्तिमान ईश्वर को भी नकारेगा। तो ईश्वर के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणिक जिन्हें ईश्वर ने भी ना रचा हो। तो तीनों चीजें हो गई। परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत वो सर्वशक्तिमान ईश्वर और तीसरा शाश्वत धर्म। ये तीन चीजें आपको बचाती हैं। और ये तीन चीजें आपको प्राप्त कैसे होती हैं? तो चौथा चौथा आ गया कि परंपरा प्राप्त गुरु परंपरा प्राप्त आचार्य और पांचवा आ गया परंपराओं में परंपरा शंकराचार्य परंपरा शंकर परंपरा तो क्या कहते हैं वो नारायण समारंभा शंकराचार्य मध्यमाम अस्मदाचार्य पर अस्मदाचार्य परताम वंदे गुरु परंपरा तो ये पांच सिद्धांत आपके पास होने चाहिए आप समाज को एक कर पाओगे संगठित कर पाओगे लोगों को अपने साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा कर पाओगे।

01:40:07:25 आप कितने भी सामान्य व्यक्ति क्यों ना हो आप एक क्रांति ला पाओगे अपने समाज में अपने परिवार में अपने रिश्ते नाते अपने कुल खानदान है ना जी सनातन जी पूरा करें फिर आज का हां हां नहीं आपने सारा कुछ ही कवर कर लिया जो बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट थे काफी बढ़िया ये स्ट्रीम रही है जी तो हमें हमें भी काफी कुछ जानने को मिलता है आपके चैनल से और अ जो मेरे मेरे अंदर जो ये आया प्रेरणा आई वो भी आपसे ही आई है। मैं कई बार बोल भी चुका हूं इस बात को कि आपसे बड़ी प्रेरणा मिलती है इस बात को लेकर। चाहे कोई कुछ भी बोले उससे मुझे फर्क नहीं पड़ता। पर विधर्म के अगेंस्ट में और अपने ही हिंदुओं के अंदर जो संप्रदाय हैं उनके अगेंस्ट में बोलने की प्रेरणा मुझे आपसे मिली है। ये बात मैं किसी भी मंच पर बोलने के लिए मतलब वो इस बात का गलत अर्थ निकाल लेंगे कि अपने हिंदुओं में जो संप्रदाय उनके खिलाफ बोलने की? इसको ऐसे बोले का मतलब है संगठन ऐसे बोले ऐसे बोले जो स्वयं को हिंदू कह तो रहा है हां सनातनास नहीं तो ये लोग तो इन लोगों को सन सनातनाभास हां ये सबसे सही वर्ड है सनातना आभास के भैया इस वालों के साथ खड़े होते हैं तो हरे रामा

01:41:22:26 हरे कृष्णा ले चल चल देते हैं उनके सिद्धांतों को देखते हो तो वहां पर आप उसको मूल सनातन धर्म से बिल्कुल अलग पाते हो आर्य समाज के साथ आप चलते हो दयानंद सरस्वती सत्यार्थ प्रकाश की जय हो ऐसे बोलते हुए चलते हो तो आप अपने आप को सोचते हो कि मैं हिंदू हूं लेकिन वहां पर आप ये मूर्खता कर रहे होते हो कि आप परंपरा को भी नकार रहे होते हो अपने अवतारों को भी नकार रहे होते हो राम कृष्ण को भी नकार रहे होते हो और जो हमारे सनातन धर्म में मंदिर में हम पूजा करने जाते हैं उसको भी आप नकार रहे हो मतलब सारा कुछ आपने खत्म कर दिया एक तरह से रामपाल के साथ तो बिल्कुल वो तो बिल्कुल ही आउट ऑफ सिलेबस चीजें हैं तो वो सनातना आभास जो मुझे था और उसके अगेंस्ट में बोलना अच्छा रामपाल के अगेंस्ट में आप बोल दो कोई कुछ नहीं बोलता लेकिन जब इस के अगेंस्ट में बोलोगे तो 10 लोग खड़े हो जाते हैं। आर्य समाज के अगेंस्ट में खड़े बोलो तो 10 लोग और खड़े हो जाते हैं। अरे भाई ये तो हिंदू ही है। हिंदुओं को बचा रहे हैं। क्योंकि उन्होंने क्या किया है? एक ढिंढोरा पीटा है कि हम हिंदुओं के लिए खड़े हैं। जबकि एक्चुअल में वो नहीं खड़े हैं। वो आपके विरोधी हैं। लेकिन उन्होंने ढिंढोरा पीटते हैं। सब लोग इस पर मैं ये कहूंगा जो लोग ऐसा कहते हैं उनको कभी बस इतना नहीं हुआ है कि उनकी जो जो मान्यताएं हैं किसी ने उसको

01:42:38:13 बिल्कुल चरितार्थ रूप से काट दिया हो। बस इतना हुआ है उनके जीवन में जो लोग ऐसे पक्ष लेने आते हैं जैसे मान लीजिए कि कोई मूर्ति पूजक है और जो आपसे ये कह रहा है कि आर्य समाज से क्यों बोल रहे हो? वह भी तो हिंदू ही है। क्या हुआ है? यह वो है। उसको बस यह नहीं पता है कि अगर वह शिव जी का भक्त है तो उनके लिए लिखा हुआ है कि जो है शिवजी तो है। क्या वो है? ऐसे लिखा हुआ है ना। जी। तो उसको ये सब चीजों से वो गुजरा नहीं है। इसलिए वो दूर ही दूर से बस स्थाई स्तर पर। अच्छा रामपाल में क्यों खुश हो जाते हैं? वही लोग जो आर्य समाजियों का विरोध करने पर रामपाल वाले में खुश हो जाते हैं। क्यों होते हैं? क्योंकि रामपाल की चीजें वो देख रहे हैं जो यह वाली चीजें हैं कि अरे वेद को मत पढ़ो और गीता बोलने वाला वो है यह है काल है राक्षस है तुमको खाएगा तब वो तब उनको गुस्सा लगता है। अच्छा कुल मिला के बात यही है कि उनकी किसी मान्यता को प्रत्यक्ष रूप से जब तक कोई आर्य समाजी या इस वाला इस तरह का सनातन भासी क्रॉस नहीं कर जाता है तब तक वो ऐसी बातें आपसे करते रहेंगे मिलीजुली है ना जी बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल चलिए फिर आने का सभी को आभार समय देने के लिए वैभव पालेवाल

01:43:53:15 जी एक प्रश्न बार-बार पूछ रहे हैं कि गायत्री मंत्र वाला पडकास्ट था उसका सही उत्तर क्या है? मांगना चाहिए कि नहीं मांगना चाहिए? क्यों नहीं मांगना चाहिए? जब तक हम व्यवहार को प्राप्त हैं इनका प्रश्न है वह जो मैंने पूछा था ना गायत्री मंत्र में तो मांग रहे हैं। ध्यान है गायत्री मंत्र में तो मांग रहे हैं। तो व्यवहार में है जब तक तब तक हमें मांगना चाहिए और मांगने से मिलता है। यह व्यवहार में सिद्ध है। दो तरह के सत्य हैं। व्यवहार व्यवहारिक सत्य और पारमार्थिक सत्य। पारमार्थिक दृष्टि के अनुसार आपको आपके कर्मों का फल मिलेगा। जी व्यवहारिक दृष्टि के अनुसार आपने ईश्वर से कुछ मांगा है तो आपको मिला है। सिंपल ठीक है। पारमार्थिक दृष्टि से देखेंगे आध्यात्मिक दृष्टि से देखेंगे तो आपने जब राम नाम जपा भगवान से प्रार्थना की तो आपके कर्म अच्छे होने लगे। भगवान का स्मरण करने के कारण आपने अच्छे कर्म किए। उससे आपको अच्छा फल प्राप्त हो गया। यह क्या हुआ? सूक्ष्म दृष्टि से देखने पर। मगर एक व्यवहारिक दृष्टि से व्यवहारिक दृष्टि से क्या हुआ? आपने मांगा आपको मिला तो व्यवहार व्यवहार के अनुसार करना है तो आप मांगिए यही सोचिए कि भगवान दे रहे हैं

01:45:09:03 यही सोचना है जैसे कि पृथ्वी गोल है वैज्ञानिक मान्यता के अनुसार पृथ्वी गोल है परंतु आप व्यवहार कैसा कर रहे हैं जैसी पृथ्वी आपको दिख रही है तो वो सूक्ष्म दृष्टि हो गई कि पृथ्वी गोल है मगर व्यवहार नहीं कर रहे हो ना उसके उसके अनुसार व्यवहार कैसा कर रहे हो कि पृथ्वी जो चपटी है। चपटा मान के व्यवहार कर रहे हो ना? उसी तरीके से व्यवहार क्या है? ईश्वर से मांगा जाता है। ईश्वर देते हैं। यह व्यवहारिक सत्य है। और जी सूक्ष्म सत्य दूसरा है। और ये जो आर्य समाजी हैं या ये जितने भी लोग सनातन वासी हैं ये लोग अपने कस्टमाइज तरीके से कहीं पर केवल व्यवहार को मानते हैं और कहीं पर केवल परमार्थ को और कहीं पर परमार्थ और व्यवहार दोनों को मान लेते हैं। ये अपने तरीके से चलते हैं। इनका कहीं केवल व्यवहार है। कहीं केवल परमार्थ है। अब जैसे परमार्थ क्या हुआ कि अरे वह तो कहता है मैं अजन्मा हूं। हां भाई पारमार्थिक रूप से अजन्मा है ईश्वर। अब वो जन्म कैसे ले सकता है? तो यहां इन्होंने केवल परमार्थ को माना। केवल परमार्थिक स्थिति पर वो कर दिया। परमार्थ के आधार पर व्यवहार को काट दिया। व्यवहार में आत्मा भी तो अजन्मी

01:46:24:25 है। मगर वही तो व्यवहार में जन्म लेती हुई दिख रही है। प्रकट हो रही है। तो कहीं पर वो व्यवहार को मानते हैं केवल। अच्छा व्यवहार को केवल कैसे मानते हैं? अच्छा अच्छा अगर होता तो यहां अभी बचाने क्यों नहीं आ रहा निर्भया केस में? ये केवल व्यवहार कर दिया। अब वो सूक्ष्म दृष्टि छोड़ दी कि भगवान जिसके साथ जो भी आचरण करता है उसके पीछे सूक्ष्मता होती है कि उसका पीछे क्या प्रारब्ध है। उसने पीछे क्या कर्म किए हैं। कैसे अच्छा एक बात सोचने की है कि जिसको ब्रह्म ज्ञान हो वो ब्राह्मण इनके हिसाब से ठीक है? तो उसका यज्ञ पवीत होता है। जिन ऋषियों को इन्होंने वेदों के मंत्र दिए थे ईश्वर ने उनका यज्ञ पवित होकर दिए थे। बिना यज्ञ पवित के दिए थे। कैसे दिए? तो जन्म से माना ना उनको। नहीं तो श्रंखला ही नहीं चलेगी। श्रृंखला ही नहीं चलेगी। बिल्कुल। उनको जन्म से चुना ना कि उनका प्रारब्ध ऐसा था कि उनको मंत्र दृष्टा बनाया जाए। प्रारब्ध था ना मंत्र दृष्टा बनाने के लिए मानना पड़ेगा। नहीं

01:47:40:04 तो यदि वो ऋषियों को मंत्र दृष्टा बनाते हैं हमें क्यों नहीं बना रहे? बनाओ मैं तो कहीं पर वह खाली व्यवहारिक हो जाता है आर्य समाज कहीं वह पारमार्थिक हो जाता है केवल और कहीं वो व्यवहार परमार्थ दोनों को ले चलता है ठीक है ये है तो मुझे लगता है संतुष्टिजनक उत्तर मिल गया होगा और आने के लिए आपका सबका देखने के लिए आभार और हम ये दो तीन वीडियो लाने वाले हैं आज हमने थ्योरिकल हमारे हमारी थ्योरिकल अप्रोच कैसी होनी चाहिए अपने सनातन की रक्षा के लिए सनातन को

01:48:21:01 सनातन को रक्षा करने के लिए और संगठित करने के लिए हमारी वैचारिक अप्रोच कैसी होनी चाहिए इसी में एक वीडियो और आएगा थर्मामीटर वो बहुत रोचक है इंटरेस्टिंग है आप लोग देखिएगा और उसके बाद हम लोग ग्राउंड रियलिटी पे हमें क्या करना है उससे रिलेटेड एक आपके सामने एक चर्चा लाएंगे बिल्कुल पिन पॉइंट कि आप अगर अपने धर्म की रक्षा में निमित्त बनना चाहते हैं तो आप ये तो करिए कम से कम ठीक है जुड़ने के लिए सभी का आभार। सनातन शंकर जी आपको भी बहुत सारा साधुवाद। आपने इतना समय दिया और जय श्री राम। सभी का सभी का आभार। जय श्री राम। जय श्री राम जी।

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 1:48:59 · 19 Apr 2025

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