⬜ Not used yet · 00:00:00:00 – 02:22:36:04 (2:22:36)
00:00:00:00 सभी को जय श्री राम और हिंदू नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं सभी को और नवरात्र की भी हार्दिक शुभकामनाएं सभी को और एक जैसे कोई बड़ी घटना में आप समझ सकते हैं कि अभी तक हमारा जो चैनल का रवैया रहा है काम करने का वीडियो डालने का जो भी है तो वह उसके बिल्कुल विपरीत जाकर के हो रहा है। पर जब वह बात है कि कोई व्यक्ति इस तरह का मिल ही गया है जो आपको अपने आप को बहुत अलग तरीके का प्रस्तुत करता है और ऐसे करता है कि जैसे बस हम ही सबसे बड़े सनकी हैं इस दुनिया में तो ठीक है। हम भी बहुत बड़े सनकी हैं। तो
00:00:59:08 क्या है कि हमने जबकि यह बता दिया था कि भाई अब इसके बाद हमने लाइव के लिए बोल दिया है। आप आ जाइए लाइव और करिए विजय श्री के बारे में शुरू और फिर परिकरों को गलत सिद्ध करिए। है ना? ये सब हमने बोल दिया था। मगर यह सब चीजें मैं समझ रहा हूं क्यों हो रही है। मुद्दे से भटकना है। अब बहुत बातें खोदी जाएंगी कि पुरी शंकराचार्य जी की भविष्यवाणी का क्या हुआ? यह हुआ वो हुआ। सारी चीजें हमने बात की। तो खैर अब देर ना करते हुए अब लाइव रिएक्शन देते हैं फटाफट फटाफट।
00:01:36:22 और क्या हुआ? चार्ज हो रहा है। आपने बंद किया था क्या? ठीक है। [संगीत] तो कुछ समाधि भी जुड़ गए हैं। जय श्री राम सभी को तो भाई चालू करते हैं। प्ले करते हैं। हम पहले वाला संतोष विद एक्सपीरियंस देखते हैं।
00:02:21:27 हां स्पीड देख दो की रखो दो की बस ऐसे कुछ है क्या इसके नीचे वो हां ओके और मैं आपके कमेंट नहीं खाऊंगा थी और और एक क्योंकि तो बोलने में कुछ शब्दों का एक बात और बता कुछ लोगों के मैसेज कर रहे क्या आज आप शिवाश के लाइव चैट में जाकर कमेंट कर रहे तो मैं सोच कर की मैंने शिवश के पीछे वीडियो लाइव चैट में ज्यादा कोई नहीं थी। तो यह सबसे पहले बता रहे हैं जो आज एक लाइव कमेंट में हमें ऐसा प्राप्त हो रहा था और हमारे ऑपरेटर ने वहां पर जो सूझबूझ दिखाई सूझबूझ दिखाते हुए कहा कि फेक आईडी है। बिल्कुल सही कहा क्योंकि लाइव कमेंट में ऐसा हो रहा था कि भगवतानंद की तरफ से उसमें कहा जा रहा था कि लिंक दो और ऐसा
00:03:37:01 है वैसा है। ठीक है? तो वो जो है वहां पर हमारे ऑपरेटर ने यह सचेत कराया था लोगों को कि यह फेक आईडी है। तो इन्होंने आकर के वो कमिट कर दिया। मतलब स्वीकार कर लिया कि हां इनकी आईडी नहीं है। चलिए मैंने देखा और आप आप लोगों को ये जो मैं देख रहा हूं इनकी आवाज आ रही है क्या? कोई कमेंट करके बता दे जो मैं देख रहा हूं वो आवाज आ रही है आपको?
00:04:24:21 करना चाहते हैं किसी भी व्यक्ति के लिए या किसी महापुरुष के किसी के हो स्वामी हो या कोई हम भी यही कह रहे थे इन्होंने शुरू में अपने वीडियो में कहा कि किसी भी जो संत है ऐसा है उसके लिए गाली का उपयोग ना करिए और विरोध करना है विरोध करिए पर गाली का उपयोग ना करिए। हम भी यही बात आपको समझा रहे थे ना जो अभी आप अपने फॉलोअर्स को समझा रहे हैं। आपने यही किया है। इसीलिए हमने आपसे निश्चित दूरी बनाई थी। विरोध करते अगर आप जहां पर आपको शास्त्रोचित उनका आचरण नहीं दिख रहा है। ठीक है? तो कोई दिक्कत ना होती। केवल विरोध करते। शास्त्रोक्त खंडन करते जो आपका पक्ष है वो खंडन नहीं। खंडन नहीं शास्त्रोक्त पक्ष आप अपना रखते तो कोई दिक्कत नहीं थी। आज आप वही बात बता रहे हैं लोगों को जिस बात के कारण हमने आपसे निश्चित दूरी बनाना स्वीकार किया था। ये नहीं इसको मैं कोई नहीं पता नहीं की
00:05:31:22 मैं तो सुनते रहूंगा सामने वाले ने कहा कि है तो मैंने देखा एक तो लगभग किसी लगभग तीन घंटे का है और ये कहां से है तो पौने आती घंटे तो ले लिया तो इसने सोचा कि बना अभी ये बात कर रहे हैं कि तुमने इतना बड़ा मतलब उसकी ओर एक टोंट कस रहे हैं कि तुमने इतना बड़ा वीडियो क्यों बनाया क्या कहते हैं उनके इस वीडियो पर उस पे आ रहे हैं
00:06:13:15 1.5 है इसकी स्पीड है 1.5 कोई और नहीं होगा मैं कृपा है ऐसी कृपा करने वाले लोग संसार में कम मिलते है जो अपने जीवन के समय को देते हुए और आप सब को शास्त्र की एक अद्भुत की अवस्था है शिवा को धन्यवाद देना चाहेंगे की उन्होंने इतना विस्तृत समय निकाला उन्होंने जीवन से जुड़े बहुत से पहलुओं पर चर्चा की और पहलुओं पर चर्चा करने के लिए ऐसी ऐसी शब्दावली का ऐसे प्रमाणों का उन्होंने प्रयोग किया प्रमाणों को हम अभी तक हम्म मुझे नहीं पता था कि ये सब है तो अब यहां पर यह प्रमाणों की बात कर रहे हैं। उस पर ध्यान दीजिएगा। यह कह रहे हैं कि ऐसे ऐसे प्रमाणों के आधार पर जो है बात की है शिवश द्विवेदी जी ने। उन्होंने बड़ा समय निकाला बात करने के लिए। तो अगर ये समय निकालने में एक तंज है अगर ये टोंट है कि समय निकाला तो ये लोग ये पूरी के शंकराचार्य जी और आप जिसजिस की समीक्षा करते वो सब कह सकते हैं कि भाई तुमने तुम्हारा धन्यवाद जो तुमने हमारे लिए समय निकाला समीक्षात्मक रूप में ही सही मगर तुमने समय निकाला तो मैं जीवन ऐसा आ गया मेरे जीवन ऐसा आ गया तो फिर मैंने सोचा शिवा मेरे जीवन मुझे नहीं पता बच्चा मेरे जीवन का होता तो मैं शिवा जी का जवाब देता हूं कि बात
00:07:28:28 आपको अच्छा सबसे पहले एक बात देख लीजिए आप लोग कि जब तक मैं विनम्र रह रहा था और मेरा जो टेक था इनके लिए तो जब तक मेरा वैसा था हम्ल वाला मामला तो तब तक ये बड़े तूफान मेल की तरीके से बात कर रहे थे। है ना? और अब देखिए इनका रवैया पूरा चेंज है। यहां तक कि जो वो बना है ना थंबनेल पहले क्या बना था? जब तक तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं। और अब थंबनेल क्या बना है कि नारी के सम्मान की आड़ में ऐसा करने मतलब थोड़ा उसमें सुद्रीकरण हुआ। चलिए अच्छा है। मैं इसके लिए धन्यवाद देता हूं इनका कि इन्होंने अपनी शैली में थोड़ा सुधार किया है। चलिए शास्त्र के कुछ नियमावली याद रखे हैं और नियमा में सा और असाध्य रखा गया है। तो शास्त्रार्थ में किसी भी ऐसे पक्ष हो पत्र हो और एक जानवी वाला गाना उसका शेयर कर ताकि दूसरा को अरे भैया मैं सुनाऊंगा और चिंता मत करो वो सब होगा की कृपा के बारे में ऐसे महापुरुष तो लाखों में एक होते है और चिंता मत करो वो सब होगा शासन श्री कृति के बारे में ऐसे महापुरुष तो लाखों में एक होते है
00:08:44:02 और जो शास्त्र की विभाग की बात कर रहा हूं तो शास्त्र की जो लिखा है उसमें यहां भी शास्त्र का नाम भी मालूम पक्ष विपक्ष ही हो उसमें क्या है यहां पर तथ्य को सामने प्रधानता देते हैं तो कक्ष चर्चा करते है वहां हारे कोई भी चाहे जीते कोई भी उसका मतलब नहीं होता तो जहां पर पक्ष और विपक्ष की जय पराजय प्रधान हेतु नहीं होते अपितु तथ्य का निर्णय जहां पर प्रधान हेतु होता है उसको कहा जाता है वाद स्किप करिए वादी और वादी का उत्तर देने वाला होता है वादी थोड़ी बहुत गाड़ियों की आपको रिसर्च पड़ सकती है तो इसलिए उसको आप इग्नोर करेंगे उसकी आप करेंगे तो यहां पर यथार्थ की करने का प्रयास होता है यथार्थ वादा यहां पर यथार्थ की सिद्धि करना ही कक्षा का प्रधान उद्देश्य होता है उसको शास्त्रों में वाद कहा जाता है फिर उसके एक वाद के ही आगे एक और उस भावना सम्मिलित हो जाती है। त की संसद के एक प्रबल भावना यह हो जाती है की तथ चाहे जो लेकिन कम से कम हमारा पक्ष जो है हो तो यहां पर उसको कहा जाता है त की संसि के माध्यम से स्वपक्ष मंडल जल इतने वैसे तो इतने अब ये शास्त्रार्थ की विधा के बारे में बात कर रहे हैं और कि वो ऐसा होना चाहिए वैसा होना चाहिए तो या फिर वो एक शास्त्रार्थ को के बारे में ही बात करते हुए
00:09:59:03 सारी व्याख्या इनकी चल रही है। तो अगर उसमें काफी लंबा विश्लेषण है। मुझे समझ शायद आगे बताएं कि क्या क्यों ये पक्ष रख रहे हैं जहां पर वादी का पक्ष बन जाए वहां होती है विदंडा खंडन प्रधान तुमने जो कह दिया बता तीसरा होता है विकंडा की जहां पर अपना कोई पक्ष नहीं तुमने जो कह दिया उसका विरोध करना ही जहां पर प्रवादी का पक्ष बन जाए वहां होती है विदंडा खंड प्रधान जहां अपना कोई पक्ष नहीं तुम जो बोलोगे उसी का खंडन किया जाएगा इस भावना से जहां पर जो कोई व्यक्ति प्रस्तुत होता है उसको कहते है तो बाद क्या है यथार्थ यथार्थ प्रधान प्रधान पक्ष मंडने प्रधान जलपक्ष मंडल प्रधान ये स्थान इत्यादि भी होते हैं इसमें अनेक भेद होते हैं तो ये सब आते है उसमें स्थान प्रतिपत्ति अपतिपत्ति ये सब छ और 16 ये सब भेद होते है तो ये सब का बहुत सुंदर अनुभव उदाहरण आपको देखने को मिले हमारे वक्तव्यों में आपने कई बार स्वामी के द्वारा सुना होगा अब एक बात देखिए कि जब बात हो रही है इन्होंने कहा कि जब हम सामने वाले व्यक्ति का विरोध ही करना है। कारण कोई भी हो इन्होंने कहा उसको कहते हैं वितंडा। ठीक है? तो इन्होंने
00:11:14:12 जो मेरे ऊपर व्यक्तिगत प्रहार किया कि तुमने वहां फुचके खाए ये किया वो किया। ठीक है? वो क्या था? भाई तुम्हें अगर यथार्थ पे ही बात करनी थी तो तुम व्यक्तिगत चीजों पे क्यों गए? कि तुम फुचके खाते हो, पाउडर पी कर के वो बनाते हो, यह करते हो, वो करते हो। तुम तो सिद्धांत पे बात कर रहे थे ना तो ये क्या थी वितंडा ना मैं ऐसी कौन सी बात कह रहा हूं जो तुम्हारे अनुसार अनुचित है मेरी कही हुई बात पर तुम्हें प्रहार करना था तुमको तुमने अपनी बात को बड़ा दिखाने के लिए तुमने क्या किया कि मेरे को ही गलत साबित करना है कि मेरा जो शरीर है मेरा जो अवयव है जीवन है ये है वो है वो गलत है व्यक्तिगत हुए तुम जिन सिद्धांतों पर चर्चा हो रही थी उस पर बात ना करके तुम व्यक्तिगत हुए कि तुम्हारे जीवन में यह हो रहा है वो हो रहा है और आगे तुमने ऐसे व्यक्ति के जीवन के बारे में जब बात आई तो बड़ा कन्वीनिएंट वहां पर हुए हो मैंने देखा है वो चलो चलते हैं आगे वो अंश देख लिया है मैंने सुनिएगा सुनिए जिस पहले मैं एक बात बता दूं जिस स्क्रीन रिकॉर्डिंग को दुष के आधार पर दुष्प्रचार किया जा रहा है मटका
00:12:29:25 मटके परिकरों का गुरुदेव के परिकरों का वो स्क्रीन रिकॉर्डिंग जगतगुरु शंकराचार्य जी ने आज से दो वर्ष पूर्व ही देख ली थी लगभग अगर मैं गलत नहीं हूं तो इतने समय पूर्व ही देख ली थी और उसके बाद उन्होंने कहा था कि मेरे जो परिकर हैं हमारे जो परिकर होते हैं दिव्य दिव्य संतों के परिकर होते हैं और मेरे जो परिकर हैं वो देवताओं के समान ही हैं। ठीक है? हां और दूसरी बात अगर व्यक्तिगत जाने की बात है तो व्यक्तिगत तो कौन जा रहा है वह आप समझ सकते हो। पहली बात तो व्यक्तिगत तुम गए कब जब तुमने विजय श्री के पूर्व के जीवन के बारे में बात की ये ऐसी थी वैसी थी है ना तुमने तुम व्यक्तिगत वहां पर गए और फिर तुम निराधार रूप से व्यक्तिगत हुए मटके परिकरों के लिए अगर तुम्हें आकर के विरोध करना है तो ठोस प्रमाण लाओगे ना कि आधी अधूरी चीजों पर ही बात करने लगोगे और जब तुम्हारे पास ठोस प्रमाण नहीं है तो तुम प्रमाणों की बात कर रहे तुम्हारे व्यक्तिगत जीवन पर बात हो रही है तो चलो ने बड़ी सुंदर बात कही थी कलंब नामक ग्रंथ विधा में इस गुण में हमारे जो संस्था करेंगे हम तो शत्रु है भी नहीं शिवा के महाराज बड़े गुण है
00:13:44:26 और शिवश के गुण में हमारे जो शिवश भैया है और बात मेरी आप मानिए कि इस विवाह में इस गुण में बहस में जीना चाहे तो उसको क्या करना चाहिए जी ने बड़ी सुंदर बात कही थी कलम नामक ग्रंथ की अगर कोई व्यक्ति किसी बहस में जितना चाहे तो उसको क्या करना चाहिए और बात मेरी आप मानिए कि इस वि में इस गुण में हमारे जो शिवश भैया शिवा जी महाराज बड़े गुरु है और शिव जी की प्रतिभा की तो शत्रु बड़ी प्रस्था करेंगे हम तो शत्रु है नहीं शिवाने योग्य नहीं उसे शत्रुता ले सके तो क्या है उसमें हमें ना तुम्हारी शत्रुता पसंद है ना चाहिए और ना तुम्हारी मित्रता चाहिए ठीक है जो योग्यता की तुम बात कर रहे हो क्योंकि हमने तुम्हारे प्रति जो भी वीडियोस बनाए थे उन सब में मैत्रीपूर्ण भाव के साथ ही उसका समापन किया था कि चलो दूर ही से ही दूर ही दूर से जो कर रहे हैं वो करते रहे और बहुत बार मैंने भाव प्रकट किया था कि मत मत करो मत करो मत करो मत बढ़ाओ इस मामले को अभी भी बढ़ा रहे हो ठीक है और बात योग्यता की है तो भैया हमारी जो बात कही थी ना तुमने कि वो तुम्हारी अलग से स्वतंत्र पहचान क्या है हमारी बहुत बड़ी पहचान है तो भाई हम योग्य नहीं है किसी भी कार्य के योग्य नहीं है हम बस इतने योग्य हैं
00:15:00:04 कि हम जगतगुरु शंकराचार्य सनातन धर्म की जो सर्वमान्य सार्वभौम गद्दी है गुरु गद्दी उसके हम एक बहुत छोटे से कचरे से जैसे कचरे के ढेर में भी उसका कोई बहुत सबसे छोटा हिस्सा होगा उसमें हम है ठीक है बस यही है और कोई हमारी योग्यता नहीं है सबसे बेकार वाला कोई भक्त हो सकता है इस संसार में इस पूरी सृष्टि में वो हम है तो हमें और कोई योग्यता चाहिए भी नहीं तुम्हारी शत्रुता और तुम्हारी मित्रता अब तुम ही रखो। चलो मैं जो दीक्षित जी ने कहा है श्लोक निकाल लेता हूं। जो व्यक्ति सामने वाले को पराजित करना चाहे चाहे अपना पक्ष उस व्यक्ति का दो कौड़ी का हो चाहे उसके बुद्धि घास शक्ति हो लेकिन फिर भी वो जीत सकता है। मतलब आपको बस में जीतने के लिए बहुत ज्ञान की आवश्यकता नहीं है। आपके पास प्रमाण की भी आवश्यकता नहीं है। जो व्यक्ति बस में जीतना चाहे उसको किसी ज्ञान बल की आवश्यकता किसी त प्रमाण की आवश्यकता नहीं है। क्या करना है? सबसे पहला नियम है दीक्षित जी कहते है नभव्यम उसको डरना नहीं है तो वाद विवाद में जो व्यक्ति जितना चाहता है उसके पास ज्ञान बल कम है उसके पास प्रमाण बल कम है उसके पास हेतु का अभाव है उस स्थिति में भी वो व्यक्ति जीत सकता है क्यों न्य उसको डरना नहीं है फुल कॉन्फिडेंस बनाना है सामने वाले को बदल देंगे डरना नहीं है सबसे पहले आपने घबराना
00:16:15:13 नहीं आपके पास ज्ञान नहीं है आपका प्रमाण नहीं आप गिर जाइए बस फिर नो धव्यम आपको कुछ समझना नहीं है सामने वाला का तो आप समझाएंगे और आप समझेंगे तो क्या पाएंगे उसके पास प्रमाण बात मानी पड़ी इसलिए सबसे पहले समझदारी को बाहर निकाल दीजिए क्यों अगर आप समझने नहीं आएंगे तो आप अपने जिनको सिर्फ कैसे करें? आप कैसे करें? अच्छा ये लैपटॉप की आवाज सुनाई दे रही है ना? लैपटॉप में जो बातें चल रही है जो ये भगवत आनंद बोल रहे हैं समझ में आ रही है ना मैं सुन रहा हूं वो आप लोगों को भी सुन सुनाई दे रहा है कि मुझे आपको समझाना पड़ेगा।
00:16:50:13 हम कोई कमेंट करके बता दे। अच्छा ठीक है। बढ़िया है। करने के लिए करने के लिए समझदारी से काम नहीं लेना है। नासम से काम लेना है। सामने वाले व्यक्त अब ये आरोप लगा रहे हैं कि तुमने सामने वाले की बात को समझने का प्रयास नहीं किया क्योंकि तुम्हें इससे मतलब नहीं था। तुम्हें तो जीतना था वो कोई शास्त्र का प्रमाण रखते हुए। पहली बात तो यह है कि शास्त्र का प्रमाण रखने की आवश्यकता। पहली बात तो तब है जब कहीं पर मामला अटके कि तुम्हारी कोई कही हुई बात जो है मैं स्वीकार नहीं कर रहा। जैसे मैं कह रहा हूं कि एक हम लोग अगर वैदिक हैं दोनों और मैं कह रहा हूं कि सभी के मन में जो है ये प्यास है। है ना कि उसको जो है कभी ना मरने की प्यास और सदैव आनंदित रहने की प्यास ये जब मैं कह रहा हूं सामने वाला कह रहा है नहीं है। हम् तो हम शास्त्र बताएंगे है ना कि शास्त्र में सतो सदगमया तमसो माग मृत्यु मृतमया है ना तो अगर ऐसी कोई बात है कि दोनों वैदिक है दोनों वेदों को मानने वाले हैं और जब मैं कह रहा हूं कि मैं तुम्हारी इस बात से सहमत क्यों हूं जब मैं ऐसा कह रहा हूं तब शास्त्र को बताने की आवश्यकता है मगर मैंने दिन में भी बताया था कि यह शास्त्र को
00:18:05:18 क्यों रख रहे हैं अब कोई एक आध जगह पर आ गया बहुत प्रेम है उस वक्तव्य से बहुत जैसे मैं कर्मवादी कारस्ते मा फलेशु कदाचना या असतो मा सद्गमया या फिर आपका रामो विग्रह धर्म ये सब मेरे जो हृदय से लगे हुए शास्त्र वचन है ठीक है मगर क्या है कि अब ये तो मोबाइल में देख रहे हैं तो इसका मतलब जाहिर सी बात है कि भैया इनके ऐसे नहीं है कि हृदय से लगे हुए वचन हो शास्त्र के ढूंढ के निकाल के बोल बोल रहे हैं। ठीक है। अच्छी बात है। बोल लीजिए कोई बात नहीं। उससे कोई दिक्कत नहीं है। मगर अभी एक इनका कहना यह है कि जो व्यक्ति को केवल बहस जीतनी होती है उसका पहला कर्तव्य है कि वो कॉन्फिडेंट लेवल में रहे। तो इनकी पिछली लाइव देख लीजिए आकर के कॉन्फिडेंट में थे कि नहीं? हां। अभी थोड़ा ये हंबल दिख रहा है। जैसा मैं जैसा मैं शुरू के तीन लाइव वीडियोस में दिख रहा था और ये अपने हर वीडियो में जो है ताबड़तोड़ तूफान मेल कालका बेल बने हुए थे। अब अब यह जो है हंबल हुए हैं। है ना? तो पहली बात कॉन्फिडेंट में कौन था? और दूसरी बात सामने वाली की कोई बात समझनी नहीं है। तो मैं कह रहा हूं कि तुमने जो है विरोधाभासी वीडियो डाला मेरे मेरा विरोधाभासी।
00:19:20:19 तुम कह रहे हो कि नहीं वह उस वीडियो में मिलने वाली सूचना विरोधाभासी है तो इसका मतलब तुम्हें मेरी बात नहीं समझनी है। तुमने आज एक कम्युनिटी पोस्ट डाली है कि उसने पूरा चैट नहीं दिखाया। पहली बात तो तुम मध्यस्थ के द्वारा बात क्यों कर रहे हो? क्या डायरेक्ट बात कर यदि तुम्हें बात करनी है इस तरह से मैसेजिंग के द्वारा तो तुम किसी और को क्यों भेज रहे हो? क्या कोई भय है? पहली बात। दूसरी बात यह है कि जो बाकी की चैट थी वह आवश्यक नहीं लगी मुझे क्योंकि मैंने पहले ही वक्तव्य से यह बता दिया जिससे सिद्ध हो रहा था कि मैं नहीं समझ पाया कि वो जो संदेश था जो गौरी ने भेजा था वो बहुत इधर की बात उधर करती है उसकी आईडी है शायद दसनामी दसनामी सेव से शैव के नाम से कभी कुछ कहेगी मुझे आकर के तुम्हारे बारे में कभी इधर की बात उधर ये ये सब चीजें वो किया करती है ना और वह लड़की ही है, मातृ शक्ति ही है। यह भी मुझे नहीं पता है। वह शायद आवाज कन्वर्ट करके बोलती है। क्या है उसका उद्देश्य? ये सब चीजें भी नहीं पता है और वह अपने आप को कहती है कि पूरी के शंकराचार्य जी मेरे जो है दादा हैं यह है वो है फिर वो जो है जहां पे नहीं
00:20:35:27 बोलना चाहिए जिसके पक्ष में ऐसी जगह पर जहां वो पूरी के शंकराचार्य जी का ही विरोध कर रहा है कोई व्यक्ति तो वहां पर उसका पक्ष भी लेती है समय पे अपनी इच्छा अनुसार अपना मत बदलने लगती है उसके बाद भाई मेरी स्क्रीन अगर चैट है पहली बात तो तुम कहीं पर फोटो खींच के उसको क्यों भेज रही हो हां अच्छा अच्छा दूसरी बात ये है मैं सीधे विषय पर आ जाऊं कि इनका कहना था कम्युनिटी पोस्ट में कि शिवश ने पूरी चैट नहीं दिखाई भाई आज भी बात हुई है उससे तो वो भी दिखाऊं क्या जितनी चैट आवश्यक है यह बताने के लिए कि मैं नहीं समझ पाया था कि संदेश यह संदेश भगवतानंद की तरफ से आ रहा है और उतना पर्याप्त था जब मैं यह बोल रहा हूं कि यदि सत्य के पक्ष रहो तो सामना करो प्रत्यक्ष वार्ता करो। इतने से ही प्रकट हो गया कि मैं ही समझ रहा हूं कि तुम भगवत आनंद ये जो संदेश आया वो भगवतानंद के द्वारा भेजा गया। क्यों? क्योंकि सर्वविदित है कि भगवतानंद ने तो मुझे स्वयं लाइव के लिए कहा है। प्रस्ताव दिया है। तो मैं भगवतानंद को ये क्यों कहूंगा सत्य के पक्ष पक्षधर हो तो लाइव आओ। तो उसी वक्तव्य से सिद्ध हो गया। अच्छा दूसरी बात क्या है? उसके बाद उसने कुछ आगे और भेजा था इनका भेजा हुआ कि भाई प्रत्यक्ष
00:21:51:01 चर्चा के लिए ही तो आ रहे हैं। मगर तुम कुछ उसमें फिर आगे बात लिखी तो मैंने उसमें जवाब दोबारा दिया उससे भी यही सिद्ध हो रहा है कि मैं नहीं जान रहा हूं कि यह संदेश भगवत आनंद की तरफ से आ रहा है। मुझे ये लगा था कि यह संदेश जो आ रहा है पहली बात तो यह है कि कितने संदेश व्यक्ति देखेगा दिन भर में। तो अगर गौरी वास्तविकता में कोई मध्यस्थता स्थापित करना चाहती थी तो कॉल कर लेती मुझे समझाती भगवतानंद है वो आपको यह संदेश भेज रहे हैं। अच्छा कोई बात नहीं अब क्या है कि जब ये मैंने जो लास्ट में जो संदेश लिखा वो क्या लिखा कि भैया पहली बात यह है कि अगर तुम भगवतानंद की बात कर रहे हो मतलब मुझे अभी भी लग रहा है कि वह जो वो जो व्यक्ति है जो यह कह रहा है कि हमने तो तुम्हें लाइव ही बुलाया था। अभी भी मुझे लग रहा है वो कोई थर्ड पर्सन है। अभी मुझे नहीं पता चला कि भगवतानंदी है। इसलिए जब मैंने अपनी वीडियो जब मैंने उसको उत्तर लिखा तो मैंने यह सोचा मुझे ये लगा कि यह व्यक्ति मुझसे WhatsApp के माध्यम से लिख लिखकर चर्चा करना चाहता है। और जब मैं प्रत्यक्ष वार्ता के लिए कह रहा हूं तो ये भगवतानंद का नाम दिखा रहा है कि तुमको बुलाया तो था भगवतानंद ने। क्यों नहीं गया? ऐसा कई लोग करते हैं मुझे। आदत पड़ चुकी है ये ऐसा समझने की। करते हैं वास्तविकता में कि
00:23:06:07 जब क्या कहते हैं? पहले तो मुझसे चर्चा करने का प्रयास करेंगे WhatsApp पर ही और जब मैं कहूंगा लाइव आ जाओ तो वह किसी ऐसे व्यक्ति का नाम लेंगे जैसे वो आज अलंकार समाज का जो वो है अंडर कवर्ड गुंडा है ना तो फिर कहेंगे जब चर्चा करने वाली आएगी तो उसने बुलाया तो था अंडर कवर्ड गुंडे थे क्यों नहीं गए तो ऐसा ही मुझे यहां पर लगा कि यह व्यक्ति भी यही कर रहा है कि भगवतानंद ने तुम्हें बुलाया तो था क्यों नहीं गए तो मैंने क्या नाम मैंने क्या वक्तव्य दिया वहां पर उसको मैंने कहा कि भाई जो व्यक्ति गुरु निंदा कर चुका है ऐसा ऐसा कर चुका है उसके मंच साझा करने में दिक्कत है और भी कई प्रॉब्लम्स है वहां पर ठीक है मंच साझा करने में और उसके बाद फिर मैंने कहा अगले पैराग्राफ में कि तुमको जब तुमको जब प्रत्यक्ष आकर के वार्ता नहीं करनी है तो तुम वार्ता कर क्यों रहे हो जब तुम्हें वार्ता नहीं करनी है प्रत्यक्ष आने के नाम पर किसी और को भेजना है थर्ड थर्ड पर्सन को क्योंकि मैं नहीं समझ रहा हूं कि ये भगवत आनंद है तो मैं यहां ये लिख रहा हूं। तुमको जब वार्ता करनी नहीं है वो वार्ता कर क्यों रहा है? यही मैंने वहां लिखा था। तो इससे भी सिद्ध होता है कि मैं समझ रहा था कि किसी थर्ड पर्सन का मैसेज है जो WhatsApp के माध्यम से मुझे जो है वो करना चाह रहा है। चैट
00:24:21:10 परेशान करना चाह रहा है। और जब प्रत्यक्ष आने की बात हो रही है तो फिर वो कह रहा है भगवतानंद के पास क्यों नहीं गए? यह चर्चा थी। ठीक है? तो जब तुम मेरी बात को समझ नहीं पा रहे हो। तुम विरोध कर रहे हो। धड़ल्ले से कम्युनिटी पोस्ट डाल रहे हो। और अभी बात आएगी आगे इसमें जो जो मैंने क्योंकि मैंने सिद्ध किया है तुम कहांहां मेरी बात को समझ नहीं पाए हो तो वहां ध्यान रखना कि यह जो मंत्र तुमने बताया तुमने जो शास्त्र का प्रमाण बताया श्लोक बताया है ये तुम्ही पर लागू हो रहा है क्योंकि तुमने मेरी बात को नहीं समझी ठीक है चलिए आगे चलना है उसके बाद से समझदारी प्राप्त करना चाहता है उसको डरने की आवश्यकता है कुछ समझने के आवश्यकता नहीं क्या करना है वाचा अब यदि आप अपने विपक्षी की बात को सुनेंगे तो कहीं ना कहीं आपको बुद्धि आएगी सामने वाली बात कह रहा है
00:25:15:14 इसको समझना नहीं तो आपको सुनना बंद करना पड़ेगा किसी ने कहा नभ्यम तो इन्होंने कहा कि सुनना नहीं है तो इन्होंने मेरी बात कहां सुनी ये तो खुद कह रहे है कि इनके समर्थकों ने अंश काट काट कर दिया तो इसका मतलब क्या है कि इन्हें मेरी बात सुननी नहीं है जो विरोधाभासी कुछ चीजें तत्व मिल रहे हैं उसप वीडियो बनाना है तुरंत लाइव करना है। खुद ही ये जो प्रमाण दे रहे हैं शुरुआत में इस प्रमाण ये सारे जो वक्तव्य है इनहीं के ऊपर लागू हो रहे हैं। चलिए और हां वो जो मैं बात बता रहा था कि ये प्रमाण दिखा क्यों रहे भाई जब तुम कोई बात बोलोगे और उसमें मैं यह कहूंगा कि नहीं नहीं हम आपकी इस बात को नहीं मानते। क्यों मान ले तब आप प्रमाण दिखा दो। तो प्रमाण ज्यादातर इसलिए दिखाए जाते हैं कि अपना पल्ला हैवी दिखाने के लिए। कि देखो हम शास्त्र के कितने बड़े ज्ञाता है। हमें शास्त्रों को मालूम है। भले ही उस बात का कनेक्शन हो रहा हो वहां पे कि नहीं हो रहा हो मगर हमें प्रमाण दिखाने हैं जबरदस्ती। ठीक है?
00:26:13:22 अरे वो काम करेगा। कमाना है तो भाई साहब ये पहला रुको दूसरा भी बताओ। आपको ना तुम्हें समझना है ना सुनना है ये बात तुम पे लागू होती है लेवल पर काम करने का भैया के लगभग 78 के लेवल पर काम करने का दावा कर रहे हैं ऐसे जी के वक्तव्य में आपको कई बार बोला जहां मैं जो बात कह रहा हूं बात को पूरी तरीके से सुने बिना ही आप अपनी बात पूरी नहीं कर यही बात तुम्हारे ऊपर भी लागू होती है तुम्हारे वक्तव्य ये बात तुम पर ही लागू होती है कि मैं जो कह रहा हूं उसको सुनना नहीं है, समझना नहीं है। सुनना नहीं है। तो यह तो तुमने ही कह दिया कि मैंने पूरा वीडियो नहीं देखा था। मेरे समर्थकों ने जो मुझे छोटे-मोटे अंश देगी वो देख भेजे वो देखा था। तो तुमने ये प्रूफ करा है कि तुमने मेरी बात सुनी नहीं है और समझी भी नहीं है। ये भी मैंने प्रूफ करा है। आगे देखो तुम क्या जवाब देते हो? वो जो मैंने तुमको बताया है। उसके बारे में क्या जवाब देते हो? देखते हैं। वही सर क्या हुआ? शिवास जी आपको सिखाना चाह रहे हैं कि आप करते हो। ना डरना है ना समझना है ना सुनना है बोलना है तो उसे जो सभा में विजय प्राप्त करने की इच्छा रखा है ऐसे व्यक्ति को डरना नहीं है ना कुछ समझना है की बात सुननी है तुरंत बोलना है नहीं ऐसा नहीं ऐसा
00:27:29:21 नहीं क्या तो पहले क्या समझे थे कि पूरी के शंकराचार्य जी ने चांदी का छत्र और सिंहासन त्याग रखा है तो वहां वो जो सम्मेलन हुआ था जिसमें वो बैठे थे अन्य शंकराचार्यों के साथ है वहां वो उन्हें क्यों बैठना पड़ा क्या व्यवस्था थी तुम समझे थे नहीं समझे थे पूरी के शंकराचार्य जी के शिष्य हम है दीक्षित हम है और तुम हमको बता रहे हो कि उन्होंने क्या कहा और वो भी उन गुरु द्रोहियों के आधार पर जिन्हें पूरी के शंकराचार्य जी के दर्शन किए हुए अरसों अरसे हो गए तुम हमको बताओगे हमारे हमारे गुरु के हम शिष्य है ना वो क्या कह रहे हैं क्या नहीं कह रहे हैं वो वो हम हम लोग नहीं बताने के लिए अधिकारी या पूरी के शंकराचार्य जी स्वयं नहीं अधिकारी है। भाई तुम उतना ही वेट कर लेते विरोध करने का। उनके ही शिष्यों का विरोध कर रहे थे ना उनके वक्तव्यों के आधार पर तो उनके बोलने का ही वेट कर लेते। मगर नहीं पूरी के शंकराचार्य जी को क्या बोलना है? वो क्या बोलना चाह रहे हैं? किस संदर्भ में बोल रहे हैं? यह ना पूरी के शंकराचार्य जी बताएंगे। यह ना उनके शिष्य बताएंगे जो उनसे दीक्षित है। यह लुप्त मत के गुप्त आचार्य बताएंगे।
00:28:45:27 जिनका नाम है भगवत आनंद। चलिएगा शब्द निकलेगा तो क्या बोलता हूं ऐसे बैठना है जैसे मेरे सामने कुछ नहीं डरेगा नहीं स्टेशन पे तुम ऐसे ही बैठे थे हालांकि आज थोड़ा ठीक हो ठीक है क्लास ही बजाएंगे क्योंकि बाकी कई से असम निर्लजता पहले होनी चाहिए क्योंकि निर्लज्ज नहीं कल हम अब अब निर्लज्जता याद आ गई गालियां यूज़ करते हुए निर्लजता याद नहीं आई जब अपनी पे आई तब निर्लज लज्जा याद आई जब तुमको लज्जा याद दिलाई जा रही थी तो तुम्हें याद नहीं थी तुम तो कहोगे कि हम तो सबके सबको भकेंगे हम जब कोई बराबरी वाला मिल गया जब कोई तुम्हारे जैसा या तुमसे डेढ़ मिल गया तो तुम्हें लज्जा और निर्लज्जता याद आ रही है ना फिर भी हम तुम्हारे जैसे नहीं हुए जो तुम तुम जिस स्तर तक गिरते हो अपने वचनों में है ना तब भी हम तुम्हारे जैसे नहीं हुए
00:29:49:03 सामने वाले तिरस्कार को करोगे तिरस्कार को करो अरे 900 चूहे खा के बिल्ली चली हज को हम तिरस्कार कौन कर रहा है किसने तुमने किया नहीं तुमने किस किसिस का तिरस्कार नहीं किया तिरस्कार को करो सर्ववेदित है आह्वान की मर्यादा और तुम्हारे बहुत बोलने की मर्यादा देख ले कोई अगर कोई सच्चा व्यक्ति होगा सत्य का पक्षधर होगा तो बताएगा नहीं आान मर्यादा में रहता है शिवश नारायण द्विवेदी मर्यादा में रहता है और तुम मर्यादा का उल्लंघन करते हो तिरस्कार में लज्जा में सब में पीछे हो तिरस्कार करते हो लज्जा भाव नहीं है जो तुम कह रहे हो निर्लज्ज हो जाना यही सब तो क्वालिटीज है ना तभी तो फेमस हुए हो तुम भाई आर्य समाज कैसे फेमस हुआ था उसने सारे परंपरा प्राप्त आचार्यों के बारे में बुरा बुरा बोलना शुरू कर दिया आज भी देखो गौतम खट्टर फेमस है क्यों फेमस है वो जानता है भड़काऊ भाषण दूंगा वो भी अन्यों के खिलाफ कम
00:31:04:07 शंकराचार्य के लिए दूंगा तो ये हिंदू थोड़ा प्रभावित होंगे क्योंकि हिंदू तो असली वही से जुड़े हैं शंकराचार्य रामानुजाचार्य इन सब से जुड़े हैं तो वो हिंदू हमारे पास कैसे आएंगे तो मैं जो है ऐसे मसाले उत्पन्न करूंगा। वही अपने ट्रेनिंग भी देता है। फिर अपने अनुगत हो जाती है। दूसरी मातृ शक्ति उनको भी ट्रेनिंग देता है। तुम ऐसे ही बुराई करो मंच पे जाके। वो आएंगी झांसी की रानी बनके। एक तरफ गाना गाएंगी कि क्या कहते हैं वो? क्या गाना था? अरे वो किसी के इश्क में खुद को भुला दूं। हो नहीं सकता। वो गाना गाएंगे एक तरफ। इस कोन को एक तरफ पूजेंग और दूसरी तरफ कृष्ण भगवान की लीलाओं का खंडन करेंग और फिर एक तरफ जो है जाके ये शंकराचार्य हमको गायत्री मंत्र नहीं पढ़ने देंगे तो इस कौन ये जो इसका जो अस्तित्व है आर्य समाज का इसका अस्तित्व ये जो रोस्टिंग टाइप का कंटेंट देकर के ही है वो पंडे इस तरह की चीजें भाषा शैली शुरू करके है ना उसी पर ही इसका अस्तित्व खड़ा हुआ है तो उसी ऐसी ऐसी ही बातों पर तुम्हारा अस्तित्व खड़ा है। तुमने जो तुम्हारा जो ये चीजें है ना ये इसी इसी पर
00:32:19:15 इसी पर ही टिका है जो तुम बोल रहे हो कि निर्लज हो जाना और सामने वाले का अपमान करना निकलता है वहां पर चिढ़ाते और हाथ तो राज्य किए थे कि हाथ तुम्हारी बात में प्रमाण था जब तुमने यह कहा था कि विजय श्री फ्री मेंशन के लिए कार्य करने वाली है तुम्हारी बात में प्रमाण था। जब तुमने यह कहा था कि विजय श्री पूरी के शंकराचार्य जी के मंच पर बैठी है। तुम्हारी बातों में प्रमाण था। जब तुमने यह कहा था कि जब तुमने ये कहा था कि विजय श्री वहां पर पूरी के शंकराचार्य जी का मंच साझा करते हुए और क्या कर रही है? व्यापार कर रही है। तब तुम्हारी बातों में प्रमाण था। है ना?
00:33:09:22 तुम्हारी बातों में प्रमाण था। तुम्हारी बातों में प्रमाण था कि क्या कहते हैं वो मठ के जो परिककर हैं वो क्या कहते हैं उनके आचरण गलत है ये है वो है तुम्हारी बातों में प्रमाण था कि आचार्य रामशंकर शुक्ल जी ने तुमसे ये कहा है कि वो जो है मत के मठ के जो परिकर है कुछ ऐसा मिला के दे रहे हैं जिसके जिससे कि वो उनके अनुगत हो रहे हैं पूरी के शंकराचार्य जी ये सब प्रमाण की बात है वो एलिमेंट तुमने नहीं बताया वो तत्व नहीं बताया तुमने क्या था वो वो क्या तत्व था जिससे पूरी के शंकराचार्य जी उनके अनुगत हो रहे हैं हम वो भी बताना चाहिए था ये सब प्रमाणिक बातें थी ना तुम्हारी हेलीकप्टर बच्चा क्या बात करेगा उसका आंसर देना है
00:34:02:09 देखिए इनका कितनी देर का हो चुका है करीब 15 मिनट हो चुका है 15 मिनट तक अभी तक ये मुख्य मुद्दे पर नहीं आए ये अपनी बातें सीधे-सीधे बोल सकते थे कि भैया सामने वाले को अगर तुम्हें जीतना है तो अमुक अमुक चीजें होती है। वही सब शिवाश नारायण द्विवेदी करता है। मगर बड़ा देर लगाएंगे क्योंकि इनको अपना प्रभाव उत्पन्न करना है। वो मीडिया का बैच लगा के जाएंगे ना पुलिस स्टेशन कि पुलिस वाले मुझको मीडिया वाला समझते हुए जो है वो प्रायोरिटी दे और न्याय से ज्यादा इस बात पर ध्यान दें कि इसके पास मीडिया का बैच है। इसी तरीके से हम बहुत ज्यादा शास्त्रों के श्लोक पढ़ पढ़ के लोगों को बताएंगे। देखो हम अपनी हर बात को जोड़ शास्त्र के उससे वचन से जोड़ करके बोल रहे हैं। इसलिए लोग यह ध्यान देना भूल ही जाए कि भैया इससे इसका गलत होना कहां सिद्ध हो रहा है? अगर शास्त्र में ये लिखा है तो
00:34:54:12 भाई पहले तुम गलत सिद्ध तो करो मुझे। उसके बाद यह कहो कि शास्त्र में तुम्हारे इस लक्षण के लिए ये लिखा है। तुमने मुझे गलत तो सिद्ध नहीं किया। मैंने तुम्हारी कहां कौन सी बात गलत समझी? तुम पहले यह सिद्ध कर रहे हो कि शास्त्र में यह लिखा है और तुम्हारी शास्त्र के वचन को सुनकर यह कहां इन शास्त्रों के वचन जो तुमने पढ़े हैं इनसे यह कहां सिद्ध हो रहा है कि मैं तुम्हारी अमुक अमुक बात को समझ नहीं पाया। नहीं सिद्ध हो रहा है। मगर तुम शास्त्रों के वचनों को पढ़ने में ही बहुत सारा समय निकाल लो। जबकि ये समय बचाया जा सकता था। मगर तुम्हें अपना अपना जो है प्रभाव उत्पन्न करना है ना। वो प्रभाव उत्पन्न करने की कला है कि हम जो है शास्त्रों को किस तरीके से संदर्भों का उपयोग करेंगे और जो प्रबुद्ध लोग नहीं है जो बैल बुद्धि है वो तर्क अपनी तर्क शक्ति को छोड़ देंगे एक साइड और वो ये सोचेंगे इसने इतने सारे श्लोक पढ़े इतने सारे मंत्र पढ़े हैं और यही सही है चलिए चल रहा हो मार्केट में यहां राजा है राजा
00:35:53:14 साथ राजा का समा जो आपके बचपने में खूब आप करो। अरे महाराज जी आपके समान मंत्र अरे महाराज जी आपके स्वादान नहीं अरे विजय तुम्हारे समान कोई योगाचारी नहीं तुम्हारी वाणी में तो मुझे स्वामी दीजिए दिखाई पड़ती है विजय तुम्हारी जैसी युवा को रखनी चाहिए चाहे विजय जो है वो अंडरवियर में दिखाई विजय ये टाइम स्ट नोट कर लेना ये 1651 हम अच्छा अब क्या है कि अगर किसी को वास्तविकता में किसी की वाणी वाणी अगर उसमें झलक रही हो तो क्या सिद्धांत होगा? किसी की वाणी में अगर कोई ऐसा शब्द यूज़ करे जो किसी से मैच खा रही है वास्तविकता में क्या करें? वहां वहां क्या होगा? उसका भी तो सिद्धांत होना चाहिए। भाई चापलूसी करते हैं तो वो मैंने जो किया था वो चापलूसी थी कि नहीं थी ये कैसे पता चलेगा? हो सकता है वो प्रोत्साहन हो किसी को आगे बढ़ने के लिए धर्म के पथ पर। यह भी तो हो सकता है। यही क्यों है कि जो भगवतानंद कहेगा वही क्यों माना जाए मेरे उस कर्म का? जैसे कि मैंने अभी पानी पिया तो पानी पीने के पीछे
00:37:09:03 यही क्यों हो सकता है कि मुझे प्यास लगी थी। यह भी हो सकता है कि मेरे गले में कुछ अटक रहा था। उसको मुझे ठीक करना था। तो आपको कंफर्म करना होगा ना तुमने पानी क्यों पिया? यह कैसे कह रहे हो तुम? यह तुम अपना मत थोप रहे हो। कि मुझे जो चापलूसी करनी थी और फिर अगर तुम चापलूसी तो फिर अपने अन्य चीजों को बैकअप को ला करके केवल तुम वो जो उसके आधार पर ऐसा सोचा जा सकता है कि चापलूसी है। ठीक है? ऐसा क्योंकि पानी मैंने पिया तो उसके आधार पर ऐसा सोचा जा सकता है कि मैंने पानी प्यास लगने के कारण ही पिया है। एक घूंट पिया है। मगर सिद्ध नहीं होगा अंतिम रूप से वो। मगर तुम बोलो। तुम्हें उससे कोई मतलब नहीं है। तुम्हें बोलना है चापलूसी चलो होता है तो कलयुग में है वो असंभव वाला विषय कर्ज राम की अवज्ञा में और परिहास में और ये सारी चीजें तुम अपना अवलोकन करना और अभी आकर आगे क्या-क्या करोगे अपने वक्तव्यों का जहां मैंने पोल खोली है तुम्हारे वक्तव्यों की वहां कैसी डेंटिंग पेंटिंग होगी मैं बताऊंगा तुम्हें। ये सारी चीजें तुम पर लागू थी सब सीखना पड़ेगा
00:38:24:19 और इस समय आप लोग जब हटाना चाह रहे हैं आपको पकड़ नहीं पा रहे आप चैट में सब गाली गलौज करते रहते है ना ये सब गाली गलौज इससे कुछ नहीं होगा खाना चाह रहे है आप लोग उसको पकड़ नहीं पा रहे आप लोग चैट में सब गाली गलौजने की दरेंगे तो कैसे चल पाएंगे भाइयों शिवा आपको जो बताना चाह रहे है आप उसको पकड़ नहीं पा रहे की मोड बनाइए मोड बनाइए देखो तो भैया मुझे मोड बनाने आता है ना मैं मोड बनाऊंगा तुम लोग को जितना नाचो देंगे हां उसमें क्या है लेकिन कम से दूसरे को गाली दोगे तो गाली सुनोगे उसको हमको अगर देना चाहो तो मैं क्या हो पाऊंगा ऐसे 50 लोग दे रहे हैं 50 लोग देंगे हां उसमें क्या है लेकिन कम से कम दूसरे को गाली दोगे मुझे लगा मैं गाली नहीं बोल रहा मुझे किसी ना इससे क्या होगा भाई कोई गाली गलौज किसी को ना दे और मरदित भाषा में अगर अपना प्रतिकार प्रकट करना है तो वो करे बस
00:39:07:25 मेरी मुझे दिखाई देगा तो बैन भी करूंगा और फेक आईडी मैं अपने समर्थकों से कहूंगा ये जो फेक आईडीज बनी है इनके हैंडल्स आप जो है नोट कर लीजिए और मुझे प्रोवाइड कराइए। नंबर है मेरा 740830 7408301869 इस नंबर पर ये जो फेक आईडी के जो हैंडल्स है जो फेक आईडी से चल रहा है ये हैंडल्स आप नोट कर लें और इनके कुछ आपत्तिजनक कमेंट्स भी नोट कर लें जो बाद में डिलीट ना हो पाए और वो मुझे आप भेज दें क्योंकि इन पर कारवाई करनी है जो ये इस तरह से फर्जी वो भले ही फिर विजय श्री के विजय श्री नाम से फेक अकाउंट चल रहा हो ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी के नाम से फेक अकाउंट चल रहा हो या भगवतानंद के नाम से फेक अकाउंट चल रहा हो किसी पक्ष या विपक्ष जो भी फेक अकाउंट ऐसे आपत्तिजनक वो कर रहे हैं उनको आप नोट करिए और मुझे दीजिए जो किसी को बदनाम करने के लिए प्रयास किया जा रहा है क्योंकि तुम्हारे जैसे लोग पर चिंता करते हो पहले ये तो काम नहीं किसी तुम्हारे परलोक है तो तुम्हारे जैसे लोग छोड़ देता हूं मैं तो तुमको कर दूंगा निकाल पर बात कर तुम बात प्रतिता वार्ता जिसका कोई कभी नहीं आएगा। अब
00:40:23:06 हमने इस प्रकार से आपको बताया कि डरना नहीं समझना नहीं सामने वाले की बात सुनना नहीं लेकिन तुरंत पहले कपट के बोल देना है। असम भ्रांत रीति से निर्लजता पूर्वक प्रतिभागी की आज्ञा कोस करते हुए राज करते हुए जो व्यक्ति कथा में प्रस्तुत होता है। कलयुग की बड़ी कृपा इस पर और चाहे कितना बड़ा बैल बुद्धि को हम तुमने भी यही किया है। अच्छा है। 1858 पे आप लोग टाइम स्ट ले लीजिएगा। 1858 पे इनका बड़ा अच्छा सा एक चित्र आ रहा है जिससे कि बहुत सारे इनके भाव प्रकट हो रहे हैं अपनी बातों को कह करके और ये सारी बातें इन पर ही लागू है। अगर कभी हुई प्रत्यक्ष वार्ता तो मैं बताऊंगा इनको। एक चलिए अब हम शिव सर जी की ओर बढ़ते हैं। तो शिव सर ने जो वो वीडियो बनाया है। इसमें शिवशं बड़ी सुंदर बात करते हैं कि किसी को कभी हम तोड़ते नहीं। फेरते नहीं दिखाई। कहते किसी को कभी हम छेड़ते नहीं। कोई हमें छेड़ दे तो छोड़ते नहीं। हरि बोल बच्चा बोल परम की जय हो। का सीमा का हां तो चलिए अब हमने अपना मंगलाचरण कर दिया
00:41:36:10 है। वाईफाई बर्थडे का तो ज्यादा ही स्लो है। इधर से हां हाथ में ले लो पहले बनते हैं। भैया शिवास जी आपको किस प्रकार से दिखाएंगे कि प्रतिवादी के सामने अपनी बेइज्जती कैसे कराई जाए उपस्थिति की सम्मान करते हुए हम सब इनके भाई से इनका स्वागत करेंगे। अच्छा नाटक है अच्छी नौटंकी ताली वाली बजा के नाटक करना है। एंटरटेनमेंट भी होना चाहिए थोड़ा बहुत। अब इसमें इसने मैं बता दूंगा और बोल मैं देखो मैं इसके एक भाई मैं बता दूंगा और बोल मैं देखो मैं इसकी लग रहा है स्किप कर इसलिए लाइव में कुछ भी स्किप नहीं अब इसमें इसने कहीं मेरा सुना है आप लोगों को आप मेरे मुंह से सुनी इसकी लाइव सुनी होगी तो उसको मैं स्किप कर दूंगा क्योंकि मुझे तो पता है मैंने क्या बोला आपको पता है मैंने क्या बोला पहले मेरा लाइफ में हमने बोला फिर से लाइफ वही कहता हूं उसमें अपनी बात शास्त्र तुम्हारे दिए लेकिन क्योंकि शास्त्र है ना शास्त्र को आवश्यक नहीं मानेगा तो बाहर वाला कैसे खाएगा कैसे होता है समर्थन करने के लिए शास्त्रेंगे तो ये सब मैंने कब कहा कि शास्त्र को प्रमाण नहीं मानूंगा या आवश्यक नहीं मानूंगा हम मगर शास्त्र का जो संदर्भ जिस बात के लिए
00:42:51:15 दिया जा रहा है उस शास्त्र हम बोल रहे हैं कि असतो सदम तमस मृत्यु मृतमय रा विग्रह धर्मा अच्छा हम किसी से बात क्या कह रहे हैं कि तुम धार्मिक नहीं हो तुम्हें सिद्ध यह करना है या तुम जो है आस्तिक नहीं हो तो शास्त्र रामो विग्रह धर्म से यह कहां सिद्ध हो रहा है कि जो है शिवाश नारायण द्विवेदी धार्मिक नहीं है। उसको धार्मिक सिद्ध करने के लिए तुम्हें यह बोलना पड़ेगा कि शिवाश नारायण द्विवेदी तुम दो तरह की बातें कर रहे हो। तुमने यहां कुछ कहा यहां कुछ कहा और रामो दुरनाभि भाषते और रामो विग्रह धर्मा तब तुम्हें ये कहना पड़ेगा। तब तुम ये सिद्ध करोगे कि हां शिवश नारायण द्विवेदी धार्मिक थी। मगर तुम कह रहे हो धार्मिक नहीं है और रामो विग्रह धर्मा इसका क्या रिलेशन है? रामो राम श्री राम धर्म का साक्षात स्वरूप है। इससे कहां सिद्ध हो रहा है कि शिवश नारायण द्विवेदी धार्मिक नहीं है। तुम्हें बताना पड़ेगा कि शिवश नारायण द्विवेदी ने यहां पर दो तरह की बातें की है। दोगलापन दिखाया है और क्योंकि श्री राम दो तरह की बातें नहीं करते। रामो दुरना वासते इसलिए और फिर उसी क्रम में क्रमशः क्या है कि रामो विग्रह वान धर्मा
00:44:06:26 और क्योंकि श्री राम दो दो प्रकार की बातें नहीं करते और क्योंकि श्री राम धर्म का साक्षात स्वरूप है इससे प्रूव हुआ कि शिवश नारायण द्विवेदी तुम धार्मिक नहीं हो मगर जब तुम शास्त्र का प्रमाण ऐसे रखोगे कि हमने शास्त्र का प्रमाण तो रखा जैसे अभी तुमने पीछे बहुत सारी बातें की कि ऐसा होना चाहिए वैसा होना चाहिए मगर यहां पर शिव द्विवेदी को अवमानना करना सीख लो अवज्ञा करना सीख सीख लो सामने वाले की सामने वाले को सुनना नहीं है समझना नहीं है तो तुमने यह तो किया मगर यह नहीं बताया कि शिवश नारायण द्विवेदी ने अवज्ञा की कहां हम तो ये कुछ नहीं है केवल एक सेटिंग है बस अपना उस श्लोक संख्या इत्यादि ये सब बता करके उसका प्रभाव उत्पन्न करना मगर जब सामने से बात होगी तो यह सब नहीं हो पाएगा है ना चलिए
00:45:07:14 अनावश्यक पुचके पुचके की बात कह रहे हैं कि तुमने पुचके खाया यह खाया वो खाया हैं अरे हमने कब कहा कि हमारा पुचके खाना बिल्कुल वो शास्त्रों के अनुसार है कहा है क्या हमारी हमारा जो जीवन है वो कैसे कहां से हम आए हैं हमारा बैकग्राउंड क्या है हम कैसे उसे धीरे-धीरे परिवर्तित कर रहे हैं कैसे अपनी जो चीजें हैं जो आदतें उनमें सुधार लाए हैं जो आज से पांच साल पहले मैं जिस तरह के आचरण में था वो आज से दो साल पहले नहीं था और जो आज से दो साल दो साल पहले था वो आज नहीं हूं। मेरा बचपन तो ऐसा नहीं गुजरा। मैंने तो कभी नहीं कहा कि मेरा बचपन गुरुकुल में गुजरा है या फिर मुझे जो है देवताओं ने दर्शन दिया था या फिर मैं जो है 2017 में मुझे जो है यंत्र मिल गया था या फिर मैं फलाने लुप्त संप्रदाय का गुप्त आचार्य हूं। ये सब तो तुम कह रहे हो और मैं इन सब बातों को नहीं भी करता। अगर तुम व्यक्तिगत यह ना होते बातें करते मैं जो कह रहा हूं वह गलत है कि नहीं यह सब बातें करते रहते मगर तुम कहां गए कि तुमने फुचका खाया क्यों खाया क्या खाया किसके किसके साथ खाया किस हालात में खाना पड़ा इससे कोई मतलब नहीं है तुमने फुचका खाया तुमने प्रोटीन पाउडर खाकर के बॉडी बनाई ये सब तुम ये सब तुमने चालू किया था ना तुमने चालू किया ये
00:46:22:28 अब प्रत्येक शुक्रवार की बात आ गई तो थोड़ा अब तुम्हारे उसमें वो जो तुमने बताया ना वो जो सब होता है कि अगर अगर साथ उसको शास्त्र को जीतना है तो शास्त्रार्थ को जीतना है तो क्या करो कॉन्फिडेंट हो के बात करो तो आज तुम जो है वैसा कॉन्फिडेंट नहीं दिखा रहे हो जैसा इससे पिछले वाली सभी लाइव में दिखा रहे ठीक है चलिए आगे चलते हैं तो अनावश्यक छात्र को मारेगाने का इच्छा करके ये सात दिन बाद ठीक है सुनते है
00:46:57:26 और तो सबसे पहले तो इस तरीके से की स्वामी जी को मेरे से बच के तो के सम्मान और समर्थन में बड़ी को पता लगा उस समर्थन कैसे मिलेगा तो आपका कहने का मतलब है की दुनिया में संसार में ज भी कुछ होगा अच्छा तो वहां पर सुभाष करने वाला होना चाहिए अब मेरी बात सुन लीजिए प्रसंग आपको बता दू किस प्रसंग मैंने कहा था किस प्रसंग में कहा था मैं आपको बता दू पढ़ लिया होगा विजय श्री का एक साक्षात्कार था जिसमें 11 महीने पहले आप चैनल से उस वाली आईडी से इसने कमेंट किया है। आपकी पूरी टीम को स्वय आभार आपने अत्यंत कम शब्दों में सनातन धर्म की सर्वतम परिभाषा प्रदान की आंग भाषा में आपके मुख से निकलने वाली शब्दावली में भगवान आदि शंकराचार्य की परंपरा के महान विद्वान धर्म सम्राट जी महाराज के शब्द समाज में इसी प्रकार युवाओं के धारण के विषय में प्रकट होने की आवश्यकता है। प्रभु श्री राम आप सभी पर कृपा बनाए रखे एवं आप सभी अपने जीवन में यथोचित मनवाछित फलों को प्राप्त कर सके ऐसी प्रार्थना ईश्वर से करते है ऐसा मतलब जो विजयशील लड़की है उसके प्रति ये व्यक्ति इतना समर्पित हो गया है कि अंग्रेजी में उसकी कही दो चार बातों से इसको सीधे सम्राट स्वामी याद आ गई अच्छा अब ये बताइए सबसे पहली बात तो ये है कि जो हमारे आचार्यों के जो सिद्धांत होते हैं क्या हम नहीं चाहते हैं वो बच्चे बच्चे
00:48:13:01 के मुख से जो है निकले बच्चा-बच्चा बच्चा जो है ऐसा हो जाए हमारे यहां जो उन सिद्धांतों को बोलने वाला हो जाए उन सिद्धांतों को रखने वाला हो जाए तो अगर कोई रखने वाला हो रहा है उसको कहा जा रहा है उसी अंश में जिस अंश में वो हुआ तो उसको अगर ये कहा जा रहा है उसके प्रोत्साहन के लिए उसका एप्रिशिएशन किया जा रहा है तो उसको बस देखिए तथ्य वही है वही वाली बात है अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा शब्द का उपयोगी अच्छा है ना अच्छा शब्द का उपयोगी किसी भी प्रकार से आप कर लो। उसी तरीके से तथ्य तो वही है कि हां मैंने उनका जो है प्रोत्साहन करने के लिए वहां पर वो लिखा और अब उसका कोई भी अर्थ आप निकाल लो ये भी निकाल लो कि वो चापलूसी है या जो आगे कहने जा रहे हैं बहुत बड़ा समर्पण भाव है। वो भी है। अब समर्पण समर्पण भाव है बहुत बड़ा वो सिद्ध कैसे होगा? तुम बोल रहे हो कि समर्पण भाव है। बहुत ज्यादा वहां अनुगत हो गए हैं। नतमस्तक हो गए। बहुत ज्यादा। तुम्हारा यह कहना है। हम सुन ले पहले तुम्हारा कहना क्या है? पूरा आसना में शास्त्री विषयों का हो जाता। इसलिए नहीं आई क्योंकि हमने तुम्हें जब देखा था
00:49:28:14 जब तुम तुम्हारा वीडियो हमने पहली बार देखा था। उस समय तुम कोई पत्र का जवाब दे रहे थे जो पूरी के शंकराचार्य जी के शिष्य द्वारा कोई कमेंट किया गया होगा। कुछ किया होगा शायद वो आयुष सिंह चौहान का जो नाम तुम लेते हो बार-बार और वहां पर हमको यह समझ में आया था कि पूरी शंकराचार्य जी का तुमने कई जगहों पर जो है उनके शास्त्रीय पक्ष का भी तुमने खंडन किया है और शायद एक वीडियो हमने तुम्हारा ऐसा देखा था जिसमें कि खंडन का प्रयास किया है खंडन नहीं और एक पक्ष हमने एक वीडियो शायद तुम्हारा वो वाला देखा था जिसमें तुमने अपनी कहानी सुनाई थी कि मैं जो है पहले पूरी मठ में रहता था और जो है मैं वो देता था। सबको जवाब देता था। जो लोग प्रश्न करते थे पीठ से तो वो लोग ये समझते थे शंकराचार्य तो मैंने वहां पर यह समझा कि वे व्यक्ति पहले मठ से जुड़ा हुआ था और अब नहीं है जुड़ा हुआ। मगर मुझे वहां भी तुम्हारी उस दिन ही ये बात खटकी थी कि जब तक ये साथ है तब तक तो आपके राज को राज रखेगा। अगर राज है तो तुम्हारे अनुसार और उसके बाद जब तुम अलग हो जाओगे तो उस राज को खोलेगा जिस समय तुमसे मित्रता थी। उस समय तुम्हारे कौन-कौन सी चीजों में तुम लोग एक मत थे। तो वो राज भी वो खोलने लगेगा बाद में। तो यह छाप तुम्हारी छूटी और दूसरी छाप क्या छूटी कि तुम जो है शंकर मत का कहीं कहीं पर वो
00:50:43:18 जो है विरोध करते हो। ठीक है? तो जब यह पता चला तो हमने तुम्हारे ऊपर अलग से कोई रिसर्च करना तुम्हारा चैनल ऐसा तो है नहीं कि उनका जो प्रतिकार है और लोग नहीं करते। तो हम क्या सबका सब जाकर के देखने लग जाए? नहीं देखा। नहीं सुने तुम्हारे वीडियोस। मगर हमने कहीं भी यह नहीं कहा ना कि तुमने ऐसा नहीं किया है क्योंकि हमने देखा नहीं था इस आधार पर अगर हम ऐसा बयान देते थे कि तुमने ऐसा नहीं किया है तो तुम्हारी शिकायत होती कि तुमने हमारा जब देखा नहीं था तुमने चेक नहीं किया जो कि तुमने किया है तुमने किया है ये कार्य तुमने किया है तुमने देखा नहीं कि हमने क्या किया क्या नहीं और आगे पक्का से बोल दिया तो ये दोष तो तुम पर ही आ रहा है भाई तुम पहले पूछते तो पता तो करते कि मैंने कितना तुम्हें रीड किया है दूर ही दूर से थोड़ा बहुत जानता हूं बस थोड़े बहुत अंश तुम्हारे पता है कुछ अच्छी चीजें हैं तुमने की है मगर मैंने ज्यादा तुम पर रिसर्च नहीं किया था कि तुमने कहां कहां कब कब क्या-क्या किया क्या-क्या नहीं किया है विजय श्री से मेरा सीधा संपर्क हुआ विजय श्री जब उस इंटरव्यू में जा रही है तो एक दिन पहले दो दिन पहले मुझे कॉल कर रही है कि मेरा ऐसे इंटरव्यू है उसमें जो है ऐसा सवाल हो सकता है मुझसे किया जाए विजय श्री को
00:51:58:21 वो परिभाषा मैं बता रहा हूं गुरुदेव की कृपा से जो प्राप्त है वो कर पाते जी महाराज की कृपा से जो प्राप्त है। उसके बाद यथावत रूप से वो प्रयास कर रही है अगले दिन जाकर के और वहां पर प्रमाणिक आचार्यों की बात भी कर रही है। परंपरा प्राप्त आचार्यों की बात कर रही हैं। तो ऐसे व्यक्ति को जो ऐसे व्यक्ति जो कि बिल्कुल विपरीत उसमें है वातावरण में और वो जब इतने आसानी से शास्त्र निष्ठता दिखा रहे हैं। प्रमाण बुद्धि दिखा रहे हैं। वो अपने जीवन में पता नहीं विजय श्री पूर्णतया शास्त्र सम्मत आचरण कर कब कर पाएंगी। पता नहीं मैं कब कर पाऊंगा और तुमने अगर अपनी जीवन शैली बता दी तो मैं तुम्हारे अंदर भी दोष निकाल दूंगा शास्त्र निष्ठता का मतलब शास्त्र निष्ठता के विपरीत दोष मैं आपको बता सकता हूं अगर अपने जीवन के बारे में आपने बताया जो ट्रांसपेरेंसी आप नहीं रखते हो इसलिए बचे हुए हो कई बार कहा मैंने तो हां हां ये है कि परसेंटेज में मैं आपसे ज्यादा हूं और वो विजयश्री जी वो मुझसे ज्यादा होंगी जो जहां जिनजिन अंशों में वो शास्त्र के विपरीत आचरण होंगे क्योंकि वह मेरे काफी दिन बाद जुड़ी है। एक प्रामाणिक आचार्य की शरण में आई है और इस मामले में तुम मुझसे सीनियर हो।
00:53:14:07 ठीक है? यही तो बात है। क्योंकि आपके पिताजी से आपको गायत्री प्राप्त हो गई थी। तो ये जो चीज है कि क्या कहते हैं ये? मैंने वहां प्रोत्साहन क्यों किया? क्योंकि मुझे पता था यहां पे ये हुआ। मैंने तुम्हारा प्रोत्साहन क्यों नहीं किया? क्योंकि मुझे नहीं पता है कि वहां पर यह कहीं पर यह हुआ। तो अगर मैंने तुम्हारा विरोध अगर मैंने तुम्हारी प्रशंसा नहीं की तो तुम्हारा विरोध भी तो नहीं किया। विरोध करता तब तुम ये कहते कि तुमने हमारी चीज देखे बिना ये विरोध क्यों कर दिया? मैं सर्वज्ञ थोड़ी ना हूं। सर्वज्ञ हूं क्या? या तुम सर्वज्ञ हो। अभी आएंगे इससे रिलेटेड प्रश्न आएंगे अभी। ओके। क्रिया के पास ऊपर और नीचे दोनों पहुंच ऊपर मैं ऊपर करना चाह रहा हूं बाकी आप जो बात समझना चाहे वो समझ सकते हैं आप सुनो पेंब्रा इन्होंने शब्दों का उपयोग किया है किसी मातृ शक्ति के लिए जो अब उस वातावरण में नहीं है जिस वातावरण में पहले कभी थी अच्छा क्या तुम्हारी माताओं और बहनों ने कभी अपने जीवन में उन अंतर वस्त्रों को धारण नहीं किया था अंग वस्त्रों को धारण नहीं किया था
00:54:29:10 किया होगा ना सिर्फ उसी में रही हो बचपन में रही ना बचपन में तो रही मगर जब उनको दिशा मिली तो वो ठीक हुई कि नहीं ये बात होती है जब उनको दिशा मिली तो वो ठीक हुई कि नहीं हुई और तो और उनको कौन से ऐसे पद पर बिठा दिया गया अगर वो सही समय पर हो जाना था उनको ठीक और सही समय पर अगर ठीक नहीं हुई तो सही समय पर ठीक ना होने के कारण ना होने की उसमें होते हुए भी उनको कहां से ऐसी जगह से जोड़ दिया जोड़ दिया गया जिससे सारे समाज सारे तुम जैसे दंभियों को आपत्ति हो गई हम कहां से ऐसा जोड़ दिया गया जो उस मातृ शक्ति को बार-बार तुम ये जो टॉर्चर कर रहे हो ऐसे ही तुम धर्म से जोड़ोगे ना लोगों को कोई व्यक्ति कैसा भी हो अपने पुराने जीवन से आना चाहे यहां पर आकर के प्रामाणिक आचार्यों के पास भाई आज बहुत सारी संस्थाएं हैं जो अनुकूल धर्म प्रस्तुत कर रही है। धर्भास फैला रही है और व्यक्ति को वहां मिलने लगता है हम तो धर्म से जुड़ गए। विचार को भी धर्म बताया जा रहा है। तो जब व्यक्ति उन सारी विपरीत जो ऐसी संस्थाएं हैं जो जितनी
00:55:44:14 भी ऐसी संस्थाएं हैं जो धर्भास फैला रही है जो जो भोग को ही भोग को ही धर्म बता देती है। भोग को भी धर्म का चोला पहना देती है। तो ऐसी बहुत सारी संस्थाएं हैं। तो तुम जब कोई वास्तव में कोई विपरीत परिस्थितियों से तुम्हारे पास आएगा तो तुम उसको कहोगे तुम ये करती थी तुम वो करती थी। और अभी देखूंगा प्रेम प्रसंगों के बारे में क्या कहोगे अभी वो बाकी है चलो मेरे पास नहीं हां हर वो चीज है तो यहां इन्होंने क्या प्रदर्शित किया कि मैंने मैंने विजय श्री के प्रशंसा क्यों की क्योंकि वो कोई महिला है और दबे हुए शब्दों में क्या
00:56:23:19 किया दबे हुए शब्दों में अप्रत्यक्ष रूप से ये सब समझ रहे हैं ना चलिए 24 26 तो जो आह्वान ने सीधे सीधे संत कपात्री जी के शब्द ही तुम्हारी वाणी से संबंधित हो रहे हैं। ऐसा कह दिया तो नीचे विजय ने कमेंट भी किया आपका बहुत-बहुत आभार शिवांश और जैसा कि आप जानते हैं कि लड़के सिंपिंग करते हैं। भैया जी सिंपिंग करते हुए बढ़िया के साथ पंक्तियां प्रशंसा सिंपिंग करते हुए 24 48 पे बोला है भाई हम हमें अंग्रेजी भाषा का भी उतना ज्ञान नहीं है जितना इनको है। तो ये सिंपिंग करते हैं। इसका क्या है अर्थ जरा देख लेना क्या बोला हमें समझ नहीं। प्रशंसा नहीं सीधे सम्राट जी के वचनों के साथ इसके वचन की तुलना कर दी गई और देवी जी ने बस धर्म सम्राट स्वामी जी के वचनों से इस देवी जी के वचनों की तुलना कर दी गई ये क्या है भाई तुलना नहीं की है उन्हीं के वचन को बोल रही है वो और बोलो उन्हीं की बात को बोल रही है उनके वचन है ही नहीं वो अरे भाई अगर मैं बोल रहा हूं रामू विग्रहान धर्मा तो ये किसका वचन वाल्मीकि जी का वचन है ना रामायण का वचन है ना ये वाल्मीकि द्वारा वाल्मीकि जी द्वारा लिखा हुआ
00:57:38:24 और वहां पर शायद संभवत रावण से संवाद हो रहा है राक्षस का वही वचन है ना ये और भी एक दो जगह पर आया है तो ये जो उन्होंने जो विजय श्री जी ने बोला है वो वचन उनका है ही नहीं स्वामी करपात्री जी का वचन है जो उन्होंने अंग्रेजी में जो है बोलने का प्रयास किया है वक्तव्य हां उसको थोड़ा उन्होंने एक्सप्लोर जरूर कर दिया है। उसको क्या कहते हैं? लेमन लैंग्वेज हां बस उसमें किया है। मगर उनका अपना क्या है? उनको थोड़ी ना कुछ पता था। करपात्री जी का वचन है वो जो उन्होंने इस तरह से बताया है। तो यह भी आपकी गलतफहमी है कि विजय श्री के वचन की तुलना धर्म सम्राट करपात्री जी से की गई है ना। धर्म सम्राट करपात्री जी के ही वचन की तुलना धर्म सम्राट करपात्री जी से हो। धर्म सम्राट करपात्री जी के ही वचन की तुलना धर्म सम्राट करपात्री जी के वचन से हो सकती है। हां तुम्हारे वचन की तुलना भी नहीं हो सकती उनसे। ठीक है?
00:58:43:19 चलो मगर तुम्हें तो चौवा उड़ाना है। ऐसी बातों पर ही बात करते रहना है घंटों जिससे ना कोई तथ्य है ना कोई तंत्र है ना पानी। चौवा उड़ाना है बस। हां तो चलिए पंचाक्षरी आशीर्वाद दिया। अब यह इस समय किसी छज्जे पर बैठकर बात कर रहे हैं। छत पर बैठकर बात कर रहे हैं। ठीक है? तो अब ये क्योंकि छत पर बैठकर बात कर रहे हैं। तो हमने क्या किया कि शास्त्र के वचन बताए कि जो व्यक्ति क्या कहते हैं? जो व्यक्ति छत से कूदता है, जो व्यक्ति छत पर नाचता है, जो व्यक्ति छत पर नाटक करता है, है ना? उसके साथ ये ये होता है। ये इस संबंध में शास्त्र के कुछ वचन बता दिए। ठीक है? जबकि हमने यह सिद्ध नहीं किया कि इसके यहां बैठने से यह सिद्ध होता है कि यह छत पर नाचने के लिए बैठे हैं। छत पर नाटक करने के लिए बैठे हैं। छत पर कवाली करने के लिए बैठे हैं। हमने ऐसा कोई शास्त्र का वचन नहीं दिया जिससे कि अगर छत पर कोई इस तरीके से बैठा हुआ दिखे तो यह समझना चाहिए कि वो कवाली के लिए बैठा है। कवाली करने बैठा है। हमने यह नहीं सिद्ध किया शास्त्र के वचन से। हमने सिद्ध किया
00:59:58:19 कि यदि कोई छत पर बैठकर के कवाली करता है तो उसका यह परिणाम होता है कवाली करने का। अब कवाली करना भी तो किसी शास्त्र के वचन से सिद्ध करो मगर वो हम नहीं करेंगे। हम जो रिलेट ही नहीं कर रहे हैं वो अप्रासंगिक उन शब्दों को उन वचनों को कहेंगे और उसके वजह उसके आधार पर प्रभाव उत्पन्न करेंगे और अपनी जय जयकार कराएंगे अपने अंध भक्तों के द्वारा। आपका बहुत-बत आभार हम तोड़ रहे हैं 100 आवर्स हर घंटे तो बनो किसी के हम कहीं से भी
01:00:38:19 सुनो एक अच्छी इंश्योरेंस अच्छी इंश्योरेंस पॉलिसी एआई से पूछ रहे हैं एक ऐसी पॉलिसी जिसमें प्रीमियम पेमेंट हो लिमिटेड लाइफ टाइम फ्यूचर से और इस प्रकार से शिवा जी को लगा कि आज हम आज भी आज सूर्य समस्त का प्राप्त कर दिया और आपको जो है प्रत्येक शुक्रवार को जहां मिलने जाते हो वहां पर जो है सारे यज्ञों का फल प्राप्त होता है। तो जो इलाज के रूप में आपको मिल जाता है जिस समस्या से आप पीड़ित हैं। है ना हमने कहा भाई हमने जहां गुरु शंकराचार्य जी का शब्द लिखा था तो ये हमारे मुका समर्थन किया लगाई तो इसका समर्थन नहीं है वो सुन लीजिए मैं बताऊंगा संसार में ज भी आग लगाई सप्तम कैसे तो आपका कहने का मतलब है की दुनिया में है संसार में ज भी कुछ भी हो कुछ करने वाला और ज पर दुनिया में कुछ भी कर नहीं मैंने ऐसा नहीं कहा ये अनुपाल का एक लक्षण है। अब सुभाष
01:01:53:22 भैया आपको क्या सिखा रहे है? आपने क्या सिखा? आपको मैं शास्त्र करना सिखा रहा हूं। ठीक है। भैया ने क्या कहा? मैं ये कहना चाह रहा हूं। मुझ पर आरोप लगाया की मैं ये कहना चाह रहा हूं कि दुनिया में जहां गलत हो रहा था। तो ये मैंने कभी नहीं कहा। ना मैंने लिखित से ऐसा कहा ना मैंने मुख्य ऐसा कहा। तो शिवा जी का ये वक्तव्य शास्त्रार्थ में क्या दिखाता है? अनुक्तोपाल नामोपाल मतलब किस बात का आरोप लगाना। ये गलत है। ये दोष नहीं दिखा रहा है। जब तुमने कहा कि मैंने ऐसा कर करना था तो तुम्हें ये पहले ये पूछना चाहिए था कि अगर मैंने ऐसा किया कृपात्री जी महाराज का वो किया क्या तुम्हें ये बात मालूम थी कि नहीं मालूम थी? अगर तुम ये कहना चाहते हो कि मैं ये ये क्या कहते हैं? अगर तुम ये कहना चाहते हो कि मैं जो यह कह रहा हूं कि दुनिया में कहीं भी अच्छा हो तो मुझे उसका समर्थन करना चाहिए या फिर दुनिया में कहीं भी गलत हो तो उसका मुझे विरोध करना चाहिए। तो ऐसा तुमने नहीं कहा यदि तुम कहना चाहते हो तो तुम्हें मुझसे पहले पूछना चाहिए था कि मैंने कृपात्री जी का फलानी फलानी जगह संघर्ष किया था समर्थन किया था क्या शिवश नारायण द्विवेदी तुमको पता था कि नहीं पता था मैं बताऊंगा ना मुझे पता है कि नहीं पता है तुमने क्या किया भाई हु आर यू तुम्हारे को जानने कौन निकलेगा क्यों निकलूू जानने मैं राम को जानने निकलूूंगा गुरुदेव को जानने निकलूूंगा थोड़ा बहुत उनके मार्गदर्शन
01:03:09:01 में राम को जानने का प्रया प्रयास करूंगा। तुम होते कौन हो जिसको जानता हो व्यक्ति और जहां मुझे पता है वहां भैया समर्थन किया जिस रूप में किया। अच्छा मैं कह रहा हूं मैंने तुम्हारा समर्थन किया। तुमने मेरी प्रशंसा की अब तुम कहोगे हमें पता ही नहीं है। तो यही तो मैं भी कह रहा हूं हमें पता नहीं है। तो अगर तुमने ये जांच नहीं की कि मुझे पता था कि नहीं पता था और तब तुमने मेरे ऊपर ये दोष लगाया कि मेरे मेरा समर्थन क्यों नहीं किया। ठीक है? तो अगर तुमने यह जांच नहीं की थी तो तुम्हें यह नहीं कहना चाहिए था कि मेरा समर्थन क्यों नहीं किया और अगर तब भी तुम यह कह रहे हो अगर तब भी तुम यह कह रहे हो कि मेरा समर्थन नहीं किया बिना जाने के मुझे पता था कि नहीं तुमने क्या किया क्या नहीं किया तो वहां पर मैं ये बात कह रहा हूं कि अगर तुम बिना मैंने मुझे पता है कि नहीं पता है मगर मुझे तुम्हारा समर्थन करना चाहिए था तो फिर तुम वहां पर यही तो कह रहे हो कि मुझे दुनिया में हर अच्छी चीज का समर्थन करना है और दुनिया में हर गलत चीज का विरोध करने वाला होना चाहिए यही तो कह रहे हो तुम सर्वज्ञ बता रहे हो ना मुझे बिना जाने अगर ये आरोप लगा रहे हो मेरे ऊपर कि तुमने मेरा समर्थन क्यों नहीं किया तो तुम्हारी दृष्टि में मैं सर्वज्ञ हूं तो सर्वज्ञ है तो फिर वो संसार के सब सब चीजों का वो करे समर्थन और सब और या फिर वो क्या कहते
01:04:24:04 हैं विरोध करे हम बारे में कभी नहीं भैया ने आपको क्या ज्ञान दिया कैसे किया जाता है ये ये तुम्हारा वो दूसरा वाला वाला दोष था कि समझना नहीं है सामने वाले की बात को यहां पर वही कर रहे हो कि मैंने वो उदाहरण क्यों दिया है लगा दो तुमने कभी नहीं कहा था तो फिर तुमने बिना जाने जब तुमने नहीं कहा था तो तुमने बिना ये जाने के शिवश को हमारे बारे में क्या पता है क्या नहीं पता है ये बात क्यों बोली कि शिवांश ने हमारा समर्थन क्यों नहीं किया या शिवांश ने हमारा समर्थन नहीं किया इस बात को लेकर दोष क्यों लगाया तुमको पहले पता करना चाहिए चाहिए था कि शिवश को तुम्हारे बारे में क्या पता है और क्या नहीं पता है और हम तुम्हारे बारे तुम तुम्हारे जो वक्तव्य हमारे बारे में होते हैं उसमें हम यही बात कहते हैं तुमने बहुत सी ऐसी बातें बोली है हमारे बारे में जो निराधार रूप से बोली है और तुम्हें उसके बारे में हमने प्रूफ भी दिखाए बाद में और मैंने अभी आगे देखा है जब तुम्हारा लाइव चल रहा था तुमने कई कई बार चीजों को छोड़ दिया है छोड़ो अगले मुद्दे पर आते उसपे बात ही नहीं की फंस रहे हो ना वहां पे इसलिए मैंने नहीं कहा मैं कम कर सकता हूं क्योंकि मुझे मानवीय शरीर के तुम कहा सीमा का बोध है सीमा का बोध मुझे मुझे मुझे मुझे
01:05:39:15 मुझे शुक्रवार का बोध बहुत है। कौन सी गाड़ी से जाते हो वो थोड़ा पता करना है और अभी नवरात्र में तो शायद इसी तरीके से देवी की कृपा हो ही जाएगी। तो शायद थोड़ा बहुत तुम्हारे अपने उस रोग से या वह जो भी है इंद्रियों पर तुम अपने को कंट्रोल कर पाओ। है ना? तो नहीं तो वहां बड़ी-बड़ी जब ट्रेन से कहीं पहुंचने लगते हैं, किसी शहर एंटर करने लगते हैं तो वहां एंटर करने से पहले जो पुल आता है उसकी दीवारों में या फिर गांव खेत खलियान के जो दीवारें दिख रही होती है वहीं लिखा होता है। तो गुप्त रोगी मिले प्रत्येक शुक्रवार। तो उसका भी बोध इन्हें है। कि कौन से शहर में कौन से खंभों में यह चीजें लिखी हुई है। मैं यह पढ़ना चाहूंगा कि हर व्यक्ति हर जगह ना बोल सकता है ना सकता है ना कुछ कर सकता है ऐसे दुनिया में जहां ज्यादा वहां शिवाशंस की नहीं बस वो नहीं जा सकता है शिवाश के लिए नहीं जा सकता है शिवा तो फिर तुम ये फिर मैं वही बात कहूंगा तो फिर तुम ये बात क्यों कह रहे हो कि शिवश ने मेरा समर्थन क्यों नहीं किया इसका क्या लॉजिक है पहले जान तो लो कि तुम्हें शिवांश जानता
01:06:54:24 कितना है तुमने क्या किया क्या नहीं किया है ज्यादा कुछ नहीं कर सकता सिद्धि हमारी कथा नहीं समस सिद्धि हमारी कथा में रहने के शिवाजी ने आपको अभी मालूम का सुंदर उदाहरण दिया है नहीं खुद ही खुद में मिया बन जाओ मालूम का सिखाई बोल रही है तो नुकसान किया इन्होने कहा फिर आगे सुनते अब इतनी बात कर पहली बात क्योंकि ये उस लड़की को सिखा रहे थे क्या सिखा धर्म की बात क्या है कौन सी मुझे सिखाई तो उनको उनके गुरु ने सिखाई तो इनका ये कि जहांजहां वो लड़की इनकी कैसी बातों को कहे वहां वहां पर ये जा रहे बात ये कर सकते थे तुमने मेरी कैसी बात को कहा तुमने मेरी कही बात को कहा नहीं दे सकते थे कि तुमने कोई शंग की बात को कहा नहीं यहां पे सबसे पहली बात अभी इन्होंने कहा है अनुपतो पालन अब इसी की मीमांसा कर लेते है कि क्या मैंने वहां कमेंट में लिखा है कि तुमने कृपाती जी के शब्द कहे है अब अनुपतो पालन की मीमांसा करो इनके यह खुद कह रहे हैं कि वहां मैंने कहा है करपात्री जी के शब्द ध्वनित हो रहे हैं। यानी कि
01:08:10:19 सुनाई दे रहे हैं। वहां पे एक जैसा दिख रहा है, प्रतीत हो रहा है। इस तरह का भाव मैंने डालने का प्रयास किया। मगर तुमने तो वही सामने वाले को सुनना नहीं है, समझना नहीं है। अनुत्व पालन तो तुम कर रहे वो दोस्त तो तुम्हारे अंदर आ रहा है। करपात्री जी के शब्द ध्वनित हो रहे हैं। ध्वनित सुनाई दे रहे हैं। प्रतीत हो रहा है। वहां पर मेरा यह भाव है ये कहने का और मैं तो कह रहा हूं कि उन्हीं के शब्द है। कृपात्री जी के ही शब्द है। विजय सिंह के शब्द है ही नहीं। ना मेरे शब्द है। क्या दिक्कत है
01:08:48:06 उससे? बस बात का पतंग बनाना है और कुछ नहीं। स्वामी को दिया। उनकी बात तुम्हारी वाणी में ये ब्रह्म ज्ञान देती है और उसकी आदमी इसका भी योग अभी वो चल सके और सब लोग अब ये सब क्या है बिना किसी आधार के चलो मैंने वहां पर ये किया कि वहां पर मैंने ये कहा कि तुम्हारे जो शब्द है तुम्हारी जो वाणी है उसमें कृपात्री जी के जो शब्द है वो ध्वनित हो रहे हैं। मगर ये कहां का सनातन सिद्धांत है कि अगर मैं ये कह भी रहा हूं जो तुम्हारे अनुसार गलत है तो उसका कारण है कि वो जो उसका बिजनेस बढ़े अगर मैं ये कह भी रहा हूं कि अगर मैं ऐसा कह भी रहा हूं जो तुम्हारे अनुसार वो सटीक नहीं है जो कि ऐसा है नहीं मगर दुर्जन तोष न्याय से अगर मान भी लिया जाए कि वो जो मैं कह रहा हूं वो ठीक नहीं है तो उसका आधार यही क्यों है कि विजय श्री का व्यापार बढ़े उसका आधार ये भी तो हो सकता है कि आहान का व्यापार बढ़े। उसका आधार यह भी तो हो सकता है कि करपाती जी का नाम यहां के लोग भी जान ले। उसका आधार यह भी तो हो सकता है उसका कारण कि वहां के लोग आहान को जान ले। उसका आधार यह भी तो हो सकता है कि वहां पर आने वाले दर्शक भी पूरी के शंकराचार्य जी को जान ले। वहां तक पहुंचे। ये ये क्यों नहीं हो
01:10:03:06 सकता है? दूसरी संभावनाएं क्यों नहीं है? जो स्वयंभू अहंकारी नेता बनकर बैठ गया है। उसके द्वारा सोची जाने वाली बात ही क्यों है? मैंने अभी बताया ना कि तुम वहां पर आए हो तो मैं ये सीधे-सीधे कह दूं ये वहां पर इसलिए गया था क्योंकि शिवान से परेशान हो गया था। वीडियो बनाने के बाद छत से छलांग लगा के कूद कूदने के लिए आया था। आत्महत्या करने के लिए और मैं अभी से ही कहने लग देखो देखो छत पर बैठा हुआ है बालकनी पर बैठा हुआ है कूदने के लिए आत्महत्या करने के लिए तो इसका कोई आधार है क्या कैसे सिद्ध हो रहा है कि छत पे ये आया है तो आत्महत्या करने ही आया है ये भी सिद्ध हो ये भी हो सकता है कि यहां पर ये जो है एकांत की वजह से आया हो ये भी हो सकता है कि यहां पर ये जो है क्या कहते हैं यहां ऐसी रोशनी इनको प्राप्त हो रही हो या इंटरनेट के सिग्नल ला रहे हो ये भी हो सकता है। क्यों कह रहे हो यार निराधार बातें ऐसे नहीं होता है ना मत करो ऐसे मैं पडूंगा तुम्हारी चीजों को पकड़ लूंगा
01:11:10:18 मैं जो तुम ये करोगे शास्त्रों का प्रभाव उत्पन्न करके लोगों के मन में मैं वहां पर ध्यान दिलाऊंगा यहां ये देखो क्या बातों का पतंग बना रहे हैं अगर मैंने तुम्हारे हिसाब से वहां पर मुझे नहीं कहना चाहिए था कि करपाती जी के शब्द धनित हो रहे हैं तो उससे यह कैसे सिद्ध होता है कि मैंने वहां व्यापार के लिए कहा यह तो सिद्ध करो वो भी विजय श्री के हो सकता है अपने व्यापार के लिए कहा हो कि आान को देख ले वही गाथा चैनल पे हां या फिर पूरी करपात्री जी नाम यहां पे आने वाले लोग भी पढ़े कि भाई ये कौन ऐसी विभूति है जिनके शब्दों के बारे में बात हो रही है हम हो सकता है उसकी वजह से पूरी शंकराचार्य जी तक लोग पहुंचे बहुत सारे कारण हो सकते हैं मेरे ऐसा ऐसा लिखने के मगर वही कारण माना जाएगा जो लुप्त संप्रदाय के गुप्त आचार्य बताएंगे प्रत्येक शुक्रवार को जाने वाले राजस्थान जो है ये जो लड़की है इसी प्रकार से स्वयं छात्र रूप में कर रही है प्रत्यक्ष रूप से वहां लोगों की पारंपरिक रूप से धर्म की जात को जानती है उसी पर इसीलिए ये जो भी करेगी रूप से शास्त्री धर्म ये कमेंट कर रहा है अरे मेरे भाई तुम जैसे लोगों पर मुझे हंसी आती है जहां पर
01:12:25:18 मैंने करपात्री जी का नाम लिया है ना वो दुनिया ऐसी दुनिया है जहां ना लोग पूरी के शंकराचार्य जी को जानते हैं ना लोग वहां पर क्या कहते हैं कृपात्री जी महाराज जी को जानते हैं और उन्हीं को जनवाने के लिए हम आगे भागे फिर रहे हैं तो वहां पर जिन लोग जो जिसको दुनिया जानती ही नहीं है वहां पर उनका नाम लेने से वो योगाचार्य अगर है वो एंडोर्स हो रही है। अरे वो सब वर्णाश्रम के विधी लोगों की दुनिया है। कम्युनिस्टों की दुनिया है। उनको तो मालूम पड़ जाएगा कि कर्पात्री वर्णाश्रम धर्मी कट्टर रूप से जो है पालन करने वाले शास्त्र शास्त्रों वो तो वो तो और दूर भागेंगे।
01:13:20:24 तो वहां पर किस तरीके से वो एंडोर्स होगी करपात्री जी का नाम लेने से करपात्री जी का नाम लेने से कहां पर एंडोर्समेंट होगा कि हम किसी अच्छे संत इत्यादि के यहां बैठे हैं वहां पर कृपात्री जी का नाम वहां से जुड़े हुए लोगों के बीच में धार्मिक कितने कम लोग हैं धार्मिक जो सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म से वास्तविकता में प्रमाण्य बुद्धि रखते हैं। आचरण करना तो बहुत दूर की बात है। मैं इस पर वीडियो बनाऊंगा। तो ऐसी जगह जहां पर करपात्री जी फेमस ही नहीं है। ऐसी जगह जहां पर कृपात्री जी की वैल्यू लोग जानते ही नहीं है। वहां पर कृपात्री जी का नाम लिखने से मेरे भाई वो जो अगर योग शिक्षिका योगाचार्य है वो विजय श्री कैसे वहां पर लाभान्वित हो जाएगी। ये समझाओ ना
01:14:10:08 मुझे उल्टा हम गए वहां पर उनके द्वारा अपने जो अभियान है उसको प्रचार करने तो यह होगा कि नहीं नहीं इसके इसके द्वारा वह प्रचारित हो रही है। मैं गया था ना जब लोगों के पास कि अरे शंकराचार्य राय लखनऊ चले चलो शिव के अवतार है उस गद्दी पर बैठने वाले साक्षात लोगों का रिएक्शन ये होता है चल चल हवा आने दे ये है आज के स्थिति करपात्री जी को करपात्री जी के विषय में पुरी शंकराचार्य जी के विषय में हम और तुम जैसे लोग जानते हैं कि अगर वो आ जाएंगे तो हम भागेंगे राघवाचार्य जी के विषय में हम और तुम जैसे लोग जानते हैं वो कम्युनिस्टों की दुनिया मेरे भाई वो लोग आचार प्रशांत जैसों के आने से भागेंगे। सद्गुरु जैसों के लोगों के आने से भागेंगे। तो अगर सद्गुरु का नाम वहां लिया जाएगा तो वहां पर वो जो है तुम्हारा जो प्रचार वाला वो है वो थोड़ा बहुत उसमें भी ऐसा नहीं है बिल्कुल अकाट रूप से सिद्ध हो जाए। मगर तब भी वो तुम कहते तो वो बात चलने की संभावना हो सकती है। करपाती जैसे वर्णाश्रमी आचार्य पूरी शंकराचार्य जी से जैसे वर्णाश्रमी आचार्यों का नाम लेने से वो जो कम्युनिस्टों की दुनिया वाला जो चीजें हैं जिनको कुछ नहीं पता
01:15:25:08 है परंपरा क्या होती है परंपरा प्राप्त आचार्य क्यों होते हैं कुछ उनको वैल्यूस नहीं पता है वहां पर जाकर के और जो शिक्षिका योग शिक्षिका है वो अपने आप अपना प्रचार कर लेगी बिल्कुल गलत देखिए पूरी शंकराचार्य जी के कई शिष्य लोग व्याख्या में देते हैं। पूरी शंकराचार्य जी के कई शिष्यों के अतिरिक्त लोग ज्ञान देते हैं। यहां तो उन्हीं को कहा जाता है वहां पर भगवान की कितनी टिप्पणी आपको दिख रही थी मुझे नहीं पता लेकिन उसके फिर वही बात अभी खुद ही कह रहे थे इन्होंने कहा ना कि पूरी शंकराचार्य जी के कितने दीक्षित शिष्यों पर आहान की टिप्पणी आपको मिलेगी अभी खुद ही अभी खुद ही कहा तो अब फिर वही बात आ गई अब मैं इस पर बोलूंगा कि मुझे सर्वज्ञ होना चाहिए मुझे मालूम होना चाहिए पूरी शंकराचार्य जी के शिष्य कौन-कौन कहां कहां पर वक्तव्य दे रहे हैं खुद ही तो कह रहे हो। खुद ही तो ऐसी संभावना उत्पन्न कर रहे हो। अरे भाई मुझे जहां जहां के बारे में पता है मैं जहां उपलब्ध हो गया। सामर्थ के अनुसार पहुंच गया। वहां बोल दिया। अभी मैंने लव भारत जो वीडियो बनाया था उसके बारे में मुझे पता चला। वहां पर मैंने उसको प्रोत्साहन किया। उस लड़के ने जो बात कही तो इसका अगर मैंने उसके चैनल पर जाकर के
01:16:40:09 बात कर दी तो इसका मतलब यह है कि या तो मुझे जितने भी लोग हैं उन सबके चैनल पर क्यों? पूरी शंकराचार्य जी के गुरु भाई हैं आचार्य रामशंकर शुक्ल जी तुम भी जानते हो तुमने कहा कितने लोगों के यहां तुमने वक्तव्य दिया तो मैंने उनका उनका चैनल तो यहां से बहुत बार उसको प्रमोट किया है उनका जो चैनल है आचार्य रामशंकर शुक्ल जी का तो यहां पर आपकी ये बात गलत हो गई कि कितने लोगों का किया है जो दोष लगा रहे हो कि तुम अन एक विजय श्री का ही चैनल के प्रमोट कर रहे हो। मैंने अपने चैनल से आचार्य रामशंकर शुक्ल जी का चैनल प्रमोट किया है। मैंने वो जो भगवत भगवत वचन वाले जो वो है युगल किशोर जी जिनके साथ तुम गए थे लाइव गए थे ना उनके चैनल को भी प्रमोट किया। उनको भी प्रोत्साहन प्रोत्साहन दिया है। और इंटर ये क्या कहते हैं? Instagram पे कोई अच्छी चीज मिल जाती है उसको स्टोरी पर लगाता हूं कि नहीं लगाता हूं। तो यहां तुम्हारी बात खत्म हो गई। कितनों को किया है? गिनवा सकता हूं तो मैं कम से कम 100 नाम बेकार की बातें कर रहे हो भगवतानंद खैर मगर क्योंकि तुम अपना सनकीपन दिखा रहे हो तो फिर हम बड़े वाले सनकी
01:17:55:10 है और ये सामने परिभाषा तो नहीं सिखा सदाचार की परिभाषा स्वशास्वस्थ की परिभाषा पक्ष की परिभाषा ये सब सिखा धर्म की परिभाषा मात्र सिखा देने से बात को मात्र किसी और बता देने से करपात्री लेकिन बोलना इस लड़की से करने लगे लड़की को बोलना अच्छा अब यहां पर ये क्या कह रहे हैं पहले कह रहे थे उसके शब्दों की तुलना करपात्री जी के शब्दों से की गई अब क्या कह रहे हैं लड़की की तुलना जो है कृपात्री जी से की यही तो है कि उसके आचरण कहां से शुद्ध हो गए थे जो तुमने करपात्री जी महाराज से उसकी तुलना कर दी। हम अगर मैंने यह कह दिया कि भैया यहां पर तुमने राम की मर्यादा का पालन किया है। राम श्री राम द्वारा बताई गई मर्यादा का पालन किया है तो बस मैंने उसको राम कह दिया। अगर मैंने कहा कि यहां पे तुमने भगवान श्री कृष्ण के द्वारा बताए गए सिद्धांत का पालन किया है। तो बस वो कृष्ण हो गया। क्या तर्क है
01:19:11:26 तुम्हारे यह उम्मीद नहीं थी मुझे तुमसे भगवत आनंद सच में से करने लगी सिखाया हां ले लो तुम्हारी विषय परित हो रहा है ये सिद्धांत कहां है ये यहां पर सिद्धांत की आवश्यकता है ना जब तुम यह कह रहे हो कि तुम्हारे इन इन कार्यों से ऐसा परिलक्षित हो रहा है तो अब मुझे प्रॉब्लम है तुम्हारे इससे। यहां पर तुम्हें सिद्धांत शास्त्र का प्रमाण रखना चाहिए था कि अगर तुम ऐसा ऐसा करोगे तो ऐसा ऐसा परिलक्षित होगा और ऐसा ऐसा माना जाएगा। ठीक है? तो सिद्धांत दो। तेरे लिए कर्तव्य अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण मन मुखी बातें मत दो कि ऐसा ऐसा परिवलक्षित होगा ऐसी संदिग्धता उत्पन्न होगी उसके लिए शास्त्र का प्रमाण दो चलो जहां शास्त्र का प्रमाण देना है वहां नहीं देंगे वहां आवश्यक नहीं है मगर बहुत सारा ड्रामा ग्लोरिफिकेशन
01:20:27:15 है ना राज यूटिलाइजेशन और वो क्या था प्राण वाला वो सब जरूर देंगे। अब ये तो बात किसने कही कि आवश्यकता आपको प्रोत्साहन की आवश्यकता होगी। मुझे कोई प्रोत्साहन की आवश्यकता नहीं पड़ी। ठीक है? प्रोत्साहन की आवश्यकता मुझे ऐसा मैंने नहीं कहा। मैंने बस ये कहा कि अगर तुम धर्म का समर्थन करने के लिए उसके प्रोडकास्ट में जा सकते हो तो अनेकाने प्रकरणों में किसी अलाक प्रकरण में तो मेरे संबंध को सकारात्मक बात नहीं कर सकते थे। अरे भाई तुम्हारे को मैं नहीं जानता हूं कि तुम कहां पर क्या करते हो। तुम्हारे संबंध में हमने बात कही है। तुम रील देखो ना जाकर के। अभी थोड़े दिनों पहले कही है तुम्हारे बारे में समर्थन में। ये तुम्हारे वो है। अज्ञानता वश कर रहे हो तुम। तुम्हें पता नहीं है कि हमने कहा है कि नहीं कहा है। और दूसरी बात भाई ये कोई आवश्यक नहीं है कि मैं जो है सबका जो है वो करूं। जहां पर मेरी अनुकूलता हो गई। जहां मेरी सामर्थ सामर्थ्य हो गई अनुकूलता हो गई अनुकूलता शब्द उचित है वहां मैं पहुंच गया मैं इस तरीके से नहीं देखता हूं कि तुम्हारे सारे वीडियोस कब आ रहे हैं क्या कर रहे हो क्या नहीं कर रहे हो ये सब मुझे नहीं पता
01:21:42:19 है जो सुना किसी से सुन लिया और जिस स्तर पर समर्थन देना था दे भी दिया तुमको क्या पता चल रहा है अगर मैंने तुम्हारा जो वीडियो है वो कहीं पर शेयर किया हो तो इसलिए ऐसी बातें मत करो ना जो तुम सिद्धि नहीं कर पा रहे हो मैंने तुम्हारा समर्थन किया। पहली बात तो मेरा तुम्हारा क्या कहते विजय श्री को समर्थन देने के लिए मेरा तुम्हारा तुमको समर्थन देना आवश्यक नहीं है। पहली बात और ऐसा नहीं है कि मैंने तुम्हें समर्थन दिया नहीं है। ठीक है? तो ये अनर्गल बातें हैं और कुछ नहीं है। चलो खास करके मैंने तो कई बार अच्छे काम तुम्हारा नाम लेकर तुमको टैग करके या तुम्हारे मैंने भी किया। मैंने भी किया तुम्हारा नाम लेकर किसी ना किसी प्रकार से तुम्हारा प्रोत्साहन किया तुम्हारा तुम्हें समर्थन प्रकट किया मगर वो तुम्हें रास नहीं आया वो तुम्हें रास नहीं आया मैंने तुम्हारा समर्थन उस समय भी किया जब पहली लाइव की थी कि अच्छा कार्य कर रहे हैं मगर तुम्हें वो सुनाई नहीं दिया क्योंकि तुम बहरे हो जो तुम्हें मैत्री भाव सुनाई नहीं दे रहा है अंधे हो जो तुम्हें जो सहिष्णुता है वो दिखाई नहीं दे रही और बहुत जल्द गूंगे
01:22:57:25 भी हो जाओगे जब कुछ जो अनर्गल प्रलाप है ना ये करने के योग्य भी नहीं रहोगे लोगों को मार के भेजा देखो आप अच्छी बात मेरे मन था तुम अपने चारों आ रहे थे आंड था इस व्यक्ति से दूर हो व्यक्ति हमारे का तो प्रमाण है प्रमाण वहां किसी शास्त्रीय विषय पर किसी मर्यादा पर चर्चा हो झगड़ा नहीं झगड़ा नहीं था ये शास्त्री विषय पर ऐसा नहीं है इसके हम आपको बहुत सारे अभी उदाहरण दे रहे हैं लगे हुए हैं इकट्ठा करके एक बंच देंगे तुम्हें बढ़िया सा और तुम्हें बताएंगे तुमने कितनी अवमानना की है जो केवल शास्त्रीय विषय पर नहीं शास्त्रीय विषय से बाहर होकर के तुमने बात की विषय पर इतिहास पुराण श्रम एक विषय पर खंडन करना है खंडन करने की आवश्यकता होती अगर हमें कभी तो हम किसी महान व्यक्ति को साधने की आप रूप से यह कह दे कि आप मेरे समर्थन में पत्र जारी कर दीजिए या मेरे समर्थन में या पत्र जारी कर दीजिए आप रूप से यह तो तुम क्यों रो रहे हो अगर तुम्हें
01:24:13:01 प्रोत्साहन की आवश्यकता नहीं है तो आंसू क्यों बहा रहे हो कि शिवश ने मेरा प्रोत्साहन नहीं किया Facebook पर तुम्हारा कमेंट था। जब लोग शिव मेरी बात वहां पर कर रहे थे और मुझे ऐसा कुछ याद है कि शायद एक कोई तुम्हारा वो वीडियो है जो वहां पर मैं पहुंच गया था। किसी ने मुझे लिंक दिया था। तो संभवत मैंने उसको लाइक किया है। वो पढ़ा है कि नहीं पढ़ा है वो लाइक वो देखने का विषय है। मुझे ऐसा लगता है कि मैंने उसे लाइक किया है। वो समर्थन नहीं है। उसको चेक करिएगा। शायद वही वाला है जिसमें कि आप जो है जो दो वीडियोस है इसके एक में वासुदेवाचार्य जी महाराज बोले एक में राघवाचार्य जी महाराज बोले हैं उन दोनों वीडियोस की क्लिप लगाई है और आपने कहा है दोनों का अभिनंदन है। हालांकि आपने भी वहां पर भी यह कह दिया कि जो है अच्छा है हमारे आवाज उठाने के कारण जगह-जगह से आवाज उठने लगी है। कारण स्वयं को क्रेडिट दे दिया मगर फिर भी शायद मैंने वहां पर लाइक किया है। तो तुम्हारी यह वाली बात भी गलत साबित होगी। अगर मैंने वहां पर लाइक किया होगा तो मैं कल वहां पर दिखाऊंगा लोगों को। अभी लोग वहां उस वहां जाकर के भगवत आनंद के अच्छा देखना जरा Facebook है। Facebook
01:25:28:21 चालू करो जरा। Facebook चालू करो जल्दी। देखो शायद दिख जाए। हां। इस पे यह स्वामी निगराचार्य की आईडी पर जाना है। अभी देखते हैं। पहली बात तो ऐसा कोई आवश्यक नहीं है। मगर मुझे ऐसा संभवत मेरी स्मृति में है कि मैंने वहां पर जाकर लाइक किया है। और तुम्हारे पास नोटिफिकेशन आ जाएगी अगर मैं अभी के अभी करूंगा तो बाद की नोटिफिकेशन आएगी ना प्रमाण के रूप में दिखा देना। तो ऐसा भी नहीं है कि पहले का लायक नहीं है। तो अभी तुम्हारी यहां पर बताता हूं। झूठ हम आ गई आ तो गई। यहां पर इनकी वीडियो है। यह मैं यह भगवतानंद जी की यह चला रहा हूं। Facebook आईडी खोल रखी है। ठीक है। नीचे जा रहे हैं। लॉग इन मांग रहा है तो। जल्दी अकाउंट बनाओ तब तक मैं दिखाता हूं। अकाउंट बनाओ जल्दी उसमें लॉग इन करो।
01:26:41:03 अच्छा अभी वह अकाउंट बनाया जा रहा है कि क्योंकि जो हमारे पास हैं सहायक के रूप में उनका वो नहीं है। अकाउंट नहीं बना हुआ है। Facebook पे वो अकाउंट बनाएंगे और फिर जाएंगे आईडी पर और जो है देखेंगे कि वहां पर लाइक मिला है कि नहीं मिला है। ठीक है? पहली बात। दूसरी बात आवश्यक नहीं है कि अगर मैंने कहीं पर लाइक किया है तो आपके यहां भी लाइक करूं। पहली बात और अगर मैंने आपको लाइक नहीं किया है तो इसका मतलब है कि वहां पर मेरा कोई दूसरा चक्कर है। है ना कोई गलत बात यहां सनातन सिद्धांत देना चाहिए था कि आप मेरे समर्थन में जारी कर दीजिए या मेरे समर्थन में यह वक्तव्य जारी कर दीजिए और की हमारी लिखी हुई पुस्तकों में कीमतियां प्राप्त होती है लेकिन यह भी बता दे की बहुत से विद्वानों ने स्वयं ही तक्तिया भेजी है और मैंने किसी भी विद्वान को यह नहीं कहा है कि आप मेरी विकृति को सम्मानित करने के लिए या मुझे सम्मान देने के लिए मुझे अपने कार्यक्रम को बुलाने के लिए बाध्य है या मैं आपसे आग्रह करूंगा आप मेरे साथ ऐसा कर दीजिए ऐसा मैंने नहीं कहा मैंने वीडियो भेजा है आप पढ़िए इसमें क्या है मैंने ये भी कहा है अगर आप शास्त्र का समर्थक देंगे तो पता कीजिए क्योंकि आपका श्लोक है उनसे भी पूरा बताएंगे यू नीड इज एन आई
01:27:46:22 वाली दिस लाइक नो वन सी गो [संगीत] लेकिन इनसे कहा है क्योंकि अपनी बात है शास्त्री वाणी का पता होना चाहिए और मैंने अपने बारे में नहीं कहा मैं तो मन से शंकराचार्य की बात को भी करता हूं वो स्वामी हिंदुस्तान में मामलों में तो मैंने मन के साथ नाम सत्य योगी वाले मैंने कहा है एक तरफ तू तड़ाक करो उनके लिए फिर मलू पी पीठाधीश्वर देख रहे हो ना आज बड़े हमंबल हो गए हैं
01:28:28:18 [संगीत] ये क्या बात है पूरी के शंकराचार्य जी की वाणी वो क्यों नहीं खाली कर पाए? क्यों नहीं हो पाए? इसीलिए तो हिंदू राष्ट्र के लिए लड़ रहे हैं। और इसका यहां प्रसंग क्या है? तो क्यों रो रहे हो कि हमको प्रोत्साहित नहीं किया। प्रोत्साहन ना लेने वाली बात बताऊं। वहीं पर यह कमेंट में रो रहे थे कि शिवश नारायण द्विवेदी हमारा हम भले ही वह कर दे मगर वह हमारा समर्थन नहीं करेगा क्योंकि वह पूरी मटके परिकरों के बीच का व्यक्ति है और जबकि हमने तुम्हारा प्रोत्साहन किया उस उस कमेंट को देखने से पहले हम तुम्हें लाइक दे चुके थे वहां पर ठीक है और दूसरी बात क्या है संभवत अभी देखता हूं पता नहीं हटा ना लिया हो या मुझे ऐसा याद है कि किया था तो
01:29:34:12 दूसरी बात यह है कि अगर ऐसा नहीं है कि आपको आवश्यकता है तो आपको रोना नहीं चाहिए। हां मेरे मन में ये भाव था। मुझे तुम जैसे मनुवादियों की आवश्यकता है। बिल्कुल है। मगर कुछ चीजें अगर तुम्हारी जो है वो ठीक हो जाए। उसके उसमें मेरी और तुम्हारी अनुकूलता हो जाए। प्रतिकूलता की भी मैं कह रहा हूं। तुम कह रहे हो ना तुम्हें आवश्यकता नहीं है। मुझे आवश्यकता है। तुम जैसे आज मनुवादी होने चाहिए जो शास्त्र के लिए लड़ सकते हो। प्रखर होकर के बोल सकते हो। मगर उसमें कुछ दोष है। साथ-साथ मर्यादा का उल्लंघन मत करो मेरे भाई। मर्यादा का उल्लंघन तो तुम कर रहे हो। कोई मात्र शक्ति है। वह अपने जीवन को बदल चुकी है। दिशाहीन थी तब की उसके जीवन से लेकर के और जो है तुम बात कर रहे हो कि क्या कहते हैं वह। उसके अंतर जो अंतरंग जो उसके वस्त्र है उनका नाम ले रहे हो उसका यहां पर धज्जियां उड़ा रहे हो उसकी गरिमा की क्यों किसी को सुधर के अपने जीवन को ठीक से जीने का वो नहीं है क्या अधिकार क्या वो तुमसे व्यास गद्दी तुम्हारी मांग रही है क्या ऐसा तुम्हारा तुमसे मांगा जिसको
01:30:49:16 अह देते टाइम तुमको ये सब याद दिलाना पड़ेगा तुम्हारी ये फोटो है ऐसा है वैसा है क्या ऐसा तुम्हारा छीन लिया उसने हां हां राघवाचार्य जी महाराज का जो वीडियो डाला होगा वह हम निकाल रहे हैं।
01:31:36:07 कितनी फरवरी हो गई ऐसे ही है। यह देखो यह देखो इसको कहते हैं एक्शन देखो भगवत आनंद तुमने कहा ना समर्थन नहीं किया ये देखो मेरी आईडी से जब तक नहीं करोगे तब तक कैसे पता चलेगा कि मैंने किया है कि नहीं लाइक्स में जाओ अंदर किस-किस के द्वारा लाइक किया गया है
01:32:24:04 उसी में गए ना हां शायद इससे किया होगा एक्टिविटीज में जाओ हैं ऐसे कैसे होगा नहीं मैंने लाइक किया है कि नहीं वही लिस्ट में पता चलेगा किस-किस ने लाइक किया है। उसकी लाइक की लिस्ट में जाओ किस-किस ने किया है। आप ढूंढो तब तक मिल जाए तो हम तो वहां पर क्या हो रहा था मैं बता दूं वहां संदर्भ कि वो जो वहां पर तुमने अपने आप को क्रेडिट भी दे दिया वासुदेवाचार्य जी महाराज का वीडियो था और क्या कहते हैं इनका था राघवाचार्य जी महाराज का इसमें मैं भी हूं मेरा नाम लिया था इसमें एक बार प्ले कर लेना कोई इस की बात हो रही है कि नहीं हो रही ना बस इसमें लाइक की लिस्ट में जाओ मेरा नाम ढूंढो कितने लाइक हैं उस पर ढूंढो नाम होगा मेरा नव वर्ष के हार्दिक शुभकामनाएं ठीक है तो तुम्हारे अंदर कुछ चीजें हैं जिसके कारण जो है तुम ऐसा कर रहे हो मगर ऐसा भी नहीं है कि तुमको बिल्कुल अपने से अलग ही कर दिया
01:33:39:06 जाए कुछ दोष हैं कुछ हो सकता है उस पर हम लोग चर्चा करें तो पता चले भाई मगर वो सब चीजें तो तुमने ने रहने नहीं दी और हां या तो आह्वान सिद्ध लाइक होगा या शिवश नारायण द्विवेदी के नाम से लाइक होगा आपका आ जाएगा आप लेवल पहुंच जाए तो आप यह मत कहो ना मेरा प्रोत्साहन क्यों नहीं किया हो अगर प्रोत्साहन की आवश्यकता होती खैर ये मेरा एक तंज था इनके लिए कि हमारे प्रोत्साहन की बात क्यों कर रहे हैं अगर मैं सर्वज्ञ नहीं हूं। अगर मैं कोई सर्वज्ञ नहीं हूं तो हमसे यह अपेक्षा क्यों कर रहे हैं कि मैं सबको लाइक करूं। अच्छा सबको लाइक मतलब सबको समर्थन दूं। अगर ये मुझे सबको समर्थन देने वाला नहीं समझ रहे हैं तो यह बिना जाने कि हमने इनके कौन-कौन से अच्छे कर्म है। यह क्यों सोचा कि इन्होंने मुझे समर्थन क्यों नहीं दिया? विजय श्री को क्यों दिया? तो यह थोड़ा
01:34:46:26 मेरे ख्याल से युक्ति की कमी है इनके पास बैनर लगा के नीचे अपना काम करते ताकि हमको समस्या अच्छा तुम मेरे कितने बैनर दिखाओगे जो मैंने अपना कोई कार्य किया है और उसमें जो है पूरी के शंकराचार्य जी का बैनर बना लगाया हो दिखाओ एक नहीं दिखा पाओगे सिर्फ जो मठ का जो प्रकल्प हमें बताया गया है केवल उसी प्रकल्प में उनका उनका बैनर होगा अथवा उनका कोई जन्मोत्सव मना रहे होंगे तब क्योंकि जैसे करपात्री जी का जन्मोत्सव होगा तो उसमें गुरुदेव का नाम होगा करपात्री जी का नाम होगा ठीक है तो हमने अपने प्रकल्पों में कहां किसी का बैनर लगाया कि यह जो कार्य हम कर रहे हैं वाला इनके अनुगत हो के कार्य हो रहा है और हमारे प्रत्येक वीडियो में गुरुदेव के प्रति एक श्रद्धा की जाती है उनको प्रदान करने के लिए केवल उसके लिए वहां पर वो परंपरा दिखाई जाती है और वो जो वाक्य लिखा होता है उसका उसका उपयोग विनियोग इसलिए नहीं है कि जो है ये जो वीडियो है ये जो है मठ से बन रहा है। हम
01:36:02:04 अपने पूज्य है जो उनको अपनी श्रद्धा अर्पण कर रहे हैं। ठीक है? अगर तुलसीदास जी महाराज ने अपने गुरु का नाम लिया अपनी रामचरितमानस में सबसे पहले है ना तो Facebook लॉगिन कैसे करोगे तो आईडी पासवर्ड मेरा कैसे मिलेगा पता नहीं कौन सी आईडी से बनाया होगा मुझे खुद ही याद नहीं तो चलो 5 मिनट के लिए रोकते हैं लाइव को और जो है वह Facebook का लेकर के आते हैं मामला। अब जब बात की बात है तो फिर पूरी बात करते हैं। ठीक है? तब तक आप लोग शुक्रवार की टिकट बुक कराइए राजस्थान की।
01:39:29:01 तो वापस आ गए हैं। तो इनका कहना है कि तुमने हमें समर्थन नहीं किया बल्कि हमने कई बार समर्थन किया। तो यह देखो मैं ज्यादा वो शास्त्रों के वचन नहीं बोलता हूं। मगर मैं श्री राम को जितना जान गया हूं थोड़ा बहुत भगवत कृपा से श्री राम जी की कृपा से गुरु की कृपा से उतना प्रयास जरूर करता हूं कि मैं वही बात बोलूं जो डंकी की चोट बिल्कुल यथावत रूप से डंकी की चोट पर वह सिद्ध हो सके। ठीक है? तो यह देखिए आप
01:40:03:10 इसको कहते हैं रामो विग्रह धर्म इसको कहते हैं रामो दनाभि भाषते ये देख लो ठीक है क्यों मेरी तो आईडी है हां हो रहा है फोकस हो रहा है देख लो भैया 18 फरवरी 2025 को शिवश नारायण द्विवेदी लाइक्स निग्राचार्य है श्री भगवतानंद गुरु इनकी पोस्ट को मैंने लाइक किया तो यह भी झूठ हो गया और
01:40:40:07 ठीक है तो अब तुम्हारा ये भी खत्म हो गया तो ये तुम्हारा अहंकार है मेरे भाई तुम्हारा अहंकार है जो तुमने बिना जांच किए बिना चीजें किए कुछ भी और यह वक्तव्य अपने देते हो। यह तुम्हारा अहंकार है। इसलिए तुम्हारा ऐसा हो रहा है लफड़ा मेरे साथ। तुमको नहीं मालूम है कि मैंने लाइक किया तो मैं क्या करूं? अब वही वाली बात हो गई ना? जैसे मुझे नहीं मालूम था तुमने कहां-कहां क्या-क्या किया। जो मालूम पड़ा अगर मैं वहां पर रहूं पश्चित और ऐसा कुछ कर उसमें भी मेरे पास अगर कमेंट करना समय होना चाहिए। आवश्यक नहीं है कि मैं वहां कर दूं। अच्छा अब मैंने किया कि नहीं किया तुम्हें कैसे पता? अब तुम्हें नहीं पता था तो अब मैं तुम्हें दोष दे रहा हूं और जबकि तुम्हें पता होना चाहिए क्योंकि तुम्हारे पर रिएक्ट किया है तुम्हारे Facebook अकाउंट में फिर भी मैं तुम्हें बेनिफिट ऑफ डाउट दूंगा कि हो सकता है भाई 2500 वहां पर लाइक है कहां तुम देखने जाओगे किस-किस ने लाइक किया है कि नहीं किया है। हां मगर जब तुमको नहीं पता है तो मत बोलो ना मेरे भाई बोलोगे तो
01:41:55:07 फसोगे चलती लाइफ में हो गया तुम्हारा किरकिरी कि मैंने समर्थन तुम्हारा किया है कि नहीं किया है जब तुम्हें नहीं पता था तो तुम्हें आरोप नहीं लगाना चाहिए था कि मेरा समर्थन नहीं किया ठीक है अब देखो तुम्हारे जो समर्थक हैं अब विषयांतर करते नजर आएंगे समर्थन किया कि नहीं किया बात यह चल रही है तो समर्थन किया जहां मैं पहुंच गया जहां मुझे दिख गया मुझे लोगों ने बताया ऐसा ऐसा है वीडियो डाला है जबकि वहां पर भी तुम्हारी एक ऐसी बात थी जो तुम्हारे अहंकार को पोषित करने के लिए वहां पर तुमने लिखी थी कि हमारे कहने के कारण अब जगह जगह से आवाजें उठ रही है ये है ना वहां पर क्यों तुम्हारे कहने का कारण जो है आन चैनल पर इस के बारे में बोला बोला गया था नहीं इसको कहते हैं रामो विग्रह वान धर्मा मैं नहीं हूं उनके जैसा बनने का सदैव प्रयास करता रहूंगा दोगली बातें नहीं बोलता हूं मैं 18 फरवरी को तुम्हारी उस पोस्ट को मैंने लाइक किया
01:43:10:09 है तुम्हें नहीं पता तो यह मेरी यह मेरी गलती नहीं है कि तुम्हें नहीं पता और ना ही मैं ऐसी अपेक्षा करता हूं कि तुम्हें पता होना चाहिए। यह है धर्म। मैं उस बात की तुमसे अपेक्षा करता हूं जो शास्त्र कहते हैं, जो राम कहते हैं और तुम उस बात की लोगों से अपेक्षा करते हो जो तुम कहते हो। यह है मुझ में और तुम में अंतर। देख लिया हो गई किरकरी। बता देना इसको जाकर के कि तुम्हें यह नहीं कहना चाहिए था कि शिवांश ने तुम्हें समर्थन किया है कि नहीं। यह तो मैंने सबूत दिया है।
01:43:48:02 और इसके अलावा भी बहुत सारी जगहों पर तुम्हारा समर्थन किया है। जिन अंशों में तुम ठीक हो। क्योंकि गुरुदेव ने सिखाया था कि जिसका जहां गुण गुण हो उसकी वहां उतनी वो करो और जिसका जितना अंश जो है गलत हो उसका वहां पर खंडन करो। खंडन करो। प्रतिकार करो। पूछा था एक दिन गुरुदेव से कि गुरुदेव क्या श्री राम ने रावण को भी कभी पुरोहित के रूप में स्वीकार किया था तो उन्होंने कहा था हां बिल्कुल तब से हम करने लगे ये कार्य ठीक है चलिए आगे बढ़ते हैं उमर के बता दिया समर्थन मिलता है ना समर्थन चलो हो गई ये वाली बात है और ना कभी हमको किसी अच्छा अच्छा कार्य कर रहा है। खास करके उसके परिश्रम से आपका भी लाभ हो रहा है। आपके गुरु का भी सम्मान हो रहा है। लोगों के अंदर ड्यूटी आ रही है। लोग से वैसे उसके परिश्रम का सम्मान करना किसी भी सज्जन के लिए कृतता के ज्ञापन का एक उदाहरण होता है। हो गया आपकी कभी हमारा समर्थन कर रही है। हमारे शास्त्री की प्रशंसा ये दिखाना आप लोग क्लिप बना करके इस व्यक्ति का झूठ दिखाना। अरे भैया जब तुम्हें पता नहीं है कि मैंने तुम्हारा समर्थन किया है कि नहीं किया है तो तुम
01:45:03:06 क्यों बोल रहे हो कि तुमने कभी समर्थन नहीं किया। यही तो मैं कहता हूं वह बातें बोलो उन बातों के लिए लड़ जाओ मर जाओ जो अकाट्य हो मगर जिन बातों का दूसरी दूसरे अर्थ निकल सकते हैं जो केवल संभावना है उनप मत बोलो मत लड़ो और क्या बोला है मैंने अब अकाट रूप से तुम्हें दिखा दिया ना समर्थन किया है अब हो गए निग्रह संप्रदाय के निग्रचार्य हो गए झूठे साबित यहां पर ऐसा नहीं है कि सब अब जो इनके यहां पर फॉलोअर्स हैं। वह विषयांतर कर रहे हैं। फिर यह क्यों हुआ? यह होता है बात से दूर भागना। दूसरे दूसरे पॉइंट को उखाड़ो जल्दी जल्दी उखाड़ो। दूसरे पॉइंट को उखाड़ो। यहां तो ये तो फस गए यार। साक्षात हो गया तो है ना? 18 फरवरी को इनकी पोस्ट को लाइक किया है और वह भी दिल से किया था। हृदय से किया था।
01:46:05:27 ठोकते है वो उनसे सहमत होते है कुछ बिंदु ऐसे जरूर है जिसमें हमने ये कहा कि उनका पता हमें पता नहीं लग रहा उन्होंने भी कहा कि हमको इनका पक्ष नहीं लग रहा है यहां पर लगा कि उनका परिश्रम उनका शास्त्र शाश्वत है और उस बात को अधिक जनता तक पहुंचाना चाहिए तब हमने उनका समर्थन लिखा प्रशंसा की और उन्होंने भी मेरे पर ऐसा ही किया जिस समय आप शंकराचार्य जी को ही गाली देने वाले रामचार्य से हाथ मिलाते थे ना उस समय राजेश राज्या रामचार्य के शास्त्री क्रमांक के आधार पहुंचेगा रामभद्राचार्य जी से मैंने हाथ कम मिलाया यह एक विचारणीय बिंदु है तुमको समय मिले तो बताना रामभद्राचार्य जी से मैंने कब हाथ मिलाया क्योंकि उनका जो वो वक्तव्य मैंने सुना है तब से मैं तो उनको सुनता भी नहीं हूं कि चारों शंकराचार्य में से कोई नहीं है जो मेरे साथ जो है पांच मिनट भी टिक सके संस्कृत में और वहां पर तो मैंने ने एक वीडियो भी बनाया था। उस पर प्रतिक्रिया दी थी अपनी हम तो ये तो निराधार बात है।
01:47:16:01 [संगीत] चलिए परिश्रम के प्रति यहां ये बताना व्यक्ति जो है ये कर रहा है। व्यक्ति के लिए विवेक के प्रति शास्त नहीं है। है उसमें आपको अपने मान आपके लिए भाई मान लो लेकिन आपको उनके प्रति यह भी उसे सब नहीं सीख सके है ना मान वाला समर्थन वाला तुरंत हमने वीडियो बनाया वाले वीडियो को छोड़ दे आपसे निश्चित रूढ़ बनाए रखना हमारा YouTube में उसमें आपने कहा विषय को छोड़ दे आपसे निश्चित रूढ़ बनाए रखना तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है ना भगवतानंद कि तुम अपने पूर्वाग्रह और अपने अहंकार के मारे हुए हो। अहंकार ने तुम्हें अंधा कर दिया है।
01:48:10:02 ठीक है? उसके मारे हुए हो। उसी कारण से तुम तुम्हारा इतना विवेक काम नहीं किया कि मैं यह सोचने से पहले कि उसने मेरा समर्थन किया है कि नहीं। या तो पूछ ही लूं कुछ वा ही लूं। मगर तुम तो उस बात पर लड़ने मरने आ गए। यह यह दिक्कत है। तुम्हें तुम्हारे अहंकार ने मारा है। और तुम यह जो अहंकार में आकर के जो छटाक कसी करने के चक्कर में लाइन क्रॉस करते हो फिर यह मारेगा। है ना? क्योंकि तुम्हें लोकेशना हो गई है। तो लोकेशना का वो भगवत गीता में बड़ा अच्छा बताया गया है कि जब व्यक्ति को लोकेश वो आसक्ति हो जाती है किसी चीज में। उसी कारण उसकी पूर्ति ना होने के कारण आसक्ति की पूर्ति ना होने के कारण फिर व्यक्ति के मन में उत्पन्न होता है क्रोध।
01:49:05:25 ठीक है? और क्रोध के क्रोध जहां से उत्पन्न होता है उसी जगह को पहले जलाता है। तो यह जो तुम्हारी आसक्ति है ना लोकेशना की अपने अहंकार को पोषित करने की यह जो तुम्हारी आसक्ति है इसी आसक्ति से तुम्हारे अंदर एक क्रोध उत्पन्न हुआ लोकेशना के कारण और फिर वो जो चीजें हैं अहंकार उत्पन्न हुआ और फिर वो जो चीजें है वो तुम्हें ब्लाइंड कर देती है। तुम्हें तुम्हारा विवेक क्षीण कर देती है। ये सब लिखा है भगवत गीता में। तुम तो ज्यादा तुम तुम्हें तो चार साल की उम्र में रट गई थी तो यह श्लोक तुम ही बता दोगे है ना तो मैं बताऊंगा भाई मुझे ऐसे याद नहीं है इस तरह से पर हां मर्म मुझे याद है एक श्लोक का मर्म ये है और तो तुम्हारा विवेक जो है छिन गया है लोकेशना के प्रति आसक्ति में तुम ये अच्छाई बुराई का निर्णय नहीं कर पा रहे हो हर जगह तुम्हें वो विवेक छिन जाने के कारण हर जगह तुम्हें दिक्कत हो रही है निर्णय नहीं ले पा रहे हो सही देख नहीं पा रहे कहां क्या हो रहा है, कहां क्या नहीं हो रहा है। और जहां पर अगर नहीं पता है अभाव है जानकारी का तो वहां पे भी तुम अपना निर्णय जरूर दे रहे हो। जितनी तुम्हारी जानकारी
01:50:21:01 है बस उतना ही दुनिया है। जितनी तुमने देखी बस उतनी दुनिया है। तुमने जापान नहीं देखा तो तुम ये बोलोगे कि जापान है ही नहीं। तुमने शिवश नारायण द्विवेदी को समर्थन करते हुए नहीं देखा तो तुम ये बोलोगे कि शिवश नारायण द्विवेदी ने समर्थन किया ही नहीं। यह सिद्धांत नहीं होता है। चलिए इसका क्या है? हम चाहे कितना भी आपके गुरु की इच्छा भी बोल दे आपके मन में नहीं आ सकती। आपके मन में यह सारा जो है यह बकवास सिद्ध हो गया जब हमने लाइक दिखा दिया है भी हाथ मिला लेते हैं हाथ मिलाने को आप बहुत हाथ मिला लेते हैं दुशासन खचाते हैं इसलिए धर्म का विरोध करने वाले आरएस से भी हाथ मिला लेते हैं इसलिए अच्छा एक मिनट एक मिनट एक मिनट धर्म का प अधर्म का पक्ष पक्ष रखने वाले आरएसएस से हाथ मिलाने का मतलब क्या होगा जब मैं आरएसएस का कार्यकर्ता हो जाऊंगा आरएसएस में जाकर के मिल जाऊंगा आरएसएस एस के लोगों को अगर मैं रामपाल के यहां पर ले जा रहा हूं साथ में तो उससे यह हो गया कि मैंने आरएसएस से हाथ मिला लिया। मैंने उसके सिद्धांतों को अपना लिया। अगर आरएसएस वाले लोग, बजरंग दल वाले लोग या बीजेपी वाले लोग मेरे साथ कहीं पर खड़े हुए हैं और वह कोई कार्य में मदद कर रहे हैं जो कार्य धर्म के लिए अनुकूल है। जो कार्य तुम्हारे लिए अनुकूल है, मेरे लिए अनुकूल है।
01:51:36:24 अगर बीजेपी वाले, आरएसएस वाले ऐसा कर रहे हैं तो उसका यही मतलब क्यों निकलेगा कि मैंने जो है आरएसएस जाइन कर ली है। यह मतलब क्यों नहीं निकलेगा कि उन्होंने शंकर मठ के प्रति अपनी कृतज्ञता दिखाई है या यह जो अभियान है उसके प्रति निष्ठावान हुए हैं या चलो मेरे ही प्रति निष्ठावान हुए यही तो तुम्हारे पूर्वाग्रह है और तो और यह करके तुम विरोध किस कार्य का कर रहे हो यह भी सोचो क्या तुम्हारे पक्ष का कार्य नहीं है उस कार्य का जो विरोध कर रहे हो क्या तुम्हारे लिए संभव है अकेले जाकर के किसी उसको स्टॉल को उखाड़ देना क्योंकि तुम जिसका भी जिसका भी साथ लोगे एट ए टाइम वह व्यक्ति तुम्हारे अनुसार जो है तुम्हारे सिद्धांतों को मानने वाला नहीं होगा और मैंने कई बार कहा है दो अपने बारे में बताओ कौन-कौन है तुम्हारे साथी संगी पता चल जाएगा वो कितने तुम्हारे सिद्धांतों को मानने वाले हैं ठीक है तो अगर आरएसएस और बजरंग दल वाले मेरे साथ खड़े हैं तो इसका अर्थ यही नहीं है कि मैंने बजरंग दल जाइन कर लिया आरएसएस जाइन कर लिया इसका मतलब यह भी कि उन्होंने सनातन के सार्वभौम सिद्धांतों को स्वीकार किया। परंपरा प्राप्त आचार्यों की शरण में आए। उतने अंश में कम से कम जब वो वहां
01:52:51:27 जाकर के रामपाल से मेरे नेतृत्व में वहां खड़े हुए या मेरे साथ में वहां खड़े हुए। ठीक है। मेरा आरएसएस जाइन करना सिद्ध करो। वरना अगर यह बोलना है तो शास्त्रों का करता है कुरान नहीं मानता जो शंकराचार करती है संस्था और शंकराचार्य रामभद्राचार्य से कहां पर मैंने वो किया है अनुकूलता प्रस्तुत की है वो जरा बताना कहां अनुकूलता है शंकराचार्य आपका धर्मास
01:53:29:09 है तो अच्छा ऐसे हिमा है वैसे बहुत सारी बातें होगी आप नहीं तो इसका अर्थ ये है ना कि हम बहुत मालूम से पीछे चल रहे है मुझे मालूम हम आगे चल रहे हैं वहां भी तुम्हारा सम्मान नहीं कर रहे है ना पूरा जीवन शास्त्री बिताई आप बीच में जीवन समास हो रहा है ना वो जब पीछे से कर दिया कि हमने तुम्हारा समर्थन किया है की बात आपने कही हमने कभी भी Facebook पर या सोशल मीडिया पर इस प्रकार से अपील की हो गाली दे रहे है हमारा समर्थन करो हमें से करना है वो करता है चाहिए हा मगर अगर तो ऐसे ही हुआ है मुझे कोई नहीं सुन लीजिए सुन सुन लीजिए सुन लीजिए फिर से यहां पर मैं आपको एक और छोटा सा ज्ञान देने वाला हूं श्री भैया के इस वक्तव्य में एक आपको निग्र स्थान प्राप्त हो रहा है निग्र स्थान के 22 प्रकार होता है लेकिन वो इस तरह का विषय नहीं है मुझे पता है कि आपको होती है की आवश्यकता होती है भैया ने अपने वक्तव्य में आपको एक ज्ञान दिया है आप ध्यान से सुनेंगे इस वीडियो में ये कह रहे है की इन्होंने इनको किसी के समर्थन की आवश्यकता किसी ने समझ लिया आपने सुन इनके लाइब्रेरी आप सुन चुके होंगे तो इसको कहते हैं है ना प्रतिज्ञा सन्यास मतलब कोई बात आप पहले स्वयं कहे और फिर उसी बात से स्वयं पलट जावे आपने कोई बात पहले रखी अरे मेरे भाई तुमने अभी बहुत सारे तंज कसे हैं अपने में
01:54:44:16 ये ये सीमा है फलानी ये है वो है वो क्या मैं समझ नहीं रहा हूं तंज कसे ना तो सामने वाला तंज कस रहा है तो तुम्हें क्या दिक्कत हो रही है हम और यह तंज के रूप में ही तो बोल रहा हूं मैं कि जब तुम क्यों इतना ज्यादा पीड़ित हो कि शिवास ने मेरा समर्थन नहीं किया। कौन सा सिद्धांत ये कहता है कि मुझे तुम्हारा समर्थन करना चाहिए था और इस बारे में शास्त्र प्रमाण दो। तुम तो अपने मन की बातें कर रहे हो। जहां पे शास्त्र प्रमाण रखना होता है वहां नहीं रखते हैं। जहां पे अपनी बकवास करनी होती है वहां उसके लिए उसको पोषित करने के लिए शास्त्र का प्रमाण रखते हैं। और लोगों की बातें होती है। भाई अर्ज किया है तो इनके अंध भक्त कहेंगे वाह वाह वाह वाह वाह वाह। फिर ये कहेंगे हम शुरू तो करने दो। वही वाली बात है तुम्हारी। यहां शास्त्र का प्रमाण रखना चाहिए था कि तुमको जो है राजेश राजौरिया जी से सीखना चाहिए था या फलाने से सीखना चाहिए था। इतनी छोटी छोटी सी बात और समर्थन देना चाहिए था। तो पहली बात तो समर्थन दिया गया। फिर शास्त्र का प्रमाण दो मेरे समर्थन देने से देना आवश्यक है। बिल्कुल वो भी तब भी जब मैं तुम्हें ना जानता हूं। तुम्हारे बारे में तुम क्या कर रहे हो नहीं जानता हूं। और वरना यह सिद्ध करो
01:55:59:25 शास्त्र के प्रमाण से या तो यह सिद्ध करो कि तुम्हारी इन इन चीजों से पता सिद्ध होता है कि तुम मेरे बारे में जानते हो हम ऐसे होगा ना मीमांसा मनमुखी व्याख्या है तुम्हारी पूरी मनमुखी कभी हमने ऐसा किया नहीं इसको कहते हैं प्रतिज्ञा सन्यास का स्थान होता है और यदि शिव अगर मेरे सुर ध्यान से सुनेता पक्ष है पक्ष की हार हो रही है हम अगर मेरे चलो यहां पे नोट कर लो भैया पक्ष की हार हो रही है यहां बहुत अच्छा फेस आया है इनका बड़ा अच्छा सा प्यारा सा फोटो निकाल लेना बड़ा प्यारा
01:56:40:12 इनके वीडियो का 42 39 41 के आसपास ऐसे करके जो हंस रहे हैं बड़ा प्यारा सा आया फोटो समाज में उसको नोट कर ही रहे ऐसे फोटो जो है इनके वीडियोस में कम मिलते हैं एक मिनट बता सही तो नहीं समाज में छात्र अगर मेरे को ध्यान से ना 42 42 42 42 की तो कहानी है समाज में समाज या काम भी कर ही नहीं रहे हम अपनी पीछे नहीं हट पाए समाज राम बाल स्क इत्यादि ब्रह्मा कुमारी के नहीं तुमने विरोध किया है पीछे हट रहे हो तुमने विरोध किया है तुमने अपनी वीडियो में ये कहा है कि हमने इस आर्य समाज अपनी जो पिछली लाइव हुई है उसमें तुमने कहा है कि हम जो है इस और आर्य समाज के और रामपाल के भी अधिकृत व्यक्ति से नहीं मिले। बात नहीं की। वैसे तो यह गलत है। वैसे तो यह गलत है। हम अधिकृत व्यक्तियों से भी मिले और साधारण व्यक्ति से भी मिले और इसलिए मिले कि सा क्योंकि हम साधारण है तो हम साधारण से साधारण व्यक्ति से मिले जिससे कि वो जो तथ्य हैं वो ज्यादा से ज्यादा बाहर आते जाए।
01:57:55:25 इसीलिए मिले। अगर हमारे परंपरा के जो मान्य आचार्य गण हैं वह अगर मिले तो हां वहां के सिर्फ आचार्यों से ही मिले या वो जिनको आचार्य कहते हैं भाई हमारे अनुसार आपके अनुसार तो आचार्य है नहीं वो तो वो उनके द्वारा मान्य जो उनके आचार्य है उनसे ही मिले मगर हम हम तो ऐसे नहीं है ना हम तो स्वयं हरे कह रहे न्थू कह रहे हैं तो हम फिर भी हम उनके यहां के प्रमाणिक लोगों से भी मिले और हम उनके यहां के जो केवल फॉलोअ और मात्र है उनसे मिले। ठीक है? तो ये गलत और दूसरी बात यहां पर आपका वक्तव्य झूठ हो रहा है कि हम इतने में तो अंश में उनका साथ देते हैं। नहीं आपने विरोध किया। एक कोई आर्य समाजी है बंगाली। उसने आपकी वीडियो लेकर के और नीचे लिखा है देखो शिवा नारायण द्विवेदी का सच। मैं इसी दिन का इसी दिन से बचना चाहता था। और तुम वही करा रहे हो। आगे आगे चल रहे हो डाल डाल। मैं पीछे पीछे आ रहा हूं बात पात तुम वही करा रहे हो तो क्या
01:59:04:01 है अब देखो एक ये वक्तव्य आ रहा है इतना कौन डिफेंड करता है ठीक है तो ये बात तुम वहां जाके क्यों नहीं कह रहे हो जो आठ घंटे का लाइव कर रहा है या जो भी है रात भर जो जाग रहा है वहां जाके क्यों नहीं कह रहे हो दूसरी बात इतना कौन डिफेंड करता है तो यहां किस पैरामीटर से तय होगा कि कितना कितना डिफेंड करना है, कितना नहीं करना। तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है। अपनी कोई बात मनवानी है ना तो वहां पर फिर शास्त्र को रखो। कितना डिपेंड करता है? कितना नहीं करता है? यह कहां लिखा है? इसका पैरामीटर क्या है?
01:59:53:25 यह भी सिद्धांत दो कि जो प्रवृत्ति वाला नहीं होगा वो अगर करेगा तो उसका चलेगा मगर जो प्रवृत्ति वाला होगा वो अगर करेगा तो उसको टोका जाएगा इसके बारे में सिद्धांत दो हम क्या चल रहा था साहस का कार्य किया है किसी नहीं साहस का कार्य नहीं किया है ना मैं अधिकृत लोगों से कहां मिला? कहां किया साहस का कार्य? अब यहां पर तुम अपनी डेंटिंग पेंटिंग कर रहे हो। तुम तो विरोध कर चुके हो। नहीं किया साहस का कार्य। मैंने तो केवल वो टच पुंजियों से बातें की है जो कि ऐसा है नहीं। मगर तुम्हारे अनुसार तो यही है कि केवल मैंने जो है जो है ऐसा ऐसा किया है और तुम्हारे उस वक्तव्य का लोग फायदा उठा भी रहे हैं। मेरे विरोध में तुम्हारे वक्तव्यों का फायदा उठाएंगे और तुम्हारे विरोध में मेरे वक्तव्यों का यही होगा और उदाहरण शुरू हो चुका है। बंगाली वाले चैनल पर मैं इसी दिन के इसी दृश्य से बचने के लिए निश्चित दूरी मुख्य रूप से इनसे बना रहा था। क्योंकि अगर मैं पास आऊंगा तो द्वंद होगा क्योंकि मुझे मालूम है इन्होंने कई जगह हल्के शब्दों का उपयोग किया है जो मैं अभी आने वाले समय में प्रस्तुत कर दूंगा
02:01:09:10 बहुत किया बहुत द्वंद होगा तो अगर पास आएंगे तो द्वंद होगा और द्वंद होगा तो उन लोगों को मटेरियल मिलेगा वो मिल रहा है संदीपन रॉय का चैनल देखो जाकर के उसने रील बनाई है ये देखो देखो शिवश नारायण द्विवेदी की स्थिति निग्रचार्य जी बताते हुए निग्राचार्य जी वहां शिवाश नारायण द्विवेदी के विरुद्ध बोल रहे हैं आर्य समाज के मंच से बढ़िया
02:01:48:27 है कर चुके अब ये नहीं वहां को बचाने की यहां क्या कहा किसी के समर्थन की आवश्यकता तब तक दिया लेकिन जब पिछला था आया उसमें इन्होंने स्वयं कहा था कि हमने आरएसएस से भी सहयोग लिया हमने राम से भी लिया गलत आरएसएस के लोगों से सहयोग लिया आरएसएस के लोगों से रामभद्राचार्य के लोगों से सहयोग लिया अब मुझे समझ में आया भाई जब आप अपने आसपास देखोगे हिंदू को ढूंढोगे तो कौन मिलेगा या तो वो सबसे पहले आपके के शंकराचार्य का अनुगामी हो या ऐसा कोई मिलेगा वैसे तो बहुत मुश्किल से मिलता है प्रामाणिक परंपराओं से जुड़ा हुआ व्यक्ति शायद आपके यहां ज्यादा मिलता हो पर मैं जिस मैं ये जो महानगर है उनमें देख रहा हूं तो परंपरा प्राप्त आचार्यों से जुड़ा हुआ व्यक्ति उनकी शरणागत हो में रहने वाला व्यक्ति बहुत कम मिलता है प्रायोरिटी से फिर भी अगर देखो तो सबसे नजदीक का हिंदू कौन मिलेगा जो सक्रिय होगा इधर-उधर तुरंत जाएगा तो वह हिंदू तुम्हें मिलेगा। सबसे पहले हो सकता है परंपरा प्राप्त कोई मिल जाए। नहीं मिलेगा तो
02:03:04:07 क्या कहते हैं यही वाले लोग तुम्हें पहले मिलेंगे। अब वो अब वो आरएस अब वो अपने इस धर्म के पोषण को जितने रूप में वो धर्म को जानते हैं उसका पोषण करने के लिए आरएसएस से जुड़े हुए हैं। तो हम ना ले जाए उनको साथ में। आरएसएस से हाथ मिलाना। रामभद्राचार्य से हाथ मिलाने का मतलब है कि मैं वहां गया कि अपने लोगों को मेरे पास भेजो। आरएसएस के पास गया। नहीं किसी की मोबाइल की दुकान है मेरे घर के पास में। वो आरएसएस से जुड़ा हुआ है। मेरा कहने का अर्थ था कि वो लोग आरएसएस वाले थे। अब मैं वहां क्या उनको ये बताऊं तुम्हारे सिद्धांत गलत है। तुम मेरे साथ मत
02:03:41:07 चलो। हम अब यहां पर तुम्हारा वही दोष है। तुमने बात को समझा नहीं। आरएसएस से हाथ मिल गया साहब। वही तो बात है। तुम विदेशगामी के साथ खड़े हो गए तो तुम भी विदेशगामी हो गए। तुम्हारे इस सिद्धांत के अनुसार हम युक्ति रहित व्यक्ति हो तुम। युक्ति रहित अगर इसकी बात की जाए जो तुम चर्चाएं कर रहे हो ध्वस्त हो रही तुम्हारी सारी चर्चाएं। युक्ति नहीं है उसमें। और जो प्रमाण है वह अप्रासंगिक है। मैंने बताया उदाहरण देकर के कि अगर कहीं किसी प्रमाण में लिखा हुआ है कि भैया जो शास्त्र में जो छत पर जाकर के कवाली करेगा किसी दिन यह तमाशा मुस्कुरा कर हम भी देखेंगे। किसी दिन यह तमाशा मुस्कुरा कर हम भी देखेंगे। तो कोई व्यक्ति कवाली करने अगर गया है छत पर तो उसको फलाना दंड मिलेगा। मगर इससे यह कहां सिद्ध हो रहा है कि जो अब इस अब इस संबंध में हमने प्रमाण दे दिए। मगर इससे यह कहां सिद्ध हो रहा है कि भगवत आनंद इस समय जो छत पर बैठा हुआ है वह कवाली करने बैठा हुआ है। कवाली करने के वो कवाली
02:04:56:09 करने बैठा हुआ है। इस संबंध में पहले प्रमाण दो और फिर जो है ये सिद्ध करो कि हां इस इसका ये दंड होता है। ठीक है यार ऐसे और स्वयं आपके पास गए थे। हे शिवश तुम्हारे समा बहुत अच्छा कार्य कर रहे हो। तुम राम के बहुत अच्छा कार्य करो। मैं तुम्हारा समर्थन करता हूं। ऐसे बात कोई मतलब ही नहीं साथ कहते हैं प्रतिज्ञा सन्यास नामक निग्रह स्थान है ना आगे सुनते हैं अब यहां बोल दिया प्रतिज्ञा सन्यास नामक निग्रह स्थान बोल दिया तो इससे लोग खुश अरे दादा रे वाह बस शास्त्र का प्रमाण दे दिया अरे मेरे भाई तुम्हारे घर के बगल में आग लगेगी हां तो वहां पे तुम जाओगे तो ये चेक करोगे क्या कि आरएसएस का तो नहीं
02:05:47:14 है। अगर कोई धार्मिक प्रहार हो रहा होगा तो वहां पर तुम यह चेक करोगे बीजेपी का तो नहीं है। और वैसे भी तुम्हारे अगल-बगल तुम्हें शहरों की बात कर रहा हूं तो कम्युनिस्ट, विधर्मी, सेकुलर ये सब ये सब लोग मिलते हैं तुम्हें? कौन जाएगा तुम्हारे साथ? जो जो कम से कम यह सोच रहा होगा कि मैं धर्म की रक्षा करता हूं आरएसएस में रहकर हो जाएगा ना जो कम से कम ये किसी के भी अनुगत हो के ये सोच रहा होगा भले ही वो दिशाहीन हो कुछ भी हो जो ये सोच रहा होगा कि मैं धर्म के लिए जीता मरता हूं वही जाएगा ना लड़ने के लिए कि कम्युनिस्ट
02:06:33:00 जाएंगे जो सब ऊपर से बचेंगे इससे क्या होगा इनकी जो है आगे निकलेगी तो इनकी को आप समझेंगे मेरा उद्देश्य आपसे लड़ना नहीं है मुझसे लड़ना है फिलहाल पिछली कुछ वीडियो में तो यही था कि तुम्हें मुझसे लड़ना ही था कम्युनिटी पोस्ट में भी यही था मगर अब थोड़ा सा ठीक लग रहा है है ना अब थोड़ा सा ठीक लग रहा है चलो बात है क्योंकि शास्त्र के गुरु भी उपदेश नहीं करते ज्ञान के बोध के कारण ही ज्ञान गुरु का अधिकारी नहीं होता है इसलिए यहां शास्त्र बात गुरु जी से गुरु जी से गुरु जी सही शास्त्र की बात पे अगर गुरु जी से भिड़ोगे वो ठीक है भिड़ो मगर व्यक्तिगत टिप्पणियां मत करो अपना जो वो क्या नाम है उसका कैरी मिनाटी नाम है क्या वो वो हुनर यहां मत दिखाओ कैरी मिनाटी वाला भड़ो शास्त्रों के अनुसार और भड़ो ही क्यों शरणागत हो के प्रश्न पूछो ना पहले भड़ो ही क्यों गुरु है तो शरणागत होकर के प्रश्न पूछो कैरी मिनाटी क्यों बन रहे हो तुम? धार्मिक कैरी मिनाटी बनना है। ये करियर है तुम्हारा।
02:07:55:28 कि अपने मन में कोई संशय आने पर उसके निवारण के लिए शरणागत होकर प्रश्न करो गुरु से शरणागत होकर नहीं किया तुमने प्रश्न शरणागत होकर ठीक है हां मैं अभी भी कहता हूं मैं अभी भी कहता हूं मैं राम नाम का जाप करता हूं और मुझे जो संतुष्टि राम नाम से मिलती है वो ना श्री राम से मिलती है ना राम जी से मिलती है ना श्री राम जी से मिलती है वो संतुष्टि मुझे राम से मिलती है और उसका भी कारण गुरुदेव ही है उनके मुख से जो व्याख्या सुनी थी राम शब्द की तो तुम्हें उससे उसमें भी विरोध है
02:08:42:13 तुम्हें दयानंद के व्यक्तित्व है जो यह सब लोग हैं जो इनका जो अवयव है औररा है वह ऐसा नहीं है कि इनका खाली नाम ले लिया तो चल जाएगा। राम में अपने आप में इतनी शक्ति है, इतना बल है कि उसी में सब कुछ वो है। मिश्रित है सब कुछ उसी में। अब किसी को मिश्रित नहीं लग रहा है तो वो श्री लगा लेता है। किसी को मिश्रित नहीं लग रहा है तो वह श्री राम जी लगा देता है। किसी को मिश्रित नहीं लग रहा है तो वह प्रभु श्री राम जी लगा देता है। और किसी को मिश्रित लग रहा है वह केवल राम बोलता है। तो तुम्हें इससे भी दिक्कत है इस विषय में शास्त्र वो नहीं बताओगे कुछ यदि तुम जो है किसी मनुष्य का नाम लेते हुए जी बोल रहे हो तो तुम्हें वहां पर अगर राम का नाम लेना है तो वहां पर भी जी लगाना आवश्यक है अन्यथा ये शास्त्र का खंडन है दिखाओ ना यहां प्रमाण यहां क्यों अपनी मनोखी बातें बोल रहे हो ऐसे ही होते हैं तुमको कोई मिला नहीं है इसीलिए तुम कैरी मिनाटी बन चले हो धार्मिक चलो अब तो मिल गए देखते हैं क्या होता
02:09:56:26 लेकिन मैं बताऊंगा हम श्री गोस्वामी जी महाराज के शब्दों में प्रभाव करना चाहेंगे कहते हैं न अनीति कछु भाको भाई राम राम बजा अनीति कछु भाको भाई इसका कोई फायदा नहीं है सम्मान कर लो उसको मत ठीक है इसका कोई फायदा नहीं है क्योंकि तुम व्यक्तिगत होते हो उपास करते हो जूतों से मारने की बातें करते हो। तू ततड़ाक करने लग जाते हो और फिर अभी आके समझाते हो कि किसी की तूतड़ाक मत करना। खुद ही तो तूत तड़ाक करते हो। ये ऐसा है ये वैसा है। कम से कम उस भष का ही सम्मान कर लो। जितना अंश उन्होंने बोला है उसका सम्मान कर लो। और नहीं संसार का सनातन धर्म की कितनी हानि हो रही है। नहीं तो उसके प्रति समाज में शब्द का प्रयोग करना चाहते हो। तो राम जी कुछ लेना चाहते हो लेना चाहते हो आज अगर आज अगर दयानंद जीवित हो जाए आज अगर
02:11:02:15 ये प्रभुपाद जीवित हो जाए तो मेरा रवैया उनके लिए भी वैसा ही रहेगा जैसा अमोग लीला के लिए है ठीक है वैसा ही रहेगा मगर वो जीवित नहीं है ना और बैर मृत्यु के बाद बैर खत्म हो जाता है तो इस विषय में बात नहीं करोगे मृत्यु के बाद बैर खत्म होता है कि नहीं होता है और अगर होता है तो आपने जो वो पोस्ट में लिखा था कि मेरे तो शत्रु हैं वो डिलीट करो जाकर के क्षमा मांगो उसके लिए अपनी गलती कहीं पर है तो उसके लिए क्षमा मांगो ना कि हां मृत्यु के बाद बैर मिट जाता है। राम जी ने कहा था श्री राम तुम श्री राम जी बोलोगे। श्री राम जी ने कहा था यह मैंने गलत बोला है कि दयानंद मेरे शत्रु हैं। प्रभुपाद मेरे शत्रु हैं। ये तुमने बोला है अपनी कम्युनिटी पोस्ट में।
02:12:01:13 ठीक है। तो बोलो जा करके वो बात ही नहीं करोगे। जिसमें फंस रहे होंगे वो बात ही नहीं होगी। दूसरी दूसरी बातें होंगी और उसमें भी फंस रहे हो। चलो। अंतिम संस्कार की बात करना शरीर से क्या करना है हमको ऐसे शरीर का चला दीजिए संस्कार हो जाना चाहिए नहीं अंतिम संस्कार की बात नहीं है वहां वहां स्पष्ट है कि मृत्यु के बाद बैर रहेगा कि नहीं रहेगा तो ये श्री राम जी का वचन है राम का वचन है कि मृत्यु के बाद कोई बैर नहीं रहता तो तुम क्यों कह रहे हो कि दयानंद और ये प्रभुपाद मेरे दुश्मन है लोगों को दिखाने के लिए बवाई लूटने के लिए शेर है हमारा शेर धर्म का कैरी मिनाटी है ये ये किसी को नहीं छोड़ेगा है ना मर्यादा अगर मेरे मतलब साक्षात वाणी राम जी कह रहे है मेरे राम जो है उससे कोई नहीं है राम जी के कोई शास्त्रीयता नहीं है कोई प्रमाण राम जी अपश वाणी बोल रहे है ब्रह्म की वाणी अवतार के हाथों से निकलने पर भी अपश मानी जाती है इसमें भगवत गीता उष नहीं मानते अपने पद में तो ब्रह्म विद्या है और साक्षात ब्रहता है लेकिन वो पुरुष
02:13:16:21 क्लेश कर्म इत्यादि से अपर है इसलिए गीता ये सब कहा गया भगवती के इस्तेमाल का इस्तेमान करते है भगवान राम जी के द्वारा सेवा है और इस्तेमान हम मान गए तो भगवान श्री राम जी ने क्या कहा कि जो अनीति भागो भाई तो बर भराय अगर हम कुछ गलत भी करो उनसे डरना मत की राम जी का कैसे करेंगे अगर तुमको लगता है मेरी वाणी में थी कोई शास्त्री पक्ष है तो डरना मत तुम उसको बोलना तुम बताना कहते तो ये तो हम भी कहते हैं। इसको तुम इस बात से क्यों जोड़ रहे हो? क्योंकि ये सारे जो प्रमाण जो ये दिखाते हैं ये अपना प्रभाव उत्पन्न करने के लिए दिखाते हैं। बस और कुछ नहीं है। इससे कहां सिद्ध हो रहा है कि तुम्हारा तू तड़ाक में बात करना ये शंकराचार्य को बुला लो और जो है ये तो मुझे याद है। अभी इसप वर्क नहीं किया है मैंने। ये तो मुझे केवल याद है। अभी जब वर्क करूंगा तब निकाल के लाऊंगा। वैसे ही जैसे अभी तुम्हारा एक वो बताया ना झूठ पकड़ा गया कि शिवश ने कभी हमारा समर्थन नहीं किया। अभी निकाल के लाऊंगा मैं शक्ति संहार शक्ति है। हमें क्षति पहुंच जाएगी। हमको मानते हमें अपनी प्रचंड शक्ति से बेचैनी घबराहट उत्पन्न होती है उसको साहित्य दर्पण में कहा जाता है। चित्त में जो डर उत्पन्न होता हैित में जो बेचैनी घबराहट उत्पन्न से चित्त में जो विकल्प उत्पन्न होता है चित्त में जो डर उत्पन्न होता हैित में जो बेचैनी घबराहट उत्पन्न
02:14:31:27 होती है उसको साहित्य दर्पण में कहा तो भगवान क्या कहते हैं कि जो अनी कछु हा भाई हे भाई हे प्रजनों मैं भी कुछ गलत कह रहा हूं तो तुम मुझे भोगना भय मत करना डरना होना चाहते और इसी मर्यादा का दोनों इसी मर्यादा का पालन करते हुए हमने भी और ये केवल राम राम ने हमारे ने भी किया आज शंकराचार्य जी ने भी पुराण है जी उदा भगवान शंकराचार्य जी के जैसे बात शंकराचार्य जी के शास्त्र का विरोध करने के लिए अगर अशास्त्रीय कुछ बात है उसका विरोध करने के लिए हमने नहीं कहा हमने उसका विरोध करने उसका विरोध करने के लिए बोला है जहां पर आपने निराधार रूप से ये सिद्ध किया कि यहां शास्त्र का पालन नहीं हो रहा है। ठीक है? और ऐसी जगह पर शास्त्र के पालन को ढूंढने का विरोध किया है जहां पर शास्त्र का पालन हो पाना कठिन है। जैसे मैंने बताया ब्राह्मण होते हुए उनको छात्र धर्म का आलंबन लेना पड़ रहा है। तो वहां पर तुम उसी दृष्टि से लगा करके देखोगे। आपातकाल है। ब्राह्मण को क्षत्रिय का क्षत्रिय धर्म का आलंबन लेना पड़ रहा है। तो कई जगह आएंगे जहां रणनीति रणनीति पूर्वक काम कार्य करना पड़ेगा। दूसरी बात हमारा मुख्य विरोध है जो तुम तू तड़ाक हल्के शब्द उपास
02:15:47:06 कैरी मिनाटी बनने का प्रयास करते हो उसके लिए हमने तुम्हें टोका हमने शास्त्रोक्त पक्ष रखने के लिए नहीं टोका चलो क्या तुम्हें जी को बता रहे हो सुनो किसकी मर्यादा का अनुसरण करते क्यों श्री रामचंद्र जी की मर्यादा का अनुसरण करने का प्रयास का भाव हमारे मन में नहीं होना चाहिए क्या बोल रहे हो तुम? रामो विग्रहवान धर्म धर्म का पालन करने का प्रयास का हमारे मन में भाव नहीं होना चाहिए। क्या मैंने यह कहा है कि मैं श्री राम की मर्यादा का पूर्ण रूप से पालन करता
02:16:27:26 हूं। पता नहीं क्या है। लाइव ही आ जाते हैं। आज मैंने कल भी अपने उसमें कह दिया है कि लाइव आ जाओ। तो यह सब तुम्हारे ये सब जो व्यर्थ के प्रलाप है इनसे बच जाते। मैंने अपने पुस्तक आखरी में यह भी लिखा है कि हमारा जो ने गलत किया है वो भी वो सम शास्त्रीय है। अगर वो शास्त्री है तो यहां पर ये बात है इसमें इसको मान लिया था और कुछ लोगों को नाम दीक्षा दी है लेकिन वो जारी करवाया है चार लोगों को और कुछ लोगों को नाम से है नहीं जारी करवाया है चार लोगों को और कुछ लोगों को नाम की शिक्षा दी है लेकिन वो के वो आर्य शिष्य नहीं कहते तारका दीक्षा ऐसी नहीं है कुछ खासा लोगों को लेकिन जो ऐसे दीक्षित चाहे या होंगे उनके लिए मैंने छोड़ दी ऐसे बात लिखे लोग से अगर आप मेरे किसी भी भगवान शंकर जी भगवान उसको ज्ञान दे वो ज्ञान उसके अंदर प्रतिष्ठित नहीं होता है व्यक्ति जो मेरे द्वारा दीक्षित शिक्ष है हमारा और जो मेरे कृत के विषय में सोचा है मैं पक्ष है वो सार्वजनिक रूप से सभा में वो उसके करता है मांग सकता है दिखाते क्या तुम्हारे प्रकार के है तो थे महादेव है तुम्हारे इस प्रकार के पक्षधर है क्यों नहीं है पक्षधर क्यों है क्यों नहीं है पक्षधर
02:17:43:22 क्या तुम सभा में जाकर के उनसे प्रश्न नहीं करते हो क्या हम लोग नहीं करते हैं प्रश्न कुछ भी इनका कहना है कि जो पूरी शंकराचार्य जी हैं वो इस उदारता के पक्षधर नहीं है कि उन जो शिष्य गण है श्रोता गण है वो उनसे प्रश्न कर सके और यू ही हो रही है सभाएं इनका कहना है कि प्रश्न करने की उदारता का वो होना चाहिए मगर यह भी शास्त्र में ही लिखा है ना कि गुरु गुरु से प्रश्न करने के लिए शरणागत होकर जाओ नतमस्तक होकर जाओ मगर तुम्हें तो बगल में बैठना है इसलिए तुम वहां उसके पीठ की पीठ की वो करते हो अवेलना यह मैं तुम्हारा ही वह सिद्धांत अपना रहा हूं कि मुझे ऐसा लगता है। मेरा सिद्धांत यह है कि हो सकता है तुम्हारा और भी कोई कारण हो। मगर तुम्हारा सिद्धांत है कि भैया नेगेटिव ढूंढना है तो नेगेटिव यही है कि अन्य अन्य जगह पर तुम्हें जो है बैठने को मिल रहा है तो तुम वहां कम पीछे पड़ोगे। यहां तुम्हें बगल में कभी बिठाया नहीं जाएगा। तो यहां पीछे पड़ोगे।
02:19:02:27 ये तो ऐसे हुआ मगर एक बात अच्छी है मुझे एक बात सही लगी कि कम से कम तुमको ये पता चल गया कि हां कोई ठीक-ठाक व्यक्ति हम मिल गया है हमको सही हो सकते है बहुत है और जब अपनी बदलते हुए चाहिए हमारे फायर होने की आवश्यकता नहीं ऐसा नहीं है हमारे आगे देखते है कब है क्या एडवांस क्लास में हमारे स्टूडेंट आए थे थे चाहिए जब बनाया जाएगा जिसकी वाणी से बनाया जाएगा उसकी बोल रहे
02:19:49:00 होंगे पता नहीं आपको दिया है काम नहीं चलता है और दूसरी बात ये है दुनिया में हो रहा है सभी नहीं हम भी नहीं उसके सब ये तो किसी से संभव नहीं है तुम्हारे बुक नहीं है हमसे भी नहीं उस क्योंकि किसी ने पढ़ा नहीं है किसी ने किसी को पढ़ाया तो ये नहीं किसी मतलब सामान खाली बैठे है क्या कहा हमने तो कहा तुमने तो जब भी क्या बोल मतलब मतलब क्योंकि तुम क्योंकि किसी ने किसी ने इसको साथ दिया किसी और
02:20:38:26 यहां पे ये बात नहीं कर रहे हैं। मेरी इस बात का उत्तर नहीं प्रस्तुत कर रहे हैं। ये टाइम स्टैंप देख लीजिएगा 2420 जब मैं यह कह रहा हूं कि कोई व्यक्ति ने अगर कहीं किसी को समर्थन दिया है और दूसरों को नहीं दिया है तो इससे यह सिद्ध नहीं होगा कि वो अन्यों का समर्थन अन्यों के अच्छे कार्य का समर्थन नहीं करता है। विरोध करता है। समर्थन छोड़ो विरोध करता है। और अगर किसी ने किसी को कहीं पर पकड़ा है गलत काम करते हुए तो वही की वही कुछ दूसरे लोग हैं जिनको पकड़ नहीं पाया। अपनी अल्पज्ञता के कारण है ना या असामर्थ्यता के कारण वो नहीं पकड़ पाया। तो इससे यह सिद्ध नहीं होता है कि वो उन लोगों के गलत कार्य का विरोध नहीं करता है। यहां पे ये प्रश्न का उत्तर नहीं दे रहे आगे कि हम तो मूल विषय पर आ रहे हैं। अभी तक मूल विषय चल रहा था। हमारे बीच का मूल विषय क्या है? विजय श्री पे इन्होंने जो वक्तव्य दिया सही दिया परिकरों के बारे में जो जिन जिस आधार पर इन्होंने बोला है क्या वह सही है यह मूल विषय है ठीक है यही है ना मूल विषय अब तक मूल विषय ही चल रहे है और अब यहां पर जो इनको शायद सहज नहीं लग रहा है तो वो मूल विषय नहीं है टाइम नोट कर लेना 5420
02:21:59:14 लगे हमने तुमको ये कहा कर हमने तो कहा ना तुमने तो अभी देखिए अभी इसने स्वयं स्वीकारा है इसने मुझसे नहीं कहा कि तुम कर हम इसने क्या कहा कि हमने नहीं कहा कि मुझे लाइव कर लेकिन ये व्यक्ति जो इसने श अभी कम्युनिटी पोस्ट में डाला है उसमें इस व्यक्ति ने क्या आज ही डाला था उसमें इस व्यक्ति ने स्वयं कहा था कि प्रत्यक्ष वार्ता करनी है और प्रत्यक्ष वार्ता करने का तो कमेंट में लाइव आ जाइए लाय कहता है क्योंकि हम जाने से काम नहीं तो लाइव आ जाओ लाइव आ जाओ ये सब यही कह रहा था प्रत्यक्ष वार्ता इसका तात्पर्य यही प्रदेश होता तथा रूप से इस व्यक्ति ने जो कोई गौरी नाम की जो देवी है उनका स्क्रीनशॉट लगाया था अपनी कम्युनिटी पोस्ट में उसमें इसने क्या लिखा है इसने लिखा है
✅ This part is already used · 02:22:36:04 – 02:22:39:20 (0:04)
→ Used in: A · Live स्वयं को निर्भय कहने वालों में आह्वान का भय बौखलाहट अभद्रता और पलायन at 1:47:36 ↗
02:22:36:04 यदि आपको लगता है कि आप सभी के पक्ष है तो प्रत्यक्ष वार्ता करने का साहस प्रकट करें इसने
⬜ Not used yet · 02:22:39:20 – 02:55:13:15 (32:34)
02:22:39:20 लिखा है प्रत्यक्ष वार्ता होगी तो दृश्य बदल जाएगा इसमें लिखा है इसका जवाब पूर्व में दे चुके हैं गौरी वाला जो मामला है गौरी ने जो बिचौलियापन दिखाया है कि तुम्हारा वो संदेश यहां लाएगी फिर यहां का संदेश वहां बेचेगी फिर मेरे स्क्रीनशॉट लेकर के तुम्हें में भेजेगी और मेरे जो दादा हैं वो मेरे जो शपुरी के शंकराचार्य जी हैं वो गौरी जिसका Instagram पे पेज है वो दसनावी साहब के नाम से वो बिचौलियापन उसने दिखाया है हम क्या कि वो यहां की चीजें वहां भेजे वहां यहां की यहां की वहां भेजेगी वहां की यहां नहीं है ना तो वो स्क्रीनशॉट भेजेगी ये हुआ है वो हुआ है और इस बिचोलिएपन के कारण होने वाली गलतफहमी से उत्पन्न होने वाली ये दिक्कतें वो वो सौदागर याद आ रही है मुझे वो जो जय वीरू में लड़ाई वो किस में राजू और वीरू में लड़ाई करवाई थी ना उसने अमरीश पुरी ने ऐसे ही इनके समर्थकों ने आग लगवाई लगवाओ भैया ठीक
02:23:47:12 है बीच के लोगों की वजह से आग लग रही है जहां तक मुझे दिखाई दे रहा है क्योंकि वो मिस मिस इनफार्मेशन वहां पर पहुंचा रहे हैं और ये जो है उस मिसइफ पर एक्टिव हो रहे हैं। सक्रियता दिखा रहे हैं। अच्छा तो अब ये क्या कारण है कि मैंने तो नहीं कहा कि अप्लाई करा मैंने तुम्हें पहले भी नहीं कहा कि लाइव आइए। मैंने वहां पर यह समझा था कि तुम्हारा कोई पक्षधर है जो अच्छा सबसे जरूरी बात यह है कि गौरी ने मुझे जो वो मेरा कम्युनिटी पोस्ट दिखाना जरा बताता हूं उसमें दिक्कत क्या
02:24:33:02 है? गौरी ने क्या किया था? सबसे पहले तो यह नहीं बताया कि भगवतानंद ने आपको कुछ भेजा है, संदेश भेजा है ना सबसे पहले ना सबसे लास्ट जैसे होता है ना एक पत्राचार का माध्यम होता है कि भाई नमस्कार से शुरू हुआ और नीचे अपना नाम डाल दिया भगतानंद ठीक है या नमस्कार मत करो जय श्री राम मत करो कुछ मत करो मगर नीचे उसी मैसेज में नीचे अपना नाम डाल ऐसा नहीं है बहुत ही अधूरा टाइप का मतलब जो एक क्या कहेंगे उसको एक अव्यवस्था स्थित मैसेज उसने मुझे किया था। वो दिखाता हूं क्या था। यह देखो यह मैसेज उसने मुझे किया है। दिख रहा है दिख रहा है। दिख रहा ये ये
02:25:22:27 हां ये देखो। इसमें यह मैसेज शुरू हो रहा है तो उसमें कहीं नहीं लिखा है कि यह मैसेज भगवतानंद ने भेजा है। फिर उसके बाद दूसरा मैसेज आता है। फिर वहां पर भी नहीं लिखा है कि भगवतानंद ने भेजा है। फिर तीसरा मैसेज आता है वहां पे अलग से लिखा है कि यह आपके लिए भगवतानंद जी ने भेजा है। तो पहले तो मैं इस पूरे मैसेज को पढ़ता रहा हूं, पढ़ता रहा हूं और अनेकानेक मैसेजेस आ रहे हैं भले ही मगर मैं बड़े ही ध्यान पूर्वक ये 10 नामी शैव का मैसेज पढूं जबकि मुझे मालूम है विरोधी भी है। हो सकती है और यह जो है मुझे संशय है उसकी स्थिति को लेकर। ये है कौन? यह इंटरनेट पर घूमने वाले जो चोर टाइप के लोग हैं कभी-कभी वैसा प्रतीत हो रहा है कि हो सकता है लड़की की आवाज में कोई जो है पुरुष ही ऐसा कार्य कर रहा हो और या फिर अब उसकी स्थिति को लेकर के मैं संशय में हूं क्योंकि कभी वो बात हुई तो वो मुझे लगा कि जेन्युइन है ठीक है पूरी शंकराचार्य जी के लिए वो रक्त कभी-कभी ऐसा लगता है के इनकी ज्यादा मान प्रतिष्ठा है उनके मन में पूरी शंकराचार्य जी के सापेक्ष वो इनकी इनका आदर सम्मान
02:26:37:27 ज्यादा करती ये भी लगा तो ऐसे व्यक्ति का यहां लिखा गया है कि यह बात निग्राचार्य ने ही कही है हां तीसरे तीसरे उसमें कही है ये आपके लिए भेजा है भगवतानंद जी ने ये उसमें लिखा है तीसरे मैसेज में तो ऐसे अव्यवस्थित मैसेज में मेरा ना देख पाना एक उसकी संभावना थी। फिर भी ना देख पाने की मैंने देख पाने के लिए अपने दोष को मानते हुए वहां पर क्षमा प्रार्थी बोला। अब दूसरी बात यह आती है कि जब मैं इसको नहीं देख पाया कि भगवतानंद ने भेजा है तो मैं क्या कर रहा हूं वहां पर यह समझ रहा हूं कि भगवतानंद का कोई समर्थक है जो अपना मैसेज मुझे गौरी के माध्यम से पहुंचा रहा है तो ये बात का जवाब मैंने शुरू में दिया है तो जिसको देखना हो वो वहां जाकर के देख लगाया क्या कह रहा है कि ये क्या कर रहा है ये क्या कर रहा है ये ये स्वयं ही अपने कथन को अपने कथन से काट रहा है कि नहीं काट रहा ना ऐसे
02:27:46:08 मिलेंगे की बात की बात कर अब ये कह रहे है की हमने ना की बात कही थी तो हमने ना की बात इसलिए कही थी क्योंकि तुम लाइव कर ही रहे थे तुम्हारे लोग कमेंट तो कर ही रहे लाइव पर बुलाओ तुम भी कर ही रहे थे नहीं हमने लाइव पर बुलाने के लिए तुम्हारे लिए कहीं नहीं कहा है दिखाओ यह है तुम्हारा झूठ टाइम स्टैंप नोट करो भैया। 5635 पे इन्होंने कहा है कि हमने इनको लाइव पे बुलाने की बात कही है। ये प्रमाण बताएं कहां कही है लाइव पे बुलाने की
02:28:19:14 बात? लाइव लोग गए थे कि रिसोर्स आज निगाह। तो लाइव आने के बाद कम भेजा आते हैं कि लाइव आने के बाद हमें पता है हमने वहां भाव प्रकट किया था कि इस पर इन विषयों पर सौहार्दपूर्ण चर्चा हो सकती है। तुम्हारे लिए जो भाव प्रस्तुत किया था। हमने कहीं नहीं कहा कि लाइव पर आओ। और सौहार्दपूर्ण चर्चा से मेरा मतलब था कि हम कहीं व्यक्तिगत रूप से मिले। अगर दिक्कत है तो। ना कि यहां लाइव पर आकर के द्वंद करें, लड़े। ठीक है? चलो।
02:28:59:00 साहस करने का साहस वो केवल इस प्रकार से होंगे क्या क्या समझ आ से बात कर रहे है से बात कर रहे है कॉल 15 कब समय लगा? फाइनल कॉल 17 कब समय लगा? आप लोग जरा घूंघट में खोजिए तो फाइनल कॉल का क्या होता है? बताओ। फाइनल कॉल लिखा है। चलिए फाइनल कॉल की बात है। अगर फाइनल कॉल की बात है तो मैं इस फाइनल कॉल का कॉल का जो शब्द है वो बुलाने की बजाय दूसरे उसमें मैं दिखा दूंगा। कहां-कहां पे लिया गया है। वो एक अलंकार के रूप में भी हो सकता है। कॉल जैसे हम लोग करते हैं। कहीं की चीज जो है यूज़ कर लेते हैं। इसमें हो सकता है मैं कॉल शब्द का यूज़ दूसरे उसमें दिखा दूंगा कि माय फाइनल कॉल है ना जिसका बुलाने में नहीं हो रहा होगा ऐसा यूज़ कॉल का मैं दिखा दूंगा किया जाता है। ठीक है। जैसे इतने तुम नहीं है सर सबसे पहला वीडियो बनाया आप गौर करेंगे उसके बाद पहला जो बनाया सारी बात
02:30:14:00 सोशल मीडिया पर है और कमेंट बताया यहां पर चैट में जहां नहीं पता गाना सब इतने तुम नहीं मुझे नहीं पता मैं तो तुमको प्लेयर पर इतनी बढ़िया तुमको सामने वाला राहुल गांधी वाला क्या मशराज वाला थंबनेल इसमें राज थंबनेल बना क्यों बनाए उसको कहते है क्लिक आप चलाते हैं लोग सब जानते है क्लिक क्या होता है थंबनेल में ऐसी बातों को लिखना ऐसा कुछ नहीं है मैंने मलेश राज चला करके अप्रत्यक्ष रूप से यह बताने की कोशिश की थी कि इसमें जो आपने विजय श्री के बारे में बोला है उससे संबंधित बातों भी बातें भी उस वीडियो से संबंधित बातों के संबंध में भी बात होने वाली है। यही तो बात है। दिक्कत यही है कि तुम अपने पूर्वाग्रह के आधार पर चलते हो। शास्त्रों के आधार पर नहीं चलते हो। यही दिक्कत है। हो सकता है तुमने शौच शौचाचार इत्यादि में पारंगत हो। बहुत बढ़िया ध्यान रखते हो अपने जीवन शैली में। मगर जो साध्य कोटि का धर्म का यह वाला जो भाग है ना धर्माचरण उसकी बहुत कमी है। सिद्धांतवादी नहीं है। उसमें कि आप अपनी बात हम पर थोप रहे हैं। आपको ऐसा लग रहा है कि वो क्लिकबेट के लिए है तो आपने बोला क्लिकबेट के लिए है। मगर उसका दूसरा
02:31:29:06 अर्थ भी हो सकता है। हम वहां पर अप्रत्यक्ष रूप से आपको एक प्रतीकात्मक आपसे जुड़ी हुई कोई चीज रख सकते हैं। उसका यह अर्थ भी उसमें यह अर्थ भी हो सकता है कि देखो मलेचराज का प्रभाव कैसे बढ़ रहा है। लोग कैसे गलतफहमियां पाल रहे हैं। यह अर्थ भी हो सकता है। मगर आपको तो क्लिकबेट वाला अर्थ ही पकड़ना है। क्योंकि खुद धंधा कर रहे हो तो दूसरा भी धंधा करने वाला दिखेगा। है ना? चलो इसका मतलब लिखा जाता है ताकि आपको। अच्छा मित्र एक बात मैं कहूं अगर तुमसे कि तुमने पूरी मठ का पूरी मठ का नाम लिया है गोवर्धन मठ का नाम लिया तो क्लिकब के लिए लिया है तुम कहोगे ना कि नहीं भैया हमने नहीं
02:32:15:26 लिया फाइनल कॉल के बारे में बात इनको प्रमाण देना है और एक जो है वो कोई और बात कही थी क्या मैंने इससे पहले कि हम उनको दे देंगे हैं। नहीं नहीं नहीं लाइव पर आने की बात झूठ बोली थी। हां वो प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं। वो तो देखा ही ना सबने। मतलब इनको हमें ये देना है कि फाइनल जो कॉल शब्द का उपयोग है वह अन्य अन्य उसमें भी किया जा सकता है। और ऐसा होता है काव्यात्मक शैली में कई बार किसी शब्द को कहीं पर यूज़ कर लिया जाता है।
02:33:01:06 तो इनको उससे प्रॉब्लम और आने के बाद सबसे पहले हमने यही बताया ना फाइनल कॉल मतलब मेरा क्या कहना है उस बारे में कॉल का देखना जरा और क्या-क्या यूज़ हो सकता है कॉल शब्द का यूज़ Google में करके देखो जरा अभी पता पता चलेगा देखो कॉल शब्द का शब्द उपयोग जो है बुलाने की बजाय और किसी संदर्भ में हो रहा हो तो वह निकालो उससे पूछो जरा वो बताएगा उसको क्या कहते हैं ए आई हां जो पूछो खत्म क्या चले सामान्य सी बात करेंगे बना क्या खत्म हो जाएगी ये तो क्लिक होते है ऐसे कहोगे तो ये वाले जो पंडित वाला था स्ट्रेटजी है ताकि लोग अधिक पंडित वाला था स्ट्रेटजी ताकि लोग अधिक हां तो वो कह रहे हैं विनोद चल रहा है। है ना? श्री राम जी ने जब सुपनखा आई थी कि मुझसे ब्याह कर लो या मेरे को स्वीकार कर लो। तो श्री राम जी ने वहां कहा था तुम्हारे लिए लक्ष्मण बहुत बढ़िया रहेंगे। लक्ष्मण से पूछ लो। और फिर लक्ष्मण जी ने भी कहा था कि तुम्हारे
02:34:16:07 लिए श्री राम जी बहुत अच्छे रहेंगे। तो वास्तविकता में तो नहीं कह रहे थे। वो कह रहे थे। विनोद कर रहे थे। विनोद किया था वो राम विग्रह धर्म थोड़ा राम को ही जान लो अच्छे से बस उतने से ही बहुत कुछ हो जाएगा। फिर आचार्यों से पूछपूछ करके अपने जीवन में ये वो तो है ही तुम्हारे जीवन में आ गया
02:34:51:26 हम ठीक हम ये देखो आखरी मौके के रूप में फाइनल फाइनल कॉल लिखा हुआ है। ठीक है? आखिरी मौके के रूप में आप लोगों को दिख पा रहा हो तो फाइनल कॉल लिखा हुआ है
02:35:40:06 और बुलाने से भिन्न इसी और अर्थ में फाइनल कॉल लिखा हुआ है। देखो मोमेंट ऑफ फाइनल डिसीजन देखो देखो वो मेरा डिसीजन के उसमें था ना क्या था? जब कोई व्यक्ति किसी महत्वपूर्ण निर्णय के अंतिम चरण में होता है तो मैं वहां पर अपना फाइनल डिसीजन बता रहा था कि हां मैं अब तुम्हें बुलाता हूं। ठीक है? वहां पर मैं तुम्हें अपना डिसीजन दिखा रहा था ना अपना डिसीजन बताने वाला था कि हां भैया मेरा फाइनल कॉल क्या है? उसके संबंध में तुम्हारे वो लाइव डिस्कशन के इनविटेशन के संबंध में। तो देखो यहां देखो मोमेंट ऑफ फाइनल डिसीजन लो हो गया हो गया चौपट इसलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में पॉल शब्द का उपयोग दूसरे अर्थ में भी हो सकता है बजाय इसके कि सिर्फ किसी को बुलाया जा रहा है हमने वहां ये नहीं दिखाने का प्रयास किया था हो सकता है उसका वो अर्थ भी निकल रहा हो ऐसा कुछ नहीं है। हमारी भावना यह थी कि हम अपना फाइनल वक्तव्य दे रहे हैं। फाइनल डिसीजन दे रहे
02:36:54:08 हैं। हां अब यहां पे एक व्यक्ति पूछ रहा है तुमने जो कुतर्क किया है उसके बारे में उसी को आधार बनाके पूछ रहा है। तो फिर इतने वीडियो क्यों? अब वीडियो हम तुम्हारे उसमें प्रतिक्रिया दे रहे हैं ना। वो जो इनविटेशन था उसके संबंध में हमारा जो आखरी डिसीजन था वो हमने दिया था उसमें। बताया था कि अब हम तैयार है और आगे भी रहेंगे। बता दिया। अब तो तुम जो प्रतिक्रिया करते रहोगे उस पीछे चलते रहेंगे। अब आगे तो मैंने यह सोच लिया है कि तुम डेली एक वीडियो बनाना। मैं आऊंगा जब यहां पर अपने कार्य क्षेत्र में तो सबसे पहले आगे तुम्हारा ऑन करूंगा लाइव और फिर चालू हो जाऊंगा। डेली एक घंटे का वीडियो निगराचार्य के उत्तर में या फिर आ जाना। सिद्ध करना तुमने जो जो बातें कही है विजय श्री के बारे में और मठ के बारे में वह बातें सिद्ध करना तुम और फिर बताना अपनी परंपरा तुम कहां से हुए हो निग्राचार ठीक
02:37:50:13 है तो क्या है कॉल शब्द का उपयोग दूसरे अर्थ में भी हो सकता है पहली बात अरे तुम्हारे कैसे लोग हैं टॉपिक चेंज करने वाले विषय अंतर्गत हां तुम्हारे लोग हैं तो भैया वो तो करेंगे ही तुम उसमें उस्ताद हो विषयंतर करने में तो कॉल शब्द का उपयोग अन्य उसमें भी हो सकता है। डिसीजन के रूप में वहां पर दिया गया है। डिसीजन के रूप में कॉल शब्द का उपयोग करते हैं। होता है। अब मेरी अंग्रेजी तुम्हारे इतनी सशक्त नहीं है। मगर मैंने ऐसा सुना था। अ ऐसा मेरे स्मरण में था तो मैंने ऐसा उसको बनाया। फाइनल कॉल ऑन। अच्छा वहां पर देखिए एक बात और है क्या है मेरा वो थंबनेल जरा चेक करना क्या थंबनेल है मेरा एक बात और है पकड़ने की मीमांसा करो ना यार बिल्कुल सूक्ष्म तरीके से देखो लेंस लगा के देखो नजर आएगी दुनिया में अच्छाई दुनिया में अच्छाई नजर आने लगेगी मेरे भाई क्या लिखा है यहां पर
02:38:53:08 यहां लिखा है फाइनल कॉल कॉल फॉर लाइव डिस्कशन। हां, ठीक है। इसमें वो इनविटेशन शब्द नहीं लिखा है। कोई बात नहीं। मगर जो कॉल शब्द का उपयोग है वो जो है उपयोग हो सकता है डिसीजन के रूप में कि फाइनल डिसीजन क्या है? तो मेरा फाइनल कॉल क्या होगा? मैं क्या कहूंगा? तो क्योंकि मैंने अभी तक यह सब नहीं अभी तक कुछ और कहा था और मैं अब कुछ और कहने वाला था और जो यह वह कहने वाला था जिससे मैं अगर तुमने कोई और ऐसी स्थिति ना पैदा कर दी कि भैया तुमने बिल्कुल ही कुछ ऐसा कार्य कर दिया कि फिर तो जान के दुश्मनी हो गए कि अब तो जो है कुछ नहीं अब तो तलवारें चलनी चाहिए। अगर ऐसी स्थितियां नहीं जान दी तो मेरा अब यही कॉल रहेगा कि आओ चर्चा करो भाई। मगर तुमने यहां पर भी अपना अब इसको कहेंगे अल्पज्ञता के आधार पर जो है निर्णय दे दिया कि कॉल शब्द का अर्थ ही होता है बुलाना नहीं अरे वो तो जब सबको मालूम ही है कि तुमने ही हमको पहले बुलाया है हां तो फिर क्यों हम ये बताएंगे वहां पर कि हम तुम्हें बुला रहे हैं दिमाग खराब है बिल्कुल
02:40:18:09 तो तुम जैसा चलते हो तुम जैसा करते हो वैसा हम लोग करें ये कहां लिखा है ये कोई बात है क्या कि तुम जो जो जिसज तरीके का तुम थंबनेल लगा रहे हो वैसा ही थंबनेल हम लगाएं भाई हमारा थंबनेल कुछ और होता है इससे क्या मतलब है हां मगर हमने हमारा वहां मलेच्छराज लिखने का क्या कारण था वह हमने बता अब वो तुम्हारा तुम अपने पूर्वाग्रह से ग्रसित हो तो उसमें हम क्या कर सकते हैं या तो सनातन सिद्धांत दे दो के लुप्त संप्रदाय के गुप्ताचार्य जो कहेंगे वही मान्य होगा बस चाहे शास्त्रों में लिखा हो या ना लिखा हो जहां शास्त्र का संदर्भ देना होगा वहां नहीं दोगे खूब भूमिका बनाओगे वहां तो नहीं था लेकिन क्या हमारे पति पत्नी के शास्त्रीय संबंध और मर्यादा उसी विषय में बदल नहीं सकता लेकिन दिया कोई नहीं बैठे दिया लोग उसको देखने हां लोग आके देखे उसको सुने वो लोग जो तुम्हें जानते हैं और जिन्होंने तुम्हारा वो वीडियो देखा है हमें यह भी नहीं मालूम था अब तुमने यहां पे आरोप लगाया है क्लिकबेट का ठीक है चलो इसकी मीमांसा करते हैं अब पोस्टमार्टम करते हैं तुमने आरोप क्या लगाया कि क्लिकबेट तो इसके
02:41:33:13 लिए यह पहले सिद्ध होना चाहिए कि हमें यह पता है कि नहीं कि वो तुम्हारा जो है मलेच राज वाला जो शब्द है वह ट्रेंडिंग में है। यह भी होना चाहिए ना। अब यह किससे किस प्रकार सिद्ध होगा कि हमको मालूम है कि नहीं कि मलेच राज वाला शब्द जो है ट्रेंडिंग में है। और फिर तुम तो कहते हो ना कि जो क्या कहते हैं हम हमारा जो है प्रोत्साहन करते हो ना तो तुम्हें क्या दिक्कत हो रही है? अगर अगर उसमें वो क्लिकबेट के रूप में भी यूज़ हो रहा है तो तुम्हारा खंडन तो नहीं हो रहा है ना? क्लिकबेट से क्लिक क्लिकबेट की अगर बात है तो तुम्हें क्या दिक्कत हो रही है उससे?
02:42:15:10 अब देखो तुम्हारे लोग जो है थोड़ा ठंडे पड़ने लगे हैं तो अब बात कर रहे हैं कि हम आपके शुभचिंतक हैं और मठ की स्थिति पता करने की कोशिश करें तो क्या तुम हमसे ज्यादा शुभचिंतक हो? मठ की स्थिति हमसे ज्यादा तुम्हें मालूम है तो तुम बता दो आकर के। हम और अगर तुमने स्थिति पता नहीं अच्छा मैं कहूं तुम निग्रचार की स्थिति जरा जाकर पता कर लो हम आपके शुभचिंतक हैं तो तुम क्या कहोगे कि हमें पता है वो ठीक है मैं कह रहा हूं वहां छत पर देखो सामने बकर्रा आ गया है तेंदुआ आ गया है खा जाएगा निगराचार्य को स्थिति पता कर लो मैं तुम्हारा शुभचिंतक हूं क्या कहोगे बकवास बातें करवा लो बस दो पांच मिनट के खिलाड़ी हो तुम जो ये बातें कर सत्य से करा सत्य के आसपास लिखा है कभी लेकिन नहीं शब्द का पता है एल्गोरिथम कहां पर ये जो शब्द का प्रयोग जैसे इसने किया वैसे फाइनल शब्द का इसने प्रयोग
02:43:17:09 किया सुन लीजिए आप लाइक एयरपोर्ट क्लोजिंग टाइम समथिंग फॉर द फाइनल अनाउंसमेंट समथिंग एल्स मुझे लगता है कि इनका एआई कम जानता है एयरपोर्ट फाइनल कॉल लास्ट कॉल ऑफ चेंज फाइनल कॉल मीन्स द लास्ट चांस फॉर कस्टमर्स टू वाटर ड्रिंक्स बिफोर द प्रोसेस बिफोर डिसिशन को लेने से पहले दिया गया अंतिम अवसर। हालांकि गूगल ने इसमें फाइनल कॉल या 12 तारीख अपनी अनुसार बता दिया था लेकिन फिर भी फाइनल कॉल का अर्थ फाइनल डिसीजन नहीं होता है। फाइनल कॉल का अर्थ होता है निर्णय लेने से पहले दिया गया अंतिम बुलावा अवसर। देखो आप निर्णय लेना है। अभी भी तुम्हारे पास अंतिम अवसर है लेकिन एक मिनट अंतिम डिसीजन वाला होता है कि नहीं? दिखा दें। तो कर सकते हो। तो प्रकाश ये होता है। इसको ज्यादा समझाए। शुद्धि होगी मेरे फाइनल कॉल का क्या कर रहा है? फाइनल डिसीजन है नपोसिद्ध है। ऐसे शब्दों को ला रहा है। ये भी प्रकार का निगम स्थान हो सकता है यहां पर इसको ये सब अभी ज्ञात होते हैं क्योंकि फाइनल कॉल का होता ही है। अंकुर आ रहा है नहीं आ रहा है क्या है बता फाइनल कॉल का फाइनल फाइनल कॉल फाइनल डिस्क लगा सामान्य शब्द शब्द का बोल रहे हैं। देखो यहां पर चैट जीपीटी में ही लिखा है कि फाइनल कॉल का अर्थ यह भी हो सकता है। क्या हो सकता है? क्या हो सकता है? लिखा है जब कोई व्यक्ति किसी महत्वपूर्ण निर्णय के अंतिम
02:44:32:19 चरण में होता है। और मैं जो कुछ प्रसिद्ध चीजों में इसकी उपयोगिता की गई होगी उसको ढूंढो जरा और संतुष्टिजनक उदाहरण मिल पाए। देखिए इसमें दो चीजों को स्थिति की गंभीरता फाइनल कॉल का जो है स्थिति की गंभीरता और अंतिम अवसर तो स्थिति की गंभीरता को प्रकट करने के लिए भी फाइनल कॉल का उपयोग हो सकता है। तो हम स्थिति की गंभीरता बताने जा रहे हैं। ठीक है? और आगे अंतिम जो अवसर है वह भी एक ऑप्शन
02:45:36:18 है। इसी परियोजना योजना का या प्रक्रिया के अंतिम चरण को भी फाइनल कॉल कहा जा सकता है। यह देखो। यानी कि बुलावा आवश्यक नहीं है कि कॉल का उपयोग जो है बुलावे में ही लिया हो और यह कहा जा सकता है चलो उसको देखो मिल जाए तो यह भी यह भी तो सोच सकते हो कि इसको अंग्रेजी की नहीं ज्ञान होगा इसलिए इसने लिख दिया सिंपल यह भी तो मुझे बेनिफिट ऑफ डाउट दे सकते हो जैसे कि तुमने शुरू में जब अपनी पहली वाली लाइव शुरू की थी तो क्या कहते हैं? मैंने जैसे मैं जैसे मैंने तुम्हें बेनिफिट ऑफ डाउट दिया कि तुमने अपनी वह लाइक किस-किस ने किया है। तुमने चेक नहीं किया है। तुम्हें नहीं पता है। मैं तो यह सोचूंगा ये कहूं कि नहीं तुम्हें पता था और तुमने जो है मना किया। तो बेनिफिट ऑफ डाउट दे दो कि हो सकता है मैं उस कॉल शब्द का उपयोग अन्य रूप से हो सकता है कि नहीं। उस पर भी भड़ रहे हो।
02:46:41:24 भड़ो जो प्रतिज्ञा सन्यास और तरी क्या समझ आएगा दूसरे प्रोजेक्ट के पास आपको जाना है हम देखो यहां पे लिखा है निर्णय या अवसर का निर्णय निर्णय या अवसर का दूसरा नंबर पर्याप्त है इसके लिए निर्णय या अवसर का अंतिम मौका फाइनल कॉल का उपयोग हुआ है और ये कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। इसमें दोष भी हो सकता है कि मैंने ऐसा सोचा कि कॉल का उपयोग दूसरी जगह भी हो सकता है। कोई वो नहीं है। मगर यहां पर उपयोग हो रहा है। निर्णय या निर्णय या अवसर निर्णय या या अवसर का अंतिम मौका। हां। तो लास्ट मोमेंट जो मैंने लास्ट मोमेंट था मेरा जो निर्णय का वो था वो जिसमें मैंने बताया कि मैं तैयार हूं। अब एनी टाइम एनीवेयर एनीबडी वाले मामले तो मैंने वह बताया निर्णय या अवसर का अंतिम मौका तो मैंने निर्णय के अंतिम
02:47:57:01 मौके को इंगित किया था और वो कोई इतना उसमें विरोध लड़ाई की बात नहीं है हो सकता है कि भाई मैंने ऐसा सुना है कि कॉल शब्द का उपयोग भी सुना था और यहां पर दिखा भी रहे है कॉल शब्द का उपयोग हुआ कहीं पर कई जगहों पर और यहां चैट जीपीटी भी बताया ही जा रहा है। ठीक है? चलो कई तीन साल का 300 साल तो नहीं कहा हो सकता है जैसे ये लोग शब्द कहा नहीं होगा। कई 350 साल 350 साल तो नहीं रहा। हो सकता है जैसे ये लोग शब्द का अपने अनुसार बता देते हैं। अब ये क्या करना है? समाजवादी बात कर भाई। समाज लोग शब्द का भी सही बता देते हैं। हमने अर्थ नहीं बदला। हमने सीधे कहा कि हम जो आचार्य कुछ ऐसी वाणी बोल रहे हैं जो उनके अनुगत होने वाले लोगों के लिए ही है। शंकराचार्य शंकराचार्य इसलिए नहीं है कि उन्होंने भविष्यवाणी की है सा वर्ष में हिंदू राष्ट्र की या उन्होंने बताया कि मधुमक्खी की सेना है।
02:49:05:27 ठीक है? शंकराचार्य शंकराचार्य इसलिए है क्योंकि वह शंकर परंपरा के प्रामाणिक आचार्य होते हैं। लक्षण संपन्न सन्यासी होते हैं। तमस्त शति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देने वाले होते हैं। अपने शिष्य का संशय दूर कर देने वाले होते हैं। यदि आपको उनकी इस वाणी से वाणी से कोई दिक्कत है, कोई संशय है तो जाके पूछ लीजिए। हम तो लड़ने मरने नहीं जा रहे इसलिए कि शंकराचार्य ने सा वर्ष की भविष्यवाणी की है। इसको मानो मानो मानो। हम तो नहीं जा रहे इसके लिए लड़ने। पहले शंकराचार्य को शंकराचार्य मानो। उसके बाद देखो उनकी वाणी में तुम्हारी निष्ठा हो रही है कि नहीं हो रही है। अगर नहीं हो रही तुम चले जाओ भैया। शंकराचार्य को शंकराचार्य मानने के लिए तीन वर्ष में हिंदू राष्ट्र की भविष्यवाणी आवश्यक नहीं है। ठीक है? तो हम शंकराचार्य का प्रचार करते हैं। और आवश्यकता पड़ने पर जहां पर उसकी उपयोगिता होती है वहां पर बोलते भी है। तो शंकराचार्य का प्रचार हम इस आधार पे शंकर मठ का प्रचार शंकर संप्रदाय का प्रचार हम इस आधार पे नहीं करते हैं कि उन्होंने वह जो है सा वर्ष की जो है अवधि दी है। इस रूप इस
02:50:21:01 आधार पे हम प्रचार नहीं करते। ये उनके लिए होती है ये बातें जो उनके प्रति श्रद्धावान है। उन्होंने बताया भी है वो तीन का मतलब क्या है? मैंने ठीक से समझा नहीं है और आचार्य की वाणी है वह जाकर के आप उनसे पूछ सकते हैं मिल सकते हैं और मैं भी पूछूंगा कि तीन वर्ष का अर्थ क्या लिया था आपने उन्होंने किसी वीडियो में बोला है तो मैंने यह नहीं बोला है जो तुम आर्य समाज से मेल खाने वाला मुझे बता रहे हो कि शब्द का अर्थ ही बदल दिया से करते करते संयम को उसी प्रकार के कारण बुलाया है अच्छा ठीक है हम आगे सुनते है खैर यहां पर कॉल का अर्थ हमने दिखा दिया है। निर्णय या अवसर का अंतिम मोमेंट। ठीक है? निर्णय या अवसर का अंतिम मोमेंट। कॉल का
02:51:17:09 अर्थ। चलो। और अगर हिंदू राष्ट्र की बात करें तो नेपाल में देखिए क्या-क्या हो रहा है। चीजें हो रही हैं। और फिर सबसे बड़ी बात है कि इससे तुम्हें दिक्कत क्या हुई? भाई देखो अगर आर्य समाज यह कहेगा कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। इससे दिक्कत यह होगी कि व्यक्ति की मूर्ति पूजा में निष्ठा टूटेगी। व्यक्ति की क्या कहते हैं? क्या कहते मंदिरों जिनमें मूर्तियां है उनको बचाने की निष्ठा टूटेगी और सर्वशक्तिमान ईश्वर की प्रतिष्ठा ना हो पाने के कारण जो अंतःकरण में जो निष्ठा होनी चाहिए भगवान के प्रति विश्वास होना चाहिए वो नहीं बनेगा धर्म के प्रति तो वहां तो ये दिक्कत हो रही है मगर गुरुदेव भगवान की ये वाणी जो है सा वर्ष की वो उन्होंने कही है वह आगे भविष्य में सिद्ध होगी या नहीं होगी उसके कारण क्या प्रभाव होगा इससे धर्म ब्रह्म को क्या प्रभाव पड़ जाएगा व्यक्ति को जो उनके प्रति निष्ठावान है वह कुछ ना कुछ अपना ढूंढ ही लेंगे संतुष्टि और जो उनके प्रति निष्ठावान नहीं है वो इस के कारण निष्ठावान होने वाले नहीं है।
02:52:32:14 तो इससे इससे रिलेशन क्या है हमारे धर्म प्रचार का वो समझ में नहीं आया। इसमें जो है ना इसमें चलो फिर के लिए क्या किसी बिना सोचे समझे सामने वाले समझे सामने वाले का जाओ जल्दी जाओ
02:53:15:14 रिलेशनशिप बॉडी से ये देखो मिल गया। ठीक है? ये देखो क्या लिखा है? निर्णय घोषणा के संदर्भ में और उदाहरण भी दिया है। मैच में आउट देने का कॉल अंपायर का था। अब अंतिम फैसला तुम्हारा कॉल है। लो हो गया बंटादार। इसीलिए हम कार्य वही करते हैं जो ठोस होता है। अब क्या हुआ? हो गया। कॉल शब्द का उपयोग हो गया ना और अंतिम अंतिम कॉल भी तुम्हारा है। लो फाइनल कॉल भी हो गया वहां।
02:54:17:18 ठीक है? चलो भाई यह भी अच्छा हुआ। मिल गया। खैर इसमें वैसे बेनिफिट ऑफ डाउट दिया जा सकता था। इससे कोई इतनी बड़ी भारी वो नहीं है कि मेरी अंग्रेजी में अल्पज्ञता है तो मैंने ही लिख दिया होगा डिसीजन के संबंध में। मगर तुम उसमें भी कह रहे हो कि इसने वह क्लिकबेट बनाई। लोगों को यह दिखाना चाहा कि मैं बुला रहा हूं तुमको। अरे मैं क्यों दिखाऊंगा जब लोगों को पता है कि तुमने मुझे पहले दिखाया है। रिलेशन नहीं है मगर आप ज्यादा अकाट अकाट अरे भाई तो हम हम कब किस बारे में कह रहे हैं और तुम लाइव आ जाओ ना फॉर्म भर दो लाइव आ जाओ तुमको लगता है कि तुम सत्य के पक्षधर हो माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो
✅ This part is already used · 02:55:13:15 – 02:55:19:25 (0:06)
→ Used in: A · Live स्वयं को निर्भय कहने वालों में आह्वान का भय बौखलाहट अभद्रता और पलायन at 1:47:40 ↗
02:55:13:15 प्रत्यक्ष वार्ता करने का साहस प्रकट करो अन्यथा मुंगेरी लाल के हसीन सपनों की दुनिया में डूबे रहने के लिए
⬜ Not used yet · 02:55:19:25 – 04:46:26:16 (1:51:07)
02:55:19:25 वो भाई जब हम ऐसे पहली बात तो यह है कि कई चीजें ऐसी है जिसमें हम उनके वैचारिक वो नहीं है। एकता नहीं है वैचारिक फिर भी हम लोग शांत है एक दूसरे को लेकर के नहीं बोल रहे हैं क्योंकि वर्णाश्रमी है क्योंकि अमुक अमुक चीजें हैं। मगर जब भी किसी बात पे यदि अटकेगा मामला तो दूसरी बातें सारी खुद खुद डाली जाएगी। तो तुमने क्योंकि हमें ये कैसे पूछ लिया तो अब हम ये सारी चीजें खोल देंगे। सारे विषय खोल देंगे। मगर उस पर बात नहीं करेंगे। उसको सिद्ध नहीं करेंगे। क्यों भाई उसको ही सिद्ध करो ना और अगर दूसरी कुछ चीजें हैं जिन पर तुम्हें लगता है कि वह अकाट नहीं है तुम उनको बोल सकते हो तो इसका मतलब तुम्हें छूट मिल गई है कुछ भी अपने मन से बोलने के लिए और हमने बोला है तो तुमको दिक्कत होगी जान दियो जान भी करोगे जो तुम्हें छूट मिल गई है अगर अगर कुछ ऐसे मामले हैं जो अभी सुलझना बाकी है और जो कि इतना धर्म और ब्रह्म से वो उसका कोई ऐसा कुछ खास वो नहीं है। ठीक है? मगर तुम्हें लगता है कि ऐसे कुछ ऐसे मामले हैं जिन पर बात जो अभी जो है ठोस रूप से जिन पर बात नहीं हुई है। मगर क्योंकि उन बातों पर हम कुछ
02:56:34:28 नहीं बोल रहे हैं तो इसलिए तुमको छूट मिल गई है। उन बातों पर तुम कुछ नहीं बोल रहे तो तुम्हें छूट मिल गई है कि अब तुम कुछ भी बोलते रहो। भाई जिसमें तुमसे अकाट्य चीजें मांगी गई उसमें तो अकाट्य चीजें दो। तुम विषयंतर करोगे। अगर तुम्हें लगता है कि गुरुदेव ने कुछ ऐसी बात बोली है जो अकाट नहीं है तो इसका मतलब तुम्हें अकाट बोलने की छूट मिल गई क्या? अकाट के बिना बोलने की छूट मिल गई। हमारे गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध होगा क्या? तुम तो अपने आप को सही सिद्ध करो। अगर तुम अगर तीन वर्ष में हिंदू राष्ट्र नहीं बना या उनकी बात का कुछ मतलब है या जो भी है। पहली बात यह समझ लो ये जितने भी चमत्कारिक व्याख्यान हैं गुरुदेव के द्वारा दिए जाने वाले यह उनके लिए है जो उनमें श्रद्धावान
02:57:27:19 है। और शंकराचार्य में श्रद्धावान होने के लिए इन वक्तव्यों की आवश्यकता नहीं है शंकराचार्य को कि हम जो है हमें जो हमारे पास मधुमक्खियों की सेना है या ये है। आप उनकी शरणागति पहले प्राप्त करिए। किस लिए? क्योंकि वो शंकराचार्य है। उसके बाद देखिए कि उनके वो वक्तव्य देने के बाद भी आप उनमें श्रद्धावान रह पा रहे हैं कि नहीं रह पा रहे हैं। जहां तक मुझे उम्मीद है कि रह पाएंगे। ठीक है? हम चलिए मैं नहीं बैठा मैं आपको बताने बताना कैसे किया जाता है मैं आपको नहीं स्वयं अपना करियर खराब करते हुए आपको ज्ञान दे रहे हैं यार कृपा हम कर रहे हैं आपने बताइए इज्जत करना सीख परिश्रम करता है ना तो इज्जत करना सम्मान परिश्रम सम्मान हम की बात नया शब्द सीखें इसलिए हम को पहले धन्यवाद देंगे और इतना ही नहीं धन्यवाद देंगे पूरी नौटंकी पूरी नौटंकी अब इनका जो है नोट कर लेना इन्होंने चैट जीपीटी के आधार पर ये सिद्ध किया था इन्होंने टाइमिंग है 1652 इन्होंने बोला है कि फाइनल कॉल का अर्थ जो है फाइनल डिसीजन नहीं हो
02:58:42:19 सकता है चैट जीपीटी के आधार पर इन्होंने यह चीज सिद्ध की है। तो अब चैट जीपीटी के आधार पर हम यह सिद्ध कर रहे हैं कि फाइनल कॉल का अर्थ फाइनल डिसीजन हो सकता है। ठीक है चैट जीपीडी दिखा दो भाई इनका नोट कर लेना और बनाना कटिंग तब तक होगा जब तक जो तुम्हारे जो लुप्त संप्रदाय के गुप्त आचार्य है
02:59:20:06 जो जब तक वो जो जो बात बोल रहे हैं हर उस बात का हम उत्तर नहीं दे देते तब तक होता रहेगा और फिर कहेंगे लाइव आ जाना। यह देखो तुम्हारे जो लुप्त संप्रदाय के गुप्त आचार्य हैं वह एक छान के आसपास बोल रहे हैं। चैट जीपीटी के आधार पर दंभ भर रहे हैं कि कॉल शब्द का अर्थ निर्णय में नहीं लिया जा सकता। फाइनल कॉल का अर्थ अंतिम निर्णय नहीं हो सकता। चैट जीपीटी ही यह बता रहा है कि जब कोई व्यक्ति जब कोई
02:59:57:19 व्यक्ति प्राधिकरण कोई निर्णय लेता है या घोषणा करता है उसको भी कॉल कह सकते हैं। यहां नीचे उदाहरण दिया गया है। मैच में आउट देने का कॉल अंपायर का था। किसको बुला रहा था अंपायर? बताइए भैया। अब अंतिम फैसला तुम्हारा कॉल है। लो अंतिम फैसला तुम्हारा कॉल है। यहां तो बोल दिया चैट जीपीटी ने कि अंतिम फैसले को कॉल कहा जा सकता है किसी का। अंतिम फैसला फाइनल कॉल। ठीक है? चलो ये दिखाना लुप्त संप्रदाय के गुप्ताचार्य को खुद ही खुश हो जाते हो।
03:00:49:27 देखिए हमने वो वीडियो देखा जिसमें वो वालों के खिलाफ वीडियो हमने बनाया था उसमें मैंने मेरा फोटो लगाया मतलब ये कहते हमने कहा था गुरुदेव मनाया जाए ऐसा गलत किया है चीज उसके पीछे भी इनकी मंशा है मेरा मोटिव है वो केवल इतना हैकि इस के विषय में कह रहे थे और इसके पीछे भी मतलब ये कहते हमने कहा सबमि ऐसा गलत किया है एक चीज मेरा फोटो लगाया मतलब ये कहते गुरु सप्तमी के खिलाफ वीडियो बनाया था उसमें इन्होंने मेरा फोटो लगाया हमने वो वीडियो देखा भी जिसमें वो इस वालों के खिलाफ वीडियो बनाया था उसमें इन्होंने मेरा फोटो लगाया मतलब ये कहते हैं कि उन्होंने निगाह गुरु सप्तमी बनाया ऐसा गलत किया लेकिन उसके पीछे भी इनकी मंशा है मेरा मोटिव है वो केवल इतना है क्योंकि इस के विषय में उसका कह रहे थे और इस वाले में और इस वाले जितने भी बातें अपने वीडियो में या अपने लेखों में या और भी कम्युनिटी पोस्ट में कर रहे थे हमारे उनके दोनों के चैनल को अटैक किया जाता था तो मजबूरी में इनको एक कहना पड़ा कि सर वो गलती से एक बार इन्होंने वो शब्द आ रहा है। इसके अलावा और कुछ नहीं और इनके पास कुछ भी नहीं है। बस एक बार उसमें ये बात तो तुम्हारी वही वो हो चुकी है कि हमने वो लाइक किया है तुम्हारे अह तुम्हारा जो वो है ना 18 फरवरी को तुम्हारा वो रील जो पोस्ट की है तुमने Facebook पर वहां हमारा लाइक शो होगा और तुम दिखाना अपना प्रमाण दो कि हमने तुम्हारा वो लाइक नहीं किया। दूसरी बात तुम कह रहे हो यहां पे भी पूर्वाग्रह
03:02:05:15 है ना भाई जहां पर संभावनाएं दूसरी है वहां तुम्हारी बात क्यों मानी जाए और अगर मानी जाए तो वहां शास्त्र प्रमाण दो कि हमारी बात इसलिए मानी जाए तुम्हारे मन से थोड़ी ना होगा यहां शास्त्र प्रमाण तुम्हें देना चाहिए कि नहीं इन्होंने हमारा नाम इसलिए लिया था क्योंकि इनको लोग टैग कर रहे थे ऐसा नहीं है हमने इसलिए नहीं लिया था क्योंकि 18 फरवरी को जिस दिन हमने तुम्हारी वह पोस्ट लाइक की थी उसी दिन हमने वहां के कमेंट्स पढ़े थे और उन कमेंट्स में मैंने देखा था कि वहां तुम तुमको ऐसा लग रहा है कि हमने तुम्हें समर्थन नहीं दिया है। तो इसलिए अपना वो भाव प्रकट करने के लिए अपनी मर्यादा में रहते हुए हमने तुम्हारा नाम लिया था। और दूसरी बात क्रोध भी था उन लोगों के लिए जो ऐसा कर रहे थे तो तुम अपनी बात जो कह रहे हो ना कि नहीं ऐसा नहीं इसने ऐसा इसलिए किया ये जो है ग्रंथों के सामने इसलिए बैठा है क्योंकि यह दिखाना चाहता है कि मेरे पीछे ग्रंथ है इसलिए नहीं बैठ इसका और दूसरा कोई कारण नहीं हो सकता तो यह पूर्वाग्रह है तुम्हारा जिसको तुम थोप रहे
03:03:21:12 हो। तुमको इस बात को शास्त्र के प्रमाण से सिद्ध करना चाहिए कि मैं यहां पर इसलिए बैठा हूं क्योंकि मेरे मेरा जो है दिखे कितने शास्त्र है। और भी कारण हो सकते हैं कि मेरे सामने जगह ही ना हो। मेरे पास इतनी ही जगह हो। कई कारण हो सकते हैं इधर बैठने का कि पीछे बैकग्राउंड ठीक-ठाक कौन सा लग रहा है? यही ठीक लग रहा है। यही बैठ जाते हैं भाई। ठीक है? तो इस यह कटिंग आप लोग ले लेना। एक छ के एक छ पर बोला है इन्होंने जो यह कटिंग लेना और इनको दिखाना इनके इनके मुंह पर मारना कि देख कॉल शब्द का उपयोग निर्णय के रूप में है और अंतिम निर्णय के रूप में फाइनल कॉल का उपयोग भी हो सकता है। गलत नहीं है। अच्छा इसकी अंग्रेजी करो जरा। Google से ट्रांसलेट ट्रांसलेट करो। कि इसका ट्रांसलेशन करो कि यह जो है मेरा अंतिम कॉल है। मतलब इंग्लिश में लिखो यह बात। फाइनल कॉल है। इट्स माय फाइनल कॉल या जो भी उसकी अंग्रेजी बनती हो। और फिर देखो उसकी हिंदी क्या दे रहा है वो? इस मामले में इस केस में यह मेरा फाइनल वो
03:04:36:18 है। फाइनल कॉल है। इसकी हिंदी क्या दे रहा है वह? लिख दूं। अच्छा इस पूरे प्रकरण में यह मेरा फाइनल कॉल है। इसको पूर्णतया पहले इंग्लिश में लिखो फिर देखो उसका ट्रांसलेशन क्या दे रहा है। Google या चैट जीपीटी कितनी बार तुम अपनी लाइव में झूठे सिद्ध हो रहे हो। यहां लिखा वैसे बना पूरे के पूरे निकाल अच्छा अब कोई कह रहा है चैट जीपीटी रिलायबल सोर्स नहीं है तो फिर किसी विद्वान को लाइए और कहलवाइए उनसे कि अंतिम निर्णय अंतिम अंतिम निर्णय के रूप में फाइनल कॉल का उपयोग नहीं हो सकता है। तुम तो चैट जीपीटी को ही आधार बना रहे हो ना हमारी बात का खंडन करने के लिए
03:05:41:04 लोग इसीलिए लोगों की नजर में सही बनाए रखने के लिए 25 [संगीत] ये सब पूर्वाग्रह बोल रहे हो हम इसके लिए नहीं जीते हैं भाई तुम हमारी कहानी जानते नहीं हो और कोई जरूरी नहीं है कि जानने वाला होना मगर यह सब तुम्हारे पूर्वाग्रह हैं और हम इस तरह से कार्य नहीं करते कि अपनी अपने पूर्वाग्रह को थोपे किसी पर तुमने जो है ये ऑरेंज कलर का जो वस्त्र पहन रखा है धारण किया है जो हो सकता है तुमने बिना देखे बिना सोचे समझे यह सोचा हो कि मुझे ठंड लग रही है और हम कह दें कि तुमने जो भगवा कलर का धारण किया अपने आप को हिंदुत्व का प्रेमी दिखाने के लिए तो ये हम नहीं थोपेंगे तुम्हारे ऊपर। हां पूछ लेंगे तुमने क्यों धारण किया? अगर तुम्हारा ऐसा हमें तुम्हारा अर्थ गलत लगेगा तो हो सकता है प्रतिकार करें।
03:06:44:21 वन नंबर है। देखिए ये चैट जीपीटी सेंटेंस बना करके दे रहा है कि दिस इज़ माय फाइनल डिसीजन इन दिस एंटायर मैटर। एंड आई एम टेकिंग माय फाइनल कॉल रिगार्डिंग दिस एंटायर सिचुएशन। ठीक
03:07:17:26 है? तो हो सकता है फाइनल कॉल के रूप में फाइनल डिसीजन का फाइनल डिसीजन के रूप में फाइनल कॉल का उपयोग हो सकता है। अगर 5 मिनट तक कोई नहीं बात तो सरकार ऐसी कॉपी दे रहे थे तो कोई क्यों नहीं वहां पहुंचेगा? पहुंचेगा। पहुंचे थे वहां पहुंचे पांच मिनट तक बात नहीं हां
03:07:51:08 तुम्हारी बुद्धि छोटी है भगवत आनंद और कुछ नहीं है अब मैं समझा तुम छोटी बुद्धि के व्यक्ति हो मतलब बच्चे हो अभी आयु में तो छोटे हो ही 7 आठ साल वह अब पता लग रहा आयु का प्रभाव है। अनुभव का कमी है तुम्हें। संकीर्ण विचारधारा है तुम्हारी। तो उसी संकीर्ण विचारधारा से तुम्हें जो संकीर्ण संकीर्ण दिखता है उसी सब तुम सब तुम डिसीजन ले लेते हो। तुमको कोई मिला नहीं। ऐसा जो तुम्हारी शैली में तुमसे बात करे तो तुम सोचने लगे कि अब मैं हो गया। जयकांत शिखरे हम अब तुम्हें सिंघम मिल गया। तो वो दिखाओ जरा क्या था मैं मेरा चैनल खोलो जरा लाओ इधर चैनल खोलो मेरा मेरे चैनल पर जाओ और बताओ इनको क्या बोल रहे हैं पहले इनका सुन मेरे चैनल पे जाओ वीडियोस की लिस्ट
03:08:51:15 हां थोड़ा वर्क किया करो होमवर्क भी किया करो थोड़ी बहुत ठीक है और नहीं किया है होमवर्क तो मत बोलो कोई नहीं तुमसे कहने जा रहा है कि बोलो कितनी बार तुम झूठे सिद्ध होगे सबूतों के साथ और नीचे नहीं जा सकते। अरे तो नीचे ही नहीं जा रहा। अरे आवान कौन लोग धर्मा को लोगो? यह क्या लिख रहे हैं कि प्रोवाइडेड बाय शिवश इज एन ऑस्कर वन का क्या मतलब ऑब्सकर्ड वर्ड मैं बता रहा हूं एक मिनट ये ऑब्सकर्ड वन का क्या
03:09:51:28 अर्थ क्या मतलब मतलब सिद्ध करो भैया तेरे लिए कर्तव्य अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है तो सिद्ध करो लाओ मेरा वो मेरा खोल दो वो क्या कहते हैं अह हां देखता हूं रुक जाओ तो ठीक है क्लियर मीन िंग नहीं है तो क्या करें क्लियर नहीं है तो हम तो इनका कहना है हमने रामभद्राचार्य का रामभद्राचार्य जी का विरोध नहीं किया प्रतिकार नहीं किया विरोध तो हम क्या ही करेंगे उनका प्रतिक्रिया नहीं प्रदान की ये देखो ये देखो देख लिया कितनी बार झूठे सिद्ध हो गए यह मैंने उसी विषय पर बनाया है पांच मिनट संस्कृत वाले विषय पर और हां सीधा स्वामी वाला विषय मुझे नहीं पता है ठीक है और आवश्यक नहीं है कि मैं बनाऊं समय भी होना चाहिए और वो उतना आवश्यक
03:11:07:08 होना भी चाहिए बहुत लोग दुनिया में बहुत से लोगों ने गुरुदेव का विरोध किया है तो मैं एक-एक करके सब पर वीडियो नहीं बना सकता और अगर मैं एक वीडियो बना करके गुरुदेव का पक्ष रख लूंगा और गुरुदेव के सिद्धांत को अंतिम रूप से स्थापित कर दूंगा तो उसमें सबका विरोध भी होगा। ठीक है? तो नाम ले ले के मैं सबका वीडियो नहीं बना सकता। मगर मैंने इनका भी हाथ जोड़ के और इनको सम्मान देते हुए ही वीडियो बनाया था क्योंकि मैं इनके स्तर का नहीं हूं। मैं स्वयं को नहीं समझता हूं। तुम समझते होगे। तुम समझते होगे। मैं नहीं समझता अपने को इनके स्तर का।
03:11:48:15 और गुरुदेव जाने और यह जाने। फिर भी मैंने इनका एक अपनी मर्यादा में रहते हुए प्रतिकार किया। यहां पर तुम्हारा ये झूठ सिद्ध हुआ। तुम्हारी ये कही जाने वाली बात कि हमने वहां प्रतिक्रिया नहीं दी। ठीक है चलो कुछ हो रहा है कुछ हो रहा है तुम जो पोस्ट लिख रहे हो उस पोस्ट का हमें तब से हम लोग निरंतर हमको दिख रही है हम वहां पढ़ रहे हैं क्योंकि अभी तुमसे सीधे-सीधे बातचीत शुरू हो गई है वीडियोस के माध्यम से उससे पहले हमें नहीं पता चलता था तुम कब क्या कर रहे लोग बता देते थे। वो जो तुम्हें निग्गू कहते हैं वो बता देते थे कभी-कभी। वो जो मेरी चीजें तुमको बता रहे हैं अपने अनुसार वो बता देते थे कभी-कभी या और कुछ लोग बताते थे।
03:12:49:12 चलो पकड़ रहा है। उस स्थिति में तक बात नहीं पहुंच पा रही। हमें पोस्ट कर यह गलत बात ऐसा कुछ नहीं है। हम तक बात पहुंची और हमने कई लोगों का वो किया। ठीक है? हमने यहां तक कि योगी जी ने जो स्टेटमेंट दिया था अ पूज्य गुरुदेव को गुरुदेव के ऊपर जो स्टेटमेंट दिया था कि कोई भी आचार्य श्री राम से बड़ा नहीं है। उस पर भी हमने उन्हीं दिनों बोला था। चलो बात हो जाती है और साथ में तो सामना नहीं कोई शंका कर अब यहां भी पूर्वाग्रह है पहली बात तो मैं ऐसा है ही नहीं कि मैंने वहां पर बात नहीं की दूसरी बात ऐसा है कि यह तुम्हारा फिर पूर्वाग्रह है कि अगर मैं नहीं टकरा रहा हूं तो इसका एक ही अर्थ है कि सामर्थ्य नहीं रखते हो। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि मेरे बगल में जो एक ऐसा व्यक्ति है जो जिसके बुलाने पर 50 लोग आते हैं और जब मुझे रामपाल की किताबें जलानी होती हैं तो वो जाता है यह सोचे समझे बिना कि मैं शंकराचार्य जी को मानने वाला हूं। वो वहां पर दुर्गा मां को गाली देने वालों से लड़ने के लिए मेरे साथ जाता है। ठीक है? और
03:14:04:16 मैं अपने वीडियोस में उसके बारे में भी बोलूंगा। मगर जब वो जा रहा होगा मेरे साथ तब नहीं कहूंगा नहीं पहले तू अपने गुरु का मानना छोड़ तब तू मेरे साथ जाएगा। ठीक है? तो पूर्वाग्रह से ग्रसित हो संकीर्ण विचारधारा है तुम्हारी। झूठ पर झूठ बोले जा रहे हो। अधूरी अधूरी जानकारियों पे निर्णायक वक्तव्य नहीं दिए जाते। और तुमने दिए। कई बार सिद्ध हो गया। अभी वह एफबी वाला लाइक दिखा दिया। अभी यह दिखा दिया। रामभद्राचार्य जी के लिए मैंने प्रतिकारात्मक वीडियो बनाया और योगी और मोदी जो शासन तंत्र हैं उनके लिए मैंने बोला। ठीक है? और मैं कहूं कि जो लोग ब्राह्मणोचित धर्म के साथसाथ क्षत्रियचित धर्म का आलंबन भी ले रहे हैं तो उनसे आप यह अपेक्षा करना बंद कर दीजिए कि धरातल पर कार्य करते समय भी वो जो है हां वो धर्म की व्याख्या गलत करने लगे तो गलत है कि धर्म रक्षा के नाम पर धर्म की व्याख्या ही बदल दी। धर्म रक्षा कर रहे इसलिए धर्म की व्याख्या ही बदल दें। यह नहीं सिद्धांत पूछा जाएगा तो वही बताएंगे। ये नहीं करेंगे कि कृष्ण और अल्लाह एक है। ठीक है? सम्मान करता है बिनेस नहीं करता कोई आपके बिना देखने से पता
03:15:21:07 नहीं देखो पहले सीसी बात है जो हमारी बात हुई बताऊंगा कैसे हुई लाइव का विषय है अब क्या बोलना है की उसने पहले से दिया था पहले रखा है मतलब उसका नाम रखा है और रखा मतलब इस क्लास एग्जाम में फाइनल डिसीजन दे चुके होंगे। फाइनल डिसीजन मतलब फाइनल फाइनल ड्राफ्ट और कोई फाइनल नहीं होता है ना कि फाइनल फर्स्ट फाइनल सेकंड फाइनल थर्ड पीपीटी बना रहे हैं यहां बैठ के। ये ड्राफ्ट वन ड्राफ्ट डॉट ड्राफ्ट वन डॉट टू डॉट 3 डॉट4 फाइनल ड्राफ्ट फाइनल ड्राफ्ट वन फाइनल ड्राफ्ट टू फाइनल फाइनल ड्राफ्ट फाइनल फाइनल ड्राफ्ट वन फाइनल ड्राफ्ट ये पीपीटी बना रहे हो तो हां तो अ क्या कहते हैं किसके संबंध में?
03:16:13:18 फाइनल कॉल रिगार्डिंग लाइव डिस्कशन हां तो उसके संबंध में फाइनल कॉल था फाइनल कॉल टू तो नहीं कर रहे तो क्या दांत दिखाने की यहां बात हो गई समझ में नहीं आया ये तुम्हारा जो जोक है ना वो वैसा जोक है जो पहले जो हंसी की हास्य फिल्में आती थी तो उसमें वाकई में व्यक्ति को हंसी आती थी जैसे गोलमाल वन देखोगे टू भी देखोगे तो उसमें वाकई में लोगों को हंसी हंसी आएगी। मगर उसके बाद जब थ्री में देखोगे, फोर में देखोगे तो वहां पर जनता पॉपकर्न खाती हुई खामा हंसती हुई दिखेगी। तो तुम्हारा जोक भी वैसा ही है। जिसमें हंसी नहीं आएगी। तुम ही हंस लोगे जबरदस्ती। और वही वाह वाह वाह वाह अम्मा शुरू तो करने दो। वो हाल है। इसमें क्या दांत दिखाने की बात हो गई भाई। हमने कहां कहा कि फाइनल कॉल टू, फाइनल कॉल थ्री। डिसीजन के बारे में जो हमारा फाइनल कॉल था वो दे दिया। अब तो नहीं लिखा हमने दूसरी चर्चा में दिन में भी नहीं लिखा तुम्हारा यह वक्तव्य सुनने से पहले तक यह हो कि तुम्हारा यह वक्तव्य हमने सुन लिया है इसलिए नहीं लिखा तो हमने दिन में जो अभी लाइव की थी उसमें भी हमने नहीं लिखा कि फाइनल कॉल जो है वो टू फाइनल कॉल थ्री ये सब तो नहीं लिखा हमने तो इसमें क्या हंस रहे हो अरे
03:17:29:15 पहले लिख तो देने दो फिर वही बात अगला वीडियो क्या मैं इस संबंध वहां देखो ना फाइनल कॉल किसके किसके साथ लिखा हुआ है। मतलब तुम पर बात ही ना करूं। अगर वहां डिस्कशन के संबंध में मैंने फाइनल कॉल लिख दिया तो अब तुम कुछ भी करते रहो तुम पर बात ही ना करूं। तो ऐसा तो नहीं होगा ना। झूठे की हद तक झूठे की हद तक और चोर के घर तक जाएंगे हम। ठीक है। चलो।
03:18:03:01 चलो खैर आज तुम्हारी एक चीज जो थोड़ा सा हंबलनेस देख के अच्छा लगा। यह कुछ अच्छा है। एक एक ही वीडियो बनाने से ऐसा परिवर्तन आ गया है। मुझे पहले कर देना चाहिए था जो मैं नहीं करना चाहता था। ये गलती थी क्योंकि तुमने वो उस कहावत को सिद्ध कर दिया। लातों के भूत बातों से नहीं मानते। मैं करता रहा, गिड़गिड़ाता रहा। गिड़गिड़ाना ही कहेंगे। हम आपके साथ नहीं करना चाहते हैं। यह वह सब कर रहा था ना। प्रयास कर रहा था नहीं माने हम फिर जब अपना दिखाया तुमको तुम्हारे स्टाइल में बोल के तो तुम्हें अकल आ गई आज बड़ी प्यारीप्यारी आवाज में बात कर रहे हो हंसते हुए चलो कोई बात नहीं और इससे पहले वाले में शिवश मैं तुम्हारा करियर खा
03:18:59:12 जाता मतलब बात है अपने उसमें दम है अपने कार्यों में है ना देना चाहेंगे चलो खैर एक बात तो मैं भी कहूंगा जैसे तुमने शुरू में कहा हाथ जोड़े थे तो मैं भी एक कहूंगा कि वो कोई कायदे का मिला तो है थोड़ा बहुत ही सही मगर अभी काफी मतलब तर्क से बहुत दूर और प्रमाण रटे हैं मगर उसको जो है संबंध नहीं स्थापित कर पा रहे और तर्क संगत बहुत तर्क की बहुत कमी है। युक्ति नहीं है बिल्कुल भी और अधूरी जानकारी पर कार्य करने वाले हो तो उसमें भी दिक्कत है। झूठे सिद्ध हो जा रहे हो उसके कारण क्योंकि मैं तो यह अगर मैं चाहूं तो यह बोल सकता हूं कि तुम यहां झूठ बोल रहे हो जानबूझकर तुम्हें पता है कि मैंने लाइक किया है फिर भी झूठ बोल रहे हो यह कह सकता हूं मगर वहां पर मैं बेनिफिट ऑफ डाउट दे रहा हूं तुम्हें क्योंकि कोई भी संभावना तुम्हारे सही होने की अगर निकल सकती है तो शिवश
03:20:14:21 नारायण द्विवेदी तुमको सही कहेगा तुम्हारे सही पक्ष को ढूंढ निकालेगा जिस दिन तुम्हारा कोई भी सही पक्ष नहीं निकलेगा तब शिवश नारायण द्विवेदी तुम्हारे तुमको जो उस विषय में गलत कहेगा उस विषय में यह है शिवश नारायण द्विवेदी यह है आह्वान और यह है राम का प्रभु श्री राम का साधारण भक्त और यह है जगुरु शंकराचार्य जी का अल्पज्ञ शिष्य ठीक है मैं तुम्हारी तरह नहीं हूं जो जहां पर संभावना निकल रही हो वहां पर वहां पर भी जो है अपना पूर्वाग्रह घुसेड़ो
03:20:56:19 तो उसको अच्छे दिखा ठीक है उसको ये कामते तो मिल गए तो ये जो ने कहा कि हमें कभी तुम लाए तुम्हारे साथ नहीं कर सकते भाई तुम्हारा स्तर नहीं है हम क्योंकि तुम्हारा स्तर नहीं है पूरा नहीं कर सकते बात नहीं तुम्हारी बात कर तुम फिर उसी मेरे वीडियो को देख के बातें कर रहे बात करना चाह रहे थे आमने सामने की बात करना चाह रहे हो आमने सामने बात कर तुरंत जाओ किसी नहीं करना चाह रहे लेकिन तुम अपना एक्सेप्ट मैंने मैंने कल की लाइव में कह दिया है कि हम लाइव करेंगे। हो गया। यह बात भी खत्म हो गई तुम्हारी। तुम्हारा तो एक-एक वाक्य कटता जा रहा है भाई। अभी शायद या तो तुमने सुना नहीं है इसलिए तुम ये बातें बोल रहे
03:21:43:04 हो। अभी अभी इसी वीडियो में इनकी आवाज कट जाएगी। तो कहा नहीं बुलाए क्यों नहीं बुलाया भाई हम नहीं क्या है इसलिए इसलिए क्योंकि उनके के द्वारा मैंने व्यक्तिगत रूप से जिसको भी मैं लूंगा लाइव में यह इनका कहना है कि तुम हमारे समर्थकों को लाइन में बुला रहे हो हमको नहीं बुला रहे इसलिए क्योंकि उन समर्थकों ने व्यक्तिगत रूप से गुरुदेव इत्यादि के लिए ऐसे शब्द ऐसा ऐसी पंक्ति नहीं कही है मेरी जानकारी में जो कि जो है मर्यादा को क्रॉस करने वाली लाइनें हैं। ठीक है? और तुम्हारी लाइनों का एक गुच्छा दूंगा तुम्हें बना करके। वैसे तो सब सर्वविदित है तुम्हारे द्वारा अपमान मगर फिर भी मैं तुम्हें गुच्छा दे दूंगा पूरा पड़ेगी एक
03:22:58:12 प्रश्न आ रहा है ब्रह्म मुहूर्त में क्या कर रहे हो ठीक है तो ये आपातकालीन स्थिति है ठीक है आपत्ते तो हमने और किया है हमने मान लिया है कल तो किसी को मानक हमने ये मान लिया ताकि लोगों को हमने कहा हमने ये मान लिया किसी को पकड़ेगा हम समझते हमने इसका अर्थ गलत समझा ही नहीं है तो ये बात ही गलत खत्म हो गई पहली बात तो और बहन का अर्थ यदि मैं जानने वाला हूं तब भी मैं बहन शब्द का उपयोग पत्नी के रूप में करूं बाद में कि हमने अर्थ गलत समझ लिया था तो मैं वहां पर दोषी होऊंगा। मगर मैं इंग्लिश भाषा को आंग्ल भाषा को जानने वाला व्यक्ति नहीं हूं। मैंने अपनी लाइफ में यह भी कहा। इसी लाइव में कहा है जिसको तुम सुन रहे हो। ठीक है? तो फिर ये दोष मुझे नहीं लगेगा। बहन शब्द के उपयोग को बाद में बदलकर पत्नी के लिए कर देने वाले उसमें दोष लगेगा क्योंकि मैं हिंदी को जानने वाला हूं। हिंदी भाषा हिंदी भाषी व्यक्ति हूं। मगर मैं अंग्रेजी
03:24:13:22 भाषी व्यक्ति नहीं हूं। तो यह बात भी तुम्हारी खत्म हो गई। चलिए उसका लाइव हो भारी है तो विज्ञान को विकलांग विकलांग को ज्ञान कर दिया कर दिया ऐसा तो मत करो हम तुम्हारा समझते ऐसा तो मत करो हर तरह से तुम्हारी वो हो रही
03:25:05:16 है आगे भाई रहेगा तुम्हारा रहेगा झूठ तुम्हारा रहेगा झूठ तुम्हारा रहेगा पूर्वाग्रह तुम्हारा तुम्हारा रहेगा अप्रासंगिकता तुम्हारा ये सब रहेगा तुम्हारा रहेगा झूठ तुम्हारा रहेगा पूर्वाग्रह तुम्हारा रहेगा अप्रासंगिकता ये सब तुम्हारा रहेगा उसी शैली में जो तुम चर्चा का जिसको नाम दे रहे हो
03:25:59:10 संसार में बता पूरे संसार में वकील हमको नोटिस भेजा है उसमें ज्यादा अनपढ़ को लिखा अच्छा सुनिए आपको याद रखना है कोई भी वकील जब नोटिस भेजता है इस बार मेंबर है कि इस बार एसोसिएशन वकील एसोसिएशन में उसका जो राइटिंग वो रहेगा प्रेशन उसका रहेगा देखो लॉयर और एडवोकेट मतलब लॉयर की क्या है कोई भी व्यक्ति को आय कानून की जो पड़ा है उसका लॉयर होता है लेकिन लॉयर होने से कोर्ट में जा चुके ठीक
03:27:54:00 है मतलब और लाइव नहीं करेंगे ना ये ठीक ठीक है ठीक ठीक हो गया की नींद लेगे और फिर अपना जो कृत उसको संपादित करके फिर कुछ पारायण इत्यादि करके और फिर एक लाइव करेंगे फिर जाकर भगवती का श्रृंगार करेंगे फिर आएंगे फिर एक ठीक चलो ये जो है
03:28:34:15 हम तो बैटल फॉर सिविलाइजेशन तुम यह सब बातें मत करो कि तुम्हारे मन में मेरे लिए जो है सम्मान है। तुम्हारे जैसे लोगों से मुझे सम्मान प्राप्त नहीं करना है। जो बिना जाने ताने किसी मातृशक्ति के पीछे पड़ गए हो। उसको उसका पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया तुम जैसे लोगों ने। खैर चलो कोई बात नहीं। उसका बनता है ये सब और उसके बाद जब हां उसके बाद नोटिस जारी करता है तो उतनी बात ध्यान नोटिस बढ़ाइए। चलो ये जो वकील वाला विषय है वो वकील देखेगा एडवोकेट
03:29:14:18 देखेगा कि वहां सुभाष का तुम्हारा चक्कर खा जाएंगे लाइसेंस कैसे हो जाएगा तुम्हारा वहां सुभाष का समर्थन करते तुम्हारा चक्कर खा जाएंगे लाइसेंस कैसे हो जाएगा तुम्हारा तुम बनो ना ये के चक्कर में के चक्कर में तुम्हारा खा जाएंगे नंबर है तुम्हारे सिग्नेचर है वही है ठीक है फोटो लगा पढ़ रहा था फिर वापस
03:29:49:18 मैं कर दूंगा मैं कर दूंगा बाद उसने मुझे दूसरी बात नोटिस पांच के बाद मैंने पढ़ा नोटिस मुझे पूछा मिल गया पूछा क्या मिल गया मिल गया माध्यम से तो हम इसको पढ़ेंगे अपने कानून जो भी हमारे सलाहकार है उनसे बरामद करेंगे भैया इसमें जो एडवोकेट का पक्ष है वो है हमारा क्या आगे को सबसे बड़ी बात को पर भेजा जाएगा ये एक ता से संपर्क करने का माध्यम लेकिन उसका पूर्व में नहीं आएगा अभिषेक द्विवेदी ने चक्कर में छोड़ो और तुम हमसे ही काम कर क्योंकि जिस उम्र में ना उसके उस समय हमारे पिताजी हमको प्रथम अपील पदाधिकारी के लिए आवेदन लिखवाकर बताते थे बोलना कैसे आठ साल को देखते तो इस मामले में गलती बनाने के खिलाफ ऐसा कभी भी आपको बीएस गया नहीं किया और आईपीसी सीआरपीसी की सारी धारा लगभग वो सारे के सारे पिताजी अकेले रहे
03:31:04:19 बिना किसी की सहायता से थे और सब जगह जब वो मुसलमानों ने पता करने के लिए लगाए थे वो शायद भी अब तो मर गया अब मेरे पिताजी पर जितने आरोप लगे थे सब मुसलमानों ने कर दिया लगभग मेरे पिताजी का ये जो सब चला रहा था वहां पर मिसियों के पिताजी कुछ कर रहे थे वहां के बनवास के बीच में कम मारना बना रहे थे समझा और मेरे पिताजी अपने मेरे पिता तो भाई तगड़ा उससे बहुत तगड़ा काम करते और एक बिना सब अपराध कर दिया और अंत पिताजी धरातल पे काम करने की बात करते हैं। पिताजी बहुत जगह वो लड़े लड़ाई शायद धर्म से संबंधित थी तो प्रणम में है। मगर उन्होंने तो समीक्षा नहीं की ना आचार्यों की जगतगुरु की गद्दी पर बैठे हुए लोगों की समीक्षा नहीं करी ना पब्लिकली आकर के तो उनसे अपनी तुलना क्यों कर रहे हो? हमने तो यह बताया है कि तुम समीक्षा इसलिए कर पा रहे हो क्योंकि तुम धरातल पर एक्टिव नहीं हो और एक्टिव हो जाओ कुछ करो जाकर के फिर बता देना कितनी समीक्षा कर रहे हो क्योंकि एक्टिव होगे तो तुम्हें छात्र धर्म का आलंबन लेना होगा रणनीति बनानी होगी फिर तुम्हारी रणनीति का रणनीति जो तुम्हारी रणनीति होगी उसका खंडन हम करेंगे यहां बैठ कर के चश्मा लगा के लेंस लगा
03:32:19:22 के चलो क्या है तुम्हारे खिलाफ क्या तुम पिता बता रहा है उसके बाद से बता दिया करता था बेटा बातें हम नहीं देते उसको अभ्यास हो डिलीट करते नोटिस देते डिली करते नोटिस देते डिलीट करते मत हो रहा है कि क्या अपना करियर नापने पर इसको मतलब इतनी डांट से और इतना हम वकील नहीं है लेकिन वकीलों के गतिविधि से अदालती कारवाई से अवगत है और कुछ नहीं तो मेरे पास इंटरनेशनल लॉ की पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री भी है तो ऐसा मत समझो की क्या मुद्दा
03:33:06:13 है तुमको नहीं है अच्छा करियर है तुम्हारे लिए अच्छा करना करियर नहीं है वो हमारे समाज से लड़ने के लिए से लड़ने के पूरी शंकराचार्य किसी से बात कर लेते अरे पहले तो सिद्धांत कहां है कि धर्म की रक्षा करने के लिए केवल उसी का साथ लिया जाएगा जो तुम्हारे सिद्धांतों से बिल्कुल यथावत सहमत होगा। तेरे लिए कर्तव्य अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है। कहां है? शास्त्र का प्रमाण भैया यह कहा जाता है कि आवश्यकता पड़ने पर यदि लुटेरों का भी मनुष्मति में कहा गया है ना लूट का धन भी हो उससे भी धर्म की रक्षा करने के लिए आप उसको ले सकते हो उसका उपयोग कर सकते हो तो फिर तुम शास्त्र प्रमाण दो कि धर्म की रक्षा करने के लिए उसका नहीं लिया जाएगा साथ जो तुम्हारे सिद्धांतों को नहीं मानता होगा पहली बात और दूसरी बात यह है कि अवेलेबिलिटी नाम की भी कोई चीज होती है ना
03:34:23:02 पूरे लखनऊ में कितने शिष्य हैं पहले नंबर ये ढूंढना है फिर क्या वो सारे शिष्यों का फोन नंबर मेरे पास है कि नहीं दूसरे नंबर ये ढूंढना है फिर वो शिष्य किस-किस स्थिति में कौन-कौन है जब मुझे 4 बजे पता लग रहा है 4:30 बजे मुझे वहां पहुंचना है तो मैं ये ढूंढूंगा अरे वो सब छोड़ो अगर तुम्हारे घर में किसी की किसी का स्वास्थ्य बिगड़ जाएगा तो तुम ये ये ढूंढोगे क्या कि किसी ऐसे को बोला तुम्हारे सिद्धांत को मानता हो सबसे पहले कौन मिलेगा तुम्हें पड़ोसी और हां मेरे पड़ोस में आरएसएस और बजरंग दल को मानने वाले लोग थे वो मिले मुझे तो मैं बैठा रहा हूं तब तक दुर्गा मां को गाली देने वालों के लिए कि जब मेरे वो शंकराचार्य जी के शिष्य आएंगे मैं तभी उनको रोकने जाऊंगा भले ही मुझे कोई हिंदू ऐसा मिल रहा हो जो अभी भटका हुआ है। परंतु वह इस मामले में मेरे साथ देने को तैयार है। भले ही मुझे कोई ऐसा व्यक्ति मिल रहा हो जो प्रमाण्य बुद्धि अपने धर्म में रखता है। हालांकि उसको धर्म की परिभाषा आती है कि पूर्ण रूप से कि नहीं आती वो एक अलग विषय और वो मेरे जाने के लिए मेरे साथ जाने के लिए तैयार है।
03:35:49:26 चलिए बोले शंकाचार्य की धारा पर काम करो तुम्हारे ऐसा काम कर रहे हो शंकाचार्य के पास जाने की बोले हम ये पढ़ रहे हैं कि आप आशीर्वाद चाहिए आपके संसाधन का प्रयोग करने चाहिए ताकि तुमने मत की व्यवस्थाओं पर पत्र नहीं उठाया कभी भी बल्कि यही कारण है ये क्या नाम है कि कभी भी तुमने मत की व्यवस्थाओं पर पत्र नहीं उठाया कभी भी बल्कि जिन वकिलों के नीचे तुम काम करते हो वही वकील तुम्हारी ये जो अभिषेक काम करता है वही फकीरों ने कोई शंकराचार्या के अवस्थाए आज पर बात करके बहुत बताया है महाराज आपस में लोग इसके बाद ये सभी वीडियो बना रहे है ना इनके लोग ऐसे ऐसे शब्दों के लिए भी ऐसी शिकार हो सकती है जिसका कोई दो नहीं तो इसीलिए मैं ये कहता हूं क्या है जिसका कोई दो नहीं लोग बहुत बुरे पकड़ेंगे ये सभी वीडियो बना रहे हैं ना ऐसे ऐसे शब्दों के लिए भी ऐसी कारवाई हो सकती है जिसका कोई दो नहीं अच्छा बढ़िया तो कर लेना कारवाई कर लेना इसीलिए तुम्हारे से सभी हाथ मिलाते हो कल को तुमको समाज के साथ करती है ये सब शास्त्र के प्रमाण से क्यों नहीं बोल रहे? बहुत बड़े शास्त्रज्ञ हो। क्यों नहीं बोल रहे शास्त्र के प्रमाण से कि हमने अगर आरएसएस का साथ ले लिया है तो हम धंधा है ये हमारा।
03:36:49:02 हम और तुमने नहीं लिया क्या? तुम भी धंधेबाज हो गए। तो शास्त्र का प्रमाण तो है नहीं इस विषय में कि अगर तुमने ले लिया किसी से तो तुम जो है धंधेबाज हो जाओगे और पास आ जाते हैं। पहली बात तो शास्त्र का प्रमाण है नहीं कि तुम जो है व्यक्ति अगर जो सिद्धांत को पूरी तरीके से मानने वाला नहीं होगा उसका साथ ले लोगे तो तुम जो है धंधेबाज हो जाओगे। शास्त्र का प्रमाण नहीं है। जहां देना होता है वहां नहीं देते हो। चलो बस बकबक करा लोका के लोग भी कुछ करते हैं शास्त्रीयता कारण तो भी उनका करते हैं इसीलिए हम तो धर्म को मान रखते हुए शंकराचार्य जी के विरुद्ध भी कुछ करते है शास्त्रीयता का कारण तो भी उनका करते हमारे धार्मिक संप्रदाय सीमा में क्या है नहीं है हमने समर्थन नहीं किया जो फिल्मों का योग कर रहे थे जो सुरक्षा के लिए बात करते हैं जो तो हमारा उसे निजी नहीं है हमने कभी ये नहीं कहा कि हमसे निश्चि बनाएंगे तो मेरा धर्म मेरा करता है कि हम उसे निश्चित धुरी बनाएंगे क्योंकि तुम्हें धर्म का बोध नहीं है क्योंकि पहली बात तो तुम गुरु विहीन हो क्योंकि तुम अपना लुप्त एक संप्रदाय बना रहे हो कल्पना के आधार पे लुप्त संप्रदाय के गुप्ताचार्य बन रहे हो तो तुम गुरु विहीन हो इसलिए
03:38:04:04 तुम्हें धर्म का बोध नहीं है तुम्हें ये नहीं पता है कि गुरुदेव की निंदा करने वाले की जीवा ना काट सको तो उससे दूरी तो कम से कम बना ही लो ये तुम्हें नहीं पता है तुम्हें यह सब पता है कि इसको गोलगप्पे खाने चाहिए कि नहीं तुम्हें ये सब पता है कि क्या कहते हैं इतनी बार मिट्टी से शौच करना है या यह धोना है ये धोना है सब अच्छा है और इसके लिए प्रणम्य हो तुम ये सब पता है ठीक है भक्षवक्ष में तुम्हें ज्ञान है ये सब पता है मगर दूसरे जो धार्मिक आचरण है कि अन्यों के साथ तुम्हारा क्या व्यवहार होना चाहिए उस व्यवहार का तुम्हें ज्ञान नहीं है। उसमें जो धार्मिक आचरण होना चाहिए वो तुम्हें नहीं पता है। इसलिए तुम्हें नहीं पता। तुमने पहली बात तो यह है कि जो हमारे गुरु हैं बल्कि हमारे ही नहीं तुम्हारे भी गुरु हैं। तो तुमने कहीं पे अपने वक्तव्य में कहा भी है कि मैं तो शिष्य होने का कर्तव्य निभा रहा हूं। मगर उनसे प्रश्न पूछने की तुम्हारी शैली तो गलत है। शास्त्र विरोधी है। तो यहां तुम्हारा खंडन क्यों नहीं होगा? ये हमने कभी नहीं कहा। अभी तो पर
03:39:19:09 लगा सही है यहां पर कोई नहीं के साथ खड़े इतना में किसी धंधे के चक्कर में तुमने आज समाधि और आज कुछ क्षेत्र में प्रभावी शंकर परंपरा दिया कम से कम कोई वश दिया किसी ऐसे सब संप्रदाय के शिष्यों को एक करके विश्व में रखने वाले को एक काम कोई तुम्हारी घर की स्त्रियों पर जब आक्रमण करेगा तो तुम यह ढूंढना कि यहां पर आसपास मेरे रामानुज परंपरा का कौन है? और फिर तुम्हें कैसे पता कि मैंने नहीं ढूंढा। मैं तो मैं तो पकडूंगा ना। तुमने एक पता लगाया मैंने ढूंढा है कि नहीं ढूंढा है। भाई मैंने तो मैसेजेस किए थे अनेकों को। हां नहीं आया कोई तो मैं रुका रहूं आने तक।
03:40:08:25 क्या तर्कहीन अप्रासंगिकता पूर्वाग्रह हां क्या क्या है संकीर्णता विचारधारा की कि नहीं नकारात्मक सकारात्मक दोनों अर्थ है पर मैं नकारात्मक को ही पकडूंगा तुमने क्या किया है तुम कहां पे रहते हो यह बताओ सब छोड़ो तुम कहां पे रहते हो? तुम अपने शहर का नाम बताओ। नजदीकी जो डिस्ट्रिक्ट हो मैं देखता हूं वहां पे। तुम्हारे नजदीक में कहां पे राम रामपाल का नाम दान सेंटर है और तुम्हारे पिताजी ने भी बहुत सारे केस लड़े हैं और जीते हैं और तुम्हें भी अच्छा खासा ज्ञान है। तो रामपाल की लड़ाई लड़ो। वहीं से मुकदमा कर दो उनके ऊपर। और उनकी जो सामग्री है वो इललीगल है पूर्णतया। इस बारे में ठोस प्रमाण मैं तुम्हें दे रहा हूं। लड़ो लड़ो मुकदमा। नहीं लड़ोगे
03:41:07:13 यहां चिकचिक बाजी करो खुद कुछ करना नहीं है जो कुछ कर रहा है उसको तुम ये बता रहे हो तुम्हें ऐसा करना चाहिए था ये जाने बिना कि तुम्हारे द्वारा दिए जाने वाले विकल्पों का आलंबन उसने लिया कि नहीं लिया है क्या भाई अहंकार की भी अति होती है इसमें बहुत बड़ा बात कर दिया ऐसे मैंने ये बता दिया अच्छी बात को है क्या सत्य है तो सत्य है आगे सुना नहीं उसने कहा है की ये मेरे बारे में बोलने वाले सत्य है ठीक है और सत्य से अघात सत्य बात सत्य की तो नहीं है आज ही सत्य है और सत्य से सत्य है सुनने आगे सुना नहीं है जो सत्य है तो सत्य है सुन सुन आगे सुना नहीं कहा है की ये मेरे बारे में बोलने वाले सत्य है ठीक है और सत्य से सत्य सत्य से अघात सत्य को तो अब सुने बात सत्य कितनी है आज भी सत्य है वो भी सत्य है बिलकुल भी सत्य नहीं है की अघात सत्य है क्या ऐसे सत्य अघात ही होता है तो हो जा वो सत्य नहीं होता है इसने कहा वो सत्य बात है सुनते है क्या है नहीं
03:42:25:14 हो के साथ है को इतने नहीं भैया ने बोला श्दावली है जैसे स्वामी ब्रह्मचारी जी भी स्वामी सरस्वती हो चुके है उनकी भी शरी है भैया बोल अरे भैया अरे भैया तो शब्दावली होती है लोगों की तो मैंने ऐसे भैया कर दिया इसके साथ मुझे भाईचारा नहीं रखना है पता नहीं है ये सिवा कब्जा करा कब्जा करा समा मैं पहले बोल चुका हूं तुम्हें तुम्हारा उत्तर दे दे रखा है चलो तुमने यहां पे कहा मैंने पहले ही कह दिया ना शुरू में हमें ना तुम्हारी मित्रता चाहिए ना तुम्हारे वो चाहिए ये क्या कहते हैं शत्रुता खैर तुम्हें अगर लेनी है तो तुम कर लो मगर हमें तुम्हारी मित्रता की कोई आवश्यकता नहीं है। ठीक है भ्रातत्व तो बहुत दूर की बात है। चलो हां और भाई के रूप में अगर तुम्हें लेना है कि नहीं लेना है वो हम तुमसे डिसाइड नहीं करेंगे। वो हमारे गुरुदेव हैं। बोलते हैं कि हम 100 और तुम पांच और बाहर का कोई आ जाए तो 105 तो उस सापेक्ष में हम कहेंगे कि तुम्हारे भाई हो तुम मत कहो। मगर मत कहो मगर तुम कभी अगर परेशान हो जाओगे कहीं पर अगर फंसेगे और हम देख रहे होंगे
03:43:40:16 कि यहां पर जो है तुम्हें बचाना चाहिए। है ना? तो हम जरूर बचाएंगे। भाई कौन स्वीकार करते हैं भाई छोटा ना बड़ा किसी प्रकार से इससे हमारा कोई भाईचारा भाईचारा तो है जब तक वेदों में प्रमाण्य बुद्धि है भाईचारा है तो तुम स्वीकार करो या ना करो बात अलग है ठीक है उस सापेक्ष से वेद विरोधियों के सापेक्ष से चलो तुम्हारे स्वीकार करने से संबंध थोड़ी ना बन बनेंगे बिगड़ेंगे जो संबंध होंगे वो होंगे। जो संबंध नहीं होंगे वो नहीं होंगे। चलो क्या
03:44:29:01 और अब अब तुम्हारी ये जो व्याख्या की है इतनी सब मैंने तो अब छोटे भाई के रूप में हो। भटके हुए छोटे भाई। मतलब बड़े नहीं हो। छोटे हो। मैं अगर 35 36 साल का हूं तो मेरा एक छोटा भाई है। एक हिंदू है सनातन वैदिक आर्य हिंदू भटका हुआ। वो थोड़े अपने पूर्वाग्रह से अहंकार से अपने किसी मंतव्य से धंधे धंधे की वजह से वो जो है अपने आप को ख्यापित में करने में लगा हुआ है। मगर हिंदू होने के नाते वर्णाश्रमी होने के नाते वैदिक होने के नाते वेदों में प्रमाण्य बुद्धि रखने के नाते वो मेरा भाई है। तुम मत मानो। तुम्हारे करने से नहीं होता है ना शास्त्रों से होता है गुरु वाक्यों से होता है तुम मत
03:45:21:26 मानो हम एक भाई क्या इससे भी दिक्कत हो गई देखो अब ठीक है कह के आगे बढ़ने लगे एक 28 38 पे देखो एक 28 38 टाइम स्टैंप लगाओ क्या कहा है इन्होंने वहां पे देखो पहले बोले विरोध करने लगे फिर उसके बाद देखा कि ये तो ठीक बात है तो आगे बढ़ गए क्यों क्योंकि अगर तुम मेरे साथ नहीं जाते ना अगर तुम मेरा साथ नहीं जाते तो पूरे पिछवाले तुमको इतनी गालियां देते और तुम्हारा वो बचा छोड़ दिया जो 100 105 वाजपेय इसका मतलब हम बाहर वाले हैं। इन्होंने अभी बोला जल्दबाजी में इन्होंने बोला क्या बोला? इसका मतलब हम बाहर के हैं। फिर जब आगे व्याख्या सुनी तो इनको पता चल गया ये हम गलत बोल गए तो उस विषय को छोड़ दिए। एक 28 48 और वो भी चौपट। यही कारण है कि तुम मेरे साथ नहीं लिखना चाहते। एक और उदाहरण देता हूं। वो उदाहरण इसलिए देता हूं क्योंकि वो व्यक्ति खुले आमने लगे। का नाम लूंगा और सब तुम्हारा नाम इस पत्र में लूंगा। कैसे लूंगा? इस आगे इस लाइन में उसके आगे वाले लाके बताऊंगा। जब जी के था गौशाला में हमारा रामायण का व्याख्यान हुआ था उस व्याख्यान में यात्रा
03:46:37:01 गोकुल का तो वहां पर प्रबंधक रूप में प्रशांत मिश्र जी थे तो प्रशांत मिश्र जी कर रहे थे बैठकर बोलना है आप लगा दे मैं व्यवस्था की थी क्योंकि मैंने कहा था मैं मोबाइल से ही रिकॉर्ड कर लूंगा लेकिन उन्होंने व्यवस्था की थी हालांकि वो व्यवस्था पर आए जो मुझे माला पहना रहे तो उन्होंने मुझे वो सारे फोटो भेज खुद ही भेज और कहा की फोटो साधन मत कीजिएगा और आपके क्यों क्यों आपके और मेरे क्षेत्र में कोई असा बात है क्या हम लोग कोई खत्म कर रहे हैं क्या कोई श्राप के विचार कर रहे हैं नहीं या कोई हम लोग ऐसा कोई शरीर कर नहीं मैं करने बैठा हूं तो वहां पर वो व्यक्ति जिसने तुम्हें सम्मान दिया है अगर वो गुरुदेव का शिष्य है तो वो धूर्त है जो तुम्हारे साथ इस तरह से खड़ा हुआ बिना किसी द्वंद के धूर्त है जो गुरुदेव का शिष्य होते हुए तुम्हें सम्मान प्रकट कर रहा है तो वो उसको अगर या तो उसको मालूम मालूम नहीं है हम यह बेनिफिट ऑफ डाउट दे दे कि तुमने यह सब मजाक उड़ाया है कि नहीं उड़ाया है। अनावश्यक रूप से अपनी श्रेष्ठता को सिद्ध करने के लिए तुमने ये शंकराचार्यों के लिए अवमानना वाले शब्द पंक्तियां बोली है कि नहीं बोली? तुमने केवल शास्त्रोक्त विषय पर बात नहीं की है। मिस्टर
03:47:52:01 भगवतानंद तुमने केवल शास्त्रोक्त विषय की पर बात नहीं की। तुमने कैरी मिनाटी बनने की कोशिश की है धर्म का। धार्मिक कैरी मिनाटी बनने की कोशिश की तुम और होते जब अपनी तुम उसमें वो हो गए डूब गए अहंकार में कि अब बस अब तुम्हारे को कोई कहेगा नहीं कुछ तो तुमने ये किया कि अ तो तुम्हें तो तुम ये सब बात कर रहे हो तो मैनेजर आप मुझे मेरा काम मैं करने बैठा हूं। क्यों मर से आपत्ति आएगी? और यहां तक मन से आपत्ति आएगी ना क्योंकि तुम हमारे गुरु के निंदक हो। निंदा की है तुमने। भाई चलो कहीं शास्त्र शास्त्रीय पक्ष की बात है। तुम मधुमक्खी सेना का मजाक क्यों उड़ा रहे हो भाई? तुम ही तो तो क्या तुम उनमें हरिहर का तेज नहीं मानते हो? ये सब नहीं मानते हो। इन बातों का मजाक क्यों उड़ा रहे हो? मजाक ही तो उड़ा रहे हो। इस विषय में पूछो उनसे जाके पूछा
03:49:01:04 तुमने मजाक ही तो उड़ा रहे हो तुम उनका यहां पर यहां पर तो कोई शास्त्र शास्त्रीय बात है ही नहीं शास्त्र के पक्ष की तो बात है ही नहीं कि तुम यहां कोई शास्त्रीय उनका वो कर रहे हो उन्होंने अपने अंदर कोई दिव्यता दिव्य विद्या का वो बताया है कि भैया मेरे पास ऐसे कोई दिव्य शक्ति है तो क्या तुम ये कह रहे हो कि ऐसी दिव्य शक्ति हो नहीं सकती है अब तुम ना तुम्हारा कहना है कि तुमको देवताओं के दर्शन होते थे। तभी तुम अब हम उसका मजाक उड़ाए कि तभी तुम्हें जो है हर हफ्ते जो है राजस्थान जाना पड़ता है प्रत्येक शुक्रवार को। हम ऐसे तुम्हारा मजाक उड़ाए उन देवताओं के दर्शन का। तुम्हें यंत्र मिला। उसी को तुमने बाद में बैटबॉल खेला। ये सब मजाक उड़ाए तुम्हारा। तो यही देख लो। यहीं पर तुमको मैंने बता दिया। और जब इस मजाक को उड़ाने के बाद भी और जानने के बाद भी कोई ऐसा व्यक्ति है जो क्या कहते हैं तुम्हें सम्मान दे रहा है तुम्हारा तुम्हारे साथ खड़ा है तो वो धूत है फिर या फिर एक बेनिफिट ऑफ डाउट और दे दो कि उसको धर्म का बोध नहीं है मगर तुम तो उसके साथ खड़े हो तुम्हें तो धर्म का बोध है उसको बताना चाहिए कि हमने तुम्हारे गुरु
03:50:16:07 के लिए यहां उपहास बनाया है बिना बात के करो ना कि मेरे पास मधुमक्खियों की सेना है। इस बात का शास्त्रोक्त खंडन करो। अगर तुम चमत्कारों को घटित होना स्वीकार करते हो तो फिर तुम्हें यहां पर मजाक नहीं उड़ाना चाहिए इस वक्तव्य का। क्या ले रहा है? क्या लिए ले रहा है तुम्हारा? ये क्या बिगाड़ दे रहा है वक्तव? यही है। अपने आप को श्रेष्ठ दिखाने का प्रयास। तो अपनी बारी आई। मुझे देवताओं के दर्शन होते थे। मेरा जो जन्म है वो बड़ा ही दिव्य है। हम तो जन्मे ही बहुत दिव्य उसके साथ है। हम तो बचपन से ही सुधरे हुए हैं। और फिर तुम्हारे दिव्य जन्म में तुम्हारा आ रहा है बाईपोलर। कृष्ण कुमार जी क्या नेता षड्यंत्र कर बैठे हैं जिन लोगों की औकात नहीं है कि मत से डरते हैं से डरते हैं वो लोग जो षड्यंत्र कर बैठे हैं इन लोगों की औकात नहीं है कि मत कर देखो औकात ये औकात शब्द ये है मर्यादा का उल्लंघन ठीक है ये औकात शब्द बोला है ना एक 310 पे देखो
03:51:31:10 नोट करो औकात बोला ना तुमने यह है मर्यादा गुरु यह ठीक वर्ड नहीं है जब तुम प्रबुद्ध लोगों के बीच में हो जब तुम शास्त्र के पक्ष को रखने वाले हो तो औकात की बात मत करो किसी की रेस्पेक्टेड वर्ड्स में चलो और या फिर अपने आप को घोषित कर दो कि मैं तो मर्यादा का उल्लंघन करने वाला ही हूं। चलो उसी को थोड़ा सुंदर निरूपण से बोल सकते हो।
03:52:06:21 किसके साथ? यही तुम्हारी चिढ़ है। तुमको जो है साथ में बिठाया नहीं जा रहा है। तुमको बैठना है साथ में जैसे अन्य जगह जाकर के तुम्हें मिलता है सिंहासन मंच पर। यह दिक्कत है तुम्हारी। तुमको बनना है लुप्त संप्रदाय का गुप्त आचार्य। तो तुमको बराबरी चाहिए। दिक्कत यह है और सबसे बड़ी बात है कि अगर तुम इसमें कुछ ऐसा दिखा भी दोगे मैं कह रहा हूं एक बार को दुर्जन तोष न्याय थे अगर तुम अपने वीडियो में अपने द्वारा कोई ऐसा तथ्य प्रस्तुत कर भी दोगे कि भैया उससे सिद्ध ही हो गया कि जो पूरी मठ के जो परिकर है वो गलत है एक मिनट को मान लेते हैं तब भी जो हमारा तुम्हारे विवाद का विषय है वो उसमें कुछ बदलाव नहीं आ जाएगा क्योंकि हमने कहा था कि कोई विवाद तब बोलो जब तुम अकाट्य प्रमाण को लेकर आओ रखो अन्यथा मत बोलो गंभीर गंभीर बातें मत करो फिर ठीक है तो बात वही की व रहेगा यहां जीत और हार की बात नहीं है सिद्धांत की बात है अगर तुम वो
03:53:21:22 ले भी आओगे तो वह एक अलग पक्ष कि उसके अनुरूप जो है कार्यवाही होगी। मगर तुम अधूरे प्रमाणों को जो संभावना वाले प्रमाण है उनको जो है आधार बनाते हुए ये सब चीजें मत बोलो। गंभीर बातें मत करो। ऐसे किसी पर आक्षेप मत लगाओ। ठोस चीजों पर चलो। ठोस निकाले लेकिन मेरे साथ क्यों? क्योंकि बाहर से सिद्धांत वाली प्रशांत चाहते भी सिंडिकेट के खौफ से लोग चाहे इस बात का आते भी होंगे ये थोड़ी कहा था प्रशांत चाहते भी होंगे सामर्थ नहीं है सामर्थक कभी नहीं तो प्रधान मिश्र जी का नाम से कभी नहीं लिखते और अच्छा भी नहीं कल उन्होंने जो 600 पर टिप्पणी की कल जो उन्होंने 600 पर टिप्पणी की जिसमें उन्होंने इस पर मैं लिखना जरा ये आप क्या नाम है शनि जी का त्याग आपको दिखा दूं तो उस पर यह आप देख रहे हो तो मैं आपको दिखा दूं यह वाला उसके बाद करता हूं। आइए यहां पर कोई आप लोग में से बात करेंगे तो दिखाने
03:54:31:09 में चलिए आप देख लीजिए इसमें क्या लिखा है फोटो भी देख लीजिए लीजिए अब इसका क्या है इसका मतलब ये क्या है इसलिए क्या लिखा है इसमें ये फोटो क्या सामने का त्याग स्वामी कौन शंकराचार्य तो नहीं शंकराचार्य की बात शंकराचार्य जी के शंकराचार्य होता लेकिन जैसे गजानन शंकराचार्य जी केचार होता लेकिन जैसे गजानंद मिश्र ने इस निर्ग असं नहीं है भविष्य को तो भगवान का अवतार बता सारे सा है मैं वैसे नाम तुम लोग हो ना किसी को हम कभी छेड़ते नहीं और कोई पेड़ पे छोड़ते नहीं किसी वाले नियम पर हम किसी को नहीं छोड़ते कितने लोग सब तुम्हारे सम्मान का लिहाज
03:55:23:21 क्या चाकू से अब सम्मान को इसलिए सम्मान की बखिया उदेड़ दोगे चार साल से चुप थे मगर अब सम्मान की बखिया इसलिए उदेड़ोगे क्योंकि जयकांत सिगरे का ईगो हर्ट हो गया है। अगर 4 साल से किसी के सम्मान की रक्षा की है तो इसका मतलब तुम्हें यह अधिकार प्राप्त हो गया कि तुम किसी के बारे में भी कुछ भी बोलते रहो और तुम्हें कुछ ना कहा जाए क्योंकि तुमने चार साल से किसी के सम्मान की रक्षा की है। ये तुम्हारे दुर्जन तो ऐसे मैं तुमको बता रहा हूं। तुम्हारी बात मानते हुए हां चार साल से तुमने सम्मान की रक्षा की है। वो मुझे दिख नहीं रहा है। बोलते तो आए हो तुम। बस अब ये है कि अब क्योंकि तुम्हारा ईगो हर्ट हो गया तो तुम पीछे पड़ोगे। प्रमाण कहां से मिले? मेरी बात कैसे सिद्ध हो जाए? यह हो सकता
03:56:21:19 है। तुमने चार साल से अगर सम्मान की रक्षा की है दुर्जन तोष न्याय से। पहली बात तो यह है कि आज तुम पहली बात तो यह है कि तुम तीन चार साल से क्या कर रहे हो? फिर क्यों बोल रहे हो उस पर? और यह कहां का सिद्धांत है कि अगर तुमने जो प्रयास किया है चार साल से वो रक्षा करने का तो इसका अर्थ है कि तुम जो है किसी की भी कुछ भी निराधार बात किसी के लिए भी बोलने वाले हो गए रावण हो गए क्या हाव हो गए क्या तुम रावण हो गए तुम प्रभु श्री राम के साधारण भक्त हो गए और फिलहाल जो कलयुग के जो टेंपरेरी वाले हो लोकल टाइप के रावण तो तुम्हारे लिए भक्ति पर्याप्त
03:57:13:14 है। सालों से बोलते हैं कहां देख इसमें भैया कोई विषय की बात नहीं हो रही है फिर भी क्या है इसमें कितने पता नहीं क्या लिखा है निर्विक के लिए स्वामी जी का त्याग और समर्पण सभी प्रेरणा है तो निरपान से प्रेरणा तो प्रेरणा को मान रहे हो तो फिर ऐसे ही का समर्थन करोगे फिर आएगा स्वामी जी के पढ़ने वाले है उन्हें बेहती का लोटा रखा है वो लिखा है निंदा करने से समय मेरे लोगों को आज मैं उसको सा करूंगा आज तो नहीं किया आप स्वयं क्योंकि आप जानते है की सचिव पैसा ले आप जानते है सचिव ने कैसे नहीं करना तो करने दीजिए प्रयास करने क्या आपसे सुन रहे अगर अभी तक हम किसी ने सबसे निराश किया है आप मैंने तो तुमको ये बात कही थी ना ऐसे लोगों को लेकर के युद्ध में नहीं उतरा जाता है जो वक्त आने पर साथ छोड़ दे ढूंढना पड़ता है गुरुदेव कहते हैं चयन शिक्षण प्रशिक्षण तुम्हारा दोष है ये हल्के लोगों की बातों को लेकर के मुंह के कहे गए कथनों को लेकर के जो राम में राम को
03:58:28:14 जानते नहीं है राम ने क्या सिखाया है या जानते हैं तो उसको अपने जीवन में लाते नहीं है ये सब लेकर के तुम आगे बढ़ रहे वाला लेकर तो ये तो तुम्हारे साथ होगा ही। मैंने ऐसी लाइन में बोला है वो लोग आएंगे नहीं। आगे जब तुम बात करोगे यही बातें बोली है कि समय आने पर वो तुम्हारा साथ छोड़ देंगे जिनके आधार पर तुम आज बात कर रहे हो। तुम्हारा मुतासा हो जाएगा। दिक्कत आएगी। और अपने अहंकार को पोषित करोगे। करते रहो। मैं पीछे पीछे चलूंगा तुम्हारे। जब तक तुम बोलते रहोगे तब तक मैं बोलता रहूंगा। भगवत आनंद जब तक तुम बोलते रहोगे तब तक मैं तुम्हारे पीछे पड़ा रहूंगा। बोलता रहूंगा और अन्यथा आ जाना लाइव कर लेना भाई और तुम्हारे उन आधे अधूरे अध कचरे प्रमाणों को भी ले आना।
03:59:24:06 हम मैंने तो यही कहा था ना तुमसे कि मत हल्के फुल्के चीजों पर लेकर के युद्ध नहीं लड़े जाते। मैं मूर्ख मूर्ख साबित होता ना अगर तुम्हारे दिए हुए अनर्गल हल्के प्रमाणों के आधार पर चला जाता वो जो तुमने कहा था जाना हाथ पैर पकड़ लेना ये कर लेना मैं तो मूर्ख सिद्ध होता क्योंकि तुम्हारे आधार पर मैं कहा गया मैं गया और तुम्हारा जो आधार है उससे आज तुम भिड़ रहे भिड़ना पड़ रहा है तुम्हें यही मैं कह रहा था जो तुमने समझा नहीं क्योंकि तुम्हें लड़नी लड़ना था केवल तुम्हारा इसमें था कि कोई कल का है जिसने गुरुकुल में शिक्षा भी प्राप्त नहीं की है जिसके वत दोष लगा हुआ है जिसमें वो कौन होता है मुझे बोलने वाला मैं किसी के बारे में बात करूंगा नहीं ऐसा नहीं किसी के भी बारे में बात नहीं करोगे और तुमको मिलेंगे तुम्हारे जैसे लोग तुमको सबक सिखाने वाले लोग मिलेंगे भगवान ने यह कार्यभार शायद मुझे सौंपा है मैं कर रहा हूं ऐसा नहीं है ना साथ में जाने जाते मैंने कहा ना खेल
04:00:39:13 अच्छा है तुम्हारा बहुत बढ़िया है खेलो आदमी गलत चुन लिया चलो आपने जो हमारा सहयोग की बात ये सब बकवास बातें हैं जो तुम अपने उनसे कर रहे हो करते रहना निरर्थक बात है निरर्थक बातें उसने ये कहा उसने वो कहा उसने ये कहा प्रमाण रूप में जिसको रख सके उस पर बात होती है ये सब नहीं होता उसने ये कहा ऐसे अगर हम तुम्हारे बारे में बात करने लग जाए तो फिर वो सारे तथ्य जो हमने कहे थे मान लेना शुक्रवार वाली बात मान
04:01:34:10 किया है वो ताकि उठा देता है उसका पेट निकाल बनाया है और ये देखो क्या दिखा देता है उसका पेट निकाल जो बनाया है और बातें ने कहा मैं नहीं जानता बता नहीं लेकिन मैं बता दूंगा सबको है पढ़कर बताया करते नहीं है इसको पीडीएफ कर देता हूं पहले पीडीएफ में कर लो तो ये प्रधान जी ने जो अच्छा किया हमने तो आजीवन नहीं जब तक ये पुस्तक रहेगी धरती पर पुस्तक नहीं जब तक ये पुस्तक रहेगी धरती पर तब तक अच्छा
04:02:29:22 उससे कोई मतलब नहीं है। मेरे [संगीत] साथ इफ यू आर समवन हु प्रोग्रासनेट्स अ लॉट नो मैटर हाउ हार्ड यू ट्राई बट यू कैन नॉट गेट थिंग्स डन देन लिसन टू मी फॉर द नेक्स्ट वन मिनट। आई एम शेयर वि यू द थ्री मोर आपकी सत्ता बढ़ाकरण करने के साथ स्वयं के बारे में जो बातें मुझे बताई
04:03:07:14 आप शासन नहीं करा सकते क्यों क्यों भाई आज तक क्यों चार साल से क्यों जो है निजी उसको वो कर रहे थे क्योंकि आज तक तुम्हारे ईगो को हर्ट नहीं हुआ इनका कहना है कोई प्रशांत मिश्र जी हैं जिनके साथ इनकी चैट है या जिनके पास उनके नाम से पर्याप्त वो है। ठीक है? इत्यादि इत्यादि कुछ भी है। अब प्रशांत मिश्र जी की वाणी कितना क्रेडिबिलिटी है वो बाद की बात है। मैं नहीं जानता हूं। जाहिर सी बात है। मगर इनका कहना है कि इनके पास पर्याप्त सामग्री है। प्रशांत मिश्र के आधार पर यह सिद्ध करने के लिए कि मठ के परिकरों में दोष है। पहली बात तो मैंने तुमको बताया कि तुम हल्के लोगों के हल्के चीजों पर आगे बढ़ते हो तो तुम्हारा यह होना ही था। विश्वासघात तुम्हारे साथ जो हो रहा है मैंने बोला ऐसी लाइव में आगे आज की लाइव में बोला है देख लेना। दूसरा क्या है
04:04:09:07 कि अब तुम्हारा कहना है कि मैं तुम्हारे निजता के चक्कर में वह बंद नहीं कर सकता। वह गोवर्धन मटकी उसको भंग नहीं कर सकता। अच्छा तो अब तक क्यों नहीं किया था? तो बात यह नहीं है तुम्हें धर्म की चिंता नहीं है। तुम्हें वर्चस्व की चिंता है। तुम्हें अपनी श्रेष्ठता की चिंता है। तुम्हें अपने आचारत्व पद की चिंता है कि कोई आकर के उसको कैसे हिला रहा है। और तुम्हें एक बात बता दूं जो तुम जीत ढूंढ रहे हो। मैं कह रहा हूं कि अगर तुम ले भी आए प्रमाण अगर तुम प्रमाण ले भी आए बिल्कुल अकाट प्रमाण वैसे ऐसा संभव नहीं है। मगर दुर्जन तोष न्याय से अगर तुम ले भी आते हो अकाट्य प्रमाण तब भी हमारी तुम्हारी जो बात है वह इस बारे में नहीं है कि तुमने अकाट्य प्रमाण में क्या सिद्ध किया। इस बात पर है कि तुमने हमें अकाट्य प्रमाण क्यों नहीं दिए? वहां मैंने हमने तुम्हें ललकारा था कि कोई बात है तो आप अकाट्य प्रमाण लेकर आइए। आप अकाट्य प्रमाण के बिना निराधार बातें मत बोलिए। वो तुमने बोली है। ठीक है तो क्या हुआ इसका अर्थ क्या
04:05:24:13 हुआ कि आपको जो तुम जीत के भूखे हो वर्चस्वता के भूखे हो वो भी कुछ नहीं मिलने वाला बाकी तुम ले आओ देख लेंगे तुम्हारा क्या है क्या नहीं है और विश्वासघात का सबक तो तुम्हें मिल ही गया ऐसे ही सबका गायब हो जाना इसलिए कही सुनी बातों पर भरोसा नहीं करते सब लोग राम नहीं होते हैं सब लोग राम नहीं होते तो इसलिए कि सबकी कही सुनी बातों से ऐसे जंग लड़ने के लिए नहीं निकला जाता है। यह मैं तुम्हें तुमसे बड़ा होने के नाते तुम्हें बता रहा हूं। समझ में आ रहा है? यह सब चीजें तुमको कभी किसी ने बताई नहीं। जैसे तुम कह रहे हो ना कि तुम ये तुम्हें ये नहीं बताया गया। ये नहीं हुआ वो हुआ। मैं बोलता था। ऐसे ही तुमको ये सब तुम्हारी समीक्षा ये वाली तो किसी ने की नहीं बैठकर के। आधी अधूरी चीजों को लेकर के जंग नहीं लड़ी जाती मेरे भाई। और हां एक बात और है इसने क्या किया है भगवतानंद ने मेरा जो भाई होने का वो अस्वीकार किया है और फिर ब्राह्मण होने के नाते संभवत भाई फिर कहा भी है मत कर भाई
04:06:56:03 कैसे हमने तुम्हारे लेटर पर अपने वीडियो में बात नहीं की है। जिन प्रश्नों पर हमने बात की है क्रमबद्धता से उसको देख लेना दोबारा लाइव को वह प्रश्न Instagram पर पहले ही घूम रहे थे। एक कैंपेन प्रॉपर चलाया जा रहा था विजय श्री के विरुद्ध और वहां पर आने वाले जो सवाल उठाए जा रहे थे उन सारे सवालों को कलेक्ट करके हमने लाइव में बात की थी। हमने तुम्हारी पीडीएफ का जिक्र किया था मगर पीडीएफ के बारे में बात नहीं की थी पूरी क्रमबद्धता से। ठीक है? हमने तुम्हारे केवल मुख्य रूप से उस अंश को उठाया था। उस पर मुख्य रूप से बात की थी जिसमें तुमने फ्री मेंशन से जोड़ा था विजयश्री को और जिसमें तुमने उनके बारे में यह सब कहा था कि वो जो है मंच पर बैठी पहली बात और फिर क्योंकि वहां पर मठ की प्रतिष्ठा की भी बात है तो हम उसके लिए भी खड़े हुए। हालांकि मठ को हमारी आवश्यकता नहीं है कि हमें उसके लिए खड़ा होना पड़े। मगर क्योंकि वहां वही की वही जहां हम एक चीज के लिए बोल रहे हैं वहीं पर दूसरी चीज दिख रही है। तो वहां हमने वह बात भी रखी। मगर तुम्हारी उस वीडियो के लिए हमने लाइव नहीं किया था। तो यह तुम्हारा कहना यहां गलत होता है कि हमने हमने पीडीएफ में वही बात की थी। हमने
04:08:12:15 तुम्हारे तुमने जो मुख्य रूप से जो विजय श्री का वीडियो दिखाया, ये किया, वो किया उस पर बात की थी अपने लाइव में। हमने तुम्हारे पूरे के पूरे वीडियो को मुख्य नहीं बनाया था। अपने लाइव का आधार नहीं बनाया था। मतलब अभी देखो अभी देखो बात क्या है जैसे वो जो लेटर है किसने लिखा किसने नहीं लिखा उन लोगों को जब घसीटा जाएगा वो लोग भी ऐसे ही भागेंगे प्रशांत मिश्र की तरह जिनका तुम नाम ले रहे हो ऐसे जंग नहीं लड़ी जाती युद्ध नहीं लड़े जाते ऐसे ये ये सब बचकानी चीजें आप कर रहे हैं आप और क्या है
04:09:11:15 अभी वह बालक जो है ना चार साल वाला बड़ा नहीं हो पाया ठीक से बालक जो है अभी वो चार साल वाला वो बड़ा नहीं हो पाया हो पाया ठीक से इसलिए इसलिए ये सब चीजें हो रही है बुलाओ उनको अद्वैत विजयंती और आशुतोष भट्ट आशुतोष भट्ट भट्ट तो शायद गुरुदेव के शिष्य भी नहीं है मेरी जानकारी में तो नहीं है खैर मतलब
04:09:56:00 वेदा टेल्स वेदा टेल्स वाले जो है आशुतोष भट्ट है जो वेदा टेल्स वाले आशुतोष भट्ट है जो वो गुरुदेव से दीक्षित है कि नहीं मुझे नहीं पता और दूसरी बात यह है वेदा टेल्स और आशु वेदा टेल्स वाले आशुतोष भट्ट और ये बात कंफर्म की है चलो ठीक है उनसे पूछा जाएगा बाकी यह है कि हमने तुम्हारे वीडियो के बारे में बात नहीं की थी वो पीडीएफ हमारा मुख्य बिंदु नहीं था। तुमने बात की है मगर हम तुम्हारे उस अंश पर जोर दे रहे हैं जो तुमने विजय श्री के बारे में निराधार तथ्य दिए। ठीक है? प्रीमेशंस और मंच पर बैठना ये मुख्य रूप से और बाकी फिर उसके साथ जो दूसरी चीजें जुड़ी थी उस पर हमने बात की थी।
04:10:51:15 उस कंप्लेंट दी थी एफआईआर कराई एफआईआर दर्ज हो गई कि नहीं हुई यह नहीं पता है कंप्लेन का पता है कंप्लेंट का फोटो आपने प्रसारित किया था और अच्छा आयुष जी जरा एक कमेंट करके बता दीजिए जो ये भगवतानंद बोल रहे हैं इनकी आवाज आ आ रही है कि नहीं तो यह बोल रहे हैं कि एक व्यक्ति ने जो है कंप्लेंट कराई थी वो व्यक्ति अगर मुझे मिल जाता तो मैं भी उसको मार मारता ही पीटता ही वहां पर स्वामी नारायण वाले पहुंचे थे मठ में घुसने की कोशिश कर रहे थे तो वो उनकी चापलूसी कर रहा था गाड़ी खड़ी करने को लेकर के उसने मैं अपनी कार से वहां पहुंचा था साथ में परिवार भी था तो किसी ने मटका जहां पर शिविर लगा हुआ था वहां पर बहुत सारी बाइक मोटरसाइकिल खड़ी कर दी थी तो मैं बहुत थक करके आया था कोई गुरु भाई थे जो जा रहे थे वापस
04:12:06:16 तो उनको छोड़ के आया था मैं पैदल पहले थोड़ा कार से उसके बाद वहां से लेकर के ऊपर तक प्रयागराज का जोशी वाला पुल है वहां तक उनको उनका लगेज वगैरह लेकर के और मैं छोड़ के उन्हें आया था। मतलब उसमें अच्छा खासा शारीरिक परिश्रम हुआ था आने जाने। उसके बाद गाड़ी लेकर वापस आया था। तो मैं गाड़ी खड़ी करनी थी उसी जगह पर गाड़ी का जहां स्पेस था तो वहां पर बहुत सारी मोटरसाइकिल्स खड़ी हुई थी। इधर-उधर के लोगों की मटके लोगों की नहीं, शिविर के लोगों की नहीं इधर-उधर के लोगों की खड़ी हुई। मैंने उन सारी मोटर साइकिल्स को एक-एक करके एक-एक करके और जो है वहां पर जगह बनाई और जब मैं आखिरी मोटरसाइकिल को साइड करने लगा तो वो धूर्त व्यक्ति आया और जो है सीधे अपनी गाड़ी डालने लगा। मैंने उसको इशारा किया मत लगाओ मत लगाओ। तो वो बोला कि ये है वो है बहाने झूठ झूठे बहाने मुझे बोलने लगा। यह वह व्यक्ति है तो चलो मैंने तो उदारता दिखाई कि चल ठीक है भाई तू गुरु भाई है गुरुदेव के पास गुरुदेव से दीक्षित है मैंने एक वो दे दिया ठीक है तू ही लगा ले लगा ली मगर मेरे घर मेरे परिवार में जो मातृशक्तियां थी जो
04:13:21:22 उनको बड़ा रहम आया मुझ पर क्योंकि मैं ऑलरेडी उन्होंने देखा था थका हुआ हूं और मैंने करीबन 15 20 मिनट उन मोटरसाइकिल्स को एक साइड किया कार लगाने के लिए है ना और उसमें आकर के उसने अपनी कार घुसेड़ दी 50 झूठे बहाने बना कि मैं मरीज ले आया हूं। मरीज ले जाना है। थोड़ी देर बाद वही व्यक्ति मुझे स्वामी नारायण मत वालों के जो है चापलूसी करता दिखा। तो मुझे बड़ा गलत लगा। ठीक व्यक्ति नहीं है जो घूम रहा है। मगर मैंने कुछ कहा नहीं। तुमने जब वो एफआईआर वो कंप्लेंट की कॉपी डाली थी। बड़ा अच्छा लगा था। ठीक है। पिटाई अगर हुई है तो सही हुआ है उसके साथ। ठीक है। मूर्त व्यक्ति था होनी चाहिए ऐसे लोगों की पिटाई कर रहा होगा जरूर कुछ
04:14:12:10 बदमाशी भाई मेरे मैं ये कह रहा हूं आपको का सफाया करने का धंधा करना है ना मठ में फैलने की विकृति है तो उसको लाउडस्कर पे बोल बोल करके मठ को सही करोगे क्या ढूंढो ऐसे कौन से लोग है जिनका जो अपनी बात से बात के पक्के हो ऐसे लोगों को ढूंढो उनके साथ मिलकर के जो है शोधन का कार्य करो तुम अपने को ख्यापित कर रहे हो और कुछ नहीं है शोधन का तरीका यह नहीं है चिल्लाना शुरू कर दो लाउडस्कर में लेकर के उन बातों को लेकर के जिन बातों को तुम्हारे अनुसार सामने वाला छुपा रहा है ये शोधन थोड़ी ना है आप बौखला से इस मामले में हाईलाइट ना हो सके हो सके इसलिए लोगों का दिमाग भटकाने के लिए ना भटकाने के लिए आप प्रोजेक्ट किया गया है ना हो
04:15:20:02 ये ठीक है आपके अनुसार ये हो रहा है वो ठीक है यहां पे मुझे अच्छा लगा कि तुमने दोनों विकल्प सोचे तुमने अपना पूर्वाग्रह थोपा नहीं कि चाहे तो अनजाने में हो रहा है चाहे वो आपको प्रोजेक्ट के रूप में स्थापित किया गया है। तुमने यहां पे विकल्प योग उपयोग में लिया है। संभावनाएं हो सकती है जितनी उतनी लेनी चाहिए। अपना मत अपना पूर्वाग्रह थोपना नहीं चाहिए जो तुम थोपते हो। नहीं
04:15:56:15 किया उस समय कर्मचारी का नाम का नाम हो गया को अपना डाला गया जब पूरा करने के लिए हां बिल्कुल बिल्कुल क्योंकि जो ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी हैं और सचिव जी हैं वो सामर्थ्यवान है वो जब चाहे तब अपने जो है सामर्थ्य का उपयोग करके तुम्हारा जवाब तुम्हारा प्रस्तुत कर सकते हैं। सब कुछ सामर्थ्यवान है। जगतगुरु शंकराचार्य जी की शरण में है वह लोग। तो इसलिए हमें हमें उनके लिए बोलने के लिए आने के लिए आवश्यकता ही नहीं है। जब व्यक्तिगत उन पर बात हो रही है तो है ना और ना ही हमें कोई उनकी तरफ से ऐसे निर्देश मिले कि तुम्हें बोलूं। पूर्ण रूप से सामर्थवान है। जिस दिन चाहेंगे उस दिन तुम्हारा सारा ठीक कर देंगे। मगर वहां पर एक ऐसी मातृशक्ति जिसकी यात्रा मैंने स्वयं देखी उसके लिए मैंने बोला हां यह बात सही है मैं चुप रहता था तुम्हारे वीडियोस देखता तो था पहले भी नहीं आता था बोलने तो तुम जब ये खुद स्वीकार कर रहे हो कि मैं विजय श्री के लिए बोलने आया हूं यहां पर स्वीकार कर लिया नोट करो इनका एक
04:17:13:26 436 तो तुम जब ये खुद स्वीकार कर रहे हो कि मैं मुख्य रूप से विजय श्री के लिए बोलने आया हूं। तो फिर तुम ये क्यों कह रहे हो कि मैं जो है वो क्योंकि वो उससे मेरा तुम्हारे अनुसार कोई भी संबंध है। ठीक है? तुम जब ये खुद स्वीकार कर रहे हो कि मैं विजय श्री के लिए बोलने आया हूं। हमारे तुम्हारे बीच में विवाद का मूल कारण है तुम्हारा विजय श्री पर बोलना। ठीक है? तो अगर तुम जब यह खुद स्वीकार कर रहे हो तो फिर तुम यह कैसे कह रहे हो कि विजयश्री की बात करके मैं जो है मामले को भटका रहा हूं। अच्छा तुम्हारा शायद यह सोचना होगा कि तुम्हारे वीडियो में मैंने विजय श्री के नाम लेने का उपयोग किया है मठ के परिकरों को बचाने के लिए। यह शायद तुम कहना चाह रहे हो। तो ऐसा सोचा जा सकता है। इसको पूर्वाग्रह कहेंगे और क्या कहेंगे? आप ऐसा सोच सकते हो। मगर हमने इसलिए ऐसा नहीं किया। आपको सिद्ध करना होगा। फिर अब यहां ऐसी जगह पर शास्त्र लाने चाहिए आपको। यहां शास्त्र दो प्रमाण। कि मेरी किन गतिविधियों से ऐसा लगता है शास्त्र के नियम के अनुसार कि जिस जिस वीडियो में मैंने विजय श्री का होने के कारण मैंने
04:18:28:28 वो जो प्रतकारात्मक वीडियो बनाया है तो उसमें मैं विजय श्री का उपयोग कर रहा हूं मठ को बचाने के लिए हम विजय श्री से मुझे कोई मतलब नहीं है तो तुमको इस संबंध में शास्त्र का प्रमाण देना पड़ेगा अगर वो वाला पूर्वा दूसरा वाला विकल्प है तो चलो उसने क्या कही थी इसका नाम लेना है सीधा के सामने रखना तुम्हारी वीडियो से नहीं ये इसलिए कहते है वहां नहीं होना चाहिए पहले से वीडियो पहले बंद थी उस पर बात कर रहे हो इसका अर्थ क्या है हम कोई शंकराचार्य नहीं हम कोई शंकराचार्य को नहीं बोल रहे इस कारण हम परिकों की उनहीं अवस्थाओं पर मठ में सभी ब्रह्माचारी करने वाले स्त्रियों के आने जाने क्यों कर रहे है अरे
04:19:30:19 जबरदस्ती कुछ का कुछ कर दोगे। बात ये हो रही है बात प्रसंग ये चल रहा है। विषय ये चल रहा है भगवतानंद कि क्या मैंने तुम्हारे वीडियो बनाने के बाद ही कोई प्रतिक्रिया दी विजय पर उठने वाली उंगलियों के संबंध में नहीं। बात यह चल रही है कि क्या मैंने वो वीडियो तुम्हारे लिए बनाया था कि नहीं? तो यहां पे तुम यह क्यों बता रहे हो कि हमारा ऐसा बोलना ठीक है कि नहीं है? तुम्हें यह सिद्ध करना है यहां पर कि वो वीडियो मैंने तुम्हारे लिए बनाया था कि नहीं। अब जब उस बात में फंस रहे हो या उसका तुम्हारे पास जवाब नहीं है तो तुम दूसरा प्रसंग ला के बातें कर रहे हो। उससे क्या मतलब है? तुम्हें यह सिद्ध करना है कि मैंने वो वीडियो तुम्हारे लिए ही बनाया है। और तुम इस बात को मान रहे हो कि पहले से वो क्वेश्चन उठ रहे थे। तो यहां पर अपनी गुरु द्रोही वाली बात कि हम गुरु निंदक नहीं है। मटकी व्यवस्थाओं पर उंगली उठाई है। अधर्म यह है वह है। बात ये हमने यह क्वेश्चन नहीं हमने वहां पर यह नहीं कहा है कि तुमने जो कहा है वो धर्म अधर्म के संबंध में है कि नहीं? हमने ये कहा है प्रसंग ये चल रहा है, विषय ये चल रहा है कि हमने वीडियो तुम्हारे वीडियो के संबंध में बनाया है कि नहीं? तो तुमने खुद मान लिया कि मैया
04:20:45:25 मैंने उनके लिए बनाया था। मगर अब दूसरी बात छेड़ दी। इसलिए करना है देखो यहां इन्होंने ये बात छोड़ दी कि हमने वीडियो इनके वीडियो के संबंध में बनाया था कि नहीं मुख्य विषय ये था अब इस पर बात ना करके अब इस पर बात कर रहे हैं कि हमने क्यों बोला ऐसा भाई पहले एक बात खत्म तो कर रहे बात क्या चल रही है वही प्रसंग चल रहा है उस पर बात नहीं हो रही है विषय विषय अंतर हम आओ कभी लाइव में कभी आओ ना जी हवेली में
04:21:36:19 ित है। हम गुरुदेव के शिष्य हैं। तुम कौन होते बताने वाले कि उन्होंने क्या कहा? किस संदर्भ में कहा। अभी तुम्हारा पाखंड का खंडन या तुम्हारे जो चार शिष्य हैं या जो भी शिष्य हैं हम हम उनको बताने लगे कि तुम्हारे हां हम उनको बताने जाए कि भैया मान लो कोई भी बात हो और उसके संबंध में तुम्हारी वाणी हमें प्राप्त हो जाए। कोई भी विषय हो और हम तुम्हारे लोगों से मिले। तुम्हारे डायरेक्ट जो तुम्हारे शिष्य हैं उनको ये बताएं। हमारे गुरु ने यहां पर यह कहा है उस उसका अर्थ वो कुछ बताएं नहीं उनके यह कहने का यह अर्थ था हमने उनसे बात की है बैठे हैं हम वहां पर उनके साथ तब भी हम उनका विरोध करेंगे क्या नहीं कर सकते क्योंकि वो तुम्हारे प्रामाणिक शिष्य हैं वो तुम्हारे शिष्य है वो तुमसे मिलते हैं बैठते हैं तुम्हारे बातों का सही अर्थ वो जानते हैं तो हम उनको क्लेम नहीं कर सकते हम हम उनको क्लेम नहीं कर सकते तुम हमें क्लेम क्यों कर रहे हो भाई? हम उनके पास गए हैं ना बैठे हैं ना तो उनके उन्होंने नाम लिया है क्या विजय श्री का? हमने बता दिया और भी महिलाएं आती थी। अब बताओ क्या करोगे? तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है। विजना डलाती थी वो बिजना
04:22:51:27 डलाती है। बेर शब्द का उपयोग कहां कौन क्यों कर रहा है? ये लिखने वाला ही बताएगा ना अपने शिष्य को। या तुम कह दोगे कि नहीं उन्होंने तो कहा है कि दोनों जगह बेर वही है खाने वाला बेर हां इसलिए आप ये जो योगाचार वाली बात कर रहे हो कि गुरुदेव ने योगाचार की निंदा की है पहली बात तो योगाचार उनको विजय श्री को कहना और कहना चाहिए अपने आप को वो सिद्ध करो और दूसरी बात यह है कि गुरुदेव ने किसके लिए कहा किस संदर्भ में कहा यह तुम हमको मत बताओ लुप्त संप्रदाय के गुप्त आचार्य नहीं बताएंगे।
04:23:43:13 क्यों भाई किसी आयोजन में अब देखो ये जो चीज है ये ये देखो देखो कितनी महिला कितनी महिलाएं पाल रखी है ये है अमर्यादित लाइन नोट करो एक 45 31 ये है रैकेट है यह तरीका नहीं है ना बात करने का फिर यह हुआ मर्यादा का उल्लंघन क्यों भाई गुरुदेव के दर्शन करने कहीं पर एक से ज्यादा महिलाएं नहीं जा सकती हैं। और हमने तो यह तक कहा कि वो मठ में रह ही नहीं रही है। हमने यह तक कहा कि गुरुदेव ने कहा आती है वो एक बार गई है मठ में। ये सब सुनाई नहीं दिया। हां। ये सब नहीं सुनाई दिया। देखो रैकेट चला रहे हो क्या तुम? अगर एक से ज्यादा महिलाएं हैं तो उसका मतलब हो गया रैकेट है वह। सिद्ध कर कौन सा सनातन सिद्धांत कहता है कि एक से ज्यादा महिलाएं हैं तो वह रैकेट है। सिद्ध कर
04:24:54:25 चलो और जो योग सिखा तुम हमें मत बताओ हमारे गुरुदेव ने क्या कहा है? तुम्हारी महिला कौन है ऐसा तुम्हारी महिला है ऐसा क्या ऐसा कैमरे पर फालतू की बकवास करवा लो तब तो एक ये जो है बहुत हीन स्तर की बातें बोल रहे हैं। मतलब दीन स्तर की बातें मतलब जो वह है ना लेवल ऑफ़ थिंकिंग वह बहुत गिरा हुआ है यहां पर तो क्या कर्तव्य नहीं था गुरुदे से पूछते गुरुदेव कौन है गुरुदेव हमको पहचान बताइए क्योंकि आप कौन है लोगों को पहचान है हमको तो नहीं पहचान पा रहे गुरुदे का नाम बताइए गुरुदे नाम बताने पूछा का प्रयास किया नहीं का प्रयास कर उसके खिलाफ वीडियो बना रहे किसको जो मार रहे है कुमारी भी है योगाचार्य भी कह रहे है और तुम लोगों से जा रही है एक है अनेक है पूरा पूरा ग्रोह है तुम लोगों का ऐसा मतलब अनेक अनेक
04:26:10:04 हैं पहली बात उसको ग्रोह कहते हैं ये शास्त्र से सिद्ध करना होगा अगर एक से ज्यादा मात्र शक्तियां मठ में दर्शन हेतु आ रही हैं प्रवचन सुनने आ रही हैं वो एक से ज्यादा है तो तुम्हें सिद्ध करना होगा पहली बात और दूसरी बात है कि क्या कहा है एक और है एक है कुंवारी भी नहीं कहा जा रहा है तो कितने ऐसी महिलाएं हैं जो पूरी म में आ जा रही है कुंवारी भी है जो आचार्य भी कहला रहे हैं और से एक है नहीं कहा जा रहा है तो कितनी ऐसी महिलाएं हैं जो पूरी मच में आ जा रही है कुमारी भी है योगाचार्य भी कह रही है योगाचार्य हां ये बात थी योगाचार्य कौन कहला रहा है भाई सिद्ध करो इसीलिए मैंने कहा था डाल डाल पातपात अब चलेंगे और इसीलिए मैंने कहा था कि ऐसा करो तुम सब छोड़ो लाइव आ जाओ कह दिया मैंने क्योंकि मैं तुम्हारे साथ भिड़ता हुआ नहीं दिखना चाहता था इसलिए मैंने मना किया था मगर ठीक है तुमको भिड़ता हुआ दिखना पसंद है तुम्हें और कोई मतलब नहीं रहा है कि और कौन से अभियान फिर वो होंगे इफेक्टेड होंगे और फिर इतना कंटेंट तो बन ही रहा है मुझे
04:27:25:08 लगता था कि शायद तुम मान जाओगे पर तुम नहीं मानोगे तो आ जाओ लाइव कोई बात नहीं ठीक है एक है मैंने कहा नहीं कहा इतना कहा है ना कैसे हम यहां पे तुमने शब्द पे ध्यान दिया ना एक है तो यहां पे ये दूसरा शब्द है आती है तो आती है शब्द का क्या करोगे आती है तो मतलब काफी बार आती जाती है हम वो तो एक ही बार गई है उससे पहले तो वो जानती नहीं थी पूरी के शंकराचार्य जी को दीक्षा उन्होंने ली है अह क्या कहते हैं जयपुर में जो उनका वो हुआ था जन्मोत्सव और वो चातुर्मास में वहां गई है। फसोगे हर जगह फसोगे चलो
04:28:16:19 स्वयं को स्वयं को योगाचार नहीं कहा उन्होंने ये सब बातें हमको मत बताओ ये सब बातें उनको बताओ जिनको आप आपके अनुसार जिन पर आप भरोसा करते हो और लट्ठ ले निकले हो ऐसे नहीं लड़ा जाता है। फिर बता रहा हूं ये सब बातें हमको ना मत बताओ कि मैं ये करूंगा आचार्य रामशंकर शुक्ल जी के साथ वो है वो है। ये सब हमें मत बताओ। सब उनको बताओ। हमने तुमको बताया ना कि हल्के टूटे फूटे प्रमाण लेकर के युद्ध नहीं लड़े जाते। पर तुम्हें समझ में नहीं आया। अब तुम्हें दिक्कत हो रही है। सब जगह से आवाजें उठ रही है। अब तुम्हारे को तुम्हारा जो गुप्त लुप्त संप्रदाय का गुप्त सिंहासन है वो डामाडोल होता हुआ नजर आ रहा है। इसलिए दिक्कत
04:29:21:12 है। नहीं एक कार्य करना एक्सटेंशन बोर्ड ले लो एक लंबी लीड वीड ले लो और एक्सटेंशन बोर्ड लगा लो और चार्जर लगा के लाइव किया करो मैं भी वैसे ही लाइव कर रहा हूं फिलहाल हालांकि कैमरा है पर कैमरे से अभी तक वो तकनीकी असुविधा होने के कारण मोबाइल से ही कर रहा हूं और कैमरे से भी करूंगा तो एक हद होगी ना कैमरे की तो आपको चार्जिंग की व्यवस्था रखनी चाहिए अपने पास जो एक्सटेंशन बोर्ड एक बना लीजिए खूब लंबा सा इसमें तार हो और जो है उसको लगा करके आप कर सकते हैं लाइव
04:30:08:18 लंबी करेंगे अब समय आ गया है क्योंकि जयकार सिगरे का ईगो हर्ट कर दिया सिंघम ने अब समय आ गया है उनका ज्ञान विज्ञान उनका उसके कारण पूरी में कोई सुधार नहीं हो रहा है ले रहे हैं इसलिए पड़ेगा पड़ेगा तो क्रमश हो जाएगा ये सब विषय पर बात होगी लेकिन क्रमश होगी जिस प्रकार से लोग कमेंट में पूछना है कि तुम्हारा वजन क्यों नहीं बढ़ रहा है मेरे वजन क्या
04:30:54:02 गुरुदेव की भविष्यवाणी तीन वर्ष वाली वो सिद्ध हो रही है कि नहीं हो रही उसका धर्म से क्या संबंध है वजन क्यों नहीं बढ़ रहा है लोग पूछ रहे हैं क्या बताया हां ये सब क्यों किया जा रहा है बुधबक्की की सेना है तीन वर्ष सिंधु राष्ट्र क्योंकि मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके वो तुम भटका रहे
04:31:27:04 हो तो क्या गुरुदेव से यही पूछा जाना चाहिए था कि गुरुदेव जब दिए हो गए थे गुरुदेव भैया कैसी हो सुन लो ना उसको तो तुम किसी का प्रोडक्ट क्यों नहीं देख चेहरे में देखते रहो वीडियो में भैया कैसे देख रही हो सुन लो वो स्वयं कोई बात बता रही है ना वो गलत पहली बात तो मैंने उसका वो पडकास्ट पूरा का पूरा पूरा देखा ही नहीं है। मैंने तो वहां पर उसने मुझे बताया कि यह वाला शूट यहां हुआ है। मैंने उसका शॉट देखा विजय श्री जी का जो शॉट था वो देखा Instagram पर। फिर उन्होंने बताया यह चैनल है महागाथे यहां पर मैंने दिया है। तो मैंने पूरा का पूरा पडकास्ट आज भी नहीं देखा है। हां मगर क्योंकि मैंने उनका वो शॉर्ट क्लिप वहां देख लिया था तो उसके आधार पर मैंने इस वीडियो के नीचे वो कमेंट किया था। क्योंकि वो वीडियो इंग्लिश में भी था शायद। तो मैं इंग्लिश में उतनी गति रखता नहीं हूं। मैं समझ सकता हूं। समझने का प्रयास कर सकता हूं। मगर मैं इंग्लिश के साथ फ्रेंडली नहीं। असहज हूं। भावनाएं कनेक्ट नहीं हो पाती तो तुमने देख ही रहे हो कि वो वीडियो इंग्लिश में है तो फिर मैंने वो पूरा
04:32:42:04 नहीं सुना खैर चलो बता तुम्हारी YouTube कमेंट में लोग बता देना इसके लिए ऐसा नहीं हम कमेंट में तो बता देना इसके लिए ऐसा बात बता बता रही है ना वो ऐसा तो तुम्हारी योगाचार्य नहीं कहा उसने अपने को YouTube कमेंट में तो बता देगा क्या कर प्रक उसके बाद नहीं कभी नहीं मैं मैं जाके तुम्हारे साथ ये है कि मैं रावण हूं मैं कभी गलत नहीं हो सकता हनुमान कैसे आकर के मुझे वो सिखा रहा है हम तुम्हारा ये दिक्कत है तुम गलत नहीं हो सकते योगाचार्य ने ही कहा उस वैसे अगर देखा जाए तो वह पडकास्ट भी गुरुदेव से दीक्षा लेने से पहले हो रही है। अगर उस पर तुम यह बनाओगे कि योगाचार मान लो कहा मेरी जानकारी में नहीं है। मगर वो तो गुरुदेव से दीक्षा लेने से पहले की पडकास्ट तो वहां भी बात खत्म हो जाएगी। मैं नहीं सोचता
04:33:51:04 नहीं बैठे हुए हैं। क्या है? अच्छा तुम्हारे गुरु भाई आ के वहां कमेंट करके बता रहे हैं। ये फिर दिक्कत हो गई। भाई ऐसी चीजों पर हमारी चीजें नहीं होती है। निर्णय नहीं लेते हम। किसी ने बस कमेंट करके कह दिया वो गुरु भाई है कि नहीं जांच पाए कि नहीं जांच पाए। वो कितने क्रेडिबल है। सारे गुरु भाई बिल्कुल रामचंद्र जी है क्या? श्री रामचंद्र जी। नहीं बनने का प्रयास कर रहे हैं। उनमें से पता नहीं कितने बनने का प्रयास कर रहे हैं। भगवान श्री कृष्ण ने कहा था ना कि लाखों मनुष्यों में से कोई मुझे मुझे खोजता है। फिर उनमें से कोई मुझे क्या कहते हैं? जान पाता है। फिर कोई उनमें से मुझे पाने के लिए प्रयत्न करता है। तो पता नहीं उसमें से प्रयत्न करने वाले कितने हैं जो गुरुदेव से जुड़े हुए हैं। तो यह भी देखना पड़ेगा किसकी वाणी क्रेडिबिलिटी है किसकी नहीं है।
04:34:52:03 चलो चलिए आपका भी देखेंगे रिसर्च आपका इतना उत्तम है ना इतना उन्नत है ना इनके रिसर्च का चाहिए भी चाहिए आपका भी देखेंगे रिसर्च आपका इतना उत्तम है ना इतना उन्नत है ना रिसर्च का अपना माथा पी पी फसने के लिए हो जाएंगे चाहिए स्वीकार किया है कौन सा रामायण आचार्य ने स्वीकार किया है ये एक लंबा विषय है हां पिछले प्रश्न किया है कि उनका वजन क्यों बढ़ते जा रहा है? बात है भैया। कौन से प्रामाणिक आचार्य तुमको स्वीकार किया है? सही बात है। इस इस जगह ये जो संदर्भ चल रहा है इसका मैं इंतजार कर रहा था क्योंकि यही एक है जो सैद्धांतिक बात कुछ होगी और तो ज्यादातर खामखा की बातें ज्यादा हुई। चलो तुम किनको प्रमाणिक मानते हो? क्योंकि भाई अपना किसी व्यक्ति का संदर्भ दूंगा। यहां पर मैं छोटा सा उदाहरण देता हूं। विद्या स्वामी जी है कई बार मतलब मैं जानता हूं चार पांच जब वो वाराणसी में वाराणसी से बगल में एक नाम जगह कोई है कोई है ऐसे पूछा
04:35:56:20 ना लेकिन स्वामी जी वीडियो होगा वो हाल आप देखना वहां पर वो कह रहे हैं हमारे मतलब जी और वो साथ करता है हम भी करेंगे ऐसा वो कह रहे है और एक बात अरे मेरे भाई तुम्हारे तुम्हारा उन्होंने यह कह दिया कि तुम शास्त्र सम्मत हो तो तुम्हारा संप्रदाय प्रामाणिक है। ये कहां से हो गया? तुमने अपने आप को समाज में निग्रचार रूप नाम से स्थापित किया है। उसका उन्होंने उपयोग किया तो यहां इससे ये कहां सिद्ध हो गया कि वो तुम्हारा संप्रदाय ये कह रहे हैं कि प्रामाणिक
04:36:38:18 है। श्री आशीष के घर में आशीष के घर में प्राप्त हुआ था और तो वहां पर के साथ में दो दिन किया तो समय के साथ अपनी प्रामाणिक परंपरा है इस प्रकार अच्छा इनकी अपनी प्रामाणिक परंपरा है तो भाई इसमें जो है आप ही ने कहा है कि गुरु अगर क्या कहते हैं शास्त्रों के अनुकूल नहीं होगा तो फिर आप उसमें वहां पर प्रश्न कर सकते तो उनकी शरणागत हो के पूछेंगे भाई प्रश्न कि निग्रह संप्रदाय प्रमाणिक है कि नहीं पूछ लेंगे अगर उन्होंने ऐसा कहा है तो ठीक है और बोलो क्योंकि अब इसमें दोष आएगा ना कि कहां से कौन-कौन से शास्त्रों के आधार पर वो हो रहा है चलिए तो अगर ऐसी जानकारी है तो ठीक है फिर फिर प्रमाणिक मान लेंगे अगर तुम्हें वासुदेवाचार्य जी जैसे प्रामाणिक आचार्य वो मान रहे हैं पूछेंगे पहले अपने संशय को दूर करेंगे। ठीक है? चलो वो वीडियो हमारे चैनल पर देख सकते हो। चैनल पर भी देख सकते हो। जनवरी महीने में हुआ था और साल को देखा होगा शायद ये जनवरी महीने 2000 23 में हुआ था शायद। 2023 में हो सकता है। 203
04:37:53:25 में हुआ होगा क्योंकि तो प्रश्न पहला क्या है? प्रश्न को समझो। तुम्हारी परंपरा क्या है? और उसके लिए सरलतम में एक उपाय है परंपरा को प्रामाणिक सिद्ध करने के लिए कि क्या तुम्हें प्रमाणिक आचार्यों के द्वारा स्वीकार किया गया है कितनों के द्वारा स्वीकार किया गया है मगर यदि मिल जाता है तो फिर वहां पर एक संशय तो उत्पन्न होगा किस आधार पर उन्होंने प्रामाणिक कहा है क्या नहीं कहा है तो तुम्हारी शैली में हम जाकर के उनसे पूछेंगे तुम्हारे तरीके से नहीं पूछेंगे पूछेंगे पता करेंगे भाई और होगा तो मानेंगे भी अगर होगा चीजें सिद्ध होंगी वास्तविकता में ऐसा ही है तो मानेंगे भी मान लेंगे प्रमाणिक संप्रदाय लो चलो और इधर 204 दिसंबर में अंग्रेजी बताओ जल्दी से समझाओगे इसे बताता हूं उधर मई मेरी सरादान हुआ था सर और इधर दिसंबर में बताओ जल्दी समझाओ इसे बता रहा हूं मई में मेरी सगाई हुई थी और इधर 204 दिसंबर में अंग्रेजी बताओ जल्दी से समझाओ इसे बता रहा हूं उधर मई में मेरी सरादान हुआ था सर और इधर दिसंबर में हुआ तो उसे से बात है उसमें हमारा जो है पैदा हुआ नहीं मतलब ऐसे ही उनकी नानी ने जो बात है वो वो तो 2017 से ही मेरा जो रिश्ता था दो हमारे घर पत्नी है उनकी नानी ने ये इच्छा
04:39:08:26 की थी कि मैं उनकी नाति से बात करूं और उस समय वो देवी थे थे उसकी तैयारी भी थी बहुत अतिक्रमण नहीं हुआ था तो फिर उन्होंने कहा लेकिन उसी सामान्य से नहीं बन पाए और दृष्ट से पायदारी साफ नहीं कर पाए और भी नहीं बन पाई वा तो बाद उनसे ही हुआ लेकिन करना पड़ा जो निर्देश था तो थी पता नहीं जानवी कहां से पैदा हो गई समझना पड़ेगा खैर मैं यहां पे बता रहा था ये बात पता नहीं जाने कहा पड़ेगा मैं यहां पे बता रहा था ये बात की ये घटना जनवरी 2000 23 का हो स्वामी जी के चैनल पर आप देख सकते है मेरा पुराना चैनल हो गया चैनल पर हमने अपलोड किया है आप देख सकते है वहां भी स्वीकार किया है फिर से आए कब आए 2000 पिछले साल स्वामी जी जनार्दन दास जी वहां पर स्थान बन रहा है उपलब्ध है YouTube पर श्री वैष्णव के साथ यहां पर हम श्री वैष्णव नहीं स्वामी जी के साथ मंच पर विद्वान थे उन्होंने हमारा श्री वैष्णव के समय जहां पर हम श्री वैष्णव नहीं है लेकिन पांच छात्र जी के समय एकता में से जो श्री वैष्णव नहीं थे फिर भी पांच व्याख्यान करने आ गए थे विद्या स्वामी बीच में थे उनके भाई हम थे और दाने जी और स्वामी थे तो वहां पर विद्याल जी ने जो संस्कृत भाषा दिया हमने भी संस्कृत में ही भाषा दिया था जो प्रस्ताव थे वो मेरे पास आए थे स्वामी जी का संस्कृत में जो कहा था उसको मैदान में तेलुगु बोल रहा है लेकिन आप वहां पर निग्रचारी शब्द सुन सकते है और स्वामी जी ने कहा निग्र जैसे अलग-अलग आगम में अलग आसना पद्धति है जैसे आगम है शक्त आगम है निग्रह आगम है पांच आगम है वैसा आगम है
04:40:23:27 ऐसा है और फिर हमारा नाम लिखा भाग में निग्रचार्य बैठे हुए तो शास्त्रों के माध्यम से शास्त्रों के हाथ बा भाग में निग्रहचार्य बैठे हुए हैं। इससे नहीं होता है कि उन्होंने प्रमाणिक माना। वो जो पहले वाला था वो अतीक था। अगर वो है तो उसमें हमें हमारे अंदर की कुछ जिज्ञासा है वो शांत करेंगे और फिर मान लेंगे। ठीक है? दूसरी बात ये आती है कि आप तुम तो जाकर के राजेंद्र दास जी महाराज जी के बगल में बैठे हो। मगर तुम्हारे अनुसार उनकी जो चीजें हैं वह प्रामाणिक नहीं है। अशास्त्रीय है। यानी कि किसी के बगल में बैठने से कुल मिलाकर के यह सिद्ध नहीं होता है कि उसको वो प्रमाणिक मानता है कि नहीं मानता है। ठीक है? और तुम अभी आगे बात आएगी कि वो प्रमाणिक मानने के विषय में। तो किसी के बगल में बैठ जाने, खड़े हो जाने से यह सिद्ध नहीं होता है। पूज्य गुरुदेव जो हैं उनके पास अभी अमित शाह और योगी जी दोनों लोग आए थे। और वह बैठे थे वहां उनके पास गुरुदेव के पास हालांकि नीचे बैठे थे गुरुदेव थोड़ा सा ऊपर बैठे थे मगर बैठे थे ना उनके पास तो इससे सिद्ध नहीं हो गया कि गुरुदेव उनको मान गए उनकी चीजों को मान गए सब चीजें सही है उनकी
04:41:39:06 ओके है ठीक है चलो ये वाला तुम्हारा पूरा कर ले जल्दी से हां सही आज इस प्रकार है तो एक उदाहरण संपर्क के लिए दे दिया है तुमको और क्यों कारण मान्यता वाली बात नहीं कही इस प्रकार से लेकिन शास्त्र के रूप में या शास्त्र व्यक्ति के रूप में रूप में रूप में तो शास्त्र निष् व्यक्ति के शब्द तो हमने भी शायद यूज़ किया है तुम्हारे लिए अभी बात हो रही है आपके पास ज्ञान आया कहां से परंपरा एक सदाचार आचार्य के रूप में आएगा सवाल बताएगा तो वो कई बार समस है देखो तुम कमाई मांगते हो और फिर उदाहरण भी फिर भी अगर तुम कमाई नहीं मानते हो तो उन लोगों की छुट्टी है हमको देखो तुम कमाई मांगते हो और फिर लिख लेंगे तो प्रवेशिका को भेज देंगे फिर तुम्हारे मनभूति समझ सके इसके फिर वीडियो बनाकर एक एक श्लोक को पढ़कर प्रमाणित करके उसका विश्लेषण समझा मंदबुद्धि कौन है जो इस वीडियो को शुरू से देखेगा उसको पता लग जाएगा मंदबुद्धि कौन है संकीर्ण विचारधारा वाला कौन है पूर्वाग्रह से ग्रसित कौन है और क्या कहते हैं वो होता है ना जिसको आईडिया नहीं होता है कि कैसे तर्क करते हैं कैसे बहस करते हैं वो वो वाला जिसको जीतना है ज्ञान ना होते हुए तो वह कौन है वो
04:42:54:16 इस वीडियो को जो देखेगा पूरा वो समझ जाएगा और भी एक दो उपाधियां थी जो मिल रही थी इसी वीडियो के आधार केवल इसी वीडियो के आधार पर तुम्हारी दो तीन चीजें तो मैंने ऑन चलती हुई लाइव में निकाली है तुम्हारे झूठ दिखाए हैं और तुम्हारे अल्पज्ञता के आधार पर दिए गए निर्णायक वक्तव्य दिखाए अब तुम में मुझे एक छोटा बच्चा नजर आ रहा है और कुछ नहीं हो तुम जिसने शास्त्रों को रटा है मगर मगर तर्क शक्ति बिल्कुल जीरो है। बिल्कुल जीरो।
04:43:30:12 युक्ति है ही नहीं, प्रासंगिकता है ही नहीं, संबंध है ही नहीं। बस प्रमाणों को तुमने रटा है। समझ बात आएगी। तब फिर पूछा की प्रामाणिक बनता है। क्योंकि प्रामाणिक अपमानिक कहां होता है? जब हम अपना प्रमाण तुम्हारे सामने अच्छे प्रकार से व्यवस्थित कर छोटे मोटे प्रकार से हमने बहुत कुछ कहा है। छोटे मोटे तारों में हमने कहा है। छोटे लेखों में छोटे-छोटे वीडियो में इंटरव्यू में कहा। लेकिन उतना प्रमाणिक अभी उसे प्रमाणिक बनाने के लिए तुम्हारे बुद्धिमान के बुद्धि वाले तो नहीं है तो तुम जो बुद्धि वाले लोगों के लिए जो तुम्हारा
04:44:02:20 है तो मतलब कि तुम्हारी बुद्धि वाले ये सिद्धांत कहां पर है? पर्याप्त नहीं है। मतलब बुद्धि वाले लोगों के लिए जो है तुम दे चुके हो और तुम्हारी जो बुद्धि है तो मैं जो है अल्प बुद्धि हूं तो मेरे लिए तुम्हारा वो प्रवेशिका लिखनी पड़ रही है। अच्छा तो ये कुछ मामला जच नहीं रहा है। क्या बोल रहे हो? इसके लिए हमको मेहनत करके एक दिव्य की रचना करनी पड़ी भगवती गीता से जिसका नाम हां मैं स्वीकार करता हूं। यह गलती मैं भी स्वीकार करता हूं। लेकिन बताए गए निर्धारित समय से विलंब से हो रही है। लेकिन इसका एक बहुत महत्वपूर्ण कारण है तुम्हारे सम्मुख जो हमारा समय है। दूसरा बहुत नहीं इसका कारण है तुम्हारा अहंकारी होना। इसका कारण है तुम में लोकेशना होना। इसका कारण है तुम्हें धर्म का बोध ना होना। किसके साथ कैसा व्यवहार करना है। इस बात का बोध ना होना। शायद तुम्हें यह मालूम है कि तुमको अपने निजी जीवन में क्या करना है। मगर तुम्हें व्यवहार का व्यवहारिक जो धर्म है ना वो नहीं पता है। अन्यों के साथ क्या व्यवहार करें वो सब नहीं पता था।
04:45:18:00 इसका कारण यही है। जो तुम कैरी मिनाटी बनने चले हो ना धर्म के ये कारण है। मैं लिख रहा था तो मैंने सोचा 100 से 150 पीठ का अपने जगह को तोड़ कर दूंगा। साल बाद तो 70 पेज संस्कृत फिर दूंगा 70 पेज 49 50 पे जाते पूर्ण करूंगा लेकिन जब मैं ग्रंथ लिख बैठा है तो मुझे समझ में आया अगर मैं प्रमाण छोड़ देता हूं फिर यहां ये शंका हो सकती है प्रति हो सकता है या फिर नहीं किया गया यानी कि तुम जो अब लिखने वाले हो उसमें तुम्हें मालूम है कि शंका उत्पन्न हो सकती है तो फिर शंका करने वाले को जो जिन शंकाओं से तुम खुद सेटिस्फाइड हो कि हां ऐसी शंका हो सकती है तो शंका करने वाले को तुमने मंदबुद्धि कैसे कहा अरे भाई जो केवल तुम्हारे उतने से कह देने पर मान रहे हैं उनको तुमको कहना चाहिए जो शब्द हमको कह रहे हो क्योंकि उनके मन में शंका नहीं उत्पन्न हो रही है। इसका मतलब कुछ ऐसी चीज है जो पूछी जा सकती है। मगर वो बिना पूछे मान ले रहे हैं। इसको तो अंधभक्ति कहेंगे ना। ध्यान नहीं दे रहे हैं। तथ्यों को टटोल नहीं रहे हैं। कोई वहां पर वो वाला नियम लागू है क्या कुरान का? उसमें लिखा
✅ This part is already used · 04:46:26:16 – 04:46:34:12 (0:08)
→ Used in: B · Video खुद की ही किताब से एक्सपोज हुआ पाखंडी! बड़ा खुलासा at 34:16 ↗
→ Used in: A · Live सतलोक गैंग का बागी शिष्य करेगा किए सनसनीखेज खुलासा भाग 1 किताबों का सच at 39:20 ↗
04:46:26:16 है ज्यादा सवाल मत करो। वरना तुम्हारे लिए वह आयत खोल दी जाएंगी जिनके कारण पहले के लोग भागी
⬜ Not used yet · 04:46:34:12 – 05:34:09:22 (47:35)
04:46:34:12 हो गए। जिन शंकाओं का उत्पन्न होना तुम खुद स्वीकार कर रहे हो उन शंकाओं का उत्पन्न जिन मस्तिष्कों में हो सकता है उनको तुम अल्पबुद्धि कह रहे हो। यहां पर क्या होता है तो मैं काम करने लगा और मैं आपको वचन देता हूं विश्वास दिलाता हूं। मेरी जब आप निग्र प्रवेशिका पढ़ेंगे तो निग्र प्रवेशिका की गुणवत्ता से आप करेंगे इस लुक को लिख कितना परिश्रम दिया गया है और परिश्रम के कारण जो विलंब हो रहा है दे देना तब बात करना अभी बातें मत छोड़ना 800 से अधिक संप्रदाय प्रमाण बताया गया है 750 ग्रो नहीं बता रहा 70 श्लोक नहीं ग्रंथ 750 एक एक ग्रंथ से कई श्लोक मतलब एक ग्रंथ की बात करते मंत्र के विषय में तो फिर माना लेकिन वो कम से कम ये शास्त्र प्रमाण मानेंगे उनके लिए केवल उनके लिए नहीं अभी तो नहीं नहीं मानेंगे शास्त्र प्रमाण भी मानेंगे उनकी व्याख्या भी देखी जाएगी कहां से कौन सी संप्रदाय से हो रही है और ये भी पूछा जाएगा कि ब्रह्म सूत्र कहां से आ रहा है भागवत कहां से आ रही है ये सब भी देखना पड़ेगा शास्त्र प्रमाण के साथ साथ कौन सा भाव किसका तत्व विवेचन तुमने स्वीकार किया वो सब चीजें है चलो
04:47:50:04 शास्त्र पुराण माने उनके लिए मतलब नाम भी नहीं सुने होंगे ठीक से तुमने 75 80 ग्रंथों के नाम नहीं सुने हैं आज नहीं सुने हैं राम का नाम सुना है राम का नाम सुना है और उसको बहुत अच्छे से धारण करने का प्रयास किया है तुम्हारी तरह वो 70 80 ग्रंथ या 700 ग्रंथ जो है उन सबको लेकर के और केवल लेकर के और लोगों को दिखाने के लिए ऐसा जीवन नहीं हमने राम का नाम सुना है। शंकराचार्य का नाम सुना है। वो पर्याप्त है हमारे लिए। ठीक है? वो क्या है? यहीं पर एक श्लोक है। मनुष्य चाहे चारों वेद पढ़ ले। सारे उपनिषद पढ़ ले। जप तप व्रत दान पुण्य कर्म तीर्थ यज्ञ इत्यादि सब कुछ व्यर्थ है। यदि कोई प्रामाणिक आचार्य नहीं है तो क्योंकि इन प्रामाणिक आचार्य के बिना गुरु के बिना यह सभी चीजें तुम्हें भटका देंगी, भ्रमित कर देंगी। तो वो 700 ग्रंथ का तुम्हारा अर्थ कहां से आ रहा है?
04:49:05:08 कौन सा ले रहा है? कैसे तुम्हारा तत्व आया? कौन सा तुम्हारा सिद्धांत है वो सब भी तो देखना पड़ेगा। बनाओ बनाओ प्रवेशिका बनाओ। मतलब प्रवेशिका से पहले तक तुम परंपरा में बात नहीं करोगे अपनी। तुम सिद्ध नहीं करोगे कि मैं निग्रचार के हूं। अभी टाइम है सिद्ध करने में तो सिद्ध नहीं हो तो अभी मत बोलो। अभी भगवत आनंद बोला। क्यों बोल रहे हो? अभी प्रवेशिका बना लो। सिद्ध कर दो फिर बोलना। कोई बात नहीं बोल लो। कोई बात नहीं। है उस पे केवल तुम्हारा एक भौका दिख रहा है हम इतना बड़ा एक बोलना तो पटरी के बोल देते है सेटअप जो तुम्हारा है ना उस सेटअप के कारण अब एक सुप्रीम कोर्ट के वकील का भी फोन आ रहा है मैं जरा वही नोटिस क्यों अच्छा एक इससे पहले जोस ने लाइव हूं तो अच्छा हां एक छोटस ने कहा है शंकचार्य ने कहा है मैं क्लास सुना देता हूं जैसा वो क्या कह रही है अभी इसको डाल सकता है और इसमें इसमें इसमें रिदमम से विजय और गुरु शंकराचार्य ये तो टाइटल है बहुत गलत मतलब सोचो रिदमम कपू या विद्या के प्रति ये व्यक्ति कितना अधिक बुरा हुआ है अटैच में महसूस करता है की विद्या एक इंटरव्यू दे दे तो सिंपल करते कमेंट करते कहा विजय अरे आम भाषा में मुझे बात का दर्शन हो मानो वो बात किसी से निकली नहीं एक
04:50:20:09 मिनट एक मिनट अगर विजय श्री का मैंने प्रोत्साहन किया तो इससे ये कैसे सिद्ध हुआ कि मैं यह कह रहा हूं कि विजय श्री से पहले किसी ने धर्म की परिभाषा नहीं बताई क्या बचकाने तर्क है छोटे बच्चों की तरह बात करते हो। आज रात में मुझे जो तुम्हारा बड़प्पन था वो सब नष्ट हो गया। अब केवल एक छोटा बच्चा नजर आ रहा है जो जििद कर बैठा है। जििद कर बैठे हो और कुछ दया भी आ रही है तुम्हारे ऊपर। इसमें तुम इतने ज्यादा मुझको छोटे अनुभव कर रहा हूं। मैं तुम्हारे प्रति करुणा का भाव उत्पन्न हो रहा है। सही बता रहा हूं। ऐसी बचकानी बातें कर रहे हो। अगर मैं अगर मैं विजय श्री को मैं प्रोत्साहन दे रहा हूं कि तुमने अच्छा है ये है वो है तो उससे ये कहां सिद्ध हो रहा है कि उससे पहले धर्म की व्याख्या किसी ने नहीं की। ये कौन सा सिद्धांत है भाई? कहां के तुम आचार्य हो? ये कैसी बातें कर रहे हो? फंस जाओगे। बहुत बुरा मत मत आना। प्रार्थना करना कि तुम मेरा तुमसे सामना ना हो। नहीं तुम बहुत बुरा फसोगे। फस जाओ। अब करुणा आ रही तुम्हारे ऊपर। वजन भी कम है तो उस तरह से भी
04:51:35:10 देखता हूं। जििद कर बैठे हो तुम और कुछ नहीं। अपने बड़प्पन को मनवाने की जिद। बहुत-बहुत धन्यवाद। अरे भाई टिक नहीं पाओगे तो तुम बताओ ना। तुम आ जाओ। बता दो। कि अगर मैंने किसी से ये कहा है ये सुन लो इनका वक्तव्य क्या है? सुनो भाई ने कौन सी कमेंट कहा यहां पे क्या बोल रहा है ये तो सिंक करते कौन सी कमेंट कहा विजय आंग्ल भाषा में भाषा का दर्शन मानो वो आगे से निकली और देखो अगर मैं कह रहा हूं कि तुम्हारी आंग्ल भाषा में जो तुमने धर्म की परिभाषा दी है ये सुनो भाई क्या नाम है तुम्हारा तुम्हारे आचार्य कह रहे हैं अगर आंग्ल भाषा में ये कुछ नहीं है। ये रोस्टिंग में इन्होंने एक्सपर्टीज हासिल करी है। तो उसकी ये ख्याति थी। खैर वो दूसरी दूसरा कारण भी हो सकता है। जो मुझे लग रहा है वो तो यही है भाई।
04:52:47:07 खैर जो विजय जो इन्होंने कहा कि तुम्हारी वाणी तुम्हारी आंग्ल भाषा में जो है ऐसा ध्वनित हो रहा है अगर बात महाराज बोल रहे हैं धनित हो रहे हैं तो इससे ये कहां सिद्ध हो रहा है कि मैंने यह कहा कि मतलब इससे यह अर्थ भी निकलता है दूसरा वाला कि इससे पहले धर्म की परिभाषा किसी ने नहीं कही तो क्यों बोल रहे हो ये क्या मतलब तुमको अगर क्या कहते हैं ये वो वाली बात है मैं तुम्हारा तुम्हारे तरीके समझाऊं कि तुमको अगर वासुदेवाचार्य जी महाराज जी ने अपने बगल में बिठा लिया तो इसका मतलब तुमसे बड़ा कोई दुनिया में है ही नहीं। हां ये कहां से अगर मैं ये कहने लगू तुम्हारा ये ड्रामा करूं ये जो तुमने अभी अभी बोला है मुझे वासुदेवाचार्य जी ने यहां पर बिठाया था। ऐसे है वैसे है। मैं इसमें एक्टिंग करके बोलूं। वासुदेवाचार्य जी ने मुझे यहां पर बिठाया था। अब जो है मुझसे बड़ा कोई है ही नहीं। तो हो गई बस ना शास्त्र चाहिए ना कुछ चाहिए। है ना? तो देखो जरा क्या कुतर्क कर
04:54:02:09 रहे हैं तुम जिसको फॉलो कर रहे हो और लाइव आ जाओ। फॉर्म भर दो लाइव आओ। 7408301869 सामना करो। सत्य के पक्षधर हो तो सामना करो। अन्यथा मुंगेरी लाल के हसीन सपनों की दुनिया में डूबे रहो। सदैव सदैव भाई मुझे लग रहा है कि मेरा मंच प्रमोट हो रहा है। मनुवादियों का प्रमोशन होता है क्या? तुम अपने दिल पे हाथ रख के बताओ। अपने हृदय पे हाथ रखो। बताओ क्या मनुवादियों का प्रमोशन होता है आज के इस भौतिकवादी युग में? तब जगह कम्युनिस्ट विचारधारा भौतिकवादी विचारधारा नास्तिक विचारधारा प्रभावी है मलेच्छराज है ना तुम्हारे अनुसार तो हम तो उस विचारधारा के लोगों का ही उपयोग करके अपने चैनल को प्रमोट करवा रहे हैं हमसे वो कहां प्रमोट हो जाएंगे ये भी तुम्हारा कुतर्क है भाई मनुवाद का तुम पक्ष ले रहे हो इसलिए तुम आज तक जो है 20 30 हजार अटके हुए हो अभी बोलने लगो वर्णाश्रम के विरोध में देखो
04:55:17:10 कैसे मीटर भागेगा चलो खैर कोई बात नहीं तो ये तुम्हारे तर्क है तुम्हारे निग्रह संप्रदाय के आचार्य के सुन रहे हो ना फॉलोवर्स उसको पकड़ भाई भाई देखो यार भाई उसको सर सदैव उसको प्रमोट करने वाली बात सुन लो। सदैव मेरे चैनल को एक्टिव रूप से जो काम कर रहा हूं वो शायद 2022 या 23 से एक्टिव हूं और आज तक उसको मैंने एक दो बार लाइव में लिया है विजयश्री को। ये सदैव वाली बात कहां से हो गई? सदैव सदैव सदैव। अच्छा तो ये सिद्धांत पता नहीं कहां से आते हैं तुम्हारे मनमुखी शायद वही परंपरा से आते होंगे लुप्त वाली से लुप्त सिद्धांत लुप्त परंपरा लुप्त आचार यही है ना किसको पकड़ मैंने भाई मत भाई चमत्कार क्लिंज लगता है तो तुमको लगता है
04:56:32:15 ना हमें शास्त्र का प्रमाण रखो क्लिंज लगता है तो अब यहां शास्त्र का प्रमाण नहीं दोगे यहां दोगे बहुत क्लियर है मगर ठीक है तुम्हारी शैली अच्छी है यहां पर छोटे हो ठीक है ठीक लग रहा है भाई मत कर मैंने मैंने ऐसे मैं हाथ जोड़ता नहीं हूं मत कर नहीं हो पाएगा बहुत बुरा करेगा मत कर भाई मैं भी मैं भी मैंने भी हाथ जोड़े थे मैंने भी हाथ जोड़े थे वाणी के द्वारा हाथ ही जोड़े थे कि मत करो मत करो मत बढ़ाओ इस मामले को आगे पर तुमने सुना हाथी जोड़े थे ना कि हम आपके ऐसे ऐसे आप आप करके और जो है मैं तुमको लगा कि डर रहा है मैं हूं रावण दसर वाला खा जाऊंगा इसको करियर खा जाऊंगा ये है वो है आओ कटेगा तू अभी भी उसमें जो विनोद वाला टाइम है उसमें भी वो कटेगा बहुत बड़ा कटेगा अरे मैं भी यही कह रहा हूं भाई तुम प्रार्थना करना ईश्वर से सामना ना हो वरना तुम्हारी जो सच्चाई है ना वो आ जाएगी सबके सामने कितना तुम्हारा
04:57:47:22 वो है ये क्या है कवालियों वाली मंडली बनाकर लाइव किया था भाई अगर ये विरोध करने वाले हो सचिन भारद्वाज तो आप आ सकते हैं लाइव फॉर्म भर दीजिए 7408301869 एक ही मैसेज बार-बार करोगे तो बैन कर देंगे। ये जो निग्रहचार्य स्पीक्स नाम से जो वो है वो और राम करके है एक ही मैसेज बार-बार ना करें। बैन कर देंगे। नजर जैसी पड़ेगी तो ठीक है। फॉर्म भरो लाइव आओ। तो तुम्हारे जो वो है ना आचार्य वह अभी कह रहे हैं अभी वो अपनी परंपरा को सिद्ध करने की स्थिति में नहीं है। लिख रहे हैं फिर सिद्ध करेंगे। चलो भाई तब तक इंतजार करते हैं और हां वो प्रमाणिक वाली बात है तो देख लेंगे किसने कहा है किस आधार पर कहा है ठीक
04:58:53:21 है ठीक है दे रहा है दे रहा है प्रसिद्धि दे रहा है क्या कर रहा है सब कर रहा है अच्छा प्रसिद्धि मैं कैसे दे रहा हूं प्रसिद्धि मैं कैसे दे रहा हूं मैं प्लेटफार्म कैसे दे रहा हूं विजय श्री के आज की आज की तारीख में 1.5 लाख फॉलोअ है मेरे मेरे YouTube और इंस्टा दोनों को मिलाकर के क्या कहते हैं जो एक्टिव वाला YouTube है वो पुराना वाला नहीं उस पर तो व्यूज देख लो जिसमें 8000 फॉलोवर्स हैं। अगर मैं तीनों को मिला दूं 80000 20000 और 20000 1 लाख 20000 तब भी होता है। ठीक है? विजय श्री के तब भी 1.5 लाख फॉलोअ है मुझसे 3000 ज्यादा। मैं कैसे उसको प्रमोट कर रहा हूं? वह मेरे चैनल पर आएगी तो मैं प्रमोट ना हमारा चैनल प्रमोट होगा। उस चैनल के जरिए चलने वाला अभियान प्रमोट होगा। वो सिद्धांत प्रमोट होंगे कि मातृ शक्तियां जो है गायत्री मंत्र नहीं पढ़ना चाहिए। प्रणव का उच्चारण नहीं करना चाहिए। तुम्हारे जैसे लोग होंगे तो धर्म का पतन निश्चित है। क्योंकि तुम किसी को सुधरने ही नहीं दोगे। सुधरेगा तो टांग खींचोगे। जो समझ लो समझ जाएंगे अब जिसमें अपना नहीं था जल्दी इस वीडियो में
05:00:08:21 आप ये देख लीजिए इसमें और विद्या दोनों दिख रहे है अगर विद्या का नाम को संस्कृत में भान भी होता है तो अगर मैं प्लान को विद्या प्रेमी कहूं तो आप यहां विद्या को मत मानिएगा है ना क्योंकि विद्या का भान वैसे कहा नहीं हो सकता है तो विद्या प्रेमी का ये होता है कि जैसे भांग को उठाने के बाद व्यक्ति प्रणाम कर कुछ बोल वैसे ये भी कुछ बोल रहा है भगवतानंद का मतलब जो है वो भगवत तत्व का आनंद लेने वाला भी है। तो इसलिए अगर मैं उस संबंध में कुछ कहूं भगवत आनंद के संबंध में तो आप सदैव ये ना समझिएगा कि जो है यह बात जो है भगवतानंद के ही बारे में हो रही है। है ना? ठीक है? सदैव ना समझिएगा ऐसा। वो कहीं पे जोड़ के उसका अर्थ दूसरा बनाया जा सकेगा। चलिए लीजिएगा जो कि सब है ना? ऐसा नोटिस नहीं आएगा। ऐसे नोटिस भेजने वाले का क्या मैं उसको तो पहले वकालत सीखनी चाहिए तो ये बैठा हुआ है बढ़िया से रहा है ये वो लगाओ नोटिस भेजने वाले का क्या मैं कहूं उसको वकालत सीखनी चाहिए ये कह रहे हैं
05:01:18:19 अपना दिया जा रही है अपना और क्या करते है यहां पे इन्होने यही से थोड़ी देर पहले इन्होंने जो विजय को फिर से हमारे साथ जो है वो विजय के बारे में बात हो रही है। उन्होंने बोला कितना आया? कहां से मेरी पद्धति? एक तरह से उत्तर भी उसी में ही है आचार्य किसने? आचार्य कौन बनता है? कहां से मेरी पद्धति? तुम्हें पता है कि हम योग शिक्षक है। उन्होंने बोला किसने बनाया तुम्हें योगाचार्य? कहां से मेरी पद्धति? तुम्हें पता है कि हम अभी उसको डाल सकते हैं। तो मेरा प्रश्न था कि योगाचार्य कैसे होते हैं? तुम्हें पता है कि हम योग शिक्षक थे। उन्होंने बोला किसने बनाया तुम्हें योगाचार्य? कहां से मेरी पदवी? एक तरह से उत्तर भी उसी में ही है कि आचार्य बनाया किसने? आचार्य कौन बनता है? आचार्य का टाइटल देता कौन है? यूनिवर्सिटी देती। पहली बात यहां पर क्लीन हो गया कि उन्होंने क्या कहा था अपने बारे में कि हम योग शिक्षक हैं। और गुरुदेव ने किस भाव से यह कहा वो एक अलग बात है। किसने बनाया तुम्हें योगाचार्य? मगर इन्होंने अपने लिए कमिट किया कि मैं योग शिक्षक हूं।
05:02:26:08 वापस पहले बताओ सुनो सुनो सुनो सुनो सुनो ये शिवश इतना सिंिंग कर रहा है इस लड़की के साथ अभी ध्यान दीजिए शिवश इतनी सिंपिंग कर रहा है आचार्य का टाइटल है और कोई शंकराचार्य जी के चेले कमेंट करते है मेरे वीडियो में कई बार फिर से टाइटल है और कोई शंकराचार्य जी के चेले कमेंट करते है मेरे वीडियो में कई बार इन लोगों का लोभास लोग की बात है एक आचार की का टाइटल है और कोई शंकाचार्य जी के चेले कमेंट करते मेरे वीडियो में कई बार फिर से शंकराचार्य और कोई पांडे जी अभी ध्यान दीजिए शिव चिंतन कर रहा है की ये लड़की खुले की यूनिवर्सिटी आ जाए और कोई शंकराचार्य जी के चेले कमेंट करते हैं मेरे वीडियो में परिवार की शंकराचार्य के बारे लोगों का कितने लोगों की बात
05:03:11:00 है कहां से होता है जैसा कर लोगे यार अजय हम इस उम्र में ऐसे रहेंगे क्या बिल्कुल रहेंगे अगर पापा जैसी सही प्लानिंग की तो पर हमें तो इस ऐज तक वेट करना पड़ेगा ना बिलकुल नहीं हमने तो अभी इन्वेस्ट किया है LIC के न्यू जीवन शांति ने जो हमें देगा डिफर्ड एनुअल मतलब कुछ साल बाद से रेगुलर इनकम LIC के एनटी प्लान से एनटी ऑप्शन और नियमित इनकम पाने में फ्लेक्सिबिलिटी भी भाई तूने ये जो चार घंटे बर्बाद किए है ना ये एक्सेल रिपोर्ट बनाने में ये देख मैंने एक मिनट में वो सेम एक्सेल रिपोर्ट बना के दिखा दिया वो भी एआई से तू अगर ऐसे ही काम करता रहेगा ना तो सैलरी अप्रेजल तो भूल जा तेरी नौकरी भी नहीं रहेगी तुझे एआई विद एक्सेल सीखना पड़ेगा ये चार घंटे बर्बाद करके कुछ नहीं हो सकता है। ये एआई तेरे सारे एक्सेल रिपोर्ट बना के दे सकता है। तेरे बिना यूनिवर्सिटी के आज भी शिक्षा व्यवस्था है। उसमें बिना के ग्रेजुएशन का ग्रेजुएशन का ही समानांतर शास्त्री को बना दिया है। आधुनिक शिक्षा व्यवस्था ने एमए का ही समांतर आचार्य की डिग्री को बना दिया है। अमुक विश्वविद्यालय से नियुक्तिचार्य अमुक विश्वविद्यालय से आयुर्वेदाचार्य अमुक विश्वविद्यालय से क्या करनाचार्य न्यायाचार्य करते है कि नहीं तो आचार्य की उपाधि नहीं दे रहे यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी को खींचने की बात करते पता चल रहा है कि इस लड़की के पास क्या धन है और इस लड़की की तारीफ कर सके वेदांत आचार्य की उपाधि देती है यूनिवर्सिटी। इस बात का खंडन
05:04:26:07 नहीं करना चाहिए कि आचार्य की उपाधि कोई गुरु ही अपने शिष्य को दे। अगर सरकारी तंत्र चला रहे हैं ना? तो अगर वो ये चीज चला रही हैं। चला रहे हैं कि शास्त्री होना चाहिए या आचार्य होना चाहिए तो इस बात का तुम खंडन नहीं करते हो क्या? तुम पक्ष ले रहे हो कि सरकार बताएगी कौन आचार्य? कौन नहीं आचार्य? फिर तो ये आचार प्रशांत जैसे खड़े होंगे। बिल्कुल पक्की रूप पक्की बात है। फिर तो तो इसका मतलब तुम ऐसे जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुसार जो आचार्य पद प्राप्त कर रहे हैं लोग तो फिर तुम उनके साथ हो। चाहे वो प्रामाणिक हो गुरु परंपरा से हो ना हो उन्होंने वहां जाके एमए कर लिया। वो हो गए आचार्य। है ना? तो हम तो हमें तो नहीं मानना चाहिए। जब तक गुरु परंपरा से नहीं है उसे आचार्य नहीं मानना चाहिए। भले ही वो जो सरकारी तंत्र है लोकतंत्र है उसने उसको आचार्य शास्त्री की डिग्री दी होम है क्या? तो अगर यहां वो सोच समझ के कर रही है या जानबूझ के कर रही है जो भी है उनकी इस बात की रक्षा करनी चाहिए तुमको और इसको धर्मज्ञा के रूप में स्थापित कर सके।
05:05:42:07 धर्मज्ञा के रूप में उसको स्थापित नहीं करना है। उसके यहां आने के कारण जो उसके हमसे बहुत ज्यादा संख्या में बहुत आगे जो फॉलोअर्स हैं उसके उनको यहां आकर्षित करने के लिए भी किया जा रहा है। और यह जो आर्य समाज के द्वारा खड़ी की गई जो मातृ शक्तियां हैं जिनका वह आलंबन लेकर के जो थोड़ा सा मेंटली एक ब्रेन वाश करते हैं वो लोग कि वो हमको गायत्री मंत्र पढ़ने से रोकते हैं। तो यहां पर यह भी उद्देश्य है कि एक लड़की एक मातृ शक्ति आकर के बोल रही है कि गायत्री मंत्र नहीं पढ़ती हूं और और मुझे बहुत अच्छा लगता है अनुवाद के सिद्धांतों में रहना तो इसलिए है तुम्हारा पूर्वाग्रह है क्योंकि तुम संकीर्ण विचारधारा के व्यक्ति हो इसलिए बता दे जिसको ये नहीं पता कि आचार्य दे रही है उसी लड़की का और वो भी नहीं शंकराचार्य से मिलने के बाद वाला इंटरव्यू चल रहा है ना शंक से मिलने वाली बता रही है विजय ये विजय बोल रहीम कपूर की यूनिवर्सिटी विद्या की डिग्री यूनिवर्सिटी तो पढ़ लिखने को तो क्या कर रहे यूनिवर्सिटी देती है पर उसकी दी हुई डिग्री मान्य नहीं है हमारे जैसों के लिए तुम्हारे जैसों के लिए होगी लुप्त संप्रदाय के गुप्ता आचार्य हो हमारे जैसों के लिए मान्य नहीं है हमारे लिए आचार्य वही है जो परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्यों के
05:06:57:20 यहां से घोषित हो वो आचार्य ठीक है शास्त्र करेंगे ये लोग सिखाएंगे और इनके चक्कर में आचार्य को समय खराब करना पड़ेगा किसी का पाप मानते हैं तब पाप समझते समझते क्या जो है इसी दो साल दुर्भाग्य हम भी समझते हैं। हम पर जो समय वेस्ट कर रहे हैं रात भर जाग के ये दुर्भाग्य है। संध्या वंदन का समय निकल गया और कर रहे हैं। ठीक है। क्या था? तूफानी फैसला करेगा रोशनी का। दिया वो जलेगा जिसमें
05:07:33:04 दम। दो वर्षों हो गए। हमारे ऊपर उज्जैन है। अब क्या करवाएंगे? इसी दो साल पहले अमावस्या को उज्जैन में हमारे गुरु विचारों ने करवाया था और बढ़ रहे थे थोड़ी पीड़ा मंत्र का बंद होता है हनुमान जी का सफर जब ब्रह्मा बनता है तो हम लोग मनुष्य मंत्र होता है तो आंशिक पीड़ा हमको परिवार खेलनी पड़ी थी मुझे पीड़ा खेलनी पड़ी लेकिन जब हमने घर में काम किया समाप्त हो गई हमारी हमारे घर पर उन्होंने करना प्रारंभ किया था घर वाले विशेष करके हमारे घर के जो वहां पर ने कहा कि इस प्रकार से उनका संरक्षण दिया तो आज दो वर्ष पूरे किया वाले विशेष करके हमारे घर के जो होता है तो होता है बने तमास्या को उज्जैन में हमारे गुरुचार करवाया था और असफल रहे थे उज्जैन करवाया था इसी दो साल तमावस्या को उज्जैन में हमारे गुरु चारों ने करवाया था और असफल रहे थे थोड़ी कष्ट पीड़ा तो मंत्र का बल होता है हनुमान जी ब्रह्मास्त्र बने थे हनुमान जी के स्तर पर जब ब्रह्मास्त्र बन सकता है तो हम लोग तो मनुष्य है मंत्र बल होता है तो कुछ आंशिक पीड़ा हमको सब परिवार झेलनी पड़ी थी मुझे नहीं झेलनी पड़ी है हनुमान जी भी ब्रह्मास्त्र बन सकते और विचार करवाएंगे दो साल पहले चैत्र अमावस्या को उज्जैन में हमारे विरुद्ध विचार उन्होंने करवाया था और असफल रहे थे थोड़ी पीड़ा तो हमको हुई मंत्र का बल होता है हनुमान जी के बंधे हनुमान जी के स्तर पर जो ब्रह्मा उससे आगे
05:08:48:04 बल होता है तो हमको परिवार खेलनी पड़ी मुझे नहीं खेलनी पड़ी व्यक्ति यहां परेशान ये है कि अपने वो जो निग्रहचार वाली जो वो है ना उसको भी बचाना है जो पवा है उसका निग्रचार जो पद है उसको भी बचाना है तो ध्यान रखना है कि परिवार वालों को झेलनी पड़ी मुझे नहीं झेलनी पड़ी और दूसरी बात यह है कि मेरे ऊपर भी अविचार करवाया है अभी तीन चार दिन पहले जो है और मुझे मेरे परिवार को भी नहीं झेलनी पड़ी मुझे तो क्या मेरे परिवार को भी नहीं झेलनी पड़ी अब बताओ क्या करें दो मेरे ऊपर अविचार तुम करवा दोबारा और ना करवाया करना अगर ना करवाना स्वीकार कर रहे हो तो मैं कह रहा हूं तुम विचार करवा दो मेरे पीछे राम वो देखें करवा दो
05:09:50:08 अविचार सैद्धांतिक लड़ाई छोड़ दो बस बकवास करवाओ फिल्म बनवाओ भूमिका बनवाओ पड़ी थी लेकिन समाप्त हो गई हमारी हमारे घर किया था विशेष करके हमारे घर के जो परिस को बकरा उसी से कहा महाराज जी का आया है उधर से आप क्या करना था बकरा हमको कहा गया दूसरा [संगीत]
05:10:33:12 सा बकरा और ये कहा गया था उसी मुझे मैसेज कहा महाराज जी का आया है उधर से आपके विचार करना था हमको कहा गया तो हम क्या करेंगे बोले देखो मुझे ये जो अभिचार करवाया है ये किसने बनाई है बताइए पता है जिसने तुम वरुण शौर्य है ना जिसने तुम्हें वो बताया था वो गोलगप्पे वाली बात है ना उसी ने बताई है मुझे यह कि तुमने विचार करवाया हो गया भाई जिस तरह से तुम बातें करते हो यह है वो है उसको मनवाने का ऐसे रूप में रखते हो जैसे तुम्हारी कोई व्यक्तिगत घटना है उसको मानने या ना मानने से भी काम चल रहा है तो कोई बात नहीं है मगर जब तुम प्रमाण के रूप में अपनी व्यक्तिगत जीवन की चीजों को रखोगे तो कैसे चलेगा पर तो कोई भी कुछ भी बोले जब तुम कुछ भी बोल सकते हो लो
05:11:33:15 काम कर ये अच्छी बात है जिसको बचाना है जिसको बचाएगा ये अभी इसको डाल सकता है। तो मेरा प्रश्न था कि योगाचार्य कैसे होते हैं? उन्हें पता है कि हम योग शिक्षक है। उन्होंने बोला किसने बनाया योगाचार्य? कहां से मेरी पद्धति? एक तरह से उत्तर भी उसी में ही है कि आचार्य बनाया किसने? आचार्य कौन बनता है? आचार्य का टाइटल देता कौन है? यूनिवर्सिटी देती है। नहीं वो आपको पीएचडी का टाइटल देती है। तो लोगों को ये जानना भी बहुत जरूरी है कि कौन होगा? जैसे हमने तो शैली पूछी थी कि उसका व्यवहार व्यवहार कैसा रहेगा और उसकी खुद की जो मतलब जीवन में जो आगे सीख रहा होगा वो कैसी रहेगी। उसकी शैली क्या होगी? पर उसमें जो हमें उत्तर चाहिए था गुरुदेव ने वो दे दिया की सबसे पहले जो लोग खुद को आचार्य बोल रहे हैं आप प्लीज पहले समझिए कि कहां से आचार्य कौन सी परंपरा से आचार्य उसी में आपको पता चल जाएगा कि ये फॉलो
05:12:48:19 करना है या नहीं करना है और सच है आप किसी को मत मानिए आप भाषचार्य को तो मानेंगे तो उनके चार मत है ये लड़की परंपरा की ओर आस्था कर रही है बोल के ये बुरा लग रहा होगा गंभीियों को कर दी इसका क्या होता है तो लगाती थी तभी तो शब्द आया यह शब्द क्यों आया? यह कहां से सिद्ध हुआ? योगाचार्य वो शब्द आया। कई बार ऐसा होता है कि गुरुदेव से कोई व्यक्ति पूछता है कुछ तो गुरुदेव कहते हैं अच्छा तुम्ही को करना है। ऐसा करना है। ऐसा प्रसंग होता है। गुरुदेव कई बार ऐसा करते हैं। मगर उस उसमें यही होता है कि गुरुदेव का विनोद होता है उसमें। तो ऐसा कुछ नहीं है। यह केवल एक रिलेट रिलेटेबल हो सकता है कि गुरुदेव ने समझा कि कहीं स्वयं के लिए तो नहीं कह रही कि योगाचार्य है ना और वो अपने आप को योग शिक्षक कह रही कह रही है इसको इसका क्या यहां पर युवाचार गुरुदेव तो है मत मानिए हमारे शंकराचार्य को तो मानिए चार मठ है चार मठों को देखिए समझिए तो गुरुदेव तो
05:14:03:25 है यहां पर युवाचार का मत मानिए आप पता चल जाएगा बोल रहे है प्लीज पहले समझिए की कहां से आचार्य कौन सी परंप दे दिया की सबसे पहले जो लोग खुद को कैसे उसकी शैली क्या होगी पर उसमें जो हमें उत्तर चाहिए था गुरुदेव ने वो देखो मतलब जीवन में जो आगे वो होगा जैसे हमने तो शैली पूछ सकते तो कौन बनता है आपकी मेरी पत्नी योग शिक्षक है तो मेरा प्रश्न था कि योगाचार्य कैसे होते हैं एकदम कहीं और से नहीं आया था ना वो शब्द उन्होंने बोला था योगाचार्य कैसे होते हम हां ये ये ये कहा जा सकता है कि गुरुदेव ये समझ रहे हो कि वो खुद को योगाचार्य इंगित कर रही है तो वहां पर हो सकता है गुरुदेव ने ऐसा समझा हो और तब उन्होंने पूछा तो उन्होंने क्लियर किया नहीं नहीं हम योगाचार्य नहीं है इसमें क्या दिक्कत होगी योगाचार देखो किसी अनाधिकृत व्यक्ति द्वारा स्वयं को योगाचार्य कहे जाने का खंडन किया है गुरुदेव ने इससे हमें कहां परहेज है क्योंकि क्योंकि जो ये विजय श्री जी है इन्होंने कहीं भी अपने आप को योगाचार्य कहा ही नहीं है। ये तुम्हें साफ सुनाई दे रहा है और आज जो ये सब ये जो विवाद हुआ है
05:15:19:03 इससे एक साल लगभग पहले की वीडियो देख रहे हो उसमें भी यह हो रहा है। तब विवाद तो तब नहीं था। तब वो अपने आप को योग शिक्षक कह रही है। यही से उसकी सत्यता प्रमाणिक हो रही है। ना ना ना ऐसा नहीं है। कई बार गुरुदेव ऐसा करते हैं कि कोई व्यक्ति कुछ प्रश्न कर रहा है किसी पक्ष को जानने के लिए तो सबसे पहले विनोद में या किसी कारण से गुरुदेव उसी से पूछ लेते हैं। है ना? आपको तो दिक्कत नहीं है। बैठो बैठो ऐसे भी करते हैं। डायरेक्ट उसने जो प्रश्न पूछा है उसी से पूछ लेते हैं। चलो खैर ये भी पूर्वाग्रह है। इसको हुआ
05:16:06:20 पूर्वाग्रह तो और इसका अर्थ ये ऐसा नहीं वो शंका नहीं है। जो जो अच्छा सबसे पहली बात तो उसने इस बात का स्वयं स्वीकार किया कि एक गुरु ही अपने शिष्य को आचार्य का पद दे सकता है। वो स्वयं इस बात को स्वीकार कर रही है। तो फिर इसमें कहीं जगह रही नहीं गई। जब उनको आचार्य नहीं कहा है तो वो इस बात का खुद ही विरोध कर रही है कि अगर कोई मुझे आचार्य समझता हो तो ना समझे। सिंपल लगातार जो है आती है वीडियो को आप अपने वीडियो दिखाने का प्रयास कर रहा हूं
05:16:48:01 महाराज में की परिभाषा को जानते हैं आचार्य तो ये भी नहीं कह सकते हो विजय सही सही है आपको मेरे गुरुदेव होंगे गुरुदेव मैं विजा का साथ कभी नहीं छोडूंगा ऐसा कुछ नहीं है क्योंकि गुरुदेव के पास में गया हूं ना रहा रहता हूं कई बार देखता हूं गुरुदेव किससे क्या कह रहे हैं। हां तुम दूर दूर बैठे-बैठे दाल भात में मूसर चंद जरूर बनते हो। उसी का परिणाम है ये जो आज तुम्हारे प्रति मुझे दया आ रही है। तुम्हारा सारा जो आग वो था ना वो एक जो इमेज थी बिगड़ गई। सारी इमेज बिगड़ गई।
05:17:35:10 [संगीत] Q2 पाई लग रहे हो Q2 पाई आदित्य Q2 पाई लग रहे हो Q2 पाई वो इमेज खो दी तुमने है ना तो क्या था कि हम कि नहीं गुरुदेव अगर योगाचार्य के बारे में बात कर रहे हैं पहली बात तो ये है तो तुम मत बताओ गुरुदेव क्या कह रहे हैं क्या नहीं कह रहे हैं तुम उनके पास जाकर बैठकर के अनुगत हो के बात नहीं कर रहे हो हम लोग कर रहे हैं हमारे गुरु हैं वो और या तो उनसे वो कहलवा दो जाकर के जो तुम बिल्कुल स्पष्ट कर रहे हो स्पष्ट कहलवा दो कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा भानुमती का कुवा जोड़ा वाली बात मत करो। ठीक है। चलो
05:18:46:21 अच्छा आप देखता हूं क्या होता है हमारे लिए 15 मिनट का जो था वो बहुत लेकिन तुम एक करने वाली महिला की अवसर वलत करोगे वहां पर बैठकर के लिए नहीं करोगे अनावश्यक वकालत भाई पहले यह तो सिद्ध करो कि उसने ऐसा कौन सा कार्य किया है जिसके कारण उसका विरोध करना पड़े हैं उसके पुराने फोटो के आधार पर उसका मजाक बनाया जा रहा है उसकी छींटाकसी हो रही है तो वहां मैं अगर लोगों को यह कह रहा हूं कि ऐसा मत करो है ना एक मिनट जरा एक
05:19:49:22 तो अगर वहां पर मैं यह कह रहा हूं कि ऐसा मत करो। इसकी पुरानी फोटो के आधार पर इसको आज के टाइम में ये सब मत करो। तो यह अनावश्यक वकालत है। तो अब यहां ऐसी जगहों पर जो है शास्त्र के प्रमाण की आवश्यकता होती है। वहां तुम अपनी बातें करते हो। केवल तुम शास्त्र का प्रमाण लोगों को डराने के लिए देते हो। छोटे भाई ठीक है। तुम शास्त्र का प्रमाण लोगों को केवल डराने के लिए देते हो। खौफ बनाने के लिए टेरर बनाने के लिए देते हो और कोई कारण नहीं तुम्हारे शास्त्र के प्रमाणों का। क्योंकि जहां आवश्यकता है वहां तो देते नहीं। अपने मन मनमुखी व्याख्या करते चले गए। करते चले गए।
05:20:31:06 वाइट वाश कहां किया? तुम्हारे खुद ही के साथी तो तुमसे भाग रहे हैं। तुम्हारा विरोध कर रहे हैं। जो कल तक तुम्हारे लिए प्रमाण होते थे। तुम्हारे अनुसार जो लोग तुम्हारे लिए प्रमाण थे वह लोग भाग रहे हैं। मैंने तो तुमसे यह कहा था कि अगर तुम्हें मेरे से जंग मेरे साथ जंग लड़नी है कोई मुझे युद्ध में शामिल करना है तो मुझे ठोस चीज जला कर दो और नहीं दिया। तुमको तो मुझे से लड़ना था। हम हां यह धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं। ये जो है धर्म धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं और विवेकी का दायित्व ज्यादा होता है। ये अपने आप को निग्रहचार्य बोल रहे हैं। केवल व्यक्तिगत धर्म को धारण कर लेने से कुछ नहीं होता है कि मुझे शौच ये करना है इत्यादि ये ये वाला मंत्र मुझे बोलना है। यहां पे है ना जो सामाजिक रूप से आपका क्या आपकी आपका रोल होना चाहिए उसमें उस धर्म का भी धारण उस धर्म को भी धारण करना आवश्यक होता है केवल शौचाचार इत्यादि में बहुत पारंगत होने से विधि जो अपना भक्ष अभक्ष में ध्यान रखने से प्रणम्य है बढ़िया है मगर अपने आप को निगराचार्य भी बोल रहे हैं ना धर्म का धर्म को स्थापित करने वाले बोल
05:21:46:07 रहे हैं ना तो इनसे पहले प्रश्न किया जाएगा और जो वह तो तैयार है ना जहां पर वह गलत है उसको बताओ वो मान जाएगी वो तो कह रही है ना किसी ने बताया ही नहीं पहले बताओ तो गलत क्या हो रहा है जबरदस्ती वही वाली बात तानाशाही नहीं चलेगी नहीं चलेगी किसकी किसी की भी अरे बताओ तो गलत क्या कर रही है तुम्हें तुम्हें किस बात की तकलीफ है क्या ऐसा वो कर रही है जो उसे नहीं करना चाहिए वो बताओ फिर उस पर बात की जाए मीमांसा की जाए और सामने आओ मुंह मत छुपाओ मार दो मार दो
05:22:32:26 क्यों अकाट्य प्रमाण अगर मैं बोल रहा हूं तो ये तुम्हारे लिए कैसे है मैं वहां पे ये भी बोल रहा हूं कि अपने गुरु द्रोही जो गुरुद्रोही भाई है मतलब गुरु द्रोही भाई कहां से हुए भाई हो भी गए वो प्रमाण्य बुद्धि के कारण खैर जो गुरु द्रोही है उनके लिए बोल रहा हूं ना वहां बोल भी रहा हूं कि कहीं तुम तुम अपने ईगो पर ना ले जाओ इस बात को। वहां मैं इस बात का ध्यान रख रहा हूं। जयकांत सिगरे का ईगो हर्ट ना हो जाए। मैं इस बात का ध्यान रख रहा हूं। वहां सुन ध्यान देना जरा मैं जब अकाट प्रमाण मांगूंगा। देखना वहां मैं कैसे तुम्हारे ईगो को बचाने का प्रयास करता हूं। देखना दोबारा
05:23:20:16 क्या करेगा कोई व्यक्ति बोले तो गलत नहीं बोले तो भी गलत तो पहली बात तो मैंने तुम्हारे लिए बोली नहीं है तुमने अदब के लिया है अपने ऊपर और चलो ठीक है। बाकी इसमें वैसा कुछ मुझे दिख नहीं रहा है कि मुझे जवाब देना है। बोल लो।
05:23:55:08 चुप रहे गलत मैंने चुप रहने पे गलत कहां कहा? तुम्हारी ये वाली समीक्षा कब की? कि चुप रहे तुम गलत। कब समीक्षा की ये वाली? हां? जबरन कुछ भी प्रयास नहीं तुम भी जुड़े हुए हो YouTube पार्टनर हो तुम मोनेटाइज है ना तुम्हारा चैनल तुम भी जुड़े हुए हो और तुम अपने अपना जो वो है उसको थोड़ा सार्वजनिक करो जीवन जैसे उसने किया है फिर देखो तुम्हें जोड़ते हैं मलच्छ सार्वजनिक तो करो अपना जीवन तभी तो आएगा ना मजा खेल का सबकी सबकी समीक्षा तुम कर रहे हो। अपने जीवन को सार्वजनिक करो। जैसे उसने अपनी फोटो फोटो डाली है। जहां गई ये गई उसके साथ मिली। सार्वजनिक करो। तब तुम्हें जोड़ेंगे फ्री मिशन से। और कोई अगर विवत्स संस्था होगी सनातन विरोधी उससे जोड़ देंगे। करो तो सार्वजनिक तुम भी जुड़े हुए हो। अभी जोड़ रहे हैं। YouTube के पार्टनर हो। YouTube बहुत सारी मलेच उससे जुड़े हुए हैं। और सुनो तुम YouTube
05:25:10:09 के पार्टनर हो। YouTube पे ही बहुत सारा ऐसा कंटेंट है जो बिल्कुल सनातन विरोधी है और वो YouTube उसका भी पार्टनर है। तो तुम उनके तो उनके पार्टनर हो एक तरीके से जो जो है जो अश्लील ये सब वीडियोस बना रहे हैं। नेक्स्ट टू अश्लील पोंड वाले वीडियोस हैं। वह सब चल रहे हैं। तुम उनके पार्टनर हो। ठीक है। हो गया सिद्ध। चलो नहीं है शायद। अगर वो 17 गोली मारी लेवल पर उसने अपने पत्नी की साल कर दो 13
05:25:51:00 46 मुझे नहीं लगता कि महिला किसी छोटेमोटे वजह के चक्कर में मुझे भी नहीं लगता है जिस तरीके से आपका बाईपोलर इत्यादि का इतिहास है मुझे भी नहीं लगता है कि आप जो है कोई लुप्त संप्रदाय के प्रतिष्ठित आचार्य ठीक है तो इससे क्या करें किसी को जो लगता है उससे करने से रोक थोड़ी ना लगेगा आप अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। प्रत्यक्ष वार्ता होगी तो सब धूमिल हो जाएगा। सब कुछ तहसनहस हो जाएगा। और ईश्वर से प्रार्थना यही करना है कि प्रत्यक्ष वार्ता ना वरना चुन्नू मुन्नू बन जाओगे।
05:26:26:12 जी दीक्षा दिलवाइए भाई और धर्म की स्थापना के लिए आवश्यक है कि लोग अपने प्रामाणिक आचार्य को जान जाए उसकी सार जो वो सार्वभौम तत्व है वो उनमें जो सार्वभौम सिद्धांत है उन सिद्धांतों के छत्र के नीचे हम एक हो सके वैचारिक एकता और उसके बाद व्यवहारिक एकता और तब हम जब संगठित होकर के हाथी बन के बैठेंगे तब किसी में यह बल नहीं होगा किसी स्वान में कि हमारी और भके आज हम लोग बटे हुए हैं क्योंकि लोग अपने प्रामाणिक आचार्य को नहीं जानते हैं। सार्वभौम आचार गद्दी को नहीं जानते हैं। हम लोग बटे हुए हैं। ठीक है? तो क्या कह रहे थे तुम? चक्कर में है कोई शंकाचार्य जी से मुझे नहीं लगता तुम करना 20000्राइबर का चैनल में तुम उसको करने जा रहे हो क्या लाइव दर्ज 20000 के चैनल में लाइव करने जा रहा हूं अबे उसके डेढ़ उसके डेढ़ लाख फॉलोअ है जाके चेक कर ले छोटू अब तो तू क्यूटिपाई क्यूटिपाई हो गया है रात रात भर
05:27:41:18 में जो तेरे तर्क सुने हैं मैंने तो छोटा भाई जैसा ही लग रहा है वो जो भोला भोला वाला होता है बस उसके अंदर जिद्द होती है। जििद तुम्हारे अंदर भी जिद्द है। चुन्नू क्या बोल रहे हो? 1.5 लाख फॉलोअ वाला व्यक्ति 20,000 फॉलोअ वाले के पेज पर आएगा। हम वो वीडियो वहां प्रमोट होगा। हमें फायदा होगा। चुन्नू मुन्नू तुम हो। तुम्हारा तो पों्स वाला वो ऐड याद आ रहा है मुझे। गुगली गुगली गोश मगर गाल है नहीं तुम्हारे पिचके आएगा नहीं हाथ में कुछ वजन इतना कम है इसलिए
05:28:27:02 हम इस प्रकार से कहानी से तिवारी करने लग गई वो वाली वाली महिला का लग रहा है विश्वास है जानिता से तुम्हारी हृदय से कह रहे इसको मैंने इस बात का तुमने यहां पे मुझे लग रहा है कि यहां हृदय से बोल रहे हो। यहां पे तुमने हृदय से बोला है थोड़ा दिख रहा है। एक होता है आभास जैसा अच्छा लगा। भाई जैसी फीलिंग आई मगर फिर भी तुम्हारे वो तुम्हारी वो शंका है। ऐसा कुछ है नहीं। मैं वहीं पर खड़ा होता हूं। वहीं पर अड़ जाता हूं। वहीं पर भिड़ जाता हूं। जहां मुझे अकाट्यता दिखती है। मैंने राम को इसलिए चुना क्योंकि वहां मुझे अकाटता दिखी। कोई नहीं काट सकता। मैंने शंकराचार्य को इसलिए चुना कि मुझे वहां अकाट्यता दिखी। और आज मैं जिस विवाद में खड़ा हो गया हूं उसको भी मैंने इसीलिए चुना है क्योंकि मुझे उसमें अकाट्यता दिख रही है। ठीक है? तो यह तुम जो हृदय से बोल रहे हो छोटे
05:29:42:02 चुन्नू मुन्नू यह तुम्हारा वो है शंका है इसे मिटा दो विजयश्री कोई प्रायोजित नहीं है फ्री मिशनंस के द्वारा पहली दिक्कत वाली बात तो यह है ना कि तुम डिसाइड नहीं कर पा रहे हो कि वो व्यापार के लिए वहां गई है फ्री मिशनंस के लिए वहां गई है ना ये तुम डिसाइड नहीं कर पा रहे हो तुमने अभी यहां पर हृदय से कहा यानी तुम्हें तुम्हें इस बात को लेकर के शंका है कि मैंने वहां उसको जानबूझकर किया है या बिना अनजाने में किया है। मगर पहले तुम कह चुके हो कि वो मैंने अपने धंधे को प्रमोट इत्यादि करने के लिए किया है। तो यह भी तुम्हारा गलत व्यवहार है। ठीक नहीं है। और टोटे हो तुम। थोड़ा बस यह है तुमने ग्रंथ के श्लोक याद करे हैं और उनको कहां पर रखना है कहां नहीं रखना है वो नहीं सीख पाए। इसी कारण से जहां रखना होता है वहां शांत रहते हो। हां ये सवाल आ रहा है देखो ये वाला अकाट्य मैं इसलिए नहीं जुड़ा था शंकराचार्य जी से। ये बाद की बातें हैं। साढ़े तीन वर्ष वाली भविष्यवाणी
05:30:57:13 मनुमक्खी के सेना ये बाद की बातें हैं। वो शंकराचार्य हैं। सार्वभौम गुरुगद्दी जिसने बचाया था सनातन धर्म को नष्ट होने से उस पर बैठने वाले परंपरागत रूप से बैठने वाले वो आचार्य हैं। बौद्धों का खंडन करने वाले वो आचार्य हैं। नास्तिकता का खंडन करने वाले वह आचार्य हैं। एक ऐसे ऐसी परंपरा के आचार्य जिनका विरोध करते हुए ईश्वर की सिद्धि ही नहीं हो सकती। एक ऐसी परंपरा का आचार्य एक ऐसी परंपरा के आचार्य जिनका विरोध करते हुए ईश्वर की सिद्धि ना हो पाने के कारण धर्म की स्थापना ही नहीं हो सकती। और एक ऐसी परंपरा के आचार्य जिसके अंदर रह के उस मत के अंदर रह के सबके अपने अपने स्वमत पोषित कर सकते हैं। इसलिए जुड़ा था उनसे। ठीक है। चलो
05:32:11:20 नहीं नहीं नहीं सीधा मोक्ष हो जाएगा। ये सब कुछ नहीं। मेरे जीवन का जो उद्देश्य को उस दिन पूरा हो गया था। जब मुझे गुरुदेव दिख गए थे। मुझे श्री राम नाम की दीक्षा मिल गई थी। अब तो बस केवल मैं वो कर रहा हूं जो गुरुदेव ने बताया, शास्त्र ने बताया वो करने का प्रयास करता हूं। बाकी और कोई उद्देश्य नहीं है जीवन का। हम जिस स्थान पर बैठकर तुम्हारा भविष्य और उस लड़की के पीछे काम करना चाहते हो समझ रहा हूं जो मैंने कहा पॉइंट इस दृष्टिकोण में आना जाना बहुत बड़े वैश्विक महिला ऐसी महिला ऐसी संस्थाओं का बहुत बड़े कार्य
05:33:04:10 है तुम अपने उस पर ध्यान दो थे परंपरा है तुम्हारी तुम बोल रहे हो तुम इसको आएंगे अगर लंबा बताएगा बता देंगे अच्छा होगा अच्छे से आऊंगा निकला नहीं है
05:33:42:27 दीक्षा किसी और दिशा में जा रहा है क्या बोलगा क्या है तब मैं वापस करूंगा दीक्षा किसी दिया [हंसी]
✅ This part is already used · 05:34:09:22 – 05:34:15:01 (0:05)
→ Used in: A · Video गालियों का पोस्टमार्टम-लुप्त सम्प्रदाय का गुप्त आचार्य at 38:57 ↗
05:34:09:22 विदेश गमन करने वाले किसी भी व्यक्ति को हम ना समर्थन देते हैं विदेश गमन प्रति में और ना उस व्यक्ति का
⬜ Not used yet · 05:34:15:01 – 05:43:14:28 (9:00)
05:34:15:01 प्रोत्साहन करने के अच्छा किया ना किसी को ऐसा करने की सलाह ठीक तो अगर तुम गमन विषय पर इतना ही कमर हो इसको मतज्ञान स्थान कहा जाता है मतज्ञान ग्रस्थान का क्या अर्थ है कि वन रिलेशनशिप लाइफ टाइम लिटली रिलेशनशिप योर बॉडी हमने आपने कहा तुम भी होगा ये सिद्ध नहीं होता पहला वाला हां बिल्कुल भी बिल्कुल बिलकुल बिलकुल तो यही हमने कहा ना किसी दूसरे के गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं होता है पीछे कहा है हमने अच्छा हुआ तुमने उसको प्रमाण दे दिया इन्होंने यहां पे जो प्रमाण दिया 2 17 32 जरा नोट कर लेना भैया धन्यवाद आपका प्रमाण उपलब्ध कराने के लिए। वो जो है पीछे हमने यही बात तुम्हें याद दिलाई है कि हमारे गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं होता है। तो फिलहाल क्या मैं तुम्हें गलत करके अपने आप को सिद्ध कर रहा हूं क्या सही? नहीं नहीं नहीं मैं तुम्हें तुम्हारा जो है कॉन्फिडेंस लेवल जो होता है ना समीक्षा करते समय जो तुम
05:35:30:04 समीक्षा करते समय उलते हो उसको जरा डाउन करने के लिए तुमसे प्रश्न करता हूं और कर सकता हूं ना तुम तो आचार्य हो मैं थोड़ी ना आचार्य हूं क्या दिक्कत हो रही है अगर तुम और तुम्हारे जो सवाल है उन पर बात करने के बाद तीसरा सवाल ला रहा हूं ना प्रमाणिक प्रमाणिकता पर भाई मेरे पास भी तो प्रश्न हो सकते हैं कि तुम शास्त्रोक्त हो कि नहीं हो जब तुम तुम दुनिया भर से शास्त्र शास्त्रों की बात पूछ रहे हो हां तो मेरे पास भी तो सवाल हो सकते हैं। तुम शास्त्र हो कि नहीं हो? और जो जो आज की जो परिस्थिति है जो विपरीत काल चल रहा है उसमें जैसे ही हम अपने कक्ष से बाहर निकलते हैं तुरंत कहीं ना कहीं शास्त्र की मर्यादा का कहीं ना कहीं किसी ना किसी रूप में उल्लंघन हो जा रहा है। तो वातावरण ही इतना दूषित हो गया। ली वातावरण के लिए शुद्ध करने के लिए सब लोग लड़ रहे हैं। उन लोगों को नहीं लड़ने वालों को भी यह नहीं पता है कि यदि जिस दिन सुधरेगा तो तो उनको भी जीवन में काफी दिक्कतें आने वाली है। है ना? पूर्ण रूप से शास्त्र वो हो जाएगा। बहुत सी दिक्कतें आएंगी। उनको जिन जिन चीजों की आदत पड़ गई है वो चीजें छीनंगी। फिर भी लड़ रहे हैं। चलो
05:36:52:09 क्या आता है कि कोसा गया करने वाले क्योंकि तुम हां पहली बात तो यह है कि हम यहां ये बोल क्यों रहे हैं कि तुम किसी के साथ उठने बैठने से अगर अपनी प्रामाणिकता को सिद्ध कर रहे हो यदि तो तुम जो है साथ में तुम्हारे साथ में जो प्रमाणिक गतिविधि वाला व्यक्ति बैठ रहा है जुड़ रहा है वो भी प्रमाणिक सिद्ध हो जाएगा उस हिसाब से वहां पे ये बोला है ठीक है
05:37:39:22 फिर आगे और अगर साथ में उठने बैठने से कोई व्यक्ति शास्त्रोक्त सिद्ध होता है, प्रामाणिक सिद्ध होता है तो तुम्हारे साथ में जो है ये विदेशगामी व्यक्ति जो है खड़ा है। तुम उससे आतिथ्य स्वीकार कर रहे हो। क्योंकि तुमने कहा ना अप्रामाणिक व्यक्ति से जो है गांठ गांठ है बोलते हैं मिलते हैं करौली सरकार आते हैं बागेश्वर वाले आते हैं तो बागेश्वर वाले जो आते हैं वहां पर उनके जो अंश को उन्हें पता चलता है कि गलत है तो वहां पर उनका खंडन किया कि नहीं गुरुदेव ने मगर उसका मतलब यह है कि वो अगर साथ में खड़े हो रहे हैं तो प्रशय दे रहे हैं तो इसका मतलब तुम विदेशगामी को प्रश्रय दे रहे हो ये है बात नहीं है साथ में खड़े हम यहां पे तुमको दोष नहीं दे रहे तुमको याद दिला रहे हैं कि साथ में खड़े होने का मतलब प्रश्रय नहीं है और तुम आप यहां पे वही कर रहे हो अपने आप को बता रहे हो कि हमने विदेश गमन का साथ नहीं दिया है। ठीक है। विदेश करने वाले किसी भी व्यक्ति को हम समर्थन देते हैं। और उस व्यक्ति का है नहीं देते। तो इसका मतलब जाति पात का करो विदाई करने वाले को वो कभी भी समर्थन नहीं देते हैं गुरुदेव। तो फिर क्यों
05:38:54:28 कह रहे हो कि वो क्यों आ रहा है वहां पर? क्योंकि साथ में खड़ा हो जाने से आशीर्वाद प्राप्त कर लेने से उनको समर्थन मिल गया उनके कार्य के लिए वो सिद्ध नहीं होता है कि इसको ऐसा करने तो अगर तुम्हारे इतना ही कम हो उसको मतलब कहा जाता है तो शिवा किया लोगों ने किया शिवा का उदाहरण प्रस्तुत किया है विषय विदेश गमन हमने विदेश गमन करने वाले व्यक्ति का ना समर्थन किया ना प्रोत्साहन किया ना इस प्रकार का कृत कभी स्वयं किया जिन लोगों ने किया उनका विरोध किया और विदेश गमन के विरोध में स्वामी जी का जो मत है उस मत का हमने प्रसारण किया जबकि तुम्हारे ही अन्य गुरु भाई को वो भाई लिया कर तुम बार बार गुरु भाइयों को मत लाया करो यार जी के सिद्धांत तुम्हारा वो फेल हो गया वहां जब रो रहे थे अभी मिश्रा जी के लिए कि तुमने हमें धोखा दिया मत बोलो गुरु भाइयों की बात
05:39:57:06 आधी रोटी पर दाल मत लो। वही कहा था मैंने कि ये संभावना उत्पन्न करने वाले प्रमाणों पे वो मत करो। उसका सा बताते हुए वैदिक प्राणों की निकालते हैं बेचारे के वहां पर वैदिक प्राणों की झंडा बताते हैं। सिद्धांत का बदलते हुए वैदिक प्राणों की से निकालते हैं बेचाने के लिए। जी के पापी जी के सिद्धांत का झंडा करते हैं। दूसरे कपा जी के सिद्धांत का सा करते हुए ब्राह्मणों की निकालते हैं बचाने के लिए तुमने कुछ नहीं कहा क्योंकि वहां पर बात तुमको पर्सनली नहीं चू रही थी। विजय सुन रही थी मेरे बात ये है और क्या है? क्यों नहीं कहा? तुम पहले तुम पहले तय कर लो कि विजय सिंह का मामला क्या है? मैं पैसों के लिए उसको लाता हूं या उसके साथ जो तुम जो एक प्रदर्शित कर रहे हो वह संबंध है मेरा या फिर मैं भी फ्री मिशनंस के लिए कार्यरत हूं या अनजाने में हूं तुम पहले तय कर लो और अगर तुम कंफ्यूज हो तो फिर बात मत करो बोलो मत आरोप मत लगाओ चार तरह की बातें तुम कर रहे हो तुम इस वाले जैसे हो गए यहां पर सब बातें कर लो कोई एक बात तो फिट हो ही जाएगी
05:41:20:00 जाने के लिए तब तुमने कुछ नहीं कहां क्या सिद्धांत का श्राद्ध करते हुए वैदिक ब्राह्मणों की वैकेंसी निकालते हैं जाने के लिए तब तुमने कुछ नहीं कहा नहीं हमें हमारे संज्ञान में नहीं है और वैकेंसी निकालते होंगे तो निकाल भी सकते हैं ठीक है हमें इस बारे में बोध नहीं है और अगर पता चलेगा कोई ऐसी चीज तो अगर वहां पर आवश्यक होगा हमारे बोलने से कुछ उपयोगिता सिद्ध हो रही होगी तो
05:41:57:12 जरूर क्योंकि वहां पर बात उनको पर्सनली नहीं चूक रही थी विजय श्री नहीं थी मेरे बात ये क्या है और विजय श्री जहांजहां इन्वॉल्व है तो अटैच हो जाता है वो अटैचमेंट फैल जाती है ऑटोमेटिक अटैच हो जाती है वैसे अटैच हो जाता है बेचारा हमको बड़ी जलन हो रही है तो शिवास मुझे यार उससे समझने का हो जाती है वैसे क्यों तुमको बड़ी जलन हो रही है जलन हो रही है क्या छोटे हो तुम भाई अटैच हो जाता है बेचारा शिवाश शिवांश तो है कि विजयंश है समझ नहीं आता से अटैच हो जाता है तुम कैसे अटैच हो रहे हो
05:42:39:16 तुम शकल देखने लायक है हालांकि ये बात तुम कह सकते हो कि मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी क्या मैं सत्य का परमात्मा नहीं बोल सकता बिलकुल ठीक लेकिन जिन लोगों ने मेरा सम्मान किया जिस समय जिन लोगों ने मेरा फिर जिन लोगों जिन लोगों उस कुकृत का बोध नहीं था ये ऐसा कर चुके है जब समय ऐसा बोध हुआ तो हमने इसका बहिष्कार करना आरंभ किया उदाहरण उसको मैं एक नाम लेना चाहता मैं बहुत
✅ This part is already used · 05:43:14:28 – 05:43:25:18 (0:11)
→ Used in: A · Video गालियों का पोस्टमार्टम-लुप्त सम्प्रदाय का गुप्त आचार्य at 39:10 ↗
05:43:14:28 अच्छे से नाम लेना चाहूंगा और ये मेरे मन की पीड़ा है जिसको मैं व्यक्त नहीं करना चाहता था लेकिन मैं करूंगा करूंगा करूंगा कृष्ण शास्त्री जो श्रीनाथ
⬜ Not used yet · 05:43:25:18 – 05:47:43:00 (4:17)
05:43:25:18 जी के शास्त्री के है धाम में रखते हैं वैदिक ये लाइव देखो भैया कितने बड़े हैं चुन्नू है और कुछ नहीं बन गया लेकिन जो खर्च हुआ उसको किया इसका ये नहीं है की हम सम्मान करने हा फिर उस शिक्षा के आ गए उनहीं के थे और विशेष धर्म का हम धर्म का बता
05:43:58:03 लेकिन अपने अध्या को एक बार आते भी कथा सुनने फिर आते एक बार मिलने पीड़ा प्रतिमा से कुंडली लिखवा दूसरे के लिए बड़े आत थे उनके लिए हमने प्रार्थना किया अपने वस्त से किया फिर जब हम उस वहां से जब जा रहे थे मुझसे मिलने आए जाने समय अगर कोई समय नहीं था तो उन्होंने मुझसे प्रयाग करके धाम में वही लेने आए थे तो अनुराग जी मुझसे मिलने आए जाने समय अगर कोई समय नहीं था तो फोन में बात की और उन्होंने एक मैसेज का मैं जान मैसेज का उत्तर नहीं दिया तो फिर मैंने सब समझ लिया की शायद ये मुझसे संबंध रखने में कुछ नहीं रखते तो अगर कोई आपका संबंध आगे रखने मुझे नहीं रखता है आपसे आगे क्यों संबंध रखेंगे डू यू फील टायर्ड आफ्टर क्लाइंबिंग जस्ट वन फ्लाइट ऑफ़ स्टेयर्स योर आउट ऑफ ब्रेथ ट्रेन एंड दोज़ फ्यू स्टेप्स फील लाइक रखिंग अ मैराथन इट फील्स एज इफ योर बॉडी इज वर्किंग अगेंस्ट तो नहीं इसका अर्थ ये नहीं का स्मरण करने की इसका अर्थ ये है धीरेधी करके उस व्यक्ति से मेरा संबंध अंत समाप्त ही हो जाता है क्यों धीरेधी करके एक मिनट एक मिनट धीरेधीरे करके अंततः मेरा उस व्यक्ति से संबंध समाप्त ही हो जाता है मतलब तुम्हारा कहना है कि संबंध होना नहीं चाहिए अंतिम स्थिति यही है। अच्छा या फिर तुम यह स्वीकार कर रहे हो कि धीरे-धीरे करके समाप्त ही हो जाता है तो हो सकता है किसी और का भी हो रहा हो जहां तुम्हें गलत दिख रहा है फिर क्यों लड़ रहे हो
05:45:13:20 वहां पर भी तो धीरे-धीरे हो सकता है समाप्ति की ओर बढ़ रहा हो वहां तुम्हें एट अ टाइम रिजल्ट क्यों चाहिए कि अभी के अभी मुझे समाप्त दिखना चाहिए इसका मतलब तुम्हारा ये धीरे-धीरे वाला सिद्धांत ही गलत है। सिद्धांत तो वही पकड़ना होगा कि किसी के साथ अगर संबंध है किसी अंश में तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम उसके जो है वो हो गए। समर्थक हो गए। अगर श्री राम ने पुरोहित के रूप में रावण को बुला लिया तो श्री राम रावण के समर्थक हो गए। उसके इस कार्य के समर्थक हो गए कि उसने सीता का हरण किया है। ठीक है? तो यहां प्रकरण यही चल रहा था कि भैया कोई साथ में खड़ा होने से समर्थक नहीं हो जाता है। तो वहां आपने ही उत्तर दे दिया। यही बात माननी पड़ेगी कि साथ में खड़ा होने से समर्थक नहीं हो जाता है। तो तुम्हें ये बातें नहीं कहनी चाहिए। करोड़ी सरकार क्यों आ रहा है? बीजेपी वाले क्यों आ रहे हैं? भाई शंकराचार्य किसी से मिलेगा ना। तब तो शोधन होगा ना किसी का।
05:46:22:14 लेकिन अगर सके अगर यही हुआ था कि इतिहास है कि ऐसा ऐसासा हुआ है उनके जीवन में। उनको पश्चाताप है उस जीवन का। यही जो विदेश गमन की बात तुमने की। विदेश गमन हुआ था उनके जीवन में तो तुमने कहा ना कि हुआ था पश्चाताप भी है। उसके बाद तुमने किसी विधि के द्वारा उसको जो है बताई 16 मिनट 16 मिनट 16 मिनट तक लाइव चला है। समय में लाइव अभी दो घंटे चला है। क्योंकि मेरी
05:47:09:09 समय फिर मिलेंगे। फिर मिलेंगे। क्या छोटू छोटू फिर मिलेंगे। हां चलो ठीक है। समय देने के लिए धन्यवाद और खेल अच्छा था छोटू तुम्हारा। अब तुम चुन्नू मुन्नू लग रहे हो और कुछ नहीं। तुम्हारी बातें इतनी सुन ली मैंने। कुछ उसमें रह नहीं गया है। खेल अच्छा खेला था। आदमी गलत चुन लिया। जय श्री राम। सही
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
Live: Required tasks are not set on the Rules page yet.
-
⬜Hindi SRT
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
तुम डाल डाल हम पात पात @SwamiNigrahacbarya
% not set🔗 This video is made from parts of these videos
Description
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮