⬜ Not used yet · 00:00:03:08 – 01:41:31:00 (1:41:28)
00:00:03:08 सभी को जय श्री राम अ कल हमारी एक चर्चा होने वाली थी रामपाल दास के शिष्य के साथ उसका कहना था कि वह सच्चा शिष्य है उनका और यह जो सतलोक आश्रम वाले हैं ऐसे न्यूज चैनल वाले यह सब ढोंगी है पाखंडी है ये उसका कहना आज शाक्त से बात अभी जिनसे बात होने वाली है कुछ चीजों को लेकर के हम में और इनमें थोड़ा सा वैचारिक अंतर है और संभवतः आज हम इनके साथ अपनी इस अंतर को मिटाने का प्रयास करेंगे यह अपना परिचय स्वयं ही देने वाले हैं तो हम उनको ले लेते हैं
00:00:58:01 पहले जी जय श्री पुष्पदंत जी श्रीराम पुष्पं जी जय सीताराम सीताराम हरि ओम राम एक बार मव करके वापस आ जाइए मुझे मेरी आवाज बंद करू क्या ब आपको हटा दे जी ठीक
00:01:33:21 है पाखंड का खंडन जी ब्रह्मा कुमारी श जो लखनऊ के उनके टीचर है स्कॉलर उनके साथ हमारी चर्चा हो गई है जिसकी सूचना आपको कल दे दी गई थी और संडे की सुबह 11:30 बजे वह वीडियो आपके सामने आ जाएगा तब तक आप लोगों को थोड़ा सा र रखना होगा उस वीडियो को देखने के लिए बहुत ही कई समय से हम लोग इस बात का प्रयास कर रहे थे कि ब्रह्मा कुमारी के किसी व्यक्ति के साथ बातचीत हो पर वह लोग समय देते नहीं है और कैमरा ऑफ भी करवा लेते हैं जब उनके प्रांगण में हम लोग होते हैं तो बहुत सी चीजें हैं और जैसे तैसे करके यह प्राप्त हुआ है दुर्लभ है आप लोग मिस ना करें उसको अवश्य देखें संडे की सुबह 11:30 बजे वो आएगा
00:02:37:06 तो अभी जो पुष्पदंत जी है वो पुनः जुड़ चुके हैं जी पुष्पदंत जी जय श्रीम हा जय सीताराम राधे राधे सभी सभी दर्शकों को हरि ओम जी मेरी आवाज कैसे आ रही है मुझे आपके आप दूसरा मोबाइल यूज कर रहे हैं
00:03:15:13 क्या व अभी अभी बंद अभी आवाज आया अभी सा आ नहीं मैं पूछ रहा हूं दूसरी आवाज कोई मोबाइल तो मुझे री आवाज रिपीट सुनाई दे रही है अभी कोई हां नहीं नहीं नहीं आवाज साफ आ रहा है आपका वो टीवी चल रहा था ना इस कारण से है आपका थोड़ा सा इंटरनेट भी वीक है मुझे ऐसा लग रहा है क्योंकि आपका जब जो लिप्सिंग है ना वो मैच नहीं खा रही है वॉइस से अच्छा अच्छा वो थोड़ा क्या है j का नेटवर्क थोड़ा साफ नहीं रहता ना हमारी इधर थोड़ा प्रॉब्लम जाता है भले वो थोड़ा आप अपना परिचय बता द मेरा नाम मेरा नाम पुष्पदंत गायत्री है और मैं छत्तीसगढ़ के रहने वाला हूं जिला मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी क्षेत्र से हूं और यही मेरा परिचय है थोड़ा सा आध्यात्मिक बैकग्राउंड बताइए कि आपका मतलब आप क्या मान मतलब कहां से जुड़े हुए हैं क्या मान वो थोड़ा
00:04:30:18 सा आध्यात्मिक अब मैं जुड़ा हूं तो गायत्री परिवार से जुड़ा हूं भैया बचपन से मेरे पिताजी बहुत पहले से जुड़े थे उसी के परंपरा से हम जुड़े थे और दीक्षा लिए थे गुरु दीक्षा य गो पवित हमारा संस्कार हुआ था गुरु के सानिध्य में बैठ कर के कहां पर मतलब जहां पर हम जाते हैं ना गायत्री परिवार में वहां से हमारा दीक्षा हुआ था [संगीत] गायत्री परिवार से एक तरीके से आप जुड़े हुए हैं जी जी जी यह बात हमें बताई नहीं गई एक्चुअली आपके आने से पूर्व कि आप गायत्री परिवार से नहीं तो शिवम भैया को मैं बता दिया था ना जो मेरठ वाले भैया है हमारे मित्र आपके भी मित्र हमारे मित्र आप भी हमारे मित्र जी और एक दर्शकों के भैया जी हम एक दर्शकों से करना चाहता एक बार आपके बीच में हमारा संवाद और चलने वाला था इसी विषय पर तो हमारा जो पुराना जो मोबाइल है उसमें से एक्सेप नहीं कर रहा था इस वेबसाइट को तो हमको कई बार धोखा खाना पड़ा तो कई जो भाई थे उन लोगों ने भी बोल दिए थे
00:05:46:16 कि डर के भाग गया करके तो मैं उन जितने भी अभी दर्शक जुड़े उन भाई से विनम्र प्रार्थना करता हूं कि मैं डर कर नहीं भागा था मेरा मोबाइल के खराबी होने की वजह से मैं कुछ उसमें नहीं आ सका आपके साथ जुड़ नहीं सका तो इसके लिए मैं सभी दर्शकों भाई से मैं क्षमा याचना करता हूं और मुझे क्षमा कीजिएगा अभी नया मोबाइल एक जनवरी को खरीदा फिर शिवम जी से इसी वेबसाइट पर थोड़ा दो मिनट के लिए हम बात किए तो कनेक्ट हो गए तो हम बोले शिवम भैया बोले कि हम उनसे भैया जी से बात करेंगे फिर जुड़ जाना ऐसे करके तो आज हम जुड़े हैं और आपकी धन्यवाद करते हैं भैया जी कि आपने हमें आप अपने ट पर चैनल पर बुलाए संवाद करने के लिए सनातन धर्म के लिए आप भी सनातनी हो मैं भी सना सनातनी हो तो मतलब जो जिज्ञासा था उ जिज्ञासा को हम जनमानस के बीच में रखेंगे जिससे कि हमारा जो सनातन धर्म में कई प्रकार के वाद विवाद होते रहते वह दूर हो जाए और अच्छी जानकारी मिले अच्छे प्रकाश में सभी लोग आ जाए यह मेरा भावना है बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया तो मैं शुरू करते हम लोग मुख्य विषय पर आ जाते हैं गायत्री परिवार धर्म की स्थापना जो है जी धर्म की क्या धर्म की क्या व्याख्या
00:07:01:22 करता है गायत्री परिवार धर्म क्या है गायत्री परिवार की सबसे बड़ा प्रचार वो करता है विचार क्रांति अभियान सबसे पहले मैं मेरा प्रश्न यह है कि धर्म की व्याख्या क्या है गायत्री परिवार के अनुसार धर्म की व्याख्या है यह है कि सत्कर्म करना अच्छे कर्म करना बुरे चीजों को त्याग करना और सत मार्ग की ओर प्रेरित होना और सबको प्रेरित प्रेरित करना और जो बुराई है आप समझे नहीं सत कर्म इज आल्सो इक्वल टू धर्म जी जी मैं पूछ रहा हूं कि सत्कर्म क्या है अब सत्कर्म अच्छे कर्म को सुनिए सत कर्म और धर्म में कोई अंतर नहीं है जी धर्म भी सत्कर्म है और सत्कर्म ही धर्म है उसम कोई अंतर नहीं है है ना जी जी तो वो सत्कर्म है क्या उसकी क्या उपयोगिता है और मनुष्य के लिए आवश्यक क्यों है क्यों किसी को धर्म का पालन करना चाहिए यानी कि क्यों किसी को अच्छे कर्म करने चाहिए सत्कर्म करने
00:08:16:22 चाहिए मैं यह पूछ रहा हूं अच्छा यह सत्कर्म हमको इसलिए करना करना चाहिए कि हमारा इससे विचार संस्कार और घर परिवार का जो नैतिकता है जो परिवार में जो नेगेटिव है एक प्रकार से उसको दूर करना और दूर करके अपने आप को आत्म तत्व प्रकाशित करके ब्रह्म की ओर उन्मुख हो जाना मतलब भगवान की प्राप्ति करना धे करना उसका ध्यान करना मैं यही इतना जानता हूं ज्यादा तो नहीं धर्म की व्याख्या तो नहीं कर पाऊंगा लेकिन यही मेरे को इसमें दिखाई देता है इस चीज को हम फॉलो भी कर रहे कि अपने पहले अपने कर्म को सुधारे अपने अपने अंदर के दुर्गुण को मिटा कर के अच्छे कर्म करें ये कर्म इसका मतलब ये नहीं कि हम अच्छे कर्म की स्वर्ग की प्राप्ति के लिए हो ऐसा भाव नहीं है कि हम अच्छे कर्म करेंगे हम स्वयं प्रकाशित हो जाएंगे तो हमारे सामने जो भी व्यक्ति बैठेगा अरे कि फलाने के पास हम बैठे थे हमको अच्छा लगा जी उनकी बातों में अच्छा लगे चलो हम इस बात को हम भी फॉलो करें हमारे जीवन में भी हम इस चीज को उतारे और हमारे जीवन को भी हम ऐसे नैतिक ऐसे सत मार्ग की ओ ले चले कि जिससे हमारा जीवन जो दुर्गुण में अंधकार में है उस प्रकाश के की तरफ आगे बढ़े मुझे कुछ समझ में नहीं आया स्पष्ट बात आपने कुछ बताई
00:09:32:01 नहीं सत्कर्म क्या है और सत्कर्म की उपयोगिता क्या है अब मैं तो इ सत्कर्म की आवश्यकता इसलिए है भैया कि हम मैं अभी अब बताया अब मैं तो ज्यादा समझ नहीं नहीं पा रहा हूं कि सत्कर्म का मैं जितना जानता हूं उतना आपको बताया मैं आपको समझाने का प्रयास करता हूं जी जी देखिए संसार के प्रत्येक प्राणी को मोक्ष चाहिए जी जी सदा सुखी रहने की आकांक्षा में सदा जीवित रहने की आकांक्षा में जी और सर्व सर्वज्ञ हो जाने की आकांक्षा में वो एक ही चीज ढूंढ रहा है परम स्वतंत्रता जी जी क्या ढूंढ रहा है परम स्वतंत्रता जी जी तो जब वो परम स्वतंत्रता को ढूंढ रहा है है ना तो सबसे पहली बात तो यहां पर यह सिद्ध हो गई कि जब वह परम स्वतंत्रता को ढूंढ रहा है तो इसका मतलब परम स्वतंत्रता इस दुनिया में है जी
00:10:47:08 उसी को हम भगवान कहते हैं जी कोई है जो परम स्वतंत्र है जो सभी चीज सभी बंधनों से मुक्त है उसी को भगवान तो अब जब हमें ये पता चल गया कि प्रत्येक व्यक्ति परम स्वतंत्र होना चाहता है तो वह परम स्वतंत्रता तक पहुंचाने वाले जो नियम है विधि विधान है उनका नाम धर्म है उन्हीं का नाम सत्कर्म है यानी कि जो कर्म आपको भगवान की ओर ले जा रहा है वह कर्म सत्कर्म है वह कर्म धर्म है जो कर्म आपको भगवान से दूर ले जा रहा है वो कर्म अधर्म है वो कर्म दुष्कर्म है जैसे कि साइंस नहीं कहती कि झूठ मत बोलो कहती है क्या नहीं नहीं मगर धर्म कहता है झूठ मत बोलो क्यों कहता है झूठ मत बोलो क्योंकि धर्म का वास्तविक फल क्या है मोक्ष मोक्ष तो अगर इसको एक पंक्ति बद्ध करके कहना चाहे तो ऐसे कह सकते हैं
00:11:57:19 कि संसार के प्रत्येक प्राणी में भी व्याप्त नास्तिक में भी व्याप्त उसकी जो वास्तविक चा है उसका विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त कराने के निमित्त सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा बताई गई विधि का नाम धर्म है सत्कर्म है भगवान को प्राप्त कराने वाली विधि का नाम
00:12:31:21 सतक हा उसी विधि का नाम धर्म उसी सत्कर्म का नाम धर्म और जो चीज आपको भगवान से दूर ले जा रही है वही चीज अधर्म है जैसे कि झूठ बोलोगे तो भगवान से दूर जाओगे अधर्म है य विचार करोगे तो भगवान से दूर जाओगे अधर्म है है ना हा तो यह धर्म और अधर्म में धर्म की व्याख्या अब मैं जी मुख्य विषय इसलिए क्योंकि ये कुछ चीजें सेट कर लेने से आगे हमको दिक्कत नहीं आएगी बात करने में जी तो तो धर्म की आवश्यकता धर्म की परिभाषा तो हमने जान ली ठीक है जी अब मुझे आप ये बताएं कि गायत्री परिवार ईश्वर के अस्तित्व को कैसे सिद्ध करता है गायत्री परिवार ईश्वर के सत्य को साकार रूप में स्वीकार करता है अगर इसकी हम वो कैसा है मैं ये नहीं पूछ रहा वो है कि नहीं यह गायत्री परिवार कैसे कैसे एस्टेब्लिश करता है मतलब भगवान के बारे में ना है ना
00:13:47:10 भगवान है कि नहीं इसको कैसे एस्टेब्लिश करता है स्थापित कैसे करता है क्योंकि भगवान होगा क्योंकि जब हम ये सिद्ध कर देंगे कि भगवान है हां और यह सिद्ध कर देंगे कि तेरा एकमात्र विकल्प अंतिम विकल्प भगवान ही है तभी तो कोई व्यक्ति तभी तो कोई व्यक्ति उसको प्राप्त करने के निमित्त धर्म का पालन करेगा जब हम व्यक्ति को यह समझाने में सफल हो जाएंगे यह है और इसी की तुझे जरूरत है हा ठीक है सरल भाषा में कहे तो यह है और इसी की तुझको जरूरत है जब हम येय समझाने में सफल हो जाएंगे तभी तो कोई व्यक्ति धर्म का पालन करेगा और यह नहीं है या इसकी तुझे आवश्यकता नहीं है तो कोई व्यक्ति क्यों धर्म का पालन करे क्यों झूठ ना बोले क्या मिल रहा है भाई भगवान है यह तो सिद्ध ही नहीं हुआ या मुझे उसकी आवश्यकता है यह भी सिद्ध नहीं हुआ तो मैं क्यों झूठ ना बोलू मैं क्यों विचार ना करू मैं क्यों अधर्म से बचू समझ रहे तो इसलिए यव कोई धर्म संस्था धर्म की बात करने वाले
00:15:02:18 के लिए कि उसको यह मालूम हो कि ईश्वर की स्थापना होती कैसे है जी देखिए ईश्वर की स्थापना के लिए सबसे पहले तो हमको सदगुरु की शरणागत में जाना होगा हमें गुरु के सानिध्य में जा सदगुरु की सदगुरु की शरणागत में जाना होता है तो यहां से हमने कह दिया जैसे कोई एक व्यक्ति है मान लीजिए नास्तिक है उसको अभी ईश्वर से ही मतलब नहीं है हा ठीक है और सदगुरु का अर्थ है सत गुरु अच्छा गुरु अच्छे का मतलब हो गया धर्म अच्छे का मतलब क्या हो गया हमने भी जाना सकर्म हा हा तो व्यक्ति को धर्म का धर्म का बोध होना चाहिए तब तो वो गुरु में जाएगा हा तो यदि और मान लीजिए कि वो गुरु के पास गया भी है तो वहां पर जाके गुरु को तो बताना पड़ेगा ना कि ईश्वर है तो वो गुरु क्या बताएगा वो वो चीज बताइए कि ईश्वर है ये कैसे सिद्ध करता है गायत्री परिवार तो गुरु सबसे पहले तो गुरु के सानिध्य में अगर वह नास्तिक व्यक्ति चला जाता है कि चलो भाई कि हम
00:16:18:08 हम गुरु के सानिध्य में जाए इस दलदल से हम निकलना चाहते अधर्म के दलदल से निकलना चाहते हैं और किसी व्यक्ति विशेष से मतलब प्रभावित हो समझ नहीं रहे दंत जी अधर्म के दलदल से वो तब निकलना चाहेगा जब उसे यह पता चल जाए कि इस दुनिया में ईश्वर है वो तब निकलना चाहेगा ना अभी तो हम बात कर रहे हैं कि तो सबसे पहले तो ईश्वर का अस्तित्व से स्वीकार होना चाहिए तब तो वो धर्म धर्म को मैं अंतर करेगा तो पहले वो तो उसका प्रभाव देखेगा प्रभाव पहले वो देखेगा कि कोई ना कोई ऐसे व्यक्तित्व उसके पास पहुंचेगा जब वो कोई उसके पास जैसे कि हम दोनों भाई अभी समय चर्चा कर रहे हैं धर्म की चर्चा अब इस बीच में कई लोग अभी हम आपसे जुड़े हुए हैं वो भाई को जब हम धर्म की चर्चा करेंगे और कर रहे उसमें उसको समझ आ जाएगा तब उस दिशा की ओर जाएगा कि चलो भाई मैं भी इस सत मार्ग की ओर चलू जहां वो बता के पास वही धर्म चर्चा आपसे पूछ रहा हूं मैं वही धर्म चर्चा आपसे पूछ रहा
00:17:23:01 हूं आपको बता रहा सदगुरु की शरण में जाने पर या वो जो आप धर्म च कह रहे हो उसके अनुसार ईश्वर का अस्तित्व गायत्री परिवार कैसे सिद्ध करता है ईश्वर का अस्तित्व वही वही वही यह करता है बताता है गायत्री परिवार कि सबसे पहले वह जन जन तक की उसकी संदेश को पहुंचाता है वो संदेश क्या होता है वो संदेश होता है कि हमें इन बुराइयों को अपने अंदर की बुराइयों को हटाकर कर सत मार्ग को जाने के लिए हमें सदगुरु की जरूरत है वहां आप मेरी बात समझ नहीं रहे मैं आपसे पूछ रहा हूं कि एक व्यक्ति के पास संदेश आया कि सतगुरु के पास जाओ अब वो सतगुरु के पास पहुंचा अब वो कहेगा कि मैं जो आप जो शिक्षा दे रहे हो मुझे मेरे द्वारा उसका पालन करना आवश्यक क्यों है मैं क्यों मानू कि इस दुनिया में ईश्वर है अच्छा तो वो तो वो तो सीधा यह बताएगा ना कि मैं आप क्यों मानो जब आपके नहीं मानेगा तो वति तो जा भी नहीं पाएगा उस जगह पर
00:18:38:04 अगर मानेगा तो माछ रहा इसीलिए मैं पूछ रहा हूं धर्म की संस्थापन धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर का अस्तित्व स्थापित करना आवश्यक है दृढ़ता के साथ तो जब ईश्वर की ईश्वर के अस्तित्व की स्थापना आवश्यक है तो मुझे वो तरीका ताए गायत्री परिवार का जिसके द्वारा वह ईश्वर के अस्तित्व की स्थापना करता है तत्व ईश्वर की अस्तित्व के लिए तो सबसे पहले तो अभी वह चला गया जब उनकी प्रभाव शक्ति को जानेगा वहां पर कोई ना कोई गुरु गुरु बताएगा या उसके जो अनय रहेंगे या साथ रहेंगे गुरु क्या बताएंगे ऐसा कि वो मान जाए ईश्वर के अस्तित्व को वो क्या बात होती है आपको नहीं पता है नहीं नहीं सुनो ना वो सबसे पहले वो उस जगह पर जाएगा तो मैं उस चीज को जानू सबसे पहले जानने के लिए जाएगा तो सबसे पहले चलो भाय तो उसको पूछ उसको वो तो गया है तो मैं जानने के लिए जुड़ने के लिए गया है जब जुड़ने के लिए गया तो वो गुरु मंत्र आप जड़े हो ना आपने दा भी ली जी जी तो आपको क्या बताया गया है
00:19:53:15 ईश्वर के अस्तित्व की स्थापना के बारे में स्तव ईश्वर की अस्तित्व की स्थापना के बारे में सबसे पहले जो बताया गया जो दीक्षा दिया दीक्षा देने के बाद में हमारा उन चीजों पर फॉलो नियम करने की नियम बताएगा उस नियम के अनुसार हम जब जब हम कार्य किए तो उसका जो दैवी अवतरण हुआ हमारे अंदर में वो अवतरण हमको उसका प्रभाव दृष्टि गोचर हुआ इससे हमको उस ईश्वर की अस्तित्व को हमने स्वीकार किया कि ईश्वर है क्योंकि जब जाएंगे उस जगह पर हम पहले गए ना तो कुछ हमको अनुभूति हुई उस अनुभव के आधार से यानी कि मान के चलिए मैं एक मैं आपको एक बात बताऊं इसमें दो प्रश्न खड़े होते हैं एक तरीके से आपने कहा कि प्रैक्टिकल करके मुझे दिखाया गया तो मैंने जान लिया कि ईश्वर है ठीक है जी जी तो प्रैक्टिकल का मतलब है कि आपको यह कहा गया कि देखो तुम जो हम बता रहे हैं वैसा वैसा करोगे अगर तो तुम्हारे गले में कुछ ठंडा ठंडा तुम फील होगा उदाहरण ले रहा हूं उदाहरण उदाहरण अनुभव वाला उ जी तो उन्होंने कहा कि जब तुम हमारे कहे अनुसार चलोगे तो तुम्हें अपने गले
00:21:08:19 में कंठ में कुछ ठंडा ठंडा फील होगा अगर हुआ जी तो उससे सिद्ध होता है कि इस दुनिया में ईश्वर है क्या ऐसा है क्या जी जी नहीं नहीं ऐसा नहीं है देखो हम नहीं जानते थे फिर भी देखो हम नहीं जाने उन्होने आपको ऐसा क्या बताया होने से क्या अनुभव होने से आपको यह सिद्ध होता है इस दुनिया में ईश्वर है नहीं देखो वो यह बताया कि दे जैसे कि एक रसगुल्ला है ठीक है एक उदाहरण दे एक रसगुल्ला है उस रसगुल्ला को अगर मैं स्वयं खाता हूं और दूसरे व्यक्ति को मैं बोलूंगा कि भैया रसगुल्ला खाने से तो बहुत मीठा लगता है व जिंदगी में कभी रसगुल्ला खाया नहीं है तो उस व्यक्ति को मैं बताऊंगा तो वो क मैं भी खाकर देखो मीठा क्या होता है तो उसी तरह से वहां से जो हमको ज्ञान मिला उस ज्ञान तत्व को हमने अभ्यास किया हमारे शरीर में रगड़ना चालू किया तो रगड़ने के बाद जो उसके ऊर्जा मिला नहीं उस ऊर्जा से उस ऊर्जा से हमको अनुभूति हुआ कि ईश्वर तो है और ये तो सुनिए पहली बात तो ये है कि आपने जब उस रसगुल्ले को रसगुल्ले की बात आप कह रहे हो ना कि रसगुल्ले से आपको वो होता है तो पहली बात य कि रसगुल्ले का अस्व
00:22:23:21 आपके सामने स्थापित है रसगुल्ला है आपको दिख रहा है आपकी आंखों से ठीक है जी जी जी और जिसने भी चीनी वगैरा खाई है तो उसको चासनी की मिठास पता है दूसरी बात यह भी है दूसरी बात यह भी है कि एट द एंड आप यही कह रहे हो कि हमारे पास बताने के लिए ज्ञान नहीं है केवल वह सिर्फ उसको सिर्फ क्या कहते प्रैक्टिकली कराया जा सकता है दो दूसरी बात ये हो गई ज्ञान नहीं है हम उसको समझा करके यह प्रयास कर सकते उसके सामने ईश्वर का साबित हो जाए जो ईश्वर को नकार रहा
00:23:06:01 हो तो उसको भी पहले सत्संग किया जाता है किसी भी चीज को जानने के लिए एक दूसरे के बीच में हम दोनों मेरे भाई सस मैं आपके साथ मैं सत्संगी तो कर रहा हूं एक तरीके से मुझे समझिए नास्तिक अब मुझे समझाइए कि ईश्वर है पहले तो ठीक है अभी हम सत्संग करें तो सत्संग के माध्यम से होता है कुछ ऐसी चीजें होती है कि भगवान के बारे में चर्चा किया जाता है चर्चा करने के बाद में वहां से उसको सुन कर के भगवान के प्रति या गुरु के प्रति उसको भावी भोर जब हो जाता है उसको समझ में आ जाता है तभी वो चीज पर व प्रवेश करके गुरु से दीक्षा लेगा सबसे पहली बात तब उसका अनुभूति उनको होगा गुरु मंत्र यानी कि आपके पास ज्ञान बताने के तौर पर शास्त्रोक्त कोई वर्णन कोई व्याख्या कोई परिभाषा ऐसी नहीं है कोई तर्क ऐसा नहीं है जिसके कारण गायत्री परिवार ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध कर सके जो व्यक्ति यह मान ले कि भैया ईश्वर
00:24:21:09 है जैसे वो गया गायत्री परिवार और उससे किसी ने कहा कि भैया देखो हम जैसा जैसा कह रहे हैं वैसा ऐसा करो तो तुम्हें अनुभूति होगी और वह अनुभूति एजेक्ट कैसी होगी यह बताते हैं क्या वो क्या हुआ चले गए क्या हुआ इनको इंटरनेट खराब है क्या इनका खैर
00:24:58:13 संडे को जो स्टॉप फ्रॉड रामपाल फ्रॉड हिंदू रामपाल और स्टॉप एंटी हिंदू रामपाल इस तरह का हम लोग चालू कर रहे हैं आप लोग उसमें जरूर हमें सपोर्ट करें र पर है ना हां तो मैं यह पूछ रहा हूं कि आपके पास जो वाद संवाद का कोई माध्यम नहीं है कि आप ईश्वर के अस्तित्व को किसी के सामने प्रूफ करने का प्रयास कर सके आप केवल उससे यही कहेंगे भैया गुरुओ अच्छे गुरुओं के पास जाओ और जाकर के जो है तुम सत्संग करो और ज्ञान चर्चा के माध्यम से जो है तुम वो करो आपके पास कोई तरीका नहीं है ज्ञान ज्ञान का कि आप उसको संतुष्ट कर सको या संतुष्ट करने का प्रयास कर सको जय श्री राम जय श्री राम
00:26:00:26 पुष्पदंत जी हां दिख रहे हैं आप दिख रहे हैं आपके य ठंडी बहुत है लग रहा [संगीत] है क्या हुआ आपकी आवाज नहीं आ रही क्या हुआ की आवाज नहीं आ रही वो शिवम भैया फोन लगाया था कट गया कर आप डू नोट डिस्टर्ब लगा दीजिए फोन में आप नो डिस्टर्ब लगा दीजिए फोन में आपने फिर टीवी स्ट आपने फिर टीवी पर स्टार्ट की है क्या नहीं नहीं कुछ नहीं किया है तो दोबारा से आइए मेरी आवाज फिर से रिपीट सुनाई देर मेरी आवाज फिर से रिपीट सुनाई दे रही है ऐसा फिर कट करके फिर से आऊ
00:26:58:14 [संगीत] जी आज आप लोगों ने सर्वशक्तिमान धर्म चैनल पर हमने एक वीडियो डाला था जिसमें एक तथाकथित जो ट्रेंड लोग होते हैं उसके साथ हमारा जो है एक वार्तालाप सुना होगा जिसमें कि एक व्यक्ति फोन करके हमें बताता है कि हम ब्राह्मण त्रिपाठी हैं और गोत्र प्रवर पूछने पर वह बोल्ड हो जाता है
00:27:41:13 क्लीन आप लोगों में से जिसने नहीं देखा है वह तो अवश्य देख [संगीत] ले जी पुष्पदंत जी जीन हां भैया सुनाई दे रहा है भैया जी तो मैं ये पूछ रहा था कि कहने का अर्थ ये है कि आपके पास केवल यह है बताने के लिए कि भाई देखिए हम यह बता रहे हैं आपको यह कर लीजिए इससे आपको अनुभव हो जाएगा कि ईश्वर है और आपके पास कोई वाद संवाद वाला कोई तरीका नहीं है उसको संतुष्ट करने का जिससे आप प्रयास कर सके अब ऐसा है भैया अपनी अपनी वो तरीका होता है और जो अनुभव मुझे मैं तो पहले सत्संग किया सत्संग से बाद मुझे ईश्वर के प्रति प्रेम हुआ और प्रेम होने के बाद में मैंने सो देख मेरी मैं एक बात मैं एक बात सुनना चाहू पूछना चाहूंगा कि आपको अनुभव हुआ इसलिए क्योंकि आप ईश्वर के अस्तित्व को पहले से प्रेम करते थे तो आप गायत्री परिवार गए आप ईश्वर के अस्तित्व को पहले पहले से भगवत भक्ति हां अब जो व्यक्ति ऐसा
00:28:56:21 है जिसको जो व्यक्ति ऐसा है कि जिसको ईश्वर का बिल्कुल उसको एक्सेप्टेंस ही नहीं उसकी लाइफ में व वो सीकर है सकारात्मक बुद्धि है उसकी उसकी बुद्धि सकारात्मक है मगर अभी उस वो अभी ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार नहीं कर पाया है तो उसको ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करने के लिए भाई सत्संग क्यों जाएगा तभी तो जाएगा सत्संग तभी तो जाएगा जब मानता हो कि सत्संग जाने से मुझे प्राप्त होगा ईश्वर धर्म का पालन क्यों करेगा क्योंकि वो ये मानता है कि धर्म का पालन करने से मुझे प्राप्त होगा ईश्वर जी जी तो तो बात यह है ना कि आप पहले ही उसको सत्संग में भेज रहे हैं और अगर वह सत्संग में आया भी है तो तब तो उसे बता दो ईश्वर है यह कैसे सिद्ध होता
00:29:55:18 है नहीं तो उसको तो चर्च देखो हम चर्चा करके उसको समक्ष सत्संग के बीच में तो बताया जरूर जाता है लेकिन वो जब उस उस चीज पर जैसे जा साब चर्चा करके चर्चा करके जो है क्या बताया जाता है अब वो तो ईश्वर के ही बारे में बताया जाता है भैया सत्संग में तो ईश्वर कैसे सि होता है मुझे बताइए मैं आपसे पूछ रहा हूं ईश्वर है इस दुनिया में यह कैसे सिद्ध होता है अब सबसे पहले देखा जाए तो सामान्य दृष्टि से देखा जाए ईश्वर प्रकृति को मानता हूं सबसे प्रथम ये मूल प्रकृति जो है जो हम देखते हैं यह मूल प्रकृति है यही ईश्वर अगर यह समझे इंसान तब की बात है ना समझे तो उसको हम कैसे कर सकते हैं यह मेरी भावना है अब जो पूछ र उ स्तर कर नहीं जा रहा हूं तो मेरी पहुंच वहां तक की नहीं जा रहा है तो मैं इसका उत्तर आपको नहीं दे पाऊंगा जो मैं जो मैं जान इसलिए मैं आपसे इसका उत्तर इसलिए मांग रहा हूं जी जी जी क्योंकि इससे आगे चलने पर जो हमारी कुछ चीज है जिसमें आड़े आएंगी ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध ऐसे ही होता है ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध ऐसे ही होता
00:31:11:03 है कि जो ईश्वर को नहीं भी मानता है उसके अंदर भी ईश्वर को ही प्राप्त करने की चाह विद्यमान है क्योंकि जीव मात्र की चाह का वास्तविक विषय ईश्वर ही है क्योंकि जी जी जो जीव है वह सत होना चाहता है व चित होना चाहता है वो आनंद होना चाहता है जी जी जीव जो है वह सच्चिदानंद स्वरूप होकर शेष रह जाना चाहता है वह एसी में फ्रिज में टीवी में कूलर में यही ढूंढ रहा है ठीक है एक नास्तिक व्यक्ति भी यह मन में कई बार सोचता है कि बारिश ज्यादा हो रही है तो कम हो जाए हा जबकि साइंस यह नहीं कहती भौतिकवाद अभी तक यह नहीं कहता कि कोई व्यक्ति कंट्रोल कर सकता है बारिश को केवल सोचने मात्र से फिर भी एक व्यक्ति ऐसा सोच रहा है कि मेरे सोचने से बारिश कंट्रोल हो जाए हा ठीक है तो एक नास्तिक व्यक्ति भी भगवान को भले ही तार रहा है मगर उसकी भी वो भी अंदर से वास्तविकता में भगवान को ही ढूंढ रहा है
00:32:29:08 हा तो हमारे अंदर की वो चाह जो हमारे अंदर इनबिल्ट है जिससे हम अलग नहीं हो सकते हैं उस चाह का अस्तित्व इस दुनिया में है ऐसी कोई हमारे अंदर की इनबिल्ट चाह नहीं है इनबिल्ट जिससे हम अलग नहीं हो सकते हमारे अंदर की कोई भी इनबिल्ट चाह ऐसी नहीं है जिसके सब्जेक्ट जिसका सब्जेक्ट इस संसार में मौजूद ना हो जैसे हमारे अंदर इनबिल्ट है क्या प्यास हम जन्म लेते हैं प्यास के साथ लेते हैं ना तो प्यास हमारे अंदर इनबिल्ट है तो उससे हमारे अंदर प्यास होने से य सिद्ध हो गया कि दुनिया में पानी है हमारे अंदर हमारे अंदर भूख इनबिल्ट है उससे हम अलग नहीं हो सकते भूख से भूख से ही यह सिद्ध हो गया कि दुनिया में क्या है क्या है दुनिया में भोजन भोजन आपका इंटरनेट बड़ा स्लो चल रहा है
00:33:45:16 अरे कम ज क कम ज्यादा हो रहा है जय श्री राम आपका वीडियो रुक गया है ऐसा अभी आया क्या हां आ गया आपको कवरेज एरिया में आके बात करनी चाहिए फिर आपका इंटरनेट रुक रहा है [संगीत] पीछे हां घर के तरफ जाना पड़ेगा उधर तब वो आ जाएगा अब इधर क्या है भैया मैं इधर लाइट वेट व्यवस्था कीना तो इधर ही बैठा हूं
00:34:42:03 मेरी वीडियो भी अटक रही है क्या कोई कमेंट करके बता दे पाखंड का खंडन जी बोल रहे हैं [संगीत] जी तो ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध होता है कि प्राणी मात्र
00:35:24:18 के अंतर आत्मा में मन में संसार की प्रत्येक बाधा से मुक्त हो जाने की चा विद्यमान [संगीत] है मेरा इंटरनेट भी स्लो आ रहा है क्या कुछ लोग बोल रहे हैं ऐसा तो नहीं आप लोगों के आपका इंटरनेट स्लो है जी आपका इंटरनेट स्लो है जी जी जी जी आप डाउन डाउन कर रहा भैया आप सही सही जगह पर जाक के आइए
00:36:18:08 ना जी तो मैं वही कह रहा था और मैं आप लोगों को एक बात की सूचना दे रहा हूं आने वाले समय में मेरे साथ हो सकता है कोई अप्रिय घटना घट जाए क्योंकि मुझे धमकी वगैरह आ रही है और आज मुझे किसी ने जिनसे हमारा द्वंद चल रहा है तेजी से इस समय उनकी ओर
00:36:54:27 से महिला के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाने की धमकी दी गई है ऑन कैमरा व हमारे पास है प्रूफ उसका वह धमकी दी गई है और समय आने पर उसको जो है हम प्रस्तुत कर देंगे बाकी आप लोगों के सपोर्ट की बहुत आवश्यकता है कोई भी युद्ध अकेले नहीं लड़ा जाता है इसलिए आप लोग जैसे भी जो भी कर सके वो करें और बाकी हमारा तो हम तो कर ही रहे हैं जो कर सकते
00:37:43:21 हैं धीरज जी पूछ रहे कौन कर रहा है कौन हमारे विरोध में वीडियोस बनाए जा रहे हैं किसका इस समय सबसे ज्यादा हो रहा इस चैनल के द्वारा तो वही उही लोगों में से उन्ही लोगों की किसी अनुयाई ने तो हम इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि यह लोग किस स्तर तक जा सकते हैं अपनी चीजों को बचाने के लिए क्योंकि इन्होंने यह तक कह दिया कि भाई हम छेड़छाड़ का आरोप
00:38:20:20 लगाएंगे जी बताइए पु गाय जी अभी सा भैया आवाज आ रहा है भैया आवाज आ रहा है अभी साहब आवाज तो आ रहा है पर आपकी वीडियो अटक रही है अभी तो डे हां जी नेटवर्क में आ गया भैया आप एक बार फिर से रिमूव हो दोबारा
00:39:07:13 आइए तो देखिए यह जो जितने भी य सेक्टस है जो बन रहे हैं वह थोड़ा हल्का हाथ रखो आप देखिए जो यह बात है ना जो भी कोई व्यक्ति धर्म की स्थापना करना चाहता है या धर्म क्या धर्म की बात करना चाहता है उसके लिए सर्वप्रथम आवश्यक है कि उसकी धर्म की व्याख्या क्लियर हो जिससे कि वोह लोगों को बता सके कि तुम्हारा इन नियमों को इन नियमों को मानना क्यों आवश्यक है तुम्हारे लिए अंततोगत्वा यही एक मात्र विकल्प है धर्म और उसके लिए आवश्यक है ईश्वर के अस्तित्व की स्थापना जो कि आप आपको प्राप्त नहीं हुआ हो सकता गायत्री परिवार ने इसकी व्यवस्था की हो मगर आपके आपकी नॉलेज में नहीं है तो आपको इस बात की नॉलेज रखनी चाहिए कि ईश्वर कैसे सिद्ध होता है जी तो जीव की चाह का वास्तविक विषय ही ईश्वर है सोते जागते उठते
00:40:22:22 बैठते सुख चयन सब में जो प्राणी मात्र है वह ईश्वर ही खोज रहा है और यदि कोई इस सत्य को कहने के बाद भी ईश्वर का खंडन करता है कि कोई इस दुनिया में सर्वशक्तिमान सत्ता है कि इस दुनिया में परम स्वतंत्रता है मैं नहीं मानता तो फिर हम यह कह सकते हैं उससे कि यदि तुम परम स्वतंत्रता को नहीं मानते हो तो तुम परम स्वतंत्रता को खोज क्यों रहे हो ठीक है ये बात अब हम लोग आगे चलते हैं अब हमें ये पता चल गया कि परम स्वतंत्र होना चाहता है जीव मात्र जिसके कारण जिसके
00:41:09:10 कारण परम स्वतंत्र होना चाहता है ईश्वर जिसके कारण यह जिके कारण परम स्वतंत्र होना चाहता है जिसके कारण ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध होता है ठीक है इसका अर्थ क्या है जी जी जी कि ईश्वर जो है वो परम स्वतंत्र है इसका अर्थ ये हुआ ना जी परम स्वतंत्र हा इसका अर्थ क्या है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है अवाद है ठीक है हां जी जी जी अब मैं आपसे पूछना चाहता हूं क्या गायत्री परिवार के द्वारा पूजित परिभाषित प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वह सर्वशक्तिमान है कि नहीं अब व स तो सर्वशक्तिमान
00:42:10:18 है आपने कहा कि वह साकार है नहीं देखो भगवान की दो रूप की उपासना होती है एक तो साकार ब्रह्म की एक निराकार ब्रह्म की अगर हम गायत्री परिवार के में चले जाए तो मां भगवती भगवान की मातृ रूप में उसकी उपासना होती अगर उसके मंत्रों को देखा जाए गायत्री गायत्री को तो उसमें स्पष्ट झलकता है कि उसमें किसी भी देवी देवता कुछ नहीं उस निराकार ब्रह्म की उपासना है जो जति स्वरूप है यानी कि जो ब्रह्म है वो सर्वप्रथम निराकार है फिर वो व्यक्त होता है माता के रूप में हां मा उसको मां के रूप में बजा गया
00:42:55:20 है मतलब अंततोगत्वा जो ब्रह्म है वह व्यवहार में ना आ सकने वाला है ना जो वाणी का विषय ना हो है ना जिसको शब्दों के द्वारा परिभाषित नहीं किया जा सकता अ व्यवहार में ना आ सकने वाला वो है फिर वो जी जी आपके अनुसार माता के रूप में प्रकट होता है जी जी ऐसा ही है हां अब उसको माता के रूप में बसते आ रहे है तो जैसा हमको मिला य बात तो सनातन सत्य है कि उसी को उसी के रूप में हम मानते आ रहे हैं और ये चल रहा है तो उसी का आध मैं बता नहीं नहीं मैं पूछ रहा
00:43:38:12 हूं हेलो जय श्री राम हां सुन रहा आपका वीडियो बहुत अटक रहा है भाई साब बड़ी दिक्कत आ रही है नहीं भाई नेटवक कम जदा ज्यादा होता है किसी किसी समय नहीं तो ऐसे कैसे चर्चा करें आपसे आपका तो रुक रहा है ना मामला हा बात क पटी पर हो रहा
00:44:17:10 है अभी आया आवाज जी आ रही है आवाज जी जी जी तो आपका कहने का मतलब परमात्मा सर्वप्रथम उसका एक व्यवहार में ना आ सकने वाला रूप है और उसके बाद फि व स्वयं को माता के रूप में व्यक्त करता है मां के रूप में भी व्यक्त है पिता के रूप में भी व्यक्त है समय के अनुसार [संगीत] से यानी कि यानी कि माता और जो पिता यानी कि शिव और शक्ति में कोई भेद नहीं है कोई भेद नहीं कोई अत भेद नहीं है देखो शिव शब्द से [प्रशंसा] श मुझे ऐसा बताया गया था मुझे ऐसा बताया गया था कि आप भेद मानते हैं आप यह मानते हैं कि भगवती ही है और जो बाकी ब्रह्मा विष्णु महेश और गणेश जो रूप है भगवान का
00:45:21:14 वह जो है वोह ब्रह्म ब्रह्म स्वरूप नहीं है तो आप लोग हमारे साथ अगर कुछ ऐसा होता है अनुचित या अप्रिय तो आप लोग जान जाइएगा कि किसने कराया है और क्या है हो सकता है मैं आपको बता भी ना पाऊ है ना तो इसलिए
00:46:00:01 आप लोग आप लोगों पहले से ही मैंने आगाह कर दिया है कि ऐसा ऐसा हो रहा है आज ही हमको एक धमकी दी गई है इस तरह की कि हम जो है वो भी खुले आम दी गई है सड़क पर दी गई हैया भया क्यों हा धमकी दे रहे लोगों को क्या हो रहा हा बताऊंगा आपको ब जी तो हमको ये बताया गया था कि आप भगवती में और ब्रह्म के जो अन्य पांच रूप है जिनकी व्याख्या वेदों में भी हुई अन्य नहीं अन्य चार रूप है जो जिनकी व्याख्या वेदों में भी हुई है पुराणों में भी हुई है आप भगवती में और उनमें भेद मानते हैं मर अभी आप कह रहे हैं कि नहीं एक ही है व कभी भगवती है कभी भगवान जी जी जी नहीं य सनातन सत्य है लेकिन मैं इसमें शिवम भैया को मैं यह बताया था कि पिता और माता एक ही तत्व है लेकिन वर्चस्व में मां का स्थान सपरी है सभी जगह पर मां का स्थान सपरी है य बताया था उस भैया को पिता जैसे कि अभी आपने बोला स शक्ति में क्या अंतर है अब हम स संप्रदाय के देखा जाए
00:47:15:01 तंत्र संप्रदाय से आप उस उस य को स्वाध्याय की नहीं है तो मेरा एक ही गुरु नहीं एक और गुरु है स्वामी निखिलेश्वरानंद जी उसके गुरु थे दादा गुरु सच्चिदानंद जी तो मैं दो पंथ से दीक्षित हूं मैं तो मैं अभी एक अब शिव शक्ति के संबंध आ गए तो ये एक अलग स्वरूप में जाता है तो मैं थोड़ा इस आपका शव संप्रदाय है शैव संप्रदाय जो है आपका वो वर्ण को जन्म से मानता है या कर्म से मानता है वर्ण को अब देखो जी इंसान मैं सबसे पहले एक बता दूं मैं ज्यादा उस मैटर पर नहीं जाऊंगा ये मैं आपको बस यह पूछ रहा हूं सव संप्रदाय से आप दीक्षित है वह वर्ण को जन्म से मानता है या कर्म से मानता है सबसे पहली बात जन्म जन्म सित नहीं होता क्योंकि कर्म से सब चीज होता है क्योंकि तुलसीदास बाबा लिखते रामचरित्र मानस आप पता नहीं क्यों समझाने में जा रहे हैं मुझे वह चैप्टर ही अलग है मैं आपसे जनरल इंफॉर्मेशन मांग रहा हूं जो सव संप्रदाय है वो जन्म जन्म से मानता है वर्ण को या कर्म से मानता है मैं पूछ रहाय नहीं पूछ रहासा ऐसा वास्तविकता
00:48:30:04 में सही है या गलत है व बाद की बात है देखो भैया अब जी चीज में मैं जानता हूं जो जैसा मुझे मिला है ज्ञान वो तो कर्म संप्रदाय काप क्या नाम है संप्रदाय का नहीं नहीं वो श शव संप्रदाय जो शिव की उपासना करते व शव संप्रदाय शक्ति की उपासना कर शक्ति शक्त संप्रदाय गणपति की उपासना गणपत होता है और स उपासक मतलब मतलब किसी परंपरा से दीक्षित नहीं है आप नहीं नहीं ऐसा नहीं है मैं एक एक है और जो बताया दूसरे कैटेगरी बताया ना उसका भाग अलग खंड है उसमें ज्यादा नहीं कि आपने शि और शक्ति के संबंधित जो अभी चर्चा होगा तो उसी विषय पर मैंने उस चीज को लिया था अच्छा चलिए जैसे कीने मैं ये पूछ रहा हूं की जो आपने कहा कि गायत्री माता ही सर्वोपरि है
00:49:45:04 मतलब भगवती को ही सर्वोपरि रखा गया है है ना यह कहा आपने तो किसी भगवान के किसी रूप का सर्वोपरि होना या ना होना यह किस बात पर निर्भर करता है म सपरी होना ना होना किस बात पर निर्भर करता है देख भगवान तो को अच्छा जाता मैं उसी जगह पर चलो अभी आया
00:50:27:24 आवाज सा पा है तो यह जा चुके हैं फिर से आएंगे मेरे ख्याल से आशा करते हैं अभी तक की चर्चा आपके लिए कुछ लाभदायक रही हो मेरा आग्रह है कोई भी इस तरह से अगर आने वाला है तो वह हर महादेव पाड़ी जी हर हर महादेव पहाड़ी जी डेली अपने वीडियोस के माध्यम से प्रतिकार कर रहे हैं रामपाल के ज्ञान का अज्ञान का सॉरी तो आप उनको फॉलो अवश्य करें टी आर पाड़ जी को मेरा आग्रह है जो भी इस तरह से चर्चा करने के लिए आते हैं तो वह एक अच्छे इंटरनेट की जगह पर हो तभी आए उनको जब मतलब ये सुनिश्चित हो जाए कि यहां पर इंटरनेट अच्छा आता है वहीं आकर के जुड़े अगर जहां पर वह है वहां पर इंटरनेट अच्छा नहीं है तो वह ना जुड़े और अगर उन्हें
00:51:42:27 जुड़ना उनके लिए महत्त्वपूर्ण है तो वह अपने घर से निकल कर के उस जगह जाएं जहां पर इंटरनेट अच्छा हो फिर वहां से वो जुड़े मेरा आग्रह है इस तरह से क्या होता है समय सबका खराब होता है और दर्शकों को भी वो कंटेंट नहीं मिल पाता है जो जिसके लिए व आए हैं देखने के लिए जी पुष्पदंत जी बताए बताइए जी भैया बोलिए अभी जो चर्चा चला शिव और शक्ति ठीक है अगर आपने ये कहा कि कहीं ना कहीं शक्ति सर्वोपरि है जी जी कहीं ना कहीं शक्ति सर्वोपरि है तो जी जी कहीं ना कहीं शक्ति जो सर्वोपरि आप कह रहे हो तो मैं आपसे पूछ रहा हूं कि भगवान के किसी रूप को सर्वोच्च मानने अथवा ना मानने का क्या आधार है आपका ना मान इसमें ना मानने कोई विषय ही नहीं तो माना ही जाएगा इसको क्योंकि
00:52:58:02 वो भगवान सर्वशक्तिमान है चाहे वो मातृ रूप में हो या पिता के रूप में हो तो फिर आप ही तो कह रहे हो कि कहीं ना कहीं वो सर्वोपरि है आप भेद कर रहे हो ना थोड़ा सा व मैं समझ रहा हूं आपकी अनन्य भावना है आप भगवती में सबको देखो आप भगवती भगवती को ही सब में देखो और सबको भगवती में देखो यह तो बात सही है मगर जब आप ऐसे कहने लगेंगे कि भगवती कहीं ना कहीं सर्वोपरि है तो यहां आप की जो अपनी जो पर्सनल मनो भावना है व आप हावी कर रहे हैं सनातन सिद्धांतों पर समझ रहे हैं अच्छा जैसे मुझे मेरी माता इस दुनिया में मेरी माता जैसा कोई नहीं है इस दुनिया में ये मेरे लिए मेरी मेरी मेरा अनन्य का भाव है यह सत्य नहीं है बहुत ऐसी माएं होंगी जो अपने बच्चों के लिए बहुत बहुत प्यारी होंगी मगर मेरी अन्यता है कि मेरी मां जैसा कोई नहीं है मैं तो यही ही कहूंगा वास्तविकता भले ही है नहीं और भी कुछ माए ऐसी है दुनिया में जिन्होंने अपने बच्चों के लिए बहुत त्याग किया है है ना अपनी व हा तो अभी हम जो वो
00:54:13:03 जो आपका व्यक्तिगत जो वो है ना अनंता अन्यता के लिए कि सब में मां को देखो और सबको मां में देखो है ना वो तो ठीक है मगर जब आप ऐसे खंडन करेंगे कहीं ना कहीं मां सर्वोपरि है और जो पिता है वोह कहीं ना कहीं थोड़ा समझ रहे हैं तो फिर मुझे वहां पर आपको पूछना पड़ेगा कि आपका मां को सर्वोपरि और पिता को थोड़ा सा नीचे निम्न मानने का आधार क्या है किस आधार पर कहते
00:54:53:15 हैं नहीं निम्न की बात नहीं है माता देखो मां जो एक कार्य कर सकता है वह पिता पिता नहीं करता अगर सांसारिक दृष्टि से देखा जाए अभी मैं एक चीज आपको बताऊ एक बुक जो कार्य पिता कर सकता है व मा भी नहीं कर सकती सक बातो पर चलते हम लोग अगर मन की बातें करेंगे तो उसम तो काफी इधर उधर होते रहेंगे आप सैद्धांतिक बातें बोलिए जी मतलब आपको पढ़ाई गई हो जो आपको शास्त्रों में पता हो आप उसके आधार पर बात करिए मन के जो तर्क होंगे तो उस पर हमारा खामखा बहुत लंबा टाइम जाएगा उससे कुछ निचोड़ आना नहीं है आपको जो सिखाया गया है समझाया गया है पढ़ाया गया है सिद्धांत गायत्री परिवार के आप उनको रखिए जी देखो येर के सिद्धांत है त्रिदेव और त्रिदेव और भगवती इसमें कोई अंतर भेद अब मैं एक बात आपको बता रहा हूं आप आप त्रिकाल संध्या करते हैं
00:56:02:24 क्या आप त्रिकाल ब्रम संध्या करते हैं जी अच्छा तो त्रिकाल ब्रह्म संध्या करते है तो उस संध्या बंधन में किसकी संध्या बंधन करते हैं आप मैं भाई साहब आप क्या कर रहे हैं ना आप पहले अपने क्लेम को बता नहीं रहे हैं आप सीधे समझाने लग रहे हैं समझ नहीं रहे आप मेरी बात आपसे पूछ रहा हूं मैं आपसे ये पूछ रहा हूं कि आप मुझे ये बताइए कि आपका किसी को सर्वोपरि मानने अथवा ना मानने का आधार क्या है देखो वो आधार पहले क्लियर करिए कि जैसे आपने त्रिकाल संध्या के बारे में बोला तो आप यह बोलिए कि त्रिकाल संध्या में जिसकी पूजा होगी वो ही सर्वोच्च ब्रह्म है तो यह मेरा आधार है माता को सर्वोपरि मानने का ऐसा कुछ क्लेम करिए तब आप त्रिकाल संध्या में पूछिए कि आप किसकी पूजा करते हैं पहले अपना क्लेम तो बताइए कि मेरा आधार माता को सर्वोपरि मानने का मेरा आधार यह है क्योंकि संध्या बंदन जो है सभी के लिए उसमें माता की पूजा
00:57:18:03 होती है इसलिए मैं यह मानता हूं कि माता ही सर्वोपरि है अब मैं यही चीज आपको बता रहा बड़े भैया और आपने उसको बोल दिया जैसे कि आप हम त्रिकाल ब्रह्म संध्या करते हैं ठीक है कोई कोई लोग एक ही संध्या आप क्लेम तो करिए पहले आप पहले सिद्धांत बताइए कहिए कि त्रिकाल संध्या में क्योंकि माता की पूजा होती है इसलिए मैं मानता हूं कि माता की पूजा ही सर्वोपरि है तो मैं आपको यही बात आपको बता रहा हूं कि त्रिकाल संध्या में जो भगवती की उपासना होती है ब्रह्म विद्या सावित्री की याने गायत्री की उसमें देखो सुबह हम जब वंदन करते हैं इसका आप नित्य आप गलत बात कर रहे हो मैं आपको कह रहा हूं पहले आप अपना आधार क्लियर करिए कि मैं इसलिए मानता हूं माता सर्वोपरि है वो लाइन बोलिए तो मैं आपसे जब पूछू अब उस लाइन को आप्लोर करिए तब आप एक्सप्लोर करके बताइए अभी आप पहले अपना क्लेम तो करिए हो स आपका क्लेम ही गलत साबित हो जाए चलो ठीक है मैं अपना अपना क्लेम अपना
00:58:33:08 बात रख रहा हूं ठी देखो से करके उसम ले जाता हूं फिर उसके बाद जो आपके पास है वो आप बताइएगा जिस मां के गर्भ से हमारा जन्म होता है व मा तीन कार्य करता है जाके वापस आइए आवाज नहीं आ रहा है अटक रहा है ठीक है ठीक है ठीक
00:59:08:14 है हम देख लेते हैं एक लास्ट बार देख लेते हैं वो लिंक दे दीजिए हां आप अपना क्लेम बोल दीजिए कि मैं जैसे मैं मेरे से कोई पूछे मैं मान लीजिए दो मिनट के लिए कि मैं राम को ही सर्वोपरि मानता हूं तो अब मुझसे कोई पूछ रहा है कि राम को सर्वोपरि आपका किसी को आपका किसी को सर्वोच्च अथवा सर्वोच्च सर्वोच्च मानना अथवा ना मानने का आधार क्या है या मुझसे कोई पूछे कि राम को सर्वोच्च मानने का आधार क्या है तो अब मैं पहले ये बताऊंगा कि देखो श्री राम ने श्री राम
01:00:23:16 ने धनुष्य से रावण को मारा तो इसलिए मेरा आधार यह है कि जो धनुष्य रावण को मारेगा वही सर्वोच्च होगा तो यह मेरा आधार है राम को सर्वोच्च मानने का ठीक है उसके बाद कोई पूछे अच्छा राम ने रावण को मारा कहां लिखा है क्या हुआ है वह बात की बात है मैंने आपको अपना क्लेम बताया कि भाई जो रावण को धनुष बाण से मारेगा वो वही सर्वोच्च होगा यह मेरा आधार है तो ऐसे आप अपना आधार बताइए मेरा आधार है श्रीमद् देवी भागवत महापुराण
01:01:05:07 से आप फिर प्रमाण पर आ रहे हैं आप बोल लीजिए अपनी बात बोल लीजिए मैंने आप आ प्रमाण सुनिए मैंने आपसे प्रमाण मांगा क्या अभी मांगा है क्या आप प्रमाण बाद में बताइए मुझे आप अपनी बात तो कहिए वो सिद्धांत क्या है कि जो ऐसा होगा वो सर्वोच्च होगा जो ऐसा करेगा वो ये होगा वो सिद्धांत तो बता दीजिए फिर मैं अगर मांगू प्रमाण के संबंध में मुझे प्रमाण दीजिए तो प्रमाण दीजिए आप सुनो मैं मां को इसलिए प्रमाण दे रहा हूं कि हम निजी जीवन में जब हमारा पादु मां के गर्भ से हमारा जन्म होता है तो मां ही तीनों का कार्य करता है पालन भी करता है पोषण भी करता है और हम मल मूत्र में रहेंगे तो उस मल मूत्र को धो करके उसको शुद्ध करके उसका संघार भी करता है वो इसलिए मा को मैंने सर्वोपरि माना है पिता को भी उसके ऐसा बात नहीं कि मैं पिता को नेगलेक्ट कर रहा मा और पिता यानी की अब मैं आपकी बात को समझने का प्रयास करता हूं आपका कहना है
01:02:11:12 कि क्या कहते हैं क्योंकि एक बच्चे के जीवन में मां की उपयोगिता ज्यादा होती है इसलिए जो भगवान का ये जो स्वरूप है भगवती वाला वो सर्वोच्च है और अन्य स्वरूप थोड़े से डाउन है नहीं नहीं वैसा नहीं कह रहा हू डाउन की बात नहीं है मैं यहां पर जो मां की महत्वता है मैं उसम कभी नहीं मैं पहले भी आपको बताया कि मैं ब्रह्म में इसलिए मैं आपको पहले पूछा कि त्रिकाल संध्या में त्रि गायिक होता है एक ब्रह्म रूप में मध्यान में विष्णु रूप में और शाम के समय में शिव स्वरूप में होता है लेकिन वही वह त्रिगुणात्मक है और तीनों के गुण रह कर के तीनों का कार्य को संभालने की सामर्थ्य मां में है यह बता रहा हूं वही तीनों त्र गुणात्मक है उसी को हम ब्रह्मा भी कहेंगे सुब सुबह के संध्या काल में मध्यान काल में भाई साहब आप ना बात को रहे हो मेरा प्रश्न समझ नहीं पा रहे आप पहले मुझे ये बताइए कि आपका किसी को सर्वोच्च मानने पहली तो यह बताइए कि सर्वोच्च कोई है कि नहीं है सब बराबर है या थोड़ा बहुत अंतर है अगर अंतर है कोई सर्वोच्च है तो उसको सर्वोच्च मानने का कारण क्या है वो हिंदी में
01:03:26:12 बोल दीजिए भाई साहब एक बार मैं यही तो मैं आपको बता रहा हूं जी हां आप ये बता रहे आप ये बता रहे हो सुनिए आप ये बता रहे हो कि मां ही तीनों के रूप में कार्य करती है आप मुझे यह बताइए कि क्योंकि भगवती ही ब्रह्मा विष्णु महेश बनके कार्य करती है शास्त्रों के अनुसार इसलिए मैं मानता हूं कि भगवती ही सर्वोच्च है यह क्यों नहीं बोल पा रहे आप मैं तो वही तो बता रहा हूं भैया श की बात ले रहा आध आप वो आधार बोलिए कि जो जो जो सृष्टि का उत्पत्ति स्थिति और समार करता है वही सर्वोच्च होता है तो मां भगवती ही ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में जो सृष्टि है उसका उसका क्या कहते उत्पत्ति स्थिति और समार करती है इसलिए मां भगवती सर्वोच्च है य आप ना बोल करय बताने लगते हैं ये ठीक है नहीं नहीं हा यही बात है यही बात है जो आप बोल रहे हो यही बात है यही बात है यही बात है यही बात है कि मां भगवती के रूप में ही जो ईश्वर है वोह उत्पत्ति स्थिति और समार करता
01:04:41:26 है मतलब ये ब्रह्मा विष्णु महेश का रूप मां भगवती ही धारण करती है और कोई नहीं इसलिए इसलिए इसलिए मां भगवती ही मां भगवती ही मे लिए सर्वोच्च है ठीक है जी जी जी हा भैया अगर मैं अब ये जो बात है कि मां भगवती ही ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में ये कार्य करती है सारा सृष्टि का संचालन तो ये बात आप कहेंगे कि आप ये बात शास्त्रों में लिखी है भागवत में लिखी है देवी भागवत में लिखती है कई जगह लिखी है ठीक है ठीक है ना ठीक है ठीक है हा हा हा आपका आपका माता को सर्वोच्च मानने का कारण यही है कि शास्त्रों के अनुसार शास्त्रों के अनुसार मां भगवती ही ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में सारा जगत का पालन समार उत्पति सब करती है ठीक है देख इतनी सरल लाइन थी आप बोल ही नहीं पा रहे इतनी देर से जी जी अब मैं बताता हूं आपको शास्त्रों में यह अगर लिखा है कि माता भगवती ही ब्रह्मा विष्णु महेश का रूप धारण करती है तो क्या यह नहीं लिखा है कि शिवजी ही ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश का रूप धारण करते
01:05:57:08 हैं यह बात ये बात भी सर्पी है इसमें कोई संदेह नहीं है तो फिर अंतर क्यों कर रहे हैं यानी कि एक मिनट यानी कि यानी कि यह आधार नहीं माना जा सकता जो आपने कहा कि शास्त्रों के अनुसार मां भगवती ब्रह्मा विष्णु महेश का रूप धारण करती है यह आधार नहीं माना जा सकता क्योंकि शास्त्रों के ही अनुसार जैसे मां भगवती से अभी सब कुछ प्रकट हो रहा है वैसे ही शास्त्रों के ही अनुसार शिवजी से भी सब कुछ प्रकट हो रहा है शास्त्रों के ही अनुसार विष्णु से ही सब कुछ प्रकट हो रहा है यानी कि अगर आप इन दूसरे वालों को भी मानते हैं जहां पर मां भगवती प्रकट हो रही है शिव से ठीक है अगर आप दूसरे प्रमाणों को भी मानते हैं तो इसका मतलब इसको आधार नहीं मान सकते आपका मां भगवती को सर्वोच्च समझने का तो वह आधार अब क्या है अब क्यों मानते हो जब दूसरे प्रमाण भी हमें हमारे पास है तो फिर जो माता का रूप है और शिव का रूप है उसम भेद क्यों करते हो देख मैंने इसमें भेद नहीं ये तो एक ही मैंने पहले बताया भेद की बात नहीं है ना इसमें मैं तो भेद क बात आप ही तो कह रहे हो सर्वोच्च है कहीं ना कहीं
01:07:12:08 उनका ज्यादा वो है वो मैं समझ रहा हूं आपकी वो भक्ति है उनके लिए मगर उनकी भक्ति को आप सिद्धांत के रूप में थोप मत अगर थोप तो दिक्कत जी हमारा एक भाव है जैसे कि हम देखे हैं तो हम सांसारिक दृष्टि देखते हम पुराण की दृष्टि से नहीं देखते पिता है मां है घर में ठीक है सब कुछ तो आधार पिता क्या है संसार की ओर जो भी कार्य करना होता है कमाना व माना मां घर में रहती बालक का पालन पोषण करती है भोजन कराती है तो इसलिए कहीं भी जाए जैसे कि हमारे सनातन धर्म में भी कहावत है मातृ देवो भवा पितृ देवो भवा आचार्य देव भवा अतिथि देवो भवा लेकिन मा का आता है सबसे पहले इसीलिए मां के स्थान को मैं सर्वोपरि मानता हूं मैं किसी परि चज को नहीं थता मैं जिद नहीं करता इसके विषय देखि आप यहां जब हम लोग धर्म की बात करने बैठे हैं जब हम कहीं से शास्त्रों की मर्मज्ञ संस्था से जुड़ने की बात कर रहे हैं तो आप अपने व्यक्तिगत तर्क मत दीजिए आपने कहा पुराणों से नहीं वेदों से नहीं तो मैं आपको एक प्रमाण दे देता हूं व्यक्तिगत तर्क अमान्य ब्रह्म सूत्र
01:08:27:14 में दो एक 11 में व्यक्तिगत तर्क अमान्य है अब पहले तो मेरा आधार सुन लीजिए किसी को भी सर्वोच्च मानने और ना मानने का ठीक है जो हमारे शास्त्र है जो हमारे श्रुति शास्त्र है उनके द्वारा भगवान के किसी भी रूप को यदि मोक्ष दायक कल्याणकारी कह दिया गया जीवन मृत्यु से परे ले जाने वाला कह दिया गया तो वो रूप हमारे लिए सर्वोच्च है तो वो रूप शिव को भी कहा गया है वो रूप विष्णु को भी कहा गया है ये ये एकमात्र आधार है हमारे शास्त्रों ने किस रूप को मोक्ष दायक कहा भगवान के किस रूप को मोक्ष दायक कहा ये एकमात्र आधार है किसी को स्वीकार करने का सर्वोच्च रूप में परम ब्रह्म के रूप में ठीक है अब दूसरी बात य आ जाती है कि आपका कहना है कि मैं अपनी प्रैक्टिकल लाइफ में देखता हूं प्रैक्टिकल जो आपका जो आपने जो तर्क दिया उसमें मैं आपका खंडन करूंगा मगर पहले मैं आपको बता दूं खंडन नहीं करूंगा मैं समझाने का प्रयास करूंगा आप तो मित्र है खंडन की कोई बात
01:09:42:15 नहीं है तो हा तो क्या है उसमें कि जब आप ये जब आप यह कहते कि नहीं मैं शास्त्रों नहीं मैं तो सांसारिक दृष्टिकोण से मैं मानता हूं ठीक है तो वहां पर मैं आपको शास्त्र की एक बात बताता हूं ब्रह्म सूत्र दो 11 वहां लिखा है व्यास जी ने व्यक्तिगत तर्क अमान्य शास्त्र के विरोध में यदि आप व्यक्तिगत तर्क दे रहे हैं ये मैं मैं आपको शास्त्र बोल रहा हूं कि 16 दो में लिखा है शिव की भक्ति मोक्ष दायक है तो शिव हो गए सर्वोपरि अब यहां पर जब मैंने आपको स्थिति बोल दी तो आप कह रहे हैं सांसारिक दृष्टिकोण से मैं मानता हूं कि वो है है ना तो यहां क्या हुआ व्यक्तिगत तर्क क्या हुआ व्यक्तिगत तर्क आप दे रहे हैं तो व्यक्तिगत तर्क अमान्य है सनातन धर्म ग्रंथों के आधार पर दो पांच व्यास स्मृति और ब्रह्म सूत्र दो एक 11 व्यक्तिगत तर्क अमान्य दूसरी बात अब मैं कह रहा हूं अब आपके प्रैक्टिकल जो आप बात तर्क दिया है उसका भी जवाब ले लीजिए आपने कहा कि कहीं ना कहीं वो मां
01:10:57:18 है वो पालन पोषण और वो सब कर रही है इसलिए वो सर्वोच्च है और मैं अगर कह दूं कि वो जो पिता है जो बाहर से अन्न की व्यवस्था कर रहा है मां की भी वो मां के लिए भी कर रहा है अन्न की व्यवस्था कि तुम घर में बच्चे का भरण पालन पोषण करो और तुम्हारा भी भरण पालन पोषण पालन की व्यवस्था मैं करूंगा गेहूं मैं लाऊंगा चावल मैं लाऊंगा तो मैं कह रहा हूं वो सर्वोच्च क्यों नहीं वह माता के बराबर क्यों नहीं जो मां की भी भरण पोषण की व्यवस्था कर रहा है भाई मां अपना कर रही है और बच्चे का कर रही है पिता तो बाहर से लाकर के मां के लिए भी कर रहा है और वही करा हुआ माता के माध्यम से बच्चे तक भी पहुंच रहा
01:11:46:07 है यह तीन प्रकार के हो गए जी जी तो इसलिए मेरा मेरा कहना है कि आप अपनी भक्ति करिए माता के प्रति मगर आप इसमें यह भेद बुद्धि का प्रचार ना करें माता ही सब में है और सब माता में है इस दृष्टिकोण को अपनाए बड़ा छोटा ना करें
01:12:26:26 जैसे प्रयागराज में एक आलो बाग में आलो माता का मंदिर है तो वहां पर मैं साय काल में आरती हो रही थी वहां पहुंचा तो माता के दर्शन करके इतना भाव विभोर हो गया कि इतना भाव बोर हो गया कि आंसू निकलने लगे क्यों निकलने लगे क्योंकि वह माता में ही मुझे राम दिखने लगे मेरे राम इतने सुंदर रूप में यहां पर प्रकट हो गए तो सबको मैंने माता में देखा और माता को मैंने सब में देखा ठीक है और यह बात भी गीता में लिखी हुई है भगवत गीता तो यह तो रही य बात अब मुझे आप यह बताएं कि जिस कारण से आप अब तक यह मान रहे हैं कि ऐसा है वैसा है तो जाहिर सी बात है गायत्री परिवार के द्वारा आपको ये सिखाया जाता है हां यह मेरा व्यक्तिगत है उससे उससे नहीं सिखाया गया है यह बात गाय परिवार से आपको य नहीं सिखाया गया नहीं
01:13:35:12 नहीं नहीं उसमें कोई अंतर भेद नहीं ये मेरा अनुभव के आधार पर आपको बताया ये चीज जो अपनी व्यक्तिगत वर्तमान में बताया नाय मेरा अनुभव है वो अनुभव अनुभव को काट दिया है शास्त्रों ने काट दिया व्यक्तिगत तर का मान्य होते हैं आप शास्त्रों के विरोध में यदि आप शास्त्रों को मानने वाले हैं और शास्त्रों के विरोध में व्यक्तिगत तर्क दे रहे हैं तो आप सिरे से अमान्य है आप तो यहां नास्तिक सिद्ध हो जाएंगे क्यों क्योंकि जो वेद जो वेद को नहीं मान जो वेद को नहीं मानते जो वेद को नहीं मानते हैं वो जो वेद का खंडन करते हैं वह सनातन परिभाषा के अनुसार नास्तिक मान लिया जाता है क्योंकि वेद का खंडन करने का मतलब है सर्वशक्तिमान सत्ता का खंडन करना
01:14:30:19 ठीक है जी जी अब अब मैं ये पूछ रहा हूं कि चलिए अब अब आई गए तो थोड़ी सी और जानकारी कर ले जी जी जैसे की आपने कहा कि आपकी दीक्षा हुई है गायत्री परिवार के द्वारा जी यानी कि आपको गायत्री मंत्र प्राप्त हुआ है गायत्री परिवार के द्वारा ठीक है हा जी जी गायत्री परिवार तक य जो गायत्री मंत्र आया कैसे अब ये तो गुरु परंपरा वाला है उसके गुरु ने उसको दिया होगा तब से तब उसी से आया है गुरु के कौन है आपके गायत्री परिवार में गुरु कौन है अब गुरु पंडित श्री राम शर्मा चार्य को मानते हैं उनके गुरु वही उनके गुरु उनके हमारे दादा गुरु जी थे सर्वेश्वरा अंद जी उनके गुरु अब उसके बारे में मेरे को जानने वहां तक मेरा पहुंचने इत नहीं बता सकता मैं यानी कि आपको आपकी पीछे की 10 पीढ़ियां भी नहीं पता है नहीं मैं भाई जितना मैं जानता हूं उतना बताऊंगा भाई अब क्या कहीं पर लिखा है कि पीछे की 10 पीढ़ियां 12 पीढ़ियां 20 पीढ़ियां इतनी ये
01:15:42:08 है ऐसा नहीं अब वैसा तो मैं अभी पढ़ा नहीं है कोई बुक तो पढ़ा नहीं है तो मैं नहीं इसके बारे में बोल ही नहीं सकता इसका मेरे पास कोई उत्तर ही नहीं है आपको पता है कि सैद्धांतिक धरातल पर श्री राम शर्मा चार्य ने किसको गुरु माना है अब उसके बारे में स्वयं हमको बताया जाता है कि दादा गुरु जी थे ना सर्वेश्वरा नंद जी उन्हीं से उन्होंने गायत्री मंत्र की दीक्षा लिया था और दीक्षा लेकर के पुचन करके उसने गायत्री का उसके आज्ञा अनुसार प्रचार प्रसार किया था ऐसा हमको बताया पता है कि जो जो राम जो राम शर्मा जी हैं वो शंकराचार्य को मानते थे सैद्धांतिक धरातल पर गुरु रूप में इसके बारे में मेरे को नॉलेज नहीं कुछ नहीं बोल सकता मैं उन्होंने बुक लिखी है आदि शंकराचार्य अच्छा
01:16:44:00 अच्छा तो उन्होंने आदि शंकराचार्य को गुरु रूप में स्वीकार किया है दूसरी बात ये है कि आपको यदि यह नहीं पता है कि य मंत्र आपके गुरुओं के पास कहां से आए दो गुरु का नाम आप ले रहे हैं तो इसका मतलब हम यह मानना पड़ेगा कि जिनको पता है कि गायत्री मंत्र उनके पास कहां से आया उन्हीं कहीं से कॉपी करके आपके गुरुओ ने गायत्री मंत्र आपको दिया यह मानना पड़ेगा ना क्योंकि आपको तो पता नहीं है कहां से आया परंपरा क्या है आपको पता है आपकी आपको कैसे पता जोन आपको कैसे पता कि जो ज्ञान आप को दिया जा रहा है वेद के अर्थ के रूप में वो वही ज्ञान है जो ईश्वर ने वहां दिया था शुरुआत में हम क्योंकि आपको आपके गुरुओं का नाम तो पता ही नहीं है अब दो जने को जानते हैं जी ज्यादा तो जानते नहीं तब क्या क्या बताएं आपको तो इसका मतलब आपका जो गायत्री मंत्र का अर्थ जो आप ले रहे हैं वो कहां से लिया है आपको नहीं पता है वो गुरुओं से आया है परंपरा से आया है या आपने मन से दे दिया है आपको नहीं पता है नहीं ये तो गुरु परंपरा ही बताया जाता है अरे गुरु परंपरा क्या है
01:18:00:06 आपकी तो वही वही तो बताते जो जो गुरु उसके गुरु ने दिया उसके गुरु ने उसको दिया वही स वो परपरा क्या है देखिए देखिए गुरु ने उसको दिया तो मैं जिन गुरुओं का अस्तित्व है हमें मालूम है जो राम शर्मा चार्य से बहुत पुराना है वो मैं आपको बता दे रहा हूं आदि शंकराचार्य जी का अस्तित्व श्री राम शर्मा चार्य से करीब ई हजार वर्ष पुराना है ठीक है अच्छा जी उनका अस्तित्व सिद्ध है और इसके साथ ही साथ श्री राम शर्मा चार्य सैद्धांतिक धरातल पर आदि शंकराचार्य जी को ही अपना गुरु मानते थे यह मेरे पीछे य पंचदशी रखी है पंचदशी इस पंचदशी का जो अनुवाद करने वाले हैं वो है स्वामी प्रखर प्रज्ञानंद सरस्वती पंचदशी किसका शास्त्र है पता है आपको किसका शास्त्र शंकराचार्य जी का हा शंकराचार्य कौन से विद्यारण्य स्वामी चंगेरी के शंकराचार्य थे वो तो इसमें उनको गुरु रूप में माना है
01:19:15:09 आपके जो स्वामी प्रखर प्रज्ञानंद सरस्वती जी है उन्होंने और गुरु रूप में माना है तभी तो उनके शास्त्र की व्याख्या की है ठीक है जी जी मैं आपको बता देता हूं देखिए ये इसमें इनके इनके गुरु का नाम भी लिखा है मंत्र दक्षा हम ये देखिए गायत्री जी जी लिखा है हां हां हां वो थोड़ा हां आपके जो ये है ये जो प्रज्ञानंद सरस्वती ये राम शर्मा जी से दीक्षित है गुरु है ना गायत्री परिवार से इनका सीधा-सीधा संबंध ठीक है तो सैद्धांतिक रा पर इनको गुरु इन्होंने गुरु किसको माना
01:20:03:04 है शंकराचार्य ठीक है जी जी अब मुझे आप एक बात बताइए कि क्या शंकराचार्य जी ने वर्ण को कर्म से माना है अब मैं शंकराचार्य के बारे में ज्यादा नहीं जानता तो इसको मैं नहीं बोल सकता आपको जानना चाहिए सुनिए इसलिए जानना चाहिए इसलिए जानना चाहिए आपको आपको इसलिए जानना चाहिए कि आपको यह कह कर के ज्ञान दिया जा रहा है कि जो गुरु परंपरा से आया है वही हम आपको दे रहे हैं ठीक है आपको यह पता चल गया कि भाई गुरु कौन थे पुराने तो अब आपको जो ज्ञान दिया जा रहा है वो पुराने गुरुओ से मैच हो रहा है या विरोध कर रहा है अगर विरोध हो रहा है जितने अंश में विरोध है उतने अंश में आपको इनका ज्ञान क्यों मानना चाहिए शंकराचार्य जो वर्ण है उसको जन्म से नहीं जन्म से नहीं मानने वालों का विरोध करते हैं शंकराचार्य शंकराचार्य जो कर्म आधारित वर्ण
01:21:18:07 व्यवस्था है वो नहीं मानते क्योंकि वो व्यवस्था व्यवस्था ही नहीं है अगर उस पर बात करेंगे बहुत देर हो जाएगी मगर अभी बात मैं कर रहा हूं अगर गायत्री परिवार के द्वारा जो वर्ण है उसको कर्म से माना जाता है तो इसका अर्थ है कि गायत्री परिवार के जो लोग हैं वह गुरु का विरोध कर रहे हैं गुरु विरोध है और गुरु विरोध के लिए बहुत अवस्था है बहुत सारी व्यवस्था पुराणों में शति शास्त्रों में भी है कि जो गुरु में और भगवान में भेद करे भेद बुद्धि रखे सब विरोध करने पर यह है वो है बहुत सारे दंड है तो क्या हुआ कहने का
01:22:11:18 [संगीत] अर्थ भाई य स्क्रीनशॉट लेकर दिखा दीजिए जरा यह देखिए धमकी स्क्रीनशॉट लेक दिखा दीजिए तो कहने का अर्थ आदि शंकराचार्य जी ने वर्ण को कर्म से नहीं माना है क्योंकि कर्म से मानने पर वो व्यवस्था ही नहीं होगी और हम लोग किसी और दिन इस बात का रख लेंगे विवेचना आप ही आ जाइएगा मगर अच्छी जगह इंटरनेट हो तब ठीक है किसी और वर्ण ज से या कर्म से तो आप आ कर के उसम आप काउंटर करिएगा फिलहाल आपको मैं बता दूं आदि शंकराचार्य ने वर्ण को कर्म से नहीं माना है जन्म से माना है ठीक है तो यहां पर इतनी इंफॉर्मेशन के अनुसार अगर यदि आप बता रहे हैं कि गायत्री परिवार जो है वो क्या कहते हैं कर्म से मानता है तो इतने अंश में गायत्री परिवार गुरु विरोधी है यानी कि अधर्म
01:23:12:13 है ठीक है बाकी आपके साथ कोई हमारा ऐसा कोई वैचारिक खास अंतर है नहीं आप जो है आपने बताया कि वो शिवो शक्ति वो आपकी अनन्य है माता के प्रति हम उसको प्रणाम करते हैं और बहुत अच्छे भक्त है आप माता के भगवती के और रहिए और सब सब में उनको देखिए उनको सब में देखिए और जो माता के मंत्री दीक्षा ले ले माता को ही माता में ही अपनी मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग चुन ले उसको यही बताइए कि माता ही सर्वोपरि है ऐसा ही मान कर के आप चलो जी ये देखिए इस तरह की धमकियां आ रही है हमको वो देखिए सामने मैं कमेंट में अभी पढ़ रहा था ना चैट में देख रहा था बहुत सारे चाकू मारेंगे बक रहे हैं गाली बक रहे हैं आपको चाकू मारने वाली अभी देखा है कमेंट निकाल एक कोई बड़ा करके दिखा दीजिए कोई भी एक तीन एक साथ है ना इसमें तो बहुत सारे दिए जी वो बहुत सारे गाली बकर ये क्या क्या लिख रहे दुबे हुए को बहुत सार शब्द जो बोला नहीं जा सकता आपके लिए लिखे हैं ये मैं पढ़ सकता
01:24:27:02 मत प माता बहन भी जुड़े होंगे ना मत पढ़ो मत पढ़ो मत पढ़ो को मतलब नहीं पढ़ने का कोई अर्थ नहीं है ना उसमें बहुत सारे गलत गलत शब्द लिखा गया है फिर कोई मतलब नहीं है कौन है भाई उड़न
01:24:59:14 फेडर ठीक है पुष्पदंत जी हम लोग किसी और दिन वो वर्ण व्यवस्था पर बात कर लेंगे मगर आपको जांचना चाहिए आदि शंकराचार्य क्या कहते थे वर्ण व्यवस्था के बारे में ठीक है नहीं नहीं जरूर जरूर ठीक ठीक है भैया तो ये आज हमारी इनके साथ बात थी कुछ चीजें थी जो शायद हमें आशा है कि समझने का प्रयास करेंगे पुष्पदंत जी और फिर से हमारी चर्चा आप लोग देख पाएंगे उन ट्रेडरस जी बताए आपका चेहरा दिख नहीं रहा है जुड़ क्या
01:25:39:18 हा आप जुड़ गए आपका चेहरा नहीं एक सेकंड लेट में जाक फर जुड़ता हूं लाइट में चले जाओ वसे चले जाओ कोई दिक्कत नहीं है गाने वाले कहां के लोग हैं जो आपको गाली दे र है वो अब यह तो अपना नाम राम पाली लिखे हुए संत रामपाल संत रामपाल महाराज इनके यही सिखाते हैं नहीं मैं तो एक वीडियो देख रहा था आप पुस्तक का दुकान लगा था उसमें जाकर के वो ये आप बंद कराने के लिए बोल रहे थे कि एक माता जी थे ना वो पुस्तक बेच रहे थे उसके बगल में एक और लड़का कोई खड़ा था पुस्तक बंद करने के लिए बोल रहे थे तो देखा मैंने आपके
01:26:43:15 य इसमें एक बात और है ना कि जैसे आपने कहा ना कि माता सुप्रीम है और क्या कहते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश का रूप वही लेती है तो उसमें ये वाली बात ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में आने के बाद वो कोई छोटी थोड़ी ना हो जाती है इसमें छोटे वाली बात ही नहीं ना हम जैसे के अभी आपको आपने हम चर्चा कि तो उसम त्रिकाल ब्रह्म सं में तो वही तो दिखता है ना वही तो है दूसरा थोड़ी अंतर्द कहा उसम अंतर्द है शक्ति कस बस बस फिर कोई बात ही नहीं है बस आप ये वाला बात पता करना कि गायत्री मंत्र के गुरु परंपरा क्या है क्या जो गायत्री परिवार है वो वही शिक्षा दे रहा है वही न दे रहा है जो गुरुओ ने दिया जिनको वो गुरु कहता है यह सब चीजें आप प करना ठीक है जी जी जय श्री राम अंश शर्मा जी जी जय श्री राम जय श्री राम जी जो भैया जी ने कहा कि देवी के लिए तो इन्होंने बीच में वो देवी पुराण का भी जो उसम लिया था तो इसमें ब्रह्मा विष्णु महेश का तो कोई भेद नहीं क्योंकि देवी पुराण में भगवती खुद ही कह रही है ब्रह्मा विष्णु महेश में जो भेद करता है वो मेरा दोषी है और भगवती देवी पुराण में स्पष्ट कह रही है कि मेरे पूजन का जो फल भी देंगे वह स्वयं नारायण ही
01:27:59:09 देंगे देवी पुराण में एक बात देवी पुराण में एक बात और दी गई है मैं जो तात्विक बात है पहली बात तो यह लिखा है लोग कहते हैं शक्ति के बिना भगवान कुछ नहीं है और शक्ति माता है मगर जलाई गई किताब में यह था गायत्री जी यह देखिए गायत्री माता के लिए क्या लिखा हुआ
01:28:31:15 है गायत्री माता के लिए बड़ा बद्दा लिखा है इन्होंने अगले पेज प किसका बख ये रामपाल का ये देखिए आप में ये क्या क्या उल्टा पुल्टा लिखा है भाई आप नहीं जानते क्या राम पालियो को चलिए अरे मैं एक बात बता रहा हूं ये रामपाल वालों का एक बुक आया था ज्ञान गंगा तो ज्ञान गंगा बुक बेचने के लिए आया तो मैं इसी साइकिल स्टोर पर बैठा था जहां पंचर सुधारते वहां पर मेरा खेत है बसि साहब के पास तो आया फिर उसने बोला कि पुस्तक के बारे में दिखाया फिर अष्ट गी देवी की बात एक मैं मोबाइल वहां छोड़ दिया है कि मैं आपको दिखाते एक कथावाचक भी चीज को कुछ जगह पर बोला है तो मैं बोला अष्टांगी दुर्गा के बारे में बोला देवी भागवत में है हनुमान प्रसाद पदार गीता प मैं बो मैं तुमको चैलेंज करता हूं गीता प्रेस गोरखपुर के हनुमान प्रसाद पुदार के में कहीं पर अष्ट देवी के बारे में उल्लेख नहीं है मैंने उसको बोला चलो मैं दिखाता फिर एक बार मैं से काल के च ज्ञान गंगा पढ़ना चाहिए तो वो लोग फ्री में देते हैं पुस्तक इस बात के लिए मैं धन्यवाद करता हूं कि फी बांटते हैं उसमें है क्या चीजें जरा मेरे को जानना है करके तो लाए बाइज्जत दिए कोई रुपया पैसा नहीं ले और अच्छे से बर्ताव
01:29:46:20 कि मैंने उसको चाय पानी पिलाया और उसको सादर विदा किया था उन लोगों को तो पुस्तक देखा मैंने पढ़ा तो बहुत सारी ऐसी चीजें लिखे गई है जो कहना भी अच्छा बात नहीं है फिर उसको हम कुछ नहीं बोले उनको विध द क्योंकि अति जैसे मैं आपको वो बता रहा था उसमें एक बात ये लिखी गई है कि शक्ति शक्तिमान को द्वैत भाव में नहीं डालती समझ रहे जसे लोग ये कहते है ना शक्ति के बिना शिव कुछ नहीं ये रस की बात है वो है सिद्धांत प जब जाएंगे तो कहना पड़ेगा कि शक्ति शक्तिमान को द्वैत भाव में नहीं डालती जैसे की शिवांश भाई सुनो ना एक मिनट वो क्या है मेरा नेट पर खत्म होने वाला है डाटा तो आप चले जाइए मैं बता दूंगा य पर आप चले जाइए नेट प डाटा खत्म हो ग मैसेज आ गया कोई बात नहीं कोई बात नहीं जय श्री तो शक्ति शक्तिमान को दैत भाव में नहीं डालती कहां लिखा है यह लिखा है देवी भागवत जैसे कि मैंने कहा कि भगवान यहां खड़े हैं ठीक है अब भाई खड़े तो उनका हाथ है एक तो क्या दो तत्व हो गए क्या उनका हाथ अलग हो गया क्या
01:31:01:28 वो अपने हाथों से कुछ करते हैं तो इसका मतलब हाथ अलग हो गया और वो अलग हो गए यानी कि शिव है ही वही जिसमें शक्ति है अगर शक्ति नहीं है तो शिव ही नहीं है अगर आप शिव को शिव मान रहे तो आपको मानना पड़ेगा कि उसम शक्ति है तो शक्ति के अलग होने की स्थिति का वर्णन ही नहीं हो सकता जैसे सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर सच्चिदानंद स्वरूप भैया ये भी तो भगवान में अगर य गुण है तो निर्गुण कैसे यह गुण नहीं है यह उनका स्वरूप भूत लक्षण है भगवान भगवान तब ही है जब वह सच्चिदानंद स्वरूप है और गुण क्या है जिनसे अलग होने के बाद भी भगवान भगवान है जैसे आप भगवान अपनी त्रिगुण मई माया में आए और उन्होंने तरह तरह के रूप लिए तरह तरह की लीलाएं की मगर उनसे अलग होने के बाद भी वो है सच्चिदानंद स्वरूप सच्चिदानंद से अलग हो जाएंगे तो वोह है क्या नहीं है ठीक है तो इसलिए यह लक्षण है उनका स्वरूप भूत लक्षण तो पहली बात तो यह हो गई
01:32:17:01 दूसरी बात उसमें एक चीज और लिखी है कि ना ही मैं स्त्री हूं ना ही मैं पुरुष तो यहां पर वो माता के तत्व को ही सर्वोपरि मानने वाले जो सिद्धांत है उसका खंडन हो गया भेद करने वाली हम क्या है टची नाम का उसको वर्ण व्यवस्था पर परंपरा पर बोल रहा है शिवांश भैया जय श्री राम जय श्री राम आदेश च भैया आपसे थोड़ी बातचीत मतलब बात करनी थी मुझे ये जो एमपी खबर ये जो एमपी एमपी खबर फास्ट करके जो चैनल है youtube1 दो हफ्ते पहले का या फिर मतलब 11 11 डेज पहले का उन्होंने इस तरीके से डाला है कि शिवांश का भाई पोंगा पंडित वो आया और हमसे चर्चा की और चर्चा करने के बाद शिवांश को ही कॉल लगाया और शिवांश ने ही हमें फोन पर कहा कि वहां से भाग जाओ और वो लोग जो भी कर रहे हैं वो सही कर रहे हैं उनका जितना भी तथ्य है वो सारी चीजें सही है तो ये लोग इस तरीके से लोगों को बहलाती फुसला हैं कि मतलब समझ में ही ना आए जो खुद को बैल मानते हैं वो मानेंगे उनकी
01:33:32:07 वो बात जो खुद को स्वीकार कर चुके हैं कि हम तो बैल बुद्धि हैं मानेंगे उसकी बात मतलब ये लोग खुद के ही लोगों को पंडित बनाकर और खुद के ही लोगों को रामपाल का मतलब जो भी है रामपाल जी का शिष्य बनाकर एक दूसरे में ही ये डिबेट करते हैं और जब कहा जाए करने के लिए तो आते नहीं है एक चैनल है एसए न्यूज करके हा एस न्यूज करके भी है उस पर बहुत सारे यही चीज आ रही है कि व अपने लोगों को विपक्ष बनाकर उनको खड़ा करते हैं और लास्ट में फिर व मान जाते हैं हा हा हम तो इस ज्ञान के बारे में जानते नहीं थे और अब हम इसका अध्ययन करेंगे आपके गुरुजी का सत्संग सुनेंगे और ऐसा ऐसा व बात करते
01:34:18:15 हैं य ले लीजिए य वाला प्राइवेट चैट वाला य एक मिनट प्राइवेट चैट में आए तो इसका मतलब जुड़े होंगे तो फका आई एड्रेस निकल सकता है जी बताइए मैं जानता हूं ऐसे न्यूज वाले क्या करते हैं चेहरे को राक्षस बनाया था उन्होने क्या करें क्या करें सामना नहीं कर सकते ना क्या कर व दिखाते भी ऐसे मतलब पडि जी आए ना तो ऐसे पूरा ऐसे त्रिकुंड भी पूरा धारण ऐसे करेंगे या तिलक भी ऐसे जैसे पूरा धारण करेंगे पंडित जी बैक जय श्री राम जय श्री कृष्ण हर हर महादेव जय श्री राम ह महादेव आपको देख के बड़ा दर्शकों को सुखद एहसास मिल रहा हो रहा होगा बड़े वत मैं तो जब मुझे पता लगा बश हो रही है क्या नहीं नहीं भैया फैन चल रहा है फैन चल रहा है भैया मैं बंद कर देता हूं इतनी ठंड में कहां प है आप साउथ इंडिया मैं नहीं मैं मुंबई में रहता हूं भैया हा
01:35:33:25 तोव साउथ ही हो गया एक तरीके से यहां तो कड़कड़ जा रहे हैं य तो हया जाम जा रही है हां हमारा भी गाव उत्तर प्रदेश का ही है बट हम रहते मुंबई में जी के भाई आए थेर आया र फ शमा ने फोन करके बलाया मैं उसके आगे की कहानी बताता हू ना फ शमांस बोला उन्होंने वहां से भाग जाओ लेकिन वो नहीं भागे फके बाद व शास्त्रार्थ जो शास्त्रार्थ हुआ था व पर वो जीत गए फ इसके बाद उन्हीं के चरण ने पिया हा हाा हा चरण धो के पिया हा ऐसी कहानी वो बता रहे उसके आगे कहानी मैं बता देता
01:36:22:16 हूं मैंने कहा वैसे वो इतने वैसे वो इतने नीच है कि ड्रामा करने के लिए ये भी करना पड़ेगा तो कर देंगे और और शिवांश जी को कॉल भी लगा शिवांश जी ने कहा कि वो जो जो भी काम कर रहे हैं वो सही कर रहे हैं वो सब प्रमाणित है वेद के अनुसार ऐसा उन्होंने कहा मतलब बनाए थे वीडियो इसको अंग्रेजी में क्या कहते हैं पता है डे ड्रीमिंग सबने देखना हा सिचुएशन क्रिएट करना जी तो ठीक है फिर आज की चर्चा सार्थक रही कुछ कुछ आगे फिर देखा जाएगा और ब्रह्मा कुमारी के साथ हमारी चर्चा हो चुकी है वीडियो आने वाला है 1130 बजे रविवार को यह रिलीज होगा बहुत बढ़िया चर्चा हुई है आनंद आएगा आप लोगों को भैया आप लोग श शिवाज भ ये आपने अभी जो कहा ब्रह्मा कुमारी इस के बारे में मतलब वीडियो आने वाला है और मैं ये कहना चाहता हूं कि जैसे रामपाल जितने भी इनकी जो भी कंपनी कह लीजिए जो भी है
01:37:37:25 जैसे इनको आपने एक्सपोज किया है उसी तरीके से आप ब्रह्मा कुमारी वालों को भी एक्सपोज करिए क्योंकि भैया एक्चुअली मेरे परिवार में ही एक दो जन ऐसे हैं जो कि उनसे जुड़े हुए हैं हां तो आप जिस तरीके से तथ्य देंगे तो मैं उनके सामने प्रस्तुत कर सकता हूं और उनको कह सकता हूं ना अभी तो ये पौने दो घंटे का वीडियो बहुत पर्याप्त हैय आप लाइए उनको ब्रह्मा कुमारी वालों को एक्चुअली यह लोग बात नहीं करते हैं ना तो बात हो गई है अब देखिएगा आप लोग वीडियो है इची करके कोई है जो विरोधाभास प्रकट कर रहे हैं ची जी हमारा नंबर नोट कर लीजिए 74836 और उस पर हमारा फॉर्म प्राप्त कर लीजिए फॉर्म को भरिए और सामर्थ्य वान की तरह योद्धा की तरह सामना करिए सिद्धांतों का कायरों की तरह जिन्होंने बचपन में माता का दूध ना पिया हो उनकी तरह आचरण ना
01:38:42:14 करें अगर माता जी ने निष्ठा पूर्वक दुख का पान कराया है स्वागत है हा ठीक है ना इची जी वैसे ची हिची नाम की कंपनी थी ना वो बाहर की वि विदेश की कहीं हा जी ये वाले ता अपने आप को समझ रहे हैं कोई बात नहीं आइए उसी की माया में ही लपेट दिया जाएगा आप जो माया ता लाता है श आदित्य आदित्य वाहिनी से जुड़ने के लिए क्या करना होगा सबसे पहले गोवर्धन मठ का प डाउनलोड करिए गोवर्धन का प डाउनलोड करके व आपको रजिस्टर करवा दीजिए और उसके साथ-साथ वहां से आपको वो आएगा साथ ही साथ जो आपके प्रांत के आपको नंबर दे दिया जाएगा आप लोग हमसे संपर्क कर लेना तो आपके क्षेत्र में जो सक्रिय होंगे आपके वानी के कार्यकर्ता तो व आपसे जो है संपर्क करेंगे ठीक है सबसे पहले अपने आपको रजिस्ट करवा जैसे बजरंग जैसे बजरंग दल वालों का विश्व हिंदू परिषद लोगों का जैसे ब्रांच होता है उसी तरीके से आदित्य वाहिनी का भी हम
01:39:58:21 अच्छा ठीक है अरे इनका स्क्रीनशॉट ले लो भाई प्राइवेट चैट वाले धमकी दे रहे हैं गायत्री पार्क के पास रहता है ना तू तेरे भाई का नाम आदित्य है ना सुधर जा समझ जा रामपाल महाराज के खिलाफ मत बोल रामपाल महाराज से कहिए अपनी वो किताबें फट दे अपने वो वीडियोस मिटवा दे जिन्होने जिसम उन्होंने ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश के विरुद्ध बोला है शंकराचार्य के विरुद्ध बोला है और अपने ऐसे न्यूज चैनल वाले से कहो सारे वीडियो मिटा दे जिसमें उन्होंने हमारे परंपरा प्राप्त आचार्यों की निंदा की है है ना मेरा वीडियो रख लेना सौगात में मेरी ओर से तुम्हारे ऊपर एक रहम है मेरे ऊपर जो वीडियो बनाया वो रख लेना बाकी सारे वीडियो मिटा दो सारे वो किताबों को फाड़ डालो आग लगा दो और खूब करो कबीर की भक्ति क्या दिक्कत है दिक्कत रामपाल की या कबीर की भक्ति से नहीं है दिक्कत है ब्रह्मा विष्णु महेश की निंदा से दिक्कत है आचार्यों की निंदा से ठीक है
01:41:14:25 तो ठीक है सभी को जय श्री राम आने के लिए आभार तां जी आपसे मैं बात करता हूं वो हमारा जोर का वो हैला ठीक है शीराम भैया जय श्रीराम
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