⬜ Not used yet · 00:00:01:11 – 00:12:00:09 (11:59)
00:00:01:11 [संगीत] सभी को जय श्री राम आशा करते हैं आप सभी कुशल मंगल होंगे और जैसा कि आज आपने देख ही लिया है [संगीत] कि यह जो महोत्सव है उसमें रामपाल दास के नाम से दोबारा व लोक आश्रम वाला स्टॉल लगा हुआ था जहां पर हम आज गए हमने विरोध प्रकट किया और यथोचित कारवाया व ई जिसके संबंध में विस्तृत वीडियो आपको जल्द ही देखने को मिल जाएगा पर इस सब के साथ में मैं एक बात कहूंगा हम तो अपना कार्य जो करना है वह कर ही रहे हैं और करेंगे जब तक अंतिम सांस है तब तक करेंगे पर आप जानते हैं कि हमने हर जगह मोर्चा खोल रखा है ऐसा तो है नहीं कि केवल रामपाल या केवल इकन या केवल नास्तिक या केवल मुसलमान या केवल
00:01:16:21 आर्य समाज हर जगह मोर्चा खुला हुआ है तो ऐसे में क्या है कि बहुत सारे एक साथ में विरोध विरोधी है जो समय आने पर हो सकता है एकजुट होकर के भी प्रयास करें हमारे इस अभियान को नष्ट करने का इस बारे में आपको पहले से पता होगा हमने एक वीडियो डाला था जाकिर नायक के ऊपर काफी पहले वह वीडियो डिलीट करवा दिया गया विरोधियों के द्वारा और अभी हाल ही में हमारा एक वीडियो और डिलीट हुआ है जिसमें हमने कोई अभद्र भाषा का उपयोग हम करते नहीं है ना ही अपने कमेंट्स में ना ही उसमें मगर वो भी डिलीट हुआ तो यह चैनल को रोकने की चैनल के द्वारा प्रसारित प्रसारित होने वाले मुख्य रूप से सर्वशक्तिमान ईश्वर के बारे में जो संदेश है उसको रोकने की जिसमें जितनी तथा है वह हर संभव प्रयास कर रहा है तो इसके साथ ही साथ और देख लीजिए हमको आए दिन धमकियां आती रहती हैं वह जो वार्निंग
00:02:31:26 होती है वह आती रहती हैं कि आपने गलत कमेंट क्यों किया है जबकि हमारा जो कमेंट होता है हमारे बात करने की जो शैली है वह सदैव मर्यादित होती है फिर भी आती है इसका कारण क्या है कि जो विरोधी पक्ष है वह संख्या में बहुत ज्यादा है और हम संख्या में बहुत कम है ऐसा नहीं है कि हम डर रहे हैं मगर जो स्थिति है उसको यथावत रखना भी आवश्यक होता
00:03:05:15 है इसके साथ ही साथ अगर यूट्यूब से हट के देखें तो जैसे आज हमने यहां पर यह जो विरोध प्रकट किया वहां पर हमने जाकर के कहा कि तुम कैसे इतनी नीचता भरी यह सब बातें क्यों कर रहे हो हमारी माता के बारे में तो अब हमें धमकी आना शुरू होंगी कोर्ट केस की धमकी होगी तरह तरह के धमका के प्रयोग किए जाएंगे है ना यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि हमने समर्पित कर दिया है स्वयं को कि हम धर्म की रक्षा जो धर्म के बारे में जो उन्मादी बातें बताने वाले लोग हैं या जो धर्म के बारे में जो विवाद आसपास शिक्षाएं हैं जिसके कारण हमारा धर्म बट रहा है उसको हम
00:04:02:04 रोकेंगे जब तक हमारे अंदर सामर्थ्य है तब तक हम उसे रोकेंगे तो फैसला आप लोगों का है कि आपको क्या करना है आपको किस तरीके से कैसे हमारा साथ देना है कैसे खड़े होना है क्योंकि हम तो भाई अपनी मां के लिए लड़ रहे हैं अब मुझे नहीं पता वो आपकी भी मां है कि नहीं है वो आप लोगों के ऊपर है आपकी भी मां है आपका भी धर्म है तो लड़ साथ निभाए जो कर सकते हैं वह करिए और नहीं भी कर सकते तो मन से प्रार्थनाएं करिए हम तो कर र कर ही रहे
00:04:55:03 हैं अभी कुछ ही दिन पहले मुझे वार्निंग मिली थी मेरे कमेंट्स के लिए भाई आपके कमेंट जो है आप जो है य की गाइडलाइंस के विरुद्ध जाकर के कर रहे हो यह तो कोई विरोधी पक्ष वाला भी जो है व सामने आकर के य नहीं कह सकता कि हमारे कमेंट्स जो होते हैं हां एक बैकअप चैनल पर काम चल रहा है एक हमारा चैनल है सर्वशक्तिमान नाम से सर्वशक्तिमान चैनल को आप लोग फॉलो करिए
00:05:30:08 सर्वशक्तिमान चैनल को आप फॉलो करिए वह चैनल हमने बनाया बैकअप के लिए अभी उस पर हम लोगों ने वीडियोस नहीं डाले हैं आप लोग उसको फॉलो करिए हम लोग जल्द से जल्द जो है वहां पर थोड़ा सा सक्रिय होंगे और कुछ चीजें वहां पर भी करेंगे अभी बात यह हो रही है कि यह हमारे ऊपर किस तरह से प्रभाव डालने का कार्य किया जा रहा है एक मिनट में जरा [संगीत]
00:06:12:01 तो खैर आज आपके लिए एक अच्छी सूचना यह भी है कि एक जगह से गलत शिक्षा सनातन धर्म का नाम लेकर के सनातन धर्म के विरोध में शिक्षा परोसी जा रही थी जिसको हमने यथावत रूप से वहां पर प्रतिकार करते हुए बाद किया उसे और अब उनकी ओर से भी हमें धमकी आने लगी तुरंत है ना तो आप लोगों का कर्तव्य ये है कि कम से कम अगर कुछ भी नहीं कर पा रहे तो मोरल सपोर्ट जरूर एक
00:06:44:28 जो हम जल्द ही अगर अभी चैनल का नाम भी सुनिश्चित नहीं है निश्चित नहीं है अगर हम जल्द ही वह जो चैनल है जो बैकअप के लिए बनाया है तो उस चैनल को जल्दी उसका लिंक वगैरह भी शेयर कर देंगे और अगर नाम बदलेगा तो नाम भी बदल दिया जाएगा उसमें अभी उसका चीजें भी सुनिश्चित नहीं पर काम चल रहा है तो अ अभी क्या हो रहा है कि जैसे हमारी लाइव चलती है तो उसमें आर्य समाज वाले लोग आते हैं रामपाल के नाम से रामपाल वाले लोग आते हैं आर्य समाज के नाम से अभी आपने कुछ दिन पहले एक बंगाल में रहने वाले आर्य समाजी का वीडियो देखा होगा उसमें वह हमारा विरोध करते
00:07:36:14 समय उस उन राम पालियो का समर्थन लेने का प्रयास करता दिखाई देगा आपको जिन राम पालियो के सरगना यानी रामपाल को जेल में पहुंचाने वाला आर्य समाज ही है तो आप यह सोच के देखिए कि अपने मत की रक्षा करने के लिए व्यक्ति कहां तक जा रहा है क्या जब हम वहां पर लड़ रहे हैं हम चिल्ला चिल्लाकर जब यह कह रहे हैं किय रामपाल ब्रह्मा विष्णु महेश की बुराई करते हैं तो वह विष्णु जो है वह क्या स्कोन वाले स्कन के विष्णु नहीं है है मगर स्कोन वाले साथ क्यों नहीं आएंगे क्योंकि वह तभी एक्टिव होते हैं जब उनके पर्टिकुलर विष्णु तत्व पर नहीं जब पर्टिकुलर उनकी जो चीजें हैं उसी परिवार होता है तभी वह एक्टिव होते हैं जैसे सनातन पर बात की उसमें सनातन डेंगू है यह है वो तो तो एक्टिव नहीं हुए मगर किसी ने स्कोन के खिलाफ कुछ बोल दिया था मुकदमा लिखवा दिया अरे भाई रामपाल कर तो रहा है इतनी सारी चीजें कर रहा है विष्णु भगवान के बारे में रामपाल की बुक दिखाता हूं मैं आपको
00:09:05:27 ब करो माता पार्वती है रामचंद्र जी की र्म भावना कर रहा जो आपने किया है बत जंडा काम किया है कर आप क्यों कर रहे
00:09:39:06 मा नहीं है रा ये है जेल में हर पेट प र पेट प गाली द इन लोगों ने हिंदू धर्म के माता की पूजा करने वाले मूर्ख है अरे चला चिलाए नहीं दुर्गा माता के साथ बलात्कार हो रहा है वीडियो हमारी जो डिलीट हुई है अभी हाल ही में वही है जिसमें हमने किसी अंडर कवर्ड गुंडे का पर्दा फाश किया था कि वह अलंकार समाज ने उसे जो है लात मारी हुई है उसको पहचानने से मना कर दिया उस वीडियो को डिलीट करवा दिया गया और जैसे कि मैं अभी बात कर रहा था कि हम जब वहां पर विष्णु की विष्णु भगवान के सम्मान की बात कर रहे हैं तो क्या वह विष्णु भगवान क्या स्कोन के नहीं है क्या इकोन उस पर पर्टिकुलर उस पर जब कोई प्रहार होता है तो वह एफआईआर करवाता है वह यह करता है तो क्या इसकन इस पर एफआईआर नहीं करवा सकता
00:10:54:19 है करवा सकता है मगर यह वो चीज हैं जो तभी यह वह संस्थाएं जो अपने मत की रक्षा कर रही है मगर प्रॉब्लम यह है कि हम अपने केवल अपने मत की रक्षा नहीं कर रहे हैं हम रक्षा कर रहे हैं सार्वभौम सनातन सिद्धांतों की उनकी रक्षा करते समय जो भी कोई सामने आएगा तो उससे हमें उसका हमें प्रतिकार करना पड़ रहा है और नतीजतन क्या हो रहा है व्यक्तिगत रूप से हरेसमेंट कोर्ट केस की धमकी इत्यादि अभी आपने कुछ दिन पहले देखा होगा अंडर कवर्ड गुंडा बोल रहा था अपना कोट वो दिखाओ यह दिखाओ वरना हम यह करेंगे वो करेंगे है ना तो यह सारी चीजें चल रही है अब इसमें आप लोगों को यह देखना है कि आप लोगों आप लोग क्या कर सकते हो हम अपना कार्य कर रहे हैं कर रहे थे कर रहे हैं करते रहेंगे आप लोगों को किस रूप में कैसे खड़े होना है हमारे साथ यह कोई
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→ Used in: A · Live रामपाल को नोटिस जारी High court big update at 20:36 ↗
00:12:00:09 खेल नहीं है जो हम लोग केवल मौज मजा मनोरंजन के लिए खेल रहे हैं यह एक युद्ध है जो हमें जीतना है और
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00:12:14:07 युद्ध जीतने के लिए टीम वर्क चाहिए होता है तो इसलिए आप लोग देखिए कि आप लोगों का क्या कर्तव्य बनता है यह वीडियो डिलीट हुआ है यह
00:13:06:07 देखि अरे किसी बात पर तो खून खोलेगा किसी का दिख रहा है यह विष्णु क्या केवल मेरे विष्णु है हा हो सकता है क्योंकि हमारे विष्णु सर्वशक्तिमान है ना हो सकता है कि उसके ना हो जो ईश्वर को सर्वशक्तिमान नहीं मानता ये यह भगवान शिव क्या मेरे शिव है
00:13:41:09 [संगीत] केवल यह माता पार्वती के लिए क्या लिखा है दिख रहा है बलात्कार ये केवल मेरी माता है आप सबकी नहीं है और नहीं है तो कौन कह रहा है फिर अपने आपको को सनातनी
00:14:26:27 हिंदू ये माता सीता माता पार्वती मेरी माता है केवल जो सीता के रूप में श्री राम के पास जा रही है कि श्री राम उन्हें प्यार करें संतुष्ट करें इतना ही सहिष्णु मत बनिए वो उदारता जो आपके अस्तित्व और आदर्श पर हावी हो जाए व उदारता नहीं कायरता होती है
00:15:05:00 तो देखिए प्रहार तो हो ही रहा है आप लोगों के साथ की आवश्यकता है लिंक दे दीजिए भाई कोई आना चाहता है तो चर्चा के लिए व जो एक मातृ शक्ति आई थी जो अचानक से चली गई थी बिल्कुल एंडिंग मोमेंट में उनसे बातें हो रही थी जो यह पूछ रही थी कि मुझे क्या करना चाहिए उन्होंने हमसे संपर्क किया था और जो बातें उस दिन हमने उनसे कही थी उनसे व सहमत भी थी रामपाल की जो फॉलोअर थी और उन्होंने बताया था कि उनका विवाह होने वाला है जिसके साथ वह प्रेमानंद जी महाराज के फॉलोअर है तो दे दो भाई
00:15:57:16 इनको जो चर्चा करना चाहता है व आ सकता है वैचारिक मतभेद के निमित्त यह ध्यान रखिएगा जिज्ञासु हो तो क्लास में आइए यदि कोई अपनी आईडियोलॉजी है जो हमारे विरोध में है आवान ऐसा क्या था उस वीडियो में वाच वाला जो एक्सपोज करा था एक्सपोज यह किया था कि किस प्रकार से अलंकार समाज यों ने हाथ खड़े कर दिए हैं पहले कहते हैं कि हम ऋषि वाद जो है वह हमारा ही चैनल है उस चैनल को ऑपरेट करने वाला जो मुख्य वक्ता है वह कृते पटेल नाम का कोई है और वह हमारे यहां की संस्था के पदाधिकारी हैं उसके बाद हम जब उसके बारे में कुछ ऐसी चीजें देते हैं आपत्ति जनक है तो पत्र में वो लिखित में यह दे देते हैं कि हम ऋषि वाच को नहीं जानते राकेश
00:17:12:28 कुमार आपने कहा कि शिवांश पाखंडी है रामपाल दास का पाखंड देखेंगे क्या बहुत पाखंड है देखो अभी पूरा नहीं है मगर काफी है तो पाखंड आपको अपने रामपाल दास का ओपन करवाना है संदीप आर्य करके कोई आया है हां जी बोलिए संदी जय श्री राम सर जीय जो आप हमें बता रहे हैं वोह हमने भी सुना है बहुत बाकी है ना मुझे ये अच्छा नहीं लगता है मेरे साथ में ये आती है क्योंकि मैंने मैंने माता पिता मान रखे हैं महादेव और पार्वती को और मैंने दर्शन भी करे हैं महादेव
00:18:18:25 के गुस्सा बहुत आता मेरे को तु मैं नहीं चाहता कि यह जो चीज चला रहे हैं य चले उसके लिए कुछ भी कर सता तो आप देखिए बहुत सारी चीज है तो सारी यहा पर डिकस नहीं की जा सकती मगर यदि आप वाकई में इन चीजों से लड़ना चाहते हैं तो आप हमसे धरातल पर संपर्क कर बिल्कुल सर आपका नंबर भी है मेरे पास में और ब बाकी मैं आपसे हट रहा था क्योंकि कुछ बड़ी बातें है जो अभी हुई नहीं है अच्छा जो विदेशों में चल रही
00:19:11:04 है अपने आप जैसे जैसे जैसे जैसे अपने आप को हम लोग सक्षम बनाएंगे वैसे वैसे हम लोग और बड़ी शक्तियों से लड़ने के योग्य बन पाएंगे जब हमारे भाइयों को जि हमारे साथ मिलकर के लड़ना होगा भाइयों को यहां से ले जाए जाएगा ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा क्यों कर रहा है माता दुर्गा के साथ तो यह हुआ था काल तो यह है काल तो वो है गीता बोलने वाले की जो भक्ति करते हैं वो लोग नरक में जाते
00:19:44:16 हैं यह सब चीजें जब बोली बताई जाएंगी तो हमारा कौन सा भाई हमारे साथ खड़ा होगा हम आखरी तक खड़े हुए हम हा आपको व्यवहारिक रूप से साथ निभाना है आप उसम संपर्क करिए हम लोग योजनाए बना रहे हैं कई तरह से और कई तरह की योजनाए है तो कोई ना कोई योजना किसी ना किसी को सूट करी जाती है जैसे हम लोग इतने तरीके से कार्य कर रहे हैं तो उसम हर व्यक्ति कहीं ना कहीं एडजस्ट हो जाता है आपकी ओर से साउंड आ रहा है आप एक बार लीव करके दोबारा आ जाए
00:20:26:19 हा जी पहाड़ी जी हर महादेव जय श्री राम हर हर महादेव भाई जय श्री राम आज का एक शट देखा आपका बहुत अच्छा लगा और प्रहार भी किया जा रहा है आपके चैनल के ऊपर य कायरता है एक तरफ से कहा जाए तो हा शा समत जवाब नहीं है ना इसलिए इस तरह से प्रहार कर रहे रोकने का प्रयास कर रहे हैं बिल्कुल जो आपत्ति जनक सामग्री थी उसको चौराहे पर बी चौराहे पर जलाया भी गया है वो वीडियो भी आपको बहुत जल्द प्राप्त होंगे एक दो में डाल दिए जाए जय श्री राम जी जय श्री राम जय श्री राम हम केवल वो नहीं है ना इंटरनेट योद्धा सोशल मीडिया वरियर कैसे हो प्रभु जी बस बस कृपा है आप बताए बहुत बढ़िया सर आपका काम तो बहुत सरानी आपने जो आज किया है ना यह देख के मतलब मलब जब भी यहां पर हम लोग करेंगे ना य हम लोग करेंगे जैसे आप आप फलो करेंगे इन चीजों में जी धीरे धीरे मेंबर्स जोड़ रहे हैं हम लोग भी यहां पर ना अपने एरिया में मेंबर जोड़ रहे हैं फिर उनको य इसी टाइप से सेटअप बनाएंगे फिर ना क्योंकि इनके लिए
00:21:41:26 बहुत जरूरी हो गया है कारण क्या है इन इन्होने अपनी सीमाए ला लांग द है बहुत ज्यादा जी इनकी जो हरकत दिख रही है मतलब सारी सनातन विरोधी हरकत इनकी सारी की सारी इनकी मब सनातन काम वही कर रहे हैं सनातनी वाले लेकिन विरोध हमारा ही करना है वही चप्पल पूज रहे हैं वही य वही ये फोटो भी पूज रहे हैं वही ये कच्छे भी पूज रहे हैं लेकिन प्रॉब्लम मूर्ति पूजा से ये देखो आप मतलब इन्होने बेशर्मी की सारी हद पार कर रखी है मतलब इनको इतनी शर्म नहीं आती तुम लोग कर क्या रहे हो भी जिस शाक पर बैठे हो उसी को काटने प लगे हुए हो इतनी शर्म नहीं है इन लोगों [संगीत] को और अगर कोई इंसान को इंसान को पैसे के लिए इतना नहीं गिरना चाहिए जितने यह रामपाल और इसके चेले गिर चुके हैं भाई पैसा सब कुछ नहीं होता इनके दिमाग के अंदर बस वो पैसा इनको कहने का भाव य है पैसे के लिए ये कुछ भी करवाने को तैयार हो जाए कुछ भी मतलब कुछ भी ये अपनी मां बहनों का सौदा तक भी करवा देंगे मतलब जो इन्होंने सिचुएशन अपनी क्रिएट कर रखी मैं देरा दिल मदा आप मर्यादा में छोड़ा रहेर आप बात सही कह रहे हो लेकिन मुझे ये लग रहा है कि ये अंदर से जो इनकी हरकत म ये कैसी हरकत म
00:22:57:02 अंदर दिल क चोड़ता है मेरा इन बातों से इनका देख के भाई क्या कोई मतलब अपने पिता को पिता को गालियां दे सकता है क्या हमारे श्री कृष्ण जी श्री विष्णु जी एक ही बात है तो उनको गालियां मतलब अपने पिता हमारे पिता मतलब परम पिता है वो उनको गालिया दे रहे हैं देखो सोचने ली बात है जिन्होने संसार को बनाया मोहम्मद आरिफ हुसैन जी आप अपना चेहरा दिखाएं सर ये चेहरा नहीं दिखाते ना इनको तो बिल्कुल आप लाइन प लि ही मत करो हुसन जी
00:23:37:00 बताइए आपकी आवाज नहीं आ रही मैं बांग्लादेश से हूं जी बोलिए मैं आया था व आपको वीडियो देख रहा हूं क कई दिनों से वो जोकन वाले है ना वो जो कहते हैं जी अल्ला ही या कृष्ण है वो माने झूठ झूठ क्या हुआ उनको बात रखने दीजिए ना
00:24:16:15 अपनी जी बोलिए वो इस्लाम की इस्लाम के अल्लाह के बारे में नहीं जानता है डिटेल्स इसका व्याख्या क्या है तो आप यहां क्यों आए हैं आपको उनसे शिकायत हैना वहा जाना चाहिए इस मैं तो अभी देखा के बारे में कन की बुराई हम आपके साथ बैठ कर के करने के लिए य नहीं बैठे हैं बात चल रही है यहां पर नहीं विषय कोई भी हो मतलब आप यह चीज हमको मत बताइए कि कौन वाले क्या गलत कर रहे हैं क्या सही कर रहे हैं वो हमारा आपस का मामला है वो हम देख लेंगे हां आप अगर ईश्वर आपका जो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने आप मानते हैं कुरान जो है वो ईश्वर है कुरान के अंदर ये वो सब मानते हैं आप है है यस कुरान का ईश्वर ईश्वर है हम कुरान का धर्म जो है वो धर्म है है है अच्छा आपकी जानकारी में धर्म की परिभाषा क्या है
00:25:34:01 धर्म की परिभाषा में जो आते है आपके तरफ से क्या है मैं पूछ रहा हूं आपसे क्या परिभाषा हैकी मेरे तरफ से धर्म की परिभाषा यह तो है धर्म संस्कृत शब्द है बांगलादेश बांगला भाषा में भी धर्म कहती है लेकिन अरबी भाषा में धर्म नहीं कहती है क्या दन कहती है दनन की परिभाषा क्या है धर्म में समझती हो जो अल्लाह की दया विधि जो उसने कही है करने के लिए वह करो ज जो निषद किया है उसको ना करो यानी कि अच्छाई और बुराई के बीच अंतर बताने वाली जो नियमावली है उसी का नाम आपको दन है नहीं नहीं नहीं मैं कहती हूं जो अल्लाह को मानना उसके उसके आदेश निषद में चलना जो वही बात है आप समझ नहीं रहे मेलिए ठीक है क्या कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है व सर्वशक्तिमान
00:26:50:18 है ये यह यह जो क्वेश्चन है हेलो ये जो क्वेश्चन है यह क्वेश्चन नास्तिक नास्तिक से आती है तो पहले मैं आपको एक बात क्लियर कर दूं नास्तिक और साधारण जो आस्तिक होते हैं उनके बीच बहुत सी समानताएं है जो आस्तिक है वह भी पैरों से चलते हैं नास्तिक भी पैरों से चलते हैं आस्तिक है दांतों से चबा के खाना खाते हैं नास्तिक भी दांतो से चबा के खाना खाते हैं अगर कुछ चीज मिल रही है तो आप यह टोपा नहीं पहना सकते कि ये नास्तिकों का सवाल है भाई मैं आपको बताती हूं मैं आपसे ये जानना चाहती हूं मैंने एक सवाल पूछा है क्या आप जिस ईश्वर को ईश्वर कह रहे हैं वह सर्वशक्तिमान है या नहीं आप ईश्वर को मानते हैं आप भाई साहब अगर ईश्वर को ना नहीं मानते आपको यह पता नहीं है हम मानते हैं कि नहीं मानते ना ना आप आप मानते हैं कि क्या आप मानते हैं क्या आप सवाल के जवा आप सवा बच क्यों रहे सिपल क्वे पूछ गया है आपके द्वारा माना जाने वाला
00:28:05:21 पूजित होने वाला जो अल्लाह है जिसको आप ईश्वर कहते हैं वह सर्वशक्तिमान है या नहीं ले चलिए सर्वशक्ति का मान का मतलब क्या है आप क्या जानते हैं आप क्या जानते हैं उसके अनुसार मुझे बता दीजिए मैंने सर्वशक्ति का मतलब क्या जो सब चते श्रेष्ठ हो जिसको कहते हैं वो कुछ भी कर सकता है ये कुछ भी कर सकता है और दूसरी बात ये है सर्वशक्तिमान का एक अर्थ ले कि उसने ही सभी नियमों को बनाया है संसार को उसी ने बनाया है वह सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है उसके ऊपर कोई भी नियम लागू नहीं होता सब कुछ कर सकता है उसके ऊपर कोई नियम लागू नहीं होता वो कुछ भी कर सकता है
00:28:58:09 आप थोड़ा ऐसे बैठ के बात करें थोड़ा आपका फेस दिखाई दे आपका फेस दिख नहीं रहा ठीक से थोड़ा जी बांगला समझ में बांगला बांगला बांगला बांगला समझ में आएगा बांगला में बोलने के बांगला समझ में नहीं आएगा आप यहां पर आए हिंदी भाषी चैनल है आप हिंदी में बात करें जो अल्लाह अल्लाह है अल्लाह काज करेगा उसके नियम [संगीत] से अल्लाह के जो नियम है उसके नीचे दबा हुआ है अल्लाह उन नियमों को नहीं तोड़ सकता इस तरफ ये बात जोद एग्री करते है तो आपकी ईश्वर भी नहीं कर पाएगा देखिए वो बाद की बातें हैं कोई हमारे गलत सुनिए हमारे गलत होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता है हमारे गलत होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता है आप अपनी बात करिए फिलहाल जब आपकी बात चल रही है
00:29:56:02 तो समझ रहे हैं ना हम अपने आप को सही कर लेंगे जब हमारी बारी आएगी अभी आप अपनी बात बताइए अब होगा क्या जब मैं अपने जब मैं अपने आपको को बताने लगूंगा तो उस क्वेश्चन प क्वेश्चन क्वेश्चन प क्वेश्चन होते चले जाएंगे तो यह हिसा छूट ही जाएगा कि इस्लाम का ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं तो अब जब एक चैप्टर खुला हुआ है तो उसको बंद किए बिना दूसरे चैप्टर को मत खोलिए अब यह चल रहा है कि अल्लाह सर्वशक्तिमान है कि नहीं तो आप अल्लाह को सर्वशक्तिमान सिद्ध करिए तो मैंने आपसे पूछा आपने कहा कि सर्वशक्तिमान है और वह सब कुछ कर सकता है वह किसी भी नियम के नीचे नहीं है मगर अभी आप बता रहे हैं वो अपने ही नियमों के नीचे है नहीं यह तो मैं एक एक उत्तर दिया हूं अल्लाह उसकी मर्जी के अल्लाह अल्लाह की मत काज करेगा काम करेगा हमारी या से नहीं चलेगा एक मिसाल देता हिंदी बोल में हिंदी हिंदी बोलने में आप किसी हिंदी भाषी को भेजिए भाई
00:31:11:13 साहब बांगला बोला जावेना बांगला ठीक है इनको हटाइए भैया ठीक है आप किसी हिंदी भाषी को भेजिएगा अरे यह बोल ने कि जो अल्लाह है वो अपनी मर्जी से काम करेगा हमारी मर्जी से काम नहीं करेगा वो समझ रहा हूं मैं वो बोल ही नहीं पा रहे कर रहे तो ठीक नहीं है हिंदी का प्रॉब्लम है भाषा का प्रॉब्लम है थोड़ी समस्या है ऐसे में नहीं हो पाता कुछ चीज समझ में आएगी कुछ चीज समझ में नहीं आएगी ली कन्फ्यूजन क्रिएट होगी कल योगी योगी जी आपने वह वीडियो पूरा देख लिया है क्या जिसके बारे में आप कह रहे थे कि मुझे पता नहीं है मैंने अभी वीडियो देखा नहीं है कौन सा आर्य वरा वाला
00:31:59:01 तो आपकी राय क्या है उस राय वो राय बताइए आकर के हां बोलिए पहली बात तो मैंने पूरी वीडियो देख ली है उसमें आपकी वाइफ को की फोटो दिखाई गई उ ब्लर कर दिया गया वहां पे ठीक है उसमें आपके भाई के ऊपर ही बात हुई है ठीक है तो मैं पूर्णता निंदा करता हूं फैमिली के ऊपर नहीं जाना चाहिए ता साफ सी बात एक वीडियो आपने भी मेरे ऊपर बनाई है वीडियो नि वीडियो की आप निंदा करते हैं पूरी निंदा करता हूं थोड़ा नाम माम ले चैनल का नाम नाम लेके थोड़ा बोलिए थोड़ा चैनल का एक बार आप आप नाम बताइए चैनल का नाम आप बताइए आपको नहीं पता है जिस चैनल पे आप गए थे आप नाम बता दीजिए आपने नाम बोला बो प देखिए ू के ऊपर बात नहीं होती है आपको नाम नहीं पता है मुझे अभी रिमेंबर नहीं हो रहा है आपने नाम बोला था मुझे पता है लेकिन अभी रिकॉल नहीं हो रहा है तो आप एक बार बोल दीजिए नाम आर वरा आर्य वरा के चैनल में जो आपकी डिबेट जो आपके बारे में कहा गया फैमिली के ऊपर नहीं जाना चाहिए सिद्धांतों के ऊपर बात रखनी चाहिए पूर्णत में उसका खंडन करता हूं चलिए ये हो गया खत्म और उस वीडियो को हटा देना चाहिए उस वीडियो को हटा देना चाहिए फैमिली के ऊपर नहीं जाना
00:33:14:01 चाहिए बात होनी चाहिए सिद्धांतों के ऊपर आपने जब पिछली बार आए थे वाकई में वो नहीं देखा था मैं उसमें था लेकिन मुझे सची में याद नहीं पूरा तो नहीं देखा था मैं ए बीच में बीच में जुड़ा था ने पूरा नहीं देखा था इसलिए मैं नहीं बोल सकता था उसमें लेकिन जब मैंने देखा तो मैं बोलता हूं मैंने स्त भी कहा था कि फैमिली के ऊपर कोई जाए कोई बात हो नहीं लेके आना चाहिए वैसे ही जैसे कि आपने एक स्टोरी डाली थी मेरे ऊपर और मेरे लिए कहा था आपके ऊपर नहीं डाली थी कलयुग के एक नीच योगी के लिए डाली थी हां तो वो जो आपने नीच शब्द का प्रयोग किया कलयुग का योगी वो मेरे ही चैनल का नाम है आपने कहा कि इसने अपने माता और बहन के साथ संभोग किया होगा करके देख लिया होगा सबूत चाहिए तो सबूत भी दे दिया जाएगा ठीक है चलो इस विषय को छोड़
00:34:02:04 ने मैंने य कहा है हा मैंने ऐसा कुछ अगा मैंने उसम कहा है कि जो ऐसी शिक्षा देता है संभवत उसने ऐसा किया भी होगा जो कैसी शि जो कैसी शिक्षा देता है कैसी धर्म को समय समय पर बदलने की धर्म नहीं धर्म के नियम नियम बोला था वो अलग बात आपने गलत सुन लिया होगा धर्म क्या है धार धर्म जो धारण करने योग है वो धर्म है बस और भी धर्म मोक्ष को पाने के लिए अरे क्या है वो उसका अपना स्वरूप क्या है ये तो सब एक सेकंड एक सेकंड पिछली बार क्या हुआ था कि हमारी चर्चा करते करते आप गुरु परंपरा में चले गए थे इस बार चर्चा सर्वशक्तिमान ईश्वर के वही रहेगी आप ही तो शुरू कर रहे हो दूसरी चीजों पर नहीं नहीं अब चर्चा ही रहेगी पिछली बार तो चर्चा बदल दी गई थी अगर जो लोग देख रहे देख चने बदली गुरु के ऊपर आप गए थे उसके बाद मैंने बोला गुने चर्चा वीडियो देख
00:35:17:07 लीभी विय दोबारा दोबारा विषय के ऊपर मैं देख लेता हूं मैं देख लेता हूं दोबारा विषय पर आ जा मैं अभी आपको एक क्लियर कर दूं आपने बोला था अवतार बाद के सं में हमारी बहुत अच्छी चर्चा हो चुकी है आपने यह कह के अगला अगला चैप्टर खोला था क्योंकि क्योंकि सुनिए पले मैं तो बहुत प्रेम से था आप जब आपद पा मिनट ी आपने जा कर के वहा वीडियो कट करके डाला था पा मिनट पाच मिनट तक जब आप गुरु परंपरा की र चले गए आप प्रेम से थे तभी आपने वीडियो कट कर न्याय दर्शन के अनुसार वाघ छल बोलते है कि शब्द के अनुसार मैंने भाई साहब देखिए आप अगर यहां पर अपनी कुछ भरी हुई चीज कुछ भरी हुई चीजें बोलने आए हैं तो उसका मौका देने के लिए नहीं है च चर बदलने वाला कौन था आपके चर्चा से बिना अगर आपकी कोई बात असंतुष्ट पूर्ण थी तो चर्चा से बिना बताए जाने वाला कौन था आप थे उस चर्चा को अपना शीर्षक देख कर के अपने चैनल पर अपलोड करने वाला कौन था आप थे कर प्रॉब्लम पहली बात हमसे कह रहे हैं कि वाक चल है वो वो जिसने देखे वो जाइए और वीडियो को देखिए कि किस
00:36:32:09 प्रकार से अपवाद से बात करते चलिए आपने एक तर्क दिया कि व्यवहारिक सत्ता में ईश्वर हो सकता है क्या व्यवहारिक सत्ता सत्य है शंकराचार्य की दृष्टिकोण से देखिए आप शंकराचार्य जी ने क्या समझाया है और क्या नहीं समझाया है चले गए नहीं नहीं य पे लाइट हां बोलिए बोलिए शंकराचार्य ने क्या समझाया है और क्या नहीं समझाया है अगर इस परे आप बात करेंगे तो हमारी चर्चा का विषय फिर बदल जाएगा नहीं नहीं व्यवहारिक सत्ता सत्य नहीं है ना शंकराचार्य ने क्या बताया क्या नहीं बताया इस टॉपिक को अगर आप लाएंगे तो फिर बदलेगा फिर गुरु परंपरा पे आएगा फिर इस पे आएगा कि आपको कैसे पता शंकराचार्य ने क्या बताया क्या नहीं बताया मैं कह रहा ह अगर अगर आप शंकराचार्य को मानते हो तो फ बात करनी है अगर आपको इसम बात करनी है शंकराचार्य ने क्या बताया है देख देखिए देखि देखि देखिए क्या आपने अपने पॉइंट को रखने के लिए बोला ना क्या शंकराचार्य ने बताया
00:37:35:26 है उर जाना पड़ेगा शंकराचार्य क्या कहते हैं कैसे जन जो व्यक्ति जिस सिद्धांत को मानता है उसी के अनुसार अगर खंडन हो रहा है तो फिर मुझे अपनी बात कर आपने शंकराचार्य की शिक्षा कहां से ली है य बताइए शकरा मैंने पूछा शंकराचार्य की शिक्षा कहां से लीरा श से कुछ नहीं होगा चिल्लाने से कुछ नहीं होगा
00:38:20:06 ट जी पा बताइए आर समाज से आए साब चलिए जय सिया राम भाई जय सियाराम जय श्री राम बताइए मैं आपसे ये कह रहा था आपने जो मेरा वीडियो डाला है सब परेशान मेरा वडियो डाला आ अरे मैं वीडियो डालने से परेशान नहीं भाई जी पर आप आधी अधूरी बात करते हो क्या आधी अधूरी बात की बताइए आप आधी अधूरी क्या आपने ये कहा ग ये अ वो सर्वशक्तिमान ये हुआ वो हुआ पता नहीं क्या क्या उसम क डाल दिया आप ये बताइए आपने कहा था वह सर्वशक्तिमान वाली जो बात है वह आपके गुरु जी उसका उत्तर देंगे वो ले आए आप बात हां वो लेके आया मेरे जो मेरे गुरु उन्होने वीडियो डलवा दिया है ना पर आप जवाब ले आ डलवा दिया है ना वीडियो किसने मैं तो बता तो रहा हूं आपसे उन्होंने वीडियो डलवा दिया है नहीं आप जवाब लाए
00:39:29:16 आप जवाब ला पास गया ही नहीं आप गए नहीं लो मैं गया ही नहीं जवाब सुनो तो स मैं बता तो रहा हूं उसका वीडियो उन्होने बनवा के डाल दिया चैनल बना हुआ है आपने वो वीडियो देखा है कौन सा जो दो सर्वशक्तिमान वाला हा देख तभी तो बता रहा हूं वीडियो देखा है तभी तो देखा है तो आप समझ गए और क्या और आप देख लेना आप अच्छी तरह से समझ
00:40:05:10 जाओगे तो आपने देखा है तो इसका मतलब अब आप समझ गए होंगे कि आर्य समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वह सर्वशक्तिमान है कि नहीं हा जी हा है तो सही है पका आज तो यह नहीं कहेंगे कि गुरुजी इसका जवाब देंगे पक्का है ना जवाब क्या उन्होने दे रखा है ना वीडियो देख लेना पड़े भाई साहब साहब मैं तो आपसे पूछा आप मैं वीडियो क्यों देखू मैं कह दे रहा हूं आप जाकर के शंकराचार्य की किताब पढ़ लेना य मत आओ जाओ पढ़ लो बता दूं ना पढ़ लो ब्रह्मसूत्र प ब्रह्मसूत्र पढ़ लो जाकर के तो उन्होने भी तो उसम ब्रह्मसूत्र से व दिया भाई साहब अगर आपको कोई ऐसी बात मुझे कहनी है कि आप वो वीडियो देख लो तो मैं भी आपको कह दूंगा शंकर परंपरा के आचार्य इतने हो चुके हैं इतने हो चुके हैं इतने नाम इतने ग्रंथ लिख चुके हैं आपका जीवन निकल जाएगा आप शायद पढ़ भी ना पाओ पूरे ग्रंथ तो ये कोई बात नहीं है कि आप जाकर के वीडियो देख लेना आपको वो वीडियो देख कर के समझ में आ गया कि नहीं आया कि आर समाज का ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं
00:41:20:15 मेरे तो समझ में आ गया जब ये बताओ अवतार ले लेगा सुनो भाई साहब अगर जन्म ले आगे मत चलो एक एक करके चलेंगे आगे मत चलो क्या वो सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है और क्या अच्छा सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है हम उस पर तो कोई नियम लागू नहीं होता भाई जो परमात्मा के जो नियम है वो वही तो करेगा यह थोड़ी नहीं है कि तुम कहो भाई गेट के पास खड़ा हो जा परमात्मा ये तो करेगा नहीं परमात्मा नहीं तो हम कहां कह रहे हैं हम कह रहे हैं हम ये कह रहे हैं वो कर सकता है कि नहीं हमारे कहने पर करेगा कि नहीं यह अलग बात है उसके अंदर क्षमता है कि नहीं यह अलग बात है हां क्षमता सब कुछ है पर अवतार लेने की जरूरत नहीं है अवतार लेने की क्षमता है सब कुछ है पर अवतार लेने की जरूरत नहीं आप मुझे थोड़ा क्लियर करिए आर्य समाज के ईश्वर में अवतार लेने की क्षमता है क्षमता सब कुछ है पर लेने की जरूरत ही नहीं है अवतार
00:42:36:19 हा यानी कि आर्य समाज का ईश्वर भी आर्य समाज का ईश्वर अवतार ले सकता है ले सकता पर लेता नहीं है ना जरूरत ही नहीं है ने की अरे एक बात क्लियर कहो वो आगे की बात जब मैं पूछू कि वो लेता है कि नहीं लेता तब आप बताइए अपनी बात को ठीक से कह पाने में जो प्रश्न किया है उसको नीट एंड क्लियर कह पाने में दिक्कत हो रही है क्या मैं आपसे पूछ रहा हूं व अवतार ले सकता है या नहीं आर समाज का ईश्वर नहीं लेता है अवतार देखो मैंने क्या पूछा ले सकता है कि नहीं ताकत है कि नहीं ताकत है ना सब कुछ सब कुछ कर सकता है ईश्वर तो तो आप एक बार बोल दो ना हा आर्य समाज का ईश्वर अवतार ले सकता है क्या दिक्कत है बो लेता नहीं है मैं कहां कह रहा हूं मैं पूछ रहा हूं लेता है कि नहीं लेता भाई मैं यहां से उठकर जो है और चाइना जा सकता हूं जापान जा सकता हूं जाता हूं कि नहीं नहीं जाता यह तो बाद की बात है जा सकता हूं कि नहीं यह अलग बात है अब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या आर्य समाज का ईश्वर आर्य समाज का ईश्वर अवतार ले
00:43:51:19 सकता है कि नहीं नहीं लेता अवतार अरे सवाल ही बदल दे रहे सवाल नहीं बदल रहा बड़े भाई साब मैंने आपसे पूछा वो सवाल वो जन्म लेता है कि नहीं अवतार लेता है मैंने पूछा क्या मैंने पूछा क्या मुझे पता है आप बातो में घुमा के ना य यही सिद्ध कर दो देख आ समा ने पता है तो फिर आप क्यों आते हैं जब आपको पता है कि मैं बातों को घुमा सकता हूं तो आप आते क्यों है मुझे पता है ना आपकी बात तो फिर क्यों आए मैं तो एक्सपर्ट हूं और आप छोटे बच्चे हो मैं बात घुमाऊंगा आप घूम जाओगे जैसे जैसे माता पिता अपने बच्चों को समझाते हैं ना घर में बेटा बाहर मत जाना वो झोली बाबा आएगा वो तुमको ले जाएगा ऐसे ही आप लोगों को समझाया जाता है बेटा उसके चैनल पर मत जाना वो बातों को ऐसा घुमाएगा तुमको ले जाएगा कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं झोली पकड़ने वालो को पकड़ लेते हैं ठीक है आप मुझे पकड़ लो आप मुझे पकड़ लो बड़े भाई मैं चाहता हूं कि मुझे
00:45:06:19 पकड़ा जाए नहीं देखो मैं बताऊ आपकी मुझे देखो एक बात पसंद आती है फिहाल करने का अ लगता एक मिनट फिलहाल मैं एक बात कर दूं वो जो कलयुगी योगी जो अभी गया है हां जी वो प्रमाण को आगे नहीं रखता है तर्क को आगे रखता है पर हमसे जब बात करने तो प्रमाण को आगे रखा है कि भाई शंकराचार्य ने माना है क्या उसका उत्तर यह है उसकी बात का उत्तर कि शंकराचार्य ने व्यवहार को सत्य माना है क्या नहीं माना है व्यवहार को सत्य नहीं माना ये सत्य है मगर उस व्यवहार में माता भी आती है बहन भी आती है यानी कि व्यवहारिक सत्य सत्य है ही नहीं मगर तब तक आपके लिए व्यवहारिक सत्य सत्य है जब तक आपके लिए माता माता है बहन बहन है हमने अपनी वीडियो में कितनी बार बता दीय बात मगर उसके भेजे में घुसने नहीं है और दूसरी बात ईश्वर के अवतार को स्पष्ट रूप से माना है कि भगवान लीला करते हैं भगवान यह करते हैं व्यवहारिक सत्य अलग है पार मर्थक सत्य अलग है कितनी जगह माना है शता सत्रप निषद में माना है इतने सारे हमने वीडियो बना रखे हैं अब वो आ कर के पूछ रहा है उसने माना अब प्रॉब्लम क्या है प्रॉब्लम क्या है जब उसने नाम लिया शंकराचार्य ने माना है क्या अब मैं दिखाऊंगा शंकराचार्य ने
00:46:21:20 ये लिखा है वो कहेगा यहां ये लिखा है तो टॉपिक क्या हुआ चेंज हुआ टॉपिक चल रहा था शक्तिमान ईश्वर है तो यह कर सकता है कि नहीं यह कर सकता है कि नहीं और फिर क्या हुआ फिर टॉपिक इस पर आ गया कि शंकराचार्य ने क्या लिखा है क्या नहीं लिखा है फिर टॉपिक इस पर आएगा भैया तु तुम्हारे पास शंकराचार्य की किताबें आई कहां से शंकराचार्य खुद अपने भगवत गीता के भाष्य में 13 अध्याय के दूसरे श्लोक में लिख रहे हैं कि संप्रदाय हीन व्यक्ति परंपरा से हीन व्यक्ति से शिक्षा नहीं लेनी चाहिए वो कितना भी बड़ा विद्वान हो त्याग देना चाहिए जब वह खुद परंपरा की बात कर रहे हैं परंपरा से शिक्षा लेनी चाहिए तो उनकी शिक्षा कम से कम परंपरा से ले लो मेरे भाई क्यों आए हो बिना उनकी परंपरा से ज्ञान नहीं लिया शंकराचार्य ने क्या कहा क्या नहीं कहा तुम हमें बताओगे जिनके द्वारा तुम्हारे पास शंकराचार्य की ग्रंथ आ रहे वह नहीं बताएंगे तुम बताओगे हमें कि शंकराचार्य ने क्या कहा क्या नहीं कहा सोचने वाली बात है जो लिख रहा है मेरे द्वारा स्थापित पीठ पर आरू वाला सन्यासी मुझ शिव का स्वरूप ही मान्य होगा वह सन्यासी नहीं बताएगा शंकराचार्य ने क्या लिखा है यह बताएंगे
00:47:38:19 ट को चज करना है सर्वशक्तिमान ईश्वर बात करनी मगर शंकराचार्य ने क्या कहा है क्या नहीं कहा इस टॉपिक को ले आ बीच में तो टॉपिक को तो तुम ला रहे बीच में हा बता अब मैं आपसे दोबारा नर्मल आ जाता हूं पॉट टू द पॉइंट क्या आर्य समाज आप कुछ कह रहे थे कि आपको हमारी कोई बात अच्छी लगती है व बता दीजिए क्योंकि ऐसा सुनने को कम मिलता है अच्छी लगती है बात मैं बताऊ मैं वो आदमी सही को सही बताता हूं मेरे अंदर य खासियत है मुझे आपकी जो बात करने का तरीका है ना मुझे बहुत अच्छा लगता है अच्छा मैं आपकी वीडियो बहुत ज्यादा देखता हूं और मुझे आपकी बात करने का तरीका बहुत अच्छा लगता है कुछ अच्छा लगे या ना लगे बत अलग चीज विचार अच्छे लगे बात करने का तरीका बहुत अच्छा लगता है आपका
00:48:28:20 हम जी और मैं आपसे ये कह रहा था मेरे जानने वाले हैं हां जी बोलिए मैं ये कह रहा था साहब सिंह जी आपके अनुसार धर्म की परिभाषा क्या है मेरे अनुसार मैं आपको बताता हूं मैं मानता हूं धर्म की परवा वही है जो धर्म को धारण करते हैं धर्म जो धारण करने योग्य वही धर्म है मैं ये मानता हूं जी धारण तो आप र् मैं पूछ रहा हूं धारण तो आपने टीशर्ट भी की है ना [संगीत] सत्य सत्य सत्य ही सनातन है ना हा स सनातन सनातन ही विज्ञान हा ये धर्म की परिभाषा ये धर्म की परिभाषा है इसको थोड़ा प्रैक्टिकली एमप्लीफाई करिए इसको प्रायोगिक करिए कि इसको आप यूज में कैसे लेंगे इस परिभाषा को और अगर यूज में लेने वाली परिभाषा कोई और है तो वो परिभाषा बताइए जैसे मनुस्मृति में दिया तो गया है धर्म के द लक्षण दिए गए हैं उसमें धर्म के वो लक्षण है हा धर्म की उपयोगिता क्या है आपके जीवन में क्यों चाहिए आपको
00:49:45:19 धर्म धर्म क्यों चाहिए हां सही गलत के लिए धर्म होगा तभी अगर हम धर्म पर चलेंगे जभी तो हमें सही गलत का ज्ञान होगा यानी आपको सही गलत पर चलने के लिए धर्म चाहिए जबकि हम लोग ये समझते थे कि धर्म से हमें सही गलत का पता चलता है हां धर्म से हमें सही गलत का पता चलता है और क्या और सही और सही गलत का पता चलने से क्या होगा तभी तो परमात्मा के बारे में पता चलेगा जब धर्म की जानकारी होगी और सही गलत की जानकारी होगी ी तो परमात्मा का पता चलेगा परमात्मा कैसा स्वर कैसा नहीं है और कैसे प्राप्त होगा और क्या तो धर्म की जो जो उपयोग में आने वाली वो है परिभाषा वो क्या है कि जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले वेदा आदि सनातन शास्त्रों द्वारा बताई गई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त कराने वाली विधि का नाम धर्म है इसीलिए भगवान ने कहा ना तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एकमात्र शास्त्र प्रमाण है
00:51:00:21 हां जी ठीक है तो आपका जो धर्म है वो इस बात पर टिका हुआ है आपका जो धर्म है वो इस बात पर टिका है कि वो जो धर्म है वो आपको ईश्वर तक पहुंचा रहा है कि नहीं आपकी जीव आपकी जो अंतिम इच्छा है उस इच्छा को पूरी करवा रहा है कि नहीं जो मूल आपका है ना मूल इच्छा वो उस इच्छा को पूरी करवा रहा है या नहीं सही बात है आपकी है ना हां तो आपकी जो जीव की जो मूल इच्छा है जो एक नास्तिक के अंदर भी है वो क्या
00:51:43:19 है मैं आपकी बात समझा र नास्तिक के अंदर क्या स्पष्ट बताओ थोड़ा दुनिया के प्रत्येक नास्तिक में भी सत चित आनंद की चाह विद्यमान है चा हा सच को जानने की चाह सत चितता आनंद सच को जानने की नहीं सत चित आनंद को प्राप्त करने की चाह विद्यमान है मृत्यु विहीन जीवन की चाह विद्यमान है जड़ता रहित जीवन की जड़ता रहित जीवन की चा विद्यमान
00:52:19:16 है असतो मा सद गम तमस माया मतया इनकी चा विद्यमान है दुनिया के प्रत्येक जीव में चाहे वो वो नास्तिक क्यों ना हो जानवर क्यों ना हो वो भी चाहता है सदा मृत्यु से दूर रहना सदा आनंदित रहना सब कुछ जान लेना वो भी चाहता है ठीक है इन चाह ये जो चाह है ना इनको निचोड़ निकालो तो वो सच्चिदानंद होना चाहता है क्या होना चाहता है सच्चिदानंद हां तो यानी कि इस सच्चिदानंद को प्राप्त कराने वाले जो नियम है कि यह नियम प्राप्त कराएंगे और यह नियम यह करोगे तो प्राप्त होगा यह करोगे तो प्राप्त नहीं होगा यह जो नियम है इसी का नाम धर्म
00:53:14:18 है तो मैंने भी तो वही बताया था तो जब इसका नाम धर्म है तो इसका मतलब है कि आप जिन नियमों को मान रहे हो के धर्म है उनके द्वारा जो मिलने वाला मोक्ष है मिलने वाला ईश्वर है वो सच्चिदानंद होना चाहिए और क्या है ना हां जी अब यह बताओ कि आर्य समाज के अनुसार मुक्ति क्या है बंधनों से मुक्त होना ही मुक्ति है नहीं आर्य समाज के अनुसार जीव कुछ काल के लिए मुक्त होता है उसमें कुछ गणना है लंबी चौड़ी कुछ लाख वर्षों के लिए मुक्त होता है उसके बाद वापस आ जाता है फिर बंद जाता है यह आर समाज के अनुसार मुक्ति है क्या यह जीव की चाह वाली मुक्ति है दिखा दू लिखा हुआ किसम लिखा मेरे को बता दो मैं भी चेक कर लूगा ब भाई साब मैं भी चेक कर लू क लिखा हुआ एक बार दिखा दो
00:54:48:24 दो समथिंग पने पर था इसमें लिखा है मुक्त जीव मुक्ति में प्राप्त होकर ब्रह्म में आनंद को तब तक भोग के पुनः महाकल्प के पश्चात मुक्ति सुख को छोड़कर संसार में आते हैं यह देख लो
00:55:24:21 सत्या सत्या प्रकाश और इसमें कौन पेज है संसार में वापस आते हैं यह तो मुझे पता है लिखा हो कौन सा पे पेज नंबर बता दो चेक कर लूंगा जाके अभी तो मैं कहीं और हूं अभी तो नहीं ठीक है पेज नंबर 199 है चेक कर लीजिएगा तो य कहा जा रहा है यहां पर कहा जा रहा है कि जो जीव है वो मुक्त होने के बाद वापस वापस आएगा तो क्या जीव को मुक्ति मिल रही है क्या जीव को मुक्ति मिल रही है इसके बारे में मैं पढ़ के जब बताऊंगा पूरा डिटेल क्या लिखा हुआ है आपने ईश्वर के बारे में हा पढ़ लिवर के बारे में पढ़ लिया हा जी तो आप ईश्वर की बात ही बता दीजिए मुझको ईश्वर सर्वशक्तिमान है कैसे क्या बता सर्वशक्तिमान है तो बता हां क्या चीज अवतार अवतार ले सकता है या नहीं अब नहीं लेने
00:56:39:27 की जरूरत ही नहीं अवतार नहीं लेता अरे मैंने सवाल य पूछा देखिए साहब सिंह जी यहां आपकी चोरी है थोड़ी सी अगर आप सत्यवादी है ना तो सीना सीना तान के सत्य बोलना सीखिए अपने नाम साहब सिंह लगाते हैं शेर शेर लगाते हैं अपने नाम में कितनी बार आप उस सवाल से बच रहे हैं मैं सवाल कर आप जानते हैं कि आप क्या कर रहे हैं मैंने आपसे सवाल पूछा है एक सरल भाषा में हिंदी में क्या ईश्वर अवतार ले सकता है या नहीं तो आप ये बोलते वो लेता नहीं है आप इसका जवाब दो ले सकता है कि
00:57:24:00 नहीं ये कौन सी बड़े भाई बात आप क्लास में आइए अच्छा वो आप कह रहे हो उसको जरूरत नहीं है ठीक आ जाएंगे बड़े नहीं नहीं रुको आप कह रहे हो उसे जरूरत नहीं है वेदों में जगह जगह पर अलंकार लगाया गया है मंत्रों में जहां जहां पर जहां जहां पर अवतार विषयक बातें हुई है ईश्वर के स्वरूप विषयक बातें हुई है वहा सब जगह ये दयानंद जी ने कह दिया समाज ने बोल देता है कि अलंकार लगा है यहां पर यहां ईश्वर वास्तव में अवतरित नहीं हो रहे हैं वास्तव में उनका स्वरूप नहीं है ये अलंकार है उपमा अलंकार है ये अलंकार है वो अलंकार है अच्छा जी
00:58:13:28 हम तो अलंकार लगाने की क्या आवश्यकता है ईश्वर को ये तो देखो विद्वान बताएंगे जो व्याकरण आचार्य है इस पर तो आप चर्चा कर सकते हो ना वेद भाष्य कौन सही है कौन गलत है भाई साहब मैंने आपसे पूछा अलंकार लगाने की आवश्यकता क्या है अलंकार होता है सुंदरता के लिए वो कोई प्रतीक भी तो हो सकता है समझाने के लिए बताया गया हो समझाने के लिए यानी कि किसी बात को सरलता से समझाने के लिए ईश्वर अलंकार लगा सकता
00:58:51:24 है चलिए ठीक है आप जो है आप आपसे बेकार मगजमारी करना ठीक नहीं है आप क्लासेस जवाइन करिए आपको बहुत अभी आप इस योग्य नहीं है कि आपसे इतनी देर तक बात की जाए ठीक है यह सवाल से सब लोग क्यों भागते हैं जैसे रामपाल जी वाले भी भागते हैं ये लोग भी भागते हैं बस मैं आपको जाते जाते ये कहूंगा कि कुमार एक महान जाति है हमारे कुमार भाई महान है यह ध्यान रखिएगा जी विशाल भाटिया जी जय श्री राम जय श्री राम और बताइए नमस्कार नमस्कार सभी को नमस्कार नमस्कार आज आप मेरी थोड़ी सी शंकाओं का समाधान कर देंगे शंकाओं का समाधान आप पर्सनली मुझसे बात करिए वहां पर करेंगे नहीं नहीं रामायण पर कुछ ट है बस एक दो बस वाल्मीकि रामायण ठीक है बोलिए अभी एक य पर वाल्मीकि रामायण पर एक चैनल आता है 21 नोट्स के
01:00:06:24 नाम से व जिसम वाल्मीकि रामायण के ऊपर वो दिखाया जाता है उनमें मतलब दो तीन चीज उसम ऐसी दिखाई जाए जो मतलब मुझको पर्सनली मतलब दिमाग के बा की चीज है वो जैसे यह है आप व्यक्तिगत व्यक्तिगत संपर्क कर लीजिएगा वहां पर हम लोग बात करेंगे इ बातो ठीक है [संगीत] बक नमस्कार शिवांश भैया नमस्कार पहाड़ी जी नमस्कार जय श्री राम ज श्रीम आज की चर्चा का विषय क्या है देखिए मुख्य विषय तो यह था कि हमको जो है जो ट दिए जा रहे हैं चैनल को बैन कराने के पीछे लगे हुए हैं सब लोग हमारे एक रील पूर्व में जाकिर नायक वाली डिलीट कर दी गई थी उसके बाद अभी बीच में हमारे कमेंट्स पर जो है प्रहार हो रहा था वानिंग आ रही थीय से और अभी एक रिसेंटली एक वीडियो और डिलीट कर दिया गया है और इनकी तरफ से थट तो आते ही रहते हैं कॉल्स आते रहते हैं य सब चीज है वही चर्चा का विषय हा क्या मैंने आपको रीसेंट का वीडियो देखा बहुत अच्छा लगा देख एकदम बहुत सरा अच्छा
01:01:21:24 लगा सराह वयो है और किसी मतलब पर्सनल अटैक ये नहीं करते हैं और ना ही इनका कोई पर्सनल कुछ वो है बस आइडल जीी जो विकृत आइडल जीी है जो आगे चलकर घातक हो सकती है जिन्होंने हिंदू समाज को अपंग बना दिया है अलग-अलग मत मता तरों में जो बढ़ गए हैं हमारे मूल जो चीजें हैं जो नहीं समझ पा रहे हैं जैसे वर्णाश्रम व्यवस्था हो गई ये सब चीजें हो गई इसके कारण जो आगामी गलत परिणाम होंगे उसका ही ये विरोध किया जा रहा है इस चैनल के माध्यम से लेकिन ये लोग नहीं समझ के उसको पर्सनल अटैक समझते हैं और शायद मास रिपोर्ट करवाते होंगे आपकी वीडियो को जिसके कारण वो सब वीडियो हटा दी जाती है यह वाली कुछ कमेंट कर रहे हैं शिवांश की दुकान बंद हो रही है इसलिए घुमा रहा
01:02:14:22 है अभी दुकान बंद करवा के आ रहे हैं देख लीजिए सबूत सबूत भी है बहुत बंदर चला सब एक बार देखेंगे हम फिर से बहुत सरानी कार्य है आपके क्षेत्र में आपने किने बत काम किया नहीं है रा
01:03:02:28 येर दि इन लोगों ने ू धर्म के मा की पूजा करने वाले मूर्ख है माता के सा बलात्कार हो रहा हैम ब आ बस करो बस करो आर्य आयुष जी कह रहे हैं कि इजी टॉपिक पर हर बार क्यों आते हो तो आर्य आ जी क्या कमेंट्स के माध्यम से अपने पक्ष को रखते रहना यह इजी नहीं है क्या सामने आकर के बात करने से तराना यह कायरता नहीं है आपका सिद्धांत आप पर लागू नहीं होता दूसरों के लिए केवल संदीप जी
01:04:08:03 बताइए संदीप जी चेहरा दिखाएं बात करें चले गए संदीप जी चेहरा दिखाएं हां जी बोलिए अब जो साधारण व्यक्ति है ना उसकी बात ऐसी हो गई है कि बस वो चला जा रहा है उसको पता ही नहीं है वो कहां चला जा रहा है अब जैसे साहब सिंह जी है ये जो है इसलिए देखिए वो मैंने बताया ना कि फसाया कैसे जाता है व्यक्ति को उसकी जो कमजोर न होती है ना उस पर वार किया जाता है गायत्री मंत्र गायत्री मंत्र गायत्री मंत्र अरे देख वो तुझे गायत्री मंत्र नहीं पढ़ने देते क्यों क्योंकि वो तुझे नीट समझते हैं तू शूद्र है हमारे साथ आज हम तेरा जने कराएंगे हमारे यहां जो है कर्म से माना जाता है ऐसे ऐसे करके अपने साथ भर लिया अब साहब सिंह को ये नहीं बता पाए कि भैया हमारे द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान नहीं है हम तो केवल भीड़ बटोर रहे हैं हमारे हमारे द्वारा जो मिलने वाली मुक्ति है मुक्ति वो मुक्ति नहीं है जो जीव की चाह का वास्तविक विषय है अब ये लोग कहते हैं नहीं नहीं ऐसा नहीं है वो जो है मुक्त हो जाता है उसके बाद मुक्ति के बाद वो वापस आना
01:05:23:08 वापस आना पड़ेगा इसमें आगे तर्क भी उन्होने उन्होंने अपने सही अपने ग्रंथ उन्होने सही से नहीं पढ़े और यहां तर्क करने आ गए उनको यही नहीं पता था इसम उन्होने जो है तर्क भी दिया है इसमें उन्होने तर्क क्या दिया है कि अगर व्यक्ति वापस नहीं आएगा तो मुक्ति से बोर हो जाएगा बताइए यह तर्क है इसका मतलब सबसे बड़ा बोर तो ईश्वर होना चाहिए जो हमेशा मुक्त है वो बोर नहीं हुआ अपनी मुक्ति से कुछ भी बोल देते हैं अच्छा दूसरी एक दूसरी एक बात और है कि चलो मान लिया कि इनका फंडा सही है मगर मुक्त तो वो सभी तरीके की चीजों से होना चाहिए ना उस 36 लाख कितने लाख वर्ष है 33 लाख 20 सहस्त्र वर्षों की एक चतुर्य गी दो सहस्त्र चतुर युग यों का एक अहोरात्र ऐसे 30 अहोरात्र का एक महीना ऐसे 12 महीनों का एक वर्ष ऐसे शत वर्षों का प्रांत काल होता है तो इनका ये जो मुक्ति का काल है ये है इतना लंबा है ठीक है मगर क्या इस बीच वो पूर्णतया मुक्त रहा सोचने वाली बात है नहीं क्यों क्योंकि
01:06:38:13 उसको एक दुख था क्या दुख था उसको कि मुझे वापस जाना है यह तो था यह दुख तो चिपका है ना इसका क्या करोगे वो पूरे प्रांत काल में ये जानता है कि मुझे अभी वहां दुख भोगने कष्ट भोगने दोबारा वहां जाना है बिल्कुल जैसे कि आप अगर एक सामान्य व्यक्ति की बात करें वो कहीं पर घूमने जाता है अपनी जो आम जो दिनचर्या होती है उससे समय निकाल कर के वो घूमने जाता है कुछ करने जाता है छुट्टी मनाने जाता है जितनी बार उसको याद आता है ना कि अभी मुझे वापस अपने उसी काम पर लगना है तो उसके मन में संकीर्णता आती है कि नहीं आती है बिल्कुल आती है बच्चों की गर्मियों की छुट्टियां होती थी सबको याद होगा ना गर्मियों की छुट्टियां होती थी पहले दो महीने की पूरे जो क्या कहते हैं वो मई और जून पूरा होता था वो पूरे में हम लोग खेलते थे कोई दिक्कत नहीं है मगर जितनी बार ये याद आता था ना एक तारीख को स्कूल खुलने वाला है उतनी बार अरे ऐसा ही नहीं रहेगा बदल जाएगा तो हम तो आनंद चाहते हैं ना
01:07:53:15 अनंत आनंद अनंत ये कैसा अनंत आनंद है भाई जिसमें कहा जा रहा है वापस जाना है मैंने ना अब एक निर्णय लिया भैया हां बोलिए मैंने निर्णय यह लिया कि अब मैं भी अ ग्रंथों से इनका खंडन ज्यादा करूंगा नहीं क्योंकि जब मैंने बताया था अमि दस जी के चैनल पर गया था तो एक व्यक्ति ने बोला था हम उन्हीं को मानते हैं कि जो हमको अनुकूल होते हैं तो अब जो खुद ही कह रहे हैं कि हम वो चीज मानते जो हमको अच्छी लगती है ग से तो हम क्या उनका खंडन करें फिर वही तो नहीं नहीं अब उनका अब उनका खंडन उन्ही किताबों से होगा बक ऐसा सतलोक है जहां से लौट के आना पड़ता है जी का साथ ला सकते हैं जी जी जय श्री राम बोलिए जय श्री राम जी हा जीी आपसे बात हुई थी उस दिन एक्चु मेरा रिचार्ज जो है व खत्म हो गया था अच्छ जी हा तो को कंटिन्यू नहीं करना पड़ा तो मेरे को बहुत सारे क्वे जैसे आपने मेरे से बोला था के मतलब हम
01:09:08:21 जो है हम उसको नहीं मानते हैं कबीर सागर को कबीर भीज को नहीं मानते हैं मतलब जो चीज कांट्रडिक्ट्री है जो वेद विरुद्ध है वो नहीं माना जा सकता जीी हा जीी तो को य बोलना था उनमें और आप में क्या फर्क र गया मैं बता देता हूं फर्क क्या है जी देखिए इसको स्टोरी को फिर से वहीं से शुरू करना पड़ेगा सबसे पहली बात य समझ लीजिए कि जीव की वास्तविक चाह क्या है सच्चिदानंद स्वरूप हो जाना सत चित आनंद को प्राप्त करना दुनिया में ऐसा कुछ ना हो जिसे मैं ना जानता हूं मेरे मुझे जो प्राप्त होने वाला सुख है वह कभी खत्म ना हो और मैं सदा सत होकर रहूं सच्चिदानंद स्वरूप हो जाना जी तो अब इसमें एक बात आती है कि हमारी इस चाह की पूर्ति कौन कर सकता है जो स्वयं सच्चिदानंद स्वरूप हो ये हमने उस दिन कर लिया था ना क्लियर इतना तो क्लियर है आपको जी जी ठीक है तो हमारी इस चाह की पूर्ति कौन कर सकता है जो स्वयं सच्चिदानंद स्वरूप हो अब उसको अगर हम सिंपली सिंपल भाषा में कह ले तो वो ईश्वर जो किसी भी प्रकार के
01:10:23:25 नियम के नीचे नहीं है बल्कि सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है ठीक है जी हा तो इसका अ यह है कि हमारी चाह का वास्तविक विषय वह ईश्वर है जिस पर कोई नियम लागू नहीं होता यहां तक क्लियर है आपको जी हा तो अब जब उस पर कोई नियम लागू नहीं होता है तो दूसरा क्वेश्चन यह बनता है कि जब उस पर कोई नियम लागू नहीं है और वही सब कुछ बनाने वा सर्व नियामक है सर्व नियंता है सब कुछ उसी ने बनाया है तो फिर यह कैसे पता किया जाएगा कि जो उसने हमें ग्रंथ दिए हैं वह हमारे हित के लिए हैं या अहित के लिए हैं जी जी एक तो मैं जब वह सर्व नियामक है जैसे कि आपकी बात कर ले जैसे जैसे आपने कबीर को भगवान माना तो कुछ अंशों में कबीर को भी लीला करने वा माना गया कि नहीं माना गया जी जी माना गया लीला का मतलब कि ऐसा कुछ दिखाना जो वास्तविक नहीं है जी है ना जैसे कि आपके
01:11:39:16 ये रामपाल जी के अनुसार कबीर जो है वह भगवान है और भगवान को आवश्यकता तो है नहीं किसी को गुरु बनाने की हां जी हां जीी मगर उन्होंने गुरु बनाया आप मेरे को पाच मिनट दे रियली सॉरी अब मेरे को पा मिनट दे सकते हैं मेरे को जाना पड़ेगा ठीक है आप आइए ठीक है जी चक्र पाणी जी बोलिए जय श्री राम चक्र पानी जी कैसे हैं आप ज श्री
01:12:19:01 राम ज बढ़िया है जी वीडियो मिला आज का फ वाला जी वो व इस पर भी डाला गया है य पर भी है अच्छा हा एक शोध करता आए शोधकर्ता जी आप अपना चेहरा दिखाए फिर बात करें और अब यह कलयुगी योगी को लीजिएगा नहीं वो केवल बात को बतंगड़ बनाने लिए आते किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए नहीं
01:13:01:03 आते वो कंटेंट लेने आया था केवल जैसे अमित दास नहीं आने लगा था बीच में थोड़ हर दो तीन दिन में कोई बात लेकर आ जाता फिर यहां से व उठा कर के वहां भेजेगा जो अभी बहन आए थी नाम भी उसी हिसाब से रख रखा है उन्होने अच्छा अकेलापन सॉलिट्यूड कार्थ एकांत जो जि म जिसमें दिल और दिमाग अलग थलग हो जाता है उस स्थिति को बोला जाता हैय अच्छा समझ में है
01:13:36:18 ये सॉलिट्यूड का जी शिवांश भैया नमस्ते मैं कह रहा था कि आज की चर्चा में आते हैं मैं कह रहा था कि आज की चर्चा का मुख्य विषय यह है कि आपको जो थ्रेट आ रहे हैं वो इसलिए आ रहे है क्योंकि कई सारे लोग हमारा वक्तव्य या आपका वक्तव्य नहीं समझ पा रहे हैं आपकी जो रियल इंटेंशन है जो आप जिस तरीके जिस लिए आप ये सब चीजें कर रहे हो हिंदुओं को एक करने के लिए और मूल जो हमारे सिद्धांत है उसकी रक्षा के लिए कि जो हमारे मूल सिद्धांत है उसको सब लोग मान के एकजुट हो जो खंड खंड और संस्थाओं में अलग-अलग ग्रुपों में जो हिंदुइज्म बट गया है तो खतरे के समय में यह एक हो पाए क् कुछ सार्वभौम सिद्धांत है जो सबको मान्य होने चाहिए आप इसके लिए कर रहे हो पर इसके लिए भी इंटेलेक्चुअल जो कैपेसिटी है होनी चाहिए ना तो बहुत सारे लोग वो नहीं समझ पा रहे हैं और वो सोच रहे हैं कि आप उनसे प पर्सनल दुश्मनी कर रहे हो जिसकी वजह से वो क्या कर रहे हैं आपके वीडियो को डिलीट कराने के षड्यंत्र हो रहे हैं गलत गलत कमेंट करते हैं जैसे आप बता रहेते थ्रेड्स भी आ रहे हैं तो ऐसे लोगों पे अगर हम समय बर्बाद ना करके अपने समान
01:14:51:25 जो हमारे चीजों को समझते हैं या हमारे विचारों को जो महत्व देते हैं उनसे ही अगर हम संपर्क करें और उनके द्वारा अगर होना होगा तो वह लोग भी समझ जाएंगे जैसे अभी जब मैंने जवाइन किया था तो इससे पहले आपके साथ एक महानुभाव चर्चा में थे उनको जितना भी समझा समझा दो मुझे लग रहा है वो समझना ही नहीं चाहते हैं और अगर उनको यह भी पता लग जाए कि सामने वाला सही बोल रहा है फिर भी वह कुछ ना कुछ अड़ंगा डालेंगे सबसे पहली बात यह है कि हम जिस विचारधारा को मानते हैं उसके ग्रंथ तो हमें पड़े होने चाहिए और उसका हमें अच्छा नॉलेज होना चाहिए जब आपने उनके ग्रंथों को कोट किया तो वह खुद नहीं जानते थे कि उनके ग्रंथों में यह लिखा है तो इसी से हमें पता लग जाना चाहिए कि इन पर हमें समय व्यर्थ नहीं करना है तो अब एक मैं आपको श्लोक प्रस्तुत करूंगा श्लोक यह है कि जो आपने बोला था कि इनके जो समाधि जो इनका जो लक्ष्य होता है आर्य समाज का कि हमें इतने वर्ष तक समाधि प्राप्त करनी है उसके बाद हम वापस आ जाएंगे लेकिन हमारी जो परंपरा है सनातन परंपरा उसमें क्या लक्ष्य है मनुष्य का वह बताया गया है जैसे आपने बोला था एक श्लोक आप अर्थ बताते हो बहुत
01:16:06:25 सरल भाषा में कि असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर गमय मृत्योर मा अमृतम गमय इसी से पता लग जाता है कि यह वैदिक मंत्र है कि असतो मा सद्गमय सार्वभौम मंत्र यह है कि हर व्यक्ति असत्य सत्य की ओर बढ़ना चाह रहा है असतो मा सद गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय अंधेरे से प्रकाश की तरफ बढ़ना चाह रहा है और मृत्य मा अमृत मतलब हर व्यक्ति के अंदर जो ऐसा ढोंग करते हैं आजकल की डेट में बड़े-बड़े कथावाचक और बड़े-बड़े स्पिरिचुअलिस्ट की अहम ब्रह्मास्मि शिवोहम अगर उनकी तरफ भी कोई चाकू लेकर दौड़ेगा तो वो अपनी सुरक्षा करने के लिए क्या करेंगे बचाव करेंगे हालांकि वो एक्टिंग करते हैं सबके सामने की शिवो हम मा स्मी मैं आत्मा हूं ऐसा बोलते हैं पर अगर भी अगर उनके ऊपर भी कोई चाकू लेकर दौड़ेगा उनको मारने के लिए तो वो क्या करेंगे अपनी सुरक्षा के लिए अपने शरीर को बचाएंगे तो मतलब एक सुरक्षा का भाव एक अमरत्व प्राप्त करने का भाव उनके अंदर बहुत ही डेप्थ में है हर व्यक्ति के अंदर जो वो फिलोसोफी नहीं भी मान रहा है तो इसका मतलब अमरत्व का भाव है
01:17:21:26 तो अस्तो सद्ग तमस मित्य अमृतम गम आप अमृत मृत्यु से अमृता की तरफ जाने की चाह है आनंद की चाह है ठीक है दूसरा क्या था असतो मा स गमय आपने बोला था कि हर व्यक्ति सब कुछ जान लेना चाहता है जैसे मेरी एक गवर्नमेंट जॉब लगी कुछ दिनों बाद मेरी लाइफ मोनोटोन हो जाएगी और मैं चाहूंगा या इससे कुछ और अच्छा होना चाहिए था जैसे बूढ़े बुजुर्ग लोग की मेंटालिटी हो जाती है कि जो हमने पाना था वो तो हम अभी कर ही रहे जो हमने सोचा था यंग एज में लेकिन फिर भी हम कुछ और पाना चाह रहे हैं तो यह चीज पूरे जीवन भर चलती है वो चीज पूरी नहीं हो रही है सब कु जानने की इच्छा वो क्या मिले कि वह पूरी हो जाए यह केवल हमारे ग्रंथों में ही बताया गया है जब उपनिषदों में शिष्य गुरु के पास जाता है तत् विधि प्रणिपात न परि प्रश्ने न सेवया कि इसका मेथड भी भगवत गीता में भगवान कृष्ण बताते हैं अर्जुन को कि प्रणिपात करके सेवा सुसु सा करके पात्र व्यक्ति को ही ज्ञान दिया जाता है यह ज्ञान दिया जाता है यह ज्ञान क्या है यह वह ज्ञान है जिसको जानने से कुछ भी जानना शेष नहीं रहता है यह पूरे सारे धर्म और मत मता के लोगों को चैलेंज
01:18:37:02 है कि अपने शास्त्रों में यह वाक्य बता दे कि ऐसी कि शिष्य गुरु से पूछ रहा हो कि ऐसा क्या ज्ञान है जिसको जानने से कुछ भी जानना शेष नहीं रह जाता है यह हमारे उपनिषदों में ही शिष्य गुरु से पूछ रहा है कि मुझे कुछ ऐसा बताइए जिसके जानने से जान हा कुछ भी जानना शेष ना रह जाए आधार बना के मैं इनको वही बता रहा था जो बहन जी वापस आ गई है मैं इनको आप जो बोल रहे हैं ना बिल्कुल सही बोल रहे हैं और वही बात मैं इनको बता रहा था जी आप वापस आ गई है बताए आप क्या बात है आपकी मेरे को जैसे जो आपने हमसे एक प्रश्न पूछा था आपने हमसे एक प्रश्न पूछा था कि फिर आप में और उनमें अंतर क्या है तो मैं आपको अंतर बता रहा हूं कि आपकी जो मूल इच्छा है वह है सर्वशक्तिमान ईश्वर को प्राप्त कर लेने की और उसकी प्राप्ति से जो आपको प्राप्त होगा वह है परम स्वतंत्र मोक्ष यह दो इच्छाएं हैं आपकी वो आप अपनी अंतरात्मा से पूछ करके देखिए कि है कि नहीं हमने तो आपको कई अभी गौरव जी ने भी बहुत अच्छे से जस्टिफाई किया क्लेरिफाई किया सॉरी है ना तो आप अपने आप से यह पूछ
01:19:52:08 करके देखिए क्या यह आपके अंदर इच्छा है नहीं तो आपने आप जो यह आपका प्रश्न है ना कि आप हम में और उनमें अंतर क्या है क्या वो इस आपकी मूल इच्छा पर बात कर रहे हैं नहीं कर रहे क्योंकि मैं आपको एक चीज बोलना चाहती हूं एक्चुअली मेरा बिहेवियर जो है व थोड़ा डिबेट वाला नहीं है मैं आपको मैं आपसे सिर्फ पूछ सकती हूं मतलब मैं आपसे ऐसे नहीं कर पाऊंगी नहीं मैं डिबेट वाले उसम नहीं हूं वो मेरी बोलने की शैली ऐसी हो जाती है लोग थोड़ा सा सुन मैं थोड़ा स्पष्ट वादी हूं मतलब जो मेरे थॉट्स है और जो मैं मेरे वक्तव्य है वो क्लियर होने चाहिए इसलिए थोड़ा सा मैं लाउड रहता हूं बोलते टाइम मैं डिबेट वाले उसम नहीं हूं मोड में आप चिंता ना करें मेरे वक्तव्य हा पास टाइम बहुत कम है तो इसलिए मतलब मैं आपसे क्वेश्चन पूछना चाहती हूं जैसे मैं जो अगर मेरे को कोई सुन रहा है मैं हो सकता है मेरा 15 मिनट बा नेट खत्म हो जाए तो मैं आपसे बस इतना बोलना चाहती हूं जैसे रामपाल जी महाराज का अगर कोई मैं आपके एक प्रश्न का उत्तर दे दूं मुझे बस दो मिनट दीजिए फिर आप अपने अगले प्रश्न रख लीजिए ठीक है हा तो कारण यह है कि रामपाल
01:21:07:10 की चीजों को क्यों ना माना जाए और यह जो सनातन परंपरा प्राप्त चीज हैं इनको क्यों माना जाए इसका पहला कारण है कि यहां पर आपको वह दिया जा रहा है जो आपको चाहिए मतलब कि परम स्वतंत्र मोक्ष यह आपकी अत आत्मा की इच्छा है रामपा द्वारा दिया जाने दिया जाने दिया जाने वाला जो मोक्ष है वो क्या है कि आप जो है सतलोक पहुंच जाएंगे और वहां पर जो बादाम खाएंगे काजू खाएंगे मतलब वहां पर भी व्यवहार है व्यवहार है तो वहां पर भी व्यवहार के बीच में आने वाली समय गणना है और अगर समय गणना है तो इसका मतलब वहां पर भी आपको मोक्ष नहीं है वहां पर भी नित्य सुख नहीं है अनंत सुख नहीं है दूसरी बात काल फिर से जन्म लेता है काल कई बार जन्म ले चुका है तो काल फिर से जन्म ले फिर से आत्माओ आत्माएं उनकी ओर आकर्षित होंगी और वह नीचे आएंगी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि जो जीवात्मा शुरू में नीचे आती है वह क्यों आती है वो सतलोक में ही थी वो क्यों आती है क्योंकि उनका उनको आकर्षण हुआ काल की ओर ठीक है तो मे पास मेरे पास बुक है सॉरी फॉर इंटरप्शन बट मेरे को मेरे पास बुक है इनकी तो उसमें इन्होंने लिख रखा है मैं उसको ढूंढ के हो सकता है दिखा
01:22:22:10 भी दूं आपको भेज द उसम लिखा है कि उसमें किसी ने बुक के एंड में है कि क्वेश्चन एंड आंसर जो होते हैं शंका एंड समाधान तो उस उन्होंने बोला कि भाई हम ऐसी गलती दोबारा कर सकते हैं तो उन्होंने बोला कि नहीं हम ऐसी गलती दोबारा नहीं कर सकते क्योंकि मतलब जो हम हम धोखा खाए हुए हैं जो दूध का जला होता है व छा भी फूक म कहने का मतलब य है उनका अब उन्होने यह कहा है कि हम ऐसी गलती दोबारा नहीं कर सकते पर पहली बात तो यह है कि यह सिद्धांत क्या कहीं पर शास्त्र में लिखा है क्या कबीर जी ने यह सिद्धांत लिखा है कि अगर कोई व्यक्ति एक बार गलती कर लेगा तो उसको फिर से आकर्षण नहीं हो सकता नहीं ऐसा तो कुछ नहीं है हा तो इसका मतलब यहां पर शास्त्र का प्रमाण नहीं है यहां पर अपने मन की व्याख्या है दूसरी बात मैं ये नहीं कह रहा हूं जब काल दोबारा जन्म लेगा क्योंकि काल एक बार नहीं जन्म लिया इन्होंने अपनी बुक में लिखा है काल जन्मता और मरता है तो काल दोबारा जन्म लेगा तो उसकी ओर आकर्षित होने वाली जीवात्मा कौन सी होंगी हां हां मतलब वही सब जो मतलब वो तो उस पर डिपेंड करता है कि कौन सी होंगी म
01:23:37:14 मतलब यही यही जीवात्मा जो सतलोक में रह रही है वही तो वही तो आकर्षित होंगी काल की ओर हां जी दूसरी बात दूसरी बात हमने तीन चीजें पकड़ी है आकर्षित होंगे इसका मतलब ये है कि उनके अंदर मन है हा मतलब ये हु आकर्षित होंगी इसका मतलब कुछ ऐसा है देखिए सबसे बड़ी बात है कि आपने कहा कि दोबारा वो आकर्षित नहीं होंगी ये रामपाल ने कहा मगर एक फैक्ट फुल बात और है कि वो जो फर्स्ट टाइम फर्स्ट टाइम जो वो आकर्षित हुई थी यानी कि कुछ लोग कुछ सतलोक में ऐसा था जो उनके पास नहीं था जिसके कारण उनको आकर्षित होना पड़ा वो परम सुख नहीं था ना तभी तो कुछ बाल बराबर दिक्कत थी जो वो काल की ओर अट्रैक्ट हो गई अट्रैक्ट हुई ना यानी कि सतलोक में भी वोह सुख नहीं था जिसको प्राप्त करने के बाद व्यक्ति हां उस बुक में ऐसा लिखा है कि जैसे आज हम किसी सेलिब्रिटी को देख लेते हैं जैसे मान लीजिए एक तरफ कोई धर्म गुरु है और एक तरफ सेलिब्रिटी है तो हर कोई ऐसे सोचता है अरे इसने तो ब्रांडेड कपड़े पहने हैं वाओ य मतलब वो त्रुटी हम में ही होती है कि हम उस तो यानी कि वहां पर वहां पर भी त्रुटि होती है गलतियां है
01:24:52:18 पाप है पुण्य है बड़ा छोटा है सब एक जैसे नहीं है जैसा यहां पर है वैसा सतलोक में नहीं है मेरे क्वेश्चन मतलब थोड़ा मैं आपसे फिर कह द म आपसे डिबेट करने के लिए नहीं नहीं मैं आपको डिबेट वाले उसम आंसर नहीं दे रहा हूं मैं जनरल आंसर दे रहा हूं देखिए यह जो बड़ा छोटा है कि वह सेलिब्रिटी है मैं सेलिब्रिटी नहीं हूं यह यहां की बात है ना जब सतलोक में सबको परम सुख मिल गया परम सुख का मतलब एक ही चीज है सबके पास तो कोई सेलिब्रिटी कैसे बन गया या या सेलिब्रिटी तो जब कोई बनेगा जब किसी के पास कुछ ऐसा हो जो बाकियों के पास ना हो तभी तो सेलिब्रिटी कहलाएगा इसका मतलब सतलोक में भी कुछ चीजें जो जीवा आत्माओं को मिली मगर फिर भी कुछ चीजें ऐसी थी जो उन्हें नहीं मिली तभी तो कोई सेलिब्रिटी है सेलिब्रिटी कोई कैसे बन सकता है सोचिए आप भाई ज्यादा से ज्यादा एक ईश्वर हो सकता है सेलिब्रिटी कि चलो ईश्वर है द्वैत को मान लिया तो ईश्वर है वहां पर वो सेलिब्रिटी हो सकता है मगर एक काल एक और चीज है कोई जो सेलिब्रिटी है यह कैसे हो रहा है यानी कि कुछ चीज ऐसी है जो उन आत्माओं के पास नहीं है सतलोक में जिसके कारण वो सेलिब्रिटी समझ रहे हैं काल को और फिर काल की ओर अट्रैक्ट हो रहे हैं तो शुरुआत तो यही
01:26:07:21 से गड़बड़ हो गई आपने उग्र गीता पढ़ी है जो यह कबीर साहब ने लिखी थी नहीं अच्छा वो मतलब काफी उसे आप एक बार हालाकि उस बुक में बातें कर लू एक हो गया परम स्वतंत्र मोक्ष नहीं है अभी तक हमने जो बात की है अब दूसरी बात आ जाती है सर्वशक्तिमान ईश्वर इनका कहना है कि कबीर ही ईश्वर है और वो कबीर ये कबीर है जो इनकी किताबों में पहले पन्ने पर हैय ये है ना हां जी ये जो है दाढ़ी वाला अब पहली बात तो ये है कि अगर ये ये ईश्वर का इटरनल स्वरूप है इटरनल का मतलब जो किसी देश काल परिस्थिति में बाधित बदलता नहीं है किसी भी कुछ नहीं हो सकता इसको अगर ये वो रूप है आप ये कहोगे कि वो बूढ़े कैसे हो गए नहीं नहीं मैं बूढ़ नहीं क बूढ़ा नहीं कह रहा हूं मैं बूढ़ा नहीं कह रहा हूं अगर यह टर्नल स्वरूप है तो यह बदलना नहीं चाहिए और अगर यह बदल नहीं रहा है तो सर्वशक्तिमान नहीं है एक नियम लागू हो रहा है इसके ऊपर कि वो अपने स्वरूप को बदल नहीं सकता है
01:27:24:20 जी यह नियम लागू हो रहा है और दूसरी बात यह भी है कि यह जो है शिशु के रूप में आते हैं उसके बाद बीच बीच में इन्ही बुक्स में इनका कहीं कहीं पर दूसरा चित्र दिया गया है जिसमें य थोड़े यंग दिख रहे हैं फिर ये बूढ़े हो रहे तो फसे ऐसे तो कृष्ण जी भी मतलब वो भी पैदा हुए उन्होने भी ली अपना तो वो वो भगवान का मूल स्वरूप नहीं है भगवान जो है वो अवतरित हुए हैं प्रकट हुए हैं व्यवहार में नहीं आ सकने वाले ईश्वर थे उन्होंने अपने आप को इंद्रियों का विषय बना दिया तब वह श्री कृष्ण के रूप में आपके सामने प्रकट हुए हैं मगर यह कह रहे हैं कि यह जो यह जो भगवान है इसका व डायरेक्ट वहां से सीधे आ रहा है नीचे तो जब वो डायरेक्ट आ रहा है तो बाधित हो जाएगा यही प्रश्न है और भी बहुत सारी चीजें है जो ये नहीं कर सकता जैसे कि अगला वो आ जाएगा जैसे हमने कहा शाश्वत धर्म मैंने तीन चीजें बताई है एक तो हो गया सर्वशक्तिमान ईश्वर एक हो हो परम स्वतंत्र मोक्ष अब तीसरी चीज आती है शाश्वत धर्म शाश्वत धर्म की बात है भगवत गीता में यह बात इन्होंने भी मानी आपके जो रामपाल है की ठवा अध्याय चौथे अध्याय
01:28:39:20 में यह चौथा अध्याय इसमें जो है कौन सा म कौन सा श्लोक था शलोक नंबर 10 से 15 के बीच में है व क्या है मैं मैं कुछ कहना चाहती हूं इसमें इसमें ये कहा गया है मैं बोल दू पूरी बात कि पूर्वजों द्वारा की जाने वाली भक्ति का जो अनुसरण अनुक्रम अनुसरण और अनुकरण करते हैं वही मोक्ष को प्राप्त करते हैं यह आपके रामपाल दास जी ने भी मान लिया है पूर्वजों द्वारा जो किया जा रहा है और इसको हम अपने अन्य शास्त्रों से देख ले जो परा क्या चली आ रही है पीछे से करने की वो है दूसरी बात ये अगर कहे मैं अपनी बात पूरी कर लूं शाश्वत धर्म की बात कर रहा हूं तो शास्त्र तो आपने पूछा ना कि आपकी चीज क्यों मानी जाए ऐसे तो आपकी चीज कैसे मान ली जाए पहली बात हमारे पास ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है दूसरी बात हमारा जो मोक्ष है वो परम स्वतंत्र मोक्ष है और तीसरी और सबसे इंपॉर्टेंट बात वो है कि हमारे जो शास्त्र है वो ईश्वर ने रचे नहीं है ईश्वर ने कहे नहीं है क्यों किक क्योंकि ईश्वर
01:29:55:00 वही है जो कुछ भी कर सकता है ईश्वर शैतानों का निर्माण भी कर सकता है जैसे कि कबीर ने काल का निर्माण किया क्या कबीर को नहीं पता था कि काल क्या करेगा अगर नहीं पता था तो वह सर्वज्ञ नहीं हुआ भविष्य दे भविष्य जानने वाला नहीं हुआ तो तो इस सब के बाद जो परम स्वतंत्र परम स्वतंत्र मोक्ष की व्याख्या है जो शाश्वत धर्म की व्याख्या उसके अनुसार हमें ये बात भी सोचनी होगी कि अगर हम यह देख रहे हैं कि ईश्वर हमको कुछ कह रहा है तो उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता क्यों क्योंकि ईश्वर लीला भी कर सकता है ईश्वर काल को भी बना सकता है ईश्वर बुराई भी बना सकता है तो हम सनातनी जो परंपरा प्राप्त सनातनी है उन शास्त्रों को मानते हैं जिन शास्त्रों को ईश्वर ने भी नहीं रचा है बदार उपनिषद दो च 10 के अनुसार जो हमारे वेदा दि शास्त्र हैं वो सदैव विद्यमान थे ईश्वर की सांस के रूप में उनको कभी भी श् ने लिखा नहीं या कहा नहीं है वो सदैव थे जब से ईश्वर है तब से वो है हम उस धर्म को धर्म मानते हैं हम उन शास्त्रों को शास्त्र मानते हैं उन शास्त्रों के अनुसार हम अपने धर्म की व्याख्या को स्वीकार करते और यह जो चीज है यह खुद कह रहे हैं कि मैंने कहा
01:31:10:04 और जब ईश्वर कुछ कह देगा तो उसमें उसकी बुद्धि इवॉल्व हो जाएगी इसको ऐसे समझ लीजिए कि हम दो प्रकार के कार्य करते हैं एक जिसमें कि हम चाहकर कुछ कर रहे हैं और दूसरा बिना चाहकर जब हम चाह के कुछ करते हैं तो हमारे सामने ऑप्शन होता है कि हम कैसे करें जैसे मान लीजिए मेरे सामने रामपाल दास की दो किताबें हैं नहीं एक रामपाल की है और एक सत्यार्थ प्रकाश तो मैं चाहूं अगर मैं चाहता हूं कि बुक उठाऊं तो मैं चाहूं तो सत्यार्थ प्रकाश उठाऊं और मैं चाहूं तो गरिमा गीता की उठाऊं इसी प्रकार से जब ईश्वर कुछ चाहेगा आपको बताना तो वह चाहे तो आपको झूठ बताए वो चाहे तो आपको सच बता मगर कुछ कार्य हम ऐसे भी करते हैं जो हमारे स्वाभाविक कार्य होते शुद्ध होते हैं उसमें हमारी चाह इवॉल्व नहीं होती वो बस करते हैं जैसे कि सांस लेना जैसे कि सांस लेना एक बच्चा माता के गर्भ से जन्म ले रहा है मगर सांस ले रहा है तो जो वेदा आदि शास्त्र है वो ईश्वर की सांस है वो ईश्वर ने कभी रचे नहीं इसलिए हम उनको उन शास्त्रों पर विश्वास करते हैं जो यह नहीं कहते कि हमको ईश्वर ने रचा ईश्वर ने कहा तो क्या हो गया सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म और वह हमें परंपरा
01:32:25:08 से मिल रहा है जी अब आपनी बा जी मैं यह कहना चाहती हूं कि जैसे अगर कोई मेरे को सुन रहा है रामपाल जी महाराज का शिष्य तो मैं उनसे यह पूछना चाहती हूं कि जैसे गरीब दास जी महाराज है जो उनको मिले तो मेरे को यह है कि उन्होंने जैसे वासुदेव का मतलब जो यह है क्या नाम रामपाल जी महाराज य बताते हैं कि वासुदेव का मतलब जो है कबीर साहब है ठीक है क्योंकि वासुदेव तो कृ के जो है वो पिताजी थे ठीक है इसलिए उनकी कोई सेंस नहीं बनता है ठीक है लेकिन जो गरीब दस जी महाराज का इतना मोटा ग्रंथ है उसमें उन्होंने कृष्ण को ही वासुदेव बताया है मैं ज्यादा दूर की बात छोड़ दीजिए ये इन्होंने भी कहीं कहीं पर वासुदेव को ही कृष्ण माना है वो आपको दिखा देता हूं इन्होंने हा इन्होने भी कहीं कहीं पर आप पुराणों को तो बिल्कुल सत्य मानते हैं तो फिर पुराणों में क्यों लिखा हुआ है कि वो जन्मते मरते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश लीला पूर्वक लीला भाई जैसे एक पूर्ण ज्ञानी कबीर दास जी गुरु बना सकते हैं लीला पूर्वक तो भगवान अपनी जन्म और मृत्यु करके दिखा रहे हैं जन्म और मृत्यु का
01:33:40:08 मतलब सिर्फ इतना है आविर्भव और तिरो भाव वो आपके सामने प्रकट हो गए तो उनकी जो है आपने जन्म मान लिया वो अपने आप को उन्होंने अंतर ध्यान कर लिया आपकी आंखों का विषय थे वो नहीं किया ना नष्ट कर दिया उस विषय को तो वो रो भाव हो गया उसको मृत्यु का नाम दे दिया वो लीला पूर्वक अच्छा और य अनुत्तम का मतलब तो आप भी मानते हो अतम का अ आपको उस डिक्शनरी से दिखा देता हूं री को आप मेरी बात सुनो एक
01:34:14:19 मिनट जो शंकराचार्य जी है हमारे उन्होंने भी इस बात को माना मुझे नहीं पता वो कौन से हैं लेकिन उन्होने उन्होने माना ना इस बात को कि हां अनुत्तम उत्तम का मतलब बढ़िया और अनुत्तम का मतलब घटिया ये उनके वर्ड्स थे मैं कोई इसमें मिलावट नहीं कर रही नहीं नहीं नहीं उनके आप सुन लीजिए चारों पीठ के शंकराचार्य देखिए कभी-कभी होता क्या है जैसे मैं यहां पर अभी कुछ कह रहा हूं अभी कलयुगी योगी से कोई बात हो रही थी आपसे पहले एक व्यक्ति आया था ना कलयुगी योगी अब वो यहां से कोई कटिंग निकालेगा अपने वीडियो पर डालेगा अब उसमें मेरी बात को आधी इधर से लेगा आधी उधर से लेगा तो आपको यह कंफर्म करना होगा कि अगर आपको कोई वीडियो दिखाया गया है कि उसमें शंकराचार्य किस लिए कह रहे हैं अब जैसे मैं आपको कहूं कि थोड़ी देर के लिए मैं बता दूं आपको जैसे वो कौन सा है वो लास्ट वाला जो जा है ना 18 66 मैं आपको आपसे उदाहरण देता हूं 18 66 एक मिनट थोड़ा सा होल्ड करिए बस 18वां अध्याय और 66 वा श्लोक ये देखिए ये रामपाल दास जी की बुक है गरिमा गीता की ठीक है जी अब इसमें इन्होंने ब्रज का अर्थ
01:35:29:25 क्या किया है क्या कि है समस्त प्रकार के धर्मों आप पढ़ के बता दो मुझे क्या किया है समस्त प्रकार के धर्मों का परि त्याग करो और मरण में आओ समस्त पा से तुम्हारा उद्धार हां तो ब्रज का अर्थ क्या किया इन्होंने यहां पर मेरी शरण में आओ मतलब आा आओ आओ जबकि प्रचार क्या किया जाता है इनके द्वारा कि जाओ मेरी शरण से जाओ किया जाता है ना ब्रज किया जाता है अब इसमें एक फैक्ट है इन्होंने इससे जस्ट पहले वाले पेज पर यह लिखा है कि देखिए 18 66 का अर्थ जो है लोगों ने गलत किया है और इकोन की गीता में गलत अर्थ बताया गया और इन्होने य पर इकन की गीता को बोला है यहां पर जो है स्कोन की गीता का उन्होंने प्रस्तुत किया है ये उन्होंने कहा नहीं है कि ब्रज का अर्थ आओ है उन्होंने इसकन की गीता को बोला है अब यहां से अगर मैं चाहूं तो इस हिस्से को उठा लू और ये कहने लगूं कि नहीं नहीं देखो ये रामपाल दास जी ने भी ब्रज का अर्थ आओ मान लिया तो ये गलत बात है ना तो
01:36:45:03 जो शंकराचार्य जी ने बोला है वो किस कॉन्टेक्स्ट में बोला है ये क्लियर करना होगा शंकराचार्य की अपनी ये भगवत गीता भाष्य है यदि कोई शंकराचार्य है तो वह इसके विरोध में तो नहीं जा सकता ना जब तक वो इसके विरोध में नहीं जाता है तभी तक व शंकराचार्य अगर वो इसके विरोध में चला गया तो वो शंकराचार्य कैसा फिर वो शंकराचार्य कैसे रह जाएगा तो इसका 18 66 देख लेते हैं अच्छा इन्होने आओ क्यों करा है मतलब आपको क्या लगता है इसके पीछे कि इन्होंने आओ क्यों करा है उसका मतलब इन्होने ये रामपाल जी महाराज जो है उन्होने इन्होने आओ नहीं किया इन्होंने फॉर एग्जांपल यहां पर लिखा है इकोन की गीता को लिखा है फॉर एग्जांपल इनका ये नहीं है कि हम मानते हैं कि ब्रज का अर्थ आओ होता है इन्होंने यहां पर इकोन की गीता के श्लोक को एज इट इज य एग्जांपल के तौर पर लिखा है मगर कोई व्यक्ति इस बात का फायदा उठा सकता है कि देखो देखो गरमा गीता की में रामपाल दास जी ने भी व्रज का अर्थ आओ लिखा है और वो यह चीज ध्यान नहीं देगा कि जस्ट पहले वाले पेज पर रामपाल जी ने क्या कहा है तो शंकराचार्य जी ने किस बात किस कांटेक्ट में वो बात कही है इसको हमें क्लेरिफाई करना
01:38:00:04 होगा और शंकराचार्य जी की जो क्लेरिफाई बात है वो देखिए 18 66 यहां से कर लीजिए शंकराचार्य क्या कह रहे हैं 18 66 में अब मैं चाहूं तो इस बात पर खूब वीडियोस बना दूं कि देखो देखो इनकी गीता में ही लिखा है ब्रज का अर्थ आओ जैसा कि ये करते हैं ये ऐसा ही करते हैं सर एक चीज और मुझे बो जी जी बोलिए जैसे यह बताते हैं बताते हैं रामपाल जी महाराज के गरीब दास जी जो भी मेरे को सुन रहा है अगर किसी को कंटक्ट करना हो तो भाई कर लेना क्योंकि मेरा वो नहीं है क्योंकि मैं भी जानना चाहती हूं मेरे अंदर भी य जिज्ञासा है पर मेरे को ये बोलना जैसे गरीब दास जी महाराज ने बोला है ऐसे ही मलूक दास जी महाराज भी है ठीक है इनको गरीब दास जी महाराज ने लिखा है कि जो मलूक दास जी थे उनको भी परमात्मा मिले थे जो मलूक दास जी है उने भी लिखा है कि हां कबीर साहब परमात्मा है लेकिन उन्होंने श्री कृष्ण को भी परमात्मा
01:39:15:12 बताया है बिल्कुल बताया हा तो मेरे को यह बहुत ज्यादा कांट्रडिक्ट लगता है मे को ऐसे लगता है जो मेरा पर्सनल है बिल्कुल मेरे को पर्सनली य लगता है कि समाज को सुधारने के लिए एक अच्छा व्यक्तित्व बनाने के लिए बुराइयों से बचने के लिए अब चाहे हम इस चीज में उलझे हुए हैं लेकिन हमारे पास आप उलझे हुए हो मैं सब मतलब जितने भी लोग है क्योंकि हम हमको चा है भगवान की हमारे पास इतना फालतू टाइम नहीं है कि हम मतलब मूवी देखें यह करें वो करें मुझे यह लगता है पर्सनली के ये जो जितने भी संत हुए हैं ये उद्धार करने के लिए हुए थे चाहे मतलब बुराइयों से बचाने के लिए हुए थे चाहे वो गरीब दास जी हो गए या मलूक दास जी हो गए चाहे उन्होंने कांट्रडिक्ट्री करा या कुछ भी करा पर फस्ट एक ह्यूमन ही बनना हमको शोभा देता है ऐसे नहीं कि बाहर निकाल दो अपनी बहू को नहीं नहीं हम तो मंदिर अपना अलग रख लो कि नहीं नहीं हम तो आज से रामपाल जी महाराज के वो हो गए मैं भी हू कल को क्या पता मतलब ना मेरा माइंड हो मुझे रखना पड़े तो मैं तो यह नहीं कह सकती कि भाई नहीं नहीं मेरे को तो अलग ही मंदिर चाहिए
01:40:31:08 नहीं ऐसे नहीं होगा ना तो मेरे को तो रिजट नहीं होनी चाहिए मैं आपको एक बात बता रहा हूं और एक वो ब्रज वाला देखिए कहने कोय तत्वदर्शी है मगर ये इनकी गीता ज्ञान अमृत है ठीक है और यहां पर य क्या लिख रहे हैं यह जो कबीर कबीर दास जी है बाबा जिंदा के रूप में ठीक है हा जी अब ये यहां पर लिख रहे हैं हे धर्मदास जी गीता शास्त्र आपके परमपिता भगवान कृष्ण उर्फ विष्णु जी ने आपको आदेश किया है ये देख ली जहां मेरी उंगली है आपको आदेश
01:41:34:14 और विष्णु जी कृष्ण परमपिता भगवान विष्णु और कृष्ण दिख रहा है आपको हा जी दिख रहा है ये रामपाल दास जी को लिखना पड़ रहा है और रामपाल दास जी क्या बता रहे हैं कबीर दास ने बोला रामपाल दास जी से गलती हो सकती है कबीर दास जी ने बोला वो यह बता रहे कबीर दास जी ने बोला कि गीता का ज्ञान किसने दिया है परमपिता भगवान कृष्ण उर्फ विष्णु इन्होंने दिया उन्होंने आपको आदेश कबीर सागर भी है जो उसमें जो श्लोक सॉरी जो उग्र गीता है उसके अंदर जो गीता है उसके अंदर श्लोक वाइज लिखा हुआ है मतलब यह तो लिखा नहीं है न टूथ फ पर ऐसे मतलब सीक्वेंस बना हुआ है तो उसमें जब अर्जुन पूछता है तो अर्जुन लिख रखा है और जब श्री कृष्ण बोलते तो श्री कृष्ण श्री कृष्ण भगवान ऐसे करके लिखा हुआ है कि उन्होंने इस चीज को बोला है कबीर सागर में लिखा बिल्कुल बिल्कुल आप कहा तक देखिए वो सच्चाई छुपती नहीं है देखिए होता क्या है जब हमें पूरा का पूरा एक इंफ्रास्ट्रक्चर झूठा खड़ा करना है तो हमसे फिर चूक होनी शुरू होती है और यह व
01:42:47:22 चूके और मेरे को यह लगता है कि कोई भी अगर आपकी लाइफ में कोई भी दिक्कत है या कुछ भी है तो मुझे नहीं लगता कि आप फिर तो भगवान हमारे किस चीज का वो कर रहे हैं जो हम हमसे यह सुनना चाहते हैं कि 000 रप तो पाठ करवाने पड़ेंगे यह चीज मेरे को बहुत गलत लगती है आप ये देख रही है जो ग्रीन है उसको जरा पढ़ देंगी मेरे को जूम नहीं दिख रहा हैय जो वेद ज्ञान है वह तो पूर्ण परमात्मा द्वारा दिया गया था उसी का वर्णन काल आगे क्या लिखा है काल वह ज्योति निरंजन ने किया है यानी कि वेद का ज्ञान किसने दिया है पूर्ण परमात्मा का ज्ञान पूर्ण परमात्मा ने दिया था वेद का ज्ञान जो आगे ज्योति निरंजन इनके हिसाब से इसमें करता है तो वेद का वेद ज्ञान कौन दे रहा है पूर्ण
01:43:44:20 परमात्मा फिर भी यह कह रहे हैं कि नहीं वेद का ज्ञान पूर्ण परमात्मा से वो मुक्ति का ज्ञान जो है से नहीं मिलेगा वो वेद को छोड़ कर के हमें जाना पड़ेगा तत्वदर्शी के पास यह जो सारी चीजें बनी है ना ये इनका पता है निचोड़ क्या है आपको इनका निचोड़ यह है इसमें आपको यह बताया गया है कि जो गीता वेद पुराण है वह आपको क्यों नहीं पढ़ने बस इनके अनुसार जो भक्ति है वह आपको क्यों नहीं करनी इनमें जो पूजा इनम जिनकी पूजा बताई जा रही है उनकी पूजा क्यों नहीं करनी और यह सब करते करते एक अपने लिए संकेत छोड़ा गया है कि तत्वदर्शी वो तत्वदर्शी भी हालांकि झूठ हो जाता है क्यों कि जब काल एक जगह गलत बात बोल सकता है भटकाने के लिए तो दूसरी जगह क्यों नहीं बोल सकता जब किसी की कोई एक बात गलत है तो दूसरी बात गलत ऑटोमेटिक हो जाएगी हम कैसे विश्वास करें कि अगर काल हमें भटकाने आया है तो जहां पर वो कह रहा है ये मेरा मत है वहा वहां पर भटका रहा है और जहां पर वो ये नहीं कह रहा है कि मेरा मत है कि नहीं है वहां वो नहीं भटका रहा है आप बताओ आपको अगर कोई भटकाने आएगा तो वो क्या बता के भटका हैगा मैं तुझे गलत रास्ता बता रहा
01:44:58:27 हूं तो यदि गीता बोलने वाला आपको भटकाने वाला है तो फिर उसके द्वारा बताया जाने वाला तत्वदर्शी भी तत्वदर्शी नहीं हो सकता मगर तत्वदर्शी मान लेंगे क्योंकि पूरी शास्त्रों का जो निचोड़ है इनका वो यह है गीता वेद पुराण आपको छोड़ दीजिए और उसमें जो एक पॉइंट पकड़ रखा है तत्वदर्शी वो भी सिद्ध नहीं होता उन्हीं की किताबों के अनुसार उसको पकड़ के आप रामपाल के पास आ जाइए फिर रामपाल के अनुसार जीवन जीना चालू करिए जिसमें कि आपको परम स्वतंत्र मोक्ष सर्वशक्तिमान ईश्वर और शाश्वत धर्म नहीं मिलेगा चलो एट द एंड सब कुछ य माथा मथ या करके और किताबें सब सब कुछ मान भी लो तो अंत में आउटपुट क्या है यह भी तो देखो चलो हमने इनपुट ढेर सारा ले लिया हमने सब मान लिया मगर एट द एट आ एट दी एंड आपको आउटपुट में मिला क्या जो आप घर से निकले थे लेने वो मिला क्या आप घर से निकले थे सच्चिदानंद स्वरूप होने वो प्राप्त करने आप घर से निकले थे मगर आपको नहीं मिला आपको वो सतलोक मिला जहां पर आपको कोई काल सेलिब्रिटी लगता है भाई आपको कोई अगर आप सतलोक में हो सतलोक में ऐसा सुख होना चाहिए जहां आपको कोई सेलिब्रिटी ना लगे
01:46:14:02 क्यों क्योंकि यदि कोई आपको अपने से अधिक लग रहा है इसका मतलब आपको सब कुछ प्राप्त नहीं है अनंत सुख नहीं है आपके पास जी है ना तो हम लोग ये जो तीन चीजों की बात करते हैं वो इसीलिए करते हैं कि चलो इन इन बातों को कोई मान पाएगा नहीं मान पाएगा तर्क और प्रमाण हमने रख दिए तब भी है आउटपुट पर तो देख लो आपको मिल क्या रहा है जब आपको व मिल ही नहीं रहा है तो वह उसको प्राप्त कराने अब जैसे आपको चाहिए पानी और आपको पानी की जगह कोई अल्कोहल दे रहा है वाइन दे रहा है शराब दे रहा है मदरा दे रहा है मगर पानी नहीं दे रहा है तो उस मदरा को प्र करने के लिए क्या आपको उन नियमों का पालन करने की जरूरत है जो वहा बताए जा रहे हैं जबक आपको चाहिए पानी आपकी प्यास पानी से बुझेगी मद्रा से नहीं जी जी जी मेरे को एक चीज और बोलनी है जो मतलब मैंने अभी टीवी में देखा था मतलब जो मैंने मैं पिछले उसम आई थी तो उसके बाद जो अभी यह थे मतलब क्या नाम उनका क्या नाम था टी आर पहाड़ी नाम है उनका हा हां जी उन्होंने बोला था के जो काल को काल
01:47:29:19 को शराब दे रखा है ऐसे करके तो इसम शंका समाधान है मब मैं अपना कैमरा ऑन कर सकती हूं मतलब पीछे सेसे दिखाने के लिए करिए कर क्यों नहीं होगा कैसे ये पीछे कैसे जाएगा मेरे को समझ में नहीं आ रहा आप पहले लीव करके अपना चेक कर लीजिए फिर बताइए जी संदीप जी आप थोड़ा गुस्से पर कंट्रोल किया करिए गिरो मगर रने की तरह जो गिलके भी अपनी सुंदरता होने नहीं देता जी जी जी कोई बात नहीं ध्यान रखू आ देना अभी ना अभी जैसे ये 18 ब 66 की बात कर रहे थे ना जैसे ये सवाल कर रहे थे 18 ब 66 में इसमें ना ये दो तरह से मिसगाइडेड हो जाते हैं होता क्या है कि जैसे ये कुछ दिखा रही है बताइए जैसे इसमें लिखा है आपको दिख रहा है मुझे पढ़ने में नहीं आ रहा है थोड़ा और क्लोज ले जाइए काल के किस ब्रहमांड में कर्मों का फल कौन सी बुक है ये कौन सी बुक है ये है परिभाषा प्रभु की अच्छा ये
01:48:45:00 नहीं की है काल के किस ब्रह्मांड में काल के 21 ब्रह्मांड में कर्मों का फल भोगना पड़ता है प्रश्न पूछा गया है किसी के द्वारा तो काल भगवान ने सतलोक में बुरा कर्म किया और हम आत्माओं ने अपने पिता से इजाजत ली सत्यलोक से इस दुख के सागर में आए काल काल भगवान को अपने कर्मों का बल कपल क फल भोगना पड़ा और हम भी हमें भी क्योंकि हमने काल को पसंद किया कबीर परमात्मा ने काल भगवान को श्राप दिया उन्होंने बोला है कि श्रप क्यों दिया है और फिर हमें वही बचाने के लिए क्यों आ रहे हैं तो फिर चलो इसका इसका उत्तर मैं आपको दे देता हूं आपने जैसे डिफेंड किया है तो मैं आपको एक उत्तर दे देता हूं उसका जो आपने डिफेंड किया है आपके पास ज्ञान गंगा है क्या नहीं ज्ञान गंगा नहीं है मेरे पास ये गीता तेरा ज्ञान अमृत मेरे पास वो भी नहीं मेरे पास सिर्फ दो बुक है परिभाषा प्रभु की हां गीता ये है है है मेरे पास है गहरी नजर गीता में है मेरे पास नहीं नहीं गहरी नजर गीता में नहीं अ क्या कहते हैं वह गीता तेरा ज्ञान
01:50:00:08 नहीं यही दो बुक है बस मेरे पास गीता तेरा ज्ञान अमृत में सृष्टि रचना है दद ज्ञान गंगा में है सृष्टि रचना तो सृष्टि रचना में यह बताया जा रहा है आपकी बात हो रही है षष्टि रचना में ठीक है देखिए कैसे चीजें बदलती है फेल होती है यहां पर एक एक चीज बता रहा हूं मैं आपको कि श्राप देना पहली बात गलत बात है ठीक है जी और श्राप व्यक्ति जो देता है वो किसके कारण देता है काल के प्रभाव में आकर अब ये मैं नहीं कह रहा हूं गुस्सा ये मैं नहीं कह रहा हूं यह कह रहे हैं आपके रामपाल देखिए जब इन्होंने भवानी ने गायत्री को श्राप दे दिया तीनों को श्राप दे दिया ब्रह्मा जी को और गायत्री को और एक और है उनको तो फिर यहां पर इस प्रकार पढ़िए ग्रीन ग्रीन वाला जो है पढ़िए तीनों को शराब देकर
01:51:15:12 माता भवानी बहुत बथाई इस प्रकार पहले तो जीव बिना सोचे मन यानी काल निरंजन प्रभाव से गलत कार्य कर देता है परंतु जब जब आत्मा सत्य पुरुष अंश के प्रभाव में प्रभाव से उस ज्ञान उसे ज्ञान होता है तो पीछे पछताना पड़ता है एगजैक्टली मतलब आप मेरी बात को समझो उन्होंने यही लिखा है कि क्या बोलते हैं कि उन्होंने श्रप नहीं दिया मतलब उन्होंने ऐसे लिखा है कि उन्होंने श्राप नहीं दिया है ये तो उन्होने श्राप दिया है ना वहां लिखा है कि उन्होंने श्राप दिया था उन्होंने लिखा है ना श्राप दिया था वो क्वेश्चन पूछ रहा है नहीं नहीं नहीं वो क्वेन नहीं वो क्वेश्चन नहीं जब सृष्टि रचना हम पढ़ते हैं तो भगवान श्राप देते हैं ना कबीर दास जी श्राप देते हैं ना काल को श्राप लगा हु है हा हा ऐसे बोल श देते तू एक लाख आत्मा रोज खाएगा तो श्राप अगर दिया तो सबसे पहली बात तो श्राप तो ऐसा कार्य है जो देने वाला पछताएगा पहली बात यानी कबीर दा स पछताने वाला कार्य कर रहे हैं वो परमेश्वर है पूर्ण ब्रह्म है इनके अनुसार रामपाल के अनुसार और दूसरी बात की
01:52:31:07 श्राप देता क्यों है कि काल के प्रभाव में यानी काल के अधीन हो गया व्यक्ति यह तत्व ज्ञान नहीं है यह तत्व ज्ञान नहीं है क्या इन्होंने कभी आपसे कहा कि आपकी आपकी चाह का वास्तविक विषय ईश्वर है सर्वशक्तिमान परम स्वतंत्र मक्ष यह तात्विक बातें की आपसे इन्होने कभी जी नहीं आपको केवल शास्त्र खोल के दिखाए हैं वह शास्त्र जिन पर आपकी श्रद्धा थी उनका तीन पा 13 करके आपको ऐसा व गाइड किया कि भैया जो आपके प्रति जिनकी जिनके लिए जिनके लिए आप आपके मन में जिनके लिए आपके मन में श्रद्धा है वही कह रहे हैं कि तुम मुझे नहीं इनको मानो बस उन्होंने इतना आपको डायवर्ट जरूर किया है मगर आपसे कभी यह नहीं पूछा कि अतो मा सद गमाया त जतिया मत यह तत्व कहां गया जी ऐसा जैसे पुराणों को आप बिल्कुल आप यह तो मानते हो कि हा गलत कुछ चीजों में ट्रांसलेशन हुई है एटलीस्ट आप इतना तो समझ ही सकते हो देखिए देखिए मैं आपको बताऊ धर्म जो प्रतिपादित होता है व केवल ग्रंथ से नहीं होता है गुरु गोविंद और ग्रंथ से होता है तो जो भी ऐसे शास्त्र है जो हमें परंपरा से प्राप्त है जैसे आज गीता प्रेस गोरखपुर
01:53:46:10 शास्त्र छाप रही है हो सकता है कल को उनका जो ओनर है गीता प्रेस का बदल जाए उसकी नियत बदल जाए कि मैं सनातन धर्म को नष्ट करूंगा कैसे करूंगा रामायण में दो श्लोक बढ़ा दूंगा तो हम कैसे पहचानेंगे जिस गुरु ने अपने गुरु से परंपरा से उन शास्त्रों का अध्ययन किया होगा वोह देखेगा अरे य शलोक यह श्लोक तो हमारे गुरु ने बताया नहीं है य तो एक्स्ट्रा है तो कोई भी हमारे धर्म में परिवर्तन नहीं कर सकता अगर होगा अगर कहीं पर होगा तो इसका निर्णय कौन करेगा परंपरा प्राप्त आचार्य होगा ऐसा नहीं है कोई छाप नहीं सकता आज इन्होने छापा आज इन्होने छापा अ आप मेरी बात को समझो जैसे आपने शराब वाली बात कही कि मतलब शराप यह बात मैं भी मानती हूं शराप इंसान जब देता है जब गुस्सा आता है बिना गुस्से के तो कोई शराब ही नहीं दे सकता तो फिर गुस्सा क्यों आया ठीक है इस बात को मैं बहुत अच्छी तरीके से समझ गई लेकिन मुझे यह पूछना है जैसे मैं मैं वो पढ़ रही थी श्री भागवत पुराण है उसकी गीता प्रेस गोरखपुर की ही है तो उसमें ब्रह्मा की ब जी की उत्पत्ति के बारे में लिखा है तो उसम उसमें एक वर्ड आता है रजोगुण व्यापक मतलब उके
01:55:01:14 पास रजोगुण है ठीक है तो जब उनके पास रजोगुण है तो फिर हम उन्हें पूजे क्यों वो तो गुणों से बिल्कुल अलग है जो पर देखिए मैं बता रहा हूं आपको जो परम तत्व है एक रूप है कि उसने सृष्टि की रचना की वो सर्वव्यापक सर्व तरीके से हर जगह व्याप्त है फिर वो अपने आपको लीला पूर्वक जीव का जो जीव की जो जो मनुष्य की जो इंद्रिया होती है उनका वह विषय बना देता है उसमें व अलग अलग प्रकार की लीलाए करता है हम उन्हें इसलिए हम उन्हें इसलिए पूछ पूजेंगे कि वह पूर्ण है वोय जानते हैं कि मेरा वास्तविक स्वरूप क्या है हम नहीं जानते हैं यह अंतर है जैसे कि अर्जुन तेरे और मेरे कई जन्म हो चुके हैं तू नहीं जानता मैं जानता हूं क्योंकि वो पूर्ण है उनका कंधा भी य से शुरू हो रहा है यहां पर खत्म हो रहा है उनका जो स्ट्रक्चर है वह सीमित दिखाई दे रहा है मगर हम उन्हें इसलिए पूजते हैं क्योंकि वह पूर्ण है वह जानते हैं कि उनका वास्तविक स्वरूप क्या है वो अविद्या से कृषित नहीं है हम अविद्या से ग्रसित है तो भागवत में ही एक जगह वचन आता है कि भगवान इन गुणों को य जो गुण आप बता रही है भगवान इन गुणों
01:56:16:20 से परे हैं मगर वो इन गुणों को धारण करते हैं स्वेच्छा से जैसे हम हमारे अंदर भी अवगुण है रजोगुण है सतोगुण है या तमोगुण है है ना ठीक है मगर हमने इनको स्वेच्छा से धारण नहीं किया है हम इनसे प्रभावित है हम इनके अधीन है मगर वहां पर ईश्वर अपनी लीला पूर्वक जब अपना रूप धारण करते हैं तो वह अपनी स्वेच्छा से इन गुण को धारण करते हैं तब वह आपको लीला करके दिखाते हैं जी अब आपकी एक बात मुझे बहुत मतलब जिस बात से जो मुझे सबसे ज्यादा हिट करी थी बहुत अच्छी जो बात थी वो यह बात थी जैसे आपने बोला था कि जो परमात्मा जो है और जीवात्मा जैसे परमात्मा उसमें लिखा है कि निराकार है आप उस
01:57:16:10 कंटेक्सचर्स हुई थी यह बात बिल्कुल सच है इस वजह से खा हु ऐसा है कि ईश्वर क्या है हम अगर ये मान लेंगे ना कि ईश्वर ये जो इन्होंने रूप बता दिया कि ये जो है य यही ईश्वर है अगर हम ये ऐसे ईश्वर को मान लेंगे तो यही से ईश्वर की ईश्वर का भंग है अगर हमने य मान लिया क्यों क्योंकि यदि ये ईश्वर है तो फिर इसने सब कुछ नहीं बनाया है सबसे पहले वो जगह इसने नहीं बनाई जहां पर ये इस तरह का शरीर धारण करता है तो क्या है कि ईश्वर की जो प्रारंभिक स्थिति है वो है कि वो व्यवहार में नहीं आ सकता फिर वह व्यवहार में आ सकने वाला रूप लेकर के अभी भी दिखाई नहीं दे रहा है वह एक रूप लेकर के सृष्टि का निर्माण करता है और फिर वो व्यवहार में दिखाई दे सकने वाला रूप लेकर के लीलाएं करता है इसको ऐसे समझ लीजिए जैसे विद्युत है ना इसका उदाहरण भागवत में दिया गया है विद्युत है जो विद्युत सर्वत्र व्याप्त है जमीन इत्यादि में जल अगर जल में मान ले जल में तो व्याप्त है ही है ठीक है मगर वह सर्वत्र व्याप्त होते हुए भी आपको करंट
01:58:31:13 नहीं मारती है आप मान लीजिए कहीं धरती पर खड़े तो करंट मार रही है क्या विद्युत नहीं मार रही मगर वह है मगर वह क्या है अभी वह एक्टिव नहीं है इसको कहा गया और अभी भी वो दिख नहीं रही है इसको कहा गया निर्गुण निराकार ठीक अब इसके बाद हम लोग उद्योग करते हैं मेहनत करते हैं और फिर वो जो विद्युत है वो बिजली के तारों में दौड़ने लगती है अभी भी बिजली के तारों में जो विद्युत दौड़ रही है वो हमें दिख नहीं रही है मगर अब अगर उन तारों को हम छू लेंगे तो वो क्या मारेगी शौक मारेगी ना झटका मारेगी तो अब क्या हुआ निर्गुण निराकार से ईश्वर हो गया विद्युत निर्गुण निराकार थी अब विद्युत निर्गुण निराकार से सगुण निराकार हो गई अभी भी निराकार है मगर वो सगुण हो गई अब उसमें गुण आ गया सक्रिय एक्टिव हो गई ठीक है अब यही विद्युत आपको बल्ब के माध्यम से प्रकाशित हो करर के दिखने लगती है जो आपकी आंखों का विषय बन जाती है तो अब यह क्या हो गया सगुण साकार और यह उदाहरण मैं अपने पास से नहीं दे रहा हूं यह उदाहरण भी भागवत में दिया गया है तो यह ईश्वर का रूप है अब जब ईश्वर अपना रूप बनाता है तो कुछ भी
01:59:46:14 कर सकता है वो हाथी बन सकता है वो शेर बन सकता है वो पहाड़ बन सकता है जंगल बन सकता है सब कुछ वही है वो कुछ भी कर सकता है यह है अनलिमिटेड ईश्वर और यदि हम यही कह देंगे कबीर ही ईश्वर है तो शुरुआत ही गड़बड़ हो गई ठीक है तो फिर थैंक यू सो मच ओके आशा करते हैं आपके बेहतर भविष्य की और भगवान से प्रार्थना करते हैं आप प्रभु श्री राम की कृपा बनी रहे आप आए आपने बात की और बहुत सारी बातें सामने आई थैंक यू सो मच जय श्री जय श्री राम
02:00:38:02 री सूरज देव जी आपका वो नहीं आ रहा बहुत अच्छी चर्चा थी इसमें एक चीज मैं ऐड करना चाहूंगा जैसे उन्होंने बोला कि वासुदेव वासुदेव भगवान कृष्ण को इसलिए बोलते क्योंकि व वासुदेव के पुत्र थे इसलिए वासुदेव उनका एक नाम ही है तो जो वासुदेव बोला गया है वो भगवान कृष्ण के लिए ही उपयोग है उनके पिता जी के उसमें वासुदेव और व्याकरण के जो विद्वान होते हैं इसको अलग तरीके से और भी तरीके से परिभाषित करते हैं क्योंकि व्याकरण बहुत डेप्थ का विषय है अमर कोश नामक ग्रंथ में प्रत्येक शब्द का अलग-अलग प्रकार का अर्थ किया गया है एक एक शब्द के तो वासुदेव एक व्यापक अर्थ में भी इसका प्रयोग होता है और वैसे देखा जाए तो वासुदेव के पुत्र है सिंपल तो वासुदेव इसलिए भी उन्हीं का नाम है भगवान कृष्ण का नाम है और काफी अच्छी चर्चा थी और भागवत में जैसे आपने कहा बताया हुआ है कि जो ईश्वर है वह एक को हम बहु श्याम वह तत्व रूप में सृष्टि के आदि काल में अ क्रियाशील रूप में था अब लीला पूर्वक उसको क्या करना है जैसे एक व्यक्ति को अपनी कंपनी चलानी
02:01:53:04 है तो कंपनी चलाने के लिए उसको अपने मेंटालिटी के लोग हायर करने पड़ेंगे या अलग-अलग क्रिया करने के लिए अलग-अलग रोल्स अदा करने पड़ेंगे अपनी फैक्ट्री को चलाने के लिए तो एक को हम बहु श्याम नाम की जब इच्छा उत्पन्न हुई तो अलग-अलग गुणों को अलग-अलग गुणों को धारण करके सृष्टि स्थिति प्रलय अनु ये निग्रह हा निग्रह और अनुग्रह करने के लिए सत्व रज और तम गुणों के तारतम्य से ही उसने क्या किया अपने स्वरूप रचे तो पंच परमेश्वर जो सनातन धर्म में है इनमें कोई भेद नहीं है अगर हम इनमें भेद करते हैं तो भेद हमारी बुद्धि में है तो ये सभी के सभी ईश्वर कोटि है और जितने भी हमारे देवी देवता है 33 करोड़ देवी देवता वो सब इन्हीं में कल्मिनेट हो जाते हैं सारे देवी देवताओं को पूछते हुए हमें इन पांचों देवता में से जो हमारी कुल परंपरा प्राप्त इष्ट देव है कुल देव है या आजकल शहरों में इसका लोप हो रहा है लोगों को अपने कुलदेव इष्टदेव नहीं पता है तो वह यह कर सकते हैं जैसे गुरुदेव ने बताया हुआ है कि जिस पंच देवों में से ही जिसके
02:03:08:18 अवतार शास्त्रार्थ भाव से प्रार्थना करनी है अच्युत अनंत गोविंद करके या उनके नाम से और स्वप्न में या एकांत में हमें ऐसा संदेश प्राप्त होता है यह प्रमाणिक है और मैंने अपने कई सारे मित्रों को ये चीज जब वीडियो देख के बताई और उनके साथ ये घटना घटी इसलिए मैं आपको बता रहा हूं यह मैं ऐसे नहीं बोल रहा हूं तो यह जो गुरुदेव ने बोला है यह हुआ है और दूसरा मैं आपके साथ एक और चीज शेयर करना चाह रहा हूं कि जैसे आर्य समाज और आरएसएस वाले लोग क्या करते हैं महिलाओं को भी का जने संस्कार के लिए और यस वाले आरएसएस वाले नहीं करते हैं आरएसएस धार्मिक संस्था नहीं है मगर उनका जो आधार है उनका जो आधार है व आर्य समाजी आधार ही है नहीं वह ठीक है मगर आप आर्य समाज की ही बात करें क्योंकि वैचारिक मतभेद तब होगा जब विचार हो आरएसएस का इस बारे में कोई अपना विचार है ही नहीं रूप सेक्ष रूप से कुछ हो पीछे से वो उस पर हम लोग बात
02:04:23:19 नहीं करें प्रकट रूप से आरएसएस के धर्म और धर्म की व्याख्या के बारे में अपना कोई विचार नहीं है आर्य समाज की अगर बात करें और गायत्री परिवार की बात करें ठीक है हालांकि सभी धार्मिक संस्थाओं को कुछ ना कुछ वैदिक कुछ ना कुछ वैदिक सिद्धांत य फॉलो करते हैं तो उन अंशों में हम इनको प्रणाम करते हैं नतमस्तक होते हैं हम इनका उल्लंघन नहीं करेंगे कुछ ना कुछ अंशों में वैदिक सिद्धांतों को वो करते हैं लेकिन जो चीज इनकी विकृत है वो बतानी पड़ेगी तो क्या करते हैं महिलाओं को भी गायत्री मंत्र का उच्चारण और जनेऊ पहनने के लिए कहते हैं तो आज ही मेरी माता जी ने अपना एक संस्मरण मेरे से शेयर किया कि बचपन में उनके चाचा वगैरह जब क्या करते हैं जने को चेंज करते हैं तो जनेऊ को चेंज करने के समय उन्होंने क्या किया था उसको कहीं पर रख दिया और जब अपना जनेऊ परिवर्तित किया चेंज किया पूरा विधिवत तो वो वहीं पर पड़ा रह गया तो मेरी माताजी लोग क्या थे बहुत छोटी उम्र के थे उस समय उनको ज्ञान नहीं इन सब चीजों का तो उन्होंने खेल खेल में क्या किया था वो जनेऊ अपने ऊपर जैसे चाचा जी को देखा था वैसे ही डाल लिया और जब उन्होंने वो डाल लिया तो विधिवत तरीके से उन्होंने निकाला था और वहां रखा था वहां व भूल गए थे और मेरी माता जी के जिन जिन हिस्सों में वह जनेऊ
02:05:38:28 टच हुआ वहां वहां पर फफोले पड़ गए और यह माता जी बता रही थी और उन्होंने बताया अभी भी वह निशान है तो तब से व इन चीजों को एकदम मानती है कि यह जो चीजें बताई गई है यह सच्ची में होती है और पहाड़ों और जो धार्मिक जगह है वहां ये आपको प्रत्यक्ष देखने को मिलेगी जो लोग आज सोचते हैं कि अगर हम जनेऊ पहन सकते हैं हम गायत्री कर सकते हैं तो और क्यों नहीं कर सकते यह उनको बाद में पता लगेगा कि इनसे कितनी मानसिक विकृतियां क्या-क्या चीजें हो सकती है तो यह आज ही उनका एक था मैंने सोचा आपको आप कभी मिलेंगे आपसे शेयर करेंगे कि महिलाओं को कई महिलाओं को ये ऐसा हुआ है मेरी माता जी के साथ तो ऐसा हुआ है कि जनेऊ धारण करने में उनको जिन जिन अंगों में वो जनेऊ था वहां वो अंगों में फफोले पड़ गए थे और प्रॉब्लम हुई थी तो ये आपके साथ शेयर करना था बाकी आप बताइए मैं एक बात कहूंगा आर समाज जो कहता है ईश्वर अवतार नहीं लेता उसके बारे में उसके साथ ही हम लोग आज की चर्चा को विराम दे देंगे एक सिंपल सी बात है एक जगह इन्होंने कहा है कि एक समय ऐसा होता है जब स्थिति जो है तर्क में नहीं आ सकती प्रलय के समय इन्होंने वो माना है है ना शायद 199 में ही वा इन्होंने वहां पर
02:06:54:03 तर्क में ना आ सकने वाली स्थिति स्वीकार की है तर्क में नहीं आ सकता हालांकि उपनिषद में भी दिया गया है मांड उपनिषद सात में जब तर्क में नहीं आ सकता है तो यह जो ईश्वर है जो सृष्टि की रचना कर रहा है यह जो ईश्वर है जो जिसके बारे में तर्क कर रहे हैं जिसके बारे में यह तर्क कर रहे हैं यह कौन सा ईश्वर है जब वो तर्क में नहीं आ सकता है एक स्थिति ऐसी होती है तो जो तर्क में आ रहा है वो कौन सा ईश्वर है अगर हम कह ब का विषय ब विषय बना दिया ना तर्क बुद्धि से आता है हा तर्क में आ सकता है तो बुद्धि का विषय बना तो क्या हुआ कि वो जो तर्क में ना आ सकने वाला ईश्वर था अब वो निराकार है मान लिया निराकार है वो तर्क में आ रहा है तर्क में आ रहा है तो क्या हुआ अब या तो यह माने कि जो पहले वाला जो ईश्वर का स्वरूप है वो उसने छोड़ दिया अब वो यही हो गया तो इसमें मानेंगे तो परिवर्तनशील हो गया और मैंने इनका थोड़ा बहुत पढ़ा है या बोलते हैं कि दयालु है ये है वो है तो निर्गुण निराकार तो मान ही रहे गुण का तो आरोप कर दिया इन्होंने ना ना वो मैं आप एक स्टेप आगे बढ़ गए मैं कह रहा हूं कि अगर वो तर्क में आने से ही तर्क में आ सकने वाला बना और हमने य मान
02:08:09:07 लिया कि वो बदल गया तो व इटरनल ट्रुथ नहीं है शाश्वत नहीं रहा वो क्योंकि वो बदल गया हा ईश्वर के लिए नासतो विद्यते भावो ना भावो विद्यते सत तीनों परिस्थिति समान है अब क्या है जब वो अब अब क्या है कि जब वो तर्क में ना आ सकने वाले रूप से तर्क में आ सकने वाले रूप में आया तो फिर हम हमको या तो ये मानना पड़ेगा कि वो शाश्वत नहीं है वो खुद बदल गया या फिर वो तो वैसा का वैसा ही रहा एक रस वो तो वैसा का वैसा ही रहा एक रस फिर भी उसने एक और स्वरूप धारण कर लिया यानी कि अजन्मा विनाशी तर्क में ना आ सकने वाला होते हुए भी मैंने एक और रूप धारण कर लिया तो जब वोह यहां से यहां आ रहा है अवतरित हो रहा है तो फिर यहां से यहां क्यों नहीं आएगा यहां से यहां तो आ जाएगा यहां से यहां आने में दिक्कत अंग्रेजों के प्रभाव से अंग्रेजों के प्रभाव से मूर्ति का खंडन किया गया होगा उस समय और इसीलिए अवतारों का भी उन्होंने क्या किया खंडन कर दिया है देख बात है किसी समय ऐसी आवश्यकता हो सकता है कि भाई मूर्तियों का नाम पर कुछ ऐसा हो रहा हो तो आपने लिख लिया
02:09:24:20 गुस्से में आकर के या किसी भी सुरक्षा की दृष्टि से मगर वह सनातन सिद्धांत नहीं है जैसे कि सोशल रिम है सिधांत नहीं है कि हमने किसी देश काल परिस्थिति के अनुकूल समस्या को सुलझाने के लिए कुछ लिख दिया मगर उसको सनातन व्याख्या मानना यह गलत है दूसरी बात ये लोग खुद कहते कि शोध ग्रंथ है ये लोग खुद कहते शोध ग्रंथ है और इसमें कई बार बदलाव हो चुका है बदलाव हो चुका है तो इसका मतलब इसमें लिखी हुई बातें सनातन सिद्धांत नहीं है सिंपल जी संदीप जील सोल रिम अध्याय 10 लोक 42 में लिखा हुआ है स्पेशली कि यह संपूर्ण जग जो है यह मेरा एक अंश मात्र है सिर्फ इसका अर्थ यह हुआ कि जितना भी जितना भी यह सारा सिस्टम चल रहा है ना परमात्मा के अंदर ही चलर परमात्मा
02:10:21:21 उनके अंदर कई सृष्टि चल रही है ये हम हर चीज तभी इसलिए हम लोग कई बार कह तो देते हैं कि ये चीज मल उसको कह देते यह मतलब की निष्क्रिय यह सक्रिय म जबक सारी चीज सक्रिय है क्योंकि परमात्मा सबके अंदर है यह समझने वाली बात है इन चीजों में एक सर छोटी सी बात कर रहे थे जैसे अध्याय 18 श्लोक 66 की बारबार य बा बात करते हैं ना सर ज्यादा नहीं समय लूंगा इसमें छोटी सा है उसम उसमें उन्होंने समझाया क्या हुआ है कि संपूर्ण ध को त्याग कर व धर्मों की बात पता क्या मुझे क्या लगता है धर्म क्या होता है धर्म बेसिकली जैसे वो संसार जो संसार धर्म हम निभाते हैं ना जैसे जैसे माता-पिता के प्रति धर्म है हमारा या पत्नी धर्म है या बच्चों के प्रति मतलब संसारी धर्मों को त्याग कर मतलब की उन्होंने कहा कि जितने भी संसार के तुम ये कर्म या धर्म कर रहे हो तो यह इन सबको त्याग कर मेरी शरण में शरण को ग्रहण करो नहीं मैं इसको क्लियर कर देता हूं उन्होने क्या कहा है वहां पर संपूर्ण धर्मों को त्यागने से अर्थ है कि मुझे अर्पित करो जैसे कि आप जैसे कि आप माता की सेवा तो करनी है मगर क्यों करनी है क्योंकि माता की सेवा करने से ईश्वर खुश
02:11:36:26 होंगे अगर वो कर देता उन्होने बोला है संदीप जी ने तो वो युद्ध ही नहीं करते तो वो युद्ध ही नहीं करते कर न मैं पूरा कर पर का ये है कि उसको ना आप जो मतलब य करो भगवान को अर्पित करके युद्ध करना है वहां अर्जुन को भगवान को अब इसका एक उदाहरण दिया है आप आप इसका एक उदाहरण दिया है साधक संजीवनी में भी वो उदाहरण है और शायद गीता प्रबोधनी में भी वो उदाहरण है उदाहरण यह दिया है कि शुरुआत में एक जगह आया है कि जो युद्ध स्थल में जो सैनिक खड़े हुए थे वह अपने प्राणों को त्याग कर खड़े हुए थे ठीक है अब प्राणों को त्यागने का मतलब क्या हुआ लाश थी हां नहीं नहीं ह नि स्वार्थ इसका इसका मतलब प्राण से जो आसक्ति होती है उसको त्याग करके व खड़े हुए थे इसका मतलब मरेंगे या लड़ेंगे प्राणों की जो आसक्ति है प्राण रहेंगे प्राणों की जो आसक्ति के प्राण रहेंगे तो मैं जो है यह भोग कर लूंगा मैं वो भोग कर लूंगा जो आसक्ति है उसको त्याग करके वहा खड़े तो इसी प्रकार से जो धर्म धर्म कार्य हम जो कर रहे हैं इनकी इनसे प्राप्त होने वाले में जो
02:12:51:28 फ फल के जो भोग है उनके प्रति जो आसक्ति है उसको तू त्याग दे परंपरा प्राप्त आचार्य की आवश्यकता होती है जैसे वो बहन जी बोल रही थी इससे पहले वाली की मैंने भागवत पढ़ी भागवत में यह लिखा था वो लिखा था आप उनको सीधे बोलते परंपरा प्राप्त आचार्य के सानिध्य में ग्रंथों को पढ़ो जो हमारे कन्फ्यूजन होते हैं वो सब उससे होते खैर वो काफी काफी हद तक वो समझ के गई है बाकी अपना परिवर्तन लाएंग शंकराचार्य जी इसमें जो शंकराचार्य जी ने जो आंसर दिया है उसका भी उनका भी यही आंसर है लगभग सभी परंपरा प्राप्त आचार्यों का 18 66 का आंसर यही है कि जो इंद्रिय धर्म होते हैं इंद्रिय धर्म वो भोग होता है इंद्रिय धर्म क्या है भोग तो जो इंद्रिय धर्म है उसको त्याग कर आप मेरी शरण में आओ कुल मिलाकर के वो जो आपकी आसक्ति है जो धर्म से अब मान लो हम अच्छे कार्य कर रहे तो हमें आसक्ति मैं इतने अच्छे कार्य करता हूं तो मुझे ये मिले मुझे वो मिलेगा मुझे भोग मिलेगा तो वो आ उसी को शंकराचार्य जी ने कहा इंद्रिय धर्म को त्याग कर मेरी शरण में आओ फिर उन्होने उपनिषद का प्रमाण भी दिया है शंकराचार्य जीने तो अब कल हमें एक विशेष प्रयोजन से कहीं जाना है
02:14:07:16 तो आज की इस लाइव स्ट्रीम को हम लोग बढ़ाएंगे पहाड़ी जी वापस आए तो कुछ कहना हो तो कह दीजिए आपकी वार्ता के साथ हम लोग जं भी आगी एकादशी में गीता जयंती में लाइ जी नहीं नहीं मुझे कुछ नहीं कहना है ठीक है आपने कल कहीं जाना है तो ठीक हैमा सर देव जी आपने अपना चेहरा नहीं दिखाया आपने अपनी कोई बात भी नहीं रखी हां सर जी मेरा वॉइस ठीक है आपका परिचय सर मैं आपका सब्सक्राइबर हूं मैं आपका फॉलोअर ही हूं आप मतलब आप मेरा कैसा परिचय मांग रहे हैं थोड़ा बता दीजिए तो ये होगा वैचारिक मतभेद के निमित्त आए हैं या फिर कोई स्वार्थ पूर्ण वो चर्चा के लिए नहीं नहीं मैं मैं आपका फॉलोअर हूं मैं आपसे डिबेट कैसे करूंगा ना और मैं आपके लायक भी नहीं हूं मैं आपसे बहुत छोटा हूं ना मैं कैसे आपसे डिबेट करूंगा मेरा कुछ डाउट था तो वो आप अगर क्लियर कर देंगे तो इसलिए आया के लिए डाउट के लिए मैंने कई बार कहा है आप लोग क्लास में आया करिए क्लास के लिए हमारे ट नंबर पर फॉर्म भरिए फम प्राप्त करिए और उसको
02:15:22:16 फॉर्म भरिए आप क्लास में मिला करिए हर संडे को सुबह 9:00 बजे 8 बजे क्लास होती है ठीक है सर अगर मेरा एक छोटा सा बात था अगर आप थोड़ा निराकरण करते तो अच्छा होता क्या है सर मैं और मतलब आजकल आप आर्य समाज के भी विरोध कर रहे अच्छा बात है पर इस समय बहुत सारे ईसाई लोग भी सनातन धर्म को विभिन्न तरीकों से आक्रमण कर रहे हैं ना तो कुछ हिंदू भी इसके प्रति उत्तर देने में उठे हैं चैनल भी बनाया है तो मैं भी उस तरीका ही प्रयास कर रहा हूं पर एक मेरा डाउट था हालांकि हमने उत्तर देने की प्रयास किया है पर बहुत सारी ईसाई देवी भागवत को कोट करते हैं और विष्णु जी का साबित करने की कोशिश करते कि विष्णु जी देवी से अलग है देवी से भिन्न है और देवी से अलग होने के नाते तो जितने भी वैष्णव पुराण है वो असत्य हो गया मतलब सनातन धर्म को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और विष्णु जी को एक विष्णु जी जो परम तत्व है उनके जो ईश्वर का है उस पर सवाल उठा रहे तो इसके थोड़ा थोड़ा डाउट था प्रमाणिक आचार्य कौन है जो शास्त्रों का अर्थ बताएगा मैंने कितनी बार अपने वीडियोस में कहा है कि
02:16:38:03 संसार के सभी सनातनी हों को संसार भर में रहने वाले जितने भी सनातनी है उन सबको शास्त्र का मर्मज्ञ होने की आवश्यकता नहीं है उन सबको केवल इतना मालूम होना चाहिए कि परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्य कौन है बस अगर कोई भी व्यक्ति कल को कोई भी बुक उठा कर के आपको धर्म की व्याख्या करने लगेगा तुम्हारे धर्म में य तो आपका सवाल यह नहीं होना चाहिए नहीं नहीं यय नहीं लिखा है आपका सवाल यह होना चाहिए कि आपने य जो अर्थ बोल रहे हो यह कहां से प्राप्त किया है अगर आपको कल को कोई भी जीओ छोड़ो डीओ डू को डीओ डो कहने लगेगा तो आप उससे पूछोगे ना तुमने इंग्लिश की पढ़ाई कहां से की है पूछोगे ना तो जब भी कोई व्यक्ति आपके धर्म पर आघात करने चलता है शास्त्रों का गलत अर्थ बताते हुए तो आवश्यक नहीं है कि आप शास्त्र के मर्मज्ञ बने आपको यह मर्मज्ञ बनना होगा कि उससे पूछो तुम किस परंपरा प्राप्त आचार्य के शिष्य हो जो तुमने य अर्थ बताया हमको क्या वो सन्यासी है क्या उसके दवारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है क्या वो समस्त शति स्मति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देता है अर्ध कुट न्याय तो नहीं करता है हां सर मैं थोड़ा बोल लू एक्चुअली
02:17:53:10 हमारा जो विरोधी है जो ई लोग मैं देखिए हमें ऐसा नहीं कि हम पूरी तरीके से ऐसा करिए आप जो है क्लास में आइएगा और आप वहां पर भी लिख के दे सकते हैं टेलीग्राम चैनल पर आपका प्रश्न बहुत जटिल नहीं है पर अब समय हो रहा है हम लोगों को जाना है कल एक आवश्यक कार्य है और हमारे एक आंसर दे देते तो अच्छा होता दो मिनट चाहिए था क्या चाहिए था दो मुझे चाहिए दो मिनट में दे देते मैंने आपको दिया है आवश्यक नहीं है कि मेरे द्वारा दिया जाने वाला निराकरण संतुष्ट हो नहीं नहीं मुझे पता है आपका जो निराकरण आप
02:18:37:19 दे बोलिए अच्छा बोलिए हा मुझे पता है मैंने शिवांग जी का बहुत अच्छा सारा वीडियो भी देखा शिवा जी के लिए ही मैं रामपाल वालो की असली चेहरा मुझे पता चली वरना मैं जब छोटा था मैं बहुत रामपाल वालों की वीडियो भी देखा किया करता था और उससे भी थोड़ा भ्रमित भी हो चुका था तो शिवांग जी का तो इसलिए मुझ धन्यवाद देना ही पड़ेगा और एक छोटा सा बात था कि दे भागवत सबका सबका भटकाने का ट्रैक वही है इनकी वीडियो से आप उनको भी कवर कर सकते हो सबका एक ही ट्रैक है उनका भड़काने का चाहे ये रामपाल है चाहे वो है तो उन्हीं के ट्रैक से उसी के ऊपर काम कर सकते हो आपको दिक्कत ही नहीं है वही प ठीक है आप बोलिए आपका प्रश्न प्रश्न बोलिए आपका देखिए अब देवी भागवत जो फोर्थ स्कंद है चतुर्थ स्कंद के आठवे अध्याय में 18 चैप्टर में भगवान विष्णु खुद को स्वतंत्र नहीं बता रहे भगवान विष्णु कहते हैं कि भगवान विष्णु स्वतंत्र नहीं है और भगवान विष्णु जितने भी अवतार लिए हैं वह देवी भगवती की इच्छा से ही लिए है और भगवान विष्णु देवी भगवती की ही पराधीन है तो वह साधीन ईश्वर नहीं है तो इस अगर इस पॉइंट के आप निराकरण कर देते तो मैंने आपको बताया तीसरा पॉइंट समस्त शति स्मति शास्त्रों में
02:19:52:22 सामंजस्य की शिक्षा साधु सम्मत धर्म है अगर हम यही मान लेंगे कि जो विष्णु भगवान है वो स्वतंत्र नहीं है तो देवी भागवत मेंही नौवे स्कंध में जो देवी है वो कृष्ण भगवान के विष्णु भगवान के अधीन है फिर क्या करोगे देवी भागवत से देवी भागवत कट जाएगी तो हमें ये मानना पड़ेगा कि लीला पूर्वक भगवान अपनी भक्ति प्रकट कर रहे हैं देवी मां के प्रति तो इतनी अधीनता दिखा रहे हैं और सबसे बड़ा पॉइंट यह है आपको एक बात याद रखो ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है तो ईश्वर भगवान भी है तो ईश्वर भक्त भी है यह बात सही ईश्वर भगवान भी हो सकता है ईश्वर भक्त भी हो सकता है क्या दिक्कत है ईश्वर हनुमान भी हो सकता है ईश्वर राम भी हो सकता है अब राम भगवान शिव जी की पूजा कर रहे वही शिव जी हनुमान के रूप में राम की पूजा कर रहे हैं पर इतना ध्यान देना है कि शास्त्रो तो भगवान कोई भी नहीं शास्त्रो भगवान जो दुर्गा जी का प्राकट्य हुआ था ना पहले तो वो पढ़िए किस लिए हुआ था वो राक्षस को वध के लिए हुआ था और हुआ कैसे था वो जितने भी देवी देवता थे ना उनके तेज से हुआ था अब आप कहोगे कि व उनके दुर्गा जी उनके नीचे आ गई यह चीज नहीं होती वो उनके प्रकट का तरीका होता है अलग अलग होता केव
02:21:08:08 केवल वो लीला है कि उस रूप में उन्होने लीला कैसे की बस इतनी सी बात है इसी तरीके से विष्णु भगवान ने विष्णु भगवान के रूप में उन्होंने वहां यह कह दिया कि मैं जो है स्वतंत्र नहीं हूं मगर दूसरी जग शिव भगवान ने कह दिया नहीं नहीं विष्णु जैसा कोई नहीं है तो यह इसलिए होता है यह इसलिए होता है कि जिसके प्रति आपकी आस्था है मान लीजिए आपकी मां भगवती के प्रति आस्था है तो आपने मां भगवती का अध्ययन करना शुरू किया मां भगवती के अध्ययन में जब आप उनका अध्ययन कर रहे होगे तो उसमें ऐसी बातें होनी चाहिए जिसके कारण आपकी एकाग्रता बन जाए मां भगवती में तो ये अन्यता की रक्षा के लिए इस तरह की बातें हमारे शास्त्र में होती है अनन्य की रक्षा मतलब जैसे कि आप अपनी आप अपनी माता जी है आपने बताया आपकी माता जी होंगी आपके घर में आपके पिताजी होंगे आप उनसे कई बार ये बात कह देते होंगे कि आप इस संसार के सबसे अच्छे पिता है अब ये आपकी अन्यता है या घमंड है या आपको परफेक्ट पता चल गया कि उनके जैसा और कोई नहीं है ना ये तो मेरा प्रेम है ये आपकी अन्यता है आपका अन्यता का भाव है कि आप को अपने पिता के अलावा और कुछ दिख नहीं रहा है इसलिए
02:22:23:12 आप कह रहे हो कि आपके जैसा कोई नहीं है आपके आगे सब बेकार है तो ऐसे ही भगवान ने वो भाव प्रकट किया है कि भाई मैं जो है स्वतंत्र नहीं हूं मैं भी मैं भी इनके अधीन हूं अन्यता का भाव तो उससे भक्त की भगवान के प्रति अनन्य के भाव की रक्षा होती है इसलिए इस तरह के आते हैं मगर यदि इसी को हम अंतिम सत्य मान लेंगे तो शास्त्र के दूसरे वचन खंडित हो जाएंगे तो हमें क्या करना पड़ेगा सब वचनों की रक्षा करनी पड़ेगी सामंजस्य तो हमें विष्णु वहां पर विष्णु सूक्त है वेदों में सूक्त आया है विराट पुरुष का विष्णु भगवान की बातें हो रही है वहा तो वहा खंडन कैसे कर दे उनका तो मानना पड़ेगा य भगवान अनंता के भाव की रक्षा कर रहे हैं और यहां पर भगवान लीला पूर्वक य बात कर रहे ठीक है अ धन्यवाद धन्यवाद थक य जय श्री राम जय श्री राम
02:23:17:07 श्रीराम जय श्री राम h [संगीत]
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