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00:00:06:18 सभी को ज श्रीराम तो आज की वीडियो का लाइव का आपने देख ही लिया टॉपिक आज हम लोग इनके द्वारा जो साद का व्रत का उपहास उड़ाया जाता है खंडन किया जाता है उस पर हम लोग बात करने वाले हैं [संगीत] और पता नहीं क्या हो गया सिस्टम में र कुछ एक चुटकियों भी लेंगे कुछ जरूरी बातें जो बीच बीच में जो ट्विस्ट होते हैं वह भी आपको बताएंगे कुछ बिल्कुल ऐसी चीजें जो अन एक्सपेक्टेड होंगी आपके लिए हम मगर शुरू शुरू करने से

00:01:03:19 पहले प्यारी बहना क्या कह रही है चलो अच्छा है आज टाइम आगे बढ़ाने के बाद तो कम से कम टाइम पर आ गए भैया अच्छा ठीक है खर तो मुख्य विषय पर आने से पहले हम लोग एक बात कर ले हालांकि कल मैंने काफी देर तक इस बारे में बात की थी तो भाई जो लोग हैं जो शास्त्रार्थ की चुनौती दिया करते हैं उनके पास शास्त्रार्थ से बचने का और कोई तरीका तो था नहीं तो इसलिए उन्होंने दो ऐसी शर्तें रखी जिसको कि सामने वाला ना मानने के लिए विवश हो जाए और वह यह कहे कि हमें शास्त्रार्थ नहीं करना पर हो गया इसका उल्टा सामने वाला थोड़ा हम आदमी जरा दूजे किस्म के वाला निकला उस ने क्या किया उसने पलट के ऐसी शर्त रख दी कि वो तो कभी मान्य हो ही नहीं सकती तो वही हुआ हमने जब अपनी चीजें कहीं और बताया तो हमें रात में फिर एक लेटर प्राप्त हो गया उसमें भी कुछ निराधार बातें कुछ उन्हीं के लेटर में ही उन्हीं की चीजें हो रही

00:02:18:26 है तो उसका मैं संक्षिप्त विवरण देते हुए उत्तर दे दू उसके बाद हम लोग मुख्य विषय पर आ जाएंगे सबसे पहली बात जो इन्होंने कही है उसमें जो मैंने पिक की है कि इन्होंने कहा कि शास्त्रार्थ के विषय में और लिखित बातें ही मान्य होती है इस तरीके से यट इत्यादि की बातें मान्य नहीं होती और फिर अपने ही उसी लेटर में जिसमें वो यह बता रहे हैं सिद्धांत देखिए यह लोग वीडियो क्वालिटी खराब है दोबारा है क्या रुक रही है क्या

00:03:23:13 हां तो इनका दोहरा चरित्र देखिए कैसे अपने ही पत्रों में दोगलापन अपना प्रस्तुत करते हैं उसको स्पष्ट करते जाते हैं वो देखिए इन्होंने वहां पर हमें पत्र में एक बात कही है कि शास्त्रार्थ के विषय में आपको इतना सामान्य ज्ञान तो होना चाहिए कि शास्त्रार्थ के विषय में इसका मतलब है कि हमारे द्वारा वीडियो क्वालिटी अटक रही है क्या किया जाए देखते हैं

00:04:26:01 भाई संभवत अब नहीं हट गगी वाईफाई ऑफ था क्षमा करिएगा ठीक है अब ठीक आ रही है वीडियो क्वालिटी राधे राधे राधे राधे ठीक आ रही है वीडियो क्वालिटी जी तो आर्य समाज की ओर से जो हमें एक कल के लाइव स्ट्रीम के बाद एक फिर से उत्तर मतलब लिखित में प्राप्त हुआ तो उसका कुछ उत्तर दे दे छोटा सा संक्षिप्त में और फिर हम लोग अपने मुख्य विषय पर चलेंगे तो उस लेटर में ही ऐसी चीजें हैं जिनसे उन्हीं की बात से वह अपनी ही बात को काट रहे हैं तो उन बातों पर हम लोग बात करते हुए अपना फिर से एक बार जवाब प्रस्तुत कर दे उन्होंने ये कहा है जो मैंने मुख्य मुख्य बातें पिक की है उनके लेटर्स में उन्होंने एक बात यह कही है कि आपको इतना सामान्य ज्ञान होना चाहिए कि शास्त्रार्थ के विषय में ट वीडियो इत्यादि प्रमाण के रूप में नहीं होते अच्छा पहली बात यह कि आप हमें यब के माध्यम से ही जानते हैं कि हमने कुछ बात अगर कही है तो वोह आपने जाना कैसे ू के माध्यम से ही आप हमें जानते हैं मतलब हमारी जो बात है कि हमको आपका मन क्यों हुआ हमसे शास्त्रार्थ करने का शास्त्र चर्चा करने का

00:05:41:08 वो इसलिए हुआ क्योंकि आपने हमें हमारी किसी टूब की कही हुई बात को माना कि हम यह कह रहे हैं है ना ट पर कही हुई किसी बात को आपने माना कि हम यह बात कह रहे हैं तब आपने हमें वो लेटर भेजा है अच्छा दूसरी एक बात है आपने यह बात मानी कि आपको इतना सामान्य ज्ञान होना चाहिए कि शास्त्रार्थ के विषय में youtube1 की पराकाष्ठा तो दोगले पन की पराकाष्ठा देखिए उसी लेटर में ये भी लिख रहे हैं कि आपके जो गुरु हैं पूरी पीठाधीश्वर और शंकराचार्य उनको हमारे रुद्रपुर में एक आर्य समाजी ने हरा दिया शास्त्रार्थ ये है डगले पन की हम तो भाई कम से कम शास्त्र चर्चा या आप शास्त्रार्थ विषयक बातें कर रहे हैं वीडियो के माध्यम से आपका यह जो व्यक्ति है इसने कौन से नियम तय किए थे कौन सी चुनौती भेजी थी शंकराचार्य जी को कि यहां होगा फलाना होगा रिकॉर्डिंग नहीं होगी तुम्हारे कैमरे ऑन नहीं होंगे सिर्फ मेरे कैमरे ऑन होंगे हिंदू शब्द का प्रमाण पर हिंदू शब्द की प्रामाणिकता पर बात होगी

00:06:56:24 ये इस विषय में कौन से लिखित पत्र पत्राचार हुआ था वह जरा बता दीजिए आप खुद ही कह रहे हो कि शास्त्रार्थ के लिए लिखित पत्राचार या लिखित चीजें आवश्यक और फिर खुद ही कह रहे हो कि एक व्यक्ति चलती हुई सभा के बीच में जो पहुंच गया उसने अपना प्रश्न किया और अपनी ओर से उन्होंने उत्तर दे दिया शास्त्रार्थ के उसमें नहीं है वह वातावरण में तो आपने उसको शास्त्र का नाम दे दिया तो जब नाम दे दिया तो आप बताइए ना कि लिखित कौन सी चर्चा लिखित कौन सी कौन सा पत्राचार हुआ था क्योंकि आपको तो सामान्य ज्ञान है कि शास्त्रार्थ के विषय में लिखित पत्राचार आवश्यक है कौन सा लिखित पत्राचार हुआ था चलो वहां पर उस व्यक्ति ने यह कहा था कि मैं शास्त्रार्थ के लिए आया हूं यह कहा था उसने माइक पकड़

00:07:48:20 के वाह रे दोगलो वाह यही तो है जहा बाधित ईश्वर है ईश्वर है ही नहीं वहां से और क्या निकलेगा दोगलापन इसीलिए तो और क्या निकलेगा फिर हमसे बता रहे हैं कि अच्छा ऐसा नहीं है हमने इनको दो बार लिखित में उत्तर भी दिया हमने इनको यह भी बता दिया कि भाई हम बारबार आपके साथ पत्राचार नहीं करेंगे आपको हमारी चीजें मंजूर है तो आप आइए और वो दो ही चीजें थी ईश्वर विषयक चर्चा को प्राथमिकता से लीजिए जिससे कि अगर उसके बाद में जो बाकी के जो टॉपिक्स है उन पर बात हो पाए या ना हो पाए मगर एक निर्णायक चीज लेकर के हम बाहर आए क्योंकि आप लोग सबको मालूम है यह बात जग जाहिर बात है कि वोह चर्चा बाद वाली हो पाएंगी कि नहीं हो पाए ठीक है उनकी कितनी संभावना है तो हमने यह कहा था कि भाई ईश्वर विषय चर्चा को आप प्राथमिकता से लीजिए बाद की चर्चा जो बाकी के दो है जिसमें आपका बड़ा मन है नहीं नहीं हमें हरा के ही दिखाना है वोह हम बाद में कर लेंगे ठीक है और दूसरी थी कि स्वतंत्रता दोनों को होनी चाहिए ना अपने ष शर्त वो आपने वो शर्त मानी पहली वाली

00:09:03:26 और ना ही दूसरी मानी कुछ नहीं माना तो हमने इसमें आपको लिखित में बता दिया था कि हम बार-बार प्रचार नहीं करेंगे हमारे ये अंतिम उत्तर है आपको लिखित ठीक है तो अब क्या है कि उनको तो भागना था तो वो ये चाहते थे कि चर्चा के लिए मना हम करें मगर कल के लाइव में हमने यह कह दिया भाई नहीं बिना कपड़ों के आओगे और नृत्य करोगे तो हम तुम्हारा हिंदू शब्द को भी प्रामाणिकता से ले लेंगे और रिकॉर्डिंग भी नहीं करेंगे अब इसमें उनके आग लग गई होगी भाई ये कैसी च शर्तें रख दी इसने तो ये तो हम से एक कदम आगे का व्यक्ति निकला हमने तो सोचा ही नहीं था इतना बोल देगा अगली बार में अगली बार में रखूंगा कि चर्चा में जो व्यक्ति आएगा हवाई जहाज से छलांग लगाएगा नीचे फिर तुम्हारी हर शर्त मार लूंगा मैं क्योंकि आप लोग ऐसी ऐसी शर्त दे रहे हैं ना जिसको पहले से ही डिक्लेयर है कि वो सामने वाला ना माने हम जानबूझ के ऐसी शर्त देंगे जिससे वो चर्चा हो ही ना है ना तो हमने कई बार लिखित में उत्तर भी दिया और अपने वीडियोस में भी बोला कि हम बारबार पत्राचार आपके साथ नहीं करेंगे हमको अगर हमारा चैनल 200 हज लोग सब्सक्राइब किए हुए 18000 लोगों ने सब्सक्राइब किया है और लगभग हर वीडियोस को 2000 लोग भेजते हैं अगर 2000 लोग रोज

00:10:19:01 हमें पत्राचार करें 2000 नहीं उसम से 100 तो हम 100 के 100 का जवाब नहीं देंगे भाई लिखित में ठीक है अगर हमें कोई ऐसा उसम से पत्र मिल जाएगा कि हां नहीं इससे बात करना अत्यंत आवश्यक है इससे बात करने से कोई परिवर्तन आ सकता है तो हम अवश्य उस पर प्रतिक्रिया देंगे पर वह हमारे स्वविवेक और हमारे ऊपर निर्भर है कि कौन हमें कैसा समझ में आ रहा है जैसे आपके व स्वामी जी अच्छा अब ये हमारे इसको बोलते हैं कि यही शिष्टाचार सिखाया है क्या तुमने ये जो हमने जो जो सामान्य ज्ञान के अभाव में इन्होंने हम पर लगाया कि आपको इतना सामान्य ज्ञान होना चाहिए कि शास्त्रार्थ के विषय में ट वीडियो इत्यादि की कही हुई बातें प्रमाण नहीं होती तो आपने तो कोई बात हुई नहीं है शास्त्रार्थ के विषय में उन बात उसको भी शास्त्रार्थ का नाम दे दिया तो आपका शिष्टाचार क्या है आपका सामान्य ज्ञान क्या है फिर आपकी बातों से आपकी बातें कट रही है कितने बड़े दोगले

00:11:27:03 हो जैसे ल र लोग नहीं होते कि कुछ भी कह दो उनके समझ में नहीं आएगा वो तो अपनी बातें करते रहेंगे यहां पर कुछ वैसा दिखाई देने लगता है अरे भाई कितने बड़े दोगले हैं आप खुद ही सिद्धांत बता रहे हो कि शास्त्रार्थ के विषय में यह जो वीडियो यट वीडियो इत्यादि नहीं होता लिखित बातें होती है मैं उस पर नहीं जाऊंगा कि प्रमाणिक है कि नहीं मगर फिर भी अपने अपनी बात आप ही काट रहे हो फिर आप रुद्रपुर वाली बात जो एक व्यक्ति प्रश्न पूछता है सभा में से उठकर के और गुरुदेव अपनी भाषा शैली में उसको उत्तर दे देते हैं व्यक्ति को नहीं समझ में आया वो असंतुष्ट है वो बड़बड़ा लगा उसको आगे सभा में दूसरों को अवसर दिया जाना है उसको आप शास्त्रार्थ का नाम दे रहे हो वो वातावरण को बिगाड़ने के निमित्त वहां पर गया है हमने तो तुम्हारे लोगों से बैठकर चर्चा की है तब भी हमने उसको कभी शास्त्रार्थ का नाम नहीं दिया बैठकर घंटों घंटों तक चर्चा की तब भी हमने उसे शास्त्रार्थ का नाम नहीं दिया यह अंतर है धर्म और अधर्म का फिर आप बता रहे हो कि वोह परंपरा की ताल ठोकने

00:12:42:03 वाले परंपरा पर चर्चा नहीं कर सकते कर सकते हैं परंपरा पर आपने जो विषय दिया है किसकी परंपरा आश आप अपनी परंपरा बताओ तो सही आप अपनी परंपरा बता कहां रहे हो परंपरा की ताल ठोकने वाले या परंपरा में बात करने से डर जा कहां डर रहे हैं भाई हमने तो एक बार भी नहीं कहा कि हमें परंपरा में बात नहीं करनी हमने तो आपसे हमने कभी आपकी परंपरा पर प्रश्न ही नहीं उठाया कि आपकी परंपरा गलत है हमने आपकी परंपरा पूछी है क्या है हम तो आपके वहां पर कह कर आए कि भाई आपको जब पता लग जाए आपकी परंपरा तो बता देना इंदौर में मह में हम जहां गए थे वहां पर जो सज्जन थे सामने उनसे हम कह कर आए थे कि आपको आपकी परंपरा पता लग जाए तो बता देना आज तक किसी ने परंपरा प्रस्तुत की है मैं कह रहा हूं नहीं तुम भगवान तक की परंपरा बताओ अपने से पीछे की 40 20 पीढ़ियां तो बता दो अरे 10 15 पीढ़ियां तो बता दो तुम भेज दो लेटर में परंपरा हम उसी तुरंत उस पर बात कर लेंगे अपनी परंपरा भेजो तो लिख के गिरजानंद के गुरु पूर्णानंद पूर्णानंद के बाद फुल स्टॉप ये सब होने लगता है देखना आधुनिक गार्गी जी का वीडियो

00:13:57:06 देखना ये सब होने लगेगा पूर्णानंद जी के गुरु का नाम नहीं पता है बस तो परंपरा बताइए तो कहां है परंपरा परंपरा से भाग गया अपने मन से ही मिया मिट्ठू बन जाओ हमसे कह रहे हैं कि आपको अपनी परंपरा पर विश्वास नहीं है भाई तुमको नहीं है क्या परंपरा पर विश्वास क्योंकि जो परंपरा हम तो अपनी परंपरा दिखाते हैं ग्रंथों में छापते हैं आपकी परंपरा कौन सी कहां पर छपी हुई है किस कौन सी बुकलेट कौन सी ऐसी बुक है जिसमें आपने अपनी परंपरा का विवरण दिया है यह हमारी परंपरा है ूमा फिरा के वही

00:14:42:19 बात अब आप कह रहे हो कि आप जो है हिंदू शब्द पर बोलते हो हिंदू शब्द के लिए आप वीडियो बना सकते हो मगर उस पर बात नहीं कर सकते भाई बात कर सकते हैं बिल्कुल कर सकते हैं मगर हिंदू शब्द पर बात कर देने से कोई भी बदलाव आने वाला नहीं है मैं हर समाज की मान्यता को मानने के लिए विवस नहीं हो जाऊंगा मुझे चाहिए सर्वशक्तिमान ईश्वर और आप भी यहां मानने को तैयार नहीं हो जाएंगे हिंदू शब्द से कुछ नहीं निकलना है मगर मैंने भी उस चर्चा से मना नहीं किया जैसे आप कह रहे हैं कि आपने उस चर्चा से मना नहीं किया जैसे आपने ईश्वर विषय को पीछे रखा है ऐसे ही हमने हिंदू शब्द की प्रमाणिकता के विषय को पीछे रखा है बस प्राथमिकता से उस पर चर्चा करिए जिसको आपने विकल्प के रूप में दिया था ईश्वर विषय उस पर कर सबसे पहले जब हमने उसको चुन लिया तो अपना उसी में शब्दों का खेल खेल रहे व शब्दों का खेल भी टूट गया अब इस पर चर्चा करने आप आ जाना हमारी लाइव स्ट्रीम चलती है इस पर ही चर्चा हो जाएगी पहले कि भैया किस विषय पर चर्चा होगी इस पर आप आ जाना लाइव स्ट्रीम रो आए दिन चला करती है लिंक दे देंगे आ जाना पहले इस पर चर्चा होगी क्यों तुमने दोगलापन किया क्यों आप अपनी बात से मुक रहे हो शाब्दिक भेद से विषयात

00:15:57:19 हो जाता है तो फिर आपने विष यांतर क्यों किया अपने ही दिए हुए को दूसरा नाम से क्यों लिखा दूसरे शब्दों में क्यों लिखा यह सब बातें हैं है ना और तुम यह सब बातें जो करते हो कि हिंदू शब्द आपकी चीजें देखिए हिंदू शब्द जो है मुस्लिमों ने दिया आर्कलॉजिकल एविडेंसेस मुस्लिमों के आने से पहले हिंदू शब्द का उपयोग हो रहा था तो पता चल गया आपके अंडर कवर्ड गुंडे को मालूम होगा फिर व्याकरण की बातें करने लगो पूछना उससे वो जो संतों को गालियां दिया करता

00:16:38:03 है तो आपने अच्छा उसमें इन्होंने एक बात और कही है कि हम तो आपके विषय पर भी बात करने को तैयार है पर आप तैयार नहीं है आपने कब कहा हमारे विषय पर बात करने के लिए आप किस रूप में तैयार है यह सबको समझ में आ रहा है उस विषय पर आप अंत में बात करेंगे और हो सक है कि हम आपसे हिंदू शब्द की प्रमाणिकता पर शुरू से ही बात कर लेते मगर आपने जब उसको स्वयं दिया था विकल्प के रूप में ईश्वर विषय तो फिर आपने उसको क्यों छोड़ दिया शाब्दिक भेद के कारण हम तो आपने किस प्रकार से हमारे विषय को लिया है और अब कैसे बातों इनकी बातों की जलेबी दिखा दीजिए जरा कि हम तो आपके विषय पर भी चर्चा करने को तैयार है पर आप तैयार नहीं है आपने कौन सी जगह कहा कि नहीं ठीक है ईश्वर विषय पर हम चर्चा करेंगे कहां कहा आपने आपने कहा सबसे लास्ट में करेंगे वो लास्ट तक पहुंचेगी नहीं चर्चा कोई चर्चा पहुंची है क्या आज तक लास्ट तक कि हां ठीक है अब मानते हैं ये विषय खत्म हो गया होता है क्या ऐसे वो चर्चा हम लास्ट में करेंगे जैसे आपने लास्ट के लिए रखा है ना ईश्वर विषय को ऐसे ही हमने भी रखा है ू

00:17:53:06 हिंदू शब्द को लास्ट के लिए आप अपने ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करिए और नहीं है तोय ढोल पीटना बंद करिए कि हमारा ईश्वर सर्व शक्तिमान है सर्व सामर्थ मान है बंद करो ढोल पीटना नाटक लोगों को बेवकूफ बना के रखा है नहीं सर्वशक्तिमान है सर्वशक्तिमान है मगर सर्वशक्तिमान की परिभाषा कौन सी है जो हमने बनाई है और आपने हमारी रिकॉर्डिंग की बात चार बार हो गया रिकॉर्डिंग तुम क्यों करोगे केवल तुम्हारा कैमरा ऑन क्यों होगा केवल और यह सब बातें मानते हुए हम क्या गुलाम है क्या कि मरे जा रहे हैं आपके साथ चर्चा हो जाए चर्चा हो जाए चाहे किसी भी कीमत पर हो जाए तो चाहे किसी भी कीमत पर हो जाए अगर आप ऐसी कीमत देने के लिए बोल रहे हैं तो हमने भी अपनी कीमत दे दी हवाई जहाज से कूद के आओगे वेन्यू में सारे आपके जो अभी तक के जो जितनी भी शर्त थी सब मान लेंगे चलते हुए हवाई जहाज से लैंडिंग करेगा जब व्यक्ति वहां पर शास्त्र चर्चा स्थल में तब हम चर्चा करेंगे उससे और बाकी पहले वाली वो ऐड है जो पहले बोला था चलिए खैर अब आते हैं मुख्य विषय

00:19:04:12 पर यह लोग श्राद्ध के लिए बोला करते हैं रामपाल एंड कंपनी वाले तो आज हम लोग श्राद के बारे में जानेंगे क्या लिखा है हमारे शास्त्रों अथर्व वेद में अ दो पूरे पूरे सूक्त हैं पित्र यज्ञ पित्र के लिए यज्ञ करना पित्र के लिए अमुक अमुक चीजें पित्र के लिए स्तुति करना तो पूरे सूक्त

00:19:54:07 है अथर वेद 18वां 18 18वां कांड और तीसरा सूक्त ठीक है इसका नाम ही है यहां से पितृ मेद सू दिख रहा है

00:20:30:21 तो आज के बाद ये कहना बंद कर देना कि श्राद्ध जो है ना वो नहीं करना चाहिए पित्रों का वो भी मैं अभी बताऊंगा जो पित्र पहली बात तोय समझ लीजिए कि पित को य ब्रह्म के रूप में मोक्ष प्राप्ति के रूप में मोक्ष विषयक तत्व के रूप में नहीं पूजा जा रहा है यहां पर पित्रों की शांति के लिए पित्रों की मुक्ति के लिए पित्रों की चीजों के लिए ब्रह्म की ही पूजा की जा रही क्योंकि जितने भी यज्ञ कर्म है उनमें प्रतिष्ठित कौन है आपके अनुसार आपकी जो जीजी की है गर्मा गीता की यज्ञ में प्रतिष्ठित कौन है

00:21:20:00 सर्वगुण होता है वह परमेश्वर की ही पूजा में होता है तो भगवत गीता में जो एक कहा गया कि पित्रों को पूजने वाले पित में जाते हैं वो उसके लिए कहा गया कि पित को ही जो स्वतंत्र सत्ता मान ले नहीं पित जो है मुझे सुखी कर देंगे पित जो है मुझे मुक्त कर देंगे पित जो है मुझे स्वर्ग दे देंगे जो स्वतंत्र सत्ता मान ले पित्रों की भगवान से इतर उसके लिए कहा गया है कि वोह पित्र को लोक में जाएगा मगर पित्रों के लिए भी पूजन कर रहा है उसका भी जो यज्ञ का जो वो है अधिष्ठान स्वरूप व परमात्मा ही है तो उसके लिए मना नहीं किया है यदि आप उसके लिए मना करने की बात करोगे तो आपको अपनी गीता का जो अर्थ है उसको छोड़ना पड़ेगा क्योंकि आप ही कहते हो गीता का वो अर्थ मान्य नहीं है जो वेद विरुद्ध हो जैसे गरिमा गीता की पृष्ठ संख्या दिखाइए इनको व छवा

00:22:19:14 अध्याय गरिमा गीता की छठवां अध्याय न से 15 में इन्होंने लिखा है कि जो अर्थ वेद के विरुद्ध हो उसको मान नहीं सकते और तीसरे अध्याय में भी लिखा है तो ये पितृ मेद में बहुत सारे 18वां कांड तीसरा सुक्त और चौथा सुक्त ये दोनों सुक्त पित पूजा पर ही है पित के निमित्त जो पूजा होती है उस पर ही है पित्रों के निमित्त तो मैं उसके बारे में आपको बता रहा

00:22:55:15 हूं आठवा पढ़ते हैं क्या लिखा है इसमें तीसरा अध्याय में पेज नंबर मुझे याद नहीं है तो देखना पड़ेगा पीछे से आप जाइए तब तक मैं इनको सुनाता हूं देखिए पित्रों के लिए बात हो रही है हे मृता तू इस स्थान से ऊपर स्थित होकर उठ उत्थान के अनंतर चल फिर शीघ्रता से चल फिर अंतरिक्ष में घर बना और उस लोक में पित्र भी पित्रों बर्षद अग्नि वाता आदि पित्रों से एकमत होकर सोमन सोम पान करके आनंद को प्राप्त हो पुत्र आदि के किए हुए स्वाद स्कार संपन्न श्राद्ध से आनंद को प्राप्त हो ठीक है यह है पितृ पूजा के लिए क्या है ये अथर्ववेद अवा कांड तीसरा सूक्त और

00:24:09:10 आठवा मंत्र अब इसके बाद हम देखेंगे दसवा दसव में क्या है सोम के पात्र पित देवता पितर मुझ यजमान को तेज से व्यक्त संयुक्त करें तथा विश्वे देवा भी मुझको मधुरता संपन्न दीप्ति प्रद त से संयुक्त करें सूक्ष्म दृष्टि से देखने के लिए और मुझको अच्छी प्रकार दीर्घ काल तक देखते रहने के लिए रोग आदि के पार उतारते हुए और वृद्धावस्था तक के लिए भोजन को जीण कराते हुए मुझको वर्ध संतु यानी बढ़ावे यह पितृ पूजा की बात हो रही है और मैं आप सब लोगों को जो भी यहां पर देख रहे हैं उन सबको एक बात याद दिला दूं कि हम लोग जो जो हमारा जो सनातन धर्म है उसमें पित्रों के निमित्त बहुत अधिक महत्व दिया गया है तो आप जो पित्रों के लिए तर्पण किया जाता है जो घर में जो गाय की रोटी निकाली जाती है स्वान के लिए रोटी निकाली जाती है यह सब चीजें करके देखिएगा आपको तुरंत

00:25:24:22 आपको जो है आपकी चीजें जो है सुनियोजित होती हुई दिखाई देंगी और ये प्रैक्टिकली मैंने किया है मैंने देखा है इस चीज को जो जल देते हैं ना पित्रों को वो करना चाहिए उससे मतलब काफी बदलाव आते हैं परिवर्तन होते हैं अच्छा 18वां कांड तीसरा सूक्त अब देखिए यहां पर यह कह रहे हैं भूत और पित पूजा करोगे तो भूत बनोगे भाई हम पित का ब्रह्म के रूप में नहीं कर रहे उनके लिए भगवान की पूजा हो रही है पित्रों के लिए पहली बात दूसरी बात अगर तुम य यहां कही हुई बातों को नहीं मानते तो क्या वेद विरोधी हो तुम्हारी शास्त्र समत भक्ति भाड़ के चूले में चली गई कहां चली गई जो तुम चलाते हो शास्त्र सारे शास्त्र खोल के दिखा दिए तत ने कहां चली गई

00:26:22:07 हेलो कहां चली गई भाई या केवल लट्टू तोते की तरह ही हो बस यही सीखा है चाहे कुछ भी हो रहा हो वेद खुल रहे हो कुछ भी हो रहा हो कबीर सागर खुल रहा हो कबीर भी स्वयं आ कर के कह रहा हो कि नहीं रामपाल जो है ढोंगी है तब भी नहीं यह गलत है दाढ़ी वाला सफेद दाढ़ी वाला कहीं भगवान हो सकता है हा आना अभी पूछेंगे तो इस तरीके से इसमें भर भर के प्रमाण है अथर्ववेद के 18 कांड के तीसरे सूक्त में और उसके बाद चौथे सूक्त में और कौन सा है दवा हो गया अब देखते चवा क्या कह रहा है चवा कह रहा है हे पित देवताओं पितर तुम हमारे लिए हमारे किए हुए पित्र यज्ञ रूप कर्म से संतुष्ट हो परा मुख होकर हो अपने स्थान को जाओ और जब हम फिर तुम्हारा आवान करें तो भी आ भी जाना ठीक है तुमको अब भाई कुल मिलाकर आपने यही देख लिया ना इसका नाम ही है पितृ मेद सूक्त

00:27:37:28 इसको कैसे बदल देगा कोई सतलोक भेज दी हमारी शिकायत अरे भाई सतलोक मत भेजिए शिकायत वहां काल है सतलोक में अभी वो भी बताएंगे सतलोक में काल है कि नहीं है सतलोक में कबीर नहीं है सतलोक में काल है अभी बताएंगे देखना हां तो यह कुल मिला के यहां पर भी 14 में भी पित्र पूजा ही हो रही है और आगे देखें क्या हो रहा

00:28:14:19 है नहीं नहीं 18 तीन और 19 19 वा देखते हैं वैसे पूरा भरा हुआ है इसी से पित पित्रों के निमित्त जो अनुष्ठान होता है उसी से भरा हुआ है ये पूरा दोनों सूक्त मगर अभी हम 19 देख रहे हैं हे पित्रों पितर शब्द आ रहा है बार-बार बार-बार पितर शब्द आ रहा है ये ध्यान रखना नहीं नहीं यह वाली नहीं वहां जिम के अंदर

00:29:21:10 तो कुछ गड़बड़ी हो गई थी तो अभी जो है 19 वा पढ़ रहे थे हम हे पित्रों जो तुम्हारा हर्ष जनक सौम्य कार्य उस धन के साथ तुम हमसे संयुक्त हो क्योंकि तुम्हारा तुम स्वाधीन यश वाले भूत हो अतः हो अतः तुमको ईष्ट फल प्रदान करना उचित ही है ऐसे गतिशील और शोभन भूत का मतलब केवल एक वही भूत वाला भूत नहीं होता जो पुरानी हवेली में आता है जो पंचभूत भी होते ठीक है प्रकृति के पंचभूत भी होते

00:30:11:22 हैं अभी वाईफाई नहीं है थोड़ी दिक्कत आ रही होगी वीडियो क्वालिटी खराब है पाच मिनट में कुछ ठीक हो जाएगी तब तक आप लोग काम चला लीजिए तो भूत का अर्थ केवल वही नहीं होता सब नहीं होता भूत का अर्थ केवल भूत उनको भी कहा जाता है जो वो वाले भूत नहीं होते हैं कौन से वाले जो आप जिनके जिनके नाम पर आप द्वेष फैलाते हो ठीक

00:30:44:18 है तो ऐसे गतिशील क्रांत दर्शी यहां पर भी कव शब्द आया है कव क्रांत दर्शी और सोवन धन से संपन्न तुम हमारे यज्ञ में आहत होकर हमारी प्रार्थनाएं आकर सुनो यहां क्या हो रहा है प्रार्थना सुनो यह जो एक बात कहते ना गरुण पुराण गरुण पुराण को मरने के बाद क्यों सुनाया जा रहा है भाई यह देख लो आकर सुनो और गरुण पुराण को मरणोपरांत इसलिए भी पढ़ा जाता है कि व्यक्ति केवल उसी को नहीं सुनाया जा रहा क्योंकि उसने अपने जीते जी जब उसके य किसी और का स्वर्गवास हुआ था या निधन हुआ था तब उसने सुना था यह भी समझो गरुण पुराण को उस समय पढ़ा इसलिए जाता है कि व्यक्ति जीवन की सत्यता को समझे सबका यही गत्य है राम नाम सत्य है उस समय वो हावी होता है और उसकी जो आम जीवन जो होता है उसमें जब मृत्यु वाली बातें होती है कि मृत्यु के बाद क्या होगा कैसे मुक्ति मिलेगी मोक्ष कैसे मिलेगा तो वो व्यक्ति उसको सुनना नहीं चाहता है मगर जब उसके यहां पर किसी का निधन हुआ होता है तो उसके ज्यादा वो अपीलिंग होता है कि उस उसके आसपास उस उस प्रकार का वातावरण होता है कि वो उससे जुड़ सके उस पर ध्यान दे सके इसलिए भी गरुण

00:31:59:22 पुराण का जो श्रवण होता है उस समय अच्छा होता है मगर पहली बात ये कि यहां पर देखो आकर सुनने की बात हो रही है मरण उपरांत पित्रों को ठीक दूसरी बात ये कि हां

00:34:21:18 क्षमा करिए भाई बाधा के लिए तो गरुण पुराण के लिए य लोग क्लेम करते हैं कि गरु पुराण जो है मरणो प्रांत क्यों सुनाया जाता है फिर उसको क्या फायदा है पहली बात तो यहां पर अथर्ववेद के अवे कांड के तीसरे सूक्त के 19 में मंत्र में आकर सुनो आ शोत बात हो रही है यानी पूजन होता है अनेक जगह स्तुति हो रही है मरण उपरांत पित्रों के लिए दूसरी बात कि ऐसा नहीं है कि जो प जो पित के रूप में हो गया है वो उसने कभी सुना नहीं था उसने उसके जब पूर्वज गए थे तब उसने भी वोह गरुण पुराण जब वो किसी के मरणोपरांत पढ़ा जाता है तो उसने भी तब सुना था ऐसा नहीं है कि किसी के मरणोपरांत ही सुना जाता है मगर मरणोपरांत का कारण यह होता है सुनने का कि उस समय व्यक्ति गरुण पुराण की जो बातें हैं कि आपका जो लाइफ आफ्टर डेथ वो क्या होगी तो उससे वह कनेक्टिविटी प्राप्त कर पाता है इसलिए पुराण को वहां पर आवश्यक रूप से कहा जाता है बाकी ऐसा नहीं है कि गरुण पुराण को पढ़ना निषेध है अन्य दिनों

00:35:36:27 में और इसके बाद आगे चलते हैं कि 18 और तीन और 42 ये लोग बहुत श्राद्ध श्राद्ध किया करते हैं इसीलिए मैंने कहा श्राद और इसका भी भांडा फोड़ ही दो वो व्यक्ति तो बेचारा यह सब कर कुरा के जेल पहुंच गया जेल में अपना जो है पापों का प्रश्चित भी कर रहा है ऐसा सुनने में आया है मगर यह लोग अब उस चीज को आगे बढ़ा रहे हैं तो क्या है 42 में क्या लिखा है हे अरुण वर्ण माली माता उषा की गोद में बैठने वाले पितर तुम हवी देने वाले मरण धर्मी यजमान के लिए धन दो पितरों से धन मांगा जा रहा है ठीक है तुम हमें नामक नरक से बचाने वाले पुत्रों के लिए उस प्रसिद्ध धन दो ठीक है बल बल प्रदान करो तो पित्रों से प्रार्थना की जा रही है मगर स्वतंत्र रूप से पित्रों से प्रार्थना नहीं की जा रही

00:36:52:01 है जैसे कि आप ही की बात अगर मान ली जाए कि भाई क्या कहते हैं रामपाल भगवान है ठीक है आप ही की बात मान ली आपने कहा रामपाल भगवान है तो क्या अपने माता-पिता की ओर आदर सम्मान की भावना बंद कर दोगे आप कहते हो कि परमात्मा की भक्ति करनी कबीर की भक्ति करनी है मगर फिर भी काल की पूजा करने का ढोंग तो करते हो ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा करने का ढोंग तो करते हो अगर उससे ढोंग हटा दी जाए तो पूजा करते हो क्यों कर रहे हो भाई उनकी पूजा गुण तीनों की भक्ति करके तो व्यक्ति गुण बनेगा अपनी बातों में फसते हो ठीक है यह हो गया तो 42वां हो गया और प्रमाण ले लो भर भर के प्रमाण है पूरे पूरे सूक्त है दो कम से कम 100 से ज्यादा मंत्र है पित पूजा के निमित्त पित यज्ञ के निमित्त 100 से ज्यादा प्रमाण है क्या है एक और अच्छा सा ले लेते हैं कोई हां इसको ते 183

00:38:01:14 63 अच्छा पहले 18 च लेते हैं प देखिए पित्रों की पूजा करने से भी जीवन मृत्यु से परे होने की बात लिखी हुई है इसलिए 39 ले रहा हूं वैसे तो पूरा ही पितृ पूजा के निमित्त में है ठीक

00:38:34:20 है यह देखिए यह मधुर रस वाला आचमन के योग्य जल पुत्र व पत्रों को तृप्त करता रहता है पिंडो जीवी पित्रों के लिए अमरता का साधन अपने को प्रसन्न करने वाली स्वधा को देता रहता है अमरता का साधन इसीलिए कहता हूं मत पढ़ो चक्कर में क्यों क्यों खामा खा अपनी चीजें बिगाड़ से

00:39:07:18 हो अब तो दूसरे लोग भी यह वाला जो अपना वो है ना स्लोगन यूज करने लगे हैं मत पढ़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में अपने साथी जो साथ मतलब अपने ही समर्थन वाले वो इसको यूज करने लगे अपने वीडियोस में अच्छा है मनुवाद हों का नारा हो जाएगा मत पढो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में और देखिए 40 में क्या कह रहे हैं 40 में कह रहे हैं कि अव सेचन के साधन रूप तुम अपने द्वारा अवश दक्षिणा अग्नि को यज्ञ में दिए हुए पिंडों को पहुंचाने के लिए पिता पितामह आदि पित्रों के समीप पहुंचाओ मेरे पितर इस पिंड पित यज्ञ नामक यज्ञ का सेवन करें मरणोपरांत हो रहा है भैया ये सब तो अब मैं कुछ हास्यास्पद बातें बता दूं उसमें आपको थोड़ा रोचकता आ जाएगी तो भैया पितरों को कबीर भी कहा गया है वेदों में प्रमाण है ओय व

00:40:22:21 कबीर तो पितर है हा तुम्हारे हिसाब से तुम्हारी भाषा में 183 63 अब दिखाता हूं आपको कवि का अर्थ क्या है कबीर तो कबीर तो पितर है पितरों की पूजा करने वाले तो पितर लोग जाएंगे मत करो कबीर की पूजा दिखाते हैं दिखाते हैं मान लिया ओए मान लिया ओ कबी को कबीर कबीर मान लिया ओए ये देखिए वो जो मैंने आपको एक भेजा था ना ज स्क्रीनशॉट दिखा दीजिए दयानंद जी वाला वो दिखा दीजिए तो

00:41:10:00 भाई इसमें जो है दो तरीके के अर्थ है 18 3 63 में दो तरीके के अर्थ है एक कि जो कवि यानी क्रांत दर्शी यानी परमात्मा मान लो जो परमात्मा प्रकट अथवा श्रेष्ठ बुद्धि वाला है अपनी महिमा से स्तुति करने वाले पित्रों को अंतरिक्ष लोक में धारण करता है यानी कि यह जो पित पूजन हो रहा है उससे व्यक्ति कहां पहुंचेगा कबीर के पास अब तुम इस अर्थ को अगर नहीं मानोगे परमात्मा के पास पहुंचेगा यानी पितृ पूजा से मुक्ति वो वाली जो तुम बता रहे हो ठीक है कबीर के पास पहुंचेगा परमात्मा के पास अब तुम अगर इस अर्थ को नहीं मानोगे क्योंकि हमें पित पूजा को नकारना है तो नहीं मानोगे तो तुम कौन सी चीज मानोगे दयानंद जी का दयानंद जी का भी दिखा देता हूं मैं अवे दयानंद जी का है कि नहीं मेरे पास और गया देखता हूं

00:42:22:01 [संगीत] दयानंद जी का तो नहीं है पर आर्य समाज का जरूर है इसमें देखिए क्या कहा जा रहा है इसमें जो शब्द आया ना

00:43:37:02 कवि उसको कबीर कहा जा रहा है हम हां भाई जिस परमात्मा ने पितरों में कवि यह देख लो भैया पितरों में कौन वो पितर जो बुद्धिमान

00:44:22:07 है पित्रों में कवि अब इन्होंने कवि का अर्थ बुद्धिमान लिया है आप कबीर ले लेना ठीक है जिस परमात्मा ने पित्रों में कवि इन्होंने बुद्धिमान किया आप जो है ले लेना कबीर तो क्या हो जाएगा फिर यह देखो दिख रहा है जिस परमात्मा ने पित्रों में कवि यानी कबीर ठीक है पितरों में कौन जो पित्रों में जो कबीर है

00:44:57:15 उसके लिए बात आगे हो रही है कि बुद्धिमान होकर जो कबीर है आकाश के बीच प्रबंध के साथ अपनी महिमा से उसने सब लोगों को धारण किया तो कबीर कौन हो गए पितरों में जो बुद्धिमान पितर है वह कबीर है और परमात्मा अलग है तो फिर आगे क्या हो रहा है परमात्मा को सबके मित्र होकर तुम आत्म समर्पण से अर्चित पूजो ठीक है तो या तो आप इसको मान लो इसके अनुसार जो कबीर है वो पितरों में बुद्धिमान जो पितर होंगे पितरों में जो बुद्धिमान पितर वो हो जाएंगे कबीर और या फिर अगर दूसरा हमारा वाला मानोगे तो क्या होगा कि पित पूजा पित यज्ञ करने से वह मुक्ति प्राप्त होती जिसको तुम मुक्ति कहते हो कवि को प्राप्त होता हमारे अनुसार कभ परमात्मा सर्वज्ञ को कहा गया है तुमने अपना कभ नाम दे दिया तो पि पूजा को तुम गलत नहीं बता पाओगे आना इस पहले की अपनी बात ठीक है मैंने सुना है कि हमारे लिए भाई तैयारियां चल रही है कैसे जवाब दिया जाएगा शिवांश नारायण द्विवेदी

00:46:12:20 को अच्छी बात है करो तैयारी शिवांश नारायण द्विवेदी को कैसे उत्तर दिया जाए तो यह है और आपको एक रोचक बात बताते हैं ठीक है कि अथर वेद 18वां कांड 1832 देखिए बहुत बढ़िया

00:46:53:19 बात ये लोग क्या कहते हैं देखिए एक तो इनके दयानंद जी के भाष से सिद्ध हो रहा है कि जो कबीर है वो कौन है पितरों में पितर है बुद्धिमान पित्र है पर पितर है पित्र ठीक है और हमारे वाले से पित्रों की पूजा से वो मोक्ष की प्राप्ति हो रही है जो जिसको आप मोक्ष कहते हो तो आप पित्रों की पूजा से बताओ कैसे मुक रहे हो अब आना फिर क्या है आगे अभी एक और चीज बताता हूं बढ़िया ये लोग कहते ना सुकृत ऋषि सुकृत ऋषि

00:47:35:10 बताता 18वां अध्याय और तीसरा सूक 18 तीन और 20वां मंत्र यह देखिए इसमें जो है आपको सुकृत शब्द दिखाई दे रहा है सुकृत और नीचे उसके शब्दार्थ में सुकृत है सुकृत तो यहां पर सुकृत किसे कहा गया है कि हे पित्रों अत्री के गोत्र के हो जो अत्री के गोत्र के हो अंगिरा के गोत्र के हो नव मास तक सत्र याग करके स्वर्ग को प्राप्त हुए नव हो द पूर्ण मास आदि योगों से पूजन कर चुके हो तो तुम सब दक्षिणा प्रदान करने वाले पुण्यात्मा हो तो यहां पर पुण्यात्मा यहां तो पुण्यात्मा मगर आपका जो सुकृत है है कबीर ही है सुकृत के रूप में आता है तो यहां पर जो पितर है ना वही कबीर बन रहे हैं ठीक है

00:48:50:15 कबीर बन सुकृत बनू आपके अनुसार क्या है तो तुम दक्षिणा प्रदान करने वाले सुकृत हो हो जाओ बन जाओ हो गया कान को किधर से भी पकड़ लो एक तो पित पूजा को मना नहीं कर पा रहे य सुकृत मिल गया आपका और कहां पर है और सुकृत दिखा दूं आपको सुकृत था ना सुकृत के रूप में आया था ना कबीर तो लो सुकृत वेदों में मगर किसी और रूप

00:49:25:21 में 18 चती इसमें क्या है 18 चती में क्या है 18 चार और यह आ गया तीसरा यह भी पितृ मेद सूक्त है दोनों पितृ मेद सूक्त

00:50:18:10 है फिर आ जाएगा बताओ पितरों की पूजा करने से तो पितर जो कबीर बनना है और क्या है तुम उसी चीज से रोक रहे हो जिससे कोई और कबीर ना बन जाए है ना क्यों दयाल दास जी आ जाओ दयाल दी व्यर्थ बातें करना अच्छा नहीं है आ जाओ लगता है माता जी ने निष्ठा पूर्वक आपको दुग्ध पान नहीं कराया है इसीलिए केवल कमेंट में ही सामर्थ्य का प्रदर्शन कर पा रहे हैं तो यहां देखिए यहां भी शब्द देख लीजिए सुकृत शब्द आपको दिख जाएगा ठीक है सुकृत रूप में इनके कबीर आते हैं ना अब यहां सुकृत कौन है यहां सुकृत है

00:51:22:02 भाई सत्य भूत यज्ञ के मार्गों या यज्ञ से संबंधित मार्गों को भली प्रकार देख अथवा जान और सुकृत अंगी गोत्र में उत्पन्न हुए महा ऋषि किसम उत्पन्न हुए अंगी गोत्र में उत्पन्न हुए महा ऋषि अंगी गोत्र में कौन उत्पन्न होता है गोत्र किसे मिलता है जिसका वंशा अनुक्रमण किसका पुत्र है उससे गोत्र प्राप्त हुआ ीरा के गोत्र में उत्पन्न हुए मषि जिस मार्ग से स् स्वर्ग लोक को गए तो महा ऋषि य जो सुकृत है यह कहां जाते हैं स्वर्ग लोक को जाते हैं सुकृत सतलोक को नहीं जाते हैं स्वर्ग लोक को जाते हैं तो भैया कबीर जो है व सतलोक को नहीं वो स्वर्गलोक को जाता है वो सतलोक को नहीं जाता है ध्यान रखना नित्य लोक आपका वाला जो नित्य लोक वो अलग है जहां जिस स्वर्ग में अदिति के पुत्र देव देता मधु के समान प्रसन्न करने वाले मधुर अमृत का आस्वादन लेते हैं वहां देवता कौन है वहां आपके कबीर देव देव नहीं है ये तो वहा जाते हैं वहां तो

00:52:37:19 अतिथि के पुत्र है जो वो मधु का मधु समान प्रसन्न करने वाले मधुर अमृत का आस्वादन लेते हैं और उस स्वर्ग लोक में तू प्रतिष्ठित हो तो यहां पर सुकृत कौन है जो स्वर्गलोक में जाता है सतलोक में नहीं ठीक है तो यह तुम्हारा कबीर जो है मिल गया कहां पर एक तो अगर कवि का अर्थ कबीर है तो पित पूजन से कबीर की प्राप्ति हो रही है पित पूजन का खंडन नहीं कर सकते दूसरी बात अगर दयानंद पर भी जाओगे दयानंद जी का व आर समाज का भाष लोगे उसमें कभ का कभी को इसी मंत्र का अर्थ कुछ इस प्रकार से है कि आपका जो व्यक्ति है वो सिद्ध हो जाएगा पितर ठीक है वो पितर सिद्ध हो जाएगा और यह जो सुकृत के रूप में आप जो बताते हो कि हमारे परमात्मा सुकृत रूप में आए थे व य सुकृत कौन है पितर स्वर्ग लोक जाने वाले हैं सतलोक जाने वाले नहीं है अच्छा अब इनकी एक टांग और खींची जाए वो कैसे खींच यह लोग कहते हैं कि अज्ञ का मतलब है

00:53:52:26 जिसका वध ना किया जा सके नहीं यह लोग कह अग्न का मतलब है पहले तो अग्न को अधनपुर गा र इनके बात करने से ढंग से ही पता चल जाता है कि कितनी पढ़े लिखों वाली बात है या फिर गवार बुद्धि वाली बात है मगर मान लिया ओ मान लिया तुम्हारे ही तरीके से चलेंगे जिस तरीके से तुम चलोगे उसी तरीके से बात करेंगे आपसे

00:54:29:26 उसमें क्या है अग्न्या का 18 वा कांड अथर्ववेद और तीसरा सूक्त और चौथा मंत्र है ना चौथा मन 183 च यह देखिए आपको इसमें अग्ने शब्द दिखाई दे रहा होगा अग्नि ठीक है बाद में जब इसकी संधि हुई है तो यह सबसे पहले ये अग्नि लिखा हुआ है दिख रहा है अग्नि अब ये है धन्य मगर यह कौन है मालूम है ये एक स्त्री को गौ के रूप में बताया जा रहा है तो वह स्त्री है जिसका पति मर गया है जिसके पति का देहांत हो गया उसके बारे में बात हो रही है मैं युवावस्था वाली सबके

00:55:45:07 समीप लाई जाती हूं जीवित स्त्री को मृत पुरुष के प्रसव मिलाने से अनुस्क कहलाती है यह सब प्रकरण चल और वहां पर उस स्त्री को जिसका पति जो है जा चुका है देवास उसका देहांत हो चुका है उसको यहां पर अगन गौ के समान ग की उपमा दी गई उस स्त्री को तो इन्होंने तो कहा कि अन्या का अर्थ है जो कुमारी हो अगर यहां तो विवाहिता को अगन कहा गया हो गया हो गया बंडल फिर फैक्ट बाई अश कुछ ना कुछ करेगा

00:56:27:22 तो अच्छा और और भी एक चीज ले लेते हैं कि अच्छा आप तब तक वो दे दीजिए लिंक अगर किसी को आना हो चर्चा करनी हो इस बारे में तो व कर सकता है लिंक दे दीजिए आप तो हमने शास्त्रों से जो पित्र पूजन है उसकी प्रामाणिकता देख ली अब हम एक जगह से और बात करते हैं पितृ पूजन की

00:57:12:02 प्रामाणिकता यह ग गरुण पुराण है यह वाले पुराण आपने देखे नहीं होंगे क्योंकि आपके जो भाई साहब है तत्वदर्शी वो गीता प्रस्त सीमित रहते हैं ज्यादातर मेरी जानकारी मुझे मैंने कभी देखा नहीं जो उन्होंने संक्षिप्त छापा तो उनके पास संक्षिप्त ही है फिर वो तो इसमें हम आ जाते हैं भाई गरुण पुराण में पूरा पूरा एक अध्याय है श्राद्ध वाला अच्छा परमात्मा जो है मुक्ति देता है कैसे देता है पापों से सबसे मुक्त कर देता है वही है ना परमात्मा तो यहां पर देखिए क्या हो रहा है 103

00:57:58:20 श्राद्ध विधि देखिए कहां तक जाओगे भाई आप डाल डाल अ पात पात दिख रहा है श्राद्ध विधि दिख गई श्राद्ध विधि श्राद्ध विधि वर्णन 333 वा पेज यह इसमें क्या लिखा है कि अब सर्व पाप नाश करने वाली श्राद्ध विधि सुनिए क्या नाश करने वाली सब पाप नाश करने वाली श्राद्ध विधि तो यह भी श्राद्ध की प्रामाणिकता हो

00:58:47:06 गई अच्छा एक मैंने वीडियो देखा इन भाई साहब का जिसमें यह सुकृत के बारे में ही बात कर रहे हैं वहां पर पर प्रमाण देने के लिए कि सुकृत की बात किसी ने सुनी नहीं थी हालाकि उसने झूठ लपेट लगा लाग लपेट कर दिया कि उसको मन सुना नहीं अनसुना कर दिया मगर वहीं पर य कहा जा रहा है कि जो सुकृत जिसको वामदेव बता र वामदेव शिव के भक्त है और शिवजी परम ब्रह्म वही उसी जगह मगर य उसको नहीं मान रहे प्रमाण इनकी उंगलिया जहा चल रही है य जो बोल रहे हैं वही पर लिखा हुआ है शिवजी जो है परम ब्रह्म है और जो वामदेव सुकृत है वो शिवजी के वो है भक्त मगर उसको प्रमाण ना मानते हुए अपनी लाग लपेट उसम अपने मन से मनम कीी भक्ति और फिर कहते हैं हमने शास्त्र सम्मत भक्ति की है अब मैं आपको बता दूं इनकी एक और स्टोरी मैं तो आपसे कहता ही हूं ब्रह्मचारी सन्यासी होना चाहिए यहां पर क्या बात हो रही है वो पेज दिखा दीजिए रोच मनु रोच मनु की उत्पत्ति कथा इनको

01:00:20:00 तो यहां पर क्या है यह जो आपके तथाकथित जेल धाम ने जो तत्वदर्शी है उन्होंने यह दिखाया है कि जो पितर होते हैं यह दिखाना चाहते थे कि पितर होते हैं वो आपके आपको मोक्ष मार्ग से भटका हैं हमने बहुत सारे प्रमाण ले लिए वेदों का प्रमाण दिखा दिया अमरता तक अमरता का साधन पितृ पितृ से होकर पितृ पूजा से होकर निकल रहा है मगर यह दिखाने के लिए कि पितृ पूजा पितृ जो होते हैं वो भटकाने वाले होते हैं यह दिखाने के लिए उन्होंने प्रमाण लिया मार्कंडेय मनु की उत्पत्ति की कथा तो य मैं आपको थोड़ा सा पढ़कर सुनाऊंगा आप थोड़ा सा सुनो तब तक आप अगर हो सके तो इनको व शेयर कर

01:01:13:00 दो वो शेयर वीडियो अच्छा नहीं आ रहा है मुझे पता है मेरी आवाज तो सुनिए आप मेरी आवाज सुनिए आप तब तक आप इनको वो पेज शेयर करो रोच मनु की उत्पत्ति कथा उसका कारण यह है कि वो जो हां जी थोड़ा सा

01:02:28:16 संसाधन का अभाव है इसलिए थोड़ा सा क्षमा करिए उसके लिए जो विघ्न आ रहा है है अभी ठीक चल रहा होगा मेरे ख्याल से है ना टी आर पहाड़ी जी ऊपर ले लीजिए और दास जी [संगीत] आए जी जय श्री राम अभी आप से बात करेंगे दो मिनट में जय श्री राम पाड़ी जी जय श्री राम

01:03:05:10 तो हम यह जो रोच मनु की उत्पत्ति कथा है इसको जरा सुनिए इसमें इन्होंने रामपाल जी ने क्या गुल खिलाया उसको देखिए ब्रह्मण पूर्व काल की बात है प्रजापति रुचि ममता और अहंकार से रहित इस पृथ्वी पर विचरण करते थे उन्हें किसी से भय नहीं था वह बहुत कम सोते थे उनका ना तो अग्नि स्थापना की थी और ना अपने लिए घर ही बना रखा था व एक बार भोजन करते तो बिना आश्रम के ही रहते थे उन्हें सब प्रकार की आसक्ति हों से रहित एवं मुनि वृत्ति से रहते देख उनके पितरों ने उनसे कहा बेटा विवाह स्वर्ग और अपवर्ग का हेतु होने के कारण है ना अब ये क्यों कहा क्योंकि अग्नि होत्र जो यज्ञ आदि कर्म होते हैं शास्त्र वेद जो कर्म होते हैं उसमें स पत्नी गृहस्थ का ही अधिकार होता है तो क्या क्या कहा पितर पितरों ने क्या कहा विवाह स्वर्ग और अपवर्ग का हेतु होने के कारण एक पुण्य पुण्य मय कार्य है उसे तुमने क्यों नहीं किया गृहस्थ पुरुष समस्त देवताओं पित्रों ऋषियों और अतिथियों की पूजा करके पुण्यम लोगों को प्राप्त हो जाता है

01:04:21:04 वह स्वाहा के उच्चारण से देवताओं को स्वधा शब्दों शब्द से पि को तथा अन्न दान आदि से भूत आदि प्राणियों एवं अतिथियों को उनका भाग समर्पित करता है बेटा हम ऐसा मानते हैं कि गृहस्थ आश्रम को स्वीकार ना करने पर तुम्हें इस जीवन में क्लेश पर क्लेश उठाना पड़ेगा तथा मृत्यु के बाद और दूसरे जन्म में भी क्लेश ही भोगने पड़ेंगे रुचि ने कहा पित गण परिग्रह मात्र ही अत्यंत दुख एवं पाप का कारण होता है परिग्रह मात्र मतलब यह जो है जो यहां पर जिनकी बात हो रही है रोच मनु आपके तत्वदर्शी ने इनको कहा है कि मोक्ष मार्ग पर चल रहे हैं पॉइंट टू भी नोटे सबसे पहले और यह कौन है वैरागी जो विवाहित जीवन से गृहस्थ के जीवन से दूर होना चाह रहे हैं वैराग्य इनके जीवन में मैं कहता हूं ना कि सबसे बड़ा जो वो होना चाहिए वह वैराग्य होना चाहिए उसके जीवन में तो पितृ गण परिग्रह मात अत्यंत दुख एवं पाप का कारण होता है यह मोक्ष के मार्ग पर है यह आप आपके तथा तत्वदर्शी ने अपनी बात को सिद्ध करने के चक्कर में स्वीकार लिया है तो ये यहां पर क्या कह रहे हैं परिग्रह मात्र यानी विवाह

01:05:36:18 इत्यादि मात्र ही अत्यंत दुख एवं पाप का कारण होता है तथा उससे मनुष्य की अधु होती यही सोचकर मैंने पहले स्त्री संग्रह नहीं किया क्या नहीं किया स्त्री संग्रह मन और इंद्रियों को नियंत्रण में रखकर जो यह आत्म संयम किया जाता है वह भी परिग्रह करने पर मोक्ष का साधक नहीं होता ममता रूप कीचर में सना हुआ होने पर भी यह आत्मा जो परिग्रह शून्य चि रूप जल से प्रतिदिन धोया जाता है व श्रेष्ठ प्रयत्न है तो ये जो है परिग्रह से दूर रहने को ही श्रेष्ठ बता रहे हैं वैराग्य को तो पितर बोल रहे हैं जितेंद्रीय होकर आत्मा का प्रक्षालन करना उचित ही है किंतु तुम जिस पर चल रहे हो वह मोक्ष का मार्ग है किंतु पलक्षा रहित दान और शुभाशुभ के उपभोग से भी पूर्व कत अशुभ कर्म दूर हो जाता है ये यहां पर बता रहे हैं कि अगर तुम अगर तुम प्रवृत्ति मार्ग में भी जाओगे अगर उसमें आप फल की लिया सक्त नहीं होंगे वही वाली बात जो वहा फलाक शक्ति से दूर रहने की बात भगवान श्री कृष्ण ने कही है यहां पर पितर वही बात कह रहे हैं कि अगर तुम प्रवृत्ति मार्ग में जाओगे तो वहां पर फल स्वरूप जो फल है उनकी अगर इच्छा उनमें आसक्ति नहीं रखोगे फल में तो वहां पर भी तुम वही

01:06:51:25 प्राप्त करोगे जो तुम यहां से प्राप्त कर रहे हो इसी प्रकार दया भा से प्रेरित होकर जो कर्म किया जाता है व बंधन कारक नहीं होता बंधन कारक नहीं होता मतलब मोक्ष बंधन कारक जो नहीं है तो क्या है वोह मोक्ष कारक पल कामना से रहित कर्म भी बंधन में नहीं डालता पूर्व जन्म में किया हुआ मानवों का शुभाशुभ कर्म यह वह पृष्ठ है जिसका उपयोग आपके जेल धाम निवासी ने इस बात को सिद्ध करने में किया है कि पितर आपको जो है मोक्ष से दूर घसीटते हैं मगर वो भूल गया है यह करते समय यहीं से उसके हजारों खंडन हो रहे हैं क्यों क्योंकि जिस श्लोक का उपयोग भगवत गीता का वो करता है व्रत व्रत को ठुकराने के लिए वहां पर कहा गया है कि बहुत कम सोना गलत है इसके अनुसार कम सोना गलत है और यहां पर क्या लिखा है कि ये जो मोक्ष के मार्ग पर चल रहे थे बहुत कम सोते थे ये उसने पढ़ा भी है आपके जेल धाम निवासी ने सोचिए यह देखिए बहुत कम सोते थे देख लीजिए लिखा है पहले पैराग्राफ में दिख रहा है यह बहुत कम सोते थे

01:08:07:10 और यह भी माना है तत्वदर्शी ने आपके यह जो है मोक्ष के मार्ग पर चल रहा था ऐसे ही नहीं है और सुनिए इस प्रकार विद्वान पुरुष आत्मा का प्रक्षालन करते हैं उसकी बंधनों से रक्षा करते हैं ऐसा करने से व अविवेक यहां पर जो आपका तत्वदर्शी वो ये दिखाना चाहता है कि पितर जो है वो कोई व्यक्ति मोक्ष के मार्ग पर चल रहा है मगर पितर उसको विवाह की ओर खींच रहे हैं जो मोक्ष का मार्ग नहीं है तो पहली बात तो जितने भी रामपाल को मानने वाले लोग हैं वह शादी करना छोड़ दो फिर क्यों 17 मिनट की शादी करवा रहे हो और अगर शादी करने करवाने वाला मोक्ष से दूर नरक में लाने वाला है तो इसका मतलब 17 मिनट की शादी करवाने वाला जो है वो तो फिर पितर हो गया रामपाल पितर है क्या रामपाल की भक्ति कर रहे हो पितर की भक्ति कर रहे हो पित्रों की भक्ति आपके अनुसार ही आपका खंडन है यार क्या करें इतना ज्यादा तुम लोगों ने हलवा कर रखा है कि कहीं से भी पकड़ो तुम्हारा हो जाता है तास के पत्तों का महल बना रखा है उसको कहीं से भी छू तोख पूरा गिर जाता है

01:09:23:06 हां इनके जो अभी एक न्यूज आई थी 17 17 मिनट में विवाह संपन्न हुआ अब भाई जब वो मोक्ष का मार्ग है ही नहीं तो तुम क्यों विवाह विवाह में उसको व्यक्ति को 17 मिनट की सुविधा दे रहे हो सबको कर दो बैरागी अभी देखो तुम्हारे सारे आश्रम खाली हो जाएंगे अभी तुम एक लाइन लिख दो विवाह करना मना है सारे आश्रम खाली हो जाएंगे या तो ओशो का आश्रम बनाना पड़ेगा बक हां अरे शिवांश भाई यहां पर से व यह सिद्ध करना चाहते हैं जो वेदों में कर्मकांड लिखे हैं वह अविद्या कहा गया है रुचि मुनि ने पर उसके नीचे रु उसके नीचे रुचि मुनि ने क्या कहा कर्मकांड को वो भी तो दिखाइए लास्ट वेद में वेद में कर्म मार्ग को अविद्या कहा गया है फिर क्यों आप लोग मुझे उस मार्ग में लगाते हैं तो यह वो पहली बात तो यह है जैसे जो तर्क भी सुनते जाइए जो व्यक्ति धरती पर गिरा हुआ होता है वह धरती का ही सहारा लेकर के उठता है तो धरती का जो गुरुत्वाकर्षण है उसका कै किस प्रकार का यूज है जो आपके उठ खड़े होने में सहायक

01:10:38:12 होगा इसी प्रकार से यह जो कर्म है अविद्या है ठीक है मगर यह अविद्या का वो रूप है जो आपको अविद्या से मुक्त होने में सहायता कराएगा समझ गए जैसे कि पृथ्वी गोल है और साइंस की साइंस के अनुसार पृथ्वी गोल है अब आपको पृथ्वी के चपटे पन आपको पृथ्वी चपटी दिखाई दे रही है अब इस चपटे पन से आपको मुक्ति पानी है इस चपटे पन का किस प्रकार का उपयोग हो कि आप जो है इस चपटे पन से मुक्त हो सके तो इस चपटे पन का उपयोग ऐसे करो कि आप एक स्पेसशिप बना सको इधर-उधर जाओ तो इस चपटे पन का ही ऐसा उपयोग आपने किया स्पेसशिप बनाने में कि आप इस चपटे पन से मुक्ति पा गए और आपने देखा कि पृथ्वी ग उसी प्रकार से यह जो यह जो कर्म है अविद्या में तो है मगर यह वो वाले अविद्या रूपी कर्म है जो आपको अविद्या से छुड़ाए तो कैसे यह सत्य है कि कर्म को अविद्या ही कहा गया है इसमें तनिक भी मिथ्या नहीं है फिर भी इतना तो निश्चित है कि उस विद्या की प्राप्ति में कर्म ही कारण है यह वह अविद्या है जो आपको अविद्या से छुड़ाएी जैसे नदी पार करते समय चप्पू चलाते हैं ना

01:11:53:13 तो नदी का ही प्र होता है व आपको सहायता देता है इस प्रकार से उसका उपयोग आप करते हो कि आप आगे बढ़ते हो ठीक है और अगर तो पहली बात तो यह है कि कर्म को अविद्या कहा गया है कर्म को और अगर वैदिक मार्ग वैदिक वैदिक कर्म में अविद्या ही है और वह नरक ले जाने वाली है तो फिर क्यों तुम उसको नरक ले जाने वाले शास्त्रों के आदर सम्मान देकर के लोग पाखंड करते हो कि हम बहुत मानते हैं सद ग्रंथ है तो है नहीं यह सत्य की कर्म को अविद्या कहा गया इसमें तनिक भी मिथ्या नहीं है फिर भी इतना तो निश्चित है कि उस अविद्या की प्राप्ति में कर्म ही कारण है इतना इस इस वाली बात से तो इतना इनके इतने हर बात पर इनका जो है आंसर है भेद कर्म का पालन ना करके जो अधम मनुष्य संयम करते हैं वह संयम अंत में मोक्ष की प्राप्ति नहीं कराता अब यहां पर अगर यहां पितरों के साथ नहीं है तो आप पता है अपनी बात का खंडन कर रहे हैं क्यों आप अपनी बात का खंडन क्यों कर रहे हैं इसलिए कर रहे हैं अपनी बात का खंडन

01:13:07:01 कि आप आपने एक जगह पर वहा जो जिसको आपने हट योग नाम दे दिया ना हट योग इंद्रियों को वश में करके ठीक है यहां पर पित जो है वही इंद्रियों को वश में करके चलने चलते हुए प्रवृत्ति मार्ग में रहने को बोल रहे हैं और आप कह रहे हो नहीं वो नहीं करना पित्र जो है वो यहां पर जो है जो ये रुचि मुनि है भाई बंद करो गेट बंद करो जो रुचि मुनि है वो आप जिस हट योग को मना कर रहे हो रुचि मुनि उस हट योग पर जाने की बात कर रहे हैं इंद्रियों को वश में करके बिल्कुल कंट्रोल करके और आपने वहा अयोग की हठयोग नाम दे दिया छव अध्याय के न से 15 वाले लोक हठयोग नाम देक के मना किया है ना हठयोग के लिए और यहां पर रुचि मुनि वही कर रहे फिर अब रुचि मुनि का यहां पर हठयोग आपने स्वीकार कर लिया अभी आपकी भाषा में बात कर रहा हूं आप अपना ही खंडन कर रहे षि मुनि को स्वीकार करके और जबक आपने वहां कहा व एकांत में नहीं जाना चाहिए ऐसा नहीं करना चाहिए वैसा नहीं करना चाहिए यहां पर रुचि मनी वही सब कर रहे हैं आपने उनकी बात य मान ली क्यों क्योंकि यहां पर आपको पित्रों को गलत कहना है वैदिक कर्मों को आपको अविद्या स्वीकार

01:14:22:04 करना है आगे चलते हैं तो वे कर्म का पालन करके जो अधम मनुष्य संयम करते हैं वह संयम अंत में मोक्ष की प्राप्ति नहीं कराता भद कर्म का पालन ना करके जो अधम मनुष्य संयम करते हैं भद कर्म का पालन ना करके त शास्त्र भत कर्म उनका पालन ना करके जो मनुष्य संयम करते हैं अगर शास्त्र त कर्म का त्याग कर दिया और हमने संयम करने का प्रयास किया तो क्या होगा अंत में मोक्ष की प्राप्ति नहीं होगी अतु अो में ले जाने वाला होगा तुम तो समझते हो मैं आत्मा का प्रक्षालन करता हूं किंतु वास्तव में तुम शास्त्र वेद कर्मों के ना करने के कारण पापों से दगद हो रहे हो कर्म अविद्या होने पर भी विधि के पालन द्वारा शोध हुए विष की बाती मनुष्यों का उपकार करने वाला ही होता है इसके विपरीत व विद्या भी विधि की अवेल से निश्चय ही हमारे बंधन का कारण बन जाती यानी कि यहां पर ये बता दिया गया है कि अगर वैदिक कर्मों का शास्त्र वेद कर्मों का आपने त्याग किया है और आप उससे इतर किसी विद्या को सोच रहे हो वो विद्या है तो वह विद्या भी आपके बंधन

01:15:37:08 के हे का हेतु हो जाएगी तुम विधि पूर्वक स्त्री संग्रह करो ऐसा ना हो कि इस लोक का लाभ ना मिलने के कारण तुम्हारा जन्म निष्फल हो जाए फिर वो आगे कह रहे हैं पित्र अब तो मैं बूढ़ा हो गया भला मुझे कौन स्त्री देगा वो समझ गए इस बात को अब एक बात समझ लो पितर यहां पर विवाह के पक्ष में और अगर आप यहां रुचि मुनि को सही बता रहे हैं तो आपके जो तत्वदर्शी है व विवाह के पक्ष में नहीं है तो तुरंत सन्यासी होईए आप सब

01:16:20:22 लोग कहीं का कहीं इधर उधर सब कुछ अब तो मैं बूढ़ा हो गया भला मुझको कौन स्त्री देगा इसके जवाब दरिद्र के लिए स्त्री को रखना कठिन कार्य है यदि हमारी बात नहीं मानोगे तो हम लोगों का पतन हो जाएगा तुम्हारी भी अधोगति होगी यह सब यहां पर बातें हो रही है प्रवती मार्ग यहां पर वैराग्य में चले गए थे वह भी अविधवा इसको वहां पर इसका निस्तारण कर रहे हैं वहां पर और आगे पढ़ना है इसे रहने दे अब जी काफी हो

01:17:02:12 गया रहने दीजिए आप समझने वाले इतने में समझ जाएंगे हा ठीक है ना तो यह हो गया मार्क जी से आपे उस मार्ग पर लगाते है प बोले य सत्य है कम को अही कहा है इस नहीं फिर क्या अरा बता नहीं है इन पत्रों की निकलवाने वालो की अब वो लड़का ठीक साना कर रहा था वेद के आधार से य भी मानते है आप साधना

01:17:35:18 कर और ये क रहा रहा मेंा बता अ और ख मान बा गा क्या गाद में रिजेक्ट कर दिया साधना नहीं करनी चाहिए पूजा यही होता है इनके साथ एक लाइन सबसे पहले तो अगर राम पाली अगर सच्चा राम पाली है तो क्योंकि वो मोक्ष मार्ग था शादी ना करना तो तुम सारे लोग अपनी अपनी स्त्री को तिलांजलि दे दो तुरंत जितने भी राम पाली हैं तुरंत और बोट लगवा दो सतलोक आश्रम में विवाह करना मना है बात कुछ और हो रही है वहां पितर यह समझा रहे हैं कि अगर तू प्रवृत्ति मार्ग पर चलेगा मगर उसमें फलों के प्रति आसक्त नहीं रहेगा तो भी तू सही तरीके से मुक्ति की और आगे बढ़ेगा यहां पर तेरी जो मुक्ति है इस तरह से बिना विधि के सन्यास जो तू ले रहा है इसमें बाधा आ सकती है शास्त्र वृद्धि का त्याग होने के कारण तू आगे चल कर के फस सकता है तो तुमने इसका उपयोग विनियोग इसमें ले लिया कि वो मोक्ष मार्ग में था और पितर एक तो उसको नरक के तरफ कट रहे हैं और वैदिक मार्ग जो है वो नहीं है अविद्या है मगर वो वास्तविकता

01:18:50:27 ये है कि वैदिक वैदिक कर्म वो अविद्या है जो आपको अविद्या से मुक्त कराएगी और दूसरी बात यह कि अगर वो जो रोच मुनि है वो अगर सही मार्ग पर चल रहे हैं मोक्ष मार्ग पर चल रहे तो तुम क्यों 17 मिनट की शादी करवा रहे हो लोगों की क्यों नोरा पीट रहे हो दहेज मुक्त विवाह का नरा पीटो विवाह बंद सतलोक आश्रम वाले विवाह बंद कर दो अभी देखो सब सारे आश्रम खाली पड़े रहेंगे जैसे इन्होंने किया विवाह मना है चलो भैया जय राम राम सत [हंसी] साहेब अधूरा ज्ञान बड़ा घातक होता है इसलिए मैं इनसे कहता हूं कि अधूरा ज्ञान नहीं पूरा ज्ञान लिया करो क्या लिखा है पूरा पढ़ो उसको उसके बाद ही कोई निष्कर्ष निकालिए सामने वाला तो अपनी दुकान चलाने के लिए वो तुमको दिखा रहा है आधा पूरा पढ़िए पूरी बात हो रही है उस चीज के बारे में ये मैं बहुत बार हर किसी को मैं बोल इनको बोल भेज दो भैया लिंक भेज दो लिंक लिंक भेजो कई लोग आना चाहते हैं ये लोग बोलते हैं कि सबकी दुकाने बंद हो रही है पर दुकान तो उसने खोली थी ना जो प्रचार कर रहा है जब दुकान खोलेगा प्रचार करेगा ना

01:20:05:27 सड़कों पर कौन प्रचार कर रहा है सड़कों पे या किसी दुकान पे मॉल पे अभी मैं महोत्सव में गया था लखनऊ महोत्सव जहां पिछले साल से कहानी शुरू हुई थी ना दोबारा महोत्सव लगाया हां हां तो वहां महोत्सव में गया तो मैंने एक व्यक्ति से पूछा भैया वो दे दिया आपको लिंक दे दिया है माता जीी ने निष्ठा पूर्वक पिलाया होया हो तोइए प बोले

01:20:45:15 बेटा पि बोले बेटा जितेंद्रीय होकर आत्मा का करना उचित ही है तुम जिस पर चल रहे हो व मोक्ष मार्ग है ये देख लो मोक्ष का मार्ग है षि मुनि शादी नहीं करना चाहते विवाह नहीं करना चाहते यही मोक्ष का मार्ग है बने काम की बा जदा काम की जदा काम की

01:21:20:21 बा अपने काम की बात बताएंगे आपको पूरा प सुनाते हैं क्योंकि ये जो जिस बात को आपके मन में डालना चाहते हैं केवल उतनी बात दिखाएंगे आप देखो सुनो ध्यान से दोबारा एक बार और सुन तो भैया प बोले बेटा अपने काम की बात प हम ज्यादा ना प अपने काम की बात पगे प बोले ज्यादा ना अपने काम जी ब्रजलाल ब्रजराज शर्मा जी जय श्री राम नमस्कार भैया जय श्री राम

01:22:09:07 भ बस आज देखा तो मैं करके बस आप मैं आपको देखता रहता हूं सुनता रहता हूं सपोर्ट में भी है मेरा भतीजा भी है आपसे के लिए आपको शुभकामना देने आ बस सत साब जी दसके जी जय श्री राम बताइए आप जो है कबीर साहिब जी के बारे में जानना चाहते हैं इसीलिए हम पहले आपने एक वीडियो बनाया ना हमारे ऊपर जी जी क्या वीडियो है वो वो वीडियो है जो परमात्मा को लेकर और क्या

01:22:56:26 उसको संसार रूपी वृक्ष के बारे में जो जर आप सुन रहे हैं हा बोलिए बोलिए दास जी नी की जो जर रूपी जो मूल है ना ईश्वर और शाखा रूपी ब्रह्मा विष्णु महेश जी के बारे में लेक वीडियो बनाया आप यह बताइए पहले तो कि आपके लिए प्रमाण कौन-कौन से ग्रंथ है मेरे पास एक शीफ कबीर साहेब जी का है बस पास नहीं पूछ रहा हूं आपके लिए प्रमाण कौन-कौन से ग्रंथ है कौन सा वही तो हम प्रमाण के र प्रमाण की तौर पर तो कहे आपको कौन सा है कबीर सागर कबीर सागर आपका प्रमाणिक ग्रंथ है सबसे ज्यादा ठीक है जीरब

01:23:55:21 अब क्या आप ये कहना चाहते हो कि वेदों के अनुसार गीता के अनुसार जो है जो कवि जो कबीर है वो परमात्मा है या कबीर सागर के अनुसार किसके अनुसार हम हम जो है उनको बाणी के अनुसार और कबीर सागर के अनुसार परमात्मा कहते हैं जी पहली बात तो हमने इस बारे में कोई वीडियो बनाया ही नहीं है कि कबीर सागर के अनुसार व परमात्मा है कि नहीं बनाया है क्या जी नहीं आपने वो क्या कहते कबीर सागर के अनुसार परमात्मा के बारे में तो आप नहीं बनाए हैं पर आप जो है कबीर साहेब जी को बारे में लेके कुछ कहते इस रामपाल के जो क्लेम है वेदों के अनुसार गीता के अनुसार पुराणों के अनुसार कबीर भगवान है उस क्लेम पर हमने वीडियो बनाए हालाकि हम यह बात भी नहीं मानेंगे कि कबीर सागर के अनुसार जो प्रतिपादित होने वाला ईश्वर है अगर वो कबीर है तो वो ईश्वर है उस बात प भी काउंटर करेंगे मगर अभी मैं बता दूं मैंने ऐसा कोई वीडियो अभी तक नहीं बनाया है कि कबीर सागर के अनुसार जो है कबीर परमात्मा है कि नहीं हमारा हमारी दिक्कत मेन उससे है जो यह कहता है कि कबीर वेदों के अनुसार कबीर भगवान

01:25:10:21 है पुराण के अनुसार कबीर भगवान है गीता के अनुसार कबीर भगवान है तो आपके लिए प्रमाणिक ग्रंथ नहीं है तो सबसे पहले तो ये हिसा अलग कर देते हैं गीता वेद पुराण ठीक है ठीक है जी अब आ जाते हैं अब आ जाते हैं की आप कबीर के अनुसार कबीर सागर कबीर वाणी के अनुसार जो है आप मानते हैं कि कबीर जो है भगवान है अच्छा तो मुझे आप ये बता दीजिए भगवान के लक्षण क्या क्या होते हैं आपके

01:25:47:14 अनुसार भगवान को लक्षण सबसे पहले प्रथम तो ईश्वर का लक्षण क्या है कि वो अविनाशी होता है ठीक है दूसरी में वो जन्म लेकर गर्भ से नहीं आता है अच्छा व इंसान के प्रमाण के तौर पर है और मरने के बाद अर्थात जो इंसान को शरीर दिखाई देता है वह गुप्त हो जाता है तो उनका शरीर नहीं पाया जाता है व इंसान को प्रमाण के लिए निरा नहीं नहीं निराकार निराकार नहीं हा शबद रूपी शबद रूप अच्छा मुझे एक बात बताइए यह जो कबीर वाणी है य स्वयं कबीर कबीर कबीर जी ने ही बोली किसी और ने बोली है जी कबीर साहिब जी ने बोले कबीर साहब ने बोली और कबीर परमात्मा है जी ठीक है तो अब मुझे एक बात बताइए कि इस दुनिया की हर चीज को कबीर जी ने ही बनाया है कि नहीं बनाया है सबसे पहले प्रथम

01:27:02:15 उस चीज को जानने के लिए आपको अभी भौतिक चीज को जानना पड़ेगा जैसे आप वर्तमान में अभी कुछ कर रहे हैं तो आप श्वर कर रहा है कि आप कर रहे हैं पहले इसको परखना पड़ेगा फिर उसको जवाब मिलेगा ईश्वर कर रहे हैं कि मैं कर रहा हूं जी अगर पार मर्थक दृष्टि से देखेंगे तो ईश्वर ही कर रहे हैं और व्यावहारिक दृष्टि से देखेंगे तो मैं कर रहा हूं ठीक ठीक तो आप परमार्थिक हिसाब से पूछ रहे हैं कि व्यवहारिक हिसाब से दोनों हिसाब से बता दीजिए नहीं दोनों में से एक छानना पड़ेगा आपको फिर आसर मिले जैसे मैंने आपको दोनों बताया ऐसे आप दोनों बताइए इस संसार की हर चीज को इस संसार इस संसार की हर चीज को आपके कबीर परमात्मा ने ब बनाया है कि नहीं बनाया है यह बताइए जैसे अब सुनिए जैसे हुकुम रूप में वो कर रहा है और कार्य रूप में जो शरीर वो शरीर कर रहा है भौतिक में मैं भाई साहब ये पूछ रहा हूं

01:28:17:27 मेरा प्रश्न ये नहीं कर क्या रहा है मेरा प्रश्न है कि उसने सब कुछ बनाया है कि नहीं यह पूछ रहा हूं मैं भी तो वही बात आप पृथ्वी सूरज चंद्रमा य सब उसने ही बनाया है किसी और ने बनाया है पहली बात सुनिए ना आपको हम पहले ही क्या कहे हैं कि आपको भौतिक रूप और परमार्थिक रूप दोनों अलग जैसे आप खुद बोले हैं कि दोनों अलग है अरे मेरे भाई मेरी जो बात करने की चीज है कि मैं बात कर रहा हूं या कुछ लिख रहा हूं इसको आप सूर्य चंद्रमा के निर्माण से जोड़ रहे हैं हर चीज का जो है ना एक जैसे आप कुछ बोल रहे हैं तो आप शरीर रूप में निर्वाण कर रहे हैं मगर शद रूप कह रहा क्या इस जगत की हर चीज का निर्माता व कबीर है कि नहीं य जानना चाहता हूं सब कुछ उसने ब सुनिए शबद रूप सब का उत्पन्न किया है शरीर रूप में जिसका अलग अलग विभाग है जैसे कि शरीर की बात नहीं कर रहा मेरे भाई य सारी जो सृष्टि बनाई है सूरज चंद्रमा तारे य सब कुछ उसी ने बनाया है कि नहीं

01:29:33:00 हम आपको क्या कर रहे हैं पहले यही बात सुनिए तभी तो हा आप डरेक्ट मनुष पर क्यों आ रहे केवल आप केवल मनुष्य पर क्यों आ रहे हैं मैं संपूर्ण संसार की बात कर रहा हूं आप केवल मनुष्य का जवाब दे रहे हो आप संपूर्ण संसार की बात कर रहे हैं तो हम पूछ रहा हूं पर एक बात बताइए संपूर्ण संसार जो है ना उनको हुकुम से बन रहा है मगर शरीर रूप में जैसे इंसान हर कार्य अपना अपना कर रहा है नासे हर व्यक्ति विभाग में बांटा गया वो कर रहा है तो मैं ये आपसे कहां पूछ रहा हूं कि कोई व्यक्ति क्या कर रहा है कोई व्यक्ति क्या नहीं कर रहा है मैं आपसे अभी प्रश्न ये पूछ रहा हूं क्या उन्होंने सब कुछ बनाया है कि नहीं मैं भी तो वही कह रहा हूं शब्द रूप में व सब कुछ किया है आकार रूप में अलग अलग विभाग दिया गया है यानी कि सब कुछ उसी ने बनाया है ना जी सबद रूप में सब कुछ वही बनाया सब एक ही है अलग नहीं है एक है अब दूसरी बात यह है कि बुराई करने वालों को किसने बनाया है हम आपको क्या कहे हैं पहले ही भौतिक या परमार्थिक दोनों वहार में उसने नहीं

01:30:49:16 बनाया हुकम उन्ही का चलता है व्यवहार में इंसान कर रहा है दिखाने केलिए मैं कर रहा हूं दिखावटी जो है जैसे आप पूछ रहे हैं कोई ऐसा सवाल तो आप वात सचा यही है कि उसी ने बनाया है जी वास्तविक में हुकुम उन्ही का चलता है वही करता है यानी कि जो अच्छाई है या बुराई है वो उन्होने बनाई है अब सुनिए अच्छाई और बुराई इंसान को दृष्टि में है परमाथ दृष्टि में एक ही है ज एक है तो अच्छाई और बुराई कहां से आ गया नहीं नहीं हमारी दृष्टि से जो अच्छाई और बुराई है वो दोनों चीज उन्होंने ही बनाई है अच्छाई और बुराई देखने का अनुभव अपने अंदर होना पड़ता है तो मैं वही कह रहा हूं हमारी दृष्टि से जो अच्छाई और बुराई है वो दोनों उन्होंने बनाई है क्योंकि उनकी दृष्टि में अच्छाई बुराई में कोई अंतर नहीं है आप सही कह रहे हो मैं आपके साथ हूं इस बात जी है ना अच्छा यानी झूठ और सच दोनों उन्होने ही बनाया है

01:31:56:02 यानी कि झूठ और सत वो इंसान का व्यवहार बनाता है वो तो सिर्फ उनका एक जैसे कहे ना आप कुछ बोल रहे हैं पहले सुनिए आप कुछ बोल रहे हैं तो उसमें सच और झूठ छिटका है आप छिटका अपने बुद्धि के अनुसार क् उनको अनुसार भाई मैं वही कह रहा हूं जो हमारी मैं अभी अपनी दृष्टि की बात कर रहा हूं हमारी दृष्टि में जो झूट और सच है गलत और स सही गलत और सही न्याय और अन्याय हमारी में जो न्याय और अन्याय है वो उन्होंने ही बनाया है ना दोनों चीज देखिए जैसे हमारी दृष्टि में न्याय और अन्याय य जब चीज आता है ना तो इसमें लिक शेयर कर दीजिए जी बोलिए इसमें क्या है कि दो हिसाब आ जाता है जैसे हम देखते हैं कोई ऐसा चीज को तो बुद्धि से पहले विवेक द्वारा विचार किया जाता है फिर ज्ञान द्वारा टाइम टेकिंग क्यों कर रहे हैं कट टू कट जब बात हो रही क्यों टाइम टेकिंग बातें कर रहे हैं सिंपल बात जब चल रही है कि हां भाई उसकी दृष्टि से सब कुछ एक है बनाया सब कुछ उसी ने है यह जो अच्छाई और बुराई का अंतर है या न्याय और अन्याय का अंतर है सच और झूठ का अंतर

01:33:11:08 है हमारी दृष्टि से है तो बनाया उसने ही है मगर उसने सच और झूठ नहीं बनाया मगर हमारे लिए कुछ चीजें सही है कुछ चीजें गलत है कुछ चीज सच है और कुछ चीज झूठ है ठीक है जी ठीक तो भौतिक में आ गया ना परमार्थिक में नहीं है कहा कह रहा परमार्थिक में बनाया परमार्थिक में बनाया नहीं क्यों इस इसम पीछे पड़े मैंने क मतलब य है इसका मतलब यह है कि हमारे लिए जो गलत चीज है व भी कबीर ने बनाई है हमारी दृष्टि से हमारी दृष्टि से गतिक दुनिया में दुनिया में हमारी दृष्टि से जो गलत व भी कबीर नेही बनाई है और जो सही चीज व भी कबीर ने ही बनाई है सही है हम आपको पहले ही क्या चीज कहे थे कि सबका अलग अलग विभाग है जैसे परमात्मा शब्द रूप रचा गया है सब यानी शबद शब्द एक ही है दूसरी बात जब शरीर का निर्वाण हुआ तो वहां पर बहुत सारे शरीर का निर्माण किया गया तो उसमें से एक सत्पुरुष आता है और उस सत पुरुष के निर्माण से काल निरंजन

01:34:26:09 जी आता है और 16 पुत्र है और काल निरंजन जी के निर्वाण से और उसमें से जो सत्पुरुष रचना किया जाता है उसमें से दुर्गा जी भी आता है और दुर्गा जी के निर्माण से और काल निरंजन जी के निर्माण से ब्रह्मा विष्णु महेश जी का निर्माण होता है और ब्रह्मा विष्णु महेश जी का निर्माण से जैसे कि ब्रह्मा जी का गुण है रगुण उसमें डाला गया है तो उनको निर्माण से जन्म होता है और विष्णु जी के गुण के अनुसार से पालन होता है और शकर जी गु केस से रं कहा इतनी डिटेलिंग पूछ रहा हूं आप क्यों जा रहे डिटेलिंग प एक का

01:35:12:13 नाम खा देर लगा रहे भक रूप से आपका जो ईश्वर है भौतिक रूप से सब कुछ कर सकता है कि नहीं लीला में क्योंकि उसके हिसाब से तो कुछ एक ही है तो भौतिक रूप से हमारे हमारी जानकारी में ईश्वर सब कुछ कर सकता है कि नहीं यह बताइए भौतिक रूप से ईश्वर सब कुछ कर सकता है कि नहीं वो तो जो चाहेगा वो कर सकता है स पर भौतिक रूप में एक भौतिक रूप में एक कंडीशन है जो हम पहले ही बताए थे ईश्वर यानी की व माना जाएगा इसी हाल में कि वो अविनाशी रहेगा दूसरा गर्भ से जन्मे नहीं तीसरा वो गुप्त होगा तो शरीर उनका मिलेगा नहीं ठीक है ठीक ये आपने न गर्भ से जन्म नहीं लेगा और अपने अपना नाश नहीं करेगा ठीक है जी और खाना नहीं खाएगा ठीक है खाना नहीं खाएगा अभी मैं पूछ रहा आपसे वो झूठ तो बोल सकता है कि नहीं उनको झूठ बोलने का क्या आवश्यकता है कभी झूठ नहीं बोलेगा आप देखिए

01:36:27:18 आवश्यकता उसको सट बनाने की क्या है अब सुनिए सृष्टि हम पहले ही आपको जर में बताए थे कि सृष्टि जैसे सुनिए एक मिनट जैसे आप खेती क्यों कर रहे हैं खेती क्यों कर रहे हैं खेती जीना है र खाने के लिए खेती आप क्यों कर रहे खाने के लिए खाना खाने के लिए हा पर इस प्रकृति के अंदर पा तत्व के अंदर आप पा तत्व को उस खेती से क्या लोभ था क्या आप इस संसार में आकाश के नीचे रह रहे हैं भाई साहब मैं इतना ज्यादा समय नहीं दे सकता चार लोग और है मैं आपको सीधा सिंपल प्रश्न पूछा हूं क्या व्यवहार में यानी की भौतिक सृष्टि में आप मुझे इसका आंसर दीजिए कि आपका जो ईश्वर है वो सब कुछ कर सकता है या नहीं अगर कर सकता है तो वो झूठ बोल सकता है कि नहीं या फिर वो सीमित है नहीं बोल सकता सिंपल बोलिए वो झूठ नहीं बोलेगा झूठ क्यों बोलेगा यानी वो झूठ नहीं बोल सकता

01:37:42:27 व क्यों बोलेगा झूठ मतलब नहीं बोल सकता ना जी जी जी नहीं बोलेगा झूठ बोलने वालों को बना सकता है वो जो ईश्वर है वहां से डिवाइड होते हुए आया जैसे तो डिवाइड होने के बाद झूठ बोलने वालों को बना सकता है कि नहीं सिंपल बात बोलिए ना भाई क्यों इतना आपकी आप जो आप जो वो लेके आए हैं पूरा का पूरा य बताने की आवश्यकता नहीं सिंपल सिंपल बात कर दर्शको को भी समझ में आए कि वो झूठ बोलने वालो को बना सकता है नहीं पहले सुनिए हम आपको हर सवाल को जो आप पूछ रहे हैं उस का जवाब जो है जिस तरह से हम पूछ रहे हैं आप पूछ रहे हैं उस तरह से हम बता के ही दे रहे हैं आप सिर्फ कह रहे हैं कि जैसे जज होता है एक मिनट सुन लीजिए एक भी सवाल रहे आप अपना रायता फैला रहे हैं मैं आपसे पूछ रहा हं आपको उस आपको उसी में जवाब है जो मैं बोलता हूं उसी में जवाब है किस जो मैं बोलता हूं उसी में जवाब है बोलिए जैसे आप जैसे जज होता हैसे कहते हैं यस यस और नो में बताने के लिए तो ऐसे ईश्वर के लिए नहीं बताया

01:38:58:03 जाता है क्यों मुझसे आप पूछिए मैं अभी तड़ त बता दूं पूछिए अभी त आप बता दीजिएगा तो ठीक है आप बताइए आपका ईश्वर कौन है आपका ईश्वर कौन है सचिदानंद सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर कौन कौन उनका नाम सच्चिदानंद तो मान गए नाम है आपका अगर नाम सच्चिदानंद ही नाम है और बोलो ब्रह्म ही नाम है उनका तो ठीक है उनका आकार रूप क्या है आकार रूप क्या है जो व्यवहार में नहीं आ सकता जो मनुष्य बुद्धि में नहीं आ सकता पहली बात सुनिए व्यवहार में नहीं आ सकता पर परमार्थी में तो है हा तो परमार्थी में कौन सा है बता तो दिया जो आपकी व्यवहार में नहीं आ सकता अनिर्वचनीय है जो हम आपसे व्यवहार में नहीं आ सकता है परमार्थिक में तो है मैं आपको एक तरीका बताता हूं आप तब समझ पाएंगे मेरी बात अगर आपको व्यवहार में कुछ भी कर सकने वाला ईश्वर ईश्वर के रूप में स्वीकार कब होगा आप किसी को भी ईश्वर के रूप में स्वीकार कब कर सकते हैं जब वोह सर्वशक्तिमान अपने आप को सिद्ध कर दे

01:40:13:28 उसके बाद अगर वह सर्वशक्तिमान आपके व्यवहार में सिद्ध हो गया तो आवश्यकता नहीं है कि व्यवहार वो पमा ईश्वर को भी सिद्ध किया जाए तो इसका मतलब है ईश्वर को ईश्वर सिद्ध करने के लिए उसका व्यवहार में सिद्ध होना आवश्यक है व्यवहार में सर्वशक्तिमान सि होना आवश्यक है तो आप मेसे तो मे व्यवहारिक प्रश्न कर क्या ईश्वर य कर सकता है क्या ई कर सकता है तब तो व जाइए क्योंकि आपको वहा की बात सब समझ में नहीं आएगा मैं तो आपसे ठीक है मिनट ईश्वर जो है रिक हिसाब से नपा जाता है कि परमार्थिक के हिसाब से व्यवहार के हिसाब से अभी मैंने बात की ना अविद्या अविद्या का वो रूप जो आपको विद्या तक पहुंचाए तो व्यवहारिक स्वरूप आपको अव्यावहारिक स्वरूप तक पहुंचाएगा तो इसका मतलब आलंबन किसका लेना पड़ेगा आलंबन किस आलंबन किसका लेना पड़ेगा व्यवहारिक ईश्वर का क्यों क्योंकि जो आपका परमार्थिक ईश्वर है वो तो व्यवहार का विषय है ही नहीं तो उसका ना कैसे रहे हो आपने कहा आपने एक बात कही ईश्वर नापा जाता है व्यवहारिक के हिसाब से कि परमार्थिक के हिसाब से यने

01:41:29:10 फस गए य मिनट नापना क्या है नापना क्या है उनका गुण के हिसाब क्या है मैं आपसे पूछ रहा हं नापना क्या है नापने का अर्थ है गुण उनका क्या क्या है कैसे है परमार्थ के य भी वहार है कि नहीं आप बोल भी रहे उका गुण क्या क्या है यह भी व्यवहार नापना भी वहार इसलिए आपसे पूछ सुनिए देखिए किसी निष्कर्ष पर ऐसे नहीं पहुंचेगी मैं जानता हूं आप तैयार हो करके आए हैं घुमाने के लिए बातो नहीं नहीं नहीं आप आप सोच रहे जो बात अलग है मैं रामपाल जी का चेला हूं नहीं मैं ये नहीं कह रहा जी के ले कक आपने अपने वीडियो में उनका खंडन कर दिया रामपाल मैं य जानता हूं मगर मैं अभी आपसे सिपल पूछ रहा हूं कि क्या आपके ईश्वर ने यदि ये सृष्टि बनाई है हमारे लिए अच्छाई बुराई है उसके लिए नहीं है उसने ही सब कुछ बनाया यानी बुराई भी उसी ने बनाई तो पहली बात तो ये है कि आप ये कह रहे हो कि व्यवहार में आकर के जो ईश्वर है आपका वो झूठ नहीं बोल सकता आप जो है दो तरह की बात कर रहे हैं जैसे कि

01:42:44:20 आप जब खुद कह रहे हैं कि ईश्वर उनको हिसाब से बुराई नहीं है ईश्वर के हिसाब से भौतिक हिसाब से बुराई है और अच्छाई है हिसाब से पूछ रहा हूं हमारी जानकारी के अनुसार हमारे व्यवहारिक दृष्टि के अनुसार क्या ईश्वर झूठ बोल सकता है कि नहीं उसकी अनुसार नहीं बोल सकता वो छोड़ दो मैं पूछ रहा हूं हमारी जानकारी में आने के लिए लीला पूर्वक वो ऐसी लीला कर सकता है जिसम उसने झूठ बोला हो झूठ बोलने वाला देखि ईश्वर झूठ बोलेगा तो फिर ईश्वर नहीं रहेगा झूठ नहीं बोलता है इसका मतलब उसकी सीमा है वो झूठ ना बोलने की मर्यादा में है नहीं एक मिनट सुनिए मर्यादा क्या चीज को कहा जाता है भाई साहब आप बारबार किसी एक टॉपिक को लेकर के आगे निकल जाते मैं अभी आपसे पूछ रहा हूं कि आपका ईश्वर अनंत सामर्थ वान है कि नहीं पहले आप सुनिए ना आप मर्यादा में बांधे हैं ना सच बोलेगा तो मर्यादित हो जाएगा झूठ नहीं बोला तो मर्यादा का परिभाषा क्या है पहले बताइए मर्यादा क्या कहा जाता हैमा जिसको ला लगे मर्यादा सीमा जिको लांग नहीं सकता अच्छा अच्छा सुनिए सीमा

01:43:59:25 को अंदर जो रहता है उसको लिए सीमा है कि सीमा से बाहर रहता है उसको लिए जो सीमा के अंदर रह रहा है जो अंदर आ रहा है उसके लिए सीमा है उसके लिए है ना तो आप एक बात बताइए जैसे आप कह रहे हैं कि ईश्वर झूठ नहीं बोलेगा तो बांध बाथी हो गया क्या कहते हैं मर्यादा में हो गया अरे श्वर सब कुछ कर सकता है हां सब कुछ करने तो कहा ना आप लाओ मत उसको बाहर से यहां यहां करने वाले के रूप में आप ला क्यों रहे हो आप ही तो उसको गेम के अंदर ला रहे हो ईश्वर के दो स्वरूप है एक व्यवहारिक और एक परमार्थिक आप परमार्थिक ईश्वर को यहां ले आए आप गेम के अंदर ले आए लकीर के इस तरफ ले आए आप जो आप कह रहे हो ना मैं सम रहा जो सीमाओं से बाहर होगा वो ईश्वर होगा कि जो सीमाओं के अंदर होगा वो ईश्वर होगा ठीक है वो नियमों से परे है आप ये कह रहे वो नियमों से परे है तो नियमों से परे ईश्वर को आप गेम के अंदर ले आए ना नियमों के बीच में ले आए ना इसलिए पूछ रहा हूं या तो ये कहो नीचे नहीं आ सकता नीचे आ सकता विय बन सकता है यहां से चालू हो रहा है य पर खत्म हो रहा है यहां से चालू हो र हो रहा है पहले सुनिए

01:45:15:08 एक मिनट नियम के अंदर नहीं लाए हैं कैसे है हम आपको पहले ही शुरू में क्या बताए थे कि परमा हुकम चलता है हुकम से हर काम हो रहा हैको आपने जो बताया है मैं उसी को खोद रहा हूं आपने जो बताया है उसकी प्रमाणिकता को जांच रहा हूं अभी वह बातें आपकी बोली हुई प्रमाण नहीं हो गई कि आपने जो कह दिया मान लिया अभी जो आपने कहा है जो आपने क्लेम किया है उसी क्लेम की जांच कर रहे हम लोग ठीक है इसलिए मैं आपसे पूछ रहा हूं कि इस दुनिया में अगर झूठ का अस्तित्व है है कि नहीं हैय बताओ हमारे अनुसार है भक अनुसार है हा भौतिक के अनुसार तो क्या उस झूठ का कारण भी कबीर है कि

01:46:05:21 नहीं देखिए झूठ का करूंगा ठीक है हो गया आपको जवाब नहीं देना है आपको सीधे सीधे बात सुनिए सुनिए बा ईश्वर की नर्मल सी बात है इस दुनिया में जिस भी चीज का अस्तित्व है उसका कारण ईश्वर है अब मैं आपसे पूछ रहा हूं झूठ का अगर अस्तित्व है तो उसका कारण ईश्वर है कि नहीं देखिए कारण जो है इंसान को लालच बनाता है और व्यवहार में आता है उससे कारण बनता है पूछ रहा हूं भाई साहब की झूठ का कारण आपका ईश्वर है कि नहीं एक मिनट सुन लीजिए हमारा भी बात सुनिए मुझे नहीं सुनना प् आप जाइए नहीं सुनना है दूसरी बात नहीं सुननी आपको ये बताना है इस दुनिया में हर चीज का कारण ईश्वर है आपका या नहीं है तो आप ज्ञान चर्चा कर रहे कि क्या कर रहे हैं प हम जा जा आप जाइए आप जा

01:47:07:08 सकते इता भैया घी नहीं पिया है ना आप जो दूसरी दूसरी बातें भटका रहोगे हम आपसे झक लड़ाते रहे आपको अपनी बात फसना है क्योंकि आप बोलोगे नहीं तो सीधा साधा जवाब देते नहीं है घुमाते हैं बात एक तरफ कह रहे कि सर्वशक्तिमान है फिर एक तरफ बोलने की फिर ऐसा हैसा है झूट नहीं बोल सच बोलने की नियमों में आ सकता है वो सिर्फ सच बोलेगा ये भी तो नियम है नियमों के बीच में तो आप ला रहे हो फिर कह नियमों के परे है अबे नियमों के परे तो फिर सच बोलने वाला क्यों कह रहे हो उसको हां भैया रामपाल दास जी आप जेल से कब आए अच्छा आप रामपाल नहीं है आप उनका नाम आपका नाम प्रॉपर यही है आप नाम लिखते हो केवल ना यही है यही नाम है यही नाम है हां यही है यही है आप तो पहले कई बार आ चुके हैं एक दो बार हां तीसरी बार हम बताइए मैं रात्र पूजा को गलत मानते हैं आप मैं ये कह रहा हूं आप बात करही थी हां शादी के बाद

01:48:22:26 बात कर रहे थे शदी हो जाती है क्या हो जाती है अरे अभी आप शादी अरे वो हो रहा था 17 मिनट में ना उसके बारे में बात करना चाह रहे हैं थोड़ा आवाज क्लियर नहीं आ रही इनकी हां बताइए बताइए बताइए क्या बात कर फ 84 लामा फ आप अपनी पूरी बात बोल लीजिए आप क्या कहने आए हैं बोलिए हां जैसे जी अगर से शादी नहीं कर तो योग क्रिया से बच्चे होते हैं व आवाज कट रही है इंटरनेट कनेक्शन आपका कमजोर है अच्छा

01:49:14:04 दोबारा दोबारा आइए आप एक बार हटके 84 लाख यो में भटक रहे हैं बोल रहे चलो बढ़िया है और कौन आया है गोस्वामी जी हैं चेहरा दिखाइए भाई आज लाइट नहीं है शिवांश भैया लाइट नहीं है तो रहने देते हैं थोड़ी देर आप रूम में वेटिंग रूम में आ जाइए आरन कुशवा जी जय श्री राम जय श्री राम शिवांश आवाज आ रही है मेरी जी आ रही है शिवांश मैंने आपको वो मैसेज किया था स्कन का ऑडियो हां हां हां हम लोग उस पर बनाएंगे लाइव करेंगे उस पर हा तो मैंने भ दोबारा कर दीजिएगा कल करेंगे ठीक देख लेंगे कल शायद हो सके कल करें अच्छा शंकर जी आप मेरे को वहां उनके चैनल प मिले

01:50:31:19 थे शंकर जी बोलिए क्या सिद्ध करना है आपको अन म्यूट कीजिए आप अपना आवाज नहीं जी मैं कहू कहिए चलो शंकर जी आप म्यूट हो जाओ फिर थोड़ी देर म्यूट हो जाओ बताओ रामपाल आवाज ठीक आ रही है जी बोलिए आ रही है मैं कह रहा ज 84 में जीवात्मा फस रही है हम तो बिना शादी किए हुए बच्चे उत्पन्न नहीं हो सकते यो क्रिया से जो और बच्चे नहीं होंगे तो फिर आदमी भक्ति करेगा कैसे मनुष्य रूप में करेगा

01:51:20:03 ना आप ये कहना चाह रहे हा हा तो इसीलिए शादी करवाई जाती है योग क्रिया से बच्चे होते हैं और जब मान रूप भ भक्ति करेंगे मो का मिल सकता है देख आपको आपका उत्तर दे दू कि आपके जो तत्वदर्शी है वो यह कह रहे हैं कि जो विवाह नहीं करना चाहता है है ना क्या कह रहे देख परिग्रह मात्र ही अत्यंत दुख एवं पाप का कारण होता है उससे मनुष्य की अधोगति होती है यह ऐसा कह रहा है व्यक्ति वैरागी रहना चाहता है यह विवाह नहीं करना चाहता है इससे पितृ गण बोल रहे विवाह कर ले तो यह कह रहा है मुझे विवाह नहीं करना है ठीक है और आगे बोल रहा है इसलिए मैंने स्त्री संग्रह नहीं किया इसलिए मैंने क्या नहीं किया स्त्री संग्रह नहीं किया ठीक है आगे इसके प पितर बोल रहे हैं बेटा जो तू जिस मार्ग पर चल रहा है वो मोक्ष का मार्ग तो है वैराग्य ही है मगर ये वो वैराग्य है जो अ विधि पूर्वक आया है विधि पूर्वक नहीं आया तो अ विधि पूर्वक जो वैराग्य

01:52:35:04 भी आ जाएगा तो वो भी मोक्ष का दायक नहीं तो मार्ग तो तेरा सही है मगर विधि पूर्वक मार्ग नहीं है यह पितर कह रहे हैं तो इस बात में जो पितर इसको शादी की ओर लाने की बात कह रहे हैं आपके तत्वदर्शी कह रहे हैं गलत कह रहे हैं मैं ये कह रहा हूं जी ये कौन कह रहा है मतलब बाल ब्रचा मोक्ष होगा आपके आपके जो तत्वदर्शी है वो य पर कह रहे जो व्यक्ति है वो सही कर रहा है और जो उसको शादी के लिए इधर ला रहे हैं व गलत ला रहे

01:53:16:12 हैं ऐसा ब्रमर हिसाब से होता है सकते शदी के बाद बचा भाई सा आप तो ये बताओ कि उन्होंने यहां पर जो इसको कहा है ना मोक्ष का मार्ग स्वीकार किया है रुचि मुनि है जो रुचि मुनि है जो इनको मोक्ष के मार्ग पर चलने वाला स्वीकार किया है और यह बाल ब्रह्मचारी है इन्होंने शादी की ही नहीं है विवाह किया ही नहीं है इन्होने अब यहां पर इनके जो पितर है वो कह रहे बेटा विवाह करके तू जब वैराग्य में आएगा ना तो वो ज्यादा सही है मगर त विवा नहीं करेगा तो ये तेरा वैराग्य जो है वो अधि पूर्वक है य तुझे मोक्ष नहीं दिलाएगा कुछ ऐसी वार्ता य हो रही है तो आपके जो तत्वदर्शी है जेलम निवासी वो यह कह रहे हैं कि यहां पर य जो रुचि मुनि है य मोक्ष के मार्ग पर चल रहे हैं और पितर जो उनसे कह रहे विवाह कर ले विवाह करके जो जब तू वैराग्य में आएगा मोक्ष के मार्ग पर आएगा त ज्यादा सही रहेगा वो गलत कह रहे पितरों को गलत कहा और उस पित्रों को गलत कहने के लिए उधर जो कर्म है और जो कर्म है शास्त्र वेद कर्म उनको गलत कहा तो वो कह रहे हैं कि देखो ये व्यक्ति मोक्ष के मार्ग पर चल रहा है फिर भी उसको वहां से घसीट

01:54:31:14 रहे मतलब उन्होंने माना आपके तत्वदर्शी ने कि बाल ब्रह्मचारी रहना और स्त्री संग ना करना ही मोक्ष का मार्ग है यहां पर उन्होंने यह मान लिया नहीं तो उनको पितरों का साथ देना चाहिए सही कह रहे हैं पितर वो यहां पर रुचि मुनि को सही कह रहे हैं ऐसा पि पूजा करेंगे मोक्ष कहां मिल पाएगा ये बताइए मोक्ष मिल पाएगा नहीं मिलेगा भाई साहब मैं आपसे कह रहा हूं आपके जेल धाम निवासी कह रहे हैं ये कि रुचि मुनि सही है यहां पर और सही इसलिए सही हो इसलिए बता रहे थे ना पित्र पूजा नहीं करना चाहते थे ना चीज ा नहीं करना यहां पितर पूजा की बात नहीं है उन्होंने कहा कि रुचि मुनि मोक्ष के मार्ग पर चल रहे हैं पितर उन्हें मोक्ष से घसीट रहे हैं पित्र पूजा के लिए घसीट रहे थे ना वो वीडियो दिखा दो वीडियो दिखा दो इनको

01:55:29:14 जरा रामपाल दास जी वहां पर अच्छे से पढ़िए वहां पर विवाह की बात कर रहे हैं वहां सरात की बात नहीं कर रहे हैं तुम जिस पर हो व मोक्ष मार्ग है ने पता वेद में कम मार्ग कोस मत दिखा पीछे यही का मार्ग हैब एक मिनट कहते देखलो य मोक्ष के मार्ग पर चल रहा है फिर भी उसको घसीट रहेर

01:56:06:22 रे विवा दिखा देखो वहा से कैसे उने प पीछे दिखाओ अभी विवाह शब्द आया था नाय देखो बेटा विवाह म जी कहते पूव काल की बात है तते उन्होने तो अगनि की स्थापना की थी और अपने घरही बना रखा वे एक बार भोजन करते और बिना आश्रम केही रहते थे उन्ह सब प्रकार की आसक्ति रहित मुव में रहते देख उनके पि ने उनसे कहा अब देखो क्या

01:56:52:14 चोरी हैय चोरी है इन्होने पढ़ नहीं पि ने क्या कहा दोबारा दिखाओ क्या कहा प ने देखो पि ने क्या क प बोले बेटा देख देख हटा दो इनको और देखो मोक्ष का आगे देखो मोक्ष का मार्ग थोड़ा आगे आगे बढ़ दो मोक्ष का मार्ग दिखा दो दादा का पिताजी दादा कादा य चार अब क्या इशन दे रहे प बोले बेटा पुरुष समस्त देवताओ प ऋषियो और अतिथियो की पूजा करके व और अपवग का हेतु होने के कारण एक पु कार्य है उसे तुमने क्यों नहीं किया पु समस्त देवताओ प ष और अतिथियो की पूजा करके पु लो को प्राप्त करता है वह स के उचार से देवताओ को श के श से प को था अन

01:57:59:08 तो सामने सामने स्कम कर दिया ये देखो बेटा जितेंद्र होकर आत्मा कालन करना उचित ही है तुम जिस पर चल रहे हो वह मोक्ष मार्ग बस और इसमें इस वीडियो में आपके तत्वदर्शी ने यह भी कहा है जो पितर होते हैं व्यक्ति मोक्ष मार्ग पर चल रहा है तो उससे घसीट रहे हैं आपको घसीट इसलिए रहे क रहे थे पित्र पूजा करो इसलिए घ पूजा कर भाई साहब पितर पूजा का शब्द कहां आया इसमें वो पितर दिख किसलिए लिए हमा पि पूजा करते पूजा नहीं कर रहे वहा पर वो वो पुत्र पित्र पूजा नहीं कर रहे वैरागी जीवन जी रहे हैं तो व पर पित आ करके कह रहे बेटा तू विवाह कर ले सम में आर कह रहे बे कर लेता तो हमारी पितर मतलब पूजा करता अब वो कह मुझे मोक्ष प्राप्त करना है पिताजी मैं ये नहीं कर सकता तो भाई वो क तो ल एट द एंड विवाह के लिए रहे ना वहां पे विवाह के लिए कह रहे नहीं कह

01:59:08:14 रहे हां क रहे कि नहीं कह रहे ये बताओ अरे जो पितर है उनके वो कह रहे हैं शादी करते तो हमारी पि पूजा करते आप तो उन्होने मुझे मुझे मोक्ष कर करवाना भाई साहब इसका मतलब यह माना जाएगा कि विवाह करने का अर्थ होता है पित पूजन यह मान लो नहीं ऐसे कने मतलब य है शादी किए बना मक्ष हो

01:59:44:07 जाएगा अभी सिच को क्लियर समझ थोड़ा एक व्यक्ति है जो विवाह नहीं करना चाहता है और आपके अनुसार पतर आ कर के उससे कहते हैं कि भाई तू विवाह कर ले विवाह कर लेगा तो अन्य शास्त्र वेद जो कर्म है उनको कर पाएगा और तू उस पर चलते हुए भी मोक्ष को प्राप्त कर सकेगा यह पितर आक के कह रहे हैं आपके जो रामपाल दास जी है वह यह कह रहे हैं कि पितर उससे गलत गलत चीज की ओर घसीट रहे हैं वो जो कर रहा है वह मोक्ष है वह अपने मोक्ष के मार्ग पर चल रहा है मगर पितर जो उसको विवाह करने के लिए कह रहे हैं वो गलत कह रहे हैं तो आप ये मानते हैं विवाह गलत है नहीं ब्या करना गलत नहीं है भक्ति सही करो तो उचित है मोक्ष हो जाएगा ब्या करना गलत नहीं य पर जो बात चल रही है उसकी बात करो यह जो पढ़ रहे हो इसमें य कहां दिखाओ आपकी बात जो सही हो रही है वो बताओ मुझे ये जो उन्होने प्रमाण दिया है उस उन्होने य दिखाया है मैं दोबारा दिखा दू आपको दोबारा समझा दू एक व्यक्ति है जो बिना विवाह के अपना जीवन का निर्वाह कर रहा है उसके पितर आ कर के उसको बोल कि अगर तू अगर तू विवाह करके और शास्त्र भद कर्मों को करेगा तो तू सही तरीके से मोक्ष के मार्ग पर आगे

02:00:59:12 चल पाएगा आपके रामपाल दास जी कह रहे हैं कि देखो जो व्यक्ति मोक्ष के मार्ग पर चल रहा है उसको यह लोग नरक के मार्ग पर घसीट रहे हैं तो यानी कि वैराग्य विवाह के विवाह के बिना चलने वाला इंसान ही सही है आपके अनुसार व विवाग में कह रहे थे वो ये कह रहे थे पित्र पूजा मैं क्यों करू मुझे मोक्ष करवाना है ये कह रहे थे अपने पित्रों से यहां पर सबसे पहला शब्द क्या लिखा है बेटा विवाह क्या लिखा है सबसे पहला शब्द हा वो विवाह के लिए इसलिए कह रहे थे कि हमारी पित पूजा करते विवाह करने के बाद उन्होने की पिताजी मैं पित पूजा नहीं करूंगा तो विवाह के लिए कहा ना पित्रों ने आपके जेल धाम निवासी को कहना चाहिए था कि विवाह करना तो सही है मगर विवाह करने के की पूजा है गलत है उन्होंने तो कहा कि नहीं पितर उनको ग गलत कर रहे पूरी तरीके से गलत कर दिया ना क्यों कहा व पित पूजा के लिए शादी के लिए नहीं अरे मेरे भाई इसमें कहां पर पित पूजा के लिए आ रहा है इसमें विवाह के लिए बात हो रही है वो कह रहे मैंने स्त्री संघ नहीं किया फिर वो उसको स्त्री संघ के लिए मना

02:02:14:13 रहे हैं इसमें जो मूल विषय है उनके बीच में बात होने का वो विवाह है वो तोला पित पूजा पित तब तो ऐसा होना चाहिए था कि व पित पूजा नहीं कर रहे थे तो वो आकर के ये कहते कि तू पित पूजा क्यों नहीं कर रहा है पित पूजा कर बात तो पित पूजा की हुई और पित पूजा और पित पूजा करने के लिए विवाह कर यह कहते यहां तो विवाह कोही विवाह की बात चल रही है पूरी और आप उसको पितृ पूजा से जोड़ रहे हो नहीं बेवा के लिए नहीं मना करेवा के लिए मना थोड़ी किया प पूजा के लिए मनाया होता है आपके कहने से नहीं होता है यहां पर एक व्यक्ति वैराग गुरु गुरुजी ने कहा ये बताओ ये बताओ कि पितृ पूजा नहीं कर रहा है वो व्यक्ति ठीक है पितृ पूजा के बिना रह रहा है अब वो पितृ पूजा के लिए घसीट रहे हैं और पित पूजा के लिए विवाह होना आवश्यक है मगर यहां पर यहां पर आपके व्यक्ति ने यह कहा कि वो व्यक्ति सही जीवन जी रहा था मोक्ष मार्ग था उसका वैरागी मोक्ष मार्ग था उसका आपके व्यक्ति ने कहा और विवा सुनो विवाह प्लस पित पूजा यह मार्ग गलत है

02:03:29:24 पि पूजा करो तो गलत हो जाएगा सही बात है प लो प जा य पर बात हो रही है विवा की उसको के लिए बना रहे य परने माग मुझे दिखाने दो मुझे दिखाने दो मुझे दिखाने दो परिग्रह मात्र ही अत्यंत दुख एवं पाप का कारण होता है तो यहां पर ये ये कह रहे हैं जो जिस जो व्यक्ति आपके तत्वदर्शी के अनुसार मोक्ष मार्ग पर चल रहा है वो यह कह रहा है कि स्त्री को ग्रहण करना विवाह करना दुख एवं पाप का कारण होता है ये ये कह रहा है व्यक्ति मानते हैं आप वो ऐसा है ना वो सोच रहे फ में कर बताओ मुझे आपके र् ने कहा य व्यक्ति मोक्ष के मार्ग पर चल रहा है यह व्यक्ति यह सोच रहा है कि शादी करना क्या कहते बंधन का कारण होता है आप यह बात मानते

02:04:40:22 हैं बंधन फसो तो हो जाए गलत नहीं फ कोई क्लियर बात करो ना क्लियर बता तो रहा हूं शादी करने के बाद केवल उसम क्यों फसो भक्ति भी करो ना आपके तत्वदर्शी के अनुसार ये जो व्यक्ति य मोक्ष मार्ग पर चल रहा है कि नहीं चल रहा है पहले ये बताओ हां मोक्ष पर चल रहा है वो तो मोक्ष मार्ग पर चल रहा है ना मोक्ष मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति की सोच ये है वो यह कह रहा है कि स्त्री संग्रह से अधोगति होती है पाप का कारण होता है अब यह व्यक्ति यह बात मानते हो कि नहीं मानते हो स्त्री संग्रह से यानी विवाह से अधोगति होती है पाप का कारण होता है मोक्ष के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति ये कह रहा है या तो ये मोक्ष का मार्ग नहीं है एक मिनट या तो ये मोक्ष का मार्ग नहीं है या तो ये मोक्ष का मार्ग नहीं है और या फिर जो पित्र है वो उसको सही दिशा में ला रहे हैं दोनों ही तरीके से आपकी बात कट रही

02:05:49:27 है अच्छा अभी बताओ जी पित पूजा से मुक्त कैसे हो जाएगा पित पूजा त्यानी पड़ेगी ना आगे बढ़ना पड़ेगा करना पड़ेगा ये बताओ पूजा पड़ेगी म होगा ये बताओ आप मुझे कि कबीर की पूजा करने से मोक्ष कैसे हो जाएगा बिल्कुल हो जाएगा सतलोक चले जाएंगे अच्छा कबीर सतलोक में रहता है हा स जो लोग पाप करते हैं वो कहां जाते हैं नरक में जाएंगे अच्छा

02:06:32:14 जो जो लोग पाप करेंगे और ब्रह्म की पूजा करने वाले कहां जाएंगे ब्रह्मलोक जाए ब्रह्मलोक अच्छा तो मरने के बाद जो पाप करने वाले हैं वो ब्रह्म के पास जाएंगे नहीं च में जाएंगे वहा कैसे प जाए भगवान तो बहुत बड़ी चीज है ब्रह्म ब्रम काल का ता है काल भगवान जी है भगत जी काल भगवान जी केवल काल नहीं है काल भगवान जी है अभी इस पर बात करेंगे भगवान प अभी मैं बात कर रहा हूं कि जो पाप करते हैं वह किस कहा जाते हैं मृत्यु के बादन पहुच जाए व मान शरीर नहीं मि करने शास्त्र कर्म ना करने वालों को शास्त्रों के अनुसार ना चलने वालों को ब्रह्म लोक जो ब्रह्म आपका जो काल ब्रह्म है वो मिलता है य मैं दिखा दूं आपको पाप करने वालो पर जो शास्त्र ओम नाम की तो बताया भवान जी के लिए अरे चाहे व पाप करहे वो पाप करे चाहे वो की पूजा करें वो

02:07:47:15 पहुंचते वही ब्रह्म के पास है र पाप करने वाले का जाएंगे पाप करने वाले आपके परमात्मा के पास तो जाएंगे नहीं नहीं ये भी परमात्मा अवस्था है ब्रह्म भगवान की ये भी परमात्मा अवस्था है पर उनसे अलग है सतलो कबीर साब से अलग है अच्छा सय भी अपने स परमात्मा है ब्रह्म परमात्मा है हां अपने सत के है जितनी मतलब उन लिखा है ब्रह्म को परमात्मा रामपाल ने कहां माना है बताओ काफी सारी वीडियो में अपने अपने स् के सब परमात्मा है विष्णु

02:08:29:09 जी ब्रह्म को परमात्मा कहां पर लिखा है आपके इसने आपके रामपाल ने अपने अपने स के परमात्मा ख अच्छा परमात्मा का अर्थ क्या है परमात्मा त है जो आपको बताया लोक में रहते है त की बात करोगे और जी तुम सबके अंदर रम रहे

02:09:02:07 हैं परमात्मा शब्द क्या परमात्मा शब्द का अर्थ क्या बता श रूप में भाई साहब परमात्मा परमात्मा शब्द का अर्थ क्या है परमात्मा बता दो हा परमात्मा इसके अर्थ में कहीं पर ये आ रहा है क्या ये लिख कर के आ रहा है क्या कि वह अपने लोक में जो परम हो वह परमात्मा होता

02:09:36:25 है परमात्मा का शब्द मालिक भी तो हो गया अपने अपने श का मालिक ये परमात्मा का ये अर्थ कहां पर लिखा है अपने अपने लोग का मालिक होगा उसको भी परमात्मा कहा जाएगा शास्त्र में लिखा कहां लिखा कहां पे हां लिखा परमात्मा कह सकते भगवान कह सकते हो अपने अपने सतक है अपने अपने सक इंसान भी अपने अप ऐसे बात नहीं होती है ना आप तो शास्त्र सम्मत भक्ति करते हैं ना भाई

02:10:14:15 साहब हम मैं लेक बैठ नहीं अब मैं अब मेरी बात सुनो मैं आपको थोड़ा बताऊ कि पितृ पूजा करने वाले परमात्मा को प्राप्त होते हैं यह मैं लिखा दिखा दूं परमात्मा को भगत जी कैसे कृष्ण जी ने मना कर दिया ब्रह्म भगवान जी मना कर दिया साब देखिए शास्त्रों में जब दो तरह की बातें हो रही होती है तो हमें ऐसा अर्थ निकालना होता है कि दोनों में से एक भी बात कटे नहीं इसके बारे में भी मेरे पास प्रमाण व्यास स्मति पांचवा दूसरा अध्याय उसका पांचवा वो है ठीक है श्लोक और मनुस्मृति में भी है मगर मैं अभी फिलहाल बात ये कर रहा हूं कि पितृ पूजा करने वाले भी भगवान आपका कबीर है ना जो उसको प्राप्त हो रहे हैं दिखा दूं ना प्राप्त जब होंगे ना वो त्याग उसे त्याग के आगे बढ़ेंगे तब हो जाएंगे त्यागना पड़ती है अवस्था डायरेक्ट हो रहे पित पूजा करने वाले पि पूजा करने वाले प्राप्त हो रहे हैं परमात्मा को

02:11:31:18 प्राप्त ऐ अवस्था छोड़नी पड़ेगी आगे बढ़ना पड़ेगा जब हो ना क्लास तो छोड़नी पड़ेगी आगे बढ़ नहीं है ना कि छोड़नी पड़ेगी ये नहीं ये नहीं लिखा है में जाने के लिए दवी छोड़नी पड़ेगी मैं एक बात बता रहा हूं आपने एक बात कही कि पाप कर्म करने वाले ब्रह्म के लोक में भी नहीं जाते हैं यानी परमात्मा के लोक में नहीं जा सकते नहीं जाएंगे ना हा जब तक व बरे त्याग देंगे मान ज ले सही भक्ति नहीं करेंगे शास्त्र का आधार पर ठीक है ठीक तो मतलब वो जैसे ही वो बुरे कर्म करने वाला अपनी दे का नाश मतलब मृत्यु को प्राप्त होगा तो ऑटोमेटिक वो जो है नरक में चला जाएगा या फ 84 लाख योनियों में अगला जन्म ले ट अगर पुण हो थोड़ मिल आपको लालिए जेलिए बना में

02:12:32:16 जाओ जाएगा नहीं व बता जब तक नहीं जाएगा जब तक जम आक सार भक्ति नहीं करेगा शस्त्र के आधार पर जब तक नहीं जाएगा इनको दिखा दो भाई पापी लोग पर के लोक में जा रहे हैं जीने की राह पेज नंबर 10 और आठ पहले 10 दिखा दो दसवे का लास्ट पैराग्राफ है लास्ट यह

02:13:16:03 देखिए परमात्मा के दरबार में मृत्यु के उपरांत पापों की माल गाड़ी भरकर मृत्यु के उपरांत परमात्मा के दरबार में मुंह लटका कर हो गया और और दिखा दो इसके आगे वो आठवा पेज दिखाओ आठवा इसमें सबसे बड़ा पैराग्राफ जो होगा आठवे पेज का

02:13:52:13 और ऊपर आठवा ही हैय ये आठवा है क्या कौन सी जन गंगा है कौन सी वाली गीता इसमें सबसे बड़ा वाला पैराग्राफ है जो वो है और ऊपर थोड़ा हा उस परमात्मा के दरबार में ठीक

02:14:43:25 है और ऊपर थोड़ा सा परमात्मा के घर में जाकर पश्चाताप के अतिरिक्त कुछ नहीं हाथ लगेगा ये परमात्मा के घर क्यों जा रहा है भाई परमात्मा के घर जा रहा हैय व परमात्मा के परमात्मा के घर नहीं है व पहले ही रास्ते में खड़े राज कर लेते व कैसे चला जाएगा तो ये लिखा है ना आपके परमात्मा के घर जाकर होगा वो होगा हटा लो ये लिखा है ना

02:15:22:20 नंबर धर्म धर्मराज के धर्मराज होता है तो परमात्मा की रस्ता बता व उसके लिए कहा जा रहा है व नहीं जा सकता पर आपको सीधे सधे दिखाया है परमात्मा के घर जाकर परमात्मा के लोक में जाकर सेकंड यानी जाता तो है निकाल के फेंक दिए जाएंगे बाद की बात है जाता तो है वो धर्म केर में खड़े हो जाते फैसला होता क्या किया क्या नहीं हम आपको लिखा दिखा रहे परमात्मा के घर जा रहा है ये नहीं मानते रामपाल ने गलत लिखा है य नहीं जाता राम वो परमात्मा के घर रामपाल ने गलत पनला य पर बीच में रोक लिया है ना जाहा कहा रोक लिया दोबारा दिखाओ दवा पेज इनको दोबारा दिखाओ बीच में दवा पेज दोबारा दिखाओ इनको

02:16:27:16 ऊपर अलवा ये देखो परमात्मा के दरबार में लटका कर ओ भैया परमात्मा के दरबार में लटका कर खड़ा हो जाएगा हा तो ये गलत लिखा हैने रामपाल ने हटा लो दवा पेज है दसवा कंप्यूटर स्क्रीन के हिसाब से दसवा है आपकी किताब के हिसाब से है दूसरा

02:17:09:02 नंबर बस हटा लीजिए बस देखी पट ति के पश्चा परमात्मा दर में खड़ा होता है देख य कौन पज दूसरा बता अपनी बातों को सिद्ध करने के लिए अपने गुरु की गुरु की बातों का ही खंडन करने लगे वो कर चुके पहले कई बार उनका क्यों कर उ क कर हा करा तुमने कर रहे हो ना आप अभी कहां करा क करा बताओ अभी आप निराकार है हां तो दिखाऊ वीडियो दिखा दू क्या खा चलिए वी चला तो तुम लोग फिर ये क्यों कहते हो परमात्मा कहो ना निराकार है वो तीसरी अवस्था में है ना सतलोक में सतलोक में साकार है तो भाई पूरी बात क्यों नहीं बता रहे तुम लोगों को कि वो सतलोक वाला जो रूप है वो असली रूप नहीं है उससे और भी कोई रूप है ऊपर बता तो सत्संग में सारा बता दिया है सारा

02:18:24:03 बता दिया तीन चर हज वीडियो एकदम तो सुन नहीं लेगा कोई भगत आदमी धीरे धीरे तो सुन पाएगा ना वो चलो तुम अ पहले ये वाली बात करो फिर फिर उसपे आएंगे निराकार वाले मैं वीडियो दिखाती क्या कहते आ बा पहले बात करो तुम कौन सी वाली कि परमात्मा के लोक में जा रहा है कि नहीं जा रहा है आदमी पाप कर्म करने वाला जीने की रात कौन सी लानन सेकंड पेज सेकंड म दूसरा

02:19:08:04 हैम परमात्मा के दरबार में ले जाया जाएगा जाएगा गीता जी में तो निराकार स्वरूप की तो भर भर के प्रमाण है बावा अध्याय पढ़ोगे तो पूरा निराकार के रूप में साकार भी है निराकार भी है ये भगत जी उसके लिए कहा व जाएंगे दरबार में तो परमात्मा थ मला धम के लिए खड़े हो जा नीचे

02:19:59:15 कुते बात नहीं होती है लिखा दिखा धर्मराज है व पर परमात्मा नहीं है अगर धर्मराज परमात्मा है तो धर्मराज परमात्मा लिखा दिखाइ कहा पर है मैं बता र मृत्यु उपरांत परमात्मा के दरबार में मुह लटका कर भयभीत होकर जाएगा कुते सर के जन्म पाएगा बात ये है ना व फैसला चे अब देखो कितना तुम लोग अपनी बात पलटते हो अभी अभी ये कह रहे रास्ते में ही पकड़ लेगा धर्मराज अब अपने आप आप स्कन खुद पढो वो परमात्मा के यहा नहीं जाता वो धर्मराज के पास जाएगा धर्मराज उसको रास्ते में पकड़ लेगा नरक जाएगा 84 लाख योयो में

02:20:47:08 जाएगा अब प्रधानमंत्री चे पूरी बात कहा करो ना क्या पूरी बात कहा करो नीचे भी तो लिखा है कुत्ते क सर की सर के जन्म पाएगा फिर वो बात ये है ना तो क्या हुआ वहा से फेंक दिया जाएगा परमात्मा के लोक में गया कि नहीं गया लो ऐसा ज प्रधानमंत्री होता है उसके नीचे बैठे होते हैं कार्य करने वाले तो परमात्मा के दरबार में गया कि नहीं गया परमात्मा के घर प गया कि नहीं गया दरबार ना की परमात्मा के पास दरबार परमात्मा के घर गया कि नहीं गया घर घर घर कैसे चला गया वो रस्ते में रोक दिया फेंक दिया मैं पूछ रहा हूं परमात्मा के घर गया कि नहीं गया घर परमात्मा का घर परमात्मा का दरबार लिखा हुआ दरबार ना कि उसके परमा नहीं पूछ रहा हूं परमात्मा के घर गया कि नहीं गया नहीं घर क गया पक्का अरे दरबार अलग है घर अलग है भत जीसे पूछ रहा हूं घर गया कि नहीं गया इस टको ना अपनी

02:22:02:14 बात प मजबूत क्यों नहीं रहते हो घर कहां जाएगी आपसे पूछ रहा घर गया नहीं नहीं घर नहीं गया घर नहीं गया इनको पीछे आठ नंबर वाला पन्ना दिखाओ ये फिर फसने वाला शायद फसाने से ना फसाने से बात नहीं होती आप खुद खुद समझिए इस बात को पापी आदमी अगर मोक्ष पा जाए तो हो गया काम भक्ति की क्या जरूरत है फिर तो पाप करेंगे नहीं कर रहा आपकी बातें गलत है आपका तत्वदर्शी गलत लिखता है ये बता रहा हूं आपको मैं अरे नहीं अब आपको समझ में गलत आ हम क्या कर सकते हैं आप आप देखिए आपने कहा घर नहीं गया अब मैं आपको घर दिखा रहा हूं ये देख अब एक दो शब्द में फसा लेना ये कोई वो बात हो रही देखो परमात्मा के घर में जाकर इसको देखो सबसे पहली लाइन पढ़ो इस समय स्क्रीन पर क्या लिखी है इनको पेज नंबर बता दो भैया पेज नंबर कौन सा है इनकी बुक का खोलो यह भूमिका पहला पहला प्रश्न खोलो अपनी बुक में पहला

02:23:14:16 प्रश्न खोल लिया इसी में थोड़ा ऊपर जाइए भैया ऊपर जाइए जरा वो लाइन क परमात्मा के घर में जाएगा मुह लटका कर खड़ा हो जाएगा अभी सबसे पहली लाइन वही तो थी अभी हा ये देखिए यह पढ़ो ये लाइन अब देखो आप फस गए परमात्मा के घर पहुंचा कि नहीं पहुंचा य तो क्या मोक्ष हो गया उसका मैं कहा कह रहा हूं मोक्ष हो गया अभी तुमने कहा परमात्मा के घर नहीं दरबार पहुंचा है

02:23:50:18 चार बार पूछा घर पहुचा कि नहीं पहुचा तुमने कहा घर नहीं दरबार घर नहीं दरबार अब मैंने घर दिखा दिया तो अब क्या मोक्ष हो गया नहीं तो मान ली घर दर मत पहु मानने से काम नहीं चलता है क्यों मान ले खरी बात क खरी दो प्रकार की बात नहीं सुनो आप य मान लेना तब कह देते चलो मान लो घरही गया हो उससे क्या मतलब थोड़ी ना मिला मगर तब क्या कहा था नहीं घर थोड़ी ना गया है दरबार गया है चार बार कहा घर नहीं गया दरबार गया आपने पहले देख लिया होगा ना व सारा तो हम ऐसे ही थोड़ी ना बात करते हैं कोई बात तो वहा रुक नहीं सकती जीमा चला तो व रुक नहीं सकती पाप आसे क आप पहले क अभी से दो मिनट पहले आप गुरु विरोध कर रहे थे अपना कहिए

02:24:51:16 ग गुरु विरो क्यों करेंगे क्यों गुरु ने लिखा था कि घर गई आप कह रहे घर नहीं दरबार गई मैंने चार बार पूछा घर गई कि नहीं गई आपने कहा नहीं घर नहीं जी अब ऐ ऐसा तो आप सब भी विरोध करवा रहे हो गुरु भगवान सब क्या कहते पि पूजाते इसलिए कहते अधूरी जानकारी प आप उसको जब आप उसम कन्फर्म नहीं है तो उस चीज के लिए क्यों आ कर के लड़ रहे हैं आपकी हर चीज आपको छोड़नी पड़ रही

02:25:26:25 है ना मैं रहा इतनी सी बात है पापी आत्मा कैसे टिक जाए स गीता की वो चीज मानोगे जो वेद विरुद्ध होंगी कि नहीं मानोगे देखो कितना दिक्कत है इसको कहते हमसे पूछे कोई हमारा सिद्धांत सटा सिद्धांत बताएंगे यह है सिद्धांत नता व्यक्ति बोलने में घबराता है अरे कैसे सिद्धांत है तुम्हारे वेद शस्त्र सब परमात्मा दिखा इ गलत इन्ह गलत हम क्यों मानेंगे इनसे ही तो परमात्मा की दस्ता वेद को क्यों मानेंगे बताओ मैं आपसे ये पूछ रहा हूं मैंने जो

02:26:15:12 पूछा मैंने जो पूछा है उसका जवाब दो गीता की ऐसी बात मानोगे वेदों के बाहर होगी वेदों से मेल नहीं खा रही होगी वेदों का विरोध कर रही होगी कि नहीं मानोगे जो परमात्मा का जो रास्ता बता र वो सारे वेद मान्य होंगे चाहे वो वेद हो उपनिषद हो या गीता हो दे पर मैंने आपसे क्वेश्चन क्या पूछा है भाई साहब क्या क्वेश्चन पूछा बाहर और अंदर सुना बाहर और अंदर से क्या मतलब है परमात्मा की

02:26:52:28 आपसे मैं पूछ रहा हूं गीता की जो बात वेद से मैच नहीं खाएगी वो आप मानते हो कि नहीं मानते हो गीता की बात वेदों से मैच नहीं ई व्यक्ति को और तलवार की धार प रहना पड़ता है ये भाई लवाई नी बता तो दिया मैंने आपके लिए सारा बता दिया जो परमात्मा की रस्ता बता सारे वेद मान्य है वो आप बहुत कुछ होता अपने सितो की रक्षा करने नहीं आए हो सब पहले तोय समझ लो क्योंकि आपको आपके सिद्धांत क्लियर नहीं है जिसको जिसके सिद्धांत क्लियर होते हैं वो अपने सिद्धांत बोलता है ना भाई हा अगर गीता से और वेद की बात है अगर गीता की कोई बात वेद का विरोध करेगी उसको नहीं मानेंगे यह सिद्धांत है मगर आपको अपने सिद्धांतों की रक्षा नहीं करनी है सिद्धांतों की रक्षा तो तब करोगे जब सिद्धांत पता होंगे तो आपको य क्या करना है पता है किसी तरीके से रामपाल का विरोध करने वाले का विरोध करना है भले ही उ विरोध क्यों ना करना पड़ जाए नहीं सारी आत्मा परमिता परमात्मा की है कोई किसी का विरोध नहीं है रजत प्रेम का म पर प्रेम के पाय प्रेम

02:28:09:27 से गमा गीता की लो अब भाई साब जाइए आप ठीक है हो गया बहुत हो गया जा ठीक है शिवा को धर्म स्थापना से कोई लेना देना नहीं है ना उची करने आते ने चले ग ह कोई बात सीधी सीधी बोलनी नहीं है कि यह सिद्धांत है हमारा शंकर सिंह को

02:28:44:27 लो सिधांत सिद्धांत ही अधूरे इनके से चर्चा करेंगे किस बात पर चर्चा करेंगे पले परमात्मा साकार ही है अब बताने लगे कि नहीं परमात्मा पहले निराकार फिर साकार होगा और इनका विरोध बात कि नहीं यह लोग निराकार कहते हैं अरे हम भी तो वही कहते निर्ग निराकार जो अपने आप को व्यक्त करते हैं पाच रूपों में हा भैया शंकर सिंह जी बोलिए मेरी आवाज आ रही है हा सीधे बैठ के बात करिए भाई साब मैं सीध नहीं बैठ हा सीधे नहीं बैठे ठीक है बोलिए आप य भैया से जब क्वेश्चन कर रहे थे आपका जो तर्जुमा जो है मतलब वो गलत आप इनको गाइड कर रहे हो मतलब व बोल नहीं पा रहे इसका मतलब आप य मत य नहीं उनको आप अपनी बात बोलिए भाई साब आप वहा पर जवाब दे रहे हैं उनसे पूछे हुए प्रश्न का उनका जवाब यह है जैसा आप बता रहे हो ना परमात्मा के घर जाकर पाप की जो लाइन बता रहे थे आप जीने की रा से अभी

02:30:00:03 तो प्रश् चल रहा था अभी प्रश्न ये चल रहा था की गीता की वो बात मानोगे जो वेद से मैच नहीं खाएगी या नहीं मानोगे वेद गीता और मब जैसे उनका सारांश है गीता जी चार चारों वेद का भाई साहब मैंने आपसे सवाल क्या बो गीता जी के अंदर वेद की बात नहीं मिलेगी तो उसको नहीं मानेंगे हम नहीं मानेंगे तो ऐसे बोलो ना क्यों लंबा खीच रहे हो लंबा क खच रहे बोल रहे दो तीन बात और फालतू बोली फल नहीं बोली आप लाइन की बता रहे हो दरबार में जाके मालि के दरब में भी लिखा हुआ है तीसरे अध्याय के पाच से आठ में श्लोक की व्याख्या करते समय आपके जो जेल धाम निवासी रामपाल जी हैं उन्होंने भी इस बात को माना है कि जो गीता की जो बात वेद से मैच नहीं खाएगी वह स्वीकार नहीं है ठीक है बिल्कुल नहीं है अब यह बताइए यह पितृ पूजा का जो खंडन है यह गीता के अनुसार किया है कि नहीं रामपाल जी

02:31:15:27 ने कौन सा पि पूजा पित पूजा के लिए मना करते हैं ना गीता में बिल्कुल मना करते हैं पि की पूजा करेंगे पित लोक में फिर उनके नौकर लगेंगे फिर हा ठीक है तो करते हो आप आप करते होंगे अरे भाई जब आगे जो बात पूछ रहा वो करो अगर य मस्करा गिरी करने आए हो तो निकाल दिया जाएगा बहुत जल्दी निकालने से कोई फायदा नहीं पालतू बात मत करना य पर मस्कारा गिरी करोगे हटा दिया जाएगा

02:31:59:07 जो चर्चा करनी है वो तो नहीं बाबू राम बोलो अच्छा बाबूराम बड़े प्यारे हैं अब बाबूराम से मैं बात करूंगा जी सर सबको नमस्ते नमस्ते नमस्ते आज क्या लाए हो नया बाबूराम भैया आज जो हमारे शिवांश भैया का टॉपिक है उसी पर बात करेंगे चसे करिए फिर चलो बोलो नहीं मैं टीआर पहाड़ी जी से भी बात कर सकता हूं ऐसा कोई दिक्कत नहीं है अरे अभी तुम बोलो जो बोलने आए वो बोलो अभी हम यह बात करने आए हैं कि गरुड़ पुराण के आधार पर आपने जो टॉपिक रखे हैं कि नरक मार्ग नरक लोक में जाने के लिए और स्वर्ग लोक में जाने के लिए मक्ष प्राप्ति के लिए इसके बारे में तो हम ये जानना चाहते हैं कि क्या आप लोग ने लोगों को जब गरुड़ पुराण का पाठ सुनाते हैं तो क्या बताते हैं कि यह मार्ग मोक्ष मार्ग है और यह मार्ग नरक मार्ग है पहले एक बात कान खुल कर के सुनो कि हमारा

02:33:14:08 जो धर्म है वो केवल गरुण पुराण से प्रतिपादित नहीं होता है जी समझ गए जी तो आप हमें डेडलाइन नहीं दे सकते कि गरुण पुराण के आधार पर ही बात होगी बात होगी सनातन धर्म के आधार पर जिसमें की वेद है रामायण है गीता है 18 महापुराण है और भी बहुत सारे ग्रंथ है ठीक है अब आप अब आप अपनी बात अब आप अपनी बात बताइए कि आपकी समस्या क्या है वो बताइए हमारा समस्या यह है कि आपने अपने हेडिंग में लिखे हैं कि संत रामपाल जी महाराज के वंशज लोग वो लोग मोक्ष प्राप्ति नहीं किए पितृ लोक में गए इस प्रकार से आपने हेडिंग में लिखे हैं तो हम इसी को जानना चाहते हैं कि आप लोगों ने जो पित पूजा करवाते हैं तो आपके भी वंशज तो पित लोक में गए होंगे मोक्ष प्राप्ति नहीं किए प तो ये बताओ यह कहा लिखा है कि पितृ लोक में प पित्रों की पूजा करने से पितृ लोक प्राप्त होगा यह बताओ गीता अध्याय न श्लोक नंबर 25 में लिखा हुआ है ठीक है अब मैंने तुमसे पूछूंगा गीता की वो बात नगे जो वेद से मैच नहीं खाएगी

02:34:23:27 देखिए गीता में दो प्रकार का ज्ञान है देखा देखा मेरे को सीधी बात बोलो जो बात वेद से मैच नहीं खाएगी वो मानोगे कि नहीं दोनों ज्ञान अपने अपने लेवल में अच्छे हैं अपने अपने लेवल में है मैं तुमसे पूछ रहा हूं जो बात वेद से मैच नहीं खाएगी वो मानने की है कि नहीं अभी आपने बोला कि गरुड़ पुराण का ज्ञान हम पूरा नहीं मानते हैं तो जो ज्ञान अपने अपने लिए अपने अपने लेवल में अच्छा है आप बोले थे आपने अभी बोले ण का पूरा नहीं मानते आपने अभी बोले थे कि गरुड़ पुराण का जञा केवल गरुण पुराण से हमारा धर्म नहीं है जब गरुड़ पुराण की कोई एक बात लिखी मिलेगी जो हमारे सिद्धांतों को क्रॉस कर रही होगी तो हम सभी धर्म ग्रंथों से उसका मिलान करेंगे और फिर सामंजस की शिक्षा मत पुराण में ये भी लिखा है कि स्रोत स्मा धर्म का पालन करना समस्त सुति स्मति शास्त्रों में सामंजस्य बिठा करके उसका ज्ञान निकालना वो साधु समत धर्म है ऐसा थोड़ी ना करें ग पुराण की कोई एक बात आ गई तो शिव पुराण में कुछ भी लिखा हो अथर्ववेद में कुछ भी लिखा हो और सारे 17 महापुराण में कोई भी लिखा हो वो गरु पुराण की उस बात का जो अर्थ आपके तत्वम ये जेलम निवासी जी बता रहे बस उनकी बात

02:35:38:28 मान ली ऐसे नहीं दूसरों से भी मिलान करेंगे आप अपने अभी सुनिए अभी टॉपिक से भटक मत अभी हम यह कह रहे हैं कि जो भगवत गीता है उसके अनुसार यह कहा गया है कि पित्रों की पूजा करने वाले पित लोग जाते हैं जी ठीक है जी और अगर मैंने आपको दिखा दिया कि पितरों की पूजा करने वाले कबीर के लोग जाते हैं तो कबीर की पूजा करना बंद कर दोगे अभी हम गरु पुराण पर बात करने इसको गरु पुराण से भी दिखा सकते हैं य हमारे पास गरु पुराण है देख लीजिए अरे मेरे भाई मैं आपसे पूछ रहा हूं कि आप पुराण की गीता की वो बातें मानोगे जो वेद के बाहर होंगी कि नहीं मानोगे हम अभी गरु पुराण पर बात करेंगे अगर बात करना हो तो आपसे टी बात करा दीजिए हम से बा पले आप पहले गरुण पुराण की बात बता दीजिए चलिए

02:36:40:04 बता बोलिए आप बहुत दिनों से गरुण प्रण लेकर के आते हैं मगर अधूरे में वापस लौट जाते ये गरुण पुराण का सवा अध्याय खोलने वाले हैं गरुण जी और विष्णु जी की बात भगवान विष्णु की बातो का अ बहुत अध्याय है सर कहे आप लोग टेंशन में पड़े हैं अरे ठीक है ल लेने दो भाई शेर का बच्चा एक ही अच्छा बोलो मैं भी मैं भी तो आप ही लोगों के बीच में पले पस के बड़े होकर तैयार हुए हैं क्या हमारा अधिकार नहीं बनता है हमारा प्रन म अपना काम करो कोई बात कोई बात नहीं जी

02:37:31:01 सर हम आते हैं सर यहां पर अध्याय पच अध्याय पाचवा अध्याय है सर पाचवा अध्याय में लोक नंबर श्लोक नंबर 32 एक मिनट पांचवा अध्याय श्लोक नंबर 32

02:38:10:01 जी बोलो इसमें लिखा हुआ है कि मृतक के एकादश में भोजन करने वाला कुत्ता बनता है ग्राम यज्ञ के यज्ञ करने वाले देव लक ब्राह्मण को कुक योनियों में प्राप्त होते हैं एक मिनट रुको जी लोक नंबर 32 पांचवा अध्याय जी यहां तो यह नहीं है

02:38:46:04 भाई यहां परा अन्य की बात हो रही है सरा प्राण नहीं खाते ना वो जो श्र जो करते हैं व अरे यहां कहां लिखा है कुत्ते की योनि वगैरा यहां तो 32 नंबर में क्या लिखा है मैं बता दूं आपको जी 32 नंबर में लिखा है इसके पश्चात श्रद्धा ने काम को लक्ष्मी ने दर्प को धृति ने नियम को दृष्टि ने संतोष को पुष्टि ने लोभ को मेदा ने श्रुत को क्रिया ने दंड को लय तथा विनय को पुत्र रूपेण जन्म दिया बुद्धि का पुत्र था बोध इसी प्रकार कीर्ति का पुत्र था यश धर्म की 13 पत्नियों से इस प्रकार से 16 पुत्र उत्पन्न हुए धर्म पुत्र काम की पत्नी थी रति काम का पुत्र था हर्ष इसके पश्चात दक्ष प्रजापति ने अश्वमेध यज्ञ का प्रारंभ किया जिसमें पुत्री सती तथा जा माता महादेव को छोड़कर सभी पुत्रियों तथा ज माता को आमंत्रित किया था ये ज माता निमंत्रित होने के कारण अपनी पत्नियों के साथ यज्ञ में आए यद्यपि सति को निमंत्रण प्राप्त नहीं था तताप यह उसकी उपेक्षा किए बिना यज्ञ देखने आई इससे

02:40:01:10 दक्ष ने उनका अपमान किया इसमें कहां है सर पांचवा अध्याय में लिखा है पापियों का किन किन योनियों में जन्म होता है इसके बारे में दिया है देखिए विष सूची से देखिए तो विष सूची से आप अपना गरुण पुराण दिखाइए कौन सा है पहले हमारा ग्रम पुराण है प्रकाशक सावित्री ठाकुर प्रकाशन वाराणसी और इसका वाराणसी सर्वाधिकार प्रकाशन मुद्रक सावित्री प्रिंटिंग प्रेस

02:40:40:12 वाराणसी इसमें पांचवा पाचवा जो पांचवा अध्याय उस जी उसम खंड देखो खंड कौन सा इसमें लिखा पंचम अध्याय इसमें विष इसमें लिखा है कि पापियों का किन किन योनियों में जन्म होता है अरे मेरे भाई खंड कौन सा है पूर्व खंड है उत्तर खंड है इसमें तो सर खंड नहीं दिया गया सिर्फ अध्याय ही दे दिया गया है डायरेक्ट हा तो पांचवा खंड वो नहीं है नाम बताओ खंड वो अध्याय का नाम क्या बोल हो पापियों का किन किन योनियों में जन्म होता है

02:41:36:16 हमें नहीं मिल रहा तो ऐसे पढ़ सकते हैं ऐसे मैं पढ़ सकता हूं पापियों का किन किन योनियों में जन्म होता है ही नहीं इसमें तो पढ़िए पढ़िए क्या लिखा ये आपके प्रश्न संख्या कौन सी है ये बताओ हमारे पृष्ठ संख्या है 65 65 यानी शुरू का ही है ज्यादा आगे का नहीं है जी सर अरे यहां प की बात करी है इसमें हो गया पढ़ देते हैं जैसा आप लोगों को इच्छा होहुआ कोई दिक्कत नहीं हमको इस पढ़ो मृतक के मृतक के एकादश में भोजन करने वाला कुत्ता होता है ग्राम यज्ञ करने वाला देवल ब्राह्मण को कुकुट योनियों में प्राप्त होते हैं य ग्राम ञ क्या बोला क्या ग्राम ग्राम यज्ञ करने वाले

02:42:42:10 देवलकर उसकी क्या है संस्कृत पढ़ रहे सर 3 का मृत मृत इसक का एकादश त बुजन स्वाभि जायते ल देवा लो को पपयो योनि कुक संज काम इसमें इसका हिंदी में दिया है कि मृतक के एकादश में भोजन करने वाला कुत्ता होता है ग्राम यग ग्राम यज करने वाला देवलकर को कुकुट योनि प्राप्त होती है धन के लिए हां सर और कुछ पढ़ना है इसमें बहुत सारे नरक के बारे में दिया गया है सर यदि आप कहे तो पढ़ सकते हैं यदि नहीं कहेंगे कोई बात नहीं नहीं मतलब कुल मिलाकर के तुम यहां से खंडन कर रहे हो ना पित पित पूजा का जी सर जी सर पहले तो मैं बता दूं कि यदि कोई व्यक्ति केवल ये जो श्राद्ध कर्म है इन्हीं पर निर्भर होकर के भोजन इत्यादि करेगा कि वोह कुछ और नहीं करेगा वह केवल श्राद्ध कर्मों का ही खाएगा तो उसके

02:43:57:15 लिए क्या व्यवस्था होगी अच्छा इसमें और चीज इस होते हुए भी क्षत्रीय कुल में उत्पन्न होते हुए भी यदि कोई रक्षा का कार्य नहीं करेगा और वहां जाकर के केवल उसी उसी खाने के आशित हो जाएगा तो उसकी क्या गति होगी भाई तो मृतक के गवे दिन का भोजन करना ये तो ये तो मेरा पक्ष रहा अब मैं तुम्हें तुम्हारे तरीके से ही बंद करता हूं पुराण और गीता की वो बात जो वेद से मैच नहीं खाएगी वो मानोगे कि नहीं मानोगे अच्छा सर इसको आप नहीं मानते हैं ना सर अरे मैं तो मानता हूं मैंने तुम्हें बता दिया ना मैंने तुम्हें बता दिया यहां प स्वतंत्र यहां पे ऐसे स्वतंत्र यज्ञों में ना खाने की अनुष्ठानों में ना खाने की बात हो रही है जिन अनुष्ठानों को एक तो पुत्र पूजा को ही ब्रह्म के रूप में मान लिया यही हमारे मोक्ष देंगे पितृ पूजा को मोक्ष रूपी मान लिया कि ये हमारा ये पित को ब्रह्म के रूप में समझ लिया ब्रह्म से स्वतंत्र सत्ता स्वीकार कर ली और दूसरा ये कि कोई व्यक्ति जो कि क्षत्रिय कुल में उत्पन्न है वैश्य कुल में उत्पन्न है वो अपनी वृत्ति का आलंबन ना लेकर के और जो है केवल जाकर के वहां पर भोजन खा कर के जिंदा है उसको ऐसी ऐसी नी मिलेगी ये तो ये हो गया अब तुम्हे मेरा

02:45:12:15 अर्थ मानने है नहीं अच्छा सर इस पर हम ये क रहे हैं सर थोड़ सुन लीजिए सुन लीजिए क्या है कि हर जनता को यह प्रश्न जानना उचित है कि अगर ये चीज अगर पुराण में हमारे लिखा है कि इसको करने से ऐसे मिलता है तो आप लोगों का भी एक फर्ज बनता है कि हमें जनता को सही दिशा दे सही दिशा दे तो रहा हूं ऐसा मत करो कि श्राद्ध वो जो जो श्राद्ध का जो भोजन है केवल उसी पर निर्भर हो जाओ यह बताया जा रहा है अगर आपके दो हाथ दिए हैं दो पैर दिए हैं तो आप अपना काम करके कमाओ और जो जिसकी वृति है वो जो जिसकी वृत्ति है वो वहा जाकर के उससे भोजन प्राप्त करेगा अब क्यों ऐसा कहना पड़ रहा है इसको समझो क्यों ऐसा कहना पड़ रहा है इसको समझो यह है गरुण पुराण जी ठीक है जी रुण पुराण का

02:46:13:19 एक 133 वा अध्याय नहीं अध्याय जी जी जी जी जी जी जी ठीक है जी जी क्या है ना बाबू भाई जी हां हम केवल शास्त्र के किसी एक हिस्से से प्रमाण नहीं मान लेंगे हम उसका मिलान करेंगे कई हिस्सों से तब ऐसी बात निकालनी पड़ेगी जिसमें की किसी का भी खंडन ना हो ना तो इस बात का खंडन हो और ना ही दूसरी बात का खंडन हो समझ गए समझ गए ना जी जी तो अच्छा एक चीज और अब सुनो मैंने ये बात क्यों कही रुको मैंने ये बात क्यों कही क्योंकि अगर हम यह नहीं मानेंगे कि वहां श्राद्ध का किसी ने अगर खा ही लिया तो नरक गामी हो गया तो जहां पर श्राद्ध की बढ़ाई हो रही है उसको हमें काटना पड़ेगा फिर जी जहां श्राद्ध की बढ़ाई हो रही है उसको हमें काटना पड़ेगा अच्छा परमात्मा जो मोक्ष हमें देता है वो हमारे सारे पाप कर्मों को मिटा देता है ना मुक्त कर देता है ना पाप कर्मों से अच्छा थोड़ा इसमें और समझ लेते हैं सर इस थो सम जवाब देने आया तो थोड़ा और समझ लो अभी कह रहे थे

02:47:28:24 जनता जानना चाहती है बताइए सर जनता जाना जनता जाना है समझ लेते सुनो सुनो बहुत ज्यादा उसम विस्तार की आवश्यकता नहीं है जी उसम बहुत ज्यादा विस्तार की आवश्यकता नहीं मैं आपको सार रूप में बात बता दे रहा हूं वो सुन लीजिए जी की पहली बात तो मैं आपको शास्त्र से प्रमाण दे चुका हूं जब दो शास्त्र में दो अलग अलग जगह दूसरी बातें हो रही होती है तो हमें दोनों को मानना पड़ेगा और या फिर ऐसा अर्थ निकालना पड़ेगा जिसमें दोनों का मान रह जाए समझ गए समझ गए कि नहीं समझे अच्छा दूसरी बात यह है कि आप खुद कहते हैं अब यह तो रही मेरी बात कि मैं तो दोनों का ऐसा अर्थ निकालू जिसम दोनों जगह का मान रह जाए मैं आपसे पूछ रहा हूं कि जब परमात्मा जो मोक्ष देता है वो हम हमारे सारे पाप कर्मों से मुक्त कर सकता है कि नहीं कर सकता है कर सकता है कर सकता है यानी मोक्ष का मतलब होता है पाप कर्मों से मुक्ति जी है ना जी जी जी ठीक अच्छा सर इसमें और थोड़ा समझते हैं अरे भाई मुझे दिखाने तो दो ना जितनी बार

02:48:43:25 दिखाने चलता हूं फिर थोड़ा और समझ लो तो ये गरुड़ पुराण के बारे में जनता समझेगी सर आप लोग कुछ बताएंगे गरुण पुराण से ही तो दिखा रहा हूं ये देखो श्रा विधि वर्णन दिख रहा है जी श्राद विधि वर्णन दिख रहा है जी जी दिख रहा पढ़ दीजिए कि पाप का नाश हो जाने से मुक्ति होती है पाप से मुक्त हो जाने पर मुक्ति होती है इसमें पहली लाइन है पाप का नाश करने वाला श्राद्ध पहली लाइन जी पाप का नाश करने वाला श्राद्ध विधि जी ठीक है पढ़ पढ़िए सर

02:49:32:28 पढ़िए सर्व पाप नाश करने वाली श्राद्ध विधि अमावस्या अष्ट का वृद्धि वो विधि बताई गई है फिर आगे उसका कोई औ चित नहीं है मगर किसका नाश करती है सर्व पाप नाश क्या करती है जी सर्व पाप सर्व पाप नाश तो अब क्योंकि इसी ग्रंथ में सर्व पाप नाश भी हो रहा है श्राद्ध से और आपके अनुसार मैंने तो खैर अभी देखा भी नहीं आपके अनुसार इसी ग्रंथ में कहीं पर श्राद का खंडन है तो हमें ये निकालना पड़ेगा अर्थ कि इसका भी मान रह जाए अब अगर आपसा अगर आप ऐसा अर्थ नहीं निकालते बाबू जी तो हम आपको और परम प्रमाण दे देते हैं परम प्रमाण आपके गीता की में उन्होंने लिखा है कि

02:50:20:15 जो बात गीता की पुराणों की वेद से मैच नहीं खाएगी वो बात मान्य नहीं है

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02:50:26:25 इसको मानते हो ना तत्वदर्शी की इस बात को जो हमारे गुरु जी लिखे होंगे वो तो पूरा बात मानेंगे हम अरे भाई साहब मैं पूछ रहा हूं गीता और पुराण की जो बात वेद से मैच नहीं खाएगी वो बात आप मानोगे कि नहीं मानोगे उसको तो हम शुरु में बता दिए कि गीता में दो प्रकार का ज्ञान है भाई साहब मैं पूछ रहा हूं वेद से जो चीज मैच खाएगी कि नहीं खाएगी उसको मानते हो प्रमाण के रूप में कि नहीं मानते हो करने योग्य है कि नहीं हम गीता को भी बांधते हैं वेद को भी बांधते हैं वो लोग अपने अपने य पूछ रहा हूं कि गीता की जो बात वेद से मैच नहीं खाएगी उसको आप मानोगे कि हां इसे हमें करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए देखिए वो अपने स्तर में सही है हम उसको अपने उके स्तर से कह रहा हू किसके स्तर से तुम उस बात को करोगे कि नहीं जो गीता करने को कह रही है और वो वेद में नहीं है गीता में नहीं गीता में दो प्रकार का ज्ञान है शुरू में बता दिया आपको अरे यार देख रहे हो मैं तुमसे सवाल पूछ रहा हूं क्या कि कितने प्रकार का ज्ञान है मैं आपसे पूछ रहा हूं बाबू बाबू भाई कि गीता की जो बात वेद से

02:51:41:25 मैच नहीं खाएगी वो अच्छी है बुरी है सही बोला है नहीं बोला है वो बात जाने दो तुम अगर वो वेद विरोध कर रही होगी तो तो क्या तुम उस बात को करोगे जैसे मान लो वह कह रहे हैं कि फुटबॉल खेलो जी मान लो वो कह रहे हैं कि फुटबॉल खेलो वेद में लिखा है मत खेलो तो यह जो फुटबॉल खेलने वाली बात है गीता जी की वो उन्होंने अच्छे के लिए कही होगी अपने हिसाब से मगर वह वेद से मैच नहीं खा रही तो क्या तुम

02:52:14:14 मानोगे देखिए बड़ी शम आती है इसीलिए दिक्कत है जाओ चलो हटो यहां से भाई जी जय श्री राम जय श्री राम ये गरुड़ पुराण का जो प्रश्न कर रहे थे वो पांचवे अध्याय में है हमें दिख नहीं रहा पांचवे में वो प्रेत कल्प में जाइए प्रेत कल्प में है तो मैं बता दूं इसका लिखा है कि ब्रह्म हत्या करने वाला उसको पाप मिलेगा गो हत्या करने वाला बालक ये कह रहे थे सही उसम लिखा एकाद का जो भोजन लिखा हुआ है इसलिए नहीं करना कौन सा बताया आपने क्या कल्प का नाम बताया प्रेत कल्प जो 16 अध्याय में प्रेत कल्प दिया है महर्षि वेदव्यास जी ने प्रेत कल्प है 16 अध्याय में 16 अध्याय में य पर लिखा विष्णु ध्यान वर्णन 16 शुरु के 16 अध्याय प्रेत क पर प्रेत कल्प हो प्रेत कल्प है 16 अध्याय में जहां पर म बैत नदी का वर्णन हो 21 28 प्रधान 21 प्रधान नर कों का वर्णन होगा 16 पयों का वर्णन होगा नरक का वर्णन प्रश्चित का

02:53:29:15 वर्णन ब्राह्मण आदि वर्णों का धर्म पालन प्रश्चित आठों निधियों के फल का वर्णन भुवन कोष का वर्णन लावत आदि वर्षों का वर्णन नरक का वर्णन यही नहीं र उसम यह है ना कि आपको उस पांचवा अध्याय में आपको आप अने पहले जन्म में ये ये पाप किए होंगे तो अगले जन्म में आपको ये ये चिन्ह मिलेंगे बोला जैसे बाल हत्यारा करने वाला कुबड़े को लात मारने वाला लंगड़ा उसम सब दिया हुआ है और उसके बाद एकादश का एकादश का ये है कि जब तक सपन सराध ना हो जाए जब तक रवी ना हो जाए जो उस अशुद्ध भोजन को करता है बोला तो कुत्ता होता है ब्राह्मण को एकादश का भोजन नहीं करना चाहिए बोलो जब तक स पिंडन श्राद ना हो जाए जब सिंडी करण होता है पहले तीन पिंड जो है य पितामह य पुरुष है तो पितामह पर पितामह वृद्ध पर पितामह और एक प्रेत का पिंड बनता है जब तक यह विधि ना हो जाए कर्मकांड के द्वारा तब तक उनके यहां बोला अशुद्ध में भोजन नहीं करना चाहिए फ वो ग्राम वो कह रहा था हवन तो जब तक कहा दिन पूर्ण ना हो यदि कोई उससे पहले धन के याचक में लोभ में हवन करा लेता है यजमान भी नरक का अधिकारी है

02:54:44:15 और वो ब्राह्मण भी नरक का अधिकारी है उसमें वा क्या बात है आप इसलिए समझाना था आपको क्या और एक इनसे मेरी बड़ी वो परसों में वो एमपी फास्ट देख रहा था वहां पर कोई अमित शर्मा नाम का एक व्यक्ति है बड़ी गाली दे रहा था वो मुझे बाबूराम से कहे कि ये म संस्कार है आपके कि वो वो एमपी फास्ट में सनातन हों को ठीक है अपने आप अपनी बात रखी अपनी सोच रखिए वो कह रहा था हरिद्वार से एक किताब छपी है और ऐसा लिखा है कि ब्रह्मा विष्णु जो है कबीर दास की जो पैर की नोक के बराबर है अब ऐसी ऐसी बातें आप कह रहे हो यह कहां का मतलब की न्याय है जब तुम इतने मतलब कहेंगे आपको कुछ ज्ञान का संस्कृत पढ़ रहे थे अभी जिनको संस्कृत का अ का ब नहीं है संस्कृत आप एक श्लोक शुद्ध नहीं बोल पा रहे हो क्या हिंदी में तो कौन नहीं पढ़ सकता बाबूराम जी हिंदी में तो पांचवी क्लास का बच्चा को अच्छी इमला हमारे य पले इमला लिखते थे हम लोग पांचवी छठवीं में गुरुजी बोलते थे इमला लिखते थे राइटिंग सुधारने आपकी बात का जवाब दे दिया है मैंने मुझे तो वो मिल ही नहीं रहा था ना जो मैं इनके बात का समझ सक क्या है वहा पर मेरे को स सूरज प्रकाश जी से बात करने

02:56:00:16 दीजिए आप उनसे बात मत करिए बाबू हमसे बात करिए आपको यह बताना है कि गीता और पुराण की वह बातें जो वेद से मैच नहीं खाएगी वह आप मानोगे कि नहीं देखिए सूरज प्रका जी ऐ है एक मिनट बाब मिनट सूरज प्रकाश जी हम लोग इनको जब तक करेंगे ना तब तक ये लोग इनके इनकी असलियत इनके सामने नहीं आएगी जनता के सामने नहीं आएगी तो मेरे वाला तरीका ही इनके लिए सही है बिल्कुल 100% जब इनके पास तो कुछ है ही नहीं सारा झूठ और मन गंत है हम लोग कितना भी इनको प्रमाण दे दे समीक्षा दे दे व्याख्या दे दे प्रमाण यही ग्रंथों से दे दे इनको समझ में नहीं आएगा इनको समझ में तब आएगा जब उनकी गरमी गीता की से देंगे प्रमाण हां तो भाई बाबू बताओ जो बात बता रहे की वो बात जो वेदों से मैच नहीं खाएगी तो वो आपको मान्य होगी कि नहीं होगी अभी सूरज प्रकाश जी जो बात बताया क्या आप उसे संतुष्ट बाबू अब मैं लास्ट बार तुमसे पूछ रहा हूं एक बार और गीता और पुराण की व बात जो मेद से मैच नहीं खाएगी उसको व मानोगे या नहीं मानोगे मैं आपके टॉपिक प बात करने आया हूं गण पर आप

02:57:17:04 जाइए मैं इन को गरुड़ पुराण काने शुरू से गरुड़ पुराण पढ़ा है वो क्या इन्होने गरुड़ पुराण को शुरू से देखा है गरुड़ पुराण को अरे कुछ नहीं हैय ये कौवा पुराण पढ़े खाली हिंदी पढ़ लिया गरुड़ पुराण में शुरू से सांग पांग को पढ़ा है कुछ एकांकी शब्दों को पढ़ा है इन्होंने टी भोजन ब्राह्मण को कहां कराते है इनको इतना तक इनको ज्ञान नहीं है और य आ ग यहा पर ज्ञान है प्रेत कर्म का प्रेत का कितना बड़ा विध विधान बो सी बात वेद से खंडित कर रहा हूं ना ये देखिए हम तोय क ब्राह्मण कौन है बोलो ब्राह्मण कौन है हमारी भाषा में जो सतचंडी सिंडी और कुष कंडी को जानने वाला हो वो पूर्ण ब्राह्मण है सतचंडी सिंडी और कुस कंडी यज्ञ में कुस कंडी मा भगवती का सतचंडी का विधान जानने वाला हो और सपिंड श्रा को जानने वाला हो वही पूर्ण ब्राह्मण है जी ये देखिए मैं मैं मैं जो है ना इनको वो दे रहा था क्या

02:58:24:18 कि पित्रों की पूजा करने से व्यक्ति कवि के पास पहुंच रहा है अब बताइए किसकी बात मानोगे 183 63 अथर्ववेद पहली बात तो यह लास्ट के जो दो सूक्त अवेद के दोनों पूरे पूरे सूक्त पित पूजा पही है पित पूजा प 16 अध्याय प्रीत मंजरी में प्रीत कल्प है ना 16 अध स अध्याय में फल है महातम है जो कह रहे थे 16 अध्याय में तत्व ज्ञान बताया गया है लास्ट में गरुड़ पुराण की जी हा नहीं अ दिखा रहा हूं यह देख लेना भाई आप जो पिंड दान से भाग रहे हो वो पित पूजा से भाग रहे हो गीता और पुराण बा मत मानो देखिए हमारे लिए गीता और जो पुराण की जो बातें उनका सही अर्थ हम लोगों ने निकाल लिया हम लोग उनको मान रहे हैं मगर आपको वो अर्थ मानना नहीं है एक मिनट आपको वो अर्थ मानना नहीं है तो इसका मतलब है कि गीता और पुराण का अर्थ बताया जा रहा है कि भैया पिंड दान व पितृ पूजा मत करो मगर वेद कह रहा है कि जो पित पूजा करेगा वो कवि के पास जाएगा लिखा

02:59:39:22 है पु पुन नरका तारत पुन नाम नरका रते इत पुत्र जो अपने पित्रों को पुन नामक नरक से तारता है उसी को पुत्र की संज्ञा दी जाती है ये देखिए इसमें कवि शब्द आपको दिखाई दे रहा है कि कवि यह जो ये ये देखिए कवि जी जी दिख र क नाम ठीक है रहा है बिल्कुल ब की बात हो रही है कवि की बात हो रही है ये देखिए पित पम क

03:00:20:21 प्राप्ति अब देखिए नीचे क्या लिखा है जो कवि यानी कबीर इनका कबीर इनके अनुसार बात कर रहे तो इनके अनुसार बात करेंगे तो जो कबीर प्रकट अथवा श्रेष्ठ बुद्धि वाला है यानी ईश्वर है जो और हमारे हिसाब से कवि यानी सर्वज्ञ सब कुछ जानने वाला जो ईश्वर है अपनी महिमा से स्तुति करने वाले पित्रों को अंतरिक्ष लोक में धारण करता है यह पि पूजा से धारण हो रहा है पि पित्र कहां पहुंच रहे हैं कवि धारण कर रहा है अपने पास यहां पर उसके लोग को बोला गया है कि वो उसके पास वो अपने पास धारण करता है कवि तो अब जो है आज से आप लोग पित्र पूजा शुरू कर देना क्योंकि गीता और पुराण की वो बातें मान्य नहीं है जो वेदों से मैच नहीं खाएगी इस बात को हम लोग आपको दिखा देते हैं आपकी गरमा गीता की से गरमा गीता की खोल दीजिए भैया ये इनके बुक में है या हमारी बुक में है मैं ये कन्फ्यूज हूं थोड़ा ये अथर्ववेद है अथर्ववेद में अथर्ववेद में पित्रों के लिए जो यज्ञ किया जाएगा पित्रों की जो पूजा की जाएगी

03:01:35:24 उससे पित पि पहुंचेंगे मुक्ति को प्राप्त करेंगे तृप्त होंगे वो बिल्कुल तृप्त तर्पण का मतलब ही तृप्त करना है पितरों को तीसरा अध्याय खोलिए तीसरा ज्यादा आगे नहीं जाना है तीसरा है ना इसमें वो चल रहा है वो अपन को जाना है पांच में से आठवे श्लोक की व्याख्या की है अथर्ववेद में तो पितरों का जो भाग है वह देने की बात कर रखी है हा बिल्कुल पित मेद नाम के दो सूक्त पूरे पूरे

03:02:19:03 छोड़ दो गीता की वो बात मान लो कि वो भी काल ने कही है छोड़ दो पित पूजा को त्यागना तुरंत पकड़ लो पित पूजा काल ने कह दिया होगा भाई वेद विरुद्ध बात है य यजुर्वेद में यजुर्वेद में उनका जो भाग दिया गया बोले उसम लिखा कि बैल जिस प्रकार अपना जो वो पाके खुश होता है उसे ही हमारे पितृ गण अपना भाग पाके खुश होते हैं ये लिख रखा है उस मैं आपको पाच से आठ प आना है अपने को इससे पहले था वो शायद पाच से

03:02:57:03 आठ इसमें रुकिए सूची में देखने दीजिए रुकिए शास्त्र विधि रहित 38 नंबर पेज निकालिए ये इनकी किताब लग रही है ज्ञानवर्धक अब अब इसमें थोड़ा सा तीन से आठ में भगवान ने कहा है कि निष्पाप अर्जुन में ज्ञान तो ज्ञान को श्रेष्ठ मानते हैं योगी फसल काटने रुक जाइए रुक जाइ पढ़ने दीजिए यही कहीं लिखा होगा यदि भक्ति कर्म नहीं होते जुआ और नीचे आइए नीचे आइए रुक जाइए रुक जा रुक जा रुक जाइए ऊपर जाइए ऊपर जाइए ऊपर जाइए गीता अध्याय तीन से आ में भगवान ने कहा है कि अच्छा ये तो वही प और नीचे आइए नीचे आइए अध्याय तीन से श्लोक में आठ में क निष्काम होकर और नीचे

03:04:05:04 आइए एक मिनट एक मिनट हा ये देखि उपरोक्त गीता अध्याय तीन श्लोक छ से न तक एक स्थान पर भक्ति बताई है और यह कहा है कि गीता अध्याय [संगीत] वो आदेश नीचे जाइए थोड़ा और नीचे नीचे नीचे नीचे नीचे आप ऊपर जा रहे हैं हां एक मिनट एक मिनट फिर अध्याय ये कहा है ये सात में कहा है अध्याय ये कहा है ये शरीर त्याग कर 15 से 14 में पवित्र वेदों बोलने वाले भवा यहां नहीं है यहां नहीं है आप छठवें अध्याय प जाइए छव अध्याय प जाइए छठ में अध्याय

03:04:59:12 पहुंच ना ना इस हां ये ये ये ये गीता में दो प्रकार के ज्ञान है बस बस बस रुक जा ऊपर जाइए गीता में दो प्रकार के ज्ञान है गीता का जो ज्ञान वेदों ठीक है गीता का जो ज्ञान वेदों से नहीं खाता है उसे जो है अपने मन से बोल दिया है उससे मेल नहीं करता है वह गलत ज्ञान है पहली बात तो य जो ढंडोरा पीटते हैं ना गलत कुछ नहीं है तो यहां गलत लिखा है ये जो ढंडोरा पीटते है ना इसको नोट कर लेना चव पेज प हैय गीता का जो ज्ञान वेदों से मैच नहीं खा रहा है वह गलत ज्ञान है

03:05:49:25 ठीक है अब अगर गीता कह रही है कि पितृ पूजा से पित्रों के लोग जाएंगे और वेद कह रहे हैं कि पितृ पूजा से कहां जाएंगे कवि धारण करेंगे कवि के पास पहुंचेंगे तो किसकी बात मानोगे अब गीता की वेद की या अपने जेल धाम निवासी की चलिए खैर अब हम लाइव स्ट्रीम को बढ़ाते हैं काफी देर हो गई 7:00 बजे से कर रहे हैं बहुत आने के लिए धन्यवाद आज पंडित जी आपने भी बहुत बढ़िया चीज बताई क्योंकि मुझे तो मिल ही नहीं रहा अभी भी नहीं मिल रहा मुझे जरा ना उस जगह की किसी के पास फोटो हो तो फोटो खीच के भेजिएगा तो मैं अपने पास जो ग्रंथ है उसम मिलान कर लूंगा कहां पर है ऐसा है ना भाई जी टीका का ने भी थोड़ा अपना अपना मत दिया है ना किसी ने ज्वाला प्रसाद का है बना र था टीका काने अपने अपने भा ऐसा करना मैं बताऊ ऐसा करना उसके आगे पीछे के चैप्टर्स के नाम बता देना मैं आपको दे दूंगा हा हा वो मिल जाएगा जी मैं आपको बकुल ठीक है अच्छा तो आने के लिए सभी का धन्यवाद राजा राय जी एक बात और है इनसे सटी जोय क

03:07:05:12 राधे राधे जो ये मतलब की राधे राधे भाई जी जो ये मतलब की इतना मतलब अनाप सनाप बोलते हैं भाई जी मतलब एक भाषा की अमर्यादित होकर के नहीं इनको ज्ञान नहीं है नहीं इतना अमर्यादित भाषा थी इनकी मैं कह नहीं सकता हूं भाई जी भी आए थे पहाड़ी जी भी उन्होंने कुछ कहा फिर व भी चले गया मैं तो कमेंट करता रहा आप एक बात बताइए कुछ दिन पहले गए थेना उन लोगों के ग्रुप में र पड़ जी गया था मे आने नहीं दिया लिक आने नहीं दिया एक एक करके राजा जी आप बोल लीजिए टी आर पहाड़ी जी जी आप गए थे तीन चार दिन पहले आपने बहुत अच्छा चारचार बीच बीच में उसम आ रहे थे एक एक करके एक को चार चार प अकेले भारी पड़ रहे थे समझा रहे थे बोले गीता का मजाक बना के रखा है तुम लोगों ने बहुत अच्छा समझा रहे थे े याद है व क्या था उत्तम का उल्टा अनुत्तम होगा जब उसने उत्तम का उल्टा अनुत्तम बोला तभी मैं बोल रहा था मेरे माइंड में आ गया था कि टी आर प जी को बोलना चाहिए उत्तम का जो विलोम होगा वो अधम होगा लेकिन आपने फिर तुरंत गगल किया आपने भी वही अर्थ निकाला उत्तम का अ अदम होगा तो

03:08:20:12 वो कह रहा है हमारी बचपन से पढ़ाई लिखाई बेकार हो गई क्या उत्तम का तो अनुत्तम होता है और जब की ये ना मतलब बेसिक भाई जिस जिस डिरी से पढ़े थे ना जिस डिक्शनरी से तुम ब्रज का अर्थ जाना ले रहे हो उसी डिक्शनरी में लिखा है कि अनुत्तम का अर्थ है कि जिससे श्रेष्ठ कोई नहीं है हा बा ये बात रखी मैंने हम लोग बचपन में पढ़े थे ना तीसरी क्लास में अनुलोम विलोम याद किए थे उसमें लिखा होता है उत्तम का विलोम है अधम अधम उत्तम माने बहुत श्रेष्ठ अधम माने नीचा चच नीच भाई उनको हिंदी का ही ज्ञान नहीं है उन्होने हिंदी पढ़ ली थोड़ किताबों से देख लिया कोई पूछे उनको संस्कृत कौन सा सूत्र लगता

03:09:10:00 है दिखा देते ये लिखा है उनका आजकल उनका देखा मैंने शिवांश भाई का एक दुर्गा दुर्गा नाम की कोई की एक ली है बड़ा खंडन करी थी शिवांश भाई को बड़ी आपको एक बात बताऊ यहां पर नाम मत लिया करिए इनका इनको और पब्लिक देखेगी जा कर क्यों नाम ले रहे बता नाम मत लीजिए पर आपका भाई है हर चैनल पर शिवांश जी का भाई है हर चैनल क्या उन्होने हम आने ही नहीं दिया हमने कहा लिंक भेजो लिंक भेजो हम तो पूरी खुली छूट देते हैं पर हमने 100 बार रिक्वेस्ट की पर उन्होंने हमें बिल्कुल भी नहीं आने दिया नहीं देंगे भाई और और एक पता है क्या है एक आश्चर्य की बात है कि जैसे कुछ छोटे छोटे चैनल है मतलब सब्सक्राइबर बहुत कम है व्यू बहुत कम होते हैं तो देखने में ऐसा लगता है किय सब अलग अलग लोग है सुने ना देख के लगता है सब अलग लोग है एक दिन मैंने देखा कि जितने भी बंदे हैं वो सब आपस में मिलकर बात कर रहे हैं जसे चांडाल चौकड़ी

03:10:25:01 ला सब बैठ थे एक साथ सब एक ही हैय आया कबीर कबीर पंथ से था व रामपाल का भी खंडन करता है दाढी में आया था मगर उसने बहुत मगर उसने बहुत प्रेशन की थी आने के लिए मैं इस फस नहीं फस नहीं क्योंकि ग की बात तो एक तरफ हो गई जब ग्रंथों की बात साइड हो जाती है जब तो सामने वाले से बिल्कुल लॉजिकल केवल बात करने में बड़ा आसान ग्रंथ में क्या तोड़ मरोड़ के करेंगे य नहीं मानेंगे आता भैया मुझे कौन सा विद्या तप ज्ञानम दानम शलम गुण धूता मनुष्य

03:11:11:02 रूप गुजरे है नहीं मुझको ना भगवान का व लोक है काते कि माया पह जिनकी बुद्धि मेरी माया के द्वारा मारी हुई है वो मुझे साधारण मनुष्य समझते हैं और मैं तीनों लोगों का ईश्वर हूं इस बार ऐसा नहीं समझ पाते बोला गया ना गता भगवान बिल्कुल बिलकुल ठीक है तो अब हम लोग चर्चा को विराम देते हैं काफ ी आप 7 बजे से लगे हैं बिल्कुल आपका बहुत बहुत धन्यवाद काफी देर हो ग तीन घंटा से ऊपर हो ग बकुल बक

03:11:55:10 मेहन भाई जी मैं भी थक के आया मैं भी भागवत कथा में हूं आजकल थका हुआ हूं फिर मैंने देखा खुला हुआ था मैं फिर जाग में तो सो गया कंबल अंबल लेके जागत हो गया पुराण वक्तव्य दे रहा था तो मेरा एकदम आज मैं वही प्रसंग पर सुन रहा था वही प्रसंग पढ़ रहा था भागवत में भी भागवत में 28 प्रधान रकों का वर्णन है तो मेरे को झट से आ गया मैंने कहा थोड़ा विस्तार करो तब तक वो चला गया भाई साब एक सवाल आ रहा है कि मुसलमानों को आना चाहिए कि नहीं आना चाहिए कुंभ में एक शंकराचार्य बोल रहे हैं आना चाहिए एक शंकराचार्य बोल रहे हैं कि नहीं आना चाहिए पहली बात कि अभी हमने क्या देखा जब दो प्रमाण जो होते हैं व अलग अलग बात कर रहे होते तो हमें ऐसा अर्थ निकालना होता है जिससे कि दोनों का मान रह जाए तो अर्थ क्या होगा कि अगर कोई मुसलमान जो दवे आना चाहता है उसको नहीं आने दिया जाए और कोई श्रद्धावन है रसखान रहीम जैसा उसको आने दिया जाए सिंपल आज हो कौन द रहा हैसे मैं एक बात बता रहा दूसरी बात य है कि अगर शंकराचार्य की आपस में बात को लेकर के कोई मैच नहीं खा रही है तो उससे आपके धर्म और ब्रह्म

03:13:10:13 पर क्या अंतर आ जा रहा है भाई आध्यात्मिक दृष्टि से एक रूप में शंकराचार्य की गद्दी पर बैठे हुए हैं तो उनका धर्म ब्रह्म को लेकर के निर्णय एक है मगर उसके साथ ही साथ वो मानव देह में भी है तो उनके व्यवहारिक दृष्टि में क्या करते हो क्या मतलब दृष्टि से उनके जो वो हो सकते हैं मार्गदर्शन मार्ग का दिखाने का रास्ता अलग हो सकते हैं उससे आपके धर्म ब्रह्म पर क्या असर पड़ जा रहा है क्या धर्म की व्याख्या बदल गई कि ब्रह्म की व्याख्या बदल गई कि इसके आधार पर तुम आ गए हमारे पास क्या कौन सा शंकराचार्य सही है रिपोर्टर था रिपोर्टर था उसने कर की बात किससे हो रही है है ना ऐसे प्रश्नों का रोज नित्य प्रति हम आंसर देते हैं बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल इसमें

03:14:06:26 कोई आप अस्वस्थ है जिसकी वजह से कोर्ट में पेश नहीं हो पाए स्व हो गया पहले बीमार था ये देखिए स्व हो बर भी देख लीजिए बस बस बस बस बस बस पहली बात तो इनका बुढ़ापा देख लीजिए भैया अजर अमर अविनाशी यह तत्वदर्शी है और सुनिए कि यह पहले बीमार थे तो बीमार व्यक्ति क्यों होता है कोई जब उसने पाप कि हो वो कह रहा पले बीमार थे अब सही हो गया अरे वो बीमार नहीं गलत उन अर कास के बोल रहा है बीमार नहीं है व बीमार नहीं काल बोल रहा है में भी काल सकता है श्री कृष्ण के अंदर सकता अंदर सकता बताइ

03:15:05:03 आपसे वैसे जो काल से प्रभावित तो हो सकता है ईश्वर यह हमने पिछले अपने लाइव में सिद्ध किया था कि जब कोई किसी को श्राप देता है तो इनकी पुस्तको में लिखा वो जो श्राप देने वाली वृति आती है वह काल के प्रभाव से आती है तो कबीर ने भी काल को श्राप ही दिया है मैं तो कबीर दास भी ऊपर से देखते होंगे तो उनके आंसू टपकते होंगे थोड़ा मुझे ना मुझे को स्वामी जी की एक लाइन याद आती है की जेना तर भव सिं नर समाज असि पाय और काल कर्मही ईश्वर ही मिथ्या दोष लगाए काल को कर्म को ईश्वर को बचारे मिथ्या दोष लगाते हैं ऐसा मनुष्य शरीर पाकर और सनातन धर्म पाकर अपना उद्धार नहीं करते बालम की रामायण में हील श्री राम से कह रहे हैं कि मैं आपके अंश से उत्पन्न हुआ इसलिए मैं आपका पुत्र हुआ और ये लोग कहते केत्र

03:16:04:03 ह जब वाल्मीकि जी भी अपना दे रहे थे भगवान को अपने विषय में बता रहे थे तो कह रहे थे अंगुली बाबू है मैं ये सोच रहा थाय बाबू है कुछ गरु पुराण लाएगा तो कुछ बहुत बड़ी कोई ऐसी समस्या लाएगा हम दिक्कत हो जाएगी वो बाबू नहीं बाबू भैया है वो आप उनको बोल बाबू भैया जरा गरुड़ पुराण का संधि विच्छेद कीजिए गरुड़ पुराण शब्द का निर्वचन करिए गरुड़ पुराण शब्द में कौन सी विभक्ति लगती है कभी पूछिए भाई सा में उतरते जा रहे कहा गहराई में उतर रहे भाई वो लोग केवल उतना ही जानते हैं जितनी चाबी ली पालने उतना चले खिलौना बाबू भैया है बाबू भैया याद है बाब भैया बाबू भैया है अच्छ सभी को समय देने के लिए

03:16:58:08 आभार लगे रहे आप बस आपसे बहुत प्रेरित है आप लगे रहे आप बिल्कुल बैठिए नहीं रन र बिल्कुल बिल्कुल ब विरामम को हो लंबा य कह रहा था हा जो पहली बात है कि बहुत दिन होन प वीडियो बनाते हुए तो लोग उछल रहे आजकल बहुत ज्यादा बहुत जदा नहीं नहीं हम कोई बात ऐसी देखेंगे तो अवश्य बात करेंगे उस आपने जो ऑडियो भेजा है नाम को वो हमें भेजिएगा दोबारा हा वो पड़ा हुआ है ठीक है ठीक व हमा एक दिन में डिलीट हो जाता है नहीं आपने से कर कर लिया था वो अभी भी है वहां ठीक है ठीक और दूसरी बात है वो एक आर्य समाज के वो है नाम तो नहीं लूंगा गौतम और वो आज फिर से शंकराचार्य जी के ऊपर टिप्पणी की उन्होंने शंकराचार्य जी पर टिप्पणी करते हुए वो बागेश्वर ही तो बोल रहे हैं बागेश्वर का ही तो रूप है वो बागेश्वर वालो ने हा हा हा मेरा ही मेरा ही स्वरूप है दूसरा ऐसा है ना देखिए बात ये है कि सभी को

03:18:13:18 यह भाव सभी के मन में है कि मैं धर्म रक्षा करूं ऐसा नहीं भागेश्वर वाले बाबा भी धर्म की रक्षा ही करना चाहते हैं मगर क्या है कि शास्त्रों का समग्र रूप से अध्ययन और उसके अनुसार बिल्कुल कांटे की नोक वाली बातें करना यह कहां से हमें लेना है हम तय करना होगा बिल्कुल ब या फर हम लोग य सोच ले शास्त्र किसी काम के है ही नहीं पालतू की चीज तो फिर किसकी रक्षा कर रहे हैं सही शास्त्र में अपने हर समस्या का निदान दिया गया है पाच काल का धर्म भी बया गया इस पर मुझे एक बात याद आई सुना दूं अगर आप बोले तो इस घटना पर मुझे एक बात याद आ गई है सुना दूं अगर आप बोले तो जी इस इस विषय पर हम उनसे बात करेंगे मेरा उनसे एक बार मिलना हुआ था बागेश्वर धाम जी से वृंदावन में हमारी थोड़ा उनसे अच्छी वो है दो चार हम करेंगे इस विषय पर अ भले व्यक्ति है उनके करेंगे उन बा क्योंकि वो वृंदावन में है ठाकुर जी आना जाना है हमारा भी वहा आना जाना लगा रहता है हम इस विषय पर बात कर भैया शवास भैया जी हमने एक प्रसंग सुना है राजेंद्र दास जी महाराज बता रहे थे कि एक बार धर्म समराट करपात्री जी महाराज वृंदावन आए तो उनके जो गुरु थे गण गणेश दास जी उन्होंने बोला कि ब्रिज में हमारे यहां गीता जयंती नहीं होती

03:19:28:18 है तो तो स्वामी जी ने कहा कि आप गीता जयंती मनाइए पहली बार तभी से शुरू हो गई वहां पर हम स्वयं आएंगे तो कपात जी महाराज गीता जयंती के अवसर पर वृंदावन आए तो उस उस सभा का जो आयोजन करता लोग थे वो आरएसएस के लोग थे तो जब स्वामी जी को बोलने का मौका मिला तो स्वामी जी जी भाई वो तो उनके वैसे वक्ता थे उन्होंने आरएसएस का खंडन करना शुरू किया तो वहां पर जितने जो वक्ता थे वो लोग बिगड़ गए बाबा जी तो हमारा ही खंडन कर रहे हैं तो उनके जो गुरु थे उन्होंने बोला तुम लोग शांत बैठो देश में इस समय ऐसे महात्मा विराज रहे हैं जो धर्म को उसी स्वरूप में स्वीकार करते हैं जिस स्वरूप में हमारे पूर्वजों ने स्वीकार किया है इसीलिए वो जो बोल रहे हैं शांति से सुन लो और तुम सबका मंगल होगा तुम अपने मन में उनके प्रति मन मैला मत करो कि हमारे आ का खंडन कर रहे हैं अगर वो खंडन भी कर रहे हैं ना और तुम चुपचाप सुन लोगे तो तुम्हारा कल्याण होगा मंगल होगा ठीक है क्योंकि उनका तुम खंडन सुन रहे हो वो केवल बाहरी है उनका जो अंतःकरण इतना है इतना कोमल है कि उनको खंडन को सुन लो उनके द्वारा तुम्हारा तिरस्कार भी हो जाए और तुम उसको सह जाओ तो तुम्हारा उसम परम मंगल होगा तो सब लोग चुप हो गए और सबने बड़े प्रेम से सुना हमारे पूज्य गुरुदेव को बचपन में बहुत सानिध्य मिला है सुनी हुई बात बता रहा हूं जी महाराज ने बताया है

03:20:43:24 सुनाया था बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया उनके एक शिष्य गु चन के परम विवान जी जी गुरु चरण दास जी को जानते आप सभी को जय श जानता जानता हं गु चरण जी को जानता हूं बिल्कुल परम विद्वान है संस्कृत के बहुत अच्छे विदत है बहुत मलक पठ मलक पठ हा हा जानता मेरी बात होती है झारखंड के हैं जी जी जय श्री

03:21:24:16 राम हर हर महादेव हरर महाद महादेव [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 3:21:38 · 27 Nov 2024

रामपाल के पूर्वज नरकगामी ? #तत्त्वदर्शीसंत #rampaljimaharaj

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A · Live Breaking news रामपाल का काल #rampaljimaharaj #kabir
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