⬜ Not used yet · 00:00:01:06 – 00:36:55:19 (36:54)
00:00:01:06 [संगीत] सभी को जय श्री राम जय श्री राम सभी को और शीर्षक आपने देख ही लिया है टॉपिक कहूंगा कि बहुत हास्यप्रद है और अब थक गए एक ही बात पर बार बार बार बार बार बार बात करते करते कारण क्या है जिन लोगों को पूरी कहानी नहीं मालूम उनके लिए बता दूं मैं अगस्त में कुछ दिनांक हमें याद नहीं है हमको आबू पर्वत उस समय हमको कई जगह से आ रहा था कि हमसे शास्त्र कर लो हमसे शा कर लो तो इसी क्रम में आबू पर्वत से भी आबू पर्वत पर अलंकार समाज का कोई केंद्र है जहां से हमको जो है इसके बुलाया गया शास्त्रार्थ के लिए चुनौती दी गई चुनौती तो उसका उत्तर हमने वीडियो के माध्यम से दे दिया था तुरंत उसके एक दो दिन में ही अच्छा जो व्यक्ति हमको वीडियो के माध्यम से जानता है
00:01:16:26 तभी उसने हमें कोई चुनौती दी ना तो उसको हमारा वीडियो के माध्यम से दिया हुआ उत्तर भी प्राप्त हो जाना चाहिए था भा यदि वो हमको डायरेक्ट वीडियो देख देख करके लेटर भेज रहा है और कोई तो हमारी उसके नजर में पहचान है नहीं तल तो वो हमको जानता नहीं है वो वीडियो के माध्यम से हमसे जानता है हमें जानता है और अगर वीडियो के माध्यम से हमने उसे उत्तर दे दिया तो उससे फिर उसको वो उत्तर प्राप्त हो जाना चाहिए था मगर उसका यह कहना है कि आपने तीन महीने बाद हमको उत्तर दिया हमने आपको तीन महीने बाद भी उत्तर नहीं दिया था उसी लेटर को शायद तीन महीने बाद किसी उनके फॉलोअर ने एक स्टोरी पर हमें टैग करते हुए लगा दिया तो हमने जो उत्तर पहले हम दे चुके हैं वीडियो के माध्यम से वही उत्तर हमने वहां पर दे दिए तो इनको य लगा कि इन्होंने आपने हमारे उसका जो उत्तर है वो तीन महीने बाद दिया है देखो देखो इसमें भी बड़ बत्ती है तो ये अपनी जानकारी का आपकी अभाव है हमने आपको उत्तर पहले ही दे दिया था तो यहां से कहानी शुरू होती है फिर अब ये कहते हैं कि ठीक है हमने उसमें उसमें उत्तर हमने ये दिया था कि हम आबू पर्वत आने का हमारे पास समय नहीं है आप जो है अ लखनऊ आकर के हमसे चर्चा कर सकते हैं जब लखनऊ आना हो तो उस बारे में आप बातचीत कर सकते हैं इन्होंने जो है कहा ठीक है लखनऊ हम आ जाएंगे लखनऊ आक
00:02:32:00 के बात कर लेंगे लखनऊ आकर के जब बात करने के लिए बात हुई तो इन्होंने एक लेटर भेजा कि हम लखनऊ आ जाएंगे और जो है आप जो है अपनी स्वीकृति प्रदान करें तो हमने फिर और इसमें उन्होंने फिर अपना एक लेटर और भेजा जिसम की यह भी लिख दिया कि आप कौन-कौन से विषय जो है चुन सकते हैं तो उसमें कुछ विषय मैं आपको पढ़ के बता दूं कौन-कौन से थे स्क्रीन पर भी दिखा दीजिए भाई इनके जो विषय थे इन्होंने कहा आप निम्नलिखित में में से और इन्होंने अपना लखनऊ में जो इनका केंद्र है आर्य समाज का उसको चुना कि वहां पर होगी बात तो उसमें इन्होंने लिखा अगर आप शास्त्रार्थ को स्वीकार करते हैं तो हम जो आपकी जो इन्होंने तारीखें भी दी कि हम इस तारीख से इस तारीख के बीच आ सकते हैं ठीक है भाई आप कब आ सकते हो तो आप भी देख सकते हो तो हमने उसमें तारीखों में स्वीकृति दे दी और उन्होंने स्थल के लिए बता दिया कि जो स्थल है वो यह रहेगा और इसमें आकर के आपको चर्चा करनी होगी यह भी उन्हीं का केंद्र है तो हमने इसमें न किया ठीक है अब इसमें इन्होने हमें उत्तर व जो ऑप्शन थे वो दिए ईश्वर का स्वरूप आचार्य यण
00:03:47:01 आचार्य महिदर आचार्य उबट स्वामी करपात्री जी तथा महर्षि दयानंद के वेद भाषियों की प्रामाणिकता यह बहुत जरूरी चीज है जो भी याद रखनी है इस लाइव को अगर आपको आगे समझना है ध्यान से सुनिए इन्होंने हमें ऑप्शन क्याक दिया ईश्वर का स्वरूप आचार्य यण आचार्य महिदर ईश्वर का स्वरूप एक ऑप्शन हो गया दूसरा ऑप्शन है आचार्य यण और ये ये जो आचार्य है तीन और स्वामी कपाती जी महाराज और दयानंद के वेद भाष्य की प्रमाणिकता ठीक है हिंदू शब्द की प्रमाणिकता स्त्री वेदा अध्यन अधिकार अवतारवाद मूर्ति पूजा किसकी परंपरा स्वामी शंकराचार्य और महर्षि दयानंद ठीक है ये उन्होंने हमें ऑप्शन दे अब इन सबके बाद हमारा इनको लेटर पहुंचता है कि भाई इनका जो प्राथमिकता से जो वो था विषय वो था किसकी परंपरा आ स्वामी शंकराचार्य या फिर महर्षी महर्षी दयानंद जो ये लिखते हैं उनके लिए जो भी तो हमने उसमें इनको
00:05:02:07 जब लेटर दिया तो उसमें इनको यह बताया कि इनका जो प्राथमिकता से जो इनका विषय था वो था परम किसकी परंपरा आर्ष तो हमने इनको उसम यह कहा कि भाई हमारी जो परंपरा है वोह आर्ष है कि नहीं है यह बाद का विषय है हमारी एक परंपरा है जिसको हमने सार्वजनिक कर रखा है ग्रंथों के माध्यम से एवं इवन वेबसाइट के माध्यम से भी आप जाकर के अगर गुरु परंपरा देखेंगे तो आपको जो री मट की वेबसाइट होगी गोवर्धन मट की वेबसाइट होगी सब पर आपको गुरु परंपरा मिल जाएगी और नहीं होगी तो बुक के माध्यम से आपको मिल जाएगी तो किसकी परंपरा आर् यह तब आता है जब आपने अपनी परंपरा बताई हो कि हमारे दयानंद जी के गुरु ये थे उनके गुरु ये थे उनके गुरु ये थे उनके गुरु ये थे यह हमारी परंपरा है इस तरीके से ऋषियों का जो ज्ञान है व हम तक पहुंचा है कुछ भी वो बाद की बात है कि वो आर्ष है कि नहीं तो हमने इनको उत्तर दिया किसकी परंपरा आर् इस विषय पर चर्चा तब हो स जब आप अपनी परंपरा बताए तब उसमें कंपेरिजन हो सकता है तो ऐसा ऐसा कोई ग्रंथ ऐसी कोई जानकारी तो हमें प्राप्त है नहीं अलंकार समाज की ओर से तो हमने कहा इसलिए इस विषय पर कोई इस इस विषय को प्राथमिकता
00:06:17:07 से और मुख्य विषय बनाते हुए चर्चा कैसे हो सकती है भाई पहले आप अपनी परंपरा बताए और फिर उस परंपरा पर कोई हम टिप्पणी करें कि भाई आपकी परंपरा में य दोष है तब ये होगा ना कि हां आपने टिप्पणी कैसे की आ जाओ आपकी परंपरा आर् से है कि हमारी परंपरा आर् तब ये बात होती है हमने टिप्पणी की है आपके ईश्वर पर आर समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर पर हमने टिप्पणी की है कि वो बाधित है वो सर्वशक्तिमान नहीं है आप अगर यह कहना चाहते हो कि ईश्वर जो है बाधित ही होता है मगर वो ईश्वर है तो वो बात की बात है मगर पहले अपने ईश्वर के सामने से सर्वशक्तिमान और अनंत सामर्थ्य मान इत्यादि जो आपने शब्द लगा रखे हैं ब्राह्मण उनको हटा दो वो बात की बात है कि जनता फिर आपके उस ईश्वर को ईश्वर के रूप में एक्सेप्ट करेगी कि नहीं करेगी हम करेंगे कि नहीं करेंगे ये तो बाद की बात है तो हमने ये उत्तर इन्ह दिया था अब होता क्या है कि जब हम इनको यह उत्तर दे देते हैं तो यह अपनी बात से मुकर जाते हैं और इनका जो तीसरा लेटर हमें प्राप्त होता है सर्वशक्तिमान ईश्वर हम लिख देते हैं कि भाई परंपरा किसकी परंपरा आर्स है यह विषय कुछ सटीक लग नहीं रहा है चर्चा के लिए और जो है आप ईश्वर विषय पर चर्चा करिए
00:07:32:08 और इन्होंने ऑप्शन भी दिया था ईश्वर का स्वरूप तो यह तुरंत कहते हैं अपने अगले ही लेटर में और इनको जैसे व्यक्तिगत हो जाएगा य मगर इनको थोड़ा सा लेटर लिखने का तुरंत टाइम भी रहता है तुरंत पेन कॉपी उठा कर के लिख देते हैं और इतना टाइम भा हमारे पास नहीं है इसीलिए हमने कहा था कि हमसे लेटर्स की अपेक्षा ना रखें तो फिर ये लेटर लिख कर के कहते कि नहीं नहीं के विषय में इनका वो लेटर कहां गया
00:08:09:08 येहा हम इस बात से असहमत है कि आर समाज के द्वारा स्वयं की परंपरा यह वो शंकराचार्य की परंपरा कुछ प्रश्न पूछे गए थे इसका निराकरण हमने अपने पिछले ये जो पैराग्राफ में जो बातें चल रही है इसका इस बारे में हमने पिछले लाइव में बात की है मगर इसमें जो मुख्य बात है वो इन्होंने क्या कही कि सर्वशक्तिमान ईश्वर पर आप अन्य आर्य विद्वानों से चर्चा कर चुके हैं इस विषय पर आपकी और आर्य समाज की जो जो मान्यता है उस पर पर्याप्त सा सामग्री सर्वत्र उपलब्ध है और निष्पक्ष लोग उसे देखकर निर्णय ले सकते हैं तो हमने तो हमने ये बताया था भाई परंपरा पर भी हमारी आर्य समाज के कई लोगों के साथ बहुत सी बातें हो चुकी हैं और उसकी बहुत सारी सामग्री उपलब्ध है और जो निष्पक्ष लोग होंगे व उन सामग्रियों को देख कर के अपना निर्णय ले लेंगे फिर परंपरा पर क्यों आप बात करना चाह रहे हो अच्छा सबसे बड़ी बात यह है कि जैसे हम लोग यह कहते हैं कि पहले आप अपनी परंपरा बताइए भाई बताना तो दूर की बात है आपके लोगों ने तो यह तक कहा है कि हमारे यहां पर गुरु परंपरा नहीं मानी जाती गुरुम परंपरा नहीं चलती और उसका
00:09:24:12 आउटपुट भी है ऐसा नहीं है कि लोगों ने कहा वो जो समाज का प्रमाणिक नहीं था मंदिर में बैठ कर के बोल रहा है आपके द्वारा नियुक्त है वो कह रहा है कि आ समाज में गुरुम परंपरा नहीं चलेगी हमें तो नहीं सत्यार्थ प्रकाश में कहीं मिला गुरुम परंपरा के बारे में अपनी गुरुम परंपरा के बारे में आपने बात की हो आपके जो दयानंद जी उन्होंने और जब हमें यह नहीं मिला और व्यक्ति आपका यह कह रहा है कि हमारे य गुरुम परंपरा है ही नहीं तो हम किसकी बात को सच माने जो इस बात पर आपसे हम चर्चा करें आपके लोग कह रहे हैं हमें पता ही नहीं है कहीं ना कहीं लिखा हो आज तक नहीं फोन आया हमने तो यह तक कहा था पता चल जाए तो बताना आपकी परंपरा क्या है वो कौन से बीच के आचार्य जिनसे आप तक आया ज्ञान जो ज्ञान आज आप सनातन के नाम पर सनातन का ठप्पा लगा कर के सत्या प्रकाश की बिक्री के तहत लोगों तक पहुंचा रहे हो है ना तो इनका जवाब य आया इस विषय पर आपकी बहुत बार बात हो चुकी तो भाई हमारी जो है परंपरा पर भी बहुत बार बात हो चुकी तो परंपरा पर क्यों आप चर्चा करना चाह रहे हालाकि ऐसा मत समझना कि उस पर बात कर नहीं चाहते या उसमें कोई कमजोरी है उससे बात वो मुख्य विषय नहीं है मुख्य विषय क्या है हमने अपने वीडियोस में कई बार बताया है
00:10:39:12 सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म ये तीन चीजों में हमें संतुष्ट कर दीजिए अपने साथ ले चलिए कितने वीडियोस में हम बोल चुके हैं अगर इन विषयों से हटकर आप हमें गलत साबित करने के लिए या फिर यह दिखाने के लिए नहीं इसने यहां पर यह बात गलत बोली है अगर आप भी रहे हैं तो इसका मतलब आपका उद्देश्य धर्म संस्थापन नहीं है ू समाज का एकत्व नहीं है संगठन करना नहीं है आपका उद्देश्य यह है कि किस तरीके से इसको गलत साबित किया जाए हमारा उद्देश्य नहीं है कि किसी को गलत साबित करना है हमारा उद्देश्य है कि उन सार्वभौम सिद्धांतों को बाहर लाना जिनके क्षत्र में जिसके नीचे एक छत्र हो सके सनातन समाज जो बटा हुआ है है ना यह दोनों के उद्देश्य में अंतर है अच्छा इस पर अभी हम बात करेंगे तो हमने यह कहा था इनसे कि चर्चा तो उ पर भी हो चुकी है तो इस सबके बाद हमने यह कह दिया कि भाई देखिए अच्छा इसमें एक उन्होने और कॉमेडी वाली बात भी की थी कि नहीं नहीं आपको हमारे वाले में आना पड़ेगा हमारे केंद्र में आना पड़ेगा और कैमरा सिर्फ हमारा चलेगा और किसी को रिकॉर्ड करने की वो नहीं होगी तो यह भी कॉमेडी है भाई हम क्या वहां पर आकर के परतंत्र हो जाएंगे गुलाम हो जाएंगे क्या हो जाएंगे कि अगर हम वहां पर आपसे
00:11:54:18 चर्चा करने आ रहे हैं तो वहां पर अगर हम आपसे वहां पर चर्चा करने आ रहे हैं तो वहां पर हमारे अधिकार कम हो जाएंगे अधिकार छीन लिए जाएंगे तो यह सारी बातें उसमें हमसे कही गई कि आप वहां आओगे रिकॉर्डिंग हम करेंगे कैमरा हमारा चलेगा लाइव हम करेंगे और हमने कह दिया पहली बात हमें आपके स्थान पर आने में कोई आपत्ति नहीं है दूसरी बात आप अपने कहे हुए वचन से मुक ए मत आपने विषयक ईश्वर के स्वरूप का वो दिया था हमें विकल्प दिया था और हम ईश्वर के स्वरूप परसे आपसे बात करना चाहते उसी ईश्वर के स्वरूप को हमने अपने शब्दों में सर्वशक्तिमान ईश्वर लिख दिया था ठीक है तो और बार-बार हम आपसे लेटर बाजी कर नहीं पाएंगे आपके पास समय होगा बारबार लेटर लिखने का रात में कल 10:30 बजे हमको इनका लेटर प्राप्त हुआ है एक 10:30 बजे रात में तो यह सब आपके पास समय होगा हमारे पास तना समय नहीं है कि हम बारबार आपसे पत्राचार के माध्यम से बात करें और आपको उत्तर देते रहे ठीक है हमने आपको बता दिया कि आप लखनऊ में आएंगे आपके स्थान पर आने में हमारी हमें कोई आपत्ति नहीं है और कैमरे दोनों
00:13:09:24 के चलेंगे और चर्चा उस विषय पर होगी जिस विषय को आपने पूर्व में हमें दिया था ईश्वर विषयक चर्चा आपने ईश्वर का स्वरूप कहा हमने उसको सर्वशक्तिमान ईश्वर कहा अब इनका एक कॉमेडी भरा एक लेटर प्राप्त होता है भाई इनको लेटर दिखाते जाइए जब मैं लेटर पढ़ूंगा तो तो अब इसमें ये कहते हैं इसको मैं आपको एक एक पॉइंट को पढ़ के बताऊंगा और यही विशेष है सबसे ज्यादा अब इसमें ये कहते हैं कि दिनांक 23 नवंबर 2024 का आपका पत्र में मिला था उसमें आपकी तरफ से ईश्वर के स्वरूप अब सबसे पहले तो यही इनकी लाइन ठीक नहीं है क्यों नहीं है क्योंकि आप हमें वीडियोस के माध्यम से भी सुनते समझते हैं तो केवल लेटर्स के माध्यम से हमें जानने का दिखावा क्यों कर रहे हैं यह पाखंड है यह दोगलापन
00:14:11:01 है आप हम लोग वीडियो में भी तो बोल रहे हैं बात और आप हमें जानते कहां से है कि हमने हिंदू शब्द के लिए क्या कहा है या दयानंद स्वामी जी के भाष्य के लिए क्या कहा है ये सब तो आप वीडियो से जानते हैं ना तब तो आपने हमें पत्र भेजा तो फिर आप केवल इस पर ही आधारित हमें क्यों जान रहे हैं दिखावा कर हमें आपका पत्र मिला था हम बाकी नहीं जानते अभी बताता हूं तो इन्होंने भी लिखा कि आपका पत्र हम मिला था उसमें हमें आपकी तरफ से ईश्वर के स्वरूप विषय को चुनने की कोई बात नहीं लिखी हुई थी आपके पत्र के क्रमांक में चार शब्द है अत चर्चा का विषय सर्वशक्तिमान ईश्वर ही उचित है अब सबसे पहली बात तो इनका खेल देख लो भाइयों इनको ईश्वर के स्वरूप में और सर्वशक्तिमान ईश्वर में अंतर दिख रहा है दोनों अलग-अलग विषय है यह है सर्वशक्तिमान ईश्वर की पावर कैसे आदमी भागता है सर्वशक्तिमान का नाम सुन कर के जितने लोग फॉलो करने वाले अलंकार समाज को वो और जितने लोग फॉलो करने वाले हैं य जो परंपरा प्राप्त आचार्य गणों को वो आज सुन लो कैसे सर्वशक्तिमान ईश्वर से शाब्दिक खेल करके बचा जा रहा मगर शाब्दिक खेल में भी नहीं बचने देंगे क्योंकि मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं टकम शाब्दिक खेल में भी नहीं बचने देंगे तो
00:15:26:02 तुमने यहां पर हमारे आपने यहां पर हमारे शद को पकड़ लिया कि हमने आपके विषय को आपके द्वारा दिए गए विषय को हमने नहीं चुना हमने अपना विषय दिया आगे इन्होंने लिखा है हमारे द्वारा प्रस्तावित विषय ईश्वर का स्वरूप था ना कि सर्वशक्तिमान ईश्वर ध्यान से देखिए इनके द्वारा प्रस्तावित जो विषय था वो ईश्वर का स्वरूप था ना कि सर्वशक्तिमान ईश्वर जब आप हमारे दिए हुए विकल्पों में से किसी एक विकल्प को का चुनाव नहीं करते हैं एक नया ही विकल्प अपने से देते हैं तो हमारे द्वारा दिए गए सारे विकल्प स्वत निरस्त हो गए हैं वाह अपने आप सब कुछ सटर घोट करके अपने आप अपने आप को भाई इसलिए हम सारे हमारे जो है विकल्प जो हमने दिए थे आपने उसमें से किसी को नहीं लिया आपने अपना दिया इसलिए अब जो हमारे पुराने विकल्प है वो निरस्त हो गए हैं ठीक है तो पहली बात तो इनका ये मजाक आप पकड़ने का प्रयास करिए कि ईश्वर के स्वरूप और सर्वशक्तिमान ईश्वर में इनको भेद दिख रहा है ठीक है अब क्या है सबसे पहली बात कि हमने जो इनको सेकंड लेटर भेजा है ठीक है हमने इनको जो सेकंड लेटर भेजा है उसमें इनका जो अंतिम लेटर आया ना
00:16:41:16 इनका जो अंतिम लेटर हमारे पास आया है उसमें उससे पहले हमारा लेटर इनके पास पहुंच गया था जिसमें हमने इनके दिए हुए विकल्प को ही चुन लिया था इनके दिए हुए विकल्प को भी बता दिया था क्या कहा था कि इसमें हमने कहा था कि आपके द्वारा आपके द्वारा दिए गए विकल्पों में से हमने स हमने ईश्वर के स्वरूप का विकल्प चुना था तो इस बात से भी इनको समझ जाना चाहिए कि हम ईश्वर के स्वरूप को ही सर्वशक्तिमान कह रहे हैं जब हम यह कह रहे हैं कि हमने आपके द्वारा विकल्प दिए गए विकल्पों में से सर्वशक्तिमान ईश्वर को ही चुना था मगर अब ये शाब्दिक लड़ाई लड़ रहे हैं क्योंकि आपने एक बार वो यह कह दिया है ईश्वर के स्वरूप की जगह सर्वशक्तिमान शब्द का उपयोग कर लिया है इसलिए आपने विषय को बदल दिया इसलिए हमारे द्वारा जो लिस्ट दी गई थी वह सारी लिस्ट निरस्त हो जाती है अब हम नई लिस्ट देते हैं अ ये देखिए हमने 23 तारीख को इनको लेटर दिया है जिसमें हमने इनको क्लियर किया कि हमारा विषय क्या होगा उसके बाद यह कह रहे हैं कि क्योंकि आपने हमारे द्वारा दिए गए विकल्प में से नहीं चुना था यह देखिए यह 23 वाला लेटर है
00:17:57:01 इसमें हमने सर्वशक्तिमान कहा विषय को और आगे आगे जो लेटर है उसमें क्या कहा है अगले वाले में दिखा दीजिए इनको जो लास्ट लेटर भेजा है जो लास्ट लेटर भेजा है उसमें लास्ट लेटर में हमने इनको क्लियर कर दिया कि जो हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान वाला विषय है वही हमारा देखिए आपके द्वारा दिए गए विकल्पों में से हमने ईश्वर के स्वरूप को चुना था तो यहां से इन्होने यह लेने की बजाय कि हमारा सर्वशक्तिमान ईश्वर और ईश्वर का स्वरूप एक ही है बस हम उसे सर्वशक्तिमान ईश्वर के रूप में लिख रहे हैं तो यहां से इन्होंने ये लेने की बजाय ये ले लिया कि नहीं नहीं आपने एक बार जो गलती कर दी ना आपने जो है वो यह लिख दिया है ना कि क्या आपने जो है हमारा हमारा दिया हुआ विकल्प तो चुना नहीं आपने अपना एक नया विकल्प दे दिया इसलिए अब हमारे जो दिए गए बात थी वो सब खत्म हो जाती है अब हम नई बात लेकर आने का अधिकार रखने के उसमें आ गए अब हम नई बात कहने का अधिकार रखते हैं क्योंकि हम एक बात पर रहने वाले तो है नहीं अरे भाई अगर तुमने नहीं दिया था अगर अगर आपने नहीं भी दिया था तो आपको अंतिम लेटर लिखने से पहले तो हमारी भावना मालूम पड़ गई ना कि ईश्वर सर्वशक्तिमान
00:19:12:13 का मतलब हमारा वही है ईश्वर का विषय और अगर दुर्जन तोष न्याय से अगर मान लिया जाए तो अब तो आपको पता चल रहा है कि हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान का विषय जो है वो वही है ईश्वर का स्वरूप तो आप अपनी बात से क्यों बदल रहे हो इसमें ऐसा कौन सा कारण आ जाता है कि अब आपको जो है ईश्वर के स्वरूप से भागना पड़ रहा है पहली बात अब इनकी य शब्द से पकड़ा है ना ऐसे ही इनको इन्हीं के लेटर से शब्द से पकड़ेंगे जैसे इन्होंने कहा कि ये शब्द का भेद हो जाने के कारण आपने जो विषय को बदल दिया तो अब हम इनका शब्द का भेद दिखाएंगे शब्द का भेद क्या है देखिए इन्होंने जो हमको दूसरा लेटर दिया है उसमें जो ऑप्शंस दिए हैं उसमें ऑप्शंस है नहीं तीसरा लेटर जब जब हमने यह कह दिया कि सर्वशक्तिमान ईश्वर में बात होगी तो इन्होंने हमें तीसरा लेटर दिया नहीं नहीं सर्वशक्तिमान ईश्वर नहीं आप तो इस पर बात करो हिंदू शब्द की प्रामाणिकता या फिर किसके वेद भाष्य सनातन मान्यता के अनुकूल यह इन्होने ऑप्शन दिया एक ऑप्शन और दिया था इन्होने इन्होंने उसमें एक ऑप्शन और दिया था
00:20:33:25 हिंदू शब्द की प्रमाणिकता किसके वेद भाष्य सनातन धर्म की मान्यता के अनुकूल यह दो ऑप्शन उन्होंने दिए हैं ठीक है सिर्फ दो ऑप्शन है हिंदू शब्द की प्रमाणिकता और किसके वेद किसके वेद भाष्य सनातन धर्म के अनुकूल सनातन धर्म की मान्यता के अनुकूल ये दो ऑप्शन दिए अब देखिए अब इन्होंने हमारे ईश्वर के स्वरूप को सर्वशक्तिमान ईश्वर कहने पर यह कह दिया कि आपने विषय बदल दिया ठीक है शाब्दिक भेद से विषय बदल गया अब हम इनका शाब्दिक भेद दिखाते हैं ऐसे थोड़ी ना होगा भाई खाते
00:21:14:13 हैं ये हटा दो इसको पकड़ो अब देखिए इसी प्रकार आपने अनेक बार यह प्रश्न उठाए कि महा ऋषि ध्यान ने पौराणिक आचार्यों का अनुसरण नहीं किया ये बात इन बातों पर मैं आऊंगा पौराणिक क्यों कह रहे हो आप जब य वीडियो में ये प्रश्न आप पूछ सकते हैं तो विद्वानों के समक्ष आकर पौराणिक आचार्य के वेदार्थ और महर्षि दयानंद के वेदार्थ पर आप चर्चा क्यों नहीं कर सकते अब यह बताओ अगर हमारा ईश्वर के स्वरूप को सर्वशक्तिमान कह देना गलत है जो कि आप जनता है आप खुद समझिए कौन केवल ये पत्राचार खेल खेल करके ही दम भर रहा है किसको भागना है वास्तविकता कौन कायर है यह आप निर्णय लीजिए अब इन्होंने यहां पर क्या इन्होंने चर्चा का विषय क्या कर दिया है पौराणिक आचार्य के वेदार्थ और महा महा ऋषि दयानंद के वेदार्थ पर आप चर्चा यानी चर्चा का विषय क्या है पौराणिक आचार्य के वेदार्थ और महा ऋषि दयानंद के वेदार्थ मगर इन्होंने अपने तीसरे लेटर में क्या लिखा है चर्चा का विषय किसके वेद भाष्य सनातन धर्म की मान्यता के अनुकूल है स्वामी करपात्री जी आचार यण मदर
00:22:29:16 और महर्षि दयानंद में से किसके वेद भास सनातन धर्म की मान्यता के अनुकूल है आप तो खुद ही अपने द्वारा दिया गया जो है बदल रहे हो दिखा दो इनको वो वाला दिखाइए जो इससे जस्ट पहले वाला लेटर है उसका सेकंड पेज दिखाइए है ना आपने अपने खुद के पत्र में दिया गया जो अगर शाब्दिक भेद की बात है ना तो हम भी पकड़ लेंगे आपकी अगर यह जो ईश्वर के स्वरूप से सर्वशक्तिमान ईश्वर जो कह दिया गया है इसको आप यह पकड़ रहे हो कि आपने जो है पॉइंट को विषय को बदल दिया आप यहां क्या कर रहे हो आपने तो यहां पर यह इसको कहते दोगले पन की पराकाष्ठा इसको कहते हैं दोगले पन की पराकाष्ठा इससे पहले वाला पेज प जाइए सेकंड पेज प यहां क्या कर रहे हो आप हमारे द्वारा ईश्वर ईश्वर शब्द तब भी आ रहा है हमारे में और आपका एक कितना चौ शब्द बदल गए देखिए आप कह रहे हो स्वामी करपात्री आचार्य यण महिदर और मर्ष दयानंद में से किसके वेद भाष्य सनातन धर्म की मान्यता के अनुकूल है यह चर्चा का विषय है अब देखो शब्द कितने
00:23:46:28 बदले शब्द कितने बदले इनके देखिए आप क्या है शब्द पौराणिक आचार्य के वेदार्थ और मर्ष दयानंद के वेदार्थ अरे भैया अगर शाब्दिक भेद को ही देखोगे तो तुम तो खुद ही अपने द्वारा दिए गए विकल्पों को छोड़ रहे हो ऐसे दोगलो से किस प्रकार से बात की जाए कैसे सोचा जाए कि हम जहां जाएंगे वहा सुरक्षित होंगे और फिर आप गारंटी ले रहे हो हमा रिकॉर्डिंग करेंगे हम आपको दे देंगे आपको लिंक दे देंगे हा कैसे विश्वास किया जाए जो पलपल में अपनी बात बदल रहा है पहली बात तो यह यह ज जाहिर बात है कि ईश्वर का स्वरूप और सर्वशक्तिमान ईश्वर में कोई अंतर नहीं है और दूसरी बात हमने चलो अगर तुम्हे अंतर दिख भी रहा तो हमने अगले लेटर में आपके द्वारा यह बात आने से पहले कि आपने ईश्वर के वि ईश्वर के स्वरूप पर बात करने को नहीं कहा था उससे पहले हमने आपको अपनी भावना क्लियर कर दी कि हमने ईश्वर के स्वरूप पर ही बात की है तो आप हमारी बात को निकाल रहे हो कि भाई शब्द अलग अलग तो अगर ये शब्दों का भेद हो जाने से व टॉपिक बदल गया है तो टॉपिक तो तुम भी बदल रहे हो तुम खुद के ही टॉपिक को बदल रहे हो हमने तो तब भी तुम्हारे टॉपिक को बदला वो भी तुम्हारे अनुसार हमने बदला ही नहीं है कुछ पर टॉपिक को तो आप बदल रहे हो क्या लिख रहे हो वहां पे कि किसके
00:25:02:00 वेद भाष्य सनातन मान्यता के अनुकूल और यहां पर कह रहे हो पौराणिक आचार्य के वेदार्थ और महा ऋषि दयानंद के वेदार्थ पर आप चर्चा करो हम ऐसे थोड़ी ना बचोगे इतना आसान नहीं है ना हां ठीक है अब जरा क्रमानुसार चलते हैं अब आप लोगों के इनकी ये लेपन की बात समझ में आ गई कि कोई व्यक्ति ईश्वर के स्वरूप को अगर एक बार सर्वशक्तिमान कह देगा तो वह विषय को बदल रहा है भले ही वह बाद में यह भी कह दे कि भाई ईश्वर का स्वरूप ही है हमारा विषय यह देखिए इसमें देखिए इनकी लाइन बड़ा करिए
00:25:42:19 थोड़ा इन्होंने खुद खुद के द्वारा दिए गए विकल्प को बदला है इन्होंने विकल्प में क्या दिया है कि स्वामी करपात्री जी आचार्य यण महिदर और महर्षी दयानंद में से किस वेद भाष्य सनातन धर्म की मान्यता के अनुकूल है और लास्ट लेटर में क्या लिखा है कि पौराणिक आचार्य मषि दयानंद में से किसके वेद भाष्य किसके वेदार्थ पौराणिक वेदार्थ हा पौराणिक आचार्यों के वेदार्थ और महा ऋषि दयानंद के वेदार्थ पर आप चर्चा क्यों नहीं कर रहे अरे भाई ये विकल्प आपने दिया ही कब हमें आपकी भाषा में अगर बात करें तो यह कैसे लिख दिया कि हम चर्चा नहीं कर रहे हैं यह विकल्प आपने दिया कब ता हमें और वो आप विकल्प देने वाले होते कौन हो यह सब बातें भी क्रम में आएंगी ठीक है इसको कहते दोगले पन की पराकाष्ठा इसको ध्यान से
00:26:45:04 देखिए अब चलते हैं जरा क्रम से तो यह तो हो गया भाई अब इन्होंने आगे बहुत बड़ बत्ती की है उस बड़ती पर भी हम लोग बात करेंगे क्या कहा है कि हमारी पूर्ण इच्छा है कि शास्त्रार्थ हो शास्त्र चर्चा हो इसलिए आपके द्वारा जो जो मांग रखी गई है हमने वह स्वीकार कर लिए कुछ उदाहरण देते हैं हमने शास्त्रार्थ को आबू पर्वत आबू में आबू में ना करते हुए लखनऊ में करना स्वीकार किया अरे भाई आपने हमसे पूछ कर के शास्त्रार्थ को होना सुनिश्चित किया था हम आपके पास आए थे क्या कि हमसे साथ साथ कर लो हम मरे जा रहे हैं क्या हम मरे जा रहे हैं क्या आप आए थे हमारे पास तो आपको हमारी चीजें तो देखनी पड़ेंगी ना हमें कोई जरूरत नहीं है आपसे बात करने की आप ऐसे व्यक्ति नहीं है हमें जब लगेगा तो हम उसके पास स्वयं जाएंगे आप अगर हमारे पास आ रहे हो कि हमसे शास्त्रार्थ कर लो तो हमसे आपको टाइम और जगह मांगनी पड़ेगी ना आप आए हो विनती करने और दिखाय रहे हो कि हम आपसे विनती कर रहे हैं इसको कहते ऐसे ही इन्होने य सब चीज फैलाई
00:28:00:09 है युधिष्ठिर मी मांस ने हरा दिया प्रोपेगेंडा सब यह सब ऐसे ही फैलाते हैं यह वास्तविकता में इनका लक्ष्य नहीं है धर्म संस्थापन वगैरा सुन लो इनका लक्ष्य यही है आर्य समाज ने शास्त्र में किसको हला दिया यह है इनका लक्ष्य और कैसे हराया व आपके सामने तो हमने आपकी बहुत डिमांड मानी है जैसे हम इनके पास भीख मांगने गए थे भैया हमसे सा कर लगा हमने बहुत आपकी जो है डिमांड मानली तो इन्होंने क्या कहा हमने चर्चा को आबू में ना करते हुए लखनऊ में करना स्वीकार किया जैसे इन्होंने हम हम पर रहम कर दिया है ये हमसे जो बात करने आ रहे हैं चर्चा करने आ इन्होने र हमने आपको शास्त्र की चुनौती दी थी जिसे आपने शास्त्रार्थ शास्त्र चर्चा में बदलने की विनती की भाई हम जिनसे विनती करते हैं उनसे रोज करते हैं आप जैसों से हमें विनती करने की कोई आवश्यकता नहीं है भ्रम निकाल देना हमने आपसे विनती की हमने आपको अपनी बात बताई है आपने हमें कहां पर स्वयं को शास्त्रार्थ के रूप में ख्या पित करने वाला देखा वो बताइए हमें उसके बाद हमसे शास्त्रार्थ की अपेक्षा रखिए मुंह उठा के चल आपने लेटर भेजा मुह उठा के आपने जो हमसे
00:29:15:15 कहा कि हमें आपसे शास्त्रार्थ करना है हमने आपको बता दिया हम शास्त्रार्थ है ही नहीं स घोषित विजेता स्वघोषित और हमने विनती भी कर ली उन्होंने विनती स्वीकार भी कर ली हमें पता लगा वही वाली बात है ना हमने इनसे विनती भी कर ली इन्होंने विनती स्वीकार कर ली हम पर रहम कर दिया हम पर करुणा बरसा दी अपनी और जो हमें पता ही नहीं लगा कितना भाई पराकाष्ठा है पराकाष्ठा विनती
00:29:48:03 अच्छा अगर इसमें आगे चले तो इसमें आगे और क्या लिखा है हमने मूल विषय जिस पर चुनौती दी गई थी वह था किसकी परंपरा भाई पहली बात तो यह समझिए कि हम एहसान कर रहे हैं आपको समय देकर के अगर एहसान की बात है आपकी विनती है कि हमसे चर्चा कर लो एहसान हम कर रहे हैं अगर ऐसी बात करोगे तो कि आपने विनती की थी तो हमने स्वीकार कर ली अपनी भाषा पर जरा ध्यान दीजिए मैच्योर पर्सन है फिर हम जब जब उसका प्रतिकार करेंगे तो आपको लगेगा कि यह क्या हो रहा है तांडव हो रहा है ये तो तो फिर क्या है अभय आगे लिख रहे हैं हमने मूल विषय जिस पर चुनौती दी थी वह था किसकी परंपरा आ और दोनों में से किसकी परंपरा इस विषय को बदलने की आपने मांग की मांग नहीं की आदेश दिया और सुन लो निर्णय दिया आप हमें तार्किक रूप से बताइए तो आपकी परंपरा है क्या तब तो य हम पूछेंगे किसकी परंपरा आ आपकी परंपरा है ही नहीं कुछ तो यह विषय कहां से आ जाता है किसकी परंपरा हमने नहीं छोड़ा है आप अपनी परंपरा बता दीजिए यह लिस्ट है हमारे गुरुओं की
00:31:03:25 और फिर आ जाइए बात कर लेंगे लिस्ट बताइए आपकी क्या है कहां से आए वेद मंत्र आज तक कोई नहीं बता पाया बल्कि यह कहने वाले लोग है कि हमारे यहां गुरु परंपरा को नहीं मानते और उसका उदाहरण है आपके यहां कोई भी यह नहीं कह सकता मैं आर्य समाज की ओर से प्रामाणिक व्यक्ति हूं यही कहोगे हम फलानी आर समाज संस्था की ओर से प्रमाणिक व्यक्ति है मगर आपके के यहां कोई ऐसी गद्दी सुरक्षित नहीं है जिसको प्रामाणिक माना जाए सार्वभौम रूप से आर समाज की ओर से प्रमाणिक मान लिया जाए कोई ऐसी गद्दी नहीं है इससे ही यह पता चलता है कि आपके य परंपरा का कोई मान नहीं
00:31:46:06 है अच्छा अब आगे चलते हैं तो पहली बात आपने अपनी मूल हमने परंपरा विषय से चर्चा करने के लिए मना नहीं किया है मगर परंपरा विषय पर चर्चा होने के लिए किसकी परंपरा आर्स इस पर चर्चा करने के लिए यह आवश्यक है कि आपकी च परंपरा का कोई अस्तित्व हो अस्तित्व है नहीं अभी मैं दिखा दूंगा आपका ही व्यक्ति है जो बोल रहा है कि गुरुरम परंपरा को आर समाज में नहीं माना जाता तो आप क्या कहोगे उसको य प्रामाणिक व्यक्ति है यही तो दिक्कत है जिसके यहां परंपरा नहीं है उसके यहां किसकी बात को प्रामाणिक माना जाए किसकी बात को ना माना जाए इसका पता ही नहीं लगा सकते आप आ जीवन भर आप बार-बार किसी ना किसी को निरुत्तर करते रहो निराधार सिद्ध करते रहो उसको आउट करते रहेंगे यही तो दिक्कत है ना अभी हम उसका वीडियो दिखा देंगे तो उस व्यक्ति को आप नौकरी से निकालने की धमकी दोगे वो हमारे पास फोन करता है कि भैया वो हमें नौकरी से निकाल रहे मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं क्यों नौकरी से निकलवा रहे हो वो वीडियो हटा दो बताओ यह देख लीजिए यह वास्तविकता है जो सबसे पहले वो जो सूरज आर्य था उनका फोन आया मेरे पास फोन करके मुझे कह रहे हैं भैया मेरे छोटे-छोटे बच्चे हमारा वो वाला वीडियो हटा दीजिए मैंने कहा क्यों आपने
00:33:01:07 क्या कुछ ऐसा कह दिया है जो उचित नहीं है जो सच नहीं है नहीं नहीं वो सब तो है मगर भैया क्या बताए हमें हटाने धमकी दी जा रही है नौकरी से हटाने की धमकी दे रहे हैं लोग उन्हें अब वो आदमी अपना 40 45 वर्ष का जो जीवन निकाल चुका है आर्य समाज को दे चुका है और उसमें रह कर के अपना पालन पोषण कर रहा है जो बच्चों का उस आदमी को विवश होना पड़ा जो उनकी मान्यता को नहीं मानता है उसके पास गिड़गिड़ाना पड़ा फोन करके ये है इनकी अलंकार हों की वास्तविकता समय आने पर य अपने सगे के भी सगे नहीं होते हैं देख
00:33:42:00 लो उसको धमका रहे हैं कि तुमने ये क्यों कह दिया कि गुरुम परंपरा नहीं है अरे भाई तब तक नहीं थी आज आप लोग अ ये तानाबाना बुनने लगे हो अभी आगे बात होगी जब से हम लोगों ने से सवाल उठाया है आप ये भी आपके व्यक्ति ने कहा है हां हमने हमसे पहले किसी ने सवाल नहीं उठाया यह भी आपके व्यक्ति ने कहा है कि यह सवाल आज आप पहली बार कर रहे हैं आपसे पहले किसी ने सवाल किया नहीं कि वेद मंत्र आए कैसे यह भी हम अपने मन से नहीं बोल रहे उसको भी नौकरी से निकालने का धमकी देना है पद से हटाने की धमकी देना व सामर्थ मान व्यक्ति अपना स्कूल चला रहा है उसको भी धमकी दे देना य तुमने य बात कैसे कही शिवांश नारायण द्वेदी से पहले य बात किसी ने पूछी नहीं है हर वो व्यक्ति जो आपके सिद्धांतों को जैसा आपने टाया है वैसा का वैसा जब बताने लगे और वो आपके दिक्कत आने लगे तो आप उस व्यक्ति को सजा देने लगो
00:34:50:15 [संगीत] तो थोड़ा सा बाधा आ गई थी नेटवर्क वगर में अच्छा तो उस व्यक्ति को य लोग डरा दमका रहे हैं तो कुल मिलाकर के आपकी परंपरा का अस्तित्व है ही नहीं तो फिर यह जो विषय है कहां से बनता है पर कोई बात तो बताइए तो कहने का मतलब तो यह है हमारी लाइव भैया आए दिन आती रहती है इस पर ही आ जाना पहले ये सेट कर लो आ कर के कि कौन प्रामाणिक होगा आर्य समाज की ओर से अलंकार समाज की ओर से और उसमें भी फिर यह तय कर लो कि चर्चा का विषय होगा क्या उसके बाद आप लखनऊ आओ लाइव आते रहते हैं उसमें आ जाओ और यह तय करो कि चर्चा का विषय होगा क्या
00:35:53:07 अच्छा आप जिस विषय पर वीडियो बनाते हैं उस विषय पर विद्वानों के साथ बैठकर चर्चा करने में क्या समस्या है कोई समस्या नहीं है जैसे आप ये कह रहे हैं कि आपको ईश्वर पर चर्चा करने से कोई समस्या नहीं है वैसे ही हमें भी हिंदू शब्द पर और ये जो आपने जो अगला टॉपिक दिया कि पौराणिक किसके किसके वेद भाष्य मान्य है इन पर हमें भी कोई चर्चा करने से आपत्ति नहीं है बात है न्याय की पहली बात जो आपने विकल्प दिया उसी को हमने चुना और अगर वेद और अगर शाब्दिक भेद से आप जो है टॉपिक का बदलना मान रहे हो तो टॉपिक तुम भी बदल रहे हो क्यों बदला रामो दुर भी भाषित धर्म है कहां कहां है धर्म टॉपिक तुम बदल रहे हो जब तुम एक जगह दूसरे शब्दों का मिलता जुलता टॉपिक तो है मगर टॉपिक तो तुमने भी बदला ना अगर शाब्दिक भेद से टॉपिक का बदलना मानते हो तो और दूसरी बात यह है कि हमारा उद्देश्य किसी संस्था अथवा व्यक्ति को नीचा दिखाना नहीं है यह आपको लगता है हम अपने कितने वीडियोस में यह बात कह चुके हैं
✅ This part is already used · 00:36:55:19 – 00:36:59:26 (0:04)
→ Used in: A · Live रामपाल का झूठा satlok #तत्त्वदर्शीसंत #rampaljimaharaj at 1:59:45 ↗
00:36:55:19 कि हमें सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्त मोक्ष और शाश्वत धर्म दो हम आपके हो जाएंगे
⬜ Not used yet · 00:36:59:26 – 01:39:34:00 (1:02:34)
00:36:59:26 कितने वीडियो में कह चुके हैं ले चलो अपने साथ हम व्यक्तिगत रूप से कोई भी मान्यता रखे अगर आपने अपने ईश्वर को सर्वशक्तिमान बता दिया सिद्ध कर दिया तो हम आपके साथ खड़े हो जाएंगे हम और आप एक हो जाएंगे हमें इससे मतलब नहीं है कि वो जो वो जो प्रचार हो रहा होगा सनातन धर्म का वो आर समाज के माध्यम से हो रहा होगा या फिर इकोन के माध्यम से हो रहा होगा या रामपाल के माध्यम से हो रहा होगा हमें मतलब इससे कि वो सार्वभौम ऐसे ऐसे शिक्षाओं का प्रचार प्रसार किया जाए जो अकाट्य हो नास्तिक आ कर के उसमें टिक ना पाए अब होगी धर्म की संस्थापन यह सब आपके नहीं आएगा आपकी बुद्धि क्योंकि संकीर्ण हो चुकी है आपको मतलब इससे है कि किस टॉपिक पर इसको गलत सिद्ध किया जाए अगर ये सर्वशक्तिमान ईश्वर की तरफ जा रहा है तो इसका मतलब है ये कहीं ना कहीं उसमें थोड़ा कच्चा है तो उसी को पकड़ो जिससे हट रहा है श शब्दों का खेल खेल हम उसको क्यों पीछे रख रहे हैं हमें उसम बात करने में कोई आपत्ति नहीं है मगर अगर हिंदू शब्द में निराकरण प्राप्त भी हो गया तो उससे क्या हो जाएगा सनातन समाज एक हो जाएगा हिंदू शब्द की प्रमाणिकता प्रमाणिकता पर नहीं केवल जीत और हार होगी सर्वशक्तिमान ईश्वर से समाज एक होगा हां
00:38:15:10 जिसका ईश्वर सर्वशक्तिमान उसके साथ पूरी जनता उससे एक होगा इसलिए उसको हम प्राथमिकता से रख रहे हैं और दूसरी बात हमने मना नहीं किया जैसे आप मना नहीं कर रहे ईश्वर स शक्तिमान पर बात करने से हमने तो मना नहीं किया इस पर भी हम अभी आगे क्रम से बात कर लेंगे कि हमने मना किया आपने मना किया उस टॉपिक पर बात करने से अच्छा अब इनका अगला पॉइंट आता है कि ये आपके अगला अगला अगला पेज दिखाइए अब इनका अगला पॉइंट आता है कि आपके चैनल पर हिंदू शब्द को नकारने वाले वेद विरोधी आप हिंदू शब्द को नकारने वालों को वेद विरोधी कह रहे हो एक तरफ आप कहते हैं कि आप आचार्य नहीं है इसलिए शास्त्रार्थ नहीं कर सकते और दूसरी तरफ आप हिंदू शब्द को नकारने वालों को वेद विरोधी घोषित करते हो कर देते हो यह अधिकार आपको कैसे प्राप्त हुआ जब सनातन धर्म आधारित शास्त्र पर हिंदू शब्द प्रमाणिक है कि नहीं इस विषय का ज्ञान नहीं था तो आपने हिंदू शब्द को नकारने वालों को वेद विरुद्ध घोषित कैसे किया इस विषय का ज्ञान और अगर इस विषय पर आपको ज्ञान है तो शास्त्र चर्चा करने हेतु आप क्यों तैयार नहीं हो रहे हैं हमने पहली बात तो हमने बता दिया जैसे आप कह रहे हैं ना कि हम ईश्वर विषय पर चर्चा करने से पीछे नहीं हट रहे हैं मगर उसको बाद में करेंगे ऐसे हम हिंदू शब्द पर पीछे नहीं हट रहे हैं मगर उसको हम बाद के
00:39:30:12 लिए इसलिए रखना चाह रहे हैं क्योंकि अगर एक चर्चा शुरू होती है तो आपको क्या लगता है निर्णय हो जाता है अधूरे पन के साथ ही वह बात खत्म होगी जनता निर्णय लेगी कि किसने सही काहा किसने गलत कहा आप उसको अंत मानेंगे और अंत मानने का आधार क्या होगा चर्चा में कैसे डिसाइड होगा कि चर्चा पूरी हो गई तो अब हिंदू पर करें चर्चा कैसे डिसाइड होगा कि चर्चा पूरी हो गई तो अब सर्वशक्तिमान पर करें चर्चा कितने दिन के लिए आ रहे हो तीन दिन चलेगा क्या शास्त्रार्थ तीन दिन चलेगी चर्चा यह सब नाटक वाली बातें हैं यह सब यह बात है कि हिंदू शब्द परही घोल मोल करके और कुछ ऐसा दिखा दिया जाए कि जो मूल विषय है उस पर बात आए ना जिसमें हम लोग हम लोगों के पास कुछ बोलने के लिए है नहीं तो हमें ऐसा व्यर्थ का प्रयास नहीं करना है ठीक है अगर इस तरह से सुनियोजित चर्चा होगी तो सर्वशक्तिमान ईश्वर पर करिए ना और दूसरी बात य न्याय आप ने जब खुद अपना विषय दिया है ईश्वर का विषय सबसे पहला ईश्वर का स्वरूप तो उससे क्यों मुक रहे हो अगर हमने शाब्दिक भेद से उसको लिख भी दिया था तो हमने अपने दूसरे पत्र में उसको सही भी कर दिया कि हमने ईश्वर सर्वशक्तिमान ईश्वर के रूपने हमने आपका जो विकल्प था
00:40:45:13 ईश्वर विषय उसको ही स्वीकार किया है क्यों मुक रहे हो और मुकने वालों के साथ क्यों बात की जाए उनके एरिया में जाकर के उनका वो उनके गढ़ में जाकर के उनके केंद्र में जाकर के और तो और अब आपने कहा कि जब आपको आप कहते हो कि आप श आप आचार्य नहीं हो अच्छा पहली बात तो यह बताइए कि जब आपके धर्म का खंडन हो रहा हो तो वहां पर उस बात का प्रतिकार करने के लिए क्या आचार्य होना आवश्यक है जब आपके धर्म का कहीं पर खंडन हो रहा हो तो क्या वहां पर प्रतिकार कर ने के लिए आचार उने आवश्यक है बाली ने जब यह कहा था कि अमुक अमुक तरीके से आपने मेरा वध गलत किया है तो प्रभु श्री राम ने वहां पर मनुस्मृति का श्लोक देते हुए वहां पर उसका प्रतिकार किया था तो वो आचार्य थे क्या आचार्य तो नहीं थे वो वो तो क्षत्रिय थे अब आप ही तो कहते हैं ना कि ब्राह्मण का कार्य होता है वो कर्म कर्म से मानते हो ना क्षत्रिय थे आचार तो नहीं थे वो वो जन्म और कर्म दोनों से
00:42:01:10 थे तो इसका अर्थ यह है कि आपके धर्म का यदि कहीं पर खंडन हो रहा है तो उसके लिए आवश्यक नहीं है कि व्यक्ति का आचार्य होना आवश्यक हो फिर भी आपने अगली लाइन क्या लिखी है यह अधिकार आपको कहां से कैसे प्राप्त हुआ यानी कि आप अधिकार किसी से किसी तरीके से प्राप्त होना स्वीकार करते हैं स्वयं को अधिकार स्वयं को अधिकार देने वाला नहीं घोषित करते हैं कहीं से प्राप्त होना स्वीकार करते हैं कैसे प्राप्त हुआ है ना यानी कि आप भी ये स्वीकार करते हैं कि धर्म के बारे में निर्णय देने के लिए कहीं से प्राप्त होना अधिकार आवश्यक है उसी को परंपरा कहते हैं उसी को परंपरा कहते हैं कि धर्म के बारे में निर्णय देने के लिए अधिकार कैसे प्राप्त हुआ इसी को परंपरा कहते हैं तो आपको कहां से प्राप्त हुआ जो आप मनमुक व्याख्या करते घूम रहे हैं जहां पर भगवान के विराट स्वरूप की बात की जा रही है वहां पर भी उसको निराकार सिद्ध कर रहे हैं अलंकार कह देते हैं कहीं पर भी अपने मन से कहां से अधिकार प्राप्त हुआ आपको बताइए कैसे प्राप्त हुआ आपको य अधिकार अधिकार का प्राप्त होना आप स्वीकार कर रहे हैं स्वयंभू नहीं हो सकते आप आपने स्वीकार किया आपको प्राप्त करना पड़ता
00:43:16:12 है कहीं से लाना पड़ता है अधिकार वो अधिकार आपको कहां से मिला मैंने जो बात कही है वो उस आचार्य के द्वारा बताई गई बात है जिसको कहीं से इसी प्रक्रिया के द्वारा वह अधिकार प्राप्त हुआ धर्म के संबंध में निर्णय देने का आप बताए दयानंद जी को अथवा उनके गुरु को अथवा उनके गुरु को कहां से वो अधिकार प्राप्त हुआ था निर्णय देने का बताइए फस गए ना ऐसे ही बाल की खाल निकाली ना जो ईश्वर के स्वरूप को हमने सर्वशक्तिमान ईश्वर कह दिया लो
00:44:02:00 हमने कहा बोली विषय बदल दिया अच्छा और हमने फिर मैं आपको याद दिला दूं कि हिंदू शब्द पर बात करने से हमने कोई मना नहीं किया है मगर हम यह चाहते हैं कि य चर्चा जीत और हार के लिए ना हो यह चर्चा हो सनातन की एकता के लिए धर्म की स्थापना के लिए इसलिए हिंदू शब्द की प्रामाणिकता और अपमा कता से ऐसा कोई परिवर्तन नहीं आ जाएगा सिद्ध जाने अथवा ना हो जाने से जो ईश्वर के सिद्ध होने से आएगा ईश्वर सर्वशक्तिमान क्यों वो सिद्ध करो ना क्यों भाग रहे हो सर्वशक्ति मत्ता से ईश्वर की नहीं है ना बोल दो ना नहीं हमारा ईश्वर स ईश्वर ऐसा ही होता है जो बाधित होता है बोल दो ना दिक्कत है बोलने में वो यह नहीं कर सकता वो वो नहीं कर सकता मगर बाधित नहीं है व अबद दिक्कत है बोलने सच्चाई बोलने में दिक्कत है क्योंकि व्यक्ति फिर दूर हटने लगेगा
00:44:57:15 दुनिया में धर्म और अधर्म की जो लड़ाई है वह इस बात पर टिकी हुई है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है और दूसरी ओर नहीं है ईश्वर बाधित है इधर का इधर ईश्वर अवाद अद बस इसी पर है पूरी व्याख्या परम स्वतंत्र मोक्ष है और इधर बाधित मोक्ष है चलिए आगे देखते हैं उन्होने क्या लिखा है इसी प्रकार आपने अनेक बार यह प्रश्न उठाए दयानंद ने वेदों में पौराणिक आचार्यों का अनुसरण क्यों नहीं किया अब देखिए जब आप स्वयं को वेद वैदिक रूप में प्रस्तुत करते हुए सामने वाले को पौराणिक कहते हैं तो इसीलिए फिर जब अलंकारी अलंकारी कहते तो बुरा नहीं मानना चाहिए है ना फ फिर वहां पर रोना नहीं हमको अलंकारी कह दिया ये नहीं करना चाहिए य आपने कैसे कहा पचार किसने स्वयं को लिखा है किसी अन्य को वैदिक मानते हुए स्वयं को पौराणिक आचार्य किसने का किया है सनातन वैदिक आर्य हिंदू है परंपरा प्राप्त सनातनी है ये सब लिखो मगर अपना प्रोपेगेंडा अपना जो वो एक वो सुपीरियर
00:46:24:03 कॉम्प्लेक्शन कैच हवाई फायर यह भी नहीं कह सकते वह जो आपका जो अनऑफिशियल गुंडा है ना वो जो कहता फिर रहा है आजकल जो आपके पत्र को हम तक पहुंचने से पहले अपने उस पर डाल देता है चैनल पर वह जो आजकल आजकल कहता घूम रहा है कि क्या कहते हैं वो हमें वो जो है वो क्या कहते साक्षात्कार किया अर्थ का साक्षात्कार किया स्वयं ईश्वर से ना इस विषय को लेकर
00:47:00:19 के तभी लाइव आ जाओ पता चल जाएगा साक्षात्कार किया उसको कंफर्म कहां से कराया भाई अगर गुरु जो गुरु परंपरा है वो कुछ कह रही है और आप साक्षात्कार करके कुछ आ रहे हो सकता है आपकी इंद्रियों का प्रतिबिंब हो जो साक्षात्कार कर रहे उसको वेरीफाई करोगे ना परंपरा प्राप्त शास्त्रों से तो शास्त्रों के आधार पर अगर आपने वेरीफाई कर लिया तो हो गए गुरु वो जिसके आधार पर आप वेरीफाई कर रहे हो अपने सपने में आने वाले जो भी आपका ईश्वर है उसके द्वारा दिए गए ज्ञान का वेरिफिकेशन अगर आप कर रहे हो परंपरा प्राप्त शास्त्रों के आधार पर हो गए गुरु आपके आपको प्रदान करने वाले तो ऐसे बच नहीं पाओगे ठीक है अच्छा तो इन्होंने क्या किया सबसे पहले तो नाम बदल दिया पौराणिक आचार्य हो गया उसके बाद जब ट में ये प्रश्न आप पूछ सकते हो तो विद्वानों के समक्ष आकर आपको पौराणिक आचार्य के वेदार्थ और मषि दयानंद के वेदार्थ पर आपको चर्चा करने में क्यों आपत्ति हो रही है अरे भाई आपके वो वृद्ध जन है जिन्होंने अपनी मट्टी कुटाई थी अभी कुछ दिन पहले वो भी तो यब पर बैठ कर के चर्चा कर रहे हैं अंडर कवर्ड गुंडे के साथ जिसको जब मन चाहे आर समाज की संस्थाए लात मार देती है हम इसे नहीं जानते
00:48:15:25 कौन वाच उसके साथ चर्चाएं कर रहे हैं य पर बैठ के वो आ जाए सर्वशक्तिमान के विषय में चर्चा की है उन्होंने आ जाए क्यों नहीं आ रहे भेज दो उनको जब आप लोगों को पढ़ा सकते हो कि ईश्वर अवतार नहीं लेता अपने गुरुकुल में आर्स गुरुकुल में लोगों के कूट कूट के जैसे वो मिर्ची कूटी जाती वैसे भर सकते हो उनके मन में कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता तो आकर के यहां पर एक अल्पज्ञ शिष्य से शंकराचार्य के अल्पज्ञ शिष्य के साथ चर्चा करने में क्यों डर है क्यों भाग रहे हो उस विषय से तरकीब निकाल रहे हो कि कैसे इसको शब्दों के जाल में फसा कर के इसको ये सिद्ध किया जाए इसका विषय जो है निरस्त हो जाता है अपने आप नियम बना लिया निरस्त हो जाता है और फिर खुद के शब्द बदल गए तो पकड़े
00:49:04:27 गए इतनी दो मतलब परा मतलब कोई हद होती है मतलब झूठ भी बोलने में शर्म नहीं आ रही है बात को बदलने में शर्म नहीं आ रही है निरंकुश शासक स्वयं को तुम सिद्ध कर रहे हो तुम्हें शर्म नहीं आ रही है अपने आप तुम विनती सुनने वाला स्वयं को सिद्ध कर रहे हो मगर शर्म नहीं आ रही है तुम्हे अपनी बातों से तुम मुकर रहे हो मगर शर्म नहीं आ रही अपने सिद्धांतों से यही की यही लेटर में तुम बदल रहे होगर तुम्ह शर्म नहीं आ रही है हद होती है बेशर्मी
00:49:42:09 की अगर शाब्दिक भेद से विषय का बदलना माना जाएगा तो आपने भी शाब्दिक भेद के अनुसार अपना विषय क्यों बदला अंतिम लेटर में फस गए स्वयं को विनती सुनने वाला मान लिया हमने आपकी विनती सुन ली हमने आपकी मांगे सुन ली जैसे हम मरे जा रहे थे आपसे चर्चा करने के लिए जिन लोगों से चर्चा की है उन लोगों के पास से हम गुजर रहे थे तो चर्चा कर ली और एक दो तो ऐसे हैं जिनको धन राशि भी प्रदान करके आए हैं यह लो जो आपने हमको अपना कीमती समय दिया उसका पैसा
00:50:24:10 लो फ लोग कहेंगे हम अमर्यादित हो गया इसलिए मेरा आपसे पुनः आग्रह है ईश्वर के स्वरूप पर भी अगर आपको चर्चा करनी है तो उपरोक्त दो विषयों के बाद उस पर भी चर्चा कर ली जाएगी यह पॉइंट बहुत जरूरी है यह पॉइंट बहुत जरूरी है क्यों जरूरी है यह पॉइंट कि भाई पहली बात ये बताओ आपको क्या लगता है कि हम लोग लोग जब किसी एक विषय पर अटक तो क्या उसका बहुत अच्छे से हा ठीक है हम हार गए आप जीत गए या फिर हा यह चर्चा समाप्त हुई ऐसे होगा क्या चर्चा हम लोगों का जो मनोभाव होगा वो यही होगा कि चर्चा अधूरी है कुछ निर्णय नहीं निकला आप अपने घर हम अपने घर यह निर्णय होगा तो हम ऐसे विषय पर बात क्यों करें जिस विषय पर हम लोग मेहनत करने के बाद भी और जो है कोई उसका फल ना मिले जनता जब उसको देख ठीक है हिंदू शब्द सिद्ध नहीं हो पाया भैया ठीक है अभी भी हम अलंकारी और हम जो है सनातन परंपरा प्राप्त हिंदू हम और हम मना कहां कर रहे हैं
00:51:39:12 जैसे आप कह रहे हो कि इस विषय को हम बाद में रख लेंगे आप रख लो बाद में आप रख लो बाद में हिंदू शब्द की प्रमाणिकता को बाद में रख लो अपनी किसके वेद भाष्य अनुकूल इसको बाद में रख लो ईश्वर सर्व ईश्वर ईश्वर का स्वरूप इसको पहले रख लो आप हीने य सबसे पहला विकल्प है आपका ईश्वर का स्वरूप और हम जब कह रहे हैं ईश्वर सर्वशक्तिमान तो उसका यही मतलब है ईश्वर का स्वरूप और अगर शाब्दिक भेद से बदलाव होता है तो फिर पता चल गया ना आपकी ही लेखनी से आपका
00:52:15:04 खंडन तो सबको लाभ होगा आपका उद्देश्य मैं फिर याद दिला दूं आप कह रहे हो कि उपरोक्त तीन विषय पर आपसे चर्चा करके सबको लाभ होगा आपका उद्देश्य सबको लाभ का नहीं है आपका उद्देश्य है कि शिवांश नारायण द्विवेदी अगर कुछ बोल रहा है तो उसको गलत सिद्ध करना है उसको हिंदू शब्द पर खींच लो हिंदू शब्द पर जो है परेशान कर लो और उस चर्चा में दिखा दो आपको ऐसा लग रहा है कि वो परेशान हो जाएगा परेशान नहीं होा मगर अगर उसमें मैं तार्किक रूप से प्रामाणिक रूप से सही भी सिद्ध हुआ मगर उससे हमारे समाज को कोई ऐसा खास लाभ नहीं मिलने वाला है लाभ मिलेगा तीन चीजों से सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म इनसे मिलेगा लाभ यह दे दो हमें बिना मत करो चर्चा यह दे दो तीनों चीजें अपने कोई ऐसा वीडियो बनाओ संतुष्ट हो जाए व्यक्ति दे दो हम आपकी सत्यार्थ प्रकाश को बेचेंगे जैसे आजकल व जो आपके जो प्रतिनिधि अपमा प्रतिनिधि या करते हैं सत्यार्थ प्रकाश पढ़ सत हम भी करेंगे सत्यार्थ प्रकाश पढ़ो भाई अरे आप लोग खुद ही कहते हो शोध का विषय है उसमें बदलाव होना है ये वो है फिर क्यों उसके पीछे लड़ रहे हो शोध का विषय है
00:53:31:00 तो जब उसमें बदलाव को स्वीकार कर रहे हो तो एक दिन आगे चल कर के आपको बदलाव ये भी करना है स्वीकार कर लो कि नहीं नहीं ईश्वर जन्म ले सकता है भाई ईश्वर अवतार ले सकता है कर लो स्वीकार शोध का विषय है ना वो तो भाई जो जीव है वो अज्ञानी है ना उसको वो दिखा रहे हो ना जो नहीं है मगर इस दुनिया के लिए वो सच्चा ही है उसके लिए उसी तरीके से ईश्वर का जन् भी दिखाई देने लगेगा उसको इस दुनिया के अनुसार वो सच्चाई होगी
00:54:06:07 सिंपल आगे चलते हैं आप देखिए इसमें वोह हास्यास्पद बात आ गई हमें विश्वास है कि जिस जिन पर आप वीडियो बना रहे उन विषयों पर आपको चर्चा करने में कोई आपत्ति नहीं होगी अभी बताएंगे बाद में अभी रुको जरा इस पर अभी देखेंगे ठीक है ऐसा नहीं है कोई भी एक पंक्ति भी खाली नहीं जाने देंगे तो हमें भी विश्वास है कि जो आप विकल्प दे रहे हैं उन्हीं विकल्पों में से एक विकल्प पर चर्चा करने में आपको कोई आपत्ति नहीं होगी हमें भी विश्वास है कि जिन जिन विषयों पर आप लोग मंचों पर चिल्ला रहे हैं जिनको आप अपने और गुरुकुल में पढ़ा रहे हैं उन पर चर्चा करने में आपको कोई आपत्ति नहीं होगी है ना हमें भी विश्वास है हमें भी विश्वास है कि आप अपने दोगले पन को हटाओ अपनी कायरता को हटाओ और आप जो है अपनी बात पर कायम रहोगे हमें विश्वास रामो दुर भी भाषित कहां है राम कहां है अपने ही कहे हुए वचनों से मुकर जाते हो अजीब डोला पन है भाई ठीक है आगे चलिए अब इसलिए मेरा आपसे पुनः आग्रह है कि श शास्त्र चर्चा के लिए अवश्य पधारिए उपरोक्त तीन विषय पर आपसे चर्चा करके सबको लाभ होगा उस
00:55:21:08 लाइव जब लाइव हो रहा है तो रिकॉर्डिंग का कोई औ चित नहीं है यहां पर भी इन्होंने हमारी उस बात को माना नहीं है कि रिकॉर्डिंग हम कर सकते हैं कि नहीं क्यों हम कोई गुलाम है क्या भाई कि आप जो है हमसे चर्चा करने के लिए कहे हम आपको कहे ठीक है हम आपके लिए समय निकाल लेंगे उसके बाद आप कहे नहीं ऐसे नहीं ऐसे होगा ऐसे नहीं ऐसे होगा ऐसे नहीं ऐसे होगा और हम सारी बातें आपकी अगर नहीं मानते हैं तो हम भगोड़े सिद्ध हो जाएंगे जो कि आपने आगे हमको दिखाया है कहने का प्रयास किया अभी उसको भी बताएंगे तो सबसे पहली बात है आपने कहा कि लिंक जो है वो हम आपको दे देंगे इसमें आप संशय ना रखिए क्यों भाई जो व्यक्ति अपने पत्रों में अपनी बात से बार-बार बदल रहा है वो अपनी बात पर कायम रहेगा हमय विश्वास क्यों रखें आपने कहा जब लाइव होगा तो फिर रिकॉर्डिंग की कोई आवश्यकता नहीं है आप हमें लिंक दे देंगे कंट्रोल तो सारा उसका आपके हाथ में होगा ना कल को बदल दोगे फिर कहोगे युधिस्टर मीमांसा जीत गया था शास्त्रार्थ में करपात्री जी से अपना वो जैसे जलेबी नहीं बना बनाते हो जलेबी वही बनाने लगोगे जैसे अभी यहां पर भी शुरू में हमको विनती करने वाला बोल दिया अपने लेटर में कि हमसे विनती की थी
00:56:36:10 आपने यह सब क्या है बातों की जलेबी हमें ये सब नहीं आती सीधी बात करते हैं सीधी बात नो बकवास स्प्राइट नहीं पीते पर बात सीधी करते हैं कंट्रोल आपके कंट्रोल पूरा अपने हाथ में रखोगे और फिर अगर तुमने हटा दिया बदल दिया हम क्या करेंगे फर हा फिर आप लोग यह सब चिल्लाने लगे अरे हम लोग हमने हरा दिया य व लिख दोगे किताबे लिख दोगे ग्रंथ लिख दोगे उस पर भैया तुम्हारे पास तो टाइम है रात के 10:30 बजे तुम लेटर भेज देते हो आपके पास तो टाइम ही टाइम है लिख दोगे आप एक ग्रंथ फल्स प्रोपेगेंडा वाला हम यहां काशी में जीत गए हमने यह कर दिया हमने वोह कर दिया ताना बाना भाई कौवा कान ले गया कान ले गया लोग इस पर ध्यान देना भूल ही जाएंगे
00:57:28:13 कि हमारा कान तो हमारे पास ही है इतना चिल्लाओ ग इतना चिल्लाओ ग कि लोग ये भूल ही जाएंगे भाई ये वास्तविक है कि नहीं जो कहानी में पढ़ रहा हूं हम और हम क्या गुलाम हो जाएंगे क्या वहां पर आएंगे हमने आपके साथ जो चर्चा कर ली है तो क्या आपने कोई बहुत बड़ा एहसान कर दिया है क्या जो हम वहां पर आना स्वीकार करें आपकी ये सब ऊट पटांग चीजें स्वीकार करें आपका दोगलापन स्वीकार करें उसके बाद आप जो है कहोगे कि नहीं नहीं रिकॉर्डिंग केवल हम करेंगे कैमरा केवल हमारा चलेगा कुल मिला के ये कहो आपको शास्त्रार्थ में जिसको आप शास्त्रार्थ कह रहे हो चर्चा में आपको आना नहीं है यह कहो आपको पता नहीं था कि ओके कर देगा आने के लिए दिक्कत ये है आपको किसी ने उकसाया किसी कुख्यात आतंकवादी टाइप के व्यक्ति ने हो सकता है इधर उधर अपनी सोशल मीडिया पर चीजें डाली हो जिससे आप हो सकता है प्रभावित हो गए हो
00:58:26:16 और उसके यह जो वो जो अनऑफिशियल हरकत करा करता है और वो जो ये हो गया कृ पात्री जी पाखंडी है ये है वो है ये सब जो अनाप सनाप बे सिर पैर की बातें जो किया करता है ऐसे किसी व्यक्ति की चीजों से आप प्रभावित हो गए और सोचा कि चलो वो एक वो क्योंकि वो ये कहता घूम रहा है अपनी चीजों में क्या कि ये जो है इसको अगर आप लोग यह कहोगे ना कि आ जाओ चर्चा के लिए आ जाओ तो ये आएगा नहीं देखना उसने ऐसे उकसा दिया अब वो वो नहीं पता कि आपका व्यक्तिगत संपर्क है कि आपने कहीं उसका वीडियो देखा आपने उसकी कहीं पोस्ट देखी हो स मुझे तो ऐसा ही लग रहा है व्यक्तिगत संपर्क होगा जिसम की उसने आपको बताया होगा नहीं नहीं आप इसको लेटर लिख के दे दोय आएगा नहीं देखना 100% कोई डरने की आवश्यकता नहीं है आप चिंता मत करो मुझे मालूम है आप सर्वशक्तिमान ईश्वर को सिद्ध नहीं कर पाओगे आप दे दो अब दे तो दिया हमने इधर स्वीकार कर लिया उसकी बात हो गई गलत तोब फस गए इसलिए अब किसी तरीके से ऐसी चीज करो कि मौका आए ही नहीं ऐसी चीजें करो कि सामने वाला खुद ही कह दे नहीं नहीं इन शर्तों के आधार पर हम चर्चा आपसे नहीं करेंगे और फिर चीज चिल्लाओ हम जीत गए जीत गए जीत गए जीत गए बगड़ बड़ बताऊ मगर हम ऐसे व्यक्ति
00:59:41:19 नहीं है हम वो व्यक्ति नहीं है जो अपने मुंह से कहेंगे कि नहीं नहीं हम इस बात पर चर्चा नहीं करेंगे अभी बताता हूं तो अगला क्या लिखा आपने लास्ट लास्ट वाला पैराग्राफ दिखा दीजिए हमें अनेक व्यक्तियों ने कहा था कि आप शास्त्र चर्चा में नहीं आएंगे देखा वही बात जो मैं कह रहा हूं यही है इसी उकसाने के नाम पर आपसे गलती हो गई है इसी उकसाने के नाम पर आपसे गलती हो गई है हमको य लेटर बेज करके और कुछ नहीं है अब उसको धीरे धीरे आप जो है पलस्तर कर रहे हो और कुछ नहीं है तो क्या हुआ कि हमें अनेक व्यक्तियों ने वो अनेक व्यक्ति वही है अ प्रत्यक्ष से वही अनेक व्यक्ति है वो
01:00:28:20 अनेक व्यक्तियों ने कहा था कि आप शास्त्र चर्चा नहीं करेंगे आप केवल य प्रसिद्धि के लिए चर्चा या का हंगामा करते हैं इत्यादि किसने कहा हम चर्चा नहीं करते कितने बार आपके मंदिरों में बैठ कर के चर्चा की है भाई चार जगह तो हुए और अभी फिर जाएंगे फिर जाएंगे बार-बार जाएंगे बार-बार बनाएंगे वीडियो और बताएंगे कि सर्वशक्तिमान ईश्वर ही ईश्वर है परंपरा प्राप्त आचार्य के द्वारा प्राप्त होने वाला धर्म ही धर्म है और इस प्रकार जो बताया जाने वाला जो मोक्ष है वही मोक्ष
01:01:10:03 है बताएंगे तो क्या है कि आप जो है सचा केवल वीडियो बनाते हो कहां का वीडियो तो आप बनाते हो अरे शंकराचार्य के यहां गया था वो अनऑफिशियल गुंडा वहां जाकर के क्यों नहीं उसने च वो कर ली चर्चा शास्त्रार्थ क्यों नहीं कर लिया शंकराचार्य से द्वारका पीट गया था ना वो क्यों नहीं वहा जाकर के उनसे जो स्वामी सदानंद सरस्वती जी उनसे चर्चा कर ली क्यों कहते हो तुम जो है मा ये विद्या विद्या यह सब क्या है व तो हाथ जोड़ के माफी मांग के चले
01:01:50:15 वापस अच्छा लेकिन जब सच में चर्चा करने के लिए कोई बुलाता है तो बाना बनाकर भाग जाते हैं हमने ऐसे कोई कथनों पर कोई विश्वास नहीं किया है अब मैं एक बात बता दूं हमें भी सोशल मीडिया के माध्यम से और व्यक्तिगत रूप से लोग आपके बारे में क्याक कहते हैं पता है नमाजी पता नहीं क्या ऐसे कई शब्द लेते हैं जो कहने लायक भी नहीं है यहां पर सार्वजनिक रूप से हम भी विश्वास नहीं करते थे नहीं भाई कोई सभ्य व्यक्ति ने कोई मैच्योर पसन पर्सन ने संपर्क किया ठीक है इसकी बात का हमें मान रखना चाहिए
01:02:28:08 हम भी विश्वास नहीं करते थे आपके बारे में क्या क्या कहा लुचे हैं अधर्मी है पापी है घिना है घिना है यह तक का नाए है विधर्मी है कलंक है सनातन समाज के नाम पर यह सबका हमने विश्वास नहीं किया अब आपका आगे कहना है कि आपने विश्वास नहीं किया है तो हमें आपके व्यवहार पर विश्वास है आपको तो है हमारे व्यवहार पर विश्वास मगर अभी तक आपका जो आचरण है अपने ही लेटर में अपने सिद्धांत को बदलना क्योंकि शाब्दिक भेद से टॉपिक बदल जाता है तो ये सिद्धांत हो गया शाब्दिक भेद से टॉपिक का बदलना तो जब शाब्दिक भेद से टॉपिक का बदल जा टॉपिक बदल जाता है तो फिर आपने तो अपने ही टॉपिक को बदल लिया तो ऐसे बदलने वाले इंसान के साथ हम कैसे चर्चा करें कैसे सोचे कि वो लिंक दे देगा हमें और वो हमें परतंत्र क्यों मान रहा है हमने जब उसके सामने कोई ऐसा गिड़गिड़ा नहीं तो वो क्यों विनती विनती दिखा रहा है क्यों स्वयं को स्वयंभू बता रहा है वो हमें हमें उस नाम से क्यों पुकार रहा है जहां पर खुद को वैदिक और हमें पौराणिक क्यों दिखा रहा है हमको वैदिक पौराणिक दिखाओ
01:03:39:00 ना सनातन वैदिक आर्य हिंदू दिखाओ ना ये सब चाले हैं सूक्ष्म चाले अपने नैरेटिव को फैलाने की क्योंकि आपका जो जो उद्देश्य है वो धर्म संस्थापन नहीं है आर्य समाज की संस्थापन व्यक्ति निष्ठ हो संस्था निष्ठ हो ईश्वर निष्ठ नहीं हो धर्म निष्ठ नहीं हो हम आशा करते हैं कि आपके आपके आप प्रस्तावित तीन विषयों पर चर्चा करने के लिए पधार कर आपको भगोड़ा कहने वालो लोगों का मुंह भी बंद करेंगे कर देंगे परस्पर द्वेष त्याग कर चर्चा करने का उत्तम अवसर आपके और हमारे हैं हम अब यहां पर आपने बड़े तरीके से जो है हमको बता दिया कि यदि हम जो है नहीं करते हैं तो हम भगोड़े शिद्ध होंगे अप्रत्यक्ष रूप से आपने हमें ये बता दिया ठीक हम भी आपसे आशा करते हैं अब पहली बात तो ये है सारी शर्तें मंजूर है अब आपसे आपकी भाषा में आप ये चाहते हो ना चर्चा के लिए हम मना करें यह नहीं करेंगे अब आपसे आपकी भाषा में बात करेंगे आपका कहना यह है कि आप जो जो चर्ते बताते जाए उन उन शर्तों को हम
01:04:54:08 नतमस्तक हो कर के मानते जाए अगर नहीं मानेंगे तो हम भगोड़े कहे जाएंगे हमारे जो आपके जो लोग हैं उनकी बात सत्य साबित हो जाएगी है ना तो अब हमारी शर्त सुनिए हम आपकी सारी शर्तें मान लेते हैं इसको कहते हैं मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में अब सुनो हम आपकी सारी शर्तें मानेंगे हमें ना लिंक हमें ना रिकॉर्डिंग करनी है हम ना हम जहां आप कहोगे वहां क्या कहते हैं ये हम आपके स्थान में आकर के भी चर्चा कर लेंगे आप जो है हिंदू शब्द में प्रमाणिकता बात करना चाहते हो कर लेंगे ठीक है आपने हमारे सामने ऐसी शर्त रखी है ना कि हम रिकॉर्डिंग भी नहीं देंगे हम जो है वो हिंदू शब्द पर पहले बात करेंगे जिससे जीत हार पता चले कौन ज्ञानी है कौन नहीं हमें धर्म सं स्थापना पर बात नहीं करनी है हमें इस पर बात करनी है है ना जबकि हमने कहा आपको हिंदू शब्द पर अगर बात भी करनी तो उसको बाद के लिए रखो क्योंकि अगर बाद के विषय रह भी गए तो मुख्य विषय पर चर्चा हो चुकी होगी ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं ईश्वर का स्वरूप क्योंकि यह जो बात की चीजें रहेंगी ही महीना भर नहीं रहोगे यहां पर हमारे साथ चर्चा करने के लिए वो रहेंगी और हो सकता है उसमें इतनी गरमा गर्मी हो जाए शुरू में ही कि वो बाद की चीजें आने का कोई स्थान ही ना बाकी रह जाए यह भी
01:06:09:15 है तो हम क्यों ऐसी चीज से शुरू करें जिसमें मेहनत हमारी व्यर्थ जाए अगर हम वहां पर सिद्ध भी करते हिंदू शब्द की प्रमाणिकता तो उससे क्या समाज में एकत्व आएगा भाई ऐसी बहुत सी चीजें जिन पर बात की जा सकती है क्यों लगाते हैं यह क्यों होता है वो क्यों होता है मगर इन सब पर हम अगर चर्चा करने बैठेंगे एक तो इतने इस तरह के टॉपिक्स है जो अनंत काल तक चलते रहे बात करते रहो उस पर उससे क्या मिलेगा सर समाज को फायदा इसीलिए तो हमने वो तीन टॉपिक पकड़े जिससे धर्म संस्थापन हो सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र
01:06:47:25 मोक्ष अब बात आती है कि आपका ये दोगलापन देखते हुए अपने ही सिद्धांतों से मुकर हुए आपका स्वा विजेता होते हुए स्वघोषित राजाधिराज होते हुए यह सब देखने के बाद भी आपके व्यवहार पर हमको विश्वास ना होने के बाद भी हम आपकी सारी शर्तें मान लेते हैं सारी सारी शर्तें मान लेते हैं आपके स्थान में होगी आपको लिंक नहीं देना है हमें गुलाम बनाना है ठीक है मत देना लिंक वो लिंक दे देना रिकॉर्डिंग का हमें मौका मत देना कि हम भी रिकॉर्डिंग कर पाए ठीक है अच्छा और क्या है कि आपका वो जो टॉपिक है ू की प्रमाणिकता यह भी मान लिया ठीक अब जब आपने हमें कुछ ऐसी चीजें दी है जिसको स्वीकार ना करने की स्थिति में हमें यह कहना पड़े कि हम चर्चा नहीं करेंगे है ना तो हम भी कुछ ऐसी शर्त आपको दे सकते हैं जिसको ना स्वीकार करने की स्थिति में आपको कहना पड़ेगा आप चर्चा नहीं करेंगे और जो चर्चा नहीं करेगा वो आपके हिसाब से क्या है बड़ा तो हम शर्त दे देते हैं जो व्यक्ति चर्चा के लिए आएगा हमारी शर्त य है वो निर्वस्त्र केवल कच्छे में होगा और पहले वो शीला की जवानी पर नृत्य करेगा नाक
01:08:04:01 रगड़े और जो परंपरा प्राप्त आचार्य के द्वारा दी गई चीजें हैं उनके जो मेन मेन स्लोगन है उनको बोलेगा अपने मुख से और उसके बाद हम आपके द्वारा जो शर्त बताई गई है उनके अनुसार चर्चा करेंगे ठीक है अब मान लेना इन शर्तों को क्याय उचित है इस तरह की शर्त देना उचित है जो सामने वाला स्वीकार ना कर पाए और जब स्वीकार ना कर पाए तो उसको कह दो कि तुम अपने अपने को भगोड़ा कहने वालों का मुह जरूर मैं भी कह रहा हूं आप लोगों को लुचा अधर्मी पापी विधर्मी नमाजी यह सब कहने वालों का आप मुंह जरूर बंद करेंगे इन शर्तों को मान लीजिए मुझे विश्वास है आप आएंगे भेजेंगे ऐसा विद्वान जो केवल कच्चे में
01:08:51:14 आए नाक रगड़े शीला की जवानी पर नृत्य करे और वो सारी और हम पांच स्लोगन लिख के देंगे उनको बोले अपने मुख से मैं ये मानता हूं हां मैं ये मानता हूं और उसके बाद आपके अनुसार चर्चा होगी ठीक है मान ली आपकी शर्त है हम नहीं भागे हम आएंगे अब देखो तुम क्या करते हो और हां यह लेटर बाजी खेल करके हमसे उम्मीद ना अपेक्षा मत करना लेटर बाजी की
01:09:32:21 लेटर बाजी की उम्मीद हमसे मत रखना ठीक है हमने अपना सारा जवाब दे दिया है यह सब आपके आप वास्तविकता यह है कि आप संभवत किसी के प्रभाव में आकर या किसी के उकसाने से आपने लिख दिया हमको लेटर और अब किसी तरीके से उसको टालने के लिए ऐसी कर रहे हो कि हम यह बोलने के हमें चर्चा नहीं करनी जिससे कि आप यह बोले कि भगोड़ा भगोड़ा देखो तो नहीं खेल इस बार भी अच्छा खेला है आपने आदमी गलत चुन लिया ठीक है मान लो
01:10:14:12 शर्त अपनी ऐसी शर्त लिख कर के देंगे जो सामने वाला मतलब सीधे सीधे गुलाम बना लो सामने वाले को रिकॉर्ड भी नहीं करने दोगे ये है बराबरी का अवसर
01:10:50:25 चलिए एक वो रेशन इस्ट आर्य नाम से है जो व्यक्ति पिछली बार आया था उसको भी मैं उत्तर दे दूं उसने कोई एक लाइव वगैरह की थी उसमें हमको टैग बैक भी किया है और हमारे वीडियोस के माध्यम से भी हमने य बोला था जब हमने आपको लेटर दिया था ना आबू वाले भाई साहब हमारे वीडियोस के माध्यम से भी हमने आपको उत्तर दिया था कि हमने आपका जो है ईश्वर विषय वाला ऑप्शन चुना है आप हमारा वीडियो देख भी रहे हो उस पर आकर के कमेंट भी कर रहे हो यह भी नहीं कह सकते हमारा वीडियो नहीं देखा और अगर हमारे वीडियो को नहीं देखा है तो फिर आपका हमारे साथ किसी प्रकार का व्यवहार सिद्ध नहीं होगा आए क्योंकि वीडियो देख के ही
01:11:50:18 हो पौराण का आचार आप कुछ भी बोलते रहो और हम बोल दे तो यह कर दिया भाई यह कैसे कर दिया वो कैसे कर दिया तो जो रेशनल व्यक्ति आया था उसने कुछ कुतर्क किए हैं कहीं पर बैठ कर के हमें टैग बैग भी किया है सबसे पहले उसने हमें कहा है कि हमने उत्तर दे दिया आपका भाई हमारा एक सिंपल सा प्रश्न था आपसे आपसे नहीं तुमसे सिंपल सा प्रश्न था कि क्या आपको आर्य समाज की ओर से प्रामाणिक व्यक्ति माना जाए या नहीं माना जाए आप सिंपल बोल दो नहीं है हम फॉलोअर है र समाज के मगर आपको इस प्रश्न से बचना है कि आर्य समाज की ओर से किसी को भी क्योंकि इसमें पोल है ना इसमें पोल है आर्य समाज की ओर से किसी को भी प्रमाणिक कम माना जाए
01:12:55:07 तो इस गुरु परंपरा के अभाव में इन नियमों का अभाव है तो आपको इस प्रश्न से बचना था खाना भी खा रहे हो बात करते करते तो आपने जो अपने उसमें उत्तर दिया उस पर थोड़ी हाईलाइट देख लेते हैं आपने कहा कि हमारे यहां सब फ्री स्टाइल है कुछ आर समाजी यह कहते कुछ आर समाजी वो कहते हैं भाई हम कह रहे हैं आपके यहां की नियमावली क्या है वो नियमावली तो दे दो हमको किसकी बात माननी है किसकी नहीं माननी है फ्री स्टाइल क्या होता है धर्म फ्री स्टाइल नहीं है तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एकमात्र शास्त्र प्रमाण है कहां है शास्त्र हम तो अपनी नियमावली देते हैं ना नियमावली देते हैं आपकी नियमावली कहां है लौकिक सिद्धांत संविधान जो बदल जाता है बहुमत होने पर यही है आपका सनातन फ्री स्टाइल शब्द का यूज किया है बंदे ने कि हमारे यहां तो सब फ्री स्टाइल है जिसका जैसा बुद्धि विवेक कहे वो मान ले अरे भाई वो धर्म थोड़ी होता है धर्म वो नहीं होता है फ्री स्टाइल फिर क्या है तो कुल मिलाकर के जो निश्चित नियमावली नहीं है इस बारे में कि किसको प्रमाणिक माना जाए किसको ना माना
01:14:10:10 जाए इस प्रश्न से आपने बचने की कोशिश की जब हमने कहा कि भाई आपको प्रमाणिक माना जाए कि नहीं माना जाए सीधे बोलो कि नहीं हम फॉलोअर है को हम प्रमाणिक व्यक्ति नहीं है प्रमाणिक वो जो आर्य समाज के नाम से इतना ही कह दो लौकिक सिद्धांत के अनुरूप हालांकि उस पर भी बात हो सकती है लौकिक सिद्धांत के अनुरूप जो रजिस्टर संस्था है वहां से जब कोई अध्यक्ष के द्वारा पत्र लिखा हुआ व्यक्ति होगा उसको प्रमाणिक मा इतना ही कह दो हम प्रमाणिक नहीं है मगर नहीं मैं किसी संस्था से नहीं जुड़ा हुआ तो जुड़े कहां से हो संस्थाए है जो किताबें छप रही है जो तुम पढ़ रहे
01:14:44:28 हो पहली बात आगे क्या है कि तुमने हमारे व्यवहार के बारे में वहां पर बहुत सी बातें की कि हमने आपको त तड़ाक के बारे तू तड़ाक करते हुए ये किया वो किया अपने व्यवहार के बारे में कुछ किया मुंह चलाते हुए खाना खाना यह कहां की सभ्यता है दयानंद जी के द्वारा ही बता दो खाना खाते हुए बात करना मुह चला चला करके बात करना वो भी सार्वजनिक रूप से यह भी नहीं कि व्यक्तिगत दो मित्र बात कर रहे हो अपने कमरे में सार्वजनिक रूप से मुंह चलाते चलाते बात करना जब हमें कई लोग देखने वाले हो हजारों लोग हमें देखने वाले हैं तब
01:15:26:18 ये आपने इस व्यवहार पर कोई आपने बात नहीं की हमने हमारे व्यवहार पर बात की और जब आपके मुंह चलाने के कारण आपके जो शब्द है वह स्पष्ट नहीं हो पा रहे हैं और हमें उस चीज को पकड़ना है जहां पर आप बच के जाना चाहते हैं कंफर्म करना है तो चार बार कन्फर्म कर रहे क्या दिक्कत हो रही है चार बार कन्फर्म करने से क्योंकि वहां पर कमजोर खड़ी है ना इसलिए उससे बच के आगे निकलना चाहते हो और तकलीफ हो गई हमने अगर दो चार बार उसी बात को कन्फर्म ठप्पा लगाने के लिए पूछ लिया क्या बोल इसलिए हमारे व्यवहार पर आपने उंगली उठा दी आपने य नहीं बताया कि मैं वहां पर बदतमीजी से खाना खा खा कर बात कर रहा था मेरी आवाज क्लियर आ रही है आपको आ रही है आपकी आपकी तो आ रही है लेकिन आप बारबार कर रहे थे मेरे को डाउट हो क्या पता नहीं आ रही हो आवाज आ रही बात कर रहे ना मुह चलाते हुए हमारे य बात नहीं करते हैं खा पी मैं कर लेता हूं मैं तो कर लेता कोई दिक्कत नहीं मैं तो कर लेता हूं तो क्या हुआ इसका मतलब अच्छा इसने वहां पर एक बात कही कि मुंह चलाकर इसलिए बात कर रहा था क्योंकि ऐसी ऐसी मेरी सिचुएशन थी बता सकते थे अपनी सिचुएशन भैया ऐसी ऐसी बात है नहीं मैं तो कर लेता हूं यानी इसने जो अमर्यादित आचरण है अभद्र आचरण है बदतमीजी है उसको अपना धर्म बताया और यह
01:16:41:20 लोग है धर्म के रक्षक यह लोग है धर्म के रक्षक यह लोग टॉयलेट से भी लाइव आ जाएंगे बदतमीजी करने के लिए बेशर्मी दिखाने के लिए यह धर्म के रक्षक और क्या कहा इन्होंने अपनी उस लाइफ में यह तो बताया कि हमने इनको तड़खा इन्होंने ये नहीं बताया कि इन्होने मिमिक्री करके बताया महाभारत में लिखा है सामने वाले के साथ वही आचरण करो जो अपने साथ जो सामने वाले से अपने लिए अपेक्षा करते हो वही धर्म उसी धर्म का पालन करो तो इस तरीके से कोई आपके जो ठीक ठाक लोग हो उनसे कोई इस तरह से आपसे बात करता देखेगा आपको ठीक लगेगा तो क्यों किया और अगर कोई कारण था तो वो कारण क्यों नहीं बताया अपने धर्म अपने द्वारा मजबूरी में हो जाने वाली चीज को ही वहां पर बड़े गर्व के साथ क्यों ठहरा दिया कि मेरा यही धर्म है मैं ऐसा ही करता हूं मैं तो कर लेता हूं अब तुम तो पता नहीं क्या क्या कर लेते हो भाई तुम तो पता नहीं क्याक कर लेते हो क्योंकि जब मैं तो कर लेता हूं पर आते हैं ना जब धर्म को त्याग दे तो उसकी फिर कोई
01:17:56:21 अंत नहीं होता है एक ऐसा व्यक्ति भी आता है जो यहां बोलता है हां भाई माता के साथ गमन करने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है तो तुम तो पता नहीं क्या क्या कर लेते हो ऐसे लोग भी आते हैं वो आया था एक बार कौन था उसका क्या नाम था सिरोही उससे मैंने पूछा क्या आप ऐसा कोई सिद्धांत मानते हैं जिसमें माता के साथ पत्नी जैसा व्यवहार नहीं करना नहीं नहीं आवश्यकता पड़ने पर मैं कर लूंगा तो लोग तो पता नहीं क्याक करते हैं ऐसे नहीं होता ना एक मर्यादा होती है और अगर आपकी कोई दिक्कत है तो आप मत आओ उस समय मत आओ हम तो फोन नंबर देते रहते हैं फोन नंबर से संपर्क करो आपके पास तो है पहले भी चर्चा हो चुकी है क्यों आप घबरा रहे हो कि अभी ये लाइव से चले जाएंगे इसलिए क्योंकि चोट पहुंच रही है ना हृदय में दिक्कत हो रही है उससे कोई मतलब नहीं है जब आप चोट पहुंचाते हैं राधा जी के बारे में यह हो रहा है वो हो रहा है इससे तुलना हो रही है उससे तुलना अरे भाई किसी की मान्यता है क्यों बोल रहे हो शब्द क्यों बोल रहे हो नाना मर्यादित भाषा में कर दो खंडन औरन स्टार से कंपेयर करना तुम्हें बुरा नहीं लग
01:19:11:00 रहा आएंगे इस पर भी आएंगे चलो आगे चलते हैं अब बात क्या हो रहा है कि यह भाई साहब अपने मनमर्जी तरीके से बेशर्मी के साथ वहां पर मुंह चला चला कर के बातें कर रहे हैं इनके कुछ शब्द हमें समझ में नहीं आए या फिर हमने बात को यथावत रूप से जानने के लिए और यथा रूप से जानने के लिए वहां पर दो तीन बार क्वेश्चन कर दिया तो अब उसका अर्थ क्या निकाला जाए यही निकाला जाए कि आप जो है प्रश्न से भागना चाह रहे हैं या फिर यह निकाला जाए कि आपके पास उसका उत्तर कुद जो भी निकाला जाए मगर कुल मिलाकर के उसी के उपलक्ष में आपने यह बोल दिया कि वो जो जो मिमिक्री की थी ड्रामे बाजी ये सब जो किया था उसके बाद आप चाहते हैं कि आपसे वही व्यवहार हो और भी कई कारण थे जो तू तड़ा की भाषा का उपयोग हुआ तो केवल इन्होंने जो अपनी लाइव की है वहां पर ये सब छुपा लिया कि भाई वो जो मैंने मिमिक्री की थी सामने वाले की है ना छुपा लिया छुपाओ छुपाओ तो जहां ईश्वर बाधित होता है वहां से धर्म की अपेक्षा करना मूर्खता होती है वो हमने
01:20:26:00 यहां भी देखा यहां भी देखा व्यक्ति लेटर लिख लिख के लिख लिख के अपने अधर्म का वो दे रहा है प्रमाण आगे क्या है कि हां जब इनसे पूछा भी जा रहा है तो एक यह नहीं बता रहे वहां पर बता रहे मेरी माता जी ने ऐसा कहा था मेरी माता जी ने मुझे अभी अभी खाना परोस के दिया था मुझे खाना था वो ठंडा हो रहा था जो भी है इन्होंने वहां पर रीजन दिया यहां पर अकड़ में बकती में मैं तो ऐसे ही करता हूं क्यों क्योंकि नाक कट रही होगी ना है ना सच्चाई वहां जाकर बताओ और तुम्हारी सच्चाई को ना जानते हुए जब यहां पर आपके आचरण के अनुसार आदमी व्यवहार करे प्रतिकार करे तो वो गलत है क्योंकि उसने उस उस सच्चाई के अनुसार काम नहीं किया जो आपने छुपाई थी और कहीं और जाकर बताई थी इसीलिए तो गलत है ना क्योंकि यहां तो आपने छुपा ली वो सच्चाई मां के द्वारा खाना परोसे जाने की छुपा ली ना तो इसलिए क्योंकि आपने वो हमने आपकी छुपाई जाने वाली सच्चाई के अनुसार आचरण नहीं किया तो इसलिए हम गलत है अरे क्या सोचते हो अपने मन में तीन पांच हो जाते हो जब सामना होता है
01:21:43:22 तो परतंत्र है लोग तुम्हारे तुम कुछ भी करते रहो सामने वाला को उत्तर ना दे और उत्तर दे दे तो मैं यह हूं पर्सनल लाइफ में वो हूं मैं एसपी का हूं मैं ये हूं मैं मुझे व्यक्तिगत रूप से जानते नहीं हो तुम अभी क्या जानोगे तुम्हें घमंड होगा तुम्हारे व्यक्तिगत उसका कि तुम इसके आईजी डीआईजी आईपीएस वो अरे प्रम प्राइम मिनिस्टर प्रेसिडेंट हो गए हमें घमंड है राम का गुरु गोविंद और ग्रंथ का हमारे लिए यही पर्याप्त है तुम्हें लगता है तुम्हारे पीछे लॉयर्स है हाई कोर्ट है सुप्रीम कोर्ट है प्रेसिडेंट है प्राइम मिनिस्टर है
01:22:25:09 तो हमारे पीछे राम है राम हमारे पीछे गुरु गोविंद और ग्रंथ है हमें उसका घमंड है बेकार में भगवत गीता पढ़ते हो यार भगवत गीता में कितनी बार कहा है भगवान ने मुझे समर्पित कर सब कुछ बावटा कहां है मेरा ये मेरा वो केवल धर्म रक्षक होने का पाखंड दिमाग पर खुमार चढ़ गया है मानसिक रोगी जैसा लक्षण हो गया
01:23:13:16 है कोई न्याय प्रियता है ही नहीं तुम लोग जो भी करते रहो सामने वाला उसको जो झुक कर के बिल्कुल तोड़ दो उसको उसको इतना मोड़ो इतना मोड़ो उसकी री की हड्डी टूट जाए मेरी बात मान कोई न्याय प्रियता नहीं है कोई निष्पक्षता नहीं है मेरी बात मान मैं जो भी करूं उस पर प्रतिकार मत कर यहां तुमने एक वजह बताई कि मैं तो ऐसा ही करता हूं वहां तुमने वजह बताई कि क्या कहते वो मेरी माता जी ने खाना परोसा था ये क्या है दो प्रकार की बातें है राम क्या सिखा रहे हैं रामो दुर भी भाते इतना तो तुम्हारे जो अलंकार समाज है व भी मानता है भूल गए रामो दुर्वी भाष चले धर्म की रक्षा
01:24:15:08 करने उस समय भी धर्मिक आचरण नहीं है जब धर्म के लिए तुम कहीं पर धर्म को प्रस्तुत करने आ रहे हो अरे कम से चलो अपनी पर्सनल लाइफ में कुछ और हो भाई कम से कम जिस समय धर्म को प्रस्तुत करने आ रहे हो उस समय तो धर्म का आचरण पकड़ लो मगर नहीं धर्म से ऊंचा है अपना अहंकार राशनलिस्ट आर्य निर्भय आर्य यह सब ऊंचा है धर्म नहीं ऊंचा है राम नहीं ऊंचे है यह सब ऊंचा
01:24:49:01 है अब आप अब आ जाते कि भाई आप जो है भेद लेने आए थे भेद ले आए हनुमान जी की तरह क्या आपको अपने ईश्वर पर विश्वास नहीं है जो उसकी ईश्वर उस ईश्वर की ईश्वर को सिद्ध करने के लिए आपको सामने वाले के पास शिक्षा लेने उसका भेद लेने के रूप में उसकी शिक्षा प्राप्त करने जाना पड़ रहा है भाई आपका ईश्वर पूर्ण है ना सत्यम ज्ञान अतम ब्रह्म है ना तो आपको क्या आवश्यकता है किसी के पास जाकर के उसका भेद लेने की शिक्षा लेने की उसकी
01:25:26:28 पूर्ण है ना नहीं है और इसका अर्थ क्या है आपको ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता से नहीं ईश्वर की पूर्णता से नहीं आपको जो है केवल हराने से मतलब है आर समाज की सिद्धांत के ऊपर किसी ने उंगली कैसे उठा दी हमको बस सामने वाले को हराना है आपको इससे मतलब हमारा उद्देश्य नहीं है हमने कितनी बार कहा है सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म ले चलो अपने साथ हम तो आर्य समाज ही कहने लगेंगे अपने आपको को कर दो सर्वशक्तिमान ईश्वर को बदल दो ये वाली चीजें संशोधन वो वो तो शोध ग्रंथ है ना शोध होने लायक है बदल दो व जो वादत ईश्वर है उसको हटा दो हम होंगे हर समाजी हमको इससे मतलब नहीं है कि हम किस संप्रदाय के नाम से जाने जाए हमको इससे मतलब है कि हमारा सनातन धर्म सुरक्षित हो एक छत्र हो बदल दो अपनी
01:26:40:12 चीजें अगर हमको तुमने गलत कर भी दिया तो क्या करोगे ज्यादा से ज्यादा तुमने जो दुर्जन तोष न्याय की बात कर रहा हूं तुमने अगर गलत सिद्ध कर भी दिया ज्यादा से ज्यादा क्या करोगे सर्वशक्तिमान ईश्वर छीन ग ना दुनिया से यही करोगे बस सार्वभौम सिद्धांत अकाट्य सिद्धांत नहीं तुम्हारे पास नास्तिक बनाओगे दुनिया को नहीं तो अपने ईश्वर को अद सिद्ध करो ना क्या भेद लेने जाने की जरूरत है और क्या भद ले लिया तुमने दो कोड़ी की बातें थी हमने आपको एक जिज्ञासु समझते हुए ज्यादा बात नहीं की दूसरा विषय भी चल रहा था
01:27:25:06 भेद ले लिया हम भेद लेने गए ते हनुमान जी की तरह ब्रह्म विद्या में कहां स्वीकार किया है इस तरह से भेद लेकर के प्राप्त करो शरणागत हो कर के ब्रह्म विद्या जानने को कहा गया है कहां परण सात्विक कार्य में आप जो राजसिक नियम को क्यों लागू कर रहे हो रणनीति क्षत्रिय विषक कार्य ब्रह्म विद्या का कार्य नहीं है वो हनुमान जी जो भेद लेकर आए थे युद्ध को जीतने के लिए लाए थे यह युद्ध है क्या तुहे इससे मतलब नहीं धर्म की संस्थापन हो हनुमान जी जो भेद लेकर आए थे युद्ध के लिए भेद लेकर के आए थे इनके पास कितने शस्त्र अस्त्र यानी कि तुम्हें सत्य से कोई मतलब नहीं है तुमने पहले ही सोच रखा है कि इसको इसका मुंह बंद कैसे कराना है इसलिए तुम य जानने आए थे इसके पास कौन कन से तर्क
01:28:13:27 है और ऐसा कोई उस दिन हमने वाक्य नहीं बोल दिया तुमसे जो हमने अपने सेशन में अपने लाइव सेशन में अपने वीडियो में बोला ना हो और अगर यह मान भी लो कि तुम भेद लेने आ रहे हो तो तुम्हें ये क्यों लगता है कि भेद लेने आने वाली स्थिति में जो बाद में होता है वो सौहार्द पूर्व ऐसी चर्चा होगी तुम हमसे भेद लेकर जाओगे अरे वाह ये तो हनुमान जी ने किया था इसलिए हम भी वो तुमसे भेद लेके गए उसमें कोई आपत्ति नहीं है और आ जाओ आ जाओ हम तुम वो हम तुमसे बात करते हैं चर्चा करते हैं भाई ज भेद लेके आया जाता है ना तो सुनियोजित चर्चा नहीं होती है भेद लेने जाया जाता है तो सुनियोजित चर्चा नहीं होती है फिर होता है युद्ध तो उस भेद लेने जाने को इस भेद से आप मत जोड़िए मनुस्मृति 12वां अध्याय 37 वा श्लोक जिन कर्मों को करते समय छिपाने का भाव आए वो त्याज है तामसिक है क्यों छिपाई तुमने अपनी आइडेंटिटी भगवान शंकराचार्य ये वो सब क्यों कहा तुमने स्वयं को ब्रह्म विद्या विद्या में इस तरह से भेद लेने की बात हमें बताओ ये तो हार जीत का खेल कर रहे हो भाई तुम्हारे लिए हार जीत है हमारे लिए धर्म संस्थापन है
01:29:29:12 हमें मतलब नहीं है आर समाज जीते कौन जीते अब तुमने जब भेद लेने को धर्म मान लिया है तो तुम नहीं चाहते कि बराबरी की हो बातचीत तुम्हारे हिसाब से अगर भेद लेना धर्म है तो तुम नहीं चाहते कि बातचीत बराबरी की हो तुम यह चाहते हो कि तुम्हारे भेद लेने को हम जो है स्वागत करें वाह अगर हनुमान जी भेद लेने जाए भी रावण के य तो रावण से अपेक्षा करोगे वो स्वागत कर बा तुमने बहुत बढिया धर्म
01:30:01:25 निया अरे भाई तुमने भेद लिया है तो हमें भी भेद लेने दो अगर वो धर्म है तो भेद लेने से कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए अगर तुम कह रहे हो कि वो धर्म है तो हमें भेद लेने दो क्यों फिर अब तुरंत चर्चा के लिए हुआ जा रहा है क्योंकि तुम्हें धर्म संस्था से मतलब नहीं है तुमको केवल अपना नाक ऊंची करनी है नाक मैं बहुत बड़ा तुरम खाऊ 30 मार खाऊ नाक ऊंची करनी चोरी जब तुम्हारी चोरी पकड़ी गई तो उसको तुम गर्व के साथ बता रहे हो कि भाई व जो है हनुमान जी क भेज लेने तुमको अपने ईश्वर की ईश्वर को साबित करने के लिए लोगों के पास जाना पड़ रहा है इससे और बेकार बात क्या
01:30:50:15 होगी और जिससे तुम शिक्षा लेने जा रहे हो ना उसके तुम फिर वो हो रहे हो शरणागत नहीं हो रहे उसके इसलिए ब्रह्म विद्या को जानने में ब्रह्म विद्या पर चर्चा करना और जो जो युद्ध लड़ना होता है दोनों अलग-अलग चीज है उनको एक मत करो हनुमान जी से अपनी तुलना मत करो ठीक है और फिर अगर तुमने यह स्वीकार कर ही लिया कि हम भेद लेने हनुमान जी भी गए थे तो तुम्हारी इस चीज पर तुम ये अपेक्षा मत करो कि सामने वाला बहुत दिल खोल के तुम्हारा जो है हृदय से स्वागत करेगा वाह तुमने भे लेकर के बहुत बढ़िया काम किया उस तरह उसके अनुरूप व्यवहार
01:31:29:25 होगा और सामने वाले को भी भेद दो अपना सब भेद दो जो जो मांगे सारे भेद दे देना अपने मतलब व्यक्ति देखो कर क्या रहा है कि उसकी जब चोरी पकड़ी जा रही है तो उसके लिए वो कह रहा है मेरी इस चोरी को स्वीकार करो तुम धर्म के रूप में हद होती है व्यक्तिगत जीवन हमारा बहुत प्रभावशाली है अरे होगा लोग कहते हैं अक्सर कहते हैं कि हमारा स्पन इतना बड़ा है हरा हमारे पीछे इंटरनेशनल है और जो है रामपाल वाले कहते हैं हमारे इतने वो है हम लोग ये करते हैं वो करते हैं हमारा यह चलता है वो चलता है लोग कहते हैं आ दिन तुम भी कहो हम आईजी है डीआईजी है हम भगवान है धरती के तो ऐसे लोगों से कहना कि अगर तुम्हारे पीछे ये सब है ना पूरा तंत्र तो हमारे पास हमारे पीछे तो हमारे पीछे राम
01:32:36:13 है आज तक क्यों नहीं भेद लेने भेद लेने की बात बताई थी मैं भेद लेने गया था एक महीने बाद जब पकड़ा गया तब अपने आकाओं को बता रहा है कि मैं भेद लेने गया था हनुमान जी की तरह और किसी ने वहां पर चलती हुई स्ट्रीम में से पूछ लिया कि यह तो इसके यह रशन कहता है ना स्वयं को रशन आर यह इसके तर्क है कि हमारे आर्य समाज में तो फ्री स्टाइल है यह धर्म है इनका आर्य समाज का हमारा समाज में तो फ्री स्टाइल है नियमावली नहीं है निश्चित तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एक मात्र शास्त्र प्रमाण है यह सब नहीं है इनके फ्री स्टाइल है फ्री स्टाइल जैसे फ्री स्टाइल फाइट होती थी पहले दारा और इनके जमाने में फ्री स्टाइल फाइट होती थी ये सब है कह रहा है वो रेशन हमारे आर समाज में तो फ्री स्टाइल है सब फ्री स्टाइल ही तो होता है नास्तिकों का फ्री स्टाइल ही तो होता है ये लोग जो जानवरों जैसा आचरण कर रहे हैं ये सब फ्री स्टाइल वाले ही है कोई मर्यादा नहीं है तो बोलने से पहले सोचो अब किसी ने इनसे चलती हुई उसमें प्रश्न कर दिया कि ये सब करने की बजाय जो है आप लोग
01:33:52:01 धर्म का प्रचार करो ये सब क्या कर रहे हो तो बोल रहा है कि हमको शिवांश ने विवश किया है मतलब शिवांश जो है इनके हिसाब से जो आलोचना करता है तो वो क्यों करता है ना करे आलोचना वो अपना काम करे हम अपना काम कर रहे हैं हमें थोड़ी ना पड़ी है कि हम ये सब करे खंडन मंडन तो आलोचना करना अगर गलत है अगर आपके हिसाब सेय आलोचना है पहली बात और वो गलत है तो किसने शुरू किया आलोचना किसने शुरू किया भांड कहना किसने शुरू किया राधा जी को गाली देना अरे भाई तुम्हारे हिसाब से प्रमाणिक नहीं है बैठो अपना प्रचार करो किसने शुरू किया पुराणों को गाली देना किसने शुरू किया जिसको अपने सर पर लेकर घूमते हो उसी में वह सारी आलोचना लिखी है जो कहीं से भी किसी को शुरुआत में ऐसा भी करते हैं लोग किसी को जब सत्यार्थ प्रकाश कहते चौथा समुल्लास बाद में पढ़ना पहले चवा पढ़ लो बाद में पढ़ना कक उसमें ऐसी ऐसी बातें है ना जो व्यक्ति अगर शुरू में पढ़ ले तो व कभी पढ़े ही ना
01:34:58:08 तो किसने शुरू किया ये सब अपमान जनक आपत्ति जनक वक्तव्य देना फतिया कसना य सब किसने शुरू किया भांड कहना प प मूवी से कंपेयर करना मर जाए भागवत का मर ही क्यों नहीं जाता वोह ये सब कहना क्यों आवश्यकता अपना निराकार ईश्वर को पूछो ना नहीं जब तक य सब नहीं करेंगे तब तक हमारे दुकाने कैसे चलेंगी और जब इन चीजों का कोई प्रतिकार करे तो हमें विवस कर रहा है आलोचना कर रहा है अच्छा यहां पर एक तर्क और आता है हमने तो जो भी बात कही प्रामाणिक कही इसका मतलब कि आप जो आज जो ये कर रहे हो बैठ कर के खंडन मंडन उसका कारण हमारी हमारे वक्तव्य नहीं है शिवांश नहीं है उसका कारण है क्या प्रमाणिक है क्या नहीं है इसलिए आप कर रहे हो तो जो व्यक्ति जो बोल रहा है ना पूछ रहा है य सब क्यों कर रहे हो तो उसको सही जवाब दो आपके हिसाब से प्रमा णता कारण है तो यह बोलो कि हम जो कर रहे वो प्रामाणिक है प्रामाणिक बोल रहे इसलिए हमें करना पड़ रहा है यह मत बोलो शिवास ने विवस किया है रामो दना भी भाष दो प्रकार की बातें क्यों कर रहे हो पूरा समाज कर रहा है पूरा समाज लगा के गुरुकुल के हेड और भले ही वह किताबों के माध्यम
01:36:13:09 से उसको फॉलो करने वाला कहां है धर्म या फिर वो अंडर कवर्ड गुंडा आर्य है ये यही होता है आर्य का लक्षण एक एक जगह पर आकर के कहते हैं कि हमारी शत्रुता अद्वैत से नहीं है इतनी जितनी हमारी शिवान से हां क्योंकि था नहीं ना कोई यह सब बोलने वाला प्रखर हो कर के कांटे की तरह चुम रहा है तुम्हे अब
01:36:49:07 आवान कह रहे हैं वहां पर कि उसके वीडियोस देख लेना उसमें देख लेना उसके होंगे 10000 और उसके लाइक्स होंगे इतने क्योंकि लोगों को मसाला चाहिए होता है अरे भाई तुम ही तो अपनी बात का ही खंडन कर रहे हो इनके चुबरा ये है कि ये जो जो सशक्तिकरण हो रहा है ना इन विचारों का सार्वभौम सिद्धांतों का जो सशक्तिकरण हो रहा है इनकी मेन प्रॉब्लम यह है जो वहां पर बैठकर चर्चा कर रहे देखना उसके व्यूज इतने हैं उसके हमारे इतने मेरा मेरा देख लेना 5000 व्यूज और इतने लाइक है भाई प्रहलाद के टाइम पर अगर वोटिंग पड़ती ना तो हिरण्य कश्यप को सारे वोट जाने थे कौरवों के टाइम पर वोटिंग पड़ती ना तो कौरवों को वोट जाने ौर सौरव वाला पक्ष सही तुम खुद ही अपनी चीजों को सामने ला रहे हो तुमने बताया हमारे वोट कम है और तुम्हारे वोट ज्यादा
01:37:45:15 है तो समझ लो तुम किधर जा रहे हो जुगनू और उल्लू सूर्य के प्रकाश की ओर आकर्षित नहीं होते इसमें दोष सूर्य के सामर्थ्य का नहीं जुगनू और उल्लू की असमर्थता का है निर्णय क्या हुआ प्रकाश के विषय में जुगनू और उल्लू प्रमाण नहीं होते समझे और बात अगर यह की जाए ना मसाला चाहिए लोगों को मसाला चाहिए तो मसाले से आपकी चीजें चलती है आपने इतना निर्लज तरीके से ये सब ना किया होता ये राधा जी के बारे में यह कह रहे वो कह रहे ये सब चीज ना चालू की होती कौन सुनता यह भड़काऊ भाषण दे दे कर के अपने अस्तित्व में आए हो परंपरा प्राप्त आचार्यों को कोप कह के पंडे क के पाखंडी कह के जाने कितनी जगह भांड यह सब सत्यार्थ प्रकाश में लिखा है और क्या और किसकी बात करें तो मसाला यह है
01:38:58:13 मसाले की ओर जाती है पब्लिक सभी को जय श्री राम किसी प्रकार का वैचारिक मतभेद हो निम चर्चा करनी हो तो संपर्क करें 74836 जय श्री राम [संगीत]
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
Live: Required tasks are not set on the Rules page yet.
-
⬜Hindi SRT
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
सर्वशक्तिमान का भय या भागने के बहाने #aryasamaj #dayanandsaraswati
% not set🔗 This video is made from parts of these videos
Description
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮