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00:00:01:23 [संगीत] सभी को जय श्री राम आज की हमारी जो चर्चा है बहुत ही महत्त्वपूर्ण विषय पर है वर्णाश्रम व्यवस्था को त्यागने की लोग बात कर रहे हैं पहली बात तो यह है कि लोगों के मन में भ्रम है कि जाति व्यवस्था और वर्णाश्रम व्यवस्था जो है वोह दोनों अलग अलग है अच्छा वर्णाश्रम व्यवस्था में जब ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र है और जाति व्यवस्था में भी यही बात बोली जा रही है कि कोई ब्राह्मण नहीं कोई क्षत्रिय नहीं सब सभी है तो फिर दोनों में अंतर क्या मान रहा है व्यक्ति किस बात का अंतर मान रहा है पहला प्रश्न य आ जाता है दूसरी बात य आ जाती है कि हम जो बागेश्वर वाले हैं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी उनका सम्मान भी करते हैं और उन्होंने उनको उन्होंने जो वक्तव्य दिए हैं उसके कुछ ऐसे अर्थ हम निकाल सकते थे कि वह जो है हिंदुओं को एक ही करने
00:01:17:02 के मकसद से ऐसा बोल रहे हैं कि जाति के नाम पर जो भेदभाव होता है जो गलत चीजें होती है जाति के नाम पर कि मैं बड़ा हूं तू छोटा है या घणा मूलक जो जाति का एक पेश किया जाता है किसी के भी द्वारा अमूमन ऐसा होता नहीं है मगर एक पिक्चर बनाई जाती है लोगों के मन में उस पर हम बात करेंगे डिटेल में तो हमारे साथ कुछ विश्लेषक और है इन विषयों के मर्मज्ञ वो भी आएंगे और बात करेंगे अलग तरीके से केवल शास्त्र और प्रमाण के आधार पर भी तर्क के आधार पर भी और जो प्रासंगिक जो प्रासंगिक वातावरण बना हुआ है उसके आधार पर हम मैं जो बात कर रहा था कि हम जो धीरें कृष्ण शास्त्री जी उनका सम्मान करते हैं और उनको हम एक दे सकते थे इस बात का क्या कहते हैं उसको शब्द नहीं आ रहा है मतलब एक प्लस पॉइंट था कि उनकी बातों का य अर्थ हम निकाल सकते थे कि भाई ऐसे जात पात की विदाई करो जैसा कि आपने नरेट देखा है ऐसे जात पात की विदाई करो जिसमें की घणा मूलक उसका रूप जो है अगर कहीं पर है
00:02:32:18 तो उसकी विदाई करो तो तो ठीक है मगर जब व्यवस्था को ही चरमरा देंगे तो फिर आप रक्षा किस धर्म की करने की बात कर रहे हैं प्रश्न ये उठ जाता है जैसे जात पात की करो विदाई भाई ये बौद्ध ने भी तो यही कहा था जैन ने भी तो यही कहा था और आज भी जो बहुत सारे ऐसे तंत्र चल रहे हैं ब्रह्मा कुमारी हो या आर्य समाज हो या वो भी ये जो वर्ण व्यवस्था का वो है वो कर्म के आधार पर वही करने की कोशिश करता है कि यह जो वर्गीकरण के द्वारा जो एक व्यवस्था बनाई जा रही है समाज में उसको हटा दो उसको त्याग कर दो तो आप एक बात बताइए कि आज क्या वर्ण व्यवस्था लागू है जो कि बाधक बन रही है सनातन धर्म की स्थापना में क्या व वर्ण व्यवस्था लागू है अगर आप अनटचेबिलिटी की करते हो छुआछूत की करते हो तो क्या आज एक आम नागरिक गोलगप्पे की दुकान पर गोलगप्पे खाते समय यह चेक करता है कि जो गोलगप्पे खिला रहा है वो कौन है शूद्र है ब्राह्मण है वैश्य है क्षत्रिय है कौन है नहीं इसका अर्थ क्या है कि पिछले 200 सालों से लगभग जब से ये अंग्रेजी सरकार
00:03:47:21 आई अंग्रेजों ने हमारे ऊपर राज किया तब से वर्णाश्रम धर्म को बिल्कुल हमारे समाज से वो वर्णाश्रम नाम करह गया शास्त्रों में रह गया है और जो कुछ अ जो ढो के ला रहे हैं ना हमारे धर्म को पीछे से परंपरा प्राप्त आचार्य गण उनके पास रह गया वस्तु स्थिति यह है कि आज समाज में कहीं पर भी वर्ण व्यवस्था लागू है ही नहीं तो जब वर्ण व्यवस्था लागू नहीं है तो आप समाज के पतन का जो टोपा है वह वर्ण व्यवस्था के सर पर कैसे पहना रहे हो कि हिंदू जो विफल हो रहा है वो बट के हो रहा है वो वर्ण व्यवस्था के कारण हो रहा है भाई वण लागू कहां पर है कौन से क्षेत्र में ऐसा है कौन सा हमारी ची जहां पर जन्म से जो वो होगा ब्राह्मण वही ब्राह्मण का कार्य कर रहा होगा बहुत कम रह गया ऐसा तो यह ऐसा दिखाई दे रहा है जैसे कि आप जो समस्या नहीं है उसको जो समस्या है उससे उत्पन्न होने वाले जो उत्पाद है समस्या से उत्पन्न होने वाले उत्पादों का टोपा जो समस्या है ही नहीं जो अस्तित्व
00:05:02:27 में ही नहीं है उसको पहना करके और आप जो है अपनी किसी तरीके के मंतव्य की पूर्ति करना चाहते हो यही तो दिखाई दे रहा है भाई वर्ण व्यवस्था लागू नहीं है तो फिर सनातन समाज के पतन का कारण कहां से है जब वर्ण व्यवस्था लागू थी तब तो हमें राम राज्य मिलता था सोने की चिड़िया कहा जाता था देश जैसे जैसे वर्ण व्यवस्था का हास हुआ है भले ही वो बौद्धों के समय से हो जहां जहां जैसे जैसे कुटा आत होना शुरू हुआ राजा राम राजा राम मोहन राय इत्यादि इत्यादि के द्वारा वर्ण व्यवस्था पर जैसे जैसे दयानंद जी के द्वारा तो जैसे जैसे कोटा घात हो रहा है वर्ण व्यवस्था इत्यादि पर तब ये पिछले 200 साल में आपको देखने को मिल रहा है ना हमारे देश का जो बंटवारा पिछले 200 साल में हुआ है वो उससे पहले था क्या ये सब बातें सोचने की है अ जो हमारे आज के आगंतुक हैं अतिथि हैं राघव जी तो आ गए हैं राघव जी तो पहुंच गए जी राघव जी जय श्री
00:06:11:12 राम तो मेरा कहने का पहला सूत्रा क्मक शैली में मैं आपको बता दूं कि जब वर्ण व्यवस्था आज की डेट में लागू नहीं है तो उसको आप दोष कैसे दे रहे हो कि वह समाज के पतन का कारण है जिस उसको जिसको कि आपको दूर कर देना है भाई वास्तविकता यह है कि वर्ण व्यवस्था लागू नहीं है यह समाज के पतन का कारण है और इसको आपको दूर करना है और इसमें भी एक फैक्ट फुल बात बता दूं कि एक लाइन हमारे सुनने में आ रही है कि भाई हिंदू को हिंदू बनाना है तो ऐसा करना है तो जिनको आप हिंदू बना रहे हो यह जो जात पात मिटा करके जात पात की व्यवस्था को चरमरा करके जिनको आप हिंदू बना रहे हो वह हिंदू नहीं है क्या जो उनको हिंदू बना रहे हो आप क्या बना रहे हो उनको इसका अर्थ यह है कि आप जो हिंदू परंपरा से चला आ रहा है जो पुराण को मानता है भगवान की रास लीलाओं को मानता है भगवान श्री कृष्ण वो जो हिंदू है जो परंपरा प्राप्त पुराण वेद उपनिषद सबको समग्र जो चीजें हमें परंपरा से प्राप्त है सबको मानने वाला जो हिंदू है उस हिंदू से बचाते हुए आप उसे उस हिंदू की ओर ले जा रहे हो समाज को जो इन चीजों को नहीं मानता यही तो कह रहे हो आप तो इसका अर्थ क्या हुआ
00:07:26:19 कि आपकी परेशानी है यह वर्ण व्यवस्था है ही नहीं क्योंकि आर्य समाज भी ऐसी व्यवस्था देता है जो पुराणों को नहीं मानता है कृष्ण को नहीं मानता है रासलीला को नहीं मानता है भगवान की बहुत सी चीज जो पुराणों की जो व्याख्या गलत तरीके से करता है और गलत अर्थ बता कर के पेश कर प्रस्तुत करता है समाज के सामने और एक नफरत एक द्वेष का भाव उत्पन्न कर देता है समाज के समाज के अंदर तो आप जो परंपरा से आ रही जो चीजें हैं व्यक्ति को उनसे बचा इस नाम पर कि हम जात पात को मिटा रहे हैं जात पात तो मिटी हुई है ऑलरेडी मिटी हुई है मेरे घर के पास में मंदिर है हनुमान जी का वहां का जो पुजारी है वह ब्राह्मण नहीं
00:08:15:22 है और क्या ही बताऊ मैं आपको तो जो चीज मिटी हुई है उसको आप उस चीज के मिटे होने के कारण जो समस्या उत्पन्न हो रही है उन समस्याओं का दोष उस मिटी हुई चीज को आप दे रहे हो जिसको जीवंत करने का प्रयास हम लोग कर रहे हैं समाज को बचाने के लिए धर्म को बचाने के लिए तब तक हम कुछ बातें कर लेते हैं दोनों पर एक हमसे दूर है और एक साथ उसके साथ कैसे रहे जिसने गाली दी और पता नहीं कौन सा कहां से प्रत्याशित कर लिया
00:09:05:08 तो सबसे पहली बात तो यह हो गई कि जिस वर्ण व्यवस्था से आप मुक्त करने का समाज को कह रहे हैं कि हम मुक्त कराएंगे समाज को उससे ऑलरेडी समाज मुक्त है तो उसके मुक्त होने के कारण जो विकृति उत्पन्न हो रही है समाज का उससे जो मुक्त होने के कारण जो समाज में जो विकृति उत्पन्न हो रही है उन विकृतियों का भी टोपा जो है पहना रहे हो आप वर्ण व्यवस्था के ऊपर जाति व्यवस्था के ऊपर तो यह एक ठीक बात दिखाई नहीं देती
00:09:42:22 और और भी बातें हैं जो आज हम करने वाले हैं ढेर सारी अभी मैं आपको एक बात बता दूं कि यहां पर आने से पहले ही कुछ देर पहले ही ये मुझे एक रामपाल वाले का फोन आया रामपाल वाले की तरफ से यह कह रहे हैं जातिवादी शंकराचार्य जाति धर्म कुल धर्म शाश्वत बोला जा रहा है भगवत गीता में तो वह भी जातिवादी है अब हसो है ना एक वार्ता हुई थी एक जगह हम हिंदू राष्ट्र गोष्ठी के लिए गए थे हाथरस में वहां पर एक सज्जन थे जो जातिवाद से दिक्कत है तो उनके साथ एक वार्ता हुई है बहुत कट टू कट टू द पॉइंट वार्ता है और उसको लेखनी के माध्यम से हुई तो खैर जो उस समय माइक भी लगे हुए थे तो माइक उस समय काम नहीं कर पाया जिसकी वजह से रिकॉर्ड नहीं हो पाई तो आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके मगर उसको रिटन में नोट किया गया है तो उसकी पीडीएफ प्राप्त है यहां इसके डिस्क्रिप्शन में वीडियो के डिस्क्रिप्शन में हम उसको डाल देंगे तो आप लोग पढ़िए टू द पॉइंट है और बहुत ही मतलब सरल भाषा में तो आप आसानी से एक
00:10:58:15 उसपे पहुच पाएंगे आयुषी गुप्ता जी क्या प्रश्न है आपका पूछ लीजिए तब तक मैं ऑपरेटर महोदय से कहूंगा कि राघव जी से संपर्क करते हुए जो आतिश जी आज आने वाले हैं उनसे संपर्क साधे और उनको यहां पर लाए आयुषी गुप्ता जी बताए क्या क्वेश्चन है आपका हां यह बात आप सही कह रहे हैं कि धीरें जी ने हिंदुओं को एक करने के लिए ऐसा बोला है हम लोग भी ऐसा ही अर्थ निकालना चाहते थे उनकी बात का मगर जब मैंने सर्च किया तो उनका एक वक्तव्य आया कि पुजारी भी बनेगा जात पात के आधार पर घृणा जो फैलाई जा रही है उसको दूर करना तो ठीक है उसकी विदाई करना करना ठीक है मगर जब आप उसको एज इट इज जो जात जो वर्ण व्यवस्था है जो जाति धर्म है उसको आप बुलाकर के आप ही जो परंपरा प्राप्त लोग हैं आप कहते हो कि आप उनसे जुड़े हुए हो
00:12:14:08 आप जो हमारा रामानंद संप्रदाय रामचरित मानस जिन के रचयिता है इसमें तुलसीदास जी हैं क्या ये लोग जाति जाती धर्म को मिटा देने वाले लोग थे जाति धर्म का को विदाई करने वाले लोग थे अच्छा एक बहुत सिंपल सी बात है सब लोग कहते कर्म से कर्म से वो वाली बातें बहुत बार हो चुकी है और धीरे धीरे आज की लाइव में भी हम लोग करते रहेंगे मगर एक बात बताइए कि क्या कोई इले देखिए कर्म के आधार पर जब हम सिलेक्शन करेंगे ना सीधे कर्म के आधार पर तो पहली बात तो व्यवस्था नहीं रह जाएगी फिर भी मैं कह रहा हूं क्या राम राज्य में श्री रामचंद्र जी का जो अभिषेक होने जा रहा था उसके लिए कोई इलेक्शन हुआ था कोई कंपटीशन हुआ था कि नहीं हुआ था
00:13:01:12 किस आधार पर उनका जो है राज्य अभिषेक होने जा रहा था वंश परंपरा के आधार पर ना और वह हटे तब भी कोई कंपटीशन नहीं हुआ जब उन्हें वनवास जाना पड़ गया भरत बने और वापस आ गए तो फिर वह बने क्यों नहीं वहां एक इलेक्शन एक कंपटीशन रखा गया कि कर्म के आधार पर चुना जाएगा भाई तो जन्म से नॉमिनेशन व्यक्ति का जन्म किस कुल परंपरा में हो रहा है उसके आधार पर उसका नॉमिनेशन
00:13:40:14 होगा हां जी जी जी सही कह रहे हो आप वह भी हमने देखा उन्होंने यह भी कहा है कि रोटी रोटी बेटी के बारे में और उन्होंने यह भी कह दिया कि मंदिरों में पुजारी भी जो है व होने चाहिए जो अमुक अमुक वर्ग है वो भी बन सकता है तो इन सबसे बातें उनकी जो बातें हैं वह कुल मिलाकर उधर ही जा रही है जिधर जाने से हम रोकना चाहते हैं जिधर जाने से उनकी बातों का अर्थ हम य नहीं निकालना चाहते कि उधर जाती हुई उनकी बातें हम नहीं निकालना चाहते मगर उन्होंने तो क्लियर कर दिया जो शास्त्रोक्त शास्त्र सम्मत जो बातें हैं वह नहीं है उनकी ना अच्छा एक तरफ व कहते हैं मैं उनकी थोड़ा सा प्रकाश डालूंगा एक तरफ कहते हैं कि शंकराचार्य सनातन धर्म के प्रधानमंत्री है धर्म क्या होता है तुमको क्या करना है और क्या नहीं करना यही धर्म है बहुत सरल भाषा में अगर क धर्म यह है आपको क्या करना है और क्या नहीं करना है तो जब सनातन धर्म के प्रधानमंत्री जो हैं वह यह कह रहे हैं कि जो वर्णाश्रम धर्म है उसी से हमारे हमारा उत्थान हो सकता है उसी से हम बच सकते हैं तो जब आप स्वयं स्वीकार करते हैं कि व प्रधानमंत्री तो फिर यह अवेल
00:14:55:28 क्यों क्या कारण है उस अ वेलना का यह सोचने वाली बात है विचार करने वाली बात क्यों अलना आप एक तरफ कहते हैं कि भाई वह सनातन धर्म के प्रधानमंत्री है और उनके जैसा शास्त्र एकदम एकदम शास्त्रोक्त बात निकलती है उनके मुख से और सबसे ज्यादा पूज्य हमारे लिए प्रधानमंत्री कहते हैं आप अपने स्वयं इतनी निष्ठा आपकी अपने स्वयं के गुरु को प्रधानमंत्री नहीं कहते आप आप प्रधानमंत्री शंकराचार्य को कहते हैं और इस पर भी शंकराचार्य को प्रधानमंत्री आप कहते हैं फिर भी शंकराचार्य के जो वचन है आपके लिए कोई मान नहीं रखते या आपके कानों में नहीं पढते चलिए आपने स्वयं उस पर वो नहीं किया खोजबीन नहीं की कि क्या है क्या नहीं है मगर शंकराचार्य के वचनों को तो आप मानते हैं ना तो आप कैसे विरुद्ध चले गए अच्छा दूसरी एक बात यह भी है कि एक तरफ ये कहते हैं शंकराचार्य जो है प्रधानमंत्री है सनातन धर्म के फिर दूसरी तरफ इनके पास गौतम खट्टर जी आते हैं गौतम खट्टर कौन है अच्छा एक तरफ यह भी कहते कि हनुमान जी के लिए ऐसा बोलने वाले गलत है राधा जी के लिए ऐसा बोलने वाले गलत य भी मानते
00:16:11:04 हैं मूर्ति पूजा य भी करते हैं मगर एक दिन इनके पास आते गौतम खट्टर जी गौतम खट्टर जी क्या लेकर चलते हैं अपने हाथ में सत्यार्थ प्रकाश लोगों को प्रेरित करते हैं सत्यार्थ प्रकाश को पढ़ने के लिए आप अपने चैनल से उस व्यक्ति को प्रमोट कर रहे हैं जो उस किताब को बेच ने वाला व्यक्ति है उस किताब का प्रचार करने वाला व्यक्ति है जिस किताब में लिखा हुआ है कि मूर्ति पूजा करना अधर्म है पाप है शिव भगवान के लिए इतनी अनर्गल बातें लिखी हुई है राधा जी के लिए इतनी बातें लिखी हुई है उसी प्रधानमंत्री के लिए पोप पंडे पाखंडी यह सब लिखा हुआ है तो ये क्या है यह दोहरा दोहरी बात नहीं है तो और क्या है धर्म का रास्ता कठिन होता है कठिन होता है निर्णय लेना कठिन होता है इसीलिए भगवान ने कहा था तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एकमात्र शास्त्र प्रमाण है तू शास्त्र से मत हिलना बहुत सिचुएशन आएंगी तरह तरह की इधर उधर की समझ नहीं आएगा क्या करना है इसीलिए शास्त्र शास्त्र में लिखी बात मान निष्ठा
00:17:24:01 रखो अब एक बात यह है कि लोग कहते हैं कि अंधविश्वास नहीं करना चाहिए अध विश्वास नहीं करना चाहिए तो अंध अविश्वास भी तो नहीं करना चाहिए अगर अंध विश्वास नहीं करना चाहिए गुरुदेव का वचन है अं अविश्वास भी नहीं करना चाहिए कई बार हम लोग अलजेब्रा इत्यादि में गणित में ऐसे प्रॉब्लम को सॉल्व करते तो वहां पर एक्स स्क्वा वा स्क्वा वगैरह को मानक ले लेते हैं उपाद उपाधि दे कर के चलते हैं कि माना किय ये है माना कि ये है और उसको लेकर के चलने पर हमारा जो है परिणाम हमें प्राप्त हो जाता है जो प्रामाणिक होता है जब छत बन रही होती है ना आरसीसी की तो उसमें एक नकली छत एक सपोर्ट के लिए नकली दीवारें पहाड़ बांधते हैं ना बनाई जाती है और उससे वह प्रामाणिक छत प्रामाणिक दीवारें प्राप्त हो जाती है जो हमें प्राप्त करनी है तो वह क्या है वहां पर विश्वास तो इसी प्रकार से विश्वास भी होता है जो आपको उस जगह तक पहुंचा देता है जहां आप तर्क से नहीं पहुंच पा रहे है
00:18:41:19 ना तो एक तरफ यह कहते हैं शंकराचार्य हमारे लिए पूज्य है परम पूज्य हैं प्रधानमंत्री हैं एक तरफ यह कहते हैं कि एक तरफ यह उसको क्या कहते हैं गौतम खट्टर को अपने यहां पर बुलाते हैं और प्रमोट कर और गौतम कट्टर कौन है जो जिनकी पूजा य कर रहे हैं उन पूजा हों का खंडन करने वाला जो पूजा यह कर रहे हैं उन पूजा का खंडन करने वाला गौतम खट्टर और चलो वह हिस्सा भी हटा दो मगर वह गौतम खट्टर तो बैठ मंच पर चढ़ चढ़ के शंकराचार्य को क्रिटिसाइज करता है कि आज के शंकराचार्य क्या कर रहे हैं यह कर रहे हैं वो कर रहे क्योंकि उनका तो जन्म ही शंकराचार्य के क्रिटिसाइज करने से ही हुआ है शंकराचार्य को क्रिटिसाइज करने से ही बहुत सारी संस्थाए जो फली फूली है बहुत सारी इस कन हर पन्ना खोलो
00:19:42:12 मायावादी रहे हो ज्ञान गंगा पढ़ो गीता तेरा ज्ञान अमृत पढ़ो पहले दूसरे तीसरे चौथे पेज पर शंकराचार्य का विरोध उसको आवश्यकता नहीं पड़ी और किसी आचार्य का नाम लेने की क्योंकि हिंदू धर्म का अर्थ ही है सनातन धर्म का ही है शंकराचार्य मगर ठीक है इन बातों को साइड रख देते हैं मगर वो जब एक तरफ आप कह रहे हो कि जब शंकराचार्य मेरे लिए प्रधानमंत्री परम पूज्य हैं ये हैं वो बहुत अच्छी बात है बहुत अच्छी बात है उसके बाद फिर गौतम खट्टर को आप प्रमोट कर रहे हो जो मूर्ति पूजा का विरोधी है जो मूर्ति पूजा के को अधर्म कहता है पाप कहता है और वही गौतम खट्टर उन्हीं शंकराचार्य जी को जो है क्रिटिसाइज करता है मंच से खंडन करता है उनका निराधार निराधार होता है तब केवल जैसे यह जो तर्क रहित बातें करते हैं यह जो नव सवादी है तथाकथित स्वघोषित आचार्य प्रशांत जैसे य बे सिर पैर की बातें जो तर्क दिया करते हैं उसी तरीके के बे सिर पैर के तर्को के आधार पर यह लोग बहुत बाबाई लूटते हैं शंकराचार्य का खंडन के नाम पर अब फिर आप लास्ट
00:20:57:16 में कह देते हो कि मैं मैं तोय मैं तो अपने छोटे भाई को देख रहा हूं गौतम खट्टर के रूप में मैं तो स्वयं को देख रहा हूं गौतम खट्टर के रूप में यानी कि आप क्या हो आप शंकराचार्य को पूज्य मानने वाले हो शंकराचार्य को फॉलो करने वाले हो या आप गौतम खट्टर के रूप में शंकराचार्य का विरोध करने वाले हो ये सोचने वाली बात है अरे भाई धर्म को बचाने के लिए हम अधर्मी नहीं बन जाएंगे कुछ चीजें तो पकड़ के चलनी ही पड़ेंगी ना सब चीजें थोड़ी ना छोड़
00:21:32:08 दे कुछ चीजें तो पकड़ के चलनी पड़ेंगी ना हा इसको नहीं छोड़ेंगे भाई ठीक है धर्म रक्षा के लिए इतना कॉम्प्रोमाइज ठीक है इतना कॉम्प्रोमाइज इतना कॉम्प्रोमाइज कुछ चीजें तो होंगी ना जो पकड़ के रखनी है मां का मतलब मां बहन का मतलब बहन कि कल को कॉम्प्रोमाइज वो हिंदू धर्म का नाम बचाने के लिए इनको भी छोड़ दे क्या नहीं छोड़ सकते ना कुछ चीजें होंगी जिनके लिए हमें प्रतिवाद होना पड़ेगा नहीं इसमें परिवर्तन नहीं आएगा वो कौन सी चीजें हैं भाई जिस जिस चीज से आपको दिक्कत लग रही दिखाई दे रही जबक उससे दिक्कत है नहीं बौद्धों से शुरुआत होती है जाति व्यवस्था का जाति व्यवस्था को नकारने की और जैसे ही शुरुआत होती वहीं से हमारे यह जो भारत भारतवर्ष है इसपे संकट
00:22:24:12 है आपसी युद्ध होते थे अगर ऐसा युद्ध नहीं होता था बाहे मेरे ख्याल से उनको आने में कोई समस्या हो रही जिससे कि वह आ नहीं पा रहे तो राघव जी आ चुके हैं राघव जी आप
00:22:56:01 बोले जी राघव जी राघव जी बोले जी जय श्री राम आवाज आ रही आवाज आ रहीम जी जी बोलिए हां तो मैं जी मैं कहना चाहता हूं कि श्रीमान धीरेन कृष्ण शास्त्री जी यदि अभी उन्होंने हाल ही में जो वक्तव्य दिया कि मंदिरों में अब ब्राह्मण पुजारी भी होना चाहिए अब वह जात की भी करवा रहे हैं तो यदि जात पात की वे विदाई करवा रहे हैं और सभी को पंडित बनाने की बात कर रहे तो क्या यह एक इनके हिसाब से नवीन जातिवाद को पैदा करने वाली बात तो नहीं हो रही क्योंकि जातिवाद बाद तो कैसे आपके इन लोगों के नजरिए में कैसे पनक पाए कार्य विशेष को लेकर के तो आप यदि कार्य विशेष में दूसरों की सह भागीदारी कर रहे हैं पंडितों की कार्य
00:24:11:07 में तो फिर क्या करना चाहते हैं आप कि पंडित उनके काम करें यदि पंडित उनके काम करें तो जो ऑलरेडी सब अपने अपने काम कर रहे हैं उस व्यवस्था को आप बिगाड़ना क्यों चाहते इसकी स्पष्टता उन्होंने करनी चाहिए और अभी दो तीन दिन दो तीन महीने पहले उन्होंने शंकराचार्य जी को जब बुलाया था और उन्होंने उद्घोष किया था कि हमने हिंदू राष्ट्र बनाने की प्रेरणा इनके बयान इनके वक्तव्य से ही ली है तो फिर क्या उन्होंने शंकराचार्य जी के वचनों को नहीं सुना यदि नहीं सुना तो फिर यह ऐसा क्यों कर रहे हैं यह कुछ समझ में नहीं आता और यह कह रहे हैं कि गौतम खट्टर जी इनकी फोटोकॉपी है जबकि जिनकी कथा यह सुनाते हैं गौतम खट्टर जी इन्हीं के मंचों पर करके उन अवतारों का खंडन कर जाते हैं तो इसका मतलब यह धार्मिक है यह रामानंद संप्रदाय से जुड़े हैं इसी परंपरा प्राप्त गुरु के शिष्य हैं यह मनमुक व्याख्या करने वालों के चेले बनकर घूम रहे हैं यह स्पष्ट भी उनको कर देना चाहिए मेरी आवाज आ रही है जी बिल्कुल
00:25:21:21 आ इसी क्रम में जैसे पूर्व में अपनी बात हुई थी कि आज आज समाज में में बहुत कुछ भारत का समाज झेल रहा है अब वो जब झेल रहा है तो अपने अपने तरीके से अव्यवस्थाओं कु व्यवस्थाओं का रोना रोता है लेकिन जैसा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी और अन्य चाहते हैं जात पात की विदाई वाली बात तो भारतीय समाज जात पात की विदाई हो चुकी है
00:25:54:15 जी उसी स था कति ज्ञाप वाद माना जाता जी आवाज नहीं आ रही राघव जी आपकी
00:26:29:28 आपको एक मजे की बात बताऊं जैसे कि अभी राघव जी ने एक बात कही कि हमारे समाज में आप नॉर्मली देखिए जहां भी आप जाते हैं क्या आप आप जो एक सामान्य नागरिक है उसकी बात मैं कर रहा हूं क्या वह य देखता है कि मैं किससे क्या ले रहा हूं किससे मिल रहा हूं कौन है क्या है जाति व्यवस्था कहां है अच्छा तो दूसरी बात यह है कि अभी आप देखो कि हम हमारे यहां पर देश में जितने भी शीर्ष के लोग हैं जिसको हर कोई फॉलो करना चाहता है जितने भी शीर्ष के लोग हैं वह नेता हो अभिनेता
00:27:09:08 हो कलाकार म्यूजिशियन हो आईएएस हो आईपीएस हो यह जितने भी शीर्स पर रहने वाले लोग हैं इवन कोचिंग बड़ी बड़ी यह सब लोग वर्णाश्रम को ना मानने वाले लोग है तो कहां पर किस रूप में वह वर्णाश्रम व्यवस्था है जो आपको चुप रही है कुल मिलाकर के यह दिखाई दे रहा है कि ले दे कर के जो ये कुछ मठ है रामानुजाचार्य के मठ हो गए मधवा चार्य के मठ हो गए शंकराचार्य के मठ हो गए इन मठों में जो कुछ आचार्य गण जो बच गए हैं जोय चार पांच मट बच गए चार पांच परंपराएं हैं जो अपने धर्म को लेकर आ रही है सदियों से इन मठों पर अब आपका अतिक्रमण है इससे आपको समाज सुधार दिख रहा है मतलब प्रधानमंत्री को क्यों मानते हैं क्योंकि प्रधानमंत्री की शैली को प्रधानमंत्री के ज्ञान को प्रधानमंत्री की हर चीज को बदल देना इसलिए मानते हैं ऐसे नहीं बोलना चाहिए जब हम एक भीड़ को संबोधित कर रहे होते तो हमें ध्यान रखना है कि हम क्या कह रहे हैं किससे कह रहे हैं कौन कौन हमें सुन रहा है आते जी आ चुके बहुत बहुत स्वागत है आप जी आपका जय श्री
00:28:24:08 राम जी जय श्री राम जी तो दर्शकों को मैं थोड़ा सा आप स्वयं ही बता दें अपने बारे में मैं तो बोल ही चुका हूं आप भी थोड़ा सा बता दे और फिर हम आगे फिर बात करते जी कलकाता से का रहने वाला हूं मूलत बिहार से हूं जी जी और धर्म का कार्य करना चाहता हूं कुछ सोच विचार रखता हूं इस माम जी बहुत बढ़िया अच्छा ये एक बात जैसे एक बात कही गई है जो उसी पर हम लोग आज चर्चा कर रहे हैं जात पात की करो विदाई जैसे मान लीजिए जो हमारे मुख्य मुख्य शहर है जो जितना भी हमारा जो ऐसा ऐसी जगह है वहां पर कोई वर्णाश्रम आज लागू नहीं है हो सकता है किसी गली कूचे में किसी गांव में किसी रूरल एरियाज में बच गया हो मगर क्या यह जो नारा दिया जा रहा है जात पात की करो विदाई क्या विशेष तौर पर वहां के लिए है तो ये किस जात पात की विदाई करने की बात कह रहे हैं लोग जो जात पात जो जो जात पात आज अस्तित्व में रही नहीं गई है और जिसके ना रहने का यह दोष है जो आज हम पतन
00:29:39:13 देख रहे हैं क्षति देख रहे हैं समाज की जो उसके ना रहने पर जिस उससे जो उत्पन्न होने वाली जो विकृतियां है उन्हीं विकृतियों का दोष जो चीज नहीं है जिसके कारण वह विकृति उत्पन्न हो रही है उसी को पहनाया जा रहा है तेरे ही कारण है तो इस पर आप अपना क्या विचार रखते वो थोड़ा सा बताए जात पात की करो क्या विधाई ये तो ऑलरेडी सब कोई करके बैठे हुए हैं और जितना जात पात से दूर जाएंगे उतना ही अपना अनिष्ट बुला के लाएंगे जैसे आप मैं बंगाल से हूं तो बंगाल में एक बात खूब चलता है कि देश का जब बंटवारा हुआ था तो बंगालियों और पंजाबियों का बंटवारा कर दिया गया और इसका दोष नेहरू के नाम पर एक्चुअली हिंदुओं को दिया जाता है कि हिंदी भाषी लोगों ने ऐसा करवाया था यह कम्युनिस्ट की एक चाल है तो मेरा यह कहना है कि जब आप लोग यह समझ रहे हो कि बंगाल और पंजाब का बटवारा हुआ किसी और प्रांत का नहीं हुआ तो उनको यह भी तो समझना चाहिए कि बंगाल और पंजाब में ही उस काल में जाति को लेकर सभी कोई उल्टा बात करने लग गए थे कि जाति ही सबसे खराब चीज होती है जाति को छोड़ देना
00:30:54:18 चाहिए जाति को जिस राज्य ने छोड़ा वो बद हो जाति को छोड़ना क्यों है किस लिए है क्योंकि दरअसल हम आज के डेट में जो भी जीविका करते हैं जिस जो भी जीविका करने के लिए मजबूर है उसमें जाति की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि हम जहां पर भी नौकरी करते हैं या जो भी कार्य करते हैं वह कार्य करवाने वाला कोई एक कंपनी तंत्र है और कंपनी की तो अपनी जाति होती नहीं तो व अपने यहां पर काम करने वालों की जातियों से उसका क्या लेना देना और जैसे ही हम किसी नौकरी में चले जाते हैं तो हमारी जाति खत्म हो गई यह लोग चूंकि अपनी जातिया कर्म करने के लिए अब उनके पास कोई स्कोप नहीं है और ऐसे होते हुए भी इतने साल गुजर गए चार पांच जनरेशन तो आराम से निकल ज्यादा भी हो सकते हैं तो इतने जनरेशन के बाद लोग भूल गए हैं कि हम जाति व्यवस्था में क्यों थे उसका रहने का क्या अच्छाइयां था अच्छाइयां
00:32:10:21 थी आज के डेट में अगर हम नौकरी के लिए ही सोचते हैं कि भाई पढ़ाई लिखाई क्यों कर र है नौकरी करने के लिए पढ़ाई लिखाई क्यों करना है आर्थिक दृष्टिकोण से सफल होने के लिए पर आर्थिक दृष्टिकोण क्या है अर्थ क्या है अर्थ के लिए सबसे पहले लोग पैसे रुपए पैसे को मानते हैं रुप आज के रेट में जो रुपया पैसा है ुद उसकी अपनी जाति विकृत हो चुकी है अगर कोई हिस्ट्री ऑफ मनी पढ़े तो रुपए पैसे की भी एक जाति होती है विच मटेरियल कैन बिकम फिट टू बी अ मनी हम सोना को पैसा मानते हैं ना सोना को क्यों मानते हैं आलू को क्यों नहीं मानते हैं इसके पीछे कुछ कारण है क्यों सोना को ही पैसा माना गया है तो सोना में हर वो गुण है जिसके कारण व पैसा बन सकता है वह पैसे की जाति के हिसाब से एकदम सही है पर यह कागज का जो नोट जिसे हम आज पैसा मान रहे हैं उसमें पैसा बनने का कोई गुण नहीं है उसकी जाति पैसों की रुपयों की है ही नहीं
00:33:26:20 तो हम लोग जब वाले अर्थ को ही अर्थ मान रहे हैं तो हमारी तो अपनी जाति होगी हम समझेंगे नहीं की जाति क्या ब बढ़िया बहुत सारी बातें इतने सारे विषय है और इतने सारे अलग अलग आयाम है और सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और हम लोग ज्यादातर आयाम और विषय के बारे में के मूल सिद्धांतों के बारे में भी नहीं जानते ऐसे में से कोई बात कह देना बहुत गलत है
00:34:03:15 जी अच्छा एक ये जो बात आती है मैं इस पर अपनी बात बता दू की जैसे कुछ लोग कहते कि नहीं कर्म से होती है जाती कि व्यक्ति जन्म से कुछ और होगा मगर वह जो कर्म करेगा उसके अनुसार उसकी जाति हो जाएगी तो इस बारे में हम लोग बहुत सारी चीजें कह चुके हैं मगर केवल सिर्फ तर्क परही बात करले प्रमाण प तो फिर वो वाली बात आ जाएगी कि हम जो प्रमाण दिखाएंगे उसका अ कुछ और निकालते क्या कहे चिरिया चिरिया खाना में रहने से शेर बिल्ली हो जाता है
00:34:39:02 क्या नहीं मगर मैं यह सोचता हूं कि जो व्यवस्था है व्यवस्था का भी परवन कहीं ना कहीं एक सुनियोजित वातावरण से है व्यवस्था का अर्थ है एक सुनियोजित वातावरण और सुनियोजित अर्थात उसमें सीमाएं हैं कि एक ऐसा वातावरण जिसमें हमने जो सीमाएं बना दी हैं उन सीमाओं के अंदर की चीजें होंगी उन सीमाओं के बाहर की चीजें नहीं होंगी अर्थात व्यवस्था का मतलब यह हो गया कि यह होगा और यह नहीं होगा जी है ना अगर हम कर्म के अनुसार यह बहुत बड़ा एक टॉपिक आ जाता है जब हम लोग जाति व्यवस्था की विदाई की बात कर तो कर्म के अनुसार यदि हम लोग मान लेते हैं कि व्यवस्था हो सकती तो क्या वो उस व्यवस्था का परवन एक व्यवस्था के रूप में देखा जा सकता है जैसे अभी आपने बात कही ना कि सोना सोने में सोने के गुण है व सारे गुण है जिससे उसको मनी माना जा सके मनी उसको मनी के रूप में माना जागर जो कागज का नोट है उसम वो गुण नहीं है फिर भी वो उस चीज को उसम अपनाया जा रहा है तो इसी प्रकार से ये जो कर्म के अनुसार जो वर्ण व्यवस्था
00:35:54:07 है यह वास्तविक तौर पर वण व्यवस्था है नहीं और इसी का तो नतीजा है आज अपने चारों और जो आप विकृति देख रहे हैं समाज में अब ऐसी बातों का क्या कहे कभी ऐसा लगता है खर मैं भी यह सब बातें अपने यंग टाइम में बोला करता था नहीं समझता था आजकल तो ऐसा लगता है कि इन सब बातो का क्या जवाब दे कोई कहे आसमान का रंग लाल है पानी भगाता नहीं है तो फिर इस बात का क्या जवाब हो सकता है के अनुसार जाति अरे जाति जाति होती है कर्म कर्म होता है आप एक बात
00:36:35:08 बताइए पिता का धन पुत्र को मिलना चाहिए या नहीं मिलना चाहिए बिल्कुल मिलना चाहिए क्यों अगर उसम वो आवारा है तो नहीं नहीं वो बगल वाले को पहले गुण कर्म देके उसको दे फिर हा गही ना मेरे परोस का एक लड़का अच्छा है और मेरा बच्चा आवारा है तो मैं अपनान परोस वाले को दे दूं फिर फिर तो सेकंड सेकंड ऑप्शन आ जाएगा भाई पति मेरा कर्म ठीक से करता नहीं है कोई और लड़का है वो अच्छा कर्म करता पति के रूप में तो क्या उसको पति मान ले अरे जी कुछ भी बोल रहे हैं इसमें एक ये भी बात है कि जैसे ये कर्म के अनुसार परवन अगर होगा तो जैसे भगवान ने कहा हे अर्जुन जा तेरा धर्म है युद्ध करना तो कर्म के अनुसार जो जाति को हम अगर वर्ण को अगर हम स्वीकार करने भी लगेंगे तो फिर उस वर्ण आधारित जो धर्म होगा उसके लिए हम किसी को बाध्य कैसे करेंगे क्योंकि वह तो अपना मन मन के अनुसार कर्म करके और अपना धर्म धर्म बदल लेगा और उसको वह धर्म बदलने
00:37:50:14 का विकल्प हमने दे रखा है मतलब की जसे जैसे अभी हम हमने बात कहा ना कि पिता का धन पुत्र को मिलना चाहिए या नहीं मिलना चाहिए अगर सच्चे इस्लाम की बात की जाए माने जो आधार था इस्लाम का यहां तक कि अली को नेक्स्ट खलीफा नहीं माना गया अबू बकर को माना गया इसके पीछे लॉजिक यही था कि पिता का धन पुत्र को नहीं मिलना चाहिए अच्छा उनका कहना था कि जो मुसलमान लोग लूट खोट के जो भी पैसा ला रहे हैं वह तो धर्म का पैसा हुआ तो चलो मान ली कोई एक मोमिन अच्छा है उसने बहुत सारा काफिरो को लूट लिया तोब उसके मरने के बाद उसका पैसा उसके बेटे को जाएगा या समाज में बटेगा क्योंकि उसके बेटे ने तो जिहाद किया नहीं था जिहाद तो बाकियों ने किया है तो इस्लाम के हिसाब से पिता का धन पुत्र को नहीं मिलना चाहिए वकफा कारण भी यही है कि हर व्यक्ति का अपना संचित धन उसके मृत्यु के बाद
00:39:05:15 धर्म को जाएगा और कुछ हिस्सा वो अपने बच्चों को भी दे सकता है तो पूरा हिस्सा बच्चे को देने के लिए वो वक बोर्ड बनाकर उसका मतवाली अपने बच्चे को बना देता है तो उस तरह से वो ये र बैक डोर पॉलिसी निकाला गया है तो उ वही बात यहां पर आती है जी मतलब आपका कहने का मतलब है कि इस्लाम की जो मूल संरचना है वो भी वर्णाश्रम के विरोध में हां मल इस तो विरोध में है सक्सेशन एक्ट में पर हां लेकिन कहने का मतलब क्या है अल्टीमेटली अली खलीफा बना अल्टीमेटली अबू सुफियान के बच्चों का ही वंश चला जो सुनी लोग कहते थे कि वंश नहीं चलना चाहिए उन्होंने भी अपना ही वंश चलाया तो वो कहने से नहीं होता वो प्रैक्टिकली पॉसिबल नहीं है जी हा और सार का क्या मतलब होता है मतलब कुछ भी बोल सकते हैं जैसे एक एग्जांपल अभी देता हूं आजकल यह फेमिनिज्म का मैटर बहुत चल रहा है हमारे बड़े बड़े कोर्ट के बड़े बड़े जज भी उल्टा सीधा बोल देते हैं अब कोई अगर मन से माने कि वो लड़की है चाहे व पुरुष के रूप में जन्म
00:40:20:16 लिया हो तो आज का कानून व्यवस्था धीरे धीरे य हमें समझाना चाहता है कि वो मन से लड़की तो उसे लड़की मान लो अब एक पुरुष लड़कियों के हॉस्टल में चला गया ये कह के कि मैं अपने आप को लड़की मानता हूं और फिर वहां किसी के साथ उसने दुष्कर्म कर दिया जबरदस्ती यह केस हुआ है तो भाई मनमाना तरीका से करो इसमें ये वाला भी हुआ है कि एक एकने बोला मैं मन से अपने को लड़की मानता हूं तो उसको लड़की घोषित कर दिया गया उसने जो है ओलंपिक शायद उसमें भाग लिया और
00:40:59:21 यों को पटक दिया अ नहीं ऐसा ऐसा हुआ है लड़कियों के हॉस्टल में वो लड़का लड़की बनके रह रहा है और वहां पर रहते हुए उसने अपने रूम मेट का या हॉस्टल की किसी दूसरी लड़की के साथ दुष्कर्म किया और वो दुष्कर्म का केस कोर्ट में आया तो वहां पर यह कहा जा रहा है कि चकि वो लड़की तो दुष्कर्म कैसे कर सकता है पता नहीं उसका जजमेंट अभी मुझे ध्यान में पूरा केस चल ही रहा है तो भाई अगर मन माने तरीके से हर चीज करोगे तो जन को मानना ही नहीं है तो फिर यह तो क्या कह
00:41:45:08 मैंने एक आ स्पद बात थी अगर सनातन धर्म के दृष्टिकोण से अगर देखे फिलहाल तो इसका परवन अगर कर्म के अनुसार मान लेते तो इसका पसान किस व्यवस्था में होता है सोच के देखिए कि यह व्यवस्था की इसलिए जा रही है कि जब हमें आवश्यकता पड़े कि हमें ब्राह्मण की आवश्यकता है क्षत्रिय की आवश्यकता है तो हम उसको आसानी से ढूंढ सके इसलिए हमारे यहां पर नाम तक डिवाइड किए गए कि अगर ब्राह्मण हो वो ऐसा नाम रखे जिससे वोह जल्दी पहचान में आए अगर हमें ब्राह्मण की आवश्यकता है क्षत्रिय की आवश्यकता जल्दी पहचान में आए तो इसलिए नाम को भी डिवाइड किया गया कि वो ऐसे नाम रखे वो ऐसे नाम रखे टीका भी डिवाइड किया गया वो ऐसा का लगाए वो लगा है ना ये मतलब बहुत सारी सिंबल्स है जो डिवाइड कर दिए गए कि जिससे कि वो व्यवस्था में जल्दी से काम आए अब मैंने एक आर्य समाज की एक महिला थी माता शक्ति उनसे मैंने कहा था पूछा था कि वह सिचुएशन कैसी है कि भाई मैं मैं यह सोच मैं आज तक जानता हूं कि यह व्यक्ति ब्राह्मण है या क्षत्रिय है और मैं छत्री के पास गया रक्षा रक्षा के विषय से जल्दी चलो डाका डाला जा रहा है आपकी आवश्यकता रक्षा करो अब वो क्षत्रिय बोलता है भाई
00:43:00:14 पाच मिनट पहले तुमने थोड़ा सा दीर कर दी मैंने पाच मिनट पहले कर्म कर लिया ब्राह्मण का मैं अभी भी ब्राह्मण हो गया हूं तो यह कैसा धर्म है जो अपने धर्म को त्यागने का विकल्प दे रहा है व्यक्ति को यह कैसी व्यवस्था है और जब धर्म को त्यागने की व्यवस्था थी ही तो ऐसे धर्म को मानने के लिए बाध्य करते भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को हे अर्जुन जा तू क्षत्रिय है तेरा धर्म है रक्षा करना जा के युद्ध कर रक्षा कर मैंने आपको एक लेख भेजा है नौकरी का इतिहास नौकरी का इतिहास जी तो दरअसल जब यूरोपियन लोग अपने यूरोप से बाहर निकले दुनिया में अनजान जगहों पर जाकर लूटपाट करके वहां से धन इकट्ठा करने के लिए तो वो लूटपाट के लिए उनको नौकरों की आवश्यकता थी कोई भी लुटेरा गैंग होता है तो उसको लुटेरे गैंग में बहुत सारे लोगों की आवश्यकता पड़ती है ना तो पहले क्या होता था कि लोग अपने कुछ दोस्त दोस्तों को एकत्र कर लिए और कहीं पर जाकर लूटपाट कर लिए तो यूरोप में एक सिद्धांत बना कि हम लोग कुछ कंपनी खोल लेंगे और कंपनी में लोगों को नौकरी देंगे और
00:44:15:14 उनका नौकरी में काम ही होगा कि दूसरे जगह पर जाकर लूटपाट करके व से धन इकट करके ला अच्छा ईस्ट इंडिया कंपनी का क्या काम था वो जहां भी गया लूटपाट किया ईस्ट इंडिया कंपनी के अलावा और भी जितने ईस्ट इंडिया कंपनी या उस समय जो भी कंपनिया यूरोप में बना जो अफ्रीका में गया दक्षिण अमेरिका में गया ऑस्ट्रेलिया में गया भारत में तो आया ही और भी अलग जगह पर गया उनका काम क्या था लूटपाट करना पर वहां पर वो लूटपाट करते कौन थे जो उन कंपनियो की नौकरी
00:44:51:21 करते और एक बात है एक किसी अंग्रेज इतिहासकार का एक बहुत फेमस कोट है शायद सीटी बॉक्सर नाम था अभी ध्यान में नहीं आ रहा उसने कहा था थर्ड वर्ल्ड इज द बेस्ट प्लेस फॉर द यूरोपियन टू सेंड देर बास्टर्ड्स आपने टी लोरेंस का नाम सुना होगा जिसने इस्लामिक वर्ल्ड का राजनैतिक नक्शा तैयार किया था आज जो हम मिडिल ईस्ट में इस्लामिक दुनिया का जो भी नक्शा देख रहे हैं कि कहां पर कौन सा देश है यह सारा प्लान टी लॉरेंस का बनाया हुआ था और टी लॉरेंस जैसे हजारों या बहुत सारे मिलिट्री स ऑफिसर थे अंग्रेजी सेना में जो किसी राजा के किसी बहुत बड़े बैरन के नाजायज औलाद थे ये हर बड़ा जो भी पैसे वाला लोग था राज परिवार का हो या कोई बहुत बड़े धनाढ्य परिवार का उनके घर में जो नौकरा निया काम करती थी उन नौकरा नियों से इनके संताने होती थी और इन्हीं संतानों को यह लोग अपने फौज में टॉप पोजीशन देकर दूसरे देश में भेजते थे मार्केट करने के लिए लूटपाट करने के लिए
00:46:08:16 क्योंकि जिस व्यक्ति का जन्म का ठीक ना हो वह बहुत आसानी से कुछ भी गलत कर जाता है फिर धीरे-धीरे जब उनको इसमें सफलता मिलने लग गया तो उनको यह भी पता चल गया कि हमारे देश में इतने ज्यादा मने जार पुत्र नहीं है या इतने सारे लोग नहीं है जिनको हम नौकरी दे सके तब इन्होंने अपनी रचना रची कि भाई जिस देश को हम लूटेंगे वहीं से लोगों को नौकरियां देंगे और ये नौकरी आप हां ताकि भाई वो हमें मान लीजिए भारत को छोड़ दीजिए एक छोटा सा कोई देश मान लीजिए मान लीजिए नाइजीरिया को लूटना है तो नाइजीरिया को लूटने के लिए हमारे फ्रांस में ज्यादा व्यक्ति नहीं है तो नाइजीरिया के कुछ लोगों को नौकरी पर रख लो वो लोग हमारा होकर लूटने में मदद करेंगे फिर आज के डेट में बहुत लोग कॉरपोरेट वर्ल्ड की बात करते हैं कि रे हमारे यहां तो इतने धना से धन्ना सेठ लोग हैं इनका कंपनी इतना बड़ा हो गया यह हो गया वो हो गया तो ज्यादातर कॉरपोरेट फैमिलीज का हिस्ट्री यह है कि इनके पूर्वज इनके परदादा के परदादा लोग ईस्ट इंडिया कंपनी का जितना इलीगल ट्रेड था उस समय भी
00:47:23:18 और आज भी चाहे वो ड्रग्स का स्मगलिंग हो चाहे ह्यूमन ट्रैफिकिंग हो उसमें उनकी हिस्सेदारी थी बिरला फैमिली रविंद्रनाथ ठाकुर का फैमिली यह लोग सब उस समय के अफीम के बिजनेस में इनके पार्टनर थे टाटा का भी वही हाल है तो इन्होंने हा इन लोगों का अपना जो जिन लोगों से इन्होने अपना सारा इलीगल धंधा करवाया हम कहते कपनी ने हमारे ऊपर अत्याचार किया तोव अत्याचार करने में जिन लोगों ने उनको हेल्प किया उनके लिए इन्होंने बड़े बड़े कॉरपोरेट बॉडी बनाकर उनको बैठा के गए हम इसीलिए किसी भी कॉर्पोरेट बॉडी से धर्म के लिए उनके जेब से पैसा नहीं निकलता है क्योंकि उनका तो पैसा मिला ही है का काम
00:48:21:03 करके एक प्रश्न आ रहा है मैं कुछ बातें इसम बीच में बोल दू जी जी जैसे बोल रहे हैं कि रक्षा पुलिस करेगी क्षत्रिय कहां से आ गया भाई तो इस यही तो हम बता रहे हैं कि आज के टाइम में जो वर्ण व्यवस्था है वो जन्म से लागू ही नहीं है वो डिपार्टमेंट खोल दिए गए बस वो आपको करेगा तो फिर किस जात पात की विदाई कर रहे हो वही तो हम कह रहे हैं अभी हा अभी दो बहुत नया घटना है एकदम नया घटना है और इसी से पता चल जाता है कि पुलिस हमारी रक्षा कर रही है या नहीं कर रही है जी एक तो कोलकाता का आरजी करर का घटना पता है जी आरजी करर हॉस्पिटल में जो घटना हुआ वो क्या आपको पता है कोलकाता आ हा कोलकाता में जो ई है हां कोलकाता में हुई है जो डॉक्टर के साथ दुष्कर्म करके उसकी हत्या कर दी गई ना जी तो जिस दिन यह दुष्कर्म हुआ था उसके दो दिन बाद आके पुलिस कमिश्नर टीवी पर बैठ के बोल रहा है कि यहां पर यह केस हत्या का नहीं है आत्महत्या का है कोई गोयल जी है यहां के कलकाता के पुलिस कमिश्नर उन्होने
00:49:36:03 यह बयान दिया हुआ है जी तो जब आप वैकल्पिक रक्षा के लोगों को खड़ा करेंगे तो ऐसे ही बोलेंगे अभी दो चार दिन पहले मद्रास के एक कोर्ट में किसी वकील को धारदार हथियार से मारा गया बेचारा बच गया लेकिन हालत खराब था कौन पुलिस आया किसको पकड़ा गया कुछ नहीं जी इस मैं एक आंसर दे दू मैं इस की छत्रिय कैसे आ जो पुलिस वाला है उसको आप धर्म का वास्ता देक के बाद नहीं कर सकते कि तुझे यह करना है उसको आप जिसकी भी नौकरी कर रहा है जिस शासन की नौकरी कर रहा है अकॉर्डिंग टू कांस्टिट्यूशन वो नौकरी कर रहा है वहां पर और गवर्नमेंट का वास्ता देखकर देख कर के आप उसे बाद कर सकते हो वो भी वो उसको कितना फॉलो करता है उस पर निर्भर करता है ठीक है मगर धर्म क्या होता है कि अगर उसने नौकरी छोड़ दी है तो आप उसी व्यक्ति को बाद नहीं कर सकते हो कि भाई मैं जो है अब तुम्हारी तुझे अब भी मेरी रक्षा करनी है मगर यह जो है ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र इसमें जो क्षत्रिय जो है
00:50:51:03 उसका जन्म है क्षत्रिय के लिए तो उसको आप धर्म जो जो धर्म है एक क्षत्रिय के नाते धर्म का वास्ता देकर के भी उसको रक्षा के लिए बाध्य किया जा सकता है यह अंतर है पुलिस में और क्षत्रिय में आप पुलिस के पास जाओगे जो पुलिस में कल तक था आप सिचुएशन के डीप में जाए जो पुलिस में कल तक था और उसने आज रिजाइन दे दिया है पुलिस में आप उसके भरोसे हो कि मैं जा रहा हूं उसके पास जो कल तक पुलिस में था और आपने उसका दरवाजा खटखटाया आपको इमरजेंसी है कि मुझे रक्षा चाहिए और उस समय उसने कहा कि मैंने वो नौकरी छोड़ दी अब मैंने जो है पढ़ाना चालू कर दिया कॉलेज में ब्राह्मण बन गया हूं मैं मतलब पुलिस नहीं सॉरी लेक्चरर बन गया हूं अकॉर्डिंग टू तो वहां पर क्या हुआ व्यवस्था आपकी चरमरा गई ठीक है तो यही अंतर है जब हम लोग वैकल्पिक जो आधार ले रहे हैं कर्म क्षेत्र का कि अमुक अमुक कोई भी व्यक्ति बस वो अपनी योग्यता सिद्ध कर दे और उस परीक्षा में पास हो जाए और वो जो है मान ली जाए अच्छा दूसरी बात ये भी है कि हम जब परीक्षा लेते भी है जैसे मान लीजिए किसी की हमने पुलिस की भर्ती की
00:52:06:04 तो पुलिस की भर्ती जब हम करते हैं होती है भर्तियां तो वहां पर एक क्राइटेरिया सेट किया जाता है कि इस भर्ती में अमुक अमुक जिसने उत्तीर्ण कर लिया होगा स्नातक उत्तीर्ण कर लिया होगा या बवी क्लास उत्तीर्ण कर ली होगी वही इस भर्ती में फॉर्म भर सकते हैं तो वहां आने के बाद भी एक परीक्ष तो ली जाती है भले ही सब लोग ग्रेजुएट थे उन सबने फॉर्म भरा आने के बाद सबकी परीक्षा हुई वहां जिसने सही कर्म कर दिया गुण कर्म का प्रदर्शन कर दिया उस गुण कर्म के आधार पर उसको पद मिल गया पुलिस वाले का मगर वहां पर आकर के जो उसने गुण कर्म किया है उससे पहले भी उसकी एक पहचान थी जिसके कारण वह नॉमिनेट हुआ था अगर आप नॉमिनेशन के लिए एक आधार को छोड़ दोगे तो नॉमिनेशन के आधार पर करोगे वह आधार आज नहीं है तभी तो यह वर्ण व्यवस्था के बिना जो समाज है भाई वर्ण व्यवस्था का अभाव है वही तो हम भी कह रहे हैं अगर हमने वह क्राइटेरिया सेट नहीं किया जो पुलिस में भर्ती होने के लिए जो प्रतियोगिता कराई जा रही है वो प्रतियोगिता हो गया गुण कर्म
00:53:21:08 का प्रदर्शन ठीक है कि गुण कर्म के आधार पर आपका जो है सिलेक्शन होगा यह बात सही है कि प्रतियोगिता में आपका गुण कर्म का प्रदर्शन होगा ठीक है मगर उस गुण कर्म के प्रदर्शन के लिए आपको नॉमिनेट कैसे किया गया वहां पर जो भर्ती हुई है उस भर्ती से पहले जो आपकी पहचान थी उसके आधार पर आपको नॉमिनेट किया गया तो इसी प्रकार से जो मानव जीवन आपको मिला है इससे पहले आपके जो एक पहचान लेकर के आए भगवान की ओर से पिछले जन्म के कर्मों के आधार पर पूर्व जन के कर्मों के आधार पर इस जन्म का शरीर शरीर के आधार पर इस जन्म का वर्ण ण वर्ण के आधार पर इस जन्म के पुनः कर्म इसी प्रकार से भर्ती से पहले के आधार पर आपका इस जन्म में यह नॉमिनेशन कि आप कौन से पद के लिए फॉर्म भर सकते हैं और फिर उस जो आपको इस जन में जो भर्ती के आधार पर आपको पद का वो मिला कि आप जो क्षत्रिय का फॉर्म भर सकते पुलिस का फॉर्म भर सकते हैं उसके आधार पर फिर से इस जन्म के कर्म यानी पुलिस के आधारित कर्म अब आपने पुलिस का फॉर्म भर दिया पुलिस के पद पर आप जो है नियुक्त हो गए मगर आपने पुलिस के अनुसार
00:54:36:10 आचरण नहीं किया तो क्या होगा आपका बहिष्कार सस्पेंड होंगे टर्मिनेट होंगे यही होगा ना मान लीजिए भ्रष्ट आचरण करने लगे घूस लेने लगे यह करने लगे वो करने लगे तो क्या होगा आपका बहिष्कार होगा इसी प्रकार से आपको ब्राह्मण जन्म मिला क्षत्रिय जन्म मिला और आपने आकर के सिलेक्शन भी करवा लिया कि वो जो वहां पर जाकर गुरुकुल में जो है आचार्य बन गए ब्राह्मण और जो क्षत्रिय वो जाकर के कहीं पर सेनापति बन गए मगर उन्होंने अपने कर्म को त्याग करके दूसरे भ्रष्टा आचरण शुरू कर दिए तो क्या हुआ उनका उस पद से बहिष्कार हो गया किस पद से जिस पर वो नियुक्त हुए सेनापति के पद से या आचार्य के पद से मगर उन्होंने जो जिस कुल में उन्होंने जन्म लिया था वह तो उनसे नहीं चिना तो कर्म के आधार पर जो व्यवस्था है वो केवल खावा है वो व्यवस्था है ही नहीं और उसी का तो नतीजा आज हम देख रहे हैं पिछले 200 साल में जितना विभाजन हुआ देश का उतना विभाजन उससे पहले हुआ था क्या जब से हम लोगों ने हिंदुओं ने ही पहले तो जब विरोध हुआ वर्ण व्यवस्था का तो कैसे हुआ जैन और बौद्ध के रूप में और फिर जब जैन और बौद्ध के रूप में जब विरोध होने लगा और तर्क और प्रमाण के आधार पर उनका आपके पास निराकरण नहीं रहा तो आप ही ने ये चिल्लाना शुरू
00:55:51:15 कर दिया आप ही ने चिल्लाना शुरू कर दिया कि नहीं नहीं वो कर्म के आधार पर जाति व्यवस्था मतलब कुल मिलाकर वो जाति व्यवस्था जो पुरानी चली आ रही जिसके कारण जैन और बौद्ध जो है अपने यह भ्रम में हो गए और उसका आधार बना कर के निंदा करने लगे समाज की तो उस समस्या के निराकरण का समाधान देने की बजाय आपने उस समस्या का जो वो है अस्तित्व जहा से व उत्पन्न हो रही दिख रही है जी आवाज आ रही है आवाज वापस लट रही है जैन और बौद्धों के बारे में एक बात कहना चाहता हूं जी जो बात है वह है तो थ्योरी के लेवल परने प्रमाण अभी मेरे पास नहीं है पर थ्योरी प्रबल है जिस तरह
00:56:47:02 से डिप्लोमेटिक वर फेयर होता है उसमें हम ऐसा करते हैं कि शत्रु के यहां पर कुलांग पदा पैदा कराया जाता है ताकि वो शत्रु को भीतर से खोखला करे जैन और बौद्ध जिस समय आए थे अगर आप ध्यान देंगे तो जैन बौद्ध और मूसा इन तीनों का लगभग टाइम फ्रेम सेम है मूसा या डेविड कोई एक प्रोफेट है जिसका टाइम फ्रेम सेम है इस समय में इस काल में मध्य एशिया में जरर ये पारसियों का धर्म काफी शक्तिशाली और वही हर तरफ अपना वर्चस्व दिखा रहे थे तो उस समय हमारा एक कॉन्फ्लेट था पारसियों के धर्म के साथ और यह पारसियों के जो बड़े बड़े राजा हुए साइरस दारा इन्हीं के मेरे ख्याल से इफस में बौद्ध जैनियों का जन्म हुआ है हमारे य पर और बौद्धों का इतना बड़ा प्रभाव रहा कि मध्य एशिया जो पहले पूरी तरह से हिंदू हिंदुओं का देश था व पर हिंदुओ का ही वर्चस्व था पॉपुलेशन भी हिंदुओ का था जब वो लोग बध बन गए
00:58:02:13 तो उनका धर्मांतरण या मता कराना बहुत आसान हो गया महमूद गजनवी एक तरह से कहा जाए तो सबसे पहला सफल आक्रांता था जो भारत में प्रवेश कर पाया मोहम्मद बिन कासिम की बात को छोड़ दीजिए वो बस एक युद्ध करके फिर मारा गया था पहला सफल मोहम्मद गजनी है गजनी का क्या पिताजी का नाम था सबुत जिन और सबुत जिन के दादाजी बौद्ध थे तो अगर हम यह कहे कि मध्य एशिया के वो प्रांत जिनके ऊपर यह जिनका धर्म था मूल भारत भूमि की रक्षा करना जब उनका मता तरण और धर्मांतरण हो गया तब उन्होंने हम पर अटैक किया अरब अरब देश के लोग हम पर कभी अटैक नहीं किया मोहम्मद बिन कासम बा किसी का हिमत नहीं हु से य अटैक करे उन्होंने फिर क्या किया कि बीच में इंटरमीडियरी बनाया बीच के लोगों को हिंदुओं से मुसलमान बनाया और फिर उन्होंने हम पर अटैक किया मोहम्मद गोरी गजनी लजी सब ऐसे ही लोग है और इस धर्मांतरण में बौद्धों का बहुत बड़ा योगदान रहा है
00:59:17:22 मुसलमानों के लिए बहुत ही बड़ा शहर है धार्मिक शहर है उसका नाम है बुखारा और हदीस सही हदीस लिखने वाले सही बुखारी वही बुखारा शहर से थे कहते हैं कि बुखारा सहर का ओरिजिनल नाम विहारा था और वह बौद्धों का एक बहुत बड़ा केंद्र था और उन्होंने उस काल में इस्लामिक आक्रांता के बहुत हेल्प किया था और उस बुखारा शहर में एक मौत का टावर है उस टावर से सारे बौद्धों को फेंक फेंक के मारा गया था जैसे ही बौद्धों ने हमें हमारी जाति से काटा हमारा मता तरण हो गया और फिर हम जिनके ऊपर रक्षा का दायित्व था वही आक्रांता बन ग
01:00:05:28 जी बिल्कुल ब नहीं इसमें इसमें यही बात आती है ना कि कर्म के आधार पर जब हम कह देते हैं तो फिर अगर कर्म के आधार पर सिलेक्शन होना ही नहीं है अगर रक्षा के लिए हमें यह देखना ही नहीं है कि कौन क्षत्रिय है कौन ब्राह्मण है तो फिर य ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र का अस्तित्व नहीं होना चाहिए ना फिर वेदों में और दूसरी बात जो एक बात की जा रही है कि जैसे विदेशों में उनके य तो वो नहीं तो वैकल्पिक उन्होंने भी वर्ण व्यवस्था को लिया ना वैकल्पिक वर्ण व्यवस्था को उन्होंने लिया उस वैकल्पिक वर्ण व्यवस्था का पर्यान किसम है अव्यवस्था अधर्म आपके यहां आज भी वह धर्म बचा हुआ है मूल्य बचे हुए हैं आदर्श बचे हुए हैं तो क्यों बचे हुए हैं क्योंकि थोड़ी बहुत आज भी वर्ण व्यवस्था थोड़ी बहुत कहीं ना कहीं अस्तित्व में है और आप जो रही सही वर्ण व्यवस्था उसको भी आप लजली दे चाहते हो और जो वर्ण व्यवस्था का नाश हुआ उसका नतीजा पिछले 200 सालों में आप देखिए क्या क्या हो रहा है देश का विभाजन हो रहा है देश की जो संस्कृति उसका पतन हो रहा है आज हर कोई व्यक्ति अद्वैत को पढ़ाने चल देता है अद्वैत को पढ़ा रहा है अद्वैत का खंडन करते हुए अद्वैत को पढ़ा रहा है आज आप देखिए मैंने अपने चैनल पर देखा मैं एक दिन स्क्रॉल कर रहा था ा
01:01:21:25 उसम मैंने देखा कि आदि शंकराचार्य जी द्वारा बताया गया अद्वैत इसका अद्वैत का अध्ययन करिए आप हमारे पास आग कौन था पता है साइंस जर्नी वाला साइंस जर्नी वाला आपको अद्वैत पढ़ा रहा है यही नतीजा है ना वर्ण व्यवस्था को ना मानने का रामपाल आपको वेद इसलिए पढ़ा रहा है गीता इसलिए पढ़ा रहा है कि वेद और गीता छोड़ दो क्यों पढ़ा रहा है किस किसने अधिकार दिया उसको पढ़ाने का क्योंकि कोई भी पढ़ा सकता है जो पढ़ाए वही ब्राह्मण कहलाएगा ब नहीं पढ़ाए जो पढ़ाए वो ब्राह्मण कहलाएगा पढ़ रहे सब लोग जब अनाधि कारी भी अर्थ करने लगेगा तो अर्थ होगा वो हो रहा है होने
01:02:10:16 दो तो यह जो व्यवस्था है कि पुलिस के पास जाएगा यह बिल्कुल ठीक है मगर यह भी तो वैकल्पिक व्यवस्था ही है कि हर हाल में हम पुलिस के ही पास जाएंगे हम किसी के पास भी नहीं चले जाएंगे मगर व व्यवस्था वो है कि क्षत्रिय ही पुलिस बने तो क्या होगा कि क्षत्रिय जब पुलिस बनेगा तो क्षत्रिय वो है जिसको पहले से उसके पिता द्वारा उसके पूर्वजों द्वारा उसके जीनस में उसके शरीर में वो क्षत्रिय प्राप्त है कि वो पुलिस का कार्य अच्छे से करेगा और जब हम विकल्प ढूंढ करके किसी को पुलिस वाला बनाते हैं तो उस विकल्प को ढूंढने में उसको पुलिस वाला बनाने में अर्थ समय ज्यादा खर्च होगा और फिर भी हमें वो क्षत्रिय प्राप्त नहीं होगा जो क्षत्रिय पीछे से चला आ रहा वंश पंच परंपरा से जो हमें प्राप्त हो इसके लिए है वर्ण
01:03:05:06 व्यवस्था और जो छुआछूत की बात है तो छुआछूत का परव सान सिर्फ इतनी सी बात में है कि अगर ब्राह्मण को जीवन मिला है कि तुम्हारी प्रज्ञा शक्ति इतनी हो कि तुम वेद पढ़ो और पढ़ा पाओ तो उसके अनुसार ब्राह्मणों के जो जीवन है जीवनयापन सौचा चार मुख्य रूप से उसको अत्यंत कठिन और जटिल बना दिया गया बहुत जटिल जीवन है अगर जो शास्त्रों के हिसाब से अगर आप ब्राह्मण का जीवन देखेंगे तो बहुत जटिल होता है और उससे सरल थोड़ा सा किया गया क्षत्रिय का क्यों क्योंकि क्षत्रिय को कहीं सीमा पर लड़ना है तो सीमा पर लड़ते हुए क्षत्रिय ये नहीं कर सकता कि उसको इतने कुल्ले करने हैं इतनी बार वो मूत्र विसर्जन के बद हर बार वो इतना मूत्र त्याग के बाद इतने कुल्ले करे इतनी बार ये करे तो एक सिस्टम बनाया जिसको प्रज्ञा शक्ति अपनी बटोर के रखने के लिए ब्राह्मण का जीवन दिया गया उसको सबसे कठिन जीवन दे दिया गया और फिर उससे थोड़ा सा मुक्त किया गया क्षत्रिय को उससे थोड़ा सा मुक्त किया गया वैश्य को और उससे और मुक्त किया गया शूद्र को तो जो अ स्पता वाला विचार आता है स्पर्ता स्पर्ता वाला विचार मैं पूरा करलू बस यह विचार केवल इसलिए आता है कि जिनकी
01:04:20:16 जीवन शैली दोनों की बिल्कुल ठीक विपरीत है वो दोनों आपस में एक दूसरे के गुण दोषों का आदान प्रदान ना करें सिर्फ इसमें परवन है उसका और गुण दोष स्पर्श होता से आदान प्रदान होते हैं इसका नतीजा आपने कोरोना के काल में देख लिया और नहीं होते और अगर इसी बात से ही दिक्कत है कि नहीं हम जो आपका जो यह जो वर्ण व्यवस्था या उसके द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो स्पष्टता अस्पष्टता है इसको हम तभी मानेंगे इसको हम घृणा मूलक तब नहीं मानेंगे जब आप जब हम यह करो यह करके दिखा दो तो इसमें एक छोटी सी बात है हम किसी से पूछे कि आपके घर की मातृ शक्ति को आप हमें स्पर्श कर लेने देंगे क्या इसमें किसी साइंस ने आपको मना नहीं किया होगा कि इससे कोई दिक्कत है तो आप क्यों नहीं छूने देंगे आपको दिक्कत क्यों होगी उस छूने से उसमें साइंस भी है मगर उसमें धर्म भी है धर्म की भी मर्यादा है उसम धर्म की मर्यादा क्या है धर्म ने कहा है कि स्पर्श नहीं होना चाहिए तो इसलिए वो वो जो धर्म है उसमें भी साइंस है कि हमारे कुल के जो गुण दोष है उसमें मिलावट ना हो छूने से तो वो जो एक जीवन शैली है दोनों की अलग-अलग उसमें
01:05:35:27 मिलावट ना हो गुण दोष की इस वजह से इसमें परवन है उसका घृणा मूलक नहीं है व्यवस्था मूलक है ठीक है जी मैं एक बात और कहना इस पर जोड़ना चाहूंगा जी यूं समझ लीजिए कि समाज में बहुत सारे एसेट्स है फिजिकल एसेट्स जिसे हम अर्थ कह सकते हैं संपत्ति कह सकते हैं धन कह सकते हैं ब्राह्मणों को किसी भी संपत्ति का ओनरशिप नहीं लेना है वह किसी भी संपत्ति का स्वामी नहीं है स्वामी नहीं बनेंगे स्वामी बनने का अधिकार क्षत्रियों को दिया गया है जी वो स्वामी तो क्षत्रिय रहेंगे मगर जिस भी संपत्ति का वो स्वामी है उसका उपयोग क्षत्रिय नहीं करेंगे ब्राह्मण स्वामी भी नहीं रहेंगे क्षत्रिय स्वामी रहेंगे मगर उपयोग नहीं करेंगे जो भी संपत्ति है व एक जगह से दूसरे जगह हर व्यक्ति को मिलता रहे ताकि
01:06:50:28 वो उसका अपने जीवन में उपयोग कर सके यह कार्य वैश्य प्राप्त है पर संपत्ति का जनरेशन और संपत्ति का भोग ये शूद्र को प्राप्त है जी संपत्ति के भोग में कभी कभार कुछ दोष आ जाते हैं उस दोष के कारण वो संपत्ति जो है उसमें भी वो दोष आ जाता है फिर जब हम उस संपत्ति का क्योंकि हम भी जीवित प्राणी है तो हमें तो संपत्ति का उपयोग थोड़ा बहुत तो करना ही पड़ेगा तो जब हम संपत्ति का उपयोग करते हैं और क्योंकि वो भोग से उत्पन्न हुई संपत्ति है तो उसमें कहीं ना कहीं दोष रहता है तो जितना कम दोष वाला संपत्ति हम उपयोग कर सके यही ब्राह्मण का लक्ष्य होता है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जिस संपत्ति में उसे लगता है कि थोड़ा सा भी दोष हो सकता है तो उस संपत्ति से वो अपने आप को दूर रखना चाहता है स्पता अस्पृश्यता के पीछे लॉजिक यही है अब इसको प्रैक्टिकल लाइफ में कहां पर कहां तक खींच के ले जा रहे हैं लोग क्या कर रहे हैं इंडिविजुअल लेवल पर क्या हो रहा वो दूसरी बात यूं समझना है कि ब्राह्मण को स्वामित्व नहीं है क्षत्रिय को स्वामित्व है पर उपयोग
01:08:06:02 नहीं करना है अब मैं एक प्राइम मिनिस्टर हूं तो मैं प्राइम मिनिस्टर गाड़ी उपयोग करूंगा मैं राजा हूं तो राजमल उपयोग करूंगा पर मैं सैनिक हूं मैं किसी क्षेत्र के जमीन का मालिक हूं क्योंकि हो सकता है मैं छत्री हूं तो वो जमीन मेरे नाम पर है पर उस जमीन का उपयोग वहां रहने वाले लोग करेंगे उस जमीन का दोहन करके जो भी संपत्ति का उत्पन्न होगा वो शूद्र के हाथ में और शूद्र से छत्रिय छीनने नहीं जाते हैं शूद्र से दान लेते हैं यही बहु बात है इसमें मुझे एक बात याद आई इतनी बात तो जितने भी सनातनी होंगे व सब मानेंगे कि आहार को लेकर के विचार किया गया हमारे यहां अब कोई मानता है नहीं मानता है जो व्यक्ति भोजन को बना रहा है उस व्यक्ति के मुख में तो कुछ झूट नहीं है वह कहीं चप्पल तो नहीं पहने हैं वो कहीं गालियां दे दे करके तो जो खाद्य पदार्थ है व उनका निर्माण नहीं कर रहा है क्यों होता है ऐसा क्यों सोचा गया यह सब कि किसके द्वारा बनाया जा रहा है क्योंकि उसके द्वारा बनाए जाने में वह जो उसकी जो तामसिक प्रवृतियां जो तामसिक चीज उनका निवेश हो
01:09:21:03 जाएगा उसके बनाए गए भोजन तो इस लिए जैसे इन्होंने अभी एक बात कही कि उसका भोग भोग भोग से उत्पन्न होने वाली जो अर्थ होता है उसमें जो है कहीं ना कहीं दोष आ जाता है तो ब्राह्मण का जीवन होता है कि कम से कम ऐसे अर्थ का उपयोग करना जिसमें की जो भोग से उत्पन्न हुआ हो तो बिल्कुल वही चीज इसमें आ रही है कि भाई किसी ने जब गालियां देते हुए खाना बनाया या झूठे मुख से खाना बनाया अच्छा एक बात और है कि शूद्र को मुक्त क्यों किया गया इस तरह के कठिन जीवन से क्यों मुक्त किया गया क्योंकि मुक्त नहीं करेंगे तोव अपना काम नहीं कर पाएगा जैसे क्षत्रिय को अगर ब्राह्मण जैसा जीवन दे दिया जाए टोटली तो क्षत्रिय अपना क्षत्रिय त्व नहीं निभा पाएगा तो एक व्यवस्था के लिए कि अगर तुम्हारा यहां पर सरल है केवल मानसिक कार्य है ब्राह्मण का तो उसके शारीरिक इधर कार्य बढ़ा दिए गए और उसका जो जीवन कठिन हो गया अगर दूसरा क्षत्रिय उसका वहा लड़ना है उसका शारीरिक कार्य है तो उसका वहां पर जो मानसिक कार्यों के निमित्त जो शारीरिक जटिलताएं बढ़ाई गई थी वह शारीरिक जटिलताएं यहां पर कम कर दी गई तो यह एक व्यवस्था है और इसमें जो या
01:10:36:04 तो विवाह इत्यादि हो अंतरजातीय विवाह इत्यादि जो भी है व उस पर प्रतिबंध लगाना जो भी है उन सब का परिवन इस जो मूल जो जेनेटिकली आपको प्राप्त हो रहा है ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य या फिर शूद्र इन सबकी रक्षा करना है वर्ण आश्रम की रक्षा करना है है ना तो दूसरी बात ये है कि विदेश में अधर्मी नहीं होते हैं मगर क्या उनके यहां वो प्रज्ञा शक्ति है जो व्यक्ति के जीवन का परव सान मोक्ष में हो सके नहीं है आना पड़ रहा है ना उनको यहां पर भारत के गुरुओं के पास क्यों आना पड़ रहा है धर्म को जानने के लिए क्यों आना पड़ रहा है अधर्मी का मतलब क्या है जो बुरे कार्य करे या सनातन धर्म को ना माने वो अधर्मी पहले तो सनातनी को यह सोचना चाहिए वेद विरोधी नास्तिक नास्तिक कौन है जिसके पास सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में चुनाव करने का आधार नहीं है और धर्म क्या है जीव की चाह के वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को
01:11:51:24 परिभाषित करने वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई गई विधि का नाम धर्म है तो व्यक्ति के जीवन का जो मुख्य उद्देश्य है धर्म धर्म का जो परवन है वास्तविक फल क्या है धर्म का मोक्ष तो वह जो उनकी जो प्रज्ञा शक्ति है वहा ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र जो वैकल्पिक बनाए जा रहे हैं उनकी प्रज्ञा शक्ति क्या उस ये जो ब्रह्म की व्याख्या रामानुजाचार्य जी ने की आचार्य जी ने की ये सब व्याख्या है क्या उनको प्राप्त नहीं है आना पड़ रहा है आपके पास इसी इसी विषय में मैंने
01:12:37:14 बोला अगर आप ऐसा समझते हैं कि बाइबल है ना उधर उसको मोक्ष मिलता ही होगा तो फिर आप इसका मतलब यह समझते हैं कि वेदों के द्वारा प्रतिपादित होने वाला मोक्ष मोक्ष ही नहीं है क्योंकि बाइबल और वेद के ईश्वर में बहुत अंतर है बाइबल और वेद के मोक्ष में बहुत अंतर है तो आप पहले सिद्ध करें आक के बाइबल का जो धर्म है वो धर्म है कि नहीं बाइबल का ईश्वर ईश्वर है कि नहीं बाइबल का जो मोक्ष है मोक्ष है कि नहीं फिर आके सिद्ध करें जो ये बोल रहा है कि जिनके पास बाइबल है उसे बाइबल अरे भाई अगर बाइबल से भी मोक्ष मिलता है अगर कुरान से भी मोक्ष मिलता है तो ये सब चीजें अलग होती ही क्यों जब सबसे मोक्ष मिल रहा है सबसे मोक्ष नहीं मिल रहा है इसीलिए तो अलगाव है अगर आप बाइबल में मोक्ष मिलना स्वीकार कर रहे हैं तो आपने इनडायरेक्ट वे में स्वीकार कर लिया कि सनातन से मोक्ष नहीं है रामानुजाचार्य गलत शंकराचार्य गलत ार काचार्य गलत और वहां जो बाइबल लिखने वाले लोग हैं वह सही ठीक है किसी भी प्रकार से एड़ी चोटी का जोल लगाना है मगर काटना है बात को सोचना समझना नहीं है क्या कह रहे हैं क्या नहीं कह रहे हैं
01:14:00:20 अरे वह पुरी के लिए नहीं बोले थे यह बात अपनी जानकारी सही कर लीजिए यह बात वह बोले थे अभि मुक्तेश्वरा नंद जी के लिए जी आते जी एक बात मैं कहना चाहूंगा आपने एक बात कही बौद्धों और जैनों की भी बात हो रही थी तो मैंने देखा कि भारत जो है सोने की चिड़िया थी और भारत विश्व गुरु कहा जाता था जो अभी जो पिछले 200 सालों में जो वर्णाश्रम धर्म के विरोधी के रूप में उत्पन्न हुए हैं तंत्र ये तो तब थे नहीं जब भारत को विश्व गुरु कहा जाता था भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था तो उस काल में जातियां थी कि नहीं इस इस परिपेक्ष से थोड़ा सा दृष्टि डाले मतलब जो 200 साल पहले का जो भारत है जब व सोने की चिड़िया था आपने एक बात और कही पहले आप इसको ले लीजिए फिर मैं आपको जो है पूछता हूं नहीं यह इस प्रश्न का तथ्यात्मक उत्तर देना मेरे लिए कठिन है यह काफी शोध का विषय है जी जिसे जिस समय भारत सोने की चिरिया थी उसका अवसान एक तरह से समझ लीजिए कि गुप्त काल के साथ हो गया उसके बाद हम सोने की चिरिया बने रहे पर हमारी
01:15:15:20 शक्तिया छीन होती चली गई और यह सोने की चिरिया को जो सोना है वो 1857 तक भी हम बचा के रख पाए क्योंकि हम जाति को मानते थे 1857 के बाद वो हमसे त लुप्त हो गया लुप्त तो ठीक नहीं हुआ पर क्या है कि अर्थ का अर्थ के प्रकृति को बदल दिया गया बैंकिंग सिस्टम आ गया तो जो अर्थ हमारे पास है वो अब निरर्थक हो गए और जो निरर्थक थे वही अर्थ हो गया तो इस तरह से हम लोग लुट गए क्योंकि हमसे जितने लोगों ने जो भी लूटा लूटने के बाद भी हम गरीब नहीं हुए
01:15:56:28 हम हमारे पास हमारे लोग अभाव में नहीं थे अभाव में आए हैं नौकरी तंत्र के शुरुआत के बाद 1857 के बाद से हमारे घरों में अभाव शुरू हुआ है क्योंकि 1857 के बाद से अब हम हम अपना जाति का काम काम नहीं कर पा रहे तो जैसे ही हमारी जाति वाली जीविका खत्म हो गई तो हम गरीब हो गए अगर हम जाति का कार्य कर पाए तो हम अभी भी नहीं है जी जी अभी भी सब खड़े हो जाएंगे गुरुदेव कहते हैं ना कि कोई चुनौती देकर के ऐसी व्यवस्था ला दो वर्णाश्रम के विरोध में कि जन्म से सबकी जीविका सुरक्षित हो मातृ शक्ति का शील सुरक्षित हो और सुव्यवस्थित हो और व्यक्ति का परवन जो है धर्म अर्थ काम मोक्ष में हो तो वो कहते हैं गुरुदेव जो है जी जी इस पर मैं एक बात इस पर मैं एक बात कहना चाहूंगा हमारे देश में 2011 में अंतिम सेंसस हुआ है तो हमारे पास 2011 का डाटा है 21 में कोई सेंसस हुआ नहीं तो डटा नहीं है हमारे यहां जो नौकरियों का जो
01:17:12:04 आंकड़ा है वह है सरकारी नौकरी में पौने पर लोग काम कर रहे हैं और जो ऑर्गेनाइज सेक्टर है जो कॉर्पोरेट हाउसेस है बड़े-बड़े वहां पर सवा पर लोग काम कर रहे हैं दोनों मिलाकर 6 पर लोग काम करते हैं यहां पर डी के भाई आप जो है अभी लाइव में आ जाइएगा आपसे लाइव बात करेंगे आप जो है बाइबल के द्वारा मोक्ष को सिद्ध करिएगा ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करिएगा बार-बार आप वो करेंगे तो आपको फिर बैन करना पड़ेगा एक ही कमेंट आप बारबार करते जा रहे हैं ठीक है आप लाइव में आ जाइएगा जी बताइए तो क्या कह रहा था [संगीत] मैं किस विषय पर बात कर रहा था कुछ हिस्ट्री में चल रहा था कुछ सिस्टम ब जैसे हमा जा जातीय काम जो खत्म हो गया हमारा तभी हम गरीब हो गए अगर हमारे पास हमारी जाति का कार्य रहता तो हम गरीब नहीं रहते और नौकरी में 6 पर लोग नौकरी कर रहे हैं यानी कि 94 पर लोगों के पास नौकरिया नहीं है जीविका नहीं है
01:18:27:09 और यह जो तंत्र चल रहा है वह चाहता है कि लोगों के पास जीविका ना हो वह चाहता है कि स्त्रियों का सील सुरक्षित ना हो क्योंकि स्त्रियों का अगर सील सुरक्षित होगा तो उनके गर्भ से भविष्य में मानव समाज के कल्याणकारी लोग लोगों का जन्म होगा और जब कल्याणकारी लोगों का जन्म होगा तो इनका यह सिस्टम है जिसके द्वारा वो पूरी दुनिया में एक लूट तंत्र चला रहे हैं उसका अवसान हो जाएगा तो उन्होंने इतना तक सोचा कि भाई अगर स्त्री का शील ही सुरक्षित ना रहे तो ऐसा कोई व्यक्ति जन्म ही नहीं लेगा जो हमें चैलेंज कर सके और इसीलिए वह चाहते हैं कि स्त्रियों का सील सुरक्षित ना हो और अगर हम सबके हाथ में जीविका हो जन्म से सुरक्षित जीविका हो मुझे कहीं सोचना नहीं पड़े मुझे एक काम है मैं करूंगा और मेरे मुझे भोजन मिलता रहेगा रहने का जगह रहेगा मुझे किसी चीज की कोई तकलीफ ना रहेगी तो अगर किसी चीज की तकलीफ नहीं रहेगी तो आप इन लुटेरों की के लिए किस काम के है आपको तकलीफ रहेगी तभी तो आप किसी से मदद मांगने जाएंगे
01:19:42:18 और तब वह आपको मदद करके अपना लूट तंत्र चलाएंगे तो वह चाहते ही है कि हमें जीविका हमारे पास ना हो स्त्रियों का सील सुरक्षित ना हो तभी उनका सिस्टम चलेगा ये ठीक ऐसे है जैसे एक मिनरल वाटर कंपनी राजस्थान में अपना प्लांट डालने जाती है जी वो क्या करती है कि पहले जो है वहां के जो पीने का पानी होता है हम उस पीने के पानी के जितने भी स्त्रोत थे उनमें सब में कुछ ऐसे केमिकल या कुछ ऐसा जहर मिलाती है जिससे कि वहां के लोग बीमार पड़ने लगे हम और फिर उसकी दवाई के रूप में अपना उसके समाधान के रूप में अपना मिनरल वाटर वो प्रसिद्ध करती है जी जी बिल्कुल बिल्कुल इसी प्रकार से जैसे वर्णाश्रम धर्म के बारे में पहले ऐसी फिल्म बनाओ ऐसे शूद्र ये वो वहां पर इतना नाक रगड़ा जाती थी सर पर जूते रखवा जाते थे इतना घणा मूलक पेश कर दो वर्णाश्रम व्यवस्था को कि व्यक्ति को वर्णाश्रम व्यवस्था में दोष लगने लगे बीमारी दिखने लगे और फिर उसके समाधान के रूप में अपनी वैकल्पिक जो चीजें है जो जहां पर आपको उनका उपयोग करना है अपने मन के अनुसार उनका फिर उपयोग करो है ना
01:20:57:28 इसमें इसमें एक चीज अभी आपने थोड़ी देर पहले कही थी कि जो दो ये बंगाल और पंजाब कटे जो ये कहने लगे कि भाई वो वहां पर वर्णाश्रम का त्याग हुआ वहां पर आप देखिए दोनों जगह पर हिंदू धर्म का जो है जो क्या कहते उ डेमोग्राफी वो नीचे होती जा रही है वहा हा हो रहा है वहां व्यक्ति क्रिश्चन बन रहा है वो लंगड़े को खड़ा कर दे रहे हैं वहां पर पंजाब में खूब धर्म परिवर्तन तेजी से हो रहा है और इधर बंगाल का आप देख ही रहे अब तो मैं पंजाब के लिए नहीं अब तो मैं हिमाचल और हरियाणा के चिंतित हूं हिमाचल और हरियाणा में इन घुस पैट बहुत ज्यादा हो चुका है जी पंजाब तो गन केस है अब हिमाचल हरियाणा को बचाना है जी हरियाणा के लोग इतने तेजी से कन्वर्ट हो रहे हैं जी और इसमें सबसे बड़ा रोल प्ले कर रहा है हमारे
01:21:55:06 सरकारी नौकरी वाले लोग जो किसी ना किसी यूनियन के साथ जुड़े हुए हैं और वह यूनियन किसी ना किसी दिल्ली या किसी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के साथ जुड़ा हुआ है और यह लोग हर वीकेंड में मंथ में एक बार साल में बहुत बड़ा सेमिनार करते हैं जहां पर लोगों बताया जाता है कि जाति को नहीं मानना चाहिए जी और जाति मानने से क्या क्या खराबी होगा और जाति ना मानने से क्याक अच्छा पर वह यह नहीं बताते हैं कि उस नछा इयों में सिर्फ 6 पर का ही गुजारा होगा बाकियों का नहीं होगा बहुत बड़े लेवल पर एक ट्रैप चल रहा है वर्णाश्रम को खत्म करने का बहुत अब तो उका सक्सेस का पोजीशन आ गया ना 1857 में कोलकाता विश्वविद्यालय बना तो मान लीजिए 20 साल बाद उनका पहला खेप तैयार हुआ
01:22:52:28 18777 है मान लीज कितना साल हो गया 150 साल 20 साल का एक जनरेशन होने पर सात पु खत्म हो गया आठवा पुस्त चल रहा है अभी या और आठवा पुस्तो सात पिछले सात पुस्त कब चीज बदल गया तो एक तरह से उनका जो 1857 में जो बीज रोपण किया था अब तो फसल काटने का टाइम हम जैसे कुछ लोग इधर उधर बच गए हैं हम लोग जब हो जाएंगे तो फिर यह सब बात करने वाले भी लोग नहीं रहेंगे जी एक भाई साहब कह रहे हैं कि वेद को ना मानने वाले वही वेद को ना मानने वाले देश अमेरिका चाइना भारत से ज्यादा डेवलप है पर्न इंडस्ट्री भी वहीं पर ज्यादा डेवलप है है ना इसका मैं उत्तर देना चाह इसका मैं उत्तर देना चाहू आप भी दे दीजिएगा मैं भी दे दूं प बहुत डेवलप है और अंततोगत्वा जो शीर्ष के लोग है ना उनको वो जो चैन और सुख चाहिए ना जिसके जिसको वो अर्थ में ढूंढ रहे हैं जिनको विकास में ढूंढ रहे हैं विकास के नाम पर जो विनाश हो रहा है उसमें ढूंढ रहे हैं उनको आना यही पड़ता है अंततोगत्वा मांग
01:24:09:14 चुकर बर्ग और क्या कहते हैं ये स्टीव जॉब्स के बारे में आपने शायद सुना हो है ना तो अर्थ का ये देखिए विकास विकास आपको दे क्या रहा है क्या दे रहा है आपके घर के बगल में जब पन इंडस्ट्री खुल जाएगी तब आपको पता चलेगा नहीं भारत ही अच्छा था जी बताइए आप भी दे दीजिए इनका जवाब जिन व्यक्ति ने यह बात कहा उन्हें चीन और अमेरिका के पिछले 200 साल का इतिहास के बारे में कुछ मने है नॉलेज है कुछ बात कर सकते हैं चीन को कहा जाता है कि वह 1949 में आजाद हुआ था यह बात गलत है चीन कभी भी पराधीन नहीं था अंग्रेजों ने कभी भी चीन पर शासन नहीं किया था हां चीन के ऊपर उसका पूरा एक तरह से वैचारिक कब्जा था हर बात उसी का चलता था क्योंकि उसको वहां पर वो लोग मिल गए थे जो ब्रिटिश इंटरेस्ट का काम करते थे चीन में तो माओ के आने के बाद 1975 में माओ मारा गया और इतने काल में चीन पूरी तरह से बर्बाद हो चुका था गरीबी हर तरफ थी हर तरफ लोग परेशान थे तब उस मरने
01:25:24:21 के बाद न साल तक उसके पत्नी ने पूरे चीन को संभाल के रखा 1978 में उसके पत्नी के खिलाफ जो भी आंदोलन वगैरह हुआ जिसमें उसकी पत्नी और उसके कुछ लोगों को फांसी दे दी जिसे गैंग ऑफ फोर कहा जाता है तो 1978 में डंग पंग पावर में आया डंग जियांग पंग भी माओ का ही सिद्धांत मानने वाला व्यक्ति था पर उसके पास दिमाग माओ से ज्यादा था वो यह बात समझ चुका था कि चीन के लोगों के पास वो टेक्नोलॉजी है नहीं जिसके दम पर वो अमेरिका के साथ पंजा लड़ा सके तो उस टेक्नोलॉजी को समझने के लिए उसने चाल चला और वह चला गया यूरोप और अमेरिका के टूर पर और वहां के राष्ट्र राष्ट्र अध्यक्षों के साथ मिला और उनको यह समझाया कि चीन में अगर आप अपना प्रोडक्शन करेंगे तो आपकी प्रोडक्शन की कॉस्ट बहुत कम हो जाएगा और आपका प्रॉफिट बढ़ जाएगा इस लालच में यूरोप और अमेरिका के जो बिजनेसमैन थे वो आ गए और सरकार भी आ गई और उन्होंने चीन में लगाना शुरू किया ये काल है 1980 का दशक तो 1980 के दशक से असल में चीन का उत्थान आज जिसको ये उत्थान कह र है वो शुरू हो रहा है और उस समय चीन का प्रोडक्शन हब
01:26:39:24 बनने के लिए एक बहुत बड़ा कंपटीशन था कलकाता और हुगली कोलकाता हावड़ा हुगली ये तीन जो डिस्ट्रिक्ट है बंगाल के यहां पर बहुत फैक्ट्रियां थी और बहुत बड़े बड़े फैक्ट्रियां थी बहुत कुछ प्रोड्यूस होता था तो चूंकि बंगाल में ज्योति बसु शासन में थे और वह चीन के ही एक तरह से पिट्ठू थे तो चीन के कहने पर उन्होंने यहां के सारे इंडस्ट्री को बर्बाद कर दिया ताकि जो प्रोडक्शन हावरा में होता था अब वो चीन में हो और इस तरह से जो प्रोडक्शन का हब इंडिया में था वो खत्म होता चला गया और चीन में प्रोडक्शन बढ़ता चला गया अब चीन में अगर हम कहे तो हां ठीक है आज के डेट में इकोनॉमिकली इकोनॉमिक पावर हाउस बन गया है पर उसने इकोनॉमिक पावर हाउस बनने के लिए जिस तरह से फैक्ट्रियों को अपने यहां पर लगाया तो फैक्ट्रियां लगाने के पीछे उनका प्रोडक्शन करने का मन नहीं था उनका विचार यह था कि हम जब वो प्रोडक्शन करेंगे तो हम ये टेक्नोलॉजी को सीखेंगे और सीखने के बाद हम खुद बनाएंगे तो अब उन्होंने दुनिया में हर चीज जो बनता है उसका नकल बनाना शुरू कर दिया इसके बाद क्या हुआ कि इन्होंने यूरोप से जो निकले हुए इकोनॉमिक्स के सिद्धांत है अर्थशास्त्र के जितने सिद्धांत है उसको मानते
01:27:54:25 हुए इन्होंने कुछ बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स अपने यहां लगाए इन्होंने क्या किया कि किसी भी एक जगह को उठा लिया यहां पर एक नया शहर बनाएंगे और उन्होंने वहा एक नया शहर बना दिया तो जिस समय वह शहर बन रहा है वहां पर मटेरियल लग रहा है लेबर काम कर रहा है लोग वहां पर जो घर बन रहे है वह खरीद रहे हैं तो बैंकिंग का भी पैसा चल रहा है इकोनॉमी में पैसे आ रहे हैं और उन्नति हो रही है ये लगभग 1990 के बाद से शुरू हुआ 2000 2014 20 तक पूरा हो गया अब ऐसे बहुत सारे भूतिया शहर चीन में बन चुके हैं जिनके सारे घर भी हो सकता है बिक ग हो या नहीं बके हो पर उन शहरों में कोई जाना नहीं चाहता और यह सारे शहर बस खड़े हैं खंडार के रूप में नहींन स अब जो इन्होंने झूठा एक इकोनॉमिक डेवलपमेंट दिखाया वो तो खत्म हो गया कितने नए शहर बनाएगा अब इनका फॉल का टाइम आ गया है और ऊपर से क्या हो गया है कि इनके यहां पर नौकरी करने वाले लोग कम है पेंशन लेने वाले लोग ज्यादा है तो कमाने वाले लोग अगर कम होंगे और पेंशन लेने वाले लोग अगर ज्यादा होंगे तो
01:29:10:02 सिस्टम चलेगा या नहीं चलेगा जो व्यक्ति चीन के इकोनॉमिक्स इकोनॉमिक राइज की बात कर रहे हैं मैं उन्हें क और 10 15 साल रुक जाइए आपने 10 15 साल उनका राइज देखा है अब 10 15 साल में फॉल भी देख लीजिए ये हुई चीन की बात अमेरिका की बात करते हैं अमेरिका कोई बहुत बड़ा इकोनॉमिक पावर हाउस शुरू में नहीं था बल्कि हिटलर के मृत्यु तक भी यह कहा जा सकता है कि वह वर्ल्ड में कोई बहुत बड़ा इकोनॉमिक पावर नहीं था मगर हिटलर ने जब यूरोप को तहस नहस कर दिया तो यूरोप के जो धनाढ्य देश थे वो एक तरह से टूट गए और उनके तुलना में अमेरिका के पास कुछ भी उनको उसको कुछ हुआ नहीं विनाश तो उसके यहां हुआ नहीं था तो पैसा वाला बन गया तो यूरोप के लोगों ने यह सोचा कि हिटलर को तो चलो हम लोगों ने संभाल लिया पर हमने जो दुनिया पर राज किया इतने सालों तक उसको कैसे बचा के रखेंगे तो अपने उस आसुरी राज्य को बचाने के लिए उन्होंने यूएनओ के निर्माण के तौर पर यूएनओ का एक सिस्टम डेवलप किया उस यूएनओ में वर्ल्ड को एक करेंसी देने की बात उठी कि दुनिया में करेंसी कौन सा करेंसी बनेगा
01:30:25:19 चूंकि अमेरिका दुनिया का उस समय सबसे कम क्षतिग्रस्त देश था तो इसलिए सारे यूरोपियन के लोगों ने सोचा कि चलो अमेरिका को के डॉलर को ही हम दुनिया का करेंसी मान ले क्योंकि बाकी यूरोपियन देश वाले किसी और अपने यूरोप के किसी दूसरे करेंसी को वर्ल्ड का करेंसी नहीं बनने देना चाहते थे और उनको लगा कि अमेरिका तो अपने हाथ में ही है वो कौन सा हमें हटा देगा इसलिए उन्होंने अमेरिका के करेंसी वर्ल्ड का करेंसी बना दिया यह डॉलर जब वर्ल्ड करेंसी बन गया तब अमेरिका के पास इकोनॉमिक पावर और उस इकोनॉमिक पावर के पीछे अमेरिका ने उस समाज को एक वादा दिया था कि वो यूरोप के समाज को बिना बताए एक्स्ट्रा डॉलर नहीं छापे और इस वादे से अमेरिका मुकर गया और उसके इस मुकने के कारण 1970 71 में जो बहुत भयंकर गरीबी दुनिया में छाया था उसका कारण यही था कि अमेरिका डॉलर ना छापने का जो उसका वादा था उससे व मुक चुका था जब अमेरिका ने डॉलर ना छापने से मुकर गया तो डॉलर
01:31:39:08 कोलप्पन की इकोनॉमी कोलप कर जाती लेकिन उस समय निक्सन ने जाकर सऊदी अरेबिया के राजा के साथ कांट्रैक्ट किया और उसने यह कहा कि पेट्रोल जो बिकेगा वो डॉलर में बिकेगा तो चूंकि पहले डॉलर के पीछे गोल्ड था अब पेट्रोल आ गया और इसलिए व वर्ल्ड करेंसी रह गया तो जो करेंसी वर्ल्ड में करेंसी रहेगा तो दे इकोनॉमिक पावर हाउस बनेगा तो आप पहले इतिहास को देखि कौन कैसे बड़ा बना है उसके बाद हम बात करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा जी अच्छा एक चीज और बोलते हैं कि क्या कहते हैं जाति के कारण जो पाकिस्तान ल बांगलादेश अलग हुआ है या अफगानिस्तान यह टूटा जाति जाति के कारण तो इसमें इसको कैसे देखते हैं जाति का मतलब क्यों जाति का क्या बात हुआ जातिवाद के जावा के कारण छोटी जाति के लोग मुसलमान बन ग और फिर वो अलग हो गए यही कहना चाहते परवत अगर आप पुराने सेंसस डटा तो उतने है नहीं पर फिर भी अंग्रेज अपने टाइम में का डटा
01:32:54:20 बनाने लग गए थे तो आप पाएंगे कि 1857 के पहले तक पूरे भारतवर्ष में मुसलमानों की संख्या 10 पर से अधिक नहीं थी जी मैं इस बात पर आना चाह रहा था हा मुसलमानों ने इतनी देर तक राज किया तब भी उनकी जनसंख्या इतनी नहीं बढ़ पाई मगर जब 1857 के बाद से जो चीज हुई वर्णाश्रम से दूर जाने लगा तब जो जनसंख्या का बड़ा ग्रोथ हुई है बिल्कुल अलग है बात आना चाह रहा था जी जी और इस काल में जैसे जो लोग कहते हैं कि हम छोटी जाति से अत्याचार के होने के कारण हमने धर्म छोड़ दिया तो मेरा यह पूछना है कि भाई जो हिंदू वहां पर छोटी जातियों पर अत्याचार करते थे ऐसे किसी अत्याचारी का नाम बताओ जैसे हम कहते हैं कि मुसलमानों ने मुगलों ने पर अत्याचार किया तो फिर हमारे पास नाम है ना औरंगजेब है मोहम्मद साह रंगीला है और भी बहुत सारे इनके सब थे अफजल खान वगैरह ये सब है तो भाई एक हिंदू जमींदार का नाम बताओ
01:34:10:02 जिसने छोटी जातो पर अत्याचार किया था और ऐसा एक अत्याचार का कोई घटना बताओ बंगाल और पंजाब में दूसरे देश राज्य की बात छोड़ देता हूं अब बंगाल से एक घटना बताओ कि ऊंची जाति के लोगों ने छोटी जाति के लोगों पर अत्याचार किया उनके गांव को जला दिया उनको कत्लेआम कर दिया ऐसा एक घटना का वर्णन जी सारे इतिहासकार तुम्हारे कोलकाता विश्वविद्यालय में बैठे हुए हैं बड़े बड़े कम्युनिस्ट नेता लोग बैठे हुए हैं जिन्होंने पाकिस्तान के बनने को वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन का नाम दिया हुआ है उनसे भी मैंने ये सवाल किया कि भाई तम मुझे एक घटना बता दे जहां पर किसी जमींदार ने छोटी जाति के लोगों पर अत्याचार किया बहुत अकते अत्याचार किया ने शासक ने किसी का तो हिस्ट्री होगी ना हा अरे होगा ना ये कहते है ना फुले ने लिख कर गया था बाद में अंबेडकर ने भी कहा कि वो झारू बांध के चलते थे और एक घड़ा बांध के चलते थे अरे भाई कोई लिखित प्रमाण दिखाओ ना यार पेशवा का तो सारा डॉक्यूमेंट आपने भंडार में रखा हुआ है वहा से निकाल कर दिखाओ कोई एक राज आज्ञा दिखाओ कि हा पेशवा ने ऐसी आज्ञा दी थी
01:35:25:27 ये ये पिछले 100 200 साल में जो नैरेटिव बनाए गए हैं उसमें ऐसे सिनेरियो बनाए गए कि भैया देखो देखो इतना अत्याचार हुआ ऐसा ऐसा घरना मूलक चीजें की गई और वोह जो चीज नहीं थी वो चीज बना कर के आपको प्रस्तुत कर दी गई जो अस्तित्व में थी नहीं वर्ण व्यवस्था से उत्पन्न होने वाली कोई आधार नहीं इनकी बा इनकी बातो का कोई आधार नहीं है वो इन्होने उत्पन्न कर दिया देखो ऐसा होता था वैसा होता था इतनी ज्यादा बातें की उसके बारे में कि आदमी भूल ही गया कि कौआ कान ले गया कान ले गया कि देगा के कान तो यही है कोई कुछ नहीं ले गया तो उस परे ध्यान देना भूल ही ग ये इतिहास नहीं है ये जैसे फिल्मों की कहानियां लिखी जाती है ना वैसे कुछ कहानियां लिखी गई है जी सब इनके मन गणन बातें हैं जैसे ही बात करके ठीक है भाई कोई ब्राह्मण अत्याचारी था कोई क्षत्रिय अत्याचारी था तो भाई नाम बताना कौन था जी जब मैं पूछता हूं किसी से कि एक अत्याचारी ब्राह्मण का नाम बताओ ये नाम बताते है
01:36:27:25 [हंसी] रावण और कहीं कहीं कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो रावण को काल्पनिक कहेंगे हा और जब मैं कहता कि एक ब्राह्मण का नाम बता जो अत्याचारी था तो नाम आता रावण का मैं बो छत्रिय का नाम बता जो बहुत बड़ा अत्याचारी था तो घूम फिर के क दुर्योधन का नाम आ जाता है या वसे ही कुछ नाम आ जाते बस यही है जी जी जी चलिए बहुत बढ़िया आपसे आज चर्चा हुई है और मूल विषय यही है मूल विषय हमारा एक बात याद दिला दूं कि पहली बात आप जो जात पात की करो विदाई की बात कर रहे हो तो कहां पर वो लागू है वो तो दिखाओ कहां पर लागू है बहुत स्ट्रिक्टली ज फॉलो हो रहा हो जिसकी वजह से आपको बड़ी वो धर्म के क्षेत्र में धर्म की रक्षा करने की आवश्यकता पड़ गई कि इस जात पात को नहीं मिटाए तब तक यह वाली जो यहां पर जो फॉलो हो रही है जिसके कारण जो है हमारा धर्म खतरे में है और भाई अधर्म से लड़ते लड़ते अगर यूं ही हम अपने धर्म को बदलते रहेंगे बदलते रहेंगे तो आखिरी में हम सामने वाले से लड़ कर के बचाएंगे क्या बदला हुआ धर्म बदले हुए धर्म जो कहते हैं मैं लड़ रहा हूं
01:37:42:27 दूसरों से वो लड़ नहीं रहे वो उन्हीं के लोग है मुझे यह बात कहने में कोई तकलीफ नहीं है मैंने एक सिद्धांत दिया है कि 1793 के बाद बंगाल में और 1857 के बाद समूचे भारतवर्ष में जो भी व्यक्ति या जो भी संस्था जो भी संगठन प्रसिद्ध हुआ है उसे संदेह की नजर से देखो चाहे वह कोई भी हो कोई भी मतलब कोई भी जी बहुत बहुत सूत्रा क्मक बात बोल दी आपने जी जी जी जी आज हम एक चीज देखें कि ये लोग कहते हैं कि भाई व जात पात की करो विदाई हम लोग अगर बड़ी वाली वो आपको वो याद है लाइन मैन होते थे पटरी पर लाइन दिखाने वो टॉर्च दिखाने जाते बड़ी सी टॉर्च होती थी उनके पास जी जी वो वाली टॉर्च लेके भी आज हम ढूंढेंगे अगर मुख्य शहरों की बात कर ले जो जो राज करते हैं जहां से आपकी चीजें चालू होती है भाई गांव में राज तो होता नहीं है हेड क्वार्टर कहां होता है मुख्यालय वो तो सिटीज में होता है तो अगर हम लोग सिटीज की बात कर ले मुख्य रूप से
01:38:58:12 तो उसमें हम लोग बड़ी वाली टॉर्च लेकर के घूमे ना तब हमें दो चार वर्णाश्रम जने वाले ब्राह्मण जने वाले क्षत्रिय जने वाले वैश्य ये लोग मिलेंगे तो ज्यादातर हम जो ब्राह्मण कुल में जन्म लेने वाला भी है ज्यादातर जो क्षत्रिय कुल में जन्म लेने वाला भी है क्षत्रिय वैश्य में तो लुप्त हो चला प्राय साउथ की साइड आप चाहेंगे तब भी काफी मिल जाएगा मगर जो जो हमारा जो ये जो उत्तर प्रदेश अगर इसकी बात करें जहा राम जन्मभूमि कृष्ण जन्मभूमि जो उद्गम स्रोत माने जाते हैं सनातन धर्म को ले जाने वाले आगे तो इनकी जो धरती है इनके आसपास की धरती इसमें देखिए आप ब्राह्मण कुल में जन्म लेने वाला क्षत्रीय कुल में ब्राह्मण कुल में तो तब भी मिल जाएंगे क्षत्रिय कुल में और वैश्य कुल में तो यही कहेंगे कि भैया हमारे यहां लुप्त हो चुकी है परंपरा हमारे यहां होता ही नहीं है मनु महाराज कहे तो कहने दो तो जब अच्छा तो अब ये लोग कौन है पतित ब्राह्मण पतित क्षत्रिय पतित तो यह भी कोटि इनकी भी कोटि वही हो गई शूद्र कोटि के हो गए बस केवल इनका एडजेक्टिव रह गया मैं बस इतना कहूंगा आप समझ लीजिए कि अगर मैं सही माने में कह जिनको हिंदू कहना चाहिए जिनको जाति मानने वाला हिंदू
01:40:13:16 कहना चाहिए तो उस नजरिए से मैं भी हिंदू नहीं हूं जी मैं इतनी बड़ी बात क रहा हूं मेरा जीवन ऐसा नहीं कि मैं अपने आप को वर्णाश्रम कह सक मैं अपने आप को धार्मिक कह सकू तो हिसाब से इसमें मैं आपका खंडन करूंगा मैं आपको एक बात बता दू आज भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने एक बात कही यदि अज्ञानता वश अथवा व्यवस्था वश धर्म का पालन ना कर पाने की स्थिति में आपके मन में धर्म का पालन ना कर पाने का पश्चाताप है या प्रमाण बुद्धि अभी भी वही है है तो सही वही मैं जो कर रहा हूं वो गलत है मेरे से जो हुआ मेरे साथ जो हुआ वो गलत है प्रमाण बुद्धि वही है केवल प्रमाण बुद्धि के कारण भी आप
01:41:10:04 धर्मजीत जान के बहुत अच्छा लगा हा ये अगर आपने इसका उल्टा कर दिया कि मैं सही हूं शास्त्र गलत है वो कह रहे वो आज के टाइम पर लागू नहीं हो सकते वो प्रक्षिप्त है जो भी है तो वहां पर जो है हम लोग अधर्मी होते हैं तो अगर हम लोग आचरण में नहीं भी ला पा रहे मगर हमें ये मालूम है कि प्रमाण बुद्धि वही है तो हम लोग तब भी धर्म के कहलाएंगे जैसे एक पिता मना करता है कि बेटा सिगरेट मत पी बहुत गलत आदत है मगर वो अपनी आदत नहीं छोड़ पा रहा किसी कारणवश भी मजबूरी में अपनी आदतन वश उसको सिगरेट पीनी पड़ रही है मगर सिगरेट पीते समय वो ये जान रहा है कि ये मैं गलत कर रहा हूं मेरे पिता ने जो कहा है वो सही है तो वो अपने पिता का आज्ञा वो प्रमाण बुद्धि के कारण वो एक अच्छा पुत्र कहलाएगा उसी तरीके से आपातकाल में ये सब्रम नहीं भी है तब भी आपकी क्योंकि प्रमाण बुद्धि है धर्मशास्त्रों में तो इसलिए आप
01:42:08:13 धर्मजीवन आया है महाभारत में भी कि इस कारण से जो आपकी श्रद्धा है ना श्रद्धा वान जो एक आचरण हीन व्यक्ति भी होता है वो भी अ श्रद्धावन आचरण वान व्यक्ति से अच्छा होता श्रद्धावन आचरण हीन व्यक्ति भी अ श्रद्धावन आचरण वान व्यक्ति से अच्छा होता है क्योंकि वो जो आचरण वान है उसका कोई आधार नहीं है इसके कारण उसके लुप्त हो जाने की बहुत जल्दी आवश्य वो है संभावना और जिसके पास आचरण नहीं है क्योंकि उसके पास आधार है अच्छे और बुरे का तो उसके पास आचरण आ जाने की बहुत संभावना है जैसे कोई नास्तिक है जिसको नहीं पता माता को माता क्यों मान रहा हूं बहन को बहन क्यों मान रहा हूं और पत्नी को पत्नी क्यों मान रहा हूं इन तीनों में अंतर क्यों कर रहा हूं उसको नहीं पता नास्तिक क्योंकि उसके पास धर्म नहीं है तो फिर क्या होगा कि वह आज मान रहा है कि माता है बहन है पत्नी मगर किस क्षण कौन सी घड़ी में उसकी व मनोवृति चेंज हो ठीक है यार कॉम्प्रोमाइज कर लेगा और जो धर्म से जुड़ा हुआ व्यक्ति होगा वह हमेशा एक बात नहीं यह नहीं हो सकता उसके मन में एक मर्यादा हमेशा वो बनी
01:43:23:14 रहेगी इसलिए नास्तिक व्यक्ति का आचरण वान होना भी कोई काम का नहीं होता है तो इसी तरीके से है बहुत बढ़िया बात है आप कह रहे थे आप हम लोग शायद विषय तो छूट गया मगर आप जो कह रहे थे ना कि हां टॉर्च लेकर के भी ढूंढे तो कोई ब्राह्मण क्षत्रिय जो ये वर्णाश्रम धर्म का पालन करने वाले आजकल हमारे जो जो मुख्यालय होंगे हेड क्वार्टर उसमें मिलना मुश्किल है मगर हो क्या रहा है कि अ ये जात पात की करो विदाउट विदाई तो क्या कर रहे हैं इसके नाम कि जिसको शास्त्रों ने या धर्म ने कहा कि तुम ऐसा करो जिसके कुल वंश में पीछे से उसे जो गुण प्राप्त है उसके अनुसार जो यह करना चाहिए तो यह लोग अपना जीवन जो जिनके जीवन में कठिनाई है ब्राह्मण क्षत्रीय वश्य इनका जीवन कंपेरटिवली टू शूद्र का जीवन जो है वह कठिन है अगर देखा जाए है ना क्योंकि आज देखिए हम सरलता के लिए ही तो जने को छोड़ के बैठे हैं जितने लोगों ने आज जने को छोड़ा है वो क्यों छोड़ा है सरल होता है जीवन हम कहां कर पाएंगे उतनी बार कुल्ले हम कहां कर पाएंगे छोटी छोटी सी जगह पर तो सरलता के लिए जनेऊ को त्यागा हुआ है तो इसका अर्थ क्या है कि धर्म के अनुसार जो शास्त्र ये जो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य का जीवन है वो कंपेरटिवली टू
01:44:38:15 शूद्र कठिन है तो अब ये लोग क्या कर रहे हैं जो ऐसे ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र जिनका जो धे वो धर्मो चित मार्ग में नहीं है बल्कि अपने जीवन के भोग में है अपने जीवन के उसमें है लाभ में सुख भोगने में वो लोग क्या कर रहे हैं कि हम तो बिना जनेऊ के रहे और जो शूद्र का सरल जीवन है वह तो हम जिए और हमारा जो कठिन जीवन है वो शूद्र जी है ऐसा मिथ्या भाषण फैलाया जाए ऐसा सिनेरियो क्रिएट कर दिया जाए वर्णाश्रम जात पात मिटाओ जात पात से करो विदाई तो और इन सबका जो दूरगामी जो वो है नतीजा परिणाम वो दिखाई नहीं दे रहा है किसी को तो ये सारी चीजें है आप आए आज बहुत अच्छी अच्छी बातें हुई और मैं चाहूंगा ना कि जो अर्थ वाली जो आपकी थ्योरी है उस परे भी हम लोग किसी दिन जल्दी से जल्दी चर्चा करें मुझे उसम उसमें एक बहुत दूरगामी जो है आपका दृष्टिकोण प्राप्त हो रहा है जो इकोनॉमिक इकोनॉमिकली जो आपने व्याख्या जहां जहां प की तो वहां पर बहुत शार आपकी बातें थी और काफी बढता थी आपकी बातों में और एक दू समय निकालते हैं फर उस बैठते हां उसके लिए फिर एक दिन बैठेंगे एक आयु बहुत देर से
01:45:53:18 उनका नाम कमेंट में आ रहा था आयुषी जी लिंक दे दीजिए वह आना चाहती थी कोई क्वेश्चन है उनका पूछ लू उनसे आज वैसे हमने यह सभी के लिए नहीं नहीं रखी थी स्पेशली आतिश जी के साथ में ही चर्चा थी मगर आयुषी जी को हम ले लेते हैं क्योंकि चर्चा की शुरुआत से अभी तक उन्होंने जो है कमेंट किया है कि मुझे जो है लिंक दे
01:46:32:26 दीजिए जी आयुष लिंक दे दिया गया है लिंक दे दिया गया आयुष जी आयुषी जी को ही जुड़ना है केवल और कोई ना जुड़े हम लोग फिर किसी दिन रखेंगे और कल हम लोग स्त्री गायत्री और वैदिक मंत्रों पर एक चर्चा फिर से रखने वाले हैं उसमें आएंगी विजया उनकी यात्रा है वह कैसे एक आधुनिक लाइफ को जी रही थी पाश्चात्य जो संस्कृति उनसे काफी प्रभावित थी उनकी उनका जीवन और वह आज जो है वैदिक वर्णाश्रम धर्म को मानते हुए परंपरा प्राप्त आचार्यों के द्वारा दिए गए सिद्धांतों को मानते हुए जी को जीवन को दिशा दे रही है तो काफी अच्छा लगेगा आप लोगों को उन्ह सुनने में आयुषी जी आ नहीं रही है हमें लग रहा है ठीक है हम लोग फिर किसी दिन आते
01:47:40:27 हैं ठीक है आते जी आपको बहुत बहुत आभार आपने बहुत अच्छे से प्रकाश डाला और आपने जो बहुत अच्छा लगा आपका जो आपने जिस तरह से प्रकाश डाला और हम लोग जल्दी से जल्दी आपके साथ एक चर्चा फिर से रखते हैं ठीक है सभी को जय श्री राम जड़ने के लिए आभार सभी को जय श्री राम जय श्री राम तो एक बात क्लियर हो गई है कि जात पात की करो विदाई जात पात अस्तित्व में नहीं है यह तो किस जात पात की विदाई हो रही है जात पात की विदाई करने के नाम पर जो परंपरा प्राप्त हमारे सिद्धांत है शायद यह कहने वाले को भी नहीं पता है कि हम उन्हीं की विदाई की बात कर रहे हैं ठीक है तो पहली बात तो यह हो गई और दूसरी बात यह कि कर्म के आधार पर अगर जाति मान ली जाए तो उसका परव सान क्या सुव्यवस्था में हो सकता है नहीं हो सकता है और नहीं हो सकता है उसी का परिणाम है आज जो हम देख रहे हैं समाज में ठीक है और किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के लिए आप लोग हमसे संपर्क कर सकते हैं 74836 य नंबर है नामा स्त्र हम लोग नाम जप कर रहे हैं डेली
01:48:56:20 उसमें आप हमसे जुड़ सकते हैं उसके लिए भी यहीं पर ट करना है भाई व किया करें फोन ना किया करें और इसके इसी क्रम में आगे अगर आप धार्मिक इस अभियान से जुड़ना चाहते हैं तो उसमें जुड़ सकते हैं इसी नंबर पर ट करके हमारी क्लासेस से जुड़ सकते हैं इसके साथ ही साथ आपको जो धर्म के धर्म और धर्म के विषय में जो सवाल आते हैं आपके मन में उसको आप गोवर्धन मठ पर पुरी शंकराचार्य जी के नाम से आप सर्च कर सकते हैं अपने सवाल को लिख कर के हर हरघर गुरुकुल भी एक चैनल है जहां से गुरुदेव के वक्तव्य मिल जाएंगे आपको और विधि विषय विधि निषेध इत्यादि के बारे में जानने के लिए आचार्य राम शंकर शुक्ल जी का चैनल है आचार्य राम शंकर शुक्ल के नाम से ही है वहां जा सकते हैं और आदित्य वाहिनी से जुड़ने के लिए गुरुदेव का जो अभियान है गुरुदेव की से उसमें अपना नाम रजिस्टर अवि करा ले उसके लिए आप उनकी जो गोवर्धन मठ पप है उसको डाउनलोड करें उसमें अपना रजिस्ट्रेशन करा ले आयुषी जी आ रही है जी आइए आयुषी जी बताइए
01:50:24:16 यह रामपाल के फॉलोअर नहीं है यह तो बाइबल के द्वारा मानते हैं कि मोक्ष है बाइबल नास्तिक है नास्तिक चीजें हैं बाइबल इस्लाम में अगर आप बाइबल और इस्लाम को मोक्ष का प्रतिपादक मान रहे हैं तो आप फिर आस्तिक नहीं रहे वेदोक्त दृष्टिकोण से आपको जो है ना आर समाजी मानेंगे आपको यही लोग मानेंगे जो ब्रह्मा कुमारी या राम पाली यार समाजी भी आपको आस्तिक नहीं मानेंगे परंपरा प्राप्त आचार्य की तो बात दूर है ठीक है वह आ नहीं रही है काफी देर हो चुकी है सभी को जय श्री राम
01:51:10:07 [संगीत]
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