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00:00:04:17 [घंटी की आवाज़][संगीत] होने
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→ Used in: A · Live ₹10000000 के ओपन चैलेंज पर रामपाल का कट्टर शिष्य आया सामने अब होगी सबसे बड़ी... at 1:38:53 ↗
00:00:05:18 जा रही है। इसमें जो मेरे ज्ञान को शास्त्रों के आधार से कोई गलत साबित कर दे 50 लाख का इनाम। मैं हूं सनातन धर्म का एडवोकेट और मैं घोषणा करता हूं रामपाल और इसके विश्व भर में फैले हुए समस्त चूहे भगत को कि रामपाल ने जो परंपरा प्राप्त सनातन सिद्धांतों के विषय में जिन विषय को लेकर मैंने आपत्ति प्रकट की है उन विषयों में मेरी एक ही बात को गलत साबित कर दे मैं उसे एक करोड़ दूंगा 50 लाख नहीं एक करोड़ दूंगा
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00:00:40:04 ठीक है ये मेरा खुला चैलेंज है जिसको को भी उसकी मां ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो। वो गलत साबित करके बताए और ₹1 करोड़ ले जाए। फिर आने से पहले मैंने एक कॉमेडी शो देखा। तो थोड़ा सा मैं उस कॉमेडी शो के बारे में बात कर लूं। कॉमेडी शो क्या है कि एक पगला चला है अ बुद्धिमान की चाल। एक मूर्ख चला है बुद्धिमान की चाल। और उसने
00:01:13:18 उसने एक वीडियो बनाया है। वीडियो जारी किया है कि भाई मैं 50 लाख रुपए दूंगा जो मेरी बातों को गलत साबित कर दे और वह खुद को सनातन का आदि सनातन का एडवोकेट कह रहा है। तो उसकी जरा बोली हुई जो टच्चगिरी की बातें हैं उनका अवलोकन करते हुए उनका रिप्लाई कर देते हैं और फिर आज का जो चैप्टर है वो चालू करते हैं। वो क्या है ना आज बुलेट पॉइंट्स बुलेट पॉइंट्स तो है नहीं तो उनका स्पेस खाली रहेगा तो चलो इसने अच्छा कॉमेडी शो दे दिया तो उसी में बात हो जाएगी। अच्छा [गला साफ़ करने की आवाज़] बात करते हैं इसने क्या-क्या बकवास की है अपने उस कॉमेडी सर्कस में हम
00:01:59:15 वर्किंग प्रोजेक्ट इसने बोला है विश्व के जितने भी धर्म गुरु हैं पहले तो क्या इसको धर्म की परिभाषा मालूम है। परमात्मा की परिभाषा मालूम है। यह कहता है आगे कि पवित्र जो शास्त्र है जिसमें कबीर सागर को भी जोड़ देता है। सूक्ष्म वेद के नाम पर सूक्ष्म वेद छमम छक्षम वेद करके अपना जो उसमें पष्ट बेषण किया। कबीर सागर एक पवित्र ग्रंथ है। पर जो यह प्रस्तुत करता है अपना घोटाखोरी मिलावट के साथ वह पवित्र नहीं है। तो कबीर सागर एक सम्मानित ग्रंथ है। तब तक जब तक उसकी बात का अर्थ उसमें कही हुई किसी बात का अर्थ वेद के सम्मत है। सनातनियों के लिए बाकी वो अपने नजर से कुछ भी हो उससे हमें कोई आपत्ति नहीं है। सनातनियों के लिए तब तक वो ग्राह है तब जब तक उसकी कही हुई किसी बात का अर्थ वेद के विरुद्ध ना निकल रहा हो। क्योंकि वेद यह घोषणा करते हैं कि वेद के अलावा कोई मार्ग नहीं है। और उपनिषदों के अनुसार जो पंचम वेद कहा गया है, सूक्ष्म वेद कहा गया, सूक्ष्म वेद तो प्रणव है। जो प्रणवाक्षर है वही सूक्ष्म वेद है। बीज रूपी वेद वो हमारा प्रणवाक्षर है। और पंचम वेद कहा गया इतिहास, पुराण, महाभारत इत्यादि को, पुराण, शास्त्र इत्यादि को और इसके भरभर के उपनिषदों में प्रमाण भी हैं।
00:03:15:08 अच्छा तो यह कहता है कि जो हमारे शास्त्र है उन पर आधारित चर्चा होगी। इसने कम से कम उस वीडियो में तीन से चार बार यह बताया है कि कौन-कौन से शास्त्र ने इस पर जोर दिया है। उसमें रामचरितमानस का नाम लिया है। उसमें जो है वाल्मीकि रामायण का नाम लिया है। महाभारत का नाम लिया है। गीता का नाम लिया है। और गीता को इसने सार बताया है। गीता को इसने किसका सार बताया है? चारों वेदों का प्लस सूक्षम वेद का। इसके चमचम वेद का। तो उसको इन सब का सार इसने गीता गीता को बताया है। जबकि यह खुद ही कहता है कि गीता में पूर्ण ज्ञान नहीं है। यह खुद ही कहता है और गीता कबीर सागर का भी सार है। यह इसकी मूर्खता है। इसने अपनी वीडियो में कहा। तो एक-एक करके चलते हैं। सबसे पहली बात इसने बोली है कि परमा पवित्र शास्त्र में कबीर सागर यह कैसे जुड़ा? रामपाल तुम बता दो। जब पंचम वेद, इतिहास, पुराण शास्त्र इत्यादि हैं उपनिषदों के अनुसार, महाभारत के अनुसार, पुराणों के अनुसार, ब्राह्मण ग्रंथों के अनुसार तो फिर तुम कैसे उसमें कबीर सागर को घुसेड़ोगे? अपनी वो थुल्लाग्लागिरी के आधार पर। अच्छा। फिर तुम कहते हो
00:04:30:09 कि गीता चार वेद प्लस सूक्ष्म वेद। तुम्हारे छमम छमम वेद का सार है। तो भैया तुम ही तो यह कहते हो कि गीता में पूर्ण परमात्मा की भक्ति कैसे करनी है? ये देखो वेदों और गीता में ज्ञान तो श्रेष्ठ है। मगर जो साधक परंतु भक्ति की साधना केवल तुम्हारे अनुसार जो काल ब्रह्म है जिसको पाकर के मुक्ति नहीं होती वहां तक की है। तो फिर तुम कैसे कह रहे हो कि गीता उसका सार है। या तो तुम यह कहो कि कबीर सागर में भी पूर्ण ज्ञान नहीं है। इसके अलावा और भी कई जगह तुमने कहा है चारों वेदों 18 पुराणों गीता जी व छह शास्त्रों में केवल ब्रह्म काल की उपासना है यानी मुक्ति की बात नहीं है तुम्हारे हिसाब से तो तुम गीता को कबीर सागर का सार कैसे कह रहे हो क्योंकि भैया दुकान चलानी है अपनी आप को फेमस करना है इसलिए है ना और एक जगह लिखा हुआ बिल्कुल साफ सुथरा कि भैया गीता में जो है अच्छा क्या कहता है गीता इसके और यह कहता है कि यह जो शास्त्र है ना वेद, पुराण और गीता यह सब जो है सद ग्रंथ है इसके लिए पवित्र ग्रंथ हैं। और यह
00:05:45:10 सद ग्रंथ कहने वाला कौन है? जो लोगों को बहकाता है, झूठ बोलता है, अज्ञानता करता है, अपना उल्लू सीधा करता है, झूठ बोल के उल्लू सीधा करता है। उसके द्वारा की गई जो उल्टी है, जो इसने कहीं अपनी कल्पनाओं में सोच रखी है, उसको ये हमारे शास्त्रों से जोड़ देता है। और फिर भी इस मूर्खता को करने के बाद भी कहता है कि ये सद ग्रंथ है। अरे भाई तेरे अनुसार ये सद ग्रंथ है। पहले ये तो साबित कर सद ग्रंथ है कैसे? इनको तो काल दे रहा है और काल झूठ बोलता है। यह देखो इसका 95 नंबर पेज खोलकर दिखाओ। 95 चलो बाद में लगा देना। अभी मत खोलो। 95 नंबर प्रश्न पर तीसरे चौथे पैराग्राफ में लिख रहा है यह कि जो काल ब्रह्म है वह अच्छी आत्माओं को रचता है अर्थात पैदा करता है फिर उनमें स्वयं प्रवेश करके गुप्त रूप से अपना उल्लू सीधा कर लेता है और अभी आज पांचवे चैप्टर में भी यह बात आ रही है कि काल जो है भ्रमित करता है व्यक्ति को अज्ञानता फैलाता है व्यक्ति को तो फिर काल के द्वारा दिए गए जो वेद है वह भ्रमित करने वाले नहीं है कैसे तय हो रहा ठुल्ले गिरी के ज्ञान से घटियाई घटियाई रामपाल की घटिया गिरी के ज्ञान से जैसे तुम कहते हो ना ब्रह्मा विष्णु
00:07:00:12 महेश की भक्ति करने वाले या वो गीता ज्ञान दाता की जो भक्ति है वो गति है वो घटिया है तो वास्तविकता में तुम्हारा जो घटिया स्तर है उसके आधार पर तुम ये कहते हो तुम्हारी घटिया गिरी है ये कि तुम पहले तो कहते हो कि काल जो है वो उल्लू सीधा करता है झूठ बोलता है अज्ञानता फैलाता है भ्रमित करता है और और फिर उसी के द्वारा दिए जाने वाले शास्त्रों को तुम कहते हो कि ये हमारे सद ग्रंथ है और सद ग्रंथ होने के बाद भी तुम फिर उसमें एक ठुल्लू लगाते हो कि इसमें ये तो काल ने अपनी मर्जी से कह दिया ये झूठ है वो झूठ है फलाना है ढिमका है तो पहली बात तो तुम यही सिद्ध कर दो कि भैया धर्म किसे कहते हैं ईश्वर किसे कहते हैं तुम्हारे अनुसार जो धर्म है जो धर्म है वही सिद्ध नहीं होगा धर्म की परिभाषा ही सिद्ध नहीं होगी फिर उसके बाद तुम ईश्वर की परिभाषा तुम्हारी सिद्ध नहीं हो पाएगी और तो और अंतत गतवा तुम्हारे द्वारा शास्त्र की परिभाषा सिद्ध नहीं हो पाएगी और अंत में अगर बात करो कि तुम इनको शास्त्र कहते हो सद ग्रंथ शास्त्र कहते हो तो किस आधार पर कहते हो सद ग्रंथ कहते हो तो किस आधार पर कहते हो अगर गीता कबीर सागर का और बाकी चारों वेदों का सार है तो फिर गीता में पूर्ण भक्ति की बात क्यों नहीं है तुम्हारे हिसाब से उसमें ज्ञान अधूरा है यह है तुम्हारा
00:08:15:18 घटियागरी का ज्ञान है ना ठोको ताली अच्छा इसके बाद इसने अपने उसमें क्या कहा है। आगे चलते हैं। इसने बड़ी कॉमेडी की है उसमें। मैं तो अभी तक समझता था कि रामपाली जो है ज्यादा बड़े कॉमेडियन हैं। मगर आज मुझे इस वीडियो को देख के पता लगा कि सबसे बड़ा कॉमेडी तो कॉमेडी किंग तो रामपाल है। कैसे? आगे क्या कह रहा है? फैसला कौन करेगा? जनता करेगी। है ना? फैसला कौन करेगा? जनता करेगी। और उसमें उदाहरण देता है। उदाहरण क्या देता है? कि जैसे दो वकील हैं। ध्यान देना इस बात पे। जैसे दो वकील हैं वो आपस में एक दूसरे को कुछ नहीं कहते हैं बल्कि वो अपनेप पक्ष को रखते हैं। फैसला जो है वह करता है। जज करता है। ठीक है? तो फैसला जब जनता को करना है और फिर इसने ये कहा कि मैं साधना टीवी पर बैठकर के अपने आश्रम में क्या कहते हैं? कायरता पूर्वक क्योंकि मैं अपने बिल से तो बाहर निकल नहीं सकता। तो कायरता पूर्वक रामपाल अपने वक्तव्य निर्गत करेगा साधना टीवी पर आकर के और उसके बाद जिसका भी मन हो उसकी बात को काटने का जिससे कि रामपाल फेमस हो जितने ज्यादा से ज्यादा धर्म गुरु रामपाल की बात करेंगे उससे शास्त्रार्थ जैसा सीन बनेगा रामपाल कभी ये मानेगा नहीं कि मैं गलत हूं जनता का जनता
00:09:30:21 ने किसको गलत माना किसको सही माना ये फैसला कैसे होगा इस बारे में रामपाल जी का घटियागरी का ज्ञान कोई आधार नहीं है जनता ने किसको चुना इस इस बारे में रामपाल के पास कोई उपाय उपाय नहीं है। उसके बाद रामपाल यह कहता है कि रामपाल यह नहीं कहता कि आप साधना टीवी पर आकर के लाइव चर्चा करो मेरे सामने बैठकर ना रामपाल ये कहता है कि आप भी अपना चैनल बुक करके उस पर बोलो जैसे मैं बोल रहा हूं और चैनल ना हो तो YouTube पर बोलो और YouTube पर या Instagram पर जिस पर सोशल मीडिया पर मेरे बारे में बोलना है मेरी बात को काटो। कितना घटियागिरी करोगे भाई। कितनी घटियाई बातें करोगे। जो चीज तुम करने को कह रहे हो वह तो वह अभी भी कर रहे हैं। क्या अनुचार्य ज्ञान नहीं दे रहे? क्या देवकीन नंदन ज्ञान नहीं दे रहे? क्या रामानुजाचार्य परंपरा के जो आचार्य गण है वो ज्ञान नहीं दे रहे? क्या मधवाचार्य परंपरा के लोग हैं वो ज्ञान नहीं दे रहे सोशल मीडिया पर? क्या शंकराचार्य परंपरा के लोग ज्ञान नहीं दे रहे सोशल मीडिया पर? तो ये क्या मूर्खता की पराकाष्ठा प्रस्तुत कर रहे हो? तुम्हारे लोग वैसे ही अर्ध पागल है। उन्हें पूरा पागल बना के ही छोड़ोगे क्या? भाई वह लोग जो काम तुम करने को कह रहे हो वह तो दे ही रहे हैं। अच्छा तुम कहो
00:10:45:22 कि मेरा नाम लेकर के मेरी बात काटते हुए तो कोई बात नहीं कही। वैसे तो कही भी है। सुक्राईनाथ इत्यादि तरीके जो कई ऐसे संत हैं जिन्होंने तुम्हारी बात को काटते हुए बातें की है। पर यदि चलो मान लिया कि जो बड़े संत है उन्होंने तुम्हारी बात को काटते हुए बात नहीं कही। उन्होंने अपना पक्ष रखा है तो हो चुल्लू व्यक्ति शुरू में तू ही तो कह रहा है कि भैया केवल अपना पक्ष रखो आपस में नहीं जुड़ना है फिर बाद में तुम ये क्यों अपेक्षा कर रहे हो कि भैया मेरा नाम लेकर के ज्ञान दो वो तो वो कर ही रहे हैं तो एक नया एक वो क्या होता है वो एक तनतुना लेकर के आए बस और कुछ नहीं फिर तनुने में आगे क्या बोलते हैं आगे क्या बोलते हैं कि
00:11:35:13 आगे बोलते हैं कि जो सृष्टि रचना जो सृष्टि रचना बता सकता है वही सृष्टि करता है। तो भाई अगर सृष्टि रचना बतानी है तो जितने शास्त्र वेदव्यास के माध्यम से हमको प्राप्त हुए यानी वेदव्यास मानते थे जानते थे सृष्टि रचना तो वो तो सृष्टि तो वो तो तुम्हारे हिसाब से ईश्वर हो गए वेदव्यास जी अच्छा इसने कुछ उदाहरण भी दिए अपने बकवास में एक उदाहरण दिया भागवत का जो इनका फेवरेट पुराण है जिसमें इनको अपना वो ब्रह्मा विष्णु महेश का आविर्भाव तिरभाव मिल जाता है तो ये वहां पर जो है ये व्यक्ति कहता है देवी भागवत में ब्रह्मा जी पूछ रहे हैं और देखो जो शिव शिव पुराण है उसमें ब्रह्मा विष्णु पूछ रहे हैं। इससे सिद्ध हो गया कि तीनों लोगों को नहीं मालूम है। जबकि सृष्टि रचना के बारे में ही जहां पर ब्रह्मा जी पूछ रहे हैं वहां पर देवी जी बता रही हैं। जहां पर ब्रह्मा और विष्णु दोनों पूछ रहे हैं वहां पर शिव जी बता रहे हैं। मगर यह बात नहीं बोलेगा क्योंकि यह दोगला व्यक्ति है। झूठा व्यक्ति है। कहीं पर भी एक बात को आप नोट करो। ये लोग कहते हैं कि शास्त्रों में इनकी भक्ति करने को मना किया गया है। पहली बात इस यह कभी प्रमाण सहित बता पाएगा यह घटियागिरी करने वाला व्यक्ति कि ब्रह्मा विष्णु महेश जो हमारे पंच देवोपासना
00:12:50:16 है वो करने के लिए यदि मना किया गया है शास्त्रों में तो इनकी भक्ति करने की जो विधा है वो आई कहां से अगर इनको जो है पूर्ण परमेश्वर नहीं कहा गया है शास्त्रों में तो इनको पूर्ण परमेश्वर माना कैसे किस आधार पर माना क्यों माना तो यहां पर तुम्हारे पास कोई जवाब नहीं होगा क्योंकि जो हमारे सारे शास्त्र हैं। इसके हिसाब से इसकी घटियागरी की बातों के हिसाब से वो सारे शास्त्र तो इस बात के लिए हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान नहीं है। पूर्ण भगवान नहीं है। इस बात के लिए है तो फिर उनको पूर्ण भगवान माना किस आधार पे? दूसरी बात एक बहुत पॉइंट की बात है। ये लोग जितने लोग ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश की भक्त को पूर्ण ब्रह्म मानने वाली बातों को कट करने के लिए जितने भी शास्त्र के प्रमाण ले आएंगे आपके सनातन शास्त्रों के तो जहां से प्रमाण दे रहे होंगे वहीं पर यदि ब्रह्मा विष्णु महेश को कहा जा रहा होगा कि उनका जीवन मरण होता है या आविर्भाव तिरोभाव होता है हमारे अनुसार आविर्भाव तिरोभाव इनके अनुसार जीवन मरण तो जहां पर ये कहा जा रहा होगा वहीं पर इन पांचों देवों में से किसी ना किसी एक को पूर्ण ब्रह्म के रूप में स्थापित किया है। मगर वो बात ये नहीं बताएंगे क्योंकि यह हैं दोगले। कौन है ये? दोगले अपने बिल में बैठकर के बकवास करने वाले।
00:14:06:12 इसके बाद ये दो बातें हमेशा ध्यान रखो। एक बात कि भैया ब्रह्मा, विष्णु, महेश को पूर्ण परमेश्वर मानने वाली बात शुरू कहां से हुई? इसका प्रमाण क्या है? क्योंकि यह सारे शास्त्र तो उनको पूर्ण परमेश्वर ना मानने के निमित्त बनाए गए हैं। और दूसरी बात क्या कहीं पर ऐसा है कि एक सिरे से पांचों देवों की उपासना को खंडन कर दिया गया हो। कहीं नहीं है। यदि ब्रह्मा विष्णु महेश का आविर्भाव तिरोभाव बताएंगे तो वहां पर देवी ब्रह्म के रूप में स्थापित है। उत्पत्ति के रूप में स्थापित है। यदि देवी को उत्पन्न होना दिखाएंगे तो वहां पर शिव जी स्थापित है। यदि शिव जी का उत्पन्न होना दिखाएंगे तो विष्णु जी स्थापित है। इसका अर्थ क्या है? एक ही परम तत्व ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश के रूप में बार-बार सृष्टि करता है। कभी सृष्टि उसने मां मां भगवती के रूप को प्राथमिकता देते हुए रखी तो यह उनके परिकर कहलाए। बाकी के चार देव और जिस-जिस देव को प्राथमिकता देते हुए सृष्टि रचना की व्याख्या हुई। तो उस सृष्टि रचना के आधार पर जो बाकी के चार अन्य देव हैं वो उनके परिककर कहलाए। इतनी सी बात समझने वाली है। इसको कल्प भेद कहते हैं। वह बात और है कि इनके यहां पर काल मरता भी है। काल मरता है इसका मतलब वो दोबारा पैदा होता है। दोबारा पैदा होता है।
00:15:21:18 उसका जीवन मरण होता है। मानता है ना रामपाल अपनी घटियागरी के ज्ञान के अनुसार। तो काल जब मरा उसके बाद वो जन्म लिया। कबीर को मालूम है ये ऐसा-सा करेगा। फिर भी उसको जन्म दिया। यानी कि उसको फंसाना है दोबारा से आत्माओं को और जब वो दोबारा जन्म लेगा तो वही कहानी सब रिपीट होगी। वह दोबारा से ऐसा कुछ करेगा कि आत्मा उसके जाल में फसग दोबारा से कुछ ऐसी गलतियां जिससे कि ब्रह्मा विष्णु महेश रामपाल के हिसाब से प्रकट होंगे। ये सारी चीजें इसके यहां पर मान्य है और हमारे यहां के कल्प वेद को ये घटियागरी का ज्ञान देने वाला कभी समझ नहीं सकता। इसके बाद इसने क्या बकवास की है? ये इसने पुराणों की बात की थी। वो हो गया। इसके बाद इसका एक चमचा बैठा हुआ है। किसी संत का भष धरे हैं। मैं उनको जानता नहीं हूं। हो सकता है संत हो या फिर हो सकता है इनके द्वारा प्रायोजित हो। ज्यादा चांसेस ऐसे हैं क्योंकि उन्होंने संस्कृत बोली और रामपाल के खेमे का व्यक्ति कभी संस्कृत बोलता हुआ नहीं मिलेगा। है ना? तो उन्होंने संस्कृत बोली तो वो एक इनका एक घटियागिरी का चेला वहां पर बैठा हुआ है और वो बातें कर रहा है कि वो रामपाल ने जो गौशाला में दान भेजा। अरे भैया रामपाल यदि गौशाला में दान भेज रहा है तो यह प्रश्न करने वाले क्या अपनी स्त्रियों को रामपाल के पास सोने के लिए भेज देंगे
00:16:38:12 जो तुम ऐसी बातें करते हो कि दुर्गा माता के बलात्कार की बात करने वाले का पक्ष लेते हो कि उसने पाइप दिए हैं। उसने जो है गेहूं, शक्कर, आटा, तेल, चावल दिया है। हां। बात हो रही है कि उसने जो है वेदों के नाम पर कूड़ा क्यों किया? उसने उसको कूड़ा करना है अपना भैया जो तुम लिख रहे हो किताब अपने आप को परमेश्वर कहो भजवाओ मगर वेदों के नाम पर कूड़ा करना इसलिए जरूरी है क्योंकि वेदों पे सबकी आस्था है पुराणों पे सबकी आस्था है गीता पे सबकी आस्था है इसलिए जिस पे पहले से सबकी आस्था है उसी के अंदर चोरी से घुसना है और अंदर घुस के ऐसा दिखाना है कि भैया इसके द्वारा तो मुझे ही पूजा जा रहा है। वो बात और है कि मेरी हर दूसरी बात पहली बात से कट जाती है और हर पहली बात दूसरी बात से कट जाती है। क्योंकि मेरा जो ज्ञान है, रामपाल का जो ज्ञान है, वह घटियागिरी का ज्ञान है। है ना? अच्छा। और आगे क्या है? फिर इसने आखिर में कहा कि जो है ये इनाम देगा जो इसकी एक बात को गलत साबित कर देगा। गलत साबित का निर्णय कैसे होगा? तेरी बात गलत साबित हो गई। अरे फुअर है क्या तू? एक नंबर का मूर्ख व्यक्ति है क्या? एक तरफ तो कह रहा है भैया जनता फैसला ले लेगी। जनता फैसला ले लेगी। ये पता कैसे चलेगा? इस बारे में कोई तूने समीकरण बैठाए समीकरण
00:17:53:22 बैठा भी नहीं पाएगा उसके लिए दिमाग चाहिए होता है उसके लिए फोड़ बुद्धि काम नहीं करती है एक लेवल तक जो रटा रटाई चीजें हैं वो बोल लोगे उसके बाद ये सब चीजें कैसे स्थापित करोगे जनता ने किसको चुना किसको नहीं चुना अच्छा दूसरी बात जब ये निर्णय ही नहीं होगा तो फिर यह कैसे तय होगा कि तेरी बात गलत साबित हुई कि नहीं हुई हम अच्छा अब 100 की सीधी एक बात है तो अभी रामपाल ने एक घोष की है। एक घोषणा मैं कर देता हूं। कॉमेडी सर्कस उसने किया है। मैं उसको उसका जवाब दे देता हूं। आप लोग यहां से चाहो तो रील कट करके अपना जो जवाब किसी को देना हो तो दे देना। तो एक कॉमेडी सर्कस में रामपाल ने हरियाणा का जो तथाकथित बाबा है जो हमारे सनातन देवी देवताओं का मजाक उड़ाता है। हमारे सनातन धर्म को मानने वाले हिंदुओं की आस्था के जो केंद्र हैं हमारे तीज त्यौहार इत्यादि हमारे ईश्वर के स्वरूप और हमारी पूजा पद्धति यानी कि श्राद्ध कर्म इत्यादि करवा चौथ के व्रत इत्यादि इन सबका मजाक उड़ाता है। कहता है करवा चौथ रखने वाली जो महिलाएं हैं वो गधी बनेंग है ना और ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति करने वाले नीच हैं। दुर्गा के साथ जो है बलात्कार किया एक राक्षस ने और भी ना जाने कितनी
00:19:08:28 बातें कि गायत्री ने गवाही देने के लिए झूठी झूठी गवाही देने के लिए शर्त रखी कि मेरे साथ पहले संभोग करो तब जो है मैं झूठी गवाही दूंगी। तेरे का कई सांड पति होंगे। यह सब अश्लील बातें हैं। स्त्रियों के अंतरंग वस्त्रों की बात यह करता है माता पार्वती और शिवजी के विवाह वाले प्रकरण में अंतरंग वस्त्रों वो भी अंग्रेजी नाम उनका हिंदी नाम नहीं अंग्रेजी नाम। तो ये सब चीजें करने वाला जो बाबा है तथाकथित जो अपने जो कायरता पूर्वक [हंसी] अपने बिल में बैठा रहता है। उसने अपने बिल में बैठकर के एक घोषणा की है कि मैं हूं आदि सनातन धर्म का एडवोकेट। अरे घोंंचू तेरी सबसे पहले तो यही बात गलत हो गई। तू कह रहा है ना मेरी गलत बात साबित कर दो। सनातन के आगे यदि आदि लगा दिया तो सनातन का अस्तित्व कहां रह गया? जिसकी शुरुआत हो रही है वो सनातन नहीं है। सनातन वो जो अनादि है। अनादि सनातन कहता मूर्ख तो तेरी बात चल भी जाती। कहां तू प्रबुद्ध जनों में बैठकर के सोच रहा है कि लाइव तेरे साथ कोई शास्त्रार्थ करेगा। इतना बड़ा तू मूर्खता का पिटारा है ना। इतना बड़ा पिटारा है कि तुझको कौन अपने सामने बिठाएगा? आदि सनातन मैं हूं आदि सनातन का एडवोकेट तो सुन ले भाई रामपाल कहता है कि वह आदि सनातन का एडवोकेट
00:20:24:02 है और वो आदि सनातन उसका जो तथाकथित धर्म है जिसका उसे खुद ज्ञान नहीं है धर्म होता क्या है उसके बारे में वो अपना पक्ष रखेगा और उसकी बातों को जो भी गलत साबित कर देगा वो उसको 50 लाख देगा तो सुन मैं हूं सनातन धर्म का एडवोकेट और जितनी बातें तुमने सनातन परंपरा परंपरा प्राप्त सनातन धर्म के विरुद्ध कही है। उसके संबंध में जो मैंने निराकरण प्रस्तुत किए है और तेरी मूर्खता प्रस्तुत की है। उसके एक भी शब्द को एक भी पंक्ति को एक भी बात को जो गलत साबित कर देगा उसको मैं ₹1 करोड़ इनाम दूंगा। बोल कर गलत साबित तू डाल डाल तो मैं पाथप पाथ। और फैसला कौन करेगी जनता? तो जनता फैसला करके बता देगी गलत साबित किया कि नहीं किया? तेरी डपोर शंख वाली बातें हैं ना। कर गलत साबित रामपाल के विरुद्ध मेरे द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले सिद्धांतों में से एक भी सिद्धांत को कोई गलत साबित कर देगा मैं उसको ₹1 करोड़ इनाम दूंगा। अपना चैनल खोलो सोशल मीडिया पे आओ YouTube पे आओ और करो गलत साबित और अगर कर दिया तो ₹1 करोड़ तुम तुम्हें मैं इनाम दूंगा रामपाल
00:21:40:19 तू भी कर दे गलत साबित तेरे को मैं इनाम दूंगा जा [संगीत] आ
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शिवांश नारायण द्विवेदी द्वारा रामपाल और उसके आश्रम कोOpen Debate Challenge ₹ 10000000 का नकद इनाम
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