⬜ Not used yet · 00:00:01:26 – 00:09:55:04 (9:53)
00:00:01:26 [संगीत] सभी को जय श्री राम और पलेट को लेकर के काफी शिकायत हैं शिवांश भैया लेट भाई पूरा प्रयास करते हैं क्या बताए आखिरी मिनट तक कोई ना कोई कार्य कर रहे होते हैं तो आज हम लोग एक और बहुत बड़े खुलासे के साथ आए हैं एक विशेष ऐसी वार्ता जो कहीं ना कहीं हम लोगों से अछूती रह गई है और जिस पर बात करना बहुत आवश्यक है जय श्री राम पैरा सेटा मल
00:00:53:13 जी लुकिंग फायर तो हम लोगों से एक बहुत विशेष बात जो है अछूती रह गई है आज हम उस पर भी चर्चा करेंगे और यदि कोई अपने मत को स्थापित करते करने हेतु चर्चा के लिए आना चाहता है तो वो भी आ सकता है कुछ देर के बाद हम लोग अ लिंक देंगे आने के लिए और तो सबसे पहली बात है एक एक बार एक अमित दास नाम का व्यक्ति आया था आर समाज की तरह तत्वदर्शी जो जेल धाम निवासी हैं तथागत उनकी तरफ से तो उससे एक चर्चा हुई थी जिसका उत्तर उसने अंततोगत्वा यह दिया था कि उसको नहीं पता है और वह प्रश्न यह था कि यदि जो इनके जो संत है तथाकथित वो इस समय जो जेल में है तो उनके नाम से जो बाहर जो नाम दीक्षा बाटी जा रही है लोगों को और जो एलईडी में बिठा कर के जो इत्यादि इत्यादि ये सब कार्य हो रहे हैं क्या
00:02:09:01 एलईडी में जिसको दीक्षा लेनी होती है वो एलईडी के थ्रू दीक्षा ले लेता है तो यह शास्त्र सम्मत नहीं है उसने कहा था कि यह जो है हमारे गुरु सम्मत है पहली बात तो वही बात आ जाती है कि गुरु सम्मत यदि शास्त्र सम्मत नहीं है तो फिर वो माना कैसे जाएगा वो वाली बात आ जाती है मगर गुरु सम्मत भी है कि नहीं यह भी आज हम लोग बात करेंगे हरिशंकर द्विवेदी जी जय श्री राम जी तो पहली बात तो यह हो गई और कुछ और भी आवश्यक तथ है तो सबसे पहली बात है कि यदि रामपाल दास जी के नाम से जो नाम दान केंद्र चल रहे हैं वह शास्त्र सम्मत है तो हमें इस बात का शास्त्रोक्त प्रमाण प्राप्त होना चाहिए कि जो गुरु है वह कहीं और है उसको एक महीने के बाद यह ज्ञात हो रहा है कि आज उसने किसी को दीक्षा दी है जिस समय दीक्षा ली जा रही दी जा रही है उस समय गुरु को पता ही नहीं कि मैं इस समय किसी को दीक्षा दे रहा हूं हो सकता है व उस समय भोजन कर रहे हो हो सकता है वो उस समय सच
00:03:24:06 में बैठे हो हो सकता है वो उस समय कोई उनसे जो जेल हो उसके अंदर की गतिविधिया आप जानते ही है उनसे कोई ऐसी बात हो गई हो जिसके कारण जो है वहां का प्रशासन उन्हें प्रताड़ित कर रहा हो है ना उन्हें दंड भुगतना पड़ रहा हो और उस समय यहां पर जो है दीक्षा ली और दी मतलब दीक्षा दी जा रही है उनके नाम से ये कितना शास्त्रोक्त है दूसरी बात हम लोग एक बात पूर्व पक्ष के रूप में यहां पर ये रख सकते कि भाई नहीं जो गुरु है भगवान के तुल्य होता है और उस तरीके से देखा जाए तो गुरु में दैवीय शक्तियां होती है वो कहीं पर है और फिर भी जो है वो शिष्य को जो है वह जान रहा है कि मैं इस समय दे रहा हूं कि नहीं दे रहा हूं मेरा कौन सा शिष्य बन रहा है मगर इस पर अमित दास जी का कहना था कि भाई हमारी तरफ से हर हफ्ते जो है हर महीने पूरा का पूरा मान लीजिए इनकी तरफ से य कहा जाता है बहुत लोग जुड़ रहे हैं तो अगर एक महीने में 10 20 हजार लोग भी अगर जुड़े हैं रामपाल से नए तो उन सबका खाता खतौनी हर महीने जाता है वहां पर और उनको दिखा दिया जाता है अब सबसे पहली बात है कि इस संबंध में क्या रामपाल जी ने कोई
00:04:39:13 ऐसा वक्तव्य जारी किया है ठोस कि भाई मेरे नामदान केंद्र के द्वारा जो नाम दीक्षा दी जा रही है मेरे अनुमति से दी जा रही है तो हो सकता है दिया हो मगर उसने य हमको नहीं बताया कि ऐसा कोई वक्तव्य उनका है कोई ऐसा वीडियो है अब बात दूसरी आ जाती है क्या उन्होंने किसी को अपनी ओर से प्रामाणिक बात बोलने वाला उत्तराधिकारी घोषित किया है तो ऐसा भी कोई हमें प्राप्त नहीं है तो बात य आ जाती उनके नाम से जोय नाम दान केंद्र चल रहे हैं क्या वह वास्तविकता में रामपाल दास जी की ही कही हुई बातें बता रहे हैं या फिर कुछ और बता रहे हैं या फिर व कुछ ऐसा बोल रहे हैं जो रामपाल दास जी ने स्वीकार नहीं किया है तो यह सारी बातें जो है
00:05:31:18 विचारणीय है बहुत ज्यादा क्योंकि ऐसी भी खबरें सुनाई देती है कहीं कहीं से कि रामपाल दास जी को उन्हीं के जो प्रियजन है उन्होंने ही अंदर फसा रखा है और वह नहीं चाहते हैं कि वह बाहर आए जिससे कि इनका जो कार्य चल रहा है सुचारू रूप से उसमें कोई बाधा है ऐसा भी सामने आ रहा है तो पहली बात इस बारे में कोई शास्त्रोक्त हमें संदर्भ प्राप्त नहीं है कि गुरु के बिना ही गुरु की अनुमति के बिना ही गुरु की स्वीकार्यता के बिना ही किसी को उन्होंने अपना शिष्य बना लिया गुरु शिष्य गुरु शिष्य का रिलेशनशिप है गुरु शिष्य का संबंध
00:06:13:15 है केवल शिष्य का गुरु के प्रति नहीं है गुरु का भी शिष्य के प्रति है तो यदि गुरु की एक रिकॉर्ड की हुई जो बात है उसी से सब कुछ हो जाना है तो उससे का मैं अभी कहूंगा तब इसको आप चलाइए मैं भी कहूं तो एक सबसे बड़ी बात य आ जाती है कि क्या रामपाल दास जी के नाम से जो नामदान केंद्र चल रहे हैं क्या वह रामपाल दास जी की सहमति से चल रहे हैं इसके बारे में कोई शास्त्रोक्त बात नहीं है अगर रामपाल दास जी का कोई ठोस वक्तव्य हमें प्राप्त नहीं है तो फिर यह कैसे माना जाए कि उनके द्वारा जो जो किताबें जो हमें मिल रही है वोह सत्य है यह भी बात खड़ी हो जाती है वो जो साहित्य है व है कि नहीं भाई जो व्यक्ति झूठा झूठ बोल सकता है झूठ फसा सकता है तो कुछ भी कर सकता है कुछ भी कहीं पर भी झूट मिला सकता है रामपाल दास जी के नाम से कितनी किताबें सत्य कितनी किताबें सत्य नहीं है ये सब चीजें फिर विचार हो जाती अब इसमें एक पक्ष ये सामने आता है कि रामपाल दास जी के द्वारा जो दीक्षित जो महकमा है उसमें ही इस बात को लेकर के दुराव है जैसे स्न है ना इकोन में भी इस बात का दुराव है कि भाई तुम गुरु कैसे बन रहे हो या तुम किसी को नाम दीक्षा कैसे दे
00:07:28:15 रहे हो कुछ कु लोग ये कह रहे कि नहीं नहीं गुरु तो वही रहेंगे कौन शील प्र उपाद तो इसी प्रकार से यहां पर भी दो महकमे बन चुके हैं एक महकमा है जो यह कह रहा है कि नहीं नहीं उनके नाम से जब तक वो है तब तक जो है दीक्षा नहीं दी जा सकती नाम दान नहीं दिया जा सकता है और दूसरा महकमा है जय श्री राम प्यारी मना और दूसरा महकमा है जो यह कह रहा है कि नहीं नहीं उनके नाम से नामदान केंद्र चल रहे हैं पहली बात तो ये जो पहला वाला पक्ष है जो यह कह रहा है कि भाई जो शास्त्रों के आधार पर तो उसकी बात सही है गुरु है गुरु को पता ही नहीं चल रहा है और यहां पर गुरु किसी का शिष्य प्राप्त कर रहा है शिष्य उनके जानकारी के बाहर शिष्य प्राप्त कर रहा है तो ये बहुत बड़ा ड्रॉ बैक है जिस पर कोई भी व्यक्ति हमारी बातों को मानता है नहीं मानता वो एक अलग बात है मगर उसे इस बात को लेकर के हमारा जो दर्शन है हमारा जो सिद्धांत है उसको वो मानता है नहीं मानता मगर यदि कोई रामपाल के प्रति भी आस्थान वित है उसको भी इस बात पर प्र करना चाहिए कि मैं रामपाल से जुड़ रहा हूं तो रामपाल से दीक्षा ले रहा हूं या फिर किसी एलईडी से टीवी से किससे दीक्षा ले रहा हूं और यदि इस तरीके से एलईडी से कोई शब्द
00:08:43:21 प्राप्त कर लेने पर यदि कोई वो बन जाता है शिष्य बन जाता है तो फिर इस तरीके से तो यदि आप गीता प्रेस की छपी हुई किताबें पढ़ रहे हैं तो गीता प्रेस को छापने वाला या गीता उसका लेखक आपका गुरु बन गया फिर उसके प्रति गुरु का धर्म नि भाइए क नहीं मार ये वाली बात आ जाती है तो अब इस बारे में रामपाल दास जी का एक सनसनी खेज वीडियो हमें प्राप्त हो गया है जिसका आज हम खुलासा करने वाले हैं कि क्या शास्त्र तो नहीं मानते मगर क्या रामपाल दास इस बात को मानते हैं कि गुरु आमने सामने नहीं है उसको चार महीने बाद पता चलेगा एक महीने बाद पता चलेगा फिर भी जो है वहां नाम दन हो गया नाम दीक्षा हो गई किसने दी अरे भैया रामपाल दास जी से ली कहां से ली एलईडी से ली सीडी से तो इनको जरा वो वीडियो दिखाइए क्या कहना है इस बारे में रामपाल दास जी
00:09:46:10 का गुरुजी तो वो है जो प्रैक्टिकल करवावे और आमने सामने मंत्र देवे गुरुजी बैठे अमेरिका में वो
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→ Used in: A · Live Satlok Ashram भयभीत #तत्त्वदर्शीसंत #rampaljimaharaj at 57:11 ↗
00:09:55:04 तो बैठे अमेरिका में महात्मा जी और नाम देव थर्ड पर्सन और गुरु जी वो य बहुत बढ़िया बात भाई फेरे हु
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00:10:02:24 की सेत और पति कोई और ये कभी आज तक सुना है किसी ने अब जो और संत अभी आए भक्त आत्मा हमारे पास परिभाषा प्रभु की सुनक वो कहते हैं जी वो तो पहले तो ऐसा किया करते थे अब तो स्वयं ही क्रिया बताते हैं अब किसी के माध्यम से नहीं बताते उनको पता लग गया होगा कि ये तो सब ऐसे ऐसे कहानी हो रही है और फिर य तो मर्यादा भंग हो रही है फिर वो स्वयं कया गुरुजी तो वो है जो प्रैक्टिकल करवावे और आमने सामने मंत्र देवे बस इतना काफी है गुरु जी तो वह है जो प्रैक्टिकल करवावे और आमने सामने मंत्र भेज दे हां गॉड इज वन कबीर जी अभी अब आपको लिंक दे रहे हैं हमारी बात जरा पूरी हो जाए तब तक आप थोड़ा धैर रखिए गुरु जी तो वो है जो प्रैक्टिकल करवावे और आमने सामने मंत्र दे तो यहां से बात इनकी क्लियर हो गई है अब ये जो वीडियो जिस सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन से मिला है मैं उसके बारे में बता दूं पवन दास नाम का इनका एक शिष्य है जो इस बात को लेकर आवाज उठा रहा है उसका कहना है कि जब तक गुरुदेव गुरु जिंदा है स
00:11:18:01 शरीर यहां पर प्राप्त है तब तक जो है उनके नाम से नाम दन केंद्रों में एलईडी के द्वारा जो नाम दान दिया जा रहा है वो उचित नहीं है वो शास्त्र उचित नहीं है इस अंश में केवल इस अंश में वो व्यक्ति सही कह रहा है कि गुरु को पता ही नहीं है वो जेल में विवश है वो अपनी दिन गिन रहा है वहां पर दिन काट रहा है और यहां पर उसके नाम से जो है नामदान केंद्र चल रहे है जबकि गुरु ने किसी को अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है इसमें एक बात और आ जाती है कि जो उनकी पैरवी कर रहा है जो उनसे मिलता जुलता उसका आदेश आता है तो गुरु ने क्या कोई ऐसा वक्तव्य दिया है कि मुझसे यह फलाना व्यक्ति जो मिलता है वो मेरी ओर से वक्तव्य देगा अभी गु गुरु इनके जो गुरु हैं वह तो उनसे तो मिलने वाले कई लोग उनका वकील भी है वो जब कभी अगर मान लो पेशी पर आते होंगे वहां से जेल धाम से निकल कर के और न्यायालय धाम तक तो जब वह दोनों एक धाम से दूसरे धाम आते होंगे तो उनको कुछ पुलिस वाले साथ में पकड़ के लेकर आते होंगे कि भाग ना जाए दौड़ ना लगा ले तो क्या जो साथ में चल रहे पुलिस वाले हैं जो उनको उनके साथी दिख रहे हैं क्या वो लोग भी इनके गुरु के नाम से बात बोल कुछ नहीं बोल सकते तो उनका एक ठोस वक्तव्य होना चाहिए
00:12:33:02 कि मेरी ओर से कौन मेरा उत्तराधिकारी है जिसकी बात को मेरी तरफ से प्रमाण मान लिया जाए कि यह जो है गुरु ने ही बोली है और इसी व्यवस्था को गुरु परंपरा भी कहते हैं है ना गुरु अपना उत्तराधिकारी घोषित कर देते और वह फिर अपना उत्तराधिकारी घोषित करते वो अपना तो वो उन्होंने क्या बोला था यह हमें प्रामाणिक रूप से किसकी बात माननी पड़ेगी जिसको उन्होंने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है अब इस जो पवन दास है इनको गुरु द्रोही कहने वाला एक वीडियो वह जो धाम है जेल धाम वहां से और प्रसारित होता है कि भाई उन्होंने जो है इनको गुरु द्रोही कहा है और गुरु द्रोही कहते हुए यह भी कहा है कि वोह लोग गलत बोल रहे हैं जो यह कहते हैं कि एलईडी के माध्यम से दीक्षा नहीं होगी ये इस तरह का एक वीडियो प्राप्त है उनका जेल से मगर आप ध्यान से जब उस वीडियो को देखेंगे तो उस पर कई सारे प्रश्न उठ जाते हैं उस वीडियो पहली बात यह है कि जब यह वाला प्रसंग आता है कि वो लोग गलत है जो यह कह रहे हैं वहां पर आप देखिएगा कि उनकी लिप्सिंग जो है मैच नहीं करेगी उन शब्दों से जो बोल रहे हैं तो इससे षड्यंत्र का और पर्दा फास हो जाता है क्योंकि वो जो लिप्सिंग है
00:13:48:08 मुझे ऐसा लगता है आप लोग भी उस वीडियो को सर्च करेंगे मिल जाएगा जेल धाम से जहा पवन दास के लिए बोला उन्होंने कि भाई यह पवन दास गुरु द्रोही है यह काल करवा रहा है इस पर ध्यान मत दो यह सब बातें उन्होने और फिर बीच में एक जगह उन्होने य कहा कि भाई वो लोग गलत है जो यह बोलते एलईडी के माध्यम से दीक्षा नहीं हो सकती है मगर यहां पर बात य सामने आती कि जब व यह वाली बात आती तो वहां हल्का सा कट दिखाई देता है हल्का सा एक कट सा समझ में आएगा आपको एडिट किया हुआ वीडियो और जो उनकी लिप्सिंग है वह मैच नहीं करेगी इस लाइन के साथ कि वह लोग गलत है जो यह बोलते हैं कि एलईडी के माध्यम से दीक्षा नहीं इतनी जगह पर उनकी लिप्सिंग आपको मैच करती हुई नहीं दिखाई देगी मगर हमने जो वीडियो आपको अभी दिखाया और सुनाया है यह वीडियो पवन दास के द्वारा भी डाला गया है किसी चैनल पर कहीं पर और साथ ही साथ यह वीडियो जो है इसमें बिल्कुल स्पष्ट है क्लियर सामने से आपको दिखाई दे रहा है वहां पर तो इनके जो परमेश्वर है इनके अनुसार परमेश्वर है वो परेशान है दिख रहे हैं दया है यह है वो सब आपको पता चलेगा जेल धाम से जब वो फोन पर बात करते हुए दिखेंगे यहां पर वो चौड़े में बैठे हैं उन पर कोई जोर जबरदस्ती नहीं है और उनका बिल्कुल लिप्सिंग आपको
00:15:03:10 समझ में आएगी कि जो आवाज आपको सुनाई दे रही है वही इनके होठ भी उसी प्रकार से हरकत कर रहे हैं तो यह एक बहुत बड़ा मामला है कि इनकी ओर से यह जो नाम दाम नाम दान केंद्र चल रहे हैं वास्तविकता में रामपाल के द्वारा ही चल रहे हैं या फिर उनके नाम का उपयोग करते हुए अन्य लोग उस पर जो है अपना काम कर रहे हैं अब इसी मामले में एक बात और मैं याद दिला दूं कि ये जो तत्वदर्शी शब्द है इसकी बड़ी बात होती है इस बारे में इनका यह कहना होता है कि तत्वदर्शी चा 34 में भगवत गीता में कहा गया कि तू विभिन्न यज्ञों के ज्ञान को तत्वदर्शी से लेने जा वोह बात अलग है कि यज्ञ को इन्होंने कह दिया यज्ञों से मुक्ति प्राप्त नहीं होती यह दिखा दीजिए यज्ञों से मुक्ति प्राप्त नहीं होती दूसरा तीसरा पेज है तीसरा चौथा गरिमा गीता
00:16:08:12 की इन्होंने मेंशन कर दिया यज्ञ और उसमें यह भी मेंशन कर दिया कि सारे यज्ञ उसमें ज्ञान यज्ञ भी है और 433 में कहा जा रहा है कि भाई ज्ञान यज्ञ की बात हो रही है और फिर 434 में कहा है भगवान ने कि वो जो ज्ञान यज्ञ उसका ज्ञान लेने के लिए तू तत्वदर्शी के पास जा तो सबसे पहली बात तो ये आ जाती है कि वहां पर उन्होंने पूर्ण परमात्मा के नहीं यज्ञ जो ज्ञान यज्ञ है उसकी बात की है ज्ञान और अगर ज्ञान यज्ञ के अनु ज्ञान यज्ञ के द्वारा इन्होंने खुद स्वीकार किया है कि मुक्ति संभव नहीं है मोक्ष नहीं है तो जब मोक्ष नहीं है ज्ञान य के द्वारा तो ज्ञान य का ज्ञान देने वाला भी पूर्ण जो पूर्ण प्रामाणिक आचार्य या गुरु नहीं हो सकता
00:17:23:24 दूसरी बात इन्होंने तत्वदर्शी की बात कही है वहां पर जी आपको पेज नहीं मिल रहा है क्या वो यज्ञ वाला तीन नंबर पेज देखिए हेडलाइन में ही लिखा होगा वो बड़ा करिए थोड़ा
00:18:02:26 और नीचे चलिए और और नीचे चलिए अगला पेज ीरे नीचे चलिए और नीचे चलिए ये हम लोग पिछली वाली लाइव में दिखा भी चुके हैं और नीचे चलिए अन्य प्रमाण ना पेज नंबर अभी याद नहीं है पिछले पिछले वाले उसमें हमने दिखाया था कि वेद के द्वारा जो है आपको मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो
00:18:50:07 सकती अभी पेज नंबर ढूंढना पड़ जाएगा एक मिनट 4 नंबर निकालिए 39 नंबर 39 नंबर पेजय यज्ञों का लाभ केवल सांसारिक सुविधाएं मुक्ति नहीं है अच्छा दूसरी बात एकय बात और कहते हैं यज्ञों का लाभ सांसारिक सुविधाए मुक्ति नहीं है मगर दूसरी और यह भी कहते हैं कि जो व्यक्ति इसका मतलब यह हुआ कि तत्वदर्शी जो इनके अनुसार है वह सांसारिक नहीं बल्कि मोक्ष की व्यवस्था करता सांसारिक चीजों के लिए यज्ञ बहुत है मगर यह लोगों को लुभाने के लिए कि देखो हमारे यहां आओगे तो यह होगा य भंडारा मिलेगा या तुम्हारे जो बेटियों की शादी हो जाएगी बहुत सस्ते में निपट जाओगे या बिना पैसों के ही निपट जाओगे तो यह यह देखिए इन्होंने यहां पर यज्ञ हवन यज्ञ ध्यान यज्ञ प्रणा प्रणाम यज्ञ ञ कौन सा होता वो नहीं पता और ज्ञान यज्ञ यह यज्ञ पांचों माने है और पांचों यज्ञों
00:20:05:09 के ऊपर शीर्षक में इन्होंने कह दिया कि यज्ञों से मुक्त मुक्ति प्राप्त नहीं होगी मोक्ष प्राप्त नहीं होगा हा पेज नंबर मिल गया भाई पेज नंबर मिल गया वडी डा द चाहे तो अपना कमेंट डिलीट कर दीजिए पेज नंबर आपके सामने है ठीक है मत पढ़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में तो क्या हुआ कि इन्होंने पांचों यज्ञ माने यज्ञों से मुक्ति प्राप्त नहीं है वह बात और है यह खुद भी सांसारिक भोग ही दिलवा हैं य लोगों को अपने से जोड़ने के लिए हमारे शरण में आया तो उसका स्वास्थ्य ठीक हो गया हमारी शरण में आओगे तो दहेज मुक्त जो है विवाह होगा हमारी शरण में आओगे तो भंडारा मिलेगा य इनको यह नहीं पता बनारस में त्रिपति बालाजी में जाने कितने भंडारे लगातार चलते सि तीन दिन भंडारे नहीं होते लगा तार चलते हैं जाइए और खाइए नाश्ता भी पाइए दोपहर का भोजन भी पाइए और रात का भोजन भी पाइए बस वो बात और है हम आपकी तरह जो है यह जो हाथी बैठ के चिल्लाते नहीं है इन चीजों को है ना जाइए अन्नपूर्णा मंदिर है आइए दिन और रात वहा पर चल रहा है भंडारा अच्छा
00:21:21:22 तो यह लोग यह दावा करते कि यज्ञों से सांसारिक भोग मिल जाता है मगर जब धरातल पर बात होती तो यह लोग य दावा करते कि ये जो वैदिक रीति रिवाज है वैदिक चीजें है इनसे आपको सांसारिक भोग भी प्राप्त नहीं होगा सांसारिक चीजें भी आपको मिल नहीं पाएंगी तो एक तो यह बात हो गई दूसरी बात इन्होंने खुद मान लिया यज्ञों से मुक्ति नहीं है और वहां पर चार चौ में तत्वदर्शी कौन है जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान दे वो तत्वदर्शी है चार चौ में और इसका इसका मतलब क्या हुआ जब इन्होंने यह कह दिया यज्ञों से मुक्ति नहीं है और तत्वदर्शी कौन है जो ज्ञान यज का ज्ञान दे यानी कि तत्वदर्शी मुक्ति की बात नहीं बता सकता पहली बात अब दूसरी बात ये आती है कि आगे अगर मान भी ले तो और इन्होंने उसी उसी के अनुसार उल्टा वृक्ष तो जब ये ये कह चुके कि यज्ञ से मुक्ति नहीं है और यह कह चुके कि ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी है और तत्वदर्शी कौन है उल्टे वृक्ष की बात करने वाला तो उल्टे वृक्ष की बात करने वाले के रूप में संत रामपाल इनके तो इन्हीं की बात के अनुसार वह तत्वदर्शी जो है मोक्ष दायक सिद्ध नहीं होते क्यों क्योंकि यज्ञों से मुक्ति नहीं मिलती और वह तत्वदर्शी
00:22:36:27 है तत्वदर्शी कौन है जो यज्ञ की यज्ञ का ज्ञान दे तो पहली बात तो यह हो गई अब जो है अब क्या है कि एक प्रामाणिक बात कर लेते हैं अब हमने भले भले पूछा कि तत्वदर्शी कहां लिखा है कि वो रामपाल ही है भाई उल्टे वृक्ष की बात तो भगवत गीता य पीछे रखी है इनको लिखने वाले जो जय दयाल गोविंद का जी हैं उन्होंने रामपाल दास जी से बहुत साल पहले इसमें उल्टे वृक्ष की व्याख्या कर दी है तो इनको इनको तत्वदर्शी क्यों नहीं माना इसमें उन्होंने उल्टे वृक्ष की व्याख्या की है यह देखिए यह भगवत गीता है और य देख दिख रहा है उल्टा वक्ष हा पहली बात तो ये हो गई दूसरी बात हो गई कि इन्होंने कहा कि भैया हमारे तत्वदर्शी तत्वदर्शी तो इनके लिए कहीं लिखा नहीं है तत्वदर्शी मगर यह कह रहे हैं कि यज्ञों से मुक्ति नहीं मिलती है मगर तत्वदर्शी कौन है यह हम आपको दिखा देते हैं यह शास्त्र है हमारे पास श्रीमद् भागवत श्रीमद् भागवत स्कन वाला नाम निकल जाता है आदत हो गई है क्योंकि उनका कई बार पढ़ते शिव विष्णु
00:23:51:27 में कहां भेद किया है श्रीमद् भागवत है और उसमें स्कंद नंबर चार अध्याय 18 श्लोक नंबर तीन इसमें सीधे-सीधे तत्वदर्शी का उपयोग हुआ है शब्द बिल्कुल उसमें कोई फेर नहीं है तत्वदर्शी अ उंगली रख ल पहले ये देखिए यह मेरी जहां पर उंगली है यहां पर आप लोग देख सकते हैं तत्वदर्शी आया तत्वदर्शी भी ठीक है तो यह तत्वदर्शी कहा जा रहा है किसको कहा जा रहा है यहां
00:24:33:26 पर स्कंद चार श्रीमद् भागवत स्कंद चार और अध्याय 18 और श्लोक तीन तत्व दर्शी मुनियों ने इस लोक और परलोक में अग्नि होत्र यज्ञ आदि बहुत से उपाय निकाले हैं और काम में लिए हैं पहली बात क्या है तत्वदर्शी वही है जो यज्ञ की बात कराए ठीक है उन प्राचीन ऋषियों के बताए हुए उपायों का इस समय भी जो पुरुष श्रद्धा पूर्वक भली भाति आचरण करता है वह सुगमता से अभीष्ट फल को प्राप्त कर लेता है तत्वदर्शी मुनियों ने इस लोक और परलोक में मनुष्यों के कल्याण के लिए तो परलोक परमार्थ भी सिद्ध हो गया और ये लोक भी सिद्ध हो गया और अभीष्ट फल भी प्राप्त करने वाला हो गया और इसमें आगे बहुत सी चीजें बताई है मगर सबसे पहली बात है इसी में आगे ब्रह्मा जी को कहा जा रहा है तत्वदर्शी के रूप में ब्रह्मा जी ने जिन धान्य अच्छा ब्रह्मा जी को ये लोग क्या कहते हैं अज्ञानी शास्त्र ब्रह्मा जी को क्या कह रहे हैं पूर्व काल में ब्रह्मा जी ने जिन धान्य आदि को उत्पन्न किया था मैंने देखा कि यम नियम आदि व्रतों का पालन ना करने वाले दुराचारी
00:25:49:01 लोग ही लोग ही उन्हें खाए जा रहे थे तो यहां पर क्या हुआ तत्वदर्शी ब्रह्मा जी तत्वदर्शी और ब्रह्मा जी के द्वारा बताए गए जो ये व्रत उनका पालन ना करने वाले कौन लोग हैं दुराचारी उन्हें खाए जा रहे हैं तो क्या हुआ इसका मतलब कि जो यह तत्वदर्शी सिद्ध कर रहे हैं कि हमारा हमारे द्वारा माना जाने वाला तत्वदर्शी ही तत्वदर्शी है वह तत्वदर्शी नहीं है पहली बात शास्त्रों के हिसाब से और दूसरी बात अगर इनकी ही बात को मान ले तो वह मोक्ष दायक नहीं है क्यों क्योंकि यज्ञों से मुक्ति नहीं मिलती और 434 में किसी और के पास नहीं बल्कि यज्ञ का ज्ञान देने वाले के पास जाने वाले का जाने के लिए कहा जा रहा है तो ये खुलासा है सबसे पहली बात कि नाम दान केंद्र का पता लगाया जाए कि भाई वो रामपाल दास जी के अज्ञान में ही चलाए जा रहे हैं वो जो विधि है उन्हीं के अनुसार है या कुछ और है दूसरी बात ये है कि अ तत्वदर्शी शास्त्रों के हिसाब से हमने आपको शब्द के साथ दिखा दिया वो है जो यज्ञ यज्ञ की बात बताए जिस और उन यज्ञों से लोक परलोक दोनों का व्यक्ति का लाभ सिद्ध हो जाए और
00:27:04:26 उसमें व्रत भी आता है व्रत का खंडन नहीं बल्कि व्रत बताने वाला तत्वदर्शी और आगे बहुत बहुत सारी इसमें बातें हैं जो आपको पता चलेंगी ठीक है तो यह तत्वदर्शी शब्द हमने दिखा दिया स्पष्ट अब आप लिंक दे दीजिए यदि कोई आना चाहता है तो आ सकता है हम
00:27:59:15 बिल्लू सांडा जी अपना मुखड़ा दिखाएं ऐसे बात नहीं होती है मुखड़ा दिखाए हमने पिछली वाली लाइव में यह बताया था कि क्लास जवाइन हो जाए आपको थोड़ा धैर रखना है आपसे संपर्क संपर्क किया जाएगा और तब तक आप लोग अपने प्रश्न पूछ सकते हैं जब तक कोई आ नहीं रहा है तो तो हम लोग उसकी बात कर लेंगे है
00:28:46:25 ना इस धरती पर कोई तत्वदर्शी नहीं आज की संख्या में आज की डेट में संत रामपाल जी संत रामपाल जी तो आपके अनुसार यज्ञ का जन देने वाले हैं ना और यज्ञ का ज्ञान तो मोक्ष दायक है नहीं यज्ञ का ज्ञान मोक्ष दायक है क्या पहले तो यह बताओ मोहम्मद रकीब रकीब जी अपना चेहरा
00:29:21:25 दिखाए हां महेंद्र सिंह जी जय श्री राम जयी जय श्री राम जी बताए बस भाई साहब बस देख रहा था मैं तो अच्छा तो भैया कोई हो जो पढ़ना चाहता हो चक्कर में और जिसको लगता हो कि वह है टक्कर में तो व [हंसी] आए कोई आए कोई नहीं आता तत्व ज्ञान से प्रकाशित कर दे कोई नहीं आ रहा एक बार तब तक इनको वो वीडियो और दिखा दीजिए कि जो जो लोग नाम दान लेकर बैठे हैं एलईडी पे एलईडी से वो उनको क्लियर हो जाए अमित चौहान अमित चौहान चेहरा दिखाएं अभी मैं कहूंगा कि अभी केवल उसी के लिए आए क्या कहते हैं ये अ अगर कोई अपनी बात रखनी है अन्यथा आप प्रश्न पूछ सकते हैं
00:30:33:20 व है करवाने सामने मत्र बस इसी को थोड़ा दो चार बार दोहरा दीजिए जो लोग अपने आप को रामपाल दास का शिष्य समझ रहे हैं प्रैक्टिकल करवावे और आमने सामने मंत्र दे गुरुजी बैठे अमेरिका में गुरुजी तो व है जो प्रैक्टिकल करवावे और आने सामने मंत्र दे गुरुजी बैठे अमेरिका में ठीक है ना तो ये जो जो लोग ऐसा सोचते हैं कि हम जो है रामपाल दास के चेले हैं चेले भी नहीं हो आपका तो कौन मालिक है वह भी समझ में नहीं आता है क्योंकि आपको लगता है कि आप जो है उनके चेले हो मगर रामपाल दास का भी हाथ नहीं है आपके ऊपर आपको तो एक तरीके से देखा जाए तो प्राइवेट कंपनी यूज कर रही है अपने अपनी चीजों के लिए आपका दोहन कर रही है अगर आपकी निष्ठा रामपाल दास जी के लिए भी है तो आपको चिंता में पड़ जाना चाहिए पता करिए अपने रामपाल दास जी से मिलिए जाकर के नाम लिखवाए जेल में जाकर के पर्ची लिखवाए अपने नाम की हमें मिलना है इनसे कम मिल सकते हैं अगर वाकई में अपने आप को तुम रामपाल दास का ही चेला मानते हो शिष्य
00:31:48:28 मानते हो तो जाकर मिलो अपने गुरु से पूछो कि क्या हमने एलईडी से जो हम दीक्षा ले रहे हैं आपकी जो दीक्षा ली है वो मान्य है कि नहीं नहीं मानने तो कम से कम वहीं की वहीं दीक्षा ले लो मेरे भाई बहुत बड़ी गलतफहमी में चल रहे हो जाके इसको पता करो मिलो किसी के ऊपर विश्वास मत करो कुछ पता है नहीं कैसे पहुंचे क्यों बैठे हैं वहां वह क्या कर रहे हैं क्या नहीं कर रहे हैं वह बैठे हैं संडास में और उनके नाम से यहां पर दीक्षा चल रही है ऐसे होती है दीक्षा हो सकता है उनके बोतल चढ़ रही हो गुल कोस की चक्कर आ गया हो कुछ परेशानी में हो यहां पर दीक्षा हो गई दीक्षा हो गई ऐसे होती है दीक्षा कोई मतलब नहीं है केवल बस अंधे में फायर करना है
00:32:39:25 बस हां भाई अमित दास बताइए अभी आपने जो बोला था कि यज्ञों से मोक्ष नहीं होता चार 34 में लिखा हुआ है तो 4 34 में ऐसा कुछ नहीं लिखा हुआ है मुझको ये बताइए कि आप मानते किसे हैं कबीर को भगवान मानते हैं कि नहीं मानते क्यों आए य पर कबीर को भगवान मानते श्लोक आ श्लोक आठ के न में लिखा हुआ है कबीर भगवान ने कबीर गीता अध्याय आ के
00:33:17:02 शलोक कबीर अक्षर पुरुष है परम अक्षर पुरुष है या र पुरुष है वो तो पूर्ण परमात्मा है नहीं व पुरुष तो नहीं है ना पूर्ण परमात्मा है वह सबके पिता है मैं पूछ रहा हूं व अक्षर पुरुष है या परम परम अक्षर पुरुष है परम अक्षर पुरुष है परम अक्षर पुरुष है तो जरा इनको संपूर्ण सृष्टि रचना खोलिए जरा शायद 548 पेज नंबर है आपके कंप्यूटर स्क्रीन के अनुसार
00:33:59:01 नहीं अभी आपने एक शब्द जो बोला था यज्ञों के विषय में 4 34 में यज्ञ की बात आप य पहले हम पता करले आप कबीर को भगवान मानते हैं कि नहीं मानते हैं वो हम देख रहे हैं उसके बाद आपका प्रश्न पहली बात आपने झूठ बोली है जो कवि आपने 44 में यज्ञ की बात कर तो आपको हटाया जाएगा कबीर परम अक्षर पुरुष नहीं है अभी अब आपको दिखा रहे हैं संपूर्ण सृष्टि रचना
00:34:46:14 खोलिए 548 पेज है संपूर्ण सृष्टि रचना अब यह तो मुझे भी नहीं पता है संपूर्ण सृष्टि रचना में है मैं मैं मैं बता रहा हूं आपको
00:35:30:28 संपूर्ण सृष्टि रचना शायद यह ज्ञान गंगा का ही है चैप्टर ज्ञान गंगा में देखिए तब तक आप लोग प्रश्न कर सकते हैं अभी नहीं मिल रहा है ठीक है उसको दिखाएंगे हम लोग ढूंढना
00:36:43:28 पड़ेगा योगेश जी आगरा से राकेश दास हा और टी आर पहाड़ी जी जी बताइए योगेश जी जी मैं रामपाल वालो से बात करने आया था लेकिन लगता कोई आया नहीं रामपाल वाले आए हैं राकेश दास जी आप रामपाल से हैं अभी आए हा जी जी
00:37:18:21 बताइए आप ही बताओ हम तो सुन रहे हैं बैठ के बताइए तत्वदर्शी है कि नहीं आपके व रामपाल उनका ज्ञान पढ़िए समझ में आ जाएगा तत्वदर्शी है या नहीं यही बताने आए हैं क्या यही बताने आए हैं हां जी क्या मैं आपको कह रहा हूं जाके ज जॉर्ज बुस का ज्ञान पढ़ो समझ में आ जाएगा व तत्वदर्शी है कि नहीं हो गया नहीं आज आज तक कोई पैदा नहीं हुआ तत् होते तो साहित्य का पूरा कोई पैदा नहीं हुआ जो ज जॉर्ज बुझ से जाकर के उसका तत्व वो जो वहां का ज्ञान है और ये सब कर ले अब बताओ मेरी बात मान लोगे नहीं मानेंगे जभी तो बे सिर पैर की बातें मत करिए कोई तात्विक बात हो तो वो करिए कर रहे हो ना आआ भाई बकरे हो कोई पॉइंट बताओ ना अपनी बात करने के
00:38:20:27 लिए हर हर महादेव शिवांश भाई ये शास्त्र में लिखा है कहीं पे बताइए जो आप बोल रहे हो आप बताओ ना त दर्शी का मतलब क्या होता में लिखी मनम बात हैय बताओ नहीं आप तो सारी मनम की बात कर रहे हो शास्त्रों की बात कर रहे हो कुछ बताना नहीं है इनको इनको कुछ नहीं बताना है हर हर महादेव भाई हर हर महादेव जय श्री राम जय श्री राम बहुत बढ़िया
00:38:58:04 कैसे हो बस कृपा है राम की आपने अभी जो अमित दास जी आए थे ना वह वीडियो का कंटेंट लेने आए थे मुझे पता है यह संपूर्ण स रचना है मुक्ति बोध मुक्ति बोध में है यह और कंप्यूटर स्क्रीन के अनुसार पेज नंबर है 556 नहीं ये वो वाला नहीं
00:39:50:22 है हां यही यही है 548 पेज नंबर निकालिए 548 पीडीएफ के अनुसार और 556 556 आपकी कंप्यूटर स्क्रीन के अनुसार निकालिए मुक्ति बोध देखो इनका ज्ञान कैसे पता
00:40:48:24 चलेगा हां इसमें आपकी स्क्रीन के अनुसार 548 पेज नंबर है 556 आपकी आपकी जो ऊपर काउंटिंग आती है उसके अनुसार हां 556 राकेश दास जी आपके पास कुछ प्रमाण है नहीं शास्त्रों पर आपको बात नहीं करनी है केवल मुंह चलाना है बकवास करने के लिए यहां पर हम पास समय नहीं है आप कहीं और जाकर के अपना ट चैनल खोलिए वहां जाकर के बकवास
00:41:44:02 करिए देखिए यह लोग अपना पहले से नरेट यह देखिए इसको थोड़ा बड़ा करिए और ऊपर से चौथी लाइन पर आइए पांचवी लाइन पर ऊपर से पांचवी लाइन पर आइए बड़ा करिए और बड़ा करिए हां देखिए यहां पर यही प्रमाण गीता में यहां से जरा अंडरलाइन करिए गीता अध्याय 3 15 में है कि अक्षर पुरुष अर्थात अविनाशी प्रभु से ब्रह्म उत्पन्न हुआ है ठीक है यानी कि अक्षर पुरुष को इन्होंने मान लिया अक्षर पुरुष और परम अक्षर पुरुष एक है अगर एक नहीं है तो इनको मानना पड़ेगा कि कबीर जो है परम अक्षर पुरुष नहीं है और कबीर जो है वह अविनाशी नहीं है यहां देखिए अक्षर पुरुष को इन्होंने कबीर को इन्होंने अक्षर पुरुष बोला है न 15 में है कि अक्षर पुरुष अर्थात अविनाशी प्रभु से ब्रह्म उत्पन्न हुआ है ऊपर देखिए ऊपर भी लिखा है जस्ट वाली लाइन कबीर देव कबीर
00:42:59:02 प्रभु से विराट अर्थात ब्रह्म काल की उत्पत्ति हुई है तो कबीर और अक्षर पुरुष दोनों एक हो गए तो कोई अलग तीसरा परम अक्षर पुरुष नहीं है कबीर ही या तो अक्षर पुरुष है यानी कबीर भगवान नहीं है और या फिर ये मान लो तुम्हारी किताब में लिखा हुआ है या तो ये मान लो कि या तो दोनों अलग नहीं है अक्षर और परम अक्षर या तो ये मान लो या फिर ये मान लो कि कबीर देव जो है कबीर जो है व भगवान नहीं है व अक्षर पुरुष है क्योंकि यहां उसके लिए आपने लिख दिया कि वह उससे ही ब्रह्म उत्पन्न हुआ है ठीक
00:43:39:15 है हा इस बुक को नकार देंगे हा य मुक्ति बोध है तुम्हारे जो जेल धाम निवासी जी है वस्तुत वर्तमान में उनके उनके द्वारा रचित पुस्तकों में से एक ऊपर दिखा दीजिए लेखक तथा सरलार्थ कता संत रामपाल दास ठीक है यह अमित दास पहले से कुछ एक दो लाइन बोलने आता है स्क्रीन पर और फिर जाएगा अपने चैनल पर वह वीडियो बनाएगा और फिर वू कमाए इसको मतलब नहीं है तत्वदर्शी से इसको जेल नहीं
00:44:25:07 है राकेश दास जी कुछ शास्त्रोक्त बातें करनी है कि केवल मुंह चलाना है अरे मुंह तो आप चला रहे हो तुम्हे सबता ही नहीं है देखा आप जाइए राकेश दास जी अपना चैनल खोलिए वहां पर खूब गालियां दीजिए हमें जाइए ये इसलिए आए हैं इनके पास वो शास्त्रोक्त बात नहीं हुई ये पूछ लूंगा इसका इसका प्रमाण कहां है के मुंह मैं चला रहा हूं और यह गलत है तो फिर दिक्कत आएगी
00:45:06:03 शास्त्र शास्त्र समत शास्त्र सम्मत बात कर कर के तुमने अपना झंडा खड़ा किया है आज जब शास्त्र खोल के तुम्हारे ही दिखाए जा रहे है तो तुमको दिक्कत हो रही है जब हमने कहा कि अक्षर और परम अक्षर में कोई अंतर नहीं है वही परम अक्षर पुषी अक्षर बनता है जीव जगत और जगदीश्वर तीनों रूपों में एक ही परम तत्व स्वयं को प्रकट करता है तब समझ में नहीं आया अब देखिए आप खुद ही फस गए कबीर से ब्रह्म उत्पन्न हो रहा है और फिर नीचे अक्षर पुरुष से ब्रह्म उत्पन्न हो रहा है तो हो गया कभी रक्षण परम अक्षर नहीं रहा अगर अलग है
00:45:45:16 तो राकेश दास जी आपको शास्त्रोक्त बात करनी है तो आप यहां पर बात करने के लिए रुकिए अन्यथा आप अपना समय नष्ट कर रहे हैं अगर आपको शास्त्र सम्मत बातें करनी है तो आप रुकिए यहां पर करनी है तो हा हा में हा मिलाइए ऐसे करनी है इनको मत लो ना इनको हटा दो किक फ्रॉम द स्टूडियो व लिख के आता है व ऑप्शन हटा दो इनको जाए जय श्री राम जय श्री राम जाने इनको जवाब देना चाहिए इनको ऐसे क्यों जाने दे रहे हो अरे भाई बात ये है कि हम लोग अपनी मर्यादा को भंग ना करे ना यहां पर वो वैसा माल ब जैसे को तैसा ये कह रहे थे आप कर प्रेम से बोलेंगे ये वो जगह नहीं है जैसे को तसा जैसे कोसा चला रहे हैं इतने मूर्ख होने के बाद भी महामूर्ख से महामूर्ख का ठप्पा इन पर लग चुका है फिर भी अपनी बात मनवा रहे हैं एक होता है ये है महामूर्ख इनको तो महामूर्ख के कंपटीशन में जाना चाहिए अरे अरे देखो ये व्यक्ति क्या कह रहा है ट्रथ फुल कबीर य फला है भाई कबीर अक्षर पुरुष है परम अक्षर पुरुष है ये बताओ
00:47:00:20 खुद ही बातो फस गए इनके ग्रंथों में इनकी का रखी है जय श्री राम जी जय श्री राम जय श्री राम महेंद्र जी वापस आ गए इनको जुड़ने दीजिए जो एक राकेश जी को जुड़ने दो अभी अरे रा अरे वो ठीक है वो यहां पर वो सब नहीं करना है वो क्या है जैसे बे सिर पैर की बातें होती है उससे वो चलाएंगे हमें उनको जवाब देना पड़ेगा य कोई बात थोड़ी ना कोई शास्त्र की बात हो रही हो शास्त्र चर्चा चल रही हो कुछ बात कहनी हो तब तो क रोका भी जाए जी बोलिए शास्त्र नको मानना ही नहीं है लाते में प्रमाण है अब हमने इनकी
00:47:48:26 किताब हा ये लोग वेद विरोधी हैय लोग पूरी पूरी इनकी पूरी किताब में वेदों की निंदा लिखी हुई है वेदों से नहीं हा वेदों में ब्रह्म नहीं वेदों में मोक्ष नहीं को कहने वाला वेदों को कहने वाला ज्ञानी नहीं व्याकरण के दर्शन नहीं कि कभी गुरु परंपरा से पढ़े नहीं शब्दों को कैसे रखना है कैसे बोलना है जो मन में आया वो बोल दिया जो मन में आया वो लिख दिया
00:48:27:04 अभी तो इनकी एक दो किताबे खोली है सरसरी निगाहो से अभी देखते जाइए क्या क्या खुलेगा किताब भाईजी स्क्रीन पर दिखाओ इनका सारा पाखंड खोलना चाहिए हम लोगों को अभी ब्राह्मण है अच्छे व्याकरण की दृष्टि से तो व भी कह रहे थे व भी कगा जब तक कोई आ नहीं रहा है तब तक हम लोग और देख लेते हैं कि इनका जो परमात्मा है उसको जो है यह कहते हैं ना कि वो काल वो खाएगा वो खाएगा तो इनके जो परमात्मा है वो क्या कर रहे हैं 48 नंबर पेज निकालिए स्क्रीन के हिसाब से मुक्ति बोध का 48
00:49:23:19 नंबर सप्ता कंप्यूटर स्क्रीन के हिसाब से 48 नंबर यहां पर यह वाली बात है काल ने काल की प्रार्थना कबीर ने मान ली यही है क्या 48 जब कबीर जीवात्मा जो फसी हुई थी
00:49:58:08 उन जीवात्मा हों को लेने आए थे बचाने के लिए आए थे तो काल ने उनके पैर पकड़ लिए और उन्होंने काल की बात मान ली हम तो इसमें एक और बात भी तो है आजकल य रामपाल वाले कहते हैं कचरा चता है का लेकिन रामपाल कहते है कि उनकी शरीर में से निकलने वाली गंध को खाते है क्या करते हैं रामपार कहते है कि सूक्ष्म शरीर से गंध जो निकलती है उसको काल खाते है और आजकल ये रामपार वाले कह रहे कि उसको कच्चा खा जाते है मैं समझ नहीं पाया क्या कह रहे हैं मैं बोल रहा हूं कि रामपाल वाले कहते कि काल लोगों कचा खाते है कच्चा खाता है हां जबक रामपाल कहते है कि उनके शरीर से निकलने वाली गंद को खाते है गंद को खाता है हा
00:51:13:22 बिना सर पैर की बातें है इस तरीके से इनका एलिगेंस रामपाल जी का कि जब हम हमारी जब वो काल हम हमारी आत्मा खींच के ले जाता है एक तप्त शिला है व तपत शिला में हम सेकता है जैसे पराठा सेका जाता है ना वसे सेकता है वहा से कु पदार्थ निकलता है वो खाता है व काल है त हमको सेकता है उधर काल कैसा मूर्ख है कैसा मूर्ख व्यक्ति है नहीं चलो
00:51:53:19 रा इनकी दशा उससे भी बेकार है उपनिषद का श्लोक है तो एक्चुअली क्या पंडित जी पंडित जी एक्चुअली है क्या व अपने डिबेट में या अपने सत्संग में व दूसरों को आपका स्न है मैं तो अभी मलेशिया में उत्तराखंड से हूं मैं देखो यह अपने डिबेट में उत्तराखंड में कौन जगह से है आप उत्तराखंड में खटीमा से है
00:52:26:27 मैं पहन पन हम लोग कर लेंगे स्ट्रीम के बाद कर लेंगे जा जन बातें करें एक दूसरे जान पहचान हो जाएगी क्या है ना वो अपने सत्संग में या अपने डिबेट में भर भर के हमारे ऋषि मुनियों को या किसी को गाली देते रहते हैं किसी को अज्ञानी मूर्ख या कुछ भी कह देते हैं वो पर हम अपनी जो ट है मैं कहता बताओ किताब लेकर जाते हैं कभी कभी तो को लेवल तक बात करनी है प्रश्न जरूर करना मगर किसी को मूर्ख इस तरह की संज्ञा हम लोग ना देने से बचे जहां तक हो सके संभव हो और एक क्वालिटी कंटेंट लोगों को प्रदान करें जिस पर कोई अेक ना लगा क्या करें उनके वो भड़ने आ जाएंगे पर बातों को समझेंगे नहीं पहले व सुनिए फ प्रथम भगत संतन कर संगा तो श्रवण कीर्तनम विष्णु को ना सुनना है ना कुछ है पहले वो सुनो तो सही फिर अपनी बात रखें वो ना सुनते हैं ना कुछ करते हैं फिर अपनी बात जो जितना उन्होंने रटा है कि वेद का ये सक्त मंडल गीता का ये
00:53:41:27 उससे मैंने आज तक उनको कभी बाहर जाते हुए नहीं देखा नहीं वो उनकी सोच है ना अब हमने तो उनकी उनके हिसाब से अपनी सोच नहीं रखनी ना तो हमने हमारी जो स्ट्रीम है थोड़ी साफ सुथरी रहे तो एक अच्छा कट बनेगा भाईजी शिवा बड़ा है उनको भगवान का मल बध शक्ति बहुत है हम लोगों के बस का नहीं है पहले ठीक है पहले ठीक है बाद में हम तो बड़ा बीपी हाई हो जाता है सुन के भा हम क जी जो जीवात्मा फसी हुई है वो क्यों फसी हुई है क्योंकि कबीर ने काल की बात मान ली काल ने चरण पकड़ के प्रार्थना की तो कबीर ने कबीर जी का दिल पिकल गया और उन्होंने उस समय जब वो ले जाने के लिए आए थे जीवा आत्माओं को देखिए जिस समय परमेश्वर कबीर जी प्रथम बार हमारी शुद्ध लेने के लिए काल लोक में आए थे तो काल ने चरण पकड़ कर कुछ शर्त रखी थी जो परमेश्वर कबीर जी ने मान ली क्यों मानी भाई मानली क्यों मानी वो तो अपने जीवों से प्यार करते हैं ना काल ने कहा
00:54:56:28 था कि आप कह रहे हो कि मैं जीवों को तेरे जाल से निकाल कर वापस सतलोक ले जाऊंगा मेरे को सत्पुरुष ने श्राप दे रखा है कि एक लाख मानव शरीर धारी जीव खाने का तथा सवा लाख उत्पन्न करने का यदि सब जीव वापस चले गए तो मेरी भूख कैसे समाप्त होगी इसलिए आप जोर जबरदस्ती करके जीव ना ले जाना यह देख लो जीवों को वापस ले जा सकते थे मगर काल के पैर पकड़ने पर छोड़
00:55:31:21 दिया ठीक है इसका मतलब क्या हुआ पुत्र मुह में फस गए तो कौन जिम्मेदार है काल के लोक में फसने का और देखिए कबीर भी मर जाता है कबीर मरता भी है तो कबीर ईश्वर कैसे हो रहा है 72 नंबर निकालिए भक्तो भगवान का यह लोग तो बोलते हैं इसमें ज्ञानी ज्ञान भरा है पर लगता तो किसी अंगल से नहीं कि ज्ञान
00:56:10:00 है भक्त और भगवान का निकालिए अपने शुरू में एक बात बोली थी पहले डिबेट में कि काल को उत्पन्न करने वाले भी कबीर जी है तो बुराई तो कबीर जी ने उत्पन्न करी इसका जवाब नहीं मिला अभी तक नहीं मिलेगा आपने राइट क्वेश्चन किया था ये उस दिन हां बिल्कुल जब यह ये कहते कि वो ईश्वर यह कैसे कर सकता है वोह कैसे कर सकता है तो मैंने पूछा था अगर ऐसा है तो व काल को उत्पन्न करने वाला भी तो वही है बिना उसकी मर्जी के उत्पन्न हो गया क्या मुसीबत तो कबीर दास जी ने खड़ी करी
00:56:50:12 हा ना काल बनाते ना हम चे आते ये लोग बड़ा दम भरते हैं इन्हीं की किताब में लिखा है कबीर मरता भी है उनका व हाल है काजल काजल वाला आप एक डायलॉग मारते हो ना काजल काजल वाला परमाण से मतलब नहीं है इनको यह भक्त और भगवान का 72 नंबर पेज है कबीर अपने मरने की बात कर रहा
00:57:36:02 है पर आपकी बातों का असर हो रहा है लोगों पर जो विवेकशील है वह मंथन कर रहे हैं भाई मैं तो आज यह तक कह रहा हूं कि वह बाद में देख लेंगे रामपाल दास ने सही कहा है कि नहीं कहा है मगर जो उसके शिष्य स्वयं को समझ रहे हैं वो जाकर अपने गुरु से पूछो तो कि तुमने हमें दीक्षा दी है मेरा नाम बताओ मैंने चलो नाम मत बताओ मैंने तुमसे दीक्षा लिए तुम्हे पता चल गया कि नहीं पता चल गया इतना तो पूछ लो जाके और तुम्हारे नाम से ये नाम नाम दान केंद्र चल रहे हैं सब ऑथेंटिक है कि नहीं अरे वेदों में ही लिखा है 11 ये अथर वेद का अथर वेद का 11 अध्याय है पांचवा सूक्त हैद हा यही है 11 11 पा ब्रह्मचर्य
00:58:28:22 गुरु दीक्षा दे रहे हैं यहां पर गुरु दीक्षा दे रहे हैं य सात मंत्र से शुरू होता है गुरु अपने शिष्य से इस प्रकार कहे मतलब की गुरु शिष्य सामने बैठे हैं इस प्रकार क आगे पूरी दीक्षा दे पूरे मंत्र है इनके बहुत सारे हा व वही वाला है मैंने उस सवाल य उठाया कि वेद जो है परम ब्रह्म की बात नहीं करते हैं ब्रह्म की बात करते हैं तो यदि कोई परम के पास जाने की शिक्षा दे रहा है तो वेद विरुद्ध है और तुम कहते हो कि वेद विरुद्ध शिक्षा जो है व मान नहीं है जो वेद से मैच नहीं खाएगी वह मान्य नहीं है य वे यदि वेद से मैच नहीं खा रहा है आपका परम ब्रह्म हा यही है क्या 72 नंबर
00:59:21:13 है इसी में है कहीं पर यह देखिए मैं मरूंगा मैं मघर में मरूंगा यहां पर वह अपने मरने को भी स्वीकार कर रहे हैं कि ऐसी स्थिति भी आ सकती है कबीर साहब ने कहा कि मैं मगहर में मरूंगा यह देख लीजिए भैया मैं मगर में मरूंगा तो कबीर मघर में अपने मरने की बात को स्वीकार कर रहे हैं इसका निराकरण प्रस्तुत करें ठीक
01:00:02:18 है ये काल ने लिख दिया है यह काल ने लिखवा दिया है यह काल ने लिखवा दिया एक भाई साहब कह रहे पूरा पढ़ तो पहली बात तो य आपने पहले जो कहा था उसका उत्तर मिला कि नहीं मिला दूसरी बात यह है कि जब पूरा पढ़ने की बात है तो तुमने पूरे पढ़े थे क्या शास्त्र जहा मना है वहा से उठा के ब्रह्मा विष्णु म वो सिद्ध कर दिया तीसरी बात ये है कि यहां पर हमने उसम आगे ऐसा कुछ नहीं लिखा जिसको पढ़ने की आवश्यकता हो आवश्यकता होगी तो पढ़ा जाएगा और आपको कोई दिक्कत है सत्य के पक्षधर है माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो आप ऊपर आ जाए बात करिए आ कर के आमना सामना करिए इतनी चिंता है तो आ और दिखाते पूरा पढ़ अपनी बात आएगी तो पूरा पढ़ और दूसरों की बात आएगी तो उसम जहां मन चाहो जहां से ये उठा लिया मन चाहो वहां से वो उठा बाकी का छोड़ दो हा पूरा पढ अब रामायण का युद्ध कबीर ने करवाया जीवात्मा को ले जा सकता था मगर नहीं ले गया तो कौन फसाया जो लोग ये लोग कहते उन्होंने महाभारत करवा
01:01:18:04 दी कौन फसा रहा है अच्छा इन्होने शास्त्र हमारे वेदों में समथिंग साज से ऊपर मंत्र होंगे उसमें से 20 से 25 मंत्र लोगों ने उठाए हैं बाकी का क्या करें छोड़ दे बाकी का पढ़ नहीं पाए होंगे उनको संस्कृत आती नहीं है और जहां से मिल लिया होगा उसम व पेज पट गया होगाया कुछ हो गया होगा तो बाकी का पढ़ नहीं पाए
01:01:56:15 बाकी क्या वो तो एक भी नहीं पढ़ पाए ने जरा हि देख करके व देख लिया उनको एक शलोक बताए पूछिए हमने अभी तक यह जाना है कि यह लोग वेदों की बात अवश्य करते हैं मगर यह वेद निंदक है क्योंकि ये कहते हैं वेदों के द्वारा मो नहीं मिलता है वेदों के द्वारा सिर्फ आपको एक ही बात मिलेगी वेद गीता के द्वारा सिर्फ आपको एक ही बात इनकी स्ट्री क्या उसको समझिए उसी सर्वशक्तिमान पूर्ण ब्रह्म कबीर देव ने से ही विराट अर्थात ब्रह्म काल की उत्पत्ति हुई है हां हा बिल्कुल वो तो हुई है जो काल इनको खा रहा है उसकी उत्पत्ति तुमने ही करी है और तो और ले जा सकते थे पर ले नहीं गए काल के लिए तो क्या गारंटी है कि दोबारा काल कहेगा पैर पकड़ के भगवान मुझे इनको ले जाने दो दोबारा फसा देने दो क्या गारंटी है कि नहीं मानेंगे उसकी बात करेक्ट
01:02:57:16 अच्छा काल का कांसेप्ट आया कहां से समझ में नहीं आया मेरे अरे कहीं बनाया है अपना बैठ करके मैं भी बचपन में अपने मित्रों को कहानियां सुनाया करता था बढ़िया मेरे घर के पीछे जो है एक जंगल है और उसमें हर कम पर एक भेड़िया एक भालू है एक शैतान है यह सब मैं बनाता सुनाता था तो कोई बहुत बड़ी बात नहीं है सब इस तरह से लिखने के लिए अगर सिंपली भी अगर अगर शास्त्र के आधार भी देखा जाए तो काल का अर्थ होता है समय समय सभी को नष्ट करता है जी पृथ्वी लोक में जितनी भी चीजें है सभी चीज नाशवान तो है कौन है हमने इनको शास्त्र में दिखा दिया यज्ञों को मानने वाला यज्ञ कराने वाला व्रत व्रत की बात करने वाला तत्वदर्शी है अभी भी इनकी आंखें नहीं ऐसे खुलेगी नहीं भाई आप उसको तत्वदर्शी मान रहे हो जो यज्ञों की बात नहीं कर रहा है वो तो कह रहा है ञ से मुक्ति नहीं है य यज्ञों से परलोक सिद्ध हो रहा
01:04:06:02 है मैं पूर्ण परमेश्वर हूं मेरे द्वारा बनाए नियम के आधार से रावण में रामचंद्र की उत्पत्ति हुई रामायण का ना रामायण का युद्ध कैसे हुआ पूर्व निर्धारित संस्कार से किसने निर्धारण किया उनका किसने निर्धारण किया मैं पूर्ण परमेश्वर हूं पूर्ण और आधा परमेश्वर परमेश्वर है अर्धा पूर्ण कहां से आ गया वो वही वाली बात कि भाई वो इसलिए है इनका मामला कि परम लगा के अपनी दुकान का नया सेटर खोल दो अभी इनमें एक और कोई लग जाएगा कोई और एडजेक्टिव लगाते जाओ नया अपना खोलते जाओ जैसे शास्त्रों ने दे दिया ब्रह्म फाइनल स्टेट ब्रह्म अब क्या करें पूर्ण ब्रम परम ब्रम यह सब लगा दो अभी कोई नया आ जाएगा ा दर्शी वो कहेगा परम परम ब्रह्म अरे तुम्हारा एक ही बार परम ब्रह्म है हमारा परम परम ब्रह्म है दो परम है हमारे पास रा वो कहेगा परम परम पूर्ण ब्रह्म तुम्हारा ब्रह्म है परम तो है पर वो ब्रह्म है हमारा परम परम पूर्ण ब्रह्म
01:05:21:26 फिर और एक और आ जाएगा परम परम परम अच्छा एक चीज समझ में नहीं आई अभिनाशी और अमर का अर्थ होता है कि कभी ना मरने वाला और इनकी इनकी पढ़ाई भी देखोगे इस तरीके की ना एक एक ना एक बार वो मरता है तो फिर अभिनाशी किधर से हो गया अमर कहां से हो गया मर रहा ना वो खत्म हो रहा है तो अविनाशी तो उसके लिए लगेगा नहीं हम तो ये अर्थ कहां से मिले इनको ये अविनाशी का अर्थ ये होता है देख कबीर का शरीर भी यहां आ के नष्ट होता है उसने मान लिया ना बूढ़ा होता है बिल्कुल उसने माना कबीर का शरीर भी य के नष्ट होता है फि बक फिर क्या है भाई झूठी खबर फैलाने के लिए तो कोम क्रम ब्राउजर के डेस्कटॉप साइट को ही ब्लॉक कर दिया क्रोम ब्राउजर के डेस्कटॉप साइट को ब्लॉक कर दिया यह क्या भाई यह क्या बात हुई भाई सुंदर य क रहे जी आपने झूठी खबर फैलाने के लिए तो क्रोम ब्राउजर के डेस्कटॉप साइट को ही ब्लॉक कर दिया पहले तो आप यह सोचो आप जो है अभी बहुत कम उम्र के दिख रहे हैं तो
01:06:37:02 आपकी दीक्षा कहां हुई है अगर जेल धाम में जाकर हुई है तो तो ठीक है एलईडी से हुई है तो पहले चेक कर लो कि आपके गुरु वही है जिनके लिए आप लड़ रहे हो कि नहीं फिर बात करते हैं समझ में नहीं आ रही वैसे आपकी बात शिवान जी आपको खुला चैलेंज सबलोक आश्रम में आ जाओ कभी समय होगा तो पहुंचेंगे अभी यहां लखनऊ में कोई हो आपके आ का ने खा 30 मार खाको भेजो सुबह बोलो सुबह शाम बोलो शाम एनी टाइम एनी वेर यहां भेजो बिल्कुल
01:07:16:10 खड़े तो ठीक है आप लोग एक बात कुछ सूत्रम शैली में समझा दूं इनके द्वारा क्या स्ट्रेटजी अपनाई जाती है इनके द्वारा यह आपको बताया जा रहा है कि यह देखो यहां ब्रह्मा जी लिखा है यह मत पढ़ो जहां ब्रह्मा जी का मरना लिखा है वो पढ़ो यह देखो यहां पूर्ण ब्रह्म लिखा है शिव जी का वो मत पढ़ो जहां शिव जी की दास्ता सिद्ध हो रही है वो पढ़ो और यह पढ़ पढ़ के तुमको क्या पता चलेगा यह सारे शास्त्र नहीं पढ़ने हैं हां इन शास्त्रों की एक बात पढ़नी है बस वो क्या है कि उल्टे वृक्ष की व्याख्या करने वाला तत्वदर्शी है ये पढ़ना है और देखो देखो हमारे जेल दव निवासी ने उल्टा वृ सिखा दिया हो गए त वा बस हो गया हो गया इतनी बात के लिए इनके लिए ये है शास्त्र और बाकी बाकी यज्ञ से मुक्ति नहीं मिलती गीता में मुक्ति का वो परम ब्रह्म की बात जरूर है क्योंकि तत्वदर्शी की बात कह दी गई है बाकी उसमें वो भी नहीं है अच्छा गीता और वेद को कहने वाला भी अज्ञानी है वो भी अज्ञानी है मूर्ख है और अगर गीता और वेद का तुमने पालन
01:08:31:22 किया तो तुमको वो खाएगा क्योंकि वोह एक काल नाम का राक्षस समझ लो उसे और भगवान तो हमने यूं ही लिखा है जबकि हम उनका अपमान करते हैं दिन और रात बिल्कुल अच्छा कुछ लोग अभी अपने गुरु के लिए नहीं लड़ने अपने स्वाभिमान के लिए लड़ने की जो हमने किया है वो सही किया है बिल्कुल और आपको दिखा दे एक बात मुक्ति बोध का पेज क्रमांक 346 दिखाइए बीच-बीच में टस्ट लेते रहिए कहानी
01:09:05:19 में यह क्या बोल रहे हैं कबीर गाली दिए कबीर को जिनम था ज्ञान या फिर गाली वह दिए जिनकी बंद हुई दुकान हां तुम्हारी दुकाने बंद हो रही है यह कबीर जी की बात सही है तुम्हारी दुकान जो चल रही है रामपाल दास जी के नाम पर उस में दिक्कत आ रही है जाके अपने गुरु भाई से मिलो इसका पेज नंबर है 346 कंप्यूटर स्क्रीन के अनुसार अरे दुकान तो उन्होंने खोली थी ना जो प्रचार कर रहे हैं मैं तो गया था इनकी दुकान पर वहां पर इनके 15 20 लोग लोग थे सबका मुह बंद हो गया वेद को नहीं मानते भाई सीधे कहो ना वो वीडियो बड़ी अच्छी लगी आपकी
01:09:57:10 उसी के कारण तो यह सब स्टार्ट हो गया जब वो वीडियो बनी थी उसके बाद हमने छोड़ दिया था इनको बस वो वीडियो बनवा दिया था और वीडियो वीडियो ब बना कर के हमने छोड़ दिया था उसके बाद हुआ क्या वह वीडियो बाद में चलती रही चलती रही चलती रही और उसको लोग देखते रहे जब देखते रहे तो इनको दिक्कत हुई कि भैया लोग उससे प्रभावित हो रहे हैं जब प्रभावित हो रहे हैं तो क्या हुआ कि इन्होंने हमारे विरोध में कई सारे वीडियोस बना दिए तब भी मैंने कहा कि छोड़ो सामना करें करना होगा तो आएंगे मैंने तो अपना नंबर दिया था उस वीडियो में भी अपना नंबर दिया मैंने पता दिया दिया दिया है हा तो नंबर दिया था मगर किसी में इतनी झस नहीं हुई कि वो एक बार कॉल कर लेता इतना गुर्दा किसी का नहीं था कि कॉल कर लेता मैं आपके साथ लाइव आऊंगा फिर उसके बाद लाइव आए तो लाइव आकर के फिर वो लाइव आने से फिर वो क्रम बन गया फिर मैंने इनका जो मैंने कहा यार अच्छा मुझे लगता था मुझे इनका ऐसे शास्त्रोक्त तरीके से बैठ कर के विवत इनके मतलब इनके जाल में बुद्धिजीवी लोग नहीं फसते होंगे ऐसे ही जो कम ज्ञानी है या जो पिछड़े वर्ग के लोग है वही फसते होंगे
01:11:12:16 तो मैंने अपने मन में ये नहीं था कि मैं इनका शास्त्रों को लेकर के निराकरण प्रस्तुत करूं बस ये वहा मिल गए थे मेले में तो मैंने इनका वहा पर किया मगर जब मैंने इसको ध्यान से देखा तो मैंने कहा ये लोग तो मतलब बिल्कुल कर दे रहे तब मैंने जो है शास्त्रों को लेकर बैठा और फिर एक पूरी पीडीएफ बनाई कि इनकी हर बात का निराकरण प्रस्तुत करना कर दे एक बार को और वो किया तब से यह सिलसिला चालू हो गया बहुत बढ़िया ऐसे ही अगर और एक बार लिक लिंक दे दीजिए कोई आना चाहता हो कोई जो पढ़ना चाहता हो चक्कर में मानता हो खुद को टक्कर में वो आए ऊपर जी बोलिए पाड़ी जी बो कि ऐसे ही अगर कहीं और स्टॉल लगता है तो आप इस बार टीम के साथ जाइए और निराकरण करके आ अी से बिल्कुल बिल्कुल अब लगा नहीं है इस बार फिलहाल तो नहीं लगा अभी कल जाकर चेक करना है व लखनऊ महोत्सव लग गया है इस बार वो यहां के जो आरएसएस वाले लोग है वो लोग भी तैयार है फुल तरीके से अगर लगता है तो वहां पहुंचेंगे सब लोग अभी लगा नहीं है इस बार अब उसका कारण यह टेरर है या फिर यह कि इनका
01:12:27:21 भंडारा भी था ना 15 16 17 को हो सकता है उसकी वजह से ना लगाओ हो सकता है तात्विक जी तो मैं एक बार जय श्री राम सा जी तो मैं एक ब जो है जय श्री राम मैं एक बार जो है वो एक पूरा बता दूं यह लोग वेदों में विश्वास नहीं रखते क्योंकि अगर हम किसी को पवित्र ग्रंथ कह रहे हैं सद ग्रंथ कह रहे हैं तो सत्य ग्रंथ सद ग्रंथ सत ग्रंथ सत्य बोलने वाले ग्रंथ यह फिर उसी ग्रंथ में खुद कह देते कि वो सत्य नहीं बोल रहे कहीं कहीं दूसरी बात य सत का मतलब व ईश्वर की बात कर रहे ईश्वर तक पहुंचाने की बात कर रहे फिर य खुद ही कहते यज्ञ के द्वारा मोक्ष नहीं है जब यज्ञ के द्वारा मोक्ष नहीं है तो यज्ञ का ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी नहीं है पूर्ण ब्रम की प्राप्ति कराने वाला नहीं है
01:13:27:09 और बहुत सारी चीजें हैं किसी दिन इसको एक समरा इज करके भी एक साथ बता दिया जाएगा आपकी बहुत जल्द पोल खोलने वाली भाई ऐसे पोल मत खोलो ना सामना करो ना अपने बंद कमरे में बैठ के कुछ भी बना दो और फिर उसके बाद को हमने पोल खोल दी यही तो किया था आपके तथाकथित तत्वदर्शी जी ने या कहे तिरछा दर्शी जी ने पता नहीं कौन सा रजिस्टर्ड लेटर भेजा भी है कि नहीं भेजा है उसमें खुद ही ठप्पा लगा के बना बनू के दिखा दिया हमको क्या पता है और अगर कोई तुम्हारे बुलाने पर नहीं आया तो बस हो गया अब मैं बुला रहा हूं तुम नहीं आ रहे हो तो तुम हर ग तुम्हारा मत जो है गलत है मैं बुला रहा हूं आ जाओ मैं बुला रहा हूं तुम्हें आ जाओ आओ ये वही हेमंत दास है क्या वही तो नहीं है अरे छह
01:14:42:15 शास्त्रों के नाम पूछे थे इनसे छह शास्त्रों के नाम नहीं बता पाए ये एमपी खबर वाले पा पाच छछ लोग बैठे थे इनके नहीं चलो खैर ये तो खैर एक वो वस्तुनिष्ठ वाली बात है कि नहीं स्मरण रहा व्यक्ति को अब जैसे कि कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति है उससे आप यह भी कह दो कि भाई छोटा बड़ा सुना दे पूरा वो तो ठीक है कई बार हो सकता है वो गच्चा खा जाए मगर उनके पास शास्त्रोक्त बातों का जवाब नहीं
01:15:15:06 है कुछ रट रखा उन लोगों ने उन्होंने बस वही चीज याद है उनको वेदों की अपता के बारे में यही है कि उनका रचनाकार नहीं है इसी से वो अपुष सिद्ध है उनको किसी ने रचा नहीं है ये वेदों से सिद्ध हो जाता है वेदों में बहुत जगह आ रखा हैय चीजें हां चलिए फिर मेरे ख्याल से आज की बातें पूरी हो गई और कोई और है नहीं जो आना आ सकता हो गोपाल चौधरी जी आपकी फोटो नहीं दिख रही आपका शायद वो नेट गड़बड़ कर रहा है तो आज मुख्य रूप से वही चीज जान लीजिए कि जो वेद है रामपाल उसके निंदक है वेद निंदक और अगर वेदों की भाषा में कहा जाए तो वह नास्तिक है क्योंकि वह वेदों की निंदा कर रहे हैं क्यों कर रहे हैं क्योंकि उस वेदों को गीता को बोलने वाला लिखने वाला जो है वह अज्ञानी है और उनका अनुसरण करोगे उनके रास्ते पर चलोगे तो तुमको खा लेगा ब्रह्म नाम ब्रह्म नाम का एक राक्षस है इन्होने बनाया है ठीक है और उनके इनके अनुसार उनसे मिलने
01:16:30:09 वाली केवल एक ही शिक्षा है जो काम की है वो है कि उसमें लिखा है तत्वदर्शी के पास जाओ इसको छोड़ दो उसमें लिखा है मुझे छोड़ो इसके पास जाओ किसके पास तत्वदर्शी के पास तो उसमें भी इनसे चूक हो गई क्योंकि वो तत्वदर्शी क्या है जो यज्ञ की बात सिखाए यज्ञ जो है मोक्ष देते नहीं है और भी अच्छा इन्होंने अपना ही खंडन वो खिचड़ी जो पकाई उसने खूब किया है खूब खंडन अपना किया है अब यज्ञ जो है वो नहीं देते मगर अर्जुन जो है मुक्त हो गया वह तो नहीं मिला रामपाल से वो नहीं मिला कबीर से मगर अर्जुन मुक्त हो गया सभी को मुक्ति मिली थी हा नहीं मैं इनकी किताबों की बात कर रहा हूं अभी तो अर्जुन इनकी किताबों के अनुसार मुक्त हुआ है क्या खिचड़ी पगा रखी है महाभारत में जितने भी रेक्टर थे प्रतिपक्ष पक्षम जी करके कोई आए हैं आपके पास आपका चेहरा होगा तो उसको दिखाए राम जी नहीं है तो फिर आपको हटा दिया
01:17:46:03 जाएगा एक दिन शिवं भाई महाभारत का महाभारत का प्रथम खंड का एक जल्द ही एक समरा इज वीडियो लेकर के आऊंगा जो अभी तक हमने इतनी सारी डिबेट्स की है या जो चर्चाएं की है उनको लेकर के पूरा एक सराइज वीडियो कि आधे घंटे में ही आपको सारी जानकारी सूत्रा क्मक शैली में पता चल जाए कि इनका है क्या क्या कर रहे हैं अंततोगत्वा तो मैं ये कह रहा हूं अगर तुम सबसे पहले तो ये जानो एलईडी से दीक्षा ले लेकर के जो तुम लोग बन रहे हो हम रामपाल के शिष्य हो गए रामपाल जिंदाबाद पहले जाके पता करोगे डी से माना है कि नहीं रामपाल ने जी जी जी नहीं मैं ये कह रहा था जैसे एलिगेंस से लगाते हैं ना ये कि भगवान श्री कष्ण इतने महान थे तो उन्होने महाभारत का युद्ध क्यों नहीं रोका उनको शराब क्यों लगा तो इसका एक दिन आप महाभारत के ऊपर वीडियो रखो लाइव स्ट्रीम रखो प्रथम खंड का एक अवतार अवतार जो पर्व है एक वो और स्त्री विलाप पर्व दो और स्वर्गारोहण पर्व तीन ये तीन पर्व में पूरे महाभारत का सारांश निकल जाएगा पूरा पता चल जाएगा
01:19:01:04 कि ये युद्ध क्यों हुआ था और भगवान श्री कृष्ण को जो शराप दिया था यादव वंश को कटने का तो श्री कृष्ण भगवान ने कहा था कि ये तो पहले से तय था ये तो होने वाला था जो होने वाला तुम उसी को बता रहे हो मेरे को ये अवद है जितने भी यादव है ये ये अवद है ये देव है ये देवता है ये ये किसी के द्वारा मारने योग्य नहीं है इसलिए आपस में ही कट के मरेंगे और और मेरे साथ ही यह वहां जाएंगे य मधाम में लिखा है महाभारत में उदेश यदि गलत को जानना है तो ठीक है लेकिन ईष है तो गलत ही है कौन है अच्छा एक चीज और दिखा देते इनको कि काल जो है वह किसके इशारों पर काम करता है यह भी देख
01:19:50:19 लीजिए इनकी एक बुक है भगवान और भक्त उसमें 54 नंबर पेज निकालिए जहा परमेश्वर के अलावा जहा परमेश्वर के अलावा किसी और की सत्ता हुई तो व परमेश्वर सर्वशक्तिमान कैसे हो गया वही तो बात है जो ये लोग नहीं सुनते इसका मतलब काल के आगे कबीर दास जी की भी नहीं चलती
01:20:32:02 जी मिला ये बड़ी अच्छी अच्छी इन्होंने जानकारियां दे रखी है हां ये देखिए कबीर ने हमें बारबार कहा था य ज्योत निरंजन तुम्हें बहुत दुखी करेगा क्योंकि यह तो मेरा मजबूर मजदूर है तो किसका मजदूर है काल किसके कहने पर काम करता है कवि जी के हा यह कबीर की ही इच्छा है कि वह दुखी कर रहा है आपको और बताओ
01:21:25:27 ठीक है चलिए कोई है नहीं टक्कर में कोई पढ़ना नहीं चाहता चक्कर में तो बहुत सारी बातें मेन बात तो आज की यह थी कि भाई जो नाम नाम दान दिया जा रहा है इनके द्वारा वोह अच्छा य जो अमित दास है ना इससे कोई भी बात अर्थपूर्ण बात नहीं हो रही है यह केवल आता है कुछ रट के उसको उसको यहां पर आके बोलना होता है फिर यह यहां से कट उठाता है और वहां जाकर के दिखाता है देखो हमने यह किया वो किया बाबूराम चलो कोई तो
01:22:09:24 आया बाबूराम चेहरा कहां है आपका बाबूराम चेहरा कहां है आपका बाबूराम जी सर जी सर आ रहा [संगीत] हूं हां सर बोलिए बाबू राम हां नमस्ते सर हां जय श्री राम बोलिए आपसे हम आज गरुड़ पुराण पर चर्चा करना चाहते हैं गरुड़ पुराण पर चर्चा क्यों करना चाहते हो यह बताओ हम मक्ष प्राप्ति के लिए जानना चाहते हैं कि जो हमारे हिंदू धर्म के लोगों को आप लोगों ने मक्ष प्राप्ति के क्या दिशा निर्देश दिए हैं मैं आपसे यह पूछूंगा सबसे पहले क्या आप मानते हो कि जो वेदों का मार्ग है उससे मोक्ष मिलता है वेदक मार्ग से मानने वाले हो कि नहीं
01:23:24:27 मानते हैं ना सर वेदों को मानते हो तो क्या मानते हो वेदों के बारे में वेदों में हमारे गुरुजी ने बताया है कि कबीर परमात्मा का एक वाणी है कि वेद मेरा भेद है मैं ना मिलू वेदन की माही जोन वेद से मैं मिलू व वेद कोई जानते नहीं बताया है कि जो हमारे चार वेद है अथर्ववेद सामवेद और ये जो है इनसे क्या मुक्ति मिलती है इसमें देखिए कुछ भेद छिपा हुआ है लेकिन मुक्ति के रास्ता नहीं है तत्वदर्शी के पास है अच्छा मुक्ति का रास्ता में नहीं है ना मुक्ति का रास्ता तत्वदर्शी के पास उसम कुछ भेद छिपे हुए हैं देखिए पॉइंट टू नटेड आप लोग पहले देख लीजिए कि यह खुद कह रहे हैं वेदों में और यह जो गीता है इसमें केवल एक ही चीज आपको मिलनी है और वो है तत्वदर्शी अय बताइए कि आपने अपने गुरु को तत्वदर्शी क्यों माना है गीता जैसे बता रहे हैं आप देखिए गीता में अगर कृष्ण भगवान के पास अगर पूरा ज्ञान होता तो वह तत्वदर्शी भाई साहब देखिए होता होता नहीं जो बात चल रही है वो पूछ रहा हूं आपने अपने गुरु को तत्वदर्शी क्यों माना
01:24:40:07 है तत्वदर्शी इसलिए माने है कि उन्होने तत्व ज्ञान दे रहे हैं और तत्व ज्ञान क्या है वह परमात्मा परमात्मा तक का जानकारी देते हैं कि परमात्मा कौन सुलो ध्यान से पूछ रहा हूं अब दोबारा पलटना नहीं अपनी बात से जैसे पलटते हो जी जी जी गीता में चा 34 में तत्वदर्शी जाने को बात कही गई है ना जी सर जी सर तो 4 34 का जो तत्वदर्शी है व कौन सा ज्ञान देता है वह तत्व ज्ञान देता है उसमें लिखा गया है कि द्रव में यज्ञ की अपेक्षा ज्ञान यज्ञ अत्यंत श्रेष्ठ है और न मात्र जो द्रव यज्ञ है वह व क्या है कि जो तत्व ज्ञान है तत्व ज्ञान में मुझे बताइए जो तत्व दर्शी है 4 34 का वह कौन सा ज्ञान देता है वह तत्व ज्ञान देता है तत्व ज्ञान किस चीज का तत्व तत्व तो पेड़ का भी तत्व है साइंस का भी तत्व है किस चीज का तत्व ज्ञान वह परमात्मा तत्व का ज्ञान देता है परमात्मा तत्व का ज्ञान देने वाला नहीं लिखा है वहां पर यज्ञ का ज्ञान देने वाला लिखा है वहां पर मैं खोल रहा हूं सर खोल रहा हूं खोलिए
01:26:09:10 हा 3 33 से पढ़ रहे हैं ना सर पढ़ो हे प्रपंच अर्जुन द्रव्य में
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01:26:17:12 यज्ञ की अपेक्षा ज्ञान यज्ञ अत्यंत श्रेष्ठ है तथा या वन मात्र संपूर्ण कर्म ज्ञान में समाप्त हो जाते हैं
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01:26:25:28 यह बोल रहा है कि द्रव में यज्ञ यानी जो वस्तु का यज्ञ है अरे वो द्र यज्ञ छोड़ो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी है ना जी सर जी सर ठीक है अब इनको इनकी किताब दिखा दो वही जो सबसे पहले दिखाया था रुक जा बात मत काटिए परा सुन्य दीजिए बात क्यों काट रहे हैं इसमें अब 34 में क्या कहता है आपने जब ये मान लिया ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी है तो अब और क्या सुनाओ जी जी जी जन यज्ञ का ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी है ना हा और यहां पर ये बोल रहा परमा ई पूछ रहा उसम ना यार क्यों टाइम बढ़ रहे हो आगे का ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी है ठीक है इनको को सुनि इसीज आपको दिखा रहे रुक जाओ जी व निकालो क्या कहते हैं
01:27:25:16 इनकी गरिमा गीता की का पेज नंबर शुरुआत का था जो जी खाए हां पहले इनको हेडिंग दिखा दो इसी की इस पैराग्राफ की हेडिंग है पिछले पेज प ये पढ़ संख्या पृष्ठ संख्या बोलिए मे मे पास पुत पृष्ठ संख्या बता प्रश् संख्या
01:28:01:12 39 जी बोलिए इसको पढ़ो हेडिंग क्या लिखी है जो सामने दिख रहा है बड़ा कर दो थोड़ा बाबू की शायद आंखें वीक हो जी जी थ बड़ा कर पढ़ो बाबू जी क्या इस हेडिंग में इस हेडिंग में लिखा है यज्ञों का लाभ केवल सांसारिक सुविधाएं मुक्ति खा हु रुक जाओ गलत अरे यार तुम वो मत बताओ जो पढ़ रहा है पढ़ दिया ना अब आगे नीचे जाओ नीचे जाओ इनको दिखाओ कौन-कौन से यज्ञ जिनसे मुक्ति नहीं होगी यह पढ़ो दिखा नीचे पढ़े हा यह पढ़ो धर्म यज्ञ कौन-कौन से यज्ञ यज्ञों का मतलब 40 पृष्ठ
01:28:52:18 पर उसम धर्म धर्म य हवन य ध्यान य प्रणाम य ज्ञान यज हा रूपी रू जल जी जन यज आ गया ना पाच होता है सुनो सुनो बड़ा कर दो हमारा इनका चेहरा बड़ा कर दो हमारा इनका चेहरा बड़ा कर जी यज्ञ का अर्थ ज्ञान भी है ना जी ऊपर आपने लिख दिया यज्ञ से मुक्ति नहीं होगी तो वो बोल तो रहा है कि आप जो यज्ञ करेंगे उसे संसार द्रव में यज्ञ करेंगे द्रव में यज्ञ से आपका संसार व पर पांचों यज्ञों का लिखा है ना वहा नहीं ज्ञान यज्ञ को छोड़ा नहीं गया है वहा पांचों यज्ञों की बात हो रही है कि यज्ञों से मुक्ति नहीं होगी पांचों प्रकार के यज्ञों से आपने पढ़ा ना पांचों का नाम प ज्ञान यज्ञ से मुक्ति हो पांच य तो होते है पाच य पाच य होते हैं य पा लेकिन मुक्ति होती है जन यज से
01:30:07:28 उसम लिखा है क्या जन होगी परा को पढ़ दोबारा कहा लिखा है आपको गीता से नहीं दिखा क्या सर दरा स्वीकार चीज है उसम पढ़ो य से मुक्ति क लिखा है तुम्हारे गुरु ने जी पढ़ रहे के लिए जल पोषण के लिए खाद आवश्यकता होती उसी प्रकार परमात्मा के भ मंत्र बीज रूपी आत्मा डालने के पश्चात उसम चल खाद की आवश्यकता परंतु उस पूर्ण गुरु से नाम लेने परक गुरु माध रहने से अंतिम समय तक अन मन से नाम जाप अभ्यास योग करते है व साधक अंत समय में अपने लोक में चला जाता है जबत में रहता है उसको यज्ञ के फल स्वरूप संसारी सुविधाएं भी अधिक मिलती रहती है वही यज्ञ में प्रतिष्ठित इष्ट ही मन इच्छित यज्ञ का फल देता है यह बोल रहा है कि आपको पूर्ण गुरु की आवश्यकता है तो आपको मोक्ष हो जाए पूण गुरु की पहचान के लिए ही अभी हम लोग बात कर रहे हैं ना जी पूर्ण गुरु कौन होगा उसकी पहचान के लिए बात कर रहे हैं ना उससे जब तक पहचान नहीं मिल जाती तब तक तो हम किसी को पूर्ण गुरु नहीं बना लेंगे ना जी अब आपका कहना है कि पूर्ण गुरु वो है जो ज्ञान यज्ञ
01:31:23:02 का ज्ञान दे जी जी जी आप ये कह रहे हो कि किसी भी प्रकार का यज्ञ पांच यज्ञ बताए हैं उन पांचों में से कोई भी यज्ञ ऊपर हेडिंग लिखी है यज्ञों से मुक्ति नहीं है यानी कि जो गीता का जो तत्वदर्शी है आपके अनुसार वोह ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाला है और ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं है ज्ञान यग से मुक्ति है तो गीता कह रही है तो कैसे गलत कर रहे आप आपका गुरु कह रहा है गलत कह रहा है क्या हमारे गुरु जी कह रहे पांच प्रकार के यग होते हैं हां तो उसम उसम ऊपर क्या हेडिंग है उसमें ऊपर क्या हैडिंग है ऊपर में हेडिंग है मुक्ति बताई उसम बताया है कि जो यज्ञ करते हैं इस यज्ञों से मुक्ति नहीं होती है ये संसार सुविधाए आपको उपलब्ध हो जाएगी लेकिन जो ञान उन्होने उन्होंने यज्ञ का अर्थ ज्ञान यज्ञ भी माना है ना माना है जो पांचवा ज्ञान यज्ञ है जो पांच यज्ञ है तो उसमें पांचवा जो ज्ञान यज्ञ है उस मुक्ति ये आपके गुरु ने नहीं लिखा ना व ज्ञान यज्ञ अलग है उन्होंने ज्ञान यज्ञ को भी उन्ही यज्ञों के साथ में लिया है इसलिए तो बताया है पाच प्रकार के य होते है इसम गुरु
01:32:38:04 व आपको पूछ रहा ज्ञान यज्ञ अलग लि उसी में तो नीचे लिखा हु पूर्ण गुरु से ही मुक्ति होगी ज्ञान यज्ञ को अलग लिखा है क्या ज्ञान यज्ञ अलग है ऐसे लिखा है क्या एक में लिखा हुआ है एक में लिखा हुआ है उसम हम नहीं क रहे लेकिन उसी नीचे लि सुनो उन्होने सुनो जब उन्होंने हेडिंग डाली यज्ञों से मुक्ति नहीं उसके बाद उन्होंने यज्ञ का जब मतलब समझाया तो उसमें पांचों यज्ञ लिए हैं जी तो आपके अनुसार जो भगवत गीता का जो तत्वदर्शी है आपके अनुसार आपके गुरु के अनुसार वो पूर्ण मोक्ष देने वाला नहीं है ज्ञान यज्ञ देर कैसे नहीं नीचे खुद लिखा है पूर्ण गुरु से मुक्ति होगी उसी में अरे पूण पूर्ण गुरु कौन होगा जो ज्ञान यज्ञ देगा ज्ञान यज्ञ देगा ये कहां लिखा है इन्होने जो ज्ञान यज्ञ देगा जो पूर्ण गुरु होगा य अभी तुम कह रहे थे कि जो परमात्मा का ज्ञान देगा वो जो है पूर्ण गुरु है और ज्ञान यज्ञ प आ गए तुम तो ज्ञान यका गीता से हम प्रमाण दिखा दिए कि व तत्वदर्शी वही होगा तुम्हारा गुरु तो कुछ और
01:33:53:07 बोल रहा है तुम्हारा गुरु कहा है जन तुम्हारा गुरु यह कह रहा है कि ज्ञान यज्ञ से भी मुक्ति नहीं है बरा गु वो ये लिखता कि यज्ञों से मुक्ति नहीं है मगर कौन से यज्ञ शुरू के चार यज्ञ ज्ञान यज्ञ अलग है ज्ञान यज्ञ से मुक्ति होगी मगर उसने ज्ञान यज्ञ को तो यज्ञ का अर्थ जब किया जब उसने यह कह दिया यज्ञ से मुक्ति नहीं उसके बाद उसने यज्ञ का अर्थ किया है उसमें उसने पांचों यज्ञ माने हैं वो बताए है पा पांच प्रकार के जन उन्होने माने है कि पांच होते हैं उसम से जो ज्ञान यज्ञ है वह पूर्ण गुरु देगा उससे मुक्ति होगी कहा लिखा है देख नीचे नीचे लिखा हु पूण गुरु से मुक्ति होगी देख गुरु देय लिखा है उल्लू हमको बनाते होय लिखा है पूर्ण गुरु से मुक्ति होगी लिखा है ना देखिए पूर्ण गुरु से मुक्ति होगी पूर्ण गुरु ज्ञान यज्ञ देगा ये कहां लिखा है इन्होने आपको गीता से हम दिखाए तो भाई पूर्ण गुरु वही होगा जो ज्ञान यज्ञ देगा गीता से दिखा रहे हो जब तुम्हारे यहां पर गुरु कह रहे हैं कि गीता से तो मुक्ति है ही नहीं अच्छा ये बताओ
01:35:09:00 वेदों में वेदों में प्रमाण है कि कबीर भगवान है अ अभी हमारे पास वेद नहीं रखे हम गीता रखे हैं गरुण रखे हैं और ये रखे हैं ये बु ये देख लीजिए ये बुक रखे हैं इससे आप प्रमाण ले सकते हैं हम कहेंगे प्रमाण दिखा प्रमाण कैसे दिखाए मैं प्रमाण दिखाने को नहीं कहूंगा मैं तुमको प्रमाण दिखा दूंगा फिर लोग देखेंगे कि तुम उस प्रमाण को मान रहे हो कि नहीं मान रहे हो हम अब बता तुमय मानते हो सद ग्रंथ का मतलब क्या है अभी जो जन ज्ञान की जो बात हो रही है आपको इसी ज्ञान को हम गरुड़ पुराण से भी दिखा दे रहे हैं उसम भी बोला गया मुझे तुम गरु प्रमाण से पुराण से प्रमाण तब देना जब गरु पुराण को तुम मानने वाला अपने आप को सिद्ध करो गरुण पुराण को तुम नहीं मानते हो क्योंकि तुम्हारे अनुसार गरुण पुराण से मुक्ति नहीं है गीता से मुक्ति नहीं है वेद से मुक्ति नहीं है बोलो हा गरु पुराण में य लिखा हुआ है कि ज्ञान कोई गुरु देगा देखो बाबू अपने मन की बात बोलने के लिए यहां पर तुम आए हो मुझे पता है कि तुम्हे कर के कुछ बात रट के आए हो वो तुम्ह बोलनी है सर हम फोटो अग
01:36:24:06 मैं तुमको विषय से भागने नहीं दूंगा मैं तुमसे पूछ रहा हूं मैं तुमसे ये पूछ रहा हूं क्या तुम गरुण पुराण को सद ग्रंथ मानते हो बिल्कुल मानते हैं क्या होता है गरुड़ पुराण अपने लेवल में ऑथेंटिक है महत्त्वपूर्ण है अपने लेवल के लिए जी क्या लिखा है ो नहीं मिलता पंडित दीजिए पठन पाठन से ज्ञान यज्ञ का फल मिलता है मोक्ष नहीं मिलता लो ज्ञान यज्ञ का फल मिलता है फिर मान लिया ज्ञान यज्ञ का फल मोक्ष नहीं है देख लो पढ़ लो तुम्हा त लिख रहे हैं ज्ञान गंगा स ग्रंथ सद ग्रंथों को पढ़ने से आप मोक्ष नहीं मिलता है ये आपका गरु पुराण भी सिद्ध कर रही है अरे मेरे भाई तुम अपने गुरु को मानते हो कि मानते हो और सुनिए गरुण आपको बता रहेता तु अपने गुरु को मानते हो कि नहीं मानते हो 100 पर मानते हैं 100 पर मानते हो तो तुम्हारे गुरु यहां पर यह कह रहे हैं कि जो गीता या सद ग्रंथ है उनको पढ़ने से
01:37:39:10 ज्ञान यज्ञ का फल मिलता है यानी ज्ञान यज्ञ से जो मिलता है व मिलता है मगर मोक्ष नहीं मिलता यानी की ज्ञान यज्ञ से मिलने वाला जो फल है व मोक्ष नहीं है नहीं है लि पढ़ो इसको लाइन को पढ़ो अंडरलाइन को धार्मिक ग्रंथों के पठन पाठन से ज्ञान यज का फल मिलता है य यक्ष का फल कुछ समय व स् या जिस उद्देश्य से किया गया उसका फल मिल जाता है परंतु मोक्ष नहीं है क्या है कि ग्रंथों को पढ़ने से मक्ष होता हैनो मेरे भाई सुनो तुमने कहा तुमने कहा उसम लिखा है तुम्हारे में कि ज्ञान यज्ञ से फल ज्ञान यज्ञ का फल तो मिलता है मगर तुमने आगे जाकर के लिखा है मगर मोक्ष नहीं यानी की ज्ञान यज्ञ का जो फल है व मोक्ष नहीं है क्य सद ग्रंथों को पढ़ने से मोक्ष नहीं मिलता उसम लिखा हुआ है जन यज आया है कि नहीं व उसम ज्ञान यज्ञ आया है लेकिन बोला स मिल रहा है एक मिनट जन से क्या मिल रहा है उसम बोला गया है जन पढ़ेगा उसे
01:38:54:14 ज्ञान तो ज मिल आपसे पूछ रहा हं व पर ज्ञान यज्ञ से क्या मिल रहा है ये बताइए बस फल मिल र उसम वहा पर लिखा है जन फल मिहा है उ ग्रंथ लिखा है ज्ञान यज स ग्रंथ नहीं बोलोगे नहीं बोलोगे पटरी छोड़ोगे भागोगे प्रश्न से मैं पूछ रहा हूं ज्ञान यज्ञ से फल मिलना लिखा है कि नहीं ज्ञान यज्ञ सद ग्रंथों से बोला गया है ज्ञान यज्ञ का अगर स ग्रंथ में उसको आप पढ़ेंगे तो उसम आपको स्वर्ग मिल सकता है लेकिन आपका मोक्ष नहीं होगा ज जन यज्ञ का फल लिखा है कि नहीं ज्ञान यज्ञ का फल उस लिखा ज्ञान यज्ञ सद ग्रंथों से पढ़ेंगे अगर आप तो उससे आपको स्वर्ग मिल सकता है लेकिन म नहीं मिलेगा ग्रंथ को पढ़ने पर ज्ञान यज का फ मिलेगा क्या मिलेगा जो फल जन यज्ञ से मिलता है वो मिलेगा मगर मोक्ष नहीं मिलेगा उसम कपलीट नहीं अरे क्यों नहीं कपलीट है तुम्हारे कहने से कट नहीं है अब तुम मुझे तुम मुझे अब यह बताओ कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है सही बात है
01:40:10:08 सही बात है इसको हम देखे हैं यानी कि वे में यानी कि वेदों में ब परम ब्रह्म पूर्ण ब्रह्म की पूरी जानकारी है यह तो है प्राप्त करने की जानकारी नहीं है पर पर पूर्ण ब्रह्म की पूरी जानकारी है प्राप्त कैसे होगा उसम कुछ कुछ जानकारिया छिपी है लेकिन पूर्ण नहीं है उसम इन कंप्लेंट है कंप्लीट नहीं है पूरा कुछ जानकारिया छिपी है जैसे की जैसे को परमात्मा कैसे लीला कैसे लीला करता है धरती पर कैसे आता है अपने बच्चों को कैसे ज्ञान देता है इस प्रकार से उसकी जानकारिया छिपी है उस ग्रंथों में लेकिन तो उसको क्या रह गया रहया गया कि मोक्ष प्राप्ति के लिए उसमें नहीं है मोक्ष प्राप्ति नहीं ईश्वर के विषय में कौन सी बात बाकी रह गई भाई बाकी यही है कि मोक्ष प्राप्ति करना मोक्ष प्राप्ति के लिए यानी की ईश्वर के विषय में जितना जितना है सब लिखा है मगर मोक्ष प्राप्त कैसे होगा यह नहीं लिखा है मोक्ष प्राप्त के लिए तत्वदर्शी की बात संकेत किया है तर्शी देख जो पूछा जा रहा है उसकी बात करो मैं रहा हूं क्या ईश्वर के
01:41:25:08 विषय में पूरी जानकारी है वेद के अंदर या अधूरी जानकारी है ईश्वर के विषय में अधूरी जानकारी अधूरी जानकारी है अरी जानकारी है तो क्या बाकी है और क्या दिया गया है यह बताइए उसमें बोला गया तत्वदर्शी के पास जा वही बताएगा उसम कंपलेट नहीं दिया पूछ रहा हूं क्या जानकारी है और क्या नहीं है यह बताओ उसमें जानकारी है परमात्मा यहां पर आता है अपना शिशु रूप में आकर के यहां पर लीला करता है और उसने अपने भक्तों को ज्ञान उपदेश देता है इसके बाद यहां से चला जाता है और उसको परमा को प्रत क्या रह गया वो बताओ उसमें मोक्ष प्राप्ति के लिए बोला गया है कि आप तत्वदर्शी की तलाश करो भाई मैं अभी अभी हम लोग बात कर रहे थे ईश्वर कैसा है ईश्वर के क्या-क्या चीजें हैं ईश्वर की कैरेक्टरिस्टिक क्या है ईश्वर के फीचर्स क्या है यह सब आपने कहा जो वेद है उसमें पूरा नहीं बताया है अधूरा बताया है तो आपने बता दिया वेद में क्याक बताया है अब बाकी क्या रह गया वो बताओ ईश्वर के बारे में वो विधि विधि बाद की बात है कि मोक्ष प्राप्त कैसे होगा वो उसम दिया है कि नहीं दिया वो एक अलग विषय है अभी हम पूछ रहे हैं कि ईश्वर के विषय में कौन सी जानकारी है जो वेद में नहीं दी गई है वो बताओ वही तो बता रहे मोक्ष प्राप्ति नहीं है जबरी खाई लड़ रहे
01:42:40:08 हैं आप जब मोक्ष प्राप्ति नहीं कैसे बताते आपका बहुत बहुत स्वागत है गीता वेद पुराण वा अब हटा द क्या करेंगे हया भाई वही तो आप करना चाह रहे हैं अपनी बात को र कर थोड़ी देर मैं भाई साहब से बात कर लू जब तक या तो स्वयं ही चुप रहे तो अच्छा होगा म्यूट नहीं करना पड़े थोड़ी देर चुप रहिए हा जी भाई साहब जय श्री राम सभी भाइयों को राम राम जी जी आपके वीडियो देखे थे मैंने काफी पहले बहुत ब किया था तो अभी बंद कैसे हो गया क्या हो गया बस सर थोड़ा सा मैं गांव चला गया तो थोड़ा सा मैं नेटवर्क का थोड़ा प्रॉब्लम रहता है यहां पर तो इसलिए मैंने बंद कर दिया बाकी दो तीन साल खूब वीडियो बनाए थे मैंने ह से भी ज्यादा वीडियो बनाए थे इनके खिलाफ कई सारे वीडियोस थे मेरे हां देखे हमने आपके वीडियो हां जी हा वीडियो बहुत बढ़िया लगा था जिसम आपने जो है जो तत्वदर्शी को सिद्ध किया था गीता से बहुत पहले का वीडियो है वो आपका जी जी आपने गीता से ही बताया था कि तत्वदर्शी क्या है और तत्व ज्ञान क्या है भगवान को जान लेना तत्वज्ञान है उनको अविनाशी
01:43:55:16 समझना ही तत्व ज्ञान है वो सब आपने गता सेया जी बहुत बढ़िया तो आपसे मैं कहूंगा कि अभी बंद ना करें बनाए बिल्कुल बिल्कुल आपके साथ में आया करूंगा और कल हम और आपस में डिस्कस कर लेंगे टॉपिक रखते हैं और उस पर हम लाइव आते हैं हम आपके साथ बिल्कुल बिल्कुल आप लाइव आइए आपका स्वागत थैंक यू थक तो बाबू राम जी भगवान के विषय में भगवान समझ गए एक मिनट प्रश्न क्लियर कर दू मैं अपना प्रश्न क्लियर कर दूं भगवान के देखो मोक्ष प्राप्त नहीं होगा यह हम समझ गए यज्ञों से अब भगवान के विषय में क्या वेदों में पूरी जानकारी है या अधूरी जानकारी है इस बारे में आपका क्या मानना है भगवान के विषय में मोक्ष के विषय में नहीं वो हमने उस बात को अलग रख दिया कि मोक्ष कैसे मिलेगा ये बात यज्ञ वेदों में नहीं है यह बात हमने आपकी साइड में रख दी अब बात हो रही है ईश्वर के विषय में क्या पूरी जानकारी वेदों में है या नहीं है अगर नहीं है तो कौन सी जानकारी है और कौन सी नहीं है कौन सी जानकारी है यह आपने बता दिया अब कौन सी नहीं है य आप बताना
01:45:10:21 है आपको बताइए हम अभी उसको नहीं बताएंगे आपको एलर्जी हो जाएगी हम पले हम पुराण से आपको दिखा रहे कुछ जानकारी भाई मैं आपको तब मानूंगा गरु पुराण की आपकी कोई तब सुनूंगा जब आप गरु पुराण को मानने वाले सिद्ध होंगे आप भाई आपकी मैं वो पोल खोल रहा हूं जिसमें की आप जो है वेदों को मानने वाले ही सिद्ध नहीं होंगे क्योंकि आपने यह कह दिया कि ना तो वेदों से मुक्ति मिलेगी वेदों में मुक्ति का ज्ञान नहीं है ना अगर मुक्ति का ज्ञान होता तो तत्वदर्शी के पास क जाने करो जो सीधा उत्तर है वो दो वेदों में मुक्ति नहीं है दूसरी बात अब आपका कहना है कि वेद के अंदर जो है ईश्वर का ज्ञान है मगर अधूरा है तो बाकी वेद से आगे की बात किसने की है और वो क्या बात है वो
01:46:11:26 बताओ देखिए नहीं आए आउट ऑफ सिलेबस हो गया ना क्वेश्चन अब आ रहा है आ रहा है आ रहा आ रहा है आप तोर आप ये चाह रहे है कि सिर्फ अपना बात को हम ऊपर रख दे इसको हम हटा दे त हमारा नाम रोशन हो जाएगा देखिए बोले तो तुरत हटाएंगे मैं आखिरी बार कह रहा हूं विषय से हट करके अगर बोला मैं सट से हटाऊ काम की बात करिए काम की कौन सा ज्ञान है जो वेदों से आगे का ज्ञान आपके तत्वदर्शी ने दिया वो ज्ञान क्या है वो ज्ञान वह परमात्मने है वो क्या है बोलो उसको बोलो य और बताया जो वे नहीं था जी उस परमात्मा तक जाने के लिए उस परमात्मा के पास जब जीव चला जाता है तो उसका जन्म मृत्यु दोबारा नहीं होती है तो उस उस ज्ञान ये तो गीता में लिखा है उसी ज्ञान को तो दे रहे हैं वो कि जन्म मृत्य बताओ जो गीता और वेद में नहीं है वो कौन सा ज्ञान है गीता वेद में वो ज्ञान नहीं है जिसको गीता गीता ज्ञानदाता बोल दिया कि तत्वदर्शी के पास जाओ वो ज्ञान नहीं है कि गीता और वेद में कौन सा ज्ञान नहीं है जो तुम्हारे तत्वदर्शी ने
01:47:27:03 दिया या सूक्ष्म वेद ने दिया वो कौन सा ज्ञान तत्वदर्शी ने दिया तत्व ज्ञान को जिसम गीता वेद में नहीं है गीता ज्ञान दाता बोल दिया तत्वदर्शी के पास जाओ फिर भाही बात वो ज्ञान क्या है वो तो बताओ क्या ज्ञान है गीता वेद से बाहर का है बता रहे हैं हम लोग सदियों से पंडित लोगों को ऊंचा स्थान पर रखे हैं देख लीजिए गरु में आपको क्या कर सुनो मेरी बात सुनो मैं तुम्ह बता दूं तुम समझ जाओ शायद कि पूछा क्या जा रहा है पूछा ये जा रहा है जैसे कि तुमने कहा कि ईश्वर के बारे में वेदों में अधूरा ज्ञान है और तत्वदर्शी के पास से पूरा ज्ञान मिलेगा ठीक है तो अब उसमें ऐसी बात है मैं उदाहरण दे रहा हूं इसको समझो कि ईश्वर जो है वो सफेद दाढ़ी वाला है यह वेदों में नहीं लिखा ये हमको तत्वदर्शी बताएगा ठीक है तो कहने का मतलब इस तरह की बातें बताओ ईश्वर के विषय में जो वेदों ने नहीं बताई और जो बहुत आवश्यक है जिनको जानना और जिससे य सिद्ध हो रहा है कि ईश्वर के बारे में जो तत्वदर्शी है व पूर्ण ज्ञानी है बताइए जी देखिए जो गता में
01:48:42:08 गीता में दिया गया है तत्वदर्शी को व संसार वृक्ष है जो संसार रूपी वृक्ष को आज दिना तक किसी भी धर्म गुरु ने नहीं बता पाया कौन जड़ है भाई साहब आपको और कर द जरा प्रश्न को सीधा कर दू फ्लैट कर दू आपने कहा कि वेदों में वेदों को देने वाला पूर्ण ज्ञानी नहीं था इसलिए उसने वेदों में जो ज्ञान दिया है वह अधूरा है और हमारे तत्वदर्शी पूर्ण ज्ञानी है ठीक है जी ये तो सही है ठीक है जी तो यानी कि ईश्वर के विषय में ऐसा कोई सवाल नहीं है जो तत्वदर्शी के पास ना हो जी ठीक ठीक तो अब मुझे बताओ कि तत्व वो जो ईश्वर है तत्वदर्शी के अनुसार वो कहां रहता है क्याय बताया ने कि नहीं बताया है वह सनातन परमधाम में रहता है अच्छा ये बताया है अच्छा जी जहां पर वो रहता है उस जगह को किसने बनाया व सा प बताओ हम उस ज्ञान को अगर आपको बता देंगे तो आपके अंदर वो नहीं समाए
01:49:52:28 तो क्यों टाइम वेस्ट कर रहे हो जाओ फिर आप जैसे अगर पहली कक्षा पहली कक्षा के ब से ज्यादा बताया ने तो वे से ज्यादा वाली बात तो बोलो ना बता रहे हैं अगर पहली कक्षा के बच्चे को अगर बवी तक का ज्ञान देंगे बताना है बता नहीं बताना है कि नहीं बता अभी नहीं नहीं चलिए टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चेन देख लिया इनको वेदों में अधूरा ज्ञान है अब देखिए है क्या मैं बताऊ है क्या यह बात हमारे शास्त्रों में कई बार कही गई है कि ईश्वर के बारे में पूर्ण रूप से बता पाना हमारे लिए भी संभव नहीं है क्योंकि वह विषय वाणी का नहीं है भगवान का जो एक स्वरूप है ना जो वाणी का विषय नहीं है उसको आप शब्दों में व्याख्या नहीं कर सकते जो असीमित रूप है क्योंकि भगवान असीमित है तो सीमित शब्दों में उनकी व्याख्या नहीं हो सकती उसको सिर्फ प्राप्त किया जा सकता है जैसे हमसे कोई कहे कि तुम कितना प्रेम करते हो अपनी बिटिया से क्या मैं इसको शब्दों में वर्णित कर सकता
01:51:08:13 हूं नहीं कर सकते अगर मेरी कोई बिटिया है मेरा मैं अपनी माता जी से प्यार करता हूं या अपने छोटे भाई से प्यार करता हूं या अपने किसी मित्र से प्यार करता हूं उसकी क्वांटिटी क्या है एटली वो मैं किसी को बिल्कुल फिक्स कर के शब्दों में बयान नहीं कर इस रूप को कहा गया है कि भैया यह जो है सिर्फ अनुभव का विषय है यह सिर्फ प्राप्त का विषय है इसको सिर्फ प्राप्त किया जा सकता है जैसे कि मान लीजिए कि आपने भोजन प्राप्त किया आपकी भूख मिट गई मगर भूख मिटते समय आपको कैसा अनुभव हो रहा था क्या इसको आप वाणी में बता सकते हैं मेरी नसे यहां पर फूल रही थी यहां पर आथ सुकड़ रही थी ऐसे फिक्स आप बता सकते हैं कि क्या हो रहा था मेरे शरीर में इन विषयों के लिए हमारे शास्त्रों में कई जगह यह बात कही गई कि भाई पूर्ण वो प्राप्ति का विषय है कई जगह पर जाकर के वो जो है बताने योग्य नहीं है बता बताया नहीं जा सकता भगवान के उस स्वरूप को हां वही भगवान अपना एक ऐसा स्वरूप धारण करते हैं जो वाणी का विषय हो जाता है जिनके बारे में चर्चा करके हम और आप उसका अनुगमन करके अनुसरण करके अनुकरण करके मोक्ष के प्राप्त के रास्ते पर जा सकते हैं अब इस बात का य लोग फायदा उठाते वेदों में भी अधूरा ज्ञान है या शास्त्रों में सनातन शास्त्र अधूरा ज्ञान है तो जब आप वेदों की
01:52:23:14 निंदा कर रहे हो अधूरा ज्ञान कहते हुए तो आपको फिर अपने ज्ञान को पूर्ण तो सिद्ध करना होगा और आपके पास तो वो वो ज्ञान नहीं है जो वेदों में दिया गया ऑलरेडी आप तो उसी में ही चूक रहे हो क्योंकि आपने ईश्वर को एक सातव आसमान पर बैठा हुआ बता दिया तो फिर आपका ईश्वर इतनी बार बाधित होगा इतनी बार खंडित होगा कि पूछो नहीं उसका ईश्वर फिर आप खुद कहोगे इनके जो अमित दास है अमित दास नहीं इनका जो वो है एक दिनेश दास नाम का व्यक्ति आया था उसने खुद बोला ईश्वर ने इस विषय में बताया ही नहीं है ई हमारे तत्वदर्शी संत ने इस बारे में बताया नहीं तो क्या हो गया अधूरा ज्ञान हो गया ना वेदों की निंदा तुमने क्यों की कि यह अधूरे हम पूर्ण है और पूर्ण कैसे हो हमें भी नहीं पता
01:53:15:20 गा और फिर भी जो आंसर इनके पास नहीं है वो आंसर हमारे आचार्य गण लेकर बैठे हुए हैं एक जगह जाकर के बस वो बात होती है कि जो उनका पर्थ स्वरूप है वह अनिर्वचनीय है उसको वचनों के माध्यम से नहीं बताया जा सकता व से प्राप्त किया जा सकता है कैसे प्राप्त होगा कि उनका जो वनीय रूप है उसको फॉलो करो उसकी पूजा करो उसकी भक्ति करो तो उनको प्राप्त करने से आपको उनका जो अनिर्वचनीय रूप है प्राप्त हो जाएगा जैसे भोजन चाहिए कैलोरी चाहिए हमको कैलोरी जिसके बारे में परिभाषा देना मुश्किल है कितनी ग्राम चाहिए कितना यह चाहिए मगर वो जिससे प्राप्त होती है उसके लिए हम व्यवहार करते हैं किससे प्राप्त होती है भोजन से मैं चार रोटी खाऊंगा मैं छह रोटी खाऊंगा मैं दाल पिऊंगा एक कटोरी दाल पिऊंगा यह सब क्या है वचनी जिसको परिभाषा की जा सकती है और इससे हमको जो अनिर्वचनीय चीज है व प्राप्त हो जाती कैलोरी हम कभी कैलोरी खरीदने जाते हैं क्या बाजार 50 ग्राम कैलोरी दे दो या कैलोरी दे दो तो यह बात है
01:54:29:24 जैसे भगवान का जो यह वाला रूप होता है व्यवहार में आ सकने वाला रूप इसकी पूजा करके व्यवहार में ना आ सकने वाले रूप की प्राप्ति होती है यह शास्त्रों का सार है अगर इससे ज्यादा अगर किसी को ज्ञान है तो व आए हो हमें वो ज्ञान बताए भाई कौन सा पूर्ण ज्ञान दे दिया जी आपने ज्ञान पढ़ तो लिया अभी किताबों से इनके वही है दूसरा कोई नहीं है अब यह अपनी यह जो 39 नंबर का पेज है ना इनका वो दिखाना जरा गरमा गीता की दिखाना
01:55:15:04 जरा हमारे बात सही क रहे ये बात सही कह रहे गरुण पुराण गरु पुराण तो लेकर चल रहे मगर इनको अपना जो इनके तत्वदर्शी है उनका ज्ञान नहीं पता है 39 में और थोड़ा नीचे चलिए नहीं नहीं नहीं ऊपर है ऊपर है यही 39 है क्याय 39
01:55:49:19 है नहीं ये तो 19 है 39 लाइए आ गया 39 जय श्री राम शिवांश जी जय श्री राम जय श्री राम छोटे भाई और सबसे पहले सभी को जय श्री राम और सबसे पहले मैं देवेंद्र शर्मा जी को भी जय श्री राम मेरा मैं बहुत-बहुत आपको धन्यवाद करना चाहूंगा मैंने भी आपकी वीडियोस देखी आपका जितना धन्यवाद किया जाए बहुत कम है बहुत-बहुत आपकी आपकी वजह से मैं बहुत सारे डाउट्स भी बहुत क्लियर हुए हैं मेरे जी जी बहुत अच्छा था और कोई नहीं था जब कोई नहीं था तब ये उतरे थे मैदान में जब कोई नहीं था संत रामपाल के मिथ्या प्रचार के विरुद्ध हां भैया ऊपर जाइए थोड़ा सा ऊपर जाइए मैं इनके बारे में बताने भी वाला था लेकिन मैं भूल गया आज अच्छा लगा इनको यहां प देख के बहुत बहुत देवेंद्र जी आपका धन्यवाद बहुत बहुत जय श्री राम देखिए श को बोलने वाले ब्रह्म ने कहा कि पूर्ण परमात्मा के विषय में कोई यह कहता है उसके बारे में और फिर आ जाइए यहां पर कि पूर्ण परमात्मा के बारे में मुझे पूरी जानकारी नहीं है
01:57:04:25 अब जितनी जानकारी इनके हिसाब से वेद में है कि कबीर ही भगवान है तो कबीर का कंधा कहां से चालू हो रहा है और कहां पर खत्म हो रहा है यह जानकारी वेद में है इनके ही हिसाब से मैं बोल रहा हूं अभी कबीर का सर कहां से शुरू हो रहा है और पैर कहां पर है यह जानकारी वेद में इनके हिसाब से जब कबीर नाम ले दिया इनके हिसाब से तो वेद में पर्याप्त जानक मतलब पर्याप्त जानकारी वेद में है फिर यह कह रहे हैं कि पूरी जानकारी नहीं है तो जब पूरी जानकारी नहीं है तो वोह जानकारी आपको देनी होगी उसके विषय में जो जानकारी वेद में नहीं है वो जानकारी जब आपसे पूरी लेने जाते हैं तो आपके एक भी भक्त के पास एक भी भगत के पास जवाब नहीं होता है कि कबीर ने जो बनाया है वह कहां से बनाया है वो दिखा दीजिए एक मिनट वो दिखा दीजिए उसमें वो लाइन दिखा दूं अब इनकी दो बात महाराज होते हैं ना आज अग क पात्री जी महाराज होते तो ये ये रामपाल या आर समाज सबकी बुनियाद हिला देते हैं खटिया खड़ी हो जाती इनकी अरे इनका अस्तित्व ही नहीं होता ये सारा जो ढो रहे हैं ना हम लोग ये आर्य समाज के प्रमा को ढो रहे हैं हम ये ये सब आ समाज लाया हूं जहा भगवान ने अपने को काल बोला है जी जी
01:58:20:21 मैं दिखाऊंगा कहां गया 39 वाला अभी जो था अरे नहीं वो वो वाला खोलिए वो जो अभी खुला था गरिमा गीता की मा भा से हमने गीता की गरिमा दिखा दी उससे इनको संतुष्टि नहीं हुई जी नहीं इनको कभी संतुष्टि नहीं होगी हम वो पब्लिक को होगी संतुष्टि हम अब अब अब अब बाबू राम यादव क्या करेंगे मैं बताऊंगा
01:58:55:16 नहीं इसको कहते हैं हा नीचे आइए थोड़ा इसमें इस पेज में नीचे आइए हा और नीचे और नीचे अब देखिए मैं वेद को ये ऊपर से पांचवी लाइन है लास्ट में मैं वेद ज्ञान देने वाला ब्रह्म भी नहीं जानता पूर्ण परमात्मा की पूरी जानकारी मैं वेद का ज्ञान देने वाला ब्रह्म भी नहीं जानता पहली बात अपने मन मन गंत लिखा है इन्होंने इसमें मगर अगर पूर्ण ये नहीं जानते हैं वेद तो क्या आप जानते हो अगर जानते हो तो हमसे आगे बात करो एक सवाल का जवाब नहीं दे पाओगे उन सवालों का जवाब हम आपको दे देंगे वेद में प्रमाण है ओ कहां गए वेदों में प्रमाण भगवान है आ जाओ भैया बात आती है कि अगर वेद में जो वेदों इनके अनुसार जो वेद को कह रहा है उसके पास परमात्मा का पूर्ण ज्ञान नहीं है तो इसके अनुसार अगर देखें तो जो कबीर शब्द वहां पर आया है वो कबीर जो है भगवान नहीं है क्यों नहीं है क्योंकि वो तो पूरा शरीर उसका है कबीर का कहां से चालू हो रहा है क्या
02:00:10:19 क्या कर सकता है सब कुछ है उसमें मगर तुम कह रहे हो कि वेदों को बोलने वाले को पूर्ण जानकारी नहीं है इसका मतलब उसके द्वारा भगवान के बारे में बात नहीं की गई जो करनी चाहिए थी तो जब नहीं की गई तो फिर य कबीर को भगवान कैसे माना जा रहा है उसके अनुसार पहली बात और दूसरी बात यदि उसमें अधूरी जानकारी है तो तुम आ जाओ और हमें बता दो कि तुम्हारे पास पूर्ण जानकारी क्या क्या है हा वो वा अंडर कवर्ड गुंडा है उसका चैनल आप देखते क्यों है मत देखा करिए उसको व्यू भी तो हम लोग देते हैं विशाल भाटिया जी बोले
02:00:53:24 विशाल भाटिया जी बोले नहीं तो स्ट्रीम को हम लोग बढ़ाते हैं और कल हमारी स्ट्रीम होगी आपका मैं नाम नहीं जानता हूं एक बार नाम बता दीजिए गीता वेद पुराण वाले भाई देवेंद्र शर्मा देवेंद्र शर्मा अच्छा हाका चैनल देखा था देवेंद्र शर्मा आपका चैनल है ना कुछ करके बहुत बढ़िया खंडन किया इनका जी मुझे लगा इन्होने आपके साथ मतलब कुछ आपको दबाने का प्रयास कुछ इस तरह का किया
02:01:34:20 है ऐसा कुछ नहीं तो देखिए य नहीं देखते जैसे कोई वेद का दो लाइन का श्लोक है उसका 12 ब लाइन का इन्होने अर्थ कर रखा है बारबार अर्थात अर्थात सब लगे तो वो अर्थ कहां रह जाता है वो तो अनर्थ हो गयाना य ये लोग सोचते हैं दो लाइन का अगर श्लोक है तो चार लाइन का अर्थ हो सकता है लेकिन इन्होने चार लाइन की 10 लाइन 12 लाइन इस तरीके से अर्थ कर रखा है यानी आठ लाइन उन्होंने अपनी तरफ से मिक्स कर दी है तो वो अर्थ कहां रह जाता है मैं यही कहूंगा कि हमें जो है डिफेंसिव बहुत हो गया खेलते खेलते अब अटैकिंग खेलना पड़े शास्त्र से अपने शास्त्रों से बारबार इनको जवाब प्रस्तुत करते हैं बारबार करते हैं कुछ नहीं होता उससे अब इनके शास्त्र सेन की नानी याद दिलाओ बिल्कुल बिल्कुल वीडियो बना रहे हैं अभी भी हैं वो अभी भी वीडियोस ही बनाए जा रहे हैं बंद कमरे में बा आप बताइए क्या प्रमाण लाए हैं आज प्रमाण बताने से पहले मैं एक चीज आप लोगों को बताना चाहूंगा जैसे शिवांश जी आप जो प्रमाण बता रहे हो उसके वीडियोस तो ये लोग बनाए रहे हैं अब जैसे देवेंद्र शर्मा जी ने बनाए तो उनके भी ऊपर वीडियोस बने मैंने जो आपकी स्ट्रीम में जो प्रमाण दिखाया हैं मेरे ऊपर भी वीडियोस वो लोग
02:02:49:22 बना सकते हैं काट पीट करके लेकिन अब उसका का कुछ फायदा नहीं होगा क्योंकि आप ही ने बोला है कि बंद के कमरे में बनाना और सामने आके चर्चा करना दोनों में बहुत अंतर होता है हो सकता है कि तुम्हारे लोगों के बीच में गए थे 1515 20 20 लोगों के बीच में तुम्हारी तरह नहीं नकली शूटिंग कर लेते हैं जो तो ये सही कहा आपने वो आपस में जगत भगत बन जाते हैं हां जगत भगत तो मिल गया किसी दिन तुम लोगों को तो पता चलेगा प्रार्थना करना कभी टकराव नहीं रस्ते रस्ते में वरना हम सर सिर को सामने पाओगे किसी दिन बिल्कुल बताइए विशाल जी बताइए तो बताया था तो सबसे पहले अब तीन मैंने मतलब 2000 सबसे पहले मेरे पास अगर कोई ग्रंथ आया तो मेरे पास राम चत मानस आई थी फिर मैंने 2021 से मैंने सब ग्रंथों को धीरे धीरे पढ़ना स्टार्ट किया और जब मैंने देवेंद्र शर्मा जी की मैंने वीडियो देखी तो उनसे भी प्रेरित होकर फिर मैं ग्रंथों से ला ला के इनका खंडन में दिखा पा रहा हूं जो मुझको पढ़ने को मिल रहा है तो अब जैसा कि आपको पता है मैंने पुराणों को पढ़ना भी स्टार्ट किया है तो 18 पुराणों में सबसे पहले ब्रह्म पुराण आता है फिर पदम पुराण आता है मैंने एक ब्रह्म पुराण से एक बार इनका खंडन किया था जिसमें भगवान विष्णु ने बताया
02:04:04:26 कि मेरा कभी अंत नहीं होता और मैं परमात्मा हूं एक बार मैंने आपको दिखाया था आपको याद होगा दूसरा आपने मुझसे अभी दो दिन पहले प्रमाण मांगा था कि आप प्रमाण दिखाए जहा भगवान विष्णु या श्री कृष्ण ने अपने को काल बोला हो आपने मुझको फोन भी किए थे उसके लिए एक प्रमाण मैंने श्रीमद् भागवत से दिखाया था 11 स्कंद से अब ये मैं लाया हूं ये पदम पुराण देखो गीता का है संक्षिप्त पुराण हैय अब ये कल मैं ये पढ़ा था पदम पुराण अभी मेरा इसका अध्ययन चल रहा है तो मुझे कल एक प्रमाण मिला जैसे एक कथा है वो तीन तीन जग उसका मा कंड ऋषि की कथा आती है उसका तीन तीन जग पर वर्णन आता है कि कुछ प्रलय काल आया तो एव जल में उनको भगवान के बाल रूप के दर्शन हुए य ब्रह्म पुराण श्रीमद भागवत और महाभारत में आपको य कथा तीन तीन जगह पर मिल जाएगी तो एक पुराण में भी मिलाय आपने सुना होगा पढ़ा होगा ये तो इसम क्या जो मारकंडे ऋषि थे ना तो जब एक बार कल्प का अंत हो गया था पूरी पृथ्वी जल में सब ब्रह्मांड ूब गया तो भगवान जो थे वो भगवान विष्णु अपने ए में वो शन कर रहे थे तो एक बाल रूप में उनको मखंड जी को दिखाई दिए तो मखंड जी को भगवान ने कहा कि मैं आपको एक चीज बताऊ अगर इनको यह प्रसंग मिलता है ना कि वो परमात्मा ही थे बालक रूप में वो बोलेंगे
02:05:20:01 कि ये कबीर जी थे जो मांड के सामने बाल रूप में आए थे अगर प पीछे से चैप्टर चला आ रहा होगा ना कौन थे क्या होंगे वो अपने मन से बोल दे जब तक हम में से कोई नहीं है तो कुछ भी बोल दे सामने होंगे तो उनको बोलेंगे भाई पीछे से पढ़ो कौन से मारकंडे ऋषि है पता चल जाएगा मांडने जब एक बालक को देखा वो तेज निकलता हुआ देखा तो उससे तो भगवान ने कहा बेटा मैं तुम्हारा पितामह आयु और प्रदान करने वाला पुराण पुरुष भगवान विष्णु य बोल रहे हैं ये क पर है पदम पुराण में पदम पुराण में कहां पर है सृष्टि खंड में है ये उसका देखो अध्याय नंबर तो नहीं लिखा है लेकिन मैं बता दे रहा हूं भगवान श्री नारायण की महिमा युगों का पचय प्रलय पेज नंबर क्या है ये मेरे पास पेज नंबर दिखा रहा हूं 146 ठीक है बताइए इसमें देखिए भगवान माक को अपना परिचय इस प्रकार दे रहे हैं भगवान विष्णु कह रहे ब्रह्मण मैं नारायण हूं जिनकी जिन्ह हजारों मस्तको और हजारों चरणों से युक्त बताया जाता है स शीष पूष सहस्त्र आक्ष सहस्त्र पाद वह विराट परमात्मा स्वरूप है मैं सूर्य के समान वर्ण वाला तेजो में पुरुष हूं ये आप देख सकते हैं एक सेकंड मेरा कैमरा पता नहीं कैसे उल्टा होगा आपको पता हो तो कुछ बता
02:06:35:06 देना ना ना वो रहने दीजिए आप बस पढ़िए है बस मैं तेजों मैं सूर्य के समान वण वाला तेजो में पुरुष हूं मैं देवताओं को हविष्य पहुंचाने वाला अग्नि हूं और मैं सात घोड़ों वाला सात घोड़ों के रथ वाला सूर्य हूं मैं ही इंद्र पद पर प्रतिष्ठित होने वाला इंद्र और ऋतुओ में परिवल हूं संपूर्ण प्राणी तथा समस्त देवता मेरे ही स्वरूप है मैं सर्पों में शेष ना पक्ष में गरु देखो यहां पर भी विभूतियों का वर्णन हो रहा है संपूर्ण भूतों का संघार करने वाला मैं सर्प में शेष और पक्षियों में गरुण हूं संपूर्ण भूतों का संहार करने वाला काल भी मुझे ही समझना चाहिए भगवान विष्णु बोल रहे हैं यण करने वाला काल मुझे ही समझना चाहिए बहुत बढ़िया य दूरा प्रमाण मैंने दे दिया आपको तीवा अध्याय है उसका सृष्ट खंड कावा अध्याय पास मेरे पास अभी पीछे जितने भी सार ग्रंथ आप देख रहे हो सब की सब गीता प्रस की है एक मेरे पास इसन की गीता और रामायण है गीता प्रस भी है गीता रामायण लेकिन और भी जितने ग्रंथ है सब गीता प्रस है पास और किसी प्रकाशक के नहीं है कौन के गीता का क्या काम है वहा पर अरे पहले मैंने पढ़ा था ना एक बार तब मेरे पास ने थे
02:07:50:08 नहीं आप देख सकते हो मेरे पीछे दिख रहे आपको गता है बहुत बढ़िया और प्रकाश का नहीं गता त लाना पड़ेगा जब शलोक भी आपको कई ऐसे ग्रंथ है जिनके शलोक नहीं मिलते नहीं नहीं बढ़िया ब ठीक है व मुझे लगता है चले गए कल हम लोग वेद पुराण वालों से संपर्क करेंगे और हम लोग लाइव आएंगे अगर वो हमें सुन रहे हो तो एक बार और आ जाए एक बार लाइन में अगर वह हमें सुन रहे हैं तो या तो हमें 7408 30169 पर संपर्क करें जिससे
02:08:42:20 कि आपस में कोऑर्डिनेट करके हम कल की लाइव को डिसाइड कर सके है ना तो तो आज की यही पर हम लोग विराम देंगे और कल फिर हम लोग जय श्री राम भाई जय श्री राम विशाल भाई जो आप बताए ना जो आप बताए सेम ये चीज तो भगवान श्री कृष्ण ने उसम श्रीमद् भागवत गीता में भी कहा हुआ है सूर्य हूं उसमें भी उन्होंने कहा हैय बो व बैठा था
02:09:23:00 उन्होने ऐसा है भगवत गीता पर ही तो क्लेम है इसलिए इनको उससे उससे सबूत दिखाया जा सकते है ऐसा नहीं है नहीं दिखा जा सकते मगर उस मानते नहीं है हां ये मानते नहीं है ये उसी को उसके उसके दूसरे जो रिलेटिवली जो शास्त्र है उससे दिखाए जा रहे अरे तो उसमें भी तो है हम कह मत से पुराण खोलोगे उसमें भी इन चीजों का जिक्र है मत्स पुराण में भी हमने देखा था अभी कल देख रहे थे इसके बाद और हमसे संपर्क कर लीजिए और कल की हम एक आपके साथ चर्चा रखते शिवांश आप अपना सेकंड वाला नंबर हमको सेंड कर देना तो
02:10:00:27 प्लीज नहीं नहीं वो एक और नंबर जिस पर हम आपसे कॉल पर बात किए थे एक बार ये नंबर तो हम बात हो जाएगी इस भी बात हो जाएगी ये प्रा में है हा बात हो जाएगी ठीक है कल हम लोग फिर 8 बजे आएंगे लाइव बोलिए विशाल आप अगर एंड कर रहे तो मेरे को भाव आ रहा है कि हम उससे करना चाहे हनुमान चालीसा से दो मिनट अगर आप ले तो अरे बिल्कुल बिल्कुल हनुमान
02:10:33:20 चालीसा वो कर सकते जय जय जय हनुमान गोसाई कृपा करो गुदव बस दो मिनट लगेगा चलो बो अरे कोई ना या दो मिनट की जग पा मिनट लग जाए कोई ना चलो नम हम सब पढ़ते हैं ताकि ऐसी सनातन मतलब बचा रहे सुरक्षित रखे प्रभु श्र गुरु निज मन मुकुर सुधारी वर्ण रघुवर विमल जस जोदा फल चारी बुद्धिहीन तन जानि के सुमरो पवन कुमार बल बुधि विद्या
02:11:12:22 दे जय हनुमान ज्ञान गुण सागर जय कप लो जागर रामदूत अतु बलमा अंज पुत्र महावीर विक्रम बजरंगी कुवार सुम के संगी कंचन ब विराज सु कानन कुंडल कु केसा हाथ बज और ा बरा काधे मने शकर सुवन केसरी नंदन तेज प्रताप महा जगवन विद्यावान राम का प्रभु च रामलखन सतावन
02:11:49:01 बसिया रूप रावा भीम रूप ध अस रामचंद्र जी लाय संजीवन लखन जी आए श्री रघुवीर ह की बहुत बई तुवे श्रीपति कल जते कभी कोविद ग सके कहा तुम उपकार सु
02:12:23:07 मिला तुम मत्र ता मरल जान प्रभु मुदिका मे दुर्गम का जगत के जते सुगम अनुग्रह तुमते राम द्वारे तुम रखवार हो सुख ल तुम्हारी शरणा तुम रक्षक का भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे ना रोग हरेरा हट से हनुमान छुवे
02:13:07:00 मनम तपस्वी राजा न के का सकल तुम साजा और मनोरथ जो कोई ला सताप तुम्हारा है प्रगत उजियारा साधु संत के तुम रखवा अध के दाता अन जानकी माता राम रसाय तुमरे पासा सदा रघुपति के तुमरे भजन राम को पावे जन्म जनम के दुख बसरा अंत काल रघुवर और देवता
02:13:42:01 च संकट कटे मिटे सब हनुमत बलरा जय जय जय हनुमान कपा करो गुरुदेव कीना जो सतवार पाठ कर कोई कोई छ बंद महा सार पा करई छ ब महा सुख होई हनुमान ई गरी तुलसीदास हरा की जय नाथरा पवन संक मंगल म रू राम लखन सीता स हदय बसो सु सियावर सियावर रामचंद्र की जय पवन सुत हनुमान की जय जय नम पार्वती पते हर हर महादव तो भाई किसी को किसी भी प्रकार की चर्चा करनी हो वो आ सकता है वैचारिक मतभेद के निमित्त हमारा नंबर है 7408 30169 नामा स्त्र में जुड़कर के नाम जप करना चाहते हैं जो वो संपर्क कर सकते हैं और
02:14:52:08 जो क्लासेस जवाइन करना चाहते हैं वह इस पर व कर सकते हैं जो धर्म रक्षा अभियान में भाग लेना चाहते हैं वह इसमें ट कर सकते हैं और एक और कोई चीज थ भूल गया है ये ना मास्त्र हमको समझाइए जरा आपके जो प्रश्न होते हैं वो सबसे पहले गोवर्धन मट के चैनल पर आप देख सकते हैं जाकर के अपना प्रश्न टाइप करें और आगे पूरी शंकराचार्य लिख द तो गन मिट के चैनल पर आपको जो है आपके प्रश्नों का उत्तर प्राप्त हो जाएगा इसके अलावा ना होने पर ना मिलने पर आपसे रिलेटेड प्रश्न आप वो क्वेश्चन लिख कर के हमें दे सकते हैं टेलीग्राम चैनल पर एक ग्रुप है प्रश्न उत्तरी वाला उसम उसका लिंक आपको यहां पर वीडियो के लिंक डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा विधि निषेध इत्यादि के संबंध में आचार्य राम शंकर शुकल जी का चैनल है उसको आप देख सकते फॉलो कर सकते हैं और गुरुदेव से दीक्षा लेने के लिए गुरुदेव कहां पर है कहां नहीं है इसके लिए गोवर्धन मठ पप में आदित्य वाहिनी से जुड़ने के लिए गोवर्धन मठ पप है उसको इंस्टॉल करके उसमें अपने आपको रजिस्टर्ड करवा ले गोवर्धन मठ की जो प है उसम आपको सारा गुरुदेव का प्रवास कहां कहा पर हो रहा है सब कुछ मिल जाएगा और उनका व चैनल
02:16:07:14 है वहां पर भी आपको मिल जाएगा जी विशाल ये नास्त्र के बारे में थोड़ा जानना चाहते थे ना मास्त्र में दिन में पांच बार भगवान के भगवन नाम का जप होता है 1515 मिनट के लिए तो उसमें एक एप्लीकेशन जूम या जो मीटिंग गल मीट इत्यादि एप्लीकेशन के जरिए सब लोग एकत्रित हो जाते 15 मिनट के लिए नाम जप करते हैं ऐसे करके दिन भर में पांच बार करते हैं तो शास्त्रोक्त यह है कि हमारा दिन भर में सवा घंटे की भक्ति हो जानी चाहिए भगवान की नित्य प्रति तो सवा घंटे की भक्ति पूरी करवाई जा रही है और उसके बहुत ही पॉजिटिव रुझान भी आ रहे हैं जैसे कुछ लोग थे जिन्होंने ऐसी बात की थी कि उनके पास आजीवक पार्जन का माध्यम नहीं था और वह लगातार नाम जप कर रहे हमारे साथ हमारे ही संज्ञान में हमसे किसी ने संपर्क किया कि आपके जो भाई है जिनके पास अभी आजी को पार्जन का माध्यम नहीं है तो उन्होंने संपर्क किया मदद करने के लिए एक बहन थी जो इस बात से दुखी थी कि मेरे घर वाले मुझे पूजा नहीं करने देते हैं मेरे पूरे घर वाले रामपाल दास को फॉलो करने लगे हैं और भगवान की पूजा नहीं करने देते हैं उसकी भी न्यूज आई है वो भी लगातार 40 दिन ने वाले उनको नाम जप
02:17:22:21 करते हुए उसकी भी न्यूज आई कि उसके घर में उनकी जो माता जी है उन्होंने रामपाल को मानना छोड़ दिया है और अब वो भगवान की जो जो ये परंपरा प्राप्त जो सनातन वैद का हिंदू जो सिद्धांत है उनकी ओर वो प्रभावित हो चुकी है स्वित हो चुकी पुन वापस एक तरी से घर वापसी उनकी एक तरह से आस्तिक हो गए हैं नास्तिक से अच्छ एक एक और क्वेश्चन था मेरा यार वो काफी परेशान है थोड़ा हमको बताइए आप लोग हम किसी मतलब कोई हमारे तो अभी तक पर्टिकुलर किसी को हम गुरु बना नहीं पाए हैं कोई हमारे आसपास ऐसा मिला नहीं व्यक्ति और हम कुछ मंत्र ऐसे हैं जो जैसे कि पीतांबरा माता का जो 3 अक्षरी मंत्र है इस तरह के मंत्र का जाप हम शुरू कर दिए काफी नियर अबाउट हम समझ लीजिए कि मोर देन 36000 हम जाप कर भी चुके हैं तो क्या वो करें देखिए मंत्र और नाम भी गुरु मुख से ही सुन कर के करना चाहिए अब उस समय तो मान लीजिए मिला नहीं कोई हमें और हमने शुरू कर दिया तो कोई कर दिया तो कोई बात नहीं मगर जितना जल्दी हो सके किसी गुरु मुख से सुन लीजिए यह शास्त्र कहते हैं हां तो वही अब दिक्कत यह है ना कि हम मतलब एक दिन जैसे
02:18:37:24 ई आप जैसे लोग थे किसी का वीडियो हम देखे हैं और देखने के बाद हमने जो है उसको ही सर्च किया फिर हमारे यहां काशी विश्वनाथ मंदिर जो है भगवान शिव का वहां गए तो वहां एक कचौड़ी गली करके मार्केट है वहां पर सारे धार्मिक पुस्तकें उपलब्ध है तो वहां से हम बगलामुखी साधना लेकर आए उसको बका मतलब जिस तरीके से उसमें था हमने सापा साप विमोचन किया दिंग न्यास अंगन यास यह सारी चीजों को करने के बाद जो है हम उस मंत्र का सवा लाख का संकल्प भी ले चुके हैं और प्रतिदिन कर रहे हैं लेकिन अभी तक हमने उसकी दीक्षा नहीं ली किसी से यही हमको चिंता है थ दीक्षा लिए बिना मंत्र कार्य नहीं करते हैं मंत्र का प्रभाव ी हैब दीक्षा हो जी विशाल जी बोले जाते जाते एक चीज स चाहूंगा ये बात देवेंद्र शर्मा जी भी जानते हैं अ गीता प्रस का जो ग्रंथ दिखाते हैं अब हमारे पास तो संस्कृत के होते हैं बाय संस्कृत क्या होते हैं इनके पास पता नहीं लेकिन हा गीता प्रस की अग कोई एक गीता होती है ना इनके पास तो यही होती है जैसे आप देख सकते हैं ये संधि विच्छेद वाली गीता दिख रही है आप लोगों को जय दयाल लेकिन इसमें भी इन्होने काटा पीटी कर रखी है ज इनके मतलब का अर्थ अरे उसमें भी कटपट है उसमें
02:19:52:26 उन्होंने एक दो वीडियो हम आपको कहोगे तो हम सेंड कर देंगे स्क्रीन रिकॉर्डिंग बना के उसमें ये स्पष्ट करना कि देखो यहां पर इन्होंने ऐसे कर दिया ऐसे होना चाहिए था यह बोलते हैं उस बोलते सभी को जय श्री राम समय देने के लिए हमको जरा बताइए यार कि ये मतलब हमको पीतांबरी माता का जो 3 अक्षरी मंत्र है जो नंबर है ना उस वो जो हमारा टेलीग्राम चैनल है वहां पर प्रश्नोत्तरी वाला ग्रुप है वहां पर आप कर दीजिए से आप पूछ
02:20:28:22 लीज और आपको ेर सारा सन जी और क आप हमसे संपर्क कर लीजिएगा ठीक है बिल्कुल बिल्कुल जय श्री राम जय श्री रामम जय माता जय माता दी आपको कुछ कहना है चौहान जी गए चलिए ठीक है जय श्री राम [संगीत]
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तत्वदर्शी पर सनसनी खुलासा #rampaljimaharaj #kabir #exposed
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