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00:00:01:23 [संगीत] जय श्री राम सभी को काफी देर वेट करा दिया आज आधा घंटा हो गया ऑलमोस्ट कारण कार्य ज्यादा कार्य की अधिकता समय का भाव और अभी जस्ट आने से पहले ही भी कुछ चीजें जानने को मिली तो अभी हम लोग ना इनकी गरिमा गीता की का अध्ययन कर रहे थे उसका नाम जीजी के आप कह सकते शॉर्ट

00:00:47:12 में मैं पंक्चुअल कभी नहीं बना पंक्चुअल देखिए वह एक्सपेक्टेड टाइम देते हैं कि 8:30 बजे आएंगे मगर अब आप ही का भाई हूं आप के बीच का व्यक्ति हूं बहुत कोशिश करता हूं अरे यार सभी लोग लेट लेट के लिए अच्छा आप पूरा प्रयास करेंगे कि समय पर आ जाए मगर बहुत जरूरी चीजें लाए आपको अंत तक इस बात का जो वो है ना अफसोस नहीं होगा कि मैं लेट क्यों आया यह मेरा प्रॉमिस है ठीक है यह वचन है कि आप लोग अगर आज की जानकारियों को देखेंगे तो अंत में कहेंगे कि ठीक है अगर यही मिलना है लेट आने से तो लेट ही सही

00:01:35:25 हम जी तो हम लोग अध्ययन कर रहे हैं इनकी जो गरिमा गीता की है वह अपने आप में इतना उलझा देने वाली हालांकि इनके सारे ही ग्रंथ जो है वह ऐसे ही हैं मगर अगर आप इन ग्रंथों को इनके ग्रंथों को पकड़ लेंगे विशेष तौर जो मैंने अध्ययन किया गरिमा गीता की तो आपको इनकी बातों का प्रतिकार करने के लिए कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी उसी से मिल जाएगा सब कुछ मिल जाएगा आपको गरिमा गीता की तो मैंने कहा था कि हम काल के बारे में जरा ठीक से बात करेंगे है ना आज हम लोग काल के बारे में बात करने वाले हैं

00:02:27:08 कि काल के लिए इनकी गीता में कहा क्या गया सबसे पहले तो हम यह समझ ले कि जो मैंने कल एक कंक्लूजन दिया था आपको कि इनका य जो इन्होंने सटर घट किया है ना शास्त्रों में जो इन्होंने खिचड़ी पकाई है हा यह ग्रंथ है गरिमा गीता की तो जो इन्होंने शास्त्रों में जोय खिचड़ी पकाई है ना उसमें कुछ ऐसा किया है कि यदि आप कुछ पढ़ने जाएंगे ना तो आपको लगेगा कि चीज तो गलत लिखी है अब उस चीज के लिए आप दूसरी जगह इन्होने कुछ दिया होगा रेफरेंस के यहां पर चेक करें अब वहां चक चेक करने जब जाएंगे तो वहां एक दूसरी चीज गलत मिल जाएगी आप वहां जब एक दूसरी चीज गलत मिल जाएगी तो वहां भी गलत चीज का रेफरेंस मिला मिल रहा होगा कि यहां से यहां देखिए तो जब वहां देखने जाएंगे तो वहां एक और तीसरी चीज आपको गलत मिल जाएगी हर पृष्ठ प आपको असहनीय पीड़ा होने वाली है अगर आपने इस बुक को पढ़ा तो जो भी आपके पास जो सर दर्द की दवाइयां हो कुछ भी हो औषधियां हो उसको लेके आसपास रख के और चक्कर आने की स्थिति में अपने किसी प्रियजन को आसपास में खड़ा करके मैं

00:03:42:12 अब ये इनकी जो जीजी के नाम की जो पुस्तक है उसको पढ़ने जा रहा हूं और तब पढ़िए वरना आपको जो क्षति पहुंच सकती है है ना बहुत बहुत मनगण बातें है तो सबसे पहले बात करते हैं कि आज दो तीन चीजों पर बात करेंगे एक तो य मुख्य विषय तो यह है कि काल काल जो है वह अपना जो विराट रूप वो वाला जो काल साकार है कि निराकार है और उसकी उत्पत्ति और क्या है यह वेदों को क्यों मानते हैं वेदों की बात क्यों करते हैं जैसे कि कल हमने एक कंक्लूजन दिया वेदों की बात इसलिए करते हैं कि वेदों के नाम पर वेदों का अर्थ करते समय गीता का अर्थ करते समय यह आपको यह बता सके कि गीता को क्यों नहीं पढ़ना चाहिए गीता वेद को क्यों नहीं पढ़ना चाहिए क्यों नहीं मानना चाहिए

00:04:46:26 और उसमें वर्णित जो पात्र है जो घटनाए हैं उनका गलत मतलब बुरा अर्थ कैसे है वो क्यों घटना है वो आपके लिए जो है ठीक नहीं है और जो जो उसके पात्र है जो उसमें जो भगवत रूप भगवत लीलाए दी गई है वो सब किस प्रकार से आपके लिए गलत है यह बताने के लिए य लोग वेद और गीता की बात करते हैं वस्तुतः इन्होंने जगह जगह कह दिया है कि जो वेदों की भक्ति है वेदों में जो भक्ति बताई गई है भक्ति का पथ बताया गया है वो जो है मुक्ति के लिए नहीं है वेदों में बताई गई जो पूजा पद्धति है वो मुक्ति के लिए नहीं है मैं आपको बता देता हूं कहां-कहां लिखा है इन्होंने 39 नंबर का पेज निकालिए 39 नहीं 90 हां 39 निकाली 39 गरिमा गीता

00:05:47:03 की जब मैं पेज नंबर बोलूंगा ना तो उसका मतलब है कि वो पीडीएफ के अंदर का जो पेज नंबर है वह निकालना है और जब मैं आपको बोलू कि कंप्यूटर पेज नंबर तो आपकी स्क्रीन का जो कंप्यूटर का नंबर दिया होता है उसका उसके अनुसार फिर कार्य करिएगा तो अभी आप जो है 39 नंबर का पेज निकाले थोड़ा बड़ा कर दीजिए तो मैं देख

00:06:24:15 सकूंगा जी जी बस बस हा 39 32 निकला और आगे चलिए तेजी से च चार पाच पेज बस बस आ गया आ गया आ गया आय इसमें थर्ड पैराग्राफ है कि मुझ ब्रह्म का उच्चारण करके सुमर करके करने का केवल एक मा यह प्रणव अक्षर है जो

00:07:02:09 इसका जाप अंतिम स्वास तक कर्म करते करते भी करेगा वह मेरी वाली परम गति को

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00:07:07:12 प्राप्त होगा ठीक है अब इनकी जो परम गति है वह है क्या इनकी परम गति को भी देख लेते हैं 95 नंबर का पेज देखिए य 7.18 फोथ पैरा इसका मुझे पेज नंबर नहीं पता है 7.1 अध्याय की बात हो रही है कहीं पर वहां जाना है लगभग मेरे ख्याल से काफी आगे है व बस एक यही है जिसका मुझे पेज नहीं पता है

00:07:52:01 7.1 मतलब इसमें जहां पर 7.1 की बात हो रही हो सातवे अध्याय पर पहुंचना है तो 7.18 में इन्होंने कहा है कि जो ब्रह्म की जो यह नहीं है 7.1 हां अध्याय 7 18 में स्वयं गीता जी को बोलने वाला ब्रह्म यह कह रहा है य नंबर नोट कर लो

00:08:30:08 यह कह रहा है कि बोलने वाला ब्रह्म ने कहा है कि यह ज्ञानी आत्मा उदार है जिनको वेद पढ़कर ज्ञान तो हो गया कि एक प्रभु की भक्ति से पूर्ण मोक्ष होगा परंतु तत्वदर्शी नहीं नहीं य य एक्जेक्टली वोह वाली बात नहीं है आप 7.18 जहा अध्याय हो वहां जाइए अध्याय सा 18 में अति श्रेष्ठ अति देखिए यहां अपनी भक्ति को इसने कहा अनुत्तम अनुत्तम का अर्थ ये लेते हैं अश्र पूर्ण मोक्ष नहीं होता है अश्र ठ और और बता दूं कि वोह अपनी भक्ति के नाम पर फिर भी आप एक बार वो वहां बहुत अच्छी बात लिखी आप आप वहां चले जाइए वहां पर आप जाइए बहुत बहुत सही बात है हम सातवें अध्याय में

00:09:27:02 पहुंच सातवा अध्याय आ गया बारवा आ गया पीछे चलिए तो भाई यहां पर जो है पहली बात तो यह है कि अगर हम लोग वेदों को फॉलो करते हैं वेदों के अनुसार जीवन को जीते हैं तो हमें उससे पता है क्या मिलेगा आपको हमें उस से ब्रह्म की प्राप्ति होगी और ब्रह्म की प्राप्ति से हमें क्या मिलेगा वह हम देख लेते हैं यह सात पॉइंट 18 की बात हो रही है यहां पर सातवा अध्याय चल रहा है बस बस ज्यादा पीछे ना जाए इसमें इसने ये कहा है कि जो मेरी भक्ति करते हैं वह कुछ समय के लिए अमर हो जाते हैं कुछ समय के लिए अमर अब ये कुछ समय के लिए अमर का अर्थ क्या होता है वो इन्हीं से पूछिए अमर का अर्थ होता है जो कभी नहीं मरता जो मर नहीं सकता ऊपर जाइए थोड़ा

00:10:42:16 पेज नंबर नहीं नोट किया मैंने इसका कुछ समय तक अमर हो जाता है फोर्थ पहरा में है अनुत्तम का अर्थ अ श्रेष्ठ है जबकि समास में अनुत्तम का अर्थ अति उत्तम होता है जिससे उत्तम कोई और ना हो के विषय में समास में अनुत्तम का अर्थ भी अति उत्तम होता है तो यह तो यहां दूसरी बात चल रही है खैर मगर कुल मिलाकर के इन्होंने एंड में यहां पर यह कह दिया कि वह जो परम गति है वह मेरी वाली परम गति है और मेरी वाली परम गति क्या है कि वह कुछ समय तक अमर हो जाता है है ना कुछ समय तक अमर हो जाता है एक बार 35 नंबर के पेज पर दोबारा जाइए 35 नंबर का पेज था

00:11:33:24 जो जो सबसे पहले खोला था कुछ समय के लिए अमर यह देख रहे इनका मन गणतहीन है उनका अर्थ ही बदल दिया वही वाली बात कि बाढ़ का पानी जो है खतरे के निशान तक आ गया तो क्या किया जाए तो भैया एक काम करो खतरे का निशान दो इंच और ऊपर कर दो तो अमर शब्द हमारे उसमें टांग अड़ा रहा है तो क्या करें एक काम करो अमर का अर्थ कर दो कुछ समय के लिए अमर तो हा इसमें जरा सिक्सथ पैराग्राफ पर जाइए जरा इसमें सिक्सथ पैराग्राफ है क्या मैंने कहीं और से नोट कर लिया है वो सेकंड हो गया थर्ड हो गया और थर्ड के बाद और नीचे जाइए हां और नीचे चणक ऋषि ये हो गया एक एक मिनट जैसे बहुत जन्मों के उपरांत जैसे चणक ऋषि दूसरा रूप लेता है हा यहां कहीं इन्होने लाइन लिखी है वो आगे कहीं पर बता दिया जाएगा ठीक है तो वो कुछ समय के लिए अमर होता है अच्छा दूसरी एक बात और है

00:12:49:18 कि जो लोग ब्रह्म की पूजा करते हैं वो अंततोगत्वा उसका भोजन बनते हैं उसकी खुराक बनते हैं यह भी एक बात है मतलब वेद जो आपको जो ज्ञान दे रहे हैं भक्ति करने का वो ज्ञान जो है अंततोगत्वा आप उसकी खुराक बनोगे यह कहां पर लिखा है यह भी कहीं पर लिखा है मैं बता देता हूं कि काल के आप आप जो है खुराक बन जाओगे

00:13:33:19 गीता ने कृष्ण अगर आप उसकी भक्ति करोगे ब्रह्म की तो ब्रह्म को आपको खाएगा एक दिन ब्रह्म उसकी भक्ति करने का यही फायदा है यह भी इनकी इसी पुस्तक में लिखा हुआ है कि ब्रह्म की ब्रह्म की पूजा करने का जो फल है एक तो इतना सारा मैटर हो गया था ना इकट्ठा कर कर के इसलिए देर लग रही है है ना तो कुल मिलाकर के यह हमें वेद और गीता का सम्मान करने का नाटक करते हुए यह बताते हैं पवित्र ग्रंथ सद ग्रंथ बोल बोल के यह बताते हैं कि अगर तुम इन पवित्र ग्रंथों को सद ग्रंथों के आधार पर अपने जीवन को जियोगे अगर आगे बढ़ो ग तो तुमको एक तो ब्रह्म रूपी जो ब्रह्म नाम का जो काल नाम का राक्षस है घटिया यह घटिया भी कहां लिखा है वह भी देख लो घटिया कहां लिखा है अनुत्तम घटिया 10079 नंबर का पेज निकालिए

00:14:55:21 179 179 एक और आ हा इसमें है फिफ्थ पैरा हां को अव्यक्त बताया है उपरोक्त मूर्खों का विवरण प्राणी मुझे प्राणियों का प्रभु मानते हैं मैं महेश्वर नहीं हूं महेश्वर तो पूर्ण परमात्मा है इसका फिथ पैराग्राफ एक मिनट ऊपर से जरा गिनने दीजिए कौन सा है वीडियो क्लियर नहीं है फिथ पैराग्राफ में यह जो है यहां पर काल को घटिया कहा गया है तत्व ज्ञान से के अभाव से मूर्ख प्राणी मुझे सब उसका प्रभु मानते हैं और मैं महेश्वर नहीं हूं महेश्वर तो पूर्ण परमात्मा है जो गीता अध्याय मुझे शरीर धारण करने वाला समझ रहा है इसी और थोड़ा सा नीचे जाइए थोड़ा सा नीचे इसी का प्रमाण बस बस बस बस बस जाइए तो उपरोक्त मुहूर्तो का विवरण निम्न श्लोकों में भी दिया गया है समझ मैं कृष्ण नहीं हूं उसी का प्रमाण गीता में यदि कोई तत्

00:16:11:07 पूर्ण परमात्मा को तथा कृष्ण जी ने बोला है तथा काल महेश्वर ने नहीं वमू नहीं मानते तो यहां पर इसको जो है इसने खुद कहा है कि यह घटिया है तो कुल मिलाकर के वेदों के मार्ग का अनुसरण करते हुए आप घटिया घटिया काल ब्रह्म और फिर उसको भगवान भी कह देते हैं उसकी आप भक्ति करते हैं इनके अनुसार रामपाल एंड कंपनी के अनुसार और वो भक्ति करके आपको देखो यह आ गया ब्रह्म काल उपासक उसी का आहार तो ब्रह्म की भक्ति करके आपको मिलने क्या वाला है कि आपको यह ब्रह्म जो है खाएगा काल यह आपको मिलेगा तो मतलब यह वेद वेद के नाम पर आपको वेद विरोधी बनाया जा रहा है समझ में आ रहा है थोड़ा बहुत हिंदुओ कि हम लोग भक्ति बताते हैं सद भक्ति बताते हैं मगर वेदों की भक्ति वेदों की भक्ति कहां तक है ब्रह्म तक है वेदों की भक्ति मुक्ति नहीं है वेदों की भक्ति ब्रह्म तक है ब्रह्म कौन है घटिया और उसके बाद ब्रह्म और उसकी भक्ति करने पर आपको मिलेगा क्या उसकी भक्ति करने पर आपको मिलेगा कि वह आपको खाएगा मुक्ति तो दूर की बात है वह आपको खाएगा यह लिखा है य ठीक है अच्छा अब एक

00:17:26:07 बात समझ में आती है किय लोग एक तरफ कहते हैं कि वेद विरु वेद विरुद्ध भक्ति नहीं होनी चाहिए मगर वेद विरुद्ध वेद विरुद्ध भक्ति नहीं होनी चाहिए अच्छा एक बात और है इनके मन में कितना सम्मान है हमारे वेदों के लिए वो भी देख लीजिए 39 नंबर पेज पर दोबारा जाइए 39 नंबर पेज पे जगह जगह जहां पर भी वो सात 24 वाले श्लोक को भगवत गीता सात 24 वाले श्लोक को उपयोग करते हुए उसको आधार बनाते हुए जहां भी बात की है ना इन्होंने वहां पर काल को घटिया भाव वाला घटिया मेरा अश्र देखिए सात श्लोक 18 में अति अश्र अर्थात अति व्यर्थ बताया नीचे करिए जरा नीचे करिए हल्का सा नीचे करिए नीचे नहीं मतलब ऊपर जाइए वापस वापस ऊपर जाइए य बड़ी प्रॉब्लम है इसमें इन्होने ये देखिए यह जो ऊपर से रुक जाइए

00:18:31:09 टॉप से जरा गिनना चालू करिए कौन सा पैराग्राफ है अध्याय ये लिखा हुआ है अध्याय आ श्लोक सात में कहा है

00:18:38:08 कि हर समय मेरा स्मरण कर कर तथा युद्ध भी कर इस प्रकार मेरे आदेश का पालन करते हुए अर्थात सांसारिक कर्म करते हुए साधना करते हुए मुझे ही प्राप्त होगा भले ही अपनी परम गति को

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00:18:51:06 गीता अध्याय सात श्लोक 18 में अति अश्र अति घटिया अर्थात अति व्यर्थ बताया और यहां पर इन लोगों ने घटिया शब्द का प्रॉपर उपयोग किया है तो वेदों का अनुसरण करके आपको मुक्ति नहीं मिलने वाली है वेदों का अनुसरण ब्रह्म प्राप्ति तक है ब्रह्म की प्राप्ति जो है ब्रह्म की प्राप्ति से आपको क्या मिलेगा ब्रह्म की प्राप्ति घटिया है क्योंकि ब्रह्म घटिया है और इनके अनुसार अगर आपने ब्रह्म को प्राप्त कर भी लिया तो वह आपको खाएगा अब एक एक वेदों को ना मानने के संबंध में एक और प्रूफ ले लीजिए 39 नंबर पेज पर

00:19:32:07 जाइए यही है क्या हा तो इसमें 39 नंबर जो पेज है हां इसमें नीचे आइए एक बड़ा सा पैराग्राफ होगा हां यही वाला यही है यही है बस बस पवित्र वेदों को बोलने वाला कौन है ब्रह्म वह जो राक्षस जैसा एक एंटिटी है वही पवित्र वेदों को बोलने वाला है पहली बात तो यह हो गई अब पवित्र वेदों को बोलने वाला ब्रह्म है और आगे इसने कहा है कि पूर्ण परमात्मा कैसा है वह कैसे प्रकट होता है पूर्ण परमात्मा की पूरी जानकारी मुझे नहीं पता है मैं वेद ज्ञान देने वाला ब्रह्म भी नहीं जानता क्या है अज्ञानी यह जो वेद कहने वाला है यह वेदों को कितना मानते हैं यह देखिए मैं वेद ज्ञान देने वाला ब्रह्म भी नहीं जानता कि पूर्ण परमात्मा कैसा है यानी कि वेद से भी अलग ज्ञान

00:20:47:13 है इनको वेद से अलग ज्ञान है अय एक जगह लिखते कि वेद विरुद्ध ज्ञान जो है स्वीकार नहीं जो वेद से मैच नहीं खाएगा वो स्वीकार नहीं मगर यहां पर कह रहे हैं कि वेद में तो पूर्ण ज्ञान है ही नहीं है ना अच्छा अब इनकी ये बात एक जगह और से भी कट जाती है इनका देखिए दोगला चरित्र दिखाऊं मैं आपको कितना दोगलापन है हद है दोगले पन की कि वेद का ज्ञान वेद में क्या है मंत्र और मंत्र का ज्ञान जो है किसने दिया है अब इन्होंने कह दिया कि वेदों को कहने वाला मूर्ख है ये 39 में नंबर पर कह दिया इन्होंने मगर 40 में पर यह मान लिया कि वेदों का ज्ञान देने वाला कौन है कबीर अब इनसे कोई ये पूछो कि कबीर मूर्ख है अज्ञानी है वो पूर्ण परमात्मा है कि नहीं है एक जगह कह रहे कि ब्रह्म है वेदों का ज्ञान देने वाला हर जगह यही कहा है मगर क्योंकि भाई वो होता है ना छिपाए कैसे तो छिपा तो ना छिपा पाए तो यहां देखिए पूर्ण परमात्मा ने कल्प के प्रारंभ में यज्ञों अब यज्ञों का ज्ञान हम सभी जानते हैं किसका ज्ञान है वेदों का ज्ञान नहीं तो इनके कौन से कबीर सागर में कौन से यज्ञ

00:22:02:15 का विधान है बता दीजिए जरा यज्ञों का ज्ञान किसने दिया पूर्ण परमात्मा ने कबीर ने दिया अब इनकी कौन सी बात मानोगे क्या कोई काल घुस गया था क्या गरमा गीता की लिखते समय इसी से दिमाग पंचर होता है अब देखिए एक पेज पहले लिख रहे हैं कि ब्रह्म ने दिया है ज्ञान ज्ञान काल ने दिया और यहां लिख रहे हैं

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→ Used in: A · Live गीता के नाम पर रामपाल के बोलबचन अध्याय 3 Ep-4 #satlokashram at 40:36 ↗

00:22:29:06 कि पूर्ण परमात्मा ने कल्प के प्रारंभ में यज्ञों यज्ञों यानी धार्मिक अनुष्ठानों का ज्ञान तथा प्रजा को उत्पन्न

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00:22:36:03 करने के उससे कहा था ठीक है तो यज्ञ का ज्ञान देने वाला कौन हुआ यज्ञों का ज्ञान देने वाला खुद कबीर हुआ और यज्ञों से मुक्ति मिलती नहीं है ऊपर जाइए जरा इसी में ऊपर लिखा है यज्ञों से मुक्ति नहीं मिलती है यज्ञ कर्मों से मुक्ति नहीं मिलती और ऊपर जाइए और ऊपर जाइए यही तो था 39 में ही लिखा है ना नीचे 39 और ऊपर जाइए हां ये यज्ञों से मुक्ति मिलती नहीं है मगर यज्ञ जो है काल ब्रह्म कहते हैं मगर अपनी बात को पचाने के लिए उसमें सटर घोट करने के लिए फिर यज्ञों को कहने वाला यज्ञों को कहने वाला वह भी हो जाता है कबीर पूर्ण पूर्ण परमेश्वर भी हो जाता है वही वाली बात के कोई कंक्लूजन अगर कह दो तो पकड़ हो जाएगी तो सब बातें कह दो भा स्कोन के तरीके से सब बातें कहो ठीक है अच्छा अब एक बात और है एक लड़का कल चिल्लाया था कि आज तक मुक्ति किसको मिली है इन्होंने कहा वेदों का ज्ञान वेदों का ज्ञान जो है वेदों के ज्ञान में पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान नहीं है पूर्ण

00:23:51:06 ब्रह्म का ज्ञान क्यों नहीं है क्योंकि अभी हमने देखा 39 नंबर के पेज पर ऊ परर जाइए थोड़ा सा थोड़ा सा इसी में हां बस ब ब बस बस ज्यादा ऊपर नहीं नीचे जाइए नीचे जाइए नीचे जाइए हां पवित्र वेदों को बोलने वाला और और नीचे जाइए बस तो वास्तव में पूर्ण परमात्मा कैसा है यह है वह है यह सब मैं वेद ज्ञान देने वाला ब्रह्म भी नहीं जानता ठीक है तो ब्रह्म किसी अज्ञानी ने वो वेद किसी अज्ञानी ने बोले वेदों के द्वारा ब्रह्म की पूजा होती है जो ब्रह्म घटिया है और उसकी पूजा करके अंततोगत्वा आपको क्या प्राप्त होता है कि वह आपको खाता है और जो यज्ञ है इनसे भी मुक्ति के लिए उपयोगी नहीं है यज्ञ तो ऐसे ही है वो मुक्ति में कोई काम नहीं है तो कुल मिलाकर इनके अकॉर्डिंग धर्मशास्त्र भी सिद्ध नहीं होते जो यज्ञ है यज्ञों को बताने वाले मंत्र इत्यादि है यह धर्मशास्त्र भी सिद्ध नहीं होते यानी वेद जो है धर्मशास्त्र नहीं है क्यों क्योंकि धर्म का वास्तविक लय क्या है धर्म का वास्तविक गंतव्य स्थान

00:25:06:07 है मोक्ष तो मोक्ष की बात ही नहीं हो रही जब तो जब बात ही नहीं हो रही तो कहां से उनको आप धर्मशास्त्र कहोगे उसमें तो किसी शैतान की पूजा करने की बात हो रही है इनके अकॉर्डिंग और वह शैतान अगर उसकी पूजा करोगे तो अंत में आपको खाएगा यह भी नहीं कि वो शैतान कुछ आपको रियायत दे दे ठीक है तो एक तो ये वाली बात हो गई अब इस इसके दूसरे पहलू पर हम लोग नजर डालते हैं कि अब यह कह रहे हैं कि यज्ञों यज्ञों से पूर्ण मुक्ति नहीं मिलती है

00:25:44:13 मगर 182 सर्व यज्ञों में प्रतिष्ठित पूर्ण परमात्मा यह है 182 नंबर पेज निकालिए या 40 में भी यही लिखा है 40 नंबर पेज निकालिए 40 4 में भी य लिखा है फर्स्ट पैराग्राफ हां इसमें क्या लिखा है

00:26:21:21 कि धर्म यज्ञ होता है खाद आवश्यक होती है परंतु पूर्ण का नाम लेकर हा रहते हुए अंतिम समय तक अनन्य नाम से नाम जप य रहता

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→ Used in: A · Live तत्वदर्शी पर सनसनी खुलासा #rampaljimaharaj #kabir #exposed at 1:30:54 ↗

00:26:34:28 है उसको यज्ञ में फल स्वरूप सांसारिक सुधा अधिक मिलती है वही यज्ञ में प्रतिष्ठित

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00:26:39:02 ये देखिए अब यहां पर फिर आ गया अब यह कह रहे हैं कि जो वेद के जो मंत्र है जो यज्ञ है उनमें उनका मतलब उनके द्वारा जो पूर्ण परमात्मा है पूर्ण ब्रह्म उसकी बात नहीं होती मगर यहां क्या कह रहे हैं यहां कह रहे हैं वही यज्ञों में प्रतिष्ठित पूर्ण परमात्मा ही मन मन इच्छित यज्ञों का फल देता है तो अब क्या हुआ कि पूर्ण परमात्मा यज्ञों में प्रतिष्ठित है यज्ञ द्वारा कौन पूजा जा रहा है पूर्ण परमात्मा और 181 182 लाइए

00:27:21:13 182 180 182 इतना इन्होंने इसमें खिचड़ी पकाई है यह दो मिनट सामने नहीं बैठ सकते जो नते पाते किया करते हैं हां एक मिनट थोड़ा धीरे चलिए धीरे धीरे वेदों के अनुसार साधना करने वाला हूं इसी में होगा ऊपर जाइए पहले जरा बस बस बस बस बस बस बस बस बस ज्यादा ऊपर नहीं एक ब्रह्म भक्ति की रक्षा मैं करता हूं यहां कह रहे हैं जो निष्काम थोड़ा सा नीचे चलिए नीचे चलिए थोड़ा सा प सेकंड हो ग अब 182 नंबर पर य लिख रहे हैं क्या लिख रहे हैं कि यज्ञों का मैं ही व भक्त मुझे अच्छी तरह नहीं जानते हैं काल है इसलिए इसकी पूजा करके पतन को प्राप्त होते हैं 84 लाख यज्ञ के सर्पण की जाती है वह परमा हा जिसको यह यज्ञ समर्पण की जाती है वह परमात्मा पूर्ण ब्रह्म है अब लो फिर पूर्ण ब्रह्म हो गया यज्ञ किसको समर्पित है पूर्ण ब्रह्म को समर्पित है और 181

00:28:37:02 में देखिए क्या लिखा है 99 यज्ञों में यह अपनी ही बात पर नहीं टिक रहे हैं ऊपर चलिए बस बस बस बस बस बस तो लास्ट पैराग्राफ देखिए क्या है क्या लिखा है हां मनोकामना सिद्धि के लिए मेरी पूजा तीनों वेदों में वर्णित शास्त्र अनुकूल करते हैं हां क्योंकि यह देखिए 9 24 यह देखिए इसका अर्थ देखिए गीता में क्या बोल रहे हैं क्योंकि सब यज्ञों को भोगने वाला केवल अय अब खुद ही कह रहे हैं केवल 21 ब्रह्मांड का स्वामी मैं हूं इनका सटर घोंट देखिए कि किस तरह से आपको उलझा करके प्रश्नों में चार तरह की बातें करके आपको आप के वेदों से आपकी गीता से आपके धर्म से आपके सनातन से दूर ले जाया जा रहा है दूर कि यहां पर कह दिया भगवत गीता का अर्थ करते समय कि यज्ञों का भोक्ता कौन है यज्ञ किसको समर्पित है यज्ञ जो है भैया इनका जो काल ब्रह्म है घटिया ब्रह्म है उनको समर्पित है और

00:29:52:26 आगे कह दिया कि वो तो नहीं वो तो यज्ञ भी जो है सब तरीके से उसी को जाते हैं अब यहां पर एक बात आती है यह ये कह सकते हैं कि इसमें एक लाइन आई है कि यदि तत्व ज्ञानी से ज्ञान ले लिया तो जरूर वह जो यज्ञ आपका है वह पूर्ण उसकी ओर जाने लगेगा मगर तत्व ज्ञानी जो ज्ञान दे रहा है क्या वह यज्ञों का दे रहा है दूसरी बात अर्जुन को तो कोई तत्व ज्ञानी मिला नहीं था इनके अनुसार और कल एक व्यक्ति कह भी रहा था अब इनकी सारी चीजों का देखो इन्हीं की किताबों में पोल खुलेगी इनकी सारी चीजों की पोल इन्हीं की किताबों में खुलेगी क्यों क्योंकि इनका कहना है कि वेदों के द्वारा पूर्ण मुक्ति नहीं मिलती है मोक्ष नहीं मिलता है वेदों को अज्ञानी ने कहा है और हमने यह भी बता दिया कि वेदों को इनके ही कबीर ने कहा है इसके बाद इनका कहना है कि यज्ञों के द्वारा मुक्ति प्राप्त नहीं होती है और बिना तत्वदर्शी के अगर तत्वदर्शी मिल जाएगा तो अवश्य आपके यज्ञों के द्वारा यज्ञ आपके सफल हो सकते हैं मगर तत्वदर्शी जो इनके अनुसार

00:31:08:02 है क्या वह यज्ञ करवाता है यज्ञ करने को कहता है नहीं व यज्ञ नहीं बता रहा है दूसरी बात अर्जुन को तो यज्ञ मिला नहीं था मगर भाई अर्जुन को मुक्ति जरूर मिल गई कल एक व्यक्ति ने पूछा था किसको मुक्ति मिली है उसी के शास्त्र में लिखा है मुक्ति किसे मिली निकाल भैया 99 नंबर पैराग्राफ 99 नंबर पेज सॉरी आज जो खुलासे होने वाले हैं ना वह बहुत ही

00:31:55:01 ज्यादा पूरा जिसको अपने दिमाग में ड्रिल चलाना हो ना वोह इनकी एक गरमा गीता की का नाम का जो नाम की पुस्तक है उसको उसका अध्ययन करें 99 नंबर 99 थोड़ा सा आगे हां थोड़ा पीछे यही होगा यही इसमें पहला पैराग्राफ है हा अर्जुन

00:32:24:02 यज्ञ में प्रतिष्ठित पूर्ण परमात्मा को ईस्ट रू में मानकर यज्ञ करता है तथा यज्ञों के साथ-साथ वास्तविक नाम का सुमेर करके पूर्ण रूप पूर्ण मोक्ष रूपी अवंत को प्राप्त हो जाता है अर्थात पूर्ण परमात्मा को प्राप्त

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00:32:40:13 हो जाता है वाह अब यह कौन सा अर्जुन है भाई यज्ञों के द्वारा मुक्ति नहीं है यज्ञ बताने वाला मूर्ख है उसको पूर्ण परमात्मा का पता नहीं है य और वेदों के अनुसार वेदों के मार्ग पर चलने वाला कोई मुक्त नहीं होता क्योंकि वेदों में पूर्ण ब्रह्म की भक्ति नहीं है पूर्ण ब्रह्म की प्राप्ति नहीं है मगर अर्जुन जो है

00:33:05:14 यज्ञ में प्रतिष्ठित पूर्ण परमात्मा को इष्ट रूप में मानकर यज्ञ करता है तथा यज्ञों के साथ-साथ वास्तविक नाम का स्मरण करके पूर्ण मोक्ष रूपी

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00:33:14:13 अनंत को प्राप्त हो जाता है अब इसको कौन से तत्वदर्शी मिल गए थे भैया अर्जुन को इनके अनुसार तो अर्जुन को तत्वदर्शी मिले ही नहीं इनके अनुसार तो अर्जुन को मोक्ष ही नहीं मिला था तो ये कैसे लिख दिया इन्होंने अच्छा इतनी सारी चीजें है ना कि आपको मैं बताते बताते कुछ भूल भी जाऊंगा इतनी सारी गड़बड़ है इनकी इनके उसमें कुछ भी है ही नहीं जो एक सिद्धांत पर टके हो क्योंकि वेदों को कहने वाला अज्ञानी है वह जानता ही नहीं पूर्ण ब्रह्म को दूसरी जगह कह रहे पूर्ण ब्रह्म ही वेदों को कह रहा है एक जगह कह रहे यज्ञ से जो है पूर्ण ब्रह्म नहीं मिलता है पूर्ण ब्रम मुक्ति नहीं मिलती है मगर दूसरी कह रहे कि अर्जुन को देखो मुक्ति मिल गई अब कोई आएगा नहीं और कह रहे हैं कि वेद विरुद्ध भक्ति जो है गलत है शास्त्र विरुद्ध भक्ति गलत है मगर फिर खुद ही कह रहे हैं कि वेदों में जो है मुक्ति का ज्ञान है ही नहीं वेदों में ब्रह्म की पूजा बताई गई है और ब्रह्म तुम्हें खाता है तो ब्रह्म की पूजा करना तो गलत है तो उसमें वेदों में गलत ज्ञान दिया गया है तो क्या है ये वेद विरोध सनातन विरोध क्या है ये इसको कहते हैं सनातन विरोध सनातन के नाम पर

00:34:29:13 सनातन विरोध मैं सदैव यही बात कहता हूं ना सनातन के नाम पर सनातन विरोध अच्छा इनकी कॉमेडी वाली लाइन देखते जरा 179 पेज नंबर खोलिए जरा 179 एक कॉमेडी देखिए थोड़ा हस भी लिया करो थोड़ा हस भी लिया करो ओ अच्छा एक बात और है यह कहते हैं कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है जबकि यह कहते कि वेदों को बोलने वाला पूर्ण परमात्मा को जानता नहीं है जब वो पूर्ण परमात्मा को जानता नहीं है तो वह कैसे बता रहा है कि वेदों कबीर पूर्ण परमात्मा है या तो कबीर पूर्ण परमात्मा नहीं है या फिर वेदों को बोलने वाला जो है वो पूर्ण परमात्मा को ना जानने वाला नहीं है और यदि वो पूर्ण परमात्मा को जानने वाला है तो यह जो गरमा गीता की जो लिख रहा है वो अज्ञानी है व तत्वदर्शी नहीं है व तिरछा दर्शी है 179 में देखिए जो गीता अध्याय न श्लोक 11 इनकी मूर्खता की पराकाष्ठा देखिए पराकाष्ठा न श्लोक 11 का

00:35:44:14 अनुवाद दिखाइए इ सेकंड पैराग्राफ है गीता ये अरे अरे ऊपर चला गया वापस जाइए ये है ना इस पर जरा अंडरलाइन करिए इसको गीता अध्याय न श्लोक 11 का अनुवाद अंडरलाइन करिए नीरा नीरा इसको हां मूर्ख जन मुझको मनुष्य का शरीर धारण करने वाला तुच्छ जानते हैं यह इन्होंने अर्थ किया है क्या जानते हैं तुच्छ जानते हैं मूर्ख जन मुझे साधारण समझते हैं तुच्छ समझते हैं यह इन्होंने अर्थ कर दिया ठीक है अब मूर्खता देखिए इनकी मूर्ख देखिए आपका दिमाग पंचर हो जाएगा इसके नीचे भावार्थ देखिए क्या लिख रहे हैं दिखाइए भाई

00:36:36:13 भावार्थ तत्व ज्ञान के अभाव से मूर्ख प्राणी मुझे सर्व प्राणियों का ईश्वर मानते हैं प्रभु मानते हैं यह लो न 11 का अर्थ करते समय कह रहे हैं कि मूर्ख मुझको तुच्छ मानते हैं और भावार्थ में कह रहे हैं कि मूर्ख मुझको ईश्वर मानते हैं क्या करोगे इसका क्या करोगे भाई चक्कर आ जाएगा इसको ज्यादा देर तक पढ़ा तो चलो और बताता हूं वेदों में महिमा पूर्ण ब्रह्म की है परंतु भक्ति के मंत्र यज्ञ ब्रह्म तक है तो इसको निकालो 181 थर्ड पैरा

00:37:37:13 181 182 आ गया 181 पहले तो डलाइन ही पढ़ लीजिए पवित्र वेदों के अनुसार देखिए कितने कितने मतलब इनको नीचता की हद है इनको शर्म नहीं आती पवित्र वेद और फिर वेदों के द्वारा मुक्ति नहीं है इसका थर्ड पहरा क्या है वेदों में महिमा तो अमर परमात्मा यानी परम अक्षर ब्रह्म की है परंतु भक्ति के मंत्र यज्ञ आदि क्रियाएं काल ब्रह्म तक है यानी कि वेदों का कोई भी मंत्र ऐसा नहीं है जो पूर्ण ब्रह्म की बात कर रहा हो ठीक है भक्ति की बात कर रहा पूर्ण ब्रह्म की अच्छा एक दसव नंबर का वो है मंत्र चौथे अथर्ववेद का उसके अनुसार य बोलते हैं कि उसमें जो है तत्वदर्शी जाने के पास जाने को कहा है जबक उसमें कहा नहीं है मगर यदि वेद का कोई भी मंत्र पूर्ण ब्रह्म तक जाने की जाने के लिए है ही नहीं तो फिर वह मंत्र भी तो नहीं है भाई जिससे कि तुम जाने को कह रहे

00:38:52:28 हो वो मंत्र भी नहीं है पूण ब्रम का अच्छा और देखिए और इनका क्या है अब इन्होंने 197 नंबर का पेज निकालिए ज 197 लगभग 16 पेजेस आगे हद कर दी है इन्होंने हद हद कर रखी

00:39:44:10 है अब भाई इन्होंने एक बात कही है पीछे कि वेदों के द्वारा क्या मिलेगा ब्रह्म की प्राप्ति होगी और यहां क्या लिखा है ब्रह्म काल भगवान की प्राप्ति भी असंभव है तो वेदों के द्वारा क्या मिलेगा पंचर रामपाल दास एंड कंपनी के द्वारा जो आपको ज्ञान मिलेगा उसके अनुसार वेदों के द्वारा आपको क्या मिलेगा दिमाग को पंचर करने का तरीका हालांकि वेद तो बहुत पवित्र है मगर इनकी यह जो किताबें इनको पढ़कर जरूर आप लोग एक आद बार बीच में सोचोगे कि मैं जो है जिन आंखों से मैंने इस पुस्तक को पढ़ा उसमें मैं हार पिक डाल लू या फिर ड्रिल मशीन से अपना जो भेजा है उसमें जो है होल कर दूं अरे भैया किसी बात पर तो टिक

00:40:40:16 जाओ किसी एक बात पर तो खड़े हो जाओ नहीं हमने यह कहा है वेदों के द्वारा पूर्ण ब्रम की प्राप्ति संभव नहीं है मुक्ति संभव नहीं है किसकी प्राप्ति संभव है ब्रह्म की प्राप्ति जो घटिया है जो अपने भक्तों को खाता है और अंत में ब्रह्म की प्राप्ति भी असंभव है ठीक है तो यह सारी चीजें हैं कि यह कितना पवित्र मानते हैं इन ग्रंथों को अब हम लोग चलते हैं

00:41:24:03 कि जो भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने इनको दर्शन दिए थे विराट रूप में उसमें जो इन्होंने कुतर्क किए हैं कि वह कृष्ण नहीं थे इस बारे में आज हम चर्चा कर रहे हैं तीन नंबर पेज पर चलिए तीन नंबर हां यही यही है जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता इसकी हेडिंग जरा पढ़िए क्या है इस पैराग्राफ की हेडिंग क्या है ऊपर जाइए

00:42:13:16 थोड़ा हां गीता का ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं दिया ठीक है इसको पढ़ते हैं नीचे आइए थोड़ा बड़ा कर लीजिए स्क्रीन पर करिए जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता जी का ज्ञान सुनाते समय अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाले यह बार-बार पवित्र क्यों कह रहे हैं मालूम है आपको यह पवित्र इसलिए कह रहे हैं कि आपके मन में य बैठ जाए कि आपके ग्रंथों का कितना सम्मान करते हैं जबकि उसको लिखने वाले अज्ञानी है मूर्ख है उसको र उसको समझाने वाले अज्ञानी है मूर्ख है उसके द्वारा मुक्ति नहीं है उसमें पूर्ण ब्रह्म की बात नहीं है और उसके द्वारा आपको प्राप्त क्या होगा कि वह आपको खाएगा और यह भी हो सकता है कि वह आपको प्राप्त ना हो ठीक है यह सारी चार चीजें

00:43:18:00 तो जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता जी का ज्ञान सुनाते समय अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाले प्रभु प्रभु कह रहा कि अर्जुन मैं बड़ा हुआ काल हूं अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूं जरा सोचे कि कृष्ण जी तो पहले से ही अर्जुन के साथ थे अब यहां पर देखिए यदि पवित्र गीता जी के ज्ञान को कृष्ण जी बोल रहे होते तो वह यह नहीं कहते कि मैं अब प्रवृत हुआ हूं अच्छा यह बताइए कोई व्यक्ति यह कब बोलेगा कि मैं बढ़ा हुआ हूं अगर वह कहीं और से आने वाला कोई और है तो वह यह बोलेगा कि मैं आया हूं कहीं से यहां पर तू अब तक जिससे बातें कर रहा था व कहीं और से मगर अपने आप को बड़ा हुआ क्यों बोलेगा क्यों क्योंकि वह अभी तक आपको सूक्ष्म थोड़ा छोटा दिखाई दे रहा था वही अब बड़ा हुआ बड़ा अब वो बड़ बड़ा हो गया पहली बात दूसरी बात इन्होंने कहा है कि इससे सिद्ध होता है वही रहिए धीरे धीरे चलिए ऊपर जाइए हा तो जरा इससे इन्होंने यहां कहीं कहा है कि इससे सिद्ध होता है कि वह ज्ञान जो है पहला तर्क इन्होंने

00:44:33:01 जो दिया है कुतर्क यह ज्ञान जो है श्री कृष्ण ने नहीं दिया बल्कि उनके शरीर में प्रेत वत प्रेत वत घुसकर ब्रह्म ने दिया है यह कहीं पर लिखा है प्रेत वत वाली बात प्रेत वत जैसे प्रेत किसी के शरीर में घुस जाता है वैसे ही जो है काल ब्रह्म ने ये ज्ञान दिया है तो सबसे बड़ी बात है यह प्रेत वत घुसना कहां लिखा है उसमें शास्त्र में कहीं लिखा है क्या प्रेत वत घुसा वो काल श्री कृष्ण के शरीर में दूसरी बात दूसरा कुतर केय करते हैं कि श्री कृष्ण कौन थे अर्जुन ने य कहा कि आप कौन है यहां पर इन्होने कुतर किया है कि उसको देखकर ऊपर जाइए भैया थोड़ा सा हां श्री ये दूसरी

00:45:28:28 हां और ऊपर जाइए बस बस बस बस बस फिर अध्याय 11 श्लोक 21 में अर्जुन कह रहा है यह देख लो जो हमें अभी सभ्यता सिखा रहे थे ना वो देख लो यहां क्या क्या कहा जा रहा है अर्जुन कह रहा है काल कह रहा है ठीक है कह रहे होना चाहिए था तो सुन लो तुम्हारे वो जेल धाम निवासी की भाषा क्या है अर्जुन कह रहा है कि भगवन आप तो यह हैं खा रहे हो आपका गुणवान चरित वेदों मंत्रों द्वारा चारण कर रहे हैं तथा जीवन के लिए कामना कर रहे हैं कुछ आपके ये हैं मैं आपके इस विकराल रूप को देखकर धीरज नहीं धर पा रहा हूं ठीक है तो यहां पर जो इन्होंने यह कहा है कि वह भय खाने लगा अर्जुन जो है भय खाने लगे उनके रूप को देख कर के और उन्होंने आगे कहा कि महानुभाव उग्र रूप वाले आप कौन है मुझे बतलाइए श्री कृष्ण जी तो अर्जुन के साले थे श्री कृष्ण की बहन सुभद्रा का विवाह अर्जुन से हुआ था क्या व्यक्ति अपने साले को भी नहीं जानता इससे सिद्ध है कि गीता का ज्ञान श्री कृष्ण ने दिया है तो सबसे पहले हम

00:46:43:28 आश्चर्य वाली बात देख ले धर्मदास जो थे वह कबीर को देखकर अचरज में पड़ गए थे मुक्ति बोध का पेज क्रमांक निकालिए 38 आपके कंप्यूटर के अनुसार 3 मुक्ति बोध शास्त्र चेंज होगा यहां पर मुक्ति बोध और पेज नंबर 384 आपकी कंप्यूटर स्क्रीन के अनुसार जब धर्मदास कबीर जी को पहले से जानते थे तो क्यों अचरज में पढ़ रहे भाई उसे उन्हें देख कर के

00:47:32:08 यह जो इन्होंने य चक्कर चलाया ना कि गीता जी काल ने नहीं बोली यह मेन जो सीन उठाया वही वाला सीन उठाया है जहां पर भगवान अपना विराट स्वरूप दिखाते हैं वहां इन्होंने तमाम सारे कुतर्क किए हैं उन सभी कुत को का आज एक एक करके सारी चीजें करने वाले हैं अब नहीं आएंगे वो लोग हम आपने पढ़ा है आ जाओ जाओ आप आ जाओ आपने पढ़ा है ना अच्छे से आप आ जाओ ऊपर डेली ब्लॉग आ जाओ भैया ऊपर आ जाओ क्या

00:48:14:24 दिक्कत लिंक दे दो इनको डेली ब्लॉग वालों को इन्होंने अच्छे से पढ़ा है जरा मैं स्वरूप वाला पूरा कर लू फिर मैं लिंक देता हूं वो मिला आपको मुक्ति बोध नाम का जो ग्रंथ है उसमें लिखा है 384 नंबर पेज पर के धर्मदास कबीर को देखकर अचरण में पड़ गए तो पहले तो यह होना चाहिए जब मिल जाए तब बता देना अब मैं वापस वहीं पर आ जाता हूं जो वो पेज था आप एक काम करते वो पेज भी खुला रहने देते सारे कुतर्क वहीं पर है एक साथ

00:49:13:13 हां तो अब यह श्री कृष्ण जी ने श्री कृष्ण कौन है यह अर्जुन ने क्यों पूछा तो पहली बात तो यह है कि अर्जुन ने उनसे यह इसलिए पूछा था कि वह उनका एक बढ़ा हुआ स्वरूप था जो इससे पहले उन्होंने कभी नहीं देखा था एक दूसरा रूप श्री कृष्ण का जो वह अब तक समझते थे एक सामान्य सखा भाव में जिसके लिए उन्होंने सात 24 में भी कहा कि मुझे सामान्य मनुष्य के शरीर में देख कर के मुझे जो है सामान्य समझते हैं मेरे ब्रह्म भाव को नहीं समझते व मूर्ख है उसी तरीके से अर्जुन उनको समझता था तो इसलिए जब उन्होंने उनका व विकराल रूप देखा विराट रूप तो क्या

00:50:06:22 हुआ जब उसने वह देखा तो वह चकित हुआ और चकित आपके धर्मदास भी हो रहे हैं कबीर को देख कर के जो जिसको पहले से जानते हैं ठीक है मगर अब बात यह है कि वह जो यह प्रमाण हमें और मिल जाता है कि उन्होंने जो है वो जो सखा वाला भाव था ना उसमें उत्तर था हां भगवत गीता 11वां अध्याय और 35 वा श्लोक इसमें इस बात का उत्तर है 11वां अध्याय 41 से 42 वा

00:50:50:24 श्लोक कि अर्जुन ने यह क्यों कहा था कि मैं आप आप कौन हो मैं आपको पहचान नहीं पा रहा हू और यह पहले तो यह बताए धर्मदास ने क्यों कहा था कि मैं आपको पहचान नहीं पा रहा हूं तो 11वां अध्याय और 41 वा श्लोक 41 से 42 देखिए आपके इस भाव को ना जानते हुए आप मेरे सखा हैं ऐसा मानकर प्रेम से अथवा परमाथ से मैंने हे कृष्ण हे यादव हे सके इस प्रकार से जो कुछ बिना सोचे समझे हटात का जब उन्होंने वो दर्शन कर लिए ना बड़े उनके वो विकराल रूप देखा विराट स्वरूप विश्वरूप तब उन्होंने ये बात कही कि आपके इस भाव को मैं नहीं जानता था कि आप ऐसे भी हैं तो जो कुछ मैंने आपको सामान्य व्यक्ति समझ कर के जो बोला है जो आपके सब सका भाव से बोला है उसके लिए मुझे क्षमा कर दीजिए तो ये उत्तर मिला आपको

00:51:58:12 और इसमें अभी आ गया बहुत पोल खुलने वाली अगला कुतर्क लाइए वही पेज पर आ जाइए दोबारा गीता अध्याय गीता अध्याय 11 कुछ दिखा रहे थे क्या यह हमने अपनी गीता से दिखाया है यह जो गीता है उसमें दिखाया अर्जुन ने 11 अध्याय के 41 से 42 में श्लोक में इस बात को स्पष्ट किया है कि वो आश्चर्य चकित क्यों हुआ था और यह देखिए य आ गया इसमें पेज नंबर है 384 आपकी स्क्रीन के अनुसार पीडीएफ के अनुसार नहीं आपकी स्क्रीन में ऊपर जो पेज आते हैं ना टोटल वसे इतने पेज पर है यह अभी भी आ रहे हैं शायद हां धर्मदास अचरज है

00:52:52:27 रहेव हो गया अचरज में गए धर्मदास लीला देखकर आप तीन रूप प्रकट दिखावा एक तीन होए एक समावा लीला देखत लीला देखी चकित भए दासा पुनि विनती एक कीन प्रकासा हो गया अब उत्तर देना ये लीला देख कर के धर्मदास चकित क्यों हो रहे हैं और उसके बाद मैंने आपको उत्तर दे दिया वहां आपका पता नहीं उत्तर है कि नहीं मगर वहां उत्तर है दवा अध्याय 35 में कि वोह चकित क्यों हो रहे हैं क्योंकि उन्होंने उसका यह रूप इससे पहले नहीं देखा था जो विश्व रूप के रूप में ईश्वर को उन्होंने देखा था उस समय और तो और कई जगह इन्होंने खुद माना है कि वह जो काल है वह यह कहता भी है इनके अनुसार कि मेरा यह रूप इससे पहले किसी ने नहीं देखा है इस पर भी हम आएंगे तो पहली बात तो ये हो

00:53:55:00 गई अच्छा अच्छा एक बात और है उसी पर आ जाते हैं नहीं तो चैप्टर खो जाएंगे अच्छा पहले किसी ने नहीं देखा यह काल काल ने जो है वहां पर श्री कृष्ण से यह कहा मतलब अगर सही भाषा में बोले तो जो विश्वर रूप में भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि यह जो रूप है मेरा यह तेरे से पहले किसी ने नहीं देखा इससे पहले किसी ने नहीं देखा तो वहां पर उनका कहने का अर्थ है कि जिनके पास दिव्य दृष्टि सामान्य जो मनुष्य है उन्होंने नहीं देखा मगर दिव्य दृष्टि युक्त या जो भी दिव्यता को प्राप्त होने वाले हैं वो तो देख रहे हैं अच्छा इसमें इन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण तो अपना विराट रूप पहले ही दिखा चुके थे कौरवों को भगवान श्री कृष्ण कौरवों को अपना यह रूप पहले ही दिखा हो गए थे इसके लिए हमको जाना पड़ेगा

00:55:08:21 अ इन्होंने अपनी गीता में ही लिखा है गीता का ज्ञान किसने दिया पेज नंबर दो पर जाइए आप वहां लिखा है हां इससे थोड़ा ऊपर चलिए ऊपर चलिए थोड़ा थोड़ा ऊपर चलिए पवित्र श्रीमद भगवत गीता का ज्ञान किसने दिया ठीक है इसमें यह बोल रहे हैं नीचे जाइए कि यहां पर यह खुद यह बात मान रहे हैं कि जो श्री कृष्ण ने यहां पर रूप दिखाया था वो चतुर्भुज रूप था वो विश्वर रूप नहीं था विराट रूप नहीं था और यहां पर उन्होंने ये भी माना है कि श्री कृष्ण का चतुर्भुज रूप और काल का विराट रूप अलग है ठीक है तो अगर यह जो तर्क दे रहे हैं कि श्री कृष्ण का विराट रूप तो पहले ही देख लिया था इन्होंने यहीं पर कहीं पर तर्क दे रहे हैं इसी पेज प यहां पर

00:56:23:25 तर्क दे रहे हैं कि श्री कृष्ण का विराट रूप तो पहले ही देख लिया था तो फिर ये यहां क्यों कह रहे हैं कि यह रूप किसी ने नहीं देखा जबकि इन्होंने खुद माना है कि वह जो श्री कृष्ण ने वहां जो रूप दिखाया था वह चतुर्भुज रूप था वह विराट रूप था ही नहीं पांडवों के सेंसले से श्री कृष्ण बहुत प्रसन्न हुए दुर्योधन ने कहा हा यहां यहां पर है श्री कृष्ण से नाराज होकर दुर्योधन ने सभा में हां अब यहां देखिए यहां पर देखिए इसका विवरण महाभारत में है महाभारत के अनुसार श्री कृष्ण ने वहां पर अपना चतुर्भुज रूप दिखाया था इस बात को यह भी मान रहे हैं वह विश्वरूप उन्होंने नहीं दिखाया था और उस रूप में और वहां पर दिखाए जाने वाले जो काल का जो विराट का जो ये रूप बता रहे वहां पर दिखाए जाने वाले रूप में अंतर हैय लोग खुद मान रहे हैं मगर फिर अपनी बात को वहां पर गलत सिद्ध कर दे रहे हैं यह कह कर के कि श्री कृष्ण ने तो अपना विराट रूप पहले दिखा दिया था श्री कृष्ण ने अपना विराट रूप नहीं चतुर्भुज रूप दिखाया था और चतुर्भुज रूप दोबारा से जब अर्जुन वहा प्रार्थना करते हैं कि आप मुझे अपना

00:57:39:16 चतुर्भुज रूप दोबारा दिखाइए मैं आपको यह विराट रूप में नहीं देख पा रहा हूं तो अर्जुन जब प्रार्थना करते हैं अगले ही श्लोकों में वही 11 अध्याय में शायद 35 में में 11 अध्याय के 35 में में करते हैं कि भाई मुझे आप जो है चतुर्भुज रूप में वापस आ जाइए तब वापस भी आते हैं अर्जुन के कहने पर यानी कि वो जो ये बात कह रहे हैं कि पहले किसी ने नहीं देखा अच्छा एक कुतर को और कर रहे है कि संजय भी देख रहा है संजय भी देख रहा है दिव्य दृष्टि वाले देख रहे हैं मेरे भाई क्या उस समय ब्रह्मा विष्णु महेश नहीं देख रहे हैं आपके कबीर नहीं देख रहे हैं जो इस ग्रंथ को लिख रहा है वो नहीं देख रहा है सामान्य मनुष्य नहीं देख रहे हैं और अर्जुन भी तभी देख रहा है जब उसको दिव्य दृष्टि दी भगवान ने तो ये कुतर किनका हो गया

00:58:31:09 अब इन्होंने एक कुतर्क और किया है कि पहले और बाद में कभी कृष्ण ने यह नहीं कहा कि वह काल है ठीक है श्री कृष्ण के शरीर में प्रेत वत यह देखिए प्रेत वत यह आ गया प्रेत वत घुसने का है ना प्रेत वत य कह रहे हैं ना ये लोग कि श्री कृष्ण के शरीर में प्रेत घुसे थे यह ब्रैकेट वाली चीज दिखाइए जरा ब्रैकेट ब्रैकेट में जो लिखा है आगे हां यह देखिए श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रेत वत प्रवेश करके अपना विराट रूप काल ने दिखाया था अब देखिए इनकी बातें कितनी कटती है श्री कृष्ण के शरीर में प्रेत वत प्रवेश करके अपना विराट रूप काल ने दिखाया था अब देखिए इनका कैसे यह होगा

00:59:33:28 मामला इसी में आगे है आगे चलिए इसी में नीचे जाइए जरा आप आप आप नीचे चलिए हां धीरे धीरे चलिए धीरे धीरे दूसरी बात रुक जाइए मुझे पढ़ने दीजिए एक तो इनका वो तीन दिन का भंडारा है ना उसके कारण इनकी वो किताब मेरे हाथ में हार्ड कॉपी में नहीं आ रही है ऊपर जाइए थोड़ा इसलिए थोड़ी सी दिक्कत बस बस बस बस बस एक एक पैराग्राफ मुझे पढ़ लेने दीजिए दूसरी बात सिद्ध हुई की पवित्र गीता जी को बोलने वाला काल ब्रह्म ना की श क्योंकि कृष्ण ने पहले कभी नहीं कहा कि मैं काल हूं तथा बाद में भी नहीं कहा इस बारे में हम लोग प्रमाण दे चुके हैं श्री कृष्ण को अनेकानेक जगह काल कहा गया है श्री कृष्ण ने स्वयं भी काल कहा है व उद्धव से जब बात हो रही तब भी कहा है कि मैं हूं सनातन काल खूब जगह पर ये बात हम लोग प्रमाण चुके खैर उनके दर्शन मात्र को दूर दूर से क्षेत्र के स्त्री तथा पुरुष तड़पा करते थे पशु पक्षी भी उनको प्यार करते थे और सा 24 के अनुसार गीता ज्ञान दाता प्रभु ने कहा कि बुद्धिहीन जन समुदाय मेरे उस घटिया देख लीजिए मैं घटिया शब्द दिखा रहा था ना यह देखिए वेदों के द्वारा प्राप्त होने वाला जो

01:00:49:00 ब्रह्म है वह घटिया घटिया अनुत्तम अटल विधान को नहीं जा घटिया शब्द उपयोग हुआ है कई बार मैं कभी मनुष्य की तरह किसी के सामने प्रकट नहीं होता मैं अपनी योग माया से छिपा रहता हूं और नीचे चलिए चार श्लोक नौ में कहा है कि अर्जुन मेरे जन्म कर्म दिव्य है ये है वो है जिस समय काल ब्रह्म ने श्री कृष्ण के शरीर से देखिए इनकी चोरी देखिए ये देखिए काल ब्रह्म ने श्री कृष्ण जी के शरीर से बाहर निकलकर अपना विराट रूप दिखाया था और ऊपर क्या लिख रहे हैं ऊपर जाइए अभी वापस श्री कृष्ण के शरीर में प्रेत वत घुस कर के विराट स्वरूप दिखाया था देखो श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रेत वत प्रवेश करके अपना विराट रूप काल ने दिखाया था अब कौन सी बात मानोगे भाई कौन सी बात मानोगे आप प्रेत वत घुस करके दिखाया था या बाहर निकल कर दिखाया था अच्छा बाहर निकल कर दिखाया था आ जाते हैं एक मिनट अगर बाहर निकल के दिखाया को मान लेते हैं तो इसका मतलब उस समय अर्जुन को यह बिल्कुल फिक्स हो गया

01:02:04:26 यह जो ज्ञान दिया जा रहा है यह काल के द्वारा दिया जा रहा है और कृष्ण अलग है ठीक है पहली बात बाहर निकलने की बात जो संजय तरा जी को यह कहानी यह जो भगवत गीता सुना रहे हैं क्या उन्होंने माना है कि भाई कृष्ण के शरीर से कोई बाहर निकला फिर उसने विराट रूप धारण किया नहीं इस बात का कोई प्रमाण नहीं है प्रेत वत घुसने का प्रमाण नहीं है बाहर निकलने का प्रमाण नहीं है ठीक है दूसरी बात कि क्या वहां पर ऐसा आया है कि श्री कृष्ण भी खड़े हैं और वह काल भी खड़ा है अलग नहीं आया तीसरी बात कि जब वह वापस अपने चतुर्भुज रूप में आ गए जब उन्होंने अपना चतुर्भुज रूप में नहीं आए सॉरी 1135 में नाम लेकर जब 11 जब 1132 में कृष्ण से अलग होकर के काल ने विराट रूप धारण कर लिया है 1132 में और सा 24 में काल यह कह चुका है कि मैं घटिया मेरा जो वो मेरा भाव मेरा काम करने का तरीका सब कुछ घटिया है ठीक है और मैं लोगों को खाता हूं मुझे प्राप्त करने

01:03:20:00 पर परम गति नहीं मिलती है अमरता मिलती है कुछ समय के लिए अमरता मिलती है उस समय के लिए तो उनका वह विकराल रूप काल को कृष्ण से अलग देखने के बाद भी कृष्ण जो अर्जुन है वह क्या कर रहे हैं देखिए 1135 में कृष्ण जी के वचन सुनकर जब काल का काल अपने रूप में आकर के विराट स्वरूप दिखा कर के उनको यह बोल रहा है कि मैं ऐसा हूं वैसा हूं क्या बोला था उन्होंने पिछले

01:04:08:15 में हां द्रोणाचार्य और भी पितामह तथा जयद्रथ और कर्ण तथा और भी बहुत से मेरे द्वारा मारे हुए शूरवीर योद्धाओं को तू मार भय मत कर निसंदेह तू युद्ध में बैरियो को जीतेगा इसलिए युद्ध कर तो यह वचन बोल रहा है इस समय काल क्योंकि उसने अपना रूप धारण कर लिया है 1132 के अनुसार मैं बड़ा हुआ काल हूं ठीक है और अब वो बात अब वो अपनी चीजें बोल रहा है कि तू मार वैसे भी यह कहते कि कृष्ण जी युद्ध नहीं कराना चाहते थे काल युद्ध कराना चाहता था तो यह जो बात कह रहा है यह काल कह रहा है इनके अनुसार यह जो बात कह रहा है य काल कह रहा है 1134 में तो अब जब यह बात ये काल कह रहा है तो अर्जुन तो अभी भी इनको कृष्ण कह रहे हैं क्या कह रहे हैं संजय धृतराष्ट्र को बता रहे हैं तो यह नहीं बता रहे कि वहां पर काल बोल रहा है जो कृष्ण के बॉडी से बाहर निकला है ना बाहर निकलने का कोई श्लोक नहीं अंदर घुसने का कोई श्लोक नहीं और जब काल बाहर निकल कर के इनके अकॉर्डिंग वह विश्वरूप धारण कर करके बोल रहा है तो संजय बता रहे हैं 11 अध्याय के 35 में श्लोक में केशव भगवान के इस ये नाम लिया है

01:05:24:19 केशवसुत ये नाम लिया है केशव भगवान के इस वचन को सुनकर ठीक है नाम लिया है नाम इसमें हेर फेर नहीं कर पाओगे केशव और सुनो उसके बाद जो 35 वा श्लोक है शायद देखिए 35 में श्लोक में क्या है कि केशव भगवान के इस वचन को सुनकर आप कैसे अलग करोगे बात देखो केशव भगवान के इस वचन को सुनकर अत्यंत भयभीत होकर प्रणाम करके भगवान श्री कृष्ण के पति गदगद वाणी से बोला कौन अर्जुन किसके प्रति बोला कृष्ण के प्रति किसके वचन थे केशव के वचन थे तुम जब यह कह रहे हो कि वोह बड़ा हुआ काल है तो बढ़ने के बाद भी वो केशव है बढ़ने के बाद भी वो कृष्ण है उसका अंदर घुसना सिद्ध नहीं हो रहा उसका बाहर निकलना सिद्ध नहीं हो रहा तुम ही कह रहे हो कि अंदर घुस कर के बड़ा हुआ तुम ही कह रहे हो कि बाहर निकल के बड़ा

01:06:34:13 हुआ हद होती है दोगले पन की अच्छा श्री कृष्ण के दर्शन को सब तड़पा करते थे सामान्य दृष्टि से कृष्ण रूप के लिए भगवान श्री कृष्ण के दर्शन को सब तसा करते थे किस रूप के लिए जो जो उनका कृष्ण रूप था ना जिसको देख कर जो सबके लिए सुगम में था उस रूप को उस रूप के लिए सब लोग तरसा करते थे ठीक है जो आपने ये वाला कुतर्क किया है वहां पर कि भाई वो कृष्ण के दर्शन को तो सब तड़पा करते थे तो वो दर्शन को तड़पा करते थे जो उनका कृष्ण रूप था मगर आप ही के अनुसार उन्होंने जो चतुर्भुज रूप लिया था कौरवों के सामने तो उस रूप को देख कर के सब भाग गए थे तो आपका यह कहना भी गलत है कि अगर कृष्ण और काल एक होते तो अर्जुन डरता क्यों हो गया गलत आप ही कह रहे हो कि कृष्ण का चतुर्भुज रूप देख कर के कौरव भाग गए जरा ऊपर जरा लाइए वही पर जहां चल रहा था दो तीन नंबर का पेज था

01:07:43:20 जो इन्होंने इतना दोगलापन किया है इतना दोगलापन किया है कोई इनकी बात इन्हीं की बात से कट रही है प्रेत मत घुस के बड़ा हुआ बाहर निकल के बड़ा हुआ किस बात को मानोगे जय श्री राम जी जय श्री राम जय श्री राम आवाज कम है आपकी संदीप जी [संगीत] आवाज हां यहां ले आए कोई ठीक हो गया ऊपर लाइए ऊपर मैदान जब वहां पर वो वाली बात आई थी ना कृष्ण से कृष्ण ने अपना विराट रूप लिया अभी जहां पर आप बारबार अंडरलाइन कर रहे थे अब रही सर ना ना धीमे आ रही है एक बार जाके आइए

01:08:32:22 आप हां अर्जुन ने युद्ध करने से इंकार कर दिया था नीचे आइए नीचे आइए नीचे आइए नीचे आइए श्री कृष्ण श्री एक मिनट एक मिनट विचार एक मिनट विचार करले पांडवों के इस फैसले से श्री कृष्ण बहुत प्रसन्न हुए हां इसी में नीचे आइए इसी में नीचे आइए श्री कृष्ण को घेर लिया बस बस बस बस बस श्री कृष्ण को चारों तरफ से घेर लिया श्री जी ने जब अपना विराट रूप यह विराट रूप व वाला नहीं है यह चतुर्भुज रूप है य इन्होंने माना है ठीक है श्री कृष्ण ने जब अपना विराट रूप लिया था व चतुर्भुज रूप था यानी य वो वाला विराट रूप नहीं है यहां पर जो लिया है तो जिस कारण सर्व योद्धा कौरव डर करर भाग गए लो हो गया आप यह कुतर्क कर रहे हो कि श्री कृष्ण का विश्वर रूप देख कर के अर्जुन डर क्यों रहा है पहली बात तो तुम्हारा धर्मदास भी डर रहा है दूसरी बात है कि तुही यहां पर मान रहे हो कि उनका विराट रूप जो चतुर्भुज वाला था उसको देख कर के यहां पर कौरव भाग रहे हैं हो गया सर अध्याय 11 श्लोक 41 42 में भी अर्जुन ने माना है उन्होंने बोला है कि आपका यह वाला रूप मतलब जो मैं आपको ना अपना मैंने बता दिया 41 42 बता दिया बता दिया

01:09:47:24 41 आपने शायद देखा नहीं वो बता दिया दे वही जी जी 41 42 में बता दिया कि मैं आप का यह रूप पहले कभी नहीं देखा है मैं आपको सामान्य समझा था यह है वो है तो ये जो 9 ब 11 की बात करते हैं ना व इ इसी बात के ऊपर भी है 9/1 की बात कर यहां पर य हो गया अब एक बात और है बहुत गजब की बात है वो क्या है सुन 198 नंबर पेज दिखाइए जरा [संगीत]

01:10:51:00 198 आ गया ऊपर जाइए जरा और ऊपर हेडिंग होगी ना हा देखिए काल के दर्शन वेदों से तप से दान से यज्ञ से आदि से नहीं है केवल अनन्य भक्ति से हैं तो पहला प्रश्न ये आएगा कि काल का जो रूप है आगे यह भी लिखा है कि काल का वास्तविक रूप तो देखने को मिलेगा ही नहीं देखने को क्या मिलेगा जो अनन्य भक्ति से देखने को मिलेगा वो उसका चतुर्भुज रूप मिलेगा देखने को तो जब काल का चतुर्भुज रूप जब देखने को मिलेगा काल का वास्तविक रूप देखने को मिलेगा ही नहीं कोई साधन ही नहीं है उसको देखने का यह भी लिखा है कि काल का कोई साधन नहीं है इसी में नीचे लिखा है इसी में 198 में नीचे जाइए थोड़ा सा थोड़ा ज्यादा नहीं और नीचे हां देखिए देखिए विराट रूप तो किसी भी साधना से नहीं देखा जा सकता जो काल का वास्तविक रूप लो विराट रूप किसी साधन से देखा नहीं जा सकता फिर तुम कह रहे हो कि वहा काल ने अपना विराट रूप दिखा दिया क्या किया है तुमने

01:12:06:01 भाई इसको इसको संदीप जी आप पढ़ोगे ना आपको सर में दर्द हो जाएगा एक बात है ही नहीं कुछ नहीं है अच्छा इसके बाद अब सबसे बड़ी बात ये आती है कि यदि अनन्य भक्ति से उस रूप को मान लेते देख भी जा सकता है तो अर्जुन को आपने सा 24 में बताया है कि मेरा यह अनुत्तम भाव मेरा घटिया भाव इसकी भक्ति कर मान लो थोड़ी देर के लिए तो अर्जुन ने भक्ति कब कर दी एक तो ना इन भक्ति कब कर दी अर्जुन ने भाई सर आपके तुमने अपना विराट स्वरूप दिखा दिया और जबक विराट स्वरूप तो तुम किसी भी कारण से दिखाते ही नहीं हो विराट रूप तो किसी भी साधना से देखा ही नहीं जा सकता अच्छा दूसरी बात कुतर करते हैं कि वो खाना खाता है लोगों को खाने वाला है अच्छा उसके मुंह में तुमने धृतराष्ट्र को देखा उसके मुंह में तुमने द्रोणाचार्य जी को देखा बाद में युद्ध किससे हुआ था अर्जुन का बाद में युद्ध किससे हुआ था मतलब वहां पर विश्व रूप लेकर के भगवान ने दिखाया था कि इनका उत्पत्ति स्थिति और समार तीनों मैं तय करता हूं

01:13:21:26 जी उस विराट स्वरूप से भगवान अर्जुन को यह बता रहे हैं मगर तुम तो कह रहे हो कि नहीं वो खा रहे हैं प्राणियों को तो खा रहे हैं तो तरा तो उनके मुंह में था गीता का ज्ञान सुन कौन रहा है उन्होंने यह दिखाया था कि मैं बड़ा हुआ काल हूं इसका मतलब है उन्होंने अपना भविष्य काल दिखा रहे थे अपने अंदर ही सारा दिखा दिया देखो सारे मेरे अंदर जाएंगे तुम अपना सिर्फ तीर कमान उठा लो इसका मतलब भविष्य काल भी वह स्वयं भूत भविष्य वर्तमान सब वो स्वयं ही है व वो बता रहे थे कि भाई मैं कौन सी शक्ति हूं मैं वो शक्ति हू जिससे यह जगत उत्पन्न होता है जिससे जिससे जगत की स्थिति होती है और जिससे इस जगत का समार होता है मगर अगर ये बता रहे कि वो खाता है अच्छा इन्होने एक जगह ये भी माना है इसी ग्रंथ में कि उसको जब वो खाता है ना तब देखा जा सकता है जब वो प्राणियों को खाता है पहली बात तो उसको किसी प्रकार से देखा नहीं जा सकता अनन्य भक्ति से भी नहीं देखा जा सकता फिर अर्जुन को बिना अनन्य भक्ति के वो अपना रूप दिखा देता है वो के रूप में क पता नहीं चलता है कोई श्लोक नहीं है वो कृष्ण के शरीर से कब बाहर निकला कोई पता नहीं है बाहर निकल भी गया तब भी क तब भी अर्जुन उसको जो है कृष्ण कहते हैं ठीक है

01:14:37:24 और उसका जो सबसे अविनाशी और घटिया नियम है ना वोह क्या है उसका वोह दिखाता हूं 179 पेज नंबर 179 नंबर उन्होंने अर्जुन को यह दिखाया कि ये ऑलरेडी ये होना है अभी जो तभी कर रहा है आप एक बार जाके वापस आ जाइए अच्छा मैं देखता हूं एक सेकंड हर हर महादेव हर हर महादेव पाड़ी जी कैसा चल रहा है आज का अरे बिल्कुल लाजवाब चल रहा है पूरा पोस्टमार्टम कर दिया आज तो अरे अभी आप देखना अभी लास्ट तक तो बिल्कुल यह हो जाएगा ये है क्या भाई 170

01:15:37:25 ना पीछे जाइए भगवान श्री कृष्ण ने पहले कह दिया ना जो होने वाला और जो हो चुका है और जो होगा उन सबको मैं जानता हूं इस यह मुझे नहीं लगता कि जो पता नहीं क्या किसी बुद्धि वाले व्यक्ति ने इस किताब को लिखा है ऐसा रायता फैलाया ना इसमें जहां आप जहां जो पढ़ने लगो उसी में दिक्कत हां रुक जाइए देखिए ब्रह्म काल कभी आकार में नहीं आता आकार अब देखो और यह देखिए नीचे लिखा है मेरा घटिया भाव पहली बात तो वो ध्यान करो वेदों के द्वारा मिलने वाला जो ब्रह्म है वह घटिया है सुन लो हिंदुओं जो यह सोचते हो कि यह रामपाल हमको जो है सद भक्ति बता रहा है सद ग्रंथों की भक्ति बता रहा है मेरा घटिया भाव मैं कभी आकार

01:16:53:02 में नहीं आता अब मेरे भाई यह बताओ जब तुम आकार में आते नहीं हो तो तुम किसी को कैसे विश्वरूप दिखा रहे हो यह मेरा अविनाशी अटल नियम है मैं कभी शरीर धारण करके नहीं आता लो क्या है यह दो बातें हो गई ना यहां पर तो यानी कि यानी कि क्या हुआ कि

01:17:25:00 रूप में नहीं आ सकता किसी के मतलब समक्ष नहीं हो रूप में आही नहीं सकता तो वो कैसे श्री कृष्ण से बाहर निकल के अगर वो वाली बात मान ले श्री कृष्ण के अंदर ही है और अंदर रहकर ही वह अपना दिखा रहा है तब तो एक बार को सोचा जा सकता है श्री कृष्ण बड़े हुए तब तो मान सकते हैं मगर इसने तो यह माना ना कि श्री कृष्ण के शरीर से बाहर निकल के उसने अपना रूप दिखाया दूसरी बात बिना भक्ति के क्यों दिखा दिया अनन्य भक्ति कहां है कब कर दी अर्जुन ने अर्जुन जब तुमको जान गया तब भी तुमको कृष्ण क्यों कह रहा है काल क्यों नहीं कह रहा है संजय तो जान गया संजय तो सब कुछ देख रहे हैं ना वहां पर जो धृतराष्ट्र को सुना रहे हैं हद होती है दोगले पन की हद अर्जुन जी को पता नहीं चला पर हां 6000 साल बाद रामपाल जी को पता चल गया कि वह काल है ये लोग गजब का लॉजिक है एक लॉजिक इनका और है कि वहां पर जब उन्होंने यह कहा कि तेरे अतिरिक्त इस रूप को किसी ने नहीं देखा है मगर संजय तो देख रहा है भाई और भी बहुत से लोग देख रहे थे ना जो इस गाथा को लिख रहे हैं वह भी देख रहे हैं ब्रह्मा विष्णु महेश देख रहे हैं मां भगवती देख रही है अर्जुन

01:18:40:00 भी तब देख रहा है जब उसको दिव्य दृष्टि मिली है संजय भी तब देख रहा है उसको दिव्य दृष्टि मिली है मगर कौन-कौन उस रूप को देख पा रहा है इस बात से इसका क्या संबंध है कि वो ब्रह्म जो काल है वो कृष्ण से अलग है यह देख लो वेदों की वेदों की वेदों के अनुसार चलोगे तो तुमको ब्रह्म काल अंत में खाएगा क्योंकि वेदों के द्वारा किसकी पूजा बताई है ब्रह्म की पूजा और इनके अनुसार वेद विरुद्ध भक्ति जो करते हैं वोह गलत होते हैं कौन सी बात पकड़ोगे इनकी भाई हर लाइन का कांट्रडिक्शन इ इन्हीं के अनुसार है नीचे ये कमेंट्स कर रहे होंगे कि वेद वेद को पढ़ने वाले वेद को समझना और गीता को समझना बच्चों का खेल नहीं है

01:19:28:25 अच्छा एक बात और है यह भी समझिए 198 नंबर का पेज जरा निकालिए 198 फट पैरा हां इसके दर्शन बहुत ही दुर्लभ है देवता भी इस रूप के दर्शन को सदा तरसते हैं यह चतुर्भुज हां यह वेदों में वर्णित विधि से ना तप से ना दान से ना यज्ञ से देखा जा सकता है समझ गए वेदों के पहले कहेंगे ब दीजिए

01:20:30:27 इसको पहले कहेंगे हमारी मेन स्क्रीन ले आइए आप मेन स्क्रीन ले आइए पहले कहेंगे कि वेदों के द्वारा पूर्ण ब्रह्म की प्राप्ति नहीं है पहले सबसे पहले समझिए वेदों में ये कहेंगे वेदों में पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान नहीं है और सबसे पहली लाइन तो ये कहेंगे वेदों में पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान है मैं भी आप ही की तरह बात कर रहा हूं अगर कोई रामपाल वालों का फलो रामपाल का फॉलोअर को सुन रहा हो तो मैं इस समय आप ही की भाषा में बात कर रहा हूं आप चार तरह की बात करते हो तो मुझे चार तरह की बात करनी पड़ रही है तो सबसे पहले कहेंगे वेदों में पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान तो है महिमा तो है मगर उसको प्राप्त करने की विधि नहीं है ठीक है मान लिया उसके बाद कहेंगे कि वेदों का ज्ञान जिसने दिया है ना वो पूर्ण ब्रहम को जानता ही नहीं है अरे भाई जब वो नहीं जानता है पूर्ण ब्रह्म को तो उसका ज्ञान कहां से आ जाएगा वेदों में

01:21:24:22 जब वेद और गीता को बोलने वाला पूर्ण ब्रह्म को जानता ही नहीं है तो पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान कहां से आ गया वेद और गीता में फिर क्या हुआ कि इसका मतलब तुम जो ये ताल ठोकते हो कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है वो गलत है क्योंकि वो जिसने कबीर वहां कहा है आपके अनुसार वो कबीर जो है वो पूर्ण ब्रह्म नहीं है क्योंकि वो वो तो कहने वाला खुद कह रहा है मैं जानता ही नहीं हूं पूर्ण ब्रह्म कौन है वेद को कहने वाला पहली बात फिर आगे कहेंगे वेद के द्वारा किसकी किसकी पूजा होती है वेद के द्वारा ब्रह्म की पूजा होती है अच्छा उस पूजा से क्या मिलता है कुछ देर के लिए अमरता मिलती है अच्छा अमरता कुछ देर के लिए होती है परम गति मेरी वाली कौन सी वाली जिसमें मैं खाता हूं जिसमें मैं अपना उल्लू सीधा करता हूं यही भाषा है वहा प उल्लू सीधा करता हूं अच्छा और फिर बाद में यह भी कह दिया कि नहीं नहीं वेद से तो ब्रह्म भी नहीं मिलता वेद से मिलता क्या है मेरे भाई कुछ तो बता दे कुछ नहीं घुमा फिरा के ंग बंग डंग श यह करके वेद से बाहर निकलो घुमा फिरा के गीता में एंग बंग डंग श करके गीता से

01:22:39:24 बाहर निकलो यह है पूरा प्रोपेगेंडा ये वेद वेद की बात कर कर के गीता की बात कर कर के गीता से बाहर निकलो वेद से बाहर निकलो अच्छा इनका एक भांडा और फोड़ता हूं मैं सबसे पहले हम यह देख ले किय यज्ञ का मतलब क्या मानते हैं तो चावा पेज निकालिए 4 वा पेज

01:23:15:12 निकालिए अर्जुन को मोक्ष मिल गया बिना तत्वदर्शी संत के अर्जुन ने तो कहीं नहीं जपा कबीर कबीर जपा क्या फिर ये अर्जुन को मोक्ष दिला रहे हैं अच्छा यज्ञों से मोक्ष नहीं मिलता वेदों से मोक्ष नहीं मिलता मगर अर्जुन को यज्ञ करने से पूर्ण परमात्मा मोक्ष मिल गया अच्छा ये लोग बोलते हैं कि पांडवों को मोक्ष नहीं मिला महाभारत पढ़िए तो सही अरे भाई अरे खुद ही खुद ही बोल रहे हैं मिला अर्जुन को मोक्ष मिला खुद ही बोल रहे

01:23:48:28 हैं हां अभी तुम्हारे तत्वदर्शी की पोल खोल रहा हूं रुको अभी तुम्हारे तत्वदर्शी की पोल खोल रहा हूं रुक जाओ उसी पोल खोल रहा हूं 40 नंबर का पेज है इसमें पहले पैराग्राफ में फोर्थ लाइन यज्ञ यज्ञ में कौन-कौन से यज्ञ है धर्म यज्ञ जरा ब्लू कर दीजिए धर्म यज्ञ हवन यज्ञ ध्यान यज्ञ प्रणाम यज्ञ और लास्ट में ज्ञान यज्ञ ठीक है अच्छा तो यज्ञ से ऊपर जाइए जरा ऊपर जाइए इसी की हेडिंग क्या लिखी है जरा पढ़िए जरा यज्ञ से वो नहीं मिलता हां यज्ञ से मुक्ति नहीं मिलती पढ़ लीजिए भाई य यज्ञ से मुक्ति नहीं मिलती अभी तुम्हारे तत्वदर्शी की बैंड बजेगी अब यज्ञ से मुक्ति नहीं मिलती और यज्ञ में पांचों यज्ञ है धर्म यज्ञ और लास्ट में ज्ञान यज्ञ भी है अच्छा अब 434 पर चलते हैं भगवत गीता 434 तो भगवत गीता 434 मैं यहां से दिखा देता

01:25:04:26 हूं भगवत गीता 4 34 में क्या कह रहे हैं इस ये तो कहीं के नहीं रहे जो मैंने इनकी गीता पढ़ ली आपने तो खोल दि अध देखिए अध्याय तीन चार पाच कर्म योग और सांख्य योग के बारे में पूरा सुनिए अध्याय 4 33 में भगवान कह रहे हैं कि ज्ञान यज्ञ अत्यंत श्रेष्ठ है ठीक है बिल्कुल इन्होंने माना यज्ञों से मुक्ति नहीं मिलती में भगवान ने कहा ज्ञान यज्ञ श्रेष्ठ है यानी यज्ञ श्रेष्ठ है और उसका ज्ञान तू तत्वदर्शी से ले भगवान ने नहीं कहा पूर्ण परमात्मा का ज्ञान तत्वदर्शी से ले भगवान ने क्या कहा यज्ञ का ज्ञान यज्ञ श्रेष्ठ है उसका ज्ञान तू तत्वदर्शी से ले तो तत्वदर्शी आपको कौन सा ज्ञान बताएगा गीता के अनुसार यज्ञ का ज्ञान यज्ञ का ज्ञान बताएगा और ये लिख रहे हैं कि यज्ञ से मुक्ति नहीं

01:26:20:23 [संगीत] मिलती यानी कि यानी कि यज्ञ से जब मुक्ति नहीं मिलती है मान लिया तो यज्ञ का ज्ञान देने वाला आपका पूर्ण गुरु भी नहीं हुआ क्योंकि पूर्ण परमात्मा को बताने वाला नहीं है वो वो क्या वो क्या ज्ञान दे रहा है आपको यज्ञ का ज्ञान दे रहा है यज्ञ और आप खुद ही कह रहे हो यज्ञ से मुक्ति नहीं होती तो यह हो गया इसको हम लोग एक बुक बना देंगे कुछ दिनों में और उसको प्रकाशित करवा के संदीप जी आप लोग मिलकर के उसको पब्लिश करवा के और जो है सर्कुलेट कर दीजिएगा इसको अभी इतना जो अध्ययन किया है ना मैंने इसम मेरा भेजा फ्राई हो गया बिल्कुल जो अभी पिछले तीन दिन तीन बार किया है आज आज ज्यादा किया है पूरे दिन हर बात को बदल दिया अपनी ही कही हुई बात को हर बात को बदला है हर बात को प्रत्येक बात आप देखो ना एक बड़ा इंपोर्टेंट मैटर हमने उठाया था अभी वो जो जब आपने कहा था जब ये बूढ़े हो जाते हैं तो ये लोग कहते वो लीला कर रहे हैं तो क्या श्री कृष्ण जी लीला नहीं कर सकते उन्होंने जो बकल बिल्कुल बिल्कुल उसमें तो इनकी छुट्टी हो गई व अजर का जवाब नहीं था इनके

01:27:37:25 पास आप देख नहीं रहे वो लीला इन्होने माननी नहीं है जो हमारे भगवान कर रहे वो लीला नहीं मानेंगे कबीर दास ने कर दी वो लीला वही बात है वही बात है जैसे स्न वाले करते हैं शिवजी करे तो वो सत्य है और भगवान श्री कर तो लीला है ऐसे ही ये लोग करते हैं कृष्ण ब्रह्मा विष्णु महेश करें तो वो सत्य है और कबीर करेंगे तो वो लीला है तुम करो तो लीला हम करे तो करेक्टर ला ली अच्छा जो इकोन की जो भागत तो भाई ज्ञान यज्ञ जो है वो यज्ञ में से एक है और इन्होंने कहा कि यज्ञ से मुक्ति नहीं मिलती ठीक है तो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाला इन्होंने कहा है वो चा 34 में वो तत्वदर्शी है पूर्ण ब्रह्म की जानकारी देने वाला नहीं ज्ञान यज्ञ का अब ज्ञान यज्ञ यदि अलग हो पूर्ण ब्रम की बात करने वाला अलग हो मगर इन्होने ज्ञान यज्ञ को यज्ञ में स्वीकार किया है हमने पहले दिखा दिया यज्ञ में क्या क्या है और इन्होंने कहा कि यज्ञ से पूर्ण मुक्ति नहीं मिलती यानी कि मुक्ति का ज्ञान नहीं है तत्वदर्शी के पास गीता के अनुसार और भी सिद्ध हो जाता है जब हम 15 एक पढ़ते हैं तो उसमें कहते कि अगर 15 एक के अनुसार वो तत्वदर्शी है तो वेदों को जानने वाला है और वेदों के अनुसार भी मुक्ति नहीं है

01:28:52:25 तुम ने कहा अब यह मैंने बताया क्यों आपको पता है यह इसलिए बताया य आपको कि जब हम यह कह देते हैं कि वेद में कुछ नहीं है वेद में कुछ नहीं है वेद से ब्रह्म मिलेगा ब्रह्म तुमको खा जाएगा ब्रह्म भी नहीं मिलेगा पूर्ण ब्रह्म भी नहीं मिलेगा कुछ नहीं मिलेगा धर्म भी नहीं मिलेगा कुछ नहीं है वो जो महाभारत का युद्ध हुआ था उसके लिए भी उन्होने लिख दिया वो धर्म युद्ध नहीं था क्या कहो हमारा कोई भी धर्म ग्रंथ धार्मिक है ही नहीं नाटक हैको धार्मिक मानने का पवित्र मानने का सद ग्रंथ मानने का ये कहते श्री कृष्ण जी ने युद्ध करवा के इतने लोग कटवा दिए और इसने रामपाल ने अपनी बुक में लिखा हुआ है के इसके 64 लाख शिष्यों को जो है नरक प्राप्त हुआ था कबीर दास की भक्ति करने से इसकी बुक में लिखा हुआ है पेज नंबर चार प ज्ञान गंगा में और मैं आपको बता दूं एक जो डेढ़ सवा डेढ़ क्या कितने एक लाख आत्माओं को वो रोज खा रहा है वो किसकी परमिशन किसकी आज्ञा से खा रहा है नहीं आ आत्मा इनको ये पूछो आत्मा को खाने से क्या होगा आत्मा तो अजर अविनाशी है उसको खाने से क्या हो जाएगा और सुनो और सुनो और मैं बताऊ एक बात आपको ये कह रहे हैं रामायण में इनको असली

01:30:08:02 अभी श मुक्ति बोध दिखाइए जरा मुक्ति बोध 351 पेज नंबर मुक्ति बोध हम केवल उन किताबों को पकड़ रहे हैं जिसको इन्होंने लिख दिया अपने से मतलब हम लोग कबीर दास और ये जो कबीर सागर और कबीर वाणी गरीब दास इनको भी नहीं उठा रहे क्योंकि इनको भी उठा के लाएंगे तो उसम कह सकते हैं कि मिलावट है जो इन्होने खुद लिखी है किताबें हम उनमें से दिखा रहे हैं 367 है मुक्ति बोध में आपना ज्ञान गंगा पेज ं चा आपकी कपर स्क्रीन के अनुसार हा पीछे जाइए नहीं नहीं आपकी कंप्यूटर की स्क्रीन क्या कह रही है ऊपर हा ये 351 होना चाहिए य प एक ना ज्ञान गंगा का नंबर च लिखा हुआ है कि जो युद्ध है वह कबीर ने करवाया था जो रामायण का युद्ध है

01:31:13:15 हा मुझसे उत्पन्न है सब कुछ ऐसे कुछ कह रहे हैं सूर उत्पन्न किए धरती पर चले वेधारी परमेश्वर दिखाई नहीं देता उत्पन्न शरीर प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा है तो निराकार है आपने ही मुझे भेजा था आप एक बार चेक करो आपको ना सुन के हंसी आएगी एक बात बड़ी इंपोर्टेंट बताता हूं आपको ये लोग कहते हैं कि जो मारता है ना वो परमात्मा नहीं हो सकता श्री कृष्ण जी को उन्होने उन्होंने मारा तो इस कर परमात्मा नहीं फिर दूसरी तरफ कहेंगे कि कबीर दास ने हिरना कश्यप को मार दिया अबे साले दोलो एक तरफ से बात कर लो क्या बोल रहे हो नहीं वर्ड का ध्यान रखिए जी जी जी जी

01:31:59:12 उनको हमने आज क्या क्या जाना वेद और गीता से मुक्ति नहीं मिलेगी वेद और गीता में पूर्ण परम ब्रह्म का ज्ञान भी नहीं है और वेद और गीता को फॉलो करने वाला ब्रह्म की साधना करता है ब्रह्म कौन है घटिया और ये ये सिखाते हैं जनता को सर पवित्र करके ये देखिए मैंने रामचंद्र के पूर्व जन्म के संस्कार के कारण उसकी गुप्त सहायता की थी समुद्र का पलपल देखिए इनकी तमीज देखिए रामचंद्र के उसके है ना और आगे चलकर के इन्होने ये यहां स्वीकार किया है कि कबीर जो है उन्हीं ने उसने ही कबीर ने ही रामायण का युद्ध करवाया था बो खैर तो हमने सूत्रा क्मक शैली में जान ले आज क्या सीखा है कि वेद वेद और गीता को गीता में पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान नहीं है मुक्ति नहीं है

01:32:59:01 और हां वेद ठीक है हटा लीजिए अब वेद और गीता में पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान नहीं है मुक्ति का ज्ञान नहीं है और उस उस वो परम ब्रह्म तक वो परम ब्रह्म की बात नहीं करते वो ब्रह्म की बात करते हैं पूर्ण पूर्ण ब्रह्म की बात नहीं करते एक एक और कैरेक्टर पकड़ रखा है परम ब्रह्म अलग है ब्रह्म अलग है परम ब्रह्म अलग है पूर्ण ब्रह्म अलग है तो वेद गीता में पूर्ण ब्रह्म नहीं है पूर्ण मुक्ति नहीं है और क्या है कि ब्रह्म की साधना है ब्रह्म क्या है कि वो घटिया है और अश्र है और उसकी भक्ति करने से उसकी जो उसकी वाली जो परम गति है उसकी वाली परम गति प्राप्त होगी कुछ समय के लिए अमरता प्राप्त होगी उसके बाद आपको फिर वो कच्चा चवा जाएगा और और फिर उसके बाद थोड़ी देर बाद वो भी नहीं प्राप्त होगी उसको प्राप्त नहीं किया जा सकता असंभव है वेद गीता के अनुसार ठीक है अब अब अब इनको ना संपूर्ण ब्रह्म की वो बताओ पूर्ण तो पूर्ण तो इनको पता लगे गया संपूर्ण ब्रह्म का नहीं पता इनको तो ये इसके आप आप ब्लॉक तो नहीं है किसी ने आपको ब्लॉक

01:34:14:08 नहीं किया है तो ये एक बात मालूम पड़ी और इनका जो कुतर्क थे कि भाई वो क्या कहते हैं वो हां तो अब जब यह सब नहीं है आपके पास वेद और गीता में यह सब नहीं है तो कुल मिला केर है क्या कुल मिला केर इनके अनुसार वेद और गीता में काल ब्रह्म ने कहा कि हे प्रभु आप कह रहे हैं कि मैं जीवों को तेरे जाल से निकालकर वापस सतलोक लेकर जाऊं हां यहां पर देखिए काल के कहने पर मान गए कबीर कि तू खा डेली एक लाख मानव शरीर जीवों को खाली हा सही बात है है ना यह है आपके कबीर ये है आपका परमेश्वर ठीक है अच्छ किसी शैतान को बोलोगे तू आदमी आदमियों को खा ये उसके लिए वरदान हुआ कि श्राप हुआ पहले यह पूछिए रा दिया था

01:35:15:13 बोल अच्छा एक एक पॉइंट पर और आऊंगा पहले मैं सूत्रम शैली में जरा बता दूं क्या है दोबारा से एक बार रिपीट कर वेद और गीता के द्वारा रामपाल एंड गैंग के अनुसार कंपनी के अनुसार आपको ना तो पूर्ण मुक्ति मिलेगी ना ही उसमें पूर्ण ब्रह्म की बात है उसके बाद आपको मिलेगा क्या उससे क्या सीखने को मिलता है ब्रह्म की भक्ति ब्रह्म की भक्ति से आपको पांच छ ऑप्शन है उसमें से जो समझ में आ जाए वो आप मान लीजिएगा ब्रह्म की भक्ति से हो सकता है ब्रह्म आपको खाए ब्रह्म की भक्ति से हो सकता है आपको ब्रह्म वाली जो परम गति है वो मिले जो कुछ देर के लिए अमरता है वो मिले ब्रह्म ब्रह्म की भक्ति से ब्रह्म भी नहीं मिलता असंभव है उसे प्राप्त करना तो इनम से जो आपको समझ में आए वो आप मान लेना ठीक है दो चार ऑप्शन है आपके पास क्या मिलेगा उसके बाद अब यह सब तो इन्होने मना कर दिया जो मैं पॉइंट की बात कर रहा हूं उस पर ध्यान दीजिए यह सब तो इन्होंने मना कर दिया मगर इसमें अपनी सूक्ष्म चाल को बना कर के रखा है वह क्या है कि वेद को छोड़ो तत्वदर्शी के पास जाओ गीता को छोड़ो और तत्वदर्शी के पास जाओ तो भाई तुम ने जो एक करा है ना उसमें सबसे बड़ी गलती कर ये कर बैठे कि आप जो है तत्वदर्शी को वेद और गीता

01:36:30:18 के अनुसार सिद्ध नहीं कर पाओगे क्योंकि क्योंकि मुक्ति कैसे मिलेगी उन ग्रंथों को मानने से उन बातों को मानने से जिनको जो है ये रामपाल डिसाइड करेंगे तो रामपाल को कौन डिसाइड करेगा ये रामपाल गीता से डिसाइड कर रहे अब क्यों क्यों तत्वदर्शी नहीं है रामपाल या पूर्ण पूर्ण पूर्ण ब्रह्म के बारे में बताने वाले गुरु क्यों नहीं है इसको देख लीजिए गीता और वेद को कहने वाला कौन है काल काल तो ज्ञानी है वो तो जो बात कह रहा है गलत कहेगा उसको मालूम ही नहीं है पूर्ण ब्रह्म के पास कैसे जाया जाएगा वो तो अज्ञानी है दूसरी बात कि काल तो खाने के लिए लोगों को फसा है तो वो क्यों सच्ची बात बताएगा कि वो तुम तत्वदर्शी के पास चले जाओ तीसरी बात कि इनके अनुसार 15.1 में के अनुसार जो तत्वदर्शी है वो वेदों को जानने वाला है और वेदों को जानने वाला वह है देवी भागवत के अनुसार जो मा भगवती की पूजा करे अन्य अन्य पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा करे है ना तो तो तत्वदर्शी वो है

01:37:46:00 तो वो भी सिद्ध नहीं हुआ तत्वदर्शी अच्छा इसके बाद अंततोगत्वा आप कह रहे हो कि उस उस यज्ञ का ज्ञान तू तत्वदर्शी के पास जाकर ले तो तत्वदर्शी कौन है जो यज्ञ का ज्ञान देगा और आप ही कह रहे हो कि यज्ञ से मुक्ति नहीं है तो आपका तत्वदर्शी जो आपने जो ये चाल चली है बहुत बड़ी सी वेदों को नकार दो गीता को नकार दो ब्रह्मा विष्णु महेश को नकार दो सबको न नकार दो उस चाल के बाद भी आप जो है आपका तत्वदर्शी वो सिद्ध नहीं हुआ

01:38:25:09 अब देखिए ये जो षष्ठी रचना है इसके अनुसार जो काल की उत्पत्ति यह वाला रहने दीजिए मैं बता रहा हूं वो निकालिए आप यह रहने दीजिए हां अब जरा इस पर आइए यह लोग जो कहते हैं ना वो परमात्मा कौन है वो परमात्मा कौन है 62 में क्या कहा है भगवान ने जरा देख लेते 11 व 12 18

01:38:59:13 62 और हमने आज क्या जाना कि इनकी जो थ्योरी है उसके हिसाब से सिद्ध नहीं होता कि काल जो है कोई अलग था भगवान श्री कृष्ण से क्योंकि काल कभी अपने काल कभी आकार ही नहीं ले सकता और तुम कह रहे हो श्री कृष्ण के शरीर से बाहर निकलकर उसने अपना आकार लिया काल को देखने समझने के बाद भी उसको संजय जो है केशव कह रहे हैं कृष्ण कह रहे हैं क्यों कह रहे हैं है ना अच्छा 18वां अध्याय एक बार निकाल ले उसकी पोल भी खोल दे यह भी एक बहुत बहुत रोचक बात

01:39:44:14 हैय खिचड़ी तो बनाए बनाए खिचड़ी में चीनी चाय पत्ती सब चीज लास्ट में रेत डाल दिए देखिए सुनिए यहां पर जो 6 में बात करते हैं कि उस परमेश्वर की शरण में जा उस परमेश्वर की शरण में जा यहां पर परमेश्वर परमेश्वर की बात नहीं हो रही है यहां पर परम पद की बात हो रही है यहां परम शांति है ठीक है वो क्या है देखिए तू सब प्रकार से ये भगवत ये गीता प्रेस वालों ने यहां पर परमेश्वर को बोला है परमेश्वर शब्द उपयोग में लाया ये क्या कहते हैं क्या वहा पर परमेश्वर की संस्कृत है तो परमेश्वर की संस्कृत यहां नहीं है इस श्लोक में इस लोक में क्या है शरणम गच्छ सर्व भावे भारत त प्रसादा पराम शांति स्थानम पपसी शाश्वतम तो इसमें कहीं भी परमेश्वर की परमेश्वर की संस्कृत यूज नहीं हुई है इन्होने अपने अपने पीछे से कनेक्ट करते हुए लिखा है मगर आप तो ऐसे नहीं मानते हो ना शब्द आना चाहिए तो यहां

01:40:59:22 पर उस परम धाम को प्राप्त करने की परम शांति को उस ये जो उस शब्द आया है ना ये इसलिए नहीं आया कि उनसे अलग कोई परमात्मा है यह उस शब्द आया है कि जब तू परमात्मा की शरण में जाता है तो तुझे वो वाली वो वाली शांति प्राप्त होगी उस उस परम पद को तू प्राप्त कर उस परम शांति को तू प्राप्त कर यहां ये कहा है ठीक है अब अब बात आती है कि जब अगर मान मान भी लिया जाए कि भगवान ने य पर उस शब्द का उपयोग क्यों किया यद उन्ही के पास एक मिनट यदि उन्हीं के पास शांति थी तो वो उस शब्द का उपयोग क्यों कर रहे हैं वोह जो है यह कहते कि तू मेरी शरण में आ मतलब उस शब्द का उपयोग से इनको दिक्कत है तो अब मैं आपको बता दू

01:41:54:26 कि 922 में 933 में भगवान ने सीधे-सीधे कहा है कि मैं करता हूं भगवान ने सीधे-सीधे कहा है कि मैं यह करता हूं मैं मेरी शरण में आजा मैं तेरे यह कर दूंगा मैं यह कर दूंगा 9233 में भगवान ने यहां पर इन्होंने बिना संस्कृत वर्ड के और 933 और 92 में उस उस शब्द को फिट कर दिया जब भगवान सीधे-सीधे कह रहे मैं तेरी रक्षा करू लाइए जरा 922 182 नंबर पेज निकालिए जय श्री राम जय श्री राम विशाल भाटिया जी और अभी पांडे जी आके चले गए मैं आपको सुनूंगा बहुत बहुत अच्छा लगा आपने कॉल किया मेरे को अच्छा अच्छा पेज नंबर

01:42:45:04 182 हा इसमें देखिए 92 में क्या अर्थ कर रहे हैं 922 का ये अरे ऊपर जाइए ऊपर ऊपर लिखा है ऊपर था हां अध्याय न श्लोक 22 में कहा कि जो निष्काम भाव से मेरा चिंतन करते हु देखि इनकी इनकी बातें देखी मेरा चिंतन कर उस पूर्ण परमात्मा की शान शास्त्र अनुकूल भक्ति भक्ति कर यह क्या है भाई जब भगवान की भक्ति करनी है तो भगवान का चिंतन करे ना व्यक्ति हा सही बात है चिंतन मेरा कर और पूजा परमात्मा की कर और य पर उस शब्द कहां से आ गया इसकी संस्कृत कहां है कोई संस्कृत नहीं है इसकी और इसी प्रकार से 9 33 इसी में नीचे जाइए 933 उसम भी इन्होने यही कहा है यह देखो बारबार लिखा देख लो हिंदुओ जो तुम सोचते वेदों के अनुसार चलना सिखाते हैं ऊपर देखो ऊपर जाइए और ऊपर क्या और ऊपर अभी हेडिंग आई थी ना वेदों के अनुसार हा ये वेदों के अनुसार साधना ना करने वाला पूर्ण मुक्त नहीं और वेदों के अनुसार पूर्ण मुक्ति नहीं यह दूसरी जगह

01:44:00:07 लिखा है वेदों के अनुसार साधना ना करने वाला पूर्ण मुक्त नहीं और वेदों के अनुसार पूर्ण मुक्ति है ही नहीं ये सबसे शुरू में दिखा दिया था और शिवांशी सुनिए भैया ये लोग ना मारकंडे पुराण से कुछ दिखाते हैं गीता प्रस के मांड पुराण से एक बात कर रहा हूं उसको पूरा कर लू बस तो 9 33 सिखाइए इन्होने 9 33 का क्या दिया है

01:44:34:14 अनुवाद वेद को नहीं मानते तो बोलना बंद करो ना वेदों में प्रमाण है ओए ज्यादा आगे आ गए क्या चलिए चलिए आगे चलिए अभी अभी अभी यही सब चल रहा है बाकी जय श्रीराम हमारा 9 प और आगे चलिए और आगे चलिए 9.33 निकालना और आगे और

01:45:11:07 आगे पीछे आ गए क्या 933 पर पहुंचना है नवा यह 8 पेज नंबर पर यह वो है इनका गरमा गीता तेरा ज्ञान अमृत हां बाहर से अमृत है अंदर से जहर है सही बात है हा ये आ गया इसमें पैराग्राफ नंबर है हां ये 931 है इसमें नीचे जाइए 933 आ जाएगा हां ये देखिए 933 में क्या कर रहे हैं अनुवाद पुण्य आत्माओं में ब्राह्मण राज ऋषि का तो कहना ही क्या पूर्ण मोक्ष के लिए उस परमात्मा का भाई कहां लिखा है उस शब्द की संस्कृत कहां है गलत किया हु उन्होने देखिए माम ये अनन्यास चिंत माम जन परिपास तेम युक्ता नाम योगम भा माम शब्द है उस शब्द की कहा है संस्कृत भाई और 9 को भी देख लीजिए इसमें भी माम शब्द है जहा उस नहीं है वहां भी तुम उस लगा दे रहे

01:46:26:13 हो माम भज माम मेरा भजन कर क्यों लिख रहे हो कि उस परमात्मा का भजन कर झूठ लिख रहे हो ना झूठे झूठो क्यों लिख रहे हो यहां पे उसका भजन कर जब यहां लिखा है कि भज माम और सुनिए अब जरा इनका पोल खोलते हैं ये लोग कहते हैं जब वो स्वयं है तो वो उसका उसका क्यों कर रहे हैं अब मैं पूछता हूं ये इनका पेज नंबर निकालिए भगवत भक्त और भगवान का 38 नंबर पेज निकालिए अब कहां चले गए एकम एव दयम फैक्ट बाय अभिषेक सामने आ बना सकते हैं हिम्मत नहीं है इनम सही बात शिवाजी जो ये पढ़ के देखिए वेदों में वर्णित भक्ति विधि के अनुसार साधना करने वाला भक्त अपने स्वर्ग में अपने पुण्य को समाप्त करके फिर जन्म और मरण के नीच योनियों कुत्ता कुतिया गधा गधी इनमें आकर कष्ट पाएगा ये है ये है इनके सद

01:47:37:03 ग्रंथ समझ गए ये है इनके सद ग्रंथ कुत्ता कुतिया गधे में ही आएगा ये भी बात है ये भी नहीं कि मानव में आ जाए कुता कुत्ता कुतिया गधा गधी में आएगा वो ये इन ये इनका तमीज है और ये लोग हमें तमीज सिखा रहे थे शिवा जी ये जो भी 18 ब 62 की बात होती है ना जो जी इसमें आप देखोगे ना 18 ब 61 में ये लिखा हुआ है कि भी वो परमात्मा के बारे में लिखा हुआ है कि वो परमात्मा जो है ना वो कहते सभी प्राणियों को जो है वह सबके हृदय निवास में रहते हैं तो वोह जो है ना उनके कर्मों के अनुसार उनको चलाते हैं फिर उन्होने 18 ब 62 में क्या लिखा हुआ है कि आप ना अपने अंतर मन में जाके मन में जाने की बात हैय सोच रहे घर से बाहर निकलना उने बोला मैं इनको इ की भाषा में उत्तर दे रहा हूं चिंता मत करो इनको जो भाषा समझ में आती है उसी में उत्तर दूंगा निकालिए इनका भगवान और भक्त वसे आप सही तरीके से ढूंढ के करते हो बढ़िया तरीके से यह बात सही है भगवान और भक्त का पेज नंबर 38 आपकी कप मान भी ले अगर वो काल कह रहा है कि वो एक लाख जीव

01:48:52:08 खाता है रोज तो ये क्यों बोल रहा है नव अध्याय के 26 श्लोक में बत्र पुष्पम फल तोय यो भक्ति मुझको चढ़ते हैं वो सब व ये क्यों बो वो ये क्यों नहीं कह रहा कि मैं रोज एक लाख जीव खाता हूं इसमें वो इस वाली बात थी कहीं पर इस दास की बात थी हां ये रहा नहीं नहीं या तो 38 आपका जो वो वो वाला पेज नंबर है जो जो आपकी कंप्यूटर की स्क्रीन के अनुसार है या फिर वो पेज नंबर वो वाला पेज नंबर है ये आपको चेक करना पड़ेगा गंगादास की तरह परमात्मा प्राप्ति होनी चाहिए समय संत आप वो निकाल लीजिए ना जो ् प आपने मुझे दिए थे वो वाले पिक्चर आप तो दे

01:49:46:10 दीजिए ये 38 नंबर का पेज है और आगे चलिए और आगे चलिए 38 है 38 प जाइए हा ये आ गया 38 इसमें देखिए क्या लिखा है धर्मदास [संगीत] जीवन उपरोक्त विवरण से यह भी नहीं है वो ढूंढना पड़ेगा आप वो वीडियो दिखा दीजिए इस दास बोला हो जिसमें इन्होंने अपने ग्रंथों में मैं आपको बता दू मैं क्या दिखाने जा रहा हूं इन्होंने अपनी किताबों में हां देखिए अब इस दास रामपाल दास जब भाई मैं खुद हूं रामपाल तो मैं कहूंगा मैं रामपाल इस दास का मतलब यहां पर कोई तीसरा है यानी कि कोई एक काल खड़ा हुआ था वहां पर जिसकी बात कर रहे हैं बारबार रामपाल इस दात तो वहां कोई तीसरी अदृश शक्ति भी है जिसकी बात हो रही है इस दास व्यक्ति अपने लिए इस नहीं बोलता है वो कहता है मैं हां जैसे ये बोल रहे ना व्यक्ति अपने लिए उस नहीं बोलता वो बोलता मैं तो वैसे ही मैं बता रहा हूं इनके जो रामपाल है जगह

01:51:01:20 जगह पर अपने लिए इस दास इस दास किया करते हैं जगह जगह पर तो इसका मतलब वो रामपाल स्वयं नहीं है और रामपाल के साथ में कोई भूत खड़ा हुआ है वो उसकी बात करते हैं देखिए प्र अंदर चला नहीं नहीं अंदर साथ में इस दास और इन्ही दास चुप रहि एक मिनट चुप रहि सुनिए इसका इसकी वाणी सुनिए हाके खड़ा कर दिया न डूबने वाला है और साथ में इस दास ने ओके खड़ा कर दिया नका इस दास का क्या म और साथ में इस दास ने ओके खड़ा कर दिया

01:51:46:16 नका बस बस कर और कई जगह इनके ग्रंथों में कई जगह इसने लिए लिखने वाले ने अपने लिए इस शब्द का उपयोग किया है तो वो खुद कहेगा ना मैं इसका उपयोग क्यों कर रहा है भाई तो इसका मतलब वहां पर कोई और है कोई और परालु जी की तरह ये सीधे इन्होंने कुछ नहीं किया सब कुछ जो ये जाल फैलाया है वो उस दास ने फैलाया जिसकी रामपाल दास जी बात कर रहे हैं द सांकेतिक

01:52:36:21 भक्ति और मैं क्या बताऊ तो यह सारी चीज आज हमने जान जानी है अब कोई आना चाहे भाई हरियाणी वो आओ आओ बताओ वेदों में कहां प्रमाण है भवान आजम तुम्हारी किताबों से उए आज मुझे मौका दो आज आज इ को मखाना चाता थोड़ा सा आज बिल्कुल लिंक को पब्लिक कर दीजिए तब तक विशाल भाटिया जी आप अपनी वो करिए बात आपने अभी जो फोन में को पूछा था की ग दिखा श्री कृष्ण ने अपने को काल कहा है तो मिला है मुझे प्रमाण ज दूसरी बार भी अपने को श्री कृष्ण ने वो है मेरे पास श्रीमद भागवत महापुराण देख सकते हैं अब मैं इसका गवा स्कंद खोलूंगा इसमें भगवान श्री कृष्ण जैसे दव अध्याय में अब जैसे दव अध्याय में इन्होने अपनी विभूतियों का वर्णन किया था ना अर्जुन को वैसे ही स्क में उ को करते कौन सा स्क स्वा स्कं 10 ब 33 में इन्होने अपने को कालों का काल महाकाल भी बोला है श्रीमद भागवत

01:53:53:01 स्कंद और अध्याय नहीं नहीं मैं ढूंढ रहा हूं इसी में है ढूंढ एक सेकंड उ जी से बा ढूंढ रहा मिल गया मिल गया सवा अध्याय पेज नंबर 809 सवा अध्याय शलोक एक सेट मैं आ तो जाऊ 809 पेज नंबर [संगीत] है एक

01:54:34:03 सेकंड आप ये बात समझिए जो ये जो चक्र चलाया है ना वेदों में प्रमाण है ये रामपाल दास जी ने नहीं चलाया उनके पास कोई काल खड़ा हुआ है शैतान ने चलाया वो बोलते हैं ना इस दास इस दास ये सब कुछ जो चक्कर चक्कर चलाने वाला वो वो है काल देखिए मुझको मिल गया है मैं अभी स्टार्ट करने वाला हूं बस दो मिनट में ठीक है मैं आ रहा हूं दो एक [संगीत]

01:55:09:01 सेकंड मैं निकाल ू क्या आप निकालो मैं जब तक कुछ काम करके आ रहा हूं क्या नंबर क्या 809 आ बस प्रभु को भोग लगा के पहाड़ी जी आज कोई द दास गगर नहीं आ रहा क्या चक्कर आज सारे बजी लग रहे हैं क मंडारा चल रहा है ना बोलने लायक नहीं शिवांश भाने उनको क्या बोलेंगे भंडारे में नचे नचे करके बैठे हुए लगता है पड़े होंगे रस्ते में अभी ये पता है क्या है ये लोग बहुत ज्यादा तीन पा दोय सब किया करते अब ये लोग आएंगे नहीं क्योंकि इनका जो प्रतिकार है इनके हम अपने ग्रंथ खोलने की आवश्यकता ही नहीं है नहीं होगा काल सिद्ध नहीं होगा कुछ सिद्ध नहीं कर पाओगे भैया तुम्हारी ही मटिया मेट हो जाएगी आओगे तो सुनि देखिए ये लोग इनको हम सनातनी बोलना ही सनातन शब्द का अमान है ली हमेशा रामली रहेंगे अलंकारी हमेशा अलंकारी ही रहेंगे क्या बात है शेर की तर

01:56:23:27 आर्य समाज वाले हमेशा अलंकारी रहेंगे और सतलोक वाले हमेशा राम पाली रहेंगे बस सनातनी वो रत्ती भर के भी नहीं है नहीं रामपाल वालों को तो सनातन की लिस्ट में स्वीकार करना बिल्कुल गलत है क्योंकि ये लोग वेद की बात करते हुए वेद का खंडन करते हैं हा वेद में मुक्ति नहीं है वेद में ईश्वर नहीं है वेदों को कहने वाला ज्ञानी है मूर्ख है ला है घटिया है मुझे एक चीज पता चली है पर पुता प्रमाण राम जेल जाने से पहले एक बार सरकार के व से पिटीशन लगा चुके हैं कि हमको एक अलग धर्म का वो दिया जाए दर्जा दिया जाए और और कोटा दिया जाए मैं न्यूज देख रहा था कहीं रद कर द इनकी जो दिया था इने कि पहले से 12 पंथ है कबीर दास के तो अब को भी उसना जाएगा

01:57:22:14 ये मैं ढूंढू ये है इसमें इसका ये लोग अपनी वोटिंग पावर बढ़ा के करना चाहते हैं लोगों को मिसगाइड करना चाहते हैं यह चकर जिसम 2014 में जो दंगे हुए थे ना धर य बरवाला कांड हुआ था जो उस समय य चीज बात निकल के आई थी आई होगी पक्का आई होगी य हा यह चल रहा है प्रिय उद्धव तुम प्रश्न मर्म समझने वाले हो शिरोमणि हो जिस समय कुरुक्षेत्र में कौरव पांडवों का युद्ध छिड़ा हुआ था उस समय शत्रुओं से युद्ध करने के लिए तत्पर अर्जुन ने मुझसे यही प्रश्न किया था अर्जुन मन में ऐसी धारणा हुई कि कुटुंब हों को मारना मैं मारने वाला हूं ऐसा है तब मैंने रणभूमि में बहुत सी युक्तियां देकर वीर शिरोमणि अर्जुन को समझाया था उस समय अर्जुन ने भी मुझसे यही प्रश्न किया था जो तुम कर रहे हो मैं समस्त प्राणियों का आत्मा तैसी सुर और ईश्वर नियामक हूं मैं ही इन समस्त प्राणियों और पदार्थों के रूप में हूं और इनकी उत्पत्ति स्थिति एवं प्रलय का कारण हूं

01:58:38:02 गतिशील पदार्थों में मैं गति हूं अपने अधीन करने वाला मैं काल लो तो इनका वो जो इन्होने वो स्क्रीन पर दिखा दीजिए भैया इन्होने कहा थाजी आपसे मिलना चाहते हैं मेरे पिताजी है ह मेरे पिताजी है जी जी आभार आप प्रणाम जी तो बताए बताए आप कुछ कहेंगे नहीं बस कुछ नहीं बस आपसे मिलना था जो है मैं ये देख रहा था कि आप लोगों के साथ ये काफी घुलमिल गया है बहुत ज्यादा जो है आप लोग का इंतजार रहता है इसको कि कब रात में जो है ये आप लोगों के साथ जो है अपना बैठे वार्तालाप करे बहुत खुश होता है ये आप लोगों से जो है बात करके और ये सब अच्छा लगता है इसको का नहीं बहुत वो जो है बौद्धिक स्तर बहुत अच्छा है विशाल का और अच्छा अध्ययन है उसका प्रेरणादाई अन अन्य किशोर अवस्था में जो आज है किशोरों के लिए युवाओं के लिए प्रेरणादाई है

01:59:56:00 तो एक बार वो इनका इनका जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम एक बार इनका वो कुतर्क दिखा दीजिए स्क्रीन पर पेज नंबर दो जीजी के नाम की इनकी पुस्तक है जो [संगीत] उसका गरिमा गीता की दिखाइए पेज नंबर टू जहां पर इन्होंने कुतर कि ना कि वो अगर वह अगर वह का वो होते हां नीचे जाइए नीचे जाइए आ गया इसी में बस मुझे पढ़ने दीजिए मैं देख

02:00:45:07 लूंगा और नीचे चलिए थोड़ा और नीचे नीचे चलिए यहां पर इन्होंने कुतर्क किए बहुत सारे और नीचे चलिए थोड़ा सा हम हां थोड़ा ऊपर जाइए ऊपर जाइए थोड़ा हां जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता जी का ज्ञान सुनाते समय 1132 में पवित्र गी बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि अर्जुन मैं बड़ा हुआ काल हूं अब सर्व लोकों को खाने के लिए ऐसा ऐसा प्रकट हुआ हूं जरा सोचे श्री कृष्ण जी तो पहले से ही अर्जुन के साथ थे यदि पवित्र जी गीता जी के ज्ञान को श्री कृष्ण जी बोल रहे होते तो व यह नहीं कहते कि मैं प्रवृत हुआ हूं फिर अध्याय 11 श्लोक 21 और 46 में अर्जुन कह रहा है कि भगवान आप तो ऐसा ऐसा कर रहे हैं लटक रहे हैं कामना कर रहे हैं हे सहस्त्र आप चतुर्भुज रूप में आइए मैं आपके विकराल रूप को देखकर धीरज नहीं रख पा रहा हूं चलिए 1131 में अर्जुन ने पूछा कि

02:02:00:13 हे महानुभाव उग रूप वाले आप कौन है मुझे बतलाइए कृष्ण जी ने तो कृष्ण जी तो अर्जुन के साले थे तो उनको उनको पहचान नहीं पा रहे थे गीता जी का ज्ञान कृष्ण ने नहीं दिया है आगे 1147 में गीता जी को बोलने वाले प्रभु काल ने कहा हे अर्जुन यह मेरा वास्तविक काल रूप है जिसे तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा है उपरोक्त विवरण से एक तत्व सदुआ के कौरवों की सभा में विराट रूप श्री कृष्ण जी ने दिखाया था मगर इन्हो इन लोगों ने यह बात माना है कि वो जो रूप था ना विराट रूप कह तो रहे हैं उसे मगर वो चतुर्भुज रूप दिखाया था इन्होंने वहां पर माना है ठीक है तो दिखाया था श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रेत वत प्रवेश करके उन्होंने वोह विराट रूप दिखाया था काल दिखाया था नहीं तो यह नहीं कहता कि यह विराट रूप तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा है और क्योंकि श्री कृष्ण जी अपना विराट रूप कौरवों की सभा में पहले भी दिखा चुके थे दूसरी बात य सई के पवित्र गीता जी को बोलने वाला अ काल ब्रह्म ज्योति निरंजन है ना कि श्री कृष्ण क्योंकि श्री कृष्ण जी ने पहले कभी नहीं कहा कि मैं काल हूं ना ही बाद में कभी कहा कि मैं काल हूं लो हो गया लो भैया पहले कभी नहीं कहा कि मैं काल हूं और बाद में भी कभी नहीं कहा कि मैं काल हूं और

02:03:15:19 ये बाद में कह रहे हैं कि मैं काल हूं अब क्या करें प पहले कह चुके हैं कि मैं काल हूं विराट रूप दिखाने से पहले गीता में 10 33 में हा 10 में कह चुके हैं तो पहले और बाद दोनों में कहा है इनके सभी को तर्को का समाधान हो गया अब अगर कोई आना चाहता है तो वह आ सकता है सात्विक जी बताए चेहरा थोड़ा लेक आया करय चेहरा ना होने की वजह से थोड़ा वो ठीक नहीं रहता है

02:03:53:28 तो अब हम लोग कुल मिलाकर के आज जो चीजें हमने जानी है उससे आप इतना जान लीजिए इसको और थोड़ा क्लेरिफाई करके फिर कभी लाएंगे आपके सामने इतना जान लीजिए कंक्लूजन सर वही है जो मैंने कई बार बता दिया कि यह वेदों की बात इसलिए करते हैं कि यह आपको वेद विरोधी बना सके सनातन की बात इसलिए करते हैं सनातन विरोधी बना सके हिंदुत्व की बात इसलिए करते कि हिंदुत्व की विरोधी आपको बना सके क्यों क्योंकि वेदों द्वारा मुक्ति नहीं है वेदों में पूर्ण ब्रह्म नहीं है वेदों को बोलने वाला घटिया है वेदों को बोलने वाला अज्ञानी है वेदों के द्वारा प्राप्त होने वाला जो ब्रह्म है वो यह सब है और अंततोगत्वा वो प्राप्त होगा कि नहीं यह नहीं पता वो आपको खाएगा कि नहीं ये नहीं पता वो दिखाई देगा कि नहीं यह नहीं पता वो तीन में से कौन सी बात माननी है वो आप लोग डिसाइड करना येय कालनेमी टाइप से लोगों को मिस करने कालनेमी जैसे किया हनुमान जी कोरे मैं देखता हूं ना कि इनके य के जितने भी लोग आते हैं वो थोड़ा सा मानसिक रोग क्यों दिखता है उनके क्यों दिखता ड़ी विक्षिप्त क्यों उनको कुछ समझ में नहीं आता है इसलिए दिखता है क्योंकि वह इनकी ऐसी जो किताब है जो अपना ही बार बार बार बार बार बार उल्टी सीधी वो कर रही है

02:05:09:16 इन किताबों के आधार पर व्यक्ति इनको पढ़ने वाला क्या होगा क्या होगा इनकी बुद्धि में कालनेमी आया हुआ चक्कर नहीं वो जो रामपाल दास जी के बगल में कोई खड़ा रहता है ना जिसकी ओर वो इशारा करते हैं वो कोई छुपी हुई कोई शक्ति है वो जिसके बारे में बारबार संकेत करते हैं खुल के नहीं बता पाते डर के मारे वो संकेत करते इस दास इस दास वो छुपी ई धूर्त शक्ति है कोई बात सही है हा वो कोई गलत शक्ति है नकारात्मक चलिए कोई आना चाहता है तो आ सकता है वेदों में प्रमाण है कभीर भगवान है वही शक्ति जैसे दुर्योधन के आसपास थी कंस के आसपास थी शिशुपाल के आसपास थी वही है उस टाइप की शक्ति है आए भैया कोई आना है या भंडारे में गए सब के सब भंडारे भंडारे या फ जवाब नहीं है कोई भी पुड़िया खाके बेहोश हुए पड़े हैं और मैं एक बात और बता दूं की जो लोग भी शास्त्रों के नाम पर पाखंड फैलाते हुए सनातन के नाम पर सनातन का विरोध करते हुए हिंदू समाज को

02:06:24:16 सनातन समाज को क्षति पहुंचा रहे हैं उनके बारे में जिनके बारे में मैंने अभी तक बात नहीं की है वो लोग ये ना सोचे कि उनका नंबर कभी आएगा नहीं भगवान से प्रार्थना करें जिस रूप में भी आप मानते हो कि आहवान की रडार प आप आए नहीं क्योंकि जिस दिन आएंगे उस दिन से फिर आप सबकी आपकी भी उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी हम चलिए पूरा करते हैं कोई है नहीं आज लगता है दास सारे गायब है

02:07:08:26 आज नहीं एक दो है वो जो होंगे भी तो व ये सोच रहे होंगे अब क्या करें हमारी गरमा गीता कीने तो कोई गरमा नहीं रखी हमारी अब वो सोच रहे हैं कि बेजती करा के जाएगा कौन अब ये भी तो चक्कर है अब कितनी बेजती करवाएंगे भी तो बात है नारा जय श्री राम जय श्री राम निशांत जी अरे वाह प्रणाम भैया हा खुश रही आप पहुंच ग कोटा हा [संगीत] हा बताइए यह पूछ रहे हैं बाबू राम जी कि कल तुमने उसको क्यों हटाया था लाइव से क्योंकि वह यह कह रहा था कि बता देंगे तो जब वहां उसके पास कुछ बताने के लिए था नहीं तो फिर उसको क्यों रखे और तुम तो गुरु द्रोही हो तुम किस मुह से बात कर रहे

02:08:08:26 हो तुम तो जो बोल रहे हो व तुम्हारे गुरु मना कर रहे हैं वो तुम बोल रहे बताया झूठ बोल रहे हो गुरु के नाम पर न जी बताए जय श्रीराम खिचड़ी देख के आए हैं अभी एक किताब का खिचड़ी क्या इस सारा सब्जी मिला दिया है अरे अगर तुमने स्वयं यह पढ़ी तो भाई सर में दर्द हो जाएगा

02:08:48:28 निश्चित हर बात को अपनी बात को काट दिया काल आकार नहीं लेता है मगर वह श्री कृष्ण के शरीर से बाहर निकल के अपना विराट स्वरूप दिखा रहा है वेदों के द्वारा ब्रह्म प्राप्त होता है मगर ब्रह्म को प्राप्त भी नहीं हो कर सकते आप क्या बात कर रहे हो यज्ञ के द्वारा जो अर्जुन को मोक्ष मिलता है मगर यज्ञों के द्वारा मोक्ष नहीं मिलता है यज्ञ को बताने वाला तत्वदर्शी है मगर यज्ञों से मुक्ति नहीं मिलती क्या

02:09:25:15 करोगे और यह तो मैं बताओ मैं अभी इनको खैर बनानी चाहिए ये तो अभी यह मान के चलिए चलते फिरते जो नहीं किया जाता है बस केवल उतना है ये अगर लेके बैठ ही गए इनकी अभी क्या है इनका भंडारा चल रहा है ना तो मेरे हाथ में किताबें नहीं आ रही है तो थोड़ी अड़चन आई पढ़ने में पीडीएफ के थ्रू मेरे पास है नहीं गरमा गीता की पीडीएफ वो हार्ड कॉपी अब ये लोग अपने सबको कहेंगे देखो शिवांश द्वेदी के हाथ में गरमा गीता की नहीं पहुच अरे जय श्री राम जय श्री राम जम अरे अभी अभी अभी कोई लॉजिक इन लोगों का आया था कि उन्होंने जो है अपना रूप वो कौरवों के राज्यसभा में दिखाया था और यहां पर रूप दिखाया था तो उसमें दोनों रूपों में इन लोगों को य नहीं पता कि बहुत बड़ा अंतर था यहां पर अर्जुन ने डिमांड किया था कि मैं आपके जितने रूप अब तक हुए हैं चाहे वो द्वादश मतलब 12 आदित्य के रूप है 11 रुद्र के रूप है आठ जो है वसु के रूप है 49 मरुद गणों के रूप है उस सारे रूप को अर्जुन ने एक ही बार में देखना चाहा था ये इच्छा अर्जुन ने जाहिर की थी कि मैंने अ आपके विभिन्न

02:10:40:28 गुणों को विभिन्न कर्मों को विभिन्न रूपों को सुना है उन सारे रूपों को मैं एक ही बार में देखना चाहता हूं तो उन्होंने कहा भी था कि मैं यह सारे रूप तू अपनी इस दृष्टि से देख नहीं सकता ये बात सही है इसीलिए मैं तुम्हें दिव्य दृष्टि मतलब वहां पर उन्होंने उनको चतुर्भुज रूप दिखाया था राज्यसभा में जो कि विराट था और यहां पर उन्होंने अपने जितने रूप उनके थे वो सारे रूप एक साथ दिखाए थे असीमित रूप हां मतलब असीमित क्या जितने रूप है उसमें बता तो ना है 12 आदित्य थे 11 रुद्र थे आठों वसु थे और 4 मरुद गण थे अंतिम बात है कि जब यह रूप दिखा दिया तब भी संजय ने उसको उस रूप वाले को कृष्ण कहा महा कृष्ण नाम है अरे संजय ने अरे सुनो संजय ने छोड़ो श सुनो संजय ने कहा वो अलग छोड़ दो ना उसके बाद फिर अर्जुन ने यह जो है इच्छा प्रकट की कि मैं आपके चतुर्भुज रूप को देखना चाहता हूं तो उन्होंने फिर चतुर्भुज रूप भी दिखाया है आठ या न श्लोक के बाद हम इस बात का वर्णन है और अर्जुन ने उनको विष्णु शब्द कहकर संबोधित किया

02:11:56:06 है 41 42 में कृष्ण जी भी बोला उने 11 ब 412 हा बो वही तो कहा है वो शिवास जी ने बता दिया वो उसने क्या बोला कि मैंने आपको आज तक सखा समझा था तो क्या काल को सखा समझा था सही बात काल को सखा समझा था काल तो उसी समय निकला ना अरे जो है सो है इन लोगों को समझाने में बड़ा मजा आता है लेकिन समझे तब तो बड़े ी टाइप सुनो ना पता है पैसे से मैं एक टीचर हूं लेकिन यह बड़े ट टाइप के स्टूडेंट है ट टाइप के स्टूडेंट होते डंडे से समझते हैं अरे यार पते को स्टूडेंट होता डेली मार खाता था उसने बस मार खानी और कुछ नहीं करना

02:12:51:27 क्या हुआ चलिए फर बढ़ते हैं किसी प्रकार के वैचारिक मतभेद के निमित चर्चा करनी हो तो आप संपर्क कर सकते हैं ट करिएगा 74036 नामा हम लोग नाम जप करते हैं आप लोग उसमें हमारे साथ दे सकते हैं ना मास्त्र में किसी प्रकार से अभियान को सहायता करना चाहते हैं तो वो कर सकते हैं और जो हमारी कक्षाएं हैं उसमें आप आ सकते सभी चीजों के लिए एक ही नंबर 74036 जी जी किसी प्रकार के प्रश्न के समाधान के लिए सबसे पहले टब पर गोवर्धन मट का चैनल है उस पर चेक करें आपके प्रश्न का उत्तर मिल जाएगा आदित्य वाहिनी से जुड़ने के लिए जो गुरुदेव पुरी शंकराचार्य की सेना है उससे जुड़ने के लिए आपको वहीं पर उनकी जो प है गोवर्धन मटकी पप है उसको डाउनलोड करिए उसमें अपना नाम रजिस्टर करवा लीजिए जब भी आपकी आवश्यकता होगी तो वहां शंकराचार्य जी आपको आवाज देंगे मेरे सैनिक कहां है उस समय आपको पहुंचना होगा और अगर विधि विषयक प्रश्नों के उत्तर चाहिए तो आप आचार्य रामशंकर शुक्ल जी है उनका चैनल है वो आप फॉलो करें

02:14:07:02 विधि विषेक आपको हां जी जी ठीक है तो आज मेरे ख्याल से काफी हो गया है जी जी जी जी सभी को जय श्री राम जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 2:14:36 · 15 Nov 2024

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A · Live रामपाल की भक्ति मनमुखी या शास्त्र सम्मत
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