⬜ Not used yet · 00:00:01:03 – 00:01:31:09 (1:30)
00:00:01:03 [संगीत] तो सभी को जय श्री राम जितने भी श्रोता गण जय श्री राम जय श्री राम जितने भी अतिथि है सभी को जय श्री राम युगल किशोर जी आपका बहुत-बहुत स्वागत है आज हमारे बीच में राघव जी भी है राघव जी को आपने पिछली एक चर्चा हुई थी जो जिसमें हम लोगों ने कुछ मुंह को छिपाने वाले काले कारनामे करने वाले लोगों के बारे में बात की थी काफी विस्तृत चर्चा थी और हमारे बीच में एक नए अतिथि और है शेखर प्रताप सिंह जी और बहुत ही जय श्री राम जय श्री राम शेखर जी इनका शेखर जी का भी चैनल है धार्मिक इंटेलिजेंस के नाम से और बहुत ही लॉजिकल बात को रखते हैं लॉजिकली बात को रखते हैं यह भी तर्क और प्रमाण के साथ मैं आप लोगों से कहूंगा कि इनका चैनल भी एक बार जो है आप लोग जरूर वहां पर जाए और इनकी चीजों को देखें जोय कर रहे हैं किस तरीके से अपनी चीजों को रखते हैं और आज की जो चर्चा है
00:01:17:02 उसको शुरू करने से पहले मैं भगत सिंह का एक वक्तव्य मुझे याद है वो कहूंगा सीने पर जो घाव है वो फलो के गुच्छे
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→ Used in: A · Live स्वयं को निर्भय कहने वालों में आह्वान का भय बौखलाहट अभद्रता और पलायन at 38:59 ↗
→ Used in: B · Live लुप्त संप्रदाय और गुप्त आचार्य का सच at 1:12:46 ↗
00:01:31:09 हैं सीने पर जो घाव है वो फूलों के गुच्छे हैं हमें पागल ही रहने दो हम पागल ही अच्छे हैं
⬜ Not used yet · 00:01:42:19 – 01:33:56:00 (1:32:13)
00:01:42:19 यह मैं क्यों कह रहा हूं क्योंकि हमारा कहीं पर लाइव इलाज चल रहा है दिमाग का तो इसलिए बताना पड़ रहा है वहां पर एक पर्टिकुलर एक डॉक्टर भी है पता नहीं लोगों को ऐसा क्यों लगता है कि डॉक्टर से उनी के पास है मगर हम अपनी बात जब भी लाएंगे धर्म के विषय में तो शास्त्र लेके आएंगे साइजल प्रॉब्लम है हमारा नहीं नहीं हमारा इलाज भी चल रहा है लाइव और सबसे बड़ी बात है ना भगवान श्री कृष्ण ने एक बात कही थी तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एक मात्र शास्त्र प्रमाण हम अपनी जो बात बोल रहे हैं आचरण के संबंध में भी बोल रहे हैं सिद्धांत भी बोल रहे हैं उसके लिए शास्त्र का प्रमाण रख रहे हैं और यह लोग क्या कर रहे हैं डॉक्टर को ला रहे हैं संविधान को ला रहे हैं राजनीतिज्ञों को ला रहे हैं इनका धर्म से लेना देना खत्म हो गया अब आधुनिक भौतिक विज्ञान पर आ गए हैं धर्म से लेना देना बंद हो गया धर्म के साथ जोड़ते हुए लाए तब भी ठीक है
00:02:57:28 युक्ति के लिए वैज्ञानिक उसको अब जैसे मैंने अभी थोड़ा सा मेरे कान में पढ़ा कि भाई जब तुम किसी का तुम्हें कोई अधिकार नहीं है कि तुम किसी के बारे में कुछ बोलो ना मनुस्मृति में लिखा है सुन लेना भैया लड़का हो या लड़की वह आवाज बदल के लाइव करते हो कि वाकई मेंही कोई किसी की बिटिया हो सुन लेना कि मनुस्मृति में लिखा है मौन रहने से अच्छा है सत्य बोलना यह है शास्त्र शास्त्र के साथ अपनी बात बोलो ना भाई हमने जो प्रश्न किया यज्ञ पवित्र करते समय के लिए किसी पर तो हमने शास्त्र से किया हमने कहा कि वेदों में लिखा है कॉपी मेखला पहनकर धारण पूर्वक ब्रह्मचारी धारण करता है तो कहां है कपन मेखला और अगर तुम धारण कर भी रहे हो तो कौन से तुम्हारे वस्त्र है यह फिर कहां से निर्धारण हो रहा है अगर तुम शास्त्रो चित विधि का उपयोग नहीं कर रहे हो जो सबसे महत्त्वपूर्ण चीजों में से एक है उसको करते समय तो फिर वह जो चीजें हैं उनको कहो कि वह शास्त्री
00:04:13:09 है और अगर हमने यह वाली लाइन भी कही है ना कि भाई मैं धर्म का जो धर्मानुसार जो विधि है उसका तरीके से निर्वाह नहीं कर पा रहा हूं ये भी भगवत गीता में है भगवत गीता भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं व्यवस्था वश अज्ञानता वश शास्त्रो चित विधान का पालन ना करने की स्थिति में यदि तुम्हारी प्रमाण बुद्धि शास्त्रों में है धर्म में है तो भी तुम
00:04:47:03 धर्मजीत मैं यह स्वीकार कर रहा हूं कि मैं शास्त्र उचित नहीं हूं मैं जो कर रहा हूं वो कहीं ना कहीं गलत है मैं यदि यह स्वीकार कर रहा हूं तो भी मैं धर्मजयगढ़ जब शास्त्रों के बाहर जाकर के कुछ करेगा और यह कहेगा नहीं यह शास्त्र उचित है तो अच्छा एक बात तो है वो कहते हैं ना कि अच्छे लोगों की जब संगत मिलती है तो भले ही विरोध के रूप में मिले या सहयोग के रूप में मिले उसका असर आने लगता है तो मैं देख रहा हूं कि असर आया आज वह अभद्रता व अ मर्यादा वो हीन आचरण वो सब मुझे थोड़ा उसकी मैं ट नजर आई बाकी तो आगे तो चीजें है अपनी अपनी
00:05:36:06 जगह हां एक एक मैं मुख्य विषय को स्टार्ट करने से पहले एक बात और कह दू कि हमारे बारे में आचार्य प्रशांत जी है उन्होंने अपने चैनल पर एक पोस्ट डाला है और मैं उनका सम्मान करता हूं उन्होंने बहुत ही अच्छे शब्दों का उपयोग करते हुए जो है अपनी बात को रखा है कि आप हमारे आश्रम आ जाइए और जो दो पक्ष है उन दोनों पक्षों में बात होनी चाहिए आचार्य प्रशांत जी मुझे आपको आपने उसमें कुछ जो कुछ मैं कहूंगा शायद आपको मालूम नहीं होगा हमारे बारे में इस वजह से वो हुआ है पहली बात तो यह है कि आपने कहा कि नव युवकों में आजकल वाद विवाद छेड़ा हुआ है तो प्रशांत जी मुझे नहीं पता आपकी आयु कितनी है
00:06:32:13 मगर यदि आप 35 वर्ष की आयु वाले को नवयुवक कहेंगे तो फिर अधेड़ या फिर जो 21 साल का युवा होगा 24 का युवा होगा उसको क्या कहेंगे या मतलब क्या कहेंगे उसको नव युवक अगर आप कह रहे 35 वर्ष की आयु वाले को जिसका परिवार है है ना तो मुझे लगता है कि मेरी और आपकी आयु में बहुत ज्यादा डिफरेंस नहीं होगा जो आप अपने को अलग करते हुए और हमें जो है चिला चटर मटर में थोड़ा सा डाल रहे होग वो कैंडी खाने वाले बच्चे आपस में लड़ रहे हैं ऐसा नहीं है 35 वर्ष की आयु है और मुझे लगता है य जितने भी जो नवयुवक हैं जो भिड़ने आ रहे हैं उन सबसे करीब 10 10 साल का गैप तो होगा ही हां वो जो एक भद सा क्या है वो एक गुंडा टाइप का है ना जो अंडर कवर्ड एजेंट है जो गालियां दिया करता है विविर वगैरह पर और अभद्र भाषा का उपयोग करता है उस उससे
00:07:47:21 मुझे लगता है कि हमारी आयु की सिमिलरिटी हो सकती है मगर यह जो विज्ञान दर्शन इत्यादि है वि विज्ञान दर्शन हो गया जो जो हमारे ऊपर जो वीडियो बनाया गया लाइव किया गया उसमें जो उपलब्ध और अन्य जो युवा थे मुझे नहीं लगता कि उनकी जो हा उवाच नाम का जो एक अमर्यादित हीन आचरण युक्त व्यक्ति है वो उससे आयु की हो सकता है सिमिलरिटी हो 19 20 का अंतर हो यह हो सकता है मुझे ऐसा लगता है बाकी सत्यता क्या है वो नहीं पता तो एक तो यह बात हो गई कि जो आपने कहा कि नवीको में आपस में वो हो रही है तो मुझे फिर यह जानना होगा कि आपकी नजरों में फिर युवक क्या है जब 35 साल का व्यक्ति भी आपके लिए नव युवक है तो फिर नव युवक है 35 वाला तो फिर युवक क्या होगा 40 45 इसको थोड़ा सा ठीक करें दूसरी बात आपने एक शब्द उपयोग में लिया हमारे लिए पौराणिक और आर्य समाज के लिए वैदिक तो यह निर्धारित आपने कहां से किया कि हमारे लिए जब आप हमारे समक्ष किसी को रख रहे हैं वैसे आप पौराणिक कह सकते हैं मगर जब समक्ष किसी को रखते हुए
00:09:02:24 पौराणिक कह रहे हैं जब किसी को समक्ष रखते हुए वैदिक कह रहे हैं तो आप वहां पर हमें पौराणिक कहने का अधिकार आपको किसी ने नहीं दिया तो इस बात का आपको ध्यान रखना चाहिए मैं सम्मान कह रहा हूं क्योंकि अगर हमें कोई पौराणिक कहेगा तो हम वेदों की सीमा के अंदर होते हुए पौराणिक है अगर मैं आपको आर्य समाज को वैदिक ना कहूं सत्य प्रकाशी कहूं कैसा चलेगा आपको अजीब लगेगा क्योंकि जो आइडेंटिटी आपने अपनी बनाई है या जो अपने लिए आप सुनना चाहते हैं जो अपने आप को आप कहते हैं वोह सामने वाला नहीं कह रहा है भले ही वो जो बुक है वो आप यूज करते हो उस पर आधारित हो मैं आपको अगर बोलने लगू ये जो है सत्य प्रकाशी है वैदिक ना बोलू वैदिक हम अपने लिए वैदिक बोलू और आपके लिए बोलू यह प्रकाशी है यह समाजी है तो आपको अजीब लगेगा तो आपको ये वर्तनी का थोड़ा सा ध्यान रखना चाहिए था कि आपको हमारे लिए बोलना चाहिए था परंपरा प्राप्त वैदिक और आर्य समाज के लिए बोलना चाहिए था स्वघोषित वैदिक ऐसा ही है ना या अगर स्वघोषित नहीं बोल रहे हैं तो समाजी वैदिक यह
00:10:17:24 बोल सकते हैं है ना परंपरा प्राप्त वैदिक परंपरा प्राप्त वैदिक बोलेंगे तो उसमें पुराण आ जाएगा फिर अलग से पुराण को लगाने की आवश्यकता नहीं हां किसी ऐसे व्यक्ति के लिए आप पुराणिक संज्ञा दे सकते हैं जो पुराण को मानता हो मगर वेदों को ना मानता हो तो ऐसे तो नहीं हम वेदों में प्रमाण बुद्धि ना रखता हो पुराण में प्रमाण बुद्धि रखता ह ऐसे तो नहीं तो यह थोड़ा सा आपको ध्यान रखना चाहिए था और मैं नहीं चाहता हूं कि आपके साथ आपके लिए मैं इस तरह के अलंकार समाज इत्यादि जो मैं प्रस्तुत करता हूं अलंकार समाज आपने स्वीकार किया आर्य समाज ने स्वीकार किया अलंकार समाज को अलंकार को वेदों में कई जगह अलंकार आ गया विराट पुरुष में अलंकार आ जाएगा तीन पग जब धरती नाप वामन अवतार में तो अलंकार आ जाएगा तो अलंकार को स्वीकार करते हैं इसलिए अगर हम आपको अगर अलंकारी कहने लगे तो आपको उचित नहीं लगेगा तो इसी प्रकार से आपको पुराण पौराणिक नहीं कहना चाहिए ठीक पौराणिक कहिए वैदिक होते हुए पौराणिक कहिए या परंपरा प्राप्त वैदिक कह सकते हैं यह तो
00:11:32:25 रही आपने जो व लिखा है उसके अंदर की बात दूसरी बात यह है कि बिल्कुल आपका जो क्या कहते हैं उसको आपका जो निमंत्रण है आपका जो आमंत्रण वह हमें स्वीकार है बस बात यह है कि जो विज्ञान दर्शन नाम का जो व्यक्तित्व है उसके साथ कोई भी चर्चा नहीं होगी उसके साथ इसलिए चर्चा नहीं होगी कि यह व्यक्ति वहां उस मंच का एक भागीदार था जिस मंच पर अशा स्त्रीय रूप से हमारे ऊपर टीका टिप्पणी की गई हमारे आध्यात्मिक मार्ग में आने से पहले के जीवन की फोटो लगा कर के इस तरह से उन्हें उपयोग में लाया गया जैसे आज भी हम उस तरह की फोटो अ कर रहे हैं खिंचवा रहे हैं और उनको उपयोग में लाया गया हमें डिफेम करने का प्रयास किया गया और सबसे बड़ी बात है कि हमारे जो परिवार है फैमिली है जिसने किसी के ऊपर कोई कटाक्ष नहीं किया था उसको भी नहीं छोड़ा गया उसको भी बीच में लाया गया तो यह व्यक्ति वहां पर उपलब्ध थे उपस्थित थे वहा इनका कहना है कि भाई हमने नहीं किया वो जिसका पेज है उसने किया है ना तो आपने
00:12:48:03 तो आप तो आचार्य है और जो यह कह रहा है वो भी सुन ले भीष्म पिता महा वहां उपलब्ध थे उपस्थित थे जहां पर द्रौपदी का चीर हो रहा था विवेकी का दायित्व ज्यादा होता है तो जब पनिशमेंट का अवसर आया ना तो पहले कौरवों की बारी नहीं आई पहले दुर्योधन की बारी नहीं आई पहले उसका ऋण चुकाना पड़ा भीष्म पिता मा इत्यादि को जिन्हें धर्म का बोध था तो यदि आप वहां पर उपलब्ध है तो मनुस्मृति का खंडन कर रहे हैं मौन रहकर क्यों यदि आपको लगता है कि वह कार्य गलत हो रहा है या तो आपके अनुसार वो गलत नहीं है गलत नहीं है तो आप फिर से विरोधी हो गए और यदि विरोधी अगर गलत है और आप मौन है तो आप मनुस्मृति का खंडन कर रहे हैं धर्म का खंडन कर रहे हैं क्यों क्योंकि मौन रहने से उचित होता है सत्य बोलना तो ये जो अ दर्शन विज्ञान दर्शन नाम का व्यक्तित्व है जो बोल रहा है कि मैंने नहीं वो तो दीदी ने बोला था अच्छा उसका एक तर्क और है वो ये भी बोल रहा है कि भाई वो वो मातृ शक्ति ने मातृ शक्ति के लिए बोला है मातृ शक्ति ने मातृ शक्ति के लिए मतलब आपके हिसाब से मातृ शक्ति अगर मातृ शक्ति के साथ कुछ भी करे तो वह कर सकती है
00:14:03:18 यह कहने का मतलब है हम तक सीमित होते तो अलग बात थी परिवार को बीच में ले आए तो ऐसे व्यक्ति के साथ हम मंच साझा नहीं करेंगे हां कोई अन्य व्यक्ति जो जिसके अंदर सद्भाव हो जिसके अंदर मर्यादा हो आप उससे हमारी चर्चा करवाए या फिर आपने जैसा की अंत में कहा कि भाई आप हमसे पूछ लीजिए अपने प्रश्न जो है तो यह भी हो सकता है आप आप अपने आप को रखिए वहां पर या फिर आप अन्य किसी को किसी मर्यादित व्यक्ति को अगर रखना चाहे तो वहां पर रखिए मगर विज्ञान दर्शन ने अच्छा विज्ञान दर्शन का एक और कहना भी है
00:14:46:02 कि विज्ञान दर्शन का एक और कहना भी है कि भाई मैंने कुछ नहीं किया था अरे जब आप यह कहते हुए अपने आपको अलग कर रहे हो मैंने कुछ नहीं किया इसका मतलब आप अप्रत्यक्ष रूप से तो स्वीकार कर रहे हो कि वहां कुछ हुआ मगर आप आपने नहीं किया जब हुआ तो जब आपको पता लग गया कि ऐसा हो रहा है तो आपने क्या किया आप मौन रहे आप वापस बाहर आ चुके हैं बाहर आने के बाद आपने जहां पर यह सब हुआ है उसका विरोध प्रकट किया आपने उनसे याचना की कि भाई वो आपने उनके परिवार को बीच में लाकर के गलत किया है आप जो है उनके पुराने फोटो दिखा कर के गलत किया परिवार तो दूर की बात है आप उनके पुराने फोटो क्यों दिखा रहे आज के फोटो दिखाइए और तो और उसने जो है शास्त्र को रखते हुए प की थी जहां पर वेद आपके कपड़ों पर जा रहे हैं वहां पर उसने बोला था और जिस बात को आप धर्मो चित रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं उस बात पर बोला था आप कॉफी पीजिए कैफेटेरिया में जाकर के उसको धर्म के रूप में प्रस्तुत मत करिए कोई कुछ नहीं कहेगा मगर आप कल को यह बताने लगेंगे कि कॉफी पीना जो है वेद संवत है गीता संवत है तो तो प्रश्न करना पड़ेगा ना इस इस संदर्भ में प्रश्न किया गया था खैर तो आपने इसी मर्यादा को नहीं कई मर्यादाओं को तोड़ा
00:16:01:14 संदर्भ को छोड़ दिया उसके बाद आप जो है व्यक्तिगत पुराने जीवन पर चले गए फिर परिवार को ले आए तो यह सब बातें आपको यदि गलत नहीं लगती है तो भी हम आपके साथ मंच साझा नहीं करेंगे यदि गलत लगती है और आप मौन है आप प्रतिकार नहीं कर रहे हैं तो भी आप जो है दोषी है यदि आपको लग रहा है कि य सब चीजें गलत है तो आपको वहां खलना चाहिए वो वीडियो डिलीट कर दो गलत किया तुमने यह अन्याय है मगर नहीं हम पक्षपात विहीन नहीं है हम तो पक्षपाती हैं तो यह विज्ञान दर्शन का पॉइंट ऑफ व्यू है अगर आप यह कहते हुए अपने आप को अलग कर रहे हो कि वह गलत हुआ है तो आपको स अगर आपके कहने पर व वीडियो डिलीट नहीं हो रहा है तो आपको सार्वजनिक रूप से उसका उसकी निंदा करते हुए यह सब आचरण गलत था और वीडियो बनाना चाहिए था यह सारी चीजें हैं बाकी लिखित में हमारे पास जो आया उसका ख में भी हम उत्तर दे देंगे जैसे एक विधिवत एक पैराग्राफ है उसका भी उत्तर दे देंगे वो हमें समय नहीं था गुरुदेव इस समय लखनऊ आए हुए हैं हमारा जो कार्य स्थली है वहां पर और इस कारण से हमें समय नहीं है हम एक से दो दिन में जो आपका प्रॉपर एक जो उत्तर है बाई
00:17:16:14 पोस्ट या जैसे भी उचित होगा दे देंगे उसको तो यह सारी बातें हमने कह ली अब आ जाते हैं हम मुख्य विषयों पर जी युगल किशोर जी जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम आज मुख्य रूप से हमने जो य चर्चा रखी है वो कल जो गोपाष्टमी है उसका विशेष महत्व लोगों को बताने के लिए रखी है और यह प्रेरणा देने के लिए रखी है कि अब से आने वाले समय से गोपाष्टमी को एक बहुत महत्त्वपूर्ण पर्व के रूप में प्रत्येक सनातनी मनाए तो इस तरह का कुछ भाव लेकर के आज हम चले हैं तो इसमें युगल जी हम सबसे पहले चाहते हैं कि आप थोड़ा सा इस पर प्रकाश डाले गौ का महत्व और गोपाष्टमी पर गौ का पूजन सपथम हम गोविंद भगवान श्री कृष्ण चंद्र को प्रणाम कर लेते हैं फिर उसके बाद इस पर प्रकाश डाल सभी मेरे साथ एक मंत्र का उच्चारण करें नमो ब्रह्मण्य देवाय ब्राह्मण हिताय जगत
00:18:32:01 ताय गोविंदाय नमो नम तो भगवान श्री कृष्ण भगवान श्री गोपा देख महत्व बहुत अधिक सभी पुराणों ने सभी धर्मशास्त्रों ने य का महत्व बहुत बताया है महाभारत के अनुशासन पर्व की यदि मैं बात करू उसकी बात बाद में करूंगा सर्वप्रथम में बात करूंगा जो गोपाष्टमी है व कार्तिक में पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है तो कार्तिक शुक्ल पक्ष की जो अष्टमी होती है उसको हम कहते गोपाष्टमी और भगवान श्री कृष्ण चंद्र जी ने जब गोवर्धन धारण किया था अपनी उंगली पर श्रीमद भागवत के द में बताया गया है गलोक से स् माता कामधेनु पधारी और स्वर्ग लोक से देवराज इंद्र पधारे तो गलोक से माता कामधेनु और स्वर्ग से देवराज इंद्र जब पधारे जब उनका अहंकार चूर कर दिया भगवान श्री कृष्ण चंद्र जी ने त माता काम नेनु ने अपने दुध की धारा से भगवान श्री कृष्ण चंद्र का अभिषेक किया वहा पर मा माता काम नेनु ने क्या कहा कि आप जो है आज से हमारे इंद्र हो जाइए तो वहां पर भगवान श्री कृष्ण चंद्र का नया नाम संस्कार हुआ वहा पर उनका क्या नाम पड़ा गोविंद
00:19:47:20 इसलिए हम कहते हैं गोविंद जो भगवान श्री कृष्ण चंद्र है वो हमारे सहायक हो वो जगत के हित के कारण है तो य गोपाष्टमी का महत्व गोदान का तो बहुत अधिक महत्व है अब देखिए जब हम मृत्यु को प्राप्त हो जाते है तो परलोक में क्या होता है तनी नाम की नदी होती वो तनी नाम की नदी इतनी भयानक होती है उसके अंदर रक्त पी मास इत्यादि य सब भरे हुए होते वो रक्त पी मास इत्यादि भरे हुए होते और नदी कैसी होती समुद्र जैसी उसका कोई और छोर नहीं होता समुद्र जैसी लंबी नदी होती है अब समुद्र जैसी लंबी नदी उसको पार कर भाई वहां पर खड़ा रहना भी मतलब कोई व्यक्ति खड़ा भी नहीं रह सकता इतनी दुर्गंध होती है वहा पर रक्त प मास इत्यादि भरा हो कितनी दुर्गंध आएगी और वो भी समुद्र की भाति ना और है ना छोर है तो वहां प महाभारत के अनुशासन परव में पितामह भीष्म ने गाय का य महत्व बताया की गाय की सेवा को तो आप छोड़ केवल व्यक्ति गाय का यदि स्पर्श मात्र कर ले कभी जीवन में यदि उसको गाय का स्पर्श हुआ हो तो वो रभी माता स्वयं तनी
00:21:03:10 नदी पर आकर के उस व्यक्ति को तनी नदी को पार करने में उसकी सहायक होती ये पिता भीष्म के वचन है और महाभारत अनुशासन पर बहुत अच्छी कथा है जो में रघुनंदन मह चवन होते हैं म चवन है रघुनंदन तो वो क्या जल के अंदर समा भी लेते हैं जब जल के अंदर समाधि लेते हैं तो वहां पर व्रत धारण करते हैं तो क मछार आ जाते हैं कई सारे मछुआरे आ जाते हैं वहा पर मछली को पकड़ने के लिए मछली को पकड़ने के लिए आते हैं जैसे जाल डालते मछली तो आती नहीं साथ में रघुनंदन चवन ऋषि होते है वो निकल आते हैं जाले के साथ जब वो बाहर निकल के आते हैं तो वो कहते कि तुम मछार ने मेरे को निकाला है और तुम्हारी इस रस्सी से जाल से कई सारी मछलियों का वध भी हुआ है तुमको पाप भी लगा इसलिए जो तुम्हारे राजा है उनके पास मेरे को ले चलो वो राजा के पास जाते हैं राजा कौन थे न उनके पास जाते हैं अब उन राजा से कहते कि राजा तुम मेरे को खरीद लो यदि तुम्हारे अंदर सामर्थ्य हो किंतु राजा खरीदे कैसे राजा कहता है अच्छा तो वो अपने पुरोहित जी से कहता है कि पुरोहित जी आप एक कार्य कीजिए आप
00:22:18:18 जो चवन है ना उनके 1000 मुद्राए इन मार को दे दीजिए और हम इनको खरीद लेते हैं तो 1000 मुद्राए चिवन ऋषि को खरीदने के लिए वो देते चवन ऋषि क्या कहते है देखो राजन तुमने मेरा जो मूल्य है व 1000 रुद्रा में लगाया है मेरा मूल्य 1000 मुद्रा का नहीं है राजा सोच में पड़ गया अच्छा तो एक लाख मुद्रा शिवन ऋषि ने फिर कहा ना एक लाख मुद्राए नहीं एक लाख मुद्राओं का भी मेरा मूल्य नहीं है फिर पुन कहा एक करोड़ मुद्रा शन ष ने पुन कहा ना पुन सोच विचार करो एक करोड़ मुद्र भी नहीं बोले अपने पुरोहित जी से कि एक काम करो मैं अपना सारा राज्य समर्पित कर देता हूं मैं अपना आधा राज्य दे देता हूं बोले राजन एक बार पुनः विचार करो ऋषियों के साथ विचार करो ब्राह्मणों के साथ विचार करो तो वहां पर जब ब्राह्मणों के साथ ऋषियों के साथ वो विचार करने के लिए बैठे तब एक निष्कर्ष निकल के आया एक ऋषि वहां पर बैठे हुए थे जो कि गौ के उदर से ही उत्पन्न हुए थे तो वहां पर उन ऋषि ने बताया कि देखो एक काम करो इनको हम संतुष्ट कर सकते हैं किंतु सारा राज्य दे
00:23:33:22 कर के नहीं संतुष्ट कर सकते क्योंकि इनका मूल्य सारा राज्य देकर भी इनको खरीदा नहीं जा सकता तो बोले क्या करें तो आप एक काम कीजिए इनको एक गौ दान कर दीजिए एक गौ दान का इतना बड़ा महत्व है कि महर्षि चवन को एक गौ दान में खरीद मतलब राजन तो देखिए पूरा राज्य देकर भी चिवन ऋषि को नहीं खरीद पा रहा किंतु एक गौन का कितना महत्व च बिकने को तैयार हो गए ये गौन का महत्व और सबसे बड़ी बात वहा पर यह बताया गया की गौ माता का और ब्राह्मण का कुल एक है तो ब्राह्मणों का तो प्रथम कर्तव्य बनता है गौ माता की रक्षा करे क्यों गौ माता का ब्राह्मणों का कुल एक है एक के हाथों में मंत्र की शक्ति है और एक में हविष्य की देवताओ को गौ माता से हविष्य मिलता है और ब्राह्मणों के द्वारा जो है मंत्र शक्ति प्र होती है तो इसीलिए ब्राह्मणों का सर्वप्रथम कर्तव्य और श्रीमद भगवत गीता के 18 अध्याय में बताया गया है ऋषि गोरक्ष वाणिज्य वैश्य कर्म स्वभाव माने के वैश्य का कर्म है कृषि खेती करना व्यापार करना और गौ माता की रक्षा करना खेती और व्यापार के बीच में गौ
00:24:48:28 माता को रखा गया है माने की खेती करते व्यापार करते गौ माता की रक्षा तुमको अवश्य करनी चाहिए तुम्हारा कर्तव्य है वैश्य कर्म स्वभाव स्वभाव से को कर्म प्राप्त है कि वो गौ माता की रक्षा अवश्य करे यदि ग गौ माता की रक्षा नहीं होगी अ श्रीमद् भागवत में एक वचन प्राप्त हुआ है छठे स्कंध में वहा प चित्र केद नाम का एक राजा होता है जो बाद में तासर आदि बन गया श्राप के कारण माता पार्वती के तो वहां पर लिखा है चित्र केतु का पुत्र हुआ था तो वहा लिखा है कि उन्होने कई सारी गय दान की और कितनी ग दान करी धेनु नाम ट नु नाम ट गुदान माने की छह अर्ध ग दान करी उन्होने छ अर्ध ग सोची कितनी एक अवध में 10 करोड़ तो छ उर्द में 60 करोड़ हो गई आज तो भारतवर्ष में 60 करोड़ ग है ही नहीं इतनी ग एक करोड़ भी नहीं है तो आप सोचिए जब वो राजा उस समय प्राचीन भारत में जो राजा थे जब 6 6 करोड़ ब दान कर सकते थे आप सोच की देश कितना समृद्ध होगा उस समय 60 करोड़ उनका दु उनका घी उनका कितना लाभ प्राप्त करते हैं और भारत की देसी गाय है देसी नस्ल की
00:26:04:00 जो गौ माता है जिसके गल कंबल आद जो र से होता है व देसी गाय होती है य ये मैं य पर विशेष रूप से बताना चाहूंगा कि जो देसी गाय हैं वेद लक्षणा गाय उनके पीछे कुब होता है है ना और गल कंबल होता है दो चीज ध्यान अगर पूजन करना है आपको तो सबसे पहले प्राथमिकता यही है कि हमें वेद लक्षणा गाय का पूजन करना चाहिए वो प्योर मतलब जो देसी हमारे भारतवर्ष की जो गाय जी और भारत की जो वेद लक्षणा देसी उसकी परंपरा कहां से है ब्रह्म लोकी भ भव जना सत्यम सारे लोगों की एक एक गौ माता है और ब्रह्म लोक से जो गौ माता है बहुला वहा से परंपरा प्राप्त हमारी जो देसी गौ माता भारत की गौ माता है वहा तक परंपरा प्राप्त तो दीपावली के दूसरे दिन से गौ नवरात्र ंभ हो जाते है दीपावली के दिन भी गौ माता का पूजन का विशेष महत्व है गौ पूजन के बिना माता लक्ष्मी का पूजन हो ही नहीं सकता क्योंकि माता लक्ष्मी का पूजन तभी माता ग्रहण करती है जब ग का पूजन हो और आप देखिए श्रीमद भागवत में विशेष रूप से कहा गया कि जब भी पृथ्वी पर संकट आता है संकट के बागल ते
00:27:19:02 है तो पृथ्वी क्या करती है ग का रूप बनाती है ग का रूप बनाती है और भगवान के पास जाती है जब महाराज थु ने पृथ्वी को मारने के लिए जब पृथ्वी सारा अन्न निकल गई अपने अंदर क्योंकि दुष्टों का राज्य था तो जब दुष्टों का राज्य आता है पृथ्वी क्या करती है सारे अन्न रस को निगल जाती है और जब कोई ऐसा शासन करता आता है जो सु बुद्ध हो जो समृद्ध हो और जो प्रतापी हो जो धर्म के मार्ग पर चलने वाला हो सारे अनन रस को अपने आप बाहर कर देती है तो महाराज पृथु को बड़ा कष्ट हुआ कि ये पृथ्वी को मैंने इतना संभाला और ये क्या कर रही है कि सारा अन्य रस निकल ग मेरी प्रजा भूख मर रही है महाराज प भागे पीछे तो उन्होंने गौ का रूप धारण कर लिया ग का रूप धारण करके कहा महाराज प से कि आप क्या कर रहे मैं तो आपकी इतनी प्या और आप मेरा वध कर देना चाहते हैं ये तो आपके लिए अच्छा नहीं आप एक काम करिए आप सभी को पात्र बनाइए और दोहन की पृथ्वी का दोहन हुआ तो सभी जानते उसम से नाना प्रकार की औषधि और अन निकले तो जो पृथ्वी है वो सारे औषधि और अन्न की भूमि है अब देखिए सबसे बड़ा महत्व क्या है जो गाय का गोबर होता है ना गाय का गोबर उसके अंदर अर विष नाशक जो है औषधि होती है एक ऋषि थे काशी के अंदर
00:28:34:04 काशी के अंदर जो एक ऋषि थे तो वहा प एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई उस व्यक्ति की मृत्यु हुई सर्प के डंस से तो उसके पूरे शरीर में विष फैलने लगा उन ऋषि को जाकर के सबने बताया कि इसकी जो है मृत्यु हो गई है बोले कैसे हुई स के डंग से हुई एक काम करो गाय का गोबर लेकर के आ गाय का गोबर लेकर के आए सभी लोग नासिका को छोड़ कर के संपूर्ण पर गाय के गोबर का लेपन कर दिया फिर आधे घंटे बाद पुन लेपन कर दिया गाय के गोबर का तो जब गाय के गोबर का लेपन हुआ वो व्यक्ति सांस लेने लगा तो उससे गाय के गोबर से विष उतर गया पूरा हैजा प्लाज्मा जो इत्यादि जो बीमारियां भयंकर भयंकर बीमारियां होती है वो सभी गाय के गोबर से दूर हो जाती है आज भारत की वर्तमान स्थिति ऐसी है कि गौ रक्षा के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है है ना तो जो गौ माता की परंपरा है देखिए बहुला ंगा अतो भया ीमा कामा शरभ ये इत्यादि जितनी गौ है हमारी वो सभी परंपरा है हमारी गौ माता की और गौ माता से हमको सीखना चाहिए गौ माता कभी भी फालतू में नहीं बोलती अब देखिए जब गौ माता को कष्ट होगा ना तभी बोलेगी कष्ट नहीं होगा तो नहीं बोलेगी जैसे कोई भी जानवर
00:29:49:19 जैसे कुत्ता भता रहता है अब देखिए खेती के अंदर गौ माता का बड़ा प्रयोग है ग से जो बैल उत्पन्न होता है खेती के हम उसका प्रयोग कर सकते गौ माता का दूध सात्विक होता है किंतु हम भैस का दूध उपयोग कर लेते हैं भैस का दूध उतना सात्विक नहीं होता जितना दूध गौ माता का सात्विक होता है दूध तो ऊट का भी लिया जा सकता है टनी का भी लिया जा सकता है किंतु टनी का दूध जो है वो तामसी होता है उससे दुर्गंध आती है और उससे घी भी नहीं बन सकता और ना ही जो उनके ट ऊट होता है जो ना उससे खेती की जा सकती है क्योंकि खेती इसलिए नहीं की जा स क्य ऊंट बहुत महंगा होता है सामान्य व्यक्ति के अंदर समता नहीं की ऊंट को खरीद ले किंतु जो बैल होता है उसके हम खेती में भी प्रयोग ला सकते हैं गौ माता का जो मूत्र होता है गौ माता का जो गोबर होता है उसको यदि हम खेती में खाद के रूप में प्रयोग करते हैं तो अा एक प्रयोग हुआ था खाद के रूप में उसको प्रयोग किया गया था अंगूर का वृक्ष निकला था किसी व्यक्ति ने बताया था लिखा हुआ है गीता प्रेस के एक उसम मैंने पढ़ा था उसम लिखा हु राम सुखदास जी के द्वारा तो एक व्यक्ति ने उनको बताया की खाद का प्रयोग किया था ग गोबर का और
00:31:04:22 ग मूत्र का अंगूर का पेड़ लगाने के लिए तो वहा पर जो अंगूर थे दुगने अंगूर बड़े बड़े मोटे मोटे अंगूर और सबसे बड़ी विशेषता य है की ग का गोबर और ग का मूत्र प्रयोग किया जाए तो खेती है जो बीज व नष्ट नहीं होता विदेशी का जो करते लोग यूज उससे क्या है जो बीज होता है व नष्ट हो जाता है धरती जो होती है र हो जाती है उससे कोई प्रयोग में लाने योग्य वो होती नहीं है इसलिए देसी गाय जो होती है वो सर्व उपयोगी होती है भगवान श्री कृष्ण चंद्र भगवान श्री रामचंद्र य सदैव गौमूत्र का सेवन किया करते थे जो छोटी सी बछिया होती है ना गौ माता की छो छोटी सी बच्ची यदि उसका भी गौ मूत्र उसका भी मूत्र पान किया जाए उससे हमारे पेट की जो बीमारिया होती है वो ठीक हो जाती है और आज के साइंस ने माना भी है कि ऐसी प्रकार की बीमारिया है जो गौ के मुख से ही ठीक हो जाती है गौ का इतना बड़ा महत्व हमारे धर्मशास्त्र के अंदर बताया गया है पद्म पुराण के अंदर भी वर्णित है महाभारत के अनुशासन पर मैंने आपको बताया कितना बड़ा महत्व उसका है और ब्राह्मण और जो गौ माता है वो तो एक ही कुल की दोनों शाखाए है अब यदि गौ
00:32:19:27 की रक्षा नहीं होगी तो संपूर्ण मानव जाति संकट में आ जाएगी कैसे आ जाएगी सर्वप्रथम ग का उपयोग हम करते हैं यज्ञ में गौ का उपयोग होता है उसके हविष्य का उपयोग होता है घी का उपयोग होता है दुध का उपयोग होता है पंचगव्य जो गौ माता के होते है दूध ी गोबर गोमूत्र इत्यादि जो पंच गव्य होते है उनको मिला कर के जो यज्ञ में उनका उपयोग किया जाता है वो बहुत महत्त्वपूर्ण होता है अब यदि ग लुप्त हुई तो क्या होगा ग का घी लुप्त हो जाएगा घी लुप्त हुआ तो जो यज्ञ है ब्राह्मण यज्ञ कैसे करेगा बिना गौ माता की ी के तो देवताओ तक अविष्य पहुंचेगा ही नहीं अब भैस का यूज करो चाहे किसी का आप प्रयोग करो उससे कोई लाभ नहीं है क्योंकि शास्त्रीय बात क्या है गौ शास्त्रीय बात है गौ का हविष्य होना आवश्यक तो गौ का हविष्य यदि ब्राह्मण को प्राप्त नहीं होगा तो ब्राह्मण का मंत्र जो है उचित रूप से जो है देवताओं तक नहीं पहुंचेगा अब जब ग का ग लुप्त हुई हविष्य लुप्त हुआ यज्ञ लुप्त हुआ यज्ञ से ब्राह्मण लुप्त हुआ ब्राह्मण से मंत्र लुप्त हुआ मंत्र से वेद लुप्त हुआ और वेद लुप्त हुआ तो ज्ञान और ज्ञान त हुआ तो पूरा विश्व संकट तो गौ माता की रक्षा ही विश्व की रक्षा है यदि हम गौ
00:33:35:03 माता की रक्षा नहीं कर सकते तो आप समझिए कि ये पूरा विश्व पूरी मानव जाति संकट के अंदर है जैसा की मैंने कहा कि प्राचीन भारत के अंदर 60 करोड़ ग चित्र केतु राजा ने दान में की और एक समय तो ऐसा भी था भारत के अंदर की अकबर के शासन काल में भी गौ मास बिकता नहीं था कहीं जगह गौ मास तो छोड़िए एक जीव की हत्या अकबर के शासनकाल में नहीं होती थी किंतु भारत का आज कोई ऐसा प्रांत नहीं दिखाई देता जहां प ग हत्या ना होती हो या किसी जीव की हत्या ना होती हो इस विषय प हम लोग आएंगे इस विषय पर हम लोग आएंगे कि गौ माता की रक्षा के लिए हम क्या कर सकते हैं अब थोड़ा सा मैं राघव जी से कहूंगा कि वह अपना कुछ वक्तव्य रखे जी राघव जी जय श्री राम बहुत सुंदर विवेचन किया आपने आपने मतलब जो काफी समग्र रूप से आपने सार गर्भ एक विवेचन दे दिया
00:34:35:04 और कुछ भी ऐसी चीज बची नहीं है कि जो मुझे जिसको जोड़ना ड ऑन करना होता है ना कि कुछ चीज बच जाए तो उसको ड ऑन करने का म होता है जी राघव जी जी सभी को जय श्री राम और एक बार प्रेम से सभी जय गौ माता जय गोपाल बोले जय गौ माता जय गोपाल जी हा देखिए शर्मा जी ने बहुत अच्छा बोला इस विषय में मैं एक बात यह कहना चाहता हूं कि
00:35:09:00 बहुदा आवाज नहीं आ रही देखने में आता है कि सनातन में एक चर्चा हा जीरी आवाज आ बहुदा के बाद आपकी आवाज कट गई थी हा जी बहुदा हा बहुदा क्या हो रहा है कि सनातन में बहुत सारे प्रश्नों पर चर्चा चल रही है उसमें एक प्रश्न यह भी है कि हम जो त्यौहारों की संस्कृति वाले हैं उसमें हमारा इन सभी त्यौहारों में सबसे मुख्य त्यौहार कौन सा माना चाहिए माना जाना चाहिए जी तो कोई कुछ कहता है कोई कुछ कहता है क्योंकि कुछ त्यौहार हमारे यहां प्रांतीय विशेषता लिए हुए भी होते हैं लेकिन समग्र रूप से एक त्यौहार की प्राधान्य होनी चाहिए और वह क्यों होनी चाहिए क्योंकि हम यदि किसी एक त्यौहार पर एक नहीं होंगे तो फिर हम अपने बाकी त्यौहारों की महत्ता भी नहीं जान सकेंगे तो मुझे ऐसा लगता है मेरे अपने अध्ययन के अनुसार कि गोपा अष्टमी को हम सनातनी हों में सबसे बड़ा पर्व माना जाना चाहिए कारण क्या है इसके पीछे क्योंकि पूरा विश्व आज यह विषय नहीं है इसलिए ज्यादा उसमें डिटेल में नहीं जाऊंगा अन्यथा किसी दिन मैं इस विषय को कह दूंगा कि कोई भी नास्तिक
00:36:24:06 से नास्तिक भी प्रभु श्री रामचंद्र और श्री कृष्ण चंद्र का भक्त हुए बगैर नहीं रह सकता तो जो भगवान श्री राम और कृष्ण जिनका ही जन्म गौ माता की रक्षार्थ ब्राह्मण की रक्षार्थ और सभी की रक्षार्थ होता है उनकी भी आराध्य पूज्य गौ माता है तो हमारे आराध्य की भी आराध्या जो है हमारे आराध्य देव ही जिनकी आराधना करते हैं उस पर्व को हमारे यहां सबसे बड़ा पर्व माना जाना चाहिए और हम लोग गौ माता क्यों कहते हैं केवल वह हमारा पोषण करती हैं जैसा शर्मा जी ने कहा कि उनके सारे जो गव्य पदार्थ है उससे हमारे उपचार होते हैं यह बात बिल्कुल सही है लेकिन इससे भी बड़ी एक बात यह है मेरी आवाज आ रही है ना कहीं रुके तो बताइएगा तो सन 1995 में गीता प्रेस गोरखपुर की मासिक पत्रिका कल्याण में एक गौ तंत्र नामक ग्रंथ छपा वो गौ तंत्र में भगवान श्री शिव और माता पार्वती जी का संवाद है उसमें भगवान श्री शिव माता जी से कहते हैं कि हे जगत जननी आद्या शक्ति पार्वती तुमसे ही यह जगत सब फैला है तुम
00:37:39:09 ही सबकी माता हो लेकिन इन सभी जीव जगत के पोषण हेतु तुमने गौ के रूप में इस धरा धाम पर अवतार लिया है इसलिए माता पार्वती हमारी जी आवाज फिर से चली गई राघव जी का स्पीकर वगैरह बड़ा बड़ी स्पष्ट आवाज आती है जब बोलते हैं तो जी बो हा जी आ रही है ना मेरी आवाज हा जी आवा हा तो गौ माता के रूप में मां आद्याशक्ति पार्वती माता ही गौ के रूप में हमें प्राप्त है इसलिए उनके शरीर से प्राप्त होने वाला जितना भी पदार्थ है वह हमारे लिए पूजनीय है अब सोचिए जिसका मल भी ना परम पवित्र है वह कितनी पवित्र होगी और आज गोपा अष्टमी पर जब हम लोग बात कर रहे हैं गौ सेवा की गौ दान की तो मैं कहना चाहता हूं गौ दान के बारे में सब लोग बात करते हैं लेकिन वही गौ तंत्र नामक ग्रंथ यह कहता है और भगवान शिव के वचन में कह रहा हूं या शिव पार्वती के संवाद की चर्चा कर रहा हूं कि 10 गौ माता के दान के बराबर एक नंदी महाराज के दान की महत्ता है क्योंकि नंदी महाराज
00:38:54:15 और कोई नहीं भगवान श्री शिव ही है क्योंकि जब माता पार्वती गौ माता के रूप में आई है तो भगवान श्री शिव नंदी महाराज के रूप में अवती हुए हैं और इसके अतिरिक्त एक बात कहना चाहता हूं मैं जो हमारा साधन चतुष्टय है हमारा पुरुषार्थ चतुष्टय जो है धर्म अर्थ काम और मोक्ष उसकी सरलता से जो हमें प्राप्ति करवा सकता है शक्ति है वह एकमात्र गौ माता है तो यह महत्व का ध्यान में रखते हुए यदि कार्य करें तो उनके जीवन का उत्कर्ष होगा अब इसमें क्या है जैसे अभी देसी गौ माता की बात की तो केवल और केवल देसी गौ माता की ही पूजा होनी चाहिए क्योंकि देसी गौ माता ही हमारी माता है मैं गौ सेवा से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ हूं तो प्राय में गौ पालक किसानों से चर्चा करता हूं तो कई बार जर्सी को भी गौ माता कह देते हैं जबकि जर्सी पशु है और इससे भी भयानक स्थि यह है कि जो जर्सी और देसी गौ माता का वर्ण शंकर पशु है उसे भी गौ माता मान लिया जाता है जबकि देसी गौ माता की जो पहचान है जो थोड़ी देर पहले आप दोनों महानुभावों ने कही
00:40:09:24 कि पीछे कुकु होता है दिखने में सुंदर होती है सुंदर सिंग होते हैं पीछा जो पीछे जो उनका पृष्ठ भाग है उसमें शंख जैसी आकृति बनती है और पूछ नीचे तक जाती है वह हमारी गौ माता की पहचान है तो आज गौ के रूप में यदि इन पशुओं की पूजा हो रही है इसी वजह से हम अपने लक्ष्य को अर्जित नहीं कर पा रहे हैं कई बार क्या होता है कि गौ हत्याएं जब हो रही होती है तो हम एक दूसरे पर दोष डालते हैं जी हां सरकार की अपनी महती भूमिका है उसे इस बारे में काम करना चाहिए लेकिन हम क्या कर सकते हैं पहले हम इस प्रश्न को अच्छे से समझे तो कि गौ रक्षा क्या है कैसे करनी है बाद में पहले प्रश्न को समझे प्रश्न यह है कि गौ रक्षा है क्या क्या गौ रक्षा करने में कहीं हमसे चूक हो रही है जो हम गौ पालक है उनसे भी जी हां हो रही है कैसे यदि हम में से कोई गौ पालक है तो वह कह देगा कि नहीं नहीं मैं तो कभी गह को किसी के हाथों नहीं बेचता मैं तो दूध देना भी बंद कर देती तब भी सेवा करता हूं जी राघव जी आपकी आवाज फिर से चली
00:41:21:10 गई लेकिन आपकी आवाज कट गई थी राघव जी जी जी जी आवाज आ रही मेरी जी अभी कट गई थी जी शिवस दास दासा जी देखिए आपको क्या लगता है कि हम वह कौन सा दिन होगा जब वह हमारी बुराई नहीं कर रहे होंगे तो आप आपको इसमें दुखी होने की आवश्यकता नहीं है भक्ति का बल बढ़ाइए अपना कार्य करिए कर्म करिए और वोह लोग तो कुछ ना कुछ करेंगे ही ना ऐसा तो है नहीं कि भाई हम लोग कुछ भी करते रहे और सैद्धांतिक प्रश्न करते रहे और वह कुछ भी ना करें कुछ तो करेंगे ही करेंगे कुछ ना कुछ उसमें दुखी होने की आवश्यकता नहीं है भक्ति इस सिचुएशन से निपटने के लिए गौ माता की सेवा करिए भगवान श्री कृष्ण की भक्ति करिए और जो संत महापुरुष है उनके दर्शन करिए उनका सानिध्य प्राप्त करिए तो आपको वो बल मिलेगा जिससे कि विपरीत परिस्थिति से आप जो है हसते हसते सामना करते हुए लड़ पाएंगे निकल पाएंगे है ना जी राघव जी हा तो गौ रक्षा क्या है
00:42:37:00 हमें उसको समझना होगा क्या हम भी गौ हत्या के रूप में कहीं ना कहीं हम भागीदार तो सिद्ध नहीं हो रहे जो यह हम में से कोई यह दंब भरता हो कि हम गौ सेवा करते हैं हमने कभी किसी कसाई के हाथ गाय नहीं दी है तो मैं कहना चाहता हूं कि जिस प्रकार से आप लोग गौ माता के वर्ण संकरी को बढ़ावा दे रहे हैं आज जगह जगह गांव में शहरों में कृत्रिम गर्भाधान केंद्र सरकार ने खोल रखे हैं जिसमें अनपढ किसान गौ पालक वहां जाता है और वह कहता है कि दूध अच्छा दे दे ऐसी नस्ल तैयार करने के लिए डॉक्टर साहब आप जो भी इंजेक्शन लगाएंगे तो आप लगा दीजिए बस दूध अच्छा आना चाहिए तो वह जर्सी का इंजेक्शन लगा देता है और हमारे गौ पालक किसान यह सोचते हैं कि हमने तो बहुत अच्छा काम किया है इसके अतिरिक्त होता क्या है कि नंदी महाराज के एक बार की सीमन से 80 लगभग 80 स्ट्रिप एआई की आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन यानी कृत्रिम गर्भधान के ट्यूब तैयार किए जाते हैं अब इससे समस्या क्या आती है कि जब 80 आपके पास ट्यूब केवल एक बार के सीमें से किसी एक नंदी महाराज के तैयार हुए इसके जो दूरगामी परिणाम जो घातक होते हैं वो यह होते हैं कि आपके पास नंदी
00:43:52:13 महाराज की वैल्यू ही खत्म हो रही है तो यदि बछड़ा जन्म ले रहा है यदि आप देसी का भी टीका लगवा रहे हैं लेकिन बछड़ा ही जन्म ले रहा है तो वह आपके लिए यूजफुल नहीं है क्योंकि आपको मालूम है कि बछड़े से मुझे लेना देना नहीं है मुझे तो गौ माता से है जो दूध देगी जैसे ही बछड़ा होता है तो कहने में बड़ा दुख होता है कि उसे इन लोगों के हा हवाले कर दिया जाता है और मैं ऐसे लोगों से कहना चाहता हूं कि जो लोग कृत्रिम गर्भाधान पर जोर देते हैं वह क्या अपनी माता बहनों के लिए इस प्रक्रिया को का प्रयोग करना चाहेंगे आप ना खर्चा करके अपनी बहन बेटियों की शादियां करते हैं अपने जिगर के टुकड़े को किसी और के हवाले करते हैं तो क्या दिक्कत है मॉडर्न जमाने में मॉडर्न बनि है उसको घर पर रखिए और एक से एक नेता अभिनेता के सीमन उपलब्ध होंगे तो उनसे उसको गर्भवती भी करवाइए ऐसा भी कीजिए लेकिन यदि वह सुनने में ही खराब लग रहा है तो आप जिनको अपनी माता कह रहे हैं उनके साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं इससे गौ माता के गर्भ धारण की क्षमता भी खत्म हो रही है ण की यूटिलिटी खत्म की जा रही है क्या यह गौ हत्या नहीं है जी बिल्कुल है लेकिन केवल यही समस्या भी नहीं
00:45:08:08 है गौ रक्षा में एक बड़ी समस्या यह भी है कि कुछ बनिया ने राघव जी आपकी आवाज फिर से चली गई है जी बताए जी आ रही है अभी आ रही है जी जी आ रही है हां तो एक और घातक प्रक्रिया हमारे देश में चल रही है कि कुछ हमारी श्रद्धा का हमारी भावुकता का जो गौ माता के प्रति है उसका लाभ उठाने के लिए कुछ बनियां ने गीर गौ माता जो गुजरात की गौ माता है उनकी बहुत तगड़ी वाली ब्रांडिंग कर रखी है जिसके तहत उन्होंने क्या करना चालू किया है कि पूरे देश में गीर गौ माता का एक तरीके से मार्केट खड़ा किया है लेकिन वह मूर्ख और उनकी बातों में आने वाले महामूर्ख यह नहीं सोचते कि भारत के हर प्रांत में अलग-अलग जलवायु है और उस जलवायु के अनुरूप वहां पर गौवंश प्राप्त है तो यदि आप गीर गौ माता को जो गुजरात की मुख्य रूप से गौ माता है उनको ला रहे हैं तो अपने घर की जो नस्ल है उसको आप स्वतः ही कसाई के हवाले कर रहे हैं बड़ा खर्चा
00:46:23:19 करके ला रहे हैं यह कहते हुए कि वह दूध ज्यादा देती हैं लेकिन वे दूध गुजरात में रह कर के देती हैं क्योंकि गुजरात के वातावरण के अनुकूल उनकी उत्पत्ति हुई है अन्यथा भगवान एक ही गौ माता समग्र भारतवर्ष में प्रदान करते तो इस प्रकार की मूर्खता से हम मौसी गीर गौ माता हमारी मौसी हुई गुजरात के लिए गुजरातियों के लिए वो मां हु हम मौसी को घर में ला रहे हैं और मां को बाहर निकाल रहे हैं यह मूर्खता है यदि देसी गौ माता जो आपकी स्थानीय गौ माता है उन पर अच्छे से काम किया जाए तो वह उतना ही दूध देंगी जो प्रचारित प्रसारित अन्य गौवंश के लिए किया गया है इसके लिए गुजरात में ही राजस्थान में ही मध्य प्रदेश में बहुत सारे गौ प्रेमी गौ पालक और गौ वैज्ञानिक काम कर रहे हैं और उन्होंने सिद्ध करके बताया कि गिर गौ माता के हवे में आप मत जाइए और तो और गीर गौ माता की एक विशेषता यह है कि गीर गौ माता का एक ही वर्ण होता है रक्त वर्ण लेकिन यदि हम शास्त्रों को पढ़ते हैं गौ तंत्र जिसके बारे में बात कर रहा हू या अन्यान्य जो पुराण आद है उसमें अलग-अलग वर्ण की गौ माताओं के गोबर गोमूत्र ग्रत दूध दुग्ध आदि की महिमा कही गई है तो केवल रक्त वर्णा जो गिर गौ
00:47:42:03 माता राघव जी बड़ा अच्छा प्रकाश डाल रहे पर बारबार बीच में इनका जो है एक वो कैप आ जाता है आपकी आवाज कट जाती है बारबार राघव जी शिवस दाह जी आपकी बात मैंने देख ली है हां जी आवाज आ रही है अब प्रशांत कर निमंत्रण दिया है हमने उनका उत्तर इस लाइव स्ट्रीम की शुरुआत में दे दिया उसको देखें जी अब जैसे एक उदाहरण के लिए मैं एक बात कहता हूं पहले तो हम कहेंगे कि हमारी जो ऑडियंस है दर्शक गण है वो उनको आपकी जो आवाज है बहुत प्यारी लगती है वाणी आपकी माता की कृपा और उसको अगर एक उचित संबोधन दिया जाए तो उसको कहेंगे आप मृद भाषी है म सब गुरु जी की कृपा आशीर्वाद और गौ माता की कृपा है और कुछ भी नहीं है और मैं तो गौ माता को लेकर के बहुत भावुक हूं इसलिए जो कुछ भी निकल रहा वो मेरी कोरी भावना ही प्रकट हो रही है मैं बहुत दुखी हृदय से य सारी बातें कह रहा हूं क्योंकि मैं जुड़ा हुआ हूं उस क्षेत्र से तो जैसे उदाहरण के लिए मैं अपनी बात कहना चाह रहा था जैसे पुरा में
00:48:57:07 शास्त्रों में एक बात आती है कि जो श्याम वर्णा गौ माता है उनका गौमूत्र में सबसे ज्यादा करक्यूमिन पाया जाता है और करक्यूमिन कैंसर से लड़ने की सबसे बड़ी औषधि है दूसरी गौ माता के मूत्र में करक्यूमिन नहीं है ऐसा नहीं लेकिन सबसे अधिक श्याम वर्णना में अब गिर गौ माता श्याम वर्णना नहीं हो सकती है तो सबकी अलग अलग अलग अलग महिमा है और आज जैसे हम क्लाइमेटिक चेंज के कारण परेशान है सबके अपने अपने वो है पेड़ कट रहे हैं यह हो रहा है वो हो रहा है लेकिन पेड़ जो लगा भी रहे हैं वह भी पनप क्यों नहीं रहे इसलिए क्योंकि उनको खुराक नहीं मिल रही उनकी खुराक गौ माता का गोबर और मूत्र और तो और उनको अच्छे से वातावरण मिले ईश्वरी कृपा से बरसात का पानी उनको मिले उसके कारण भी वह जो पनपते हैं वह पनप नहीं पा रहे क्योंकि उसमें भी गौ माता के गोबर की बड़ी महिमा है आप यदि शास्त्रों को पढ़ेंगे तो आप देखेंगे माता ऐसा प्राणी है जैसा मैंने कहा कि गौ माता जिनका मल ही इतना पवित्र है तो सोचो व कितनी पवित्र है तो उनके मल की अद्भुत महिमा यानी गोबर की इतनी अच्छी महिमा है कि गौ माता के गोबर पर जब आप उसे उठाए ना जमीन पर पड़ा
00:50:12:07 रहने दे तो उस पर एक दो दिन बाद या अगले ही दिन एक सफी सफेद सी चादर बन जाती है झिल्ली जैसी आपने देखा होगा कभी ध्यान दिया होगा पूरी सफेद पपड़ी जम जाती है उसको संस्कृत में कषण कहते हैं वो कषण इतनी शक्तिशाली है कि जिस जमीन पर वो गोबर कषण वाला पड़ा हुआ है जिस पर कषण आ चुकी है वो आकाश में बादलों को आकर्षित कर देती है जल वर्षा करने के लिए अच्छा तो ये खुराक नहीं मिल रही
00:50:43:27 है जी नहीं आपने एक बहुत अच्छा दृष्टिकोण बताया कि जो हम गिर गिर गिर गाय की और जो एक मार्केट बना दी गई है वहां के गौवंश की और उसकी वजह से हम अपने यहां का जो लोकल स्थानीय वंश परंपरा से प्राप्त जो गौवंश है उसको महत्व ना दे कर के हम गिर से लाकर गौ माता को जो है उनका भरण पोषण करते हैं तो उनके साथ भी गलत कर रहे हैं क्योंकि वो यहां के क्लाइमेट के लिए नहीं है और साथ ही साथ अपने य की जो परंपरा प्राप्त नस्ल है जो वंश है उसका हम धीरे धीरे य कर रहे हैं हमारी स्थि बरी है कि हम कुए से निकल के ई में गिर रहे हैं पहले अभी जर्सी का बड़ा बोलबाला चल रहा था कुछ समय से सोशल मीडिया ने जर्सी का थोड़ा सा थोड़ा सा कह रहा हूं अभी नहीं पूरा तिलिस्म नहीं टूटा है जर्सी का टूटा तो हम गीर में आकर फस गए याने खाई में आकर गिर गए हम गीर माता को वैसे ही पूज्या मानते हैं लेकिन स्थानीय गौ माता के निरादर करके हम गीर माता की भी पूजा करेंगे तो वह मेरी गीर माता भी खुश नहीं होगी अपनी बहन का तिरस्कार देख कर के मैं सभी सनातनी हों से यह कहना चाहता हूं कि कृपया इस बात को बंद कीजिए
00:51:59:06 और जब तक आप गौ माता को पैसा कमाने की मशीन के रूप में पा लेंगे तब तक आप अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं मां के साथ व्यापार नहीं किया जाता यदि आप मां मान रहे हैं और यदि उस उनके गौ माता के मैं किसी व्यापारिक पक्ष को भी देखूं तो दुग्ध के लिए गौ माता पालन करना हमेशा हानिकारक है क्योंकि गौ माता जीवन में अपने कुछ समय तक ही दूध देती है और उतना दूध नहीं देती है जितना कि हमें अपेक्षित है इसलिए गौ माता कभी भी पाली जाती है तो गौ माता पाली जाती समा गौ माता हमें पालती है तो जब भी हम उनके आश्रित होते हैं तो यदि हम व्यापार के रूप में उनको लाना चाह रहे हैं देखना चाह रहे हैं तो हमें चाहिए कि हम गोबर गोमूत्र के रूप में उनका पालन करें क्योंकि जन्म से लेकर आखिरी समय तक गौ माता गोबर गोमूत्र तो प्रचुर मात्रा में देती है और सब इतने समय से सोशल मीडिया है मैं उसमें नहीं जाना चाहूंगा कि उसके कितने कितने उपयोग और कितने कितनी आजकल दवाइयां और क्याक उत्पाद बन रहे हैं वो एक अलग विषय में उसकी डिटेल में नहीं जाना चाहता सबको पता है सबके पास ट मैसेज आद आते रहते हैं तो हम यह कहना चाहते हैं कि हम
00:53:14:25 अपने अपने क्षेत्र में इस प्रकार की जागरूकता के साथ काम करें यदि गोपाष्टमी के दिन या अपने जो परिवार के जो मुख्य तिथियां है जिनको हम उत्सव के रूप में मनाते किसी का जन्मदिवस किसी की सालगिरा वह हम गौशाला में मनाए कितना अच्छा होगा बच्चों को भी अच्छा लगता है यह मैंने खुद में प्रयोग किया हुआ है कि बच्चों को ले जाया जाए उनके जन्मदिन को वहां मनाया जाए उनके हाथों से गौ सेवा करवाई जाए तो अगली बार से बच्चा खुद अपने माता-पिता की उंगली पकड़ के बोलेगा कि आज मेरा जन्मदिवस है मुझे गौशाला ले चलिए माता-पिता बच्चों को एडवेंचर चाहिए ना यदि मैं बच्चों के पॉइंट ऑफ व्यू से भी कहूं तो यह उनके के एडवेंचर को भी पूरा कर रहा है तो गौ से उनको जोड़िए गौ माता की महत्व महत्वता बताइए अपनाए ट पर शेयरिंग करने से मतलब नहीं है आप एक रोटी दे देते हैं बासी तो आप समझते हैं आपने गौ सेवा कर ली जी नहीं और मैं बड़ी बड़ी गौशाला चलाने वाले हमारे जो गौ माता की सेवा करने वाले जितने भी हैं बहुत अच्छे लोग हैं उनसे एक और विनम्र विनती करना चाहता हूं कई बार देखने में आता है कि गौशाला है गौ माता
00:54:31:06 आप राघव जी आप अपना हेडफोन हटा लीजिए मुझे लग रहा है वो दिक्कत कर रहा है हा जी हा जी हां थोड़ा सा आज वो कुछ अभी आ रही है आवाज हा आवाज आ रही है हा तो कई बार क्या होता है मैंने देखा है बहुत स गौशालाओं में मैं रहा हूं गया हूं गौशालाओं में गौ माता को तो रखा जाता है अच्छा पैसा भी आ रहा है अच्छा चारा भी आ रहा है सब कुछ हो रहा है ऐसी बात नहीं लेकिन क्या होता है कि गौ माता को चरने के लिए छोड़ा नहीं जाता जबकि गौ माता यदि चरने के लिए विचरण नहीं करेंगी तो यह उनके स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है और गौ माता का चरना इसक है कि गौ माता यदि आपको शरीर में किसी प्रकार की व्याधि है तो व आपको सूंघ के पता लगा लेती हैं कि आपको क्या व्याधि है और किस औषधि को वह खाएं जिसके कारण उनके दुग्ध गोबर गोमूत्र में वो उसके गुण आ जाए जिसका सेवन करके आप आरोग्य को प्राप्त करें ऐसा वो जाकर के वो वनस्पति को खाके आती हैं तो आप उन्हें छोड़ नहीं रहे हैं यह तो वृद्धाश्रम जैसा है और भी बुरी बात कहूं तो जेल जैसा है तो ऐसा नहीं होना चाहिए गौ माता को थोड़े में थोड़ा घूमने की भी स्वतंत्रता होनी चाहिए जब हम इन चीजों पर काम करेंगे तो सरकार पर
00:55:46:08 भी बल पड़ेगा सरकार को अपनी ड्यूटी निभानी चाहिए बिल्कुल कोई पार्टी कोई जी राघव जी मैं आपने बहुत सुंदर सुंदर जो है प्रासंगिक विषयों पर प्रकाश डाला है और जी बीच में बाधा आ जाने के कारण आपकी आवाज टूट जाती है जी हां जी जी जी नहीं बहुत सुंदर आपने जो व्याख्यान किया युगल जी ने जो शास्त्रोक्त तरीके से और जो हमारे जो लीलाओं के वर्णन के द्वारा गौ का महत्व बताया तो वही दूसरी ओर आपने जो है वैज्ञानिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी उनके महत्व का और उनके संरक्षण संवर्धन का आपने उपाय भी बताया अब मैं एक जो गौवंश की रक्षा है उसको लेकर के प्रैक्टिकली बिल्कुल प्रैक्टिकली देखि हमने क्या होता है कि आजकल क्या होता है जब ये सोशल मीडिया पर हिंदुत्व की लहर आई है तबसे मैं एक चीज देखता हूं मेरे पास मैसेजेस भी आते थे जब मैं इस युद्ध में उतरा नहीं था धर्म रक्षा के युद्ध में उतरा नहीं था संभवत सात आ साल पहले की बात है जब मैं एक सामान्य व्यक्ति बन कर के
00:57:01:08 और केवल मेरा जो पॉइंट ऑफ व्यू होता था दिन भर का वह पॉइंट ऑफ व्यू होता था कि किस तरीके से कंजन करू यह दुनिया में मैं आया हूं तो मुझे कंज्यूम करना है एक व्यक्ति का एक नॉर्मल व्यक्ति का जो दिन भर जो एक कोर पॉइंट ऑफ व्यू होता है व होता है कंजप्शन हाउ टू कंज्यूम द वर्ल्ड हां पर आपको जन्म मिला तो मैं भी ऐसा ही था तो उस मैं कंजप्शन करते समय भी मगर हां वही मैं बताता हूं प्रारब्ध या संस्कार प्रारब्ध के कारण ऐसे घर परिवार में जन्म मिल गया जो राम नाम मुझे बचपन से मिल गया था बारबार मैं बता देता हूं अपनी बात और राघव जी मुझे आपका नाम भी बहुत अटैच करता है आपसे क्योंकि आपका नाम राघव है और हा जी तो जी क्या कहा राघव जी आपने क्या कहा जी मैंने कहा कि आपका नाम भी मुझे बहुत अटैच कर देता है आपके साथ आपका नाम ही राघव है वो हमारे स् है तो जी हा तो ये था एक बात बताना चाहता हूं माफी चाहूंगा लेकिन आपने बात कही तो मेरा जो नामकरण है हमारे पूज्य पिताजी नेने भगवान राम के इष्ट जो स्वयं है उन्हीं की प्रेरणा से ही रखा है अच्छा तो राम
00:58:16:10 भक्त परिवार में मैं भी जन्मा हूं इस वजह से यह राघव नाम मिला है बहुत बड़ी जिम्मेदारी में उसको समझता हूं जी तो आप बो ईश्वर की एक अनुक रही कि बचपन से प्रभु श्री राम का नाम मिल जाने के कारण जो व्यक्तिगत आचरण में हीनता आ जानी चाहिए ना विधि विधि निषेध इत्यादि का नहीं पता है शास्त्रो क्या है क्या नहीं है वह अलग बात है मगर जो एक धर्म और अधर्म के निर्णय में जो हीनता आ जानी चाहिए वो नहीं आई एक राम नाम के कारण जैसे वय विचार इत्यादि के बारे में कहूं तो बचपन से ही जब छोटे थे तो तभी से एक ई श्री राम आदर्श और उन्होंने हमें सिखाया है कि एक नारी सदा ब्रह्मचारी तो ये सब जो भावनाए निर्मित हुई वो मतलब छोटे थे तभी से निर्मित हो चुकी थी व विचार इत्यादि के बारे में तो सोचना बहुत दूर की बात तो राम नाम का एक बहुत बड़ा प्रभाव है गुरुदेव भी कहते हैं कि जहां राम जहां राम है वहां काम नहीं तो राम जी का वो था आलंबन तो जिसके कारण क्या था कि एक रा था कंज्यूम कंजप्शन तो था कि हां मुझे जो है कंज्यूम करना है मगर फिर भी राम की एक मर्यादा थी इस मर्यादा के अंदर रहते हुए कंज्यूम
00:59:31:21 करना है तो कंजप्शन में दिन भर यही है कि भाई कहां घूमने जा सकते हैं कितने अच्छे से अच्छे और महंगे वस्त्र धारण कर सकते हैं यह सब कंजप्शन का वो पॉइंट ऑफ व्यू रहता अब ऐसे में मैं उस समय एक लहर चालू हो गई थी कि आपके पास मैसेजेस आते हैं आज भी आते हैं अरे य ये हो गया अरे हिंदुओ कब जागोगे अरे देखो उसने ये कर दिया अरे देखो इस्लाम कों ने ये कर दिया अरे तुम्हारे जिहादियों ने यह कर दिया आप अगर सोशल मीडिया में कनेक्टेड है तो आपको दिन भर में इतनी चीजें आएंगी खबरें यहां वहां की की आप कुछ करने वाले होने के लिए मोटिवेटेड होने की बजाय आप डी मोटिवेट हो जाओगे शाम तक अगर आपने ध्यान देना शुरू कर दिया अगर आप ध्यान देते हो तो आप विचलित रहोगे परेशान रहोगे प्रोत्साहित प्रोत्साहन मिलने की बजाय हतोत्साहित आप हो जाओ तो मेरे पास इस तरह के मैसेजेस बहुत आते थे कि देखो देखो तुम्हारे इतिहास के साथ खिलवाड़ हुआ है हालांकि मैं भी अपने धर्म को लेकर के बचपन से ही कट्टर रहा कि नहीं हिंदुत्व सबसे महान और मैं इस रूप में देखता था कि मुझे जब मालूम नहीं है कि कुरान में क्या लिखा है या बौद्ध में क्या लिखा है
01:00:46:21 जो भी है तो मैं सोचता था भगवान ने अमुक अमुक जगह पर इस नाम से धर्म का प्रतिपादन किया है वो वस्तुत जो धर्म और अधर्म की व्याख्या वहा सब एक होगी जो वही व होगा ऐसा सोचता था वो भ्रम टूटा मेरा आज से कुछ पाच छ साल पूर्व तो इस रूप में मैं चलता था मगर कहीं पर यदि यह बराबरी की बात आ जाती ऊपर नीचे की बात आ जाती तो अपने धर्म को प्रति रूप से रखने का मेरा प्रयास रहता था तो मेरे पास जब इस तरह के वो आते थे कि उन्होंने यह कर दिया उन्होंने यह कर दिया जिहादियों ने यह करया इस्लामिया ने ये किया क्रिश्चन ने ये किया या तो एक दिन मैं परेशान हो गया और मैंने एक
01:01:56:12 किसी को गोली मार दू बताओ जल्दी क्या करू यह मैसेजेस मेरे पास क्यों आ रहे हैं मुझे बता दो करना क्या है तो यह करना क्या है वाली बात पर कोई बात ही नहीं करता है जितने भी जो आपको इस तरह के तत्व मिलेंगे जो बता रहे होंगे वह सदैव आपको आपकी समस्याए बताएंगे वह कभी नहीं बताएंगे कि यह अधा उठाओ उसका सर फोड़ दो या फिर यह करो कुछ भी वो सृजनात्मक हो या विनाशा मक कुछ भी हो सजन हो या विनाश हो कुछ भी हो वो बात आपको सोल्यूशन कभी नहीं देंगे वो सदैव आपको खबरें देंगे तुम्हारे साथ ये हुआ तुमने क्या कर लिया जिससे कि आप जो है अब मैं कहूंगा यहां पर की उनको अपना नेतृत्व करने वाला मान लो वहां पर यही होता है कि आपको आपकी वही समस्याएं बताई जा रही है जिनको आप जानते हो ऑलरेडी आपको आपकी वही समस्या बताई जा रही है मगर इतने झग झोड़ देने वाले तरीके से बताई जा रही है कि आज आपको ऐसा लगने लगता है कि फिर भाई जो है यही हमारे लिए सोचने वाला है क्योंकि इसको मालूम है हमारे साथ हो क्या रहा है सबको मालूम भाई क्या हो रहा है तो ऐसा ही कुछ गौ माता के संबंध में भी है कि गौ माता की बातें बहुत सारी
01:03:11:13 की जाती है मगर उनका संरक्षण और संवर्धन प्रैक्टिकली कैसे हो यह प्रैक्टिकली बिल्कुल बिल्कुल यह चीज करनी है यह पेन उठाना यहां रखना है यह मोबाइल उठाना है यहां रखना है इसको बटन को दबाना है इस तरीके से कोई आपको दिशा निर्देश देने वाली बात आप तक नहीं आती है तो ऐसी ही कोई बात थी जो जब गुरुदेव का सानिध्य प्राप्त हुआ था तो ऐसी एक बात मुझे मिल गई थी कि भाई हिंदू धर्म की रक्षा करनी तो क्या करें व्हाट टू डू पता चल गया कि भैया जो विदेशी अक्रांता है उन्होंने इतने साल तक राज किया तो उन्होने ये किया इन्होने वो किया पता चल गया अब करना क्या है बताइए तो यह मुझे गुरुदेव के सानिध्य से प्राप्त हुआ था कि अपने आसपास के मट मंदिरों को शिक्षा रक्षा सेवा का केंद्र बनाओ प्रैक्टिकली वहां पर जाओ वहां के पुजारी से बात करो जो आपके आसपास का मंदिर हो और वहां पर बैठना चालू करो वहां पर अपने आसपास के पड़ोसियों को बुलाना चालू करो और यह बिल्कुल जो प्रैक्टिकल इंतजाम होता है यह आप देखिएगा जितने भी इन्फ्लुएंस है जो इस तरह से इन्फ्लुएंस करते हैं कि अरे तुमने क्या कर लिया 200 साल और ये वो बहुत तरीके से से तो
01:04:26:24 वो इनफ्लुएंसर कभी भी आपको सॉल्यूशन नहीं देते हैं और आपको जल मिन मछली के तरीके से छटपटा हुआ छोड़ देते हैं अगली बार ये ट्राई करके देखिएगा आप लोग जब आपके पास कोई ऐसा मैसेज आए ना अरे ये हुआ है वो हुआ है उसको पलट के उसी व्यक्ति को मैसेज भेजिएगा कि भाई मुझे इसका उत्तर दो कि अभी मैं यहां पर बैठा हुआ हूं रेलवे स्टेशन पर बैठा हूं क्या मैं कुछ कर सकता हूं क्या उठा के गुम्मा किसी को मार सकता हूं या फिर दूध दूध लेकर पी सकता हूं अपना बल बढ़ा सकता हूं क्या करना चाहिए तो और उससे लास्ट में य लाइन भी लिख दीजिएगा यदि य ये जो खबर है आप मुझे नहीं भेज रहे हैं तोय उसको यह मेरा प्रश्न उसे भेजे जहां से आपके पास खबर आई है तो जहां से वह खबर चली होगी ना उसको झटका लगेगा भाई यह कर क्या रहा हूं मैं केवल प्रॉब्लम पर बात करना कोई माने नहीं रखता है जब तक हम सॉल्यूशन ना दे रहे जब हमारे पास सोल्यूशन है तभी हमें प्रॉब्लम पर बात करनी चाहिए तो प्रैक्टिकली मैं फिर से आ जाता हूं मुख्य विषय पर काफी लंबा हो जाता है प्रैक्टिकली गौ माता की जो रक्षा करनी है उसमें से एक बात तो यह आती है जैसे कि अभी राघव जी ने बताया कि आप अपने यहां की जो स्थानीय जो वंश परंपरा है उसके अकॉर्डिंग
01:05:41:25 जो गौवंश है आपके यहां आपके यहां का स्थानीय उसका उसको आप लाइए अपने घर और उसका लालन पालन करने का प्रयास करिए उनके ही संरक्षण में रह कर के पहला तो ये है इसके अलावा दूसरी बात ये है जैसे आपने भी बताई कि जब बछिया हो जाती है या वो बछड़ा हो जाता है जो नंदी आगे चल कर के रूप धारण करते हैं तो उनकी उपयोगिता हमने बिल्कुल ना के बराबर कर दी है तो आप यह समझ लीजिए कि गाय माता के दूध का जहां पर उपयोग हो रहा है सबसे ज्यादा वहां से वहां जो जन्म लेने वाले जो नंदी होते हैं ये बीफ का जो इंपोर्ट एक्सपोर्ट का मामला होता है उसमें उनका उपयोग होता है सबसे ज्यादा क्यों क्योंकि व्यक्ति जो दूध के लिए जो क्या कहते हैं गौ माता का पालन कर रहा है गौवंश का पालन कर रहा है वो उसके लिए जब नंदी ने जन्म ले लिया तो उनके लिए नंदी की कोई वैल्यू नहीं जैसा कि अभी इस बात पर प्रकाश डाला था तो सबसे पहली बात हम हमें अपने मन में भावना क्रिएट करनी है कि गाय माता का संरक्षण या गाय माता को हम जो ला रहे हैं अपने घर या गौशाला इत्यादि
01:06:57:03 में वो हम उनसे मिलने वाले उत्पाद के लिए नहीं ला रहे हैं हम अपने ऊपर एक अनुकंपा कर रहे हैं गौ माता का सानिध्य प्राप्त करने के लिए सबसे पहला सिद्धांत ये होना चाहिए आपको यह नहीं सोचना है कि उनसे हमें अमुक अमुक चीजें प्राप्त होंगी आप यह सोच लो उनसे हमें गौमूत्र और केवल गोबर प्राप्त होगा क्योंकि जब तक जीवित है तब तक भोजन तो पाएंगे तब तक य दोनों चीज आपको सदैव मिलती रहे इस बोलना चाहता हूं मैं जी बोलो देखिए जैसा कि मैंने अपने अपने वचन के प्रारंभ में वक्तव्य के प्रारंभ में बोला था कि साक्षात माता पार्वती आदि शक्ति का ही रूप गौ माता के रूप में हमें दिखाई दे रहा है और उनके ही पुत्र नंदी महाराज है पुराणों में चर्चा भी वर्णन भी आता है कि एक बार भगवान भोलेनाथ को लीला स्वरूप अपने शरीर में बहुत ज्यादा पीड़ा हो गई जिसको मिटाने के लिए वह त्रिलोकी में गमन करते रहे लेकिन उसका नहीं हुआ तो व अंत में खुद गौ माता के पास पहुंचे और गौ माता ने उन्हें अपने पेट के भीतर स्थान दे दिया बाद में जब उनका रोग शांत हुआ तो गौ माता ने उनको प्रसव के रूप में बाहर किया और व नंदनी महाराज के रूप में प्रकट आए पुराणों में कथा आती है
01:08:12:13 जी और आप देखिए कि हमारे देश में सबसे ज्यादा पूजा भगवान शिव और माता जी की ही होती है और इन दोनों की ही साक्षात प्रति साक्षात प्रतिमा गौ माता ही है गौवंश जी तो मैं आगे बढ़ाता हूं अपनी बात आपकी आवाज फ जो गौ माता है गौ माता जहां पर सांस लेती है जहा पर शवास लेती है वो स्थान ही इतना पवित्र हो जाता है मात्र गौ माता के शवास लेने तो गौ माता का जो स्थान है वो तो सर्वोपरि है ही और महत्व भी गौ माता का सर्वाधिक है जैसा कि राघव जी ने बताया था कि जो पुरुषार्थ चतु है धर्म अर्थ काम और मोक्ष की सिद्धि भी हमको गौ माता के माध्यम से प्राप्त हो जाती है गौ माता के ऊपर जब भगवान श्री कृष्ण को नजर लगती थी किसी की किसी की कुदृष्टि लग जाती थी तो माता यशोदा क्या करती थी गौ माता की पूछ लेती और भगवान कृष्ण के ऊपर ऐसे कर देती दो तीन बार तो भगवान कृष्ण की नजर भी उतर जाती है उस तो ये बात बोल शर्मा जी इस पर एक बात बोलना कृष्ण की माता
01:09:27:16 यशोदा करती थ और एक बात सबसे महत्वपूर्ण ये है कि हम किसी भी जैसे पर्व मनाते हैं गोपाष्टमी का हमने पर्व मनाया दिवाली का पर्व मनाया या फिर कोई भी पर्व मनाया तो उस पर्व तक ही इस बात को सीमित ना रखे गौ माता की सेवा हमेशा करें नित्य प्रतिदिन गौ माता की सेवा करें और गोपाष्टमी आएगी तो हर व्यक्ति गौ माता को गुड़ खिलाएगा जिसे कई सारी गौ माता ऐसी है जो बीमार भी प जाती अने के कारण तो केवल एक ही दिन उनको गुड़ ना खिलाया जाए नित्य प्रतिदिन उनकी सेवा की जाए नित्य प्रतिदिन आप उनको रोटी भी खिलाए पहली रोटी तो गाय के लिए निकलती ही है और गुड़ भी खिलाए समय समय के हिसाब से हर उनके लिए खाद्य पदार्थों की आवश्यकता है वो भी खिलाई जाती है और सबसे महत्त्वपूर्ण बात ये है कि गौ माता को जो भी बीमारिया होती है वो उन्हीं के शरीर के अंदर ऐसी क्षमता है उनके मूत्र के अंदर गोबर के अंदर दुद के अंदर की उन्हीं से जो जो गौ माता की बीमारिया उनका शमन हो सकता है अग्नि पुराण के अंदर गौ माता की जो बीमारी शरीर के अंदर जितनी भी बीमारिया होती है जितने रोग इत्यादि होते हैं या हाथ का भी रो कोई रोग हो अश्व का हो गौ माता का हो अग्नि पुराण के अंदर उसका विवेचन किया गया है
01:10:42:18 कि किस प्रकार से जो गौ माता का रोग उनके शरीर के अंदर हो जाए उनके दांतों में कष्ट हो रहा है तो हम क्या घर पर ऐसी सामग्री उपलब्ध है हमारे घर प यदि गौ माता के दांतो में कष्ट हो रहा है तो सामग्री को उपयोग करके हम गौ माता के दांत के रोग को भी ठीक कर सकते हैं गौ माता के शरीर के ऊपर बहर रोग हो रहा है तो ऐसी सामग्री हमारे घर पर ही उपलब्ध है अगनि पुराण के अनुसार तो उस उस सामग्री का उपयोग करके हम गौ माता के रोग को दूर कर सकते हैं तो गौ माता को गौ माता के लिए पालन करना चाहिए हमको गौ माता सबका पालन करती है विश्व की माता है विश्वस्त माता तो एक पर्व की तरह सीमित ना रखे नित्य प्रतिदिन गौ माता की सेवा उनको दंडवत प्रणाम अवश्य करें और श्री सुर नम श्री सु नम इसका पाठ अवश्य करें इस मंत्र का जब अवश्य जी जी आप पूरी कर लीजिए मैं क्योंकि प्रैक्टिकल बता रहा था एक मैं फिर भूल जाऊंगा राघव जी अपनी बात रख लीजिए क्योंकि मैं बता रहा था व्ट टू डू उस पर बात कर इसी में कहना चाहता हूं जैसा कि मैंने कहा कि सबसे ज्यादा पूजा पूरे कश्मीर से कन्याकुमारी त भारतवर्ष में माता रानी और शिवजी की होती है तो गौ माता
01:11:57:27 इनकी गौ माता के बगैर इनकी पूजा संपन्न नहीं है तो यदि इनके जितने भी भक्त हैं माता रानी के और भोलेनाथ के यदि यह बिल्कुल सही रूप से आस्थान वित है इन दोनों हमारे भगवानों में तो गौ माता की सेवा और रक्षा इनको तत्परता से करना चाहिए जैसा कि मैंने अपने व्याख्यान के शुरुआत में कहा था कि गौ तंत्र नामक ग्रंथ में यह लिखा गया है कि भोलेनाथ जी कहते हैं कि हे पार्वती कोई 10 वंश का वि रक्षण कर ले तो तुम उसे साक्षात शिव ही यानी कि मैं ही स्वीकार करो लेकिन
01:12:33:28 आज जी चलिए मैं अपनी बात को आगे बढ़ाता हूं जी बस मैं एक कंप्लीट कर हा नेट की बड़ी गड़बड़ है तो हमें क्या करना होगा कि हम गौ रक्षा यदि नहीं कर पा रहे हैं तो हमें गोपालो की रक्षा करनी होगी यदि गोपालो की रक्षा कर जाएंगे तो गौ रक्षा में हम बहुत बड़ा योगदान दे जाएंगे गोपालो की रक्षा यह कि किसी भी तरीके से हम उनके जीवन में ऐसा क्या करें चाहे अर्थ से चाहे किसी भी वस्तु विशेष से हम उनकी ऐसी सहायता करें कि वह गौ रक्षा से गौ पालन से दूर ना हो क्योंकि यह हमारे हाथ में है सरकार को मनाना हमारे हाथ में नहीं है जी और छोटी-छोटी सेवाएं कर सकते हैं जैसे मैं मैं अपनी बात बताता हूं दूसरा उसको माने ना माने मैं कहीं जा रहा होता हूं तो लोग मूर्ख होते हैं मैं यहां इस पटल पर कहना चाहता हूं कि मूर्ख लोगों कई बार आप अपने घर का कचरा पॉलिथीन प्लास्टिक की पॉलिथीन में बांध के फेंक देते हैं तो उनके हाथ तो है नहीं पूज्य गौ माता के जिसको खा लेती
01:13:44:24 है जी तो ऐसे छोटी-छोटी चीजों का ध्यान रखना चाहिए आपकी आवाज फिर चली गई थी अभी मैं आपकी बाता ह छोटी छोटी सी ज ये देख सकते हैं जैसे पॉलीथिन में आप कोई भोज पदार्थ पैक करके ना डाले जिसको की गौ माता सबसे पहली बात है यहां वहा कचरा डालना ही क्यों है क्यों डालना है उसको अच्छे तरीके से उनको निवेदित कीजिए किसी कारण वह कचरे के ढेर में मुंह डालती हुई पॉलिथीन निकलती हुई मिले तो बिल्कुल जाइए परवाह मत कीजिए और उनके मुख से वो पॉलिथीन खींचिए इतना तो कर सकते हैं यह मैं करता हूं इतना भी नहीं कर सकते हम कहीं भी जा रहे हैं आ रहे हैं अपने काम से और कहीं ऐसी गौ माता दिख रही है तो क्या हम वो छुड़वा नहीं सकते किसी पॉलिथीन में जो भी कोई मूर्ख व्यक्ति है डाल के गया हम उस पॉलिथीन को खोल के उनको जो खाना है वो खाने को निवेदित नहीं कर सकते क्या ये एक गिलहरी प्रयास नहीं होगा गौ रक्षार्थ मैं सभी से प्रश्न कर रहा हूं बिल्कुल तो अब आप पूरी कीजिए बात जी जी जी मैं म्यूट हो जाता हूं मैं अपनी बात रखूं तो देखिए सबसे पहले अगर हम मैं यह समझते हुए बता रहा हूं कि अभी मैं
01:14:59:26 उन लोगों से बात कर रहा हूं जो बिल्कुल न्यूट्रल है अभी तक उन्होने इस दिशा में कुछ भी नहीं सोचा है कुछ कर नहीं रहे हैं तो वह कहां से शुरू करें तो उसके लिए बहुत ही विशेष अवसर है कल गोपाष्टमी का तो आप वहां पर एक प्रण लीजिए सबसे पहले कि आज से मैं जो गौ माता है गौ माता गौवंश उनके महत्व को लेकर के सजग हो चुका हूं जागरूक हो चुका हूं अपने मन में सबसे पहले कल से एक संकल्प धारण करिए कि यदि मैं स्वयं को हिंदू मानता हूं यदि मुझे हिंदुत्व की रक्षा करनी है यदि मैं अपने धर्म से प्यार करता हूं उसकी रक्षा करनी है तो मुझे जो उसकी धारक है धर्म की उस गौ माता की रक्षा करनी सबसे पहला कल से संकल्प अब इस संकल्प को हम एमप्लीफाई कैसे करें उसके लिए मैं कुछ महत्त्वपूर्ण बिंदु बता रहा हूं मैं बहुत ज्यादा विकल्प नहीं दूंगा आपको क्योंकि विकल्प जब ज्यादा होते हैं तो फिर तब भीय व्यक्ति कंफ्यूज होता है कि यह करें कि यह करें तो इसके लिए भी हमारी तरफ से कैंपेन चलाए जाएंगे कि पर्टिकुलर आपको ये ये करना है जिससे कि अनुशासित
01:16:15:09 होकर के आप वो कार्य कर सके मगर अभी मैं आपको सिस्टमिकली थोड़ा बताऊंगा कि आपको क्या करना है सबसे पहली बात तो ये है कि आप अपने घर का कोई भी पर्व बिना गौ पूजन के ना मनाए प्रत्येक पर्व में प्रत्येक जन्म दिवस में प्रत्येक जितने भी आपके यहां पर पर्व बने उस दिन गौ पूजन अवश्य रखें इससे क्या होगा गौ का महत्व बढ़े दूसरी मैं बात बोल रहा था जो वो था कि वो तो आप ऐड कर ही लीजिएगा कि अपने यहां का जो स्थानीय गौवंश है उसका पालन करें उसके पालन का प्रोत्साहन प्रोत्साहित करें लोगों को वो ऐसा ना सोचे कि हम गुजरात से लेकर के आएंगे तभी मामला बनेगा दूसरा एक भावना अपने अपने अंदर और अपने आसपास के जो वातावरण है समाज है उसमें डालिए कि गाय का पालन पोषण इसलिए नहीं करना है कि हमें उनसे जो है दूध लेना है हमें उसको बेचना है या पीना है इसके लिए नहीं करना है हमें गाय को गाय का सानिध्य प्राप्त करना है अपने जी का एक अंश निकाल कर के गाय को समर्पित कर देना है इसके लिए हम जो है गाय का
01:17:30:09 पालन गाय के पालन पोषण को प्रोत्साहित प्रोत्साहन कर रहे हैं इसके अलावा जो बहुत प्रैक्टिकल बात है बहुत प्रैक्टिकल बात आज भी इस लाइव को जो लोग देख रहे हैं या जो जब यह लाइव नहीं रहेगा एक वीडियो के रूप में हो जाएगा तब इसको जो लोग देखेंगे वो सब बातें सुनने के बाद अभी जब दूध लेने जाएंगे तो अमूल का लाल वाला दूध खरीदेंगे नमस्ते इंडिया का लाल पैकेट खरीदेंगे है ना तो एक प्रण लीजिए कल से नहाकर स्नान करने के बाद ईश्वर के सामने कि मैं अपनी ओर से फुल एफर्ट लगाऊंगा कि भाई मेरे घर में जो दूध का दूध पिया जाए व गाय का दूध इससे क्या होगा गाय का महत्व बढ़े गाय का दूध मैं पि अच्छा दूसरी बात क्या है भाई अगर माह में आप चार बार कुछ व्यय करते हैं अपने पर्सनल अपने भोग के लिए कि मैं यह खा लिया वो खा लिया या यह कर लिया वो कर लिया थोड़ा कम कर दीजिए भाई थोड़ा महंगा पड़ेगा दूध वो लाइए आप थोड़ा वहां से जहां से आप दूध लेने जा रहे हैं ना वहां अपना जो मोल तोल वाला भाव है उसको छोड़कर
01:18:45:10 जाइए अगर वह कह रहा है 5 रप लीटर दूंगा मैं आपको तो आप उसको लीटर करिए पूरे महीने में पा रुप की बढ़त से आपको 50 रुप का फर्क पड़ा पूरे महीने में पा रुप की अगर बढ़त पड़ गई तो आपको 50 रप पड़ा यह 50 रप से उसको जो गौ का पालन कर रहा है उसको कितना प्रोत्साहन मिलेगा तो वहां पर अपनी भावनाएं लेकर के जाइए वहां पर एक ग्राहक बन के मत जाइए कि मैं तो दूध खरीदने आ रहा हूं और य जो लाल वाले पैकेट है बिल्कुल इनको अवॉइड करिए यहां तक हो सके यथा संभव तो इससे गाय का महत्व बढ़ेगा अब बात आती है जो नंदी महाराज की हत्या होती है जो नंदी हो जाते हैं जैसे कि इन्होंने बताया कि एक नंदी की एक बार के सीमन से 80 गाय गाय जो है गर्भवती हो सकती हैं तो इसलिए नंदी की जो उपयोगिता है वह कम हो गई है तो नंदी महाराज की उपयोगिता के लिए हम एक कैंपेन चलाने वाले हैं जिसमें हम ऐसे प्लांट लगा रहे हैं जहां पर जो कोलू है उसको नंदी महाराज जी के द्वारा चलाया जाएगा और उसे धीरे धीरे करके शुद्ध वाला जो कोलू के बैल का पिसा हुआ जो तेल हो वो निकलेगा और
01:20:00:12 आप लोग भी प्रयास करके अपने अगर थोड़ा बड़े लेवल पर अगर कर सकते हैं जैसे जब सबसे पहला क्या है कि आपने बनाया अपने आसपास के मठ मंदिर को शिक्षा रक्षा सेवा का प्रकल्प उसके कारण क्या हुआ आपका एक ग्रुप बन गया आपकी वो जो सोसाइटी आपका वो जो गली मोहल्ला जो भी है कॉलोनी वो सब वहां के जितने भी हिंदुत्ववादी लोग है वहां आने लगे ग्रुप बन गया अब इस ग्रुप ने मिलकर के क्या किया किसी गौ पालक को पकड़ा या फिर स्वयं में ही निर्धारित किया कि भाई यह वाले हैं यह चाचा जी हैं यह सेवा से निवृत हो चुके हैं इनके लिए सही रहेगा और उनको जो है एक प्लांट लगवा दिया प्लांट में बहुत ज्यादा खर्च नहीं आता है इस पर हम आगे आने वाले जब हम प्लांट डालेंगे आवान की तरफ से प्लांट हम डालने वाले हैं तो जब हम यह प्लांट डालेंगे तो उसके वीडियोस सरलता पूर्वक कैसे कैसे इसमें क्याक हो सकता है वो सब कुछ हम डालेंगे तो लू के बैल द्वारा पिसने वाला तेल हम आप लोग घर में उपयोग में लाए उसके वैज्ञानिक फायदे तो है ही साथ ही साथ सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि हम इस तरीके से जगह जगह पर कोलू के बैल की बात करने लगे तो कोलू के बैल के पिसे हुए तेल को आप पहली बात तो आपकी फैमिली
01:21:15:20 आपका परिवार स्वस्थ होगा और दूसरी बात यह है कि हम लोग जो नंदी महाराज की हत्या हो रही है निर्ममता के साथ बिना किसी आधार के वो उसमें गिरावट आएगी धीरे धीरे क्योंकि हमने गौवंश का महत्व बताया देखिए जो पुरी के शंकराचार्य जी जगतगुरु वोह सूत्रा क्मक शैली में आपको इतना सब कुछ बता देते हैं कि आपको बहुत कुछ अध्ययन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है उन्होंने बता दिया कि जो बैल है उनकी उपयोगिता बढ़ानी है अब उपयोगिता कैसे कैसे बढ़ा सकते हैं कि कृषि में अगर उनका उपयोग हो सकता है तो वहां कर ले अब कृषि तो हम लोग करते नहीं है शहरों में रहने वाले लोग तो हमें क्या करना है ऐसी चीजें करनी है जैसे मान लीजिए हमारा 50 लोगों का भी ग्रुप हो गया तो आपका जो वो जो कोलू के एक कोलू के बेल से जो तेल निकलेगा ना व 50 100 स लोगों मेंही कंज्यूम हो जाएगा आपको उसके लिए मार्केट ढूंढने की आवश्यकता नहीं पकड़नी है अब दूसरी बात वो जो प्लांट है उसका खर्चा कैसे होगा कि यह जो तेल होगा व र लीटर नहीं आएगा वो आएगा ज्यादा मगा तो वहां पर आप अपनी भावनाए लेकर जाइए कि भाई हम जो है यहां पर ये जो है गौ माता के लिए कर रहे हैं हम तेल पिएंगे तेल लेंगे तेल खाएंगे तो वो ओलू
01:22:31:00 के बैल का पिसा हुआ ही खाएंगे और भले ही वो हमको 500 00 लीटर घी के बराबर पड़े तब भी हम वही खाए ये बहुत बड़ा इन्वेस्टमेंट नहीं है इससे ज्यादा इन्वेस्टमेंट शहरों में रहने वाले लोग सिंगम थ्री आती है और कर देते हैं जाकर के वहां टिकट ले लेते हैं उसके तो आप यदि छोटा सा ध्यान दें तो बहुत बड़ा कोई आपके जीवन में प्रभाव नहीं पड़ने वाला है और यह आप को एक आपके जीवन में एक वो वहां पर जो आपने फिल्म देख कर के पैसे वेस्ट किए ना वही पैसे आपने यहां पर अपने धर्म की रक्षा में अपनी गौ माता की रक्षा में अपने स्वास्थ्य पर खर्च किए आपके हॉस्पिटल्स के चक्कर कम होंगे पलू के बेल का जब तेल पिसा हुआ लेंगे और अगर गौ माता का सानिध्य आपको प्राप्त हो रहा है तो फिर कहना ही क्या है मगर हमें उपयोगिता पर ध्यान देना है छोटे-छोटे से प्रोडक्ट बनते हैं गौ माता का जो गोबर होता है उससे भी बहुत सारे आजकल चीजें बनने लगी हैं तो आप इन सबको प्रचलन में लाए संकल्प ले कि हम गौ माता के पास जब जा रहे हैं तो वो गिव एंड टेक वाले मामले से नहीं जा रहे हैं स्थानीय गाय का पालन भरण पोषण पर ध्यान दें गौ पालको को प्रोत्साहन करें और अपने जीवन में जहां जहां पर गौ माता से प्राप्त होने वाला उत्पाद ऐड हो सकता है अब देखिए एक
01:23:46:01 वेगन की बात आती है वो जो है कुछ तथाकथित स्वघोषित आचार्य है वो कहते हैं भाई जो है जो गाय से मिलने वाला जो जो प्रोडक्ट है वो बंद कर दो क्योंकि गाय पर अत्याचार होता है है ना तो इससे क्या कर रहे हैं हम मानव जीवन में गाय की उपयोगिता ही उपयोगिता को ही खत्म कर दे रहे हैं जब वो उपयोगी नहीं रहेगी तो धीरे धीरे वो समाप्त कर दिया जाएगा उन्हे तो हमें अगर गाय को बचाना है तो उनकी उपयोगिता को सिद्ध करना होगा और उन उनकी नहीं उनके पूरे परिवार की उपयोगिता को सिद्ध करना हो और उसके लिए हमें सबसे पहले अपना संगठन बनाना होगा कि हम कम से कम अपने नगर क्षेत्र के हिसाब से वहां के 50 100 परिवार संगठित हो जिससे कि हम कोई भी निर्णय ले पाए कि भाई हम 50 लोग तो वहां का तेल ही खाए खाएंगे हम 50 लोग तो वही वाला घी खाएंगे गौ माता मक्खन वही वाला खाएंगे है ना यह आधारभूत चीजें हैं जो आप अपने जीवन में छोटे से बदलाव को लाकर के कर सकते हैं और इसके साथ ही साथ यह जो अवसर है कल जो गोपाष्टमी आ रही है यह प्रण अपने जीवन में आप कल लेंगे कल एक संकल्पित हो जाइए कि मैं अपने जीवन
01:25:01:03 में ज्यादा से ज्यादा सबसे पहला स्टेप है कि गौ माता के विषय में गौवंश के विषय में मैं गिव एंड टेक वाला व्यक्ति नहीं हूं और दूसरा अब मैं ज्यादा से ज्यादा जो उत्पाद होंगे वह गौ माता से आ रहे उत्पाद है वो लूंगा और प्रयास करूंगा कि मेरे आसपास कोई गौशाला हो बड़े-बड़े शहरों में सब जगह है गौशाला मैं वहां से लाऊ क्योंकि कंपनी से क्या आ रहा है क्या नहीं आ रहा वो एक अलग बात मगर पहला प्राथमिक प्रयास क्या है कि आप वहां से लाइए अपने जीवन से धीरे धीरे कट करिए कि गौ माता की जो हां एक और दिक्कत आती है कि जब आप गौ माता का दूध लेकर के आएंगे तो आपके घर वाले हो सकता है जो यह सब आध्यात्म की बातें ना सुनते हो धर्म रक्षा की बातें ना सुनते हो वो हो सकता है कहे कि अरे हमें पसंद नहीं आ रहा इनके दूध में स्वाद नहीं है वो गाढ़ा पन नहीं है वो मजेदार नहीं भाई वो गाढ़ा पन आपके हृदय को नुकसान प रहा है जो ओवर गाढ़ा पन है जो इसको कहते हैं क्या कहते हैं बैड फैट में आता हैय जो ओवर जो फैट होता है पाछ ग्राम फैट होता है 100 ग्राम दूध में जो मैं भैंस के दूध की बात कर रहा हूं तो उसमें 5छ ग्राम फैट होता है वो बहुत क्या कहते हैं उसको कहते
01:26:16:08 बैड फैट में आता है स्टन फैट जब आप कभी अपने चर्बी को कम करने चलेंगे तो वो आपके लिए दुखदा होगा आपके शरीर से वो चर्बी कम होना तो आप यह सोच रहे हो कि आप बस आजकल वैसे भी घरों में क्या हुआ है कि सामान्य जो परिवार है उनमें जब सुबह होती है तो भोजन यह सोचकर नहीं बनता है कि क्या स्वास्थ वर्धक आज बनाया जाए भोजन यह सोचकर बनता है कि क्या स्वादिष्ट बनाया जाए तो उसी का प्रभाव यहां भी है कि हमको स्वाद चाहिए स्वाद में नहीं बदलाव है बदलाव पता है क्या है आपको आदत है बचपन से भैंस का दूध पीने की और इसलिए जब गाय का आ रहा है तो आपको ऐसा लग रहा है तो आपको क्या करना है वहां पर पहले से ही एक प्रतिरोधक क्षमता निर्माण करनी है कि भाई हमको प्रहलाद बन जाना है पूरे घर का पूरे घर पूरे घर से हम सामने खड़े हो जाएंगे भाई गाय का दूध ही पी गाय के दूध पर आ जाइए गाय के घी प आ जाइए गाय के मक्खन पर आ जाइए और हो सके तो लू के बैल के तेल पर आ जाइए कुछ दिनों में हम लोग चालू करने वाले हैं उसकी विधिवत जानकारी आपको दी जाएगी इसके साथ ही साथ जो जैसे छोटी छोटी सी जो गिलहरी वाले प्रयास आपको बताए गए वो मन की भावना कि हम गिव एंड टेक वाली भावना नहीं रखते हैं गाय के लिए
01:27:31:25 स्थानीय गाय गौवंश को देंगे यह सारे वो घटक है जिन पर कार्य करते हुए आप गौवंश के संवर्धन में संरक्षण में एक निमित्त बन सकते हैं और गाय की रक्षा का मतलब है धर्म की रक्षा सनातन धर्म की रक्षा का जो आधार है वो गाय से शुरू होता है गाय की रक्षा करने लग जाइए सभी देखिए आपके आसपास का वातावरण सुधरने लगेगा जितने भी अशा स्त्रीय कार्य हो रहे बंद होने लगेंगे अशा स्त्रीय जो मंत्र पढ़े जा रहे हैं बंद होने लगेंगे जब अशा स्त्रीय मंत्र पढ़ा जाना बंद होने लगेगा तो जो गलत वाइल्स उत्पन्न हो रही है मंत्र पढ़ने से है ना वो बंद होने लगेंगी क्यों क्योंकि जब अशा स्त्रीय मंत्र पढ़ा जाता है शस्त्री विधि का आलंबन लेकर के तो क्या होता है आपके पास यदि आसपास अकाल घटनाए घटित हो रही है तो इसका अर्थ यह है कि कहीं अधि पूर्वक पूजन अर्चन हो रहा है तपस्या हो रही है कहां लिखा है रामायण में कहां लिखा है मनुस्मृति में तो जब आपकी व गलत वाइब्रेशन उत्पन्न होना नकारात्मक वाइब्रेशन उत्पन्न होना कम हो जाएंगी आपका वातावरण शुद्ध होने लगेगा अब यहां पर कुछ लोग य यह भावना कर सकते हैं अब कौन कुछ कर पाएगा क्या होगा सब बिगड़
01:28:46:28 चुका है कोई कुछ नहीं कर सकता है तो पता है क्या सोचना है आपको कर्मन वादी का रस्ते फले सु कदा चना आपको यह नहीं सोचना है कि हम क्या बदलाव ला पाएंगे क्या नहीं ला पाएंगे आपको यह सोचना है कि यह मेरा कर्तव्य है और मुझे करना है बस अपने कर्तव्य को करने का आनंद उठाइए उसके परिणाम में आनंद मत ढूंढिए अपने कर्तव्य कर्म को करने में आनंद ढूंढ है ना और एक बात और आती है एक युक्ति दी थी करपात्री जी महाराज ने इस विषय में कि सब बिगड़ चुका है क्या है कलयुग है कुछ नहीं होगा तो करपात्री जी महाराज ने बताया था जब उनसे किसी ने कुतर किया था कलयो है कुछ नहीं होगा तो कपाती जी महाराज बोले थे कि गर्मियों के दिनों में भीषण गर्मी जब पड़ रही होती है तब ये बात सर्व जगत मतलब जग जाहिर होती है कि गर्मी तो है ही गर्मी तो पड़ेगी फिर भी हम यथासंभव प्रयास करते हैं कि हमें गर्मी कम लगे यथासंभव प्रयास करते हैं कि नहीं कि हमें गर्मी कम लगे इसी प्रकार से भले ही कलयुग है भले ही सब कुछ है पूरा विरुद्ध हो रहा है आचरण सब कुछ है
01:30:02:06 मगर फिर भी हम सदैव प्रयासरत रहेंगे कि कलयुग का प्रभाव कम हो यही धर्म सिखाता है चाहे कलयुग हो द्वापर हो कुछ भी हो मगर हम सदैव प्रयास रत रहेंगे अपने धर्म की रक्षा के लिए और जो कलयुग से होने वाले जो दुश प्रभाव है उनके नाश के लिए बाकी महादेव की इच्छा बाकी भगवान देखेंगे तू मेरी शरण में जा मैं देखूंगा तुझे क्या चाहिए और क्या तेरे पास है वो सब मैं देखूंगा आप अपना कर्म करिए कभी-कभी एक बात ये भी आती है यहां पर कि कर्म के फल में आसक्ति नहीं होगी तो व्यक्ति जो है वो उतनी निष्ठा से कैसे लड़ेगा आपकी निष्ठा किसम होनी चाहिए पता है मैं यह काम जैसे जैसे अर्जुन अर्जुन ने कहा कि भाई मैं लड़ रहा हूं और मैं अगर जीतूंगा अगर उसकी जीतने से होने वाले जो फल है उसमें अगर निष्ठा नहीं होगी तो वो क्यों जीतने में उसकी निष्ठा आएगी जब फल की उसके अंदर आसक्ति होगी फल के प्रति कि मुझे ये फल मिलेगा तभी तो उसकी निष्ठा आएगी नहीं उसकी निष्ठा किस बात में है जैसे अर्जुन से कोई पूछे क्यों जीतना चाहते हो तो एक जवाब है कि जीतने के बाद मुझे महल मिलेगा मुझे बहुत अच्छा सोने का सिंहासन मिलेगा
01:31:17:19 या अमुक अमुक चीजें मुझे मिलेंगी तो इसके प्रति आसक्त होने से भगवान ने मना किया तो फिर लड़ क्यों रहे हैं जब कोई परिणाम में हम ध्यान ही नहीं लड़ाई कैसे करे मुझे जीतना है क्यों भगवान ने कहा शास्त्र ने कहा है इसलिए मुझे जीतना है मुझे तुम्हें लड़ना है क्यों भगवान ने कहा है शास्त्र ने कहा है इसलिए मुझे लड़ना है बस यह बुद्धि होनी चाहिए कर्मण्य वादी का रस्ते माफस कदाचना का यही अर्थ कि मैं क्यों जीतना चाहता हूं इसलिए नहीं कि जीतने से मुझे महल मिल जाएंगे ईश्वर ने कहा कृष्ण ने कहा है महादेव ने कहा है शास्त्र ने कहा है इस बुद्धि को लेकर के अपना कर्म करना चालू करिए यह सब जो लोक आते हैं तो मेरे जो वक्तव्य कहते समय भाव होते हैं व बदल जाते हैं तो ठीक है कल गोपाष्टमी सभी लोग मनाएंगे मैं ऐसी अपेक्षा कर रहा हूं शिवस दशा जी अवनीश जी आदित्य वासने जी आर आर्यन कुशवा जी है ना आप सभी जितने भी श्रोता गण है और मैं यह कहूंगा
01:32:32:26 कि भाई देखो इस मामले में आर्य समाजी हो इस कौन हो या जो रामपाल दास जी के फॉलोअर्स है वह हो इस बात को लेकर के हम सब एक मत है कि गाय हमारे लिए सम्माननीय है और हमें उसका रक्षण करना है तो इसमें कोई भी दुराव ना रखें कल से कल गोपाष्टमी के दिन गौ पूजन अवश्य करें इस मामले में हम सब भाई हैं हमारे आपस की बातें वो सब आपस की चीजें हैं वो सब सुलती रहेंगी मगर गाय माता की रक्षा पर हम सब लोगों को ध्यान देना है आप सब लोगों से निवेदन है कि निसंकोच होक के और निर्विवाद रूप से गौ माता के संरक्षण संवर्धन पर ध्यान दें विशेष रूप से और आपकी कुछ अन्य युक्तियां हो तो उनका स्वागत होगा आगे हम इस तरह का प्रकल्प लाने वाले हैं मगर सबसे पहले कल गोपाष्टमी के दिन गौ माता का पूजन और संकल्प ये दो चीजें कल करनी है पूजन और संकल्प ठीक है इस पर हम हैशटैग भी लाएंगे शैग चलाएंगे गौ माता का पूजन और संकल्प य आपको कल करना है इसके साथ ही साथ आज की हम ये जो लाइव है उसको पूरा कर रहे हैं
01:33:46:03 और सभी को जय श्री राम h [संगीत]
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