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00:00:03:00 [संगीत] तो सभी को जय श्री राम और आज हमारे साथ हैं आप इनको शायद जानते हो गोविंद गुरुकुल के नाम से इनके सोशल मीडिया पर अकाउंट है और यह हमारे साथ एक बार चर्चा में आ भी चुके हैं तो आज हम लोग जो आपको विषय पता ही होगा कि जो रामपाल की जो भक्ति है रामपाल के द्वारा बताई जाने वाली वो मनमुक इसी के निमित्त हम इस मंच पर आए हैं यद्यपि पूर्व में गुरुकुल गोविंद जी के कुछ कार्य ऐसे रहे या जो भी रहा तो इन्होंने अपने आप को तब से कुछ परिवर्तन काफी किया है परिवर्तन लाए अपने आप में और ऐसा भी है कि हमारे और इनके जो विचार है बिल्कुल हर पॉइंट पर बिल्कुल एकमत नहीं भी है फिर भी जो जगतगुरु है जो कपाती जी महाराज हैं उन्होंने एक डेडलाइन दी थी
00:01:18:08 कि अंततोगत्वा जो वेद में प्रमाण बुद्धि रखेगा चुटियों में प्रमाण बुद्धि रखेगा वो एक तरफ होनी चाहिए अगर बात उससे हो रही है जो वेद में श्रुति हों में प्रमाण बुद्धि नहीं रखते हैं या फिर उसमें दोष दृष्टि रखते हैं संदेहास्पद दृष्टि रखते हैं और इस लाइव का उद्देश्य इस लाइव का उद्देश्य वही है कि जो आजकल चल रहा है एक क्रम है कि हम लोग एक निश्चित बिल्कुल बाल की बिल्कुल एक एक बात का बाहर ले आए कि भाई आखिरकार कौन-कौन सी जगह पर जो रामपाल के द्वारा रामपाल के फॉलोअर्स के द्वारा अब रामपाल के द्वारा मैं नहीं कहूंगा कि रामपाल के द्वारा फैलाया हुआ रामपाल के जो फॉलोअर्स हैं जो रामपाल के नाम पर अब जो तंत्र चला रहे हैं उनके द्वारा जो बताया जाने वाला जो धर्मा भास है उसकी सच्चाई बाहर लाना उसी का एक क्रम उसी में एक क्रमिक वो है अभिव्यक्ति और मैं बता रहा था गुरुकुल गोविंद जी के बारे में और हमारे बारे में तो यह बात मैंने जैसा
00:02:33:12 कि कहा कि यद्यपि हर दृष्टिकोण से हर मान बिंदुओं पर हमारा एक मत होना नहीं है ऐसा मगर क्योंकि वेदों में पूर्ण रूप से परमाण बुद्धि है तो इस कारण से जब बात किसी ऐसे व्यक्ति से होगी जो यह कहेगा कि अ हम वेद को उतना मानेंगे जितना हमें अच्छा लगेगा या फिर कोई और आ करर के बताएगा कि के वेद के कौन से मंत्र लेने हैं कौन से नहीं तो जब ऐसे किसी से बात होगी तो वेद में प्रमाण बुद्धि वाले हम साथ में हो जाे और इस प्रयास में भी है हम लोग कि आगे चलकर के अंततोगत्वा हम एक मत हो जाएं और यह प्रयास हमारा सबके लिए भी है हम आर्य समाज से भी कहते हैं कि भाई वो जो बीच की स्थिति वाली चर्चा है उसके लिए वो आए यहां पर आकर के करें कि कैसे धर्म की रक्षा हो सकती है अगर स्कन विदेशों में जाकर के धर्म का प्रचार कर रहा है तो हम उसमें दोष दृष्टि नहीं रख रहे हैं अगर वह धर्म का प्रचार कर रहा है लोगों को वेदों से जोड़ रहा है अगर उसमें कोई गलत बात हो रही है तो हम उसके लिए हैं हम उसके लिए टोक हैं तो हम वेदों में प्रमाण बुद्धि रखने वाले जब
00:03:48:18 बात होगी किसी ऐसे से जो वेदों में वेदों को कस्टमाइज होकर के स्वीकार है या वेदों का ही खंडन करता है किसी भी एक श्रुति का खंडन कर देता है तो उससे जब बात होती है तो हम वेदों में प्रमाण बुद्धि रखने वाले एक तरफ हो जाएंगे और तो अब मैं चाहूंगा गुरु गुल गोविंद जी से कि आप थोड़ा सा अपने बारे में बता दे जी जी जी तो जैसा की पहले बा आपकी आवाज नहीं आ रही एक मिनट आप म्यूट तो नहीं है फिर आपकी आवाज क्यों नहीं आ रही अभी अभी आ रही आवाज नहीं आ रही आवाज अच्छा एक सेकंड रुक
00:04:33:13 अभी मेरी आवाज आ रही आवाज नहीं आ रही आवाज अभी आ रही अभी बोलिए एक बार आप लीव करके दोबारा आ जाइए आपको आ रही है हां हमें नहीं आ रही है क्यों नहीं आ रही भाई एक मिनट अब बोलिए [संगीत]
00:05:19:03 जी तो अभी आप आही मेरी आवाज जी आ रही है ठीक तो परिचय पहले मैं दे देता हूं अपना जैसा कि हुआ कि पहले की बात हुई अतीत में कुछ ऐसी बातें हुई जो कि बड़ी अफसोस जनक भी है ठीक है और शिक्षा भी लेने की जरूरत है कि किस मौके पर कितना बोलना चाहिए और कहां से कदम वापस ले लेने चाहिए ठीक है तो जो मैंने गलतियां की ठीक है जैसा कि बताया जाता है वह यह है कि कभी भी एक सीमा से आगे जाकर ना किसी सत्पुरुष के लिए बोलना है और ना ही किसी देवी देवता के लिए एक सीमा से बढ़कर कोई भी बात होनी चाहिए यदि लगता है दिशा एक मतलब एक बातचीत एक ऐसी दिशा में जा रही जहां केवल अभद्रता ही प्राप्त होने वाली है आपको भी और सामने वालों को भी तब हमें उस चीज से कदम पीछे हटा लेने चाहिए जैसे कि सोशल मीडिया पर मेरे बारे में यह देखा भी गया कि किस प्रकार की बातें जो है निंदनीय बातें जो होती है वह भी हुई चलिए वोह एक इतिहास था शिक्षा जो व्यक्ति किसी भी चीज से ले लेता है उसके लिए वो उसका कार्य निरर्थक नहीं चला जाता ठीक है तो जैसे कि लक्ष्मण जी को भी शिक्षा दे रहे हालांकि
00:06:34:10 हम तो लक्ष्मण नहीं है मैं भी एक रामायण का प्रसंग सुना रहा हूं लक्ष्मण जी को शिक्षा दे रहे हैं ना भगवान कि तुम क्यों माता को अकेला छोड़कर चले आए मेरे पास ठीक है तो उनसे जो गलती हुई अब हम उससे पूरी शिक्षा ले रहा है समाज कि नहीं जो बड़े भाई ने कहा है या ज्ञानी पुरुष ने कहा है उस कार्य को बिल्कुल बिना किसी शंका के हमें करना है ठीक है तो यही बात होती है कामाख्या देवी के बारे में वो बातचीत थी वहां पर कुछ हद से आगे जाने की प्रयास किया मैंने भी किया और भी लोगों ने किया तो उससे कुछ त्रुटियां भी हुई और उससे फिर कुछ हमें सबक भी लेना चाहिए ठीक है तो उसके लिए जो है जितने भी लोग देख रहे हैं उनसे मैं क्षमा प्रार्थी भी हूं ठीक है परंतु आपको यह बात जाननी चाहिए कि मैंने सबक सीखा है यदि सबक नहीं सीखा तब वो बात गलत हो जाती है ठीक है तो पहला तो मेरा यह छोटा सा जो पास्ट था ताकि क्लियर हो जाए ये बताने का वजह बस इतनी सी है कि इस चैनल के ऊपर कोई भी व्यक्ति कल को उंगली ना उठा सके ठीक है क्योंकि जगतगुरु श्री जो शंकराचार्य जी है उनका नाम कहीं ना कहीं इस चैनल से जुड़ा हुआ है मैं शिवास जी को पहले भी कह चुका हूं मैं बैक एंड पर रहकर भी काम करने को तैयार हूं लेकिन
00:07:49:13 इस मिशन में कभी भी मेरी तरफ से कोई भी गड़बड़ नहीं होनी चाहिए चैनल के ऊपर कोई भी व्यक्ति उंगली नहीं उठाना चाहिए क्योंकि वो मेरी पर्सनल बात है अगर किसी ने उंगली उठानी है तो वो ट मेरे ऊपर उठा सकता है ठीक है पहली बात तो ये है दूसरी बात है मैं स्वाध्याय करता हूं अध्ययन करता हूं थोड़ा बहुत और जो मेरे को देखिए एक तो बात होती है जो संप्रदायिक सिद्धांत है मैं उन पर बात नहीं करता हूं ठीक है मैं बात करता हूं जो कि सोशली जैसे कि गीता है तो सोशली हम इसको कैसे अप्लाई कर सकते हैं और थोड़ा बहुत अपने जीवन में भी सत मार्ग पर ला सकते हैं ठीक है बस मेरा इतना सही मैं स्वयं से ही स्वाध्याय करता हूं और स्वयं से ही लोगों को मैं प्रचार भी करता हूं जो भी चीज सोशली चीजों को इन्फ्लुएंस कर रही बस वहां तक नहीं यह आपने बहुत अच्छी बात बताई आपने देखिए कुल मिलाकर के जो है भूतकाल में जो आपसे कुछ त्रुटियां हुई आपने साहस के साथ उसको स्वीकार किया है पब्लिक के सामने और आपने क्षमा भी मांगी है और हम भी भगवान से प्रार्थना यही करते हैं कि आगे जाकर के हमारे जो मार्ग अभी भी थोड़े से थोड़े बहुत जो दूर रह गए हैं या दिख रहे मात्र हैं वो जाकर के आपस में एक हो जाए मगर मर आज हम बात करेंगे जो वेदों में जो कस्टमाइजेशन वाले लोग हैं
00:09:05:10 उनके साथ बात करेंगे जो दिख तो रहे हैं कि हम वेदों को मानने वाले हम जो शास्त्र सम्मत बात करते हैं और वह जो है स्वयं कितना शास्त्र सम्मत है तो आज हम उस पर बात करेंगे और कुछ देर के बाद हम जोड़ेंगे भी अगर उनका कोई फॉलोअर आना चाहेगा तो ऊपर आए तो आपका ऐसा क्या एक्सपीरियंस रहा इनके साथ वह आप पहले बताएं क्योंकि आप मुझे ऐसा मालूम चला कल भी गए हैं और मैंने उस उनके वहां के कुछ दृश्य देखे तो हास्यास्पद थे वो दृश्य काफी और ऐसा होता ही है तो आप थोड़ा सा अपना एक्सपीरियंस बताए आपका क्या जर्नी रही रामपाल एंड कंपनी के विषय में रामपाल को बाबा जी को मैं कोई सुनने लगा आज से कोई चार पाच साल पहले लेकिन कह है ना कि एक हमारे जो यशस्वी प्रधानमंत्री जी है उन्होंने भी एक नारा दिया था हालांकि य कोई पॉलिटिकल बात नहीं है कि आपदा में अवसर खोजना ठीक है तो मेरे को आपदा में अवसर इसी प्रकार मिला कि संदीप संदीप बत्रा जी शायद आपकी लाइव में जुड़ते हैं वो मेरे को बहुत पहले से जानते हैं मैं उनके साथ काम किया करता था यही फु
00:10:20:14 प रामपाल जी के जो है द्वारा तो मेरे को जब इन्हो पता चला ऐसी ऐसी बातें लिखी हुई है तो मैं मेरे को बड़ा कष्ट हुआ भाई ये क्या है क्या मेरे हमने मतलब हमारा पूरा धर्म ही झूठ पर बेसिक है यानी मेरा पूरा जो धर्म है वही झूठा है यानी कि क्योंकि यह तो ग्रंथ खोल के दिखा रहे हैं ऐसा तो है नहीं कि वो ग्रंथ नहीं दिखा रहे वो तो नेशनल टीवी पर ग्रंथ दिखा रहे तो मैंने भी अपने ग्रंथ पर घर में दो तीन ग्रंथ ले आए तब मेरे को जब पूरा पैराग्राफ पढ़ा मैंने कहा यार ये कैसे लोग है मतलब इतना मोटा ग्रंथ है उसमें से डेढ़ लाइन पढ़ के बोल रहे हैं कि देखिए जी हमने पूरा का पूरा जो है अध्ययन कर लिया और उसम इतनी वाहियात भी चीजें बताई गई है जिसका कोई हल नहीं मतलब कुछ तो सिद्धांति बात कर लो कुछ भी मैंने बस तब से इनको कोई तीन चार साल हो गए बस एक ही बात कह रहा हूं आज तक रामपाल जी का कोई भी एक ज्ञान शास्त्र सम्मत सिद्ध कर दीजिए मैं बहुत दुविधा में हूं ठीक है पूरा मेरे को चाहिए नहीं मेरे को सिर्फ एक ज्ञान चाहिए वो भी शास्त्र सम्मत आज तक इनसे नहीं देने हो पाया फिर मैंने इनसे डिबेट्स करी मेरे पास ढाई ढाई तीन-तीन साल तब की भी डिबेट्स पड़ी हुई है आज की भी पड़ी हुई है फोन करता हूं इनके आश्रम में फोन काट देते हैं व का मेरा नंबर ब्लॉक कर देते हैं मेरे फोन
00:11:35:16 के नंबर ब्लॉक कर देते हैं गालियां देते हैं गंदगी बोलते हैं आगे से ठीक है मतलब पहले मैंने इनके वहां पर फोन कर लिया फिर मेरे को कभी दूसरे नंबर से फोन आएगा वो डायरेक्ट मेरे साथ गाली गलोज करेगा मैंने कहा भाई गाली गलोज करने वाली बात ही नहीं है तुम्हारे ग्रंथों में जब सारी चीजें लिखी हुई है और वो सारी की सारी ही गलत है ग्रंथों के अनुसार तो इसमें मेरा क्या लेना देना मैंने सिर्फ एक बार इनसे आप यकीन मानिए मैंने सिर्फ फोन करके इनसे इतनी बात पूछी कि भाई आविर्भव का मतलब जन्म और तिरो भाव का मतलब मृत्यु कहां पर लिखा हुआ है ठीक है आप यकीन मानिए आश्रम का बंदा मेरे को गालियां देना शुरू हो गया फोन के ऊपर ऑफिशियल लाइन की बात कर रहा हूं जहां पे वो आता है ना कि इनसे बात करने के लिए ये दबाइए एक दबाइए चार दबाइए चार दबाया बंदे से मैंने चार पांच बार पूछा वो इतना फ्रस्ट्रेट हो गया दूसरे नंबर से फोन करके मेरे को गालियां देना शुरू हो गया पहले वहां पर मेरे को गालियां दे रहा फिर दूसरे नंबर से भी फोन करके गालियां दे रहा है आज तक कोई एक भी चीज मेरे को इन्होंने शास्त्र सम्मत नहीं बताई जो दुनिया भर का झूठ है सिर्फ सिर्फ फ्रॉड शुरू से लेकर यह पुस्तक है मेरे पास इनकी मैं खून के साथ लिख के दे सकता हूं अभी हम खोल लेंगे यह क्या खून से लिखने वाली कोई बात ही नहीं
00:12:51:21 है इसमें एक भी बात शास्त्र सम्मत सिद्ध करने वाले को मैं अभिमन्यु वर्मा मेरा नाम है मैं 000 पेटीएम इनाम दूंगा जो भी इसकी एक भी बात ग्रंथों से हूबहू बिना मिलावट के ये नहीं कि इसका वर्ड उठा के उधर रख दिया उधर उठा के इधर कर दिया तुम को मैं कर दिया और उसको आ को जा कर दिया और खा को पी कर दिया ठीक है एक भी इसमें कोई ऐसी चीज नहीं है जो प्रमाण सहित हो मैं ये बस कह रहा हूं हां ठीक है तो अगर कोई कर देता है तो हम अपनाएंगे और उसे भेंट स्वरूप हम देंगे भी जो उसका बनता होगा ठीक है ना हालांकि पैसे का तो आप लालच नहीं होगा जितने भी रामपाल जी के शिष्य सुन रहे हैं लेकिन चलिए उससे कोई ना कोई कार्य तो हल हो जाएगा आपके प्रचार में लग जाएगा वो कार्य प्रचार कर लेंगे वो भंडारा होता है ना तीन दिन का भंडारा होता है इनका उसम उसम हो जाएगा चलो डिस्पोजल आ जाए हज में डिस्पोजल भी बहुत सारा आ जाता है हा नहीं भैया हम यह कहेंगे कि इन्होंने बहुत सी कुछ जरूरी जरूरी मुख्य बातें हैं इनके कुछ कुत होते हैं जैसे मैंने देखा था मुझसे भी ये कुतर किया इन्होंने कि
00:14:07:18 जैसे यह पेन है यह पेन वाला कुतर को नेपाली लड़का है ना जो वो करता है जैसे ये पेन है कल उसको मैंने नहीं बोलने दिया कल उसको मैंने नहीं बोल मैंने कहा भाई कहता उदाहरण देने लगा मैंने कहा मैं कौन से शास्त्र से उदाहरण दे रहा बता ग खो लेता तो उसने बोला जैसे पेन है अब को जो पेन कहेगा मैं उसको मानूंगा अरे भैया यह पेन है ये तुमको पहले से पता है और शास्त्र वो है जो तुमको वो चीज बता रहे हैं जो तुमको नहीं पता है तो शास्त्र को खोलने से पहले यदि तुमको पता है कि ये पेन है तो तुम्हें शास्त्र की आवश्यकता क्या पेन को जानने के लिए आवश्यकता ही नहीं है कोई भी हा और अगर तुम्हारे पास कोई और सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन है जिससे तुम यह तय कर रहे हो कि यह क्या है तो फिर तुम्हारे को शास्त्र पर डिपेंड होने की आवश्यकता नहीं है वो जो शास्त्र है तुम्हारे लिए वो प्रमाण नहीं है तुम्हारे लिए प्रमाण कुछ और है एक वो जो वो जो चिल्ला के ही बात करते केवल हालांकि चिल्लाता मैं भी हूं ऐसा नहीं है भाई मैं भी आप आवेश में आ जाता हूं मगर वो तो ऐसे ऐसे बात करते हैं इससे लगता है कि कुछ कान थोड़े वीक हैं हां मतलब नॉर्मल भी अगर अगर नॉर्मल भी बात
00:15:22:20 कर रहे तो ऐसा ही लगता है जैसे बह रहे हो तो एक बात देख ना उनका एक तर्क आता है मेरे साथ भी मेरे लिए जब बोल रहे थे तब भी मैंने देखा और आपसे जब बात कर रहे थे तब भी मैंने देखा वो बोलते हैं कि भाई 2 प्लसटू अगर कोई फ लिख देगा गलती से तो हम उसको क्यों मानेंगे भाई आपको कैसे पता चला आपको कैसे पता चला कि वो 2 प्लट 5 है आपको यानी कि उस ग्रंथ से पहले से किसी ने बता दिया है कि 2 प् तो जब बता दिया तो उस ग्रंथ का आलंबन क्यों ले रहे हो उसी के पास जाओ जिसने ू प् फ बता दिया है यानी कि आपको किसी ने बता दिया कि जो तत्वदर्शी है व रामपाल है जेल धाम वाला अब आप जो है गीता में ढूंढने जा रहे हो कि रामपाल को तत्वदर्शी कहां से कहा जा सकता है यह कौन सी बात है आपको तो पता लग गया ना कि रामपाल तत्वदर्शी जाओ अपना अब आपको क्या आवश्यकता है वेद और गीता की और यदि वेद और गीता की आवश्यकता है तो इसका मतलब है कि आपको नहीं पता है कि पेन है कि नहीं ू प्लस टू कितना होता है ये आपको नहीं पता है वेद जो ग्रंथ है उनका आलंबन इसलिए नहीं लिया जाता कि
00:16:37:24 अपनी धारणाओं को उस ग्रंथ के आलंबन के द्वारा आलंबन लेते हुए लोगों को बेवकूफ बना सके कि देखो जो हम बोल रहे वो गीता में लिखा है ग्रंथ का आलंबन इसलिए लिया जाता है कि ग्रंथ की धारणाओं को लोगों में प्रचारित किया जाए ना कि अपनी धारणाओं को ग्रंथ के नाम पर प्रचारित किया जाए बिल्कुल तो यह मैंने देखा उनके उतरक रहते हैं जैसे कल भी एक व्यक्ति आया था मैंने उसकी एक बात देखी थी उससे मैंने पूछा वेद को मानते हो कि नहीं वो उसका नाम था कबीर कबीर इज गॉड मैंने उससे पूछा वेद को मानते हो कि नहीं बोला जितना मुझे अच्छा लगता है उतना मानता हूं अच्छा मेले में हम हमारा जब इनसे वो हुआ था एक तरीके से टकरा भी कहेंगे हा टकरा हुआ था बोला मैंने कहा मैं लाके दूंगा व मानोगे क्या तो बोला जितना मेरे लिए होगा उतना मान भाई वो पैरामीटर क्या है क कौन से आप कहते हो शास्त्र सम्मत फिर बातें अपने मन की करते हो जितना मेरे मानने लायक होगा उतना मानूंगा जितना मुझे अच्छा लगता है उतना मान तो फिर यह क्यों लिखा है कि वो सारे शास्त्र खोल के दिखा रहे हैं आप तो अपने मन की बातें जगह जगह पर कर रहे हो कि टीचर दूसरा आ रहा है शास्त्र में कहां गलत है कहां
00:17:53:01 सही है वो बताने टीचर दूसरा आ रहा है कौन सा मंत्र गलत है कौन सा मंत्र काल ने बोला है उसके लिए टीचर दूसरा आ रहा है और आपको कितना आपको कितना मानना है कितना नहीं मानना है वो मेरे मन से तय करूंगा तो जब आपको सब कुछ शास्त्रों में अपने मन से चेक करना है अपने मन से ढूंढ लेना है तो उस भक्ति को शास्त्र सम्मत भक्ति कहां से कह रहे हो तुम उस भक्ति को मनमुक भक्ति कहोगे ना यही आज का टॉपिक है व वो बंदा मुझसे वो बंदा मुझसे कहता है कि मैं वेदों को उतना मानूंगा जितना मुझे अच्छा लगता है और फिर अगली अगले ही थोड़ी देर बाद मुझसे कहता है कि मैं तुम्हें लिखा दिखा दूंगा शंकर जी उनको गुरु नानक जी की पूजा करते थे और कहां लिखा दिखाएंगे गुरु ग्रंथ साहिब में मतलब वो मुझसे एक्सपेक्ट कर रहा है कि मैं गुरु ग्रंथ साहिब को जहां से व जितना दिखा दे उतना मान लू और और वह कर क्या रहा है कि जब मैं वेद वेद में लिखा उसे दिखा रहा हूं तो उसम कह रहा जितना मुझे अच्छा लगे उतना मानूंगा ये इनके लॉजिक है ये ये इनके राम पालियो के लॉजिक है अगर गुरु ग्रंथ साहब में वो चीज लिखी है तो भाई किसी पाठी साहब को आमंत्रित करिए ना अपने साथ लेकर आने को वो बताएंगे ना उसका मतलब क्या है हमें तो ना फारसी आती है ना पंजाबी पढ़ने आती है ना गुरुमुखी
00:19:08:06 पढ़ने आती है ठीक है ना हमें तो उसका कुछ पता नहीं तो अगर आप शब्दों के हेर फेर कर भी दोगे तो हमें क्या पता चलेगा वहां पर क्या लिखा हुआ है यदि नानक जी कह रहे हैं एक ओमकार ही सतनाम है कर्ता पुरख अकाल मूरत है मूरत है अजूनी सैवम गुर प्रसाद जप आद सत जुगा सत है भी सत हो सा सोचे सोच ना होई जो सोचे लख बार ठीक है तो बात यह है जब वो एक अपना सर्वप्रथम बता रहे हैं कि मैं एक ओमकार की ही पूजा करता हूं ठीक है वही सत्य नाम है वही कर्ता पूरक है अर्थात ईश्वर का वह रूप जो सच्चिदानंद है ठीक है जो कण कण में व्याप्त है मैं उसकी पूजा करता हूं ठीक है अब कहीं भी वहां पर आप कह सकते हो कि साकार को भी नकारा नहीं गया है यह भी बात हम लेकिन उसका मतलब क्या है वो तो वो होगा ना जो उस परंपरा से चला आ रहा होगा ठीक है आप कैसे वो कह देंगे कि भाई वो ये कह रहे हैं या वो कह रहे हैं आप नहीं कह सकते हैं क्योंकि आप प रहे इसका जो तरीका है तोड़ने का इसका तरीका हमने कल निकाला कि अब हम बताएंगे रामपाल दास जी ने क्या कहा है रामपाल
00:20:23:07 दास वाले नहीं बताएंगे अब हम बताएंगे रामपाल दास ने क्या वो भक्तों की निशानी क्या है जो वो सब कुछ खींचता है पता नहीं दुरा चरण भी करता है तो रहित नहीं वो सहित है हां वो रहित नहीं वो सहित है हम बताएंगे वो तो गलती से प्रिंट हो गया कोई दो और दो दो और दो पाच लिख देगा तो हम उसको सही ना करें क्या तो एक बात मैं और आपको पढ़ाता हूं चलिए ज्ञान गंगा प थोड़ी नजर डालते हैं एक उसको भी चेक कर लेते हैं दरअसल उसमें कौन सा दिव्य ज्ञान है हा ये जो थ्योर कल बात है इसको चालू करने से पहले एक मैं आपको एक ध्यान दिलाना चाहूंगा मैंने कई ऐसे वीडियोस देखे हैं रामपाल दास जी की ओर से फैलाए जाते हैं क्योंकि मैं मैं पता है उनके प्रति थोड़ी थोड़ी सिंपैथी आने लगी है जो रामपाल दास जी जो कारागार में है सिंपैथी इसलिए आने लगी क्योंकि मैंने उनका देखा कि वो कहते हैं मुझे फसाया गया मुझे फसाया गया है और ये लोग उनके जो भक्त कहते हैं अपने आप को वो बाहर फैलाते हैं वो अपनी मन से गए हैं तो कितना बड़ा तमाचा है उनके ऊपर उनके ही भक्तों के द्वारा उनके ही शिष्यों के द्वारा आदमी रो रहा है आदमी कह रहा है मुझे फसाया गया है अच्छा बताइए वहां वहां यह जब कोर्ट में पेशी में जाते होंगे मैंने अभी वो नहीं देखा इनका चार्ट शीट वगैरह नहीं देखी जब ये कोर्ट में जाते होंगे
00:21:38:09 तो यह कहते होंगे हा मैंने किया ये गुना मुझे जेल में डालो भाई जेल में रहने के लिए आवश्यक है आमी आदमी गुनहगार सिद्ध हो तभी रखेगी सरकार जेल में एक और चीज ड करता हूं कि जब देखिए हमें कोई भी चीज न्यूज से पता चलती है हमने किसी भी कैदी को अपराध करते हुए नहीं देखा है ठीक है ना बि ू से हम पता चलता है कोर्ट रूम में जब फैसला आया था तब इवन की रामपाल बाबाज जो है वो रो भी रहे थे वहां खड़े होके उन्होंने जज साहब को कहा भी कि आप कबीर के भक्त हो मेरे साथ इतना बड़ा वो ना करिए लेकिन जो कानून है वो कानून है ठीक है दूसरी बात ये भी है कि मेरे पास इस चीज का प्रमाण है अभी आपको दिखाऊंगा भी सारी जनता भी देखेगी कि उनकी कई बार जमानत भी जो है वो डिनायल की है बेल जो मिलती है ना थोड़ी दिन के लिए पैरोल वगैरह जो क्योंकि शायद उनकी बेटी का विवाह था मेरे को पक्का इस बात का नहीं पता इसलिए कोई कोई भी इस चीज को एज इट इज मत लेना पर उन्होंने अप्लाई जो किया था वो डिनायल की है क्योंकि उनका जो अपराध है वह बताया जाता है बहुत ज्यादा है क्य पांच छ बंदे मर गए थे उसमें ठीक है तो ये बात है ये जाच ये सब जो बातें है मैं क्लियर कर दूं ये सब बातें जो बोल रहे हैं ये जो ऊपर ऊपर की जानकारियां अन्य य चैनल और सोशल मीडिया प है या न्यूज चैनल्स में है वहां से है ये जांच का विषय हो सकता है
00:22:53:13 हम इसकी प्रामाणिकता की को नहीं ले रहे गारंटी कोई कोई भी हमारी कोई गारंटी नहीं है जो न्यूज कह रही है वो मैं सिर्फ बता रहा हूं न्यूज में हमें ये भी पता चलता है कि उनकी बेल भी डिनायल दे रहा है अप्लाई कर रहा है यानी कि वो वहां से बाहर आने का प्रयास कर रहा है तो ये है बाकी जैसा कि पहले ही कह चुका किसी भी लीगल कार्य में या कांस्टीट्यूशनल कार्य में हमारा कोई भी किसी प्रकार का वो नहीं है छेड़छाड़ नहीं है ना ही दखलंदाजी एक एक रॉक ली है यह कोई प्रश्न कर रहे हैं मगर इनका प्रश्न लिखकर दे दीजिए लिखिए तो हम देख ले आपका प्रश्न तो मैं यह कह रहा था कि मतलब वह रो रहे हैं वह प्रयास कर रहे हैं कि कैसे मैं इस कारागार से बाहर निकलू वो उनके हिसाब से ईश्वर का जो भी स्वरूप है वह मैं उसका प्रचार करूं या मैं अपने घर पर जाऊं मैं अपने घर के बीच में रहूं जाकर के जो भी और यहां पर उनकी उस दुख का भी मजाक उड़ा कर के रख दिया इन फॉलोअर्स ने ये करके कि भैया रामपाल दास तो खुद अपनी इच्छा से वहां पे है बताइए यह भक्ति है मतलब अपने गुरु जी को भी इन्होंने नहीं छोड़ा किसी
00:24:08:15 भी प्रकार से शास्त्र सम्मत शास्त्र सम्मत छोड़ो मनमुक छोड़ो शास्त्र सम्मत हो अरे भाई अपने गुरु जो रो रहे हैं जो बाहर आना चाहते हैं जो वहां पर कह रहे हैं कि मुझे फसाया गया है आप कह रहे हो अपने मन से जी और अच्छा इसमें मैंने देखा है अब जो तंत्र चल रहा है उनके नाम पर अच्छा मुझसे कुछ लोगों ने संपर्क किया है इस बारे में कि रामपाल दास हा रामपाल दास जी के नाम पर अब जो तंत्र चल रहा है उसमें बहुत सारी चीजें उने बताने की कोशिश की पर मैंने कई वीडियो ऐसे देखे हैं जो बहुत हास्यास्पद लगते हैं उसमें क्या होगा एक व्यक्ति बिल्कुल र रट्टू तोते की तरह बिठाया जाएगा और यह कहा जाएगा वीडियो में जैसे क्रिश्चियन मिशनरी काम करती बिल्कुल सेम जैसे वो व्यक्ति आया वो चल नहीं पा रहा है उसके अंदर भूत है वह कुछ कर रहा है और एकदम से उसने हालेलुया किया और व्यक्ति जो उछलने लगा अभी तक जो चल नहीं पा रहा था वो उछलने लगा एक्टिंग बिल्कुल साफ पता चलती है भले ही उनके जो खुद के पोप है वो वहा इंग्लैंड में वल चेयर पर चलते हैं उनके खुद के पो मगर वो यहां पर जो है वो तुरंत खड़ा होकर चलने लगता है और इसी प्रकार से एक बिल्कुल रट्टू
00:25:24:02 तोते की तरह एक व्यक्ति आता है और ये लोग अपनी सभा लगा ले देते हैं उसमें बैठ कर के और जो है कहते हैं कि ये जो बहुत दूर दूर से भक्त आए हम लोग य एकत्रित हुए हैं और हम देखेंगे एक जिज्ञासु है यह कुछ पूछना चाहते हैं यह भी राम की भक्ति करते हैं तो क्या सवाल है आपका बिल्कुल रटी हुई लाइन जैसे वो पता चल जाता है जब आदमी रट के आया होता है उसको एक्टिंग का अच्छा वो नहीं होता है भाई अभिनय अभिनय का वो तो है नहीं कि उस वो शाहरुख खान हो या ये सब अभिनेता है जो ये सब जो एक्टिंग कर रहे हैं जिनका जो काम ही है एक्टिंग करके और जो है आजीवक पार्जन ना वो नेता विनेता वो अभिनेता तो है नहीं इस तरह का फिल्में करने वाला तो क्या कहते हैं तो क्या करते हैं ये अब वो बोलता है जब उसको जो डायलॉग दिए जाते हैं डिलीवरी के लिए तो उसके बिल्कुल एक सस्टेंड बिल्कुल उसमें होते हैं फ्लैट बिल्कुल कोई उसमें भाव नहीं होता कहीं पता चल जाता है व्यक्ति एक्टिंग कर रहा है थोड़ा भी इंटेलेक्चुअल पर्सन होगा तो पता चल अब वो वहां पर बोलता है कि मैं पहले ऐसे करता था मैं राम की भक्ति करता था मुझे ये नहीं समझ में आता कि इतने सारे मतलब वो पूरा पहले से जो इनका पैटर्न है और वो वहां पर फिर इनका निराकरण करते हैं वो लोग जो आपको कल यह नहीं बता पा रहे थे कि प्रणव मंत्र है कि नहीं है घंटे भर तक आपने उन्हें ऐसी बात में परेशान
00:26:39:04 कर लिया वो आपको ये नहीं बता पा रहे थे कि प्रणव है कि नहीं है और वो एक बात और थी कहीं आपने कुछ और भी उनको काफी देर तक परेशान किया था तो वो लोग वहां पर तुरंत उनका शास्त्र सम्मत निराकरण करते हैं क्यों क्योंकि वो पूरा स्क्रिप्टेड है मामला तो प्रश्न भी स्क्रिप्टेड है और वो भी स्क्रिप्टेड है तो ऐसे वीडियोस बनाते हैं और उससे जो थोड़े बहुत भी अभी ज्यादा जुड़े नहीं है ज्यादा उनको मालूम नहीं है उनको दवाई के नाम पर भंडारे के नाम पर उनको मदद कर देने के नाम पर उनको जो है वो प्रभावित करते हैं इन वीडियो से और कहते क्या है ज्ञान चर्चा ज्ञान चर्चा हमने यह किया हमने शास्त्रों से दिखाया है हमने एक एक शास्त्रों की बात तो आपने करी थी मगर मैंने कभी यह नहीं देखा कि इन्होंने जो सनसनी खेज वाले जो वीडियोस के आते हैं वो रामचरित मानस में हनुमान जी की पूजा करना मना किया गया और ये और वो है ये सनसनी खेज वाले वीडियो कभी भी किसी दूसरे के तंबू में नहीं होते हैं अपने ही तंबू में बनते हैं सारे अरे भैया जाओ ना कभी लखनऊ महोत्सव में कैसे गए थे हम लोग सीना तान के घुस गए थे आपका तंबू था हम अकेले थे वहां पर बना था वीडियो आओ ना कभी तंबू तंबू
00:27:54:08 खेलो अपने ही तंबू में ही तंबू में अपने आप को विजेता घोषित कर लेते हो फिर कहते जीत गए जीत गए जीत गए तो ये इनके हाल है ये काम ये काम दो प्रकार से हो रहा है अगर आप ध्यान दोगे तो एक होता है एक व्यक्ति जाता है कि भैया ये है मैं राम को मानता हूं जैसे आपकी बात है ये ये बातें हैं मेरा ये कुछ कल्याण नहीं हो पा रहा या कुछ भी हो सकता है एज जिज्ञासु जाता है वो ठीक है एक तो एज जिज्ञास अब आजकल एक नया ड्रामा खेल रहे हैं अपने चैनल के ऊपर दो गुट बांट लेंगे 10 10 लोगों के वो दोनों इनके बंदे होते हैं वो ठीक है और एक हमला करेगा अरे क्या तुम्हारा बाबा हमारे देवी देवताओं के बारे में उल्टा बोलता है ये है वो है तुम्हारा ये करता है वो करता है तुम हमें कन्वर्ट कर रहे हो यह है वो है फिर वो आगे से आएगा भाई साहब मैं आपको बताता हूं आज हम आपको बताएंगे ये देखिए पवित्र गीता कहती है अध्याय 16 और 23 और 24 शास्त्र विरुद्ध भक्ति नहीं करनी चाहिए और ये देखिए लिखा है तत्वदर्शी संत से कल वो व्यक्ति उपदेश को दीक्षा बता रहा है वो बंदा उन्होंने कहा 434 में कि तत्वदर्शी व्यक्तियों को ढूंढ उनके पास जाइए उनसे प्रश्न करिए वो तुम्ह सत्य का उपदेश
00:29:09:08 देंगे या तत्व का उपदेश देंगे वो क उपदेश उपदेश का मतलब होता इसी रोने लगे थे इसम वो रवाई छूट जाती भैया उपदेश को दीक्षा साबित करो इतनी साधारण बात है मगर इसी में व चक्कर खा गए उसम जो इनका जो चेहरा था देखने लायक थाय जो सज्जन है जो चिल्ला कर ही बोलते हैं सामान्य उनका चेहरा देखने एक गांव के बेचारे भोले भाले लोग होते हैं अब उनको वो क्या इनसे बहस करेंगे ठीक है उनको जाकर बोल दिया कि यहां पर बोल रहे की तत्वदर्शी से तुम दीक्षा ले लो वो भी बेचारा देख रहा हा गीता में तो बात तो सही लिखी हुई है यहां पर उसको उपदेश का दीक्षा बना दिया उसने दीक्षा ले ली जाकर और दीक्षा अगर वो ले लेता है तो बस उसका काम हो जाता है वहीं पर धीरे धीरे हां धीरे धीरे ये व्यक्ति के मन में इतना अहंकार और इतनी नफरत भर देते हैं श्री राम श्री कृष्ण के बारे में मेरा दिल जानता है मैं अभी टैबलेट लाऊंगा अंदर से और आपको स्क्रीनशॉट दिखाऊंगा वो व्यक्ति राम श्री राम श्री कृष्ण को गालियां देते हैं और इतनी
00:30:24:08 अभद्र गालियां देते हैं इतनी अभद्रता उनके बारे में बोलते हैं कि यदि सामने हो तो भाई मैं तो उसको अच्छी तरीके से सबक सिखाऊ क्योंकि दुष्ट को दंड देना चाहिए ठीक है ताकि वह और अभद्रता आगे ना बढ़े धीरे धीरे सॉफ्टली उसका माइंड वश इस हद तक किया जाता है अब बेचारा गांव का व्यक्ति उसको उपदेश कह के उन्होंने दीक्षा दिलवा देते हैं ठीक है तो यह बात है आप कमेंट पढ़िए मैं बस एक मिनट में अपनी बात खत्म कर रहा हूं जी जी जी शुरू करते हैं वेदों से शुरू करते हैं से और खत्म पता कहां पर जाके करते हैं अपने संप्रदाय की लिखी हुई किताब प और उसको भी यहां पर लिख रहा है कि वो फर्जी किताब है वो भी मिलाफ ना वो जाते हैं सीधे जेल धाम शुरू करेंगे वेद से और वेद से गीता पुराण और कुरान बाइबल होते हुए सारा वो पहुंचते हैं सीधे जेल दम उसमें रास्ते में कबीर सागर भी आएगा और गरीब दास जी का लिखा हुआ ग्रंथ भी आ जाएगा हो सकता है गुरु नानक भी आ जाए और अंत में होते होते होते जेल दम तो वही वही बात है आप पहले अपनी बात कंप्लीट करिए अगर आप कहते हैं तो थोड़ा सा ज्ञान गंगा पुस्तक को खोलते हैं मुझे लगता है कि समय है हमारे पास
00:31:39:25 ठीक है अभी मैं एक क्वेश्चन ले लू य काफी देर से कोई क्वेश्चन कर रहे हैं ये बस उसके बाद हम जो है ले लेंगे ठीक आप करिए मैं कर बताइए क्वेश्चन क्या है आपका बहुत देर से आपने कहा है कि क्वेश्चन ले लीजिए परमार्थ से सब जगत मिथ्या है तो वेदा आदि शास्त्र भी मिथ्या ही हुए सृष्टि की रचना कौन करता है सगुण या निर्गुण अगर हमारे लिए तो सगुण ही कर रहे हैं सृष्टि की रचना और जो वेद आदि शास्त्र है जो वह माया का वह हिस्सा है जिसका आलंबन लेकर के माया से मुक्त हुआ जा सकता है जैसे कि एरोप्लेन या स्पेसशिप क्या है व पृथ्वी का वो अंश है जिसका आलंबन लेकर के हम पृथ्वी से उड़ सकते हैं जिस तरह से पृथ्वी पर गिरा हुआ व्यक्ति पृथ्वी का ही आलंबन लेता है उठ खड़ा होने के लिए इसी प्रकार से जो हवाई जहाज जिसको आकाश में उड़ना होता है उसको भी आकाश में उड़ने के लिए क्या कहते हैं धरती
00:32:54:26 पर ही पहले दौड़ता है फिर व आकाश में उड़ने लायक बन पाता है ठीक है तो वेदा दि शास्त्र जो भगवान है उनकी दृष्टि से वो है एक रूप है ना मगर उन वो माया का वो हिस्सा है जिसका आलंबन लेकर के आप माया को पार कर सकते हो जैसे जैसे जो ईश्वर का अवतार होता है सगुण साकार ईश्वर का अवतार वो भी अगर ईश्वर की दृष्टि से देखो तो क्या है उनका भी वो वैसा ही है अस्तित्व मगर वह हमारे लिए वास्तविक है हमारे लिए सत्य है और वह उसका वह अंश है जिसका आलंबन लेकर के हम इसको पार कर सकते हैं भव सागर को ठीक है जी गोविंद जी
00:33:48:19 बताइए यहां पे ना मैं एक चीज अब रखना चाहूंगा क्योंकि मैंने लाइटिंग भी ठीक कर रही है सारा कुछ ठीक कर लिया अब ठीक है आप लोग क्लास में आया करिए जुड़ा करिए सब बहुत रोचक बातें धीरे-धीरे आपको पता चलती रहेंगी क्लासेस में जुड़ जाइए जी गोविंद जी बोलिए तो इसमें ना थोड़ा सा खोल लेते हैं इसको क्योंकि मुख्यता तो यही है ना जिससे लोग चीजें जान रहे हैं इनके बारे में तो मुझे लगता है कि डायरेक्ट उस परे बात करनी चाहिए क्योंकि वही बात है कि आप पत्ते कितने भी काट दीजिए परंतु जड़ जब तक है तब तक तो कार्य चलता रहेगा उसका मैं देखता हूं यदि यहां पर कोई चेंज हो सकता है एंगल इसका मुश्किल ही है वैसे इसका एंगल नहीं चेंज होता शायद आपको बुक दिखानी तो आप बैक कैमरा कर सकते हैं अपने
00:34:40:09 में या पेज नंबर बता देंगे तो चल जाएगा हां इनकी रामपाल जी की जो पुस्तक है ना मैं चाहूंगा आप एक बार उसको जरा खोलिए एक सेकंड मैं इसको एडजस्ट करलू फिर मैं देखूंगा जब मैं लैपटॉप से कभी जुडा तो मैं खुद ही शेयर कर दूंगा इसका पेज नंबर है 15 यह आती है भक्ति मर्यादा के अंतर्गत है कर्मकांड के विषय में है ये पेज नंबर 15 है रोमन वाला नहीं वो जो नॉर्मल वाला होता है पितृ पूजा निषेध में आता है ये कर्म कांड के विषय में सत्य कथा तो यदि इसमें हम पढ़े तो यहां पर लिखा है मैं पहले थोड़ा सा इसको दिखा देता हूं ये यहां पर आप देख सकते हैं इसको ठीक है इसमें लिखी हुई है देखिए कितनी सत्य कथा है कि मेरे यानी संत रामपाल दास जी के पूज्य गुरुदेव स्वामी राम देवानंद जी महाराज को 16 वर्ष की आयु में किसी महात्मा के सत्संग सुनने से वैराग्य हो गया था एक दिन वह खेतों में गए हुए थे पास में वन था वन में जाकर किसी मृत जानवर की हड्डियों के पास उन्होंने अपने कपड़े फार करर फेंक जाते हैं और स्वयं महात्मा जी के साथ चले जाते हैं उनकी खोज हुई तो उनके घर वालों ने देखा कि वन में हड्डियों के पास फटे हुए कपड़े पड़े हैं उन्होंने सोचा
00:35:55:12 कि किसी जंगली जानवर ने उन्हें खा लिया है उन कपड़ों तथा हड्डियों को उठाकर घर लेकर आते हैं और अंतिम संस्कार उनका कर देते हैं उसके बाद 13वीं आदि छ माही करते हैं फिर श्राद शुरू हो जाते हैं तो यहां पर यह पता चलता है कि उन्होंने फिर आकर बताया कुछ साल बाद वह वापस घर आए फिर उन्होंने बताया कि हड्डियां पड़ी थी तो हमने सोचा कि किसी जंगली जानवर का वो सिस्टम पड़ा हुआ है वहां प ठीक है तो फिर मैंने मेरे पूज्य गुरुदेव छोटे भाई की प पेज नंबर एक बार और बता दीजिए शायद 15 बताया था आपने हां 15 नंबर है भक्ति मर्यादा के अंतर्गत आता है पितृ पूजा का निषेध नाम से एक चैप्टर है चार नंबर पर पित पूजा निषेध है ठीक उसी के अंदर उसी के अंतर्गत आती है कर्म कांड के विषय में सत्य कथा जी सतयुग के वर्तमान हा इसके नीचे इसके नीचे
00:36:54:09 आइए आइए आइए आते जाइए देख रहा हूं अभी बहुत आगे अभी तो यह रोमन वाले हैं अभी आगे एक नंबर से शुरू होना है आगे जाके अच्छा वो वो वाली डिजिट आ जाएगी हां ये भक्ति मय भक्ति मर्यादा है ना इसके नीचे आए आ जाइए आ जा आ आ 15 नंबर पेज पर आइए याय देख लीजिए यहीं पर लिखा होगा पित पूजा निषेध बस अब अगला वही
00:37:36:18 है 15 नहीं आया अभी 15 तो निकल गया कर्म कांड की सत्य कथा हा कर्म कांड के विषय में सत्य कथा इसको जूम कर लीजिए अगर करना है तो ये कर्मकांड में ही है ये पित पितृ पूजा निषेध नहीं नहीं कर्म कांड के विषय में सत्य कथा अच्छा यही खोलना है ना यही पढ़ रहे हैं हां है हा जूम कर लीजिए थोड़ा वो हां ठीक है पढ़िए जी तो इसमें यह बताया गया कि संत रामपाल जी के गुरु जी एक बार चले जाते हैं कहीं जंगल में तो उनको वैराग्य हो जाता है किसी महात्मा की कथा सुनने के बाद यानी कि उनसे पहले भी तत्वदर्शी संत हुआ करते थे यह बात स्वीकार करनी पड़ेगी पहले ठीक है सत्य दर्शी एक नहीं हो सकता तो पहली बात यह आती है कि वो घर से चले जा 16 साल की उम्र में कोई जानवर था उसके पास जाते जाते उसकी हड्डियों के पास अपने कपड़े फेंक जाते हैं तो घर वाले जाके उनका वही पिंडदान आदि श्राद कर देते हैं फिर कई सालों बाद वो लौट कर आते हैं ये इसमें कथा है आप अगर आप डिटेल में पढ़ेंगे तो मैं सिर्फ यह पूछना चाहता हूं भाई एक ऐसा व्यक्ति जिसके परसेंट जिसके पास 10 पर भी आंखों की दृष्टि होगी ना
00:38:51:26 वो भी पहचान जाएगा इंसान का स्केलेटन कौन सा है और जानवर का स्केलेटन कौन सा है ठीक है हां एक बात हो सकती है कि जानवर ने जब उस जानवर को खाया होगा किसी ने तो उसने सफा चट कर दिया होगा बिल्कुल उसको मतलब क्लीन बिल्कुल बिल्कुल क्लीन ना उसकी पूछ वहां पर पड़ी होगी ना कुछ पड़ा होगा ठीक है उसका म पता ही नहीं चल सकता एक इ मैं कहता हूं यदि व्यक्ति कोई दुर्भाग्यवश यदि कोई दृष्टि हीन भी है ना तो वो हाथ लगा के बता देगा यह हड्डिया जानवर की है ठीक है और यह ह मनुष्य की है तो गुरुदेव जी कोय या इनके परिवार वालों को इतनी बात नहीं पता चली और आपने सत्य कथा बना दिया इसको ये कौन सी सत्य कथा है भाई जो मैं तो जान मैं तो जाता हूं अक्सर सुबह जहां पार्क में मैं ध्यान करने जाता हूं या जो भी माला जाप करने जाता हूं वहां पर मेरे को जाते जाते मंदिर के पास कई बार हड्डी मिली है इतनी इतनी बड़ी हड्डी होती है वहां पर पड़ी ई मेरे को पता चल जाता है जानवर की हड्डी ठीक है ये कौन सी हड्डिया थी मतलब वो कौन सा जानवर था कोई व्यक्ति यदि मेरे को बता सके कौन सा ऐसा जानवर हो जिसकी हड्डिया हूबहू इंसानों जैसी होती कथा बनाइए अच्छी बात है कथा बनानी चाहिए ठीक है अति अच्छी
00:40:07:00 बात है कथा बना ऐसी बनाइए ना जिसमें कुछ तो अकल लगे यही कह देते कि वहां कोई व्यक्ति अन्य मरा हुआ पड़ा था उसकी हड्डियों के पास कपड़े फेंक थे जानवर जब किसी को खाता है ना तो व सफा चट नहीं कर जाता उसको बिल्कुल इसमें मैं एक बात इसमें मैं एक बात कहूंगा इस बात में कि मैंने यह देखा है कि रामपाल दास जी के नाम से जो चीजें फैलाई जा रही है इस समय या कबीर दास जी के नाम से जो चीजें फैलाई जा रही है उसको जो उसमें वो जो चीजें फैला रहे हैं उसमें वो लोग मेहनत बिल्कुल नहीं कर रहे हैं कि थोड़ा हम मेहनत करके चीजें करें तो जिससे कि थोड़ा बहुत तो हमारी चीजें कहीं पर सिद्ध हो सके मेहनत किए बिना ही बिल्कुल मतलब दिन दहाड़े आंखों में मिर्ची झक रहे दिन दहाड़े ये लो ये लो जैसे आप देखोगे कुछ समय पहले नाप तोल करके वो चलता रहता था जब भी कभी आप उसको खोलो तो उसम व व व देर हो रही है अभी ऑर्डर करें नहीं तोय ऑर्डर निकल जाएगा ऐसे चलता रहता था केवल केवल टीवी का मुझे याद नाल प आता था नापतोल प तो उसम हमको खोलते ही पता लगता था कि बेवकूफ बनाया जा रहा है
00:41:22:16 ल ये आंख का चश्मा है इसके य करो सोचो मत ऑर्डर कर दो जल्दी ऐसे रहता था तो तो मैं मन में सोचता था भाई बेवकूफ भी बनाना वो 00 का फोन नर्मल ही होता था उनका लेकिन उसको इसमें है ब्लूटूथ जिससे आप ये भी सुन सकते ब्लूटूथ से आप जदी कर तो मुझे वही मैं उस समय उनके लिए नापतौल वालों के लिए सोचता था अपने मन में कि भाई अगर तुमको किसी को बेवकूफ ही बनाना है तो थोड़ा ऐसे तो बनाओ कि लगे हां भाई कि हा वो बेवकूफ बनाने के लिए हम ऐसा कर रहे हैं मतलब आप बेवकूफ भी बनाओगे तो खुल्लम खुल्ला बताते हुए बनाओगे कि हम बेवकूफ बना रहे हैं अब जिसको बनना है वो बन लो आगे पर मेरे को अभी ये समझ नहीं आया जैसे आप भी पढ़े लिखे व्यक्ति है ये कौन सा जानवर होता है जो हूबहू इंसान जैसा होता है मैं वही तो कह रहा हूं कि भाई काल को वही की वही पहन भाई कुछ दिखा तो दो बगल में कि नहीं इसकी पांडुलिपि ये वाली है जिसमें ये अकाल है इसमें मिस प्रिंट हो गया है तब ये काल नहीं अकाल है कोई उसके पीछे बेस नहीं कुछ नहीं यह काल नहीं अकाल है उसी विष्णु पुराण को पढ़ रहे हो उसी विष्णु पुराण में लिख यह बोलते हैं
00:42:37:21 सब अनपढ है रामपाल से पहले अच्छा इनके वो गुरु भी अनपढ़ थे जिनका वो कंकाल तो वो क्या कहते हैं ये मुझे नहीं लगता ये वचन रामपाल की रामपाल दास जी के होंगे यह वचन इनके हैं जो तो यह अगर यह करते भी हैं तो इस तरह से करते हैं कि मतलब उसमें बिल्कुल भी मेहनत उस पर उस पर इरिटेशन होती है कि भाई सामने वाले को लगे तो कि हां भाई हम कुछ मेहनत करके बेवकूफ बना रहे हैं अपनी बात को रख रहे हैं तो यह मैंने एक अपनी वीडियो में कहा भी था कि 00 ग्राम मिर्चा झोक दो सीधे पेन से काट दो मतलब कोई होता है जिसको अगर वेदों का गलत विचार करना है ठीक है तो वह क्या करेगा कि पूरा वेदों का अपने अनुसार वह अर्थ लिखेगा फिर उसको पब्लिकेशन में जाएगा पब्लिश करवाएगा इतना भी नहीं उसी गीता प्रेस की बुक को ले लो विष्णु पुराण में जहां लिखा है काल के लिए परब्रह्म आ गया तो वो ये गलत लिख दिया अबे भैया जब छापने वाला गलत लिख रहा है लिखने वाला गलत लिख रहा है उसका आपने कोई बेस नहीं चेक किया कैसे चेक नहीं किया कहां से नहीं किया तो आप कहीं
00:43:52:22 पर भी पेन अगर चलाने वाले हो गए हो तो फिर आपका उसको प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करना कैसे स्वीकार किया जा सकता है इतनी सी बात नहीं अभी हम अभी मैंने जैसे कल किया वो रहित नहीं सहित है इन्होंने भक्तों को भ इन्होंने किन भक्तों को माना है जो मास मध्य मैथुन नशा यह सब जो स्वीकार करते हैं जिनके साथ अब मैं यह करने लग नहीं उन्होने यह किया है यह तो मिस प्रिंट हो गया रहित हो गया जो अब ये क्या कर लेंगे अब ये यह कहेंगे कि भैया वो बदल तो सकता है क्योंकि व बता प् फ नहीं होता है तो इसमें 2 प् 5 आप बता रहे हो तो इसलिए गलत एक और बात मैं य प ड करता हूं जैसे आपने कहा था ना कि भाई पेन से क्यों काट रहे हो अपना एक ग्रंथ ही छपवा लीजिए हा तो यहां एक बंदा है ए एस दास नाम से फैक्ट फुल डिबेट है पता नहीं क्या नाम है उसका उसने एक वीडियो डाली मतलब इतनी इरिटेटिंग बात मैंने जिंदगी में कभी नहीं सुनी जो उसने इसका लॉजिक दिया है कहता भाई एक बात बताइए क्या दो शब्दों के लिए हम पूरा ग्रंथ अपना तुम पूरा ग्रंथ कहां मान रहे हो भाई तुम डेढ़ लाइन मान रहे हो अगर कोई व्यक्ति सुन रहा है उनकी टीम में उसने हमारी इस बात के विरोध में ये बात
00:45:07:22 कही उसने हमारी इस बात के विरोध में हां कही है उसने मैं वीडियो भेजूंगा अरे भाई मैं कह रहा हूं तुम ना एक दो वर्ड नहीं मान रहे ना तुम पूरे चैप्टर में से डेढ़ लाइन मा मांग रहे हो ठीक है तुम मान रहे हो डेढ़ लाइन को पूरी तो तुम्हें पूरी बुक अपनी छपवा ही पड़ेगी क्योंकि तुम ने पूरे के पूरे चैप्टर को मना किया फिर पूरी की पूरी संहिता को मना किया फिर पूरे के पूरे तुमने ग्रंथ को मना किया है क्योंकि शिव पुराण में शिव की आराधना भरी पड़ी है ठीक है तो यह तुम बचकानी हरकत छोड़ दो कि भाई एक लफ्ज के लिए एक लज है तो चलो एक लज मान लेते हो बाकी सारा ग्रंथ मानते हो तुम कभी नहीं मानते भाई तुम कुछ नहीं मानते अभी हमने क्या किया है
00:45:57:03 की जो भगवत गीता है हमने एक जानबूझ के एक चीज कही इनकी जो भगवत गीता है उसमें भगवत गीता का अर्थ करते समय उन्होंने लिखा 18 66 में कि देखिए इकोन वालों ने किस तरह से शब्दों में तो माना शब्दार्थ करते समय तो माना कि व्रज का अर्थ जाना होता है मगर अनुवाद करते समय लिख दिया व्रज का अर्थ आना यह उन्होंने वहा कही य बात जो इनकी भगवत गीता है अब क्या कहते हैं इकोन का तो मामला सभी जानते हैं भाई उसने एक श्लोक में नहीं कई श्लोक में ऐसा करा है कि ब्रह्म का अर्थ ब्रह्म लिख दिया मगर नीचे जब वो आया क्या कहते हैं अनुवाद तो उसमें लिख दिया कि ब्रह्म का अर्थ है कृष्ण भावना भावित यानी की इकोन वो तो खैर उसका काम है मगर वहां पर जब उन्होंने य बात कही फिर उन्होंने ये देखिए स्कोन का श्लोक एज इट इज हम यहां पर लिख रहे हैं तो उन्होंने इकोन का श्लोक लिख दिया अब हमने यह बात कह दी कि इकोन का जो श्लोक है वो स्कोन का नहीं है हमने कहा कि यह देखिए जो रामपाल दास है उन्होंने भी अपनी भगवत गीता में व्रज का अर्थ आना किया है अब यह लोग आकर के हमको बताएंगे कि नहीं नहीं वो तो उन्होंने स्न का वो दिखाया है
00:47:12:04 हम कहेंगे वो तो काल ने लिखा है वो तो गलत गलती से छप गया है व वो रामपाल दास जी ने नहीं लिखा है वो गलती से छप गया है बोलो क्या करोगे 18 66 में 18 66 में इन्होंने इस्कोन का श्लोक उठा के छाप दिया है यह दिखाने के लिए कि इकन वालों ने ब्रज का अर्थ गलत लिखा है ठीक है मगर वहां पर जो यह वाली बात है कि ये कन का श्लोक हम यहां दिखा रहे हैं यह वाली बात ये हमको बताने आएंगे तो हम यह कहेंगे कि भाई वो तो गलती से प्रिंट हो गया है आप हमें सिद्ध कर दो ये जो है रामपाल दास जी ने ही लिखा है कर पाएंगे
00:47:54:20 सिद्धि नहीं अगर आप बात को अगर आप जब हमारी प्रमाण बुद्धि नहीं रह जाती किसी पे तो हम कहीं भी उसमें कुछ भी कर सकते हैं किसी भी बात नहीं मैं पहली बात तोय पूछता हूं आपको इतना दौड़ भाग करने की आवश्यकता क्या है कभी आप इकन के यहां पर घुस जाते हो कभी आप आर्य समाज में घुस जाते हो अरे भाई तुम यह बताओ तुम एक चित क्या तुम इसकन की सारी की सारी बात मानते हो अगर तुम इकान की सारी बात नहीं मानते हो तो भाई यह बात अगर उन्होंने गलत लिखी तो इसमें ढंडोरा किस बात का पीट रहे गलत हा तुम तुम तुम्हारे अनुसार इस कन की सारी फिलोसोफी ही गलत है तो तुम एक चीज क्या दिखा रहे हो ठीक है ना या तो ऐसा होना तुम्हारे अनुसार स्न गलत है तो स्कन की किसी एक बात को आप प्रमाण के रूप में कैसे ला सकते हो इसके लिए ना एक गलत शब्द यूज होता है लेकिन वह हमें करना नहीं है ठीक है समझने वाले समझ गए होंगे कौन जा जा के लोगों के घर में घुसता है बारबार ठीक है ना नहीं इसको हम लोग एक कहावत से जोड़ सकते हैं इसकी ईट उसका रोड़ा भानुमती का कुनबा जोड़ बिल्कुल बस वही है अपना क्या है मतलब अगर तुम्हें वेदों के ही नाम पर प्रचार करना है तो आ जाओ ना फिर वैदिक सभ्यता के पास
00:49:09:25 हर एक व्यक्ति को कोई भी पंथ हो कोई भी हो आकर यही बताए ग देखियो आपके वेदों में हमारे पंथ का जिक्र है आपके वेदों में हमारे देवताओं का जिक्र है आपके वेदों में हमारे फलाने महापुरुष का जिक्र है तो आ जाओ ना भाई हम तो आमंत्रित कर रहे हैं आपको आ जाइए फिर ठीक है और कल इनके फॉलोअर्स ने कल इनके फॉलोअर्स ने एक छुरा और घूप दिया पीठ में रामपाल दास जी के क्या छुरा घोपा कि अगर तुम कबीर सागर को नहीं मानते तो हम भी नहीं मानते तुम्हारे उसको गीता वेद पुराण को हा हां हां ये रामपाल दास जी के पीठ में छुड़ है बिल्कुल क्योंकि उन्होंने अपनी पुस्तक में उन्होंने तो हमेशा ही कहा है कि गीता मेरे लिए सर्वोच्च प्रमाण है और वेद मेरे लिए सर्वोच्च प्रमाण है ठीक है और बाकी इनकी कितनी आप कह सकते हो कि बुद्धि कैसी है कि कहते हैं कि भाई जो बात गीता में नहीं लिखी हुई वो हम नहीं मानते चाहे वो पुराणों में लिखी है या फिर वो वेदों में नहीं लिखी तो हमने अरे भाई तुम पुराणों की कोई भी बात सिद्ध कर दीजिए वेदों में से कौन सी कथा दिखाओगे मेरे को वेदों में से है कोई कथा जो पुराणों में लिखी हो और वेदों में भी लिखी हो या गीता में भी लिखी हो ठीक है भावार्थ भावार्थ के साथ में लिखी हुई है कुछ कई कथाएं
00:50:24:28 हैं जैसे ब्रह्मा सरस्वति मैं वेदों की बात पुराणों से कर रहा हूं कहते पुराणों को हम नहीं मानते हमारे लिए सर्वोच्च वेद है तो वेद में दिखा दीजिए भाई वो कहां पर कह रहे कि हम तो तुम्हारी संताने हैं वो कह रही है तुम्हारी संतान हूं क्योंकि यह तो कहीं वेद में है नहीं तो मतलब जिस भी चीज से तुम्हारी दुकानदारी चल जाएगी तुम उसको स्वीकार करोगे मैं तो खु क सकते भद में नहीं है वो रूपांतरण शाब्दिक भेद से मगर हां ये लोग एक चुनाव करते हैं कि मुझे जहां पर मेरे रामपाल दास जी या उनके नाम से प्रचारित होने वाली शिक्षा जहां से मैच खा जाए उसको प्रमाण के रूप में हम दे देंगे मैं ये कहने मैं ये कहने का प्रयास कर रहा हूं कि पूरी कथा तो आपको नहीं मिलेगी ना किसी भी वेद में पूरी की पूरी कथा जो है नहीं मिलेगी क्योंकि हमें उसका क्या मिल जाएगा हमें उससे कुछ ऐसा जो उसके अंदर भाव छिपा है वो वेदों में मिलेगा ही क्योंकि है तो आखिर सारा ज्ञान वेदों से ही आ रहा है ठीक है ना तो ये बात है मैं इनको बस इतनी बात कहता हूं आपके लिए देवी भागवत पुराण है ठीक है प्रमाण आपका सारा का सारा पंथ ही उस पर टिका हुआ है ठीक है क्या आपको पता है ब्रह्मा विष्णु महेश जी के माता-पिता कौन है दुर्गा जी की दादी जी कौन
00:51:40:00 है ये करते हैं ना ऐसे कहां से आया देवी भागवत से आइए देवी भागवत खोल के चर्चा कर लेते हैं ठीक है उसमें क्या दिक्कत है उसमें भी दिक्कत हो रही है कह रहे कि नहीं भाई हम बस इतना ही मानेंगे इसको अरे तो तो फिर तुम हमसे क्यों मनवा रहे हो कि तुम जो चाहते हो वो हम मान ले ठीक है ना जब तुम उसको अपने अनुसार मानते हो तो फिर हमसे क्यों चाहते हो कि सिर्फ तुम जितना मानते हो उतना ही हम मान ले हम तो पूरा मानते हैं ना तुम तुम उतना ही मानो अच्छा अब आज का जो टॉप पूरा जी जी और कुछ आप अगर ज्ञान गंगा से कुछ इनका ज्ञान थोड़ा सा निकालना चाहे नहीं तो हम किसी को जोड़ ले नहीं तो हम किसी को जोड़ जोड़ ले हा अभी जोड़ेंगे बस एक बात करके हम कुछ और अगर ज्ञान ये जहां से भक्ति मर्यादा शुरू हो रही है ना उसी के पिछले पेज पर एक बात दी गई है ये है भाई बाले वाली साखी है एक ठीक है ये कोई जैसे कथाएं होती है ना पुराणों की वैसे ही है भाई बाले वाली साखी इसमें देखिए पेज की फोटो दे रखी है उसकी पूरी की पूरी जैसे मतलब की वो ग्रंथ होगा उसकी ये फोटो दे दी है इन्होंने ठीक है इसमें लिखा हुआ है कि जो है वो
00:52:55:28 एक सेकंड वो पंजाब की धरती पर आएगा ठीक है और बटाला में होगा कहने लगे नहीं यह पंजाब गलती से छप गया है य पंजाब नहीं यहां हरियाणा लिखना था और यह बटाला नहीं य बरवाला है यह बटाला नहीं य बरवाला है ठीक है तोय सब गलती से हो जाता है जब ये गलत छपा हुआ है तो ओरिजिनल मैनु स्क्रिप्ट की फोटो खींच के डाल देते यहा पर हां ओरिजिनल दिखा दो गलत गया गलत है सही कहां प है तो थे नहीं उस जमाने में आज से 500 साल पूर्व तो आप थे नहीं ठीक है तो इसकी कोई मैनु स्क्रिप्ट होगी ना उनके पास वो तो होती है 500 साल पुरानी तो मनुस्क्रिप्ट होती है ठीक है तो ये बटाला का बरवाला पंजाब का उन्होंने कर दिया हरियाणा कहते वहां पर सीमा ही नहीं थी पंजाब का सीधे हरियाणा बिल्कुल डायरेक्ट विदाउट कोई वो सुपर फास्ट जाती है ना वो छोटे छो मैं तो चलो पंजाब और हरियाणा मैं कह रहा हूं हो सकता है किसी जमाने में एक धरती मानी जा सकती हो मैं कह रहा हूं जो काल है उसको अकाल कैसे कर सकते हो भाई विलोम शब्द बना अरे पर ये भी तो देखिए ना कि 500 साल पहले तो इकट्ठा था ही वो
00:54:11:07 ठीक है ना तोय ये कौन सी साइंस है भाई क्या टेक्टोनिक प्लेट जो है वो अलग अलग थी उसकी एक साथ मिलके वो ऐसे ऐसे करके एक दूसरे में समा गई बीच में ठीक है तो आप अपनी बात रखी ले लीजिए किसी को लेना है तो ये आए हैं शायद ये पंडित फ्लोकी जी है एक तो इनको ले लेते हैं ड टू स्टेज और एक ले लेते हैं महादेव पहाड़ी महादेव महादेव पहाड़ी जी आ जाइए और भाई अमित दास यह यहां से हैं अमित दास जो कई बार आ चुके हैं एक दो बार अभद्रता भी कर चुके हैं अमित दास जी सर्वप्रथम आप जो है क्षमा याचना करें आपने जो ता उसको लिए हर हर महादेव सभी लोगों [संगीत] को मिनट तो
00:55:07:19 शमाता जी जी अब बोलिए अमित जी सब शांत रहिएगा शश भाई शिवांश भाई जी मैं आपसे क्षमा चाहता हूं जो अभद्रता से मैंने आपसे बात की उसके लिए मैं दिल से क्षमा चाहता हूं चलो ठीक है माफ किया हमने क्षमा किया अच्छा जी पहाड़ी जी बोले अभी अमित जी आपसे बात करते हैं कल आपसे बात हुई थी शाम को आपसे फन बात हुई
00:55:41:22 आप इस समय मलेशिया में जी जी जी जी अच्छा अच्छा जी जी जी प कुछ मैंने एक दो तीन हफ्ते पहले आपने एक बात कही थी कि हम इस संसार में उसके अब अज्ञान के कारण हम दुख भोगते हैं मतलब दुख का अनुभव करते हैं तो सामने वाले बंदे ने यह पूछा था जैसे हम कोई लोहे की रोट पकड़ ले गर्म तो उसके क्या में दुख नहीं होगा तो आपने उसका जवाब दिया था पर मैं सोचता था कि शास्त्रों में लिखा है नहीं लिखा है पर हाय वाकई में हमारे शास्त्रों में लिख रखा है ऋग्वेद में आपने जो बात कही वो बात ऋग्वेद में लिख रखी है मंडल एक सक्त 164 मंत्र 37 38 में लिख रखा है कि समस्त विश्व में हूं बात को मैं नहीं जान पाया क्योंकि मैं मूल चित्त एवं अविद्या से बदा हुआ था तथा बहु मूर्ख मन से संसार में दुखों का अनुभव करता था करता हूं मुझे जब ज्ञान का पहली बार अनुभव होता है तभी मैं शब्द का अर्थ समझ पाता हूं जो आपने बात बोली थी हमारे वेदों में लिखी हुई है जी उन्होने परमाण माना ये तो ये बोल देंगे ना काल ने लिखा है ये तो बो
00:56:57:18 जो भी बात इनके विरुद्ध जाएगी काल काल काल उसम प्रमाण और वेदों में प्रमाणित क्या करेंगे जो वेदों में ढूंढने पर नहीं मिलेगा लेंस लेकर ढूंढोगे तो नहीं मिलेगा वेदों में प्रमाण है ओए जी बोलिए गोविंद जी एक मिनट पहाड़ी जी एक मिनट पंडित पंडित फ्लोकी जी आपका शायद नाम है पंडित जी आपको प्रणाम है सबसे पहले तो आप तो धारी है आप तो थोड़ा हमसे ज्यादा ही ज्ञान रखते होंगे ठीक है मैं एक आपको फोटो दिखा रहा हूं वो बताइएगा य आपको क्या लग रहा है ये किसकी फोटो हो सकती
00:57:37:12 है यह कोई जानवर है भैया जानवर तो है जानवर हैना ऐसा तो नहीं कि कल को आपको यह कहीं पड़ी हुई मिल जाए मेरी टीशर्ट मिल जाए तो मेरा पिंडन करवा देंगे आप नहीं नहीं ऐसे कैसे कर कितनी सल बात है जानवर की हड्डी और इंसान की हड्डी में कोई फर्क और किसको नहीं आ रहा जो घर वाले हैं इनके ठीक है जो कि वो अच्छे खासे पढ़े लिखे भी होंगे ठीक है कि इसके पास में अपनी य टीशर्ट र् संत के घर के लोग थे वो उने ये चीज देखकर और उनकी कमीज इसके पास देखकर धोती आदि देखकर उनका पिंड दान कर दिया बताइए मेरी यहां पर ये कहीं टीशर्ट दिख जाए किसी को मोटरसाइकिल के ऊपर पड़ी हुई और वो देखे भाई मोटरसाइकिल के ऊपर इसकी टीशर्ट पड़ी है यानी कि यह मोटरसाइकिल वही बंदा है चलो चल के मैं इसका पिंड दान कर रता हूं क्योंकि जितना आंख वाले को जानवर की हड्डी में फरक दिखाई देना उतना ही उसको मोटरसाइकिल में भी फर्क दिखाई देगा य कितना है इतना ही अंतर है यह अच्छा अच्छा अच्छा कहानी ऐसी रचो कहानी ऐसी रचो कि चार आदमियों का ब्लड प्रेशर वैसे ही डाउन हो जाए उसको पढ़ के कि भाई इसका मैं
00:58:52:14 क्या जवाब दू इसका कोई जवाब होना भी चाहिए नहीं होना चाहिए मे पट आप मुझे एक बात याद आ रही मेरे बचपन की अब वो थोड़ा आज का व्यक्तित्व और जो किशोर अवस्था में जो चीज थी वो थोड़ा अलग है मगर मैं बताऊंगा आज मेरा एक मित्र हुआ करते थे वो क्या करते थे कि अब संभवत जो एक किशोर अवस्था होती है सबके मन में आता है कि हमारा प्रेम प्रसंग चले ऐसा हो वैसा हो तो जो मेरे एक मित्र थे वो क्या करते थे कि खुद फ शर्ट पहने है ठीक है शर्ट में छेद हो रहा है और मातृ शक्ति को किसी को रिझाने के लिए बोल रहे हैं ऐसे जैसे ही मातृ शक्ति आसपास से निकली होता है ना कि वो कैसे रिए तो जैसे ही कोई मातृ शक्ति पास से जा रही है तो फोन पर बात करते हु हा मेरे वो 00 कब देगा मेरेज कब देगा मेरे अब शर्ट खुद की फटी है सामने से और फोन प कह रहा है मेरे 500 बेज दे मुझे इसको गिफ्ट देना है उसको गिफ्ट अपना मतलब वो अपना अर्थ की संपन्नता दिखाने के लिए किसी को रिझाने के लिए अब मैं उससे जब वो निकल जाती निकल जाती तो मैं कहता उसका कॉलर
01:00:07:19 पकड़ के अपने मित्र का अरे भाई झूठ बोलना है तो ऐसा बोल जो सामने को लगे कि थोड़ा बहुत पच पाए सही बात है सही बात है तेरी खुद की शर्ट पटी हुई है तेरी खुद की फेंट पटी हुई है और तू हजारों लाखों की बातें कर रहा है करोड़ों की बातें कर रहा है वो वाली बात ही है मेरे को ये बिल्कुल समझ नहीं आ रहा वो कौन सा जानवर देखा होगा उन्होंने जो कि बिल्कुल हूबहू इंसान की तरह दिख रहा था ठीक है वो कौन कैसा मतलब भेड़िया तो नहीं हो सकता हिरण भी नहीं हो सकता गोरिला तो जंगल में ऐसे पाए नहीं जाते वो तो बहुत घने जंगलों में पाए जाते हैं तो क्या लगता है पंडित जी आपको वो कौन सा जानवर रहा होगा आपको या शिवांश जी आपको क्या लगता है कौन सा जानवर रहा होगा जिसकी 6 फुट 55 फीट हाइट होती हो मुझे लगता है कि जो उस समय के वो जो इंसान रहे वो जानवरों जैसे ही होंगे इसलिए मैच हो गया तो इसका अर्थ य हुआ कि व धर्म विहीन होंगे ना वो पशु पशु योनि में उत्पन्न होने वाले शायद मनुष्य हो जो पशु शरीर होता हो तब वो मैच खा सकता है भाई चमत्कार तो हो ही सकता है कुछ भी हो सकता है ठीक है पहाड़ी पर ये देखिए ना यहां तो फिर यह बात माननी पड़ेगी कि जिनकी ये बात कर रहे प्रसंग का वो हुबहू वैसे ही थे पशु योनि के वाले के समान ही तभी
01:01:22:20 तो इतनी समानता उनको दिखी होगी ना भाई इसमें ये तो समझ समझ के जो ना समझे मेरी समझ में वो ना समझ वाली बात है मगर इसको हम एडमिट नहीं करेंगे कन्फर्म नहीं करेंगे जी पड़ी जी बोलिए बिलकुल एक लास्ट बात कह के मैं खत्म करूंगा उसके बाद अमित जी को मौका दीजिएगा ये गाय के ऊपर वीडियो बनाई थी इन लोगों ने कि हम लोग जो है गाय की पूजा करते हैं उनके मूत्र की पूजा करते हैं तो हमारे वेदों में ही अमित जी मैं आपसे कहना चाहूंगा आप खुद को कट्टर सनातन कहते हो हमारे वेदों में अथर्व वेद में कह रखा है जो पुरुष पुरुष ऋ सहित ब्राह्मणों को देवता के निमित गोदान नहीं करता है व अपनी संतान विक्रय करने वाला होता है से भी न हो जाता है अब
01:02:13:06 बताइए अरे वो तो पेन चलेगा ना उस पर अभी अमित जी अभी लेंगे देखिए अब जो है हम लोग एक बीच बीच में आपकी वो कहानिया सुनते रहेंगे गोविंद जी मगर अब बीच बीच में लेंगे आपको अब अब जो है एक बात पूछते हैं कि भाई एक बहुत बड़ी एक बेस है आपका अमित दास जी की जो भगवत गीता में जो ज्ञान बोला है वह काल ने बोला है ठीक है और दो प्रकार का ज्ञान है एक परमात्मा का ज्ञान है और और एक काल का ज्ञान है काल का ज्ञान लेने लायक नहीं है और परमात्मा का ज्ञान लेने लायक है ठीक है मानते हैं ना इतना है ना ठीक है अब आप हमें ये सिद्ध कर दीजिए कि एक तो उसमें दो प्रकार का ज्ञान है एक परमात्मा का और दूसरा काल का और एक कि उसमें काल ने बोला है तो पहले काल ने बोला है ये सिद्ध करिए तो मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि जो जो जो श्लोक जो गुरु
01:03:28:10 जी हमारे बताते हैं कि कृष्ण भगवान तो वहां पहले से ही विराजमान थे तो फिर उस उस समय उस श्लोक में यह शब्द क्यों आया कि हे अर्जुन मैं इस समय इन सब प्राणियों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूं तो ये श्लोक का अर्थ क्या होता है ठीक है अगर इस लोक लोक एक मिनट मैं आपकी बात का उत्तर दे रहा हूं क्या ये कोई सनातन सिद्धांत है कि अगर उन्होंने जी जी एक मिनट एक मिनट मैंका उतर देय जाना सत
01:04:07:02 जाना मुझे आप ये बताइए ऐसा कुछ बताइए जिसका अर्थ ये निकलता हो कि उसम जो है काल ने बोला अगर आपने बताया कि ऐसा क्यों आया तो यह तो आपने क्वेन पर क्वेश्चन किया अगर आपका क्वेश्चन का उत्तर मेरे पास नहीं भी है तो भी यह सिद्ध नहीं होगा कि वो काल ने बोला है आपको यह सिद्ध करना वो काल ने बोला है अगर कोई ऐसी चीज है जो समझ में नहीं आ रही है तो उसके लिए आपको समझना है मगर उसका अर्थ यह नहीं है कि व काल ने बोला है पहली बात दूसरी बात य है कि जब वो तत्वदर्शी है तो अपने आप को कुत्ता दो कौड़ी का यह रामपाल क्यों कह रहे हैं हेलो हेलो हेलो हेलो
01:04:56:15 अमित आपकी आवाज आ रही है आवाज आ रही है आ रही आरही रही हा आपके जो तत्वदर्शी है जो सब कुछ जानते हैं उन्होंने अपने आप को कुत्ता दो कौड़ी का क्यों बोला हा मैं इसका उत्तर देना चाहूंगा क्योंकि वो इसलिए कह रहे हैं कि गुरु की शरण में ऐसे रहना चाहिए अरे भाई कह तो झूट रहे ना वो सत्य तो नहीं है ना कुत्ते तो नहीं है ना वो ये आपके हिसाब से है कि जानवरों में सबसे वफादार प्राणी कुत्ता होता है तो इसलिए गुरु की शरण में वफादार बन के रहना चाहिए मैं कह रहा हूं कह तो झूठ रहे हैं ना कि वास्तव में कुत्ते हैं झूठ कह रहे हैं ना ये एक उदाहरण दे रहे हैं झूठ या सच नहीं है ये ये लीला पूर्वक कह रहे हैं वो ये उदाहरण के तौर पर कह रहे हैं ये कोई झूठ या सच नहीं है ये क्यों नहीं है झूठ या सच या तो उसको बिल्कुल परफेक्ट सुनो या तो उसको या तो उसको परफेक्ट बिल्कुल मानना है कि वो कुत्ते हैं और या फिर ये कहा जाएगा कि वो लीला पूर्वक कह रहे हैं कि मैं कुत्ता हूं वस्तुतः वो कुत्ते नहीं है अभी लाइव में आपसे कोई प्रश्न कर रहा था तो जिसका
01:06:12:02 आपने उदाहरण दिया कोई गाड़ी का कुछ एरोप्लेन का उदाहरण दिया तो मैं उसको सत्य मानू कि एरोप्लेन और ये सत्य मानू सत्य सत्य एरोप्लेन आकाश में तभी उड़ता है जब वो पहले धरती पर दौड़ता है तो सकते भैया जी उदाहरण तो किसी का भी दे सकते हैं ना अरे मेरे भाई जब उन्होंने उदाहरण दिया था कि मैं कुत्ता हूं उन्होंने य बोला उन्होंने व ये नहीं बोला कि मैं उदाहरण दे रहा हूं उन्होंने बोला कि मैं उन्होंने ये नहीं बोला कि मैं उदाहरण दे रहा हूं यह तो आप लगा रहे हो ना तो अब मुझे अब मुझे बताओ कि या तो आप यह मानोगे कि वो लीला थी और या फिर ये मानोगे कि वो जो है क्या कहते कुत्ते हैं तो आप या तो लीला मान लो या उनको कुत्ता मान लो यह तो गुरु के वचन है गुरु ही जाने बात रही है तो गुरु के चचन है गुरु ही जाने अब सुनो लीला पूर्वक भगवान श्री कृष्ण एक जगह खड़े हैं जहा गुरु जहा अर्जुन खड़ा है ठीक है हेलो हेलो उतर सुनलो लीला पूर्वक भगवान श्री कृष्ण जिससे की अर्जुन उनको देख समझ सके इसलिए
01:07:27:10 लीला पूर्वक भगवान श्री कृष्ण अर्जुन के समक्ष खड़े हैं वस्तुतः तो वो सर्वज्ञ सर्वव्यापी है और इसीलिए उनका विराट स्वरूप भी अलग हो जाता है वस्तुत अब मैं आपको पूछ रहा हूं की इसका अर्थ यह कहां निकलता है कि वह ज्ञान काल ने बोला है यह बताओ आपको मेरी बात समझ में नहीं आएगी व मैं जानता हूं आप तो यह बताओ कि अगर कंट्रक्शन है तो उसका अर्थ यह कहा निकलता है किन ने बोला है यह शास्त्र में कहा लिखा है कि अगर कांट्रडिक्शन हो जाए तो व काल का समझ लेना तो फिर उसे समझाइए ना हमें आपका आप सनातन धर्म की रक्षा करने के लिए बैठ सनातन धर्म की र समझना चाहता मेरी बात समझ अगर मैंने अपनी बात कह दी अब आपको मना ही करना है तो हम उस अटके थोड़ी आप तो यह बताओ वो ज्ञान काल ने बोला यह कहा लिखा है अगर दो बात वि हो जाए तो हम आपको शास्त्र से दिखा रहे हैं कि अगर दो बातें विपरीत हो जाए तो दोनों को सत्य मानना है एक मिनट अगर दो बातें विपरीत हो जाए तो दोनों को सत्य मानना है यह हम आपको शास्त्र से दिखा रहे हैं आप शास्त्र से दिखा दो कि दो बातें विपरीत हो जाए तो उसका अर्थ मान लेना कि काल ने
01:08:42:28 बोला तो मैं यही पूछना चाह रहा मैं यही पूछना चाह रहा हूं जिस व्यक्ति जो व्यक्ति अगर मैं यहां पर खड़ा हूं और मेरे अंदर बजरंगबली ने आके यह कहा कि हे मैं अभी प्रकट हुआ हूं और मुझे यह कार्य करके रहूंगा मैं तो लोक य लिखा हुआ था लोक उसका मुझे आधार बताइए मैं आधार जानना चाहता हूं किस आधार सुनि मैं आपको बारबार बताता हं आप सुनते नहीं है सुनिए भगवान के दो स्वरूप है एक प्रात जो सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक व्यवहार में ना आ सकने वाला स्वरूप है एक वो स्वरूप है उस स्वरूप अजन्म अविनाशी है ठीक है फिर वही वही स्वरूप जब सृष्टि करता है तो सृष्टि करते टाइम वो अपने अपने अनुसार मनुष्यों के बीच में व्यवहारिक रूप धारण करता है वो जो अजन्मा अविनाशी परमेश्वर है वो फिर मनुष्यों के बीच में आता है व्यवहारिक स्वरूप धारण करके तो जब वो यह कह रहा है कि तेरे और मेरे बहुत से जन्म हो चुके हैं तो उसका अर्थ है वो जो व्यवहारिक स्वरूप मैंने कई बार ले लिया मैं अजन्मा विनाशी हूं वो बोल भी रहे हैं मैं अजन्मा
01:09:58:09 विनाशी हूं फिर भी मैं यहां पर अपनी योग माया को योग माया को अपने अधीन करके प्रकट होता हूं अब इसको मैं एक एग्जांपल से समझाता हूं योग माया एग्जांपल जैसे मान लीजिए कि आपने एक वीडियो गेम बनाया वीडियो गेम ठीक है वीडियो गेम आपने चालू किया खेलने के लिए आप बाहर बैठे हुए हो अच्छे से बैठे हुए हो आप में कुछ नहीं हो रहा है वीडियो गेम के अंदर आप एक प्लेयर के रूप में कई बार जाते हो वो प्लेयर जो है वो जो जिस प्लेयर के रूप में जाते हो व कई बार उसका जो आविर्भव तिरो भाव वीडियो गेम के अंदर होता रहता है मगर आपका जो बाहर आप बैठे हो वीडियो गेम से उसका आविर्भव तिरो भाव कभी नहीं होता इसी इसी बात के लिए भगवान ने बोला कि मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी अपनी योग माया यानी वो वीडियो गेम की दुनिया उसको अधीन करके प्रकट होता हूं क्यों होता हूं कि वीडियो गेम के अंदर जो व्यक्ति फसा हुआ है उसको बचाने के लिए उसको उससे निकालने के लिए उसकी करने के लिए परणया साधु नाम विनाश आया चता अब यह हमने इतनी एक्सप्लेनेशन दे दी अब आप हमें य बताइए कि अगर आपको हमारी एक्सप्लेनेशन पसंद नहीं भी है आपको समझ में नहीं भी आ रही है तो इसका
01:11:14:26 अने किने एकरी समझ में आया सुनो तो सही देखिए आप ये बात बोलिए आपने उसका अर्थ काल कहां से लिया यह बताइए बस आपने जिस तरीके से एक्सप्लेन किया मेरी समझ में आ गया तो इसका अर्थ यह हुआ कि वहां पर पहले से दो भगवान विराजमान है कहां दो भगवान यह कहां से समझ में आया आपको भगवान से हो मेरे को मेरे को इनसे थोड़ी देर बात करने दीजिए सिर्फ दो मिनट ठीक है इनके दो भगवान वाला कंसेप्ट मैं क्लियर करता हूं और बाकी सबका भी हो जाएगा अमित जी जरा स्क्रीन पर ध्यान से देखिएगा ठीक है यहां पर अर्जुन य पूछ रकी स्क्रीन फीज है गुरु गोविंद जी आपकी स्क्रीन फ्रीज है नहीं नहीं वो फन दिखा फ प दिखा ये भगवत गीता का वह श्लोक है जिसका आप हवाला देते हैं यहां पर सुनिए ध्यान से मुझे बतलाइए कि आप उग्र रूप वाले कौन है तो अर्जुन यह नहीं कह रहा कि आप कौन हो मैं आपको पहचानता ही नहीं आप आए कहां से वो रूप की बात कर रहा है आपका इतना उग्र रूप कौन है
01:12:30:06 सुनिए मैं आपको ध्यान से अपनी तरफ से भी एक्सप्लेन कर देता हूं क्योंकि आपके संशय है ठीक है मेरी माता मेरे को पहचानती है डेली देखती है ठीक है एक दिन मैं कोई सर पर जामा ड़ लेता हूं कोई माला टांग लेता हूं और कुछ ऐसा मुख पर लगा लेता हूं जैसे वि भूत आदि लगा लेता हूं तो माता पूछेगी ना आप कौन हो भाई ठीक है क्या माता मेरे को नहीं पहचानती परंतु माता मेरे उस रूप को नहीं प नती है जो मैं धर के उनके सामने खड़ा हूं इस वक्त ठीक है समझ आ गया ये ठीक है तो वो यह नहीं पूछ रहा आप कौन हो मैं जानता ही नहीं ठीक है पहली बात ये क्लियर हुई ठीक है आप उग्र रूप वाले उग्र रूप ठीक है दूसरा जो आप पूछ रहे हैं नाय काल कोई और व्यक्ति है जो उनके अंदर घुस गया था ठीक है काल है और विसर्ग जुड़ा हुआ है और महाकाल आगे लिखा हुआ है ठीक है इसकी एक्सप्लेनेशन आपके बाबा जी देते हैं कि ये इस वक्त सारे संसार को खाने के लिए आया हुआ है या यह सारे संसार को निगलने के लिए आया हुआ है ठीक है तो उनको लगा कि शायद ये कोई और ही व्यक्ति है ठीक है लेकिन अब इस काल के बारे में जानना है दरअसल ये है कौन है ठीक है तो चलिए आपको मैं ग्रंथ से पढ़ा देता हूं आपकी शंका जो है ना वो मिट नहीं चाहिए क्योंकि हम चाहते हैं आपका मात्र कल्याण हमें
01:13:45:08 आपसे एक रुपया रुकिए रुकिए जब मैं खत्म कर लूंगा तब आपको बोलने का पूरा मौका देगा ठीक है शास्त्रों के बीच में नहीं बोलने दूंगा ठीक है उसके लिए क्षमा मांगूंगा पहले ये है श्री पद्म पुराण ठीक है यह पद्म पुराण है इसके अंदर श्री विष्णु सहस्त्र नाम के अंदर चलते हैं ठीक है और देखते हैं काल कौन है ठीक है यह देखिए ये पढ़िए जरा ठीक है यह कौन है यह वैसा ही काल है और विसर्ग जुड़ा हुआ है आगे काल है और विसर्ग जुड़ा हुआ है ठीक है तो इसकी एक्सप्लेनेशन क्या है भगवान का एक नाम या एक रूप काल भी है ठीक है युग वर्ष मास पक्ष आदि रूप से संपूर्ण विश्व को अपना ग्रास बनाने वाले काल पद वाच्य यमराज ठीक है तो जो गीता में कह रहे हैं ना कि मैं सारी सृष्टि को अपना ग्रास बनाने वाला हूं आदि आदि तो वो कृष्ण ही कह रहे हैं प्रमाण है हमारे पास पद्म पुराण जहां पर उनकी पूरी की पूरी लीला है उनका स्वरूपों का वर्णन है ठीक है और भी जितने आपने नाम दे रखे हैं ना वो सारे के सारे श्री कृष्ण के ही अर्थात विष्णु के ही रूप है ठीक है तो आप इसको समझिए आज से आपको ये याद रहेगा यह संक्षिप्त पद्म पुराण है इसके भीतर उत्तरखंड है उत्तरखंड के अंदर
01:15:00:16 कौन सा वाला ये अध्याय है यह भी आप देख लीजिए आपको ऐसा ना लगे कि हम आपको कोई सीधा सीधा विष्णु सहस्त्र नाम आप पढ़िए उसका श्लोक बता दीजिए आई थिंक 40 4 का का ये वाला कौन सा श्लोक हैय मैं बता रहा हूं नाम कीर्तन की महिमा तथा श्री विष्णु सहस्त्र नाम स्त्रोत का वर्णन है उत्तरखंड के अंतर्गत आता है ये ठीक है समझ आई तो अपने पवित्र ग्रंथों को पढ़िए ताकि कोई भी आपको डेढ़ लाइन पढ़ा कर ना डेढ़ शाना ना समझे अब आपको अब आपको मैं एक फाइनलाइज उत्तर दे दूं एक फाइनलाइज उत्तर आपको दे दूं आप जो जीव है जीव के रूप में आप अजन्म और अविनाशी हो कि नहीं जीव के रूप में तो मैं मैं मैं अब क्लियर नहीं होगे देखो आई ना बात आर या पार की जब बात
01:15:57:24 मेरी तो जन्म मृत्यु होती मैं समझ नहीं पाया जो आपने पूछा मेरी तो जम के बाबा जी का वीडियो दिखा दूं मैं आपको जिसम वो कह रहे हैं जीव जो है वो अविनाशी है जीव जो अविनाशी है तो जीव जो आत्मा आत्मा है वो अविनाशी है तो हा तो आपका वस्तु वास्तविक स्वरूप क्या है ये पांच तत्व का शरीर वास्तविक स्वरूप हैय ये नहीं है गलत जवाब ये वास्तविक स्वरूप है आपका तो फिर पा शरीर नट मतलब आपका एकचल जोलोक में जी वास्तविक शरीर के साथ जाओगे या जीवात्मा के रूप में जाओगे आत्मा के रूप में जाएंगे हम तो वास्तविक वास्तविक क्या हुआ स्वरूप आपका जीवात्मा तो फिर आमा के रूप में आप अविनाशी हो कि नहीं हो ना फिर भी जन्म लेते हो ऐसे ही भगवान ने कहा था कि मैं भी अजन्मा विनाशी होते हुए भी तेरे और मेरे कई जन्म हो सके अर्जुन भी था ना वहा प अर्जुन भी था ना अर्जुन के भी तो कई जन्म बता रहे हैं तो वहा दोनों दोनों अजन्म थे
01:17:13:08 दोनों के कई जन्म हो चुके हैं सिर्फ इतना अंतर है अर्जुन नहीं जानता है कि मैं जन्मा अविनाशी हूं और कृष्ण भगवान जानते हैं विद्या और अविद्या अर्जुन अर अर्जुन वो वीडियो गेम के अंदर फसा हुआ प्राणी है जिसको बचाने जो वीडियो गेम के बाहर जो वीडियो गेम खेल रहा है वो जाता है उन्हीं के बीच का रूप धारण करके ठीक है अब देखिए हमने आपको यथा सामर्थ प्रयास किया है कि आप यह दो दोहरी बातों का अर्थ समझ सके मगर अब मूल क्वेश्चन प आइए कि आपने काल का अर्थ कैसे ले लिया इन दोहरी बातों का अगर आपको हमारी बातें समझ नहीं आई है जो नहीं आए कसम खा के रखे है तो नहीं आए का पानी प भी मुझसे गलती हो गई उसको भी हटा दीजिए मैं एक भी बात ऐसी आपको नहीं दूंगा कि आप विषय को बदल सके अब मैं आपसे पूछ रहा हूं काल का अर्थ कैसे लिया बस वो बताओ मैं यह कह रहा हूं पानी पियो जान कोई दूसरी बात सु फिर मुझ पर वो लगता है आपको विषय बदलना है अब मैं बोल रहा हूं
01:18:28:19 काल का अर्थ कहां से लिया वो बताओ देखो पहला तो भगवत गीता हो गया बना प्रश्न एक बार अपना प्रश्न आपके समक्ष एक बार प्रश्न क्लियर कर दूं अगर उसमें दो बातें आ भी रही है अलग अलग तो शास्त्रों ने कहा है दोनों को मानो तुमको अगर श्री कृष्ण एक जगह नॉर्मल दिख रहे हैं दूसरी जगह भगवान दिख रहे हैं दोनों को मानो ठीक शास्त्रों ने तो ये कहा फिर भी अगर आपको लग रहा है कि कंट्रक्शन है विरोधाभास है तो इस विरोधाभास का अर्थ काल कैसे हो गया मुझको यह बताइए चलिए क्योंकि उसमें दो अलग अलग बातें हो जाती है ना पहली बात मेरी पूछ रहा हूं दो अलग बातो का लिखा है आपको ये बलग बात हो रही है दो अलग बातें हो रही है वो मुझे समझ में आ रहा है कि आप ये कह रहे हो काल मैं पूछ रहा हूं दो अलग बातों का अर्थ काल लेना है यह सनातन धर्म के कौन से सिद्धांत में लिखा है यह बताइए आपने शिव पुराण में वो प्रसंग तो सुना ही होगा जहां ब्रह्मा ब्रह्मा जी और विष्णु जी में युद्ध हुआ था हां सुना
01:19:43:22 है ना हां तो वहां पर वहां पर जब ब्रह्मा और विष्णु का युद्ध हुआ था तो शिव भगवान ने वहां पर बहुत बड़ा स्तंभ खड़ा कर दिया था अग्नि स्तंभ तो अग्नि स्तंभ में शिव भगवान ने ब्रह्मा और विष्णु से यह कहा कि तुम अपने आप को ईश्वर समझ बैठे तुम अपने आप को ईश्वर समझ बैठे जबक यह तीन लोग तुम्हारे नहीं है इस पूरी संपत्ति का मालिक तो मैं [संगीत] हूं आपने फिर आपने फिर विषय बदल दिया देखा इसलिए इनसे बात नहीं करते आपसे पूछ जा र क्या कर रहे हो आप एक और बता अगर बमा मेरी बात मेरी बात पूरे खम होने दी हम ये पूछ रहे इसका भी हमारे पास आंसर है इसका भी आंसर है हम ये पूछ रहे हैं हा अंतिम मौका दे दीजिए इनको अंतिम मौका आप अपनी बात पूरी कर लीजिए अगर य बात सिद्ध नहीं हो गया तो फिर यह जलेबी बनाने का मौका नहीं मिलेगा ना आपको ना आज के बाद किसी को भी अंतिम आपके पास मौका है ये वन एंड ओनली चांस बोलिए देखो अगर ऐसा ऐसा ही है देखो पहले मैं एक आपसे स्पष्ट और साफ बात कहना चाह रहा
01:20:58:25 हूं कि ऐसा नहीं है कि गुरु मैंने बना लिया है तो उस पर मैं डट गया हूं पहली बात आप इस बात नहीं नहीं मेरी बा या तो आप सनातन धर्म करने के लिए र रक्षा नहीं करने के लिए बैठे हो अगर रक्षा करने के लिए बैठे हो तो मेरी बात क्लियर कीजिए भाई बाकी बात में सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए हम यहां पर क्यों है मैं आपकी बात समझ गया मैं आपको बताता हूं एक मिनट रुक जाइए रुक जाइए मैं आपकी बात समझ गया संक्षिप्त में समझ लेता हूं मेरे भाई मैं आपकी बात समझ गया मैं संक्षिप्त में समझ लेता हूं हम यहां पर इसलिए नहीं बैठे हैं कि अमित दास हमसे क्लास लेने आया है समझो अमित दास हमारी किसी बात का विरोध मेरे जो क्वेश्चन कन्फ्यूज है अरे मेरे भाई
01:21:52:27 इनको अरे शिवांश जी म्यूट हो गए आप म्यूट है म्यूट है शिवांश जी म्यूट म्यूट आप म्यूट है हम लोग यहां पर इसलिए नहीं बैठे हैं कि अमित दास यहां पर हमसे क्लास लेने आया है यह जो लाइव स्ट्रीम चल रही है इस बात के लिए चल रही है कि रामपाल दास का एक फॉलोअर यह बताने आया है कि रामपाल की शिक्षा सही है और तुम लोग गलत हो ठीक है आपका एक संशय था वो हमने यथा सामर्थ प्रयास किया आपके पता पता नहीं समझ में आया कि नहीं आया अब दूसरा संशय का मैं एक बार और जवाब दे रहा हूं जो कंट्रक्शन आपने कहा ठीक है सृष्टि की रचना एक बार नहीं हुई है सिव पुराण में ही कल्प भेद भी दिया गया है ठीक है षष्टि की रचना एक बार नहीं हुई है तो जो परम तत्व है किसी बार कभी सृष्टि करता है तो वह शिव के रूप में अपने आप को ईश्वर के रूप में ख्या पित करता है और बाकी जो ब्रह्मा विष्णु ब्रह्मा विष्णु और भगवती और गणेश का जो रूप होता है वह उनके परिकर के रूप में हो जाते हैं तो उस सृष्टि में जब वह बात करते हैं आपस में तो शिवजी यह कहते हैं कि तुम अपने आप को ईश्वर समझ बते वो गलत है ठीक है
01:23:08:09 और अगली ही सृष्टि जब करते हैं तो वो उसमें अपने आप को परम तत्व को विष्णु नाम से खपत करते हैं तो उस विष्णु नाम से ख्या पित होने वाली सृष्टि में जो बाकी के ईश्वर के रूप है वो शिव ब्रह्मा भगवती और गणेश ये फिर उनके परिकर के रूप में नजर आते हैं ऐसे ही ये पांच रूपों के अंदर वो सृष्टि में कल्प भेद से आपको सारे पुराणों में मिलता रहेगा कल्प भेद सृष्टि की रचना एक बार नहीं हुई है एक ही परम तत्व कभी सृष्टि की रचना करता है तो विष्णु नाम से अपने आप को बताता है कभी सृष्टि की रचना करता है तो शिव नाम से अपने आप को बताता है यह कल्प भेद होता है ये कल्प वेद भी उन्हीं पुराणों में लिखा है जिन पुराणों में आपने जिन पुराणों से आप रेफरेंस दे रहे हो ठीक है समझ में आया वही तो जानना चाह रहा हूं कि जो ब्रह्मा विष्णु महेश से परे है वो परमात्मा कौन है सच अरे मेरे भाई मैंने बताया अभी तो बस समझाया सचिदानंद स्वरूप परमेश्वर परम तत्व अपने आप को ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में प्रकट करता है अब आप दोबारा ये अगर रिपीट करेंगे क्वेश्चन तो फिर मैं आपको हटाऊ ठीक है
01:24:23:10 ठीक है ठीक है सुनिए अब आपके तीन सवाल हो गए अब आप ला और फाइनल भैया एक मिनट एक मिनट अब आपके तीन सवाल हो चुके और शुरू से वो अटका हुआ है अगर दो तरह की बातें हो रही है शास्त्रों में तो उसका अर्थ काल है यह कैसे सिद्ध हुआ बस यह बताइए अब आप उत्तर दीजिए भाई साहब क्योंकि आप जिज्ञासु बनने के नाम पर अपने गुरु की बात को ऊंचा रखने आए हैं ठीक है आप जो है उत्तर
01:25:02:13 दीजिए बात का उतर नहीं देना चाह रहे नहीं हमें नहीं देना आपको देना है क्या अब हो गया आपको देना है क्या आपके पास है काल कैसे सिद्ध होता है काल काल है कि नहीं करो काल है नहीं गीता में दो जगह दो बात हो गई तो उसका अथ लेना है ये बताओ अमित जी मैं इनको अमित जी मेरी बात सुनी आपने अभी कहा ना कि ब्रह्मा विष्णु महेश अलग है तो परमात्मा कौन है जहां आप शक्ति स्तंभ की वो बात कर रहे हैं ना वहीं प लिखा हुआ है कि शिव से ही ये सारे लोग प्रकट होते हैं वहां प क्लियर तो लिखा हुआ है कि शिव परमात्मा है तो अब आपको कौन सा मतलब कि उसके ऊपर माइकल जैक्सन के जब तक वो ऑटोग्राफ नहीं देगा तब तक नहीं मानोगे आप तो तो शिव परमात्मा है तो फिर राम जी की भक्ति क्यों कराते हैं तो वो उनकी इच्छा है ना उनकी इा चलो इसका आसर देता हूं इसका आर देता इा कैसे वो इच्छा लिखी भी तो होगी मैं देता हूं मैं देता हूं सुनो ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम से बाधित नहीं है ईश्वर कुछ भी कर सकता है ईश्वर उसे कहते हैं व पप ईश्वर नहीं है अब मैं कह रहा हूं तत्वदर्शी संत यदि रामपाल
01:26:17:21 है तो अपने को कुत्ता क्यों कह रहे हैं बताओ वो उदाहरण दे रहे थे ऐसे ही व उदाहरण भ का भक्त बनो जब ईश्वर अपनी इच्छा से सब कुछ कर सकता है यानी कि वो पाप भी कर सकता है आपका ार नहीं है आपका ई में भागीदार नहीं है वो धर्म के दायरे में रह सब कुछ कर सकते है बात तो समझो भैया जीने बो र्म के दरे में सब कुछ कर सकता है
01:26:55:00 हमने शुरू से एक प्रश्न लिया है अमित जी हमने शुरू से एक प्रश्न लिया है कि कौन सी बात इनम से अभी तक आपने कौन सी बात बोली है जिससे यह सिद्ध हो जाए कि भगवत गीता का जो ज्ञान है वो काल ने दिया है श्री कृष्ण ने नहीं दिया है बोलो बता रहा हरी बात सुनते भाई साहब आप आप बोल ही नहीं रहे आप विषय को ब रहे आपसे बारबार आप आंसर दो आपकी कौन सी बात ऐसी है जिसका अर्थ जो है काल निकलता है आपकी कौन सी बात ऐसी है जिसका अर्थ काल निकलता है आप आंसर दो अपने वो एक वन हैता का ज्ञान काल ने बोला उसको सिद्ध करो बस ना तो मैं मैं जो बताऊंगा मैं जो आपको बताऊ आपको अगर आपने कुछ और बोला तो हमें आपको हटाना पड़ेगा आप काल ठीक है मैं जो मैं जो आपको बताऊंगा या तो उसे पूरा सुन लेना नहीं तो ना समझ में आए तो श्लोक क्रमांक क्रमांक शास्त्र आप शास्त्र का नाम बताइए बस कौन से शास्त्र में लिखा
01:28:10:08 है कि अगर दोहरी बात हो रही है अगर वह ईश्वर स्वयं को कह रहा है कि मैं भक्त हूं अगर ईश्वर कह रहा है कि तुम तुम ईश्वर नहीं हो दूसरा ईश्वर का रूप कह रहा है इनमें से कौन सी बात का अर्थ है कि वो गीता का ज्ञान काल ने बोला है बोलो अगर श्लोक क्रमांक शास्त्र का नाम बोले तो ही बोलिए अन्य कोई वे की बात ना बोले लोक क सुनि सुनि रामायण शास्त्र की बात रामायण बोलिए बोलिए रामायण आगे रामायण में बालकांड के श्लोक नंबर 13 में वहां पर लिखा हुआ है कि जिसके जिससे अनेको ब्रह्मा अनेको विष्णु जन्मते और मरते हैं पहला दूसरा दूसरा बता रहा हूं दूसरा
01:29:06:10 दूसरा पहले वाले में भया जी या तो मुझे हटाइए नहीं तो पूरी बात सुनिए बोलो बोलो बोलो दूसरा देवी भागवत पुराण पा बया बाल कांड का कौन सा बताया बालकांड का नंबर 143 जिसमें ऐसे नेति नेती कुछ लोक आता है स अब दस दूसरा सु अब दूसरा सुनि दूसरा देवी भागवत पुराण पांचवा स्कंद लोक नंबर पेज नंबर हैरे अरे भया पहले आप सर्ग बताइए बालकांड का कौन सा सर्ग है वो बताओ बालकांड का सर्ग है जिसमें नेति नेति कुछ करके
01:29:52:15 है कर श्लोक आता है नंबर बताओ नंबर नंबर बताओ 143 143 सग भाई इसमें सर्ग 143 वा सर्ग कहां है इसमें बालकांड बा बालकांड में बालकांड में 11 टोटल बाल कांड में 143 मा सर्ग है ही नहीं बालकांड में 143 है बालकांड में 147 सर्ग है ही नहीं बाल में ही सर्ग है उसम 111 सर्ग है से 143 सॉरी पेज नंबर बता रहा हूं सॉरी सॉरी पेज नंबर पेज नंबर बता रहा सॉरी पेज नंबर बता रहा हूं र तोते वाली पढ़ाई है इसीलिए गलत होती है अरे 143 नबर मैंने पेज खोला है इसका श्लोक नंबर बोलिए जरा श्लोक में उसम नेति नेति करके लोक होगा इसम नेति नेति करके हो आप बताइ कौन का मतलब कण जी में
01:31:04:00 कास आप उसे पूरा तो पढ़िए आप उसे पढ़िए तो सही पूरा और मते एक मिनट मिनट गोविंद जी आपको मिल गया कहा परन कौन सा है नबर 6वा स 6वा राजा जनक का राम लक्ष्मण का सत्कार करके उ अरे भाई मैं ये कह रहा हूं एक मिनट बालकांड का 166 वा सर्ग है पेज
01:31:44:12 है थोड़ी देर में य पता नहीं वहा श्रीराम जी की बात हो रही है अभी से पता नहीं वो हम बात कर देंगे एक एक मिनट आप मुझे वो सही क्रमांक बताइए सर्ग का 66 हा मैं बता रहा बता रहा बता रहा पूरा ही बता रहा आपको ये यह वो है जब राजा लेकर जाते हैं उनको धनुष दिखाने के लिए
01:32:24:21 मैं बताता हूं ये ् रामायन की बात तो नहीं कर रहे कहीं जो प आते सुबह सुबह रामपाल जी के ग्रुप में राजा जनक का विश्वामित्र और राम लक्ष्मण का सत्कार वही यही है 143 नंबर पेज यही है इसमें श्लोक इसमें श्लोक क्रमांक कौन सा है मेरे में कोई और है अब 1 कुछ और चल रहा है मेरे में तो 50 चल रहा है वो वाली है संस्कृत हिंदी वाली रामायण नहीं नहीं मेरे
01:33:00:24 पास संक्षिप्त की बात कर रहे इसलिए दिक्कत हो रही है इनके गुरुजी संक्षिप्त ही पढ़ते हैं मैं सबको बता देना भया शलोक क्रमांक बताओ भाई ट खोलिए ट यहां पर नहीं मिलेगा वो संदीप जी जानते बी पहले से इनका सारा ज्ञान से ही आता स में य सब ऐसी कोई बात नहीं क ति नीति वाली ति नेति है तो तुलसीदास जी ने कही है मुझे लेकिन वाल्मीकि राता है वाल्मी रामायण में और रामचरित मानस में क्या अंतर होता वाल्मीकि रामायण बोल रहे है कौन सा बोल रहे
01:33:48:19 हो रामा ति ति के बारे में गोस्वामी तुलसीदास जी ने अच्छे से समझाया है यह भी नहीं वो भी नहीं नेति नीति का अर्थ य होता है भगवान राम का बता रहे थे जब वो लेकिन वो बालकांड में है आप आप रामायण बोल रहे हैं एक मिनट ये वीडियो प्ले कर रहे हैं प्ले करिए अच्छा राम अच्छा रामचरित मानस है ना श्री राम बाल रामचरित मानस के बालकांड में 143 नं मिनट पज करो भया मिनट प करो जरा आपको यह नहीं पता है आप यहां पर धर्म और धर्म की व्याख्या के लिए आए हो आपको यह नहीं पता है कि रामचरित मानस क्या है और रामायण क्या है पता है क्या खोलो इनका इनका खोलो जरा मु मु खोलो इनका
01:34:42:03 बोलो रामायण के बाल ब रामायण के बाल भाई साहब प्रश्न सुनिए प्रश्न सुनिए पहले प्रश्न सुनिए आप ने ग्रंथ का नाम बताया रामायण हम लोग यहां रामायण में मु मार रहे हैं जिस पर रामायण लिखा है और और आप ग्रंथ कौन सा खुलवा रहे हो फिर रामचरित मान उसमें लिखा है क्या रामायण उसम रामायण लिखा है क्या इनकी रामायण पर लिखी हुई है इसलिए इनको नहीं पता रामायण और रामचरित मानस में अंतर क्या होता है जरा पूछिए इनसे श्लोक जो ग्रंथ का आप रेफरेंस दे रहे हो वो ग्रंथ रामचरित मानस है और दो दिन पहले आपने कहा है कि रामचरित मानस को हम नहीं मानेंगे आपका ही मैंने नहीं कहा नहीं नहीं मैंने कहा नहीं मैंने कहा कि वाल्मीकि रामा वाल्मीकि जी का रामायण मानेंगे हमने ये कहा था रामाय अरे तो ये वाल्मीकि का नहीं है मेरे भाई अंधे ये वाल्मीकि का नहीं है बालकांड बाल्मी का नहीं है बाल्मीकि से रें चलो रामायण नहीं आपने आपने तो बात को पता नहीं क्या कर दिया न मैंने कर दिया अभी दो दिन पहले तुमने कहा हम तुलसीदास को नहीं मानेंगे हम
01:35:57:04 बाल्मीकि के रामायण को मानेंगे अब तुलसीदास का रेफरेंस क्यों दे रहे हो या यानी कि मैंने बता दिया ब्रह्मा विष्णु महेश की जन्म मृत्यु होती है तो आपने बात को ही घुमा दिया मिनट मिट सुनो बहुत बढ़िया ये इसीलिए आते हैं ये इसीलिए आते हैं देख रहे हो सुनि देवी भागवत पुराण पह मांगिए कि आपने जो कहा है वो गलत कहा है बोलिए अब आप पहले बोलिए कि आपने कहा कि आपने बता दिया ब्रह्मा विष्णु महेश की जन्म मृत्यु होती है और इसलिए हमने बात को घुमाया इसको सिद्ध करिए नहीं नहीं नेती नेती का मतलब जन्म मृत्यु होता है ये कौन से इन्होने व्याकरण से कौन सी डिक्शनरी से पढ़ा है बताइए जरा शिवाजी इनसे हमने शुरू से एक प्रश्न किया है कि आप केवल यह बताइए कौन सी बात का अर्थ यह निकलता है कि गीता का ज्ञान काल ने बोला है श्री कृष्ण ने नहीं बोला है ठीक है
01:36:54:26 बमा विष्णु महे की जन्म मृत्यु होती है तो इसका अर्थ मैंने आपको मैंने आपको पांच बार बता दिया जन्म मृत्यु तुम्हारी भी होती है फिर भी तुम अविनाशी हो कि नहीं यह बताओ हो कि नहीं कौन सुख भोगा सक में ये शरीर खाएगा जन्म मृत्यु जन्म मृत्यु से ही छुटकारा पाना है आप यही समझिए हमें जन्म मृत्यु नहीं चाहिए आप भाई साहब आपको क्या चाहिए नहीं चाहिए हमें मतलब नहीं है आपको अब अगर यह आंसर देना हो कि काल का अर्थ कैसे निकलता है तो आप बताइए नहीं तो आप जाइए शास्त्र का कोई प्रमाण है कि अगर ब्रह्मा विष्णु महेश मृत्यु वाले हैं उनका जन्म और मरण होता है तो इसका मतलब भगवत गीता का जो ज्ञान है वो काल ने दिया कृष्ण नहीं दिया आप यही बताइए जब उनकी जन्म मृत्यु होती है तो अगर वो जन मृत्यु को प्राप्त होते हैं तो उसका अर्थ काल कैसे निकला ये बताओ ये बताओ काल लिखा है ना काल जो शब्द आता है बोलिए लोकी लोकी जी को बोलने दीजिए दो मिनट रुक जाइए दो मिनट दीजिए ठीक
01:38:10:00 है आपकी बात मैं समझ गया हूं आप यह बताइए कि आप रामचरित मानस में से बता रहे हैं या रामायण में से बता रहे हैं क्योंकि रामचरित मानस आप नहीं मानते हैं आप वाल्मीकि रामायण मानते हैं ना रामचरित मानस नहीं मानते जीय बता ब कर बो मैंने मैंने अब मैं आपको बता रहा हूं अगर रकी जी रकी भैया क्या नाम है आपका पंडित जी क्या नाम है आपका हा बोलिए मैं अभी दो मिनट दो मिनट सिर्फ आपसे शांति से प्रश्न पूछना चाहता हूं दो ही मिनट है आप हा दोही मिनट बस ओनली फॉर दो मिनट उसके बाद मैं खुद चला जाऊ आप मुझे रेफरेंस दीजिए प्रश्न नहीं वो रेफरेंस दीजिए रामायण काया मैं रेफरेंस ही दे रहा हूं आपको कि जब बालकांड में लिखा हुआ है कि ब्रह्मा और विष्णु महेश की जिनसे ब्रह्मा और विष्णु जन्म लेते हैं बालकांड के पेज नंबर 143 कौन से वाल्मीकि रामायण के कमन रामायण के रामचरित मानस के कौन से रामायण में लिखा है यह बताइए वाल्मिक रामायण की वाल्मी रामाय में नहीं लिखा है
01:39:23:19 वाल्मी में नहीं लिखा हैने पेज नंबर और बालकांड बता दिया तो आपने ये बता दिया कि वो है नहीं अरे तो अरे आप बुक दिखाओ ना बुक दिखाओ मैं दिखा रहा हूं मैं आपको बुक दिखा रहा बुक तो आपके पास भी है ना हा तो दिखा रहा बाल बाल नंबर देख नहीं देख भाई पेज नंबर च चलो ठीक है देवी देवी भागवत पुराण पांचवा स्क श्लोक नंबर 766 में लिखा
01:40:04:09 हुआ मेरी स्क्रीन दिख रही है आपकी तो स्थि आपकी स्थिति ऐसी है बता मेरी स्क्रीन दिख रही है आपको जा 143 नहीं आप वोली बक दिखा नहीं रहे को कंटेंट लेना है इसको और कुछ नहीं करना है इसको हटाओ यहां से हटाओ अरे भाई ये क्या ये क्या लिखा हुआ है ये क्या लिखा है हटा दिया हटा दिया हटा दिया उनको हटा दिया वो कंटेंट लेने आए हैं बस और कुछ नहीं है वो कंटेंट हटा दीजिए भैया इनको हटा दीजिए सर हटा दीजिए सर मैंने इनकी प्रॉब्लम बताता हूं क्या है एक्चुअल में क्या हुआ है ये जो बात बोल रहे है ना वहां पर ये लिखा हुआ है श्री राम जी के मतलब श्री राम जी के थ्रू ना श्री ब्रह्मा विष्णु महेश जी का जो आविर्भाव होता है उनसे मतलब ये चीज लिखी हुई है ये इनको अरे अरे तो तो संदीप जी हमने संदीप जी हमने कितनी बार बता दिया कि उसी ईश्वर के कभी वो पहले राम बन जाता है विष्णु बन जाता है ब्रह्मा विष्णु महेश को दिखा देता है वही ईश्वर कभी विष्णु बन जाता है फिर बाकियों को दिखा देता है कितनी बार बताया अब हम यह पूछ रहे हैं कि आपको हमारी बात अगर समझ में नहीं आ रही है ठीक है मगर इस बात का अर्थ काल कैसे निकलता है यह समझाओ मगर वोह बारबार दूसरे दूसरे
01:41:19:20 वही उदाहरण वही रिपीट वही जो जो वाला उरण है एक दिया दो दिया तीन दिया बारबार वही उदाहरण रिपीट कर रहा है अलग अलग जगह से जिसका हम बार बार जवाब दे रहे भाई तू ये बता कि अगर कांट्रडिक्शन है तो उसका अर्थ काल कैसे आ गया यह बता ये नहीं बताएंगे वो नया उ काल कोई अलग है क्या काल कोई अलग है सिद्ध करिए कृष्ण का ही नाम काल बता दिया दिया समस्या य रेफरेंस क्या देना है इन्हें ही नहीं पता अब मैं अभी स्क्रीन शेयर करके बैठा था तो कह रहे बालकांड नहीं है ये ये कोई और है क्यों कोई और है क्योंकि उनको इसमें जो है ना फंट समझ में नहीं आ रहा है मतलब ये बुद्धि की संकीर्णता देखिए कि फंट समझ में नहीं आ रहा है क्योंकि संस्कृत में लिखा है तो ये कुछ गड़बड़ है ये वो नहीं है अरे मैं तो ये कहूंगा लोकी जी कि भाई ये पृष्ठ संख्या अगर बोलेंगे और हमारे पास अगर गीता प्र की ना होकर बनारस की हुई बम्बे प्रकाशन की हुई तो इनके पास यानी कि प्रमाण ही नहीं है हमारी प्रमाण प्रमाण नहीं है क्योंकि इनको प्रश् संख्या सिखाई गई है अमित भाई अगर आप सुन रहे हो ना ध्यान से सुनो जो आप वो पेज बता रहे हो ना वहां पर ये लिखा हुआ है वो श्री राम जी से वहां से प्रकट होते हैं श्री
01:42:34:24 ब्रह्मा श्री विष्णु श्री महेश जी य बात को धन मैं अपनी बात पूरी कर देता हूं जो आप नेति नीति की बात कर रहे हैं वह रामचरित मानस में है वो तुलसीदास जी ने कही है जहां पर नेति नेति की जो बात हो रही है वह भगवान राम के बारे में कह रहे हैं यह भी नहीं है वो भी नहीं है नेति नेति मतलब यहां पर वो राम जी की जो परम ब्रह्म को बता रहे हैं तुलसीदास गोमी तुलसीदास जी इसलिए वो नेति नेति की बात करहे ने शब्द है ना ये पढ़ा है बचपन से पढ़ रहे हैं हम ये नेति नेति भगवान के लिए यूज किया गया है ये भी नहीं वो भी नहीं ये भी नहीं मैं तो ये कहता हूं मैं तो एक बात ये कहता हूं कि अगर चलो इनको रामचरित मानस के आधार पर मानना है तो राम को मान लो कहा तो जा रहा है राम को भगवान मान लो हमें कोई दिक्कत नहीं है वैष्णव हो जाओ मान लो भैया मगर उसको जब जब राम की बात आएगी तो राम मखा द और से ब्रह्मा विष्णु महेश की बात आएगी तो उनका आ क और से दिखाएंगे और कुल मिलाकर के जब सबका आ हो गया तो अपना एक लाकर गाड़ दिया काल या उसका कबीर अरे भाई वो सबूत तो दो चलो ठीक है यह सब लोग आविर्भव तिरो भाव होता है मगर इसका अर्थ यह कहां से निकलता है कि काल काल ने कहा इसका अर्थ यह तो बताओ कि वो श्री कृष्ण से अलग कोई काल
01:43:50:02 है यह तो बताओ इनके दिमाग में रावण बैठा हुआ यहां प ये रावण और क बैठे समझ पाएंगे इनकी बुद्धि ऐसी है दुर्योधन बुद्धि है कैसे समझ शुरू से केवल शुरू से केवल एक प्रश्न बोला कि भगवत गीता का ज्ञान काल ने बोला है यह कहां से सिद्ध हो रहा है मगर नहीं बताएंगे वो उदाहरण बदलते जाएंगे जी जी जी मैं काल के लिए इनका पेन चलाया हुआ वाला ज्ञान बता रहा हूं आपको जहा इन्होने पेन चलाया है वो दिखा रहा हूं 10 ब महाकाल भी बोला वो दिखाते नहीं है साले अच्छा खुद के लिए बोल रहा है मैं जन्मा विनाशी देखो खुद के लिए बोल अविनाशी तोर मिलेगा सतलोक आश्रम में जो खजूर मिलेगा क्या क्या मिलेगा उसका सुख कौन सा वो बोलेगा य ी सा शरीर भोगा वहा का व स खीर म खीर स्पेशल खीर होती तो जेलम में मिलती होगी नहीं मिलती नेट पर सर्च करो रामपाल के नहाए दूध की खीर आपको नेट पर सारा दिखेगा वहा पर
01:45:05:27 य व खाते प्रबलम है मीन व पर द जाती तने भी प रामपाल जी स्नान करते थे सुबह दूध से और उनका बना जाती थय नेट दिखा दूं अभी सर्च करके सर गल करो अभी करो रामपाल के नहाए दूध की खीर सतलोक आश्रम देखिए अ मैं अपनी बात पूरी कर देता हूं तो जो अमित जी बोल के गए थे 144 उनको यही नहीं पता कि पहली बात तो उनको ये नहीं पता कि रामचरित मास है रामायण है रामायण रामायण का 144 पेज नंबर बता रहे हैं जिस नेती नेती दोहे की बात कर रहे हैं वो बालकांड का 144 दोहा है पेज भी नहीं है दोहा है लेकिन उन्हें यही नहीं पता कि पेज है कि दोहा है ठीक है पहली बात दूसरी बात जो सॉरी दोहा कह रहा हूं चौपाई है क्षमा करिएगा चौपाई है वो और वह चौपाई है नेति नेति जी वेद निरूपा निजानंद निरूपा दि अनुपा मतलब इसका अर्थ है कि जिन्हें वेद वेद नेति नेति यानी यह भी नहीं वह भी नहीं ये भी नहीं य भी नहीं वो कह कर निरूपण
✅ This part is already used · 01:46:10:18 – 01:46:20:24 (0:10)
→ Used in: A · Live Breaking news रामपाल का काल #rampaljimaharaj #kabir at 2:22:36 ↗
01:46:10:18 करते हैं जो आनंद स्वरूप है जो उपाधि रहित है जो अनुपम है एवं जिसके अंश से अनेक शिव ब्रह्मा और विष्णु भगवान प्रकट होते हैं यहां
⬜ Not used yet · 01:46:20:24 – 01:59:08:24 (12:48)
01:46:20:24 पर यह बात हो रही है जो कि राम मानस के बालकांड के 144 चौपाई है ना पेज नंबर है रामायण का ना श्लोक है ना सर्ग है ठीक है और दो दिन पहले तो आपको पता ही है कि बोल रहे थे कि मैं रामचरित मानस मानता नहीं हूं मैं मानता हूं इस मैं इसम जो है ये बात बोलूंगा कि सबसे पहले तो देख लीजिए कि काल कौन है सबसे पहले देख लीजिए कि काल कौन है विष्णु भगवान के बारे में बात हो रही है प्रथम अंश अध्याय दो और उसका 14 से 15
01:46:58:18 श्लोक 14 से 15 श्लोक है यहां पे काल इनको काल भी कहा जा रहा है भगवान को और वही इन सब व्यक्त कार्य और अव्यक्त जगत रूप से तथा इसके साक्षी पुरुष और महा काण काल ये देखिए महा काण काल दिख रहा है क्या नहीं दिख रहा दिख रहा है दिख रहा है दिख रहा है दिख रहा है दिख रहा हैली रहा कारण काल के रूप से स्थित है अब यहां से इन्होंने काल ले लिया उसके बाद इसी इसी रूप में जब भगवान का नाम काल बताया गया तो आगे बताया जा रहा है परम ब्रह्म परम ब्रह्म भी है दिख रहा है अब यहां पर ये कहते हैं कि ये तो गलती हो गई इससे छापने वाले से अब अगर ऐसे गलती करने लगेंगे तो इनकी ज्ञान गंगा में कितनी गलती निकालू मैं कि वो भक्त कहते हैं जो मास मध्य मैथुन के सहित हो रहित नहीं भक्त उन्हें कहते हैं अब बताओ सिद्ध कर दो भैया ठीक है काल को काल को ही विष्णु भगवान कहा गया है काल को ही श्री राम कृष्ण भी कहा गया
01:48:13:21 है ठीक है पहली बात दूसरी बात ये है कि अब बात आती है रामचरित मानस की उसमें भी देख लो दो दिन पहले ऐसी व्यक्ति का वो है कि मैं च मा मैं तुलसीदास जी की नहीं मानूंगा मैं वाल्मीकि की मानूंगा उस पर अपना शर्ट चल रहा है वायरल हो रहा है आज ये वक्ति क्या कह रहा है आज य व्यक्ति दोगले पन की भी हद होती है जब श्री जब ब्रह्मा विष्णु में जब अपनी बात सिद्ध करनी हो तो तुलसीदास और जब सामने वाले की वो हो रही हो काट करनी हो तो बाल्मीकि रामायण ये दो सही रेफरेंस नहीं बताना हैनी चाबी भरी पालने उतना चले खिलोना 143 143 कर रहे हो वो क्या 143 है हम लोग रामायण खोल रहे रामचरित मानस की चौपाई बोल रहे हो वो क्या 143 है वही नहीं समझ में आ रहा जय श्री और तो अब अंततोगत्वा अगर अंततोगत्वा मैं कई बार दिखा चुका हूं मगर इसमें फिर से दिखा देता हूं एक बार मैं यही नहीं सोच पा रहाय रामायण में तो मिल ही नहीं रहा एकवा अंततोगत्वा में आपको वो भी बता दूं युद्ध कांड में भगवान को परम ब्रह्म बोला गया श्री राम कोही मान लो वाल्मीकि को मानते हो तो मान लो मगर वाल्मीकि को ना मानने के लिए फिर दूसरा ग्रंथ लाओगे कि
01:49:28:22 उसमें देखो ये कहा जा रहा है ठीक है कंट्रा क्शन है मान लिया मान लिया ओए अब तू यह तो बता दे कि काल इसका अर्थ कहां से आता है मैं वही पूछ रहा हूं नेती नेती का मतलब श्री कृष्ण के अंदर कोई काल घुस गया था ये कौन सी महिमा है भाई कौन सा ये महिमा है ये खीर की महिमा ये खीर की महिमा है इनके मैं ना इनके दरअसल अब सुन रहा हूं सारी की सारी बातें इनके चैनल सुन रहा हूं मेरे को लगता है अपने आप से मेरे को एक ् ग्रंथ लिखना पड़ेगा खुद ही इनके बयान लेकर ना वो ् ग्रंथ मेरे को खुद ही लिखना पड़ेगा सारा का सारा अरे कल आप विश्वास नहीं करेत को मतलब रामचरित मानस में नेती नेती लिखा हुआ तो कृष्ण जी के अंदर काल घुस गया कल रात को बंदे हैं नशेड़ी वो भी करते हैं कभी कभी हालाकि नहीं करना चाहिए देखिए हमारी बात बात बता दूं अगर कहीं पर उनका आविर्भव रो भाव हो रहा है शास्त्र में ठीक है कहीं पर उनको अजन्मा विनाशी कहा जा रहा है शास्त्र में तो शास्त्रों ने यह कहा है ठोक के अगर उसमें दो तरह की बातें निकल रही जिसका आप एक मतलब नहीं निकाल पा रहे हो दोनों बातें धर्म है दोनों बातें माननी है
01:50:45:02 इस रूप में भी मानना आविर्भाव का मतलब जन्म जो आपके बाबा वही मेरे पास है जी एक्चुअल में पता क्या है यह लोग जो परमात्मा को समझने की बात करते हैं ना इसमें तो नहीं लिखा हैसा ये देखिए और आपके बंदे मेरे को आश्रम वाले गालिया देते हैं मैं मैं मैं यहां प एक बात कहूंगा ये देखो भाई यहां पे एक मि आविर्भव का मतलब वो ग पर मिलता है जी आपकी आवाज कट रही है एक एक एक मिनट रुक जाइए लीव करके दोबारा आ जाइए गोविंद जी एक बार दोबारा आ जाइए तब तक हम बात करते हैं इनकी भगवत गीता की इनकी भगवत गीता में इन्होंने ब्रज का अर्थ आना लिया है आना अब अगर यह यह कहते हैं कि नहीं यह कारण था वो कारण था तो वह तो भैया छापने वाले की गलती है आप जो है दिखा दीजिए हमको कि उन्होंने उन्होंने उन्होंने वो लिखा है जो आप दिखा रहे हो ठीक है जी सर ये बरा कार् तो सहारा लेना भी होता है लेकिन इन्होने माना नहीं ना वो दर्शन करना भी होता है बहुत अर्थ होते हैं
01:52:00:07 दर्शन करना भी होता है जी जी जी और मैं मैं दिखा रहा हूं श्री राम की परम ब्रह्म जी इन्होने कुतर्क करना है अगर आपको यही मानना है तो मान लो देखिए इनकी हर बात का जवाब है कि ऐसा क्यों हो रहा है वैसा क्यों हो रहा है सब कुछ है शास्त्र सम्मत है मगर जब हम कुछ बता देंगे तो तुरंत कद के दूसरा ग्रंथ खोल देंगे ये क्यों है फिर अच्छा वो भी हमने बता दिया कि दो जगह दो प्रकार की बातें है तो दोनों धर्म है मान लो राम जी को आविर्भव त्र भाव वाला भी मान लो अविनाशी भी मान लो मान लो मगर नहीं हम एक तीसरी बात लाएंगे जो शास्त्र में है ही नहीं कि वह काल बोल रहा था उससे भी बड़ा कोई परमेश्वर है कबीर हम तीसरी बात लाएंगे को परमात्मा पता समझ आ रहे बताता क्या कारण है ये लोग परमात्मा को लेते हैं जैसे बटा दादा ऐसे समझते हैं लेकिन उनका जो समझने का असली तरीका है ना जैसे हम ये तत्व होते है ना जैसे पंच तत्व में आसमान होता है आसमान में बादल काले भी है सफेद भी है नीले भी है है तो बादल ही ना ये लोग म इस तरीके से नहीं समझते दूसरे तरीके समझते संसार तरीके से समझने की कोशिश करते हैं ऐसे समझ नहीं आते परमात्मा नहीं शिवान जी वो
01:53:15:12 क्या बोलते हैं अपना उनका भी तो था ना श्री स सनत कुमार कुमारों का और नारद जी का भी तो है संवाद जिसम परता बता रहे हैं भगवान नारद जी बता रहे है ना परता भगवान राम की हां वो बता रहे हैं मगर अभी मैं वो वाला निकाल रहा हूं जो युद्ध कांड में है ना युद्ध कांड में श्री राम के पास देवताओं का आगमन 624 अगर आप स्क्रीन पर दे सकते हैं तो दे दीजिए पेज नंबर 624 मैं दे देता हूं वाल्मीकि रामायण द्वितीय खंड
01:53:54:14 वाल्मीकि रामायण वाल्मीकि रामायण में तो खुद काल कह रहे कि मैं मैं आपसे उत्पन्न हुआ हं मैं आपका ही रूपं श्री राम से कह रहे हैं आपका पुत्र हुआ मैं कर रहा हूं शीराम क रहे मैंने तुम स्मरण किया था मैंने तुम मेरी मेरी इच्छा से आए हो इधर मेरी स्क्रीन दिख रही है ना जी जी दिख रही है आप आप दिख रहे हो अभी तो अभी आप दिख चलिए मैं पढ़ के बता देता हूं ये देखिए ना श्लोक नंबर 13 मैं पढ़ देता हूं श्लोक नंबर 13 यहां पर ब्रह्मा जी बोल रहे हैं आप चक्र धारण करने वाले सर्व समर्थ पहले तो इस इस पॉइंट पर बहुत ध्यान दिया करें सब सर्व समर्थ सर्व समर्थ वो है जो भगवान भी बनेगा जो भक्त भी बने जिसका जो यहां इस माया रूपी संसार में प्रपंच में आएगा अभिर भाव भी होगा रो भाव भी होगा वो है सर्व सामर्थ वान इसको अपनी खोपड़ी में डालो अन्यथा क्या होगा अगर इनसे वो ऐसा नहीं है तो फिर वो सर्व सामर्थ्य वान नहीं है
01:55:09:21 मगर तत्व वो क्या है तत्व आगे बोल रहे हैं कि आप अविनाशी परम ब्रह्म है 14 नंबर में और यहां पर राम के लिए हां युद्ध कांड सीधे पृष्ठ संख्या अगर गीता प्रेस का है तो 624 625 नहीं श्लोक बता दीजिए 14 है ना हा 14 नंबर शलोक तो इसमें इसमें ब्रह्मा जी बोल रहे हैं कि आप अविनाशी परम ब्रह्म है सृष्टि के आदि मध्य और अंत में सत्य रूप से विराज विद्यमान है आप ही परम धर्म है आप ही विश्वक सेन तथा चार भुजाधारी श्री हरि है तो यहां पर विष्णु भगवान भी अविनाशी हो गए राम के रूप में हरि है ना और कल एक बंदा एक बात बोल रहा था कि लोक वेद लोक वेद में आप ही वो है परम तत्व जब मैंने उसको बताया था कि वो ये कहते हैं ना कि मुझसे जो क्षर पुरुष अक्षर पुरुष और व वो सबसे जो पुरुषोत्तम है वो अलग ही है कोई तो मैंने अगले ही श्लोक में बताया था भगवान कह रहे कि मैं ही हूं बोल रहा वो लोक वेद में लोक वेद अच्छा भैया जो बताते हो कबीर के बारे
01:56:24:25 में वह क्या परलोक वेद से बताते हो क्या लोक वेद से ही तो बताते हो जो लों का वे लों में जिसको वेद संज्ञा प्राप्त है जिन शास्त्रों को उन्हीं के आधार पर तो बोलते हो तो क्या हो गया लोक वेद तुम कोई आसमानी किताब से बताते हो क्या लोक के अंदर जो ग्रंथ है उसी के आधार पर तो हमारी और आपकी बात हो रही है वरना जाओ इंद्र के यहां अभी तुम्हारा देह का नाश कर लो जाओ व वहां चिल्लाओ और विद में प्रमाण है ओए कबीर नहीं भगवान है गणेश जी भगवान है तो आ गए हैं मेरे ख्याल से तो यहां हमने दे दिया कि अगर आपको वाल्मीकि रामायण को मानना है तो वाल्मीकि रामायण को मान लो कोई दिक्कत नहीं है राम जी यहां पर परम ब्रह्म के रूप में विराजमान है वाल्मीकि रामायण में ठीक है राम जी को मान लो कोई दिक्कत नहीं है मगर आप यह नहीं कर सकते कि यह मानेंगे ये नहीं मानेंगे जहां से अपनी बात कर बल अ और कौन सी बात जो शास्त्र में है ही नहीं जो हम मुंह से बोल रहे हैं भाई शास्त्र में तो दिखाओ कि अगर दो तरह की बातें हो रही है तो उसका अर्थ है कि काल है यह तो दिखाओ ये यही नहीं दिखाएंगे बाकी सब करेंगे
01:57:41:03 अ एक मिनट गोविंद जी को ले ले एट टू स्टेज और अभी लेते हैं बाकी लोगों को ले लेते हैं चलिए ले सबको लेते हैं मिनट भाई साहब वो कहां गए वो आए थे क्या अभी रामपाल जी वाले नहीं नहीं नहीं आए थे शुभम उपाध्याय जी बोले जय श्री राम जय श्री राम भैया जी जी मैं यही कह रहा हूं कि इनको सिर्फ सत संत रामपाल जी को मानना है आप इनको कितना भी प्रमाण दे दो कितना भी कुछ दे दो ये बस अपनी बात को स करना भाई ये इस समय उनके भी दुश्मन है उनकी कही हुई बातों का ही खंडन कर रहे हैं आजकल ये इस समय उनके शत्रु बन गए हैं ये मैं बता रहा हूं आपको इस समय संत रामपाल जी वहां पर दुखी होंगे जेल धाम में वो कह रहे हैं मुझे बाहर निकालो यह कह रहे हैं कि वो अपनी मर्जी से है वही रुकने दो हां जी दिखाइए
01:58:49:20 वीडियो बाल कांड में दो 147 में आप देखिए जी यहां पर क्या दिखाया गया है नेति नेति जही वेद निरूपा निजानंद निरूपा अनुपा शभु बरं विष्णु भगवाना उपज जासु अंसते नाना जिन्ह वेद नेति नेती
✅ This part is already used · 01:59:08:24 – 01:59:21:08 (0:12)
→ Used in: A · Live Breaking news रामपाल का काल #rampaljimaharaj #kabir at 2:22:35 ↗
01:59:08:24 यह भी नहीं यह भी नहीं कहकर निरूपण करते हैं जो आनंद स्वरूप उपाधि रहित और अनुपम है एवं जिनके अंश से अनेको शिव ब्रह्मा और विष्णु भगवान प्रकट होते हैं
⬜ Not used yet · 01:59:21:08 – 03:00:01:00 (1:00:40)
01:59:21:08 अब देखिए इसमें स्पष्ट रूप से बताया गया है कि मनु और सतरूपा जो सतयुग में हुए हैं उनके ज्ञान का आप लेवल देखिए वो क्या यहां प इसमें राम मानस में उनके बारे में बताया गया है वो के बारे में बात कर रहे हैं जिनके एक अंश से सिर्फ अनेको ब्रह्मा और विष्णु भगवान प्रकट हो तो इस पर तो हमने जवाब दे ही दिया ये अननेसेसरी रहा इसका तो हमने ने उत्तर दे ही दिया है भाई जिसको वहां पर नेति नेति प्राप्त करने योग्य बताया जा रहा है या यह भी नहीं वो भी नहीं ऐसा कहा जा रहा है वो स्वयं श्री राम है और यह बात भी कि आपकी व्याख्या पूरी तरीके से करने में हम असमर्थ है महिमा गान करते हैं ना कि मैं तुम्हारी व्याख्या नहीं अभी अभी देखो मैंने बोला ना महिमा गान करते समय वो क्या बोल र है मैं कुत्ता हूं तो क्या मान ले कुत्ता ऐसे ही महिमा गान करते समय बोला जाता है भाई मगर वहां पर तो वो एज इट इज बोला है और वो जब बोल रहे हैं तो उदाहरण दे रहे हैं वो जब बोल रहे तो वो कुत्ते नहीं है व दो कौड़ी के नहीं है मगर इन्होंने बोल दिया कि हमारा भी आविर्भव होता है त्र भाव होता है अरे देख लो वो खुद कह रहे हैं आविर्भव होता है तो भाई
02:00:36:08 वो भी तो खुद कह रहे हैं कि कुत्ते हैं कुत्ते की पूजा करोगे आप मगर मैं नहीं मानता कि वो कुत्ते हैं आप जैसी बात कर रहे हो आपके लॉजिक के अनुसार आप गलत कर रहे हो हमें लगभग दो घंटे पूरे हो चुके हैं अभी तक मेरे को समझ नहीं आया है कि नेती नेती से श्री कृष्ण जी के भीतर काल कैसे चला गया मैं समझ नहीं पा रहा हूं एकली तो या इससे काल सिद्ध कैसे हो जाता और ये काल कौन है जरा किसी ग्रंथ से कोई मेरे को बताएगा अगर रामपाल जी का अभय देखिए एक बात कि कहीं कहीं पर इन्होंने अपनी म मर्जी से कहीं कबीर कर दिया है राम को कहीं राम कर दिया अपनी मन मर्जी से सब पूरा बिना शास्त्र के प्रमाण के और कहते क्या है सारे शास्त्र खोल के दिखा दिए और जब पूछो कि भैया काल कहां से आया इसमें अगर तुम्हें कोई बात शास्त्र की समझ नहीं आ रही है तो इसका अर्थ काल होता है यह सनातन का कौन सा सिद्धांत है यह ् का सिद्धांत है रॉक ली जी आप जो कह रहे हैं वो हम
02:01:51:08 पूछ चुके इसके बारे में उन्होंने प्रारंभ में ही बातें हुई थी तो धारा टूट जाएगी तो बार-बार बीच में उन्हीं बातों को ना उठाए हम लोग आश्वस्त होकर ही आए हैं चर्चा के लिए ठीक है हां तो अब हम ले लेते हैं या आप कोई दृष्टांत बीच में दे दीजिए थोड़ा सा लाइट हो जाए माहौल अभी वो कंटेंट लेने आए थे थोड़ा गर्म गर्मी बढ़ गई है तो आप कुछ बता दीजिए ज्ञान गंगा से तो थोड़ा सा लाइट हो जाए से थोड़ा माहौल लाइट हो जाता है क्योंकि बड़ी शक्ति है ना इसमें तो ये देखिए ठीक है इसमें मैं आपको एक और नई अजूबा दिखाता हूं मैं यहां पर मतलब इसमें से निकल रहे हैं धड़ाधड़ निकले ही जा रहे हैं पता नहीं क्यों निकल रहे हैं यहां पर एक स्त्री है वो व्याख्या कर रही है बाबा रामपाल जी की सुनिए ध्यान से ठीक है अच्छा ये कौन है इसके बारे में बता देता हूं अमेरिका की महिला है भविष्यवक्ता फ्लोरेंस की महत्त्वपूर्ण भविष्यवाणी है ठीक है तो फ्लोरेंस ने अपनी भविष्यवाणियों में कई बार जिक्र किया है द फॉल ऑफ सेंसेशनल कल्चर नाम की अपनी पुस्तक में उन्होंने लिखा है ठीक है अब ये पुस्तक आपको मिलेगी नहीं कहीं ठीक है व के अलावा ठीक है
02:03:06:27 जब मैं ध्यान लगाती हूं तो एक ये क्षमा करिए ये वाली इसकी बुक नहीं है इसने ये वाली बुक लिखी है इसलिए इसको राइटर बताया जा रहा है जिसमें इसने भविष्यवाणी की है वो मैं पुस्तक का नाम बता देता हूं गोल्डन लाइट ऑफ न्यू एरा ये ना आपको ग प मिलेगी ना आपको बाजार में मिलेगी ये आपको े मिलेगी ठीक है जब मैं ध्यान लगाती हूं तो अक्सर एक संत को देखती हूं गौर वर्ण का है सफेद बाल है उसके मुख पर ना दाढ़ी है ना मूछ है उस संत के ललाट पर गजब का तेज होता है उनके ललाट पर आकाश से एक नक्षत्र की किरणें बरसती हैं मैं देखती हूं कि वह संत अपनी कल्याणकारी विचारधारा तथा सत चरित्र प्रबल अनुयायियों की शक्तियों से संपूर्ण विश्व में नए ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं सबसे पहले ये जान लीजिए कि यह बाबा रामपाल जी की बात नहीं हो रही क्यों नहीं हो रही है यह मैं आपको बता देता हूं ठीक है हमने अपने से कुछ नहीं बोलना है क्योंकि हमारे ऊपर कोई बात नहीं आनी चाहिए हम बोलेंगे प्रमाणों के आधार पर ये जो यहां पर लिखा हुआ है कि सत चरित है ये बाबा रामपाल जी का क्यों नहीं है कितने लोग मेरे को बताएंगे कि बाबा रामपाल जी के आश्रम में महिलाओं के शौचालय में कैमरे लगवाए जाते थे ठीक है कितने लोगों ने ने ये
02:04:21:28 बात पढ़ी है या मैं न्यूज दिखाऊं ऑफिशियल चलिए वो बात छोड़ी है वो रहने दीजिए हा ठीक है तो मैं ये बता रहा हूं फ्लोरेंस फ्लोरेंस नाम की ऐसी कोई भी आपको राइटर नहीं मिलेगी ठीक है ना ही द गोल्डन राइज ऑफ न्यू एरा नाम से कोई पुस्तक है ठीक है मैं एक बात और ऐड कर देता हूं मैं इसमें एक बात और ऐड कर देता हूं वो कौन से सिद्धांत है जिससे एगजैक्टली रामपाल दास जी को ही यह मान लिया जाए कि उसका अर्थ ये है वो कौन से सिद्धांत ये कौन सा सिद्धांत है कि बुक है कहां पे ये वाली ये बुक कहां पे है मैं बताता हूं क्या हुआ था इनके ही एक मेरे को होता होगा हां मैं एक्स फॉलोअर था इनका उसने मेरे को बताया था कि एक बार हम कहीं बैठे हुए थे तो किसी उनके बड़े ने बताया था कि वो उसने वो आती है ना स्कूल में प्रेजेंटेशन देने कोई टीचर्स वगैरह आते हैं बच्चों के लिए जो प्रैक्टिस वगैरह करते हैं तो उन्होंने अपने से वो लिखकर अपनी उसमें एक बनाया था उन्होंने क्या नाम है यही लगा लीजिए कोई कॉलम कह लीजिए कुछ भी कह लीजिए वो उन्होंने अपने से लिखा था वो कहीं कोई ऑफिशियल चीज नहीं है ना यह कोई पुस्तक है कहीं गल पर य आपको पुस्तक नहीं मिलेगी और इन्होंने इतनी सी बातों पर मेरी जो है चैनल की
02:05:37:00 वीडियोस डिलीट करवाई है क्योंकि मैंने रिसर्च की मैंने खोजा मेरे को कहीं मिली नहीं अब पर मिलेंगी वो ट है नहीं इनके पास ठीक अरे मैं बताऊ वो बुक जो है इनके द्वारा पूजित होने वाले ईश्वर से ज्यादा सामर्थ्य वान होगी तो उसने अपना भाव कर लिया होगा अ प्रकट हो गई होगी हो सकता है आ भाव का अर्थ क्या है अगर ब्रह्म दृष्टि से देखे तो केवल दिखना और ना दिखना केव प्रकट अब भैया ये सामर्थ इनके अनुसार यह सामर्थ्य उसम नहीं है ईश्वर में आवि भाव त्र भाव का मगर उस बुक में है जो गायब हो गई है तो बुक भी ज्यादा साम हो गई रामपाल बाबा जी का अगर कोई चेला है तो वो कब मेरे को बताएगा य बुक कहां पर है य प्रकाश कहां प हुई थी और मैं कहां से इसको खरीद सकता हूं क्योंकि मेरे को खने की बड़ी इच्छा है इसकी थोड़ा सा टी आर पहाड़ी जी को सुन लेते हैं फिर एक ब एक लोग हैं यहां पर कृष्ण कुमार करके उनको हम ले लेंगे आप रामपाल की तरफ से है ना कृष्ण कुमार जी रामपाल जी की तरफ से है ना नहीं केवल हां या ना ऐसे करिए हां ठीक ठीक लेते हैं अभी आप जी हां मैं एक बात का और खंडन करना
02:06:52:03 चाहूंगा इनके जो इन् ना हनुमान जी को जो ज्ञान बोध कराया था कबीर दास जी ने मुनींद्र रूप में वो कहां से पहाड़ी जी मैं एक बात कहूंगा हम लोग यहां पर जब बातें करते हैं तो हम उसे कभी भी खंडन नहीं कहते हैं हम लोग कहते हैं चर्चा उसके बारे में मैं आपको बताऊंगा कि इनका जो पक्ष है उसको ना मानने के संबंध में मैं अपनी एक बात रखना चाहूंगा ऐसे आप कर सकते हैं जी बोलिए तो कुछ वीडियो में मैंने में देखी तो आनंद रामायण का य सर्ग नौ है एक आनंद रामायण करके एक है उसमें दिखाते हैं कि हनुमान जी जब लंका से लंका दहन करके माता सीता की मुद्रिका लेकर जब वापस आते हैं तो उनको प्यास लगती है तो पानी पीने के लिए कहीं नीचे उतरते हैं वोह आकाश मार्ग से तो देखते हैं कि एक कुटिया है सामने और वहां एक मुनि है तो उनसे बोलते हैं कि यह मेरी मुद्रिका है यहां पर रख दो मैं पानी पीने जा रहा हूं तो पानी पीने जाते हैं वो इतने में एक अंदर आके जो मुद्रिका होती है वो उनके कमंडल में डाल देता है अब हनुमान जी जाते हैं व कमंडल में हाथ डालते हैं तो उसमें ढेर सारी मुद्रिका निकलती है तो यह कैसे हुआ हनुमान जी पूछते हैं मुनि से तो मुनि बोलते हैं कि हुआ ऐसा
02:08:07:03 कि तेरे जैसे तो लाखों हनुमान यहां आ गए तेरे जैसे और तेरे जैसे लाखों राम यहां आ चुके हैं तो यह बात होती है तो उसके बाद वहां से हनुमान जी च चले जाते हैं तो बाद में क्या होता है कि एक जब लास्ट में सबको पुरस्कृत कर रहे होते हैं श्री राम जी तो हनुमान जी को भी एक मोतियों की माला देते हैं शायद ये प्रसंग है तो मोतियों की माला क्या करते तोड़ देते हैं तो सीता माता इसमें गुस्सा हो जाती इनके कहानी के अनुसार बता रहा हूं में रामपाल जी के कहानी के अनुसार कि वो गुस्सा हो जाते हैं और सीता मैया उनको गाली देने लगती तू बंदर का बंदर ही रह गया तुझे अकल नहीं है तो हनुमान जी को गुस्सा आ गया कि मैंने इतना इनके लिए कुछ किया और जल भाई साब अभी आपसे कुछ पूछा नहीं जा रहा है भाई साहब आप कैसे बोल रहे हैं जंगल कुछ पूछा नहीं जा रहा है जंगल की तरफ चले बात होगी आपसे भी बात होगी यह लोग ये लोग ये लोग जवाब देने नहीं आते हैं यह लोग यहां आते हैं कि देखो मैं वहां पर यह बोलना चाहता हूं वहां जाकर यह बोल द भाग जाऊ मेरा काम हो गया तो जंगल की तरफ वो चले जाते हैं तो वहा बैठ सोचते कि
02:09:22:03 मैंने इतना कुछ किया श्री राम जी के लिए सीता माता के लिए पर उन्होंने मेरे को यह पुरस्कार दिया कि मेरे को गाली दी इतने में कोई ऋषि आए वहां पर तो ऋषि ने बोला बेटा कैसे हो हनुमान बोले मैं बढ़िया हूं बो अयोध्या में राम आए हुए हैं मैं वहां गया था मेरे साथ ऐसा हुआ तो मुनि ने बोला तुम कौन से राम की बात कर रहे हो बोले मैं तो अपने प्रभु श्री राम जी की बात कर रहा हूं जो अविनाशी है तो मुनि ने कहा कि मैं तो उस राम को जानता हूं जो अविनाशी है पर तुम्हारा राम तो ये जन्म मरता रहता है तो हनुमान जी बोलते यह बात तो मुझे किसी ऋषि ने भी कही थी बाद में पहले बोले हां बेटा मैं वही हूं मैं वही कबीर हूं तो यह प्रकरण ले रखा कहां से यह प्रकरण ले रखा उन्होंने आनंद रामायण के सर्ग न में है ये तो ये सेम कहानी है ये सेम ऐसा पर इन्होंने जो कैरेक्टर है वो बदल दिया है वहां मुनींद्र नहीं लिखा वहां मुनि लिखा है और वो मुनि रूप में कौन थे श्रीराम ही थे जब उन्होंने जब दोबारा डरते हुए हनुमान जी जब गए उनके पास उन्होंने वो गर्व रूपी अपना वृतांत सुनाया कि मुद्रिका मेरी यहां च कमंडल में चले गए मैं भूल गया तब श्री
02:10:37:04 राम जी ने हसते हुए कहा हनुमान जी से कि जो मैंने जो आपने मुनींद्र रूप देखा वो मैंने ही बीच में नाटक रचा था कौतुक रचा था मैंने तेरा तुम्हारा जो तुम्हें जो घमंड हो गया था इसलिए मैंने वो तुम्हारा घमंड तोड़ने के लिए रचा था देखो जो तुम मुद्रिका लाए थे मेरे उंगली में है यह तो यह कहानी कहां से ली आनंद रामायण सेय अभी हमारे जो एक समर्थक है सहयोगी है वो विशाल भाटिया जी उन्होंने भीय पूरा कथानक कभी दो दिन पहले सुनाया था आनंद रामायण का उन्होने दिखाया थाय मेरे पास है आनंद रामायण बकुल सही एक बार दिखा दीजिए इनको अगर आप उसके माध्यम से स्क्रीन के माध्यम से दिखा दे तो इनके जो फॉलोवर है उनको पता चलेगी यह प्रसंग कहां से ले रखा है सर्ग न है और लास्ट के लास्ट में सर्ग कांड कौन सा है कांड कौन सा है सर्ग सर्ग इसम सर्ग नाइन सर्ग नान 300 से लेकर 398 999 ना वहां से इनकी कहानी शुरू होती है लास्ट के एक मिनट तो
02:11:53:03 कांड नहीं इसम सर्ग है नहीं कांड है न चलिए खैर वो है उसमें वो ढूंढने का विषय देर लगेगी मिल जाएगा जी बनाना जी जी जी चलिए इनको ले लेते हैं अब इनसे पूछते हैं भैया काल काल ने कैसे बोला बताओ हां भैया ऑन करिए अपना आपका
02:12:29:20 नाम मेरा नाम क नाम कृष्ण कुमार कहां से है जयपुर जयपुर और दीक्षा कब ली आपने मुझे दो साल हो गए दो साल हो गए तब वो मतलब वहां थे जेल धाम में या कहां थे य पांडी कहां गए ऐसा है भाई साहब आप जा सकते हैं जाइए हटा दो भैया इनको हटा दो य ये अलग भाव से आए इनको हटा दो सुना नहीं क्या बोला इन्होने यार पाखंडी बोल रहे पाखंडी मैंने बस उससे इतनी सी बात पूछनी थी कि रामपाल जी का आपने कौन सा ज्ञान देखा कि आपने उसकी दीक्षा ले ली इसने यहीं पर खत्म हो जा
02:13:23:12 नहीं कुछ पूछना चाह रहे थे मेरे से शायद अरे ठीक देखिए वो चर्चा के लिए नहीं आए समझिए इस बात को वो पता लग जाता है जब व्यक्ति आता है वो चर्चा के लिए आया किसके लिए आया है वो आए है कि हम य कुछ ऐसा करते कर कर आप अपनी बात करिए हाय सर्वशक्तिमान राम सेतु पुल का निर्माण सर्वशक्तिमान परमेश्वर कबीर साहब जी के आशीर्वाद से हुआ था और यह सर्वशक्तिमान ईश्वर वह है जो अपने साकार स्वरूप का आविर्भव तिरोभाव नहीं कर सकता पहाड़ नहीं बन सकता लंबा नहीं हो सकता छोटा नहीं हो सकता मोटा नहीं हो सकता कुछ भी नहीं हो
02:14:15:07 सकता सूक्ष्म हाय की वेबसाइट खुली हुई है जगतगुरु रामपाल की ठीक है हटा लीजिए तो इन्होने इन्होने रेफरेंस क्या लिखा हुआ है नीचे क्या रेफरेंस सूक्ष्म वेद राम सेतु ले राम सेतु वाले प्रसंग में इन्होने रेफरेंस क्या लिखा हुआ है नीचे चेक कर लेते हैं थोड़ा सा लिखा कुछ कुछ कुछ नहीं है वो सब मन की बातें है को कोई रेफ मे को पता ना ये वाला ग्रंथ है
02:14:55:28 ये कोई और आना चाहता हो संभ्रांत तरीके से अगर यह बताना चाहता हो कि गीता का वेद गीता का जो ज्ञान है वह काल ने दिया है तो आ कर के बताए कोई तो होगा किसी माता ने तो ऐसा पुत्र जना होगा जिसने उनका वो लिया हो उनका नाम दान लिया हो एलईडी टीवी से कोई तो होगा माइका लाल जो आए बताएगा कि हा वो जो वो जो काल है वो काल की जो वो है व्याख्या वो सही है वो शस्त्र सम्मत है वही तो होगा हम जानना चाहते भाई आज हम जिज्ञासु बन गए हमने आज तक कितनी बार आपके प्रश्न सुने हैं अभी उसने पांच बार विरोधाभास दिखाने के लिए उदाहरण दिए ना मगर उसने ये नहीं बताया कि इन विरोधा भाष का अर्थ काल कहां से है नेति नीति का अर्थ काल कहां से है नहीं मेरा एक प्रश्न है दीक्षा दीक्षा हो रही है एलईडी से ग्रंथ आ रहे हैं से तो ये क्या चल रहा है भाई मेरे को कोई समझा देगा सुनि प्रमाण दि प्रमाण दिए जा रहे आजकल एक चीज और चल गई है कमेंट में मैं देखता हूं
02:16:11:08 आजकल क्या बोला जाता है गल करके देख लो सबसे बड़ा संत कौन है रामपाल अब ग भी प्रमाण हो गया दीक्षा दीक्षा दीक्षा हो रही है एलईडी से ध्यान से समझिए दीक्षा हो रही है एलईडी से ठीक है ग्रंथ आ रहे हैं से और शास्त्रार्थ हो रहा है ग से भाई ये कौन सा डिजिटल धर्म है नया मेरे को कोई समझाएगा व बोला तो था उन्होने डिजिटल इंडिया लेकिन य डिजिटल धर्म कैसे बन गया समझ नहीं आया यही समस्या है ना जब रूट्स जो आपके जड़ जब मजबूत नहीं होती है तो यही समस्या आती है इनकी काल वाली बात ना गीता से खंडन हो जाता है श्री कृष्ण जी ने अध्याय अपनी विभूति बता दिया चार रेफरेंस देना नहीं आ रहा है रेफरेंस देना नहीं आ रहा है रामचरित मानस का रामायण बता रहे हैं चौपाई को पेज नंबर बता रहे हैं इ यही नहीं पता रामचरित मानस की चौपाई है कि उसका पेज नंबर है क्या है क्या मतलब आदमी उसी में आ घं लग जाता लेकिन जब ति नीति बोल दिया ना तभी मैं समझ गया था कि यह रामायण है ही नहीं वाल्मीकि
02:17:26:15 रामायण नहीं है रामचरित मानस से ले रहे हैं लेकिन फिर भी उनकी बात खुद नहीं पता नहीं य में वीडियो बनाई है इन लोगों ने अभी जो दिखाया था यह इसका कंटेंट यह है कि श्री राम य यहां पर श्री राम की बात नहीं हो रही है ना सीता माता की बात हो रही है यहां पर हो रही है कबीर दास की बात की इनसे समर्थ प्रभु कोई और है बिल्कुल जरूर जरूर डायरेक्ट लिखा हुआ है आप मुझे याद नहीं आ रहा जो ये रामायण के महात्म जो लिखा हुआ है इसमें वाल्मीकि रामायण में गीता से मिल जाएगा आपको जो महात्म में लिखा हुआ है उसमें कौन सा पुराण है मुझे पुराण बकुल अभी ध्यान नहीं आ रहा है उसमें सनत कुमार और नारद जी का संवाद है आपस में उसम साफ साफ नारद जी बता रहे हैं कि भगवान राम परब्रह्म परमेश्वर है ऐसे बोल के ठीक है आप अथर्ववेद का राम रहस्य उपनिषद उठाइए जिसमें उसमें तारक ब्रह्म बताया है उनको तारक मतलब भगवान राम का नाम लेने से ही तर जाता है व्यक्ति उसको तारक ब्रह्म बताया सीधा ब्रम बताया उपनिषद बता रहा हूं आपको वेदों से इस तरह से चीज लेकिन के बे इनकी बात है मैं आपको उपनिषद के बारे में बता देता हूं कि उपनिषद पूरा ऋषियों का अपना ज्ञान है
02:18:41:28 उसका कोई लेना देना नहीं है इसलिए हम मान य समस्या है वो मान लिया पुराण नहीं मानना है रामचरित नहीं मानना है लेकिन अपना प्रमाण रामचरित मानस से ही देना है क्यों क्योंकि संस्कृत समझ में आएगी नहीं ठीक है अब अवधि है उसम थोड़े बहुत कुछ शब्द समझ में आ सकते हैं उसकी प्रोटी ज्यादा है तो इसलिए मुझे प्रमाण जो है वो रामचरित मानस से ही देना है लेकिन यह बोलना है कि मैं रामचरित मानस को नहीं मानता मैं रामायण को मानता हूं इसलिए तो मतलब कोई भी बात जो मैच नहीं करती है ठीक है यही यही यही मैं कह रहा हूं देखिए बात ये है के जितनी क्वेश्चन पूछेंगे उसके जवाब हम शास्त्रों से जब देंगे तो ये कह काल ने बोला है यह अनुवाद गलत है और यह जो है मिलावट है श्लोक तो हम तो अपनी कोई बात कहने लायक है ही नहीं क्योंकि भैया हम तो गुलाम है इनके हम इनके गुलाम है मगर कम से कम मगर कम से कम भैया भगवान के नाम पर जिसको तुम मानते हो उसके नाम पर यह तो ब जा बता जाओ कि तुम्हारी जो बात है वो शास्त्र से कैसे प्रूव होती है हमारी कोई बात को अलग हटा दो सब गलत अब भैया बताओ आपकी बात कहां से प्रूव होती है आपने काल कैसे बोला तो प्रकाश बिश्नोई जी
02:19:58:22 बताइए हा सभी साथियों को नमस्कार स्टूडियो में आया मैं आपके जी नमस्कार जय श्री राम हर हर महादेव राम राम जय श्री राम राम राम अच्छा लग रहा है करीबन यह जो चर्चा हो रही है मैं देख पा रहा हूं करीबन समय परडे देखता हूं आपका वीडियो जो सेव होता है दो ढाई घंटे चार घंटे का उस दिन भी रात को मैं दो बजे तक आपका पूरा रिपीट देखा था होनी चाहिए सभी आत्माओं को जागरूकता आनी चाहिए समय भी है अभी वो जो जागरूकता का आप अच्छा प्रश्न पूछ ऐसा भी प्रश्न पूछना चाहिए हर किसी से कि का सन कान का होए तोय जो काल के काल की बात कर रहे हो ना आप जो काल ब्रम
02:20:50:24 तो मेरा सर जी इतना तो अनुभव नहीं है जब से मैं संत रामपाल से जुड़ा हूं तब से यह जो है ब्रह्म काल का जो है मैंने यह जो जन दिया है क्योंकि सर मैं तो मोबाइल बिजनेसमैन मुंबई में रहता हूं और घर परिवार में थोड़ा कहना मतलब छिड़ ये जो है अटपटा जैसे ज्ञानी की तरह था जब से संत रामपाल जी के चरण में आए तो बहुत कुछ मेरे को चेंस हुआ अपने आप में जैसे यत्र का जो रहता है ना वो सारे मेरे क एक मिनट रोकूंगा आपको ऐसे हमारे पास भी बहुत से लोग हैं जिन्होंने ब्रह्मा विष्णु महेश की सुनिए ऐसे हमारे पास भी बहुत से लोग हैं आपसे संख्या में कहीं ज्यादा है जिनका भगवान की सद भक्ति कर कर के भला हुआ ठीक है इसलिए अब बात ये आएगी कि जब मैं अपनी बातें कहूंगा तो आपको उस पर विश्वास नहीं होगा जाहिर सी बात है तो आप यह अपेक्षा क्यों करते हैं कि जब आप अपनी बात बताएंगे तो हमें आप पर विश्वास हो जाए इसलिए यहां पर सिर्फ वह बात करें जिसको आप भी माने और हम भी माने समझ रहे ऐसी
02:22:06:00 बातें बोले तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एकमात्र शास्त्र प्रमाण है तो हम यहां बैठे हैं शास्त्र पर बात करने किसके जीवन में क्या घटित हुआ है इसके लिए आप किसी और अपने वो चैनल ही है उस पर जाइए अच्छे से बताइए मेरे साथ ऐसा होता था नापतोल वाला वो दोबारा से वीडियो तो उस परे आप जाइए अच्छे से बताइए आप यहां पर यह बताइए कि जो भगवत गीता है अगर उसमें विरोधाभास आ भी रहा है हमारे पास शास्त्रों का वचन है कि अगर शास्त्रों में विरोधाभास दिखे तो दोनों को मानना कट किसी को मत करना ठीक है मगर आप यह बताइए कि आपने अगर यह कहा कि विरोधाभास है तो उसका का अर्थ काल कैसे हो गया यह हमें बता दीजिए बस शास्त्र का कौन सा सिद्धांत है जो यह कह रहा है कि एक तरफ अगर वो कृष्ण जो है जन्म अविनाशी है और दूसरी तरफ कह रहे हैं कि मेरा जन्म मृत्यु होता है मैं जन्म लेता हूं दो बातें कांट्रडिक्ट कर रही है इसलिए आपने तीसरी चीज डाली कि ये जो ज्ञान है वो काल ने दिया है वो काल ने दिया है उसका रेफरेंस दे दीजिए शास्त्र से जी सर ये तो श्री कृष्ण खुद बोलता है ना कि मैं काल हूं अी प्रवेश हुआ हूं गता में खुद ही वो बोलता है
02:23:21:12 अरे भाई श्री कृष्ण ही काल है यह तो हमने आपको बता दिया विष्णु पुराण से बता दिया गीता से आप जब यह कह रहे हो कि वह कृष्ण से अलग काल है व सिद्ध करो आप श्री कृष्ण से अलग कोई काल है वह सिद्ध करो वो तो अभी सर्च आपको चर्चा के लिए तो फिर इनका भंडा है संत रामपाल जी का 151 को नजदीक में आप आ जाइए व भैया भंडार हम भी कराते हैं हर रविवार को कल भी हुआ था आने वाला संडे फिर होगा आप आमंत्रित है आप आ जाइएगा बता दीजिएगा या आप ऐसा करो ऐसा करो वो तीन दिन का आप अटेंड कराओ और वहां पूछ आओ कि वो जो विरोधाभास है तो उसका अर्थ काल कैसे निकला और यह पूछ आओ कि शास्त्र कह रहे हैं अगर विरोधाभास हो तो दोनों मानना आपको प्रमाण दे दूं मैं विरोधा भास का वैसे अभी मैंने दिया है अगर आपने पिछले वीडियो देखे तो उसम मैंने दिया है में फिर से देख लूंगा कोई दिक्कत नहीं समय का है प्रभाव तो मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा आपका जी और आप अपनी जो आपबीती है आपके बहुत सारे चैनल हैं उन परे जाइए आप अच्छे से बताइए पहले मैं ऐसा था फिर ऐसा हो गया ऐसे आता है वो जो नेटवर्क मार्केटिंग कंपनियां भी होती है वो भी ये वाली स्ट्रेटजी अपनाती है एमवे और ये बहुत
02:24:36:12 सी ऐसी कंपनी है व इस तरह से पहले मैं ऐसा था वैसा हो गया फिर मैं ऐसा करने लगा फिर मेरे पास गाड़ी आ गई कोट पेंट टाइ में आ गया पान की दुकान से मैं छप्पर फाड़ के हो गया तो वो सब है होता है दुनिया में मगर वो वो मैं बोल के बताता हूं आपको वो ऐसे बोलता ना वो एक टूल की आथ थी उसका भी यही होता पहले फटे फटीचर हाल होते थे फिर उसके पास एक ड्रिल मशीन आ फिर वाओ मेरे दोस्त मैक ने एक दिन मेरे को बताया क्या तुम्हारे पास है अल्टीमेट टूल किट मैंने कहा यह क्या होता है तो वो बोलने लगा बेटा एक बार अजमा कर तो देखो तुम्हारी जिंदगी सेट हो जाएगी और वो टूल किट लेता है उसके कपड़े भी सिल जाते हैं सारे और एक जो महिला शक्ति है वो भी उसके पास आके खड़ी हो जाती तो ये आता था पर की जरूरत को पूरा कर एशियन स्काई शॉप मनुस्मृति दूसरा अध्याय मनुस्मृति शायद आपको नहीं पता होगी मैं जानता हूं मनुस्मृति नहीं पता है मगर अगर आप अगर आप मनुस्मृति को मना कर देते हैं ना तो आपको फिर यह मानना पड़ेगा कि जो भी व्यक्ति मनुस्मृति को मना करता है उसको यह मानना पड़ेगा कि वह अवैध संतान है किसी की क्योंकि मनुस्मृति में विवाह के नियम है ठीक है अगर वैसे तो राम जी ने
02:25:51:15 माना कृष्ण जी ने माना मनु को मनुस्मृति को मनुस्मृति वो ग्रंथ है जिसमें सबसे पहले वेद की व्याख्या कर दी मनु महाराज ने वेदों की तो मनुस्मृति में दो दूसरे अध्याय के 14वें श्लोक में लिखा हुआ है जहां दो श्रुति आपस में विरोध कर रही हो इसको अगर पढ़ सके तो जहां दो श्रुति आपस में विरोध कर रही हो तो ऐसे में दोनों को ही मानना धर्म है सिंपल अगर आपको हमारा वो मतलब समझ में नहीं आ रहा है विरोधाभास का जो हम बता रहे हैं हमने बारबार बताया कि जैसे कि मैंने जो संसार बनाया है उसके बाहर भी मैं हूं और उसके अंदर भी मैं हूं उसके अंदर जब मैं जाता हूं तो मैं प्रकट और अपक होता हूं उसके लिए भगवान ने कहा तेरे और मेरे कई जन्म हो चुके हैं मगर मैं बाहर से अजन्मा और अविनाशी भी हूं अरे भाई सिंपल बात है जब जीव रूप में आत्मा रूप में प्रत्येक जो जितनी भी वो कहते ना पुण्य आत्माओ क्या कहते हैं पुण्य आत्माओं कहते हैं ना आपका नाम तो नहीं लेते रामपाल जी क्या लेते हैं पुण्य आत्माओ आत्मा आपका वास्तविक स्वरूप आत्मा है जो कभी नष्ट नहीं हो सकता
02:27:06:24 आत्मा की दृष्टि से आप अविनाशी हो और यह मनुष्य की दृष्टि जो कि आपका नकली स्वरूप है यह वास्तविक स्वरूप नहीं है इस दृष्टि से आपके जन्म मरण हो चुके हैं ठीक है ऐसे ही भगवान एक जगह अपना वो व्यवहार स्वरूप बता रहे हैं जिसमें वो अपना आर भाव तिरो भाव बता रहे तेरे और मेरे कई जन्म हो चुके हैं तू नहीं जानता पर मैं जानता हूं यही अंतर है ईश्वर और हम में यही अंतर है वो सर्वज्ञ है वो सब जानता है और हम नहीं जानते इसीलिए हम बंधन में है और इ इसी अज्ञानता के बंधन से छूट जाना बंदी छोड़ छूट ही बंदी महा सुख होई है ना वही परमधाम की प्राप्ति तो ये हमने बता दिया मगर अब ये समझ में नहीं आया है क्योंकि कोई व्यक्ति जो आया प्रश्न करने वो प्रश्न करने नहीं आया वो कुछ जानने नहीं आया है वो तोप चलाने आया है वो तोप जिसमें बारूद नहीं है गोला नहीं है पष्ट संख्या है तो अब जो व्यक्ति समझने नहीं आया है तोप चलाने आया वो क्या कहेगा नहीं यह तो फिर वो एक और कहानी खोल देगा एक और कहानी खोल देगा मगर वह यह नहीं बताएगा चलो मान लिया विरोधाभास है तब भी विरोधाभास में दोनों को मानने को कहा गया पहली बात और अगर मान लो य भी तुम नहीं मानते हो कि
02:28:21:24 यह विरोधाभास वाली जो बात कही जा रही है शास्त्रों में यह मिलावट है चलो मान लिया ओ एक और चीज मान ली तो यह तो बता दो कि काल कौन से जगह से निकल आया यह तो बताना पड़ेगा कि वह श्री कृष्ण ने नहीं बोला श्री कृष्ण से अलग किसी काल ने बो अलग काल भी मैं ही हूं तो ठीक है श्री कृष्ण ही काल है वो अनेक शास्त्रों में विष्णु काल है शिवजी काल है माता भी काल है क्योंकि एक ही सत्ता एक ही परम सत्ता है जो विभिन्न रूपों में प्रकट होती है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश मगर अगर आप कह रहे हो श्री कृष्ण से अलग कोई काल है तो वह अर्थ कहां से निकल रहा है वो बताए श्री कृष्ण से अलग कोई काल अच्छा एक अब यह तो काफी देर हो गया एक टॉपिक बहुत ज्यादा अपेक्षित है वह क्या है कि यह लोग बोलते ये बोला गया है ज्ञान गंगा में तेरा ज्ञान अमृत में बोला गया है 38 नंबर पेज पर और ज्ञान गंगा में कहां बोला गया वो आप बताएंगे कि गीता का 5 प्र ज्ञान जो है व काल ने अपना ज्ञान दे दिया है वो गलत मतलब वो मानने योग्य नहीं है ठीक है तो वह 5 प्रत कौन-कौन से
02:29:37:00 श्लोक है इन्होंने यह नहीं बताया तो यह हमें वो 35 श्लोक बता दे उसके बाद हम अपनी 635 श्लोकों से बात को सिद्ध कर लेंगे बाकी की गीता तो ए इट मानोगे ना बाकी की गीता तो पूरी की पूरी परमात्मा की है गीता मानेंगे चार वेद चार वेद में मैंने आपको बता दिया चारों आप वेद को मानते हैं आप तो सज्जन व्यक्ति दिख रहे हैं आप चार वेद को मानते हैं ऋग्वेद में दूसरे मंडल में अच्छा कवि कार्थ कबीर मानते हैं कि नहीं मानते हैं कवि कार्थ परमात्मा मानते हैं कि नहीं मानते हैं उसम मनुष्य भी लिखा है मित्र भी लिखा सु नहीं आप क्या मानते हो ये बताओ कवि का हम कबीर देव मानते हैं कबीर साब कबीर देव यानी परम परमात्मा ठीक है तो ऋग्वेद के दूसरे मंडल में क्या कहते हैं 23 में सूक्त के पहले मंत्र में लिखा है कवि जो है वो एक नहीं है कवि बहुत सारे हैं तो कवि अगर परमात्मा है तो वो आप जिसको परमात्मा कह रहे हो वो बहुत सारे हैं और उनका बॉस कौन है पता है क्या लिखा है ऋग्वेद
02:30:53:09 दूसरा दूसरा मंडल 2 सूक्त पहला मंत्र उनका बॉस है कवियों का कवि गणपति गणेश अब तीन चीजें हो गई या तो आप कवि का अर्थ परमात्मा मत मानो कबीर मत मानो ठीक है और या फिर आपको यह कहना पड़ेगा कि मैं वेद को नहीं मानता यहां पर बताइए नहीं नहीं मानते क्यों नहीं मानते पर हमारे गुरु जी बोलते आदि गणेश अरे मेरे भाई आदि गणेश है तो आपने कहीं पर लिखा है क्या वेदों में प्रमाण है आदि गणेश भगवान है नहीं वेदों में तो गणेश आप बता रहे ना अरे तो आदि गणेश बोलते हैं ना आपके गुरुदेव आदि गणेश अनासी पर आदि मैं कह रहा हूं आदि गणेश जो है आपको यह बोलना चाहिए ना वेदों में प्रमाण है आदि गणेश भगवान है बोलो बोलो नहीं जी वेद में तो बो जो वेदों में अभी तो बोला आपने हमारे गुरु जी बताते आदि गणेश है अभी बोला ना तो बोलो वेदों में प्रमाण है आदि गणेश भगवान है बोल दो एक बार चलो बोल दो वेद वेदों में तो यही प्रमाण है कबीर साब भगवान ये ये है देखिए ये है डबल स्टैंडर्ड अभी अभी खुद आपने माना कि वो जो बात हो रही
02:32:08:13 है आदि गणेश की हो रही है हमको एक बार यही लाइन सुना दो वेदों में प्रमाण है परमात्मा के तो अनेक नाम मैं तो ठीक है एक बार यह नाम भी बोल दो ना वेदों में प्रमाण है आदि गणेश भगवान है बोल दो में तो प्रमाण वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है जैसे आदि गणेश वेदों में नहीं लिखा है तो मैं कैसे बोलू आप बता रहे अभी तो आपने बोला गणेश गणपति लिखा तो है यह गणेश गणपति यह वाला नहीं ना शंकर वाला नहीं क रहा मैं कह रहा हूं जो वाला आप मानते हो वही वाला बोलो वेदों में प्रमाण है यह वाला नहीं यह वाला नहीं व वाला गणपति भगवान है बोलो भाई जी ये जो जो स्टूडियो में चला रहे हो तो य हमको भी वापस ऐसे जवाब हम कैसे देंगे जो हमारे गुरु जी की आज्ञा में हम रहते हैं वैसे अपनी मनमर्जी जवाब नहीं देना है तो आप आ क्यों रहे हैं आप क्यों अपने गुरुजी के पीठ में चुरा गप रहे हैं आकर नहीं नहीं ऐसी बात नहीं गलत पक्ष हल्का करने क्यों आना चाहिए नहीं आना चाहिए जब आप मजबूत हो तब आना चाहिए जब आप मजबूत हो शास्त्र के बल से तो आना चाहिए अच्छी बात कर रहे हैं जब हमें और तैयार होंगे
02:33:23:16 हमारे भगत भी और बहुत है समय आएगा उसके हिसाब से य खुलासा हो जाएगा मैं तो कह ही रहा हूं कि कोई तो माई का लाल ऐसा हो कोई तो मां का जना ऐसा हो भाई कहां गए वो सब जो कहते हैं कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है एक जगह नहीं दिखा पाए आज तक हर चीज शास्त्र के विरुद्ध वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है कहीं नहीं लिखा और दीक्षा कैसे होती है एडी कहते हो हमसे बड़ा कोई ज्ञानी नहीं है स लोग लाइ टाम आज के लिए नहीं है मरु कीवा गलत थी हो सक है रा टूट जाएगी फिर फिर भूल जाऊंगा यह लोग कहते हैं कि जो गणपति की बात हो रही है वहा वो गणपति नहीं है वो आदि गणपति है आदि गणेश है तो वो बोल दो भाई भाई जिसका नाम स्पष्ट वो बोलो बा की बात बाद
02:34:28:28 करेंगे गीता में तो तीन पुरुष बताए ना उत्तम पुरुष अन्य जो परमात्मा ति उतारते फिर आ गए फिर आ गए अब गीता का प्रमाण मैं दूं अब गीता का प्रमाण मैं दू गीता का प्रमाण मैं दूं अभी आपने कहा था वेदों को मानते हैं आप वेदों को मानते हैं कि नहीं मानते हैं वेद को मानते हैं ना चारों वेद को मानते हैं और पांचवा बो रहा हूं दूसरे अ दूसरे मंडल के पांचवा वेद भी है ना वो तो आपको मालूम है कि नहीं है ले पाच वेद चार वेद बताओ चार वेद को मानते हैं कि नहीं मानते हैं अभी भाई अभी वर्तमान में जो समय हैय मिनट अभी आप अटेंप्ट मत करिए जुड़ने का अभी आप अटेंप्ट मत करिए जुड़ने का अभी यहां फुल है जब यहां से खाली होगा स्टूडियो तब हम लेंगे किसी को अभी अटेंप्ट मत करिए वो ब्लॉक कर दीजिए ना वो जो वो जो लिंक है उसको ब्लॉक कर दीजिए वो बार-बार स्क्रीन पर आ रहा है शो हो रहा है आप ज श्री
02:35:43:28 राम को ज्यादा रा मानते देखिए भाई साब देखिए आपको मैं आपकी आपको आपकी मैं एक समरी बताऊं मैं भी जय श्रीराम को मामा रहता था येता होती साब भाई साहब मैं आपको आपकी एक समरी बताऊ आप जब आए यहां एक भले मानुष बनके आए आपने कहा कि आप लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हैं जागरूकता आ रही हमें भी अच्छा लगा उसके बाद बात शुरू हुई एक मिनट शास्त्र की बात शुरू हुई जब हमने कहा काल कहां लिखा है तो आपने छोटी सी बात कही कि जो है काल तो स्वयं श्री कृष्ण ने स्वयं को कहा है फिर हमने पूछा कि अलग वाला काल कहां लिखता है तो आपके पास उत्तर नहीं आपने स्वयं बताया कि हम वेदों को मानते हैं आपने स्वयं बताया कि हम वेदों को मानते हैं अभी बीच में मत बोलिए भाई साहब अभी बीच में मत बोलिए मुझे पूरा कर ले दीजिए आपने स्वयं बताया कि हम वेदों को मानते हैं फिर मैंने वेदों से रेफरेंस दिया कि जो वेदों के अनुसार कभ एक नहीं है बहुत सारे हैं और कवियों का कवि जो है 2 2 एक में लिखा है कि कवि क नाम जो है वह है कौन गणपति भगवान वाल्मीकि रामायण में जो कवीश्वर है वाल्मीकि रामायण में कवियों
02:36:59:08 का ईश्वर कहा गया है लिखने वाले वाल्मीकि कवियों का ईश्वर अगर व वो रचना कवि पोयम करने वाले को तो सबसे बड़ी पोयम जो आदि आदि काव्य हमारा वो वाल्मीकि रामायण है उसको लिखने वाले वाल्मीकि है और यह बात लिखी है जो किय कवीश्वर है वाल्मीकि यह कहां लिखी है आनंद रामायण में पूर्ण का पूर्ण कान में आनंद रामायण में पूर्ण कांड महात्मा में ये बात लिखी हुई है कि कवीश्वर कौन है अगर वो वाला कवि देखे जिसने काव्य रचना की काव्य रचना करने वाला कवि तो कवियों का ईश्वर है वाल्मीकि जी और अगर सर्वज्ञ सर्व सामर्थ वान कवि देखें सर्वज्ञ सर्व सामर्थ्य वान कवि देखें तो वो है गणपति क्यों कि ये लिखा है गणा नाम ये ऋग्वेद का मंत्र है ठीक है बिल्कुल ऋग्वेद का मंत्र है और इसमें लिखा है कि कवियों का कवि जो है गणपति है अब आप कहते हैं कि सूक्ष्म वेद एक और है ठीक है पहली बात तो ये आएगी कि वो सूक्ष्म वेद आपका कबीर
02:38:14:12 सागर है यह आपको शास्त्र से सिद्ध करना पड़ेगा दूसरी बात ये आती है कि अगर उसमें कुछ और लिखा भी होगा तो क्या आप इसको नहीं मानोगे तो क्या आप इसको नहीं मानोगे अगर उसम कुछ और लिखा भी है तो क्या आप उसको नहीं मानोगे मानेंगे नहीं स्टेप वाइज सब मानेंगे क्यों नहीं मानेंगे तो आपने मान लिया आदि गणेश भगवान है आदि गणेश भगवान है पूर्ण परमात्मा आदि गणेश बता रहे अविनाशी तो बोलो बोलो वेदों में प्रमाण है आदि गणेश भगवान है बोल दो ऐसे नहीं बोलेंगे जब हमारे ठीक है भाई साहब ठीक है आप पूछ के आइए गुरुजी से जय श्री
02:38:58:22 राम कृष्ण कुमार जी को हटा दो इन्होने पाखंडी बोल के अपना वह खत्म कर दिया है मामला शिवजी आ गिरी अपना चेहरा दिखाए अब गोविंद जी थोड़ी देर आप करिएगा क्योंकि मैं थोड़ा सा वो होने लगता हूं और इनको सिर्फ यह बात पूछनी है काल बताइए आप क्या बताओ बताइए भैया भाई साहब आप चेहरा दिखाइए पहले भाई साहब मैं काल के बारे में थोड़ी जानकारी चेहरा दिखाए पहले निकल ग चलिए गए
02:39:47:19 नारायण श्री राम म भाई मुझे वो बहुत हंसी वाली बात आती है कि वो जो मेरे मित्र थे बचपन में वो रिझाने के लिए क्या करते थे हां एक करोड़ रुपए ट्रांसफर कर रहा हूं और शर्ट बड़ी हुई है बिल्कुल पर पर दिक्कत ये है ना मेरी मेरी शर्ट भी ठीक है और मैं 000 देने को भी तैयार हूं तब भी कोई नहीं ले रहा मेरे से देखिए मेरी किस्मत कितनी बुरी है चलिए सर जी आप हेलो आवाज श्रीराम शिवजी राम राम आदि राम हा भैया बोलिए बोलिए काल काल काल ने बोला है श्री कृष्ण ने नहीं बोला है वो सिद्ध करिए
02:40:40:24 बसौन है रहता कैसा है ये प्रभु जी काल कौन है कहां रहता कैसा है ये किस ग्रंथ से है यह काल की स्टोरी है सारी की सारी कब पैदा हुआ कृष्ण जी ने गीता बोली आपके आपके हिसाब से बराबर है मेरे हिसाब से वो तो हम करेंगे ना चर्चा ये काल है प्रश् मछ आप अपनी बात बताइए गीता का ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने नहीं काल ने दिया है यह कैसे सिद्ध होगा बताओ देख वेदों का ज्ञान किसने दिया बताओ मेरे को वेदों का ज्ञान अप है उपनिषद दो च वे स सवाल के सवाल के जवाब में सवाल नहीं आपके पास अगर है सिद्ध करने को या यह सवाल है तो वो बताओ जो सिद्ध करने को है महाभारत में जब अर्जुन ने कृष्ण जी को पूछा था तो मुझे वो ज्ञान जो गीता जी ज्ञान आपने दिया फिर से मुझे बता दो तो कृष्णा जी ने क्यों नहीं दिया ज्ञान बोले मुझे क्यों नहीं बताया दिया ना दिया तो शायद आपने वो प्रसंग अच्छे से पढ़ नहीं होगा उन्होने यह कहा है कि तब मैं योग अवस्था में स्थित था ठीक है और योगेश्वर किसको कहा गया है योग का ईश्वर
02:41:55:25 कौन है बताइ गीता शिवांश भाई मुझे जो क्वेश्चन पूछ रहे हैं उनको अभी याद है लेकिन मैं अभी कल बात करूंगा तो मुझे क्यों नहीं बता सकते कि मैंने आपको क्या पूछ ठीक इसका उत्तर दे दू आप यह बताइए कि जब रामपाल यह बोलते हैं मैं कुत्ता हूं तो भूल जाते हैं कि मैं इंसान भी हूं अरे हम तो सब य भगवान भगवान जब वो बोलते है कि मैं दो कौड़ी का हूं एक मिनट जब वो बोलते हैं कि मैं दो कौड़ी का हूं तो क्या भूल जाते हैं कि मैं जो है तत्वदर्शी हूं उनके मर्जी से कहां बोल रहे उनके मर्जी से नहीं बोल रहे कुछ वो जो शास्त्र मिलेगा वही बता रहे है ना मैं आपको पूछ रहा हूं रामपाल जब य बोलते हैं कि मैं कुत्ता हूं तो हम क्या माने वोह कुत्ता है या हम ये माने कि वोह तत्वदर्शी है बताइए तत्व संत है तो फिर वोय जो बोल रहे हैं कुत्ता उसको क्या माने तत्व है सारे भाई साब मैंने आपसे पूछा मैंने आपसे पूछा कि तत्वदर्शी जो है जो आपके रामपाल बोलते हैं मैं कुत्ता हूं तो हम यह माने कि वो कुत्ते हैं या फिर हम यह माने कि वह तत्वदर्शी है आप बताइए देखिए गीता अध्याय 32 में बोला है कि देखो देखो अभी अभी जो बात चल रही
02:43:11:00 है वो बताओ जो उन्होंने अपने को कुत्ता कहा वो कुत्ता मानते हो तत्वदर्शी मानते हो ये बताओ पहले अरे वो तो भगवान के लिए बोला मैं तो काम कुत्ता माने कि नहीं माने अब तो आप तो बोलते कबीर साहब भी कुत्ता थे ऐसे बात कर रहे आप तो मैं अभी पूछ रहा हूं रामपाल जी अपने को कुत्ता बोलते हैं उनको कुत्ता माने कि तत्वदर्शी माने हम बहुत बहुत हम रेस्पेक्ट करते हैं उनका मगर आप लोग बताइए लॉजिक जो दे रहे हो करते आप उनको नीचे दिखाने के लिए काम कर रहे खाली बस इतना कर भाई साहब मैंने आपसे प्रश्न पूछा है आपने प्रश्न पर प्रश्न कर दिया फिर भी मैंने आपको लॉजिकल उत्तर दिया आपको ये मानना पड़ेगा आपको य मान पड़गा वो भगवान की लीला है भगवान ने बोल दिया ऐसे ही भगवान की लीला है उन्होंने बोल दिया वस्तुत तत्व आपके लिए भगवान है ऐसे ही तत्व श्री कृष्ण जी ने वह ज्ञान दिया
02:44:09:21 मगर बाद में क रहा दुर्जन तोष न्याय से मान लिया कि उनको याद नहीं था अब आप मुझे बता दीजिए श्री कृष्ण के याद ना होने से ये कहां लिखा है कि वो ज्ञान काल ने दिया बस इसपे पकड़ो इनको ये कुछ भी बताए उसका अर्थ काल पूछो काल कहां से आया मैंने आपके भाई साहब भाई साहब देखिए आप ये आरोप लगाते कि मैं म्यूट करता हूं म्यूट मुझे इसलिए करना पड़ता है कि आप विषय पर बात नहीं करते आप विषय पर बात नहीं करेंगे मुझे आपको हटाना पड़ेगा मैं आपसे पूछ रहा हूं अगर श्री कृष्ण भगवान ने वो ज्ञान नहीं दिया वो भूल गए ठीक है मगर उसका अर्थ यह कहां से आया कि वो ज्ञान जो है श्री कृष्ण से अलग किसी काल ने दिया है बताइए श्री कृष्ण अर्जुन ने पूछा था आप मुझे फिर से दे दो अर्जुन कृष्ण जी बोले कि मुझे अब मैं नहीं दे सकता भाई साहब आपसे मैं आपकी बात को सुन लिया और मैंने उसका लॉजिकल उत्तर भी दे दिया कि आप आपके जो व वो है वो कहते हैं मैं कुत्ता हूं मैं दो कौड़ी का हूं ठीक है मगर फिर भी आप उनको फिर भी आप उनको दो कोड़ी का कुत्ता नहीं मानते आप उनको तत्वदर्शी और भगवान मानते हैं इसी प्रकार से लीला पूर्वक श्री कृष्ण ने यह बात कही कि मुझे वो ज्ञान उस समय
02:45:24:24 में योग अवस्था में था और वो ज्ञान मैंने दिया अब नहीं है लीला पूर्वक ठीक है ये हमने आंसर दे दिया एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट अब जब मुझे मैं आंसर दे रहा हूं तो देने दीजिए अब क्या है कि आपको यह आंसर पसंद नहीं आया ठीक है आप हमें यह बताइए अगर वो श्री कृष्ण भगवान ने ऐसा कह दिया कि वह ज्ञान मैं भूल गया हूं या मैं मुझे स्मरण नहीं है इसका अर्थ यह कहां से आया कि गीता में जो ज्ञान है वह देने वाला काल कोई अलग है श्री कृष्ण से बताओ मेरी बात सुनि आप मैं क्या बात करर आपसे उसका आंसर गीता में ही है क्या है शलोक क्रमांक बता शलोक क्रमांक बो शलोक कमा देखना पड़ेगा मेरे पास गीता है उसम बोला काल काल अरे तो वो तो वो तो कृष्ण बोल रहे हैं ना कृष्ण ही तो बोल रहे हैं ना मैं काल हूं कृष्ण की बात आपको कौन सी माननी है मैं भूल गया कि मैं काल हूं आप यह बताइए कि श्री कृष्ण से अलग कोई काल है यह कहां लिखा है श्री कृष्ण से अलग यह गीता में कहा लिखा है श्री कृष्ण जी
02:46:40:02 अगर वोह ज्ञान देते तो अर्जुन जब पूछता था तोय क लिखा है जो आप तर्क दे रहे हैं श्री कृष्ण जी अगर वो ज्ञान देते तो अगर अर्जुन जब पूछता तोय ना कहते कि मैं भूल गया यह कहां लिखा है कि इसका अर्थ होगा काल यह कहां लिखा है गीता मिली क काल हूं भाई साहब अरे भाई साहब आपने अभी एक तर्क दिया श्री कृष्ण जी अगर वो ज्ञान देते तो फिर जब अर्जुन उनसे पूछता तो वो यह ना कहते हालांकि इसका उत्तर है कि रामपाल दास जी अगर तत्वदर्शी है तो अपने आप को कुत्ता नहीं कहेंगे ठीक है मगर मैं आपकी बात मान रहा हूं कि श्री कृष्ण भगवान जी अगर वो ज्ञान देते तो अर्जुन से ये ना कहते कि अब मैं वो ज्ञान नहीं दे सकता जबकि उन्होंने वहां यह कहा है कि वहां पर भी जहां आप बात कह रहे हो कि मैं वो ज्ञान नहीं दे सकता वहां प उन्होंने ये कहा मैंने तुझे वो ज्ञान दिया था वहां ये नहीं कहा था कि किसी और ने दिया वहां उन्होंने महाभारत में ये नहीं कहा किसी और ने दिया एक मिनट मेरी बात पूरी हो जाने दीजिए मेरी बात पूरी हो जाने दीजिए वहां उन्होंने ये नहीं कहा कि किसी और ने दिया उन्होंने बताया मैंने तुझे कैसे दिया पर यह स्वीकार किया मैंने ही दिया ये तो नहीं कहा किसी और ने दिया आप मुझे बता दो श्री कृष्ण आप मुझे बता दो श्री कृष्ण से अलग कोई काल ने वह ज्ञान दिया यह कहां लिखा है शास्त्र में
02:47:55:27 बस अभी आप थोड़ा चुप बैठ अगर आप शलोक क्रमांक बोलेंगे शास्त्र का नाम बोलेंगे तो हम लोग चलेंगे आगे वरना हम आपको हटाना पड़ेगा आप हमें लोक क्रमांक शास्त्र का नाम बोलिए आपने कमेंट किया था इसके जिसने मा का वापस आएंगे इसलिए मैं वापस आया आपने भैया इनको हटा दो हटा दो इनको भाई साहब इनको इसीलिए आना था इनके मतलब इनको ये दिखाने आना हैता कृप करके कृपया करके मेरे को दो मिनट सुनिए मैं इसका उत्तर दे देता हूं संक्षेप में ठीक है पहले तो भगवान श्री कलिए आ सकते हैं मगर आक के अपनी बात को सिद्ध नहीं कर सकते यह ये बता रहे हैं मैंने मां का दूध पिया इस लिए आ सकता हूं मगर अपनी बात के लिए प्रूफ मेरे पास नहीं है हमने कहा था कि कोई तो माई का लाल होगा जो आकर के यह जो बात है जो उनका पक्ष है रामपाल दास जी का उसको सिद्ध करेगा आप शास्त्र से सिद्ध कर दो कि वो गीता काल ने बोली है और जहां का आप रेफरेंस दे रहे हो वो वहां पर श्री कृष्ण स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि वो ज्ञान मैंने तुझे दिया था वो कह रहे मैंने दिया था तब तो उनके अंदर काल नहीं है इनके अनुसार
02:49:11:15 आप मुझे वो बता दीजिए आ पर मेरे पास पूरी महाभारत है आप मुझे वो बताइए उसका रेफरेंस उसका रेफरेंस खोलिए आप लास्ट वाला जो उसका वो है अंग है महाभारत का षष्ठ खंड छठा खंड खोलिए उसमें ही उत्तर छुपा हुआ है महाभारत के
02:49:47:04 अंतर्गत महा भ छवा खंड इसके अंदर में आपको बता रहा हूं एक सेकंड पर्व आपको बता देता हूं पहले ठीक अश्वमेध पर्व खोलिए अश्वमेध पर्व खोलिए पेज नंबर मेरे यहां है 793 एक मिनट आया मिल जागा आपका सम वाला है नहीं नहीं मेरा पूरा वारा वा श्लोक श्लोक सहित श्लोक सहित श्लोक सहित हा फिर आप ही बता दीजिए कोई दिक्कत नहीं हा फिर मैं बता रहा हूं ध्यान से देखिए यहां पर यहां पर अर्जुन पूछ रहा है क्या कह रहे हैं ध्यान से सुनिए एक बार रेफरेंस दे दीजिए मैंने स्क्रीन शेयर किया है मैं बाकी लोग भी देख लेंगे कौन सा है हा हा इसको थोड़ा जूम करिए और इसमें से अश्वमेध पर्व
02:50:43:08 खोलिए अश्व मेदान पर्व इसी के अंदर अश्वमेध पर्व आएगा और इसी के अंतर्गत अनु गीता पर्व लिखा होगा अनु गीता पर्व भी लिखा होगा साथ में आगे चलते रहिए अनु खोलिए इसका प्रथम अध्याय खोलिए प्रथम अध्याय य ठीक है अनु गीता पर्व ठीक है एक
02:51:17:04 सेकंड मैं पहुच रहा वहा पर ये आ गया है मेरे पास इसका प्रथम पर्व खोल लि ना आपने अध मैं बता रहा इसम य सवे अध्याय से शुरू होता है इसके अंदर सवा अध्याय मैंने प्रथम अध्याय बोलती गलती से वही ला अध्याय खोलिए बोलिए श्लोक नंबर तो यहीं से ये शुरू होता है मैं आपको बता देता हूं कहां पर है इसका आपने श्लोक नंबर खोलना है वासुदेव उवाच से ठीक है यहां पर भगवान श्री कृष्ण बता रहे
02:52:04:04 हैं नौ नंबर श्लोक से नौ नंबर श्लोक हा श्रा वाला यही है शलोक हा पढ़ि ये है ना अर्जुन उस समय तु अत्यंत गोपनीय हा तो मैं पढ़ता हूं एक बार फिर आप भी पढ़िए देखिए पढ़िए पढ़िए आप भी पढ़िए कहने लगे अर्जुन उस समय मैंने तुम्हें अत्यंत गोपनीय ज्ञान का श्रवण करवाया था मैंने पहली बात तो क्लियर हो गई आपकी ठीक है अपने स्वरूप भूत सनातन पुरुषोत्तम तत्व का परिचय दिया था तो जो परमात्मा तत्व वहां पर बताया जा रहा है वो श्री कृष्ण का है ठीक है और शुक्ल कृष्ण गति का निरूपण करते हुए संपूर्ण नित्य लोकों का भी वर्णन किया था किंतु तुमने जो अपनी नासमझी के कारण उपदेश को याद नहीं रखा यह मुझे बहुत अप्रिय है उन बातों का पूरा पूरा स्मरण होना संभव नहीं जान पता ध्यान से सुनिए अभी आगे है ठीक है निश्चय ही तुम बड़े श्रद्धा हीन हो तुम्हारी बुद्धि मंद जान पड़ती है धनंजय अब मैं उस उपदेश को जो का तो नहीं कह सकता सुनिए क्यों सुनिए क्यों भगवत गीता का अध्याय नंबर 18 है श्लोक नंबर सत में इसकी पूरी व्याख्या है उन्होंने क्यों नहीं कहा इसको भगवत गीता अध्याय 18 67
02:53:19:15 नंबर श्लोक में क्या कह रहे हैं सुनिए इदम ते ना अपत काय ना अभय कदाच न कदाच न अ भक्ता है ये तुझे ये गीत रूप गीता रूप रहस्यमय उपदेश किसी भी काल में ना तो तप से रहित मनुष्यों से कहना चाहिए ना भक्ति से रहित और ना ही बिना सुनने की इच्छा वाले में या उससे या दोष दृष्टि रखता है उससे कभी नहीं कहना चाहिए यानी कि जो श्रद्धा ना रखता हो तो यहां पर तो पहले ही बताया गया इसीलिए तो कह रहे हैं कि तुम श्रद्धा हीन हो इसलिए मैं तुम्हें उपदेश नहीं दे सकता और सबसे अच्छी बात तो ये सबसे अच्छी बात तो यह है यहां पर बार-बार वो कह रहे मैंने कहा है मैंने ही कहा है ये देखिए दोबारा आ गया उस समय योग युक्त होकर मैंने ही वो बात कही थी लो भैया फलो फ्लोकी जी फटाफट फटाफट सारे प्रमाण खोल देते हैं स्क्रीन
02:54:11:13 पर उस समय योग युक्त होकर मैंने परमात्मा तत्व का वर्णन किया था अब किसने किया वर्णन श्री मि प्रश्न पूछ भैया यहां तो काल नहीं था इनके अंदर हेलो शिवजी गिरी जी हा एक प्रश्न एक छोटा सा चीज रह गई आपने पढ़ा ना यहां पे लेकिन एक चीज छोटी सी आपने स्किप कर दि है उस समय योग युक्त होकर मैंने ठीक है परमात्मा तत्व का वर्णन किया था उस विषय का ज्ञान कराने के लिए प्राचीन इतिहास वण उनको यदि प्राचीन इतिहास भी सारा का सारा याद था ठीक है तो उनको गीता तो भूलने का सवाल ही पैदा उन्होंने तो कहा उस वक्त मैं योग युक्त था अब आप अपनी बात रखिए अब मैं ये पूछ रहा हूं भाई आपके हिसाब से यहां पर तो काल नहीं बोल रहा है उनके अंदर से काली बोल रहा है परमात्मा मतलब परमात्मा की जानकारी दी अर पूछ रहा हूं भाई साहब आप अब बदल रहे हो बात को बात चल रही है काल ने बोला कि नहीं बोला यहां पे बोल रहे है कि मैंने बोला यहां प श्री कृष्ण बोल रहे हैं मैंने बोला अब काल है उनके अंदर कि नहीं है ये बताइए इस समय काल है कि नहीं और काल है तो आपका कहना है कि वो भूल नहीं सकता है वो तो यहां पर भूल कह रहा है सुनि
02:55:26:22 कृष्ण जी कभी ऐसा नहीं बोले कि मैं काल हूं कभी नहीं बोलते थे गीता अरे मेरे भाई यहां प वो बोल रहे हैं मैंने बोला जहां से आप यह उदाहरण दे रहे हो कि अर्जुन अर्जुन के पूछने पर उन्होंने कहा कि अब मैं वो ज्ञान तुझे नहीं दे सकता तो उन्होंने कहा कि वो मैंने बोला था वो उन्होंने एडमिट किया मैंने वो ज्ञान बोला था आप मानते हो मतलब जैसा के तैसा क्यों नहीं दे सकते बाप वापस वो अरे भाई मैं ये पूछ रहा हूं उन्होंने ये कहा ना यहां पे कि मैंने बोला था
02:56:00:28 वो फिर क्यों बो नहीं आएगा समझ में भैया इनको समझ में नहीं आएगा इनको कुछ भी कर दो इनको समझ में नहीं आएगा और मैं तो आपसे ये पूछ रहा हूं कि यह सब कुछ गलत है आप मुझे ये बता दो कि अगर श्री कृष्ण अगर शी भल ग अगर श्री कृष्ण दोबारा वो ज्ञान नहीं दे सकते भाई साहब सु सुना अगर श्री कृष्ण अगर के ऊपर कोई परमात्मा है अब आप परमात्मा पर आ गए बात आपसे पूछी जा रही है अगर आप अगर श्री कृष्ण यहां पर वो दवारा नहीं दे सकते तो इसका अर्थ यह है कि वहां पर ने दिया यह कहां पर लिखा है पहली बात दूसरी बात यदि वह भूल सकता है तो यहां पर भी आपको मानना पड़ेगा क्योंकि श्री कृष्ण कह रहे हैं कि वह ज्ञान मैंने तुझे दिया था मैंने तुझे दिया
02:57:08:07 था कबीर सागर मिलावट कैसे हुई कबीर गरीब सागर नहीं हुई मिलावट जैसे के तैसे कबीर ञान क्यों नहीं दिया गया यह कैसे भूल गए भाई बताइए अब आपके पास कोई शास्त्र का प्रमाण है तो बता दीजिए कि गीता का ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं काल ने बोला है देखो गीता अध्याय 11 3 32 में देखिए वहां प लिखा है मैं काल हूं अरे भाई मैं काल हूं य भी तो कह रहे मैंने कहा श्री कृष्ण ही काल है आप यह बताइए श्री कृष्ण से श्री कृष्ण से अलग काल ने दिया वो बताइए श्री क बोलेंगे श्री कृष्ण से अलग किसी काल ने दिया वो ज्ञान वो बताइए अगर हमारा भगवान हम काल बोलता है मैं सब लोग ख लोग हम लोग भिर चुके आपकी बात आपने बोल दी हमारी बात हमने बोल दी अब जनता डिसाइड कर ले कौन सही कह रहा था कौन गलत कह रहा था आप अब जा सकते ठीक है ठीक है आपके समझ में नहीं आएगा
02:58:23:08 मेरा ध्यान आप यह इसलिए आते हैं कि यह यह बोल के जा सके आपकी समझ में नहीं आएगा यह वो सब बोल के जा सके इसलिए आते हैं इनके पास और कुछ नहीं है बोलने को ये अंत में यह कहना चाहते हैं ठीक है एक चीज भया आपकी समझ में नहीं आएगा तो फिर मैं कह रहा हूं भाई कोई आ जाए यहां पर जो ये बता दे कि भगवत गीता का ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं काल ने दिया है जहां का आप रेफरेंस दे रहे हो वहां पर तो लिखा है श्री कृष्ण स्वयं बोल रहे हैं मैंने ही दिया था बात ही खत्म और कुछ बात ही मत करो वहां उसी लाइन में जिस श्लोक का यह उदाहरण ले रहे हैं उसी श्लोक में लिखा है कि मैंने वो ज्ञान तुझे ऐसे वैसे कैसे भी दिया और कुछ बात जैसे ही हम लोग ज्यादा चैप्टर खोल लेंगे ना तो एक देखेंगे कि मैं हाहा पर विषय को बदल सकता हूं जैसे इन्होने परमात्मा का देख लिया अब अलग परमात्मा इसलिए हमें ध्यान रखना होगा इनको विषय बदलने का मौका ना दे
02:59:33:15 इसमें भाई जी देखो श्रीम श्रीमद भागवत पुराण में द्वितीय स्कंद के सवे अध्याय में स्कंद के सवे अध्याय में लास्ट बार ज जब गीता का उपदेश दिया था श्री कृष्ण भगवान जी ने वो उद्धव जी को दिया था तो छठे श्लोक में देखोगे उसमें लिख रहे हैं कि प्रिय उद्धव तुम प्रश्न का मर्म समझने वालो में शिरोमणि
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03:00:01:00 हो जिस समय कुरुक्षेत्र में कौरव पांडव का युद्ध छिड़ा हुआ था उस समय शत्रुओं से युद्ध के लिए तत्पर अर्जुन मुझसे यही प्रश्न किया
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03:00:11:28 था गीता का ज्ञान इधर भी दिया किसको उद्धव जी को श्रीमन भागवत पुराण द्वितीय खंड स्कंद 11 और सवा अध्याय इसका प्रमाण तो आपको कुर्म पुराण में भी मिल जाएगा ईश्वर गीता उसमें वो भी मिल जाएगा वहां पर क्योंकि वहां पर लिखा है गुरु परंपरा से ये भगवान श्री कृष्ण को प्राप्त हुआ और उनके द्वारा अर्जुन को प्राप्त हुआ यहां प क आप कहां की बात कर रहे हैं भैया वो श्रीमद् भागवत में श्रीमद भागवत पुराण में द्वितीय द्वितीय खंड में 11वां स्कंद है और सवा अध्याय भगवान की विभूतियों का वर्णन
03:00:55:12 पाठ उद्धव जी को ज्ञान दे रहे हैं उपदेश दे रहे हैं लास्ट बार जब दिया था गीता का ज्ञान दिया श्रीमद भागवत द्वितीय द्वितीय खंड 11वां स्कंद सवा अध्याय द्वितीय खंड वो 11वां स्कंद काफी है सवा अध्याय ठीक है अध भगवान की विभूतियों का वर्णन ठीक है एक से लेकर छ तक के तुम आप पढ़ लीजिए जो श्लोक है शुरू से एक
03:01:30:12 मिनट एक मिनट इसमें भी अपने विभूतियों का वर्णन कर रहे हैं ये कि मैं ही काल हूं य भी कह रहे हैं [संगीत] गवा स्कंद आगे बोलते हैं सावा स्वा अध्याय सवा अध्याय सवा अध्याय लोकी जी की सर्वे बी फस्ट है भाई सारे ग्रंथ आ जाते स्क्रन
03:02:15:25 पर उद्धव जी पूछ रहे हैं श्री कष्ण जी से हा उद्धव वाज ठीक है हे भगवान आप साक्षात पर परम ब्रह्म है ना आपका आद है ना अंत है आप आवरण मैं पढ़ता हूं ना आपका आदि है ना अंत है रहित है अद्वितीय है तत्व है समस्त प्राणियों और पदार्थों की उत्पत्ति स्थिति रक्षा और प्रलय के कारण भी आप ही है लोगों ने अपने मन इंद्रियों को वश में नहीं किया ब्रह्म पुरुष भी करते हैं बड़े बड़े अंतरात्मा है अपने आप प्राणी माया से ऐसे मोहित हो रहे हैं अचिंत फिर श्री कृष्ण ने कहा भगवान ने कहा प्रिय उद्धव तुम प्रश्न का मर्म समझने वालो में
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03:03:00:14 शिरोमणि हो जिस समय कुरुक्षेत्र में मैं कौरव पांडवों का युद्ध छिड़ा हुआ था उस समय शत्रुओं से युद्ध के लिए तत्पर अर्जुन ने
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03:03:11:16 मुझ से यही प्रश्न किया था अब लो भाई श्री कृष्ण ने कहा श्री कृष्ण ने कहा जो विभूतियां गीता में बता रखी वही विभूति य भी बता रखी है मैं ही काल कह रहे देखो आगे हा अर्जुन के मन में ऐसी धारणा हुई सब युक्तियां मैं मारने वाला हूं उस समय अर्जुन से मुझ यही प्रश्न किया था जो तुम कर रहे हो मैं ही इन समस्त प्राणियों और पदार्थों के रूप में हूं इनकी उत्पत्ति स्थिति प्रलय का कारण भी हूं गतिशील पदार्थों में मैं गति हूं अपने अधीन करने वालों में मैं काल हूं क्या बात है वही काल
03:03:55:15 है काल रू एक और रेफरेंस आ रहा है अग्नि पुराण से तब तक आप अपनी बात जारी रखिए अग्नि पुराण से एक और रेफरेंस दे रहा हूं आप अपनी बात जान जारी रखिए अब आगे तो उन्होंने बहुत सी बातें फिर कही है एकादश उद्र में नीली लोहित राम का रुद्र हूं बहुत बहुत चीज है पूरी गीता बता रखी है उनको जो योग है उ योग के बारे में बता रखा है यह ध्यान योग ये सांख योग ये भक्ति योग सब चीज बता रखा जी जी अच्छा इसमें जो समय काल है वोह महाभारत घटित हो चुकी है है ना तो फिर अब ये भी बात खत्म हो गई कि उनको स्मरण नहीं था बिल्कुल उनको स्मरण नहीं था वो बात भी चली गई अब यहां पर बो राजा राय जी
03:04:49:02 सार नाम का अध्याय है अग्नि पुराण के अंतिम अध्याय में गीता सार नाम काम अध्याय है एक मिनट य प्रमाण देख ले जरा अग्नि पुराण का एक मिनट गीता सार 800 51 37 ठीक क्लियर लिखा सब कुछ बक बकुल मैं आ रहा कह रहा हूं पेज
03:05:24:27 नंबर 8 52 43 आ गया 47 ये रहा गीता सार अग्नि पुराण अग्निदेव ने कहा अब मैं गीता का सार बतला रहा हूं थोड़ा बड़ा कर देता हूं अब य यहां से देखिए अब मैं गीता का सार बतला रहा हूं जो गीता का सर्वोत्तम अंश है इससे भोग तथा मो करने वाली गीता शास्त्र का उपदेश पूर्व काल में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिया यही है ना जिसमें श्री भगवान भगवान श्री कृष्ण ने बोला हे अर्जुन किसी मरे अथवा जीवित मनुष्य के विषय में शोक नहीं करना चाहिए शरीर धारी आत्मा अजन्मा हा अजन्मा अजर अमर एवं अभेद है ठीक फिर इसके बाद अत उसके लिए शोक त्याग देना चाहिए विषयों का चिंतन
03:06:35:12 करने वाले पुरुष के की विषयों में आसक्ति हो जाती है तो ये तो इसमें क्या बता रहे हैं गोविंद जी आप ये लिखा तो है भगवान श्री क ने अर्जुन को य ज्ञान दिया था बता तो रहे हैं य पर स्पष्टता हा हा बता वो तो स्पष्ट तो यही लिख दिया ना दूसरे लोक के लोक के दूसरी लाइन में लिख दिया वाले ये देखिए मोक्ष प्रदान करने वाले गीता शास्त्र का उपदेश पूर्व काल में भगवान श्री कृष्ण ने ने अर्जुन को दिया लिखा हुआ है य पर य तो पढ़ रहा हूं आगे प्रमाण एक और प्रमाण हमारे पास आ गया ये देखिए पुराण में जाना है तो वहा भी चले जाइए पूर्म पुराण
03:07:21:27 मैंने ट किया है महाभारत का प्रमाण जिसम भीष्म पिता से कह रहे हैं श्री कृष्ण ही परमेश्वर है और काल है ने मार्क करके भेजा दिखा वो तो भरे पड़े हैं व तो भरे पड़े बहुत सारा है अच्छ अ देखिए जि विग नाम का है कौन सा है आपको कि उसके अंतर्गत यह है कौन सा है कौन सा है कुण पुराण का वो दीजिए मुझे रेफरेंस ऊपरी ऊपरी विभाग नाम से एक ना होगा यहां पर विग ठीक ठीक ठीक समझ गया समझ समझ गया ऊपरी विभाग ठीक है आगे इसके अंदर आ जाइए गवे अध्याय में शद 11 योग योग की जो अष्टांग योग के बारे में बता रहे हैं हा हा हाही वही वही आइए ठीक है 26 ये लीजिए आ गया मैं 286 हैय
03:08:37:13 कोई बात नहीं कोई बात नहीं 2686 तो होता है हा हा बताइए इसमें आएंगे हम मैं एक मिनट आपको पढ़ के सुना देता हूं अंत में है ये पेज नंबर बता दीजिए मुझे मैं वही बता रहा दो मिनट देय
03:09:09:01 नम इसमें इसमें क्या है क्या बता रहे हैं हा मैं बता रहा हूं इसके अंतर्गत आप आएंगे पेज नंबर 26 में ठीक है यहां पर 31 वा नंबर से आप पढ़ना शुरू करिए य आप कहे तो मैं पढ़ देता हूं 131 से 131 ना क्षमा करिएगा 125 से पढ़िए 125 से 125 यानी वे वे मुनि गण भी देवों के आदि देवेश्वर महेश्वर को भूता समस्त प्रपंच के मूल कारण नारायण को नमस्कार अपने स्थानों की ओर चले गए महामुनि भगवान सनत कुमार ने सवर्त को ईश्वरीय ज्ञान यानी शिव का ज्ञान ज्ञान का उपदेश प्रदान किया उन्होंने भी वह ज्ञान सत्यव्रत को दिया योगेंद्र सनन ने महर्षि पुलह को प्रजापति पुल ने गौतम को अच्छा य गुरु परंपरा बता रहे हैं ईश्वरीय ज्ञान प्रदान किया अंगिरा ने वेदों के ज्ञाता भ भरद्वाज को और कपिल ने जयगी स्वय तथा पंच शिख को
03:10:24:03 वह ज्ञान दिया सभी श को वह ज्ञान दिया सभी तत्वों के दृष्टा मेरे पिता पराशर ने ने भी वह परम ज्ञान सनक से प्राप्त किया और उनसे वाल्मीकि ने प्राप्त किया प्राचीन काल में अर्धनारीश्वर भगवान शंकर के अंश से उत्पन्न महायोगी वामदेव जी ने मुझसे कहा जो साक्षात विना कधी रुद्र स्वरूप है तो इसके आगे पढ़ हा देवकी के पुत्र हरि भगवान नारायण ने भी देवकी के पुत्र यानी भगवान श्री कृष्ण की बात हो रही है यहां पर भगवान हरि नारायण ने भी स्वयं साक्षात अर्जुन का य उत्तम ज्ञान प्रदान किया व सेम ज्ञान की बात हो रही है जो जो कैसे कैसे उस ज्ञान को दिया जा रहा है जब मैंने वामदेव रुद्र से इस श्रेष्ठ ज्ञान को प्राप्त किया वही ज्ञान ये वही ज्ञान की बात हो रही है जो भगवान श्री कृष्ण ने ने नारायण ने स्वयं साक्षात अर्जुन को जो ज्ञान प्रदान किया वही ज्ञान फिर वामदेव रुद्र भगवान से उन्होंने न्हों प्राप्त किया ये किसकी बात बता रहे हैं ये ये किसका हुआ चा है ये कौन बता भगवान ये सनत कुमार बता रहे हैं भगवान श्री शिव ने कहते हैं कि प्रथम ता गीता का उपदेश
03:11:39:03 दिया ईश्वर गीता इसका नाम है और यही उपदेश यही क्योंकि चार तो मुख्य योग है इसी का उपदेश भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिया दिया दिया हा ये है ठीक है य भी रेफरेंस आ गया और बता लास्ट मेरा प्रमाण है एक लास्ट मेरा प्रमाण है भग के अंतर्गत पवा अध्याय और पवा शलोक है भगवत गीता के [संगीत] अंतर्गत हा बताइए पवा अध्याय पवा अध्याय पवा शलोक खो लिया अध्याय खोल लि खोया मैं ही
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03:12:18:16 सब प्राणियों के हृदय में अंतर्यामी रूप से स्थित हूं मुझसे ही स्मृति ज्ञान और अपोहन होता है सब वेदों द्वारा मैं ही जानने योग्य हूं तथा वेदांत का कर्ता और वेदों को
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03:12:33:14 जानने वाला भी मैं ही हूं अपोहन का अर्थ क्या है मैं आप बताएंगे मे को थोड़ साहन अपोहन का अर्थ अपोहन अपोहन का अर्थ है विचार के द्वारा बुद्धि में रहने वाले संशय यानी या एक तरीके से माया मोह माया मोह हा मैं भी पढ़ देता हूं को हने का नाम एक मैंने भेजा माया मोह को हटाने का नाम अपोहन है ये लिखा हुआ है ना यहां पर देखिए य देखि अपोहन का अर्थ यानी अपोहन क्या है अपन नंबर दो है ना इसका अर्थ नीचे लिखा हुआ है विचार के द्वारा बुद्धि में रहने वाले संशय विपर्यय आदि दोषों का को हटाने का नाम अपोन है अपन तो या अब अगर ये काल कह रहे हैं अगर यहां पर काल है तो यहां पर काल के बारे में भी ये कह रहे हैं काल के भाई सर्व वेदों का तात्पर्य परमेश्वर को जानने का है इसलिए सब वेदों द्वारा जानने योग्य मैं ही हूं वेदों को जानने वाला भी मैं ही हूं वेदों द्वारा जानने वाला भी मैं ही हूं अब बताओ शिवा
03:13:50:03 भैया प वो मैंने हा वो दिखा दीजिए जरा मैंने ट किया है आपको अच्छा मुझे किया क्या आपको नहीं आपको नहीं उनको दिया है भीष्म पितामह कह रहे पांडवों से भीष्म पितामह 12 महा भागवत में एक पितामह भीष्म वैसे बहुत सारा है मैंने एक ही भेजा है बहुत लंबा है नाराय ये कोई बोल रहा है कि गरीब दास की वाणी में लिखा है गीता का ज्ञान श्री कृष्ण ने ही दिया है लो हा य लिखा हुआ है य लिखा हुआ है मैंने खुद पढ़ा है अपनी आंखों से तो पेन चला होगा फिर तो व फर तो पन
03:14:42:13 चलागा सुमित जी बहुत वेट कर रहे थे गा जो काल की डेफिनेशन इन लोगों ने कुछ अलग तरीके से दे रखी है काल कौन है य उससे तो नहीं मानेंगे पुराणों से इनको आप वेदों से दिखा देना अथर्ववेद उवा कांड 53 54 पूरा वर्णन है काल रूपी परमात्मा का वेदों को तो मानेंगे देखिए बा मवाना नहीं है क्योंकि हमें केवल दर्शको को दिना है इनका ठीक कौन सा कांड हैवान 19 19 और सुत 53 और 54 दोनों में पूरा न है दोनों में दोनों केतो में मंत्र में रें हो जाएंगे इतने रेफरेंस हो जाएंगे अगली बार लोग काल का नाम नहीं लेंगे अब ये दूसरे टॉपिक प आएंगे जब आएंगे तब इसको ना नहीं कर सकते कोय ये तो उस एक एक जो मैंने भेजा है भीषमा जो कह रहे दिखाइए अरे अगर
03:15:57:26 यह पुराणों को नहीं मानेंगे तो मैं इनकी बुक खोल के दिखा दूंगा ना बाबा रामपाल जी ने पुराणों को माना है ये कौन होते हैं ना मानने वाले य कभी कभी झटके में भी क जाएंगे हम रामपाल को भी नहीं मानते ये झटके में भी क जाएंगे जैसे अभी कल बो भी बस उसी दिन का इंतजार है मेरे को बस उसी दिन का इंतजार है मेरे हैदराबाद हैदराबाद में हैदराबाद में आयर समाज से एक साल किया था पंडित माधवाचार्य शास्त्री जी ने तो उसम उन्होंने बोला कि अगर तुम हमको कहते हो कि हम मूलती पूजा करते हैं तो अगर तुम दयानंद सती को के फोटो को जरा उस पर लात मारो तो उस विद्वान ने जो राज समाजी था उसने उस दयानंद जी की फोटो पर जूतो से मारा था व बात लिखा है क पंचक कल पढ़ रहा था उसम लिखा हुआ है वो भे अच्छा बताने लायक
03:16:56:00 है वो नवीन जी मैंने आपको एक ट किया है वो जरा दिखा दीजिए शो कर दीजिए अपने नंबर से किया है [संगीत] हां जी राजा जी आपका वाला है हां पढ़िए इसको बड़ा करके थोड़ा बड़ा कर पडि जी पढ़िए पंडित जी यह सब लोग राजा यह सब राजा लोग युद्ध के मुहाने पर काल के द्वारा मारे गए हैं हम भी काल से ही मारे गए हैं क्योंकि काल ही परमेश्वर है जो काल के स्वरूप को जानता है वह काल के थपेड़े खाकर भी शोक नहीं करता श्री कृष्ण ही लाल नेत्रों वाले दंड धारी सनातन काल है वाह लो बहुत सुंदर कितना रेफरेंस है भैया किसकी भक्ति है सा उनकी जो ये बताई
03:18:11:14 नहीं है जति निरंजन कौन हैय ज्योति निरंजन कौन है पता है छोटी बात आपवा भया मैं आपको एक बुक भेजने वाला हूं जो बहुत दिनों से मैं खोज रहा था आज मिल गई है वह है पश्चिम बंगाल के बहुत बड़े योगी संत हुए श्री विजय कृष्ण गोस्वामी उनके शिष्य कुदा नंद ब्रह्मचारी वो प्राण योग से अलग अलग लोको में चले जा सकते थे और उ डायरी लिखी है बहुत ही फेमस संत समाज में अपने गुरु जी के सा संस्मरण का तो उसमें उन्होने नरक लोक की यात्रा की है और वहा पर व दयानंद से मिले व लिखा है उन्होने अच्छा और उसम उन्होने बोला दयानंद आपके लिए क्या कर सकता हूं तो दयानंद ने बोला कि मैं अपने कर्मों का फल भोग रहा हूं ने दो मुझे कांड 19 19 खोलिए सक्त 53 कांड 19 खोलिए पहले खोल रहा खोल वो भेजूंगा आपको चलता हर में मुलाकात उन्होने नरक में मुलाकात हुई है अच्छा कांड 19 कौन सा है 53 53 और 54 दोनों में है पूरे
03:19:26:19 व्याख्या कर रखी काल काल उसमें कि काल कौन है मंत्र रहने दीजिए मंत्र मत शो करिए हम लोग यहां से पढ़ देंगे रहने दी हटा दिया मैंने ह इसीलिए अवॉइड करा था र्वेद खोलना वेद खोलने में थोड़ी समस्या है श्रीराम हां भाई ये तो काल सूक्त है
03:19:59:09 पूरा उसका भावार्थ पढ़ दीजिए में काल को विभिन्न रूपों को काल के विभिन्न रूपों को माध्यम से वर्णित किया गया है काल का और इसमें बताया जा रहा है काल संपूर्ण जग काल संपूर्ण को अनन काल रूप परमेश्वर सप्त रश्मी सब कुछ काल ही है अविनाशी अजर लो लो भाई वेद में आ गया मगर अब बात ये है यह मानेंगे नहीं अब ये सूक्ष्म वेद पर चले जाएंगे अरे में नहीं कम से कम 30 से 40 मंत्रों में व्याख्या कर रखी है दो सूक्तो में 5 और हा हां बिल्कुल चलिए बढ़िया है और संकलन बढ़ गया जी चलिए हम सुमित दास को ले लेते हैं सुमित दास ड टू स्टेज हो गए मैं जी नमस्कार आप अपनी स्क्रीन बंद कर दीजिए एक स्क्रीन खुली हुई है ना वो हटा दीजिए मेरी खुली है अरे अरे सुमित दास आपने शायद फॉर्म भरा था दो चार दिन पहले उसके बाद आप नॉट चेबल हो गए थे भरा था क्या नहीं कोई फॉर्म नहीं
03:21:14:12 भरा फॉर्म नहीं भरा अच्छा तो आपके गुरु रामपाल जी हैं हा दीक्षा कब हुई आपकी दीक्षा कब हुई आपकी नाम दीक्षा मैंने 2012 में ली थी तीन साल का होते मैं 2012 में तीन साल का हुआ था तब मैं नाम तीन साल की आयु में आपने नाम दीक्षा ली थी गोविंद जी कुछ कहना चाह रहे हैं पूछिए भाई साहब आपने रामपाल जी का वो कौन सा ज्ञान ऐसा देखा जिसको देखने के बाद आपने उनका जो है दीक्षा ग्रहण कर ली मैं वो ज्ञान जानना चाहता हूं कोई एक मेरी माता जी थी मम्मी जी वो उन्होंने 2005 से नाम लिया था लेकिन मैं जैसे मम्मी जी ने मेरे को नाम दिलाया फिर धीरे धीरे मैंने बड़ा हो करके ग्रंथ वेद समझे थे हा उन्होंने मतलब आपको कौन सा ऐसा ज्ञान दिया जो आपने दीक्षा उनसे जारी रखी मतलब छोड़ी नहीं उनकी नाम दीक्षा ये कोई ज्ञान मेरे को एक कोई ज्ञान दिया होगा ना उन्होने जैसे आप ज्ञान की बात कर रहे हैं ज्ञान सभी वेद शास्त्रों पर आधारित ज्ञान है ना कोई एक बताइए क्या कोई एक बताइए
03:22:30:27 ना आपकी आवाज अच्छे से नहीं आ रही क्या पूछ वो पूछ रहे हैं कि उनके द्वारा दिया गया कोई एक ज्ञान ऐसा बताइए जो वेद शास्त्रों पर आधारित हो वेद पर नहीं पुराणों पर भी चलेगा मेरे लिए अभी जो आपने टॉपिक चला रखा है काल वाला चलो चलो ठीक है काल प ले लेते शायद हमको जवाब मिल जाए शायद हमको जवाब मिल जाए भाई आया शेर का बच्चा एक ही अच्छा ठीक है कोई बात नहीं मगर हां मैं कहूंगा भाई कुछ भी बात करने से पहले मैं अप्रिशिएट करूंगा आपने साहस दिखाया क्योंकि वह लोग जो अपने आप को रक्षक कहते हैं ज्ञानी कहते हैं वो लोग पीठ दिखा रहे हैं मुंह छिपा रहे हैं मगर आपने साहस दिखाया इसके लिए को जन्म देने वाली मां को मेरा प्रणाम है क्योंकि उसने एक साहसी को जन्म दिया जिसने यहां तक आने का वोह तो लिया अब आगे आप क्या करते हैं वो बात एक अलग है जी बताइए जी तो कौन सा वो एक ऐसा ज्ञान है काल की बात हो रही है आप देखिए हमारा प्रश्न स्पष्ट है गीता में जो ज्ञान दिया है वो भगवान श्री कृष्ण ने नहीं दिया है वो उनसे अलग किसी काल ने दिया है तो यह कहां पर
03:23:46:19 कहां से सिद्ध होता है वो आप शास्त्र का प्रमाण हमें दे दीजिए जसे मैं इसके प्रमाण के लिए बात करू गीता 11 लोक 32 में लिखा है लोगों का नाश करने वाला बढ़ावा मकाल हूं इस समय स्थित यो योद्धा लोग है वे सब तेरे बिना इन लोगों को नष्ट करने के लिए प्रवत हुआ हूं इसलिए जो प्रति पक्षियों की सेना में भी नहीं रहेंगे अर्थात तेरे युद्ध ना करने से भी इन सबका नाश हो जाएगा सवाल ये है आपने मेरा सवाल सवाल यह है ये काल सुनिए सुनिए सुनिए सुनि यह देखिए हमने बहुत सारे प्रमाण दिए हैं कि जो काल जिसे कहा जा रहा है वह कृष्ण को ही कहा जा रहा है मगर अगर आप य वो वाले प्रमाण हमारे नहीं अभी देख रहे थे आप नहीं देख रहे थे भाई साब कुछ बोल रहा हूं मैं कुछ बोल रहा हूं मैंने आपकी बात बहुत प्यार से सुनी मेरा प्रश्न यह है कि हमने इस बारे में बहुत से प्रमा दे दिए कि वो जो काल है वो कृष्ण ही है आपको वो नहीं मानने बात की बात है वो बात की बात है अभी आप मुझे यह बताइए कृष्ण यह कहां लिखा है कि वो जो ज्ञान है कृष्ण से अलग काल ने दिया है अलग यह शब्द कहां
03:25:01:25 पर है वो कृष्ण ने नहीं बल्कि काल ने दिया यह कहां लिखा है यह तो कृष्ण की 11 श्लोक 32 जो है उसम स्पष्ट लिखा है मैं बड़ा हुआ महाकाल हूं लेकिन प्रित हुआ हू लेकिन श्री कृष्ण जी जो थे वो तो अर्जुन के साथ बहुत समय से वार्तालाप कर अच्छा अच्छा एक बात बताओ एक बात बताओ एक बात बताओ एक बात बताओ अगर कबीर जी यहां पर तुम्हारे बीच में आ जाएंगे आए भी थे ठीक है आए थे ना आए थे कि नहीं आए थे 600 वर्ष पूर्व आए थे आए थे ठीक है अब उसे अगर क्या वो अपने शरीर को बड़ा कर सकते हैं द सर वाला 20 सर वाला भगवान कुछ भी कर सकता है यानी कि जब वह बड़ा करेंगे तो क्या वह तुमसे यह बात कह सकते हैं कि मैं इस समय बड़ा हुआ वो हूं बड़ा किया है मैंने अपने आपको भगवान कभी भी अपने आपको को महाकाल नहीं कह सकता और दूसरी बात मिनट मिनट मिनट समझ गया आप बता दीजिए कहां पर लिखा है भगवान कभी अपने आप को महाकाल नहीं कह सकता कहां लिखा है बताइए भगवान कभी अपने आप को महाकाल कह सकता है
03:26:16:25 ये कि कहां प लिखा है शास्त्र की प्रमाण दीजिए महाकाल अपने आपको काल भगवान अपने आपको काल नहीं कह सकता कहां लिखा है सबसे पहले मैं एक ब भाई साब देखिए बात की बात होगी बात की बात आपने कहा भगवान अपने आप को काल नहीं कह सकता कहां लिखा है अभी मेरे को बोल बोलने दिया जाए क्या भाई साहब शास्त्र के नाम से बात शुरू करिए नहीं तो मानिए कि इसके बारे में मेरे पास कोई प्रमाण नहीं है शास्त्र के नाम से बात शुरू करिए शास्त्र का नाम बोलिए आप अगर शास्त्र का नाम बोलेंगे तो बोलिए अन्यथा रहने दीजिए राम राम श्याम श्याम शास्त्र का नाम
03:27:05:24 बताइए आपको प्यार से सम रहा एक बार आपको सामान्य भाषा में समझा रहा हंब आपको होना होगा आपको चुप होना होगा आपको चुप हो हो मेरी बात समझिए आपने अभी एक सिद्धांत दिया परमेश्वर कभी अपने आप को काल नहीं बोल सकता ठीक यह सिद्धांत दिया आपने यह सिद्धांत कहां पर लिखा है बताइए हमें अब जो आपका अगला वर्ड होगा अब आपका अगला वर्ड होगा वो शास्त्र का नाम होना चाहिए या फिर यह बता दीज कह दीजिए कि नहीं यह मुझे नहीं पता कि शास्त्र में कहां लिखा है तो हम आगे बात करें बताइए यह स्पष्ट नहीं लिखा है शास्त्रों में आपको नहीं पता आपको नहीं पता कि शास्त्र में कहां लिखा है स्पष्ट नहीं लिखा है शा में स् नहीं स्पष्ट का मतलब होता है कि आपके पता है मगर वह मिट गया सई उसकी धुली पड़ गई है आपको पता है कि कहां है मगर वह सई धुल गई है भैया वह अटेंप्ट कर रहे हैं कुछ करो बारबार मेरी स्क्रीन पर आ जाते है वो रिक्वेस्ट आ जाती है वो नहीं होगा
03:28:17:13 ये कॉमन सी बात है भगवान अपने आप देखिए देखिए देखिए सुमित जी आप मेरे सामने छोटे हो मैं आपको बेटा कहूंगा सुमित बेटा जो शास्त्र का आप जब यह बात करते हैं कि शास्त्र हमारी जो भक्ति है वह शास्त्र सम्मत है हमारी सारी बातें शास्त्र की अपने आपको महाकाल नहीं कह सकते यह शास्त्र में यदि नहीं लिखा है तो आपको यह मान इतनी बात हमारी शास्त्रों के बाहर है मनम है इतनी बात हमारी शास्त्रों के बाहर की बात है मन्मुख बात है बेटा मानना पड़ेगा अगर आपके पासर पास प्रमाण सुन पहले इसको खत्म करेंगे तब सुनूंगा पहले इसको पूरा
03:29:07:07 करेंगे मैं पहले अपना क्लियर कर लू आपको किस बारे में जवाब देना है कि ईश्वर अपने आप को महाकाल या काल नहीं का प्रमाण देना है आपका अगला जो वर्ड होगा वह शास्त्र का निकलना चाहिए या फिर आपको यह बोलना है कि नहीं भाई इतने अंश में हमारी जो बात है व मनमुक जैसे अभी आपने कहा कॉमन सी बात है ठीक है आपके लिए जो कॉमन है हमारे लिए कॉमन नहीं है हमारे लिए जो कॉमन है आपके लिए कॉमन नहीं है आप जो है जैसा कि बताया गया मैं कंफर्म नहीं हूं आप उनका नहाया हुआ खीर खा लेंगे हमारे लिए वो कॉमन नहीं है और हम जो है गोबर की पूजा करते हैं वो आपने र की बात की देखिए भाई साब विषयात मत करिए विषयात प मत जाइए भाई साहब भाई साहब भाई इनको भाई म्यूट करो भैया भैया वो मैं अपनी बात खत्म कर रहा हूं आप मुझे विषय पर रहिए वह मैं बात अपनी खत्म कर रहा हूं मैं आपसे कह रहा हूं जो आपके लिए कॉमन है सुन लो बेटा बेटा सुन लो अभी आपकी आवाज नहीं आ रही अभी आप म्यूट हो अभी आप म्यूट हो बेटा अभी आप म्यूट हो अभी आप म्यूट हो अभी
03:30:22:12 मेरी बात सुन लो मैं आपको उदाहरण दे रहा था कि जो हमारे लिए कॉमन है वोह आपके लिए कॉमन नहीं है जो आपके लिए कॉमन है वो हमारे लिए कॉमन नहीं है इसीलिए भगवान श्री कृष्ण ने लोगों के बीच में कॉमन को लेकर के लड़ाई ना हो एक बात कही थी भगवत गीता सवा अध्याय 24 वा श्लोक तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एक मात्र शास्त्र प्रमाण है आप हमें शास्त्र से दीजिए प्रमाणम ईश्वर ईश्वर जो है अपने को महाकाल नहीं कह सकता अन्यथा यह बात कहिए कि इतने अंश में जो हमारी भक्ति है वो मनमुक है तो हम आगे चले अन्यथा आपका आने के लिए धन्यवाद फिर किसी दिन अगले चैप्टर में मिलेंगे बहुत लोग हैं बात करने के लिए बताइए आप स्पष्ट एक तो मनमुक नहीं कह सकते पहले मेरा जवाब पूरा नहीं हुआ आपने कहा कि ये कहीं नहीं लिखा है आपने खुद कहा होने दीजिए स्पष्ट मेरा जवाब जो शास्त्र का प्रमाण देना है भाई साहब आपको शास्त्र का प्रमाण देना है हां या ना में बता दीजिए शास्त्र का प्रमाण है आप सुनने के लिए इसलिए तैयार नहीं है क आप आपका
03:31:37:16 आने के लिए धन्यवाद आने के लिए धन्यवाद आपका आने के लिए धन्यवाद भाई है या नहीं अंत में बात होती क्या है ना देखो मैं इनको क्यों हटाता हूं य समझो यह जाने से पहले कोई सीन क्रिएट करना चाहते हैं यह कोई ऐसा दृश्य बनाना चाहते हैं जाने से पहले कि हमारी बाबाई हो या उसका रील काट करके हम लोगों को दिखाए इसलिए वो बात बोलने से पहले जब यह निरस्त हो जाते निरुत्तर हो जाते निराधार हो जाते हैं तब मैं इनको हटाता हूं जब इनसे शास्त्र पूछा जा रहा है कहां लिखा है सिद्धांत क्यों दिया और अगर दिया तो मानो कि मैंने गलत बोल दिया या वो भक्ति मेरी मनमुक है मान लो फिर आगे चलते हैं
03:32:25:02 भैया और जो ये खीर वाली बात है भैया यह लोगों के द्वारा बताई जा रही है हम इसमें कोई कंफर्म नहीं है यह जांच का विषय है कि खीर खाई जा और मैंने वहां कॉमन के उदाहरण के लिए दिया था और भी कोई कॉमन के उदाहरण के लिए दे सकता हूं जैसे तत्व आपके लिए रामपाल जी तत्वदर्शी संत है आपके लिए कॉमन बात हमारे लिए नहीं है हम नहीं मानते उन्हें तत्वदर्शी हो गया खीर का उदाहरण हटा दो ठीक है यह अटेंप्ट अभी मत अटेंप्ट अभी ना करें अभी यह जो स्टूडियो है फुल है अटेंप्ट अभी ना
03:33:04:25 करें जी चलिए अब स्ट्रीम को पूरा करते हैं साढ़े तीन घंटे की हो चुकी है और आज ये लोग यह नहीं बता पाए कि काल का जवाब काल का विवरण कहां दिया है तब तक गोविंद गुरकुल जी आप बात करें अभी जैसे जो छोटा भाई आया था ना हमारा मैं आपको एक बात बताता हूं जितने भी जो लोग टीनेजर है खास करके ठीक है उनमें जोश ज्यादा होता है लेकिन दिक्कत उनके लिए बहुत होती है हम जो सारे जने बैठे हैं ना सारे तीन तीन चार चार घंटे पता है हम क्यों बैठे हुए हैं पंडित जी बैठे हैं हमारे प्रभु जी जो एडमिन है यहां पर ठीक है शिवांश भाई बैठे हुए हैं हम इसलिए बैठे हुए हैं ताकि आपको शास्त्र खोलकर आपके शास्त्र पढ़ा सके ठीक है तो हमें अपना दुश्मन ना समझिए यदि हम आपको अपना दुश्मन समझते ना तो हर एक प्रकार से केवल आपको नीचा दिखाते छोटे-छोटे बच्चे भी आते हैं ना यदि तो हम उनसे पूरी बात करते हैं ठीक है ऐसा नहीं उनको जग जोड़ के हम भगा देते हैं सारे ग्रंथों के प्रमाण देते हैं सारे तर्क वितर्क करते हैं लेकिन जो व्यक्ति य समझे कि यह
03:34:19:27 लोग तो वेले हैं य साढ़े तीन चार घंटे ऐसे ही फूक देते हैं अपने तो मैं बस अपने उन लोगों से कहना चाहूंगा जो हमारे छोटे भाई बहन हम आपके लिए कदर नहीं करते ना तो इतने ग्रंथ ना हम खरीदते ना हम उनको खोलते ना उनके रेफरेंसेस ढूंढते ना पर टैग लगाते ना उनको हाईलाइट से मार्क करते हम कुछ नहीं करते हम केवल आपके साथ झगड़ा करते हम आपको बस यह बता रहे हैं कि जो जो ग्रंथों में सत्य के प्रमाण है ना वहां से आपको बस एक डेढ़ श्लोक दे दिया गया है परंतु एक डेढ़ बात सुनकर आप किसी फैसले पर नहीं पहुंच सकते क्योंकि यह अन्याय है जज को जाकर यदि कोई बोल दे कि हां मैंने इसको देखा इसने मारा तो क्या वह मेरे को खून के इल्जाम में अंदर कर दे यानी वह फैसले पर पहुंच जाए नहीं पहुंचेगा ना क्या मारा कब मारा किसने मारा पता चले कि मैंने तो उसको खाली कंकड़ मारा था ठीक है तो बात चल रही थी मर्डर की तो उसने मेरे को अंदर बुद्धि और विवेक से ध्यान से यह बातों को सोचिए कोई भी विषय पूरा जाना जाता है तभी उसका निर्णय होता है यह तर्क संगत और बुद्धि संगत बात है अपने कोई यदि आपका मित्र है ना जो थोड़ा भी स्याना है उससे पूछ लीजिए वो भी आपको यही बात बोलेगा ठीक है यह मेरा
03:35:35:00 संदेश था आप सब लोगों के लिए हम आपके शत्रु नहीं है हम किसी के शत्रु नहीं है ना इकन ना आर्य समाज हम सबको अपने साथ लेकर चलना चाहते हैं इसलिए यहां पर बैठे हुए यही मेरा पूरा का पूरा संदेश था मनीष जी आए हैं मनीष जी अपना परिचय जय श्री राम जय श्री राम अनूट कर लीजिए भैया जय सियाराम जय श्री राम जय श्री राम शिवांशु भैया मुझे जानते हैं और मैं राम चौधरी 952 नंबर है मेरे ओ हो हो हो अच्छा अच्छा अच्छा अरे बड़ा बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया अरे वो काल का बात कर रहे अनन्य भक्त राम जी के श्री राम जी के अनन्य भक्त है और मुझे इनसे जलेस होती है मुझे लगता है ये ज्यादा बड़े भक्त है तो थोड़ा सा जलस भी होता हूं मैं इनसे बहुत सुंदर बहुत सुंदर मेरा वो बताया काल की बात कर रहे थे तो भगवान शिव ने महारामायण के पांच सर्ग में लिखा है कि देवी जो काल महाकाल भगवान के दोनों दंड स्वरूप है जो काल महाकाल रूप में होकर है ना इन दुष्टों
03:36:50:08 को दंड देते हैं महा रामायण में मेरे पास प्रमाण भी अभी मैं दे देता आपको इसका लिखा हुआ है गदा श्र महा कालो यम डांड आवाज कट गई आप महारामायण वशिष्ठ की बात कर रहे हैं क्या जो वाल्मीकि जी द्वारा विशेष ग्रंथ है सुनो भगवान का राम जी का अवतार कल के रामायण में लिखा हुआ अलग अलग कल्पों में अलग अलग तरीके है ये बात आप भी जानते हम भी जानते भगवान श्री राम है पर परम भगवान इसलिए है कि वो अलग अलग कल्पों में जैसे भगवान विष्णु से होते हुए अवतार ले लेते है कभी दुर्गा देवी से अवतार ले लेते हैं क्योंकि ो वो मानव रूप में तो सबके भक्त बन जाते हैं लेकिन वो सबके ईश्वर भी है उनका कोई आदि नहीं है इसका कारण यह है कि अब मैंने महारामायण में इसलिए बात किया भगवान शंकर ने परब्रह्म रामायण महारा माता पार्वती को महारामायण सुनाई थी ना कनक भवन महाराज की जिसमें 9 महारास हुआ था एक महारास बच गया था जो वृंदावन में भगवान श्री कृष्ण ने पूरा किया था 99 महारास सतरा कलप के प्रथम अवंतर में भगवान श्री राम का जब अवतार हुआ था उस समय पूरा किया था
03:38:05:08 उन्होंने और एक महाराज जयंत के कारण छूट गया था तो उसम लिखा हुआ है ये बात वहां पर और कवि के बारे में लिखा हुआ वहां पर महारामायण में देवी पार्वती क भी कवि महाकवि प्रभु श्री राम ही है और कोई नहीं है क्योंकि रामायण है एक मानते हो आप पुराणों में देखो हम मानते भगवान के सभी रूपों का वर्णन किया गया है लेकिन परब्रह्म का वर्णन अलग से रामायण में क्यों किया गया अलग-अलग तरीके से भगवान शंकर अपने तरीके से अपने इष्ट का वर्णन करते हैं काग संत जी अपनी तरीके से अपने इष्ट का वर्णन करते हैं यानी अलग-अलग तरीके से वर्णन किया है देखो ब्रह्म रामायण भी आती है दुर्गा रामायण भी आती है हनुमान जी के रामायण को आती है सुनते अलग-अलग रामायण है तो इसलिए राम जी के बारे में मतलब उनका हर रूप है ना अलग-अलग तरीके से जी मैं एक बात कहूंगा यहां पे कि अभी एक बात पूछी जा रही है कि वाई हिंदू आर फाइटिंग ये इनाया करके कोई आईडी है उससे पूछी जा रही है वाई हिंदू आर फाइटिंग तो मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि हिंदुओं की परिभाषा क्या होगी क्या हिंदू वो है जो अल्लाह की तरह सातवें आसमान पर कबीर को बिठा है और अल्लाह के जैसा ईश्वर क्या हिंदू वो है हिंदू की परिभाषा वह है या फिर
03:39:20:09 वेदों में प्रमाण बुद्धि रखने वाला हिंदू है कौन है हिंदू और अगर मान लीजिए कि वह भटका हुआ हिंदू है तो उसी को तो हम भटकने से बचाने का प्रयास कर रहे हैं हम कौन सा लठ मार रहे हैं एक एक भाई साहब अभी भी पूछ रहे हैं कि क्या जो ईश्वर है उसकी उसकी व माता के गर्भ से जन्म नहीं ले सकता भाई जीव भी माता के गर्भ से जन्म नहीं ले सकता अगर वास्तविक उसका देखे तो जो जीव है आत्मा वह भी माता के गर्भ से जन्म नहीं ले सकती आत्मा तो अजन्मी है आत्मा के लिए शब्द आया ना जन्म तो फिर जन्म कैसे हो रहा है उसका तो ये मानना पड़ेगा कि एक आपका तात्विक रूप है पर्थ स्वरूप आत्मा है और व्यवहारिक स्वरूप उस रूप में आप जन्म लेते हो
03:40:17:19 और इसी प्रकार से ईश्वर का तात्विक स्वरूप है अजन्मा अविनाशी मगर फिर भी वह अपने साधु भक्तों के उद्धार के लिए व्यवहारिक हो जाते हैं सरल हो जाते हैं भक्त बन के प्रकट हो जाते हैं रक्षक बन के प्रकट हो जाते हैं भाई बन के प्रकट हो जाते हैं इनको पता ही नहीं है सीधा जवाब नहीं दे पाएंगे संदीप जी हम इनसे ऐसे गुण तत्व वाले सवाल पूछ लेंगे तो हमें चार घंटे लग जाएंगे अपना सवाल समझाने में इनको नहीं पता इनका अंतिम प्रमाण क्या है तो इसलिए ऐसे ऐसे सवाल ना पछवा हमसे कि हमें अपना सर दूसरे दिन मुंडवाना पड़ जाए तो मैं यह कह रहा था अब दोबारा आ जाते हैं आज काल की हमने पूछी चार पांच लोगों से पूछी भाई गीता जो है काल ने बोली है श्री कृष्ण से अलग काल ने बोली है क्योंकि जहां से आप रेफरेंस दे रहे हैं वहां से वो श्री कृष्ण के साथ सिद्ध हो रहा है वो श्री कृष्ण ही है और इसके अलावा हमने अथर्ववेद अनेका अनेक प्रमाण दे दिए कि श्री कृष्ण और काल में कोई अंतर नहीं है वह श्री कृष्ण ही काल है राम है शिव है सब है ठीक अब आप अलग होने का प्रमाण हमें दे दीजिए शास्त्र से अच्छा हमारे प्रमाण तो आप नहीं मानोगे ठीक है हम मान लेंगे
03:41:32:28 हमें आप शास्त्र से प्रमाण दे दीजिए कि वह जो काल है वह श्री कृष्ण नहीं है दे दीजिए प्रमाण जय श्री राम ये शिवाजी गिरी क्यों आ गए आप तो अभी चले गए थे ना आप क्यों आ गए वापस सात्विक गौतम जी अपना फेस दिखाए नहीं तो अब फिर इस स्ट्रीम को बढ़ाएंगे क्योंकि बहुत देर हो गई लगभग 5 बजे से चल रही है और पौने बज रहा है इस समय तो बढ़ाना होगा दिवाली का टाइम है सबके घर में वो सफाई चल रही होगी मेरे ख्याल से और तेरस की तैयारियां चल रही होंगी जो लोग भी देख रहे हैं जो समर्थक है उनको मैं कहूंगा भाई कि केवल टब पर जुड़ने से कुछ नहीं होगा सबसे पहले कुछ करना है तो भगवान के नाम का जप शुरू कर दीजिए भगवान का नाम लेना शुरू कर दीजिए केवल शास्त्र का बल दिखाने से कुछ नहीं होगा केवल दंब भरने से कुछ नहीं होगा तो नाम जब से जुड़िए बहुत अच्छा अभियान चल रहा है बहुत अच्छी अच्छी बातें भी होती उसम थोड़ी बहुत वहां पर गल मीट में हमारी
03:42:48:15 और एकत्व आ रहा है नाम जप अभियान में दिन भर में पांच राउंड हम करते हैं पंच देवों का नाम जप और सुबह एक बार मैं स्पेशल वाला वो लेता हूं सेशन जिसमें की नाम जप हम लोग सवा घंटे का एक साथ करते हैं श्री राम के नाम का तो जो भी भाई बहन जुड़ना चाहते हैं उसमें और अपने आप को अनुशासित करना चाहते हैं भगवन नाम जप से तो आप उससे जुड़ सकते हैं उसके लिए आपको 7483 869 इस नंबर पर ट मात्र करना है इसके अलावा इसके अलावा यदि किसी प्रकार का वैचारिक मतभेद है माता जी वाला साहस है तो आप आए और सिद्ध करें कि गीता का ज्ञान जो है वो श्री कृष्ण से अलग काल ने दिया था श्री कृष्ण से अलग काल ने ठीक है दूसरी बात धर्म रक्षा अभियान के लिए जुड़ना चाहते हैं तो जुड़े और अगर एक क्लासेस में जुड़ना चाहते हैं तो जुड़ सकते हैं उसी नंबर पर ट करके आपको सारी चीजें प्राप्त हो जाएंगी चौथी बात धर्म के जो विधि विषयक प्रश्न होते हैं इनके संबंध में जो आचार्य राम शंकर शुक्ल जी हैं पूज्य कपात जी महाराज के कृपा पात्र
03:44:03:21 शिष्य उनका चैनल है आचार्य राम शंकर शुक्ल जी के नाम से ही वो आप सब्सक्राइब कर ले तो आपको दिवाली कौन से दिन है जन्माष्टमी कौन से दिन है और यह जो विधि विषयक प्रश्न होते हैं उनके उत्तर वहां आपको मिलते रहेंगे और धर्म और ब्रह्म विषयक जो प्रश्न आते हैं यह चैनल देख लीजिए आचार्य राम शंकर शुक्ल जी का चैनल है और इस पर विधि विषयक प्रश्न जो है उनके उत्तर प्राप्त हो जाएंगे आपको और जो धर्म और ब्रह्म के प्रश्न आपके अंदर आते हैं उसके लिए अपना सवाल टाइप करें यूट्यूब पर कि भैया यह क्या है एक जगह विष्णु बड़े हैं कि शिव बड़े हैं कि कोई बड़ा नहीं है कि इसमें फसने से अच्छा है सामर्थ वान गुरुओं के के सानिध्य में पहुंचे वो क्या है अपना सवाल डाला और आगे लिख दिया पूरी शंकराचार्य तो गुरुदेव ने लगभग साढे हजार प्रश्नों के उत्तर दिए हुए हैं य पर अवेलेबल है तो आपका उत्तर ज्यादातर में से एक आपको वहा मिल जाएगा गुरुदेव से दीक्षा लेनी है उनका जो चैनल है वो गोवर्धन मठ के नाम से है गुरुदेव से दीक्षा लेनी है उनके दर्शन करने हैं या फिर किसी भी प्रकार से गुरुदेव के से आपको पता करना है जुड़ना है वहां मठ से डायरेक्ट तो गोवर्धन मट की एप्लीकेशन है उस पर
03:45:18:21 गुरुदेव कहां रहते हैं कहां चल रहे हैं वो सारा उसम वृतांत रहता है उनका वो एप्लीकेशन आप लोग डाउनलोड कर ले उस एप्लीकेशन को डाउनलोड करके आपको सारी गतिविधियां उनकी पता चलती रहेंगी और बहुत अच्छी अच्छे और भी चीज आपको वहां से प्राप्त हो जाएंगे एट द एंड एट द एंड आपको यह ध्यान रखना है कि नाम जब सबसे पहले है इन सब चीजों में इन सब चीजों में भगवन नाम का जप सबसे पहले है त वो आपके अंदर बल आ पाएगा जो आज के समय में इतनी विपरीत विपरीत परिस्थितियों से आप जूझ पाओ अनथा धर्म का नाश हो रहा है हमें आपकी आवश्यकता है हमारे सभी हिंदू भाई बहनों की धर्म को बचाना होगा धर्म की रक्षा करनी होगी और इसलिए सबसे पहले कुछ नहीं करिए अगर वहां ना मास्त्र से नहीं जुड़ना है आप अपने घर में सवा घंटे की भक्ति का बल एकत्र कर लीजिए सवा घंटे की भक्ति का सबसे प्राथमिकता से आप आलंबन ले जी अब आए हैं सात्विक जी है सात्विक जी जय श्री राम महादेव जय श्री राम फोटो आपकी नहीं चलिए चलिए कोई बात नहीं बताइए
03:46:34:14 मैं ये कहना चाहता था हेलो आवाज आ रही है जी जी बोलिए जी मैं कह य जो रामपाल जी कहते हैं कि 5 पर गान काल ने दिया है हेलो वेदों में कबीर को वेदों में य कबीर को कबीर बताते हैं हा है ना तो जैसे कुर्म पुराण के पांचवे अध्याय में 21 वा श्लोक
03:47:09:26 है वो तो वो तो यह कहता है कि वो तो यह कहता है कि कबीर जो है वही काल है अच्छा हा पूर्म पुराण पांचवा अध्याय शलोक कौन सा अध्याय पाचवा अध्याय 21 वा श्लोक अच्छा एक मिनट [प्रशंसा] निकालते हेलो एक बात बताए
03:47:45:15 आपको आपको गलती लगी है शायद यहां पर ना 2 ही श्लोक है केवल पांचवे अध्याय में शायद अध्याय कोई और होगा भैया 21 वावा 21 एक मिनट एक मिनट पांचवा अध्याय ना हां है है है है मैं पढ़ के सुना देता हूं आप निकालिए ब्रह्मा रुद्र नारायण आदि बहुत भगवान एक ही है जो ई का तथा कवि कहलाता है ऐसा वेद का अभिमत है जी नहीं नहीं श्लोक पढ़िए श्लोक के आखरी तीन वर्ड पढ़िए बस पढ़ रहा हूं भगवान भगवानी काल कविति
03:48:31:19 श्रुति कवि इति शति हा कवि लो भाई ये तो बहुत बड़ा व है इसको मैं टैग कर रहा हूं आप चिंता मत करिए मैं साथ साथ सारी चीज टग कर रहा हूं आप चिंता मत करिएगा जब भी ढूंढना होगा मेरे को बोल दीजिएगा जी जी देखिए इसमें क्या होता है कि जैसे य लोग भविष्य पुराण को भी प्रक्षिप्त कह देते हैं कि कई विद्यान विद्वान प्रक्षिप्त बताते हैं हेलो जी जी बोलिए आपकी आवाज आ जैसे भविष्य पुराण की जो कथाए होती है ना ये जैसे किसी विशेष कल्प की शैली को प्रधान बनाया जाता है इनम जैसे पद्म कल्प की जो शैली है वो वो श्रीमद् भागवत में वर्णित है और सारस्वत कल्प की शैली देवी भागवत में वर्णित है उस इस प्रकार से जैसे अघोर ईशान रथ आदि कल्प होते हैं तो उस हिसाब से देखा जाए ना तो जो हमारे जो ऋषि मषि होते थे ना आउट ऑफ द टाइम लाइन जाकर देखते थे बिल्कुल
03:49:46:19 तो आउट ऑफ द टाइमलाइन जाके देख लेते थे जैसे वेदव्यास जी उन्होंने पहले से कल की पुराण लिख दिया अरे वाल्मीकि जी ने भी तो लिख दिया सब उत्तरकांड में हां तो बस वही तो है ना तो ये उस चीज को कैसे प्रक्षित बताते हैं हम कौन सा वो कहा गया है हां ये श्लोक स्क्रीन शेयर कर दीजिए श्लोक क्रमांक क्या बोला आपने
03:50:24:01 21 21 अध्याय कौन सा है बिल्कुल बिल्कुल य कवि आ रहा है बिल्कुल एकदम स्पष्ट है पांचवा पाचवा अध्याय 40 य आरहा है कवि ति शति शति के द्वारा जिसको कवि कहा गया है वही काल है लो काल और कवि कहे जाते हो गया यह लिखा हुआ है ना काल कवि इतनी शति काल ही कवि है यह लिखा है कवि रिति शति अगर कवि कबीर है तो कबीर तो काल इसका मतलब इसका मतलब तो रामपाल जी काल बन के बैठे हुए हैं चलिए ठीक है और आज एक सूचना हमें प्राप्त हुई थी वह मैं आपको आपके साथ बताना चाहता हूं एक हमारी बहन है प्यारी बहन और उनकी आज एक उन्होंने बड़ा ही हृदय विदारक बातें बताई मुझे कि किस प्रकार से उनका जो पूरा घर परिवार है वह रामपाल जी के नाम पर जो गलत शिक्षा
03:51:39:01 फैलाई जा रही है क्योंकि वोह अब नहीं पता वो वहां से क्या कहना चाहते हैं तो उनके नाम जो गलत शिक्षाए फैलाई जाती है उनके कारण उनका ग्रास उनका उस बहन का छोटी सी बहन है व उसका पूरा परिवार बन गया था और भगवत कृपा से जो हम लोगों के प्रयास है उसने बताया आज मुझे उसी नाम नाम जप वाले उसमें कि वोह धीरे धीरे अब जो है उसके मन के अंदर उसकी चेतना शक्ति वापस आ रही पहले वाली जो वह बिना कुछ सोचे समझे अंद भक्ति करने लगा था पूरा परिवार अब उसमें एक वो बीज उत्पन्न हो गया है जो उस परिवार को तो मुझसे कभी-कभी कोई कोई कुछ कहता है कि तुम यह सब कर रहे हो उसे क्या मिला तुम्हे कहता है मैं उससे कहता हूं अगर मैंने एक भी एक को भी सही करा ना जीवन में पूरे जीवन में एक की भी रक्षा कर ली सही धर्म के मार्ग पर या सही जगह से जोड़ा तो मेरा यह जो पूरा अभियान है सार्थक मेरे लिए एक भी एक भी क्योंकि धर्म की रक्षा जो अर्थ होता है ना वह क्या होता है धर्म की रक्षा का अर्थ होता है नारी की रक्षा मातृ शक्ति की रक्षा तो हमने
03:52:54:10 अपने जीवन में एक भी जगह पर धर्म के सिद्धांतों को सार्वभौम सिद्धांतों को बचा लिया तो हमने किसी ना किसी मातृ शक्ति को शोषित होने से बचा लिया यह बिल्कुल सत्य बात है तो अगर आज देखिए हमारा छोटा सा प्रयास है निमित्त मात्र है क्या क्या मायने रखते हैं हम कहां जगतगुरु शंकराचार्य कहां इतने बड़े बड़े आचार्य रामानुजाचार्य कोई कोई हमारी कोई काउंटिंग ही नहीं है मगर आज उनके प्रयासों से उनकी कृपा से गुरुदेव की कृपा से भगवान की नाम जप की महिमा से आज एक सूचना प्राप्त होती है कि एक जगह पर विष युक्त वातावरण में फस चुका परिवार अब उसमें एक बीज अंकुरित हो गया है जहां से वह परिवार वापस लौटने की ओर अग्रसर तो यह मिला मुझे यह मिला मुझे मैं अब जब रात में सोऊंगा तो सुकून के साथ सोऊंगा कि मैंने यह किया और इस बारे में ही गुरुदेव अपने एक वचन में बोले थे कि उनसे किसी ने खड़े होकर के पूछा था कि अरे अगर हमने इनको नहीं मारा उनको नहीं मारा तो वह लोग हमें मार डालेंगे तो वहां
03:54:09:14 पर गुरुदेव ने यही कहा था कि अगर हिंदू यथा साम थ उन्होंने ये नहीं कहा था जाओ बोली बारी लेकर के लड़ो अपनी उसके लिए उन्होंने यह कहा था कि अगर हिंदू यथा सामर्थ्य दर्शन विज्ञान और व्यवहार की सीमा में रहते हुए अपने धर्म का पालन करने लग जाए तो जितने सनातन विरोधी तंत्र है जितने सनातन की आड़ में सनातन विरोधी तंत्र है या सनातन डायरेक्ट सनातन विरोधी है या सनातन की आड़ में सनातन विरोधी तंत्र है उन तंत्रों में ऐसे क्रांतिकारी उत्पन्न हो जाएंगे जो अपने तंत्र का शोधन कर देंगे तो वह जो प्यारी बहन है ना व वही क्रांतिकारी है वह अपने परिवार में एक ऐसा क्रांतिकारी उत्पन्न कर दिया हम लोगों ने जो अपने परिवार का शोधन कर देगा जो अपने उस तंत्र में क्रांतिकारी खड़े कर देगा हमें कुछ नहीं करना है वाले की नोक पर नहीं गुरुदेव यह भी कहते हैं पूरे विश्व को एक दो घंटे की संगोष्ठी के लिए बुला लीजिए जो भी
03:55:24:18 नेतृत्व करने वाले हो पूरा सब सही हो जाएगा मगर वह आएगा नहीं क्यों नहीं आएगा पूरा विश्व क्योंकि उसको शांति चाहिए नहीं कुछ लोगों का जीवन यापन अशांति के आधार पर हो रहा है वह शांति वाला समय आने नहीं देंगे तो इसलिए हमें न देना है कि हम क्या कर रहे हैं केवल दम नहीं बनना है कि तुमको यह करना चाहिए यह सबका वो था और अगर किसी को कोई अपनी बात और कहनी है तो वह कह सकते हैं शिवाजी गिरी आप आ चुके आपको सुन चुके आप जा सकते हैं श्री राम
03:56:06:12 जी ऐसे तो वो महारामायण का श 50 लोक आता है ना उसमें माता पार्वती भगवान शकर कते चार पुरुष है य तो तीन पुरुष की बात करते हैं माहा रामायण में चार पुरुष बताए वो भी भगवान के रूप बताए उन्होने देखो मैं आपको बता ही देता हूं स्क्रीन शेयर का मेरे पास ऑप्शन नहीं है नहीं तो करही द इसमें माता पार्वती आप बोल दो आप बोल दो वो देख लेंगे हम लोग बोल दो आप बोल दो केवल नेटवर्क इशू आ गया अटक गया
03:56:48:24 इनका इसमें क्या है ना अलग अलग कल्पों का वर्णन है जैसे हम रो रोज अलग-अलग सब्जी खाते हैं सब्जी खाना तो नॉर्मल है ना मतलब रोज खाते हैं लेकिन फिर भी रोज अलग-अलग खाते हैं उस हिसाब से अलग-अलग कल्पों में अलग-अलग लीलाएं करते हैं भगवान वो सिस्टम है अच्छा और साथ ही साथ इन अलग-अलग लीलाओं के बावजूद भी कई जगह इन सबके एकत्व की बात भी कही जाती है कई जगह जैसे भगवान शिव बमा वि जाता है हा
03:57:23:03 अच्छा आज इनकी यह बात नहीं प्रूफ हो पाई अगर बैक टू द पॉइंट हो हम लोग तो आज हम लोग बैठे थे कि गीता का ज्ञान श्री कृष्ण से अलग किसी काल ने दिया है तो आज इनके कई लोग आए मगर उन्होंने सब बातें की घुमाया फिराया विषयात करने का प्रयास किया मगर यह नहीं बता पाए कि वह काल ने अलग किसी श्री कृष्ण से अलग किसी काल ने वो ज्ञान दिया है ठीक है अरे 95 पर भी कभी उसने ही दिया है काल नहीं दिया है पूरा ही काल नहीं दिया है पूरा ही काल ने दिया है वो कबीर सिद्ध हो गए हा अच्छा दूसरी एक बात मैं ये कह रहा हूं कि भाई आप लोग भी अपने अपने घर में ऐसे क्रांतिकारी बने जो वैचारिक क्रांति लाए समाज में हर गली मोहल्ले में क्रांतिकारी ऐसा हो जो वैचारिक क्रांति लाए और भटकते हुए हमारा जो समाज है बिखराव में पड़ा हुआ है आधे इधर चले गए आधे उधर चले गए तो एकत्रित हो संगठित हो जिससे की सुरक्षित हो यही हमारा े है एक मात्र सिंगल पॉइंट एजेंडा है कि सनातन धर्म की सनातन को आस्थान वित समाज की वेदों में प्रमाण बुद्धि रखने
03:58:38:03 वालों की हमें रक्षा करनी है जो कबीर पंथी हो गए वो भी हमारे भाई हैं आर्य समाजी भी हमारे भाई है और हमारे इकन वाले भी हमारे भाई हैं सब लोग हमारे भाई हैं जिन बातों के कारण हमारे बीच में अलगाव हो रहा है उन बातों को त्याग कर अथवा अपनी व्यक्तिगत सीमा में सीमित करके आप लोग आगे बढ़ सकते हैं निराकार की पूजा को हम स्वीकार करते हैं साकार की पूजा को आर्य समाज नहीं करता वह आ सकते हैं वो अपने उसमें रख ले उसे कि नहीं नहीं हम तो निराकार की पूजा ही करेंगे हम लोग सब साथ में हो सकते हैं इसी प्रकार से कृष्ण की पूजा हम सब करते हैं मगर आगे आप लोग जानते ही है खैर इस बात को बारबार खींचने की आवश्यकता नहीं है ठीक है आने के लिए समय देने के लिए सभी का आभार और विशेष रूप से गोविंद जी सात्विक जी और पंडित जी का बहुत बहुत आभार हमारे जी आज उन्होने फटाफट फटाफट सारे प्रमाण भी स्क्रीन पर लगा दिए जी ह नहीं मेरे पास बहुत से मा मैं पिछले एक साल से इनसे डील कर रहा [संगीत] हूं जय श्री राम भैया सभी चोट खाए हुए एक
03:59:53:07 हो रहे आवान के मंच पर जी आप आप सभी को जय श्री राम जी मैंने आज का वीडियो मैंने जो लाइव देखा है इसमें तो मेरे को पूरा लग रहा था भाई आप तो नहीं आज तो कोई रामपाल आपका वीडियो चला गया है अच्छा आ गया आ गया जी दोबारा से दोबारा से बोल दीजिए आप जी आप बैकग्राउंड न आ रहा है बहुत ज्यादा ये किसी का बैकग्राउंड को सब लोग अपना माइक म्यूट कर लीजिए जरा हर्ष जी अभी से आ रहा है आपके माइक से आ रहा है आप आप वो निकाल दीजिए ईयरफोन लीड निकाल
04:00:35:09 दीजिए अन म्यूट करिए अब जी आवाज आ रहा है अभी जी आ रहा है बहुत बढ़ बोलिए जी भैया आज से मतलब की जो यहां पर बैठे हैं ना श्री गोविंद गुरुकुल जी की तरफ से अभिमन्यु जी इनके इनसे मैंने बहुत पहले एक बार कांटेक्ट किया था वर्णाश्रम धर्म के विषय में जब मेरे को संशय था उस समय में करीबन तीन चार साल पहले मैंने उनसे कांटेक्ट किया था उनका नंबर भी है मेरे पास लेकिन वो बात किए थे बाद में फिर मैंने इनसे जुड़ा था ना जो रामपाल का जो ये करते है ना बहुत बढ़िया से रामपाल वालो का व उनसे देख कर के मैंने इनसे जुड़ा था बहुत बढ़िया लगा इनका सारा वीडियो मेरे को देख कर के और आज का जो जो वीडियो था आपका शिवाज जी सर भैया तो वो ना आज प्रमाण के लिए स्पेशल बन गया है इतने सारे प्रमाण आज जो देखेगा वीडियो ना वो अगर थोड़ा सा भी विवेकी होगा ना विवेकी तो वो जरूर सत्य की तरफ आ जाएगा इतना बढ़िया था आज का इतना गजब गजब बहुत सारा प्रमाण आज देखने को मिल गया
04:01:51:08 सभी धुरंधर यहां पर एक साथ बैठ गए और सब मिलकर के उन लोगों का तो पूरा बैंड बजा दिया बहुत बढ़िया लगा अ चलिए बहुत-बहुत आभार आपका आभार गोविंद जी गुरुकुल जी हम चाहेंगे आगे हमारे बीच में सकारात्मक ऐसी चर्चा और होती रहे और एफबी इं य पर सभी जगह आप लोगी लाइव स्ट्रीम देख पाएंगे क्योंकि सहयोग प्राप्त हुआ तो हम लोग यह जो आज आप नया प्रारूप देख रहे होंगे लाइव स्ट्रीम का तो वो उसी के कारण है आने के लिए सभी को धन्यवाद और अभी भी मैं कहूंगा एक बात बस बोलूंगा मैं गोविंद जी को आपसे तो पहले भी चर्चा हुई थी शिवान जी की तो मुझे लगा आप दोबारा चर्चा करने आए हैं तो इसलिए मैं भी आया था कि इस बार
04:02:47:04 इन्होंने प्रारंभ रुकिए गोविंद जी इन्होंने प्रारंभ में संतुष्टि जनक वक्तव्य दिए हैं अगर शुरू से देखेंगे ना लाइव को तो आपको मिलेगा त हो चुका है दोबारा से बारबार उन्हीं तारों को ना छेड़ा जाए चता र आज की लाइव में इन्होंने अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा आज की लाइव में मुझे लगा पुरानी वाली की बात हो रही है मैं मैं एक बात बोल देता हूं ठीक है देखिए जी सत्य कार करना है और उस परे चलना है ठीक है जी उस परे मेरे को समय लगेगा थोड़ा सा ठीक है मे बी लेकिन जब मेरी आंखों के सामने सत्य है कि ईश्वर है तो वह सर्वशक्तिमान ही होना चाहिए तो इसमें कोई वो क्यों है और जब जैसे कि मैं पिछली बार आया था तो आर्य समाज का पक्ष रखने आया था वैसे पूरा नहीं लेकिन जब वो स्वयं कह रहे हैं कि हमारी गुरु परंपरा नहीं है तो हम तो खुले दिल से बाहे फैला के कह रहे तब भी आप हमारे साथ अपना वैचारिक मतभेद साथ पर रख क्यों नहीं आना भाई वो इतने दुष्ट लोग है रामपाल की बात नहीं कर रहा मैं स्पेशल इतने दुष्ट लोग हैं ठीक है वो एक साथ जुड़े हुए हैं पक्के और हम सिर्फ इतने से मतभेद से एक दूसरे से नहीं बिखर चाहे कुछ भी हो जाए ठीक
04:04:02:21 है जैसा शवा जी ने बोला की सारे ही भाई है हमारे इसम दो राय नहीं है अत धर्म जो है उसी के साथ हम चलना है तो भाव से भी देखें और इस बात को करपात्री जी ने भी कई बार समझाया बोला है कि घर की बात जो होती है वो घर में ही रहनी चाहिए अगर बाहर अगर बात होगी तो फिर हमें भी डट के कंधे से कंधा मिलाकर करना पड़ेगा वही महाभारत वाला जो अर्जुन और पांडवों के बीच का था वही भाव करपात्री जी ने अपने अपने शब्दों से उसको मैसेज किया था ट तो वही चीज है और वही बात शिवा जी भी बोलते हैं तो मैं बिल्कुल सहमत हूं इस बात से उसे चलिए सभी को आने के लिए आभार समय देने के लिए आभार गोविंद जी आपका भी आभार हष जी आपका आभार साविक जी का भी आभार और जितने भी सज्जन अभी जुड़े थे यहां पर सभी का आभार और सभी को जय श्री राम और ना जप करें भगवन नाम का जप करें सभी चीजें आपको प्राप्त होने लगेगी क्योंकि भगवान ने कहा है भगवत गीता 92 में क्या कहा है कि तू मेरी में ते प्राप्ति चिंता करूंगा तो बस भगवान की शरण में जाइए सब कुछ मिल जाएगा ज्ञान भी मिल जाएगा
04:05:18:12 भक्ति भी भक्ति करने से ज्ञान भी मिल जाएगा सभी को जय श्री राम [संगीत]
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रामपाल की भक्ति मनमुखी या शास्त्र सम्मत
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