⬜ Not used yet · 00:00:24:04 – 02:10:11:24 (2:09:48)
00:00:24:04 तो कल की लाइव स्ट्रीम में जो एक बंदा आया था पहली बार मुझे ऐसा लग रहा था कि कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति आया है ठीक ठाक ये मैं कहूंगा कि रामपाल दास जी की ओर से वो कल पहला एक संभ्रांत व्यक्ति आया था अब उनसे चर्चा के हमने लगभग मेरे ख्याल से एक घंटे उनसे चर्चा की होगी और हमारी आवाज अटक रही है दोबारा जाके दोबारा
00:00:57:19 ह अभी भी अटक रही है आवाज आवाज अटक रही है क्या सही से आ रही है ठीक है तो उसको हम थोड़ा समरा इज करेंगे कल जो उस प्रवीण नाम के व्यक्ति से बात हुई अब यह होता निष्कर्ष तक आने में कन्फ्यूजिंग इतना हो जाता है बीच में बहुत सारे स्टेटमेंट होते हैं जो आते हैं फिर हम उन पर बात करते हैं नहीं करते हैं यह सब चीज बहुत सारी हो जाती जिसकी वजह से निष्कर्ष दिखाई नहीं देता कई बार कि क्या निष्कर्ष निकला उस कन्वर्सेशन का अच्छा उसके अंत में जब हमने उन्हें निकाल दिया तो जाहिर सी बात है कि जो लोग जिन लोगों ने कभी समर्थन नहीं किया तार्किक रूप से तार्किक बातों का तो उनको एक पॉइंट मिलता है कि भा आपने उन्हें क्यों निकाल दिया कि वो तो सही बात कर रहे थे मतलब वो अमर्यादित नहीं हो रहे थे मतलब कोई अगर अमर्यादित नहीं हो रहा है तो उससे हम लगातार 10 10 दिन तक बात करते रहे
00:02:13:12 क्या जब व्यक्ति सामने वाला ऐसी बात कर रहा है कि कुछ कोई जो चीजें हैं जो अभी 50 वर्ष पूर्व आई है और वो ऐड कर दी गई उन वेदा आदि शास्त्रों में जिनमें इनके अनुसार मिलावट हुई है कहां क मिलावट हुई है वो उनको पता नहीं है तो वो ठीक है वो एक अलग एंगल हो गया कहां कहा मिलावट हुई है वो एक अलग बात है उसका क्या प्रमाण है क्यों माना जाए मिलावट हुई है कि नहीं हुई मगर इनका यह तो मानना है कि 250 वर्ष पूर्व एक नई ग्रंथावली आती है उसमें भी बहुत सारा वो है डिस्प्यूट है कि जिसने वो ग्रंथावली लिखी है वो क्या कह रहा है या फिर उसमें भी हम उसमें भी इनका कहना है कि रामपाल दास जी को दिव्य शक्तियां प्राप्त हुई तो उन्होंने ये निचोड़ निकाला कि इस गरीब दास नामक जो ग्रंथ है उसमें से कितना लेना है और कितना नहीं लेना है उसम भी डिस्प्यूट है वो गरीब दास का भी एज इट इज नहीं है वो रामपाल दास जी को सही जितना लगेगा उतना ही है कुल मिला के बात तो वही हो गई कि जितना वेद में से ठीक लगेगा उतना है तो कुल मिला के इनका जो प्रमाण है वो प्रमाण ना तो गरीब दास का ग्रंथ है ना वेदा शास्त्र है ना पुराण
00:03:28:20 है ना गीता है ना उपनिषद है इनका जो प्रमाण है वह रामपाल दास जी की वाणी है तो इनको कहना यह चाहिए कि वेदों में प्रमाण है और रामपाल दास जी भगवान है यह जो लाइन है इनकी यह निराधार है वेदों में प्रमाण है कबीर दास जी भगवान है वेदों में प्रमाण है रामपाल दास भगवान है नहीं इनको कहना ये चाहिए कि रामपाल प्रमाण है कबीर भगवान है जेल धाम में बैठा रामपाल प्रमाण है कबीर भगवान इनको यह सब कहना चाहिए मगर फिर इनकी दुकाने नहीं चलेंगी इनकी दाल नहीं गलेगी इनको स्वयं को अगर किसी प्रकार से सिद्ध करना है तो इनको अपने आप को वेदों से जोड़ना पड़ेगा और बाद में यह रहस्य निकलेगा जब ज्यादा आप पॉइंट करोगे ज्यादा आप क्वेश्चनिंग करोगे तब ये रहस्य निकल कर के आएगा कि भाई वेद तो इनके लिए प्रमाण है ही नहीं है ना तो जिसके लिए वेद प्रमाण नहीं है जो अनादि शास्त्र
00:04:44:02 हमारे धर्म ग्रंथ है जिसके लिए वह प्रमाण नहीं है तो फिर वह स्वयं को सनातनी किस आधार पर कह रहा है पहली बात दूसरी बात ये आ जाती है कि जब कोई व्यक्ति ये कहता है कि वेदों में मिलावट हो गई है ठीक है तो जब वो यह कह रहा है तो उसको शुद्ध बिना मिलावट वाले वेद भी दिखाने पड़ेंगे यह देखो बिना बलाव वाले वेद ये हैं तो क्या ऐसा बिना मिलावट वाला कोई वेद है आपके पास क्योंकि जो वेद है जिस स्वरूप में है उसको आप मना कर रहे हो और बिना मिलावट वाला प्रस्तुत नहीं कर रहे हो तो क्या कर रहे हो जब वेद में कोई एक बात आप कह रहे हो कि मिलावट है तो फिर जो पब्लिकेशन उसे छाप रहा है एक जगह गलत छाप रहा तो दूसरी जगह भी छाप सकता है है ना तो जो वेद में आपने कहा कि वेद में मिलावट है या धर्मशास्त्रों में मिलावट है कहीं पर आपने तीन प्रकार से आक्षेप लगाए आपने उपलब्ध शास्त्रों पर तीन प्रकार से एक काल ने कह दिया होगा दूसरा मिलावट है य मंत्र प्रक्षिप्त है श्लोक है व आर समाज का जो तरीका है
00:06:00:03 तीसरा अनुवाद गलत है पंत्र गलत नहीं है अनुवाद गलत है तो पहली बात तो यह रामपाल वाले जो फॉलोअर्स है उन्हीं के बीच में यह संशय है कि अनुवादक ने गलत अर्थ किया है या मंत्र ही गलत है तो अगर अनुवादक ने गलत अर्थ किया है अगर अनुवादक ने गलत अर्थ किया है तो सही अर्थ आप बताओ कि जहां आ रहा है
00:06:31:18 कवियम कवि नाम गणपति उसका क्या अर्थ निकाला जाए आपके अनुसार सही और अगर मंत्र गलत है तो आपने जैसे ही वेद के किसी एक भी मंत्र को गलत कहा तो क्या होगा कि उसका जो सोर्स है उसकी प्रमाणिकता पर उंगली उठ जाएगी कि भाई यह जो जहां से वेद हम ले रहे हैं उसका अगर एक भी मंत्र गलत है आप तो एक नहीं आप तो कई मानते हो तो कई मंत्र अगर गलत है तो जो एक जगह गलत हो सकता है तो दूसरी जगह भी हो सकता है तो अगर एक भी मंत्र गलत है तो वह उस पूरे वेद में कहां पर सही लिखा है कहां पर गलत लिखा है इसका फिर निर्णय लेने के लिए हमको कोई और आलंबन लेना पड़ेगा जो हमारे लिए प्रमाण हो उसमें हम चुनाव ना कर सकते हो कि इसमें भी सही और गलत का संदेह संदेहास्पद बुद्धि ना हो वेद के प्रति संदेहास्पद बुद्धि है यदि आपकी तो पहली बात तो आप वैदिक नहीं है सनातन नहीं है क्योंकि आपकी बुद्धि संदेहास्पद है प्रमाण बुद्धि नहीं है वेद में कि हम इसकी एक भी लाइन को मना नहीं कर सकते हम इसे नहीं मानते ठीक है तो आप वैदिक नहीं है सनातनी नहीं
00:07:46:19 है अब जैसे इसका उदाहरण है कि रामपाल को गुरु कहने वाले रामपाल में संदेहास्पद बुद्धि नहीं रख सकते उसमें प्रमाण बुद्धि रखनी पड़ेगी कि एक एक बात अक्षरस सही है अन्यथा फिर वो गुरु पर अविश्वास होने का दोष लग जाएगा तो जिस प्रकार से रामपाल के ऊपर आपकी प्रमाण बुद्धि है वैसी प्रमाण बुद्धि अगर वेद प है तो आप वह देखें तो आप हिंदू है तो आप सनातनी है क्यों क्योंकि यह जो शास्त्र है यह अनादी है ये थे हैं और रहेंगे तभी आप सनातनी है इन शास्त्रों को मानने वाले के रूप में आप सनातनी है
00:08:32:24 अब जब आपने शास्त्र के एक जगह पर दोष लगा दिया कि भैया इसमें मिलावट हो गई है पहली बात तो यह है कि यह आप पहली बार नहीं कह रहे हैं यह जो दोष लगा है या आप नए नहीं है यह दोष जितने भी सनातन विरुद्ध विचार धाराए उत्पन्न होती है वह यही दोष लगाती है वेदों पर तब अपना व ताना बाना बनती है इस्लाम में भी यही कहा गया है कि कुरान से पह पहले बहुत सारे ईश्वर के भेजे हुए ग्रंथ आए हैं मगर उन सब में मिलावट हो गई है मगर कुरान की रक्षा स्वयं ऊपर वाला करता है इसलिए कुरान में मिलावट नहीं हो सकती इसलिए वो जो पहले ग्रंथ आ चुके हैं उन सब ग्रंथों की वही बातें मान्य होंगी जो कुरान में लिखी हुई बातों से मैच करेंगी वही आपने किया कि वेदों की लिखी हुई वही बातें मान्य होंगी जो रामपाल के द्वारा गरीब दास के ग्रंथ के द्वारा भी नहीं उसमें डिस्प्यूट है जो रामपाल के द्वारा स्वीकार्य होंगी वही बातें माननी होंगी दूसरी बात यह है तो यहां से एक बात आई कि वेदों में प्रमाण बुद्धि नहीं है तो वैदिक नहीं है हिंदू नहीं है सनातनी नहीं है दूसरा एक बात ये होती है कि जब आप यह कह देते हैं कि एक जगह गलत है तो वो सब जगह गलत हो सकता है
00:09:47:24 कहीं पर भी हो सकता है तो ऐसे में जब हम वास्तविक वेद जो आपके अनुसार वास्तविक है जिसमें मिलावट नहीं है वो हम जब प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं तो क्या हो रहा है उसमें हम अप्रत्यक्ष रूप से कह रहे हैं कि सनातन धर्म नाम का जो धर्म है वैदिक धर्म वो नष्ट हो चुका है उसका आज कोई अस्तित्व के लिए कोई व्यवहारिक उसकी सामग्री प्राप्त नहीं है हम यह कहते हैं सनातन धर्म का अस्तित्व नहीं क्योंकि जो अस्तित्व दिखा अस्तित्व को प्रदर्शित करने वाली जो सामग्री है उसकी विश्वसनीयता पर हमने उंगली उठा दी अब वो एक जगह गलत है तो वो दूसरी जगह भी गलत हो सकता है यह तो रही एक बात कि मिलावट कहने वाला जो मिलावट कह रहा है वह वैदिक नहीं है सनातनी नहीं है क्योंकि वह वेदों के विरुद्ध किसी और सो सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन के आधार पर वेदों में चयन प्रक्रिया कर रहा है कि कहां सही है कहां गलत है ठीक है तो इस तरह का मिलावट का आक्षेप करने वाला वैदिक सनातनी हिंदू नहीं है यह सच्चाई आ गई सामने फिर दूसरी सच्चाई आई कि
00:11:04:27 अ यदि आप यह आक्षेप लगा रहे हैं कि उसमें मिलावट है और यह प्रस्तुत नहीं कर रहे कि सही वाला यह है तो आप बिना बोले यह कह रहे हैं अप्रत्यक्ष रूप से कह रहे हैं कि सनातन नाम का धर्म आज अस्तित्व में नहीं है आज वह सभी है जो किसी विशेष देश काल परिस्थिति में उत्पन्न हुए गरीब दास या कबीर सागर या कुरान बाइबल इत्यादि यह सब जो किसी देश काल परिस्थिति में उत्पन्न होने वाली विचार धाराए है निय मावलिया है वही आज अस्तित्व में है जो अनादि धर्म ग्रंथ है मानवता के लिए वेद शस्त्र उन पर आपने आक्षेप लगा दिया और ओरिजिनल वाला आपके अनुसार है नहीं तो वह जो
00:11:53:13 है आपने अप्रत्यक्ष रूप से अवैध होना स्वयं को सिद्ध कर दिया अब एक बात आती है यह दो चीजें तो निकल आई तीसरी चीज क्या निकली तीसरी चीज य निकली इस बात से कि आपने कह दिया कि भाई वेद में मिलावट है तो वेद में कहां पर मिलावट है कहां पर नहीं मिलावट है यह सिद्ध कैसे होगा तो सिद्ध होने के लिए वेदों को वेरीफाई करने के लिए आप कोई तीसरा पक्ष लाएंगे अब आप लाएंगे गरीब दास अब आप लाएंगे कबीर सागर अब आप लाएंगे रामपाल तो इन तीनों को वेदों को प्रमाण मानने वाला व्यक्ति नहीं मानता कि यह आकर के डिसाइड करेंगे कौन सा मंत्र लेना है कौन सा नहीं लेना है वो होंगे ईश्वर आपके अनुसार ईश्वर होंगे हमारे अनुसार नहीं है तो फिर आप यह कैसे कह सकते हैं अच्छा इनको प्रमाण मानने के लिए आप क्या कहोगे गीता में लिखा है तत्वदर्शी 434 अरे भैया उसमें ही आगे क्या लिखा है श्री कृष्ण को परमात्मा के रूप में स्वीकार करने वाला तत्व ज्ञानी है 435 में ही लिखा है खैर उस बात को भी छोड़ दो नहीं तो यहां से विषय से भटक जाएंगे तो क्या होगा कि
00:13:08:20 जब आपने यह कह दिया कि गीता में कौन सा मंत्र सही है कौन सा मंत्र सही नहीं है यह तत्वदर्शी बताएगा तो तत्वदर्शी को गीता थोड़ी ना सिद्ध करेगी क्योंकि गीता की अपनी प्रामाणिकता भी सिद्ध नहीं हुई गीता की अपनी प्रामाणिकता वेद की अपनी प्रमाणिकता आपके अनुसार सिद्ध नहीं हुई फिर आप वेद के किसी मंत्र के आधार पर तत्वदर्शी कैसे सिद्ध कर दोगे पहले ये तो सिद्ध करो कि इसका ये वाला मंत्र मानना है ये वाला नहीं मानना है जब आप ये चीज सिद्ध कर लेंगे कि ये वाला मानना है ये वाला नहीं मानना है उसके बाद आप ये कह सकते हैं कि हां भाई ये जो मानने वाले मंत्र है उन मानने वाले मंत्रों के अनुसार वो तत्वदर्शी है मगर आप तो पहले उसको तत्वदर्शी कह रहे हो फिर उसी से मनवा रहे हो कि ये वाला मंत्र मानना ये वाला नहीं मानना है ठीक है अब बात आती है कि आपने कहा कि मनमुक भक्ति जो लोग ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति करते हैं जो
00:14:07:22 लोग मंत्र गायत्री मंत्र इत्यादि पढ़ते हैं यह लोग मनम भक्ति करते हैं भाई मनम कौन है जो अपने मन से यह कह रहा है कि इसमें मिलावट हुई है हमको प्रमाण दो मिलावट हुई है किसने करी कब करी कैसे करी प्रमाण दो मनम बातें तो यह है ना प्रमाण दो मिलावट का और अब आप मानते हैं कि इसका प्रमाण है कबीर सागर इसका प्रमाण है कबीर व गरीब दास या इसका प्रमाण है रामपाल तो मेरे भाई एक बात समझ लो सनातन में और सनातन विरुद्ध जितने भी तंत्र है उन सब में एक ही अंतर है क्या कि सनातन उन धर्म ग्रंथों को मानता है जो धर्म ग्रंथ यह नहीं कहते कि मुझे ईश्वर ने रचा ईश्वर की सांस के रूप में है अभी आगे आएगा पार्ट सांस के रूप में है यह धर्म ग्रंथ यह क्लेम नहीं करते हैं इसलिए हमारी निष्ठा है इनम इसलिए हमारा विश्वास है आस्था है क्योंकि बधार उपनिषद दो चर 10 इनको ईश्वर ने रचा नहीं है ईश्वर के स्वरूप सांस के रूप में विद्यमान है ईश्वर की सांस के रूप में है कब कब से है जब से ईश्वर है इनको ईश्वर ने रचा नहीं अनादि हैय यह ग्रंथ
00:15:23:03 ये कहते हैं हमको किसी ने रचा नहीं तो तर्क की पराकाष्ठा क्योंकि अगर रच देगा तो काल को बनाने वाला भी ईश्वर है आपके अनुसार जब काल को बनाने वाला भी ईश्वर है बुराई को बनाने वाला भी ईश्वर है तो फिर उसके द्वारा लिखा गया जो ग्रंथ है गरीब दास का मान लो या कबीर वाणी कबीर सागर मान लो या रामपाल मान लो आज की तारीख में जो रामपाल बोल रहे हैं जब भगवान आपके अनुसार वो भगवान है तो वो तो भटका भी रहा है ना काल को बना के उसकी वाणी पर भरोसा कैसे करोगे ठीक है तो आप उस पर निर्भर भी नहीं हो सकते इसकी चयन प्रक्रिया पर पहली बात तो यह कि चयन प्रक्रिया के लिए रामपाल और गरीब दास को क्यों माने इसका कोई आपके पास लॉजिक नहीं है ना ही तर्क है ना प्रमाण है प्रमाण दिखाओ हर बात में प्रमाण मांगते हो ना प्रमाण दिखाओ कहां मिलावट हुई हम ऐसा कोई प्रमाण दिखाओ जिसको हम मान सके अब भैया तुमने जो जिसको हम प्रमाण मानते हैं उसकी प्रमाणिकता पर उंगली उठा दी तो हम तुम्हारी बात क्यों मानेंगे
00:16:31:15 जब तुम वेदों के विरुद्ध हो गए जब तुम वेद के विरुद्ध व्यक्तिगत तर्क मान्य मिलावट करने वाले राक्षस व्यास स्मृति एक पा व्यक्तिगत तकमान शति के विरोध में शुटी की निंदा करने वाला कि यह जो वेद में लिखी हुई शुटी है यह गलत है मिलावट है यह निंदा करने वाला वेद विरोधी नास्तिक दो 11 मनुस्मृति ठीक है तो इन्होंने क्या किया है काल का बना के कुल मिलाकर के गुथ गुथी करके पहले वेदों से व्यक्ति को आकर्षित करते हैं जब व्यक्ति आकर्षित होकर इनकी टीम का खिलाड़ी बन जाता है तब उसको यह बताते हैं कि वेद भी मिलावटी है वेद वेद जो है वो नहीं है प्रमाण प्रमाण तो एक मात्र वो है संभवत जिनके स्नान से बचे हुए पानी को हम लोग पीते हैं प्रमाण तो वो है तो इतनी बात हो गई अब इसके बाद ये हो गया कि भैया वो व्यक्ति जो प्रवीण था प्रवीण पर वापस आ जाते हैं उसने कहा कि अगर आप उसको नहीं मानते हैं गरीब दास के आधार पर आप वेदों का चयन नहीं कर सकते हैं हम वेदों के आधार पर गरीब दास का चयन करेंगे भाई क्या बात कर रहे हो हम वेदों के आधार पर चेक करेंगे
00:17:46:20 कि रामपाल कितना सच बोल रहा है कितना झूठ बोल रहा है वो वैदिक है ईश्वर भी आकर के अगर कहेंगे कि वेदों वेदों को मत मानो मुझे मानो तो हम वेदों को मानेंगे क्योंकि ईश्वर वो है जो कुछ भी कर सकता है ईश्वर अवाद है सर्वशक्तिमान है यह पूरा संसार अच्छाई बुराई हर चीज उसने बनाई है उसकी इच्छा के बाहर कुछ नहीं होता शायद आपका ईश्वर ऐसा होगा जिसकी इच्छा के बाहर बुरे कार्य होते होंगे है ना तो फिर प्रवीण से प्रवीण ने एक बात कही कि भाई अपना अपना फिर वो है ओपिनियन तो भाई जब अपना अपना ओपिनियन है तो फिर तुम अपना ओपिनियन आग ठोप क्यों रहे हो वेदों में प्रमाण है मान लो मेरी बात और कबीर भगवान है यह तो तुम्हारा ओपिनियन है ना भाई तुम तो वेदों को प्रमाण ही नहीं मानते हो और अगर वेदों को मानते हो प्रमाण एक मिनट एक मिनट इसको अभी थोड़ा सा रुक जाइए मैं जो बात चल रही है उसको कंक्लूजन तो वेदों को प्रमाण ही नहीं मानते हो तो आप वेदों को प्रमाण बता कर के अपनी बात क्यों मनवाने आ रहे हो जब सबका अपना अपना ओपिनियन है भाई हम वेद को मार रहे हैं हमें वेद को मानने दो तुम कभी सागर को मान रहे हो कबीर सागर को मान मानो
00:19:03:04 और यह खूब चिल्ला चिल्ला के कहो कबीर सागर प्रमाण है कबीर भगवान है गरीब दास प्रमाण है रामपाल भगवान है रामपाल प्रमाण है जेल धाम प्रमाण है और रामपाल भगवान है यह सब खुब कहो किसने रोका है मगर आपने अपने ग्रंथों पर क्या लिखा वेदों में प्रमाण गीता तेरा ज्ञान अमृत ये क्या है व्यक्ति को मूर्ख बनाने का तरीका जिनमें आपकी खुद की प्रमाण बुद्धि नहीं अब आप आते हो य बताने देखो देखो वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है भाई तुम्हारा वाला सेलेक्ट किया हुआ मंत्र क्यों माने प्रमाण के रूप में जब तुम खुद कह रहे हो कि इसमें मिलावट हुई है तो यह जो मंत्र है जिससे तुम अपने व्यक्ति को भगवान सिद्ध कर रहे हो तत्वदर्शी सिद्ध कर रहे हो य यह वाला मंत्र तुम्हारे द्वारा चुना जाने वाला क्यों माने क्योंकि गरीब दास में लिखा है तो गरीब दास को हम नहीं मानते क्योंकि रामपाल ने कहा है वो भगवान है क्योंकि रामपाल को हम नहीं मानते पहले हमें मनवा उसके बाद इस मंत्र के आधार पर प्रमाण देना पहले उसको मनवा तो
00:20:09:26 सही ठीक है तो यह बातें हो गई अब इसके बाद क्या हुआ यह व्यक्ति जो आया था प्रवीण य व्यक्ति सनातनी सिद्ध नहीं हुआ और एक चीज और है कि सनातन धर्म की व्याख्या क्या है ये समझ लीजिए एक तो है कि आत्मा सनातन है भगवान सनातन है ठीक है तत्व से सब सनातन है वो चीज हो गई मगर सनातन धर्म का मतलब क्या है सनातन धर्म का मतलब है वो नियमावली जो इस माया रूपी संसार में फंसे हुए जीव को यहां से मुक्ति दिलाने में सहायता करती है वो नियमावली वो विधि वो धर्म सनातन है वेदा आदि शास्त्रों के रूप में ठीक है अब बात ये आती है कि कुछ लोग कहते हैं कि अभी आगे आएगा लोग उस पर बात करेंगे कुछ लोग कहते हैं कि सबका धर्म अलग अलग होता है वो धर्म अलग अलग होता है मगर वो लिखा हुआ है सनातन धर्म ग्रंथावली में जो धर्म समय समय पर अलग अलग होता है जैसे जब कोई व्यक्ति पुत्र है तो उसका धर्म अलग हो गया जब वह पति बना तो पत्नी के प्रति धर्म अलग हो गया यह सब जो अलग अलग हो रहा है द्वापर में अलग हो गया सतयुग में ये अलग अलग जो हो रहा है यह व्यवस्था उसमें
00:21:25:02 लिखी हुई है और वो जो नियमावली है वो सनातन है उसको कभी देश काल परि स्थिति में नहीं रचा गया वो सनातन है तो उस नियमावली को जो अलग-अलग विषय वस्तु स्थिति में अप्लाई होती है मगर वो एक बार जो लिखी गई है उस नियमावली को मानने वाला सनातनी है सनातन हर कोई है तत्व से मगर उस नियमावली को मानने वाला जो सनातन है जिसको कभी रचा नहीं गया कि कौन सी देश काल परिस्थिति में तुम्हें क्या करना है उस नियमावली को मानने वाला व्यक्ति सनातनी है क्योंकि वो जो वह जो नियमावली है वह भी सनातन है अनादि यह सारी चीजें प्राप्त हो गई अब लास्ट में वह व्यक्ति इस पर आया कि तुम्हारा मंत्र कौन सा है है ना तुम्हारा मंत्र कौन सा है इस पर मैंने कहा कि क्यों बताऊं इसका अर्थ क्या है कि मंत्र जो है जो मिलता है गुरु से वह किसी को बताया नहीं जाता है सिंपल आप लोग जब दीक्षा देते हो चाहे कन्या हो चाहे युवा मातृ शक्ति हो चाहे कोई भी उसको अकेले कमरे में ले जाते हो और टीवी चला कर के दिखाते हो और पता नहीं क्या है क्या नहीं है अकेले ले जाते हो कमरे में कोई उस समय दूसरा नहीं होता है नहीं तो तुम बता दो वीडियो सार्वजनिक
00:22:40:04 कर दो जो दिखाते हो सब कर दोगे इस बात का राय का पहाड़ बना रहे है कि कौन सा मंत्र बताया मैंने तब भी वो जो मंत्र था गायत्री मंत्र का नाम लिया मैंने गायत्री मंत्र पढ़ के नहीं बता दिया कि कौन सा मंत्र है गायत्री मंत्र नाम है उसका ठीक है तो इस पर आक्ष हो गया अब जब शास्त्रों की बात एक तरफ हो जाती है तो बात ये आती है क्या जो गरीब दास नामक जो ग्रंथ है उसका प्योर नाम मुझे नहीं पता या रामपाल की वाणी को धर्म के रूप में स्वीकार करना मोक्ष के रूप मोक्ष दिलवाने वाली वाणी के रूप में स्वीकार करना क्या तार्किक है नहीं है क्यों नहीं है पहली बात वो किसी देश काल परिस्थिति में रचित है किसी के द्वारा रचित है अगर वह भगवान के द्वारा रचित है तो उस पर वह खुद क्रेडिबल उसमें आ जाती है क्योंकि भगवान सब कुछ बना रहा है भगवान राक्षसों को भी बना रहा है तो भगवान की रची हुई अगर है किसी देश काल परिस्थिति में वह प्रमाण कैसे होगी बताइए भगवान ही तो है जो विलनस को बना रहा है दुनिया में
00:23:55:25 पहली बात दूसरी बात अब इस पर आ जाते कि मान भी लिया जाए कि उसको प्रमाण मानना है तो क्या उसके द्वारा मिलने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है धर्म तो शाश्वत नहीं रहा तीन तीन बिंदु हमने पकड़े हैं हमेशा सदैव इन तीन बिंदुओं पर आधारित बातें होती है हमारी कौन सी तीन बिंदु सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म सिंपल तो क्या है कि जब हम कहते हैं कि चलो मान लिया कि वह शाश्वत नहीं है वह ग्रंथावली जो लिखी गई है या जो रामपाल की वाणी है वह शाश्वत नहीं है आज किसी देशकाल परिस्थिति में आ रही है और भले ही चलो वह भटका भी सकता है मगर हमसे सच बोल रहा है यह भी मान लिया भले ही वह भटका भी सकता है मगर हमसे सच बोल रहा है यह भी मान लिया थोड़ी देर दुर्जन तोष नय अब भाई मिलने वाली जो चीजें है वो तो वो होनी चाहिए जिनके लिए धर्म का अस्तित्व है व्यक्ति धर्म का पालन व्यक्ति के जीवन में धर्म का अस्तित्व क्यों है क्योंकि उसको चाहिए मोक्ष मोक्ष का साधक क्या है मोक्ष का साधन क्या है सर्वशक्तिमान ईश्वर
00:25:11:19 तो सर्वशक्तिमान ईश्वर है क्या अबाध किसी भी नियम के नीचे ना आने वाला फिर इस पर बात होगी जब मैंने यह प्रश्न पूछा तो वो व्यक्ति कहने लगा जब मैंने कहा कि बताओ भाई सर्वशक्तिमान ईश्वर है क्या वो ऐसे आता है पहले तो वो गड़बड़ा आया बोला नहीं ये मैं नहीं बताऊंगा अब देखो मैंने कहा था मंत्र नहीं बताते मंत्र की जो बात होती कि भाई हर व्यक्ति को कान में मिलता है गुरु से मिलता है वो क्यों ऐसे सार्वजनिक बोले बता दिया राम का मंत्र बता दिया गायत्री मंत्र उसको बोल के नहीं बताया जाता है सार्वजनिक रूप से सिर्फ इतने के लिए अब वो क्या कह रहा है कि नहीं नहीं मैं क्योंकि उस गड़बड़ है उसको सनातन का अर्थ नहीं पता उसको धर्म की परिभाषा नहीं पता है और अब वो जब ईश्वर की बात हो रही है कि उसका ईश्वर कैसा है तो उसको वो भी नहीं पता है बताने से मना कर रहा है फिर जैसे तैसे करके जब हमने ये बता लिया कि भाई वो ईश्वर वहां से य आता है तो जब हमने काउंटर क्वेश्चन किया इसको समझिए जब हमने काउंटर क्वेश्चन किया तो व यह कह रहा है कि आपकी समझ में नहीं आएगा भाई ईश्वर का एक रूप ऐसा है जो हमारे व्यवहार का विषय नहीं है सिर्फ उसको प्राप्त किया जा सकता है जैसे कि एनर्जी का सोर्स है भोजन भोजन के लिए हम व्यवहार कर सकते हैं कैलोरी जो भोजन से प्राप्त होती है उसके लिए
00:26:26:19 व्यवहार नहीं कर सकते उसको हम डिस्क्राइब नहीं कर सकते तो ईश्वर का एक रूप ऐसा है जिसको केवल प्राप्त किया जा सकता है जो व्यवहार का विषय नहीं है और एक दूसरा रूप ऐसा है जो वो व्यवहारिक हो जाता है जिसको जिसके लिए व्यवहार करके हम वहां तक पहुंच पाते हैं तो उसको व्यवहारिक रूप में तो आप ला रहे हो ना नीचे एज इट इज जैसा वहा है वैसा ही य है आप उसको समझने में आने वाला बना के य ला रहे हो और जब समझने में आने वाला बना के यहां ला रहे हो कि जैसा व है वैसा ही य है तो फिर आपका ही एक सत उससे टूट रहा है क्या टूट रहा है आपने कहा कि वो शाश्वत है ट्रांसफॉर्मेबल नहीं है परिवर्तनशील नहीं है तो परवत या तो मत कहो कि व परिवर्तनशील नहीं है मत कहो और अगर परिवर्तनशील नहीं है कह रहे हो तो फिर यह मत कहो कि वह जो है सर्वशक्तिमान है परिवर्तनशील मान लिया अगर परिवर्तनशील मानोगे तो व शाश्वत नहीं है और परिवर्तनशील नहीं है तो वो सर्वशक्तिमान नहीं तो उसको ना उसका जो ना समझ में आने वाला रूप है उसको आप कह रहे हो कि मैं जानता हूं और वह समझ में आने वाला है और आपने यहां लाकर खड़ा कर दिया अब आपने लाके खड़ा किया तो आप ही का एक सिद्धांत टूटा कि वो
00:27:41:22 सर्वशक्तिमान है कि नहीं उस परे आक्षेप आ गया वो ये कर सकता है कि नहीं भाई मान लीजिए कि छ फीट है उनका कद अब मैं कहूं क्या वो इतना बड़ा हो सकता है तो अगर वो हो सकते हैं तो यानी कि उनका वो जो शरीर है छ फीट का वो शाश्वत नहीं है सिंपल वो ट्रांसफॉर्म हो रहा है और जितनी और जितनी देर वो छोटे कद में है उतनी देर जो उनका स्वरूप था जिसको अभी तक हम कह रहे थे कि ओरिजिनल स्वरूप है जितनी देर वो छोटा छोटे स्वरूप में रहे उतनी देर वो नष्ट हो गया वो शरीर उसका अस्तित्व नहीं है जितनी देर वो ये हुआ तो अगर आप आपने उसको निश्चित उस समझ में ना आने वाले रूप को आपने समझ में ना आने वाला बना केर खड़ा किया जिससे आप ही के द्वारा बताया गया एक रूल टूट गया ईश्वर सर्वशक्तिमान है और ऐसा ही होगा जब भी परंपरा प्राप्त आचार्यों के विरुद्ध आप बातें करोगे आपका ईश्वर बाधित हो जाएगा सर्व सामर्थ्य वान नहीं रहेगा पहाड़ नहीं बन पाएगा शेर नहीं बन पाएगा नरसिंह अवतार नहीं ले पाएगा सब कुछ करने वाला नहीं होगा आपका ईश्वर आ जाना कभी
00:28:57:00 भी कर देना सिद्ध तो जब हमने पहले तो उनका जो ग्रंथों की भूल भुलैया है ग्रंथों पर बात करो ग्रंथों तो जब मेहनत करके हम ग्रंथों की भूल बलैया से बाहर आए और हमने कहा अब ग्रंथ में बात करनी नहीं है हो गया अपना अपना ओपिनियन हो गया अब सीधे इस पर आते हैं कि तुम गैर हिंदू हो और मैं हिंदू हूं यही तो हो गया तुम अवद हो और मैं वैदिक हूं तुम गैर सनातनी हो और मैं सनातनी हूं यानी कि तुम इस्लाम बाइबल इस्लाम ईसाई इनके जैसे हो और मैं वही हूं सनातनी अब बात आती है क्या तुम्हारे द्वारा बताया जाने वाला जो धर्म और ब्रह्म है उसको माना जाए कि नहीं तो इसके लिए सर्वशक्तिमान की जांच करनी है उसके बाद बात होती तो मोक्ष की जांच करनी है पर पहले तो व्यक्ति यह कह रहा है कि मैं बताऊंगा ही नहीं और जब बात फस गई तो वो यह कह रहा है
00:29:50:22 कि ऐसे नहीं होता है यह है तो ये नहीं है ये है तो ये नहीं है कहां लिखा है ये है तो ये नहीं है कितनी बार मैंने सिद्ध किया कि आपकी जो बात है मनम है मिलावट मनम रामपाल को क्यों माने मनम गरीब दास को क्यों माने मनम अब आप कह रहे हो कि भैया यह जो है आपने उसको साकार भी बना दिया फिर कह रहे हो समझ में नहीं आएगा तो यह सब बातें आपकी मनम तो ये सब चीज जब वो इस पर अटका कि नहीं नहीं ऐसे नहीं होता है कि ऐसा है तो ऐसा नहीं है ऐसा है तो ऐसा नहीं है तब हमने उसको जब एक घंटे दे दिए थे व्यक्ति को एक डेढ़ घंटा उसके बाद उसे हटाया उसके बाद भी आक्षेप कर रहे हैं मनमुक मनमुक खूब बातें करने के बाद भी आक्षेप ये कर रहे हैं कि ये जो गलत हटा दिया उस व्यक्ति को भाई उस व्यक्ति को हमें बहुत पहले हटा देना चाहिए था जब उसने ये कहा था कि मुझे सनातन का नहीं पता जब तुम्हें सनातन का अर्थ नहीं पता है तो तुम क्यों कह रहे हो कि हम सनातन धर्म को मानते हैं पता करो फिर मानो तुम्हें पता ही नहीं है जब सनातन कार्थ तो तुमने कहा कैसे कि हम सनातन धर्म को मानते हैं जैसे उस दिन वो आया एक यह पढ़े लिखे लग रहे थे और वो अनपढ़ लग रहा था वो बोलता है अमित दास वो बोलता है
00:31:06:01 कि सर्वव्यापक है ईश्वर जो है सर्वव्यापक है फिर मैंने पूछा सर्वव्यापक का अर्थ समझ रहे हो इस मैंने उसकी परीक्षा लेने के लिए नहीं पूछा था ये प्रश्न मैंने अपना क्वेश्चन तैयार करने के लिए उससे क्लियर किया कि सर्वव्यापक का अर्थ इसको पहले क्लियर कर दूं तो मैंने उससे पूछा वो बोलता है सर व्यापक का अर्थ पता नहीं इसका मतलब मतलब आंखों पर पट्टी बांध करके सर मार रहे हो ना दीवारों में और ऐसे लोगों से हम घंटे घंटे डेढ़ डेढ़ घंटे बात कर रहे हैं उनको समय दे रहे हैं जिससे कि उनके कुतर को को काट सके सच्चाई सामने ला सके उसके बाद उसे हटा रहे हैं जब वो कुतर कुतर कुतर को ऐसा कुतर खुद की बात को काट रहा है परिवर्तनशील नहीं है मगर वह पहाड़ बन सकता है समझ रहे हो बदलता नहीं है मगर वो बदल सकता है खुद ही ये बात बोल रहे हैं
00:32:00:06 तो मनमुक चीजें खुद करते हो और हमको बोलते हो कि मनमुक तो अब एक भाई साहब है जो हमारा दिखा दिखा करके वहां पर एक किसी व्यक्ति को पूर्वाग्रह के रूप में सामने बिठा लेते हैं हरी चद्दर इस्लामिक कलर की चद्दर पीछे लगा लेते हैं हालांकि वो होता क्या है कि जो व्यक्ति के मूल में होता है व न केन प्रकार उसके साथ आ ही जाता है अब इनके मूल में इस्लाम है इनके मूल में सातव आसमान पर बैठने वाला इस्लामिक ईश्वर जैसा तानाबाना है तो क्या है वो हरी कलर की चद्दर पीछे लगी मिलेगी आपको उसमें एक आदमी बैठा हुआ बातें कर रहा होगा अब इनको इनका धेय है कि हमें नहीं दिखाना है कि हम इस्लाम को मानते हैं मगर वो इस्लामिक चीजें इनकी बातों में इनके आचरण में इनके आसपास वो होंगी रिफ्लेक्ट होंगी उसकी फोटो खींच लो आप आपको लगेगा दरगाह में बैठा व्यक्ति हरिचंद्र जो पीछे है हालांकि वह हरि चद्दर का परवन किसम है व ग्रीन बैग हटाने के लिए जो आता है ना स्क्रीन ग्रीन स्क्रीन लगा देते हैं पीछे मगर
00:33:15:12 अब वो भाई मैंने कहा ना वो रिफ्लेक्ट होती है वो चीज इनकेन प्रकार आपको मजबूर कर दिया जाएगा कि आपका जो मूल है वो लोगों को दिखाई पड़ने लगे तो अब हम उनके जो उन्होंने वहा क्या किया कि हमारी बातों को ले लेकर के और क्या कहते हैं कि उसने यह कहा एक व्यक्ति सामने आ गया उसने यह कहा तो वो जो भाई साहब है थोड़े अधेड़ उम्र के हैं चश्मा लगाते हैं तो उन्होंने कहा कि आवान यह कहता है तो वो अपने कुतर में जवाब दे रहे हैं और वो सामने वाला व्यक्ति सेटिस्फाइड होता दिखाई दे रहा है और फिर ताली बजा रहा वाह वाह वाह वाह वाह वाह भैया कभी सामने तो आओ तब पता चलेगा किसमें कितना है दम है ना तो अभी हम देखते हैं उनके कुतर क्या क्या थे दिखाइए भैया जरा दो चार कुत दिखाइए
00:34:15:20 उनके न तो वहा पर जो भगत जी जुड़े हुए थे कोई अमित दास करके जी उने काफी कुछ जब सवाल किए उसे तो सवाल किए प्रमाण के ऊपर तो उसने फिर रिमूव कर दिया को ऐसा ही होता है अब एक मिनट यहां पर जरा एक मिनट रुकिए प्रमाण क्या है जब तुम्हारे लिए प्रमाण वेद है ही नहीं तो वेद और पुराण पर बात क्यों करें अरे भैया तो यह कह रहे हो कि इसमें मिलावट हुई है हम थोड़ी ना कह रहे हम तो उसकी एक एक चीज को मानने वाले हैं ना तो फिर जब तुम उसे प्रमाण नहीं मानते तो प्रमाण मान क्यों रहे हो क्या रामपाल ने बताया वो सही है रामपाल को हम नहीं मानते भाई तुम मानते हो चलिए बढ़ाइए आगे तो जब ऐसा कुतर
00:35:21:07 करेगा मानने की ना मानने की स्थिति में बात रखता है तो उ देता है बोलने नहीं देता है हा बोलने नहीं देता है अब अगर हमने आपको स्टेज पर ले लिया है तो तीन चार साल तक हम आपके साथ तीन चार साल नहीं अनंत कालीन क्योंकि तुम तो य कभी कहोगे नहीं कि कबीर भगवान नहीं है रामपाल भगवान नहीं है क्योंकि तुमने तो पानी पी लिया है इसलिए आप तो कभी कहोगे नहीं तो हम हम आप उसन जाता देखिए मैं बताऊ भगत जी मैं उसके चैनल पर लाइव जा सकता हूं लेकिन मैं जान बूझ के नहीं जाता हूं क्योंकि मैं अपनी बात रखना चाहता हूं तब वो रखने नहीं देता है क्यों मैं देखता हूं भक्तो कोम कर देता है बोलने नहीं देता है बस गुमरा यह भाई साहब कह रहे हैं कि वह मेरे चैनल में उसके चैनल पर इसलिए नहीं जाता हूं पूरा कर दो इनकी बात य चैनल वाली चैनल पर ना जाने वाली पूरी करलो ता है लोगों को इसलिए यदि उसको है तो हमारे चैनल पे आए ना वो लाइव हम उसको लाइव लाते पहली बात ये है कि आज मुझे पता चला कि आपने कहा यदि
00:36:36:07 उसको आना है तो हमारे चैनल पर आए ना लाइव भाई मैंने अब तक जितने वीडियोस बनाए हैं कबीर वालों को लेके और लगभग मैंने जितन को भी लेकर जितने वीडियो बनाया हर वीडियो में नंबर दिया है क्या उंगलियां काप रही है क्या टच करने में शिवांश द्विवेदी का नंबर कांप रही है क्या मिलाओ नंबर भैया हमारे चैनल पर आ जाओ कब कहा तुमने किससे कहा तुमने मुझे क्या पता भैया तुम मेरे सपनों में आओगे
00:37:10:15 क्या दूसरी बात यह है कि हमने कई बार कहा अगर तुम तो हमें पूरा पूरा देख रहे हो ना क्योंकि तुम बता रहे हो कि हम क्या क्या करते हैं तो इसका मतलब तुम हमें पूरा देख रहे हो कि हम क्या क्या करते हैं तो हमने उसमें यह भी कहा था कि भाई अगर चैनल की बात पड़ेगी कि किसके चैनल पर आना है तो कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा है गुर्दा बीच का रास्ते पर बात करने का गुर्दा है कोई बीच का चैनल ढूंढ लेते हैं जो दो लोगों की आपस में बात करवाता हो ऐसा कोई चैनल ढूंढ लेते हैं कई चैनल्स होते हैं ऐसे ऐसा कोई चैनल ढूंढ लेते हैं उस पर आप आ जाओ हम भी आ जाए और गुरदा सुनो अगर रहते हो मुंबई में तो बीच का एक प्रणाम देख लेते हैं मैं इधर से इंदौर पहुंच जाऊंगा आप उधर से इंदौर आ जाओ आ जाओ मैदान में आधा आधा दोनों यात्रा करेंगे आ जाओ गुरदा है गुरदा केवल अपनी कायरता को छिपाने का प्रयास है यह कुछ कह रहे हैं राहुल जी इनकी अन म्यूट करिए राहुल जी
00:38:20:25 को जय श्री राम जय श्री राम जी भाई भैया जी एक बात है गीता का जो 18 अध्याय का 62 वा श्लोक है नहीं नहीं वो अभी हम आएंगे अभी टॉपिक अलग चल रहा है अलग चल रहा है हा जी जी अभी हम आएंगे ठीक है तो वो लाइए जरा स्क्रीन दोबारा उनकी तो भाई आप पहली बात तो मैंने अपना फोन नंबर दिया था कि अगर चैनल को लेकर के कोई दिक्कत है कि आप हमारे चैनल पर नहीं आ आना चाहते हैं तो आप हमसे संपर्क करिए कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा हम इधर से आएंगे तुम उधर से आ जाना मगर दूर ही दूर से अपने कक्ष में बैठ कर के इस्लामिक चद्दर पीछे लगा कर के वीडियो बनाओगे
00:39:13:18 बस एक फोन नंबर तक डायल करने का आपका वोह नहीं है साहस कि फोन कर लो आप लोगों से अच्छे तो वोह हैं जो दण विश्वास रखते हैं रामपाल दास जी में तो व आते हैं जबकि वह कोई ज्ञानी नहीं है और आप लोग जो शीर्ष में बैठे हो केवल अपने महिमा मंडन में बैठे हुए हो ट चलाने के लिए आप लोगों में साहस नहीं हुआ अभी तक कि आप लोग संपर्क कर पाते बात करते हैं व हमारे चैनल पर अरे भाई यही बात बोल देते तुम हमको फोन करके कि हमारे चैनल पर आ जाओ हम बात करते नंबर देते अपना हमने तो कैसे खुली खुला छूट नंबर दे रखा है इसको कहते हैं गुरु गोविंद ग्रंथ का बल य ऐसे ही नहीं आता है जब पीछे वास्तविकता होती है ना तब आता है जिसको लगता है ना कि अब मैं सत्य पर खड़ा हूं मैं इसके लिए अपने प्राण त्याग सकता हूं तब आता है यह बल नहीं तो व्यक्ति ऐसे ही हरि चद्दर लगा के अकेले कमरे बैठ के बातें छोक है करो ना संपर्क आते हैं बीच के चैनल पर और ज्यादा चैनल में दिक्कत है तो सीधे वन ऑन वन आते हैं न वन अभी
00:40:28:22 इनके कुतर्क देखिए आगे मानते हो तो उसको पूरा मानो जी आधा क्यों मानते हो देखिए यदि कोई टीचर पढ़ा रहा है मैं आपसे मैं बताता हूं मैं उसके बारे की एक बात बताता हूं जैसे कोई भी टीचर पढ़ाता है किसी के जीवन में उदाहरण तौर पर यदि सिलेबस से वो पढ़ा रहा है पढ़ाते शब्द में कहीं वो गलती हो जाती है तो ऐसा तो है नहीं कि वो टीचर गलत हो गया हम यदि वो पढ़ रहा है कहीं को उससे गलती हो जाती है तो वो दोबारा उसको बताता है कि ये गलत हो गया या ऐसा नहीं होना चाहिए या फिर दूसरा कोई टीचर आ जाए जानकार वो बताए कि नहीं यहां पर ये नहीं था यहां पर ऐसा होना था तो क्या वो टीचर गलत हो जाएगा या फिर वो पूरा सिलेबस गलत हो जाएगा बताइए पूरा सिलेबस नहीं गलत होगा जितना आंसर गलत दिया हुआ है उतना ही आंसर गलत
00:41:23:27 हो चलो बस बस बस अब देखिए यहां इन्होंने क्या किया है सबसे पहली बात तो अगर हमारे शास्त्र अनादि है और ईश्वर प्रदत्त है ईश्वर से हैं तो एक सामान्य टीचर जिससे गलती होना संभव है उसकी तुलना किससे कह कर रहे हैं भगवान से जो कि कौन है इनके अनुसार कवि है कवि का अर्थ क्या है सर्वज्ञ है सब कुछ जानता है भाई जो सब कुछ जानता है उससे गलती नहीं होती है पहली बात तो यह ईश्वर से गलती होना स्वीकार कर रहे हैं उसके बाद इन्होंने क्या कहा कि अगर वह कुछ गलत लिख देता है तो मेरे भाई आपको देने से पहले वह उसमें सही करेगा पहली बात तो यह कि उससे गलती होना संभव नहीं है और अगर गलती हो भी रही है तो वह उसको सही करेगा देने से पहले आपको क्या बात कर रहे हो ईश्वर है ना यार वो गलत हो गया गलत ही दे देगा वो जानता जबक वो सर्वज्ञ है हा उसके बाद क्या कह रहे हो आगे के दूसरा टीचर आकर के वो कर देगा इसका मतलब अगर दूसरा टीचर है पहली बात तो ये है वो जो दूसरा आया है
00:42:39:24 रामपाल उसको तुम दूसरा ईश्वर मानते हो हम नहीं मानते हैं पहले उसको ईश्वर तो सिद्ध करो दूसरी बात ये है कि अगर दूसरे टीचर के आधार पर आप पहले टीचर की वाणी को करेक्ट कर रहे हो दूसरे टीचर के आधार पर आप तो नहीं कर रहे दूसरे टीचर ने किया इसका मतलब वो जो पहला टीचर है आपके लिए प्रमाणिक नहीं है वो जो दूसरा टीचर आया है वह आपके लिए प्रामाणिक है क्योंकि उसके आधार पर आपने इसमें रद्द बदल किया आप मुझे बताओ क्या रामपाल को लेकर के भी आपके मन में संदेहास्पद बुद्धि है क्या यह भी कुछ गलत कह सकते हैं वो बात और है कि आप लोग चिल्लाते रहते हो कि वज्र का वो जो ब्रज का अर्थ है वो है जाना और भाई साहब इन्हीं की गीता में लिख दिया 18 66 में ब्रज का अर्थ आना अब वो कैसे हुआ इनसे गलती हो गई अपनी बात को काट दिया बात की बात मगर इन्होंने ही अपनी गीता में प्रमाण दे दिया कि रामपाल से गलती हो सकती है तो अगर आप यह सोच रहे हो कि वेदा दि शास्त्रों में किसी से कोई गलती हो गई है ईश्वर से गलती हो गई है तो उसको बदलेगा कौन जिससे खुद
00:43:54:24 से गलती हो रही है इसीलिए भाई हम उन शास्त्रों को मानते हैं जिनको किसी ने रचा ही नहीं है ईश्वर ने भी नहीं रचा मगर हम तो बात ये कर रहे हैं कि अगर वो ईश्वर से प्रदत्त है तो पहली बात तो ईश्वर से गलती नहीं हो सकती आप मानो अपने ईश्वर को ऐसा जो गलत चीजें दे देगा उसके बाद उसको क्योंकि वो सर्वज्ञ है जानबूझकर वो आपको गलत दे रहा है और उसके बाद आप किसी और से उसको वेरीफाई करवा रहे हो तो इसका मतलब आपके लिए वो जो जिससे आप वेरीफाई करा रहे हो वो आपके लिए प्रमाण है तो प्रमाण वो आपके लिए है रामपाल हमारे लिए प्रमाण नहीं है हिंदुओं के लिए सनातन वैदिक आर्य हिंदुओं के लिए रामपाल जो जेल धाम में बैठा हुआ है वह प्रमाण नहीं
00:44:39:07 है इसको डालो अपनी उसमें कुपड़ी में ठीक है कि दूसरा टीचर दूसरा टीचर यानी कि दूसरा ईश्वर का दूसरा रूप ईश्वर का या दूसरा ईश्वर वो तुम कहते हो कि वो दूसरा ईश्वर है तुम कहते हो कि दूसरा टीचर है हम नहीं मानते ना जब पहले उसको हमारे लिए दूसरा टीचर सिद्ध तो करो और जो लोग यह कहते हैं मिलावट हो गई इसमें एक बात और है मिलावट हो गई इनके अनुसार वेद शस्त्र दिए तो ईश्वर ने ईश्वर को नहीं पता था कि जो जिसको मैं दे रहा हूं मिलावट करेगा कि नहीं करेगा या यह अपने से आगे यह समझ पाएगा कि नहीं समझ पाएगा कि यह वाला व्यक्ति मिलावट करेगा कि नहीं करेगा ईश्वर ने दिए मान भगवान ने दिए आप उसको कबीर कहते हैं कबीर ने दिए ब्रह्मा जी को ठीक है ब्रह्मा जी ने दिए वशिष्ठ जी को तो ब्रह्मा जी को नहीं मालूम था वशिष्ठ जी परिवर्तन कर देंगे चुनाव करना गलत था अगर ब्रह्मा जी का वशिष्ठ जी पर चुनाव करना गलत था तो फिर कबीर का ब्रह्मा जी को चुनाव करना गलत था कबीर गलत हो गया जब आप कहते ना मिलावट हो गई सोच के बोलो वो दोष सीधा जाएगा कबीर पर लगेगा
00:45:55:06 ईश्वर पर लगेगा वो दोष मिलावट का ईश्वर को ईश्वर ने क्यों ऐसे व्यक्ति पर विश्वास किया जो धूर्त था कैसे भी पकड़ लो मत पड़ो चक्कर में हां अब आगे इ वो ये कहता है कि नहीं पूरा ही गलत मानो या फर या पूरा सही मानो जो भी लिखा बात भगत जी ये है सिर्फ ये बोलने नहीं देता क्योंकि अभी भगत जी ने एक सवाल उससे पूछा था कि आप कौन सा मंत्र जाप करते हो तो बोले मैं क्यों बताऊ हां बिल्कुल मंत्र उसने उसने कह दिया मैं गायत्री मंत्र जाप करता हूं जी मैं गायत्री मंत्र जाप करता हूं फिर भगत जी ने उससे जो है वो लिया रिफरेंस भगवत गीता का कि भगवत गीता में तो श्री कृष्ण ने अपना एक ओम मंत्र बताया है और परम अक्षर ब्रम के लिए ओम तत्सत कहा है और उसी चीज को कुरान में एन सन काफ कहा गया है कर अब उसने गीता छोड़ दी अब वो देवी भागवत बस गरी पहली बात तो यह है कि मैं पहले ही बता चुका कि क्या यह लोग अपने मंत्र को सार्वजनिक करते हैं वह वीडियो जो अकेले कमरे में अंधेरे कमरे में जाकर के दिखाते हैं जैसे आपत्ति जनक फिल्में देखी जाती
00:47:10:06 हैं उस तरीके से मंत्र को जा करर के वहां टीवी पर देखते हैं जाकर के क्या यह उस चीज को पब्लिक करते हैं क्या जो मुझसे कह रहे हैं कि तुम अपना गुरु मंत्र बता दो हमको और यह गुरु मंत्र से मतलब क्या है जब आप भगवत गीता को मानते ही नहीं हो रामपाल के अनुसार यह चुनाव करते हो रामपाल जिसको कहेगा यह मेरा प्रमाण है देख तो रामपाल पर आप विश्वास कर रहे हो और विश्वास के आधार पर आप भगवत गीता में सेलेक्ट सिलेक्टिव हो रहे हो तो वही वाली बात कि रामपाल को पहले आप सिद्ध करो कि इसको हम प्रमाणिक क्यों मान ले अब आप कहोगे आपके ग्रंथों से प्रमाणिक है भाई आपने ही कहा कि इन ग्रंथों में मिलावट हो रही है और यदि हम मानेंगे तो पूरा मानते
00:48:01:19 अब बात आती है कि गीता भगवान ने वो कहा है प्रणव तत्सत मगर क्या यह कहा है कि इसका इतनी बार डेली जाप करना है इससे वो मिलता है उन्होंने ब्रह्म के नाम के रूप में बताया ठीक है ईश्वर के नाम के रूप में प्रणव तत्सत बताया मगर क्या यह कहा इसका जाप करना है कहां लिखा है जाप करने के बारे में मैं जो बता रहा हूं गायत्री मंत्र या शिव जी का मंत्र या कृष्ण जी का मंत्र राम जी का मंत्र इनका लिखा है जाप करो फलानी माला पर जाप करो ये सब लिखा है कहां लिखा है जाप करने के बारे में वो नाम बताया उन्होंने और उनका जो परवन है इसमें होता है वो जो तत्सत है ना प्रणव तत्सत उसका परवन होता है श्री ब्रह्मा श्री
00:48:55:07 ब्रह्मर्पनम हुए ऐसा नहीं है कि उसको मगर उसको एक निष्ठ होता से जो हम किसी भगवान के किसी रूप का जब वर्णन वो कर रहे होते स्पेसिफिकली उसके लिए जाप का विधान नहीं दिया उसका उसको यूज करते हैं हम भी तत्सत को मगर स्पेसिफिकली अपने ईस्ट की भक्ति करने के लिए उसका विधान शास्त्रों ने नहीं किया है अगर किया है तो दिखा दो कि श्री कृष्ण की भक्ति करने के लिए या तुम अनुसार कबीर की भक्ति करने के लिए काल की भक्ति करने के लिए क्या उस मंत्र का जाप करो माला पर लेकर के लिखा है क्या मनमुक भक्ति तो तुम लोग करते हो और कहते हो कि मनमुक भक्ति करते
00:49:42:13 हैं चलिए और एक एक कुतर्क और था रुक जाइए एक कुतर्क और था सीधा वो चला गया देवी भागवत प क्यों भाई जिस वेदव्यास ने यह लिखा है भगवत गीता उसी व्यास ने लिखा है ना देवी भागवत और देवी भागवत के प्रमाण तुम नहीं देते क्या अलग-अलग अलग अलग जगह से संकलित करते हुए अपनी बात को नहीं रखते
00:50:15:21 क्या कि वो देवी भागवत में चला गया तो देवी भागवत जि जिन वेदव्यास जी ने महाभारत लिखी है उन्हीं वेदव्यास जी ने क्या कहते हैं देवी भागवत लिखी है तो उसमें मुझे रबली याद था वैसे अनेका अनेक जगह गायत्री मंत्र का विधान अनेका अनेक जगह मगर मुझे उसमें याद था तो मैंने एक प्रमाण दे दिया तो देवी भागवत पर क्यों गया भाई क्यों ना जाए तुम्हारे लिए चयन प्रक्रिया है रामपाल जो देश जेल धाम में बैठता है उसके अनुसार शास्त्रों का चयन करो मंत्रों का चयन करो श्लोकों का चयन करो और अभी भी मैं कह रहा हूं दावे के साथ आप आ सक आपकी जो यह बात है ना कि 5 पर इसको भी गलत सिद्ध कर देंगे ठीक है चलिए चलाइए आगे
00:51:13:27 चलाइए उसता जहा पर प्रमाण पूछा गया वहा पर बता यदि तू वेदों को मानता है और गीता जी को मानता है तो पले रोक दो जहां पर प्रमाण पूछा गया है वहां पर बताय कौन डिसाइड करेगा यह डिसाइड आप क्यों करेंगे जब हमारे पास 18 पुराण चार वेद 108 उपनिषद या उनमें से प्रमुख 11 उपनिषद और स्मृतियां है महाभारत रामायण इत्यादि के रूप में तो आप कौन होते हैं उसमें सीमा करने वाले कि जहां पर मांगा गया वहां दिखा मैं आपसे कह दूं ऋग्वेद के पहले सूक्त के पहले मंत्र मेंे प्रमाण दिखा दो कबीर का रामपाल का दिखा दोगे
00:52:05:04 चलिए बता कृष्ण भगवान की त क कृष्ण भगवान ने बताया है ता राधे राधे बताया तो गीता में कही मेंशन करके बताया ओम नमवा राधे राधे या गायत्री म क लिखा है गीताज में गीता जी के अंदर कहीं नहीं है गने क्या जब मैं कहूंगा कि भाई तुम गीता जी के अंदर दिखा दो कि कबीर भगवान है यह लिखा है क्या तो तुम उसमें अपनी बातें घुमाओ ना दूसरे शास्त्रों को लाओगे कबीर सागर को लाओगे सूक्ष्म वेद को लाओगे अभी आता हूं सूक्ष्म वेद पर भी अपना तो वह शास्त्र भी ले आएंगे जिनको सनातन धर्म ग्रंथावली में शामिल ही नहीं किया गया और हम वेदव्यास जी वेदव्यास जी के द्वारा रचित दूसरे ग्रंथों को लाएंगे तो तू गीता जी में दिखा इतने भाई पैदल हो क्या अकल
00:53:01:00 से चलिए और यह सब जो है नाम जाप नाम जाप की महिमा यह सब ब्रह्म वैवर्त पुराण जो 18 महापुराण है उनमें से किसी ना किसी पुराण में गणेश जी का मंत्र राम जी का मंत्र हनुमान जी का मंत्र और यह हरे कृष्ण हरे राम वाला मंत्र सब में लिखा हुआ है चलाइए वेदव्यास जी ने गीता लिखी और इसके बाद उनने पुराण भी लिखे 18 पुराण भी लिखे तो पुराणों में कहीं ना कहीं तो लिखा होगा तो उसने फ श्रीमद देवी भागवत पुराण में लेके चला गया वो कहीं ना कहीं नहीं लिखा है भाई मुझे वर्ली याद था इसलिए बोला मैं दिखा देता हूं कहीं ना कहीं नहीं लिखा है
00:53:57:27 कच्ची गोलिया नहीं खेलते हैं कहीं ना कहीं नहीं लिखा है ठीक है बताते हैं आपने सब लगता है वह पीडीएफ पढ़ने का भी वो नहीं किया थोड़ा सा कर लेते गायत्री मंत्र का महात्म है देवी भागवत बारवा स्कंध तीसरा अध्याय और 25 वा श्लोक खोल लेता हूं देवी भागवत देख पाओ तो देख
00:54:31:04 पाओ बावा अध्याय देवी भागवत से तुम प्रमाण लाओ कि वो सतयुग के जो राक्षस थे वो ब्राह्मण है तो कोई दिक्कत नहीं है तुम प्रमाण लाओगे ब्रह्मा विष्णु महेश का आविर्भव और तिरो भाव होता है तो कोई दिक्कत नहीं है दूसरा लाए तो गलत है इसको बैन कर दो पियूष वादवानी को यह मूर्ख व्यक्ति कुछ ना कुछ विघ्न डाला करता है राक्षसों की
00:55:20:07 तरह एकादश बारवा स्कंद यह देख लो भैया बड़ा है थोड़ा दिखाने में दिक्कत आएगी ये देखो ये खा गायत्री मंत्र की महिमा बारवा स्कंद द्वादश स्कंद ठीक है अब इसमें दिखाते हैं मोक्ष मिलता है कि नहीं इससे ठीक है प्र संख्या 1696
00:55:57:20 आप लोगों नेय जो लाइव स्ट्रीम की है ना बच्चों वाली चुन्नू मुन्नू वाली इससे बहुत कुछ हमें कंटेंट दे दिया आपने कहने को लोगों को बताने को और क्या क्या तथ जाएंगे सामने आपने गुड़ गोवर कर दिया मैं कहता तो हूं 100 मूर्ख दो मित्रों से अच्छा एक बुद्धिमान शत्रु होता है जितना तुमने मटिया मेट किया है रामपाल दास जी को उतना हमने नहीं किया हम कई कई जगह उनकी हसी उड़ने से बचा लेंगे मगर तुम लोग क्योंकि मूर्खता की हद है तो तुम लोग और ज्यादा वो करोगे सत्यानाश उन्हीं
00:56:40:12 का अभी जो जो कहा अभी सब चलेगा देखना 12 13 12 3 25 1696 ध्यान
00:57:53:20 ये देखो 12 3 25 इसको पढ़ने और सुनने से शस्त्रों गोदान का फल प्राप्त होता है इस कवच को धारण करने से मनुष्य सब पाको से मुक्त होकर परम ब्रह्म पद को प्राप्त कर लेता है इसमें संशय नहीं है मोक्ष प्राप्त होता है यह सब कुछ लिखा है इसमें देख लो भैया थोड़ा बड़ा है हम लोग व संक्षिप्त वाला नहीं पढ़ते हैं ना केवल हिंदी हिंदी श्लोकों के साथ पढ़ते हैं अगर पढ़ने में आया तो देख लेना वरना चेक कर लेना बारवा स्कंद तीसरा अध्याय गायत्री मंत्र के जाप से मोक्ष प्राप्त होता है जाप से अब आप दिखाओ तत्सत का जाप कहां लिखा है
00:58:45:15 दिखाओगे अब बा करके वो गुरु बनना चाहता है और लोग उसे गुरु बनाने में प्रमोट कर रहे हैं मैंने जाने कितनी बार अपनी लाइव में जाने कितनी बार यह कहा कि मेरे प्रति गुरु भाव ना रखें आचार्य भाव ना रखे तो यह तो फिर आप कुछ भी आप वो लगा दो मैं मैं आप पर य कह सकता हूं कि आप जो है कई स्त्रियों के साथ गमन करना चाहते हैं लो अब यह जब तुक्का ही मारना तो पता नहीं क्या क्या मारा जा सकता है आप जो है फिल्म स्टार बनना चाहते हैं आप जो है रामपाल यादव बनना चाहते हैं आप जो है मुंगेरी लाल के हसीन सपनों की दुनिया में खोए रहना चाहते हैं जब तुक्का मारना है तो कुछ भी मार सकते हैं आप जो है रामपाल दास जी का नुकसान करना चाहते हैं वहां भी उनको जेल धाम में भी चैन से नहीं रहने देना चाहते हैं अब जब तुक्का लगाना है ना बिना सिर पैर की बात करनी इसका कोई आधार नहीं है प्रमाण रहित कुछ भी बोलो चलिए बढ़ाइए आगे पूरी तरह
00:59:55:01 से भगत जी ये और जैसे सनातन के विषय में बात होती है कि सनातन धर्म के लिए जब बात की थी उसने तो भगत जी ने ये बताया था कि हम गरीब दास जी का जो अमर ग्रंथ है 18 पुराण और छह शास्त्र सभी चीज उसर भगत जी ने ये कह दिया कि ये 250 साल पहले हुआ लेकिन भगत जी ने ये नहीं बताया उसने पूछा कि कहीं ऐसा लिखा है वेदों में कहीं ऐसा लिखा है या कहीं उपनिषद में लिखा है कि वो ज्ञान को दोबारा बताने वाला आएगा लेकिन इन्होने बताया नहीं इनको बताना चाहिए था कि हां हमारे जो कबीर ग्रंथ है कबीर सागर में स्पष्ट लिखा हुआ है कि इस ज्ञान कोब बिगाड़ दिया जाएगा नकली धर्म गुरुओ के द्वारा बिगाड़ दिया जाएगा तो पुनः प्रकट करेगा वो हम या तो हम ही चल के आएगा या हमारा कोई अंश आएगा उसे पुन प्रकट करेगा वहां पर लिखा है ना इस बात को बताया नहीं अगर वो वो कबीर सागर को मानता ही नहीं है बोले मैं कबी कबीर सागर को मानता ही नहीं हूं नहीं कबीर वो कबीर सागर को नहीं मानता तो अन कह देंगे हम तुम्हारा श्रीमत देवी पुराण नहीं मानते अ बताइए कैसे होगा फिर हम गीता जी को नहीं मानते हैं तो फिर वो बोलेगा एक मिनट इसको
01:01:10:10 जरा एक बार और सुनाइए अगर वो ये कहेगा यहां से कबीर सागर को मानता ही नहीं है बोले मैं कबी कबीर सागर को मानता ही नहीं क वो कबीर सागर को नहीं मानता तो अ कह देंगे हम तुम्हारा श्रीम देवी पुराण नहीं मानते हैं बताइए कैसे होगा फिर हम गीता जी को नहीं मानते हैं ठीक है तो भाई तुमको नहीं मानना है तो मत मानो ना हम थोड़ी ना आए तुम्हारे पास ये कहने कि कबीर सागर में प्रमाण है और राम भगवान है हम थोड़ी ना आ रहे तुम्हारे पास ये कहने कि कबीर सागर में प्रमाण है और ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान है तुम आ रहे हो वेदों को वेदों में प्रमाण है तुम लेके आ रहे हो नहीं मानते उतनी ही बात मानने योग्य है जितनी वेदों की सीमा में हो गीता की सीमा में हो गीता को वेरीफाई कबीर सागर नहीं करेगा गीता को गीता वेद को वेरीफाई आपका वो गरीब दास नहीं करेगा गीता को वेरीफाई आपका वो रामपाल नहीं करेंगे उनको वेरीफाई ये करेंगे गीता और वेद तब हिंदू है तब सनातनी है तस्मा शास्त्रम प्रमाणम भगवत गीता 1624 इसको कह देना ये आउट ऑफ व है यही तो मैं कहूंगा 5
01:02:25:10 पर श्लोक निकाल लो गीता से उसके बाद मैं हराऊ क्या बात करते हो आप गिन लो 5 पर श्लोक उसके बाद तो नहीं कह पाओगे ना काल ने बोला है फिर हम बात करेंगे इतना इतना गुर्दा है चुन लो 35 श्लोक 700 में से 35 श्लोक चुन लो उसके बाद की बची हुई जो भगवत गीता होगी उस पर हम आपको मात करेंगे ठीक है कितना कितना छूट दी आपको तो फिर कबीर सागर के नाम पर हम यह नहीं कह रहे कि राम भगवान है हमारे लिए हमारे वेद पुराण उपनिषद पर्याप्त है आप कह रहे हो आपका जो ग्रंथ है कबीर सागर को छोड़ कर के आप कह रहे हो वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है
01:03:33:15 हम थोड़ी ना आए आपके पास वेदों को वेदों को मनवाने के लिए तुम आ रहे हो हमने बुलाया क्या आपको कौन पूछ रहा है तुम्हे भाई लेके बैठो अपना कबीर सागर एक तरफ हा राम सरीखे राम है संत सरीखे संत नाम सरीखा नाम है आदि नहीं अंत यह देखो आप कहते हो वेदों में प्रमाण है और कबीर साहब भगवान है जब पूछोगे कहां है कि कवि कवि का मतलब तो सर्वज्ञ कवियों की तरह आचरण करने वाला है यह सब स्पष्ट लिखा नहीं दिखाओगे कि कबीर कहां लिखा है मगर तुम्हारे कबीर सागर में तो राम लिखा है
01:04:22:20 हा अच्छा क्या लिखा है कबीर परमेश्वर ऐसा कबीर परमेश्वर ऐसा अविगल राम है लो राम शब्द कितनी बार आ रहा है तुम दिखाओ कबीर कहां आ रहा है लिखा हुआ बस करिए ठीक है अब वो चला दीजिए इन लोगों का कुतर्क
01:05:01:26 नामा इन लोगों का कुतर्क नामा प्ले करिए आनंद आ रहा है ना व्यक्ति खुद बोल रहा है कि हम भी नहीं माने ये आस्था है जिनको ये सद ग्रंथ कहते हैं पवित्र कहते हैं हम नहीं कहते कभी सागर को सद ग्रंथ पवित्र होंगे मगर हम उनको प्रमाण की दृष्टि से प्रस्तुत नहीं करते यह करते हैं और इन्होने जो एक बात कही सनातन इन्होंने एक बात और कही सनातन मैंने पहले ही बता दिया इन्होंने सनातन पर आक्षेप लगाया कि भाई एक क्या कहते हैं एक जो व्यक्ति है वो एक तरफ कुछ हो रहा है एक तरफ कुछ हो रहा है उसका यह धर्म है कि वो धर्म है भाई अगर ऐसे व्यक्ति के अपने ओपिनियन से धर्म बदलने लगेगा तो जिसका विवाह नहीं हो रहा है वो अगर बलात्कार करने लग जाएगा तो वो कह देगा मेरा विवाह नहीं हो रहा था मेरा धर्म बला करना तो मान लोगे उसकी बात भले ही व आपके घर की मातृ शक्ति क्यों ना हो जिसका जो पीड़ा है उसका धर्म है भाई ऐसे नहीं होता है धर्म धर्म और अधर्म का निर्णय क्या होता है तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एक मात्र शास्त्र प्रमाण है तो वह जो बदल जो हर स्थिति के लिए जो अलग
01:06:17:01 अलग धर्म है ना मैंने पहले ही बताया वो धर्म जो है अलग अलग वो निश्चित कर दिया गया है एक ही बार में अब वो बदल नहीं वो है सनातन कि वोह देश काल परिस्थिति से बदल रहा फिर तो व हो गया ना इस्लाम और यह सब हो गया बदलने वाला ठीक है तो एक य बात हो गई एक बात उन्होने और कही गरीब सागर जहां राम जी के लिए बताया जा रहा है उसको कबीर बोल दिया दूसरी जगह राम का अर्थ श्री राम से जोड़ रहे हैं ठीक है यह इनकी मिलावट है अब भाई आपके लिए तो ना कबीर सागर है नाी गरीब सागर है कौन सा है वो देख लेना जहां पर राम की बात हो रही है वहां पर आपने जोड़ दिया कि वह राम की नहीं कबीर की बात हो रही है अपने मन से क्यों रामपाल और रामपाल मान मान्य क्यों क्योंकि गरीब सागर कह रहा है क्योंकि कबीर सागर कह रहा है कबीर सागर में गलती कौन बता रहा है रामपाल और रामपाल को सत्यापित कौन कर रहा है कबीर अरे भाई तुमने लोगों के लिए बना दिया भुल बुलया
01:07:27:25 गरीब सागर में क्या सही है क्या गलत है यह बताएंगे रामपाल रामपाल क्यों सही है यह बताएगा गरीब सागर या कबीर सागर जो भी है हा हां गरीब सागर अच्छा तो अगर अगर अगर जैसे भगवत गीता अगर भगवत गीता का एक भी श्लोक िप मानते हो और वह अभी संशोधन का विषय है चयन का विषय है तो फिर उसके आधार पर आप रामपाल को तत्वदर्शी कैसे सिद्ध कर सकते हैं पहले सिद्ध तो करिए कितने श्लोक मानने कितने नहीं मानने भाई साहब मैं अभी लेता हूं अभी आपको मेरी कुछ बातें रह गई है अभी हटा दीजिए ना लेंगे आपको लेंगे हां अब मैं बात करता हूं इन्होंने एक बात कही कि भगवत पाद आदि शंकराचार्य भगवान ने सूक्ष्म वेद को स्वीकार किया है पहली बात तो यह समझो कि सूक्ष्म वेद कहा किसको जा रहा है ऐसा नहीं जिसको जानते ना हो नहीं तो वो कहते अज्ञात
01:08:43:02 वेद सूक्ष्म का अर्थ यह नहीं होता है कि हम जिसको जानते नहीं है छोटा होता है क्या होता है छोटा तो सूक्ष्म वेद का जो उन्होंने उपयोग किया है वो किसके लिए किया वेद बीज ओमकार के लिए तो देखो भैया पहली बात तो य अपनी जानकारी दुरुस्त कर ले कि इन्होंने जोलोक कोट किया है 42 नंबर वह 42 नहीं है यह इनकी अल्पज्ञ है ममना अनुशासनम में 42 नंबर का कोई लोक नहीं है अभी हमने कुछ दिन पहले एक ग्रंथ दिखा दिया था उसमें केवल ममना अनुशासनम नहीं था उसमें और भी चीजें थी जो गोवर्धन मट से छपता है तो उसमें जो गोवर्धन मट से आज के आचार्य द्वारा संकलित जो चीजें हैं उसमें 43 में नंबर पर आज के आज के जो आचार्य गण है उन्होंने कोट किया है उस मंत्र को और उसका अर्थ भी बताया है दिखा दीजिए
01:09:46:18 भैया दिखा दीजिए कि सूक्ष्म वेद का मतलब क्या बताया उन्होंने यह जो ग्रंथ है इसमें मठ अनुशासनम एक चैप्टर है इसको आदि शंकराचार्य जी ने लिखा है बाकी क्या जो चीजें हैं कि गुरु वंश दिग दर्शन सेतु मनु सासनम यह सब आदि शंकराचार्य जी ने नहीं लिखा है य सब तो मठमन म अनुशासनम आदि शंकराचार्य जी ने अवश्य लिखा मगर इसमें जिस जहां से वो श्लोक कोट किया गया है वह 43 नंबर का श्लोक है और उसमें वह क्या
01:11:01:22 कह रहे हैं वो दिखा दीजिए मैं यहां से दिखा देता हूं 43 नंबर का व स्क्रीन पर ला दीजिए जरा आपको भेजा था मैंने यह है इस चैप्टर का नाम नाम है शेषम नाए और इसमें 42 इन्होने शायद गलती से पढ़ लिया होगा उसके नीचे 43 है वहां पर लिखी है सूक्ष्म वेद की बात और उसके नीचे सूक्ष्म वेद के नीचे लिखा भी है कि क्या इसका अर्थ है सूक्ष्म वेद का ठीक है तो सूक्ष्म वेद का अर्थ है वेद बीज अब वेद बीज क्यों क्योंकि वह छोटा अगर वेदों का सबसे छोटा स्वरूप सबसे सूक्ष्म स्वरूप है वेदों का वो क्या है ओमकार क्योंकि सबसे पहले वेद वेद बीज ओमकार के रूप में ही प्रकट होते हैं तो भैया वो दिखा दो शास्त्रों का कहां पर लिखा है वेद बीज ओमकार के बारे में दिखा दो इनको
01:12:17:13 प्रमाण ना ना सबसे ये ये तो वो प्रमाण है सबसे पहला प्रमाण मैंने दिया होगा आपको वो दिखाइए वेद बीज ओमकार है यह भाई साहब अजीत सिंह राजपूत जो है यह लगातार कमेंट कर रहे हैं कुतर्क भरे और कुछ नहीं है भाई आप हमारे प्रमाण को उपस्थित क्यों कर रहे हो हम तो गलत करते हैं ना आप कह रहे हैं कि भैया आप लोग बजरा को बजरंग क्यों कहते हो हम तो गलत करने वाले हैं
01:13:12:12 ना अरे भाई ऊपर पीछे जाइए मैंने अभी अभी आपको सारे प्रमाण भेजे हैं सबसे पहले प्रमाण के बाद सेकंड नंबर का प्रमाण वही है चेक करके देखिए हां ये बड़ा करिए इसको हां मैं पढ़ देता हूं क्या लिखा है इसमें ओमकार के
01:14:17:09 बा मांड को उपनिषद एक ऊपर जाइए जरा मांड को उपनिषद एक कठोपनिषद एक 15 श्रीमद् भागवत 11 17 11 श्रीमद् भागवत 12 छ 39 श्रीमद् भागवत 126 41 और गोपथ ब्राह्मण यह जो ओमकार यह एक अक्षर सब कुछ है और इसी एक अक्षर की व्याख्या समस्त वेद है ठीक है सब वेद जिस पद का वर्णन करते हैं जिसके लिए समस्त तप किए जाते हैं तथा ब्रह्मचर्य आदि व्रत धारण किए जाते हैं वह पद संक्षेप में केवल संक्षेप सूक्ष्म संक्षेप समझ गए ना संक्षेप संक्षेप में केवल यह ओमकार है यह एक अक्षर है षष्टि के आरंभ में प्रणव ही वेद था इसके अनंतर तीन मात्रा वाला ओमकार उत्पन्न हुआ जो समस्त मंत्रों उपनिषदों का सनातन वेद बीज छोटा सबसे वेदों का सबसे छोटा स्वरूप सूक्ष्म स्वरूप वो क्या है ओमकार आपके अनुसार कुछ और होगा यह पर उनके अनुसार है जो जिनसे जिनसे वेद आते हैं उनके अनुसार वेद बीज ब्रह्मा जी ने
01:15:32:10 ओम इस अक्षर को देखा जी हटा दीजिए और भी मैंने प्रमाण दिए हैं इस बारे में अब अब बात करते हैं कि आदि शंकराचार्य भगवान ने पांचवा वेद किसे माना है और हमारे शास्त्रों ने पांचवा वेद किसे माना है तो वो पांचवा वेद किसे माना है दिखाना शुरू करिए अगर कोई गाली दे रहा है तो आप लोग बोल दिया करिए और उसको गाली वाले को बैन कर दिया जाएगा आप लोग गाली ना दे गिरो मगर उस झरने की तरह जो गिर के भी अपनी सुंदरता नहीं खोने देता यह देखिए चांदो उपनिषद में लिखा है सात एक दो में पांचवा वेद क्या है ंद उपनिषद सा एक
01:16:28:04 स्क्रीन पर भी देखते रहियो मैं पढ़ के भी सुना देता हूं क्या है पांचवा वेद कौन सा है क्या पांचवा वेद कहीं कभी सागर है हर तरह से बखिया उड़ेंगे भाई क्या बात कर रहे हो सात एक दो में पांचवा वेद कहा गया है छंद उपनिषद में किसको
01:17:25:03 पुराण को और अगला दिखाइए क्या लिखा है छंद और चतुर्वेद अगला दिखाइए पुराण के बारे में हां ये क्या है बृहदारण्यक उपनिषद दो च 11 इसमें भी पांचवा वेद माना गया है पंचम वेदा नाम वेदम तो पांचवा वेद पुराण है चतुर्थ चतुर्थ मिति सस पुराण पंचम वेदा नाम वेदम ठीक है चलिए और बढ़ी आगे और दिखाइए अगला न दोग उपनिषद सात एक चार हो ही गया तो ऐसे करके अनेक अनेक प्रमाण है अब सीधे वो महाभारत वाला दिखा दीजिए एक मैंने छोटा सा भेजा था आपको जिसमें वो
01:18:43:08 अ लिखा है कि जो वेद का अर्थ है वो जो इतिहास पुराण है उनकी सीमा में रहकर करना चाहिए नहीं तो जो श्रुति है वो वो डरती है कि कोई मेरा गलत अर्थ ना कर दे यह वहां कहा गया है यह देखिए वेदार्थ की व्याख्या यह लिखा है आदि पर्म महाभारत में पहला अध्याय और 64 वा श्लोक इतिहास वेदार्थ की व्याख्या वेदों का अर्थ इतिहास और पुराणों के सीमा में करना चाहिए अ श्रुत व्यक्तियों से वेद इसलिए भयभीत रहता है कि यह कहीं मेरे अर्थों का अर्थ ना कर दे अप श्रुत मतलब जिन्होंने टियो का ज्यादा ज्ञान नहीं किया है ज्यादा अध्ययन नहीं किया है थोड़ा बहुत सुना शियों को तो उनसे वेद भभ रहता है दिखाया जा रहा है कि आपको वेदों की व्याख्या पुराणों की सीमा में करनी है कबीर सागर की सीमा में नहीं गरीब सागर की सीमा में नहीं जेल धाम निवासी रामपाल की सीमा में नहीं
01:19:59:22 है ना और चलिए हां अब हम यह बता दे हमने बता दिया सूक्ष्म वेद क्या है ओम प्रणवा ओमकार और पांचवा वेद क्या है पुराण इतिहास पुराणा ब्याम और अब बात करते हैं कि शंकराचार्य की जब आप बात कर रहे हैं कि आदि शंकराचार्य जी ने य माना बात आ गई जब शंकराचार्य की बात ले रहे हो तो शंकराचार्य ने आगे क्या कहा है देख लो दिखा दो
01:20:36:06 भैया वायु पुराण में एक श्लोक आया है यह वाला नहीं अभी ये वाला नहीं इससे पहले वाला वायु पुराण में एक श्लोक आता है ब्रह्मा कृते योगे पूज्य त्रेता याम यज्ञ उते द्वापर पूज्यते विष्णु रहम पूज तुस वर्प वायु पुराण दो 32 21 इसमें आया है
01:21:12:16 कि यह देख लीजिए वायु पुराण दो 3 21 इसमें क्या आया है भगवान शंकर कह रहे हैं कि गुरु के रूप में ब्रह्मा जो सतयुग था उसमें ब्रह्मा पूज्य थे गुरु के रूप में और त्रेता में वशिष्ठ पूज्य थे और द्वापर में व्यास पूज्य थे और कलयुग में मैं महेश्वर पूज्य हूं ठीक है उसके बाद फिर कह रहे हैं शंकराचार्य भगवत पाद आदि शंकराचार्य जो कि उनके अवतार है शंकर भगवान के ये हम किसी और दिन और कई वीडियोस में बना चुके हैं और अगर मांगा जाएगा तो अलग से प्रमाण अलग से देंगे मगर फिलहाल भगवत पाद आदि शंकराचार्य कह कि मैं शिव का रूप जो हूं शंकराचार्य मैं जगतगुरु हूं खोलिए इसी को इसी वाले पृष्ठ को दोबारा खोलिए मठमन मनु शस में 77 नंबर के वर्ष में भगवत पाद आदि शंकराचार्य वायु पुराण के अनुसार बोल रहे हैं यह जरा बड़ा कर दो इतना जस्ट सबसे लास्ट जो श्लोक है उससे पहले वाला हा सतयुग में स्वयं ब्रह्मा ता में विष्णु द्वापर में व्यास
01:22:27:16 देव विश्व गुरु थे इस कलयुग में मैं शंकराचार्य जगत गुरु हूं जगतगुरु शब्द समझ लेना जो मनमुक जगतगुरु लिखते हो ना यह देख लो शास्त्र सम्मत जगत गुरु कौन है तो जगत गुरु कौन है कलयुग का जब आप सूक्ष्म वेद का प्रमाण लेने आ गए हो शंकराचार्य के पास तो वो बता रहे हैं जगतगुरु कौन है शंकराचार्य जगतगुरु है और वो यहां यह नहीं लिख रहे कि जगतगुरु कबीर है या जगतगुरु रामपाल है जेल धाम निवासी वह जगतगुरु नहीं है यहां बोल रहे हैं मैं शंकराचार्य जगतगुरु हूं अब उसके बाद उनकी पीठ पर बैठने वाला जगतगुरु क्यों हो गया यह दिखा दो अब दिखाओ वाला श्वेता सत्र उपनिषद
01:23:20:18 वाला दिखाओ जब उनका सूक्ष्म वेद मानना है उनकी यह बातें नहीं माननी मीठा मठा गप गप कड़वा कड़वा ठू यह देखो क्या कह रहे हैं शंकराचार्य अभी उन्होंने बता दिया मैं शंकर का अवतार जगतगुरु हूं अब बता रहे हैं मेरे द्वारा स्थापित पीठ पर आरूढ़ लक्षण संपन्न सन्यासी परमेश्वर में और इस शति के अनुसार मुझ शिव का रूप अर्थात शंकराचार्य शिव स्वरूप ही मान्य है इसलिए कहा जाता आता है उस पीठ पर बैठने वाले को शंकराचार्य समझ गए तो जगतगुरु कौन हुआ नो रामपाल जगतगुरु रामपाल नहीं है जगतगुरु ये है क्योंकि तुमने इनको माना ना क्योंकि ये सूक्ष्म वेद कह रहे हैं अब एक बात कह लेते हैं यह बातें तुम मानोगे नहीं इनकी फिर आ जाओगे किय तो सिलेक्शन रामपाल करेंगे कौन सा मानना है कौन सा नहीं मानना है अरे भैया रामपाल जब सिलेक्शन करेंगे तो फिर वही बात आ जाती है फिर इसकी किसी भी बात को प्रमाण कैसे मान ले जब इसकी अभी यह सिलेक्ट हुआ ही नहीं कि कौन सी सही है कौन सा गलत है अब बात आ जाती है कि चलो मान लिया उन्होंने सूक्ष्म वेद कह दिया मगर वह सूक्ष्म
01:24:35:28 वेद कबीर सागर यह कैसे सिद्ध होगा कबीर सागर कहा क्या हम तुम्हारी दुर्जन तोष न्याय भी मानेंगे हर तरह से बात करेंगे अगर उन्होंने सूक्ष्म वेद कह दिया और जो आचार्य उन्होंने नहीं आज के जो आचार्य गण है उन्होंने लिखा है पहले अपनी वो ठीक कर लो तो आज के आचार्य ने लिखा है मगर मैं कह रहा हूं कि चलो मान लेते हैं थोड़ी देर मेरी जानकारी गलत है और आपकी सही है उन्होंने सद लिखा है उसका ग जो अर्थ है वह आज के आचार्यों ने गलत कर रखा है तो सूक्ष्म वेद का अर्थ कबीर सागर है यह तुम तय करने वाले कौन होते हो भाई हमें प्रमाण तो लाओ कि हम तुम्हारी बात
01:25:20:24 माने रामपाल दास जी भी आपकी ये नॉलेज अल्प ज्ञान अल्पज्ञ देख कर के सब माथा पीट रहे होंगे ये क्या कह दिया तुम लोगों ने कि अगर तुम अगर हमारे कबीर सागर को नहीं मानते हो तो हम भी तुम्हारे वेद गीता को नहीं मानते यही सद ग्रंथ है तुम्हारे जिनको अगर कोई गलत व्यक्ति आपके अनुसार मैं गलत हूं आपके अनुसार अगर मैंने कबीर सागर को छोड़ दिया तो आप अपने सद ग्रंथों को छोड़ दोगे पवित्र धर्म ग्रंथों को छोड़ दोगे पवित्र है ना सद ग्रंथ है ना हां वो केवल एक सहारा है अपना परचम लहराने का उसमें कोई श्रद्धा नहीं है उसमें कोई निष्ठा नहीं है उसमें कोई प्रमाण बुद्धि नहीं है एक बार वो सीन दिखा दो दोबारा से जो अभी अभी आए होंगे वो देख नहीं पाए होंगे वो वाला सीन दिखा दो क्या कह रहे हैं वो उनके लिए कि अगर वो कह दे कि हम कबीर सागर को नहीं मानते भाई हम आ रहे हैं क्या कि मानो हमारे वेद पुराण को तुम आ रहे हो कि मानो हमारे कबीर को उसके आधार पर अपने वेद पुराणों को मानना बंद दो नकली धर्म गुरु के द्वारा बिगाड़ दिया हमारा कोई इस बात को
01:26:37:26 बया कबीर सागर को नहीं मानता तो अप क हम तुमरा श्रीम देवी पुराण नहीं मानते बताइए कैसे होगा नहीं मानते ये है यह सच्चाई हमें बाहर लानी थी जो यह कहते हैं ना पवित्र ज्ञान गंगा ता तेरा ज्ञान अमृत हो गया अब अमृत नहीं रहा तुम्हारा हमारा हो गया ना इसको कहते दूध का दूध और पानी का पानी तो ज्यादातर जो बातें हैं वो हम कर चुके हैं पुराणों की प्रमाणिकता दे दी पांचवे वेद के रूप में बता दिया सूक्ष्म वेद की परिभाषा दे दी आदि शंकराचार्य जी ने और क्या-क्या कहा है यह बता दिया उस कुतर की को क्यों हटाया यह भी बता दिया और यह जो अल्पज्ञ शिष्य जो अपने उनका नाश कर रहे हैं रामपाल एंड कंपनी का तो वोह जो है उनकी मूर्खता का प्रमाण दे दिया उन्होंने और गुर्दे की बात भी कर दी हां गुरुदेव अवनीश जी कह रहे
01:27:53:01 हैं अवनीश जी कह रहे हैं इन्होंने शंकराचार्य जी को भी हरा दिया मुगरी लाल के आसीन सपने भैया कोई भी देख सकता है सब लोग फ्री है देखने के लिए अरे आपसे अच्छे तो य अमित दास और ये जो ऋषि दास जो आते हैं ना चैनल पर इनम कम से कम गुर्दा तो है थोड़ा बहुत विचारों को मालूम रहता तब भी आते हैं नहीं हम अपने रामपाल दास के लिए जाएंगे हम अपने जो है कबीर के लिए जाएंगे आप लोगों से अच्छे हैं जो ग्रीन चंदर ब लगा कर के आप जो है टीपू सुल्तान बन रहे हो चलिए हमने बहुत सारी तार्किक बातें कर ली उस लड़के को क्यों हटाया उत्तर दे दिया क्यों हटाया था क्योंकि वह लड़का वो देखिए हम कब हटाते हैं जब हमें जो बात कहनी है हमने कह दी आपको जो बात कहनी है आपने कह दी और आप ऐसी बात कह रहे जो आप ही की बात आप ही से कट रही है सबसे बेकार वक्ता कौन होता है जिसकी बात उसी बात से कटती है अब जब या तो आप मान लो कि भाई मैं इस चीज इमें से एक चीज को मानता हूं तभी तो हम आगे बढ़े और क्या वहां पर हम लोग तीन तीन चार चार साल तक स्ट्रीम करते रहे
01:29:08:06 और तुम कहते रहो नहीं वोह बदल नहीं सकता मगर बदल सकता है और बदल नहीं सकता मगर बदल सकता है तुम टेप रिकॉर्ड चालू कर लो हम अपनी स्ट्रीम चलाते रहे और अगर हटा दिया तो भाई उसने तो मर्यादा का उल्लंघन किया नहीं था उसको क्यों हटाया भाई आप लोग देखो तो वो कह रहा है कि वो बदल नहीं सकता मगर वो पर्वत बन सकता है मगर वो शेर बन सकता है या तो बदल नहीं सकता और या फिर वो शेर नहीं बन सकता दोनों में से डिसाइड कर लो क्या कर सकते हो और अगर समझ नहीं सकते ईश्वर को तो फिर ईश्वर को समझने वाले रूप में यहां मत लाओ मनुष्यों के बीच में वो जहां है वहां रहने दो उसका अवतार आने दो उसका सगुण साकार स्वरूप आने दो उसका जो अव्यावहारिक निर्गुण निराकार रूप है उसको वही रहने दो फिर यहां मत लाओ फिर तुम हो जाओगे हमारे जैसे ठीक है चलो अब कोई आना चाहता है भैया आ जाए तो हां थोड़ा सा संदीप जी मैं काफी देर हो गई बोल बोल के जो है थोड़ा विश्राम ले लू आप लोग थोड़ा संभालिए बताइए मैं जरा पानी ले आऊ पीने के
01:30:14:19 लिए कैसे हैं राहुल जी बढ़िया जी बढ़िया आप बताइए शिवास जी ने तो ना इनकी जो है ना बोलते बंद कर दिए है कितना अगर शास्त्र ज्ञान हो अब इनकी वजह से कई लोग मेरे हिसाब से वापसी कर जाएंगे जिस ज्ञान दे रहे रिवर्स हो ग यस सनातन धर्म में आ जाए नलेज कम है य जो रामपाल ने इनको ऐसा घुमाया हुआ है इनका दिमाग है किया हु सम कर क्या य प्रॉब्लम इन्होने बिना व्याकरण की दृष्टि से शास्त्रों को समझने का प्रयास किया है और ये मनगण है स अभी एक छोटा सा एपल व्याकरण का इसम कोई रोल ही नहीं है हा एक गीता जी अध्याय सा ब 25 में लिखा हुआ है जो लोग मुझे अविनाशी और जन्मा नहीं मानते तो मैं योग माया से उनके लिए छिपा रहता हूं तो इन्होंने योग माया प लगाया कि वो जैसे जैसे शरीर है मेरा तो इनको शरीर से छुपा दिया वो शरीर से छुपे रहते हैं जबक योग माया का अर्थ तो ये होता है कि जैसे दुर्योधन माया से उसका भ्रमित था वो इनके दिमाग
01:31:29:26 में यह भर है वो छुपा रहता है छुपा रता शरीर से छुपा रहता है जब श्री कृष्ण जी तो सामने ही थे लेकिन योया नेसा माया हु उस भी दुधन के साथ मिले हुए उनका योग माया भगवान नहीं मानता था तो इसने जो है उ रहने का योग माया से सरल भाषा में क छिपे रहने का अर्थ इतना मात्र है व्यक्ति को उनकी परब्रह्म समझ में नहीं आती है य बिल्कुल ठीक है उन्होने बल्कि 7 ब 15 में यही बोला फिर ज्ञान माया द पहले शास्त्र आया कि पहले व्याकरण आया भाई और ये उका रिवर्स उनको बता देता है कि ये कुछ और कहानिया बना के के ऊपर मूर्ख पहले शास्त्र आया की व्याकरण आया किसी भी भाषा को शुद्ध रूप से समझने के लिए सीखने के लिए व्याकरण की आवश्यकता शास्त्र जो है शास्त्र पहले आया और फिर उसको समझने के लिए आगे समझाने के लिए आगे भाष्य ने भाष्य लिखे हैं उनमें से एक है निरुक्त जी जी संदीप जी एक अध्याय नौ श्लोक 26 में उन्होंने क्लियर बताया है कि जो भी मुझे फल फूल पत्ती वगैरह जो मुझे अपने भाव से
01:32:44:26 प्रकट करता है या भाव से देता है तो मैं स्वयं प्रकट होकर उसको खाता हूं ये चीज नहीं दिखाता ये वैसे कहता है वो छुपा रहता है इसके दिमाग में कि वो उसने शरीर रूपसे भी नहीं दिखाते परमात्मा ने बोला भोग लगाता है अच्छे रूप से म मेरे को तो स्वयं प्रकट हो उसको ता ह 9 ब में बोला ने मूर्खता पूर्ण बात अधूरा जन उसकी से प्रॉब्लम आ जाती हैले य फस गए असल में भोले है सच बताऊ तो ये दया के पात्र है दया आती है जी बात सही कह रहे हैं कल जो मैंने उससे पूछा व्यक्ति से प्रवीण जी से पूछा कि धर्म क्या जब तुम कह रहे हो कि वो धर्म है ये है वो इतनी बातें बताने आए हो तो धर्म क्या है सनातन क्या है तो मुझे तरस आया उस व्यक्ति प तरस आता वो व्यक्ति लड़ने मरने को तैयार है किस चीज के लिए जिस चीज को वो जानता नहीं है सर बुद्धि दुधन वाली है ना उसके साथ जो मिले रा गया सारा इनकी बुद्धि उस तरीके की है ना दुर्योधन बुद्धि है इनकी उन्होने अगर रूप में आए
01:34:00:15 तो शंका का समाधान हो सकता है ले ये भर करके आते फिर किसी भी चीज को मानने प्रयास नहीं करते एक अध्याय अध्याय 14 शलोक 27 में दिया है कि मैं ही सनातन धर्म का आधार हूं और पर परब्रह्म का आधार भी मैं ही हूं उन्होंने इतना क्लियर कट बोला हुआ है फिर भी इनकी बुद्धि के अंदर ये चीज घुसती नहीं है अरे वो तो इनको काल ने बोला है ना तो काल ने बोला है और कैसे पता काल ने बोला है कैसे पता काल ने बला रामपाल ने बोला है रामपाल कौन है तत्वदर्शी तत्वदर्शी किसने किया गीता ने चक्कर काटते इधर से उर इधर से उधर भाई जब गीता गीता जब गीता संदेहास्पद हो गई तो फिर उसके किसी शलोक के आधार पर हम किसी को तत्वदर्शी कैसे सिद्ध कर लेंगे पहले तो गता को प्रमाणिक बनाओ और फिर शक और या फ रामपाल को प्रमाणिक बनाओ फिर गीता में आके वो करो जी जी श्री राम जय श्री राम
01:35:08:20 ज रामपाल जी का चैनल देख रहे थे आज आपकी चर्चा आज जी नारायण जी के चैनल में नहीं जाना है बिल्कुल भी नहीं हम समे और खा कुछ भी नहीं लिखा हुआ है तो चे सेही कमेंट लिखा फिर मुझे लेट हो रहा था और आप वहा कोई चर्चा नहीं थी सिर्फ आपका ही भाई था आपकी चर्चा थी आज से बोला हम अपने लोगों को कभी नहीं भेजेंगे व डिबेट में इसीलिए कते उसकी ट में जाओ मत अपनी डिबेट खुद करो ना
01:35:49:20 अ इसीलिए तो हम कहते उसकी डिबेट में जाओ मत अप ट करो इसीलिए तो हम कहते उसकी डिबेट में जाओ मत अपनी डिबेट खुद करो बस करो बस इकी डिबेट रही फिर मेरे विचार जी से मिल रहे हैं मेरे विचार आप सबसे मिल रहे हैं तो डिबेट रही कहां बना लोगे अपना ही उत्तर पक्ष बना लोगे अब मुझे नहीं लगता पूर्व पक्ष का भी मतलब मालूम होगा क्या है हमने तो दिखा दिया सारा प्रमाण प्रम तो शिवांश जी माने ही नहीं यह जो इनके अनुसार गीता का ज्ञान जो काल दे रहा है वो काल कौन है यमराज जी है क्या अपने वाले पता नहीं क्योंकि हमारे का यमराज जी है वो इनकी एक अलग फेंटेसी कहानी है पूरी उसमें बड़ा रूप से बताया गया है हमारे जो ब्रह्मा विष्णु महेश मा भगवती उनके बारे में सब फैंटेसी कहानिया है आपको मैं तोसे मैंने क यमराज जी उतर के आए
01:37:04:24 थे वही काल है और उससे ऊपर हमारे महाकाल है परंतु उनका सपड़ा साफ करना बहुत जरूरी है अध्यात्म के लिए सपड़ा साफ नहीं करना है इनके भ्रामक शिक्षाओं का काट करनी है उनको हटाना है बिल्कुल कहां है भाई जेल धाम वाले सतलोक वाले कहां है आए अच्छा उनको ले लो एक वो आए थे भाई साहब दिख भी नहीं रहे हैं एक भाई साहब आए थे कबीर कहां गए जो वो आए थे ना कबीर इज गॉड हां सर ये हेलो ये ना 11 ब 32 का रेफरेंस देते हैं कहते वहां पर उन्होंने बोला हुआ है मैं काल हूं जबक उन्होंने वहां प बोला है मैं बड़ा हुआ उन्होने ये शब्द यूज किया बड़ा हुआ का बड़ा हुआ उन्होने फ्यूचर दिखाया
01:37:59:14 यने अब ज्यादा नहीं आएंगे वो अब वो समझ गए नहीं नहीं जिनकी माता जी ने निष्ठा पूर्वक मतलब पान कराया होगा निष्ठा पूर्वक वो लोग आएंगे और जो कायर होंगे आएंगे मैंने लिक भेजा हुआ है आपको जिसम उनकी डिबेट हुई है ये डिबेट संदीप जी को कुछ बताना है संदीप जी आप बोल लीजिए एक मिनट सब लोग अपना म्यूट कर लीजिए संदीप जी बोल लीजिए जी 11 ब में इन्होंने बताया ना उन्होंने बोला है वहां पर मैं बड़ा हुआ काल हूं तो बड़ा हुआ काल का अर्थ यह है कि उन्होंने जब जिस समय वो अर्जुन सामने था ना उन्होने अर्जुन को अपना अपना आगे का रूप दिखाया था भविष्य काल दिखाया था देखो ये सारे मेरे अंदर जा रहे हैं तुम नाम मात्र खड़े हो तुम सिर्फ तुमने श्रेय लेना है इस चीज का तो उन्होंने अपना जो भविष्य काल स्वरूप दिखाया था यह बात इनको समझ नहीं आती ूटी क्योंकि परमात्मा भूत भी है और वर्तमान भी और भविष्य मैं इनको एक वो कह रहा हूं कि इनकी बात को में गीता में से 5 प्रत जो ज्ञान है जो इनके अनुसार काल ने दिया है उसको आप हटा दीजिएगा उसके बाद जो गीता के श्लोक बनेंगे बचे बचेंगे उससे ही मैं इनकी बातें
01:39:14:21 खत्म कर दूंगा फिर ये तो ये नहीं कह पाएंगे गलत काहा है फिर तो नहीं कह पाएंगे काल काल ने कहा है 35 श्लोक चुन लो कौन-कौन से हैं बता दो वो मैं नहीं कोट करूंगा दूसरे करूंगा और तुम जो तुम्हारी जो बात सब नाबूत हो जाए आ जा आ जाओ गलत कौन सा है यह भी नहीं पता नहीं लगेगा जी जी फर तो हो गया काल वा निकाल द बाकी सब सही है काल वाले निकाल वसे इनको आज तक य नहीं पता होगा निकालने कौन से है इनको
01:39:48:14 यय गता जी के शलोक रेरस देते ब का आप 15 ब को बार एक बार निकालिए 15 बछ में क्या लिखा हुआ है उसम ना ये लिखा हुआ है इन्होने अपना बोला हुआ है के आप आपने जो पूजा करनी हम लोगों के लिए बोला हुआ आपने जो पूजा करनी है परमात्मा की नारायण स्वरूप में करनी है और नारायण स्वरूप उने य बताया वो नारायण है जिनसे जो आपका जितनी जितना य संसार है जिनसे म चला है या जिनसे पैदा हुआ है 15 ब में लिखी हुई है गीता और फिर 15 ब में मैं आपको एक बात इनकी बता रहा जो गुण की बात करते हैं स गुण की बात
01:40:36:19 करते 10 ब में क्लियर लिखा हुआ है यह जितना भी संसार है मेरा अंश मात्र है कहते हैं अंश मात्र तो इनको इतनी छोटी छोटी य इनको दिक्कत है क्योंकि इनको मिलान किया नहीं है ना इनको किसी ने बताया कि मिलान ऐसे होगा व इसम माहिर है मिला जरा गुण के बारे में बता रहा हूं एक कोट करते हैं जो गुणों की भक्ति करते हैं वो जो है उनका नर उनका अच्छा नहीं होता है तो गुण के बारे में य लिखा है जो सत्व गुण से उत्पन्न होने वाले भाव है भाव और रजो गुण से तथा तमो गुण से उत्पन्न होने वाले भाव है उन सबको त मुझसे ही होने वाले जान क्यों भगवान ने सब कुछ बनाया तो जो चीज तुम्ह बाने वाली है वो भी भगवान ने ही बनाई भगवान ने कहाय मेरी माया बहुत जटिल है किसी के बज रहा फन बज रहा है क्या हो रहा है हा म्यूट कर लीजिए म्यूट कर लीजिए हा इसके बाद क्या है कि गुणों के कार्य रूप सात्विक राजस और तामस इन तीनों प्रकारों के भाव से यह सब
01:41:51:22 संसार प्राणी समुदाय मोहित हो रहा है तो माया जो है भगवान की है तो व्यक्ति जो सत और तम से मोहित हो रहा है तो वो भगवान से उत्पन्न चीज है अच्छा क्योंकि यह अलौकिक अर्थात अ अति अद्भुत त्रिगुण मय मेरी माया बड़ी दुस्स है परंतु जो पुरुष केवल मुझको ही निरंतर बचते हैं वह इस माया को पार कर जाते हैं जो गुणों में फस रहे हैं जो गुणों में फस रहे हैं उनको पार कैसे करते हैं मेरी वॉइस नहीं आ रही क्या क्लियर क्लियर है
01:42:27:21 जो जो गुणों में जो गुणों में फंस रहे हैं वो पार कैसे करते हैं उस माया को मेरी भक्ति करके जो मुझको निरंतर भजते हैं ये कितने श्लोक निकालेंगे 5 पर में कितने श्लोक आते हैं 35 निकाल दो उसके बाद भी श्री कृष्ण की महिमा मिल जाएगी जी जी जी ये कहते हैं माया के द्वारा जिनका ज्ञान माया के द्वारा यह जो त्रिगुण इनके दवारा जिनका ज्ञान हरा जा चुका है ऐसे असुर स्वभाव वाले लोग मुझको नहीं भजते मू लो मूर्ख लोग और सुनो एक अच्छा प्रमाण तो रह गया वो महाभारत का प्रमाण दिखा दो जरा जो ग्रंथों में मिलावट के लिए क्या दिखाते हैं महाभारत क्या कहती है जो ग्रंथों में प्रक्षिप्त होने की बात है ये मिला दिया गया है हमारे शास्त्रों ने हर व्यवस्था की है त स्मात शास्त्र प्रमाणम और व्यक्तिगत तर्क मान्य आपको कुछ भी शास्त्र के बाहर जाना ही नहीं है हर चीज शास्त्र से है तो जो मिलावट का आरोप लगाते हैं मैं दिखाना स्मरण नहीं रहा था मुझे वो दिखा दीजिए महाभारत का सबसे लास्ट सबसे पहला या
01:43:42:21 लास्ट होगा यह देखिए इसमें देखिए धर्म द्रोही मनुष्य शास्त्रों की प्रामाणिकता पर डाका डालते हैं उन्हें अग्रह और अमान्य बताते हैं वह अर्थ ज्ञान से शून्य मनुष्य अर्थशास्त्र की विषमता मिथ्या प्रचार करते हैं और आगे इन्हीं को दंड देने की बात हो रही है निरंतर शास्त्र के दोष देखने वाले लोग शास्त्रों की मर्यादा को लूटते हैं और यह कहा करते हैं कि यह प्रासंगिक नहीं है आज के टाइम में समझ गए यह महाभारत में कहा गया है आप मिलावट है इस बात का प्रमाण नहीं दे पाए हमने मिलावट का दोष लगाने वाले को गलत ठहरा दिया शास्त्रों से यह होता है शास्त्र सतता इसको कहते हैं और मनम कीी तुम्हारी बातें प्रमाण लाओ मिलावट हुई है उसका जी जी जो प्रमाण है उसकी ऊपर तुमने जब आक्षेप लगा दिया तो दुनिया का कोई भी प्रमाण प्रमाणिक नहीं रह जी एक इनके दिग शास्त्रों में कौन
01:44:57:24 सी बात किस उद्देश्य से और क्यों लिखी गई है जब तक इसका पता नहीं होगा तो शास्त्र अगर आज के टाइम में कोई गीता प्रेस या कोई भी प्रेस एक श्लोक गलत कर देती है पप देती है इसका निर्णय करने वाला परंपरा प्राप्त वो आचार्य होगा जिसने उस शास्त्र को उससे लिया है जिसने उस शास्त्र को सबसे पहले व्यवहारिक सामग्री के रूप में उत किया था जी जी वो केवल बता सकता है वो केवल य निर्णय करने वाला है कि हा भाई यह मैंने अपने गुरु से नहीं पढ़ा यह वाला जो लोक है अतिरिक्त बस कल मैंने बताया था गुरु शिष्य परंपरा से कैसे जटा माला पाठ के रूप में आते हैं मंत्र हमारे पास जी जी य गु की बात चल रही थ गु में होते अब इनके दिमाग में क्या भ सगुण विष्णु और क देते हैं
01:45:56:21 जोड़ देते उनको इनको य हमारे अंदर जैसे हम अच्छा काम करते हैं कोई मालो कोई धर्म का काम करते हैं सा होते हैं तो य रामपाल केब से इनको त्याग देना चाहि गु को म कोई भी सीधा काम नहीं करना चाहिए हिब से लेकिन मर्ख कोय नहीं पता कर रहे इनके हिब सेे देनी चाहिए इनके दिमाग में गय त्रण को सधा ब्रह्मा विष्णु महेश से देखिए ब्रह्मा विष्णु महेश क्या है ब्रह्मा विष्णु
01:46:35:12 महेश जो उत्पत्ति स्थिति और समार नामक कत है उसका निर्वाह करते हैं तो इन गुणों को स्वेच्छा से धारण करते हैं अब अगर य कहा जाए कि इनके अंदर य गुण है इसलिए इनकी भक्ति नहीं होनी चाहिए तो पहली बात तो य है अगर इनके अंदर गुण है तो इनके लिए यह भी लिखा है कि मैं परम ब्रह्म हूं ठीक है तो परम ब्रह्म भी है दूसरी बात अगर आप यह मानते हो कि इस दुनिया की रचना कबीर ने की है तो सतो गुण रजो गुण और तमो गुण जीव और प्रकृति की रचना किसने की किसने की कबीर ने कीय जो गुण आए निकल के बार कहां से आए कहां से निकल के आए गुण जो निकल के आए कहां से आए वो चाहता था ना कि इस दुनिया में हो बुद्धि थी ना उसके अंदर इस दुनिया में हो तमोगुण चीजें रजोगुण चीज तो इसके हिसाब से अगर य मना किया जा रहा है अगर यहां पर यह मना किया जा रहा है कि रजोगुण जिसके अंदर होगा या तमो गुण जिसके अंदर होगा या जिससे गुण निर्गत होंगे उसकी भक्ति नहीं करनी है आपके अनुसार कबीर की भक्ति नहीं करनी है मैम
01:47:49:24 राहु जी सर तीनों गुणों को त्यागने का था जैसे मिनट शमा जितने भी आपके संदीप जी आपकी आवाज आगे पीछे हो रही है हा बोलिए बोलिए जैसे उन्होंने जो तीन गुणों को त्यागने की बात की है ना उसका अर्थ यह है कि जो हमारे अंदर जितनी भी भावनाए है जितने भी अच्छे काम करते हैं जितने भी गलत होते हैं वो सारे परमात्मा को समर्पण करने 66 में य चीज क्लियर की हुई है लेकिन इनको बोल दिया गया य ब्रह्मा विष्णु महेश को त्याग दो यह कितना गलत इनको म समझाया हुआ देखो अरे मनम मनम सब कुछ बात इंटरप्रिटेशन मनम है उनकी रामपाल र् जी जय शर्मा न गुणों को अगर य त्याग देंगे तीनों गुणों को अगर त्याग देंगे ब्रह्मा विष्णु महेश को त्याग देंगे हम ब्रह्मा विष्णु महेश की बात ना करें केवल गुण की बात करते हैं कि सतो रजो और तमो को तो ये कौन से गुण में जाएंगे कौन से गुण में जाएंगे फिर और रही बात ये सृष्टि त्रिगुणात्मक है मतलब इसमें तीनों गुणों के आधीन है ये सृष्टि तो सांस
01:49:04:24 लेना बंद कर दो दे दो अपने कबीर को पूरा मत लो सास रोक लो अपनी सास जब तक आप जब तक आप एक शरीर धारी हो जब तक आप एक मानव देह में प्राणी की देह में हो तब तक आपको इनमें से इन तीनों गुणों से ओत प्रोत रहना ही है जी जी सर वहां पर आत्म समर्पण की बात है ना आत्म समर्पण करके आप कार्य करो जो भी करना है मेन बात ये थी मतलब जो बेसिक काम था मैं कहूंगा जेल जाना जेल जाना कौन सा गुण है यात्रा करना कौन सा गुण है कोई अच्छा धावक है कोई अच्छा दौड़ सकता तो ये कौन सा ब्रह्मा विष्णु महेश कौन सा गुण है ये वाला बो अजीब सी बातें है इनकी अब मान लो मैंने कोई धर्म कार्य कर लिया मैं तो ये कह रहा हूं अगर अगर सतर और तम की भक्ति नहीं करनी है या जिसके अंदर सतर और तम है उसकी भक्ति नहीं करनी है कबीर की भक्ति करना बंद कर दो क्योंकि काल को उसी ने बनाया माया प्रकृति को उसी ने बनाया बंद कर दो बिल्कुल ठीक बात है बकुल ठीक बात है इसीलिए मैं मैं इसीलिए वो जो लॉजिक है ना उनकी इसीलिए रखता हूं य शास्त्रों से इनको कोई मतलब नहीं है बोल दिया कि हम नहीं मानते बोल दिया हा
01:50:20:01 इसीलिए मैं तर्क प आता हूं तो तक प आता हूं तो पीछे अरे पंडित जी पीछे ग्रंथ रख के उठाते क्यों नहीं अरे भैया तुमको मानना है नहीं तुम्हारी श्रद्ध है नहीं तुम वो रट के आए हो मानेंगे बाकी के शलोक प्रक्षिप्त इन्होने नहीं रखे है इसलिए नहीं उठाते ना है ही नहीं देख जय शर्मा जी को सुनले काफी देर से बो बात है हमारे शास्त्र में बात है अगर हम खुद स्वाध्याय करते हैं उसका अध्ययन करते हैं तो कई बार हम ऐसा को मिल जाता है कि एक शास्त्र कुछ बात कह रहा है तो वही दूस
01:50:54:27 लेकिन उसको समझ हमारे हमारे हमारे अंदर हमारे शास्त्र के प्रति पूर्ण श्रद्धा है कि हम उसको गलत नहीं मानते हैं उसका कोई दूसरा तर्क जरूर हो हम उस दृष्टि से नहीं देख पा रहे हैं व्यास जी ने ब्रह्म सूत्र में लेकिन ये लोग व्यास जी ने ब्रह्म सूत्र में 2 पव 2.1 में लिख दिया है संदर्भ है आगे पीछे हो सकता है मगर है क्या है कि व्यक्तिगत तर्क अमान्य जैसे मैंने कहा ये जो है ये श्लोक जो है मिलावट है अब ये मिलावट के लिए कोई वो तो है नहीं प्रमाण ये व्यक्ति की अपनी बात है ठीक है अमान्य दूसरी बात व्यास स्मृति में और दो 14 मनुस्मृति में कहा गया कि अगर हमारे शास्त्रों में दो जगह दो अलग अलग बातें आ रही है तो या तो उनको निचोड़ करके एक चीज निकाल लो और यदि नहीं निचोड़ निकल पा रहा है तो दोनों चीजें धर्म है दोनों चीज धर्म व्यास स्मति एक पा और दो कहा जाओ हम अपनी हर बात शास्त्र से बोलते हैं और तुम अपनी हर बात मन से बोलते हो और कहते
01:52:10:06 हो कि तुम शास्त्र सम्मत हो और हम मनमुक है जी जी यही तो बात है शवास भाई जी अगर य केवल अपने शास्त्र से बोले तब जाट सुंदर सिं नायक यम कर स्मर वाला ब कमेंट कर रहेको हटा दीजिए बन कर दीजिए एक ही कमेंट बारबार रिपीट कर रहे इनको ह अगर यह लोग अपने शास्त्रों को ले ना केवल अपने कबीर पंथी से ही बोले कि भैया हम यहां से बात कर रहे बात लिखी है तब जा डिबेट का कोई
01:52:43:21 फायदा बो य विचार नहीं रखने ना [संगीत] जी कबीर दास जी को भी नहीं मानते कबीर दास जी निर्गुण निराकार के वो मानते थे ये तो मानते नहीं निर्गुण निराकार कोय कहते सकार है वैसे अगर बात करें सुनते अब एक बात देखिए अरेने ये तो बोलना ही था एक बात देखिए कि जी अपने फॉलोअर्स को खुश करने के लिए ये बात बोली जाती है रामपाल की तरफ से कि रामपाल जी अपनी अपनी मर्जी से जेल में गए ठीक है हां जेल धाम में और रामपाल जी बोलते हैं कि मुझे फसाया गया है फसाया गया ये बात सही है ये बात सही है अब अब बताओ कौन बोल रहा है तुम अगर ये कहो ना तुम अगर ये तुम्हारी बात है तुम अगर ये कहो तुम अगर य एक मिनट एक मिनट अगर तुम ये कहो कि रामपाल दास जी से गलती नहीं हो सकती तो तुम ऐसे काम कर रहे हो कि तुम ही खुद सिद्ध कर रहे हो कि उनसे गलती हो गई क्यों वो कह रहे है मुझे वो कह रहे है मुझे फसाया गया तुम कह रहे हो अपनी मर्जी से गए मर्जी से गए अच्छा मर्जी से
01:53:58:22 गए हैं मैं भी सारी चीज आ जाती है इसका मतलब उन्होंने जानबूझ के ऐसा कोई काम किया कि जेल धाम की यात्रा करनी पड़े करनी पड़ इसका मतलब वो आरोप झूटे नहीं है म सीबीआई जांच करवाओ भाई जब वो अपनी मर्जी से ग तो सीबीआई जांच क्या करनी है तुमने भाई हां भाई साहब ये तुलना भी तो किससे कर रहे हैं परमेश्वर से कृष्ण से सही बात उनसे तुलना कर रहे अरे वो अपनी कृष्ण तो जेल में रहे कहां जेल में प्रकट होके तुरंत बाहर निकल गए मैं तो कह रहा हूं कि भैया कृष्ण जो है वो वो उन्होंने जिसने उसको जेल में डाला था उसको मार डाला ठीक है आप जो है मार डाला सर असल में ये रामपाल जी पिक के अवतार है पिक के सही बात है ये पंड का नाम सुना आपने भगवान एक ये कमेंट आ रहा है इसको मैं रिप्लाई कर दूं भैया कई बार ये बात बोली है अपने वीडियोस में कि आप हमारे भाव को ना बदले हुए खुद शर्ट्स बनाइए जैसे अपोजिट वाले भी जो वो करते हैं
01:55:14:07 भाव को बदल बदले नहीं अगर हम यह बात कह रहे कट पिट करके ऐसा ना कर दे कि हम कहने कुछ कहा कुछ था और आपने कटकट कर के बदल ही दिया भा सम वो तो भाव बदलेंगे नहीं मगर हम उनको भी अला कर रहे आप हमारे ख शर्ट बनाइए खब रील बनाइए अला है कोई स्क नहीं भेजेंगे खब बनाइए बस ऐसा ना कगा हम कह रहे शंकर भगवान को हम मानते हैं मगर आप जो कटपट करके ऐसा कर दो हम कबीर को मानते
01:55:45:28 हैं बाकी समर्थको को तो पूरी छूट है जो आप पॉजिटिव बनाने वाले आप तो खूब बनाइए आपको बना खूब कहीं पर भी डालिए कैसे भी यूज करिए खूब डालिए बस जो हमने नहीं किया नहीं अपोजिशन वालों जो अपोजिट वाले हैं जो विरोधी है या जो सहमत नहीं है उनके लिए य वक्तव्य है कि आप जो है उसम यह ना करिएगा कि हमने कहा कुछ और आपने जो है कट पिट करके ऐसा दिखा दिया देखो ये कह रहा है ये ना जी सर मुझे ना जा थोड़ा इजाजत दीजिए मुझे जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय शी जम जय श राम जय जय श्रिया राम इसमें एक गीता का ये श्लोक कोट करते हैं 18 62 ये मेन श्लोक कोट करते हैं तमेव शरणम स कितनी ी यात्रा हो गई है एक मिनट राहुल जी बोल रहे कुछ राहुल जी बोलिए ये गीता का एक श्लोक कोट करते हैं तमेव शरणम गच्छ सर्व भावे भारत तत प्रसादा पराम शांति नम प्राप्ति शाश्वतम तू सर्व भाव से उस ईश्वर की ही शरण में चला जा तो ये यहां पर भ्रमित करते हैं कि यह
01:57:01:03 भगवान श्री कृष्ण के अलावा कोई और ईश्वर है उसकी शरण में चले जा ऐसा कुछ प्रेरित करते हैं पर उन्होने इसका पिछला लोक है परंतु उन्होंने इसका पिछला श्लोक नहीं पढ़ा कि किसको बोल रहे हैं ईश्वर सर्व भूता नाम हृद ब्रम सर्व भूता यंत्र रूढ़ माया इसका पिछ लोक है 18 61 कि हे अर्जुन ईश्वर संपूर्ण प्राणियों के हृदय में रहता है तो संपूर्ण प्राणियों के हृदय में जो ईश्वर स्थित है उसकी शरण में जाने को कहा है भगवान जी ने 15 प में 15 अध्याय के 15 श्लोक में कहा है कि सर्वस्य चाह हृद सनि मतमति ज्ञानम पोहन हे अर्जुन संपूर्ण प्राणियों में ईश्वर रूप मैं ही हूं ईश्वर रूप में स्थित मैं ही हूं तो पूराने पढ़ना नहीं है और एक शलोक करके कर श ते उस भैया उसम एक बात और है वेद में प्रमाण है तो उसम भगवान य भी कह रहे कि वेद सर्वेद वेदांत कृत वेद विदेह चा उसके पहले बोल समस्त वेदों के द्वारा मुझे जाना जाता है वेद का कर्ता
01:58:16:07 भी मैं ही हूं और वेदों के द्वारा जानने योग भी मैं ही हूं वेद सर्वे वेदांत कत वेद विधे चा फिर सर्वस्व चाह मतमति ज्ञान मोहन बिल्कुल पविता य वाली बात देती है कालने लिखी वो पवित्र नहीं है ढ है पवित्र नहीं है वो अगर शिवांश नारायण द्विवेदी कबीर सागर को नहीं मानेगा तो यह की जो पवित्रता है मिट जाएगी इनके लिए तग्र दिखावे के लिए कहते हैं भाई अगर मैं किसी को माता कहता हूं किसी को पिता कहता हूं तो कोई अगर अगर कोई ऐसी कोई बात कर देगा कोई सामने वाला और मैं किसी को माता मानता हूं कोई पिता मानता हूं कोई सामने वाला ऐसी बात कर देगा जो मेरे लिए अप्रिय है तो मैं जिसको माता मानता हूं जिसको पिता मानता हूं व बदल जाएगा
01:59:09:15 क्या हम क्या किसी और की वजह से माता पिता डिसाइड करते हैं क्या इनकी इनकी इनके शास्त्र इनका ज्ञान इनकी जो विद्या है वो काल की कुए में जाती है के शास्त्र हर गली काल के कुए में है और हमारी महाकाल के मैं बताहा आर्य समाज का बिगड़ा हुआ वर्जन है आर्य समाज का थर्ड क्लास वर्जन है रामपाल आर्य का नहीं है ये कौन का बिगड़ा हुआ वर्जन य कन का बिगड़ा हुआ वर्जन जैसे न का जो ईश्वर है वो कहीं एक जगह बैठता है ठीक है इनका भी ईश्वर किसी एक जगह बैठता है वो सब जगह शक्ति के रूप में उसकी शक्ति के रूप में दत भाव आ जाएगा नहीं तो और मोक्ष यहां पर आने का कारण क्या है दोनों का सेम है वहां पर लोगों के मन में कुछ ऐसा हुआ कि हमें कुछ करना है इसलिए यहां आए नहीं तो पहले वही थे गोलोक मेंही थे सब के सब ऐसे ये लोग भी पहले सतलोक में ही थे मगर कुछ मन में आ गया इसलिए आना पड़ गया हां सब सिस्टम वैसा ही है दूसरी बात
02:00:24:21 उनका भी ईश्वर जैसा वहा सतलोक में वो जैसा गोलोक में वैसा ही एस इट आता है नीचे और फिर आ जाता है तो बाधित हो जाता है इनका भी ईश्वर जैसा सतलोक में वैसे ही नीचे आता है और फिर नीचे आता है तो बाधित हो जाता [संगीत] है अच्छा इन का क्या है शिवांस भाई जी अब इनकी कट्टर बुद्धि है इन्होंने इस कोन के अलावा कोई दूसरा ग्रंथ पढ़ना ही नहीं है इनको य बोला जाता है कि तुम्हें किसी भी और आचार्य की कोई भी पुस्तक कोई भी बात कोई भी वो नहीं पढ़ना है जो इस कन से प्रकाशित है या जो श्रीला प्रभुपाद ने लिख दी है वही तुम्हें पढ़नी है अब इनसे पूछा जाए मेरी एक किसी वैष्णव से बात हुई थी इस विषय में और वो गड़ ही था तो मैंने पूछा कि भ श्रीमद् भागवत को लेकर मुझे पढ़नी थी तो मैंने क मैंने गीता गोरक प्रेस की मंगा तो उन्होने बोला कि मेरे पास थी मैंने कहा नहीं मेरे को गड कभ आना चाहते क्योंकि मेरे को आज आज जो है हिंदू राष्ट गोष्ठी होती है तो मुझे 3:30 बजे सा 35 पर जाना ही होगा तो गड इस कवि को ले लेते हैं वो कुछ बातें अगर ऐसी करते
02:01:39:22 हैं कि कुछ काम की है तो देखते हैं है उनको भी ले लेना कौन है स साब संगत जी जय श्री कृष्ण जय श्री रामम दस का नाम परम दास है का मोबाइल रिपीट हो रहा है हा कोई कोई जी अब आप थोड़ा सा स्स ड़ क्या कहते हैं भैया है
02:02:16:21 ना किसको लेने को बोल रहे हैं अविनाश शुक्ला जी सब लोग अपने माइक मूट कर नारायणय एक मिनट एक मिनट मिनट आप आप भी अपना माइक मूट करिए कबीर देव जी हेलो हेलो नारायण जी श जी नहीं रुक जा ये आवाज ट क्यों आ रही है
02:02:53:04 नहीं इधर तो नहीं आ रही अब आ रही है क्या अब नहीं आ रही अविनाश जी आप चालू करिए अविनाश जी अपना जी नारायण जी नारायण नारायण नारायण क्षमा चाहता हूं कि मैं किसी कारण बस चेहरा नहीं दिखा सकता बत्रा जी भली भाती जानते हैं मुझे ना वो जानते हैं मगर बात ये है कि समझिए हमने यहां पर एक मर्यादा बनाई हुई है उसके ता जी जी दो मिनट बस अपनी बात रखूंगा ये जो अभी आप गरीब दास जी का जो आपने खोला हुआ था थोड़ी देर पहले है ना और यह जो रामपाल के दास कहते हैं कि ये अंतिम वेद सूक्ष्म वेद हैय सबसे आखरी वाणी है इसी गरीब दास की वाणी में एक अंग है अनुभव दास ने स्पष्ट कहा है कृष्ण भगवान गीता कथी लेकिन ये उसको भी नहीं मानेंगे तो यह तो अपने परंपरा द्रोही हुए कि नहीं हुए आप खोल कर देख लीजिए अभी आप मिला लीजिए ने दावा नहीं किया कि कृष्ण भगवान ने गीता नहीं व भी क चला चुके हैं ठीक अना जी मैं क्षमा चाहूंगा थोड़ा सा आप जो है हम लोग बात करेंगे आपकी बात जो आपने द
02:04:08:10 है हम लोग बात करें जो गरीब दास जी की वा है सा संगत जी जो गरीब दास जी की वाणी है मुझे रिपीट आ रही मैं एक मिनट लीव करके दोबारा आता हूं हां जी अब बोलिए गड इ कबीर देव
02:04:52:14 हा जी माइक अन म्यूट कर लीजिए सत साब संगत जी सभी को जैसे आप संत रामपाल जी महाराज जी के बारे में कहते हैं कि उनको गीता नहीं पता है उनको ग्रंथों के बारे में नहीं पता है ऐसे कहते हैं दास का नाम परमप्रीत दास है होशियारपुर से हैं पंजाब से तो अभी जो संत रामपाल जी दूसरा मंत्र देते हैं सतनाम तो वोह जो गीता अध्याय 17 श्लोक 23 भाई साहब आपने पहले तोय मुझे मेरी आवाज क्य आ रही है समझ नहीं पा रहा आप लोगों को रिपीट हो रही है क्या आवाज नहीं नहीं इधर ठीक है बिल्कुल मेरी आवाज रिपीट तो नहीं हो रही आप लोगों को अब नहीं हो रही अभी तक हो रही थी क्या हो रहा थाय अब फि व व अब अब रिपीट हो रही है अब नहीं हो रही हा
02:06:03:21 जी हेडफोन अरे आवाज क्लियर नहीं आएगी फिर आ जाएगी क्लियर हम लोग बिना हेड फोन की बात कर रहे हैं आवाज आहीर देखिए आप जो है शायद आपने स्ट्रीम देखी नहीं है अगर आप भगवत गीता से य सिद्ध करेंगे कोई भी कोई भी बात आपको पहले बताना पड़ेगा कि भगवत गीता को आप पूर्णतया प्रमाणिक मानते हो कि नहीं मानते हो अरे संगत जी ऐसा है कि जो गीता का ज्ञान है जैसे गुरु जी सत्संग बते वो एक तो पारब्रह्म का है एक काल ब्रम जसे ये किसने बताया है गीता अध्याय 15 के श्लोक 16 और 17 में तीन तीन पुरुष बए चर पुरुष अक्ष पुरुष परम अक्षर पुरुष उत्तम पुरुष अभी जो बात बोली है कि दो लोगों ने बोला है यह बात कहां लिखी है वो बताइए अभी पहले ये बात तो सुनो पहले ये बात बता साब जब आप गीता की बात कर रहे हैं तो आपने एक बात कर दी कि गीता में दो लोगों ने बात की है यह कहां लिखा है बो दो लोगों का ज्ञान है दो
02:07:18:25 प्रमा दो लोगों का ज्ञान है वो कहा यही बता रखा है उत्तम पुरुष परमात्मा उदार उत्तम पुरुष है कोई अन्य है शलोक क्रमांक बता कौन भाई साब एक मिनट जब कोई बात छी उसको पूरी करेंगे जब कोई बात छेड़ झूठ
02:08:00:02 की मिनट शलोक कमा बोलिए 15 के में परमा का हा का निकालने आप निकालिए जब तक है कि जो संत रामपाल जी है एकको निकाल लेने दो एक मिनट डिस्कशन कर रहे हैं एक मिनट रु मिनट मिनट बता रहा बात सुनिए सर दो मिनट बा एक मिनट रुको एक मिनट 15 अध्याय और
02:08:37:27 देखो इसमें इन्होंने कहा कि वोह परमेश्वर तो कोई अन्य ही है ठीक है क्या लिखा है सुन लो सुन लो इन दोनों से उत्तम पुरुष तो अन्य ही है जो तीनों लोकों में प्रवेश करके सबका धारण पोषण करता है एवं अविनाशी परमेश्वर और परमात्मा इस प्रकार कहा गया है ठीक उसके बाद इन्होंने क्या कहा कि मैं नाशवान जड़ वर्ग क्षेत्र से अगले श्लोक में सर्वथा अतीत हू अविनाशी जी जीवात्मा से भी उत्तम हूं कहा ना इन दोनों से उत्तम तो अविनाशी जीवात्मा से भी उत्तम हूं इसलिए लोक में और वेद में भी पुरुषोत्तम नाम से प्रसिद्ध हूं हाज संगत जी यही बात लोक वेद से दार से मैं पुरुषोत्तम प्रसिद्ध हूं अरे मेरे भाई मैं ही हूं मैं ही हूं वो पुरुषोत्तम बात बताओ अगर अविनाशी ये हुए हैं तो जो गीता अध्याय दो के द पांच शायद बोला है अर्जुन देखो भैया मेरी बात सुनो पहले तो पहले तो ये मान लो इसके साथ आप वेद को पूरा मानते हो अधूरा मानते हो पहले बताओ दास पहले बात आप दास की सुनो तभी बताऊ
02:09:53:15 अरे भाई क्योंकि जब मैं प्रमाण दूंगा तो आप कहोगे काल ने बोला है दिक्कत य है बात तो सुनो मैं पूछ रहा हूं वेद को पूरा मानते हो अधूरा मानते हो पहले इसका जवाब दो अ मैं पूछ रहा हूं वेद को पूरा मानते हो अधूरा मानते हो दास मानता है जो परमात्मा जिन वेद को
✅ This part is already used · 02:10:11:24 – 02:10:20:22 (0:09)
→ Used in: A · Video भागवतानंद का निगमानंद पर प्रलाप । इस्कॉन व रामपाल जैसी संस्थाओं द्वारा प्रशिक्षण at 58:24 ↗
02:10:11:24 वेद को वेद को पूरा मानते हो अधूरा मानते हो इसका जवाब दो पहले वेद को जो अच्छा लगता है वो मानता हूं गीता मानता हूं गीता गीता गीता
⬜ Not used yet · 02:10:20:22 – 02:33:51:00 (23:30)
02:10:20:22 ज्यादा गीता गीता तो उसम तो काल ने कह दिया ना जहां जहां मैं कुछ बोलूंगा वो तुम कहोगे काल ने कहा है नहीं नहीं अी अच्छा सुनो अच्छा ये बता दो सुनो ये बता दो ये बता दो गीता में जो 5 पर काल ने कहा है वो कौन-कौन से श्लोक है वो बता दो ये एक बात पहले अभी जब क्वेश्चन पुट करता हूं तो आप बो भाई क्वेश्चन मैं क्वेश्चन तब लूंगा तुमसे जब मुझे यह पता हो कि तुम्हें जवाब कहां से देना है उसी में ही आपके सवाल का जवाब अरे यार तुम क्यों बताओ भाई मुझे एक निश्चित डायमीटर तो दो कि तुमको इससे जवाब देना है तुम जहां से भी मैं खोलूंगा उसको कह दोगे कि ये काल का बोला हुआ है ज गीता जी में लिखा है कि अर्जुन ते और मेरे एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनटन आपने कहा कि वेद को मैं उतना मानता हूं आपने कहा वेद को मैं उतना मानता हूं जितना मुझे अच्छा लगता है कहा ना जो चाहिए जो हम चाहिए अभी जैसे मैं पूछ देखो भाई अभी आपने अभी आपने कहा है कि इसीलिए चिल्लाना पड़ता है इसीलिए अच्छे से बात हो सकती है मगर नहीं आपने अभी य बात कही वेद को मैं उतना मानता हूं जितना मुझे अच्छा लगता है क्योंकि
02:11:35:22 गीता में लिखा गया है मुझे ये बताओ ये कहीं लिखा है क्या के फल से आगे निकल जाता है मैं आपको शास्त्र का प्रमाण दे रहा हूं कि अगर दो जगह दो अलग अलग बातें लिखी है तो दोनों को मानना है मानोगे सर आप बातो को आप मुझे ये प्रमाण दे दो भाई कि मैं जितना मुझे अच्छा लगेगा उतना वेद मानना चाहिए यह प्रमाण अरे बात अभी अभी ये तो बताओ गीता में जो तत्व ज्ञान है गीता में लिखा है जिसको तव ज्ञान हो जाता नहीं है पहले बात सुनो जो गीता में लिखा है जिसको तत्व ज्ञान हो जाता हैब मेरी बात सुनो आप मेरी एक बात सुनो भाई भाई साहब मैं आपको एक बात बोल रहा हूं नहीं रहा हूं सुनलो आप पहले सेलेक्ट कर लो कि गीता में कौन-कौन से श्लोक काल ने कहे हैं बस वो मुझे बता दो उसके बाद अपना प्रश्न करो पहले मुझे बता दो कौन-कौन से श्लोक काल ने कहे हैं पहले ये तो बताओ फ फिर दो बातें कांट्रडिक्ट हो गई एक पास से कह रहे अविनाशी कंट्रा ट नहीं हुई है भाई साहब एक मिनट कंट्रा ट नहीं हुई है आप अगर सुनना चाहोगे तो हम समझाएंगे आपको सुनना है नहीं नहीं पूछ
02:12:51:27 बता रहा बता रहा हूं जो अविनाशी परम ब्रह्म है जो अविनाशी परम ब्रह्म है जो व्यवहार में नहीं आ सकता है सुनना नहीं है जो नानक देव जी तो जानते होंगे नानक देव जी भाई साहब इनको म्यूट रखिएगा थोड़ी देर आप मेरी बात सुनिए मुझे कुछ कहना है आपसे ध्यान से ठीक है आप मुझसे गीता को लेकर प्रश्न क्यों कर रहे हैं क्योंकि आप गीता को प्रमाण मानते हैं फिर मैं गीता को खोलता हूं आपको जवाब देने के लिए उसके बाद आप कहते हो जब मैं आपको जवाब देता हूं कि यह तो काल ने कहा है ठीक है तो मैं मेहनत वहां करूना जब मुझे पहले पता हो काल ने कहां कहा कहा है पहले आप मुझे ये बता दीजिए कि काल ने 35 वो जगह कौन सी है जो काल ने बोला है फिर मैं आपको जो जवाब दूंगा वो काल के बोले हुए से बाहर से जवाब दूंगा पहली बात दूसरी बात मैंने आपसे पूछा जब आप यह बात बोलते हो कि क्या कहते हैं
02:14:07:15 ये यहां पर जो है दो ज्ञान है एक काल का ज्ञान है एक परमात्मा का ज्ञान है ये कहते हो यह बात गीता में कहीं लिखी नहीं है ठीक है दूसरी बात आप कहते हो कि वेदों को मैं उतना मानूंगा जितना मुझे अच्छा लगेगा यह भी कहीं पर शास्त्र सम्मत नहीं है शास्त्रों में नहीं लिखा है कि शास्त्रों को उतना मानो जितना अच्छा लगे बाकी छोड़ दो मनम कीी बात तीसरी बात अगर आप यह कहते हो कि भाई कहीं कुछ लिखा कहीं कुछ लिखा है इसलिए दो तरह का ज्ञान है नहीं इस बारे में शास्त्र कहते हैं कि जब दो तरह का ज्ञान हो तो दोनों धर्म है शास्त्र य नहीं कहते एक को काल का बोल दो एक को किसी और का बोल दो एक को मत मानो शास्त्र नहीं कहते शास्त्र कहते हैं कि जब दो अलग अलग तरह की बातें हो तो दोनों शास्त्र य नहीं कहते कि अगर दो तरह की बातें है तो उसको काल का बोल दो और इसमें अगर आप कोई अलग तर्क देते तो शास्त्र कहते हैं व्यक्तिगत तर्क अमान्य अगर शास्त्रों के विरोध में आप कुछ कह रहे हैं जो शास्त्र में नहीं लिखा है मन गंत कह रहे हैं तो वोह अमान्य है संगत जी अभी दास को भी दो मिनट टाइम दो हा बोलो अभी अभी जब कहते
02:15:22:24 रामपाल जी को जी ज्ञान नहीं है ऐसे अभी एक बात बताओ जो नानक देव जी हुए सिख धर्म में प्रथम गुरु भाई साहब मैंने जो विषय चल रहा है उस विषय पर बात करिए आप मुझे यह बताइए आप मुझे य बताइए कि काल ने वो कहा है ज्ञान यह गीता में लिखा है क्या दो तरह कान लिए गुरु नानक की आवश्यकता नहीं है मुझे मेरे भाई मुझे गता गुरु नानकता नहीं है गीता वे संगत जी जिनको परमात्मा उनका ज्ञान भी प्रमाणित माना जाता है आपने शंकर जी का ज्ञान कहां से लिया भाई साहब पहले ये बताओ शकर जी का ज्ञान कहां से लिया शंकर जी का शंकर जी का कहां से लिया मैं अभी आपको एक बात बता रहा हूं रुक जाओ
02:16:22:00 अभी एक जी नानक देव जी की वाणी है सुनने ते जग स भेद बचारे सोजन पूरा अब आपसे आप ही की भाषा में बात करनी पड़ेगी ठीक है यहां पर एक मिनट मिनट अभी मैं आपसे आप ही की भाषा बात कर रहा हूं ये लिखा हुआ है गीता तेरा ज्ञान अमृत और इसमें रामपाल दास जी लिख रहे हैं कि ऊपर को मूली यहां पर मूल लिखा है गलती से लिख गया है व मूली लिखना चाह रहे हैं य ऊपर को मूली वाला नीचे को तीनों गुण यहां पर गुण गलती से लिख गया है गुण लिखा है व खाने वाला गुण होता है ना जो वो लिखा है य पर ऊपर को मूली वाला नीचे को तीन प्रकार के गुण गुण होता है ना मीठा वाला वो रूपी शाखा वाला उल्टा लटका हुआ संसार रूपी पीपल यहां पर जो अंग्रेजी का पीपल होता है ना जनता वो लिखा है वो हिंदी में गलत लिख दिया वो पीपल का वृक्ष
02:17:37:00 नहीं है जनता का वृक्ष है अब इसे जो है क्या कहा गया है इसे जो है बोल रहे हो क्या क्या ये जान बूझ के बोल रहे हो अरे भाई मुझे सिद्ध करो ना कि मैं गलत बोल रहा हूं मैं भी तो क सकता तुम जानबूझ के बोल रहे हो जो हमारा ज्ञान मुझे करो य उन्होने मल लिखा है उने य उन्होने य मल नहीं मल लिखा है मैं कह रहा करो य एक पहली बात मट करो भैया इनको म्यूट करो भाषा में उत्तर देना पड़ेगा म्यूट करो
02:18:19:12 सुनो बो ऐसे बा च अरे भाई अन म्यूट मत होने दो इनको म्यूट करो रुक जाओ अभी सुनो मैं आपको अवसर दूंगा सुनो यहां पर ये लोग ये कह रहे हैं कोई भी कोई भी पेज निकाल सकता हूं मैं कोई भी पेज निकाल सकता हूं उसका मैं अर्थ बता सकता हूं देखो कैसे बताते हैं अर्थ यहां पर ये संपूर्ण सृष्टि रचना में कह रहे हैं जो निर्विकार जिन्होंने मांस शराब तंबाकू सेवन करना त्याग दिया है अन्य बुराइयों रहित है अन्य बुराइयों रहित गलती से हो गया है अन्य बुराइयों सहित है कहा है उन्होंने अन्य बुराइयों रहित गलती से हो गया है अन्य बुराइयों सहित है कहा है उन्होंने क्या कहा है अन्य बुराइयों से सहित है देव स्वरूप भक्त आत्मा है मतलब कि इनके लिए भक्त स्वरूप आत्माएं कौन सी है जो बुराइयों से सहित है जिनके पास क्या क्या होना चाहिए मास शराब तंबाकू सेवन ये सब जिसके पास होगा वो इनके लिए देव स्वरूप भक्त आत्मा है मानोगे कि नहीं बताओ आप जानबूझ के उल्ट बोल ता मैं भी वही कह रहा हूं कि आप जानबूझ के बोल रहे हो जो
02:19:34:22 जो दास बोल रहा है कह रहा हूं के आप जानबूझ के बोल रहे हो आपको उसका पेज नंबर बताऊंगा वाणी में चेक कर सकते हैं अरे भाई उस पेज की व्याख्या आपने कि है ना वो कहां से आई है वताब आपके पास अरे नहीं नहीं हमने नहीं की व पहले की हुई है जो जो अपने करते किसने की है जोल नाम बताओ आप खुद चेक कर सकते हो य प्रमाण देरहे हो हमको नाम बताइए आप प्रमाण वही तो कहा आ वेबसाइट खुल जाएगी व नाम चेक कर लेना किसी के भी कोई भी देख सकते है कौन सी किताब हैन कौन सी किताब है नाम बताओ मैं अभी यही निकालू नाम बताओ क्वेश्चन पूछा था कि अरे भाई किताब का नाम बताओ मैं निकालता हूं किताब बताओ नाम किताब का बोल रहा हूं पले सुन तो लो हां बोलो एक ग्रंथ साहिब की वाणी है 1037 सफे प लिखा हुआ है किसकी वाणी है ग्रंथ साहिब जो अपने नानक देव जी की णी ग्रंथ साहब की वाणी नहीं 18 पुराण स्मृति वेद उपनिषद इनमें से दो
02:20:49:27 प्रमाण जो नानक देव जी की वाणी है वो भी जो गीता के जो उल्टा भाई साहब हमने जो बताया है सनातन जो शास्त्र है उनसे आपके पास प्रमाण हो तो बताओ अगर नहीं है तो आप अच्छा लगा आप आए आप जा सकते हैं आपके अकेले के नहीं है सभी मानव मात्र के है ठीक है क्योंकि सभी मानव मात्र के है वो पता चल जाएगा कितना मानते हो समझे कितना कितना समान करते हो एक बात बताओ जिस को देखो मैंने अपनी बहुत सी बातें बता दी मेरे को जाना भी है चार बजे कहीं पहुंचना है अब मैं तुमको पूछ रहा हूं अगर तुमने कहा कि वेद में ये भगवत गीता को तुम मानते हो और दो प्रकार का ज्ञान है अरे यार यह भाई ये बिल्कुल वो है क्या मैं बताऊं
02:21:45:28 ये इनको म्यूट रहने दो मैं स्टेज पर ले रहा हूं इनके साथ जल्दी से हम लोग पूरा करेंगे अभी आपकी आवाज नहीं आ रही है आपने कहा कि मैं वेद को तना इनकी आवाज बंद करो भैया क्यों करते हो जब दूसरे की बात आप क्योंकि आप विषय से हट के बात कर रहे हो हम लोगों के लिए गुरु नानक जी के लिए ग्रंथ साहब के लिए सम्मान है मगर हम उतनी ही चीजें उनकी लेंगे जो हमारे वेदा शास्त्रों की सीमा में होंगी समझ रहे हैं आप ये मानेंगे नहीं मानेंगे नहीं ये नहीं मानेंगे
02:22:24:16 इनको म सेक एक सेकंड इनसे बात करने दो सर आप मंदिरों में आरती रोज पढ़ते हो ना पार सुने बात करेंगे व सुनना नहीं है उनको उनको अपनी बात बोल त लेना शिवाज सुन आप अपनी बात बोल दो सुन रहे हैं जी जी जी अरे श लेकर के नहीं आते जिज्ञासा लेकर के नहीं आते ये अपना जन देने आते इधर सर एक मिनट सेकंड ये आप इनको बता रहे हो ये बस 15 ब इनके दिमाग में घुसा हु नाने 18 पढ़ 19 पढ जो आप पढ़ रहे पढ़ना नहीं चाह रहे न लो के अंदर प्रवेश करने की बा जी जी बोलिए सर ये कह रहे तीनों लो में प्रवेश करके धारण करता है इनसे यह पूछो तीनों लोको में प्रवेश किसने किया था तीनों लोको में प्रवेश जो है जो हमारे भ श्री विष्णु जी ने जब बली जी के समय पर तीनों लोको में प्रवेश किया था तो उन्होंने
02:23:39:16 यह चीज साबित की हुई है य तीनों लो में प्रवेश कबीर दास को घुसा रहे हैं यह क्या मतलब है भाई संदीप जी एक बात आपको याद दिलाना चाहूंगा जो उनकी गग लाइन है वो है हम उतना मानेंगे जितना हमें अच्छा लगेगा तो कहां से हम बामन का प्रमाण दे देंगे हम हम जो है जहा कहीं कहीं प गीता में काल ने बोल दिया है तो जहां पर भी हम प्रमाण देंगे वही पर काल ने बोला होगा तो हम कहां से प्रमाण दे दे तो पहले हमें बता तो दे इतनी कृपा तो कर दे कि भैया ये ये चीज ये 35 श्लोक है गीता के ये हम नहीं मानते बाकी सब सही है अब दो तुम प्रमाण
02:24:21:03 मैं सौगंध खा के कह रहा हूं जो बाकी के बचे हुए 665 लोक होंगे उन्हीं पर य पूरा तंत्र तसने कर दूंगा सर आपको एक बात बताता हूं अभी इन्होने आपसे कुछ बात कर रहे थे जबी इन्होने बोला 15 ब 18 में एक शब्द आता है लोको वेद च व वहां पर तो इनको यह समझाया गया लोक वेद का मतलब है जो संसार बातें है जबक वहां पर लिखा हुआ है लोको वेद लोक और वेद में इन्होंने उसको जो समझाया हुआ संसारी बात कर दि है शब्द नहीं है वहा पर ऐसे समझाया हु इनको म च को तो हटा ही दिया लोक वेद का मतलब जसे सुनी सुनाई बात ऐसे इनके दिमाग में सेट अप किया हुआ हैय चक्कर है इनका जवाब सुनने नहीं आते वो सिर्फ अपना सवाल रखने आते हैं फिर हम जो भी जवाब देंगे काल मन की काल मन से काल मन से काल मन से भाई जवाब होना चाहिए ही नहीं कहां से जवाब जहा से भी जवाब देंगे काल काल काल और मुझे अच्छा लगेगा अब उनके लिए वो उनको अच्छा लगेगा फिर सर कंस के दिमाग में ना काल ही घुसा हुआ तभी श्री कृष्ण जी ने उसको ठोका था इसलिए काल के चक्र में इनको समझ नहीं आती है च चलिए चलिए चलिए चलिए
02:25:36:18 ठीक है अब जो है हम लोग फिर आएंगे लाइव किसी और के साथ पर पहले हमें कुछ चीज फिक्स करनी होंगी पहले हमें कुछ चीजें फिक्स करनी होगी हां जी बहुत बहुत धन्यवाद है आपकी वजह से ना हम लोग इस प्लेटफार्म प आए हैं और इनकी जो है हम लोग बहुत ही अच्छे तरीके से ऐसी तैसी कर पा रहे हैं वरना ये चीज बहुत मुश्किल हो पा रही अगर पेन से काटना शुरू किया जाए तो इस पूरे ग्रंथ का ऐसा निचोड़ निकाला जा सकता है जो इनके पूरे कथानक के विरुद्ध हो जी जी बकुल अब मेरी बात क्यों नहीं मानोगे मैं भी कह दूंगा मेरे पास जो है भगवान ने शक्ति दी है रात में मैं भी कह दूंगा दो चार लोग बोल हां भाई मैंने देखा था बिल्कुल बिल्कुल सही बात है सर आपका जो प्रयास है ना बहुत हट के प्रयास है मेरे को लगता है कि इनके जितने भी शिष्य है ना लगभग जितना आपका प्रयास है इनके 70 80 पर शिष्य तो आपके शिशे बन जाएंगे मुझे लग रहा है 20 पर का तो कोई इलाज नहीं है 20 30 पर का कोई इलाज नहीं है लेकिन 70 पर आपके शिशे बन जाएंगे देखो अब यहां पर ये कह रहे हैं देखिए यहां पर यह कह रहे रामपाल दास
02:26:52:18 जी इसलिए यहां पर ब्राह्मण का यह गलती हो गई इनसे ब्राह्मण लिख दिया है ये गलती हो गई है ब्राह्मण का अर्थ जो है अक्षर ब्रह्म है बताओ सर इनके दिमाग में एक सेट कि हु इसका अर्थ यही है तो दूसरा अर्थ हो नहीं सकता जबक इनको जवाब नहीं सुनना है उनको केवल प्रश्न करना है प्रश्न करने के बाद जब जवाब दिया जाएगा मैनिपुलेशन की बात है काल ने बोला है अरे भैया तो करे क्या आए क्यों जवाब नहीं सुनना तो जितना मैंने बोला है तना मेरी जो निश्चित लकीर खीची है उसम से दो अच्छा वो लकीर खींचो वो नहीं खीचू सर
02:27:41:21 यत गल लिक पब करण संत ने वाणी में ीरा और मनरा लिखा हुआ है लेकिन जी संत नहीं है इसलिए गलती कर रहे हैं और हायह देखिए रामपाल जी कबीरा सर जो नानक देव जी की बात कर रहे नानक देव जी का जो व स्टार्टिंग का व है ना उने पता क्या बोला है एक ओंकार सतनाम एक बार य पब्लिक कर दीजिए लिंक को पब्लिक कर दीजिए
02:28:21:26 नानक देव जी ने बोला है नानक देव जी ने बोला है एक ओंकार सतनाम और यही बात गीता जी में लिखी ओंकार मैं ही हूं श्री विष्णु जी ने बोला तो फिर कनेक्ट हो तो रहा और कैसे कनेक्ट करना है देखिए यहां पर जितने भी रामपाल जी के शिष्य आए ा ले जानने की इच्छा से पंडित जी अपना ज्ञान देने और नहीं सुनने के लिए किसी का समय खराब करने के लिए ना आए इनने बड़ी लेकर आए जानने की इच्छा लेकर के आए नहीं पता है तो शवा जी से भी पूछ सकते किका हमें नहीं पता बताइए और आर देख
02:29:13:13 जी गोविंद गुरुकुल जी आपसे मैं एक चर्चा बस करना चाहता हूं उसके बाद फिर हम लोग लाइव करेंगे साथ में एक मुझे आपसे टेलीफोन की एक छोटी सी बात करनी है फिर हम लोग आएंगे लाइव है ना एक मैं बात कह रहा था कि देखिए व्यक्ति आता है प्रश्न लेके भाई यहां ये क्यों लिखा है वहा वो क्यों लिखा है अा ठीक है जी तो हम उसका जवाब देते हैं देखो भाई यहां ये इसलिए लिखा है ये ऐसा है य ऐसा है क्योंकि यय लिखा है ये तो काल ने बोला है अच्छा चलो य यहां से छोड़ देते वेद प चलते हैं वेद में ये लिखा है अरे ये तो मेरे को अच्छा ही नहीं लग रहा ये
02:29:52:28 माते तो चलो गीता प वापस आ जाते एक काम करो वो जो जहा जहा प काल ने बोला है वो हमें बता दो जिससे की हम उ वहा से जवाब दे जहा पर कालने ना बला हो नहीं नहीं ये मैं नहीं बता कालने बोला पता नहीं है यब इनको ढूंढना पड़ेगा अच्छे से सभी को मिलकर अपने शलोक लेके आ जाना जिसने निष्ठा पूर्वक [हंसी] शलोक लेके आइए और फिर गीता की बात करिए इनका ना कबीर देव और कविन के अंदर ना कबीर दास को ढूंढ रहा है ऐसा जैसे आलू बुखारे के अंदर आलू को ढूंढ रहे है आलू बुखारे को आलू बोलने से वो सब्जी नहीं वो नहीं बन जाएगा सब्जी नहीं बन जाएगा इनको अकल नहीं आती इस बात की आइए पंडित जी कुछ बात कहनी थी आपको सर अब दारुण शब्द ना दारुण दारुण में ये दारू ढूंढ लेंगे ऐसे लोग है ये मैंने भी तो आइएगा आप लाइव ना मैंने मूल में मूल ही ढूंढ तो लिया मैं भी देखो इतना इतना ढूंढ दूंगा ब्राह्मण में मैं ब्राह्मण ढूंढ दूंगा ये लोग कैलाश में केला ना ढूंढ ले अब भैया जी अगर आप अब लाइव आएंगे तो किसी एक शास्त्र पर ही चर्चा करनी है गीता
02:31:07:28 पर ही चर्चा करनी है सबसे पहले तो अगर अगर शास्त्र की बात करनी है तो ये पहले बताए वो 35 श्लोक कौन से हैं और अगर आना है फिर भी आइए मगर फिर शास्त्र प बात नहीं होगी फिर बात होगी ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं बकक शास्त्र नहीं होगी अगर शास्त्र प करनी है तो आप ये लेके आइए 35 लोक कौन से गीता के जी जी जी शत्र साथ लेकर के आइए जी जी और वेद को कहां पर नहीं मानना कहां मानना यह भी लेके आइए और
02:31:46:24 क्यों शास्त्र को कहां प मानना है कहां नहीं मानना है ये सब व्याख्या लेके आइए अन्यथा शस्त्र लेके मत आइए हम आपको जो है वैसे ही सामान्य तरीके से सामान्य व्यक्ति की तरीके से आपसे हम बात कर लेंगे जी जी जीकी जी चलिए सभी को जय श्री राम समय देने के लिए और जी जी जय श्री राम जय श्री राम आपका ल से बहुत बहुत धन्यवाद श जी बहुत-बहुत धन्यवाद बहुत-बहुत धन्यवाद जय श्री राम आज का वो दश्य बढ़िया रहा जो मैंने जब दिखाया ना मली मूल को मूली करके य क्या हो रहा क्या हो रहा है का प ी में कैसे आ गया यह कैलाश में केला
02:32:35:02 ढूंढ जय श्री राम जय श्री राम और सभी लोग आमंत्रित है किसी कोई भी किसी भी प्रकार से सहमत ना हो तो वो आ सकता है हमसे संपर्क करें अगर उसको यहां आने में कोई डर है कोई बीच का चैनल ढूंढा जाएगा अगर चैनल पर आने में डर है इंटरनेट पर डर है तो कोई बीच का स्थान ढूंढा जाएगा संपर्क करिए गुर्दा दिखाइए बा गुर्दा दिखाइ संपर्क करिए 74836 ट
02:33:12:12 करिए और नास्त्र से जुड़िए हम लोग नाम जप कर रहे हैं सब लोग साथ में मिलकर के जो समर्थक है वो ईश्वर का बल एकत्रित करें नामा स्त्र से जुड़िए और अगर क्लासेस से जुड़ना है तो टप करिए इसी नंबर पर और अगर धर्म रक्षा अभियान में साथ निभाना है कंधे से कंधा मिलकर मिलाकर चलना है तो आप धर्म रक्षा अभियान के लिए भी ट कर सकते हैं ठीक सभी को जय श्री राम जय जय श्री राम जय जय श्री
02:33:48:21 राम m
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
Live: Required tasks are not set on the Rules page yet.
-
⬜Hindi SRT
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
गीता वेद पुराण को नहीं मानते रामपाल वाले #rampaljimaharaj #kabir
% not setDescription
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮