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00:00:02:22 सभी को जय श्री राम तो अभी ये आप लोगों को एक दुख भरी सूचना मुझे देनी है वो यह है कि जो हमारी इस चर्चा में आने वाले थे वह अभी लापता है उन्होंने हमें अपना फोटो दे दिया था डिटेल्स दे दी थी ओम प्रकाश कुमार यह नाम उन्होंने बताया था और पहले उन्होंने हमको यह कहा कि उन्होंने फॉर्म भरते समय उसमें जब उनका किस पक्ष को प्रस्तुत करने आ रहे हैं ज हमने व पर एक प्रश्न आता है तो उसमें उन्होंने लिखा था कि इसकन के पक्ष को प्रस्तुत करेंगे उनके नाम से और ऐसा डाउट हुआ कि इस कौन के नहीं है ये और जिस तरह से उन्होंने उसमें

00:01:17:27 जहां पर ऑप्शन आता है कि आप किन किन ग्रंथों को प्रामाणिक मानते हैं उसमें भी उन्होंने लिखा था कि गीता वेद पुराण यह जो भाषा शैली है ना यह भाषा शैली स्कोन वालों की नहीं यह भाषा तो इसलिए हमने कॉल किया उने और कॉल करके उनको टटोलने का प्रयास किया तो पता लगा कि वह जो है पहले उन्होंने आना कानी की पहले बोले कि हम जो है सवाल पूछने के लिए आ रहे हैं और अपनी इस चीज को बताने में कि वो रामपाल के उसके बाद हमने भैया

00:02:11:20 अगर भाई आप अगर आ रहे हैं किसके पक्ष को प्रस्तुत करने आ और अगर आप प्रश्न करने आ रहे हैं तो आप पहले आवाज कट कट कर आ रही है ऐसा है क्या आवाज कट कट कर आ रही है य तो वाईफाई है टोटल शुरू से ही कटकट के आ रही है अभी ठीक आ रही है

00:03:02:03 आवाज अब ठीक आ रही है अच्छा ठीक है अब ठीक आ रही है तो हां तो पहले वो अपनी पहचान को छुपाने का प्रयास कर रहे थे सनातनी जी सनातनी ब्रह्मचारी हा सनातनी ब्रह्मचारी जी आपने अपना कैमरा क्यों ऑफ कर लिया कैमरा ऑन

00:03:58:21 रखें कोई प्रश्न पूछना था आप तो पहले जी चलिए मैं अपनी बात पूरी कर लू सबसे पहले तो वो अपने बारे में बताने में हिचा रहे थे कि मैं रामपाल को ही मानता हूं उन्हीं के मत को स्वीकार करता हूं तो मैं फिर वो बोल रहे थे कि मैं प्रश्न करने मैंने कहा प्रश्न करने के लिए आप वहां पर आइए क्लास में और यदि कभी हम ऐसा होगा कि प्रश्न उत्तरी करने बैठेंगे तो वहां पर आप आइएगा कोई दिक्कत नहीं है मगर अभी यह जो हम चला रहे हैं वह है कि किसी प्रकार के वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा

00:04:50:15 तो तो जब यह हुआ कि वैचारिक मतभेद के निमि चर्चा की बात आई हमने कहा अगर आपको वैसे प्रश्न करने हैं तो आप जो है क्लास में ही आइए तो फिर उन्होंने फिर धीरे से बोला ठीक है तो मैं रामपाल जी के पक्ष को रखने आ रहा हूं लब तब जा कर के उन्हें हां वह महापुरुष जो है आज वाले जो महापुरुष हैं वह भी एक मंतव्य के साथ आए हैं कि हम अपने पक्ष को नहीं रखेंगे और केवल जो है सामने वाले को काउंटर करेंगे या फिर हमारा अभी ये जो कंटेंट है ये कंटेंट हमारा है कि हम बात करने आए हैं वैचारिक मतभेद के निमित्त

00:05:43:03 चर्चा तो यदि कोई और रामपाल के मत को डिफेंड करना चाहता हो या रामपाल के पक्ष को बताना चाहता हो तो वह आ सकता है ऊपर और रामपाल के पक्ष को रख सकता है अभी हम लोग वैसे गए थे स्कंद पुराण लेने जो 12 खंडों में आता है स्कंद पुराण इस पर बहुत जल्द हम लोग कुछ रिसर्च लाने वाले आपके सामने स्कंद पुराण हम पढ़ते थे तो यह संस्कृत हिंदी वाला नहीं मिल पाता था हां ऐसा ही लगता है कमेंट वीर है

00:06:33:00 केवल टी आर पहाड़ी जी कमेंट वर बनके रह गए वहां पर अपनी बात को रटते रहेंगे मगर ऊपर आने का इसमें सामने आकर के बात करने का साहस नहीं है आप अध्ययन के लिए अगर फॉर्म भरा था तो आपसे जल्दी संपर्क किया जाएगा तो हमारे पास जो था वह छिन्न भिन्न हो गया था स्कंद पुराण तो काफी दिन से थोड़ी समस्या आ रही थी तो हम लोग यह संकलन बना ही रहे हैं ग्रंथा का एक परिपूर्ण रूप से बनाने का प्रयास है कि यथा समर्थ ज्यादा से ज्यादा हमारे पास शास्त्र उपलब्ध हो

00:07:31:14 लिंक दे दीजिए निशा पूरा जी हैं मैं हूं संत रामपाल महाराज जी की भगत आप आकर बात कर सकते हैं बंदी सोड़ तब तक हम लोग कुछ और बातें कर लेते जब तक कोई नहीं आ रहा है कोई आया क्या राजा राय जी राधे राधे हमारे एक जानने वाले हैं जो रामपाल जी के शिष्य है मतलब वो उन्होंने आपसे कुछ कहने के लिए संदेश भेजा है कह दू बताइए वो कह रहे हैं कि जब से आपका वीडियो देखा है तब से मन बहुत दुखी रहता है कारण यह है कि आप जो कह रहे हैं वह बात भी समझ में आ रही है और उनकी बात भी सुन रहे तो कुछ कुछ समझ में आ ही रही है अब हमें समझ में नहीं आ रहा कि हम इधर जाए कि उधर जाए में कहावत सुनी थी की धोबी का स्वान ना घर का ना घाट का इसी व पू में जीवन व्यतीत हो रहा है मैंने कहा जीवन व वत करने क्या जरूरत है जिस पक्ष में मति स्थिर हो उस पक्ष में आ जाओ तो ये उनसे आपकी शिकायत है कि अगर आप नहीं आते तो हमारे दिमाग में इतना भ्रम कोई नहीं डालता कि हम गलत जा

00:08:46:14 रहे हैं उनके लिए कुछ कहना चाह रहे हैं तो कह दीजिए देख मैं आपकी स्थिति जो है वो मैं समझ रहा हूं भाई साहब ये स्थिति ऐसी है कि जैसे किसी स्त्री का विवाह हुआ संपन्न हुआ या फिर किसी पुरुष का विवाह संपन्न हुआ और विवाह होने के पश्चात कुछ दिनों बाद या फिर कुछ समय के बाद उनको यह पता चलता है ज्ञात होता है कि जिनसे उनका विवाह हुआ है वह त्रिया चरित्र है तो ऐसे में दो प्रकार के लोग होते हैं पहले होते वो जो लोक लाज इत्यादि का डर होता है कि मैं ही तो इसको इनको लेकर के साथ में गया था समाज के सामने प्रस्तुत किया था अपनी पत्नी के रूप में या मैं ही तो गई थी मैंने समाज के सामने इनको प्रस्तुत किया था अपने पति के रूप में और इतने साल हो गए यहां यहां पर लोग हमें जानते हैं साथ में अब मैं किस मुंह से उनसे कहूंगा कि इन्होंने ऐसी ऐसी चीजें कर दी हैं अब मैं कैसे समाज को समाज मैं यह जाकर कहूंगा कि नहीं जिनकी मैं अभी

00:10:01:14 अभी तक जिनकी मैं प्रशंसा करता था वह प्रशंसा के योग्य नहीं है तो वहां वास्तव वास्तविकता में मैं झूठा उनके सामने ठहर तो दो प्रकार के लोग होते हैं कुछ होते हैं जो इस स्थिति का सामना करने से बचने के लिए उसी द्वंद में जीते रहते हैं उनको बिल्कुल पता चल गया कि यह त्रिया चरित्र है मगर उसके बाद भी वो वहां पर एक ठोस कदम उठाने से डरते हैं और दूसरे होते हैं सिद्धांत वादी जिनके पास सिद्धांत होते हैं उनको निर्णय लेने में ज्यादा परेशानी नहीं आती है यह तो यह या यह तो ये इधर या उधर बीच के से नहीं हो सिद्धांत वादी जो होते हैं वो निर्णय लेते हैं कि जैसे एक बात आती है ना कि संबंधों का त्याग भले ही करना पड़े मगर सिद्धांत का त्याग ना किया जाए है ना तो बस इसमें से आप कौन हो इन दोनों में

00:11:08:00 से और शिवांश भैया ऐसे बहुत से उदाहरण दे गए हैं फन आ रहा है मिट वास ऐसे बहुत सारे उदाहरण है जिन लोगों ने पहले जिज्ञासा पूर्वक संतो के पास गए और जब उनकी मान्यताएं खंडित हो गई तो फिर उन्होंने उस पक्ष को स्वीकार कर लिया हम लोगों को भी ईमानदारी पूर्वक अन्वेषण करने के बाद जो शास्त्र सत बातें हो चीज हो उनको स्वीकार कर लेना चाहिए

00:12:25:12 हां आ गए हैं वो जिनसे आज थ वो आ गए आने वाले अच्छा हुआ कि मैंने डू नॉट डिस्टर्ब नहीं ऑन किया था फोन में नहीं तो मुझे कॉल करते र जाते तो मैं यही कह रहा था कि आपको यह चुनना होगा निर्णय कई बार ऐसा होता है जीवन में ऐसी परिस्थितियां आती है जब दो गलत कार्य में से हमें कम गलत को चुनना होता है और कभी कभी ऐसी भी स्थिति आती है जब दो सही रास्तों में से हमें बेहतर रास्ते को चु होता है आवाज अटक रही

00:13:07:24 है वाईफाई तो ऑन है भैया जैसे मैंने इतिहास सुना है कि मंडन मिश्र बहुत बड़े मीमांसा थे पूर्व मीमांसा लेकिन जब उन्होंने शंकराचार्य महा भाग से बात की तो फिर वो वेदांती हो गए थे अपने पक्ष को स्वीकार कर लिया था उन्होंने जी ऐसे ही मैंने एक और सुना है सुना क्या जानता हूं पंडित भीम सेन शर्मा थे इटावा वाले व पंडित शी दयानंद सरस्वती जी के प्रधान शिष्य थे और वह सनातन धर्म का खंडन करते थे आर्य सिद्धांत अखबार चलाकर बाद में उन्होंने आ समाज को छोड़कर और सनातन धर्म में आ गए और उन्होंने ब्राह्मण सर्व जो उस समय का प्रचलित हिंदू धर्म का पत्रिका था उसका संपादन करने लगे और दयानंद स के ध में आ गए थेसे बहुत उ शर्मा

00:14:00:26 उ दयानंद सौती के शिष्य थे देखिए मैंने ज्यादातर यह देखा है कि वाप आने अभी मेरी वीडियो अटक रही है क्या मैं फिर से आता हूं फिर ओम प्रकाश जी आप आ जाइए अभी ठीक आ रही है आवाज हा हा सब अब ठीक आ रही है ना

00:15:16:22 तो उनको हमारा यही संदेश दीजिएगा कि वह निर्णय ले कुंभकरण जो थे एक तरफ समष्टि का दायित्व था कि किसी अत्याचार हो रहा है उसको रोके उससे लड़े अत्याचारी से और एक तरफ व्यक्तिगत धर्म था कि हमारे भाई के प्रति हम जो है विरुद्ध ना जाए भाई से तो उन्होंने वहा पर समष्टि की वजह व्यक्तिगत को चुन लिया संबंध की रक्षा के लिए सिद्धांत का त्याग कर दिया और वहीं पर प्रहलाद जी थे एक तरफ सम का था कि नारायण संसार को दे कि ना दे भक्ति करें कि ना करें आदर्श बने कि ना बने है ना और दूसरी तरफ पिता का धर्म था पिता की बात ने के ना माने तो उन्होंने क्या किया व्यक्तिगत धर्म को पीछे कर दिया समष्टि का धर्म को अपना लिया तो सिद्धांत का त्याग नहीं किया संबंध का त्याग कर दिया अब इनमें से जो भाई साहब है जो जिन्होंने आपको संदेश भेजा है उनको आप कहिए कि

00:16:31:28 अब इसमें से आप देख लीजिए कि आपको आप कुंभकरण हो या प्रहलाद आप तय करिए जी ओम प्रकाश जी आपका स्वागत है जय श्री राम जय श्री राम गु तो आपका परिचय बता दीजिए कौन है कहां से आए हैं किसको मानते हैं मेरा नाम ओम प्रकाश कुमार है मेरा मेरा घर झारखंड पड़ता है कहां पे झारखंड झारखंड

00:17:09:15 [संगीत] ला अच्छा ठीक है तो आप आपका घर झारखंड पड़ता है वह तो हम समझ रहे हैं आपका जो आध्यात्मिक बैकग्राउंड बताइए वह क्या है मैं अभी किसी को नहीं मान रहा हूं आपने बोला ना मैं रामपाल जी को मान गुरु है वो मेरे मैं उसके तरफ से आपसे बात करना चाहता हूं नहीं नहीं आपने मुझको बोला ना तभी तो हुआ था हा रामपाल जी को गुरु मानते हैं ना हा मानते हैं तो ऐसे बोलो ना खुल के डर है क्या उनको गुरु बताने में रने का बात नहीं है डरने का बा नहीं आपने कहा ना मैं अभी किसी

00:18:24:18 को नहीं मानता हूं आप कह रहे हो गुरु है वो मेरे नहीं अभी मैं उसे दीक्षा नहीं लिया इसके लिए गुरु भाव है गुरु भाव है लेकिन अभी लिया नहीं है उससे नहीं तो दीक्षा नहीं लिए गुरु भाव तो है ना गुरु मानते हो ना तो यह कहने में डर क्यों लग रहा है ठीक हा तो गुरुजी मेरा एक प्रश्न है प्रश्न बात यह है कि काउंटर हमने किया है कि में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है कबीर को आप भगवान मानते हैं या नहीं मानते यह बताइए हा वेद के हिसाब से मानते हैं वेद के हिसाब से मानते हैं वेद में कहां लिखा है कबीर भगवान है लिखा है अरे कहां लिखा है में लिखा है वो तो मालूम नहीं है लेकिन उसका जो य में वीडियो देखते हैं तोव हमको मतलब प्रमाण दिखा देता है तो हम समझ लेते खा है तो आपको मैं अगर प्रमाण दिखा दूंगा तो आज आप बदल जाओगे कबीर को भगवान मानना बंद कर दोगे अगर आप प्रमाण दिखा दे वेद में या गीता में किसी और से नहीं गुरुजी

00:19:40:08 वेद पुराण गीता इस चीज में अगर क लिखा है तो हम मान सकते तो आपने हमारे वीडियोस नहीं देखे क्या और कितने वीडियोस देखे आपने हमारे तो मैं तो आज पहली बार आपका वीडियो देखा तो उसम आपने गलती कर दी आपको देखना चाहिए था हमने भर भर के प्रमाण बताए ठीक है पन्नों 50 6 पन्नों की हमने किताब रिलीज कर रखी है उसको पढ़ लीजिए भरभर के प्रमाण है अगर आप वेद गीता और पुराण से अगर हमको सिद्ध कर देंगे कि भगवान कौन है उसका नाम क्या है और कहां रहता है तो हम सर आपको मानने के लिए तयार है अरे भाई तो मैं कह तो रहा हूं हमने अपने वीडियो में किया है जाके वीडियो देखना चाहिए था बिना उसको देखे हुए आ गए अब ये बताओ आपने हमारे वीडियो नहीं देखे रामपाल के देखे हैं हा रामपाल के देखे हैं तो रामपाल के अनुसार कबीर भगवान है हां ठीक है तो कबीर कहां रहते हैं कभीर सतलोक में रहते हैं सतलोक के क्या कबीर को आप इस संसार का पूरा संसार को बनाने वाला मानते हैं हां मानते हैं संसार की एक एक

00:20:55:08 चीज उसी ने बनाई है मानते हैं हां हर एक चीज बनाई है कबीर साकार है ये मानते हैं हां साकार है जहां पर कबीर बैठे हैं वो जगह किसने बनाई सतलोक वो खुद ही वो खुद ही बनाए हैं ये यह मान लीजिए ये कबीर साहब का शरीर है यह शरीर है इसका मतलब इसके बाहर कोई जगह है तभी तो ये शरीर है यह जगह कैसे बन गई किसने बनाई नहीं गुरुजी मेरा वो प्रश्न नहीं है मैं बोल रहा हूं कबीर जी ही एक पहली है परमेश्वर कबीर जहां पर बैठे हैं सतलोक वो सतलोक किसने बनाया बुद वही बनाया है ना तो सतलोक पहले उनके अंदर था नहीं नहीं वो एक अविनाशी है व अ है मैं कह रहा कबीर के शरीर में था फिर शरीर से बाहर निकाला क्या नहीं वो प्रश्न नहीं है

00:22:07:13 गुज बोलिए बोलिए आपके पीछे शोर हो रहा है क्या हा तो आप वहां से दूर हट अभी भी वीडियो रुक रहा है क्या [संगीत] कोई और आ जाए भाई आप कहीं और बैठ कर के बात करिए फिर आइए आपके पीछे बहुत शोर हो रहा है

00:22:59:00 जय श्री राम आपका परिचय मेरा नाम अंचित है बिहार से बोलिए वेद लेना था वेद चलिए आध्यात्मिक बैकग्राउंड क्या है आपका अरे मत आया करो भाई थोड़ा बहुत थोड़ा देख के तो आया करो किस स्तर की बातें हो रही है क्या हो रहा है यह तो देखना पड़ेगा हर कोई व्यक्ति आ जा रहा है

00:23:34:22 बोलिए ओम प्रकाश जी आप किसी सही जगह बैठ कर के बात करिए जहां शोर ना हो रहा हो आपकी आवाज नहीं सुनाई दे रही ओम प्रकाश जी किसी सही जगह बैठ के बात करिए एक बार ले लेते ऊपर बोलिए हा बोलिए आप आप सही जगह बैठ के बात करिए तने शोरगुल के बीच में बात मत करिए गुरुजी मेरा एक प्रश्न है आपसे प्रश् बात हो ही थी अभी बात य हो रही थी कि जहा पर कबीर बैठे हैं वह जगह किसने बनाई वो जगह खुद कबीर जी बनाए हैं खुद कबीर बनाए मतलब कबीर कबीर जहां पर खड़े हैं उनके बाहर पहले जगह है कि नहीं है जहां वो खड़े हैं जगह पहले से है ना तभी तो वो शरीर

00:24:44:12 है वो तो बात सही है अरे भाई अगर ये अगर यह बुक है अगर ये बुक है तो यह बुक बुक के शेप में तब है जब इसके बाहर जगह है अगर इसके बाहर जगह नहीं है तो य बुक अपने शेप में कैसे है ठीक है गुरुजी आपका बात तो कबीर जहां पर बैठे हैं कबीर जहां पर बैठे हैं वोह जगह किसने बनाई पता नहीं किसने बनाया पता नहीं पता नहीं तो इसका अर्थ है कि आपको नहीं पता कबीर भगवान है कि नहीं ठीक है मेरे को मालूम नहीं है कबीर भगवान है नहीं है लेकिन र भगवान है कौन उसका नाम क्या है अगर वो भगवान नहीं है तो कौन भगवान है बमा विष्णु महेश भगवती और गणेश भगवान तो एक ही होता है गुरुजी इ भगवान एक भगवान भगवान एक ही है पांच रूपों में प्रकट होता है जैसे एक बच्चे के पिता होते हैं वह जब उसके साथ खेल रहे होते हैं तो एक अलग रूप होता है व जब ऑफिस जाते हैं तो एक अलग रूप होता है व जब दोस्तों के साथ जाते हैं तो अलग रूप होता है वो कहीं पर लड़ाई करते हैं तो अलग रूप होता है ठीक है आप हमको

00:25:59:10 प्रमाण प्रमाण हम बहुत सारे दिखा चुके हैं फिलहाल मैं आपको अभी लाइव में मैं आपको शिव पुराण से प्रमाण दिखा देता हूं ठीक है दिखा दू हां दिखा दीजिए गुरुजी बिल्कुल ठीक है भैया तो क्या शिव पुराण से प्रमाण देखने के बाद फिर बोलना बंद कर दोगे ना वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है शिव पुराण में दिखाइए दुर्गा में दिखाइए वेद में दिखाइए यार तुम बात कैसे कर रहे हो कैसे बात कर रहे हो तुम हो क्या ठीक है आप शिव पुराण शिव पुराण में दिखाइए मैंने जो पूछा उसका उत्तर दिया क्या आपने ठीक है ठीक है गुरुजी आप दिखाइए मेरे को शि नहीं मैं पूछ रहा हूं अगर मैं दिखा दूंगा उसके बाद क्या करोगे क्या करेंगे फिर मानेंगे उसे तो यह बोलोगे वेदों में प्रमाण है जी भगवान है ठीक है ठीक है पुराना दिखाइए

00:27:09:06 [संगीत] हमको पहले एक बार आप गीता को पवित्र मानते हो ना भगवत गीता को अरे लो ना उहे ऊपर भाई कहां चले गए वेदों में प्रमाण नहीं है कबीर साहब भगवान नहीं है भूल जाइए आपको बहका या गया है

00:28:16:04 य कहां चले गए आ [संगीत]

00:28:55:22 गए शिवपुराण विदेश्वर समता अध्याय 18 इस चक्रवत भ्रमण की निवृत्ति के लिए चक्र करता का स्तवन एवं आराधन करना चाहिए प्रकृति आदि जो आठ पाश बतलाए गए हैं उनका समुदाय ही महाचक्र है जो प्रकृति से परे हैं वे परमात्मा शिव है भगवान महेश्वर ही प्रकृति आदि महाचक्र के कर्ता है क वे प्रकृति से परे हैं हो

00:29:36:25 गए शिव परिपूर्ण है भगवान शिव के उद्देश्य से उनकी पूजा करनी चाहिए मैं भी क्या मगज मार रहा हूं कोई सुन नहीं रहा है और सुनेंगे भी तो उनको कुछ समझना है नहीं 75 कहां चले गए वो है नहीं

00:30:20:22 क्या चले ग सब्जी काटते काटते बात कर रहे थे आपसे अपना ना लीजिएगा बहुत मूर्खता हो गई धर्मेंद्र साक जी आपका परिचय जय श्री राम मैं सं संत रामपाल जी दास जी का शिष्य हूं और आपसे एक सवाल करना चाहता हूं आप पहले बताइए कबीर को भगवान मानते हैं या नहीं मानते हैं मानता हूं बिल्कुल कबीर देव तो भगवान है उसका प्रमाण भी है कहां पर प्रमाण है अथर कांड चार अनुवा एक म साथ में कबीर देव लिखा है कबीर देव लिखा है कि कबीर देव लिखा है कबीर देव लिखा है कबीर देवों से हम कवि साहिब कहते हैं साहिब मतलब होता है परमात्मा मैं आपसे जो जो पूछ रहा हूं वो बताई जाइए प्लीज तो कबीर से आप कबीर किस आधार पर कहते हैं क्या आधार है कबीर इस आधार से कहते हैं क्योंकि कुरान में भी कभीर लिखा है वेदों में कभीर लिखा है बाइबल में कभी लिखा गु ये कह रहे हो आपका कहना ये है कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है तो हमें वेदों से प्रमाण दो कुरान

00:31:35:26 कहां से आ गई वेदों से बताओ चना पड़गा क्या वेद में ऐसा लिखा है कि कुरान के द्वारा भी हम नियम मानते हैं कहीं लिखा है वेद में ऐसा नहीं लिखा लेकिन सबको साथ लेकर तो चलना होगा ना तो ये मन का है ना वेद का नहीं है ना मैं मान लूंगा आपकी बात आप अच्छी बातें कर रहे हैं मगर पहले बताओ य तो मन की बात है वेद की बात तो नहीं है ना वेद तो क पूछ रहा देखिए देखिए मैं पूछ रहा हूं देखिए हम लोग बहुत सारी बातें कर सकते हैं अगर आप सही से कट टू कट जवाब देंगे तो हम लोग बहुत सारी बातें करेंगे आपके भी प्रश्न ले लेंगे मगर आप सही से जवाब दीजिए जवाब से भागि मत वेद में क्या कुरा वेद मैं पूछ रहा हूं वेद में कुरान को मानने के लिए कहा गया है क्या ऐसा कहीं नहीं कहा लेकिन मैं आपसे एक सवाल करना चाहता हूं मेरा सवाल सुन लीजिए आप पुरान में वेद को मानने के लिए कहा गया है क्या नहीं नहीं कहा मेरी बात सुन लीजिए आप अरे मैं सुनूंगा एकएक करके सुनूंगा यानी कि ये आपके मन की बात है वेद की चीज आधी वेद की चीज आधी कुरान

00:32:50:28 की चीज और जोड़ के अपना इसकी ईट उसका रोड़ ये आपके मन की बात है ये अ एक सवाल सुन लीजिए आप भाई साहब पहले इसको डिक्लेयर करिए य आपके मन की बात है कि नहीं है हां मेरी मन की बात है अब मेरी मेरा सवाल सुली यानी कि आप जो भक्ति कर रहे हैं वह शास्त्रो चित भक्ति नहीं है मन की भक्ति है मन मुखी भक्ति है नहीं नहीं बिल्कुल नहीं है मन की भक्ति अभी आपने कहा मन की बात है हां तो मेरा सवाल तो सुन लीजिए आप मैं सवाल सुनूंगा पहले मन की बात को क्लियर करो मन की मन की बात नहीं है देखो अभी आपने कहा मन की बात है नहीं नहीं पहले बताओ कहा कि नहीं कहा पहले तो ये क्लियर

00:33:37:22 करो मेरी बात तो सुनो आप मन की बात नहीं ऐसे नहीं होगी ना बात आप पहले सच्चाई पर आइए मन की बात कहा कि नहीं कहा देखो रि ओ सॉरी मैं पूछ रहा हूं आपने कहा कि य मेरे मन की बात है यह कहा कि नहीं कहा हां कहा था कहा तो यानी कि कहा यानी कि शास्त्र में जो चीज नहीं है आपने अपने मन से मानी हुई है बोलिए मेरी बात तो सुनिए आप सुत अभी सुनूंगा जब आप अपनी बातें क्लियर करेंगे मैं आपकी बातें सुनूंगा मुझे पता है आपके अंदर कुछ है जो आप निकालना चाहते हो उसी कमजोरी का मैं फायदा उठाऊंगा और आपसे सच बा बलवा पहले पहले

00:34:30:03 सच बोलिए भाई साहब आपकी भक्ति साथ सत नहीं है उसमें आपका मन मिला हुआ है मनमुक भक्ति है नहीं नहीं बिल्कुल नहीं है मनमुक वेदों में कबीर देव लिखा है उसी को अब जा सकते हैं भाई साहब अब आप जा सकते हैं या तो देखिए बात होगी तो या तो क्लियर कट करो बात होगी तो आप बात होगी तो क्लियर सच्चाई की राह प चलिए यहां पे झूठा खोखला मत वो मत करिए सिद्ध सच्चाई पर खड़े रहिए आपने कहा कि ये मेरे मन की बात है यानी कि आपकी शास्त्र सम्मत भक्ति नहीं है आप मेरी बात सुनोगे अब नहीं पहले इसको क्लियर करो ना

00:35:15:18 भाई देखो अब मैं आपको बता देना चाहता हूं कि कभी देखो नहीं पहले मुझे बताओ शास्त्र सम्मत भक्ति है आपकी बिल्कुल है तो शास्त्र में लिखा है क्या कुरान को मानो कुरान में लिखा है क्या वेद को मानो और कुरान लिखा भी में कोई मतलब नहीं है वेद में लिखा क्या वेदों में लिखा है कबीर देवो अरे वेद में लिखा है कुरान को मानो कुरान के आधार पर कबीर मान लो कवि को देखो वेदों में भी लिखा है कुरान में लिखा है बाइबल में लिखा है गुरु बो प्रश्न बोलो अपना हां मैं मैं बोल रहा हूं गीता अध्याय आ का श्लोक 13 में खा है ओम अक्षम ब्रह्म व्यव माम अनुसरण प्र परमा गति यानी ब्रह्म की साधना का एक ओम मंत्र है गीता अध्याय आ के शलोक 13 में लिखा है ही प्रश् बोलो प्रश्न प्रवचन मत दो प्रश्न क्या है प्रश्न जी है मेरा कि ब्रह्म लोक तक सारे लोग नाशवान है हम किसकी भक्ति करें सारे लोग नाशवान नहीं है भगवान श्री

00:36:31:25 कृष् ठीक है मैं बता देता हूं आपको गीता 16 में मैं बता रहा हूं अब सुनो किसकी भक्ति करें सुन लो हा बताइए भगवान स्वयं बोल रहे हैं आप ब्रम बोना लोका पुनरा माम कोते पुनर्जन्म मेरा धाम नाश नहीं होता तते सूर्य को पावक य गवा धाम पर व सूर चंद्रमा आदि के प्रकाश की जरूरत नहीं होती व स्वयं प्रकाशित है और आपके देवी भागवत में भी न स्क के पहले अध्याय में भगवान के धाम के बारे में बताया गया गोलोक धाम जो नित्य है कभी नाश नहीं होता मेरी बात सुनियो ऋगवेद में लिखा है परमात्मा साकार है आप उसको निराकार बोलते हो कैसे हो सकता है सुनो भाई साहब एक एक करके बात करो एक एक करके बात करो अभी करेंगे ठीक है अभी करेंगे बता रहे हैं

00:37:47:16 आपको सुनिए [संगीत] 121 [संगीत] शिव

00:39:16:22 पुराण पहला अध्याय अ उसका पांचवा अध्याय और 3 वा

⬜ Not used yet · 00:39:38:27 – 00:48:51:09 (9:12)

00:39:38:27 है बताइए क्या करें इसका बोलिए बोलिए मैंने आपसे गीता अध्याय आ के लोक नंबर 16 में लिखा है कि ब्र सारे लोग नाशवान है किसकी पूजा करें किस लोक में जाएंगे मैंने आपको बता दिया ना शिव पुराण में लिखा है शिव की पूजा करना मोक्ष दायक है क्या वहा लिखा है कि शिव की पूजा करना मोक्ष दायक नहीं है तो दिखाओ गीता में ना मोय नहीं है य लिखा है क्या वहा प मैं बता रहा हूं ना सुनो तो गीता में लिखा है जो देवता को पूछते वो देवताओ को प्राप्त होते हैं जो सचिदानंद घन ब्रम को पूछता है व उसको प्राप्त होता है तो शिवजी सचिदानंद घन ब्रम एक मिनट शिवजी सच्चिदानंद घन ब्रह्म है ये दिखा दूं आपको दिखा दीजिए दिखा दू ये दिखा दू अच्छा सच्चिदानंद घन ब्रह्म को परमात्मा परमेश्वर परम ब्रह्म कहते हैं क्या पूर्ण ब्रम है वो तो पर ब्रम से ही परे है पूर्ण ब्रम पूर्ण ब्रह्म कहते हैं

00:40:54:02 क्या परम नहीं कहते परम नहीं कते कहते चलो दिखाता शवा भया तो बमा जीने भाग भाग परमानंद ब

00:41:28:01 [संगीत] भागवत मेंही परमात्मा हैव महापुराण पहला खंड पांचवा अध्याय बावा श्लोक बताइए शिव ही परमात्मा है और क्या करें बताइए शिवांश जी आपसे एक बात कहना चाहता हूं कि परमात्मा का शरीर तो 2 तत्व का नहीं है एक तत्व का है उनका शरीर तो शिव जी का शरीर 25 तत्व का है मैंने आपसे कहा आप इसको मानते हैं कि नहीं शिव पुराण को लिखा है यह बताइए पहले बाद में बात करेंगे इसको मानते हैं कि नहीं मानते खा है वो परमात्मा है तो ये गलत लिखा है गलत नहीं लिखा मैं गलत नहीं क रहा मेरी बात समझिए आप शिवजी का शरीर 25 25 तत्व का है शिवजी का शरीर चलो ठीक है आपने ये बताइए आपका जो परमात्मा है कबीर वो कितने तत्वों से बना है उसका एक तत्व से शरीर बना हो नूर तत्व से उसका 25 तत्व का शरीर नहीं है शिवजी का 25 तत्व का शरीर है ठीक है अब ये बताइए क्या वो सर्वशक्तिमान

00:42:44:02 है शिवजी शिव जी होही नहीं सकते सचिदानंद सर्वशक्तिमान है क भैया राजा भैया आप एक बार वापस आ जाओ कबीर देव जी कुछ भी कर सकते हैं कुछ भी कुछ भी कर सकते हैं ठीक है उनका शरीर नाशवान तो नहीं है नहीं उनका शरीर भी अविनाशी है और उनका लोक है ना सतलोक वो भी अविनाशी है सनातन परमधाम है वो हमेशा था है और रहेगा ठीक है ठीक है अब मैं ये पूछ रहा हूं कि उनका शरीर सनातन है ना शाश्वत है

00:43:33:14 ना तो क्या वो हाथी बन सकते हैं क्या वो कुछ भी कर सकते कुछ भी मैं पूछ रहा हूं हाथी बन सकते हैं क्या बन सकते हैं हाथी तो फिर उनका शरीर सनातन कहां से रहा बदल गया शरीर बदल जाएगा लेकिन सनातन नहीं है ना वो कुछ भी कर सकते हैं सनातन का मतलब क्या है हमेशा रहने वाला उस हा सनातन का अर्थ होता है जिसका ना आदि है ना अंत हमेशा रहने वाला सनातन का मतलब यह भी होता है जिसमें परिवर्तन नहीं आता है

00:44:19:07 परिवर्तन परमात्मा तो वैसे कुछ भी कर सकते हैं ना अरे जब वो कुछ भी कर सकते भा कुछ भी अगर कर सकते हैं तो व अपने शरीर को बदल सकते हैं क्या शरीर को बिल्कुल बदल सकते हैं तो फिर उनका शरीर शाश्वत नहीं रहा बदल सकते तो या तो उनका शरीर शत आप एक बार जाके वापस आकी आवा डबल डबल आ रही है दीवारों से बना है

00:44:58:15 50 50 प्राइवेट चैट चल रही है पहले य लो प्रमाण मा प्रमा प्रमाण लाने जब आप जाते हो फिर बात चेंज कर देते

00:45:34:06 हैं सारे प्रमाण है हमारे पास अगर तुम कह रहे हो पूर्ण ब्रह्म तो पूर्ण ब्रम भी है भागवत में ब्रह्मा जी से कह रहे ना अहो भाग्य महो भाग्य नंद गोप प्र कम जन मित्रम परमानंद पूर्ण ब्रह्म सनातन बात इसकी नहीं है प्रमाणों की बात नहीं है जब प्रमाण हम दिखाएंगे तो इनको मानना नहीं इंटरप्रिटेशन अपनी लगानी है बात इसकी है रत बात बदल देते है इसीलिए मैं कहता हूं कि प्रमाणों पर बात करना बेकार है इसीलिए मैं कहता हू अपने आग कहां चले [संगीत]

00:46:17:01 गए आप भी थोड़ा पीछे का ध्यान रखिए अरे भैया आओ कोई वेदों में प्रमाण कबीर भगवान दिखाओ चले गए मुझे लग रहा है वो सोच रहे होंगे कि अगर शरीर शाश्वत है तो फिर कैसे सर्वशक्तिमान सिद्ध करें या तो यह मान ले कि शाश्वत नहीं है वैसे मैं बता दूं आपको जो भी जिस भगवान से संबंध पुराण है उसमें सबसे पहले उन्हीं का महिमा महिमा मंडन होता वैसे आगे जगह जगह पर और भी होता है मगर सबसे पहले उन्हीं का महिमा मंडन होता है जैसे वि विद्वेष जो समता है उसमें भगवान महेश्वर की स्तुति की है भगवान शिव की उसमें आप देख सकते हैं उनकी परब्रह्म 75 नंबर पेज पर है

00:47:56:16 ये इसमें कह रहे हैं कि जो मेरे शिवलिंग का निष्कपट भाव से यथोचित पूजन करेगा छोटू दास भाई चेहरा दिखाए जो भी आ रहे हैं जो भी निष्कपट भाव से मेरे शिवलिंग का पूजन करेगा उसके फल का मैं वर्णन कर रहा हूं फिर इस प्रकार से य पर वर्णन होते हुए आगे भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति का दिलवाने वाला बताया है

00:48:30:18 मैं ही परम ब्रह्म हूं यह डायलॉग आ गया कई बार लोग कहते हैं कि शिव जी ने कहीं पर कहा नहीं हजारों जगह कहा होगा भाई ये शिव जी कह रहे हैं देखिए कहां पर शिव पुराण में मैं ही परम ब्रह्म हूं कल यानी सगुण और अकल यानी निर्गुण

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→ Used in: A · Live क्या रामपाल का ज्ञान शास्त्र सम्मत है #rampaljimaharaj #कबीर at 50:40 ↗

00:48:51:09 ये दोनों मेरे ही स्वरूप हैं मेरा स्वरूप ब्रह्म रूप होने के कारण मैं ईश्वर भी हूं जीवों पर अनुग्रह आदि करना मेरा कार्य है ब्रह्मा और केशव सबसे बृहत और जगत की वृद्धि करने के करने वाला होने के कारण मैं ब्रह्म

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00:49:07:10 हूं सर्वत्र समरूप में स्थित और व्यापक होने से ही मैं ही सबकी सबका आत्मा हूं मेरे अतिरिक्त दूसरे के किसी के नहीं है जो जगत संबंधी पांच कृत है वो मेरे ही हैं मेरे अतिरिक्त किसी दूसरे के नहीं है जिग्नेश जी आप चेहरा दिखाएंगे तो हम आपको ऊपर ले ले जय श्री राम जय श्री राम जी बताइए गीता में सर्व धर्मा हा माम शरणम बज आप किसकी ओर से है पहले बताइए अपना परिचय बताइए मैं नागर ब्राह्मण हूं अच्छा तो यहां किसका पक्ष प्रस्तुत करने आए आप मैं सनातन धर्म का पक्ष सनातन धर्म

00:50:05:16 का बताइए गीता में साफ लिखा है कृष्ण भगवान ने सर्व धर्मा पर वो नहीं मानते भाई साहब ये सब चीज कहां है आप वो अलग से उनको ट्रेनिंग दी जाती है अलग हा वो ब्रेन वको कुछ उनको कुछ भी में नहीं आता उनको जो रटा दिया गया बस वही पता है जब वेद की बात करेंगे तो वेद के सपोर्ट में कुराण आ जाएगा जब पुराण का प्रमाण दिखा देंगे तो उनके 25 तत्व आ जाएंगे जब 25 तत्वों की बात करने लगेंगे तो उनका ईश्वर सर्व शक्तिमान शाश्वत भी है और जो है वो अपने आप को बदल भी सकता है अगर उनका इतना बड़ा शरीर है मान लो ठीक हैने कहा क्या वो चूहा बन सकता है इतना बड़ा तो जब चूहा बना वो तो कम हुआ ना बाकी का हिस्सा जो था वो गायब हुआ ना जब वो तभी तो चूहे बने तो नाश हुआ उसके बाकी के हिस्से का उसके बाकी के हिस्से का नाश हो गया ना जब वो चूहा बना जी जी वो कम करना पड़ा ना तो जिसमें चेंजेज आते हैं उसको सनातन नहीं कहते नहीं कहते सनातन वो जो नित स्थाई है तो इनका कबीर जो है वो नित

00:51:20:22 स्थाई नहीं है भाग गए वो यही ढूंढ रहे होंगे वहां पर कबीर स मान कैसे है इसीलिए नहीं आ रहे इसीलिए इसीलिए मैं तर्क पर ही बात करता हूं जितने लोग आते हैं उन पर तर्क पर मैं बात करता हूं इसीलिए प्रमाणों का कोई वैल्यू नहीं है इसकन के सामने प्रमाण आप रखोगे वो तुरंत किसकी इंटरप्रिटेशन है अरे भाई जब इंटरप्रिटेशन वाली बात है तो प्रमाण मांग के फायदा क्या है नहीं जो सही ज्ञान दिया प्रेमानंद जी ने कि आप प्रेमानंद जी को जो नहीं मानता होगा वो उनको नहीं मानेगा प्रॉब्लम य कुरान की तो बात नहीं आती फिर भी कुछ प्रमाण ऐसे होते हैं जो अकाट्य होते हैं उनको नहीं काट पाता आदमी जी जी भाई इन्होंने शिव पुराण में वेदों में जगह जगह भर भर के ब्रह्मा विष्णु महेश को परब्रह्म कहा गया सर्वशक्तिमान कहा गया ईश्वर कहा गया सब कुछ कहा गया मगर यह यह नहीं बोलेंगे कि वेदों में प्रमाण है शिवजी भगवान है यह वहां पर जो कवि शब्द आ गया है और कवि से मिलता जुलता शब्द बन गया कबीर तो यह चिल्लाए कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है अरे शास्त्र को मानना ही नहीं है

00:52:35:25 शास्त्रों को सही तरीके से इंटरप्रिटेशन नहीं करना है उनको हां भाई जोगेंदर सिंह जी बताइए जय श्री राम जय श्री राम आपका परिचय मेरा नाम सिंह उनाला माच प्रदेश जी यह तो है ठीक है आध्यात्मिक बैकग्राउंड है वो भी बताए मैं भगवान राम को मानता हूं हेलो आने का कारण बता य जो रामपाल के भक्त आ रहे हैं ये कह रहे कि शिव जी की नहीं करना पूजा नहीं करनी ये अविनाशी नहीं है तो मैं इनसे पूछना चाहता हूं कि गुरु अपने गुरु मंत्र शिवजी की शिव जी का मंत्र जपते भक्ति करते शिवजी की विष्णु की भक्ति शिवजी अविनाशी है स्पष्ट रूप से लिखा है नहीं मैं मानता हूं पर ज मानते

00:53:46:14 कहते ये इनको देखिए ये पहले रामपाल जी को मानते थे ये इनका नाम जी है अब ये राधे राधे हा इनको जरा सामने लाइए बीच में सेंटर में जी बीच में बै करो रामपा जी को राधे राधे राधे राधे जय श्री राम जय श्री राम बताइए बताइए क्या बता रहे

00:54:21:21 थे पहले मैं भी अज्ञानता व बहुत मानता था रामपाल जी को है ना ज्ञान गंगा वगैरा काफी पुस्तक जो पूरा कचरा जो पढ़ के मैंने इकट किया था मगर प्रेमानंद महाराज जी के सानिध्य में आके वह सारा जो कचड़ा था वह हमारा एक तरफ हो गया है है अच्छा हा तो हम श्री महाराज जी के सा में चलते हैं तो ऐसे और आपका जो आवाहन करके जो य चैनल है उ युवाओं को काफी प्रेरणा मिल रही है है ना और आपकी य चैनल पर मैं काफी वीडियोस देखता हूं और जो राजा राय है वो मेरे मित्री है मगर जी जी आप एक धर्म के कार्य करने में बहुत आगे आके युवाओं को काफी प्रेरणा मिल रही है आपसे तो आपका शिवांश जी बहुत धन्यवाद करता हूं मैं और धर्म की रक्षा के लिए आप जो कार्य कर रहे हैं यह बहुत ही सब के लिए प्रेरणा लायक है तो मैं तो भगवान से यही प्रार्थना करूंगा कि आपको अधिक से अधिक बल और अधिक से अधिक ज्ञान प्रदान करें और ऐसे

00:55:36:27 ही आप धर्म की रक्षा सदैव करते रहे जैसे आप अभी भी कर रहे हैं राधे राधे चलिए आभार आपका राधे राधे जय श्री राम मैंने मिलवा दिया आपसे बोला था ना मिलवा दूंगा जी बहुत [संगीत] बढ़िया भाई कहीं गलत अगर फस गए हैं तो सही बात पता चलने पर आपको व बात मान लेनी चाहिए जी ढिल्लन जी आप कुछ कह रहे थे

00:56:11:27 बताइए जोगेंदर जी अन म्यूट हो जाइए पहले जी मैं ये बात कर रहा था अगर इनका कबीर परमात्मा हैय इनका रामपार परमात्मा से मिला हुआ है उनका उनके दर्शन किए खुद परमात्मा है तो ये शिव जी का मंत्र क्यों देते हैं अपने नाम में बोलते भक्ति करो ये तो वही बताएंगे मैंने खुद नाम लिया था इनका मु जबरदस्ती नाम दवाया गया था चलो हा मुझे जबरदस्ती लेके गए थे कि आप नाम लो ये हो जाएगा वो इकट्ठे होकर मेरे पास आए थे तो मुझे कह रहे थे आप नाम लो हो जाएगा ले ज शिवजी की कर रहे शिवजी के आपका चेहरा भी दिखे सामने रखिए मोबाइल को

00:57:10:04 जी एक जगह बैठ जाइए एक जगह बैठ जाइए ठीक य शिवजी का खंडन करते हैं कि उनकी पूजा नहीं करनी तो उनका मंत्र मंत्र मंत्र की करते उनके नाम की जी े बोलते हैं कि हम इस लोक में फसे हैं हमने इनका कर्ज उतारना है े जो श्रद होते हैं जो अपने पितरों का कर्ज उतारते हैं जो उनको मना करते हैं कि पित्र का शरा नहीं

00:57:47:13 करने नहीं वो सब बातें तो एक तरफ है इनका कहना है कि शास्त्रों में नहीं दिया गया कि शिव जी भगवान है अब हमने बता दिया कि मैं ही परम ब्रह्म हू तो अय भाग गए अब इनके पास नहीं है राघव जी बताइए जय श्री राम भैया जय श्री राम बोलिए भैया मैं आपकी मतलब विचारधारा से तो पूरी तरह सहमत उसम वो नहीं है मतभेद है बस एक क्वेश्चन है जो मेरे मन में आता है जो मेरे नास्तिक दोस्त भी कई बार पूछते हैं कि जैसे जब हम कहते हैं कि भगवान सब कुछ जानता है या ऑल नोइंग है या त्रि कालज्ञ मतलब क्रिएशन से लेकर डिस्ट्रक्शन तक तो उनको सब पता होगा उसके बारे में तो फिर भैया फिर हमारी तो फ्री ल एजिस्ट नहीं करती क्या नहीं करती मतलब फिर हमारे ऊपर मतलब जब भी हमारी मुक्ति होगी तो उनको पता ही होगा तो मतलब हम जो कर रहे हैं वो तो पहले से निर्धारित हो गया बात उसमें ऐसी है व्यवहार और परमार्थ का अंतर है यह जो भगवान सब कुछ जानते हैं सब कुछ भविष्य देख सकते हैं यह पार मार्थी दृष्टि से है आपके व्यवहार में नहीं है तो व्यवहार आपको

00:59:02:18 उस हिसाब से करना है जो आपको दिख रहा है और जो दिख रहा है वह यह है कि आपका भविष्य नहीं पता है उस हिसाब से आपको व्यवहार करना है ठीक है भगवान के कई लेवल्स है एक लेवल है जो बाहर बैठ कर के वीडियो गेम देख रहा है ठीक है और फिर आपकी ही एक जो चेतना है वो अंदर जुड़ी होती है जो वीडियो गेम में छटपटा रही होती है वीडियो गेम से बाहर निकलने के लिए स्टेजेस को पार करने के लिए मगर आप भगवान का ही एक रूप वो होता है जो आपको आपकी वो जो चेतना जो फसी हुई है उसकी मदद करना चाहता है सुपर पावर्स देकर के देते हैं ना ये कॉइन आ गया वो कॉइन आ गया तो भगवान के लेवल्स है हम लोग जो भक्ति कर रहे हैं ना भगवान के इस रूप की भक्ति की जाती है जो व्यवहारिक हो जाता है जो हमें कॉइन देना चाहता है बाकी उनका एक सर्वज्ञ रूप है फ्लैट है बिल्कुल कुछ नहीं मतलब जो आपका बाहर जो आपका स्वरूप है जो बाहर केवल दृष्टा बन के बैठा है जी जो आपसे प्रभावित भी नहीं हो रहा वो कुछ नहीं एक रस है वो उसको मालूम है कि मैं जब चाहूं तब इस वीडियो गेम का प्लग इन आउट कर सकता हूं मुझे कोई दिक्कत नहीं है ठीक है तो हम लोग जो व्यवहार करते हैं भगवान के इस रूप के प्रति

01:00:17:18 करते हैं जो हमारी मदद करने वाला रूप है भगवान वही वाली बात कि भगवान जैसे सर्वज्ञ है पानी के रूप में मगर हम हमारी प्यास पानी पानी का वो रूप भुजा पाता है जो हमारे व्यवहार में आ जाए जी पानी नमी के रूप में सब जगह है और दिखाई देने वाले रूप में भी नाली में मगर तब भी हम उससे पीते नहीं है ना पीते कौन सा है जो साफ सुथरा जल जो हमारे पैरामीटर के अकॉर्डिंग हो उस जल को हम पीते हैं इसी प्रकार से भगवान तो सर्वज्ञ है हर तरह से वही वो है कण कण में वही है मगर जो वेदों के द्वारा निर्धारित पैरामीटर है जो मोक्ष दायक बताया गया वेदों के द्वारा हम भगवान के उस रूप का भजन और अनुकरण अनुसरण करते जी जी एक और प्रश्न था बस एक छोटा सा प्रश्न था नहीं आप क्लासे जन करिए यहां पर हम लोग बात करते हैं आइजल डिस एग्रीमेंट होता है फिर भी आप बोल जैसे एक और प्रश्न आता है जैसे जब भगवान सब कुछ कर सकते हैं तो फिर एक कुछ नास्तिक ऐसे भी तर्क करते हैं कि क्या ऐसा समुद्र बना स जो सूखा हो या ऐसा कोई शादी शुदा आदमी पैदा कर सकते हैं जिसकी शादी ना हुई हो ऐसे जो लॉजिकली इंपॉसिबल चीज

01:01:32:28 है बात ये है कि जो लॉजिकली इंपॉसिबल है ये एक इंफॉर्मेशन है कि वो समुद्र सूखा है जी जी ये एक इंफॉर्मेशन है उनको आपके मन के अंदर की इंफॉर्मेशन चेंज करनी है जैसे कि दो और दो पांच नहीं हो सकते चार ही होते हैं ठीक है अब ये कोई क्रिया थोड़ी ना है दो और दो को पांच करना ये क्रिया नहीं है ये आपने जो माना हुआ है उसको हमें बदलना है जी तो उसको बदलने के कई रास्ते हैं जैसे कि आपको कहां से पता चला कि दो और दो को पांच कहते हैं आपके ग्रंथों से किताबों से आपके जो शिक्षक है उनसे ठीक है वही शिक्षक आ कर के आपसे बोल दे भा दो और दो पाच होते मानना पड़ेगा ठीक है एक तो ये हो गया अब यह बात आती है क्या वो आपके शिक्षकों को मजबूर कर सकते हैं बोलने के लिए कि नहीं बताइए कर सकते हैं ठीक है दूसरी बात ये हो गई कि शिक्षकों की भी आवश्यकता नहीं है आपको ही आपके ही मन में ये इंफॉर्मेशन डाल दी गई कि भैया दो और दो पांच होते हैं जी जी डाल दी गई अब वो ये कर सकते हैं कि नहीं कर कर सकते हैं कर स अच्छा अब एक बात य आएगी कि भगवान जो है वास्तविकता में नहीं कर रहे हैं ये तो भ्रम फैला रहे हैं

01:02:48:20 झूठ फैला रहे हैं वास्तव में तो नहीं कर रहे तो यह संसार वास्तविक कहां है ये संसार भी तो माया ही है जी जी जी जी वह आपको वही तो दिखा रहे हैं जो नहीं है माया वही तो दिखा रहे हैं ना ये सब कुछ जो आपको दिख रहा है भगवान की दृष्टि से सब कुछ माया है आपकी दृष्टि से नहीं है क्योंकि आप इसमें फसे हुए हो जी ठीक है ठीक है अब क्लासेस में आइएगा ज ज अरे भाई वो कहां चले

01:03:24:07 गए चलिए तब तक हम लोग मोक्ष दय जगहों के बारे में बात कर लेते हैं मोक्ष दायक पुण्य क्त्रों का वर्णन 86 नंबर पेज यह देखिए भैया वो सतलोक आश्रम तो दूर की बात है यह मोक्ष दायक पुण्य क्षेत्रों का वर्णन हो रहा है है ना तो इसमें यही बताया गया है बार-बार कि कौन-कौन से ऐसे तीर्थ हैं जहां जाने पर जहां स्नान करने पर व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है काशी इत्यादि का वर्णन है विदेश्वर समिता है और उसका शिव पुराण में 12वां अध्याय

01:05:14:18 121 कोई आ ही नहीं रहा लगता है अपना जो टेरर है वो बढ़ता जा रहा है मान ली क्या हम लोगों की बात मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में आरोप लगाते हैं कि जो व्यक्ति बात करने लगता है उसको आप हटा देते हो अब तो हटाया भी नहीं है यह इसमें अलग-अलग प्रकार के भगवान के जो स्वरूप होते हैं कार्य ब्रम कारण रुद्र वो भी इसमें बताए गए हैं विद्वेष समता

01:06:02:22 में वे परमात्मा प्रकट रूप से नव अर्थात शुद्ध स्वरूप है इसलिए प्रणव कहलाते हैं साधक को नव अर्थात नवीन शिव स्वरूप कर देता है इसलिए भी विद्वान पुरुष उसे प्रणव कहते हैं प्रकट रूप से नव दिव्य परमात्मा ज्ञान प्रकट करता है और इसी अध्याय में विद्वेष समता और अध्याय 17 में इनके लोक का भी वर्णन

01:07:17:27 है ध्यान रूपी धर्म में स्थित रहते हैं और सदा सब पर अनुग्रह किया करते हैं उनका ग्रह सच्चिदानंद स्वरूप है लो पराशक्ति से युक्त परमेश्वर शिव निवास करते हैं कहां पर शिव सम्मत ब्रह्मचर्य लोक है वही पांच आवरण से युक्त ज्ञानम कैलाश है वहां पर मंडलों पांच ब्रह्म कलाओं और आदि शक्ति से युक्त आदि लिंग प्रतिष्ठित है उसे परमात्मा शिव का शिवालय कहा गया है वही पराशक्ति से युक्त परमेश्वर शिव निवास करते हैं वह सृष्टि पालन समार तिरो भाव और अनुग्रह इन पांचों कृत्यों में प्रवीण है उनका श्री विग्रह सच्चिदानंद स्वरूप है वह सदा ध्यान रूपी धर्म में स्थित रहते हैं सदा सब पर अनुग्रह किया करते हैं वह स्वात्मा राम और समाधि रूप आसन पर आसीन हो सुशोभित होते हैं नित्य नैमित्तिक आदि कर्मों द्वारा देवताओं का यजन करने से भगवान शिव के सराध में कर्म में मन में लगता है कर्म में मन लगता है क्रिया आदि जो संबंधी कर्म है उनके द्वारा शिव ज्ञान सिद्ध करें जिन्होंने शिव तत्व का साक्षात कर लिया है जिन्होंने शिव

01:08:33:00 तत्व का साक्षात्कार कर लिया है अथवा जिन पर शिव की कृपा दृष्टि पड़ चुकी है वे सब मुक्त हैं इसमें संशय नहीं है तो कोई आ रहा है क्या छोटू दास आप चेहरा दिखा दीजिए और ऊपर आ जाइए तो यह जब आप पढ़ेंगे ना ब्रह्मवर्त पुराण भागवत पुराण भगवत गीता और

01:09:27:26 अगर मॉडरेटर्स कमेंट पढ़ रहे हैं तो मेरी बात प्लीज शिवांश भाई तक पहुंचा दीजिए क्या बात है आपकी जी लखनऊ में हमारा ऑफिस है आप आकर के मिल सकते हैं ऋषभ मिश्रा जी और संपर्क कर सकते हैं 7408 30169 पर व करें पानी पी लेंगे आज रात को ल भी है

01:10:20:03 तो क्लासेस जिसे जवाइन करनी हो वह जवाइन कर सकता है इस नंबर पर एक ट करना है 7408 30169 जिसको भी तर्क और प्रमाण सहित अपने धर्म का और गुरुओं द्वारा प्रतिपादित ज्ञान विज्ञान का प्रारंभिक अध्ययन करना हो हम उसकी उसमें सहायता कर सकते हैं हम आचार्य नहीं है मगर आपको वह पैरामीटर दे सकते हैं थोड़ा सा आपको सपोर्ट कर सकते हैं कि आप सही दिशा में जाएं

01:10:59:03 जो भी आए चेहरा साथ में लेकर आए चेहरा छोड़कर ना आए सारे सतलोक वाले जा चुके हैं सारे रामपाल दास जी के फॉलोअर्स गायब हो गए हैं जो एक थे चर्चा में वो भी अब गोते खा रहे हैं इस बात को लेकर के कि क्या कबीर का जो शरीर है वह नाशवान है कि नहीं है हां अगर है तो उसको वही बिठा सतलोक में या नीचे मत लाओ नीचे लाओगे तो हम पकड़ के उसको शक्तिहीन सिद्ध कर

01:11:43:04 देंगे जय श्री राम जय श्री राम खुश रहि बताइए आपका परिचयम अच्छा कहां से प हया पंचकुला हरियाणा बता कुछ सवाल तो नहीं हैप किस बारे में परसेप्शन जैसे हम देव इस्तेमाल करते हैं तो दे जैसे ब्रह्म देव हो जाता है महादेव हो जाता है जल देव वायु देव मतलब तो मैं क्या इसे सही मानू की जिस देवता के साथ देव लगता है व भौतिक रूप

01:12:50:22 से देव देव के भी कई अर्थ होते हैं मगर एक बात ये है जैसे अभी मैं बता रहा था ना कारण ब्रह्म कार्य ब्रह्म सब अंतर जब वही परमेश्वर अपने शिव रूप में स्थापित होते हैं जैसे य लोग एक डायलॉग मारते हैं वो बहुत भद्दा लगता है दुर्गा के पति का नाम क्या है ऐसे बोलते हैं रामपाल वाले हा नीच नीच पं बोलते बारबार दुर्गा के पति का नाम क्या है तो जहां पर ब्रह्मा विष्णु महेश से उनकी उत्पत्ति हो रही है वहीं पर उन्होंने थोड़ी दूर जाकर के अपने बारे में बताया है दुर्गा माता ने क्या बताया है वह मैं आपको बता देता हूं

01:14:11:07 देख जैसे कारण रूप से देवी समस्त विश्व की रचना करती है तो ये उन्होंने बता दिया कारण रूप से है ना कारण रूप कार्य रूप इसमें भेद आता है जैसे शिव ने कारण रूप से की रचना की कार रूप में उसका कोई कार किया तो ये सब अब यहां जहां कार्य वाले हो गए तो वहां पर वो देव लग गया इस तरह से अंतर आता है उदाहरण मात्र के लिए कह रहा हूं आपको अब देखिए ये क्या हो रहा है देवी भागवत में तीसरे स्कंध में छठवें अध्याय में सातवे श्लोक में माता कह रही है माता के बारे में आया है भगवती ना ही स्त्री है जिस समय वो कारण ब्रह्म है मूल कारण जिस समय वो कारण ब्रह्म है वहां उस उस स्वरूप के लिए वर्णन आ रहा है भगवती ना ही स्त्री है ना ही पुरुष है और ना ही नपुंसक है तो यहां क्या हुआ उनका जो परम ब्रह्म वाला है ना तो पुरुष ना स्त्री ना नपुंसक सिर्फ है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर भगवती तो यहां उसका वर्णन हो गया तो अगर अगर ब्रह्मा विष्णु महेश की उत्पत्ति इनसे हो रही है तो ये ना तो स्त्री है ना ही पुरुष है तो ये

01:15:26:10 किसी की पत्नी सिद्धि नहीं होती हो ये किसी की पत्नी सिद्ध नहीं होती पत्नी रूप में य लीला करती है जब कार्य करती है कोई आ कर के खुद ही एक रूप ले लिया पत्नी किसी की पत्नी बन गई और कार्य करने लगी उस रूप में व शिव की पत्नी होती मगर उस रूप से मगर उस रूप से ब्रह्मा विष्णु महेश की उत्पत्ति नहीं होती है उस रूप से ब्रह्मा विष्णु महेश की उत्पति नहीं होती है ब्रह्मा विष्णु महेश की उत्पत्ति इस रूप से होती है समझ

01:16:00:22 रहे एक बात है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है तो यदि वह माता के गर्भ से जन्म नहीं ले सकता तो व ईश्वर नहीं है यदि व अपनी देह का नाश नहीं कर सकता तो व ईश्वर नहीं है यदि व अपनी देह को बदल नहीं सकता तो वह ईश्वर नहीं है यदि व दे का नाश कर सकता है दे को बदल सकता है तो उसका शरीर शाश्वत नहीं है है ना जब हमने ईश्वर की शाश्वता को स्वीकार कर ही लिया है तो उस शाश्वत तत्व को लेकर के बीच में क्यों आ रहे हो लोगों के बाधित हो जाएगा ईश्वर शाश्वत त है व्यवहार का विषय नहीं है शाश्वत तो पहुंचने का विषय शाश्वत तक पहुचा जाता है शाश्वत के साथ व्यवहार नहीं किया जाता है इन्ह ये नहीं पता कि कबीर शाश्वत है या क्या है कुछ नहीं पता है अभी दो चारसे जटल प्रश्न पूछ लेता हूं कि सतलो कबीर जहां बैठे हैं वो जगह किसने बनाई भाग जाते हैं तुरंत पूछ लेता हूं अभी कोई आ जाए मैं पूछ लूंगा फ फिर ड़ की लगा लेंगे बकुल मैं काफी वर्ष पहले भवती ने य पर क्लियर कर दिया जब

01:17:15:24 ये लोग पूछे अब कभी किसी से कोई पूछे कि देवी का पति कौन है दुर्गा का तो क्या बोलोगे दुर्गा जो है जहां पर दुर्गा से ब्रह्मा विष्णु महेश का जन्म दिखाया है वो दुर्गा ना ही स्त्री है ना ही पुरुष है ना ही नपुंसक है यह वहां खुद लिखा है तीसरा स्कंद छवा अध्याय सातवा श्लोक ठीक है यह सारी चीज है कोई नहीं आ रहा है एक देव शब्द से भैया भी कह ना देव शब्द तो भगवान के यज होता है ना एक देवो सर्व भूते सु गुण एक ही देव समस्त जीवों के जीवात्मा है देव

01:17:57:24 बिल्कुल बिल्कुल देव शब्द जो है उनके लिए भी आता है एक चीज बताऊ मैं आपको पहली बात तो यह समझिए इसको पढ़ने में मुझे बहुत टाइम लग जाएगा बहुत टाइम लग जाएगा मुझे हां यह देख लीजिए बड़ा करके तत्व भगवती ना ही स्त्री है ना ही पुरुष है और ना ही नपुंसक ही है अब यह बता रहा था शिव जी की परब्रह्म होता तो ऋग्वेद में यजुर्वेद में है 16 दो 41 ऋग्वेद बहुत सारी जगह है जब शिव जी को परम ब्रह्म कह दिया गया फिर दूसरी जगह वेद में ही शिव जी को देव कहा जा रहा है कहां कहा जा रहा है स रुद्र स महादेव यह कहां लिखा है अथर्ववेद 13 च च तो जो परब्रह्म है उसको भी देव कहा गया तो ऐसा नहीं क देव से बाधित कोही कहा जाएगा परब्रह्म को नहीं कहा जाएगा ऐसा नहीं कह सकते देव जो है कहीं पर भी लग सकता है कई जगह यूज होता है ब्रह्मा देवा नाम प्रथमा संभु विश्व कता भवन गोता ब्रह्मा जी के लिए भी आया देवी और परम

01:19:12:28 ब्रह्म एक है देवी भागवत तीसरा अध्याय छवा तीसरा स्कंद छवा अध्याय दूसरा श्लोक तो यह सारी चीजें है आज जो है बहुत बड़ा एक कहेंगे कि एक जो है पर्दा फास हुआ है कि बात करते करते वो चले गए इसीलिए मैं यह लोग कहते हैं प्रमाण लाओ जब प्रमाण लाते हैं तो प्रमाण को छोड़ के दूसरे प्रश्न पर जाते हैं तो इसलिए सीधे उस प्रश्न को पकड़ो सीधे उस प्रश्न को पकड़ा जाए

01:19:48:06 जी ये जब प्रमाण मांगते हैं जब प्रमाण आप लाते हो तो फिर क्वेश्चन को चेंज कर देते हैं उसी समय उस पर बात ही नहीं करेंगे अरे भाई पहले य तो बताओ कि इसको मैं नहीं मानता यह बोलो फिर दूसरी चीज लाओ मैं इसको नहीं मानता तो हो गई शास्त्र विरुद्ध तो जाओ अपने बना लो नए शास्त्र तुम्हारी भक्ति तुम्ह मुबारक पर फिर तुम्ह पुराण वेद य सब मत बात करो और फिर जब तुम बना लोगे नया फिर हम आएंगे फिर पूछेंगे तुम्हारा ईश्वर स शक्तिमान है कि नहीं तब फिरत दार्शनिक प्रश्न किया जाएगा ना पहले हमारे शास्त्र को से बात कीजिए ना

01:20:32:24 कबीर हम है नहीं बा बलिए कर मंदिर में देखिए जो भी व्यक्ति स्वयं को धर्म का धर्म धर्म परायण मानता है धर्म के लिए प्रतिवाद मानता है अब समय आ चुका है कि आप सभी लोग धरातल पर अपने अपने धर्म की रक्षा करने का भार उठाएं अपने कंधों पर स्वयं जहां आप रह रहे हैं वहां पर आसपास के मंदिर को अपने घर के आसपास के निकटतम मंदिर को उस जगह का केंद्र बनाइए वहां पर साप्ताहिक गोष्ठी करना शुरू करिए हिंदुओं को बुलाइए जो दर्शन विज्ञान व्यवहार के संबंध में जगतगुरु शंकराचार्य जी द्वारा प्रतिपादित जो सिद्धांत है उनका उनको वहां पर डिस्कस करिए ईश्वर अवाद श्वर सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर असतो मा सद तमस जोति गम मृत मातम गम इन सब पर बात करिए जो सार्वभौम पांच सिद्धांत है उन पर बात करिए

01:21:48:03 परस्पर सहयोग से वहां पर शिक्षा रक्षा सेवा के प्रकल्प चलाइए केवल सोशल मीडिया तक सीमित होक के ना रहिए जब आप वहां पर यह प्रकल्प चलाएंगे शिक्षा रक्षा और सेवा के शिक्षा मतलब यह ज्ञान वहां पर चर्चा करना ग्रंथ अध्ययन करना पठन पाठन करना सेवा वहां पर कोई आपने प्रकल्प कर दिया चिकित्सा हेल्थ चेकअप करवा दिया या फिर कोई ट्यूशन क्लासेस चालू करवा दी निशुल्क बच्चों को शिक्षा देने के लिए या फिर भोजन प्रसाद वितरण करवा दिया ठीक है ऐसा कोई प्रकल्प चला सकते हैं

01:22:29:04 और इसके अलावा रक्षा रक्षा कैसे कि वहां पर प्रशिक्षित करिए अपनी मातृ शक्तियों को बच्चों को बूढ़ों को वो किस प्रकार से अपनी रक्षा करें इस प्रकार शिक्षा रक्षा सेवा का केंद्र बनाइए अपने गली मोहल्ले जहां पर आप रहते हैं वहां के मंदिरों को हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी करिए उस गोष्ठी का नाम है हिंदू राष्ट्र और इस संबंध में जिस को भी सहायता की आवश्यकता हो हमारे नंबर पर संपर्क करें फॉर्म भरे

01:23:02:24 74836 इस पर ट करेंगे फॉर्म आपको प्राप्त हो जाएगा किसी भी प्रकार की वैचारिक चर्चा करनी हो मतभेद के निमित्त तो आ जाइएगा ठीक है सभी को जय श्री राम जल ले रहा हूं हरर शंकर जी जय श्री राम

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 1:23:31 · 12 Oct 2024

Discussion with Rampal follower क्या सृष्टि का रचयिता कबीर है? #rampaljimaharaj #kabir

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A · Video रामपाल जी महाराज का मिथ्या प्रचार E-2 #rampaljimaharaj @Fact by Ab...
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